Important Notice: For website Rent Whatsapp 📞 Call us: +918530812545

Massage Girl in Raigarh (Maharashtra): Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Raigarh (Maharashtra) who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Raigarh (Maharashtra) that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Raigarh (Maharashtra) massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Raigarh (Maharashtra) who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Raigarh (Maharashtra) massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Raigarh (Maharashtra) massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Raigarh (Maharashtra) who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Raigarh (Maharashtra) employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Raigarh (Maharashtra) helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Raigarh (Maharashtra)

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Raigarh (Maharashtra) at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

Antarvasna पर कहानियाँ पढ़ने के बाद मैंने भी एक कहानी लिखने की कोशिश की। यह एक सच्ची कहानी है। मेरी कहानी में एक नया अनुभव है

जो मेरा एक सबक है और मेरा पहला सेक्स है।

यह बात करीब छः साल पुरानी है जब मैं अपनी टी वी की दुकान पर बैठता था। मेरी दुकान पर एक औरत टीवी सुधरवाने आई। वो करीब बाईस साल की थी। मैंने उसे देखा तो वो गाँव से आई लगती थी। उसके टीवी में कुछ समस्या थी इसलिए वो टी वी शहर में लेकर आई। मैंने टीवी को देखा तो लगभग ठीक है बस बिजली सप्लाई में थोड़ी खराबी थी। मैंने उसे सौ रुपए का खर्चा बताया।

उसने कहा- मेरे पास रुपए कम हैं, आप इसे ठीक करके रखो। मैं इसे मंगल को ले जाउँगी।

मैंने फिर उसकी तरफ देखा तो वो मुझे कुछ परेशान लगी। अचानक उसने कहा- आप टीवी रविवार को मेरे घर पर ले आना ! मैं रुपए वहीं पर दे दूंगी ! मेरा घर ग्राम ……… सिहोर में है। और उसने फिर अपना मोबाइल नम्बर दे दिया।

फिर मैंने उसको ऊपर से नीचे तक देखा, वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उसके स्तन लगभग अमरुद के बराबर थे रंग थोड़ा सांवला और होंट गुलाबी न होकर कुछ गहरे रंग के थे पर एक सेक्स की अपील उसमें कूट कूट कर भरी थी। मैंने सोचा कि अब तक इसे मैं क्यों नहीं देख रहा था। इतने में चाय वाला चाय लेकर आ गया तो मैंने उससे चाय के लिए पूछा। पहले तो वो मना करने लगी पर मेरे ज्यादा जोर देने पर मान गई। फिर हम चाय पीने लगे। मैं चाय पीते पीते उसको ही देख रहा था। शायद उसको भी पता लग गया था कि मैं उसमें दिलचस्पी ले रहा हूँ तो वो भी थोड़ी सी खुल गई।

मैंने उससे पूछा- घर में कौन कौन है?

तो उसने कहा- मेरी सास और मेरे पति हैं, पति ड्राईवर है जो अक्सर बाहर रहता है, सास काम पर जाती है, मैं घर पर रह कर घर का काम करती हूँ।

उसने कहा- रविवार को आप ग्यारह बजे तक आना ! बिजली साढ़े दस तक आती है।

मैंने कहा- समय मिला तो आ पाउंगा और घर पर आने के लिए 50 रुपए अलग से देने होंगे।

इस पर वो कहने लगी- मेरे पास इतने रुपए तो नहीं हो पाएँगे, आप ही कोई रास्ता सोचो !

मैं उस वक्त दुकान पर था तो मैंने कहा- आपके घर पर आकर ही बात करेंगे !

मेरे ऐसा कहने पर वो मेरा मोबाइल नम्बर मांगने लगी तो मैंने मना कर दिया। पर वो बहुत ही जिद करने लगी तो मैंने अपना मोबाइल नम्बर दे दिया।

इसके बाद वो चली गई और मैं अपने काम में लग गया और बात मेरे दिमाग से उतर गई। पर रविवार को लगभग साढ़े ग्यारह बजे एक फोन आया- आप आ रहे हैं क्या ?

मैंने पूछा- आप कौन बोल रही हैं?

तो वो कहने लगी- मैं नीतू बोल रही हूँ !

मैं नीतू नाम से किसी को नहीं जानता था, मैंने कहा- मैं आपको पहचान नहीं पा रहा हूँ !

तो उसने कहा- आप टीवी लेकर आने वाले थे ना !

तब ध्यान आया कि यह वही औरत है। फिर मैंने कहा- आज तो मैं शायद नहीं आ पाउँगा क्यूंकि मैं आज भोपाल जा रहा हूँ।

तो वह कहने लगी- आपके रास्ते में ही तो पड़ेगा, आप थोड़ा समय निकाल कर आ जाओ !

तो मैंने जबाब दिया- मैं देखता हूँ !

फिर मैंने सोचा कि जाना ठीक रहेगा या नहीं !

इसी तरह सोचते हुए लगभग बीस मिनट हो गए। फिर सोचा- होकर तो आते हैं, जो होगा देखा जाएगा। इस तरह मैं उसके घर पहुँच गया। वो वहाँ पर बिल्कुल अकेली थी। मैं अकेला था तो टीवी तो नहीं ले गया तो उसने पूछा- टीवी कहाँ पर है?

मैंने कहा- मेरे साथ कोई नहीं था इसलिए टीवी तो नहीं ला पाया, वैसे टीवी तो सुधार दिया है, आप उसे ले आना !

तो वो मुझे पैसे देने लगी तो मैंने कहा- दुकान पर दे देना !

तो वो कहने लगी- मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं, आप अभी इतने ही रख लीजिये, मैं बाकी आपको दे दूंगी।

फिर वो चाय बनाने लगी, मैं वहीं पर बैठ गया और उससे बातें करने लगा। बात ही बात में चर्चा निकली- आपके पति तो बहुत दिनों में आ पाते होंगे ?

तो वो थोड़ी सी भावुक हो गई और कहने लगी- वो हमेशा ही बाहर रहते हैं और मैं जैसे तैसे घर का खर्चा चलाती हूँ, सारी तनख्वाह भी शराब में उड़ा देते हैं। अभी भी वो दो महीने से घर नहीं आये हैं।

यह कह कर वो रोने लगी तो मैं उसे चुप करने की कोशिश करने के लिये उसके पास गया और चुप कराने लगा तो वो मुझसे ही चिपक गई और और जोर जोर से सुबकने लगी।

यह सब अचानक हुआ, मैं तो एकदम ही उसके करीब था और वो मुझसे चिपक कर खड़ी थी। मैं उसे शान्त करने के लिये उसके बालों में हाथ फ़िराने लगा तो वो मुझसे और ज्यादा चिपक गई। अब तो मैं भी अपने को रोक नहीं कर पा रहा था, मैंने उसको धीरे धीरे सहलाना शुरु कर दिया। उसने भी कोई विरोध नहीं किया। मैंने धीरे से उसके होटों को चूम लिया, उसने भी मुझे जोरदार चुम्बन किया।

फिर तो मैंने कोई देर नहीं की और उसके कपड़ों को धीरे धीरे निकलना शुरु कर दिया। वो धीरे धीरे नारी सुलभ लज्जा के मारे सिमटी जा रही थी पर उसको भी मैं शायद पसंद आ गया था, इसी कारण वो भी धीरे से कोई शरारत कर देती थी जिससे मै और ज्यादा जोश में आ रहा था। मैंने उसके चुचूक को मुँह में ले लिया तो वो मारे उत्तेजना के सिसक उठी और मेरे कपड़ों को निकालना शुरु कर दिया।

