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Massage Girl in New Delhi: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in New Delhi who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in New Delhi that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The New Delhi massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in New Delhi who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your New Delhi massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This New Delhi massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in New Delhi who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in New Delhi employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in New Delhi helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in New Delhi

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in New Delhi at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex Stories

हाय दोस्तों, मेरा नाम राहुल है Sex Stories और मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं भी आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ।

मैं एक इंग्लिश की ट्यूशन में पढ़ाता हूँ। मैं २५ साल का एक कुँवारा नौजवान हूँ। मैं दिखने में गोरा और लम्बा हूँ। मैं कुछ समय पहले अपने पड़ोस में रहने वाली दूर के रिश्ते में लगने वाली मौसी की छोटी लड़की, जिसका नाम रम्या था, उसे पढ़ाने मैं हर शाम जाता था। वह अट्ठारह साल की थी और दिखने में ख़ूबसूरत थी, उसकी चूचियाँ अपेक्षाकृत काफी बड़ी थीं, जिन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और उसे चोदने का भी मन करता था। मैं उसके भाई को पढ़ा करक अक्सर कमरे से बाहर आ जाता और रम्या से बातें किया करता था।

मुझे पता ही नहीं चला कि हम दोनों में कब प्यार हो गया और अब हम एक-दूसरे से फोन पर ढेर सारी बातें किया करते थे। रम्या से मैं बातें करते हुए कभी उसके हाथ पकड़ लेता तो कभी उसके गले में हाथ डालकर उसकी चूचियाँ छूता, तो कभी उन्हें दबा भी देता था। लेकिन रम्या इन सब के लिए कुछ भी नहीं कहती थी और मुस्कुरा देती थी। अक्सर उसकी चूचियों की गोलाईयों को छू कर मेरा मन बेक़ाबू हो उठता था। कभी-कभी मैं उसकी चूचियों को उसके कपड़ों से बाहर निकाल कर देर तक चूसता रहता था, तो कभी उसके कुर्ते में अपना हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही तो कभी अन्दर हाथ डालकर उन्हें दबाता था। कभी तो उसकी चूत में अपनी ऊँगली डालकर रम्या की सिसकियाँ निकाल देता था। सच दोस्तों, उन हसीन पलों को मैं कबी नहीं भूल सकता हूँ। रम्या एक कच्ची कली थी जिसका मैं मज़ा ले रहा था।

एक दिन सुबह जब मैं अपने घर से बाहर किसी काम से बाहर गया था तो मेरे पास रम्या का फोन आया और वह कहने लगी कि आज उनके घर पर कोई भी नहीं है और वह नहाने जा रही है। यह सुनकर मेरे मन में रम्या के नहाने वाली बात को सुनकर उसकी नंगी तस्वीर नज़र आने लगी और मैं उसे चोदने का विचार बनाने लगा।

मैंने सोचा कि आज मौक़ा है, पता नहीं कब मिले। मैं तुरन्त ही अपने काम को खत्म करके रम्या के घर रवाना हो गया। जब मैं रम्या के घर पहुँचा तो घर में उसकी सहेली थी। मैंने उससे पूछा कि रम्या कहाँ है तो उसने कहा कि वह तो बाथरूम में नहा रही है। यह सुनकर मेरा लंड और भी तेज़ी से खड़ा हो गया और मन ही मन उसके चोदने के ख्याली पुलाव बनाने लगा। मैंने रम्या की सहेली से कहा कि मैं तो घर जा रहा हूँ। यह कह मैं उसके घर से बाहर आ गया और क़रीब पाँच मिनट बाद मैं वापस गया तो रम्या की सहेली कमरे में थी और मैं चुपचाप बाथरूम में चला गया। वहाँ मैंने देखा कि रम्या बिल्कुल नंगी थी, उसने केवल पैन्टी ही पहनी थी और उसके चेहरे पर साबुन लगा था।

उसका नंगा बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूचियाँ इस तरह मेरे सामने थीं कि मानो मुझे अपनी वासना बुझाने के लिए आमन्त्रित कर रहीं हों। मैं रम्या के पास जाकर साबुन उठाकर उसके गोरे जिस्म पर मलने लगा। रम्या घबरा गई और फटाफट अपना मुँह धोते हुए पूछने लगी कि कौन है? तो मैंने बताया कि मैं हूँ तेरा यार.. और आज तुझे असली मज़ा दूँगा।

रम्या ने कहा, उसकी सहेली आ जाएगी, तो मैंने कहा कि अगर वह आ गई तो वह भी हमारे साथ इस ज़न्नत का मज़ा ले लेगी। यह कहते हुए मैंने उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और होंठों को पागलों की भाँति चूमने लगा। फिर उसकी चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगा। रम्या की चूचियाँ छोटी थीं लेकिन उन्हें दबाने-चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था। अब रम्या धीरे-धीरे गरम हो रही थी। उसने अपने ही हाथों से अपनी पैन्टी हटा दी और मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत चटवान लगी और कहने लगी – “चाटो… आआआहहहहहह… आआआआहहहह…. शशशस्स्ससस्सस….”

मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था। कभी उसकी जाँघों को चाटता तो कभी उसकी चूत में ऊँगली अन्दर-बाहर करता। उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे. वह मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत इस तरह से चटवा रही थी कि मानों उसका बस चले तो मेरा सिर चूत के अन्दर ही डाल दे।

अब मेरा लण्ड भी बाहर आने को तड़प रहा था और अपने बिल में घुसने को बेक़रार था। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और अपना लंड रम्या के हाथ में दे दिया और चूसने के लिए कहा तो रम्या शरमाने लगी। मैंने उससे कहा कि तुम इसे मस्त करोगी तभी ये तुम्हें पूरा-पूरा मज़ा देगा। तब रम्या ने मेरा लण्ड चूसना शुरु किया। थोड़ी ही देर बाद मैंने रम्या को फर्श पर लिटाकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। वह दर्द के मारे चिल्ला पड़ी। उसे काफ़ी दर्द हो रहा था। वह लंड निकालने को कहने लगी। लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था, मैं उसकी चूचियों को पकड़कर उसके होंठों को चूमने लगा और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर बाद मेरा लंड आधे से ज्यादा रम्या की चूत के अन्दर चला गया। उसे भी पूरा मज़ा आने लगा।

मैं बीच-बीच में रम्या की चूचियाँ भी चूस रहा था। बाद में मैंने रम्या को दीवार के सहारे खड़ा करके पीछे से उसकी चूचियाँ पकड़कर उसकी चूत में पीछे से लण्ड डाल दिया। अब मैं उसकी ज़ोरों से चुदाई कर रहा था। इस मस्ती में हम भूल ही गए थे कि उसकी सहेली भी पास वाले कमरे में ही है।

रम्या को चोदते हुए मेरे हाथ कभी उसकी चूचियों तो कभी उसकी चूत को सहला देते थे। इस बीच रम्या झड़ चुकी थी। मैं भी क़रीब बीस मिनट बाद झड़ गया और अपना सारा माल रम्या के मुँह में डाल दिया।

तभी रम्या की सहेली की आवाज़ आई कि वह घर जा रही है। यह सुनकर हम दोनों खुशी से झूम उठे। हम दोनों काफी देर तक साथ रहे, नहाया और बाद में उसे अपनी बाँहों में उठाकर कमरे में बिस्तर पर लिटा दिया। वहाँ जाकर रम्या मेरे लंड चूसने लगी, तभी मुझे एक ब्लू-फिल्म का एक दृश्य याद आया जिसमें पुरुष अपने लंड को लड़की की चूचियों के बीच की दरार में रखकर उसे आगे-पीछे करता है। मैंने भी ठीक उसकी तरह रम्या की चूचियों के बीच में अपना लंड रखकर उसे आगे-पीछे किया और बहुत देर तक उसकी चूचियों से खेलता रहा। उस दिन मैंने रम्या को पाँच बार चोदा।

