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Massage Girl in South Delhi: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in South Delhi who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in South Delhi that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The South Delhi massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in South Delhi who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your South Delhi massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This South Delhi massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in South Delhi who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in South Delhi employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in South Delhi helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in South Delhi

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in South Delhi at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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(Hot Sisters Chudai Kahani) चुदाई की कहानी

हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई की कहानी में पढ़ें कि तीन सगी बहनें चुदाई के लिए तड़प रही थी. आखिर वे पढ़ाई के बहाने अपने प्रोफेसर के घर गयी. वहां वे तीन सिस्टर्स कैसे चुदी?

दोस्तो, तीन बहनों की चुदाई की कहानी के पहले भाग
चुदाई की प्यासी तीन सगी बहनें
में मैंने अब तक आपको बताया था कि प्रोफेसर आलोक ने सोनम की चुत को उसकी पैंटी के ऊपर से ही सूंघना शुरू कर दिया था. सोनम भी आलोक के लंड को चाट रही थी.

अब आगे हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई कहानी:

जैसे ही सोनम आलोक का लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगी, आलोक ने सोनम की पैंटी को भी उतार दिया और सोनम को पूरी तरह से नंगी कर दिया.

सोनम नंगी होने से शर्मा रही थी और उसने अपना चेहरा आलोक के सीने में छिपा लिया.
इसी दौरान आलोक ने सोनम की चूचियों को चूसना फिर से चालू कर दिया.
सोनम की चूची अब पत्थर के समान कड़ी हो गई थीं.

तब आलोक ने सोनम को फिर बिस्तर पर चित लिटा दिया और उसकी बुर को अपनी जीभ से चाटने लगा; अपनी जीभ सोनम की बुर के अन्दर बाहर फिराने लगा.

अपनी बुर में आलोक की जीभ घुसते ही सोनम को बहुत मजा आने लगा. वो जोर से आलोक का सिर अपने बुर के ऊपर पकड़ दबाने लगी और थोड़ी देर के बाद अपनी कमर ऊपर नीचे करने लगी.

आलोक चुदाई के मामले में बहुत माहिर खिलाड़ी था, वो सोनम की कसमसाहट से समझ गया कि अब सोनम की बुर में लंड पेलने का समय आ गया है.
उसने सोनम का मुँह चूम कर धीरे से उसके कान पर मुँह रख कर पूछा- सोनम रानी, अपनी कमर क्यों उछाल रही हो? क्या तुम्हारी चूत में कुछ कुछ हो रहा है?

सोनम बोली- हां मेरे डियर सर, कुछ कुछ नहीं … मेरी बुर में चींटियां सी रेंग रही हैं … मेरा सारा बदन तप रहा है, अब तुम ही जल्दी से कुछ करो.
आलोक ने पूछा- क्या तुम अपनी चूत को मेरे लंड से चुदवना चाहती हो?

सोनम ने झुंझला कर कहा- अरे यार, आपने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी कपड़े भी उतार दिए और अब भी पूछ रहे हो कि क्या चुदाई करवानी है … मुझे जल्दी से आपका लंड मेरी चुत में चाहिए.
आलोक ने ये सुना तो उसने सोनम से बोला- ठीक है मेरी जान, अब मैं तुमको चोदूंगा, लेकिन तुमको पहले पहल थोड़ा दर्द होगा, पर मैं तुम्हें बहुत ही प्यार से और धीरे धीरे चोदूंगा … मैं कोशिश करूंगा कि तुमको दर्द महसूस न हो.

अब आलोक उठा और सोनम के दोनों पैर उठा कर घुटनों से मोड़ दिए.
उसने सोनम के दोनों पैरों को अपने हाथों से फैला दिया.

इसके बाद उसने ढेर सारा थूक अपने हाथ में लेकर पहले अपने लंड में लगाया, फिर सोनम की बुर पर लगाया.

थूक से सनी बुर के छेद पर आलोक ने अपने खड़े लंड को रखा और धीरे से कमर को आगे बढ़ा कर अपना सुपारा सोनम की बुर में घुसा दिया और सोनम के ऊपर लेटा रहा.
अनचुदी बुर में लंड घुसा तो सोनम की चुत परपराने लगी.

मगर अभी लंड ने चुत को चीरा नहीं था तो सोनम को ख़ास दर्द नहीं हो रहा था.

थोड़ी देर के बाद जब सोनम नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी तो आलोक ने धीरे धीरे अपना लंड सोनम की बुर में पेलना शुरू किया.

इससे सोनम का बदन दर्द से कांपने लगा और वो चिल्लाने लगी- आह बाहर निकाल लो सर … आह मेरी बुर फटी जा रही है. हाय मैं मर गई … मेरी बुर फटी जा रही है. आप तो कह रहे थे कि थोड़ा सा दर्द होगा और आप आराम आराम से चोदोगे. मुझे नहीं चुदवाना है, आह … आप अपना लंड बाहर निकालो.

आलोक ने सोनम के मुँह में अपना हाथ रख कर कहा- बस मेरी रानी बस, अभी तुम्हारा सारा दर्द खत्म हो जाएगा और तुम्हें मज़ा आने लगेगा. बस थोड़ी सी देर और बर्दाश्त करो.
सोनम - आह उई … मेरी बुर फटी जा रही है … और आप कह रहे हो कि थोड़ी देर और बर्दाश्त करो. अरे मुझे नहीं चुदवानी है अपनी बुर, आप अपना लौड़ा मेरी बुर से बाहर निकालो!

सोनम की आंखों से आंसू आ गए.

इतनी देर में आलोक अपनी कमर उठा कर एक जोरदार धक्का मारा और उसने महसूस किया कि उसका सारा का सारा लंड सोनम की बुर में घुस गया है और सोनम की बुर से खून निकल रहा है.

सोनम दर्द के मारे तड़पने लगी और आलोक को अपने हाथों से अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी.

आलोक सोनम को मज़बूती से पकड़े हुए था और उसका हाथ सोनम के मुँह के ऊपर था इसलिए सोनम कुछ ना कर सकी .. वो बस छटपटा कर रह गयी.

आलोक ने अपना लंड सोनम की बुर के अन्दर ही थोड़ी देर के लिए रहने दिया.
उसने सोनम की एक चूची को अपने मुँह में लेकर जीभ से सहलाना शुरू कर दिया और दूसरी चूची को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर बाद सोनम की चुत का दर्द गायब हो गया और अब उसे मज़ा आने लगा. उसने नीचे से अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.

आलोक भी धीरे धीरे अपनी कमर हिला हिला कर अपना लौड़ा सोनम की बुर में अन्दर-बाहर करने लगा.

कुछ ही देर में सोनम ने भी अपनी गांड उठा कर जोरदार धक्के देना शुरू कर दिए.

जब आलोक का लंड उसकी बुर में अन्दर घुसा होता तो सोनम उसे कस कर जकड़ लेती और अपनी बुर को सिकोड़ लेती थी.
इससे चुदाई की रगड़ उसे भरपूर मजा दे रही थी.

यह महसूस करके आलोक भी समझ गया कि सोनम को चुदाई का मज़ा आने लगा है.

ये समझते ही आलोक ने अपनी कमर को ऊपर खींच कर अपना पूरा का पूरा लंड सोनम की बुर से बाहर निकाला … उसने सिर्फ लंड का सुपारा ही फांकों में फंसा छोड़ा था.
फिर उसने एक जोरदार झटके के साथ अपना लंड सोनम की बुर में पेल दिया.

इस झटके से सोनम बुरी तरह से कलप उठी और आलोक से लिपट गई.

उसने आलोक को अपने हाथ और पैर से जकड़ लिया था. सारे कमरे में सोनम और आलोक की सिसकारियां और उनकी चुदाई की ‘फच … फच .. फट फट …’ की आवाज ही गूंज रही थी.

सोनम अपने मुँह से सीत्कार रही थी- अह अह … ओह हां और जोर से आह और जोर से … हां ऐसे ही अपना लंड मेरी बुर में पेलते रहो … मजा आ गया सर.

