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मेरा नाम निक्की Antarvasna है और अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है। दोस्तो, मैं दावे से कह सकता हूँ कि मेरी यह कहानी पढ़ने के बाद सभी लड़के अपने लण्ड को मसले बिना नहीँ रह पाएंगे और सभी लड़कियाँ अपनी चूत में ऊँगली करती नज़र आयेंगी।
मेरी उम्र 25 साल है और मैं अजमेर का रहेने वाला हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। कॉलेज मै प्रवेश लेने के कुछ ही दिन में हमारा अच्छा खासा ग्रुप बन गया। उसी ग्रुप में एक लड़की थी सिमी। देखने में वो एकदम सेक्सी लगती थी। जब चलती थी तो ऐसा लगता था कि दिल पर छुरियाँ चला गई। उसकी गांड बहुत ही मस्त और मोटी थी। उस पर उसका गोरा बदन और मोटे मोटे बोबे ! उसको देखते ही ऐसा लगता था कि बस कैसे भी इसे चोद डालूँ !
धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ती जा रही थी और हम एक दूसरे से मस्ती करने लगे थे। कुछ दिनों बाद इससे पहले कि कोई और उसे प्रपोज़ करता मैंने उसे प्रपोज़ कर दिया और उसने भी हाँ कह दी। बस फिर क्या था, मेरे तो मन की हो गई थी। अब तो मुझे अपना काम बनता नज़र आ रहा था। धीरे धीरे हमारा रिश्ता बढ़ने लगा और हम एक दूसरे से काफी खुलने लगे। कभी कभी मैं उसके अंगों को भी छू लेता। शुरू में तो उसने एक दो बार एतराज़ किया पर फ़िर धीरे धीरे उसे भी ये सब अच्छा लगने लगा।
अब हम दोनों काफी खुल गए थे और सेक्स के बारे में भी बातें करने लगे थे। मेरी सारी योजना मुझे सफल होती नज़र आ रही थी।
एक दिन मैंने उसे एक रेस्टोरंट में चलने को कहा तो वो झट से राजी हो गई। मैं उसे अपने ही एक दोस्त के रेस्टोरंट में ले गया जहाँ पर हट-सिस्टम था। हम वहाँ कुछ देर बैठे और फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया।
पहले तो वो बोली- यह क्या कर रहे हो ? कोई देख लेगा !
पर जब मैंने उसे बताया- कोई नहीं आयेगा ! यह मेरे दोस्त का ही रेस्टोरेंट है और मैंने उसे पहले ही मना कर दिया है कि हमारी हट में वेटर को दोबारा मत भेजना !
तो उसने कोई आपत्ति नहीं जताई और सीधी मेरी बाहों में आ गई। मैंने भी बिना कोई देर किये अपने होंट उसके होंटों से सटा दिए और उसे जोर से चूमने लगा। शुरू में तो वो साथ नहीं दे रही थी पर जब मेरे हाथ धीरे धीरे उसके बदन पर रेंगते हुए उसके वक्ष तक पहुँचे और मैंने उन्हें उसके कुरते के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया तो कुछ ही देर में वो भी गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी। उस दिन मैंने उसके होटों का मस्त रसपान किया और उसके स्तनों को भी दबा दबा कर लाल कर दिया।
इस तरह हमारा एक दूसरे के बदन से खेलना कुछ दिनों तक जारी रहा और फ़ोन पर भी मैं उससे सेक्सी बातें करता रहा।
एक दिन उसके घर कोई नहीं था तो वो कॉलेज नहीं आई। मैंने उसके घर पर फ़ोन किया तो उसने मुझे घर पर ही आने को कह दिया। मै तो कब से ऐसे ही मौके की तलाश में था। मैंने समय बर्बाद न करते हुए तुरंत ही अपनी गाड़ी उठाई और उसके घर पहुँच गया। जैसे ही मैंने घण्टी बजाई सिमी ने दरवाजा खोला। उसने हल्के गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी और वो उसमे मस्त लग रही थी। उसने मुझे अन्दर बुलाया और बैठने को कहकर पानी लेने चली गई। वो पानी लेकर आई और मेरे सामने बैठ गई।
मैंने उससे पूछा- सब कहाँ गए हैं?
तो उसने बताया कि भाई स्कूल गया है और ५ बजे तक आयेगा और मम्मी और पापा किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हैं और वो भी शाम तक ही आएंगे।
यह सुनकर मेरे चेहरे पर ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी।
तभी उसने मुझसे पूछा- क्या लोगे ?
तो मैं भी तपाक से बोला- तुम को !
इतना सुनते ही वो बोली- तुम बहुत शरारती हो गए हो !
