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मेरा नाम राहुल राज है और Antarvasna मैं रेल गाड़ी से भोपाल से मुम्बई जा रहा था मेरे आरक्षित बर्थ के सामने वाले बर्थ पर एक खूबसूरत कमसिन लड़की बैठी हुई थी। उसके माता पिता शायद ऊपर वाली बर्थ पर थे.
रात को करीब 11 बजे जब ट्रेन के सभी यात्री सोने की तैयारी कर रहे थे, मैं भी अपने बर्थ पर सोने की तैयारी कर रहा था। तभी अचानक मेरी सामने वाली बर्थ से उस लड़की की आवाज आई- क्या आपको नींद आ रही है?
मैँने कहा- नहीं!
तो लड़की ने कहा- तो फिर कुछ बात करिये न! मुझे नींद नहीं आ रही.
लड़की के माँ बाप सो गये थे ऊपर वाली बर्थ पर। फिर मैंने लड़की से पूछा कि आप क्या कर रही हैं?
लड़की ने कहा- मैं ऐम बी बी ऐस की तैयारी कर रही हूँ।
फिर लड़की अपने बर्थ से उठ कर मेरे बर्थ पे आ गई। दिसम्बर माह होने के कारण सरदी अपने पूरे शवाब पर थी तो मैंने उसे अपना कम्बल ओढ़ने को कहा। लड़की मेरे साथ कम्बल में मेरे से सट के बैठ गई। उसके जवान शरीर की खुशबू मेरे जहन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी। फिर उसने मेरे घुटने पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर धीरे धीरे उसके हाथ की हरकत बढ़ने लगी।
मैं समझ गया कि ये लड़की क्या चाह रही है, फिर मैंने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर अपना सात इंच का लन्ड बाहर निकाल कर उस के हाथ में पकड़ा दिया। लड़की काफी चुदासी लग रही थी । उसने झट से मेरे लन्ड को अपने हाथों में ले लिया और जोर जोर से सहलाने लगी। तब मैंने उसे अपने बर्थ पर लिटा लिया, मैँने उसके लिप पर लऽऽऽम्म्म्बा किस किया तो लड़की के सारे बदन में सिरहन सी दौड़ गई। उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया।
मैंने उसकी शर्ट की बटन को खोलना चालू कर दिया, वो कुछ नहीं बोली और इस तरह हो गई कि उसके मक्खन जैसे स्तन मेरे सामने आ गये। मैंने उसकी ब्रा सरका कर उसके स्तन चूसना चालू कर दिया।
कुछ देर बाद वो सीईई ईईई कर के मेरे लंड पर टूट पड़ी और मेरे लंड को जो तीन इंच मोटाई का है को लालीपाप की तरह चूसने लगी। मैंने उसकी पैंट के हुक ख़ोल कर उसकी पेंटी में हाथ डाल कर उसकी चूत में उंगली करना चालू कर दिया।
वो सीऽऽ ई कर के पैर फैला के लेट गई। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना चालू कर दिय। वो आह उह उई श श करने लगी। जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत में ठेला तो चार ईन्च तक अंदर चला गया। उसके मुँह से अजीब अजीब सी आवाज़ें निकलने लगी और वो अपने चूतड़ हिलाने लगी।
मैंने एक धक्का और दिया तो आधे से ज्यादा लंड अंदर चला गया। उसकी आँखों से आँसू आ गये, फिर भी बोले जा रही थी- और अंदर तक डालो!
मैंने अपना पूरा लंड उस की चूत में डाल दिया और ट्रेन के इंजन की तरह धक्के मारना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वो लड़की झड़ गई। मैंने अपने लंड को चूत से निकाल कर उसके मुंह में दे दिया। वो मेरे लंड को आईसक्रीम की तरह चूसने लगी।
मैं धक्के मारने लगा फिर मैं उसके मुँह में झड़ गया। वो मेरी सारी क्रीम को पी गई और मेरे लंड को चाट कर साफ कर दिया।
इस तरह मैंने रात में उसको कई बार चोदा। फिर मेरा स्टेशन आ गया।
तो आपको ये कहानी कैसी लगी मेल जरूर करना! Antarvasna
इस वक्त मेरी उम्र पच्चीस Hindi Sex Stories साल है, मैं विवाहित और एक बच्चे की माँ हूँ। मेरे पति एक फेक्ट्री में सुपरवाइजर हैं।
जब मेरी शादी हुई तब मेरी उम्र बीस साल थी, मैं यह शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उस समय अपने एक दोस्त के साथ मेरा लव अफेयर चल रहा था, वो बहुत रोमांटिक और दिलफेंक युवक था, कभी कभी तो उसकी इस आदत का मुझ पर गहरा असर पड़ता, जहां भी किसी लड़की को अपने करीब पाता उसे वो अपनी मीठी मीठी बातों से फंसाने की कोशिश करता।
बस मैं उसकी इसी बात का बुरा मान जाती, कई कई दिन तक मैं उससे बात नहीं करती थी, वो तरह तरह से मुझे मनाने की कोशिश करता तो मैं मान भी जाती थी।
उसका और मेरा प्यार अभी तक शारीरिक सम्बंधों के बन्धन से दूर था, ऐसा नहीं था कि उसने अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी, वो कई बार मुझे चोदने की कोशिश कर चुका था, उसने कई बार मुझे सहला सहला कर गर्म भी कर दिया था, चूचियाँ दबा दबा कर उनमें आग भी भर दी थी मगर मैं अपनी मर्यादाओं की सीमा नहीं लांघना चाहती थी, मेरा इस बात पर अटूट विश्वास था कि चूत की सील सिर्फ पति तोड़ सकता है क्योंकि उस पर उसी का हक होता है।
ऐसा भी नहीं था कि मेरा प्रेमी मुझसे शादी नहीं करना चाहता था, सब कुछ ठीक था मगर मैं शादी से पहले चुदवा कर सुहागरात का मजा फीका नहीं करना चाहती थी, मेरा प्रेमी कई बार गुस्से से कहता कि मैं उससे प्यार नहीं करती। उसने शादी का वादा किया, कसमें खाई, मगर मेरा एक ही जवाब था कि अगर कुछ होगा तो शादी के बाद ही होगा। मैंने उसे साफ साफ जवाब दे दिया कि मैं शादी से पहले वो चीज हरगिज नहीं दे सकती जिसकी वो जिद कर रहा है।
मगर वो चालू था, उसने कई बार चाहा कि मैं बहक जाऊं और बहक कर उसकी बात मान लूँ।
एक दिन वो मुझे एकांत में ले गया, वहाँ ले जाकर उसने मुझे सहलाना शुरू कर दिया, वो ऐसा कई बार कर चुका था इसलिए इस ओर मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वो जब भी ऐसा करता तो मैं काफी गर्म हो जाती थी मगर संयम का दामन मेरे हाथ से नहीं छूटता था, मगर उस दिन मैं अपने आप को नहीं रोक सकी।
वो मेरी दोनों चूचियों पर हथेली चला रहा था और मैं हमेशा की तरह आँखें मूंदे उसकी इस हरकत का मजा ले रही थी। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने खड़े लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
उसका लंड काफी लंबा और मोटा था, इतना ही नहीं, वो आग की तरह जल भी रहा था। जब मैंने आँखें खोल कर अपने हाथ की तरफ देखा तो मैं चौंक पड़ी,” उफ क्या है यह?”