आलोक भी पूरी गति से सोनम की बुर में अपना लंड अन्दर-बाहर करके उसको चोद रहा था.
सोनम बुरी तरह से आलोक से चिपकी हुई थी.

काफी देर तक सोनम की बुर चोद रहे आलोक का लंड अब झड़ने वाला हो गया था.
उसने 8-10 धक्के काफी जोरदार लगाए और उसके लंड से ढेर सारा पानी सोनम की बुर में गिर कर समा गया.

आलोक के झड़ जाने के साथ ही साथ सोनम की बुर ने भी पानी छोड़ दिया.
उसने अपने हाथ पैर से आलोक को जकड़ लिया.

आलोक हांफ़ते हुए सोनम के ऊपर गिर गया और थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.

फिर सोनम उठ कर अपनी बुर में हाथ लगाए हुए बाथरूम की तरफ़ चली गयी.

आलोक इस समय बुरी तरह से थक चुका था और वो बेड पर पड़ा रहा लेकिन उसका लंड अभी भी खड़ा था.

उधर मीनाक्षी और डिंपल दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से चूम चाट रही थीं.

पांच मिनट बाद आलोक ने आंखें खोलीं और उन दोनों को इस तरह से खेलते देखा तो वो अपनी जगह से उठ कर उन दोनों के पस चला गया.

वो मीनाक्षी की चिकनी जांघ पर अपना हाथ फेरने लगा.

मीनाक्षी जो पहले ही मदहोश थी, अपने पैर पर आलोक का हाथ लगते ही अपने आप पर काबू नहीं रख सकी.
उसने डिंपल को छोड़ दिया और वो आलोक की तरफ़ मुड़ गयी.

उसके सामने आलोक बिल्कुल नंगा अपना खड़ा लंड लिए खड़ा था.

आलोक एक बार फिर से चुत चोदने के मूड में आ गया था.

मीनाक्षी ने आलोक के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और अपना मुँह उसके लंड पर रगड़ने लगी.

आलोक का लंड अब भी सोनम की चूत के खून और रस से भीगा हुआ था.
उसने मीनाक्षी को अपने दोनों हाथों में बांधा और उसे चूमने लगा.

आलोक का हाथ मीनाक्षी की नंगी सेक्सी जवानी पर घूमने लगा था. उसका हाथ मीनाक्षी की चूचियों पर गया और वो उसकी दोनों कड़क चूचियों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा.

मीनाक्षी अपनी चूचियों पर आलोक का हाथ पाते ही और जोश में आ गयी और उसने अपना हाथ आलोक के खड़े लौड़े पर रख दिया.

आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की मुट्ठी में पाते ही उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.
वो दूसरी चूची को अपने हाथ में लेकर उसका निप्पल मसलने लगा.

कुछ ही देर में मीनाक्षी ने आलोक के लंड को अपने हाथों में पूरा ले लिया और उसके सुपारे को एक बार खोल कर बंद किया.

उसे लंड देख कर गर्मी चढ़ गई और एकाएक मीनाक्षी ने आलोक के लंड के सुपारे को अपने मुँह में भर लिया.
वो लंड चाटने लगी.

जैसे ही मीनाक्षी ने आलोक का लंड अपने मुँह में लिया, वैसे ही आलोक ने अपनी कमर को हिला कर अपना लंड मीनाक्षी के मुँह के अन्दर पेल दिया.

वो बोला- ले ले मेरी रानी … मेरा लंड अपने मुँह में लेकर इसको खूब चूस … इसके बाद मैं इसको तुम्हारी चूत में डाल का इसे चूत चुसाऊंगा.

मीनाक्षी ने अपने मुँह से आलोक का लंड निकाल कर कहा- बस सिर्फ मेरी चूत से ही अपना लंड चुसवाओगे, गांड से नहीं? मैं तो तुम्हारा लंड अपनी चूत और गांड दोनों से खाऊंगी. क्या तुम मुझको अपना लंड दोनों छेदों में खिलाओगे?

आलोक की तो मानो लॉटरी निकल आई थी. वो तो अब तक तीन छेद ही समझ रहा था, जबकि उसे अब छह सील बंद छेदों की जुगाड़ दिखाई देने लगी थी.

थोड़ी देर के बाद आलोक ने मीनाक्षी को पलंग पर ले जाकर चित करके लेटा दिया और उसके पैरों के पास बैठ कर उसकी सलवार को खोलने लगा.
सलवार खोलने में मीनाक्षी ने भी आलोक को मदद की और नाड़ा खुलते ही उसने अपनी गांड उठा कर सलवार को नीचे सरका दी, फिर अपनी टांगों से उसे अलग कर दिया.

सलवार उतरने के बाद आलोक ने मीनाक्षी की पैंटी को भी इसी तरह खींचते हुए उतार दिया.

अब मीनाक्षी की गुलाबी कुंवारी चूत उसकी संगमरमर सी चिकनी जांघों के बीच चमकने लगी.

आलोक मीनाक्षी की गुलाबी चूत को अपनी दम साधे देखने लगा और अपनी जीभ होंठों में फेरने लगा.

मीनाक्षी ने आलोक को वासना भरी नजरों से देखा और अपनी चुत को हल्की सी जुम्बिश दी तो आलोक ने झुक कर मीनाक्षी की चूत पर चुम्मा धर दिया और अपना जीभ निकाल कर उसकी चूत की घुंडी को तीन-चार बार चाट दिया.

इससे मीनाक्षी की मादक आह निकल गई; उसकी चुत को मानो जन्नत का सुख मिल गया था.

अब आलोक ने मीनाक्षी की टांगों को फ़ैलाया और ऊपर उठा कर घुटनों से मोड़ दिया.

मीनाक्षी को इस वक्त लंड का इंतजार था.

आलोक ने भी देर नहीं की … उसने अपना लंड मीनाक्षी के चूत के मुहाने पर रख दिया.

इतना करने के बाद आलोक मीनाक्षी के ऊपर झुक गया और उसकी चूचियों को चूसने लगा, भंभोड़ने लगा.
मीनाक्षी मस्त होने लगी.

नीचे उसकी चुत पर लंड की गर्मी मजा दे रही थी और ऊपर चूचियों को चुसवाने का सुख मिल रहा था.

उसके मुँह से हल्के स्वर में कामुक आहें निकलने लगीं.

थोड़ी देर के बाद आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की चूत की फांकों में टच किया और चुत में लंड रगड़ने लगा.

लंड के स्पर्श से मीनाक्षी चुदास से भर उठी और अपनी कमर उठा उठा कर आलोक का लंड अपने चूत में लेने की कोशिश करने लगी.

जब मीनाक्षी से नहीं रहा गया तो वो बोली- अब क्यों तड़पाते हो, कब से आपका लंड अन्दर लेने की लिए मेरी चूत बेकरार है और आप अपना लंड सिर्फ मेरी चूत के ऊपर ऊपर ही रगड़ रहे हो. अब जल्दी करो और मुझको चोदो, फाड़ दो मेरी कुंवारी चूत को. आज मैं लड़की से औरत बनना चाहती हूँ, अब ज्यादा परेशन मत करो. जल्दी से मुझे चोदो और मेरी चूत की आग को बुझा दो.

मीनाक्षी की इतनी सेक्सी मिन्नत सुनते ही आलोक एक तकिया बेड से उठा कर मीनाक्षी के चूतड़ों के नीचे लगा दिया, जिससे मीनाक्षी की चुत और ऊपर को उठ गई और खुल गयी.
लंड ने भी चुत की फांकों में से काफी रस निकाल दिया था. चुत एकदम रसीली हुई पड़ी थी.

आलोक ने अपने लंड से एक जोरदार धक्का मीनाक्षी की चूत में दे मारा.

चिकनाई के कारण उसका पूरा लंड सरसराता हुआ मीनाक्षी की चूत में जड़ तक घुस गया.
मीनाक्षी के मुँह से चीख निकल गयी और उसकी चूत से खून निकलने लगा.

लेकिन उसे इस बात का पता ही नहीं चला कि खूनाखच्ची हो गई है.
उसे तो भयंकर वाला दर्द हो रहा था इसलिए मीनाक्षी ने आलोक को जोरों से जकड़ लिया और अपनी टांगें आलोक की कमर पर कस दीं.

