Our site can help you find a professional massage girl in Osmanabad who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.
Find Related Category Ads
Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Osmanabad that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.
Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Osmanabad massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.
Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Osmanabad who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.
Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Osmanabad massage service, which makes it easier to obtain more customers.
There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.
A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Osmanabad massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.
This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Osmanabad who are good at deep tissue treatments that function effectively.
Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Osmanabad employ the use of custom oil preparations to make you feel good.
A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Osmanabad helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.
Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Osmanabad
Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Osmanabad at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:
Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.
Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.
When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.
The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.
All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
हैलो रीडर्स, आई एम सुमित बैक वंस अगैन Hindi sex stories आई एम २४ इयर्स ओल्ड एंड विद ए गुड फिज़िक & गुड मशीन साइज़। बात तब की है जब मैं कॉलेज में था एमए फ़ाइनल कर रहा था और कॉलेज में फेस्ट चल रहा था। निधि मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी और मैं उसे दिल ही दिल में चाहता भी बहुत था लेकिन कभी कहने की हिम्मत नहीं होती थी। हम दोनों खूब साथ कॉलेज में रहते थे बात चीत करते थे लेकिन इससे ज़्यादा न कभी मैंने न कभी उसने ही कोई पहल करी। फेस्ट में हम दोनों एक्टर ऐक्ट्रेस का रोल कर रहे थे। नाटक शाम को ५ बजे होना था और हम १ बजे से ही रिहर्सल कर रहे थे। लगभग २ घंटा पहले मेक अप करके हम दोनों को थोड़ी देर डाइरेक्टर ने हमें एक ही कमरे में छोड़ दिया और डाइलोग बोल कर देखने को कहा। उसने एक आदिवासी की साड़ी पहनी थी और मैंने एक धोती और एक फटा हुआ बनियान पहना हुआ था क्योंकि मैं नाटक में एक मजदूर और वो मेरी बीवी का रोल कर रही थी।
नाटक की प्रक्टिस में हम दोनों को एक सीन में डांस करना था मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उसने मेरी कमर में हाथ डाला और हमने डांस करना शुरू किया। उसके बाद एक बेंच से टकरा कर वो थोडी सी लड़खड़ायी और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। अचानक मेरी नज़र उसके बूब्स पर चली गई जो ब्लाउज़ का गला गहरा होने की वजह से साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे। उसका रंग इतना गोरा था कि मानो दूध से भी सफ़ेद। साइज़ तो बस एक दम परफेक्ट। इतना परफेक्ट कि कोई भी देखे तो बस देखता ही रह जाए। शायद ३६-२६-३४ होगा। मेरी निगाह उसकी छाती से ही अटकी रह गई। तभी मैंने देख कि निधि अपने साड़ी का पल्लू उठाने की बजाय मेरी तरफ़ ही देखे जा रही है। मुझे लगा कि शायद ग्रीन सिग्नल मिल रहा है मैंने चेहरा ऊपर उठा कर उसके लिप्स पर किस करना शुरू कर दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं किस और ज़्यादा डीप करता गया और फ़िर अपनी जीभ उसके मुंह मी दे दी और फ़िर उसके जीभ मेरे मुंह में भी आ गई। वो भी बहुत एन्जॉय कर रही थी।
मैंने मौका देखते हुए उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और ब्लाउस के ऊपर से ही पूरा मज़ा लेने के बाद मैंने ब्लाउज़ के अन्दर हाथ डालने की बजाय उसे पीछे से बांहों में भर कर उसकी गांड दबाने लगा। मैंने वो भी मुझे बिल्कुल मना करने की बजाय मेरा साथ दे रही थी मैंने अब देर न करते हुए उसकी साड़ी को उठाया और उसकी गोरी गोरी टांगो को देख कर मेरी आँख जैसे खुली की खुली ही रह गई। मैं उसकी टांगों को नीचे से चूमता हुआ ऊपर तक गया और उसकी काले रंग की पैंटी को किस किया और फ़िर देर न करते हुए उसकी पैंटी को उतार कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो और ज़्यादा गरम होती जा रही थी।
मैंने अब देर न करते हुए अपनी धोती खोल कर अपने लंड को आज़ाद किया जिसका कच्छे में बुरा हाल हो रहा था। ८ इंच लंबा और ३ इंच मोटा लंड देखते ही उसके होश उड़ गए और वो कहने लगी कि नहीं सुमित प्लीज़ मेरे साथ वो मत करना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा डरो मत मेरी जान मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा मगर वो मान ही नहीं रही थी। तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इस हथियार को अपने मुंह में ले सकती हो? उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बार बार प्लीज़ कहने पर वो मान गई अब वो मेरे लंड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत में था। उससे खूबसूरत लड़की को मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था और वो मेरा लंड चूस रही थी।
थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाई का काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। अब मैंने उसको कहा कि जानू एक बार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुत मज़ा आएगा। वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बार थोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गई और मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर अपने लंड और उसकी चूत पर लगाया और अपना काम धीरे धीरे शुरू किया। उसे बहुत दर्द हो रहा था। मगर अब वो कुछ बोल भी नहीं सकती थी क्योंकि अगर वो थोड़ी से भी आवाज़ बाहर निकालती तो बाहर से कोई भी आ सकता था। ऐसे में मैंने अपने होठ उसके होठों पे रख दिए और चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दिया। थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और फ़िर लगभग १५ मिनट की मजेदार चुदाई के बाद हम दोनों ने अपना अपना पानी छोड़ दिया। उसके बाद तो मैंने लगभग हर हफ्ते उसे उसके घर पर जाकर चोदा।
वैसे वो आज भी मेरी बेस्ट फ्रेंड है पर अब उसकी शादी हो गई है। Hindi sex storie हालांकि शादी को २ महीने ही हुए हैं पर हो सकता है कि मेरा प्रोग्राम अभी भी चलता रहे।
डर्टी Xxx फॅमिली स्टोरी मेरी मम्मी की है. मैं दीदी की चुदाई करता था पर मम्मी को शक हुआ तो उसने दीदी की शादी करवा दी। मैंने अपनी वासना का हल कैसे किया?
नमस्कार दोस्तो, मैं एक बार फिर से आपके सामने अपनी नई सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूं।
मेरी पिछली कहानी
बड़ी सगी दीदी की फुद्दी और गांड का मजा
में मैंने आपको बताया था कि कैसे मैंने अपनी दीदी की चूत चुदाई की और उसकी गांड मारी थी।
आज मैं आपको अपनी मम्मी की डर्टी Xxx फॅमिली स्टोरी बताने जा रहा हूं।
आपको बता दूं कि मेरी मम्मी विधवा है और उसे हम भाई-बहन की चुदाई के बारे में शक हो गया था।
जल्दी ही मम्मी ने दीदी की शादी करवा दी।
अब मुझे चूत और गांड चुदाई के लिए तरसना पड़ रहा था।
जब कभी साल-छह महीने में दीदी घर आती थी तो तभी चूत मिल पाती थी।
उसमें भी मम्मी हम दोनों पर नजर रखती थी इसलिए मजा तो जैसे खत्म ही हो गया था।
ऐसे ही दिन गुजर रहे थे और मेरे अंदर सेक्स की जो आग दबी थी उसमें रोज इंतजार का पेट्रोल गिरता जा रहा था जिससे वो रोज ज्यादा भड़कती जा रही थी।
जब मुझसे रहा न गया तो मैंने सोचा कि मम्मी पर ही ट्राई किया जाए। मेरा डर्टी Xxx विचार था पर मैं वासना से अँधा हो गया था.
मैं अपनी मम्मी के फिगर के बारे में बताऊं तो उसका साइज 36-32-38 का है।
आप सोच सकते हैं कि मेरी मम्मी देखने में कैसी सेक्स माल लगती होगी।
वो अक्सर घर में सूट सलवार और कुर्ता-पजामी या पजामा पहनती है। जिसमें उसकी बाहर को निकली हुई गांड मुझमें बहुत हवस जगाती थी।
एक दिन ऐसा हुआ कि मम्मी किचन में खाना बना रही थी।
मैं बाहर मार्केट से जब वापस आया तो पानी पीने के लिए किचन में गया और जानबूझ कर मम्मी के पीछे खड़ा होकर पूछने लगा- मम्मी क्या बना रही हो तुम?
