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Massage Girl in Navi Mumbai: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Navi Mumbai who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Navi Mumbai that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Navi Mumbai massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Navi Mumbai who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Navi Mumbai massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Navi Mumbai massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Navi Mumbai who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Navi Mumbai employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Navi Mumbai helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Navi Mumbai

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Navi Mumbai at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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आदरणीय पाठको, Antarvasna

मेरी कहानी फिर दूसरी से कर लेना अन्तर्वासना पर Antarvasna आ चुकी है! शायद आप लोगों को अच्छी लगी होगी! मैं आप लोगों से क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मेरा इमेल आईडी गलत लिखा गया! मेरा सही इमेल कहानी के अन्त में है!
हाँ आगे की घटना इस प्रकार है :

जब तक बड़ी बहन की शादी नहीं हो गई हम चारों रोज ही चुदाई और लंड चुसाई का मजा लूटते रहे! बाद में जब एक बहन की शादी हो गई तो हम तीनों यानि भैया, मेरी बहन और मैं लगभग रोज ही चुदाई करते रहे! चूंकि मेरा लंड भैया से बड़ा और मोटा था तो मेरी बहन मुझसे चुदाना पसंद करती थी! लेकिन भैया को भी चोदने देना पड़ता था! मज़बूरी भी थी और वो पहले से ही उसको चोदता था!

इस बीच जब भी ताउजी की लड़की से जब भी फ़ोन पर बात होती थी तो कहती- संजय तेरी बहुत याद आती है!
मैंने कहा- आ जाओ ना!
उसने कहा- आने का तो बहुत मन है! तेरा लंड चूसने और तुझसे चुदवाने का बहुत मन करता है!
मैंने पूछा- क्या जीजा जी नहीं चोदते?
तो उसने रोते हुए कहा- उनका लंड छोटा भी है और तेरे जैसा ज्यादा मजा भी नहीं देते!
मैंने कहा- मैं ही आ जाता हूँ!
उसने कहा- जल्दी से आ जाओ!

उसके बाद मैंने उसकी ससुराल जाने के लिए किसी तरह अपने घर वालों को राजी किया और उसके यहाँ पहुँच गया!
वहां पहुँचते ही उसने मुझे गले लगा लिया और मुझसे बुरी तरह से लिपट गई और मुझे चूमने लगी!
मैंने उससे पूछा- घर में कोई नहीं है क्या?
तो उसने कहा- माँ, बाबूजी और तेरे जीजा काम पर गए हैं, शाम को ही आएंगे!

तो मैंने उससे एक बार चुदाई करने को कहा क्योंकि मैं तो उसको चोदने को मरा जा रहा था!
उसने कहा- भैया जल्दी से चोद लो! मैं भी तो मरी जा रही हूँ चुदवाने के लिए! लेकिन जरा जल्दी करना, क्योंकि मेरी ननद कालेज से आने ही वाली होगी!
मैंने कहा- कोई बात नहीं! उस साली को भी चोद देंगे!

उसके बाद हम दोनों जल्दी जल्दी नंगे हो गए! और वो मेरा लंड बहुत मस्ती से चूसने लगी! मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और उसकी चूत में ठोक दिया!
एक बार जल्दी से चोद कर मैं नहाने चला गया!

जब नहा कर वापिस आया तो देखा कि एक 19 साल की बला की खूबसूरत लड़की बैठी हुई टीवी देख रही है!
उसको दीदी की शादी में देखा था, पर अब कुछ ही महीनों में साली गजब की लग रही थी! मेरी तो हालत ख़राब हुई जा रही थी!
मेरा लंड पैंट में खड़ा हुआ जा रहा था!

इतने में दीदी आ गई और मेरा उससे परिचय कराया तो उसने कहा- मैं पहले से ही जानती हूँ!
मैंने उसको आँख मार दी, उसने कुछ नहीं कहा, केवल मुस्करा दी!
मैंने सोचा कि लगता है जल्दी ही काबू में आ जायेगी!

बाद में दीदी के सास ससुर और मेरे जीजा भी आ गए! मैंने सब को प्रणाम किया! सब खुश हो गए!!

रात में खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे!
दीदी के सास ससुर एक कमरे में, दीदी जीजाजी दूसरे कमरे में चले गए! दीदी की ननद (गुड़िया) और मैं, हम हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगे!

मैंने लुंगी और बनियान और गुड़िया ने नाईटी पहनी हुई थी! गुड़िया तो टीवी देख रही थी पर मेरी नजर गुड़िया के वक्ष पर ही लगी थी!
उसने कहा- संजय, क्या देख रहे हो!
मैंने कहा- कुछ नहीं!

पर मेरी नजर तो उसके स्तनों से हट ही नहीं रही थी! क्या मस्त चुचे थे! मन किया कि अभी दबा दूँ जोर से! पर आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई! खैर हम दोनों बैठे बैठे टीवी देखते रहे!
इतने में टीवी पर एक लव सीन आ गया! जिसको देखते हुए वो मेरी तरफ भी देखने लगी! मैं समझ गया कि साली तैयार है! पर उसको छूने की हिम्मत नहीं हो रही थी!

मैं किसी तरह मन दबा कर बैठा था कि इतने में वो एक हल्की सी चीख मार कर मुझ से लिपट गई! मेरी तो लाटरी ही जैसे निकल गई!
मैंने उसको अपने से चिपकाये पूछा कि क्या हुआ!
उसने कहा- देखो, वहाँ कोकरोच है और मुझे बहुत डर लगता है!
मैंने उसको अपने से चिपटाए रखा लेकिन कोकोरोच भगाने की कोई कोशिश नहीं की!

फिर मैंने धीरे धीरे अपने हाथ से उसकी चुचियों को सहलाने लगा। उसने कोई विरोध नहीं किया तो मैं कुछ जोर से दबाने लगा! वो सिसकारियाँ भरने लगी और जोर जोर से मुझ से लिपटने लगी! मैं खुश हो गया और उसकी चूची निकल कर चूसने लगा! वो भी पूरा सहयोग देने लगी!

मैं उसकी नाइटी उतार कर उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा! वो पूरी मस्ती में आ गई और मेरा लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी!
मुझे बहुत ही मजा आ रहा था!
मैंने कहा- मैं तुझे चोदना चाहता हूँ!
उसने कहा- मैं भी कब से चुदवाने को मरी जा रही हूँ!
मैंने कहा- मेरा लंड चूसो!

वो एक दम तैयार हो गई और मेरा लंड चूसने लगी मैं भी उसकी चूत चूसने लगा! हम दोनों को काफी मजा आ रहा था।
कुछ देर बाद वो बोली- संजय, अब बर्दाश्त नहीं होता! एक बार जल्दी से चोद दो!

मैं भी वही चाहता था! करीब 15-20 मिनट तक मैं उसको चोदता रहा! वह बार बार कहती रही कि जोर जोर से चोदो! आज मैं बहुत दिनों बाद चुदवा रही हूँ!
मैं उसको जोर जोर से चोदने लगा!
वो- आ आ इ इ इ संजय बहुत मजा आ रहा है! जल्दी से अपने कामरस से मुझे भर दो!
मैंने पूछा- चूत में डालूं या मुँह में लोगी?
उसने कहा- पहले चूत में भर दो, मुँह में तो बाद में ले लूँगी! तेरे रस का स्वाद तो चखना ही है!

मैंने जल्दी से उसकी चूत में अपना पानी छोड़ दिया!
अब हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर लेट गए और बातें करने लगे!
मैंने पूछा- पहले किस से चुदवाया है?

उसने नहीं बताया पर कुछ जोर देने पर कहने लगी- तुमको भी अपनी सारी बात बतानी पड़ेगी!
मैंने कहा- ठीक है! पहले अपनी बताओ, फिर मैं भी बता दूंगा!
उसने कहा- भैया शादी के पहले मुझको चोदते थे! पर शादी के बाद भाभी के डर से खुलकर नहीं चोद पाते!

इसी तरह बातें करते करते मैं उसके स्तनों और चूत और वो मेरे लंड से खेलती रही।
कहने लगी- तेरा लंड तो बहुत मस्त है! भैया का तो छोटा और पतला है! आज जितना मजा पहले भैया से चुदवा कर कभी नहीं आया! फिर वो कहने लगी कि अब अपनी बताओ!

पहले तो मैंने टालने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी तो बताना पड़ा- सबसे पहले मैंने तुम्हारी भाभी यानि दीदी को चोदा है!
उसने कहा- ना जाने अब भाभी की क्या हालत हो रही होगी! इतने शानदार लंड से चुदवाकर अब एक मरियल से लंड से कैसे तृप्त होती होगी!
मैंने कहा- कल कोलेज मत जाओ! हम तीनो मस्ती करेंगे!
वो ख़ुशी ख़ुशी राजी हो गई!

फिर हम दोनों ने एक बार बहुत मस्ती से चुदाई की और वो मेरे लंड को मुँह में लेकर सो गई!
कुछ देर बाद वो उठ कर अपने कमरे में चली गई और मैं वहीं सोफे पर सो गया!
घटना बहुत लम्बी है तो आगे का अंश बाद में!

कृपया अपने अपने विचार मुझे इ-मेल करें, जिससे मैं अपनी कहानियों को और रूचिकर बना सकूँ! Antarvasna

Xxx साली जीजा सेक्स कहानी में मैंने अपनी साली की काल्पनिक चुदाई की. मेरी साली बहुत सेक्सी है, उसकी चूचियां बहुत मस्त हैं. मैं उसे कभी चोद नहीं पाया पर कल्पना की है.

दोस्तो, सबसे पहले तो मैं अपना परिचय देता हूं.
मेरा नाम प्रणय है और मैं एक बैंक में काम करता हूं.
मेरी उम्र 27 साल है और शरीर भी तंदुरुस्त है.

