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आपकी अंतरा का सभी Hindi Porn Stories अन्तर्वासना के पाठकों को ढेर सारा धन्यवाद ! सबसे ज्यादा आभार तो गुरूजी का कि मेरी कहानी हवा में उड़ रही हूँ आप सब तक पहुंचाई!
तो दोस्तो, आप सब सोच रहे होंगे कि मैंने उस रात किसी तरह अपनी बुर मसलकर खुद को संभाल लिया पर मैं आगे की सोच रही थी।
उस रात के बाद से मैं जब भी मौका मिलता अपनी रांड माँ की नंगी रंगरेलियाँ जरूर देखती थी। मेरी बुर अब पानी छोड़ छोड़ कर प्यासी होती जा रही थी।
तो दोस्तो, मैंने अपना पहला शिकार अपने मास्टरजी को बनाया या शायद खुद ही बन गई !
मास्टरजी की उम्र ४०-४५ के आसपास थी लेकिन वो मस्त दीखते थे। जब से मैंने जवानी का खेल देखा था मेरा पढ़ाई में मन कम लगता था….
एक दिन मेरी सभी बहने माँ के साथ हमारे रिश्ते की मौसी के घर गई हुई थी। मुझे घर सँभालने के लिए छोड़ दिया था। मैं गुस्से में थी, पर क्या करती, मनहूस जो थी। पिताजी शहर गए थे जोकि वो रोज सुबह जाने लगे थे।
ठीक दो बजे मास्टरजी आ गए।
मैंने बेमन से किताबे निकाली और मुँह फुला के मास्टरजी के सामने बैठ गई।
मास्टरजी ने पूछा- क्या बात है?
मैंने कहा- सब मुझे छोड़ के चले गए !
मास्टरजी- कोई बात नहीं, घर में रहना भी जरूरी है।
मैंने चिढ़कर कहा – मेरा रहना ही हर बार क्यूँ जरूरी है?
मास्टरजी- क्यूंकि तुम बाकी सब बहनों से ज्यादा सुन्दर हो ! सब डरते होंगे कि कहीं कोई तुम्हें चुरा के न ले जाये !
मैंने इस जवाब की उम्मीद नहीं की थी पर अच्छा लगा !
मैंने उनसे पूछा- आपको मैं सुन्दर लगती हूँ? मेरे पास तो कोई क्रीम- पाउडर नहीं है !
मास्टरजी- अरे पगली क्रीम तो वो लगाती हैं जो सुन्दर नहीं होती ! तू तो हूर है !
मैंने पूछा- ये हूर क्या होता है?
हूर परी को कहते हैं ! मास्टरजी ऐसा कह कर मेरी तरफ लालची नजरों से देखने लगे।
तभी मुझे ध्यान आया कि जल्दी में मैं अपने घर के कपड़ो में आ गई थी जोकि मेरे स्कूल की पुरानी शर्ट और स्कर्ट था। मेरे शर्ट की ऊपर की बटन टूट गई थी और मेरे पास कोई ब्रा नहीं थी। मतलब यह कि मास्टरजी ने मेरे जोबन का उभार देख लिया था। मैंने शरमा के नजरें नीची कर ली, मुझे बुर में गुदगुदी लगी।
मास्टरजी ने भी मौके को पहचान लिया था कि लौड़ी गरम है।
मास्टरजी ने मुझसे पूछा- घर में कोई नौकर हो तो पानी मंगवाओ !
मैंने कहा- कोई नहीं है, मैं ले आती हूँ !
मास्टरजी ने कहा- ठीक है !
मैं किचन में चली गई, मास्टरजी मेरे पीछे आ गए। जैसे ही मैं किचन में घुसी मुझे अपनी पीठ पर गर्म हाथ का स्पर्श मिला। मैंने मुड के देखा तो मास्टरजी मेरी पीठ सहला के बोले मन छोटा न कर, तेरा दिन भी आयेगा।
मैं कसमसाते हुए बोली- कभी नहीं आयेगा !
फिर मास्टरजी ने कहा- चाय बना दे !
मैं चाय बनाने लगी, मास्टरजी मेरी पीठ सहलाते जा रहे थे मुझे गुदगुदी लग रही थी और अच्छा भी।
मास्टरजी ने पीठ सहलाते हुए अपना हाथ मेरी गर्दन से लेके मेरी छातियों की और कर दिया आप मेरी शर्ट के ऊपर से उनका हाथ मेरी गोलाइयों को नाप रहा था। मैं कसमसाई पर न चाहते हुए भी मेरे चेहरे पे मुस्कान आ गई जिसे उन्होंने पढ़ लिया। अब उन्होंने मेरे कंधे पे दोनों हाथ रख के मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और मेरे चेहरे पे दोनों हाथ फिराने लगे। मुझे अजीब लगा क्यूंकि रामू या पिताजी ने माँ के साथ ऐसा कभी नहीं किया था।
मुझे अच्छा लगा तो मैं मास्टरजी से लिपट गई। मास्टरजी फिर से मेरी चूचियों को सहलाने लगे। फिर उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया और पूछा- तुम्हारा बिस्तर कहाँ है?
मैंने उन्हें बताया और हम बेडरूम में आ गए।
मैंने कहा- आपकी चाय !
उन्होंने कहा- रहने दो ! जाओ, गैस बंद करके आ जाओ !
मैं गैस बंद करके आ गई और बेडरूम में मास्टरजी के सामने बैठ गई। मास्टरजी ने मुझे खींच के गले लगाया और मेरे गले में एक चुम्मा दिया। मैं गरम हो रही थी। फिर वो मेरे गाल चूमने लगे। मैं उनकी पीठ पर हाथ फिराने लगी। फिर उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी। मेरी छातियाँ नंगी उनके सामने थिरक रही थी। अब मुझे लगा कुछ गड़बड़ हो सकती है पर तब तक उनके हाथ मेरे चुचूक मसलने लगे थे। मैं समझ ही नहीं पाई कि मास्टरजी मेरी दायीं चूची को चूसने लगे। मैं पिघल रही थी, मुझे ख़ुशी भी हो रही थी कि आज मुझे लंड मिलेगा। घर पर कोई नहीं था तो मैं भी मस्त थी।
मास्टरजी ने मेरी चूचियों को चूसने के बाद मसलना चालू किया तो मैं सिसकने लगी। वो मेरी चूचियों को खींच के बाहर निकालना चाह रहे थे, मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी लाजवाब आ रहा था। मेरा हाथ मेरी बुर में पहुँच गया। मास्टरजी मेरी चूचियों से खेल रहे थे और मैं सिसकती हुई अपनी बुर को सहला रही थी।
मास्टरजी ने फिर अपने कपड़े भी उतार दिए और बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया।
मैंने मास्टरजी का लंड देखा वो तना हुआ था शायद ६ इंच का होगा। उसके ऊपर की चमड़ी सुपाडे को आधा ढक रही थी और गुलाबी सुपाडा बड़ा सुन्दर लग रहा था। मैं अपनी बुर छोड़ के मास्टरजी के लंड को मुठी में भर के दबाने लगी। क्या गरम था उनका लंड। मैं तो मस्त हो गई थी। पता नहीं कैसे मेरी शर्म कहाँ गायब हो गई। मैं मास्टरजी के लंड को चूम रही थी। उसकी खुशबू मुझे बहुत मस्त लग रही थी। मैं तो अपनी जीभ भी लंड पर फिरा देती थी तो मास्टरजी के मुंह से उन्ह निकल जाती थी।
मास्टरजी ने कहा- इसे चूस के तो देख चमेली !
चमेली सुन के मुझे और मजा आया। मैंने सुपाड़े को मुंह में ले लिया। हाय क्या मस्त नरम लगा। मुँह में जाते थोड़ा कसेला सा स्वाद आया पर वासना की मस्ती में मुझे वोह भी मस्त लगा। मैं उनके लंड को पूरा मुंह में लेके अपनी थूक से उसे गीला करने लगी। उनकी लटकती गोलियों से तो मेरी उंगलियाँ हट ही नहीं रही थी। फिर मैं उनके लंड के सुपाड़े को अपने होठों में दबा के अपनी जीभ उसके छेद में रगड़ने लगी। मास्टरजी हाय हाय करते हुए झुक गए और कस कस के मेरी चूचियां मसलने लगे। उनसे खड़ा रहना नहीं हो पाया और वो बिस्तर पर पैर लटका के लेट गए। मैं घुटनों के बल उनकी जाँघों के बीच बैठ गई और एक हाथ से अपनी बुर में ऊँगली करती हुई अपनी जीभ उनके लंड पे रगड़ती रही।
अचानक मास्टरजी ने मेरे बाल पकड़ के अपने लंड पर मेरा सर दबा दिया। मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले ही मास्टरजी के लंड से कुछ पिचकारी जैसा मेरे मुंह में आने लगा। लस लस सा नमकीन स्वाद वाला पानी मैंने पहली बार चखा था। मुझे घिन सी आई तो मैंने उस पानी को बाहर थूक दिया। गाढ़ा होने के कारण मेरे मुंह से एक धार निकल के मेरी चूचियों पर गिरी जिसे मास्टरजी ने मेरी चूचियों पे घिस दिया।
फिर मास्टरजी ने मुझे बिस्तर पे सुला दिया और मेरी स्कर्ट खोल के मुझे नंगा कर दिया। मेरी बुर पूरी तरह से भीग गई थी। मास्टरजी ने जैसे ही एक ऊँगली बुर के मुंह में रखी वो फिसल के अन्दर घुस गई। मास्टरजी के ऐसा करते ही मेरे मुंह से आह निकल गई और मैं एक बार फिर मस्त हो गई। मास्टरजी ने अपने लंड को जो थोड़ा सुस्त हो गया था, मेरी चूत के मुंह पर लगाया और मेरे दाने से रगड़ने लगे। मास्टरजी ने अपने होंठ मेरे होंठ से चिपका लिया इस तरह उनका लंड फिर से खड़ा हो गया फिर मास्टरजी मेरे ऊपर लेट गए और मुझे कस के भीच लिया।
मास्टरजी ने अपना लंड मेरी बुर के मुंह पर रखा और धीरे धीरे सरकते हुए अपना सुपाड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर अगले ही पल एक झटके में उनका चाकू मेरी चूत को चीर चुका था। मेरी सांस गले में ही अटक गई, मैं तड़प गई। मास्टरजी ने अपने होंठ मेरे होंठ से सिल दिए और मेरी निप्पल मसलने लगे। दो चार धक्कों के बाद मुझे मजा आने लगा, मैंने अपनी गांड ऊपर उठा के मास्टरजी के लंड को पूरा ले लिया और मास्टरजी की गांड पकड़ के खींचने लगी।
मास्टरजी ने भी मौका समझ के चुदाई की स्पीड बढ़ा दी अब मेरी बुर फचक फच्च की आवाज के साथ लंड अपने अन्दर ले रही थी और मैं जन्नत की सैर कर रही थी। मास्टरजी …….। आह मास्टरजी……..। मजा आ रहा है……..। हाय क्या कर ……..दिया…….। हाय मजा…….। आह………..। मास्टर……..। पेलो ……। पेल….। पेलो……। न…….। आह……। सी सी स……..स्स्स्स…..। हाय………।
मास्टरजी अपने लंड को मेरी चूत में रख कर कमर को घुमाने लगे ….। हाय क्या मजा था……। मैं बके जा रही थी….। हाय रहने दो न इसे आज अन्दर ही…….। मत निकालो……। पेलो न पेलो न………..। हाय……
मास्टरजी को चोदने की आदत थी और वो एक खिलाडी की तरह रुक रुक के धक्के लगा रहे थे। .। पर मैं तो एक बार में ही पूरा खा जाना चाहती थी… मैं मास्टरजी से चिपक गई और अपनी गांड हिलाते हुए लंड को लेने लगी…।
मास्टरजी ने मुझे पटक के मेरी गर्दन दबाई और बोले ….रुक रुक के कर रांड … कहीं मेरा निकल गया तो मेरी गोलियों को खींचने लगेगी ।
मैं कहाँ मानने वाली थी.। मैंने गांड उछालना जारी रखा…
मस्ती सातवें आस्मां में थी…. अचानक मुझे कुछ होने लगा… मास्टरजी भी आँखे बंद कर के आह आह करने लगे….
