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पब्लिक ट्रांसपोर्ट में घूमने के काफी Sex Stories मजे हैं। उनमें से एक बड़ा लाभ यह भी है कि लड़कियों से बात करने का काफी मौका रहता है। मैं तो अक्सर किसी भी गोरी, अफ्रीकन या लातिनो लड़कियों से जान बूझकर यह सवाल करता हूँ, पर वह 24-25 साल की लड़की वाकई भारतीय थी। यूँ थी वो गोरी चिट्टी और नीली जींस और गुलाबी टीशर्ट में किसी गोरी से कम नहीं लग रही थी पर भारतीय साफ पहचान में आ जाते हैं।
“येस ! बट व्हाय?” उसने मुझे परेशान नज़रों से देखा।
“काम ऑन मैडम, आई ऍम अल्सो फ्रॉम इंडिया !” फ़िर मैं जान बूझकर हिन्दी मैं उतर आया ताकि आस पड़ोस के लोगों को पता न चले हम क्या बातें कर रहे हैं। “हिन्दी बोलती हैं आप?”
“हाँ” वो बोली।
“नहीं, मैंने आपको शहर का नक्शा पकड़कर खोजते हुए देखा तो सोचा कि आप शहर में नई हैं। घर वगैरह का इंतजाम हो गया?”
वह मुस्कुराई,” मैं यहाँ घर बसाने नहीं आई। मेरी एक कांफ्रेंस है- तीन दिन की !”
“ओह, तो आप एल ऐ की मेहमान हैं, फ़िर तो मेरी भी मेहमान हुई। तो आपकी मदद करना मेरा फ़र्ज़ है, कहिये कहाँ जाना है?”
उसे सांता मोनिका के किसी होटल में जाना और मुझे वेस्ट वुड ! पर मैंने सोचा कि आज ऑफिस में भले देर हो जाए, इससे जितनी बातें हो जाए अच्छा है। बातों बातों में उसने अपना नाम बताया- मालती जोशी !
“यह तो एक बड़ी लेखिका का नाम है !” मैंने कहा।
वह खिलखिला कर हंस दी। वह भारत सरकार के पर्यटन विभाग में थी और सरकार ने उसे इस कांफ्रेंस के लिए भेजा था।
मैंने उसे टटोलने की कोशिश की,”फ़िर तो चुन्नू मुन्नू आपको मिस कर रहे होंगे?”
“कौन चुन्नु मुन्नू ?” उसने थोड़ा अनजान सा बनकर पूछा।
“आपके चुन्नू मुन्नू और उनके पापा !” मैंने कहा।
इस बार वह ऐसे हँसी कि उसके मोती जैसे दांत दिखने लगे। फ़िर उसने जवाब दिया,” हाँ हाँ ! चुन्नू मुन्नू तो नहीं, उनके चुन्नू मुन्नू जरुर दादी को मिस कर रहे होंगे। क्या …. अरे नाम भी नहीं बताया आपने !”
“ओहऽऽ हो विशाल ! तो क्या मैं यह मतलब निकालूं कि अभी तक आपके जीवन में कोई नहीं आया है?”
बातों बातों में पता चला कि वह मुझसे दो साल छोटी है। जब उसे यह पता चला कि मेरे जीवन में भी कोई नहीं है, तो उसके ओंठों पर मुस्कान आ गई।
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे। वैसे तो उसका होटल एयरपोर्ट के पास था, पर किसी लातिनो टैक्सी वाले ने पता ठीक नहीं समझा और उसे वेनिस-बीच के आस पास उतार दिया। शायद मेरी किस्मत ने……
मैंने उसे फ़ोन नम्बर दिया और ले भी लिया। मैंने कहा कि कोई भी मुश्किल हो, मुझे फ़ोन कर ले।
शाम को आठ बजे के आसपास जब उसका कोई फ़ोन नहीं आया तो मैंने निश्चय किया कि मैं ही फ़ोन कर लूँ। भले वह कुछ भी समझे। तभी फ़ोन की घन्टी बजी। नम्बर कुछ अटपटा सा था, पर यह उसकी ही आवाज़ थी।
“अरे आप ! किस नम्बर से फ़ोन कर रही हैं?” मैंने पूछा।
“कमरे से !”
“कमरे में पहुँच गई आप? इस बार टैक्सी ने परेशान तो नहीं किया?” मैंने पूछा,”कहिये, एक प्यारी सी मेहमान की क्या खिदमत करे यह बन्दा?” मैंने पूछा।
“इतवार को मेरी छुट्टी है, यहाँ से डिज्नीलैंड कितनी दूर है? मैं जाना चाहती हूँ, कैसे जा सकती हूँ? टैक्सी से मैं जाना नहीं चाहती, काफी महंगा पड़ेगा ना?”
“यह बन्दा किस लिए है? मेरी खटारा है ना?” मैंने कहा।
“नहीं, आपको तकलीफ होगी !”
“तकलीफ कैसी? सप्ताह मैं एक बार उसे वैसे ही हवाखोरी के लिए ले जाता हूँ !” मैंने कहा।
उसकी खनकती हुई हंसी फ़ोन मैं गूंजी, फ़िर उसने कहा,”नहीं, मैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ही जाऊँगी।”
यार बड़ी खच्चर लड़की है, बात ही नहीं समझती।
मैंने कहा,” ठीक है फ़िर.तुम परेशान हो जाओगी ! मैं तुम्हारे साथ चलूँगा !”
