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Massage Girl in Wardha: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Wardha who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Wardha that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Wardha massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Wardha who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Wardha massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Wardha massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Wardha who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Wardha employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Wardha helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Wardha

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Wardha at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex Stories

वो मेरे पड़ोस में रहने Sex Stories वाली 18 साल की लड़की है जो कक्षा 11 या 12 में पढ़ती है और शाम में कॉलोनी के बाकी बच्चों के साथ छुपा छुपी खेलते समय अक्सर मेरे घर में या आस-पास आकर छुप जाती है.

एक शाम मैं अपने बेडरूम में लेटा था और मेरे परिवार वाले शहर से बाहर गए हुए थे. मैं घर पर अकेला ही था..

अचानक देखा कि कोई मेरे बेडरूम की खिड़की में चढ़ गया है, थोड़ी देर तक तो मैंने ध्यान नहीं दिया फिर कुछ हलचल हुई तो परदा हटा के देखा तो चाँदनी थी..

उसने मुझे देखते ही अपने होंठों पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा किया.
मैंने शरारत में परदा इतना हटाया कि वो मुझे अंदर अच्छी तरह देख सके..
और मैं अपने डबल बेड में फिर लेट गया…

वहाँ से चाँदनी खिड़की में खड़ी साफ दिख रही थी, उसकी फ्रॉक घुटने के ऊपर तक की होने की वजह से उसकी सुडौल जांघें और थोड़ी सी चड्डी भी दिख जा रही थी तो मेरा लंड खड़ा होने लगा. मैंने पहले तो सोचा कि मेरे से 15 साल छोटी लड़की है, कुँवारी है, मुझे गंदा नहीं सोचना चाहिए…

पर दिल और लंड मेरे दिमाग़ पर हावी हो गये, और उसको देख कर मैंने अपना लंड मसलना शुरू कर दिया…
मैंने देखा कि जल्दी ही चाँदनी उसके छुपा-छुपी के खेल में नहीं मुझमें ज़्यादा ध्यान दे रही थी..
इससे मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैं धीरे से अपना पजामा नीचे करके सिर्फ़ लौड़े के बालों तक करके लंड ऊपर से ही दबाने लगा..
मेरे खेल में उसकी रुचि देख कर फिर मैं पजामा पूरा उतार कर लंड हाथ में छुपा कर लेट गया..

वो शायद मेरे लौड़े को देखने को बेताब हो रही थी और जब मैंने लौड़ा छुपाए रखा तो उसने इशारे से हाथ हटाने का आग्रह किया. तो मैं समझ गया कि लड़की गर्म हो गई है.

उसकी बेताबी से मैं समझ गया कि मेरी शरारत से मेरी किस्मत खुल गई है.

उसका इशारा पाते ही मैंने अपना लौड़ा पूरा उसके सामने कर दिया. उसने शायद पूरा खड़ा और चोदने को तैयार लंड पहली बार देखा तो उसका मुँह खुला और आँख फटी रह गई…

मैं मौका देख कर खिड़की के पास जा कर मुठ मारने लगा और लौड़े को उसको हर तरफ से दिखाने लगा और जल्दी ही मैं झड़ गया और मेरा वीर्य सीधे पिचकारी मारता हुआ उसके घुटने में जा लगा…

वो मेरे चेहरे और लंड को मिले सुकून से मुस्कुरा दी तो मैंने उसको बोला- अंदर आ जाओ..

वो खिड़की से उतर के थोड़ी देर बाद चोरी से मेरे घर अंदर आ गई जिसके लिए मैंने पहले से ही दरवाज़ा खुला रखा था..

उसके आते ही मैंने दरवाज़ा बंद किया तो वो बोली- आपका ‘वो’ कितना सुंदर है..!

तो मैंने पूछा, तो उसने बताया कि उसने ‘यह’ पहली बार देखा है, पर उसकी दूसरी सहेलियाँ उनके बॉय-फ्रेंड्स के साथ इससे खेलती हैं और बताती है कि खूब मजा आता है..

तो मैंने भी उसको सीधे बेड रूम में ले जाकर बेड पर बिठाया. मैं लेट गया और बोला- तुम भी इससे खेलो, तुम्हारी सहेलियाँ ठीक कहती हैं..

उसने डरते डरते मेरे लंड को पजामे के ऊपर हाथ में लिया तो मैं समझ गया कि वो पहली बार कर रही है और डर भी रही है…
तो मैंने पजामा उतार के उसके हाथ को अपने से पकड़ के लौड़े को कस कस के मसलने लगा तो वो डर के बोली- इतनी ज़ोर से?
तो मैंने कहा- मजा तो आ रहा है ना…?
मैंने उसको बोला- चाँदनी, देख मैं तेरे सामने बिना कपड़ों के नंगा पड़ा हूँ तो तू भी तो कपड़े उतार के दिखा..
तो बोली- डर लगता है..
मैं बोला- किससे?..मुझसे..?
मैं बोला- तुम तो अपनी मर्ज़ी से अंदर आई हो तो मुझसे डर कैसा..
वो बोली- कोई देख लेगा!
तो मैं बोला- घर पूरा बंद है, अगर हम-तुम किसी को नहीं बोलेंगे तो किसी को पता नहीं चलेगा!
तो बोली- शीला कहती है कि बच्चा हो जाता है!

तो मैं समझ गया कि इसको पूरा पता नहीं है…

मैं बोला- अगर तुम मुझ पर भरोसा रखो और मैं जैसा बोलूँ तुम वैसा करो तो ना किसी को पता चलेगा, न ही बच्चा होगा, उल्टे तुमको बहुत मजा आएगा.
तो बोली- कैसे?
मैंने कहा- पहले कपड़े उतारो…

उसने शरम से मुँह ढक लिया तो मैंने पहले फ्रॉक के नीचे ही उसकी पेंटी उतार दी और उसकी गान्ड मसालते हुए फ्रॉक की ज़िप खोल कर फ्रॉक उतार दी.

वो पहली बार किसी मर्द के सामने नंगी होने की वजह से शरमा गई थी तो मैंने कहा- देख मैं भी तो नंगा हूँ और हम दोनों के अलावा कोई और नहीं यहाँ!

और मैंने उसको आईने में दिखाया- देख हम दोनों नंगे कितने सुंदर दिख रहे हैं!

और मैंने उसको अपना लौड़ा पकड़ा दिया, उसके होंठ चूसने लगा. उसकी 32 क्स आकार के चूचे टेनिस बॉल के जैसे कस गये थे..

उसकी जवानी से मेरा लंड फिर से खड़ा हो कर कूद रहा था..

वो मेरे लंड को आगे पीछे करने के बजाए दबा रही थी, मैं गरम हो कर बोला- चाँदनी, चूस ना मेरा!
तो वो बोली- ‘क्या’
तो मुझे लगा कि पहले इसको समझा देना ज़रूरी होगा कि सेक्स कैसे करते हैं ताकि मजा आए.

मैंने उसको बताया कि सेक्स में लड़का और लड़की नंगे हो कर जो चाहे और जैसे चाहे करते हैं और कोई मना नहीं करता.
तो बोली- फिर बच्चा हो जाता होगा?

तो मैंने समझाया- हम लोग जो कर रहे हैं जैसे तुम मेरे लंड को दबा रही हो, या अगर इसको चूसोगी और मैं तुम्हारी चूची चूसूंगा या होंठ को चूमूंगा और चुसूंगा तो बच्चा नहीं होगा. यह चुदाई के पहले का खेल है जिसको ‘फोर-प्ले’ कहते हैं. जब लन्ड को चूत में घुसा कर असली चुदाई होती है, चुदाई करते करते जब लंड अपना पानी छोड़ता है और साथ में चूत भी पानी छोड़ती है तब बच्चा होने की संभावना होती है और अक्सर समझदार लोग चोदने के बाद झड़ने के समय लंड चूत से निकल के झाड़ते है, जैसे मैंने मुठ मार के किया. ऐसा करने से बच्चा नहीं होता और सेक्स का पूरा मजा आता है.

तो वो बोली- वो तो ठीक है! पर मेरी चूची आप क्यूँ चुसोगे? वो तो छोटे बच्चे चूसते हैं और मैं आपका ये ‘लंड’ क्यूँ चूसूंगी?
तो मैं बोला- करके तो देखो कितना मजा आता है.

तो शायद वो पूरी तरह राज़ी नहीं हुई, तो मैंने एक ब्लू फिल्म की सीडी लगाई और उसको लेकर बिस्तर में लेट गया…

फिल्म में लड़की ने लड़के के झूलते हुए लौड़े को पहले निकाला फिर हाथ से खेल खेल के बड़ा किया तो वो बोली- आपका तो पहले से ही बड़ा है…

फिर फ़िल्म की लड़की उसके लंड के सुपारे को चूसने लगी लॉली-पोप जैसे और उसके लंड से खेलने लगी तो उसने भी मेरा लौड़ा पकड़ा और चूसने के लिए मुँह नीचे किया तो मैंने उसको बोला- तुम पहली बार करोगी तो रूको!

और मैंने झट से लंड की टोपी में खूब सा शहद लगाया और उसको चूसने को दिया. उसको टोपी चूसने में मजा आने लगा तो मैंने धीरे धीरे पूरा 6 इंच का लंड उसके मुँह में घुसाया और अब फिल्म वाले के जैसे चाँदनी का मुँह चोदने लगा..

फिल्म में वो लोग 69 करने लगे. फिर लड़का लड़की को बिस्तर में किनारे लिटा कर उसकी चूची दबाते हुवे उसकी चूत चाटने लगा तो वो मुझको बोली- आप भी ऐसे करो ना…

मैं मन ही मन सोच रहा था कि मैं पक्का खिलाड़ी इस नई चिड़िया को तो चोद चोद के रंडी बना दूँगा…

मैंने उसकी ब्रेड के बन जैसी कुँवारी चूत के होंठ खोल कर उसमें भी शहद डाला, फिर 69 करने लगा…

मैं ऊपर चढ़ कर उसके मुँह को चोद रहा था और उसकी चूत भी चाट रहा था और वो मज़े से सिसकियाँ भर रही थी…

और फिर झर भी गई…

अब उसका ध्यान टीवी पर गया जहाँ अब चुदाई शुरू हो गई थी, लड़की लड़के के ऊपर चढ़ कर उसको चोद रही थी और उसको बार बार अपनी चूची चुसवा रही थी! बीच बीच में लड़के का लण्ड चूत से फिसल के निकल भी जाता था, तो वो दोबारा घुसा कर चोदने लगती.

तो वो बोली- चलो. हम भी ऐसा ही करते हैं!

मैं समझ गया कि चाँदनी अब चुदने के लिए पूरी तरह तैयार है पर उसको यह नहीं अंदाज़ है कि वो फिल्म की लड़की कितना चुद चुकी है, और इसकी पहली बार चुदने वाली कसी चूत! काफ़ी अंतर है दोनों में!

तो मैंने उसको बिस्तर के किनारे पर लिटाया, उसको उसके दोनों पैर कंधे तक मोड़ कर पकड़ने को कहा. लण्ड में एक कॉण्डम लगाया और उसको बताया कि हम जब चुदाई करंगे और अगर ग़लती से भी मैं झड़ने के समय चूत से लण्ड ना भी निकालूं तो मेरा पानी जो कि तुम्हारे ऊपर मूठ मारते समय गया था, वो इसी के अंदर रह जायगा और किसी भी हालत में बच्चा नहीं होगा.

