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Massage Girl in Beed: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Beed who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Beed that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Beed massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Beed who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Beed massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Beed massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Beed who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Beed employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Beed helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Beed

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Beed at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

हॉट मौसी सेक्सी कहानी में मैंने रात को अपनी मौसी को पापा के साथ जाती देखा तो मुझे लगा कि दोनों चुदाई करने जा रहे हैं. बाद में जब मौसी ने मुझसे भी सेक्स किया तो …

मेरा नाम प्रशांत है.
मेरे पापा का नाम रमेश है.

पापा की उम्र 45 साल है.
मेरे मौसा की उम्र 50 साल है क्योंकि मेरे मौसा जी ने दो शादी की हैं.

पहली मौसी शांति जो कि बड़ी है और दूसरी मौसी का नाम रीतिका है, मेरी छोटी मौसी की उम्र 33 साल है.
छोटी मौसी अभी बहुत जवान है इसलिए उनके अंदर गर्मी बहुत है.

यह हॉट मौसी सेक्सी कहानी तब की है जब मैं 22 साल का था और वाराणसी में रहकर पढ़ाई करता था.

एक बार 2 दिन की छुट्टी हुई तो मैं घर गया.
घर पर मौसी भी आई थी.

हम सबसे मिले उसके बाद खेत में काम करने चले गए.
जब शाम हुई तो सब लोगों ने खाना खा लिया.

उसके बाद मैं खेत में बने कमरे में सोने चला गया.

कुछ देर बाद पापा भी आए सोने के लिए, मेरे पास लेट गए.

उनको लगा होगा कि मैं सो रहा हूं तो वे मुझसे कुछ नहीं बोले.

उसके आधा घंटा बाद छोटी मौसी आई पानी लेकर!
तो पापा बोले- तुम क्या करने आ गई यहां पर?
मौसी बोली- पानी लेकर आई हूं आपके पास!

तो पापा बोले- पानी पिलाओगी या कुछ और भी पिलाओगी?
तब मौसी बोली- और क्या पिएंगे? साथ में बेटा लेटा हुआ है!
तो पापा बोले- यह तो सो गया.

तब पापा ने मुझे आवाज दी, मैं कुछ नहीं बोला.
तो उनको लगा कि मैं सो गया हूं.

उसके बाद मौसी पानी रख कर चल दी.
तो पापा भी उसके पीछे पीछे गए.

तो मैंने सोचा कि पता नहीं ये दोनों कहां जा रहे हैं.
थोड़ी दूर तक तो मैंने देखा, वे ज्यादा दूर निकल गये, अंधेरा होने कारण मैं कुछ देख नहीं पाया.

उसके बाद पापा कब आये पता नहीं … मैं सो चुका था.
बीच्ग रात मेरी नींद खुली तो पापा मेरे पास थे, मौसी नहीं थी, मेरे ख्याल से मौसी घर चली गई थी सोने उसके बाद!

सुबह हुई तो मेरे दिमाग में वही बात घूम रही थी.
मुझे लगा कि पापा ने मौसी को रात में जरूर चोदा होगा.
लेकिन मुझे पक्का तो पता था नहीं!

उसके बाद शाम तक मैं निकल आया वाराणसी फिर पढ़ाई करने के लिए!

तो मेरे मन में मौसी और पापा की चुदाई देखने का मन हुआ.
परंतु कैसे … यह तो संभव नहीं था क्योंकि क्योंकि मैं वाराणसी में था.
मैं सोच रहा था कि कैसे करूं … क्या करूं!
तो कुछ समझ में नहीं आया.

2 दिन बाद पापा का फोन आया.
पापा बोले- तुम्हारे मौसा घर बनवा रहे हैं तो उसमें उनको कुछ हेल्प चाहिए; उनका फोन आया था.
तो मैं बोला- अच्छा!
उन्होंने बोला- घर में काम है इसलिए हम लोग जा नहीं पाएंगे.
तो मैंने बोला- ठीक है, मैं कोशिश करता हूं.

दूसरे दिन मैं तैयार हुआ और मौसी के घर पहुंचा.
सब लोग घर पर थे.

मैं बड़ी मौसी से मिला, उनके पैर छुइ.
उसके बाद मौसा मिल गए, उनके पैर छुइ.
फिर छोटी मौसी रीतिका मिल गई.
उसके पैर छूने का मेरा मन नहीं कर रहा था क्योंकि उसके लिए मेरे दिमाग में बहुत गलत विचार बन गया था.

फिर खाना पीना हुआ शाम को!
खाने के बाद सोने की व्यवस्था कम थी तो मौसा जी वहां चले गए सोने जहां पर मकान बन रहा था.

और अब बड़ी मौसी अपनी बेटी को लेकर बाहर सो रही थी.
उसके बाद छोटी मौसी और उनका लड़का कमरे में चले गए सोने!

तभी छोटी मौसी ने बोला- कमरे में दो बैड हैं, वही तुम भी सो जाओ!
मैंने कहा- ठीक है!
तो मेरे मन में तो खुशी के लड्डू फूटे.

मैं गया.
गर्मी का मौसम था तो लेट गया.
कुछ देर बाद देखा तो मौसी की साड़ी ऊपर उठी हुई थी, उसकी जांघें दिख रही थी और दूध भी आधे आधे दिख रहे थे.

मेरा लन्ड खड़ा हो गया तुरंत!
पर मेरे मन में डर था.

कुछ देर बाद जब मौसी गहरी नींद में सो गई तो मैंने उनकी साड़ी उठाकर देखी.
पेंटी नहीं पहनी थी मौसी ने!
मुझे कुछ शक हुआ.
पर उसके बाद मैं सो गया.

सुबह हुई तो हम सब नाश्ता कर रहे थे.
मैंने देखा कि रीतिका मौसी नहा कर आ रही थी.
जब वह कपड़े रस्सी पर डालने गई तो उनमें पेंटी भी थी.

मैंने सोचा कि रात में तो पेंटी नहीं थी, अभी कैसे आ गई?
पर मैंने ज्यादा कुछ नहीं सोचा.

हम लोग काम पर लग गए.

फिर रात हुई तो फिर सोने गए.
तो जब मौसी सो गई तो मैंने उसकी साड़ी के अंदर अपना पैर डाल दिया और हॉट मौसी की सेक्सी चूत को हल्के से सहलाया.
मुझे लगा कि मौसी सो गई हैं.

तो फिर मैंने और जोर से सहलाया तो मौसी ने हल्के से आह आह की.
उसके बाद मेरी गांड फटी तो मैंने अपना पैर अपने बेड पर कर लिया.

लेकिन मौसी अब गर्म हो चुकी थी क्योंकि मेरे मौसा चोदते नहीं है क्योंकि वो अब बुड्ढे हो चुके हैं लेकिन मौसी तो अभी जवान है.

थोड़ी देर बाद जब मौसी को लगा कि मैं डर गया हूँ और अब कोई हरकत नहीं करूंगा तो मौसी ने खुद कहा- बेटा, तू मेरे पास आ जा, मुझे तुमसे बातें करनी हैं.

मैं मौसी के पास गया तो मौसी और मैं इधर उधर यहाँ वहाँ की बात करने लगे.

मौसी का हाथ मेरे लंड के एकदम पास था. मैं कुछ नहीं कर रहा था.

तभी मौसी का हाथ मेरे लंड से टकरा गया और वे हल्के हलके मेरे लंड को सहलाने लगी.

इतने से ही मेरा लंड में खड़ा होना शुरू हो गया था.

मैं अभी भी दारा हुआ था तो मैं पीछे हटने लगा.

पर तभी सेक्सी मौसी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली- प्रशांत बेटा, मेरी एक बात मानेगा क्या तू?
इस पर मैंने कहा- मौसी, आप बोलिए, मैं जरूर मानूँगा!

‘तो बेटा, तू मेरी प्यास बुझा दे बेटा … अपनी मौसी को इस्ल्न्द से चोद दे … तेरा लंड बहुत लम्बा है. तेरा लंड बहुत मजा देगा मुझे!

तभी मौसी ने मेरे लंड को हाथ से जोर से दबाया.
मैंने हटना चाहा तो मौसी मुझ से लिपटकर मेरे लबों को चूमने लगी.

मौसी के स्तन मेरी छाती पर रगड़ रहे थे.
मुझे इसमें बहुत अच्छा लग रहा था.

तब मैं अपना हाथ मौसी की गांड पर ले गया और मौसी के चूतड़ दबाने लगा.
उसके मुख से कामुक सीत्कारें निकलने लगी.

तब मैंने मौसी से पूछा- मौसी, ज़रा बताओ कि मेरा लंड आपने कब देखा? जो बोल रही हो तुम्हारा लंड बहुत बढ़िया है?
मौसी- जब तुम्हारे घर गई थी और तुम खेत में सोये थे, तब!

