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यह तब की बात है Antarvasna जब एक दिन मेरा दोस्त राकेश अपनी पत्नी के साथ मेरे घर आया। राकेश और मैं साथ साथ काम करते हैं, राकेश की पत्नी प्रिया टीचर है।
उस दिन राकेश ने बताया कि उसका प्रिंटर और यू पी एस खराब हो गया है और प्रिया को स्कूल के कुछ पेपर सेट करके स्कूल में जमा करने हैं। इसलिये वो मेरी मदद चाहता था, मेरे पास प्रिंटर और पी सी दोनों हैं।
वह जब शाम को करीब 8:00 बजे आया तो मैं थोड़ा घबरा गया था कि अचानक दोनों कैसे आ गये।
राकेश को थोड़ा ड्रिंक लेने की आदत है और उस दिन शायद शनिवार था तो उस समय वह थोड़ा ड्रिंक किये हुये था।
उससे मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं टाइप कर देता हूँ, तुम बोलती रहो!
तो प्रिया ने कहा- कोई बात नहीं, मैं बोल देती हूं, यह मैंने ही बनाया है तो गल्तियाँनहीं होंगी!
उसने बताया कि उसको अच्छी टाइपिंग नहीं आती तो वह टाइप नहीं कर पायेगी।
प्रिया मेरे बगल में कुरसी लगाकर बैठ गई, वह इतना नज़दीक थी कि मैं उसकी सांसें महसूस कर सकता था।
कई बार उसके बोडी से मेरी बोडी छू रही थी और उसके लिप्स बिल्कुल मेरे करीब थे उसके गोरा रंग और स्लिम फिगर मुझे डिस्टर्ब कर रहा था।
राकेश भी पीछे बैठा था और मैं अपने पर किसी तरह कंट्रोल किये हुये था। पर प्रिया एकदम नोर्मल थी, उसे शायद ही मेरे बुरे इरादों का अहसास हो रहा हो।
मैं थोड़ा नर्वस सा भी हो रहा था। मन तो कर रहा था कि उसकी एक पप्पी ले लूं और उसकी थाईस पर हाथ फ़ेरूं। उसके मीडियम साइज़ के टाइट बूब्स पर अपने लिप्स से चूमूं।
पर ये सब उस समय सम्भव नहीं था, इस चक्कर में, मैं एक दो बार टाइपिंग करना ही भूल गया। कभी कभी मैं उसके पूरे बदन को ही देखते रह जाता।
थोड़ी देर में राकेश को फ़िर ड्रिंक की जरूरत महसूस हुई, तो वह बोला- प्रिया मैं 10 मिनट में आया।
हम दोनों समझ गये थे कि वह कहाँ जा रहा है। दोनों ही उसकी आदत जानते थे। राकेश के जाने के बाद प्रिया और मैं अपना काम करते रहे और मैं बीच बीच में प्रिया के पूरे बदन पर नज़र मार लेता तो प्रिया भी मुझे देखकर मुस्करा देती।
फ़िर जब पेपर पूरा हो गया तो मैंने एक प्रिंट आउट चेकिंग के लिये प्रिया को दे दिया। प्रिया ने कुछ कोर्रेक्शन के बाद मुझे प्रिंट आउट दिया तो मैं कोररेक्शन करके दुबारा फ़ेयर प्रिंट आउट निकालकर प्रिया को दे दिया।
इस तरह हमारा टाइपिंग का काम पूरा हो गया तो मैंने प्रिया को बोला कि काम तो पूरा हो गया पर राकेश नहीं आया। मैं ऐसा करता हूं थोड़ी चाय बनाता हूं तब तक शायद राकेश आ जाये फ़िर तीनो चाय पीयेंगे।
प्रिया बोली- नहीं चाय में बनाऊँगी, मुझे कल भी तुमको तकलीफ़ देनी है। यह तो एक ही पेपर हुआ है अभी तीन पेपर और हैं, प्रिंटर और यु पी एस शायद दो-तीन दिन में ठीक होंगे और मुझे पेपर परसों तक जमा करना है।
मैं कुछ कहता इससे पहले ही प्रिया किचन में चली गई मैं मना नहीं कर पाया। उसे किचन में कोई परेशानी नहीं हुई और उसने चाय बनाने को भी रख दी। पाँच मिनट के बाद प्रिया दो कप में चाय लेकर आ गई तो मैंने कहा कि राकेश को भी आने दो।
तो वह बोली- राज तुम क्या बात कर रहे हो, इस टाइम वह चाय पीने की हालत में होंगे कहाँ। उनके लिये चाय मैंने नहीं बनाई है उनको जो चाहिये वो उसके लिये ही गये हैं।
मैं तो राकेश के ड्रिंक के बारे में जानता था पर किसी की बुराई और वह भी उसकी बीवी से करना बड़ी बेवकूफ़ी होती है आखिर पति परमेश्वर जो होता है।
फ़िर अचानक वह मुझसे बोली राज तुम भी अब शादी कर ही लो, ऐसे कब तक चलेगा तो मैंने कहा हाँ राकेश को देखकर मेरा भी मन करता है और उसके मज़े देखकर कभी जलन भी होती है।
प्रिया बोली- क्यों जलन किस बात की, अरे वह तो तुम्हारी बचोलर लाइफ को अच्छा बताते हैं और कहते है कि वह गलत फ़ंस गये।
मैंने कहा- मैं सच कहूं तो एक बात की जलन बड़ी होती है कि उसकी (राकेश) की बीवी बड़ी खूबसूरत है।
मेरा ऐसा कहने पर प्रिया पहले तो शरमा सा गई फ़िर बोली- अच्छा जी तो तुम मुंह में जबान भी रखते हो। मैं तो तुमको बड़ा सीधा साधा समझती थी, पर तुम भी कम नहीं हो बातें बनाने में। दूसरे की हरी हरी दिखती है, मेरी भी कुछ परेशानियाँहैं।
मैंने कहा- क्यों आपका एक अच्छा परिवार है बच्चा है। ऐसी कोई प्रोब्लम तो नहीं लगती आप दोनों ठीक ठाक कमाते हो।
प्रिया बोली हाँ वह सब तो है पर। बहुत कुछ मिस करती हूं, फ़िर भी ठीक ही है। राकेश अभी तक भी नहीं आया तो मैंने कहा पता नहीं क्या बात है?
तो प्रिया बोली- यही तो बात है अगर ड्रिंक कर लिया तो इन्हे किसी बात का कोई ध्यान नहीं रहता। अब घर जाकर न ढंग से खायेंगे न कुछ करेंगे और सो जायेंगे, कभी कभी तो रोज़ ही ऐसा होता है। मुझे ऐसे पियक्कड़ से नफ़रत होती है और फ़िर हम दोनों कई दिनो तक एक कमरे में भी अलग अलग रहते हैं। बच्चा तो बस इस बात का सबूत है कि हम पति पत्नि हैं पर शायद एक पति पत्नि की तरह प्यार किये हमें सालों गुजर गये।
प्रिया एकदम इमोशनल हो गई थी, मैंने उसके हाथ पर हाथ रखकर कहा- सब ठीक हो जायेगा तुम उसे प्यार से समझाओ वह समझेगा। वह तुमसे डरता तो है पर शायद अपनी आदत भी नहीं छोड़ पाता और इसका कारण भी शायद उसकी कम आमदनी है, तुम उस से ज्यादा मांगें ना किया करो।
प्रिया ने अपना कंधा मेरी गोद में रख दिया और बोली- राजू, तुम्हारी भी तो प्रोब्लम्स होंगी तो क्या ड्रिंक में ही सब प्रोब्लम का हल है?
वह मेरी गोद में आ गई थी, मैं उसकी बाहों पर हाथ फ़ेरने लगा, वैसे मैं ये कन्सोल करने के लिये कर रहा था पर मेरा सेक्सी मन पूरा मज़ा ले रहा था।
प्रिया को भी मेरा टच पसंद आया था और वह कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे और ऊपर खींच कर अपनी बाहों में ले लिया। प्रिया ने कुछ नहीं कहा और अपना सर मेरे कंधों पर रख दिया।
मैं उसे कमर से पकड़ कर सोफ़े की तरफ़ ले गया तो वह मेरे साथ चल दी।
प्रिया दिखने में एकदम पटाखा है, गोरा रंग और चमकदार चिकनी त्वचा, पतली कमर, कद 5’3″ उसका फ़िगर 34-26-36 होगा। प्रिया शायद चाहती थी कि मैं उससे खूब बातें करूं और उसकी तारीफ़ करूं पर में ऐसा नहीं कर पाया।
मैं अब तक प्रिया के बदन को देखकर मस्त हो चुका था और मैंने सोचा बेटा इससे बढ़िया मौका किसी औरत के बदन से खेलने का मिलना मुश्किल है इसलिये मैं भी मौके का फ़ायदा उठाना चाहता था।
प्रिया को क्या फ़र्क पड़ता अगर मैं वहाँ नहीं होता तो राकेश तो उसके साथ रोज़ ही ऐसा करता। मैं उमर में बड़ा और उसको अपनी बाहों में लेकर बोला सब ठीक हो जायेगा तुम चिंता मत करो बस मस्त रहो, अभी तो मैं तुमको निराश नहीं करुंगा, राकेश से ज्यादा मज़ा दूंगा!