फ़िर तो हमारे ऊपर कोई सीमा, कोई बन्धन नहीं रहा। मैंने उसके वस्ति-क्षेत्र पर एक जोरदार चुबन ले लिया और वो तो बहुत ही जोश में आ गई और मेरे शिश्न को हाथ में लेकर अपने योनिद्वार पर रगड़ना शुरु कर दिया। उसकी योनि से सम्पर्क होते ही मेरे अंदर एक जवालामुखी सा धधकने लगा और मैंने उसकी योनि के पास एक जोरदार चुम्बन ले लिया। इतना करने से तो उसने एकदम से ही मेरे शिश्न को हाथ में लेकर अपनी योनि के अन्दर डाल लिया और मुझसे चिपक गई, टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया और नीचे से अपनी कमर को हिलाने लगी। फिर तो मैंने भी देर न करते हुए अपने आपको पूरा उसके समर्पित कर दिया और जोरदार धक्के लगाने शुरु कर दिए। हर शॉट के साथ वह और ज्यादा उग्र होने लगी।

मैंने भी इस काम को अब अपने तरीके से करने की कोशिश करते हुए अपने धक्के एक लयबद्ध तरीके से लगाने शुरू किए। मैं धक्के लगाते लगाते अचानक रुक जाता और उसके बदन से खेलने लगता। इसी तरह हमारी कामातुर आवाजों से कमरा गूंजने लगा। मैं उसके कभी इस चुचूक को तो कभी दूसरे चुचूक को चूस रहा था। इस बीच में वह दो बार चरमोत्कर्ष से झड़ चुकी थी मगर मैं अभी भी नहीं झड़ा था।

इसके पहले उसके पति ने कभी उसे इतना संतुष्ट नहीं किया था। मैं भी अब तेजी लाया, वो मारे उत्तेजना के सिसकारी पे सिसकारी भर रही थी।मैंने उसे अब अपने ऊपर ले लिया और उसके दूध पकड़ के उसे अपने लिंग पर ऊपर-नीचे होने का कहा। वह सेक्स का पूरा मजा ले रही थी। मैं भी अब उत्तेजना के मारे चरमसीमा पर था। अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कस के जकड़ लिया और हम दोनों एक ही साथ स्खलित हो गए। वो मेरे ऊपर ही लेटकर मेरे होंठों को चूसती रही और बोली- आज मैं पहली बार तीन बार झड़ी हूँ, यह दिन मुझे हमेशा याद रहेगा।

उसके बाद हमारी चुदाई का एक राउंड और चला, वो पूरी तरह से थक चुकी थी। हमने उठकर कपड़े पहने। उसने एक बार और चाय बनाई। चाय पीते पीते वो बोली- मन तो नहीं कर रहा है आपको वापस भेजने का ! मगर मेरी सास काम से आने वाली है।

मैं भी लेट हो रहा था तो मैं भी उससे अगली बार मिलने का कहते हुए वापस घर आने लगा तो वो बोली- जाने से पहले मुझे एक बार चूमने तो दो !

फिर उसने मुझे बाहों में लेकर मेरे होंठों पर अपने मद भरे होंठ रख दिए।मगर समय का ध्यान रखते हुए मैंने उससे कहा- इस तरीके से तो तुम परेशानी में पड़ जाउंगी क्योंकि तुम्हारी सास भी तो आने वाली है।

मैंने उससे फिर किसी दिन आने का कहते हुए वापिस घर का रुख किया और उससे कहा- तुम मोबाइल से बता देना !

इसके बाद मैंने उसे उसी के घर पर पूरी रात कैसे उसके साथ चुदाई के नए नए आसनों के साथ गुजारी जबकि उसकी सास घर पर ही बगल वाले कमरे में थी।

वो मेरी अगली धड़कती फड़कती चुदाई की Antarvasna कहानी में !

Hindi Sex Stories

कहते हैं कि किसी औरत Hindi Sex Stories को गैर-मर्द के साथ अकेला नहीं छोड़ना चाहिये क्योंकि मर्द उसे पकड़ कर चोदने की ही सोचेगा।
कैसे इसकी चूत में अपना लंड डाल दूँ – यही ख्याल उसके मन में कुलबुलायेगा।
दोस्तो, मेरे साथ ऐसा ही हुआ।

गर्मी के दिन थे और भरी दोपहर थी।
मैं अपने घर में अकेला था क्योंकि अभी मेरी शादी नहीं हुई थी।
मैंने घर में कुछ ज़रूरी काम करने के लिये ऑफिस से छुट्टी ले रखी थी।

काम निबटा कर मैं बेडरूम में ठंडी बीयर का आनन्द ले रहा था।

करीब एक बजे दरवाजे पर हुआ टिंग-टोंग!

मैंने दरवाजा खोला तो सामने मानो एक अप्सरा खड़ी थी।

पैंतीस-छत्तीस साल की साँवली और गज़ब की सुंदर औरत साड़ी पहने हुए और हाथों में कागज़ और कलम लिये हुए कोयल का आवाज़ में बोली- माफ़ कीजियेगा! क्या कोई लेडी हैं घर में?
मैंने कहा- जी नहीं, मैं बेचलर हूँ और अकेला ही रहता हूँ। आप कौन हैं?

उसके माथे पर पसीने की कुछ बूंदें थी, वह बोली- ज़रा एक ग्लास पानी मिलेगा?
मैंने कहा- हाँ, क्यों नहीं?

वह ज़रा सा अंदर आयी।
मैंने पानी का ग्लास देते हुए पूछा- क्या बात है, आप हैं कौन?

पानी पी कर वह बोली- जी, मेरा नाम सना खान है और मुझे एक कनज़्यूमर कंपनी ने भेजा है सर्वे के लिये। क्या आप मेरे कुछ सवालों का जवाब दे देंगे?
मैंने कहा- जी कोशिश कर सकता हूँ। आप प्लीज़ यहाँ बैठ जाइये।

वह सोफ़े पर बैठ गयी और हमारे घर का दरवाजा अभी खुला ही था।

मैंने दूसरे सोफ़े पर बैठ कर कहा- पूछिये जो पूछना है।
वो बोली- जी आपका नाम और आपकी उम्र क्या है?
“जी मैं प्रताप सिंह हूँ और उम्र छब्बीस साल!” मैंने जवाब दिया।

“आप अपने घर की ज़रूरत की चीजें कहाँ से खरीदते हैं?”
इस तरह वो सवाल पर सवाल पूछती रही और मैं जवाब देता गया।

कुछ देर बाद मैंने पूछा- इस तरह इतनी गर्मी के मौसम में भी आप क्या सब घरों में जाकर सर्वे करती हैं?
“जी, जॉब तो जॉब ही है ना!”

“तो आप शादी शुदा होकर (उसने बड़ी सी अंगूठी पहनी हुई थी) भी जॉब कर रही हैं?”

अब वो भी थोड़ी-सी खुल सी गयी, बोली- क्यों, शादी शुदा औरत जॉब नहीं कर सकती?
“जी यह बात नहीं, घर-घर जाना, जाने किस घर में कैसे लोग मिल जायें?”

