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Massage Girl in Parbhani: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Parbhani who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Parbhani that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Parbhani massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Parbhani who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Parbhani massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Parbhani massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Parbhani who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Parbhani employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Parbhani helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Parbhani

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Parbhani at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

मदर इन लॉ Xxx फक स्टोरी में पढ़ें कि कैसे सासू माँ हमारे घर आई तो उनकी बेटी को चोद रहा था. उन्होंने देख लिया. तभी लॉक डाउन लग गया. उन दिनों में मेरी सास मुझसे चुद गयी.

‘उन्ह आन्ह मर गई …’ मेरी बीवी मोना घोड़ी बनी चिल्ला रही थी, मैं पीछे से उसकी चूत में लंड पेले हुए उसे ताबड़तोड़ चोद रहा था.
मैंने उसकी आंखों पर काली पट्टी बांध रखी थी.

तभी मैंने देखा, कमरे के दरवाजे पर मेरी सास श्वेता खड़ी थीं.

मैं और मोना घर पर अकेले थे, बाहर मेनडोर लॉक किया था इसलिए बेडरूम का दरवाजा खुला था.
लेकिन सासु मां के पास हमारे फ्लैट की एक चाबी थी, शायद उसी से वो अन्दर आ गई थीं.

मैं सासू माँ को देख कर रूका … पर वो मुझे ‘कैरी ऑन’ का इशारा करके चली गईं.
तब मैं जल्दी से खलास हुआ.

सासू माँ बाहर निकल गईं. उन्होंने बाहर जाकर फिर से डोरबेल बजाई.
मैं मोना को नंगी छोड़कर, बेडरूम का दरवाजा बंद करके बाहर आ गया.

सासू माँ दरवाजे पर थीं.
उनके चेहरे पर मुस्कान थी.

मैं अपनी पत्नी को आवाज देते हुए बोला- मोना, मम्मी जी आई हैं.
मोना की आवाज आई- ठीक है, मैं आती हूँ.

वो गाउन पहन कर बाहर आ गई.
माँ बेटी गले मिलीं.

उस वक्त दोपहर के 4 बजे थे.

मोना बोली- मम्मी, कॉफी बना रही हूँ.
सासू माँ ने हामी भरी- ठीक है.

घर पर दूध नहीं था, मैं नीचे जाकर लाने को हुआ तो मोना बोली- मैं खुद जा रही हूँ. मुझे नीचे दुकान वाली आंटी से कुछ पुराना हिसाब करना है.
यह कह कर मोना नीचे चली गई.

मैं और सासू माँ घर पर अकेले रह गए थे. मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

वे बोलीं- सॉरी … मुझे ऐसे अचानक नहीं आना चाहिए था.
मैं बोला- कोई बात नहीं मम्मी जी, आपका ही तो घर है.

वे मंद मंद मुस्कुराती हुई बोलीं- शर्माओ मत ज़्यादा, मैं मोना से कुछ नहीं कहूंगी.

हम दोनों शांत बैठे रहे.

मोना कॉफी बना लाई.

सासू माँ, मेरे हाल में स्वर्गवासी हुए ससुर जी की कुछ प्रोपर्टी और बैंक के काम से यहां आई थीं.
कल मुझे उन्हें ले जाना था.

उस रात मैंने और मोना ने सेक्स नहीं किया.
अगले रोज देश भर में लॉक डाउन लग गया; कोई कहीं नहीं जा सकता था.
हमारी अपार्टमेंट भी कोरोना के कारण सील कर दी गई.

सासू माँ अब यहीं फंस गई थीं.

शुरू के 4-5 दिन तो जैसे तैसे कटे, फिर ऊब शुरू हो गई.
हम टीवी देखते रहते, मोबाइल देखते रहते. मैं घर में पूरे कपड़े पहने रहता, सासू माँ साड़ी.
मोना ज़रूर हल्के कपड़े पहने रहती.

मेरे फ्लैट में दो ही कमरे थे.
एक में मैं और मोना रहते, दूसरे में सासू माँ.
एक हॉल था, जहां टीवी लगी थी.

मोना को चोदे हुए सात दिन हो गए थे, अब मेरा लंड तन्ना रहा था.

सासू माँ जब बाथरूम में थीं, तब मैंने मोना को धर दबोचा.
वो छटपटा उठी- मम्मी हैं अभी!

मैं मुँह बना कर वापस आ गया. मैं फिर मोना से बोला ही नहीं.

पहले बॉलकनी में बैठा रहा मैं … फिर अन्दर कमरे में आ गया.
मेरा फ्लैट टॉप फ्लोर पर था तो छत पर घूम आया जबकि ऊपर जाने की मनाही थी.
मोना समझ रही थी कि मैं नाराज़ था, वो भी क्या करती.

एक दिन मुझसे रहा नहीं गया.
सुबह के दस बजे थे, रामायण खत्म हुई.

मैंने सासू माँ के सामने ही मोना को गोद में उठाया, बेडरूम में जाकर दरवाजा बंद किया.

मोना चिल्लाती रह गई- ये क्या बदतमीजी है?
मैंने उसकी गाउन ऊपर चढ़ा कर उसकी चूत में लंड पहुंचा दिया.

दो मिनट में वो भी मेरा साथ देने लगी.
प्यासी वो भी थी 7 दिनों से … साली खुल कर चिल्लाई, सिसकारियां ले लेकर खूब चुदी वो!

सासू माँ शर्तिया बाहर से सुन रही थीं.
बाथरूम होकर मैं केवल अंडरवियर पहने बाहर गया.

सासू माँ कुछ बेचैन सी बैठी टीवी देख रही थीं.

मैं अधिकार से बोला- आप खाना बना लेना और हमें भी पहुंचा देना. आज दिन भर आपकी बेटी के साथ यही होगा.

मोना मेरे पीछे आकर बोली- ये क्या बदतमीजी है सुंदर, मेरी मम्मी से ऐसी बात कर रहे हो?
मैं पलटा और मोना को फिर बेडरूम में ले गया, उसकी गाउन उतार दी और ब्रा भी.

उसे बेड के सिरहाने टिका कर घोड़ी बनाया और फिर से चोदने लगा.
मैं बोला- भोसड़ी की, आज दिन भर चुदेगी तू … तो खाना कब बनाएगी?

मोना को फिर मज़ा आने लगा था.
अबकी बार मैंने कमरे का दरवाजा भी नहीं बंद किया था, मैं पूरे दम से चोद रहा था.

अबकी बार 20 मिनट मैंने मोना को चोदा.
वो निढाल पड़ी थी.

मैं बाहर निकला.
सासू माँ खाना बना रही थीं.
मेरे बदन पर केवल अंडरवियर था.
अन्दर मोना नंगी पड़ी थी.

मैं टीवी देखने लगा.
थोड़ी देर में गाउन पहन कर मोना भी बाहर आई.

सासू माँ साड़ी में ही थीं.
जब वे खाना लाईं, तब मैं बोला- आई एम सॉरी सासू माँ. मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया.
वे मुस्कुरा कर बोलीं- कोई बात नहीं. मैं टिपिकल कंजरवेटिव सासू माँ नहीं हूँ. कॉन्वेंट में इंग्लिश टीचर हूँ, फ्रांस, इटली और डेनमार्क रही हूँ. बगैर सेक्स के इतने दिन कैसे रहोगे, अभी तो ये लॉक डाउन कम से कम दो महीने रहेगा.

मैंने आज गौर से सासू माँ को देखा.
सामान्य से लम्बा कद, थोड़ा मांसल शरीर, सुंदर चेहरा, हमेशा मुस्कुराती रहती थीं.
स्टाइलिश साड़ी पहनती थीं. फिगर श्वेता तिवारी से कम नहीं था और उनका नाम भी श्वेता तिवारी ही था.

मेरी सासु मां श्वेता तिवारी 43 साल की लखनऊ के टॉप कॉन्वेंट स्कूल में इंग्लिश टीचर थीं.
उनके पति का खेती के अलावा सरकारी टीचर थे, स्वर्गलोक सिधार गए थे.

बड़ी बेटी टीना 22 साल की विशेष नाम के एक बिजनेसमैन से शादीशुदा थी.
छोटी बेटी मोना मेरी बीवी थी. वो 20 साल की है.

श्वेता अपनी दोनों बेटियों से ज़्यादा सुंदर और सेक्सी दिखती थीं.

मैंने पूछा- आप फ्रांस कब गई थीं?
“हनीमून पर तुम्हारे पापा ले गए थे. शादी के पहले फैशन कॉम्पटीशन में पार्टिसिपेट किया था. मैं मिस इंडिया में तीसरे नम्बर पर थी, मॉडल थी.”

