Important Notice: For website Rent Whatsapp 📞 Call us: +918530812545

Massage Girl in Malegaon: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Malegaon who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Malegaon that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Malegaon massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Malegaon who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Malegaon massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Malegaon massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Malegaon who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Malegaon employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Malegaon helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Malegaon

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Malegaon at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

दोस्तो, मेरा नाम आकाश है.. जोधपुर के एक छोटे से गांव से हूँ।

बात उन दिनों की है.. जब मैं अपनी bcom की पढ़ाई कर रहा था.. मेरे साथ एक टीना नाम की लड़की भी पढ़ती थी।
जब से मैंने उसको देखा था.. बस उसे चोदने के बारे में ही सोचता रहता था। वो थी ही इतनी हॉट और सेक्सी उसका फिगर 32-30-34 का था।

एक दिन मैंने मौका देख कर उसे प्रपोज़ कर दिया.. पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने सोचा शायद उसे बुरा लगा है.. क्योंकि वो अगले दिन क्लास में भी नहीं आई थी।

फिर जब उसके अगले दिन वो आई.. तो मुझे कुछ शान्ति हुई कि कोई गड़बड़ वाली बात नहीं है।
उस दिन क्या मस्त लग रही थी वो..!

उसने लाल रंग का सूट और मैचिंग की पजामी पहनी हुई थी.. इससे पहले कि मैं उससे बात करता.. वो ही मेरे पास आई और एक कागज दे कर चली गई।

मैंने भी जल्दी-जल्दी में देखा तो उसमें उसका नंबर लिखा था.. मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।

फिर हम दोनों की फोन पर बातें शुरू हो गईं।

अब हम दोनों बाहर मिलने लगे.. लेकिन मेरा तो बस उसे चोदने का ही मन था। फिर एक दिन मॉम-डैड कहीं बाहर गए हुए थे और मैं घर पर अकेला था।

अचानक मेरे मन में आया कि क्यों ना आज टीना को घर पर बुला कर चोदूँ.. मैंने उसी वक्त उसे फोन मिलाया और कहा- आज मैं नहीं आऊँगा क्योंकि घर पर कोई नहीं है।

वो कुछ मायूस सी लगी तो मैंने कहा- तुम आ जाओ ना इधर ही मेरे पास.. मैं भी अकेला बोर रहा हूँ..
पहले तो उसने मना कर दिया.. लेकिन मेरे ज़ोर देने पर वो मान गई और मैं उसे लेने निकल पड़ा।
घर आते समय हम कुछ आइस्क्रीम वगैरह भी ले आए.. लेकिन मेरे दिल में कुछ और ही था।

घर आने के बाद हमने कॉफी पी और फिर वो मेरा घर देखने लगी। अपना घर दिखा कर मैं उसे अपने कमरे में ले गया।
कमरे में जाते ही मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया.. मैं इस मौके को गंवाना नहीं चाहता था।
मैं उसे बेतहाशा चूमने लगा और उसके मम्मे दबाने लगा.. उसे दर्द होने लगा और वो ‘ऊऊउह..’ की आवाज़ करने लगी।

अब वो बोली- थोड़ा आराम से करो न.. मुझे दर्द हो रहा है..
फिर मैंने उसका टॉप उतारा और उसकी चूचियां उसकी ब्रा से आज़ाद कर दीं और उसकी चूचियां चूसने लगा।
अब उसे भी मज़ा आने लगा.. मैंने धीरे-धीरे अपने एक हाथ से उसकी जीन्स का बटन खोल दिया और अपना एक हाथ उसकी फुद्दी तक पहुँचा दिया। अब वो मज़ा लेने लगी थी।

अपने दूसरे हाथ से मैं उसके चूतड़ सहला रहा था.. वो मदहोश होने लगी.. उसकी आंखें बंद होने लगीं।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी जीन्स और पैंटी अलग कर दी।
अब वो मेरे सामने एकदम नंगी लेटी हुई थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था.. उसकी फुद्दी भी गीली हो चुकी थी।

मैंने उसकी टाँगें उठाईं और फुद्दी में जीभ लगा कर चाटना शुरू कर दिया।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
वाह.. उसकी सील भी बंद थी.. जो और मज़े की बात थी।
थोड़ी देर चाटने के बाद वो पूरी गरम हो चुकी थी.. और उसके मुँह से ‘आह्ह.. ह्ह्हह.. आह्ह्ह.. ह्ह्हह..’ की आवाज़ें आ रही थीं।

मैंने अपना 7 इंच का लंड उसकी फुद्दी पर रगड़ा और एक धक्का मारा तो वो कराह उठी.. लेकिन ये मज़े की कराहट थी।
अब 2-3 बार और धक्का देने के बाद मेरे लंड का अगला हिस्सा उसकी फुद्दी में घुस गया और उसकी सील टूट गई।

वो ज़ोर से चिल्लाई.. लेकिन मैंने उसके मुँह में अपना मुँह डाल कर उसकी चीख को दबा दिया.. लेकिन उसका दर्द उसकी आँखों से आँसू बनकर बह रहा था।
मुझे तो फुद्दी मारने का नशा चढ़ा हुआ था.. मैंने धक्के लगाने चालू रखे और अब चुदाई जोरों पर थी।
वो ‘आह्ह.. हह्हह’ कर रही थी और मज़ा भी ले रही थी।

हम दोनों चुदाई का आनन्द ले रहे थे।

करीब 10 मिनट के बाद वो झड़ गई और मुझे ऐसे लगा कि जैसे किसी ने मेरे लंड पर गरम पानी डाल दिया हो।
लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ था.. मैं उसे ताबड़तोड़ चोदे जा रहा था।
फिर 30 मिनट के बाद मैं भी झड़ गया और मैंने अपना सारा माल उसकी फुद्दी में छोड़ दिया।

फिर कुछ पलों तक लिपटे रहने के बाद हम दोनों अलग हुए तो देखा कि बिस्तर की चादर खून से लाल हो गई थी।
उसके बाद हम दोनों एक साथ नहाए और मैंने बाथरूम में भी उसकी फुद्दी मारी.. फिर हम नहा कर बाहर आ गए और हमने बैठ कर आइसक्रीम खाई।

मैंने एक बात नोट की कि टीना ठीक से चल नहीं पा रही थी.. और फिर थोड़ी देर बाद मैं उसे छोड़ आया।

इसके बाद हमें जब भी मौका मिलता है.. हम दोनों चुदाई करते हैं।

प्रेषक : प्रेम Hindi Sex Stories

मुझे यह कहानी मेरे Hindi Sex Stories एक दोस्त ने भेजी है, जिन्होंने प्रार्थना की है कि उनका नाम नहीं बताया जाये। उन्हीं के शब्दों को मैंने कहानी का रूप दिया है।

लीजिये हाजिर है जीजू, दीदी और बाबू की मस्त कहानी…

यह मेरी सच्ची कहानी है। अन्तर्वासना पर मैं भी हिम्मत कर रहा हूँ अपनी आप-बीती बताने की।

मेरे जीजू और दीदी दिल्ली में रहते हैं। मैं भी कुछ दिन के लिये उनके साथ रहने के लिये वहाँ गया था। मेरे वहाँ जाने पर दीदी वहाँ से बड़ी दीदी की होस्पिटल में सेवा करने जयपुर आ गई थी और मुझे बता गई थी कि मुझे घर के काम में मदद करनी है। तीन-चार दिनों में वो वापस आ जायेंगी। मुझे हिदायत दी- देखो जाना मत, मुझे तुमसे काम है ! फिर कुछ मतलब से मुझे देख कर मुसकुराते हुए कुछ इशारा भी किया।

