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Massage Girl in Mahipalpur: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Mahipalpur who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Mahipalpur that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Mahipalpur massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Mahipalpur who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Mahipalpur massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Mahipalpur massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Mahipalpur who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Mahipalpur employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Mahipalpur helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Mahipalpur

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Mahipalpur at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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कैसे हो दोस्तो…मैं हसीना जयपुर से

आदमी की नीयत औरत के प्रति हमेशा खराब रहती है… आपने सुना ही होगा कि एक औरत आदमी से बहुत कुछ चाहती है पर आदमी हर औरत से सिर्फ एक ही चीज चाहता है और वो है चुदाई। पर अगर औरत को एक से ज्यादा लण्ड का मज़ा मिल जाए तो फिर औरत का मन भी हमेशा नए नए लण्ड को देखने को करने लगता है। जैसे लड़के आती लड़की की चूचियाँ और जाती लड़की की गांड पर नजर गड़ाए रहते हैं वैसे ही औरत भी आदमी की पैंट में छुपे लण्ड को मापने की कोशिश में रहती है।

तीन लण्ड अब तक मेरी चूत और गांड का भेदन कर चुके थे। इन तीन लन्डों से चुद चुद कर मैं अब पूरी चुदक्कड़ बन चुकी थी। मेरी नजर भी अब पैंट में छुपे लन्डों का जायजा लेने लगी थी। लगभग हर समय मैं चुदास से भरी रहती थी।

इसी दौरान मैं गर्भवती हो गई। मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। पहली बार माँ बनने का एहसास क्या होता है यह लिख कर बताना बहुत मुश्किल है। अभी गर्भ तीन महीने का ही था कि मुझे कुछ तकलीफ हुई तो मैं एक डॉक्टर के पास अपना चेक-अप करवाने के लिए गई। पति देव भी साथ में ही थे।

डॉक्टर ने चेक-अप करने के बाद कहा कि अब मुझे सेक्स नहीं करना चाहिए नहीं तो होने वाले बच्चे के लिए ठीक नहीं होगा।

और फिर उसी दिन से मेरी चुदाई बंद हो गई। कोई भी माँ अपने बच्चे के लिए कुछ भी कर सकती है।

चुदाई बंद हो गई पर चुदवाने की तमन्ना तो कम नहीं हुई थी। मैं अक्सर चुदाई के लिए बेचैन हो उठती थी पर कुछ कर नहीं सकती थी। पति देव भी अब मुझ से दूर दूर ही रहते क्यूंकि पास आने पर चुदाई से अपने आप को रोक पाना शायद दोनों के लिए मुश्किल होता। पति देव मेरा पूरा ख्याल रखते थे। महीने में दो बार डॉक्टर ने चेक-अप के लिए कहा था तो वो मुझे याद से डॉक्टर के पास ले जाते थे। लगभग तीन महीने और बीत गए। मेरा पेट दिखने लगा था अब।

एक दिन की बात है…
पति देव किसी काम से शहर से बाहर थे और मुझे डॉक्टर के पास चेक-अप के लिए जाना था। पति देव नहीं थे तो मैं पड़ोस की एक लड़की को साथ लेकर डॉक्टर के पास चली गई। डॉक्टर ने करीब आधे घंटे बाद मुझे केबिन में बुलाया। मैं अकेली ही अंदर चली गई। हर बार डॉक्टर मेरा बी.पी. वगैरा ही चेक करता था पर आज उसने मुझे स्ट्रेचर पर लेटने के लिए बोला और फिर पर्दा लगा कर मेरा पेट जांचने लगा।

“हसीना जी… अगर आपको ऐतराज ना हो तो मुझे आपके कपड़ो के अंदर के हिस्से को चेक करना पड़ेगा। मेरा मतलब समझ रही हैं ना आप?”
मैं थोड़ा घबराई पर फिर सोचा कि यह कौन सा मुझे चोद देगा इस हालत में और मैंने हाँ कर दी।

मेरी हाँ मिलते ही डॉक्टर ने मेरी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठा कर मेरे पेट पर कर दिया। मैंने पैंटी नहीं पहनी हुई थी तो मेरी नंगी चूत अब डॉक्टर के सामने थी। डॉक्टर मेरी टांगों के बीच आ गया और अपने औजारों से मेरी चूत को फैला कर अन्दर से चेक करने लगा।

डॉक्टर के बारे में थोड़ा बता दूँ। वो करीब चालीस-पैंतालीस साल का तंदरुस्त शरीर वाला इंसान था। यह सोच कर ही मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी कि मैं बहुत दिनों के आज फिर से एक पराये मर्द के सामने अपनी चूत नंगी किये पड़ी थी। पर आज कुछ हो नहीं सकता था। डॉक्टर पहले तो अपने औजारों से चेक-अप करता रहा और फिर उसने पहली बार अपनी उंगली से मेरी चूत को छुआ तो मेरी आह निकल गई। डॉक्टर ने भी मेरी आह सुन ली थी तभी तो वो अब थोड़ा दबाव के साथ उंगली से मेरी चूत को सहला रहा था।

कुछ देर ऐसे ही सहलाने के बाद उसने अपनी पहले एक और फिर दो उँगलियाँ मेरी चूत की गहराई में उतार दी। मैं तो मस्ती के मारे तड़प उठी थी। मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। करीब दस मिनट तक डॉक्टर मेरी चूत को अपनी उँगलियों से सहलाता रहा और फिर अपने औजार उठा कर अपनी मेरी तरफ आया और मुझ से बात करने लगा।