मैंने उसका लंड हाथ से छोड़ दिया तो वो सांप के फन की तरह फुंफकार उठा, मेरा रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो गया था उस समय। मैं अच्छी तरह जानती थी कि यह लंड है मगर मैंने हर लड़की की तरह मासूमियत दिखाते हुए यह सवाल पूछा था।
हाथ से छूटते ही लंड एक तोप की तरह उपर उठा और सीधा हो गया, मैं अपनी पलकें झपका झपका कर उसे देख रही थी। मेरी मासूमियत देख कर मेरे प्रेमी के होंठों की मुस्कान गहरी हो गई।
इसे नहीं जानती, क्या है यह? उसने अपना अकड़ता हुआ लंड अपने हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए कहा।
नहीं … क्या है यह? मैंने कहा।
हाय तुम्हारी इसी मासूमियत पर तो हम फ़िदा हैं! वो फिर से मेरी चूचियाँ दबाता हुए बोला- खैर अब मैं ही बता देता हूँ कि यह क्या चीज है!
फिर वो अपने खड़े लंड को हाथ से इधर उधर घुमा कर देखता हुआ बोला- वैसे तो इसे कई नामों से पुकारा जाता है, मगर मैं इसे कुछ और ही समझता हूँ।
क्या समझते हो तुम इसे? उसके मोटे और लम्बे लंड का सम्मोहन मेरे दिलो-दिमाग पर छाता जा रहा था, उसने अपना लंड क्या दिखाया कि उस पर से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी।
मैं यहाँ झूठ नहीं लिखूंगी, प्रेमी का कठोर विशाल, फुंफकारता लंड देख कर मेरी तबियत ऐसी फिसली कि मेरी चूत के मुँह में पानी भर आया, मेरी चूत पूरी गीली हो गई और लगा कि अन्दर चीटियाँ रेंग रही हैं। मेरी चूचियों में भी कुलबुलाहट शुरू हो गई थी, मेरा मन यही चाह रहा था कि वो मेरी चूचियों को हाथ से पकड़-पकड़ कर खूब मसले और दबाये।
उस समय मेरी मस्ती परवान चढ़ी हुई थी, मैंने आँखें मूंद ली थी और वो कपड़े के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाये जा रहा था। उस समय सी … सी के सिवा मेरे मुँह से कुछ और नहीं निकल पा रहा था।
सच कहती हूँ, उस दिन मैं मर्यादाओं को भुला बैठी, मेरा सुहागरात वाला इरादा तो ताश के पतों की तरह बिखर गया। बस सब कुछ भूल कर दिल चाह रहा था कि लंड को अपने होंठों के बीच दबा कर खूब चूसूँ!
उसका लंड सचमुच मुझे बहुत अलबेला लग रहा था, जैसा वो खुद गोरा था वैसा ही गोरा उसका बमपिलाट हथियार भी था। ताज्जुब की बात तो यह थी कि ऐसा ना तो मैंने सोचा था और ना ही कभी किया था, हाँ मगर सुहागरात वाले सपने की यह एक कड़ी जरूर थी।
उस समय मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, लंड मेरी आँखों के सामने बार बार फुंफकार मार रहा था, तभी उसने मेरी बात का जवाब दिया तो मेरी चेतना लौटी।
इसे मैं अपना छोटा भाई समझता हूँ! वो अपना लंड बड़ी मस्ती और कामुकता से सहलाता हुआ बोला।
मेरी नजरें अब भी उसके उछलते लंड पर अटकी हुई थी।
तुम इसे बहुत गौर से देख रही हो? वो मुझे अपने लंड को देखता पाकर बोला।
हूँ! शायद इसलिए कि इसे मैंने पहली बार देखा है! मैंने अपने सूखे गले को थूक से तर करते हुए कहा।
इससे तो मैं तुम्हारी पहचान बहुत पहले ही करवा देता मगर तुम तैयार ही कहाँ होती थी? उसने अपनी चमकदार आँखों से मेरी तरफ देख कर कहा।
मैंने इसकी कोई खास जरूरत नहीं समझी थी- मैंने दिल की बात छुपाते हुए कहा।
तुम्हें कैसा दीखता है यह? उसने पूछा।
उसकी बात सुन कर मुझे मजाक सूझा तो मैंने कहा- हूँ … देख रही हूँ कि इसकी सूरत तुमसे बहुत मिल रही है इसमें कोई शक नहीं कि यह तुम्हारा छोटा भाई है!
मेरी बात सुन कर वो बड़ी जोर से हंसा, वो समझ गया कि मैं मजाक में लंड और उसकी सूरत में तालमेल बिठा रही हूँ।
इसका जादू निराला है। वो बोला और अपने हाथों से लंड को सहलाने लगा।
अच्छा तो क्या यह जादूगर भी है? मैंने हैरान होकर पूछा।
इसका जादू देखना चाहती हो? उसने पूछा।
हूँ! मगर उलटी सीधी बात नहीं होनी चाहिए।
नहीं तुम्हारी मरजी के बिना यह कोई भी उलटी सीधी बात नहीं करेगा।
ठीक है, तब तो मैं इसका जादू जरूर देखना चाहूंगी। अब मेरी चूत में बुरी तरह कुलबुलाहट होने लगी थी।
मेरे प्रेमी ने मचल कर मुझसे कहा- मधु, यह कमीज अपने बदन से उतार दो!
मोहन डीयर! तुम्हीं क्यों नहीं उतार देते? मैंने मचल कर कहा।
बटन खोलना है, तुम खोल दो फिर मैं ही उतार दूंगा। वो हंसते हुए बोला।
बस क्या था, मुझ पर तो अब वासना का भूत सवार हो चुका था, मैं धीरे धीरे मदहोश होती जा रही थी, चूत अन्दर से पूरी तरह रसीली हो गई थी, मैंने तुंरत अपनी कमीज के बटनों को एक एक कर खोल दिया और बोली- लो खोल दिए बटन! तुम इसे मेरे बदन से निकाल दो!
बांह में से तो तुम्हीं को निकालना है!
मैं बांह से निकाल दूंगी तो तुम क्या करोगे?
यही तो जादू है, देखना कैसा जादू करता हूँ।
और जैसे ही मैं अपनी कमीज को हाथ ऊपर कर निकालने लगी उसने तुंरत मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया, मेरी दोनों चूचियाँ नंगी हो गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी नंगी चूचियों को पकड़ कर कस कर मसला तो मैं सिसकारने लगी।
जीवन में पहली बार किसी युवक ने मेरी नंगी चूचियों को हाथ में लिया था, मेरा गनगना उठना स्वाभाविक था, सारे बदन का रोम-रोम मरमरा उठा।
मेरी दोनों चूचियां हमेशा की तरह अपनी औकात से ज्यादा फ़ूल उठी थी, उस समय मेरी चूत भी गीली हो रही थी। ऐसा तभी होता था जब मोहन मेरी भावनाओं से खेलता था, वैसे सुबह सुबह भी चूचियाँ फ़ूल जाती थी, पहले तो उसने मेरी चूचियों को दबाना शुरू किया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मुझसे बोला- जैसा दिल चाहे इस लंड के साथ वैसा ही व्यव्हार करो!