दो-तीन दिन तक सभी कुछ सामान्य रहा, फिर तीसरे दिन जीजू सिनेमा की दो टिकटे ले आये। शाम को हम दोनों सिनेमा हॉल में गये। अधिक भीड़ नहीं थी। हम आराम से पीछे की सीट पर बैठ गये। हमारे पास की सीटें खाली थी। कुछ ही देर में पिक्चर चालू हो गई। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि जीजू का हाथ मेरी जांघ पर था। मुझे झनझनाहट सी हुई। मैंने उनका हाथ धीरे से हटा दिया। पर वापस थोड़ी सी देर में उनका हाथ फिर से मेरी जांघ पर आ गया और सहलाने लगा। उनका हाथ धीरे धीरे मेरे लण्ड की ओर बढ़ने लगा। मुझे कुछ मजा सा आने लगा, पर मैंने उनका हाथ रोक दिया।

जीजू ने बात बदलते हुए मुझे कहा,”बाबू, कुछ ठण्डा लोगे…?”

फिर बिना कुछ कहे कोल्ड ड्रिन्क की दो बोतल ले आये। हम आराम से फिर पिक्चर देखने लगे। लेकिन जीजू ने फिर हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और दबाने लगे। मुझे भी रोमांच हो आया… और इस बार जीजू ने अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया और दबा दिया। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा।

“जीजू, हाथ हटा दो, मुझे अजीब सा लग रहा है !”

“अरे, तू तो मस्ती ले, मेरा भी पकड़ ले मुझे भी मजा आयेगा…!”

उन्होंने अब मेरे लण्ड को जरा ठीक से थाम लिया और सहलाने लगा। मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी। मैंने भी हिम्मत करके उनके लण्ड पर हाथ रख दिया। उसका लण्ड तो पहले से ही खड़ा था।

“बाबू, दो सीट उधर हो जा… “

मुझे पता चल गया कि उन्हें डर था कि कहीं पास वाला यह सब देख ना ले। पर तभी इन्टरवल हो गया। समय इतनी जल्दी निकल गया पता ही नहीं चला। पर अब मेरे जिस्म में एक तरावट आ गई थी। हम दोनों बाहर आ गये और हिरोइन के पोस्टर को देखने लगे।

सेक्सी पोज थे, जीजू बोले- भेनचोद क्या मस्त लगती है ये… पर तू इससे ज्यादा मस्त है।

जीजू, मैं कोई लडकी थोड़े ही हूँ !

जीजू मुस्कराये, बोले- देख मस्ती से चुदाना… क्या खायेगा…?

कुछ भी ले लो … आइस्क्रीम का ऑर्डर दे दो !

पिक्चर फिर शुरू हो चुकी थी। अब हम कोने वाली सीट पर आ गये थे।

बाबू, अपना लण्ड निकाल ! मुझे पकड़ा दे !”

“नहीं जीजू, शरम आती है…!”

पर जीजू ने मेरी पेन्ट की जिप खोल दी और मेरी अन्डरवियर को नीचे करते हुए लण्ड बाहर खींच लिया और हल्के हल्के मलने लगे। उफ़्फ़्… कैसा मजा आ रहा था। मेरा लण्ड बेहद कठोर होता जा रहा था। मेरा हाथ भी अपने आप जीजू की पैन्ट पर लण्ड के ऊपर पर चला गया। मैंने ज्योंही जिप खोली, वो अन्दर कुछ नहीं पहने थे। सीधा लण्ड हाथ में आ गया। मैंने उसे बाहर निकाल लिया। हम दोनों के लण्ड सधारण साईज़ के थे, पर हां … मेरा कुछ मोटा था। मैंने भी हौले हौले उसके लण्ड को मसलना चालू कर दिया। उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी।

“तेरा लण्ड तो मस्त है, तेरी दीदी को बताना पड़ेगा !”

“अरे नहीं, दीदी को कुछ मत कहना, नहीं तो नाराज हो जायेगी…”

अब हम पिक्चर नहीं देख रहे थे, एक दूसरे का लण्ड पर मुठ मार रहे थे। बला की मस्ती मुझ पर चढ़ गई थी। आंखें मस्ती में बन्द हो रही थी। जीजू अब मेरा लण्ड दबा कर जोर से मलने लगे। मेरे मुँह से आह निकल पड़ी और मेरा वीर्य निकल पड़ा। मैंने जल्दी से लण्ड आगे किया और वीर्य नीचे गिराने लगा फिर अपना रूमाल निकाला और लण्ड साफ़ कर लिया। अब सिर्फ़ जीजू को मस्त करना बाकी था। उनके लण्ड पर मैं मुठ जोर से मारने लगा। वो भी थोड़े से बैचेन हुए और लण्ड आगे करके वीर्य को नीचे टपका दिया। हमने अपने कपड़े ठीक कर लिये और ठीक तरीके से बैठ गये। मैंने सावधानी से इधर उधर देखा, किसी को कोई मतलब नहीं था, सभी पिक्चर देखने में लगे थे।

सिनेमा से हम दोनों घर आ गये। जीजू मुस्कुरा रहे थे। हमने डिनर लिया और रात को अपने कमरे में जा कर सो गये।

जीजू ने मुझसे कहा- यहाँ अकेले क्या सो रहे हो, इधर ही आ जाओ, बातें करेंगे।

मैं उनकी बात मान कर उनके कमरे में सोने चला आया। कुछ देर तक तो हम लोग बातें करते रहे।

“जीजू दीदी से मत कहना कुछ भी…”

“अरे तुम्हारी दीदी ही तो तुम्हारे बारे में कहती रहती है कि बाबू का लण्ड तो छोटेपन से ही बड़ा है और मोटा है।”

“अच्छा और क्या कहती थी वो…”

“कहती थी कि यदि आप चाहे तो भैया को मुझे चोदने के लिये राजी कर लो !”

“क्या… दीदी ने कहा ये…? मैं नहीं मानता…” मुझे आश्चर्य हुआ, पर मुझे लगा कि जीजू गे था उसे गाण्ड मारने या मराने में अधिक मजा आता होगा, इसलिये दीदी को कोई अपना लण्ड चहिये होगा कि बदनामी भी हो और चुदाई भी हो जाये।

“ठीक है… आयेगी तो देख लेना…”

दीदी के विचार सुन कर मेरा लण्ड तन्ना गया। मेरे जहन में दीदी का अब मस्त फ़िगर दिखने लगा था। दीदी की चूत कैसी होगी, चूचे कैसे होंगे। क्या सच में दीदी को चोद पाऊंगा। फिर जाने कब हम सो गये। रात को मुझे लगा कि जीजू मेरी पीठ से चिपक रहे थे और अपना लण्ड मेरी गाण्ड में रगड़ रहे थे। दूसरे हाथ से मेरा लण्ड पकड़ रखा था। मैं अनजान बन कर लेटा रहा। मुझे आनन्द आने लगा था। जीजू ने समझा कि मैं गहरी नींद में हूँ। उन्होंने मेरा पजामा उतार दिया। मेरी गाण्ड नीचे से नंगी हो गई और लण्ड बाहर आ गया। मेरा लण्ड भी बुरी तरह तन्नाने लगा था। अचानक मेरी गाण्ड में गीलापन लगा, शायद थूक था और फिर लण्ड का सुपारा मेरी गाण्ड की छेद में गड़ने लगा। अब मैंने जागना ही बेहतर समझा। मुझे भी तो मजा लेना था।