मैं हैरान हो गया कि उस समय मुझको तो पता ही नहीं चला.
मौसी बोली- पहले प्यास बुझाओ, बाद में सब बताऊंगी.
मैं बोला- ओके!

फिर मैंने मौसी के चूचे दबाना शुरू किया, वे काफी बड़े थे.

मैंने मौसी की साड़ी निकाली और उसके ऊपर लेट गया.
तो मौसी ने कहा- बेटा, मेरे चूचों को चूस ले. बहुत समय से किसी ने इनको नहीं चूसा है बस एक मर्द को छोड़कर! वे भी जब मौका मिलता है तो सिर्फ चोद लेते हैं. क्योंकि उनके पास इतना टाइम नहीं होता!
मैं- किस मर्द को छोड़कर?
मौसी- तेरा बाप!

मैं चकित नहीं हुआ क्योंकि शक तो मुझे पहले ही था.
तो मैं बोला- बताओ कैसे तुम चुदी पापा से?
मौसी- बाद में बताऊंगी.

मैं मौसी के चूचे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
मौसी के चूचे और फूलने लगे थे.

फिर मैंने मौसी का साया उतार कर उसकी चूत को ज़ोर से मसल दिया.
तब मौसी ने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

मौसी बोलेन लगी- आआह ऊह ऊओ … और ज़ोर से मसल … फाड़ दे इसको!
तब मैंने अपनी मध्यमा उंगली उसकी चूत में घुसा दी.
तो उसके मुंह से गर्म सीत्कारें निकलने लगी.

मौसी ने कहा- बेटा जल्दी कर … चोद दे मुझे!
तो मैं बोला- अरे मौसी जल्दी क्यों करती हो, पूरी रात है हमारे पास!
मौसी ने हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया.

मैंने कहा- यार मौसी, इसे अपने मुंह में लेकर चूस ना!
मौसी मेरा लंड चाटने लगी.

इससे मैं बहुत गरम हो गया तो मैंने अपना लंड सीधे मौसी की चूत में घुसा दिया.

तब मौसी के मुख से चीख की आवाज़ निकली- आआ ईई ईई उम्म्हां … अह … हांह… ओ!

मैं मौसी के उरोज मसलने लगा और थोड़ी देर बाद मौसी सामान्य हो गई.

मैं अविरत छोटी मौसी की चुदाई में लगा था.
और मैं झाड़ें लगा तो मुझसे रुका नहीं गया, मैंने अपना सारा रस मौसी की गर्म फुद्दी में डाल दिया.
मौसी बोली- यार प्रशांत, तू तो बड़ा चोदू निकला रे … मेरी जवानी की आग एक बार में ही ठण्डी कर दी.

लेकिन मौसी नहीं जानती थी कि यह मेरा प्रथम यौन सम्बन्ध अनुभव है.

उसके बाद मैंने कहा- पहले बताओ तुम पापा कब और कैसे चुदी? और मेरा लन्ड कब देखा? उसके बाद मैं तुम्हारी गान्ड मारूंगा.

मौसी- जब मैं तुम्हारे घर गई थी, तब तुम खेत में सो रहे थे. मैंने तुम्हारी चड्डी उतार कर तुम्हारा लंड देखा था.
मैं बोला- जब मैं और पापा सो रहे थे तब?
मौसी- हाँ!

मैं बोला- मैं जान नहीं पाया था.
मौसी- मैं पानी लेकर आई थी. तब मैं तुम्हारे पापा के साथ वहां से दूर दूसरे खेत में चुदवाने गयी थी.

मैं- अच्छा मतलब तुम उसी दिन पापा से चुदाई करवाने गई थी.
मौसी- तुम जानते हो क्या?
मैं- मैं जग रहा था जब तुम आई थी.
मौसी- अच्छा!

मैं- मुझे पता चला होता तो उसी दिन मैं आपको चोद लेता!
मौसी- तेरे पापा से चुदवा कर भी मेरी प्यास नहीं बुझी थी क्योंकि तुम्हारे पापा भी बुड्ढे हो रहे हैं. उस वक्त मैंने तुम्हारे पापा के सामने तुम्हारा लंड देखा था. फिर तुम्हारे पापा बोले थे कि इसे भी लेने का इरादा है क्या?
मैं- अच्छा?
मौसी ने कहा- तो मैंने तुम्हारे पापा को तुम्हारे लंड से चुदाई की इच्छा बताई थी.

इस तरह से मौसी ने ये सब कहानी मुझे बताई.

फिर मैं बोला- मुझे पापा और आपकी चुदाई देखनी है.
मौसी- चलो, अब जब तुम्हारे घर आऊंगी तो तुम्हें फोन कर दूंगी. तुम भी घर आ जाना. फिर हम साथ में चुदाई करेंगे.
मैं बोला- साथ में कैसे?
मौसी- वो मैं सब जुगाड़ कर लूंगी.

उसके बाद मैं 3 दिन मौसी के यहां रुका और उसकी खूब चुदाई की.
अगले दिन तो मैंने मौसी की गांड भी मारी.
लेकिन वो बोल रही थी- मैंने आज तक गान्ड नहीं मराई थी.

Antarvasna

दोस्तो, यह मेरी पहली Antarvasna कहानी है अन्तर्वासना पर ! मैं यहाँ दूसरों की कहानियाँ पढ़ने में काफी समय बिताता हूँ। इतना पढ़ने के बाद आज मेरा भी मन किया कि कुछ लिखा जाए तो यह कहानी आपके लिए लाया हूँ। सच है या काल्पनिक इसका फैसला मैं आप पर छोड़ रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आपको यह पसंद आएगी।

मेरा नाम रोहित है उम्र 20 साल, कद करीब 5′ 9″, देखने में भी ठीक हूँ और मेंरे लंड की लम्बाई 6″ है। मैं हमेशा से पढ़ाई में अच्छा रहा हूँ जिस कारण मुझे काफी अच्छा कॉलेज मिला जहाँ से मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ, तीसरे वर्ष में ! मैं घर साल भर में दो तीन बार ही आ पाता हूँ। मेरे घर में मेरे अलावा मुझसे तीन साल बड़ी मेरी बहन है जो हॉस्टल में रहती है और मम्मी पापा हैं। मम्मी एक सरकारी विद्यालय में अध्यापिका हैं और मेरे पापा एक बैंक मेनेजर हैं।

मेरी छुटियाँ होने ही वाली थी जब मेरी मम्मी ने फोन पर मुझे हमारे नए पड़ोसियों के बारे में बताया। मेरी मम्मी उनको लेकर काफी खुश लग रही थी और बता रही थी कि वो लोग दोस्ताना स्वाभाव के हैं और मेरी मम्मी के काफी अच्छे दोस्त भी बन गए हैं। कुछ ही दिनों में मैं दो महीनों के लिए अपने घर आया। मम्मी ने बताया कि आंटी मुझसे जल्दी से जल्दी मिलना चाहती हैं इसलिए मैं अगले ही दिन उनके घर चला गया और मुझे उस परिवार से मिलने का पहले मौका मिला।

परिवार छोटा ही था जिसमें सिर्फ भाई बहन और मम्मी पापा थे। बहन का नाम आस्था था और उसके भाई का रोहण। आस्था करीब 19 साल की होगी और रोहण 10 साल का। आंटी ने मेरा उनसे परिचय करवाया और बताया कि आस्था भी इंजीनियरिंग के दूसरे साल में है।

आस्था 19 साल की एक मस्त लौंडिया थी जिसको देखते ही मुँह में पानी आ जाये, गोरा रंग, बी-कप वक्ष, मस्त गांड और कद 5’5″। जब वो चलती थी तो उसकी बड़ी गांड देखने में बड़ा मजा आता और मन करता कि अभी कुतिया बना कर चोद डालूँ साली को।

आस्था और रोहण मेरे घर मेरी मम्मी के साथ बैडमिन्टन खेलने रोज शाम को आया करते थे। मैं भी उनके घर कभी कभार चला जाता था पर सिर्फ आंटी से ही बात कर रह जाता था। फिर एक दिन हुआ यूँ कि मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। हमारी रिश्तेदारी में किसी के यहाँ लड़का हुआ था तो इसी खुशी में पार्टी थी। मम्मी-पापा वहीं गए थे। आस्था और रोहण घर खेलने के लिए आये पर मेरी मम्मी को न देखकर आस्था ने मुझसे उनके बारे में पूछा।

मैंने उसे बताया- मम्मी-पापा पार्टी में गए हैं।

अब उसे खेलने के लिए एक पार्टनर की जरुरत थी तो उसने मुझसे खेलने के लिए कहा।

मेरे मन में ठरक तो पहले से ही उठी थी तो मैंने मौके का फायदा उठाने का सोचकर बोला- अभी बाहर धूप है, कुछ देर में खेलते हैं और अभी तुम अंदर आ जाओ।

वो अंदर आ गई मगर उसका भाई बाहर ही कुछ खेलने लगा।

वो जब अंदर आई तो मेरा कंप्यूटर चालू था, डेस्कटॉप देखकर उसने कहा- यह क्या लगा रखा है?