इतने में मैंने खड़े होकर उसे चूम लिया और अपनी बाँहों में भर लिया। धीरे-धीरे मेरे हाथ उसके बदन पर ऊपर-नीचे रेंगने लगे। वो भी मेरी बाँहों में समाती चली गई। उसके होंट मेरे होंटो से सट चुके थे। तभी मैंने उसके वक्ष पर हाथ डाल दिया और उसके मस्त मोटे स्तनों को हाथ में ले लिया और सहलाने लग गया। उसके स्तनों को हाथ में लेते ही मैं समझ गया कि आज उसने ब्रा नई पहनी है। मैंने उसे एक ही झटके में गोद में उठा लिया और पूछा- तुम्हारा बेडरूम कहाँ है?
उसने हाथ के इशारे से मुझे रास्ता बताया। बेडरूम में आकर मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया, उसकी बगल में लेट कर उसे चूमने लगा और बोला- आज मैं तुम्हारा बदन देखना चाहता हूँ !
यह कहकर मैंने उसे नाइटी उतारने के लिए कहा। पहले तो उसने मना किया पर मेरे जोर देने पर वो मान गई और नाइटी उतार दी। जैसे ही उसने नाइटी उतारी, उसके गोल गोल संतरे जैसे स्तन मेरी आँखों के सामने थे। क्या मस्त चूचियाँ थी ! उन्हें देखते ही मेरा सात इन्च का लंड सलामी देने लगा और मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर मस्त तरीके से चूमने लग गया।
इस पर वो बोली- अब तुम्हें भी अपने कपड़े उतारने होंगे !
उसके इतना कहते ही मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर एक तरफ़ फ़ेंक दिए और उससे चिपक गया। उसका गोरा बदन देख कर मैं मस्त हुआ जा रहा था। अब मैं उसके गोरे गोरे और मोटे स्तन चूसने लग गया और एक हाथ को उसके पूरे बदन पर ऊपर से नीचे तक घुमा रहा था। धीरे धीरे वो गर्म होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी- आआह्ह्ह्ह स्सस्सस्सस उसने लाल रंग की पैंटी पहन रखी थी मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबा दिया और सहलाने लगा।
उसके मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी और वो मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। मैंने भी मौका देखकर उसकी पैंटी मै अपना हाथ डाल दिया और धीरे से उसकी चूत के दाने को रगड़ दिया।
इतना करते ही वो एकदम से चिंहुक उठी और मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- नीचे नहीं !
पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने भी उसे अपनी कसम दी और उसके हाथ को हटा दिया। अब मैं उसकी चूत की फांकों को अपनी उंगलियों से अलग करने लगा और उसकी चूत के दाने को रगड़ने लग गया। वो बेचैन हो उठी और मुझे अपने से कसने की कोशिश करने लगी, उसकी सिसकारियाँ और भी बढ़ गई। थोड़ी देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मैं समझ गया कि यह चुदने के लिए बिल्कुल तैयार है।
तभी मैंने उसकी पैंटी को उसके बदन से अलग कर दिया और उसने भी कोई विरोध नहीं किया। उसकी चूत क्या मस्त थी ! बिल्कुल गुलाबी ! एक भी बाल नहीं था उसकी चूत पर ! उसे देखते ही मैं तो जैसे पागल हो गया। मैंने बिना किसी देरी के उसकी चूत पर एक चुम्मा जड़ दिया और अपने हाथ से उसे दबाने और मसलने लग गया। वो और भी उत्तेजित हो गई और मुझसे चिपक गई।
मैंने एक बार फिर से उसके होटों को चूसना शुरू कर दिया और एक हाथ से उसकी चूत के दाने को छेड़ता रहा।
अब वो भी साथ देने लगी थी और उसका हाथ अपने आप मेरे लंड तक पहुँच गया था। मैंने भी धीरे से अपना जॉकी उतार दिया और अपना लंड उसके हाथों में थमा दिया। वो भी अब मेरे लंड से खेलने लगी थी मैंने उसे लंड मुंह में लेने को कहा तो उसने मना कर दिया पर मेरे जोर देने पर मान गई और उसे चूसने लगी, मेरे पूरे बदन में एकदम से बिजली सी दौड़ गई और मेरा लंड एकदम लोहे की छड़ की तरह सख्त हो गया। मेरे लंड को देखकर वो बोली- यह तो बहुत बड़ा है !
मैंने भी कह दिया- मजा भी बड़े से ही आता है !
और हम दोनों हंस पड़े। फिर मैंने उसे लिटा कर उसके बोबों को चूसना शुरू कर दिया और फिर से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा और धीरे से अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के द्वार पर रखकर अन्दर दाल दी। वो सिसकियाँ लेने लगी और मस्त होने लगी … उसकी मस्ती बढ़ने लगी थी, उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मै समझ गया कि यही सही समय है और उसके ऊपर आकर अपने लंड को उसकी चूत के मुख का रास्ता दिखा दिया और एक हल्का सा झटका दिया पर चूत कसी होने की वजह से लंड अंदर नहीं गया…..
