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Massage Girl in Sindhudurg: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Sindhudurg who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Sindhudurg that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Sindhudurg massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Sindhudurg who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Sindhudurg massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Sindhudurg massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Sindhudurg who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Sindhudurg employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Sindhudurg helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Sindhudurg

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Sindhudurg at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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दोस्तो! Antarvasna

मेरा नाम आतिश है, मैं Antarvasna दिल्ली में रहता हूँ। मैं हमेशा यह सोचा करता था कि क्या मैं भी कभी अपनी ज़िन्दगी में किसी के साथ सेक्स कर पाऊँगा! मुझे ब्लू-फिल्म देखने की आदत है लेकिन क़िस्मत देखिए कि कभी भी मैं किसी के साथ सेक्स नहीं कर पाया था। मेरी उम्र 23 साल और कद 5 फीट 9 इंच है। वैसे लोग कहते हैं कि मैं स्मार्ट भी हूँ, ख़ैर छोड़िये।

लेकिन मैं आप को अपनी एक ऐसी हक़ीकत से वाक़िफ कराना चाहता हूँ जो मेरे साथ पहले कभी नहीं हुई। ये होने के बाद मैं मन ही मन बड़ा खुश होता रहता था क्योंकि जो मैं इतनी कोशिश करने के बाद भी नहीं कर पाया वो अचानक हो गया।

हुआ ये कि मेरे घर के सामने एक घर है जिसमें एक परिवार रहता है जो बिहार से है, उस परिवार में 4 सदस्य हैं जिनमें से 2 बच्चे और दो बड़े हैं

जून 2004 की बात है जब मेरा परिवार स्कूल की छुट्टियों की वज़ह से गाँव गई हुई थी तो बस मैं ही घर पर अकेला था। शनिवार की बात है उस दिन मेरे ऑफिस में छुट्टी होती है तो थोड़ा देर से सोया और देर से जागा। उसके बाद मैं फ्रेश हुआ और बिस्किट खरीदने के लिए दुकान पर गया।

वह दुकान बहुत ही छोटी थी और वहाँ भीड़ बहुत ज्यादा रहती थी। जहाँ मैं खड़ा था उसके एकदम आगे मेरे सामने वाली आंटी खड़ी थी वो भी कुछ सामान ले रही थी और भीड़भाड़ होने की वज़ह से हम एक-दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया फिर मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड आंटी की गाँड पर लग रहा है। मेरा लण्ड एकदम तन गया, मुझे बहुत मज़ा आने लगा।

फिर आंटी सामान लेकर जाने लगी, जाते हुए आंटी ने मेरी तरफ देखा, उनका चेहरा गुस्से से लाल था। मुझे पता नहीं क्यों, बहुत शर्म सी आई और फिर मैं भी उनके जाने के करीब 10-15 मिनटों के बाद घर आ गया।

मैंने पहले तो चाय पी, फिर अपने दरवाज़े के सामने खड़ा हो गया। अचानक आंटी ने अपना दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर आंटी ने मुझे कहा ‘बेटा, क्या तुम हमारा एक काम कर दोगे?’

‘कहिए आंटी जी- मैंने डरते हुए कहा।

उन्होंने कहा- बेटा, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है, तुम मेरा एक डिब्बा उतार दो।’

मैंने कहा- ठीक है। फिर मैं उनके घर चला गया, वहाँ ऊँचाई पर एक डिब्बा रखा हुआ था, आंटी ने बताकर कहा- बेटा यही डिब्बा उतारना है।’

मैंने डिब्बा उतार दिया। तभी आंटी ने गेट बन्द कर लिया।

मैंने कहा- आंटी! मैं जाता हूँ, तो उसने मुझे बुलाया- इधर आओ-

यह सुनकर मेरी तो हवा ही खिसक गई, लेकिन फिर मैं भी हिम्मत करके चला गया। मैंने कहा ‘कहो आंटी, क्या कोई और कोई काम है?’

‘नहीं, एक बात पूछनी थी।’ आंटी ने कहा।
मैं डर गया, डरते-डरते मैंने कहा- कहिए आंटी जी!’
आंटी ने पूछा- तुम्हारी उम्र कितनी है?’
मैंने जवाब दिया- आंटी जी, 23 साल!’

फिर आंटी ने कहा कि मेरी उम्र 40 साल है और मैंने तुम्हारी माँ के उम्र की हूँ, तुम्हें शर्म नहीं आई दुकान पर ऐसी हरक़त करते हुए?

मैंने गर्दन नीचे किये हुए उनसे माफी माँगी- आंटी मुझे माफ कर दो, आज के बाद ऐसा नहीं होगा- मैं उनके सामने हाथ जोड़ने लगा।
‘अरे कोई बात नहीं, ऐसी उमर में ऐसा होता है। पहले भी किसी के साथ ऐसा या कोई और गलत काम किया है?’
मैं कुछ नहीं बोला।

फिर आंटी ने कहा- अरे शरमाओ मत, बताओ।’
‘नहीं आंटी! अभी तक नहीं।’
‘शादी से पहले कम से कम 2-3 बार ज़रूर करना चाहिए।’

मैंने हिम्मत करके कहा- क्यों आंटी?’
‘क्योंकि हर काम से पहले ट्रेनिंग ज़रूरी है, जैसे आर्मी वालों को दी जाती है। क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?’
‘नहीं आंटी जी, मेरी कोई भी गर्लफ्रेण्ड नहीं है।’
‘ये तो बड़े ही दुःख की बात है।’ आंटी ने कहा।
‘अगर तुम इजाज़त दो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ।’ आंटी ने आगे कहा।
‘कैसे?’ मैंने प्रश्न किया।

उन्होंने कहा- मैं तुम्हें ट्रेनिंग दूँगी ताकि तुम अपनी बीवी को ज़्यादा खुश रख सको। क्या तुम तैयार हो?’
‘जी हाँ आंटी, जैसा आप कहें।’

मैं सोच रहा था कि ये मेरे साथ ऐसी बातें कैसे कर रही हैं, वो भी पहली बार। मुझे लगा शायद दुकान वाली हरकत की वज़ह से वह मुझसे ऐसी बातें कर रही है।

आंटी ने मेरे हाथ अपने चेहरे पर लगाये और मुझे कहा कि मेरे गालों को सहलाते रहो। मैं ऐसा ही करता रहा। फिर आंटी ने मेरा हाथ अपनी टाँग पर रखा और मुझसे कहा- मेरी टाँग पर अपना हाथ फेरते रहो।

मैं ऐसा ही करता रहा। मुझे भी मज़ा आने लगा। आंटी बहुत गरम होने लगी और मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरी गाँड पर हाथ फेरने लगी।

मैंने अपना हाथ टाँग से हटाकर आंटी के मोटे-मोटे बूब्स पर रखा, वैसे तो उन्होंने कपड़े नहीं उतारे थे, पर फिर भी मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। आंटी कहने लगी कि तुम तो इंटेलीजेन्ट हो, अपने आप ही हाथ रख लिया।

फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से बूब्स दबाने लगा, आंटी एकदम पागल सी हो गई। मैं भी होश खो बैठा और अपना हाथ आंटी के पेटीकोट में अन्दर उनकी प्यारी सी चूत पर रखा, वो एकदम मुझसे चिपक गई।
फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी चूत में डाली और बार-बार अन्दर-बाहर करने लगा। आंटी को बड़ा मज़ा आने लगा। मज़े की वज़ह से वो सिसकियाँ लेने लगी। उनके मुँह से आवाज़ें आ रहीं थीं… हाय! मैं मर गईईईई…! ओओओ…! ह्ह्ह्ह।

फिर अचानक आंटी ने कहा कि मैं तुम्हें इस ट्रेनिंग का आखिरी पाठ सिखाती हूँ और फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे अपने बेड पर लेटने के लिए कहा। मैं लेट गया। उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये।

अब वो मेरे सामने एकदम नंगी थी। वो उतनी ख़ूबसूरत तो नहीं थी, पर उसकी फिगर लाजवाब थी। फिर वो मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़कर अपने हाथ को ऊपर-नीचे करने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उन्होंने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और फिर अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी। मेरा लण्ड एकदम तन गया और करीब 7-7.5 इंच का हो गया।

फिर उन्होंने फिर मुझे कहा कि अब तुम उठो और मैं लेटती हूँ। मैं सोच रहा था कि यार, कहीं इसका दिमाग तो खराब नहीं हो रहा है, लेकिन फिर ये सोचकर कि कहीं बना-बनाया काम न बिगड़ जाये, मैंने कुछ नहीं कहा। फिर वो लेट गई और मुझे कहा अपना मुँह मेरी दोनों टाँगों के बीच में रखकर मेरी चूत को चाटो!

मैंने कहा, आंटी ये गन्दी है। आंटी ने पूछा- क्या तुम अपनी बीवी को खुश नहीं रखना चाहते?’

मैंने उत्तर दिया ‘हाँ’।
‘तो फिर चलो, जल्दी करो।’
मैंने चाटना शुरू कर दिया।

मैंने देखा कि आंटी की आँखें बन्द हैं और वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ ले रहीं हैं। थोड़ी देर ऐसा ही करने के बाद आंटी ने कहा ‘रूको!’