लंड चुत की जड़ में ठोकने के बाद आलोक ने लंड की पोजीशन को स्थिर कर दिया और वो मीनाक्षी की एक चूची चूसते हुए एक हाथ से दूसरी चूची की घुंडी को मसलने लगा.

धीरे धीरे मीनाक्षी का दर्द कम होने लगा और उसकी गर्मी फिर से बढ़ने लगी.
कोई दो मिनट बाद मीनाक्षी खुद अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी.

आलोक ने भी अब अपनी कमर चलानी चालू कर दी और वो मीनाक्षी की चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा.

मीनाक्षी की चुत मोटे लंड के कारण काफी परपरा रही थी और इसी कारण से वो छटपटा रही थी. मगर उसे अपनी बहनों के जैसे चुत फड़वाने की बेचैनी थी इसलिए वो दांत भींच कर दर्द को सहन करने लगी.

हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई की कहानी के अगले हिस्से में मीनाक्षी की आगे की चुदाई लिखूंगा … आप मेरी इस सेक्स कहानी के लिए अपने कमेंट्स करना न भूलें.

Hindi Sex Stories

मैं मडगाँव, गोआ स्टेशन पर उतरी। ‘जो’ लपक Hindi Sex Stories कर मेरी बोगी के आगे आ गया और मेरा सामान सामने वाले रेस्टोरेन्ट पर रख दिया। फिर वहां से लपक कर दूसरी बोगी में गया और वहां से एक जोड़े को और ले कर आ गया।

मैं उन्हें जानती थी, अमन जो का पुराना मित्र है और गीता अमन की पत्नी। जो ने बताया कि उन्हें भी मैंने गोआ घूमने के लिये बुला लिया था

हम चारों स्टेशन से बाहर आ कर कार में बैठ गए। जो वहाँ से अपने घर ले गया। सुबह का समय था हमने चाय-नाश्ता किया। फिर घूमने का कार्यक्रम बनाया। गोआ अपने आप में कोई बड़ी जगह नहीं है। यहाँ से मात्र ३५ किलोमीटर दूर पंजिम है और यहाँ कुछ ही दूर पर वास्कोडिगामा है। चूँकि आज हमारे पास घूमने के अलावा कोई काम नहीं था, सो हमने पंजिम घूमने का कार्यक्रम बना लिया। जो ने वहाँ पर किसी को फ़ोन किया और रवाना हो गये।

दिन के ११ बज रहे थे हम लोग बीच पर पहुँच गए थे। समुद्र का किनारा बहुत ही सुहाना लग रहा था… लहरें बार-बार किनारे से टकरा कर लौट रहीं थीं। हम सभी लगभग १२ बजे तक वहाँ रहे तभी जो को एक आदमी ने कुछ कहा और लौट गया।

“चलो…! लँच तैयार है…! “

सभी ने अपना सामान एकत्र किया और एक होटल की तरफ़ चल दिये। होटल पहुँच कर वहाँ लँच लिया और फिर जो हमें ऊपर वाले भाग में ले गया… ऊपर कुछ कमरे थे उसने खोल दिये और सभी से थोड़ा आराम करने को कहा। यात्रा की थकान तो थी ही, सभी आराम करने क्या गये कि गहरी नींद में सो गये।

शाम को जो ने सभी को जगाया और कॉफी पिलायी। समय देखा तो ५ बज रहे थे। हम सभी फ्रेश हो गये थे सो अब बीच पर दुबारा पहुँच गये। सभी ने स्वीमिंग सूट पहन लिए थे। मैं और गीता कम कपडों में थी उसका फ़ायदा जो और अमन दोनों ही उठा रहे थे। जो तो पहले से ही मुझ पर मरता था। पर दिखाता ऐसे था कि जैसे सिर्फ़ दोस्त ही हो। वो मेरे शरीर के एक-एक अंग का भरपूर जायज़ा लेता था। मैं भी कपड़े ऐसे ही पहनती थी जिसमें जो मेरे उभार, कटाव और गहराईयों को नाप सके। आज फिर उसे मौका मिल गया। अमन और गीता तो लहरों में खेलने लगे और मेरा पार्टनर जो बन गया। आज हम कुछ ज्यादा ही मस्ती कर रहे थे। एक दूसरे को छेड़ भी रहे थे। कुँवारेपन का मजा बहुत ही रोमांटिक होता है।

लहरें बढ़ने लगी थी… पानी का उछाल भी बढ़ रहा था। आकाश भी बादलों से ढक गया था। सुरक्षा गार्ड ने आगाह कर दिया कि अब बीच छोड़ दो… शाम ढलने लगी थी। हमने वापस लौटने का विचार किया। बादल चढ़ आए थे, किसी भी वक्त पानी बरस सकता था। हम लोग जल्दी से सामने वाले होटल में पहुँचने की कोशिश करने लगे। बूँदा-बाँदी शुरू हो चुकी थी… होटल में पहुँचते ही बरसात तेज़ होने लगी। जो ने कहा कि बरसात बन्द हो तब तक सभी लोग खाना खा लेते हैं। हमें जो का सुझाव पसन्द आया। डिनर करके जो ने बाहर का जायज़ा लिया तो बरसात तेज़ हो रही थी। होटल के मालिक ने जो को चाबी ला कर दे दी और कुछ समझाया।

जो ने कहा,”आज तो यहीं सोना पड़ेगा। रास्ता भी बन्द हो गया है… चलो सभी ऊपर उन्हीं कमरों में चलो…”

मजबूरी थी रुकने की, पर हमें उससे कोई मतलब नहीं था… हम तो आये ही घूमने के लिए थे। अमन और गीता किनारे वाले कमरे में चले गये… मैंने बीच वाला कमरा ले लिया… और जो ने दूसरी तरफ़ वाला कमरा ले लिया पर जो मेरे कमरे में आ गया। उसकी फ़ेवरेट जिंजर वाईन ले कर बैठ गया। दो पेग मैंने भी लिये। लगभग ११ बजे मैंने जो को गुडनाईट कह कर बिस्तर में सो गयी।

अचानक मेरी नींद खुल गयी। कोई मेरे शरीर को सहला रहा था। मुझे अच्छा तो लगा… पर कौन था, ये… शायद जो था। मैंने अंधेरे में देखने की कोशिश की पर एकदम अंधेरा था। मैं ज्योंही हिली सहलाना बन्द हो गया।

मैंने धीरे से आवाज दी,”जो ! जो !”

पर कोई उत्तर नहीं। मैंने साईड-लैम्प जलाया तो वहां कोई नहीं था। शायद मेरा सपना था। मैं फिर से पसर कर सो गयी। मेरी नींद फिर खुल गयी। मेरे चूतड़ों को किसी ने दबाया था। और अब वो चूतड़ों की दरार में हाथ घुसा रहा था।

“हाँ जी… जो ! पकड़ा गये ना…” जैसे ही मैंने लाईट जलाई वहाँ कोई नहीं था। पर जो के कमरे का परदा हिल रहा था। बरसात बन्द हो चुकी थी।

मैं उठ कर दरवाजे तक गई और झाँक कर देखा तो जो तो आराम से सो रहा था… मैने सोचा- साला ! जो ! नाटक कर रहा है…! रुकता तो क्या हो जाता… घूमने का और चुदाई का दोनों का ही मजा ले लेते। मैं वापस आ गयी और सोचा कि इस बार तो पकड़ ही लूँगी। मैंने लाईट बन्द कर दी… पर अब नींद कहाँ… थोड़ी ही देर में किसी ने मेरे बोबे सहलाये… मैंने तुरन्त ही उसके हाथ पकड़ लिये।

“अब तो… जो पकड़े ही गये ना…!”

“श्श्श्श्श्शीऽऽऽऽऽऽऽ चुप रहो… और अपनी आँखें बन्द कर लो… प्लीज़… मुझे शरम आती है !” उसने फ़ुसफ़ुसाते हुए कहा। उसने एक रूमाल मेरे चेहरे पर डाल दिया।

मैंने कहा,”जो… तुम कुछ भी करो ना… मजा तो आएगा… लाईट जला लेते हैं…!”

