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हाय दोस्तो, मेरा नाम राम है और मैं एक Antarvasna Stories काल बॉय हूँ। अन्तर्वासना डोट काम पर मेरी पहली कहानी औरत की चाहत प्रकाशित हुई, मेरी दिल को बड़ी ही खुशी हुई और पाठकों के बहुत सारे मेल मेरे पास आये जिनको पढ़कर बहुत ही ज्यादा खुशी मिली। मैं अपने हृदय से धन्यवाद करता हूँ कि आप को मेरी कहानी पसन्द आई। मैंने जो कहानी लिखी थी वो वास्तव में सच थी और जो कहानी अब लिख रहा हूँ वो भी सच ही है। पाठक जो भी समझें, पर यह एक हकीकत है क्योंकि मेरे पास इतना लिखने को है कि मैं रोज एक कहानी लिखूं तो भी तीन चार साल लग जायेंगे जो कि काल्पनिक नहीं हकीकत है।
इस समाज का एक कड़वा सच और मेरा भुगता हुआ। चलो अब अपको मैं अपना परिचय एक बार फिर से कराता हूँ !
मेरा नाम राम रंग साफ, कद ५ फीट ८ इंच, एकदम से स्लिम हूँ। मैं दिल्ली में रहता हूँ।
अब मैं दोस्तो अपनी कहानी पर आता हूँ।
मेरी नौकरी तो शिवानी मैडम ने अपने पति के ही ऑफिस में लगवा दी और मैं अब बड़ा ही खुश रहने लगा। दो महीने के बाद मोहित मेरे घर पर आया और कहने लगा- राम क्या बात है यार ! आप तो हम को भूल ही गये ? क्या हुआ ?
मैंने कहा- यार मोहित ! आपने तो मेरी जिन्दगी ही बदल दी ! आपका अहसान तो मैं जिन्दगी भर नहीं भुला सकता ! मोहित आप क्या कह रहे हो ! मैं तो आपका जिन्दगी भर आभारी रहूँगा।
मोहित ने कहा- तो फिर आप ना तो हमसे मिलने के ही लिए आये और ना ही फोन किया? हम तो समझे कि आप तो हमको भूल ही गये, राम।
मैंने कहा- नहीं मोहित ! बात ही कुछ ऐसी है कि समय ही नहीं मिला। यार मोहित, नौकरी जो कर ली है !
मोहित कहने लगा- नौकरी कहां पर कर ली है?
तो मैंने कहा- मैडम शिवानी जी ने अपने पति के ऑफिस में ग्राफिक्स डिजायनर की नौकरी दिला दी है।
तो मोहित कहने लगा- यह तो बहुत ही खुशी की बात है यार ! आपने तो मुँह भी मीठा नहीं करवाया !
मैंने कहा- दोस्त मोहित, ये लो अपना मुँह मीठा करो।
तो मोहित ने मिठाई खाने के बाद कहा- यार राम, आपने तो फोन भी ले लिया है ! यार ऐसी क्या लाटरी लग गई?
मैंने कहा- नहीं मोहित, यह तो आपकी ही मेहरबानी है कि आज मेरे पास सब कुछ है। और मुझे क्या चाहिए मेरे दोस्त मोहित। आपने जो मुझ गरीब पर अहसान किया हैं वो आज के जमाने में कौन किस पर करता हैं मोहित। आप तो मेरे लिए भगवान हैं।
थोड़ी देर के बाद मोहित बोला- यार राम, यह क्या हुआ ? आपने हमारे लिए पार्टी का भी इंतजाम नहीं किया ? ये तो कोई बात नहीं हुई राम।
मैंने कहा- मेरे दोस्त मोहित, बोलो आपको क्या चाहिए।
मोहित ने कहा- यार कुछ बीयर-शीयर हो जाए।
मैंने कहा- हाँ यार, क्यों नहीं ! अभी आपके लिए हाजिर करता हूँ !
तो मैंने फ्रिज से दो बीयर निकाली और मेज़ पर रख दी, दो गिलास में डाल दी और फ्रिज से पनीर निकाल कर उसको टुकड़ों में काटकर प्लेट में रखकर कहा- लो यार मोहित।
हम दोनों ने एक एक गिलास बीयर पी। और फिर मैंने दो गिलास में डाल दी तो मोहित कहने लगा- यार राम, आपको हमारा काम अच्छा नहीं लगा।
मैंने कहा- नहीं यार मोहित आपके काम की ही वजह से तो मैं सब कुछ हूँ, नहीं तो मेरे पास क्या था ? जो भी आज मेरे पास वो सब कुछ आपका ही तो दिया हुआ है, आप तो मेरे लिए भगवान के समान हो। आप जो भी कहें मैं वही करने के लिए हमेशा ही तैयार हूँ और रहूँगा।
फिर मैंने दो गिलास में बीयर डाली और मोहित को कहा- यार पियो और मेरे लिए कोई काम हो तो बताओ, मैं अपना सारा काम छोड़कर आपका जो भी काम होगा मैं करने के लिए हमेशा तैयार हूँ।
मोहित ने कहा- यार राम, मुझको आपके बारे में सब कुछ पता है जो आपको भी नहीं पता।
तो मैंने कहा- मोहित भाई ऐसी क्या बात हुई कि आप इतने ज्यादा परेशान हो गये?
मोहित कहने लगा- यार आपको मेरे काम के बारे में तो पता ही है, तो मेरी भी मजबूरी समझो, मैं इसलिए ही आपके पास आया हूँ ! आप तो एक काल करके खुश हो और अपनी जिन्दगी आराम से काट रहे हो, पर मेरी तो जिन्दगी ही दूभर हो गई है और मैं परेशानी में घिर गया हूँ क्योंकि हर कोई अब आपकी ही डिमान्ड करने लगी है, पर हमें तो पता ही नहीं था कि आप कहाँ पर हो।
मैंने कहा- यार मोहित, मेरा जो भी हैं वो सब आपकी ही तो देन हैं तो आप परेशान क्यों हो?
मोहित ने कहा- राम अपना पहले तो फोन नम्बर दो !
और मैंने अपना फोन नम्बर मोहित को दिया तो मोहित ने कहा- आपको एक हफ़्ते तक रोज काल पर जाना है।
मैंने कहा- मोहित भाई, ऐसा तो मत करो, मुझे भी तो काम करना होता है।
मोहित ने कहा- अभी तो कह रहे थे कि जो भी आप कहोगे मैं वही करुँगा ! तो अब क्या हुआ?
मैंने कहा- यार मोहित मुझे दिन भर नौकरी भी तो करनी है और फिर काम का बोझ भी तो बहुत ही ज्यादा है।
मोहित ने कहा- कोई बात नहीं ! आपको जो चाहिए वो सब मिलेगा।
फिर मैंने हामी भर दी तो मोहित बोला- राम यार आप तो कभी कुछ लेते ही नहीं थे पर आपके तो फ्रिज में तो बहुत ही बीयर रखी हैं और आप मेरे साथ भी पी रहे हो ! माजरा क्या है?
मैंने कहा- मोहित यह आपकी ही सोहबत का ही तो असर है।
मोहित बोला- अब आप मेरे ही साथ काम करोगे।
मैंने कहा- ठीक है, आप जैसा कहोगे, मैं तैयार हूँ !
तो मोहित ने कहा- मैं आपको फोन नम्बर दूंगा और आप उस पर फोन करना !
मैंने कहा- नहीं मोहित, मुझे नहीं उनको आप मेरा फोन नम्बर देना ! मैं जवाब दूगाँ जैसा आप चाहोगे और आप जो भी दोगे मुझे मंजूर है।
मोहित ने कहा- राम ऐसी बात है तो ६०-४० कर लेते हैं।
मैंने कहा- ठीक है, पर कीमत मेरे ही हिसाब से लगाना !
मोहित ने कहा- ठीक है यार आज आप की ही माँग है, जैसा आप कहोगें वही होगा। बस आप फोन का जवाब देना।
फिर मोहित जाने लगा तो मैंने कहा- यार मोहित यह तो कोई बात नहीं हुई, यह बीयर तो खत्म कर देते हैं !
हम दोनों ने एक-एक गिलास बीयर और पी और फिर मोहित जाने लगा तो मैंने कहा- यार चलो अब खाना खा लेते हैं।
मोहित ने कहा- नहीं यार, फिर कभी साथ में खायेंगे।
मैंने कहा- चलो बाहर खा लेते हैं !
तो मोहित ने कहा- आज नहीं यार ! टाइम बहुत हो चुका हैं और मुझे भी तो कुछ अरेन्ज करना है।
मैं मोहित को बाहर तक छोड़ने के लिए आया।
अगले दिन मुझे साढ़े ग्यारह बजे एक मैडम का फोन आया कि मैं मिस्टर राम से बात कर सकती हूँ? तो मैंने कहा- हाँ ! मैं राम बोल रहा हूँ ! आप कौन ?
मैडम ने कहा- मैं रूबी बोल रही हूँ !
मैंने कहा- हाँ बोलिये रूबी जी ! मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ?
रूबी मैडम ने कहा- मुझे मोहित ने आपका नम्बर दिया है !
मैंने कहा- हाँ ठीक है, कोई बात नहीं! आप कहिए !
रूबी कहने लगी- मेरा नाम रूबी है और मेरी उम्र २६ साल है।
मैंने कहा- रूबी मैम कहिए, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ?
तो रूबी बोली- आज आपको हमारे घर पर शाम को नौ बजे आना है और सही टाइम पर आना हैं हम आपका इन्तजार करेंगे। आपको जरूर आना है।
मैंने कहा- रूबी जी ! पता तो बता दो !