थोड़ी सी न-नुकर के बाद वह मान गई। इतवार को मैंने बैग पैक किया, पहले सोचा कार से चलते हैं, उसे मना लूँगा, फ़िर सोचा कहीं उसने मना कर दिया और पार्किंग नहीं मिली तो लेने के देने पड़ जायेंगे, वैसे भी बड़ी जिद्दी लड़की है। मैंने उससे कहा था कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाना है तो मुंह अंधेरे ही जाना पड़ेगा।
वह होटल के बाहर खड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी। आज उसने काली स्कर्ट और नीली कॉलर वाली हलकी पीली टी शर्ट पहनी थी।
ग्रीन लाइन के स्टेशन पर पहले ट्रेन का इंतज़ार करना था। ट्रेन आने में थोड़ी देर थी। हम इधर उधर की बातें करते रहे। मैंने उसे भरपूर नज़र से देखा। बला की खूबसूरत लड़की थी, कद होगा करीब ५’ २”,मुझसे चार इंच कम, लंबे बाल, फूले फूले गाल, उन्नत उरोज पतली कमर और चौड़े नितम्ब, बड़ी-बड़ी आँखें, पतले ओंठ। मुझे इस तरह देखते वह झेंप भी गई।
अचानक मैंने देखा उसने एक बड़ा बैग उठा रखा है,”क्या है इसमें?” मैंने पूछा,”माना कि लड़कियों का बैग नहीं देखते, पर यह क्या भर कर रखा है ?”
“खाने पीने का सामान !” उसने कहा,”पूरा दिन लग जाएगा, मैंने सोचा कि…”
मैंने सर पीट लिया,”डिज्नी लैंड में मेरे ताऊ बैठे हैं न जो इसे अन्दर ले जाने देंगे ! फेंको इसे !”
“क्या? फेंक दें? अन्न का अपमान?”
“तुम तो मेरी अम्मा जैसे बात कर रही हो ! फेंकना नहीं है तो खाओ !”
“अभी?”
“तो कब? ट्रेन में खाना मना है, फ़िर बस पकडेंगे, उसमें भी खाना मना है। चलो निकालो !”
वह घबरा गई,”यह तुम्हारे लिए भी है !”
हे भगवान ! प्लेटफोर्म में हम बैठे परांठे खा रहे थे जो उसने इंडियन शॉप से रात में आर्डर देकर मंगाया था। उसका छोटा सा पेट जल्दी भर गया और नखरे शुरू हो गए। मुझे इसी छीना-झपटी का इंतज़ार था, मैंने उसका हाथ पकड़ा और एक कौर जबरदस्ती मुंह में ठूंस दिया।
“विशाल, मेरा हाथ तो छोडो ! उई माँ !”
मैंने उसका हाथ छोड़ा नहीं, बल्कि मरोड़ के पीठ पर ले गया अब हम दोनों के जिस्म में छः इंच का फासला था और अगर मैं हाथ और थोड़ा मरोड़ता तो उसके उन्नत उरोज शायद मेरे सीने में दस्तक दे देते पर उसकी आंखों में आंसू आ गए।
“विशाल, सच्ची, उलटी हो जायेगी !”
तभी ट्रेन आ गई। मैंने पकड़ ढीली की पर उसका हाथ नहीं छोड़ा। डिब्बे में बैठकर भी नहीं छोड़ा। फ़िर जेब से एक टिशु निकाल कर उसका मुंह पोछा,”झूठे मुंह सफर नहीं करते !” उसे हँसी आ गई।
उसके बाद ट्रेन में और फ़िर बस में वह प्यारी बातें करती रही। उसकी बातों का पिटारा थमने का नाम ही नहीं लेता था। पर वह बोर नहीं कर रही थी। उसके चेहरे के हाव भाव, भाव भंगिमा, सब कुछ लुभा देने वाला था। हँसते हँसते मैंने उसकी पीठ पर एक दो बार धौल भी जमाया। कभी उसने मुझे छेड़ा तो मैंने बाल भी खींचे। अमेरिका में यह बात अच्छी है कि आस पास के लोग कोई परवाह नहीं करते।
कई बार मैं अपना चेहरा उसके गाल के काफी करीब ले गया पर चुम्बन की तीव्र इच्छा का किसी तरह दमन किया। कई बार उसके हथेली पर अंगूठा फेरा, उसकी कोहनी सहलाई, पाँव से उसके पाँव पर ठोकर मारी। एक बार हिम्मत कर के जांघ पर भी हाथ रख दिया। वह शरमाई जरुर, पर उसने हाथ हटाया नहीं !