मैंने पूछा ‘क्या हुआ?’

आंटी ने कहा- कुछ नहीं हुआ, अब मैं तुम्हें सबसे मज़ेदार, और सबसे आख़िरी स्टेप सिखाती हूँ।

फिर आंटी ने अपनी टाँगें ऊपर कीं और मुझे कहा कि अपना लण्ड मेरी चूत पर रखो और अपने हाथ मेरे कंधे के पास। मैंने ऐसा ही किया। फिर आंटी ने मेरा गरम लण्ड अपनी गरम चूत पर रखा और मुझे कहा कि अब धीरे-धीरे इसे अन्दर करते रहो। मैंने ऐसा ही किया। जब मेरा आधा लण्ड अन्दर जा चुका था तो मुझे बड़ा मज़ा आने लगा।

आंटी कह रही थी कि तुम्हारा लण्ड कितना मोटा है। बड़ा दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- अगर आप कहती हैं तो मैं निकाल लेता हूँ।

आंटी ने कहा, नहीं मेरी जान, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, और दर्द तो ज़रूर होता है और जितना दर्द होगा, बाद में मज़ा भी उतना ही आयेगा।

मैंने फिर एकदम से अपना सारा का सारा लण्ड उसकी गरम चूत में पेल दिया। वो चिल्लाने लगी, कहने लगी कि इसे फाड़ेगा क्या। उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।

मैंने पूछा- बहुत दर्द हो रहा है क्या?’
‘जानवर की तरह करेगा तो दर्द नहीं होगा?’
‘सॉरी आंटी…!’

आंटी बोली- कोई बात नहीं, तुम लगे रहो, धीरे-धीरे दर्द कम हो जाएगा।’

चार-पाँच मिनट बाद शायद उसका दर्द कम हो गया, क्योंकि वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी- आज इसे फाड़ दो… मैं तुम्हारी हूँ… ज़ोर-ज़ोर से पेलो मेरी जा..आआआन… आआआआह ईईईईईईई ऊऊऊऊऊ आआआआआह मैं मर गईईईईई।

तकरीबन 15 मिनट के बाद आंटी ने कहा मेरी जान अब दूसरा स्टेप करते हैं और वो फिर उठी और डॉगी स्टाईल में हो गई और मुझे कहा अब दुबारा अपना काम शुरू करो।

मैंने फिर उसकी गरम चूत में अपना सात इंच का मोटा लण्ड पेल डाला। वो फिर सिसकियाँ लेने लगी, और चिल्लाने लगी- मैं मर गई… आज मेरी चूत को फाड़ डालो मेरी जान…’

और मैं भी मज़े से पागल हो रहा था। हम दोनों की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं।

तकरीबन 10 मिनट बाद आंटी ने कहा ‘ज़रा हटो।’
‘क्यों आंटी?’
‘अब मैं तुम्हें वो स्टेप सिखाऊँगी जो अन्त में करना चाहिए, जब तुम्हारी गाड़ी मंज़िल पर पहुँचने वाली हो।’
‘ठीक है आंटी।’

वो पिर उसी पोज़ीशन में आ गई जैसे कि शुरू में थी, अपने दोनों पैर ऊपर उठा लिये और फिर कहा कि अब दुबारा इसमें डाल दो, और चाहे जो कुछ भी हो, अपना लण्ड अन्दर ही रहने देना।

मैंने सोचा कि यार क्या होगा, फिर मैंने अपना लण्ड घुसेड़ दिया और तकरीबन 6-7 मिनटों के बाद मुझे और आंटी को बड़ा जोश आने लगा। हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगे… आहहहह ओययययय आआ आआह हहह।

मैंने फिर आंटी से कहा कि आंटी लगता है मेरे लण्ड से कुछ निकलने वाला है।
‘मेरी भी चूत से निकलने वाला है, लेकिन तुम अन्दर ही रखना और अन्दर ही डाल देना जो भी निकलेगा।’
मैंने कहा- ठीक है।’

आंटी फिर शायद झड़ने वाली थी क्योंकि उसने मुझे बहुत कसकर पकड़ रखा था और आंटी कहने लगी मेरी जान… मैं मर गई… मैं झड़ने वाली हूँ। फिर वह झड़ गई।

दो मिनट बाद मेरा भी काम हो गया। आंटी पहले भी 1 बार बीच में झड़ चुकी थी, फिर हम दोनों थोड़ी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे और फिर आंटी ने कहा- लो ये कपड़ा और इसे साफ कर लो।’ आंटी ने भी अपनी चूत साफ कर ली और फिर पूछा- कुछ सीखा?’

‘हाँ आंटी, मैं सीख गया।’

‘मेरी जान अब मैं तुम्हारी हो चुकी हूँ। अगर तुम्हें मेरी क्लास अच्छी लगी हो तो तुम रोज़ आ सकते हो।’

‘ठीक है आंटी जी मैं रोज़ सीखने आया करूँगा।’ मैंने उत्तर दिया।
आंटी ने मुझे एक लम्बी पप्पी दी और कहा कि अब तुम जाओ मेरी जान।
फिर मैंने कपड़े पहने और अपने घर वापस आ गया।

उसके बाद मैं आंटी को चोदने रोज उसके घर जाने लगा।
1 महीने तक हमने खूब मस्ती की। और अब भी जब मौका हाथ लगता है हम दोनों सेक्स करते हैं, खूब मज़े लेते हैं… अब मैं एक दूसरी औरत पर लाईन मार रहा हूँ जिसकी शादी अभी-अभी हुई है। अगर हमारी बात वहाँ तक पहुँचती है तो मैं आपको ज़रूर लिखूँगा… बाययय

प्लीज़ आप मुझे बतायें कि आपको मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी।
मुझे मेल करें! मैं आपके मेल का इन्तज़ार करूँगा! Antarvasna


मेरा नाम साजिद है और मैं राजस्थान के चुरू जिले का रहने वाला हूँ.
मैं थोड़ा सांवला हूँ.

ये वैरी हॉट गर्ल सेक्स कहानी मेरी भतीजी की है. उसका नाम रुखसार है और उसको हम सभी प्यार से गुड्डू बुलाते हैं.

कुछ साल पहले जून 2018 की बात है. मैं सीढ़ियों से गिर गया था तो मुझे स्लिप डिस्क की प्रॉब्लम हो गई थी.

डॉक्टर के कहने पर मैंने बहुत किस्म की दवाइयां लीं पर कुछ आराम नहीं मिला.

इस बात की जानकारी मेरे सभी निकट सबंधियों को हो गई थी.
मेरे मौसी के लड़के यानि मेरे मौसेरे भईया ने मुझे अपने पास श्रीगंगानगर में बुला लिया.

वहां पर भईया का एक दोस्त डॉक्टर था, उन्होंने मेरा इलाज उससे करवाने के लिए कहा था.
मैं उनके पास चला गया और उनके मित्र डॉक्टर को अपनी समस्या दिखाई.

उन्होंने इलाज भी किया. उनके इलाज से एक दो हफ्ता तो ठीक लगा और मैं उस डॉक्टर के इलाज पर भरोसा करने लगा.

श्रीगंगानगर में भाभी और भईया और उनका बेटा यानि मेरा भतीजा, मेरा खूब ख्याल रखते थे.
उनके घर पर भईया भाभी की एक लड़की भी थी, जो मेरी भतीजी भी थी.

उसकी शादी 10 फरवरी 2018 को हो चुकी थी.
वह अपनी ससुराल में थी.

मेरे श्रीगंगानगर जाने के दो हफ्ते के बाद वह ससुराल से आई और अपने शौहर के साथ रात को बाहर वाले कमरे में रुक गई.
उस रात वे दोनों शौहर पत्नी बाहर वाले रूम में सो रहे थे और हम सभी अन्दर सो रहे थे.

रात को तकरीबन एक बजे मुझे पेशाब लगी तो मैं उठा और पेशाब करके वापिस लौटने लगा.
उसी वक्त मुझे भतीजी के कमरे से आवाजें आती सुनाई देने लगी थीं.

पता नहीं, मुझे क्या होने लगा और मैं उनके दरवाजे के पास को आ गया.
मैं दरवाजे से झांक कर देखने की कोशिश करने लगा.
पर काफी कोशिशों के बाद भी मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया.

बस उन दोनों की सेक्स की आवाजें आ रही थीं.

पांच मिनट बाद वे आवाजें भी आना बंद हो गईं.
शायद वे दोनों झड़ कर शांत हो गए थे.
मैं लंड सहला कर वापस अपने कमरे में गया और सो गया.

अब दूसरे दिन मैंने भतीजी वाले रूम के दरवाजे में एक छेद खोज लिया.
अब बस मुझे रात होने का इंतजार था.

रात को सभी के सोने के बाद मैं उनके दरवाजे के पास आ गया और अन्दर झांक कर देखने लगा.
अन्दर वह बिल्कुल नंगी थी और अपने शौहर का औजार हिला रही थी.