तो रूबी ने अपना पता नोएडा सेक्टर १४ बताया। मैंने कहा- ठीक है, आपको फीस का तो पता है ना ?
रूबी मैम बोली- फीस की आप चिन्ता मत करो, आपको आपकी फीस के हिसाब से ज्यादा ही मिलेगा।
कहा- रूबी मैडम, ठीक है, मैं पहुँच जाऊँगा।
फिर मैंने मोहित को फोन किया तो मोहित ने कहा- हाँ यार ! रूबी को मैंने ही आपका फोन दिया था, उसकी काल आई होगी !
मैंने कहा- हाँ ! मुझे क्या करना होगा?
मोहित ने कहा- यार वही सब कुछ जो आपने पहले किया था बस अब घबराना मत ! सही समय पर पहुँच जाना।
मैं शाम को ठीक समय पर रूबी मैडम के घर पर पहुँचा तो एक मैम ने दरवाजा खोला, पूछा कि आपको किससे मिलना है?
मैंने कहा- मुझे रूबी मैडम से मिलना है !
तो मैडम मुझे देखकर मुस्कुराने लगी और कहने लगी- आप राम हो? आप तो टाईम के बड़े ही पाबन्द हो !
मैंने कहा- मैम मेरा तो सारा ही काम टाईम के हिसाब से चलता है!
रूबी की लम्बाई ५ फीट ४ इंच, कमर ३० इंच, हिप्स ३६, चेस्ट ३२, रंग गौरा और रूबी ने नीले रंग की जीन्स और सफेद का रंग का टॉप पहना था। रूबी को देखकर मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ। रूबी ने मुझे अन्दर आने को कहा और मैं पीछे-पीछे अन्दर चला गया।
रूबी ने ड्राइंगरूम में मुझको बिठाया और खुद ही पानी लेकर आई। फिर हम दोनों एक दूसरे के बारे में बात करने लगे। रूबी ने कहा- राम आप इस प्रोफेशन में कितने दिनों से हो?
मैंने कहा- मैडम, यही कोई दो तीन महीने से।
रूबी हँसने लगी और कहने लगी- राम आपकी तारीफ तो बहुत सुनी है, पर आप देखने में तो कमजोर से लगते हो।
मैंने कहा- रूबी जी ! देखने या सुनने से क्या होता है, जो भी है वो तो अभी सब कुछ आपके सामने आ जाएगा।
फिर रूबी खिलखिलाकर हँसने लगी। थोड़ी देर के बाद रूबी जी ने कहा- राम आप क्या लोगे?
मैंने कहा- कुछ भी चलेगा !
रूबी कहने लगी- मेरा मतलब हैं कि विस्की, रम या बीयर?
मैंने कहा- आप जो लेंगी वही हम भी ले लेंगे।
तो रूबी जी ने कहा- बीयर चलेगी?
मैंने कहा- चलेगी क्या दौडेगी।
रूबी दो गिलास और दो बोतल बीयर लेकर आई और खोलकर गिलास में डाली, एक गिलास मुझे दिया और एक खुद ऊपर उठाकर चियर्स किया। हम दोनों ने अपना अपना गिलास खत्म किया।
मैंने कहा- रूबी जी, आपका घर तो अच्छा खासा है ! यहाँ पर और कोई रहता हैं क्या?
क्योंकि घर पर तो रूबी जी अकेली ही थी।
रूबी कहने लगी- मेरे पति कनाडा में रहते हैं और साल में एक दो बार ही आते हैं, मेरे साथ में मेरे सास व ससुर जी रहते हैं, एक नौकरानी हैं जो आज छुटटी पर है, इसलिए मैंने मोहित से सम्पर्क किया कि अकेले अकेले बोर होने से अच्छा है कि कुछ एन्जोय ही कर लिया जाय।
मैंने कहा- बच्चे नहीं हैं क्या?
तो रूबी जी कहने लगी- नहीं ! अभी तक तो कोई नहीं ! आगे का पता नहीं।
मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं इन्जोय करते हैं और आज आपकी रात को हसीन बना देते हैं !
और मैंने उठकर बाकी की बची बियर दोनों गिलास में डाली और एक गिलास रूबी को दिया और हम दोनों ने एक ही बार में अपना गिलास खत्म किया। मैं रूबी के पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ रूबी के कंधे पर रखकर कहने लगा- रूबी जी, आपने इससे पहले भी किसी गैर मर्द के साथ सैक्स किया है?
रूबी कहने लगी- शादी से पहले दो-चार बार अपने बायफ्रेन्ड के साथ किया था और उसके बाद अपने पति के साथ।
मैं कहने लगा- नहीं शादी के बाद ! जैसे आप मेरे साथ करने जा रही हो !
तो रूबी कहने लगी- नहीं आज पहली बार करने जा रही हूँ ! वो भी अपनी सहेली के कहने पर कि घर पर पडे पडे बोर होने से अच्छा हैं कि अपने अन्दर की आग को कुछ शान्त कर लो।
क्योंकि इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है।
मैंने अपने हाथ रूबी के कन्धे पर से हटाकर रूबी की चूचियों पर फिराने लगा, कपडों के ऊपर ही और उनको धीरे धीरे मसल भी देता। रूबी को नशा चढ़ने लगा था, कुछ तो पहले ही बीयर का नशा और फिर सैक्स का नशा, वो भी किसी गैर मर्द के साथ। रूबी बहकी बहकी आवाज में बोली- राम यार ! यह क्या कर रहे हो? ऊपर से ही करने का इरादा है क्या ?
मैंने कहा- नहीं यार रूबी ऐसा कोई इरादा नहीं ! चलो थोड़ी-थोड़ी बीयर और लेते हैं।
रूबी ने मुझको कस के बाँहों में भर लिया और कहने लगी- पीने के अलावा भी हम भी तो हैं ! आज हमें ही पी लो ! और अपने होंठों को मेरे होठों से सटा दिया। रूबी मेरे होंठों को चूसने लगी। मैं भी अब रूबी के सर को पकड़कर उनके होंठों को बेतहाशा चूसने लगा और अपनी जीभ रूबी के मुँह में डाल दी। रूबी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। तीन चार मिनट तक हम एक दूसरे को ऐसे ही चूमते रहे।
उसके बाद रूबी ने अपना हाथ मेरी पैन्ट के अन्दर डाल दिया, मेरे लन्ड को पकड़ लिया और कहने लगी- राम, जो आपके बारे में सुना था, यह तो सचमुच में ही उतना ही बड़ा है !
मैं भी रूबी की गाँड को एक हाथ से सहलाने लगा और एक हाथ से रूबी की चूची को मसलने लगा। तो रूबी मेरे लन्ड को छोड़कर मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, शर्ट को उतार फेंका और कहने लगी- राम बैडरूम में चलते हैं।
मैंने कहा- रूबी मेरी जान ! आप जहाँ कहो, मैं तो आपकी सेवा में वहीं हाजिर हूँ ! जहाँ कहो वहीं पर चुदाई कर देंगे आपकी रूबी जी।
रूबी हँसने लगी और कहने लगी- चलो ना बैडरूम में !
मैंने रूबी को छोड़ दिया और अपने आपको संभाला और रूबी के पीछे पीछे उसके बैडरूम में चला गया। रूबी बैडरूम में जाकर बैड पर लेट गई और मुझे इशारा करने लगी- आ जाओ राम। मेरे तन की प्यास बुझा दो राम।
मैंने अपने कपड़े उतार दिये और मेरे शरीर पर अब सिर्फ अन्डरवीयर ही बचा था तो रूबी उसको देखकर कहने लगी- राम इसको भी उतार दो ना।
मैंने कहा- मेरी जान रूबी ! सब कुछ उतार दूँगा ! पहले आपके बदन की नुमाईश तो कर लूँ देखूँ कि आपका शरीर कैसा हैं क्योंकि अभी तक तो उपर से देखा है, अब अन्दर भी देख लेता हूँ !
क्यों नहीं राम। आज हमारा पूरा का पूरा शरीर आपके लिए हाजिर हैं आप जो भी करना चाहो, आप हर तरह से आजाद हो ! पर ये देख लेना कि हमको पूरी तरह से खुश करके जाना है, हमें निराशा नहीं मिलनी चाहिए राम।
मैंने कहा- रूबी जी ! अगर हमने आपको खुश नहीं किया तो हमारा नाम भी राम नहीं।
और हम दोनों फिर हँसने लगे। और एक दूसरे के बदन से छेडछाड़ करने लगे। हम दोनों बच्चों की तरह से एक दूसरे को कभी चूमते तो कभी मैं रूबी की चूचियों को भींच देता तो कभी रूबी की गाँड के अन्दर उँगली डाल देता कपड़ों के उपर से ही और कभी रूबी की चूत को भींच देता। रूबी भी कहाँ कम रहने वाली थी, वो भी कभी मेरे गालों को पकड़कर खींचती तो कभी मेरे लन्ड को पकड़ के हद से ज्यादा दबा देती और हम दोनों ८-१० मिनट तक एक दूसरे को ऐसे ही छेड़ते रहे। फिर मैं रूबी को लिटाकर उसके ऊपर चढ़ गया और रूबी नीचे लेट गई।
मैंने पहले रूबी का टॉप निकाला और रूबी की चूचियों को उसकी सफेद ब्रा के ही उपर से दबाने लगा। रूबी की चूचियाँ एक दम से गर्म होने के कारण टाईट हो गई थी, उनको दबाने लगा फिर मैंने रूबी की ब्रा भी उतार फेंकी और रूबी के मम्मों को आजाद कर दिया। वाह ! क्या मम्में थे- गोल गोल सफेद रंग के और निप्पल तो पूरे गुलाबी रंग के ! वाह उनको देखकर मेरे मुहँ में पानी आ गया और उनको चूसने लगा, बार बार एक दूसरे को बदल बदल के चूसने लगा और रूबी के मुहँ से आवाज आने लगी- आ आ ई ई ऐ ऐ आ आ !
