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Massage Girl in Nashik: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Nashik who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Nashik that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Nashik massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Nashik who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Nashik massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Nashik massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Nashik who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Nashik employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Nashik helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Nashik

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Nashik at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

फिर मैं बोला- मुझे पापा और आपकी चुदाई देखनी है.
मौसी- चलो, अब जब तुम्हारे घर आऊंगी तो तुम्हें फोन कर दूंगी. तुम भी घर आ जाना. फिर हम साथ में चुदाई करेंगे.
मैं बोला- साथ में कैसे?
मौसी- अब मैं, तुम और तुम्हारे पापा थ्रीसम करेंगे! वो मैं सब जुगाड़ कर लूंगी.

अब आगे खेत चुदाई देसी मौसी की:

लगभग 2 महीने बाद मौसी का फोन आया- घर आ जाओ, मैं भी जा रही हूं तुम्हारे घर!

तो मेरे मन में खुशी के लड्डू फिर फूटने लग गए.
मैंने दूसरे दिन कपड़े पैक किये और घर के लिए निकल पड़ा..

मैं ट्रेन से स्टेशन पर उतरने बाद मेडिकल स्टोर पर गया.
वहां से सक्स की टेबलेट ली मैंने!

उसके बाद मैं घर पहुंचा तो देखा कि मौसी नहीं दिख रही है.
मुझे बहुत गुस्सा आया. मुझे लगा कि मौसी ने मुझे धोखा दे दिया.

फिर मैंने अपनी मम्मी से घर का और सबका हाल चाल पूछा.
तो मम्मी सब कुछ ठीक बताया.

उसके बाद मैंने पूछा- पापा कहां हैं?
मम्मी बोली- तेरे पापा खेत में गए हैं. और मौसी भी उनके साथ गई है.

यह सुन कर मुझे खुशी हुई और मैंने मम्मी से पूछा- मौसी भी आई है?
मम्मी बोली- हां, अभी सुबह-सुबह ही आई है.

मैंने पूछा- अच्छा कुछ काम था क्या?
तो मम्मी बोली- नहीं , ऐसे ही मिलने घूमने आई है.

उसके बाद हमने खाना खाया और आराम करने लगे.

कुछ देर बाद कुछ देर बाद मौसी घर आई.
वे मुझे देखकर बहुत खुश लग रही थी.

मैंने भी मौसी को आंख मार दी.
तो उसने भी एक आंख मारी.

उसके बाद मैं उठा और पीछे वाले बाथरूम में पेशाब करके आया.

धीरे-धीरे शाम होने लगी.
मेरे दिमाग में एक बड़ी टेंशन थी कि मैं पापा के सामने मौसी कैसे चोदूंगा.

धीरे-धीरे शाम हो गई.
मौसी और मम्मी ने खाना बनाया, सब लोगों ने खाना खाया.

उसके बाद मैं छत पर चला गया सोने!
और मम्मी नीचे कमरे में सोने चली गई.
पापा चले गए खेत में!

तो मैं सोच रहा था कि मैं कैसे बात करूं मौसी से कि कब और कैसी है चुदाई करनी है.
मैं बहुत टेंशन में था.

उसके बाद मेरे फोन में फोन पापा का फोन आया- तुम्हारी मौसी कहां है?
मैं बोला- मैं छत पर हूं, सो रहा हूं. मुझे नहीं पता!
पापा बोले- ठीक है!

उसके बाद आधे घंटे बाद मौसी छत पर आई और बोली- सो गए क्या?
मैं – नहीं तो!
मौसी- नींद नहीं आ रही है क्या?
मैं- नींद कैसे आएगी? चूत जो चाहिए तुम्हारी!
इतना बोल कर मैं हंस पड़ा.

मैं- पापा का फोन आया था, आपको पूछ रहे थे वे!
मौसी- तो उनका भी लंड खड़ा होगा ना मुझे चोदने को!

मैं- यह बताओ पापा के सामने मैं आपको कैसे चोदूंगा? कोई जुगाड़ कर रखा है क्या?
तो मौसी बोली- अभी मैं कुछ देर बाद में तुम्हें मिस कॉल कर दूंगी. तो तब तुम खेत में आ जाना! तो तुम हम लोगों को देखकर ऐसे व्यवहार करना कि पापा को लगे कि ये क्या … बेटे ने काण्ड करते देख लिया. बाकी मैं सब कुछ संभाल लूंगी.

मैं- ओके!

उसके बाद मैं लेट गया और मौसी चली गई नीचे!

फिर लगभग 45 मिनट बाद फोन आया मेरे पास पापा के फोन से!
पर साथ ही फोन कट गया.
इस मिस काल से मुझे सिग्नल मिल गया कि मौसी मुझे बुला रही है.

फिर मैं चुपके से नीचे उतरा और जो गोली लाया था, एक गोली तुरंत खा ली और खेत चुदाई के चला गया.

वहां बाहर से ही देखा कि कमरे में मौसी और पापा चोदम चोद में लगे हुए हैं. मौसी नीचे लेटी हुई थी और पापा उनके ऊपर चढ़कर चुदाई कर रहे थे.

मौसी धीरे धीरे ‘आह आह … आह आह आह’ चिल्ला रही थी.

उसके बाद मैं वहीं बैठ गया देखने के लिए कि ये लोग कैसे चुदाई करते हैं.

कुछ देर बाद पापा नीचे आ गए और मौसी के बाल पकड़कर अपना लंड मौसी के मुंह में डाल दिया.

मौसी चूसने लगी जैसे लॉलीपॉप चूसते हैं.

उसके बाद मैं उनके समीप तक जा पहुंचा.

पापा ने मुझे देख लिया तो जल्दी से उन्होंने अपने ऊपर कपड़ा डाल लिया.
लेकिन मौसी ने अपना साड़ी ठीक नहीं की.

पापा उनको बोले- अरे, साड़ी पहनो ना!
उसके बाद मैं बोलने लगा- यह क्या चल रहा है आपका खेल?
पापा बोले- कुछ नहीं बेटा … कुछ नहीं!

तब मौसी बोली- आओ तुम भी आ जाओ!
मैं- आप तो मेरी मौसी हो तो कैसे?

मौसी बोली- ज्यादा नाटक मत करो, मैंने सब बात बता दी है तुम्हारे पापा को पहले ही!
पापा- हाँ बेटा, ये तेरी मौसी तो बहुत गर्म है! आओ बेटा आओ … मेरे बस की बात नहीं है तुम्हारी मौसी को ठंडा कर पाना! इसने जब से तुम्हारे लंड को देखा है, तुमसे चुदाने का मन बना लिया है. खुद बोल रही थी.

मैं- अरे पापा, इनको तो मैं कई बार चोद चुका हूं पहले ही!
पापा- ओह यह तो पूरी रंडी निकली!
मैं- हाँ!

मौसी- हाँ मैं रण्डी हूं. मुझे तुम दोनों से चुदना है एक साथ!

मैं- हाँ पापा, यह इसी का प्लान था कि हम दोनों इनकी चुदाई खेत में करें. दो लंड एक साथ डालेंगे चूत और गांड में! और खूब चोदना है.
पापा- फिर जल्दी आओ!

उसके बाद मैंने अपनी अंडरवियर उतारा और अपना लंड उनके पास लेकर चला गया.

पापा- इतना बड़ा लंड?
मेरे पापा का मुंह खुला का खुला ही रह गया.

मैंने मज़ा लेने के लिए अपना लंड पापा के मुंह के पास लगा दिया.

पापा- अबे मादरचोद … मेरे मुंह में डालेगा क्या?
मैं- आपकी इच्छा है … चूसना हो तो चूस सकते हैं आप!
फिर मैं हंस दिया.

मेरे साथ साथ मौसी भी बहुत तेज हंसी.

पापा को गुस्सा आ गया कि हम उनका मज़ा ले रहे हैं.
उसके बाद मैं बोला- काम डाउन पापा!

फिर पापा शान्त हुए और मैंने अपणा लंड मौसी के मुंह में दे दिया.
मौसी उसे चूसने लगी.

और पापा ने अपना लंड मौसी की चूत में डाल दिया, वे चुदाई करने लगे.

मौसी ‘आह आह आह’ कर रही थी, पर कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि उनके मुंह में मेरा 7 इंच का लन्ड था.

उसके बाद मैंने अपना लंड निकाला और पापा को बोला- पापा, आप अपना लंड मौसी की चूत से निकालकर उनके मुंह में डालो.

पापा ने अपना लंड मौसी के मुंह में डाल दिया और मैं अपना लंड उसकी चूत में डाल कर मौसी की चूत चुदाई करने लगा.

कुछ मिनट के बाद पापा तो झड़ गए लेकिन मैं तो झड़ नहीं रहा था.

तो पापा बोले- तुम्हारा स्टैमिना तो बहत ज्यादा है!

मैंने जेब से एक गोली निकाली और पापा को दे दी.
पापा ने तुरंत वह गोली खा ली.

उसके बाद पापा ने अपना लंड मौसी के मुंह में दे दिया और मैं उनको कुतिया की पोजीशन में करके उनके नीचे लेट गया और अपना लंड मौसी की चूत में डालने लगा.

उसके बाद आधा लंड उनकी चूत में डाल दिया और चुदाई करने लगा.

धीरे धीरे पापा का लंड फिर से खड़ा हुआ.
तो पापा ने अपना लंड मौसी की गांड में डाल दिया.

और मौसी चीख उठी- उह … हाह फाड़ दी मेरी गांड!
मौसी खूब सीत्कार करने लगी.

उसके बाद बारी बारी से, कभी एक साथ दो लंड चूत में, कभी एक लंड गान्ड में एक लंड मुंह में, और कभी एक लंड चूत में एक लंड मुंह में!

हम बाप बेटा मेरी मौसी को चोदते रहे.
काफी देर के बाद हम दोनों झड़ गए.

पापा ने मौसी की गांड में और मैंने मौसी की चूत में रस छोड़ा.

उसके बाद उस रात में मैंने और पापा ने मौसी की गान्ड और चूत और मुंह को खूब चोदा.

मौसी बोली- आज से एक अरसे के बाद मैं पूरी संतुष्ट हुई हूं.

