Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Central Delhi: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Central Delhi who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Central Delhi that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Central Delhi massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Central Delhi who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Central Delhi massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Central Delhi massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Central Delhi who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Central Delhi employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Central Delhi helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Central Delhi

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Central Delhi at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

मेरा नाम लहरी बाई है, उम्र अभी 29 वर्ष(kota), (Antarvasna) जिस्म मांसल और गदराया हुआ है। मेरा जिस्म थोड़ा भारी है पर मैं मोटी नहीं हूँ। पुरुषों में मैं एक आकर्षण का केन्द्र हमेशा से रही हूँ।

मैं एक पतिव्रता स्त्री हूँ, रोज सवेरे जब मेरे पति हरि प्रसाद पूजा करके उठते हैं तो मैं उनकी पूजा करती हूँ। मेरे पति राज्य सरकार में अधिशासी अभियन्ता है। घर से पूजा पाठ करके कार्यालय में रिश्वत लेना, कमीशन लेना, सभी कार्य वे कुशलतापूर्वक करते हैं। हमारे घर में लक्ष्मी पांव पसारे जमी हुई है। मेरे पड़ोसी जो मेरे देवर के ही समान हैं, गंगा प्रसाद एक जाने माने डॉक्टर हैं, उनकी भी ऊपरी कमाई बहुत है, बस मुझसे कोई तीन साल छोटे हैं। गुलाबी, मेरी नाईन है, मेरे गांव की ही है, मुझसे पांच सात साल बड़ी है, मेरी मालिश करती है और मेरी हमराज भी है।

मैं इन्हें देवर ही कहती हूँ। मेरे देवर गंगा की निगाहें मुझ पर जमी रहती थी, शायद मेरे सेक्सी रूप का वो दीवाना था। उसकी निगाहें मेरे वक्ष की तरफ़ अधिक रहती थी। यूँ तो मेरी गाण्ड भी खासी आकर्षक उसे लगती थी, पर बेचारा वो मजबूर था, कि कैसे कुछ करे।

गुलाबी मेरे जिस्म की मालिश करने अभी अभी आई थी,”लहरी, उतार थारा कपड़ा, अब तन्ने घिस दूं !”

“क्या खबर है गुलाबी… ?” मैंने अपनी बड़ी बड़ी कजरारी आंखें उठा कर उससे पूछा।

“गंगा तो थारे पे मरा जा रिया है !”

“हुंह, मुआ… तो जैसे मेरे बोबे दबा कर ही छोड़ेगा… कुछ कह रहा था क्या ?”

“ये पांच सौ का नोट दिया है … और एक पैगाम है थारे वास्ते… “

मेरा दिल जोर से धड़क उठा। उसकी हिम्मत तो देखो… । मैंने गुलाबी की ओर देखा…

वो मतलब से हंसी।

“अरे मसखरी करे है … फेर थारे कैइ फ़रक पड़ जाये है … गंगा से दबवा ले, साली तू भी मस्त हो जायेगी !”

“फिर वो तो चोदने को भी कहेगा ?” मैं हंस कर बोली।

“तो कांई फ़रक पड़े है, थारी भोसड़ी तो कंवारी ही तो है… यूँ तो जंग लग जावेगा … “

“तो मैं क्या करूँ, हरि प्रसाद को तो बस मेरी गाण्ड ही नजर आवे … साला गाण्ड के पीछे मरा जावे है।”

मैंने अपने कपड़े उतार दिये और नीचे दरी बिछा कर लेट गई। वो मेरी पीठ घिसने लगी। गुलाबी के हाथो में ताकत थी, बड़ी मस्त मसलती थी। मेरी चड्डी उतार कर उसने एक तरफ़ रख दी और मेरे चूतड़ों के गोले गोलाई में मसलने लगी। बस मेरे शरीर में तरंगें छूटने लगी। साली जादू कर देती थी। मेरे चूतड़ों को खोल कर उसने मेरी गाण्ड के छेद में तेल भर दिया।

“ये देख तो, साली को चोद चोद के पोली कर दी है… ये देख, तीन तीन अंगुली अन्दर बैठ जावै है।”

उसने अपनी तीनों अंगुलियाँ मेरी गाण्ड में घुसेड़ दी और अन्दर चलाने लगी, घुमाने लगी। मुझे गुदगुदी सी भरने लगी। काफ़ी देर तक वो मुझे मस्ती दिलाती रही। फिर उसने मुझे सीधा कर दिया और मेरा पेट और चूचियाँ घुमा घुमा कर तेल मलने लगी, मेरे चुचूकों को तेल लगा कर मसलने लगी। मेरी चूत में बार बार करण्ट लगने लगा था। फिर वो चूत की भी मालिश करने लगी।

“देख लहरी, तेरा भोसड़ा तो सड़ गया है, ऐसा तो किसी बच्चे का भी नहीं होवै है… अरे इसकी पिलाई करा दे रे … गंगा से चुदवा ले … तेरा भोसड़ा खुल जावेगा।”

“अरे नहीं रे गुलाबी, देवर लगता है, शरम आवे है … सच बताऊँ तो मेरी हिम्मत ही नहीं है।”

“पर वो लाईन तो मारे है ना, और देख, उसका लण्ड मस्त है रे … मोटा है… एक बार ले लेगी तो मस्त जावेगी।”

“मन तो बहुत करे है … पर हरि से बेवफ़ाई नहीं करूंगी… “

“तो हरि तो बस गाण्ड ही बजावे ना… थन्ने लागे नहीं भोसड़ो चुदवाने को?”

“लागे… लागे … बहुत जोर से लागे … पर क्या करूँ, पर वो तो बस गाण्ड चोद कर सो जावे ना !”

“देख मन्ने तो गंगा ने ये पांच सौ रुपिया दिया है, थारे तक पैगाम पहुंचाने के वास्ते, तू चाहे लहरी, तो लाईन क्लीयर करवा दूँ … सीधी बात करवा दूँ … तू चाहे तो ना… “

उसने अपनी थैली में से एक चिकना चमकदार स्टील का छः इन्च का एक पाईप सा निकाला। मेरे पांव फ़ैला कर वो उसने मेरी चूत में डाल दिया। मेरी तो जान ही निकल गई। उसे अन्दर घुमाना और अन्दर बाहर करने लगी।

“क्या बिल्कुल नहीं चोदा है ? बड़ा निष्ठुर है रे जीजू तो … “

“नही… नहीं चोदा तो है पर बस आठ दस बार … उसे चूत मारने में मजा ही नहीं आता है… “

“तो गंगा को कल बुलाती हूँ … सोच लेना… ” गुलाबी ने फिर से कहा।

मैंने अपनी आंखें शरम से बन्द कर ली, उसकी हाथों की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी।

गंगा का लण्ड दिमाग में छाने लगा था। लगा गंगा ही चोद रहा है … और मेरे मन में गंगा ही बस गया था।

मुझे शान्त करके गुलाबी चली गई।

दूसरे दिन दोपहर को गुलाबी आई और मुझे देख कर मुस्कराने लगी। मेरी आंखों में काजल गजब ढा रहे थे। मेरी काली जुल्फ़ें चेहरे पर लटक रही थी। मेरे मन में हलचल मची हुई थी। जाने गंगा क्या सोचेगा ? मन में मिठास सी भरी जा रही थी। पहली बार किसी गैर मर्द के पास जा रही थी और वह भी और कोई नहीं बल्कि मेरा देवर जैसा ही था !!!

“लहरी, गंगा बाहर खड़ा चोदन के वास्ते … बोलो तो… बुला लूँ?”

मेरी सांसें चढ़ गई … पसीना सा आने लगा … हाय अब मैं क्या करूँ ?

“देख, गुलाबी, तू यहीं रहना… कहीं मत जाना… “

“नहीं जाऊंगी… बस… बुला कर लाऊं ?”

गुलाबी ने मुझे मुस्करा कर तिरछी नजरों से देखा और दरवाजे की तरफ़ बढ़ गई।

मुझे फिर मुड़ कर देखा और दरवाजे से झांक कर उसने गंगा को आवाज लगाई।

शायद वो वहाँ नहीं था। मैं जल्दी से जा कर लहंगा उतार कर पेटीकोट और ब्लाऊज पहन आई। चड्डी मैंने जान कर नहीं पहनी। गंगा के आने की आवाज मुझे आ गई थी। मेरा दिल जैसे उछल कर हलक में अटक गया।

अगले ही क्षण गंगा मुस्कराता हुआ कमरे में आ गया।

“कैसी हो लहरी ?” वो जैसे विजेता स्वर में बोला।

“मेरी तबीयत ठीक नहीं थी, सो सोचा आप को बुला लूँ… ” जाने एकदम से मेरे मुख से बहाना निकल आया।

गुलाबी हंस पड़ी,”गंगा जी सब ठीक कर देंगे, शरीर का सारा जहर उतार देंगे … और सुई भी गड़ा देंगे।”

गंगा मेरे समीप आ गया। मेरे हाथों को अपने हाथ में ले कर नाड़ी देखने लगा।

“दिल तो जोरो से धड़क रहा है … कहो, कहाँ से आरम्भ करूँ… तुम्हीं कहो गुलाबी !”