“हसीना जी… मैंने आपका चेक-अप कर लिया है, सब कुछ ठीक है और आगे भी अगर सब ठीक रहा तो आप निश्चित रूप से एक स्वस्थ और सुन्दर बच्चे को जन्म देंगी।”

मेरी साड़ी अभी भी वैसे ही मेरे पेट पर पड़ी थी तो डॉक्टर ने मेरी साड़ी को पकड़ कर नीचे कर दिया और मेरे पेट को सहलाने लगा। मैंने स्ट्रेचर को दोनों हाथ से पकड़ा हुआ था और जब डॉक्टर मेरे पेट का निरीक्षण करने लगा तो डॉक्टर का लण्ड मेरे हाथ से टकराया। तभी मेरी नजर डॉक्टर की पैंट पर गई तो मेरे दिल में गुदगुदी सी होने लगी। पैंट का अगला भाग बिल्कुल कसा हुआ था, उसमें से मोटे से लण्ड का स्पष्ट अहसास हो रहा था। मेरे दिल की धड़कन राजधानी एक्सप्रेस हो गई थी।

मुझे लगा कि शायद डॉक्टर जानबूझ कर अपना लण्ड मेरे हाथ से रगड़ रहा है। चूत में उंगली से मैं तो पहले ही बेचैन थी और अब लण्ड के स्पर्श से मेरी हालत खराब होने लगी थी। डॉक्टर करीब दो तीन मिनट तक लण्ड को मेरे हाथ पर रगड़ता रहा। अब मुझ से सब्र नहीं हो रहा था। दिल कर रहा था कि लण्ड को अपने हाथ में पकड़ कर मसल डालूँ, उसको पकड़ कर अपने मुँह में लेकर चूस डालूँ।

डॉक्टर का लण्ड भी अब पूरा तन चुका था।

तभी डॉक्टर ने मेरे पेट को एक जगह से दबाया तो मुझे दर्द हुआ। मैंने दर्द भरी आह भरते हुए स्ट्रेचर को छोड़ कर डॉक्टर का लण्ड अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया और फिर डॉक्टर की भी आह निकल गई।

डॉक्टर ने अब मेरी चूचियों को दबा कर देखा। मेरी चूचियाँ तन चुकी थी और डॉक्टर का हाथ अब मेरे अंदर मस्ती भर रहा था। अब मैंने शर्म छोड़ कर डॉक्टर का लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया था और उसको मसलने लगी। डॉक्टर मेरी चूचियाँ दबा रहा था और मैं डॉक्टर का लण्ड। दोनों मस्ती के आगोश में खो से गए थे।

कुछ देर ऐसे ही मज़े लेने के बाद मैं अपने आप को नहीं रोक पाई और मैंने पैंट की ज़िप खोल कर डॉक्टर का लण्ड बाहर निकाल लिया।डॉक्टर का लण्ड फटने को हो रहा था। मोटे मूसल जैसा लण्ड देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया था। मैं चुदवा तो नहीं सकती थी पर चूत में आग लग चुकी थी। डॉक्टर ने लण्ड मुँह की तरफ किया तो मैंने ना चाहते हुए भी लण्ड को मुँह में ले लिया। पांच मिनट ही चूस पाई थी कि डॉक्टर के लण्ड से गर्म गर्म मलाई निकल कर मेरे मुँह में भर गई। बहुत दिनों के बाद वीर्य का स्वादिष्ट स्वाद मेरी जीभ को मिला था तो मैं सारा चाट गई।

वीर्य निकलने के बाद डॉक्टर ठंडा हो गया और जाकर अपनी सीट पर बैठ गया। मैं कुछ देर तो लेटी रही पर फिर उठ कर डॉक्टर के पास आई और अपने होंठ डॉक्टर के होंठों पर रख दिए। मेरे रसीले होंठों का स्वाद और डॉक्टर के लण्ड से निकले वीर्य का मिलाजुला स्वाद डॉक्टर के मुँह में भी घुल गया।

ऐसा मजेदार चेक-अप करवाने के बाद मैं घर आई तो सारा दिन डॉक्टर का लण्ड ही आँखों के सामने घूमता रहा। रात को पतिदेव ने आकर चेक-अप का पूछा तो मैंने झूठ बोल दिया कि डॉक्टर ने हर हफ्ते चेक-अप करवाने के लिए कहा है। पतिदेव भला कैसे मना कर सकते थे।

और फिर उसके बाद तो मैं हर हफ्ते डॉक्टर के पास जाने लगी। पतिदेव साथ चलने को कहते तो किसी ना किसी बहाने टाल देती और अकेली ही जाकर डॉक्टर के लण्ड को चूस आती। इसमें अब मुझे बहुत मज़ा आने लगा था।

और फिर ठीक समय पर मैंने अपनी गुड़िया यानि पिया को जन्म दिया। अगले चालीस दिन मुझे सम्पूर्ण आराम करने की हिदायत दी गई थी। किसी तरह मैंने ये दिन काटे।

अब मैं डॉक्टर से मिल कर उसके मोटे लण्ड को अपनी चूत में महसूस करने को बेताब थी। पर पतिदेव ने अपनी एक रिश्तेदार को मेरी देखभाल के लिए बुला रखा था तो मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। और ऐसे ही दो महीने निकल गए।

फिर मैंने एक दिन पति को बोल दिया कि रिश्तेदार को वापिस भेज दो अब सब ठीक है और मैं सब संभाल सकती हूँ।
पति ने भी मेरी बात मान ली और फिर आया मेरी आज़ादी का दिन।