और मैं भी तेजी से रूबी के बदन को चूसने-चाटने लगा। रूबी बड़बड़ाने लगी- राम बड़ा ही मजा आ रहा है ! लगे रहो राम ! ओ राम।
और रूबी ने मेरे अन्डरवीयर को उतार फेंका, मेरे लन्ड को पकड़कर सहलाने लगी। मैं भी अब रूबी की चूचियों को छोड़ कर रूबी की जीन्स के बटन को खोलकर पैरों से बाहर निकाल फेंका। अब रूबी के शरीर पर सिर्फ एक सफेद रंग की पैन्टी ही बची।
मैं रूबी की जांघों का सहलाने लगा। रूबी बोली- राम अब रूका नहीं जाता ! अब अपना लन्ड जल्दी से मेरी चूत में डाल दो।
मैंने रूबी को बाहों में लेकर कहा- रूबी जी ! पूरा मजा लो और लेने दो क्योंकि बाद में आपको हमसे कोई भी शिकायत न रह जाए।
रूबी जी कहने लगी- राम मैं क्या करूँ, अपने आपको रोकना मेरे बस की बात नहीं है, राम अब कुछ करो नाऽऽआ राम करो ना।
मैंने रूबी की पैन्टी को उतार फेंका और रूबी की गुलाबी और क्लीन-शेव चूत को देखकर पागल होने लगा। रूबी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसमें से पानी रिस रिस कर बह रहा था। रूबी की चूत की खुशबू मुझको मदहोश करती जा रही थी। फिर मैंने रूबी की चूत को किस किया और उसको चूमने लगा।
रूबी कहने लगी- राम अब अन्दर डाल दो ना ! मेरी तो बर्दाश्त से बाहर हो गया है, राम डालो भी ना।
तो मैंने अपना लन्ड रूबी के होंठो पर लगा दिया, ६९ की पोजीशन में आ गया। मैं रूबी की चूत को चाटने लगा और रूबी मेरे लन्ड को मुँह में लेकर चूसने लगी और ७-८ मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही मुँह से चोदते रहे। उसके बाद रूबी ने मेरे लन्ड को छोड़ दिया और मेरे नीचे से खिसकने लगी तो मैंने अपनी जीभ को रूबी की चूत में अन्दर तक डाल दिया, रूबी का शरीर ऐंठने लगा और रूबी की चूत ने मेरे मुँह में ही अपना पानी छोड़ दिया और मैं उसके नमकीन पानी को पी गया।
अब मैंने रूबी की चूत को छोड़कर अपनी जेब से कन्डोम निकाला पर रूबी ने मुझको रोक दिया और कहने लगी- राम, बिना कन्डोम के ही करो, ज्यादा मजा आयेगा ! मुझको कोई भी परेशानी नहीं और न ही कोई यौन रोग है।
मैंने कहा- रूबी जी जैसा आप कहो, हम तैयार हैं क्योंकि आज के लिए हम आपके गुलाम जो ठहरे।
रूबी कहने लगी- नहीं राम ! ऐसे नहीं कहते ! हम दोनों क्या दोस्त नहीं बन सकते?
मैं कहने लगा- रूबी जी, दोस्त तो बन जायेंगे, पर अगर घोड़ा घास से दोस्ती कर लेगा तो खायेगा क्या?
तो रूबी हँसने लगी- नहीं राम मेरा मतलब यह नहीं था ! आपकी फीस आपको हमेशा मिलेगी। और ओरों से भी ज्यादा !
तो मैं कहने लगा- यह हुई ना बात रूबी जी !
और मैंने रूबी को कस के पकड़ लिया और अपना लन्ड रूबी को पकड़ा दिया। तो रूबी उसको मुँह में लेकर चूसने लगी और एक हाथ से मुठ मारने लगी। मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी और दो मिनट के बाद मैंने अपना लन्ड रूबी के मुँह से निकालकर रूबी की चूत पर टिका दिया तो रूबी कहने लगी- राम चूत तो गीली है पर अपना लन्ड धीरे धीरे से घुसाना ! क्योंकि आपका लन्ड तो बहुत मोटा और बड़ा है, मैंने आज तक इतना बडा लन्ड अपनी चूत में नहीं लिया है!
तो मैंने रूबी की टांगों को थोड़ा चौड़ा करके अपना लन्ड रूबी की चूत पर सैट करके एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा आधा लन्ड रूबी की चूत में समां गया तो रूबी के मुँह से चीख निकल पड़ी और कहने लगी- राम अभी अन्दर मत करना ! जहाँ हैं वहीं पर रहने दो ! मुझको बहुत तेज दर्द हो रहा है।
रूबी की चूत ने मेरे लन्ड को चारों ओर से जकड़ लिया और मैं रूबी की चूचियों को चूसने और मसलने लगा दो मिनट के बाद रूबी को थोड़ी राहत महसूस हुई और मैं अपने लन्ड को वहीं पर आगे पीछे करने
रूबी को मजा आने लगा तो रूबी बोली- राम बस अब अबकी बार अपना पूरा का पूरा लन्ड अन्दर उतार देना ! मेरी परवाह मत करना ! राम बड़ा ही मजा आ रहा है !
और फिर मैंने अपना लन्ड रूबी की चूत से बाहर खींचा और एक बहुत ही तेज धक्का मारा और मेरा पूरा का पूरा लन्ड रूबी की चूत में जड़ तक समा गया और रूबी के मुँह से घुटी घुटी सी चीख निकलने लगी। रूबी का चेहरा लाल हो गया और आँखों से आँसू आने लगे पर रूबी बोली- कुछ भी नहीं हुआ राम ! आप फिकर मत करो राम !
फिर मैंने रूबी की चुचियों को सहलाना शुरू किया तो कुछ ही देर में रूबी कहने लगी- राम धीरे धीरे से करो ना ! रूक क्यों गये ? मुझको तो मजा आ रहा है !
मैं भी धीरे धीरे अपने लन्ड को रूबी की चूत में आगे पीछे करने लगा। अब रूबी को मजा आने लगा और कहने लगी- राम अपनी स्पीड बढ़ा दो ! बड़ा ही मजा आ रहा है !
उसके मुँह से आ आ आ ई ई ई ई ई उ उ उ उ उ ऐ ऐऐए राम राम ययययय मार डाल ! आज तो मेरे कस कस के सारे बल निकाल दे राम ! ओ राम माई डियर ! फक मी ! फक मी ! फक मी हार्डर ! राम वास्तव में ही आप राम हो !
यह कहते कहते रूबी की चूत ने पानी छोड़ दिया और रूबी ढीली पड़ गई। पर मेरा कहाँ इतनी जल्दी छूटने वाला था, मैं तो रूबी पर सवार था और धक्के पे धक्के लगाये जा रहा था। फिर मैंने रूबी को कहा- रूबी जी, अब आप बैड से नीचे खड़ी हो जाओ !
रूबी बेड से नीचे खड़ा हो गई तो मैंने रूबी से कहा- अपने हाथ बैड पर रखकर झुक जाओ !
तो रूबी ऐसे ही झुक गई और मैंने अपना लन्ड रूबी की चूत में पीछे से डाल दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा और रूबी को मजा आने लगा। मैंने अपने धक्कों की स्पीड धीरे धीरे बढ़ानी शुरू कर दी और रूबी को मजा आने लगा- आ आ आ आआ आआआ ईईईई इ एएएएए ओओओ आहा आहा !
और फिर मैंने अपने घक्कों को स्पीड फुल कर दिया। १०-१२ मिनट के बाद मेरे लन्ड का पानी छुटने को हुआ तो मैंने रूबी को बैड पर लिटाकर, ऊपर लेटकर खूब तेजी से धक्के पे धक्के लगाकर अपना पानी रूबी की चूत में छोड़ दिया और रूबी भी उसी दौरान झड़ गई।
मैं रूबी के उपर दो तीन मिनट तक लेटा रहा। १०-१५ मिनट के बाद मैंने कहा- रूबी जी आपको मजा आया या नहीं?
तो रूबी कहने लगी- इतना मजा पहली बार ले रही हूँ ! आज तक जिन्दगी में इतना मजा और तृप्ति मुझको कभी नहीं मिली !
तो मैं कहने लगा- रूबी, अब मैं चलता हूँ !
तो रूबी कहने लगी- अभी नहीं ! एक बार और हो जाये राम !
तो मैंने कहा- रूबी जी ! आपको खुश कर दिया, यही मेरा काम था। यहीं पर मेरा काम खत्म हो जाता हैं। अब रूबी जी मेरी फीस दो ! मैं चलता हूँ !
तो रूबी नशीली आँखों से मुझको देखकर बोली- आपकी फीस मिल जायेगी और वो भी मुँह माँगी। मुझको पता है कि आप फीस अपने हिसाब से लेते हो ! पर कोई बात नहीं अभी एक बार मेरी आग शान्त करके जाना जोकि बहुत दिन से भड़की हुई थी राम। यार राम ! ओ मेरे राम ! बस एक बार ! आप नाराज तो नहीं हो गये?
