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Massage Girl in Gondia: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Gondia who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Gondia that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Gondia massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Gondia who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Gondia massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Gondia massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Gondia who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Gondia employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Gondia helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Gondia

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Gondia at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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हाय ! Hindi Porn Stories

मैं नागपुर से ३८ साल Hindi Porn Stories का सुन्दर और स्मार्ट पुरुष हूँ। मैं आज आपको अपने जीवन की एक पुरानी लेकिन गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

मेरे पड़ोस में संजना रहती थी जो मुझसे करीब आठ साल छोटी थी। हमारे और संजना के परिवार के बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। रुपा सुन्दर और जवान होती जा रही थी और साथ ही मेरी रुचि उसमें बढ़ती जा रही थी। वो जब चलती थी तो मेरी आँखें उसके कूल्हों पर ही अटक जाती थी। उसकी लहराती हुई चाल देखकर मैं तो जैसे पागल ही हो जाता था। वो मुझे चाचा कहती थी।

संजना अब कॉलेज़ में पढ़ने लगी थी। उसके उभार बढ़ने लगे थे और साथ ही उसकी मादकता भी बढ़ने लगी थी। उसका कद लगभग ५’२”हो गया था, उसका बदन भरा भरा सा दिखने लगा था। मैं रात को अक्सर उसे याद करके मुठ मारने लगा था। हमारा रिश्ता ऐसा बन गया था कि मैं एकदम से उसे कुछ नहीं कह पाता था। जब भी मुझे मौका मिलता मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छू लेता था।

एक दिन दोपहर में मैं उसके घर गया तो वह अपनी दादी और माँ के साथ बैठी थी। उसके पैरों में दर्द हो रहा था। मैंने उससे कहा- लाओ, मैं तुम्हारा एक्यू-प्रेशर कर देता हूँ। वह मेरे करीब आकर बैठ गई। मैंने धीरे धीरे उसके पंजों पर एक्यू-प्रेशर करना शुरू किया। मुझे एक्यू-प्रेशर के काफी सारे दबाव-बिंदु मालूम हैं। मैं समझ गया कि उसका पैर ऊपर से लॉक हो गया है।

संजना इस समय स्कर्ट और टी-शर्ट पहने हुए थी। धीरे धीरे मैं उसके घुटनों तक प्रेशर देने के बहाने अपने हाथ फिराने लगा। थोड़ी देर में मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिराना चालू कर दिया। जांघों को सहलाते हुए दो बार मैंने उसकी योनि भी सहला दी। संजना शरमाने लगी। उसकी माँ और दादी भी बैठी थी, अधिक कुछ हो नहीं सकता था।

समय बीतता गया, संजना पर और ज्यादा जवानी चढ़ने लगी। मैं एक्यू-प्रेशर करने के बहाने उस के पूरे बदन को छूने लगा, जिससे वो हमेशा शरमा जाती थी। मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में भी ऐसा कुछ हो रहा है क्या।

कुछ दिनों में संजना ने अपनी स्नातिकी पूरी कर ली। अब वो पूरी तरह से निखर चुकी थी। उसका कद ५’४” छाती ३३” कमर २८” और कुल्हे ३२” के लगभग हो गए थे। उसे देख कर मेरी जांघों के बीच जबरदस्त तनाव आ जाता था।

इस बीच मेरी शादी हो गई। मै अक्सर अपनी पत्नी के साथ सेक्स करते समय संजना को याद करके ऐसा महसूस करने लगा जैसे मैं संजना के साथ ही सेक्स कर रहा हूँ।

कुछ दिनों बाद संजना का रिश्ता आ गया और उसकी शादी मुम्बई हो गई। उसका पति दिखने में ज्यादा ठीक नहीं था। मुझे वो कहावत याद आ गई कि हूर के साथ लंगूर ही मजे करते हैं।

मुझे अपनी किस्मत पर बड़ा पछतावा होता था कि ऐसा करारा माल मेरी जगह इस लंगूर को मिल रहा है। उसकी शादी के बाद जब वो पहली बार मायके वापस आई तो उसको देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। थोड़े दिनों कि चुदाई के बाद तो उसका बदन जैसे क़यामत हो गया। उसके बात करने का तरीका भी बदल गया। थोड़े दिनों बाद वो मुंबई आने को कहकर चली गई और मैं इंतजार करने लगा कि कब मुंबई जाने का मौका मिले।

फ़िर कई महीनों मुझे मंत्रालय के काम से मुंबई जाने का मौका लगा। अब तक उसकी शादी को ७ महीने हो चुके थे। मुझे स्टेशन पर लेने के लिए उसके पति आये थे। हम लोग घर पहुंचे तो दरवाजे पर ही मेरे इंतजार कर रही थी। मैंने उसे दरवाजे पर ही अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर एक पप्पी दी।

थोड़ी देर में मैं तैयार होने बाथरूम में गया तो देखा संजना की अंडरवियर और ब्रा सूख रही थी। मैंने उसे उठा कर सूंघा, क्या मदहोश सुगंध थी ! मेरा लण्ड खडा हो गया। मैंने उसकी पैंटी को अपने लण्ड पर रख मूठ मारना शुरू कर दिया और अचानक मेरा पानी बह निकला। मैं फटाफट तैयार हुआ और मैं और उसके पति नाश्ता करके साथ में ही निकल गए।

मैं मंत्रालय चला गया और उसके पति अपने ऑफिस। करीब ४.०० बजे मेरा काम ख़त्म हुआ, मुझे वहां और ४ दिन रुकना पड़ रहा था। मैं करीब ६.०० बजे उसके घर वापस आया तो उसके पति पहले ही घर पर थे और उन्होंने मुझे बताया कि ऑफिस के काम से उन्हें ५ दिनों के लिए गोवा जाना पढ़ रहा है।

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई। वो अफ़सोस जता रहे थे कि मैं पहली बार आया और उन्हें जाना पड़ रहा है। मैंने शांत स्वर में कहा- भाई ऑफिस का काम है तो जाना ही पड़ेगा !

फिर रात १०.०० बजे की गाड़ी से वो गोवा चले गए। हमने उन्हें घर से ही ९.०० बजे विदाई दे दी थी।

उनके जाने पर हमने खाना खाया। संजना ने रसोई का काम ख़त्म किया फिर हम दोनों बैठकर घर -परिवार की बातें करने लगे। अगले दिन मुझे दोपहर बाद ही बाहर जाना था इसलिए हम दोनों को सुबह जल्दी उठाने की कोई चिंता नहीं थी। संजना ने अपनी नाईटी पहनी थी क्योंकि मुझसे ऐसी कोई शर्म तो थी नहीं। मैंने भी अपना नाईट-सूट पहन रखा था और आदत के मुताबिक मैंने अपना अंडरवियर नहीं पहना था।

थोड़ी देर बातें करते करते मैंने उससे कहा- चलो, बेड पर लेट कर ही बातें करते हैं, पीठ को थोड़ा आराम मिल जायेगा।

हम दोनों उनके बेड-रूम में आ गए। मैं लेट गया और वो पास में बैठ कर बातें करने लगी।

मैं उसका हाथ अपने हाथों में ले कर सहलाने लगा। फिर उसको खींच कर अपने बाजू में लिटा लिया। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकालकर उसका सर अपने कन्धों पर रख लिया। हम बातें करते जा रहे थे। धीरे धीरे मैंने उसके हाथ जो उसकी छाती पर रखे थे, सहलाना चालू किया। कमरे में ए सी चालू था। हल्की-हल्की ठण्ड का हमें अहसास होने लगा। उसने एक चादर खींच कर हम दोनों के ऊपर डाल ली ऐसा करते वक़्त मेरा हाथ उसके भारी उरोजों को छू गया। उसे छूते ही मेरा खम्बा अकड़ कर खड़ा होने लगा।

अब मैंने उससे शादीशुदा जिन्दगी के बारे में पूछना शुरू किया। मेरा हाथ उसके हाथों को सहलाते सहलाते उसके उरोजों को भी सहलाने लगा था। शायद अब उसे मेरे इरादे भी समझ में आने लगे थे, उसने कहा- रात बहुत हो गई है, सो जाते हैं।

मैंने कहा- अभी तो बहुत सी बातें करनी हैं, सुबह भी जल्दी उठने की चिंता नहीं है, और बातें करते हैं।

मैंने उससे पूछा कि सेक्स लाइफ कैसी चल रही है तो वो शरमाने लगी, कहने लगी- चाचा ! ये आपके पूछने की बात थोड़े ही है !

मैंने कहा- अब तुम इतनी बड़ी हो गई हो, शादीशुदा हो, अब तो हम एक दोस्त की तरह बातें कर ही सकते हैं।

संजना ने कहा- मुझे शर्म आती है !

मैंने कहा- चलो, मैं अपनी पहले बताता हूँ। देखो मुझे शादी के ४ साल होने पर भी रोज सेक्स किये बिना नींद नहीं आती। मैं पहले तुम्हारी चाची की अच्छे से मालिश करता हूँ और फिर करीब १ घंटा हम सेक्स करते हैं। इतने में तुम्हारी चाची ३ से ४ बार झडती है।

और जब चाची नहीं होती तब? -उसने पूछा।

तब मैं उसका या किसी के भी नाम से स्वयं संतुष्टि कर लेता हूँ, कभी कभी तो उसमें तुम्हारा भी नाम होता है।

वो सकपका गई। उसे मेरे इरादे खुलते नजर आने लगे। उसने कहा- ये तो लगभग रोज देर रात तक लौटते हैं और सुबह जल्दी चले जाते हैं। हम लोग शनिवार रात को ही ये सब कर पाते हैं। या फिर किसी दिन छुट्टी होती है तो बोनस हो जाता है।

अब मैं उसके मम्मों को सीधे सहलाने लग गया। उसने कहा- ये क्या करते हो चाचा?