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पतिदेव उस रिश्तेदार को छोड़ने उसके साथ चले गए। पति के जाते ही मैं भी पिया को लेकर सीधा डॉक्टर के पास पहुँच गई। डॉक्टर मुझे देखते ही मुस्कुरा दिया। क्लिनिक में दो तीन ही मरीज थे तो डॉक्टर ने जल्दी से सब को निपटाया और फिर सबसे अंत में मुझे बुलाया। केबिन में घुसते ही डॉक्टर ने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगे।

मैंने पिया को वही एक चेक-अप बेड पर लेटाया और डॉक्टर से लिपट गई।
डॉक्टर मेरे होंठ चूसने लगा और मेरी चूचियाँ जो दूध भर जाने से और भी बड़ी बड़ी हो गई थी को सहलाने लगा। बहुत दिन तड़पने के बाद आज डॉक्टर के हाथ का एहसास अपनी चूचियों पर हुआ था। मैं तो हाथ लगते ही चुदास से भर उठी और मैंने बिना देर किये डॉक्टर का मोटा लण्ड अपने हाथ में लेकर मसल दिया। डॉक्टर और मैं दोनों ही मस्ती में भर कर वासना के सागर में गोते लगाने लगे।

पांच मिनट होंठ चूसने के बाद मैंने पहल करते हुए डॉक्टर का लण्ड बाहर निकाला और मसलने लगी। डॉक्टर की आँखें मस्ती के मारे बंद हो गई थी।

तभी डॉक्टर का इंटरकॉम फोन बजा और बाहर से कंपाउंडर ने बताया कि कोई मरीज आया है। कोई एमरजेंसी थी तो डॉक्टर ने मुझे बाहर इंतज़ार करने को कहा पर मैंने इंतज़ार करने से मना कर दिया और डॉक्टर को कहा कि वो फ्री होने के बाद मेरे घर आ जाए। डॉक्टर राजी हो गया और मैं पिया को लेकर घर आ गई।

करीब एक बजे डॉक्टर का फोन आया और मुझ से पूछा की क्या वो आ जाए तो मैंने झट से हाँ कर दी क्यूंकि मेरी चूत भी अब लण्ड लेने को मचल रही थी। डॉक्टर पन्द्रह मिनट तक आने वाला था तो मैं तैयार होने के लिए बाथरूम में घुस गई। मैं नहाई और अपनी चूत रगड़ रगड़ कर साफ़ की।

अभी मैं बाथरूम से निकली ही थी कि दरवाजे पर घंटी बज उठी। कहीं कोई और ही तो नहीं आ गया। इसी डर में मैंने दरवाजा खोला पर यह तो वही था जिसका मैं और मेरी चूत दोनों ही इंतज़ार कर रहे थे।

डॉक्टर को अन्दर बिठा कर मैंने उसको चाय कोल्डड्रिंक के लिए पूछा पर डॉक्टर ने मुझे अपनी बांहों में खींच लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। अब मैं अपनी चूत को और नहीं तड़पाना चाहती थी। मैंने बिना देर किये डॉक्टर के कपड़े खोलने शुरू कर दिए। डॉक्टर ने भी मेरे कपड़े खोलने शुरू कर दिए।
मैंने, सही कहूँ तो कुछ पहना ही नहीं था, ब्लाउज और पेटीकोट ही था। पैंटी और ब्रा मैंने पहनी ही नहीं थी और साड़ी पहनने का समय ही नहीं मिला था कि डॉक्टर आ गया था।

अगले एक मिनट के बाद ही डॉक्टर और मैं दोनों नंगे थे और दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे हुए थे। डॉक्टर मेरे दूध से भरे चूचों को मुँह में लेकर चूस रहा था और उसकी एक उंगली मेरी चूत में उछल-कूद मचा रही थी। मैं मस्ती के मारे सिसकारियाँ भर रही थी और मेरी आहें… शायद चीखें कहूँ तो ज्यादा ठीक होगा… कमरे में गूंज रही थी।

कुछ देर ऐसे ही मज़ा देने के बाद डॉक्टर ने मुझे सोफे पर लेटा दिया और खुद मेरी टांगों के बीच में बैठ कर मेरी चूत को सहलाने लगा और फिर अचानक ही अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया। मैं अपने आपको रोक नहीं पाई और मेरी चूत ने गर्म गर्म पानी डॉक्टर की जीभ पर फेंक दिया।

डॉक्टर पूरी मस्ती के साथ मेरी चूत चाट रहा था। मैं अपने पाँव के अंगूठे के साथ डॉक्टर का लण्ड सहला रही थी। डॉक्टर का लण्ड पूरी तरह से तन कर अकड़ गया था। मैंने डॉक्टर को पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया। डॉक्टर ने मेरा सर सोफे की बाजू पर सेट किया और खड़े होकर अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूंस दिया। मैं भी मस्ती में लण्ड को चूसने लगी पर अब चूत में ज्वालामुखी फटने को था तो मैंने डॉक्टर को चुदाई करने को कहा।

डॉक्टर ने भी मेरी बेचैनी को समझा और मेरे कूल्हों को सोफे की बाजू पर सेट करके लण्ड मेरी चूत के मुहाने पर टिका दिया। बहुत दिन बाद चूत को लण्ड की गर्मी मिली थी। मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थी। डॉक्टर ने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखी और एक लण्ड को मेरी चूत पर दबा दिया।