डेस्कटॉप पर एक गन्दा सा वालपेपर लगा था। वालपेपर अश्लील नहीं था मगर एक बदसूरत कुत्ते का था। तब मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को बोला और कहा- बेब्स फोल्डर में जाकर तुम अपनी मनपसंद का वालपेपर लगा दो।

यह कहकर मैं जानबूझ कर वहाँ से रसोई में चला गया। बेब्स फोल्डर में बहुत सारी नग्न और बहुत ही सेक्सी तसवीरें थी। जब मैं वापिस आया तो मैंने देखा कि वो उन तस्वीरों को जल्दी जल्दी बदल कर देख रही है।

मैंने कहा- शरमाने की कोई बात नहीं है, तुम इन्हें आराम से देखो।

यह कहकर मैंने उसे कुर्सी से उठाया और खुद बैठ जाने पर उसको अपने टांगों के बीच की जगह में कुर्सी पर बैठा लिया। वो मेरी गोद में तो नहीं थी पर मेरा लंड उसकी गांड से टकरा रहा था और हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।

मैंने अब अपना हाथ उसकी कमर पर घुमाना शुरू किया जिसका उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। कुछ देर बाद उसने मुझे शरमाते हुए ब्लू फिल्म देखने की इच्छा बताई मगर मेरे कंप्यूटर में न होने के कारण मुझे उसे मना करना पड़ा।

कुछ देर में हमें एहसास हुआ कि शायद रोहण आ रहा है तो वो खड़ी हो गई और मुझे फोल्डर बंद करने को बोला। मैंने उसे बंद किया और हम लोग बाहर जाकर बैडमिन्टन खेलने लगे और फिर कुछ देर बाद अँधेरा होने पर मेरे मम्मी पापा आ गए और आस्था, रोहण भी अपने घर चले गए।

अगले दो चार दिन मुझे वो दिखाई नहीं दी पर मैं इस बीच कुछ मसालेदार नग्न फिल्में ले आया था। अगले दिन मैं बाहर जा रहा था तो वो मुझे मिली, उसने बताया कि उसके पेपर आ गए है इसलिए तैयारी करने में उसका सारा समय निकल जाता है।

हमने कुछ देर और बातें की, उसने मुझे अगले दिन दोपहर में अपने घर आने को बोला, उसके मम्मी पापा कहीं जाने वाले थे और रोहण स्कूल। मैं उस रात भर उसकी चूत के बारे में सोचता रहा और मुठ मार कर सो गया।

अगले दिन करीब एक बजे मैं उसके घर पहुंचा। उसने दरवाजा खोला और उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। वो काले रंग के सलवार कमीज़ में थी और बहुत मस्त माल लग रही थी। फिर क्या था मैं अंदर घुसा और उससे जा चिपका। मेरे दोनों हाथ उसकी गर्दन पर पहुँच गए और होंठ उसके होंठों को चूसने लगे। मेरे हाथ अब कभी उसके वक्ष पर जाते, कभी उसकी गांड पर तो कभी उसकी कमर को सहलाते। हाथ अब इधर उधर उसके गरम बदन पर भटक रहे थे। वो बेचारे करते भी क्या ! इतना गर्म माल था कि हर जगह का मजा लेना चाह रहे थे।

कुछ पल बाद मैं उसके पीछे अपना लंड उसकी गांड में लगाकर खड़ा हो गया। मेरे दोनों हाथ उसके स्तनों को मसल रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मजे में उसकी आँखें भी बंद थी, मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।

अब मेरा एक हाथ उसकी सलवार में चला गया और उसकी कच्छी के ऊपर से उसकी बुर का मजा लेने लगा। कुछ गीलापन महसूस हुआ तो हाथ उसकी पेन्टी में डाल दिया और ऊँगली से उसकी चूत को रगड़ कर मजा देने लगा।

अब तक तो वो इस नशे में पागल हो गई थी और आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह कर अपनी गांड और पीछे कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी।

कुछ देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए और एक दूसरे को देखते देखते नंगे हो गए। नंगे होने पर जब मैंने उसके चुचूक देखे तो मैं रुक नहीं पाया और उन्हें चूसने लगा। क्या गज़ब का शरीर था उसका ! हर जगह से एक दम मस्त ! चूत पर कोई बाल नहीं और ऊपर से नीचे तक दिन-रात चोदने लायक !

अब मैंने उसे गोदी में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने के लिए आगे बढ़ा। यह सब मैं पहली बार करने जा रहा था। उसने शर्म के कारण अपनी टांगों को एक दूसरे से चिपका लिया और मुझे मना करने लगी। पर मैं कौन सा रुकने वाला था, एक झटके में उसके पैर खोल दिए और उसकी चूत मेरे सामने थी। चूत चाटने के लिए जब मैंने अपनी जीभ निकाल कर उस पर लगाई तो मुझे थोड़ा गन्दा स्वाद लगा और मैं पीछे हट गया। चूत चाटने का ख्याल छोड अब मैं उसके स्तनों को चूसने चाटने लगा और वो बोलने लगी- आज तो इन्हें पूरा पी जाओ !

यह कहकर अब उसके मुँह से सिर्फ आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! जल्दी करो ! सिर्फ ये आवाजें आ रही थी।

अब उसने कहा- मुझसे रुका नहीं जाता और इस चूत को ले लो अब ! अपना लंड इसमें डाल इसको फाड़ डालो, पूरा अंदर घुसा दो और मेरी माँ चोद दो !

यह सब सुनते ही मेरा लंड कड़क होकर एकदम फटने को हो गया। मैंने लंड को उसकी चूत पर रखकर घुसाने की कोशिश की पर घुसा नहीं पाया। साली की चूत थी ही इतनी कसी हुई कि मैं क्या करता। मेरे बेचारे लंड का भी आज पहली बार था और मुझे घुसाने में हल्का दर्द महसूस हो रहा था तो मेरी गांड फटने लगी और मैंने अभी के लिए उसकी फुद्दी मारने का अपना इरादा छोड़ दिया।

फ़िर अपना लंड उसके मुँह में डालकर उसको चूसने को बोला। कुछ देर उसने लंड को ऐसे ही मुँह में रखे रखा। तब मैंने कहा- मेरी प्यारी रांड ! इसे लॉलीपॉप समझ कर चूसना शुरू कर !

यह सुनते ही वो भी जोश में आ गई और लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसना शुरू किया। मैं तो जन्नत में पहुँच गया था और उसे बोल रहा था- मान गए मेरी रांड को …. बस ऐसे ही चूसती रह.. आआआआआह्ह्ह्ह्ह् आआआह्ह्ह्ह्ह् …..

कुछ ही पल में मेरा झड़ने वाला था और मैंने उसके मुँह में पिचकारी मार दी। कुछ बूंदें तो अंदर ले गई और बाकी सब बाहर निकाल दिया। अब उसने मेरी और देखा और मुस्कुराने लगी। कुछ देर यूँ ही लेटे गए और तभी घर कोई आ गया। हमने फटाफट कपडे पहने और आस्था ने दरवाजा खोला तो पाया कि रोहण स्कूल से घर आया था।

उसने मुझे देखा और हैरान होकर अंदर चला गया। मैं उस दिन अब चूतिये की तरह वहाँ से भाग आया वो भी बिना उसको चोदे।

अगले दिन आंटी मेरे घर आई। मैं घर पर अकेला अपने कान में हैड्फोन लगाकर अश्लील फ़िल्म देख रहा था। आंटी ने दरवाजा खटखटाया मगर मुझे सुनाई नहीं दिया और मैं मुठ मारता रहा। आंटी ने तब बाहर से अंदर झाँक कर देखा कि अंदर मैं क्या कर रहा हूँ और तब दरवाजे को काफी जोर से खटखटाया।

इस बार मैंने उसे सुना और एकदम घबराया और अपना लंड अंदर करके दरवाजा खोला। मैं आंटी को देख हैरान था। तब मैंने देखा कि वो काफी गुस्से में थी और मुझसे पूछा- अभी क्या कर रहे थे और कल उनके घर दोपहर में क्या हुआ था?

मैं समझ गया था कि रोहण ने उन्हें बता दिया होगा। मैंने कुछ नहीं ! कहकर बात का जवाब नहीं दिया। तब उन्होंने एक दम से मेरे को एक चांटा लगा दिया और कहा- आज के बाद हमारे घर दिखाई दिए तो तुम्हारी टाँगे तोड़ दूंगी !