और इतना कह कर मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रखकर उसके लिप्स को बंद कर दिया। प्रिया सकपका गई और कुछ बोल नहीं पाई, मैंने उसके लिप्स जो बंद कर दिये थे। जैसे ही मैं अपने लिप्स हटाये वह बोली राज आप बहुत गंदे हो, आप ने ऐसी गंदी बात कैसे सोची।
मैंने कहा जो राकेश नहीं करता वह मैं करता हूं तो तुम क्यों परेशान हो, मैं कौन हूं भूल जाओ थोड़ी देर के लिये। मैं भी तुम्हारा नज़दीक का हूं और सोचो मैं वह सब तुमको दे रहा हूं जो तुम राकेश से इस समय चाहती हो, फ़िर मैं ड्रिंक भी नहीं करता।
मेरी इस बात का प्रिया पर असर हुआ, वह बोली- पर मुझे डर लग रहा है, मैं उनके साथ कोई गलत तो नहीं कर रही।
मैंने कहा- सोच लो यह तुम्हारे ऊपर है और मैं उसे चूमता और उसके जांघों और बैक पर मसाज भी करता रहा।
प्रिया बोली- प्लीज़ जैसा तुम चाहो पर प्लीज़ मेरे कपड़े मत उतारना आप बाहर से जो चाहे कर लो मुझे बड़ी शरम आ रही है।
मेरा तीर सही निशाने पर लग गया था और मैंने प्रिया को अपनी बाहों में ले लिया। फ़िर मैंने बिना समय गवाये किये हुए प्रिया के बूब्स पर उसकी कमीज़ के बाहर से ही हल्का हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया।
दोस्तो ये सब कैसे हो रहा था मुझे नहीं मालूम, मैं इतना हिम्मत वाला नहीं हूं। प्रिया मेरे छूने से मस्त हो रही थी, इसी बीच मैंने मौका देखकर प्रिया की सलवार का नाड़ा चुपके से खोल दिया और उसे पता नहीं चला।
मैं उसकी चिकनी जांघों पर हाथ फ़ेरना चाहता था पर जैसे मेरा हाथ उसकी पैंटी पर टच हुआ वह एकदम से नाराज़ होते हुए बोली- राज, नो चीटिंग!
और उसने अपनी सलवार एक हाथ से पकड़ ली, पर ऊपर से वह मस्त हो चुकी थी पर अभी भी मुझसे चुदवाने में वह संकोच कर रही थी पर मेरे टच से उसे मज़ा आ रहा था। उसकी सलवार अभी तक खुली हुई थी, जिसको उसने एक हाथ से पकड़ रखा था।
जैसे ही मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो उसके हाथों से उसकी सलवार नीचे सरक गई और मैंने ऊपर से उसकी कमीज़ की ज़िप पीछे से खोल दी और उसने अंदर से काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैं तो उसके गोरे बदन पर काली ब्रा देखकर मस्त हो गया।
आगे की कहानी अगले भाग में…Antarvasna
अमन अब अगले शुक्रवार Antarvasna की तैयारी में जुट गया। वह चाहता था कि अगली बार जब वह प्रगति के साथ हो तो वह अपनी सबसे पुरानी और तीव्र इच्छा को पूरा कर पाए।
उसकी इच्छा थी गांड मारने की। वह बहुत सालों से इसकी कोशिश कर रहा था पर किसी कारण बात नहीं बन रही थी।
उसे ऐसा लगा कि शायद प्रगति उसे खुश करने के लिए इस बात के लिए राज़ी हो जायेगी। उसे यह भी पता था कि उसकी यह मुराद इतने सालों से पूरी इसलिए नहीं हो पाई थी क्योंकि इस क्रिया मैं लड़की को बहुत दर्द हो सकता है इसीलिए ज्यादातर लड़कियाँ इसके खिलाफ होती हैं। उनके इस दर्द का कारण भी खुद आदमी ही होते हैं, जो अपने मज़े में अंधे हो जाते हैं और लड़की के बारे में नहीं सोचते।
अमन को वह दिन याद है जब वह सातवीं कक्षा में था और एक हॉस्टल में रहता था। तभी एक ग्यारहवीं कक्षा के बड़े लड़के, हर्ष ने उसके साथ एक बार बाथरूम में ज़बरदस्ती करने की कोशिश की थी तो अमन को कितना दर्द हुआ था वह उसे आज तक याद है।
अमन चाहता था कि जब वह अपनी मन की इतनी पुरानी मुराद पूरी कर रहा हो तब प्रगति को भी मज़ा आना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो न केवल उसका मज़ा दुगना हो जायेगा, हो सकता है प्रगति को भी इसमें इतना मज़ा आये की वह भविष्य में भी उससे गांड मरवाने की इच्छा जताए।
अमन को पता था कि गांड में दर्द दो कारणों से होता है। एक तो चूत के मुकाबले उसका छेद बहुत छोटा होता है जिससे लंड को प्रवेश करने के लिए उसके घेरे को काफी खोलना पड़ता है जिसमें दर्द होता है। दूसरा, चूत के मुकाबले गांड में कोई प्राकृतिक रिसाव नहीं होता जिस से लंड के प्रवेश में आसानी हो सके। इस सूखेपन के कारण भी लंड के प्रवेश से दर्द होता है। यह दर्द आदमी को भी हो सकता है पर लड़की (या जो गांड मरवा रहा हो) को तो होता ही है।
भगवान ने यह छेद शायद मरवाने के लिए नहीं बनाया था !!!
अमन यही सोच रहा था कि इस क्रिया को किस तरह प्रगति के लिए बिना दर्द या कम से कम दर्द वाला बनाया जाए।
उसे एक विचार आया। उसने एक बड़े आकार की मोमबत्ती खरीदी और चाकू से शिल्पकारी करके उसे एक मर्द के लिंग का आकार दे दिया। उसने यह देख लिया कि इस मोम के लिंग में कहीं कोई खुरदुरापन या चुभने वाला हिस्सा नहीं हो।
उसने जानबूझ कर इस लिंग की लम्बाई 9-10 इंच रखी जो कि आम लंड की लम्बाई से 3-4 इंच ज्यादा है और उसका घेरा आम लंड के बराबर रखा। उसने मोम के लिंग का नाम भी सोच लिया। वह उसे ‘बलराम’ बुलाएगा !
उसने बाज़ार से एक के-वाई जेली का ट्यूब खरीद लिया। वैसे तो प्रगति के बारे में सोच कर अमन को जवानी का अहसास होने लगा था फिर भी एहतियात के तौर पर उसने एक पत्ती तडालफ़िल की गोलियों की खरीद ली जिस से अगर ज़रुरत हो तो ले सकता है। वह नहीं चाहता था कि जिस मनोकामना की पूर्ति के लिए वह इतना उत्सुक है उसी की प्राप्ति के दौरान उसका लंड उसे धोखा दे जाये। एक गोली के सेवन से वह पूरे 24 घंटे तक ‘बलराम’ की बराबरी कर पायेगा।
अब उसने अपने हाथ की सभी उँगलियों के नाखून काट लिए और उन्हें अच्छे से फाइल कर लिया। एक बैग में उसने ‘बलराम’, के-वाई जेली का ट्यूब, एक छोटा तौलिया और एक नारियल तेल की शीशी रख ली। अब वह प्रगति से मिलने और अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए तैयार था। बेसब्री से वह अगले शुक्रवार का इंतज़ार करने लगा।
उधर प्रगति भी अमन के ख्यालों में गुम थी। उसे रह रह कर अमन के साथ बिताये हुए पल याद आ रहे थे। वह जल्द से जल्द फिर से उसकी बाहों में झूलना चाहती थी। अमन से मिले दस दिन हो गए थे। उस सुनहरे दिन के बाद से वे मिले नहीं थे। अमन को किसी काम से कानपुर जाना पड़ गया था। पर वह कल दफ्तर आने वाला था।
प्रगति सोच नहीं पा रही थी कि अब दफ्तर में वह अमन से किस तरह बात करेगी या फिर अमन उस से किस तरह पेश आएगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि आम आदमियों की तरह वह उसकी अवहेलना करने लगेगा। कई मर्द जब किसी लड़की की अस्मत पा लेते हैं तो उसमें से उनकी रुचि हट जाती है और कुछ तो उसे नीचा समझने लगते हैं… प्रगति कुछ असमंजस में थी…
लालसा, वासना, डर, आशंका, ख़ुशी और उत्सुकता का एक अजीब मिश्रण उसके मन में हिंडोले ले रहा था।
प्रगति ने सुबह जल्दी उठ कर विशेष रूप से उबटन लगा कर देर तक स्नान किया। भूरे रंग की सेक्सी पैंटी और ब्रा पहनी जिसे पहन कर ऐसा लगता था मानो वह नंगी है। उसके ऊपर हलके बैंगनी रंग की चोली के साथ पीले रंग की शिफोन की साड़ी पहन कर वह बहुत सुन्दर लग रही थी। बालों में चमेली का गजरा तथा आँखों में हल्का सा सुरमा। चूड़ियाँ, गले का हार, कानों में बालियाँ और अंगूठियाँ पहन कर ऐसा नहीं लग रहा था कि वह दफ्तर जाने के लिए तैयार हो रही हो। प्रगति मानो दफ्तर भूल कर अपनी सुहाग रात की तैयारी कर रही थी।
सज धज कर जब उसने अपने आप को शीशे में देखा तो खुद ही शरमा गई। उसके पति ने जब उसे देखा तो पूछ उठा- कहाँ कि तैयारी है…?