चूत पानी पानी होकर चिकनी हो चुकी थी। डॉक्टर ने एक जोरदार धक्का लगाया तो आधा लण्ड चूत में समा गया और फिर डॉक्टर ने बिना इंतज़ार किये एक और जोरदार धक्का लगा कर पूरा लण्ड चूत में घुसा दिया।

मैं बहुत दिन बाद चुद रही थी तो जल बिन मछली की तरह तडपते हुए मेरे मुँह से चीख निकल गई।
क्या लण्ड था डॉक्टर का… बिल्कुल लोहे की रोड की तरह कठोर।

फिर तो डॉक्टर ने ताबड़तोड़ धक्के लगाकर मेरी चूत का भुरता बनाना शुरू कर दिया। कुछ देर तो मुझे दर्द महसूस हुआ पर फिर तो मेरे बदन में भी मस्ती की लहरें दौड़ने लगी। डॉक्टर सच में बहुत मस्त चुदाई कर रहा था। वो चुदाई में पूरी तरह से निपुण था। बहुत ही सटीक धक्के लगा लगा कर चुदाई कर रहा था। हर धक्के में मेरी आह निकल रही थी।

“आह्ह्ह… चोद डॉक्टर… चोद… आह्हह्ह… बहुत तड़पी हूँ तेरे लण्ड से चुदने के लिए… उम्म्म्म… फाड़ डाल आज…मार जोर से जोर से धक्के लगा…”
मैं बड़बड़ाये जा रही थी और डॉक्टर भी मस्ती में मेरी चूत का भुरता बना रहा था।

कुछ देर बाद डॉक्टर ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से लण्ड चूत में उतार दिया। डॉक्टर जरूर कोई दवाई खा कर आया था तभी तो वो इस उम्र में भी किसी जवान पठ्ठे की तरह हुमच हुमच कर मेरी चूत का बाजा बजा रहा था।

करीब दस मिनट के बाद डॉक्टर ने मुझे अपनी गोदी में उठाया और लण्ड पर बैठा कर मेरी चुदाई करने लगा। कुछ देर चोदने के बाद डॉक्टर ने मुझे डाइनिंग टेबल पर लेटाया और फिर से लण्ड चूत में डाल दिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

यहाँ मैं आपको बता दूँ कि मैं अब तक दो-तीन बार झड़ चुकी थी। चूत भी फच्च फच्च करने लगी थी।
डॉक्टर अभी भी मस्त धक्के लगा रहा था। डॉक्टर करीब चालीस मिनट तक मुझे चोदता रहा। डॉक्टर का लण्ड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

मैं अब चुदवाते चुदवाते थक गई थी। जब डॉक्टर नहीं झड़ा तो मैंने हाथ नीचे ले जाकर डॉक्टर की गोटियाँ दबा दी और फिर डॉक्टर अपने ऊपर कण्ट्रोल नहीं कर पाया और जबरदस्त ढंग से मेरी चूत के अन्दर ही झड़ने लगा।

गर्म गर्म वीर्य से मेरी चूत भरने लगी थी। डॉक्टर बहुत देर तक झड़ता रहा और मेरी चूत अपने वीर्य से लबालब भर दी। झड़ने के बाद डॉक्टर बुरी तरह से थक गया था और वो मेरे बदन पर ही लेट गया। मैंने भी टाँगें उसकी कमर पर लपेट ली और उससे चिपक गई।

इतनी जबरदस्त और लंबी चुदाई किसी ने भी नहीं की थी मेरी चूत की। मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट महसूस कर रही थी।

दस मिनट के बाद डॉक्टर उठा और सोफे पर लेट गया। मैं रसोई में जाकर दूध गर्म करके लाई। दूध पीते ही डॉक्टर ने फिर से मुझे अपने साथ चिपका लिया। मैं भी डॉक्टर का लण्ड सहलाने लगी। कुछ तो गर्म दूध का असर और कुछ मेरे हाथों की करामात थी कि लण्ड फिर से अपने शवाब पर आ गया।

डॉक्टर ने इस बार मुझे कमरे में बिछे कालीन पर नीचे ही लेटाया और अपना मोटा मूसल एक बार फिर से मेरी चूत की गहराई में उतार दिया। इस बार डॉक्टर ने करीब पच्चीस मिनट तक मुझे चोदा और मेरी चूत की सारी गर्मी ठंडी कर दी।

जब डॉक्टर मेरे घर से गया तो मैं अधनंगी बेड पर बेसुध सी पड़ी थी। मेरी आँख तब खुली जब पिया के रोने की आवाज मेरे कानों में पड़ी।

उसके बाद भी डॉक्टर बहुत बार मेरे घर पर मेरी चुदाई करने आया और मेरी चूत की गर्मी को ठंडा करता रहा।

आपको मेरी चूत की यह चुदाई कैसी लगी मुझे जरूर बताना..

आपकी हसीना

आज फिर से मैं नयी देशी भाभी चुदाई कहानी ले कर आया हूं।

उस गांव से मेरा ट्रांसफर 45 किलोमीटर दूर एक गांव में हो गया था।
यह गांव थोड़ा बड़ा था और यहां के लोग थोड़े पढ़े लिखे और सुखी सम्पन्न थे।
गांव के लोगों के पास खेती के लिए काफी बड़ी जमीनें थी और लोग राजकीय पहुंच भी रखते थे।

खैर जहां समृद्धि होती है वहां टकराव भी होता है.
तो इस गांव में ताकतवर लोगों के गुट बने हुए थे और ये गुट आपस में अक्सर लड़ते रहते थे.
तो यह गांव किसी भी कर्मचारी के कठिन पर माल वाला पोस्टिंग माना जाता था।

मुझे मेरे साथी कर्मचारियों ने इस गांव के बारे में यह सब बताया था- तुम जैसे सीधे सादे आदमी को इस गांव में नौकरी करना मुश्किल है। यहां के लोगों की पहुँच ऊपर तक होने से वे हमारे जैसे छोटे कर्मचारियों को दबा के रखते हैं।

अब मेरा इस गांव से पाला पड़ ही गया था तो सोचा कि जो होगा देखा जायेगा।

मैंने वहां के पुराने पटवारी से चार्ज लिया और काम देखने लगा।

दूसरे दिन गांव के सरपंच से मेरी मीटिंग थी।
सरपंच एक महिला थी.

