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बात उन दिनों की है जब मैं अपनी Antarvasna Stories पढ़ाई के लिए दिल्ली आया था, मुझे मेरे बुआ के घर पर रहना था। मेरी बुआ का लड़का एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी में काम करता है। उनकी शादी अभी दो साल पहले हुई थी। मेरी भाभी जिनका एक साल का एक लड़का भी है, उनकी सुन्दरता में कोई कमी नहीं थी।
उनकी चूची ऐसी थी मानो नागपुरी संतरे अभी अभी पेड़ों पर लदा ही है। उनका आकार भी मानो क़यामत हो। उनको देख कर कोई यह कह नहीं सकता कि उनका एक साल का एक बच्चा भी है।
हमेशा मेरा मन उन्हें चोदने को करता पर मौका नहीं मिल पाता। वैसे जब भी मैं पढ़ कर घर आता तो उनका बिस्तर ही मेरे आराम का साधन होता था। मैं उनके बिस्तर पर ही लेट जाता जाता था, मेरी भाभी भी आकर मेरे बगल में लेट जाती थी।
चूंकि घर में बुआ के अलावा और कोई था भी नहीं और मेरी बुआ को मेरे ऊपर विश्वास था ही, इसकी वजह से कभी किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।
एक दिन भाभी मेरे बगल में लेट कर बच्चे को दूध पिला रही थी, उस वक़्त उनकी चूची देखी थी, क्या रंग दिया था खुदा ने उनके शरीर को, एकदम दूधिया रंग की चूची थी उनकी? देखा तो देखता ही रह गया था! उस दिन चोरी चोरी उनकी चूची को देखता रहा और कब नींद लग गई पता ही नहीं चला।
उस दिन के बाद मैं हमेशा उनके आगे-पीछे डोलने लगा कि कब मौका मिल जाये और उनके गोरे बदन का दीदार हो जाये। रब ने ऐसा मौका जल्दी ही दे दिया।
उस दिन बुआ पड़ोस में पूजा देखने के लिए गई थी और शाम से पहले लौटने वाली भी नहीं थी। मैं गया और भाभी की रजाई में घुस गया। थोड़ी देर बाद भाभी भी बच्चे को ले कर आई और मेरे सामने ही दूध पिलाने लगी।
अब मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं रजाई से निकल कर जाने लगा तो भाभी ने मुझे टोका, कहा- कहाँ जा रहे हो?
तो मैंने छूटते ही कहा- जब आप ऐसे रहोगी तो मेरे लिये यहाँ पर रहना मुश्किल हो जाएगा।
वो मेरी बात को समझ नहीं पाई और बोली- क्या हुआ? मैंने ऐसे क्या कर दिया जो ऐसे बोल रहे हो?
फिर मैंने कहा- भाभी एक तो आप बला की खूबसूरत हो! जो भी देखे देखते रह जाए। मेरे लिए तो आपको देख कर अपने आप पर काबू कर पाना पहले ही मुश्किल था उपर से आपके आपके ये नागपुरी संतरे मुझे जीने नहीं दे रहे हैं।
यह सुनकर भाभी थोड़ा सा शरमा गई और रूठने का नाटक करती हुई बोली- जाओ! मैं आपसे बात नहीं करती!
फिर मैं भाभी को अपनी तरफ घुमाते हुए बोला- सच कहता हूँ भाभी! मैंने जब से आपको देखा है मेरे तो नींद ही उड़ गई है, हरदम मेरे खयालो में आप ही रहती हो।
इतना सुनते ही भाभी शरमा गई और बस इतना ही बोली- धत्त!
फिर क्या था मैंने उनको अपने आगोश में लेते हुए उनके गाल पर एक चुम्मा जड़ दिया।
उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली और थोड़ी देर तक ना-नुकर करती रही, लेकिन उन पर मेरी पकड़ मजबूत होती जा रही थी, उनके गालो की जगह मेरे ओंठ उनकी ओंठों को चूमने लगे थे और मेरे हाथ धीरे-धीरे उनकी नंगी चूचियों की तरफ बढ़ने लगे थे।
मेरी उँगलियों का जादू उन पर धीरे-धीरे छाने लगा था और वो भी मदहोश होने लगी थी।
जब पहली बार मेरे हाथ उनकी चूचियों पर पड़े, मानो मुझे स्वर्ग मिल गया।
जिंदगी में पहली बार इस सुखद एहसास का आनंद मिल रहा था जिसे मैं किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था। मेरे ओंठ अभी भी उनके ओंठों पर चिपके हुए थे और मेरी उंगलियाँ उनकी चूचियों पर तैर रही थी।
मैंने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई और मैंने अपना दायाँ हाथ उनकी कमर में डाल दिया और धीरे धीरे उनकी नंगी कमर को सहलाने लगा, साथ ही अपनी जीभ उनके मुँह में ठेलने लगा।
इसके एवज में उन्होंने मुझे बहुत जोर से जकड़ लिया और मेरे हर चुम्बन का जबाव दुगुने जोश के साथ देने लगी।
अब मेरे लंड की हालत ख़राब होने लगी थी और पजामे के अन्दर वो फुंफकार मारने लगा था। मैंने एक हाथ से अपने पजामे का नाड़ा ढीला किया और 7″ लम्बे लंड को बाहर निकाल कर उनके हाथों में थमा दिया। जिसे वो बड़े प्यार से सहलाने लगी मेरे लंड की अकड़ धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी।
मैंने अपने हाथों का दायरा थोड़ा और बढ़ाया और धीरे-धीरे अपनी उँगलियों को उनकी चूत की तरफ बढ़ाने लगा।
पहले तो वो थोड़ा सा कसमसाई पर मेरे जोर देने पर फिर मान गई। मेरी उंगलियाँ ज्यों-ज्यों उनकी चूत की तरफ बढ़ती जा रही थी उनकी सांसें उतनी ही तेज चलने लगी थी, उनके मुँह से अजीब सी आवाजें निकल रही थे जैसे- ऊओह आह स स स श श!!!
मैंने धीरे से उनको बिस्तर पर लिटाया और धीरे धीरे उनके कपड़े उतारने लगा।
चूंकि दूध पिलाने के लिए उन्होंने अपने ब्लाउज के कुछ बटन पहले ही खोल रखे थे और उनकी एक चूची बाहर निकली हुई थी, इसलिए ब्लाउज उतारने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगी। अब सफ़ेद ब्रा में उनका शरीर दमक रहा था। धीरे से मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ऊपर से वो बिल्कुल नंगी थी।
इस बार उन्होंने उठ कर मेरा शर्ट खोल दिया। इस तरह हम दोनों ऊपर से आधे नंगे होकर एक दूसरे को चूम रहे थे।
फिर मैंने उनकी साड़ी खोल दी, फिर पेटीकोट भी खोल दिया। अब उनके शरीर पर सिर्फ पैंटी ही रह गई थी जिसमें उनका जिस्म चमक रहा था।
मैं फिर से उनके शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमने लगा जिससे उनमें मादकता छाने लगी।
जैसे ही मेरे ओंठ उनकी नाभि को छुए, वो बेचैन होने लगी। मेरे ऊपर भी एक अलग सा नशा छाने लगा था और मैंने अब उनकी पैंटी को भी उनके शरीर से अलग कर दिया और धीरे-धीरे मेरे ओंठ उनकी चूत की तरफ बढ़ने लगे।
उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे, इससे लगता था कि उन्होंने एक-दो दिन पहले ही अपने बाल साफ़ किये थे।
जैसे ही मेरे होंठ उनकी चूत से लगे, वो सीत्कार कर उठी। अब हम 69 की पोजीशन में आ गए थे और मेरा लंड उनके मुँह को छू रहा था। उन्होंने लपक कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और हम दोनों एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे। बहुत देर तक हम एक दूसरे को अंगो को चूसते रहे, फिर भाभी ने अपने मुँह से मेरे लंड को निकाल दिया और बोली- जल्दी डालो! अब बर्दास्त नहीं होता!
फिर क्या था, मैंने उनको सीधा लिटाया और अपना फनफनाता हुआ लंड उनकी चूत के मुंह पर जैसे ही लगाया, नीचे से वो धक्का लगाने लगी। मैंने भी एक जोर का धक्का लगाया और लंड उनकी चूत के अन्दर घुस गया।
उस दिन मैंने उन्हें पाँच बार चोदा और रात को भी भैया नहीं आये तो दो बार रात को भी चुदाई की।
फिर जब भी हमे मौका मिलता हम एक दूजे में खो जाते।
आज मेरी शादी हो चुकी है, फिर भी हमारा सम्बन्ध बदस्तूर जारी है और जब भी मौका मिलता है मैं उसी जोश के साथ उनकी चुदाई करता हूँ जैसे पहले किया था।
अब भी ऐसा लगता है कि मैं उनको पहली बार ही चोद रहा हूँ।
मेरे प्यारे दोस्तो, मुझे जरूर लिखना कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी? Antarvasna Stories
अगले दिन से मैं Antarvasna अलग कमरे में सोने लगी। भाभी अब भैया के साथ सो रही थीं। मुझे घर में रहते हुए बीस दिन से ज्यादा हो गए थे। भाभी अब मुझसे थोड़ा चिढ़ने लगी थीं।
एक दिन मैं बाज़ार घूमने गई। मुझे बाज़ार में मेरी पुरानी सहेली उमा मिल गई, वो मुझसे बोली कि उसके पति बाहर गए हुए हैं और मुझे अपने साथ रहने को कहा।
उमा मेरी अच्छी दोस्त थी। मेरी दोस्त होने के कारण उसकी भाभी से भी दोस्ती थी लेकिन वो बदमाश टाइप लड़की थी और पैसे के लिए बहुत लालची थी, शादी से पहले वो मेरे साथ हॉस्टल में रहती थी तो उसकी एक कॉल गर्ल के दलाल से दोस्ती थी और महीने में एक दो बार उमा पंच-तारा होटल में चुदने जाती थी। मुझे वो बताती थी कि उसके एक रात के दस हज़ार लगते हैं जिसमें से पाँच उसको मिल जाते थे और ग्राहक टिप अलग से देता था। मुझे भी उसने चुदने के लिए कई बार कहा, लेकिन मैं कभी चुदने नहीं गई। बाद में उमा की शादी एक कम्पनी के मैनेजर से हो गई।
मुझे घर में रहते हुए 20-22 दिन हो गए थे, भाभी मुझसे चिढ़ने सी लगी थीं। मैंने सोचा की दो दिन बाद मैं उमा के पास जाकर रह लूंगी। मेरी मौसी दो दिन के लिए आ रही थीं।
मैंने उमा से कहा- मैं दो दिन बाद तेरे साथ आकर रहूंगी।
अगले दिन मेरी मौसी आ गईं पूरा दिन गपशप में चला गया। रात में मुझे भाभी के कमरे में सोना पड़ा। मैं भाभी के कमरे में भाभी के साथ सोई। आदमी लोग अलग कमरे में सोये। मौसी और माँ एक अलग कमरे में सोई थीं। अगले दिन भैया को सुबह टूर पर जाना था, भाभी भन्ना सी रही थीं क्योंकि आज उन्हें बिना चुदे सोना था। मुझसे एक दो बार बोली भी थीं कि तू बिना चुदे कैसे रह लेती है? मेरी तो चूत एक दिन न चुदे तो खुजियाने लगती है। रात बारह बजे भाभी मुझसे बोली- प्यारी ननद जी, आप एक घंटा छत पर टहल आओ, तब तक मैं इनसे से चुदवा लेती हूँ! फिर तो यह 5 दिन बाद वापस आयेंगे।
मुझे पहले से ही नींद नहीं आ रही थी, मैं बाहर छत पर टहलने चली गई। मौका देखकर भाभी ने भैया को अंदर बुला लिया और अपनी चूत की सेवा करवाने लगीं।
थोड़ी देर बाद मैंने सीढ़ियों के पास मौसी और मौसा को कुछ फुसफुसाते देखा। मैं चुप हो कर बातें सुनने लगी। मौसी मौसा का लंड पैंट से निकाल कर पकड़े हुए थीं और कह रही थीं- कुत्ते, तेरा घोड़ा तो बड़ा टनटना रहा है लेकिन चूत में घुसते ही पिचक जाता है। एक जमाना था कि एक एक घंटे तक मेरी सुरंग में हल्ला मचाता रहता था।
मौसी की दोनों चूचियाँ खुली हुई थीं और पपीते की तरह लटक रही थीं। मौसा मौसी की चूचियाँ मसल रहे थे, मौसी के चूचुक पर चुटकी काटते हुऐ मौसा बोले- कुतिया, बहुत गाली दे रही है? तेरी जवानी की आग भी तो बहुत बुझाई है इसने!
