Important Notice: For website Rent Whatsapp 📞 Call us: +918530812545

Massage Girl in Sindhudurg: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Sindhudurg who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Sindhudurg that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Sindhudurg massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Sindhudurg who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Sindhudurg massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Sindhudurg massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Sindhudurg who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Sindhudurg employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Sindhudurg helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Sindhudurg

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Sindhudurg at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

हेल्लो दोस्तो, मैं राजू फ़िर कोलकाता से.Sex Stories

सोनाली की चुदाई के बाद हम लोग बहुत Sex Stories थक गए थे. इसलिए सभी सो गए. जब नींद खुली तो शाम के 4 बजने वाले थे. सबको भूख लगी थी. हमने रूम सर्विस को लंच आर्डर किया लंच आने के बाद हमने खाया. शाम के करीब 5.30 बजे बाहर निकलने का प्रोग्राम हुआ. जिस रिसॉर्ट में हम ठहरे थे वो समुद्र के किनारे पर था. लड़को ने शोर्ट्स और टी शर्ट और लड़कियों ने लॉन्ग स्कर्ट पहनी थी.

होटल से निकलने के समय मेरी नजर नीतू के पिछवाडे पर गई तो मुझे लगा कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी. खैर हम समुद्र के किनारे धीरे-धीरे टहलने लगे. ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी. कुछ देर टहलने के बाद हम एक जगह गोलाई में बैठ गए. ऑफ़ सीजन होने के कारण बीच पर ज्यादा भीड़ नहीं थी. रात होने लगी थी. मेरे दायें तरफ़ नीतू बैठी थी, बाएं सोनाली. हम सेक्स के बारे में बातें कर रहे थे.

पहले नीतू ने अपनी सेक्स की काल्पनिक इच्छा के बारे में बताया कि मेरी इच्छा है की 3 मर्द मुझे एक साथ चोदे. हमने कहा कि तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी आज रात को.

मनु ने कहा की मेरी इच्छा है कि मेरी सोनाली नए-नए मर्द से चुदवाये कभी मेरे सामने तो कभी अकेले में.

तो मैंने कहा कि मेरी भी इच्छा कुछ ऐसी ही है, एक लड़की को कम से कम दो मर्द मिलकर चोदें.

हम जहाँ बैठे थे वहाँ अंधकार था क्योंकि उस जगह की लाईट ख़राब थी. चुदाई की बातें सुनकर हम धीरे-धीरे उत्तेजित हो रहे थे. सोनाली ने कहा कि तुम तीनो मिलकर नीतू को चोदोगे तो मुझे क्या रिसॉर्ट के वेटर चोदेंगे?

सन्नी ने कहा की नहीं मेरी जान तुम्हारी भी चुदाई होगी, सारी रात पड़ी है और चुदाने के लिए तो केवल तुम दोनों ही हो.

उस समय शाम के 7.30 बजे थे अँधेरा छा गया था. मैंने अपना हाथ नीतू के पीठ पर रख दिया. नीतू ने मेरे हाथ को सामने ले जाकर अपनी चुचियों पर रख दिया और दबाने लगी. मैं धीरे-धीरे उसकी कठोर छोटी चूचियों को दबाने लगा. उधर सन्नी सोनाली को किस कर रहा था और अपना एक हाथ उसकी स्कर्ट के भीतर घुसा कर न जाने क्या कर रहा था. मनु इधर- उधर नजर रख रहा था कि कोई आ न जाए.

समुद्र के किनारे खुले बीच पर इस तरह की हरकतें करने का ये मेरा पहला मौका था. मैंने नीतू के टॉप के भीतर हाथ घुसाकर उसकी ब्रा को ऊपर कर नंगी चुचियों पर हाथ फिराने लगा. उसके नीपल खड़े हो गए थे. मैं उन्हें चुटकियों से मसलने लगा. नीतू ने अपना मुंह मेरी तरफ़ बढ़ा दिया. मैं उसके होठों को चूसने लगा. मैंने उसके टॉप को और ऊँचा उठा दिया और उसकी निप्प्लें चूसने लगा बारी-बारी से.

फ़िर मैंने एक हाथ उसके स्कर्ट के भीतर घुसाया. मेरा अनुमान सच था! उसने भीतर पेंटी नहीं पहनी थी. मैं अपना हाथ उसके बुर पर फिराने लगा. बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. मैंने अपनी एक अंगुली उसकी बुर में घुसा दी उसके मुंह से आह… निकली. भीतर पूरा गर्म था. मैं उसे अंगुली से चोदने लगा. एक हाथ उसकी चुचियों को दबा रहा था.

नीतू गर्म होने पर चिल्लाने लगती है. सन्नी ने सोनाली को छोड़कर नीतू का होठ अपने होठों में दबा लिया और चूसने लगा. हम सब धीरे-धीरे उत्तेजना के शिखर पर पहुँच रहे थे. नीतू की बुर में मैंने अब दो अंगुलियाँ घुसा दी थी. उसने मेरे शोर्टस के भीतर हाथ डालकर मेरा तना हुआ करीब 5” का लंड पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी. नीतू ने मेरे कान में कहा की अब मेरी बुर को भी थोड़ा चूसो तुम बहुत अच्छा चूसते हो. मैंने अपनी अँगुलियों को बहर निकालकर अपना मुंह उसकी स्कर्ट में घुसा दिया. और अपना मुंह उसकी बुर पर लगा दिया. बुर के ऊपर जीभ फिराने लगा. जीभ को सारी बुर पर फिराने के बाद उसकी बु्र के मुहाने पर लेकर जाता घुसाने की एक्टिंग करता फ़िर हटा लेता. नीतू ने आख़िर में उत्तेजित होकर मेरा सर पकड़कर बुर के मुहाने पर टिका दिया.

पहले अपने मुंह से मैंने उसकी बुर की चोंच को पकड़ कर चूसने लगा. लड़कियों का सबसे संवेदनशील पार्ट येही होता है. चोंच को रगडो या चुसो तो उनकी उत्तेजना चरमोत्कर्ष पर पंहुच जाती हैं. फ़िर मैं अपनी जीभ उसकी बुर के भीतर घुसाकर चूसने लगा नीतू ने मेरा सर पकड़कर जोर से हिलाकर जीभ से ही चोदने का इशारा किया. मैं जोर-जोर से जीभ बाहर-भीतर करने लगा. धीरे-धीरे उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई. मैंने अपना सर उसकी स्कर्ट से बाहर निकल लिया.

अब सन्नी ने कहा कि राजू इसे यहीं पर चोदते हैं. मैंने कहा कि नहीं रूम के भीतर चलते हैं वहीँ पर इसे बारी-बारी से चोदेंगे. सोनाली ने फ़िर कहा कि मुझे मत भूल जाना. उठकर हमने अपने कपड़े ठीक किए. रिसॉर्ट के भीतर आकर हमने बेल बॉय को बुलाकर डिनर के लिए मना कर दिया और रूम में घुस गए. घुसने के साथ ही नीतू ने अपना टॉप, ब्रा और स्कर्ट उतार कर फ़ेंक दिया और पूरी तरह से नंगी होकर बेड पर टाँगे फैलाकर लेट गई. पहले सन्नी उसे चोदने के लिए गया. कंडोम निकालने लगा तो नीतू ने कहा की आज मुझे बिना कंडोम के सब चोदो मेरे पर्स में अनवांटेड 72 है उसे ले लूंगी. हम लोगों ने भी अपने कपड़े उतार दिए. सन्नी ने पूछा कि मैं नीतू को देर तक चोदना चाहता हूँ. तो मैंने कहा कि चोदो और झड़ने के पहले तुम हट जाना फ़िर उसे मैं या मनु चोदेंगे ऐसे ही बदल- बदल कर थोडी-थोडी देर तक चोदेंगे. ऐसा करने से हम नीतू को बहुत देर तक चोद सकेंगे. सबने कहा कि ठीक है. नीतू ने कहा कि एक मर्द मुझे चोदेगा उस समय दो मर्द मेरे बगल में रहेंगे . मेरे होंठ चूसेंगे चुचियों के साथ खेलेंगे. कभी-कभी- अपने लंड को मेरे मुंह में डालेंगे. आज मेरा सपना पुरा होने वाला है

सोनाली ये सब सुन रही थी. मैंने कहा कि जब तक नीतू की चुदाई होगी तब तक सोनाली को कोई नहीं चोदेगा. नीतू के बाद सोनाली की चुदाई होगी.