डिज़नीलैंड देखकर वह हैरान रह गई और बच्चों की तरह उत्साह से भर गई। उसे काबू में करना मुश्किल हो गया। वह मेरा हाथ पकड़कर कभी इधर, कभी उधर ले जाने लगी। उसे मैंने प्यार से कई बार समझाया, कभी “माला” कभी “लती” कभी “लता” कभी “मति” कहकर पुकारा।
वह फ़िर इधर उधर जाने लगी। अब मैंने उसका हाथ पकड़कर खींचा, अब वह पास आई तो मैंने दोनों हाथ पकड़ लिए, मैंने समझाया,”मालती, तुम्हारा पहली बार डिजनी लैंड में आना हुआ है, सब चीज देखना मुश्किल है, फ़िर हमें कैलिफोर्निया एडवेंचर पार्क भी जाना है। लाइन तो तुम देख रही हो, ऐसा करते हैं, पहले जिसका फास्ट पास मिले वह ले लेते हैं, फ़िर मुख्य मुख्य जगह चलते हैं।
अब मैंने सोच लिया था कि यह ऐसे नहीं मानेगी, इसे थोड़ा पंचर किया जाए. उसे लेकर स्पेस माउन्टेन में ले गया. वह एक खतरनाक रोलर-कास्टर था। ऊपर से नीचे आते समय मैं जान बूझ कर उससे सट गया उसके हाथ हेंडल पर जमे थे, पर वो डरकर मुझसे चिपक गई।
उससे भी ज्यादा मज़ा तो थंडर माउन्टेन में आया, इस बार मै अपना एक हाथ उसकी पीठ के पीछे ले गया और खतरनाक मोड़ आने पर उसके एक उन्नत उरोज में हाथ का दबाव जमा कर उसे पास खींच लिया। ठोस टेनिस बाल की तरह के उरोज पर हाथ लगते ही मेरे लिंग में जबरदस्त तनाव आया।
वह सवारी खत्म होने के बाद मैंने देखा कि उसका चेहरा सुर्ख हो गया है.उसके सुडौल उरोज साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे।
“ओह बाबा !” वह बोली,”कहाँ फंस गई मैं?”
मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा और धीरे से उंगलियाँ बालों में फेरकर बोला,”मैं हूँ ना ! चलो खाना खाते हैं।”
उसे मेक्सिकान रेस्टारेंट में ले गया। खाना खाते खाते उसे देखकर मुस्कुराया, वह भी मुस्कुराई। मैंने कहा,”मालती, एक बात कहूँ ! तुम काफी हसीन लग रही हो !”
खाने के बाद ‘इन्डियाना जोन्स’ के फास्ट पास का समय हो गया था। तेज रफ्तार और अंधेरे में वह फ़िर घबराई। इस बार मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर अपने पास खीँच लिया। डर के मारे उसने अपना सर मेरे सीने में छुपा लिया। मैं उसे और डराने लगा, “लती देखो, लटका हुआ आदमी.माला, देखो बिच्छुओं का झुंड !
जब उसने आँख नहीं खोली तो मैंने एक कुच को हलके से दबाया, वह चिहुंक गई।
बाहर निकल कर मैंने देखा, उसके स्तनाग्र सिपाही की तरह तन गए थे। मैंने उसका हाथ थामा और जुल्फें संवारी। मैं चाहता था कि मदहोशी का यह खेल थोड़ा आगे बढ़ाया जाए।
अब हम पैरेट्स ऑफ़ कैरिबियन की सवारी की ओर बढ़े। जैसे ही हमारी नाव अंधेरे में बढ़ी, मैंने मालती के जाँघों पर हाथ रखकर हल्के से दबाव बढाया। वह कुछ प्रतिक्रिया करती, उसके पहले ही एक झटका लगा और अंधेरे में नाव नीचे चले गई। मेरा हाथ फिसलकर उसकी जांघों के बीच आ गया। मैंने हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाया और स्कर्ट के उपर उसकी योनि पर हाथ रख दिया, उसकी साँसे तेज चलने लगी।
सवारी आगे बढ़ ही नहीं रही थी पर मेरे हाथ आगे बढ़ रहे थे। उधर अंधेरे में मालती की भी हिम्मत बढ़ गई थी। वह मेरा बिल्कुल विरोध नहीं कर रही थी।
तभी एक उदघोषणा हुई कि सवारी के सिस्टम में कोई खराबी हो गई है और इंजिनियर ठीक कर रहे हैं।
मुझे मानो मन-मांगी मुराद मिल गई। इस बार मैंने हाथ पीछे किए और उसके स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल दिया। उफ़ ! कितनी स्निग्ध थी उसकी जांघें। उसके मुंह से एक फुरफुरी निकली और मेरे हाथ फिसल कर उसकी पेंटी से टकराए। कामोत्तेजना से उसकी पैन्टी आर्द्र हो गई थी। मैंने पैन्टी के उपर उसकी झिर्री टटोली। उसने दांतों से अपने ओंठों को जोर से दबा लिया, साँसे तेजी से चल रही थी।
फ़िर मैंने पैंटी के साइड से उंगलियाँ अन्दर डाली और अंगूठा बालों के जंगल से होता हुआ गीली और फिसलन भरी गुफा तक जा पहुँचा। योनि की दरार को टटोलता अंगूठा उपर बढ़ा और उसकी भगनासा से जा टकराया। अब मालती के मुंह से सिसकी निकल पड़ी। उसने अपने को काबू में करके मेरा हाथ थाम लिया।
“विशाल, न न नहीं..!” वह किसी तरह बोली।
तभी उदघोषणा हुई कि सवारी में खराबी की वजह से यह यहीं स्थगित की जाती है। सबको समय ख़राब होने की वजह से एक एक टिकट दिया गया, जिसे वो किसी अन्य सवारी में बिन लाइन में लगे उपयोग में ला सकते थे।
“माला, ऐसा करते हैं, कैलिफोर्निया एडवेंचर पार्क चलते हैं। इसका उपयोग बाद में करेगे।” मैंने उसे समझाया।
“तुम ही मेरे मार्ग निर्देशक हो, जैसा तुम कहो !”