मैं बोला- तभी आप इतनी स्टाइलिश हो, कमाल की दिखती भी हो.
श्वेता बोलीं- मैं पहले ही दिन से कहना चाह रही थी कि तुम लोग खुल कर रहो. मेरा लिहाज मत करो. तीन महीने कम से कम हम फ्लैट से नहीं निकल पाएंगे. सो हमें खुलना ही पड़ेगा.

एक पल रुक कर उन्होंने मुझे देखा और आगे कहा- मनोरंजन के नाम पर टीवी मोबाइल लूडो … और करने के नाम पर खाना पीना सेक्स ही तो बचे. अगर तुम दोनों की इजाज़त हो तो मैं भी साड़ी पहनना छोड़ दूँ! मैं घर पर कभी साड़ी नहीं पहनती, मोना को पता है.

मोना बोली- इट्स ओके मॉम.
मैं भी बोला- हां मुझे क्या दिक्कत है!
श्वेता बोलीं- ठीक है.

वो अन्दर गईं फिर जब थोड़ी देर बाद वो बाहर आईं तो मेरी आंखें फ़टी की फटी रह गईं.

सासु मां के शरीर पर एक हद से ज़्यादा छोटी जिम शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स ब्रा थी.
वो मुश्किल से उनके चूतड़ ढाँप रही थी. ऊपर ब्रा से उनके दूध छलक रहे थे

मेरे गले में कुछ फंस सा गया; मैं बोल नहीं पा रहा था.

वे आकर हम दोनों के सामने खड़ी हुईं- अब रिलैक्स लग रहा है. मैं साड़ी पहने पहने परेशान थी.

काले रंग के प्यूमा के इस लेडीज़ एथलेटिक्स ड्रेस में वो कमाल लग रही थीं.
लम्बी चिकनी टांगें, पतली कमर, भारी चूचे, बड़े बड़े हिप्स.

वो बोलीं- उफ्फ … अब आराम मिला. मैं साड़ी पहने पहने मरी जा रही थी.
मोना बोली- मम्मी घर पर इसी ड्रेस में रहती हैं… किसी के आने पर ऊपर गाउन डाल लेती हैं, बस!

सासू माँ मुस्कुराती हुई बोलीं- क्या हुआ … शॉक हुए सुंदर?
मैं कुछ न बोला.

उस दिन एक बार शाम को मोना को फिर से चोदा और उस वक्त मैंने अपनी सासू मां की चूचियों को याद करके उसे चोदा.

अचानक से एक दिन हमारे घर पर कोरोना टीम आई.
पूरे अपार्टमेंट में केस बढ़े थे इसलिए हमारी चैकिंग हुई और मोना को कोरोना पॉजिटिव बता दिया गया.

हमारे अपार्टमेंट के नीचे एक अस्थायी कोरोना हॉस्पिटल चालू किया गया था.
मोना को उसमें जाना पड़ा.

अब घर पर केवल मैं और सासू माँ थे.
दोपहर में मोना नीचे शिफ्ट हुई, शाम को मैं परेशान बैठा था.

सासू माँ कॉफ़ी लाईं- परेशान मत हो, डॉक्टर बोला है हल्के लक्षण हैं… बस 14 दिन रखेंगे.
वो अभी साड़ी में थीं.

हम लोगों ने 8 बजे डिनर किया.
फिर मैं टीवी देखने लगा.

सासू माँ अब केवल शॉर्ट्स ब्रा में थीं. उन्होंने मुझसे रिमोट लेकर नेटफ्लिक्स लगाया और उस पर एक वेब सीरीज़ लगा दी.

दस मिनट बाद ही उसमें चुदाई का सीन आने लगा.
माहौल में तनाव बढ़ रहा था.

मैं उठ कर अपने कमरे में चला गया और लेट गया.
मोना की वजह से मेरा मूड खराब था.

पता नहीं कब सो गया.
गर्मी थी, मैं अधजगा था.

आज सुबह मेरा लंड अचानक टन्ना गया था.
मैं फ्रेंचकट ब्रीफ पहने था.

मैंने आंखें खोलीं, सासू माँ मेरे लंड पर झुकी लंड को बहुत गौर से देख रही थीं.

उन्होंने मेरी चाय लाकर बेड के पास की रैक पर रखी थी.
वो बेड के नीचे बैठी लंड को घूर रही थीं.
उनका चेहरा मेरे खड़े लंड से थोड़ी ही दूर था.

मेरे दिमाग में शैतान आ गया था. मैंने एक हाथ उनके सर पर ले जाकर उनका सर अपने लंड पर झुका दिया.

उनके मुँह से ब्रीफ के ऊपर से लंड टच हुआ, तो वो हड़बड़ा उठीं.
मैं उनके बाल पकड़े पकड़े बोला- रिलैक्स सासू माँ, रिलैक्स.
वो मेरी तरफ देख नहीं रही थीं.

मैंने लेटे लेटे अपनी ब्रीफ के एक कोने से लंड बाहर निकाल दिया और ज़बरदस्ती सासू माँ का मुँह अपने लंड पर झुकाया.

मैं बोला- ले लो सासू माँ … अब शर्माओ मत!
वो मेरा हाथ अपने सर से हटाकर वहां से बाहर चली गईं.
उनकी बदन पर शॉर्ट्स ब्रा ही थी बस!

मैंने बस एक पल सोचा और फिर उठा. ब्रीफ उतार कर एक हाथ से अपना लंड पकड़े मैं बाहर आया.
सासू माँ बाहर किचन में खड़ी चाय पीने जा रही थीं.

मैं अपना लंड लेकर उनके सामने पहुंचा.
सासू माँ कहते हुए मैंने उनके हाथ से चाय ली, एक सिप लगाया और उन्हें घूरा.

मैं दरवाजे पर रास्ता खड़ा था तो वो बाहर नहीं निकल सकती थीं.
वे घूम गई थीं.

‘सासू माँ.’ मैंने उनके चूतड़ थपथपा दिए- चाय मैं पी लूँगा. आज आपको आपका लॉलीपॉप चूसना है.
वे चुपचाप खड़ी थीं.

मैं बोला- देखिए, मैं औरतों की बहुत इज़्ज़त करता हूँ. कभी ज़बरदस्ती नहीं करता. मुझे आप पसन्द हैं अगर आपको भी मैं पसन्द हूँ तो बाहर आकर अपना लॉलीपॉप ले लीजिए. वरना आज मैं भी नीचे हॉस्पिटल में क्वारन्टीन हो जाऊंगा.

मैं वापस जाने को हुआ कि वो पलटीं.
उनके चेहरे पर स्माइल थी.

नज़रें झुका कर उन्होंने मुझे देखा, फिर मेरे आगे घुटनों के बल बैठ गईं और मेरा लंड पकड़ कर मेरी आंखों में झांका.
इतना सब किया मगर वो बोलीं कुछ नहीं.

मैंने प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरा और दोनों हाथों से उनका सर पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया.
‘उम्म पुच्च..’ उन्होंने मेरा लंड चूमा और फिर मुँह में भर लिया.

आह… मैंने संतुष्टि से आंखें बंद कीं और वो मेरा लंड चूसने लगीं.
मैं दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़े लंड उनके मुँह में अन्दर बाहर कर रहा था.

कुछ मिनट में ही मेरा लावा उबला और उनके मुँह में मेरा वीर्य भर गया.
वो पी गईं, थोड़ा पौंछ लिया.

फिर वो उठ कर बाथरूम में गई और मुँह धोकर लौट आईं.
उन्होंने शिकायत की- मैं नहा चुकी और तुम फ्रेश भी नहीं हुए!
तो मैं बोला- अब जा रहा हूँ न!

मैं नहा कर लौटा.
मेरे बदन पर ब्रीफ और बनियान थी.

हमने नाश्ता किया, मोना से मिलकर आए.
अब 10 बजे थे.

आते ही सासू माँ ने साड़ी उतार दी.
अगले कुछ पलों में वो अपनी पसन्दीदा शॉर्ट्स ब्रा में थीं.

मैं भी ब्रीफ में आ गया था.
वो मुझे देख रही थीं.

मैंने उन्हें बांहों में भरा और चूमने लगा.
मैं चूमता हुआ बोला- उफ्फ सासू माँ यू आर टू हॉट … आई जस्ट लव यू!
वे भी मुझसे चिपटती हुई बोलीं- प्लीज लव मी सुंदर. लव मी प्लीज … और मुझे श्वेता कहो, सासू माँ नहीं.
वे फुसफुसा रही थीं.

‘ओह श्वेता माय डॉल.’ मैंने कहके उनकी ब्रा खोल दी.