उसने जवाब दिया- वैसे तो दिन के वक्त ज्यादातर हाऊसवाइफ ही मिलती हैं। कभी-कभी ही कोई मेल मेंबर होता है।
“तो आपको डर नहीं लगता।”

“जी अभी तक तो नहीं लगा। फिर आप जैसे शरीफ इंसान मिल जायें तो क्या डर?”

‘शरीफ इंसान’ – एक बार तो सुन कर अजीब लगा।
इसे क्या मालूम कि मैं इसे किस नज़र से देख रहा था।

साड़ी और ब्लाऊज़ के नीचे उसकी चूचियाँ तनी हुई थीं और मेरे लंड में खुजली सी होने लगी।
जी चाह रहा था कि काश सिर्फ़ एक बार चूम सकता और ब्लाऊज़ के नीचे उन चूचियों को दबा सकता।

हाथों की अँगुलियाँ लंबी-लंबी मुलायम सी!
वैसे ही मुलायम से सैक्सी पैर ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में कसे हुए।
देख-देख कर लंड महाराज खड़े हो ही गये।

मन में ज़ोरों से ख्याल आ रहा था कि क्या गज़ब की अप्सरा है।
इसकी तो चूत को हाथ लगाते ही शायद हाथ जल जायेगा।

तभी वह बोली- अच्छा, थैंक्स फ़ोर एवरीथिंग। मैं चलती हूँ।

मानो पहाड़ टूट गया मेरे ऊपर!
चली जायेगी तो हाथ से निकल ही जायेगी।
अरे प्रताप, हिम्मत करो, आगे बढ़ो, कुछ बोलो ताकि रुक जये।
इसकी चूत में अपना लंड नहीं डालना है क्या? चूत में लंड? इस ख्याल ने बड़ी हिम्मत दी।

“माफ़ कीजियेगा सना जी, आप जैसी खूबसूरत औरत को थोड़ा केयरफुल रहना चाहिये।” मैंने डरते हुए कहा।
“खूबसूरत?”

मैं थोड़ा सा घबराया, लेकिन फिर हिम्मत करके बोला- जी, खूबसूरत तो आप हैं ही। बुरा मत मानियेगा। आप प्लीज़ अब तो चाय पीकर ही जाइये।
“चाय, लेकिन बनायेगा कौन?”

“मैं जो हूँ, कम से कम चाय तो बना ही सकता हूँ।”

वह हंसते हुए बोली- ठीक है… लेकिन इतनी गर्मी में चाय की बजाय कुछ ठंडा ज्यादा मुनासिब होगा!
मैंने कहा- क्यों नहीं… क्या पीना पसंद करेंगी… नींबू शर्बत या पेप्सी… वैसे मैं भी आपके आने के पहले चिल्ड बीयर ही पी रहा था!

“तो फिर अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो मैं भी बीयर ही ले लूँगी!”
मुझे उससे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी लेकिन मुझे बहुत खुशी हुई।

मैंने उसे फिर बैठने को कहा और किचन में जाकर दो ग्लास और फ्रिज में से बीयर की दो ठंडी बोतलें निकाल कर ले आया।

हम दोनों बीयर पीने लगे और इधर मेरा लंड उबल रहा था।
पहली बार किसी औरत के साथ बैठ कर बीयर पी रहा था और वो भी इतनी सुंदर औरत – और मुझे पता नहीं था कि कैसे आगे बढ़ूँ।

तभी वो बोली- आप अकेले रहते हैं… शादी क्यों नहीं कर लेते?
मैंने जवाब दिया- जी, घर वाले तो काफी ज़ोर दे रहे हैं लेकिन कोई लड़की अभी तक पसंद ही नहीं आयी!

अब और हिम्मत करके मैंने कहा- सना जी, आप वाकयी में बहुत खूबसूरत हैं और बहुत अच्छी भी! आपके हसबैंड बहुत ही खुशनसीब इंसान हैं।

“आप प्लीज़ बार-बार ऐसे ना कहिये। और मुझे सना जी क्यों कह रहे हैं। मैं उम्र में आपसे बड़ी ज़रूर हूँ लेकिन इतनी ज़्यादा भी नहीं!” वो इतराते हुए अदा से मुस्कुरा कर बोली।

दोस्तो, यह हिंट काफ़ी था मेरे लिये!
मैं समझ गया कि ये अब चुदवाने को आसानी से तैयार हो जायेगी।

हमारी बीयर भी खत्म होने आयी थी।

“ठीक है, सना जी नहीं … सना … तुम भी मुझे आप-आप ना कहो! वैसे तुम कितनी खूबसूरत हो, मैं बताऊँ?”
“कहा तो है तुमने कई बार। अब भी बताना बाकी है?”

“बाकी तो है। अपनी बीयर खत्म करके बस एक बार अपनी आँखें बन्द करो … प्लीज़!”

दो-तीन घूँट में जल्दी से बीयर खतम करके उसने आँखें बंद की।

मैंने कहा- आँखें बंद ही रखना!

अब मैंने उसे कुहनी से पकड़ कर खड़ा किया और हल्के से मैंने उसके गुलाबी-गुलाबी नर्म-नर्म होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
एक बिजली सी दौड़ गयी मेरे शरीर में! लंड एकदम तन गया और पैंट से बाहर आने के लिये तड़पने लगा।

उसने तुरन्त आँखें खोलीं और अवाक सी मुझे देखती रही और फिर मुस्कुरा कर और शर्मा कर मेरी बाँहों में आ गयी।
मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।
कस कर मैंने उसे अपनी बाँहों में दबोच लिया।

ऐसा लग रहा था बस यूँ ही पकड़े रहूँ।
फिर मैंने सोचा कि अब समय नहीं बर्बाद करना चाहिये।
पका हुआ फल है, बस खा लो।

तुरंत अपनी बाँहों में मैंने उसे उठाया (बहुत ही हल्की थी) और बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया।

उसकी आँखों में प्यास नज़र आ रही थी।
साड़ी और सैंडल पहने हुए बिस्तर पर लेटी हुई वो प्यार भरी नज़रों से मुझे देख रही थी।

ब्लाऊज़ में से उसके बूब्स ऊपर नीचे होते हुए देख कर मैं पागल हो गया।
आहिस्ते से साड़ी को एक तरफ़ करके मैंने उसकी दाहिनी चूची को ऊपर से हल्के से दबाया।
एक सिरहन सी दौड़ गयी उसके शरीर में!

वो तड़प कर बोली- प्लीज़ प्रताप! जल्दी से! कोई आ ही ना जाये।

“घबराओ नहीं, सना डार्लिंग … बस मज़ा लेती रहो। आज मैं तुम्हे दिखला दूँगा कि प्यार किसे कहते हैं। खूब चोदूँगा मेरी रानी!” मैं एकदम फ़ोर्म में था।
यह कहते हुए मैंने उसकी चूचियों को खूब दबाया और होंठों को कस-कस कर चूसने लगा।

फिर मैंने कहा- चुदवाओगी ना?
आह! गज़ब की कातिलाना मुस्कुराहट के साथ बोली- प्रताप! तुम भी… बहुत बदमाश हो… तो क्या बीयर पी कर यहाँ तुम्हारे बिस्तर पे तीन पत्ती खेलने के लिये तुम्हारे आगोश में लेटी हूँ! अब इस भरी दोपहर में दर-दर भटकने की बजाय यही अच्छा है।

“सना रानी, बदमाश तो तुम भी कम नहीं हो!” और उसके नर्म-नर्म गालों को हाथ में ले कर होंठों का खूब रसपान किया।

मैं उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर था।
चूत मुझे महसूस हो रही थी और उसकी चूचियाँ … गज़ब की तनी हुई … मेरे सीने में चुभ-चुभ कर बहुत ही आनंद दे रही थी।

दाहिने हाथ से अब मैंने उसकी बाँयी चूची को खूब दबाया और एक्साईटमेंट में ब्लाऊज़ के नीचे हाथ घुसा कर उसे पकड़ना चाहा।

“प्रताप, ब्लाऊज़ खोल दो ना!”