मैंने थोड़ा और जोर लगाया और लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया और वो चीख उठी !
यह उसकी पहली चुदाई थी… वो मुझे हटाने लगी पर मैंने उसे समझाया- पहली बार में थोड़ा दर्द होता ही है !मैं उसे चूमने लग गया, थोड़ी देर में वो शांत हो गई तो मैंने दूसरा झटका लगाया और करीब आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। उसके मुँह से चीख निकल गई और वो रोने लगी। पर मैंने रहम ना करते हुए एक और झटका मार दिया और मेरा पूरा लंड उसकी जड़ तक जा बैठा।
वो जोर से चिल्लाई पर मैंने अपने हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया और उसे शांत रहने को कहा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। मैं कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा और उसे चूमता रहा। उसकी चूत से खून निकल रहा था। कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया और वो कमर हिलाने लगी। मैंने भी अब लंड अंदर-बाहर करना चालू कर दिया।
अब वो भी मजे लेने लगी थी और मेरा साथ दे रही थी और उसके मुँह से मस्त आवाज़ भी आ रही थी-आ आहऽऽ आआऽऽ अँऽऽ आ……..आआअ..हह……
और अब मैंने भी अपनी गति बढ़ा दी थी…….
करीब आधा घंटा की चुदाई के बाद अब वो अकड़ने लगी और अब मैं भी झड़ने वाला था। दस पन्द्रह झटकों के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।
उसके बाद मैंने उसे कई तरीकों से चोदा, वो फिर कभी बताऊंगा…..
आपको मेरी यह सच्ची कहानी कैसी लगी, मेल करके बताएँ ! Antarvasna
यह कहानी एक Antarvasna सत्य घटना पर आधारित है, लेकिन इसके सभी पात्रों के नाम काल्पनिक हैं !
आज सुबह से ही मौसम बहुत रोमान्टिक था। रिम झिम पानी बरस रहा था, मैं इस विचार में था कि आज कैसे अपने आफ़िस पहुँचूंगा। इतने में बारिश बन्द हो गई। हालांकि आफ़िस के लिये अभी बहुत समय था फिर भी मैं निकल पड़ा। आफिस में सफाई चल रही थी। मैं सीधे अपने केबिन में चला गया, और कम्प्यूटर खोल कर मेल चेक किया।
मैंने सोचा कि अब क्या करें, आफिस में कोई था नहीं तो मैं नेट पर पोर्न साइट खोल कर वीडियो क्लिप्स का मजा लेने लगा। देखते देखते मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैं अपना लन्ड पैन्ट के बाहर निकाल कर सहलाने लगा।
मैं अपने में पूरी तरह से मस्त था और मुझे पता ही नही चला कि इसी बीच रश्मि (रिसेप्सिनिट) कब आ कर मेरी इस हरकत को निहार रही है। यह तो तब मुझे पता चला जब रिसेप्शन पर फोन की घन्टी अचानक बजी और उसको अटेन्ड करने के लिये मेरे केबिन की तरफ से भागी।
मैंने तुरन्त नेट बन्द किया और अपने खड़े लन्ड को पैन्ट में किसी तरह डाल कर रश्मि को डरते हुए आवाज लगाई यह जानने के लिये कि उसने मुझे उस हालत में देखा है या नहीं, उसके व्यव्हार से पता चल जायेगा।
मेरे बुलाने पर वह थोड़ी देर के बाद आई और सर झुका कर बोली- यस सर…!
मैंने पूछा- तुम कब आई?
वह थोड़ी सी रुकी, मेरी पैन्ट की तरफ देखा और मुस्करा कर बोली- जब आप कम्प्यूटर पर बहुत व्यस्त थे… सर !
मैं सकपका कर हिम्मत कर के बोला- ओह ! तो तुमने कम्प्यूटर पर सब कुछ देख लिया?
जी… ! आप जो कर रहे थे वह भी मैंने देख लिया !
क्या देखा ? मैंने मुस्कराकर पूछा।
वह बोली- आप का ‘वो’ बहुत सेक्सी है !
‘वो’ क्या? मैंने पूछा।
वह बेशर्मी से बोली- आप का काले तिल वाला लन्ड !
तुम्हें मेरा लन्ड पसन्द है?
तो वह बोली- जी !
मैंने बगैर देरी किये तुरन्त पैन्ट की जिप खोल कर लन्ड को बाहर निकाला जोकि अभी भी खडा़ था, उसको दिखाया और बोला- इसको अपने हाथ से पकड़ो और फिर बताओ कि कैसा है? वह बोली- सर कोई आ जाएगा..!!
मैंने कहा- ठीक है, आज मैं पूरे आफिस की छुट्टी कर देता हूँ !
और मैंने फोन कर के सबको सूचित कर दिया कि आज अधिक बारिश के कारण ऑफ़िस बन्द रहेगा।
फिर मैंने रश्मि से कहा- मुख्य-द्वार को अन्दर से लॉक कर दो !