सन्नी ने अपना लंड एक ही बार में नीतू के बुर में घुसा दिया. नीतू के दायीं तरफ़ मैं और बांयी तरफ़ मनु था. सोनाली मेरी बगल में थी. उसने मेरे कान में कहा कि नीतू को चोदो लेकिन मेरी बुर में भी अंगुली डालना और चूचियाँदबाना. सन्नी एक बार लंड को पूरा बाहर निकालकर एक ही धक्के में जोर से घुसा रहा था. मनु नीतू के होठ चूस रहा था, मेरा एक हाथ नीतू की चूची पर था और दूसरा सोनाली के बुर में. अब सन्नी उसे जोर-जोर से चोद रहा था.

मैंने उसे हटने को कहा और मनु को इशारा किया. मनु ने अपना लंड उसके बुर में डाला और जोर-जोर से चोदने लगा. नीतू के मुंह से आवाजें निकल रही थी…आह…आह…ओह…ओह…और जोर से… हे भगवान…चोदो… राजू…मेरी चुचियों को…और…जोर…से दबाव…सन्नी… अपना लंड मेरे मुंह में डालो…

फ़िर मनु भी हट गया और मेरी बारी आई. मैंने उसे डौगी स्टाइल में उल्टा किया यानि घुटनों पर और पीछे से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया. सामने सन्नी चला गया और अपना लंड नीतू के मुंह में डाल दिया. मैं जितने जोर से धक्का मारता नीतू उतनी जोर से सन्नी के लंड को मुंह में ले लेती. सोनाली ने नीतू की चुदाई देखकर कहा कि क्या चुद रही है नीतू की बुर? मेरी भी चुदाने के लिए बेकरार है.

फ़िर उल्टा बेड पर लेट गया और नीतू मुझे ऊपर से आकर चोदने लगी. उसकी आँखें बंद थी. चेहरे पर जैसे भाव थे कि चोदो मुझे…और चोदो…चोदते ही रहो…फ़िर नीतू ने कहा कि मुझे थोड़ा रेस्ट दो और सोनाली को चोदो.

मैंने नजर घुमाई तो देखा सोनाली की चुदाई चालू हो गई थी सन्नी उसकी चिकनी बुर के धुर्रे उड़ा रहा था. पास में लेटा मनु बोल रहा था कि चोद इसे, साली का चुदाई से पेट ही नहीं भरता. पता नहीं कितनी जन्मो से नहीं चुदाई है.

मैंने नीतू से पूछा कि अनवांटेड 72 कितना है तुम्हारे पास तो नीतू ने कहा कि है तो एक ही . तुम लोग ऐसा करो कि सोनाली को चोद कर झड़ने के समय मेरी बुर में झडो, मैं भी सोनाली की बगल में लेट जाती हूँ.

सन्नी अब झड़ने वाला था. सोनाली अपनी दोनों टांगे फैलाकर चुदवा रही थी. सन्नी ने उसके ऊपर से हटकर अपना लंड नीतू के बुर में डाला और 8-10 धक्के लगाकर झड़ गया.

उस समय सोनाली को मनु चोद रहा था. सोनाली की आँखें बंद थीं. केवल बुदबुदा रही थी…चोदो…और जोर से…मनु तुम्हारा लंड थोड़ा छोटा है…इसीलिए मैं दूसरो से चुदवाना चाहती हूँ…शादी से पहले मुझे मुहल्ले के तीन लड़के चोदते थे…उसी समय से मैं पक्की चुदक्कड हूँ… राजू का लंड लंबा है…उससे ज्यादा मजा आताहै… चोदते रहो…

मनु भी हट गया और नीतू की बुर में जाकर झडा.

उसके बाद मैंने सोनाली के बुर को उसी की पेंटी से पोंछकर अपना लंड घुसा दिया. सोनाली ने कहा कि हाँ…ये लंड है मेरी पसंद का…मैंने उसकी दोनों टांगो को उठाकर अपने कंधो पर रखी और जोर से धक्के लगाने लगा. सोनाली उत्तेजना से चिल्लाने लगी…चोदो…मुझे…बुर को फाड़ दो…तुमसे चुदवाने के बाद मुझे अब किसी से चुदवाने की ख्वाहिश नहीं है…

मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था…मेरा भी झड़ने का समय आ गया था. सोनाली के ऊपर से हट कर डस्टबिन यानी नीतू के बुर में घुसा दिया और -7 जोर से धक्का लगाकर झड़ गया. फ़िर बगल में लेटकर लम्बी साँसे लेने लगा. नीतू और सोनाली के चेहरों पर असीम तृप्ति का भाव था. ये सब करीब 4 घंटे तक चला था.

अंततः हम सब थक गए थे. हमलोग सो गए और अगले दिन सुबह अपने-अपने घर चले आए. बहुत मजा आया था उस दिन.

कुछ दिन के बाद मनु ने एक नया अपना अनुभव बताया उसे मैं अगली कहानी में लिखूंगा.
ये कहानी आपको कैसी लगी जरूर बताना. Sex Stories

मैं सुनील, 26 साल का राजस्थान से हूँ। यह बात उन दिनों की है जब मैं नया-नया जवान हुआ था।

मैं एक लड़की को पसंद करने लगा, कब प्यार हुआ पता ही न चला।
इतनी ज्यादा जानकारी भी नहीं थी।

स्कूल में मुझे सब अक्षय कुमार कहते थे।
स्कूल में बहुत लड़कियों से दोस्ती थी, लेकिन उनके लाइन देने के बाद भी मुझे उनसे प्यार नहीं था। मुझे प्यार अम्रता से हुआ जो कि मेरी ही कालोनी में रहने आई थी। वो दिल्ली से आई थी।

मैं वहाँ पर क्रिकेट खेलने जाता था। उसका कद 5.5 फुट का था, गोरा-चिट्टा रंग, कालोनी के सब लड़के उसे लाइन मारते थे।

नए साल पर मैंने हिम्मत करके उसे लव-लेटर दिया तो उसने जवाब दिया।

‘आई एम सीनियर.. यू आर जूनियर…’

वो मुझसे एक साल बड़ी थी, लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया। मैं उसे किसी भी कीमत पर प्यार करना चाहता था।

मैंने उसकी सहेली जिसका नाम अंजलि था, उससे कहा- अम्रता मुझसे रिश्ता बनाए, चाहे जो भी रिश्ता बना ले, पर मुझसे बात करे।
मैं वास्तव में उसे बहुत प्यार करता हूँ।

मेरी हालत पागलों से भी बदतर थी। मुझे न भूख लगती थी, न प्यास.. सिर्फ़ वही दिखती थी।

आखिर वो दिन आ ही गया जब उसने मुझे अपने घर बुलाया बात करने के लिए। एक बात बताऊँ वो मेरी सीनियर थी, मेरी गांड फ़ट रही थी कि कहीं मेरे घर में बता न दे।

मैं एक टॉपर स्टूडेन्ट था इसलिए मेरे सभी इज़्ज़त करते थे। मैं उसके दरवाजे पर पहुँचा तो मुझे 103 डिग्री बुखार था।

उसके छोटे भाई ने मुझे कागज़ का एक टुकड़ा दिया और बोला- दीदी ने आपको देने को कहा है।

उस पर लिखा था- आई लव यू.. माई अक्षय कुमार और इसके आगे हम क्या कहें.. जानम समझा करो। शाम 6 बजे घर पर आना। कोई नहीं होगा। मैं आपको चाय पिलाऊँगी। प्लीज़ आ जाना- तुम्हारी अम्रता।

अब तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। शाम 6 बजे मैं उसके घर गया।

उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था मेरी अम्रता बहुत खूबसूरत थी, गोरा रंग 5.5 फुट का कद.. अच्छी फिगर.. गोल चूचियाँ… गोरी जांघें.. वो सब कुछ उसमें था, जो किसी को भी पागल कर दे, लंड को खड़ा कर दे.. हाथ से लौड़ा मसलने को मजबूर कर दे।