उसके बाद 3 दिन मौसी हमारे घर में रही और हम दोनों ने उसकी बहुत चुदाई की,

तीसरे दिन जब चोद रहे थे रात में पापा और मैं … तो मुझे ऐसा लगा कि कोई हमें देख रहा है.
बाद में मुझे हल्का सा दिखा कि वह मेरे चाचा का लड़का था.

लेकिन मैंने कुछ रिएक्ट नहीं किया क्योंकि वह भी बड़ा हो गया, उसका भी लंड खड़ा होता होगा. इसलिए मैंने सोचा कि देख लेने ड़ो उसको भी हमारी चुदाई को!

वह भी कुछ नहीं बोला.

उसके बाद मैं 3 बजे रात उठ कर जब वहाँ से निकला तो देखा कि चाचा का लड़का रोहित अभी भी वहीं था.
तो मैंने उसको अपने पास बुलाया और साथ साथ चलने लगे.

वह रास्ते में बोला- मुझको भी चोदना है तेरी मौसी को!
मैंने उसे कहा- ठीक है, पर मैं पहले मौसी को इसके लिए राजी तो कर लूं. फिर तुझे बताऊंगा

Antarvasna

हाय! अंतरवासना के प्यारे दोस्तो

मैं सर्मिला राजेश पटना बिहार से एक सेक्सी स्टोरी लेकर फिर Antarvasna आया हूं। सबसे पहले सभी आंटियों, भाभियों और लड़कियों को मेरा नमस्कार।

अपनी आपबीती कहानी पर आता हुं मेरी उमर २८ साल है और मेरी एक मौसी ३३ साल की थीं। मैं अपनी मामी के घर उनके बच्चे के बर्थडे में गया था।

रात में सभी पार्टी इंजोय कर एक कमरे में बैठ कर बाते कर रहे थे मुझे कुछ कुछ नींद आ रहे थी। लॅडीज़ बहुत ही गरम गरम बातें करते हुए बहुत ज़ोर ज़ोर से हंस रहीं थीं।

थोड़ी देर तक तो मैने सहन किया उसके बाद मैने कहा कि आप लोग दूसरे कमरे मैं चले जायें तो उन्होंने कहा कि तुम ऊपर वाले कमरे में जाकर सो जाओ और साथ मैं मौसी से भी कहा कि तुम भी जाकर सो जाओ।

हम दोनो ऊपर वाले कमरे में गये तो देखा कि वहां पर कई बच्चे और कज़िन सो रहे थे। हम दोनो एक किनारे लेट गये और सोने की कोशिश करने लगे पर मुझे अब नींद नही आ रही थी मौसी के बड़े बड़े बूब्स को ही देख रहा था थोड़ी देर बाद उन्होंने उठकर लाइट ऑफ कर दी।

लगभग आधे घंटे तक कुछ नहीं हुआ फिर मैने कुछ हिम्मत जुटाकर मौसी के कमर पर हाथ रख दिया उन्होंने कुछ नहीं कहा!

थोड़ी देर बाद मैने अपना हाथ उनकी बूब्स के ऊपर रख दिया इस पर वो थोड़ा हिली पर उन्होंने हाथ हटाने की कोशिश नहीं की मैने हाथ को वहीं थोड़ी देर रख कर रिअक्शन जानना चाहा जब वो कुछ नहीं बोली तो मैने बूब्स को थोड़ा प्रेस किया तो वो बोली ये तुमने कहाँ से सीखा?
मैने कोई जवाब नहीं दिया।

मैं धीरे रे उनके कुर्ते को उठाने लगा उन्होने कोई विरोध नहीं किया मैं उनके ब्रा के उपर से ही उनके बड़े बड़े चूचियों को दबाने लगा फिर मैने उनकी ब्रा को आगे ककी तरफ़ से उनकी चूचियों के ऊपर कर दिया उनके काले काले और बड़े निप्पल मुझे आउट ओफ़ कन्ट्रोल कर रहे थे मेरा लंड एकदम स्टील रोड हो चुका था।

मौसी ने मेरी पैंट में हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया। कमरे में दिनभर के सब थके हुए सो रहे थे इस लिये कोई प्रोब्लम नहीं थी

धीरे धीरे मौसी ने मेरा लंड सहलाना शुरु कर दिया और मैंने उनके बुर में उंगलियां डाल कर अंदर बाहर करने लगा वो आआआ आआआ आआअह्हह्हह्ह ह्हह्हाआआअ ओह येस्सस् ह्हह् ह्हह्ह होफ़्फ़फ़् फ़फ़्फ़ फ़फ़्फ़फ़् फ़फ़्फ़फ़् फ़फ़ वोव्वव्व कर रहीं थीं मैं भी जोश में था वो थोड़ी देर मै झड़ गईं और मै भी शान्त हो कर हम दोनो चिपक कर सो गये।

अगले दिन हम दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्करा दिये। दिन में मामी किसी काम से मार्केट चले गये तो मैने बिना समय गंवाये उनके बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा और उनके कपड़े उतारने लगा अब वो बिलकुल मेरे सामने नंगी खड़ी थीं मैने उन्हें किस किया और उठा कर बेडरूम में ले गया और अपना लंद जो स्टील के रोड की तरह हो गया था उनकी बुर जो कि बिलकुल ही गीली हो गयी थी बुर के मुँह पर रख कर एक झटका दिया

वाव क्या टाइट चूत थी मेरे लंड में थोड़ा दर्द होने लगा था मैने उसके बुर को उंगली से फ़ैलाया और एक और झटका दिया मेरा आधा लंड उनके बुर में घुस गया था बुर टाइट होने के वजह से बुर की झिल्ली फट गई और वो बहुत जोर से चीखी ओह माआआआ ऊऊऊह्ह हह्हह्हह हह्ह्हह्ह गोड प्लीज़ डू इट स्लोवली ओह्हह्ह ह्हह्हह्हह दिस इस हर्टिंग मी । दर्द कर रहा है प्लीज़ निकाल लो अपना लंड…

पर मैने उनके एक भी नहीं सुनी और एक जोर का झटका और दिया मेरा पुरा लंड उनके बुर में घुस गया था । अब मै थोड़ी देर रुका और उनके बूब्स को मुँह में ले कर चूसने लगा इससे उनका दर्द कुछ कम हुआ और वो अपनी गांड को उठा कर लंड को और अंदर लेने की कोशिश करने लगी मै उनके इशारे को समझ एक जोरदार धक्का मारा

अब वो आआआआअ ह्हहह्ह ह्हहह्हवोव्व व्वव्वव्व व्वव्वव व्वव ह्हह्हह्हह ह्हह्हह्ह ह्हह् हह्हह् हह्हह्हह्हह कर रहीं थीं कुछ देर के बाद वो बोली मै झड़ रही हूँ ऊऊऊओ ह्हह्हह ह्हहहह्ह ह्ह्हह्हा आआआआआ आआआआ आआसोमीईईईइन ग्गगगग्गग्गग ग्गगग्गग्गग ओह येस्सस्सस्सस्स स्सस्स्सस ससस्सस्स सस्सस्सस्सस और उन्होंने अपना पुरा पानी बाहर उड़ेल दिया.

मैने भी अपने धक्के तेज कर दिये और कुछ ही मिनटो में मेरा पुरा वीर्य उनके बुर में गिर गया वोव कितना मजा आया था।

मामी के आने का टाइम हो गया था हम दोनो ने उठ कर जल्दी से कपड़े पहने और रूम के बाहर आ गये। रात में हमने मौका निकाल कर फिर चुदाई की। उसके बाद जब कभी भी हमें मौका मिलता हम चुदाई कर लेते।

कुछ दिनों बाद सबलोग अपने अपने घर चले गये, पर अभी जब वो घर आती हैं तो मौका देखकर मै उनके बूब्स को दबा देता हूं और अगर चान्स मिला तो चुदाई भी कर लेते हैं Antarvasna

(Sapno Ki Baraat) Hindi sex stories

कोई चार साल के बाद मैं नीरू Hindi sex stories , अपने मायके दिल्ली आई थी और अपने छोटे भाई के यहाँ ठहरी थी जो बाहर काम करता था

और मेरे आने का सुन कर वो मुझ से मिलने आया हुआ था। रोज़ ही किसी ना किसी के यहाँ दावत होती थी।

उस रोज़ मेरे बड़े भईया ने खाने पर बुलाया था तो मैं सुबह ही अपने छोटे भाई के साथ उनके घर चली गई। हम सब लोग बातें कर रहे थे कि मेरे छोटे भाई ने भाभी से कहा- भाभी, आप नीरू को भईया से घर भिजवा देना क्योंकि मैं आज दोपहर की गाड़ी से वापस जा रहा हूँ।

हम लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने बताया कि उसे और छुट्टी नहीं मिल सकती।

शाम के 7 बजे होंगे, सर्दियों की रात थी हम सब बातें कर रहे थे कि उसी समय कॉल बेल बजी तो भईया ने जा कर देखा और उनकी आवाज़ आई- आहा आईये ! यार अचानक ही, इस समय कौन सी गाड़ी आती है कब आये?

मैंने और भाभी ने देखा तो रवि भाई थे जो मेरे चचेरे भाई थे।
वो अन्दर आये और मुझे देखते ही हैरत से बोले- अरे वाह नीरू तुम ! कब आई?

और मुझे गले लगा कर मेरी पेशानी चूमते हुए शिकायत से बोले- यार, फोन ही कर देते नीरू के आने के बारे में !

तो भईया शरमिन्दा होकर बोले- हां मैं सोच ही रहा था।

हम सब बैठे तो भाभी ने रवि भाई से पूछा- आपका सामान?