उस कच्ची कली को फूल बना कर मैं उसे ‘आई लव यू’ कहकर अपने घर वापिस आ गया।

तो दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी। Sex Stories

हैलो दोस्तों। मेरा नाम मुस्कान है और मैं यहां की एक पाठक हूं। मैंने यहां कई कहानियां पढ़ी और मुझे बहुत अच्छा लगा जैसे यहां लोग आ कर अपनी निजी कहानियां लिखते हैं। मेरे पास ऐसी ही कई कहानियां है जो मेरे जीवन के नए पुराने समय से जुड़ी हैं, जिन्हें मैं भी आप को बताना चाहूँगी। वैसे तो मेरी कई रोचक कहानियां हैं पर मैं यहां सिर्फ़ वही कहानी बताऊंगी जो मैं बिना किसी झिझक के बता सकती हूं। सबसे पहले मैं आप को अपने बारे में बताऊँ तो मेरा कद 5 फीट 7 इंच है। मेरा रंग गोरा है और दिखने मैं भी हमेशा से बहुत खूबसूरत हूं। अपने बारे में और बातें मैं अपनी बाकी कहानियों में जरूरत के हिसाब से बताती रहूंगी। आज जो मैं अपनी पहली कहानी बताने जा रही हूं वो मेरे मेरी दोस्त के पापा के साथ सेक्स की है। तो कहानी शुरू होती है मेरी एक नई दोस्त रेनु से मेरी मुलाकात से। मैं और रेनु कॉलेज में एक दूसरे से पहली बार मिले थे और कुछ ही दिनों में हम अच्छे दोस्त बन गए थे। मैं हमेशा से ही एक खुले मिज़ाज की लड़की थी और मेरी हर किसी से अच्छी दोस्ती हो जाती थी। रेनु और मुझमें भी बहुत कुछ एक जैसा था और कॉलेज में भी हम काफ़ी मज़े किया करते थे। कुछ देर दोस्ती चलने के बाद भी मैं कभी रेनु के परिवार से नहीं मिली थी। वैसे अक्सर मेरे सम्बंध मेरे सभी दोस्तों के परिवार से अच्छे रहे थे और वो मुझे पसंद भी करते थे। मुझे पता था कि रेनु के परिवार से भी मेरी अच्छी ही बनेगी। एक दिन मैंने देखा कि रेनु किसी के साथ कार में बैठ के चली गई, मुझे हैरानी हुई कि ये किसके साथ जा रही है। मैंने उस समय तो कुछ नही कहा पर बाद में हमारी बात हुई तो उसने बताया कि वो उसके पापा थे। मुझे लगा शायद झूट बोल रही होगी पर मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नही दिया। कुछ दिनों बाद हमारे कॉलेज में एक इवेंट था। उस दिन कॉलेज में बहुत रौनक थी। उस दिन पहली बार रेनु ने मुझे अपने परिवार से मिलाया। उस दिन हम स्टेज पर डांस करने वाले थे और उन्हीं कपड़ों में थे। पहले मैं रेनु की माँ से मिली जिनसे मिलके हम दोनों को बहुत खुशी हुई। उसकी माँ बहुत प्यारी थी और कुछ ही देर में हम में बहुत अच्छी बोल चाल शुरू हो गई। हम साथ बैठे और वो मुझसे मेरे और मेरे परिवार के बारे में पूछने लगी। हमारे बाकी दोस्त भी धीरे धीरे साथ आ गए और बातें करने लगे। मेरा उस समय का बॉयफ्रैंड गौरव भी हमारे साथ शामिल हो गया और बात चलती रही। तभी कोई हमारी तरफ आया और रेनु की माँ के साथ खड़ा हो गया। मैं सोच ही रही थी ये कौन है तभी रेनु ने मुझे बताया कि ये उसके पापा हैं। मैं ये उनके हैरान रह गई। वो आदमी कहीं से भी रेनु का बाप नहीं लग रहा था। वो काफ़ी जवान और कम उम्र के लग रहे थे। पहले तो मुझे लगा ये रेनु का कोई बड़ा भाई होगा। मुझे याद आया कि कुछ दिन पहले रेनु जिसके साथ कार में जा रही थी वो यही थे। तभी तो मेरी उनसे कोई बात नहीं हुई क्योंकि मुझे डांस के लिए जाना था। बाद में मैंने रेनु से बोला कि वो तो तेरे पापा तो लगते ही नहीं, इतने जवान हैं। तो उसने मुझे बोला कि सभी ऐसे ही बोलते हैं। उसकी पापा की उम्र उसकी माँ से ज़्यादा है पर वो हमेशा से ही अपनी फिटनेस पे बहोत ध्यान देते आए हैं इसलिए ऐसे दिखते हैं। तब मैंने सोचा कि कमाल है, इसकी माँ ऐसी जनानी जैसी और बाप मानो लौंडा। स्टेज डांस करने के बाद हम वापस मिले और तब मैंने पहली बार रेनु के पापा से बात की। उनको हमारा डांस बहोत पसंद आया और उन्होंने खास कर मेरी बहोत तारीफ़ भी की। हमनें अच्छे से बातें की जिसके बाद इवेंट खत्म हो गया और रेनु के मम्मी पापा वापस चले गए। जाने के समय उन्होंने मुझे घर आने भी कहा। उस दिन के बाद एक दिन मैं रेनु के साथ उसके घर गई। उसका घर काफ़ी अच्छा बना हुआ था जिसकी मैंने तारीफ़ भी की। वहां मेरा अच्छा स्वागत हुआ और रेनु की माँ मुझे देख कर बहुत खुश हुई। हम कुछ देर साथ बैठे तभी रेनु के पापा भी वहां पहुंच गए। हम सबने साथ बहोत बातें की और हर बार की तरह मेरी इनसे भी अच्छी बनने लगी। उसके पापा ने मुझे पूरा घर भी घुमाया और अपनी हॉबी के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उनको फिट रहना बहोत पसंद है। मैंने उनसे पूछा कि ऐसा क्यु है तो उन्होंने कहा कि ताकि तुम्हारी नई पीढ़ी को मैं पसंद आऊँ। ये सुन के मैं समझ गई कि ये लाइन मारने की कोशिश कर रहें हैं, पर मैंने बात तब के लिए घुमा दी। उनकी पर्सनैलिटी सच में बहोत अच्छी थी और मुझे वो अच्छे भी लगने लगे थे। मैंने भी उनकी फिटनेस वाली बातें सुन के बोल दिया कि काश मेरा बॉयफ्रेंड आप के जैसा होता। तो उन्होंने पूछ लिया कि तुम्हारा बॉयफ्रैंड भी है, पर मैंने मना कर दिया। तो इस पर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं, अगर होगा हो मैं उसे भी गाइड कर दूँगा। ऐसे ही फिर हमारी बातें शुरू हुई और बढ़ती गई। मेरा रेनु के घर आना जाना भी आम हो गया। मैं रेनु के पापा के साथ कई तरह की बातें करने लगी। किसी ना किसी तरह वो भी मुझसे फ्लर्ट करते पर सीधी तरह उन्होंने कभी कुछ नहीं बोला। मैं चाहती थी कि वो कुछ हरकत करें पर वो सख्त बने रहते थे। काफ़ी दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। फिर एक दिन मेरा मूड कुछ उफान भरा हुआ सा था। उस दिन मैं रेनु के घर बिना रेनु के चली गई। वहाँ मुझे हमेशा की तरह रेनु की माँ मिली जिन्होंने मेरा बहोत स्वागत किया। मैं बैठ कर उसकी माँ से बात करने लगी पर मेरी नज़र कहीं और थी। कुछ देर मे मुझे रेनु के पापा दिखे जो जॉगिंग कर के आये थे। वो आ के मुझसे