मैंने उसके बमापिलाट लंड को दबाना और सहलाना शरू कर दिया, शरीर में उसको छूने के कारण गुदगुदी हो रही थी।
जब मैंने उसका लंड पकड़ा तो मेरी चूत पहले से ज्यादा फ़ूल कर फुदफ़ुदाने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे वो परदे से बाहर निकल कर लंड से पहली मुलाक़ात कर लेना चाहती हो। सलवार के अन्दर वो पिंजरे में बन्द चिड़िया की तरह फुदकने लगी, मैं अपने प्रेमी मोहन का एकदम बमपिलाट कड़ा लंड उत्साह के साथ सहलाने लगी, मेरा सारा शरीर कसमसाने लगा।
फिर मेरा प्रेमी मेरी चूचियों के निप्पल को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा, उसकी इस नई हरकत से मेरा सारा शरीर मस्ती से काँपने लगा, मुझ पर वासना पूरी तरह सवार हो गई। उसने अपने होंठों के जादू से मेरी चूचियों के निप्पल नुकीले बना दिये।
कैसा लग रहा है? उसने पूछा।
सी … पता नहीं है … पता नहीं मुझे क्या हो रहा है … एक अजीब सा नशा मुझ पर छाता जा रहा है …
अभी मैं नया जादू शुरू करता हूँ … तुम नीचे अपने घुटनों पर खड़ी हो जाओ, इससे तुम्हें एक नया अनुभव मिलेगा! मोहन ने मुझसे कहा।
मैं नीचे घुटनों पर खड़ी हो गई, मोहन ने अपना लंड पकडा और मेरी चूचियों पर अपने लंड का सुपारा रगड़ना शुरू कर दिया, उसने सच कहा था कि उसके लंड में अजीब सा जादू भरा था, मेरा सारा शरीर झनझना उठा, पहली बार दिल में एक इच्छा जागी कि उसके लंड की छाँव तले सो जाऊं और सारी उम्र नहीं जागूँ। मैं एक अजीब सी दुनिया में खो चुकी थी जहां हर तरफ मस्ती और खुशी का बोल-बाला था।
अब कैसा लग रहा है? उसने एक बार फिर पूछा।
सी … कुछ ना कहो … कुछ ना पूछो … ! मैंने कसमसा कर कहा- बस इसे ऐसे ही मेरे दिल से रगड़ते रहो।
फिर उसने अपना लंड ठीक मेरी चूचियों के बीच में रख कर उन्हें आपस में सटा दिया, चूचियों के आपस में सट जाने से बीच में एक पतली सी गली बन गई थी, उसी गली में लंड फंसा था, बड़ा ही मजेदार नजारा था, मैंने उसे पूरा सहयोग करने का मन बना लिया था, फिर वो मेरी चूचियों पर धक्के लगाने लगा, उसके लंड के सुपारे से कोई चिकनी सी चीज रिस रही थी, जिसकी वजह से चूचियों के बीच बनी उस पतली गली का रास्ता चिकना हो गया था। मोहन अब उस पतली गली में आसानी से अपने लंड को घुमा रहा था, वो अपने लंड को ऊपर-नीचे कर धक्के लगा रहा था और उसका लंड चूचियों के बीच से अपनी मुंडी निकाल कर बार बार मुझे देख रहा था। उस समय मैं पूरी तरह बावली सी हो गई, इधर चूत के अन्दर गर्मी कुछ इस तरह बढ़ी कि मैंने हथियार डाल दिये।
सी … बस … बस … मैं हार गई! मैंने तड़प कर कहा- अब तुम इसका जादू यहाँ पर दिखाओ।
मैंने अपनी चूत की तरफ इशारा किया और उठ कर जल्दी से अपनी सलवार खोल डाली।
ठीक है! वो मेरी जाँघों के बिच देखते हुए बोला- यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो अपना काम तो सेवा करना ही है।
मैं सलवार उतार कर लेट गई, उसने मेरी जांघें फैला दी और मुस्कुराता हुआ बड़े प्यार से मेरी चूत को सहलाने लगा, इससे मैं और भी ज्यादा खौल उठी।
सीऽऽ जल्दी आओ ना! मैंने अपने हाथ से अपनी चूत को रगड़ते हुए कहा- यहाँ … यहाँ … कोई चीज खौल रही है! सी … ई … हाय … माँ …
फिर वो थोड़ा सा झुका और एक लम्बा मस्त चुम्बन मेरी चूत पर धर दिया, चूत उसके होंठों का स्पर्श पा कर सरसरा उठी, फिर उसने ढेर सारा थूक मेरी चूत के ठीक बीच में टपका दिया और उसे अंगुली से अच्छी तरह रगड़ा और वहाँ अपना लंड सटा कर मेरी तरफ देखा और बोला- अब आ रहा है!
आऽऽ आने दो सइयां … मैंने कसमसा कर कहा- इतनी देर क्यों लगा रहे हो! बुद्धू इसे देख कर तो मैंने अपनी कसम तोड़ दी है!
इसका फायदा भी तुम्हें मिलेगा! इतना कह कर उसने मेरे दोनों संतरों को अपने हाथों में ले लिया। उसका फुंफकार मारता बमपीलाट लंड बहुत जबरदस्त और कठोर था और पूरी मुस्तैदी के साथ चूत की खास जगह से सटा हुआ था, मेरी चूत उसे इतना करीब पा कर बौखला रही थी, वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि जल्द से जल्द लंड से तालमेल बिठा कर उसे हजम कर जाना चाहती थी।
आ रहा है! मोहन ने एक जोरदार आवाज में कहा।
आने दो! मैं भी बुलंद आवाज में बोली।
बस फिर एक जोर का झटका मैंने अपनी चूत पर महसूस किया, ऐसा लगा कि मैंने बिजली का नंगा तार छू लिया हो, जैसे किसी ने एक चूहे को दुम से पकड़ कर जमीन पर एक जोरदार पटखनी लगाई हो। एक तीखी टीस सी पीड़ा चूत से उठी और सीधा मेरे दिमाग से टकराई, मेरे मुँह से चीख निकली- ऊई … माँ … ये सी … ये क्या हुआ? मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत देखी तो उसका मुँह एक फटे हुए जूते की तरह खुला हुआ था और एक भारी भरकम पैर की तरह उसका लंड मेरी चूत में फंसा दिख रहा था।
ओफ्फो … क्या हुआ? मेरी चीख पर मेरे प्रेमी ने बौखला कर पूछा।
ऊं … हूँ … तुम्हें दिख नहीं रहा है क्या? मैंने उसे आँखों के इशारे से अपनी चूत दिखाई- देखो … सी … देखो तुम्हारा … सी … ई … छोटा भाई … छोटी सी जगह पर किस तरह फंसा पडा है, ऊई … ऊई माँ … मर … गई … आह … मुझे दर्द हो रहा है!
इसमें इतना रोने पीटने की जरूरत नहीं है! वो मेरी चरमराती चूत को सहलाते हुए बोला- यह जगह बनी ही इसके लिये है, यहाँ अब तुम्हें मेरा छोटा भाई फंसा दिख रहा है, इसमें हैरानी की क्या बात है, आज नहीं तो कल यहाँ किसी ना किसी का छोटा भाई फँसना ही था!