उस समय वो कुर्ता पजामा पहने खड़ी थी।
मैं थोड़ा आगे को खिसका तो मेरा लंड मम्मी की गान्ड से टच हो गया।
इससे एकदम से लन्ड तनाव में आ गया और मम्मी को भी महसूस हुआ।
वो एकदम से वह वहां से दूर होकर चली गई लेकिन उन्होंने मुझे कुछ नहीं बोला।
उस दिन के बाद से मेरा भी हौंसला बढ़ने लगा और मैं अक्सर उनकी बॉडी को टच करने का मौका देखता रहता।
ऐसे करते करते दो महीने निकल गए और मेरी हवस बढ़ती जा रही थी।
एक दिन मम्मी को बाहर थोड़ा काम था तो मैं मम्मी को बाइक पर ले गया।
आते समय बहुत तेजी से बारिश शुरू हो गई और मैं और मम्मी बारिश से भीग गए।
जब हम घर पहुंचे तो दोनों भीग चुके थे।
मम्मी ने उस समय लाल रंग का प्लाजो और ब्लू कुर्ता पहना हुआ था और गीला होने से उनके कपड़े एकदम उनके शरीर से चिपक गए थे।
इससे उनकी व्हाइट ब्रा पूरी साफ दिखाई दे रही थी।
मम्मी की गांड की शेप देखकर मेरा कंट्रोल छूट गया और मैंने मम्मी को पीछे से जाकर पकड़ लिया और उनकी गान्ड पर अपना लन्ड का दबाव बनाते हुए धक्के लगाने लगा जैसे मैं मम्मी की गांड चोद रहा हूं।
वो बोली- क्या कर रहे हो ये?
मुझ पर हवस सवार थी और मैं कुछ भी नहीं सोच पा रहा था।
मैं सीधे बोला- उस दिन जो किचन में जो अधूरा काम रह गया था, वो पूरा करना है। मैं बहुत प्यासा हूं। मैं रोक नहीं सकता अपने आपको।
ये कहते हुए मैंने मैंने सीधे एक हाथ उनके बूब्स पर रख दिया और आराम आराम से कुर्ते के ऊपर से दबाने लगा।
मम्मी पहले तो थोड़ी छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन बाद में वो गर्म होने लगी।
इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैंने उनका कुर्ता ऊपर किया और प्लाजो के ऊपर से फुदी को मसलने लगा।
अब वो आह … अह … करके थोड़ी थोड़ी सिसकारियां लेने लगी।
यह देखकर मेरा जोश और ज्यादा बढ़ने लगा।
मैंने उनके प्लाजो का नाड़ा खोल दिया। प्लाजो मैंने नीचे किया और निकलवा दिया।
अब वो ऊपर से कुर्ते में रह गई थी और नीचे से केवल पैंटी में।
फिर मैंने कुर्ता हटाकर पैंटी भी नीचे कर दी।
मम्मी की मोटी गांड देखकर मेरा लंड तो फटने को हो गया।
जल्दी से मैंने भी अपने कपड़े उतार फेंके और मम्मी की नंगी गांड पर लंड को रगड़ने लगा।
अब मम्मी ने मेरे हाथों को अपने कुर्ते के ऊपर से अपने बूब्स पर रखवाया और अपने हाथों से दबवाने लगी।
नीचे मेरा लंड कभी मम्मी की चूत तो कभी गांड पर रगड़ खा रहा था।
मजे में मम्मी की आंखें बंद हो चुकी थीं; वो मेरे लंड की पूरी फीलिंग ले रही थी।
उसके मुंह से उम्म … आह्ह … करके सिसकारियां निकल रही थीं।
फिर धीरे धीरे मम्मी का मूड पूरा चुदाई के लिए बन गया और उसने पीछे हाथ लाकर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया।
अभी भी मेरा लंड उनकी गांड से टकरा रहा था।
मैंने पूछा- कैसा लग रहा है मम्मी?
वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है, बरसों की प्यास है, आज बुझवाने का मन कर रहा है; मेरी प्यास मिटा दो।
ये सुनते ही मैं भी मम्मी की चुदाई करने के लिए तैयार हो गया।
मुझे भी बहुत दिनों से चूत नहीं मिली थी इसलिए चुदाई के अलावा मन में कोई दूसरा ख्याल नहीं आ रहा था।
मैंने उनकी गांड पर हाथ टिका दिए और जोर जोर से दबाने लगा।
उस वक्त इतना मजा आ रहा था कि बस बता नहीं सकता।
मम्मी की 36 साइज की चूचियों को दबाते हुए मैं जोर जोर से उनकी चूत के होंठों पर लंड को रगड़ रहा था।
इससे मम्मी की चूत से पानी निकलने लगा था और वो चिकनी हो गई थी।
मम्मी की चूत का गीलापन मैं अपने लौड़े पर लगता हुआ महसूस कर सकता था।
अब मैंने मम्मी को अपनी साइड घुमाया और स्मूच करने लगा।
साथ में नीचे से मैं हाथ से उनकी चूत को भी रगड़ रहा था।
मम्मी की चूत की आग अब हर पल बढ़ती जा रही थी।
मॉम ने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसकी मुठ मारने लगी।
कभी उसको अपनी चूत पर लगाकर मेरे कूल्हे पर टांग चढ़ा लेती थी ताकि मैं उनकी चूत में लंड घुसेड़ने पर मजबूर हो जाऊं।
मगर मैंने लंड की बजाय उनकी चूत में उंगली दे दी।
मैं एक उंगली देकर तेजी से अंदर बाहर करने लगा जिससे मॉम और ज्यादा तड़पने लगी।
मम्मी की पूरी बॉडी कांप रही थी।
मैंने और तेजी से उंगली करना शुरू कर दिया।
कुछ देर के बाद मॉम की चूत ने पानी का फव्वारा छोड़ते हुए मेरे हाथ को भिगो दिया।
उनकी चूत पूरी पानी में गीली हो गई।
मैंने उनको बेड के किनारे पर बैठाया और उनकी चूत में मुंह लगाकर चाटने लगा।
उनको गुदगुदी हो रही थी लेकिन मजा भी आ रहा था।
मैं अंदर तक जीभ घुसाकर उनकी चूत को चाट रहा था।
उनकी चूत के नमकीन पानी का स्वाद मेरे मुंह में आ रहा था।
मॉम दोबारा से गर्म होने लगी और मेरे मुंह को चूत में दबाने लगी।
मैंने उनको बेड के किनारे पर ही घोड़ी बना दिया और लंड को चूत पर सेट कर दिया। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और चूत के मुख पर लंड को ऊपर नीचे करते हुए रगड़ने लगा।
इससे मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं।
मॉम की चूत में मैंने पीछे से लौड़ा पेल दिया।
उनकी चीख निकल गई और आईई … उईई … आह्ह … मर गई … करके वो चिल्लाने लगी।
शायद बहुत समय से मम्मी ने चूत में कुछ नहीं लिया था।
मैंने पूरा लंड अंदर पेलकर उनकी चूत को चोदना शुरू कर दिया।
कुछ देर तक तो मॉम ऐसे ही दर्द में छटपटाती रही।
वो बार बार छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने उनको साइड से पकड़ा हुआ था।
मेरे दोनों हाथ मॉम की गांड पर दोनों तरफ कसे हुए थे।
मैंने फिर गांड को ऐसे ही पकड़े हुए मॉम की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।
मेरा लंड मॉम की चूत में अब स्पीड से अंदर बाहर होने लगा।
पांच मिनट के बाद मॉम को चुदाई में मजा आने लगा।
वो आराम से आह्ह … आह्ह … करते हुए चुदने लगी।
फिर मॉम ने मुझे रुकने का इशारा किया।
मैंने लंड के धक्के लगाने बंद किए और मॉम ने आगे सरक कर लंड को अपनी खुल चुकी चूत से पक् … से बाहर निकलवा लिया।
मैं समझ नहीं पाया मॉम ने ऐसा क्यों किया।
वो पलट गई और फिर मेरे सामने टांगें खोलकर लेट गई।
मुझे समझ आया कि मॉम आगे से चुदवाना चाहती है।
फिर उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मैंने फिर से उनकी टांगें फैलाते हुए लंड को चूत में पेल दिया।
अब मैं मम्मी के जिस्म के ऊपर लेट गया और चोदने लगा।
उनकी टांगों ने मेरी गांड को जकड़ लिया और मुझे नीचे खींचकर मेरे होंठों को चूसने लगी।
नीचे से मेरा लंड पूरी तेजी से मॉम की चूत में अंदर बाहर हो रहा था।
अब मॉम की चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी।
काफी देर तक मैं इसी पोज में उनकी चुदाई करता रहा।
फिर उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और खुद मेरे ऊपर बैठकर मेरे लंड की सवारी करने लगी।
वो बहुत चुदासी लग रही थी, उनकी चूचियों के निप्पल एकदम से तनकर खड़े हो चुके थे।
नीचे से धक्के लगाते हुए मैंने उनकी चूचियों को भी भींच रहा था।
अगले पांच मिनट तक मॉम मेरे लंड पर उछलती रही।
फिर मेरा माल निकलने को हो गया।
मैंने कहा- मॉम, मेरा होने वाला है।
वो बोली- तुम देख लो, कहां निकालना चाहते हो!