मुझे उनकी यह बात सुन कर बहुत गुस्सा आया और मैंने एक झटके में उन्हें कमर से खींच कर उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। उन्होंने मुझे हटाने की कोशिश की पर अब तक तो मेरे ऊपर हवस हावी हो गई थी। दो मिनट बाद आंटी को भी मजा आने लगा और उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ घूमने लगी।

आंटी 42 साल की मस्त महिला थी। उनकी गांड और चूचियों का आकार काफी बड़ा था और अपनी बेटी आस्था की तरह वो भी गोरी चिट्टी थी। देखकर लगता था कि अपनी जवानी में बहुत सारे लोगों के लौड़े शांत कर चुकी होंगी।

मैं अपने हाथ आंटी की मोटी गांड पर फ़िरा रहा था और उन्होंने मुझे कस कर गले लगा रखा था। ऐसा लग रहा था कि वो काफी समय से एक लंबी चुदाई की भूखी थी। मैं आंटी को गोदी में लेकर बैठ गया और नग्न मूवी चला दी। आंटी के स्तन दबाने में बहुत मजा आ रहा था और वो भी खूब मस्त हो रही थी। उनके मुँह से अब आआअह्ह्ह्ह्ह के अलावा कुछ और नहीं निकल रहा था और उनके हाथ उनकी चूत पर पहुँच गए थे। मूवी में अब एक 69 दृश्य चलने लगा, तब मैं आंटी को बिस्तर पर ले गया और हम भी 69 की दशा में आ गए। आंटी ने लंड को चाटना, चूसना शुरू किया। वो एक भूखी कुतिया की तरह लंड को चाट रही थी।

मुझे बेहद मजा आ रहा था और मैंने उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया। पिछले दिन की तरह आज मुझे गन्दा नहीं लगा बल्कि मजा आ रहा था ऐसा करने में। मैं चूत चाटते चाटते उनकी गांड पर थप्पड़ मार देता था तो उनकी गांड हिलती हुई काफी अच्छी लगती और गांड अब लाल हो चुकी थी। दो ही मिनट में मैं और आंटी दोनों झड गए। आंटी ने अपना मुँह बिल्कुल नहीं हटाया और सब कुछ चाट लिया। मैं भी उनकी चूत में घुसा जा रहा था जिसका स्वाद अब नमकीन लग रहा था। अब उन्होंने मेंरे लंड को छोड़ा और एक लंबी सांस लेकर उठ गई। वो उठ कर एक कुतिया की तरह बिस्तर पर खड़ी हो गई और मुझे आँखों से उनकी पीछे से चूत मारने का इशारा किया। मैं पीछे गया और लंड चूत पर लगाकर एक जोर का झटका दिया, मेरा 6 इंच का लंड सीधा अंदर चला गया क्योंकि चूत वैसे ही बहुत चिकनी हो गई थी। आंटी की एक काफी तेज चीख निकली थी जिसको रोकने के लिए मैंने पीछे से उनके मुँह पर हाथ रखा। कुछ पल में अब मैं अपनी कुतिया आंटी की सवारी कर रहा था।

उनके मुँह से आवाज़ आ रही थी- चोद दे मुझ रांड को, माँ चोद दे मेरी ,कितने समय से एक ऐसी चुदाई के लिए तड़प रही थी ! आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह !

और पच पच की आवाजों से पूरा कमरा भर गया था। पीछे से चोदते वक्त गांड बहुत बड़ी और मुलायम लग रही थी। अब मैं नीचे आया और वो मेरे ऊपर आ कर मेरे लंड पर बैठ गई। बैठते ही उन्होंने लंड पर उछालना शुरू किया और मेरे हाथ लेकर अपने वक्ष पर रख उन्हें दबवाने लगी।

वो आँखें बंद कर बोल रही थी- फाड़ डाल मेरी, मैं तो तेरी कुतिया बनके रहूंगी, आज तुम मुझे छोड़ना मत, मुझे पूरी तरह से चुदाई का मजा दो, सभी तरह से चुदाई करो मेरी तुम, चोद और चोद, मेरी चूत की प्यास बुझा दे आज तू ! ऊँगली से थक गई अब एआआह्ह्ह् आआआआह्ह्हह !

मैंने भी नीचे से एक दो फटके मारे और एक जोर के झटके में सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो सिसकाई- आहाहाआह्ह आजा मेरे अंदर आजा ! डाल मेरे अंदर डाल !

दस मिनट बाद हमने एक और राउंड लगाया और फिर मेरी मम्मी के आने का समय हो गया था इसलिए वो कपडे पहन जाने की तैयारी करने लगी। जाते वक्त मुझे बोलती कि मैं आस्था की जगह सिर्फ उनकी चुदाई करता रहूँ।

मैं उनके बाहर जाते ही हंसने लगा कि आस्था की चुदाई न करूँ, ऐसा कैसे हो सकता है। खैर दोस्तो, होना क्या था, शनिवार को मौका मिला और मैंने इस बार आस्था का भी बैंड बजा डाला। दबा कर चोदा साली रांड को ! समय के साथ मैं माहिर होता गया और अब जब भी घर आता हूँ तो माँ बेटी दोनों की चूत को शांत करता हूँ। आंटी को तो मेरे और आस्था का पता है मगर आस्था मेरे और उसकी माँ की चुदम-चुदाई के बारे में नहीं जानती। Antarvasna

Sex Stories

मैं अन्तर्वासना की Sex Stories कहानियाँ बहुत दिनों से पढ़ता आ रहा हूँ। मैं भी अपना अनुभव पाठकों के साथ बाँटना चाहता हूँ।

मुझे एक बार काम के सिलसिले में दिल्ली से चेन्नई जाना था। प्रोग्राम देर से बना था इसलिए मुझे कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाई थी, मैं स्टेशन पर जाकर टीटी से सीट के लिए बात कर रहा था कि अचानक एक 20-21 साल की लड़की मेरे पास आई और कहने लगी- मेरे पास फर्स्ट एसी का एक एक्स्ट्रा टिकट है, अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो आप मेरे साथ चल सकते हैं।

मैंने तुंरत ही हाँ कह दिया। कन्फर्म टिकट और हसीन साथ और क्या चाहिए। ट्रेन में जाकर मुझे पता लगा कि वोह एक एसी केबिन का टिकट है।

मैंने उससे पूछा- तुम्हें डर नहीं लगेगा अकेले मेरे साथ?

वो बोली- नहीं, तुम ऐसे लगते नहीं हो, वैसे भी अकेले सफ़र करने में भी तो डर है।

सफ़र शुरू होने के थोड़ी देर बाद टीटी टिकट चेक कर गया, फिर वो भी बाथरूम जाकर अपनी ड्रेस बदल कर आ गई।

मैं लेट कर एक नॉवल पढ़ने लगा तभी उसने मुझे दूसरा झटका दिया। उसने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया और अपने सामान से एक वोड्का की बोतल निकाल ली और मुझसे पूछने लगी- तुम लोगे क्या?

मैं हैरान था, मैंने हाँ कह दिया। थोड़ी देर में दोनों को नशा होने लगा। हम लोग आपस में काफी खुल गए थे।

फिर उसने कहा- चलो, ताश खेलते हैं।

थोड़ी देर के बाद वो बोली- तुमने कभी स्ट्रिप पोकर खेला है?

यह सुनकर मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैं समझने लगा कि यह लड़की चाहती क्या है, मैंने कहा- खेला तो नहीं है पर अगर तुम चाहो तो खेल सकता हूँ।

वो बोली- ठीक है पर पूरे कपड़े नहीं उतारेंगे और तुम मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा नहीं करोगे !

मैंने कहा- ठीक है।

पहला गेम मैंने जीता।

उसने शर्त के अनुसार अपनी शर्ट उतार दी। अन्दर उसने काली सिल्की ब्रा पहनी हुई थी जिसमें से उसके गोरे मम्मे झांक रहे थे।

मेरा सर घूमना शुरू हो गया। मेरी नज़र अब उसके मम्मों पर बार बार जा रही थी, ध्यान भंग होने के कारण मैं अगले दोनों गेम हार गया और अब मैं सिर्फ अपने अंडरवियर में था जिसमें मेरा लंड खड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था।

वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराकर बोली- और खेलना है?

मैंने कहा- मैं हार गया तो पूरा नंगा हो जाऊंगा !

वो बोली- तो क्या मैं भी तो हार सकती हूँ !

हमने अगला गेम खेला और वो जानबूझ कर हार गई। उसने अपना पजामा उतारा तो उसकी दूधिया जांघें देखकर मेरी आह निकल गई।

वो बोली- और खेलना है?

मैंने कहा- पर तुम तो कह रही थी कि पूरे कपड़े नहीं उतारेंगे?

वो बोली- मैं उतारने को तैयार हूँ अगर तुम मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा न करो तो !

मैंने कहा- ठीक है।

मैं अगला गेम हार गया।

उसने बोला- चलो उतारो !

मैंने धीरे से अपना अंडरवियर उतार दिया और मेरा आठ इंच का मोटा लंड बाहर निकल आया जिसे देख कर वो मुस्कुराने लगी।

उसने कहा- और खेलना है?

मैंने कहा- और क्या ! मैं भी तुम्हें नंगा देखना चाहता हूँ !