उफ … दर्द हो रहा है! मैंने दर्द से नाक सिकोड़ कर कहा- क्या अब यह बाहर नहीं निकल सकता? हूँ … मुझसे इसकी जलन बर्दास्त नहीं हो रही … सी … सी …
अब तो ये आगे जाएगा! इतना कह कर उसने एक और वैसा ही झटका आगे की ओर मारा, चूत से एक अजीब सी आवाज निकली, जैसा कपड़ा फटते समय निकलती है, फिर उसका लंड चूत में समाधी रमा बैठा, अब मैं उछल रही थी क्योंकि उसके लंड का सुपारा मेरे गर्भाशय के मुँह से टकरा रहा था, सुपारे की रगड़ से गर्भाशय के मुँह पर मीठी मीठी गुदगुदी हो रही थी- ऊई … अब तो … हाय … अब तो मैं उछल भी रही हूँ …
ऐसा ही होता है! वो मुस्कुरा कर बोला, वो मेरी चूचियों को दबाने लगा। एक बार फिर मैंने अपनी जाँघों के बीच देखा तो वहाँ गहरे लाल रंग का खून बूंद बूंद होकर टपक रहा था।
हाय … सी … वही हुआ … जो मैं सुहागरात से पहले नहीं चाहती थी, तुमने इसका खून कर ही दिया, हटो … तुम … बड़े वो हो … मैं तुमसे नहीं बोलती!
तुम्हें बोलने को कौन कह रहा है मेरी जान! वो मुझे चूम कर बोला- अब तो तुम देखती रहो … तुम्हें मैं कैसे कैसे जलवे दिखाता हूँ!
उसने चूत पर ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैं आह … ऊई … सी … के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी, चूत की कच्ची दीवारें काँप रही थी, मुझे अच्छी तरह याद है की दसवां धक्का मेरी जवानी को ठंडा कर गया था.
फिर जब तक मेरी शादी नहीं हो गई वो इसी तरह मेरी चूत पर कहर ढाता रहा था, मुझे चुदाई से बहुत सुख मिलता था, इसलिए मैं बिना डोर उसकी ओर खिंची चली जाती थी, उसने चूत पर पूरा अधिकार जमा कर उसका नक्शा ही बदल डाला था, अब पेशाब करते समय चूत से तेज सीटी की आवाज निकलने लगी थी, किसी कारणवश उसका और मेरा जीवन भर का साथ नहीं हो सका था, यह बात बहुत लम्बी है, यहाँ लिख कर मैं आप सबका समय खराब नहीं करना चाहती। Hindi Sex Stories
अभी तक अपना कौमार्य बचा Antarvasna कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।
…. इसी कहानी से
मैं बी.ए. में पढ़ रही हूँ। पिछले सावन तक तो मेरा नाम मेरा नाम मीनल ही था। लेकिन पिछले सावन की उस बारिश भरी रात में नहाने के बाद तो मैं मीनल से मैना ही बन गई हूँ। आप भी सोच रहे होंगे कि अजीब झल्ली लड़की है ! भला यह क्या बात हुई- कोई सावन की बारिश नहा कर कोई लड़की भला मीनल से मैना कैसे बन सकती है ?
ओह.. मैं बताना ही भूल गई।
दरअसल बात यह है कि मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शमा खान। एक नंबर की चुद्दक्कड़ है। अपने भाईजान के साथ चुदाई के किस्से इस तरह रस ले ले कर सुनाती है कि मेरी मुनिया भी पीहू पीहू बोलने लग जाती है। मेरे साथ बी.ए. कर रही है। अगले महीने उसकी शादी भी होने वाली है अपने चचा के लड़के के साथ। पर उन्हें शादी की कोई जल्दी नहीं है क्योंकि वो तो शादी से पहले ही रोज अपनी सुहागरात मनाते हैं।
शमा बताती है कि उनके भाईजान (गुल खान) उनके चचा का लडके हैं। उनका परिवार भी उनके साथ वाली कोठी में ही रहता है। उनका कपड़े का बहुत बड़ा कारोबार है। शमा अपने माँ-बाप की इकलोती औलाद है और गुल भी अपने माँ बाप का इकलौता लड़का और 5 बहनों का एक ही भाई है। दोनों की सगाई हो चुकी है और अगले महीने शादी है।
क्लास रूम में हम दोनों साथ साथ ही बैठती हैं। जब भी कोई खाली पीरियड होता है तो हम दोनों कॉलेज के लॉन या कैंटीन में चली जाती हैं और फिर शमा अपनी चुदाई के किस्से रस ले ले कर सुनाती है कि कल रात भाईजान ने किस तरीके या किस आसन में उसकी धमाकेदार चुदाई की थी।
एक बार मैंने उससे पूछा था कि तुम्हें शादी से पहले यह सब करने में डर नहीं लगता? तो उसने जो जवाब दिया था- आप भी सुन लें “चुदाई में डर कैसा ? खूब मस्त होकर चुदवाती हूँ मैं तो और रही हमल (गर्भ) ठहरने की बात तो आज कल बाज़ार में बहुत सी पिल्स (गोलियाँ) मिलती हैं जिनसे उसका भी कोई खतरा नहीं है।”
“लेकिन वो .. पहली चुदाई तो सुहागरात में की जाती है ना… तुमने तो शादी के पहले ही सब कुछ करवा लिया अब सुहागरात में क्या करोगी ?” मैंने पूछा तो वो हंसते हुए बोली
“अरे मेरी भोली बन्नो मेरी चूत की सहेली फिर किस काम आएगी ?”
मैंने हैरानी से उसे देखते हुए पूछा “वो क्या होती है ?”
“तुम तो एक नंबर की बहनजी हो अरे भाई मैं गांड बेगम की बात कर रही हूँ !” उसने आँख मारते हुए कहा तो मेरी हंसी निकल गई।
“छी … छी… उसमें भी भला कोई करता है ?” मैंने कहा।
“अरे मेरी जान इसमें नाक चढ़ाने वाली क्या बात है, चुदाई में कुछ भी गन्दा या बुरा नहीं होता ! इस जवानी का पूरा मजा लेना चाहिए। मेरे भाईजान तो कहते हैं असली मजा तो गांड बाजी में ही आता है ये तो जन्नत का दूसरा दरवाजा है !” वो जोर जोर से हंसने लगी।
“तो क्या उन्होंने तुम्हारी ? … मेरा मतलब …” मैं गड़बड़ा सी गई।
“नहीं उसके लिए मैंने ही मना कर दिया है। गांड तो मैं उनसे जरूर मरवाउंगी पर सुहागरात को !” शमा ने कहा “अच्छा चल मेरी छोड़, तू बता तूने कभी कुछ किया है या नहीं ?”