मैं यहां पहली बार लिख रहा हूँ और मुझे सेक्स कहानी लिखने का कोई अनुभव नहीं है.
फिर भी मैं कोशिश करूंगा कि आप सबको मजा आए.

मेरी इस Xxx साली जीजा सेक्स कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं.

मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं और हम दोनों मुंबई में रहते हैं.

यह बात जो मैं बताने जा रहा हूं, वह मेरी कल्पना है.
उस लड़की को देखकर जिसे मैं हमेशा से चोदना चाहता था लेकिन रिश्तों की वजह से कभी चोद नहीं पाया.

यह बात मेरी साली की है जो मुझसे उम्र में छोटी है और मेरे साथ अब काफी नटखट भी हो गई है.

उसे देखकर मुझे हमेशा लगता कि काश यह मेरी पत्नी होती.
उसके बारे में सोच सोच मैं हमेशा मुठ मार लेता हूं.

उन दिनों हम दोनों शादी करके कुछ दिनों के लिए ससुराल गए थे.
हमारा स्वागत बढ़िया हुआ था और हम दोनों घर में प्रवेश कर गए.

प्रवेश करते ही मुझे मेरी स्वप्नकन्या दिखाई दी.
उसका नाम सोनल है.
वह बहुत ही सुन्दर हेयर स्टाइल वाली लड़की है.

उस दिन वह पिंक कलर की ड्रेस में एक अप्सरा ही लग रही थी.

उसकी उम्र बीस साल की थी लेकिन उसके भरे हुए स्तन किसी 25 साल की लड़की के जैसे हैं.
सोनल के तने हुए दूध देख कर मुझे अपने सास ससुर के सामने बैठना मुश्किल हो गया था.

जैसे तैसे मैं बहाना करके उठा और वाशरूम से फ्रेश होकर आ गया.

साली के स्तनों का आकार देख कर मुझसे अभी भी रहा नहीं जा रहा था.
सोनल को देखकर तो ऐसे लग रहा था कि वह गंभीर मिजाज वाली लड़की है; उसे सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई से प्यार है.

मैं उसे गौर से देखने लगा और उसे देखकर मन ही मन सोचने लगा कि क्या करूँ, जिससे सोनल को सैट कर सकूं.
उस रात मैंने अपनी पत्नी को ऐसे चोदा मानो मैं सोनल को ही चोद रहा हूं.

पत्नी भी संतुष्टि के साथ सो गई लेकिन मुझे अभी भी सोनल की जवानी ने परेशान कर रखा था.

मैंने तय कर लिया था कि कुछ भी हो जाए, मैं सोनल को चोदे बिना वापस नहीं जाऊंगा.

दूसरे दिन सुबह जब मैं उठा तो सब लोग अपने अपने काम में व्यस्त हो गए थे.

फिर मैं भी नाश्ता करके अखबार पढ़ने बैठ गया.

मैंने जान बूझकर नाश्ते की प्लेट सामने रखी ताकि सोनल उसे उठाए और मैं उसके दोनों स्तनों को जीभर के देख सकूं.
हुआ भी वैसे ही.

मैंने अंततः उसके दोनों स्तनों को देख लिया.
मानो मेरे अन्दर ज्वालामुखी भड़क गया था और मुझे अपने लावा को सोनल के स्तनों पर छोड़ना है, यह सोच सोच कर मैं पागल होने लगा.

एक दो दिन और गुजर गए और मेरी परेशानी बढ़ती गई.

मौका देख कर मैंने उससे बात करना शुरू किया.
वह कम ही घुल-मिल पाती थी.
फिर भी कोशिश करके मैंने उससे दोस्ती कर ली.

मैं इस बात से खुश था कि उसने मुझसे दोस्ती की.

एक दो दिन और गुजर गए और वह अभी मुझे बेझिझक बातें करने लगी.

मैं उसके कॉलेज के बारे में बात करने लगा और उसकी सहेलियों व उसकी पढ़ाई को लेकर बात करने लगा.

बात तो वह करती थी, मैं तो सिर्फ उसे निहारता था.

कभी कभी ठंड की वजह से उसके स्तनों के निप्पल कड़क दिख जाते तो कभी मेरी आंखें उसके स्तनों के आकार को दूर से ही नाप लेतीं.

ऐसे ही चलता रहा.

एक दिन बात करते समय हम दोनों उसके एक फ्रेंड की लव स्टोरी डिस्कस करने लगे.

मैंने भी मौका देख कर उससे पूछा- तुम्हारा बॉयफ्रेंड कौन है?
उसने साफ मना करते हुए कहा कि उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है.

मेरे जोर देने पर भी उसने मना किया तो मैंने और छेड़ना ठीक नहीं समझा और इधर उधर की बातें करने लगा.
फिर हमारे बीच इस तरह बात हुई:

मैं- सोनल क्या मैं एक बात पूछूं, बुरा मत मानना तुम मुझे फ्रेंड मानती हो तो ही पूछूंगा.
सोनल- हां पूछिए न!

मैं- तुम अभी जवान हो गई हो और तुम्हारी सहेली का भी बॉयफ्रेंड है, तो तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड होना चाहिए?
सोनल चुप रही.

मैं- डरो मत, मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा!
सोनल- मुझे भी लगता है लेकिन पापा और घर के सभी लोग स्ट्रिक्ट हैं, तो चाहकर भी मैं सिंगल हूँ.

मैं- और एक सवाल पूछूं?
सोनल- हां.

मैं- सेक्स करने का मन करता है? शर्माना मत या फिर गुस्सा भी मत करना.
सोनल- करता तो है, पर अभी मेरी उम्र कम है … और शादी भी नहीं हुई.

मैं- यह कौन बोला कि सेक्स के लिए शादी करनी पड़ती है. सेक्स तो एक कला है. उसे सिर्फ नर और नारी चाहिए शादी नहीं. तुम अपनी दीदी से पूछो सेक्स का मजा क्या होता है!
सोनल- आप भी ना!
वह शर्मा कर उठ गई और जाने लगी.

मैंने सोनल को अपने हाथ से पकड़ा और पहली बार उसकी नजर में मैंने कामवासना देखी.
अब तक मैं काबू खोता जा रहा था लेकिन मुझे जल्दबाजी नहीं करनी थी.

मैं- सच बताओ … कौन हैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड?

सोनल- कोई नहीं है.
मैं- फिर शर्मा क्यों रही हो?

सोनल- आपने मेरा हाथ पकड़ रखा है.
मैं- तो क्या हुआ आधी घरवाली हो मेरी!

सोनल- प्लीज छोड़िए, मम्मी आ जाएंगी.
मैं- आने दो.

मौका देख मैंने उसको कमर से पकड़ कर अपनी बांहों में जकड़ लिया.
उसकी छूटने की कोशिश बेकार हुई.

उसे मैंने किस करना शुरू कर दिया.
वह शर्माती हुई मेरा साथ दे रही थी.

तभी मेरी पत्नी आ गई और हम अलग हो गए.
मेरी बीवी को पता नहीं चला.
वह खाने के लिए बुलाने आई थी और चली गई.

उसके जाने के बाद मैंने फिर से सोनल को पकड़ा और उससे कहा- सोनल यार, पहले दिन से तुम्हें देख कर चोदने का मन बनाया है. अब और न तड़पाओ. तुम्हारी दीदी और तुम दोनों लाजवाब हो. दोनों भी सेक्सी हो. लेकिन तुम्हें एक बार चखना है. तुम जितनी टेस्टी हो उतनी टेस्टी तो तुम्हारी दीदी भी नहीं है. तुम्हें वही सुख देने के लिए मैं बेसब्र हूँ. मैं तुम्हारा रात को टेरेस पर इंतजार करूंगा, जरूर आना.

वह चुपचाप चली गई और मैं सोचता रहा कि क्या होगा.

फिर भी मैं रात को वाइफ सोने के बाद ऊपर आ गया और सोनल की राह देखने लगा.

दो बजे के करीब सोनल आ गई और मैं खुशी से झूम उठा.
मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और किस करने लगा.
वह अब खुलकर साथ दे रही थी.

हमारे टेरेस से सब कुछ दिखता था लेकिन टेरेस पर क्या चल रहा है, ये किसी को नहीं दिखता क्योंकि हमारे घर की ऊंचाई बहुत ज्यादा थी.

मैं उसको गोद में उठाकर उस कमरे में लेकर आ गया जो टेरेस पर सामान रखने में काम आता था.

उसे दीवार के सहारे खड़ा करके मैं उसके गले को चूमने लगा.
मैं उसके दोनों हाथों को ऊपर पकड़ कर मुँह से उसके गले को और होंठों को चाट रहा था.

मुझसे भी संयम नहीं हो रहा था तो मैंने उसके टॉप को ऊपर करके निकाल दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को चूसने और दबाने लगा.

सोनल सिर्फ ‘जीजाजी मत करो …’ इतना ही कह पाई.
उसके हाथ मेरे बालों को पकड़ कर मेरे सिर को स्तनों पर दबा रहे थे.

मैंने ब्रा को निकाल दिया और जिसका इतना इंतजार किया, उसका जी भरके आनन्द लेने लगा.
खुद की शर्ट को भी उतार कर हम दोनों कमर के ऊपर नंगे हो कर एक दूसरे के जिस्म का आनन्द लेने लगे.

जब तक सोनल के स्तनों पर मेरे दांतों के निशान नहीं बने, तब तक मैं रुका नहीं.
स्तन पान करते हुए मैं पेट को किस करने लगा और वह मदहोश हो गई.

मैंने उसके बचे हुए कपड़ों को भी हटा कर उसे सिर्फ पैंटी पर खड़ा कर दिया.
वह शर्म के मारे आंखें बन्द कर चुकी थी लेकिन मैं उसे देख कर बेकाबू हो चुका था.

मैंने भी मेरे बचे हुए कपड़ों को उतार कर उसे देखा और उसका हाथ पकड़ कर मेरे लंड पर दबा दिया.