तभी झटके के साथ मैं झड़ने लगी। हाय क्या बताऊँ क्या पल था…। लंड की गर्मी, फौलाद जैसा कड़ापन। और मेरा झड़ना। तभी मास्टरजी के लंड ने भी पिचकारी छोड़ दी। मेरी बूर में डबल गर्मी..। क्या बताऊँ मजा ही आ गया…..। मास्टरजी मेरे ऊपर लुढ़क गए और मैंने भी उन्हें कस के पकड़ लिया… दो मिनट तक हम झड़ने का सुख लेते रहे…।
फिर मास्टरजी ने उठ कर कपड़े पहने, पर मुझसे उठा नहीं जा रहा था। मास्टरजी ने मुझे सहारा दे कर बाथरूम तक पहुँचाया और मेरी बूर की सफाई की। मुझे कपड़े पहना के वो बोले- क्यों चमेली कैसा लगा…?
मैं शरमा के मुस्कुराने लगी..
दर्द की हरी गोली ले लेना…। ऐसा कह के मास्टरजी चले गए।
ऐसे गए कि फिर नहीं आये। पता नहीं क्यूँ । पिताजी ने नौकर भेजा तो पता चला कि उन्होंने शहर छोड़ दिया। मैं मन मसोस के रह गई। उसके बाद मैंने कई लंड जुगाड़े पर वो स्पर्श नहीं भूल पाई।
खैर मास्टरजी न सही गुरूजी ही सही…..! क्यूँ गुरूजी.. क्या ख्याल है….?
आप सब पाठकों के पत्रों और सेक्सी सामग्रियों का धन्यवाद।
मैं आप सबको चाहती हूँ। Hindi Porn Stories
सबसे पहले अन्तर्वासना Sex Stories सेक्स स्टोरीज साईट का धन्यवाद लोगों के बिस्तर में खेले जाने वाले जायज़ और नाजायज़ संबंधों को हम लोगों के समक्ष जाहिर करने के लिए!
कई लोग सोचते होंगे कि शायद यहाँ पर मनगढ़ंत कहानियाँ होती हैं लेकिन दोस्तो, यह कलयुग है, घोर कलयुग! इन सभी किस्सों में सचाई सौ परसेंट होती है।
अब अंतर्वासना के पाठकों को वंदना की गीली चूत का प्रणाम!
मैं एक तेतीस साल की ज़िन्दगी को जी लेने वाली सोच की मालिक हूँ। मुझे जिंदगी अपने ढंग से मस्ती के साथ जीना अच्छा लगता है। मैं एक पढ़ी-लिखी महिला हूँ, तेतीस साल की
जिंदगी में अब तक मैं बहुत से लौड़े ले चुकी हूँ।
किशोर कमसिन थी जब मैंने अपनी सील तुड़वाई थी और फिर उसके बाद कई लड़के कॉलेज लाइफ तक आये और मेरे साथ मजे करके गए। मैं खुद भी कभी किसी लड़के के साथ सीरियस नहीं रही थी।
अब मैं एक सरकारी स्कूल में कंप्यूटर की वोकेशनल स्कीम के तहत कंप्यूटर लेक्चरर हूँ, वो भी सिर्फ लड़कों के स्कूल में! वैसे तो वहाँ मेरे अपने कुछ ख़ास सहयोगियों के साथ स्कूल से बाहर अवैध संबंध हैं। मैं अपने पति से अलग रहती हूँ, मेरी दो बेटियाँ हैं जो अपने पापा के साथ दादा-दादी के घर में ही रहती हैं। अकेलेपन ने मुझे और गाड़ दिया था, पतिदेव ने मुझे समझाने के बजाये छोड़ ही दिया जिससे मैं और अय्याश होने लगी हूँ। बत्तीस हज़ार मेरी तनख्वाह है, अकेली रहती हूँ, हर सुख-सुविधा घर में मौजूद है। पति के अलग होने के बाद मैं और बिगड़ चुकी हूँ और अपने साथियों को रात-रात भर अपने घर रखती हूँ।
आज मैं आपके सामने अपनी एक सबसे अच्छी चुदाई के बारे लिखने लगी हूँ ज़रा गौर फरमाना!
मुझे गहरे-खुले गले के सूट पहनना पसंद है और वो भी छातियों से कसे हुए, पीठ पर जिप, कमर से कसे, पटियाला सलवार!
जून-जुलाई की बात है, सब जानते हैं पंजाब में कितनी गर्मी पड़ती है इन दिनों! स्कूल बंद थे लेकिन आजकल हमारे महकमे में एजुसेट एजूकेशन ऑनलाइन क्लास लगती है, उसके तहत पांच दिन का सेमीनार लगा। बाकी सारा स्कूल बंद था। साइंस ग्रुप में सिर्फ पांच लड़के हैं। गर्मी बहुत थी पहले ही जालीदार मुलायम सा सूट डाला था बाकी पसीने से मेरा सूट बदन से चिपक जाता!
पांच में से तीन लड़के सिरे के हरामी हैं, उनकी नज़र तो मेरी चूचियों पर टिकी रहती, बस मेरे जिस्म को देख देख अन्दर ही आहें भरते होंगे!
पहला दिन ऐसे निकला, दूसरे दिन मैंने और पतला सूट पहना और खुल कर अपने गले की नुमाईश लगाई। मुझे शुरु से ही इस तरीके से लड़कों को अपना जिस्म दिखाना अच्छा लगता था। इससे मुझे बहुत गर्मी मिलती थी। वो आज मुझे देख देखते ही रह गए। गर्मी की वजह से मैं आज कंप्यूटर लैब में बैठ गई, ए.सी लैब थी। मैंने उनको छुट्टी कर दी और खुद लैब में चली गई। दरवाज़ा थोडा बंद कर मैंने अन्तर्वासना की साईट खोल ली साथ में ही एक और अडल्ट वेबसाइट! वहाँ कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते मेरी चूत गीली हो गई और मम्मे तन गए। देखते और पढ़ते हुए मेरा हाथ मेरी सलवार में घुस गया। मैंने अपना नाड़ा थोड़ा डीला कर लिया और अपनी चूत में उंगली करने लगी। दरवाज़े को कोई कुण्डी नहीं लगाईं थी क्यूंकि स्कूल में सिर्फ मैं ही थी इसलिए कुण्डी नहीं लगाईं थी।
पर्स से सी.डी निकाल कर लगाई और देखने लगी। अब मैं आराम से मेज पर आधी लेट गई और अपना कमीज़ उठाकर मम्मे दबाने लगी। मुझे क्या मालूम था कि मैं तो सिर्फ कंप्यूटर पर मूवी देख रही हूँ, तो कोई और मेरी लाइव मूवी देख रहा है। तभी किसी का हाथ मेरे कंधे पर आन टिका। मैं घबरा गई, मेरा रंग उड़ने लगा।
वो तीनों हरामी लड़के मेरे पीछे खड़े थे।
तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
मैडम! आप इस वक्त यहाँ क्या कर रही हो?
शट- अप एंड गेट लोस्ट फ्रॉम माय लैब!
वो बोले- मैडम, लैब सरकारी है आपकी नहीं! हमें तो कुछ प्रिंट्स निकालने थे। क्या पता था कि कुछ और दिख जाएगा!
उनसे बातें करते हुए अपनी सलवार और कुर्ती वहीं रहने दी। तभी विवेक नाम का लड़का घूम मेरे सामने आया और मेरी जांघों पर हाथ फेरता हुआ बोला- क्या जांघें हैं यार!
उसका स्पर्श पाते ही मैं बहकने लगी, नकली डांट लगाने लगी।
विकास ने अपना हाथ मेरी कुर्ती में डालते हुए मेरे चूचूक मसल दिए और राजेश ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी जिप खोल अन्दर घुसा दिया। उसका लिंग हाथ में पकड़ कर ही मैंने अब बेशर्म होने का फैंसला लिया। एक दम से मेरे में बदलाव देख वो थोड़ा चौंके।
मादरचोद कमीनो, हरामियो! कुण्डी तो लगा लो!
भोंसड़ी वालो! एक जना जाकर स्कूल के मेन-गेट को लॉक करके आओ!
तीनों ने मुझे छोड़ा और मेरे बताये सारे काम करने निकल गए। मैंने अब मूवी की आवाज़ भी तेज़ कर दी और सलवार उतार पास में पड़ी कुर्सी पर फेंक दी, फिर कमीज़ भी उतार कर फेंक दी। पर्स से कोल्ड क्रीम निकाली, उसको चूत पर लगाया और गांड में भी लिपस्टिक लगाई।
जब वो आये, मैं सिर्फ ब्रा-पेंटी में मेज़ पर लेटी थी। तीनों ने मेरे इशारे पर अपनी अपनी पैंट उतार डाली और शर्ट भी। तीनों को उंगली के इशारे से पास बुलाया और ब्रा खोलते हुए बारी-बारी तीनों के कच्छे उतार दिए।
हरामियों के क्या लौड़े थे- सोचा नहीं था कि बारहवीं क्लास के लड़कों के इतने बड़े लौड़े होंगे। एक एक कर तीनों के चूसने लगी। विकास और राजेश के एक साथ मुँह में डलवाए और विवेक मेरी पेंटी उतार मेरी शेव्ड चूत चाटने लगा। उसके चाटने से मेरा दाना और फड़कने लगा, चूचूक तन गए।
राजेश ने झट से मुँह में चूचूक लेकर चूसना शुरु किया। विकास ने भी दूसरा चूचूक मुँह में लेकर काट सा दिया- हरामी! ज़रा प्यार से चूस! बहुत कोमल हैं!