प्रगति ने बताया कि आज दफ्तर में ग्रुप फोटो का कार्यक्रम है इसलिए सब को तैयार हो कर आना है !! रोज़ की तरह उसका पति उसे मोटर साइकिल पर दफ्तर तक छोड़ कर अपने काम पर चला गया। प्रगति ने चलते वक़्त उसे कह दिया हो सकता है आज उसे दफ्टर में देर हो जाये क्योंकि ग्रुप फोटो के बाद चाय-पानी का कार्यक्रम भी है।
दफ्तर 10 बजे शुरू होता था पर प्रगति 9.30 बजे पहुँच जाती थी क्योंकि उसे छोड़ने के बाद उसके पति को अपने दफ्तर भी जाना होता था। प्रगति ने ख़ास तौर से अमन का कमरा ठीक किया और पिछले 10 दिनों की तमाम रिपोर्ट्स और फाइल करीने से लगा कर अमन की मेज़ पर रख दी।
कुछ देर में दफ्तर के बाकी लोग आने शुरू हो गए। सबने प्रगति की ड्रेस की तारीफ़ की और पूछने लगे कि आज कोई ख़ास बात है क्या?
प्रगति ने कहा कि अभी उसे नहीं मालूम पर हो सकता है आज का दिन उसके लिए नए द्वार खोल सकता है !!!
लोगों को इस व्यंग्य का मतलब समझ नहीं आ सकता था !!
वह मन ही मन मुस्कराई…
ठीक दस बजे अमन दफ्तर में दाखिल हुआ। सबने उसका अभिनन्दन किया और अमन ने सबके साथ हाथ मिलाया। जब प्रगति अमन के ऑफिस में उस से अकेले में मिली अमन ने ऐसे बर्ताव किया जैसे उनके बीच कुछ हुआ ही न हो। वह नहीं चाहता था कि दफ्तर के किसी भी कर्मचारी को उन पर कोई शक हो। प्रगति को उसने दफ्तर के बाद रुकने के लिए कह दिया जिस से उसके दिल की धड़कन बढ़ गई।
किसी तरह शाम के 5 बजे और सभी लोग अमन के जाने का इंतजार करने लगे। अमन बिना वक़्त गँवाए दफ्तर से घर की ओर निकल पड़ा। शीघ्र ही बाकी लोग भी निकल गए। प्रगति यह कह कर रुक गई कि उसे एक ज़रूरी फैक्स का इंतजार है। उसके बाद वह दफ्तर को ताला भी लगा देगी और चली जायेगी।
उसने चौकीदार को भी छुट्टी दे दी। जब मैदान साफ़ हो गया तो प्रगति ने अमन को मोबाइल पर खबर दे दी। करीब आधे घंटे बाद अमन दोबारा ऑफिस आ गया और अन्दर से दरवाज़ा बंद करके दफ्टर की सभी लाइट, पंखे व एसी बंद कर दिए। सिर्फ अन्दर के गेस्ट रूम की एक लाइट तथा एसी चालू रखा।
अब उसने प्रगति को अपनी ओर खींच कर जोर से अपने आलिंगन में ले लिया और वे बहुत देर तक एक दूसरे के साथ जकड़े रहे। सिर्फ उनके होंठ आपस में हरकत कर रहे थे और उनकी जीभ एक दूसरे के मुँह की गहराई नाप रही थी। थोड़ी देर में अमन ने पकड़ ढीली की तो दोनों अलग हुए।
घड़ी में 5.30 बज रहे थे। समय कम बचा था इसलिए अमन ने अपने कपड़े उतारने शुरू किये पर प्रगति ने उसे रोक कर खुद उसके कपड़े उतारने लगी। अमन को निर्वस्त्र कर उसने उसके लिंग को झुक कर पुच्ची की और खड़ी हो गई।
अब अमन ने उसे नंगा किया और एक बार फिर दोनों आलिंगन बद्ध हो गए। इस बार अमन का लिंग प्रगति की नाभि को टटोल रहा था। प्रगति ने अपने पंजों पर खड़े हो कर किसी तरह लिंग को अपनी योनि की तरफ किया और अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर लीं। अमन का लिंग अब प्रगति की चूत के दरवाज़े पर था और प्रगति उसकी तरफ आशा भरी नज़रों से देख रही थी। अमन ने एक ऊपर की तरफ धक्का लगाया और उसका लंड चूत में थोड़ा सा चला गया।
अब उसने प्रगति को चूतड़ से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और प्रगति ने अपने हाथ अमन की गर्दन के इर्द-गिर्द कर लिए तथा उसकी टांगें उसकी कमर से लिपट गईं। अब वह अधर थी और अमन खड़ा हो कर उसे अपने लंड पर उतारने की कोशिश कर रहा था। थोड़ी देर में लंड पूरा प्रगति की चूत में घुस गया या यों कहिये कि चूत उसके लंड पर पूरी उतर गई।
प्रगति ने ऊपर नीचे हो कर अपने आप को चुदवाना शुरू किया। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था क्योंकि ऐसा आसन उसने पहली बार ग्रहण किया था। कुछ देर के बाद अमन ने बिना लंड बाहर निकाले प्रगति को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसको जोर जोर से चोदने लगा। हालाँकि अमन आज प्रगति की गांड मारने के इरादे से आया था पर काम और क्रोध पर किसका जोर चलता है !!
अमन 2-3 मिनटों में ही बेहाल हो गया और उसकी पिचकारी प्रगति की योनि में छूट गई। अमन की यही एक कमजोरी थी कि पहली बार उसका काम बहुत जल्दी तमाम हो जाता था। पर दूसरी और तीसरी बार जब वह सम्भोग करता था तो काफी देर तक डटा रह सकता था।
उसने लंड बाहर निकाला और प्रगति को माथे पर पुच्ची करके बाथरूम चला गया। अपना लंड धो कर वह वापस आ गया। प्रगति जब कुछ देर के लिए बाथरूम गई तो अमन ने एक गोली खा ली। शाम के 6 बज रहे थे। अभी भी उसके पास करीब 2 घंटे थे। जब प्रगति वापस आई तो अमन ने उससे पूछा कि वह कितनी देर और रुक सकती है।
प्रगति ने भी अपने पति से देर से आने की बात कह दी थी सो उसे भी कोई जल्दी नहीं थी। तो अमन ने सोचा की शायद आज ही उसकी बरसों की मनोकामना पूरी हो जायेगी। उसने प्रगति से पूछा वह उस से कितना प्यार करती है।
प्रगति ने कहा- इम्तिहान ले कर देख लो !!
अमन ने कहा- कितना दर्द सह सकती हो?
प्रगति ने कहा- जब औरत बच्चे को जन्म दे सकती है तो बाकी दर्द की क्या बात !!
यह सुन कर अमन खुश हो गया और प्रगति को बिस्तर पर उल्टा लेटने के लिए बोला। प्रगति एक अच्छी लड़की की तरह झट से उलटा लेट गई। अमन ने उसके पेट के नीचे एक मोटा तकिया लगा दिया जिस से उसकी गांड ऊपर की ओर और उठ गई।
अमन ने अपने बैग से तेल की शीशी, जेली का ट्यूब, छोटा तौलिया और ‘बलराम’ को निकाला और पास की मेज़ पर रख दिया। प्रगति का मुँह तकिये में छुपा था और शायद उसकी आँखें बंद थीं। वह जानती थी कि क्या होने वाला है और वह अमन की खातिर कोई भी दर्द सहने के लिए तैयार थी।
अमन ने नारियल के तेल से प्रगति के चूतड़ों की मालिश शुरू की। प्रगति की मांस पेशियाँ जो कसी हुईं थीं उन्हें धीरे धीरे ढीला किया और उसके बदन से टेंशन दूर करने लगा। उसके हाथ कई बार उसकी चूत के इर्द गिर्द और उसके अन्दर भी आने जाने लगे थे। प्रगति को आराम भी मिल रहा था और मज़ा भी आ रहा था।
इस तरह मालिश करते करते अमन ने प्रगति की गांड के छेद के आस पास भी ऊँगली घुमाना शुरू किया और अच्छी तरह तेल से गांड को गीला कर दिया। अब उसने अपनी तर्जनी ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश की। ऊँगली गांड में थोड़ी सी घुस गई तो प्रगति थोड़ी सी हिल गई।
अमन ने पूछा- कैसा लग रहा है?
तो प्रगति ने कहा- अच्छा !
उसने कहा की अब वह ऊँगली पूरी अन्दर करने की कोशिश करेगा और प्रगति को इस तरह जोर लगाना चाहिए जैसे वह शौच के वक़्त लगाती है। इससे गांड का छेद अपने आप ढीला और बड़ा हो जायेगा। प्रगति ने वैसा ही किया और अमन की एक ऊँगली उसकी गांड में पूरी चली गई।
अमन ने कोई और हरकत नहीं की और ऊँगली को कुछ देर अन्दर ही रहने दिया। फिर उसने प्रगति से पूछा- कैसा लग रहा है?