मैंने कहा- पगली अभी तो हम दोस्त हैं चाचा-भतीजी नहीं ! देखो तुम भी जवान हो और मैं भी। तुम्हारी भी शादी हो चुकी है और मेरी भी। तुम ये भी जानती हो एक बार करने से कुछ हो नहीं जाने वाला है।

उसने बताया कि वे लोग अभी बच्चा नहीं चाहते इस लिए कंडोम इस्तेमाल करते हैं।

मैंने कहा फिक्र न करो। हम भी वही इस्तेमाल कर लेंगे।

अब मैंने उसके अधरों पर अपने होंट रख दिए, वो थोड़ा कसमसाई और कुछ बोलने के लिए मुंह खोलने लगी तो मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। उसपर इसका असर होने लगा। उसकी सांसे भरी होने लगी। लेटे लेटे ही मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया, वो हाथ हटाने लगी पर मैंने उसका हाथ जोर से पकड़ कर रखा था। फिर वो धीरे से मेरे लण्ड को सहलाने लगी।

आज मुझे अपनी बरसों की तपस्या का फल मिलने वाला था। मैंने उसके उरोजों को अब खुलकर दबाना चालू कर दिया। वो मेरी छाती में अपना मुंह छिपाने लगी। मैंने अपना हाथ उसके पेट और कमर पर से सरकाते हुए उसके मादक कूल्हों पर रख कर उन्हें दबाने लगा। मुझे जैसे स्वर्ग का आनंद मिलने लगा। अब संजना भी खुलने लगी।

आज गुरूवार था यानि उसकी पिछली चुदाई हुए लगभग ५ दिन बीत चुके थे।

अब मैं उसके पैरों के पास बैठा था। मैंने धीरे से उसका ग़ाऊन टांगों पर से उठाना शुरू किया। जैसे जैसे उसका ग़ाऊन ऊपर हो रहा था, उसकी सुडौल मरमरी टाँगें बाहर आने लगी। मेरा सुलेमान अब एकदम टाईट हो गया था। उसकी पिंडलियाँ देख मैं अपने आप को रोक नहीं सका और उन्हें चूमने लगा। मैं ग़ाऊन को इंच-इंच ऊपर कर रहा था और उसकी सेक्सी चिकनी टांगों को चूमता जा रहा था।

संजना भी मस्त होने लगी। उसने एकदम से मेरा पायजामा खींच दिया। अब मैं उसके सामने सिर्फ शर्ट में था। उसने मेरे फौलादी को हाथ में लेकर मसलना-सहलाना चालू कर दिया। मैंने उसके ग़ाऊन को जांघों पर से सरकाते हुए उसके हुस्न के दर्शन के लिए नाभि तक ऊपर उठा दिया। अन्दर वो भड़कीले लाल रंग की पैंटी पहने हुए थी। उसकी कली के आस पास की जगह गीली होने से कत्थई नजर आ रही थी। मैंने उसकी नाभि को चूम लिया और ग़ाऊन ऊपर उठाते हुए पूरा निकाल दिया।

अब मेरे सामने मेरी बरसों की तमन्ना सिर्फ ब्रा और पैंटी में मदहोश पड़ी थी। मैंने उसको उठा के गले से लगा लिया और बेतहाशा चूमने लगा। वो भी मुझे सब जगह चूमने लगी। उसने खींच कर मेरा शर्ट भी उतार दिया।

मैंने पीछे हाथ डालकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके तने हुए उरोज बंधन से एक झटके में आजाद हो गए, मैंने जल्दी से ब्रा अलग कर उसके चुचुकों को चूसना चालू कर दिया। वो मेरी छाती और लण्ड को सहलाने लगी। उसके मुंह से अब सऽऽसऽऽसऽऽऽ सिस्कारियां छूटना चालू हो गई।

अब मैं ६९ की पोजीशन बनाते हुए उसकी पैंटी से उसकी जवानी को आजाद करने लगा। मेरा लण्ड अब उसके होटों को छूने लगा। मेरे लण्ड पर एक बूंद प्री-कम की उभर आई, जो मोती की तरह चमक रही थी। उसने अपनी जीभ निकालकर उस मोती को अपने मुंह में ले लिया। उसका स्वाद शायद उसे बहुत पसंद आया क्योंकि अब वो मेरे ६.५ इंच का लण्ड अपने मुंह में लेने लगी। इस काम के लिए वो बार बार अपना सर ऊपर उठा कर मेरा लण्ड अपने हलक तक लेने लगी।

मैंने उसकी पैंटी उतार दी, अन्दर से पाव रोटी की तरह बाल-रहित एकदम गुलाबी सी उसकी चूत नजर आने लगी। उसकी चूत देखते ही मैं पागल हो गया। मैंने ६९ पोजीशन में ही अपने को नीचे और उसको अपने ऊपर कर लिया। यह पोजीशन हम दोनों के मुख -मैथुन करने में सहायक हो रही थी।

मैंने उसकी चूत की पलकों को अपनी अँगुलियों से अलग किया और अपनी जीभ उसमें घुसा दी। जीभ का खुरदरापन उसके योनि-कलिका पर महसूस करते ही वो जोश में आ गई, वो भी मेरे लण्ड को पूरा निगलने की कोशिश करने लगी।

लण्ड-चूत हमारे मुंह में होने के कारण मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसने मेरा और मैंने उसका पानी पी लिया। क्या पानी था, क्या स्वाद था। उसकी चूत की सुगंध मुझे मदहोश बना रही थी। ऐसा लग रहा था मानो ३ पैग विस्की पी ली हो !

अब मैं घूम कर उसके मुंह के करीब आ गया और उसे बाँहों में भर लिया। उसका चेहरा चमकने लगा था। अब उसकी आँखों में देख कर मेरे साण्ड ने फिर हरकत करनी शुरू कर दी। मैं उसके स्तनों और गाण्ड को सहलाने लगा। मेरा तना हुआ लण्ड उसकी नंगी जांघों से टकराने लगा।

उसके अन्दर भी फिर से तूफ़ान तैयार होने लगा। अब मुझ से सहन नहीं हो रहा था। मैंने उसके कमर के नीचे अपना हाथ डाला और अपने लण्ड को उसकी चूत के दरवाजे पर लगा कर एक जोरदार झटका मारा।

लण्ड अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाई- मर गई ! इ इ इ ई ईई ईई ! थोड़ा धीरे डालो।

लेकिन अब सुनाने का समय नहीं था, मैं पूरी गति से झटके लगाने लगा, वो नीचे से चूतड उठाने लगी। १० मिनट के घमासान के बाद मैंने उसे जोर से अपने बदन से चिपका लिया, वो अब तक तीन बार झड़ गई थी, मेरे चिपकाते ही वो ४ थी बार साथ में झड़ने लगी। हम दोनों बाँहों में बाहें डालकर अपनी साँसे दुरुस्त करने लगे।

उसकी आँखों में गज़ब की संतुष्टि नज़र आ रही थी।

उसने मुझे अब खुलकर बताना चालू किया कि वो भी मुझे बहुत पहले से चाहती है पर कभी बोल नहीं पाई। उसका पति उसे कभी कभी ही संतुष्ट कर पाता है।

हमें याद आया कि जल्दबाजी में हमने तो कंडोम लगाया ही नहीं। मैंने उसे तुंरत पेशाब करके आने को कहा। आते वक़्त वो दूध ले आई। उस रात मैंने उसे ४ बार चोदा। एक बार घोड़ी बनाकर, एक बार सोफे पर। एक बार कंधे पर लेकर और एक बार बाथरूम में !

अगले दिन क्या हुआ?

यह बाद में बताऊंगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी।

यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो मुझे जरूर बताएं।

अलविदा ! Hindi Porn Stories

Hindi Antarvasna stories

यह Antarvasna स्टोरी एक महीने old है। हाय फ़्रेंड्स आई एम प्रीत फ़्रोम भोपाल। आप लोगों ने मेरी कहानी चाची से प्यारा कौन पढ़ी। काफ़ी अच्छा रिस्पोंस आया अच्छा लगा।

अब मैं आप लोगों को एक नयी कहानी बताने जा रहा हूँ।

अब हम लोग भोपाल में ही शिफ़्ट हो गये थे। जैसा कि आप लोगों को मालूम है कि चाची को चोद कर मुझे चोदने का शौक लग गया था तो लंड चोदने के लिये तड़पता रहता है। हमारे घर में पार्ट-टाइम नौकरानियां काम करती हैं। लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी। मम्मी बड़ी होशियार थीं। सब काली कलूटी और भद्दी भद्दी छांट छाँट कर रखती थीं। जानती थी लड़का बहुत ही चालु है। आखिर में जब कोई नहीं मिली तो एक लड़की को रखना ही पड़ा जो बीसेक साल की मस्त जवान कुंवारी लड़की थी। साँवला रंग था और क्या जवान, सुंदर ऐसी कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाए। मम्मे ऐसे गोल गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज़ में समाए ही नहीं।

बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि चोदने के लिये एकदम मस्त चीज़ थी। सोच सोच कर मैंने कई बार मुठ मारा। बहुत ज़ोर से तमन्ना थी कब मौका मिले और कब मैं इसकी बुर में अपना लंड घुसा दूं।

वो भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी चोरी से नापता रहता था। मन ही मन में कई बार उसे नंगी कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच सोच कर मेरा लंड गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा होता। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल गोल चूचियों को दबाऊं। एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानो करेंट सा लग गया और वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गयी। मैंने कहा मौका आने दे, सीमा तुझे तो खूब चोदुंगा। लंड तेरी चिकनी बुर में डाल कर भूल जाऊंगा। चूची को चूस चूस कर प्यास बुझाउंगा और दबा दबा कर मज़े लूंगा। होठों को तो खा ही जाउंगा। सीमा उसका प्यारा सा नाम था।

कहते हैं उसके घर में देर है पर अंधेर नहीं। इतवार था उस दिन और मेरे लंड देव तो उछल गये। मैं मौका चूकने वालों में से नहीं था। लेकिन शुरु कैसे करूँ। अगर चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गयी तो? दोस्तो, तुम यह जान लो कि लड़कियां कितना ही शरमाये लेकिन उनके दिल में लालसा होती है कि कोई उनको छेड़े और चोदे।

मैंने सीमा को बुलाया और उसे देखते हुए कहा- सीमा, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो?
वह बोली- क्यूं साहब, क्या कम है?
मैंने जवाब दिया- देखो, ब्लाउज़ के नीचे कोई ब्रा नहीं है। सब दिखता है। लड़के छेड़ेंगे तुझे।
वो बोली- बाबुजी, इतने पैसे कहां कि ब्रा खरीद सकूं। आप दिलवाओगे?
मैंने कहा- दिलवा तो मैं दूँगा … लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी लड़के ने तेरे बदन को छेड़ा है?
उसने जवाब दिया- नहीं साहबजी।
मैंने कहा- इसका मतलब कि तू एकदम कुंवारी है?
“जी साहबजी।”
“अगर मैं कहूं कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज़ तो नहीं होगी?”
“नाराज़ क्यों होने लगी साहबजी? आप बहुत अच्छे हैं।”

बस यही उसका सिगनल था मेरे लिये। मैंने हिम्मत करके पूछ लिया- अगर मैं तुझे थोड़ा सा प्यार करूं तो तुझे बुरा तो नहीं लगेगा?
अपने पैर की उंगलियों को वो ज़मीन पर मसलती हुई बोली- आप तो बड़े वो हो साहब।
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- अच्छा अपनी आँखें बंद कर ले और अभी खोलना नहीं।

उसने आँखें बंद की और हल्के से मुँह ऊपर की तरफ़ कर दिया। मैंने कहा- बेटा लोहा गर्म है, मार दे हथौड़ा। आहिस्ता से पहले मैंने उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर रख दिये अपने होंठ उसके होंठों पर। हाय क्या गज़ब की लड़की थी। क्या टेस्ट था। संसार की महंगी से महंगी शराब उसका मुकाबला नहीं कर सकती थी। ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बांध टूट गये।

मेरे होंठों ने कस कर उसके होंठों को चूसा और चूसते ही रहे। मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया। मेरी जीभ उसकी जीभ का टेस्ट लेने लगी। इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा। बस मज़ा लेती रही।
अचानक उसने आँखें खोली और बोली- साहबजी, बस, कोई देख लेगा।
मैंने कहा- सीमा, अब तो मत रोको मुझे। सिर्फ़ एक बार।
“एक बार, क्या साहब?”