वो मुस्कुराई और खेलने लगी, और बार बार मेरे मोटे लंड को देखती रही।

अगला गेम वो हार गई और जैसे ही उसने अपनी ब्रा उतारी उसके सफ़ेद मम्मे मेरे सामने प्रकट हो गए।

मैंने अपने आप को कैसे संभाला मैं ही जानता हूँ।

पर इस धीरे धीरे होने वाले इस गेम में मुझे मज़ा आ रहा था। अगला गेम वो जानबूझ कर हार गई।

मैंने कहा- तुम्हारी पैंटी मैं उतारूंगा !

उसने कहा- ठीक है ! पर शर्त याद है न? तुम कुछ उल्टा सीधा नहीं करोगे !

मैंने कहा- है तो बड़ा मुश्किल ! पर कोशिश करूंगा !

वो मेरे सामने खड़ी हो गई और मैंने धीरे से उसकी पैंटी उतार दी और उसकी चिकनी चूत के दर्शन किये।

मैं उसके बाद बैठ तो गया पर कण्ट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो रहा था। मैंने धीरे से अपना लंड सहलाना शुरू कर दिया।

वो हंस कर मेरे पास आई और बोली- कुछ तो करना पड़ेगा नहीं तो तुम तड़प कर मर जाओगे !

उसने अपने हाथ से मेरा लंड सहलाना शुरू कर दिया, फिर वो मेरे सामने नीचे बैठ गई और मेरे लंड को चाटने लगी, फिर धीरे धीरे उसने उसको चूसना शुरू किया।

मैं नियंत्रण से बाहर होता जा रहा था, मैंने उसके बाल पकड़ लिये और उसके मुँह को जोर जोर से चोदने लगा।

मुझे झड़ने में ज्यादा देर नहीं लगी, वो मेरा पूरा जूस पी गई। उसके बाद वो मेरे बगल में बैठ गई।

मैंने पूछा- आज तक तुम कितने लंडों का स्वाद चख चुकी हो?

वो बोली- मैंने गिना नहीं !

मैंने पूछा- और कबसे चुदवा रही हो?

“कई सालों से !”

“पहली बार कैसे हुआ था?”

वो बोली- ठीक है, जब तक तुम्हारा लंड दुबारा खड़ा होता है, तुम्हें पहली बार का किस्सा बताती हूँ।

वो मेरे बगल में बैठ गई और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे सहलाते हुए मुझे बताने लगी- य बात तब की है जब मैंने नया नया अपनी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा था, मेरी सहेलियाँ अपनी चुदाई के किस्से मुझे सुनाती थी, पर मैं तब तक कुँवारी ही थी। मेरे पापा के एक दोस्त हमारे साथ रहने हमारे घर आये। मैंने महसूस किया कि जबसे वो घर आये हैं बार बार मुझे देखते थे और मुझसे बात करते थे।

एक रात को जब सब सो गए तो वो मेरे कमरे में आये और बोले- मेरा आज अकेले मन नहीं लग रहा ! अगर तुम्हें कोई परेशानी नो हो तो तुम्हारे कमरे में सो जाऊँ?

मैंने कहा- ठीक है, जैसा आपका मन।

लाइट बंद होने के बाद थोड़ी देर में मेरी आँख लग गई। अचानक मैंने महसूस किया कि अंकल मेरी चादर में घुस गए हैं और मुझसे सट कर लेट गए हैं।

मैंने अंकल से दूसरी तरफ करवट ले ली। उन्होंने भी मेरी तरफ करवट ली और मुझसे फिर सट गए, उनका लंड मुझे अपनी गांड पर महसूस होने लगा। उन्होंने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और मेरे दाहिने मम्मे पर टिका दिया, फिर वो उसको धीरे धीरे मसलने लगे।

पहले तो मुझे थोड़ा डर लगा पर फिर मज़ा आने लगा। उन्होंने फिर अपना हाथ मेरी शर्ट के अन्दर डाल कर मेरी ब्रा के हुक खोल दिए और आगे हाथ ले जा कर मेरे मम्मे मसलने लगे।

मैंने करवट ली और सीधी हो गई। उन्होंने मेरी शर्ट और ब्रा ऊपर उठाई और मम्मे चूसने और चाटने लगे।

मैं अब गरम होने लगी थी, मेरी चूत गीली हो रही थी। अंकल ने एक हाथ मेरी पैंटी में डाला और मेरी चूत को छेड़ने लगे।

मैं काबू से बाहर हो रही थी, मेरे मुँह से आह….. आह….. की आवाजें निकल रही थी।

फिर अंकल ने नीचे जाकर मेरी पैंटी और पजामा दोनों एक साथ उतार दिए। उन्होंने मेरी टाँगे मोड़ कर फैला दी और चूत को पूरी तरह खोल दिया। मेरी उनचुदी बुर देखकर उनसे रहा न गया।

अंकल अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों उतार दिए और अपना लंड मेरी चूत के पास ले आये। उन्होंने मुझसे धीरे से पूछा- पहले किया है?

मैंने कहा- नहीं !

ठीक है ! मैं धीरे से करूंगा। शुरू में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़ा आएगा।

फिर उन्होंने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगाया और मेरी चूत से धीरे धीरे बाहर से ही रगड़ने लगे।

मैं धीरे धीरे पागल होती जा रही थी, फिर अचानक उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मेरी चीख निकल गई।

अंकल ने मेरे मुँह पर हाथ रखा फिर मुझे धीरे धीरे चोदने लगे, मेरा दर्द धीरे धीरे आनंद में बदलने लगा, उनके धक्के तेज होने शुरू हो गए थे और मैं पागल हुई जा रही थी। मेरी आह आह की आवाज़ से पूरा कमरा भर गया।

फिर अचानक अंकल झड़ गए। वो मेरे ऊपर से उतरे और कपड़े पहन कर अपने कमरे में चले गए।

मुझे पहली बार ज़िन्दगी में इतना मज़ा आया था ! मैं कभी भूल नहीं सकती !

उसकी कहानी सुनकर मेरा लंड फिर पूरी तरह तैयार था।

वो मुस्कुराकर बोली- अब मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी ! जो करना है कर लो !

मैंने कहा- अब मैं भी कहाँ रुकने वाला हूँ !

और मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया, उसके मम्मों को मैं जोर जोर से मसल रहा था।

वो सीट पर लेट गई और मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी टांगों को फैला दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो पागल होने लगी और चिल्लाने लगी।

मेरा लंड बेताब हो चला था।

उसने फिर उठकर दोनों सीटों के बीच में चादर बिछाई और लेट कर कहा- नीचे चुदाई करेंगे ! ज्यादा मज़ा आता है !

उसने लेट कर अपनी टांगों को फैला दिया। मैंने नीचे जाकर उसकी चूत में अपना आठ इंच का लम्बा मोटा लंड घुसेड़ दिया।

उसकी चूत मेरा पूरा लंड पी गई। फिर मैंने उसको पेलना शुरू किया। इतनी देर रुकने के बाद कसम से उसको चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा था।

वो भी चिल्लाने लगी थी। ट्रेन अपनी पूरी स्पीड पकड़ चुकी थी और हम भी फुल स्पीड पर थे।

करीब आधे घंटे तक मैं उसको पेलता रहा उसके बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया। उस दौरान वो कम से कम तीन या चार बार झड़ी होगी।

फिर मैं अपने लंड को उसकी चादर से पोंछ कर सीट पर बैठ गया। थोड़ी देर में वो भी उठकर आ गई।

बाकी का सफ़र हमारा कैसा कटा यह मैं आपको फिर बताऊंगा। Sex Stories

प्रेषक : राहुल शर्मा Hindi Sex Stories

कहानी के तीसरे अंश Hindi Sex Stories में मैंने लिखा कि मैं, बिमला दीदी और उसकी ननद गुड़िया, हम तीनों के घर आने के बाद उसी दिन दोपहर को एक जम कर हम सबने चुदाई की और तीनों ने मिलकर हमारे लंड को चूस चूस कर हमारी मलाई काफी स्वाद लेकर खाई ! किस तरह दिन गुजर गया पता ही नहीं चला !

रात को खाना खाकर हम पांचों टीवी देखने लगे और एक दूसरे से छेड़खानी करने लगे ! न जाने कब विजय भैया बिमला दीदी को लेकर कमरे में चले गए। हॉल में अब मैं, सीमा दीदी और गुड़िया रह गए थे। वो दोनों मुझसे चिपकी हुई थी मैं दोनों की एक एक चूची दबा रहा था और वो मेरे लौड़े से खेल रही थी, कभी चूस रही थी कभी ऊपर नीचे करके हिला रही थी।

इतने में सीमा दीदी ने कहा- मैं अभी आती हूँ !

लेकिन जब काफी देर तक नहीं आई और हम भी टीवी से बोर हो गए तो मैं गुड़िया को लेकर कमरे में आया तो देखा भैया को लेकर दोनों दीदी झगड़ा कर रही थी !

