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मैं रीना Sex stories, मैं ३९ साल की हूं। शादी शुदा हूं। किस्मत अच्छी है कि मैं आज भी बहुत सुन्दर, सेक्सी हूं, मुझे पता है कि कई लंड वाले मेरी स्टोरी पढ़कर मुझे चोदना चाहेंगे
लेकिन मैं लिस्बो हूं मुझे लड़कियों से सेक्स की बाते करना और फ़ोरप्ले करना अच्छा लगता है इसलिये लड़कों, मेरी कहानी पढ़कर अपना लंड हिलाकर शांत हो जाना लेकिन गर्ल्स मुझे रेप्लय करना। १० साल पुरानी घटना है मैं आपसे अपना एक एक्सपेरिएंस बताती हूँ बात ११ साल पहले की है मेरी ननद का लड़का (विज्जु) जिसकी उमर १७-१८ साल थी एक्साम देने के लिये हमारे घर आया मेरे पति न दिनो टूर पर ज्यादा रहते थे इसलिये मैं सेक्स के लिये परेशान रहती थी। घर में सिर्फ़ दो रूम थे जिस कारण विज्जु से मुझे चिड़ हो रही थी कि इसकी बजह से मेरे जीवन का आनंद जा रहा है, उस दिन पति रात की ट्रेन से ७ दिन के लिये बाहर जाने वाले थे पति ने बोला वह दोपहर को आ जायेंगे जब विज्जु कोलेज में रहेगा और बच्चों को सुला देंगे फिर प्यार से सेक्स करेंगे क्योंकि ७ दिन नहीं मिलेगा।
मैं बहुत खुश थी मैं ने नहाने से पहले शेव की बहुत सुन्दर सेक्सी अंडर गारमेंट्स और साड़ी पहनी लेकिन मेरी किस्मत खराब, पहले तो पति लेट हो गये और जैसे ही वह आये पीछे से विज्जु भी आ गया मेरा दिमाग खराब हो गया मैं फालतू में विज्जु को डाटने लगी, पति भी मुझ पर नाराज़ हो गये कहने लगे जीवन पड़ा है, क्यों परेशान हूं फिर मैं मन मार कर उनके जाने की तैयारी करने लगी बारिश के दिन थे पानी गिरने लगा पति की ट्रेन १० बजे रात की थी मैने जल्दी खाना सब को खिला दिया ९ बजे करीब पति अंदर किचन में आये मुझे पीछे से पकड़कर चूमा-चाटी करने लगे, उनका हथियार अपने नितम्बों पर महसूस करके बहुत उत्तेजित हो गयी मैं ने पति को बताया आज की तैयारी में मैं ने क्या-क्या किया पति ने साड़ी के अंदर मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चिकनी चूत सहलायी।
मैं ने उनके हथियार को हाथों से सहलाया मेरी चूत चुदाई के लिये तैयार हो गयी थी गीली होने लगी, इतने में विज्जु ने आवाज़ दी “मामा, ट्रेन का समय हो गया चलो” फिर विज्जु उन्हे स्कूटर से छोड़ने स्टेशन चला गया, मैं हाल में लेटकर टीवी देखने लगी मैं बहुत गरम महसूस कर रही थी और मुझे अपनी किस्मत पर भी रोना आ रहा था मे उत्तेजना से भरकर अपनी साड़ी में हाथ डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी, इतने में स्कूटर की आवाज आयी मैं ने अपने कपड़े सही किये दरवाज़ा खोला विज्जु भीग कर आया था मैने उसे गुस्से से “बोला जल्दी पोंछ कर कपड़े बदल ले वरना तबियत खराब हो गयी तो हमारी ही मुसीबत होगी”
वो सहम गया मैं अंदर रूम में चली गयी रूम का दरवाज़ा बंद करने आयी तो देखा विज्जु अपनी गीली बनियान उतार रहा था उसकी नंगी पीठ देखकर मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और मैं हाल में आ गयी और कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए तिरछी नज़र से उसे देखने लगी फिर उसने अपनी पैंट उतारी उसकी अंडरवेअर सफेद थी जो गीली होने से विज्जु के शरीर से चिपक गयी थी मैने देखा विज्जु का काला लंड मुड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था वह भरपूर मोटा था जबकि खड़ा नहीं था, काले-काले बाल भी नज़र आ रहे थे और उसके लंड का गुलाबी सुपाड़ा तो एकदम चमक रहा था, वह मुझे भरपूर मर्द का जवान लंड दिख रहा था जिसे हर कोई औरत अपनी चूत में डलवाना चाहेगी चाहे वह सती सावित्री क्यो न हो, मेरी हालत जवान लड़के को अपने इतने करीब नंगा देखकर बहुत खराब हो गयी और मैं सपने में भी नहीं सोच सकी कि विज्जु इतना जवान है उसके शरीर को देखकर मैं रिश्ते को भूल गयी मैं ने सोचा रात को इसका मज़ा लेना है जो होगा देखा जायेगा फिर विज्जु ने कपड़े पहन लिये, फिर विज्जु बिस्तर पर लेट गया मैं अपने रूम में आ गयी और मैने अपनी साड़ी, ब्लाउज़ ब्रा और पेटीकोट उतार कर नाइटी पहन ली।