उसने मिठाई का डिब्बा देकर मेरा स्वागत किया और कहा- आपको हम यहां कोई परेशानी नहीं होने देंगे. हम सब साथ मिल कर काम करेंगे. आप भी हमारा साथ दीजिएगा।

मुझे काफी अच्छा लगा और मैंने महसूस किया कि सरपंच काफी होशियार महिला थी।

बाद में जानने को मिला कि सरपंच तो भले दिल की और अच्छी है पर उसका पति गांव का बाहुबली था और सरफिरा भी!
उसका गुट काफी बड़ा और ताकतवर था और काफी लड़ाई झगडे के बाद उसे सरपंच का पद दिलवाया था।

अगले कुछ दिनों में गांव के बाकी गुट वाले भी मुझसे मिलने आये और उन सबकी मुझसे समर्थन के लिए मांग थी तथा अप्रत्यक्ष रूप से धमकी भी थी की मैं उन्हें ही समर्थन करूं।

इस गांव में शुरु से ही मैंने अच्छे से कामकाज चालू किया तो लोगों के काम समय से होने लगे।
मेरे पहले के पटवारी गांव के कोई ना कोई गुट में मिल जाते थे और काम कराने के पैसे भी लेते थे तो आम लोगों में नाराजगी रहती थी।

वैसे भी गांव के गुट वाले अपनी पसंद का ही पटवारी का गांव में पोस्टिंग करवाते थे।

मैं सभी का काम अच्छे से समय पर और बगैर पैसे लिए करने लगा तो एक दो महीने में ही मेरी गांव में काफी अच्छी छवि उभर आई थी।

दूसरी तरफ दो महीने से मुझे कोई चूत नहीं मिली थी तो मेरा बुरा हाल था।
रश्मि की बहुत याद आती थी, साथ में नम्रता की गोरी और फातिमा की काली चूत भी मुझसे भूली नहीं जा रही थी।

मैंने रश्मि को वचन दिया था तो मैं उस गांव की तरफ जाना नहीं चाहता था।
हालांकि नम्रता और फातिमा की चूत तो मुझसे चुदाने को आज भी तैयार थी।

पर मैंने अब इसी गांव में चूत ढूँढना का तय किया।
यह इस गांव के हिसाब से मुश्किल और मेरे लिए ख़तरनाक भी था क्योंकि पकड़ा गया तो इस गांव के लोग जान से भी मार सकते थे।

पर मेरे लिए इस गांव में किस्मत ने पहले से अच्छा तय करके रखा था।

मैं नयी जगह और कामकाज के चलते अब तक लोंडियाबाजी में नहीं पड़ पाया था. पर अब मैंने गांव में चूत ढूँढना शुरु किया।

पहले तो मैंने सरपंच के बारे में सोचा।
वह 35 साल की घरेलू महिला थी. ऐसे तो वह काफी गोरी थी थोड़ी सी मोटी पर उसका चेहरा खास मुझे प्रभावित नहीं कर पाया. वैसे भी वह मेरा छोटे भाई की तरह ख्याल बहुत रखती थी तो मेरी नीयत उसके लिए खराब नहीं हो पायी।

मैंने दूसरी भाभियों और लड़कियों के बारे में सोचा।
कुछ भाभियां और लड़कियां मेरे पास काम करवाने अक्सर आया करती थी तो उसमें ही जुगाड़ करने की फिराक में रहने लगा।

दो महीने बाद एक बार मैं ऑफिस के दूसरे कमरे की खिड़की खोल रहा था जिसे कभी कभार ही खोलते थे क्योंकि उस कमरे में पुरानी फाइलें और रेकोर्ड ही रखते थे।
मुझे एक पुरानी फाइल की जरूरत पड़ी थी तो मैं उस कमरे में गया और वहां की खिड़की खोली।

खिड़की से बाहर थोड़ी ही दूर एक जवान औरत कपड़े सुखाती दिखी।
उसकी पीठ मेरी तरफ थी पर मैं तो उसे देखता ही रह गया।

उसका बदन कसा हुआ गठीला और एकदम गुलाबी था जिससे मेरे पैंट में हरकत सी होने लगी।
काफी देर तक मैं उसे निहारता रहा।

फिर वह मेरे सामने घूमी तो देखा कि मैं इसे जानता था।
उसका नाम नाम रेखा था, वह मेरे पास कुछ काम के लिए तीन दिन पहले ही आयी थी।

रेखा सरपंच की रिश्ते में दूर की देवरानी थी और सरपंच के मायके के गांव की ही थी तो सरपंच से उसकी काफी बनती थी।

सरपंच ने मुझे उसका काम जल्दी निपटाने का अनुरोध भी किया था।
काम में व्यस्त होने की बजह से मैंने उस पर ध्यान नहीं गया था पर आज उसका कामुक बदन देख कर मेरे तो तोते उड़ गये थे।

मैंने तुरंत ही एक प्लान बनाया और सरपंच के जरिए उसे संदेश दिया कि उसके दिये कागज में एक दो कागज कम हैं.