लंड की गर्म त्वचा से वह सहम उठी और उसने मुँह दीवार की तरफ कर दिया.
मौका देखकर मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी, जो पूरी गीली हो चुकी थी.

पीछे से उसे जोर से पकड़ कर मैंने उसकी चूत को उंगली से छेड़ना शुरू कर दिया और साथ ही दूसरे हाथ से निप्पल को रगड़ना शुरू कर दिया.

वह अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी और फिर से एक बार गर्म हो चुकी थी.
मैंने उसे पैरों पर बैठने को कहा तो वह झट से बैठ गई.

मुझे तो मानो जन्नत मिल गई. मैंने अपना लंड उसको मुँह में लेने के इरादे से हिलाया.
उसने पहले तो सर हिला कर मना किया लेकिन बाद में वह खुद ही तैयार हो गई और उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया.

वह बड़े ही पेशेवराना तरीके से लंड को चूसने लगी.
यह देख कर मुझे जरा हैरानी हुई.
पर मैं मजा लेने लगा.

मेरा लंड उसके मुँह हिसाब से साइज़ में काफी बड़ा था और वह पूरा लंड अन्दर तक नहीं ले पा रही थी.

फिर भी उसे मजे लेने थे तो उसने अपने मुँह में किसी तरह से पूरा लंड ले लिया.
मेरी पत्नी तो कभी लंड को छूती भी नहीं थी.

मैंने उसे उठाया और कहा- सोनल, तुमसे अच्छी लंड चूसने वाली कोई नहीं है. तुम्हारी दीदी को तो ये पसंद ही नहीं है.

सोनल- जीजा जी, आप टाइमपास न करो, मैं अभी तड़प रही हूं. जल्दी से अपना ये औजार मेरी चूत में डालो और इसकी भूख मिटाओ.

मैंने भी समय की गहराई को देखकर तुरंत उसे दीवार पर सटा कर अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा.
पहला धक्का लगते ही उसके मुँह से चीख निकली और वह तड़प उठी.

मैंने उसकी कमर को न छोड़ते हुए और एक धक्का लगाया.
फिर तो मैं वहशी हो गया और धक्के पर धक्का लगाता चला गया.

वह भी लंड रगड़ से मजा लेने लगी.

कुछ ही देर में उसकी चूत से खून निकलने लगा था लेकिन अंधेरे में उसे कुछ समझ नहीं आया.

कुछ ही देर में वह एक बार फिर से झड़ गई और पुराने गद्दे पर लेट गई.

मैं अभी बाकी था, तो रुकने के मूड में नहीं था. मैं उधर ही उसकी चूत में पूरा लंड डालकर उसे चोदने लगा.
वह थक गई थी लेकिन मुझे साथ दे रही थी.

मुझे भी लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूं.
तो मैंने उसके दोनों स्तनों पर मेरे वीर्य का स्खलन शुरू कर दिया और वीर्य की आखिरी बूंद तक टपका दी.
फिर मैं भी उसी के बाजू में लेट गया.

हम दोनों की सांसें फूल रही थीं लेकिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
मैंने जो सोचा था हो गया.

पड़े पड़े हम दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुराते रहे और फिर उठकर अपनी अपनी जगह पर जाकर सो गए.

सोते समय भी मुझे सोनल के शरीर का स्पर्श महसूस हो रहा था और मैं सपने मंख भी यही चाह रहा था कि वह मुझसे अलग ना हो.

दूसरे दिन सोनल मुझे देख कर शर्माने लगी और मेरे सामने ही नहीं आई.

मैंने सोचा कि ऐसे काम नहीं चलेगा, मुझे कुछ करना पड़ेगा.

तब मैंने इशारे में उसे कोने में बुलाकर उससे उसका फोन नंबर मांगा और उसे मोबाइल पर बात करने को कहा.

मैं- क्या हुआ शर्मा क्यों रही हो? कल जो हुआ, क्या वह पसंद नहीं आया?

सोनल- ऐसी बात नहीं है. मुझे बहुत पसन्द आया और आपका वह भी काफी बड़ा है.
मैं- ऐसी बात है, तो फिर घूमने चलें? बहाना बनाकर बाहर चलते हैं?

सोनल- ना बाबा ना … जो कुछ करना है रात को ही कर लेना!
मैं- ठीक है, फिर लेकिन आज रात रंगीन होगी. आधा अधूरा नहीं छोडूंगा.

सोनल शर्माकर मेरी ओर देखने लगी और मैं रात का इंतजार करने लगा.

आज मैंने पहले से कुछ सैटिंग कर रखी थी.
कल रात जो दिक्कत आई थी, वह न हो इसलिए मैंने गद्दा अच्छी तरह बिछाया और उस पर कपड़ा डालकर उसे कुछ ठीक कर दिया.

अब बस इंतजार सिर्फ सोनल के आने का था.
आज कुछ नया भी ट्राय करना था तो मैंने मन ही मन ठान लिया कि उसे आज पूरी रात सोने नहीं देना है.

सब लोग सोने के बाद मैं चुपके से ऊपर चला गया और उसका इंतजार करने लगा.
थोड़ी देर में वह भी आ गई.

मैंने उसे गद्दे पर लिटाया और उससे लिपटकर चूमने और चाटने लगा.

वह पहले से ही गर्म हो गई थी और मेरे ऐसा करने से वह और जादा कामुक हो गई.

मैंने उसका टॉप ऊपर करके धीरे धीरे स्तनों को चूसना और चाटना चालू किया.
वह आह आह की आवाज निकालने लगी.
मेरा भी लंड तन चुका था.

मैंने उसकी नाभि को चाटकर गीला कर दिया और नीचे की ओर जाने लगा.
उसकी पैंटी को नीचे कर उसकी चूत को देख कर मैं बेकाबू हो गया और मैंने अपनी जीभ से उसकी दोनों पंखुड़ियों को अलग कर दिया.

वह मेरे बालों को पकड़ कर मेरा सिर अपनी चूत पर दबाने लगी.
मैंने पूरा प्रयास करके उसकी चूत में अपनी जीभ डालकर रसपान शुरू किया और उसे काम वासना के शिखर पर पहुंचा दिया.

इधर मेरी कामवासना भी तूफान की तरह उछल पड़ी थी तो मैंने मेरी दिशा बदली और मेरा लंड उसके मुँह में डाल दिया.

फिर मैं 69 की पोजीशन में आ गया. उसके लिए ये चीज नई थी, लेकिन उसे मजा भी आ रहा था.

मैंने पूरा लंड उसके मुँह में डाला और मेरी जीभ जितनी अन्दर जा सकी, उतनी पेल कर अच्छी तरह से उसकी चूत को चाटा.
बड़ी देर बाद जब हम दोनों झड़ गए तो थोड़ी देर के लिए एक दूसरे से लिपटकर वैसे ही पड़े रहे.

अचानक से सोनल ने फिर से लंड चूसना चालू कर दिया और मेरा लंड भी तुरंत खड़ा हो गया.
इस बार बारी चूत चुदाई की थी.

मैंने सोनल की चूत पर अपना लंड सैट करके जोर से झटका लगाया.
इस बार मेरा लंड पूरा अन्दर चला गया.

कल जैसे खून आया था, आज उतना खून नहीं आया.
सोनल को भी सेक्स की लत लग चुकी थी और वह उछल उछल कर मेरा लंड ले रही थी.

दोनों टांगों को ऊपर उठाकर मैंने पूरी ताकत के साथ लंड अन्दर डाल दिया.
सोनल की चीख निकल गई लेकिन अभी मैं रुकने के मूड में नहीं था.

दस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ने पोजीशन बदली.

मैंने उसे कुतिया की तरह खड़ा करके चोदना शुरू किया.
यह पोजीशन हम दोनों को पसंद आई.
धकाधक पेलापेली से थक कर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.

बड़ी देर तक Xxx साली जीजा सेक्स यानि चुदाई चलती रही लेकिन न वह झड़ रही थी और न मैं!
फिर मैंने उसे पुनः दीवार से सटाकर चोदना शुरू किया.

शरीर की पूरी ताकत जुटा कर मैंने जोर जोर से उसे चोदना चालू कर दिया था.

अब वह भी थक चुकी थी तो उसने मुझसे कहा- मुझे लंड के रस को पीना है.
उसे मेरा माल टेस्टी लगा था.

मैंने उसे नीचे बिठाकर उसके मुँह में लंड दे दिया.

थोड़ी देर के झटकों के बाद उसने मेरा सारा माल पी लिया व लंड को चाट कर साफ भी कर दिया.

हम दोनों बहुत खुश थे.
तीन बार चुदाई करने के बाद देर रात को हम दोनों अपने अपने बिस्तर पर जाकर सो गए.

उस दिन से आज तक मैंने कभी भी सेक्स की कमी को महसूस नहीं किया.
कभी पत्नी के साथ तो कभी साली के साथ चुदाई के पूरे मजे किए.

आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा, मेल करके जरूर बताएं.
Xxx साली जीजा सेक्स कहानी पर अपनी विचार कमेंट्स और मेल में लिखिए.

आप ने पढ़ा

किस करते करते मुझे ऐसा फील हुआ कि शायद मेरा लंड हल्का हल्का गीला हो रहा है.. मैं समझा कि शायद मैं फारिघ् हो गया हूँ…

मगर मेरा लंड अभी भी टाइट था ऑर खाला की लेग्स आहिस्ता आहिस्ता ओपन होने लगी ऑर खाला की साँसे तेज होने लगी.

अब आगे…

अब खाला का हाथ मेरे उपर था. ऑर खाला ने मेरी तरफ करवट ली हुई थी. मैने खाला का हाथ अपने उपर पड़े रहने दिया ऑर खाला के उपर हाथ रख दिया ऑर उनको हग कर लिया.