हमारा बाथरूम पीछे आंगन में था रात के करीब ११ बज रहे थे, मैने विज्जु को आवाज़ दी वह बोला जी मामी मैने कहा मुझे पीछे पेशाब जाना है डर लग रहा है, तू साथ चल मैने पीछे की लाइट जलायी और बाथरूम के बाहर नाली के पास जाकर अपनी नाइटी उठाई कमर के ऊपर और धीरे से अपनी पैंटी सरकाई ताकि विज्जु मेरी चिकनी टांग और गांड आराम से देख सके और बैठ गयी, विज्जु मेरे पीछे ही खड़ा था मैने पीछे देखते हुआ बोला जाना मत, वह बोला जी मामी फिर मैं विज्जु की मुंह की तरफ़ होकर खड़ी हुई फिर मैं ने अपनी नाइटी कमर से ऊपर उठा कर पैंटी पहनी ताकि विज्जु को मेरी साफ़ चूत दिख जाये और वह भी बहक जाये विज्जु की आंखों में शरम थी लेकिन वह मेरी चूत और नंगी जांघों को देख रहा था लेकिन वह वापस जाकर सो गया मैं अपने रूम में आयी और सोचा विज्जु को आवाज देकर अपने पास बुलाऊं लेकिन डर लग रहा था कही कुछ गलत तो नहीं हो रहा है लेकिन मेरी सांस तेज़-तेज़ चल रही थी और मेरी चूत चिल्ला कर कह रही थी कि उसे लंड चाहिये मेरी हालत पागलों जैसी हो गयी मैं उठ कर बैठ गयी, विज्जु के कमरे की लाइट जल रही थी मैने धीरे से उठ कर विज्जु के रूम में झांका वह उल्टा होकर सो रहा था फ़िर मेरा हाथ अपने आप अपनी चूत पर जा रहा था, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरुआत करूं।
तभी मैने महसूस किया कि विज्जु कुछ हिल रहा है (जैसे आदमी औरत के ऊपर होकर हिलता है वैसे) मुझे समझते देर नहीं लगी कि वह मेरी नंगी जांघों को और चिकनी चूत को देखकर उत्तेजित हो गया है और अपना पनी निकालने की तैयारी में है मैने समय गंवाये बिना विज्जु के रूम में चली गयी मैं ने देखा विज्जु ने धीरे से अपनी आंख खोल कर मुझे देखा और सोने का नाटक करने लगा मैं कुरसी पर बैठ गयी मैने सोचा देखूं अब विज्जु हिलता है या नहीं यदि हिलेगा तो उससे खुल कर चुदवाने का बोल दूंगी लेकिन १०-१२ मिनट में साला बिल्कुल नहीं हिला और मेरी हालत खराब हुये जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं रात के करीब १ बज गये थे फ़िर मैं ने टीवी ओन कर दिया और देखने लगी तभी विज्जु आंख घिसते हुए उठ कर बैठ गया कहने लगा, क्या हुआ मामी, सो क्यों नहीं रही हो? मैने बोला नींद नहीं आ रही। दुख रहा है विज्जु ने कहा क्या सर दुख रहा है? मैने कहा नहीं पूरा शरीर दुख रहा है, विज्जु ने कहा तबियत तो ठीक है, मैने कहा हां विज्जु बोला मैं कुछ मदद करूं, मैं ने कहा, प्लीज मेरे पैर दबा दे, विज्जु ने कहा ठीक है, फ़िर विज्जु के बिस्तर पर मैं लेट गयी विज्जु मेरे पैर दबाने लगा मैने कहा प्लीज थोड़ा ऊपर और ऊपर विज्जु बिस्तर पर बैठकर मेरी जांघें दबा रहा था मेरी चूत से रस निकल रहा था मुझे अपनी पैंटी गीली-गीली महसूस हो रही थी।
तभी मुझे महसूस हुआ विज्जु मेरी चूत को नाइटी के ऊपर से विज्जु टच कर रहा था और चूत के ऊपर अपनी उंगलियां चला रहा था मेरी सांस बहुत तेज़-तेज़ चलने लगी। मैने अपना एक हाथ विज्जु के लंड पर रख दिया उसका लंड ८” का पूरी तरह खड़ा था बहुत मोटा महसूस हो रहा था। तभी विज्जु बोला “मेरा लंड कैसा लगा” फ़िर मैं ने कहा मुझे आज यह चाहिये है तभी विज्जु मेरे बाजु में आ गया और मेरे सीने को सहला रहा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेने अपने एक हाथ से उसका लंड सहलाना चलू रखा और उसकी गांड भी सहला रही थी। उसकी हिम्मत और बढ़हई और वो मेरे ब्रेअस्ट को जोर-जोर से दबाने लगा। मुझे सिंहरन होने लगी और मैं ने करवट बदल कर सीधी सो गई तो उसने हाथ हटा लिया और थोड़ी देर बाद वो फ़िर से मेरा बूब्स सहलाने लगा। फ़िर वो मेरी नाइटी उतारने लगा और वो मेरे नेकेड बूब्स को चूसने लगा। मैं बहुत ही गरम हो रही थी मैं उठ गयी और मैने उसे कपड़े निकालने को कहा, उसने तुरंत अपने सारे कपड़े निकाल दिये और पूरा नंगा हो गया। मैने उसके लंड को देखा वो बहुत ही बड़ा था।
फ़िर उसने मेरी पैंटी को निकाल दी। फ़िर वो मुझे किस करने लगा और मैं भी उसे बहुत किस करने लगी फ़िर उसने मुझे बेली पर किस किया। आआआअह्ह ह्हह्ह ऊओह्हह् मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं बहुत ही गरम हो चुकी थी। फ़िर वो मेरे चूत को चाटने लगा। और मैं अंगड़ाई लेने लगी ऊफ़्फ़फ़ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। फ़िर मैने उसे कहा प्लीज और मत तड़पाओ प्लीज मुझे चोदो। फ़िर वो मेरे ऊपर आ गया और उसने उसके लंड को मेरे चूत पे रखा और फ़िर धक्का मरा तो उसका पुरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। और मैं जोर से चीख उठी आआआअह्ह आआआह फ़िर वो जोर जोर से मुझे चोदते गया और मैं भी अपने हिप्स उठा उठा के उसे साथ देने लगी। और आआआअह आआआह्ह् ह्ह उह्हह्हू ऊऊउह्हह्ह वो जोर जोर से चोदने लगा।
फ़िर थोड़ि देर बाद उसने मेरी चूत में गरमा गरम लावा छोड़ दिया फ़िर सारी रात हम दोनो एक दूसरे साथ नंगे चिपके सो गये