वह अपनी कंटीली मुस्कुराहट के साथ दरवाज़ा लॉक करने चली गई।
इसके बाद मैंने अपनी पैन्ट को खोल कर थोड़ा नीचे सरकाया ताकि पूरा लन्ड दिखे, जिसको देख कर वह प्रभावित हो जाये और मेरी सालों की हसरत पूरी हो जाये।
खैर मैं अपना लन्ड सहलाने लगा। तभी रश्मि हौले से अपना कदम मेरे केबिन में रखते ही बोली- माई गॉड ! यह तो बहुत लम्बा और मोटा है… सर !
उसने बिना किसी डर के मेरी पैन्ट पूरी उतार दी, मेरा लौड़ा बाहर निकाला और चूसने लगी। मेरा लौड़ा और ज्यादा तन गया। वह ऐसे चूस रही थी जैसे काफी समय से प्यासी हो। मैं भी रश्मि की चूचियों को कुर्ते के ऊपर से ही धीरे-2 दबाने लगा।
उसकी चूचियां काफी बड़ी लग रहीं थी। वह मेरे लंड को बहुत अच्छी तरह से चूस रही थी। मैंने भी उसके मुँह को धीरे-2 चोदना शुरु किया उसको और मजा आने लगा।
अब वह मेरा पूरा का पूरा लौड़ा अपने मुंह में ले रही थी और एक हाथ से मेरे अण्डकोषों और दूसरे हाथ से अपनी चूत को सलवार के ऊपर से सहला रही थी। शायद वह बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। यह देख कर मैंने उससे कहा- अब तुम अपने सारे कपड़े उतार दो !
मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकालते हुए वह बोली- ठीक है सर…! मैं भी यही सोच रही थी !
और खड़ी हो कर वह अपने कपड़े उतारने लगी, मैंने अपने लंड की तरफ देखा, सुपाड़ा फूल कर लाल टमाटर की तरह हो गया था और मेरा लौड़ा रश्मि की चूत में घुसने के लिये पूरे साइज़ में तैयार था ।
इस बीच रश्मि पूरी तरह नंगी हो चुकी थी, क्या गजब की उसकी फीगर थी ! जैसे किसी मूर्तिकार ने बड़े इतमिनान से उसे तराशा हो ! गोरा रंग, सुन्दर बॉब कट घने बाल, तीखे नाक-नक्श, नशीली नीली आँखें, सुराही दार गर्दन, बड़ी-2 ठोस चूचियाँ, पतली कमर, सुडौल उभरे हुए चूतड़, चूत के माथे पर झाँटों की एक बारीक रेखा और उसके बगल में एक काला तिल, जो कि उसकी चूत को और सेक्सी बना रहा था, केले के तने जैसी उसकी जांघें !
कुल मिलाकर वह आकाश से उतरी कामासक्त अप्सरा लग रही थी, जिसका एहसास मुझे आज हुआ …
इससे पहले रश्मि को हमने हमेशा ढीले-ढाले कपड़ों में ही देखा था। मैं कभी सोच नहीं सकता था कि उसका जिस्म इतना खूबसूरत होगा यदि मैंने आज उसे नंगी देखा न होता।
” कहाँ खो गए…सर ?” रश्मि ने धीरे से कहा और मेरा लंड फिर से पकड़ कर सहलाने लगी।
कुछ नहीं ! मैं तो तुम्हारी सुन्दर फीगर और चूत पर काला तिल, देख कर होश खो बैठा…!
वह धीरे से मुस्कराई और बोली- आप के लन्ड के सुपाड़े के ऊपर की खाल पर भी तो काला तिल है जिसको देखते ही मैं जान गई कि आप भी बहुत बड़े चोदू हैं दुनिया की किसी भी लड़की को संतुष्ट कर सकने की क्षमता आप में है सर…
आप भी अपनी शर्ट उतारिए ना !
तुम्हीं उतार दो ना… ! मैंने मुस्कराते हुए कहा।
वो बे-झिझक मेरी शर्ट उतार कर और मेरे खड़े लंड को पकड़े थ्री-सीटर सोफे की तरफ खींचते हुए ले गई और वहाँ मुझे आराम से बैठा दिया और खुद फर्श पर घुटनों के बल बैठ कर मेरा लंड फिर से चूसने लगी।
मैं भी आराम से बैठ कर उसके मुँह को चोदने लगा। कोई 15 मिनट चुसाने के बाद मेरा लण्ड जब झड़ने वाला था तो मैंने रश्मि से कहा कि वो अपना मुँह मेरे लंड से हटा ले ताकि मैं बाहर झड़ सकूँ।
वह बोली- मैं आप का सोमरस पियूँगी !