उसकी ऊँगली मेरे होंठों पर आ गई यानि चुप रहूँ…। उसने हल्के-हल्के मेरी चूचियाँ दबानी शुरू कर दीं। मैं बहुत दिनों से चुदी नहीं थी। इसलिये मुझे बहुत ही उत्तेजनापूर्ण लगने लगा था। उसने मेरा टॉप ऊपर उठा दिया और मेरे चूचुक चूसने लगा। मेरे मुँह से हाय निकल पड़ी। उसने मेरी पैन्ट उतार दी… और मेरी चूत को सहलाने लगा। मेरा उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो रहा था। मैंने अपनी दोनो टाँगें फ़ैला दीं। मुझे लगा कि अब वो मेरी टांगों के बीच में आ गया है। उसके लण्ड का अहसास मुझे चूत पर होने लगा, उसका सुपाड़ा मेरी चूत पर टिक ही गया। मेरी तो बरदाश्त से बाहर हो रहा था। मैने अपनी चूत उछाल दी… नतीजा ये हुआ कि उसका गीला सुपाड़ा मेरी चिकनी और गीली चूत में फ़क्क से घुस गया। मुझे लगा कि उसका लण्ड साधारण लण्डों से मोटा था और शायद लम्बा भी था। बेहद गरम और कठोर लोहे जैसा। मेरी चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ गहराई में बैठ गया। मैं इतना तगड़ा लण्ड पा कर निहाल हो गयी।

“हाय जो…… क्या लन्ड है यार… इतना मोटा… हाय इतना लम्बा… तुने तो आज मुझे मस्त कर दिया…”

उसका लण्ड फिर से बाहर निकला और फिर से सरसराता हुआ अन्दर बैठ गया… मैंने जोश में रुमाल हटाने की कोशिश की पर उसने तुरन्त ही फिर से मेरे मुँह को ढाँक दिया। मेरा शरीर उसके नीचे दबा हुआ था। मेरे शरीर को दबने से पूरी संतुष्टि मिल रही थी। उसका लण्ड अब एक ही स्पीड से अन्दर बाहर चल रहा था। मेरी चूत भी उसके मोटे लण्ड की वजह से टाईट थी… चूत की दीवारों पर घर्षण बड़ा ही मीठी-मीठी गुदगुदी दे रहा था। उसके हाथ मेरी चूचियों को मसक रहे थे… मसल रहे थे… चूचकों को खींच रहे थे।

“हाय जो… मर गयी, राम रे… कितना मज़ा आ रहा है… कैसा घुस रहा है चूत में…”

“श्शशऽऽऽ मत बोलो कुछ भी……” वो फ़ुसफ़ुसाया। उसकी फ़ुसफ़ुसाहट वाली आवाज़ मुझे अनजानी सी लगी… फिर लगा कि जो ने ज्यादा पी ली होगी। उसका लण्ड मेरी चूत में अन्दर-बाहर आता जाता बहुत ही आनन्द दे रहा था। उसके चूतड़ गज़ब की तेज़ी से चल रहे थे… मैं भी उछल-उछल कर बराबर का साथ दे रही थी। सच मानों तो ऐसी चुदाई बहुत दिनों बाद हुई थी। मेरी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी और लण्ड भी मोटा होने से चूत में टाईट चल रहा था। फ़च-फ़च की आवाज़ें भी आ रहीं थीं। मैं आनन्द से सरोबार हो रही थी… लग रहा कि अब गयी…… अब गयी… निहाल हो रही थी…

“आ आऽऽऽ आऽऽऽऽ जोऽऽऽऽ हाय रे… मैं तो गयी ऊह्ह्ह ऊऽऽऽऽऽऽ मर गयी रे… निकला मेरा पानी… जोऽऽऽऽ” मुझे लगा कि अब खुद को झड़ने से रोक पाना मेरे बस में नहीं है…

“हाऽऽऽऽऽय जो मुझे दबा लो… मैं हो गयी हूँ… हाय… निकल गया रे… मुझे दबा लो जो…” अब मैं रुक नहीं पाई… और झड़ने लग गई… उसके धक्के धीरे-धीरे कम होते गये… जिससे मैं आराम से झड़ गयी… झड़ते हुए असीम संतुष्टि मिल रही थी।

“हाय जो… पहले क्यों नही मिले तुम… कितनी शानदार चुदाई करते हो…”

“नेहा… नींद में क्या बोले जा रही हो… सच में चुदने की इच्छा है…?”

मैंने रुमाल चेहरे से हटा लिया। जो वहाँ खड़ा मुस्करा रहा था। कमरे में अंधेरा ही था पर चूँकि जो के कमरे की लाईट जल रही थी इसलिये अच्छी रोशनी आ रही थी।

“अब नहीं… अब तो मैं पूरी तरह से झड़ गयी हूँ…”

“क्याऽऽऽ…… बिना किए ही… क्या सपने में चुदाई की थी।” जो हैरानी से पूछ रहा था।

मैं बिस्तर से उठ बैठी और जो को प्यार से मुक्का मारा…” इतना तो चोदा… और कह रहे हो सपने मे… ये पकडो तुम्हारा रूमाल…”

“ये मेरा नहीं है… पर तुम्हारी बात समझ में नहीं आई…”

“हाय मेरे जो… समझ गयी… चलो हो जाये एक दौर और… तुमने कपड़े कब पहन लिए… जानते हो इन १५ मिनट में तो तुमने मुझे निहाल कर दिया।”

“अरे मैं तो जो जो सुन कर यहाँ आया था… तुम तो यहाँ ऐसे कर रही थी जैसे तुम्हारी चुदाई हो रही हो… यानि जैसे कोई सपना…”

“क्या… यहाँ कोई नहीं था… यानि मेरे साथ… तुम नहीं थे…”

“नहीं तो… तुम मुझे लगा बुला रही हो… मेरी नींद खुल गयी… मैं यहाँ आया तो तुम मेरा नाम ले कर ऐसे कर रही थी कि…”

“बस-बस जो… मैं लपक कर अमन के कमरे में गई… वो दोनों भी बिस्तर पर नंगे गहरी नींद में सो रहे थे…”

क्या मैं सपना देख रही थी… तो फिर वो रूमाल… मैंने चूत में हाथ डाल कर देखा… हल्का सा दर्द अब भी था…

सवेरा हो चुका था… मन में उलझन बढ़ रही थी… जो बार-बार कह रहा था कि उसे एक मौका दे दो… फिर रात को इतनी शानदार चुदाई कौन कर गया।

अगले दिन-

“उस बीच वाले कमरे में कल कौन सोया था…” हम चारों की नज़रें रूम-ब्वॉय की तरफ़ उठ गई…

“क्यों… क्या हुआ…?”

“उन कमरों में कोई नहीं ठहरता है… आप में बहुत हिम्मत है साब…”

“मतलब… तो बताना था ना… हमें बताया क्यों नहीं…”

“वो नये आये हैं… उन्हे नहीं पता हैं… वहाँ पर एक जोड़े को हनीमून मनाते समय लड़के की हत्या कर दी थी… लड़की की तो किसी तरह बच गयी थी… वो हत्यारे उनका सारा सामान लूट कर ले गये थे…”

“तो… उससे क्या…”

लड़का बहादुर था… बराबरी से लड़ा… पर अन्त बुरा हआ… कहते हैं कि उसकी आत्मा अब भी प्यासी है… हनीमून को तरसती है…”

मुझे चक्कर आने लगे… जो सब समझ चुका था… उसने मुझे सँभाल लिया। जो और मैं एक-दूसरे को देखने लगे…

“चलो अब घर चलते हैं… अगला कार्यक्रम तय करते हैं…” मैं अब जो का हाथ ही नहीं छोड़ रही थी डर के मारे…Hindi Sex Stories