तो मुस्कुरा दिये- सामान होटल में है, मैं यहाँ एक कॉनफ़ेरेन्स में आया हूँ, सोचा आज तुम लोगों से मिल लूं और नीरू को देख कर तो मज़ा आ गया।

तो मैं शरमा कर हंस दी।

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सबने उनसे शिकायत कि यहाँ ही आ जाओ, पर वो ना माने। थोड़ी देर बाद भाभी ने खाना लगाया और इस बीच वो मुझ से बातें करते रहे। उनको देख कर मेरी अजीब सी हालत हो रही थी, रवि भाई

बिल्कुल नहीं बदले थे इन चार सालों में। वही मुस्कुराता चेहरा, वही प्यारी प्यारी दिल मोह लेने वाली बातें।

सारी पुरानी बातें याद आ रही थी, मैं पता नहीं कब उनको दिल दे बैठी थी और दिल ही दिल में उनको अपना मान लिया था। लेकिन कभी अपने दिल की बात उनसे कहने की हिम्मत ही ना हुई, लड़की

जो थी। बहुत रातें खराब की थी उन्होंने मेरी, रात-रात भर करवटें बदलती थी। आंखें बन्द करती तो उनका चेहरा सामने आ जाता। फिर तो मन ही मन उनके प्यार मैं इतना पागल हुई कि उन्हें अपने पति के रूप में देखने लगी।

एक बार तो मेरी बुरी हालत हो गई उस रोज़ एक शादी से हो कर आये और मैं सोने के लिये लेटी तो फिर रवि का चेहरा मेरी आंखो में था। वो दुल्हा बने खड़े हैं और मैं दुलहन के रूप में हूँ सब घर वालों ने हमें अपने कमरे मैं भेज दिया और रवि भाई ने दरवाजा बन्द कर लिया और फिर वो मेरे पास आकर बैठे और मेरा शर्म से लाल चेहरा उठा कर बोले- आज रात भी शर्म आ रही है?

मैंने नज़र उठा कर उन्हें देखा तो उन्होने अपनी बाहें फैला दी और मैं उनकी बाहों मैं जा कर सिमट गई। मेरा चेहरा अपने हाथों में लेकर उन्होने अपने तपते हुए होंठ एक एक करके मेरी पेशानी, आंखें और फिर मेरे सुलगते हुए होठों पर रख दिये तो जैसे मेरी जान ही निकल गई और मैं उनसे लिपट गई।
फिर तो जैसे तूफ़ान आ गया, पता ही ना चला के हमारे कपड़े कब हमारे जिस्मों से अलग हो गये और वो मेरे जिस्म से खेलने लगे थे। कभी वो मेरे गुलाबी गालों पर प्यार करते तो कभी होंठ चूमते तो कभी उनकी गरम ज़बान मेरे होठों पर मचल जाती, कभी वो मेरे दूध दबाते तो कभी उन पर प्यार करते। फिर उनकी जबान मेरे होंठो से होती हुई मुंह के अन्दर चली गई थी।

हम दोनो लिपट गये और मेरी हल्की सी चीख निकल गई, उन्होंने मेरे दोनों दूध थाम लिये थे और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे।

मैं सिसक उठी- आह प्लीज, धीरे धीरे करिये ना…।

‘उफ़ उफ़ आह! आह नीरू, मेरी जान कब से तड़प रहा हूँ इस गरम गरम रेशमी जिस्म के लिये। कितनी प्यारी हो तुम आह’

तो मैं भी सिसक उठी- सच्ची बहुत तड़पाया है आपने, ऊउइ आह !

‘क्या हुआ जान। वो मुस्कुराते हुए बोले, तो मेरी शरम से बुरी हालत हो गई।

‘कुछ नहीं, मैं धीरे से बोली; उनका गरम गरम सख्त सा वो … लण्ड मेरी चिकनी रानो मैं मचल रहा था मेरी रानों में जैसे चींटियां दौड़ रही थी।

‘बताओ ना जान अब क्योंकि शरमा रही हो? उन्होने मेरा होंठ धीरे से काट लिया।

‘ऐ ए ऊ न ह नहीं ना क्या कर रहे हैं आप? मैं कसमसाई तो वो होंठ चूस कर धीरे से बोले- कैसा लग रहा है जान?

तो मैंने शरमा करा उनका चेहरा अपने दूधों पर रख लिया तो वो फिर सटने लगे और मेरी एक चूंची मुह मे लेकर चूसी तो मैं बिलख उठी

‘आह शाम ! उफ़ ! आह ! यह कैसा मज़ा है आह सच्ची मर जाऊंगी मैं।’ नीरू मेरी जान मेरी गुड़िया पैर खोलो ना अब।

‘उफ़ आह रवि मेरे प्यार, मुझे बहुत डर लग रहा है मैं क्या करूं, अई मा धीरे ना उफ़ उफ़ आह।’

वो मेरे दूध ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे।

‘पगली डरने की क्या बात है?’ और मेरे ऊपर से उतर कर मेरी बगल मैं लेट कर फिर मेरे होंठ चूम कर मुस्कुराये।

‘लाओ मैं तुम्हारा परिचय इन मस्त चीजों से करा दूँ, फिर डर नहीं लगेगा।’

और मेरा हाथ थाम कर एकदम से अपने गरम गरम लण्ड पर रखा तो मैं तड़प गई और वो मेरे दोनों दूध में मुंह घुसा कर मचले ‘आह आहम निक्को मेरी जान। उफ़, आह रवि आह आह’

और उनका गरम लण्ड अब मेरे हाथ में था, मेरा हाथ पसीने से भीग गया और तभी मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख रोकी, उनका हाथ अब मेरी रानों के बीच मेरी चूत सहला रहा था जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

‘ऊ औ उइ, ऊओफ, आअनह ना ना नहीं’ और मेरे पैर खुद बा खुद फ़ैलते चले गये और उनके लण्ड को अब मैं ज़ोर ज़ोर से हिला रही थी।

‘आह मेरी निको मेरी जान मेरे प्यार, उफ़ कितनी प्यारी है इतनी चिकनी अह कितनी नरम और गरम है ये।

मैंने उनके होंठ चूम लिये और अपनी गरम जबान उनके होठों पर फ़ेरते हुए सिसकी।

‘क्या रवि,

‘यह मेरी जान ये…, वो मेरी चूत दबा कर और मेरे होंठ चूम कर सिसक उठे तो मैं ठुमकी।

‘बताओ ना क्या – तो मेरे होंठ चूस कर मेरी आंखों में देख कर मुस्कुराये।

‘तुम्हें नहीं मालूम इसका नाम?’

तो मैं शरमा कर ना में मुसकुराई- ऊन हूँह।

‘अच्छा तो इसका नाम तो मालूम होगा जो आपके हाथ में है? तो मैं शरमा कर धीरे से लण्ड दबा कर हंस दी,”हट गन्दे।’

मेरे दूध चूसते हुए एकदम से काट लिया तो मैं मचल उठी,”ऊउइ नहीं ना।’

और उनका चेहरा उपर किया तो बोले- पहले नाम बताओ, नहीं तो और सताऊंगा।

‘मुझे नहीं मालूम, बहुत गन्दे हैं आप।’

‘अच्छा एक बात बताओ, ये क्या, कैसा है ?’

मैं अनजान बन कर मुसकुराई- क्या?

तो मेरे होंठो पर ज़ोर से प्यार करके बोले- वो जिससे आप इतने मज़े से खेल रही हैं।

तो मेरी नजरें शरम से झुक गई और धीरे से उनका लण्ड दबा कर बोली- ये?

‘हाँ मेरी भोली सी गुड़िया इसी का तो पूछ रहा हूँ।’

तो मैं हंस दी, और शरमा कर बोली- बहुत प्यारा सा है।’

‘बिना देखे ही कह दिया प्यारा है।’ तो उनके सीने मैं मुंह छुपा कर मैं धीरे से बोली ‘आपने दिखाया ही नहीं तो फिर।’

‘देखोगी जान।’ तो मैं उनसे लिपट गई और अपने आप को ना रोक सकी।

‘कब से तरस रही हूँ सच्ची’। और वो एकदम से मुझसे लिपट गये उनकी पूरी जबान मेरे मुंह के अन्दर थी इतनी जोशीली इतनी गरम कि मैं पागल हो उठी। मेरे दोनो दूध दबा कर लाल कर दिये और मेरी चीख उनके मुंह मैं ही घुट गई मैं बुरी तरह तड़प उठी क्योंकि कि उनकी अंगुली एकदम से मेरी चूत मैं घुस पड़ी। मेरी पूरी चूत भीग गई। मेरे चूतड़ और गहराई से लेने के लिये उछलने लगे।

उनके गरम लण्ड के उपर रज की बूंदे आ गई। खूब चिकना हो गया उनका प्यारा सा लण्ड। मैं बेचैन हो कर सिसकी।

‘बस, ऊफ… बस ना प्लीज, दिखा ही दो ना अब, मेरी जान कब से तड़प रही हूँ।

मैंने उनसे अलग होने कि कोशिश कि तो मुझे फिर से लिपटा कर सिसके

‘क्या मेरी जान बताओ ना मुझे।’

‘मेरा, मेरा, उफ़ कैसे नाम लूं मैं मुझे शरम आती हैं रवि।’
‘मेरी जान मेरा ये प्यारा तुम्हे पसंद है ना’
‘हां हां मेरी जान है यह तो, कितना प्यारा है’ मैं लण्ड दबा कर सिसक उठी। – तो बताओ ना अपनी जान का नाम।’

‘मत सताओ ना प्लीज उफ़ आह आह, मत करो ना मर जाऊंगी मैं सच्ची, ऊउइ नहीं इतनी ज़ोर से नही, दुखती है ना’
‘क्या दुखती है मेरी जान।’

हाय रे मां, मैं क्या करूं प्लीज, दिखा दो ना, अब ना तरसओ अपनी निक्को को।’

वो मेरे होंठ चूस कर सिसके – बस एक बार नाम ले दो मेरी जान।’
मेरी शरम से बुरी हालत थी मैं उनके सीने मैं मुंह छुपा कर सिसक उठी – मेरा आह मेरा वाला लण्ड … ऊउइ ऊनह ऊनह आह’

और वो मेरे होठों से झुम गये। और फिर हम दोनो अलग हुए तो वो उठे और मुझे अपने सीने से लगा कर बैठ गये और अब जो मेरी नज़र पड़ी तो मैं देखती रह गई। सावँला, सलोना, तना हुआ लण्ड

मेरी हथेली पर रखा हुआ था। मैं उसे देख रही थी और वो मेरे गोल, भरे भरे और तने हुए दूधों से खेल रहे थे और उनकी अंगुली धीरे धीरे मेरी चूत की दरार मैं उपर नीचे चल रही थी। बहुत मस्ती छाने