“अब मुझसे नहीं लहरी से पूछो… !” गुलाबी ने बड़े रस भरे अन्दाज से कहा।

“हटो गंगा … मुझे शर्म आती है !” मेरी निगाहें शर्म से झुकी जा रही थी।

वो मेरे पास और आ गये और धीरे से मेरे सीने पर हाथ रख दिया। मेरे दिल की धड़कन जैसे थम गई हो।

“मैं जाती हूँ… गंगा जी, जरा जम कर इलाज करियो !”

“गुलाबी, मत जा … सुन तो… !” पर गुलाबी हंसती हुई बाहर चली गई।

“अब कहो, भाभी क्या तकलीफ़ है, ये गुलाबो तो बस… ।” गंगा मुझे सामान्य करता हुआ बोला।

“मुझे ज्वर चढ़ा है, जरा देख लो… “मैंने तिरछी नजरों से उसे देखा।

गंगा ने सर पर हाथ लगा कर देखा, फिर मेरे हाथ पकड़ कर चेक किया। अपना स्टेथोस्कोप लिया और सीधे मेरी छाती पर रख दिया। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। वह अपना हाथ धीरे धीरे मेरे स्तनों पर ले आया।

मैं सिमट सी गई,”देवर जी, यहाँ तो गुदगुदी लगती है… !”

वह अपने स्टेथोस्कोप को और मेरे स्तनों को हिला हिला कर देखने लगा, मेरे भारी स्तन जैसे कठोर हो उठे, फिर धीरे से बोला,” मस्त है, मसल दू साले को?”

“जी क्या कहा… ?”

“पेट तो नहीं दुःख रहा है ना… ?”

“दुःखता है … बहुत दुःखता है… !” मैंने जल्दी से कहा।

मुझे उसके हाथों से खेलने पर बहुत भला लग रहा था। उसका हाथ मेरे पेट पर आ गया था, उसे सहलाते हुये कहा,”कुछ हुआ क्या ?” गंगा ने मसखरी की।

मैं क्या कहती भला ? वो चाहे जहाँ भी हाथ लगाये, असर तो मेरी चूत पर हो रहा था। वासना के मारे मेरी आंखें बंद होती जा रही थी। उसका हाथ मेरे पेटीकोट में से होता हुआ मेरी चूत की ओर बढ़ गया। मेरा बदन सिहर उठा। यह पहली बार था जब किसी पराए मर्द का हाथ मेरी चूत के इतनी पास लगा था।

उसका हाथ चूत पर आते ही मैंने उसे जोर से पकड़ लिया,”नहीं देवर जी … नहीं !”

पर तब तक वो मेरी चूत दबा चुका था। मेरे मुख से आह निकल गई और मैं सिमट कर बैठ गई।

“लहरी, शर्माओ मत, चलो इलाज शुरू करें … ” उसने मेरे उन्नत स्तनों को छूते हुये कहा।

“गंगा, यह तो आपके और मेरे बीच का मामला था… गुलाबी को बीच में क्यों… “

“ऐसे कैसे मामला पटता … देवर भाभी का रिश्ता जो ठहरा… “

“अब उसे पता चल गया है ना … कहीं बदनाम ना कर दे… “

“नहीं… वो ऐसा नहीं करेगी… पर आह… मेरी किस्मत, तुम्हारा यह गदराया हुआ मांसल बदन मेरे पास है, तुम्हारी ये जवानी, ये गोल गोल मांसल चूतड़ … ये भारी भारी चूचियाँ… ये कजरारी, मस्ती भरी बड़ी बड़ी आंखें … मुझे तो जन्नत मिल जायेगी तुम्हें चोद कर लहरी … हाय रे मेरी जान !”

“ना रे गंगा, तू मुझे मिल गया, मुझे सब कुछ मिल गया… !”

“लहरी, मेरा यह कड़क लण्ड दबा दे … मसल डाल इसको… ” गंगा ने अपना लण्ड खींच कर बाहर निकाल लिया।

“राजा, मेरी छाती दबा दे… बहुत मचल रही है … जोर से दाबना… मजा आ जाये मेरे राजा !” मेरा दिल मचल उठा।

मेरे स्तन उसके हाथों में कस गये थे। मेरे मुख से आह निकल गई। उसने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे रसीले होंठ कस कर अपने होंठों से चिपका दिये। मैंने उसका कड़कता लण्ड अपने नर्म हाथों में थाम लिया और कस कर उसे ऊपर नीचे करने लगी। वो सिसक उठा। मुझे सब कुछ अजीब सा लग रहा था। पराये मर्द के हाथों में मेरा शरीर कसा हुआ था। मेरे बोबे जैसे कड़क उठे थे- आह्ह्ह्ह … अरे गंगा ! जोर से मसक दे… … मेरे चूचे बाहर निकाल कर खींच खींच कर नोच ले।

गंगा का एक हाथ मेरे चूतड़ों पर आ कर उससे खेलने लगा था। कभी मेरी गाण्ड के छेद को रगड़ मारता तो कभी गाण्ड को नोच डालता। तभी उसका बम्बू जैसा लण्ड मेरे कूल्हे पर थाप मारने लगा। मेरे दांत किटकिटाने लगे… लगा कि गंगा का मांस नोच कर खा जाऊं। काम-पीड़ा बढ़ने लगी थी। मुझे लग रहा था कि काश आज यह मेरी कंवारी चूत को कस कर चोद डाले। ऐसा चोद्दा मारे कि मेरी जान निकल जाये। मेरा पेटीकोट नीचे उतर गया था। मैंने चड्डी नहीं पहन रखी थी… चुदना जो था।

गंगा भी वासना में बह चला था। उसने झटपट अपने कपड़े उतार दिये और नंगा हो गया। आह … बिल्कुल हरि प्रसाद जैसा गोरा चिट्टा लण्ड, वैसा ही मोटा, भारी सा … मेरी चूत का उद्धार जो होने वाला था। मेरी चूत फ़ड़फ़ड़ा उठी। उसने मेरा ब्लाऊज जो आधा तो खुला ही था, पूरा उतार दिया और मुझे धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया।

हाय रे मेरी आदत… मैं बिस्तर पर गिरते ही घोड़ी बन गई और गंगा पीछे मेरी गाण्ड पर चढ़ गया। उसका तन्नाया हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में सदा की तरह घुसता चला गया।

“धत्त साला ! जैसा वो, वैसा उसका भाई …! इसको भी साले को गाण्ड ही फ़ाड़नी थी !”

“क्या कहा लहरी बाई … जो मस्त होता है पहली तो वो ही चुदेगी… पर तू बुरा ना मान !” उसने दो तीन मस्त धक्के गाण्ड में मारे और फिर मेरी बात मान कर वो बिस्तर पर धम्म से लेट गया। मैं उसके ऊपर आ गई और उससे लिपट गई। उसका लण्ड मेरी चूत पर ठोकरें मार रहा था। उसका टनटनाता हुआ लण्ड 120 डिग्री पर लहरा रहा था और फिर मेरी आंखें जैसे खुली की खुली रह गई। मेरी चूत में जैसे कोई मीठी सी छुरी उतर रही थी- “गंगा … हाय रे… “

“मेरी लहरी … उफ़्फ़्फ़्फ़ !”

“पूरो ही घुसेड़ मारो … दैया री … ईईईईई सीऽऽऽऽऽऽऽ”

गंगा कुछ नहीं बोला, बस अन्त में एक झटका दिया और बच्चेदानी पर ठोकर मार दी।

“गंगा… तुझे मेरी कसम … आज मेरी फ़ाड़ डाल … बिल्कुल शुद्ध फ़ुद्दी है मेरी !”

गंगा को जैसे कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा था। उसकी रफ़्तार तेजी पकड़ रही थी, मेरी चूत अपने आप ही उसका साथ देने लगी। दोनों ही कस कस कर साथ दे रहे थे, लण्ड पूरा अन्दर तक जा रहा था।

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

उसने अचानक रुख पलटा और मुझे नीचे दबा लिया, खुद मेरे ऊपर चढ़ गया और जोर जोर से मेरी चूत को पीटने लगा।

मेरे शरीर के जैसे सारे तार बजने लगे थे … शरीर मीठे रस में घुला जा रहा था। लग रहा था कि वो जिन्दगी भर बस यूँ ही चोदता रहे … मैं चुदती रहूँ… चुदती रहूँ… चुदती रहूँ… आह्ह्ह्ह्ह्ह्… … हाय रे … मेरी मां… उईईईईईई… पर कहां !!!