मैं यह सोच भी नहीं सकता था कि मैं ये सब देख रहा हूँ. मेरी भतीजी की नंगी चूचियां मेरा हाल बुरा कर रही थीं.
उसका गदराया और गोरा बदन मुझे उत्तेजित करने लगा और उस दृश्य ने मेरे हाथ को लौड़े पर ले जाने पर विवश कर दिया.

मुझे पता ही नहीं चला कि रुखसार का फिगर साफ नजर आ रहा था.
उसकी चूचियां 34 की, कमर 32 की और उसके 36 इंच के चूतड़ मुझे बेकाबू कर रहे थे.

रुखसार अपने शौहर का औजार अपने मुँह में ले रही थी.
उसे लंड चूसते देख कर ऐसा लग रहा था मानो उसके शौहर को जन्नत मिल रही हो.

वह अपनी टांगों के बीच में रुखसार का सर दबाए हुए था और उसकी हल्के स्वर में आह आह की आवाजें उसकी कामुकता को साफ दर्शा रही थीं.

उस वक्त मुझे अपनी भतीजी रुखसार भी इतनी सेक्सी लग रही थी मानो वह कोई आसमानी परी हो.
कुछ देर बाद उन दोनों ने पोजीशन बदल ली.
वह फिर से लंड पर झुक गई थी.

इस बार उसकी गांड मेरी तरफ थी.
कमरे की तेज रोशनी में उसकी गांड और चूत साफ दिख रही थी.

वैरी हॉट गर्ल की टांगों में से उसकी चूत की फांकें ऐसी दिख रही थीं मानो कोई खिला हुआ गुलाब हो.

कुछ देर तक मुख मैथुन के बाद उसके शौहर ने चुदाई की स्थिति बनाई और रुखसार की चूत में अपना लंड पेल दिया.
रुखसार चिल्लाने लगी.

उसका शौहर जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ मिनट बाद उसका शौहर उससे अलग हो गया और लेट गया.

रुखसार उसके ऊपर बैठ गई.
जब वह अपने शौहर के लंड के ऊपर बैठी, तो उसका चेहरा मेरी तरफ था.

वह जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी और वासना की हवस उसके चेहरे पर साफ दिख रही थी.

उसके दोनों चूचे कसी हुई गेंदों के जैसे उछल रहे थे.
यह सब देख कर मैं भी अपना लंड हिलाने लगा था.

पता ही नहीं चला कि कब उसके शौहर की जगह मैं खुद को महसूस करने लगा.
उस समय मैं एक अलग आनन्द की दुनिया में जा चुका था.

गुड्डू की सिसकारियां मेरे कानों में एक अलग ही रस की अनुभूति कर रही थीं.
तकरीबन दस मिनट के बाद उन दोनों का पानी निकल गया.

उसने गुड्डू की चूत में ही सारा पानी डाल दिया और वह दोनों ऐसे ही लेट गए.
फिर मैं भी बाथरूम में जाकर उसकी पैंटी को सूंघ कर लंड हिलाने लगा.

मैंने अपना सारा माल उसकी पैंटी पर ही छोड़ दिया और आकर सो गया.

अगले तीन दिन तक मैं अपनी भतीजी की चुदाई लीला को देखता रहा और इस बात से वाकिफ़ हो गया था कि गुड्डू को रोज रात में सेक्स चाहिए ही होता है. बिना चुदे वह सो नहीं पाती है.

क्योंकि कल रात को जब गुड्डू के शौहर ने उसे बिना चोदे ही अपनी टांगें पसार ली थीं और वह सोने लगा था तब गुड्डू ने उसे हिला कर जगाया और कहने लगी- तुम मुझे बिना चोदे कैसे सो सकते हो?
उसने जिस तरह से अपने खाविंद को जगाया था, वह तरीका देख कर तो मेरे होश फाख्ता हो गए थे.

गुड्डू ने पहले अपने शौहर को आवाज देकर उठाने की कोशिश की पर जब वह नहीं उठा तो उसने अपनी कुर्ती उतारी और ब्रा भी निकाल कर फेंक दी.
फिर वह अपने दोनों बड़े बड़े मम्मों के निप्पलों को हाथ में पकड़ कर अपने शौहर के दोनों नथुनों में घुसाने लगी.

इससे उसके लंबे अंगूर के जैसे कड़क निप्पलों ने टीट सी बना कर नाक के नथुनों को बंद कर दिया. इससे गुड्डू के शौहर को सांस आना बंद हो गई और वह हड़बड़ा कर उठ गया.

उसके उठते ही गुड्डू ने अपने एक निप्पल को अपने शौहर के मुँह में दे दिया और कहने लगी- लो अंगूर चूसो मियां.
उसके शौहर ने भी गुड्डू के निप्पल को अपने होंठों में दबा लिया और वह उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से खींचते हुए चूसने लगा.

जल्द ही गुड्डू एक सांडनी सी गर्म हो गई और उसने अपने शौहर के सारे कपड़े उतार दिए.
उसको नंगा करने के बाद वह भी अपनी सलवार और चड्डी को उतार कर मादर्जात नंगी हो गई.

गुड्डू की चूत एकदम चिकनी थी और उस पर झांट के एक बाल भी वजूद नहीं था.

गुड्डू ने 69 का पोज लेते हुए अपने आपको अपने शौहर के ऊपर सैट कर लिया और उसके मुँह पर अपनी चूत रख दी.
उसके शौहर ने चूत में जीभ फिरानी शुरू कर दी.

दूसरी तरफ गुड्डू ने अपने मियां का लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे सहलाती हुई चूसने लगी.

जल्द ही गुड्डू के शौहर का लंड एकदम टाइट हो गया और वह गुड्डू की चूत को चोदने के लिए तैयार हो गया.
गुड्डू झट से अपने शौहर के ऊपर से उठी और खुद बिस्तर पर चित लेट कर अपने शौहर को अपने ऊपर आने का इशारा करने लगी.

शौहर ने अपनी बीवी यानि मेरी भतीजी गुड्डू की चूत के छेद पर लौड़े का सुपारा सैट किया और एक झटका देते हुए लंड को अन्दर पेवस्त कर दिया.
गुड्डू की एक मीठी आह निकली और वह चूत चुदवाने लगी.

दो ही मिनट बाद दूल्हे मियां ने लंड चूत से निकाला और वह उसे इशारे से कुतिया बनने की कहने लगा.
जैसे ही गुड्डू कुतिया बनी, उसके शौहर ने अपना लंड गुड्डू की गांड में रगड़ दिया.

गुड्डू ने कहा- आह साले … वह गलत जगह है.
उसके शौहर ने चूत में लंड पेला और गुड्डू के ऊपर चढ़ कर उसकी चूचियां दबोच कर चुदाई करने लगा.

कुछ ही झटकों के बाद उन दोनों की चुदाई मस्त चलने लगी.
गुड्डू के शौहर ने कहा- बेगम, आज छोटी लाइन पर गाड़ी चलाने का मन कर रहा है.

गुड्डू समझ गई कि उसका शौहर उसकी गांड मारने की बात कर रहा है.
उसने कहा- उस तरफ भूल कर भी नजर मत डालना मियां … वरना मामला काजी साहब की अदालत में पहुँच जाएगा.

गुड्डू के शौहर ने गुड्डू की दोनों चूचियां मसलते हुए कहा- मां की चूत काजी की. वह तो साला खुद तेरे साथ हलाला के चक्कर में है.
गुड्डू हंसने लगी और बोली- यार मियां तुम समझते क्यों नहीं हो. उधर से तुम्हारा लंड लेना बड़ा मुश्किल का काम है. तुम गांड की चुदाई को कोई आसान सा काम समझ रहे हो?

शौहर ने कहा- मुझे मालूम है कि दिक्कत और दर्द दोनों ही होते हैं. पर कोशिश करो तो सब आसान हो जाता है.
गुड्डू ने कहा- वो सब अपने घर चल कर ट्राई करेंगे … इधर अब्बू के घर नहीं.

उसके शौहर ने कुछ नहीं कहा और वह तेज तेज झटके देते हुए गुड्डू की चूत चुदाई को अपने चरम तक ले जाने की कोशिश करने लगा.
करीब पांच मिनट बाद वे दोनों झड़ कर लेट गए और लंबी लंबी सांसें लेने लगे.

मैं भी समझ गया कि अब काम खत्म हो गया है और यदि इन दोनों के बीच वापस चुदाई होगी भी तो अभी आधा घंटा कुछ नहीं होगा.
मैं अपने कमरे में आ गया और अपने लंड को हिला कर झाड़ कर ढीला हुआ और सो गया.

अगले दिन गुड्डू का शौहर अपना सूटकेस लेकर जाने लगा था. गुड्डू अभी कुछ दिन यहीं रहने वाली थी.
अपनी भतीजी की रोजाना चुदाई की आदत को याद करके मेरे मन में भी एक बार को आया कि शायद मेरा चांस बन सकता है.

उस रात को मैं पेशाब करने के लिए गया तो गुड्डू के कमरे की खिड़की में झांक कर देखा.
अन्दर मेरी भतीजी गुड्डू पूरी नंगी थी और अपने शौहर के साथ वीडियो चैट करती हुई फोन सेक्स का मजा ले रही थी.