उसका यह कहना था और मैंने तुरन्त ब्लाऊज़ के बटन खोले और उसे घुमा कर साथ ही साथ ब्रा का हुक खोला और पीछे से ही उसके बूब्स को पूरा समेट लिया।

आहा … क्या फ़ीलिंग थी, सख्त और नर्म दोनों, गर्म मानो आग हो।
निप्पल एकदम तने हुए।

जल्दी-जल्दी मैंने ब्लाऊज़ और ब्रा को हटाया; साड़ी को परे किया और पेटीकोट के नाड़े को खोल कर उसे हटाया।

पिंक पैंटी और सफेद हाई-हील के सैंडल पहने हुए सना को नंगी लेटी हुई देख कर तो मैं बर्दाश्त ही नहीं कर सका।
मैंने अब अपने कपड़े जल्दी-जल्दी उतारे।

लंड तन कर बाहर आ गया और ऊपर की तरफ़ हो कर तड़पने लगा।

उसका एक हाथ लेकर मैंने अपने फड़कते हुए लंड पर रख दिया।

“उफ हायल्ला कितना बड़ा और मोटा है!” वह बोली और आहिस्ता-आहिस्ता लंड को आगे पीछे हिलाने लगी।

शादीशुदा औरत को चोदने का यही मज़ा है; कुछ सिखाना नहीं पड़ता।
वो सब जानती है और आमतौर पर शादी शुदा औरतें फैमली प्लैनिंग के लिये पिल्स या कोई और इंतज़ाम करती हैं तो कंडोम की भी ज़रूरत नहीं।

मैंने आखिर पूछ ही लिया- सना डार्लिंग, कंडोम लगाऊँ?
वो मुँह हिलाते हुए मना करते हुए खिलखिलायी- सब ठीक है। मैं पिल्स लेती हूँ।

मैंने अब उसके बदन से उस पिंक पैंटी को हटाया और इत्मीनान से उसकी चूत को निहारा।
एकदम साफ चिकनी सुंदर सी चूत थी। कुछ फूली हुई थी।

मैंने उसके ऊपर हाथ रखा और हल्के से दबाया।
अँगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी।
रस बह रहा था और चूत एकदम गीली थी।

मैं जैसे सब कुछ एक साथ कर रहा था। कभी उसके होंठों को चूसता, चूचियों को दबाता – कभी एक हाथ से कभी दोनों से!
एकदम टाइट गोल और तनी हुई चूचियाँ।

उसके सोने जैसे बदन पर कभी हाथ फिराता।

फिर मैंने उसकी चूचियों को खूब चूसा और अँगुलियों से उसकी बूर में खूब अंदर बाहर करके हिलाया।

“सना, अब मैं नहीं रह सकता, अब तो चोदना ही पड़ेगा। कस-कस कर चोदूँगा मेरी रानी।”
पहली बार उसके मुँह से अब सुना- चोद दो ना प्रताप, बस अब चोद दो।

मज़ा लेते हुए मैंने पूछा- क्या चोदूँ जानेमन? एक बार फिर से कहो ना! तुम्हारे मुँह से सुनने में कितना अच्छा लग रहा है।
“अब चोदो ना … इस … इस चूत को!”

“अब मैं तेरी गर्म-गर्म और गुलाबी-गुलाबी बूर में अपना ये लंड घुसाऊँगा और कस-कस कर चोदूँगा।”

मैंने अपना लंड उसकी बूर के मुँह पर रखा और हल्के से धक्का दिया।
उसने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और गाईड करते हुए अपनी चूत में डाल दिया।

दोस्तो, मानो मैं जन्नत में आ गया।
मैं बोल ही उठा- उफ़, क्या चूत है सना … मज़ा आ गया।
उसने भी उत्तेजित होकर कहा- चोद दो प्रताप … बस अब इस चूत को खूब चोदो।

दोस्तो … चूचियाँ दबाते हुए, होंठ चूसते हुए ज़ोर-ज़ोर से चोद-चोद कर ऐसा मज़ा मिल रहा था कि पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गया।
झड़ते-झड़ते भी मैं उसे बस चोदता ही रहा और चोदता ही रहा।

“सना … बहुत मजेदार चुदाई थी यार! तुम तो गज़ब की चीज़ हो।”
“मुझे भी बेहद मज़ा आया, प्रताप।” वो कसकर मुझे पकड़ते हुए बोली।

उसकी चूचियाँ मेरे सीने से लग कर एक अलग ही आनंद दे रही थी।

दोस्तो, फिर बीस मिनट बाद पहले तो मैंने उसकी बूर को चाटा और उसने मेरे लंड को चूसा, हल्के-हल्के!
फिर हमने कस-कस कर चुदाई की और इस बार झड़ने में काफी समय लगा।

मैंने शायद उसकी चूचियाँ और चूत और होंठ और गाल के किसी भी अंग को चूसे बगैर नहीं छोड़ा।
इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था।
बस गज़ब की चीज़ थी वो औरत!

कपड़े पहनने के बाद मैंने पूछा- सना, अब तो तुम्हें और कई बार चोदना पड़ेगा। अपनी इस प्यारी सी चूत और प्यारी-प्यारी चूचियों और प्यारे-प्यारे होंठों और प्यारी-प्यारी सना डार्लिंग के दर्शन करवाओगी ना?

मैंने उसका फोन नंबर ले लिया और कह दिया कि मैं बता दूँगा जिस दिन मैं दिन में घर पे होऊँगा!

अब वह मुझसे फ़्री हो गयी थी और बोली- प्रताप, डोंट वरी, जब भी मुनासिब मौका मिलेगा खूब चुदाई करेंगे!

उसकी यह बात सुनते ही मैंने उसे एक बार और बाँहों में भींच लिया और उसके होंठों का एक तगड़ा चुंबन लिया।
फिर वो मेरे बंधन से आज़ाद होकर दरवाजे से बाहर निकल गयी।
कुछ दूर जाकर पीछे मुड़ी और एक मुस्कान बिखेर कर धीरे-धीरे मेरी आँखों से ओझल हो गयी। Hindi Sex Stories

Antarvasna

दोस्तो, यह मेरी पहली Antarvasna कहानी है अन्तर्वासना पर ! मैं यहाँ दूसरों की कहानियाँ पढ़ने में काफी समय बिताता हूँ। इतना पढ़ने के बाद आज मेरा भी मन किया कि कुछ लिखा जाए तो यह कहानी आपके लिए लाया हूँ। सच है या काल्पनिक इसका फैसला मैं आप पर छोड़ रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आपको यह पसंद आएगी।

मेरा नाम रोहित है उम्र 20 साल, कद करीब 5′ 9″, देखने में भी ठीक हूँ और मेंरे लंड की लम्बाई 6″ है। मैं हमेशा से पढ़ाई में अच्छा रहा हूँ जिस कारण मुझे काफी अच्छा कॉलेज मिला जहाँ से मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ, तीसरे वर्ष में ! मैं घर साल भर में दो तीन बार ही आ पाता हूँ। मेरे घर में मेरे अलावा मुझसे तीन साल बड़ी मेरी बहन है जो हॉस्टल में रहती है और मम्मी पापा हैं। मम्मी एक सरकारी विद्यालय में अध्यापिका हैं और मेरे पापा एक बैंक मेनेजर हैं।