बोला- साली कुतिया कहीं की! मैडम, साली बहन की लौड़ी! रांड कहीं की!
उसने लौड़ा मेरे हलक में उतार दिया, मैं खांसने लगी। बोले- चल कुतिया तेरा चोदन करते हैं!
विवेक ने मेरी गांड पर थप्पड़ जड़ दिए, मेरे बाल नौचकर मेरे हलक में लौड़ा उतार दिया।
पागल हो गए हो कुत्तो!
हाँ!
बुरी तरह से मेरी छाती पर दांतों के निशान गाड़ डाले। विवेक ने मेरी चूत में डाल दिया, राजेश और विकास मेरा मुँह चोदने लगे, साथ में मेरे चूचूक रगड़ने लगे।
अहऽऽ उहऽऽ!
उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत चीर रहा था- ले साली कुतिया! बहुत सुना था तेरे बारे में तेरे मोहल्ले से! वाकई में तू बहुत प्यासी और चुदासी औरत है!
हाँ कमीनो! हूँ मैं रांड! क्या करूँ? मेरे खसम का खड़ा न होवे! हाय और मार बेहन चोद मेरी! विवेक जोर लगा दे सारा!
उसने साथ में अपनी दो ऊँगलियों को मेरी गांड में घुसा दिया और कोल्ड क्रीम लगाते लगाते 4 ऊँगलियों को घुसा दिया।
चूत से निकाल एक पल में गांड में डाल दिया- चीरता हुआ लौड़ा घुसने लगा- मेरी फटने लगी!
उसने वैसे ही उठाया और नीचे कारपेट पर मुझे ले गया। खुद सीधा लेट गया, मैं उसकी तरफ पिछवाड़ा करके उसके लौड़े पर बैठती गई और लौड़ा अन्दर जाता रहा। वो वॉलीबाल की तरह उछल रहा था कि राजेश ने मेरी चूत पर अपने होंठ रख दिए। विकास ने मुँह में डाल रखा था।
हाय कमीनी अब बोल के दिखा- बहुत बकती है साली क्लास में!
सही में मैं कुतिया बन चुकी थी, मैं खांसने लगती तब वो निकालता। लेकिन राजेश के होंठों की मेरी चूत पर हो रही करामात मेरी सारी तकलीफ ख़तम कर देती। विवेक गांड मारता जा रहा था कि राजेश खड़ा हुआ और आगे से आकर विवेक की जांघों पर बैठ गया और अपना आठ इंच का लौड़ा चूत पे रगड़ने लगा।
हाय हाय डाल दे तू भी साले!
उसने अपना मोटा लौड़ा चूत में घुसाना शुरु किया तब विवेक रुक गया। लेकिन जैसे ही उसका पूरा घुस गया, दोनों हवाई जहाज की स्पीड पर मेरी ठुकाई करने लगे। मुँह से सिसकियाँ फ़ूट रही थी- हाय! चोदो मुझे!
विकास ने फिर से मुँह में डाल दिया और हो गया शुरु!
राजेश तेज़ होता गया, विवेक उससे भी ज्यादा तेज़ हो गया तो राजेश रुक गया। विवेक ने राजेश को हटा दिया और एकदम से मुझे पलट कर नीचे किया और तेजी से चोदने लगा।
अह उह करता करता उसने अपना सारा माल मेरी गांड में छोड़ना शुरु किया- सारी खुजली ख़त्म!
अब राजेश सीधा लेट गया और मेरी गांड में डाल दिया, विकास ने राजेश की तरह मेरी चूत में घुसा दिया। विवेक का लौड़ा मेरी गीली गाण्ड से भर कर निकला था दोनों के रस से लथपथ मैंने मुँह में डाल सारा चाट लिया, एक बून्द भी नहीं जाने दी मैंने!
विवेक पास में लेट हाँफने लगा। राजेश ने भी वैसे ही रफ़्तार खींची, विकास को उतार दिया और घोड़ी बना के गांड में डाल फिर चूत में डालते हुए रफ़्तार पकड़ी। विकास ने मुँह में ठूंस दिया। दोनों हाथों से नीचे से भैंस के थनों की तरह लटक रहे कसे हुए मम्मों को पकड़ कर झटके दिए। एक भैंस की तरह मानो मेरा दूध चो रहा हो! ज़बरदस्त तरीके से पकड़ रखे थे उसने और पीछे दन दना दन झटके मारते हुए उसने एक दम से मेरे घुटनों को खिसकाते मुझे कारपेट पर गिरा दिया लेकिन लौड़ा बाहर नहीं आने दिया। मेरे मम्मे कारपेट से रगड़ खाने लगे। थोड़ी चुभन होने लगी। लौड़ा भी कस गया लेकिन वो नहीं रुका।
दोनों एक साथ झड़े। उसने सारा माल मेरी बच्चेदानी के मुँह के पास निकाल दिया। न जाने कितने वक्त के बाद मैंने किसी को बिना कंडोम चूत में छूटने का मौका दिया। एक साथ दोनों का कम जब मिला- मैंने आंखें मूँद ली और उसके साथ चिपक गई! फिर अलग हुए तो उसने मुँह में डाल कर साफ़ करवाया। विकास उठा और मुझे फिर से पटक कर मेरे ऊपर सवार हो गया। सबमें से विकास का लौड़ा सबसे लम्बा मोटा और फाड़ू था। उसने बेहतरीन तरीके से मेरी चूत मारी, झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। इतने में विवेक का फिर खड़ा हो चुका था।
लेकिन विकास क्या चोदू था- उसने मुझे फिर से झाड़ दिया और गांड में डाल दिया और सारा लावा वहीं छोड़ दिया।
विवेक का तन चुका था, राजेश तैयार था।
पूरा दिन स्कूल की लैब में ए.सी के सामने तीनों ने न जाने कितनी बार मुझे रौंदा!
घड़ी देखी तो शाम के साढ़े पांच बज चुके थे और छः बजे चौकीदार स्कूल में आता था। उसको सब मालूम था मेरे बारे में, क्यूंकि एक दो बार मेरे साथी टीचर ने उसके कमरे में मुझे चोदा था। लेकिन वो तीनों नहीं चाहते थे कि चौकीदार उन्हें देखे!
हम निकल रहे थे, मैंने अपनी स्कूटी स्टार्ट की ही थी कि चौकीदार ने उन्हें निकलते देख लिया। मेरी स्कूटी बंद हो गई, सेल्फ ख़राब था। मैंने उसको कहा- स्टार्ट कर दो किक से!
बोला- मैडम मेरे लौड़े को कब मौका दोगी आप? आज फिर से लड़कों से ठुकवा बैठी हो! मैं कौन सा कम हूँ? माना पोस्ट चौकीदार की है लेकिन कौन सा काला कलूटा हूँ? पूरा मजा दूंगा! किक मारते मारते यह सब बोल रहा था। उसने एक दम से अपना लौड़ा निकाला और बोला- देखो इसको! अभी सोया हुआ है फिर भी कितना मोटा है! जब आपका हाथ लगेगा तो दहाड़ेगा यह!
सही में उस जैसा लौड़ा आज तक नहीं देखा था। वो था भी खुद छः फुट तीन इंच लम्बा-चौड़ा मर्द था, सुडौल मजबूत शरीर का मालिक था।
स्कूटी स्टार्ट हुई- मैडम जवाब देती जाओ?
मैंने गौगल्ज़ लगाते हुए कहा- रात ग्यारह बजे मेरे घर आ जाना! इंतज़ार करुँगी!
वो खुश हो गया।
दोस्तो, यह थी अंतर्वासना पर मेरी मन मोहक चुदाई!
रात को घर में क्या-क्या हुआ?
वो लिखूंगी अगले भाग में! Sex Stories
जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरे पति विकास एक एम एन सी में जॉब करते हैं और अक्सर उनके पास हमारे लिए समय नहीं होता है।
हम जमींदारों के खानदान से संबंध रखते हैं और हमारी गांव में काफ़ी जमीन है और हमारा पुश्तैनी मकान भी है।
गांव के लोग विकास को ठाकुर साहब और मुझे ठकुराइन कहते हैं।
लेकिन गांव में कोई रहता नहीं है इसलिए मकान गांव के ही एक लड़के के हवाले रहता है, जिसका नाम राजू है.
वह वहां का केयर टेकर है और वहां की गौशाला में अपना तबेला भी चलाता है।
राजू विकास को भईया और मुझे भौजाई कहता है।
वह एक 28 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है और वो अकेले ही तबेले और हवेली को संभालता है।
एक बार जमीन के सिलसिले में मेरा और मेरे पति का गांव जाना हुआ।
गांव पहुंचकर मैं और मेरे पति उसी पुश्तैनी मकान में रुकने वाले थे।
हमारे आने की खबर पाकर राजू ने पहले ही हवेली की साफ सफाई करवा दी थी और हमारे रुकने की अच्छी व्यवस्था की थी।
खैर आते आते शाम हो गई थी इसलिए रात का खाना पीना करके हम दोनों हवेली में ही सो गए।
राजू हवेली के पीछे बने गौशाला के पास सोता था इसलिए वह भी वहीं सो गया।
कमरे में बहुत गर्मी थी इसलिए मुझे बड़ी मुश्किलों से नींद आई।
अगली सुबह हमें अपने खेतों का मुआयना करने जाना था।
मेरे पति अपनी कुछ जमीन बेचना चाहते थे इसलिए पहले हमारा मुआयना करना जरूरी था।
राजू के साथ हम दोनों खेतों की तरफ गए और जाकर अपनी जमीन का मुआयना किया।
लेखपाल की मौजूदगी में सारी नपाई की गई और फिर खरीददार पार्टी से फोन पर बात हुई, उन्होंने 4 दिन बाद आने की बात कही।
क्योंकि हम गांव एक हफ्ते के लिए आए थे इसलिए हमें कोई दिक्कत नहीं थी।
इसी तरह हमारा दिन निकल गया और फिर रात आई।
क्योंकि हम दोनों ही पूरी हवेली में अकेले थे इसलिए आज मेरा दिल कुछ मस्ती करने का कर रहा था।
मैंने आज अपने पति से कहा- क्यों न आज हम आंगन में सोएं क्योंकि कल रात गर्मी बहुत ज्यादा थी।
मेरे पति ने राजू को आवाज दी।
राजू आया और पूछा- क्या हुआ भैया, आपने मुझे इस वक्त बुलाया?
विकास ने कहा- राजू, आज तुम्हारी भाभी बहुत गर्मी लग रही है, तुम हमारा बिस्तर यहीं जमीन पर लगा दो, कुछ राहत मिलेगी।
राजू ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और कहा- अब भौजाई को गर्मी लग रही है तो गर्मी का इलाज तो करना पड़ेगा ना!
