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मैं ग़ुड़गाँव से हूँ। मैं 25 साल का हूँ Indian Sex Stories और मैं हर वक्त सेक्स का प्यासा रहता हूँ। मेरे घर में मैं, मोम और डैड हैं।
यह बात तब की है जब मैं बीस साल का था। हमारे घर पर एक नई काम वाली आई, क्या चीज़इ थी वो!
पहले दिन जब उसको देखा तो मैं बस देखता ही रह गया और सोचा कि अब शायद मेरा काम हो जायेगा, मेरे लंड जी की प्यास बुझ जायेगी। उसकी फ़ीगर देख कर मेरा तो लंड उछलने लगा उसकी फ़ीगर 36-32-36 थी। वो शादी-शुदा थी और साढ़े पांच फ़ीट की गोरी चिट्टी औरत थी और उसकी मोटी मोटी आंखें थी।
एक दिन जब वो मेरे कमरे में सफ़ाई कर रही थी तो मैंने उसके बड़े-2 स्तन देखे और उसके चले जाने के बाद मैं बाथरूम चला गया और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके नाम की मुठ मार दी। मैं उससे सेक्स करना चाहता था लेकिन डरता था उससे।
एक दिन मोम और डैड दोनों बाहर चले गये। मैं घर पे अकेला था और शाम के 5 बजे थे, मैंने ब्लू मूवी देखनी शुरु की और अपना लंड बाहर निकाल लिया। अचानक काम वाली अंदर आ गई। न जाने वो कब आ गई। मुझे पता नहीं चला कि कब मेन-गेट खुला और वो अंदर आ गई। मैं उसे देख कर डर गया और वो मुझे नंगा देख कर बाहर चली गई और किचन में जाकर बर्तन धोने लगी। मैं डरा हुआ टीवी बंद करके अपनी पैंट बंद कर रसोई में चला गया।
मैंने धीरे से कहा- आंटी चाय पियोगी?
वो गुस्से में बोली- नहीं।
मैं और डर गया। मैंने कहा- आंटी प्लीज़ किसी को मत बताना जो अंदर देखा।
वो कुछ नहीं बोली।
मैंने फिर कहा- प्लीज़ मोम को मत बताना।
उसने कहा- तुझे शरम नहीं आती ये सब करते हुए?
मेरे पसीने छूट गये। मैंने हाथ जोड़े- प्लीज़ आंटी, मुझे पता नहीं चला कि आप कब आ गई और मैं गरम था।
उसने मुझे आंखों से घूरा और वो बोली- तुम सारा दिन यही करते हो क्या? चल अपने कमरे में जा! मुझसे बात मत कर! मैं तेरी मां को बोल दूंगी कि इसकी शादी कर दे।
मैंने उसकी बहुत मिन्नतें की, लेकिन वो नहीं मानी। मैं कमरे में आ गया। वो 15 मिनट बाद मेरे कमरे में आई और मेरे पास आकर खड़ी हो गई।
मैंने फिर कहा- आप जो कहोगी, मैं करूंगा! अगर तुमको पैसे चाहिये तो ले लो! वो और गरम हो गई और मुझे थप्पड़ लगा दिया और कहा- मैं बिकाऊ नहीं हूँ।
मैं रोने लग गया। वो मेरे पास बेड पर बैठ गई और बोली ये रोकर किसको दिखा रहा है।
मैंने कहा- प्लीज़्ज़! आंटी! अब नहीं करूंगा!
वो बोली- क्या नहीं करेगा?
मैंने कहा- मुठ नहीं मारूंगा!
बोली- पक्का?
मैंने कहा- प्रोमिस!
उसने अपनी टांगें बेड पर रखी, उसने काली साड़ी पहन रखी थी। उसने मेरे गालों पर हाथ लगाया और बोली- मत रो! मेरे राजा! मैं तो तुमको डरा रही थी, तू तो सच में डर गया। चल अब शुरु हो जा मस्ती कर! यही तो उमर है यह सब करने की!
मुझको ऐसी बातें सुन कर थोड़ा सुकून मिला।
उसने अपना हाथ मेरी ज़िप पर रखा- अरे मेरे राजा! तुम्हारा लंड तो सो रहा है!
मैं उसके मुंह से लंड शब्द सुन हैरान रह गया।
और उसने कहा- चल अपनी पैंट उतार!
मैंने कहा- क्या?
आंटी बोली- सुनाई नहीं देता क्या? चल!
मैंने अपनी पैंट उतार दी, उसने मेरा अंडरवियर खींच दिया और मेरे 3 इंच के लंड को हाथ लगाया। मेरा लंड टाइट होने लगा और उसने मेरे लंड की टोपी को अपने अंगूठे से स्पर्श किया। अब मैं मस्त हो गया।
वो बोली- तेरा लंड तो बहुत बड़ा है!
और देखते ही देखते मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया और उसने मेरा 8 इंच का लंड अपने मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी।
मुझे ऐसा अनुभव पहली बार हुआ, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं स्वर्ग में हूँ।
मेरे लंड को चूसने के बाद वो खड़ी हो गई उसने अपनी साड़ी उतार दी और अपना पेटीकोट भी।
मैंने भी हिम्मत कर अब उसके स्तन दबा दिये, उसकी काली ब्रा उतार फ़ेंकी और उसके मोटे-2, गोरे-2 मम्मे दबाने लगा, उसकी चूचियाँ कड़ी हो गई और बोली- समीर बाबू! दबा ज़ोर से! आआह्हह ऊऊह्हहह, मैं भी बहुत दिनों की प्यासी हूँ।
मैंने उसके मम्मे जमकर चूसे। वो सिसकियाँ ले रही थी। और ऐसे में मैंने एक हाथ से उसकी पेंटी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गये, मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी, वो सिसकियाँ ले रही थी- आअह्हह्ह समीर बाबू मर गई! आज मेरी प्यास बुझा दो!
हम अब 69 पोजिशन में आ गये उसने मेरा लंड फिर चूसना शुरु किया और मैं अपनी जीभ उसकी गरम चूत पर रख कर उसे कुत्ते की तरह चाटने लगा।
उसने अब अजीब अंदाज़ में कहा- साले कुत्ते! अब मत तड़पा! चोद दे मुझको! फाड़ दे मेरी चूत! मरी जा रही हूँ!
मैं ऐसा सुनकर मैंने भी बोला- चल साली रांड! आजा आज तेरी चूत फाड़ दूंगा!और मैंने उसे कुतिया बना लिया, लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख दिया, हल्का सा धक्का लगाया।
वो बोली- आअह्हह ऊऊह्ह ह्ह ह्हह! साले पूरा डाल! अपनी रंडी आंटी के अंदर!