जब मैने खाला को हग किया तो उनके बूब्स मेरे साथ टच हो रहे थे. मैं थोड़ा सा पीछे हुआ ऑर उनके बूब्स को देखने लगा..

उनके 36 साइज़ के बूब्स ब्लॅक ब्रा मे क़ैद बहुत खूबसूरत लग रहे थे.. मैने खाला की आँखो की तरफ देखा तो वो तो गहरी नींद मे थी ऑर सो रही थी..

मैं थोड़ा सा उपर हुआ ऑर खाला के लिप पर हल्की सी किस की.. जब कोई रेस्पॉन्स ना मिला तो मैं आहिस्ता आहिस्ता खाला के लिप्स पर किस करने लगा… मेरी ये किस ज़्यादा से ज़्यादा 3 सेकेंड की होती थी…. क्योंकि मुझे डर भी था कि कहीं खाला उठा ना जाएँ.. जब मैने कोई 10 बार किस कर ली तो मैने अपनी ज़ुबान निकाल कर खाला के लिप्स से टच की…

मुझे अब ज़ुबान टच करते हुए मज़ा आ रहा था. ऑर उधर मेरा लंड खड़ा हो गया था….

मैने लेग्स पर खाला का दुपट्टा लपेटा हुआ था.. जिस से मेरा खड़ा लंड साफ तोर पर नज़र आ रहा था…

मैं अब लंड को सुलाने की फिकर मे लग गया ऑर अब मेरा मूठ मारने का कोई इरादा भी नही था. क्योंकि मैं सुबह से 2 बार मूठ मार चुका था……

मैं खाला के साथ लेट गया ऑर अपना सिर उनके सीने पर रख दिया.. खाला की हार्ट बीट मुझे सुनाई दे रही थी…. मैने खाला को टाइट हग किया ऑर उनके जिस्म की खुश्बू को सूंघने लगा.. मुझे उनकी खुश्बू से कुछ कुछ होने लगा..

मैं एक बार फिर थोड़ा सा पीछे हुआ… ऑर खाला के बूब्स को देखने लगा… मैने हिम्मत कर के खाला के बूब्स के उपर हाथ रख ही दिया ऑर अपनी आँखे क्लोज़ कर ली..

मैं ये ज़ाहिर कर रहा था कि मैं सो रहा हूँ.. मगर दूसरी तरफ से कोई हरकत ना हुई….. मैने हिम्मत कर के खाला के एक बूब को हल्का सा दबाया. मेरे दबाने से खाला के जिस्म मे हल्की सी हरकत हुई तो मैने अपनी आँखे बंद कर दी… खाला ने अपनी आँखे खोल कर मुझे देखा ऑर मेरी बंद आँखो को देख कर खाला समझी कि मैं सो रहा हूँ. तो खाला ने मुझे हग कर लिया ऑर मेरा सिर अपने सीने पर रख दिया…मेरा फेस उनकी कमीज़ के गले के उपर नंगे सीने पर था…

मैं उनके जिस्म को स्मेल करने लगा….. उनके जिस्म को स्मेल करते करते मुझ पर भी नींद छाने लगी ऑर मैं भी खाला को हग कर के नींद की आगोश मे चला गया

मैं जब खाला के साथ चिपक कर सोया हुआ था तो उस टाइम 1 बज रहा था.. मैं तक़रीबन 2 घंटे सोया था तो मेरी आँख खुल गई थी…. मैने खाला की तरफ देखा तो वो अभी तक सो रही थी.. शायद वो बहुत ज़्यादा थक गई थी……

मैने वॉल क्लॉक पर टाइम देखा तो 3:30 हो रहे थे.. मगर मुझे रूम मे कुछ अंधेरा अंधेरा सा लगा.. दोपहेर का टाइम था ऑर रूम की लाइट तो ऑफ थी.. मगर दिन के टाइम धूप की वजह से रूम मे रोशनी होती है.. मुझे वो रोशनी कम लग रही थी..

मैं रूम से बाहर निकला ऑर सहन मे आ कर देखा तो आसमान पर बादल छाए हुए थे ऑर ठंडी हवा चल रही थी.. मौसम बहुत प्यारा हो गया था ओर बारिश होने के आसार थे… मैं सहन मे ही चारपाई पर बैठ कर हवा को एंजाय करने लगा..

मैं कुछ देर वहाँ बैठा रहा तो माइंड मे ख़याल आया कि क्यू ना खाला को भी उठा दिया जाए ता कि वो भी मोसम एंजाय कर सके….. ये सोचते ही मैं रूम की तरफ गया, खाला अभी भी सो रही थी.. मुझे उन पर बहुत प्यार आया ऑर मैने झुक कर खाला के गाल पर एक किस की.. ऑर उनको हल्का सा हिलाया..

खाला ने नींद मे एक करवट ली ऑर आहिस्ता आहिस्ता अपनी आँखे खोल दी.. पहले तो वो कुछ देर नींद की खुमारी मे रही.. मैने एक बार फिर से आवाज़ दी तो खाला नींद की खुमारी से बाहर निकली ओर मुझे अपने सामने खड़ा हुआ पाया.. उन्होने मुझे देख कर एक स्माइल पास की ऑर मेरी तरफ देख कर बोली:

खाला: क्या हुआ जान, मुझे क्यू जगा दिया..

मैं: खाला, देखो बाहर इतना प्यारा मोसम हो रहा है.. चलो बाहर चल कर एंजाय करते हैं

खाला: नही यार मुझे नींद आ रही है..

मैं: ओहो खाला अब उठ तो गई हो.. चलो ना बाहर जा कर बैठ ते हैं…

ये बोल कर मैने खाला का हाथ पकड़ा ऑर उनको बाहर ले आया.. खाला बाहर निकली तो उनको भी मोसम बहुत अच्छा लगा…

खाला: अयान, रियली यार मोसम तो बहुत अच्छा हो रहा है..

मैं: हाँ जी इसी लिए तो आप को जगाया है मैं ने..

खाला: अयान क्यो ना आज आइस क्रीम खाने चलें…

मैं: हाँ, हाँ चलो… क्यू नही..

खाला ने कहा ओके मैं तैयार हो कर आती हूँ. ऑर ये बोल कर वो कपबोर्ड से कपड़े निकालने चली गई ऑर कपड़े ले कर निकली तो नहाने के लिए चली गई..

जब खाला नहा कर निकली तो मैने खाला से कहा कि आप हल्का सा मेकप भी कर लो.. खाला ने स्माइल पास की ऑर बोली…. क्यू जी, मैं मेकप क्यू कर लूँ…

मैने कहा कि मेकप मे अच्छी लगो गी..

खाला: तो क्या मैं मेकप के बिना अच्छी नही लगती..

मैं: खाला जान, ये बात नही है.. आप मेकप करो या ना करो.. आप तो मुझे दुनिया की सब से हसीन लड़की लगती हो.. आप बहुत अच्छी लगती हो मुझे.. आइ लव यू खाला

खाला: अच्छााआअ,,, ऐसी क्या बात है मुझ मे..

मैं: ज़रूरी तो नही है कि अच्छा लगने के लिए कोई वजह हो.. बिना किसी वजह के ही आप मुझे अच्छी लगती हो..

खाला: अच्छा ये बताओ, तुम्हे मुझ मे क्या अच्छा लगता है,???????

मैं खाला की बात सुन कर थोड़ा सा सटपटा गया कि अब क्या जवाब दूं खाला को…

मैने एक मिंट के लिए सोचा ऑर बोला: मुझे आप का सब कुछ बहुत अच्छा लगता है…

खाला: सब कुछ मे क्या क्या?????

वो शायद मुझे टीज़ करने का प्रोग्राम बनाए बैठी थी..

मैं: सब कुछ मे तो सब कुछ आ जाता है ना.. आप के बालों, आँखे, चीक्स एट्सेटरा एट्सेटरा

खाला: ऑर क्या क्या????

मैं: शरमाते हुए.. सब कुछ ना

ओर मैं उठ कर वॉशरूम जाने लगा तो खाला ने मेरा हाथ पकड़ लिया ऑर मुझसे बोली…

खाला: तुम ऐसे नही जा सकते,,,, पहले मेरी बात का जवाब दो….

मैं: अंजान बनते हुए,, कौनसी बात का…??????

खाला: यही कि तुम्हे मुझ मे क्या क्या अच्छा लगता है..????

मैं: बताया तो है कि मुझे आप का सब कुछ अच्छा लगता है.. बल्कि आप मुझे पूरी की पूरी अच्छी लगती हो…

खाला: यही तो मैं पूछ रही हूँ कि क्या क्या अच्छा लगता है….

खाला ने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था.. ऑर वो मेरी तरफ देखते हुए हल्के गुस्से से बोली..

देखो अयान तंग ना करो ऑर सच सच बोलो कि तुम्हे मुझ मे क्या क्या अच्छा लगता है.. वरना मैं नाराज़ हो जाउन्गी…

मैं: देखो खाला…. मुझे आप के बाल बहुत अच्छे लगते हैं.. आप के सिल्की सिल्की बाल मुझे बहुत अच्छे लगते हैं ऑर जब आप नहा कर बाहर निकलती हो तो मुझे आपके बालों की स्मेल बहुत अच्छी लगती है..
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खाला शायद अपनी पूरी तारीफ सुन,ने के मूड मे थी.. वो मुस्कुराते हुए..

खाला: ऑर….????

मैं: मुझे आप की आँखे भी बहुत अच्छी लगती है.. जब आप नहा कर निकलती हो तो आप की आँखे लाल होती हैं.. बिल्कुल ऐसा लगता है कि आप नशे मे हो.. ऑर इन नशीली आँखों मे डूब जाने को दिल करता है..

मैं एक फिल्मी हीरो की तरफ फिल्म के डाइयलोग मार रहा था ऑर खाला मेरा डाइयलोग सुन कर हँसने लगी… ऑर पूछा..