“जीजू, मेरी गान्ड मारोगे…?” मुझे गाण्ड में गुदगुदी सी लगने लगी।

“प्लीज, मारने दे ना बाबू… फिर तू भी मार लेना…” मेरा लण्ड बहुत ही कठोर हो चुका था, और रहा नहीं जा रहा था।

“जीजू पहले मुझे आपकी गाण्ड मारने दो… मेरा लण्ड बहुत कठोर हो रहा है।”

जीजू खुश हो गये, उनके मन की बात सामने आ गई।

“सच बाबू, देख तबियत से मेरी गाण्ड चोदना, मुझे लोहे जैसे लण्ड अपनी गाण्ड में बहुत भाते हैं… मेरी गान्ड चाटोगे?”

“जीजू घोड़ी बन जाओ…फिर गाण्ड चाटूंगा भी और चोदूंगा भी !” जीजू में गे वाली सारी आदतें थी।

जीजू तुरंत घोड़ी बन गए। उनकी गान्ड एकदम चिकनी और गोल थी। मैंने उसके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर चीर दिया। गाण्ड का छेद सामने था। मैंने अपनी जीभ को उसकी गाण्ड में घुसा कर उसको चाटा और जीभ को अन्दर भी डाला। कुछ देर तक चाटने के बाद जीजू खुद ही बोले,”बाबू, तू तो मस्त है रे… गाण्ड को भी चाटने से मस्ती आ गई…किसी ने मेरी गाण्ड ऐसे नहीं चाटी… अब लण्ड घुसेड़ दे…मार दे गाण्ड !”

मैंने अपना लण्ड छेद में जमा कर जोर लगाया तो पता चला कि गाण्ड तो पहले से ढीली है, लण्ड गान्ड में घुसता चला गया। मैं उनके चूतड़ों पर थपथपा कर कस कस हाथ से मारने लगा। उसे जोर का आनन्द आने लगा। उसका लण्ड भी कड़क हो उठा। मेरे धक्के चालू हो गये वो मस्त हो उठे और मुझे गालियाँ देने लगे। आह रे… मेरे लण्ड में गजब की मस्ती छाने लगी। चुदाई तो बहुत की थी पर किसी आदमी गान्ड पहली बार मारी थी। मैंने हाथ बढ़ा कर उनका लण्ड पकड़ लिया और धक्कों के साथ मुठ भी मारने लगा।

जीजू तो जैसे तड़प उठा,”भेन चोद… तू तो उस्ताद है रे… क्या गाण्ड को पेली है कि मादरचोद मजा आ गया…!”

“जीजू मेरे से मराओगे तो गाण्ड की मस्ती ऐसी चढ़ेगी कि बस मुझसे ही मरवाओगे आप !”

“तेरा लण्ड चूसने को मन कर रहा है… पर अगली बार… तेरा लण्ड और मेरी गाण्ड… वाह रे…” जीजू मेरी तारीफ़ करने लगा था।

“दीदी को मेरे से चुदवा दो… आपका अहसान होगा !” मैंने अपनी फ़रमाईश कर ही दी…

“कल ही लो… वो आये तो तू खुद ही उससे चिपक जाना… वो देखना तुझे गले लगा लेगी… और बिना कुछ कहे ही चुदवा लेगी।” जीजू ने मुझे असली बात बता दी।

जीजू का लण्ड मसलने से उसका हाल बुरा हो उठा था, और इधर मैं उसकी गाण्ड चोद चोद कर चरम बिन्दू पर आ रहा था। तभी मैं झड़ने लगा। मेरा वीर्य निकलने लगा। मेरा जोश ठण्डा पड़ने लगा। पर जीजू ने पलट कर मुझे घोड़ी बना कर मुझ पर चढ़ गया,”बस बाबू दो मिनट… मैं तो तैयार हूँ…”

उसने अपना कड़क तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसेड़ दिया। मैं दर्द से कराह उठा। उसने बस तीन-चार ही धक्के मारे और उसका वीर्य छूट पडा। पर इन तीन चार बार लण्ड पेलने से मेरी गाण्ड जैसे फ़ट गई हो… असीम दर्द होने लगा था। उसके लण्ड में भी कट दिख रहा था और खून की बून्दें छलक उठी थी।

“साली गाण्ड है या सुई का छेद… इसे बार बार चोद कर मेरे लायक बनाना पड़ेगा।”

अगले रोज दीदी आ चुकी थी। उसे देख कर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं जीजू के बताये अनुसार कुछ करूँ।

शाम को दीदी नहा कर जब बाहर आई तो सिर्फ़ पेटीकोट में थी। उसका पेटीकोट पतले कपड़े का था, सो साफ़ मालूम पड़ रहा था कि अन्दर पैन्टी नहीं पहनी है। मैं वहीं बिस्तर पर बैठा था। मुझे शरमाते देख कर दीदी ने ही पहल कर डाली।

“तुम्हारे जीजू बता रहे थे कि तुम दोनों के दिन बड़े मस्ती में कटे… खूब मजे किये…?”

“जी दीदी, जीजू तो है ही मस्त…पर आपको कैसे मालूम… ?” दीदी बिलकुल मेरे पास आ गई और लगभग चूत को मेरे मुँह के पास ले आई।

“उन्होंने मुझे सब बता दिया है…” अब कुछ शर्माने की गुन्जाईश नहीं रही थी। मैंने दीदी के चूतड़ों को थामते हुए दबा दिया और पेटीकोट के ऊपर से ही दीदी की चूत में अपना मुँह गड़ा दिया। दीदी के मुख से हाय निकल पड़ी। मेरे बालों को नोच कर पकड़ लिया और मेरे सर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। उसकी चूत की दोनों फ़ांके खुल गई और उसके बीच मेरा मुँह घुस पड़ा।

अपनी चूत को जोर देकर और मेरे मुख पर दबाने लगी,”मेरे भैया… जरा चूस डाल चूत को…!”

दीदी के मुख से आह निकली और अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया। उसकी चूत डबल रोटी की तरह फ़ूली हुई थी… उसमें से जवानी का मद मस्त रस निकल रहा था। दीदी ने अपनी एक टांग ऊंची करके बिस्तर पर रख ली और अपनी चूत का द्वार खोल दिया। मैंने अपनी जीभ निकाली और और दीदी की रस भरी जवानी को चाट लिया। उसकी यौवन कलिका चूत के साथ अन्दर-बाहर हो कर मचल रही थी। मैंने अपने होंठों से उस उभरी हुई छोटी सी नन्ही सी कली को मसल दिया।

“भाई जी, मार डालोगे क्या…?” दीदी सिसक उठी।

“बाबू… आपकी दीदी चुदने के तैयार है… पटक दो बिस्तर पर और दोनों लूटो जवानी का मजा…”

“जीजू और आप…?”