वो 18 साल की कमसिन चुदाई वाली उमर।

यहाँ तक कि अगर कह दें तो मैं किसी को भी गोली मार देता।

उसने मुझसे नमस्ते किया तो मैं बोला- सॉरी.. आप मेरी सीनियर हैं।

वो बोली- पहले सीनियर थी.. पर आप अब मेरे सब कुछ हो।

मुझे वो महसूस हुआ जो मैं शब्दों में नहीं कह सकता हूँ।

अम्रता मेरा पहला प्यार थी उससे मुझे बेइंतेहा मुहब्बत थी।

प्रिय पाठकों, मैं उसे आज भी प्यार करता हूँ।

अब आगे सुनिए उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा- डरो नहीं.. रियली आई लव यू… मैं भी आपको चाहती थी, पर डरती थी कि कहीं आप नाराज न हो जायें.. इसलिए कभी कहा नहीं, डियर सुनील जब तुम्हारे पास लड़कियाँ होती हैं तो मैं बहुत जलन महसूस करती हूँ, मुझे दूर मत करना।

इतना कहकर वो मेरे सीने से लिपट कर रोने लगी।

मैं भी रो रहा था। पहली बार कोई लड़की मेरे सीने से लिपटी थी, उसकी चूचियां मेरे सीने से चिपक रही थीं।

मेरा लंड खड़ा होने लगा, फ़िर उसने अपने गुलाबी होंठों से मेरे होंठों को चिपका दिया और हम लोग चुम्बन करने लगे।

मैं उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर रहा था वो रो रही थी।

चुम्बन करते समय वो अपनी जीभ से मेरी को जीभ चाटने लगी ये मेरे लिए पहल अनुभव था। मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी चूत के पास छूने लगा।

मुझे लगा इससे वो बुरा मान जाएगी मगर वो धीरे से बोली- सुनील क्या पहले ही दिन यह सब ठीक रहेगा?

मैं बोला- क्यों.. क्या मतलब?

वो बोली- अच्छा चलो कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी ही हूँ.. जो करना चाहो.. करो। अब मेरे समझ में न आए कि क्या करूँ? कैसे करते हैं?

वो मेरे लौड़े पर हाथ रखती हुई बोली- सामान तो दिखाओ।

मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी। उसके मुलायम गोरे हाथों ने मेरा 7 इन्च लम्बा मोटा लंड बाहर निकाला तो आँख मार कर बोली- यार ये तो बहुत बड़ा है।

मैं अब पूरे जोश में था।
मैं उसको बिस्तर पर ले गया और जींस उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में था।

मैं उसके होंठों को कसकर चूमने लगा। उसका कमीज उतारा, फ़िर ब्रा उतारी, मेरे हाथ में उसके गोरे-गोरे, गोल-गोल दूध थे उन पर भूरे रंग की भुंडी.. बहुत ही मस्त लग रहे थे।

वो ब्रा नहीं पहने हुए थी, सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो उसने शरमा कर आँखें बंद कर लीं।

मैं बोला- डियर अब काहे की शरम.. मैं आपका पति हूँ।

वो बोली- तो मैं कुछ कह रही हूँ क्या…? अब आप ही मेरे सब कुछ हो… मेरा सब कुछ आपका ही है.. जो चाहो करो।

उसे विश्वास था कि हम लोगों की शादी हो जाएगी.. क्योंकि हम एक ही जाति के थे। उसके मेरे बीच प्यार बहुत था, हम दोनों के ही पिता अधिकारी हैं, इसलिए कोई दिक्कत का सवाल ही नहीं था।

मैं भी उससे शादी करना ही चाहता था। उसकी सलवार खोल कर अलग किया उसकी गोरी-गोरी जांघें मेरा स्पर्श पाकर और भी गरम हो गईं। उसकी पैंटी में थोड़ा छेद था, देखा तो मैंने उंगली डाली।

तो बोली- अरे यार दोनों पैंटी गीली थीं इसलिए यह पुरानी पहन ली थी।

मैं मुस्कुराने लगा, तो हँस कर बोली- यार तुम तो मेरी गरीबी का मज़ाक बना रहे हो।

मैं बोला- डियर आप बहुत ही मालदार हैं। बोली- माल तो नीचे है मेरे सजना.. इस चड्डी को उतार कर फ़ेंक दो और अपने माल को ले लो।

इतना कहकर वो शरमा गई।

मैंने उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी बुर बिल्कुल गोरी.. और उस पर भूरे छोटे-छोटे बाल थे।

अब तो मैं पागल हो गया, बुर को छुआ तो लगा जैसे गरम-गरम भट्टी हो।
मैं बुर को सहलाने लगा।

‘आह ओह्ह.. क्या कर रहे हो.. प्लीज़्ज़..!’

मैंने उसकी बुर की दरार में ऊँगली डाली तो बोली- क्या ऊँगली ही डालेंगे आप? इतना कह कर चुप हो गई।

मैंने कहा- रुको डार्लिंग.. अभी सब डालूँगा जी भर कर तुझे चोदूँगा.. पहले तेरी चूत तो चाट लूँ।

मैं जीभ से उसकी चूत के दोनों हिस्सों को चाट कर चोदने लगा, इससे मैं तो उत्तेजित हो ही रहा था, वो भी ‘आह.. ओह्ह.. मार डालोगे… चोद दो.. प्लीज़्ज़..’ सिसकार रही थी।

फ़िर मैंने उसके मुँह में अपना लंड डाला वो मेरा लौड़ा चाटने लगी।
बहुत मज़ा आ रहा था।
इस 69 की अवस्था में हम दोनों पागल हो रहे थे।

अब बारी चुदने-चुदाने की थी।

वो बोली- सुनील.. लंड धीरे से डालना प्लीज़.. वरना मेरी खूबसूरत बुर फ़ट जाएगी..समझ रहे हो न…

मैंने अब उसकी बुर पर सुपारा रखा तो लंड बुर में नहीं गया..

फ़िसल गया तो हँस कर बोली- बुद्धूराम ऐसे नहीं होगा।
उसने अपने मुँह से थूक निकाल कर मेरे लंड पर मल दिया और लंड को बुर के मुँह पर खींचा।

मैंने हल्के से धक्का दिया तो बुर में दो इंच अन्दर घुस गया। वो आँखें फैला कर बोली- दर्द हो रहा है।

अब मेरे लंड को चूत की गरमी मिल गई थी।

मैं होंठों को चूसे जा रहा था… धीरे-धीरे 5-6 बार अन्दर-बाहर किया।

अब उसे भी मजा आ रहा था, वो नीचे से कमर भी हिला रही थी।
वो बोली- आप अभी इतना ही डालो… अब दर्द में भी मजा आ रहा है।

लेकिन मैं तो पूरा लंड उसकी बुर में डालना चाह रहा था।

मैं बोला- देखो अम्रता अब तुम्हें पूरे लंड का मजा देता हूँ।

मैंने दूसरा झटका लगाया तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी बुर में घुस गया।
वो इतनी तेज़ चिल्लाई कि मैं डर गया कि कोई पड़ोस से न आ जाए।
अब जोर से मैंने उसके शरीर पर दबाया कि वो उठ न जाए। वो दर्द से तड़फ कर बोली- हटो.. मैं मर गई प्लीज़्ज़.. खून आ गया है.. मुझे छोड़ दो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है।

मैं जानता था कि अगर इसे छोड़ा तो फ़िर इस डर की वजह से कभी नहीं चुदवाएगी तो मैंने धीरे-धीरे 7-8 शॉट लगाए, तो उसका विरोध कुछ कम हुआ, बोली- मार डालोगे क्या?