“मैंने ?? अरे ना बाबा ना … मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया ”
“तुम भी निरी बहनजी हो। शादी से पहले की गई चुदाई में अलग ही मज़ा होता है। लड़की की खूबसूरती चुदाई के बाद और भी बढ़ जाती है। ये देख मेरे मम्मे और चूतड़ (नितम्ब) कितने गोल मटोल हो गए हैं एक साल की चुदाई में ही। तू किसी को क्यों नहीं पटाती ? क्यों अपनी जालिम जवानी को बर्बाद कर रही है। इन मम्मों का दूध किसी प्यासे को पिला दिया कर 32 से 36 हो जायेंगे।”
कितना गन्दा बोलती है ये शमा। मुझे तो इन अंगों का नाम लेते हुए भी शर्म आती है फिर चुदाई की बात तो दूर की है। पर जब भी शमा अपनी चुदाई की बात करती है तो मेरी मुनिया भी चुलबुला कर आंसू बहाने लग जाती है और फिर मुझे टॉयलेट में जा कर उसकी पिटाई करनी पड़ती है।
मैंने अभी तक अपना कौमार्य बचा कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।
पर सबसे बड़ा प्रश्न तो यह था कि किसके साथ ? मोहल्ले में तो कई शोहदे अपना लंड हाथों में लिए फिरते है पर मेरे ख़्वाबों का शहजादा तो उनमें से कोई भी नहीं है। हाँ कॉलेज में जरूर एक दो लडके मेरी पसंद के हैं पर वो भी किसी न किसी लड़की के चक्कर में पड़े रहते हैं।
और फिर जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली। प्रेम भैया 3-4 दिन पहले ही तो हमारे यहाँ आये है अपनी ट्रेनिंग के सिलसिले में। पहले तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया था। ओह… मैं भी निरी उल्लू ही हूँ इतना सुन्दर सजीला जवान मेरे पास है और मैं अपनी चूत हाथों में लिए बेकार घूम रही हूँ। प्रेम भैया मेरी जोधपुर वाली मौसी के लड़के है। बचपन में तो हम साथ साथ ही खेलते और बारिश में नहाते थे पर पिछले 4-5 साल में मैं उनसे नहीं मिल पाई थी। परसों जब वो आये थे तो उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया था। तब पहली बार मुझे लगा था कि मैं अपने भैया के नहीं किसी मर्द के सीने से लगी हूँ। मेरे उरोज उनके सीने से लग कर दब से गए थे। पर वो तो मुझे अभी भी छोटी बच्ची ही समझ रहे होंगे। मैंने सोचा क्यों ना प्रेम भैया से …..
ओह … पर यह कैसे संभव हो सकता है वो मेरे सगे तो नहीं पर मौसेरे भाई तो हैं और भाई के साथ… ओह ये नहीं हो सकता ? वो तो अभी भी मुझे बच्ची ही समझते होंगे। उन्हें क्या पता कि मैं अब बच्ची नहीं क़यामत बन चुकी हूँ। मेरे नितम्ब देख कर तो अच्छे अच्छों के पपलू खड़े हो जाते हैं और उनके सीने पर सांप लोटने लग जाते है रास्ते में चलते हुए जब कोई फिकरे कसता है या सीटी बजाता है तो मुझे बहुत गुस्सा आता है पर फिर मैं रोमांच से भी भर जाती हूँ। काश मैं भी शमा की तरह होती तो मैं भी प्रेम के साथ आसानी से सब कुछ करवा लेती और शादी के बारे में भी सोच सकती थी पर हमारे धर्म और समाज में ऐसा कैसे हो सकता है। पता नहीं इन धर्म और समाज के ठेकेदारों ने औरत जाति के साथ हमेशा ही अत्त्याचार क्यों किया है। औरत और मर्द का रिश्ता तो कुदरत ने खुद बनाया है। शमा बताती है कि उनकी एक रिश्तेदार है उसने तो अपने सगे भाई से ही चुदवा लिया है।
और फिर मैंने भी सब कुछ सोच लिया ….
बचपन में मुझे बारिश में नहाना बहुत अच्छा लगता था। पर मेरी मम्मी तो मुझे बारिश में भीगने ही नहीं देती थी। बात दरअसल यह थी कि जब भी मैं बारिश में नहाती तो मुझे जोर की ठण्ड लग जाती और मैं बीमार पड़ जाती तो मम्मी बहुत ही गुस्सा होती। अब भी जब बारिश होती है तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाती भले ही मुझे बाद में तकलीफ ही क्यों ना हो। और फिर सावन की बरसात तो मैं मिस कर ही नहीं सकती।
हमारा घर दो मंजिला है। ऊपर एक कमरा बना है और उसके साथ ही बाथरूम भी है। अगर कोई मेहमान आ जाए तो उसमें ही ठहर जाता है। प्रेम भैया को भी वही कमरा दिया है। वो इस कमरे में बिना किसी विघ्न बाधा के अपनी पढ़ाई लिखाई कर सकते हैं। उस समय रात के कोई 10.30 बजे होंगे। हम सभी ने खाना खा लिया था। मम्मी पापा सो गए थे। मैं प्रेम भैया के पास बैठी गप्प लगा रही थी। बाहर बारिश हो रही थी। मेरा जी बारिश में नहाने को मचलने लगा। मैंने प्रेम से कहा तो वो बोले “तुम्हें ठण्ड लग जायेगी और फिर मौसीजी बहुत गुस्सा होंगी !”
“ओह कुछ नहीं होता ! प्लीज भैया, आप भी आ जाओ ना ! बहुत मजा आएगा साथ नहाने में !”
और फिर हम दोनों ही बाहर आ गए। मैंने हलके पिस्ता रंग का टॉप और पतला सा कॉटन का पाजामा पहन रखा था। आप तो जानती ही हैं कि मैं रात को सोते समय ब्रा और पेंटी नहीं डालती। भैया ने भी कुरता पाजामा पहन रखा था। मैं कोई 2-3 साल बाद ही बारिश में नहा रही थी। नहाने में पहले तो मुझे बड़ा मजा आया पर बाद में ठण्ड के कारण मेरे दांत बजने लगे और मुझे छींके आनी शुरू हो गई। मेरे सारे कपड़े भीग चुके थे और गीले कपड़ों में मेरा सांचे में ढला बदन साफ़ नजर आ रहा था। मेरे गोल गोल उरोज भीगे शर्ट से साफ़ नजर आ रहे थे। भैया की घूरती आँखें मुझ से छुपी नहीं थी। भगवान् ने औरत जात को ये गुण तो दिया ही है कि वो आदमियों की नजरों को एक मिनट में ही पहचान लेती है, फिर भला मैं उनकी आँखों की चमक कैसी नहीं पहचानती ?
मुझे अपनी और देखते हुए पाकर भैया बोले, “मैंने तुम्हे मना किया था ना ! अब मौसीजी कितना नाराज होंगी ?”
“ओह भैया प्लीज मम्मी को मत बता … न … ओ … छीईईइ …..” मुझे जोर की छींक आ गई और उसके साथ ही मेरे उरोज टेनिस की गेंद की तरह उछले।
भैया मेरा बाजू पकड़ कर नीचे ले जाने लगे मैंने कहा, “नहीं, नीचे मम्मी देख लेंगी आपके कमरे में ही चलते हैं !” और हम लोग वापस कमरे के अन्दर आ गए। मेरे दांत बजते जा रहे थे भैया ने तौलिये से मेरा शरीर पोंछना शुरू कर दिया शरीर पोंछते हुए उनका हाथ मेरे उरोजों और नितम्बों से छू गया। मेरे शरीर में जैसे कोई बिजली सी दौड़ी। मैं तो रोमांच से ही भर उठी मेरा अंग अंग गीले कपड़ों में साफ़ झलक रहा था।
“ओह इन गीले कपड़ों को उतारना होगा… पर….. वो… तुम्हारे लिए सूखे कपड़े ?”