और मैंने ज़ोर से झटका दिया, बोला- ले साली रंडी आंटी!
अब पूरा 8 इंच का लंड उसकी चूत में प्रवेश कर चुका था।
वो बोल रही थी- आआअह्हह ऊऊऊओह्ह आआऊऊ औऊस्सह! मार डाला रे! इतना दर्द तो सुहागरात को नहीं हुआ! हरामी तेरा लौड़ा ही इतना बड़ा है! ऐसे गालियाँ सुन मुझे गुस्सा आया और मैं ज़ोर-2 से उसको चोदता गया और वो मुझे गालियाँ दिये जा रही थी- साले कुत्ते! आअहह्ह! फाड़ दे! आह्हह! समीर बाबू! आआह्हह्ह ऊऊह्हह! आज लगा दे सारा ज़ोर!
कमरे में चुदाई की आवाज़ और आआअह्ह ऊओह्हह्ह की आवाज़ भर गई।
वो पागल सी हो गई और मैं भी।
वो सीधी लेट गई और मैंने उसकी टांगें खोल कर उसकी फिर से चुदाई शुरु कर दी और वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी, उसने मेरी छाती पर काट लिया।
वो अब दूसरी बार झड़ गई और बोली- साले! आज फाड़ देगा क्या! चल ज़ोर लग आआअहहह्ह! मेरा वीर्य आ गया और मैं आनन्द से भर गया। और सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया और अब हम दोनों शान्त हो गए। उसने मेरे माथे पे चूम लिया और बोली- तू मुझे रोज़ चोदा कर! मैं तेरी इस चुदाई से खुश हुई।
मुझे नरम और गरम चूत पसन्द है। मुझे मेल करें! Indian Sex Stories
सभी अंतर्वासना पढ़ने वाले पाठकों Sex Stories को और समूचे अंतर्वासना स्टाफ को नमस्कार ! अंतर्वासना से ही लोगों की बिस्तर, बाथरूम की बातें बाहर आती हैं। मैं एक-एक चुदाई के बारे पढ़ पढ़ कर मज़े लेती हूँ और आज मैं अपनी जिंदगी की एक ज़बरदस्त हकीकत अथवा अपनी मनचली जवानी के जोश में मैं होश खो बैठी थी, यह वाकया मैं मरते दम तक नहीं भूल पाऊँगी।
खैर मेरा नाम रेखा शर्मा है, मैं अठाईस साल की महिला हूँ, भगवान् ने भी गूंथ-गूंथ कर जवानी मेरे अन्दर भर दी थी और ऊपर से दिलफेंक मिजाज़ दिया, कामुक चालू किस्म का शबाब दिया है। सोलहवें साल में ही मेरा मन डोलने लगा था, मेरी उभरती हुई छाती जब मैं खुद भी आईने में देखती तो शरमा जाती, जब बाहर निकलती तो लड़कों की निगाहें वहाँ अटकती देखकर मेरे जवान होने पर मोहर लगा देतीं, छमक-छल्लो, नशे की बोतल सुन मैं कामुक हो जाती।
आखिर मैं एक लड़के को अपना दिल दे ही बैठी, पब्लिक प्लेस में मिलते हुए बात सिनेमा तक पहुंची, वहाँ वो मेरी जवानी को दिल खोल कर मसलता, क्रीम की तरह मेरी चिकनी जांघों पर हाथ लगते तो मैं सिकुड़ जाती।
सिनेमा से बात उसके घर तक पहुंची। एक दिन वो अकेला था और मुझे अपने बेडरूम तक ले गया वहां में बहक गई और अपनी जवानी लुटा बैठी। उसके बाद चुदाई का जो चस्का लगा, जो लगा कि बस फिर क्या बताऊँ ! कई लड़कों के साथ मेरा चक्कर चलने लगा और अपनी गूंथी जवानी में लुटाती रही, दबवाती रही।फिर एक दिन मेरी शादी एक बहुत बड़े घर में हुई। मेरे पति का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बहुत बड़ा कारोबार था। मैंने भी एम.कॉम कर रखी थी, जल्दी ही मैंने अपने पति के साथ उनका बिज़नस सम्भाल लिया लेकिन वो ज्यादातर घर से बाहर रहते, देश से बाहर भी जाना पड़ता, बिज़नस तो संभाल लिया लेकिन यह जवानी कैसे संभालती? चुदाई के बिना रहना मेरे लिए मुश्किल था, मर्द के बिना मैं नहीं रह पाती, शादी के बाद से वैसे ही सिर्फ एक लौड़े पर टिकी हुई थी। वो भी मुझे कभी संतुष्ट करता, कभी नहीं करता ! फिर भी ऊँगली, बैंगन से सार लेती(काम चला लेती) मेरे पति वैसे भी मुझे से बड़े उम्र के हैं। मैं एक मध्यम परिवार से उठ कर अमीर घर में आई थी।
एक दिन मैं अपने ऑफिस गई, वहां मेरी सहेली का फ़ोन आया, वो मुझे मिलने आ रही थी।
मैंने उसे कहा- ऑफिस ही आ जाओ !
मैंने बहुत आलीशान ऑफिस बनवा लिया था, पीछे एक आराम-कक्ष और एक छोटी सी लॉबी !
वो बोली- कोमल। ठण्डी बीयर मंगवा यार ! बहुत मन है !
मैंने अपने सेक्रेटरी को बुलाया और कहा- बिना किसी को दिखाए बीयर और कुछ खाने को लेकर आओ !
हम दोनों ने बैठ कर बीयर की चुस्कियाँ ली और फिरफिर उसको कॉल आई, उसको जाना पड़ा। मुझे सरूर सा हो चुका था। मैंने अकेले बैठने की बजाये उसको अपने सेक्रेटरी विनोद को अन्दर बुला लिया और अपने साथ बैठाया, उसको बीयर पिलाई और उसके साथ थोड़ा खुलने सी लगी।
वो बहुत मर्दानगी वाला मर्द दिखता है और अन्दर से मैं उस पर फ़िदा थी। आज मौका था, मैं उठी और उसकी गोद में बैठ गई। वो एक दम चौंक सा गया लेकिन मैं कुछ और सोच चुकी थी। उसे भी समझते देर न लगी। उसने मुझे जकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठों में डाल दिए। उसने भी अपना हाथ मेरे टॉप में घुसा दिया और मेरे चुच्चे दबाने लगा। उसका लौड़ा खड़ा हो चुका था, उसकी चुभन का एहसास होने लगा था मुझे !