मैंने सीमा दीदी को कहा- बिमला दीदी भैया से काफी दिनों बाद मिली है और घर पर मेहमान (गुड़िया) भी आई हुई है, आज थोड़ी देर भैया और दीदी को छोड़ दो मैं तुम दोनों को संतुष्ट कर दूंगा ! बिमला दीदी की ससुराल में तो मैंने दीदी और गुड़िया को एक साथ चोदा था ! तब सीमा दीदी मेरे पास आ गई और मैं सीमा दीदी और गुड़िया तीनों एक साथ चुदाई में मग्न हो गए ! फिर मैंने गुड़िया की गांड मारनी शुरू की। उधर भैया भी बिमला दीदी की गांड मार रहे थे ! दोनों मजे ले ले कर गांड मरवाने का मजा ले रही थी !

चूंकि मैंने बिमला दीदी की गांड चौड़ी कर दी थी और गुड़िया को गांड में लंड लेने की आदत थी, इसलिए दोनों मजे लूट रही थी ! दोनों को मजे से गांड मरवाते देख सीमा दीदी कहाँ पीछे रहने वाली थी,उसने कहा- मेरी भी गांड में डालो ना ! मैं भी देखूँ कि कितना मजा आता है !

मैंने कहा- दीदी, गांड मरवाने में पहली बार बहुत तकलीफ होती है तुम चीख पड़ोगी ! कल जब मैंने बिमला दीदी की गांड मारी तब बहुत जोर से “हाय माँ मैं मर गई” और बहुत जोर जोर से चीखने लगी ! वहाँ घर पर कोई न रहने की वजह से कोई दिक्कत नहीं हुई ! अभी घर पर सब ही हैं, अगर किसी तेरी चीख सुन ली और यहाँ आ गए तो हम लोगों का भंडाफोड़ हो जायेगा ! कल दिन में सबके जाने के बाद मैं और भैया मिलकर तुमको चूत और गांड का मजा एक साथ ही देंगे !

वो शांत हो गई ! फिर मैं और भैया तीनों को एक एक बार और चोदकर एक दूसरे से चिपक कर सो गए ! इसके बाद मैं दीदी और गुड़िया को छोड़ आया क्योंकि विनय जीजू नहीं आ सके !

इस तरह करीब छः महीने गुजर गए। बिमला दीदी इस दौरान एक बार और आई एक हफ्ता चुदवाकर चली गई !

मेरी, भैया और सीमा दीदी की चुदाई चालू रही ! इस बीच भैया की नौकरी भी लग गई ! वो भी काम पर जाने लगे ! अब मैं और सीमा दीदी घर पर अकेले रह जाते ! दिन में घर पर हम दोनों बिना कपड़ों के रहते ! दीदी का जब मन करता मेरा लौड़ा पकड़ कर चूसने लगती और मेरा मन करता तब मैं उसके मम्मे दबाता ! और दोनों चुदाई भी करते !

इसके बाद हमारे जीवन में बदलाव आ गया ! उधर खबर आई कि बिमला दीदी को बच्चा होने वाला है तो हमारे घर खुशी का पारावार नहीं रहा ! मुझे कुछ शगुन देकर दीदी के यहाँ भेजा तो मैं दो दिन वहाँ भी दीदी और गुड़िया को चोदकर और गांड मारकर वापस आ गया ! जब भी हमारे घर पर दीदी के बारे में बात होती सब कहते लड़का होगा पर न जाने क्यों मेरा मन कहता कि काश लड़की हो !

कुछ ही दिनों में भैया और सीमा दीदी की शादी पक्की हो गई ! एक तरफ जहाँ सीमा दीदी के जाने का दुःख था क्योंकि मैं अकेला रह जाने वाला था !

दूसरी तरफ भाभी के आने की खुशी भी थी ! पता नहीं भाभी किस नेचर की होगी ? क्या मुझे चोदने देगी ? ये सब सोचते सोचते मैं परेशान हो जाता था !

एक दिन जब रहा नहीं गया तो मैंने भैया को कहा इस बारे में ! भैया के ये कहते ही कि ‘तू परेशान क्यूँ होता है साली तुझसे नहीं चुदवायेगी तो जायेगी कहाँ ! तेरा लंड तो मुझसे काफी अच्छा है, एक बार देख लेगी तो अपने आप चुदाने चली आयेगी ! अब तक हम लोगों ने जैसी मस्ती की है वो तो चालू रहनी ही चाहिए !

मैं खुश हो गया ! भैया ने कहा जब तेरी शादी होगी तब मैं भी तेरी बीवी को चोदूँगा !

मैंने कहा- कोई प्रोब्लम नहीं है !

भैया और सीमा दीदी की शादी ताऊजी और पापा ही तय कर आये थे! हम लोगों को केवल इतना ही कहा कि भाभी का नाम किरण है और जीजू का नाम श्याम है ! दोनों के परिवार आपस में एक दूसरे के दूर के रिश्तेदार हैं और दोनों परिवार उनके समझे हुए हैं ! इस पर भैया और दीदी ने कुछ नहीं कहा क्योंकि बिमला दीदी की शादी भी उन्होंने तय की थी और वह अपने ससुराल में बहुत ही खुश थी !

कुछ दिनों बाद मुझे कुछ सामान लेकर सीमा दीदी की ससुराल जाना पड़ा। पहले तो मैंने मना कर दिया पर मज़बूरी थी सो जाना ही पड़ा ! वहाँ जाकर तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। श्याम जीजू जहाँ बहुत हैण्डसम थे साथ ही मिलनसार भी ! उनके माता पिता भी बहुत अच्छे थे ! मुझे सबसे अच्छी जीजू की दो बहनें लगी ! दोनों की उम्र बीस और बाईस की थी ! सबसे मजेदार देखने की उनकी चूची और गांड थी ! मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा था बड़ी मुश्किल से उसे छुपाया !

क्या क़यामत चीज थी ! जीजू ने मेरा उनसे परिचय कराया तो दोनों ने मुझसे हाथ मिलाये ! मेरी तो जैसे लॉटरी ही निकल गई ! मुझे शाम को ही वापस आना था पर सबने मिलकर मुझे रोक लिया और घर पर फोन कर दिया कि एक दो दिन रह कर जायेगा ! मैं खुश हो गया ! रात को खाना खाकर कुछ देर सब टीवी देखते रहे फिर दीदी के सास ससुर सोने चले गए ! उनके जाने के कुछ देर बाद जीजू ने कहा- संजय, चलो सोने चलते हैं !

मैं उठने ही वाला था की जीजू की एक बहन ने कहा- क्या भैया ? आज क्या कुछ नहीं होगा ? आज तो एक नया मुर्गा भी है !

मैं समझ गया कि ये भी हमारी तरह हैं, सीमा दीदी बहुत खुश रहेगी यहाँ ! बड़ी बहन का नाम रीना और छोटी बहन का नाम टीना था। टीना तो रीना से भी ज्यादा सेक्सी थी। फिर टीना उठकर मेरे पास आकर बैठ गई और मुझसे लिपट गई, और रीना उठकर जीजू के गले लग गई ! फिर न जाने कब हम लोगों ने एक दूसरे को चूमना-चाटना चालू कर दिया !

न जाने टीना ने कब मेरा लंड बाहर निकाल लिया और चूसने लगी !

उधर जीजू भी अपना लंड चुसवा रहे थे और चूची दबा रहे थे !

टीना ने भी अपने बोबे मेरा हाथ में देकर कहा- संजय मेरे बोबे भी दबाओ !

और मैं मस्ती ले ले कर दबाने लगा ! सच कहूँ- क्या चुचे थे बता नहीं सकता !

फिर दोनों ने कहा- आज तो बहुत ही मजा आ रहा है ! आज तक तो हम दोनों भैया के साथ ही सोते थे और चुदाई करते थे, आज तुम आ गए हो तो डबल मजा आयेगा !

इस तरह हाल में कब बारह बज गए पता ही नहीं चला।

जीजू ने कहा- चलो अब कमरे में चलते हैं !

हम लोग नंगे ही कमरे में चले गए ! तब टीना ने मुझे खींच कर बाथरूम में ले गई और शावर के नीचे खड़ा कर दिया और खुद भी मुझ से चिपक गई ! मुझे जो मजा आ रहा था, बयान नहीं कर सकता ! फिर टीना ने शैम्पू टाइप की कोई चीज़ ली और मेरे बदन पर लगाने लगी ! उसके बाद वो अपने बदन से मेरे बदन को रगड़ने लगी जिसे झाग ही झाग हो गया !

टीना मुझे नीचे लिटाकर मेरे बदन से अपना बदन रगड़ने लगी ! मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मुझ से रहा नहीं गया ! मैं टीना को एक बार चोदना चाहता था ! पर उसने कहा- थोड़ा कंट्रोल करो, देखो बहुत मजा आयेगा !