और लगी कस के चूसने ! और फ़िर मैं एक झटके से उसके मुँह में झड़ गया। उसने मेरा सारा वीर्य बड़े चाव से स्वाद ले कर गटक लिया। रश्मि का ब्लो-जोब इतना खास था कि मेरे जैसा चोदू और अनुभवी आदमी जिसको झड़ने के लिए कम से कम 45 मिनट चाहिए, उसको रश्मि ने मात्र 15 मिनट में ही खलास कर दिया।
मैं बगैर पूछे न रह सका- रश्मि डार्लिंग ! यह बताओ ! आम तौर पर भारतीय नारी वीर्य नहीं पीती है, फिर तुमने मेरा सारा वीर्य क्यों पिया?
उसने अपनी पूरी स्पर्म थैरेपी की बात बतानी शुरू की…
आगे की कहानी दूसरे भाग में ! Antarvasna
प्यारे दोस्तो, मैं राहुल कोटा Antarvasna से एक बार फिर से आया हूँ एक मजेदार सच्ची कहानी लेकर। आशा है कि कोटा की सभी लड़कियों को पसंद आएगी ! तो इसी आशा के साथ मैं अपनी सच्ची कहानी शुरू करता हूँ।
यह घटना है पिंकी की जिसका एक और नाम पूजा भी है। पूजा हमारी ही जाति की है। आज से करीब चार साल पहले उसकी शादी हो चुकी है और अभी उसके दो बच्चे भी हैं। देखने में थोडी सांवली है पर नाक नक्श तो ऐसे तराशे हुए है जैसे पूरे जिस्म को सोच समझकर बनाया गया हो।
उसकी शादी से पहले मेरी और उसके रिश्ते की बात चली थी पर हम दोनों की कुंडली नहीं मिल पाने के कारण हमारी शादी नहीं हो पाई थी। उसकी शादी के बाद हम दोनों का बात करना और मिलना सब बंद हो गया था।
अभी लगभग पंद्रह दिन पहले की बात है, हमारे समाज में एक शादी थी, वो भी हमारे घर से कुछ ही दूरी पर। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ, शाम को छ: बजे मैं घर पर आया तो मेरी मम्मी ने कहा कि मैं उनको शादी में छोड़ आऊं।
मम्मी को शादी में छोड़कर मैं सीधा घर पर आ गया। इस समय मेरे सिवा घर पर कोई भी नहीं था। मैं टीवी देखने लग गया। कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि सामने पूजा और मेरे मामा का लड़का खड़ा था। मैं उसको देखकर चौंक गया कि यह कैसे आ गई।
मैंने उनको बिठाया और पानी पिलाया। उसने मुझसे कहा कि उस शादी में वो भी आई है। उसने मम्मी से मेरे बारे में पूछा होगा तो मम्मी ने बताया कि वो घर पर ही है, और वो मुझसे मिलने घर पर आ गई। वो केवल पांच मिनट ही बैठी और जाने लगी। वो बाहर निकली ही थी कि वापस अन्दर आई और मुझसे मेरे मोबाइल नंबर देने को कहा तो मैंने दे दिया। तब उसने मुझे कॉल करने को कहा। उस दिन की वो बात ख़त्म हो गई।
दो तीन दिन बाद मेरे मोबाइल पर किसी नंबर से मिस कॉल आया। मैंने दुबारा उसी नंबर पर कॉल किया तो पता चला कि वो नंबर पूजा का है। बस उस दिन से हमारे बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई। उस दिन से मेरे अन्दर का सेक्स भी उसके लिए जाग गया था।
कुछ दिन बाद उसका जन्मदिन था तो मैंने उसे कॉल करके विश किया और उससे पूछा कि बताइए आपको क्या चाहिए।
तो उसने कहा- जो आपका दिल हो दे देना !
तो मैंने कह दिया- फिर जो भी मैं देना चाहूँ, वो आपको लेना पड़ेगा !
तो उसने हाँ बोल दिया।
मैंने कहा- फिर मैं कब आ सकता हूँ आपके यहाँ?
पूजा ने कहा- सुबह आठ से लेकर शाम को सात बजे तक कोई भी नहीं होता है घर पर ! तो आप इस बीच किसी भी समय पर आ जाना। उसके इस तरह से कहने का मतलब शायद मैं समझ चुका था इसलिए एक दिन शनिवार को मैं घर से दस बजे निकलकर उसके घर पर चला गया।
उसने मुझे बिठाया और चाय पिलाई। वो थोड़े गरीब लोग थे और घर में छोटे छोटे केवल दो ही कमरे थे। एक कमरे में उसके बच्चे सोये हुए थे। कुछ देर बाद मैंने उससे कहा कि मुझे दूसरा कमरा भी देखना है तो वो मेरे साथ दूसरे कमरे में आ गई। वहाँ पर लाइट नहीं थी इसलिए अँधेरा था। उसने आगे होकर मुझसे पूछ लिया कि बताओ आप क्या देना चाहते थे मुझे !