मौसी लंड को मसलते हुए बोलीं- अरे गाली क्यों दूँगी मेरे कुत्ते! तेरे शेर को तो मैं अब भी सबसे जयादा प्यार करती हूँ! इधर ला जरा एक पप्पी तो लेने दे इसकी!
इतना कह कर मौसी ने मौसा का लौड़ा मुँह में रख लिया और पूरी मस्त होकर चूसने लगी। मैं हैरान थी कि पचास साल की मौसी भी लौड़ा चूस सकती हैं। मौसी मौसा की गोदी में सर रखकर मस्ती से 5 मिनट तक लौड़ा चूसती रहीं, 55 साल के मौसा ने 55 मिनट बाद रस छोड़ दिया, मौसी उसे अपने मुँह में गटक गई।
मौसा बोले- चल भाग चलें! किसी बच्चे ने देख लिया तो क्या सोचेगा!
मैं 2-3 मिनट खड़ी यह सोचती रही कि पता नहीं लोग लौड़ा कैसे चूस लेते हैं?
अगले दिन मौसी ने मुझे अकेले में पकड़ लिया और बोली- क्यों? रात को छिप कर क्या देख रही थी? इतनी चूत में आग लग रही है तो आदमी से दूर क्यों रह रही है? घर जा और चुदवा! यह गन्दी बात होती है किसी को छिप कर देखना!
भाभी मुझसे चिढ़ी-चिढ़ी सी रह ही रही थीं, ऊपर से मौसी की बात से मेरा दिमाग ख़राब सा हो रहा था। इन सबके बाद एक असली बात यह भी थी कि मेरी चूत में खुजली भी जोरों की हो रही थी क्योंकि मेरे पति चूत तो मेरी रोज़ ही चोदा करते थे और अब भाभी मौसी की चुदाई होते देखकर मेरी चूत रोज़ पानी छोड़ रही थी। मैंने सोचा कुछ दिन उमा के पास जाकर रह आती हूँ।
उमा एक मस्त स्वभाव की लड़की थी कॉलेज के दिनों में उसने काल गर्ल बनकर, बॉय फ्रेंड बनाकर कई बार कई लोगों से अपनी चूत को चुदवाया था। मेरी रूम मेट रही थी, कई बार गर्मी में हम दोनों नंगी होकर सोती थीं इसलिए मुझमें और उसमे शर्म की कोई बात नहीं थी। मेरी उससे अच्छी दोस्ती थी। रात को नौ बजे मैं उमा के घर पहुँच गई। मुझे देखकर उमा खुश हो गई। हम दोनों ने खाना खाया, इसके बाद उमा मेरी साड़ी उतार कर बोली- चल, आज नंगे सोते हैं! तेरी सुहागरात और चुदाई की कहानी भी तो मुझे सुननी है!
चूंकि पहले भी हम नंगी होकर सो चुकी थीं इसलिए रात को हम दोनों नंगी होकर सो गईं।
उमा बोली- अब तो तेरी शर्म छुट गई होगी! तीन महीने हो गए तेरी शादी को! अब तक तो सौ से ज्यादा बार चुद चुकी होगी? बोल, चुदने में मजा आता है या नहीं?
और वो मेरा चूत के होटों से खेलने लगी। मैंने कभी खुल कर अतुल से चूत नहीं चुदवाई थी लेकिन रोज़ रात को अतुल जबरदस्ती मेरी चूत चोद देते थे। अब 20-25 दिन से मैं बाहर थी तो मुझे चूत की खुजली पता चल रही थी। मैं भी उमा की चूत खुजाने लगी। थोड़ी देर में हम दोनों गर्म थीं, उमा बोली- खुजली ज्यादा हो रही हो तो बोल! धंधे पर चलते हैं! नोट भी कमाएंगे और मौज भी लेंगे!
मैं बोली- नहीं बाबा! नहीं! मुझे तो बड़ा डर लगता है! तू क्या शादी के बाद भी धंधा करती है?
उमा बोली- भाई कभी कभी अब भी लगवा लेती हूँ! पटी जब बाहर होते हैं! एक रात के पाँच हज़ार मिल जाते हैं और मजा भी आ जाता है। लेकिन सिर्फ अपने पुराने यारों से लगवाती हूँ नहीं तो बदनाम हो जाऊँगी। मैं तो साली बदनाम हो गई थी इसलिए तो 5000 रुपए कमाने वाले से शादी हुई नहीं तो तेरी तरह सॉफ्टवेयर इंजिनियर से शादी होती! चल यह छोड़, यह बता कितना मोटा लंड है तेरे पति का? अभी नई नई शादी हुई है, 3-4 बार तो चूस ही लेती होगी एक दिन में?
मैं हूँ हाँ करती रही! मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सब लौड़ा चूसने की बातें क्यों करती हैं!
12 बजे के करीब मैं सो गई। रात को 3 बजे के करीब उमा का मोबाइल बजा। उमा ने तुंरत काट दिया। मैं नींद में थी इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन दस मिनट बाद उमा उठ कर गाउन पहन कर गई तो मैं चौंक गई। दबे पाँव मैंने पीछे जाकर देखा तो मैं हैरान थी। उमा ने अपने फ्लैट का दरवाज़ा खोला, एक जवान सा लड़का अंदर आया, उमा उसे दूसरे कमरे में ले गई और बोली- राजीव जी, पहले फीस निकालिए!
राजीव ने सौ के नोटों की गद्दी उमा के हाथ में रख दी। उमा मुस्करा दी, गद्दी अलमारी में रख दी और राजीव की पैंट की चैन खोल दी। उसके बाद उसका लौड़ा निकाल कर चूसने लगी। राजीव ने अपनी पैंट उतार दी। राजीव का लौड़ा सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा होगा। पूरा लौड़ा लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था और उमा लौड़ा लप लप कर के चूस रही थी।
मैं छुप कर देखने लगी। कुछ देर में दोनों नंगे थे। राजीव उमा को पलंग पर लिटा कर उसकी चूत चूसे जा रहा था, उमा की आह ऊह ओह की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी। होती भी क्यों नहीं! आज मुझे चुदे हुए पूरा एक महीना हो गया था।
उमा थोड़ी देर बाद चूत फ़ैला कर लेट गई। राजीव ने उसकी चूत में अपना सात इंच लम्बा लंड ठोंक दिया और धक्के मरना शुरू कर दिया। उमा की चुदाई शुरू हो गई थी। उमा जोर जोर से चिल्ला रही थी- उई! बड़ा मजा आ रहा है! और जोर से पेल कुत्ते! क्या चोदता है! क्या मस्त लंड है! महीने में एक बार तो आ जाया कर! अगली बार से 10% छूट दूँगी साले! हरामी क्या मस्त बजाता है! और जोर से पेल कुत्ते!
राजीव ने 15 मिनट तक उमा की चूत बजाई। उसके बाद उसका लंड खाली हो गया और उसने लंड बाहर खींच लिया। उमा की चूत की प्यास शांत नहीं हुई थी, उसने राजीव को जबरदस्ती अपनी तरफ खींच कर एक बार दुबारा उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी। मैं तो हैरान थी कि भाभी, मौसी उमा सब लंड चूसने में होशियार हैं और मैं लण्ड चूसने को लेकर लड़ कर आ गई। मेरे मन में एक बार लण्ड चूसने का ख्याल आया लेकिन अपने अहं के कारण मैं लंड नहीं चूसना चाहती थी और अतुल के पास वापस नहीं जाना चाहती थी।
मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ देर और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।
सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे उमा बोली- चुदना हो तो बता दियो! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है!
मैंने अनजान बन कर पूछा- उमा, शादी के बाद भी औरों से चुदवाती है क्या?
छोटी मेम आइ लव यू- Antarvasna Storiesआगे की कहानी अगले भाग में! Antarvasna
मेरे परिवार में मैं, पिताजी, माताजी Hindi Porn Stories और मुझ से तीन साल बड़ी दीदी हैं, जिनका नाम है शालिनी। मैं और दीदी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। भाई-बहन से अधिक हम दोस्त हैं। हम एक-दूसरे की निजी बातें जानते हैं और मुश्किल में राय भी लेते-देते हैं। सेक्स के बारे में हम काफ़ी खुले विचार के हैं। हालाँकि हमने आपस में चुदाई नहीं की है। जब मैं छोटा था तो वह अक्सर मुझे नहलाती थी। उस वक़्त मात्र कौतूहल से दीदी मेरे लौड़े के साथ खेला करती थी। मुझे गुदगुदी होती थी और लौड़ा कड़ा हो जाता था। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई तैसे-तैसे हमारी छेड़-छाड़ बढ़ती चली गई।
तब मैं अट्ठारह साल का था और वो इक्कीस साल की। तब तक मैंने उसकी चूचियाँ देख लीं थीं, भोस देख ली थी और उसने मेरा लंड हाथ में लेकर मूठ मार दिया था। चुदाई क्या है, कैसे की जाती है, क्यूँ की जाती है, यह सब मुझे उसी ने सिखाया था।
कहानी शुरु होती है शालिनी की शादी से। पिताजी ने बड़ी धूम-धाम से उसकी शादी की। बारात दो दिनों की मेहमान रही। खाना-पीना, गाना-बजाना सब दो दिनों तक चला। जीजाजी शैलेश कुमार उस वक्त तेईस साल के थे और बहुत ख़ूबसूरत थे। दीदी भी कुछ कम नहीं थी। लोग कहते थे कि बड़ी सुन्दर जोड़ी है।
बारात में एक लड़की थी- पारुल, जीजू की छोटी बहन यानि दीदी की ननद। भाई-बहन भी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। पारो पाँच फुट लम्बी, गोरी और पतली थी। गोल चेहरे पर काली-काली बड़ी आँखें थीं। बाल काल और लम्बे थे। कमर पतली थी और नितम्ब भारी थे। कबूतर की जोड़ी जैसे छोटे-छोटे स्तन सीने पर लगे हुए थे। मेरी तरह वो भी बचपन से निकल कर जवानी में क़दम रख रही थी।
क्या हुआ, कुछ पता नहीं, लेकिन पहले दिन से ही पारो मुझसे नाराज़ थी। जब भी मुझसे मिलती तब डोरे निकालती और हुँह — कहकर मुँह बिचका कर चली जाती थी। एक बार मुझे अकेले में मिली और बोली: तू रोहित है ना? पता है? मेरे भैया तेरी बहन की फाड़ कर रख देंगे।
ऐसी बेहूदी बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। भला कौन दूल्हा अपनी दुल्हन की झिल्ली तोड़े बिना रहता है? अपने आप पर नियंत्रण रख कर मैंने कहा: तू भी एक लड़की है ना, एक ना एक दिन तेरी भी कोई फाड़ देगा।
वह मुँह लटकाए वहाँ से चली गई।
दीदी ससुराल से तीन दिन बाद आई। मैंने माँ को उसे कहते सुना: डरने की कोई बात नहीं है। कभी-कभी आदमी देर लगाता है। पर सब ठीक हो जाएगा।
अकेली पाकर मैंने उससे पूछा: क्यूँ री? साजन से चुदवा कर आई हो ना? कैसा है जीजू का लंड? बहुत दर्द हुआ था पहली बार?