मैं उधर ही खड़ा रह कर लंड हिलाने लगा और कुछ समय बाद अपने कमरे में आकर सो गया.
मुझे इस बात का अहसास ही नहीं था कि मेरी मौजूदगी की खबर गुड्डू को हो गई थी.

अगले ही दिन मेरे बड़े भाई जान को अपने काम के सिलसिले में दिल्ली जाना था और वे मुझसे घर की देखभाल की कह कर चले गए.

रात हुई तो रोज की तरह मैं बाथरूम में गया और बिना कुछ देखे अपना लोअर नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल कर मूतने लगा.
लंड से पेशाब निकल जाने के बाद मैंने लंड को हाथ से मुठियाते हुए बुदबुदाना शुरू कर दिया- आह गुड्डू … किसी दिन मुझे भी मौका देकर देख जालिम … तेरी चूत के परखच्चे न उड़ा दूँ तो कहना.

यही सब कहते हुए मैंने लोअर ऊपर किया और बाथरूम से बाहर कदम रखा ही था कि वैरी हॉट गर्ल गुड्डू की आवाज आई- आज आपको मौका दिया जा सकता है चचाजान!

बस इतना कह कर वह तेजी से बाथरूम से बाहर निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ गई.
मुझे काटो तो खून नहीं.
एक पल को तो मैं सकपका गया था.
फिर गुड्डू ने अपने कमरे की देहरी से मुझे आने का इशारा दिया और मुस्कुरा दी.

Antarvasna

मेरा नाम जानवी है मै 19 साल की हूँ मै अपनी Antarvasna सेक्स कहानी आपको बताती हूँ. जब मेरे भइया मोंटू ने मुझे पहेली बार चुदाई का मजा चखाया .
एक दिन की बात है मै अपनी रूम मै सो रही थी मेरी कमर मै जोरों का दर्द हो रहा था घर मै कोई नही था तो मैंने मोंटू को बुलाया कि मेरी कमर पे मालिश कर दे मै उल्टा लेट गई और मेरे कमीज़ के अंदर अपने हाथों से मोंटू मालिश करने लगा धीरे धीरे मेरा दर्द कम होने लगा तो मेरी आंख लग गई
जब आंख खुली तो मेरे बदन पे कमीज़ नही था और मेरी ब्रा भी नही थी. मोंटू मेरे बड़े बड़े दोनों बूब को बारी बारी चूस रहा था मुझे भी मजा आ रहा था इसलिए मै भी चुप रहकर चुसवाती रही मोंटू ने मेरी दोनों निपल को चूस चूस के बहुत टाईट कर दी थी मै जग कर भी सोने का नाटक कर रही थी क्योंकि मुझे बहुत ही मजा आ रहा था मेरी चूत पानी पानी होकर मोंटू के लंड का इंतजार कर रही थी लेकिन मै यह बात मोंटू को बता नही सकती .

इतने मै मोंटू ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया मै तो उसका बड़ा लंड देख कर पागल हो रही थी मोंटू ने अपना लंड (लौड़ा ) मेरे बूब पर रख कर रगड़ना शुरू किया तो मुझे और मजा आने लगा मोंटू का लंड मेरी दोनों निपल से खेल रहा था मै लंड अपने मुंह मै लेकर चूसना चाहती थी लेकिन क्या करू , और मै अब सोच रही थी के मोंटू मेरी सलवार भी उतार दे और मेरी चिकनी हो रही चूत मै लंड डाल कर मुझे चोदे लेकिन मोन्टू तो अपने लन्ड से मेरे बूब्स से खेलने में लगा था।

थोड़ी देर बाद मोन्टू ने अपना लन्ड मेरे मुंह पर लगाया तो मुझ से रहा नहीं गया, मैंने तुरन्त ही लन्ड को अपने मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी। मोन्टू भी अपने आपे में ना रहा और बोला – बहन ! मेरे लन्ड को और जोर से चूसो, लोलीपोप की तरह चूसो, बहुत मज़ा आ रहा है आऽऽहा आऽऽह म्म आ।

मैने सोचा कि मोन्टू मेरे मुंह में चुदाई करेगा तो मेरी चूत का क्या होगा, वो तो प्यासी रह जायेगी।
मैंने अपने मुंह से लन्ड को छोड़ दिया और बोली- बस भैया! अब मेरी चूत की बारी है। भोंसड़ी की कभी की पानी पानी हो कर तुम्हारे लन्ड का इन्तजार कर रही है।
मोन्टू ने तुरन्त ही मेरी सलवार उतार दी। मैंने पैन्टी नहीं पहनी थी तो मोन्टू बोला- बहना कच्छी क्यों नहीं पहनी?
मैं बोली- रोज़ाना रात को अपनी उन्गली से अपनी चूत को चोदने में कच्ची पहन कर मज़ा नहीं आता। अब बातें कम करो और मेरी चूत को चाटो।
तुरन्त ही मोन्टू मेरी टांगें फ़ैला कर चूत को चाटने लगा तो मेरी चूत, भोंसड़ी की, और पानी छोड़ने लगी।

भैया अपनी पूरी जबान मेरी भोस में डाल कर चाट रहा था। मेरे मुंह से आआऽऽहऽऽ निकलने लगा और मैं मोन्टू के लन्ड को अपने हाथ में लेकर जोरों से हिलाने लगी तो मोन्टू पलट कर मेरे ऊपर आ गया और बोला- मेरी बहना ! अब मैं अपना लन्ड तेरी चूत में डाल कर चोदता हूं।
उसने मेरी चूत पे अपना लन्ड रख कर जोर से धक्का दिया तो मैं खुशी के मारे आऽऽऽहें भरने लगी। भैया मुझे चोदे जा रहा था और मैं चुदवाती जा रही थी।
थोड़ी देर तक चुदाई के बाद भैया ने अपना लन्ड मेरी चूत में से निकाल कर मुझे ऊपर आने को कहा।
भैया नीचे लेट गया और मैं उसके ऊपर।
मैंने अपनी पीकी भैया के लन्ड के ऊपर रखी और धीरे से धक्का लगाकर फ़िर से चुदाई शुरू कर दी। भैया मेरी चूत में नीचे से धक्का मार रहे थे। मैं भी उछल उछल कर भैया के लन्ड का मज़ा ले रही थी। भैया मेरी चूत को चोदते चोदते मेरे दोनो बूब्स को अपने हाथों से दबा रहे थे।

मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी कि भैया का वीर्य निकल पड़ा। मैंने तुरन्त अपनी भोस में से भैया का लौड़ा निकाल दिया और भैया को बोली- मोन्टू ! तूने अपनी चुदाई पूरी कर ली, अब मेरा क्या होगा।
मोन्टू ने एकदम मुझे लिटाया और मेरी चूत को अपनी जबान से चोदने लगा। मैं भी अपनी चूत को हिला हिला कर चुदवाती रही और चुदाई का पूरा मज़ा ले लिया।

अपने भैया से चुदाइ का मज़ा लेने के बाद दूसरा नम्बर था मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के का। मैं मन ही मन उसे चाहती थी पर उसे कहने में शरमाती थी। एक रात को मैं अपनी छत पर गयी तो देखा कि वो अपने घर की छत पे सो रहा था। मैंने उसे आवाज़ दी पर उसने सुना नहीं।
फ़िर मैंने उसे एक छोटा सा पत्थर फ़ेंक कर मारा तो उसकी नींद खुल गयी और वो मेरे पास आ गया, मुझसे पूछा कि क्या कर रही हो और मुझ से चिपट कर मेरे होठों को चूम लिया।

जैसे ही वो मेरे गले से लिपटा, मेरी चूत में उबाल सा आ गया। वो मुझे जोर जोर से किस करने लगा और मुझे अपने बिस्तर पर लिटा लिया, मेरी सलवार खोल ली और अपना लन्ड मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा।

तभी उसके घर वाले जाग गये और मैं अपनी खुली सलवार में ही अपने घर आकर सो गयी। इस प्रकार हमारी कहानी शुरू हुई। उस दिन के बाद वो मुझ से हर रोज मिलने लगा और हमारा चूत लन्ड का खेल चलता रहा। वो मेरे होटों को चूसता तो मेरी जान ही निकल जाती और उसका लन्ड हाथ में पकड़ लेती जो कि डण्डे की तरह खड़ा हो जाता था। वो कभी मेरे घर पर आ जाता और कभी मैं उसके घर पर जाकर गान्ड मरवाती थी।

एक दिन उसने कहा कि मेरा एक दोस्त है, तुम उससे दोस्ती कर लो।
मैंने मना कर दिया तो वो नाराज़ हो गया।
तब मैंने कहा- ठीक है, दोस्ती कर लूंगी पर उससे चुदाई नहीं करवाउंगी।
तो उसने बताया कि उसका लन्ड बहुत ही मस्त है, एक बार करवा कर तो देखो। उस टाईम मैंने कुछ नही कहा.