आगे क्या हुआ- अगले भाग में ! Antarvasna Stories
आज बहुत दिन बाद मैं कोई कहानी लिखने जा Hindi Porn Stories रही हूँ मैं असल में बाहर चली गई थी।
आप लोगों के बहुत सारे मेल मिले थे जिनमें मेरी कहानियों को काफ़ी पसंद किया गया है जिसका मैं आप सबका खुले दिल और फ़ैली चूत के साथ शुक्रिया अदा करती हूँ लड़कियों की चूत के लिये दुआ करुंगी कि उनको भी कोई चोदने वाला जल्दी से मिल जाए।
और लड़के तो साले होते ही हरामी हैं, कहीं और नहीं मिली तो घर में ही शुरु हो गये।
मुझे लड़कों से एक शिकायत है कि वो सब ही मुझे चोदना चाहते हैं! अरे यार… मुझे चुदवाने से कोई इंकार नहीं है पर अब मैं बैठी यू पी में… और आप लोग पता नहीं कहाँ कहाँ बैठे हो, अब भला किसी का लंड इतना बड़ा तो होगा नहीं कि वहाँ बैठे बैठे मेरी चूत को चोद डाले…
तो प्लीज़ मुझसे हर तरह की बात करें पर मुझे चोदने की बात न करें क्योंकि यह हो नहीं सकता।
हाँ तो अब मैं आप सबको बताती हूँ कि मैं आगरा अपनी मुमानी के घर गई थी करीब 5 साल बाद अपनी अम्मी और भाई के साथ…
वहाँ मुझे बहुत अच्छा लगा, इतने साल बाद जाने के बाद वहाँ सभी लोग बहुत प्यार से मिल रहे थे। हम लोगों ने खूब मौज मस्ती की पर हफ़्ते भर बाद ही मुझमें चुदाने के कीड़े रेंगने लगे क्योंकि कहाँ तो लगभग रोज़ ही चूत में लंड खाती थी, शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब मैं न चुदवाऊँ, पर यहाँ तो चुदाई क्या साला किसी से चूची मसलवाने को तरस गई।
हालांकि मेरी मुमानी की दो लड़कियाँ मेरी हमउम्र थी पर वो बहुत सीधी सादी थी। कम से कम उनके बर्ताव से तो यही ज़ाहिर होता था कि बच्चियाँ अभी बहुत नादान हैं, बेचारी अपनी जवानी के बारे में भी शायद नहीं जानती थी जबकि वो दोनों बला की खूबसूरत हैं, जिस्म का रंग दूध जैसा गोरा, भरी भरी जांघें, लाल-लाल गाल और चूचियाँ तो कयामत थी! कसम से उनकी चूची बला की खूबसूरत थी! उनमें छोटी वाली अभी स्कर्ट टॉप ही पहना करती थी।
मैं अकसर सोचती कि साली इतनी खूबसूरत हैं दोनों, फ़िर भी इतनी सीधी साधी हैं।
एक दिन की बात है मैं छत पर नहा कर बाल सुखा रही थी कि तभी कोई मेरे पीछे से मेरी गांड में लौड़ा अड़ा कर मेरी चूचियों को दबाने लगा। मेरी तो बांछें खिल गई, सोचा किसी को तो तरस आया मेरी जवानी पे!
जब घूम कर देखा तो भाई जान थे।
मैंने कहा- हटिये भी भाई! भला यह भी कोई जगह है प्यार करने की? कोई देख लेगा तो शामत आ जायेगी।
तब भाई ने उसी अवस्था में खड़े खड़े मेरी चूचियाँ दबाते हुए कहा- हाँ यार, यह तो है! साला यहाँ बाकी सब तो ठीक है पर लंड को बहुत तरसना पड़ता है। साला यहाँ घर ऐसा महल तो है नहीं कि जब जी चाहा बिस्तर पर पटक कर चोद लिया! यार तुम न हुई तो अम्मी की पुरानी भोसड़ी में ही लंड डाल लिया, नहीं तो तुम्हें ही चोद लिया पर साला यहाँ तो बड़ी दिक्कत है, अब हफ़्ता भर हो गया, साला लंड को कोई चूत नसीब नहीं हुई।
उनके चूची दबाने से मैं अब तक गर्म हो चुकी थी, तब मैंने कहा- भाई, अब आप मेरी चूची न दबायें क्योंकि इस तरह तो आग और भड़क रही है, जब चोद नहीं पायेंगे तब गुसल खाने में जाकर मुझे भी उंगली करनी पड़ेगी और आपको भी मुठ मारना पड़ेगा।
तब भाई ने कहा- यार, अब इतने दिन बाद मौका मिला है तो बिना चोदे तो नहीं छोडूंगा, चाहे जो हो जाए!
और यह कह कर मेरा तौलिया खोलने लगे.
मगर मैंने कहा- हाय भाई, ऐसा न कीजिये, कहीं यहाँ किसी ने देख लिया तो बड़ी बदनामी हो जायेगी! चुदवाने का मन तो मेरा भी है पर क्या करें, मज़बूरी है!
तब भाई ने कहा- अच्छा तुम नहीं मान रही तो मेरा लंड बस मुंह से चूस कर ही हल्का कर दो, मैं सब्र कर लूंगा।
मैंने कहा- भाई, आप मान नहीं रहे, कहीं कोई उलटी सीधी बात हो गई तो क्या होगा?
मगर भाई न माने और मुझे एक तरफ़ दीवार की आड़ में ले गये और अपनी पैंट की जिप खोल कर मुझे घुटनो के बल फ़र्श पर बैठा दिया और मेरे हाथ में लंड पकड़ा कर बोले- प्यारी बहना चूस कर खलास कर दो लंड को!तब मैंने कहा- भाई, अभी तो खड़ा भी नहीं हुआ, बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और वक्त भी लगेगा। आप मान नहीं रहे।
तब वो मेरी चूची को तौलिये के ऊपर से दबाते हुए बोले- साली नाटक न कर बहन की लौड़ी! एक तो चोदने को नहीं मिल रहा, ऊपर से तू बातें चोद रही है! चल जल्दी से चूस कर खड़ा कर लंड को!
तब मुझे भी गुस्सा आ गया, मैंने कहा- बड़ी बहादुरी दिखा रहे हो? लो अब मैं भी बहादुरी दिखाती हूँ।
ये कह कर मैंने अपनी टोवल उतार कर फ़ेंक दी और झट से भाई का लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी.
भाई ने जब देखा कि मैंने टोवल उतार कर फ़ेंक दी तो उसकी भी गांड फ़टी- आरज़ू, तुमने ये क्या किया? कहीं किसी ने देख लिया तो क्या होगा?
तब मैंने कहा- अभी मैं कह रही थी तो मेरी गांड में घुस गये अब काहे गांड फ़टी जा रही है. चोदो जो होगा देखा जायेगा, ज्यादा से ज्यादा मुमानी की लड़कियाँ या मुमानी ही तो आयेंगी ऊपर सम्भाल लूंगी मैं…
उनको तब भाई ने कहा- अगर मामु जान आ गये तो क्या होगा?
तब मैंने कहा- यार लड़कियों और अम्मा को तुम सम्भालना और अगर मामु जान आये तो वो मेरी चूत और नंगी चूचियाँ देख कर ही धरशायी हो जायेंगे!
उसके बाद मैंने भाई से कहा- भाई, आप जल्दी से मेरी चूत को चाट कर गर्म कर दो और आपका लंड मैं चूस कर तैयार करती हूं.
तब भाई जल्दी से मेरी चूत की तरफ़ मुंह करके लेट गये और अपने लंड को मेरे मुंह के पास ले आये और तब मैं जल्दी से उनका लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी. भाई भी चटाक चटाक मेरी बुर को चटखारे के साथ चूस रहे थे.
भाई का लंड जल्दी ही खड़ा हो कर तन गया मगर मैं अभी पूरी तरह से गर्म नहीं हुई थी.
तब भाई ने कहा- आरज़ू, तुम जल्दी से चौपाया बन जाओ, मैं पीछे से डालता हूं आज तुम्हारी चूत में!
मैंने कहा- भाई, अभी मैं पूरी तरह गर्म नहीं हूं, आप ऐसा कीजिये कि अपनी टांगें फ़ैला लीजिये, मैं आज झूला आसन से चुदाऊँगी!
भाई अपनी टांगें सीधी फ़ैला कर बैठ गये और मैं अपनी चूत फ़ैला कर उनकी टांगों के बीच खड़ी हो गई और पहले भाई से कहा- भाई, एक किस मेरी बुर पर कीजिये, फ़िर सम्भाल कर बैठ जाइये मैं अचानक अपनी चूत आपके लंड पर गिराऊँगी.
भाई ने मेरी चूत पर किस तो करा मगर फ़िर बोले- रानी, अगर सेंटर आउट हो गया तो मेरी भी गांड फ़टेगी और तुम्हारी भी इसलिये भलाई इसी में है कि चुपचाप मेरे लौड़े पर अपनी चूत रख कर बैठ जाओ!
मगर मुझे तो ज़िद चढ़ गई, मैंने कहा- जैसा कहती हूं करो!
तब भाई सम्भल कर बैठ गये और मैं धड़ से उनके लंड पर बैठने को हुई कि उनका लंड पीछे चला गया और मेरी गांड के नीचे दब गया. भाई के मुंह से एक दर्द भरी चीख निकल गई- आआअह मार डाला कुतिया… सालीईई मैं पहले ही कह रहा था तू नहीं कर पायेगी मगर तू तो आज मेरी गांड फ़ाड़ने पर अमादा है. हट जा, ज़रा सहलाने दे लंड को, बहुत ज़ोर से दबा है! एक तो तेरे चूतड़ इतने भारी हैं, ऊपर से 9 मन का बोझ!
मुझे भाई की हालत देख कर हंसी आ गई और मैंने कहा- एक बार निशाना चूक गया तो गांड फ़ट गई? अरे मेरी चूत की तुम और अब्बु मिलकर कितनी बार कुटाई कर चुके हो?