मिले और मेरा हाल चाल पूछा। मैं जान बुझ कर उस दिन मिनी शॉर्ट पैंट और क्रॉप टॉप पहन कर गई थी ताकि उनका ध्यान पड़े, जो कुछ हुआ भी। उन्होंने मुझे देख कर कहा कि आज बहोत अच्छी लग रही हो। फिर वो सीधा अपने जिम रूम में चले गए। उसके बाद मैंने रेनु की माँ से कहा कि आप अपना काम करो मैं चलती हूं, पर उन्होंने मुझे रुकने को बोल दिया, जो मैं चाहती भी थी। फिर मैंने उन्हें कहा कि आप चिंता मत करो मैं अपना खयाल रख लुंगी। ये सुन कर वो काम करने चली गई। मैं कुछ मिनट बाद किचन में गई और देखा वो रेनु के पापा के लिए प्रोटीन शैक बना रही थी। मैंने उनसे इधर उधर की बातें शुरू कर दी फिर जब वो शैक लेकर उन्हें देने जा रही थी तो मैंने मौके का फायदा उठाया और कहा कि मैं दे देती हूं। हंसी मज़ाक में मैंने बोल दिया कि मुझे भी फिटनेस टिप्स मिल जाएंगे। जिस पर उन्होंने कहा कि हाँ जाओ ले लो। मैं तुरंत शैक लेकर जिम रूम में गई जहां रेनु के पापा को एक्सरसाइज करते हुए देख मेरी आंखे चमक गई। उनका पसीने मे भिगा हुआ सुडोल शरीर मुझे मदहोश कर गया। मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद किया अभी उन्होंने मुझे देखा और बोला अरे मुस्कान तुम। वो मेरी तरफ आए तभी मैंने अपने आप को छुना शुरू कर दिया। मैंने उनके हाथ को पकड़ा और पीछे दरवाज़े से जा लगी। मैंने अपना टॉप uper से नीचे खिंचा और उनका हाथ अपनी टांगों के बीच दे दिया। उनके मुंह से निकला कि ये क्या कर रही हो पर मैं समझ चुकी थी कि वो भी यही चाहते हैं। मेरे थनों को बाहर आता देख वो भी बेकाबू हो गए। मैंने खुद ही अपनी टॉप निकाल फेंकी और उनके आगे आधी नंगी खड़ी हो गई। वो भी अब सारी शर्म छोड़ कर मेरी जवानी का मज़ा लूटने में लग गए। उन्होंने अपनी ऊंगली मेरी चूत पे सहलाना शुरू कर दिया और हम एक दूसरे को चूमने लगे। उनके पसीने से भीगे शरीर से लिपट कर मुझे और नशा चढ़ रहा था, ऊपर से उनकी ऊंगली मेरी चूत पर कमाल ही कर रही थी। कुछ ही देर मे मेरी सांसे तेज होती गई और मेरी टांगों के बीच से पानी बरस गया। फिर मैंने उनका प्रोटीन शैक उठाया और अपनी छाती पर पलट दिया। इस पर वो मेरे बूब्स चूसने लगे और साथ ही मेरा बदन चाटने लगे। इसी तरह उन्होंने मेरे ऊपर से सारा शैक साफ़ कर दिया पर उनके थूक से मैं सन गई। मैंने धीरे धीरे उनके ऊपर से भी कपड़े निकालने शुरू कर दिए। एक पल में वो मेरे आगे बिना कपड़ों के खड़े थे। उनका लौड़ा जोश में तन के खड़ा था। मैंने उनके लंड को पकड़ के सहलाना शुरू कर दिया जिससे वो और जोश में आने लगे। उन्होंने फिर मुझे पूरा नंगा किया और मुझे अपनी एक मशीन पे बैठाया। उन्होंने मेरी टांगे खोली और मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी। मुझे लगा नहीं था वो ऐसा करेंगे पर मुझे ये बहोत अच्छा लगा। मेरी चिकनी और साफ़ चूत उनको और पसंद आ रही थी। उनके चाटते चाटते ही मैंने एक बार फिर पानी छोड़ दिया। उसके बाद वो खड़े हुए और अपना तना हुआ लंड मेरी चूत पे रख दिया। उनके ऐसे करते ही मेरी सिसकियाँ तेज हो गई। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के अंदर धकेलना शुरू किया जिसके साथ मेरा मज़ा और बढ़ने लगा। उनका दौड़ा किसी जवान लौंडे की तरह था। ब्लकि कुछ बेहतर ही। उनका लंड मेरे अन्दर जाता रहा और मेरी आवाज़ चींखों मे बदलने लगी। हमने पूरी कोशिश की कि आवाज बाहर ना जाए। उनका जोश उनकी तरह ही अभी जवान था और उम्र के साथ घटा नहीं था जिसकी मैं गवाह बन रही थी। कुछ ही धक्कों में उनका पूरा लंड मेरी चूत मे समाने लगा और लगातार अंदर बाहर करने लगा। हम दोनों पूरी तरह एक दूसरे से लिपट गए थे और उसी तरह मैं चुद रही थी। हम लगातार एक दूसरे को चूमे भी जा रहे थे। कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद उन्होंने मुझे उल्टा किया और पीछे से मेरी चूत मारने लगे। मुझे अपनी दोस्त के पापा के साथ सेक्स करने का कोई अफ़सोस नहीं हो रहा था और मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था। मेरा ये करने का फैसला बिल्कुल गलत साबित नहीं हुआ। वो जोर जोर से मुझे पीछे से धक्के दिए जा रहे थे और मैं उनको पूरी मजबूती से झेल रही थी। काफ़ी देर तक ऐसे ही चुदाई करने के बाद उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और जोरदार कर्राहटों के साथ मेरी कमर पर अपना रस निकाल दिया। कुछ देर हम ऐसे ही पड़े रहें। फिर मैंने उनको और खुश करने के लिए उनका मुरझाया लंड अपने मूंह मे ले लिया और उनको चूसने लगी। कुछ ही पल मे उनका लंड फिर से तन के खड़ा हो गया। मैं और मज़े से उनका लौड़ा मूंह मे लेती रही और चूसती रही। काफ़ी देर लगातार चूसने और हिलाने के बाद उन्होंने फिर से पानी निकाल दिया, इस बार मेरे मुँह मे ही। फिर वो मुझे बाथरूम मे लेके गए जहा नहाने के साथ फिर हमने सेक्स किया। इतना काफ़ी नहीं था कि नहा के वो मुझे रेनु के बेडरूम मे किसी तरह अपनी बीवी से छुपा के ले गए और रूम लॉक करके फिर हमने काफी लंबा सेक्स किया। इन सबके बाद मैं काफ़ी थक गई थी और मैं कहीं जाने की बजाये नंगी ही रेनु के बेड पर कंबल ओढ़ कर सो गई। शाम को उठ कर मैंने वहाँ ही खाना खाया जिसके बाद मैं रेनु के साथ सोई और अगले दिन वहाँ से निकली। इसके बाद भी मैंने कुछ और बार रेनु के पापा के साथ सेक्स किया, जिसका पता ना रेनु को लगा और ना उसकी माँ को। हम आम तरह से मिलते रहें और हंसी मजाक krte रहें। तो यही थी दोस्तों मेरी यहां पर आप सबको बताई पहली और मेरी लाइफ की एक सच्ची कहानी। अगर आपको मेरी ये कहानी पसंद आई और आप चाहते हैं कि मैं अपनी और सच्ची कहानियां भी आप सबसे साँझा करूं तो जरूर बताइए। अभी के लिए धन्यावाद। muskaanpersonal6311@gmail.com
आपको एक खास बात बताऊं ! Antarvasna Sex Stories