एक दिन वो अपने दोस्त को अपने घर पर ले आया और मुझे भी अपने घर पर बुला लिया। मुझे यह पता नही था कि उसने अपने दोस्त को घर पर बुलाया हुआ है।. और मैं उसके घर पर चली गयी . लेकिन जब जाकर देखा तो उसका दोस्त उसके घर पर ही है तो मैं वापस जाने के लिए मुडी तो उसने मुझे पकड़ा और कहा कि ये मेरा ख़ास दोस्त है और इसकी इच्छा पूरी कर दो उसने बहुत मिन्नतें कि तब मैं मान गयी . तब वो बहार चला गया और उसके दोस्त ने मुझे नंगा कर दिया और मेरे मम्मे चूसने लगा और फिर मेरे होठों को चूसने लगा .

तभी वो भी आ गया और एक मेरी गीली चूत को चाटने लगा और एक मेरे होठों को चूसने लगा मुझे बहुत ही मजा आ रहा था . तभी उन्होंने मुझे झटके से अपने बिस्टर पर लिटा लिया और उसके दोस्त ने एक झटके से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया मेरी चीख निकल गयी .और उसने मुझे जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया और दूसरे ने अपना मोटा लंड मेरे मुंह में डाल दिया . और जोर जोर से चुसाने लगा . मुझे बहुत ही मजा आ रहा था .

तभी मुझे किसी के आने कि आहट हुई तभी मैंने देखा कि मेरे प्रेमी कि कोई दूसरी लड़की से भी दोस्ती है उसने उसको भी अपने घर पर बुला लिया था.मुझे जलन भी हुई और थोडी राहत भी क्योंकि मेरा साथ देने वाली आ गयी थी . वो उस लड़की को भी चोदा करता था लेकिन मुझे उस दिन ही पता लगा कि वो दूसरी लड़की कि चुदाई भी करता है.

फिर मेरी दोस्ती उस लड़की के साथ भी हो गई. उस लड़की ने भी अपने 3-4 प्रेमी बनाये हुए थे उसने मुझे उनके साथ सेक्स करने के लिए प्रोपोज किया मैं तैयार हो गई क्योंकि मैंने दो के साथ सेक्स करने का मज़ा चख लिया था इसलिए मेरी चूत में आग लग रही थी . वो मुझे अपने दोस्त के घर पर ले गई वहां पर हमने चाय पी और वो मुझसे बातें करने लगा और साथ साथ उसकी नज़र मेरी बूब्स पर थी. मुझे भी मज़ा आ रहा था …इस दिन के बाद दोस्तों पता नही मैं कितने लड़कों से चुदी हूँ और आज भी चुदाई करवाती हूँ . Antarvasna

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मैं एकदम चौंक पड़ी। अभी Hindi Porn Stories कुछ बोलती ही कि एक हाथ आकर मेरे मुँह पर बैठ गया। कान में कोई फुसफुसाया- जानेमन, मैं हूँ, सुरेश। कितनी देर से तुम्हारा इंतजार कर रहा था।

मैं चुप !

सुरेश, वही स्मार्ट-सा छोरा जो लड़कियों के बहुत आगे पीछे कर रहा था। मैं दम साधे लेटी रही। कमरे के अंधेरे में वह मुझे स्वीटी समझ रहा है।

“मुझे यकीन था कि तुम आओगी। एक एक पल पहाड़ सा बीत रहा था तुम्हारे इंतजार में। तुमने मुझे कितना तड़पाया !”

मेरा कलेजा जोरों से धड़क रहा था। कुछ बोलना चाहती थी मगर बोल नहीं फूट रहे थे।

स्वीटी गुपचुप यह किसके साथ चक्कर चला रही है?

मुझे तो वह कुछ बताती नहीं थी !

मेरे सामने तो वह बड़ी अबोध और कड़ी बनती थी।

इस कमरे में आज उसे सोना था। मगर वह दूल्हे को देखने मंडप चली गई थी। मुझे नींद आ रही थी और रात ज्यादा हो रही थी इसलिए उसके कमरे में आकर सो गई थी।
चादर ढके बिस्तर पर दूसरा कौन सो रहा है देखा नहीं।

सोचा कोई होगी।

शादी के घर में कौन कहाँ सोएगा निश्चित नहीं रहता। अभी लेटी ही थी कि यह घटना !

“स्वीटी जानेमन, तुम कितनी अच्छी हो जो आ गई।” उसका हाथ अभी भी मेरा मुँह बंद किए था।

“आइ लव यू।” उसने मेरे कान में मुँह घुसाकर चूम लिया।

चुंबन की आवाज सिर से पाँव तक पूरे बदन में गूँज गई। मैं बहरी-सी हो गई। कलेजा इतनी जोर धड़क रहा था कि उछलकर बाहर आ जाएगा।

मन हो रहा था अभी ही उसे ठेलकर बाहर निकल जाऊँ। मगर डर और घबराहट के मारे चुपचाप लेटी रही।

वह मेरी चुप्पी को स्वीकृति समझ रहा था। उसका हाथ मेरे मुँह पर से हट गया।

उसने अपनी चादर बढ़ाकर मुझे अंदर समेट लिया और अपने बदन से सटा लिया। उसके सीने पर मेरे दिल की घड़कन हथौड़े की तरह बजने लगी।

“बाप रे कितनी जोर से धड़क रहा है।” उसने मानों खुद से ही कहा। मुझे आश्वस्त करने के लिए उसने मुझे और जोर से कस लिया- जानेमन आई लव यू, आई लव यू ! घबराओ मत।

मेरा मन कह रहा था- जूली, अभी समय है, छुड़ाओ खुद को और बाहर निकल जाओ। शोर मचा दो। तब यह समझेगा कि चुपचुप लड़की को छेड़ने का क्या नतीजा होता है। शादी अटेन्ड करने आया है या यह सब करने ?

मगर अब उससे जोर लगाकर छुड़ाने के लिए हिम्मत चाहिए थी। एक तरफ निकल जाने का मन हो रहा था दूसरी तरफ यह भी लग रहा था कि देखूँ आगे क्या करता है ! डर, घबराहट और उत्सुकता के मारे मैं जड़ हो रही।

उसका हाथ मेरी पीठ पर घूम रहा था। गालों पर उसकी गर्म साँसें जल रही थीं। मुझे पहली बार किसी पुरुष की साँस की गंध लगी। वह मुझे अजीब सा लगी। हालाँकि उसमें कुछ भी नहीं था। पर वह मुझे वह बुरी भी नहीं लगी। वह मेरी किंकर्तव्यमूढ़ता का फायदा उठा रहा था और मुझे आश्चर्य हो रहा था कि मैं कुछ कर क्यों नही रही। मुझे उसे तुरंत धक्का देकर बाहर निकल जाना चाहिए था और उसकी करतूत की अच्छी सजा देनी चाहिए।

मैंने सोच लिया अब और नहीं रुकूंगी। मैं छूटने के लिए जोर लगाने लगी। अब चिल्लाने ही वाली थी … कि तभी उसके होंठ ढूंढते हुए आकर मेरे मुँह पर जम गए।

मैं कुछ बोलना चाह रही थी और वह मेरे खुलते मुँह में से मेरी साँसें खींचते मुझे चूम रहा था। मेरी ताकत ढीली पड़ने लगी। दम घुटने लगा।

मुझे निकलना था मगर लग रहा था मैं उसकी गिरफ्त में आती जा रही हूँ। मेरे दोनों हाथ उसकी हाथों के नीचे दबे कमजोर पड़ने लगे। मैं छूटना चाहती थी मगर अवश हो रही थी।

उसका हाथ पीछे मेरी पीठ पर ब्रा के फीते से खेल रहा था। कब उसने पीछे मेरे फ्रॉक की जिप खोल दी थी मुझे पता नहीं चला।

उसका हाथ मेरी नंगी पीठ पर घूम रहा था और ब्रा के फीते को खींच रहा था। पहली बार पुरुष की हथेली का एक रूखा और ताकत भरा स्पर्श महसूस हुआ।

मैं जड़ रहकर अपने को अप्रभावित रखना चाह रही थी मगर उसके घूमते हाथों का सहलाव और बदन पर बाँहों के बंधन का कसाव मुझे अलग रहने नहीं दे रहे थे। मुझे यह सब बहुत बुरा लग रहा था मगर अस्वीकार्य भी नहीं।

मैं सोच भी नहीं सकती थी कि कभी यह सब मैं अपने साथ होने दूंगी। मगर …

वह मेरे ब्रा के फीते को खोलने की कोशिश कर रहा था मगर हुक खुल नहीं रहा था। बेसब्र होकर उसने दोनों तरफ से पकड़कर जोर से झटके से खींच दिया। हुक टूट गया और फीते अलग हो गए। मुझे अपने बगलों और छाती पर ढीलेपन का, मुक्ति का एहसास हुआ। अभी तो वह बस पीठ छूकर ही पागल हो रहा था। आगे क्या होगा !