उसने कहा- मैडम, थोड़ी बीयर और हो जाए ! मैं मंगवाता हूँ !
मैंने कहा- इस हालत में छोड़ कर ?
नहीं मैडम ! बाहर संजू है न ! अपना ही पट्ठा है, बहुत दमदार है वो भी !
मैं तो वासना की भूखी थी, नशे में थी ! हाँ कह दी ! उसी हालत में उसे अन्दर बुला लिया। मेरे निरावृत वक्ष देख उसकी आंखें चमक उठी।
जा चार चिल्ड-बीयर ले कर आजा !
उसके जाते ही उसने मेरी जींस भी उतार दी, खुलकर हाथ मेरी जांघों पर फिराने लगा।
वाह क्या माल हो !
उसने मुझे वहाँ से अपनी मजबूत बाँहों में उठा मेरे रेस्टरूम में बिस्तर पर फेंक दिया और मेरे ऊपर आते हुए उसने अपना मोटा लंबा लौड़ा मेरे होंठों पर टिका दिया, मैंने हंसकर मुँह में डाल लिया। एक हाथ से वो मेरी चूत मसल रहा था और उधर लौड़ा चुसवा रहा था, उसने टाँगे खोल अपना लौड़ा चूत में डाल दिया, मुझे इतना मजा आया जब उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत के अन्दर बाहर होने लगा। कितने दिन बाद मर्द का सुख मिल रहा था।
इतने में संजू वहाँ आ पहुंचा, उसने बीयर मेज़ पर रख दी, वहीं खड़ा होकर चुदाई देखने लगा, साथ में अपना लौड़ा भी मसल रहा था।
मैंने वासना और नशे की झोंक में उसको अपने पास बुला लिया बीयर का मग मांगने के बहाने ! जैसे ही पास आया मैंने उसकी जिप खोल दी और उसका लौड़ा अब मेरी आँखों के सामने था। बहुत बढ़िया लौड़ा था उसका ! मैं घोड़ी बनी हुई थी, उसने अपनी पैंट उतार दी, मेरे सामने घुटनों के बल बैठ अपना लौड़ा मेरे होंठों पर रख दिया। मैंने झट से मुँह में भर लिया। मैं नशे में पागल थी।
इसी बीच वो उठा और बीयर का मग मेरे मुँह को लगा दिया, मैंने भी पूरा खींच लिया।
अब वो मेरे बाल पकड़कर लौड़ा चुसवाने लगा- साली, कमीनी, रांड चूस इसको !
बहनचोद ! साले ! चूस रही हूँ कुत्ते !
पीछे से झटके तेज़ हो गए और आगे से लौड़ा स्वाद था। अब मुझे नशा ज्यादा हो गया। विनोद ने अपना सारा माल मेरी चूत में उतार दिया था, वह हांफते हुए बगल में गिर गया, संजू पीछे गया और चूत मारने लगा, साथ साथ ऊँगली गांड के अन्दर बाहर करने लगा। उसने काफी थूक लगाया और गांड के छेद पर अपना लौड़ा रखकर झटका दिया। मैं पहले से तैयार थी उसके इस वार के लिए- अह अह थोड़ा प्यार से करो ! गांड है राजा !
उसने जल्दी ही पूरा अन्दर डाल दिया और मेरी गांड मारने लगा।
विनोद ने अपना लौड़ा फिर से मेरे मुँह में डाल दिया और मैं उसको खड़ा करने के लिए हर अदा दिखा रही थी।
संजू तेज़ और तेज़ होता गया, गांड मार रहा था, कसी हुई थी, जल्दी उसकी पिचकारियाँ छूटने लगीं।
वाह मेरे लाला ! बहुत बढ़िया गांड मारता है तू !
दोनों मेरे ऊपर लुढ़क गिरे थे, दोनों के लौड़े हाथ में ले लिए, एक पक्की रांड की तरह उनके बीच नंगी लेटी हुई थी।
एक एक ग्लास बियर डकार कर बोला- मजा आया?
मैंने कहा- पूरा नहीं !
लेकिन फिर भी बोला- साली तू मालकिन नहीं आज रांड है अपने स्टाफ के मर्दों की !
समय देखा तो काफी हो चुका था, मैंने कहा- सालो, तुम दोनों से में अच्छी तरह ठंडी नहीं हो पाई !
मैडम फिर रुक जाओ, बाकी सबको भेज देते हैं ! साब कौन सा इंडिया में हैं !
मैडम आपके लिए दो और लौड़े तैयार हैं ! पीछे देखो !! पीछे कौन खड़ा है?
और मैंने क्या देखा ? फिर पूरी रात क्या हुआ ?
जानने के लिए इसका अगला भाग ज़रूर पढ़ना ! अभी आगे काफी कुछ है ! Sex Stories
मेरा नाम अरुण शर्मा है मैं Sex Stories रायपुर में रहता हूँ, मैं रायपुर एक साल पहले ही आया हूँ। इस से पहले मैं उड़ीसा में रहता था उड़ीसा में मेरी एक गर्लफ्रेंड है उसका नाम श्वेता है। मेरा उसके साथ पाँच साल से चक्कर है वो भी मुझे बहुत प्यार करती है। मैं आप को अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई के बारे में बताता हूँ।
बात एक साल पहले की है जब उसका मुझे फ़ोन आया, उसने कहा- जब से तुम गए हो मुझे तुमसे मिलने का बहुत मन कर रहा है तुम मुझ से मिलने आओ ना!
तो मैंने कहा ठीक है मैं रविवार को उड़ीसा आऊँगा, तुम मुझे मेरे दोस्त के घर पे मिलने आ जाना।
तो उसने हामी भर दी- मैं तुम से दोपहर 2:30 को मिलूँगी।’
मैंने कहा- ठीक है।’
वो दोपहर ठीक 2:30 को आ गई। मैंने उसे देखा, वो नीले रंग की टॉप और सफ़ेद रंग की स्कर्ट पहन कर आई थी। मैं तो उसे देखता ही रह गया, क्योंकि आज वो कुछ ज्यादा ही ख़ूबसूरत लग रही थी।
मैंने कहा अन्दर आ जाओ, वो अन्दर आई। वहाँ पर मेरा फ्रेंड भी था, उसने कहा- अरुण मुझे ज़रा काम है, मैं 2 घंटे में आता हूँ।’ कह कर वो चला गया अब कमरे में सिर्फ़ मैं और श्वेता ही थे। मैंने उससे कहा- बैठो श्वेता, मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लाता हूँ,’ तो उसने कहा- तुम यहाँ बैठो, मैं लेकर आती हूँ।’
पाँच मिनट के बाद वह चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ कर कहा- जान, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।’ उसने कहा- जानती हूँ, तभी तो आई हूँ।’
फिर मैंने धीरे से उसके कान में कहा- जान मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ,’ तो उसने कहा- ठीक है, कर लो, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं करना’ तो मैंने ‘ठीक है’ कहते हुए उसके नाज़ुक होठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा।
वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। तभी मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, अबकी बार उसने कुछ नहीं किया। मैं समझ गया वह गरम हो रही है।
अब मैंने अपना एक हाथ उसकी पैण्टी में डाल दिया, उसकी पैण्टी गीली थी। मैंने पूछा कि ये गीला क्यों है?