मैंने उनको उठने के लिए कहा और बेड पर घुटनों के बल कर लिया।
कुतिया वाली पोजीशन में मैंने मम्मी के मुंह में अपना लंड दे दिया और चुसवाने लगा।
वो भी भूखी रंडी की तरह मेरे लंड को चूसने लगी।
मॉम मेरी बहन से भी ज्यादा अच्छी तरह से लंड चूस रही थी।
मुझे लंड चुसवाने में बहुत मजा रहा था लेकिन ये मजा देर तक टिक नहीं पाया।
2-3 मिनट की चुसाई के बाद मेरे लंड ने माल मॉम के मुंह में गिराना शुरू कर दिया।
मैंने सारा माल उनके मुंह में उड़ेल दिया जिसे मॉम पूरा अंदर निगल गई।
कुछ देर तक हम दोनों वहीं बेड पर पड़े रहे।
हमें सामान्य होने में 10 मिनट का समय लग गया।
उसके बाद मॉम उठकर वॉशरूम में गई और मैं भी मॉम के पीछे वॉशरूम में चला गया।
अंदर जाकर मैंने मॉम को फिर से बांहों में भर लिया।
मैं उनकी चूचियों को चूसने लगा और चूत को रगड़ने लगा।
हम दोनों फिर से गर्म हो गए।
उसके बाद मैंने मॉम को वहीं सीट पर बिठा लिया और उनकी चूत को चूसने लगा।
मम्मी की चूत फिर से गर्म हो गई और उनकी चूत से नमकीन रस का स्वाद आने लगा।
अब मैंने उनको खड़ी किया और दीवार के साथ सटा दिया।
उनका मुंह दीवार की तरफ था और गांड मेरी तरफ।
मैंने पीछे से टांगों को फैलाते हुए उनकी चूत में लंड को पेल दिया और दीवार की तरफ धक्के लगाते हुए चूत को चोदने लगा।
मैं जोर जोर से झटके देने लगा।
वो भी मेरा पूरा साथ देते हुए गांड को लंड की तरफ उछाल रही थी।
लगभग 5 मिनट तक मैंने मॉम की चुदाई दीवार से सटाकर ही की।
फिर मैंने उनको नीचे फर्श पर लिटा लिया और खुद ऊपर आकर चोदने लगा।
अब मॉम को चुदते हुए मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था।
वो मेरी पीठ को नोंचते हुए चुद रही थी।
उनकी आंखों में संतुष्टि आती साफ दिख रही थी।
इस तरह मैंने वॉशरूम में मम्मी को बहुत देर तक अलग अलग आसनों में बहुत चोदा और पूरा माल उनके बूब्स पर डाल दिया।
मम्मी भी उस चुदाई में 2 बार झड़ गई।
फिर हम दोनों नहाकर बाहर आ गए और उस दिन के बाद हमारे बीच चुदाई का रिश्ता भी बन गया।
यह बात उस समय की है जब Hindi Porn Stories मैं कंप्यूटर का कोर्स कर रहा था। मुझे उस समय कंप्यूटर ठीक करने के लिए लोगों के घर पर भी जाना पड़ता था।
एक बार की बात है, मेरे एक सीनियर ने मुझे एक पता दिया और कहा कि इस घर में जाकर इनकी प्रॉब्लम देखना है। मैंने जाने से पहले वहाँ काल किया तो उन्होंने कहा कि दो बजे के बाद आना।
मैं उनके घर अढाई बजे गया तो एक बहुत ही प्यारी सेक्सी लड़की ने दरवाजा खोला, उम्र कोई अट्ठारह-उन्नीस साल होगी। मैंने उससे पूछा कि कम्प्यूटर में क्या प्रॉब्लम है तो उसने कहा की काम करते समय कंप्यूटर कभी भी बंद हो जाता है।
मैंने कंप्यूटर ऑन किया और चेक किया तो पता लगा कि वायरस के कारण परेशानी हो रही थी। मैंने वायरस हटा दिया और उसे चेक करने को कहा। लेकिन उससे पहले उसने कहा कि आप क्या लोगे- चाय या ठंडा?
मैंने उसे कहा कि पहले चेक कर लो फिर देखते हैं।
उसने चेक किया और कहा कि आप कोई मूवी लगा कर छोड़ दो, कुछ देर में अगर बंद नहीं होता है तो ठीक है।
मुझे उसमें कहीं भी कोई मूवी नहीं दिखी तो मैंने उससे कहा- मूवी तो नहीं है!
तो उसने आकर एक फाइल खोल दी, वो अंग्रेजी मूवी थी।
वो लगाकर किचन में चली गई। कुछ देर में उसमें सेक्स के सीन आने लगे तो मैंने फाइल को बंद कर दिया।
उसने आकर कहा- प्रॉब्लम आई?
मैंने कहा- प्रॉब्लम तो नहीं आई!
तो उसने कहा कि मूवी बंद क्यों कर दी?
उसने फिर से मूवी चालू कर दी।
जैसे ही मूवी में सेक्स के सीन आये तो मैं उठकर बाहर जाने लगा।
उसने कहा- क्या हुआ?
मैंने कहा- अगर ऐसी मूवी देखेंगे तो कुछ हो जायेगा!
वो बोली- कुछ नहीं होगा!
मैं भी बैठ गया लेकिन कुछ देर बाद वो मेरे साथ वाली कुर्सी के पास आकर खड़ी हो गई। अब मुझसे भी सब्र नहीं हो रहा था सो मैंने भी उसे पकड़ अपनी गोद में बिठा लिया। वो कुछ नहीं बोली। मैंने उसके वक्ष पर हाथ रख दिया तो बोली- यही प्रॉब्लम है! फिल्म पूरी नहीं देख पाती! अकेले में देखकर फिल्म बंद करनी पड़ती है!
अब वो खुल कर मेरा साथ दे रही थी। बोलने के बाद उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में अन्दर कर दी। अब मैं भी उसे चूसने लगा। धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके स्तनों को मसलते हुए उसके पेट तक चला गया। मैंने फ़ौरन उसका टॉप उतार दिया।
कसम से ऐसे स्तन अपने जीवन में कभी नहीं देखे। जैसे ही वो ब्रा से आजाद हुए, मैंने एक चुचूक को मुंह में भर लिया। उसे भी जवानी का मजा आने लगा। उसने जोश में आकर मेरी पैंट के अन्दर हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे आगे पीछे करने लगी।
अब हम दोनों अपने बस में नहीं थे। मैंने बिना देर किये उसका स्कर्ट उतार दिया और उसकी क्रीम रंग की पैंटी उतार दी। उसकी चूत पे हल्के से बाल थे। मैंने उसकी चूत में एक ऊँगली डाल दी। उसने एक हल्की सी आह भरी। अब वो अपने पंजे के बल बैठ कर मेरी पैंट खोल के मुझे पूरा नंगा किया, एक झटके से वो मेरा लंड पकड़ कर अपने मुंह में लेकर प्यार से चूसने लगी। मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था।
अब वो कहने लगी- फिल्म को पूरा करो!