तो वह दूसरे दिन ऑफिस आ गयी।

ऑफिस में कोई नहीं था, वह अपने छोटे बच्चे के साथ आयी थी।
मैंने उसे बहुत अच्छी तरह से निहारा।

आज उसने सर पर घूंघट नहीं निकाला था तो मैं जी भर कर उसे निहारता रहा।
शायद उसे भी इस बात का अंदेशा हो गया था।

मैंने उससे हंसते हुए काफी बातें की.
उसने कहा- अरे साहब, ऐसे छोट मोटे कामों के लिए थोड़ा बुलाते हैं आप खुद ही निपटा लेते ना!
वह भी थोड़ी बातूनी और मजाकिया स्वभाव की निकली।

शाम को घर आकर मुझे उसकी कल्पना करते हुए हाथ हिला के आग को शांत करना पड़ा।

रेखा छब्बीस साल की थी और उसका एक चार साल का बच्चा भी था.
उसका फीगर करीब 36-32-34 का होगा।
उसके नाक नक्श ऐसे कि बोलीवुड की हीरोइन से टक्कर ले सकें।

वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी पर काफी होशियार थी।
मैंने सोचा कि पति ने भी क्या किस्मत पायी थी।

अब मैं रोज उस कमरे की खिड़की से रेखा को निहारने लगा।
वह अपने पति और बच्चे के साथ अलग रहती थी, उसके घर से सट कर ही उसके ससुर और जेठ के भी घर थे।

उसका घर का मुख्य द्वार बिल्कुल मेरे ऑफिस के पीछे ही पड़ता तो मैं खिड़की से ही उसके घर में भी देख सकता था।
मैंने कई बार कपड़े सुखाते या झाड़ू निकालते समय उसकी ब्रा और क्लीवेज भी देखी थी।

अब उसकी चूत मिल जाए तो जन्नत मिल जाए।

ऐसे ही तीन चार महीने निकल गये।
उसे भी शायद पता लग गया था कि मैं खिड़की से उसे झांकता हूँ।
वह अब मेरे सामने मुंह रख कर कपड़े सुखाती थी और कभी मुस्कुराती भी थी।

बात यहीं आकर रुक गयी थी, कुछ आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
उससे बात करने की मेरी हिम्मत भी नहीं हो रही थी।

फिर समय ने करवट बदली और वह एक बार शाम को पांच बजे के आसपास सरपंच से मिलने ऑफिस आयी।
सरपंच ने उसे पारिवारिक काम से बुलाया था।

वैसे मेरे ऑफिस में दोपहर के बाद ज्यादा काम नहीं रहता था पर सरपंच ने अब दोपहर के बाद ऑफिस में बैठना शुरू किया था।

अब यह सिलसिला चल पड़ा की वह सरपंच के साथ गप्पे लड़ाने ऑफिस आ जाती थी।

मेरा टेबल सरपंच के पास ही था तो मैं उसे देखते रहता था और उनकी बात सुनता था।

असल में सरपंच अपने छोटे भाई के लिए रिश्ता ढूँढ रही थी. उसी चक्कर में वह रेखा को बुलाती थी कि फलाना गांव में फलाने आदमी की बेटी अच्छी है।

सरपंच मुझे बहुत मानती थी तो उन दोनों की बातों में मुझे भी शामिल करती थी.
कभी कभी मज़ाक भी हो जाता था।

रेखा बहुत बातूनी थी और हमेशा मजाकिया बातें करती रहती थी।
मैं रेखा को टार्गेट करके बातों के शोट मारता तो वह भी मुझे करारे जवाब देती थी।
सरपंच हमारी बातों का मज़ा लेती थी।

तीन महीने तक ऐसा चलता रहा।

एक बार वह ऑफिस में आयी तो मैं अकेला ही था.
सरपंच किसी काम से बाहर गयी हुई थी.

तो वह वापिस जाने लगी.
उसी वक्त चाय वाला लड़का चाय लेकर आया.
तो मैंने रेखा को रोका और चाय पीने को बोला.
तो वह रुक गयी।

चाय पीते पीते वह बोली- विशाल जी, आपने अब तक सगाई क्यों नहीं की? कोई पसंद नहीं आयी क्या?
मैंने कहा- अभी मेरी उम्र ही क्या है … शादी वादी करके क्या फायदा!

ऐसे थोड़ी देर बात हुई.
फिर जाती हुई वह बोली- जल्दी से कोई ढूँढ लीजिए, कब तक आप यों ही खिड़की से झांकते रहोगे।
मैं कुछ समझ पाऊं … उससे पहले वह इतना बोल कर झट से चली गई।

मुझे समझ आ गया कि वह भी मुझे लाइन दे रही थी।

दूसरे दिन जब मैं खिड़की से उसे झांकने गया तो देखा कि आज वह मेरे सामने ही चेहरा करके मुस्कुराती हुई कपड़े सुखा रही थी।
जाते जाते बाल्टी में बचा पानी उसने जोरदार मुस्कान के साथ मेरी तरफ फेंका।

मैं समझ गया अब इसकी चूत दूर नहीं है।

अब वह खिड़की के पास आकर मुझसे मज़ाक भी कर लेती।
मैंने उसे कई बार शहर घूमने आने का न्योता दिया.
पर वह हमेशा अपने पति के साथ ही शहर आती थी।

एक बार उसने कहा- मेरी मौसी शहर में रहती हैं और मैं उनके घर चार पांच दिन के लिए रहने जाऊँगी.