उसने कहा- तुम बस मुझे किस करो, इतने सवाल मत करो।
मैंने कहा- जान मैं तुम्हारा शरीर देखना चाहता हूँ’ तो उसने ना कर दिया। मैंने उसे मनाने की बहुत कोशिश की तब जाकर वह मानी, कहा- सिर्फ देखना, कुछ करना नहीं।’
मैंने कहा- तेरी कसम, कुछ भी नहीं करूँगा। फिर मैंने उसकी टॉप उतारी, उसने नारंगी रंग की ब्रा पहन रखी थी। मैंने उसकी ब्रा भी उतारी, ब्रा खोलते ही उसकी चूची मेरे हाथ में आ गई। मैं उसकी चूचियों को किस करने लगा तो वह पागल होने लगी। फिर मैंने उसकी स्कर्ट भी उतार फेंकी
अब वह सिर्फ नारंगी रंग की पैण्टी में थी, मैंने धीरे से वो भी उतार दी। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था। उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे। मैंने उसकी चूत पर जैसे ही हाथ रखा, वह सिटपिटा कर उछल पड़ी। फिर मैं उसे किस करने लगा, उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। उसने कहा- आज मुझे मत छोड़ो, आज जो करना है कर लो.
तो मैंने कहा- जान, तुमने ही तो मना किया है।
इस पर वो बोली- उस बात को भूल जाओ, सिर्फ मुझे याद रखो, और जो करना है कर लो।
उसकी बात खत्म होने से पहले ही मैंने उसकी चूत में अपनी एक उँगली डाल दी, वह चिहुँक उठी- दर्द हो रहा है।’
तो मैंने कहा- जान पहली बार ज़रा दर्द होता है तुम अगर मुझसे प्यार करती हो तो आज दर्द सहन करना ही पड़ेगा।’
उसने कहा- ठीक है।
फिर उसने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी छाती पर चूमने लगी, और बाद में उसने मेरी पैन्ट भी उतार दी, लगे हाथ अण्डरवियर भी उतार दिया- इतना बड़ा मैं कैसे लूँगी?
मैंने कहा ‘तू बस देखते जा, तुझे तो ये भी कम पड़ेगा।
फिर मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और पलंग पर ले जाकर उसे लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो मदहोश हो रही थी, और चिल्ला रही थी- अब चोद दो मुझे, घुसाओ ना जल्दी।’
मैंने कहा- अभी नहीं, रानी, पहले तू मेरे लंड को तो मुँह मे ले।’ उसने देर न करते हुए मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। दस मिनट में मेरा माल निकल गया।
मैं उठा और जाकर अपने लंड पर तेल लगा कर आया और पलंग पर आकर बैठ गया, वो मेरे लंड से खेलने लगी। मैंने कहा- अभी खेल ले, थोड़ी देर में तू रोएगी।’
उसने भोलेपन से पूछा- क्यों रोऊँगी?’
मैंने कहा- बस अभी पता चल जाएगा।’ मैं उसकी पाँवों के बीच में आ गया और उसके दोनों पैरों को ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुहाने पर रखा, जैसे ही घुसाने के लिए आगे बढ़ा तो बोली- दर्द हो रहा है।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रखे, क्योंकि अब उसका मुँह बन्द था, मैंने एक ज़ोर का झटका मारा तो उसकी आँखों में आँसू भर आए, वो मुझे धक्का देने लगी।
अबकी बार मैंने और ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसा गया, वो रो रही थी। मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा, वो मुझसे कह रही थी, प्लीज़ मुझे छोड़ दो। मैंने कहा- आज करने दे दिया, फिर पता नहीं तुमसे कब मिलूँगा, कुछ तो तुम्हे याद रहना चाहिए।’
उसने कहा- ठीक है, लेकिन धीरे-धीरे करो न,’ मैं बोला- ठीक है मेरी रानी, धीरे-धीरे करता हूँ। करीब पाँच मिनट तक मैं उसे धीरे-धीरे चोदता रहा, फिर उसने कहा- अच्छा लग रहा है।’
उसे मज़ा आने लगा था। वह और ज़ोर से, और ज़ोर से कहकर चिल्ला रही थी। मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो! की रट लगा रही थी। मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा। फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लंड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया।
उसने कहा- यह क्या कर दिया, मैं तो गर्भवती हो जाऊँगी।’
मैंने कहा- चिन्ता मत कर, मैं तेरे लिए ई-पिल ला दूँगा, उसे खा लेने से कुछ नहीं होगा।’
वो बोली- ठीक है, शाम को ला देना।’
मैंने कहा- मैं एक बार और भी करूँगा।’ तो बोली- नहीं आज लेट हो गया है।’
मैंने कहा- एक बार और जान, मैं कल चला जाऊँगा।’ आग्रह करने पर वह मान गई, बोली- ठीक है, लेकिन जल्दी करना।’
मैंने भी कहा- ‘ठीक है।’
रानी को उस दिन मैंने ती बार चोदा और मैं जब भी उड़ीसा जाता हूँ, उसे ज़रूर चोदता हूँ। और मैंने किस प्रकार उसकी गाँड मारी, ये अगली कहानी में बताऊँगा। Sex Stories
मित्रो.. नमस्कार.. मैं अंकित .. हरियाणा से हूँ.. मेरी उम्र 24 वर्ष..
यह मेरी पहली कहानी है जो मैं अन्तर्वासना पर लिख रहा हूँ। ये दरअसल मेरी जिन्दगी की एक सत्य घटना पर आधारित कहानी है।
इस घटना में मेरे साथ स्नेहा जोकि 32 साल की है.. जो उसने बताई थी, इस कहानी में नाम बदले हुए हैं।
यह 28 मई 2013 की बात है.. मैं शाम को चैटिंग कर रहा था.. तो एक औरत ऑनलाइन मिली.. उसके साथ चैटिंग शुरू हो गई। उसने अपना नाम स्नेहा बताया साथ ही उसने मुझे वेबकैम चालू करने को कहा.. मैंने अपना कैम ओपन किया और उससे भी कहा तो उसने भी अपना कैम ओपन कर दिया।
जब मैं उसे देखा.. मैं खिल उठा.. क्या मस्त माल थी.. सुपर हॉट.. एकदम बोल्ड.. बड़े-बड़े और एकदम गोरे मम्मे.. खुद दबा रही थी.. उसने सूट पहना हुआ था।
मैंने कहा- खोलो तो..