इसके बाद उसका जब भी मन होता तो वो मेरे ब्लाउज़ को हटा के मेरे निप्पल चूसता रहता लेकिन मुझे पूछे बिना मेरी चूत को नहीं छूता था। एक दिन मैं नहा रही थी तो वो भी बाथरूम में आ गया और मुझसे बाथरूम में ही प्यार की भीख मांगने लगा तो मैं उसे मना नहीं कर पायी। फ़िर उसने सारे कपड़े निकाल दिये और हम शोवर साथ लेने लगे। फ़िर मैं दीवर का सहारा लेके खड़ी रही और उसने मुझे बहुत टाइट पकड़ा और मेरे होंठों का जूस पीने लगा और उसने मेरी एक टांग को उठा के फ़िर मुझे चोदने लगा। उसने मुझे एक नये अनुभव का सुख दिया। मे बहुत भी खुश हो गयी, मैं विज्जु को बहुत चाहती हूं। और वो भी मुझे बहुत चाहता है। फ़िर हमने कई बार सेक्स किया। मैं मेरे पति को भी चाहती हू. Sex stories
जैसे कि मैंने पहले Sex Stories भाग में बताया था कि जैसे ही मेरे और मेरे नौकर के बीच इशारों में बातें हुई तो उसने जल्दी से तौलिया लपेटा और अंदर आने लगा ही था कि कार के होर्न की आवाज़ सुन हम दोनों का मूड खराब हो गया और फिर अपने पति के साथ में शहर वापस घर आ गई लेकिन रह रह कर उसका लौड़ा मेरी आँखों के सामने घूमता रहता था। उसका काला मोटा लौड़ा मुझे सोने नहीं देता था। पति का लौड़ा तो अब और फीका लगने लगा था।
तभी अचानक से मेरे पति को एक कॉल लैटर आई। कनाडा की एक बहुत बड़ा कंपनी होटल, रेस्टोरेंट आदि के बारे में सेमिनार लग रहे थे। मेरे पति ने और उनके एक दोस्त ने यह ट्रिप करने का फैंसला लिया। उनका वहाँ पन्द्रह दिन का सेमिनार था लेकिन घूमने के लिए एक महीने की रिटर्न-टिकट लेकर गए थे।
उनके जाने के बाद मैं खुश थी तभी एक दिन मैंने अपने पुराने बॉय फ्रेंड का स्क्रैप जब ऑरकुट में देखा तो खिल उठी। उसने अपना मोबाइल नंबर छोड़ा था तो मैंने तुरंत कॉल की और उसको अपने नीरस यौन-जीवन के बारे बताया।
उसने कहा- तू मायके आजा ! यहीं हम मौका देख मजे करेंगे !
कहते हैं ना कि जब भगवान् सुनता है तो बहुत पास आकर सुन लेता है ! सासु माँ ने मुझे कहा- गाँव में गेहूं की फसल को पहली खाद डालनी है और फोकल पॉइंट का परमिट यहाँ है और उस पर या मेरे पति के या मेरे हस्ताक्षर होने हैं।
मैंने पति से फ़ोन पर पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि कहाँ पड़ा है परमिट और पैसे वगैरा !
मैं कार लेकर गाँव चली गई। राम ने गेट खोला। मुझे देख उसकी आंखें चमक उठी। उसको देख मैं भी अपनी अदा से मुस्कुरा दी।
कार लगा कर चाबी दे जाना राजा ! मैंने गिरने का नाटक सा किया तो उसने मुझे थाम लिया और अपने लिए राजा सुन कर वो और छाती चौड़ी करने लगा, अभी आया मेरी… ! कहकर चुप हो गया। कुछ देर बाद वो पानी लेकर आया। मैं वाशरूम गई और तरोताज़ा होकर अपने साथ लेकर आई पारदर्शी सेक्सी नाइटी पहन ली। गुलाबी नाइटी में काली ब्रा-पेंटी किसी को भी जला कर राख कर सकते थे। वो चला गया।
दस मिनट बाद मैंने आवाज़ लगाईं और खुद बिस्तर पर उलटी लेट गई, नाइटी सरका कर ऊपर कर दी जिससे मेरे चूतड़ साफ़ उभर कर दिख रहे थे। उसने दरवाज़ा खोला,
मैंने कहा-आ जाओ ! अभी गिरने से मेरी टांग में दर्द होने लगा है, थोड़ा दबा दो, मालिश कर दो ! आराम से ऊपर बैठ जाओ !
वो बाहर से सरसों के तेल की बोतल लेकर आया और कुण्डी लगा दी- आराम से करेंगे, तो दर्द जल्दी भाग जाएगा !
उफ्फफ्फ्फ़ !
वो तेल लगाकर मालिश करने लगा। मैंने धीरे धीरे नीचे से सारी नाइटी उठा दी और उसका हाथ पकड़ कर अपने चूतडों पर रख दिया। फिर दूसरा भी !
उसने थोड़ा तेल लगा कर चूतड़ मसले तो मैं गर्म होने लगी, खुद नीचे से उठने लगी मैं !
मैं एकदम सीधी हुई और उसको पलट कर उसकी जांघों पर बैठ गई, अपनी नाइटी उतार फेंकी और मैंने ब्रा भी उतार फेंकी, उसके सामने दो मम्मे थे। मैंने उसके पजामे को खोल दिया फिर उसकी शर्ट भी और टूट पड़ी उसके ऊपर !
मेरी आग देख वो हैरान रह गया- बहुत प्यासी हो मेरी जान ?
मैंने उसके अंडरवीयर से लुल्ला निकाल लिया और रांड के तरीके से चूसने लगी।
वाह मेरी बुलबुल ! मेरी हसीना और चूस !
हां ! चूसूंगी कमीने ! तेरे मालिक का तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता ! फाड़ डालो ! मेरा बस चले तो एक साथ गांड और चूत मरवा लूँ !
इसका भी इंतजाम है मेरी जान !
अबे बिरजू बाबा ! अन्दर आ जाओ ! क्यूँ छुप कर देख कर मुठ मरोगे, इसकी ही मार लो कमीनी की ! बहुत आग है इसकी चूत में !
राम ने मेरी टांगें फैला दी और बीच आकर दोनों टाँगे कंधों पर टिका कर झटका दिया, लौड़ा चीरता हुआ घुस गया जैसे आज मेरी झिल्ली फट रही हो !
लेकिन मैंने हिम्मत रखी, मैं भी खेली खाई महिला थी। उसने जल्दी ही पूरा जड़ तक पहुंचा दिया।
वाह मेरे शेर ! वाह ! फटने दे इसको !