उसने मुझे देखकर मुस्कान दी और फिर आंख मारी।
मैं कुछ न बोली और शर्मा कर नजर नीची कर ली।
राजू हमारे कमरे में गया और फिर हमारे गद्दे निकाल कर आंगन में जमीन पर लगा दिए और हमारा बिस्तर तैयार कर दिया।
उसके बाद राजू चला गया।
मैं विकास के साथ लेटी थी और हम सोने की तैयारी कर रहे थे।
आज मेरा मन सेक्स करने का कर रहा था लेकिन विकास कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे।
इसलिए मैंने उन्हें उत्तेजित करने का फैसला किया।
मैंने अपनी साड़ी उतार दी और पेटिकोट ब्लाउज में आ गई।
फिर मैंने धीरे धीरे विकास के सीने को सहलाना शुरू किया।
विकास मेरे इरादे समझ गए और बोले- डार्लिंग, आज मैं बहुत थका हुआ हूं, प्लीज हम कल करें?
मैं नाराज होकर बोली- आपका रोज का यही हाल है, एक तो घर पर नहीं रहते हो ऊपर से तुम्हारी थकावट! अगर मुझसे प्यार नहीं था तो शादी ही क्यों की?
विकास मेरी बात सुनकर हंस पड़े और कहा- अच्छा बाबा सॉरी, मेरी गलती है कि हम अपनी बीवी को खुश नहीं रख पाते हैं।
यह कहकर उन्होंने मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया ‘उउम्ह उउम्ह्ह’
मैं भी इस काम में उनका बखूबी साथ दे रही थी।
कुछ देर के चुम्बन के सिलसिले के बाद मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए और विकास मेरे स्तनों को चूसने लगे।
मेरे स्तनों को पीने के बाद उन्होनें अपना पजामा उतार दिया और मैंने उनके लिंग को चूसना शुरू कर दिया।
क्योंकि हमारे बीच अक्सर ऐसा होता रहता था इसलिए मेरे लिए उनका लिंग कोई विशेष नहीं था।
कुछ देर तक उसे गीला करने के बाद मैंने अपनी पैंटी उतार दी जिसे मैंने पेटीकोट के नीचे पहना हुआ था।
अब मेरे जिस्म पर पेटीकोट और ब्लाउज थे जिसके हुक खुले हुए थे।
मैं बिस्तर पर लेट गई और विकास ने मेरे पेटिकोट को ऊपर उठा दिया।
मेरी चूत पर थूक लगा कर विकास ने अपना लंड अंदर डाला और उसे आगे पीछे करने लगे।
मेरी आंखे इस अहसास से बंद हो गई और मैं धीरे धीरे आहें भरने लगी- उफ विकास, चोदो मेरी मुनिया को … आह!
इस तरह के अश्लील वाक्य मेरे मुंह से निकलने लगे।
इस दौरान मैं एक बार झड़ गई लेकिन विकास ने ये सब जारी रखा।
काफी देर बाद विकास भी झड़ने की कगार पे आ गए और मेरी चूत में ही झड़ गए।
जब उनका गर्म वीर्य मेरी योनि में भर गया तो मैंने आंख खोली तो छत पर कोई दिखा.
कद काठी से वह राजू लग रहा था।
मैं उसे गौर से देखने का प्रयास करने लगी.
लेकिन हल्की चांदनी की वजह से मुझे उसका चेहरा साफ़ नहीं दिखा लेकिन कद काठी से मैं ये समझ चुकी थी कि वह राजू ही है।
मेरे दिल में शरारत सूझी इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा और पतिदेव को अपने ऊपर लिटा लिया.
उनको भनक भी नहीं लगी कि कोई हमें इस हालत में देख रहा है।
जैसे ही राजू को आभास हुआ कि मैं उसे देख चुकी हूं, वह दबे पांव वहां से निकल गया और अपनी खाट पर लेट गया।
मेरा मन संतुष्ट तो नहीं हुआ था लेकिन मैंने अब विकास को जगाना उचित नहीं समझा और फिर उसी के साथ उसी अवस्था में सो गई।
अगली सुबह हम दोनों मियां बीबी नंगे ही सो रहे थे।
सुबह के 7 बजे थे।
सूरज निकल रहा था और उसकी रोशनी हमारे आंगन में आने लगी थी।
इतने में ही हमारे दरवाजे पर दस्तक हुई तो हमारी आंख खुली।
मैंने झट से अपने कपड़े उठाए और पास बने कमरे में घुस गई।
विकास ने भी अंडरवियर पहनी और जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने राजू खड़ा था।
राजू के हाथ में एक जग था, वह हमारे लिए दूध लाया था।
राजू ने अन्दर झांका तो मैं उसे नहीं दिखी।
कल रात में मेरी ठुकाई देखकर जरूर उसका दिल नहीं भरा था।
राजू दूध देकर चला गया और फिर हम दोनों अपने काम काज में लग गए।
फिर हम दोनों कुछ देर के लिए खेतों की तरफ गए।
वहां विकास के पास उसकी कम्पनी का कॉल आया था कि उसे दिल्ली आना होगा क्योंकि अप्रेजल होने वाला था और उसके प्रमोशन के पूरे आसार थे।
विकास ने मुझे बुझे मन से बताया कि उसे कल दिल्ली के लिए निकलना होगा।
हमारी जमीन की डील दो दिन बाद होने वाली थी इसलिए विकास ने मुझे गांव में ही रुकने को कहा।
मैंने हामी भर दी और घर वापस आ गए।
रात को हम दोनों फिर से आंगन में लेटे।
मुझे पता था कि आज भी राजू हम दोनों को देखेगा.
लेकिन मुझे तो मजा आ रहा था इसलिए मैंने आज रात फिर से पतिदेव को गर्म करने का फैसला किया।
क्योंकि कल उन्हें जाना था इसलिए वे भी आज पूरे दिल से मेरी फुद्दी मारना चाहते थे।
मैंने उनको रोका और कहा- 10 बज जाएं तब करिएगा क्योंकि तब तक गांव के लोग सो जाते हैं।
उनको मेरी बात ठीक लगी और रात 10 बजे के करीब हमारी रतिक्रिया शुरू हुई।
छत पर कुछ आहट सुनाई दी तो मैं समझ गई कि अब राजू छत पर आ गया है।
आज रात मैं राजू को पूरी तरह से अपना बेशर्म रंग दिखाना चाहती थी।
मैंने खुद ही अपने सारे कपड़े उतार दिए और जन्मजात नंगी हो गई।
मेरा गोरा बदन चांदी की तरह चमक रहा था।
मैंने विकास का लंड चूसना शुरू किया।
मैं जोर जोर से विकास का लंड चूस रही थी और मुंह से ‘ऊंह ऊऊउम्म’ की आवाजें निकाल रही थी.
आज मेरी आवाज कुछ तेज थी ताकि ऊपर बैठा राजू भी अच्छे से सुन सके।
लंड चूसने के बाद मैंने विकास को नीचे लिटाया और उसके ऊपर आकर 69 पोजीशन में आ गई।
मैं अच्छे से उनके लंड को चूस रही थी और विकास भी अच्छे से मेरी चूत चाटने में लगे थे।
इसके बाद मैं उनके लंड को पकड़ कर अपनी योनि पर सटाया और एक झटके में वो मेरी चूत में घुस गया।
मेरे मुंह से तेजी से आहें निकल रही थीं और मैं जोर जोर से धक्के लगा रही थी।
इस तरह चोदते हुए 10 मिनट हुए थे और विकास स्खलित होने वाले थे.
इसलिए मैंने उनके लंड को चूत से निकाल दिया और उसे चूसने लगी।
विकास का वीर्य मेरे मुंह में ही छूटा और वे हांफने लगे।
मैंने भी खुद को उनके बगल में लिटा दिया और एक हाथ से उनके लंड को सहलाने लगी।
इस दौरान मैंन्र चोर नज़रों से छत पर बैठे राजू को देखा।
वह चारदीवारी की आड़ में छुपा हमारी रतिक्रीड़ा देख रहा था।
फिर जब विकास का लंड तैयार हुआ तो हमने फिर से चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दिया।
पूरी रात हमने 3 बार चुदाई की और सुबह 3 बजे तक हमारी मस्ती चली।
इसके बाद हम दोनों सो गए।
अगले दिन सुबह हम दोनों उठे और मैंने उनके लिए नाश्ता बनाया।
नाश्ता कर के विकास जाने की तैयारी करने लगे।
राजू उनके साथ उन्हें स्टेशन पर छोड़ने जाने वाला था।
उन दोनों को विदा कर के मैं लेट गई और मेरी आंख लग गई।
उठी तो अब तक सुबह के 11 बजे थे।
राजू विकास को छोड़कर वापस लौट आया था और गौशाला के पास बैठा था।
मुझे शरारत सूझी।
मैं राजू को छेड़ना चाहती थी इसलिए मैंने एक प्लान बनाया।
मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार दिया और सिर्फ पेटिकोट से अपना वक्ष स्थल ढक लिया जैसे अक्सर गांव की महिलाएं नहाते वक्त कर लेती हैं। मेरी आधी नंगी चूचियां और आधी नंगी जांघें प्रदर्शित हो रही थी.
मैं अपनी इस हरकत से मन ही मन बहुत उत्तेजित हो रही थी.
मैं वैसे ही राजू के पास पहुंची तो वह मुझे देखकर हैरान रह गया।
मेरा चांदी सा जिस्म उसके सामने था और मेरे पेटीकोट से मेरी वक्षरेखा झलक रही थी।
राजू ने मुझे देखा तो ऊपर से नीचे तक निहारता रहा।
फिर कामुक अंदाज़ में बोला- क्या भौजी, आज खेतों में जाकर नहाने का इरादा है क्या? कहो तो ट्यूबवेल चला दें?
मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और कहा- अरे नहीं रे … खेतों में नहीं यहीं घर पर नहाऊंगी.
जब मैं नहाने बैठी तो देखा कि साबुन खत्म हो गया है.