अब वो हल्की मुस्कुराहट के साथ कमर भी हिलाने लगी।

Antarvasna

कई बार सपने में मैं अपनी सोनू भाभी को Antarvasna उनकी तारीफ में कहता था ..” भाभी आप बहुत खूबसूरत हो आपके रसीले होंठों का रस पीने के लिए कोई भी मर्द चाहेगा गोल गोल बड़ी आँखों में अजीब सी उलझन है आपकी पतली कमर देख कर कोई भी छूने को चाहेगा काजोल की जैसे बड़ी बड़ी चुचियां है आपकी दो मोटे कूल्हों को देखकर हर कोई दीवाना हो जाएगा सच कहूं भाभी आप एक हसींन हिरोइन जैसे दिखती हो.” वो मुस्कुरा कर कहती हैं-“बस बस बहुत तारीफ करते हो वो भी झूठी ” ये क्या कहा आपने मैं भी कुर्बान जाऊँ आप पर अगर झूठा निकला तो।

भैया को अक्सर शहर से बाहर जाना पड़ता है। एक बार भाभी ने काले रंग की साड़ी और ब्लाऊज पहना। भाभी गोरी हैं इसिलिए मैंने उसकी खूब तारीफ की और कहा- भाभी आप तो काले कपड़ो में बहुत ही खूबसूरत दिखाती हो वो मुस्कुरा के बोली झूठे कहीं के।

फिर कई दिनों तक मन में एक सपना सजाता रहा कि कब भाभी को पा लूं और कस के उनकी गरम नरम चूत में अपना मोटा लन्ड डाल के उन्हें चीखने पर मज़बूर कर दूं।

एक दिन भैया ने सुबह जल्दी बाहर जाना था और मैंने उन्हें स्टेशन तक छोड़ने जाना था। मैं केवल अंडरवीयर पहने कसरत कर रहा था कि अचानक भाभी आ गई। मुझे एक झटका सा लगा और मैंने एकदम अपनी कमर पर एक तौलिया लपेट लिया। भाभी मेरे पास आईं और बोली- देवर जी ! आपकी बोडी तो बहुत जानदार है। मेरी बाजू पकड़ कर कहा- क्या सख्त बाजू है। मेर लन्ड भाभी के नर्म हाथों का स्पर्श पाते ही मचलने लगा। भाभी ने तौलिये में मेरे लन्ड को फ़ूलते हुए देख लिया। फ़िर वो जल्दी से बोली- जल्दी तैयार हो जाओ, चलो तुम्हारे भैया राह देख रहे हैं, उनकी गाड़ी का वक्त हो रहा है। वो चली गई पर मेरा लन्ड गर्म हो चुका था। मैं भैया को स्टेशन छोड़ आया और फ़िर कालेज चला गया।

शाम को जब घर आया तो भाभी पड़ोस में गप्पें हान्क रही थी। मुझे देख कर वो अन्दर आ गई। आज उन्होंने गहरे नीले रंग का गाऊन पहन रखा था और अन्दर आ कर दरवाजा बंद करते ही उन्होंने कहा- क्यों देवर जी मैं काले कपडों में सुंदर लगती हूँ ना !

मैंने कहा- हाँ. तो उन्होंने मैं कैसी दिखती हू इन काले कपड़ो में ?

मैंने हँसते हुए कहा- भाभी तुमने तो नीले रंग का गाऊन पहना है.

उन्होंने शरारत से कहा उस दिन तो कहते थे भाभी तुम काली साड़ी और काले ब्लाऊज में अप्सरा लगती हो. आज क्या हुआ ? मैंने कहा- लेकिन भाभी आपने नीला गाऊन पहना हुआ है काला नहीं.

तभी मेरा ध्यान भाभी के कंधे पर दिख रहे ब्रा स्ट्रैप पर गया। मैंने आगे बढ़ कर ब्रा स्ट्रैप के नीचे उंगली डाल कर ऊपर को उठाया और कहा- अच्छा तो ये है काले रंग की ब्रा। लेकिन दिख तो नहीं रही, भाभी जरा दिखाओ ना।

” कुछ नहीं ! कुछ नहीं ! मैं तो मज़ाक कर रही थी “भाभी बोली।

मैंने कहा- भाभी प्लीज! दिखाओ ना ! प्लीज भाभी प्लीज ! बस एक झलक एक बार !

इतना सुनते ही भाभी ने अपना गाऊन निकल दिया मैं उसे देखते ही दंग रह गया सच भाभी काले रंग की चोटी सी ब्रा और काले रंग की बिल्कुल छोटी सी पैन्टी में थी। उसकी दोनों चूचियां आधी से ज्यादा नंगी थी जब पैन्टी उसकी आधी चूत को ही ढक पा रही थी दोनों ओर से चूत नंगी दिखाई दे रही थी ये नजारा देख कर मेरा लंड अंडरवियर में खड़ा होने लगा.

भाभी ने कहा ” उस दिन तो बड़ी तारीफ करते थे आज क्या हो गया ”. मैंने कहा “भाभी तुम्हारी चूचियां और चूत का कोई जवाब मेरे पास नहीं पहली बार किसी औरत का आधा बदन नंगा देखा है सच कह रहा हूँ तुम्हारी कसम भाभी इतनी खूबसूरत गदराई हुई जवानी पहली बार देख कर मैं बाग बाग हो गया हूँ ”

ये कहते हुए मैंने आगे कदम बढाया तो भाभी हिली नहीं अपनी जगह से. मैंने भाभी को कंधो से पकड़ कर अपने से चिपटा लिया।
उन्होंने मुझसे कहा- क्या कर रहे हो, पहले अन्दर चलो !

मैं समझ गया कि आज भाभी दावत दे रही हैं। अन्दर जाते ही मैंने अपनी शर्ट निकल दी ,ऊपर का बदन नंगा हो गया फिर बिना सोचे अपनी पैंट उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में आ गया मेरी नजर भाभी की चुचियों पर गई छोटी सी ब्रा और बड़े कद की चूचियां कब तक छुपाती. मैंने पीछे जा के हूक खोल दी। दो नंगे फल भाभी के बदन पर झूलने लगे .वो कसमसाई मैंने उनकी बिना परवाह किए पैंटी को एक ही झटके में उतार दी और अपना अंडरवियर को निकाल दिया.

उन्होंने नकली गुस्से से कहा- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कुछ सुना नहीं मैंने अपनी बाहों में नंगी भाभी के जिस्म को दबोच लिया वो कराहने लगी की मैंने दोनों होंठों को उसके रसीले होंठों पर रख दिए और जी भर के उसका रस पान करने लगा एक हाथ से चुचियों को दबाता मसलता रहा दूसरे हाथ से उसका जिस्म पूरा कस के मेरे जिस्म से चिपकाया ये सब अचानक हो जाने से वो हाथ पाँव मारने लगी लेकिन उसका कुछ न चला ओर मैं भाभी के जिस्म को बुरी तरह रौंदने लगा होंठों के बीच जीभ डाल के मैंने उसे बुरी तरह चूमा उसके मुह में .. आह्ह्ह उफ़. .मोनू .. मैं तुम्हारी भाभी हूँ .. ये ग़लत है .. छोड़ दो मुझे ..जग गगग ..की आवाज निकलने लगी पर मैं पूरी तरह से उनकी भरी भरी चूचियों को दबाता रहा उसकी कड़ी निप्पल को दो उंगली के बीच ले के मसलने लगा भाभी अब सिस्कारियां भरने लगी ..नही .. प्लिज्ज़ ..उईई ईई… धीरे ..मोनू ऊउऊ ..लेकिन अब उसका विरोध ख़तम हो गया था.

हम दोनों की सांसे तेज होने लगी मैंने जम कर भाभी के पूरे बदन को बेतहाशा चूमा .. .. मेरे होंठ उसके बदन पर फिसलने लगे .. एकदम गोरा और चिकना बदन था .अभी तक मैंने उसकी चूत पर हाथ नहीं लगाया था .. वो दोनों जांघो को सिकोड़े हुए थी .. मेरे हाथ और होंठो के स्पर्श से वो… ऐसी आवाजे निकलने लगी थी. सोनू भाभी अब मीठी मीठी आहें भरने लगी मेरी ध्यान अब उसके पेट से होते हुए गहरी नाभि पर गया मैंने वहाँ सहलाया तो उन्होंने सिहर कर अपनी जांघे खोल दी और अब मेरी नजर उन की चूत पर पड़ी मैं झूम उठा एक भी बाल नहीं था गुलाबी रंग की चूत के बीच में एक लाल रंग का होल दिखाई दिया ये देख कर मुह में पानी आ गया.