दीदी: कुछ नहीं हुआ है रोहित। वो पारुल अपने भैया से छूटती नहीं, रोज़ हमारे साथ सोती है। तेरे जीजू ने एक बार अलग कमरे में सोने को कहा तो रोने लगी और हंगामा मचा दिया।
मैं समझ गया। दीदी चुदवाए बिना आई थी। पाँच-सात दिनों के बाद वह पुनः ससुराल चली गई और एक महीने के बाद आई। अबकी बार उसे देख कर मेरा दिल डूब गया। उसके चेहरे पर से नूर उड़ गया था। कम से कम पाँच किलो वज़न घट गया था। आँखों के आसपास काले धब्बे पड़ गए ते। उसका हाल देखकर माँ रो पड़ी। दीदी ने मुझे बताया कि वो अब भी कुँवारी थी। जीजू ने एक बार भी नहीं चोदा था।
मैंने पूछा: जीजू का लंड तो ठीक है ना? खड़ा होता है या नहीं?
दीदी: वो तो ठीक है, नहाते वक्त देखा है मैंने। रात को मौक़ा नहीं मिलता।
मैं: हनीमून पर चले जाओ ना?
दीदी: तेरे जीजू ने यह भी कोशिश की, पर वो भी साथ चलने पर अड़ गई।
मैं: सच कहूँ? तेरी उस ननद को चाहिए एक मोटा-तगड़ा लंड। एक बार चुदवाएगी तो शांत हो जाएगी।
दीदी: तेरे जीजू भी यही चाहते हैं। लेकिन कौन चोदेगा उसे?
मैंने शरारत से कहा: मैं चोद लूँ?
दीदी हँस पड़ी: तू क्या चोदेगा? तेरी तो नुन्नी है, चोदने के लिए लंड चाहिए।
मैंने पाजामा खोल कर मेरा लौड़ा दिखाया और कहा: ये देख, नुन्नी लगती है तुझे? कहे तो अभी खड़ा कर दूँ। देखना है?
दीदी: ना बाबा ना। सलामत रहे तेरा लंड।
मैं: मान लो कि मैंने पारुल को चोद भी लिया, जीजू को पता चले कि मैंने उसे चोदा है तो तुम पर गुस्सा नहीं होंगे?
दीदी: ना, वो भी उससे थक गए हैं। कहते थे कि कोई अच्छा आदमी मिल जाए तो उसे कोई हर्ज़ नहीं है पारुल की चुदाई में।
मैं: तो दीदी, मुझे तेरे घर आने दे। कोशिश करेंगे, क़ामयाब रहे तो सही, वर्ना कुछ नहीं।
दीवाली के दिन आ रहे थे। स्कूल में डेढ़ महीने की छुट्टियाँ पड़ीं। दीदी ने जीजू से बात की होगी क्योंकि उनकी चिट्ठी आई थी पिताजी के नाम जिसमें मुझे दीवाली मनाने अपने शहर में बुलाया था। मैं दीदी के ससुराल चला आया। मुझे मिलकर दीदी और जीजू बहुत ख़ुश हुए। हर वक्त की तरह इस बार भी पारो हुँह कर के चली गई।
जीजू सिविल कोर्ट में नौकरी करते थे और अपने पुरखों के मकान में रहते थे। मकान पुराना था लेकिन तीन मंजिलों वाला बड़ा था। आस-पास दूसरे मकान जो थे वे भी काफी पुराने थे, लेकिन खाली पड़े थे। शहर के बीच होने पर भी जीजू ने काफी एकान्त पाया था।
यहाँ आने के पहले दिन मुझे पता चला कि जीजू के परिवार में वो और पारो दोनों ही थे। कई साल पहले जब उनके माता-पिता का देहान्त हुआ तब पारो छोटी बच्ची थी। उस दिन से जीजू ने पारो को अपनी बेटी की तरह से पाला-पोसा था। उस दिन से ही पारो अपने भैया के साथ सोती थी और इतनी लगी हुई थी कि दीदी के आने पर छूटना नहीं चाहती थी। दीदी की समस्या हल करने का कोई प्लान मैंने बनाया नहीं था। मैं सोचता था कि क्या किया जाए। इतने में जीजू हम सब को एक छोटी सी ट्रिप पर ले गए और मेरा काम बन गया।
शहर से करीब तीस मील दूर गलटेश्वर नाम की एक जगह है, वहीं सागर किनारे एक सदियों पुराना शिव-मन्दिर है, आसपास काफी प्राकृतिक सुन्दरता है। बहुत सारे लोग पिकनिक के लिए वहाँ जाते हैं। आने-जाने में लेकिन सारा दिन लग जाता है।
मैंने एक अच्छा सा कैमरा ख़रीदा था जो मैं हमेशा अपने पास रखता था। इस पिकनिक पर वो ख़ूब काम आया। मैंने जीजू और दीदी की कई तस्वीरें लीं। मैं जानबूझ कर पारो की उपेक्षा करता रहा, उसके जानते हुए भी उसकी एक भी तस्वीर नहीं ली। हाँलाकि मैंने उसकी चार तस्वीरें लीं थी जिसका उसको पता नहीं चला था।
अचानक मेरी नज़र मन्दिर की बाहरी दीवारों पर जो शिल्प था उस पर पड़ी। मैं देखता ही रह गया। वो शिल्प था चुदाई करते हुए युगल का। अलग-अलग पोज़ीशन में चुदाई करती हुई पुतलियाँ इतनी सजीव थीं कि ऐसा लगे कि अभी बोल उठेगीं। जीजू से छुपा-छुपी मैं फटाफट उन शिल्प को तस्वीर खींचने लगा। इतने में दीदी आ गई। चुदाई करते प्रेमी के शिल्प देख वो उदास हो गई।
पारो मुझसे कतराती रही। सारा दिन इधर-उधर घूमे-फिर और शाम को घर आए।
दूसरे दिन मैंने मेरे दोस्त के स्टूडियो में फिल्म्स दे दी। डेवलप और प्रिंट निकालने के लिए तीसरे दिन दीदी और जीजू को कुछ काम के वास्ते बाहर जाना पड़ा, सुबह से गए रात को आने वाले थे। ट्यूशन-क्लास की वज़ह से पारो साथ न जा सकी। दोपहर के दो बजे वो क्लास से आई। फोटो स्टूडियो रास्ते में आता था। इसलिए वो तस्वीरें लेते आई। आते ही उसने पैकेट मेरी ओर फेंका और रसोईघर में चली गई चाय बनाने। मैं इसके पीछे-पीछे गया। अकड़ी हुई मेरी ओर पीठ करके वह खड़ी थी।
मैंने कहा: मेरे लिए भी चाय बनाना।
गुस्से में वो बोली: ख़ुद बना लेना। नौकर नहीं हूँ तुम्हारी।
मैंने पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा। उसने तुरन्त झिड़क दिया और बोली: दूर रहो मुझसे। छुओ मत। मुझे ऐसी हरक़तें पसन्द नहीं।
मैंने धीरे से कहा: अच्छा बाबा, माफ़ करना। लेकिन ये तो बताओ कि तुम मुझसे इतनी नाराज़ क्यों हो? क्या किया है मैंने?
पारो: अपने आप से पूछिए, क्या नहीं किया है आपने।
मैं: अच्छा बाबा, क्या नहीं किया है मैंने?
अब तक वो मुझ से मुँह फेरे खड़ी थी। पलट कर बोली: बड़े भोले बनते हो। सारी दुनिया की तस्वीरें निकाल लेते हो। यहाँ तक कि वो मंदिर के पत्थरों भी बाक़ी ना रहे। एक में हूँ जिसको तुम टालते रहे हो। मेरी एक भी तस्वीर नहीं खींची तुमने। आपका क़ीमती कैमरा ख़राब हो जाएगा, इतनी बदसूरत हूँ ना मैं?
मैं: कौन कहता है कि मैंने तु्म्हारी तस्वीर नहीं खींची? भला इतनी सुन्दर लड़की पास हो और तस्वीर ना निकाले, ऐसा कौन मूर्ख होगा!
पारो: मुझे उल्लू मत बनाईए। दिखाइए मेरी फोटो।
मैं: पहले चाय पिलाओ।
उसने दोनों के लिए चाय बनाई। चाय पी कर हम मेरे कमरे में गए और तस्वीर देखने बैठे। मैं पलंग पर बैठा था। वो मेरे बगल में आ बैठी। थोड़ी सी दूर। उसने पतले कपड़े की फ्रॉक पहना था जिसके आर-पार अन्दर की ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी। उसके बदन से मस्त खुशबू आ रही थी। सूँघ कर मेरा लौड़ा जागने लगा।
पहले हमने दीदी और जीजू की तस्वीरें देखीं। बाद में पारो की चार तस्वीरें निकलीं। अपनी तस्वीर देखने के लिए वो नज़दीक सरकी। मेरे कंधे पर हाथ रख वो ऐसे बैठी की हमारी जाँघें एक-दूसरे से सट गईं, मैं मेरी पीठ पर उसके स्तन का दबाव महसूस करने लगा। बेचारा मेरा लंड, क्या करे वो? खड़ा होकर सलामी दे रहा था और लार टपका रहा था। बड़ी मुश्किल से मैंने उसे छुपाए रखा।
पारो की चार तस्वीरों में से तीन सीधी-सादी थी जिसमें वो हँसती हुई पकड़ी गई थी। बड़ी प्यारी लगता थी। चौथी तस्वीर में वह नीचे झुकी हुई थी और हवा से दुपट्टा सीने से हट गया था। उसकी चूचियाँ साफ़ दिख रहीं थीं। तस्वीर देखकर वह शरमा गई और बोली: तुम बड़े शैतान हो।
मैं: तो ओर तस्वीर खींचने दोगी?
पारो: हाँ-हाँ लेकिन ये बाक़ी की तस्वीर किसकी है?