प्रगति ने कहा- ठीक है।
तो अमन ने धीरे से अपनी ऊँगली बाहर निकाल ली।
अब उसने अपनी ऊँगली पर जेली अच्छी तरह से लगा ली और प्रगति की गांड के बाहर और करीब आधा इंच अन्दर तक अच्छी तरह से जेली मल दी। अब उसने प्रगति से कहा कि जब वह ऊँगली अन्दर की तरफ डालने की कोशिश करे उसी वक़्त प्रगति को शौच वाला जोर लगाना चाहिए। जब दोनों ने ऐसा किया तो ऊँगली बिना ज्यादा मुश्किल के अन्दर चली गई।
अमन ने ऊँगली अन्दर ही अन्दर घुमाई और बाहर निकल ली। अब उसने अपनी दो उँगलियों पर जेली लगाई और वही क्रिया दोहराई। दो उँगलियों के अन्दर जाने में प्रगति को थोड़ी तकलीफ हुई पर ज्यादा दर्द नहीं हुआ।
अमन हर कदम पर प्रगति से उसके दर्द के बारे में पूछता रहता था। उसने इसीलिए अपनी उँगलियों के नाखून काट कर फाइल कर लिए थे वरना प्रगति को अन्दर से कट लग सकता था…
एक दो बार जब दो उँगलियों से गांड में प्रवेश की क्रिया ठीक से होने लगी तो उसने दो उँगलियों को गांड के अन्दर घुमाना शुरू किया जिस से गांड का छेद और ढीला हो सके।
इसके बाद उसने ‘बलराम’ को निकाला और उसके अगले 4-5 इंच को अच्छी तरह जेली से लेप दिया। प्रगति की गांड के छेद के इर्द गिर्द और अन्दर भी अच्छे से जेली लगा दी। अब अमन ने प्रगति की टांगें थोड़ी और चौड़ी कर दी और बलराम को उसकी गांड के छेद पर रख दिया। दूसरे हाथ से वह उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। बलराम का स्पर्श प्रगति को ठंडा लगा और उसकी गांड यकायक टाइट हो गई।
उसने पलट कर देखा तो बलराम को देख कर आश्चर्यचकित रह गई। उसने ऐसा यन्त्र पहले नहीं देखा था। अमन ने बताया कि इसे उसने खुद ही बनाया है और इसको इस्तेमाल करके वह प्रगति के दर्द को कम करेगा। उसने यह भी बताया कि इस यन्त्र का नाम ‘बलराम’ है। नाम सुन कर प्रगति को हंसी आ गई।
अमन ने आश्वासन के तौर पर उसकी पीठ थपथपाई और फिर से उलटे लेट जाने को कहा। उसने प्रगति को याद दिलाया की किस तरह (शौच की तरह) उसे अपनी गांड ढीली करनी है जिस से बलराम गांड में जा सके। प्रगति ने सिर हिला कर सहयोग करने का इशारा किया।
अब अमन ने कहा कि तीन की गिनती पर वह बलराम को अन्दर करेगा। प्रगति तैयार हो गई पर अनजाने में फिर उसकी गांड टाइट हो गई। अमन ने उसे घबराने से मना किया और उसकी योनि, पीठ तथा चूतड़ों पर प्यार से हाथ सहलाने लगा।
उसने कहा- जल्दबाजी की कोई ज़रुरत नहीं है। अगर तुम तैयार नहीं हो तो किसी और दिन करेंगे।
प्रगति ने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है और मैं तैयार हूँ !
अमन ने कहा- ओ के, अब मैं तीन गिनूंगा तुम तीन पर अपनी गांड ढीली करना।
प्रगति ने चूतड़ हिला कर हाँ का इशारा किया। अमन ने एक, दो, तीन कहते हुए तीन पर बलराम को गांड के छेद में डालने के लिए जोर लगाया। पर प्रगति की कुंवारी गांड बलराम की चौड़ाई के लिए तैयार नहीं थी सो बलराम अपने निशाने से फिसल गया और जेली के कारण बाहर आ गया। अमन की हंसी छूट गई और प्रगति भी मुस्करा कर पलट गई।
अमन ने कहा- कोई बात नहीं, एक बार फिर कोशिश करते हैं।
बात अभी बाकी है दोस्तो ! Antarvasna
मेरी क्लास में गीता नाम Indian Sex Stories की एक लड़की थी, मैं उससे बहुत प्यार करता था। हमारी जान पहचान इस प्रकार हुई :
एक दिन जब हम ट्यूशन पढ़ रहे थे तो उस दिन सर जी नहीं आएगे यह बात सब को पता थी लेकिन गीता का घर दूर होने के कारण उसे किसी ने नहीं बताया। गीता के आने का समय हो गया तो मैंने नंगी तस्वीर वाली किताब को इंग्लिश की कापी में छुपा दिया। तभी वह आ गई।
गीता ने पूछा,”आज सर जी नहीं आए ?”
मैंने कहा,”नहीं !”
मैंने कहा- मुझे इंग्लिश के कुछ ट्रांसलेशन नहीं आ रहे हैं, उसे बता देना।
गीता ने इंग्लिश की कापी खोली और तस्वीर को कुछ क्षण देखा और मुझ पर भड़क उठी, कहने लगी “तुम आखिर अपने आप को समझते क्या हो !”
किताब मेरे मुँह पर फेंक कर चली गई।
मैं डर गया कि कहीं उसने सारी बातें सर को बता दी तो ?
इस ख्याल से मैं रात भर सो नहीं पाया।
अगले दिन उसने ट्यूशन में तो कुछ नहीं कहा लेकिन ट्यूशन के बाद में मिलने को कहा।
सर के जाने के बाद उसने मुझे २०-३० नंगी तस्वीर वाली किताब दिखाई और कहा- सिर्फ तुम्हारे अन्दर ही आग नहीं धधक रही है। एक छोटी सी चिंगारी मेरे अन्दर फुलझड़ी की तरह तेज होती रहती है।
इस प्रकार हमारी मुलाकात हुई।
तभी एक दिन हमें कमरा खाली मिला तो हम दोनों में जीवविज्ञान के प्रेक्टिकल करने की इच्छा हुई।
मैंने दोपहर के १२ बजे उसे घर पर बुला लिया और कमरा बंद कर लिया। मैंने कहा- जीव विज्ञान में किस जंतु के बारे में जानना है?
उसने कहा,”होमोसपियंस के बारे में !”
अब मैंने पढ़ाना शुरु कर दिया- देखो मैं सबसे पहले इनके जननांगों के बारे में बताउंगा- मेल व फिमेल दो प्रकार के होते हैं मेल का जननांग ३ से ४ इंच लंबा तथा १ से २.५ इंच मोटा हो सकता है जिसे लिंग, लण्ड, केला, मुसड़, पेलन यंत्र आदि नामों से जानते हैं।
गीता ने पूछा- क्या इसकी कोई निश्चित लम्बाई नहीं होती?
मैंने कहा,”नहीं !”
यह देखने में कैसा होता है?
यह सुन मैं हंस पड़ा।
गीता ने कहा- मैंने छोटे बच्चो का और केवल तस्वीर में ही देखा है।
मैंने अपने पैंट की ज़िप को नीचे कर अपना लिंग निकाल कर उसके हाथों में थमा दिया।
गीता ने कहा- अरे ! अरे ! देखो यह भाग रहा है !
मैंने कहा- यह दौड़ नहीं सकता !
इस पर गीता ने कहा- देखो मेरे हथेली इसके भार से नीचे को झुक रही है ! और यह क्या? इसका आकार किसी दैत्य की तरह बढ़ता जा रहा है।
फिर उसने कहा- ऐसे नहीं ! पूरे कपड़े उतारो और समझाओ !
मैंने कहा- इसके लिए तुम्हें भी नंगा होना होगा !
वो तो मानो इस बात के लिए तैयार बैठी थी। उसने झट से मेरे और अपने कपड़े उतार फेंके।
अब हम दोनों नंगे बैठे थे।
मैंने कहा- अब तेरी बारी !
गीता ने बताया- लड़कियों में कुल तीन छेद होते हैं- १. मल-द्वार २. योनि ३.मूत्रद्वार
तथा दो चूचक भी होते हैं।
मैंने कहा- दो चूचक तो मुझे दिख रहे हैं लेकिन तीन छेद की बात तो हजम नहीं हो रही है।
गीता ने कहा- लगता है तुम्हें प्रेक्टिकल करना ही पड़ेगा। इसके लिए तुम मेरे पास आओ मेरे चूचक को दबाना शुरु करो।
मैंने कहा- इससे क्या होगा?
तो गीता ने जबाब दिया- इससे तेरे लिंग में कड़कपन आने से ही प्रेक्टिकल शुरु होगा।
अब धीरे धीरे कड़कपन आ गया।
गीता ने कहा- देखता क्या है, ठोक दे मेरे योनि को ! मजा चखा दे ! बहुत दिनों से उबल रही है !
मैंने कहा- पर योनि है किधर ?
उसने फिर चट से मेरा लिंग पकड़ा और योनि में टेक लगा बोली- पेल दे इसे !
मैंने पेलना शुरू किया- १ २ ३…. मार गप्पा गप पेलता ही गया !