भाभी के जिस्म को चारो ओर से चूमने सहलाने और दबाने के बाद चूचियों को प्यार से मुंह में लेकर कई बार चूसा भाभी का अंग अंग महक ने लगा उसकी दोनों चूचियां कड़ी ओर बड़ी हो गई उसके लाल लाल निप्प्ल उठ कर खड़े हो गए तीर की तरह नुकीले लग रहे थे. तब मेरी भाभी मुझसे जोर से लिपट गई। दो बदन एक दूसरे से रगड़ने लगे मेरी सांसे फूलने लगी हम दोनों तेजी से अपने मकसद की ओर आगे बढ़ने लग॥ 10 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे को पूरा चूमा सहलाया। भाभी ने पहली बार शरमाते शरमाते लंड को पकड़ा तो बदन में बिजली सी दौड़ गई पहली बार मैंने कहा “मेरी जान उसके साथ खेलो शरमाओ मत अब हम दोनों में शर्म कैसी .”

मेरा बदन बहुत ही गरमा चुका था तब मैंने भाभी को फर्श पर लिटा दिया ओर उसके ऊपर आके जोर से चुचियों को फिर से दबाया पर बाद में मैंने चूत की तरफ़ देखा. चूत तो पूरी गीली थी. उसमे से जूस ऐसे निकल रहा था जैसे नल से पानी बह रहा हो. अब मैंने भाभी के पावों को चौडा किया तो उनकी फूली हुयी गुलाबी चूत पूरी तरह दिखने लगी .भाभी की गुलाबी चूत को देख कर मैंने कहा “भाभी सच बहुत ही चिकनी है तेरी ये चूत बिना बाल की गोरी उभरी हुई। दिल कर रहा है इसे खा जाऊँ ” इतना कह कर मैं उसकी चूत पर झुका और चूत के होठों को अपने होठों से चूमने लगा।

भाभी तो जैसे उछल पड़ी। ओह आ मोनू…॥अऽऽऽ ये क्या कर रहे हो…ऐसा तो तुम्हारे भैया भी नहीं करते कभी.. ओह मुझे अजीब सा लग रहा है। भाभी की सिस्कारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा। मैं बड़े प्यार से भाभी की चूत को चूसता, चूमता चाटता रहा। वो अपने होठों पर जीभ फ़ेर रही थी और मचल रही थी कि अचानक चिल्लाई- मोनू छोड़ मुझे… आहऽऽमेरा हो रहा है…जोर से…कहते हुए मेरा सिर अपनी जान्घों में दबा लिया और मेरे बाल खींचने लगी।…भाभी ने आह ऽऽ भरते हुए जल्दी जल्दी तीन चार झटके पूरे जोरों से अपने चूतड़ उठा कर मारे। मैंने फ़िर भी उनको नहीं छोड़ा और अपनी जीभ से उनकी चूत से बहने वाले रस को चाट गया।

वो कह रही थी- अब हट जाओ मोनू, अब सहन नहीं हो रहा। अब अपनी प्यारी भाभी को चोदो। फ़ाड़ दो मेरी चूत को अपनी भाभी की चूत में घुस जाओ। मैं पहले से जानती थी कि तुम मुझे चोदना चाह्ते हो, मैं भी तुम से चुदना चाहती थीअब मैं भी भाभी की चूत का स्वाद अपने लौड़े को चखाना चाहता था। मैं भाभी के ऊपर आया तो भाभी ने सिर उठा कर मेरे लौड़े कि तरफ़ देखा। उन्होने कहा- देवरजी ! मैं तो मर जाऊँगी इतने मोटे और लम्बे से।

मैंने पूछा किस मोटे और लम्बे से?

वो शरमाते हुए बोली तुम्हारे लो ऽऽऽ लौड़े से !

मैंने कहा-कुछ नहीं होगा… और भाभी की टांगें चौड़ी की तो उनकी चूत के होंट ऐसे खुल गये जैसे किसी फ़ाइव स्टार होटल के दरवाजे अपने आप खुल जाते हैं किसी के आने पर। मैंने अपनी दो अंगुलियों से चूत को थोड़ा और खोला और अपना लन्ड का सिर उस पूरे खिले गुलाब के फ़ूल में रख दिया। भाभी ने कहा- थोड़ा अन्दर तो करो !

मैंने कहा- अभी करता हूं। यह कह कर मैं अपना लौड़ा धीरे धीरे बाहर ही रगड़ने लगा। भाभी बेचैन हो उठी। वो अपने चूतड़ ऊपर को उठा उठा कर लौड़े को अपनी चूत में डलवाने की कोशिश कर रही थी। मैं उनको तड़फ़ाते हुए उनकी सारी कोशिशें नाकाम कर दिए जा रहा था।

“अब डालो ना !” भाभी बोली।

“क्या डालूं… और कहाँ…” मैंने भाभी से पूछा।

“अच्छा बताऊँ तुझे? बहनचोद ! अपनी भाभी की चूत में अपना लौड़ा डाल और चोद साले ! भाभी तड़फ़ते हुए बोली।

भाभी के मुंह से ऐसी गालियां सुन कर मैं हैरान रह गया।

तभी भाभी ने एक ऐसा झटका दिया ऊपर की तरफ़ अपने चूतड़ों को कि एक बार में ही मेरा पूरा का पूरा लौड़ा भाभी की चूत की गहराई में उतर गया। भाभी के मुख से निकला- आह हय-मार दिया ! एक दर्द मिश्रित आनन्द भरी चीख !

अब मैं भाभी के ऊपर गिर सा गया और उनको हिलने का मौका ना देकर उनके होंट अपने होंटों से बंद कर दिये और अपने चूतड़ ऊपर उठा कर एक जोर का धक्का मारा तो भाभी फ़िर तड़प गई।

इसके बाद तो बस आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…धीरे…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…रुक जरा… हाँ… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…जोर से… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…हाँऽऽअः…हाँऽऽअः…हाँऽऽअः…ह्म्म… हाँऽऽअः

हम दोनों की एक जैसी आवाजें निकल रही थी। काफ़ी देर ऐसे ही चलता रहा। बीच बीच में भाभी बड़बड़ाती रही- मज़ा आ रहा है ! करते रहो ! चूसो !

भाभी की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और मेरा लौड़ा बड़े आराम से अन्दर बाहर आ जा रहा था। भाभी भी अपने चूतड़ उठा उठा कर सहयोग कर रही थी। वो मदहोश हुई जा रही थी। उनके आनन्द का कोई पारावार ना था। ऐसा मज़ा शायद उन्हें पहले नहीं मिला था।

अब मैं चरमोत्कर्ष तक पहुंचने वाला था। मैंने भाभी को कहा- ले सोनू ! ले ले मेरा सारा रस ! पिला दे अपनी चूत को !

“हाँ ! भर दे मेरी चूत अपने रस से मेरे मोनू भैया ! ” भाभी बोली।

और मैंने पूरे जोर से आखिरी धक्का दिया तो मेर लन्ड भाभी के गर्भाशय तक पहुंच गया शायद और वो चीख पड़ी- मार डालेगा क्या?

मेरे मुंह से निकला- बस हो गया ! मेरा लन्ड भाभी की चूत में पिचकारियां मार रहा था। भाभी भी चरम सीमा प्राप्त कर चुकी थी। फ़िर कुछ रुक रुक कर हल्के हल्के झटके मार कर मैं भाभी के ऊपर ही लेटा रहा। हम दोनों अर्धमूर्छित से पड़े रहे काफ़ी देर। पता नहीं कब नींद भी आ गई।

जब मेरी नींद खुली तो देखा कि भाभी उसी तरह नंगी मेरी बगल में बेसुध हो कर सो रही थी। उनके मुख पर असीम तृप्ति का आभास हो रहा था। उनके लबों पर बहुत हल्की सी मुस्कान भी दिख रही थी। मैं धीरे से उठा और रसोई में जाकर दो कप चाय बना कर लाया तो देखा भाभी वैसे ही सो रही थी। मैं उनके पास गया और उनके लबों को हल्के से चूम लिया। जैसे ही मेरे होंठ ने उनके होंठों को स्पर्श किया, भाभी ने आंखें खोल दी और मुस्कुरा कर मेरी आंखों में झांकने लगी।

मैंने भाभी से कहा- “तो सोने का बहाना कर रही थी आप?”