मेरी चूत छलक उठी थी… कामरस छोड़ दिया था … मेरे जबड़े कस गये थे … गालों की हड्डियां तक उभर आई थी… मैं झड़ रही थी। कुछ ही पलों में गंगा ने अपना फ़ूला हुआ लण्ड मेरी चूत से निकाल लिया और लण्ड की तेज धार को हवा में लहरा दिया। वो मुठ में भर भर कर धार पर धार छोड़ रहा था। जाने कितना माल निकाला होगा उसने।

वो तुरन्त खड़ा हो गया।

तभी गुलाबी, अन्दर आ गई… हमारी हालत देख कर वो समझ गई थी कि मामला फ़िट हो चुका था और मैं चोदी जा चुकी हूँ।

“चलो गंगा जी अब बाहर … लहरी को मैं ठीक कर दूंगी।” गुलाबी मुस्कराती हुई बोली।

मैंने शरम के मारे अपना चेहरा छुपा लिया,”गुलाबी, तेरा गंगा तो मस्त चोदा मारे है … साले का मोटा भी है… !” मैंने गुलाबी को झिझकते हुये कहा।

“मैंने कहा था ना कि सर्विसिंग करा ले … वर्ना जंग लग जावेगा।” वो शरारत से बोली और मेरे गुप्तांगों पर पड़ा वीर्य साफ़ करने लगी,”अच्छी ऑयलिंग हो गई है आज तो !”

“चल हट, शरीर कही की… !” मुझे गुलाबी के सामने बहुत ही शरम आ रही थी।

काफ़ी दिन तक गुलाबी पांच सौ रुपये कमाती रही फिर एक दिन अचानक गुलाबी बोल उठी, “लहरी, गंगा से जी नहीं भरा अब तक ?” Antarvasna

दो भागों में समाप्य !

Kota jaise student city me call girl in city searches ka context samajhne ke liye, related information is page par dekhi ja sakti hai.

हैलो दोस्तो, कैसे हो? Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, मैं गुजरात का रहने Sex Stories वाला हूँ और मैं अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ जो काफ़ी दिलच़स्प है।

अब मैं मुख्य बात पर आ रहा हूँ। स्कूल के दिनों में मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था जिसका नाम राहुल था। हमारे स्कूल में हमने एक समूह बना रखा था जो मौज-मस्ती करता था और साथ-साथ खेलते-कूदते भी थे। एक दिन राहुल आया और उसने हमसे पूछा कि मैं भी तुम्हारे समूह में सम्मिलित होना चाहता हूँ। पर हमने उसे मना कर दिया और वह वहाँ से चला गया।

उसने लगातार दस दिनों तक प्रयास किया कि वह हमारे साथ शामिल हो जाए पर उसे निराशा ही हाथ लगी। एक दिन राहुल ने मुझसे कहा कि तुमसे मेरी माँ मिलना चाहती है, तुम्हें बुलाया है। तो मैंने उसे टालने के लिए कह दिया कि ठीक है, मैं मिलकर आ जाऊँगा, पर मैं गया ही नहीं।

एक दिन मैं रास्ते पर जा रहा था कि सामने राहुल की मम्मी आती दिखीं, उन्होंने मुझसे कहा- मैंने तुम्हें बुलाया था, आते क्यों नहीं?
मैंने कहा- ठीक है, आज आ जाऊँगा।
और मैं चला गया।

उसके बाद मैं दोपहर को उसके घर गया तो राहुल घर पर नहीं था, उसकी मम्मी थी। उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया और कहा कि तुम मेरे बेटे को अपने समूह में शामिल क्यों नहीं करते हो?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही।
तो आंटी ने कहा- ऐसा नहीं करते, तुम उसे शामिल कर लो।
मैंने हामी भर दी।
फिर उसने मुझसे पूछा कि थम्स अप पीओगे?
तो मैंने हाँ कहा।

उसने उस समय क्रीम रंग की साड़ी और उसी रंग की ब्लाऊज़ भी पहन रखी थी। अन्दर काली ब्रा पहनी थी, वो भी साफ़ दिख रही थी और उसकी गांड इतनी मोटी और गोल-मटोल थी कि कोई देख ले तो पागल हो जाए।

वह किचन में चली गई, थम्सअप लाने के लिए।
जब वह थम्सअप लेकर आई तो मैं हैरान हो गया कि उसने साड़ी उतारकर सफेद पारदर्शी गाऊन पहना हुआ था और अन्दर काली ब्रा और काली पैन्टी साफ़ दिख रही थी, और भरा हुआ बदन जैसे संगमरमर का ताज़महल हो।

वह थम्सअप के दो गिलास लेकर मेरे पास बैठ गई और एक गिलास मुझे दिया और एक ख़ुद पीने लगी।
पीते-पीते मेरे जाँघों पर हाथ रख कर घुमा रही थी, मुझे गुदगुदी हो रही थी, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था, इसलिए कुछ नहीं बोला।

धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे लण्ड के पास ले गई और पकड़ के मसलने लगी तो मैं खड़ा हो गया और कहा- मैं जा रहा हूँ।
तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिठा दिया, पूछा- क्या हुआ।
मैंने कहा- गुदगुदी हो रही है।
तो उसने कहा- आज तुझे कुछ सिखाऊँगी जो तेरे बहुत काम आएगा।
फिर मैं बैठ गया।

पहले तो उसने मुझे गाल पर किस किया और मेरी शर्ट उतार दी।
मैंने मना किया तो वह बोली- कुछ नहीं होगा, तुझे बहुत मज़ा आएगा।

फिर मैंने विरोध करना छोड़ दिया, उसने मेरी पैन्ट की चेन खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल कर उसे किस्स किया और मुँह में लेकर कैण्डी की तरह चूसने लगी और मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था।
मेरे दोस्त की मम्मी 15 मिनट तक मेरा लंड चूसती रही, इसी दौरान मेरे सारे कपड़े भी उतार दिए। उसने मुझसे कहा कि मेरा गाऊन उतार दो!
तो मैंने उसका गाऊन उतार दिया और काली ब्रा-पैन्टी में जैसा आगरा का ताज़महल मेरे सामने आ खड़ा हुआ।

उसने कहा मेरी ब्रा भी उतार दो, तो मैंने वैसा ही किया।
ब्रा खोलते ही जैसे दो कबूतर आज़ाद होकर उछलकर बाहर आ गए।

उसने मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह उसकी चूचियों पर रख कर मुझे चूसने को कहा तो मैं जीभ घुमाने लगा और चूसने लगा। तब उसके मुँह से आआआ आआ… हहह हहह… निकने लगी। वह मेरा लण्ड पकड़कर दबाने लगी।
थोड़ी देर में वह काफ़ी गरम हो गई और मुझे नोचने-खसोटने लगी, उसने कहा- तुम्हारा लण्ड तो बहुत बड़ा है और मेरे पति का तो इसका आधा ही है।

मैं तो मानो अपने होश में ही नहीं था। वह जैसा कह रही थी मैं वैसे ही करता जा रहा था। मेरे अन्दर इतनी समझ नहीं थी मैं कुछ कर सकूँ।
फिर वह बिस्तर पर लेट गई और बोली- तुम मेरी भोस को चाटो!
तो मैं उसकी पाँवों के बीच में बैठ कर जीभ घुमा-घुमा कर चाटने लगा। वह मेरा मुँह दबा कर जोर से चिल्ला रही थी… चाटो… चाटो… चाटो… मुझे खत्म कर दे, खत्म कर दे।

उसी समय उसकी भोस से कुछ चिकना-चिकना क्रीम निकलने लगा वो मैं पी गया वह मुझे काफी मज़ेदार लगा, तो मैंने पूरा चाट लिया।
अब उसने कहा- अब उठो और मेरी भोस में डालो!
तब मैं पोज़ीशन लेकर उसकी पाँवों के बीच बैठ गया और लण्ड पकड़कर उसकी भोस पर रख कर थोड़ा धक्का दिया। चिकनाई की वज़ह से मेरा लण्ड सटाक से अन्दर चला गया।
उसने कहा- शाबास बेटे तुमने सिक्सर लगाया, चालू रख!

मैं तो धक्के पर धक्का लगा रहा था, वो खुशी से पागल हो रही थी, नीचे से गांड उठा उठाकर साथ दे रही थी.
थोड़ी देर बाद वह उठकर खड़ी हो गई और मुझसे कहा- मेरी गांड में डाल और फाड़ दे।
उसने मुझे क्रीम दी और कहा- पहली बार गांड में डलवा रही हूँ इलसिए मेरी गांड पर ये थोड़ा लगा, और थोड़ा अपने लण्ड पर भी लगाकर पेल दे।

मैंने ऐसा ही किया और उसकी गांड पर रख कर धक्का दिया तो उसकी एक लम्बी चीख निकल गई, और बोली, बाहर निकाल नहीं तो मैं मर जाऊँगी। लेकिन मैंने कुछ नहीं सुना और धक्के जारी रखे, उसकी गांड से थोड़ा सा खून भी निकला, मैं घबरा गया तो उसने कहा कि डार्लिंग, कुछ भी नहीं, तू चालू रख, ये खुशी का खून है।

कुछ देर तक धक्के मारने के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और वह मेरा लण्ड चूसने लगी और मेरा क्रीम सारा उसके मुँह में चला गया और उसने पूरा पी लिया। फिर चाटकर मेरा लण्ड साफ कर दिया.