इस प्रकार गीता ने एक एक चीज के बारे में खुल के समझाया।
धन्यवाद गीता ! मैं तुझे याद हमेशा रखूंगा। Indian Sex Stories
यह एक सच्ची कहानी Antarvasna है। मैं पेंटिंग की क्लास अपने घर पर लेता था, मेरी क्लास में ज्यादातर लड़कियाँ ही सीखने आती थीं।
एक दिन एक नई लड़की प्रवेश लेने आई। वह इतनी सुन्दर थी कि मैं देखता रह गया। छरहरा बदन, औसत ऊँचाई, गोरी-चिट्टी, सेक्सी नाक नक्शा। पहली नजर में मेरे बदन में सनसनाहट पैदा हो गई। उसने अपना नाम रिंकी बताया, क्लास 12 की विद्यार्थी थी, उम्र 18-19 साल होगी।
वह रोज क्लास में आने लगी। कुछ दिन बाद वह अपनी ही क्लास की एक सहेली को ले कर आई। मैं जानबूझकर उसे अपने सामने बैठाता था और उसके रूप को निहारते रहता था। वह झुक कर जब पेंटिंग बनाती थी तब उसकी आधी चूची मैं देखकर पागल हो जाता था। मेरा लंड खड़ा हो जाता था। जब भी उससे नजर मिलती, मैं पैंट के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को अपने हाथ से उसे दिखाते हुए दबा देता था।
वह धीरे धीरे मेरी नियत समझ गई, अब वह भी बार बार मुझे देखने लगी, मैं समझ गया कि उसे भी मजा आने लग गया था।
कुछ दिन के बाद मैं उसे अपने बगल में बैठाने लगा। अब उसे ड्राइंग सिखाने के बहाने उसके बदन को छूने लगा। ऐसा करने से उसके बदन में उत्तेजना होने लगती थी और वो कसमसा जाती थी। मैं धीरे धीरे उसकी चुचियों को कपड़ों के ऊपर से ही छूने लगा। ऐसा करने से वह चिंहुक जाती थी।
अब वह जानबूझ कर मुझसे ज्यादा सट कर बैठने लगी। मैं समझ गया कि उसे भी वही चाहिए जो मुझे!
एक दिन मैंने उसके दुपट्टे के अन्दर हाथ डालकर उसकी चूची को जोर से दबा दिया तो वह काँप उठी। अब वह बिना ब्रा पहने आने लगी। जब झुकती थी तो उसकी चुचियों के निप्पल भी दिख जाते थे। अब सबकी नजर बचाकर उसके कुरते के गले में हाथ डालकर उसकी चुचियों को मसल देता था। वह मस्त हो जाती थी। अब वह क्लास में समय से पहले आने लगी और आकर मेरे बगल में चिपक कर बैठ कर मुझसे चुचियों को मसलवाने का मजा लेने लगी।
एक दिन अकेले में मैं उसे अपने हाथों से जकड़कर अपने बदन में समाकर उसके होंठों को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा तो उसने भी कस कर मुझे अपने हाथों से बांध लिया। अब मैं उसके टॉप में हाथ डाल क़र उसकी चुचियों को मसलने लगा। मेरी पैंट से मेरा लंड खड़ा होकर उसके बदन से टकराने लगा। वह मेरे चूतड़ पकड़कर खींचने लगी जिससे मेरा लंड उसकी उसकी बुर से ऊपर से चिपकने लगा।
मैं उसकी चुचियों से हाथ हटाने लगा तो वह मेरा हाथ पकड़ कर बोली- सर, और मसलिये! खूब जोर जोर से मसलिये सर! कुछ कीजिये सर!
मैंने उससे कहा- अभी इतना ही! क्योंकि बाकी लड़कियाँ अब आने वाली हैं, कल स्कूल न जाकर चुपचाप मेरे पास आ जाना! मैं सुबह तुम्हारा इन्तजार करूँगा।
उसने कहा- कैसे आऊँगी सर! रूमा भी मेरे साथ स्कूल जाती है।
रूमा भी मेरे क्लास में ड्राइंग सीखने आती थी। मैंने उससे कहा- वह तो तुम्हारी पक्की दोस्त है। उसे तो कुछ कुछ पता ही होगा तुम्हारे और मेरे सम्बन्ध के बारे में!
रिंकी ने कहा- सर, वह सब जानती है और मुझसे पूछती है कि कैसा लगता है जब सर तुम्हारी चूची मसलते हैं। मैं उसे कहा कि मसलवाओगी तब पता चलेगा कि कितना मजा आता है।
तब मैं रिंकी से बोला- आज थोड़ा मजा उसे भी दे देंगे। उसे आज मेरे दूसरे बगल में बैठने को कहना। मैं उसे भी उत्तेजित कर दूंगा। कल उसे भी अपने साथ ले आना। वह आ भी जायेगी और किसी को बोलेगी भी नहीं!
जब सभी लड़कियाँ आईं तो रिंकी ने रूमा को मेरे दायें बगल में बैठा दिया और खुद बांये बगल बैठ गई। मैं मौका देख कर कपड़े के ऊपर से ही रूमा की चुचियों को दबा देता। वह कसमसा जाती और मुझसे और सटने लगी। रिंकी तिरछी नजरों से सब देख रही थी। जब क्लास ख़त्म हो गई तो मैंने रिंकी और रूमा को किनारे बुलाकर कहा- कल तुम दोनों स्कूल जाने के बहाने मेरे पास चली आना। बहुत अच्छा पेंटिंग सिखाऊँगा।
रिंकी तो पहले से तैयार थी, बोली- मैं आ जाऊँगी पर रूमा आएगी तब न!
मैंने रूमा से पूछा- क्या तुम मेरा कहना नहीं मानोगी?
रूमा ने कहा- ठीक है सर! आ जाऊँगी।
मैंने दोनों को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा- ठीक है! मैं इंतजार करूँगा।
दूसरे दिन सही समय पर दोनों आकर मुझे अभिवादन कर मेरे दोनों बगल बैठ गई। मैं दोनों की चुचियों को दबाने लगा दोनों बिना ब्रा पहने ही आई थी। रिंकी तो कहने लगी ‘सर अन्दर हाथ डालकर खूब जोर से दबाइए।
मैं दोनों के टॉप में हाथ डालकर मसलने लगा, उन्हें मजा आने लगा।
मेरा लंड एकदम टाइट होकर खड़ा हो गया। रिकी से नहीं रहा गया, वह अपनी हथेली को मेरे लंड के उभार पर रखकर दबाने लगी।
कुछ देर के बाद मैं रिंकी के टॉप के बटन खोल कर उसकी एक एक कर दोनों चुचियों को निकलकर अपने मुंह में भर कर चूसने लगा। रिंकी सी-सी करने लगी।
फिर मैं उसके टॉप को अलग कर के उसके निप्पल को मसलने लगा साथ साथ दूसरे हाथ से उसके बदन के सभी भाग को सहलाते हुए स्कर्ट के ऊपर से ही उसकी बुर को दबाने लगा, रिंकी चिहुंक कर मुझसे जोर से चिपक गई और एक हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को ऊपर से ही दबाने लगी, बोलने लगी- सर प्लीज कुछ कीजिये, अब नहीं रहा जा रहा है। मैंने कहा- ठीक है! जरा रुको! रूमा को भी कुछ मजा दे दूं!
कह कर मैंने रूमा को आगोश में भर लिया उसके एक-एक अंग से खेलने लगा। फिर उसके कान में कहा- रिंकी बहुत गर्म हो गई है उसे अब चुदवाने का मन कर रहा है। तुम यहीं रुको। पहले उसे पहली चुदाई का मजा दे दूँ। जब मैं उसको चोदूंगा तो तुम दरवाजे पर आकर सब कुछ अपनी आँखों से देखना। देखना कैसे उसकी पहली सील टूटती है।
फिर मैंने रूमा को छोड़ रिंकी को बाँहों में भर कर उसके होठों को कस कर चूमा, फिर उससे कहा- देखो रानी, अब तुम चुदवाने के लिए तैयार हो, लेकिन एक बात बता देता हूँ कि पहली बार मेरे लम्बे और मोटे लंड को तुम्हारी छोटी सी अनचुदी बुर में घुसाने में शुरु में बहुत तकलीफ होगी। तुमको शुरू में तकलीफ बर्दाश्त करनी होगी। लेकिन धीरे धीरे तुमको जन्नत का मजा आने लगेगा।
उसने कहा- बाप रे! इतना लम्बा लंड मेरी बुर में कैसे घुसेगा? जाने दीजिये, फट जाने दीजिये मेरी बुर को। इसने मुझे बहुत तड़पाया है। चलिए मैं तैयार हूँ! जल्दी चोदिये मुझे!
कह कर वह मेरे पैंट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाल कर हाथ से रगड़ने लगी। फिर उचक कर स्कर्ट उठाकर अपनी बुर के ऊपर मेरे सख्त लंड को रगड़ने लगी।
मैंने रूमा को देखा कि वह अपने स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल कर अपनी बुर से खेल कर रही थी।
अब मैं रिंकी के पेंटी के अन्दर हथेली डाल कर उसकी बुर में उंगली घुसा दिया तो वह आह आह करने लगी, कहने लगी- और अन्दर घुसाइए सर, एक नहीं दो-तीन उंगली डालिए प्लीज! आह सर, बहुत अच्छा लग रहा है। और, और अन्दर डालिए आह सर, अब मुझे जल्दी चोदिये! मुझे असली मजा दीजिये सर! मेरे बुर में पेल दीजिये इस लंड को। हाय, अब नहीं रुक सकती!