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यह उन दिनों की बात है sex Stories जब मैं स्थानान्तरण पर ग्वालियर आया था। घर पर हमने एक काम काज के लिये एक लड़की को रख लिया था। उसका नाम सोनिया था। वो दुबली पतली और लम्बी लड़की थी। काम में माहिर थी। धीरे धीरे वो मुझे अच्छी लगने लगी थी। घर को ठीक से सेट करने के बाद मेरी पत्नी वापस भोपाल चली गई थी।

दिसम्बर का महीना था और उसका स्कूल 15 मई तक था। सोनिया यूँ तो एक साधारण लड़की थी, सेक्सी भी नहीं लगती थी, पर उसकी छोटी छोटी चूंचियां और उसके चूतड़ मुझे बहुत भाते थे। वो नजरें चुरा कर मेरी इस हरकत को देखती थी पर कुछ नहीं कहती थी।

धीरे धीरे अब हम दोनों बातें भी करने लगे थे। वो मुझे अधिकतर अपनी बड़ी बहन राधा के बारे में बताती रहती थी। उसकी बड़ी बहन की शादी होने वाली थी। उसकी बड़ी बहन 21 वर्ष की थी, यानी सोनिया से 2 साल बड़ी थी। अपने जीजू को लेकर सोनिया बहुत बातें करती थी, उसे लड़कों के बारे में बाते करना अच्छा लगता था। मैं उसे अब अपने पास बैठा कर चाय और कुछ खाने को देता था जिसे वो बड़े शौक से खाती थी।

एक दिन मैंने उससे हिम्मत करके पूछ ही लिया,’सोनिया, तेरा कोई लड़का दोस्त है?’

पहले तो वो शरमा गई, फिर कुछ गुस्से में बोली- अंकल, राधा है ना, उसने मेरा सारा काम बिगाड़ दिया, उसने हम दोनों को एक साथ देख लिया था !

‘अच्छा, तुम दोनों क्या कर रहे थे।’ मैंने उत्सुकतावश पूछ लिया, वो गुस्से और जोश में बताती चली गई, यह भी भूल गई कि क्या बता रही है।

‘रमेश मुझे अकेला पा कर मुझे चूमने लगा और मेरे शरीर को भी छूने लगा, तो दीदी अचानक आ गई और हमें देख लिया।’

‘अरे प्यार में तो शरीर को छुआ जाता है, इधर उधर हाथ भी लगाते हैं, तो दीदी को तुमसे क्या लेना था?’

‘हां यही तो, वो मेरी छातियों को दबा रहा था, मुझे चूम रहा था, तो वो जल गई !’

‘कैसे, यहाँ छाती पर… ऐसे…?’ मैंने उसकी छोटी सी एक चूची को दबाते हुए कहा।

‘अंकल, अब आप भी… हटो मैं नहीं बताती।’ मेरी इस हरकत पर उसने नाराजगी जाहिर की।

‘क्यों, अच्छा नहीं लगा? रमेश ने किया था तो कैसा लगा था। फिर हाथ लगाने से कुछ होता थोड़े ही है’ मैंने स्थिति को सम्हालने की कोशिश की।

‘अंकल, गुदगुदी होती है ना, मन में भी कुछ होता है, आपका हाथ लगाने से अभी तो हुआ ना !’ उसने शरमाते हुए कहा।

‘तो और लगाऊँ क्या? गुदगुदी में तो मजा आता है ना !’

‘अंकल, अच्छा एक बार सिर्फ़, फिर नहीं… ठीक है ना !’ उसने शरमाते हुए कहा। मेरा मन खिल उठा, यानि इसे मजा आया था और मैंने उसकी भावनाओं को जगा दिया था। मैंने धीरे से उसकी छोटी छोटी चूंचियों को सहलाना चालू कर दिया। कभी कभी उसके निपल भी उमेठ देता था। वो सिसकारी भरने लगी।

‘कैसा लग रहा है सोनिया, मजा आ रहा है ना?’

‘अंकल, हाय और करो, यहाँ दीदी थोड़े ही है, कौन मना करेगा, हाय अंकल!!!’ वो अब मस्ती में आ गई थी। मेरा लण्ड पजामें में से जोर मारने लगा था।

‘सोनिया, मुझे चुम्मा दोगी?’ मैंने उससे किस करने को कहा। पर इतना कहने पर तो मेरे से लिपट ही गई और मेरे होंठो को अपने होंठो से दबा लिया।
वह उत्तेजना में बह निकली थी। मेरे शरीर को कसती जा रही थी।
मैंने उसकी वासना को बढ़ने दिया और उसे लेटा दिया। उसे दबाता हुआ उसके ऊपर चढ़ गया।
वो मेरे शरीर के नीचे दब गई और आहें भरने लगी- अंकल आप कितने अच्छे हैं, आह, मेरी इच्छा पूरी कर दो अंकल, मुझे चोद दो…हाय !
उसके मुँह से उसकी इच्छा प्रकट हो गई।

‘सोनिया, तुम भी बहुत प्यारी हो, आह मेरा लण्ड पकड़ ले रे, मुठ मार दे !’

‘अंकल, मेरे बोबे दबा दो, हाय राम रे ! मैं तो आज मर जाऊंगी !’ सोनिया सिसकते हुए बोली। उसे मसलने और चूमने के बाद मैं उससे अलग हो गया।

‘सोनिया, अपना सलवार कुर्ता उतार दो, मैं भी उतार देता हू, मजा करेंगे।’ मैंने अपनी वासना को रोका नहीं, उसे चुदाने के लिये निमन्त्रण दे दिया।

‘हाँ अंकल, बहुत मजा आ रहा था, और करें, अरे ये तो देखो, तुम्हारा गंगाराम कैसा हो रहा है।’ हंसते हुए उसने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा किया।

‘गंगाराम? मतलब?’

‘अरे ये डण्डाराम, रमेश का भी ऐसा ही था।’

‘सोनिया, फिर चुदाया था तुमने…?’

‘अंकल, नहीं, दीदी ने काम बिगाड़ दिया था ना !’

‘पहले कभी चुदाया था क्या?’

‘अब छोड़ो ना, अब कर लेते हैं, अंकल आपने तो आण्टी को खूब चोदा होगा, कैसा लगता है?’ सोनिया का शरीर चुदासा हो रहा था। मेरा लण्ड भी चोदने को फ़डक रहा था,’खुद चुदवा के देख लो, तो पता चल जायेगा।’

मैंने अपना पजामा उतार दिया। मेरा तन्नाया हुआ लौड़ा देख कर वो शरमा गई। मैंने उसका सलवार और कुर्ता उतार दिया और उसके नंगे बदन को प्यार करने लगा। वो नंगी ही शरमाती और बदन को छुपाती रही। पर जब मैंने उसकी चूत को खोल कर अपने होंठ उस पर रखे तो वह चिहुंक उठी।

‘अंकल यहाँ नहीं करो… शर्म आती है !’ वो सिमटती हुई बोली।

पर किया उल्टा ही, उसने अपने दोनों पांव चौड़े कर के चूत को खोल दिया और झुकते हुए मेरे बाल पकड़ कर चूत का पूरा जोर मेरे मुख पर लगा दिया। मैंने भी उत्तर में अपनी जीभ उसकी योनि में घुसा दी।

‘अंकल, मर जाऊंगी, हाय रे !’ वो नीचे हाथ बढ़ा कर मेरे लण्ड को पकड़ने की कोशिश करने लगी। मैं अब बिस्तर में एक तरफ़ आ गया।
‘अंकल, मैं आपके लौड़े से खेल लूँ, मजा आयेगा !’ अपनी इच्छा जाहिर की।

मैं सीधा हो गया और उसने मेर खड़ा लण्ड पकड़ लिया और धीरे धीरे ऊपर नीचे करके मुठ सा मारने लगी।
‘आपका लौड़ा मस्त है, लाल टोपी कितनी सुन्दर है !’
‘लौड़ा नहीं, लण्ड बोलो, लण्ड शब्द अच्छा है !’

‘मैं तो लौड़ा ही कहूंगी, मेरी माँ को भी मैंने यही कहते सुना है !’ मैं हँस पड़ा। उसने मेरे लण्ड के सुपाड़े को चाटना शुरू कर दिया। उत्तेजना बहुत बढ़ चुकी थी। मैंने सोनिया के शरीर को दबा कर नीचे कर लिया और और उस पर चढ़ बैठा।

‘सोनिया, तैयार हो जाओ चुदने के लिये !’