तो मैंने बिना शर्म किये सीधे बोल दिया- मैं तुमको किस करना चाहता हूँ और मैं तुमको बहुत पसंद भी करता हूँ !
पहले तो उसने मना किया और जाने लगी पर मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। उसने दूर होने की कोशिश नहीं की। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी। तब मुझे लगा कि वो भी यही चाहती है। मैं उसे करीब दस मिनट तक किस करता रहा।
उसने साड़ी पहन रखी थी पर मैंने पहले उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा को भी उतार दिया। इसका उसने थोड़ा विरोध तो किया पर उसमें उसकी मर्जी भी शामिल थी। फिर मौका देखकर मैंने अपनी जींस खुद ही उतार दी और अंडरवियर भी। बहुत देर तक मैं उसके स्तनों को चूसता रहा। सही में दोस्तो, इतना दूध भरा था उनमें कि मैं तो मस्त हो गया। फिर मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसने साफ़ साफ़ मना कर दिया।
मैंने कहा- लंड तो तुमको चूसना ही पड़ेगा !
उसने मुझे कहा कि लंड तो उसने आज तक उसके पति का भी नहीं चूसा। तो मैंने कहा कि मैं तुम्हारा पति नहीं हूँ ! लंड तो तुमको मुंह में लेना ही पड़ेगा !
बहुत देर के बाद वो केवल कुछ सेकंड के लिए मेरे लंड को मुंह में लेने को तैयार हुई। मैंने उसको अपने पैरों पर बिठाया और लंड को उसके होंठों से लगा दिया। जैसे ही उसने लंड को मुंह में लिया, मैंने पीछे से उसके सर को पकड़कर आगे के तरफ धक्का दिया जिससे पूरा लंड उसके मुंह में चला गया और लंड को कस कर उसके मुंह में डालकर रखा। उसने दूर हटने की बहुत कोशिश की पर मैंने उसके सर को कसकर पकड़ रखा था और उसके मुंह को चोद रहा था।
मैं करीब दस मिनट तक उसके मुंह को चोदता रहा और उसके मुंह में ही झड़ गया। मैंने उसका सर अभी भी अपने लंड से अलग नहीं होने दिया। इस कारण से उसको मेरा सारा वीर्य पीना पड़ा। उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे। फिर मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद जब मैं फिर से सेक्स के लिए तैयार हो चुका था तो मैंने उसे जमीन पर पटक कर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उसको उसकी साड़ी से आजाद कर दिया और पेंटी भी उतार दी।
पहले तो मैंने उससे ऐसे ही पूछा- नीचे तो डाल सकता हूँ न लंड को?
तो उसने तपाक से जवाब दिया कि उन्होंने (उसके पति ने) पहले ही इसको चौड़ा कर रखा है, अगर तुम डाल भी लोगे तो क्या हो जाएगा ! अब डाल भी दो, बहुत बेचैनी हो रही है।
मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक धक्का मारा तो वो सीधा चूत की गहराइयों में चला गया। सच में लंड के अन्दर जाने का तो मुझे एहसास ही नहीं हुआ। तब मुझे पता लगा कि साला उसका पति उसे कितना चोदता होगा। पर मुझे क्या ! मुझे तो केवल हल्का होना था। मैंने उसकी चूत में लंड के धक्के मारना शुरू कर दिया. करीब आधे घंटे तक मैं उसे चोदता रहा। फिर लंड को निकाल कर उसके वक्ष के बीच की दरार में रगड़ने लगा। दोस्तो, इसका भी एक अलग ही आनंद है। और फिर कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य उसके वक्ष पर छोड़ दिया। इस सारे प्रोग्राम के बाद वो कुछ ज्यादा ही खुश लग रही थी, पर जाने क्यूँ मुझे अच्छा नहीं लगा और वहां केवल पांच मिनट रुक कर वापस घर आ गया।
अब वो मुझे रोज कॉल करती है, पर मैं सोचता हूँ कि हमारे बीच जो भी हुआ वो हम दोनों की गलती थी। पर मैं अब क्यूँ उसकी शादीशुदा जिन्दगी को बर्बाद करूँ। इसलिए मैं उसका फ़ोन रिसीव नहीं करता हूँ। हांलांकि मेरे ऑफिस और उसके घर के बीच में ज्यादा से ज्यादा दो किलोमीटर की दूरी होगी पर फिर भी मैं वहां नही जाना चाहता हूँ।
कई बार वो मुझे मैसेज भी करती है कि वो मुझसे लाइफ टाइम सेक्स चाहती है पर वो मेरी ही जाति की होने के कारण मुझे डर सा लगता है। इससे पहले मैं नहीं जानता था कि किसी लड़की में सेक्स को लेकर इतना क्रेज भी होता है।
तो दोस्तो, यह थी मेरी और पूजा की कहानी। इस कहानी में जैसा कि सब बताते है कि चोदते वक़्त लड़की के मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलती रही, मैंने ऐसा कुछ नहीं बताया है। क्यूंकि उस समय ऐसा कुछ हुआ ही नहीं ! हाँ थोड़ा उसको दर्द जरुर हो रहा था पर इतना नहीं कि वो चिल्लाती रहे। मैंने उसको न तो घोड़ी बनाकर चोदा और ना ही कुतिया बनाकर !