बिरजू मेरे चेहरे के पास आकर बैठ गया। मैंने उसके पजामे का नाड़ा खोला और फिर उसके कच्छे को उतारा।
मैं चौंक गई, काले रंग का नाग मानो कुंडली मारे बैठा हो ! उसका सोया हुआ लौड़ा भी मेरे पति के खड़े लौड़े से ज्यादा बड़ा था !
उसने दारु पी रखी थी। मैंने जैसे उसको छुआ, उसमें हरक़त होने लगी। मैंने अपना तकिया थोड़ा ऊँचा किया और उसके लौड़े को मुँह में ले लिया।
उसका लौड़ा कभी किसी ने मुँह में नहीं लिया था ऐसा उसने मुझे बाद में बताया और यह भी बताया कि गाँव की कई बड़े घर की औरतें उससे चुदने को आती जिनको बच्चा नहीं होता था। सास बेटे में नहीं बहु में दोष निकालती थी और पति अपनी झूठी मर्दानगी की दुहाई दे औरत को दोष देते !
बिरजू ने तीन चार औरतों की कोख भी हरी की थी।
राम अपनी धुन में मुझे चोद रहा था और मैं बिरजू का चूस रही थी। जैसे ही उसका पूरा तन गया, वो मेरे मुँह में आना बंद हो दिया, सिर्फ उसका टोपा ही चूस पा रही थी मैं ! बाकी जुबान से उसको मजा दे रही थी।
तभी राम ने तेज़ी दिखाई, वो पागलों की तरह उछल कर मुझे चोदने लगा।
बिरजू का भी मेरे मुँह से निकल गया और राम ने मेरी हड्डियाँ हिला दी और एक तूफ़ान के बाद शांत होकर मुझ पर गिर कर हांफने लगा। उसके पानी ने मेरी सारी प्यास बुझा दी।
फिर बिरजू ने मोर्चा संभाला !मुझे डर लग रहा था, उसने काफी थूक लगा गीला किया और रख दिया मेरी चूत पे ! उसने टाँगे इतनी चौड़ी कर दी कि चूत खुल गई ! काफी बड़ा खिलाड़ी लगा ! उसने झटका देने के बजाये धीरे-धीरे घुसाता चला गया। मेरी दर्द से जान निकल रही थी। जब मुझे लगा कि अब घुस गया, मैंने सर ऊपर करके देखा तो अभी आधा बाहर था।
तभी उसने मर्दानगी दिखाई और इतना ज़बरदस्त झटका दिया कि मेरी सांस अटक गई, आंखें पत्थर होने लगी, दोनों हाथों से चादर को पकड़ लिया। लेकिन उसने तुरंत निकाल लिया और फिर डाला फिर उसने मुझे वो सुख दिया जो मुझे वाकई पहले कभी नहीं मिला था। उसके लौड़े से इतना पानी निकला कि जितना कभी नहीं देखा। कुछ चूत में कुछ मम्मों पर कुछ होंठों पर ! इतने पानी से तो एक साथ दस बच्चे ठहर जाएँ !मैं उठी, चादर पर खून के धब्बे लगे थे। वाशरूम गई, चूत कोसे पानी से साफ़ की। मुझसे चला नहीं जा रहा था। वो दोनों वहीं मौजूद थे, मैंने कहा- मेरे कपडे !
बिरजू बोला- साली, दे दूंगा ! क्या जल्दी है ?
मैंने कहा- अब मुझे जाना है !
पर्स से परमिट की कॉपी निकाली, हस्ताक्षर किये और दोनों को पैसे दिए। मैं सिर्फ ब्रा पेंटी में थी, मानो अपने मर्द के सामने खड़ी होऊं !
वो दोनों मुझे देख-देख मजे ले रहे थे।
लाओ कपड़े दो !
कपड़े मिल जायेंगे ! एक बार बाँहों में आजा मेरी जान !
मैंने गुस्से से कहा- अपनी औकात में रहो ! जितना मेरा दिल किया, मैंने तुम्हें मजे दिए !
वो बोला- साली, छिनाल कहीं की ! साली, तू प्यासी थी, तू चल के आई थी ना कि हम !
हरामी जुबान बंद कर ! कपड़े दे दे !
तेरी माँ की चूत, कुतिया ! बिरजू गुस्से से उठा, उसका लौड़ा तन कर हिलौरे खा रहा था, मेरे बालों को खींचते हुए होंठ चूमने लगा।
हरामी छोड़ ! औकात में रह !
औकात दिखाती है हमें ???
उसके बाद उन्होंने जो कुछ मेरे साथ किया !मेरे बार बार औकात शब्द से वो मुझे मेरी औकात दिखाने की धार चुके थे !
उन्होंने क्या किया ?
यह अन्तर्वासना पर अगली बार पढ़ना ! Sex Stories
यह Antarvasna स्टोरी एक महीने old है। हाय फ़्रेंड्स आई एम प्रीत फ़्रोम भोपाल। आप लोगों ने मेरी कहानी चाची से प्यारा कौन पढ़ी। काफ़ी अच्छा रिस्पोंस आया अच्छा लगा।
अब मैं आप लोगों को एक नयी कहानी बताने जा रहा हूँ।
अब हम लोग भोपाल में ही शिफ़्ट हो गये थे। जैसा कि आप लोगों को मालूम है कि चाची को चोद कर मुझे चोदने का शौक लग गया था तो लंड चोदने के लिये तड़पता रहता है। हमारे घर में पार्ट-टाइम नौकरानियां काम करती हैं। लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी। मम्मी बड़ी होशियार थीं। सब काली कलूटी और भद्दी भद्दी छांट छाँट कर रखती थीं। जानती थी लड़का बहुत ही चालु है। आखिर में जब कोई नहीं मिली तो एक लड़की को रखना ही पड़ा जो बीसेक साल की मस्त जवान कुंवारी लड़की थी। साँवला रंग था और क्या जवान, सुंदर ऐसी कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाए। मम्मे ऐसे गोल गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज़ में समाए ही नहीं।
बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि चोदने के लिये एकदम मस्त चीज़ थी। सोच सोच कर मैंने कई बार मुठ मारा। बहुत ज़ोर से तमन्ना थी कब मौका मिले और कब मैं इसकी बुर में अपना लंड घुसा दूं।
वो भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी चोरी से नापता रहता था। मन ही मन में कई बार उसे नंगी कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच सोच कर मेरा लंड गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा होता। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल गोल चूचियों को दबाऊं। एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानो करेंट सा लग गया और वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गयी। मैंने कहा मौका आने दे, सीमा तुझे तो खूब चोदुंगा। लंड तेरी चिकनी बुर में डाल कर भूल जाऊंगा। चूची को चूस चूस कर प्यास बुझाउंगा और दबा दबा कर मज़े लूंगा। होठों को तो खा ही जाउंगा। सीमा उसका प्यारा सा नाम था।
कहते हैं उसके घर में देर है पर अंधेर नहीं। इतवार था उस दिन और मेरे लंड देव तो उछल गये। मैं मौका चूकने वालों में से नहीं था। लेकिन शुरु कैसे करूँ। अगर चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गयी तो? दोस्तो, तुम यह जान लो कि लड़कियां कितना ही शरमाये लेकिन उनके दिल में लालसा होती है कि कोई उनको छेड़े और चोदे।
मैंने सीमा को बुलाया और उसे देखते हुए कहा- सीमा, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो?