खाला: अच्छा ऑर भी बताओ ना..

मैं: अगर ऑर बताया तो आप नाराज़ हो जाओगी …

खाला: अरे नही नाराज़ होती..

मैं: प्रॉमिस…?????

खाला: अरे य्ाआआरररर,,, चलो प्रॉमिस बाबा…

ये बोल कर खाला ने मेरी तरफ दूसरा भी हाथ बढ़ाया ऑर मैने उनका हाथ पकड़ लिया..

मैं: खाला मुझे आप के ये पतले पतले होन्ट (लिप्स) बहुत अच्छे लगते हैं..

खाला के फेस एक मासूम मुस्कुराहट आई..

खाला: क्यू ऐसा क्या है मेरा होंठो मे..

मैं: खाला पता नही बस मुझे आप के ये होन्ट बहुत अच्छे लगते हैं… दिल करता है कि इनको भी एक बार किस करूँ….

खाला ने मेरी बात सुनी तो बहुत हैरान हुई.. ऑर फिर प्यार भरे अंदाज़ मे बोली:

खाला: तो क्या हुआ अगर तुम चाहते हो तो तुम किस भी कर सकती हो.. तुम तो मेरी जान हो..

मैं: शरमाते हुए.. नही खाला बस छोड़ो , मैं तो ऐसे ही बोल रहा था..

खाला: नही…… अब तो तुम मुझे मेरे लिप्स पर किस करो गे….

ऑर ये बोल कर खाला ने अपना फेस मेरे फेस के बिल्कुल क़रीब कर लिया ऑर बोली: लो,,,, किस करो इनको…

मैने आज से पहले कभी किसी लड़की को किस नही की थी.. ये मेरी फर्स्ट किस थी जो मैं अभी करने वाला था..

मेरा गला खुश्क हो गया था.. मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे के सेहरा ( रेगिस्तान ) मे भागता रहा हूँ ऑर बहुत प्यास लगी है.. मैं अपने लिप्स पर ज़ुबान फेरने लगा..

दिल तो कर रहा था कि अभी खाला के होंठो का सारा रस चूस लूँ मगर पता नही क्यू,, मुझ मे हिम्मत नही हो रही थी…..

मैं तो खुद भी यही चाहता था कि खाला के लिप्स को चूसू मगर अब जब खाला खुद मुझे बोल रही थी तो मुझ से नही हो पा रहा था.. मैने बहुत हिम्मत पैदा करने की कोशिश की मगर नही कर पाया…

खाला मेरी तरफ देखते हुए बोली: अरे क्या देख रहे हो.. अभी तो बोल रहे थे कि किस करना चाहते हो.. ऑर अब, जब कि मैं खुद तुम्हे बोल रही हूँ तो तुम नही कर रहे हो…

खाला: चलो मैं अपनी आँखे बंद कर लेती हूँ फिर तुम मुझे किस करो..

ये बोल कर खाला ने अपनी आँखे बंद कर ली… मैने हिम्मत की ऑर खाला के लिप्स के क़रीब अपने लिप्स ले कर गया.. ऑर खाला के लिप्स पर अपने लिप्स रख कर एक दम से हटा दिए.. कोई 2 सेकेंड तक के लिए मैने लिप्स रखे थे..

खाला ने झट से अपनी आँखें खोली ऑर मुझे कहा: ये क्या????????

मैने कुछ नही कहा क्योंकि मेरी तो आवाज़ ही नही निकल रही थी..

खाला ने मेरी हालत को नोट किया ऑर मेरा हाथ पकड़ कर रूम मे ले आई, ऑर मुझे बेड पर बिठा दिया ऑर खुद मेरे साथ ही बैठ गई…. खाला ने बहुत प्यार भरे अंदाज़ मेरे बालों मे उंगलियाँ मूव की ऑर बोली…

खाला: तुम्हे तो किस करना भी नही आती.. क्या पहले कभी किसी को किस नही की…

मैं: मैने अपना सिर नही मे हिला कर इनकार किया..

खाला: तो पहले नही की तो क्या हुआ.. आगे तो कोई ना कोई गर्ल फ्रेंड तुम्हे मिल जाए गी तो उसको तो करोगे ना…

मैने सिर उठा कर खाला की तरफ देखा मगर मुँह से कुछ नही बोला..

खाला: चलो मैं तुम्हे किस करना सिखाती हूँ..

मैं: नही खाला अभी नही… फिर कभी.. क्योंकि सोचने ऑर रियल मे करने मे बहुत फ़र्क़ होता है.. ऑर जब कि आप का फर्स्ट टाइम हो तो फिर आप कुछ कर ही नही सकते….

खाला: नही अभी ही…

मैने थोड़ी बहुत बहस की मगर फिर खामोश हो गया.. खाला मेरी खामोशी को समझ गई ऑर मेरा हाथ पकड़ के अपने क़रीब किया…

खाला ने मेरे दोनो हाथ पकड़ के अपनी कमर पर रखे ऑर अपने दोनो हाथ मेरी कमर पर रखे…

वो अपने फेस को मेरे क़रीब लाती गई ऑर मुझे पसीना आ रहा था.. खाला मेरी आँखे मे देखती देखती अपने फेस को स्लोली स्लोली मेरे फेस के क़रीब ला रही थी..

खाला की साँसे मुझे फील होने लगी थी ऑर मेरे बॉडी टेंपॅरेचर हाइ होने लगा था.. नीचे शलवार मे हल्की हल्की सी हरकत होने लगी थी..

खाला अपने लिप्स को मेरे लिप्स के क़रीब लाई…

ऑर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए.

खाला ने जैसे ही मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रखे. मैने अपनी आँखे क्लोज़ कर लीं.

खाला को भी शायद ठीक तरह से किस्सिंग नही आती थी. वो अपने लिप्स को मेरे लिप्स पर स्लोली स्लोली रगड रही थी.. हम दोनो की आँखे बंद थी. वो कभी मेरे अपर लिप को अपने लिप्स मे ले कर चूस्ति ऑर कभी मेरे लोवर लीप को.. मैने अपनी आँखे एक लम्हे के लिए खोली तो देखा कि खाला की आँखे क्लोज़ थी… मुझ पर अब सेक्स का नशा चढ़ने लगा था.

नीचे शलवार मे मेरे लंड साहिब पूरी तरह खड़े हो गये थे. ऑर मेरा लंड खाला की थाइस को टच कर रहा था.. ये पहली बार ऐसा हुआ था क्य जागते हुए मेरा लंड खाला से टच हो रहा था.. उन्होने भी मेरे खड़े लंड को महसूस कर लिया ऑर थोड़ा क़रीब हो गई.

मैं खाला की थाइस से अपने लंड को रगड़ने लगा जिसकी वजह से मुझ पर मुकम्मल तौर् पर सेक्स का नशा छा गया.

मुझे किस्सिंग करनी तो नही आती थी मगर जो कुछ पॉर्न मूवीस मे देखा वोही अप्लाइ करने का सोचा..

मैं भी खाला के लिप्स पर अपने लिप्स रगड़ने लगा उधर वो भी मुकम्मल तौर पर मेरा साथ दे रही थी…. मैने खाला के अपर लिप्स को अपने लिप्स मे लिया ऑर चूसने लगा… मेरी इस हरकत पर खाला ने भी मुझे जल्दी जल्दी किस्सिंग स्टार्ट कर दी..

मेरा लंड मुकम्मल तौर पे खड़ा हो गया था ऑर मैं खाला की थाइस से अपना लंड मुसलसल रगड़ रहा था..

कहानी जारी रहेगी………….

Hindi Sex Stories

हैलो दोस्तो, मैं सोनू एक बार फिर Hindi Sex Stories आपके लिये एक नई कहानी लेकर आया हूँ। मेरी पिछली कहानियाँ

स्कूल में मस्ती

आपने पढ़ी और उनके बारे में मुझे मेल किये, इसके लिये आपका धन्यवाद। इस बार में स्कूल के बाहर की कहानी बताने वाला हूँ।

काव्या और अंजलि को चोदने के एक साल बाद मैंने वो स्कूल छोड़ दिया और नई नौकरी की तलाश करने लगा।

इसी चक्कर में मैं एक बार इन्टरव्यू देने दिल्ली गया। मैंने दिल्ली जाकर अपना इन्टरव्यू दिया और उन्होंने मुझे अगले दिन आने को कहा। मैं रात को किसी होटल में रूकने की सोच रहा था, तभी मेरे चाचाजी का फोन आया और उन्होंने मुझे रति के यहाँ रूकने को बोला और कहा कि मैंने उससे बात कर ली है और उसे कोई दिक्कत नहीं है।

रति मेरे चाचा जी की साली थी। मैं रति से केवल एक बार चाचाजी की शादी में ही मिला था, तब उसकी उम्र लगभग १९ साल थी और उसका रंग साँवला था, देखने में भी वो ज्यादा सुन्दर नहीं थी। रति ने एम.बी.ए. कर रखा था और दिल्ली में ही जॉब करती थी, वो दिल्ली में अकेली ही रहती थी और उसने वहाँ पर एक फ़्लैट किराये पर ले रखा था।

मैंने चाचाजी से रति के घर का पता व टेलिफोन नम्बर लिये और उसे फोन किया तो उसने बताया कि वो अभी ऑफिस में है और वो करीब शाम को ८ बजे घर आयेगी, तुम चाहो तो ऑफिस आकर घर की चाबी ले जा सकते हो।

उस वक्त ४ बज रहे थे और मैं दिल्ली में किसी को जानता भी नहीं था, इसलिये मैंने उससे ऑफिस का पता लिया और उसके ऑफिस चला गया। ऑफिस पहुँच कर मैंने रति को फोन किया तो वो ऑफिस के बाहर ही आ गई। मैंने रति को देखा तो देखता ही रह गया, ४ सालो में रति बहुत ही बदल गई थी, एकदम साफ रंग, कमर तक लम्बे बाल, बड़े बड़े स्तन ! एक बार तो मैंने उसको पहचाना भी नही। मेरा लंड पैन्ट के अन्दर ही हलचल करने लगा। उससे हाय हैलो की और घर की चाबी लेकर मैं उसके घर चला आया।