“कोई बात नहीं आपकी कोई लुंगी और शर्ट तो होंगी ?”
“आन … हाँ ” उन्होंने अपनी धुली हुई लुंगी और शर्ट मुझे दे दी। हम दोनों ने बाथरूम में जाकर कपड़े बदल लिए। ढीली शर्ट में मेरे उरोजों की घुन्डियाँ साफ़ दिख रही थी। गोल गोल संतरे जैसे मेरे उरोज तो इस समय तन कर खड़े क़यामत बने थे। भैया की नज़रें तो उन पर से हट ही नहीं रही थी। इतने में जोर से बिजली कड़की तो डर के मारे मैं भैया की ओर खिसक आई। मेरे दांत अब भी बज रहे थे।
भैया बोले,“तुमने तो जानबूझकर मुसीबत मोल ली है। लाओ, तुम्हारे हाथ और पैर के तलवे मल देता हूँ इससे तुम्हारी ठण्ड कम हो जायेगी !” और उन्होंने मेरे नाजुक हाथ अपने हाथों में ले लिए। मेरे लिए किसी मर्द का ये पहला स्पर्श था। मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ने लगी। भैया मेरे हाथ मलते जा रहे थे। मैंने कनखियों से देखा था उनका ‘वो’ कुतुबमीनार बन गया था। हे भगवान् ये तो कम से कम 7-8 इंच का तो जरूर होगा। उनकी साँसे गरम होती जा रही थी। मेरा भी यही हाल था। मेरे होंठ काँप रहे थे पर इस बार ठण्ड के कारण नहीं बल्कि रोमांच के कारण। पर मैंने ठण्ड का बहाना बनाए रखा।
फिर भैया बोले “मीनू लाओ तुम्हारे पैर के तलवे भी मल देता हूँ ”
मैं भी तो यही चाहती थी। मैं बेड से टेक लगाए उकडू बैठी थी। मैंने एक पैर थोडा सा आगे कर दिया। उन्होंने मेरे पैर के तलवों को मलना शुरू कर दिया। जैसे ही उन्होंने मेरा पैर थोड़ा सा ऊपर किया मेरी ढीली लुंगी नीचे हो गई। मैंने जान बूझ कर इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया। मैं जानती थी मेरी मुनिया अब उनको साफ़ दिख रही होगी। मैंने अधखुली आँखों से देखा भैया की कनपटी लाल हो गई है। थोडा सा पसीना भी आने लगा है। उनके होंठ भी कांपने से लगे हैं। भैया का बुरा हाल था। वो तो टकटकी लगाए मेरी जाँघों की और ही देखे जा रहे था। केले के पेड़ की तरह मेरी चिकनी जांघें और छोटे छोटे रेशमी बालों से लकदक मेरी पिक्की देख कर वो तो जैसे निहाल ही हो गए थे। और पिक्की की मोटी मोटी गुलाबी फांकें को देखकर तो उनकी आँखें जैसे फटी की फटी ही रह गई थी। उनके हाथ कांप रहे थे। मैं भी आँखे बंद किये रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। मैंने छेड़ने के अंदाज में उनसे कहा “भैया आपको भी ठण्ड लग रही है क्या ?”
“आन…. हाँ शायद ऐसा ही है !”
“पर ठण्ड में तो दांत बजते है, आपको तो पसीना आ रहा है ?”
“वो.. वो … ओह कुछ नहीं ” उनकी आँखें अब भी मेरी पिक्की की ओर ही थी। मैंने झट से अपना पैर खींचते हुए लुंगी से ढक लिया।
“ओह सॉरी ….” भैया की हालत तो अब देखने लायक थी।
“भैया ये चीटिंग है ?” मैंने झूटमूठ का गुस्सा किया।
“ओह सॉरी बाबा ! मैंने कुछ नहीं देखा !”
“तो फिर आप इतना घबरा क्यों रहे हैं ?” मेरी हंसी निकल गई।
“ओह.. आई एम… सॉरी !”
“अच्छा भैया एक बात पूछूं ?”
“क… क्या …?”
“सच बताना आपकी कोई गर्ल फ्रेंड है ?”
“अरे… वो … वो… नहीं तो … पर तुम ये क्यों पूछ रही हो ?”
“प्लीज बताओ ना भैया ?”
“अरे मैंने बताया ना कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है। मुझे तो पढ़ाई से ही फुर्सत नहीं मिलती। पर एक बात है ?”
वो क्या ?”
“तुम्हारी वो जो फ्रेंड है ना ! अरे वो ही जो सुबह आई थी ?”
“ओह… शमा ?”
“हाँ….”
“क्यों क्या बात है ?”
“यार … वो बहुत खूबसूरत है ?”
“ओह … तो मेरे भैया उस पर मर मिटे हैं ?” मैं हँसने लगी।
“नहीं ऐसी बात नहीं है। वैसे वो है लाजवाब !” भैया की आँखों में जैसे चमक सी आ गई थी।
“अरे उसका वीजा लग चुका है वो हाथ आने वाली नहीं है ?”
“ओह…”
“पर ऐसी क्या बात है उसमें ?”
“यार मीनू उसके बूब्स और नितम्ब तो कमाल के हैं” भैया बोले।
उनकी आंखों में अब लाल डोरे तैरने लगे थे। ये मर्द भी सभी एक जात के होते हैं. औरत की खूबसूरती तो उन्हें केवल नितम्बों और उरोजों में ही नजर आती है. मैंने अपने मन में कहा ‘एक बार मेरे देख लोगे तो सब कुछ भूल जाओगे” पर मैंने कहा “अच्छा मेरी फिगर कैसी है ?”
“अरे तुम तो हुस्न की मल्लिका हो अगर कोई फ़रिश्ता भी तुम्हारे भीगे बदन को देख ले तो जन्नत का रास्ता भूल जाए !”
जी में तो आया कह दूं ‘फिर तुम क्यों नहीं रास्ता भूल रहे हो’ पर मैंने उनकी आँखों में झांकते हुए कहा “क्या वाकई मैं इतनी खूबसूरत हूँ ?”
“सच्ची मीनू कभी कभी तो मैं ये सोचता हूँ अगर तुम मेरी मौसेरी बहन नहीं होती तो मैं किसी भी कीमत पर तुमसे शादी कर के छोड़ता …” उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा “ओह … पर ऐसा कहाँ संभव है ?”
“क्यों ?” मैंने अनजान बनाते हुए कहा। मैं उनकी उखड़ी हुई साँसे अच्छी तरह महसूस कर रही थी। उनका पाजामा तो तम्बू ही बना था।
“ओह … मीनू … सच कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर … प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।
शेष अगले भाग में !
इस कहानी का मूल्यांकन दूसरे भाग में करें ! Antarvasna
हेल्लो दोस्तो, पहले Antarvasna तो अन्तर्वासना को मेरी कहानी अन्तर्वासना में प्रकशित करने के लिए धन्यवाद और आप सभी दोस्तों को प्यार जिन्होंने मुझे मेल किया.
आशा करता हूँ सभी चूतों और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी. मेरा इमेल कहानी के अंत में दिया हुआ है.