वह बोली- क्यूं साहब, क्या कम है?
मैंने जवाब दिया- देखो, ब्लाउज़ के नीचे कोई ब्रा नहीं है। सब दिखता है। लड़के छेड़ेंगे तुझे।
वो बोली- बाबुजी, इतने पैसे कहां कि ब्रा खरीद सकूं। आप दिलवाओगे?
मैंने कहा- दिलवा तो मैं दूँगा … लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी लड़के ने तेरे बदन को छेड़ा है?
उसने जवाब दिया- नहीं साहबजी।
मैंने कहा- इसका मतलब कि तू एकदम कुंवारी है?
“जी साहबजी।”
“अगर मैं कहूं कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज़ तो नहीं होगी?”
“नाराज़ क्यों होने लगी साहबजी? आप बहुत अच्छे हैं।”
बस यही उसका सिगनल था मेरे लिये। मैंने हिम्मत करके पूछ लिया- अगर मैं तुझे थोड़ा सा प्यार करूं तो तुझे बुरा तो नहीं लगेगा?
अपने पैर की उंगलियों को वो ज़मीन पर मसलती हुई बोली- आप तो बड़े वो हो साहब।
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- अच्छा अपनी आँखें बंद कर ले और अभी खोलना नहीं।
उसने आँखें बंद की और हल्के से मुँह ऊपर की तरफ़ कर दिया। मैंने कहा- बेटा लोहा गर्म है, मार दे हथौड़ा। आहिस्ता से पहले मैंने उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर रख दिये अपने होंठ उसके होंठों पर। हाय क्या गज़ब की लड़की थी। क्या टेस्ट था। संसार की महंगी से महंगी शराब उसका मुकाबला नहीं कर सकती थी। ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बांध टूट गये।
मेरे होंठों ने कस कर उसके होंठों को चूसा और चूसते ही रहे। मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया। मेरी जीभ उसकी जीभ का टेस्ट लेने लगी। इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा। बस मज़ा लेती रही।
अचानक उसने आँखें खोली और बोली- साहबजी, बस, कोई देख लेगा।
मैंने कहा- सीमा, अब तो मत रोको मुझे। सिर्फ़ एक बार।
“एक बार, क्या साहब?”
मैंने उसके कान में फुसफुसा कर कहा- अपनी बुर चुदवाएगी मुझसे? एक बार अपनी बुर में मरा लंड घुसवायेगी? देख मना मत करना। बहुत खूबसूरत है तू … मेरा दिल आ गया है तुझ पर!
यह कह कर मैंने सीमा को कस के पकड़ लिया और दायें हाथ से उसकी बायीं चूची को दबाने लगा। मुँह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होंठों पर और हर जगह पर चूमने लगा पागलों की तरह। क्या चूची थी, मानो सख्त संतरे। दबाओ तो चिटक चिटक जाये। उफ़, मलाई थी पूरी की पूरी।
सीमा ने जवाब दिया- साहब जी, मैंने यह सब कभी नहीं किया। मुझे शर्म आ रही है।
उखड़ी सांसों से मैंने कहा- हाय मेरी जान सीमा, बस इतना बता, अच्छा लगा या नहीं। मज़ा आ रहा है या नहीं? मेरा तो लंड बेताब है जाने मन। और मत तड़पा।
“साहबजी, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जायेगा तो?”
बस मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया। कस कर चूमते हुए मैंने उसके कपड़ों को उतारा। फिर अपने कपड़ों को जल्दी से निकाला। सात इंच लम्बा मेरा लंड फड़फड़ाते हुए बाहर निकला। देख कर उसकी आँखें बड़ी हो गयी, बोली- हाय यह क्या है? यह तो बहुत बड़ा है।
“पकड़ ले इसे मेरी जान।” कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया।
उसके बदन को पहली बार नंगा देख कर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा। चूची ऐसी मस्त थी कि पूछो मत। चूत पर बाल इतने अच्छे लग रहे थे कि मेरे हाथ उसकी तरफ़ बढ़ ही गये। क्या गर्म चूत थी। उंगली आहिस्ता से अंदर घुसाई। रस बह रहा था और उसकी बुर गीली हो गयी थी। गुलाबी गुलाबी बुर को उंगलियों से अलग किया, और मैंने अपना लंड आहिस्ता से घुसाया। हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। मुँह से उसके होंठों को मैं चूस रहा था।
“आह, साहब जी, धीरे … दुःख रहा है।”
“सीमा मज़ा आ रहा है ना?”
“साहबजी, जल्दी करिये न जो भी करना है।”
“हाय मेरी जान, बोल क्या करूं?”
“डालिये न। कुछ करिये न।”
“सीमा, बोल क्या करूं?” कहते हुए मैंने लंड को थोड़ा और घुसाया।
“अपना यह डाल दीजिये।”
“बोल न, कहाँ डालूं मेरी जान, क्या डालूं?”