मैंने उसे वहीं सोफे पे लिटाया और उसके चुचूक चूसने लगा। साथ में उसकी चूत में ऊँगली करने लगा और वो आह आह कर रही थी।
वो बोली- अब सब्र नहीं हो रहा है, कर दो पूरा!
मैंने उसकी टाँगें उठाकर अपने लंड को उसकी बुर के मुंह पर रखा और एक हल्का सा धक्का दिया। लेकिन वो कुंवारी थी इसलिए लंड आसानी से नहीं गया तो मैंने उससे कहा- थोड़ा दर्द होगा!
तो वो बोली- परवाह मत करो! लेकिन आज खुश कर दो!
इस बार मैंने उसे कमर से पकड़ के लंड को बुर के मुंह में रखकर तेजी से धक्का दिया मेरा लंड सीधे उसके बुर में तीन इंच तक चला गया। उसके आंसू आ गए और निकालने को कहने लगी। लेकिन मैं कुछ देर रुका और उसके स्तन चूसने लगा। इससे उसे दर्द कुछ कम लगा और नीचे से कमर उठाने लगी।
फिर मैं उसके होठों को चूमने लगा और उसकी कमर को कस के पकड़ के एक जोर से धक्का मारा। इस बार मेरे पूरा लंड उसकी चूत की गहराई में चला गया लेकिन होंठों पर होंठ रखे होने के कारण उसकी आवाज बाहर नहीं आ पाई। थोडी देर शांत रहने के बाद वो बोली- अब जितनी तेजी से कर सकते हो, करो!
फिर मैं भी जोर से अन्दर बाहर करने लगा और वो भी इस काम में मेरा साथ देने लगी, वो कहने लगी- मेरे अन्दर से कुछ निकल रहा है!
थोड़ी देर में मुझे भी लगा कि मेरा भी निकल रहा है तो मैंने उसके मुंह में दे दिया। वो प्यार से चूसने लगी। मैंने उसके मुंह में अपना सारा रस दे दिया, वो भी प्यार से पी गई। इसके बाद उसने मेरे लंड को चाट के साफ कर दिया तो मैंने पूछा- अब तो कोई प्रॉब्लम नहीं कंप्यूटर में?
तो वो हंस के बोली- अब प्रॉब्लम होगी तो काल कर दूँगी।
मैंने उससे कहा- कंप्यूटर ठीक करने का चार्ज ऑफिस में देना होता है!
तो वो बोली- ऑफिस के चार्ज के अलावा तुम्हारा इनाम भी लो!
उसने मुझे दो सौ रूपये ऑफिस के और मुझे एक प्यारा चुम्बन और एक हजार रूपये दिए और कहा- प्रॉब्लम होने पर आ जाना!
मैंने भी उसे एक किस देकर वादा किया और वहां से चला गया।
उसके बाद उसने अपनी एक सहेली को बुलाया और मैंने उसकी भी प्रॉब्लम ख़त्म की लेकिन वो फिर कभी!
मुझे आप सबके जवाब का इन्तजार रहेगा। Hindi Porn Stories
शर्मा जी और हम पास पास ही Antarvasna Stories रहते थे। दोनों के ही सरकारी मकान थे। मेरे पति और शर्मा जी एक ही कार्यालय में कार्य करते थे। शर्मा जी का भाई पास ही में एक किराये के मकान में रहता था और एक प्राईवेट कम्पनी में काम करता था।
पति के ऑफ़िस जाते ही शर्माजी की पत्नी मेरे घर या मैं उसके घर आते जाते थे। शादी के बाद हम बीवियाँ पति से तो चुदती ही रहती हैं, पर मन तो करता है ना कि कोई नया लण्ड भी तो चूत में घुसे।
शादी यानी कि लण्ड के चूत में घुसाने का लाईसेन्स… चूत का पर्दा तो चुदते ही फ़ट जाता है फिर चाहे कोई भी लण्ड हो, उसका स्वागत कर सकते हो। यानि हम बीवियो को शादी के बाद लण्ड लेने में छूट मिल जाती है।
शर्मा जी का भाई पप्पू… शर्मा जी के जाते ही आ जाता था फिर वो काफ़ी देर तक वहीं रहता था। उसकी ड्यूटी दिन को दो बजे से चालू होती थी, सो खाना उन्हीं के यहाँ खाता था।
पप्पू मुझे बहुत ही पसन्द करता था, करेगा क्यो नहीं… मैं भरपूर जवान जो थी… दुबली पतली, लम्बी, सुन्दर सी थी। मैं अधिकतर घर पर ढीला ढाला सा पजामा पहना करती थी और ऊपर एक कुर्ता।
मेरे उत्तेजना से भरपूर दोनों गोल गोल सुन्दर चूतड़ पप्पू को बहुत ही भाते थे। पप्पू का काम था कि पीछे से मेरे उभरे हुए चूतड़ो की चाल देखना और बस मेरे कुर्ते में झांकते रहना और उसकी भरपूर कोशिश यही रहती थी कि मेरे कहीं से भी चूंचियों के दर्शन हो जाये।
मैं यह सब समझती थी और उसका मनोरंजन उसे अपनी चूंचिया दिखा कर करती थी। इससे मेरा भी मनोरंजन हो जाता था। शरम तो बहुत आती थी पर क्या करुँ यह चूत है ही ऐसी चीज़ कि कोई लण्ड जहाँ नजर आया और फ़ड़क उठी।
मुझे अब धीरे धीरे पप्पू और नीता पर शक होने लगा था कि उन दोनों के बीच चुदाई का सम्बन्ध है… पर उन्हें कैसे पकड़ें…
एक बार उन्हें पकड़ लिया तो मैं अपने आप को चुदा लूँ ।
मैं एक बार पप्पू के आते ही चुपके से उसके घर में चली आई और बेडरूम वाली खिड़की से अन्दर का जायजा लिया। मेरा शक एकदम सही निकला। दोनों आलिंगनबद्ध थे और एक दूसरे को चूम रहे थे।
मेरे जिस्म में झुरझुरी सी आ गई। दिल में वासना जागने लगी। मैं आवाज लगाती हुई अन्दर चली गई, वो दोनों ही दूसरे काम में लग गये थे। मैंने भी अब अपने जलवे दिखाने की सोची और पप्पू को अपने लिये भी पटाने था, उसकी योजना बनाने लगी। आज मैंने उसे अपने चूतड़ भी उभार कर दिखाये, चूंचियो के दर्शन भी करा दिये और बड़ी समझदारी से उसे एक इशारा भी दिया कि मुझे पटा लो। पता नहीं मेरे इशारे ने कितना काम किया?
अगले ही दिन मैंने नीता और पप्पू को अपने ही घर की खिड़की से उन्हें लिपटे हुए देख लिया, मैंने खिड़की के पास जाकर और गौर से देखा, पप्पू नीता के बोबे दबा रहा था। मेरी चूत एकाएक फ़ड़क गई। लगा शायद मुझे ही दिखाने के लिये ये सब किया था।
मैं उत्साहित हो गई। मुझे लगा कि मुझे वहाँ जाकर मुझे कोशिश करनी चाहिये, शायद काम बन जाये। मैंने घर का काम जल्दी से समाप्त किया और नीता के घर में आ गई।
नीता से बातचीत में मैंने उससे कहा- नीता, यार आजकल मेरा मन बहुत ही भटक रहा है, दिल को चैन नहीं आ रहा है !’ मैंने उसे अपने मन की बात खोलने की कोशिश की।
‘मुझे पता है, ऐसा जब होता है जब मन में कोई इच्छा होती है !’ नीता ने मुझे उकसाया, मैं उत्साहित हो गई।
‘हाँ, मुझे ऐसा लगता है कि कोई बस आकर मेरे ऊपर चढ़ जाये और बस मेरा कल्याण कर दे !’ उसे मैंने एक स्पष्ट इशारा दिया।
‘ओह हो… यानि नीचे की बैचेनी है… अनिल है तो सही…!’ उसने इशारा समझा और मुझे परखने लगी।
‘नहीं कोई और चाहिये… नया !’ मैंने उसे इशारा किया।
वो सब समझ चुकी थी, सीधे मेरे दिल पर चोट की- पप्पू चलेगा क्या…?’