लगी थी। खूब तना हुआ उनका 7 इंच लम्बा और खूब ,मोटा गरम लण्ड बहुत हसीन लग रहा था जिसका सुपारा उनकी चिकनी रज से गीला हो रहा था। मेरे होंठो पर होंठ रख मेरी चूत दबा कर वो

सिसके –

‘जान कैसा लगा मेरा।’ तो मैं मस्त हो गई, – ‘बहुत प्यारा है सच्ची, उफ़ कितना बड़ा और मोटा है ये।’

‘खेलो ना इस से’ तो मैं धीरे लण्ड सहलाने लगी और उन्होने चूंची पर होंठ रगड़ कर उस पर जैसे ही जबान फैरी तो उन्होने मेरा चेहरा अपने सीने पर दबा लिया ।

‘आह आअह मेरी जान मेरी निको मेरी उफ़ उफ़ आह कितनी गरम अह चिकनी जबान है अह मज़ा आ गया’ ‘उफ़ मेरी प्यारी सी चूत। ऊम ऊम मेरी जान मेरे रवि खूब ले लो मेरी आह पूरी ले लो आह ऊउइ। किस से खेलूं मेरी जान; मेरी मेरी अहा मेरी च च चूत से ऊफ’और मेरे मुंह में उनकी जबान घुस गई।

हम दोनों मज़े से अब एक दूसरे की जबान और होंठ चूस रहे थे। वो एक हाथ से मेरी चिकनी चूत को और दूसरे हाथ से मेरे दूध दबा रहे थे और मैं उनके तने हुए गरम लण्ड से खेल रही थी जो पूरा उनकी रज से चमक रहा था और यही हाल मेरी चूत का था। मेरी दोनों जांघे पूरी फ़ैली हुई थी और मेरी चूत का रस मेरी चिकनी सुडौल रानों पर मल रहे थे।

काफ़ी देर बाद हम दोनो अलग हुए तो दोनो की बुरी हालत थी। दोनो के चेहरे एक दूसरे के थूक से गीले हो रहे थे। मेरे दूध उनके दबाने से लाल हो रहे थे। फिर उन्होने मुझे लेटा दिया और मेरे उपर आकर मेरी आंखो मैं देख कर बोले – दिल बहुत चाह रहा है जान।’

तो मैं उनके कंधे थाम कर होंठ चबा कर मचली – बहुत हो गया, आ जाओ ना अब।

वो जैसे ही मेरे उपर लेटे तो उनका गरम चिकना लण्ड मेरी छोटी सी चिकनी चूत पर लेट गया और मैं सिसक गई ; ‘सुनिये’

‘हां जान’ वो मेरे होंठ चूस कर बोले, तो मैं होंठ चबा कर शरमा कर सिसकी, आपको कैसी लगी मेरी वो;

तो मेरे दूध सहला कर मुसकुराये – अब भी शरम आ रही है मेरी गुड़िया को’

तो मैं शरमीली नज़रों से उन्हें देख कर मुसकुराई – ‘हूँ।’
मेरी आंखो को चूमते हुए सिसके – ‘बहुत प्यारी है मेरी जान ।
तो मैं मस्ती में सिसकी- क्या रवि, नाम लो ना प्लीज मेरी वो का’

‘मेरी गुड़िया की चूत … आह बहुत प्यारी है सच मेरी जान इतनी चिकनी, नरम, गरम, छोटी सी चूत, जी चाहता है खूब प्यार करूं इसे।’

‘आह, आह, आह, रवि मेरी जान, तो करो ना उसे प्यार और … और। हां बोलो ना जान, रवि, आह मैं प्यार कर लूं इस प्यारे से अह अह लण्ड को’

मेरे होंठ पर फिर से उसने होंठ रख दिये – उफ़ मेरी निक्को पागल कर दोगी, आज तो सच में’

और मेरी जबान चूसने लगे और फिर मुझे करवट से लेटा कर एक दम से घूमे और मेरे चेहरे की तरफ़ पैर करके मेरी चिकनी रानों पर चेहरा रख मेरी चूत पर प्यार कर लिया – आह मेरी निक्को, सच

कितनी हसीन चूत है मेरी रानी की’

‘आह रवि उफ़ अह आराम आराम से, उफ़ ओह अह’ उनका तना हुआ गरम लण्ड मेरे गालों पर मचल रहा था और मैं उनके चिकने लण्ड के आस पास प्यार कर रही थी और अपनी गरम गरम जबान फैर रही थी। उनके लण्ड के आस पास बिलकुल बाल ना थे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरी गरम जबान की चिकनाहट से वो सिसके

“आह आह निक्को मेरी जान खेलो ना मेरे लण्ड से, मेरी जान, उफ़ मेरी नन्हीं सी चूत वाली गुड़िया’

‘ओह आह मज़ा उफ़ आ गया रवि मेरी जान, चाटो ना मेरी गरम चूत।’ मैं ने उनका लण्ड थाम कर उस पर प्यार किया तो मेरे होंठ रज से भीग गये मैं अपने होठों पर चिकनाई मलने लगी और तभी मैं तड़प कर चीख पड़ी – ऊउइ ऊउइ ऊऊम अहा उफ़ शहाआआआम मेरी मेरी आइ माअ उफ़ मेरी चूऊऊत।

उनकी जबान मेरी चूत मैं चल रही थी। वो बुरी तरह से मेरी चूत चूस रहे थे मेरी राने पूरी फैली हुई थी और मेरी चूत से चप चप की आवाज आ रही थी –

आआहम हम प्लीज, आह उफ़ धीरे, मर जाऊंगी मैं, हाय मेरी आह आह चूत उफ़’ – और मुझ से ना रहा गया तो मैं ने एकदम से गरम लण्ड अपने मुंह में ले लिया।

रवि मेरी चूत में चिल्ला पड़े – आअह आआह निक्को निक्कक्को उफ़ आअह उफ़्फ़फ़्फ़ पूरा का पूरा, आह पूरा ले लो मुंह में, ऊम आअह आह मेरी जान मेरी गुलाबी चूत वाली जान उफ़ उफ़ आह।’

गरम लण्ड मेरे मुंह मैं मचल रहा था और उनकी जबान मेरी चूत मैं घुसी जा रही थी। मेरी पूरी चूत और जांघे उनके थूक से भीग रही थी और मेरी चूत लाल हो चुकी थी और रस टपका रही थी। कभी सोचा भी ना था कि लण्ड चूसने और चूत चुसवाने में इतना मज़ा आयेगा।

उनका पूरा लण्ड मेरे थूक से भीग रहा था और उनका लण्ड मेरे गले के अन्दर तक जा रहा था कि वो तड़प उठे – रुक आह रुक रुक जाओ निक्को, रुक रुक जाओ बस’ अब तो मैं ने लण्ड मुंह से निकाला तो वो उठ कर बैठे।

‘क्या हुआ’ मैं ने उन्हें देखा तो अपने लण्ड का सुपारा दबा कर बोले – आह मेरी जान मैं निकल पड़ता और मुझे देख कर मेरे होंठ और गाल को चूसने लगे जो थूक से भीग रहे थे,

‘मेरी जान, मेरी निक्को, दे दो ना अब यह प्यारी सी चूत मेरी गुड़िया।’

मैं उन से लिपट गई- रवि आह मेरी जान और उन्होने मुझे लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गये । मैंने हाथ फैला कर बांहो मैं ले लिया और उनके होंठ चूस कर सिसकी ली,

‘सुनिये। हां मेरी जान धीरे कीजियेगा, बहुत बड़ा है आपका तो’ वो मुसकुराये – क्या बड़ा है मेरी जान।

तो मैं शरमा कर हंस दी।

‘आपका प्यारा सा लण्ड और क्या जान’

‘हूँ, रखो ना उसे अपनी रेशमी चूत पर’

‘मुझे शरम आती है।’

‘प्लीज जान, देखो अभी तो मज़े से खेल रही थी’

तो मैं उनके दोनो हाथ थाम कर अपने दूधों पर रख दिये और सिसकी’

‘दबाईये ना इन्हें’ और हाथ नीचे ले जाकर लण्ड थाम कर अपनी चिकनी मस्त चूत के छेद पर रखा तो जैसे मेरे जिस्म में करण्ट दौड़ गया हो। आह रवि और मैं उसे अपनी चूत की चिकनी और गरम फ़ांक से सटा कर ऊपर नीचे करने लगी: मेरी बुरी हालत थी।

वो मचले – बस बस अब रख लो छेद पर’ और जैसे ही मैं ने छेद पर रखा उनके होंठ मेरे होठों पर आ गये और सिसके – लो मेरी जान तैयार हो ना।

‘आह हां हां मेरी जान आराम से’ और उनकी कमर हिलने लगी तो मैं तड़प उठी

‘ऊऊउइ मा नहीई ऊऊफ ऊऊनह आआअघ उफ़्फ़फ़्फ़फ़ आआह ओह्हह प्लीज ऊओफ रवि्मम नहीइ, हाय नहीं ओह मां उफ़्फ़फ़’

चिकनाई के कारण उनका लण्ड 3 इन्च मेरी चूत मैं घुस पड़ा और मुझे लगा जैसे मेरी चूत मैं गरम गरम लोहा घुस पड़ा हो। मेरी चूत गरमी और चिकनाई से नहा गई और वो भी चिल्ला पड़े –

आआअह नीरू मेरी गरम चूत वाली आअह आअह गुड़िया आह बहुत तंग और अहा अहा गरम चूत है मेरी निक्को जान की’

मैं उनसे लिपट पड़ी

हाये रे रवि, बहुत गरम हो रहा है ये अह आराम से धीरे करो ना, अपनी निक्को का मत रुलाओ प्लीज’ ‘आह मेरी जान’ और उनके चूतड़ फिर हिले तो मेरी जैसे जान निकल गई।

‘अम्मम्मा नहीईइ ऊऊउइ ऊऊमफ मैं सर झटकने लगी। मेरी नज़ुक सी चूत का मुंह फैल गया और गरम लण्ड अन्दर जाने के लिये मचलने लगा।

‘आह निको निक्को मेरी जान बहुत हसीन, उफ़्फ़ कोरी चूत है मेरी रानी की, उफ़ मज़ा आ गया’