तब भाई थोड़ा नोर्मल हो गये और मैं फ़िर से खड़ी हो गई, मुझे खड़ा होते देख कर भाई की गांड फ़ट गई, बोले- क्या इरादा है अब तेरा?
मैंने कहा- भाई वन्स मोर! कोशिश करो प्लीज!
तब भाई ने कहा- बहुत बड़ी निशानची बन रही है? याद रख, तुझे चांस तो दे रहा हूं, अगर इस बार निशाना चूका तो किसी कुत्ते से तेरी गांड मरवाऊँगा!
हम दोनों अपनी वासना में इतने गुम हो गये थे कि भूल ही गये थे कि यह घर मुमानी का है और हम लोग छत पे हैं, मुझे ज़रा आहट हुई तो देखा कि खाला की छोटी लड़की अफ़रोज़ दरवाज़े की आड़ लेकर खड़ी है और पता नहीं कब से हम दोनों की बातें सुन रही थी और नज़ारा देख कर मजा ले रही थी.
मैं उसे देख कर थोड़ा सकपका गई और सम्भलते हुए भाई की गोद में बैठ कर उसके कान में धीरे से कहा- भाई, अफ़रोज़ पता नहीं कितनी देर से हम लोगों को देख रही है और हमारी बातें भी सुन ली हैं उसने!
तब तो भाई भी घबरा गया लेकिन भाई ने धीरे से कहा- अब तो देख ही लिया है, मेरे ख्याल से ये ज्यादा कुछ नहीं करेगी, बस हम लोगों की चुदाई देखेगी, इसमें हमारा ही फ़ायदा है!
मैंने कहा- भाई, अगर मुमानी से कह दिया इसने… तब क्या होगा? मामु और मुमानी क्या सोचेंगी कि हम लोग आपस में चोदा चोदी करते हैं?
तब भाई ने कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा, अब हमें इसकी प्यास भड़कानी है, इसको इस बात का एहसास करा देना है कि चुदाई में बहुत मजा आता है. जवान तो ये भी है साली कितनी देर तक बरदाश्त करेगी चूत की प्यास को! और फ़िर जब मेरा औज़ार तुम्हारी चूत में घुसते हुए देखेगी, तब साली खुद ही उंगली करेगी अपनी बुर में और कसम से मैं तो पहले दिन से इन दोनों बहनों को चोदने के चक्कर में हूं मगर हाथ ही नहीं धरने देती हैं साली दोनों बहनें… पर आज यकीनन इसकी चूत में चुदाई का कीड़ा रेंगने लगेगा. बस तुम इस तरह से दिखाना कि तुमको बहुत मजा आ रहा है, फ़िर देखो कैसे लाइन पर आती है.
और उसके बाद भाई ने मुझे कैसे चोदा और फ़िर वहीं छत पर अफ़रोज़ को भी ऊपरी मजा यानि खाली चूची मसलने का मजा दिया उसके बाद उसकी चुदाई भी की पर उसके बारे में अगली कहानी में बताऊँगी. Hindi Porn Stories
कहानी का अगला भाग: भाई और बहन की आपस में चुदाई-2
जब मैंने मौसी की बेटी सोनू की चूत मारी और Antarvasna मुझको मज़ा आया तो मेरी और चूत मारने की इच्छा हुई पर क्या करता स्कूल भी तो था। इसीलिए मैं अपने घर पर ही रहता था। पर मन ही मन तड़पता था।
एक रात हमारे यहाँ मेरी छोटी बुआ आई। मुझे अगले दिन उसको लेकर एक गाँव की शादी में जाना था। वो मुझसे बहुत बड़ी थी पर लगती एक दम सोलह साल की जवान थी। जिसे देखकर किसी का भी मन डोल जाए। मेरी बुआ के लंबे बाल थे और रंग एक दम गोरा था। चूची भी बहुत बड़ी थी। वो अक्सर मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती थी। उस दिन उसने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। वो टाइम गर्मी का था। घरवाले सभी शादी में जा चुके थे। मैं घर पर अकेला ही था।
वो जैसे ही घर पर आई तो बोली- आज गॅप गर्मी बहुत है जा तू घर का गेट बंद करदे और अपने कमरे का एसी चला दे। मैं गया और गेट बंद करके आया। मैंने अपने कमरे का एसी चला दिया। मेरी बुआ कमरे में आई और उसने एक दम अपना साडी का पल्लू हटा दिया। और कुर्सी पर बैठ गयी फिर उसने पूछा के मम्मी पापा कब गये?
पर मैं तो उसके ब्लाउज से उसकी चूची को देख रहा था। ब्लाउज इतना टाइट और हल्का था की उसकी सफेद ब्रा ब्लाउज के अंदर साफ दिख रही थी और चूची एक दम कसी हुई थी। मानो चूची ब्रा और ब्लाउज को फाड़ना चाहती हो। बुआ रात को भी ब्रा ही पहनकर सोती थी। बुआ मुझसे बोली तेरा ध्यान किधर है एक दम मैंने उनकी आँखो की तरफ देखा वो बोली मैं पूछ रही थी कि मम्मी पापा कब गये है? मैंने कहा- सुबह ही गये है।
बुआ बोली- अच्छा चल मैं तेरे लिए कुछ बना देती हूँ। और बुआ उठी और उसने अपनी साडी उतार दी। उस का ब्लू पेटीकोट भी एक दम टाइट ही था। अब बुआ मुझे बिना साडी के बहुत अच्छी लग रही थी वो केवल अब ब्लाउज और पेटीकोट मैं ही थी। वो ब्लाउज और पेटीकोट मैं ही रसोई में चली गई। और मेरे लिए खाना बनाने लगी मैं भी रसोई में आ गया और खड़ा हो कर उसे देखने लगा। वो इधर उधर काम करते हुए चलती तो कभी वो मुझसे टकरा जाती कभी उसकी गांड तो कभी उसकी चूत मेरे लंड से टकरा जाती। अब तो बस मेरे मन में यही था कि मैं अपनी बुआ को चोद डालूँ पर डर रहा था कि कही वो मुझे डांटे नही।
अब खाना तैयार था। वो खाना लेकर मेरे कमरे में आ गई और बोली- चल खाले। फिर मैं खाना खाने बैठ गया। बुआ मेरे सामने ही बैठ गयी और वो अपने पेटीकोट को थोड़ा ऊपर करने लगी। उसने अपना पेटीकोट घुटनो तक ऊपर किया और फिर नाड़ा खोल कर पेटीकोट टूंडी से नीचे करने लगी। पर उसने तो मेरी उम्मीद से ज़्यादा ही अपना पेटीकोट नीचे कर दिया था। अब मैं उसकी टूंडी और टूंडी से नीचे भी साफ देख सकता था। क्योंकि उसने पेटीकोट चूत से ऊपर ही कर रखा था। मुझे उसके चूत के ऊपर कुछ काला-काला सा नज़र आया। मैं समझ गया कि बुआ के भी बाल है पर उसने काट रखे है। और उसकी सोनू टांग भी सुन्दर दिख रही थी। जिन पर हल्के-हल्के बाल थे। फिर मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था।
मैंने खाना खाया तो वो बरतन लेने के लिए आगे झुकी तो मुझे उसकी बड़ी-बड़ी चूची के बीच की गहरी लाइन दिख रही थी। बस मैंने अपने मन पर काबू कर रखा था। फिर वो बर्तन लेकर रसोई मे गयी और मैं टी वी देखने लगा। बुआ वापस आई तो चाय बना कर लाई थी। एक कप चाय उसने मुझ को दी और दूसरे कप को लेकर मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गई और बोली- आज तो गर्मी बहुत है तू इस एसी को ज़्यादा कूलिंग पर कर।
मैंने एसी की कूलिंग और कर दी। फिर बबुआ अपने ब्लू ब्लाउज के बटन खोलने लगी। मैं तो बस देख ही रहा था। मेरा लंड खड़ा होता गया। बुआ अपने ब्लाउज के बटन खोलकर हाथ ऊपर करके बैठ गई। अब मुझे उसकी ब्रा बिल्कुल साफ दिख रही थी। मेरी नज़र उसकी बगल पर पड़ी तो वहाँ पर बहुत छोटे-छोटे बाल थे। बुआ बोली चल सो जाएँ। और हम चाय खत्म करके बेड पर चले गये।
मैं बेड पर लेट गया और बुआ अपने ब्लाउज के बटन खुले ही छोड़ कर मेरे बराबर में लेट गयी। बुआ ने मुझसे पूछा कुछ परेशानी तो नही हो रही। मैंने कहा नही। मैंने बुआ से पूछा के घर भी आप ऐसे ही सोती हो। वो बोली कैसे? मैंने बुआ के ब्लाउज और ब्रा की तरफ इशारा किया।
बुआ बोली- हाँ जब घर पर कोई नही होता तो मैं अपने सारे कपड़े उतार कर सोती हूँ। फिर वो बोली यहाँ भी तो कोई नहीं है। मैं बोला मैं तो हूँ। वो बोली तू तो मेरा बेटा है। तुझसे कैसी शर्म। जब मैं तेरे सामने कपड़े बदल लेती हूँ तो अब क्या शर्म करो। फिर बुआ ने करवट बदली और दूसरी तरफ मुँह कर लिया।
अब बुआ की गाँड मेरी तरफ थी। बुआ की गाँड ब्लू पेटिकोट में बहुत सुन्दर लग रही थी। बुआ बोली- चल सो जा सुबहा जल्दी उठना है। मैं बस चुप होकर बुआ की गाँड देखता रहा। फिर करीब दस मिनिट बाद,मैंने धीरे से अपनी पैंट उतार दी और बुआ की तरफ मुँह करा और उसकी गाँड पर अपना लंड टेक दिया। बुआ ने भी अपनी गाँड और पीछे कर ली और उसकी गाँड के छेद मे मेरे लंड के कारण उसका पेटीकोट हल्का सा चला गया।
फिर मैं ऐसे ही धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। फिर मैंने एक हाथ बुआ के पेट पर रखा और धीरे-धीरे उसके चूत के ऊपर के भाग पर और टूंडी के अंदर अपनी उंगलियाँ घूमने लगा। जिससे बुआ जाग गई। और लेटे-लेटे ही बोली क्या कर रहा है,पीछे होकर सो ना। मैं ऐसे हो गया जैसे मैंने सुना ही नही। फिर बुआ ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया और सोने लगी।