मेरी छुटियाँ होने ही वाली थी जब मेरी मम्मी ने फोन पर मुझे हमारे नए पड़ोसियों के बारे में बताया। मेरी मम्मी उनको लेकर काफी खुश लग रही थी और बता रही थी कि वो लोग दोस्ताना स्वाभाव के हैं और मेरी मम्मी के काफी अच्छे दोस्त भी बन गए हैं। कुछ ही दिनों में मैं दो महीनों के लिए अपने घर आया। मम्मी ने बताया कि आंटी मुझसे जल्दी से जल्दी मिलना चाहती हैं इसलिए मैं अगले ही दिन उनके घर चला गया और मुझे उस परिवार से मिलने का पहले मौका मिला।

परिवार छोटा ही था जिसमें सिर्फ भाई बहन और मम्मी पापा थे। बहन का नाम आस्था था और उसके भाई का रोहण। आस्था करीब 19 साल की होगी और रोहण 10 साल का। आंटी ने मेरा उनसे परिचय करवाया और बताया कि आस्था भी इंजीनियरिंग के दूसरे साल में है।

आस्था 19 साल की एक मस्त लौंडिया थी जिसको देखते ही मुँह में पानी आ जाये, गोरा रंग, बी-कप वक्ष, मस्त गांड और कद 5’5″। जब वो चलती थी तो उसकी बड़ी गांड देखने में बड़ा मजा आता और मन करता कि अभी कुतिया बना कर चोद डालूँ साली को।

आस्था और रोहण मेरे घर मेरी मम्मी के साथ बैडमिन्टन खेलने रोज शाम को आया करते थे। मैं भी उनके घर कभी कभार चला जाता था पर सिर्फ आंटी से ही बात कर रह जाता था। फिर एक दिन हुआ यूँ कि मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। हमारी रिश्तेदारी में किसी के यहाँ लड़का हुआ था तो इसी खुशी में पार्टी थी। मम्मी-पापा वहीं गए थे। आस्था और रोहण घर खेलने के लिए आये पर मेरी मम्मी को न देखकर आस्था ने मुझसे उनके बारे में पूछा।

मैंने उसे बताया- मम्मी-पापा पार्टी में गए हैं।

अब उसे खेलने के लिए एक पार्टनर की जरुरत थी तो उसने मुझसे खेलने के लिए कहा।

मेरे मन में ठरक तो पहले से ही उठी थी तो मैंने मौके का फायदा उठाने का सोचकर बोला- अभी बाहर धूप है, कुछ देर में खेलते हैं और अभी तुम अंदर आ जाओ।

वो अंदर आ गई मगर उसका भाई बाहर ही कुछ खेलने लगा।

वो जब अंदर आई तो मेरा कंप्यूटर चालू था, डेस्कटॉप देखकर उसने कहा- यह क्या लगा रखा है?

डेस्कटॉप पर एक गन्दा सा वालपेपर लगा था। वालपेपर अश्लील नहीं था मगर एक बदसूरत कुत्ते का था। तब मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को बोला और कहा- बेब्स फोल्डर में जाकर तुम अपनी मनपसंद का वालपेपर लगा दो।

यह कहकर मैं जानबूझ कर वहाँ से रसोई में चला गया। बेब्स फोल्डर में बहुत सारी नग्न और बहुत ही सेक्सी तसवीरें थी। जब मैं वापिस आया तो मैंने देखा कि वो उन तस्वीरों को जल्दी जल्दी बदल कर देख रही है।

मैंने कहा- शरमाने की कोई बात नहीं है, तुम इन्हें आराम से देखो।

यह कहकर मैंने उसे कुर्सी से उठाया और खुद बैठ जाने पर उसको अपने टांगों के बीच की जगह में कुर्सी पर बैठा लिया। वो मेरी गोद में तो नहीं थी पर मेरा लंड उसकी गांड से टकरा रहा था और हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।

मैंने अब अपना हाथ उसकी कमर पर घुमाना शुरू किया जिसका उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। कुछ देर बाद उसने मुझे शरमाते हुए ब्लू फिल्म देखने की इच्छा बताई मगर मेरे कंप्यूटर में न होने के कारण मुझे उसे मना करना पड़ा।

कुछ देर में हमें एहसास हुआ कि शायद रोहण आ रहा है तो वो खड़ी हो गई और मुझे फोल्डर बंद करने को बोला। मैंने उसे बंद किया और हम लोग बाहर जाकर बैडमिन्टन खेलने लगे और फिर कुछ देर बाद अँधेरा होने पर मेरे मम्मी पापा आ गए और आस्था, रोहण भी अपने घर चले गए।

अगले दो चार दिन मुझे वो दिखाई नहीं दी पर मैं इस बीच कुछ मसालेदार नग्न फिल्में ले आया था। अगले दिन मैं बाहर जा रहा था तो वो मुझे मिली, उसने बताया कि उसके पेपर आ गए है इसलिए तैयारी करने में उसका सारा समय निकल जाता है।

हमने कुछ देर और बातें की, उसने मुझे अगले दिन दोपहर में अपने घर आने को बोला, उसके मम्मी पापा कहीं जाने वाले थे और रोहण स्कूल। मैं उस रात भर उसकी चूत के बारे में सोचता रहा और मुठ मार कर सो गया।

अगले दिन करीब एक बजे मैं उसके घर पहुंचा। उसने दरवाजा खोला और उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। वो काले रंग के सलवार कमीज़ में थी और बहुत मस्त माल लग रही थी। फिर क्या था मैं अंदर घुसा और उससे जा चिपका। मेरे दोनों हाथ उसकी गर्दन पर पहुँच गए और होंठ उसके होंठों को चूसने लगे। मेरे हाथ अब कभी उसके वक्ष पर जाते, कभी उसकी गांड पर तो कभी उसकी कमर को सहलाते। हाथ अब इधर उधर उसके गरम बदन पर भटक रहे थे। वो बेचारे करते भी क्या ! इतना गर्म माल था कि हर जगह का मजा लेना चाह रहे थे।

कुछ पल बाद मैं उसके पीछे अपना लंड उसकी गांड में लगाकर खड़ा हो गया। मेरे दोनों हाथ उसके स्तनों को मसल रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मजे में उसकी आँखें भी बंद थी, मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।

अब मेरा एक हाथ उसकी सलवार में चला गया और उसकी कच्छी के ऊपर से उसकी बुर का मजा लेने लगा। कुछ गीलापन महसूस हुआ तो हाथ उसकी पेन्टी में डाल दिया और ऊँगली से उसकी चूत को रगड़ कर मजा देने लगा।

अब तक तो वो इस नशे में पागल हो गई थी और आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह कर अपनी गांड और पीछे कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी।

कुछ देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए और एक दूसरे को देखते देखते नंगे हो गए। नंगे होने पर जब मैंने उसके चुचूक देखे तो मैं रुक नहीं पाया और उन्हें चूसने लगा। क्या गज़ब का शरीर था उसका ! हर जगह से एक दम मस्त ! चूत पर कोई बाल नहीं और ऊपर से नीचे तक दिन-रात चोदने लायक !

