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Massage Girl in Nagpur: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Nagpur who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Nagpur that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Nagpur massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Nagpur who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Nagpur massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Nagpur massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Nagpur who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Nagpur employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Nagpur helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Nagpur

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Nagpur at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

मैंने उसे फिर टेबल पर लिटाया, उसकी चूत गीली और गर्म मेरे सामने तड़प रही थी। “काव्या, अब फिर जंगली चुदाई,” मैंने हाँफते हुए कहा। मैंने उसकी जाँघें चौड़ी कीं, मेरा सख्त लंड उसकी चूत में घुसा, और मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। वो सिसकारी भरी, “हाय राम सर, अहह, और तेज चोदो, मेरी चूत आपकी!” टेबल हिल रहा था, मेरे हाथ उसके उभारों को मसल रहे थे, मेरा लंड उसकी चूत को चोद-चोद कर तपा रहा था। वो तड़प रही थी, “हाय सर, अहह, और तेज, मुझे अपनी रंडी बनाओ!” मैंने रफ्तार बढ़ाई, मेरे धक्के गहरे और जंगली हो गए, और उसकी सिस्कारियाँ लैब में गूँज रही थीं। “काव्या, तेरा सुख, मार्क्स पक्के,” मैंने हाँफते हुए कहा। वो फिर झड़ गई, उसकी चूत ने मेरे लंड को भिगो दिया। मैंने उसे घुटनों पर बिठाया, “अब तेरा मुंह चोदूंगा,” मैंने कहा। उसने मासूमियत से मुंह खोला, मेरा लंड उसके गर्म मुंह में गया, मैंने जोर-जोर से धक्के मारे, और वो सिसकारी भरी, “हाय सर, अहह!” मेरा लंड फट पड़ा, मैं उसके मुंह में झड़ गया, और हमारी साँसें उमड़ पड़ीं। बारिश धीमी पड़ी, काव्या मेरे सीने से लिपटी। “हाय सर, अहह, मेरी पहली बार चुदाई, मार्क्स मिले, आपका लंड मेरा,” उसने शरारत से कहा। “काव्या, मार्क्स पक्के, तेरी चूत मेरी आग,” मैंने हाँफते हुए जवाब दिया। सुबह बारिश रुकी, काव्या ने फुसफुसाया, “हाय सर, अहह, हर रात मेरी चूत चोदना।” जयपुर की उस लैब की रात, काव्या की मासूमियt, शरारत, और चुदाई की तड़प मेरे लंड और दिल में धधकती रही। यदि आपको मेरी यह असली कहानी पसंद आई, तो आप मुझे ram.sir6969@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।
Hindi Sex Stories

यह उन दिनों Hindi Sex Stories की बात है जब मुंबई में बार-डांस जोरों से चल रहा था। मेरी बीवी मायके गई हुई थी। ऑफिस से आने के बाद घर पर करने को कुछ नहीं होता था। मेरे कुछ दोस्तों को डांस बार जाने की आदत थी। कई बार उन्होंने मुझे साथ आने को कहा पर मेरी हिम्मत नहीं होती थी। हाँ इच्छा जरूर होती थी।

एक दिन घर आकर जब मैं टीवी देख रहा था, तभी एक भड़कीला गाना आने लगा, सीन डांस बार का था। बस फिर क्या था- मैंने अपने दोस्तों को फ़ोन किया और पूछा कि वे कहाँ हैं। पता चला कि वो वाशी के सन्डे-बार में बैठे हैं। बस मैंने गाड़ी उठाई और वहाँ पहुँच गया। भीतर गया तो वहाँ का नजारा देख दंग रह गया। चारों ओर थिरकती लड़कियाँ रंग-बिरंगी रोशनी में वे बहुत सेक्सी लग रही थी। मैं अपने दोस्तों के पास बैठ गया और ड्रिंक्स आर्डर करके डांस देखने लगा।

थोड़ी देर बाद ५०० रुपये का छुट्टा मंगवा के कोने में खडी एक लम्बी सांवरी लड़की को इशारा किया मेरे सामने डांस करने के लिए। जैसे ही उसने डांस करना शुरू किया तो बाकी सब लड़कियां खुद डांस करना बंद करके उसे ही देखने लगी।

क्या लाजवाब डांस कर रही थी !