“ये तो बस गाण्ड मारते हैं और मराते हैं… ये तो गे है…” दीदी ने निराशा पूर्वक कहा।

“दीदी बस, निराश नहीं हो… मेरा लण्ड आपकी चूत की प्यास बुझायेगा… चोद चोद कर मस्त कर देगा !” मैंने उन्हे तसल्ली दी।

दीदी खुशी से मेरे से लिपट गई,” बस भैया अब लग जाओ, मेरी चूत को ठण्डी कर दो… मस्त चोद दो …।”

मैंने दीदी की कमर में हाथ डाल कर उसका पेटीकोट उतार दिया और प्यार से उसे बिस्तर पर लेटा दिया। मैंने तुरन्त अपनी पैन्ट और अंडरवियर उतार दिया और दीदी को अपना मोटा तगड़ा लौड़ा दिखाया।

“ला चूस लूँ इसे… ” मेरा लण्ड खींच कर अपने मुख में भर लिया और चूसने लगी।

मैंने भी कमर हिला कर उसका मुँह चोदना चालू कर दिया। उसके मुँह से गों गों की आवाज आने लगी। लण्ड शायद हलक में भी जा रहा था। दीदी ने लण्ड बाहर निकाल दिया और खांसने लगी।

“गले को चोद डालेगा क्या…?”

“सॉरी दीदी… जोश में गला चुद गया…” दीदी ने मुझे धक्का दे कर अपने ऊपर लेटा लिया और अपनी दोनों टांगें ऊपर करके अपनी चूत खोल दी। मैंने अपना लौड़ा निशाने पर लिया और उसकी चूत में घुसेड़ दिया। एक मोहक सी सीत्कार भरते हुए उसने मेरा लौड़ा अपनी चूत में भर लिया। और मुझे कस कर पकड़ लिया।

” भैया मेरी इतनी बड़ी-बड़ी चूचियाँ भी तो है ना… मसल डालो ना… देखो ना कितने बेताब हो उठे हैं।”

“मैंने दोनों बोबे अपने हाथों में भर कर उन्हें मसलना शुरू कर दिया। उसकी कमर हौले हौले चलने लगी और वो शान्ति से चुदने लगी। उसे बड़ा ही आनन्द आ रहा था। मेरे लण्ड में भी वासना की मिठास भरने लगी थी। उसके मस्त बोबे और चुचूक घुमा रहा था और हम दोनों जवानी का लुफ़्त उठा रहे थे… पर हाय ये जीजू भी… मेरी मस्त गोल गाण्ड देख कर उनसे रहा नहीं गया… उनका कड़क तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गान्ड में घुस पडा। मेरी गाण्ड तो कल से दर्द कर रही थी, मैं दर्द से बिलख उठा,”दीदी ये देखो ना जीजू को … फिर से मेरी गाण्ड मार रहे हैं…!”

“सह ले मेरे प्यारे भैया… देख मैं भी तो चुद रही हू ना…डबल मजा ले ले…” दीदी ने मुझे समझाया।

दीदी नाराज ना हो जाये सो गाण्ड भी मरवाता रहा औए चोदता भी रहा। गाण्ड के दर्द के मारे मेरा माल भी नहीं नहीं निकल पा रहा था… पर दीदी इतने में दो बार झड़ चुकी थी। इतने में जीजू झड़ गये, उनके वीर्य ने मेरी गान्ड चिकनी और लसलसी कर दी… जीजू का लौड़ा बाहर निकलते ही मुझे शान्ति हुई और मैं दीदी को फिर से चोदने लगा और अपने अंतिम पड़ाव पर आने लगा। दीदी भी तीसरी बार झड़ने वाली थी। आँखें बन्द करके खूब जोर जोर से चुदा रही थी… अब मेरा निकला …निकला हो रहा था। दीदी को पता चल गया गया कि मैं झड़ने वाला हूँ… सो उन्होंने अपनी चूत टाईट की और मेरे लण्ड को दबा लिया। मेरा वीर्य एकदम से छूट पडा और चूत में भरने लगा… तभी दीदी भी झड़ने लगी। दीदी ने मुझे प्यार से गले लिया और हम एक दूसरे के ऊपर वैसे ही लेट गये।

“भैया तेरा तो बड़ा तगड़ा है… देख मैं तीन बार झड़ गई… और तू है कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा।”

मैं क्या बताता कि जीजू के कारण था ये सब … पर उस दिन से दीदी मेरी चुदाई की फ़ैन हो गई। मेरी गाण्ड आज पूरी सूज गई थी, बहुत दर्द था। दीदी के कहने से जीजू ने मेरी गाण्ड सात दिनों तक नहीं चोदी। जीजू से तो उन्होंने चुदना ही छोड़ दिया था। सात रोज बीतने के बाद अब तो रोज रात को यही होता कि मैं दीदी को चोदता और जीजू मेरी गाण्ड मारते… दिन को तो जीजू मुझसे बहुत बार गाण्ड मरा लेते थे… बदले में मेरी सारी फ़रमाइश पूरी कर देते थे। अब हमारी लाईफ़ बडी मस्त चल रही है… या कहिये बहुत गड़बड़ चल रही है। Hindi Sex Stories

Antarvasna

आज स्कूल में Antarvasna अचानक जल्दी छुट्टी हो गई तो मैं घर आ गया। जैसे ही दरवाजे के पास पहुँचा कि मैंने सुना:
आई … ई … मान जाओ न … यह दीदी की आवाज थी।

मैं चौंक पड़ा … मैंने दरवाजा खटखटाने का इरादा त्याग दिया और दबे पाँव दरवाजे तक पहुँच गया और सुनने लगा।

अन्दर दीदी और किसी मर्द की आवाज आ रही थी- उचक क्यों रही है … कोई पहली बार दबा रहा हूँ क्या … पुच्च पुच्च पुच्च!
“इतना जोर से क्यों दबाते हो? मुझे दर्द नहीं होता क्या?”

“इतने समय के बाद मिलेगी तो सब्र कैसे होगा!”
“आप ही तो एक साल के बाद आये हो!”

“आह्ह्ह … मेरी जान् … याद है … पिछली बार कैसे छत पर तेरी चूत चोदी थी! पुच्च पुच्च!”
“सब याद है … कुछ बिछाया भी नहीं था … पूरी छिल गई थी पीछे से!”

“सच … पुच्च् पुच्च … पर बहुत मजा आया था! सच पूछे तो तुझे चोदने बाद तेरी बहन को चोदने में बिल्कुल भी मजा नहीं आता! तुझे भी तो मजा आता है न?”
“हाँ … पर थोड़ा धीरे दबाओ … आईइ … लगती है!”

“चुदते समय तो नहीं होता दर्द तुझे?”
“उस समय तो मैं दूसरी दुनिया में होती हूँ!”

फ़िर कुछ देर शान्ति रही.

“चल अब बैडरूम में चलें!”
“अभी नहीं … भाई आने वाला होगा.”
“अभी तो दो ही बजे हैं … वो तो चार बजे आयेगा.”
“जल्दी भी आ सकता है … रात को सबके सोने के बाद आऊंगी.”
“ज्यादा नखरे मत कर!”

“मान जाओ … पूरी रात चोदना फिर!”
“तो एक जल्दी वाला राउंड कर लेते हैं … लंड भरा हुआ है … आह्ह आह्ह!”
“बीच में मत छोड़ देना मुझे!”

“आज तक छोड़ा है क्या … बहन की लौड़ी … हमेशा तेरी चूत खाली करके झड़ा है.”