जब मैं कुवांरी थी तब मेरी चुदने Antarvasna Sex Stories की इच्छा कम होती थी। क्यूंकि मुझे इस बारे में अधिक नहीं मालूम था। आज मेरी शादी हुये लगभग पांच साल हो चुके हैं, मैं बेशर्मी की हदें पार करके सभी तरीको से अपने पति से चुदवा चुकी हूँ।

जी हां ! बिल्कुल अनजान बन कर ! भोली बन कर ! और मासूम बन कर … ! जैसे कि मैं सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही भोलापन, मासूमियत उनके लण्ड को खड़ा कर चोदने पर मजबूर कर देती थी। आप ही बताईये, लड़कियां जब भोली बन कर, अनजान बनकर और मासूम सा चेहरा लेकर लण्ड लेती हैं तब पति को लगता है कि मेरी बीवी सती सावित्री है …

पर वो क्या जाने, हम लोग भोली बनकर ऐसे ऐसे मोटे मोटे और लम्बे लण्ड डकार जाती हैं कि उनके फ़रिश्तों तक को पता नहीं चल पाता है।

पर अब बड़ी मुश्किल आन पड़ी है। वो छ्ह माह के लिये कनाडा चले गये हैं … मुझे यहां अकेली तड़पने के लिये। पर हां ! यह उनका उपकार है कि मेरी देखभाल करने के लिये उन्होंने अपने दोस्त के बेटे दीपू को कह दिया था कि वह मेरा ख्याल रखे।

जानते हैं आप, उसने कैसा ख्याल रखा … मुझे चोद चोद कर बेहाल कर दिया … नए नए तरीकों से ! मुझे खूब चोदा …

क्या हुआ था आप जानना चाहेंगे ना …

मेरे पति के कनाडा जाने के बाद रात को दीपू खाना खा कर मेरे यहां सोने के लिये आ जाता था।

गर्मी के दिन थे … मैं अधिकतर छत पर ही अकेली सोती थी। कारण यह था कि रात को अक्सर मेरी वासना करवटें लेने लगती थी। बदन आग हो जाता था। मैं अपना जिस्म उघाड़ कर छत पर बेचैनी के कारण मछली की तरह छटपटाने लग जाती थी। पेटीकोट ऊपर उठा कर चूत को नंगी कर लेती थी, ब्लाऊज उतार फ़ेंकती थी। ठण्डी हवा के मस्त झोंके मेरे बदन को सहलाते थे। पर बदन था कि उसमें शोले और भड़क उठते थे। मुठ मार मार कर मैं लोट लगाती थी … फिर जब मेरे शरीर से काम-रस बाहर आ जाता था तब चैन मिलता था।

आज भी आकाश में हल्के बादल थे। हवा चल रही थी … मेरे जिस्म को गुदगुदा रही थी। एक तरावट सी जिस्म में भर रही थी। मन था कि उड़ा जा रहा था। उसी मस्त समां में मेरी आंख लग गई और मैं सो गई। अचानक ऐसा लगा कि मेरे शरीर पर पानी की ठण्डी बूंदे पड़ रही हैं। मेरी आंख खुल गई। हवा बन्द थी और बरसात का सा मौसम हो रहा था। तभी टप टप पानी गिरने लगा। मुझे तेज सिरहन सी हुई। मेरा बदन भीगने लगा। जैसे तन जल उठा।

बरसात तेज होती गई … बादल गरजने लगे … बिजली तड़पने लगी … मैंने आग में जैसे जलते हुये अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया, अपना ब्लाऊज सामने से खोल लिया। बदन जैसे आग में लिपट गया …

मैंने अपने स्तन भींच लिये … और सिसकियाँ भरने लगी। मैं भीगे बिस्तर पर लोट लगाने लगी। अपनी चूत बिस्तर पर रगड़ने लगी। इस बात से अनजान कि कोई मेरे पास खड़ा हुआ ये सब देख रहा है।

“रीता भाभी … बरसात तेज है … नीचे चलो !”

मेरे कान जैसे सुन्न थे, वो बार बार आवाज लगा रहा था।

जैसे ही मेरी तन्द्रा टूटी … मैं एकाएक घबरा गई।

“दीपू … तू कब आया ऊपर … ” मैंने नशे में कहा।

“राम कसम भाभी मैंने कुछ नहीं देखा … नीचे चलो” दीपू शरम से लाल हो रहा था।

“क्या नहीं देखा दीपू … चुपचाप खड़ा होकर देखता रहा और कहता है कुछ नहीं देखा” मेरी चोरी पकड़ी गई थी। उसके लण्ड का उठान पजामें में से साफ़ नजर आ रहा था। अपने आप ही जैसे वह मेरी चूत मांग रहा हो। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसे दबोच लिया … कुछ ही पलों में वो मुझे चोद रहा था। अचानक मैं जैसे जाल में उलझती चली गई। मुझे जैसे किसी ने मछली की तरह से जाल में फ़ंसा लिया था, मैं तड़प उठी … तभी एक झटके में मेरी नींद खुल गई।

मेरा सुहाना सपना टूट गया था। मेरी मच्छरदानी पानी के कारण मेरे ऊपर गिरउ गई थी। दीपू उसे खींच कर एक तरफ़ कर रहा था। मेरा बदन वास्तव में आधा नंगा था। जिसे दीपू बड़े ही चाव से निहार रहा था।

“भाभी … पूरी भीग गई हो … नीचे चलो … ” उसकी ललचाई आंखे मेरे अर्धनग्न शरीर में गड़ी जा रही थी। मुझ पर तो जैसे चुदाई का नशा सवार था। मैंने भीगे ब्लाऊज ठीक करने की कोशिश की … पर वो शरीर से जैसे चिपक गया था।

“दीपू जरा मदद कर … मेरा ब्लाऊज ठीक कर दे !”

दीपू मेरे पास बैठ गया और ब्लाऊज के बटन सामने से लगाने लगा … उसकी अंगुलियाँ मेरे गुदाज स्तनों को बार बार छू कर जैसे आग लगा रही थी। उसके पजामे में उसका खड़ा लण्ड जैसे मुझे निमंत्रण दे रहा था।

“भाभी , बटन नहीं लग रहा है … “

“ओह … कोशिश तो कर ना … “

वह फिर मेरे ब्लाऊज के बहाने स्तनों को दबाने लगा … जाने कब उसने मेरे ब्लाऊज को पूरा ही खोल दिया और चूंचियां सहलाने लगा। मेरी आंखे फिर से नशे में बंद हो गई। मेरा जिस्म तड़प उठा। उसने धीरे से मेरा हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया। मैंने लण्ड को थाम लिया और मेरी मुठ्ठी कसने लगी।

बरसात की फ़ुहारें तेज होने लगी। दीपू सिसक उठा। मैंने उसके भीगे बदन को देखा और जैसे मैं उस काम देवता को देख कर पिघलने लगी। चूत ने रस की दो बूंदें बाहर निकाल दी। चूंचियां का मर्दन वो बड़े प्यार से कर रहा था। मेरे चुचूक भी दो अंगुलियों के बीच में सिसकी भर रहे थे। मेरी चूत का दाना फ़ूलने लगा था। अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और दाने पर उसकी रगड़ लग गई।

मैं हाय करती हुई गीले बिस्तर पर लुढ़क गई। मेरे चेहरे पर सीधी बारिश की तेज बूंदे आ रही थी। गीला बिस्तर छप छप की आवाज करने लगा था।