मुझ पर जैसे अजीब सा नशा छा रहा था। मैं पैग पर पैग पिए जा रहा था और उसके सेक्सी बदन को मन ही मन निर्वस्त्र करता जा रहा था।

न जाने कब उसने अपना नाम पायल बता दिया। एक एक करके मेरे दोस्त घर जाने लगे, पर मैं था कि उठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

बार बंद होने को आया तो उसने कहा कि क्या मैं उसको उसके घर पर छोड़ सकता हूँ?

मैं तो नशे में था और पता ही नहीं चला कि कब मैंने उसके घर के सामने गाड़ी खड़ी कर दी। उसने मुझे अन्दर आने को कहा और मैं उसके पीछे चल पड़ा।

मुझे सोफ़े पर बैठा कर वो अन्दर फ्रेश होने चली गई। मैं इतने नशे में था कि कब मेरी आँख लगी मुझे पता ही नहीं चला, पर मुझे हल्का सा एहसास होने लगा कि कोई मेरे करीब आकर बैठ गया है।

धीरे धीरे मुझे अपने बदन से कपड़े निकलने का एहसास होने लगा। नरम नरम होंठ मेरे बदन को चूमने लगे। वे होंठ मेरी आंखें, मेरे होंठ, मेरे निप्पल्स, मेरी नाभि को चूमते हुए मेरे लण्ड की ओर बढ़ने लगे।

अब मुझे हल्का हल्का होश आने लगा। फिर उन होठों ने मेरे लंड को सहलाना शुरू किया। अहिस्ते अहिस्ते वो मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी। नशे के बावजूद मेरा लंड में बहुत ज्यादा तनाव आ गया। उसने मेरे हाथ लेकर अपनी कड़क चुचियों पर रख दिया और मैं उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा। उसके चूचुक तन गए। फिर वो मुझे उल्टा लेटा कर अपने वक्ष से मेरे बदन के हर हिस्से की मालिश करने लगी।

ऐसा लग रहा था कि मैं किसी जन्नत में आ गया हूँ। फिर वो मुझे पीठ के बल लेटा कर वापस मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी। इसके बाद उसने अपनी चूत को मेरे लंड पर रख दिया और धीरे धीरे उसे अपने अन्दर लेने लगी। मैंने तड़प कर जब अपने कुल्हे उठाने चाहे तो उसने मुझे ऐसे करने से रोक दिया।

मैं बेहाल होता जा रहा था पर उसे कोई हड़बड़ी नहीं थी, वो धीरे धीरे मुझे चोदने लगी। जैसे ही उसे एहसास होता कि मेरा झड़ने वाला है तो वो रुक जाती। ऐसा उसने कई बार किया।

फिर उसने मेरे मुँह में अपनी चूची डाल दी और जोर से चूसने को कहा। मेरे ऐसा करते ही वो मुझे जोर जोर से चोदने लगी, उसकी चूत टाइट होने लगी। इतनी टाइट की ब़स मजा आने लगा। २० २५ जोरदार झटके के बाद वो पागलों जैसे हो गई और और ऐसे लगने लगा कि वो मुझे पूरा का पूरा अपने चूत के अन्दर समां लेना चाहती है।

मेरा भी सब्र चरम पर पहुँच गया। फिर अचानक उसकी चूत एकदम से गीली हो गई और वो झड़ने लगी, मैंने भी अपना पानी छोड़ दिया। कसम से इससे ज्यादा पानी पहले कभी नहीं निकला था।

थकान के मारे मेरी आँखें बंद होने लगी। वो मेरे ऊपर से उतर कर मेरा लंड अपने मुँह में लेकर प्यार से उसे साफ़ करने लगी। ऐसा आनंद आने लगा कि कब नींद लगी पता ही नहीं चला। जब आँख खुली तो अपने आपको अपनी गाड़ी के अन्दर पाया। गाड़ी उसी बार के नीचे खड़ी थी। सुबह हो चुकी थी, खिड़की पर एक भिखारी आवाज लगा रहा था।

बहुत कोशिश के बाद भी कुछ याद नहीं आ रहा था कि मैंने किस घर में हसीं रात बिताई थी। बस हल्का सा पायल का चेहरा याद आ रहा था।