मैं क्या करता ! मैं भी उसके बदन से अपना बदन घिसने लगा ! इतने में रीना भी वहाँ आ गई और हमें देख कर कहा- तो ये सब चल रहा है यहाँ !

तो टीना ने कहा- तू भी आ जा ! दोनों मिलकर संजय का मजा लेते हैं !

फिर रीना भी आकर हम लोगों के साथ चिपक गई ! हमारे बदन तो चिकने तो थे ही रीना का बदन भी हमसे चिपकते ही चिकना हो गया ! फिर दोनों ने मुझे सेंडविच बना लिया और मेरी मालिश सी करने लगी !

मैं तो मानो सातवें आसमान पर था ! फिर उसी अवस्था में हम लोगों ने काफी देर चुदाई की ! सच कहूँ तो हमारे चिकने बदन की वजह से चुदाई का मजा बहुत बढ़ गया था ! चुदाई खत्म होने के बाद नहा कर हम कमरे में वापस आये तो देखा जीजू सो चुके थे !

इसके बाद आगे की घटना भी बहुत रोचक है जो अगले अंश में लिखूंगा !

कृपया अपनी राय मुझे मेल करें ! Hindi Sex Stories

संजय और मैं बीच एग्जाम में फ़ोन से सेक्सी चैट करते थे.
वह अपनी नंगी तस्वीरें भेजता था, इधर से मैं भेजती थी.

संजय रोल प्ले करवाता था कि मुझे कैसे चोदना है.

इसी तरह सारे पेपर खत्म हो गए और अब मुझे व छवि दोनों को एग्जाम के बाद घर जाना था.

पर संजय चाहता था कि मैं रुकी रहूँ क्योंकि घर जाने से पहले उसको मुझे चोदने की इच्छा थी.
इसलिए मैंने अपने घर पर दो दिन बाद का बोला था कि एग्जाम अभी दो दिन बाद खत्म होंगे.

पर हॉस्टल तो खाली करना ही था, उस कारण से मेरे और छवि के रुकने की समस्या थी.

संजय ने कहा कि उसने राहुल से बात कर ली है, उसके फ्लैट में हम दोनों सहेलियां जितना चाहें, उतने दिन रुक सकती हैं.
राहुल ने भी छवि के लिए हां बोल दिया था.

संजय को अभी छवि, मेरे और राहुल के सेक्स के बारे में कुछ नहीं मालूम था.

उसने हमारे लिए कैब बुक कर दी और छवि और मैं दोनों हॉस्टल में से घर का बोल कर सारा सामान लेकर राहुल के फ्लैट पर जाने के लिए तैयार थी.
हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गईं.

वहां संजय हमारा इन्तजार कर रहा था.
जब हम दोनों फ्लैट पर पहुंची तो राहुल भी उसी वक़्त आ गया था.

मैंने कहा- संजय, हमारे पास आज पूरा दिन और कल का दिन है. घर कल शाम तक किसी भी हालत में पहुंचना ही है.
उसने कहा- बिल्कुल, अपने पास बहुत समय है. पहले हम सब कुछ खा पी लेते हैं.

संजय ने खाना आर्डर कर दिया.

हम सभी आपस में बातें कर रहे थे; हंसी मजाक भी कर रहे थे.
थोड़ी देर बाद ही खाना आ गया.

संजय और राहुल दोनों ने कहा- तुम लोग खाना खा लो, हम लोग अभी आते हैं.
हमने पूछा भी कि किधर जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमें नहीं बताया.

वे दोनों गाड़ी से निकल गए.
तब तक हम दोनों ने खाना खा लिया और कुछ ही देर बाद दोनों आ गए.

वे बीयर लेकर आये और उन्होंने पहले थोड़ी-थोड़ी बीयर पी.
उन्होंने हमें भी बियर पीने को कहा पर हम दोनों ने मना कर दिया.

फिर कुछ देर बाद दोनों ने खाना खाया.

खाना खाने के बाद संजय ने मुझे इशारा कर दिया.
हम दोनों अन्दर आ गए.

मैंने जींस और स्लीवलेस टॉप पहनी थी, नेट की ब्रा और जॉकी की पैंटी पहनी थी जिसमें मेरी आधी गांड ही कवर हो.
ये जींस में भी कम्फर्ट देती है.

उसने पहले मेरे होंठों को चूमा और दोनों हाथों से मेरे दूध दबाने लगा.
उसने मेरे बालों को पूरा खोल दिया.

हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे, होंठों में होंठों को डालकर एक दूसरे को चाटने लगे.

उसके दोनों हाथ मेरी कमर पर आ गए और वह मेरी कमर को मसलता हुआ च्यूँटी काटने लगा.

फिर उसने कमर से मेरे टॉप के अन्दर हाथ डाल कर मेरे मम्मे दबाने शुरू कर दिए.
मुझे डर था कि कहीं ये टॉप को फाड़ न दे.

मैंने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए ताकि वह मेरे टॉप को उतार दे.
उसने ऐसा ही किया.

फिर वह अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया.
उसका लंड अभी खड़ा नहीं हुआ था.
मैंने अपने दोनों हाथ से उसके लंड को पकड़ा और खड़ा करने की कोशिश करने लगी.

इसी बीच वह मेरी गर्दन और गालों को चूमने लगा.
उसके इस तरह से चाटने के कारण मैं भी गर्म होने लगी थी.

भले ही मैं ब्रा में थी लेकिन वह मेरे क्लीवेज़ देखते हुए उनके बीच वह अपनी जीभ से मुझे मदहोश करने लगा था.

इस तरह से वह मेरा तापमान बढ़ा रहा था.
उसकी इन हरकतों से उसका लंड खड़ा हो गया था.

उसने मेरे बालों को पकड़ कर नीचे झुकने का इशारा किया तो मैं समझ गयी कि लंड को लॉलीपॉप समझ कर चूसना है.

मैंने सोचा कि क्यों न लंड का पानी निकाल दूँ … जिससे ये ठीक से दोबारा खड़ा होने में समय ले.

यह सोचते ही मैं पूरी शिद्दत के साथ लंड पर टूट पड़ी.
मैं अब उसके लंड के सुपारे को ऐसे चूसने लगी जैसे वह लॉलीपॉप ही हो.

जल्द ही उसका लंड गुलाबी रंग का हो गया था.

मैंने उसकी बॉल्स को भी मुँह में लिया और पूरे लंड को अपने थूक से चाट चाट कर गीला कर दिया था.

पूरा लंड मेरे मुँह में नहीं आ रहा था तो जितना हो सकता … उतना मुँह के अन्दर लेती और अन्दर जीभ से लंड के ऊपर घुमा देती.

संजय इससे एकदम से कामुक होने लगा और वह मेरे मुँह में ही झड़ गया.

उसका सारा वीर्य मेरे मुँह में था.
मैं बाथरूम में गयी और मुँह धोकर आ गयी.
क्योंकि मुझे उसके वीर्य को निगलना अच्छा नहीं लगता था.

वह वहीं लेट गया था.
उसने कहा- आज तो मजा ही आ गया. अनु, तुम तो लंड चूसने में उस्ताद हो गयी हो.

मैंने भी हंस कर कहा- हां, ये सब तुम्हारी सोहबत का कमाल है.
उसने कहा- अभी थोड़ी देर से करते हैं. पहले बाहर चलते हैं.

उसने कपड़े पहने और बाहर गया.
उसने देखा कि राहुल और छवि दोनों चुम्मा चाटी कर रहे हैं.

संजय देखकर दंग ही रह गया.
उसने अन्दर आकर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे तुरंत अन्दर से बाहर ले आया.

उसने कहा- यह देखो, क्या कर रहे हैं ये लोग?

उन दोनों ने हमारी तरफ देखा और फिर से वे दोनों एक दूसरे को निसंकोच किस करने लगे थे.

मैं ब्रा और जींस में ही उनके सामने खड़ी थी.
संजय मुझे ब्रा में देख कर जरा हैरान था.
मुझे भी लगा कि मुझसे चूक हो गई है.

मैं वापस अन्दर जाने लगी तो संजय ने रोक दिया कि ऐसे ही ठीक है.

फिर राहुल ने कहा- साले संजय, तू तो भी तो मजे ले रहा था. मैं क्या यहां पर अपनी गाड़ी हाथ से चलाऊं. मुझे भी तो चूत चाहिए ना! तो मैंने भी आज से छवि को सैट कर लिया. क्यों मेरी जान छवि!
छवि ने भी कहा- हां क्यों नहीं.

फिर वे दोनों अन्दर चले गए और हम बाहर थे.

संजय को थोड़ा अजीब लगा.
पर मैंने उसे सब समझा दिया- ठीक है. क्या प्रॉब्लम है. छवि को राहुल पसंद है.

वह भी मान गया.

जल्द ही अन्दर से चुदाई की आवाजें आने लगीं.

वे दोनों करीब 25 मिनट के बाद बाहर आने को हुए.

पहले राहुल आया.
वह तो सिर्फ अंडरवियर में ही बाहर आया था.