मैंने उसके कान में फुसफुसा कर कहा- अपनी बुर चुदवाएगी मुझसे? एक बार अपनी बुर में मरा लंड घुसवायेगी? देख मना मत करना। बहुत खूबसूरत है तू … मेरा दिल आ गया है तुझ पर!
यह कह कर मैंने सीमा को कस के पकड़ लिया और दायें हाथ से उसकी बायीं चूची को दबाने लगा। मुँह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होंठों पर और हर जगह पर चूमने लगा पागलों की तरह। क्या चूची थी, मानो सख्त संतरे। दबाओ तो चिटक चिटक जाये। उफ़, मलाई थी पूरी की पूरी।
सीमा ने जवाब दिया- साहब जी, मैंने यह सब कभी नहीं किया। मुझे शर्म आ रही है।
उखड़ी सांसों से मैंने कहा- हाय मेरी जान सीमा, बस इतना बता, अच्छा लगा या नहीं। मज़ा आ रहा है या नहीं? मेरा तो लंड बेताब है जाने मन। और मत तड़पा।
“साहबजी, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जायेगा तो?”

बस मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया। कस कर चूमते हुए मैंने उसके कपड़ों को उतारा। फिर अपने कपड़ों को जल्दी से निकाला। सात इंच लम्बा मेरा लंड फड़फड़ाते हुए बाहर निकला। देख कर उसकी आँखें बड़ी हो गयी, बोली- हाय यह क्या है? यह तो बहुत बड़ा है।
“पकड़ ले इसे मेरी जान।” कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया।

उसके बदन को पहली बार नंगा देख कर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा। चूची ऐसी मस्त थी कि पूछो मत। चूत पर बाल इतने अच्छे लग रहे थे कि मेरे हाथ उसकी तरफ़ बढ़ ही गये। क्या गर्म चूत थी। उंगली आहिस्ता से अंदर घुसाई। रस बह रहा था और उसकी बुर गीली हो गयी थी। गुलाबी गुलाबी बुर को उंगलियों से अलग किया, और मैंने अपना लंड आहिस्ता से घुसाया। हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। मुँह से उसके होंठों को मैं चूस रहा था।
“आह, साहब जी, धीरे … दुःख रहा है।”
“सीमा मज़ा आ रहा है ना?”
“साहबजी, जल्दी करिये न जो भी करना है।”
“हाय मेरी जान, बोल क्या करूं?”
“डालिये न। कुछ करिये न।”
“सीमा, बोल क्या करूं?” कहते हुए मैंने लंड को थोड़ा और घुसाया।
“अपना यह डाल दीजिये।”
“बोल न, कहाँ डालूं मेरी जान, क्या डालूं?”
“आप ही बोलिये न साहबजी, आप अच्छा बोलते हैं।”
“अच्छा, यह मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी बुर में घुस गया और अब ये तुझे चोदेगा।”
“चोदिये न, साहबजी।”

उसके मुँह से सुन कर तो लंड और भी मस्त हो गया- हाय सीमा, क्या बुर है तेरी, क्या चूची है तेरी। कहां छुपा कर रखा था इतने दिन। पहले क्यों नहीं चुदवाया।
“साहबजी, आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है। बस चोद दीजिये जल्दी से।” और उसने अपने चूतड़ ऊपर कर लिये।

अब मैंने उसकी दाहिनी चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। एक हाथ से दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए, मैं उछल उछल कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। जन्नत का मज़ा आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस चोदता ही रहूँ, चोदता ही रहूँ इस प्यारी प्यारी चूत को। मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से उसकी गुलाबी गीली गर्म गर्म बुर को चोद रहा था।
“हाय, सीमा चुदवाने में मज़ा आ रहा है न। बोल मेरी जान, बोल।”
“हां साहब, मज़ा आ रहा है। बहुत मज़ा आ रहा है। साहब आप बहुत अच्छा चोदते हैं। साहब, यह मेरी बुर आपके लंड के लिये ही बनी है। है न साहब। साहब, चूची ज़ोर से दबाइये न। साहब, ऊऊओह, मज़ा आ गया, ऊऊह्हह्ह।”

अचानक, हम दोनों साथ साथ ही झड़े। मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी प्यारी बुर में घोल दिया। हाय क्या बुर थी। क्या लड़की थी। गर्म गर्म हलवा। नहीं उससे भी ज्यादा टेस्टी।
मैंने पूछा- सीमा, तेरा महीना कब हुआ था री?
शरमाते हुए बोली- परसों ही खत्म हुआ। आप बड़े वो हैं। यह भी कोई पूछता है।

बांहों में भर कर होंठों को चूमते, चूचियों को दबाते हुए मैंने कहा- मेरी जान, चुदवाते चुदवाते सब सीख जायेगी।
एकदम सेफ़ था। प्रग्नेंट होने का कोई चांस नहीं था अभी। दोस्तो, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज्यादा मज़ा आया। क्योंकि लंड भी देर से झड़ा। चूत उसकी गीली थी। चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही थी साली। उसकी चूचियों को तो मसल मसल कर और चूस चूस कर निचोड़ ही दिया मैंने। जाने फिर कब मौका मिले। आज इसकी बुर चूस ही लो। बुर का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि कोई भी शराब में ऐसा नशा नहीं। चोदते समय तो मैंने उसके होंठों को खा ही लिया। “यह मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान। तेरी बुर में मेरा लंड – इसी को चुदाई कहते हैं सीमा। कहां छुपा रखी थी यह चूत जानी।” कहते हुए मैं बस चोद रहा था और मज़ा लूट रहा था।

“चोद दीजिये साहबजी, चोद दीजिये। मेरी बुर को चोद दीजिये।” कह कह कर चुदवा रही थी मेरी सीमा।

दोस्तो, चुदाई तो खत्म हुई लेकिन मन नहीं भरा, उसे दबोचते हुए मैंने कहा- सीमा, मौका निकाल कर चुदवाती रहना। तेरी बुर का दिवाना है यह लंड। मालामाल कर दूंगा जाने मन। Antarvasna
यह कह कर मैंने उसे दो सौ रुपये दिये और चूमते हुए मसलते हुए विदा किया।

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मेरी योनि के Hindi Porn Stories अन्दर घूमती उंगली ने मुझे मदहोश कर रखा था… स्स्स्स्सईई मेरी सिसकारी निकलने लगी… वो धीरे धीरे उन्गली अन्दर बाहर कर रहा था… पर मैं इतनी मस्त हो गई थी कि ना तो एक उंगली से गुजारा हो रहा था और ना ही इतनी कम स्पीड में अब मजा आ रहा था…

आज इन को क्या हो गया? इतनी देर से एक ही उंगली से करे जा रहे थे और वो भी इतनी धीरे धीरे… मेरी कामुकता इतनी बढ़ गई थी कि मैंने अपने आप ही उनकी दो उंगलियाँ पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ कर जोर जोर से पेलने के लिये जैसे ही उनका हाथ पकड़ा… मैं सन्न रह गई… यह तो बड़ा मुलायम सा हाथ था… मेरे पति का हाथ तो घने बालों से भरा पड़ा है.

तभी मेरा दिमाग झन्नाया… मुझे याद आया कि मैं तो अपने एक रिश्तेदार के घर शादी में शामिल होने आई थी और खाली जगह देख कर कोने में सो गई थी। कमरे में अन्धेरा था, मैंने उसके हाथ को पकड़ कर दूर करना चाहा लेकिन मैं उस की ताकत के सामने हार गई, मेरा बदन कांपने लगा।

इस कमरे में तो मेरे आने से पहले तीन औरतें और एक छोटा सा बच्चा सो रहा था और कमरे में लाइट जल रही थी तो फ़िर यह कौन है? कब अन्दर आया और इतनी हिम्मत कर ली कि मेरे साथ यह सब?

मैं उस को पहचानने के लिये अपना हाथ उसके चेहरे पर ले गई तो वो मेरे कान में फ़ुसफ़ुसाया- मम्मी, मैं हूं बिल्लू!
मैं सन्न रह गई… यह मेरा अपना 12वीं में पढ़ने वाला 18 साल का बेटा ही मेरी चूत में उंगली घुसेड़ कर मज़े लूट रहा था।
“कमीने, यह तू क्या कर रहा है… शरम नहीं आती… अपनी माँ के साथ…? चल हटा अपना हाथ!” मैं उसके कान में फ़ुसफ़ुसाई।
“मम्मी, प्लीज… अब रहने दो ना… मजा आ रहा है।”

मैंने उसको समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उस को जो कुछ भी करना है जल्दी करने को कहा।
बिना वक्त गवांये वो मेरे ऊपर आया… मेरी गीली चूत पर अपना लण्ड रखते ही धक्के मारने चालू किये, 6-7 धक्कों के बाद वो शान्त हो गया।

अगले दिन 11 बजे ऑटो से मैं और बबलू घर आये, रास्ते में हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई। चूंकि उस दिन वर्किंग-डे था सो बबलू के पापा पड़ोस में चाबी देकर गये थे, पड़ोस से चाबी ले कर दरवाजा खोलने के बाद मैं अपने बेडरूम में गई और बबलू अपने रूम में। बैग से कपड़े निकाल कर मैं बाथरूम में चली गई।

कपड़े धोने और नहाने के बाद मैं हमेशा की तरह पेटिकोट और ब्लाउज पहनकर अपने बेडरूम में साड़ी पहनने के लिये गई। साड़ी पहनने से पहले मैं आगे की तरफ़ झुक कर तौलिए से अपने बाल सुखा रही थी कि तभी किसी ने पीछे से आ कर मेरी दोनों चूचियाँ जोर से भींच ली, उस का तने हुये लण्ड का स्पर्श मैंने अपनी गांड की दरार पर महसूस किया।
एक सेकेन्ड के लिये चौंकी… फ़िर अहसास हुआ कि बबलू के अलावा घर में कोई और है भी नहीं…

मैंने गुस्से में पलट कर जोर से उसके गाल पर एक जबरदस्त तमाचा जड़ा। उसने मेरी चूचियाँ इतनी जोर से दबाई थी कि मेरे आंसू निकल गये। वो मेरे तमाचे से बौखला गया… उसका चेहरा लाल हो गया… और जोर से चिल्ला कर बोला- चाचा से तो खूब करवाती हो… चिल्ला चिल्ला कर… मैं भी तो वही कर रहा था… फ़िर मारा क्यों…??