मैं: रहने दे। ये तस्वीरें तेरे देखने लायक नहीं है।
पारो: क्या मतलब? नंगी है क्या? देखूँ तो मैं।
इतना कहकर अचानक वो तस्वीर लेने के लिए झपटी। मैंने हाथ हटा लिया। इस छीना-झपटी में वो गिर पड़ी मेरी बाँहों में। वो सँभल जाए इससे पहले मैंने उसे सीने से लगा लिया। झटपट वो सँभल गई। शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया, और उसने सिर झुका लिया। मेरे पहलू से लेकिन वो हटी नहीं। मैंने मेरा हाथ उसकी कमर में डाल दिया। ऊँगलियाँ मलते-मलते दबी आवाज़ में वो बोली: क्यों सताते हो? दिखाओ ना।
मेरे पास कोई चारा नहीं था। चुदाई करते हुए शिल्प की तस्वीरें मैं दिखाने लगा। मुस्कुराती हुई दाँतों में उंगली चबाती हुई वो देखती रही।
अन्त में बोली: बस? यही था? ये तो कुछ नहीं है, भैया के पास एक किताब है, जिसमें सच्चे आदमी और औरतों की तस्वीरें हैं।
मैं: तुम्हें कैसे मालूम?
पारो: मैंने किताब देखी है, देखनी है तुझे?
मैं: हाँ, हाँ… ज़रूर।
खड़ी होकर वो बोली: चलो मेरे साथ।
अब समस्या यह थी कि मेरा लंड पूरा तन गया था। निकर के बावज़ूद उसने मेरे पाजामे का तम्बू बना रखा था। इस हालत में मैं कैसे चल सकूँ?
मैंने कहा: मैं बैठा हूँ, तू किताब ले आ।
वो किताब ले आई और बोली: एक दिन जब मैं भैया के कमरे की सफाई कर रही थी तब मैंने पलंग के नीचे ये पाई। मेरे ख्याल से भाभी ने भी देखी है।
मैं: दीदी देखे या ना देखे, क्या फ़र्क पड़ेगा? तू जो उनके बीच आ रही है।
पारो: मैं उनके बीच नहीं आ रही हूँ। देख रोहित, भैया मेरे सर्वस्व हैं, और कोई मुझसे उन्हें छीन ले, यह मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी। चाहे वह भाभी हो या कोई और।
मैं: अरी पगली, दीदी कहाँ जाएगी तेरे भैया को छीन लेकर? भैया के साथ वो भी तेरी हो जाएगी। कब तक तू कबाब में हड्डी बनी रहेगी?
पारो: मैं जानती हूँ।
मैं: क्या जानती हो?
पारो: कि मेरी वज़ह से भैया वो नहीं कर पाए हैं।
मैं: वो मायने क्या? मैं समझा नहीं।
पारो: ख़ूब समझते हो और भोले बन रहे हो!
वो शरमा रही थी फिर भी बोली: मज़ाक छोड़ो। देखो, मैंने भैया से सिर्फ एक चीज़ माँगी है।
मैं: वो क्या?
उसने नज़रें फेर लीं और बोली: मैंने कहा, एक बार, सिर्फ़ एक बार मुझे देखने दे।
मैं: क्या देखने दे?
पारो: शैतान, जानते हुए भी पूछते हो?
मैं: नहीं जानता मैं साफ़-साफ़ बताओ ना।
पारो: वो, वो जो हर दूल्हा-दुल्हन करते हैं सुहागरात को।
मैं: मुझे ये भी नहीं पता। क्या करते हैं?
पारो: हाय राम, चु… चु… मुझसे नहीं बोला जाता।
मैं: ओह.. .ओ… चुदाई की कह रही हो?
अपना चेहरा छुपा कर सिर हिला कर उसने हाँ कही।
मैं: तुझे दीदी और जीजू की चुदाई देखनी है एक बार, इतना ही!
उसने मुँह फेर लिया और हाँ बोली।
मैं: जीजू ने क्या कहा?
पारो: भाभी ना बोलती है।
मैं: मैं उनको समझाऊँगा। लेकिन एक ही बार, ज्यादा नहीं। और एक बात पूछूँ? उनको चोदते देखकर तुम अगर उत्तेजित हो जाओगी तो क्या करोगी?
पारो: नहीं बताऊँगी तुझे।
मैंने आगे बात ना चलाई। पलंग पर बैठ मैंने उसे पास बुला लिया। वो मेरी बगल में आ बैठी। मैंने किताब उसके हाथ में रख दी। मेरा हाथ उसकी कमर में डाला। उसने किताब खोली।
किताब के पहले पन्ने पर नर्म व खड़े लौड़ों के चित्र थे। देखकर पारो बोली: ऐसा ही होता है। क्या बोलें इसको? शिश्न? मैंने देखा है।
मेरा लंड ठुमके ले रहा था। मैंने कहा: इसको लौड़ा कहते हैं और इसको लंड। कहाँ देखा है तुमने?
वो फिर शरमाई और बोली: किसी को ना कहने का वचन दे।
मैं: वचन दिया।
पारो: मैंने भैया का देखा है, कैसे वो बाद में बताऊँगी।
मेरा हाथ उसकी पीठ सहलाने लगा। वो मेरे और निकट आई। हम दोनों उत्तेजित हो चले थे, लेकिन उस वक्त हमें इसका भान नहीं था।
दूसरे पन्ने पर बन्द और चौड़ी की हुई चूत की तस्वीरें थीं।
जानबूझ कर मैंने पूछा: ये भी ऐसी ही होती है क्या? क्या कहते हैं उसे?
सिर झुका कर वो बोली: भोस। ऐसी ही होती है भाभी की भी ऐसी ही होगी।
मैं: तेरी कैसी है? देखने देगी मुझे?
पारो: तुम जो तुम्हारा दिखाओ तो मैं मेरी दिखाऊँगी।
मैं खड़ा हो गया। नाड़ा खोल पाजामा उतारा और लंड को आज़ाद किया।
थोड़ी देर वो ताज्ज़ुब होकर देखती रही, फिर बोली: मैं छू सकती हूँ?
मैं: क्यों नहीं?
ऊँगलियों के नोक से उसने लंड छुआ। कोमल उँगलियों का हल्का स्पर्श पाकर लंड और कड़ा हो गया और ठुमके लेने लगा।
पारो: ये तो हिलता है।
मैं: क्यूँ नहीं? तुझे सलाम कर रहा है।
पारो: धत्त।
मैं: मुट्ठी में ले तो ज़रा।
उसने मुट्ठी से लंड पकड़ा तो ठुमक-ठुमक करके वो अधिक कड़ा हो गया।
उसकी मदहोशी बढ़ने लगी, साँसें तेज़ चलने लगी, चेहरा लाल हो गया।
वो बोली: हाय रे, इतना कड़ा क्यों हुआ है? दर्द नहीं होता ऐसे तन जाने से?
मैं: ऐसे कड़ा ना हो तो चूत में कैसे खुस सके और कैसे चोद सके?
पारो: ये तो लार भी निकालता है।
वाकई मेरा लंड अपनी लार से गीला हो चला था।
मैं: ये लार नहीं है, अपनी प्यारी चूत के लिए वो आँसू बहा रहा है।
मुट्ठी से लंड दबोच कर वो बोली: रोहित, बड़ा शैतान है तू।
मैंने उसे बाँहों में भर लिया और कहा: ऐसे-ऐसे मुठ मार।
वो डरते-डरते मुठ मारने लगी। उसके गोरे-गोरे गाल पर मैंने हल्के से चूमा और कहा: मजा आता है ना?
जवाब में उसने मेरे गालों पर भी चूम लिया।
मैं: अब सोच, जब ये चूत में घुसकर ऐसा करे तब कितना आनन्द आता होगा।
वो बोली: नहीं, और उसने मुट्ठी से लंड मसल डाला।
मैंने लंड छुड़ा कर कहा: अब तेरी बारी।
शरमाती हुई वो खड़ी हो गई। फ्रॉक के नीचे हाथ डाल कर कच्छी निकालने लगी। मैंने कहा: ऐसे नहीं, पलंग पर लेट जा।
वो चित्त लेट गई। शरम से नज़रें चुराकर उसने फ्रॉक ऊपर उठाया।
उसकी गोरी-गोरी चिकनी जाँघें खुली हुई देखकर मेरे लंड फनफनाने लगा। उसने सफ़ेद पेंटी पहनी थी। भोस के पानी से पेंटी गीली होकर चिपक गई थी। कुल्हे उठाकर उसने पेंटी उतारी। तुरन्त उसने हाथ भोस से ढँक दी।
मैंने कहा: ऐसे छुपाओगी तो कैसे देख पाऊँगा?
उसकी कलाई पकड़ कर मैंने उसके हाथ हटा दिए, उसकी छोटी सी भोस मेरे सामने आई।
काले घुँघराले झाँट से ढँकी उसकी भोस छोटी थी। मोन्स उँची थी। बड़े मोटे होंठ थे और एक दूजे से लगे हुए थे। तीन इंच लम्बी दरार चिकने पानी से गीली हुई थी। मैंने हल्के से छुआ। तुरन्त उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने कहा: तूने मेरा लंड पकड़ा था, अब मुझे तेरी छूने दे।
मैंने फिर भोस पर हाथ रखा। उसने मेरी कलाई पकड़ ली लेकिन विरोध किया नहीं। ऊँगलियों से बड़े होते चौड़े कर मैंने भोस का भीतरी हिस्सा देखा। किताब में दिखाई थी, वैसी ही पारो की भोस थी। जवान कुँवारी लड़की की भोस मैं पहली बार देखा था। छोटे होंठ नाज़ुक और पतले और साँवली रंग के थे। दरार के अगले कोने में एक इंच लम्बी कड़ा सा भग्न था। भग्न का छोटा मत्था चेरी जैसा दिखाई दे रहा था। दरार के पिछले हिस्से में था, चूत का मुँह जो गीला-गीला हुआ था। मैंने उंगली के हल्के स्पर्श से दरार को टटोला। जैसे मैंने भग्न को छुआ वो झटके से कूद पड़ी। मैंने चूत का मुँह छुआ और एक उंगली अन्दर डाली। उंगली योनि-पटल तक जा पहुँची।
हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए थे। उसने आँखें बन्द कर ली थीं। मुझे यहाँ तक याद है कि अपनी बाँहें लम्बी कर उसने मुझे अपने बदन पर खींच लिया था। इसके बाद क्या हुआ और कैसे हुआ वो मुझे याद नहीं। वो जब चीख पड़ी, तब मुझे होश आया कि मैं उसके ऊपर लेटा था और मेरा लंड झिल्ली तोड़कर आधा चूत में घुस गया था। वो मुझे धकेल कर कहने लगी: उतर जाओ, उतर जाओ, बहुत दर्द होता है।
मैंने उसके होंठ चूमे और कहा: ज़रा धीरज धर, अभी दर्द कम हो जाएगा।
वो बोली: तू क्या कर रहा है? मुझे चोद रहा है?
मैं: ना, हम एक-दूज़े को चोद रहे हैं।
पारो: मुझे गर्भ लग जाएगा तो?
मैं: कब आई थी तेरी माहवारी?