अगले दिन शाम को फिर दोस्तों के साथ उसी बार में पायल से मिलने गया तो पता चला कि वो किसी और बार में चली गई, पता नहीं कहाँ। Hindi Sex Stories

Sex Stories

मेरा नाम राहुल है! मैं Sex Stories रायपुर शहर में रहता हूँ, 22 साल का इन्जिनियरिन्ग का छात्र हूँ। मैं जिस मकान में रहता हूँ वहां नीचे में मकान मालकिन रह्ती है। वो नौकरी करती है, उसका पति भी नौकरी करता है । उनका एक लड़का भी है वो स्कूल जाता है।

मैं मकान मालकिन को चाची कह कर बुलाता हूँ। वो बहुत गुस्से वाली है। चाची 37 साल की, बहुत मोटी है और हॉट औरत है। जरा जरा बात पर मकान मालिक से लड़ाई करती रहती है। पहले तो मैं कुछ समझ ही नहीं रहा था पर मैंने जब से अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ी, मेरे दिमाग में कुछ आया कि कहीं चाची और चाचा के बीच में कुछ गड़बड़ तो नहीं चल रहा है ! और मैंने अपना फ़ायदा उठाना चाहा।

मेरी चाची दिखने में काफ़ी सुंदर हैं और उनके स्तन काफ़ी बड़े हैं। वो घर में हमेशा सलवार सूट पहनती हैं। उनके बड़े बड़े स्तन उनके कमीज़ में नहीं समाते और हमेशा बाहर झाँकते रहते थे जिससे मेरी निगाहें उन पर जम जाती। हालाँकि मुझे यह सब ग़लत भी लगता था लेकिन क्या करूँ, कंट्रोल ही नहीं होता था। कभी कभी चाची भी मुझे अपने स्तनॉ में झाँकते हुए देख लेती थी लेकिन फिर भी वो उनको छुपाने की कोशिश नहीं करती थी, जिससे मुझे लगता कि शायद वो भी मुझे अपने स्तन दिखाना चाहती हैं लेकिन फिर मैं सोचता कि ये मेरा भ्रम ही होगा और मैं नज़रे घुमा लेता।

पर पता तो चले कि आखिर चाची उसके पति से सन्तुष्ट है या नहीं !

चून्कि उनका दरवाजा सीढ़ियों के पास में है मैंने रात को उनके घर में झांक कर देखने की कोशिश की।

अरे वाह ! वहाँ तो क्या सीन चल रहा था !

चाची तो नन्गी लेटी थी और चाचा उसकी चूत चाट रहा था। मैं डर गया और चुपचाप अपने कमरे में चला गया।

सुबह मैं लेट से जागा और रात का सीन मुझे खूब याद आ रहा था। उनका और मेरा बाथरुम एक ही है।

जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया तो देखा कि वहां चाची की पैंटी और ब्रा लटक रही थी। शायद चाची उन्हें ले जाना भूल गई थी। यह पहली बार था कि मैं किसी औरत की पैंटी और ब्रा इतनी पास से देख रहा था। मेरा हाथ रोके नहीं रुका और मैं उनको अपने हाथ में ले के सूंघने लगा, उसकी मादक सुगंध से मैं मदहोश होने लगा। मैं पैंटी को अपने मुँह में ले के चूसने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं चाची की चूत चूस रहा हूँ। उसके बाद मैं ब्रा को भी मुँह में ले के खेलने लगा।

उस दिन पहली बार मेरा लंड इतना बड़ा लग रहा था। मेरे लंड का आकार इतना बड़ा आज तक नहीं हुआ था। उसके बाद मैंने अपने लंड से पैंटी और ब्रा को खूब चोदा, उसे लंड में लपेट के मैंने अपना मुठ उसी में गिरा दिया, फिर अच्छे से धो के चाची की ब्रा और पैंटी वहीं रख दी। उस दिन हिलाने में जितना मजा आया था उतना पहले कभी नहीं आया था।