उसके होंठ मेरे होंठों से उतरकर गले पर आ रहे थे। उसके सांसों की सोंधी गंध दूर चली गई। वह फ्राक को कंधों पर से छीलने की कोशिश कर रहा था।

उसने मेरी एक बांह फ्राक से बाहर निकाल दी और उसे सिर के ऊपर उठाकर उस हाथ को ऊपर से सहलाते हुए नीचे उतरकर मेरे बगल को हथेली में भर लिया।

गर्म और गीली काँख पर उसका भरा भरा कसाव मादक लग रहा था।

मुझसे अलग रहा नहीं जा रहा था। पहली सफलता से उत्साहित होकर उसने मुझे बाँहों में लपेटे हुए ही थोड़ा दूसरे करवट पर लिया और थोड़ी कोशिश से फ्राक की दूसरी बाँह भी बाहर निकाल दी।

मेरे दोनों हाथों को ऊपर उठाकर उसने अपने हाथों में बांध लिया और मेरे बगलों को चूमने लगा। उसके गर्म नमकीन पसीने को चूसने चाटने लगा।

उसकी इस हरकत पर मुझे घिन आई मगर मुझे गुदगुदी हो रही थी और नशा-सा भी आ रहा था। मुझे नहीं मालूम था कि बगलों का चूमना इतना मादक हो सकता है।

मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश बंद कर दी। मेरी सासें तेज होने लगीं।

वह खुशी से भर गया। उसे यकीन हो गया कि अब मैं विरोध नहीं करूंगी।

उसने मुझे सहारा देकर बिठाया और फ्राक सिर के ऊपर खींच लिया। ब्रा मेरी छाती पर झूल गई। उसने उसके फीते कंधों पर से सरकाकर ब्रा को निकालना चाहा मगर मैंने स्तनों को हाथों से दबा लिया। हाथों पर ब्रा के नीचे मुझे अपनी चूचियों की चुभन महसूस हुई।

मेरी चूचियाँ टाइट होकर होकर खड़ी हो गई थीं। मैं शर्म से गड़ गई।

उसने मुझे धीरे धीरे लिटा दिया। मेरे हाथ छातियों पर दबे रहे। वह अब ऊपर से ही मेरे मेरे छातियों पर दबे हाथों को और ऊपर नीचे की खुली जगह को इधर से उधर से चूमने लगा। दबकर मेरे उभारों का निचला हिस्सा हाथों के नीचे थोड़ा बाहर निकल आया था। उसने उसमें हलके से दाँत गड़ा दिया।

चुभन के दर्द के साथ एक गनगनाहट बदन में दौड़ गई और छातियों पर हाथों का दबाव ठहर नही सका। तभी उसने ब्रा नीचे से खीच ली और मेरे हाथों को सीधा कर दिया।

अब मैं कमर के ऊपर बिल्कुल नंगी थी। गनीमत थी कि अंधेरा था और वह मुझे देख नहीं सकता था। उसके हाथ मेरी छातियों पर घूमने लगे। उसने चूचियों को चुटकी में लेकर हलके से मसल दिया।

आह, ये क्या हो रहा था! यह सब इतना विह्वल कर देने वाला क्यों था! मैं कराह रही थी और वह फिर मुझे बार बार मुँह पर चूम रहा था। मुझे उसके होठों पर अपने बगलों के नमकीन पसीने का स्वाद आया। मैंने उसके होठों को चाट लिया।

वह अब नीचे उतरा और मेरी एक चूची को मुँह में भरकर चूसने लगा। मैं गनगना उठी।

एक क्षण के लिए वह एक बच्चे का सा खयाल मेरे मन में घूम गया और मैंने उसका सिर अपने स्तन पर दबा लिया। लग रहा था चूचियों से तरंगें उठकर सारे बदन में दौड़ रही हैं। वह कभी एक चुचूक को चूसता कभी दूसरे को।

मुँह के हटते ही उस चुचूक पर ठंडक लगती और उसी समय दूसरी चूची पर गर्माहट और होंठों के कसाव का एहसास मिलता। मैं अपने जांघों को आपस में रगड़ने लगी। जोर से चलती सांसों से ऊपर नीचे होती मेरी छातियाँ मानों खुद ही उसे उठ उठकर बुला रही थीं।

अब वह मेरी नाभि को चूम रहा था। मानो उसके छोटे से छेद के भीतर से किसी को बुला रहा हो। इच्छा हो रही थी वहीं से उसे अपने भीतर उतार लूँ। अपने बहुत भीतर, गर्भ के अंदर में सुरक्षित रख लूँ। मुझे एकाएक भीतर बहुत खाली सा लगा- आओ, मुझे भर दो।

उसने बिना भय के मेरी सलवार की डोरी खींच ली और ढीली सलवार के भीतर हाथ डालकर मेरे फूले उभार को दबाने लगा। मेरी पैंटी गीली हो रही थी।

उसने पैंटी के उपर से भीतर के कटाव को उंगलियों से ढूंढा और कटाव की लम्बाई पर उंगली रखकर भीतर दबा दिया। मैं सिहर उठी। बदन में बिजली की तरंगें दौड़ रही थीं। उसने पैंटी के भीतर हाथ घुसेड़ा और मेरे चिपचिपाते रस भरे कटाव में उंगली घुमाने लगा। उंगली घुमाते घुमाते उसने कटाव के शिखर पर सिहरती नन्ही कली को जोर से दबाकर मसल दिया।

मैं ओह ओह कर हो उठी।

मेरी वह कली उसकी उंगली के नीचे मछली सी बिछल रही थी। मैं अपने नितंब उचकाने लगी। उसने एक उंगली मेरी छेद के भीतर घुसा दी और एक से वह मेरी कली को दबाने लगा। छेद के अंदर की दीवारों को वह जोर जोर से सहला रहा था।

अब उसकी हरकतों में कोमलता समाप्त होती जा रही थी। बदन पर चूँटियाँ रेंग रही थीं। लगता था तरंगों पर तरंगें उठा उठाकर मुझे उछाल रही हैं।

योनि में उंगलियाँ चुभलाते हुए उसने दूसरे हाथ से मेरे उठते गिरते नितंबों के नीचे से सलवार खिसका दी। उसके बाद पैंटी को भी बारी बारी से कमर से दोनों तरफ से खिसकाते हुए नितम्बों से नीचे सरका दिया।

उंगलियाँ मेरे अंदर लगातार चलाते हुए उसने मेरी पैंटी भी खींचकर टांगों से बाहर कर दी। कहाँ तो मैंने उसे अपने स्तन उघाड़ने नहीं दिया था कहाँ अब मैं खुद अपनी योनि खोलने में सहयोग दे रही थी। मैं चादर के भीतर मादरजाद नंगी थी।

अब मुझे लग रहा था वह आएगा। मैं तैयार थी। मगर वह देरी करके मुझे तड़पा रहा था। वह मुझे चूमते हुए नीचे खिसक रहा था। नाभि से नीचे।

कूल्हों की हडिडयों के बीच, नर्म मांस पर। वहाँ उसने हौले से दांत गड़ा दिए। मैं पागल हो रही थी। वह और नीचे खिसका। नीचे के बालों की शुरूआत पर।

अरे उधर कहाँ। मैंने रोकना चाहा। मगर विरोध की सभावना कहां थी। सहना मुश्किल हो रहा था। वह उन बालों को चाट रहा था और बीच बीच में उन्हें मुँह में लेकर दांतों से खींच रहा था। फिर उसने पूरे उभार के मांस को ही मुँह फाड़कर भीतर लेते हुए उसमें दांत गड़ा दिये।

मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। दर्द और पीड़ा की लहर एक साथ। ओह ओह। अरे यह क्या! मुझे कटाव के शिखर पर उसकी सरकती जीभ का एहसास हुआ।

मैंने जांघों को सटाकर उसे रोकना चाहा। मगर वह मेरे विरोध की कमजोरी को जानता था। उसने कुछ जोर नहीं लगाया, सिर्फ ठहर गया।

मैंने खुद ही अपनी टांगें फैला दी। वह मेरी फाँक को चाटने लगा। कभी वह उसे चूसता कभी चाटता। कभी जीभ की नोक नुकीली और कडी क़रके कटाव के अंदर घुसाकर ऊपर से नीचे तक जुताई करता।

कभी जीभ सांप की तरह सरकती कभी दबा दबा कर अपनी खुरदरी सतह से रगड़ती।

उसके तरकस में तीरों की कमी नहीं थी। पता नहीं किस किस तरह से वह मुझे पागल और उत्तेजित किए जा रहा था। अभी वो जीभ चौड़ी करके पूरे कटाव को ढकते हुए उसमें उतरकर चाट रहा था।

मेरे दोनों तरफ के होंठ फैलकर संतरे की फांक की तरह फूल गए थे। वह उन्हें बारी बारी से मुँह में खींचकर चूस रहा था, उन पर अपने दांत गड़ा दिए। दांत का गड़ाव से दर्द और दर्द पर उमड़ती आनंद की लहर में मैं पछाड़ खाने लगी।

मेरा रस बह बह कर निकल रहा था और वह उसके चूसते मुँह में उतर रहा था। उसने मेरे कटाव के ऊपर थरथराती नन्हीं कली को हांठों में कस लिया और चूसने लगा।

उसे कभी वह दांतों से कभी होंठों से कुचलता। उसने उस कली को भीतर खींचकर चूसा और उसे दाँतो के बीच होठों से मसलने लगा।