उसने मुझसे बोला- तुम भी अपना ‘टूल’ दिखाओ।
मैंने कहा- अभी तो मैं परिवार के बीच हूँ रात में सब दिखा दूँगा।
वो बोली- थोड़ी झलक तो दिखा..
मैं कमरे में अकेला था.. मैंने दरवाजा बंद किया और 2 मिनट तक अपना सामान दिखाया।
इतने में वो बोली- क्या तुम लुधियाना आ सकते हो??
मैंने कहा- अगर आप बुलाओगी.. तो क्यों नहीं..
बोली- ठीक है.. कल आ जाओ..
मैंने कहा- इतनी जल्दी ? मैं कल तो नहीं आ सकता..।
उसने कहा- मैं यहाँ पर कल तक ही हूँ.. उसके बाद दो महीने तक बाहर हूँ.. फिर बाद में ही मिल सकेंगे..
मैंने सोचा साला कोई लड़का होगा मुझे वेबकैम पर कोई ट्रिक करके पागल बना रहा होगा..
मैंने मोबाइल नंबर माँगा तो कहती हैं कल आ जाओ.. फिर वहीं देती हूँ।
मैंने कहा- ये भी कोई बात हुई?
फिर उसने कहा- तुम अपना नम्बर दो.. मैं फोन करती हूँ.. और तुम मुझे फोन मत करना..
मैंने कहा- ठीक है..
उसका फोन आया तो.. ओह.. क्या सुरीली स्वीट आवाज थी उसकी- हाय.. कैसे हो अंकित ?
मैंने कहा- वाह.. आपकी आवाज तो बड़ी प्यारी है.. मैं ठीक हूँ.. आप बताओ..
बोली- बस.. तुम कल आ जाओ..
मैंने कहा- यार कुछ समय तो दो मुझे..
अगले दिन ऑफिस में जरूरी काम था।
मैंने कहा- रात में मिलते हैं फिर बात करेंगे और आने के लिए कुछ करता हूँ।
इस तरह फोन पर कुल 2 से 3 मिनट बात हुई.. फिर चैटिंग पर आ गए।
वो बार-बार यही कहती रही- मुझे जाना है.. रात में 10 बजे मिलते हैं।
फिर मैं ऑफिस की प्लानिंग करने लगा.. रात 9 बजे तक फोन करता रहा.. तब जा कर बड़ी मुश्किल से कहीं बात बनी।
फिर रात में मैं ऑनलाइन आ गया और इन्तजार करने लगा। दस मिनट में वो भी आ गई।
फिर मैंने उसके बारे में मालूम किया.. वो शादीशुदा थी.. मैंने पति और बच्चों के बारे में पूछा तो बोली- नो पर्सनल..
मैं चुप हो गया। फिर वेबकैम चालू हो गए.. धीरे-धीरे हम नंगे होते चले गए.. बात चलती रही। उसने अपनी चूत और मम्मे साफ-साफ़ दिखाए।
मैंने भी कैपरी और चड्डी उतार दी। उस हसीन जवानी को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.. मेरा 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लवड़ा पूरा टाइट हो गया था।
वो भी बोली- हाय.. बहुत मोटा है आपका..
अब मिलने का प्लान चलता रहा.. उसने बोला- कल बस स्टैंड पर 11 बजे तक मिल जाना.. मैं 1-2 घंटे के लिए ही मिलूँगी।
फिर प्लान तय हुआ कि होटल में मिलेंगे।
उसने कहा- तुम मुझे फोन मत करना.. मैं तुम्हें 9 बजे खुद फोन करूँगी..
अब उसके साथ 1 से 1.30 घंटे चैटिंग के बाद 12 के करीब मैं सो गया। सुबह 7 बजे घर से निकला और बस पकड़ कर अम्बाला पहुँचा.. उधर से शान-ए-पंजाब ट्रेन पकड़ी।
उसका लुधियाना में मिलने का 12 बजे का टाइम था.. इतने में उसका फोन का इन्तजार करते हुए कॉल भी आ गया।
“कहाँ हो.. कैसे हो… ये मेरा नंबर चालू रहेगा… इस पर फोन कर लेना।
फिर 40-45 मिनट पहले ही फोन चालू हो गए- कहाँ पहुँचे.. कब तक आ रहे हो..
मैं 12.15 पर पहुँच गया.. मैंने फोन किया- आप कहाँ हो?
बोली- मुझे स्टेशन दूर पड़ेगा.. आप बस स्टैंड आ जाओ.. वहाँ एक ढाबा है.. बहुत बड़ा बोर्ड लगा हुआ है..
उसने पता बताया और मैं पहुँच गया.. फोन किया तो बोली- इधर ये गली है.. वहाँ आ जाओ।
मुझे गली नहीं मिली.. आगे रोड पर गया तो एक गाड़ी पास आकर रुकी.. वो पीछे गॉगल्स लगा कर बैठी हुई थी.. क्या कयामत लग रही थी यार.. पूछो मत..
उसने गाड़ी का दरवाजा खोला.. मैं अन्दर बैठ गया।
हैलो.. हाउ आर यू.. चलता रहा.. आगे गाड़ी को ड्राइवर चला रहा था।
उसकी जवानी की क्या तारीफ करूँ.. 34-30-36 का फिगर.. दूध सी गोरी जवानी.. चुस्त जीन्स और गुलाबी रंग का टॉप पहना हुआ था।
मेरी आँखों में चमक और मुँह में पानी आ गया.. मैंने मुश्किल से सब्र किया.. ड्राईवर जो साथ था।
फिर बात शुरू हुई तो बोली- कहाँ चलना है?
मैंने कहा- होटल..
तो बोली- मैं इस तरह होटल कभी नहीं गई।
मैंने भी यही कहा.. फिर मैं एक होटल में गया। उधर पूछा एसी रूम का क्या लेते हैं तो मालूम हुआ 1500 का है।
अभी बात कर ही रहा था कि इतने में उसका फोन आ गया, बोली- कमरा बुक मत करना.. यूँ ही पूछ लो बस..
फिर मैं आ गया.. वो बोली- और कहीं चलते हैं..