उसका फ़्लैट डबल बेडरूम और काफी बड़ा था। मैं पहले तो नहाकर फ्रेश हुआ और फिर टी.वी. देखने लगा, लेकिन मेरे मन में बार बार रति का ही ख्याल आ रहा था और मैं उसको चोदने के ख्वाब देखने लगा। मेरा लंड काफी तन गया था और पैन्ट फाड़ने पर उतारू हो गया था। मैंने सोचा मुठ मारकर अपनी आग शांत कर लेता हूँ और मैं बाथरूम में चला गया और मुठ मारने लगा।

तभी मेरी नजर गेट के पीछे वाले हुक पर गई, वहाँ पर रति की ब्रा और पैन्टी लटकी हुई थी, मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी को उठाया और चूमने लगा, रति की ब्रा और पैन्टी में से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। मैंने ब्रा और पैन्टी को चूमते हुए अपनी आग शांत की और फिर बाहर आकर फिर से टी.वी. देखने लगा, उस वक्त शाम के ६ बजे थे और रति को आने में अभी भी २ घंटे बाकी थे।

टी.वी. देखने में मेरा मन नहीं लग रहा था, इसलिये मैं गेट को लॉक करके बाहर घूमने निकल आया। थोड़ी देर सड़क पर इधर उधर घूमने के बाद मेरी नजर एक बार पर गई। मैं बार में चला गया और धीरे धीरे ड्रिंक लेने लगा, दो तीन ड्रिंक लेने के बाद मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, शाम के ७.४५ हो गये थे, मैंने जल्दी से पेमेंट किया और बाहर निकल आया। बाहर आकर मैंने माउथ फ्रेशनर खाया और घर की तरफ चल दिया, घर जाकर देखा कि रति मेरा इंतजार कर रही थी। उसने मुझसे पूछा कि कहाँ गये थे, तो मैंने कहा कि यहीं थोड़ी दूर घूमने गया था।

थोड़ी देर बाते करने के बाद रति फ्रेश होने चली गई। नहाने के बाद वो और भी खूबसूरत दिख रही थी। उसके भीगे हुए कमर तक लम्बे बालों से वो और भी ज्यादा आकर्षक लग रही थी। उसने लाल रंग का लोवर व हल्के आसमानी रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। फिर वो खाने की तैयारी करने लगी और मैं भी खाना बनाने में उसकी मदद करने के बहाने उसके शरीर को छूने की कोशिश करने लगा।

खाना खाने के बाद हम बाते करने लगे, तब रति ने कहा- क्या तुम ड्रिंक करते हो?

मैंने कहा- क्यों?

तो उसने कहा- तुम्हारे मुँह से बदबू बा रही है।

तो मैंने कहा- कभी कभी, लेकिन प्लीज तुम चाचाजी को मत बताना !

तो उसने कहा- ठीक है, नहीं बताऊंगी।

बाते करते करते १० बज गये थे तो हम सोने चले गये। वो दूसरे कमरे में थी और मैं दूसरे कमरे में, लेकिन मेरे उपर शराब का पूरा सरूर चढ़ चुका था और मेरे दिमाग में रति को चोदने के ही ख्याल आ जा रहे थे, नींद मेरे आँखो से कोसों दूर थी।

रात करीब १२ बजे मैं हिम्मत करके उठा और रति के कमरे में चला गया, रति गहरी नींद में सो रही थी और उसने दूसरी तरफ मुंह कर रखा था। मैं रति के पीछे जा कर लेट गया, रति के शरीर से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद मैंने अपना एक पांव उसके पांवो पर रख दिया और रगड़ने लगा, फिर एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया और कमर सहलाने लगा।

थोड़ी देर ऐसे ही सहलाने के बाद रति ने अचानक करवट बदली तो मैं घबराकर पीछे हट गया, लेकिन रति ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की, वो नींद में ही थी। फिर मैं हिम्मत करके उसके पास सरक गया और अपना हाथ उसके उरोज पर रख दिया, उसने अन्दर ब्रा नहीं पहन रखी थी। मैं धीरे धीरे रति के उरोज दबाने लगा और दूसरा हाथ उसकी चूत पर रख कर सहलाने लगा। फिर हाथ को उसके पजामे में डाल कर उसकी चूत को मसलने लगा, इतने में रति हल्की हल्की सिसकियाँ भरने लगी, मुझे पता चल गया कि रति सो नहीं रही थी, वो सोने का नाटक कर रही थी।

इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने रति से कहा- जब तुम जाग रही हो तो ये सोने का नाटक क्यों कर रही हो? क्यों नहीं तुम इस खेल का पूरा आनन्द उठाती?

तो रति ने कहा- मैं देखना चाहती थी कि तुम क्या क्या करते हो।

मैंने कहा- यह तो तुम जाग कर भी देख सकती हो, लो मैं तुम्हे बताता हूँ कि मैं क्या करता हूं। इतना कह कर मैंने रति की टीशर्ट खोल दी और उसके उरोजो को जोर जोर से मसलने लगा और रति के होठों से अपने होठ सटा दिये और किस करने लगा। हम अपनी जीभ एक दूसरे के मुंह में डाल कर चूस रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने उसके एक उरोज को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा, बीच बीच में उसके गुलाबी रंग के चूचुक को काटता भी जा रहा था, जिससे कि रति की उत्तेजना और बढ़ जाये।

फिर मैंने उसके पाजामे को भी खोल दिया, रति की चूत काफी सुन्दर थी, मैं रति की चूत को मसलने लगा, थोड़ी देर बाद मैंने अपनी एक अंगुली रति की चूत में डाल दी, उसकी चूत काफी टाईट थी। मैं अंगुली को धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा, इससे रति को मजा आने लगा क्योंकि वो कामुक सिसकारियां लेने लगी थी।

फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और अपना लंड रति को पकड़ा दिया, वो मेरे लंड को धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर मैंने उसको मेरे लंड को मुंह में लेने को कहा तो थोड़ी ना नुकर करने के बाद उसने लंड को अपने मुँह में ले लिया, और उसको धीरे धीरे चूसने लगी। मैं उसके मुंह को पकड़ कर लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। फिर हम दोनों ६९ की पोजिशन में आ गये, मैं रति की चूत को अपनी जीभ से कुरेदने लगा और वो मेरे लंड को अपने मुंह में ले कर चाटने लगी।

थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद मैंने रति को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगो को ऊपर उठा कर अपना लंड उसकी चूत से सटा दिया, फिर एक जोर से धक्का मार कर लंड को आधा अन्दर सरका दिया। रति इस धक्के को सहन नहीं कर पाई और चीखने लगी, अगर मैंने उसको जोर से पकड़ा नहीं होता तो मेरा लंड उसकी चूत से बाहर निकल आता।

उसके बाद मैं उसको सहलाने लगा, उसके शरीर को चूमने लगा, इससे उसका दर्द कुछ कम हुआ और वो भी नीचे से कमर उचकाने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने एक और जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, रति के मुंह से चीख निकल गई, लेकिन मैं अब रूका नहीं और जोर जोर से धक्के मारने लगा।

थोड़ी देर में रति भी मेरा साथ देने लगी और अपने नितम्ब को उछालने लगी। वो उत्तेजना में बड़बड़ाये जा रही थी, और जोरररररररररररर सेएएएएएएएएए हां ऐसे हीहीहीहीहीहीही औरररररररररररर जोर से चोदोओओओओ बहुत मजाआआआआ आ रहा है, फाड दो मेरीइइइइइइइ चूत को आजजजजज, और जोर से चोदो।

करीब १५ मिनट तक चोदने के बाद रति और मेरा पानी एक साथ छुटा। मैं रति के उपर ही पड़ गया, कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद मैं उठ गया और देखा कि रति की चूत से हम दोनों के वीर्य के साथ खून भी निकल रहा था, रति इसको देखकर घबरा गई, तो मैंने उसे समझाया कि पहली बार ऐसा होता है अब आगे नहीं होगा। फिर हम दोनो सो गये और अगले दिन से रति ने ३ दिन की ऑफिस से छुटी ले ली। हम दोनों ने तीनों दिन खूब सेक्स का आनन्द उठाया।

आपको मेरी नई कहानी कैसी लगी, प्लीज मुझे मेल करें। Hindi Sex Stories

मेरा नाम रेखा है, मैं नासिक (महाराष्ट्र ) कालवन के पास नाभा में रहती हूँ।

मैं गयारहवीं क्लास की छात्रा हूँ, पढ़ाई में ठीक ठाक हूँ मगर सेक्स के मामले में बहुत तेज़ हूँ।

जब से जवानी ने मेरे बदन में बदलाव लाने शुरू किए, तब से मैं इस बात को लेकर बहुत उत्सुक रही हूँ।

मैं अक्सर घर में शीशे के सामने नंगी होकर खड़ी हो जाया करती थी यह देखने के लिए कि मेरे स्तन कैसे धीरे धीरे आकार ले रहे हैं, कैसे मेरे निप्पल बन रहे हैं और कैसे मेरी चूत पर उगने वाले मुलायम रेशमी बाल गुच्छे में तब्दील होते जा रहे हैं।

और जब मुझे मासिक धर्म यानि के डेट आनी शुरू हुई तो उसके बाद तो जैसे मेरी ज़िंदगी ही बदल गई।

मुझे तभी से ऐसे लगने लगा कि जैसे मैं तो पूरी जवान हो गई।

और जब मौसी की लड़की ने यह बताया कि डेट आने का मतलब कि अब तू बच्चा पैदा कर सकती है तो मुझे बड़ी उत्सुकता हुई यह जानने के लिए कि अगर बच्चा औरत के पेट से निकलता है तो अंदर कब और कैसे जाता है।