“ये हुई ना समझदार लड़कियों वाली बात !” मैंने उसे कहा।
उसे लेकर में सीधा ग्रिज्ली रिवर की सवारी में ले गया जिसमें एक घूमता हुआ बेडा खतरनाक लहरों और झरनों, जल प्रपात के नीचे से होता हुआ जाता है। जब वह पहले खतरनाक जल प्रपात के नीचे से गुजरा वह मुझसे चिपट गई। उपर से गिरते पानी की तेज धार ने हम दोनों को सराबोर कर दिया। मालती की पतली टी शर्ट उसके बदन से चिपक गई और उसकी दूधिया ब्रा साफ़ दिखने लगी। अभी वह कुछ सम्हालती कि पानी की एक और बौछार उस पर पड़ी अब मानो कपडों का कोई अस्तित्व ही नहीं रहा।
“तुम बड़े शैतान हो !” बाहर निकल कर वह शिकायत के लहजे में बोली,”देखो, मेरे सारे कपड़े गीले हो गए।”
“अन्दर के भी?” मैंने शरारत से पूछा।
“क्या मतलब है तुम्हारा?”
“मतलब यह कि इस सवारी को दोष मत दो ! अंदर के नीचे के कपड़े पहले पहले ही गीले हो हो गए थे, मैं जानता हूँ।”
पहले वह शरमाई, फ़िर उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया,”विशाल, तुम्हारी बेशरमी बढ़ती जा रही है !”
मैंने कान पकड़े और कहा,”एक बात कहूँ, तुम बारिश में भीगी फिल्मी हिरोइन की तरह दिख रही हो !”
“पर मुझे सर्दी हो जायेगी, आक छी.” उसे छींक आ गई।
मैंने कहा,”लती, एक बात बोलूं? अन्यथा मत लेना !”
“अब क्या बचा है?” वह झल्लाकर बोली।
मैं मन ही मन बोला,”सब कुछ !”
पर मुझे वाकई दया आ गई, मैंने कहा,”मालती, में एक एक्स्ट्रा टी शर्ट लाया हूँ, मुझे मालूम था, यहाँ ऐसा होगा, तुम पहन लो।”
वह गुस्से से बोली,”क्या?”
मैंने कहा,”कॉमन सेंस से काम लो. मेरी टी शर्ट है तो क्या? थोड़ी ओवर साइज़ ही होगी।” फ़िर मैं पास आकर बोला,”और मेरी एक ब्रीफ भी है.तुम्हें थोड़ी ढीली होगी पर पहन लो।”
थोड़ी न-नुकर के बाद वह मान गई और बाथ रूम में जाकर चेंज कर लिया।
जब वह बाहर आई तो मैंने देखा कि उसके हाथ में गीले कपडों का बण्डल है.उसने मेरे बैग की जिप खोली और कपड़े उसमें डाल दिए।
मैंने देखा, उसने ओवर साइज़ टी शर्ट का फायदा उठाकर गीली ब्रा भी उतार दी है और उसके स्तन हर कदम के साथ उपर नीचे हो रहे हैं।
उसने मुझे उरोजों को देखते हुए देख लिया,बोली,”क्या है?”
मैंने अपना मुंह उसके कान के पास लाकर कहा,” मालती, तुम्हारा वो चूसने को मन कर रहा है !”
वह झल्लाए स्वर में बोली,”अगर तुम मेरा वो चूसोगे तो मैं भी तुम्हारा वो चूसूंगी !”
मैं हैरान रह गया। मेरा लिंग मानो अंडरवियर फाड़ कर बाहर आना चाहता था।
मैंने कहा,”मुझे खुशी है, तुम थोड़ी बेशरम तो हुई !”
वह कुछ समझी नहीं, बोली,” बेशर्मी की क्या बात है? तुमने कहा तुम मेरा खून चूसोगे। अगर तुम मेरा खून चूसोगे तो मैं तुम्हारा खून चूसूंगी।”
“पर खून तो मच्छर चूसते हैं।”
और दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।
कहानी का अगला भाग: लॉस एंजेलेस(अमेरिका) में प्रणय का अंकुर-2 Sex Stories
मेरा नाम अमन है। मैं बचपन से दिल्ली Antarvasna में रह रहा हूँ। जब से मुझे सेक्स की जानकारी हुई, तब से मैं बस सेक्स के बारे में ही सोचता रहता हूँ। विशेषकर मुझे विवाहित स्त्रियाँ अधिक पसन्द हैं, साथ ही मोटी स्त्रियाँ भी। मेरा लंड ८ इंच लम्बा व ३ इंच मोटा है।
मैं इन्टरनेट पर चैट रूम में एक समलैंगिक रूम में हमेशा एक स्त्री के नाम से चैट करता और पूरा मज़ा लेता। एक दिन मेरी बात ग्रेटर कैलाश में रहने वाली गौरी नाम की महिला से हुई। एक दूसरे की जानकारी लेने के बाद हम सीधा सेक्स की बात पर आ गए। उसने बताया कि उसके पति अक्सर बाहर रहते हैं। उसको जब भी अवसर प्राप्त होता है तो वह अपने कामवाली बाई के साथ समलैंगिक सहवास करती है। मैं भी उससे स्त्री बनकर ही बात कर रहा था।
मैंने उससे कहा, “आप किसी लड़के को क्यों नहीं तलाश करतीं?”
“मैं कुछ लड़कों को जानती हूँ, जो सेक्स-जॉब करते हैं।” – मैंने उसे आगे बताया
गौरी ने कहा, “क्या वो मेरी गाँड भी चाटेगा?”