अगले दिन जब चाची नहा के निकली, मैं नहाने के लिए जल्दी से बाथरूम की ओर दौड़ा ताकि कोई और ना चला जाए बाथरूम में। पर अन्दर जाते ही मुझे काफी निराशा हुई। इस बार चाची ने वहाँ अपने कोई कपड़े नहीं छोड़े थे। मैं उदास मन से नहा के बाहर आ गया। अपने कमरे में जा के भी मैं यही सोच रहा था कि आज कैसे मुठ मारी जाए। तब मैं हिम्मत करके छत पे गया। वहाँ चाची कपडे सुखा रही थी, हम दोनों खाने पीने के बारे में बातें करने लगे।

मैंने कहा- बहुत दिनो से मैंने चिकन नहीं खाया है, होटल का तो अच्छा ही नहीं लगता।

तो चाची बोली- मैं अगले शनिवार को बनाने वाली हूँ तो तू भी खा लेना !

मैंने कहा- ठीक है चाची।

मैं शनिवार को उनके घर पहुंचा, सब घर में थे! खाना खाया, अच्छा हँसे खेले, खूब मज़े किए। सब ९-१० बजे तक काम में चले गये और चाची घर में ही थी। शायद वो आज छुट्टी पर थी। उनका एक मेहमान भी आया था, २-३ घंटे बाद मैं बोर होने लगा, मैंने चाची जी को बोला- मैं चलता हूँ !

उन्होंने बोला- हैं ? तुम्हारे चाचा जी के आने तक इनके साथ में रहो !

मैने कहा- ठीक है, कुछ देर बाद वो मेहमान जाने लगा तो चाची ने कहा- राहुल, जाओ, इनको स्टेशन तक छोड़ कर आना !

मैं बात मान गया। जब वापस आया तो चाची टी वी देख रही थी।

जैसे ही मैंने देखा उसमें होट सीन चल रहा है तो मैं शरमाया और मैं जा रहा हूँ कह कर जाने लगा।

चाची ने कहा- क्या हुआ चाय पी ले, फ़िर चला जाना।

फ़िल्म रोमेन्टिक था, जिसमें हीरो हिरोइन को बुरी तरह से चूम रहा था। मैं भी उसी फ़िल्म में खो गया था। थोड़ी देर बाद चाची अचानक चाय लेकर उसी कमरे में आ गई। मैं अपना पैन्ट को बाहर से पकड़ कर बैठा था, जिसके साथ मैं खेल रहा था।

चाची एकदम बोली- तुम यह क्या देख रहे हो?

मैंने बोला- ज़ी चाची, मैं शरमा गया!

चाची ने बोला- बेटा यह गलत बात है मैं नहीं जानती थी कि तुम इतने गन्दे हो।

फ़िर मैं वहाँ से चला आया! इसके बाद मैंने मुठ मारी तब जा के मैं शान्त हुआ!

रात को मैं डिनर करने के बाद जब सोने लगा तो भी मेरे को चैन नहीं आ रहा था। २ घंटे बाद चाचा और उनका लड़का सो गये। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा था और बाथरूम उनके घर के दरवाजे पर ही था जो कि सीढ़ियों के पास था। जैसे ही मेरा लौड़ा खड़ा हुआ तो मैंने फिर उसके साथ खेलने की कोशिश की, बाहर निकाला उतने में फिर चाची मेरे कमरे में आई। मैंने अपना लौड़ा एकदम पैन्ट में वापिस अंदर डाल लिया।

सुबह जब सब फिर अपनी-२ ड्यूटी पे चले गये तो चाची ने मेरे को बोला- बेटा तुम शादी कर लो !

मैंने बोला- अभी नहीं।

वो बोली- तुम्हें चैन तो आता नहीं !

मैंने बोला- ऐसा कुछ नहीं !

मेरी चाची ने इतना बोलते ही मेरे लौड़े पे हाथ रख दिया।

मैं बोला- चाची यह आप क्या कर रही हो?

चाची बोली- तुम्हें शांत कर रही हूँ !

पर आप तो मेरी चाची हैं, मेरी माँ के समान !

बोली- चाची तेरी हूँ ! ना कि इसकी !