तो वो खुशी से मुझे चूमने लगी और बोली- आप कितने समझदार हो… प्लीज़ अब जल्दी करो ना…

मैं सोच रहा था कि मेरी समझ तो इसको अभी पता चलेगी जब इसकी चूत फटेगी और किस्मत साथ देगी तो दस मिनट बाद इसकी गाण्ड भी मारूँगा…

मैं लण्ड के सुपारे को उसकी चूत के दाने में रगड़ने लगा, साथ साथ उंगली चूत में उंगली घुसा कर रास्ता बनाने लगा और इन सब में मैं जोकि अब तक दस के करीब चूत चोद चुका था और पिछले 14 साल से किसी ना किसी की चूत चोद रहा हूँ, भी कंट्रोल में मुश्किल से था, मैंने अब एक हाथ से लण्ड पकड़ कर उसकी चूत में सुपारे को सही जगह में बिठाया और उसको अपनी पूरी पकड़ में लेकर चूची चूसते हुए बोला- चाँदनी, अब मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुसेगा और तुझे खूब मजा भी आएगा और अगर तुझे दर्द हो तो अपनी टाँगे ऊपर की तरफ उठा लेना.

तो वो बोली- ठीक है!

और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया. फिर एक करारे झटके से अपने लण्ड को उसकी चूत में आधा से ज़्यादा पेल दिया.

वो चीखी पर आवाज़ दब गई, दर्द हुआ तो टाँगें उठा ली और मैंने उसकी आँखो से अचानक हुए दर्द से निकले आँसुओं को चाटते हुए उसको पूछा- कैसी हो…

तो वो बोली- आपने तो कसाई की तरह चाकू चला दिया, मैं तो बस मरते मरते बच गई…
मैंने बोला- तो चलो निकल लेता हूँ!
तो वो बोली- नहीं, थोड़ा रूको!

तो मैंने जितना घुसा था, उतने में ही लौड़े को आगे पीछे करना चालू कर दिया. जिससे उसको आराम लगा तो मौका देख कर दूसरे और तीसरे तेज़ झटके में में पूरा 6 इंच से भी बड़ा लौड़ा उसकी चूत के अंदर कर दिया और उसकी गान्ड की गोलाइयों को मसलते हुवे उसकी जाँघ सहलाने लगा.

तो वो बोली- निकालो-निकालो! मैं मर जाऊँगी…
तो मैंने कहा- चाँदनी, जब सब हो गया तो अब निकालने का क्या मतलब, अब तो तुम वो फिल्म वाली जैसे मज़े लो!

और मैंने उठ कर उसको उसकी चूत में घुसा मेरा लौड़ा दिखाया तो उसको विश्वास नहीं हुआ कि मेरा पूरा का पूरा लौड़ा घुस चुका है.

मैंने अब तक बहुत सब्र से काम लेते हुए अपने लौड़े को कुँवारी चूत में घुसाया था, पर अब मेरा सब्र साथ नहीं दे रहा था और मैंने उसकी चूत में धक्का-पेल चूदाई शुरू कर ही और उसको बाँहों में कस के जकड़ कर उसकी चूचियों को करीब करीब चबाते हुए खूब चोद डाला.

और वो दर्द और मज़े में चीखे ज़ा रही थी और मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ चोद रहा था… कह सकता हूँ कि खूब बेरहमी से चोद रहा था.उसकी कुँवारी चूत चोदने में मुझे स्वर्ग का मजा मिल रहा था क्यूंकि चोदा तो 10-11 चूतों को था पर इतनी जवान, इतनी कमसिन, इतनी कम उम्र और इतनी फ्रेश कोई नहीं थी. उसकी चूत फट गई थी, मुझे मालूम था कि अब रुकुंगा तो वो साथ नहीं देगी.

और बेरहम चुदाई में हालांकि उसको दर्द हुआ पर जैसे ही वो पहली बार झड़ी, उसको मजा आने लगा और अब तो जब मैं झरने को था तो वो 3 बार झर चुकी थी.

मैं जैसे झरने को आया, उसकी चूत में दना-दन 5-6 ज़ोर के धक्के दिए और उसके ऊपर ही लुढ़क गया, जिससे वो भी एक और बार झड़ गई.

मैंने अपना लड़ पूरा उसकी चूत में घुसाए रखा जब तक कि वो अपने आप ढीला होकर न निकल गया…

उसने मुझसे कहा- तुमने यह क्या किया?

मैंने बोला- मेरी जान चाँदनी, आज मैंने तुमको कली से फूल बना दिया! अब इस फूल की खुशबू से तुम किसी भी भंवरे (लौड़े) को अपने काबू में कर सकती हो!

वो शरमा कर बोली- आपके ने तो मेरी जान निकाल दी और दूसरो का कैसे काबू में होगा?

तो मैंने कहा- यही तो राज़ की बात है, अब मेरा भी तुम्हारे काबू में है…

मैंने फिर उठ कर कॉंण्डम उतारा और उसको बताया- बाहर की तरफ खून और चिकनाई है, वो उसकी चूत का पानी है, और अंदर का पानी मेरे लौड़े का है, और चिंता की बात नहीं, अब बच्चा नहीं ठहरेगा.

मैंने चाँदनी को कहा- रानी, मैंने कितनी चूत और लड़की चोदी हैं पर जो मजा तुमसे मिला है वो किसी में नहीं था.

और मेरी बेरहमी के लिए माफी भी माँगी तो वो बोली- आपने मुझे कली से फूल बनाया, आप तो मुझे अब मार भी डालो तो मुझे कोई शिकवा नहीं होगा. आप तो मेरे स्वामी हो! मुझे जैसा और जितना चाहो, चोदो, जब चाहे चोदो!

इस बीच टीवी में जो सीन था वो देखकर चाँदनी फिर टीवी से चिपक गई. वहाँ एक नीग्रो एक गोरी लड़की के चूचे बेरहमी से खा रहा था और उसकी गाण्ड में लण्ड घुसाने की कोशिश कर रहा था. लड़की कुतिया की अवस्था में खड़ी थी और वो उसके गाण्ड के छेद को पहले चाटने लगा.

तो चाँदनी बोली- यह क्या करेगा अब?
मैंने कहा- मेरी जान, सेक्स में इतनी ज़्यादा वेराइटी है कि अगर हम लोग अलग अलग स्टाइल से करें तो दिन भर चुदाई की जा सकती है.
तो वो बोली- तो चोदिये ना मुझको सब तरीके से!
मैं बोला- रानी अभी तुम 30 मिनट से यहाँ चुद रही हो, और मुझे तो खुशी होगी कि रात भर तुमको चोदूँ पर अभी घर जाओ, कल जल्दी आ जाना तो 4-5 तरीके से चोदूंगा.
तो बोली- इसको तो देखो!

वो नीग्रो उस गोरी लड़की की गान्ड बड़ी बेरहमी से चोद रहा था और चाँदनी अब यह भी करवाना चाह रही थी, मैंने उसको कहा- कल जब शाम को खेलने निकलो तो याद रखना कि अब तुम बच्चों वाला नहीं वयस्कों वाला खेल खेलोगी, जिसके लिए आने के पहले चूत और गाण्ड अच्छे से धो लेना.
उसने खुश होकर कपड़े पहने और चली गई.

मैं खुश था कि मैंने ऐसी लड़की चोद दी जिसकी चूत में अभी तो अच्छी तरह बाल भी नहीं आए हैं और कल यह खुद से गाण्ड भी मरवाएगी.

उसके बाद तो मैंने 3 महीने तक चाँदनी को अलग अलग तरीके से चोदा, उसकी गान्ड मारी और सेक्स में संभव हर काम किया.

उसको भी फिर किसी और भी लौड़े का शौक लगा और फिर एक बार किसी अमीर ज़ादे को फंसाया और उसने उसको चोदा.

और एक बार होटल ले जा कर अपने 4 दोस्तों के साथ उसको चोदा!
मेल करो… Sex Stories

Antarvasna

मैं ऍम बी ए का स्टुडेंट हूँ। मैं जिस कॉलेज Antarvasna में हूँ, वो इस शहर का सबसे मशहूर कॉलेज है। हमारे कॉलेज के बगल में ही हमारे कॉलेज ग्रुप का ही इंजीनियरिंग का भी कॉलेज है। मैंने आपको अपना नाम नहीं बताया मेरा नाम है राज। इंजीनियरिंग की एक मैडम है जिनका नाम अन्नु है, जो कि बहुत ही खूबसूरत है। जब से मैंने यहाँ प्रवेश लिया है और उनको देखा है हमेशा उनको कहीं न कहीं देखता रहता हूँ, कभी कभी वो भी देखती है तो मेरी आँखे उनसे टकराती हैं तो वो मुस्कुरा देती हैं, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ जाती है। उनका फिगर 36-28-34 है जो कि बहुत ही सेक्सी है। वो गोरी तो है ही।

मैं हमेशा उनके लंच टाइम पर कैंटीन पहुच जाता और उनको देखने लगता। मुझे ऐसा लगने लगा था कि वो भी मुझे समझ रही है कि मैं उन्हें पसंद करने लगा हूँ, उनकी उम्र भी तो मेरे बराबर ही थी, वो अभी 24 की है, बी.ई ख़त्म करके ही पढ़ाना शुरू कर दिया है। हमेशा वो बहुत कसा हुआ ड्रेस पहनती है जिससे उनके पूरे उभार दीखते हैं। जिन्हें देख कर कैंटीन में ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। अब मैं हमेशा उनके पास जाने की सोचने लगा, मुझे जल्दी ही उनके पास जाने का मौका मिल गया।

एक दिन कॉलेज छूटने के बाद मैं अपनी बस में बैठ गया। आज बहुत भीड़ थी बस में। मैं डबल सीट पे बैठा था, मेरे साथ मेरा एक जूनियर बैठा था। तभी मुझे अन्नु मैडम दिखी वो आकर खड़ी हो गई। जगह नहीं थी तो मैंने अपने जूनियर को उठाया और बोला- मैडम यहाँ बैठ जाइये!
तो वो तुंरत आकर बैठ गई और बोली- थैंक यू!
मैं सिर्फ़ मुस्कुरा दिया।

हम लोग बीच में थे और चारो तरफ़ स्टुडेंट खड़े भी थे, सो हम लोग दिखाई नहीं दे रहे थे। पर वो बाहर साइड थी तो उन प्रॉब्लम हो रही थी। बार बार उन्हें किसी से धक्का लगता तो उन्होंने बोला- प्लीज़ आप बाहर साइड आ जाइये, मुझे प्रॉब्लम हो रही है।
तो मैंने बोला- ठीक है आप अन्दर आ जाइये।

फिर वो अन्दर होके बैठ गई। बस जब भी मुड़ती तो मैं उनके ऊपर या वो मेरे ऊपर आती और हम लोग सॉरी बोलते।

अब मैंने अपना एक हाथ ऐसे कर लिया कि जब भी बस मुड़ती तो मेरी 2-4 ऊँगलियाँ उनकी चुचियों से टकरा जाती तो मैं उनको देखता वो मुस्कुरा देती। मैं समझ गया लाइन साफ़ है, बस मौका ढूंढो और चोदो। अब मैंने अपना एक हाथ उनकी जांघों पर रखा और थोड़ा सहलाया तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ के दबा दिया और मुझे रोक लिया, तभी बस रुकी उनका स्टाप आ गया तो उन्होंने बोला- उठो मुझे जाना है।
मैंने बोला- मुझे भी तो उतरना है।
फिर दोनों उतर गए तो वो मुझसे बोली- तुम क्यों उतरे? वैसे तुम्हारा नाम क्या है?
मैंने बोला- मेरा नाम राज है और मुझे आज तो आपसे कुछ लेना है सो मैं भी उतर गया।
तो वो गहरी मुस्कराहट से हुए बोली- क्या लेना है?