ये कह सकते है कि वो केवल एक सधारण सेक्स था।
आपके संदेशों के इन्तजार में आतुर ! Antarvasna
मेरा नाम करण है, मैं शिमला से हूँ और दिल्ली में काम करता हूँ, आपको अपनी असली Antarvasna कहानी सुनना चाहता हूँ।
मैंने दो महीने पहले अन्तर्वासना-कथाएँ पढ़नी शुरू की और सोचा कि मुझे भी अपनी असली कहानी सुनानी चाहिए कि मैंने कैसे पहली बार अपनी होने वाली बीवी के साथ सेक्स किया। उसका नाम कोमल है और अब हमारी शादी हो गई है।
दो साल पहले की बात है, एमबीए पूरा करने के बाद मैंने एक कंपनी में नौकरी कर ली। मेरी एक मौसी की लड़की पूजा चंडीगढ़ में नौकरी करती थी। वो एक पेइंग-गेस्ट रहती थी अपनी दोस्त के घर पर। हम दोनों भाई-बहन बहुत करीब हैं। कोमल उसकी पुरानी दोस्त थी। मैंने उसे कभी नहीं देखा था।
पूजा मुझे मजाक में कहती थी- भईया आपकी शादी अपनी सहेली कोमल से करवाउंगी।
मैं भी बोल देता- ठीक है, करवा देना !
मैं एक बार दिल्ली से शिमला जा रहा था। त्यौहारों के मौसम के कारण चंडीगढ़ से दो घंटे बाद बस थी। तो मैंने बस स्टैंड से पूजा को फोन किया।
उसने बोला- मैं मार्केट में हूँ, आप बाजार में आ जाइए।
मैं बाजार चला गया। उसके साथ एक खूबसूरत लड़की थी।
पूजा ने बताया- यह कोमल है !
क्या बताऊँ उसके बारे में ! प्राकृतिक सौंदर्य था वो। हमारी सिर्फ हाय हैलो हुई।
पूजा कोमल को भी कहती थी कि आप दोनों की शादी मैं करवाउंगी। एक सप्ताह बाद में वापिस दिल्ली चला गया। पूजा रोज फोन पर कोमल के बारे में पूछती थी- कोमल कैसी लगी आपको?
बाद में मैंने हाँ कर दी और कोमल ने भी हाँ कर दी। कोमल के परिवार वाले भी मान गए क्योंकि उसके पापा मुझसे मिल चुके थे। मेरे परिवार को भी पूजा ने बताया, वो भी मान गए। फिर हमारी फ़ोन पर बात होने लगी और हम संदेशों का आदान-प्रदान भी करने लगे।
धीरे-2 हम काफ़ी घुलमिल गए। इस बीच हम दोनों के परिवार मिले और हमारा रिश्ता तय हो गया और दो महीने के बाद मार्च में सगाई भी तय हो गई। अब जब भी मैं कभी घर जाता तो कोमल से 1-2 घंटे के लिए मिल लेता था। हम बाजार में ही मिलते। अब तक हम काफ़ी पास आ गए थे।
हमारी सगाई से दो सप्ताह पहले मेरे एक दोस्त के पिता की मृत्यु हो गई। मैं वहाँ गया। वापिसी में मैं कोमल से मिलने चंडीगढ़ चला गया।
उस दिन बरसात हो रही थी। बैठने के लिए हम एक पार्क चले गए। पार्क के बीच एक छत सी बनी हुई थी, हम वहाँ बैठ गए। वो भीग गई थी, उसने कहा- मुझे ठण्ड लगा रही है।
मैंने हिम्मत करके उसे बाँहों में ले लिया। बहुत नाजुक सी थी वो ! उसने आंखें बंद कर ली और अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया।
मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने उसे और कस लिया। वो मदहोश हो गई। मुझे अपनी छाती पर उसके मम्मों का एहसास होने लगा। मुलायम और गर्म गर्म मम्मों के एहसास से मेरा लंड खड़ा होने लगा। किसी लड़की से मेरा पहला एहसास था। वो बिलकुल मदहोश हो गई।
मैंने हिम्मत करके कहा- कोमल, मैं तुम्हें चूम सकता सकता हूँ?
उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखें बंद ली। मैंने उसके माथे पर एक चुंबन किया। फिर दोनों गालों पर किया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए। धीरे धीरे उसके होठों को चूसने लगा।
क्या एहसास था ! गरम और नरम होंठ थे उसके !