फ़िर उनके जाने की आवाज आई तो मैं दौड़कर घर के पीछे पहुँच गया जहाँ की खिड़की से बैडरूम के अन्दर सब दिखता था।
दोनों एक दूसरे की कमर में हाथ डाले कमरे में आये।

ओह … ये तो समीर जीजाजी हैं … मामा की बेटी के पति … तो दीदी इनसे भी?
हे भगवान … इस लड़की ने कोई लंड छोड़ा भी है क्या!

और आते ही जीजाजी ने उसे बाँहों में भींच लिया और फ़िर उनके होठ चिपक गये।
वे हाथों से उसकी चूची, कमर व गांड को जोर जोर से भींच रहे थे।

वह बिलबिला रही थी- आह्ह्ह … ऐसे क्यों अकुला रहे हो … मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या?
दीदी हाँफ़ते हुए बोली।

और फ़िर जब जीजाजी ने उसे नंगी करना शुरू किया तो दीदी बोली- पूरे कपड़े नहीं … अभी तो ऐसे ही चोद लो … रात में चाहे जैसे चोदना!
“ज्यादा नखरे मत कर बहनचोद … अभी काफ़ी वक्त है!”

और फ़िर आनन फ़ानन दोनों नंगे हुए और कस कर फ़िर लिपट गये।

लिपटे लिपटे जीजू ने उसे पलंग पर पटक लिया और उसके ऊपर आ गये!
फ़िर रगड़ना शुरू कर दिया।

मेरी बहन भी बराबर सहयोग कर रही थी।
सात इंच का लंड चूत की गहराई नापने के लिये बेताब था तो चूत भी उसका घमंड तोड़ने के लिये आतुर थी।

“कैसे चुदवायेगी मेरी जान?”
“शुरूआत तो सीधे ही करो!”

और दीदी ने टांगें फ़ैला दी.
तो जीजू ने लंड चूत पर टिका दिया और फ़िर होठों पर होंठ जमाकर चूसना शुरू किया तो सीमा ने भी हाथ से लंड को पकड़ कर चूत पर सैट किया और चूतड़ उचकाए.

चूत ने लंड को अपने भीतर समा लिया.

फिर सीमा ने अपनी टांगों में जीजू को लपेट लिया … लंड जड़ तक समा गया।

थोड़ी देर प्यार करने के बाद जीजू ने पोजीशन ली और दनादन ठोकना शुरू कर दिया।

वह आह्ह्ह आह्ह्ह करती रही और चूत ठुकती रही.

बीच बीच में जीजू उसे चूम भी रहे थे।

दीदी भी अब गर्म हो चुकी थी।

फ़िर वे अलग हुए और उन्होंने दीदी को हाथ पकड़ कर खड़ा किया और पलंग की ओर मुँह करके झुका दिया।

दीदी ने हाथ पलंग पर जमा दिये।
उसकी चूत मेरी तरफ़ थी।

जीजाजी उसकी पैंटी से पहले चूत पौंछी और फ़िर अपने सात इंच के लंड को पीछे से चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्का दिया।
दीदी बिस्तर पर गिर गई.

“थोड़ा आराम से डालो ना जीजू राजा!”

उन्होंने उसे फ़िर उठाया और इस बार थोड़ा आराम से लंड चूत में घुसेड़ा और फ़िर चोदने लगे।

वह भी चूतड़ हिला हिला कर धक्के मार रही थी- आह्ह मेरे प्यारे जीजू … और जोर से!

“ले मेरी जान! तेरी मस्त चूत को फ़ाड डालूँगा आज!”

और इस तरह उसने पहले उसकी चूत पीछे से खूब ठोकी और फ़िर उसे सीधे लिटा कर खूब पटक पटक के चोदा।

काफ़ी देर बाद वे झड़े और फ़िर लंड डाले ही उसके ऊपर लेट गये।

मैं वापस लौट गया और फ़िर काफ़ी देर बाद आया। Antarvasna

Hindi Porn Stories

मैं बताना चाहूंगा कि मेरे अब तक के Hindi Porn Stories अनुभव के आधार पर आज तक मैंने कई कॉलगर्ल, रिश्तेदारी में, पत्नी, गर्लफ्रेण्ड आदि के साथ चुदाई कार्यक्रम किये, मगर चुदाई कार्यक्रम के दौरान ना तो उनके मुंह से कोई अश्लील भाषा निकली और ना ही मेरे मुंह से ! तो कैसे मान लूं कि चोदते वक्त अगर अश्लील भाषा का प्रयोग किया जाये तो औरत और मर्द दोनो में उत्तेजना बढ़ती है। अश्लील भाषा का प्रयोग चोदते समय तो कतई नहीं करना चाहिये, उत्तेजना बढ़ने के बजाय हो सकता है कि शिथिलता आ जाये।

खैर ……. दोस्तो, आज नई कहानी लेकर आया हूँ !

मेरी पत्नी घर के काम काज के मामले में बहुत ही आलसी है, कभी कभी मुझे उस पर बहुत ही गुस्सा आता है, मगर फिर भी मैं जानबूझ कर उसे कुछ नहीं कहता।

मेरे ससुराल में शादी थी तो मुझे भी वहां जाना था। वहां पर बहुत से रिश्तेदार आये थे, वहां मेरी पत्नी ने अपनी एक रिश्तेदार से मिलाते हुए कहा- इसका नाम चांदनी हैं और हम इसको परीक्षा के बाद अपने पास ही रखेंगे।

जब मैंने उस लड़की को देखा तो सच में देखता रह गया। उसके बोबे क्या माशा अल्लाह, और काया गजब अति सुन्दर काया थी उसकी, कि जो भी उसको देखे, देखता ही रह जाये।

अचानक मेरी पत्नी की आवाज ने मुझे झकझोर दिया कि कहां खो गये।

मैंने कहा- कहीं नहीं।

मेरी पत्नी ने मुझे धीरे से कहा- अगर तुम नहीं चाहते उसको अपने यहां पढ़ाना ! तो मैं मना कर देती हूँ।

मेरे मन में तो लड्‌डू फ़ूट रहे थे, मैं कब मना करने वाला था, मैंने कहा -नहीं-नहीं मुझे कोई एतराज नहीं।

जब तक मैं ससुराल में रहा तब तक मैं मजाक ही मजाक में उसके स्तन दबा देता, या नाजुक अंगों से छेड़छाड़ कर देता तो वह हंसकर भाग जाती।

जब मैं वापस अपने शहर आया तो मुझे उसकी याद आने लगी, मगर मैं अपने मुंह से कुछ नहीं कहना चाहता था क्योंकि पत्नी को शक होने का डर था। पर ऊपर वाला शायद एक बार फिर मुझ पर मेहरबान था।

मेरी पत्नी ने ही आगे होकर उसके शहर जाकर उसे लाने के लिये कहा। मेरा मन तो गार्डन-गार्डन हो गया।

मैं व मेरी पत्नी उसके शहर गये और उसे ले आये। अब तो बस मौके की तलाश थी। वाह री किस्मत मेरी पत्नी को फिर अपने ससुराल २-४ दिन के लिये जाना था। पहले तो मेरी पत्नी ने कहा- मैं चांदनी को भी साथ ले जाती हूँ। फिर उसने खुद ही विचार बदल दिया कि वह बेकार परेशान होगी, २-४ दिन की ही तो बात है। मैं और चांदनी मेरी पत्नी को छोड़ने सुबह ६ बजे ही रेलवे स्टेशन गये और उसे छोड़ कर वापस आये।

चांदनी ने आते ही कहा- जीजू चाय पीकर जाना !