“रीता भाभी … आप का जिस्म कितना गरम है … ” उसकी सांसे तेज हो गई थी।

“दीपू … आह , तू कितना अच्छा है रे … ” उसके हाथ मुझे गजब की गर्मी दे रहे थे।

“भाभी … मुझे कुछ करने दो … ” उसका अनुनय विनय भरा स्वर सुनाई दिया।

” कर ले, सब कर ले मेरे दीपू … कुछ क्यों … आजा मेरे ऊपर आ जा … हाय, मेरी जान निकाल दे … “

मेरी बुदबुदाहट उसके कानो में जैसे अमृत बन कर कर उतर गई। वो जैसे आसमान बन कर मेरे ऊपर छा गया … नीचे से धरती का बिस्तर मिल गया … मेरा बदन उसके भार से दब गया … मैं सिसकियाँ भरने लगी। कैसा मधुर अनुभव था यह … तेज वर्षा की फ़ुहारों में मेरा यह पहला अनुभव … मेरी चूत फ़ड़क उठी, चूत के दोनों लब पानी से भीगे हुये थे … तिस पर चूत का गरम पानी … बदन जैसे आग में पिघलता हुआ, तभी … एक मूसलनुमा लौड़ा मेरी चूत में उतरता सा लगा। वो दीपू का मस्त लण्ड था जो मेरे चूत के लबों को चूमता हुआ … अन्दर घुस गया था।

मेरी टांगे स्वतः ही फ़ैल गई … चौड़ा गई … लण्ड देवता का गीली चूत ने भव्य स्वागत किया, अपनी चूत के चिकने पानी से उसे नहला दिया। दीपू लाईन क्लीअर मान कर मेरे से लिपट पड़ा और चुम्मा चाटी करने लगा … मैं अपनी आंखें बंद करके और अपना मुख खोल कर जोर जोर से सांस ले रही थी … जैसे हांफ़ रही थी। मेरी चूंचियां दब उठी और लण्ड मेरी चूत की अंधेरी गहराईयों में अंधों की तरह घुसता चला गया। लगा कि जैसे मेरी चूत फ़ाड़ देगा। अन्दर शायद मेरी बच्चेदानी से टकरा गया। मुझे हल्का सा दर्द जैसा हुआ। दूसरे ही क्षण जैसे दूसरा मूसल घुस पड़ा … मेरी तो जैसे हाय जान निकली जा रही थी … सीत्कार पर सीत्कार निकली जा रही थी। मैं धमाधम चुदी जा रही थी … दीपू को शायद बहुत दिनों के बाद कोई चूत मिली थी, सो वो पूरी तन्मयता से मन लगा कर मुझे चोद रहा था। बारिश की तेज बूंदें जैसे मेरी तन को और जहरीला बना रही थी।

दीपू मेरे तन पर फ़िसला जा रहा था। मेरा गीला बदन … और उसका भीगा काम देवता सा मोहक रूप … गीली चूत … गीला लण्ड … मैं मस्तानी हो कर लण्ड ले रही थी। मेरे

शरीर से अब जैसे शोले निकलने लगे थे … मैंने उसके चूतड़ों को कस लिया और उसे कहा,”दीपू … नीचे आ जाओ … अब मुझे भी चोदने दो !”

“पर रीता भाभी, चुदोगी तो आप ही ना … ” दीपू वर्षा का आनन्द लेता हुआ बोला।

“अरे, चल ना, नीचे आ जा … ” मैं थोड़ा सा मचली तो वो धीरे से मुझे लिपटा कर पलट गया। अब मेरी बारी थी, मैंने चूत को लण्ड पर जोर दे कर दबाया। उसका मूसल नुमा लण्ड इस बार मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ मारता हुआ सीधा जड़ तक आ गया। मेरे लटकते हुये स्तन उसके हाथ में मसले जा रहे थे। दीपू की एक अंगुली मेरे चूतड़ों की दरार में घुस पड़ी और छेद को बींधती हुई गाण्ड में उतर गई।

मैं उसके ऊपर लेट गई और अपनी चूत को धीरे धीरे ऊपर नीचे रगड़ कर चुदने लगी। बारिश की मोटी मोटी बूंदें मेरी पीठ पर गिर रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास घुसा लिया और आंखें बन्द करके चुदाई का मजा लेने लगी। हम दोनों जोर जोर से एक दूसरे की चूत और लण्ड घिस रहे थे … मेरे आनन्द की सीमा टूटती जा रही थी। मेरा शरीर वासना भरी कसक से लहरा उठा था। मुझे लग रहा था कि मेरी रसीली चूत अब लपलपाने लगी थी। मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी। फिर भी हम दोनों बुरी तरह से लिपटे हुये थे। मेरी चूत लण्ड पर पूरी तरह से जोर लगा रही थी … बस … कितना आनन्द लेती, मेरी चूत पानी छोड़ने लिये लहरा उठी और अन्ततः मेरी चूत ने पानी पानी छोड़ दिया … और मैं झड़ने लगी। मैं दीपू पर अपना शरीर लहरा कर अपना रज निकाल रही थी।

मैं अब उससे अलग हो कर एक तरफ़ लुढ़क गई। दीपू उठ कर बैठ गया और अपने लण्ड को दबा कर मुठ मारने लगा … एक दो मुठ में ही उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया और बरसात की मूसलाधार पानी के साथ मिल कहीं घुल गया। हम दोनों बैठे बैठे ही गले मिलने लगे … मुझे अब पानी की बौछारों से ठण्ड लगने लगी थी। मैं उठ कर नीचे भागी। दीपू भी मेरे पीछे कपड़े ले कर नीचे आ गया।

मैं अपना भीगा बदन तौलिये से पोंछने लगी, पर दीपू मुझे छोड़ता भला। उसने गीले कपड़े एक तरफ़ रख दिये और भाग कर मेरे पीछे चिपक गया।

“भाभी मत पोंछो, गीली ही बहुत सेक्सी लग रही हो !”

“सुन रे दीपू, तूने अपनी भाभी को तो चोद ही दिया है , अब सो जा, मुझे भी सोने दे !”

“नहीं रीता भाभी … मेरे लण्ड पर तो तरस खाओ … देखो ना आपके चूतड़ देख कर कैसा कड़क हो रहा है … प्लीज … बस एक बार … अपनी गाण्ड का मजा दे दो … मरवा लो

प्लीज … “

“हाय ऐसा ना बोल दीपू … सच मेरी गाण्ड को लण्ड के मजे देगा … ?” मुझे उसका ये प्रेमभाव बहुत भाया और मैंने उसके लण्ड पर अपनी कोमल और नरम पोन्द दबा दिये। उसका फिर से लण्ड तन्ना उठा।

” भाभी मेरा लण्ड चूसोगी … बस एक बार … फिर मैं भी आपकी भोसड़ी को चूस कर अपको मजा दूंगा !”

“हाय मेरे राजा … तू तो मेरा काम देवता है … “मैंने अपने चूतड़ों में से उसका लण्ड बाहर निकाल लिया और नीचे झुकती चली गई। उसका लण्ड आगे से मोटा नहीं था पर पतला था, उसका सुपाड़ा भी छोटा पर तीखा सा था, पर ऊपर की ओर उसका डण्डा बहुत ही मोटा था। सच में किसी मूली या मूसल जैसा था। मैंने मुठ मारते हुये उसे अपने मुख में समा लिया और कस कस कर चूमने लगी। मुझे भी लग रहा था कि अब दीपू भी मेरी भोसड़ी को चूस कर मेरा रस निकाले। मैंने जैसे ही उसका लण्ड चूसते हुये ऊपर देखा तो एक बार में ही वो समझ गया। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। उसकी लपलपाती हुई जीभ मेरी चूत के भीतरी भागों को सहला रही थी। जीभ की रगड़ से मेरा दाना भी कड़ा
हो गया था। मैं सुख से सराबोर हो रही थी। तभी दीपू ने तकिया लेकर कहा कि अपनी चूतड़ के नीचे ये रख लो और गाण्ड का छेद ऊपर कर लो।