भाभी बोली- मैं तो तभी जाग गई थी जब तुम यहाँ से उठ कर गए थे, लाओ अब चाय तो पिला दो जो प्यार से बना के लाए हो।

हमने चाय पी। तब तक रात के आठ बज चुके थे। मैंने भाभी से पूछा- कैसा लगा?

भाभी ने शरमा कर नज़रें झुका ली, कुछ बोली नहीं।

मैंने उनकी ठोडी पकड़ कर उनका चेहरा ऊपर को उठाया और फ़िर पूछा कि कैसा लगा आज मेरे साथ।

भाभी शर्मिली मुस्कान के साथ बोली- बहुत मज़ा आया, मज़ा तो तुम्हारे भैया के साथ भी बहुत आता है, पर तुम्हारे अन्दर नया जोश है

“पहले ऐसा ही मज़ा आता था भैया के साथ?” मैंने पूछा।

” सच कहूं तो ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं आया, मुझे तो पता भी नहीं था कि इतना मज़ा भी आता होगा चुदाई में” भाभी ने कहा।
भाभी के मुंह से चुदाई शब्द सुन कर मैं अवाक रह गया। फ़िर मैंने भाभी से कहा- भाभी ! मैंने आपको इतना आनन्द दिया है, मुझे ईनाम मिलना चाहिए

” हाँ ! ईनाम के हकदार तो तुम हो। बोलो क्या चाहिए तुम्हें ईनाम में?” भाभी ने पूछा।

“मैं तो ऐसे ही कह रहा हूं, आप मिल गई, मुझे तो मेरा ईनाम मिल गया” मैंने कहा।

” नहीं, फ़िर भी मैं तुम्हें कुछ ना कुछ ईनाम जरूर दूंगी” भाभी ने कहा।

” जैसी आपकी मरजी ! अगर मैंने अपनी तरफ़ से कुछ मांग लिया तो देना पड़ेगा भाभी ! ” मैंने कहा।

” हाँ हाँ जरूर ! मेरे बस में हुआ तो जरूर दूंगी” भाभी ने आश्वासन दिया।

” अच्छा अब बताओ रात के खाने में क्या बनाऊँ? ” सोनू भाभी ने पूछा।

“अब क्या बनाओगी, मैं बाज़ार से ले आता हूं कुछ, वैसे भी मैं अभी सारी रात बाकी है। आप मुझे खाना, मैं आपको खाऊँगा” मैंने भाभी को छेड़ा।

मैंने बाज़ार जाने के लिए उठते हुए कहा- भाभी ! मैं बाज़ार से खाना ले कर आता हूं। आप बस ऐसे ही नंगी रहना, कपड़े नहीं पहनना।
भाभी भी मेरे साथ खड़ी हो गई यह कहते हुए कि दरवाजा भी तो बंद करना होगा। भाभी मेरे पीछे पीछे आईं और मुझे कहा देखो बाहर कोई है तो नहीं, मैं दरवाजा बंद कर लूं।

जब मैंने बाज़ार से आकर दरवाजे की घण्टी बजाई और भाभी ने दरवाजा खोला तो वो वही नीला गाऊन पहने थी।

अन्दर आते आते मैंने पूछा कि गाऊन क्यों पहना?

तो कमरे में पहुंच कर भाभी बोली- आज तो बस बच गई। अभी अभी थोड़ी देर पहले दरवाजे की घण्टी बजी थी और मैंने समझा तुम ही होगे और मैं बिना गाऊन पहने दरवाजा खोलने ही वाली थी कि मुझे पड़ोस वाली रितु की आवाज सुनाई दी। वो मुझे ही पुकार रही थी। मैंने दौड़ कर गाऊन पहना और फ़िर दरवाजा खोला।

क्या करने आई थी रितु? रितु वही जो चार पांच घर छोड़ कर रहती है, नमिता आन्टी की बेटी?

हाँ वही, तू तो सबको जानता है?

बड़ी मस्त चीज है वो, एक बार मिल जाए तो साली को चोद चोद कर चार छः बच्चों की माँ बना दूं।

“तेरा बस चले तो तू सारी दुनिया की लड़कियों को चोद चोद कर माँ बना दे” भाभी बोली।

“सारी दुनिया को नहीं तो भाभी आपको तो अब जरूर माँ बना दूंगा” मैंने कहा।

यह सुन कर भाभी भावुक हो उठी, उनकी आंखें गीली हो गई, वो बोली- तीन साल हो गए शादी को ! अब तक तो कोई आस बंधी नहीं, पता नहीं कब मैं माँ का शब्द सुनूंगी अपने लिए। और तुम क्या सोचते हो कि मैंने ये सारी रासलीला तुम्हारे साथ शारीरिक आनन्द के लिए रचाई है? यह सब मैंने औलाद का सुख पाने के लिए किया है। भाभी रोती जा रही थी और बोलती जा रही थी-” वैसे तो तुम्हारे भैया में कोई कमी नहीं है, वो मुझे सहवास का पूरा पूरा मज़ा देते हैं, पर पता नहीं क्यों मैं गर्भवती क्यों नहीं हो रही। अब देखो तुम क्या गुल खिलाते हो? इतना कह कर भाभी के चेहरे पर कुछ मुस्कुराहट आई।

मैंने आगे बढ़ कर भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और कहा- भगवान ने चाहा तो अगले साल तक मैं चाचाऽऽ… नहीं आपके बच्चे का पापाऽऽ… नहीं बस चाचा… हाँ… चाचा ही ठीक है, बन जाऊँगा।

अगर ऐसा हो गया तो मैं तुम्हें मुंह मांगा ईनाम दूंगी- भाभी ने भरे गले से कहा।

तो अब दो ईनाम हो गये- एक तो आपने चाय पीते हुए वायदा किया था आज ही और दूसरा अब जो अगले साल या उससे भी पहले मिल सकता है। Antarvasna

हेलो ! Indian Sex Stories

आप सब भाभियों और औरतों को चूतों Indian Sex Stories को मेरे नौ इंच के लौड़े का खड़े हो कर प्रणाम !

आप सबने मेरा पहला सेक्स, मेरी सच्ची कहानी को बहुत पसंद किया, मुझे बहुत सारी मेल भी आई, बहुत अच्छा लगा कि आप सबने मेरी कहानी को बहुत पसंद किया। वैसे मैं पंजाब का रहने वाला हूँ लेकिन परिवार शिफ्ट होने की वजह से मुझे भी दिल्ली आना पड़ा। मैं दक्षिण-दिल्ली में रहता हूँ। अब मैं आपको एक और सच्ची कहानी बताना चाहता हूँ, जो तब की है जब मैं दिल्ली में नया-नया आया था, हमने नया घर लिया था, आस-पास का माहौल बहुत अच्छा था, आस-पास के घर सरदारों के थे, मेरा घर वालों का दिल लगा रहता था, सब लोगों से अच्छी दोस्ती हो गई थी मेरी माता की।

मैं घर से बहुत कम बाहर निकलता था, मेरे घर के आस पास बहुत लड़कियाँ रहती थी पर मैं बहुत शरमीला था इसलिए मैं सिर्फ़ उन्हें दूर से निहार ही सकता था और कुछ नहीं कर सकता था। कुछ महीनों के बाद मेरी जॉब पास में ही (ओखला) में एक इंटरनॅशनल कॉल सेंटर में लग गई थी। मेरी जॉब नाइट शिफ्ट की थी और सारा दिन मैं घर में रहता था। हर रोज़ मैं शाम को छः बजे के बाद ही उठता था।

एक दिन मेरी छुट्टी होने की कारण मैं थोड़ा जल्दी उठा तो देखा घर के कोई लड़की मेरी माता से बात कर रही है, बाहर आया तो देखा वो एक शादीशुदा औरत थी। क्या मस्त चीज़ थी यार ! वो देख कर खड़ा हो गया उसे। ज़्यादा से ज़्यादा पच्चीस साल की होगी, क्या मस्त फिगर थी ! उसके स्तन होंगे कोई 34 इंच के, कमर होगी 30 इंच और उसकी गाण्ड 36 इंच और उभरी हुई गाण्ड देख कर कोई भी पागल हो जाए।

मैने अपनी माता से पूछा तो वो हमारे घर के सामने वाले घर मे किराए पर रहती थी, उस का पति मेट्रो में काम करता था वो भी नाइट शिफ्ट। मैं उसके बारे मैं ही सोच रहा था तभी वो फिर मेरे घर आई और मुझे अपना देवर बोल कर बातें करने लगी।

अब मैं उसके लिए हर रोज़ जल्दी उठ जाता था, वो रोज़ मेरे घर आती और हम बातें करते, कभी कभी मैं उसे छू भी लेता था, हर रोज़ बातें करता रहता था तो वो मेरे से खुलने लगी, रोज़ मज़ाक करती मेरे साथ मेरी गर्ल-फ्रेंड के बारे मैं पूछती तो मैं मना कर देता कि मेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है।

तो वो मेरा मज़ाक उड़ाती !