आपने कुछ दिन पहले मेरी और रक्षिता की कहानी जयपुर में पतंगबाजी पढ़ी होगी, आज मैं उसके आगे की कहानी लेकर हाजिर हूँ।
मैं अपनी कहानी वहाँ से शुरू करता हूँ जब हमने 14 जनवरी, 2010 को पहली बार चुदाई की थी।
उस दिन शाम को रक्षिता बोलती है- जान, आज तो तुमने सच में जन्नत की सैर करा दी!
मैंने उसे चूमते हुए कहा- जानू, अभी तो इस अप्सरा को पूरी जन्नत की सैर करनी बाकी है!
फिर मैं अपने घर चला गया।
अगले दिन जब उसकी भाभी पड़ोस में गई थी तब 12 बजे मैं चुपके से रक्षिता के कमरे में चला गया और वहाँ दरवाज़ा बंद करके मैंने उसे चूमना शुरू किया।
आज उसने गुलाबी रंग का सलवार सूट पहना था.
क्या तो मस्त बला लग रही थी वो!
मैंने चूमते हुए उसके स्तन भी दबा दिए।
फिर मैंने उसका कुर्ता उतारा!
पहले तो थोड़ी देर मस्त स्तनों को ब्रा में से ही दबाने लगा फिर ब्रा उतार कर उसके स्तनों को आजाद कर दिया।
उसके मोटे मोटे स्तन बड़े शानदार लग रहे थे। मैंने उसके स्तनों का दूध पीना शुरू कर दिया.
उसकी आहें निकलने लगी- आह ओह्ह आह!
फिर मैंने कहा- अब तुम मुझे इन कपड़ों से आजाद करो!
तो वो बोली- अभी लो मेरी जान, तुझे अभी नंगा कर देती हूँ.
फिर उसने मेरा टी-शर्ट उतारा और बनियान उतार कर मेरे सीने पर चूमने लगी।
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
फिर उसने मेरी जींस उतारी और और अंडरवीयर में ही लंड को मसलने लगी। फिर मेरा अंडरवीयर उतारा और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
मुझे बहुत मजा आया, जब तक पानी नहीं निकल गया तब तक वो लंड चूसती रही और सारा पानी पी गई।
फिर उसके बाद मैंने उसका कुर्ता उतारा और उसे सिर्फ पैंटी में कर दिया।
वो पैंटी में बहुत मस्त लग रही थी।
मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को मसलने लगा।
उसकी चूत गीली हो चुकी थी मैंने उसकी चूत के पानी को चाटने के लिए उसकी चूत में मुह लगाकर जीभ से चाटने लगा.
उसकी आहें फिर से सुनाई देने लगी.
फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाला और उसकी चुदाई शुरू कर दी।
आज चूत में लंड डालने पर उसे ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि आज उसे दर्द नहीं हो रहा था।
चूत की चुदाई करीब 15 मिनट चली, फिर उसकी गांड मारनी शुरू कर दी।
पहले तो उसे घोड़े के जैसे पलंग पर लेटाया फिर उसकी गांड में अपना मस्त, मोटा लौड़ा डाल दिया।
उसकी गांड कसी थी इसलिए मैंने उसकी गांड की आराम से चुदाई की लेकिन आज उसे कुछ ज्यादा ही मजे आ रहे थे और वो गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी। उसकी गांड बिल्कुल लाल हो चुकी थी।
मैंने उसकी गांड के दोनों कूल्हों पर हाथ से मारा जिससे वो और लाल हो गए।
जब पानी आया तो इस बार सारा उसकी चूत में ही छोड़ दिया।
फिर मैंने कपड़े पहने और जब मैं उसके घर से जाने लगा तो भाभी बोली- रोहित, तुम कब आये? मैंने तो देखा ही नहीं!
मैं बोला- दस मिनट हुए हैं!
और चला गया.
भाभी को शायद शक हो गया था!
अगले दिन भाभी जब पड़ोस में गई तो मैं फिर आ गया।
जब मैं रक्षिता को चूम रहा था तो भाभी ने दरवाजा खटखटाया और बोली- रक्शु, एक बार दरवाज़ा खोल! मुझे कुछ काम है!
मैं जल्दी से पलंग के नीचे छुप गया।
भाभी अंदर आ गई और कमरे की तलाशी लेने लग गई।
तो रक्षिता बोली- क्या ढूंढ रही हो भाभी?
भाभी बोली- तू बैठ! मुझे जो ढूंढना है वो मैं ढूंढूँगी!
फिर भाभी ने बेड के नीचे देखा और बोली- बाहर आ जा रोहित!
मैं बोला- भाभी, किसी से मत बोलना!
फिर वो बोली- मेरी एक शर्त है!
हम दोनों बोले- वो क्या?
“तू रक्षिता के साथ मुझे भी चोद!”
मैं बोला- ठीक है!
भाभी का फिगर बहुत मस्त था, मैं सोचने लगा कि मस्त माल हाथ लग गया।
फिर मैंने भाभी की साड़ी उतारी और फिर ब्लाऊज़ उतार कर चूचियों को चूसने लगा।
रक्षिता मेरे कपड़े उतार कर मेरा लौड़ा चूसने लगी।
फिर मैंने भाभी का पेटीकोट उतारा और पैंटी में से ही चूत में खुजली करने लगा.
भाभी के मुँह से आवाजें आने लगी- आह! ओह्ह! मजा आ गया!
अब भाभी बोली- बहन के लौड़े! तूने मुझे पहले क्यों नहीं चोदा? और तेज़ चोद मेरे राजा! आज तो तूने सच में चुदाई की.
भाभी और मैं लगभग एक साथ झड़ गए।
फिर थोड़ी देर रुकने के बाद रक्षिता बोली- जान, अब मेरी चूत की प्यास भी बुझा दो!
मैं बोला- मैं अपनी जान को चोदे बिना थोड़े ही छोड़ूंगा!
फिर मैंने रक्षिता की चूत में अपना बड़ा सा लंड डाला और उसकी तेज़ स्पीड में चुदाई शुरू कर दी।
वो आह ओह्ह आह ओह्ह की आवाजें निकालने लगी.
मुझे उसकी आवाजें सुनकर बहुत मजा आने लगा, मैंने और स्पीड बढ़ा दी।
उसकी भाभी मुझे चूम रही थी और रक्षिता के स्तन दबा रही थी।
मैंने दूसरी बार दो लड़कियों की चुदाई की थी जिसमें मुझे काफी मजा आया।
इस चुदाई में मुझे पहले से ज्यादा मजा आया।
रक्षिता की चुदाई होने के बाद भाभी बोली- रोहित, तेरे भैया तो मेरी गांड मारते नहीं हैं! तू ही मार दे.
मैं बोला- ये लो भाभी! अभी मार देता हूँ.
फिर मैंने भाभी को घोड़ी की तरह बैठाया और उसकी गांड में लंड डालने लगा.
भाभी पहली बार गांड मरवा रही थी इसलिए मुझे थोड़ा ज्यादा जोर लगाना पड़ा।
लंड को घुसने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन मैं हार मानने वाला कहाँ था … मैंने पूरा जोर लगा दिया.
भाभी चिल्लाने लगी- मर गई मैं तो … पर तू घुसा रोहित … तू मत रुक.
अब मैं और जोश के साथ गांड में घुसाने लगा।
आखिरकार मैं उसकी गांड में अपना लंड घुसाने में कामयाब रहा।
फिर मैंने धीरे धीरे स्पीड बढ़ा दी.