उस की बात सुनकर मेरी जबान कुछ कहने से पहले मेरे हलक में अटक गई… मैं फटी आंखों से उस को देखती रही… मैं अवाक रह गई।
“बोलो ना! अब क्यों नहीं बोलती कुछ?” उसने गुस्से में कहा।

थोड़ी देर खामोश रहने के बाद मैंने थोड़े गुस्से और थोड़े प्यार के लहजे में उस से कहा- क्या बकवास कर रहा है तू? कौन चाचा और कैसा चाचा?
“सहारनपुर वाले चाचा और कौन? जब वो पिछली बार जब वो दोपहर में आये थे, मैंने सब अपनी आखों से देखा था… पहले दिन अपने बेडरूम में और आपने जबरदस्ती उन को एक दिन और रोका था… वही करने के लिये और दूसरे दिन गेस्ट रूम में…! मैंने दोनों दिन देखा था और उन के जाने के बाद आप बहुत उदास भी हुई थी।” उस ने उसी गुस्से वाले अन्दाज में कहा।

मेरे पैर काम्पने लगे… मैं सिर झुका कर बेड पर बैठकर सोचने लगी… अब क्या करूं…???
उसको समझाने के लिये हिम्मत कर मैंने उस की तरफ़ देखा… पर उस की निगाहें दूसरी जगह टिकी देख मैंने अपने पेट के नीचे देखा… मेरे पेटिकोट के नाड़ेघर के पास के कट की सिलाई उधड़ी होने के कारण मेरा पूरा झांट प्रदेश साफ साफ दिखाई दे रहा था।

मैं जल्दी से उस जगह पर अपना हाथ रख कर खड़ी हुई और पेटीकोट को घुमा कर नाड़ेघर को साइड में कर उसको पकड़ कर अपने साथ बिस्तर पर बिठाया और उस को समझने लगी- देख, देवर भाभी और जीजा साली के रिश्ते में कभी कभी ऐसा हो जाता है… पर तू तो मेरा बेटा है… मां बेटे के रिश्ते में यह सब पाप होता है… गाली भी होती है।
“झूठ मत बोलो मम्मी! राजू भी तो अपनी मम्मी के साथ कभी कभी करता है।” बबलू ने झल्ला कर कहा।
राजू बबलू की बुआ का लड़का जो बबलू से एक साल छोटा है.

इस बात से मैं और चौंकी और पूछा- तुझे कैसे पता ये सब…?

वो जब रात को सोने की जगह नहीं मिली तो राजू और मैं उस कमरे में गये जहाँ आप सो रही थी… आप का एक पैर मुड़कर एक साइड में और दूसरा पैर सीधा था, जिस वजह से आपकी साड़ी पूरी ऊपर सरकी हुई थी और पूरी नंगी लेटी हुई थी। मैंने जल्दी से लाइट बन्द की और राजू का हाथ पकड़ कर नीचे ले गया। राजू ने नीचे आकर कहा कि आप की चूत बहुत सुन्दर है और उसकी मम्मी की तरह काली नहीं है।

जब मैंने उस से पूछा कि तेरी मम्मी तो गोरी है तो फ़िर उनकी चूत काली कैसे हो गई? और तुझे कैसे पता?
तो उसने बताया कि पहले वो छुप छुप कर गुसलखाने में नहाते समय दरवाजे के नीचे की झिरी से देखता था और एक दिन उसकी मम्मी ने उसको पकड़ लिया और तब से वो कभी कभी अपनी मम्मी के साथ वही करता है जो चाचा ने आपके साथ किया था। उसने यह भी बताया कि उन के पड़ोस में रहने वाले जडेजा अंकल के साथ भी उस की मम्मी वही करती है।

उस ने मुझ से कहा कि मैं ऊपर जा कर चुपचाप आप की बगल में लेट जांऊ और अपनी उंगली में थूक लगा कर आप की चूत में डाल कर धीरे-धीरे घुमाऊँ… फ़िर आप अपने आप मुझे अपने ऊपर लिटा कर करने को कहोगी… लेकिन आपने तो ऐसा कुछ नहीं किया… उलटा रात को मेरा हाथ झटक दिया और अभी मेरे गाल पर तमाचा जड़ दिया…क्यों??

अब मैं उस को क्या जवाब देती…? कुछ समझ में नहीं आया। अपनी उस गलती को याद करने लगी जब घर में उसके होते मैंने अपने देवर से… पर मैं करती भी क्या…? मेरे देवर का लण्ड था ही ऐसा जो एक बार देख ले चुदाये बिना रहना मुश्किल और एक बार चुदवा लिया तो जहन में आते ही चूत कुलबुलाने लगती है।

मेरी शादी के चार या पांच महीने बाद एक दिन सहारनपुर में उन्हीं के घर में मौका पाकर उसने मुझ से सम्बन्ध बनाने चाहे…
मेरे टालमटोल करने के बावजूद उसने एक रात मेरे कमरे में आ कर अपनी हसरत पूरी करनी चाही… और पूरी हो भी गई लेकिन बेचारे को आधे में ही भागना पड़ा क्योंकि दूसरे कमरे में लाइट जलने पर वो मेरे ऊपर से उतर कर बाहर भाग गया था। जिस कमरे में मैं सोई थी और बगल वाले कमरे (देवर और उनकी बहन का कमरा) के बीच में छत के पास एक रोशनदान था जहाँ से लाइट जलने का पता चला।

उस रात जो आठ दस धक्के मेरी चूत पर पड़े थे, उन को मैं आज तक नहीं भूल पाई हूँ। ऐसा लग रहा था जैसे एक के पीछे एक दो दो लण्ड अन्दर जा रहे हों और बाहर निकल रहे हों। एक दिन पहले पीरियड से फ़्री होने के कारण ठुकाई के लिये आतुर मेरी चूत और ऊपर से आठ दस धक्कों की रगड़ से और भड़की आग की तड़प से मैं पूरी रात सो नहीं पाई थी।

एक हफ्ता वहाँ रहते हुये हम दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन असफलता ही हाथ लगी और एक दिन मेरे पति आ कर मुझे अपने साथ दिल्ली ले आये।

आज से दो महीने पहले (जिस दिन की याद बबलू ने आज दिलाई) दोपहर को खाने के वक्त वो हमारे घर आये अपनी लड़की से कोई कोर्स करवाने के सिलसिले में मेरे पति से सलाह लेने!

उसको देखते ही मेरी काम पिपासा जाग गई… अठारह साल पहले पड़े आठ दस धक्कों की रगड़ याद आते ही चूत रानी मस्तानी हो चली थी। मेरे पति उस वक्त आफिस गये थे। बबलू खाना खाकर अपने कमरे में लेटा था। मैंने दो थालियों में खाना परोस कर डायनिंग टेबल पर रखा और दोनों (देवर और मैं) बैठकर खाना खाने लगे।

खाना खाते खाते मेरी निगाह बार-बार उसकी टांगों के बीच अटक जाती, जिसे भांप कर देवर ने मेरे पैर पर पैर मारा… मैंने जब उसकी तरफ़ देखा तो उसने मैक्सी ऊपर सरकाने का इशारा किया।

मैंने आंख और सिर हिला कर नहीं में इशारा किया तो वो कुर्सी और नजदीक खिसका कर अपना एक पैर मेरी मैक्सी के अन्दर डालकर मेरी टांगों के बीच में लाकर पैर के अंगूठे से मेरी चूत टटोलने लगा… और उसके आग्रह पर मैंने कुर्सी से उठकर अपनी मैक्सी ऊपर कर उसको अपनी… के दर्शन कराये और बैठ कर खाना खाने लगी।

मेरा देवर तेज दिमाग वाला इंसान है, उसने लुंगी के नीचे कुछ नहीं पहना था, वो बीच में से लुंगी फ़ैलाकर अपने अजूबे लण्ड को निकाल कर मेरी तरफ़ देखते देखते खाना खाने लगा। खाना खत्म करने के बाद मैं किचन से आम लेकर आई।

किचन का काम निपटा कर मैं बाहर आकर उसके पास बैठ कर उसके घर परिवार के बारे में जानकारी लेने लगी।
“तुम बैठक में जाकर सो जाओ, मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा सुस्ता लूं!” कहते हुये जैसे ही मैं उठी, उस ने खींच कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया, एक हाथ से मेरी एक चूची दबा दी।

“पागल हो गये हो देवर जी! जवान लड़का घर में है… छोड़ो ना…” मैंने विनती की।
उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उठ कर अपने कमरे में चली गई। अन्दर जा कर मुझे पछतावा होने लगा। अठारह साल बाद ऊपर वाले ने मौका दिया था और मैंने गंवा दिया। मैं कुछ सोच कर पलटी ही थी कि देवर ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।

मन ही मन बल्लियों उछलते हुये मैंने नाटक करते हुये कहा- रुको देवर जी, मैं बबलू को देख कर आती हूँ।
“उसकी चिन्ता तुम मत करो मेरी जानेमन भाभी… मैं देख कर आया हूँ… वो अपने बिस्तर पर उल्टा हो कर सो रहा है।”
“छोड़ो तो सही… दरवाजा तो बन्द कर दूं!” मैंने कहा।

देवर बाहों में पकड़े पकड़े मुझे दरवाजे के पास लाया, अपने आप कुन्डी बन्द की और उसी अवस्था में ले कर बिस्तर पर आया… मुझे लिटाया… मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरे पैरों को फ़ैलाया और एक झटके में मेरी चूत की चुम्मी ले कर बोला- सच भाभी, भगवान की कसम, इन अठारह सालों तक कैसे कैसे बरदाश्त किया… उस दिन जल्दी जल्दी में कुछ मजा नहीं आया और मैंने तो तुम्हारी फ़ुद्दी के दर्शन भी नहीं किये थे।

मेरी चूत रस भरी की तरह अन्दर से भर चुकी थी, मैं किसी तरह भींच भींच कर पानी को बाहर निकलने से रोक रही थी। मैं आज तसल्ली से उसके लण्ड को देखना चाहती थी कि उस का आकार ऐसा क्यों है…??