अब मैंने उसे गोदी में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने के लिए आगे बढ़ा। यह सब मैं पहली बार करने जा रहा था। उसने शर्म के कारण अपनी टांगों को एक दूसरे से चिपका लिया और मुझे मना करने लगी। पर मैं कौन सा रुकने वाला था, एक झटके में उसके पैर खोल दिए और उसकी चूत मेरे सामने थी। चूत चाटने के लिए जब मैंने अपनी जीभ निकाल कर उस पर लगाई तो मुझे थोड़ा गन्दा स्वाद लगा और मैं पीछे हट गया। चूत चाटने का ख्याल छोड अब मैं उसके स्तनों को चूसने चाटने लगा और वो बोलने लगी- आज तो इन्हें पूरा पी जाओ !

यह कहकर अब उसके मुँह से सिर्फ आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! जल्दी करो ! सिर्फ ये आवाजें आ रही थी।

अब उसने कहा- मुझसे रुका नहीं जाता और इस चूत को ले लो अब ! अपना लंड इसमें डाल इसको फाड़ डालो, पूरा अंदर घुसा दो और मेरी माँ चोद दो !

यह सब सुनते ही मेरा लंड कड़क होकर एकदम फटने को हो गया। मैंने लंड को उसकी चूत पर रखकर घुसाने की कोशिश की पर घुसा नहीं पाया। साली की चूत थी ही इतनी कसी हुई कि मैं क्या करता। मेरे बेचारे लंड का भी आज पहली बार था और मुझे घुसाने में हल्का दर्द महसूस हो रहा था तो मेरी गांड फटने लगी और मैंने अभी के लिए उसकी फुद्दी मारने का अपना इरादा छोड़ दिया।

फ़िर अपना लंड उसके मुँह में डालकर उसको चूसने को बोला। कुछ देर उसने लंड को ऐसे ही मुँह में रखे रखा। तब मैंने कहा- मेरी प्यारी रांड ! इसे लॉलीपॉप समझ कर चूसना शुरू कर !

यह सुनते ही वो भी जोश में आ गई और लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसना शुरू किया। मैं तो जन्नत में पहुँच गया था और उसे बोल रहा था- मान गए मेरी रांड को …. बस ऐसे ही चूसती रह.. आआआआआह्ह्ह्ह्ह् आआआह्ह्ह्ह्ह् …..

कुछ ही पल में मेरा झड़ने वाला था और मैंने उसके मुँह में पिचकारी मार दी। कुछ बूंदें तो अंदर ले गई और बाकी सब बाहर निकाल दिया। अब उसने मेरी और देखा और मुस्कुराने लगी। कुछ देर यूँ ही लेटे गए और तभी घर कोई आ गया। हमने फटाफट कपडे पहने और आस्था ने दरवाजा खोला तो पाया कि रोहण स्कूल से घर आया था।

उसने मुझे देखा और हैरान होकर अंदर चला गया। मैं उस दिन अब चूतिये की तरह वहाँ से भाग आया वो भी बिना उसको चोदे।

अगले दिन आंटी मेरे घर आई। मैं घर पर अकेला अपने कान में हैड्फोन लगाकर अश्लील फ़िल्म देख रहा था। आंटी ने दरवाजा खटखटाया मगर मुझे सुनाई नहीं दिया और मैं मुठ मारता रहा। आंटी ने तब बाहर से अंदर झाँक कर देखा कि अंदर मैं क्या कर रहा हूँ और तब दरवाजे को काफी जोर से खटखटाया।

इस बार मैंने उसे सुना और एकदम घबराया और अपना लंड अंदर करके दरवाजा खोला। मैं आंटी को देख हैरान था। तब मैंने देखा कि वो काफी गुस्से में थी और मुझसे पूछा- अभी क्या कर रहे थे और कल उनके घर दोपहर में क्या हुआ था?

मैं समझ गया था कि रोहण ने उन्हें बता दिया होगा। मैंने कुछ नहीं ! कहकर बात का जवाब नहीं दिया। तब उन्होंने एक दम से मेरे को एक चांटा लगा दिया और कहा- आज के बाद हमारे घर दिखाई दिए तो तुम्हारी टाँगे तोड़ दूंगी !

मुझे उनकी यह बात सुन कर बहुत गुस्सा आया और मैंने एक झटके में उन्हें कमर से खींच कर उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। उन्होंने मुझे हटाने की कोशिश की पर अब तक तो मेरे ऊपर हवस हावी हो गई थी। दो मिनट बाद आंटी को भी मजा आने लगा और उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ घूमने लगी।

आंटी 42 साल की मस्त महिला थी। उनकी गांड और चूचियों का आकार काफी बड़ा था और अपनी बेटी आस्था की तरह वो भी गोरी चिट्टी थी। देखकर लगता था कि अपनी जवानी में बहुत सारे लोगों के लौड़े शांत कर चुकी होंगी।

मैं अपने हाथ आंटी की मोटी गांड पर फ़िरा रहा था और उन्होंने मुझे कस कर गले लगा रखा था। ऐसा लग रहा था कि वो काफी समय से एक लंबी चुदाई की भूखी थी। मैं आंटी को गोदी में लेकर बैठ गया और नग्न मूवी चला दी। आंटी के स्तन दबाने में बहुत मजा आ रहा था और वो भी खूब मस्त हो रही थी। उनके मुँह से अब आआअह्ह्ह्ह्ह के अलावा कुछ और नहीं निकल रहा था और उनके हाथ उनकी चूत पर पहुँच गए थे। मूवी में अब एक 69 दृश्य चलने लगा, तब मैं आंटी को बिस्तर पर ले गया और हम भी 69 की दशा में आ गए। आंटी ने लंड को चाटना, चूसना शुरू किया। वो एक भूखी कुतिया की तरह लंड को चाट रही थी।

मुझे बेहद मजा आ रहा था और मैंने उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया। पिछले दिन की तरह आज मुझे गन्दा नहीं लगा बल्कि मजा आ रहा था ऐसा करने में। मैं चूत चाटते चाटते उनकी गांड पर थप्पड़ मार देता था तो उनकी गांड हिलती हुई काफी अच्छी लगती और गांड अब लाल हो चुकी थी। दो ही मिनट में मैं और आंटी दोनों झड गए। आंटी ने अपना मुँह बिल्कुल नहीं हटाया और सब कुछ चाट लिया। मैं भी उनकी चूत में घुसा जा रहा था जिसका स्वाद अब नमकीन लग रहा था। अब उन्होंने मेंरे लंड को छोड़ा और एक लंबी सांस लेकर उठ गई। वो उठ कर एक कुतिया की तरह बिस्तर पर खड़ी हो गई और मुझे आँखों से उनकी पीछे से चूत मारने का इशारा किया। मैं पीछे गया और लंड चूत पर लगाकर एक जोर का झटका दिया, मेरा 6 इंच का लंड सीधा अंदर चला गया क्योंकि चूत वैसे ही बहुत चिकनी हो गई थी। आंटी की एक काफी तेज चीख निकली थी जिसको रोकने के लिए मैंने पीछे से उनके मुँह पर हाथ रखा। कुछ पल में अब मैं अपनी कुतिया आंटी की सवारी कर रहा था।

उनके मुँह से आवाज़ आ रही थी- चोद दे मुझ रांड को, माँ चोद दे मेरी ,कितने समय से एक ऐसी चुदाई के लिए तड़प रही थी ! आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह !

और पच पच की आवाजों से पूरा कमरा भर गया था। पीछे से चोदते वक्त गांड बहुत बड़ी और मुलायम लग रही थी। अब मैं नीचे आया और वो मेरे ऊपर आ कर मेरे लंड पर बैठ गई। बैठते ही उन्होंने लंड पर उछालना शुरू किया और मेरे हाथ लेकर अपने वक्ष पर रख उन्हें दबवाने लगी।

वो आँखें बंद कर बोल रही थी- फाड़ डाल मेरी, मैं तो तेरी कुतिया बनके रहूंगी, आज तुम मुझे छोड़ना मत, मुझे पूरी तरह से चुदाई का मजा दो, सभी तरह से चुदाई करो मेरी तुम, चोद और चोद, मेरी चूत की प्यास बुझा दे आज तू ! ऊँगली से थक गई अब एआआह्ह्ह् आआआआह्ह्हह !

मैंने भी नीचे से एक दो फटके मारे और एक जोर के झटके में सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो सिसकाई- आहाहाआह्ह आजा मेरे अंदर आजा ! डाल मेरे अंदर डाल !

दस मिनट बाद हमने एक और राउंड लगाया और फिर मेरी मम्मी के आने का समय हो गया था इसलिए वो कपडे पहन जाने की तैयारी करने लगी। जाते वक्त मुझे बोलती कि मैं आस्था की जगह सिर्फ उनकी चुदाई करता रहूँ।

मैं उनके बाहर जाते ही हंसने लगा कि आस्था की चुदाई न करूँ, ऐसा कैसे हो सकता है। खैर दोस्तो, होना क्या था, शनिवार को मौका मिला और मैंने इस बार आस्था का भी बैंड बजा डाला। दबा कर चोदा साली रांड को ! समय के साथ मैं माहिर होता गया और अब जब भी घर आता हूँ तो माँ बेटी दोनों की चूत को शांत करता हूँ। आंटी को तो मेरे और आस्था का पता है मगर आस्था मेरे और उसकी माँ की चुदम-चुदाई के बारे में नहीं जानती। Antarvasna

Sex stories

हाय! दोस्तो मैं फिर वापस आ गया हूं अपनी Sex stories अधूरी कहानी लेकर आप, लोगों ने मेरी कहानी को काफी पसंद किया और बहुत सारा मेल भी, इसके लिये धन्यवाद।

तो पिछली कहानी में मैं अपनी मामी जी की चूची फिल्म देखते हुये प्यार से दबा रहा था और मामी जी कुछ नहीं बोली आगे इसी तरह चूची दबाते हुये पूरी फ़िल्म देख ली। इस बीच हम लोगों में कोई बात नहीं हुई और हम लोग घर चले आये आने के बाद पता चला कि मामा जी भारत जा रहे हैं और कल आयेंगे मामा जी ने मुझे अच्छी तरह समझाकर चले गये मामा जी और मामी जी एक रूम में सोते थे, नानी जी और मामी जी की लड़कियां एक रूम में सोते थे और मैं कुछ नौकरों को लेकर एक जगह सोता था

पर आज रात मुझे नींद कहाँ आ रही थी करीब १२ बजे उठा और दबे पाँव मामी जी के कमरे की ओर चल पड़ा जाकर जैसे ही मैने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया दरवाजा खुल गया मुझे समझते देर नहीं लगी कि मामी जी मेरे लिये ही दरवाजा खुला छोड़ रखी है फिर मैं मामी जी के पास आहिस्ते से दरवाजा बंद करके पहुँचा और पहुँच कर उनके बगल में लेट गया और लेट कर उनकी चूची को फिर से दबाने लगा ५ बच्चे की माँ होने के बावजूद उनकी चूची काफी टाइट हो गई मैं करीब ५ मिनट तक चूची को दबाता रहा उसके बाद मैने आहिस्ते से हाथ उनकी चूत पर रखा कर कपड़े के ऊपर से ही सहलाने लगा इस के बावजूद जब कुछ नही बोली तब मैने उनको खींच कर सीधा किया और साड़ी पेटीकोट को उठा कर सीधा चूत को चाटना शुरु कर दिया करीब २ मिनट के बाद ही उनके मुख से काफी मादक और उत्तेजक सिसकारियां निकलनी शुरु सो गयी और मैं सोच भी नहीं सकता था कि मेरी मामी जी इतनी गंदी गाली भी दे सकती हैं

वो उन्माद में पागल हो कर बकने लगी आआआआ मेरे राजाआआआअ चाट लो काट कर खाआआआअजाओ मेरी चूत को अबे रंडी का बच्चा मादर चोद सुबह से चूची दबा दबा कर पागल कर रखा है तेरी मा की चूची था किया मादर चोद चूची तू दबाये चूत किया तेरा माँ का भतार दबाये जा या मेरी चूची दबाने के बाद अपनी माँ की चूत में लंड डाले जाअ बोल बोलना बे भोसड़ी बाला आआआआआ सीईईइ आआआऔऊऊऊऊऊऊउआआ आआआ उसकी गाली सुनकर मुझे काफी गुस्सा आ गाया और मैं चूत चाटना छोड़ कर उठा और अपना कपड़ा खोला और उसकी दोनो टांग उठा कर अपने कंधे पर रख लिया और लंड उसके चूत पर रख कर इतनी जोर का धक्का दिया कि उसकी चूत गीली होने के बावजूद उसके मुख से चीख निकल पड़ी फिर क्या था वो हमें गाली पे गाली देती रही और मैं धक्के पे धक्का देता रहा करीब दस मिनट के बाद मैं शांत हुआ इस बीच वो तीन बार झड़ी….. बस दोस्तों आज ये कहानी फिर अधूरा छोड़ रहा हूं लेकिन इस वादे के साथ कि हम फिर मिलेंगे Sex stories

Antarvasna

दोस्तों मेरा नाम बिट्टू है Antarvasna और मैं भोपाल में रहता हूं। ये कहानी उस समय की है जब हमारे घर में किराये पर नये किरायेदार आये।

हमारे किरायेदार की बीबी बहुत ही सुन्दर थी, वो पंजाब की रहने वाली थी और जब पंजाब की है तो सुन्दर तो होगी ही। उसका नाम पायल था। उमर होगी करीब २६-२७ साल, रंग एकदम दूध की तरह सफ़ेद। एकदम गोल-२ स्तन थे उसके। उन दिनो मैं बहुत सी व्यस्क पुस्तकें पढ़ता था। इसी वजह से मुझे छोटी सी उमर में की सेक्स का काफ़ी ज्ञान हो गया था। बस हर समय चूत मारने का दिल करता रहता था। और जब पायल आंटी को देख लेता था तो मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को हो जाता था। पायल को कहने में भी डर लगता था क्योंकि वो तो मुझे कम उम्र समझती थी। इसलिये मुट्ठी मार कर ही काम चलाना पढ़ता था।

मैं तो पायल के स्तन देखने के लिये बेचैन रहता था। जब वो अपने कमरे में झुककर झाड़ू लगाती थी तो मुझे उसके सेक्सी स्तनों के दर्शन हो जाते थे। दोस्तो अभी तक तो मैं उसके चूचे ही देखता था लेकिन एक दिन मेरी किस्मत खुली और मैंने पायल को बिल्कुल नंगा देखा।