फिर उठकर कपड़े पहनने लगा तो उसने कहा- कल आना, मैं तुझे दूसरा मज़ा दूँगी जो तेरी शादी के बाद तुझे काम आएगा और तुझे तक़लीफ नहीं होगी और बहुत मज़ा आएगा।
अगली कहानी दूसरी बार। Sex Stories

Antarvasna

हाय ! मैं दीपक, आपने मेरी Antarvasna कहानी स्कूल में मस्ती का पहला भाग पढ़ा और मुझे मेल भेजे!

शुक्रिया !

अब अगला भाग :-

मै फ़िर से निधि को चोदने का अवसर ढूंढने लगा. स्कूल में नए साल की पार्टी थी.

कार्यक्रम ७.३० शाम को था. सभी लड़के, लड़कियां ७ बजे से आने शुरू हो गए थे.

मैं बेसब्री से निधि का इंतजार कर रहा था. वो ८ बजे अपनी सहेली के साथ आई, उसने नीले रंग की जींस और लाल रंग की टी शर्ट पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही थी.

मैं देखता ही रह गया. उसकी तनी हुई चूचियां देख मेरा लंड पैंट के अंदर ही नाग की तरह फुफकारने लगा.

पार्टी देर तक चलने वाली थी तो मैं बाहर जाकर ड्रिंक कर आया. आते ही निधि को ढूंढने लगा. वो अपनी सहेलियों के साथ डांस कर रही थी.

मैंने इशारे से उसे अपने पास बुलाया. थोडी देर में वो मेरे पास आई तो मैंने उसे कहा कि आज मैं तुम्हे फ़िर चोदूंगा.

वो बोली- सर यहाँ इतने लोग हैं, कैसे हो पाएगा?

मैंने उसे बताया कि बस इंतजाम कर दिया है, तुम स्कूल के पीछे वाले टॉयलेट में पहुँचो.

मैं सीधा वहां गया, वहां दिन में भी कम लोग आते थे, रात को तो किसी के आने का सवाल ही नहीं था. निधि आई तो मैं उसे लेकर अन्दर घुस गया और दरवाज़ा बंद कर लिया.

फ़िर मैंने निधि को बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा. शराब की गंध उसके नाक में चढ़ गई.

उसने कहा- सर आपने शराब पी रखी है.

मैंने कहा- जानेमन ! पीकर चोदने में जितना मज़ा आता है उतना कभी नहीं आता, आज देखना मैं तुम्हे कितना मज़ा देता हूँ.

इतना कह कर मैंने उसकी टी-शर्ट खोल दी और ब्रा के ऊपर से ही चूचियां दबाने लगा.

निधि ने मेरी जिप खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और सहलाने लगी.

मैंने उसकी जींस खोल कर जाँघों से नीचे सरका दी और पैंटी में हाथ डाल कर चूत सहलाने लगा.

बीच बीच में एक ऊँगली अंदर बाहर करने लगा. वो जोर जोर से सिस्कारियां भरने लगी.

फ़िर मैंने निधि को लंड चूसने को कहा. वो मेरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.

मैं उसके सर को पकड़ कर उसके मुंह में अंदर बाहर करके चोदने लगा.

फ़िर मैं उसको फर्श पर लिटा कर उसकी चूत चाटने लगा. वो जोर जोर से आहें भरने लगी.

फ़िर मैंने उसकी टाँगें उठा के अपना लंड उसकी चूत से भिड़ा दिया और एक जोरदार धक्के से उसको निधि की चूत में घुसा दिया. उसकी आह निकल गई.

वो भी अपनी कमर उठा उठा कर धक्कों में मेरा साथ देने लगी और बड़बड़ाने लगी- ओ यस और जोर से सररर फाड़ दो मेरीई ई ई चुत्त्त जोर से सररर !

मैंने रफ्तार बढ़ा दी.

निधि भी नीचे से मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी. थोडी देर में उसने पानी छोड़ दिया पर मेरा काम नहीं हुआ था क्योंकि मैंने शराब पी रखी थी.

इसलिए मैं धक्के मारता रहा.

निधि गिडगिडाने लगी- सर निकाल लीजिए अपना लंड चूत से मुझे बुरा लग रहा है, दर्द हो रहा है.

मैंने कहा मेरा काम अभी नहीं हुआ है और मैं अपना मज़ा अधूरा नहीं छोड़ सकता.

प्लीज़ सर ! आप कुछ भी कर लीजिए पर लंड चूत से निकाल लीजिए, अब मैं सहन नहीं कर सकती.

मुझे यही चाहिए था क्योंकि मै उसकी गांड मारना चाहता था. मैंने थोड़ा सोचने का नाटक किया और कहा – तुम सब करने को तैयार हो जो मै चाहूँ?

तो उसने कहा – हाँ सर आप जो कहेंगे मैं करने को तैयार हूँ, लेकिन आप पहले लंड बाहर निकालो.

मैंने लंड बाहर खींच लिया और निधि को घुटनों के बल कर दिया और उसकी गाण्ड पर थूक लगा कर एक उंगली अंदर बाहर करने लगा.

मेरा ऐसा करने पर निधि बोली- सर ! आप यह क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा – अब मै तेरी गांड मारूंगा.

तो वो कुछ नहीं बोली. शायद उसे पता नहीं था कि गाण्ड मरवाने से उसका क्या हाल होगा।

फ़िर मैंने अपने लंड का अग्र भाग उसकी गाण्ड के छेद पर रखा और जोर से धकेलने लगा.

जैसे ही मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुसा, वो जोर जोर से चीखने लगी. वो रोने लगी थी और छोड़ देने को कह रही थी, पर मैंने अपना काम जारी रखा और उसे समझाया कि बस थोड़ा और दर्द होगा जैसे पहली बार चूत की चुदाई में हुआ था, फ़िर बहुत मज़ा आएगा।

बाहर संगीत की आवाज़ तेज़ होने के कारण उसकी आवाज़ किसी ने नहीं सुनी. मैं और जोर लगा कर उसकी गांड में लंड घुसाने लगा.

जैसे जैसे मेरा लंड निधि की गांड में जा रहा था वैसे वैसे उसकी चीखें तेज़ होने लगी, लेकिन मैं पूरा लंड घुसा कर ही रुका.

फ़िर मैं लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. अब निधि की चीखें कुछ कम हो गई और वो भी धक्कों में मेरा साथ देने लगी.

१५-२० मिनट चोदने के बाद अपना पानी उसकी गांड में छोड़ मै उसके ऊपर ही ढह गया.

फ़िर मैंने अपना लंड निकाल लिया और उठ कर कपडे पहन लिए.

मैंने उसे भी कपड़े पहनने के लिए कहा. उसने उठने की कोशिश की पर उसकी गांड में काफी दर्द होने के कारण उससे उठा नहीं गया.

मैंने उसे सहारा दे कर उठाया और कपड़े पहनाए.

निधि को चलने में परेशानी हो रही थी, उसे इस हालत में पार्टी में ले जाना उचित ना होता, इसलिए मैं उसे चुपके से गाड़ी में बिठा कर उसके घर के पास छोड़ आया.

इसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता मै निधि को चोदता. Antarvasna

Sex Stories

हम फ़िर डिज्नी लैंड के मुख्य Sex Stories पार्क में आ गए, शाम ढल चुकी थी। दोनों थक गए थे। पर मालती को इलेक्ट्रिक परेड देखना था। मैंने भी सोचा, चलो, इतनी महँगी टिकट ली है तो वह भी देखा जाए, उसके लिए समय था। मैं रात के लिए योजना बना रहा था। काश ! किसी तरह मालती तैयार हो जाए !

“क्या सोच रहे हो?” मालती ने कहा,” मुझे डिज्नी की यादगार चाहिए ! मुझे एक पेनी और दो क्वाटर दो।”

वह एक मशीन के पास खड़ी थी जिसमें एक पेनी और दो क्वार्टर डालने पर वह पेनी को चपटा करके डिज्नी के किसी चरित्र का चेहरा छाप देती थी।

मैंने हाथ ऊपर कर लिए,”पैन्ट से निकाल लो !”

“दो ना !” वह बोली।

“अरे बाबा, निकाल लो ना !” मैंने कहा।

उसने जेब में हाथ डालकर टटोला। उसकी उंगलियाँ लिंग से टकराई, लिंग ने अंगडाई ली और वह लाल भभूका हुई।

मैंने सोच लिया, आज रात को इसे समागम के लिए तैयार किया जाए तो मज़ा आ जाए।

इलेक्ट्रिक परेड में जबरदस्त भीड़ थी और हम थोड़ा विलंब से पहुंचे। मालती अपने पंजों पर खड़ी हुई, पर उसे कुछ दिख नहीं रहा था।

“धत,” वह निराशा से बोली,”विशाल, सब तुम्हारी गलती है !”

मैंने उसकी जाँघों को पकड़ा और उसे हवा में उठा लिया।

“ओह विशाल, क्या कर रहे हो?”