मैं उठ कर बैठते ही अपना हाथ लम्बा कर उसकी लुन्गी के अन्दर ले गई… उसके लण्ड को पकड़कर लुन्गी से बाहर निकाल कर नजदीक से देखने लगी।

उसके लण्ड का टोपा नुकीला, टोपा खत्म होते ही (रिंग के पास से) फूला हुआ, 2 1/2 इंच के बाद जैसे 1/2 इंच की गांठ बंधी हो (पूछने पर देवर ने बताया कि बचपन में फोल्डिन्ग पलंग में उसकी लुली फंस गई थी, सात टांके आये थे, जिस कारण टांके वाली जगह से वो एक दम पतला और गिठा के आकार का हो गया था), उसके बाद तीन इंच पीछे की तरफ़ मोटा और जड़ के पास से आधा इंच पतला यानी कुल मिला कर करीब सात इंच लम्बा।

आज मुझे पता चला कि जिस रोज अठारह साल पहले इसने पहली बार मेरी चूत में डाला था उस वक्त मुझे क्यों अजीब लग था।

मेरे हाथ में ही उसका लण्ड झटके मारने लगा… इधर बैठे-बैठे मेरी चूत से फ़क से पानी पेशाब की तरह बाहर निकल गया और मेरे नीचे बेड सीट गीली हो गई। मेरी वासना पूरी तरह जाग चुकी थी…मैं बेड पर लेटी और बोली- आओ ना देवर जी… जल्दी करो… कहीं बबलू जाग ना जाये।
मैं आज अठारह साल पहले की भड़की आग को शान्त करना चाहती थी तसल्ली से।

देवर ने नीचे खड़े-खड़े मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हुये एक उंगली अन्दर सरका दी।
मैं बरदाश्त नहीं कर पाई… मैं समय बरबाद नहीं करना चाहती थी… उस को जोर से खींचते हुये मैंने अपने ऊपर लिटा कर कहा- बड़े कमीने हो तुम…! करते क्यों नहीं…??
“इतनी जल्दी क्या है मेरी जान…? तुमने तो मेरा तसल्ली से देख लिया… मैं भी तो देखूँ अपनी भाभी की मस्तानी फ़ुद्दी को…” वो बड़े इत्मिनान से बोला।

मेरी चूत से लगातार बूंद बूंद कर पानी रिस रहा था। हर औरत समझ सकती है कि ऐसा कब होता है और ऐसा होने पर अगर लण्ड नहीं मिले तो वो कुछ भी कर सकती है… कुछ भी। पर मैंने प्यार से काम लेना ही ठीक समझा और उसकी छाती पर उंगली फेरते हुए कहा- एक बार कर लो ना… फ़िर जी भर के देख लेना मेरे राजा।
“क्या कहा भाभी… जरा एक बार फिर बोलना जरा!” देवर बोला।

“मेरे राजा… एक… बार… कर लो… मेरी नीचे वाली तड़प रही है… उसके बाद जी भर कर जैसे मर्जी हो देखते रहना…” आधा बेशर्मी और आधा शरमाते हुये मैंने कहा और उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।
देवर- हाय मेरी जान… मुझे पता है तुम्हारी फ़ुद्दी टपक रही है… एक बार देखने दो…
मुझे खीज सी होने लगी थी- क्या है देवर जी… तंग मत करो ना… बोला तो है एक बार कर लो फिर जितना मर्जी देख लेना… कहते हुये मैं लेटे लेटे नीचे से अपने आप को एडजस्ट करने के बाद फ़िर कहा- अब नहीं सहा जा रहा है देवर जी… क्यों मेरा मजा खराब कर रहे हो… करो ना… नहीं तो मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगी…

“अच्छा यह बात है!” कहते हुये देवर ने पहले मेरी चूत के बाहर रिसे प्री-कम से अपने लण्ड के टोपे को गीला किया और फ़िर रखते ही गपा…क से घुसेड़ दिया।

मैं शायद इसी वक्त के लिये अटकी थी… मैं तो नीचे से फ़ुदकने लगी… आआआआ अभी आधा लण्ड ही अन्दर घुसा था कि मैं तो झड़ गई। मेरा मूड खराब हो गया…
मेरा बिगड़ा चेहरा देख देवर बोला- अब क्या हुआ…? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया फ़िर…

“बहुत गन्दे और कमीने हो तुम देवर जी!” मैंने कहा- कब से बोल रही थी… तुम हो कि माने ही नहीं, अब तुम भी जल्दी से अपना पानी झाड़ो और दूसरे कमरे में चले जाओ।
“पर हुआ क्या, कुछ बताओगी भी?” देवर ने पूछा।
“मैं तुम्हारे डंडे के साथ मज़े लेना चाहती थी पर तुमने तो सारा काम ही खराब कर दिया!” मैंने कहा।
“बस इतनी सी बात…! अरे मेरी जान…! सब्र करो! ऐसा मजा दूंगा कि भाई साहब को भूल जाओगी और सपने में भी याद करोगी तो चूत से पानी टपकेगा!” देवर ने कहा।

मेरे ऊपर से उतरने के बाद उसने मेरी मैक्सी से मेरी चूत को साफ़ किया और दोनों पैरों के बीच में आने के बाद मेरे चूतड़ों के नीचे अपनी दोनों हथेलियों को रख कर अपना मुँह मेरी चूत पर रखकर चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं उत्तेजित हो गई… चूत चटवाने का यह मेरा पहला अनुभव था… लाजवाब अनुभव!
मेरी चूत के अन्दर फ़िर से सरसराहट होने लगी।

आगे क्या हुआ? जानने के लिए कहानी का अगला भाग : बेटा और देवर-2 Hindi Porn Stories

Antarvasna

मेरा नाम अमित है। काफी दिनों Antarvasna से सोच रहा था कि मैं भी अपनी कहानी सबको बताऊँ। आखिर यहीं से कहानियाँ पढ़ के मैं भी बड़ा हुआ हूँ। यहीं मैंने मुठ मारना सीखा, यहीं से मेरी सोच में सारी औरतें और लड़कियाँ एक सी लगने लगीं, इसलिये आज मैं आप सबको अपनी कहानी सुना रहा हूँ।

मेरा नाम तो आप जान ही गए हैं। मेरी माँ का नाम अनिता है। मैं एक संयुक्त परिवार में रहता हूँ। मेरे परिवार में मेरी दो चाचियाँ हैं, बड़ी चाची का नाम अनीता और छोटी चाची का नाम हेमा है। मेरी माँ की उमर 42 होगी, अनीता चाची 36 की हैं और हेमा चाची 32 की। मेरी एक दीदी का नाम सीता है जो 21 साल की है।

बात उस समय की है जब मैं 12वीं की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चला गया था, वहीं पे मुझे इन कामुक कहानियों की आदत पड़ी। इन कहानियों में तो माँ बहन का कोई लिहाज होता नहीं है और कहानियाँ पढ़ने में काफी रोचक होती हैं तो मैं सारी कहानियाँ पढ़ जाता हूँ। उसके बाद से जब कभी भी मैं घर वापस जाता तो मेरे दिमाग में यही कहानियाँ चलती रहती थी। इन कहानियों ने मेरी जिंदगी ही बदल दी या फिर यह भी कह सकते हैं कि मेरी लाइफ बना दी।

मैं घर पे काफी अकेला-अकेला सा रहने लगा। अकेले में अन्तर्वासना कहानियों को याद करके मैं दिन में कई बार मुठ मारता था।

एक दिन जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया तो देखा वहाँ अनीता चाची की पेंटी और ब्रा लटक रही थी। शायद चाची उन्हें ले जाना भूल गई थी। यह पहली बार था कि मैं किसी औरत की पेंटी और ब्रा इतनी पास से देख रहा था। मेरा हाथ रोके नहीं रुका और मैं उनको अपने हाथ में ले के सूंघने लगा, उसकी मादक सुगंध से मैं मदहोश होने लगा। मैं पेंटी को अपने मुँह में लेके चूसने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अनीता चाची की चुत चूस रहा हूँ। उसके बाद मैं ब्रा को भी मुँह में ले के खेलने लगा।

उस दिन पहली बार मेरा लंड इतना बड़ा लग रहा था। मेरे लंड का आकार इतना बड़ा आज तक नहीं हुआ था। उसके बाद मैंने अपने लंड से पेंटी और ब्रा को खूब चोदा, उसे लंड में लपेट के मैंने अपना मुठ उसी में गिरा दिया, फिर अच्छे से धो के चाची की ब्रा और पेंटी वहीं रख दी। उस दिन हिलाने में जितना मजा आया था उतना पहले कभी नहीं आया था।

मैं नहा कर नाश्ते के लिए गया, वहाँ अनीता चाची ही खाना खिला रही थी। चाची मुझे देख के मुस्कुराई। आज मैं चाची को देख के उनको देखता हो रह गया, वो भी मुस्कुराती ही जा रही थी। चाची ने हाफ ब्लाउज पहन रखा था, वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं बता नहीं सकता। मैंने तो सोच लिया कि आज के बाद मैं जब भी मुठ मारूंगा, चाची की पेंटी ब्रा ले के ही मारूंगा और चाची को ही याद करके अपना रस निकालूँगा।

अगले दिन जब चाची नहा के निकली, मैं नहाने के लिए जल्दी से बाथरूम की ओर दौड़ा ताकि कोई और ना चला जाए बाथरूम में। पर अन्दर जाते ही मुझे काफी निराशा हुई। इस बार चाची ने वहाँ अपने कोई कपड़े नहीं छोड़े थ। मैं उदास मन से नहा के बाहर आ गया।
अपने कमरे में जा के भी मैं यही सोच रहा था कि आज कैसे मुठ मारी जाए। तब मैं हिम्मत करके छत पे गया, वहाँ देखा तो चाची की पेंटी लटक रही थी। मुझे लगा कि यहाँ पर मुठ मारूंगा तो अच्छा नहीं होगा। सो मैंने उसे अपने अंडरवियर में छुपा लिया और अपने कमरे में चला गया। चाची की पेंटी को छूते ही अन्दर मेरा लंड जाग गया था। फिर कमरे में जाकर मैंने जी भर के मुठ मारी, फिर पेंटी को धो के वहीं लटका आया।

फिर मैंने इसी तरह काफी दिनों तक अनीता चाची की मदद से मुठ मारते हुए काफी मज़े लिए। इससे मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी। अब मैं कभी कभी कमरा खुला छोड़ के मुठ मारने लगा था। अब मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि केवल मुठ मार के मेरा मन नहीं भरता था। अब चाची के कपड़ो से मेरा लंड कड़क नहीं हो पाता था। मुझे लगा कि अब कुछ करना पड़ेगा।

मैं अब अनीता चाची के कमरे में ताक-झांक करने लगा, यह सोच कर कि कभी मैं चाची को नंगा देख सकूँ तो मजा आ जाए। बाथरूम में तो कई बार कोशिश कर चुका था पर चाची हमेशा बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लेती थी, इसलिए मुझे सफलता नहीं मिल पाई थी।