उसने ज्यों ही पूछा, मैंने अपनी निगाहें शरमा कर झुका ली, हाँ में सर हिलाया।
‘अरी मुँह से तो बोल ना मोना… ‘ मैं शरमा कर भाग गई।
दिन को मैं वापस गई… तो सोफ़े पर पप्पू नीता की चूंचियों से खेल रहा था, उसके कुर्ते का एक भाग ऊपर करके उसे दबा रहा था। नीता का मुँह मेरी तरफ़ था।
मैं जैसे ही दरवाजे पर आई नीता में मुझे देख लिया और हाथ से इशारा कर दिया, कि बस देख लो। पप्पू को नहीं बताया कि मैं दरवाजे पर हूँ।
उसने पप्पू का सर अपनी चूंचियो पर दबा लिया और मुझे देख कर मुस्करा उठी और अपनी चूंचियाँ भचक भचक करके उसके मुँह में मारने लगी। जैसे पप्पू दूध पी रहा हो। अचानक पप्पू ने मेरी तरफ़ देखा।
‘क्या हो रहा है जनाब… ‘मैंने कटाक्ष किया।
‘ये पप्पू मुझे प्यार बहुत करता है ना, इसलिये मुझसे चिपका ही रहता है।’ नीता ने बनावटी हंसी हंस दी।
‘पप्पू जी, हमें भी तो कभी करके देखो ना… ‘मैंने पप्पू को सीधे कहा।
‘मोना जी… आप तो मजाक करती हैं !’
‘ना जी, मजाक कैसा… अच्छा एक बार और नीता को प्यार करके दिखा दो ना !’ मेरी नजरें जैसे उसे न्योता दे रही थी।
नीता मुस्करा उठी और उसने पप्पू को प्यार से चूम लिया। पप्पू ने भी नीता को चुम्मा दिया और फिर पप्पू के होंठ नीता के होंठ से मिल गये। पप्पू का एक हाथ नीता के स्तनों पर आ गया और दूसरा उसकी सेक्सी जांघ पर आ गया।
मैं यह सीन देख कर पसीने पसीने हो गई। मुझे उम्मीद नहीं थी, मुझे खोलने के लिये वो मेरे सामने ही मस्ती करने लगेगी। मेरे हाथ पांव जैसे कांपने लगे। वासना के डोरे मेरी आखो में खिंचने लगे।
नीता ने अब मेरे सामने ही पप्पू का लण्ड पेण्ट के ऊपर से थाम लिया। उसके मोटे लण्ड का शेप उसके हाथों में नजर आने लगा।
‘पप्पू , बस भई बहुत प्यार हो गया… अपनी दूसरी भाभी को भूल गया क्या…?’ मेरी आवाज वासना से भर उठी थी।
‘देख ना मोना, मुझसे कितना प्यार करता है ये… बस मुझे छोड़ता ही नहीं ‘नीता ने मुझे आंख मारी, और उसका सलोना लण्ड हाथों में कस लिया। मैं तो वैसे भी पिघलती जा रही थी।
‘मुझे भी तो एक बार प्यार कर ले ना !’ मेरे मुख से निकल पड़ा… बिल्कुल ऐसे ही…
‘मोना भाभी… आप तो बहुत ही नाजुक हैं, आओ यहाँ बैठो… प्यार करने से तो दिल खुश हो जाता है !’उसे मेरा हाल मालूम हो चुका था।
मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मैं उसके पास बैठ गई। वो मेरे पास आ गया और गहरी नजरों से मुझे निहारने लगा, आंखो आंखो में सेक्सी इशारे होने लगे, मैं कभी तिरछी नजर से उसे देखती कभी लण्ड की ओर इशारा करती। कभी चूंची उभारती और कभी आंख मारती।
हमारी हालत देख कर नीता कह उठी- अच्छा मैं चाय बना कर लाती हूं… पप्पू मेरी सहेली है ये ! प्यार अच्छे से करना… !’
नीता ने मेरे हाथ दबाते हुये कहा।
यानि अब मुझे एक नया, ताज़ा लण्ड मिलने वाला था। नीता ने मुझे बहुत ही प्यार से पप्पू को मेरे लिये तैयार कर लिया था।
पप्पू की बाहें अब मेरे गले और कमर के इर्द गिर्द लिपट गई। मेरा जिस्म डोल उठा। चूंचियाँ दबने के लिये मचल उठी। मेरे और उसके होंठ चिपक गये। उसके होंठो पर प्यार करने का अन्दाज बड़ा मोहक था। कुछ क्षणो में मेरे बोबे दब गये। मेरे मुख से आह निकल गई। जिस्म में वासना का उबाल आ रहा था।
उसके हाथ मेरे कुर्ते के अन्दर पहुंच गये थे। मेरी चूंचियो के निपल को उसने अपनी अंगुलियो से मलना चालू कर दिया। मैंने उसका लण्ड पेण्ट के ऊपर से थाम लिया। उसकी पेण्ट की ज़िप खींच कर खोल दी और उसका कड़कता लण्ड खींच कर बाहर निकाल दिया। उसका सुपाड़ा को चमड़ी खींच कर बाहर निकाल दिया।
‘चाय आ गई है… चलो नाश्ता कर लो… अरे ये क्या… प्यार करने को कहा था… मोना ये क्या करने लगी… ‘ पप्पू के सुपाड़े को देख कर नीता ने अपना व्यंग का तीर छोड़ा।
मैं तुरन्त सम्भल कर बैठ गई, शरमा कर नीची नजरें कर ली, मैंने धीरे से नीता की ओर देखा और मुँह छुपा लिया।
‘बस बस , चाय मैं दे देती हूँ… ‘नीता ने हंस कर चाय दे दी।
‘पप्पू अपने छोटे पप्पू को तो भीतर कर लो…!’
पप्पू हंस पड़ा और मैं शर्म से झेंप गई।
मैंने जल्दी से शरम के मारे चाय समाप्त ही और उठ कर जाने लगी। नीता ने मुझे पकड़ लिया बोली- कहाँ चली गोरी, तेरी चूत में तो आग लगी थी ना… आजा अब मौका है तो बुझा ले… तुझे एक बात बताऊँ !’
मैंने प्रश्नवाचक निगाहो से उसे देखा।
‘तुझे जब से पप्पू ने देखा है ना, तब इसका लन्ड फ़ड़फ़ड़ा रहा है, यानि तूने मुझे कहा, उससे भी पहले !’
‘चल हट… झूठ बोलती है !’
‘हाँ री… तेरे को पटाने के लिये हम ऐसे ही एक्शन करते थे कि तुझे शक हो जाये… और तू हमें छुप छुप कर देखे !’
‘हाय रे ! मुझे तो तुम दोनों ने बेवकूफ़ बनाया… !’ मुझे उसके दिमाग की तारीफ़ करनी पड़ी।
‘जब तेरी चूत में आग लग गई तो तुझे चोदना और भी आसान हो गया और देख अब तू चुदने वाली है !’