पारो: आज-कल में आनी चाहिए।
मैं: तब तो डरने की कोई बात नहीं है। कैसा है अब दर्द?
पारो: कम हो गया है।
मैं: बाक़ी रहा लंड डाल दूँ अब?
वो घबड़ा कर बोली: अभी बाकी है? फिर से दुखेगा!
मैं: नहीं दुखेगा। तू सिर उठा कर देख, मैं हौले-हौले डालूँगा।
मैं हाथों के बल थोड़ा उठा। वो हमारे पेटों के बीच से देखने लगी। हल्के दबाव से मैंने पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।
अब हुआ ये कि मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी। दीदी के घर आ कर मूठ मारने का मौक़ा मिला नहीं था। बड़ी मुश्किल से मैं अपने-आप को झड़ने से रोक पा रहा था। ऐसे में पारो ने चूत सिकोड़ी। मेरा लंड दब गया। फिर क्या कहना? दन-दना-दन धक्के शुरु हो गए, मैं रोक नहीं पाया। पारो की परवाह किए बिना मैं चोदने लगा और आठ-दस धक्कों में झड़ पड़ा।
उसने पाँव लम्बे किए और मैं उतरा। उसने भोंस पर पेंटी दबा दी। चूत से खून के साथ मिला हुआ ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा। बाथरूम में जाकर हमने सफाई कर ली।
वो रोने लगी, मैंने उसे बाँहों में भर लिया, मुँह चूमा और गाल पर हाथ फिराया। वो मुझसे लिपट कर रोती रही।
मैं: क्यूँ रोती हो? अफ़सोस है मुझ से चुदाई की, इस बात का?
मेरे चेहरे पर हाथ फिरा कर बोली: ना, ऐसा नहीं है।
मैं: बहुत दर्द हुआ? अभी भी है?
पारो: अभी नहीं है, उस वक्त बहुत दर्द हुआ। मुझे लगा कि मेरी… मेरी… चूत फटी जा रही है। लेकिन तू इतनी जल्दी में क्यूँ था? तेरा बदन अकड़ गया था और तूने मुझे भींच डाला था। और तेरे ये… ये… लंड कितना मोटा हो गया था? क्या हुआ था तुझे?
मैं: इसे स्खलन कहते हैं। उस वक्त आदमी सबकुछ भूल जाता है और अद्भुत आनन्द महसूस करता है।
पारो: लड़कियों के साथ ऐसा नहीं होता?
मैं: क्यूँ नहीं। तुझे मजा नहीं आया?
पारो: तू चोदने लगा तो भोस में मीठी सी गुदगुदी होने लगी थी, लेकिन तू रुक गया।
मैं: अगली बार चोदेंगे तब मैं तुम्हें भी स्खलित करवाऊँगा।
पारो: अभी करो ना। देखो तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा है।
मैं: हाँ, लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है, मिटने तक राह देखेंगे, वर्ना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा।
शेष अगले भाग में… Hindi Porn Stories
अंधेरे में एक साया एक घर Antarvasna Sex Stories के पास रुका और सावधानी से उसने यहाँ-वहाँ देखा। सामने के घर की छोटी सी दीवार को एक फ़ुर्तीले और कसरती जवान की तरह उछल कर फ़ांद गया और वहाँ लगी झाड़ियों में दुबक गया।
कमरे में रीना बिस्तर पर लेटी हुई कसमसा रही थी, उसे नींद नहीं आ रही थी। उसे अचानक लगा कि उसके घर में कोई कूदा है। वह दुविधा में रही, फिर उठ कर खिड़की के पास आ गई। उसे एक साया दिखा जो झाड़ियों के पास खड़ा था।
वो साया दबे पांव अन्दर की ओर बढ़ रहा था। उसे आश्चर्य हुआ कि मुख्य दरवाजा खुला हुआ था। वो तेजी से अन्दर आ गया और सीधे मौसी के कमरे की तरफ़ बढ़ गया। रीना का दिल धक-धक करने लगा, पर उसे ताज्जुब हुआ कि वो मौसी के कमरे में ना जाकर ऊपर सीढ़ियों पर चला गया।
उसने अंधेरे में तुरंत अपना मोबाईल निकाला और अपनी पड़ोसन शमा आण्टी को फोन किया,”आण्टी, हमारे घर में कोई चोर घुस आया है।”
” क्या… क्या … कहाँ है वो अभी ?”
“वो ऊपर गया है”
“रूपा कहाँ है…।”
“शायद सो रही है…”
“ओह्ह्… तुम सो जाओ वो चोर नहीं है ?”
“तो आण्टी ???”
“वो दिल का चोर है… तुम्हारी आन्टी भी ऊपर ही है… सो जाओ !” शमा की खनकती हंसी सुनाई दी ।
रीना ने फोन बन्द कर दिया। ओह्ह्… तो यह बात है… यह मौसी का यार है !!! अरे ये वही तो नहीं है जो सवेरे चाय पी रहा था। इसका मतलब यह रात भर मौसी के साथ रहेगा। मौसा अक्सर बिजनेस यात्रा पर चले जाते थे।
“तो क्या मौसी … छी … छी … ऐसा नहीं हो सकता। मैं ऊपर जाकर देखूँ? हाँ यह ठीक रहेगा।” रीना ने धीरे से दरवाजा खोला और नंगे पांव सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ गई। मौसी के कमरे की लाईट जल रही थी। मतलब वो अभी तक सोई नहीं थी। वो चुपचाप सीढियाँ चढ़ गई। सारी खिड़कियाँ बन्द थी। पर हां खिड़की के पास एक पत्थर की बेन्च थी, उसके ऊपर ही एक खुला रोशनदान था। रीना बेन्च पर चढ़ गई।
जैसे ही अन्दर झांका तो जैसे उसके दिल की धड़कन रुक गई। वो लड़का वही था… उसका नाम आशू था। वो बिल्कुल नंगा खड़ा था और उसका लण्ड लम्बा सा और मोटा सा था। उसका सीधा खड़ा और तन्नाया हुआ लण्ड बड़ा ही मनमोहक लग रहा था।
मौसी बस एक पेटीकोट में थी, उनका ब्लाऊज उतर चुका था। उनकी दोनों चूचियां खूबसूरत थी, गोल गोल, भूरे भूरे निपल, आशू ने मौसी को प्यार से चूम लिया और बदले में मौसी में उसके फ़डकते हुये लण्ड को अपनी मुठ्ठी की गिरफ़्त में ले लिया। उसे प्यार से सहलाते हुये उसके लण्ड अपना हाथ आगे पीछे चलाने लगी।
रीना का दिल कांप उठा। धड़कन बढ़ गई। उसके मन में वासना जाग उठी।
“आशू, मस्त लण्ड के मजे कुछ ओर ही होते हैं… हैं ना…?”
“रूपा, और मस्त चूत भी कमाल की होती है… जैसे आपकी है !”
“कल तो तू बड़ा रीना की चूत मारने की बात कर रहा था…?”
“वो तो नई चूत है ना … अभी तक चुदी नहीं होगी… आप आदेश दे तो उसे भी सेट करें?”
“अभी तो मेरी चूत कुलबुला रही है… चल अपना लौड़ा अब चूत में घुसा डाल… रीना को तो पटा ही लेंगे… अब बेचारी के पास चूत है तो लण्ड तो चाहिये ही ! है ना?”
आशू हंस पड़ा और रूपा से लिपट गया। कुछ देर तक तो वो कुत्ते की तरह लण्ड चूत पर मारता रहा फिर चूत के द्वार पर अपने आप ही सेट हो गया और चूत के पट खोलता हुआ अन्दर घुस गया। रूपा आशू से लिपट गई और एक टांग उठा कर आशू की कमर में डाल दी और लण्ड को अपनी चूत में सेट कर लिया।
रीना का बदन पसीने से भीग गया, सांस फ़ूलने लगी। उसकी चूत भी रिसने लगी और गीली हो उठी। अपने चुदने की बात से उसे अपनी पहली चुदाई याद हो आई। दोनों की कमर धीरे हिलने लगी और रूपा चुदने लगी। दोनों के मुख से वासना भरी सिसकारियाँ निकलने लगी।
“हाय रे आशू, भगवान ने भी क्य मस्त चीज़ें बनाई हैं… धरती पर ही स्वर्ग का आनन्द ले लो !”
“हां देखो ना आपके अधर रस से भरे, आंखों में जैसे शराब भरी हुई है, गुलाबी गाल को सेब की तरह काटने को मन करता है… चल बिस्तर पर चुदाई करते हैं !”