वो मेरे गाल और होंठ चूम और चूस रहे थे। इस धक्के ने मेरी बुरी हालत कर दी। दर्द के कारण मेरी आंखो से आंसू बहने लगे और मेरे आंखो को चूम कर वो सिसके – ना रो मेरी जान बस थोड़ी देर की बात है।’

‘नहीं नहीं प्लीज अब नहीं रवि बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी’

मेरा पूरा चेहरा लाल हो रहा था मैं ने उनकी कमर ज़ोर से पकड़ ली तो मेरे होंठ चूस कर सिसके ‘बस थोड़ा सा रह गया है मेरी निको, बस एक बार और।’

‘नहीं रवि नहीं’ मैं ने उनका चेहरा दोनो हाथों मैं लेकर होंठ चूम लिये, मत रुलाओ अपनी निक्को को, तरस खाओ, सच मैं बहुत दर्द है उफ़्फ़ ।’

‘बस मेरी गुड़िया देख, बस दो इंच लण्ड बचा है’

मैंने हाथ अपनी चूत पर लेजा कर लण्ड पकड़ा।

‘आहाह हां देखो मेरी जान बस इतना सा बचा है’

‘नहीं रवि सच मैं, तुम्हारा लण्ड तो बिलकुल सूखा रखा है’

तो मेरे होंठ चूम कर सिसके – एक मिनट जान” और उपर होकर ढेर सा थूक मेरी चूत पर डाला और मेरे होंठ चूम कर बोले – देखो खूब चिकनी हो गई मेरी गुड़िया की नन्ही सी चूत।

‘हाय मैं क्या करूं। बस जल्दी से घुसा डालो दो अब’

और फिर मेरे होठों पर होंठ रख कर ज़ोर का धक्का लगया तो फच से पूरा लण्ड मेरी चूत के अन्दर था। मैं लिपट गई उनसे। उफ़्फ़्फ़ इतना मज़ा; उफ़ इस मज़े मैं रवि से झूम गई और मेरे गोल बड़े

बड़े चूतड़ उनका लण्ड लेने को उछलने लगे और उन्होने मेरे होंठ से होंठ अलग किये और मेरा दूध मुंह मैं ले लिया और दोनो बुरी तरह तड़प रहे थे।

‘हाय रे मज़ा आ गया मेरे रवि और तेज़ करो, अह मुझे क्या हो रहा है उफ़ अह ऐयया आह ऐई मां मेरी च च चूत, बोहोत गरमा गरम लण्ड है और तेज़ करो ना जल्दी जल्दी।’

‘हाय मेरी निक्को उफ़ आह आह तेरी गरम चूत, उफ़ह बहुत तंग आह और गहरी चूत है मेरी चुद्दो की अह अह्ह्ह्ह निक्को चूतड़ उछालो अह अह हां ले लो मेरा लण्ड आह उफ़ अपनी आह गरम छोटी सी चूत में, मेरी आअह मेरी जान।

‘ऊउइ रवि हाय रे मज़ा आ गया खूब तेज़ करो ना अन्दर… बाहर , उफ़ मेरा प्यारा सा गरम मोटा लण्ड ऐ मां मज़ा आ गया।’

और फिर वो एकदम से चिल्ला पड़े – निक्को निक्को उफ़ आअह आऐई मैं अह मैं आने वाला हूँ ले लो मेरा लण्ड उफ़”

“आह लण्ड मेरी जान मेरी चूत मार दी।’

कमरे में फस्सह फस्सह और हम दोनो की सिसकियों की आवाजें गूंज रही थी।

‘आ जाओ मेरी जान, मेरे राजा उफ़ आह हाय रे मज़ा आ गया, झाड़ दे राजा लण्ड को’

और हम दोनो के धक्के तूफ़ानी हो गये और फिर मुझे लगा के मेरी पूरी चूत फैल गई हो उनकी लण्ड से। रवि की गरम मनी की पिचकारी जो निकली मेरी चूत के आखिरी छोर तक चली गई और

मेरी चूत का झरना भी फ़ूट पड़ा। वो मेरे दूधों पर निढाल हो कर लेट गये और मैं उनको अपने चिकने मुलायम और गरम जिस्म से लिपटा लिया। हम दोनो पसीने से नहा रहे थे।

इतना प्यारा सपना था, जब मैं सुबह सो कर उठी तो मेरी शलवार पूरी गीली थी। ऐसा लगा जैसे वो रात वो मेरे पास रहे हो, और चुदाई कर रहे हो। लेकिन वो तो सिर्फ़ एक सपना था। कुछ समय के बाद मेरी शादी दूसरी जगह हो गई। शादी के 4 साल बाद आज फिर रवि वही मेरे सामने थे।

‘अरे भाई नीरू कहां खो गई, मैं कुछ पूछ रहा हूँ।’

मैं एकदम से चौंक गई और उनको देखा और शरम के मारे उनसे आंख ना मिला सकी और भाग कर भाभी के पास किचन मैं घुस गई।

उनकी ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई, पता नहीं क्या हुआ इस लड़की को, ना जाने कहां खो गई थी। भाभी ने मुझ से पूछा – ‘क्या हुआ ‘ तो मैं अपने आप को कन्ट्रोल करके हंस दी।

‘नीन्द आ गई थी एकदम से।’ पर उन्हे क्या पता था कि मेरी नीचे से पूरी गीली हो गई थी।

वो भी हंस दी, मै भी अपने पैर समेटे हुये हंसने लगी। Hindi sex stories

Antarvasna

कई बार सपने में मैं अपनी सोनू भाभी को Antarvasna उनकी तारीफ में कहता था ..” भाभी आप बहुत खूबसूरत हो आपके रसीले होंठों का रस पीने के लिए कोई भी मर्द चाहेगा गोल गोल बड़ी आँखों में अजीब सी उलझन है आपकी पतली कमर देख कर कोई भी छूने को चाहेगा काजोल की जैसे बड़ी बड़ी चुचियां है आपकी दो मोटे कूल्हों को देखकर हर कोई दीवाना हो जाएगा सच कहूं भाभी आप एक हसींन हिरोइन जैसे दिखती हो.” वो मुस्कुरा कर कहती हैं-“बस बस बहुत तारीफ करते हो वो भी झूठी ” ये क्या कहा आपने मैं भी कुर्बान जाऊँ आप पर अगर झूठा निकला तो।

भैया को अक्सर शहर से बाहर जाना पड़ता है। एक बार भाभी ने काले रंग की साड़ी और ब्लाऊज पहना। भाभी गोरी हैं इसिलिए मैंने उसकी खूब तारीफ की और कहा- भाभी आप तो काले कपड़ो में बहुत ही खूबसूरत दिखाती हो वो मुस्कुरा के बोली झूठे कहीं के।

फिर कई दिनों तक मन में एक सपना सजाता रहा कि कब भाभी को पा लूं और कस के उनकी गरम नरम चूत में अपना मोटा लन्ड डाल के उन्हें चीखने पर मज़बूर कर दूं।

एक दिन भैया ने सुबह जल्दी बाहर जाना था और मैंने उन्हें स्टेशन तक छोड़ने जाना था। मैं केवल अंडरवीयर पहने कसरत कर रहा था कि अचानक भाभी आ गई। मुझे एक झटका सा लगा और मैंने एकदम अपनी कमर पर एक तौलिया लपेट लिया। भाभी मेरे पास आईं और बोली- देवर जी ! आपकी बोडी तो बहुत जानदार है। मेरी बाजू पकड़ कर कहा- क्या सख्त बाजू है। मेर लन्ड भाभी के नर्म हाथों का स्पर्श पाते ही मचलने लगा। भाभी ने तौलिये में मेरे लन्ड को फ़ूलते हुए देख लिया। फ़िर वो जल्दी से बोली- जल्दी तैयार हो जाओ, चलो तुम्हारे भैया राह देख रहे हैं, उनकी गाड़ी का वक्त हो रहा है। वो चली गई पर मेरा लन्ड गर्म हो चुका था। मैं भैया को स्टेशन छोड़ आया और फ़िर कालेज चला गया।

शाम को जब घर आया तो भाभी पड़ोस में गप्पें हान्क रही थी। मुझे देख कर वो अन्दर आ गई। आज उन्होंने गहरे नीले रंग का गाऊन पहन रखा था और अन्दर आ कर दरवाजा बंद करते ही उन्होंने कहा- क्यों देवर जी मैं काले कपडों में सुंदर लगती हूँ ना !

मैंने कहा- हाँ. तो उन्होंने मैं कैसी दिखती हू इन काले कपड़ो में ?

मैंने हँसते हुए कहा- भाभी तुमने तो नीले रंग का गाऊन पहना है.

उन्होंने शरारत से कहा उस दिन तो कहते थे भाभी तुम काली साड़ी और काले ब्लाऊज में अप्सरा लगती हो. आज क्या हुआ ? मैंने कहा- लेकिन भाभी आपने नीला गाऊन पहना हुआ है काला नहीं.

तभी मेरा ध्यान भाभी के कंधे पर दिख रहे ब्रा स्ट्रैप पर गया। मैंने आगे बढ़ कर ब्रा स्ट्रैप के नीचे उंगली डाल कर ऊपर को उठाया और कहा- अच्छा तो ये है काले रंग की ब्रा। लेकिन दिख तो नहीं रही, भाभी जरा दिखाओ ना।

” कुछ नहीं ! कुछ नहीं ! मैं तो मज़ाक कर रही थी “भाभी बोली।

मैंने कहा- भाभी प्लीज! दिखाओ ना ! प्लीज भाभी प्लीज ! बस एक झलक एक बार !

इतना सुनते ही भाभी ने अपना गाऊन निकल दिया मैं उसे देखते ही दंग रह गया सच भाभी काले रंग की चोटी सी ब्रा और काले रंग की बिल्कुल छोटी सी पैन्टी में थी। उसकी दोनों चूचियां आधी से ज्यादा नंगी थी जब पैन्टी उसकी आधी चूत को ही ढक पा रही थी दोनों ओर से चूत नंगी दिखाई दे रही थी ये नजारा देख कर मेरा लंड अंडरवियर में खड़ा होने लगा.