उसने बिना किसी डर के मेरी पैन्ट खोली, मेरा लौड़ा बाहर निकाला और चूसने लगी। मेरा लौड़ा भी एकदम फिर से टाइट हो गया। चाची ने ऐसे चूसा जैसे काफी समय से प्यासी थी।

मैंने भी चाची की कमीज़ खोली, नीचे उसने गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली, देख कर आँखे खुली ही रह गई, उसके मूमें ३८ साइज़ के थे, चूचुक भी ब्रा की तरह गुलाबी रंग के थे। मैंने भी चाची के मूमें ऐसे चूसे जैसे दूध पी रहा हूँ।

मेरे को चाची ने बताया- बेटे तेरे चाचा ज्यादा कर नहीं पाते हैं, उनका लौड़ा दुबारा खड़ा ही नहीं होता। मैं सालों से तरस गई हूँ, मेरी चूत सालों से आधी ही चुदी है। मेरे को आज ऐसे चोद कि मैं तुम्हीं से पूरा चुदवाऊँ !

मैंने बोला- चाची ! मैं तो तुम्हारे बेटे के समान हूँ !

वो बोली- बेटे ही मुसीबत में काम आते हैं।

वो रोने लगी। मैं भी तैयार हो गया। चाची ने मेरा लौड़ा चूसते चूसते यह सब मेरे को बताया। मैं चाची को बेड पे ले गया और चाची के कपड़े उतारे तो मेरे लंड ने सलामी दी चाची की चूत को।

चाची की चूत इतनी सेक्सी कि बता नहीं सकता। चूत की शेव करी हुई थी, जैसे के सब तैयारी पहले से ही कर के रखी हुई थी। उसने फिर से मेरा लौड़ा चूसना चालू किया, चाची के मूमें भी इतने बड़े थे कि मेरे हाथ में ठीक से आ नहीं रहे थे। अब मैंने उसकी भोसड़ी चूसनी चालू करी तो ऐसी चीखें मारी जैसे इक कुँवारी चुदने वाली है।

मेरा लौड़ा पूरे साइज़ में तैयार था ८.५” का !

बोली- बेटे तेरा लौड़ा तो बहुत ही बड़ा है !

मैंने जैसे चाची की चूत पर रखा, आधा तो आसानी से अंदर चला गया, बाद में रोने लगी, बोली- मेरी भोसड़ी तो अब दर्द कर रही है।

मैंने एकदम जोर लगाया तो चाची की चूत से थोड़ा-२ खून निकला। थोड़ी देर बाद चाची भी धक्के देने लगी, मजे से चुदने लगी। चाची कोई २ बार झड़ चुकी थी, मेरा भी निकलने वाला ही था। मैंने चाची के अंदर ही डाल दिया।

चाची बाद में बोली- तुमने तो आज मेरी भोसड़ी को अपने चाचाजी के लायक ही नहीं छोड़ा, इस भोसड़ी को भोसड़ा बना दिया। तुम्हारे इस लंबे लौड़े ने बुरी तरह से चोद दिया।

इसके बाद मैंने चाची की जमकर चुदाई की। मैंने सब तरीकों से चाची की भोसड़ी मारी। आज भी चाची लगातार चोदता रहता हूँ जब घर में कोई नहीं रह्ता तो वो फोन करके बुलाती है। Sex Stories

प्रेषिका : संजू Antarvasna

मैं 29 साल Antarvasna की एक स्वस्थ और मस्त औरत हूँ। मेरी शादी 1998 में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुई।

बात उन दिनों की है जब शादी के कुछ दिनों बाद मेरे पति जालंधर अपनी नौकरी पर चले गए जो किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उनके जाने के कुछ दिन तो ठीक-ठाक रहा लेकिन फिर मेरी कामेच्छा बढ़ने लगी और मेरा चुदवाने का मन होने लगा।

मेरी ससुराल में सास-ससुर, जेठ-जेठानी और उनके तीन बच्चे थे, कोई और नहीं था।

तभी दो दिन बाद मेरा चचेरा देवर अपने घर आया जो कहीं बाहर नौकरी करता था। उसकी शादी अभी नहीं हुई थी। चचेरा देवर बहुत ही मिलन सार है। वह जब भी घर आता तो सभी लोगों से जरूर मिलता है। चूँकि मेरी शादी में वह नहीं आ पाया था इसलिए मुझसे भी मिलने चला आया।