मैंने बोला- आपका नम्बर चाहिए, मुझे आपसे बात करनी है, बहुत जरूरी है, अब तो रहा ही नहीं जाता।
वो बोली- तो बोलो क्या बात है, अभी बोल दो।
मैं बोला- नहीं आप नम्बर दीजिये मैं आपको फ़ोन करूँगा।

तो उन्होंने अपना नम्बर दे दिया। मैंने उसी रात उन्हें कॉल किया और रात के 11 से लेकर 1 बजे तक बात करता रहा। उस रात मैंने उन्हें प्रोपोज़ भी कर दिया और दोस्तों मेरी तो किस्मत चमक गई उन्होंने स्वीकार भी कर लिया।

अब तो मैं रात दिन सिर्फ़ उन्हें चोदने के बारे में सोचने लगा। वैसे बस में अब डेली मैं उन्हें कहीं न कहीं जरूर हाथ लगाता तो वो भी बुरा नहीं मानती, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ती।
एक दिन तो मैंने अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया जिससे वो झन्ना गई और तेज़ी से सांस लेने लगी पर कुछ बोली नहीं, इसी तरह दिन निकलते रहे। मैं मौका ही तलाशता रहा।

किस्मत ने भी जल्दी ही मेरा साथ दिया और वो एक दिन मुझे स्टाप पर खड़ी हुई मिल गई उस टाइम बहुत तेज़ बरसात हो रही थी और वो कॉलेज से आई थी। वो पूरी तरह से भीग चुकी थी। मैंने उनसे बोला- मेरा रूम पास में ही है, चलिए, आप यहाँ कब तक खड़ी रहेंगी, पानी भी बंद नहीं होने वाला, पहले तो वो मना करती रही फिर मान गई। मैंने उन्हें अपनी बाईक पे बैठाया और चल दिया। फिर मेरे रूम पहुंचे।

मेरा एक सिंगल रूम है और मैं अकेला ही रहता हूँ, ये उनको भी मालूम था, मैंने उन्हें बैठाया और बोला- आप कपड़े चेंज कर लीजिये। जब तक मैं नीचे से आता हूँ।
फिर मैं उन्हें एक तौलिया देकर चला गया। मैंने दूध लिया फिर अचानक मैं मेडिकल में गया और वहाँ से कंडोम ले लिया सोचा-आज तो मौका नहीं जाने दूंगा चोद के ही रहूँगा।

मैं रूम में पंहुचा तो देखा कि वो अपने बालों को पौंछ रही है, क्या सेक्सी लग रही है। मैं उन्हें पलंग पर बैठा कर दरवाजा बंद करके चाय बनने लगा और वो मुझे ही देख रही थी। मैं चाय बनाकर लाया और पलंग पर बैठ गया। पलंग ज्यादा बड़ा नहीं है सो अच्छे से नहीं बैठ सकते थे।
उन्हें अच्छे से बैठना था तो मैंने बोला- आप आराम से पैरों को फैला कर बैठ जाइए।
तो वो बैठ गई, चाय पीने लगे, मैं उनकी आँखों में देखने लगा तो वो बोली- क्या देख रहे हो?

मैं बोला- देख रहा हूँ आप कितनी खूबसूरत हैं और आज कितनी सेक्सी लग रही है, प्लीज़ आज मुझे कुछ करने दीजिये!
अन्नु बोली- तुम्हारा मतलब क्या है?

मैं बोला- वही जो आप समझ रही हैं, मैं कब से ऐसे मौके की तलाश में था जब आप मेरे साथ अकेली हो और फिर मैं आपको अच्छे से प्यार कर सकूं, आप भी आज मुझे प्यार करिए।
इतना बोलकर मैं उनके गालो को सहलाने लगा तो उन्होंने मुझे रोका तो नहीं पर बोली- नहीं ये ठीक नहीं है।
मैंने बोला- जिसमे आपको और मुझे मजा आए वही ठीक है।

फिर मैं अपने होंठ उनके होंठों के पास ले गया और पास और फिर मेरे और उनके होंठ जो चिपके की चिपकते गए,बहुत ही जोरदार किस्सिंग चालू हो गई, जबान से जबान टकराने लगी, मैं उनकी पूरी जीभ को चबा जाना चाहता था। वो भी मेरी पूरी हेल्प कर रही थी, मैंने उन्हें किस करते करते ऊपर से नंगी कर दिया, चूँकि उन्होंने मेरा रात का सूट पहन लिया था सो ब्रा तो थी नहीं। सो चुचियाँ तुंरत नंगी हो गई, जिन्हें देखकर मैं पगला गया और पागलों की तरह चुचियों को मसलने लगा, जिससे वो भी जल्दी ही उत्तेजित होने लगी।

फिर मैं रुका और उनसे बोला- आज पूरा दिन मैं और आप मिलकर चुदम-चुदाई का खेल खेलते हैं।
अन्नु बोली- अब तुमने मुझे गर्म कर दिया है तो पूरी प्यास तो बुझा ही देना!
मैंने पहले उसे और ख़ुद को पूरी तरह से नंगा कर दिया। उसके दूध जैसे गोरे बदन को देखकर मेरा लंड तुंरत फ़नफ़नाने लगा। मैंने उसकी चूत को देखा जो बालों से ढकी थी।

मैंने एक हाथ से उसके होंठो और एक हाथ से उसकी चूत को मसलना शुरू किया जिससे अन्नु स्स्स्स्स् स्स्स्स स्स्सस्श्ह्ह्ह् आआअ ह्हह्ह्ह्ह् की आवाजे निकलने लगी। उसे अब मजा आने लगा। वो मेरे अंगूठे को चूसने लगी। नीचे मेरा हाथ चिपचिपाने लगा, यानि की वो पूरी तरह से गर्म हो गई, तो बोली–राज प्लीज़ अब मुझसे नहीं रहा जाता, अपना लंड मेरी चूत में डालो वैसे ही बहुत खुजली हो रही है।
उसके इतना बोलते ही मैंने अपना लंड लिया और उसकी चूत का अन्नुना लगाया और जोर से धक्का मारा, वो आआअह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह करके चिल्ला उठी, लंड भी फिसल गया, उसकी चूत बहुत तंग थी, वो पहली बार चुदवा रही थी। मैंने फिर से अन्नुना लगाया और जोर से धक्का मारा इस बार लंड बुर में फस गया वो फिर चिल्ला उठी, अब तो मैंने जोर जोर से धक्के मार मार कर उसके अन्दर पहुंचने लगा, वो चिल्लाती रही, अब तो उनके मुँह से केवल आआ आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह म्म्म्ममा आआअर्र ग्ग्ग्गाआ आऐईईइ ,राज मुझे बहुत दर्द हो रहा है, प्लिज्जज्ज बहार निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी।
मैंने बोला- अन्नु कुछ नहीं होगा बस थोड़ा सा और दर्द फिर मजा ही मजा आएगा।
फिर से मैं धक्के मारने लगा और साथ ही उसके होंठो को अपने होंठो से चूसने लगा जिससे वो ज्यादा चिल्ला न पाए। अब मेरे लंड का सबसे मोटा हिस्सा घुसना शुरू हुआ तो वो मेरे होंठो को बहुत जोर से चबाने लगी। अब लंड पूरी तरह से उसकी चूत की जड़ो में घुस गया तो अन्नु बोली-पूरा घुस गया?
मैं बोला- हाँ पूरा घुसेड दिया मैंने। अब शुरू करूँ?
अन्नु बोली- हाँ अब मारो धक्के!

फिर मैंने उसे लगातार धक्के मारना शुरू किया। वो फिर से चिल्लाने लगी- आआह्ह्ह्ह ह्ह्ह आआह्ह्ह
इतने में वो एक बार झड़ गई, जिससे उसकी चूत गीली हो गई और लंड थोड़ा अच्छे से अन्दर बाहर होने लगा। अब मेरे छोटे से रूम में केवल खचाखच फचफच आह्ह्ह्ह्छ ऊउउह्ह्छ की आवाजें आने लगी।

अब अन्नु भी पूरे जोश में आ गई। अपनी गांड उछाल उछाल के चुदवाने लगी, बोली- और जोर से डाल राज, आज मेरी चूत को पूरे बी ई का मजा दे दे, मैंने पूरे बी.ई. में नहीं चुदाया, मुझे नहीं मालूम था इतना मजा आता है। अब तो मैं डेली तुमसे चुदवाऊँगी और जोर से आआअह्ह ह्ह्ह्ह्ह!

उसकी बातों से मैं और जोश में आ गया और जोर से धक्के मारने लगा। करीब 50-55 धक्के मारने के बाद मैं उसके ऊपर गिर गया, मेरा पूरा वीर्य कंडोम में गिर गया, उसकी पूरी चूत खून से लाल हो गई। हम लोग थोड़ी देर ऐसे ही रहे। एक घंटे बाद मैं फिर तैयार हो गया और उसे चोदना शुरू किया।

मैंने उसकी गांड भी मारी, लेकिन वो कहानी बाद में, उस दिन मैं 5 कंडोम लेकर आया था और सभी मैं उपयोग में लाया, जमकर चुदाई की। Antarvasna

प्रेषक : अजय शर्मा Sex Stories

मैं आज अपनी सच्ची कहानी पहली बार Sex Stories आप सबको बताना चाहता हूँ। मैं ३६ साल का ५’११” लंबा ख़ूबसूरत मुंबई में रहता हूँ।

बात १ साल पहले की है. सुरुति नाम था उसका, टेली कालर थी वो, पहली बार जब उसका फ़ोन आया तो मैंने ज्यादा बात नहीं की उससे और ३५ मिनट में कॉल करने को कहा. ठीक ३५ मिनट के बाद उसका कॉल आया तो मैंने उसे कोम्प्लिमेंट दिया और इस तरह हमारी बातों का सिलसिला शुरू हुआ. वो रोज मुझे ऑफिस मैं ठीक उसी समय काल करने लगी और धीरे धीरे हम एक दूसरे को अच्छी तरह जानने लगे तो सोचा कि एक दिन हम कहीं मिलें

तो उसने कहा कि इस रविवार को वो अपनी एक सहेली की शादी में अलिबौग जा रही है चाहो तो तुम भी आ जाओ. हमने एक दूसरे को अभी तक देखा भी नही था इसलिए मिलने की तड़प काफी थी. दोनों तरफ़ आग लगी थी. हमने गेटवे से फेर्री मै जाने का प्लान बनाया और तय समय पे गेटवे पे मिलने का वादा किया.

रविवार के दिन सुबह जल्दी से उठ कर मैं तय जगह पर पहुँच कर उसका इंतज़ार करने लगा. तभी मैंने देखा एक बहुत ही ख़ूबसूरत लड़की ३५-३२-३६ साइज़ वाली मेरी तरफ़ आ कर बोली- विन्स !

मैं तो एक पल के लिए सब कुछ भूल गया और उसे देखने मैं सब कुछ भूल गया, उसने टोका और कहा- कहाँ खो गए !

तो मैंने कहा- इस खूबसूरती में खो गया तो वो शरमा गई और बोली खोने के लिए और भी बहुत कुछ है, अभी यहाँ से चलो.

पूरे सफर में हम एक दूसरे के अंग से अंग रगड़ रहे थे। उसने बताया कि उसकी सहेली की शादी तो एक बहाना था, उसे तो मुझसे मिलना था, मैंने भी अपने दिल की बात उसको बताई तो वो मुझसे लिपट के बोली हम इतने दिनों तक क्यों नही मिले?