भाभी ने कहा ” उस दिन तो बड़ी तारीफ करते थे आज क्या हो गया ”. मैंने कहा “भाभी तुम्हारी चूचियां और चूत का कोई जवाब मेरे पास नहीं पहली बार किसी औरत का आधा बदन नंगा देखा है सच कह रहा हूँ तुम्हारी कसम भाभी इतनी खूबसूरत गदराई हुई जवानी पहली बार देख कर मैं बाग बाग हो गया हूँ ”

ये कहते हुए मैंने आगे कदम बढाया तो भाभी हिली नहीं अपनी जगह से. मैंने भाभी को कंधो से पकड़ कर अपने से चिपटा लिया।
उन्होंने मुझसे कहा- क्या कर रहे हो, पहले अन्दर चलो !

मैं समझ गया कि आज भाभी दावत दे रही हैं। अन्दर जाते ही मैंने अपनी शर्ट निकल दी ,ऊपर का बदन नंगा हो गया फिर बिना सोचे अपनी पैंट उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में आ गया मेरी नजर भाभी की चुचियों पर गई छोटी सी ब्रा और बड़े कद की चूचियां कब तक छुपाती. मैंने पीछे जा के हूक खोल दी। दो नंगे फल भाभी के बदन पर झूलने लगे .वो कसमसाई मैंने उनकी बिना परवाह किए पैंटी को एक ही झटके में उतार दी और अपना अंडरवियर को निकाल दिया.

उन्होंने नकली गुस्से से कहा- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कुछ सुना नहीं मैंने अपनी बाहों में नंगी भाभी के जिस्म को दबोच लिया वो कराहने लगी की मैंने दोनों होंठों को उसके रसीले होंठों पर रख दिए और जी भर के उसका रस पान करने लगा एक हाथ से चुचियों को दबाता मसलता रहा दूसरे हाथ से उसका जिस्म पूरा कस के मेरे जिस्म से चिपकाया ये सब अचानक हो जाने से वो हाथ पाँव मारने लगी लेकिन उसका कुछ न चला ओर मैं भाभी के जिस्म को बुरी तरह रौंदने लगा होंठों के बीच जीभ डाल के मैंने उसे बुरी तरह चूमा उसके मुह में .. आह्ह्ह उफ़. .मोनू .. मैं तुम्हारी भाभी हूँ .. ये ग़लत है .. छोड़ दो मुझे ..जग गगग ..की आवाज निकलने लगी पर मैं पूरी तरह से उनकी भरी भरी चूचियों को दबाता रहा उसकी कड़ी निप्पल को दो उंगली के बीच ले के मसलने लगा भाभी अब सिस्कारियां भरने लगी ..नही .. प्लिज्ज़ ..उईई ईई… धीरे ..मोनू ऊउऊ ..लेकिन अब उसका विरोध ख़तम हो गया था.

हम दोनों की सांसे तेज होने लगी मैंने जम कर भाभी के पूरे बदन को बेतहाशा चूमा .. .. मेरे होंठ उसके बदन पर फिसलने लगे .. एकदम गोरा और चिकना बदन था .अभी तक मैंने उसकी चूत पर हाथ नहीं लगाया था .. वो दोनों जांघो को सिकोड़े हुए थी .. मेरे हाथ और होंठो के स्पर्श से वो… ऐसी आवाजे निकलने लगी थी. सोनू भाभी अब मीठी मीठी आहें भरने लगी मेरी ध्यान अब उसके पेट से होते हुए गहरी नाभि पर गया मैंने वहाँ सहलाया तो उन्होंने सिहर कर अपनी जांघे खोल दी और अब मेरी नजर उन की चूत पर पड़ी मैं झूम उठा एक भी बाल नहीं था गुलाबी रंग की चूत के बीच में एक लाल रंग का होल दिखाई दिया ये देख कर मुह में पानी आ गया.

भाभी के जिस्म को चारो ओर से चूमने सहलाने और दबाने के बाद चूचियों को प्यार से मुंह में लेकर कई बार चूसा भाभी का अंग अंग महक ने लगा उसकी दोनों चूचियां कड़ी ओर बड़ी हो गई उसके लाल लाल निप्प्ल उठ कर खड़े हो गए तीर की तरह नुकीले लग रहे थे. तब मेरी भाभी मुझसे जोर से लिपट गई। दो बदन एक दूसरे से रगड़ने लगे मेरी सांसे फूलने लगी हम दोनों तेजी से अपने मकसद की ओर आगे बढ़ने लग॥ 10 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे को पूरा चूमा सहलाया। भाभी ने पहली बार शरमाते शरमाते लंड को पकड़ा तो बदन में बिजली सी दौड़ गई पहली बार मैंने कहा “मेरी जान उसके साथ खेलो शरमाओ मत अब हम दोनों में शर्म कैसी .”

मेरा बदन बहुत ही गरमा चुका था तब मैंने भाभी को फर्श पर लिटा दिया ओर उसके ऊपर आके जोर से चुचियों को फिर से दबाया पर बाद में मैंने चूत की तरफ़ देखा. चूत तो पूरी गीली थी. उसमे से जूस ऐसे निकल रहा था जैसे नल से पानी बह रहा हो. अब मैंने भाभी के पावों को चौडा किया तो उनकी फूली हुयी गुलाबी चूत पूरी तरह दिखने लगी .भाभी की गुलाबी चूत को देख कर मैंने कहा “भाभी सच बहुत ही चिकनी है तेरी ये चूत बिना बाल की गोरी उभरी हुई। दिल कर रहा है इसे खा जाऊँ ” इतना कह कर मैं उसकी चूत पर झुका और चूत के होठों को अपने होठों से चूमने लगा।

भाभी तो जैसे उछल पड़ी। ओह आ मोनू…॥अऽऽऽ ये क्या कर रहे हो…ऐसा तो तुम्हारे भैया भी नहीं करते कभी.. ओह मुझे अजीब सा लग रहा है। भाभी की सिस्कारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा। मैं बड़े प्यार से भाभी की चूत को चूसता, चूमता चाटता रहा। वो अपने होठों पर जीभ फ़ेर रही थी और मचल रही थी कि अचानक चिल्लाई- मोनू छोड़ मुझे… आहऽऽमेरा हो रहा है…जोर से…कहते हुए मेरा सिर अपनी जान्घों में दबा लिया और मेरे बाल खींचने लगी।…भाभी ने आह ऽऽ भरते हुए जल्दी जल्दी तीन चार झटके पूरे जोरों से अपने चूतड़ उठा कर मारे। मैंने फ़िर भी उनको नहीं छोड़ा और अपनी जीभ से उनकी चूत से बहने वाले रस को चाट गया।

वो कह रही थी- अब हट जाओ मोनू, अब सहन नहीं हो रहा। अब अपनी प्यारी भाभी को चोदो। फ़ाड़ दो मेरी चूत को अपनी भाभी की चूत में घुस जाओ। मैं पहले से जानती थी कि तुम मुझे चोदना चाह्ते हो, मैं भी तुम से चुदना चाहती थीअब मैं भी भाभी की चूत का स्वाद अपने लौड़े को चखाना चाहता था। मैं भाभी के ऊपर आया तो भाभी ने सिर उठा कर मेरे लौड़े कि तरफ़ देखा। उन्होने कहा- देवरजी ! मैं तो मर जाऊँगी इतने मोटे और लम्बे से।

मैंने पूछा किस मोटे और लम्बे से?

वो शरमाते हुए बोली तुम्हारे लो ऽऽऽ लौड़े से !

मैंने कहा-कुछ नहीं होगा… और भाभी की टांगें चौड़ी की तो उनकी चूत के होंट ऐसे खुल गये जैसे किसी फ़ाइव स्टार होटल के दरवाजे अपने आप खुल जाते हैं किसी के आने पर। मैंने अपनी दो अंगुलियों से चूत को थोड़ा और खोला और अपना लन्ड का सिर उस पूरे खिले गुलाब के फ़ूल में रख दिया। भाभी ने कहा- थोड़ा अन्दर तो करो !

मैंने कहा- अभी करता हूं। यह कह कर मैं अपना लौड़ा धीरे धीरे बाहर ही रगड़ने लगा। भाभी बेचैन हो उठी। वो अपने चूतड़ ऊपर को उठा उठा कर लौड़े को अपनी चूत में डलवाने की कोशिश कर रही थी। मैं उनको तड़फ़ाते हुए उनकी सारी कोशिशें नाकाम कर दिए जा रहा था।

“अब डालो ना !” भाभी बोली।

“क्या डालूं… और कहाँ…” मैंने भाभी से पूछा।

“अच्छा बताऊँ तुझे? बहनचोद ! अपनी भाभी की चूत में अपना लौड़ा डाल और चोद साले ! भाभी तड़फ़ते हुए बोली।

भाभी के मुंह से ऐसी गालियां सुन कर मैं हैरान रह गया।

तभी भाभी ने एक ऐसा झटका दिया ऊपर की तरफ़ अपने चूतड़ों को कि एक बार में ही मेरा पूरा का पूरा लौड़ा भाभी की चूत की गहराई में उतर गया। भाभी के मुख से निकला- आह हय-मार दिया ! एक दर्द मिश्रित आनन्द भरी चीख !

अब मैं भाभी के ऊपर गिर सा गया और उनको हिलने का मौका ना देकर उनके होंट अपने होंटों से बंद कर दिये और अपने चूतड़ ऊपर उठा कर एक जोर का धक्का मारा तो भाभी फ़िर तड़प गई।

इसके बाद तो बस आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…धीरे…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…रुक जरा… हाँ… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…जोर से… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…हाँऽऽअः…हाँऽऽअः…हाँऽऽअः…ह्म्म… हाँऽऽअः

हम दोनों की एक जैसी आवाजें निकल रही थी। काफ़ी देर ऐसे ही चलता रहा। बीच बीच में भाभी बड़बड़ाती रही- मज़ा आ रहा है ! करते रहो ! चूसो !

भाभी की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और मेरा लौड़ा बड़े आराम से अन्दर बाहर आ जा रहा था। भाभी भी अपने चूतड़ उठा उठा कर सहयोग कर रही थी। वो मदहोश हुई जा रही थी। उनके आनन्द का कोई पारावार ना था। ऐसा मज़ा शायद उन्हें पहले नहीं मिला था।

अब मैं चरमोत्कर्ष तक पहुंचने वाला था। मैंने भाभी को कहा- ले सोनू ! ले ले मेरा सारा रस ! पिला दे अपनी चूत को !