आह आह आ: जा जा जा। मैं बांध की तरह फूट पड़ी। अब तक किसी जोर से रोक रखा झरना फूट पड़ा। सदियों से जमी हुई देह मानो धरती की तरह भूकंप में हिचकोले खाने लगी। उसने उंगलियों से खींच कर छेद को दोनों तरफ से फैला दिया और उसमें भीतर मुँह घोप कर चूस चूसकर मेरा रस खींचने लगा।

कुंआरी देह की पहली रस-धार। सूखी धरती पर पहली बारिश सी। वह योनि के भीतर जीभ घुसाकर घुमा घुमाकर चाट रहा था। मानों कहीं उस अनमोल रस की एक बूंद भी नहीं छोड़ना चाहता हो।

मैं अचेत सी हो गई।

कुछ देर बाद जब मुझे होश आया तो मैंने अपने पर उसका वजन महसूस किया। मैंने हाथों से उसे टटोला। वह मुझ पर चढ़ा हुआ था। मेरी हाथों की हरकत से उसे मेरे होश में आने का पता चला। उसने मेरे मुँह पर अपने मुँह रख दिया। एक तीखी गंध मेरे नथुनों में भर गई। उसके होठों पर मेरा लिसलिसा रस लगा था।

मैंने खुद को चखा। एक अजीब सा स्वाद था- नमकीन, तीखा, बेहद चिकना। मैं उसकी गंध में डूब गई। उसने सराबोर होकर मुझे पिया था। कोई हिचक नहीं दिखाई थी कि उस जगह कैसे मुँह ले जाए।

मेरा एक एक पोर उसके लिए प्यार के लायक था। एक कृतज्ञता से मैं भर उठी। मैंने खुद उसे विभोर होकर चूमा और उसके होठों को गालों को अगल बगल सभी को चाटकर साफ कर दिया। अंधेरे में मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया था।

मुझे कोई दुविधा नहीं थी। वह मुझे स्वीटी समझकर कर रहा था। मैं उसका आनंद बिना किसी डर के ले रही थी। मैंने उसे बाँहों में कस लिया।

इस कहानी का अगला व अन्तिम भाग आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर शीघ्र ही पढ़ पाएंगे!

स्वीटी-2 Hindi Porn Stories

Xxx मॉम चुदाई कहानी मेरी सौतेली अम्मी की चूत मारने की है. पहले मैं अपनी बहनों को चोद कर मजा कर लेता था. उनकी शादी के बाद मेरी नजर अपनी अम्मी पर पड़ी.

दोस्तो, मेरा नाम आदिल है और मैं 23 साल का हूँ.
मेरे घर मे मेरे अलावा अम्मी, अब्बू और मेरी 2 छोटी बहनें है.

यह Xxx मॉम चुदाई कहानी है, मजा लें.

मेरे अब्बू ने कई शादियाँ की हुई हैं.
मेरी सगी अम्मी पहले ही मर गयी थी.
इस वक्त जो अम्मी मेरे साथ रह रही है, वो मेरी नहीं … पर मेरी दो छोटी बहनों की अम्मी है.

अपनी दोनों बहनों की चूत की सील मैंने पहले ही तोड़ दी थी. मैं मजे से उन दोनों के चुचों के साथ खेलता था.

पिछले साल उन दोनों का निकाह हो गया और अब वो दोनों अपने शौहरों के लंड की सेवा में लगी हुई हैं.

मेरी अम्मी का नाम नगमा (43) है. वो बेहद खूबसूरत बदन की मल्लिका हैं, जिनके 36D के गोल और तने हुए बोबे, किसी भी लंड को खड़ा करने का दम रखते हैं. तीस की कमर है, जिसको मैंने कई बार ख्वाब में पकड़कर उन्हें चोदा है.

अम्मी की 38 इंच की उठी हुई गांड है, जो चलते हुए इतनी मस्त हिलती है कि बस मन करता है कि अभी के अभी साली की सलवार खोलकर गांड मार दूँ.

मेरे अब्बू का नाम नासिर है, वो 51 साल के हैं.
अब्बू छह साल पहले उस्मान चाचा के साथ कोलकाता काम करने गए और वहां जाकर अपने से 20 साल छोटी औरत 31 साल की शब्बो से शादी कर ली.

शब्बो हल्की सी सांवली पर बेहद दिलकश कटाव वाले भरे हुए बदन वाली औरत थी. उसे देखकर कई बार मैंने सोचा कि एक बार तो कम से कम शब्बो के गुलाबी होंठों से अपने लंड की सेवा करवानी चाहिए.

मैं कई बार अपने बाप की किस्मत को लेकर सोचता था कि क्या किस्मत है साले की … एक तरफ मेरी सौतेली अम्मी नगमा, जैसे साउथ फिल्मों की अभिनेत्री नयनतारा … तो दूसरी तरफ शब्बो जैसे श्रुति हसन को अपने लंड की सेवा के लिए सैट किया हुआ है.

अब अब्बू कभी कभार ही घर आते थे और घर खर्च भेज देते.
उनके घर न आने से घर पर कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि मैं इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों को रिपेयर करने का काम करता हूँ, जिससे घर का खर्चा भी निकल जाता है और थोड़ी बहुत बचत हो जाती है.

मैं और मेरी अम्मी नगमा अजमेर के छोटे से इलाके में एक छोटे से घर मे रहते हैं, जो पुराने जमाने के खंडहर जैसा ही है.

एक के ऊपर एक घर बिल्कुल पैक, ना कोई आवाज सुन सकता है और ना ही कोई घर के अन्दर झांक सकता है.
मुझे कई साल से अपनी अम्मी की जवानी चखने का मन था पर मेरी बहनों ने कभी मुझे चूत की कमी नहीं होने दी.

उन दोनों ने टाइम टाइम पर मेरे लंड की खूब देखभाल की और मैंने भी उनके सारे ख़र्चे और जरूरत पूरी की.
बहनों की शादी के कुछ दिन बाद ही मुझे चुदाई की भयंकर तलब लगी तो सामने अम्मी थी.

मेरा पुराना ख्वाब फिर से जवान हो गया और मैंने सोचा क्यों ना इन्हें ही अपने बिस्तर पर खींच लूँ.
वैसे भी अम्मी कई साल से नहीं चुदी थी तो चूत टाइट होगी … और साली का फिगर तो कमाल है ही.

अपनी अम्मी के बारे में इस तरह की सोच कोई मादरचोद ही रख सकता है, जो कि मैं तभी बन गया था, जब अम्मी को दूर के मामा के आगे घोड़ी बनते देखा था.

ख़ैर ये बात 8 साल पुरानी है, पर याद अभी तक ताज़ा है कि कैसे मामू मेरी अम्मी को लुल्ली पर बैठा कर उछालने की कोशिश कर रहा था और अम्मी कह रही थी कि साले तू भी नासिर की तरह 4 इंच का ढीला हथियार लेकर आ गया है. पता नहीं कब मेरी चूत को मोटे और लंबे लौड़े मिलेगें.

अम्मी की इच्छा सुनकर अब तो बस चाहत थी कि अम्मी को अपने 8 इंच के लंड का जायका चखाया जाए और उसकी चूत का रस पिया जाए.

अम्मी को लंड पर बैठाकर गंदी गंदी गालियां देते हुए उछालने की, मेरे लंड से चुदते वक़्त अम्मी के चहरे पर कामुक भाव देखने की, जिसके लिए मैं रोज़ कुछ न कुछ नया तरीका अपनाता.

अब मैं रोज़ अम्मी की ब्रा और पैंटी पर अम्मी को याद करके मुठ मारकर माल निकालता और अम्मी को गले लगाता या उनके गाल चूमता तो पूरा ठरक से काम लेता.

पहले तो अम्मी ने इन सब चीज़ों को नज़रअंदाज़ किया और खुलकर मुझसे गले लग कर चूम लेतीं.
पर जब मैं हद से ज्यादा आगे जाकर उसके बोबे और गांड पर हाथ लगाकर ये सब करता, तो अम्मी कहतीं कि अब तुम्हारा भी निकाह करना पड़ेगा.
और मुस्कुरा कर चली जातीं.

अम्मी की इन बातों से मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गयी.
मैं अम्मी के सामने जाता तो लंड खड़ा करके ही जाता और डबल मीनिंग बात करता.

जैसे अम्मी आज तो दे दो …
अम्मी कहतीं- क्या?
तो बोल देता- चूत ओ … सॉरी सॉरी दूध.
या अम्मी के बूब्स देखते हुए बोल देता- आज तुम्हारे बहुत मोटे लग रहे हैं.

अम्मी बोलतीं- शर्म नहीं है क्या?
तो कहता- अम्मी, मैं तो आपके होंठों की बात कर रहा था.

यही सब कुछ दिनों तक चलता रहा.
फिर मैंने अम्मी की जितनी भी ब्रा और पैंटी थीं, एक बैग में भरकर फेंक दीं.

अम्मी को जब ब्रा और पैंटी नहीं मिलीं, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि तूने मेरी ब्रा पैंटी देखी हैं क्या?
मैंने अम्मी से कहा- अम्मी, तुम्हारे निप्पल्स कितने काले और मस्त हैं. तुम्हारी छाती बिना ब्रा के कितनी खूबसूरत दिखती है. तुम आज से ब्रा मत पहना करो.