एक दिन दोपहर में जब काफी गर्मी थी तो मैं खाना खा के चाची के कमरे में चला गया। वहाँ खिड़की में काफी बड़े-बड़े परदे लगे हुए थे। उसमें कोई भी आसानी से छुप सकता थ। गर्मी इतनी थी तो मैंने सोचा शायद चाची जब काम करके आएगी तो कुछ कपड़े तो जरूर उतारेंगी, यही सोच कर मैं परदे के पीछे छुप गया। थोड़े देर बाद जब चाची आई तो मेरा सोचना सही निकला।

चाची ने कमरे का दरवाज़ा बंद करके तुंरत ही साड़ी उतार फेंकी। मैं तो देखता ही रह गया। चाची ब्लाउज और साये में काफी खूबसूरत लग रही थी। चाची बिस्तर पर लेट गई पर गर्मी इतनी थी कि चाची को अभी भी पसीना आ रहा था। चाची से रहा नहीं गया, उन्होंने साया पूरा उपर कर लिया। अब मैं उनकी जांघों का मजा ले रहा था। उन्होंने गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी, वो पसीने से भीग चुकी थी। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि आज इतनी गर्मी हो कि चाची पूरी नंगी हो जाए और मेरा सपना पूरा हो जाए। पर भगवान ने मेरी सुनी नहीं। चाची साया ऊपर करके ही सो गई।

काफी देर इन्तज़ार करने के बाद मैं उनकी जांघों को ही देख के मुठ मारने लगा और रस को अपने हाथ में गिरा लिया ताकि किसी को पता न चले और खिड़की से ही कूद के अपने कमरे में चला गया।

दूसरे दिन भी मैं आशा लगा के वहीं छुप गया। आपको यकीन नहीं होगा कि अगले दिन भगवान ने मेरी सुन ली थी। चाची ने आते ही साड़ी ब्लाउज और साया तीनों उतार कर फ़ेंक दिए। पेंटी और ब्रा में चाची किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। चाची बिस्तर पे लेट गई और अपने हाथ से पेंटी को सहलाने लगी। मुझे लगा कि चाची ऐसे ही सहला रही है, पर चाची ने जब अपनी चुत में अपनी ऊँगलियाँ डालनी शुरू की तो मुझे लगा कि आज चाची गरम हैं, आज वो भी मुठ मारने वाली हैं। मुझे तो स्वर्ग मिल गया था।

चाची ने फिर फिर अपनी पेंटी उतार दी और मैं उनकी चुत को देखता रह गया। और चाची ने फिर अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी। उनकी चुचियों को पहली बार मैं ऐसे नग्न देख रहा था। 38 इंच की उनकी चूचियाँ बस मेरी हालत ख़राब कर रही थी। इतनी बड़ी चूचियाँ मैंने तो सपने में ही देखी थी। उधर मेरा हाथ मेरे लंड की माँ बहन एक कर रहा था। मुझे पता भी नहीं चला कब चाची उठ कर खिड़की की तरफ़ आने लगी। मैंने जैसे ही देखा तो मैं जल्दी से खिड़की से कूद के भाग गया।

मैं इतना गरम हो चुका था कि खुले दरवाज़े ही मैं अपने बिस्तर पर लेट के ज़ोर ज़ोर से लंड हिलाने लगा। हिलाते हिलाते जब मेरी नज़र दरवाज़े पर गई तो मैं तो बस पत्थर हो गया। देखा कि चाची मुझे देख रही हैं। चाची को देखते ही मेरा लंड एकदम सिकुड़ गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!

तब चाची ही बोली- क्या कर रहा है रे अमित?

मैं- कुछ नहीं चाची!

चाची- कुछ नहीं का मतलब? तू ये सब कब से कर रहा है और किसने सिखाया तुझे ये सब! हाँ?

मैं- चाची, मैं कभी कभी करता हूँ, वो मेरे एक दोस्त ने बताया था इसके बारें में!

चाची- तूने ऐसे ऐसे दोस्त बना के रखे हैं जो तुझे ये सब सिखाते हैं?

मैं- चाची मुझे माफ़ कर दीजिये, मैं आगे से कभी नहीं करूँगा! और प्लीज़ किसी को नहीं बताइयेगा!

चाची- ठीक है वो सब, मैं किसी को नहीं बोलूंगी पर तू मेरे जवाबों का सही सही जवाब देगा तब!

मैं- हाँ चाची, मैं आपको सब सच सच बोलूँगा।

चाची- किसके बारे में सोच के अभी तू हिला रहा था?

मैं- सच बोलूं चाची? आपको सोच के हिला रहा था!

चाची- मुझे सोच के हिला रहा था या देख के हिला रहा था? तू मेरे कमरे में था ना खिड़की के पास?

मैं- नहीं चाची, मैं नहीं था!

चाची ने मेरे गाल पे एक ज़ोर से तमाचा मारा।

चाची- तूने बोला कि सब सच बोलूँगा और तू झूठ बोले रहा हैं। मैंने तो कल ही समझ लिया था जब मैंने खिड़की के परदे के नीचे तेरे रस की कुछ बूंद देखी। क्यूँ तेरे ही काम थे थे ना वो?

मैं- चाची, पता नहीं कैसे गिर गया वो, मैंने तो हाथ में ही निकाला था। सॉरी चाची…!

चाची- और तू ही मेरे ब्रा और पेंटी ले के उसमें मुठ मारता है ना? वो सब दाग तुमने ही लगाये थे न मेरे कपडों में?

मैं- चाची आपको वो भी मालूम चल गया? पर मैं तो उसे धो देता था!

चाची- अरे इसके दाग ऐसे ही थोड़े चले जाते हैं, और फिर मैं तेरी चाची हूँ रे! कोई दूध पीती बच्ची नहीं ..तुझे ये क्या सूझी रे कि तूने अपने चाची को अपनी मुठ मारने का जरिया बना लिया?

मैं- चाची मुझे माफ़ कर दीजिये, पर क्या करूँ आप हो ही इतनी सेक्सी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया!

चाची- तुझे ये 36 साल की औरत सेक्सी लगती है रे… तू भी ना!… अच्छा सुन ये अच्छी बात नहीं है.. ज्यादा मुठ मत मारना.. और अगली बार जब मुठ मारने का मन करे मुझसे कपड़े मांग लेना, मैं दे दूंगी, ऐसे चोरी मत कर! एक दिन पकड़ा जाएगा.. पर ज्यादा नहीं, हफ़्ते में 2 बार से ज्यादा नहीं मारना, ठीक है…?

मैं- हाँ चाची.. आप बहुत अच्छी हो…!

फिर मैं चाची से उनकी पेंटी और ब्रा मांग के हिलाने लगा. मुझे ऐसा लगने लगा था की चाची मेरे इस आदत का मजा ले रही है. मुझे ऐसा भी लग रहा थी चाची शायद मुझे अपनी चुत भी मारने दे! मुझे लग रहा थी कैसे चाची से बात करूँ इस बारें में। दूसरे दिन जब मैं चाची से उनकी पेंटी मांगने गया तो चाची की बातें बहुत मजेदार थी.

चाची- कल ही तो ली थी तुमने, आज फिर से चाहिए, कितना मनचला हो गया है मेरा भतीजा! आज कोई पेंटी नहीं मिलेगी! वो छत पर ही है और मैं नहीं लाने वाली…

मैं- चाची मैं तो मर जाऊँगा अगर नहीं मुठ मारूँगा तो, चाची दो ना ऐसा मत बोलो..!

चाची- अरे तुझे क्या लग रहा है कि मैं झूठ बोल रही हूँ? तू खोज ले पूरे कमरे में, यदि मिल जाए तो ले ले…

मैंने सब जगह देखा, पर शायद चाची सच बोल रही थी, मुझे कहीं भी ब्रा या पेंटी नहीं मिली। तब मुझे एक आईडिया आया!

मैं- चाची आप सच बोल रही थी, पर मुझे एक मिल गई…आप दोगी न उसे…?

चाची- मिल गई तो ले ले , पूछ क्यूँ रहा है?

मैं- चाची वो तो आपको देनी होगी, आपने जो अभी पहन रखी है मुझे तो वही पेंटी चाहिए…!

चाची- पागल हो गए हो क्या, ये नहीं मिलेगी, गन्दा कर दोगे, मैं क्या पहनूंगी उसके बाद? नहीं मैं नहीं दे सकती! जा आज तू कुछ और उपाय कर..!

मैं- चाची, आप ऐसा मत करो, मैं आपकी मिन्नतें करता हूँ.. आप जो बोलोगी मैं करूँगा पर आज मुझे अपने पेंटी दे दो.. आज मैं उसकी ताज़ी सुगंध से मस्त हो जाना चाहता हूँ…!

चाची- जो बोलूंगी वैसा करेगा तब दे सकती हूँ…!

मैं- चाची आप एक बार बोल के देखो तो , आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा!

चाची- आज तब तू मेरे सामने हिलाएगा… जो भी करेगा मेरी पेंटी के साथ, वो मेरे सामने करना पड़ेगा…!

मैं- चाची पर आपके सामने तो मेरा खड़ा भी नहीं होगा डर से.. आपने देखा नहीं था? जिस दिन अपने मुझे मेरे कमरे में पकड़ा था, मेरा कैसे सिकुड़ के छोटा हो गया था…

मुझे ऐसा लगने लगा कि आज तो मैं सफल हो ही जाऊँगा, लगा चाची आज गरम है और वो आज मुझे चोदने दे सकती है।

इसलिए मैंने चाची से फिर से बोला…

मैं- चाची पर एक बात बोलूं! यदि आप मेरी मदद करो तो शायद मेरा लंड खड़ा हो जाएगा… चाची! बोलो आप मेरी मदद करोगी न…?
चाची- मैं कैसे मदद करुँगी?
मैं- चाची यदि आप मेरे लिए अपने सारे कपड़े निकाल दोगी तो मेरा लंड जरूर खड़ा हो जाएगा…!

चाची- बदमाश कनीं का! आज तू मुझे नंगा होने के लिए बोले रहा है..? तेरी इतनी हिम्मत…? तुझे मैं अपने कपड़े देने लगी तो तू कुछ भी बोलेगा? जाके के तेरी मम्मी को सब बोले दूंगी!

मुझे लगा चाची गुस्सा कर रही हैं, सो मैंने सोचा छोड़ दें, पर फिर लगा नहीं एक बार और कोशिश की जाए, शायद चाची ऐसे ही मजाक कर रही हो.. फिर यदि चाची फिर से गुस्सा करेगी तो मैं माफ़ी मांग लूँगा…

मैं- चाची आप गुस्सा मत करो, ठीक है आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा… पर चाची एक बात पूछूं?
चाची- हाँ पूछ!
मैं- चाची आप वादा करो इस बार गुस्सा नहीं करोगी?
चाची- हाँ रे! ठीक है, नहीं करूंगी गुस्सा..