मौसी के घर का जो पता उसने बताया, वह स्थान मेरे घर से आधा किलोमीटर दूर था।
उसी दौरान मेरी भी दो दिन की छुट्टी थी।

उसने कहा- चलो आप बहुत दिन से निमंत्रण दे रहे थे तो आपकी मेहमान नवाजी भी देख लेते हैं।
मैंने उसे शहर में पास वाले पार्क में मिलने के लिए कहा।

आखिर वह दिन भी आ गया.
वह पार्क में अपने बच्चे के साथ आयी हुई थी।
मैं भी सज-धज के वहां पहुंचा।

उसके बच्चे को अपनी गोद में लेकर मैं उससे बातें करने लगा।
फिर मैंने उसे रूम पर आने को बोला तो थोड़े नखरे दिखा कर वह मान गई।

रूम पर जाकर उसके बच्चे को मेरे बेड पर सुला दिया और हम नीचे चटाई पर बैठ गए।

उसने बताया कि उसकी शादी अठारह की उम्र में हुई थी। शुरू में उसका पति बहुत अच्छे से उसको रखता था फिर बाद में वह सरपंच के पति के संगत में आया और वह पैसों के पीछे पड़ा। वह ट्रांसपोर्ट का बिज़नस करता था जिसमें अच्छी कमाई हो जाती थी. पर अब वह और ज्यादा कमाने के चक्कर में पड़ गया था और राजनीति में भी बड़ा पद पाना चाहता था। सरपंच के पति के अच्छे बुरे सब कामों में वह शामिल रहता है. उस पर पुलिस केस भी चल रहे थे। महीने में करीब बीस दिन घर से बाहर ही रहता था और जब घर आता था तो भी अपने गुट वालों के साथ मीटिंग या पुलिस या कोर्ट वकील या प्रोपर्टी के कामों में व्यस्त रहता। आठ दस दिन घर आता उसमें भी दो तीन दिन ही वह पत्नी और बच्चे के लिए ठीक ठाक समय दे पाता।

दूसरी बात यह थी कि रेखा को अपनी खूबसूरती पर काफी नाज था।
वह चाहती थी कि हर कोई उसकी खूबसूरती का लोहा माने।

पर छोटी उम्र में ही उसकी शादी हो गई और उसके पति ने भी दो तीन साल ही उसकी खूबसूरती को भोगा था। अब वह घर पर होता तो खाली अपनी हवस बुझाने ही रात को रेखा के ऊपर चढ़ जाता और अपने आपको शांत कर के जल्दी ही उतर जाता।
उसमें भी कई बार तो नशे में चूर होकर रेखा को भोगता तो अब रेखा को संतुष्टि नहीं मिलती।
ना तो वह रेखा की तारीफ करता और न उसे समय दे पाता।

पर रेखा की जवानी अब भी बहुत कुछ मांग रही थी जो उसका पति उसे नहीं दे रहा था।

जब रेखा ने मुझे उसके पीछे लट्टू पाया तो उसके अरमान फिर से हरे भरे हो गये।

उसने सरपंच से मेरी काफी तारीफ सुन रखी थी तो वह भी मेरी तरफ आकर्षित हुई थी।

मैं उससे चिपक कर बैठ गया और बातों बातों में मस्के मारने लगा वह भी मुझे करारे जवाब दे रही थी।

वह मुझसे पांच साल बड़ी और एक बच्चे की मां थी आज मैं उसे चोदने जा रहा था।
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उसके कंधे पर भी एक हाथ रख दिया।

जब मैंने उसके गालों पर एक चुम्बन लिया तो वह दूर जाने लगी.

पर मैंने उसे पकड़े रखा और फिर उसके होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
वह भी मेरा साथ देने लगी।

मैंने उसकी पीठ के खुले हिस्से को काफी सहलाया और चूमा भी!
इससे वह काफी गर्म हो चुकी थी.

फिर मैंने उसके बोबे पकड़ लिये और दबाने लगा।
उसके बोबे फातिमा से भी बड़े थे और वह नम्रता से भी ज्यादा गोरी थी तथा रश्मि की तरह गर्म थी।

उसने खुद ही ब्लाउज और ब्रा उतारी फेंकी।
वह बार बार विशाल कर रही थी.
मतलब था कि वह जल्दी मेरा लौड़ा अपनी चूत में चाहती थी.

पर मैं उसे थोड़ा तड़पाना चाहता था और धीरज के साथ उसकी खूबसूरती को पीना चाहता था।

मैं उसके स्तनों को चूसने और दबाने लगा.
वह भी मदहोश हो गई थी।

मैंने उसके पूरे शरीर को चूमा तो वह पागल सी हो गई और हांफने लगी।
वह बोली- विशाल जल्दी करो, अब सब्र नहीं होता है।

मैंने भी अपने कपड़े उतारे और उसने अपने बाकी बचे कपड़े उतार फेंके।

उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी, फिर टोपा चाटने लगी और फिर पूरा लंड चूसने लगी।
मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया था क्योंकि एक परी मेरा लंड चूस रही थी।

थोड़ी देर बाद उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकला और बेड पर सीधी लेट गई और मुझे कहा- विशाल जल्दी आओ, मुझसे रहा नहीं जाता।
मैं भी उसके उपर चढ़ गया और लंड उसकी चूत में डालने लगा।

उसकी गोरी चूत पर काफी काली झांटें थी तो मुझे चूत का छेद ढूंढने में तकलीफ हो रही थी.
पर उससे रहा नहीं गया और उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत में सेट किया और बोली- अब धक्का मारो।