मैंने भागने की सोची पर पर पप्पू ने मुझे दबोच लिया और बिस्तर पर पटक दिया।
मैं बिना वजह उसकी बाहों में कसमसाने लगी। दिल तो कर रहा कि हाय जालिम, इतनी देर क्यूँ लगा रहे हो? चोद डालो ना।
‘हाय पप्पू, मुझे अब चोद डालोगे…?’ मेरे मुख से दिल की बात निकल पड़ी।
‘हाँ मेरी मोना भाभी… मुझसे रहा नहीं जा रहा है…! आपकी जगह नीता भाभी को चोद चोद कर उनकी चटनी बना डाली थी… अब तुम मिल ही गई हो… तो कैसे छोड़ दूं?’ उसका शिकायती स्वर था।
नीता ने लपक कर मेरे हाथ पकड़ लिये। पप्पू ने मेरे बोबे भींच दिये, और मेरे ऊपर चढ़ गया।
‘मोना… बुझा ले अपनी प्यास मोना… नये लण्ड से… मुझे तो ये पप्पू रोज ही जम कर चोदता है !’ नीता वासना से भरे हुये स्वर में बोली। उसकी आंखो में भी गुलाबी डोरे उभर आये थे।
‘नीता… हाय रे ! मुझे बहुत शरम आ रही है… तू जा ना यहाँ से… मैं चुदा लूंगी !’ मैंने मुँह छुपाते हुये कहा।
‘ना… ना रे… मुझे भी तो चुदना है ना… पप्पू अपना लौड़ा निकाल ना… चोद डाल मेरी सहेली को !’ नीता की आवाज वासना में डूबी हुई थी।
‘हाथ छोड़, मैं निकाल लूंगी इसका लौड़ा… ‘ मैंने अपना हाथ नीता से छुड़वाया और उसकी पेण्ट का हुक खोल दिया। पप्पू ने अपनी पेण्ट उतार दी।
मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपने मुँह तक खींचा, उसने अपना कड़क लण्ड आगे आ कर मेरे मुँह में डाल दिया।
‘तू उधर देख ना नीता… मुझे मन की करने दे ना… !’
‘कर ले ना यार… लण्ड चूसना है ना, तो चूस ले… मैं तेरी चूत का मजा ले लेती हूँ…’
‘नहीं, मत कर नीता… प्लीज…!’
नीता ने मेरी एक नहीं सुनी और जल्दी ही मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। मैंने अपने पांव चौड़ा दिये और चूत खोल दी। मेरी छाती पर पप्पू बैठा था और मेरे मुँह में उसका लण्ड घुसा था।
उधर मेरी चूत नीता के कब्जे में आ चुकी थी। वो मेरे चूत के दाने को जीभ से चाट चाट कर मुझे मदहोश कर रही थी।
अचानक नीता ने अपनी एक अंगुली मेरी गान्ड में घुसेड़ दी। मुझे असीम आनन्द आने लगा।
पप्पू के लण्ड के सुपाड़े के छल्ले को मैंने कस के चूस लिया और वो एक बारगी तो तड़प उठा। सुपाड़ा फूल कर लाल टमाटर की तरह हो गया था। उसने नीता को हटाया और स्वयं मेरे ऊपर लेट गया। उसका फ़ूला हुआ सुपाड़ा मेरी चूत पर रेंगने लगा था। मेरी चूत ऊपर उठ कर लण्ड को लीलना चाह रही थी।
ज्यादा इन्तज़ार नहीं करना पड़ा मुझे… वो अपने आप निशाने पर मेरी चिकनी चूत से टकरा गया… और हाय रेऽऽऽऽऽ… उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में घुस पड़ा। मैं सिसक उठी। चूत और ऊपर उठ गई। मेरा बदन कसक उठा। शरीर में एक मीठी सी लहर दौड़ गई।
‘मेरे भगवान… आह… कितना मजा आ रहा है… और मैंने भी अपनी चूत को ऊपर उठा कर पूरा जोर लगा दिया। लण्ड सभी हदों को पार करता हुआ… मेरे चूत की तलहटी तक पहुंच गया था। लण्ड को मेरी चूत ने पूरा लील लिया था।
अब मैं कुछ देर तक इसी तरह रह कर लौड़े का पूरा आनन्द लेना चाहती थी। सो मैंने उसे उसकी कमर को कस कर जकड़ लिया। लण्ड ने एक ठोकर और मारी और मेरी आंखे मस्ती में बंद हो गई। वो अपने लण्ड को जोर से चूत की गहराई में गड़ाने लगा था।
मेरी चूत अपने आप अब थोड़ी थोड़ी लण्ड को घिसने लगी थी। तेज मीठी जलन होने लगी थी। जैसे चूत में आग लग गई हो। मेरी सिसकारियाँ उभरने लगी। मुझे गाण्ड में कुछ मोटा मोटा सा लण्ड जैसा लगा,… आह रे ये क्या… नीता ने मेरी गाण्ड में तेल लगा डिल्डो घुसा दिया था।
‘रानी अब पूरा मजा ले… ये तेरी गाण्ड में सुरसुरी करेगा… चूत में लण्ड मजा देगा !’नीता ने मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था।
‘हाय मेरी नीता… तूने तो आज मेरा दिल जीत लिया है… तेरी जो मर्जी हो वो कर… मुझे चाहे मार डाल… !’ मैं स्वर्गीय आनन्द से विभोर हो उठी, मेरी चूत जल उठी, बदन वासना की तेज तरंगों में नहा उठा। जिस्म का कोना कोना मीठी सी वासना से जल उठा।
मेरी गाण्ड में नीता बड़ी मेहनत के साथ डिल्डो पेल रही थी। मुझे दोनों ही पूरा शारीरिक वासना का सुख देने की कोशिश कर रहे थे। अब मैंने अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया और धक्कों का मजा लेना चाहती थी।
पप्पू की कमर को छोड़ते ही उसके चूतड़ उछल पड़े और मेरी ढीली चूत पर जम कर लण्ड को ठोकने लगा। साला लण्ड पूरी गहराई तक घुसता और बाहर आ जाता था। सुख से मैंने आंखें कस कर बंद कर ली।
मेरी चूत भी फ़्री स्टाईल में उछल उछल कर उसका साथ देने लगी। जितनी जोर से वो धक्के मारता, मैं भी जवाब उतने ही जोश से तेज धक्का मार देती। इसी चक्कर में मेरे नसें खिंचने लगी… जिस्म ऐंठने लगा… सभी कुछ जैसे चूत से बाहर आ जाना चाहता हो… मीठी सी जलन अब आग सी हो गई… मैं झुलसने लगी… जैसे जल गई…
‘आह पप्पू… हरामी साला… चुद गई ! हे मेरे मालिक… गई मैं तो… जोर लगा रे…!’
उसके एक झटने ने अब मेरी आखिरी सांस भी निकाल दी… ‘ईईई… आह्ह्ह्ह्… निकला मेरा… ऊईईईई… पप्पू… बस ऐसे ही चोदता रह… मेरा पूरा निकल जाने दे…!’
पर कहाँ… वो तो धक्के मारते मारते… खुद ही ढेर हो गया। और उसका माल निकल पड़ा। उसका वीर्य मेरी चूत में भरने लगा।
नीता ने डिल्डो मेरी गान्ड से बाहर निकाल लिया। मैंने दोनों हाथ बिस्तर पर फ़ैला लिये और जोर जोर से अपनी फ़ूली हुई सांसो को नियंत्रित करने लगी।
पप्पू मेरे ऊपर से हट गया और नीता अब मुझे प्यार करने लगी… ‘मोना मेरी… नये लण्ड का पूरा मजा आया ना… मेरे पप्पू ने तुझे आनन्द दिया ना… ‘नीता मुस्कराने लगी।
‘नहीं नीता… तेरा नहीं नहीं, अब तो वो मेरा भी पप्पू है’ मैंने भी अपनापन दिखाया।
पप्पू अब नीता के कपड़े उतारने में लगा था।
‘हाय, मोना अब ये मुझे भी नहीं छोड़ने वाला है… अब मैं चुदीऽऽऽऽ… हाय !’ नीता के मुँह से वासनाभरी आह निकल गई।
मैंने पप्पू की गाण्ड सहलाते हुये उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया। वो नीता की चूंचियाँ मसलने में लगा था।
मेरी इच्छा अभी बाकी थी… मेरी गाण्ड उदास हो चली थी कि अब ये नीता को चोदेगा तो वो दो बार झड़ जायेगा, फिर मेरी गाण्ड मारने जैस उसके लौड़े में दम रहेगा या नहीं।
कुछ ही देर में पप्पू का लण्ड चूसने से वो फिर से तन्ना उठा, जैसे पप्पू मेरे मन की बात जान गया गया था। बोला- नीता भाभी, मोना जी का काम तो निकल गया अब तो चली जायेगी, मेरा काम तो हुआ ही नहीं !’
‘अच्छा, चल तू अपना काम पूरा कर ले… फिर बाद में मुझे चोद देना… बस..!’