पर मैंने जल्दी से करवट बदली और उल्टी हो गई और अपनी चूत को तकिये पर जमा दी। मैंने अपनी दोनों टांगे फ़ैला कर अपना फ़ूल सा भूरा गुलाब खिला कर लण्ड़ को हाज़िर कर दिया। उसका मूसल जैसा लण्ड चिकनाई की तरावट लिये हुये मेरे गुलाब जैसे नरम छेद पर दब गया। मैंने पीछे घूम कर उसे मुस्करा कर देखा। दूसरे ही क्षण लण्ड मेरी गाण्ड पर घुसने के लिये जोर लगा रहा था। मैंने अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ा और लण्ड का स्वागत किया। वो धीरे धीरे प्यार से अंधेरी गुफ़ा में रास्ता ढूंढता हुआ … आगे बढ़ चला। मेरी गाण्ड तरावट से भर उठी। मीठी मीठी सी गुदगुदी और मूसल जैसा लण्ड, पति से गाण्ड मराने से मुझे इस लण्ड में अधिक मजा आ रहा था। उसके धक्के अब बढ़ने लगे थे। मेरी गाण्ड चुदने लगी थी।

मैं उसे और गहराई में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी। मेरे चूतड़ ऊपर जोर लगाने लगे थे। दीपू ने मौका देखा और थोड़ा सा जोर लगा कर एक झटके में लण्ड को पूरा बैठा दिया। मैं दर्द से तड़प उठी।

“साला लण्ड है या लोहे की रॉड … चल अब गाड़ी तेज चला … “

वो मेरी पीठ पर लेट गया। उसके हाथ मेरे शरीर पर चूंचियाँ दबाने के लिये अन्दर घुस पड़े … मैंने जैसे मन ही मन दीपू को धन्यवाद दिया। दोनों बोबे दबा कर उसकी कमर मेरी गाण्ड पर उछलने कूदने लगी। मैं खुशी के मारे आनन्द की किलकारियाँ मारने लगी। सिसकी फ़ूट पड़ी … । उसके सेक्सी शरीर का स्पर्श मुझे निहाल कर रहा था। मेरी चूंचियाँ दबा दबा कर उसने लाल कर दी थी। उसका लण्ड मेरी गाण्ड की भरपूर चुदाई कर रहा था। मेरी चूत भी चूने लग गई थी। उसमें से भी पानी रिसने लगा था। मेरी गाण्ड में मनोहारी गुदगुदी उठ रही थी, अब तो मेरी चूत में भी मीठी सी सुरसराहट होने लग गई थी। मेरी चूत लण्ड की प्यासी होने लगी। हाय … कितना अच्छा होता कि अब ये लण्ड मेरी चूत की प्यास बुझाता … मैंने गाण्ड मराते हुये घूम कर दीपू को आंख से इशारा किया।

“आह्ह नहीं रीता भाभी … तंग गाण्ड का मजा ही जोर का है … पानी निकालने दो प्लीज !”

“हाय रे फिर कभी गाण्ड चोद लेना, अभी तो मेरी चूत मार दे दीपू !”

“तो ये ले भोसड़ी की … हाय भाभी सॉरी … गाली मुँह से निकल ही गई !”

“नहीं रे चुदाते समय सब कुछ भला सा लगता है … ” फिर मेरे मुख से सीत्कार निकल पड़ी। उसने अपना लण्ड मेरी चूत में जोर से घुसेड़ दिया था … बस लण्ड का स्पर्श जैसे ही चूत को मिला … मेरी चूत फ़ड़क उठी। लड़कियों की चूत में लण्ड घुसा और वो सीधे स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है। मेरी चूत की कसावट बढ़ने लगी … वो मेरे पीठ पर सवार हो कर चूत चोद रहा था। उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा … शायद लण्ड को अन्दर पेलने में तकलीफ़ हो रही थी। मेरी गाण्ड ऊंची होते ही उसका लण्ड चूत में यूं घुस गया जैसे कि किसी बड़े छेद में बिना किसी तकलीफ़ सीधे सट से मोम में घुस गया हो। मेरी चूत बहुत गीली हो गई थी। किसी बड़े भोसड़े की तरह चुद रही थी … उसने मेरे स्तन एक बार फिर से पकड़ते हुये अपनी ओर दबा लिये। मुझे चुचूकों को दबाने से और चूत में मूसल की रगड़ से मस्ती आने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत को तेजी से झटके मार मार कर चोद रहा था। अचानक उसका चोदने का तरीका बदल गया। करारे शॉट पड़ने लगे। मेरी चूत मे तेज आनन्द दायक खुजली उठने लगी। लगा कि चूत पानी छोड़ देगी।

“मां … मेरी … दीईईईपूऊऊऊ चोद मार रे … निकाल दे फ़ुद्दी का पानी … हाय राम जीऽऽऽऽ … मेरी तो निकल गई राजा … आह्ह्ह्ह” और मैंने अपना पानी छोड़ दिया …

उसका हाथ स्तनों पर से खींच कर हटाने लगी …

“बस छोड़ दे अब … मत कर जल रही है … ” पर उसे कहाँ होश था … मैं दर्द के मारे चीख उठी और दीपू … उसका माल छूट गया … उसकी चीख ने मेरी चीख का साथ दिया …

उसका लण्ड बाहर निकल आया और अपना वीर्य बिस्तर पर गिराने लगा। कुछ देर तक यूं ही माल निकलने का सिलसिला चलता रहा। फिर उस बिस्तर से उठे और हम दोनों दूसरे बिस्तर पर नंगे ही जाकर लेट गये … और फिर जाने कब हम दोनों ही सो गये।

मुझे लगा कि कोई मुझे बुरी तरह झकझोर रहा है … मेरी आंख खुल गई … सवेरा हो चुका था … पर ये दीपू … मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने का प्रयत्न कर रहा था … मुझे हंसी आ गई … मैंने अपने दोनों टांगें पसार दी और उसका लण्ड अपनी चूत में समेट लिया। उसे अपने से कस कर सुला लिया। मैं सुबह सवेरे फिर से चुद रही थी … मुझे अपनी सुहागरात की याद दिला रही थी … सोना नहीं … बस चुदती रहो … सुबह चुदाई, दिन को चुदाई रात को तो पूछो मत … शरीर की मां चुद जाती थी … हाय मैंने ये क्या कह दिया … Antarvasna Sex Stories

Antarvasna

राहुल और सूरज नये नये Antarvasna कॉलेज में आये थे और शहर में ही कॉलेज के पास उन्होंने एक कमरा किराये पर ले रखा था। जवानी का नया नया जोश भी था और वो जवानी का पूरा लुत्फ़ भी उठाना चाहते थे। उन्हें स्वतन्त्र माहौल मिल गया था। मां बाप का कोई डर नहीं, यहां कोई भी कुछ कहने वाला नहीं था। सबसे पहले उन्होंने लुत्फ़ शराब का उठाया। वे दोनों लगभग रोज शाम को एक आधी बोतल ले आते थे और पीते थे। कुछ दिनों के बाद उन्होंने एक सी डी की दुकान से ब्ल्यू फ़िल्म भी किराये पर लाना आरम्भ कर दिया था। एक दिन…

शाम के आठ बजे थे। नहा धो कर वे दोनों ही बोतल खोल कर पीने बैठ गये थे। टिफ़िन आ चुका था। सूरज ने टी वी खोल कर कर किराये पर लाई हुई सीडी प्लेयर पर लगा दी और दारू का दौर चलने लगा। ब्ल्यू फ़िल्म भी चल रही थी। एक के बाद एक चुदाई के सीन आने लगे थे। राहुल और सूरज पर भी रंग चढ़ने लगा।