थोड़ी देर बाद छवि कपड़े पहन कर बाहर आ गई.
हम सब वहीं बैठे थे.

राहुल ने मुझे इशारा करते हुए पूछा.
मैंने भी उसे इशारे से कहा- सब ठीक है.

वह भी निश्चिन्त हो गया.
फिर माहौल ठीक करने के लिए राहुल ने बात शुरू की.

अब संजय भी नार्मल हो गया.
कुछ देर के बाद राहुल का फ़ोन आया तो उसने कहा कि उसे कुछ काम से 15-20 मिनट के लिए बाहर जाना पड़ेगा.

संजय और मैं चुप रहे.

राहुल ने छवि से कहा- छवि तुम भी चलो, घूम कर आते हैं.

वे दोनों तैयार होकर निकल गए.

संजय ने कहा- अनु, चलो तैयार हो जाओ.
मैंने कहा- मैं तो कब से तैयार हूँ.

अब संजय भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया.
उसका लंड अभी खड़ा नहीं था तो उसने मुझे इशारा किया.
मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है.

वह वहीं कुर्सी पर बैठ गया और मुझे घुटनों पर बैठ कर उसके लंड को चूस कर खड़ा करना था.
मैं शुरू हो गई.

मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया.

लंड को चूसते हुए मैं उसे धीरे-धीरे खड़ा करने लगी.
लंड धीरे धीरे बड़ा होने लगा था.

इस बीच उसने मेरे बालों को पड़कर मुझे ऊपर उठाया और मुझे किस करने लगा.
मैं भी उसे किस करने लगी.

वह मुझे चूमते हुए गालों तक आया और मेरी गर्दन को चूमने लगा.
गर्दन को चूमते हुए वह मेरे बूब्स पर आ गया और मेरे बूब्स को दोनों हाथों से ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, मसलने लगा.

अब उसने मुझे वहीं खड़ा किया और मेरे पीछे आकर पीछे से चूमने लगा.

उसका एक हाथ मेरी चूत को जींस के ऊपर से ही मसल रहा था और दूसरा हाथ मेरी कमर को लॉक किए हुए था.

उसने पीछे से ही मेरी जींस का हुक और चैन खोली और उसे उतारते हुए धीरे-धीरे मेरे घुटनों के नीचे कर दिया.
फिर पीछे से ही उसने मेरी गांड को पैंटी के ऊपर से ही चाटना चूमना शुरू कर दिया.
वह एक हाथ से मेरी चूत को पैंटी के ऊपर से ही मसलने लगा.

मेरी चूत अब तक गीली हो चुकी थी और लंड की मांग कर रही थी.
वह अभी भी मेरी गांड पर अपने होंठों से किस कर रहा था.

फिर उसने मुझे सोफे पर वहीं पर बिठा दिया और मेरी जींस को पैरों से पूरी तरीके से निकाल कर वहीं पर फेंक दिया.
अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी.

संजय ने मेरी तरफ देख कर कहा कि आज कुछ नए तरीके से करते हैं.
मैंने ज्यादा कुछ न सोचते हुए मुस्कुराते हुए कहा- हां क्यों नहीं.

उसने मुझे खड़ा किया और सोफे पर झुका दिया.
फिर मुझसे कहा- अपनी दोनों टांगें फैला लो और बस ऐसे ही रहना.
मैं हो गई.

उसने अपने एक हाथ से मेरी पैंटी को चूत से साइड में खिसका दिया और अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में धीरे धीरे पेलते हुए अन्दर बाहर करने लगा.

मैं सीधी खड़ी होने लगी तो उसने मुझे रोकते हुए कहा- न न … वैसी ही रहो जैसी हो.
तो मैं वापस उसी पोजीशन में हो गई.

मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
बस मैं पागल सी होने लगी थी.
मेरी चूत गीली थी ही!

फिर उसने मेरी पैंटी को चूत के पास से ही फाड़ दिया और पैंटी को ऊपर कमर की ओर खिसका दिया.

मैंने कहा- बाबू, कंडोम तो पहन लो, भूल जाओगे.
उसने कहा- जान तुम ही पहना दो.

मैंने उसके लंड को चूमा और अपने हाथों से कंडोम पहना दिया.

अब उसने मुझे सोफे पर इस तरह से झुकाया कि जहां पर कोने की ओर हाथ रखते हैं, वहां पर मेरी कमर हो ताकि चूत को वह खड़े खड़े ही निशाना लगा सके.

मेरी कमर से ऊपर का हिस्से सोफे पर था.
इस वजह से मेरी चूत उसे साफ साफ दिख रही थी.

वह मेरी चूत को मुँह से चाटने लगा और अपनी जीभ से ही मुझे चोदने लगा.

मेरी चूत और ज्यादा गीली हो चुकी थी.
अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर घिसना चालू कर दिया. उसके दोनों हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थे.

मैंने उस पर झुक कर अपनी दोनों टांगों को फैला दिया और अपनी दोनों टांगों को फर्श पर रख दिया.
साथ ही मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी गांड को फैला लिया.

संजय ने मेरी पीठ के निचले हिस्से पर हाथ रखा.
मैंने कहा- जान अब कितनी देर और तड़पाओगे?

उसने कहा- ऐसी बात है तो ये लो.
उसने एक झटके में अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर डाल दिया.

मेरी आह निकल गई.

उसने लंड को दबाते हुए कहा- अब ठीक है न!
मैंने भी ‘ह्म्म्म …’ कहा.

वह शुरू हो गया.
धपाधप गीली चूत में आराम से लंड अन्दर बाहर होते हुए आवाज़ कर रहा था.

उसकी दोनों टांगें मेरी दोनों टांगों के बीच में थीं.
वह भी जानबूझ कर रुक रुक कर तेज धक्के लगाता.

मुझे मजा आने लगा था.

कुछ ही मिनट ऐसे ही चोदते हुए उसने मेरे दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ किया.

अब मेरे बूब्स हवा में थे और वह आराम से मेरी चुदाई कर रहा था.

तभी अचानक से दरवाजा खुला और राहुल और छवि अन्दर आ गए.

मुझे थोड़ी शर्म आयी लेकिन संजय को पता नहीं क्यों, उसे कुछ फर्क नहीं पड़ा.

वह उन्हें देखकर कुछ सेकंड रुका, फिर वापस शुरू हो गया.

यह देख कर दोनों नंगी गर्ल Xxx चुदाई के मजे लेने लगे.
मेरी चूचियां गजब हिल रही थीं.

राहुल सामने आकर बैठ गया और बोला- वाह क्या चूचियां हैं, मजा आ जाएगा ऐसी चूचियां पीने में तो … ओए होए होए होए!

छवि भी सामने बैठकर मुस्कुरा रही थी और संजय रुकने का नाम नहीं ले रहा था.
वह धपाधप मेरी चूत मारे जा रहा था.

फिर राहुल मेरे पास आकर मेरी चूचियों को दोनों हाथों से दबाने लगा और मुझे चूमने लगा.
इधर संजय ने कहा- राहुल!

राहुल ने कहा- क्या हो जाएगा यार … यदि मैं उसकी चूचियों को थोड़ा सा दबा लूँ तो? ले तो तू ही रहा है न … अगर तू मुझे पेलने दे तो कुछ बात हो!

संजय कुछ नहीं बोला.
राहुल मुझे किस करके अलग सामने आकर बैठ गया.
संजय मुझे चोदता रहा.

कुछ देर के बाद मैंने कहा- संजय, मेरा होने वाला है.
उसने कहा- बहुत अच्छा … निकल जाओ.

मैं झड़ गयी.
मेरी जांघों तक पानी आ गया था.

संजय ने मुझे कुछ देर चोदने के बाद पोजीशन से चेंज करके अपने गले से लगाया और कहा- जान मैं अपना पानी निकालने वाला हूं, कहां निकालूँ?

मैंने उसके लंड से कंडोम को निकाला और कहा- मेरे ऊपर ही निकाल दो.
उसने अपना सारा पानी मेरे बूब्स के ऊपर निकाल दिया.
ज्यादा पानी नहीं निकला था.

फिर हम दोनों नंगे ही वहीं सोफे पर बैठ गए.

अब तो मुझे शर्म भी नहीं आ रही थी क्योंकि राहुल मुझे छवि के सामने चोद चुका था इसलिए शर्म खत्म हो गई थी.

मैंने अपनी फटी हुई पैंटी को कमर से निकाला और बस फिर कुछ देर बाद बाथरूम जाकर एक नयी पैंटी और ब्रा को पहन लिया.
अपने कपड़े पहन कर वापस आ गई.

राहुल और संजय दोनों का एक दूसरे के ऊपर से गुस्सा शांत हो गया था.
उन दोनों में सुलह हो गई थी.

हम चारों ने फिर से बातचीत शुरू कर दी.

फिर प्लान बना कि मूवी देखने चलते हैं.
हम लोग चारों मूवी देखने गए.

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