‘क्या बात है? कौन सा काम नीता…?’ मैंने जैसे अनजान बनते हुये कहा।
‘बात ये है कि तेरे चूतड़ इसे बहुत पसन्द हैं… तू जैसे ही मुड़ती है इसका लण्ड खड़ा हो जाता है…!’
‘हाय राम… ऐसा मत कहो…’
‘हाँ सच… अब ये तेरी गाण्ड मारना चाहता है… प्लीज, चुदवा ले अपनी गाण्ड… ‘नीता ने पप्पू की तरफ़ से कहा।
‘मैं कैसे मानूं कि सच बोल रही है… पप्पू ने तो कुछ कहा ही नहीं !’ मैंने शिकायत की।
‘सच, मोना जी… देखना मेरा लण्ड देखना आपकी गाण्ड में घुस कर कैसा खुश हो जायेगा।’
‘तो चल खुश हो कर बता…’
‘आप कुतिया की तरह झुक जाईये फिर देखिये मैं कुत्ते की तरह आपकी गाण्ड मारूंगा !’
‘हाय राम… अच्छा ये देखो… !’ मैं कुत्ते की तरह बिस्तर पर झुक गई। मेरे दोनों चूतड़ कमल की तरह खिल गये।
मेरी गोरी गोरी गाण्ड देखते ही उसके लण्ड ने सलामी मारी। दरार के बीच मेरे गाण्ड का कोमल फूल चमक उठा। जो पहले ही लण्ड खाने की लालसा में अन्दर बाहर सिकुड़ रहा था।
पास पड़ी तेल की बोतल से पप्पू ने मेरे दरार के बीच नरम फ़ूल पर तेल की बूंदे टपका दी। उसका लाल सुपाड़ा गाण्ड के फ़ूल पर टिक गया और हल्के से जोर से ही गप से अन्दर घुस पड़ा।
‘साली क्या गाण्ड है…! घुसते ही लण्ड पानी छोड़ने लगता है !’ पप्पू ने एक आह भरी।
‘नीता, हाय कितना नरम और प्यारा लण्ड है। तूने मुझे काश पहले बताया होता तो मैं इतना तो ना तरसती…!’
‘मोना, मेरी सहेली… अब लण्ड खा ले… देर ही सही, चुदी तो सही… मजा आया ना !’नीता भी चुदासी सी मुझे देख रही थी। उसे भी चुदाने की लग रही थी।
अब पप्पू का सब्र का बांध टूट चुका था, वो मेरी चूतड़ों पर मरता था… उसका डण्डा मेरी गाण्ड को कस कर पीटना चाहता था, सो उसने अपनी कलाबाज़ी दिखानी चालू कर दी। उसका लम्बा लण्ड गाण्ड की गहराईयों को नापने लगा।
मेरी गाण्ड में जबरदस्त झटके मारने लगा। मुझे तरावट आने लग गई। हल्की सी मीठी सी गुदगुदी एक बार फिर मुझे रंगीनियों की ओर ले चली। मेरे बोबे मसले जाने लगे।
नीता चुदाई की प्यास की मारी अपनी चूत को मेरे सामने ले आई और कातर नजरों से विनती की। मैंने उसकी टांगें मेरे मुँह के पास खींच ली और अपना मुँह उसकी चूत से चिपका लिया। मैं उसके बोबे पकड़ कर मसलने लगी।
आलम ये था कि तीनो एक दूसरे पर दुश्मन की तरह जुटे हुये वो सब कुछ कर रहे थे कि किसी का माल बाहर निकल जाये। मेरी गण्ड पर लण्ड ऐसे मार रहा था कि जैसे उसका लण्ड किसी मोरी में सफ़ाई कर रहा हो। लण्ड जोर जोर से घुसेड़ कर वो मेरी गाण्ड चोद रहा था। गाण्ड में सुरसुरी से मीठी मीठी असहनीय सी गुदगुदी चलने लगी थी, अगर मेरी गाण्ड चूत की तरह झड़ जाती तो कितना मजा आता।
पर हुआ उल्टा ही… मुझे पकड़ कर वो वासना भरी सीत्कार भरता हुआ गाण्ड के भीतर ही झड़ने लगा। मुझे निराशा सी होने लगी, शायद समझी थी कि ऐसे ही जिन्दगी भर गाण्ड चुदती रहे और मैं मस्ताती रहूँ।
उधर नीता भी वासना की मारी झड़ने लगी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। पप्पू ने अपनी सारी मलाई मेरी गाण्ड में निकाल दी। उसका लण्ड सिकुड़ कर स्वत: ही बाहर निकल आया। वो वहीं बैठ गया और मैं चित्त पांव पसार कर औंधी लेट गई।
पप्पू भी अपनी बिखरी हुई सांसे समेटने लगा और सोफ़े पर जाकर धम से बैठ गया। मेरा काम हो चुका था। मैं आगे और पीछे से चुद चुकी थी। मैंने अपनी गाण्ड के छेद को तंग कर सिकोड़ लिया और झट से पजामा और टॉप पहन कर अपने घर भाग आई। नीता मुझे आवाज देती ही रह गई।
घर आकर मैं लेट गई और उसका वीर्य गाण्ड में रहे इसलिये उल्टी लेट गई। मेरे पजामें में वीर्य के धब्बे उभर आये थे। गाण्ड चिकनी और लसलसी हो गई थी पर मुझे एक अनोखा आनन्द आ रहा था। इसी आनन्द का लुफ़्त लेते हुये मेरी आंख जाने कब लग गई। पर नीता ने मुझे जगा दिया।
‘ये क्या, जरा तेरा पजामा तो देख नीचे से पूरा गीला हो रहा है…’
‘ये पप्पू का वीर्य है रे… जरा मजा तो लेने दे…’
‘उनके आने का समय हो रहा है… मरना है क्या…?
मैं चौंक गई, देखा तो पांच बज रहे थे… ना तो खाना बनाया था और ना ही चाय… नहाया धोया भी नहीं था… सब कुछ छोड़ कर मैं नहाने भागी… सोचा चुद तो कल लेंगे
… ये आनन्द तो रोज ले सकते हैं। पर कहीं उनको इसकी भनक भी लग गई तो फिर… Antarvasna Stories
जैसे कि मैंने पहले Sex Stories भाग में बताया था कि जैसे ही मेरे और मेरे नौकर के बीच इशारों में बातें हुई तो उसने जल्दी से तौलिया लपेटा और अंदर आने लगा ही था कि कार के होर्न की आवाज़ सुन हम दोनों का मूड खराब हो गया और फिर अपने पति के साथ में शहर वापस घर आ गई लेकिन रह रह कर उसका लौड़ा मेरी आँखों के सामने घूमता रहता था। उसका काला मोटा लौड़ा मुझे सोने नहीं देता था। पति का लौड़ा तो अब और फीका लगने लगा था।
तभी अचानक से मेरे पति को एक कॉल लैटर आई। कनाडा की एक बहुत बड़ा कंपनी होटल, रेस्टोरेंट आदि के बारे में सेमिनार लग रहे थे। मेरे पति ने और उनके एक दोस्त ने यह ट्रिप करने का फैंसला लिया। उनका वहाँ पन्द्रह दिन का सेमिनार था लेकिन घूमने के लिए एक महीने की रिटर्न-टिकट लेकर गए थे।
उनके जाने के बाद मैं खुश थी तभी एक दिन मैंने अपने पुराने बॉय फ्रेंड का स्क्रैप जब ऑरकुट में देखा तो खिल उठी। उसने अपना मोबाइल नंबर छोड़ा था तो मैंने तुरंत कॉल की और उसको अपने नीरस यौन-जीवन के बारे बताया।
उसने कहा- तू मायके आजा ! यहीं हम मौका देख मजे करेंगे !
कहते हैं ना कि जब भगवान् सुनता है तो बहुत पास आकर सुन लेता है ! सासु माँ ने मुझे कहा- गाँव में गेहूं की फसल को पहली खाद डालनी है और फोकल पॉइंट का परमिट यहाँ है और उस पर या मेरे पति के या मेरे हस्ताक्षर होने हैं।
मैंने पति से फ़ोन पर पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि कहाँ पड़ा है परमिट और पैसे वगैरा !