“आप ही बोलिये न साहबजी, आप अच्छा बोलते हैं।”
“अच्छा, यह मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी बुर में घुस गया और अब ये तुझे चोदेगा।”
“चोदिये न, साहबजी।”
उसके मुँह से सुन कर तो लंड और भी मस्त हो गया- हाय सीमा, क्या बुर है तेरी, क्या चूची है तेरी। कहां छुपा कर रखा था इतने दिन। पहले क्यों नहीं चुदवाया।
“साहबजी, आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है। बस चोद दीजिये जल्दी से।” और उसने अपने चूतड़ ऊपर कर लिये।
अब मैंने उसकी दाहिनी चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। एक हाथ से दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए, मैं उछल उछल कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। जन्नत का मज़ा आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस चोदता ही रहूँ, चोदता ही रहूँ इस प्यारी प्यारी चूत को। मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से उसकी गुलाबी गीली गर्म गर्म बुर को चोद रहा था।
“हाय, सीमा चुदवाने में मज़ा आ रहा है न। बोल मेरी जान, बोल।”
“हां साहब, मज़ा आ रहा है। बहुत मज़ा आ रहा है। साहब आप बहुत अच्छा चोदते हैं। साहब, यह मेरी बुर आपके लंड के लिये ही बनी है। है न साहब। साहब, चूची ज़ोर से दबाइये न। साहब, ऊऊओह, मज़ा आ गया, ऊऊह्हह्ह।”
अचानक, हम दोनों साथ साथ ही झड़े। मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी प्यारी बुर में घोल दिया। हाय क्या बुर थी। क्या लड़की थी। गर्म गर्म हलवा। नहीं उससे भी ज्यादा टेस्टी।
मैंने पूछा- सीमा, तेरा महीना कब हुआ था री?
शरमाते हुए बोली- परसों ही खत्म हुआ। आप बड़े वो हैं। यह भी कोई पूछता है।
बांहों में भर कर होंठों को चूमते, चूचियों को दबाते हुए मैंने कहा- मेरी जान, चुदवाते चुदवाते सब सीख जायेगी।
एकदम सेफ़ था। प्रग्नेंट होने का कोई चांस नहीं था अभी। दोस्तो, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज्यादा मज़ा आया। क्योंकि लंड भी देर से झड़ा। चूत उसकी गीली थी। चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही थी साली। उसकी चूचियों को तो मसल मसल कर और चूस चूस कर निचोड़ ही दिया मैंने। जाने फिर कब मौका मिले। आज इसकी बुर चूस ही लो। बुर का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि कोई भी शराब में ऐसा नशा नहीं। चोदते समय तो मैंने उसके होंठों को खा ही लिया। “यह मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान। तेरी बुर में मेरा लंड – इसी को चुदाई कहते हैं सीमा। कहां छुपा रखी थी यह चूत जानी।” कहते हुए मैं बस चोद रहा था और मज़ा लूट रहा था।
“चोद दीजिये साहबजी, चोद दीजिये। मेरी बुर को चोद दीजिये।” कह कह कर चुदवा रही थी मेरी सीमा।
दोस्तो, चुदाई तो खत्म हुई लेकिन मन नहीं भरा, उसे दबोचते हुए मैंने कहा- सीमा, मौका निकाल कर चुदवाती रहना। तेरी बुर का दिवाना है यह लंड। मालामाल कर दूंगा जाने मन। Antarvasna
यह कह कर मैंने उसे दो सौ रुपये दिये और चूमते हुए मसलते हुए विदा किया।
मेरा नाम अंजलि है । मै, पापा Sex Stories और मम्मी बहुत दिनों बाद थियेटर में गये। स्थानीय कलाकार वहां अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। नाच, गाना व नाटक वगैरह चल रहे थे। मुझे एक डांस बहुत प्यारा लगा। कार्यक्रम चल रहा था। हम आगे ही बैठे थे। मैं पानी पीने के लिये स्टेज के पास गई। अचानक मुझे वो डांस करने वाली लड़की वहा मिल गई। मैं तुरन्त उससे जाकर मिली।
“आप डांस बहुत अच्छी करती हैं।”
“थेंक्स … यह मेरा बचपन का शौक है … ”
“आपका नाम जान सकती हूँ प्लीज … ?”
“कमल नाम है मेरा … ”
“मैं कभी आपसे मिलने जरूर आऊंगी !”
“आप अंजलि है ना … मेरा घर आपके पास ही है … ”
“अच्छा तो हम जरूर मिलेंगे … आप मेरे घर आना !”
औपचारिक बात होने के बाद मैं पानी पी कर अपनी सीट पर आ गई। कार्यक्रम समाप्त होने पर हम घर पर आ गये। दूसरे दिन सुबह ही कमल मुझे घर के बाहर दिख गई। वो स्कूटी से निकल रही थी … उसने मुँह पर कपड़ा बांध रखा था। उसने हाथ हिलाया और और स्कूटी रोक दी … मैंने उसे अन्दर बुला लिया … और उसका परिचय सबसे कराया। फिर मैं उसे कमरे में ले आई।
उसने टाईट जीन्स पहन रखी थी और सेक्सी लग रही थी। उसने मुँह पर से कपड़ा हटाया और बैठ गई। हम बातें करने लगे। उसके बात करने का करने का स्टाईल कुछ अलग सा था। कभी कभी वो लड़के के स्टाईल में बोलने लगती थी। मुझे कुछ शक सा होने लगा।
मैं एक दिन उनके डांस क्लब में गई। बाहर ही मेरे जान पहचान के अंकल मिल गये। बात बात में मुझे सब मालूम हो गया कि कमल वास्तव में लड़का ही है, पर मैंने उसे ये जाहिर नहीं होने दिया कि मुझे पता चल गया है कि वो लड़का है। चूंकि उसका जिस्म दुबला पतला था और नाचने में माहिर था, इसलिये वो ऐसा ही रहता था। उसके बाल वास्तविक लगे इसलिये बाल भी उसने लम्बे कर लिये थे। उसकी आवाज लड़कियों जैसी ही थी। उम्र भी 18 साल की थी। ना चेहरे पर कोई बाल … लड़कियों जैस चिकना चेहरा।
अब वो अक्सर मेरे घर आ जाता था। मैंने जान बूझ करके उसे मेरी सहेली बना लिया था … जब भी उसका कोई प्रोग्राम होता तो वो मुझे पास ला देता था। वो या तो जीन्स पहनता था या पैन्ट । एक दिन मैंने उससे पूछा।
“कमल … तुम्हारा कोइ बॉय-फ़्रेन्ड है क्या?”