वो भी साथ देने लगी थी मेरा। एक लड़की को बरसात में चूमने का क्या एहसास क्या होता है, मैं ही जानता हूँ।
काफी देर बाद हम अलग हुए, सिर्फ चुंबन ही किया। हम शादी से पहले आगे नहीं जाना चाहते थे। फिर कुछ दिन बाद हमारी सगाई हो गई। अब जब भी मिलते तो हम एक दूसरे को चूमते थे। एक बार चूमते हुए हम कुछ ज्यादा ही गर्म हो गए। हम पार्क में थे तो कुछ कर भी नहीं सकते थे।
दिल्ली जाकर मैंने संदेश भेजा कि आज मेरा दिल नही मान रहा, मुझे फ़ोन पर ही चूमो।
वो मुझे चूमने लगी। वो भी तब कुछ ज्यादा ही गर्म थी।
मैंने कहा- आज मेरा दिल कर रहा है कि तुम्हें सारी पा लूँ !
उसने कहा- कैसे ?
मैंने कहा- मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।
उसने कहा- वो क्या होता है?
मैंने कहा- सेक्स !
तो कोमल बोली- किया तो है हमने !
मुझे तो झटका लग गया, मैंने पूछा- कब किया?
वो बोली- क्यूं? चूमते तो हो हर बार !
मुझे हंसी आ गई और पूछा- सेक्स के बारे में क्या जानती हो?
उसने कहा- जब होंठ चूमते हैं तो उसको सेक्स कहते हैं।
मेरी तो हंस-2 कर बुरी हालत थी! मैंने पूछा- तुम्हें किसी सहेली ने सेक्स के बारे में नहीं बताया क्या?
वो बोली- नहीं।
मुझे लगा कि वो मेरा बेवकूफ बना रही है पर सच में उसे पता नहीं था कि सेक्स में क्या करते हैं!
तो मैंने उसे बताया कि सेक्स क्या होता है और सेक्स क्यूँ करते हैं। वो शरमा गई। फिर मैंने उसे फोन सेक्स के बारे में भी बताया। अब हम रोज रात को फोन सेक्स करते थे, उसे भी मजा आता !
अगली बार जब हम मिले तो एक फिल्म देखने गए। थियेटर में बहुत कम लोग थे। मैं उसके कंधे पर हाथ फेरने लगा, वो भी गर्म होने लगी थी। .उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया! फिर मैं उसके होंठ चूमने लगा, वो भी पूरा साथ दे रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और उसके मुँह में फिराने लगा और उसकी जीभ को चूस रहा था!
मैंने एक हाथ उसकी कमीज में डाल दिया और पेट पर फिरने लगा। उसके शरीर को मैंने पहली बार छुआ था। उसकी सांसें तेज हो गई, उसने आंखें बंद कर ली और उसके मुँह से आवाजे निकलने लगी- म्मम्मम्मम्म मम्म म्मम्मम आहऽऽ
मैंने अपना हाथ ऊपर किया और उसके मम्मों पर फिराने लगा। मैं ब्रा के ऊपर से उसके चूचे दबा रहा था। इतनी नरम चीज़ मैंने पहली बार स्पर्श की थी। मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। वो भी मम्म अम मम कर रही थी। फिर मैंने हाथ उसकी ब्रा के अंदर डाल दिया। उसके नर्म नर्म मम्मों से मेरी हालत खराब हो रही थी, मैं तो पागल हो रहा था। उसकी भी हालत खराब हो रही थी।
मैंने धीरे से पूछा- कोमल, मुझे तुम्हारी सलवार में हाथ डालना है !
उसने मना कर दिया- कोई देख लेगा।
वो भी चाहती थी पर डर रही थी। मैंने धीरे से हाथ उसकी सलवार में डाल दिया और उसकी पैन्टी के ऊपर से हाथ फिराने लगा। उसकी चूत की गर्मी को महसूस करने लगा, मेरी हालत ख़राब हो गई थी! अब मैंने उसकी पेंटी के अंदर हाथ दाल दिया। उसने अपनी चूत के बाल एक दम साफ़ किये हुए थे। एकदम गर्म और चिकनी चूत थी। मैं उसकी चूत की मालिश करने लगा। कोमल ने अब मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और मेरी गर्दन को चूसने लगी! मैं भी तेज-2 उसकी चूत को मलने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- मम्म म्मम्म मम मम मम म्मम्म .
उसने मेरी गर्दन पर अपने दांत लगा दिए और काटने लगी। शायद वो भी गर्म हो गई थी, उसकी चूत भी गीली हो गई थी। मैंने एक ऊँगली अंदर दाल दी और फिराने लगा। उसने और तेज काटना शुरू कर दिया। मेरी हालत भी खराब हो गई थी!
फिर उसने कहा- बस करो ! मुझे कुछ हो रहा है !
शायद उसे लंड चाहिए था। तभी फिल्म ख़त्म होने लगी, हम ठीक होकर बैठ गए। Antarvasna
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