मैं कार लेकर गाँव चली गई। राम ने गेट खोला। मुझे देख उसकी आंखें चमक उठी। उसको देख मैं भी अपनी अदा से मुस्कुरा दी।
कार लगा कर चाबी दे जाना राजा ! मैंने गिरने का नाटक सा किया तो उसने मुझे थाम लिया और अपने लिए राजा सुन कर वो और छाती चौड़ी करने लगा, अभी आया मेरी… ! कहकर चुप हो गया। कुछ देर बाद वो पानी लेकर आया। मैं वाशरूम गई और तरोताज़ा होकर अपने साथ लेकर आई पारदर्शी सेक्सी नाइटी पहन ली। गुलाबी नाइटी में काली ब्रा-पेंटी किसी को भी जला कर राख कर सकते थे। वो चला गया।
दस मिनट बाद मैंने आवाज़ लगाईं और खुद बिस्तर पर उलटी लेट गई, नाइटी सरका कर ऊपर कर दी जिससे मेरे चूतड़ साफ़ उभर कर दिख रहे थे। उसने दरवाज़ा खोला,
मैंने कहा-आ जाओ ! अभी गिरने से मेरी टांग में दर्द होने लगा है, थोड़ा दबा दो, मालिश कर दो ! आराम से ऊपर बैठ जाओ !
वो बाहर से सरसों के तेल की बोतल लेकर आया और कुण्डी लगा दी- आराम से करेंगे, तो दर्द जल्दी भाग जाएगा !
उफ्फफ्फ्फ़ !
वो तेल लगाकर मालिश करने लगा। मैंने धीरे धीरे नीचे से सारी नाइटी उठा दी और उसका हाथ पकड़ कर अपने चूतडों पर रख दिया। फिर दूसरा भी !
उसने थोड़ा तेल लगा कर चूतड़ मसले तो मैं गर्म होने लगी, खुद नीचे से उठने लगी मैं !
मैं एकदम सीधी हुई और उसको पलट कर उसकी जांघों पर बैठ गई, अपनी नाइटी उतार फेंकी और मैंने ब्रा भी उतार फेंकी, उसके सामने दो मम्मे थे। मैंने उसके पजामे को खोल दिया फिर उसकी शर्ट भी और टूट पड़ी उसके ऊपर !
मेरी आग देख वो हैरान रह गया- बहुत प्यासी हो मेरी जान ?
मैंने उसके अंडरवीयर से लुल्ला निकाल लिया और रांड के तरीके से चूसने लगी।
वाह मेरी बुलबुल ! मेरी हसीना और चूस !
हां ! चूसूंगी कमीने ! तेरे मालिक का तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता ! फाड़ डालो ! मेरा बस चले तो एक साथ गांड और चूत मरवा लूँ !
इसका भी इंतजाम है मेरी जान !
अबे बिरजू बाबा ! अन्दर आ जाओ ! क्यूँ छुप कर देख कर मुठ मरोगे, इसकी ही मार लो कमीनी की ! बहुत आग है इसकी चूत में !
राम ने मेरी टांगें फैला दी और बीच आकर दोनों टाँगे कंधों पर टिका कर झटका दिया, लौड़ा चीरता हुआ घुस गया जैसे आज मेरी झिल्ली फट रही हो !
लेकिन मैंने हिम्मत रखी, मैं भी खेली खाई महिला थी। उसने जल्दी ही पूरा जड़ तक पहुंचा दिया।
वाह मेरे शेर ! वाह ! फटने दे इसको !
बिरजू मेरे चेहरे के पास आकर बैठ गया। मैंने उसके पजामे का नाड़ा खोला और फिर उसके कच्छे को उतारा।
मैं चौंक गई, काले रंग का नाग मानो कुंडली मारे बैठा हो ! उसका सोया हुआ लौड़ा भी मेरे पति के खड़े लौड़े से ज्यादा बड़ा था !
उसने दारु पी रखी थी। मैंने जैसे उसको छुआ, उसमें हरक़त होने लगी। मैंने अपना तकिया थोड़ा ऊँचा किया और उसके लौड़े को मुँह में ले लिया।
उसका लौड़ा कभी किसी ने मुँह में नहीं लिया था ऐसा उसने मुझे बाद में बताया और यह भी बताया कि गाँव की कई बड़े घर की औरतें उससे चुदने को आती जिनको बच्चा नहीं होता था। सास बेटे में नहीं बहु में दोष निकालती थी और पति अपनी झूठी मर्दानगी की दुहाई दे औरत को दोष देते !
बिरजू ने तीन चार औरतों की कोख भी हरी की थी।
राम अपनी धुन में मुझे चोद रहा था और मैं बिरजू का चूस रही थी। जैसे ही उसका पूरा तन गया, वो मेरे मुँह में आना बंद हो दिया, सिर्फ उसका टोपा ही चूस पा रही थी मैं ! बाकी जुबान से उसको मजा दे रही थी।
तभी राम ने तेज़ी दिखाई, वो पागलों की तरह उछल कर मुझे चोदने लगा।
बिरजू का भी मेरे मुँह से निकल गया और राम ने मेरी हड्डियाँ हिला दी और एक तूफ़ान के बाद शांत होकर मुझ पर गिर कर हांफने लगा। उसके पानी ने मेरी सारी प्यास बुझा दी।
फिर बिरजू ने मोर्चा संभाला !मुझे डर लग रहा था, उसने काफी थूक लगा गीला किया और रख दिया मेरी चूत पे ! उसने टाँगे इतनी चौड़ी कर दी कि चूत खुल गई ! काफी बड़ा खिलाड़ी लगा ! उसने झटका देने के बजाये धीरे-धीरे घुसाता चला गया। मेरी दर्द से जान निकल रही थी। जब मुझे लगा कि अब घुस गया, मैंने सर ऊपर करके देखा तो अभी आधा बाहर था।
तभी उसने मर्दानगी दिखाई और इतना ज़बरदस्त झटका दिया कि मेरी सांस अटक गई, आंखें पत्थर होने लगी, दोनों हाथों से चादर को पकड़ लिया। लेकिन उसने तुरंत निकाल लिया और फिर डाला फिर उसने मुझे वो सुख दिया जो मुझे वाकई पहले कभी नहीं मिला था। उसके लौड़े से इतना पानी निकला कि जितना कभी नहीं देखा। कुछ चूत में कुछ मम्मों पर कुछ होंठों पर ! इतने पानी से तो एक साथ दस बच्चे ठहर जाएँ !मैं उठी, चादर पर खून के धब्बे लगे थे। वाशरूम गई, चूत कोसे पानी से साफ़ की। मुझसे चला नहीं जा रहा था। वो दोनों वहीं मौजूद थे, मैंने कहा- मेरे कपडे !
बिरजू बोला- साली, दे दूंगा ! क्या जल्दी है ?
मैंने कहा- अब मुझे जाना है !
पर्स से परमिट की कॉपी निकाली, हस्ताक्षर किये और दोनों को पैसे दिए। मैं सिर्फ ब्रा पेंटी में थी, मानो अपने मर्द के सामने खड़ी होऊं !
वो दोनों मुझे देख-देख मजे ले रहे थे।
लाओ कपड़े दो !
कपड़े मिल जायेंगे ! एक बार बाँहों में आजा मेरी जान !
मैंने गुस्से से कहा- अपनी औकात में रहो ! जितना मेरा दिल किया, मैंने तुम्हें मजे दिए !
वो बोला- साली, छिनाल कहीं की ! साली, तू प्यासी थी, तू चल के आई थी ना कि हम !
हरामी जुबान बंद कर ! कपड़े दे दे !
तेरी माँ की चूत, कुतिया ! बिरजू गुस्से से उठा, उसका लौड़ा तन कर हिलौरे खा रहा था, मेरे बालों को खींचते हुए होंठ चूमने लगा।
हरामी छोड़ ! औकात में रह !
औकात दिखाती है हमें ???
उसके बाद उन्होंने जो कुछ मेरे साथ किया !मेरे बार बार औकात शब्द से वो मुझे मेरी औकात दिखाने की धार चुके थे !
उन्होंने क्या किया ?
यह अन्तर्वासना पर अगली बार पढ़ना ! Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.