“तुम मेरे लिए नहाने वाला साबुन ला दो।” यह कहकर मैंने राजू के हाथ में 100 का नोट रखा।
राजू ने मुस्कुरा कर कहा- वैसे आप जैसी गोरी गोरी भौजाई को साबुन में मजा नहीं आयेगा, आप कहो तो गाय का कच्चा दूध भिजवा दूं, उसी में नहा लीजिए, आप का गोरा बदन और निखर जाएगा।
मैंने कुछ नहीं कहा और हंसकर राजू की बात को टाल दिया।
बात उस समय की है जब मैंने एक Indian Sex Stories फ़ाईव स्टार होटल में नई नई नौकरी शुरू की थी। उस समय मै बाईस वर्ष का एक सुन्दर नौजवान था। होटल मेनेजमेन्ट करते समय मैं जिम जाता था उसके फ़लस्वरूप मेरा शरीर बेलेन्स और सुन्दर हो गया था। मेरी लम्बाई भी लगभग छ: फ़ुट और मेरा चेहरा-मोहरा बहुत ही आकर्षक था, कपड़े भी मुझे पर बहुत फ़बते थे।
मुझे लगता था कि मेरे साथ की लड़कियाँ भी मुझ पर मरती थी। मेरे साथी मुझे फ़िल्मो में कोशिश करने को कहते थे, शायद मैं उन सब बातों को मजाक समझता था।
मैं इस फ़ाईव स्टार होटल में फ़्रण्ट-ऑफ़िस में काम करता था और अधिकतर मुझे काऊन्टर पर अतिथि का स्वागत करना होता था, उन्हें उनके कमरे तक पहुंचाने का काम भी करना होता था।
मेरी यह आप बीती एक होलीवुड की अभिनेत्री के बारे में है। वो एक छब्बीस वर्ष की बेहद सुन्दर युवती थी। उसके लिये होटल में सबसे महंगा स्वीट बुक किया हुआ था।
यूं तो यहाँ कई भारतीय अभिनेत्रियां भी आई थी, पर उनमें वो बात नहीं थी, शायद कैमरे के सामने और मेकअप में ही वो सुन्दर लगती थी। उसमें सेक्स अपील जबरदस्त थी। उसका फ़िगर तराशा हुआ और ऐसा प्रतीत होता था कि भगवान ने उसे बनाने में बहुत समय लगाया होगा। उसका चेहरा, उसके होंठ, उसकी मुस्कान, उसकी आकर्षक आंखे हर बात में लाजवाब थी वो।
मै उसका असली नाम नहीं लेकर उसे लीज़ा कहूंगा। उसे यहाँ आये हुए दो दिन हो गये थे। जब वो शूटिन्ग से फ़्री होती थी तो मुझसे अवश्य ही बात करती थी। वो मेरा मन मोह लेती थी। पर वी आई पी गेस्ट होने के कारण मुझे ही नहीं सभी को उसकी हर एक बात का ध्यान रखना होता था, यहाँ तक कि उसके इशारों तक को समझना होता था।
आज वो लन्च के बाद फ़्री थी। उसने मेरे बॉस से कुछ बात की और मुझे शहर में घूमने के लिये साथ ले गई। वह एक बहुत ही सरल और मधुर स्वभाव की लड़की लगी। मुझसे बात करने में उसकी दिलचस्पी साफ़ झलकती थी, या वो थी ही इतनी सहज कि बात करने में अपनापन लगता था। मुझसे मेरे बारे में उसने सब कुछ पूछ लिया।
उसे यह पता चल गया था कि मैं एक साधारण परिवार से हूँ। शायद उसने मेरी इस बात का पूरा फ़ायदा उठाया या कहिये कि हर वक्त वो मुझे कुछ ना कुछ बख्शीश के रूप में देती थी, हर बात में वो मुझे बहुत रुपया देने लगी थी। कोल्ड ड्रिन्क हो या बोटिन्ग करना हो, जहा सौ रुपये लगते, वहाँ वो एक हजार का नोट दे देती थी, और बाकी का बचा हुआ पैसा वापिस भी नहीं लेती थी। शाम तक यूं ही मेरे पास लगभग पांच हजार रुपये जमा हो चुके थे।
मैं खुशी से फूला नहीं समा रहा था कि आज मेरे भाग्य से मैं दुनिया की सबसे सुन्दर हिरोईन के साथ था और पैसा भी बहुत मिल गया था।
शाम को वो मेरे बॉस से स्वीकृति ले कर मुझे अपने स्वीट में ले गई। वहाँ उसने मेरे साथ कुछ वाईन और स्नेक्स लिये, फिर वो स्विमिंग सूट पहन कर आ गई। स्विमिंग सूट क्या था एक बिलकुल छोटी सी ब्रा और एक ना के बराबर अडरवीयर जिसमें बस उसकी चूत छिपी थी। उसके तराशे हुए चूतड़ की दरार में एक डोरी सी थी जो दरार में ही कहीं खो गई थी। शायद ऐसा पहनना उसके लिये नई बात नहीं थी, क्योंकि वो इसमें भी बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रही थी।
(उससे बातचीत के अंश मैं कोशिश करके हिन्दी में रूपान्तर करके लिख रहा हूँ)
“आप मेरे साथ पूल में नहाना पसन्द करेंगे?” उसने मुस्कान भरी आवाज में प्रार्थना की।
सीधी सी बात थी उसने मुझे आज्ञा दी थी, यह मैं समझता था।
“जी पर मेरे पास नहाने के कपड़े नहीं हैं !” मैंने अपनी मजबूरी दर्शाई।
“आपने अन्दर अन्डरवीयर पहना है, यह काफ़ी है ! मेरे दोस्त तो नंगे ही मेरे साथ नहाते हैं !” उसने हंसते हुये कहा।
मैं शरमा गया। अन्डरवीयर भी पुरानी सी पहना हुआ था। मुझे झिझक आने लगी। पर मैंने कपड़े उतार दिये और मात्र अन्डरवीयर में खड़ा हो गया। उसने मेरे नंगे बदन को एक गहरी नजर से देखा और शायद अपने जहन में उतार लिया।
“थेंक्स मेरे प्यारे दोस्त !!! बहुत सुन्दर …. आओ चलें !” उसने मुझे गाल पर हल्का सा किस किया और वो मेरे आगे आगे चल पड़ी। उसकी चाल बला की मनमोहक थी। उसके दोनों चूतड़ो की गोलाईयाँ चलते समय ऊपर नीचे होती हुई गजब ढा रही थी। उसका कमाल का फ़िगर देख कर मेरा लण्ड जोर मारने लगा था, पर डर अधिक लग रहा था कि कहीं लण्ड का उभार उसे नजर ना आ जाये।
पर मैं गलत था, उसे सब पता था। पूल पर आ कर उसने मुझे पानी में खड़ा कर दिया और स्वयं सामने खड़ी हो गई।
“मुझे गोद में ले लो और मुझे धीरे धीरे पानी में गीला करना, ठीक है?” उसने मुझे समझाया।
मैंने उसे एक बच्चे की तरह बाहों में ले लिया। मुझे वो बिलकुल फ़ूल जैसी हल्की लगी। उसका जिस्म मेरी बाहों में आ गया। इतना कोमल और नरम बदन का स्पर्श पा कर मैं सिहर उठा। मेरी सिरहन तक उसे पता चल गई।
“तुम्हारा जिस्म बहुत अच्छा है, मुझे इससे प्यार है।”
मेरे बदन में चींटिया सी रेंगने लगी। उसने मेरे जिस्म की तारीफ़ की, मुझे पहली बार लगा कि जिम जाने से मेरा शरीर सुन्दर दिखता है। मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो गया था। यह उसे भी पता था, वो अपना एक हाथ नीचे लटका कर मेरे लण्ड को भी छू लेती थी।
“क्या मैं तुम्हें चूम सकती हूँ….?” उसने बड़ी सहजता से पूछा और अपने होंठ मेरी तरफ़ बढा दिये। मै कुछ कहता उसके पहले उसके होंठ मेरे होंठो से मिल चुके थे। उसके चूमने का अन्दाज बेहद रोमांचित करने वाला था। मैंने भी जाने कब उसे चूमना और चूसना शुरू कर दिया।
उसने अपनी अधखुली आंखो से मुझे देखते हुए कहा,”तुम्हारा भारतीय स्टाईल बहुत अच्छा है, मुझे नीचे पानी में उतार दो !”
“जी ….जी…. थैंक्स मैम !”
“मुझे लीज़ा कहो, मैम नहीं ! तुम बहुत उत्तेजित हो रहे हो, क्या तुम मेरे साथ सेक्स करोगे?”
“लीज़ा, मुझे माफ़ करना, ये तो अपने आप ही ऐसा हो गया !” मेरा खड़ा लण्ड को मैंने नीचे दबाते हुए कहा।
“ये तो प्राकृतिक है, इसमें शरमाना कैसा …. और मुझे देख कर ये खड़ा नहीं हो, ये तो मेरे लिये अच्छी खबर नहीं है। मुझे अच्छा लगेगा अगर तुम मेरे साथ सेक्स करोगे तो…. मुझे भी इसे देख कर चुदाने की इच्छा होने लगी है !”
उसने पानी के अन्दर ही मेरा लण्ड सहलाया और उसे पकड़ कर सहलाने लगी। उसके लण्ड को सहलाने का अन्दाज, बस पानी निकालने देने वाला था। उसने मेरी अन्डरवीयर नीचे खींच दी।
“बहुत अच्छा है और सुन्दर है तुम्हारा लण्ड, तुम भी ! मेरे जिस्म को मसाज करो !”
वो भी हीट में आने लगी थी। मुझे चुदाई का कोई अनुभव नहीं था, पर फ़िलहाल इसमें बहुत मजा आ रहा था। उसने मेरी अंडरवीयर पूरी उतार दी और डोरे जैसी स्वयं की अंडरवीयर भी उतार दी। पानी में कुछ साफ़ दिखाई नहीं दिया।
उसने मुझे चूत देखते हुए देख लिया और हंसी। वो उछल कर पूल की दीवार पर बैठ गई और अपनी दोनों टांगे खोल दी- मेरी चूत देखना चाहते हो ना ? देखो ! और पास आकर इसे प्यार करो !”
मेरे बदन में एक सनसनी दौड़ गई। उसकी गुलाबी चिकनी चूत, शेव की हुई थी, पानी से गीली थी, दोनों उभरी हुई पंखुड़ियों के बीच एक दरार और उसमें से झांकता हुआ गुलाबी सा एक छेद।
“लीज़ा, इतनी सुन्दर और मोहक है, सच में चूम लूं क्या?”
“येस माई डार्लिंग, कम एण्ड सक इट !” उसने मेरे बाल पकड़ पर अपनी चूत से मेरा मुंह चिपका लिया। सुगंधित, रसीली, चिकनी लसलसी, उभरा हुआ गुलाबी दाना मेरे होंठो से टकरा गये। एक ही सांस में उसका सारा पानी जीभ से मैंने चाट लिया, उसकी चूत की गुहा में मैंने अपनी जीभ घुसा दी। मेरी नाक की नोक उसके दाने पर से रगड़ खा गई।
“ओह गॉड, सो स्वीट, आहऽऽऽ, यू आर टू गुड, ओह्ह सक माइ पूसी हार्ड !” वो सिसक उठी।
मेरे हाथ उसके सुडौल उरोजों पर आ गये। जैसे ही मैंने उसे दबाया तो कह उठी,”नाईस, ओह्ह्ह, स्लो डियर, दिस इस माइ फ़िगर बॉय, नाउ लीव इट !”
उसे मजा तो बहुत आ रहा था पर शायद चूंची दबाने से उसके उरोज ढीले ना पड़ जाये, उसने मेरा हाथ हटा दिया। अब वह पानी में कूद पड़ी, और मेरे से लिपट गई।
“अब तुम इस दीवार पर बैठ जाओ” मै उछल कर दीवार पर बैठ गया।
“प्लीज डोन्ट माइन्ड, यूअर कोक इस सो नाईस, मे आई लव इट?”