मैंने उसका हाथ पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया और मस्ती करने लगा। यह सब ऊपर की मस्ती मजाक तो मेरी पत्नी के सामने भी करता था, मगर आज तो बस उसे चोदने का मन बना हुआ था।

मैंने कहा- चांदनी, चाय-वाय बाद में बनाना, आओ थोड़ी देर बैठो तो।

उसने कहा- जीजू, क्या बात है, विचार तो नेक हैं, आपके?

मैंने कहा- विचार तो आपके जीजू के हरदम ही नेक होते हैं, बस आप ही नहीं समझती।

और मैं अपने हाथों को उसके शरीर के नाजुक अंगों पर फिराने की कोशिश करने लगा। मैंने उसके वक्ष को पीछे से हल्के से दबाया तो वह कुनमुना गई और छुटने की नाकामयाब कोशिश करने लगी। आज मुझे लग रहा था कि चांदनी भी मुझसे चुदवाने को बेताब है। मैंने जब उसकी तरफ से मौन इशारा समझा तो अपने हाथों को धीरे-धीरे उसके नाभि-मण्डल पर ले गया और मेरे होंठों ने भी अपना काम चालू कर दिया था। मेरी तरफ उसकी पीठ होने के कारण मैंने उसकी गरदन को अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठों का रसस्वादन करने लगा। अब मेरा हौंसला भी बुलन्द होने लगा।

मैंने उसके कुर्ते को थोड़ा ऊपर किया तो उसने कहा- नहीं जीजू यह सब नहीं ! अगर किसी को मालूम हो गया तो?

मैंने चांदनी को समझाते हुए कहा- देखो जान ! इस घर में मेरे व तुम्हारे अलावा कोई नहीं है, तो किस को मालूम होगा और कौन बतायेगा कि हमने क्या किया।

चांदनी मेरा मतलब समझ गई और चुप हो गई। अब मैं भी बिन्दास हो गया और चांदनी की कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर बोबों को दबाने व सहलाने लगा। चांदनी का पहला चुदाई कार्यक्रम था तो उसमें डर और मजा दोनों का समावेश था।

उसके मुख से रह रहकर सिसकारियाँ निकल रही थी- आ….ह…….. जीजू……………

मैंने चांदनी की कुर्ती को एक झटके में शरीर से अलग कर उसकी ब्रा को खोल दिया और बोबों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

चांदनी मदहोशी में आंखे बंद किये ही कहने लगी- जीजू ! ऐसे क्या करते हो !

तो मैंने कहा- चांदनी अभी तो बाकी है ऐसे-वैसे सब करेंगे, तुम बस महसूस करो और मजा लो।

बोबों को चूसते हुए उसके नाभि-स्थल तक होंठों को फिराता हुआ लाया, नाभि से नीचे जाना चाह रहा था, मगर चांदनी का नाइट पायजामा और पेंटी दीवार बन कर खड़े थे। इधर चांदनी मेरी पीठ को सहला रही थी। मैंने चांदनी की पैंटी और पायजामा एक बार में ही खोल दिया और अपना मुँह चांदनी की गुलाबी चूत पर ले गया, चांदनी की गुलाबी चूत पर नाम मात्र के मुलायम बाल थे जो उसकी गुलाबी चूत की पहरेदारी कर रहे थे।

मैंने अंगूठे से उसके पहरेदारों को एक तरफ किया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी सिसकारियाँ लगातार जारी थी- जी……जू……….ये क्या……….कर रहे……. हो……….आ.हहहहहह जी…..जू………मजजजजजा आाा ररररहा हैं औररररर जोर सेससस चाटटो नााा

गुलाबी चूत से रिस रिस कर नमकीन पानी निकल रहा था, उसे चाटने में मुझे भी मजा आ रहा था और शायद अब चांदनी को भी मजा आने लगा था। चांदनी अपनी गांड उठा उठा कर मुखचोदन करा रही थी।

आधे घण्टे तक चूत चाटने के बाद हमारे लण्ड महादेव भी हुंकारने लगे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को व्याकुल होने लगे। मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लण्ड निकाल कर चांदनी के हाथ में दे दिया।

वह लण्ड देखते ही चिल्ला उठी- ये क्याऽऽऽ ?

मैंने कहा- लण्ड।

बोली- इतना बड़ाऽऽ? मैं मर जाऊंगी जीजू ! नहीं मुझे छोड़ दो !

मैंने उसे समझाया- जानू, तुम्हारी जीजी भी तो इसे लेती हैं, वो तो नहीं मरी। इसे मुँह में लो ! तुम्हें मजा आयेगा !

वह ना ना करती हुई मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेने लगी। धीरे धीरे आधा लण्ड मुँह में लेने के बाद मैंने उसके मुंह को चोदना चालू कर दिया। लण्ड चूसने में अब चांदनी को भी मजा आ रहा था। वो अब लण्ड को लॉलीपाप की तरह चूसने लगी। मैं पॉजीशन बदलते हुए ६९ की पॉजीशन में आ गया और अब वो मेरा लण्ड और मैं उसकी चूत चाटने लगा। करीब २०-२५ मिनट में चांदनी दो बार स्खलित हो गई और मैं अब होने वाला था।

और मैं……….. ये ……..गया वो गया……… और अपना सारा माल उसके मुँह में उड़ेल दिया। और फिर आपस में चिपक कर हांफने लगे।

थोड़ी देर बाद अचानक अपने लंड पर किसी के स्पर्श से मैंने आंखे खोली तो देखा कि चांदनी उससे खेल रही है और उसे खड़ा करने की कोशिश कर रही है। मेरे आंख खोलते ही मुझे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। मैं समझ गया कि अब मेरी साली को जीजू से क्या चाहिये।

मेरा लण्ड कब पीछे रहने वाला था, उसने तुरन्त सलामी ठोक दी और चूत पर जाकर पहरेदारों से भिड़ गया। आखिर जीत मेरे लण्ड की हुई और सारी दीवारें तोड़ता हुआ चांदनी की अनछुई गीली, चिकनी चूत में धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा क्योंकि मुझे मालूम था कि चांदनी पहली बार चुदने वाली हैं।

जैसे ही लण्ड ने संकरे रास्ते में प्रवेश किया, चांदनी ने रोक दिया- नहीं जीजू ! दर्द हो रहा है ! और चिल्लाने लगी।

मैंने सोचा अगर चांदनी की बातों में आ गया तो सारा किया धरा रह जायेगा और मैंने तुरन्त चांदनी के होंठों पर कब्जा कर एक लण्ड की तेज ठोकर लगाई और उसकी चिल्लाहट को होंठों से दबा दिया।

मैंने महसूस किया कि लण्ड पर खून का फव्वारा छुट गया और वह हाथ पैर मारने लगी, मगर मैं अपने हाथों से उसके स्तनों को सहलाते हुए और होंठों से अब गाल, कान, गरदन वगैरह चूम कर उसे दिलासा देने लगा और धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा। उसका प्रतिरोध अब कम होता नजर आया और अब शायद उसे भी मजा आने लगा इसलिये गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी और मुंह से अनाप शनाप आवाजें निकालने लगी- जी……जू चो…….दो मुझे………….. चोद………..डालो ! वगैरह वगैरह।