” नहीं रे अभी नहीं … अभी थोड़ा सा गाण्ड को भी तो मस्ती दे यार !” और उसका लण्ड बाहर निकाल कर पीछे घूम गई और घोड़ी बन कर चूतड़ उभार दिये…
जैसे ही आशू का लण्ड गाण्ड के छेद रखा… रीना सिहर गई। रीना का मन उनकी पूरी चुदाई देखने को हो रहा था, और अब तो ये हालत थी कि उसकी चूत भी फ़डफ़डा उठी थी। उसने अपनी चूत को अपने हाथ से हौले से दबा दी। उसकी चड्डी बाहर तक गीली हो गई थी और चिपचिपापन बाहर से ही लग रहा था। उसके सारे शरीर में एक वासना भरी कसक भर उठी थी। रूपा की ग़ाण्ड के दोनों गोल गोल उभरे हुये चूतड़ किसी का भी लण्ड खड़ा कर सकते थे।
आशू ने हल्का सा ही जोर लगाया और उसका लोहे जैसा डण्डा उसकी गाण्ड के छेद में उतर गया। दोनों ही एक साथ सिसक उठे। उन दोनों का रोज का ही गाण्ड मराने का और फिर चुदाने का दौर चलता था।
सो रूपा की गाण्ड तो लण्ड ले ले कर मस्त हो चुकी थी। उसे दोनों ही छोर से चुदाने में मजा आता था। आशू ने रूपा के मस्त बोबे पकड़े और मसलने लगा। साथ ही साथ जोश में लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा। दोनों मस्ती के माहौल में डूबे हुये थे … हौले हौले सिसकी भरते हुये रूपा चुद रही थी। रीना की आंखें मदहोशी में डूबने लगी थी। उसका सारा शरीर पसीने से भीग उठा था। उसकी आंखों के कटोरे नशे से भर गये थे, नयन बोझिल हो गये थे। उसका बदन जैसे आग में जलने लगा था। उसकी नस नस में वासना की कसक भर चुकी थी। ऐसे में उसे यदि कोई मिल जये तो उसको जी भर के चोद सकता था। रूपा की गाण्ड चुद रही थी। आशू का लण्ड भी फ़ूलता जा रहा था।
उसे भी स्वर्ग का आनन्द आ रहा था। दोनों ही दीन दुनिया से बेखर जन्नत में विचरण कर रहे थे। रीना का मन सकता जा रहा था। उसकी चूत भी चुदाई करने जैसी हालत में आगे पीछे चलने लगी थी। जाने कब उसकी एक अंगुली उसने अपनी चूत में घुसा ली और चूत को शान्त करने की कोशिश करने लगी।
तभी आशू ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और रूपा झट से बिस्तर पर आ गई और उसने अपनी टांगें लेटे हुये ऊपर की ओर उठा ली। अपनी चूत को लण्ड को घुसेड़ने के लिये खोल दी। आशू भी उछल कर रूपा पर सवार हो गया। उसे अपने बदन के नीचे दबा लिया।
उसका लण्ड उसके मुख्य द्वार में घुस गया और अन्दर उतरता चला गया। दोनों ही एक बार फिर से सिसक उठे। दोनों के होंठ मिल गये और फिर दोनों के चूतड़ एक दूसरे दबाते हुये लण्ड को घुसाने लगे। दोनों एक लय में, एक ताल में चलने लगे और चुदाई आरम्भ हो गई। दोनों की वासना भरी चीखें कमरे में गूंजने लगी।
उस कामुकता भरे वातावरण में रीना का मन डोल उठा और उसने चुदाने की सोच ली।
पर अभी चुदाई चल ही चल ही रही थी… उसे देखने का लोभ वो छोड़ ना सकी। रुपा की चुदाई के बाद वो भी कमरे में घुस कर चुदवाना चाहती थी। रीना की चूत मारे गुदगुदी के बेहाल हो रही थी। बार बार अपनी अंगुली चूत में घुसा लेती थी।
तभी रूपा की चीख निकल पड़ी और वो झड़ने लगी। आशू भी साण्ड की तरह अपना मुँह ऊपर करके जोर लगा कर झड़ने की तैयारी में ही था। कुछ ही क्षणों में उसने अपना चेहरा ऊपर करके हुन्कार भरी और लण्ड बाहर निकाल कर वीर्य उसकी उसके बदन पर बिखेरने लगा। रीना ने देखा कि मामला तो अब शान्त हो चुका है, बड़े बेमन से वो पत्थर की बेंच पर से उतरी और दबे पांवो से सीढ़ियाँ उतर गई।
उसकी चूत की हालत यह थी कि उसकी चड्डी सामने से गीली हो चुकी थी। कमरे में घुसते ही उसने मोमबत्ती ली और बिस्तर पर लुढ़क गई। अपनी चूत को मोमबत्ती से शान्त किया, फिर वो निद्रा में लीन हो गई। सुबह तक उसकी चड्डी सूख कर कड़क हो गई थी। उसकी चूत का पानी भी यहां वहां फ़ैल कर जांघ से चिपक गया था। उसने अपनी फ़्रॉक को नीचे खींचा और कमरे से बाहर निकल आई। उसने अपने खुले टॉप की तरफ़ भी ध्यान नहीं दिया। उसने बाहर आकर दोनों हाथों को उठाकर और आंखे बंद करके एक मदमस्त अंगड़ाई ली, पर आँखें खुलते ही उसने देखा कि आशू सामने खड़ा था। वो उसे आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर यूं घूर रहा था जैसे उसने कोई अजूबा देख लिया हो।
रीना ने उसे देखा और घबरा कर वापस अपने कमरे में आ गई। आशू भी मुस्कुरा पड़ा और रीना भी कमरे में मुस्कुरा उठी।
वो तुरंत बाथरूम में जाकर नहा धो कर फ़्रेश हो गई। उसने रूपा के कमरे में जैसे ही कदम रखा तो उसे आशू वहाँ नहीं मिला। वो जा चुका था।
रात को खाना खाने के बाद रूपा अपने कमरे में आराम करने लगी, तभी रीना भी वहाँ पर आ गई।
“मौसी, मैं भी आपके पास लेट जाऊं?”
मौसी एक तरफ़ खिसक गई। रीना उनके पास लेट गई।
“मौसी, एक बात पूछूँ… ये आशू क्या करता है…?” रीना ने धीरे से पूछा।
रूपा ने उसकी तरफ़ करवट ली और कहा,”क्यूं क्या बात है … है ना सुन्दर लड़का…?”
“हां मौसी, सुन्दर तो है, पर मेरे से वो बात ही नहीं करता है…” रीना अपनी चूंचियां रूपा की बांह से दबाती हुई बोली। रुपा को रीना की बैचेनी का अहसास हो गया था। उसने अपनी बांह को उसकी चूंचियों पर और दबाते हुए कहा,”अरे, वो तो तुम्हारी ही बात करता है … कहो तो उससे दोस्ती करा दूँ…!”
रीना को अपनी चूंची पर दबाव महसूस हुआ तो उसके मन में तरगें फ़ूट पड़ी।
“सच मौसी, मान जायेगा वो…आप कितनी अच्छी हैं…!” रीना ने अपनी चूची को उनकी बांह पर पूरा दबाते हुये उन्हें चूम लिया।
“लगता है तेरा मन भटक रहा है… अब तेरी शादी करा देनी चाहिये !” मौसी ने मन की बात पढ़ ली थी।
“मौसी, शादी तो करा देना… पर मन को तो हल्का कर दो… !” रीना की आवाज में कसक थी। रूपा ने उसकी बैचेनी को देखते हुये अपने हाथों में रीना की दोनों चूंचियां भर ली।
“मेरी रीना, अभी तो ये ले … फिर समय आने दे… आशू भी मिल जायेगा…!”
रीना सिसक उठी और रूपा से लिपट गई। रूपा ने भी मौके का पूरा फ़ायदा उठाया और अपनी एक चूंची उसके मुँह से रगड़ दी। रीना ने भी रूपा को पटाना उचित समझा और उसके ब्लाऊज को ऊपर खींच कर उसकी चूंची को अपने मुँह में भर लिया। रुपा भावना में बह चली। दोनों ही वासना में लिप्त हो कर एक दूसरे के बदन से खेलने लगी थी। अंधेरा बढ़ चला था। तभी आशू ने हौले से कमरे के भीतर कदम रखा। रीना चौंक गई, वो भूल गई थी कि आशू के आने समय हो चुका है।
रूपा तो रीना को बहला कर बस आशू के आने का ही इन्तज़ार कर रही थी। रीना तो लगभग नंगी ही थी, पर रुपा ने अभी भी पेटीकोट पहना हुआ तो था पर वो पूरा ही ऊपर उठा हुआ था।
“रीना, देख आशू आया है…”
” मौ… मौसी, मैं तो मर गई, कुछ दो ना… मुझे शरम लग रही है !” रीना हड़बड़ा गई।
“शरमा मत … ये तो मुझे रोज रात को चोदता है… चल आज तू चुदवा ले …” रूपा ने उसे धीरज बंधाते हुये कहा।
” रूपा जी आपने तो अपना वादा पूरा कर दिया … वाह … रीना जी यदि कहेंगी तो ही कुछ करने का मजा आयेगा… “
“आशू जी, आप तो अपने कपड़े उतारो … रीना आपका स्वागत करेगी… रीना कुछ तो कहो !”
“जी मैं क्या कहूँ… मुझे तो बहुत लज्जा आ रही है…” रीना ने मुँह छुपा रखा था। आशू रीना के और नजदीक आ गया था।
” आपके मुख के पास कुछ है… रीना जी… मुख खोलो तो…” आशू ने कहा।
रीना ने अपना मुख खोल दिया… और आशू ने अपना कोमल, नरम चमड़ी वाला कठोर लण्ड उसके होंठो से सहला दिया। रीना के शरीर में सनसनी फ़ैल गई। उसने धीरे से हाथ बढ़ा कर उसका लण्ड पकड़ लिया,”हाय राम… इतना बड़ा…?” रीना की भारी आंखे आशू की ओर उठ गई और उसे प्यार से निहारने लगी। वो एक दम नंगा उसके सामने खड़ा था। रूपा रीना की ओर देख-देख कर मुस्करा रही थी। उसने प्यार से रीना के सर पर हाथ फ़ेरा और आशू के लण्ड को उसके सर को दबा कर रीना के मुँह में प्रवेश करा दिया। रीना ने सारी शरम छोड़ कर आशू के चूतड़ पकड़ लिये और अपने मुँह में उसे भींच लिया।
रूपा ने आशू को चूम लिया और उसकी गाण्ड में अंगुली डालने लगी। आशू झुक कर रीना के सर को पकड़ कर अपना लण्ड उसके मुँह में अन्दर बाहर करने लगा।
आशू को रूपा की अंगुली अपनी गाण्ड में बहुत भली लग रही थी। आशू जैसे रीना का मुख चोद रहा था। अब आशू ने रीना को लेटा दिया और उसकी चूंचियों को दबाने और मसलने लगा। उसके चुचूक जो बेहद कड़े हो चुके थे, उन्हें हौले हौले से सहलाने और अंगुलियों से खींचने लगा।
“आह मौसी, ऐसा मजा तो कभी नहीं आया… आशू जी, अब नहीं रहा जाता … प्लीज आ जाओ ना…”
“अभी से कहाँ रीना जी… जवानी का मजा तो लो अभी …” अब आशू के हाथ उसकी चूत की पंखुड़ियो के आस पास सहला रहे थे। बीच बीच में चूत के ऊपर रीना की यौवन-कलिका को भी सहला देता था। उसे हिला हिला कर रीना को असीम आनन्द दे रहा था। रीना की दोनों टांगें ऊपर उठने लगी थी। नतीजा यह हुआ कि उसकी गाण्ड का भूरा-भूरा कमल भी नजर आने लग गया था। आशू पंजों के बल बैठा था, सो रूपा भी आशू का आनन्द ले रही थी। कभी वो उसके लण्ड को मसल देती थी, कभी उसकी गोलियों को सहला देती थी, तो कभी उसकी गाण्ड में अपनी एक अंगुली घुसा देती थी। आशू भी थूक लगा कर रीना की गाण्ड में अंगुली घुसाने लगा था। उसकी गाण्ड के छेद को बड़ा कर रहा था, पर इस क्रिया में रीना मस्ती में बेहाल हुई जा रही थी। उसके मुख से सिसकारियाँ जोर से निकल रही थी, कभी कभी तो मस्ती में चीख भी उठती थी। आशू की अंगुलियाँ चूत में भी कमाल कर रही थी।
रूपा का दिल भी मचल उठा और जान करके उसने आशू का कड़कता लण्ड रीना की गाण्ड में रख दिया और आशू को कुछ कहा।
आशू मुस्कुरा उठा और उसने लण्ड का जोर गाण्ड के छेद पर लगा दिया। लण्ड रीना की गाण्ड में घुसता चला गया। रीना की गाण्ड तो कितनी बार उसके दोस्तो ने चोद रखी थी, सो लण्ड सरकता हुआ भीतर बैठने लगा। रीना ने भी अपनी गाण्ड थोड़ी ऊपर उठा दी। रूपा ने जल्दी से तकिया नीचे लगा दिया। रूपा ने आशू की गाण्ड में अपनी अंगुली फ़ंसाते हुये कहा,”आशू चोद दे साली को, ये तो पहले से ही खुली हुई है… लगा धक्के साली की गाण्ड में…”
“आह्ह्ह, आशू जी, जोर से चोद दो ना इसे … बहुत दिन हो गये इसे चुदवाये … आह्ह… लगा और जोर से…” रीना सीत्कार भरने लगी।
रीना की गाण्ड चुदने लगी … रीना को आनन्द आने लगा।
अब रुपा रीना के पास आ गई और उसके स्तन मुँह में भर कर चूसने लगी, कभी कभी वो उसके मुख को भी जोर से चूस लेती थी। कुछ देर तक यही दौर चलता रहा, फिर आशू ने अपना लण्ड गाण्ड से निकाल कर चूत में घुसा दिया। रीना के मुख से आनन्द की जोर से आह निकल गई। तभी आशू ने रूपा की चूत में भी अपनी अंगुली प्रवेश करा दी। वो भी चिहुंक उठी। अब आशू का लण्ड रीना की चूत में घुस चुका था। रीना को लगा कि हाय, स्वर्ग है तो बस चूत में ही है…
रुपा भी अपनी चूतड़ आशू की तरफ़ उठाये थी और वो उसमें अपनी अंगुली फ़ंसाये हुये था। अब तो रीना की कमर और आशू की कमर बराबरी से चल रही थी। मस्त चुदाई का माहौल बना हुआ था। तीनों नशे में झूम रहे थे।
रीना तो जबरदस्त चुदाई मांग रही थी,”आशू, प्लीज ! मुझे जोर से चोदो ना… जल्दी जल्दी करो ना … मेल इंजन की तरह …”
आशू ने रुपा को एक तरफ़ किया और अपनी पोजिशन को फिर से सेट की और उसके पांव खींच कर पलंग के किनारे कर दिया और खुद खड़े हो कर पोजीशन बना ली। अब उसका लण्ड उसकी चूत के बिल्कुल सामने था।
“तो रीना रानी, चूत फ़ाड़ चुदाई के लिये तैयार हो…?”