मैंने कहा- कोई बात नही देर आए दुरुस्त आए तो उसने पूछा- क्या मतलब?

मैंने कहा थोडी देर मै पता चल जाएगा.

हम अलिबौग पहुँच के थोड़ी देर बीच पे घूमे और पानी में मस्ती करने लगे तो उसके कपड़े गीले हो गए, जिससे उसके छाती के उभार सफ़ेद रंग के कपड़ों में काफी साफ़ दिखाई दे रहे थे. उसने मुझे कहा क्या देख रहे हो?

तो मैंने कहा- कहाँ दिख रहे है तो वो बोली- झूठे ! मुझे पता है तुम क्या देख रहे हो और मुझसे जोर से चिपक गई. उसके बदन की गर्मी से मेरे सारे बदन में करंट सा दौड़ गया और मैंने भी जोर से उसे बाहों में भर लिया. हम १० मिनट तक ऐसे ही खड़े रहे. फिर हमें ध्यान आया कि हम बीच पे हैं। उसने कहा भूख लगी है और कपड़े भी गीले हो गए हैं.

मैं तो जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रहा था.तुंरत नजदीक के एक होटल मैं जा के एक कमरा बुक कर लिया और हम दोनों रूम में आ गए. मैंने उससे कहा अपने कपड़े बदल ले नही तो ठण्ड लग जायेगी. तो वो बोली वो तो तुम्हे भी लग जायेगी.हम दोनों ही बदल लेते हैं, खुला ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं तुंरत उसे बाथरूम में ले गया और उसके होठों को चूसने लगा, वो भी साथ देने लगी और धीरे धीरे मैं उसके बब्बो को मसलने लगा तो वो सिस्कारियां भरने लगी और गरम हो गई. धीरे धीरे मैंने उसको पूरा नंगा कर दिया और ख़ुद भी नंगा हो गया. उसके भरे भरे बब्बे देख के मेरा लण्ड तन के खंभे के जैसे खड़ा हो गया तो सुरुति की आँखे एकटक उसे ही देख रही थी।

मैंने पूछा क्या कभी देखा नही क्या तो वो बोली नहीं आज पहली बार देख रही हूँ सिर्फ़ सुना था कि मोटा और लंबा होता है, आज देख के मजा आ गया और मेरे लण्ड को छूकर बोली- माय गोड ! कितना बड़ा है यह !

फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर खूब रगड़ रगड़ के नहाये और बाहर बेड पे आ गए. सुरुति बोली आज तुम मुझे चाहे जैसे प्यार करो जो चाहे वो करो. मैंने कहा- हम ६९ पोसिशन में आ के एक दूसरे का चाटते हैं तो वो शरमा के बोली- पहले आप करो मैं साथ देती हूँ।

मैंने उसे बिस्तर पे लेटा के उसकी कुंवारी चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो वो सिसकियाँ लेने लगी और पूरा कमरा आह ऊह से भर गया. वो अपनी गांड उठा उठा के अपनी चूत चटवा रही थी. थोडी देर बाद बोली- मुझे भी चॉकलेट खानी है तो मैंने अपने लंड को उसके मुंह की ओर किया और कहा- खा लो.

उसने तुंरत कहा- एक मिनट रुको और अपने बैग से कैडबरी डेरी मिल्क का एक बड़ा पैक ले आई और बोली अब लाओ और उसने डेरी मिल्क का एक टुकड़ा मुंह में लिया और थोड़ा खा के फिर लंड के नजदीक जा के बड़े ही प्यार से सुपाडे पे चॉकलेट का सिंगार किया और चाटने लगी। लंड मिक्स विद चॉकलेट गज़ब का स्वाद बोलते हुए वो लंड को एक सीखी हुई चुद्दकड़ के जैसे चूस रही थी। मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था मैंने भी थोडी चॉकलेट मुंह में ली और ६९ पोसिशन में चूत चॉकलेट का मजा लेने लगा. हम दोनों में जैसे होड़ लगी थी कौन कितना अच्छा चूस रहा है. इस बीच अचानक वो बोली- अन्दर कुछ तो हो रहा है जैसे कुछ बाहर आ जाएगा !

तो मैंने कहा- आने दो ! मैं तैयार हूँ पीने के लिए.

वो पूरी तरह से गांड हिला हिला के चुसवा रही थी और चूस रही थी. उसकी चूत से रस की फुहार निकली और मैंने पूरी पी ली। वो निढाल हो के बोली राजा ये क्या था? जो भी था बहुत मजा आया.

“असली मजा तो अब आएगा” मैं बोला तुम लंड चूसती रहो, मेरा भी रस निकलने वाला है।

तो उसने लपालप लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया और पूरा का पूरा मुंह में ले लिया, मेरे रस की फुहार पूरी चूस ली उसने.

सुरुति बोली- राजा मजा आ गया ! मुझे नही पता था लंड तो लंड उसका रस विद चॉकलेट कितना मजेदार होता है. पूरी जवानी के इतने दिन इस सुख से मैं कैसे वंचित रह गई.”

रानी क्यों घबराती हो, आज ऐसे चोदूंगा कि जितना खोया है उससे ज्यादा आज मिल जाएगा.

“सच” बोल के सुरुति चिपक गई फिर से लंड से, और सहलाते हुए बोली- हाय कहाँ था तू मेरे शेर ! कब से चूत तुम्हारे इंतज़ार में थी.

उसने लंड को चाटकर तुंरत ही फिर से घोड़े जैसे किया और बोली- राजा आ जा और चोद मुझे, फाड़ दे मेरी चूत को, बहुत तड़पा रही है मुझे, चूस मेरे इन बब्बो को दबा दबा के और पूरा दूध पी लो इनका !

आज मेरे लंड राजा को सुरुति की चूत मुबारक हो !

मैंने भी तुंरत लंड को चूत पे रखा और धीरे से धक्का दिया, पर सुरुति की कसी हुई कुंवारी चूत में मेरा घोड़े वाला लंड थोड़े ही आसानी से जाता !

वो तो चुदवाने के लिए मरी जा रही थी- हरामखोर ! खुली हुई चूत है, फिर भी तड़पा रहा है, डाल जल्दी से मुझसे नहीं रहा जाता है अब तो !भोसड़ा बना मेरी कुंवारी चूत को !

दो धक्के में लंड चूत में समां गया, सुरुति दर्द से कराह उठी लेकिन बोली- राजा छोड़ो मत ! चोदों मुझे !

८-१० धक्कों में ही वो मस्त हो गई और गांड उठा उठा के मजे लेने लगी। मैं भी मस्त हो के उसे चोद रहा था। अलग अलग आसन लगा के साली को चोदा।

वो भी मदमस्त घोड़ी के जैसे लंड से चुदवा रही थी,”मजा आ गया ! साले लन ऐसा होता है? पता होता तो हम फ़ोन पे फालतू ही गांड मरवा रहे थे। जानू पहले क्यों नही बताया कि चुदाई ऐसी होती है। बहनचोद ! क्या चीज़ है ये लंड और चूत ! मजा आ गया ! आज जिन्दगी का असली सुख मिला है ! जी भर के चोदों मुझे ! बब्बे चूसो मेरे ! चूत का भोसड़ा बना दो ! जैसे चाहो वैसे लो मेरी चूत को ! आज से ये तुम्हारी गुलाम है साली ! लंड राजा आजा !”

३० मिनट तक चोदने के बाद मेरे लंड से गरम गरम रस निकलने को तैयार हुआ तो धक्के और बढ़ गए- सुरुति रानी मैं अब आने वाला हूँ, संभालना ! मेरा घोड़ा तैयार है रस मलाई निकलने को !”

“मेरी चूत भी तैयार है खाने को.”वो बोली.

कुत्ते कुतिया की पोसिशन में उसको ले के जोर जोर से १५-२० कस के शोट लगाये- साली ले ! मैं आ रहा हूँ ! कहते हुए पूरा रस चूत मैंने उड़ेल दिया उसकी चूत के अन्दर तक.

सुरुति के चेहरे से खुशी झलक रही थी. उस दिन शाम तक हमने ५ बार चोदा और फिर शाम को खाना खा के फिर से अगली चुदाई का कार्यक्रम तय कर के मुंबई के लिए निकल पड़े…

अगली बार क्या हुआ? और कहाँ? किसके साथ हुआ? मैं आपके विचार जानकर लिखूंगा. Sex Stories

मेरा ईमेल पता है

पिंकी का घर हमारे घर के बगल में ही है, हमारे घर की व पिंकी के घर की छत आपस में मिली हुई है, दोनों छतों के बीच में बस कमर तक ऊँचाई की एक पतली सी दीवार ही है इसलिए हम छत से भी एक दूसरे के घर चले जाते थे और पड़ोसी होने के नाते हमारा व पिंकी के घर काफी आना जाना था, जो अब भी वैसा ही है.

मगर उस समय मेरी व पिंकी की कभी नहीं बनती थी। बचपन से ही हम दोनों झगड़ते रहते थे। बचपन में मेरी नाक बहती थी इसलिये वो मुझे बहँगा कहती थी, और पिंकी को मैं छिपकली कहता था क्योंकि दुबले-पतले शरीर व बिल्कुल सफेद गोरे रँग के साथ साथ उसकी हरकतें छिपकली के जैसी ही थी जब भी उसे गुस्सा आता तो वो छिपकली की तरह चिपक जाती व नाखूनों और दाँतों से काट खाती थी।

बड़ा होने पर मेरी नाक तो बहनी बन्द हो गई मगर पिंकी की हरकतें बाद में भी बिल्कुल वैसी ही रही, झगड़ा होने पर वो अब भी नाखूनों व दाँतों से काट खाती थी।
हम दोनों में अब भी नहीं बनती थी, अभी तक हम दोनों एक दूसरे को बचपन के नाम से ही चिढ़ाते रहते थे। हम दोनों में से किसी को भी अगर चिढ़ाने का कोई मौका मिल जाये तो हम बाज नहीं आते थे।

जब भी पिंकी मुझे बोलती तो वो मुझे बहँगा ही कहकर बुलाती और मैं भी उसे छिपकली कहकर पुकारता था। पिंकी भी मेरे ही समान कक्षा में पढ़ती थी मगर वो लड़कियों के स्कूल में पढ़ती थी और मैं लड़कों के स्कूल में पढ़ता था।
पिंकी भी पढ़ने में काफी होशियार थी। हम दोनों में अब यह होड़ लगी रहती थी की परीक्षा में किसके नम्बर अधिक आयें।

पहले तो मैं भी पढ़ने में काफी अच्छा था मगर फिर बाद में तो आपको पता ही है भाभी के साथ सम्बन्ध बनने के बाद मैं पढ़ाई से काफी दूर हो गया था।
चलो अब कहानी पर आता हूँ.

सुमन के चले जाने के बाद मैं फिर से रेखा भाभी के साथ सोने लगा सब कुछ अच्छा ही चल रहा था कि एक दिन भाभी कपड़े सुखाना भूल गई, जब उन्हें याद आया तब तक शाम हो गई थी। उस समय भाभी खाना बनाने में व्यस्त थी इसलिए भाभी के कहने पर मैं ऊपर छत पर कपड़े सुखाने चला गया, मैं कपड़े सुखाकर छत पर से वापस आ ही रहा था कि तभी मेरी नजर सामने पिंकी के घर की तरफ चली गई, उनके घर में एक कमरा व लैटरीन बाथरुम ऊपर छत पर भी बना हुआ है.