“नहीं तो … और तुम्हारा … ”
“नहीं यार … कोई मुझे पसन्द ही नहीं करता है … ”
“तो मेरी फ़्रेन्ड बन जाओ … ”
“छी: तुम तो लड़की हो … मैं लड़कों की बात कर रही हूँ … ”
“अरे यार बॉय-फ़्रेन्ड तुम्हें परेशान कर देगा … तुमसे सेक्स की बातें करेगा और फिर जाने क्या क्या … ”
“तुझे क्या सेक्स की बातें अच्छी नहीं लगती है क्या ?”
“हां … लगती तो हैं … बातें क्या सेक्स भी अच्छा लगता है … कोई किसी के साथ सम्भोग करे मजा नहीं आयेगा क्या ?”
“क्या बात है … सम्भोग को चुदाई कहते हैं … ” मुझे सेक्स की बातों में मजा आने लगा था। मैं उसे उत्तेजित करने लगी।
“धत्त ये तो गाली होती है … पर हां च् … च् … चुदाई ही कहते हैं … ” कमल हड़बड़ा गया।
“अच्छा आज बाहर चल कर आईस्क्रीम खायेंगे … मैं ड्रेस बदल लेती हूँ … ”
मैंने अपना टॉप उतारा तो मेरी दोनों चूंचियां बाहर छलक पड़ी। मैंने जान कर उसे भड़काने के अपने बोबे सहला दिये।
“अरे … रे ये क्या कर रही हो … अन्दर जाओ ना … !” कमल आंखे फ़ाड़ कर मेरी चूंचियाँ देखने लगा।
“ऐसे क्या कर रही है … तेरे नहीं है क्या … ?” मैंने उसे छेड़ा।
“बड़ी सुन्दर हैं … सीधी तनी हुई … अच्छी लग रही हैं … ” उसके ऐसे कहने से मेरे शरीर में सिरहन दौड़ गई। मैंने जाल और कसा।
“कमल … हाथ लगा ना इसे … ” कमल ने धीरे से मेरे बोबे सहला दिये और मेरे चूंचक भी दबा दिये …
“मस्त है तेरी चूंचियाँ यार … ।” कमल उत्तेजित हो उठा था।
“हाय कमल … ला तेरे भी भी सहला दूं” मैंने उसे छेड़ने की नीयत से कहा और मुझे ये भी बताना था मैं उसे लड़की ही समझ रही हूं।
“नहीं … नहीं अभी नहीं … बाद में … मेरे तो अभी हैं ही नहीं … ” वो घबरा उठा।
“अरे जा … अभी दबा दबाऊंगी … ।” मैंने उसकी छाती पर जबरदस्ती हाथ लगाया तो साफ़ चट मैदान था। पर कमल की आंखो में वासना दिखने लगी।
मेरे हाथ दूर करके बोला,”आ ! तेरे और दबा दूं … !
“और उसने मेरे मेरे बोबे सहलाने शुरू कर दिये। मुझे मजा आने लगा। इतने में उसका एक हाथ मेरी चूतड़ पर आ गया … और दबाने लगा। उसने मुझे चिपका लिया और मेरे होंठ अपने होंठों से मिला दिये। मैंने भी उसके चूतड़ पकड़ लिये और दबाने शुरू कर दिये … अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और उसने जीन्स के ऊपर ही मेरी चूत भींच दी।
“हाय रे कमल … और भींच दे … साली तू लड़की क्यो है … लण्ड होता तो उसे ठूंस ठूंस कर चुदवाती … ” मेरे मुँह से एक वासना भरी कराह निकल पड़ी। उसके कड़े बदन में मर्दों वाली बात साफ़ नजर आ रही थी …
“ला मैं तेरी चूत भींच दूं !”
मैंने भी उसके लण्ड पर ज्योंही हाथ लगाया। वो दूर हो गया …
“बस अंजलि … अब नहीं … चल तैयार हो जा … चलते है … ” मेरा नशा टूट गया …
“कमल … रात को यहीं आ जाना … थोड़ा और मजा करेंगे … ऐसे ही … खूब मजा आया ना अभी … ”
हम दोनों स्कूटी पर बैठ कर निकल पड़े। हम दोनों ने मुँह पर कपड़ा बांध लिया था।
रात को मैं उसका इन्तज़ार करती रही, पर वो नहीं आया। मैंने उसे फोन किया तो वो बोला कि अभी रात हो गई है कल आऊंगी।
सुबह ही वो आ गया … मैं खुश हो गई … सोचा आज तो चुद के ही छोड़ूगी … साली चूत को शान्त तो करना ही है … ये चक्कर में आ गया है तो मजा कर लूँ … हमने चाय पी और कमरा बन्द कर लिया। और मम्मी से कह दिया कि हम एक घण्टा पढ़ेंगे … हमें डिस्टर्ब नहीं करना।
“चल यार मजे करते हैं … ” मैंने अपना नाईट सूट उतार दिया और नंगी हो गई …
“तू तो बड़ी बेशरम है … यार … ” कमल बोल उठा और मेरी चूचियाँ दाबने लगा … ।
“अरे उतार ना कपड़े यार … जल्दी कर … मेरी तो खुजली बढ़ रही है … ” मेरी वासना बढ़ती जा रही थी और कमल से चिपकती जा रही थी। उसने मेरी चूत दबा दी और मुझे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा … और मुझे बाहों में कसने लगा। मैं होश खोती जा रही थी … उसके लण्ड का दबाव अब मेरी चूत पर पड़ रहा था। मुझे मस्ती आने लगी थी। लण्ड की चुभन पा कर मुस्कराई। पर नंगा हो जाता तो उसकी पोल खुल जाती … जो कि अभी खुलने ही वाली थी।
“हाय रे कमल … काश तू लड़का होती … तेरे मोटा सा लण्ड होता … कितना मजा आता … अरे टॉप और जीन्स उतार ना … ” पर उसने नहीं सुना … वो मेरे अंगों को भींचती रहा। मैंने खींच कर उसका टॉप उतार दिया। उसने तुरन्त मेरी आंखें बन्द कर दी …
“प्लीज मत देखो शरम आती है … मैं जीन्स उतार रही हूँ … देखो आंखे बन्द ही रखना … ” अपना जीन्स उतार कर वो नंगा हो गया … मैंने तिरछी नजरों से उसका कड़कता लण्ड देखा। उसने वापिस से मुझे दबोच लिया।
उसका लण्ड अब मेरे जांघ पर लग रहा था … मैंने जान करके कुछ नहीं कहा।
“अरे ये चूत में क्या घुसा रही है … ” उसका मोटा लण्ड मेरी चूत पर रगड़ लगाता हुआ घुसने लगा।
“एक मजे की चीज़ है … ” मैंने आंखे बन्द किये हुये ही नशे में मजे लेने लगी। अचानक लण्ड का दबाव मेरी चूत पर पड़ा और मोटा और लम्बा लण्ड पूरा ही अन्दर घुस गया … मैं सिहर उठी … … उसने दुबारा धक्का दिया तो पूरा ही घुस गया। कमल के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
मेरे मुख से भी आह निकल पड़ी। मुझे भी असीम आनन्द आया … उसने धक्के मारना शुरु कर दिया … मैंने अचानक ही उसे धक्का दे दिया … पर नाटक तो करना था … मेरी चूत लप लप कर रही थी … चुदने को बेताब हो रही थी …
“हाय रे … तुम तो लडके हो … लण्ड तो असली है … और इतना मोटा ?”