खैर ये तो मेरे बचपन की बातें है।

जब मैं 10+1 में हुई तो पापा ने ट्यूशन पढ़ने के लिए घर पर ही इंतजाम कर दिया।

एक सर हर रोज़ मुझे शाम 6 से 7 बजे तक ट्यूशन पढ़ाने के लिए घर पर ही आते थे।

थोड़े दिनों बाद पड़ोस की कपूर आंटी का बेटा अमित जो 10+1 में था पर किसी दूसरे स्कूल में था, वो भी मेरे ही सर से ट्यूशन पढ़ने हमारे ही घर आने लगा।

पहले तो हम बहुत कम बात करते थे, पर धीरे धीरे हम दोस्त बन गए और हौले हौले आपस में बहुत खुल कर बात करने लगे।

ट्यूशन के दौरान मम्मी हमें चाय देकर जाती थी और सर की आदत थी कि वो चाय से पहले एक सिगरेट पीते थे, तो जब माँ चाय देकर जाती, सर चाय लेकर बालकनी में चले जाते, वहीं पर पहले एक सिगरेट और फिर चाय पीते।

इसी दौरान हम दोनों को आपस में खुसर फुसर करने का मौका मिल जाता।

एक दिन ऐसे ही चाय के समय किसी बात पर छीना झपटी के दौरान अमित का हाथ मेरी चूची पर ज़ोर से लगा।

अमित ने तभी मेरे से माफी मांगी- सॉरी रुचि यार, गलती से लग गया।

मैंने उसका बुरा नहीं माना और कहा- कोई बात नहीं, मुझे बुरा नहीं लगा।

‘क्या बुरा नहीं लगा, मेरा हाथ लगना?’ उसने पूछा।

‘नहीं, कुछ भी नहीं…’ मैंने भी कह दिया।

‘क्यों तुम्हें चोट नहीं लगी, मेरा हाथ तो बहुत ज़ोर से लगा था?’

‘नहीं, कोई बात नहीं!’ मैंने कहा।
हालांकि उसके हाथ के छूने से मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई थी।

‘हाँ, शायद नर्म चीजों पर चोट कम लगती हो?’ उसने कहा।

मैंने देखा उसकी आँखों में शरारत थी।

मैंने कहा- अच्छा, तो फिर एक दिन मैं भी बदला लूँगी, और तुम्हारी भी किसी नर्म चीज़ पे मारूँगी।

और हम दोनों हंस दिये।

इतने में सर आ गए और हमारी बातचीत बंद हो गई।

उसके बात तो अगले दो तीन दिनो में ही अमित ने जान बूझ के मेरे वक्ष के उन्नत उभारों को छूआ, मगर मैंने कभी भी बुरा नहीं माना।
इससे उसकी हिम्मत बढ़ गई और एक दिन जब सर बाहर खड़े चाय पी रहे थे तो अमित ने बड़े आराम और इतमीनान से सरेआम ही मेरे चूचों को पकड़ लिया।

‘अमित ?!’ मैंने बड़े हैरान हो कर कहा- हाऊ डेयर यू?

पर मैंने उसका हाथ अपने स्तनों से हटाने की कोई कोशिश नहीं की।

‘बस यार… दिल किया छू कर देखने को, तो छू लिया।’

‘और अगर सर देख लें तो या मम्मी आ जाएँ तो?’ मैंने कहा।

‘तो जब सर या तुम्हारी मम्मी न हों तो तब छू के देख लिया करूँ?’ उसने मुस्कुरा के कहा।

मेरी तो हंसी निकल गई।

बस मेरे हंसने की देर थी और उसने झट मेरे दोनों बूब्स पकड़ के दबा दिये।

मुझे भी अच्छा लगा।

उसके बाद तो यह सिलसिला ही चल निकला।

2-4 दिनों बाद अमित ने मुझे किस करने की इच्छा जताई।

मैंने कहा- मगर करेंगे कहाँ?’

तो वो बोला- ऐसा करते हैं, सर के जाने के बाद भी आधा घंटा रिवीजन किया करेंगे, उस दौरान अगर मौका मिल गया तो किस कर लेंगे’

मुझे आइडिया पसंद आ गया।

अगले ही दिन हमने आधा घंटा और रिवीजन की, मगर मौका नहीं मिला क्योंकि सर के जाने के बाद मम्मी आ कर बैठ गई थी।

मगर उससे अगले दिन करीब सात बज कर बीस पच्चीस मिनट पर दूध वाला आ गया, और जैसे ही मम्मी दूध लेने गई, अमित ने मुझे आँख से इशारा किया तो मैंने भी अपना चेहरा उसके पास कर दिया।

अमित ने बड़े ही प्यार से मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिये और मेरे नीचे वाले होंठ को अपने दोनों होंठों में दबाया।

यह एक बहुत ही अलौकिक एहसास था, मेरे जीवन का पहला चुम्बन था, और अमित का भी !

तो हम दोनों के जैसे बदन में बिजलियाँ कौंध गई, हमारे रोंगटे खड़े हो गए, चेहरे से गर्मी निकलने लगी और न जाने क्या क्या हो गया।

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

खैर अब जब बूब्स दबाना और चूमाचाटी करना रोज़ की बात हो गई तो हम यह सोचने लगे कि अब आगे कब, क्या और कैसे किया जाए।

फिर एक दिन अमित अपने मोबाइल में एक फिल्म लेकर आया और उसे मेरे मोबाइल में डाल कर बोला- रात को देखना, बहुत बढ़िया चीज़ है।

रात को सोने से पहले मैंने अपने कमरे में बेड पे लेट कर वो वीडियो देखी।

वो एक ब्लू फिल्म थी जिसने मेरी सारी शंकाएँ दूर कर दी।
अब मुझे सब पता चल गया कि रात को मम्मी और पापा क्या करते हैं।

मैंने वो वीडियो 4-5 बार देखी और अपनी चूत को बहुत मसला, मगर जो कुछ मेरी हालत हो रही थी वो मेरे बस से बाहर थी।

मैं ये सब कुछ अमित के साथ करना चाहती थी।

अगले दिन अमित ने मुझसे उस वीडियो के बारे में पूछा तो मैंने बता दिया कि मुझे वीडियो बहुत अच्छी लगी।

‘जो वीडियो में देखा, मेरे साथ करोगी?’ अमित ने पूछा।

‘सच कहूँ अमित , मैं तो हर पल वो सब करना चाहती हूँ, जब से वो वीडियो देखी है, मुझे हर पल बेचैनी सी लगी रहती है, मुझे समझ में नहीं आता मैं क्या करूँ?’ मैंने अपनी हालत बताई।

‘मेरा लण्ड देखेगी?’ अमित ने पूछा।

‘हाँ, पर कैसे?’ मैंने बड़ी उत्सुकता से पूछा।

‘जब तेरी मम्मी दूध लेने जाएगी न, तब मैं बाथरूम में घुस जाऊँगा और अंदर जाकर निकाल लूँगा, जब मम्मी दूध वाले के पास होगी तो तुम बाथरूम का दरवाजा खटखटा कर खुलवा लेना और देख लेना!’ अमित ने प्लान बताया।

वैसे तो मैंने उसकी पैंट के ऊपर से ही उसका लण्ड कई बार पकड़ के देखा था, पर बिल्कुल सामने देखना और बात थी।

प्लान के मुताबिक जब मम्मी दूध का बर्तन लेने रसोई में गई तो अमित झट से बाथरूम में घुस गया और जब मम्मी बर्तन लेकर घर से बाहर निकली तो मैंने झट से जाकर बाथरूम का दरवाजा खोला, और अंदर का नज़ारा देख कर तो मैं दंग ही रह गई।

अमित बिल्कुल नंगा हो कर खड़ा अपना लण्ड हिला रहा था।

उसने मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा और कहा- आओ, और इसे छू कर देखो।

मैं आगे बढ़ी और मैंने उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ा।

अमित ने मुझे बाहों में जकड़ लिया और हम दोनों ने एक दूसरे के मुँह से मुँह जोड़ दिये।

हम दोनों ने आँखें बंद कर ली, अमित का लण्ड पूरा सख्त हो चुका था।

अमित ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी जिसे मैं बड़े मज़े से चूस रही थी कि तभी ड्राइंगरूम के दरवाजे के खुलने की आवाज़ आई।

मतलब मम्मी दूध लेके आ चुकी थी।

मैं बिजली की तेज़ी से अमित से अलग हुई और जाकर अपना बैग समेटने लगी।

दूध को फ्रिज में रख कर मम्मी हमारे कमरे में आ गई।

मेरे तो होश उड़े पड़े थे, जैसे दिमाग सुन्न हो गया हो।
मगर किसी को कुछ पता नहीं चला।

अगले दिन अमित ने मुझसे कहा- तूने तो मुझे नंगा देख लिया है, अब तू मुझे किस दिन नंगी हो कर दिखाएगी?