उनके बड़े बड़े चूचे अब मेरे सामने एकदम नंगे थे.
मैंने उनके एक निप्पल को मुँह में भर के चूसना शुरू किया.
उनकी मादक आहें और कराहें घर को मादक बनाने लगीं.

मैं उनको गोद में उठाकर बेडरूम के अन्दर लाया और उन्हें बेड पर औंधा लिटा दिया.

मैंने पीछे से आकर उनकी शॉर्ट्स उतार दी.
अब वो मादरजात नंगी थीं.

मैंने उनके उठे हुए गोल गोल चूतड़ों पर किस किया और कहा- सासू माँ, आपके जितने अच्छे हिप्स आज तक नहीं देखे. मस्त फिगर आपका, पतली कमर चौड़े चूतड़.
सासू माँ कुछ ऐसा बोलीं- उम्ममह लव यू!

मैंने उन्हें पलट दिया.
उनकी चूत शेव्ड थी, लगता था कल ही चिकनी की थी.
मैंने उनकी चूत को प्यार से थपथपाया और उनकी चूत में एक उंगली घुसेड़ दी

‘आह…’ वो सिसकारियां भरने लगीं.
मैंने कुछ देर उंगली से उनकी चूत खोदी.

वे तड़पती रहीं, बोलीं- प्लीज अब करो ना!

मैंने अपनी ब्रीफ उतारी और उनकी टाँगों के बीच आ गया.

उनकी चूत गीली थी, मैंने लंड उनकी चूत पर टिकाया.

वे बोलीं- क्रीम लगा लो.
मैंने क्रीम ले ली, उनकी चूत में भरी, अपने लंड पर भी लगाई.

उनकी टाँगें ऊपर उठा कर चौड़ी कीं.
चूत पर लंड सैट किया और अन्दर धकेल दिया.

‘आन्ह…’ वो चिहुंकी.
थोड़ा सा लंड अन्दर घुस गया था.
उनकी चूत मुझे एकदम कसी लग रही थी.

मैं दांत पर दांत भींच कर लंड उनकी चूत में घुसेड़ता गया.
वो चीख ही पड़ीं. उनकी आंखों में आंसू थे.

‘बस बस.’

मैंने उन्हें पुचकारा, चूमा और उनकी चूची को चूमने लगा चूसने लगा.

उनकी चूत बहुत ज़्यादा कसी लग रही थी.
मैं बोला- आपकी चूत बहुत कसी है सासू माँ. मोना से भी ज़्यादा!

वे मुझे देखती हुई बोलीं- हां कुदरती है. लेकिन मुझे सासू माँ नहीं, श्वेता कहो.

‘ओके श्वेता. लेकिन तुमको श्वेता नहीं कहूंगा सासू माँ, आज से तुम्हें अपने दिए नाम से पुकारूँगा.’
मैंने उन्हें चूमा.

उन्होंने पूछा- क्या नाम दोगे?
‘छम्मक छल्लो … छमिया, मेरी छमिया.’
मैं उन्हें होंठों पर चूमते हुए बोला.

मैं उनकी चूची पकड़ कर लगातार उन्हें चोद रहा था.
‘आह ओह …’ वो भी सिसकारियां भर भर कर मुझे उकसा रही थीं.

कुछ देर बाद मैंने उन्हें ऊपर किया, उनके गोल चूतड़ हाथों में पकड़े और उन्हें अपने लंड से उछालने लगा.

वो रूक रूक कर मेरे मुँह में अपने निप्पल भर दे रही थीं.

‘आह मेरी छमिया, तेरी चूत बहुत प्यारी है रे … उछल कुतिया, लंड पर उछल मेरे!’ मैं अंडबंड बक रहा था.
‘ले ले मादरचोद, चोद ले अपनी छमिया.’ वो गाली देती हुई मेरे लंड पे उछल रही थीं.

थोड़ी देर में वो थक गईं.
मैंने उन्हें नीचे किया.

कुछ ही देर में वीर्य का फव्वारा मैंने उनकी चूत में उड़ेल दिया.
वे संतुष्ट थीं.

मैं थक कर सो गया था.

दो बजे उठा, हमने खाना खाया.
शाम को हम दोनों फिर से मोना मिले.

डिनर के बाद मैं छत पर टहलने गया.
लौटा तो देखा सासू माँ मेरे बेड पर बिना कपड़ों के घोड़ी बनी हुई थीं,

वे अपने चूतड़ हिलाते बोलीं- कम ऑन बच्चे, आई एम वेटिंग!
मैंने उनके गोल गोरे चूतड़ सहलाये, चूमे फिर उनके पीछे आकर उनकी चूत में लंड घुसेड़ा.

वे Xxx फक में सिसकारी लेती हुई बोलीं- आह पागल … बहुत सीधा है रे तू!
मैं बोला- क्या हुआ?

उन्होंने पलट कर मुझे चूमा- मैं समझती थी, तू मेरी गांड मारेगा.
वे बोलीं और मुझे इनविटेशन दे रही थीं.

‘तो अभी क्या हुआ? ये बोलकर मैंने चूत से लंड निकाला, उनकी गांड में क्रीम लगाई और अपना लंड गांड में घुसेड़ दिया.
‘आह …’

वो केवल हल्के से चीखीं.
मेरा लंड उनके गांड में आसानी से घुस गया था.

मैं बोला- सासू माँ, आपकी गांड में बहुत ईजिली घुस गया!
‘हां, बेटा.’ वो हंसी.

ऐसे ही इन हिप्स की ये शेप नहीं आई है. मेरे सारे लवर्स अपना सारा प्यार मेरी गांड में ही घुसेड़ते थे. मुझे भी आदत हो गई.
सासू माँ बोलीं- तुम्हारे पापा भी इसी के शौकीन थे. अब तुम भी मज़े लो.

मैं आराम से हल्के हल्के धक्के दे रहा था.
वे बोलीं- अभी कच्चे खिलाड़ी हो बेटे, तुम्हें बहुत कुछ सिखाना पड़ेगा. गांड मारी जाती है. चोदी नहीं जाती.

फिर वो पलट कर मेरी आंखों में देखकर फुसफुसाती हुई बोलीं- एक बात और सुनो. बिस्तर पर औरत पर रहम खाने वाले लोग मुझे पसन्द नहीं आते. यही वो जगह होती है, जहां मर्द औरत को उसकी जगह दिखाता है. एंड आई लव डर्टी टाक.

‘अच्छा मेरी रानी …’ कह कर मैंने उन्हें नीचे किया और उनको कायदे से घोड़ी बनाया, मुँह नीचे चूतड़ ऊपर करके और दोनों चूतड़ पकड़ कर दे दनादन उनकी गांड में लंड पेलने लगा.
साथ ही मैं रह रह कर उनके चूतड़ों पर चपत मारता, उनके बाल पकड़े खींचता.

मैं बोल रहा था- देख भोसड़ी की, देख … गांड मरवा रही है अपने दामाद से तू कुतिया. तेरी माँ की चूत, साली रंडी, मादरचोदी, तेरी बेटी चोद दी, अब माँ को लगा दिया.

वो चूतड़ पीछे करके लगातार जवाब दे रही थीं- मेरी माँ भी चोद देगा हरामी तू, गांड भी मारेगा न सासुचोद साले!

पन्द्रह मिनट तक मैंने उनकी गांड मारी फिर उनकी गांड में वीर्य छोड़ दिया.

चौदह दिन मोना कवरन्टीन रही और 14 दिनों तक मैंने मदर इन लॉ Xxx फक का मजा लिया.

मोना के आने के बाद सासू माँ अपने घर चली गईं.
मेरी सास और मेरे यौन सम्बन्धों का मोना को कुछ पता नहीं चला था.

Hindi Sex Stories

मैं एक नए शहर में जब अकेले घूमने Hindi Sex Stories निकला तो मैं चलते चलते एक वेश्याओं की गली में पहुंच गया। मैंने देखा कि बहुत सी लड़कियाँ छोटे छोटे मकानों के सामने खड़ी थी। मैंने समझा कि सभी किसी त्यौहार की तैयारी करके कहीं जाने की तैयारी कर जा रहे होंगी। सभी सजे धजे थे । मुझे कुछ समझ न आया और आगे बढ़ता चला गया। गली में पहुंच कर देखा कि वहाँ सभी इशारों में बुला रहे थे। मैंने देखा कि एक आंटी मुझे बुला रही है। तो मैंने सोचा कि शायद आंटी को किसी प्रकार की मदद चाहिए।

मैं आंटी के पास पहुंचा तो आंटी ने पूछा,”लोगे?”