“सब कुछ करेगा, जो कुछ तुम करवाना चाहोगी, और उसकी शुल्क भी अधिक नहीं है।” – मैंने उसे जानकारी दी।
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे, मेरी बात बनती नज़र आ रही थी। मैंने गौरी को टेलीफोन नम्बर दिया, और कहा कि यह उसका नम्बर है, और उसका नाम अमन है। तुम उससे बात कर लो, मैं भी उससे बात करके तुम्हारे बारे में बता दूँगी। असल में अमन तो मैं ही था।
चैट के लगभग एक घण्टे के बाद उस स्त्री का फ़ोन आ गया। उसने मेरा नाम पूछा, और अपना नाम बताया। उसने कहा कि आपका नम्बर मुझे एक औरत ने दिया है। वो तो मैं ही था, तो मैं समझ गया।
मैंने पूछा, “तो फिर कब आऊँ आपके पास?”
कल दिन में ११ बजे आ जाओ।
मैंने कहा, “ठीक है।”
क्या बताऊँ दोस्तों, वह आधा दिन काटना मेरे लिए पहाड़ जैसा प्रतीत हुआ, बस मैं तो यही सोचता रहा कि ये करूँगा, वो करूँगा, और ये सब सोच-सोचकर मैंने उस औरत के नाम से दो बार मुट्ठ भी मार ली।
अगले दिन ठीक ११ बजे मैं उसके घर पहुँच गया। मैंने घंटी बजाई, दरवाजा खुला, और लगभग ३५ वर्ष की एक गोरी स्त्री ने दरवाजा खोला। मैंने उसे बताया, “मैं अमन…”। उसने अन्दर आने को कहा।
मैं जैसे ही अन्दर घुसा, उसने दरवाजा बन्द कर लिया, और सीधे शयनकक्ष में ले गई और कहा, तुम ५ मिनट यहीं रुको, मैं अभी आई। ५ मिनटों को बाद जब वह वापस आई तो मैं उसे बस देखता ही रह गया। वह गुलाब़ी रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुए मेरे सामने थी। थोड़ी देर के लिए तो मैं बिल्कुल सुन्न हो गया था, फिर मैं होश में आया और सीधे जाकर उसे ज़ोरों से गले लगा लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा, उसे ख़ुद को सँभालने का मौक़ा भी नहीं मिला।
चूमते-चूमते मैंने अपना एक हाथ उसकी पैन्टी के अन्दर डाल कर उसके गोरे-गोरे और मुलायम चूतड़ों को सहलाने लग गया। फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी। ब्रा उतारते ही उसकी गुलाब़ी घुंडियों वाली चूचियाँ मेरे सामने थीं। मैंने उन्हें दबोच लिया और एक हाथ से उसकी घुंडी को मसलने लगा, तो उसकी सिसकियाँ निकल पड़ीं। फिर मैंने एक झटके से उसकी पैन्टी को उतार कर उसे बेड पर लिटा दिया, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।
उसने झट से उठकर मेरे लंड को पकड़ कर चूसना शुरु कर दिया। मैंने जीवन में कभी भी ऐसा अनुभव नहीं किया था, मुझे स्वर्ग की अनुभूति हो रही थी। वह मेरे लंड को चूसती रही। मैं कभी उसकी चूचियों को सहलाने लगता, कभी घुंडियों को काट लेता। उसने मुझे नीचे लिटा दिया और स्वयं मेरे ऊपर इस तरह आ गई, कि उसकी बिना बालों की चूत मेरे मुँह के पास थी। मैंने भी उसकी चूत में उँगली डालकर चूसने लगा।
उसके गाँड की छेद भी गुलाबी रंग की थी। मैं बीच-बीच में उसमें भी उँगली डाल देता, जिससे वह अचानक चिहुँक पड़ती। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे नीचे लिटा दिया, उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर मैंने अपना लंड उसके गाँड की छेद पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसके अन्दर चला गया, जिसके कारण वो चिल्ला उठी। मैं रुक गया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा, उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने फिर उसकी जाँघों को पकड़ कर धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। वह एकदम से चिल्ला उठी।
मैंने उसके होठों को चूमने शुरू कर दिया, फिर थोड़ा सामान्य होने पर मैं उसकी गाँड में अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा। मैंने साथ में उसकी चूत में उँगली करना भी जारी रखा, जिससे उसे और भी मज़ा आ रहा था। वह सिसकारियाँ लेने लगी और बोली, अमन थोड़ा और तेज़ करो। मैंने चुदाई की गति में और बढ़ावा किया। थोड़ी देर बाद उसकी चूत से पानी आने लगा, और वह अपनी गाँड को दबोचने लगी। उसने कहा, “अमन मैं गई… मैं गई…!” कहते हुए फिर वो आहहह्हहहह…. आह्ह्हहह्हहहह करने लगी।
पर मैं रुका नहीं। ५ मिनट बाद मेरा भी निकलने वाला था। मैंने पूछा – “गौरी कहाँ छोड़ूँ?”