हुआ क्या कि मैं अक्सर उसके कमरे में जाता था ताकि मैं उसको देख सकूँ।

एक दिन मम्मी ने मुझे पायल को कुछ देने के लिये भेजा, मैं दरवाजे को बिना खटखटाये ही पायल के कमरे में घुस गया, उस समय पायल अपने कपड़े बदल रही थी और वो बिल्कुल नंगी थी। मैंने जैसे ही उसको देखा तो मेरे सारे शरीर में एक करेंट सा दौड़ गया, वो घबराकर किचन में चली गई और मैं भी कमरे से बाहर आ गया। मेरा दिल जोर-२ से धड़क रहा था क्योंकि ऐसा हसीन नजारा मैंने पहली बार जो देखा था। मुझे थोड़ा खुद पर शरम भी आई कि मैं बिना खटखटाये कमरे में चला गया, लेकिन दिल में एक खुशी भी थी कि चलो इसी बहाने मैंने पायल को नंगा तो देख लिया।

जिस दिन से मैंने पायल आंटी को नंगा देखा, तब से तो उसको चोदने की तम्मना और ज्यादा बढ़ गई। रात को बस वो ही सपनों में आती थी। पायल के पति प्रेस में थे। उनकी एक सप्ताह दिन की ड्यूटी होती थी और एक सप्ताह रात की। जब उनकी रात की ड्यूटी होती थी तो वो मुझे अपने कमरे में सोने के लिये बुला लेती थी, उन्हें अकेले सोने में डर लगता था। वो तो मुझे बच्चा समझकर सोने के लिये बुलाती थी लेकिन उन्हें क्या पता कि मैं रोज़ उनको ही सपनों में देखकर मुट्ठी मारता हूँ। रात को जब वो गहरी नींद में होती थी तो मैं धीरे-२ उनके स्तनों और कूल्हों पे हाथ फेर लेता था। दिल तो करता था कि अभी के अभी चोद दूं लेकिन डरता था कि कहीं ये मेरे घर में न बता दे।

एक दिन मैं उनके साथ कमरे में सो रहा था, पायल साड़ी पहन कर सो रही थी। ब्लाउज़ में से उनके सेक्सी स्तन बाहर आने को हो रहे थे। बूब्स को देखकर मेरे लंड का बुरा हाल हो रहा था, जब मेरे से कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और मुट्ठी मारने लगा तो पायल आंटी नींद खुल गई और बोली- क्या कर रहा है?

मैं डर गया और बोला- मैं तो कुछ नहीं कर रहा !

फिर मैं चुपचाप सो गया। सुबह मेरे से आंटी से नजर नहीं मिलाई जा रही थी, मुझे डर था कि कहीं ये किसी को बता न दे।

अगले दिन वो मेरे से बोली- रात को क्या कर रहा था?

मैं कुछ नही बोला, पायल बोली- मुट्ठी मार रहे थे न?

मैंने कहा- हां !

वो बोली- किसके बारे में सोच रहे थे?

मैंने कहा- आपके बारे में !

पायल ने कहा- अच्छा चल ठीक है, तुझे मुट्ठी मारने की जरूरत नहीं है, तुम मेरे साथ कर लो जो करना है। आज रात को जब तू मेरे साथ सोयेगा तो हम मज़े करेंगे।

मैं मन ही मन बहुत खुश हो रहा था कि चलो चूत का जुगाड़ तो हुआ। इन्तजार के पल तो वैसे भी बहुत मुश्किल से कटते हैं, तो सारा दिन मैं रात होने की प्रतीक्षा करता रहा। रात को सोने के लिये उनके कमरे पे गया तो वो भी तैयार बैठी थी। मेरे मन में थोड़ी हिचकिचाहट भी थी क्योंकि एक तो मैंने कभी सेक्स नहीं किया था और दूसरे वो मेरे से उमर में काफ़ी बड़ी थी।

वो बोली- इतना क्यों शरमा रहा है?

फिर मैं बिल्कुल पायल के पास बैठ गया। उनको छूते ही मेरी नस-२ में आग सी लग गई। मेरा लंड एकदम तनकर पैंट फाड़ने को हो गया, आंटी बोली कि तेरे लंड को बहुत जल्दी लगी हुई है चूत में घुसने की?

मैं बोला- हां बेचारे ने कभी चूत का मजा नहीं लिया है ना !

अब मेरी शरम भी खत्म हो गई थी, मैंने पायल के ब्लाउज़ में हाथ डाल दिया और उनके स्तनों को दबाने लगा, साथ ही उनके रसीले होंठों को अपने होंठों में ले कर चूसने लगा। वो भी बहुत बुरी तरह से मेरे होंठों को चूस रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। काफ़ी देर तक हम एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे।

मैंने उनके ब्लाउज़ के हुक खोल कर उनके बूब्स को आज़ाद कर दिया, पायल के मोटे-२ बूब्स ऐसे लग रहे थे जैसे कश्मीर के सेब हों, उसके एक बूब को मैंने अपने मुँह में लिया और दूसरे को हाथ से दबाने लगा, वो सिसकियां ले रही थी। दिल तो कर रहा था कि इसके बूब्स को खा जाऊँ। पायल बोली- अकेले ही चूसते रहोगे कुछ मुझे भी चूस लेने दो !

मैं उनका इशारा समझ गया कि वो मेरे लंड को चूसना चाहती है, मैंने अपनी पैंट खोल दी। पैंट खोलते ही मेरा लंड एक झटके से बाहर आकर ऐसे खड़ा हो गया जैसे कुतुब मीनार।

उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और बोली- मैं तुझे बच्चा समझती थी पर तुम्हारा लंड तो तगड़ा है !

वो मेरे लंड को मुँह में लेकर ऐसे चूस रही थी जैसे कि आइस-क्रीम चूस रही हो। मैं अपना लंड उसके मुँह में अंदर बाहर करने लगा, मुझे भी लंड चुसवाने में बहुत मजा आ रहा था।

लंड चुसवाने के बाद मैंने उसे बेड पे लेटा लिया और फ़िर से उसके बूब्स को चूसने लगा। बूब्स चूसते-२ मैंने बूब्स पे जोर से काट लिया वो चिल्ला पड़ी, बोली- क्या कर रहे हो इन्हें?

मैंने कहा- तुम्हारे बूब्स हैं ही एकदम कश्मीरी सेब की तरह, दिल तो यही कर रहा है कि इन्हें खा ही जाऊँ !

पायल को मैंने अब सीधा लेटा लिया, उसने अपनी टांगे फ़ैला ली, मैं अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ने लगा वो बोली- अब क्यों तड़पा रहे हो लंड को, अब मेरी चूत में डाल भी दो !

मैंने अपना लंड उसकी चूत पे लगा कर एक झटका मारा, मेरा पूरा लंड अब पायल की चूत में घुस गया। मैं धीरे-२ झटके मारने लगा, वो भी नीचे से गांड उठा-२ कर झटके मार रही थी। उसके मुँह से आह्ह ऊह्ह ह्हह की आवाजें आ रही थी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर-२ से झटके मारने लगा। पूरे कमरे में फ़च-२ की आवाज आ रही थी, थोड़ी देर के बाद हम दोनो डिस्चार्ज हो गये और १5 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर हम दोनो अलग हो गये और दोनों ने अपने कपड़े पहन लिये।

वो बोली- क्यों ! चूत का मजा आया या नहीं?

मैं बोला- हां सच में बहुत मजा आया ! ऐसे लग रहा था जैसे कि मैं स्वर्ग में आ गया हूं। Antarvasna

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