तब मुझे समझ में आया कि मैं किस गली में पंहुचा हूँ।

मैंने पूछा,”कितना ?”

तो उसने बोला,”१०० रुपए लड़की का और ५० रुपए मेरा !”

मैंने अपने सारे पैसे लगभग ख़त्म कर दिए थे इसलिए मैंने उस आंटी को पेलने का निश्चय किया। उसने मुझे कमरे में बुला लिया मेरा मन उस लड़की पर अटक गया था जो वहाँ थी, वो बिल्कुल जवान और पतली दुबली थी। अफसोस मुझे तो आज उस आँटी को पेलना होगा।

आंटी ने मुझे कपड़े उतारने को कहा तो मैंने तुंरत ही सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल ही नंगा होकर खड़ा हो गया लेकिन मेरा लिंग जैसे तैयार नहीं था, बिल्कुल मायूस था। मानो जब किसी बच्चे की कोई बात न मानने पर मायूस हो कर बच्चे एक तरफ खड़े हो जाते हैं।

फिर उस आंटी ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मेरे लिंग को रगड़ना चालू किया जब बात नहीं बनी तो हस्त मैथुन पे चालू हो गई । जैसे ही लिंग में थोड़ा सा कड़कपन आया तो उस पर कंडोम पहनाने लगी। कंडोम पहनाने के बाद आंटी बिस्तर पर जा कर लेट गई और इशारे से मुझे बुलाया।

मैं पैसे वसूल करने के लिए उस पर चढ़ बैठा और पेलना शुरु करा। आंटी के स्तन काफी मोटे व बड़े थे। मैं उन्हें दबाये जा रहा था और हौले हौले पेल भी रहा था। अचानक आंटी को गुस्सा आ गया- यह क्या कर रहे हो?

मैंने सोचा आंटी न जाने किस बात से नाराज हो गई।

आंटी ने फिर कहा,”जोर लगा के पेलो !”

मैं समझ गया कि आंटी को मैं संतुष्ट नही कर पा रहा था और उनका योनि तो घाट घाट का पानी पिया हुआ है। अब मैंने जोर जोर से धक्का मारना शुरु करा तो मेरे लिंग में भी कड़कपन बढ़ गया। मैं लगातार वार पे वार किए जाने लगा अब आंटी को भी मज़ा आने लगा। बैटिंग में लगातार छक्के-सिक्सर मार के अपने-आप को धोनी या युवराज से कम नही समझ रहा था।

और फिर मैं कैच आउट हो गया। और मेरा लिंग पवेलियन लौटने लगा यानि सुकड़ने लगा जैसे कि जब कोई बैटसमैन शतक बनाकर आउट होता है तो उसे खुशी भी रहती है और आउट होने के अफ़सोस में सर नीचे कर पवेलियन जाता है।

उस आंटी ने तो मेरा ही बाज़ा ही बज़ा दिया था।

आप के जीवन में ऐसी आंटी आए तो क्या होगा। Hindi Sex Stories

दोस्तों / सहलियों और मेरी खास अजीज चूत की मालकिनों !Hindi Porn Stories

आप सभी ने मेरी पूर्व में अंर्तवासना Hindi Porn Stories पर ‘माला की चुदाई‘ और ‘मजा और मलाई‘ पढ़ी, और मुझ को मेल कर मेरा होंसला अफजाई किया उसके लिये मेरा आप सभी को धन्यवाद। मजा और मलाई के पिछले भाग में आपने पढा कि मैंने किस तरह स्वीटी को चोदा, अब आगे…

स्वीटी के घर से जाने के बाद भी मेरी ख्वाहिशें और इच्छायें कम नहीं हो रही थी। उस रात मैं ठीक से नहीं सो पाया, जबकि होना यह चाहिए था कि इतनी चुदाई और मेहनत के बाद मुझे तबीयत की नींद आनी चाहिये थी, मगर नहीं आ रही थी, मुझे रह रहकर स्वीटी की चुद या गांड दिख रही थी, अंत में मुझे, कसम से, जिंदगी में पहली बार, मुठ मार कर सोना पड़ा।

ऐसे ही दो चार दिन निकल गये। इस बार मैंने सोच रखा था कि अब मैं स्वीटी की अनछुई कुंवारी गांड पर हाथ साफ करूंगा, यानि कि गांड मारूंगा।

ईश्वर सच में बडा ही दयालु हैं, उसने मेरी सुन ली। मुझे स्वीटी का करीब एक सप्ताह बाद बुलावा आया। मैं खुश था कि इस बार उसने मुझे रात में बुलाया है, जिससे मुझे स्वीटी को चोदने के लिये पूरी रात मिलेगी।

मैं शाम को करीब 8 बजे ही स्वीटी के घर पहुंच गया। वहां स्वीटी ने बताया कि उसके पति फेक्ट्री के काम से बाहर गये हैं, जो एक दो दिन में आयेंगे। बस फिर क्या था, मैं आजाद था, मैं बेडरूम में गया, तब तक स्वीटी फ्रीज से बीयर की बोतल निकाल लाई और मैंने आज उसे गिलास में न डलवा कर उसे वैसे ही बोतल में रहने दी क्योंकि मुझे आज कुछ अलग तरह से प्यार करना था।

मैं स्वीटी को बेडरूम की दीवार के सहारे चिपकाकर पहले एक लम्बी होंठ किस करते हुए उसके गाऊन के ऊपर से ही अपने एक हाथ को उसके प्यारे बॉब्स पर रखकर सहलाने लगा और दूसरे हाथ को उसकी चूत पर रखकर सहलाने लगा और 15-20 मिनट बाद धीरे धीरे स्वीटी के गाऊन को उतारा और अब स्वीटी कुल मिलाकर ब्रा पेंटी में थी।

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को अपने दोनो हाथों से सहलाया और चूमा फिर स्वीटी को बेड पर लेटा कर पेंटी और ब्रा को भी आजाद कर दिया फिर स्वीटी ने भी मेरे सारे कपड़े खोल दिये। आज मुझे स्वीटी को अंगुरी बनाना था और जैसा सोच कर आया था वैसा ही करने का मूंड था।

मैं बेड पर लेटी स्वीटी के बुब्स को आराम सहलाते हुये चूसने लगा और फिर धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा और चूत चटाई शुरू कर दी, मगर कोरी चूत चटाई नहीं की, दोस्तो ! मै बीयर की बोतल खोलकर उसकी धार पहले स्वीटी के बोबों पर डालता हुआ चाटने लगा। इस वक्त अगर कोई देख लेता तो सच में मुझे कुत्ता ही समझ लेता।

इधर स्वीटी की गर्मी बढ़ती जा रही थी। वह मुंह से- संजू ये क्या कर रहे हो? ऐसे तो मुझे गुदगुदी हो रही हैं ! मुझसे रहा नहीं जा रहा है और आ.आ.आ.. हहहहह की आवाजें करने लगी। मगर अभी तो मेरी बस आज की शुरूआत थी। बोब्स से उतर कर नीचे की ओर बह रही बीयर की धार जो बाद में नाभि के खास छिद्र पर जा रही थी। वहां जैसे ही मैंनें जीभ लगायी, कसम से स्वीटी एकदम से चिल्ला पड़ी कि ये क्या कर रहे हो संजू, ऐसे तो मैं बिना चुदे ही झड़ जाऊंगी।

मैंने कहा- स्वीटी डांर्लिग चिंता ना करो, पूरी रात बाकी हैं। शेष आधी बोतल मैं उसकी चूत पर धार बनाकर डालने लगा और चाटने लगा। कसम से अब मुझे बीयर के साथ-साथ मुझे स्वीटी की चूत से निकल रहा पानी, शायद स्वीटी इस दौरान एकाध बार झड़ चुकी थी, भी सोमरस से कम नशा नहीं दे रहा था। मैंनें चूत चाटने में आधा घंटा लगाया जिसमें चू्त के हर कोने को अपनी जीभ से नाप लिया था।

स्वीटी मुझसे कम नहीं थी, वो भी मेरी ओर देख मुझे चिड़ाते हुवे दूसरी बीयर की बोतल खोल कर मुझे बेड के सिरहाने लेटा खुद मेरे लंड को अपने मुंह में लेने लगी और मेरी नाभि पर व मेरे लंड के ऊपर व नीचे बीयर डालकर चाटने लगी, चूसने लगी।

आज स्वीटी की चुसाई में एक अलग ही आनन्द था मेरे मुंह से आह…ऊ… आह… तक निकाल दी, मैं थोड़ी देर में झड़ गया, मगर स्वीटी ने मुझे छोड़ा नहीं उसने मेरा सारा जूस निकाल लिया और बिल्ली दूध पीकर कटोरे को जीभ से चाटती हैं, वैसे ही उसने मेरे लंड के पानी को गटक लिया और अंत तक चाटती रही और अपने हाथ और मुंह से मेरे लंड को फ़िर खड़ा करने लगी।