“हां जी… अब देर ना लगाओ … मेरी तो अब फ़ाड़ दो आशू राजा !”
“लगता है पहले से मस्त चुदी चुदाई हो…!”
“आशू जी। आप भी तो मस्त चोदते हो ना… पुराने खिलाड़ी हो ना।”
तीनों ही हंस दिये। आशू ने अपना लण्ड पहले तो अपना लण्ड भीतर घुसा कर सेट कर लिया, फिर बोला,”हां जी… तैयार हो जाओ…” और कहते हुए उसने पूरा लण्ड निकाल कर पूरा ही जोर से धक्के के साथ घुसा डाला। रीना के मुख से खुशी की एक तेज चीख निकल गई। जल्दी ही दूसरा धक्का लगा जो जड़ तक चीर गया। फिर धक्के पर धक्के भीतर तक, चूत को फ़ाड़ देने वाले धक्के चलने लगे। रीना तेज धक्कों से प्रसन्न हो उठी। और उसे और तेज धक्कों के लिये प्रोत्साहित करने लगी। उसके मुख से आनन्द भरी चीखें वातावरण को और वासनामय बना रही थी। अब तो रीना के चूतड़ भी उछल उछल कर लण्ड भीतर तक लेकर चुदवा रहे थे। दोनों के दिल की धड़कनें तेज हो गई थी। पसीना छलक उठा था। रूपा दोनों का इस प्रकार का रूप देख कर विचलित हो रही थी और सोच रही थी कि आशू ने मेरी चुदाई तो कभी भी इस तरह से नहीं की थी। वो मन ही मन जल उठी।
तभी एक तेज चीख ने रूपा का ध्यान भंग कर दिया। रीना झड़ रही थी। उसका यौवन रस निकल पड़ा था। रीना अपना यौवन रस अपनी चूत लण्ड पर दबा कर निकाल रही थी। आशू को लगा जैसे कि रीना की चूत ढीली पड़ गई थी, उसमें पानी भरा हुआ था और लण्ड अब फ़च फ़च की आवाज कर रहा था। तभी रूपा ने अपने आप को आशू के सामने पेश कर दिया…
“उसका काम तो हो गया, आशू जी, मेरी ओर तो देखो, यहाँ तो आपको फिर से बेकरार एक चूत मिलेगी… उठो और मेरे से चिपक जाओ !” रूपा ने आशू को अपनी ओर खींचा। आशू का कड़कता लण्ड रीना की चूत से बाहर गया जो कि रस से नहाया हुआ था। रीना बिस्तर पर ही लोट लगा कर एक किनारे हो गई और रूपा को चुदने के लिये जगह दे दी। कुछ ही पलों में आशू का लण्ड रूपा की चूत में घुस चुका था। इस बार रुपा की बारी थी सिसकारी भरने की। पर आशू तो रीना को ही चोद कर झड़ने के करीब आ चुका था, सो रुपा को चोदते हुये कुछ देर में अपने आप को सम्हाल ना पाया और अपना वीर्य छोड़ने लगा। दोनों ही अब आशू से लिपट पड़ी और उसे अपने चुम्बनों से बेहाल कर दिया। रीना तो आशू का लण्ड मुँह में भर कर बचा खुचा वीर्य भी चट गई। रूपा और रीना भी आपस में लिपट कर एक दूसरे को प्यार करने लगी……
शेष दूसरे भाग में ! Antarvasna Sex Stories
दोस्तों अंतरवासना Hindi sex stories पर यह मेरी पहली कहानी है मेरा नाम विकास है और मैं इंदौर का रहने वाला हूं।
अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए मैं अपनी आपबीती सुनाता हूं।
बात आज से ५ साल पुरानी है जब मैं बी . इ . करने मंदसौर गया था। मैंने मंदसौर के बारे में सुना था कि यहाँ २ नम्बर के बहुत काम होते हैं पर जब मैं वहाँ पहुँचा तो दो और चीज पता चली कि यहाँ हर घर में रांड बस्ती है और यहां के पानी में बहुत सेक्स है। मेरा पहला सेमेस्टर खत्म हो चुका था और मेरे बहुत से दोस्त भी बन गये थे उनमें से ३ कुछ बहुत अच्छे दोस्त बन गये थे जो कि अगले सेमेस्टर में मेरे रूम पार्टनर बन गये और हमने एक कोलोनी में एक बंगला किराये पर लिया इस कोलोनी की एक बात बहुत खास थी कि सभी बंगलों कि छत आपस में मिली हुई थी और सभी बंगलों पर टावर बना हुआ था जिससे कोई भी किसी के भी घर में जा सकता था।
पर जब हम उस कोलोनी में रहने गये तो उसके एक दो बंगले छोड़ सभी खाली थे क्योंकि अभी कोलोनी बन ही रही थी। करीब २ महीने बाद पड़ोस के बंगले में एक फ़ैमिली ट्रांसफ़र होके रहने आई। अच्छे पड़ोसी की तरह हमने उनका सामान उतरवाया और बंगले में रखवाया। शाम को उन्होंने हमें चाय नाश्ते पर बुलाया तो पता चला उनकी फ़ैमिली में अंकल, आंटी और उनकी एक १९ साल की लड़की थी अंकल, आंटी दोनो डोक्टर थे लड़की का नाम नेहा जैन था उसकी हाइट ५’७” थी बूब्स थे ३२ साइज़ के एक दम कड़क और तने हुए बड़ी गांड और दूध जैसी गोरी और चेहरा एक दम मासूम और आंखों में सेक्स भरा हुआ था। मैंने जब पहली बार उसे देखा तो देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं उसे चोदने के बारे में सोचने लगा वो १२ वीं कर चुकी थी और घर पर ही रहकर पी एम् टी की तैयारी कर रही थी।
थोड़े दिनो में ही में उन लोगों की दिनचर्या पता लगा ली अंकल आंटी दिन भर होस्पिटल में रहते हैं और शाम को अपनी क्लीनिक चले जाते हैं मतलब नेहा शुबह १० बजे से रात ९ बजे तक घर में अकेली रहती थी। मैं सोचने लगा नेहा से बातचीत कैसे करूं? एक दिन मेरी किस्मत खुल गयी मैं मार्केट से आ रहा था कि मैंने देखा नेहा अपनी गाड़ी में धक्का लगा रही थी मैंने पूछा क्या हुआ तो वो बोली गाड़ी पंचर हो गई है पर आज संडे है इसलिये दुकान बंद है मैने कहा गाड़ी मेरे दोस्त के घर पर रख कर आप मेरे साथ घर चलो पहले उसने मना करा पर अपनी मजबूरी को देखते हुए तैयार हो गई मैने उसकी गाड़ी अपने एक दोस्त के घर रखी और उसे अपनी गाड़ी पर बैठा लिया और धीरे धीरे गाड़ी चलाने लगा
तभी मुझे एक आइडिया आया मैंने ब्रेक लगाया तो वो मुझसे टकराई और उसके बूब्स मुझसे टकराये तो वो थोड़ा सम्भल कर बैठ गई और बोली ये क्या कर रहे हो मैंने बोला गड्ढे बहुत हैं फिर तो रास्ते भर मैंने ब्रेक लगाता गया और वो मुझसे टकराती रही मेरा लंड खड़ा हो गया था। जब हम घर पहुंचे तो वो गाड़ी से उतरी और मुझे गुस्से से घूरते हुए थैंक्स बोल कर चली गई। मुझे लगा मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी। दूसरे दिन मैंने उसकी गाड़ी ठीक करवा कर ले आया और जान बूझकर १० के बाद उसके घर गया ताकि घर पर उसके अलावा कोई नहीं हो। जब मैंने डोर बेल बजाई तो नेहा ने दरवाजा खोला वो जींस और टी शर्ट पहने हुए थी और गजब लग रही थी वो मुझे देखकर चौंक गई मैंने उसे गाड़ी की चाबी दी तो उसने गुस्से से चाबी ली और थैंक्स कहा और मुझे बाहर ही रुकने का कहकर अंदर पैसे लेने चली गई।
मैंने सोचा साली बहुत भाव खा रही है तो मैं बगैर पैसे लिए ही वापस चला आया और ४-५ दिनों मैंने उसे देखकर अनदेखा करने लागा तभी एक दिन सुबह मैं अपने बंगले की छत पर पढ़ने गया जैसे ही मै छत पर पहुंचा तो देखा नेहा भी छत पर पढ़ रही है और मुझे देख रही हे मैं वापस नीचे आ गया करीब आधे घंटे बाद नेहा हमारी छत से उतर कर नीचे आई और सीधे मेरे कमरे में आई मैं उसे देखकर चुओंक गया। उसने मुझसे कहा आप उस दिन बगैर पैसे लिए ही आ गये थे कितने पैसे हुए मैने कहा १० रुपए उसने मुझे पैसे दिये जाने लगी।
मैंने उसे रोका और छेडते हुए कहा हमारे घर अगर कोई आता है तो हम उसे कम से कम पानी तो पिलाते हैं इसलिए रुकिये पानी पीके जाना वो घबरा गई मैंने उसे पानी पिलाया और कहा क्या आप चाय पियेंगी वो बोली नहीं आप तकलीफ मत कीजिये मैंने कहा इसमें तकलीफ की क्या बात है मैं अपने लिये तो बना ही रहा हूँ आप भी पीकर जाइये वो बोली ठीक है। मैंने किचन में जाकर चाय बना लाया हम दोनो ने चाय पी और बात करने लगे तभी वो बोली “आइए एम सोरी” आपने उसदिन मुझे लिफ़्ट दी और मेरी गाड़ी सुधरवाई और मैंने आपको चाय पानी तो दूर आपको अंदर आने को भी नहीं कहा मैंने कहा इट इज़ आल राइट मैं सोचने लगा फस गई रजिया गुंडो में। उसकी चुन्नी गले में लिपटी हुई थी इसलिये बार बार मेरी नज़र उसके बूब्स पर जा रही थी और मेरा लंड खड़ा हो गया था। वो बोली अच्छा अब मैं चलती हूँ और वो चली गई उस दिन मैंने ३ बार उसके नाम की मुठ मारी और रात भर वो मेरे सपनों में मुझसे चुदवाती रही। अब मैं दिन रात उसे चोदने के सपने देखने लगा और सोचने लगा कैसे उसे पटाऊं।
अब अक्सर मैं उसे बात करने के बहाने ढूंढने लगा और अक्सर जब वो छत पर पढ़ने जाती तो मैं भी अपनी किताब लेकर छत पर पहुंच जाता अब उसे भी मुझसे बात करना अच्छा लगने लगा था और रोज हमारी घंटों बातें होने लगी पर मेरी उसे कुछ करने की कभी हिम्मत नहीं हुई। अब हमरी फोने पर भी बातें होने लगी एक दिन हिम्मत करके मैंने उसे आई लव यू बोल दिया वो चौंक गई और एक दम से गुस्सा हो गयी और मुझ पर चिल्लाने लगी कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसा कहने की, आज के बाद मुझसे बात मत करना और चली गई। मैने सोचा साली नखरे दिखा रही है २ -४ बार बोलूंगा तो मान जाएगी पर वो तो और नखरे दिखाने लगी और मुझे धमकी देने लगी कि अगर आज के बाद फोन करा तो पापा मम्मी से बोल दुंगी।