“अपनी, प्यारी प्यारी प्रेमिका की छोटी सी मुराद पूरी कर रहा हूँ !” मैंने उसके गाल चूमते हुए कहा।

जब तक परेड चलती रही, मैं उसे बाँहों में उठाये रहा। वह डिजीटल कैमरे से क्लिक क्लिक करते रही, हर क्लिक पर मैं उसके गाल एक बार चूम लेता था। मैं महसूस कर रहा था कि उसका बदन भी धीरे धीरे तप रहा है।

मैं स्वप्न लोक में था पर तभी मुझे एक झटका लगा।

परेड ख़त्म होने के बाद हम वापिस आ रहे थे। मैंने उसके कान में धीरे से प्रणय का इज़हार किया,”मालती ! क्या आज रात में हम यौन-आनन्द लें?”

वह रुक गई, मेरी ओर देख कर बोली,” विशाल, बुरा मत मानना ! तुम बहुत अच्छे इंसान हो ! मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे तुम्हारे जैसा दोस्त मिला ! पर मैं अक्षत-यौवना हूँ ! मैं अपना कौमार्य अपने पति को भेंट देना चाहती हूँ।”

मुझे एक झटका लगा, साथ ही मुझे लगा कि किसी ने मुझे एक झापड़ मारा हो ! रास्ते भर हमने बात नहीं की। बस में उसे नींद आ गई। वह मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई। मैं उसके मासूम चेहरे को देखता रहा। वह कितनी मासूम है ! अब मुझे आत्म-ग्लानि होने लगी ! मैंने उसके बालों में धीरे से हाथ फेरा,”माला ! उठो ! नोरवाक आ गया है, यहाँ से हमें ग्रीन लाइन की ट्रेन पकड़नी है।”

हम ग्रीन लाइन की ट्रेन से एविएशन स्टेशन आये, वहां से टैक्सी से उसके होटल चले गए।

मुझे अपना टीशर्ट और अंडरवियर याद नहीं रहा। मालती ने ही कहा,”चलो, मेरे कमरे में चलो, तुम्हारा टीशर्ट देती हूँ।”

“और वो भी !” मैंने कहा।

“हाँ, वो भी !” वह मुस्कुराई।

कमरे में आकर वह बाथरूम में कपड़े बदल कर आई और बोली,”विशाल ! आज यहीं रुक जाओ।”

“मालती, नहीं ! मुझे जाने दो !”

“नहीं, विशाल ! प्लीज ! रात हो गई है, ये एक सुइट है, सोने के लिए काफी बिस्तर हैं।”

मेरे बैग में टीशर्ट के अलावा एक बरमूडा भी था। रात वाकई काफी हो गई थी, पर मेरा मन खिन्न हो गया था।

फ़िर मैंने कहा, अच्छा, मैं सुइट के फ्रंट-रूम में सो जाता हूँ।”

बत्तियां बंद हुई पर मेरी आंखों से नींद ना जाने कहाँ गायब हो गई थी। अचानक कमरे में सरसराहट हुई। मैंने नाईट लैंप जलाया, देखा- सामने मालती खड़ी थी।

“मालती !” मैंने मुंह फेर लिया, वह पारदर्शी नाईट ड्रेस में सामने खड़ी थी।

“विशाल ! नाराज हो मुझसे?”

“नहीं !” मैंने कहा।

“मेरी ओर देखो प्लीज़ ! एक बार !”

मैंने उसकी ओर देखा, उसकी आंखों में आंसू उमड़ आए थे।

“मेरी मज़बूरी समझो विशाल ! मैं पुराने ख्यालों की लड़की हूँ। मेरा कौमार्य मेरे पति की अमानत है। तुम बहुत अच्छे इंसान हो। अगर तुम मेरे पति बन जाओ तो मुझसे खुशकिस्मत कोई नहीं होगा।”

“हो सकता है !” मैंने कहा।

“हाँ, पर वो शादी के बाद होगा ना ! मैं तुम्हें निराश नहीं करना चाहती, पर मेरी मज़बूरी समझो विशाल !”

और उसकी आंखों से आंसू की धार बह निकली। मैंने तड़पकर उसे बाँहों में भर लिया। हम एक दूसरे की बाँहों में खोये रहे। फ़िर मैंने पूछा,”मालती, हो सकता है, मैं तुम्हारा पति बन पाऊं, पर अभी तुम मुझे अपना क्या मानती हो?”

“एक अच्छा दोस्त।” वह बोली।

“बस ! मैंने कहा,” ओह नो !”

“अच्छा, मेरे खास, मेरे प्रियतम !”

“बस, यही तो मैं सुनना चाहता था। देखो मालती, प्रेमी और प्रेमिका बिना कौमार्य भंग किए यौवन मधु पी सकते हैं.यह यौन क्रीडा की चरम सीमा तो नहीं, पर उसके आस पास है समझो. . .बोलो पिलाओगी?”

“हाँ, वादा करो कि कुमारित्व …”

“हरगिज नहीं, पर पिलाओगी, न.”

“क्या ? ” वह शरमा गई,”यौवन मधु ?”

“मधु बाद में, पहले दूध !” मैंने कहा।

हम एक दूसरे की बाँहों में खो गए। मैंने उसके दोनों गालों पर कई चुम्बन लिए, फ़िर मेरे ओंठ सरककर उसकी सुराहीदार गर्दन पर घूमने लगे। फ़िर मैंने गर्दन के आधार पर चुम्बन लिया। वह शरमाकर बाँहों से निकल भागी, मैं उसके पीछे भागा और उसे बाँहों में उठा कर उसके बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया।

वह कसमसाने लगी, मैंने अपने ओंठ उसके ओंठों पर चिपका दिये और रस पीने लगा। धीरे धीरे मैंने उसके ओंठों की पंखुडियाँ फैलाई और अपनी जीभ उसके मुंह के अन्दर डाली। मेरी जिह्वा ने उसकी जिह्वा को ललकारा, उसकी जिह्वा शर्म से बाहर आई और मेरी जिह्वा से भिड़ गई। उसकी पलकें बंद हो गई थी।

मैंने उसकी स्लीवलेस गाउन के कंधे की तनी खोली और उसे धीरे धीरे नीचे सरकाया, वह शरमा कर फ़िर भागना चाहती थी पर जैसे ही उठी, उसकी गाउन कमर तक खुल गई और गुन्दाज तने हुए कबूतर चोंच उठाये बाहर आ गए।

मैंने भी तुंरत अपनी टीशर्ट हवा में उछाल दी, मेरी छाती देखकर मालती ने उँगलियाँ मुंह में डाली।

अब मुझे लगा कि मेरी प्रेयसी अपना इरादा ना बदल दे। मैंने फ़िर उसकी ग्रीवा के आधार पर कई चुम्बन जड़ दिए।

“सी, आहऽऽऽ सी..” वह सिस्कारियाँ भरने लगी, मैंने ओंठ नीचे सरकाए। फ़िर उसके उरोजों पर मुलामियत से हाथ फेरा। उरोजों के आधार पर उँगलियाँ फिराते हुए धीरे धीरे उपर ले गया, पर निप्पल जान बूझकर छोड़ दिए। मेरी उँगलियों ने मेरे ओंठों को रास्ता दिखाया। मैंने उसके कान में कहा,”मेरी रानी, दूध पीने की इजाजत है?”

“स्स्सिस, उन्ह हाँ”

मुझे कोई जल्दी नहीं थी। मैंने इस बार ओंठों से उसके स्तनाधार पर कई चुम्बन लिए।पहले बाएं स्तन पर, फ़िर दाएं स्तन पर। धीरे धीरे मेरे ओंठों का दायरा दाहिने स्तन पर कम होता गया और वह निप्पल के पास पहुंचे। मैंने अभी निप्पल पर एक गरम गरम साँस छोड़ी ही थी कि मालती में मेरा सर थाम लिया और उसे कस कर निप्पल पर जमा दिया।

उफ़, क्या स्वादिष्ट था उसके निप्पल का स्वाद। मैं निप्पल पर पिल पड़ा और जोरों से चूसने लगा, दूसरे हाथ से मैंने शरारत से दूसरे स्तनाग्र को चुटकी से मसल दिया…

“उईई, मां !”

मेरे हाथ उसके पेट और नाभि में घूम रहे थे।

‘उह उई, उई मां, धीरे, और जोर से, आह धीरे।”

मैंने निप्पल बदला और बाएं निप्पल पर आक्रमण कर दिया। अचानक उसने मेरा सर जोरों से दबाया और उसका शरीर जोर से कांपा, फ़िर वह निढाल हो गई।

“मालती !” मैंने उसके कानों में सीटी बजाई,” मेरी रानी, आगे बढ़ें?”

उसने गहरी साँस लेकर कहा,” उह, हाँऽऽऽ “

मेरी उंगलियाँ नाभि पर घूम रही थी। फ़िर मैंने नाभि का एक चुम्बन लिया और नाभि में जिह्वा घुसा दी। काफी गहरी थी उसकी नाभि। उत्तेजना में उसका शरीर लगा कि लहरों में नाव की तरह उपर नीचे हो रहा है। मैंने उसके नितम्बों पर एक थपकी दी, मालती इशारा समझ गई और उसने नितम्ब उठाये, मैंने गाउन उसके शरीर से अलग करके नीचे फेंक दिया और पेंटी में उंगलियाँ फंसी ही थी कि मालती शर्म से दोहरी हो गई।

“नहीं, यह नहीं !”