जब मैंने पहली बार उसे देखा तो मैं खुश हो गई मेरी नीयत उसी समय बिगड़ गई। लेकिन मैं उससे अनजान थी और वो भी मुझसे पहली ही बार मिला था। थोड़ी देर तक हम दोनों बातचीत करते रहे और थोड़ी देर बाद उसने मजाक किया- भाभी अगर आपकी कोई बहन और हो तो मेरा भी नंबर है।

और कुछ देर के बाद वह चला गया। मैं उसके बारे में रात भर सोचती रही।

अगले दिन दोपहर में वह फिर मिलने आया, मेरी सास कहीं बाहर गई थी। घर में जेठानी अपने बच्चों को सुला रही थी। वह मेरे पास आया और बैठ कर बातें करने लगा। मैंने देखा कि उसका ध्यान मेरे ब्लाउज पर है। जहाँ से वह मेरी चूचियों को देख रहा था।

मैंने पूछा- क्या देख रहे हो राजीव ?

वह चौंक गया और बोला कुछ नहीं। मेरा मन तो पहले से चुदवाने को था, मैंने अपनी साड़ी थोड़ी खिसकाई, उसे मजा आ गया और वह बदमाश हो गया।

उसने तुरंत मेरी चूचियाँ पकड़ ली और मैं राजीव से लिपट गई। उसने मेरे होठों को चूमना शुरु कर दिया। मैं गर्म होने लगी। मेरे पति का लंड मोटा तो था लेकिन वह जल्द ही झड़ जाते थे। मैं चुदवा कर भी प्यासी थी। अब मेरा हाथ राजीव की पैन्ट की जिप की तरफ बढ़ा। उसका लंड बाहर आने को बेताब हो रहा था। उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा के ऊपर से मेरी चूचियाँ मसलने लगा। मुझे मजा आ रहा था, मैं जोर जोर से उसका लंड मसल रही थी।

उसने धीरे से मेरा ब्लाउज और साड़ी दोनों ही उतार दिए और मैंने उसकी पैंट और टी-शर्ट।

अब राजीव केवल अंडरवियर में था और मैं पेटीकोट और ब्रा में। मैंने अपने पेटीकोट को खुद ही उतार दिया। राजीव ने मेरी चूचियाँ दबाते-दबाते मेरी चूत में हाथ लगाया, मेरी चूत गीली थी। राजीव की सांसें तेज हो गई। वो मेरी ब्रा और पैंटी उतार कर मुझसे जोर से लिपट गया।

मैंने उसका अंडरवियर उतार दिया और बोली- देवर जी, जल्दी करो मेरा धैर्य जवाब दे रहा है।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर लेट कर अपने लंड का गुलाबी सुपाड़ा मेरी चूत की फांकों में डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बिना अनुभव के उसका लंड मेरी चूत में नहीं जा सका। तब मैंने उसकी मदद की और उसका लंड पकड़ कर मैंने सही रास्ता दिखाया।

रास्ता पाते ही राजीव तो बड़ा ही ताकतवर निकला और मुझे धकाधक चोदने लगा। मुझे मजा आने लगा राजीव ने 40 मिनट तक मेरी चुदाई की, मेरी चूत का उसने पूरा मजा लिया। इस दौरान मैं दो बार झड़ चुकी थी।

मैंने इसके बाद राजीव से कई बार चुदवाया जो मैं अगली कहानी में बताउंगी कि मेरे देवर ने मेरी प्यास कैसे बुझाई। Antarvasna

दोस्तो, आज मैं आपके सामने एक सच्ची कहानी लेकर आया हूँ। Antarvasna Stories

बात उन दिनों की है जब मैं अपनी Antarvasna Stories पढ़ाई के लिए दिल्ली आया था, मुझे मेरे बुआ के घर पर रहना था। मेरी बुआ का लड़का एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी में काम करता है। उनकी शादी अभी दो साल पहले हुई थी। मेरी भाभी जिनका एक साल का एक लड़का भी है, उनकी सुन्दरता में कोई कमी नहीं थी।

उनकी चूची ऐसी थी मानो नागपुरी संतरे अभी अभी पेड़ों पर लदा ही है। उनका आकार भी मानो क़यामत हो। उनको देख कर कोई यह कह नहीं सकता कि उनका एक साल का एक बच्चा भी है।