मैं- चाची जब पहले दिन आपने ये पता लगा लिया था कि मैंने खिड़की के पीछे खड़ा हो के वहाँ पे मुठ मारा था..तो फिर दूसरे दिन आप कमरे में आ के पूरी नंगी क्यूँ हुई थी…? सच बोलो चाची! आप जानती थी ना कि मैं वहाँ हूँ! और आप मुझे दिखा के मुठ मार रही थी ना…?
चाची- तूने तो मुझे चुप करा दिया रे…! अब मैं क्या बोलूं, हाँ मुझे यकीन था कि तू वहाँ है, इसलिए मैंने वो सब कुछ किया था, और मैं जानबूझ के खिड़की की तरफ़ गई ताकि तुझे पकड़ सकूँ पर तू भाग गया था।
मैं- चाची जब आप उस दिन नंगी हो सकती थीं तो आज क्यूँ नहीं? चाची आज तो आपको अब नंगी होना ही होगा..!
चाची- ठीक है अब तो मना भी नहीं कर सकती..!

उसके बाद चाची ने अपनी साड़ी उतार दी… फिर ब्लाउज और साया भी साइड में फेंक दिया.. और पेंटी को स्टाइल से खोल के मेरी तरफ़ फेंक दिया..
चाची- ले बदमाश ले सूंघ और हिला अपने लंड को..!
मैंने चाची की पेंटी को नाक से लगाया… उसकी मादक सुगंध से मेरा लंड तन गया.. फिर चाची को देख के लंड तड़पने लगा..

मैंने सोचा आज मौका है आज चाची से बोलता हूँ कि मेरी लंड की मालिश करें..!
मैं- चाची अपनी ब्रा उतारो ना, आपकी चूची देखनी हैं..!
चाची- क्यूं रे! क्या करेगा मेरी चूची देख के?
मैं- चाची आपके शरीर में सबसे प्यारी चीज़ तो आपकी चूची है.. उसे देख के मेरा लंड और भी तन जाएगा।
चाची- तुझे मेरी चूची इतनी अच्छी लगती है,
मैं- हाँ चाची आपकी चूची तो सारी ब्लू फ़िल्म की नायिकाओं से भी अच्छी है।
चाची- ठीक है, लगता है तू चूची का शौकीन लगता है.. ले देख मेरी चूची.. और अच्छे से हिला ..!

मैं- चाची एक बात पूछूँ , आप चाचा के लंड को छूती हैं ना?
चाची- हाँ तेरे चाचा के लंड पर तो मेरा अधिकार है.. उसे मैं छूती ही हूँ!
मैं- चाची मेरे लंड पे भी तो आपका अधिकार होता है.. तो आप मेरे लंड को पकड़िये ना.. देखिये ना कैसे ये लंड आपके हाथों में आने के लिए तड़प रहा है।
चाची- नहीं रे..! तू पागल हो गया है क्या..? मैं नहीं छूती तेरा लंड.. चल हिला अपना लंड ख़ुद से…!

फिर मैं चाची के पास जा के लंड हाथ में ले के- चाची लो ना देखो कितना तड़प रहा है ये.. ले लो ना चाची.. आपके हाथ का सोच के ही ये हाल है… यदि आपने इसे हाथ में ले के थोड़ा प्यार से हिला देंगी तो सोचो कि ये कितना खुश होगा।

फिर चाची के हाथ पे ज़बरन मैंने अपना लंड रख दिया.. चाची ने अब मना नहीं किया.. चाची ने जैसे मेरे लंड को प्यार से सहलाया.. मुझे लगा कि झड़ जाऊँगा..

मैं- चाची मेरा रस निकलने वाला है..
चाची- इतनी जल्दी…
मैं- चाची क्या करूँ आपके छूने से मेरा रस उबलने लगा था.. अब नहीं रहा जा रहा है…

इतनी बात करते ही मैंने अपना रस निकाल दिया.. जो चाची के बूब्स पे गिरा… चाची और भी सुंदर लग रही थी..
मैं- सॉरी चाची.. सारा आपके चूचियों पर गिर गया… मैं साफ़ कर दूँ?
चाची- अब तू चूची को हाथ लगाने के बहाने निकाल रहा है.. जरूरत नहीं है.. जा भाग अब..!

मैं- चाची आपका मन नहीं है ना मुझे भगाने का! मुझे पता है आप मुझे सब कुछ करने को देंगी.. देंगी ना चाची?
आप मेरी सबसे अच्छी चाची हो..
चाची- चल हट यहाँ से.. क्या क्या करना है तुझे रे… ज़रा बता तो एक बार..!
मैं- चाची मैं आपको चूमना चाहता हूँ, आपकी दूध पीना चाहता हूँ, आपकी चुत का मजा लेना चाहता हूँ, आपकी चुत का रस पीना है मुझे! फिर मुझे आपको चोदना भी है…

चाची- तू तो एकदम हरामी हो गया है रे.. अपनी चाची को ही चोदेगा… तू तो मादरचोद निकल गया है… तुझसे तो बच के रहना पड़ेगा..

मैं- चाची आप गली भी देती हैं… आप भी कम हरामी थोड़े हैं, आपने अपने भतीजे का लंड पकड़ा है.. उसे अपनी कपड़े दिए हैं.. उसके सामने मुठ भी मारी है.. चाची मुझे मालूम हो गया कि आप बहुत बड़ी चुदक्कड़ हैं… चाची सच बोलिए आपको मेरा लंड चाहिए ना…?

चाची- तू तो बड़ा हरामी है रे… मैंने तेरी मदद की तो आज मुझे ही चुदासी बना दिया.. आज से तुझे कुछ नहीं मिलेगा!
मैं- चाची आप ऐसा नहीं करो, मैं तो मर जाऊँगा.. मैंने तो सोचा कि ऐसा बोलने से आप मुझे चोदने दोगी तो मैंने बोल दिया.. मुझे माफ़ कर दीजिए।

चाची- ऐसा बोलने से कोई तुझे चोदने दे देगा..
मैं- तब चाची कब कोई मुझे चोदने देगा.. बोलिए न चाची मुझे आप कब चोदने दोगी?

चाची- तू नहीं मानेगा न.. ठीक है चल तू अपनी माँ के सामने यदि मुझसे बोलेगा कि चाची चोदने दो.. और तेरी माँ भी बोलेगी कि हाँ चुदा ले तो मैं तुझसे जरूर चुदवाऊँगी।
मैं- चाची इतनी मुश्किल शर्त रख दी आपने.. ठीक है मैं आज डिनर के समय ही मम्मी से बात करूँगा..!

फिर उस दिन डिनर पर मैं चाची और मम्मी के साथ ही खाने को बैठा, मुझे काफी डर लग रहा था कि मम्मी से कैसे बात की जाए.. फिर अचानक लगा कि कुछ घुमा के मम्मी से बात कर लेते हैं..

मैं- चाची आप मेरे इच्छा पूरी नहीं करोगी ना, मैं कब से आपसे एक चीज मांग रहा हूँ.. आप क्यूँ नहीं देतीं?
मम्मी- क्या हुआ अमित क्या चाहिए तुझे चाची से, जो वो नहीं दे रही है..
मैं- कुछ नहीं मम्मी! एक बहुत प्यारी चीज है चाची के पास मैं वही मांग रहा हूँ.. पर चाची देने को तैयार ही नहीं होती!
मम्मी- क्यूँ री अनीता! मेरे बेटे को वो चीज क्यूँ नहीं दे देतीं? देख बेचारा कितना परेशान है?
चाची- ठीक है दीदी! मैं आज ही दे दूँगी इसे..

मैं तो उछल पड़ा.. मैंने मम्मी से हाँ तो करवा लिया था.. फिर चाची ने मुझसे कहा कि कल लंच के बाद आ के ले लेना अमित…!

उसके बाद मैं हवा में उड़ने लगा था, मैं बस किसी तरह चाहता था कि रात ख़त्म हो.. और लंच का टाइम आ जाए… उस दिन रात काफी लम्बी लग रही थी .. पर आखिर में मेरा इंतज़ार ख़त्म हो गया.. सुबह मैं काफी अच्छे से नहा के सेंट वेंट लगा के लंच करने गया.. जल्दी से लंच करके चाची के कमरे में जा कर इन्तज़ार करने लगा चाची का..! आज मैं चाची को चोदने वाला था.. यह सोच कर मेरा मन फ़ूला नहीं समां रहा था.. फिर चाची कमरे में आई..

मैं बेड पे लेट के टीवी देख रहा था..
चाची- तो अमित आखिर तुमने अपना दिमाग लगा के माँ से हाँ करवा लिया न!
मैं- चाची मैं आपको चोदने के लिए कुछ भी कर सकता था!

चाची- आज तो चाची भी तुझसे चुदना चाहती है.. देख अच्छे से चोदना चाची को.. जल्दी बाज़ी में मत चोदना.. जैसे बोलूँ वैसे चोदना!
मैं- चाची आप जैसा बोलोगी, मैं वैसे ही चोदूँगा!
चाची- तू आ आज तू मेरी कपड़े उतार!

फिर मैं चाची के पास गया और चाची की साड़ी उतार दी.. फिर चाची की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.. फिर चाची ने ख़ुद ही ब्लाउज उतार दिया.. फिर मुझे लगा कि चाची को पूरा नंगा कर दूँ.. और मैंने चाची की ब्रा, साया, पेंटी सब निकाल दिया.. फिर चाची बिस्तर पर लेट गई और मैं चाची को खड़ा देखने लगा.. चाची को ऐसे देख के तो किसी मुर्दे में भी जान आ जाती..

चाची- क्यूँ रे दूर से ही देखता रहेगा.. या पास भी आएगा.. आ मेरे पास आ ना..
मैं चाची के पास जा के बैठ गया..
चाची- तू कल बोल रहा था न मेरा दूध पिएगा.. ये ले आ जा मेरे दूध पी जा..

मैं भी चाची के चूचियों को प्यार से सहलाने लगा.. उनकी चूचियाँ मेरे हाथों में नहीं आ पा रही थी.. इतनी बड़ी और इतनी मुलायम चूची… बस मन कर रहा था कि दबाता ही रहूँ। फिर मैं चाची की एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.. और दूसरी को पूरी ताकत से दबा रहा था.. चाची बड़े प्यार दे मुझे अपना दूध पिला रही थी.. हालाँकि चाची की चूची में दूध अब आता नहीं था, पर चाची की चूची बहुत स्वादिष्ट थी..