मैंने फिर अपने हाथ से हरकत शुरु कर दी और बुआ के पीछे से धक्के लगाने शुरु कर दिए। बुआ बोली नही मानेगा। मैं फिर चुपचाप लेट गया। बुआ ने एक हाथ पीछे किया और अपनी गांड से मेरा लंड निकाला और अपनी गांड पर हाथ रख लिया।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड निकर मे से निकाला और बुआ के हाथ पर रख दिया। बुआ ने उस पर हाथ रखा। फिर बुआ ने अपनी गांड से हाथ हटा लिया। शायद बुआ को मेरे लंड की लंबाई और मोटाई पसंद आ गयी थी। फिर मैंने धीरे से उनका पेटीकोट जाँघ तक ऊपर कर दिया ओर पीछे से पूरा कमर तक।
फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर जैसे ही रखा तो बुआ ने भी पीछे को झटका दिया। मैं समझ गया कि बुआ अब गरम हो चुकी है। पर सोने का नाटक कर रही है। फिर मैंने अपने आपको पीछे किया और बुआ की दोनो जाँघो के बीच में थूक लगाया और दोनो जाँघो में अपना लंड फसा दिया। बुआ ने भी अपनी दोनो जाँघो को कसकर भींच लिया। अब मेरा लंड उनकी दोनो जाँघो को एक गांड की तरह ही चोद रहा था।
फिर मैंने एक हाथ बुआ के आगे से उसके पेटीकोट में डाल दिया। और उसकी चूत पर ले जाने लगा तो बुआ ने अपनी ऊपर की जाँघ को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया। फिर मैंने अपनी बुआ की चूत को छुआ तो उसमें से चिकना पानी निकल रहा था। फिर मैं ने बुआ की जाँघो में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और एक हाथ से मैं उसकी चूत को सहलाता रहा और उसकी चूत से चिपचिपा पानी निकलता रहा था।
अब बुआ को भी मज़ा आ रहा था। पर वो बोली नही और उसने अपनी टांग उठाकर मेरे पीछे रख दी। और मेरे लंड को हाथ से पकड़कर एक इशारा सा किया। और मेरा लंड उसकी चूत से चिपक गया पर अंदर नहीं गया। मुझे ऐसे ही मज़ा आ रहा था। इसी लिए मैंने कोशिश भी नहीं की उसकी चूत में लंड डालने की।
मैने चूत से लंड हटाकर उसकी गांड के बीच मे रख दिया और धक्के लगाने लगा। बुआ फिर पहले की तरह हो गई। मैंने फिर एक हाथ उसके आगे से उसके पेटीकोट में डाला और चूत की खाल पकड़ कर खींचने लगा। इससे बुआ को दर्द हुआ और वो बोली बहुत देर हो गई तुझे। तू अब सो जा, सुबह जाना नहीं है क्या? मैंने फिर अनसुना कर दिया। मैं अब की बार धक्के लगता रहा। फिर मैंने बुआ की चूत को टटोलना शुरू किया और उसकी चूत को चौड़ा करके सहलाना शुरू कर दिया। अब बुआ को बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकि वो भी मेरे लंड पर अपनी गांड का ज़ोर लगा रही थी मानो वो मेरा लंड अंदर करना चाहती हो।
अब मैं झड़ने वाला था। तो मैंने कई झटके ज़ोर-ज़ोर से मारे और बुआ की चूत को ज़ोर से रगड़ने लगा। बुआ की चूत से एक दम गरम पानी सा निकाला और बुआ ने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया। जिससे मैं रुक जाऊं पर मैं रूका नहीं मैं उसकी चूत को कोशिश करके जब तक रगड़ता रहा जब तक के मेरा पानी उसकी गांड के बीच में ना निकल गया। और मैं धक्के मारता रहा, बुआ भी अब धक्के मार रही थी। जिससे मैं जल्दी झड़ जाऊं और उसे छोड़ दूँ। मैंने एक ज़ोर का झटका दिया। तो बुआ ने भी ज़ोर से झटका दिया। और मेरा सारा पानी उसकी गांड के
बीच में ही निकल गया। मैं थोड़ी देर रुका तो बुआ ने मेरा लंड हाथ से ऐसे निकाल दिया जिससे कि मुझे लगे कि उसे कुछ पता ही नही है। पर मैं समझ गया था कि बुआ को सब पता है।
मैं भी दूसरी तरफ मुँह करके लेट गया। फिर मैंने बुआ की साइड मुँह किया। तो मैंने देखा के बुआ का पेटीकोट पीछे से गांड से ऊपर है और आगे से जाँघ तक है। फिर मैं आँख खोलकर देखता रहा की बुआ क्या करेगी? क्योंकि वो शायद मेरे सोने का इंतज़ार कर रही थी। क्योंकि वो मेरे जगाने पर सही करती तो मुझको पता चल जाता की उसे सब पता है। इसीलिए,मैं चुपचाप उसकी तरफ मुंह करके पड़ा रहा जैसे मैं सच में सो गया हूँ। फिर कुछ देर बाद बुआ उठी और उसने मेरे सर पर अपना हाथ फेरा और बेड से खड़ी हो गई। फिर उसने अपना पेटीकोट नीचे किया और और पेटीकोट को देखने लगी। पेटीकोट उसके और मेरे पानी से बहुत गीला हो चुका था। और वो बाथरूम में चली गई जो मेरे कमरे में ही था।
उसने जैसे ही बाथरूम का गेट बंद किया। तो मैं भी बाथरूम के पास गया और गेट के एक छेद में से देखने लगा। मैंने गेट में एक छेद कर रखा था। जिससे की कोई लड़की या औरत मेरे बाथरूम का इस्तेमाल करे तो मैं उसे देख सकूं।
मैंने देखा बुआ अपने आप को देख रही थी। और अपनी चूची को ब्रा के ऊपर से मेरा नाम लेकर दबा रही थी। फिर उसने अपना पेटीकोट उठाया और गांड के पीछे हाथ लगाकर देखा। उसके हाथ पर मेरा पानी आ गया था। तो उसने हाथ को देखा और फिर उसे चाटा भी फिर उसने अपनी चूत से भी हाथ से अपना पानी लिया और उसे भी चाटा। फिर वो पेटीकोट को कमर तक ऊपर करके बैठ गयी। फिर उसने मग्गे में पानी लिया और अपनी चूत और गांड को धोया। फिर खड़ी होकर उसने अपने पेटीकोट मुंह से पकड़ा और और अपनी टांगों से मेरा और अपना पानी धोया। फिर उसने बाथरूम वाला एक टोवल लिया और अपनी चूत, गांड और टांग पूँछी। फिर उसने पेटीकोट नीचे किया और शीशे में देखने लगी। फिर वो बाहर आने के लिए चल दी।
मैंने घड़ी देखी रात का एक बज चुका था। और मैं बेड पर आकर लेट गया और सोने का नाटक करने लगा। बुआ आई और मेरे बराबर में आकर लेट गई। मैंने देखा बुआ के ब्लाउज के बटन अभी भी खुले और पेटीकोट टूंडी से नीचे था। मैं बुआ की तरफ ही मुंह करके सो रहा था। बुआ ने भी मेरी तरफ मुंह कर लिया। तो उसके पेट से मेरा लंड अंडरवियर के अंदर से टकरया तो मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने फिर अपना लंड निकाला और उसके मुलायम और गोरे पेट पर रगड़ने लगा। बुआ बोली तेरे पास लेट कर तो मैं दुखी हो गयी। तू नहीं सोने देगा।
मैं चुप लेट गया। बुआ थोड़ी ऊपर को हो गई जिससे मेरा लंड उसकी गहरी टूंडी में चला गया। मैं बुआ का मतलब समझ गया था कि उसको मेरा लंड पसन्द आया और अब वो मुझसे फिर मज़ा लेना चाहती। यानी अपनी टूंडी और पेट को चुदवाना चाहती है।
मैं उसकी टूंडी में लंड और अंदर कर के धक्के मारने लगा। अबकी बार मैनें उसकी एक साइड की ब्रा भी ऊपर करदी। और उसकी चूची को मुंह से चूसने और चाटने लगा बीच में उसे काट भी लेता तो वो दर्द से आह सी भरती। फिर मैने पीछे हाथ करके उसके पेटीकोट में हाथ डाल दिया। और उसकी गांड को दबाने लगा। मैं अबकी बार जल्दी झड़ गया और सारा पानी मैंने बुआ की टूंडी में ही छोड़ दिया। जिससे बुआ का पेट गीला हो गया। फिर मैं सीधा हो कर लेट गया। और बुआ के पेट पर हाथ फेरने लगा। जिससे बुआ के पेट पर मेरा पानी सारे में फ़ैल गया।
फिर मैं चुपचाप लेट गया। बुआ ने सोचा मैं सो गया हूँ। तो उसने अपनी ब्रा ठीक की और सो गयी सुबह को जब मैं उठा तो बुआ घर की सफाई कर रही थी। उसने अपना ब्लाउज उतारा हुआ था। वो केवल ब्रा और पेटीकोट में ही थी। पर हम एक दूसरे से नज़र नही मिला पा रहे थे। फिर नहा कर हम शादी में चले गये। इसके बाद बुआ ने मुझे कई बार चोदा और मुझसे चुदवाया।
अगर आपको कहानी अच्छी लगी हो तो आगे लिखूंगा। Antarvasna
मेरा नाम गौरव है और मैं Antarvasna आपको बताना चाहता हूँ कि मेरे यौन-जीवन की शुरुआत कैसे हुई।
मेरे घर में मेरे पापा और मम्मी रहती हैं। मुझे मस्ती करना बहुत अच्छा लगता था इसलिए मेरा पढ़ाई में उतना मन नहीं लगता था जितना लगना चाहिए। मेरे डैड ने इसीलिए मुझे होस्टल भेज दिया। वहाँ जा कर मुझे कुछ ऐसे दोस्त मिले जो कि मेरी क्लास के थे लेकिन अच्छे परिवारों से थे। मैं भी अच्छे घर से ताल्लुक रखता हूँ लेकिन उन सब में एक बात थी कि वे सब सेक्स के मामले में काफी एडवांस थे।
उनमें से एक था गौरव ! स्लिम बॉडी का गोरा लड़का था मैं भी उसी की तरह दीखता था इसलिए मेरी और उसकी दोस्ती जल्दी हो गई। वो मेरी कक्षा में और मेरे साथ ही कमरे में था। मुझे उसे अंडरवीयर में देख कर अच्छा लगता था।
एक दिन उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए वो क्लास में नहीं गया और मुझे भी नहीं जाने दिया। मैं भी दोस्ती के नाते नहीं गया। हमारी क्लास ९ से ४ बजे तक चली थी। लगभग सभी चले गए, तब गौरव ने कहा- गौरव ! मेरे को बुखार है जरा छू के देख !