मैं बोलता- आप मेरे गर्ल फ्रेंड बन जाओ।

कई बार तो मैं उसके बारे में सोच के मूठ मार लेता था। कई बार वो मेरे साथ बाज़ार भी जाती थी, मुझे वो बहुत अच्छी लगने लगी थी। मैं रोज़ उसकी चूत मारने की सोचता था।

अब गर्मियाँ शुरू हो गई थी। कई बार मैं घर में निकर पहन कर ही सो जाता था।

उस दिन मेरी माता कहीं गई हुई थी शाम तक आने का बोल कर। मैं सोते हुए भी उसी के बारे में सोचता था। मुझे पता नहीं चला कि कब वो मेरे घर में आ गई और मेरे ऊपर से चादर उतारने लगी, उतारते हुई उसका हाथ मेरे आधे खड़े लौड़े पर लग गया। वो एक दम धक से रह गई। मैं थोड़ी नींद में था, उसने अपना हाथ मेरी निकर के ऊपर ढाल लिया और मेरे लौड़े को महसूस करने लगी। अब मेरा लौड़ा भी तैयार होता जा रहा था। मेरी आँखों से नींद बहुत दूर थी। उसने लाल रंग की सलवार कमीज़ पहन रखी थी मैंने अपनी आँखें खोली तो उसने एक दम हाथ उठा लिया लेकिन उस की साँस चढ़ी हुई थी।

मैने अंजान बन कर कहा- क्या हुआ भाभी जी ?

वो बोली- कुछ नहीं, माता जी कहाँ है आपकी?

मैंने कहा- वो तो कहीं गई हैं, कल आएँगी !

तो उसने अपने आप को संभाल कर बोला, “आप आज काम पर जाओगे या नहीं?

मेरी उस दिन छुट्टी थी, मैने कहा,” नहीं आज नहीं जाना, क्यूँ क्या हुआ? आप क्यूं पूछ रही हैं?”

नहीं वैसे ही ! आज आप शाम को फ्री हो क्या?

मैने कहा,”हां जी !”

बोली,”आप का सामान बहुत बड़ा है !” उसने शर्माते हुए कहा।

मैं भी एकदम हैरान हो गया।

मुझसे बोली- बाहर निकाल के दिखाओ !

मैने कहा- खुद ही निकाल लो !

उसने झट से मेरी निकर में हाथ डाला और मेरे लौड़े को पकड़ कर बाहर निकाल लिया। एकदम उसकी आंखें हैरान रह गई इतना बड़ा देख कर !

वो हाथ से लंड को हिलाने लग गई और वो और भी टाइट होता चला गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। मेरे लंड पर मुझे थोड़ी गर्मी महसूस हुई तो मैंने आंखें खोली तो देखा कि उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया था।

मुझे मज़ा आने लगा, वो मेरे लंड को चाटती हुई मुँह में ले रही थी, मुझे मज़ा आ रहा था, मेरा लंड उसके मुँह में आधा ही जा रहा था। अब मैं खड़ा हुआ और उसको घुटनों के बल नीचे झुका दिया और उसके बाल पकड़ के अपना लंड उसके मुँह में देने लगा। मैं भी काफ़ी दिनों से उसकी चूत मारने की सोच रहा था। मुझे मज़ा आ रहा था।

मैं उसके बड़े बड़े मुम्मे पीना चाहता था। मैने अपनी निकर पूरी नीचे कर दी, वो भी काफ़ी खुश थी कि आज वो इतना बड़ा लौड़ा लेगी।

मैंने उससे बेड पर लिटा लिया और ऊपर चढ़ कर उसके होंठ पीने लगा। वो मेरे लंड को अपनी चूत पर घिसा रही थी सलवार के ऊपर से। अब मैने उसका सूट उतार दिया। उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहन रखी थी, मैने जोश में उसकी हुक तोड़ दी, वाउ ! वाऽऽवाहह क्या बूब्स थे उसके बिल्कुल सफ़ेद दूध जैसे ! इतने बड़े कि जितने मैंने सोचा नहीं था।

मैं उसके निप्पल मुँह से काटने लगा, उसके मुँह से आवाज़ें निकलने लगी- आअहह अहहा हाहः अहहा प्लीज़ मत करो !

मैने और ज़ोर से काटा, फिर चूसने लग गया उसके बूब्स।

अब उसकी हालत खराब हो गई थी। उसने अपनी सलवार खोल दी थी और मेरे लंड को अपनी पैन्टी के ऊपर से चूत पर हिला रही थी। मुझे भी मज़ा आ रहा था मेरे लोड्‍ा लोहा बन चुका था, अब मैं भाभी की चूत चूसना चाहता था मैं बेड के नीचे उतरा, नीचे बेत कर पनटी नीचे करी भाभी जी की और चूत पर अपनी जीव रगड़ने लगा, आअहह अहहा अहह अहह अहह प्लीज़ अपना लंड मुझे दो ना, पर मैं उसे अच्छी सी तरह चूसना चाहता था, मैं उसकी चूत के होंठों को चूस रहा था।

अब हम 69 पोज़ में आ गये। मैंने अपना खड़ा खंभा उसके मुँह में दे दिया और उसकी चूत चाटने लगा। वो बोलने लगी- प्लीज़ मेरे अंदर डाल दो ! प्लीज़ प्लीज़ !

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया उसकी गाण्ड पर ज़रा सा अपना लंड रखा, वो डर गई, बोली- नहीं ! चूत में प्लीज़, गाण्ड नहीं ! मैने पहले कभी नहीं मरवाई !

उसके 36 इंच के कूल्हे क्या लग रहे थे ! डॉगी स्टाइल ऐसा लग रहा था कि एक साथ तीन लण्ड खा जाएगी।

मैने उसकी चूत के छेद पर अपना लण्ड रखा और एक ज़ोर का ज़टका दिया, कसम से उसका रोना निकल गया क्यूँकि पूरा लंड एक ही झटके में अंदर था, उसकी आँखों से आँसू आ गये। लेकिन बोल रही थी- और ज़ोर से मज़ा आ रहा है, अहह अहह अहह अहह अहह ज़ोर से !

मैने उसकी कमर पकड़ी और ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा। मेरा लंड पूरा बाहर और फिर अंदर जाता, मेरा लंड उसकी चूत को पूरा भर रहा था।

वो बोली- जल्दी झटके मारो ! मैं आने वाली हूँ ! आहह आह अहह अहह अहह अहह अहह मर गई !

मैने उसे कन्धे से पकड़ा और लंड अंदर करके साथ में खड़ा कर लिया, मैं उसके मम्मे दबा रहा था और मेरा लंड अपना काम तो कर ही रहा था। अब वो झड़ गई थी। मैंने लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह में भर दिया और मम्मे दबाने लगा तो कुछ समय बाद वो फिर तैयार हो गई। अब मैं उसकी गाण्ड मारना चाहता था, मैंने उसे खड़ा किया, उसके हाथ दीवार के साथ लगाए, उसकी गाण्ड का छेद खोला और लंड अंदर डालने लगा। छेद टाइट था, लंड अंदर नहीं जा रहा था। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया, छेद पर लौड़ा रखा और अंदर घुसा दिया।

खूब दबा के चोदा उसे ! वो चिल्ला रही थी दर्द और आनन्द से ! मैं साथ ही उसके मम्मे दबा रहा था।

अब मैने उसे बेड पर लिटा लिया, उसकी चूत के नीचे तकिया रखा और उसकी बुर में लंड दे दिया फिर से ! अब मैं उसके होंठों पर चूम रहा था और ले रहा था उसकी !