थोडी देर में हम दोनो तैयार हो गये, मैंने आज लेटे लेटे ही स्वीटी को अपने ऊपर चढ़ाया और उससे उठक-बैठक करने को कहा। स्वीटी तुरंत मेरे लंड पर आकर बैठ गई और मेरे लंड के सुपाड़े को अपनी चूत का रास्ता बताने लगी, शायद उसने इसे सामान्य चुदाई समझ लिया था, वह बेफिक्र थी, मगर जैसे ही उसने मेरे लंड के सुपाड़े को अपनी चूत का रास्ता बताया मैंने एक ही शॉट नीचे से अपने लंड का दिया तो लंड को सीधे उसकी बच्चेदानी तक पहुंचा दिया।

दोस्तो, वह इसके लिये तैयार नहीं थी। उसकी आंखों से आंसू आ गये और नीचे उतरने की जिद करने लगी, पर मैं फिर उसे प्यार से समझाकर धीरे धीरे शाट लगाने लगा और अपने दोनो हाथों से उसके बुब्स मसलने लगा। कभी कभी उसकी चूंचियों को जोर से दबा देता जिससे वह फिर उत्तेजित होने लगी। अब मैंने शॉट मारना बंद कर दिया अब वह खुद ही ऊपर नीचे होने लगी और हाय संजू मजा आ गया आ…ह…अ. अ…अ..ा… करने लगी।

शायद अब उसे मस्ती चढ़ने लगी, मैं भी कभी नीचे से शॉट लगाता तो लंड फिर बच्चेदानी तक चल जाता, मगर अब उसे इस दर्द में भी मजे की अनुभूति हो रही थी। स्वीटी की स्पीड धीरे-धीरे तेज होने लगी और कहने लगी आहा सं…जू… मेरा निकल रहा है और वह झड़ गयी। कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। वह मेरे ऊपर ही लेट गयी।

थोडी देर बाद मेरा हाथ उसकी गांड की तरफ बढ़ा तो वह चौंक गयी और बोली संजू ये क्या कर रहे हो? तुम्हारे इरादे तो नेक हैं?

मैंने कहा- स्वीटी डार्लिंग ! आज मेरे इरादे क्या मेरा सब कुछ नेक है और मुझे आज तुम्हारी गांड मारनी हैं।

नहीं संजू मुझे दर्द होगा मैंनें आज तक गांड नहीं मराई !

मैंने उसे समझाया कि जैसे पहली बार चुदवाने में दर्द होता हैं, वैसा ही थोड़ा सा पहले पहले दर्द होगा फिर मजा चुदवाने से ज्यादा गांड मराने में आयेगा। वह मेरी बात मान गई और तब तक मेरा लंड अपने झटके दिखाने को तैयार हो चुका था। मैंने स्वीटी को घोड़ी बनाया और अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगाया और दो उंगलियों पर तेल लेकर उसकी गांड में धीरे धीरे डालने लगा, जिससे कि उसकी गांड मेरा लंड लेने को तैयार हो जाए, मेरी उंगली जाते ही कहने लगी- संजू डार्लिंग मुझे दर्द हो रहा है !

तो मैंने कहा- जान, कुछ देर की बात हैं व फिर मैं एक हाथ उसके स्तनों की ओर ले गया और चूंचियों मसलने और सहलाने लगा और उसके गरदन, कान व गाल आदि को चूमने लगा, जिससे वह उत्तेजित होकर मेरा हाथ चूंचियों से हटा कर अपनी चूत के विराने की ओर ले गयी और मुझे उंगली करने का इशारा करने लगी। मैं उसकी चूत में उंगली डाल कर उसे धीरे धीरे उंगली से चोदने लगा।

और इधर अब मेरे लंड ने भी कसरत चालू कर दी और झटके मारने लगा। मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मैंने धीरे से अपना सुपाड़ा उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे धीरे डालने लगा मगर स्वीटी की गांड अनछुई होने के कारण बार बार लण्ड फ़िसल जाता और मेरा लंड महाराज दरवाजे पर ही अटक जाता।

खैर मुझे आज स्वीटी की गांड मारनी थी, सो एक हाथ जो चूत की तरफ था उससे चूत को अंदर से पकड़ कर अपने लंड को स्वीटी की गांड के छेद पर लगाकर एक जोरदार झटका दिया, जिससे स्वीटी आगे को जाने लगी मगर मेरे एक हाथ से चूत पकड़ी होने के कारण वह आगे तो नहीं जा सकी अपितु चिल्ला जोर से गई आहहह हहहह संजू क्या मार डालोगे, अपने इस लंड को बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

मैंने उसे पकड़े रखा और स्वीटी छुटने के लिये तड़पने लगी, मगर कुछ देर बाद मेरे एक हाथ से चुंचियों को सहलाने व मसलने और उसके कान, गले और मुंह चुम्माचाटी करने पर वह फिर हिलने लगी। अब मुझे गांड मारने का समय सही लगा और धीरे धीरे स्वीटी की गांड में अपना लंड पेलने लगा। स्वीटी भी मस्ती में आकर चिल्लाने लगी, संजू फाड़ डाल मेरी गांड को आह… अ…ा…ह… ऊ…अ.. …ह करने लगी।

15-20 मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झडने वाला हूँ, तो मैंने स्वीटी को कहा डार्लिंग मेरा निकलने वाला है, तो उसने सीधे मुंह में झड़ने को कहा और मैं अपने लंड को स्वीटी की गांड में से निकाल कर उसके मुंह में डालकर मुखचोदन करने लगा और 8-10 झटको के बाद मैं झड़ गया और इसी तरह स्वीटी को पूरी रात कभी एक टांग कंधे पर रख कर चोदा तो कभी कुत्तिया बनाकर चोदा।

सुबह 6 बजे तक चोदन कार्यक्रम चलता रहा, फिर नौकरानी के आने का समय बताकर मुझे जाने को कहा और मुझे फिर से रूपए देने लगी तो मैंने उसे मना किया, मगर वह नहीं मानी।

दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी, मुझे मेल करें। Hindi Porn Stories

sex stories

मेरा नाम मयंक पूनिया है, मैं वैसे तो हरियाणा का निवासी था लेकिन अब दिल्ली में रहता हूँ, मेरी छोटी बहन 20 साल की है और मैं 25 का हूँ. मेरी sex stories...

एक बार की बात है मैं और मेरी बहन अपनी मौसी के घर हरियाणा के एक गाँव में गए थे. मौसी के घर पर मौसी और उनकी बेटी रिया थी. रिया अभी 19 साल की थी.

मेरी मौसी गाँव में रह कर खेती का काम देखती थीं और मौसा उनके साथ नहीं रहते थे. वे शहर में नौकरी करते थे. उनका मौसी के पास करीब चार साल से आना नहीं हुआ था. शायद मौसा और मौसी के बीच कोई अनबन हो गई थी.

मेरी मौसी बेहद खूबसूरत हैं, उन की जवानी बहुत ही नशीली है. उन की फिगर 36-28-38 की है. मौसी के उठे हुए चूतड़ों को और तने हुए मम्मों को देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता था. पर गाँव में बंदिश अधिक होने के कारण मौसी लाज के चलते किसी से ज्यादा नहीं खुलती थीं.

मैं मौसी के पास पहुंचा तो मौसी को बड़ी ख़ुशी हुई. दूसरे दिन मौसी सुबह ही खेतों में चली गईं और मेरी बहन भी उनके साथ चली गई. उन्होंने अपनी बेटी से कहा कि वो खाना खेत में मेरे हाथों भेज दे.
मैं बाद में खाना लेकर गया.

मौसी काम करने के बाद थक गई थीं.. उन्होंने खाना खाया और आराम करने के लिए लेट गईं. मैं उनकी बगल में लेट गया और मेरी बहन भी मेरे पास लेट गई.

मेरी आंख लग गई, जब आंख खुली तो मैंने देखा कि मौसी के चुचे ब्लाउज से बाहर निकल रहे थे और वो खुद ही उनको दबा रही थीं. मैंने आँखें बंद कर लीं. लेकिन एक पल बाद मैंने धीरे से एक आँख खोल कर देखा तो पाया कि मौसी एक मोटी सी मूली से अपनी चुत की खुजली मिटाने में लगी थीं.

ये गरम सीन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और लंड से पानी निकलने लगा. मैं मौसी की मुठ मारने की गतिविधि को हल्की मुंदी आँख से देखने लगा.