लण्ड और चूत की लड़ाई चालू हो गई थी, या यूं कहिये आपस में शास्त्रीय संगीत की प्रतिस्पर्धा चालू हो गई हो। क्योंकि लण्ड जैसे ही अन्दर जाता तो तबले पर पड़ने वाली थाप की आवाज आती और चांदनी के मुँह सिसकारियाँ निकलती। मतलब कि उस वक्त सरगम बज रही थी।

१५-२० मिनट बाद मैंने चूत में लण्ड डाले डाले ही उसे घोड़ी बनाया और फिर चालू हो गया। इस दरम्यान वो २-३ बार झड़ चुकी थी मगर मेरा अभी ठिकाना नजर नहीं आ रहा था।

मगर घोड़ी की पोजीशन में आते ही मुझे लगने लगा कि अब ज्यादा देर नहीं टिक सकूंगा और मैं भी १५-२० धक्कों के बाद उस पर ढेर हो गया और अपना सारा माल उसकी कोमल चूत में बहा दिया।

देर बाद जब हम उठे तो उसकी नजर बिस्तर पर गई जहां खून ही खून और वीर्य उसका और मेरा दोनों का पड़ा था, जिसे देख कर वह डर गई और रोने लगी- जीजू ! यह क्या हुआ ? इतना खून निकल गया।

मैंने कहा- साली साहिबा ! यह सब तो पहली बार में होता ही है ! और समझाने लगा।

मैंने उस दिन ऑफिस फोन कर छुट्‌टी ले ली और उस दिन और उसके बाद जब तक मेरी पत्नी नहीं आई तब तक मैं चांदनी को लगातार चोदता रहा कभी घोड़ी-कुतिया तो कभी किचन में एक टांग पर। कुल मिलाकर चांदनी के साथ बिताये वो हर पल आज भी मेरी आंखों के सामने आते हैं तो बस उसे चोदने की इच्छा जागृत हो जाती है।

उसके बाद हमें जब भी दिन में, रात में या जब भी मौका मिलता हम एक हो जाते। अब वो हमारे साथ नहीं रहती ! वो अपने घर चली गई, मगर उसकी याद अब भी दिल में बाकी है।

यह कहानी आपको कैसी लगी, मेल करें।

चोदे, चुदायें और लाइफ बनायें। Hindi Porn Stories

सबसे पहले मैं अपना परिचय दे दूं.
मैं 50 वर्षीया एक कामुक हाउस वाइफ हूं और पति के साथ अपने सेक्स जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हूं।
मेरा जिस्म गदराया हुआ है।
मेरा कामुक बदन आज भी मर्दों को आकर्षित करता है।

मैं हर तरह की ड्रेस पहनती हूं पर देखने वाले मन ही मन मेरे कपड़े उतार के मुझे नंगी देखते हैं, मुझे ऐसा लगता है।

जैसा कि मैंने बताया मैं अपने पति की चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट हूं लेकिन जिस व्यक्ति को रसगुल्ला पसंद हो, वो भी रोज रसगुल्लों से पेट नहीं भर सकता तो फिर कामुक मन तो नए स्वाद के लिए भटकता ही है।
इसलिए मेरा भी मन भटका और शादी के पच्चीस साल बाद भटका.

जब मैं बच्चों की जिम्मेदारियों से फ्री हो गई, तब मेरी दबी हसरतें मेरे जिस्म को मेरे दिमाग को नए नए मर्दों को देख के ये कल्पना करने पर मजबूर करने लगी कि इसका लंड कितना लंबा होगा, कितना मोटा होगा?

मेरा अनुभव कहता है कि कई कहानियों में बहुत बढ़ा चढ़ा के लंड का आकार बताया जाता है।
मैंने जो पहला पराया लंड लिया न तो वो पति के लंड से लंबा था न मोटा, किंतु फिर भी चुदने में बहुत मजा आया क्यों कि आखिर मेरा पहला नया स्वाद था।
वास्तव में नए लंड की सनसनी का कोई जवाब नहीं।

एक बात और बताती चलूं, मेरे पति ने ही मेरी कामुकता को बढ़ावा दिया.
हमने आपस में खूब कहानियां पढ़ीं, हजारों पोर्न वीडियो देखे, बहुत एंजॉय किया।

इस प्रकार उन्होंने ही मेरी लालसाओं को जगाया, मेरी कामाग्नि को भड़काया, मैं उनके सामने या उनकी अनुपस्थिति में किसी भी पराए मर्द के साथ चुदाई करूं उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
उनका मानना है कि कुदरत ने तो इंसान को पृथ्वी पर आनन्द लेने भेजा है, उसने कोई नियम कायदे नहीं बनाए।
समाज में सारी बंदिशें इंसानों ने ही बनाई हैं।

दुनिया में जितने भी सुख हैं उनमें सबसे अनूठा है ‘कामसुख’ जो पूरी दुनिया में एक समान है।
पूरी दुनिया में खाने की, कपड़ों की विविधता है. पर चुदाई, उसकी प्रक्रिया, चरम सुख, स्खलन, जिस्म को दिमाग को राहत एक जैसी होती है।

मेरे पति का बस इतना कहना है कि जो भी हो, मेरी जानकारी में हो।
मैंने भी उनकी इस बात को ध्यान में रखते हुए उनके साथ भी और अकेले भी कई मर्दों के साथ शारीरिक सुख के मजे लिए।

हमने थ्रीसम, फोरसम, स्वैपिंग सारे खेल खेले हैं बस ग्रुप सेक्स का मजा लेना बाकी है।

मेरी इस कहानी में पेश है मेरी पहली गैर मर्द से चुदाई की दास्तान।

एक बार की बात है कि मेरे पति पंद्रह दिन के लिए बैंक द्वारा आयोजित एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए दिल्ली गए थे।
हम आज भी एक दिन छोड़ के चुदाई करते हैं।

उनके जाने के एक हफ्ते बाद मेरे जिस्म को चुदाई याद आने लगी।
मेरी कामुकता मुझे बेचैन करने लगी.

ऐसे में मेरा ध्यान गया हमारे 28 वर्षीय किरायेदार रवि की तरफ!
उसकी पत्नी भी मायके गई हुई थी और रात डेढ़ बजे की ट्रेन से ही लौटने वाली थी।

मैंने मन ही मन उसका लंड लेने की सोची क्योंकि कई बार मैंने उसे मेरे भरे भरे स्तनों को निहारते पकड़ा था।
मुझे लगा कि वह आसानी से मुझे चोदने के लिए तैयार हो जाएगा.
और पति को पता लगने का डर तो वैसे भी था नहीं!

यह सोचते सोचते मेरी रवि से चुदने की इच्छा ज़ोर पकड़ने लगी और रात में मैं रवि के यहां अपने पहले गैर मर्द के लंड से चुदवाने पहुंची।

मैंने एक झीना गाउन पहन रखा था. अंदर न ब्रा थी न पैंटी!

उसके कमरे में दरवाजे पर मैं थी और सामने ट्यूब लाइट जल रही थी.
उसकी रोशनी में न केवल मेरा पूरा बदन दिख रहा था बल्कि रवि ने ये अंदाजा भी लगा लिया कि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना है क्योंकि उसकी शॉर्ट्स में उसकी मर्दानगी करवट लेती हुई दिख रही थी, वो चोरी चोरी अपने तन रहे लंड को सेट कर रहा था।

मैं कनखियों से उसकी इस हरकत को देख चुकी थी.