उसने कहा, “अन्दर ही।”
थोड़ी देर धक्के मारने का बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी गाँड में ही छोड़ दिया। यह पहला अवसर था कि मैं किसी की गाँड में स्खलित हुआ था।
फिर मैं उसके ऊपर लेट गया, थोड़ी देर लेटे रहने के बाद हमने एक-दूसरे को साफ़ किया और वापस आकार दुबारा बिस्तर पर लेट गए और बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। फिर मैंने उसकी चूत की जमकर चुदाई की।
उस दिन मैंने उसकी २ बार चुदाई की। फिर उसने मुझे १००० रुपये दिए और कहा कि अब मैं तुम्हें बुलाती रहूँगी।
उस दिन से अब तक मैंने उसकी कई बार चुदाई की। फिर मैंने उसके द्वारा अन्य स्त्रियों से भी सम्पर्क साधा। Antarvasna
मेरा नाम सुरेश है, मैं Sex Stories ग्वालियर में रहता हूँ। मुझे पहली बार सेक्स का अनुभव करने का मौका तब मिला जब मैं २१ वर्ष का था, आज मैं वह अनुभव आप सब से बाँटने जा रहा हूँ। इस समय मेरी उम्र २३ साल की है और मेरा शरीर तंदुरुस्त है और मेरी लम्बाई ५’९” है।
मैंने अपना कुँवारापन अपनी पड़ोस में रहने वाली भाभी के साथ खोया। उनकी सुन्दरता के बारे में क्या बताऊँ आप लोगों को ! फिगर ३५-३०-३६ की होगी। उनके मनमोहक शरीर को देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। उनके साथ सेक्स करकने की तमन्ना दिल में कब से थी। उनकी उम्र ३० साल की होगी।
एक दिन ऐसा आया जब मुझे उनके बदन को चूमने का मौक़ा मिला। भैया एक बिज़नेसमैन हैं और वो सुबह ही निकल जाते हैं। उनके २ बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। सुबह जब वह कपड़े सुखाने आती है, तब मैं हमेशा उनकी चूचियों और पेट को देखा करता हूँ। उन्होंने कई बार शायद मुझे देखा भी है कि मैं उन्हें छुप कर उन्हें देखता हूँ, पर उन्होंने कभी किसी से कुछ कहा नहीं। उनके मम्मों को देख कर उनका दूध पीने की इच्छा जाग जाती है। तो दोस्तों आपको अधिक बोर नहीं करते हुए मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ।
एक दिन की बात है, मुझे शहर में किसी काम से बाहर जाना था। घर में माँ और पिताजी दोनों ही नहीं थे, और घर में हेलमेट भी नहीं था और कविता भाभी के घर में सिर्फ कविता भाभी ही थी। मुझे अचानक याद आया कि भाभी के घर हेलमेट हो सकता है। तो मैं घर पर ताला लगा कर भाभी के घर हेलमेट लेने चला गया। भाभी कपड़े धो रही थी। जब वह कपड़े धोते हुए उठी तो उनकी साड़ी एक ओर हटी हुई थी और मुझे उनकी दोनों चूचियाँ ब्लाऊज़ में से दिखाई दे रहे थे। मन हो रहा था कि दूध पी लूँ। मैं उन्हें टकटकी लगा कर देखता जा रहा था, भाभी ने भी यह ग़ौर किया और अपनी साड़ी ठीक करते हुए मुझसे काम पूछा।
मैंने बताया कि हेलमेट चाहिए। भाभी ने कहा कि हेलमेट तो कमरे के ऊपर स्टोर में रखा है, चढ़कर उतारना पड़ेगा। भाभी और मैं कमरे में आ गए। मैं एक कुर्सी लेकर आ गया। भाभी ने मुझसे पूछा,”तुम रोज़ मुझे छुप-छुप कर क्यों देखते हो?”
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर भाभी से क्या कहूँ,”आप बहुत सुन्दर हैं और आपका शरीर ऐसा है कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। भैया बहुत भाग्यशाली हैं जो उन्हें आप जैसी पत्नी मिलीं।”
भाभी ने एक शरारत भरी मुस्कान से मुझे देखा. मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें एक बार चूमना चाहता हूँ। उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए हामी भर दी। मैंने उनके गालों पर चूम लिया और उसके साथ ही अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।
भाभी ने हँस कर कहा, “अब ठीक है, या कुछ और भी करना है?”
मन तो कर रहा था कि कह दूँ, पर हिम्मत नहीं हो रही थी। तो मैंने भी हँस कर कह दिया, “अनुमति मिल जाए तो सब कुछ कर दूँगा।”
वह मुझे शैतान कह कर कुर्सी पर चढ़ गई। अब भाभी अपने दोनों हाथ ऊपर कर के हेलमेट तलाश कर रही थी। उसे इस अवस्था में खड़ा देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैं उनके मम्मों और पेट को ही देखे जा रहा था। पहली बार मैंने उन्हें इतने नज़दीक से देखा था। अब मेरा नियंत्रण छूट रहा था। तभी भाभी ने मुझसे कहा कि कुर्सी हिल रही है, मुझे आकर पकड़ लो, नहीं तो मैं गिर जाऊँगी।
अब क्या था, मैंने भाभी की गाँड के नीचे से इस तरह पकड़ा कि मेरा चेहरा उनके पेट के सामने रहे। मेरे और उसके पेट के बीच कुछ ही सेन्टीमीटर का फ़ासला था। अब मेरा नियंत्रण छूट गया और मैंने भाभी के पेट पर चूम लिया।