उसने मुझे फिर से जकड लिया और लण्ड फिर से घुसा डाला। मैंने भी घुसने दिया … मजा कैसे छोड़ देती …
“हाँ … अंजलि मैं तो लड़का हूँ … प्लीज चुदाई चलने दो ना … मैं सब बता दूंगा … ” मुझे तो पहले से ही पता था … फिर उसे कैसे जाने देती।
“प्रोमिस … चोदने के बाद बताना … हाय अब चोद डालो … देखा तुम्हारे लण्ड आ ही गया ना … ” मैंने उसे छेड़ते कहा। उसका लण्ड चूत की जड़ तक घुसा हुआ था।
मुझे असली चुदाई का आनन्द मिल रहा था। चूंकी मामला खुल चुका था। उसके मन में भी अब चोर नहीं था। अब हम खुल कर मर्द औरत की तरह चुदाई का मजा लने लगे। मैंने भी उसे अब प्यार से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और उसके होंठ से होंठ मिला दिये।
उसका लण्ड मेरी चूत में रगड़ मारते हुए उतर रहा था और फिर एक के बाद एक मजे के झटके … मैं अपनी चूत उछाल उछाल कर चुदाने लगी। मेरी वासना उबलने लगी। कमल भी अपने होश खो बैठा। बेतहाशा धचक धचक धक्के मारने लगा … तेज सिसकारियाँ उसके मुँह से निकल रही थी।
डांस में माहिर होने से उसकी कमर में बहुत लचक थी … मेरी सिर्फ़ चूत पर उसका लण्ड टकरा रहा था … उसने ऐसा पोज बना रखा था लण्ड और चूत के अलावा कोई भी अंग स्पर्श नहीं कर रहा था। लण्ड और चूत दोनों आग उगल रहे थे। फ़च फ़च और थप थप की मधुर आवाजें उभर रही थी।
“कमल मेरी चूचियाँ मसल दे राजा … दे और दे … साली को फ़ाड़ दे … ” वो बड़ी सफ़ाई से मेरी दोनों चूंचियों की घुंडियों को हल्के हल्के गोल गोल घुमा कर मसलने लगा। मुझे लगा कि ये मुझे मस्त करके मार ही डालेगा। मेर सारा जिस्म अंगड़ाई लेने लगा। सारे शरीर में मिठास भरने लगी … नसों उबाल आने लगा … लगा कि जैसे सब कुछ मेरा अब चूत में सिमटने लगा है … सारी मिठास खिंच कर चूत में समाने लगी। कमल की आंखें बन्द थी … अपनी कला से मेरी आनन्द दायक चुदाई कर रहा था …
“ईईईह्ह्ह्ह् … हाय … ये ये … मर गई … कमल गई मैं तो … मेरी मां रे … चोद दे जोर से … घुसा और जोर से घुसा … ” मेर बदन ऐंठने लग गया था … मैं अपने आपको रोकना चाह रही थी … पर हाय रे … पानी निकल ही पड़ा … और मैं झड़ने लगी … उसी समय कमल ने मेरी चूत में अपना लण्ड गड़ा दिया … और जड़ में दबाने लगाने … हाय कहते हुए अपना वीर्य मेरी चूत की गहराईयों में निकालने लगा।
अब उसने मेरे शरीर पर अपना भार डाल दिया। और चूतड़ों को मेरी चूत पर दबा दबा कर अपना वीर्य उगलने लगा। मैंने अपने दोनो पांव फ़ैला कर चित लेट गई। कमल पूरा झड़ चुका था। कमल भी एक तरफ़ बगल में आ गया। हमारी सांसे जल्दी ही नियन्त्रण में आ गई। दिल की धड़कनें सामान्य होने लगी। कमल तो जल्दी से खड़ा हो गया मैंने उसे खींच कर फिर लेटा लिया …
“कमल प्लीज ! एक बार और चुदाई करेंगे … ! ” कमल मेरी बगल में फिर से लेट गया। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी …
कमल कहने लगा,” अंजलि सॉरी … मैंने तुम्हे नहीं बताया कि … ”
मैंने उसके मुख पर अंगुली रख दी,” मुझे बहुत पहले से ही पता था कि तुम लड़के हो … मुझे तो सच में चुदना था … अब रोज चोदोगे ना … ”
कमल के लण्ड में एक बार और उफ़ान आ गया और मैं एक बार फिर नीचे दब गई … मेरे बोबे मसलने लगा … और मेरी चूत में मोटा सा लम्बा सा गरम लोहा घुस पड़ा … Sex Stories
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