मैंने कहा- हाँ.. सिटी के बाहर ही ठीक रहेगा।
तो गाड़ी आगे ले ली.. फिर उससे बात होने लगी।
‘पहले कभी किया है आपने?’
मैंने धीरे से कहा- हाँ..
फिर वो बोली- ये ड्राइवर नहीं.. मेरे पति हैं..
मैं एकदम से सकते में आ गया.. मैंने कहा- झूठ??
तो बोली- कसम से..
मैं अवाक था।
फिर आगे चल कर उसके पति ने ही एक होटल बुक किया।
उसने कहा- पति के साथ एडजस्ट कर लोगे ना.. वो भी कमरे में ही रहेंगे?
मैंने कहा- ओके..
हम लोग कमरे में गए। उसका पति बोला- मैं बाथरूम में जाता हूँ.. आप लोग कर लो..
मैंने पीने का पानी मँगवाया.. गर्मी बहुत थी.. मैंने पानी पिया.. उसने मना कर दिया।
मैं मूड में आ गया वो बिस्तर पर बैठी थी मैंने कपड़े उतारे.. बस चड्डी नहीं उतारी। फिर उसे अपनी बाँहों में ले लिया- आ जाओ जान..
उसे बिस्तर पर गिरा दिया.. उसके रसभरे होंठों को ज़ोर से चूसने लगा।
वो भी मेरे होंठों को जी भर के चूस रही थी।
फिर मैंने उसका टॉप उतारा.. और मैं चूंकि लेटा हुआ था.. सो पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया.. फिर उसको बाँहों में ले लिया।
मैं उसे ज़ोरों से चूमता-चूसता रहा.. उसके मम्मे यम्मी थे.. स्वीट सेक्सी निप्पल चूसे.. बोली- दर्द होता है..
फिर हम दोनों एक-दूजे के जिस्मों से खेलते रहे और पति बाथरूम से आकर पलंग के दूसरी ओर मुँह करके बैठ गया था।
फिर मैंने कहा- जान.. जीन्स तो उतारो..
उसने कहा- लो खोल लो।
मैंने उसकी जीन्स उतारी… क्या नरम-नरम कमर और टाँगें थीं.. नीचे उसकी पैन्टी वो भी गजब की थी.. भूरे रंग की.. फिर मैं उसके होंठ.. गला.. मम्मे.. नाभि… पेट चूसते-चूसते चूत पर आया तो उसकी हसीन मखमली चूत को चुम्बन किया.. उसको खूब चूमा-चाटा.. वो भी मस्ती से मचलने लगी।
फिर तो जितना चूमता था उतनी और प्यास लगने लगती थी। बड़ी ही मीठी महक थी.. नरम साफ चिकनी खूबसूरत चूत थी.. चूसने का और ज़ोर का मन हुआ और ज़ोर से चूसता गया।
वो ‘अहहा.. आहह.. आहह..’ की सिसकारियां लेती रही। फिर उसने एकदम से मेरे बाल पकड़ कर मेरा सर चूत के ऊपर दबा दिया और बोली- और ज़ोर से चूस… ज़ोर से चूस… अहहह..
उसकी चूत का स्वाद इतना मस्त.. जिंदगी भर ना भूलूँ.. हल्का सा नमकीन.. मस्त गीली चूत.. गर्म इतनी जितना जलता हुआ कोयला.. बस मैं भी चूसता जा रहा था। इस बीच मैंने चड्डी उतारी और लंड निकाल कर उसके मुँह में लगा दिया.. वो कामातुर होकर चूसने लगी…
उसे चूसने नहीं आता था.. फिर मैंने ही उसका मुँह पकड़ कर धक्के लगाए। इतने में मैं उसके मुँह में लंड डाले हुए ही उसके पेट के ऊपर से चूत पर पहुँच गया और चूत चूसने लगा।
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उसका पति भी नंगा हो गया और मेरे कान में कहने लगा- मैं मर्द नहीं हूँ.. तुम आज इसकी चूत चोद डालो..
मैंने कहा- ठीक है..
फिर वो अपनी बीवी से कहने लगा- आज जी भर कर चुदवा ले..
हम लंड-चूत चूसते रहे चूचियों से खेलते रहे.. इस हसीन जन्नत में बहुत मजा आ रहा था। फिर मैं उसे स्मूच करने लगा.. तो बोली- तुम्हें नहीं आता.. मैं सिखाती हूँ..
फिर तो वो मेरे ऊपर आ गई और मेरी बाजू पकड़ लीं.. मेरी दोनों टांगों में अपनी दोनों टांगों कर जोरों से बाँध लीं।
उसने मुझे इस कदर जकड़ लिया था कि मैं हिल भी नहीं सकता था।
फिर वो मेरे होंठों के किनारों पर धीरे-धीरे अपनी जीभ फिराती हुई चूम रही थी.. मैं अपने मुँह से उसकी जीभ पकड़ने की कोशिश करता तो सर ऊपर कर लेती।
मुझे बहुत सनसनी हो रही थी.. ऐसा लग रहा था.. जैसे वो मेरा देह शोषण कर रही हो। इस चुदाई के सबसे हसीन पल यही लगे थे मुझे।
इसके बाद वो मेरा लंड पकड़ कर मुझे चोदने लगी। फिर पोज़ बदल कर मैंने उसे लिटा कर उसकी गीली चूत चूसने लगा और उसके पति ने अपना नामर्द लंड उसके मुँह में डाल दिया।
फिर मैंने अपना लंड पकड़ कर उसकी गरम चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
बोलती है- और ज़ोर से चोद.. और ज़ोर के धक्के मार.. अहहा.. उउहह..
उसे पकड़ कर चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक चोदने के बाद वो अकड़ गई और झड़ गई उसके पानी की गर्मी से मेरा भी निकलने का था।
फिर मैंने लंड निकाल कर उसके मुँह पर पर पिचकारी मारी.. उसने मुँह साइड में किया तो उसके मम्मों पर माल की पिचकारी दे मारी।
फिर पूछा- चूसोगी?

उसने सिर हिला कर मना कर दिया- नहीं..
इतने में वो मुस्करा रही थी.. क्या क्यूट लग रही थी.. और माल उसके मम्मों पर और चेहरे पर खूबसूरती बढ़ा रहा था।
इसके बाद उसके पति ने चोदा.. वो तो 2 से 3 मिनट में धक्के मार कर गिर गया। फिर हमें होटल में डर भी लग रहा था.. इस दौरान 2 घंटे तक हमने चुदाई के खूब मजे किए।
उसके बाद मैंने पूछा- मज़ा आया?