कमरे की लाईट जल रही थी और खिड़की में से बेहद ही गोरी नंगी पीठ दिखाई दे रही थी, खिड़की से बस उसकी कमर के ऊपर का ही हिस्सा ही दिखाई दे रहा था मगर फिर भी दुबले पतले बदन से और बेहद ही गोरे रंग से मुझे पहचानने में देर नहीं लगी कि वो पिंकी है, वो नीचे झुकी और फिर हाथों में कुछ पकड़ कर सीधी हो गई. शायद उसने नीचे पायजामा (लोवर) पहना होगा, फिर उसने शमीज (लड़कियों के पहनने का अन्तः वस्त्र) पहना और फिर ऊपर से उसने गुलाबी रंग की टी-शर्ट डाल ली।

यह नजारा देखते ही मेरा लिंग उत्तेजित हो गया, फिर तभी उस कमरे की लाईट बन्द हो गई। शायद वो बाहर आने वाली थी इसलिये मैं भी चुपचाप नीचे आ गया मगर उस नजारे को देखकर मेरे तन बदन में आग सी लग गई। मैं चुपचाप भाभी के कमरे में आकर ऐसे ही लेट गया और पिंकी के बारे में सोचने लगा.

मैंने पिंकी को कभी भी इस नजर से नहीं देखा था, और देखता भी कैसे?
वो किसी भी तरीके से लड़की नहीं लगती थी…
क्योंकि उसके दुबले पतले शरीर पर कही भी मांस नहीं दिखाई देता था, बस सीने पर हल्के से उभार ही दिखाई देते थे, जो छोटे निम्बू के समान ही होंगे। उसके शरीर के साथ साथ वो रहती भी लड़कों की तरह ही थी, लड़कों की तरह बाल कटवाना, लड़कों की तरह ही कपड़े पहनना, और तो और स्कूल की वर्दी भी उसने पेंट-शर्ट की ही बनवा रखी थी। उसके स्कूल में सब लड़कियाँ शलवार कमीज पहनी थी मगर वो स्कूल में भी पेंट-शर्ट पहनती थी। घर में वो हमेशा लोवर और टी-शर्ट पहने रहती, और जब कभी बाहर जाती तो पैंट-शर्ट या जीन्स के साथ टी-शर्ट पहन कर बाहर निकलती थी।

मैंने कभी भी उसे लड़कियों के कपड़े पहने हुए नहीं देखा था, मगर आज मैंने उसकी सफेद कोरे कागज जैसी नंगी पीठ को देखा था मेरे तन बदन में आग सी लग गई थी। मैं उसके बेहद ही सफेद दूधिया गोरे रंग का कायल सा हो गया था, मैं सोच रहा था कि अगर उसका बदन ही इतना गोरा है तो उसके नन्हे उरोज व उसकी प्यारी सी योनि कैसी होगी?
यह बात मेरे दिमाग में आते मैं रोमांच से भर गया और मेरा लिंग अपने चर्म उत्थान पर पहुँच गया।

मैं पिंकी के ख्यालों में इतना खोया हुआ था कि पता ही नहीं चला कब भाभी कमरे में आ गई। मेरी तन्द्रा तो तब टूटी जब भाभी ने मुझे टोकते हुए पूछा- कहाँ खोये हुए हो?
भाभी के बात करने पर भी मैं बस हा ना में ही उनकी बात का जवाब दे रहा था।
मेरे व्यवहार से भाभी समझ गई कि कुछ ना कुछ बात है इसलिये भाभी ने फिर से मुझे पूछा- क्या बात है आज तबीयत खराब है क्या?
मगर मैं सोच रहा था कि भाभी को पिंकी के बारे में कहूँ या ना कहूँ?
तभी बाहर से ‘भाभी… भाभी… पायल भाभी…’ पुकारते हुए पिंकी की आवाज सुनाई दी और भाभी उसका जवाब देती उससे पहले ही पिंकी हाथ में किताबे पकड़े कमरे में आ गई, उसने वो ही गुलाबी टी-शर्ट पहन रखी थी जिसे अभी अभी छत पर मैं पिंकी को पहनते हुए देखकर आ रहा था।
पिंकी ने आते ही ‘ओय… बहंगे पैर हटा…’ कह कर एक हाथ से मेरे पैरों को उठा कर पीछे पटक दिया और भाभी की बगल में बैठ गई।

दरअसल पिंकी, मेरी भाभी से सवाल का हल निकलवाने के लिये आई थी। पिंकी व उसके घर वालों को पता था कि मेरी भाभी ने बी.एस.सी. तक पढ़ाई की हुई है इसलिये वो बहुत सी बार भाभी के पास पढ़ने के लिये आती रहती थी। पिंकी और उसके घरवाले तो चाहते थे कि मेरी भाभी उसे ट्यूशन पढ़ा दे मगर भाभी घर के कामों में ही व्यस्त रहती थी इसलिये उन्होंने मना कर दिया था।

मैंने पिंकी को कुछ नहीं कहा, बस अपने पैर पीछे खींच लिये, पिंकी भी भाभी को अपनी किताबे देकर सवाल समझने लगी और मैं बस उसे देखे जा रहा था।
पिंकी का इस तरह से बोलना आज मुझे बुरा नहीं लगा था, नहीं तो अभी तक मैं भी उसे दो-चार सुना चुका होता। पता नहीं क्यों पिंकी मुझे आज बहुत अच्छी व खूबसूरत लग रही थी इसलिये मैं बस उसे देखे ही जा रहा था.

गोल व मुस्कराता चेहरा जिसे देखते ही हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाये, लड़कों की तरह कटिंग किये हुए काले बाल जिन्होंने उसके आधे से ज्यादा माथे को ढक रखा था, नीली व बड़ी बड़ी आँखें, लम्बी पतली सी नाक, बिल्कुल सुर्ख गुलाबी व पतले पतले होंठ उसके दूधिया गोरे चेहरे पर अलग ही छटा सी बिखेर रहे थे और मुस्कुराते होंठों के बीच बिल्कुल सफेद दाँत जो मोतियों से दमक रहे थे, लम्बा कद और सबसे बड़ी बात उसका बिल्कुल सफेद दूधिया गोरा रंग अगर हल्का सा उसके बदन को कोई जोर से छू भी ले तो अलग ही निशान बन जाये।
भगवान ने पिंकी पर नैन-नक्श और रंग-रूप की दौलत तो दिल खोल कर लुटाई थी मगर बस एक ही जगह पर कंजूसी कर दी थी कि उसका शरीर बिल्कुल भी भरा नहीं था। सच कहूँ तो अगर पिंकी का शरीर थोड़ा सा भी भर जाये और वो अपने बाल बढ़ा ले तो स्वर्ग की अप्सरा से कहीं ज्यादा ही खूबसूरत लगेगी।

पिंकी का सारा ध्यान भाभी से सवाल समझने में था मगर मैं अब भी बस उसे ही देखे जा रहा था… तभी मेरे दिमाग में एक योजना ने जन्म ले लिया, मैं सोच रहा था क्यों ना पिंकी को पढ़ने के लिये रोजाना हमारे घर बुला लिया जाये और वैसे भी पिंकी और उसके घर वाले तो चाहते भी यही हैं कि मेरी भाभी पिंकी को ट्यूशन पढ़ा दे…
मगर मेरी यह योजना तभी कामयाब हो सकती थी जब भाभी मेरा साथ दे!

भाभी से सवाल का हल निकलवा कर पिंकी अपने घर चली गई मगर मैं उसी के ख्यालों में ही खोया रहा। पिंकी के जाने के बाद भाभी फिर मुझसे पूछने लगी- आज इतने गुमसुम सा क्यों हो?
मैंने जो योजना बनाई थी उसमें भाभी को शामिल किये बिना मैं कामयाब नहीं हो सकता था इसलिये मैंने भाभी को सारी बात बता दी.

एक बार तो मेरी बात सुनकर भाभी भड़क गई और कहने लगी- रोजाना तुम्हें नई-नई कहाँ से मिलेगी?
मगर मेरे बार बार विनती करने पर भाभी मान गई और मेरा साथ देने की लिये तैयार हो गई।

मेरे कहे अनुसार भाभी ने बातों बातों में पिंकी को रोजाना पढ़ने आने का इशारा सा कर दिया।
पिंकी और उसके घरवाले तो यही चाहते थे कि मेरी भाभी पिंकी को पढ़ा दिया करे इसलिये पिंकी रोजाना भाभी के पास पढ़ने के लिये आने लगी।

सुबह शाम भाभी को घर के काम करने होते थे इसलिये भाभी ने पिंकी को पढ़ाने के लिये दोपहर का समय चुना। भाभी पिंकी‌ को अपने कमरे में ही पढ़ाती थी।

वैसे तो मैं कभी भी पढ़ सकता था मगर मेरी योजना के अनुसार मैं भी पिंकी के साथ साथ पढ़ने के लिये बैठने लगा ताकि अधिक से अधिक पिंकी के पास रह सकूँ। मेरी भाभी भी इसमे मेरा साथ देती थी वो हमें किताब से थोड़ा बहुत पढ़ा देती और बाकी हमें खुद ही पढ़ने का बोलकर कमरे से बाहर चली जाती।
इसी तरह गणित विषय के भी एक तो सवाल समजा देती और बाकी का हमें हल करने का बता देती, जब कभी हमें कुछ समझ में नहीं आता तो हम भाभी से पूछ लेते थे।

भाभी के कमरे से जाने के बाद मैं और पिंकी अकेले ही होते थे जिसका फायदा पिंकी मुझे चिढ़ा कर या छेड़ कर उठाती और मैं उसका सामिप्य पाकर उठाता था।
पिंकी को जब भी मुझे चिढ़ाने का मौका मिलता वो मुझे चिढ़ाने से बाज नहीं आती थी मगर मुझे उसका चिढ़ाना व छेड़ना अब अच्छा लगता था। पिंकी के चिढ़ाने पर मैं उसे कुछ भी नहीं कहता बस किसी ना किसी बहाने से उसके कोमल बदन को छूने की कोशिश करता रहता था। मेरी कोशिश रहती कि मैं अधिक से अधिक पिंकी के कोमल बदन को स्पर्श कर सकूँ।

मैं और पिंकी बैड पर साथ साथ ही बैठकर पढ़ाई करते थे और मैं जानबूझ कर पिंकी के बिल्कुल पास होकर बैठता ताकि पिंकी के कोमल बदन को छुता रहूँ!
मैं जानबूझ कर पिंकी के कोमल हाथों को छू लेता तो कभी उसकी मखमली बदन से अपने शरीर का स्पर्श करवा देता मगर पिंकी इस पर कोई ध्यान नहीं देती थी, उसके लिये तो ये सब कुछ हँसी मजाक ही था।

इसी तरह करीब दो हफ्ते गुजर गये मगर पिंकी ने मुझ पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया।
मुझसे भी अब सब्र नहीं हो रहा था इसलिये एक दिन पढ़ाई करने के बाद पिंकी जब घर जाने लगी तो मैंने उसके गाल को चूम लिया और उसे कह दिया- मैं तुमसे प्यार करता हूँ…!
मेरी इस हरकत से पिंकी बुरी तरह से गुस्सा हो गई और अपने घर में मेरी शिकायत करगी, ऐसा बोलकर जल्दी से अपने घर चली गई।

शिकायत की बात सुनकर मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और मैं बुरी तरह घबरा गया। मैंने जब ये सारी बात भाभी को बताई तो भाभी भी मुझ पर गुस्सा हो गई और कहने लगी- तुम मुझे भी फंसवा दोगे, तुम्हें इतनी जल्दी ये सब करने की क्या जरूरत थी।
मेरे साथ साथ भाभी को भी डर था कि इसके लिये कहीं उनका नाम ना आ जाये।
डर के मारे मेरी हालत अब तो और भी खराब हो गई।