‘हाय रे, तैयार हूँ, हाय घुसेड दो लौड़ा… मेरे राजा !’ वह उत्तेजना से मचल उठी। उसने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठा ली। लण्ड गीली चूत को चूमता हुआ फ़क से अन्दर उतर आया। मैंने धीरे से लण्ड दबाया। चूत टाईट थी। पर मैंने धीरज रखा। धीरे धीरे अन्दर उतारने लगा।

‘अंकल थोड़ा सा दर्द हो रहा है और धीरे करो।’ मुझे पता चल गया कि फूल अभी खिला नहीं है, सील टूटी नहीं है। मैंने उसे प्यार से चूमा और कहा,’थोड़ा सा दर्द शुरू में होगा, फिर तो बाद में मजे ही मजे हैं !’

‘चलो ना, चोद दो ना अब !’ मैंने उसे आश्चर्य से देखा और उसकी चूत में जोर लगा कर पूरा जड़ तक घुसा डाला। वो चीख उठी।

‘अरे, हाय रे… मर गई मैं तो, निकालो वापस !’ उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उसका चेहरा विकृत हो उठा, दांत भींच लिये। मैं चुप से उस पर लेट गया और उसे प्यार करने लगा।

‘बस बस सोनिया, शान्त हो जाओ, बस हो गया जो होना था, अब स्वर्ग में चलें?’ आंसू भरे चेहरे में भी वो हंस पड़ी।

‘इतना तेज दर्द होगा, यह मुझे नहीं मालूम था। अब और तो नहीं होगा ना?’

‘बस दो तीन धक्कों में होगा, फिर चूत की मिठास में सब दर्द घुल जायेगा।’ मैं हल्के से और प्यार करते हुये धक्के मारने लगे।

उसे दर्द होता रहा पर वो सहती रही। फिर उसकी रफ़्तार भी बढ़ने लगी, मुझे पता चल गया कि दर्द की जगह मिठास ने ले ली है।
मेरे लण्ड में भी भीनी भीनी मिठास का मजा आ रहा था। उसकी टाईट चूत का मजा अभूतपूर्व था।
शरीर उसका दुबला था पर बहुत ही लचीला था। वो भी अपनी चूत को घुमा घुमा कर लण्ड का मजा ले रही थी। उसकी कमर मशीन की तरह बल खाकर धक्के मार रही थी।
चूत में लाल खून उसकी चिकनाई को बढ़ा रहा था। फ़च फ़च की मधुर आवाजें आने लगी थी। मेर सुपाड़ा भी और लाल हो गया था।
चूत की रगड़ से लण्ड मस्त हुआ जा रहा था। मेरे शरीर में वासना की चिन्गारियाँ निकलने लगी थी। मेरा तन अगन से तड़प उठा था। लग रहा था कि अभी कुछ लण्ड के रास्ते सब कुछ बाहर आ जायेगा।

अचानक सोनिया की वासनायुक्त खुशी की चीख निकल पड़ी,’अंकल जीऽऽऽ, ये मुझे क्या हो रहा है, हाय रे… मेरा पेशाब निकला जा रहा है… !!’

‘निकाल दे मेरी रानी, कर दे पेशाब यहीं पर, कर दे…रोक मत !’ मैं भी उसके पेशाब का मजा लेना चहता था, पर वो पेशाब नहीं था, उसकी चूत की लहरें बता रही थी कि वो झड़ रही थी। शायद झड़ने का उसका पहला अनुभव था या इस तरह से वो पहली बार झड़ी थी।

मेरा लण्ड भी फूल कर कुप्पा हो रहा था। उसकी चूत के ढीले पड़ते ही मैंने अपना लण्ड उसकी चूत की जड़ में दबा दिया और अपना पूरा जोर लगा दिया। अन्दर का लावा फूट पड़ा। मैंने अब लण्ड बाहर खींच लिया और फ़ुहार निकल पड़ी।
रुक रुक के वीर्य बाहर आ रहा था। उसका पूरा पेट भीग गया। ढेर सारा वीर्य बाहर जमा हो गया। मैंने हाथ से उसे उसके पेट पर मल दिया।

‘छी: ! ये क्या कर दिया। सारा गन्दा कर दिया अंकल आपने तो !’ वह मुझ पर झुंझला उठी। फिर उसने वहीं पेट पर से वीर्य हाथ में लेकर मेरे मुँह पर मल दिया और हंस पड़ी। मैंने पहली बार अपने ही वीर्य का स्वाद चखा, फ़ीका फ़ीका सा, लसलसा, चिकना।

मैं बिस्तर से उठ खडा हुआ और बटुए में से उसे पचास रुपए निकाल कर कहा- सोनिया यह तेरा इनाम है, तू जब भी चुदवायेगी मैं तुझे पचास रुपए दूंगा।

सोनिया खुश हो गई उसने झट से रुपये रख लिये। बाथ रूम में जा कर हमने अपने लण्ड और चूत साफ़ कर लिये। सोनिया पचास रुपए पा कर बहुत खुश थी,’अंकल, आप बहुत अच्छे हैं, अब मैं अपने लिये झुमके खरीदूँगी।’

‘कल भी चुदवायेगी क्या…?’
‘आप मुझे पचास रुपए दें तो मैं अभी और चुदवा लूँ !’ कह कर वो मेरी तरफ़ बढ़ गई।
‘तो फिर आ जाओ मेरी बाहों में !’

‘अंकल, एक बात पूछूँ?’
‘हां जरूर, मेरी जान !’
‘राधा को भी पचास रुपए दोगे?’ मैं सुनते ही चौंक गया।
‘वो भी क्या चुदवायेगी?’

‘उसकी शादी होने वाली है ना, उसे चुदाना ही नहीं आता है, वो सीख भी लेगी और उसके पास कुछ पैसे भी आ जायेंगे।’

‘उसने तुम्हारे साथ ऐसा किया फिर भी तुम उसके लिये ऐसा सोचती हो, तुम हो ही प्यारी !’
‘प्यारे अंकल जी, मान जाओ ना !’
‘उसे कल ले आना, मजा तो रहेगा ही और वो चुदना सीख भी जायेगी!’

मैं बिस्तर पर सीधा लेट गया और सोनिया मेरे ऊपर चढ़ गई। मेरा लण्ड उसकी चूत में सरसराता हुआ अन्दर जाने लगा और सिसकियों का बाज़ार गर्म हो गया।

सोनिया अगले ही दिन राधा को मेरे पास लेकर आई!
राधा के साथ क्या हुआ? यह अगले भाग में! sex Stories

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सबसे पहले तो मैं गुरूजी का Hindi Porn Stories आभार मानता हूँ कि उन्होंने मेरी सही अनुभव वाली दो कहानियाँ ‘स्वर्ग का अनुभव-१’ और ‘स्वर्ग का अनुभव-२’ प्रस्तुत की ! इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है इसलिए जिसको काल्पनिक कहानी में ही मजा आता हो वो यह कहानी नहीं पढ़े ! मेरी पहली दो कहानी के बाद मुझे बहुत सारे मेल मिले ! इसलिए आज मैं मेरी तीसरी सही अनुभव वाली कहानी आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ!

मैं अहमदाबाद में रहने वाला ३६ साल का लड़का हूँ! मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट मेनेजर की जॉब करता हूँ! आज मैं जो कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूँ वो उन्हीं में से एक लड़की की है जिसने मुझे मेल किया था ! उसका नाम कविता हे ! उसी की इच्छा थी कि मैं हम दोनों की कहानी लिखूँ ! उसी की इच्छा को मान देते हुए मैं यह कहानी लिख रहा हूँ ! वो भी अहमदाबाद में रहती है! उसने मेरी कहानी पढ़कर मुझसे मिलने का प्रस्ताव रखा था ! तो लीजिये अब आप सुनिए उसी की कहानी !