कह कर मेरा हाथ पकड़ कर अपने सर पर रखा। थोड़ा गरम था उसका सर !
मुझे तो नहीं लग रहा है ! कहते हुए मैंने उसके सीने को छुआ तो मुझे लगा कि उसने शर्ट नहीं पहनी हुई है। मैंने हाथ को थोड़ा नीचे किया तो उसके निप्प्ल मेरे हाथ से छू गए। मुझे एक अजीब सा करंट सा लगा। मेरा हाथ धीरे धीर नीचे जाने लगा, मुझे पता भी नहीं चला कि मेरा हाथ कब उसके अंडरवीयर तक पहुँच गया।
तभी उसने मुझे पूछा- बुखार है या नहीं?
मैंने कहा- पता नहीं लग रहा है !
कहते हुए मेरा हाथ उसके अंडरवीयर के ऊपर से जाने लगा। इसी समय उसके लंड ने थोड़ी सी हरकत की और मुझे लगा कि कुछ है !
मैंने लंड को पकड़ कर कहा- यह क्या है?
वो बोला- कुछ नहीं !
मुझे भी नहीं मालूम था कि वह लंड है …..
मुझे लगा कि चॉकलेट है। मैंने कहा- चॉकलेट है ! और मुझसे छुपा रहे हो ! दोगे नहीं?
वो बोला- चॉकलेट नहीं है !
मैंने उसको पकड़ रखा था और मेरी पकड़ जोर से थी जिससे उसका लंड खड़ा हो गया। मैंने चादर को हटा तो देखा की उसका लंड पूरी तरह से खड़ा है। मैंने जल्दी से उसके अंडरवियर को नीचे खींचा तो देखा कि ७ इंच लंबा लंड छत की तरफ खड़ा है। मैंने उसे तुरन्त छोड़ दिया और छि छि करते हुए उससे दूर हट गया।
उसने चादर से फिर अपने आप को ढक लिया और सॉरी बोला ….
मै कमरे से बाहर चला गया, मेरे मन में सिर्फ उसके लंड का ही ख्याल आ रहा था। जिसके कारण मेरा भी लंड खड़ा हो रहा था और मेरे से रहा नहीं जा रहा था। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं !
और ३० मिनट के बाद मैं उसके पास आया तो वो सो रहा था। मैं भी उसके पास सो गया। मैं उसके अंडरवीयर में हाथ डाल कर उसके लंड को पकड़ कर महसूस करने लगा कि धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होने लगा और मेरा भी !
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका अंडरवीयर निकल दिया। उसका गोरा लंड अच्छा लग रहा था। फिर मैंने भी अपना अंडरवियर निकाल दिया और उसके लंड से खेलने लगा। 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि गौरव जागा हुआ है। उसने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे होठों पर चूमने लगा …… मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया …….
गौरव ने मुझे ऊपर खींचा और मेरे लंड को चूमने लगा।
चूमते-चूमते मुझे पेट के बल लिटा दिया और अपने आप मेरे ऊपर लेट गया। फिर मुझे उसका लंड मेरी गांड की दरारों में जाता हुआ लगा जोकि मेरे गांड की छेद के पास आ गया। सिर्फ एक जोरदार झटका और मेरी चीख निकल गई, ऐसे लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहा मेरी गांड में जा रहा है। मै गौरव से मना कर रहा था कि निकाल ले, मुझे दर्द हो रहा है। लेकिन गौरव नहीं रुका और मेरी गांड को पेलता चला गया, मै रोता जा रहा था और गौरव पेलता जा रहा था।
चार-पाँच मिनट के बाद गौरव शान्त हुआ, मुझे लगा कि मेरी गांड में कुछ गरम चीज गौरव के लंड से गिर रही है। गौरव १० मिनट तक मेरे उपर लेटा रहा, फिर बोला- गौरव ! सॉरी यार !
…….मै अभी रो रहा था …..
गौरव ने मुझे चुप करने के लिए बोला कि मेरी गांड ले ले !
पहले तो मैं मना करता रहा लेकिन बदले की भावना के कारण मैंने हाँ कर दी। गौरव नीचे लेटा, मैं ऊपर था। गौरव अपने हाथों से अपनी गांड फैला कर छेद दिखा रहा था। मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रख कर एक जोरदार झटका दिया, गौरव चिल्लाने लगा। मेरा लंड गौरव के लंड से ज्यादा मोटा था। मैंने एक ही बार में अपना पूरा लंड गौरव की गांड में पेल दिया और जैसे गौरव झटके ले रहा था, उससे भी तेज मैं कर रहा था क्योंकि मुझे गौरव से बदला लेना था।
२० मिनट के बाद मेरा माल गौरव की गांड में गिर गया और मैं गौरव के ऊपर से ५ मिनट के बाद उठा तो देखा कि गौरव की गांड से खून निकल रहा है।
मैं डर गया, गौरव बेहोश हो गया था !
मैं पानी ले कर आया, गौरव पर डाला तो उसे होश आया। रात में गौरव की तबीयत काफी ख़राब हो गई थी …… यह मेरे ही कारण हुआ था .. ४ दिन के बाद गौरव ठीक हुआ। मैं उसके पास गया और बोला- सॉरी गौरव ! उस दिन ज्यादा हो गया था !
गौरव बोला- नहीं यार …… यह तो शुरुआत है ! धीरे- धीरे अच्छा लगने लगेगा …..
उसके बाद से मैं और गौरव रोज रात एक दूसरे की गांड मारते थे …… Antarvasna
वहां मैंने अपने भाई को सहेली की चुदाई के लिए दूसरे कमरे में भेज दिया और मैं अंकल को गर्म करने लगी.
अंकल मेरे साथ मस्ती करते करते पजामे में ही झड़ गए.
तभी मेरा भाई मेरी सहेली की चुदाई करके बाहर निकला.
मैं मुस्कुराती हुई बोली- उन्हें छोड़ो … यह बताओ काम हो गया कि कुछ कसर बाकी रह गयी है? प्लान सही था कि नहीं मेरा?
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- प्लान तो लाजवाब था।फिर हम तीनों हंस दिये।
तभी कुछ देर बाद अंकल भी लोअर चेंज कर आ गये।
चूंकि उन्होंने दोबारा उसी रंग की लोअर पहनी थी तो ज्योति और सोनू ने ध्यान नहीं दिया कि वे दूसरी लोअर पहने हैं।फिर हम सबने कुछ देर बातें की और फिर घर के लिए वापस चल दिये।
अब आगे गरम चूत का इलाज:
सच कहूँ तो इतनी देर में मेरी चूत भी एकदम गीली हो चुकी थी और उसकी खुजली बर्दाश्त नहीं हो रही थी।
अंकल के घर से निकलते-निकलते करीब साढ़े आठ बज चुके थे और अंधेरा हो चुका था।
घर लौटते वक्त रास्ते में हम बातें करते आ रहे थे।
मैंने कहा- तुम दोनों अंदर मजे कर रहे थे और तुम दोनों के बारे में सोचकर मेरी चूत में खुजली मच रही है उसी समय से!
ज्योति हंसते हुए बोली- अरे तो आ जाती ना तू भी!
मैं बोली- अरे अंकल थे … नहीं तो मैं आ ही जाती!
सोनू हंसते हुए बोला- तो क्या हुआ … उन्हें भी लेती आती, साथ में मजे कर लेते चारों!
हम तीनों हंस दिये।
अब मैं क्या बताती कि अंकल ने ही आग लगायी है।
सोनू मुस्कुराते हुए बोला- मेरा तो दो बार पानी निकल चुका है तो दोबारा खड़ा होने में टाइम लगेगा नहीं तो अभी खुजली मिटा देता। रात में मिटाता हूं खुजली!