इसके बाद भाभी तो घर के काम में व्यस्त हो गई मगर मैं कमरे में ही बैठा रहा और भगवान से दुआ करने लगा कि भगवान बस आज बचा ले, आज के बाद कभी भी ऐसा कुछ नहीं करुँगा,
और शायद भगवान ने मेरी सुन भी ली…!
क्योंकि रात होने तक पिंकी के घर से मेरी कोई शिकायत नहीं आई।

अगले दिन सुबह भी सब कुछ सामन्य ही रहा मगर दोपहर को पिंकी पढ़ने के लिये हमारे घर नहीं आई। पिंकी का पढ़ने के लिये नहीं आने से मेरे दिल में अब भी डर बना रहा, इसी तरह दो दिन गुजर गये मगर पिंकी के घर से ना तो मेरी कोई शिकायत आई, और ना ही पिंकी हमारे घर पढ़ने के लिये आई।
पिंकी के घर जाने की तो मुझ में हिम्मत नहीं थी मगर मैं उसके घर के बाहर से ही उसे देखने की कोशिश करता रहता था मगर मुझे पिंकी कहीं भी दिखाई नहीं देती थी, पिछले दो दिन से शायद वो स्कूल भी नहीं जा रही थी।

मेरे दिल में अब भी डर बना हुआ था मगर फिर तीसरे दिन मैं भाभी के कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहा था, पढ़ाई तो क्या कर रहा था बस ऐसे ही बैठकर भाभी से बातें कर रहा था कि तभी हाथों में किताब पकड़े पिंकी आ गई, अचानक से पिंकी को देखकर मैं घबरा सा गया और चुपचाप पढ़ाई करने लगा।
पिंकी भी नजर झुकाकर चुपचाप पढ़ने के लिये मेरे पास बैड पर बैठ गई।

भाभी के पूछने पर पिंकी ने बताया कि वो रिश्तेदार के यहाँ गई हुई थी इसलिये दो दिन तक पढ़ने के लिये नहीं आ सकी थी।
पिंकी की बात सुनकर ‌मेरी जान में जान आ गई।

पिंकी अब फिर से रोजाना पढ़ने के लिये आने लगी मगर पिंकी से दोबारा बात करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी। पिंकी ने भी मुझसे बात करना बन्द कर दिया था, भाभी के सामने तो फिर भी जरूरत होने पर वो कभी कभी बात कर लेती मगर अकेले में हमारी कोई बात नहीं होती थी।

इसी तरह हफ्ता भर गुजर गया, मेरी पिंकी से बात करने की हिम्मत तो नहीं हुई मगर इस हफ्ते भर में मैंने देखा कि पिंकी के व्यवहार में काफी बदलाव आ गया था। पहले तो वो बात बात पर मुझसे झगड़ा करती रहती थी मगर अब जब कभी हमारा सामना होता तो वो नजर झुका लेती थी, उसने मुझे चिढ़ाना भी बन्द कर दिया था और जब कभी मेरा हाथ या पैर गलती से पिंकी को छू जाता था तो वो मुझसे दूर हट जाती थी मगर मुझे कुछ कहती नहीं थी।

मुझे पिंकी से डर तो लगता था मगर फिर भी मेरे दिल में उसके लिये नये नये ख्याल आते रहते थे।
एक दिन बातों बातों में ऐसे मैंने यह बात जब भाभी को बताई तो वो हंसने लगी और कहा- लगता है अब तेरा काम बन जायेगा।
मैंने उत्सुकता से पूछा- कैसे…?
तो भाभी‌ कहने लगी- बुद्धू… पिंकी को तेरी शिकायत ही करनी होती तो कब की कर देती…!

भाभी की बात सुनकर मुझ में फिर से एक नई जान सी‌ आ गई, मगर इस बार मैं जल्बाजी में कोई गलती नहीं करना चाहता था, इसलिये मुझे धीरे धीरे आगे बढ़ना ही सही लगा, और इसके लिये सबसे पहले तो मैं पिंकी से फिर से बाते करने की कोशिश करने लगा। मैं जानबूझ कर पढ़ाई के बारे में या किसी और के बारे में पिंकी से कुछ ना कुछ पूछने की कोशिश करता रहता, पहले पहल तो पिंकी मेरी बातों पर कम ही ध्यान देती थी और मेरी बातों का बहुत कम जवाब देती थी मगर फिर धीरे धीरे वो भी मेरी बातों का जवाब देने लगी।

मैं भी पिंकी से कुछ ना कुछ पूछता ही रहता और जानबूझ कर उससे बातें करने की कोशिश करता रहता था, पिंकी को भी पता चल गया था कि मैं जानबूझ कर उससे बात करने की कोशिश करता हूँ इसलिये जवाब देते समय उसके चेहरे पर अब हल्की सी मुस्कान आ जाती थी, इससे मेरी हिम्मत बढ़ने लगी।

इसी तरह हफ्ता भर गुजर गया, पिंकी अब मेरी बातों का जवाब तो दे देती थी मगर वो खुद पहल करके मुझसे कभी बात नहीं करती थी।

धीरे धीरे मैं अब फिर से पिंकी के पास होकर बैठने लगा और कभी कभी जानबूझ कर उसके हाथ पैरों को छू देता जिससे पिंकी शर्मा कर हल्का सा मुस्कुरा देती और अपने हाथ पैरों को मुझसे दूर कर लेती।

पहले तो एक दूसरे को छूना पिंकी के लिये हंसी मजाक ही था मगर उस दिन के बाद से पिंकी भी समझ गई थी कि मेरे दिल में उसके लिये क्या है इसलिये मेरे छूने पर पिंकी अब शर्माने लगी थी। पिंकी की जो भावनाएँ सोई हुई थी, जिसके बारे में उसने शायद कभी सोचा भी नहीं था, उनको मैंने जगा दिया था।

इससे मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी इसलिये कभी कभी तो मैं अब बातों बातों में जानबूझ कर पिंकी का हाथ भी पकड़ लेता जिससे‌ पिंकी बुरी तरह घबरा सी जाती और अपना हाथ मुझसे छुड़वाकर शर्म से सिकुड़ जाती, मगर मुझे कुछ कहती नहीं थी।

इसी तरह एक हफ्ता और बीत गया और मेरी हिम्मत बढ़ती गई…

फिर एक दिन पढ़ाई के बाद पिंकी जब अपने घर जाने लगी‌ तो मौका देखकर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे फिर से कह दिया- मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
अचानक से मेरे ऐसा करने पर पिंकी बुरी तरह घबरा गई, घबराहट के कारण वो कुछ बोल तो नहीं पा रही थी मगर मुझसे अपना हाथ छुड़ाने के लिये हाथ पैर चलाने लगी जिससे उसके हाथ से किताबें भी छुट कर फर्श पर गिर गई।

इससे पहले कि पिंकी मुझसे छुड़ाकर भाग जाये, मैंने पिंकी को पकड़कर अपनी बांहों में भर लिया और धीरे धीरे उसके मखमली बदन को सहलाते हुए उसके नर्म मुलायम गोरे गालों को चूमना शुरू कर दिया, अब तो डर व घबराहट से पिंकी का पूरा बदन कंपकपाने लगा, वो ऐसे ही हाथ पैर चला रही थी मगर तब तक पिंकी के बदन को‌ सहलाते हुए मैंने उसे दीवार से सटा लिया‌ और धीरे धीरे पिंकी के गाल को चूमते हुए उसके गुलाब की पंखुड़ियों की तरह सुर्ख लाल व कोमल होंठों की तरफ बढ़ने लगा.

पिंकी के दिल की धड़कन अब तेज हो गई थी और साँस भी तेजी से चल रही थी… डर व घबराहट के मारे पिंकी ठीक से कुछ बोल तो नहीं पा रही‌ थी, बस धीमी आवाज में कराह‌ सी रही थी
‘इश्श… च.छ.ओ.ड़..अ… च.छ.ओ.ड़..अ… म…उ..झ…ऐ…’
मगर फिर तभी बाहर किसी की आहट सुनाई दी, शायद मेरी भाभी होगी, इससे मेरा भी ध्यान बँट गया और तभी पिंकी ने अपनी पूरी ताकत से मुझे धकेलकर अलग कर दिया।
मैंने भी पिंकी को दोबारा पकड़ने की कोशिश नहीं की, बस चुपचाप उसे देखता रहा।

पिंकी बहुत ज्यादा घबरा गई थी वो जल्दी से नीचे बैठकर अपनी किताबें समेटने लगी, किताबें समेटते हुए वो अभी तक अपनी उफनती साँसों को काबू करने की कोशिश कर रही थी।
किताबें उठाने के बाद पिंकी जब कुछ सामान्य हुई‌ तो मुझ पर गुस्सा करने लगी और आज फिर से मेरी शिकायत करने की कहने लगी… मगर पिंकी की उखड़ती साँसें व आँखों में तैरते उत्तेजना के गुलाबी डोरे कह रहे थे कि मेरी हरकत से उसे भी मजा आ रहा था इसलिये शायद वो ऐसा कुछ नहीं करेगी, उसका गुस्सा भी मुझे झूठमूठ का ही लग रहा था।
मुझ पर गुस्सा दिखा कर पिंकी अपने घर चली गई…
और जैसा मैंने सोचा था वैसा ही हुआ पिंकी ने किसी से कुछ नहीं कहा।

अगले दिन‌ पिंकी जब पढ़ने के लिये हमारे घर आई तो उस समय भाभी कमरे में नहीं थी इसलिये मैंने भी मौका पाकर पिंकी को फिर से पकड़ लिया और उससे पूछने लगा- तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया?
मुझसे छुड़ाने का प्रयास करते हुए पिंकी कहने लगी- कौन सी बात?
मैंने बताया- जो कल कहा था, उसी का?
इस पर पिंकी का चेहरा शर्म से लाल हो गया और शर्माते हुए कहा- मुझे नहीं पता…!

तब तक मेरी भाभी कमरे में आ गई और पिंकी मुझसे छुड़वा कर बैड पर जाकर बैठ गई, पिंकी ने कोई जवाब तो नहीं दिया था मगर पिंकी की शर्म‌ हया से मुझे मेरा जवाब मिल गया था, बस अब तो धीरे धीरे उसे पटरी पर लाना था, और इसके लिये मैं पिंकी के बिल्कुल पास होकर बैठता, और जब भी मुझे मौका मिलता मैं पिंकी के गोरे गाल को‌ चूम ‌लेता, तो कभी उसके हाथ पैरों को‌ सहला देता था जिसका पिंकी बनावटी गुस्से से हल्का सा विरोध करती मगर किसी से कुछ कहती‌ नहीं थी।

मेरी हरकतों से बचने के लिये पिंकी मुझसे दूर होकर भी बैठने का प्रयास करती मगर मैं खिसकर उसके पास हो‌ जाता था। पिंकी के गालों को चूमना तो अब सामन्य सा हो गया था जिसका‌ पिंकी ने भी विरोध करना कम कर दिया था, वो बस झुठमुठ का बनावटी गुस्सा करके हंसने लगती थी।

इसी‌‌ तरह दो हफ्ते और बीत गये, मैं भी अब धीरे धीरे करके पिंकी के गुप्तांगों तक‌ पहुँच गया था, मौका मिलने पर कभी कभी मैं कपड़ों के ऊपर से ही उसके छोटे छोटे उरोजों को सहला देता था, यहाँ तक‌ कि‌ एक बार तो मैंने कपड़ों के ऊपर से पिंकी की योनि को भी‌ सहला दिया था जिस पर पिंकी बस बनावटी‌ गुस्से से कहती‌- सुधर जा… नहीं तो‌ मैं सही‌ में तेरी शिकायत कर दूँगी!
मगर मुझे पता था कि मेरी हरकतों से उसे भी मजा आता है इसलिये वो‌ किसी‌ से कुछ नहीं कहेगी।

और फिर एक दिन मुझे अच्छा सा मौका मिल ही गया, उस दिन मेरे पापा गाँव गये हुए थे और मम्मी‌ के बारे में तो आपको पता ही है जो कि बीमार होने के कारण अधिकतर अपने कमरे में ही रहती थी।
मेरी भाभी को भी उस दिन घर के काम देर हो‌ गई थी इसलिये दोपहर को पिंकी जब पढ़ने के लिये आई तो भाभी ने हमें कुछ देर तक तो पढ़ाया और बाकी की पढ़ाई अपने आप करने के लिये बोलकर कपड़े धुलाई करने के लिये चली गई।
मैंने भी‌ भाभी‌ को‌ जाते समय आँख से इशारा करके बता दिया कि वो‌ जल्दी से‌ कमरे में ना आयें!