अब मैंने झटकों की गति बढ़ा दी और उसके बूब्स खींचने लगा और मैं उसके अंदर झड़ गया। उसने मेरा लंड निकाला और चूसने लगी।

फ़िर उस रात मैने उसे बिना लाइट जलाए चोदा, बहुत मज़ा किया।

अब जब भी मेरा दिल करता है उसे चोदता हूँ !

मुझे भाभी और थोड़ी बड़ी उमर की औरतें बहुत पसंद है। Indian Sex Stories

Antarvasna

प्रियो पाठको और चुदाई Antarvasna करवाने वालियों को मेरा प्रणाम !

यह कहानी जो आपको बताने जा रहा हूँ, यह एकदम सच्ची घटना है, ७ महीने पहले की है।

मेरी उमर २६ साल और मेरी चाची की ४२ साल है।

मैं वैसे तो पहाड़ी इलाके का रहने वाला हूँ, एकदम गोरा, हृष्ट-पुष्ट, अच्छे खासे लंबे लंड वाला।

बात तब की है जब मैं अपनी चाची जी के घर मिलने के लिए गया था कोई ५-७ दिन के लिए। मेरे चाचा जी के २ लड़के है वो कोलेज में जाते हैं। मेरे चाचा जी नौकरी करते हैं। मैं शनिवार को उनके घर पहुंचा और रविवार को सब घर में थे! खाना खाया, अच्छा हँसे खेले, खूब मज़े किए। सोमवार को सब ९-१० बजे तक चले गये और मेरी चाची और मैं घर में थे। २-३ घंटे बाद मैं बोर होने लगा, मैंने चाची जी को बोला- आपके पास डीवीडी प्लेयर है?

उन्होंने बोला- है ! तुम्हारे चाचा जी के कमरे में है, जाओ बेटा देख लो !

जैसे ही मैंने ओन किया उसमें ब्लू फ़िल्म चली जिसमें बड़ा लंबा लंड वाला एक गोरा एक गोरी की बुरी तरह से चुदाई कर रहा था। मैं भी उसी फ़िल्म में खो गया था। थोड़ी देर बाद चाची अचानक नहा कर उसी कमरे में आ गई। मैं अपना लंड पैन्ट से बाहर निकाल कर बैठा था, जिसके साथ मैं खेल रहा था।

चाची एकदम बोली- तुम यह क्या देख रहे हो?

मैंने बोला- मैंने डीवीडी ओन किया तो यह अपने आप ही चल पड़ी, मैंने नहीं लगाई!

चाची ने बोला- बेटा यह तुम्हारे चाचा जी ही ले के आए थे।

मैंने पूछा- चाचा जी इतनी गंदी फिल्में देखते हैं?

बोली- हाँ बेटा !

फ़िर मैंने डीवीडी बंद कर दिया था ! इसके बाद मैंने मुठ मारी तब जा के मैं शान्त हुआ!

रात को हमने डिनर करने के बाद जब सोने लगे तो भी मेरे को चैन नहीं आ रहा था। २ घंटे बाद मेरे चाचा के लड़के सो गये। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा था और बाथरूम उनके घर में एक ही था जो कि हमारे कमरे में था। जैसे ही मेरा लौड़ा खड़ा हुआ तो मैंने फिर उसके साथ खेलने की कोशिश की, बाहर निकाला उतने में फिर चाची हमारे कमरे में आई। मैंने अपना लौड़ा एकदम पैन्ट में वापिस अंदर डाल लिया।

सुबह जब सब फिर अपनी-२ ड्यूटी पे चले गये तो चाची ने मेरे को बोला- बेटा तुम शादी कर लो !

मैंने बोला- अभी नहीं।

बोली- तुम्हें चैन तो आता नहीं !

मैंने बोला- ऐसा कुछ नही !

मेरी चाची ने इतना बोलते ही मेरे लौड़े पे हाथ रख दिया। मैं बोला- चाची यह आप क्या कर रही हो?

चाची बोली- तुम्हें शांत कर रही हूँ !

पर आप तो मेरी चाची हैं, मेरी माँ के समान !

बोली- चाची तेरी हूँ ! ना कि इसकी !

उसने बिना किसी डर के मेरी पैन्ट खोली, मेरा लौड़ा बाहर निकाला और चूसने लगी। मेरा लौड़ा भी एकदम फिर से टाइट हो गया। चाची ने ऐसे चूसा जैसे काफी समय से प्यासी थी।

मैंने भी चाची की कमीज़ खोली, नीचे उसने गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली, देख कर आँखे खुली ही रह गई, उसके मूमे ३८ साइज़ के थे, चूचुक भी ब्रा की तरह गुलाबी रंग के थे। मैंने भी चाची के मूमे ऐसे चूसे जैसे दूध पी रहा हूँ।

मेरे को चाची ने बताया- बेटे तेरे चाचा जी ब्लू फ़िल्म ले तो आते हैं पर देख कर सो जाते हैं, उनका लौड़ा खड़ा ही नहीं होता। मैं ४ साल से तरस गई हूँ, मेरी चूत ४ साल से चुदी नहीं है। मेरे को आज ऐसे चोद कि मैं चुदवाना भूल ही जाऊँ !

मैंने बोला- चाची ! मैं तो तुम्हारे बेटे के सामान हूँ !

बोली- बेटे ही मुसीबत में काम आते हैं। वो रोने लगी। मैं भी तैयार हो गया। चाची ने मेरा लौड़ा चूसते चूसते यह सब मेरे को बताया। मैं चाची को बेड पे ले गया और चाची के कपड़े उतारे तो मेरे लंड ने सलामी दी चाची की चूत को।

चाची की चूत इतनी सेक्सी के बता नहीं सकता। चूत की शेव करी हुई थी, जैसे के सब तैयारी पहले से ही कर के रखी हुई थी। उसने फिर से मेरा लौड़ा चूसना चालू किया, चाची के मूमे भी इतने बड़े थे कि मेरे हाथ में ठीक से आ नहीं रहे थे। अब मैंने उसकी भोसड़ी चूसनी चालू करी तो ऐसी चीखें मारी जैसे इक कुँवारी चुदने वाली है।

मेरा लौड़ा पूरे साइज़ में तैयार था ८.५” का !

बोली- बेटे तेरा लौड़ा तो बहुत ही बड़ा है !

मैंने जैसे चाची की चूत पर रखा, आधा तो आसानी से अंदर चला गया, बाद में रोने लगी बोली- मेरी भोसड़ी तो अब दर्द कर रही है।

मैंने एकदम जोर लगाया तो चाची की चूत से थोड़ा-२ खून निकला। थोड़ी देर बाद चाची भी धक्के देने लगी, मजे से चुदने लगी। चाची कोई २ बार झड़ चुकी थी, मेरा भी निकलने वाला ही था। मैंने चाची के अंदर ही डाल दिय॥ चाची बाद में बोली- तुमने तो आज मेरी भोसड़ी को अपने चाचाजी के लायक ही नहीं छोड़ा, इस भोसड़ी को भोसड़ा बना दिया, तुम्हारे इस लंबे लौड़े ने बुरी तरह से चोद दिया।

इसके बाद मैं चाची जी के पास ३-४ दिन और रुका, इन ३-४ दिनों में मैंने जमकर चुदाई की चाची की। चाची ने मेरे को औरत चौदने के सब तरीके भी सिखा दिए कुतिया स्टाइल, तकिया स्टाइल, खड़े हो के चोदना !

मैंने इन सब तरीकों से चाची की भोसड़ी भी मारी और ट्रेनिंग भी ली। आज भी चाची की मस्त चूत की याद आ रही है और दुबारा कोचिंग भी लेनी है।

वैसे हमारी फ़ोन पे भी अक्सर बातें होती रहती हैं!

पाठको ! मेरी कहानी आपको कैसी लगी मुझे मेल करना- Antarvasna

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