कुछ देर बाद शायद मौसी झड़ गई थीं उन्होंने अपने कपड़े ठीक किये और निढाल सी होकर लेटी रहीं.

मैं इस बात पर गौर नहीं कर पाया था कि जिस तरह से मैंने मौसी को ये सब करते देखा था, उसी तरह मौसी ने भी मुझे देखते हुए देख लिया था. कुछ देर बाद मौसी उठ गईं और फिर से खेत में काम करने लगीं. काम खत्म होने के बाद रात तक हम सब घर आ गए.

अब मेरी मौसी को देखने का नजरिया बदल गया था. मौसा के चार साल से न होने के कारण मौसी मुझे एक माल दिखने लगी थीं.

खाना खाने के बाद जब सोने गए तो मौसी ने कहा- मयंक तू मेरे पास आना, मुझे तुम से बातें करनी हैं.

मैं मौसी के पास गया तो मौसी ने मेरी माँ के बारे में बात की और यहाँ वहाँ की बात करने लगीं. मैंने देखा कि मौसी का हाथ मेरे लंड के बिल्कुल पास था. मैं उनके व्यवहार को कुछ समझ नहीं पा रहा था और इतने में मौसी का हाथ मेरे लंड को छूने लगा. अब मुझे लगने लगा था कि मौसी मुझ से कुछ चाहती हैं. उन की उंगलियां बार बार बहाने से मेरे लंड को छूने लगीं तो मैंने भी मजा लेना शुरू किया. उन की उंगलियों के लगातार लंड छूने से जब मैंने कुछ नहीं कहा तो वो हल्के से मेरे लंड को रगड़ने लगीं.

अब मेरे लंड में भी कसाव आना शुरू हो गया. मैंने एक बारी वहाँ से हटने की कोशिश की तो मौसी ने मेरे लंड को पकड़ लिया.
मौसी ने कहा- अपनी मौसी की एक बात मानेगा?
तो मैंने कहा- मौसी मैंने आज तक आपकी कोई बात टाली है क्या?
‘नहीं.. तो सुन बेटा, तेरी मौसी को बहुत प्यास है.. अपनी मौसी की प्यास मिटा दे बेटा.. तेरा लंड बहुत मोटा है. जब तू सो रहा था तो मैं तेरा लंड देख रही थी. सच में वो बहुत मोटा है.. आ मेरी प्यास बुझा दे.’

ये कह कर मौसी ने लंड को तेजी से दबाया, मैंने हल्का सा विरोध किया तो मौसी मुझ से लिपट गईं और मेरे होंठों को चूमने लगीं. मौसी अपनी चुचियों को मेरी छाती पर रगड़ने लगीं.

इस सब से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने अपना हाथ मौसी की गांड पर लगा दिया और मौसी की मदमस्त गांड दबाने लगा.
मौसी के मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.

मैंने मौसी के मम्मों को दबाना शुरू किया. उनके मम्मे बहुत मोटे थे. अब चुदास की गर्मी बढ़ गई थी तो मैंने मौसी का सूट निकाला और उन्हें लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया.

मौसी ने मुझे चूमते हुए कहा- बेटा मेरे मम्मों का सारा दूध पी ले.. पूरे 4 साल हो गए.. किसी ने इनको नहीं पिया है.

मैं मौसी के मम्मों को ज़ोर ज़ोर से पीने लगा. मौसी के चूचे एकदम से कड़क होने लगे थे. फिर मैंने मौसी की चुत पर हाथ रख कर ज़ोर से दबा दिया.

मौसी- आआ ऊऊओ और ज़ोर से दबा दे.. फाड़ डाल इसको..

मैंने अपनी उंगली उनकी चुत में पेल दी. मौसी के मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मौसी बोलीं- बेटा जल्दी कर..
मैं बोला- जल्दी क्या है सारी रात हमारी ही तो है.
मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया.
मैंने कहा- मौसी, तू मेरा लंड मुँह में ले ले.

मौसी लंड चूसने और चाटने लगीं. मैं लंड चुसाई से बहुत गर्म हो गया और मैंने लंड उनके मुँह से निकाल कर सीधे मौसी की चुत में पेल दिया.
एकदम से लंड पेलने से मौसी के मुँह से चीखने की आवाज़ आई- आआईई ईई मममम ममम्म्मीईईओ.. ओह हः!

मैंने मौसी के मम्मों को मसलना शुरू किया. कुछ देर बाद मौसी नॉर्मल हो गईं. अब मैं मस्ती से मौसी को पेले जा रहा था और करीब दस मिनट बाद मैंने मौसी की चुत में लंड का पानी छोड़ दिया.

मौसी ने कहा- तू तो बहुत बड़ा उतावला है मौसी की चूत में एक बार में ही पूरा बाड़ दिया.(पूरा घुसा दिया)

यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था दोस्तो.. आप को मेरा ये हिन्दी sex stories कैसी लगी?

Sex Stories

मैं दमन में रहता हूँ। हमारे Sex Stories पड़ोस में मेरा दोस्त सुरेश रहता है। सुरेश अकेला रहता है उसके परेंट्स गांव में रहते हैं। एक बार उसकी मामीजान किसी अधिवेशन के सिलसिले से दमन आयी और उसके घर पर करीब दो महीने रही। सबसे पहले उसके मामी के विषय में आप लोगों बता दूं।

मेरे दोस्त की मामी का नाम सौम्या है वो करीब 40 साल की सांवली सुडौल शादीशुदा महिला है। वैसे तो वो हाउसवाइफ़ है लेकिन गांव में मशहूर समाज सेविका है। उसके चूतड़ और बूब्स काफ़ी बड़े बड़े और भारी हैं, शकल सूरत से वो खूब सेक्सी और 30 साल से कम लगती है।

अकसर में शनिवार या रविवार जो कि मेरे छुट्टी के दिन हैं, सुरेश के साथ गुजारता हूँ। जब से उसकी मामीजान आयी है तब से मैं मामी से दो तीन बार मिल चुका हूँ। वो जब भी मिलती तो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी, मुझे देख कर उसकी नज़रों में एक अजीब नशा छा जाता था या यूं कहिये उसकी नज़र में सेक्स की चाहत झलक रही हो!
ऐसा मुझे क्यों महसूस हुआ यह मैं बता नहीं सकता हूँ लेकिन मुझे हमेशा ही लगता था कि वो नज़रों ही नज़रों से मुझे सेक्स की दावत दे रही हो।

मैं जब भी उनसे मिलता तो कम ही बातचीत करता था मगर जब वो बातें करती तो उनकी बातों में दोहरा अर्थ होता था, जैसे ‘हार्दिक तुम खाली समय में कुछ करते क्यों नहीं?’
मैंने कहा- मामी जी, क्या करूँ, आप ही बतायें?
वो बोली- तुम्हें खाली समय का और मौके का फायदा उठाना चाहिये।
मैंने कहा- जरूर फायदा उठाऊँगा अगर मौका मिले तो!
वो बोली- मौका तो कब से मिल रहा है लेकिन तुम कुछ समझते नहीं, न ही कुछ करते हो?

मैं उनकी बातें सुन कर चकराया और बोला- मामीजान, आप की बातें मेरे दिमाग में नहीं घुस रही हैं।
वो बोली- देखो हार्दिक, आज और कल यानि शनिवार और रविवार तुम्हारी छुट्टी होती है तो तुम्हें कुछ कुछ पार्ट टाइम जोब करना चाहिये ताकि तुम्हारी आमदनी भी हो जायेगी और टाइम पास भी होगा।
इसी तरह की दोहरे शब्दों में मामी जी बातें करती थी और वो जब भी मुझसे बातें करती तब सुरेश या तो बाथरूम में होता या फिर किसी काम में व्यस्त होता।

एक दिन जब सुबह करीब 11 बजे सुरेश के घर पहुंचा तो घर पर उसकी मामी थी, सुरेश मुझे कहीं नज़र नहीं आया।
मैंने पूछा- मामी जी, सुरेश नज़र नहीं आ रहा है, कहां गया वो?
मामी- वो बाथरूम में कब से नहा रहा है। मैं उसी के बाहर निकलने का इन्तज़ार कर रही हूँ।
मैं- लेकिन वो तो ज्यादा समय बाथरूम में लगाता ही नहीं, तुरंत पांच मिनट में आ जाता है।

मामी हंसते हुए- अरे भाई, बाथरूम और बेडरूम ही तो ऐसी जगह है जहां से कोई भी जल्दी निकलना नहीं चाहता है।
मैं कोई जवाब नहीं दे सका, वो भी चुप रही।

थोड़ी देर बाद सुरेश बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया। उसके बाथरूम से आते ही मामी जी बाथरूम में गयी और मेरी तरफ़ नशीली नज़रों से देखती हुयी बोली- घबराना मत, मैं ज्यादा समय नहीं लगाऊँगी। आप लोग नाश्ते के लिये मेरा इन्तज़ार करना!