कह कर मेरे लंड को मुंह में भरकर होठों और जीभ से चूसने लगी। मैं पलट कर रूमा को देखा तो अपने बुर में उंगली डाल रही थी। मुझे देख कर वह शर्म से अपना मुंह छिपाने लगी।
मैंने अब रिंकी को अपने गोद में उठा कर दूसरे कमरे में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके सारे कपड़े एक एक कर उतार दिए, अब वह सिफ पैंटी में थी। मैं उस पर चढ़ कर उसकी चुचियों को मसलते हुए उसके होंठों को चूसने लगा। फिर उसकी बुर में उंगली डालकर आगे पीछे करता रहा।
अब रिंकी मेरा लंड पकड़ कर रगड़ने लगी। मैंने उठकर 69 के पोजीशन में आकर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और मैं अपने जीभ से रिंकी की बुर को चाटने लगा। वह उम्-उम् कर मजा लेने लगी।
कुछ देर बाद वह बोल उठी- सर, अब अपना लंड मेरी बुर में डालिए! सर जल्दी डालिए, आहा अब चोदो सर, चोदो न प्लीज!
अब मैं उठकर बैठ गया तो वह अपनी टांगों को फैला कर बोली- लीजिये डाल दीजिये इसमें अपना लंड!
मैंने अपने लंड की सुपारी उसकी बुर के मुँह पर रख दी तो वह शी-शी करने लगी, मेरा लंड पकड़ कर अपनी बुर के छेद पर ले आई और कहने लगी- जल्दी घुसाओ सर!
मैंने उसकी कमर पकड़ कर हल्का सा धक्का दिया तो मेरा लंड उसकी बुर में नहीं घुसा, उसका बुर इतना टाइट था कि लंड घुस नहीं पा रहा था। मैं उठ कर खड़ा हो गया तो वह मेरा हाथ पकड़कर खीचते हुए बोली- क्या हुआ? चोदो न सर!
मैं बोला- तुम्हारी बुर बहुत कसी हुई है। ऐसे नहीं घुसेगा! थोड़ा तेल लगाना पड़ेगा, मैं तेल लेकर आ रहा हूँ।
मैं कमरे से निकलने लगा तो देखा कि रुमा दरवाजे में खड़ी होकर सब देख रही थी। मैं रुमा की चूची पकड़ का खींचते हुए किचन में ले गया और उसकी बुर में उंगली डाल कर रगड़ने लगा। फिर उससे कहा- तुम रिंकी की पूरी चुदाई दरवाजे से देखती रहना!
मैंने तेल की शीशी उठाकर रुमा की बुर पर हाथ रखते हुए उसे दरवाजा पर खड़ा कर दिया और कमरे में घुसा तो देखा कि रिंकी आँख बंद कर अपनी बुर में उंगली कर रही थी। मैं फिर उसकी टांगें फैलाकर बीच में बैठ गया और तेल निकाल कर उसकी बुर के छेद में डाला और उंगली से तेल उसकी बुर के अन्दर करने लगा, दो उंगली ड़ाल कर उसकी बुर को तेल से चुपड़ दिया।
रिंकी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ कर छटपटाने लगी। फिर मैंने थोड़ा तेल अपने लंड पर लगाकर मालिश कर दिया। मैंने रुमा की ओर देखा तो वह अपनी बुर में उंगली कर रही थी और सबकुछ गौर से देख रही थी। रिंकी को कुछ पता नहीं था कि रुमा देख रही है।
अब मैं अपने लंड को रिंकी की बुर के छेद पर रख कर कमर से एक धक्का दिया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी बुर में फंस चुका था।
रिंकी चिल्लाई- नहीं सर, मत डालिए! बहुत दर्द हो रहा है! छोड़ दीजिये प्लीज! अभी नहीं बाद में! हाय मैं मर गई! निकालिए!’
मैंने उसी हालत में रहते हुए उसे समझाया- थोड़ा दर्द बर्दाश्त करो! बस थोड़ा दर्द सह लो, आखिर कभी भी तो चुदवाओगी ही! और तब भी दर्द करेगा! तो आज ही बर्दाश्त कर लो!’
कह कर उसे खूब प्यार से पुचकारने लगा तो वह मान गई और बोली- ठीक कीजिये जो करना है, पर जरा धीरे-धीरे! नहीं तो मैं मर जाऊँगी, फिर आप किसको चोदेंगे!’
मैंने साहस कर इस बार उसके मुंह पर हाथ कर एक करारा झटका दिया तो मेरा आधा लंड घुस चुका था, रिंकी छटपटाने लगी उसकी आँखों से आंसू निकल पड़े, पर मैं उसे दबोचे रहा और धीरे आधे लंड को आगे-पीछे करने लगा।
धीरे-धीरे उसका छटपटाना बंद हुआ, अब मौका देख कर मैंने एक और जोर का धक्का लगा दिया और पूरा लंड उसकी बुर में घुस चुका था।
रिंकी मुझे धक्का देकर अलग करना चाहती थी पर मैं उसे उसी पोज़ीशन में जकड़े रहा और कहा- बस रानी! अब दर्द नहीं करेगा! अब तुम जन्नत का मजा लोगी! बस मेरा साथ देती रहो’
और मैंने धीरे से थोड़ा सा अपने लंड को पीछे खिंचा और फिर उसी तरह जड़ तक घुसा दिया। तीन चार बार ऐसा किया तो वह आह आह करने लगी। मैं समझ गया कि अब उसे मजा आने लगा है। अब मैं स्पीड बढ़ाने लगा। कुछ देर बाद मैं महसूस किया कि रिंकी भी नीचे से धक्का देने लगी है।
फिर क्या था मैं सटासट, जोर से आगे-पीछे धक्का देने लगा।
अब वह बोलने लगी- हाँ सर, इसी तरह, हाय मेरे राजा कितना अच्छा, हाय घुसाओ जोर जोर से चोदो सर, खूब चोदो सर, फाड़ दो राजा, भरता बना दो मेरी बुर का! हाँ, ऐसे ही चोदो, चोदो, खूब चोदो, आह चोदते रहो सर, मैं आपकी हो गई सर, खूब मजा दे रहे हो, हाय आह-आह आह! मेरे सोना सर कितना अच्छा है.. सर अब मैं तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई। मेरी बुर का चिथड़ा निकाल दो, हाय जोर से, और जोर से, करो, करो हाय, चोदो जोर से चोदो, मारो धक्का, लो मैं भी धक्का देती हूँ चोदो, और जोर से और..जो र से च ओ दो चो दो हाय मैं गई! मैं गई राजा! हाय गई!
और वह झड़ गई।
मैं फिर भी उसे जोर जोर से धक्का लगाकर चोदता रहा। और मैं बोलने लगा- रिंकी रानी कैसा लगा, हाय मजा आया न, मैं बोला था न, जन्नत का सैर करा दूंगा। लो अब मैं भी गया, रानी हाय आ..अ..आ.’
और मेरा सारा वीर्य रिंकी की बुर में झड़ गया। मैं पांच मिनट तक रिंकी की बुर में लंड डाले रहा और उस पर लेटे रहा। फिर उठ कर लंड बाहर कर लिया। मैंने देखा कि रिंकी आँखे बंद कर सुध-बुध खोकर एक नशे में डूबी हुई है।
मैं उसे उसी अवस्था में छोड़कर रूमा, जो दरवाजे पर खड़ी थी, के पास जाकर उसे कस कर चूम लिया और कहा- कैसा लगा चुदाई का खेल?
तो वह शर्म से लाल हो गई।
मैं उसकी चूची पकड़कर क्लास वाले कमरे में ले गया और उसकी बुर में उंगली डाल कर तैयार करने लगा। वह भी मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी, मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा।
मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और वह उसे लॉलीपॉप जैसा चूसने लगी। इतने में रिंकी उस कमरे में आ गई। रूमा के साथ यह सब करते देख वह गुस्से में लाल हो गई और रूमा को एक चपत लगा कर धकेल दिया और बोली- रूमा तुमको सर के साथ इतना करने की इजाजत मैं नहीं दूंगी। सर सिर्फ मुझे चोदेंगे। सिर्फ मुझे। बस मैं तुम्हें सर से सिर्फ ऊपर तक की ही इजाजत दे सकती हूँ। खबरदार, जो इससे आगे बढ़ी। सर सिर्फ मेरे हैं!’
फिर दोनों ने ठीक से अपना अपना स्कूल ड्रेस पहना और आइने की मदद से बाल वगैरह ठीक किए। रिंकी ने मुझसे जोर से चिपक कर मुझे जबरदस्त चुम्बन दिया और बोली- सर, मैं तो डर गई थी, पर अब पता चला कि आपके लंड को लेकर मैं जन्नत पहुँच गई। मैं अभी भी उसी में खोई हुई हूँ। सर अब जब चाहें मुझे चोद सकते हैं। मैं तो दिन रात आप से चुदवाते रहती! पर मजबूरी है। जाना तो पड़ेगा ही, फिर मिलेगे, फिर चुदाई का खेल खेलेंगे। मुझे तो लग रहा है कि मैं आपके लंड को अपनी बुर में रख कर के ले जा रही हूँ, हाय सर, है आपका लंड!