“हाँ ! भर दे मेरी चूत अपने रस से मेरे मोनू भैया ! ” भाभी बोली।

और मैंने पूरे जोर से आखिरी धक्का दिया तो मेर लन्ड भाभी के गर्भाशय तक पहुंच गया शायद और वो चीख पड़ी- मार डालेगा क्या?

मेरे मुंह से निकला- बस हो गया ! मेरा लन्ड भाभी की चूत में पिचकारियां मार रहा था। भाभी भी चरम सीमा प्राप्त कर चुकी थी। फ़िर कुछ रुक रुक कर हल्के हल्के झटके मार कर मैं भाभी के ऊपर ही लेटा रहा। हम दोनों अर्धमूर्छित से पड़े रहे काफ़ी देर। पता नहीं कब नींद भी आ गई।

जब मेरी नींद खुली तो देखा कि भाभी उसी तरह नंगी मेरी बगल में बेसुध हो कर सो रही थी। उनके मुख पर असीम तृप्ति का आभास हो रहा था। उनके लबों पर बहुत हल्की सी मुस्कान भी दिख रही थी। मैं धीरे से उठा और रसोई में जाकर दो कप चाय बना कर लाया तो देखा भाभी वैसे ही सो रही थी। मैं उनके पास गया और उनके लबों को हल्के से चूम लिया। जैसे ही मेरे होंठ ने उनके होंठों को स्पर्श किया, भाभी ने आंखें खोल दी और मुस्कुरा कर मेरी आंखों में झांकने लगी।

मैंने भाभी से कहा- “तो सोने का बहाना कर रही थी आप?”

भाभी बोली- मैं तो तभी जाग गई थी जब तुम यहाँ से उठ कर गए थे, लाओ अब चाय तो पिला दो जो प्यार से बना के लाए हो।

हमने चाय पी। तब तक रात के आठ बज चुके थे। मैंने भाभी से पूछा- कैसा लगा?

भाभी ने शरमा कर नज़रें झुका ली, कुछ बोली नहीं।

मैंने उनकी ठोडी पकड़ कर उनका चेहरा ऊपर को उठाया और फ़िर पूछा कि कैसा लगा आज मेरे साथ।

भाभी शर्मिली मुस्कान के साथ बोली- बहुत मज़ा आया, मज़ा तो तुम्हारे भैया के साथ भी बहुत आता है, पर तुम्हारे अन्दर नया जोश है

“पहले ऐसा ही मज़ा आता था भैया के साथ?” मैंने पूछा।

” सच कहूं तो ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं आया, मुझे तो पता भी नहीं था कि इतना मज़ा भी आता होगा चुदाई में” भाभी ने कहा।
भाभी के मुंह से चुदाई शब्द सुन कर मैं अवाक रह गया। फ़िर मैंने भाभी से कहा- भाभी ! मैंने आपको इतना आनन्द दिया है, मुझे ईनाम मिलना चाहिए

” हाँ ! ईनाम के हकदार तो तुम हो। बोलो क्या चाहिए तुम्हें ईनाम में?” भाभी ने पूछा।

“मैं तो ऐसे ही कह रहा हूं, आप मिल गई, मुझे तो मेरा ईनाम मिल गया” मैंने कहा।

” नहीं, फ़िर भी मैं तुम्हें कुछ ना कुछ ईनाम जरूर दूंगी” भाभी ने कहा।

” जैसी आपकी मरजी ! अगर मैंने अपनी तरफ़ से कुछ मांग लिया तो देना पड़ेगा भाभी ! ” मैंने कहा।

” हाँ हाँ जरूर ! मेरे बस में हुआ तो जरूर दूंगी” भाभी ने आश्वासन दिया।

” अच्छा अब बताओ रात के खाने में क्या बनाऊँ? ” सोनू भाभी ने पूछा।

“अब क्या बनाओगी, मैं बाज़ार से ले आता हूं कुछ, वैसे भी मैं अभी सारी रात बाकी है। आप मुझे खाना, मैं आपको खाऊँगा” मैंने भाभी को छेड़ा।

मैंने बाज़ार जाने के लिए उठते हुए कहा- भाभी ! मैं बाज़ार से खाना ले कर आता हूं। आप बस ऐसे ही नंगी रहना, कपड़े नहीं पहनना।
भाभी भी मेरे साथ खड़ी हो गई यह कहते हुए कि दरवाजा भी तो बंद करना होगा। भाभी मेरे पीछे पीछे आईं और मुझे कहा देखो बाहर कोई है तो नहीं, मैं दरवाजा बंद कर लूं।

जब मैंने बाज़ार से आकर दरवाजे की घण्टी बजाई और भाभी ने दरवाजा खोला तो वो वही नीला गाऊन पहने थी।

अन्दर आते आते मैंने पूछा कि गाऊन क्यों पहना?

तो कमरे में पहुंच कर भाभी बोली- आज तो बस बच गई। अभी अभी थोड़ी देर पहले दरवाजे की घण्टी बजी थी और मैंने समझा तुम ही होगे और मैं बिना गाऊन पहने दरवाजा खोलने ही वाली थी कि मुझे पड़ोस वाली रितु की आवाज सुनाई दी। वो मुझे ही पुकार रही थी। मैंने दौड़ कर गाऊन पहना और फ़िर दरवाजा खोला।

क्या करने आई थी रितु? रितु वही जो चार पांच घर छोड़ कर रहती है, नमिता आन्टी की बेटी?

हाँ वही, तू तो सबको जानता है?

बड़ी मस्त चीज है वो, एक बार मिल जाए तो साली को चोद चोद कर चार छः बच्चों की माँ बना दूं।

“तेरा बस चले तो तू सारी दुनिया की लड़कियों को चोद चोद कर माँ बना दे” भाभी बोली।

“सारी दुनिया को नहीं तो भाभी आपको तो अब जरूर माँ बना दूंगा” मैंने कहा।

यह सुन कर भाभी भावुक हो उठी, उनकी आंखें गीली हो गई, वो बोली- तीन साल हो गए शादी को ! अब तक तो कोई आस बंधी नहीं, पता नहीं कब मैं माँ का शब्द सुनूंगी अपने लिए। और तुम क्या सोचते हो कि मैंने ये सारी रासलीला तुम्हारे साथ शारीरिक आनन्द के लिए रचाई है? यह सब मैंने औलाद का सुख पाने के लिए किया है। भाभी रोती जा रही थी और बोलती जा रही थी-” वैसे तो तुम्हारे भैया में कोई कमी नहीं है, वो मुझे सहवास का पूरा पूरा मज़ा देते हैं, पर पता नहीं क्यों मैं गर्भवती क्यों नहीं हो रही। अब देखो तुम क्या गुल खिलाते हो? इतना कह कर भाभी के चेहरे पर कुछ मुस्कुराहट आई।

मैंने आगे बढ़ कर भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और कहा- भगवान ने चाहा तो अगले साल तक मैं चाचाऽऽ… नहीं आपके बच्चे का पापाऽऽ… नहीं बस चाचा… हाँ… चाचा ही ठीक है, बन जाऊँगा।

अगर ऐसा हो गया तो मैं तुम्हें मुंह मांगा ईनाम दूंगी- भाभी ने भरे गले से कहा।

तो अब दो ईनाम हो गये- एक तो आपने चाय पीते हुए वायदा किया था आज ही और दूसरा अब जो अगले साल या उससे भी पहले मिल सकता है। Antarvasna

हेलो दोस्तो, Sex Stories

मुझे संजू कहते हैं। मैं 25 Sex Stories साल का हूँ, मुंबई में रहता हूँ। मेरी 6′ की हाईट है।

आप लोग बोर हो रहे होंगे मेरी बातें सुन कर। चलिए मैं आपको अपनी कहानी की ओर ले चलता हूँ।

यह घटना अब से 5 महीने पहले हुई जब हमारी कॉलोनी में एक भाभी रहने को आई थी।
भाभी तो पूछो मत … मादकता उनके बदन में कूट-कूट के भरी थी।

चूची उनकी थी 38डी, कमर 32 और गांड तो क़यामत थी उनकी 40 साइज़ की।
चलती तो क़यामत लगती थी।

उनके आने के कुछ दिनों में उनकी दोस्ती हमारे परिवार से हो गई।

भाभी बहुत चंचल स्वभाव की थी। उमर यही कोई 30 साल के आस पास थी।

धीरे धीरे वो हमसे भी खूब बातें करने लगी थी क्यूंकि उनके कंप्यूटर को मैं ठीक कर देता था सो वो मुझसे काफी करीब थी।

एक बार उनके कंप्यूटर में कुछ खराबी आ गई थी।
वो मम्मी से बोली कि संजू से कह के मेरा कंप्यूटर ठीक करवा दो।

तो मैं दोपहर को उनके घर गया।

वो बड़ी सेक्सी नाईट गाउन पहन के घर पर थी और वो मुझे अपने कंप्यूटर के पास ले गई।

मैं उनके कंप्यूटर को ठीक करने लगा। उसको फॉर्मेट करना था।

सो मैंने भाभी जी से कहा भाभी जी आपका कोई महत्वपूर्ण फाइल हो तो बैक-अप ले लो, सिस्टम फॉर्मेट करना पड़ेगा.

तो वो बोली- कुछ पर्सनल फाइल हैं तुम हटो तो मैं बैक-अप ले लूँ।

मैं कुर्सी से हट के खड़ा हो गया और वो अपनी व्यक्तिगत फाइलों का बैक-अप लेने लगी थी।
उसमें बहुत सारी सेक्स कहानियाँ और पॉर्न तस्वीरें थी जो गलती से खुल गई।

मैंने उनसे कहा- भाभी, अगर ऐसी फाइल्स है तो आप बैकअप रहने दो! मैं आपको ढेर सारी दे दूँगा।
वो बोली- ठीक है!
और कंप्यूटर से हट गई।

तभी मैंने पूछा- भाभी! भइया कहाँ हैं?
तो वो बोली- ना जाने कहाँ गए हैं। उनके होने और ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम कंप्यूटर ठीक करो!