कहते हुए वो बाथरूम में घुस गयी, करीब 20 मिनट बाद वो तैयार होकर हमारे साथ नाश्ता करने लगी।

नाश्ता करते वक्त सुरेश ने कहा- यार, आज मुझे ओफ़िस के काम के सिलसिले में सूरत जाना है। और मैं कल रात को या सोमवार दोपहर को वापस लौटूंगा। अगर सोमवार दोपहर को लौटूंगा तो तुम्हें कल फोन कर दूंगा। अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो तो क्या तुम जब तक मैं नहीं आता हूँ मेरे घर रुक जाना ताकि मामी को बोरियत महसूस नहीं होगी न ही मुझे उनकी चिंता रहेगी क्योंकि वो दमन में पहली बार आयी हुई हैं।
मैंने कहा- ठीक है, नो प्रॉब्लम!

और वो साढ़े बारह बजे वाली ट्रेन से सूरत चला गया। मैं भी उसे ट्रेन में बिठाने के लिये बोरिवली गया जब वापस लौट रहा था तो एक रेस्तराँ में जाकर 3 पेग व्हिस्की पी और लौट कर सुरेश के घर गया।
घर पर मामी जी हाल में बैठ कर कोई किताब पढ़ रही थी। मामीजान ने मुझे नशीली निगाहों से देखा और बोली- सुरेश को बैठने की सीट मिल गयी थी क्या?
मैंने कहा- हां… क्योंकि ट्रेन बिल्कुल खाली थी।

वो बोली- मैंने खाना बना लिया है, भूख लगी हो तो बोल देना।
मैंने कहा- अभी भूख नहीं है, जब होगी तो बोल दूंगा।

मामी की निगाहों में अजीब नशा देख कर मैंने पूछा- मामी जी, आप करती क्या हैं?
थोड़ी देर तक मेरे नज़रों से नज़रें मिलाती रही, फिर बोली- समाज सेवा!
यह सुनते ही अचानक मेरे मुंह से निकल गया- कभी हमारी भी सेवा कर दीजिये ताकि हमारा भी भला हो जाये।

वो हल्के से मुसकुराई और बोली- तुम्हारी क्या प्रोब्लम है?
मैंने कहा- वैसे तो कुछ खास नहीं है लेकिन बता दूंगा जब उचित समय होगा।
वो मेरे आंखों में आंखें डालती हुए बोली- यहां तुम्हारे और मेरे अलावा कोई नहीं है, बेझिझक प्रोब्लम कह डालो शायद मैं तुम्हारी प्रोब्लम हल कर दूं?

मैंने कहा- आप किस प्रकार की समाज सेवा करती हो?
वो बोली- मैं जरूरतमंद लोगों की जरूरत पूरी करने की मदद करती हूँ, उनकी समस्या हल करती हूँ।
मैंने कहा- कि मेरी भी जरूरत पूरी कर दो न?
वो बोली- जब वक्त आयेगा तो कर दूंगी!

फिर वो चुप रही और मैगज़ीन पढ़ने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने पूछा- मामी जी आप क्या पढ़ रही हैं? कुछ खास सब्जेक्ट है क्या इस मैगज़ीन में?
वो मुस्कुराते हुए बोली- इस मैगज़ीन में बहुत अच्छा लेख है पत्नी और पति के सेक्स के विषय में!
फिर वो पढ़ने लगी।

थोड़ी देर बाद उसने पूछा- हार्दिक ये उत्तेजना का क्या मतलब होता है?
मैं सोचने लगा.
वो मेरी ओर कातिल निगाहों से देखती हुयी बोली- बताओ न?
मेरी समझ में नहीं आया कि हिंदी में उसे कैसे बताऊँ।

वो लगातार मेरी और देख रही थी, उसकी आंखों में नशा छाने लगा। मैं उसे गौर से देख रहा था, उसके होंठ खुश्क हो रहे थे, वो अपने होंठों पर जीभ फेर रही थी।
मैंने सोचा अच्छा मौका है मामी को पटाने का।

वो इठला कर बोली- बताओ न क्या मतलब होता है?
उसकी इस अदा को देखते हुए मैंने कहा- शायद चुदास!
वो बोली- क्या कहा? क्या मतलब होता है?
मैंने कहा- क्या तुम चुदास नहीं समझती हो?
वो बोली- कुछ कुछ… क्या यही मतलब होता है?
मैंने कहा- हां शायद यानि कि… कैसे समझाऊँ तुम्हें मामीजी!
मैंने उलझ कर कहा।

वो हंसते हुए बोली- चुदास का मतलब सेक्स करने की चाहत तो नहीं?
मैं उसे एकटक देखने लगा, उसके होंठों पर चंचल मुस्कुराहट थी।
मैंने कहा- ठीक समझी आप!
वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोली- किस शब्द से बना है चुदास?

मैंने उसकी आवाज में कंपकपी महसूस की। मेरे दिल ने कहा ‘गधे, वो इतना चांस दे रही है, तू भी बन जा बेशरम… वरना पछतायेगा।
मैंने कहा- चुदास चोदना शब्द से बना है!
वो खिलखिला कर हंसने लगी और मैगज़ीन के पन्ने पलटने लगी।

मैं सोचने लगा कि अब क्या कयूँ?
अचानक उसने पूछा- ये वेजिना क्या होता है?
मेरे दिल ने कहा ‘साली जानबूझ कर ऐसे सवाल पूछ रही है।’ मैंने बिंदास होकर कहा- योनि को वेजिना कहते हैं।
वो फिर पूछने लगी- यह योनि क्या होता है।
मैंने कहा- क्या आप योनि नहीं जानती हो?
वो बोली- नहीं।
मैंने कहा- चूत समझती हो?
मामीजान ने झट से मुंह पर हाथ रखा और मैगज़ीन के पन्ने पलटती हुयी बोली- हा…

मैंने हिम्मत कर के कहा- चुदास की बहुत चाहत हो रही है।
वो हल्के से मुस्कुराते हुए कहा- चुदास की प्यास?
मैंने कहा- वाकई चुदास की प्यास लगी है।
वो बोली- मैं भी दो साल से प्यासी हूँ क्योंकि दो साल पहले मेरा पति से तलाक हो गया था।

मैंने कहा- ओह… इसका मतलब कि दो साल से तुम्हारी चूत ने लंड का पानी नहीं पिया है।
वो सिर झुका कर बोली- आज तक तुम्हारे जैसा कोई मिला ही नहीं।
मैं बोला- अगर मिल जाता तो?
वो बोली- तो मैं अपनी चूत को उस लंड पर कुर्बान कर देती।
मैं बोला- आओ मेरा लंड तुम्हारी चूत पर न्यौछावर होने के लिये बेकरार है।

मैंने तुरंत उसे अपनी बांहों में ले लिया और उसके होंठ में होंठ डाल कर चुम्बन करने लगा, मैंने महसूस किया कि उसके हाथ मेरे लंड की तरफ़ बढ़ रहे थे और उसने पैंट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को पकड़ लिया फिर धीरे धीरे सहलाने लगी।
मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो गया। मुझसे बरदाश्त नहीं हुआ और मैं पैंट और अंडरवीयर निकाल कर बिल्कुल नंगा हो गया।

अब मामी ने मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुंह में ले लिया और लोली पोप की तरह चूसने लगी।
मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
कभी वो मेरे लंड के सुपारे को चूसती, कभी जबान से लंड को जड़ तक चाट रही थी.
ऐसा उसने करीब 15 मिनट तक किया।

आखिर में रहा न गया मैंने उसके मुंह में ढेर सारा वीर्य डाल दिया। फिर हम दोनो सोफ़े पर आकर बैठ गये। मेरा लंड फिर सामान्य हो गया।

वो अब भी साड़ी पहने हुयी थी, मैंने उसकी साड़ी में हाथ डाल कर जांघों को सहलाया फिर हाथ को उसकी चूत पर ले गया। उसकी पैंटी गीली हुयी थी, इतनी गीली थी जैसे पानी से भिगोयी हो। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही चूत को मसलना शुरु किया, वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला, उसकी चूत फूली हुयी और गरम भट्टी की तरह सुलग रही थी। मैंने उसकी चूत की दरार में उंगली डाल कर चूत के दाने को मसलने लगा जिस कारण वो बेकरार होने लगी।