मेरी एक फ़ैन थी कविता ! मुझे भी उसमे बहुत दिलचस्पी होने लगी थी ! मैं भी उसको मिलने के लिए बेकरार था ! उसका मेल आते ही मैंने अपना सेल नंबर उसको भेजा था ! और एक दिन उसका फ़ोन मेरे मोबाइल पर आया ! पहले उसने मेरे बारे में जानकारी ली और फिर उसने मुझसे मिलने के लिए बोला !

मैं भी एक दिन ऑफिस में से आधी छुट्टी लेकर उसको मिलने के लिए चला गया ! हम रास्ते में कहीं मिले फिर हमने होटल में जाने का तय किया ! हम दोनों होटल में चले गए ! मैंने पहले स्नान कर लिया ! फिर मैं कमरे में आ गया ! तो अचानक उसने बोला कि मैं तुमसे नहीं मिल पाऊँगी ! वो कुछ घबराई हुई मुझे लगी ! क्योंकि पहली ही मुलाकात में हम होटल में पहुँच गए थे ! मेरी इच्छा उसे मिलने की बहुत थी ! मैं सोचता था कि काश वो मेरी लाइफ में होती तो मजा आ जाता ! वो दिखने में भी काफी खूबसूरत थी ! उसने बोला कि मैं तुमको छू भी नहीं पाऊँगी !

हमने थोड़ी देर बातें की फिर मैंने उसकी इच्छा को मानते हुए उसे जाने दिया ! मैं उस दिन तड़पता ही रह गया !

उसकी याद मेरे दिल से नहीं गई थी ! इस लिए मैंने उसे एक दिन मेल कर दिया ! तो उसका भी साथ ही फ़ोन आया कि हम युगल-कमरे में मिलते हैं! मुझे लगा कि युगल-कमरे में भी वो मुझे छूने नहीं देगी !

उस दिन हम दोनों युगल-कमरे में पहुँच गए ! मैं सोच रहा था कि उसको छू लूं या नहीं !

उसने अचानक मेरे हाथ को अपने चूचियों पर रख दिए ! मुझे तो लग रहा था कि मैं कोई सपना देख रहा हूँ ! पर यह हकीकत थी ! फिर मैंने उसके चूचियाँ उसके शर्ट से बाहर निकाल दी ! उसकी चूचियाँ क़यामत थीं ! बिल्कुल तनी हुईं। उसके निप्पल बहुत ही ख़ूबसूरत थे।। मैंने उसकी चूचियों को हाथों से मसलना शुरु कर दिया और फिर दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा। हम दोनों को काफी मज़ा आ रहा था ! फिर मैंने उसकी पैंटी में अपना हाथ डाल दिया ! उसने अपनी पैंटी नीचे कर दी !

फिर मैं अपनी ऊँगली से उसकी चूत को सहलाने लगा ! उसके चूत में एक अजीब सी महक थी ! वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी ! फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में मेरी पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया और मसलने लगी ! मैंने अपना ७’’ के लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथ में दे दिया ! उसको मेरा लंड बहुत पसंद आया ! फिर उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया ! मैं अब आपे में नहीं रह पाया ! फिर वो मेज़ पर आ गई ! मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया ! मैं काफी अन्दर तक अपनी जीभ ले जा कर उसकी चूत को चाटता था ! वो अब मदहोश होने लगी थी ! उसे बहुत मजा आने लगा ! मैं उसकी चूत का सारा पानी निगल गया ! वो अब बहुत उत्तेजित हो चुकी थी ! फिर मैंने खड़े हो कर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया ! फिर मैं उसकी चुदाई करने लगा ! मैं बहुत जोर से धक्का देकर चुदाई करने लगा ! उसको भी उसमें बहुत मजा आने लगा ! ऐसा करने से आवाज भी बाहर जाने लगी थी ! पर हम तो अपने में ही मस्त हो चुके थे ! हम दोनों उस वक्त सेक्स में पूरे खो चुके थे ! फिर मैंने अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया ! वो भी झड़ चुकी थी ! उस दिन स्वर्ग का अनुभव क्या होता है वो हमने महसूस कर लिया !

उस दिन के बाद हम दो बार और कमरे में मिले थे !

अगर आपको मेरी सही अनुभव वाली कहानी पसंद आई हो तो मुझे मेल करे ! Hindi Porn Stories

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मैं भी अन्तर्वासना के लाखों Hindi Sex Stories चाहकों में से एक हूँ। मैंने यहाँ बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं। कुछ तो इतनी लाजवाब हैं कि पढ़ते-पढ़ते किसी का भी लण्ड खड़ा/चूत गीली कर दे।

यह मेरी प्रथम सेक्स की कहानी है जो मैं आप सब को बताने जा रहा हूँ। एक प्यासी स्त्री की सच्ची कहानी।

अभी मेरी उम्र 30 वर्ष है पर यह कहानी 11 वर्ष पहले की है। यह मेरी पहली कहानी है, लिखने में कोई भूल हो तो माफी चाहता हूँ।

मेरा नाम जय है और मैं सूरत में रहता हूँ। बचपन से ही मैं अपने दादा-दादी और चाचा के साथ बैंगलोर में रहा और वहीं पढ़ाई की, वहाँ पर दादा की स्थाई नौकरी थी और चाचा दुबई में नौकरी करते थे।
चाचा की शादी को 8 साल हुए थे और उनकी 2 बेटियाँ थी। चाचा साल दो साल में एक बार आते और 1 महीना रहते थे।

जैसा कि मैंने आप को बताया कि चाचा दुबई में थे और साल दो साल में एक महीने के लिये आते थे। तो आप समझ सकते हैं कि चाची कि हालत क्या होती होगी जब चाचा वापस चले जाते होंगे। दादा -दादी साथ रहते थे इसलिए उन्हें कहीं बाहर जाने या किसी से मिलने का भी कोई मौका नहीं था, बस कभी कभी कुछ काम हो तो मेरे साथ जाती थी।

मेरी चाची के साथ अच्छी बनती थी, मैं काम में उनकी मदद भी कर दिया करता था। और जब चाचा दुबई जाते तो मैं चाची के कमरे में सोता था, सब कुछ सामान्य था। मैं चाची के साथ मस्ती भी बहुत करता था लेकिन कभी उन्हें वासना भरी नज़र से नहीं देखा था।

समय बीतता गया और मैं भी जवानी में कदम रख रहा था और कुछ दोस्तो के साथ मिलकर कभी कभी ब्ल्यू फिल्म देख लिया करता था और कुछ सेक्स की किताब भी पढ़ता था छुप-छुप कर और कभी कभी मुठ भी मार लिया करता था।

जैसे जैसे मुझे सेक्स के बारे में पता चलता गया मेरी नज़र बदलती गई और मेरी नीयत बदलती गई। अब मैं चाची के बारे में सोच सोच कर मुठ मारने लगा और मन में उन्हें चोदने की इच्छा जागी।

हमारे घर में दो बेड रूम थे, एक में दादा-दादी और चाची की एक बेटी सोते और दूसरे में मैं चाची और मेरी एक चचेरी बहन सोते थे। (मैं एक बेड पर और चाची और बहन एक बिस्तर पर सोते। मैं दस साल का था तब चाचा की शादी हुई थी और चाचा एक महीने के अंदर ही वापस चले गये थे, तब से मैं चाची के कमरे में ही सोता हूँ)

जिस दिन मैंने कोइ ब्ल्यू फिल्म देखी हो उस रात मुझे नींद ही नहीं आती, पूरी रात चाची को देखने में ही निकल जाती, कभी उनकी नाईटी ऊपर सरक आती और उनकी गोरी जांघ दिखाई देती तो कभी उनके स्तनों की झलक मिलती।
नाईट लेम्प की रोशनी में ही मजे लेने पड़ते थे। कई बार सोचा कि उनके स्तन दबाऊँ, गोरी जांघ पर हाथ फेरूँ, पर डर लगता था कि कही चाची ने शोर मचाया और दादा दादी को बता दिया तो अंजाम बहुत बुरा होगा।

समय बीतता गया और धीरे-धीरे अब मैं सेक्सी किताबें और ब्ल्यू फिल्म की केसेट घर पर ही लाने लगा और जब भी मौका मिलता, छुप-छुप कर पढ़ता और फिल्म देखता था।

जब भी मौका मिलता, मैं उनके गुप्त अंगों को देखने की कोशिश करता और मस्ती-मस्ती में उन्हें छू भी लेता था। चाची भी इसका कोइ विरोध नहीं करती थी, शायद उन्हें भी आनन्द आता था। लेकिन यह सब तभी होता था जब दादा-दादी कहीं बाहर गये हों।

तभी हमारे एक रिश्तेदार की मृत्यु हो गई और दादा-दादी को 15 दिनों के लिये सूरत जाना पड़ा। अब घर पर मैं, चाची और उनकी 2 बेटियाँ रह गये। दोनों बेटियों दे स्कूल दोपहर के थे और मेरी सुबह में! यानि मैं घर आता तो वो दोनों स्कूल गये होते थे और शाम को 5.30-6.00 बजे आते थे।

दादा-दादी को गए दो दिन हो गये थे और इन दो दिनों में मैंने देखा कि चाची कुछ बदली-बदली सी लग रही थी। मतलब एक दम बिंदास, मस्ती ज़्यादा और काम कम!