कह कर जाते मेरे लंड पर किस कर ली और ‘बाई सर, बाई आपका लंड!’ कहते हुए मेरे लंड को मसल कर मुझे फिर किस देकर चली गई। Antarvasna
लेकिन मुझे इस संबंध में बहुत सारे ईमेल आये जिसमें पाठकों ने कहा था कि वे मेरी कहानियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इसलिए मुझसे भी रुका न गया और मैंने फिर से अपनी चुदाई की कहानी लिखना शुरू किया।
तो फ्रेंड्स, शादी के बाद मैंने चुदाई के खूब मजे लिए हैं, मेरे पति ने मुझे जमकर चोदा है।
मुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी।
मेरे पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं इसलिए काम के कारण कई दिनों तक भी शहर के बाहर रह जाते हैं।
जितने दिन वो घर पर नहीं होते हैं, मेरी चूत को लंड भी नहीं मिल पाता है और मैं तड़प जाती हूं।
मेरी आज की हॉट अंकल Xx कहानी इसी बारे में है।
बात तब की है जब हमारे घर के बगल वाले घर में एक परिवार रहने के लिए आया था।
उस फैमिली में एक अंकल, आंटी और उनका बेटा था।
वो अंकल वन विभाग में काम किया करते थे।
जॉब के चलते उनका ट्रांसफर होता रहता था और अब वो हमारे साथ वाले घर में आकर रह रहे थे। हमारी छतें मिली हुई थी.
उनका बेटा एक बैंक में काम करता था।
चूंकि वो हमारे पड़ोसी थे तो धीरे-धीरे बातचीत भी होने लगी; धीरे-धीरे आपस में आना-जाना भी होने लगा।
ऐसे ही एक दिन मैं छत पर सुबह-सुबह जल्दी कपड़े सुखाने चली गई।
मैंने देखा कि अंकल और उनका बेटा दोनों वहां योग, एक्सरसाइज वैगरह कर रहे थे।
मेरी नजर उन पर पड़ी तो हट नहीं पाई।
दोनों ने बदन पर बस शॉर्ट्स डाले हुए थे।
उन दोनों की छाती नंगी थी और जांघें भी नंगी थीं।
मेरा ध्यान कपड़े सुखाने में कम और उनके शरीर पर ज्यादा लगा हुआ था।
पांच मिनट बाद उनका बेटा उठा और ऑफिस का बोलकर वहां से चला गया।
मेरी नज़र बार-बार अंकल की तरफ ही जा रही थी।
कुछ देर बाद शायद अंकल ने मुझे देखा होगा तो उन्होंने मुझे गुड मॉर्निंग बोलकर विश किया।
मैंने भी मुस्कराते हुए उन्हें गुड मॉर्निंग विश की।
वो बोले- रोमा, आज इतनी सुबह-सुबह तुम यहाँ छत पर?
मैने कहा- हाँ अंकल, आज सुबह ही कपड़े धुल गए थे तो मैं इन्हें सुखाने के लिए तार पर डालने चली आई। आप क्या रोज इसी तरह यहाँ योग और एक्सरसाइज करते हैं?
(माफ करना दोस्तो, मैंने आप लोगों को अंकल का नाम नहीं बताया, अंकल का नाम अशोक राठौर था.)
अशोक अंकल- हाँ, मैं और मेरा बेटा, हम दोनों ही रोज सुबह योग और एक्सरसाइज करते हैं। ये हमारी दिनचर्या का हिस्सा है।
मैं- अंकल, आप की उम्र क्या होगी?
अशोक अंकल- मैं 48 साल का हूँ।
मैं- आपको देख कर लगता नही अंकल कि आप 48 साल के होंगे।
अशोक अंकल- क्या लगता है तुम्हें, मेरी उम्र क्या होगी?
मैं- यही कोई 38-40 साल की।
अशोक अंकल- नहीं, मैं 48 का ही हूँ। मेरा बेटा 25 साल का हो गया है। मैंने अपने आपको शुरू से ही काफी मेंटेन किया हुआ है योग और एक्सरसाइज करके, यही मैं अपने बेटे को भी सिखाता आ रहा हूँ।
मैं- सच में आप 48 के तो लगते ही नहीं हो।
अशोक अंकल- ठीक है, चलो तुम्हारी बात भी मान लेते हैं। अब मैं भी चलता हूँ, मुझे ऑफिस जाना है।
अंकल का गठीला बदन अब मेरी आंखों में बस गया था, मेरी चूत में आग लग गई थी।
मैं नीचे आकर अपने कमरे में आई तो पति सो रहे थे।
मैंने उनको सहलाकर जगाया और चोदने के लिए गर्म किया।
पति गर्म हो गए और उनका मूड भी अपनी प्यासी बीवी की चुदाई करने का बन गया।
वो मुझे नीचे लिटाकर मेरे ऊपर चढ़ गए।
लंड चूत में अंदर बाहर होने लगा तो मुझे बहुत मजा आने लगा।
मगर यहां चुदाई मेरे पति कर रहे थे और मैं ख्यालों में अंकल को सोच रही थी कि वो ही मुझे चोद रहे हैं।
उनके गठीले बदन को याद कर चुदने में और ज्यादा रस मिल रहा था मेरी चूत को!
अंकल के लंड को मैं कल्पना में ही सोच रही थी कि बदन इतना गठीला है तो लंड भी कितना मस्त होगा उनका!
कुछ दिन बाद मेरे हस्बेंड को अपने ऑफिस के काम से कहीं जाना पड़ गया।
कुछ दिन तो मेरे बिना चुदाई करवाए निकल गए लेकिन फिर मेरी चुदाई की वासना बढ़ने लगी।
अब मेरा मन मचलने लगा था।
रह-रहकर अब मेरे अंदर चुदाई की प्यास जग रही थी।
मुझे बस अब किसी का लंड चाहिए था।
तो फिर अब मेरे अंदर अंकल से चुदने का ख्याल आने लगा।
एक दिन मैं कुछ काम से अंकल के घर गई तो उनके घर का दरवाजा खुला हुआ ही था और अंदर से कुछ आवाजें आ रही थीं जो चुदाई की लग रही थीं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था।
मैंने किसी तरह की आवाज किए बिना आगे कदम बढ़ाए।
आवाजें अंकल के कमरे से ही आ रही थीं।
मैं दबे पैर कमरे के पास गई और देखा तो कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था।
अंदर का नज़ारा देख मेरे होश उड़ गए।
अंकल-आंटी आपस में बहुत ही जबरदस्त चूमा चाटी कर रहे थे और दोनों बहुत ही रोमांटिक मूड में थे।
यह देख मुझे तो वहाँ से चले जाना चाहिए था लेकिन मुझे मजा आने लगा।
ऊपर से मेरे अंदर अंकल का लंड देखने की प्यास भी लगी थी।
अंकल-आंटी पूरे नंगे थे।
इस तरह उन्हें पूरा नंगा देख मुझे उत्तेजना हो रही थी।
इधर मेरी भी चूत गीली होने लगी थी।
अंकल का मुंह आंटी की तरफ था तो अंकल की मुझे सिर्फ गांड ही दिख रही थी, अंकल का क्या गठीला शरीर था, एकदम मस्त! आंटी नीचे बैठ कर उनका लंड चूस रही थी।
कुछ देर बाद आंटी ने कहा- चलो अब चोदो मुझे!
तो अंकल कहने लगे- इतनी भी क्या जल्दी है! अभी मजे तो लेने दो!
फिर अंकल ने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी चूत चाटने लगे।
मुझे अभी तक अंकल के लंड के दर्शन नहीं हुए थे।
कुछ देर बाद अंकल ने आंटी की चुदाई चालू कर दी।
दोनों खूब मजे ले कर चुदाई कर रहे थे।
इधर मेरी चूत भी पूरी गीली हो चुकी थी।
मैं भी अपनी साड़ी उठाकर अपनी चूत को रगड़ने लगी।
चुदाई देख कर मुझे मज़ा आने लगा था।
कुछ देर बाद अंकल आंटी की चुदाई पूरी हो गई।
फिर जैसे ही अंकल मेरी तरफ मुड़े, मुझे उनके लंड के दर्शन हुए।
लंड काफी बड़ा था लेकिन अब वो कुछ ढीला हो गया था।
मगर ढीला होने के बाद भी लंड साइज में काफी बड़ा और मोटा था।
अंकल कमरे से बाहर आने के लिए दरवाजे की तरफ आये और मैं दरवाजे पर ही साड़ी ऊपर उठाए हुए चूत को रगड़ रही थी।
जैसे ही अंकल की नज़र मुझ पर पड़ी, मैंने भी उनको देख लिया और मैं तुरंत वहां से भागी।
जब मैं घर आई तो मेरी सांसें फूल रही थीं और मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
मैं थोड़ी घबरा गई थी क्योंकि मुझे अंकल ने देख लिया था।
अब क्या होगा ये सोचते हुए मैं बिस्तर पर लेट गई और थोड़ा रिलेक्स होने की कोशिश करने लगी।
फिर सोचने लगी कि अब मैं अंकल के सामने कभी नहीं जाऊंगी, और उनसे नज़रें भी नहीं मिलाऊंगी।
मगर फिर मैंने सोचा कि इसमें मेरी क्या गलती थी।
अगर वो लोग दरवाजा बंद किए बना चुदाई कर रहे थे तो इसमें उनकी ही गलती है।
मेरी जगह कोई और होता तो वो भी देख ही लेता।
वैसे भी लाइव चुदाई देखने का मौका कौन छोड़ता है।
फिर मैं तीन-चार दिन तक अंकल के घर नहीं गई, न ही उनसे मैंने नजरें मिलाईं।
कई दिन बाद छत पर अंकल-आंटी बैठे हुए चाय पी रहे थे।
मुझे देखकर उन्होंने चाय पीने का न्यौता दिया।
मैं बोली- नहीं, आप लोग पीजिए, मैं बस छत पर घूमने आई हूं, मौसम बहुत अच्छा है।
अंकल बोले- हां, मौसम तो है ही मस्त, इसलिए मैं और तुम्हारी आंटी यहां चाय पीने का मजा ले रहे हैं।
कुछ देर बाद आंटी वहाँ से चली गई.