उसने पूछा- आओ आंटी, कैसे आना हुआ?
मैंने कहा- यार, अकेले में तो आंटी मत बोल! क्या मैं बूढ़ी दिखती हूं?

उसने लंड को दबाते हुए कहा- फिर क्या बोलूं?
मैंने कहा- माधुरी नाम बुरा है क्या? तू मधु या मधु जी भी बोल सकता है।

उसने कहा- ठीक है मधु … जी!

मैं तो चुदाने के मूड से ही गई थी पर अब उसका भी मूड पूरा तन मेरा मतलब बन गया था।

मैंने कहा- यार रवि, मेरा एक जरूरी काम है, कर देगा क्या?
उसने कहा- हां, बोलो न मधु जी!

मैंने कहा- तेरे अंकल को गए पूरा हफ्ता हो गया है!
वो हैरानी से मुझे देखने लगा कि मैं ऐसा क्यों बोल रही हूं.

उसने कहा- तो?
मैंने कहा- और सपना (उसकी पत्नी) को भी मायके गए 4 – 5 दिन हो गए हैं!
वो बोला- हां, वो आज रात को ही आ रही है।

मैंने कहा- अच्छा, तुम्हारी शादी को कितने साल हुए हैं?
वो बोला- पांचवां चल रहा है. आप कुछ काम का बोल रही थी?

मैं समझ गई कि अब वो नहीं, उसका लंड बोल रहा है।

मैंने कहा- यार, तुम घर की दाल रोटी से उकता जाते हो तो क्या करते हो?
वो बोला- बाजार में जाके कोई भी मसालेदार नई डिश खा लेता हूं।

मैंने कहा- एक मसालेदार नई डिश खुद चल के तुम्हारे पास आई है, इसको चखोगे नहीं?

इतना कहना था कि वो ‘ओह मधु’ कहते हुए मेरे होठों को चूसने लगा.
उसका हाथ मेरे स्तन पर और मेरा उसके लंड पर पहुंच चुका था।

मैंने गाउन उतारा और बिछ गई उसके सामने!
वो भी नंगा हुआ और लंड मेरे मुंह के सामने लेकर आया.

मैंने उसे एक गाली बकी- मादरचोद, पहले मेरी चूत में डाल के चोद अच्छे से!
उसने भी थूक लगाया और चूत में डालते हुए कहा- ले भेनचोद, अब वो भी जी लगाना भूल गया था।

मेरी चूत तो बहुत प्यासी थी ही … लेकिन वो जवान लौंडा, उसका लंड भी 4-5 दिन से सेक्स का भूखा था.
बीच बीच में रुक के वो उफान को नियंत्रित कर रहा था।

वह मेरे स्तनों को पागलों की तरह चूस रहा था.
मेरे शरीर में काम लहरा रहा था, मैंने कहा- यार रवि, एक बार कस के रगड़ दे, डिस्चार्ज होने लगे तब भी रुकना मत!

उस ने पेलना शुरू किया, दे दनादन, 10-15 धक्कों के बाद उसका वीर्य उछलने लगा.
मेरी चूत पूरी भर गई थी पर वो रुका नहीं … मेरी वीर्य भरी चूत को लगातार चोदता रहा.

मेरा भी क्लाइमैक्स नजदीक था, उसने 25-30 धक्के ही लगाए होंगे कि मैं भी झड़ गई.
मेरी चूत बहुत देर तक फड़कती रही।

मेरी सांसें भारी हो गई थी.
कई मिनट तक मैं इस मस्ती को आंखें बंद करके अनुभव करती रही।

अभी साढ़े ग्यारह बजे थे, उसकी बीवी के आने में दो घंटे बाकी थे.
हम दोनों अभी चुदाई के एक और दौर के लिए तैयार थे।

तो हम दोनों बाथरूम में अपने चूत और लंड को धोकर आए.
दोनों पूरे नंगे तो थे ही, मैं उसका धुला धुलाया, लटका हुआ, नर्म लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.

मैं पति का भी ऐसा लंड तकरीबन रोज चूसती हूं, जब वो नहा कर आते हैं.

उसका लंड दो मिनट में ही फूलने लगा, उसके हाथ मेरे स्तन से खेल रहे थे.

इससे पहले कि उसका लंड पूरी तरह से तन्नाता, मैंने उसके कंधों को दबा के नीचे झुकाया और उसका मुंह अपनी चूत पे लगा दिया।

उसकी जुबान के स्ट्रोक मेरी चूत पर चलने लगे, उसके मुंह में मेरी चूत और उसके वीर्य का मिला जुला नशीला रस घुलने लगा।

मैंने चूत केवल बाहर से धोई थी।
यह सोच सोच कर मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी कि एक मर्द मेरी चूत से अपना ही वीर्य सुड़क रहा है।

मेरे पति कहते हैं कि तू किसी से चुद के आए और तेरी चूत में उसका वीर्य भरा हो तो मैं चाट सकता हूं. लेकिन लंड खड़ा हो तब … डिस्चार्ज होने के बाद वीर्य चाटने का बिल्कुल मन नहीं करता।
मैं देख रही थी कि कितना सच बोल रहे थे वो!

मेरी चूत चाटते चाटते उसका 6 इंच का लंड पूरी तरह अकड़ गया.

इस बार मैंने उसको चित लिटाया और उसके लंड पर सवार हो गई.
रवि का पूरा लंड मेरी लपलपाती चूत में समा गया।

उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी मकान मालकिन आंटी उसके लंड की सवारी कर रही है.

वो पूछ बैठा- मधु यार, आज मेरे लन्ड की लॉटरी कैसे लग गई? तुम्हारी आज चुदाने की इच्छा कैसे हो गई, ऐसे मौके तो पहले भी आए हैं!
तो मैंने कहा- यार, आज चुदना लिखा था तो आज ही ध्यान आया.

मैंने कमर हिलाना शुरू किया, बहुत देर तक मैं लंड को चोदती रही.
फिर जब लगा कि झड़ने का समय नजदीक है, तब मैं फ़िर चित लेट गई और रवि को बोली- फिर से रगड़ दे मादरचोद, मेरी इस प्यासी चूत की प्यास बुझा दे।

रवि ने भी कस के धक्के लगाने शुरू किए- ले भेनचोद, ले भोसड़ी वाली, देख मेरा लंड कैसे रगड़ रहा है तेरी गर्म चूत को!

इस बार भी रवि के लंड से वीर्य विस्फोट हो गया.
पर वो रुका नहीं, मेरी चूत जोर जोर से फड़कती रही और वो रगड़ता रहा।

इस बार करीब आधा घंटा तक सेक्सी लेडी Xxx चुदाई चली.
रवि निढाल होकर मुझ पर पड़ा था, उसका पूरा बदन पसीने में लथपथ था।

मैंने पूछा- अभी तुम्हारी बीवी भी आकर लंड मांगेगी तो क्या करोगे?
वो बोला- इतनी लजीज बिरयानी खाकर दाल चावल खाने की बिल्कुल इच्छा नहीं है। लंड में भी दम नहीं बचा है, सिरदर्द का बहाना बना दूंगा, पर कुछ भी हो जाए आज तो सपना को नहीं चोदूंगा।

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