और घर पर कोई बुजुर्ग नहीं होने की वजह से उनके कपड़े भी अस्त-व्यस्त रहने लगे थे, लेकिन इससे मुझे भी आनन्द मिलने लगा और मैं उनके गोरे सेक्सी बदन को देखने और छूने का कोई मौका नहीं छोड़ता।

मैं अपने दोस्त से ब्ल्यू फिल्म की एक केसट ले आया और कमरे में ही छुपा दी, जो मुझे देख कर लौटानी थी। सोचा घर पर कोई नहीं हो और मौका मिले तो देख लूंगा।

अगले दिन मैं कॉलेज़ से लौटा, चाची ने कहा- चलो जल्दी से कपड़े बदल ले, मैं खाना लगाती हूँ और वो रसोई में चली गई। मैंने कपड़े बदले और खाना खाना खाने बैठ गया। खाना खाकर चाची पास ही कुछ सब्जी लेने चली गई और मैं घर पर अकेला!

मैंने सोचा कि मौका अच्छा है फिल्म देखने का, और मैं वो केसेट लेने कमरे में गया। वहाँ जाकर देखा तो केसेट वहाँ से गायब था। मैं एकदम चिन्ता में पड़ गया। एक तो केसेट दूसरे का और कहीं चाची के हाथ में आ गया तो दादा-दादी को बताने का डर!

मैंने सब सामान इधर उधर कर दिया पर वो केसेट नहीं मिला। थोड़ी देर में चाची वापस आ गई तो मैंने जल्दी-जल्दी सब सामान वापस रख दिया और कुछ बाहर ही रह गया।

चाची आई तो पूछने लगी- यह सब क्या कर रहे हो? और सामान क्यों निकाला?

मैंने कहा- कुछ नहीं! एक किताब रखी थी मैंने अंदर! वही ढूंढ रहा हूँ, मिल नहीं रही है।

मेरी चिन्ता मेरे चेहरे पर साफ नज़र आ रही थी और चाची जिस तरह मुझे घूर रही थी वो देख कर मुझे लग रहा था कि वो केसेट उनके हाथ लग गई है।
वो वही बैठ गई और थोड़ी देर मेरी हरकतों को देखती रही, मेरी चिन्ता देख वो बोली- चिन्ता मत कर, तूने और कहीं रख दी होगी, बाद में आराम से ढूंढना, मिल जायेगी। अपने घर में से कहाँ जायेगी।

उस रात मुझे नींद नहीं आई, पूरी रात सोच में ही निकल गई कि अब क्या होगा?

खैर रात बीत गई और सुबह हुई। सुबह से ही मैंने चाची में कुछ बदलाव देखे! चाची बहुत खुश नजर आ रही थी और वो मुझमें भी बहुत दिलचस्पी दिखा रही थी। किसी न किसी बहाने से मेरे गाल पकड़ती तो कभी प्यार से बालों में हाथ फेरती।

खैर मैं कॉलेज़ चला गया पर वहाँ भी मन नहीं लगा। दोपहर 12.15 बजे घर वापस आया, चाची अपने काम में व्यस्त थी तो मैं फिर से विडियो केसेट ढूंढने मे लग गया क्यूंकि घर पर मेरे और चाची के अलावा और कोई नहीं था।

‘तुम क्या ढूंढ रहे हो? मैं कुछ मदद करूँ तुम्हारी?’

यह सुनकर मुझे थोड़ा और यकीन हो गया कि वो केसेट चाची के ही पास है, लेकिन डर के मारे कुछ बोल नहीं पाया। फिर चाची वहीं बैठ गई और मेरी हरकतों को देखती रही। थोड़ी देर बाद चाची ने फिर से पूछा- सच बताओ कि क्या ढूंढ रहे हो? जो है सच बताओ मैं कुछ नहीं कहूंगी। हो सकता है कि मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकू!

यह सुनकर मुझ में थोड़ी हिम्मत आई और मैंने कहा- मैंने यहाँ एक वीडियो केसेट रखा था, मिल नहीं रहा! वही ढूँढ रहा हूँ!

तो चाची ने पूछा- कौन सा केसेट? किस फिल्म का था?
मैंने डर के मारे कहा- मेरे दोस्त के भाई के शादी का था!
चाची ने तुरंत पूछा- कल से तू वही ढूंढ रहा है?
मैंने कहा- हाँ चाची!
‘तो कल क्यों झूठ बोला था तूने?

मैं कुछ नहीं बोल सका। फिर चाची मेरे पास आई और मुस्कुराते हुये मेरे गाल पकड़ कर कहा- इतना परेशान मत हो, मिल जायेगी! चल सब सामान वापस रख दे अभी!

इतना बोल वो वहाँ से चली गई और अपने काम में लग गई। चाची की बातें सुनकर मुझे थोड़ा डर भी लगा और कहीं थोड़ी खुशी भी हो रही थी, खुशी इस बात की कि अगर चाची ने वो वीडियो देख ली है और मुझसे नाराज़ नहीं हैं तो मेरा उन्हें चोदने का सपना सच हो सकता है। लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी चाची से कुछ भी कहने की। मैं हाल में सोफे पर बैठा था, मन में कई प्रकार के सवाल जवाब चल रहे थे।

तभी चाची आई और मेरे बाजू में बैठ गई। तभी मैंने हिम्मत कर के कहा- चाची, अगर वो केसेट आप के पास है तो प्लीज मुझे दे दीजिये, वो वापस लौटानी है मुझे!

चाची- अरे तुझे कहा ना, टेन्शन मत ले, पहले जा और अपने कपड़े बदल ले!

मैं तुरंत उठा और दूसरे कमरे में कपड़े बदलने लगा। तभी मैंने अलमारी के शीशे में देखा तो मेरे पीछे चाची दरवाजे के पास खड़ी मुझे देख रही हैं। मैंने उन्हें लगने ही नहीं दिया कि मैंने उन्हें देख लिया है, और जैसे ही मैं कपड़े बदल कर मुड़ा, चाची वहाँ से जा चुकी थी।
वहाँ से मैं रसोई में गया, चाची खाना परोस रही थी, मैं खाना खाना खाने बैठ गया। हम दोनों आमने-सामने बैठे थे, मैंने चुपचाप सर झुकाये खाना खाया और बेडरूम में आकर अपनी किताब ले कर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद चाची भी आ गई और एक मैगज़ीन लेकर मेरे पास बैठ गई। थोड़ी देर बाद चाची ने मस्ती शुरू कर दी, वैसे तो हम अकसर करते थे, पर जैसा मैंने कहा, उस दिन उनका मूड कुछ अलग ही था। वो मुझे गुदगुदी करने लगी।

मैंने कहा- प्लीज़ चाची, मत करो ऐसा, मैं करुंगा तो आप को पता चलेगा, फिर मत बोलना!
चाची तुरंत बोली- अच्छा तो क्या करेगा तू? हाँ? मैं भी तो देखूँ जरा?

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