भाभी बोली- मजा आ गया पहली बार गांड मरवाने में! बहन का लौड़ा, मेरा पति तो मेरी गांड चोदता ही नहीं है.
फिर मैंने उसकी गांड में पानी छोड़ दिया।
तब तक दो बज चुके थे, भाभी बोली- रोहित, हम दोनों चूत और गांड धो कर आते हैं, तू तब तक कमरे में बैठ! हम एक साथ खाना खायेंगे।
फिर भाभी खाना लगाया और मुझे बोली- रोहित, तू कल आना! मैं अपनी सहेलियों को बुला कर लाऊँगी।
मैं बोला- ठीक है.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए अन्तर्वासना3 डॉट कॉम हर रोज देखते रहें!
मुझे सभी के मेल का इंतज़ार रहेगा! Antarvasna
ये कहानी आज से 6 महीने पहले की Antarvasna है जब हम अपनी दूसरी साली की शादी में गये थे बड़ौदा, मेरी पहली साली की शादी को 6 महीने हुए थे।
वो भी अपनी बहन की शादी की तैयारी के लिये आई थी।
मेरी साली का नाम है सोनू, हम सब शादी से 1 हफ़्ते पहले गये थे।
उसका पति नहीं आया था।
वो करीबन होगी 24 की।
वो भी मेरी बीवी की तरह ही बहुत सेक्सी थी, वैसे साली का फ़ीगर होगा 36-29-38 उसके बूब तो बहुत ही सेक्सी थे जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे ये देख कर कोई भी आदमी मचल जाये।
उसके पति की अक्सर नाइट ड्युटी रहती थी।
मैं जब भी उसके घर पर जाता तो उसको देखता ही रहता और उसको चोदने के बारे में सोचा करता के काश इस को चोद सकूँ।
एक दिन जब रात को सोने गये तो एक रूम में पूरा सामान पड़ा था इस लिये हम सब एक साथ ही सो गये। पहले मेरे बगल मे मेरी वाइफ़ तब साली।
रात को जब मैं पानी पीने उठा तो वापस आकर देखा तो मरी जगह पर मेरी वाइफ़ थी।
इसलिये में साली और मेरी वाइफ़ के बीच में सो गया।
मुझे नींद नहीं आ रही थी।
थोड़ी देर के बाद मेरी साली ने अपने पैर मेरे पैरों पर रख दिया।
उसने नाइटी पहनी थी और वो उसके घुटने तक ऊपर हो गयी थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया और पूरा टेंट बन गया।
फिर मैंने भी अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया।
थोड़ी देर के बाद जब वो कुछ न बोली तब मैंने अपने हाथ को थोड़ा ऊपर लेके उसके एक बूब पर रख दिया और धीरे से दबाने लगा।
वो धीरे से मेरे पास आ गई तो मुझे लगा रेस्पोंस मिल रहा है।
ओर मैंने फिर दूसरे बूब को दबाने लगा।
फिर वो मेरी तरफ़ घूम गई तो मैंने अपने हाथ उसके नाइटी में ऊपर से डाल कर उसके टिट्स को दबाने लगा।
वो मचलने लगी और मुझे कान में कहा स्टोर रूम में चलते हैं।
फिर वो उठके दूसरे रूम मे चली गई और मैं भी उसके पीछे चला गया और स्टोर रूम का दरवाजा बंद कर दिया।
उसको मैंने पीछे से पकड़ कर उसके बूब्स दबाने लगा।
उसने कहा- आहिस्ता, आहिस्ता।
फिर मैंने उसकी नाइटी को ऊपर उठा कर पूरा निकाल दिया और उसको किस करने लगा।
मैंने उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके टिट्स को हाथ से दबाने लगा।
उसकी सांसे तेज हो रही थी।
उसने मुझे बूब्स चूसने को कहा और मैंने उसका दायाँ बूब्स चूसने लगा और पूरा चाटने लगा।
थोड़ी देर के बाद दूसरा बूब्स भी चूसा।
अब मैंने धीरे से उसका पेटीकोट को ऊपर कर के अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया और बूब्स भी चूसता रहा।
उसकी चूत पर बाल नहीं थे और पूरी गीली हो गई थी।
थोड़ी देर के बाद मैंने एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी और वो मचल गई।
अब वो सिसकियाँ ले रही थी और मैंने उसका पेटीकोट और पैंटी निकाल दिया और उसकी चूत को चाटने लगा।
उसके पानी का स्वाद बहुत अच्छा था। उसने मेरे पैजामे का नाड़ा खोल दिया और पैजामा और अंडरवियर उतार दिये।
वो मेरा लंड को देखती ही रह गयी और बोली ये तो उसके पति से बहुत बड़ा है और उस पर हाथ फ़ेरने लगी।
मैंने फिर से उसकी चूत को चाटने लगा और हम 69 कि पोजिशन में आ गये।
वहां पे कोई बिस्तर नहीं था इसलिये टाइल्स पर ही लेट गये।
मैंने उसके स्लिट को दांतो से थोड़ा सा दबाया और वो जोर से मचल पड़ी और फिर मैंने अपनी जीभ को उसके अंदर डाल कर अंदर बाहर हिलाने लगा।
वो सिसकिया भरने लगी और बहुत गर्म हो गई।
फिर वो मेरी बाहों में आ कर लिपट गई और धीरे से कहा कि अब मत तड़पाओ, अब मेरे अंदर जल्दी से डालो, मैं मर रही हूं।
तो मैं एक कुरसी पर बैठ गया और उसको आगे की तरफ़ झुका कर अपने लंड पर बिठा दिया और जोर से एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
वो दर्द के मारे अपने होंठों को दबाये मुझे पीछे पकड़ लिया।
थोड़ी देर उसको ऐसे ही बिठाये मैं भी बैठा रहा।
फिर उसे मजा आने लगा और वो आगे पीछे होने लगी।
मैंने भी पीछे से धक्के देने शुरु कर दिये।
10 मिनट बाद उसकी रफ़्तार तेज हो गई और मेरा भी निकलने वाला था इसलिये मैंने भी जोर से धक्का लगाना शुरु कर दिया।
थोड़ी देर के बाद वो मुझे पर बैठ गई और मैंने भी उसके दोनो बूब्स को जोर सो दबाने लगा और हम दोनो ने एक साथ अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहे।
फिर हम दोनो ने अपने कपड़े पहन कर एक लम्बी किस कर के वापस अपनी जगह पर आके सो गये।
हम दोनो पूरी रात नहीं सोये।
मैं भी उसके बगल में लेटे उसकी पैंटी में हाथ डाल कर चूत पर अपना हाथ फेरता रहा।
वो भी चादर में हाथ डाल कर मेरे लंड को पूरी रात पकड़ कर सोयी रही।
जब तक हम वहां पर साथ रहे रोज कुछ बहाना निकाल कर बाहर चले जाते और कोई फ़र्म और खाली जगह पर जाके अपनी मोटर साइकल पर बैठ कर ही मजे लूटते रहे।अब वो प्रेग्नेंट हो गई है और मेरे ही बच्चे की मां बनेगी। Antarvasna
दूसरी साली को भी कैसे चोदा वो अगली कहानी में
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