तो बोली- हाँ बहुत ज़्यादा.. तुम चूसते बहुत मस्त हो।
हम सबने कपड़े पहने और निकल गए।
उसने मुझे 2000 दिए.. बोली- रख लो कोई बात नहीं।
मैंने मना किया.. पर उसके प्यार के आगे मना नहीं कर सका।
बोली- अपने लिए कोई गिफ्ट खरीद लेना।
वो पैसे मैंने आज भी संभाल कर रखे हुए हैं।
फिर बोली- आज रात को वेबकैम पर ज़रूर मिलना..
मैंने इन्तजार किया.. पर वो नहीं मिली। मैंने एक-दो बार फोन भी किया तो अटेंड नहीं किया और मैसेज से जबाव दिया- मैं कॉल करूँगी।
उसका आज तक कोई फोन नहीं आया! मुझसे कहा था कि वो 6 से 7 हफ्ते के लिये वो बाहर जा रही है और मैं उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता। पता नहीं शायद मेरे नसीब में उससे मिलना था।
उस दिन को कभी नहीं भुला सकता.. उसी हफ्ते मुझे एक कपल से मिलने दिल्ली जाना था.. पर मैं नहीं गया। एक सच्चे प्यार का सा एहसास था वो.. मैं उसे बहुत याद करता हूँ।
मुझे इसके बाद कई कपल और औरत तो मिलीं.. पर उसके जैसी आज तक नहीं मिली।
मैं अपना लंड हाथ में पकड़ कर Antarvasna उसके होठों को छुआने लगा और जैसे ही वो कुछ बोलने लगी मैंने झट से उसका मुँह पकड़ कर लंड अंदर डाला और उसको बोला- प्लीज़ एक बार इसको चूसो!
और मैं निर्मला के बाल को पकड़ कर धक्का मारने लगा और मैं भी खुद आगे पीछे होने लगा. मैंने उसकी मुँह चुदाई चालू कर दी. करीब दस मिनट के बाद मैंने सारा लंडरस उसके मुँह में डाल दिया और उसके पास लेट गया.
करीब पाँच मिनट के बाद उसका एक हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख मैं खुद उसका हाथ पकड़ कर आगे पीछे करने लगा और उसकी चूत को मसलने और उंगली से चोदने लगा.
तो उसने कहा- भैया प्लीज़ मुझे जाने दो.
मैंने कहा- निर्मला, असली काम अब चालू होगा!
तो वो बोली- क्या?
हाँ, मैं तुझे अब चोदूँगा!
उसने कहा- नहीं आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते!
मैंने कहा- निर्मला, ऐसा हर लड़की और लड़का चोदते हैं और चुदवाते हैं जैसे कि तुम्हारी मम्मी पापा से चुदवाती है, तुम्हारी भाभी भैया से चुदवाती है, मेरी पत्नी मेरे से चुदवाती है, फिर तुम क्यों मना कर रही हो!
उसका हाथ मेरे लंड पर रखते ही मेरा लंड टाइट होने लगा था और वो भी गरम हो गई इन सब बातों से, और बोली- भैया मैंने पहले कभी भी नहीं किया है!
(दोस्तो, मैं उसकी शरम मिटाना चाहता था और मैंने कल की तरह उस टॉपिक छेड़ दिया)
मैंने उससे पूछा- कल तो तुमने इतना नाटक नहीं किया, आज अचानक इतना नाटक क्यों?
वो बोली- भैया, कल जो हुआ वो एक हादसे की तरह था!
मैंने कहा- ठीक है!
मैंने उससे पूछा- कल तुमने अपनी मम्मी-डैडी की चुदाई देखी या नहीं?
तो बोली- भैया, नहीं!
मैंने कहा- क्यों?
बोली- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ!
मैंने उसको कहा- मैंने कब कहा कि तुम ऐसी लड़की हो! मैं तो तुझे बता रहा था कि तुम सिर्फ एक बार देखो और तुमको सीखने को भी मिलेगा! खैर कल नहीं देखी तो तुम आज देखना और मुझे बताना कि कैसी है! ठीक है? और मैंने चूत में उंगली आगे पीछे करना ज़ाऱी रखा और वो मेरे लंड को हिलाने लगी.
मैं अब उसके ऊपर आया और उसकी टाँगों को थोड़ा अलग किया और उसकी गीली चूत पर लंड को और मुँह पर मुँह को रख कर दोनों हाथों को उसकी गांड के नीचे रख कर एक ज़ोऱ का धक्का मारा, उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और लंड एक इन्च अंदर चला गया. मैं दोनों हाथों को नीचे से निकाल कर उसकी दोनों चूची के चूचुक मसलने लगा, साथ में चुम्बन भी कर रहा था. लंड अंदर रखा और धीरे धीरे उसको चोदने लगा.
थोड़ी देर के बाद मैंने फिर एक ज़ोऱ का झटका मारा और लंड 3 इंच अंदर घुस गया और वो मेरी पीठ पर मारने लगी क्योंकि उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और उसकी झिल्ली भी फट गई. वो एक दम कुंवारी थी, खून निकलने लगा और वो तड़पने लगी, मेरे बालों को खींचने लगी. मैंने मुँह को हटाया और बोला- क्या हुआ?
वो बोली- भैया! मुझे बहुत दर्द हो रहा है!
मैंने कहा- निर्मला, मुझे भैया मत कहो और मेरे नाम से ही पुकारो! ऐसा दर्द पहली बार करने से होता है, तुम घबराओ मत, मैं हूँ ना!
और मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह पर हाथ रखा और एक हाथ से लंड को पकड़ कर उसकी चूत पर रख और ज़ोऱ का झटका मारा, इसके साथ ही मेरा लंड 6 इंच उसकी चूत में चला गया.
मैंने उसके मुँह से हाथ हटाया और चूची मसलने लगा- निर्मला, तेरी चूत तो कमाल की है!
वो बोली- भैया, प्लीज़ आप बाहर निकालो, मुझे बहुत जलन हो रही है और दर्द भी बहुत हो रहा है!
मैंने कहा- क्या निकालूँ रानी?
भैया, आप इतने गंदे हो, इधर मैं मरी जा ऱही हूँ और आप मज़ाक के मूड में हो!
मैंने कहा- निर्मला, प्लीज़ एक बार कहो कि क्या निकालूँ!
वो बोली- प्लीज़ भैया! मैं नहीं कहूँगी, आप बाहर निकालो!
मैंने कहा- ठीक है, जब तक तुम नहीं कहोगी, मैं बाहर नहीं निकालूँगा!