मैंने कंप्यूटर को फॉर्मेट कर के लोडिंग पर लगा दिया और भाभी से बोला- मैं अभी घर से आपके लिए कुछ फाइल्स ले कर आता हूँ!
तो वो बोली- अरे इतनी क्या जल्दी है? बाद में दे देना।

मैंने कहा- अरे भाभी! आप देखो! मुझे अच्छा लगेगा कि कम से कम मेरा कल्लेक्शन किसी के काम तो आएगा!

यह कह के मैं घर से अपने डीवीडी का बॉक्स ले आया और उन्हें दे दिया कि आप देखो। जब देख लें तो मैं और दे दूंगा।
वो बोली- ठीक है! और उसे आलमारी में रख दिया।

मैंने उनका कंप्यूटर ठीक कर दिया और चला आया।

अगले दिन वो मेरे घर आई और मेरे से बोली- उसमें कुछ फाइल खुल नहीं रही हैं।
मैं समझ गया कि उसमें कुछ मोबाइल वाली फाइल थी जो अलग मीडिया प्लेयर पर खुलती थी।

सो मैं मीडिया प्लेयर लेकर उनके घर गया और इंस्टाल कर के जाने लगा तो वो बोली- इसे ओपरेट कैसे करते हैं?

मैंने कहा- भाभी, सेक्स क्लिप है! मैं आपके सामने कैसे ओपरेट कर पाऊंगा?

इस पर वो बोली- तुम करो, कोई बात नहीं। अब हम दोस्त है और अब तुम मुझे अलका कह के बुलाओ। भाभी लोगों के सामने बोला करो।
मैंने कहा- ठीक है!

और मैंने वो फाइल रन कर दी और भाभी मेरे साथ बैठ के वो फाइल देखने लगी और फाइल देखते देखते मैं भी उत्तेजित हो गया था।
वैसे मैं तो भाभी को देख के हमेशा उत्तेजित रहता हूँ, पर उनके साथ मूवी देखने में तो मेरी हालत ख़राब हो गई थी।

भाभी मेरी तड़प देख के मुस्कुरा रही थी और बोली- कोई मस्त लड़के की मूवी दिखाओ।
मैंने पूछा- भाभी कैसे लड़के की?
तो वो बोली- अपनी उम्र के लड़के की मूवी दिखाओ।

मैंने एक मूवी ढूंढ निकाली और प्ले कर दी।
अलका भाभी बोली- संजू, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने कहा- नहीं।

तो वो बोली- यह मूवी तुम देखते हो?
मैंने कहा- हाँ।

उसने फिर पूछा- उसके बाद तुम्हारा मन नहीं करता कुछ करने को?
मैंने कहा- करता तो बहुत है पर कर भी क्या सकता हूँ?
इस पर वो बोली- फिर तुम क्या करते हो?

मैंने शर्म के मारे अपना सर झुका लिया तो वो बोली- शरमाओ नहीं, क्या हाथ से हिलाते हो?
मैंने कहा- हाँ।

उसने कहा- ये बुरी बात है। इससे तुम में कमजोरी आ जायेगी और शादी के बाद तुम्हारी बीवी की हालत मेरे जैसे हो जायेगी।
मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं!

तो बोली- मेरे पति भी मेरे साथ कुछ कर नहीं पाते। हाथ से हिला हिला कर उन्होंने अपना सामान ख़राब कर लिया है और अब वो खड़ा भी नहीं होता है और मुझे बैंगन या मूली से काम चलाना पड़ता है। अगर तुम्हें जरूरत हो तो मेरे पास आ जाना, मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। वैसे भी अब हम दोस्त हैं।

इतना कह के वो रसोईघर से पानी लेने अपनी गांड मटकाती हुई चली गई जिसे मैं देख के पागल हो रहा था।
वो रसोईघर से दो गिलास शर्बत लेकर आई और एक मुझे दिया, दूसरा खुद पीने लगी।

तब मैंने पूछा- भाभी, आप मेरी कैसे हेल्प कर सकती हो?
वो बोली- कैसी हेल्प चाहते हो?
मैंने कहा- भाभी आप बुरा मान जाओगी।
तो बोली- नहीं।

मैंने कहा- भाभी, मैंने आज तक किसी भी औरत या लड़की को असल में नंगी नहीं देखा है। क्या मैं आपको देख सकता हूँ?
उसने कहा- जरूर!
और खड़ी हो गई, बोली- लो, तुम खुद देख लो जैसे देखना हो।

मैंने जल्दी से गिलास खाली किया और उनके पास खड़ा हो गया।

उन्होंने खुद ही मेरा हाथ पकड़ के अपनी चूची पर रख दिया और बोली- यह पसंद है? लो दबाओ और मज़ा लो।
मैं उनकी चूचियों को दबाने लगा।
बड़ी टाइट और मस्त चूचियाँ थी उनकी।
मजा आ गया था।

फिर मैंने उनकी नाइटी उठाई और उनकी चिकनी टांगों को सहलाने लगा.
तो वो मेरे करीब आ गई और जींस के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी, बोली- तुम्हारा लंड कितना बड़ा है?
मैंने कहा- 6″ का!

तो बोली- क्या मैं देख सकती हूँ?
मैं बोला- भाभी पहले मैं आपको देखूंगा, फिर आप मुझे देख लेना।
बोली- ठीक है।

और यह कहकर उन्होंने अपना गाउन उतार दिया और काले रंग के लेसयुक्त ब्रा पैंटी में खड़ी हो गई।
वो बला की खूबसूरत लग रही थी।

मैं उनको पैर से लेके सर तक चूमता रहा और वो सीई ईईई आह्ह ह अह्ह हह्ह्ह कर रही थी।

फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी।
पूरे बदन में एक भी दाग नहीं था और चूचियाँ जैसे हिमालय पर्वत की तरह सर उठाये खड़ी थी।

मैं उन्हें देख कर पागल हो गया था।
उन्हें उनके बेडरूम में ले गया और उनको चूमने और चाटने लगा।

मैं उनकी चूत के पास आया और उनकी चूत को चाटने लगा तो उन्होंने मुझे अपने पैरो से दबा लिया, बोलने लगी- खूब चाटो मेरे राजा मेरी चूत को, मैं बहुत प्यासी हूँ मेरी प्यास बुझा दो!
और मैं उनकी चूत को चाटने लगा।
5 मिनट में वो मेरे मुँह में झड़ गई और मैं उनके चूत के अमृत को चाट के पी गया।

फिर उसने उठ के मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को मुँह में लेकर चाटने लगी, डाबर हनी की बोतल निकाल लाई और मेरे लंड पर डाल कर खूब चाटने लगी।

तभी कुछ देर बाद मैंने कहा- अलका भाभी, मेरा होने वाला है!
तो उन्होंने कहा- मेरे मुँह में झड़ो! मैं तुम्हारा अमृत पीना चाहती हूँ!

और वो मेरे लंड को तब तक चूसती रही जब तक मैं उनके मुँह में झड़ नहीं गया।

वो मेरा लंड लगातार चूस रही थी, जब तक मेरा लंड दोबारा खड़ा नहीं हो गया।

उसके बाद वो बेड पर लेट गई और मुझे अपने ऊपर ले लिया और मेरे लंड को अपनी चूत में रगड़ने लगी।
मैंने पूछा- भाभी! क्या मैं आपको चोद सकता हूँ?
वो बोली- और नहीं तो क्या तेरा लौड़ा मैं अपनी चूत पर इसीलिए तो घिस रही हूँ। बहनचोद चोद मुझे!

मैंने कहा- भाभी क्या आपको पसंद है गन्दी बात करना?
तो वो बोली- इसी में तो मजा है असली चुदाई का। खूब गालियाँ देके मुझे चोद और अपनी रखैल बना ले मुझे।

फिर मैंने उनकी टाँगे फैलाई और अपना लौड़ा उनकी चूत में डालने लगा तो वो चिल्लाने लगी- अरे भोसड़ी के! फ्री की चूत समझ के फाड़ने लग गया। अरे मादरचोद! आराम से चोद, मैं कोई भागे थोड़ी जा रही हूँ। मेरी चूत फट रही है निकाल ले अपना लौड़ा, मुझे नहीं चुदवाना तेरे से!

पर मैंने उनकी एक न सुनी और धीरे धीरे अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया और उनकी चूची के रस को पीने लगा।

थोड़ी देर में उनका दर्द कम हो गया तो वो गांड उछालने लगी और मुझे बोली- खाली डाले पड़ा रहेगा या फिर चोदेगा भी मुझे?

तो मैंने अपना लंड निकाला और एक बार में पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया और उन्हें जम के चोदने लगा और वो भी बहुत बड़ी चुद्दकड़ थी। खूब गांड उछाल के चुदवा रही थी और साथ में गालियाँ दे रही थी, और जोर से चोदने को कह रही थी।

मैंने उन्हें 10 मिनट तक खूब जम के चोदा और वो लगातार अह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह ह्ह्ह अह और पेलो, फाड़ दो मेरी चूत को, चिथड़े उड़ा दो आज इस निगोड़ी के! इसने मुझे बड़ा दुःख दिया है। आज, संजू, इससे मत छोड़ना। इसे फाड़ देना अह्ह।

अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- अलका मैं झड़ने वाला हूँ।
वो बोली- मेरी चूत में झड़ो, मुझे तुमसे बच्चा पैदा करना है, तुम्हारे भैया को मैं संभाल लूंगी, फिलहाल तुम मुझे चोदो और मेरी बुर को सींच दो अपने पानी से।

मैं उन्हें चोदते चोदते उनकी चूत में झड़ गया और उन्हीं के ऊपर लेट के उनको किस करने लगा।
मैंने भाभी से कहा- भाभी, मुझे आपकी गांड बड़ी प्यारी लगती है क्या मैं आपकी गांड मार सकता हूँ?

इस पर बोली- अरे मादरचोद! आज चूत दी तो गांड के पीछे पड़ गया? चल कल मेरी गांड भी मार लेना। अब ये जिस्म तेरा हैं, तू जैसे चाहे मुझे चोद सकता है।

दोस्तो, उसके बाद मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं अलका भाभी को चोदता हूँ.
और अब वो मेरे बच्चे की माँ भी बनने वाली है।
वो अब मुझसे काफी खुश है और मुझे ही अपना सब कुछ मानती है.

आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, मुझे कमेंट्स करके जरूर बतायें। Sex Stories

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