मुझे बहुत देर तक जगह जगह चूमती रही फिर मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
“बहुत अच्छा है तुम्हारा लण्ड !” उसने मुझे जताया कि उसे भी थोड़ी बहुत हिन्दी आती है।
“ऐसा नहीं कहते लीज़ा, आप बहुत अच्छी है” काफ़ी देर तक वो लण्ड का मजा लेती रही, मेरी हालत झड़ने जैसी होने लगी।
“बस लीज़ा, अब नहीं !” उसने अपनी नशीली आंखे ऊपर उठाई, उसकी वासना का आलम चरम सीमा पर था। उसकी आँखे गुलाबी हो उठी थी। उसने मुझे प्यार से पानी में उतार लिया फिर मेरी ओर पीठ करके और चूतड़ उभार कर घोड़ी बन कर खड़ी हो गई। बेहद कशिश भरी आवाज में वो बोली,”फ़क माइ पूसी, माइ बॉय। डू इट नाउ, कम ऑन, लेट्स एन्जोय नाउ !”
मैंने अपने आपको रोक नहीं सका और अपना लण्ड पानी के अन्दर ही उसकी चूत से चिपका दिया। मै अब उसकी पीठ से चिपक गया और लण्ड का जोर लगाने लगा। लीज़ा ने हाथ का सहारे से लण्ड को अपनी चूत में डाल दिया और अपने चूतड़ मेरे लण्ड पर दबा दिया। मैंने भी जोश में जोर लगाया। लण्ड मक्खन की तरह उसकी चूत में पानी के भीतर ही घुस पड़ा।
“ओह्ह डार्लिन्ग, फ़क मी, इट इस टू गूऽड”
मेरे लण्ड में हल्की सी जलन हुई, मुझे चोट सी लगी, पर मैं उसे नाराज करने की स्थिति में नहीं था। फिर मेरी हालत भी ऐसी नहीं थी कि मैं उसे नहीं चोदता, वासना की तेजी मुझ पर भी थी। मैंने जलन सहते हुये लण्ड पूरा घुसा दिया। लीज़ा झूम उठी और मस्ती में कमर जल्दी जल्दी हिलाने लगी। उसकी चूत में लण्ड आराम से अन्दर बाहर आ जा रहा था, टाईट या कसी हुई चूत नहीं थी। इसलिये अब जलन भी कम होती जा रही थी।
मुझे भी उस रस भरी चूत का आनन्द आने लगा था। उसकी कोमल काया, मखमली बदन, फिर गोरी चमड़ी, गोरी चूत, गोरी गाण्ड। उसके सारे शरीर को सहलाते हुये धक्के मारने में असीम आनन्द आ रहा था। पानी में लहरे चलने लगी और छप छप की आवाज अने लगी। जोश में मैंने उसकी चूंचियाँ मसल ही दी और उसे दबा कर जोर से चोदने लगा।
“माई गॉड, फ़क मी हार्ड, माई बॉय, ऊऊईईईई, ओह्ह्ह, व्हॉट ए कॉक्….”
“हाय मैम, फ़ीलिंग नाईस, ओह्ह, तेरी तो…. साली मक्खन मलाई है !” मुझे भी आनन्द मारे मस्ती आ रही थी।
“यू मीन बटर…. आह लण्ड अच्छा है, फ़क मी !” उसके बोलते ही मुझे मालूम हो गया कि उसे मजा आ रहा है। उसने अपनी टांगे पानी में और फ़ैला ली और थोड़ा और झुक कर मेरे लण्ड को धक्का मारने लगी। फिर उसने अपना पोज बदल लिया। और सामने आकर मेरे से जोर से लिपट गई। लण्ड एक बार फिर अपने निशाने पर घुसता चला गया।
उसकी सिसकारियाँ बढ़ गई थी। उसकी चूत और मेरा लण्ड फिर से तेजी में आ गये। पर वो सामने से अच्छे झटके दे रही थी। दोनों सामने से एक दूसरे को धक्के मार मार कर चोद रहे थे। पानी में भी उबाल आ चुका था। लहरें चुदाई के कारण उछल उछल कर हमें भिगा भी रही थी। चूंकि मेरी यह पहली चुदाई थी सो मेरा शरीर जवाब देने लग गया था, मेरे लण्ड में गहरी मिठास भरने लगी थी। उधर लीज़ा का भी यही हाल था। उसकी तेजी बता रही थी कि अब जवानी का रस बाहर आने को बेताब है।
“माइ लव, आह्ह्ह, माई पूसी हेज गोन नाउ ऊईईई !”
“मैम, मेरा तो हाय, निकलने वाला है !” मै इंगलिश भूल गया और हिन्दी बोलने लगा।
“ओह्ह्ह कमिन्ग, ऊईईई…. फ़क मी हार्ड्…. कमिन्ग बॉय….” और उसने शायद पानी छोड़ दिया। मुझे उसने पीछे धक्का दे दिया और लण्ड निकाल दिया। मेरा लण्ड भींच कर पकड़ लिया और मुठ मारने लगी। कुछ ही क्षणो में मेरा वीर्य पानी में लहरा कर निकल पड़ा। मेरा वीर्य निकलते हुए वो देखती रही।
“ओह्…. सो नाईस, व्हॉट ए कलर, यूअर कम इस सो ब्यूटीफ़ुल, यु इण्डियन आर वेरी नाइस इन फ़किन्ग !” और स्वयं पानी के अन्दर डुबकी लगा गई। मैं भी उसके पीछे गोता मार कर तैरने लगा। कुछ ही देर में हम पानी से बाहर आ गये। दोनों नंगे ही कमरे के अन्दर भाग कर चले गये।
कुछ देर पश्चात मैं फिर से अपनी ड्रेस में था। शाम गहरी हो चुकी थी। उसके डिनर का समय हो गया था। मैंने लीज़ा से जाने की इज़ाज़त मांगी।
“ठहरो, मेरी तरफ़ से ये गिफ़्ट !”
उसने एक लिफ़ाफ़ा मुझे दिया। मैंने सर झुका कर उसका अभिवादन किया और लिफ़ाफ़ा ले कर बाहर आ गया। घर आ कर मैंने लिफ़ाफ़ा खोला तो उसमें एक हज़ार के पचास नोट थे। और एक इन्विटेशन कार्ड था, उसका पता लिखा हुआ था। उसमें एक सन्देश था,“आई लव यू ! जब भी जी चाहे मुझे फोन कर देना, और तुम यू.एस.ए. में होगे…….. लीज़ा”
मुझे एक बार सारी घटना फिर से आंखो के सामने घूम गई। एक प्यारी सी, गुड़िया सी, भली सी लगने वाली सुन्दरता की मूर्ति, मुझे जैसे कुछ यकीन ही नहीं हो रहा था……..मानो एक सपना देखा हो…. Indian Sex Stories
मेरा नाम निखिल है दोस्तो.
मैं 28 साल का एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ।
मेरा चेहरा मेरा गोल है, बाल घुंघराले हैं और माथा चौड़ा है।
मैं हंसमुख स्वभाव का हूँ, बिंदास हूँ और बोल्ड हूँ।
कसरत करना और अपनी बॉडी बनाना मेरा शौक है इसलिए मैं हर रोज़ जिम जाता हूँ।
मेरी शादी अभी दो साल पहले एक नेहा नाम की लड़की से हो गयी है।
नेहा भी बहुत खूबसूरत, सेक्सी और बोल्ड है, गोरी है, छरहरे बदन की है और 5′ 4″ कद वाली है।
उसके मम्मे बड़े बड़े भी हैं और सुडौल भी।
बातें करने में वह बड़ी स्मार्ट है, खुल कर बोलती है और हँसी मजाक करने में भी बड़ी तेज है।
हाज़िर जवाबी उसका बहुत बड़ा गुण है।
अच्छी बात यह है कि हम दोनों को सेक्स बहुत ज्यादा ही पसंद है।
उसे चुदाने का बड़ा शौक है तो मुझे चोदने का! उसे लण्ड पकड़ने का बड़ा शौक है तो मुझे लण्ड पकड़ाने का।
मुझे चूचियाँ मसलने का बड़ा शौक है तो उसे चूचियाँ मसलवाने का!
कुल मिलाकर हम दोनों की सेक्स लाइफ बहुत अच्छी चल रही है।
दिन भर मैं ऑफिस में काम करता हूँ और मेरी बीवी घर में काम करती है.
लेकिन रात में हम दोनों नंगे नंगे सेक्स का खूब मज़ा लेते हैं।
मैं उसके नंगे बदन का मज़ा लेता हूँ और वह मेरे नंगे बदन का मज़ा लेती है।
इस तरह हम दोनों की लाइफ मस्त से गुज़र रही है।
एक दिन रात में वह बड़ी मस्ती से मेरे लण्ड से खेल रही थी; लण्ड पर बार बार बड़े प्यार से थप्पड़ मार रही थी; थप्पड़ मार मार कर लण्ड को चूम रही थी, उसे पुचकार रही थी।
मैंने पूछा- यह क्या कर रही हो मेरे लण्ड के साथ?
उसने एक थप्पड़ और जड़ दिया मेरे लण्ड पर फिर बोली- ये तेरा लण्ड नहीं है। ये तेरे दोस्त का लण्ड है यार … मुझे तेरे दोस्त के लण्ड से प्यार हो गया है। मैं तेरे दोस्त के लण्ड को चाहने लगी हूँ।
मैंने पूछा- यह मेरे कौन से दोस्त का लण्ड है?
वह तपाक से बोली- ये तेरे दोस्त आशीष का लण्ड है, रोहन का लण्ड है, प्रकाश का लण्ड है।
यहीं से वाइफ चेंज Xxx कहानी की शुरुआत हो गयी.
मैंने कहा- तेरे हाथ में सिर्फ मेरा लण्ड है। पागल हो गई हो क्या तुम? ये सब मेरे अच्छे दोस्त हैं।
वह बोली- हां मैं पागल हो गई हूँ. मैं तेरे दोस्तों के लण्ड पाकर ख़ुशी से पागल हो गई हूँ।
यह सब सुनकर मेरे भी लण्ड में जबरदस्त तनाव आ गया।
वह और ज्यादा तन कर झूमने लगा।
नेहा मेरे लण्ड पर थूक थूक कर चाटने लगी।
कोई औरत लण्ड की इतनी दीवानी हो सकती है, यह मुझे उस दिन साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था।
लेकिन एक बात है उसका मेरे दोस्तों का नाम लेने से मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था.
तो मैंने फिर लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और बड़ी मस्ती से चोदने लगा।
वह बोली- हाय मेरे राजा, आज तो मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा है। आज तुम्हारे लण्ड में बड़ी ताकत आ गईं है. आज तुम्हारा लण्ड बड़ा खूंखार हो गया है. लगता है आज मेरी चूत फट जाएगी। आज मुझे खूब जम कर चोदो।
फिर उसके मुंह से निकला- हाय दईया, तुम क्या बोल रहे हो यार निखिल? किसकी बीवी चोद रहे हो तुम?