‘भेनचोद अन्ग्रेज औरतें क्या मस्त होती हैं…’ राहुल गर्म होता हुआ बोला।

‘हाँ यार, साली की चूत तो देख… लगता है अभी चोद डालूं…!’ सूरज अपना लण्ड पजामे के ऊपर से मसलता हुआ बोला। राहुल ने सूरज को देखा, सूरज का लण्ड खड़ा हुआ था। उसे देख कर राहुल का लण्ड भी जोर मारने लगा। पहले तो वो शरमा कर लण्ड दबा रहा था, पर सूरज को देख कर वो भी अपना लण्ड को हल्के हाथों से उपर नीचे करने लगा।

– अन्ग्रेजों का लण्ड भी देख कितना मोटा और लम्बा होता है… अपना तो उनके सामने कुछ भी नहीं है। राहुल ने अपना लण्ड सहलाते हुए कहा।
‘तो क्या हुआ, लण्ड तो तेरा भी बहुत जोर मार रहा है ‘ सूरज ने उसके लण्ड को मसलता हुआ देख कर कहा।
‘अरे ! ये मादरचोद… लण्ड को कैसे चूस रही है… ! हाय मेरा लण्ड भी ये मां की लौड़ी चूस ले…! ‘ राहुल ने अपना लण्ड दबाते हुए कहा।

‘उसे मां चुदाने दे…तू कहे तो…तेरा मसल दूं?’ कहते हुए सूरज ने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। राहुल एकबारगी सिहर गया। उसका हाथ हटाते हुए कहा- मत कर यार ! गुदगुदी होती है।

गुदगुदी तो होगी ही, पर मजा भी तो आता है, सूरज ने अपना हाथ लण्ड के पास राहुल के हाथ पर रख दिया और लण्ड पकड़ने की कोशिश करने लगा। पहले तो राहुल को अच्छा नहीं लगा, पर उसके हाथ की रगड़ से उसे मजा आने लगा। धीरे धीरे राहुल ने विरोध करना बंद कर दिया। अब लण्ड सूरज की गिरफ़्त में आ गया। पाजामे के ऊपर से ही वो लण्ड को सहलाने लगा। राहुल को मजा आने लगा। उसका लण्ड अब फ़ड़फ़डाने लगा।

सूरज, तेरा कैसा है?…लगता तो मस्त है! कैसे पजामे में से बाहर निकलने को बैचेन हो रहा है!’ राहुल ने अपना हाथ सूरज के लण्ड पर रख दिया और उसे दबा दिया। सूरज के मुख से आह निकल पड़ी। उसने कोई विरोध नहीं किया।
दोनो नशे में मदहोश थे। आंखें लाल हो चुकी थी। दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और एक दूसरे को नशीली निगाहों से देखने लगे। राहुल के पाजामे का नाड़ा खुल चुका था। सूरज ने राहुल का लण्ड बाहर निकाल लिया। पास में देसी घी का डब्बा पड़ा था, सूरज ने उसमें से थोड़ा सा घी निकाल कर राहुल के लण्ड पर मल दिया और उसे चिकना कर दिया।

अब चिकने लण्ड पर मुठ मारने में सूरज को भी आनन्द आने लगा था। राहुल भी आहें भरने लगा था। अचानक सूरज ने राहुल को चूम लिया और चूमते हुए उसके होंठों तक आ गया। राहुल भी अपना आपा खो बैठा और और उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिये और एक दूसरे को चूमने लगे।

– राहुल, आई लव यू…यार !
– सूरज, चूमते रह, मजा आ रहा है ! इतने दिन तक तू कहाँ था भोसड़ी के?
– मुठ मारने में कितना मजा रहा है, रस निकाल दे मेरे लौड़े का !

– हाँ रे ! बहुत मजा आ रहा है… और घिस दे यार…माँ चोद दे मेरे लण्ड की !’ दोनो के पजामे उतर चुके थे। लण्ड की घिसाई चल रही थी। दोनों के लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। मुठ अब जोर जोर से मार रहे थे। अचानक सूरज ने राहुल को जोर का धक्का दिया और वहीं चित लेटा दिया और उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुपाड़े को चूसने लगा। राहुल तड़प उठा और सूरज को खींचने लगा। सूरज ने इशारा समझा और 69 पोजिशन में आकर अपना लन्ड उसके मुँह में डाल दिया।

दोनो तरफ़ से कस कर लण्ड की चुसाई हो रही थी। इतने में राहुल का शरीर कसमसाया और उसके लण्ड ने लावा उगल दिया। सूरज ने तुरन्त मुँह हटा दिया और हाथ में वीर्य भर लिया। पर साथ में उसका लण्ड मसलता ही रहा। उसके लण्ड के आस पास उसका वीर्य फ़ैल गया था। इतने में सूरज भी छूट गया और राहुल का मुख वीर्य से भर उठा।

राहुल ने वीर्य को मुख से निकाल दिया और गले के पास से बहता हुआ नीचे बिस्तर पर गिरने लगा। दोनों ही झड़ चुके थे। ब्ल्यू फ़िल्म पर किसी का भी ध्यान नहीं था। पास में पड़ा तौलिया उठा कर दोनों ने अपने लण्ड और मुख साफ़ किये और नंगे ही बैठ गये। माहौल गर्म हो गया था। उन दोनों ने अब अपनी बनियान भी उतार कर मरजात नंगे हो गये थे। पंखे की हवा उनके शरीर को सहला रही थी। दोनों के जवान चिकने शरीर और उनकी कसी हुई मसल्स उभरी हुई दिख रही थी।

– मजा आ रहा है ना सूरज…
-हाँ यार, इसमें इतना मजा आता है मुझे तो पता ही नहीं था।
-देख घी लगा कर कितना चिकना लग रहा है तेरा लण्ड, राहुल।
– तू भी लगा ले यार…चल मैं लगा देता हूँ…

राहुल घी निकाल कर सूरज के लन्ड पर मलने लगा। सूरज का लण्ड फिर से तन्ना उठा। सूरज ने राहुल का लण्ड फिर से पकड़ लिया। दोनो फिर से झूम उठे। दोनों एक बार फिर एक दूसरे का मुठ मारने लगे।

अचानक सूरज बोला- राहुल मेरी गाण्ड में खुजली होने लगी है, शान्त कर दे यार ! सूरज ने अपनी गाण्ड राहुल की तरफ़ करते कहा।
राहुल ने घी के डब्बे में से घी निकाल कर उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और घिसने लगा। सूरज के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
‘राहुल यार पेल दे लौड़ा गाण्ड में, मजा आ जायेगा !
– सच ! पेल दूँ क्या?

सूरज घोड़ा बन गया। राहुल ने अपना कड़कता लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया। उसकी चिकनी मस्कुलर गाण्ड पर हाथ फ़ेरा और लण्ड गाण्ड के फ़ूल पर दबाने लगा। छेद चिकना था, लण्ड अन्दर घुस पड़ा।

-मजा आ गया राहुल, चोद डाल साली हरामी गाण्ड को। राहुल ने जोर लगाया और लन्ड घी की सहायता से अन्दर घुसने लगा।
सूरज दर्द से भरे स्वर में बोला- तेरी तो टाईट गाण्ड है… मेरे तो लण्ड की भी मां चुद जायेगी यार, कहीं छिल ना जाये?
-हाय रे, राहुल, दर्द होता है, पर पेल दे लण्ड, इस की तो मां दी फ़ुद्दी।

राहुल ने लण्ड बाहर निकाल कर फिर से अन्दर पेल दिया। और अब धक्के चल निकले। सूरज की गाण्ड चुदने लगी। राहुल का लौड़ा फूलने लगा और कड़कने लगा। सूरज को भी अब दर्द कम हो रहा था। पर उसे गाण्ड मराने में मजा आ रहा था। सूरज का लण्ड भी नीचे फ़ुफ़कारे भर रहा था, लन्ड नीचे लटकता हुआ फ़ड़क रहा था। कुछ ही देर में राहुल का वीर्य छूट पड़ा और सूरज की गान्ड में भरने लगा। राहुल झड़ चुका था।