और इसके साथ ही उसको धीरे धीरे चोदने लगा और उससे बोला- तुम कितनी अच्छी हो, तुम्हारे बूब्स कितने प्यारे हैं, तुम्हारी चूत का कोई जवाब नहीं!
इतना कहने के बाद मैं उसकी चूची चूसने लगा साथ में धीरे धीरे चोदने लगा. थोड़ी देर के बाद उसको मजा आने लगा तो बोली- भैया प्लीज़ आप और अंदर मत डालना! नहीं तो मैं मर जाऊँगी!
मैंने कहा- क्या अंदर नहीं डालूँ?
और मैंने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा, मेरा फिर 6 इंच तक अंदर गया. निर्मला सिसकारी लेने लगी- ऊऊऊवीई ईईईई ईम्म्म्म् म्म्म्मा आआआ! मार डाला इस पागल ने! मैंने कहा था कि अंदर मत डालो! फिर डाल दिया!
मैंने कहा- क्या डाल दिया?
तो बोली- भैया, मैं सिर्फ एक बार ही कहूँगी!
मैंने कहा- ठीक है, बोलो!
इसके साथ ही मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा और वो भी पूरी गरम हो गई और बोली- भैया, आप भाभी के साथ भी ऐसे ही करते हैं?
मैंने कहा- नहीं!
तो मेरे साथ में ऐसा क्यों?
मैंने कहा- मेरी बीवी तो मेरे साथ खुलकर पेश आती है, तुम्हारे जैसे नहीं है, जब मैं चोदने के मूड में नहीं होता हूँ तो मेरे पास आकर बोलती- जी आप मुझे चोदिए ना! देखो मेरी चूत कितनी तड़प रही है तुम्हारे लंड के लिए!
भैया आप झूठ बोल रहे हैं!
मैंने कहा- तुम एक काम करो, मेरी पत्नी से कभी भी पूछ लेना!
भाभी को शरम नहीं आती?
मैंने कहा- तुमको कल ही बता दिया था- सब तेरी मम्मी ने ही सिखाया है, जब चुदाई करते हैं तो हम लोगों को गंदी भाषा बोलनी चाहिए, इससे प्रेम बढ़ता है और जीवन भर प्यार रहता है आपस में!
अब मैंने लंड को पूरा बाहर निकाला और फिर जोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया और मैं उसके ऊपर लेट गया.
निर्मला बोली- भैया प्लीज़ बाहर निकालो! बाहर निकालो!
मैंने कहा- जब तक तुम नहीं कहोगी मैं तुझे ऐसे ही चोदता रहूँगा और रगड़ता रहूंगा!
तो बोली- भैया, मुझे शरम आती है!
मैंने कहा- अपनी आंख बंद करके एक बार कहो- प्लीज़ लंड को बाहर निकालो!
तो बोली- भैया मैं नहीं कह पाऊँगी!
मैंने कहा- एक बार बोल लोगी तो टईक रहेगा, नहीं तो जिंदगी भर नहीं बोल पाओगी! और कुछ नहीं जल्दी से बोल दो!
तो बोली धीरे से- भैया प्लीज़ लंड को बाहर निकालो!
मैंने कहा- क्या निकालूँ?
तो बोली- लंड को!
मैंने लंड को बाहर निकाला और वापस ज़ोऱ से अंदर डाला और धीरे धीरे से चोदने लगा साथ में चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.
मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?
तो बोली- प्लीज़ आप मुझे मत पूछो!
मैंने उससे कहा- निर्मला, तुमको आज मैंने एक बहन से पत्नी बना दिया है, तुम्हारी आज प्रमोशन हुई है, तुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा है, ऐसा मजा तो मुझे कभी नहीं आया!
मैं ऐसे ही उसे गरम करके चोद रहा था और वो भी मेरा खुल्लम-खुल्ला साथ देने लगी थी.
दोस्तो मुझे इसको चोदने में इतना मजा आया कि आपको नहीं बात सकता! आप समझ लीजिए कि मुझे जन्नत मिल गई थी!
मैं उसकी चूत से धीरे धीरे लंड बाहर निकालता और अंदर चूत में डाल कर चोद रहा था, बीच बीच में ज़ोऱ से शॉट भी लगाता था और वो हर शॉट के साथ वो सिहर उठती और मुझे बोलती -भैया, मुझे कुछ हो रहा है!
मैंने उसकी चूची को रगड़ते हुए पूछा- क्या हो रहा है रानी?
तो बोली- मैं नहीं बता सकती!
मैं अब उसे ज़ोऱ ज़ोऱ से चोदने लगा और दोनों हाथों से उसकी चूची को मसलते हुए बोला- ले मेरी रानी, मेरा लंड ले! और ले! अभी तेरी चूत को भी मजा आ रहा है! तू मुझे नहीं बताएगी तो तेरी चूत बताएगी!
मेरे हर शॉट का जवाब उसकी ओओ… आआईईई! जल्दी! प्लीज़ जल्दी करो! ओओ आआआ! में था.
मैं उसे ऐसे ही चोदने लगा और पूरे कमरे में पच पच और उसकी आवाज़ें गूंज रही थी. मैंने निर्मला को करीब़ 10 मिनट और चोदा!
वो कितनी बार झड़ी, मुझे नहीं मालूम! जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा- निर्मला, मैं अब झड़ने वाला हूं, कहाँ निकालूं मेरा प्रेम रस? तेरी चूत में या फिर तेरे मुँह में?
वो बोली- भैया चूत में मत डालना! आप बाहर ही निकाल लो!
मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला और उसके मुँह के पास लेकर उसको बोला- रानी मुँह खोलो!
वो ना करने लगी और अपने मुँह पर हाथ रख लिया. मैंने उसका हाथ हटाया और लंड को मुँह में डालकर मुँह चोदने लगा और कुछ ही देर में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ी और मैंने उसे प्रेम-रस पिला दिया. जब मेरा लंड सिकुड़ गया तो मैंने बाहर निकाला. निर्मला के मुँह से लंड निकालते ही वो बेड पर निढाल हो गई और मैंने बाथरूम ज़ाकऱ शॉवर लिया और बाहर निकल अपने कपड़े पहनने लगा, साथ में निर्मला को आवाज़ लगाई- निर्मला, उठो!
तो वो उठ नहीं पा रही थी, मैंने उसको सहारा दिया और बाथरूम ले गया और उसको मूतने के लिए बोला. वो बैठ कर मूतने लगी और मुझसे बोली- भैया तुम बाहर बैठो!
मैंने कहा- अब मेरे से शरम कैसी! अब तो हम पति-पत्नी की तरह हैं!
कैसी लगी मेरी कहानी, अपनी राय मुझे लिखें! Antarvasna
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