मैंने कहा- मैं आशीष की बीवी चोद रहा हूँ।
मैंने फिर 4 / 6 धक्के मारे और कहा- अब मैं रोहन की बीवी चोद रहा हूँ।
फिर उसी स्पीड में 4 / 5 और धक्के मारे, फिर कहा- अब तो यह लण्ड प्रकाश की बीवी की बुर में पेल दिया है मैंने! मुझे प्रकाश की बीवी चोदने में ज्यादा मज़ा आ रहा है।
वह बोली- तुम अपने मन से अपने दोस्तों की बीवियां चोदते जाओ लेकिन मज़ा तो मेरी ही बुर को मिल रहा है। एन्जॉय तो मैं ही कर रही हूँ।
यह सच है कि अगर मन में पराई बीवियों का नाम लो तो अपनी बीवी चोदने में ज्यादा मज़ा आता है।
इसी तरह बीवी अगर सोचे कि वह किसी पराये मरद से चुदवा रही है तो उसे भी अपने पति से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
हम दोनों की चुदाई में रूचि दिन पर दिन बढ़ने लगी।
ऐसा करते करते दिसंबर का महीना आ गया।
25 दिसंबर की रात को जब वह मेरा लण्ड बड़े प्यार से चूम चाट रही थी तो मैंने पूछा- नेहा इस बार नया साल किस तरह मनाओगी?
वह बोली- जैसे पिछली बार मनाया था, वैसे ही मना लेंगे।
मैंने कहा- नहीं यार इस बार कुछ नया होना चाहिए. कुछ नया सोचो न प्लीज?
वह बोली- जो तुम चाहो कर लो, मैं तो तुम्हारे साथ हूँ।
मैंने कहा- वो तो ठीक है … पर बताओ न कुछ नायाब आईडिया?
वह बोली- तो फिर तुम लोग एक दूसरे की बीवी चोद कर मनाओ नया साल। एक ही कमरे में एक दूसरे के सामने एक दूसरे की बीवी चोदो। लण्ड दूसरे की बीवी की चूत में 2021 में पेलो और 2022 में निकालो। फिर किसी और की बीवी की बुर में पेल दो। इस तरह एक दूसरे की बीवियां लण्ड पेल पेल कर रात भर चोदो। मैं तो तुम्हारे दोस्तों से चुदवाने के लिए तैयार हूँ।
मैंने कहा- मैं भी अपने दोस्तों की बीवियां चोदने के लिए तैयार हूँ।
वह बोली- फिर देर किस बात की … कल से काम पर जुट जाओ। अपने दोस्तों से बात करो, उन्हें राज़ी करो।
आशीष, रोहन, प्रकाश तीनों मेरे दोस्त हैं।
हमारा फैमिली सहित तीनोंके घर में आना जाना है।
तीनों फैमिली एक दूसरे को अच्छी तरह जानतीं हैं; कोई अपरिचित नहीं हैं और तीनों से खुल कर बात करने में भी कोई संकोच नहीं है।
इसलिए शाम को मैं और आशीष एक होटल में ड्रिंक्स पर बैठ गए और खुल कर बात करने लगे।
बातों का सिलसिला नया साल मनाने पर टिक गया।
थोड़ा इधर उधर की बातें की, बाद में मैंने उसके सामने अपना नये साल के मौके पर बीवियों की अदला बदली का सुझाव रखा.
तो वह उछल पड़ा।
वह बोला- यार, यही तो मैं भी कहने वाला था। मेरी बीवी रोज़ मुझसे पूछती है कि आज तुमने निखिल से बात की या नहीं? वह तो वाइफ स्वैपिंग में मुझसे ज्यादा इंटरेस्टेड है। उसी ने मुझसे कहा था कि तुम निखिल से बात करो वह मुझे पसंद है, मान जाएगा। ये तो बहुत बढ़िया रहेगा मैं भी तैयार हूँ और मेरी बीवी भी तैयार है।
मैं ख़ुशी ख़ुशी घर लौट आया।
घर में आकर मैंने अपनी बीवी नेहा को पूरी बात बताई तो खुश हो गई।
उसने कहा- अब मैं तुमको बता रही हूँ कि मैंने क्या किया.
जब तुम ऑफिस में थे तो मैं पहले आशीष के घर गई और उसकी बीवी आरती से मिली।
औरतें आपस में खुल कर खूब गन्दी गन्दी बातें कर लेतीं हैं; मरद उतना नहीं कर पाते।
मैंने तो कह दिया- यार आरती, मैं तेरे पति से चुदवाना चाहती हूँ. बदले में तुम मेरे पति से चुदवा लो।
वह बोली- अच्छा तो तुम हसबैंड स्वैपिंग करवाना चाहती हो।
मैंने कहा- हां, नया साल हसबैंड / वाइफ स्वैपिंग के साथ मनाना चाहती हूँ।
वह बोली- हां ठीक है, मैं तैयार हूँ।
मैंने पूछ लिया- तेरा पति मान जाएगा?
वह बोली- क्यों नहीं मानेगा भोसड़ी वाला? मैं बोलूंगी तो उसे मानना ही पड़ेगा।
फिर मैं रोहन की बीवी के घर चली गई, उससे भी खुल कर बात हुई।
वह तो साफ़ साफ बोली- एक बात बताऊँ नेहा? किस भोसड़ी वाली को पराये मरद का लण्ड अच्छा नहीं लगता? सबकी सब बीवियां पराये मरद के लण्ड के लिए उतावली रहतीं हैं. और मैं भी! एक सच्चाई और सुन ले नेहा, कोई माने चाहे न माने … पर यह सच है कि बीवियां बुरचोदी सब अंदर से रंडियां होतीं हैं। कई मर्दों से चुदवाने की चाहत सबमें होती है, मुझे में भी है।
उसकी बातें सुनकर मैं तो ख़ुशी से पागल हो गया।
मैंने मन में कहा कि अभी तक मैंने वाइफ स्वैपिंग के बारे में पढ़ा और सुना बहुत है पर अब तो हम सब वही करने जा रहे हैं। कितना मज़ा आएगा!
अगले दिन यानि शनिवार को मैंने दोनों कपल आकाश आरती और रोहन रूचि को ड्रिंक्स एंड डिनर पर आमंत्रित कर लिया।
अगली शाम को सही टाइम पर सब लोग आ गए।
हमने उनका स्वागत किया और बड़े आदर सत्कार से बैठाया।
आकाश की बीवी आरती साड़ी और ब्रा में थी।
ब्रा उसकी इतनी तंग थी कि उसके अंदर से उसके बड़े बड़े मम्मे बाहर निकलने के लिए बेताब हो रहे थे।
मेरी नज़र बस वहीं टिक गयी।
उधर रोहन की बीवी रूचि लो वेस्ट जींस और डीप नेक का स्लीवलेस टॉप पहन कर आयी थी।
टॉप तो बहनचोद एक छोटी सी ब्रा जैसी ही थी।
उसकी भी बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियाँ मुझे विचलित कर रहीं थीं।
इधर मेरी बीवी नेहा ने एक घाघरा पहना था और ऊपर वह बिल्कुल नंगी थी।
वह अपने लम्बे लम्बे बालों को आगे करके अपने मम्मे छिपाये हुए थी.
लेकिन इधर उधर घूमने फिरने में उसके बड़े बड़े मम्मे सबको दिख जाते थे; निप्पल भी दिख जाते थे।
आकाश और रोहन दोनों मेरी बीवी की चूचियाँ देखने के लिए आँखें गड़ाए हुए बैठे थे।
इतने में मेरी बीवी ने सबको ड्रिंक्स का गिलास पकड़ा दिया।
सबने एक स्वर में चियर्स कहा और दारू पीने लगे।
सबको दूसरे की बीवियों के साथ दारू पीना बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं सोचने लगा कि जब ये दोनों मेरा लण्ड अपने होंठों से लगायेंगी तो मुझे कितना मज़ा आएगा?
रूचि ने पूछा- बीवियों की अदला बदली करके नया साल मनाने का आईडिया कहा से आया निखिल?
मैंने कहा- यह आईडिया मेरा नहीं, मेरी बीवी नेहा का है।
आरती बोली- बड़ी रोमांटक है तेरी बीवी बहनचोद … क्या मस्त आईडिया है. मैंने कई बार अपने पति से कहा कि तुम निखिल से इस विषय पर बात करो। पर चलो आज मेरे मन का होने जा रहा है।
रूचि ने कहा- अब दुनिया बदल चुकी है। अब तो लोग अपनी सुहागरात भी बीवियां अदल बदल कर मनाते हैं। मेरी एक पक्की सहेली है नीरजा। वह सुहागरात मनाने गोवा गयी थी. वहां से अपने पति के अलावा तो और मर्दों से चुद कर आई थी.
मेरी बीवी ने कहा- दूसरे का पति सबको अच्छा लगता है और दूसरे की बीवी सबको अच्छी लगती है। तभी तो मेरे मन में आईडिया आया।
इन बातों से माहौल गर्म और रोमांटिक हो गया।
मैंने आरती भाभी की पीठ पर हाथ रख दिया तो उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया।
उसे मैंने अपनी तरफ खींचा तो उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं, मेरी चुम्मी ले ली।
मैंने भी उसके होंठ चूमे।
तब मैंने देखा कि आकाश रोहन की बीवी रूचि को अपनी तरफ खींच कर उससे प्यार करने लगा है।
रोहन ने मेरी बीवी नेहा को अपनी बाहों में भर लिया और उसने गाल चूमने लगा, उसकी चूचियाँ दबाने लगा.
उसके मम्मे तो एकदम खुले हुए थे।
इस तरह हम तीनों ने अपने अपने पार्टनर चुन लिया।
इतने में मेरी बीवी बोली- यार रूचि और आरती, तुम चाहो तो अलग अलग कमरे में अपने अपने पार्टनर के साथ चली जाओ।
रूचि ने कहा- क्यों चली जाऊं? मैं देखूंगी कि तू मेरे पति का लण्ड कैसे चूसती है.
आरती बोली- मैं भी देखूंगी कि रूचि मेरे पति का लण्ड कैसे चूसती है. इसलिए कोई यहाँ से कहीं नहीं जाएगी। यहीं आमने सामने ही होगी पतियों की अदला बदली और बीवियों की अदला बदली। हम सब एक दूसरे चुदाई देख देख कर मज़ा लेंगी। जब हमें कोई शर्म नहीं, कोई झिझक नहीं, तो फिर अलग अलग क्यों? एक साथ क्यों नहीं? हम कोई 20 / 21 के साल कपल नहीं है। मेच्योर कपल हैं. अब हमें शर्माना नहीं आता.