हमेशा मेरा मन उन्हें चोदने को करता पर मौका नहीं मिल पाता। वैसे जब भी मैं पढ़ कर घर आता तो उनका बिस्तर ही मेरे आराम का साधन होता था। मैं उनके बिस्तर पर ही लेट जाता जाता था, मेरी भाभी भी आकर मेरे बगल में लेट जाती थी।

चूंकि घर में बुआ के अलावा और कोई था भी नहीं और मेरी बुआ को मेरे ऊपर विश्वास था ही, इसकी वजह से कभी किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।

एक दिन भाभी मेरे बगल में लेट कर बच्चे को दूध पिला रही थी, उस वक़्त उनकी चूची देखी थी, क्या रंग दिया था खुदा ने उनके शरीर को, एकदम दूधिया रंग की चूची थी उनकी? देखा तो देखता ही रह गया था! उस दिन चोरी चोरी उनकी चूची को देखता रहा और कब नींद लग गई पता ही नहीं चला।

उस दिन के बाद मैं हमेशा उनके आगे-पीछे डोलने लगा कि कब मौका मिल जाये और उनके गोरे बदन का दीदार हो जाये। रब ने ऐसा मौका जल्दी ही दे दिया।

उस दिन बुआ पड़ोस में पूजा देखने के लिए गई थी और शाम से पहले लौटने वाली भी नहीं थी। मैं गया और भाभी की रजाई में घुस गया। थोड़ी देर बाद भाभी भी बच्चे को ले कर आई और मेरे सामने ही दूध पिलाने लगी।

अब मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं रजाई से निकल कर जाने लगा तो भाभी ने मुझे टोका, कहा- कहाँ जा रहे हो?
तो मैंने छूटते ही कहा- जब आप ऐसे रहोगी तो मेरे लिये यहाँ पर रहना मुश्किल हो जाएगा।
वो मेरी बात को समझ नहीं पाई और बोली- क्या हुआ? मैंने ऐसे क्या कर दिया जो ऐसे बोल रहे हो?
फिर मैंने कहा- भाभी एक तो आप बला की खूबसूरत हो! जो भी देखे देखते रह जाए। मेरे लिए तो आपको देख कर अपने आप पर काबू कर पाना पहले ही मुश्किल था उपर से आपके आपके ये नागपुरी संतरे मुझे जीने नहीं दे रहे हैं।

यह सुनकर भाभी थोड़ा सा शरमा गई और रूठने का नाटक करती हुई बोली- जाओ! मैं आपसे बात नहीं करती!
फिर मैं भाभी को अपनी तरफ घुमाते हुए बोला- सच कहता हूँ भाभी! मैंने जब से आपको देखा है मेरे तो नींद ही उड़ गई है, हरदम मेरे खयालो में आप ही रहती हो।
इतना सुनते ही भाभी शरमा गई और बस इतना ही बोली- धत्त!

फिर क्या था मैंने उनको अपने आगोश में लेते हुए उनके गाल पर एक चुम्मा जड़ दिया।
उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली और थोड़ी देर तक ना-नुकर करती रही, लेकिन उन पर मेरी पकड़ मजबूत होती जा रही थी, उनके गालो की जगह मेरे ओंठ उनकी ओंठों को चूमने लगे थे और मेरे हाथ धीरे-धीरे उनकी नंगी चूचियों की तरफ बढ़ने लगे थे।

मेरी उँगलियों का जादू उन पर धीरे-धीरे छाने लगा था और वो भी मदहोश होने लगी थी।
जब पहली बार मेरे हाथ उनकी चूचियों पर पड़े, मानो मुझे स्वर्ग मिल गया।

जिंदगी में पहली बार इस सुखद एहसास का आनंद मिल रहा था जिसे मैं किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था। मेरे ओंठ अभी भी उनके ओंठों पर चिपके हुए थे और मेरी उंगलियाँ उनकी चूचियों पर तैर रही थी।

मैंने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई और मैंने अपना दायाँ हाथ उनकी कमर में डाल दिया और धीरे धीरे उनकी नंगी कमर को सहलाने लगा, साथ ही अपनी जीभ उनके मुँह में ठेलने लगा।
इसके एवज में उन्होंने मुझे बहुत जोर से जकड़ लिया और मेरे हर चुम्बन का जबाव दुगुने जोश के साथ देने लगी।