अम्मी ने कहा- साले सुअर … चुप कर वर्ना थप्पड़ खाएगा.
मैंने भी जवाब दे दिया- अम्मी, तुम्हारे थप्पड़ से डर नहीं लगता, जब तुम्हारी छाती के तरबूज हिलते हैं तब डर लगता है कि कहीं ये बम मुझ पर गिरें, तो मैं मर ना जाऊं.

अम्मी अपना दुप्पटा छाती पर लेकर ये कहती हुई अन्दर चली गईं कि आने दे तेरे अब्बू को वापस … बताती हूँ कि तू कितना बेशर्म हो गया है. अगर तेरी खाल नहीं खिंचवाई तो कहना. अपनी अम्मी को छेड़ता है कमीना.

मैंने जवाब में कहा कि अब्बू तो शब्बो को घोड़ी बनाकर उसकी सवारी करते हुए बाल खींचने में बिजी होंगे.

अम्मी ने मेरी इस बात का कोई जवाब नहीं दिया.
मेरे इस बदले हुए रवैये से अम्मी हैरान भी थीं और परेशान भी.

अम्मी में वैसे तो हवस की कोई कमी नहीं थी, किसी और की बात होती तो वो खुद ही चटाई की तरह बिछ जातीं और बोलतीं- लगा दे लंड, बना ले अपनी रांड … पर अपनी ही बेटे से चुदवाना कैसे हो, शायद यही बात उसे परेशान कर रही थी.

थोड़ी देर बाद मैं अम्मी के पास आया और अम्मी का नाम लेकर बोला- नगमा, तुम मेरी बात का बुरा मत मानो … मैं तुमको बहुत प्यार करता हूँ और खुश देखना चाहता हूँ. मैं जानता हूँ कि रात में तुम बाथरूम में इतनी देर क्यों रहती हो? तू अगर चाहे तो हम-दोनों एक दूसरे की मदद कर सकते हैं.

ये कहते हुए मैंने अम्मी के दोनों हाथों को अपने हाथ से पकड़ लिया.
अम्मी ने अपने हाथ से मेरे गाल को छुआ और बोली- बेटा, तू अभी इतना बड़ा नहीं हुआ कि ये सब बात समझ सके.

मैंने अम्मी की कमर पकड़कर अम्मी की आंखों में देखते हुए कहा- नगमा, मैं और मेरा हथियार इतना बड़ा हो गया है कि बिस्तर पर रात भर तेरी चीखें निकलवा सके.

ये सुनते ही अम्मी ने थप्पड़ मारना चाहा, पर मैंने हाथ पकड़कर उनके बाल पकड़े और अम्मी के होंठों को अपने होंठों से लगा लिया.
मेरे दिल की धड़कन इतनी बढ़ गयी कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ.

कुछ देर बाद अम्मी के होंठों को हल्का सा काटते हुए छोड़ा तो अम्मी की लिपस्टिक मेरे होंठों पर भी लग गयी थी.
अम्मी ने कहा- बेटा अम्मी हूँ तेरी … ये सब मेरे साथ करेगा … तू कहे तो तेरे लिए तेरी ममेरी बहन हिना को बुला लेती हूँ. वो अपनी जवानी की दहलीज पर है अभी, तेरा पूरा ख्याल रखेगी.

मैंने अम्मी की सलवार में हाथ डाल कर एक उंगली चूत में डाल दी और हिलाने लगा.
मैं बोला- नगमा, तेरी जवानी पर हिना जैसी कई कलियां कुर्बान कर दूँगा मैं … जान आज मना मत करना … तूने मर्द पैदा किया है, अब तेरी चूत से निकले हुए मर्द की मर्दानगी देख बस.

अम्मी- अहह ओह्ह हहह … मादरचोद … अम्मी हूँ तेरी.
मैंने अम्मी के कपड़े उतारते हुए कहा- नगमा, आज से तू मेरी अम्मी नहीं, बेगम है समझी साली छिनाल.

अम्मी- अहह … आदिल … मैं तेरी अम्मी हूँ … कोई अपनी अम्मी के साथ ऐसा नहीं करता.
मैं- नगमा जान, जब भाई के साथ कर सकती हो तो बेटे के साथ क्यों नहीं? कोई गलत बात नहीं है इसमें मेरी जान … देखो तुम कितनी मस्त बदन वाली हो और मेरे पास कितना मस्त लंड है.

मैंने अपने अपने 8 इंच के लंड को बाहर निकालते हुए अम्मी को दिखाया और कहा- क्यों न अब से हम दोनों एक-दूसरे के बदन का भी ख्याल रखें?

अम्मी मेरे लंड को देखती हुई बोलीं- हायल्ला … आदिल तुझे ज़रा भी शर्म-लिहाज़ नहीं रह गया है … मेरे सामने लंड निकल के खड़ा हो गया? वैसे तेरा लंड बहुत बड़ा है. मजा खूब देगा.

मैं- नगमा, आज तो तेरी चूत से निकले इस मर्द के लंड में आग लग चुकी है. आज तो तुझे मुझसे चुदना ही पड़ेगा.
मैंने अम्मी को दोनों हाथों से उठाया और उसी बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया, जहां अब्बू और अम्मी सोते थे.

अम्मी- बेटा, मैं तेरी अम्मी हूँ!
मैं- नगमा देख अब इतने नाटक मत कर, मैं जानता हूँ तू कितनी प्यासी है. आज तेरी सारी प्यास बुझा दूंगा बस ये फालतू की बात करने की बजाए कुछ मूड बना जान.

मैं अम्मी की चूत को फैला कर सीधा बिना कुछ कहे उसकी चूत चाटने लगा और जोर जोर से अम्मी की चूत को चूसकर गीला करने में लग गया.

कुछ देर बाद अम्मी की चूत से पानी निकला गया, तो मैंने अम्मी से पूछा- अम्मी, कुछ मज़ा आया?
अम्मी- उउममम … आह … आदिल अहह बेटा … आह …

अम्मी की चूत गीली होने पर मैंने बिना थूक लगाए ही मेरा 8 इंच का लंड अम्मी की चूत के मुँह पर सैट किया और एक जोर का झटका देते हुए कहा- लव यू अम्मी जान.

अम्मी की चूत में आज तक 4-5 इंच की लुल्ली ही गयी थी और इतने साल से वो चुदी भी नहीं थी, मेरा 8 इंच का मोटा लंबा लंड कैसे सहन कर पाती?

मेरे लंड के आधा अन्दर जाते ही वो कराह उठीं- हायल्ला मर गई!

अम्मी के मुँह से इतनी मादक आवाज से लंड में अकड़न और बदन की जकड़न दोनों और बढ़ गई.
अम्मी की चूत से हल्का सा खून भी निकला, जो अलग नशा दे रहा था.

इतना मज़ा बहनों की चुदाई में भी कभी नहीं आया, जितना आज अपनी मां चोदने में आ रहा था.

मैं बिना रुके झटके देने लगा और उसकी चूचियों से प्यासे की तरह दूध पीने लगा.
अम्मी अब मदहोश हो चुकी थीं और मुझे किसी भी तरह की कोई हरकत करने से मना नहीं कर रही थीं बल्कि अब तो सिर्फ सिसकारियां ही भर रही थीं.

मैं लगातार अम्मी की चूत का रस निकालने में लगा हुआ था.

चूत के चुदते-चुदते अम्मी की शर्म खुलने लगी थी.
वो भी अपने हाथों से मेरी पीठ को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं और ‘आह … उफ्फ्फ … हाय … उम्म …’ जैसी आवाज निकालती हुई मुझे अपनी तरफ समेट रही थीं.

मैं- नगमा मेरी बेगम … सुहागरात मुबारक़ हो.
अम्मी अपनी आधी खुली हुई आंखों से देखती हुई बोलीं- आह … आदिल … अन्दर मत झाड़ना बेटा … मेरा ऑपरेशन नहीं हुआ है.

अम्मी से ऐसी बात सुनकर मेरे अन्दर का वहशी और हवस से भर गया.
मैंने लंड निकालकर सीधा अम्मी के मुँह में डाल दिया और रस झाड़ दिया.
आह … क्या मज़ेदार लम्हा था वो … जब मैंने अपनी अम्मी को लंड के नीचे लेकर चोद डाला था.

उस रात मैंने कंडोम लाकर Xxx मॉम के साथ रात भर 4 बार संभोग किया और उसकी गांड के छेद की सील भी तोड़ डाली.

पिछले एक साल में मैंने अम्मी की सारी शर्म उतार दी. अब वो किसी गर्ल फ्रेंड की तरह ही मेरे साथ रहती हैं.

उस रात के बाद अम्मी ने कभी मुझे मेरे नाम आदिल से नहीं बुलाया बल्कि सुनो, जान, जानू बेबी, बाबू, हनी, राजा जैसे लफ़्ज़ों से आवाज देने लगीं और मेरे लंड की जरूरत का ख्याल मेरी बहनों से भी ज्यादा अच्छे से रखने लगीं.

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