भाभी के जाते ही मैंने पिंकी को पकड़कर अपनी बांहों में भर लिया और धीरे धीरे उसके गोरे गालों‌ को चूमने लगा जिससे पिंकी झूठमूठ का गुस्सा करते हुए ‘छोड़… छोड़ मुझे… मैं घर जा रही हूँ…मुझे नहीं पढ़ना है तेरे साथ…’ इसी तरह पिंकी ना-नुकर करते हुए मुझसे छुड़ाने का प्रयास करने लगी मगर मैंने उसे पकड़ कर बैड पर गिरा लिया.

पिंकी मुझे धकेलकर उठने की कोशिश तो कर रही थी मगर मैं उसे ऐसे ही दबाये रहा और अपना एक हाथ कपड़ों के ऊपर से ही उसके छोटे छोटे उभारों की ओर बढ़ा दिया। पिंकी के उभार बहुत ही छोटे थे जो मुश्किल से नीम्बू के समान ही होंगे। पिंकी के उभारों को कस के रगड़ने मसलने के बजाय मैंने उसके ज़वानी के दोनों छोटे छोटे फूलों को हल्के से सहलाना शुरू कर दिया जैसे कोई भौंरा कभी एक फूल पे बैठे तो कभी दूसरे पर…

मेरे हाथ भी यही कर रहे थे, साथ ही मैं पिंकी की गर्दन व गालों को भी चूम रहा था जिसका पिंकी अपने सर इधर उधर हिलाकर मेरे चुम्बन से बचने का प्रयास कर रही थी।
पिंकी एक किशोरी थी जो पहली बार यौवन सुख का स्वाद चख रही थी इसलिये उसका शर्माना, झिझकना जायज ही था मगर मेरा भी काम उसे पटाना, तैयार करना और वो लाख ना ना करे उसे कच्ची कली से फूल बनाना था।
पिंकी के गालों को चूमते हुए धीरे धीरे मैं उसके गुलाबी रसीले होंठों पर आ गया और हल्के बहुत ही हल्के से उसके रसीले होंठ चूसने लगा।

पिंकी की साँसें भी अब गहरी होने लगी थी और उसका‌‌ विरोध भी‌ कुछ हल्का पड़ने लगा था।

मैंने अपनी जीभ पिंकी के मुँह में डाल दी जिसका पहले तो वो अपनी गर्दन को इधर उधर हिलाकर बचने का प्रयास करती रही मगर मैंने भी एक हाथ से उसके सर को कस के पकड़ लिया और उसके मुंह में अपनी जीभ को ठेले रखा.
और फिर कुछ देर की ना नुकुर के बाद ..पिंकी की जीभ ने भी हरकत करना शुरू कर दिया, वो अब हल्के से मेरे जीभ के साथ खिलवाड़ करने लगी। उसके रसीले होंठ भी अब मेरे होंठों को धीरे धीरे कभी कभी चूमने लगे थे.

मगर मैं ऐसे छोड़ने वाला थोड़े ही था, मैं आज पहले से कुछ आगे बढ़ना चाहता था इसलिये मेरा हाथ जो अब तक उसके छोटे छोटे उभारों से खेल रहा था वो पिंकी के बदन पर से रेंगता हुआ उसकी दोनों जाँघों के बीच आ गया मगर तभी पिंकी ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और साथ ही मेरे होंठों पर से अपना मुँह हटा कर ‘ नहीं नहीं… छोड़… ना…’ कहने लगी लेकिन मैंने उसको छोड़ा नहीं बल्कि हल्के हल्के उसके गाल पर फिर से चूमने लगा, साथ ही मेरा हाथ पकड़े जाने के बावजूद भी थोड़ी सी‌ जबरदस्ती करके मैं धीरे धीरे उसकी योनि को‌ भी सहलाने लगा।
‘अआआ…ह्ह्हह… बस्स्स… अ..ओओ..य.. हो.. गय..आ… अआआ…ह्ह्हह… ..प्लीज..अअआ… ह्ह्हहहहह.’
वो बुदबुदा रही थी।
पिंकी की आवाज में घबराहट और डर तो था लेकिन साथ ही कही ना कही उसकी भी थोड़ी बहुत इच्छा हो रही थी।

मैंने उसके गालों को छोड़ा नहीं बल्की हल्के से उसी जगह पे एक हल्का सा चुम्बन किया और…
और फिर एक झटके से मैंने अपना हाथ छुड़वाकर पिंकी के लोवर व पेंटी में डाल‌ दिया जिससे पिंकी ने ‘अ..अ..ओ…य… न..नहीं..इई.. इ…इईई…श्शशश.. क्क्क…क्या… कर रहा है…’
कहकर पकड़ने की कोशिश करने लगी मगर तब तक मेरा हाथ पिंकी की लोवर व पेंटी को भेद कर उसमें में उतर चुका था।

पहले तो पिंकी ने अपने घुटने मोड़ने चाहे मगर उसके दोनों पैरों को मैंने अपने पैर से दबा रखा था, फिर पिंकी ने दोनों जाँघों को भींच कर अपनी‌ योनि को छुपाने की‌ कोशिश की… मगर उसकी जांघें इतनी मांसल भरी हुई‌ नहीं थी कि उसकी योनि को‌ छुपा सके, उसकी जाँघों को बन्द करने के बाद भी दोनों जाँघों के बीच इतनी जगह रह गई कि मेरी दो उंगलियां उसकी योनि को छू गई जो योनिरस से हल्की सी गीली हो रही थी।

पिंकी की योनि बिल्कुल सपाट व चिकनी लग रही थी जिस पर ना तो कोई उभार था और ना ही कोई बाल महसूस हो रहे थे। मेरी जो दो उंगलियाँ पिंकी कि योनि को‌ जितना छू‌ रही थी उन्हीं से मैं योनि को छेड़ने लगा, साथ में ही योनि को उंगलियों से हल्के हल्के दबा भी रहा था, जिससे पिंकी शर्म से दोहरी हो‌ गई और ‘इईईई…श्शशश…नहीं..इई.. अ..ओ.ओय.. वहां से हाथ हटा…प्लीज… बात… मान.. वहां नहीं… छोड़ ना… अब बहुत हो तो गया… बस्सस…’ करके मेरे हाथ को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी।

मगर मैं कहाँ मानने वाला था, मैं धीरे धीरे ऐसे ही पिंकी की योनि को उंगलियों से दबाता सहलाता रहा जिससे कुछ ही देर में पिंकी की योनि‌ पर असर हो गया क्योंकि मेरी‌ उंगलियाँ कामरस से भीगने लगी और पिंकी के मुँह से भी अब हल्की हल्की कराहें निकलना शुरु हो‌ गई।
पिंकी ने अब भी मेरा हाथ पकड़ रखा था मगर अब वो उसे निकालने की इतनी कोशिश नहीं कर रही थी। मेरा हाथ पकड़े हुए वो अब भी यही बुदबुदा रही‌ थी ‘अ..अ.. ओ…य… न..नहीं..इई.. ना.. इ…इईई… श्शशश… क्क्क…क्या… कर रहा है… इईईई…श्शशश… नहीं..इई.. छोड़ ना… प्लीज.. बस्सस… अब बहुत हो तो गया… बस्सस…’

पिंकी की जांघों की पकड़ भी अब कुछ हल्की होती जा रही थी और धीरे धीरे मेरी‌ उंगलियाँ पिंकी की जाँघों के बीच जगह बना‌कर नीचे की ‌तरफ बढ़ती जा‌ रही थी, तब तक‌ पिंकी की योनि‌ भी काम रस से लबालब हो गई‌। मैंने फिर से पिंकी के होंठों को मुँह में भर लिया और हल्के हल्के उन्हें चूसना शुरू कर दिया. इस दो‌ तरफा हमले को पिंकी ज्यादा देर तक सहन‌ नहीं कर सकी‌ और उसके बदन‌ ने उसका‌ साथ छोड़ दिया, पिंकी की‌ जांघें अब फैलने लगी और वो भी अब कभी कभी मेरे होंठों को हल्का हल्का दबाने लगी थी, तब तक‌ मेरी उंगलियाँ योनि के अनार दाने तक‌ पहुँच गई और मैंने उसे हल्का सा मसल दिया जिससे पिंकी जोर से ‘इईई…श्शशश… अ..अआआ…ह्ह्हहहह…’ करके चिहुंक पड़ी और जोर से मेरे हाथ को दबा लिया. मगर मैं रुका नहीं, धीरे धीरे मेरी उंगलियाँ योनि के प्रवेश द्वार तक पहुँच गई जो‌ योनिरस से भीगकर बिल्कुल तर हो गया था।

पिंकी ने भी अब अपनी जांघें फैलाकर समर्पण कर दिया जिससे मेरे हाथ का पूरी योनि पर अधिकार हो गया और मैं खुलकर पिंकी की‌ योनि‌ को ‌रगड़ने मसलने लगा… पिंकी के मुँह से भी अब सिसकारियाँ निकलनी शुरु‌ हो गई।

मैं पिंकी की योनि को रगड़ते मसलते हुए धीरे धीरे योनिद्वार पर भी हल्का‌ से अन्दर की ‌तरफ दबाने लगा, बस उंगली का एक पौरा भर ही अन्दर कर रहा था, मगर पिंकी अब खुद ही मेरे हाथ को पकड़ कर जोर से दबाते हुए ‘इईई…श्शशश… अआआ…ह्ह्ह… इईई…श्शश… अआआ…ह्ह्हहह…’ करने लगी ताकि मेरी उंगली‌ उसकी गुफा में समा जाये, लेकिन मैं उंगली को योनिद्वार में ज्यादा अन्दर तक नहीं डाल‌ रहा था क्योंकि अन्दर योनि की गुफा काफी संकरी थी।

पिंकी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी उत्तेजना के वश वो नहीं जान पा रही थी कि वो क्या कर रही है। इसलिये मैं जितनी‌ मेरी उंगली योनि में जा रही थी उसे ही योनिद्वार के अन्दर बाहर करने लगा मगर अब मैंने थोड़ी गति‌ बढ़ा दी थी जिससे‌ पिंकी की सिसकारियाँ भी तेज हो‌ गई और वो जोर से ‘इईई… श्शशश… अआआ… ह्ह्हह… इईईई…श्शश… अआआ…ह्ह्ह…’करते हुए मेरे हाथ को अपनी‌ योनि पर दबाने लगी‌ साथ ही वो अपनी दोनों जाँघों को भी कभी खोल रही थी, तो‌ कभी जोर से भींच रही थी।