अब मैंने उसे सोफ़े पर लिटा कर उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरकाया। उसकी पैंटी चूत के अमृत से तर-बतर थी। मैंने पैंटी को पकड़ा और जांघों तक सरका दिया।
अब मामी ने खुद उठ कर अपनी पैंटी निकाल दी और फिर सोफ़े पर लेट गयी। उसके घुटने ऊपर थे और टांगें फैली हुयी थी। उसकी सांवली चूत अब बिल्कुल साफ़ साफ़ दिखायी दे रही थी।

मैंने अपने एक उंगली उसकी चूत में डाली तो मुझे लगा मैंने आग को छू लिया हो क्योंकि उसकी चूत काफ़ी गरम हो चुकी थी। मैं धीरे धीरे अपनी उंगली उसके चूत में अंदर बाहर करने लगा, उसके मुंह से आअह्ह ह्हाअ ऊफ़्फ़ की आवाज निकल रही थी।

अब मैंने दो उंगलियां उसकी कोमल चूत में घुसाई। चिकनी चूत होने से दोनो उंगलियां आराम से अंदर बाहर हो रही थी। लगभग पचास साठ बार मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चूत की घिसाई की।
इधर मेरा लंड भी फूल कर तन गया था। अब मैं उठ खड़ा हुआ और उसे लेकर बेडरूम में ले गया। वो आंखें बंद किये मेरे अगले कदम का इन्तज़ार करने लगी। मैंने शर्ट निकाल कर उसकी साड़ी और पेटिकोट दोनो उतार दिये और हम बिल्कुल नंगे हो गये।
वो करवट लेकर लेट गयी, अब उसके चूतड़ साफ़ झलक रहे थे, मैंने उसकी गांड पर हाथ से सहलाया। क्या गांड थी… गोल मटोल गांड थी उसकी।

मैं करीब 5 मिनट तक उसकी गांड को सहलाता रहा फिर उसकी कमर पकड़ कर चित लिटा दिया और जितना हो सका उतनी उसकी टांगें फैला दी, फिर उसकी चूत की दरार को फैला कर अपनी जीभ से चूत चाटने लगा।
उसके मुंह से हाअ ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ की नशीली आवाजें निकल रही थी। मैं अपनी जीभ से उसकी चूत के एक एक भाग चाट रहा था, बीच बीच में चूत को जीभ से चोद रहा था।

वो बिल्कुल पूरी तरह से गरम हो चुकी थी, वो बोली- अब हटो हार्दिक, मेरी चूत काफ़ी गरमा चुकी है। अपना लंड मेरी गरम गरम चूत में घुसेड़ दो राजा… उफ़्फ़… अपने लंड से मेरी चूत की गरमी और प्यास बुझा दो, मेरे हार्दिक, आज इतना कस कस कर चोदो कि मेरे पूरे अरमान निकल जाये।

जैसे ही मैंने उसकी चूत से अपना मुंह हटाया, उसने अपनी टांगें मोड़ ली, मैं उसकी उठी हुयी टांगों के बीच बैठ गया। मैंने उसकी टांगें अपने हाथ से उठा कर अपना लंड उसके चूत के मुंह में रखा जिस कारण उसके शरीर में झुरझुरी मच गयी।
लंड को चूत के मुंह में रखते ही चूत की चिकनाहट के कारण अपने आप अंदर जाने लगा। मैंने कस कर एक धक्का मारा तो लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया। गरमा गरम चुत के अंदर लंड की अजीब हालत थी।

अब मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। उसकी चूत के घर्षण से मेरा लंड फूल कर और मोटा हो गया। मेरे हर धक्के पर वो ऊऊफ़्फ़ आआह्ह ऊऊह्ह ह्हह की आवाजें निकालने लगी।
करीब बीस मिनट तक मैं उसके चूत में अपना लंड अंदर बाहर करता रहा, फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और दनादन लंड को चूत में मूसल की तरह घुसाता रहा.

मामी ने मुझे कस कर बाहों में जकड़ लिया, मैं समझ गया कि वो झड़ रही है।
मामी कराह रही थी, बोल रही थी- हाय! हार्दिक दो साल बाद मेरी चूत की खुजली मिटी है। वाकयी तुम पक्के चुदक्कड़ हो। चोदो मुझे जोर जोर से चोद।

मेरा लंड फच फच की आवाज के साथ अंदर बाहर हो रहा था। पूरे कमरे में चुदाई की फ़चाफ़च फ़चाफ़च की आवाजें गूंज रही थी। मेरा लंड उसकी चूत को छेदता जा रहा था. कुछ देर बाद उसके झड़ने के कारण मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था और वो निढाल होकर लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी।

करीब 50-60 धक्कों के बाद मेरे लंड ने आखिर जोरदार फ़व्वारा निकाला और उसकी चूत में समा गया। जब तक लंड से एक एक बूंद उसकी चूत में समाती रही, मैं धक्कों पर धक्के लगाता रहा। आखिर में मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके बाजु में लेट गया। हम दोनों की सांसें तेज चल रही थी, वो दाहिनी करवट से लेटी हुई थी।

करीब 15-20 मिनट तक हम ऐसे ही लेटे रहे।
फिर मेरी नज़र मामी की गांड पर पड़ी, गांड का ख्याल आते ही लंड फिर से हरकत करने लगा।

मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रख कर घुसाने की कोशिश की। उसकी गांड का छेद बहुत टाइट था। मैंने ढेर सारा थूक उसकी गांड के छेद पर और अपनी उंगली पर लगाया और दुबारा उसकी गांड में उंगली घुसाने की कोशिश करने लगा। गीलेपन के कारण मेरी उंगली थोड़ी गांड में घुस गयी.
उंगली घुसते ही वो कसमसाहट करने लगी, वो तड़प कर आगे खिसकी जिस वजह से उंगली गांड के छेद से बाहर निकल गयी.

मामी मुड़ कर बोली- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- मामी तुम्हारी गांड सचमुच खूबसूरत है।
वो बोली- उंगली क्यों घुसाते हो? लंड क्या सो गया है?

उसकी यह बातें सुनकर मैं खुश हुआ और उसे पेट के बल लिटा दिया और दोनो हाथों से उसकी चूतड़ को फ़ैला दिया जिस से उसकी गांड का छेद और खुल गया।
वो धीरे से बोली- हार्दिक, नारियल तेल, घी या कोई चिकनी चीज मेरे गांड और लंड पर लगा लो तो आसानी रहेगी।

मैंने कहा- मामीजान, इससे भी अच्छी चीज है मेरे पास… वेसलीन!
और मैं उठ कर ड्रायर से वेसलीन ले आया और ढेर सारी वेसलीन अपने लंड और उसकी गांड पर लगाई और उसकी गांड मारने को तैयार हो गया। अब मैंने अपना लंड उसकी गांड के सुराख पर लगाया और थोड़ा जोर लगा कर पुश किया, लंड का सुपाड़ा गांड में थोड़ा सा घुस गया। फ़िर थोड़ा जोर लगा कर और पुश किया तो सुपाड़ा उसकी गांड में समा गया।

सुपाड़ा गांड में घुसते ही वो बोली- हार्दिक, थोड़ा आहिस्ते आहिस्ते डालो, दर्द हो रहा है, दो साल हो गये गांड मरवाये।

अब मैं सिर्फ़ सुपाड़े को ही धीरे धीरे गांड के अंदर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद ही उसकी गांड का छेद पूरा लंड खाने के काबिल हो गया। मुझे लगा अब मेरा लंड पूरा उसकी गांड में घुस जायेगा और ऐसा ही हुआ।
उसकी गांड का छेद चिकनाहट की वजह से लंड थोड़ा थोड़ा और अंदर समाने लगा।

दो तीन मिनट की मेहनत से मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में घुस गया। मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड से अंदर बाहर करने लगा। उसकी टाइट गांड होने से मुझे बड़ा मजा आ रहा था। उसे भी गांड मरवाने का मजा आ रहा था और मुंह से ऊफ़्फ़ आह्हा की आवाजें निकाल रही थी।

40-50 धक्कों के बाद मेरे लंड ने घुटने टेक दिये और उसकी गांड में ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया, वो भी अपनी गांड को सिकोड़ने लगी।
अब हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लेट गये।

जब तक मेरा दोस्त नहीं आया, मैंने उसकी मामीजान की कई बार चूत और गांड मारी।

जब मैं वापस अपने घर लौटने लगा तो मामी बोली- कैसी रही मेरी समाज सेवा?
और मैंने हंस कर कहा- मामी जी, आप सच्चे तन मन से समाज सेवा करती हो!
फिर मैं घर लौट आया.
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