अब मेरे लंड की हालत ख़राब होने लगी थी और पजामे के अन्दर वो फुंफकार मारने लगा था। मैंने एक हाथ से अपने पजामे का नाड़ा ढीला किया और 7″ लम्बे लंड को बाहर निकाल कर उनके हाथों में थमा दिया। जिसे वो बड़े प्यार से सहलाने लगी मेरे लंड की अकड़ धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी।

मैंने अपने हाथों का दायरा थोड़ा और बढ़ाया और धीरे-धीरे अपनी उँगलियों को उनकी चूत की तरफ बढ़ाने लगा।

पहले तो वो थोड़ा सा कसमसाई पर मेरे जोर देने पर फिर मान गई। मेरी उंगलियाँ ज्यों-ज्यों उनकी चूत की तरफ बढ़ती जा रही थी उनकी सांसें उतनी ही तेज चलने लगी थी, उनके मुँह से अजीब सी आवाजें निकल रही थे जैसे- ऊओह आह स स स श श!!!

मैंने धीरे से उनको बिस्तर पर लिटाया और धीरे धीरे उनके कपड़े उतारने लगा।

चूंकि दूध पिलाने के लिए उन्होंने अपने ब्लाउज के कुछ बटन पहले ही खोल रखे थे और उनकी एक चूची बाहर निकली हुई थी, इसलिए ब्लाउज उतारने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगी। अब सफ़ेद ब्रा में उनका शरीर दमक रहा था। धीरे से मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ऊपर से वो बिल्कुल नंगी थी।

इस बार उन्होंने उठ कर मेरा शर्ट खोल दिया। इस तरह हम दोनों ऊपर से आधे नंगे होकर एक दूसरे को चूम रहे थे।
फिर मैंने उनकी साड़ी खोल दी, फिर पेटीकोट भी खोल दिया। अब उनके शरीर पर सिर्फ पैंटी ही रह गई थी जिसमें उनका जिस्म चमक रहा था।

मैं फिर से उनके शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमने लगा जिससे उनमें मादकता छाने लगी।

जैसे ही मेरे ओंठ उनकी नाभि को छुए, वो बेचैन होने लगी। मेरे ऊपर भी एक अलग सा नशा छाने लगा था और मैंने अब उनकी पैंटी को भी उनके शरीर से अलग कर दिया और धीरे-धीरे मेरे ओंठ उनकी चूत की तरफ बढ़ने लगे।
उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे, इससे लगता था कि उन्होंने एक-दो दिन पहले ही अपने बाल साफ़ किये थे।

जैसे ही मेरे होंठ उनकी चूत से लगे, वो सीत्कार कर उठी। अब हम 69 की पोजीशन में आ गए थे और मेरा लंड उनके मुँह को छू रहा था। उन्होंने लपक कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और हम दोनों एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे। बहुत देर तक हम एक दूसरे को अंगो को चूसते रहे, फिर भाभी ने अपने मुँह से मेरे लंड को निकाल दिया और बोली- जल्दी डालो! अब बर्दास्त नहीं होता!

फिर क्या था, मैंने उनको सीधा लिटाया और अपना फनफनाता हुआ लंड उनकी चूत के मुंह पर जैसे ही लगाया, नीचे से वो धक्का लगाने लगी। मैंने भी एक जोर का धक्का लगाया और लंड उनकी चूत के अन्दर घुस गया।

उस दिन मैंने उन्हें पाँच बार चोदा और रात को भी भैया नहीं आये तो दो बार रात को भी चुदाई की।

फिर जब भी हमे मौका मिलता हम एक दूजे में खो जाते।

आज मेरी शादी हो चुकी है, फिर भी हमारा सम्बन्ध बदस्तूर जारी है और जब भी मौका मिलता है मैं उसी जोश के साथ उनकी चुदाई करता हूँ जैसे पहले किया था।

अब भी ऐसा लगता है कि मैं उनको पहली बार ही चोद रहा हूँ।
मेरे प्यारे दोस्तो, मुझे जरूर लिखना कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी? Antarvasna Stories

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