भाभी सहम गई पर कुछ कहा नहीं। इससे मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसके पेट पर किस करना शुरु कर दिया। मैं उन्हें पेट पर चूम रहा था और उनकी नाभि को खा रहा था। अब वो मेरा सिर पकड़ कर अपने पेट से चिपकाने लगी और लम्बी-लम्बी साँसों के साथ हल्की सिसकियाँ लेने लगी।
उन्हें भी बड़ा मज़ा आ रहा था। १५ मिनटों तक उनके पेट को खाने के बाद वह कुर्सी पर बैट गई और मुझसे लिपट गई। अब मुझे हरी झंडी मिल गई थी। मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी भी। वह सच में कितनी सेक्सी लग रही थी – काम की देवी। मैं उसके होंठों को चूसने लगा। वो भी प्रत्युत्तर देने लगी। फिर मैं धीरे-धीरे उसके गले से होते हुए उसकी चूचियों तक पहुँचा।
उसकी चूचियों को चूसता और दबारा रहा और वह सिसकियाँ निकालती रही। अब मैंने उसकी ब्लाउज़ उतार दी और पेटीकोट में घुस कर उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा। अब मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँ प्रविष्ट कर दीं और लगभग १५ मिनट तक उसे उँगली से ही चोदा। उसकी चूत को खूब चाटा।
वह उउम्म्म्म्म…. आहहहहहहह ओओओह्ह्ह्हहहह, और चाटो! की आवाज़ निकाल रही थी। उसका पानी एक बार निकल गया। मैंने वो पूरा पी लिया। अब उसे भी मेरा लंड चूसने था। मेरा लंड साढ़े छः इंच का है। हम 69 की मुद्रा में आ गए। मैं उसकी चूत खा रहा था और वह मेरा लंड। इसी तरह २० मिनट के बाद वो मुझसे कहने लगी कि और मत तड़पाओ, मुझे जल्दी से चोट दो।
मैंने अपने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा, उसके पाँवों को पैला दिया और ज़ोर के धक्के के साथ लौड़ा अन्दर पेल दिया। वह चिल्लाई और तड़पने लगी। कहने लगी कि धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं उसे चोदता चला गया। थोड़ी देर के बाद वह भी मस्त हो गई और गाँड हिला-हिला कर साथ देने लगी। उसके मुँह से ओओहहहह… आआआआहहहह… और ज़ोर से… हाएएएएए…. म्म्म्म्महह्हहहहह… आआआआआहहहहह की आवाज़ें निकलना रुक ही नहीं रहीं थीं। और अब मैं उसकी एक चूची को मसल रहा था और दूसरे को चूस रहा था। उसकी घुँडियों को काट रहा था। उसे चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही बह गया और मैं उसके ऊपर लेट गया।
वह मुझसे खुश थी। उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता है, मैं जाकर उसका दूध ज़रूर पीता हूँ और उसे चोदता भी हूँ।
मेरी कहानी आप को कैसी लगी, मेल कर के बताएँ Sex Stories
मेरे और मेरी चाची के Antarvasna बीच के सेक्स का ये राज सुनो !! यह हसीन ख्वाब तब से चालू होता है जब से मेरी चाची मेरे चाचा से शादी करके हमारे घर आई। मेरे चाचा एक सुस्त प्रकृति के इंसान हैं, दुबले-पतले मुरझाये से देख के तो यही लगता है कि नपुंसक हैं !
उनकी शादी के समय तो ऐसा कुछ नहीं हुआ पर जब शादी के बाद एक दिन मैंने चाची को कपड़े बदलते देखा तो मैं पागल सा हो गया। चाची उस समय २९ साल की थी और मैं १८ साल का। मेरे लंड ने नया-नया उठना सीखा था। उनको ब्रा-पैंटी में देखकर मेरा लंड कुमार तो बिलकुल आपे से ही बाहर हो गया ! इच्छा हुई उसी वक़्त जाकर योनि क दर्शन कर आऊं।
कुछ दिन तो सब सामान्य रहा, फिर एक दिन जब चाची अपने कमरे में अकेली थी तो मैं उनके कमरे में यह देखने गया कि आखिर यह माल कर क्या रहा है !
मैंने देखा कि वो नंगी लेटी हुईं थी और एक बैंगन को अपनी चूत में डाल रही थीं। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैं आँख बंद करके उस मालजादी को चोदने के सपने देखने लगा !
इतने में ही मेरा ध्यान भंग हुआ एक आवाज से, यह आवाज मेरी चाची की ही थी, वो बोलीं- सनी बाहर क्यूँ खड़े हो? अंदर आ जाओ !
मैं एकदम से डर गया- अरे इसने कैसे देख लिया मुझे ?
अंदर गया तो चाची ने तब तक एक गाऊन पहन लिया था ! हाय उस गाऊन में भी क्या लग रही थीं वो ! उफ्फ्फ्फ़ एकदम बम्पर माल !सांवला-सलोना शरीर ! उस पर ये बड़े बड़े दूध ! मस्त चौड़ी गांड और गोल गोल जांघें ! पूरे बदन से यौवन टपक रहा था जैसे ! मैं तो दीवाना हो गया था !
तभी चाची मुझसे बोली- क्या देखते रहते हो सनी तुम मेरे कमरे के बाहर खड़े होकर?
मैं बोला- कुछ नहीं चाची जी ! बस ऐसे ही खड़ा हुआ था !
वो बोली- अगर तू ऐसे ही खड़ा हुआ था तो तेरा यह हथियार क्यूँ इतना खड़ा हुआ है?
मैं यह सुनकर एकदम सकपका गया लेकिन हिम्मत जुटाकर बोला- हथियार ? कौन सा हथियार ?
चाची बोली- अरे मेरे मिटटी के माधव ! हथियार मतलब तुम्हारा पप्पू ! याने कि तुम्हारा लंड !
मैं- नहीं चाची जी ! कैसी बात कर रही हैं आप ? मैं तो बस .. यूँही .. . और कुछ नहीं !
चाची- सुन रे लौंड़े ! जल्दी से बता दे- क्या कर रहा था? नहीं तो सब को बुलाकर बोलूंगी कि यह साला मेरी इज्जत लूटना चाहता है !