“क्या हुआ मेरी रानी?”

मालती पेट के बल लेटी थी,”नहीं विशाल, पेंटी नही !”

मैंने उसके नितम्ब पर हल्का दंत-प्रहार किया।

“सी ऽऽ काटो नहीं ! ” मैंने पेंटी के कटाव पर नितम्ब में गुदगुदा स्पर्श करना शुर किया और हलके हाथ नीचे ले गया। मालती अभी भी औंधी लेटी थी, फ़िर मैंने उसके नितम्बों के बीच उंगलियाँ फिराई और पेंटी के अन्दर से हाथ ले जाकर उसके गुदा-छिद्र को हल्के से कुरेदा।

“उई मां, मालती हवा में उछल पड़ी। इतना ही मेरे लिए काफी था, मैंने पेंटी नीचे सरका दी। मालती ने हार मानकर करवट बदली और टाँगें उपर उठाई पर तुंरत उसने योनि को हाथों से ढँक लिया।

“विशाल, नो ! प्लीज़ !”

“क्यों?”

“मुझे शर्म आती है ! तुम अब भी …”

“ओह हो !यह तो तुम्हारा काम था। खैर मैं कर देता हूँ अपनी प्यारी-प्यारी प्रेयसी की खातिर।” मैंने एक झटके से बरमूडा और अंडरवियर उतार फेंके। मेरा लिंग ज्यादा लंबा तो नहीं है, सिर्फ़ छः इंच का, पर उस समय वह भूखे शेर की तरह दहाड़ता हुआ बाहर आ गया।

“मालती, इसे छू कर तो देखो मेरी जान !” मैंने प्यार से कहा,” काटेगा नहीं !”

मालती का लाल भभूका चेहरा, उसकी आँखें भी बंद ! योनि पर उसकी हथेलियाँ और कस कर जम गई। मैंने लिंग के अग्र भाग से उसकी योनि में ढँकी उँगलियों को स्पर्श किया तो मेरे लिंग ने प्री-कम की एक बूंद उगल दी।

अब ?

इस हसीना के साथ जबरदस्ती का मेरा कोई इरादा नहीं था।

मैं फ़िर उसके उरोजों से रस पीने लगा।

“सी, उई आह इस्स्स्स्सी, .” योनि पर उसके उसके हाथ थोड़े ढीले पड़े। मैंने लिंग के अग्र भाग से उसके बाएं निप्पल को स्पर्श किया, वह सिसक पड़ी और उसकी उँगलियों ने मेरे लिंग को धकेला ..

इसी का तो मुझे इन्तजार था, योनि से उसकी हथेलियाँ हटते ही मैंने उसकी जांघों में अपना सर घुसा दिया और उसकी योनि का एक मधुर चुम्बन ले लिया।

“उई ऊऊऊऊउईईईईइ माँ मम्मी, मम्मी !”

और मैं उसकी आर्द्र झिरी में जीभ चलाने लगा। जीभ उपर ले जाकर मैंने उँगलियों से उसकी योनि के ओंठ खोले और जीभ कड़ी करके अन्दर घुसा दी और मथानी की तरह चलने लगा।

“अहा, अहा, उई, सीई, सीईईईईईईई, ”

और मैंने भगनासा खोज लिया और जिह्वा से एक करारा प्रहार किया।

“ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईइ, सीईईईईईईइ”

उसने मेरा सर जांघों से जोर से दबाया, उसकी योनि में मानो मदन-रस की बाढ़ आ गई.. मैं उसका यौवन मधु पीने लगा और वो उत्तेजना के चरमोत्कर्ष पर पहुँच कर निढाल हो गई। जैसे ही उसने आँखें खोली, मैंने फ़िर एक बार भगनासा का जीभ से मर्दन किया।

“ऊऊऊऊईईईई मर गाआआआआआईईईईईइ”

वो फ़िर शिखर पर पहुँची और निढाल हो गई।

इस बार मैंने अपना लिंग उसकी दरार से भिड़ाया। उसने चौंक कर आँखें खोली- नहीं विशाल नहीं ! प्लीज़, वादा?”

हाँ, वादा याद है मेरी रानी !”

मैंने लिंग के अग्र भाग से उसकी भगनासा के साथ घर्षण किया।

“सीईईईईईईए, ऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईई,आआया ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् “

वह फ़िर मानो आकाश में ऊँची उड़ी, एक रॉकेट की तरह, फ़िर झड़कर निढाल हो गई। जैसे ही उसकी आँखें खुली, मैंने उसका प्रगाढ़ चुम्बन लिया ।”मेरी रानी, देखा न, यौवन-क्रीड़ा का मधुर आनंद . .अब खुश हो ना?”

“हाँ, मजा तो आया, पर !”

“पर क्या?”मैंने पूछा।

“तुम प्यासे रह गए !”

“मेरी चिंता मत कर पगली”मैंने उसका एक और चुम्बन लिया।

“क्यों नहीं? मैंने कहा था न, कि अगर तुम मेरा वो चूसोगे तो मैं भी तुम्हारा वो चूसूंगी।”

और इससे पहले मैं कुछ कहता, उसने मेरा लिंग पकड़कर जोर से मरोड़ा मैं दर्द से कराहकर बिस्तर मैं पीठ के बल गिरा और वह मेरे उपर छा गई।उसने पहले मेरे निप्पल चूसने शुरू किए।

“आह, मालती, आह, प्लीज़ दांत नहीं आह !”

वह धीरे धीरे नीचे सरकी, नाभि पर अपन जिह्वा धुमाई, फ़िर और नीचे…फ़िर ना जाने उसे क्या सूझा, उसने रेशमी जुल्फों से तन्नाये लिंग को छेड़ा, लिंग उछल पड़ा।

फ़िर उसने शरमाते हुए लिंग थाम लिया और उंगलियाँ उपर नीचे फिराने लगी, लिंग के अग्र भाग को उसने नाखून से कुरेदा।

“आह, अचानक मुझे लगा, लिंग के अग्र भाग में कोई ठंडा अंगूर घिसा जा रहा है। वह अपने स्तनाग्र बारी बारी से घिसने लगी।

उसकी जिव्हा अब मेरे अंडकोष चूम रही थी।

“आह, आह” मैंने उसके लंबे बाल पकड़कर सर आगे धकेला।

“आआआह्ह्ह” मैं उत्तेजना के सागर मैं गोते लगाने लगा। उसने पहले लिंग का अग्र भाग चूसा फ़िर पूरा लिंग मुंह में भर लिया।

“आया ह्ह्ह … वह जीभ का सञ्चालन कर रही थी। अचानक मेरे शरीर की मसें कड़ी हुई,”आ ह्ह्ह्ह् ऊऊऊ आआआ ह्ह्ह्हा ” मैंने उसे पीछे धकेलना चाहा, पर कुछ नहीं, मेरा शेर उसके मुंह के पिंजरे मैं कैद था। मेरे लिंग से वीर्य की धारा फ़ूट पड़ी।

अगले ही क्षण बिस्तर में हम एक दूसरे की बाहों में थे।

इस तरह बिना मैथुन या गुदामैथुन के हमने यौन-क्रीड़ा का भरपूर आनंद उठाया।

तीसरे दिन मालती चली गई। मैंने मालती से कहा कि मैं जल्दी भारत आऊंगा और तुम्हारे मम्मी-पापा से तुम्हारा हाथ मांग लूँगा पर मैं अभी जल्दी भारत जाने के मूड में नहीं हूँ। मैं यहाँ यौवन के नए अनुभव अर्जित करना चाहता हूँ ताकि जब मालती से शादी हो तो उसे यौन-क्रीड़ा का सम्पूर्ण आनन्द दे सकूँ !! हम अभी भी ऑनलाइन भीनी भीनी मीठी रसभरी बारें करते हैं ! Sex Stories

प्रिय पाठको, मेरा नाम निहारिका है और मैं कोलकाता से रहने वाली हूँ.
मेरी उम्र 23 साल की है और मैं देखने में बेहद मस्त व ख़ूबसूरत हूँ. मैं एक प्राइमरी स्कूल में टीचर हूँ.

मैं अपनी सच्ची Xxx साली जीजा सेक्स कहानी शेयर करने जा रही हूँ. मेरी हिंदी की भूल को माफ़ कीजिएगा.

मेरी एक बड़ी दीदी हैं, जो मुझसे 4 साल बड़ी हैं और उनकी शादी हो चुकी है.
मेरी दीदी हमारे घर से एक घंटे की दूरी पर रहती हैं, इसलिए अक्सर हमारा आना जाना लगा रहता है.

मेरी दीदी की लाइफ अच्छी और सुखद है. जीजा जी एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करते हैं. वे दिखने में अच्छे और काफी आकर्षक व तगड़े हैं.
ये बात मेरी दीदी की शादी के 3 साल के बाद की है. उस वक़्त मैं 20 साल की थी.

हमारे यहां एक फंक्शन में सब लोग आए हुए थे, तो दीदी और जीजा जी भी आए हुए थे.