इस तरह की गरमागरम बातें भी हो रहीं थीं और साथ ही साथ सबके कपड़े भी एक एक करके उतर रहे थे।
मेरी बीवी नेहा ने फटाक से अपने बालों को पीछे धकेला और हाथ उठाकर उनका जूड़ा बना लिया.
उसका ऐसा करने से उसके बड़े बड़े मम्मे सबको दिख गए।
सबने खूब मज़ा लिया.
फिर आरती ने अपनी साड़ी उतार कर रख दी और हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोल दिया।
हुक खुलते ही उसकी बड़े बड़े दूध छलक पड़े।
मेरा तो लण्ड साला उछल पड़ा और रोहन का लौड़ा भी कुलबुलाने लगा।
इसी तरह जब रूचि भाभी ने अपना टॉप उतारा तो उसकी मादक चूचियाँ देख कर सारे मर्द मस्त हो गए।
रूचि सच में बड़ी हॉट लग रही थी।
मेरा मन हुआ कि अगर उसकी जींस भी थोड़ा खुल जाए तो सबको उसकी झांटें दिख जाएँगी।
लेकिन वह जींस पहने बैठी रही।
मैं आरती भाभी की चूचियाँ सहलाने लगा.
आशीष ने रूचि भाभी की चूचियों की चुम्मी ले ली और निप्पल मसलने लगा।
रोहन मेरी बीवी नेहा के बूब्स हौले हौले दबाकर मस्ती करने लगा।
हम तीनों को एक दूसरे की बीवी के मम्मे बड़े प्यारे लग रहे थे।
मैं तो जोश में आकर आरती भाभी के स्तन चाटने लगा, निप्पल मुंह में भर कर चभुलाने लगा।
आरती मेरा लण्ड ऊपर से ही दबाने लगी।
रूचि आशीष का लण्ड ऊपर से ही टटोलने लगी और मेरी बीवी ने रोहन की पैंट की जिप खोल कर अपना हाथ अंदर घुसेड़ दिया।
वह जल्दी से रोहन का लण्ड निकाल कर देखना चाहती थी।
मजे की बात यह थी कि सब कुछ आमने सामने ही एक ही जगह हो रहा था।
न किसी को कोई शर्म थी और न कोई डर!
बीवियां इस खेल में उन्मुक्त होकर भाग ले रहीं थीं।
तीनों बीवियां खुद एक दूसरे के पति का लण्ड पकड़ने के लिए व्याकुल हो रहीं थीं। तीनों बीवियां बड़ी निडर, साहसी और बोल्ड थीं।
रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे।
अब नया साल आने में बस आधे घंटे का समय ही बाकी था।
देखते ही देखते तीनों बीवियां एकदम नंगी हो गईं।
उनको नंगी देख कर मर्दों के लण्ड में गज़ब का करंट लग गया।
तब बीवियों ने एक दूसरे के पति को फटाफट नंगा कर दिया।
सबके लण्ड टनटना खड़े हो गए।
आशीष की बीवी नंगी नंगी मेरा लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी, बोली- बाप रे बाप … क्या मस्त लौड़ा है नेहा तेरे पति का?
उधर मेरी बीवी नंगी नंगी रोहन का लण्ड पकड़ कर बोली- हाय मेरी बुर चोदी रूचि, तेरे पति का लण्ड तो भोसड़ा भी फाड़ डालेगा.
रूचि तब तक खुद नंगी होकर आशीष का लण्ड पकड़ कर चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखने लगी थी।
वह बोली- अरे यार आरती, तेरे पति का मादरचोद लण्ड आज ही मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा।
इन तीनों की मस्त मस्त बातों से सबके लण्ड बड़े ताव में आ गए।
मेरी बीवी रोहन का लण्ड चाटने लगी, रोहन की बीवी आशीष का लण्ड चाटने लगी और आशीष की बीवी मेरा लण्ड चाटने लगी।
यह सीन देख कर हम सब मस्त होने लगे।
बीवियां बड़ी शिद्दत से एक दूसरे के पति का लण्ड चाट चाट कर मज़ा लेने लगीं।
सबकी नज़र घड़ी पर थी क्योंकि सबको अपना लण्ड दूसरे की बीवी की बुर में 2021 में पेलना था और 2022 में निकालना था।
मुझे आरती भाभी का नंगा जिस्म बड़ा मज़ा दे रहा था।
फिर मुझसे रहा न गया और मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसकी दोनों टांगें फैला दीं।
उसकी मस्तानी चूत मेरे सामने खुल गई तो मैंने लण्ड उसी पर रख दिया।
मैंने एक धक्का मारा तो लण्ड सरसराता हुआ पूरा अंदर घुस गया।
तब मैंने देखा कि रोहन भी मेरी बीवी नेहा की बुर में अपना पूरा लण्ड घुसा चुका है।
यह देख कर मैं और उत्तेजित हो गया।
फिर मेरे बगल में, आशीष एकदम नंगा नंगा रोहन की बीवी रूचि के ऊपर चढ़ बैठा, अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और गचर गचर चोदने लगा।
इस तरह हम तीनों लोग आमने सामने एक दूसरे की बीवी बिंदास चोदने लगे।
अपनी बीवी को दूसरे से चुदवाते हुए देख कर किसी और की बीवी चोदने का सुख सच में बड़ा अच्छा होता है.
यही सुख हम तीनों लेने लगे।
अपनी बीवी को किसी और से चुदते हुए देखने में भी बड़ा मज़ा आता है।
मुझे यह अहसास हो गया कि हर एक बीवी पराये मर्द के लण्ड से ज्यादा मस्ती से चुदवाती है।
आरती भाभी मस्ती में बोली- हाय मेरे निखिल राजा, तेरा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है। आज मुझे सबसे ज्यादा मज़ा आ रहा है, मुझे खूब चोदो। मेरे पति के सामने फाड़ डालो मेरी फुद्दी … क्या मस्त लौड़ा है तेरा! ऐसा ही लौड़ा मेरी चूत का बाजा बजा सकता है। मैं ऐसे ही लण्ड के लिए तरस रही थी।
उधर से रूचि बोल पड़ी- हाय मेरी बुरचोदी आरती, तेरा पति का लौड़ा मेरी चूत के चीथड़े उड़ा रहा है। बड़ा अच्छा लग रहा है यार! तूने अपने पति से मेरी चूत पहले क्यों नहीं चुदवाई? हाय आशीष … चोदे जाओ मेरी चूत। पूरा लौड़ा घुसा घुसा के चोद … पटक पटक के चोद मुझे!
मेरी बीवी नेहा भी पूरी मस्ती में थी।
वह भी कुछ न कुछ बोले चली जा रही थी- हाय रोहन, हाय मेरे राजा, तेरा लण्ड मेरी तमन्ना पूरी कर रहा है। मुझे पराये मरद से चुदवाने की बड़ी इच्छा थी, देखो आज चुदवा रही हूँ। पूरा मज़ा ले रही हूँ। आज रोहन मुझे मेरे पति के आगे चोद रहा है। कितना मज़ा आ रहा है. मुझे तो अपने पति को आशीष की बीवी चोदते हुए देखने में भी आ रहा है। मैं यही तो कह रही थी अपने पति से की कभी किसी और बीवी चोद कर देखो. कभी अपनी बीवी किसी और से चुदवा कर देखो. मेरा पति मेरी बात मान गया और आज देखो वह आशीष की बीवी चोद रहा है और मुझे रूचि के पति रोहन से चुदवा रहा है। पति हो तो मेरे पति जैसा! लण्ड हो तो रोहन के लण्ड जैसा!
इन सब बातों से चुदाई का मज़ा दुगुना हो गया।
अब बस 2 / 3 मिनट ही बाकी थे नया साल आने में!
सबकी नज़रें टी वी पर लगीं थीं।
इधर हम तीनों ने चोदने की स्पीड बढ़ा दी।
इतने में टी वी से आवाज़ आयी- HAPPY NEW YEAR.
हम सबने भी कहा ‘HAPPY NEW YEAR’
हमारे लण्ड अभी भी चूत में घुसे हुए थे।
हम सब एक दूसरे की बीवी अपनी तरफ खींच कर पूरे जोश में चोदने लगे।
जैसा ही 5 मिनट हुए तो हमारे लण्ड झड़ने लगे।
आशीष की बीवी ने मेरा झड़ता हुआ लण्ड चाटा, रोहन बीवी ने आशीष का झड़ता हुआ लण्ड चाटा और मेरी बीवी ने रोहन का झड़ता हुआ लण्ड चाटा।
इस तरह लण्ड चूत में 2021 को घुसा और 2022 में चूत से बाहर निकला और फिर हमने अंदर पेल दिया।
कुछ देर तक हम सब नए साल में भी एक दूसरे की बीवी चोदते रहे।
बीवियां भी बड़े मजे से चुदवातीं रहीं।
उनको शायद हमारे से ज्यादा मज़ा आ रहा था।
आखिर में एक एक करके लण्ड झड़ने लगे और सबने झड़ते हुए लण्ड चाटे।
उसके बाद नए साल का केक काटा गया; केक सबको बांटा गया।
मर्दों ने बीवियों की चूत पर, चूतड़ों पर और चूचियों पर केक लगाया और खूब प्यार से चाटा।
बीवियों ने भी सबके लण्ड पर, पेल्हड़ पर केक लगाया और मस्ती से चाटा।
वाइफ चेंज Xxx का सबने खूब एन्जॉय किया।
फिर बाथरूम से नहा धोकर सब लोग वापस आ गए।
खूब बातें होने लगीं.
सबके चेहरे खिले हुए थे, सभी चुदाई के नशे में थे।
धीरे धीरे फिर चुदाई का माहौल बनने लगा।
इस बार मेरी बीवी नेहा ने आशीष का लण्ड पकड़ लिया.
आशीष की बीवी आरती ने रोहन का लण्ड पकड़ लिया.
और रोहन की बीवी रूचि ने मेरा लण्ड पकड़ लिया।
फिर क्या … मैंने बड़े मजे से रोहन की बीवी चोदा।
रोहन ने आशीष की बीवी चोदी.
और आशीष ने मेरी बीवी चोदी।
यह चुदाई अब पूरी तरह 2022 की चुदाई थी।
नए साल का पहला ही दिन था।
शाम को मेरा दोस्त प्रकाश अपनी बीवी मिहिका के साथ आ गया।
मिहिका को देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।
उधर मेरी बीवी भी प्रकाश पर मोहित हो गई।
वह मुझे अंदर ले जाकर बोली- अब आज तो मैं प्रकाश से चुदवाऊंगी। तुम उसकी बीवी चोद लो।
मैं तो उसकी बीवी चोदना चाहता ही था।
फिर क्या … मेरी बीवी ने मिहिका से खुल कर बात की और मैंने भी प्रकाश से खुल कर कहा।
दोनों राज़ी हो गए।
फिर मैंने रात भर प्रकाश की बीवी प्रकाश के सामने चोदी।
प्रकाश ने मेरी बीवी मेरे सामने चोदी।
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