मैं तो घबरा गया एकदम से फिर मैं बोला- मैंने आपको नंगा देख रहा था, आप बहुत सुंदर हो ! मुझसे चुदवाओगी क्या आप ?
चाची- हाँ मेरे राजा ! मैं तो कब से चाह रही थी कि कोई माँ का लवड़ा फंसे तो कुछ अपनी भी प्यास शांत हो जावे ! ये तेरा चाचा तो बड़ा थकेला इंसान हैं , साला न चुम्मा लेता हैं न दूध दबाता है और न चूत चाटता है, साला मुझे भी लंड चूसने नहीं देता ! यहाँ तक कि बहनचोद कोई गन्दी बात भी नहीं करता है! शादी को दो महीने हो गए लेकिन इस भोसड़ी वाले ने सिर्फ दो बार चोदा है ! चोदा क्या है, दो मिनट मे लंड हिला के सो जाता है साला ! तू अच्छा हट्टा-कट्टा है ! तेरे से तो कुतिया के जैसे चुदुंगी मैं !
क्यूँ नहीं मेरी रानी ! बिलकुल संतुष्ट कर दूंगा, तुझे तो मैं ऐसा चोदूँगा कि तू साली बीच सड़क मे भी चुदवाने के लिए राजी हो जायेगी ! ऐसा माल जैसा शरीर लेकर अभी तक प्यासी बैठी है ? पर अब तेरी गांड को मैं अपने लंड के प्यार से सराबोर कर दूंगा ! एक काम करते हैं, यह चाचा कल जा रहा है बाहर ! तू तो यहीं रहेगी और तेरा कमरा भी घर से थोड़ा हट के है, मैं किसी बहाने से रात को तेरे कमरे में आ जाऊंगा, फिर बहनचोद दोनों मिल के सेक्स का आतंक मचाएंगे !
चाची- प्लान तो मस्त है ! तू एक काम करना, एक अद्धा दारू और एक बटर चिकन भी ले आना ! मस्त दारू पी के मूड बनायेगा ! और हाँ मादरचोद सिगरेट लाना मत भूलना ! साला पूरे तीन महीने हो गए दारू को हाथ लगाये ! इतना सीधा पति मिला है कि साला चूत को भी नहीं देख पाता ! पर आज अभी थोड़ा सा सेक्स तो कर ही लेते हैं ! तेरा लंड तो मैं आज ही चाखुंगी लौंड़े !
फिर मैंने धीरे धीरे चाची के दूध सहलाना चालू कर दिए चाची ने भी मेरे लंड को मसलना शुरू कर दिया ! मैंने चाची के गाऊन को उतार दिया और उनके बटले पीने लगा ! साली रंडी ऐसी आवाजें निकाल रही थी जैसे ब्लू फिल्म में मालू राण्डें निकालती हैं- हाय ! उफ़ सनी मादर चोद ! उफ़ साले और मसल हां हा हाय …. उफ़ ..उफ्फ्फ साले फ़ोड़ दे आज तो तू इनको ! फिर उसने झट से मेरा लौड़ा अपने मुँह मे ले लिया !
और मैं जन्नत में पहुँच गया ! वो खींच खींच कर मेरे लौड़े को चूसने लगी मैं भी उसकी फ़ुद्दी को सहलाने लगा ! आह आह क्या मजा आ रहा था ! आह, लौड़ा तो पूरा टाइट हो गेला था ! फिर सुपाड़े को चूसने लगी मेरी चाची !
फिर मुझसे बोली- अब चल गांडू मेरी बुर चाट तू !
मैं झुका और देखा तो आज क्या दर्शन हुए हैं योनि देवी के ! वाह वाह मजा आ गया- हलकी गुलाबी बुर थी चाची की पर एकदम टाइट न थी। ऐसा लग रहा था कि बहुत चुद चुकी है।
मैंने पूछा- एक बात बता रंडी ! मेरी चाची बनाने से पहले कित्तों से खेली-खाई हैं तू ?
वो बोली- छः महीने तक तो एक बॉयफ्रेंड था, उसने चोदा ! लेकिन इस सील को तोड़ने का श्रेय तो मेरे जीजाजी को जाता है ! वो बहुत अय्याश इंसान हैं ! मेरी दीदी को अलग अलग तरीके से चोदते हैं ! अबकी बार मैं उनके यहाँ जाउंगी तो तू भी चलना ! मेरी दीदी, जीजाजी, जीजाजी के भाई, उनकी पत्नी, जीजाजी की बहन और बहनोई मिलकर ग्रुप सेक्स करते हैं ! हम भी शामिल हो जायेंगे !
फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया ! उसके बाद मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया और धक्के पे धक्का मारने लगा ! वो भी मस्ताती जा रही थी ! आह आह …उफ़ …हे …आह आह मेरे राजा ! मेरे जानेमन ! मुझे कुत्ते के जैसे चोदो ! आहऽऽ फाड़ डालो आज इस बुर को ! चूत के चिथड़े उड़ा डालो आज ! आज आह आज ……. ऐसा चोदो की बस मजा आ जाये !
मैंने चाची को दस मिनट तक चोदा और झड़ गया !
चाची संतुष्ट हो गई थी आज ! बोली- कल रात को चार-पाँच बार चोदना ताकि मेरी ये छिनाल बुर भी पानी छोड़ दे !
फिर मैं बाहर आ गया !
भाई लोग मेल करो कि कहानी कैसी लगी !
अगली कहानी में अगली रात की चुदाई का वर्णन करूँगा ! अगर मेरी चाची आपको पसंद आई हो तो उसके बारे में भी लिखें। Antarvasna
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