मेरे जीजा जी अक्सर मुझसे मजाक करते थे और नॉटी बातें करते थे.
मैं अक्सर उनकी नॉटी बातों को नजरअंदाज कर टाल देती थी.

चूंकि हमारा रिश्ता भी जीजा साली का था तो उनका मजाक करना बनता था.
दीदी भी कुछ नहीं बोलती थीं.

मैं उस वक़्त जवान और अल्हड़ थी और सच बोलूँ, तो जीजा जी पर भी मेरा थोड़ा क्रश था. दूसरी ओर जीजा जी भी मुझ पर थोड़ा फ़िदा से थे.
वे मुझ पर फिदा होते भी क्यों न,
आखिर मैं इतनी मस्त माल जो हूँ.

मेरा फिगर 32-28-34 का था और मैं बेहद गोरी हूँ.
बहुत सारे लड़के मेरे पीछे पड़े थे, पर मुझे कोई जँचता ही नहीं था.

जीजा को देख कर लगता था कि इनके जैसा कोई मिले तो बात बने. बस इसी वजह से जीजा जी मुझे अन्दर ही अन्दर कुछ लव सा हो गया था.

खैर … इन सब बातों को छोड़ कर मैं सीधा अपनी जवानी की वो मदमस्त सेक्स कहानी आप सब पाठकों को सुनाती हूँ, जिसके आपके सामान भी गीले हो जाएं.

दरअसल ये बात 2019 की है. हमारे यहां जो समारोह था, उसकी तैयारी के लिए दीदी ने मुझे और जीजा जी को कुछ सामान लाने बाजार भेजा.

मैं उनके साथ अपनी स्कूटी से चली गई. स्कूटी को मैं चला रही थी और जीजा जी मेरे साथ पीछे बैठे थे.

उस दिन मैं पार्लर से आई थी और बहुत खूबसूरत लग रही थी.

मैंने एक पीली साड़ी पहनी थी.
जीजा जी अक्सर कहते थे कि मैं साड़ी में बहुत खूबसूरत दिखती हूँ.

फिर घर में जिस तरह का समारोह था, तो कुछ पारंपरिक ही पहनना था.
बस उसी वजह से मैंने ये साड़ी पहन ली.

जीजा जी भी मुझे देखे जा रहे थे.
मुझे भी अच्छा लग रहा था.

साड़ी को मैंने बहुत ही अच्छे से बांधी थी.
मेरा ब्लाउज भी बैक लैस था.
और शिफॉन साड़ी पहने होने से मेरा पेट थोड़ा सेक्सी सा नजर आ रहा था.

साड़ी को भी मैंने नाभि से नीचे बांधी थी, तो मेरी गहरी नाभि भी कामुक नजर आ रही थी.

मैं स्कूटी चला रही थी और जीजा जी पीछे बैठे थे.
रास्ते में एक गाय बीच में आ गई, मैंने अचानक से ब्रेक लगा कर स्कूटी रोकी तो जीजा जी मेरे ऊपर ही ढह गए और चिपक से गए.

उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली.
उस वक़्त तो मुझे अहसास नहीं हुआ, क्योंकि रास्ते की भीड़ भाड़ में ध्यान नहीं गया, पर दस सेकंड बाद मुझे लगा कि मेरे जीजा जी मेरी नंगी कमर पकड़े हुए हैं.

मैं कुछ नहीं बोली और गाड़ी चलती रही.
मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था और कुछ पल के लिए घबराहट सी भी लगी, लेकिन फिर मुझे अच्छा लगने लगा.

आखिर पहली बार जीजा जी ने मुझे छुआ था.
रास्ता थोड़ा लम्बा था और मैं भी स्कूटी को धीरे धीरे चला रही थी.
जीजा जी अब भी मेरी कमर पकड़े हुए ही थे.

मैंने भी कुछ नहीं बोला.
गाड़ी चलाते चलाते मैंने महसूस किया कि उनका हाथ मेरी साड़ी के पल्लू के और अन्दर आ रहा है. अब उनका हाथ मेरी नाभि पर था.

मुझे मेरी नाभि पर छूने से बहुत अच्छा और कामुक सा लगता है; मैं मदमस्त हो जाती हूँ.

कुछ 30 मिनट बाद हम अपनी जगह पर पहुंचे और सामान लेकर वापस आने लगे.

जीजा जी ने रास्ते में मुझसे कहा- आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.
मैंने उनसे थैंक्यू कहा.

उन्होंने आगे बोला- अगर मेरी तुम्हारी दीदी से शादी न हुई होती, तो मैं तुमसे ही शादी करता, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.

उनकी इस बात पर मैं शर्मा गई.
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था, दिल धक धक करते हुए जोर से धड़क रहा था.

मुझे लगा कि मैं अगर और देर तक गाड़ी चलाई तो कहीं ठोक न दूँ.
इसी को ध्यान में रख कर मैंने एक खाली सी जगह देख कर गाड़ी रोक दी.

जीजा जी ने पूछा- क्यों रोकी गाड़ी?
मैं कुछ बोल नहीं पा रही.

मैंने कहा- आप चलाइए.
उन्होंने मेरी हालत देख कर समझ लिया और मुझसे गाड़ी ले ली.

तभी मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने गाड़ी पर बैठने से पहले उन्हें होंठों पर किस कर लिया.
यह देख वे भी भौंचक्के से रह गए.

आखिर मैंने उनसे कह ही दिया कि आप मुझे बहुत पसंद हैं और मुझे ख़ुशी है कि आप मेरे जीजा जी हैं.
वे मुस्कुरा रहे थे.

उस दिन अगर हम रास्ते में न होते तो मेरी जवानी के मज़े तो मेरे जीजू उसी वक़्त ले लेते.
पर परिस्थितियां वैसी न थीं और हमें जल्दी घर आना था तो हम आ गए और घर पर अपने कामों में लग गए.

उस दिन के बाद से जीजू मुझे जब भी अकेला पाते, तो मेरे पास आकर मुझे धीरे से गले लगा लेते या चूम कर भाग जाते.

अब हम दोनों को एक दूसरे के जज्बात पता चल चुके थे तो हम दोनों भी अच्छे से एक दूसरे से मिलने की अपनी तैयारी में लग गए.

यह तैयारी जीजा जी कर रहे थे.

उस दिन के बाद से हम दोनों जब भी हम दोनों खाली होते, तो अक्सर मोबाइल पर, व्हाट्सऐप पर घंटों बातें करते.

वीडियो कॉल पर मैं नंगी होकर उन्हें अपना जिस्म दिखा कर और ज्यादा उकसाने लगी थी.

उस वक़्त मैं कॉलेज में मास्टर्स की डिग्री की तैयारी कर रही थी तो मुझे कोचिंग की आवश्यकता हुई.

जीजा जी ने मुझे एक कोचिंग के बारे में बताया.
यह कोचिंग उनके घर से आगे जाने वाले रास्ते में थी.

उन्होंने मुझसे वहां दाखिला लेने को कहा.
घर में भी सबने मान लिया.
मैं भी खुश थी.

कोचिंग में एडमिशन लेने के बाद मैं जीजा जी के साथ आना जाना करने लगी, उनकी बाइक पर ही मैं आती जाती.

एक दिन मैंने प्लान बनाया.
उस दिन मैं एक कोचिंग की एक्स्ट्रा क्लास का बहाना बना कर जीजा के साथ निकल पड़ी.

उन्होंने हमारे लिए एक दूर के होटल में कमरा बुक करा रखा था.
हम दोनों वहां कोचिंग जॉइन करने के समय तक पहुंच गए.
अब हमारे पास शाम तक का समय था.

हमने नाश्ता आर्डर किया जो रूम में ही आ गया.
उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के आलिंगन में हमबिस्तर थे.

मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.

मैंने बाथरूम में जाकर अपने कपड़े बदल लिए जो मैं अपने साथ लेकर आई थी.
बाथरूम से बाहर आते ही जीजा ने मुझे हग कर लिया.
मैं एक छोटा सा टॉप और हॉट पैन्ट्स में थी.

मेरा टॉप मेरी कमर के ऊपर तक आ रहा था जिससे मेरी नाभि दिख रही थी.
नीचे मेरी सेक्सी जांघें जीजा जी के लंड को अकड़ा रही थीं.

जीजू ने मुझे गोद में उठा लिया और किस करने लगे.
मैं आहें भरने लगी.

फिर मैंने उनका कुर्ता खोला और पजामे का नाड़ा ढीला कर दिया.
उन्होंने भी मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे टॉप को खोल दिया.

मैं अब एक ब्लैक ब्रा और पैन्ट्स में थी.

जीजू मेरी गर्दन को किस करने लगे.
मैं जोर जोर से आहें और सिसकारियां लेने लगी.

फिर उन्होंने ब्रा के ऊपर से ही मेरे दोनों स्तनों पर किस किया और ब्रा खोल दी.
अब वे पागलों के जैसे मेरी चूचियों को बड़ी बेरहमी से जोर जोर से मसल रहे थे.

मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

फिर उन्होंने मेरे एक दूध पर काट लिया तो मैं चीख पड़ी.
पर उन पर कोई असर नहीं पड़ा था वे जोर जोर से चूसते और काटते रहे.

उनके प्यार की निशानी मेरे स्तनों पर बन गई थी.

मेरी ब्रा खोलने के बाद जीजू ने मेरी पैन्ट्स खोल कर फेंक दी. मैं अब सिर्फ अपने ब्लैक पैंटी में थी.
वह मेरे सपाट पेट पर किस करने लगे और मैं पागल हो रही थी.

उनकी जीभ मेरी नाभि में आ लगी और बस मैं चहक उठी.
उन्होंने मेरी नाभि में जीभ को भीतर तक डाल कर किस किया.

मेरी नाभि बहुत गहरी है.
जब उन्होंने अपना मुँह लगाया तो मेरी सांस अन्दर चली गई और नाभि और गहरी लगने लगी.

वह नाभि पर चूमते हुए मेरी फुद्दी को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगे.

अब तो मुझसे रहा ही नहीं जा रहा था.
उन्होंने हल्के हल्के लव बाइट मेरे पेट पर नाभि के आस पास भी दिए, जैसे बूब्स पर दिए थे.

फिर मैंने खुद ही अपनी पैंटी को उतार कर फेंक दिया.
अब मैं अपने सेक्सी जीजू के सामने पूरी नंगी थी.

वे मुझे निहार रहे थे और अपना मोटा सा लंड सहला रहे थे.

उनका मोटा लंड देख कर मैं डर रही थी.

वे बोले- कुछ नहीं होगा.
मैंने कहा- इतना मोटा मेरे अन्दर कैसे जाएगा?

वे बोले- तुम बस लेटी रहो, मैं सब कर लूँगा.
मैं बोली- बहुत दर्द होगा!

वे बोले- अपने प्यारे जीजू के लिए इतना दर्द नहीं सह सकती क्या!
मैं हंस पड़ी.

अब जीजू बोले- पहले मुँह में लंड लेकर चूसो.
मुझे ये अजीब सा लगा पर मुझे पता था कि लड़कों की ये आदत होती है.

मैं मुँह में लंड लेने हुई पर लंड मेरे मुँह में पूरा नहीं आ रहा था.
जीजा जी ने कहा- इसे अच्छे से चूसो.

अब किसी तरह से उनका मोटा लंड मेरे मुँह में अन्दर बाहर होने लगा था.

जीजू मेरे सर को पकड़े थे. फिर अचानक से उन्होंने अपना पूरा लंड मेरे में मुँह में घुसाने की कोशिश की.

लंड मेरे गले तक आ गया.
मैं हांफने लगी.

मैंने जीजू से कहा- इतना लम्बा मैं पूरा कैसे लूं!
वे बोले- जितना ले सको, उतना अन्दर करो.

वे खुद भी जोर जोर से मेरे मुँह को चोदने लगे.
मैं बेबस सी उनके सामने थी और जो वे बोल रहे थे, वह कर रही थी.

उनका मोटा लंड मेरे थूक से चमक रहा था.

थोड़ी देर बाद जीजू बोले- अब रुको और तुम लेट जाओ, अब मैं तुम्हारी चूत में लंड घुसाऊंगा.

मैं सहमी सी लेट गई और उनके मोटे लंड को निहारने लगी.
तब मैं सोचने लगी कि मेरे जीजू, दीदी की क्या हालत करते होंगे.

मेरे सोचते सोचते तक ही वे मेरे ऊपर आ गए और लंड का मोटा सा सुपारा मेरी चूत पर घिसने लगे.
जीजा जी के लौड़े की गर्मी से मैं ऐसे मचलने लगी जैसे पानी के बाहर मछली.

उसके बाद अचानक उनका 6 इंच का मोटा लंड मेरे अन्दर घुसता चला गया.
मैं चीख पड़ी.

पर उन्हें मानो कोई फ़िक्र ही नहीं थी.
वे अपने मोटे लंड को मेरी बुर के अन्दर पेल कर आगे पीछे होने लगे और मैं जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
पहले हल्का दर्द हुआ, पर अब मज़ा आने लगा.

जीजा जी दस मिनट तक मेरी चूत में लंड पेल कर चोदते रहे.

फिर वे अपना लंड निकाल कर बोले- अब घोड़ी बन जाओ.
मैंने वैसा ही किया.

जीजू ने फिर से अपना मूसल सा लंड मेरी चूत में पेल दिया और कमर पकड़ कर जीजू आगे पीछे होने लगे.

मेरी हालत ख़राब हो रही थी.
पर वे तो किसी ज़ालिम के जैसे लगे हुए थे और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

कुछ देर बाद जीजू को ज्यादा मस्ती चढ़ गई और अब वे मेरे लंबे बाल पकड़ कर घोड़ी बना कर पीछे से मुझे ताबड़तोड़ चोदने लगे.

इस तरह मुझे और 10 मिनट चोदने के बाद उन्होंने अपना मोटा लंड बाहर निकाल लिया.

मैं तो दो बार झड़ कर पूरी गीली हो चुकी थी. पर उनका लंड अभी तक खड़ा था.

अब मैं सोच रही थी और कितना करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा- अब मेरे लंड को चूसो.

उफ्फ … क्या बताऊं पहली बार मैं अपनी ही चूत का पानी चख़ रही थी.

मैं मस्त होकर लंड चूसने लगी.
उनका मोटा लंड इस बार मुझे बड़ा मजा दे रहा था और जीजू भी पागल हो रहे थे.

वे मेरे मुँह में पूरा लौड़ा घुसाने की कोशिश कर रहे थे पर मैं पूरा नहीं ले पा रही थी.
मैं मुश्किल से आधा लंड ले पा रही थी.

मैंने बहुत देर तक लंड को चूसा.

फिर जीजू बोले- अब लेट जाओ.
मैं किसी सड़क छाप रांड की तरह चूत पसार कर लेट गई.

अब जीजा जी दोबारा से मेरे ऊपर चढ़ गए थे और उनके मोटे लंड का सुपारा मेरी चूत को छू रहा था.
मैं पागलों के जैसे गांड उठा कर लंड लेने को मचल रही थी.

उन्होंने धीरे से पूछा- और चाहिए?
मैंने जल्दी से हां में सर हिलाया.

इसके बाद तो उनका लंड मेरी चूत में दोबारा जा घुसा और इस बार तो वह जैसे किसी पागल सांड के मानिंद हो गए थे.
चूत को भोसड़ा बनाने की नीयत दिखने लगी थी.

मेरे दोनों पैर उनके कंधे पर थे.
उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली और जोर जोर से झटके लगाने शुरू कर दिए.

मेरी चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी.
इन आवाजों को सुन कर वे और पागल हो गए.

अब जीजू मेरे स्तनों को पकड़ कर दबा रहे थे और लौड़े के झटके लगा रहे थे.
मैं ‘आह आह … उहह उह्ह्ह’ कर रही सिसकारियां ले रही थी.

हम दोनों का बदन पसीने से लथपथ हो गया था.

उनके जोर के झटकों से मेरे दोनों दूध बड़ी तेजी से हिल रहे थे.

सिर्फ स्तन ही नहीं बल्कि मेरा पेट भी लहरा रहा था.

उनका मोटा लंड ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी चूत में अन्दर तक जा रहा था.
मुझे जीजू के लंड का अपने पेट में भीतर तक अहसास हो रहा था.

इस तरह और दस मिनट तक वे मुझे चोदते रहे.
मैं उनके नीचे बेसहारा और उनकी दया पर निर्भर पड़ी थी मानो मैं कोई बकरी हूँ और वह किसी शेर की तरह मुझे ज़कड़ कर रखे थे.

कुछ देर बाद उनके झटके और तेज हो गए.
मैं चीखने लगी और जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.

तब मैं कराहती हुई उनसे बोलने लगी- आह जीजू छोड़ो, मैं अब और नहीं सहन कर पाऊंगी … इस्सस.

पर क्या बोलूं … उस ज़ालिम जीजा ने छोड़ने का नाम न ही लिया.

इस तरह करते करते अचानक से उनका शरीर अकड़ सा गया और लंड पूरा अन्दर तक जाकर अड़ गया.

अगले ही पल मुझे अपने पेट में कुछ गर्म गर्म सा अहसास हुआ.
उनके लंड का पानी मेरी चूत में ही निकल गया.

Xxx साली जीजा सेक्स से मैं पागल सी हो गयी थी.
मेरा भी शरीर अकड़ गया था और गांड ऊपर को उठ गयी थी. मेरा भी पानी जोर से निकल रहा था.

मेरी आंखें बंद हो गई थीं और जीजू की भी.

मैंने चादर को जोर से पकड़ लिया और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी.

जीजू पानी निकाल कर मेरे ऊपर बैठ गए और मुझे निहारने लगे.

अब मैं भी मुस्कुरा कर उन्हें देखने लगी.

अगर आपको यहां तक की सेक्स कहानी पसंद आई हो, तो कृपया मुझे बताएं.

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