अब दोनों ने अपना पोज बदला और सूरज का कड़कता लण्ड राहुल की गाण्ड में टिका था। राहुल की गाण्ड टाईट नहीं थी, फिर देसी घी का असर, लण्ड फ़क से राहुल गाण्ड में घुस गया, राहुल एक बार तो दर्द से कराह उठा पर सम्भल गया।
सूरज अपना लण्ड राहुल की गाण्ड में पेलने लगा। राहुल गान्ड चुदाई को एन्जोय कर रहा था। वो धीरे से नीचे पांव पसार कर पेट के बल लेट गया और अपनी आन्खे बंद कर ली और गाण्ड मराने क भरपूर आनन्द लेने लगा।
सूरज राहुल की पीठ पर लिपट कर लण्ड पेल रहा था। गाण्ड के फ़ूल की चमड़ी लण्ड के साथ साथ बाहर निकल रही थी और अन्दर जा रही थी। दोनों के चिकने शरीर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे।

अचानक सूरज के लण्ड ने पिचकारी छोड दी और वीर्य निकल पड़ा। सूरज हाय कह कर राहुल की पीठ से चिपक गया और वीर्य राहुल की गान्ड में भरने लगा। सूरज अब पूरा झड़ चुका था। उसका लण्ड अपने आप बाहर आ गया था। अब सूरज और राहुल आराम से बैठ गये। उन्होंने शराब का अन्तिम जाम बनाया और आज के मजे के नाम पर चीअर्स करके पीने लगे।

आज दोनों जवानी का पूरा लुत्फ़ उठा कर सन्तुष्ट थे। जाम समाप्त हो चुका था और अब टिफ़िन की तैयारी हो रही थी।

वो दोनों इस बात से अन्जान थे कि उन्हें किसी जगह से मेरी दो आंखें उन्हें ये सब करते हुए देख रही थी। इस दौरान मैं दो बार अपनी भोसड़ी में अंगुली डाल कर रस निकाल चुकी थी।… हमेशा की तरह मैं उन दोनों से चुदने का कोई बढ़िया प्लान बना रही थी… उन्हें अपने चक्कर में लेकर दो दो लण्ड का मजा लेने का प्लान। Antarvasna

हाय दोस्तों Antarvasna

मेरा नाम रमेश है। वैसे तो मैं उत्तर Antarvasna प्रदेश का रहने वाला हूँ पर जॉब कोइम्बटोर में करता हूँ। मेरा जॉब मार्केटिंग का है जिसमें घूमना ज्यादा होता है। अब मैं आपको असली बात बताता हूँ।

एक बार मैं काम के सिलसिले में कोइम्बटोर से चेन्नई जा रहा था। मैने एसी स्लीपर बस में टिकट बुक कराई थी। मुझे बस में डबल वाली सीट मिली थी। मैंने सोचा पता नहीं कौन आयेगा मेरे साथ ! मगर जब बस चलने लगी तो एक औरत जो कि कोई ३०-३५ साल की होगी, वो मेरे साथ सीट पर आ गई और पूछा दस नम्बर की बर्थ यही है क्या?

मैंने कहा- हाँ!

वो मेरे साथ बैठ गई और इधर-उधर की बात करने लगी। वैसे वो देखने में सुंदर और गोरी चिट्टी थी। थोड़ी देर के बाद मुझे नींद आने लगी और मैं बोला- मुझे सोना है !

और मैं अपना कम्बल ले कर सो गया। वो भी मेरे साथ लेट गई।

मैं सोच रहा था कि इतना अच्छा मौका हैं, एक तो एसी बस और एक सुंदर औरत जो मेरे साथ ही लेटी हुई है !

मैं बस अपने लण्ड को पकड़ के लेटा था, कुछ कर नहीं पा रहा था, क्योंकि मुझे डर था कि यह कुछ कह न दे ! और मैं ऐसे ही सोया रहा।

मगर कोई एक घंटे के बाद मुझे लगा कि मेरी गांड पर कुछ लग रहा है। मैंने ध्यान किया तो उसका घुटना मेरी गांड से लग रहा था और बस के झटकों की वजह से मेरी गांड में लग रहा था। मैं तो एकदम से पागल हो गया और सोचने लगा कि शायद यह जानबूझ कर कर रही है।

तो मैंने यह जानने के लिए उसकी तरफ मुँह कर लिया और अब उसका पैर मेरे लंड पर लगने लगा जो कि एकदम खड़ा हुआ था। मुझे मजा आने लगा। पर धीरे-धीरे मुझे लगा कि कुछ और भी मेरे लण्ड पर लग रहा है। मैंने हाथ लगाकर देखा तो उस औरत का हाथ था जो मेरा लण्ड सहला रही थी। जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरा लंड जोर से पकड़ लिया और दबाने लगी। मैं भी अब कुछ नहीं कह रहा था और अपना हाथ हटा लिया और उसकी साड़ी पर हाथ लगाने लगा और धीरे धीरे उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा, उसकी चूत पर ऊपर से ही हाथ फिराने लगा।

फिर वो मेरे और पास सरक आई और मुझे चूमने लगी। मैं तो पहली बार किसी को चूम रहा था, मुझे बहुत मजा आ रहा था। हम लोगों कोई २० मिनट किस करने के बाद बस के परदे इस ढंग से लगा दिए ताकि कोई देखे नहीं ! वैसे तो वोल्वो में सुविधा अच्छी होती है पर हम बेफिक्र होना चाहते थे। किस करने के बाद वो मेरा लंड पैन्ट में से निकाल कर चूसने लगी और उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दी। अब वो सिर्फ चड़डी और ब्रा में थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और अब मैं सिर्फ चड्डी में था। उसने एकदम से मेरी चड्डी उतार दी और मेरा लंड चूसने लगी।

फिर मुझे बोली- तुम भी मेरी चूत चाटो !

मैं भी बेताब था चूत चाटने के लिए और फिर मैंने उसकी ब्रा और चड्डी भी उतार दी। वो एक दम नंगी हो गई थी। मैंने तो पहली बार किसी को नंगा देखा था। मैं तो बस पागल हो रहा था और उसको चूमने लगा। फिर हम दोनों ६९ की पोसिशन में आ गये। कोई १५ -२० मिनट तक चाटने के बाद वो बोली- अब मुझे शांत कर दो !

मैंने पूछा- कैसे?

तो बोली- अपना लंड मेरी चूत में डाल दो !

मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मैं अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा तो लंड ढग से नहीं जा पा रहा था। उसने हाथ से लण्ड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखकर बोली- अब करो !

मैंने जैसे ही झटका मारा तो थोड़ा सा ही लंड अंदर गया क्योंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी। फिर मैं धीरे धीरे डालने लगा और जब लंड पूरा घुस गया तो मैं झटके मारने लगा। मेरे झटके और बस के झटकों से हम दोनों को अलग ही मजा आ रहा था। ४०-४५ झटकों के बाद वो झड़ने लगी तो उसने मुझे बहुत जोर से पकड़ लिया और अपने अंदर समेटने की कोशिश करने लगी।

पर मेरा अभी झड़ा नहीं था तो मैंने उसकी चूत से लंड नही निकाला और तेज-तेज करने लगा। फिर १०-१२ झटकों के बाद मैं भी झड़ गया और उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसको चूमता रहा।

इस तरह हमने पूरी रात ४ बार चुदाई की।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी?

कृपया मुझे मेल करे !

मेरा आईडी है Antarvasna

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