मैंने कहा- कल को, मगर मैं पूरी नंगी नहीं हो सकती, अगर सिर्फ अपनी स्कर्ट उठा कर दिखा दूँ तो चलेगा?
‘नहीं मैं तुझे पूरी नंगी देखना चाहता हूँ, जैसे मैंने किया वैसे ही तू कर दे।’ उसने स्कीम बताई।

मैंने कहा- ठीक है।

मगर उस दिन दूध वाला लेट हो गया और अमित को मन मसोस कर जाना पड़ा।

उससे अगले दिन मैं स्कर्ट पहन के बैठी थी और मैंने नीचे से कच्छी नहीं पहनी थी।

जब सर सिगरेट पीने बालकनी में गए, तो मैंने बिना कोई देर किया अमित के सामने अपनी स्कर्ट उठा दी। अमित ने बड़े प्यार से मेरी जांघों हाथ फेरते हुये, बिना पलक झपकाए मेरी चूत को देखा और अपने हाथ की उँगलियों से मेरी चूत के होंठों को सहलाया।

मुझे बहुत मज़ा आया और मैं चाह रही थी कि अमित ऐसे ही करता रहे पर उसने थोड़ा सा सहलाने के बाद छोड़ दिया और मेरी स्कर्ट नीचे कर दी।

हम फिर पढ़ने बैठ गए।

मगर अब ये सब हम दोनों की बर्दाश्त से बाहर होने लगा था।
हम दोनों सेक्स का आनन्द लेना चाहते थे।

अमित रोज़ ही कोई न कोई नई वीडियो दे जाता और मैं उसे देख के रात रात भर तड़पती रहती।

करीब दस दिन बाद हमें एक ऐसा मौका मिला जिसने हमारे सारे अरमान पूरे कर दिये।

जब हमारे तिमाही पेपर शुरू हो गए तो उन दिनों तो वैसे ही पढ़ाई का ज़ोर बहुत ज़्यादा था।

उन दिनों में ही हमारे पड़ोस के अंकल घर जगराता आ गया।

मतलब यह था कि सारे मोहल्ले वाले जाएँगे।

मैंने तो बहाना बना दिया कि मैं नहीं जाऊँगी, मैं तो घर बैठ कर पढ़ूँगी।

अमित ने भी मम्मी से कहा कि वो हमारे घर बैठ कर ही पढ़ेगा और जाते वक़्त अपनी मम्मी पापा के साथ अपने घर चला जाएगा।

जगराते वाली रात सब करीब 9 बजे चले गए।

घर में मैं, अमित और मेरा छोटा भाई ही थे।

पहले तो हम पढ़ते रहे और इन्तज़ार करते रहे कि कब मेरा भाई सोये।

जब वो सो गया तो हम दोनों मेरे कमरे में आ गए।

आते ही अमित ने मुझे बेड पे गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर लेट गया।

हम दोनों एक दूसरे खा जाना चाहते थे।

चूमा चाटी करते करते हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिये।

अमित का सख्त लण्ड मेरे पेट पे मुझे महसूस हो रहा था।

उसने बड़ी बेदर्दी से मेरे बूब्स दबाये, उन्हें चूमा चूसा, चाटा, दाँतों से काटा।

मैं तो बस चाहती थी कि अमित मुझमें समा जाए।

बस थोड़ा सा प्यार करने के बाद ही अमित ने मेरी टाँगें चौड़ी की। मैंने अमित का लण्ड अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत पर रखा, जो न जाने क्यों इतनी गीली हो रही थी।

अमित ने थोड़ा सा ज़ोर लगाया और हम दोनों दर्द से तड़प उठे, क्योंकि अमित और मैं दोनों कुँवारे थे।
मगर यह एक ऐसा मौका था जो शायद दोबारा हमे न मिलता।

थोड़ा सा सहने के बाद अमित बोला- फिर से डालूँ?

मैंने अमित के दोनों कंधो पे अपने हाथ रखे और अपनी टाँगों को उसकी कमर के गिर्द लिपटा कर बोली- आराम आराम से, धीरे धीरे से डालो, मुझे दर्द हो रहा है।

‘दर्द तो मुझे भी हो रहा है।’

उसने फिर कोशिश के मगर जैसे ही अंदर डाला, मेरी तो चीख निकल गई, मेरी आँखों में आँसू आ गए।

हमने कई बार कोशिश की पर अमित का लण्ड मेरी चूत में नहीं जा पा रहा था।
फिर अमित बोला- ऐसा कर किचन से कोई तेल ले कर आ।

मैं किचन में गई और सरसों का तेल लेकर आई।

अमित ने काफी सारा तेल अपने लण्ड पर लगाया और मेरी चूत में भी लगाया।

उसके बाद मैंने अपने हाथ से उसका लण्ड अपनी चूत पर सेट किया और अमित से कहा- ऐसा कर, एक ही झटके में अंदर डाल, बार बार के दर्द सहने से अच्छा है कि एक बार ही दर्द हो जाए।

अमित थोड़ा नीचे झुका, उसने मेरे होंठों से अपने होंठ लगाए और अपनी ताकत लगा कर अपना लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ना शुरू कर दिया।

मैं तो फूट फूट के रो पड़ी।

अमित के चेहरे पर भी दर्द के भाव थे, मगर तेल लगाने से यह ज़रूर हुआ कि उसका पूरा लण्ड फिसलता हुआ सा मेरे बदन में समा गया।

उसके बाद हम कितनी देर वैसे ही लेटे रहे।

अमित मुझे चुप कराता रहा।

जब मैं थोड़ा सयंत हुई तो अमित ने अपना लण्ड बाहर निकाला, उसके लण्ड के ऊपर से खून निकल रहा था और मेरी चूत के अंदर से।
अमित मुझे उठा कर बाथरूम में ले गया।
वहाँ हमने अपने आप को पानी से अच्छी तरह से धोया।
साफ़ होकर हम बाहर निकले और आकर फिर बेड पर लेट गए।
मगर अभी हमारी संतुष्टि नहीं हुई थी, उसने फिर से वही चूमना चाटना शुरू कर दिया।

दो मिनट बाद हम फिर से तैयार थे।

अबकि बार अमित ने दोबारा वैसे ही तेल लगाया और जब डाला तो बड़े आराम से उसका लण्ड मेरी चूत में समा गया।

‘अब ठीक है?’ अमित ने पूछा।

‘हाँ, अब दर्द भी कम है।’
उसके बाद तो अमित पूरे जोश में आ गया।
मैंने भी उसका भरपूर साथ दिया।

हम एक दूसरे के होंठ, गाल, ठुड्डी, कान, गला, छाती और न जाने कहाँ कहाँ हम एक दूसरे को चाटते, काटते रहे।

बेशक हम दोनों को अभी भी दर्द हो रहा था पर आज तो हमने अपनी मंज़िल को पाना ही था।

मैंने अपनी पूरी ताक़त से अमित को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और वो पूरी ताक़त से अपना लण्ड मेरी चूत में अंदर बाहर कर रहा था।

मेरा सारा मुँह उसने चाट चाट कर अपने थूक से गीला कर दिया था, पर मुझे वो भी अच्छा लग रहा था।

मेरे सारे बदन में एक अजीब सी बिजली दौड़ रही थी, मेरी आँखें बंद होने लगी, मुझे लगा जैसे आज मेरी जान मेरी चूत के रास्ते से बाहर निकाल जाएगी।

अमित का बदन पसीने से भीग गया था और उसका पसीना मेरे बदन पे टपक रहा था।

मैं भी पसीने से तर बतर थी, क्योंकि मैं भी नीचे से अपना ज़ोर लगा रही थी।

अमित के हर शॉट के साथ मैं अपनी कमर ऊपर उठती जा रही थी, जैसे मैं चाहती थी कि सारा अमित मेरी चूत में घुस जाए और उसके बाद मैंने अमित के होंठ को काट खाया- आआहहहहह राहूऊल मैं मर जाऊँगी।

यह कह कर मैं तो अकड़ गई।

अमित ने मेरे बाएँ बूब पर बड़े ज़ोर से काटा मगर मेरी तो जान निकाल दी उसने।

उसके बाद मैं तो बेड पे धड़ाम से गिरी, अमित का लण्ड बाहर निकल गया, उसने फिर से डाला और फिर चुदाई करने लगा।

मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ रही थी।
‘ओ मेरी जान, मज़ा आ गया, मदरचोद, साली क्या दमदार चूत है तेरी, तेरी क्या मैं तो तेरी माँ की चूत में चोद दूँ, साली कुतिया, बोल अपनी माँ चोदने देगी, साली के कितने बड़े बड़े बोबे हैं, भैण की लोड़ी साली हिला हिला के दिखाती है अपने यार को, मादरचोद आज तेरी बेटी चोद दी कल को तुझे भी ऐसे ही चोदूँगा।’

अमित पता नहीं क्या क्या बड़बड़ा रहा था और मैं उसकी हर बात में हाँ में हाँ मिलती जा रही थी।

उसके बाद तो उसने बहुत ही बेदर्दी से मुझे चोदा।
हम दोनों के फिर से खून निकलने लगा।
मगर अब खून की परवाह किसे थी।

फिर अमित ने अपना गरम गरम वीर्य मेरी चूत में छुड़वाया।
वो मेरे ऊपर ही गिर गया।
मैं उसकी बेहद तेज़ दिल की धड़कन अपने सीने पे महसूस कर रही थी, जैसे उसका दिल बाहर ही निकल आया हो।

न जाने कितनी देर हम ऐसे ही लेटे रहे।
जब हम थोड़ा संभले तो मैंने अमित से पूछा- यह बता तू मेरी मम्मी के बारे में क्या कह रहा था?

अमित बोला- सॉरी यार, जोश में पता नहीं क्या क्या कह दिया। पर एक बात तो तू मानेगी, कि तेरी मम्मी है बड़ी मस्त, गजब की सेक्सी औरत है, या नहीं?

मैंने कहा- हाँ तेरे पापा कौन से कम है, बहुत ही शानदार मर्द हैं।

कह कर हम दोनों हंस दिये।

कुछ देर आराम करने के बाद हमने अपने अपने कपड़े पहने।

मैंने एक विस्पर पैड लगा लिया और थोड़ी सी काटन और दवा अमित को लगाने को दी।

फिर हम बाहर आकार ड्राइंग रूम में बैठ के टीवी देखने लगे और अपने मम्मी पापा का इंतज़ार करने लगे।

बेशक अमित और मुझे दोनों को गुप्तांगों में दर्द हो रहा था पर दोनों के चेहरे पे एक संतुष्टि भी थी कि आज हम दोनों पूर्ण मर्द और औरत बन गए थे।

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