तो अंकल ने मुझे बुलाया और पूछा- उस दिन तुम कुछ काम से आई थी क्या? फिर बिना कुछ बोले ही भाग गई?
ये सुन कर मैं घबरा गई।
मैं बोली- हां, आंटी से कुछ काम था।
अंकल बोले- तो क्या तुमने हमें सब कुछ करते हुए देख लिया था?
अंकल बहुत खुलकर सवाल कर रहे थे और मैं पसीना पसीना हो रही थी शर्म से!
फिर किसी तरह मैंने भी हिम्मत की और बोली- हां, मैंने आप लोगों को वो सब करते हुए देखा था। आप तो काफी स्टेमिना रखते हो। बहुत देर से मैं देख रही थी।
अंकल बोले- ओह्ह, तभी तो तुम चूत रगड़ने लगीं थी! लगता है कि तुम्हारी चूत ने पानी भी छोड़ दिया होगा।
मैंने भी हां में सिर हिला दिया।
धीरे-धीरे अंकल और मैं अब खुल गए और हमने खुलकर बातें कीं।
अब हम दोनों हंस रहे थे।
इतने में ही आंटी वहां आ गईं।
तभी अंकल ने बात को घुमा दिया।
अंकल से सेक्स की बात करने के बाद मेरी अब चूत चुदवाने की इच्छा और ज्यादा तीव्र हो गई थी।
मैंने सोच लिया था कि जैसे ही मौका मिलेगा, मैं अंकल से चुदाई करवा लूंगी।
अब मेरा ध्यान अंकल में रहने लगा था।
अगली सुबह मैं जानबूझकर कपड़े सुखाने छत पर गई।
रोज की तरह अंकल और उनका बेटा वहां योग-व्यायाम कर रहे थे।
मैं उन दोनों को बहाने से देखने लगी।
दोनों ने सिर्फ शॉर्ट्स पहन रखे थे।
कुछ देर बाद अंकल की नजर भी मेरे ऊपर गई।
मैंने पहले ही साड़ी को अपनी नाभि से नीचे बांध लिया था ताकि अंकल मेरी पतली कमर का नजारा ले सकें।
मैंने जानबूझकर ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि चूचियों की शेप और निप्पलों का आकार अंकल को सही से दिख जाए।
मैं अब ध्यान दे रही थी कि अंकल अब मेरी ओर ज्यादा देख रहे थे और अपने व्यायाम पर कम ध्यान दे रहे थे।
कुछ ही देर बाद मैंने नोटिस किया कि अंकल का लंड टाइट हो गया था।
उनके शॉर्ट्स में से लंड नजर भी आने लगा था।
अंकल अब जानबूझकर अपने लंड के आसपास सहला रहे थे और देख रहे थे कि मेरी नजर भी उनके लंड पर है या नहीं!
इधर मैं भी अंकल की हरकतों को पूरे ध्यान से देख रही थी।
अंकल का लंड पूरा टाइट होकर अब तना हुआ अलग से दिखने लगा था।
हम दोनों अब एक दूसरे को पूरी लाइन दे रहे थे।
दोनों के मन में ही शायद चुदाई का ख्याल चल रहा था।
कुछ देर बाद उनका बेटा उठकर चला गया।
मैं भी इसी पल के इंतजार में थी।
बेटे के जाते ही अंकल ने मुझे आवाज देकर पास बुला लिया।
पास पहुंची तो उन्होंने गुड मॉर्निंग कहा और मैंने भी जवाब दिया।
फिर वो बोले- क्या कर रही हो?
मैंने कहा- कपड़े सुखाने आई थी अंकल!
वो बोले- लेकिन यहां तो कुछ गीला हो गया रोमा!
कहकर अंकल ने अपने लंड को सहला दिया।
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मैं मुस्करा कर हंसने लगी।
फिर वो बोले- कल की बात अधूरी रह गई थी।
मैंने कहा- कौन सी बात अंकल? (मुझे अच्छी तरह याद था कि कल चुदाई की बात हुई थी, लेकिन फिर भी मैं जानबूझकर अनजान बन रही थी)
वो बोले- वही बात, जब तुमने मुझे और तुम्हारी आंटी को चुदाई करते हुए देख लिया था!
मैंने शर्माते हुए कहा- तो अंकल जब कोई दरवाजा खोलकर बिना किसी की परवाह किए ऐसे चुदाई करेगा तो सामने वाले की नजर कैसे नहीं जाएगी! वैसे भी आपका बदन इतना गठीला और जवान लगता है कि मैं भी देखने से रोक नहीं पाई। आपको देखकर तो मेरी भी (चूत) गीली हो गई थी।
इस बात पर वो हँस दिए।
फिर बोले- तो कैसा लगा तुम्हें वो सब देखकर?
मैंने कहा- बहुत अच्छा, बड़ा मजा आ रहा था आप दोनों की चुदाई देखकर! जब आंटी की दोनों टांगें आप कंधों पर रखवाकर जोर-जोर से शॉट मार रहे थे, और आंटी मजे लेकर चुद रही थी तो बहुत मजा आ रहा था। लेकिन …
इतना कहकर मैं रुक गई।
अंकल बोले- लेकिन क्या …
मैंने कहा- कुछ नहीं।
वो बोले- बताओ ना रोमा … ऐसी कौन सी बात है जो छुपा रही हो!
मैं बोली- अंकल … मैंने आपकी पूरी चुदाई देख ली, लेकिन लंड नहीं देख पाई। मुझे बस आपके चूतड़ ही दिख रहे थे। तभी आप मेरी ओर मुड़ गए थे और मैं वहां से भाग आयी थी।
अंकल इस बात पर हंसने लगे।
फिर उन्होंने जो किया, मुझे उस पर यकीन नहीं हुआ।
उन्होंने यहां-वहां देखा और एकदम से अपने शार्ट्स को नीचे खींच दिया।
उनका लंड एकदम से फनफना रहा था।
मैं लंड देखकर जैसे सुन्न सी हो गई।
फिर मैं साथ ही घबरा भी गई।
वो बोले- डरो नहीं, कोई नहीं है देखने वाला … आराम से देख लो!
अंकल का लंड देखकर मेरे मुंह में पानी आने लगा।
लंड बड़ा ही दमदार, मोटा और एकदम से सख्त था।
इससे पहले मैं कुछ बोलती, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे नीचे खींच लिया और एक हाथ से मुझे आगोश में समाते हुए मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया।
उनके लंड को छूते ही मेरे बदन में करंट दौड़ गया।
लंड एकदम से रॉड जैसा सख्त हो गया था।
लेकिन मैं बहुत घबरा रही थी और उठने लगी।
वो बोले- अरे कहां भाग रही हो, कोई नहीं है यहां, तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा क्या इसे छूकर? देखो कैसे तड़प रहा है तुम्हारे लिए!
मुझे अंकल का लंड पकड़ने में बड़ा मजा आ रहा था लेकिन मैं कुछ कह नहीं रही थी।
फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर ऊपर नीचे करना शुरू किया।
मैं भी अंकल के लंड पर हाथ ऊपर नीचे चलाने लगी।
इससे अंकल को भी मजा आने लगा और वो आहें भरने लगे।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
डर तो बहुत लग रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।
मैं और जोर जोर से अंकल का लंड हिलाने लगी।
उनकी सिसकारियां तेज हो गईं।
वो अब कहने लगे- आह्ह … रोमा … क्या नर्म हाथ हैं तुम्हारे, और जोर से चलाओ हाथ … आह्ह … हाय … मेरी जान!
अंकल का हाथ मेरी पीठ पर से होता हुआ दूसरी तरफ मेरी चूची तक पहुंच कर उसे दबाने की कोशिश कर रहा था।
मेरा भी मन कर रहा था कि ब्लाउज उतार कर अंकल से यहीं चूचियां भिंचवा लूं लेकिन छत पर इतना रिस्क नहीं ले सकती थी।
दो मिनट के बाद ही अंकल के लंड ने माल फेंक दिया और मेरा पूरा हाथ उनके वीर्य में सन गया।
अंकल ने जल्दी से पास पड़े हैंड टावल से मेरा हाथ पौंछा और अपना लंड भी साफ कर लिया।
मैं भी फटाक से वहां से उठी और बाल्टी उठाकर नीचे आ गई।
मेरी चूत में पानी आ गया था।
मुझे चूत में गीलापन बिना हाथ लगाए ही महसूस हो गया था।
अब चूत को लंड लेने की खुजली मची थी।
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