मैं- चाची आपने तो बोला दूध पियो.. पर आपके चूची से तो दूध नहीं निकाल रहा है.. चाची अब दूध कैसे पियूँ?
चाची- अरे मेरे लाल… चूची का दूध ख़त्म हो गया है.. पर आ तुझे अपना खास दूध पिलाती हूँ, मेरी चुत पे जा और चाट जा चुत का सारा दूध…

मैं- चाची आपकी बूर का रस मीठा है न?
चाची- तू चख के देख ले.. चूची का दूध भूल जाएगा..

फिर मैं चाची की चुत के पास जाकर बैठ गया.. चाची की चुत में हल्की हल्की झांट थी.. जो पसीने से भीगी हुई थी.. मैंने पहले चाची की झांट को चाटा.. चाची की झांट इतनी नमकीन थी कि बस चाटने का ही मन कर रहा था.. चाची उधर अपनी गांड उठा उठा कर मुझे इशारे कर रही थी कि चुत चाट..

तो मैंने सोचा कि अब चाची को ज्यादा न परेशान करूँ..फिर चाची की चुत को प्यार से सहलाया.. चाची की चुत तड़प में गीली हो गई थी.. मैंने पहले चाची की चुत में अपनी एक उंगली डाली, वो चाची की चुत में काफी आराम से आ जा रही थी.. तब मैंने दो दो उंगलियाँ एक साथ घुसाना शुरू किया. तब चाची को मजा आने लगा.. चाची हल्की हल्की आवाज़ निकलने लगी..

चाची की आवाज़ सुन के मैं और तेज़ी से उनकी चुत फाड़ने लगा.. चाची की चुत एकदम गीली हो गई थी.. सो मैंने सोचा अब बुर रसपान कर लिया जाए.. और चाची की बुर में अपना मुँह रख दिया… बूंद बूंद चाट लिया… इतनी स्वादिष्ट रस मैंने आज तक नहीं पिया था.. चाची चुत उठा उठा के मुझे चुत का रस पिला रही थी.. मैं चुत का रस ऐसे चूस रहा था जैसे कोई निम्बू से रस चूसता है.. मुझे सब कुछ सपना लग रहा था.. मैंने चाची की बूर का इतना रसपान किया चाची ने ख़ुद से मना किया..

चाची- अरे बस भी कर कितना प्यासा है.. क्या मुझे मार ही डालेगा..
मैं- चाची आपका चुत-रस इतनी प्यारा है कि मैं हमेशा आपका रस चूसता रहूँ।
चाची- तूने तो मुझे धन्य कर दिया रे.. आजतक ऐसा रसपान ज़िन्दगी में किसी ने नहीं किया.. चल अब आ मैं तेरी सेवा कर दूँ..

मै- क्या करोगी चाची?
चाची- आ मैं तेरी लंड की प्यास बुझा दूँ.. तू भी चाहता है न कि मैं तेरा लंड अपने मुँह में लूँ?
मैं- चाची मैं तो रोज़ रात को सपने में अपना लंड आपके मुँह में देता हूँ.. मुझे तो वि्श्वास नहीं हो रहा है कि.. आप इसे मुँह में लोगी।

फिर चाची ने मेरी लंड को अपने हाथ में लिया.. मेरा लंड गरम होकर इतना कड़ा हो गया था कि चाची ने उसे छूते ही अपने मुँह में ले लिया.. आज मेरे लंड को अपनी मंजिल मिल गई थी। चाची मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चाट रही थी.. चाची के चाटने के अंदाज़ से लग रहा था कि चाची तो लंड की शौकीन हैं।

चाची लंड मुँह से निकाल के उसे अपनी चूची से सटाने लगी… लंड से चाची की चूची को छू के इतना प्यारा लगा कि मैं बयान नहीं कर सकता.. मेरा लंड बस अब चाची की चुत का प्यासा था.. फिर चाची ख़ुद ही लेट के लंड को अपनी चुत से सटाने लगी.. तब मुझे लगा कि अब समय आ गया है.. चाची भी चुदना चाहती है…

मैं- चाची अब मैं आपको चोद लूँ?
चाची- हाँ अमित आ अब अपनी चाची की चुत को चोद डाल..! पूरी जान लगा के चोदना..! बहुत दिन से प्यासी है तेरी चाची की ये चुत.. आज इसकी प्यास बुझा दे मेरे लाल…!

मैं चाची को नीचे लिटा के उनके ऊपर आ गया.. चाची की चुत पे अपनी लंड को रखा और उसे चुत पे रगड़ने लगा। चाची से रहा नहीं जा रहा था.. चाची ने चुत उठा के गली दी की मादरचोद अब चोद भी.. कितना इन्तज़ार कराएगा..
फिर मैंने चाची की चुत में अपना लंड घुसाना सुरु किया.. एक ही बार में मेरा लंड आधा चाची की चुत में चला गया… फिर मैंने दूसरी बार जब ज़ोर लगाया तब मेरा पूरा लंड चाची की चुत में.. मुझे ऐसा लग रहा की चाची की चुत स्वर्ग हो.. मेरा लंड तो फुला नहीं समां रहा था..

मैंने चाची की चुत में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरु किया.. चाची काफी ज्यादा आवाज़ कर रही थी.. चोद डाल.. चोद मेरे ला..चोद दे अपनी चाची को.. चाची जैसे जैसे बोले रही थी.. मैं और भी ज़ोर ज़ोर से चाची को चोद रहा था..

फिर मैंने चाची घुमने की लिए बोला.. और चाची के पीछे से उनकी चुचियों को दबाते हुए.. लंड को फिर से चाची की चुत में डाल दी.. चाची मजा ले ले के चुदवा रही थी.. फिर मैंने चाची को कुतिया बन्ने को कहा.. और चाची के पीछे जाकर.. चाची की चुत की खूब पूजा की.. आज मेरा लंड काफी साथ दे रहा था.. चाची एक बार पुरी तरह से स्खलित हो चुकी थीं.. उसके बाद मेरा लंड फच फच की आवाज़ के साथ चाची की चुत फाड़ने लगा.. अब मेरा लंड भी अपनी पानी उगलने वाला था..

मैं- चाची मेरा लंड पानी निकलने को तैयार है..
चाची- निकाल दे बेटे चाची की चुत में ही निकाल दे.. चुत को काफी दिनों से नहीं मिली है लंड का रस..

मैंने पूरा का पूरा पानी चाची की चुत में डाल दिया.. चाची ने ज़ोर से मुझे गले लगा लिया और मुझे प्यार से चूमने लगी..
चाची- कैसा लगा बेटा चाची को चोद के.. मजा आया न तुझे..?
मैं- चाची मेरे ज़िन्दगी बन गई आज… आज से आप जैसा बोलोगी.. मैं वैसा ही करूंगा… आप मेरी चाची हो.. मेरी दुनिया हो… मेरी लव हो..! चाची, मैं आपको रोज़ चोदूंगा.. चुदवाओगी न चाची.. बोलो न…!
चाची- हाँ मेरे लाल मैं तेरे से रोज़ चुदवाऊँगी.. चल अब जा अपने कमरे में! नहीं तो कोई पकड़ लेगा…
फिर अनीता चाची को मैं रोज़ चोदने लगा!

पाठको! यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो मुझे ज़रूर मेल कीजिये, तब मैं आपको आगे की कहानी बताऊँगा.. अभी मेरी हेमा चाची..और माँ की कहानी बाकी है… Antarvasna

Antarvasna

हाय रीडर्स

ये मेरी पहली कहानी है।

बात उन दिनों कि है जब मोम, डैड कहीं बाहर गये हुए Antarvasna थे और मैं घर पे अकेला बोर हो रहा था, अचानक मन में आया और मैने कोई नम्बर घुमाना शुरु किया के शायद कोई लड़की भी होगी जो मेरी तरह बोर हो रही होगी, बहुत नम्बर मिलाने के बाद एक नम्बर मिल ही गया। मैने कहा-क्या मैं पायल से बात कर सकता हूँ, तो आवाज़ आयी – यहां कोई पायल नहीं है, तो मैने कहा आप कौन तो उसने अपना नाम सीमा बताया। मैने कहा अगर आप बुरा न माने तो हम कुछ देर बात कर सकते हैं? तो वो मान गयी।

अब हम हर दिन बात करने लगे, धीरे धीरे मैने उसके बारे में बहुत कुछ जान लिया, उसे भी सेक्स करने का उतना ही शौक था जितना मुझे। मैने उससे पूछा कि हम कब मिल सकते हैं तो उसका जवाब था जब आप चाहो।

१ दिन मिलने के लिये टाइम भी फ़िक्स हो गया जब हमारा सामना हुआ तो स्टोरी बदल चुकी थी, वो मेरे दोस्त की बहन थी और उसने अपने बारे में जो भी बताया सब गलत था, मैने उसे कहा क्या इरादा है अगर तुम मेरे साथ नहीं चलोगी तो मैने तुम्हारी सब बातें जो मोबाइल में रिकोर्ड की हैं तुम्हारे भाई को सुना दूंगा, वो डर गयी और मेरे साथ चलने के लिए मान गयी।

उसे लेकर मैं एक होटल में गया और हम रूम में पहुँच गये।

रूम में जाते ही मैने उसे अपनी बाहों में भर लिया, मैं मौका गवाँना नहीं चाहता था।

मैने उसकी चूची दबानी शुरु कर दिये, उसे दर्द होने लगा और वो ऊऊउह की आवाज़ करने लगी मैने उसकी चूचियां उसकी ब्रा से आज़ाद कर दी और उसकी चूचियां चूसने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा, मैने धीरे धीरे अपना एक हाथ उसकि सलवार में डाल दिया और उसके चूतड़ सहलाने लगा। वो मज़ा लेने लगी थी।

अब मैने अपना हाथ उसकी बुर पर फ़ेरना शुरु किया, वो मदहोश होने लगी, उसकी आंखें बंद होने लगी, मैने उसे बेड पे लिटा दिया और उसकी सलवार और पैंटी अलग कर दी। अब वो मेरे सामने एक दम नंगी लेटी हुई थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था, उसकी चूत गीली हो चुकी थी।

मैने उसकी टांगे उठाई और चोदना शुरु कर दिया वाह उसकी सील भी बंद थी जो और मज़े की बात थी।

जैसे ही मेरा ७ इंच का लंड उसके अंदर गया वो कराह उठी लेकिन ये मज़े की कराहट थी। अब २-३ बार धक्का देने के बाद उसकी सील टूट गयी अब चुदाई जोरों पे थी। वो आहह कर रही थी और मज़ा भी ले रही थी हम दोनो चुदाई का आनंद ले रहे थे।

उस दिन हमने २ बार चुदाई का मज़ा लिया और इसके बाद हमें जब भी मौका मिलता हम ये खेल खेलते थे और आज भी खेलते हैं। Antarvasna

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