ज्योति मुस्कुराते हुए बोली- अरे तो क्या हुआ जीभ का कमाल दिखा ना! वैसे भी यहाँ सुनसान और अंधेरा है।
चूंकि कॉलोनी में बाहर का कोई आना जाना नहीं था तो सुनसान सड़क पर हम लौट रहे थे।
दोनों तरफ पेड़ और बड़ी झाड़ियाँ थीं।
स्ट्रीट लाइट भी सब खराब पड़ी थीं।
जिसकी वजह से कोई देख नहीं सकता था हमें!
सोनू ने आगे की तरफ एक जगह की ओर इशारा करते हुए कहा- वहाँ एकदम अंधेरा है वहीं चलते हैं। वहीं अपने जीभ का कमाल दिखाता हूँ।
हम तीनों हंस दिये और फिर उस जगह पर आकर सड़क से हटकर पेड़ों के पीछे झाड़ियों में आ गये।
मेरे ऊपर वासना का ऐसा भूत सवार था कि मैं रात का इंतज़ार नहीं करना चाह रही थी, मुझे मेरी गरम चूत का इलाज तुरंत चाहिए था।
मैंने एक पेड़ पर पीठ टिका दी और सोनू मेरे सामने वहीं घुटने के बल बैठ गया।
अपनी पैण्टी निकाल कर मैंने ज्योति को पकड़ा दी और स्कर्ट को पूरा उठाकर कमर को आगे कर चूत को सोनू के सामने कर मुस्कुराती हुई बोली- जल्दी से अपनी जीभ का कमाल दिखा दे भाई!
हालांकि अंधेरे में हम एक-दूसरे को भी मुश्किल से ही देख पा रहे थे।
सोनू ने बिना कुछ बोले मेरी दोनों हाथों से मेरी जांघों को फैलाया और अपना मुंह सीधा मेरी चूत पर रख दिया और जीभ निकालकर तेजी से चूत चाटने लगा।
मैं रात के सन्नाटे में हल्का-हल्का अपनी कमर हिलाते हुए भाई से चूत चटवाने लगी।
मेरी मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकलने लगीं.
वहीं ज्योति थोड़ा आगे बढ़कर सड़क पर निगाह गड़ाए थी कि कोई आ तो नहीं रहा है।
इधर सोनू तेजी से मेरी चूत चाटे जा रहा था और मैं सोनू के सिर को पकड़े कमर हिलाते हुए तेजी से चूत चटवा रही थी।
मैंने अपने होठों को दांतों से भींच रखा था ताकि मुंह से सिसकारी की आवाज तेज न निकले।
उसके बावजूद मेरे मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी- आआआ आआह हहह … सोनू … तेज और तेज चाट भाई … आह!
मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि चूत चाटते हुए बीच-बीच में सोनू आराम से अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डालकर घुमा रहा था।
मैं इतनी चुदासी हो चुकी थी कि मेरे लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल था।
अचानक मैंने तेजी सोनू के सिर को कसकर पकड़ लिया और अपनी चूत से एकदम सटा दिया.
मेरे मुंह से तेज सिसकारी निकली- आआआ आआ आआ आआहह हहह … बस ससस!
और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।
मैं करीब 15-20 सेकेण्ड तक उसी तरह मुंह को चूत में दबाए खड़ी रही।
सोनू ने चूत का सारा पानी चाट लिया उसके बाद उसने चूत से मुंह को हटाया और खड़ा हो गया।
मैं भी सांस को जल्दी से काबू में करने की कोशिश करने लगी।
ज्योति ने मुझे पैंटी दी जिसे मैंने पहन लिया फिर हम तीनों घर वापस आ गए।
खैर इसी तरह डेढ़ दो महीने बीत गये।
लेकिन उस दिन के बाद हमें और अंकल को दोबारा वैसा मौका नहीं मिला कुछ करने का और न ही हम उससे आगे बढ़ पाए।
हालांकि इस बीच मैंने महसूस किया कि अंकल के दिमाग में कुछ और चल रहा है।
पहले तो मुझे लगा कि वह शायद उस दिन जो हुआ उससे शर्मिन्दा होंगे।
लेकिन बाद में जब पता चला कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है तो मैं दंग रह गयी।
दरअसल एक दिन हर बार की तरह अंकल संडे की शाम को घर आये।
उस दिन वह साथ में मिठाई का डिब्बा भी लेकर आये थे और बहुत खुश थे।
पापा ने पूछा- क्या हुआ, कोई खुशखबरी है क्या?
अंकल बोले- हाँ भाई, आज बेटे का रिजल्ट आ गया, उसकी रेलवे में जॉब लग गयी है।
तब तक मम्मी भी आ गयीं, अंकल ने उन्हें मिठाई का डिब्बा दे दिया।
मम्मी-पापा ने उन्हें बधाई दी।
मैंने भी अंकल को नमस्ते किया और बधाई देकर किचन में आ गयी और मम्मी की मदद करने लगी।
अंकल संडे को अक्सर खाना खाकर ही घर जाते थे तो मैं और मम्मी किचन में खाने की तैयारी में लग गये थे।
उधर पापा अंकल के साथ बात कर रहे थे।
तभी पापा ने मम्मी को आवाज देकर बुलाया।
वैसे पापा कभी मम्मी को बुलाते नहीं थे जब तक कोई खास बात न हो.
तो मम्मी पास चली गयीं।
वे लोग धीमे-धीमे कुछ बातें कर रहे थे लेकिन मुझे कुछ क्लीयर नहीं हो रहा था कि आखिर क्या बात हो रही है।
करीब 15 मिनट के बात मम्मी किचन में आयीं तो बहुत खुश लग रहीं थीं।
मैंने पूछा- क्या हुआ, कुछ खास बात है क्या?
मम्मी मुस्कुराती हुई बोलीं- है तो खास ही … बाद में बताती हूँ, पहले जल्दी से खाना बना लें।
मैं समझ नहीं पायी और फिर मम्मी की मदद करने लगी।
खैर … खाना वगैरह खाकर जब अंकल चले गये तो मम्मी ने तुरंत मामा को फोन लगाने लगीं।
तब जाकर मुझे पता चला कि आखिर क्या मामला है।
मम्मी बेहद खुश होकर नानी और मामा से बात करते हुए कह रही थीं- गरिमा के लिए रिश्ता आया है। लड़का सरकारी नौकरी में है रेलवे में … और रिश्ता खुद लड़के वालों की तरफ से आया है। लड़के के पापा भी रेलवे में अधिकारी हैं।
पापा ने मेरी ओर देखा तो मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया।
चूंकि पापा-मम्मी साथ में थे तो पापा ने ज्यादा कुछ नहीं कहा।
जब ये सब बातें होने लगीं तो मैं अपना खाना लेकर अपने कमरे में चली आयी।
अब मैं समझ गयी कि अंकल के मन में इतने दिन से क्या चल रहा था।
मम्मी-पापा तो समझ रहे थे कि अंकल तो पापा के साथ दोस्ती निभा रहे हैं लेकिन असलियत तो मुझे पता थी कि वह तो अपने चक्कर में मेरी शादी अपने लड़के से कर रहे हैं।
लेकिन यह बात मैं किसी से कह भी नहीं सकती थी।
क्योंकि वैसे भी मम्मी, मामा, नानी और पापा की बातचीत से लग रहा था कि वे सभी इस रिश्ते के लिए तैयार हैं।
मामला सरकारी नौकरी का था इसलिए सभी इस रिश्ते के लिए तैयार थे।
हालांकि मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी … लेकिन शादी इतनी जल्दी तय हो जाएगी मुझे अंदाजा नहीं था।
उस समय मेरी उम्र अभी 21 साल की ही थी और कॉलेज का आखिरी साल था।
हालांकि एक बात सोचकर ही मेरे मन और चूत दोनों में कुलबुली हो गयी थी कि शादी के बाद ससुराल में भी दो लण्ड तो तय हैं।
एक हसबैंड का और दूसरा ससुर का … जो पहले ही मेरी मस्त जवानी के दीवाने हो चुके थे।
एक दिन मेरी चुदाई करते समय पापा मुझसे बोले- एक बात बोलूँ बेटा!
मैंने कहा- बोलिए पापा?
पापा बोले- मेरी इच्छा है कि शादी वाले दिन जब तू दुल्हन के कपड़े में सज धज कर तैयार हो तो उस दिन भी मैं तुम्हारे साथ सेक्स करूँ।
कुछ दिन बीतने के बाद एक दिन मम्मी मुझसे बोलीं- अगले संडे अंकल के साथ उनका बेटा (जिससे मेरी शादी होनी थी) और उसकी बहन मुझे देखने आ रहे हैं।
यह सुनते ही मेरी धड़कन बढ़ गयी।
शनिवार को मामा-मामी भी घर आ गये।
खैर … सब कुछ तय हो गया, लड़के और उसकी बहन दोनों को मैं पसंद आ गयी।
इंगेजमेंट और शादी की डेट भी फाइनल हो गयी।
सबकुछ इतनी तेजी से हो रहा था कि क्या बताऊँ।
इसमें सबसे ज्यादा तेजी दिखा रहे थे अंकल यानि मेरे होने वाले ससुर!
इस बीच मेरे होने वाले ससुर जी का हमारे घर आना-जाना बंद हो गया.
उसकी वजह ये थी शादी के कुछ दिनों पहले ही उन्होंने जुगाड़ लगाकर अपना ट्रांसफर उसी शहर में करवा लिया जहाँ उनका घर यानि मेरी होने वाली ससुराल थी।
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