मैंने सोचा चलो छोड़ो किसी और को पटा लेंगे चुदाई तो करनी है पर अफसोस भी था कि इतना अच्छा माल हाथ से चला गया। अब हमारी बात बंद हो गई थी और कुछ दिनों के बाद सेमेस्टर ब्रेक में इंदौर आ गया और इंदौर में गर्लफ़्रेंड की खूब चुदाई की १ महीने बाद मैं वापस मंदसौर गया। अब तक नेहा मेरे दिमाग से उतर चुकी थी अब मैं कोलेज में अपनी नयी जूनियर को पटाने में लगा था और घर सिर्फ़ सोने के लिये ही आने लगा और नेहा को देखता भी नहीं था एक दिन मैं छत पर गया तो देखा नेहा भी छत पर ही खड़ी है मैं वापस नीचे आ गया थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल पर एक फोन आया मैंने नम्बर देखा तो मैं चौंक गया नम्बर नेहा का था। कुत्ते दिमाग में एक आइडिया आया मैंने फोन काट दिया थोड़ी देर बाद फिर फोन आया मैंने फिर काट दिया और सोचने लगा अबके बार फोन उठा लूँगा मेरी किस्मत फिर गांडू निकली फोन नहीं आया मैं खुद को गाली देने लगा कि फोन क्यों नहीं उठाया।
दूसरे दिन जब मैं कोलेज जाने लगा तो मुझे नेहा के पापा ने आवाज देकर बुलाया मेरी तो गांड ही फट गई मैं डरते हुए उनके पास गया तो वो बोले बेटा मेरा एक काम कर दो प्लीज़ आज पी एम् टी के फ़ोर्म मिलने की आखरी तरीख है और मुझे झरूरी काम से बाहर जाना है प्लीज़ तुम नेहा का फ़ोर्म दिला दो और नेहा को भी साथ ले जाओ लड़कियों की लाइन कम रहती है रुची भी वहीं खड़ी थी तो मैंने थोड़ा नाटक दिखाया फिर तैयार हो गया। नेहा मेरी गाड़ी पर बैठ गई और हम फ़ोर्म लेने चल दिये रास्ते भर हमारी कोई बात नहीं हुई और न ही मैंने कोई ब्रेक लगाया। मैं सोचने लगा पहले मैं नहीं बोलूंगा। करीब दो घंटे लाइन में लगने के बाद हमें फ़ोर्म मिल गया हम वापस घर आ गये पर हमने कोई बात नही की।
मैंने उसे २ बजे घर छोड़ा और जाने लगा तब उसके घर पर कोई नहीं था तब वो बोली पानी तो पी लो मैंने कहा नो थैंक्स और अपने घर चला गया १५ मिनट बाद मैं चाय के लिये दूध लेने के लिये बाहर निकला तो देखा नेहा धूप मैं बाहर ही बैठी थी। मैंने पूछा तो बोली मैं अपनी चाबी ले जाना भूल गई थी और पापा मम्मी अपनी चाबी रतलाम ले गये हैं मैंने सोचा यही सही टाइम है और बोला यहाँ कब तक बैठोगी, चलो मेरे घर चलो और बैठो मैं दूध लेकर आता हूँ। मेरे घर पर कोई भी नहीं था मेरे रूम पार्टनर आशीष, अनुज, प्रतीक कोलेज गये हुए थे और ६:३० – ७:०० बजे तक। वो मेरे घर पर चली गई थोड़ी देर में मैं दूध लेकर आ गया। मैंने उसे पानी दिया और चाय बनाने चला गया थोड़ी देर बाद मैं चाय बना लाया। हम दोनो ने चाय पी और मैंने खाना लगा लिया क्यों कि सुबह से हम दोनो ने ही कुछ नहीं खाया था मैं मन ही मन सोचने लगा इस बार मैं कुछ नहीं करुंगा। मैंने उसे कहा तुम इस कमरे में आराम कर लो। मैं दूसरे कमरे में हूँ।
मैं दूसरे कमरे जाकर लेट गया और नेहा को कैसे चोदुं सोचने लगा तभी नेहा कमरे में आयी और मेरे पास आकर बैठ गई मैं भी उठ कर बैठ गया और पूछा क्या हुआ तब वो रोते हुए बोली विकास क्या अपन दोनो अच्छे दोस्त नहीं रह सकते हैं। मैं तुम से बात करे बगैर नहीं रह सकती मैंने सोचा अब फसी और बोला प्लीज़ नेहा मैंने बड़ी मुश्किल से अपने दिल को समझाया है, प्लीज मुझसे ऐसी बात मत करो अगर मैं तुमसे बात करता रहा तो मैं तुम्हें भुला नहीं पाउंगा और मैं कुछ कर बैठूँगा इसलिये प्लीज़ मुझसे अब कोई भी रिश्ता मत बनाओ। वो जोर जोर से रोने लगी और बोली क्या वाकई तुम मुझसे इतना प्यार करते हो, मैं भी रोने का नाटक करने लगा और बोला अपनी जान से भी ज्यादा वो मुझसे लिपट गई और बोली “आई लव यू टू जान”।
इन २ महीनो में मुझे पता चला कि मैं भी तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती आई लव यू। मैं मन ही मन सोचने लगा मैं इस मक्खन मलाई आइटम को पटक कर चोद दूं पर फिर सोचा जल्दी करने से माल हाथ से निकल भी सकता है थोड़ा इन्तज़ार कर। वो मुझसे चिपक कर रो रही थी तभी मैंने उसका सिर पकड़ कर उसके माथे पर एक किस किया और बोला आई लव यू जान और फिर उसके होंठों पर किस कर दिया वो शरमा गई। मैंने फिर से उसके होंठों को पकड़ के किस किया और चूसने लगा वो भी अब मेरे होंठ चूसने लगी और बोली आई लव यू जान। मैंने धीरे से अपनी जुबान उसके मुँह में डाल दी और वो उसे भी चूसने लगी और अपनी जुबान मेरे मुँह में डाल दी। मैं भी उसकी जुबान चूसने लगा
अब वो गरम होने लगी थी। मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया और एक हाथ उसके बूब्स पर रख कर उसे दबाने लगा और उसकी जीभ चूसता रहा वो और गरम होने लगी मैंने धीरे से एक हाथ उसकी कुर्ती में डाला और ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा वो सिस्कारियां लेने लगी तभी मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और दोनो कबुतरों को आज़ाद कर दिया और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा वो बहुत गरम हो चुकी और जोर जोर से सिस्कारियां ले रही थी और मेरे सर पर हाथ फेर रही थी और होंठ चूस रही थी। मौके की नज़ाकत को समझते हुए मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा
वो मदहोश होने लगी और उसकी आंखें बंद होने लगी मैंने उसकी कुर्ती और ब्रा उतार दी और उसके बूब्स चूसने लगा और धीरे से उसका नाड़ा खोल दिया और पयज़ामा उतार दिया वो बस सिस्करियां ले रही थी। मैंने उसकी चड्ढी भी उतार दी। वो भी अब मेरे कपड़े उतारने लगी मैंने फटाफट अपने सारे कपड़े उतार दिये और उसकी चूत पर हाथ रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में डाल दी वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हथों से मेरा लंड टटोलने लगी मेरा लंड पूरे जोश में आ गया था और पूरा खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था वो मेरा लंड पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये वो तिलमिला उठी, उसकी चूत एक दम गुलाबी रखी थी और चूत पर एक भी बाल नहीं थे, उसकी चूत एक दम लाल सुर्ख हो गई थी ऐसी इच्छा हो रही थी कि उसकी चूत खा जाऊं।
मैं ६९ की पोजीशन में आ गया। उसने मेरा लंड पकड़ा और मुँह में लेकर चूसने लगी तबी वो काँपने लगी और उसने अपने चूत का पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया तभी मेरा लंड अकड़ गया और मैंने सारा पानी उसके मुँह में छोड़ दिया, वो भी मेरा सारा पानी पी गयी हम वैसे ही नंगे लेटे रहे थोड़ी देर बाद बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने उसकी टांग चौड़ी की और उसके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा वो फिर सिस्करियां भरने लगी। मैंने धीरे से अपना ९” और ३” मोटा लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुसा दिया वो चिल्लाने लगी “प्लीज़ धीरे करो, मैं मर जाउंगी”। मैंने धीरे से उसे प्यार से सहलाने लगा और उसके बूब्स चूसने लगा और वो सिस्कारियां भरने लगी और उसका दर्द भी कम हो गया। मैंने फिर जोर से एक झटका मारा और ३’ लंड अंदर घुस गया उसकी आंख से आंसू निकल आये थे। मैं फिर रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा और एक जोर के झटके के साथ पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया वो जोर से चिल्लायी “मर गई”। मैं बोला अब दर्द नहीं होगा मजा आयेगा। जब थोड़ी देर में वो नोर्मल हो गई तब मैं धीरे धीरे लंड आगे पीछे करने लगा।
अब उसका दर्द भी खत्म हो गया था और वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर हिलाने लगी, उसकी चूत में से खून बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और उसकी शील मैंने तोड़ी है। उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरा लंड बहुत मोटा इस लिए बहुत मजा आ रहा था और हम एक दूसरे में पूरे तरीके से समा गए थे। वो जोर जोर से अपने पुट्ठे हिला रही थी और मैं तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था। करिब १ घंटे की चुदाई में वो ३ बार झड़ चुकी थी और एक बार और झड़ने वाली थी तभी हम दोनो एक साथ अकड़ गये। एक साथ जोर जोर से धक्के मारने लगे और एक दूसरे में झड़ गये और सातवें आसमान पर पहुंच गये। उसे दिन हमने ३ बार और चुदाई की और ये सिलसिला ३ साल तक चला। फिर मैं इंदौर आ गया।
आप लोगों को मेरी ये आपबीती कैसी लगी प्लीज़ मुझे बतायें Hindi sex stories
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