पिंकी ने मेरे होंठों को भी अब जोरो से काटना शुरू कर दिया था और फिर अचानक से पिंकी का बदन थरथरा गया उसने जोर से ‘इईईई…श्शशश… अआआ…ह्ह्हहहहह… ईई…श्शश… अआआ… ह्ह्ह…’ की किलकारी सी मारते हुए मेरे हाथ को अपनी योनि पर दबा कर जोर से दोनों जाँघों से भींच लिया और उसकी योनि ने मेरे हाथ पर उबलता हुआ सा लावा उगलना शुरू कर दिया।

पिंकी तीन-चार किश्तों में अपने योनिरस के लावे से मेरे हाथ को नहला कर बेसुध सी हो गई। मैं भी कुछ देर तक ऐसे ही बिना कोई हरकत किये खामोशी से पिंकी को देखता रहा मगर मेरा हाथ अब भी पिंकी की पेंटी में ही था।

पिंकी आँखें बन्द करके लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी, चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव साफ नजर आ रहे थे जैसे की‌ कोई बहुत लम्बी दौड़ को जीतने की खुशी के बाद आराम कर रही हो।

पिंकी का ज्वार तो मैंने शांत कर दिया था मगर मैं अब भी प्यासा ही था इसलिये मैंने धीरे से पिंकी के गाल को फिर से चूम‌ लिया, जिससे पिंकी चौंक‌ सी ‌गई जैसे‌ अभी अभी‌ गहरी नींद से जागी हो, पिंकी ने मेरा हाथ पकड़कर अपने पजामे से बाहर निकाल दिया और मुझे धकेल कर जल्दी से उठकर बैठ गई।

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो पिंकी ने अपने कपड़े ठीक करते हुए हल्की सी मुस्कान के साथ बस एक बार मेरी तरफ देखा और फिर शर्माकर गर्दन नीचे झुका ली।
मैंने फिर से पूछा- क्यों… मजा नहीं आया क्या?
इस पर पिंकी ने हल्का सा मुस्कुराकर कहा- तू बहुत गन्दा है।
और शर्माकर फिर से गर्दन नीचे झुका ली।

मैं फिर से‌ पिंकी को पकड़कर‌ चूमना चाहता‌ था मगर तभी‌ बाहर से भाभी ने आवाज देकर मुझे छत पर जाकर कपड़े सुखाने को कहा!
तब तक पिंकी भी घर जाने के लिये जल्दी जल्दी अपनी किताबें समेटने लगी।

जाते समय मैंने फिर से पिंकी का हाथ पकड़ लिया और उससे कहा- आज रात को छत पर मिलेगी क्या?
इस पर पिंकी ने अपने कंधे उचकाकर हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा- क्यों… किसलिये…?
और जल्दी से अपना हाथ छुड़वा कर भाग गई.

Antarvasna

और ऐसा कहकर वो लेट गई Antarvasna और मेरे लन्ड को अपनी चूत के योनि-द्वार पर रगड़ने लगी और जैसे ही उसकी कोमल चूत का स्पर्श मेरे लन्ड पर हुआ, फ़िर से 8″ का लम्बा हो कर सलामी मारने लगा। मेरा लन्ड भी उसकी चूत के लिये बहुत ही व्याकुल था, क्युँकि बहुत तड़पा था राखी की चूत के लिये।

मैंने कहा,” देखा जान ! कैसा फ़ुदक रहा है तुम्हारी चूत के लिये !”

फ़िर मैंने राखी को बेड पर सीधा लिटाया और मैं उसके उपर आ गया। अपने लन्ड को उसकी चूत के गुलाबी छेद पर रखा और अन्दर डालना शुरु कर दिया, उसकी चूत बहुत ही टाईट थी इस लिये मेरा लन्ड उसकी चूत में मुश्किल से जा रहा था, लेकिन कुछ जोर लगाने से सारा अन्दर घुस गया मुझे लगा कि उसकी चूत की सील पहले ही किसी ने तोड़ी हुई है।

मैने उससे पूछा,”क्या आज से पहले कभी सेक्स किया है?”

तो उसने कहा,” हाँ ! एक बार मेरे मामा का लड़का हमारे घर में आया था और रात को वो हमारे कमरे में सोया था तो रात को मेरे करीब आया, उसने मुझे नंगा कर दिया और अपने लन्ड को मेरी गीली चूत के पास लाया और मेरी चूत पर मसलने लगा। मुझे बहुत ही मजा आने लगा था इसलिये मैं उसके लन्ड को अपनी चूत में घुसाने लगी, जैसे ही उसका लन्ड मेरी कुंआरी चूत में गया मुझे बहुत दर्द हुआ था और मेरी चुत में से खून निकलने लगा। फ़िर वो मेरी चूत में कुछ देर तक हिला और जल्दी ही झड़ गया। और वो जाकर सो गया, मेरा मजा अधूरा ही रह गया और उस रात को मैंने अपनी चूत को अपनी उन्ग्लियों से शान्त किया !”

“लेकिन आज आप मेरी चूत को ऐसे चोदना कि इस साली को चैन पड़ जाये !”

मेरे लन्ड ने उसकी चूत में अपने लिये जगह बनाई और पूरा का पूरा 8″ का अन्दर समा गया। मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत की चुदाई शुरु कर दी। अब वो जन्नत में थी, चिल्लाई,” और अन्दर तक डाल दो !”

मैं समझ गया कि उसकी चूत बहुत ही चुदासी हो उठी है।

उसने अपने कूल्हे ऊपर उठाये और मेरे लन्ड को अपनी चूत में और गहराई तक समा लिया। मेरा लन्ड काफ़ी मोटा और तगड़ा था जिससे मेरे लन्ड पर उसकी चूत कसी हुई थी। जैसे ही मैं अपना लन्ड बाहर निकालता उसकी चूत के अन्दर का छल्ला बाहर तक खिंच कर आता और लन्ड के साथ अन्दर चला जाता।

मेरा लन्ड उसकी चूत को अन्दर तक पेल रहा था। कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद मैंने एक तकिया उसकी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे उसकी चूत ऊपर उठ गई और चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया और अपना लन्ड उसके योनि-द्वार पर रखा और कमर को एक झटका दिया, मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर के आखिरी हिस्से पर जा टकराया। राखी उत्तेजना में भर गई, मेरे सीने से चिपक गई और उसके मुँह से निकल पड़ा,” ओह्ह्ह्………हाय्…………अब……मजा मिला है ! आपका लन्ड मेरी चूत के आखिरी हिस्से को रगड़ रहा है, बस ऐसे ही मुझे चोद डालो !”

मैंने उसकी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और उसकी चूत में लन्ड तेज रफ़्तार से आगे पीछे करके लगा। मेरा लन्ड उसकी चूत में रफ़्तार पकड़ चुका था। मैं उसके ऊपर छाया हुआ था और मेरे होंठ उसके रसीले होंठों को चूस रहे थे। राखी की कामोत्तेजना इतनी तीव्र थी कि उसका सारा शरीर तप रहा था, उसने उन्माद में अपनी दोनों आँखें बन्द कर रखी थी और उसका शरीर मछली की तरह तड़प रहा था।

जैसे ही मेरा लन्ड उसकी चूत में जाता, वो अपनी कमर उठा कर लन्ड को अन्दर तक समा लेती, मेरे लन्ड के हर प्रहार का जबाव वो अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी। मेरे बेडरूम का वातावरण राखी की चुदाई से गरम हो रहा था, कमरे में उसके मुँह से उत्तेजना भरी आवाजें गूंज रही थीं,” आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! उईईईईई………उम्म्म्म्म्म्म्……… ।आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्……… ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…… चोद ! मुझे ! कस कर ! हाँ ………और तेज ! जोर जोर से चोद मुझे ! अन्दर तक पेल दे अपने लन्ड को ! फ़ाड डाल मेरी चूत को ! बहुत मजा आ रहा है। और चोद , कस कर चोद, सारा लन्ड डाल कर पेल ! मेरी चूत बहुत ही तंग करती है मुझे ! आज इसको शान्त कर दो अपने लन्ड से ! बहुत दिन बाद चूत की खुजली मिट रही है ! हाँ और तेज ! और तेज ! उईईईईईईइ………आआआअहाआअ………उह्ह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्……………ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्……………हाँ…………”

और राखी का पूरा जिस्म अकड़ गया और उसने मुझे नीचे कर दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई और मेरे लन्ड को अन्दर लिये हुए चूत को रगड़ने लगी और उसने जिस्म को अकड़ाया और रुक गई। उसकी चूत इतनी गरम हो उठी कि मेरा लन्ड पिघलने लगा, और वो चुदाई के आखिरी पड़ाव पर आ गई और झड़ गई। मेरा लन्ड उसकी चूत के तरल द्रव्य से सराबोर हो गया। वो पहली बार इतना स्खलित हुई कि उसकी चूत से गरम गरम रस रिसने लगा और मेरी जांघों पर टपकने लगा।

उसके चेहरे पर सन्तुष्टि का भाव साफ़ नजर आ रहा था, लेकिन मैं अभी जल्दी झड़ने वाला नहीं था और मैं उसको लगातार ऐसे ही चोदे जा रहा था। अब उसकी चूत उसके स्खलित होने से लिसलिसा उठी थी और मेरा लन्ड उसकी चूत को घपाक से चोद रहा था, घच-घच की आवाज उसकी चुदाई से कमरे में गूंज रही थी।

मैंने राखी को घोड़ी की तरह पोजिशन में लिया और पीछे से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया। इस बार मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में आसानी से चला गया और मैं उसको उसी पोजिशन में चोदने लगा।

कुछ देर बाद राखी फिर से झड़ गई। मैं लगातार उसको चोद रहा था, वो भी कमर आगे पीछे करके चुदाई का मजा लेने लगी। उसकी गाँड का भूरा छेद मेरे सामने था, मैं एक उन्गली से उसकी गाँड को भी मसल रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूची पकड़ ली और उनको दबाने लगा। मैं मानो राखी को चोदते हुए स्वर्ग में आ गया था और मैं कस कर रफ़्तार से तेज तेज चोदने लगा। उसके नितम्ब मेरी जांघों से टकरा रहे थे। 10 मिनट के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं भी स्खलित होने वाला हूँ।

मैंने राखी से पूछा तो उसने कहा,”मेरी चूत में ही भर दो तभी इसकी आग शान्त होगी !”

मेरे मुँह से कराह निकली और मेरे लन्ड ने गरम गरम वीर्य से उसकी चूत को भर दिया। मैंने चुदाई तब तक चालू रखी जब तक मेरे लन्ड में से वीर्य की आखिरी बूँद उसकी चूत में न निकल गई और उसी समय राखी भी फ़िर से झड़ ग़ई।

मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया। हम दोनों निढाल होकर बेड पर पड़ गये, उसकी चूत में से मेरा और उसका रस मिश्रित हो कर रिस कर उसकी जांघों पर आ गया।

कुछ देर बाद मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो गया और उस रात को मैंने राखी को दो बार और चोदा।

चुदाई के बाद राखी ने कहा,”आज आपने मेरी चूत की वर्षों की आग को शान्त किया है, ऐसा मजा जिन्दगी में पहली बार मिला है !”

फ़िर उसने मुझे गुड नाइट किस किया और हम दोनों थक कर सो गये। सुबह होते ही वो अपने घर चली गई।

अगर आपको मेरी कहानी पसन्द आई हो तो मुझे मेल करें। Antarvasna

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