मैंने एक ही झटके में पूरा लौड़ा उसके अंदर घुसा दिया तो उसके मुंह से आह निकली।
मैं उसे धमाधम चोदने लगा.
वह विशाल आह आह और जोर से जोर से ऐसी आवाजें निकाल रही थी।

मैं भी बोल रहा था- मेरी रानी रेखा, तुम्हें जब से देखा तब से मेरे मन में शोले भड़क रहे थे। आज तू मिली है मेरी जान!
ऐसा बोलते हुए मैं उसे जोर जोर से चोद रहा था।

ज्यादा जोश के कारण दस मिनट में ही मेरा पानी छूटने को हुआ तो मैंने कहा- डार्लिंग, पानी कहां निकालूं?
उसने कहा- अंदर ही निकालो।

मैंने उसके अंदर ही अपना वीर्य निकाल दिया और उसके ऊपर ही लेटा रहा।

काफी देर बाद हम अलग हुए और कपड़े पहन कर एक दूसरे की बाहों में लिपट कर बैठ गये।

उसने कहा- काफी समय बाद किसी ने इतने प्यार से मुझे चोदा है। मेरा पति तो बस दारू के नशे में मुझ पर चढ़ जाता है और पांच ही मिनट में पानी छोड़ कर लुढ़क जाता है। मैं प्यासी ही रहती हूँ।

आधा एक घंटा हमने बातें की।

वह फिर से चुदना चाहती थी तो बार बार अपने बोबे मेरे मुंह पर घिसती और मेरे लंड को सहलाती.
तो मेरा लौड़ा भी अब खड़ा हो गया था।

हमने फिर कपड़े उतारे और फिर से चुम्माचाटी और बोबा दबाई की।

उसने मेरा लंड फिर से चूसा तो वह लोहे की छड़ की तरह खड़ा हो गया।
मैंने फिर से उसकी चूत में लौड़ा डाल दिया और चोदने लगा।

इस बार धैर्य के साथ चुदाई की तो आधा घंटा चोद सका।
फिर से मैंने उसकी चूत में अपना वीर्य छोड़ा।

इस चुदाई के बाद वह अपनी मौसी के यहां गयी।
वह अपनी मौसी के घर पांच दिन तक रुकी और मैंने भी अपनी ऑफिस में छुट्टी ले ली और हम रोज मिलते रहे और चुदाई करते रहे।

फिर गांव आ कर वही सिलसिला खिड़की से झांकने का चालू हुआ।

हम दोनों एक-दूसरे को फ्लाइंग किस करते तथा दिन में चार पांच बार खिड़की पर ही मिलन हो जाता।
ज्यादा कुछ नहीं कर पाते थे क्योंकि उसका पति उसके मौसी के घर से वापस आने के दूसरे दिन ही घर आ गया था।

एक हफ्ते बाद उसका पति वापस काम पर लौटा तो उसने मुझे दोपहर में अपने यहां खाने पर बुलाया।

हमने साथ में खाना खाया और खूब चुदाई की.

ऐसे दो महीने चलता रहा।

बाद में उसने मुझे बताया कि वह मां बनने वाली है और उसके बच्चे का बाप मैं ही हूं।
मेरी गांड फट गई.

मैंने कहा- अब क्या करेंगे?
वह हंसती हुई बोली- बिल्कुल फट्टू हो तुम. इसमें डरने की क्या बात है. यह तो खुशी की बात है।

मैंने कहा- किसी को पता चल गया तो क्या होगा?
उसने कहा कि उसने सोच समझ कर ही बच्चा रखवाया था। वह अपने पति की जगह मेरे बच्चे की मां बनना चाहती थी इसलिए उसने मुझे कभी कोंडोम इस्तेमाल नहीं करने दिया था और मेरा वीर्य अपनी चूत में डलवाती थी।

उसने कहा- तुम तो खुश हो. बस किसी को बताना मत कि यह बच्चा तुम्हारा है. यह बच्चा तो हमारे प्यार की निशानी है।

तब जाके मुझे भी राहत हुईं और मैं भी खुश हुआ।

नौ महीने बाद रेखा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया।
रेखा ने मुझे कहा- यह तुम्हारी बेटी है तो तुम्हीं इसका नाम रखो।
मैंने उसका नाम प्रेरणा रखा।

बाद में मौका मिलने पर मेरी और देशी भाभी चुदाई चालू ही रही।

उसी ने मुझे गांव की कुंवारी चूत भी दिलाई जो आपको बाद में बताऊंगा।
लेखक के आग्रह पर उनकी ईमेल आईडी प्रकाशित नहीं की जा रही है।
यह देशी भाभी चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, कमेंट्स में बताएं.

Hindi Porn Stories

जीजाजी के जंगल Hindi Porn Stories की ओर जाते ही राहुल और बंटी ऊपर कमरे में आ गए।आते ही बंटी बोला – ‘ तुम तो साहब की औरत के भाई हो, उनसे यह क्या करवाते हो? ‘

‘क्या …? ‘ मैं हड़बड़ाया।

‘ बनो मत … हमें सब मालूम है कि तुमने साहब से क्या क्या करवाया है। ‘

‘ क्या करवाया है? ‘ मैं डरते हुए बोला।

‘ अभी हम बताते है… ‘ बंटी ने मेरे हाथ पकड़ लिए और राहुल ने मेरी नेक्कर नीचे खींच दी। मैं पूरी तरह नंगा हो गया। जीजाजी ने रात में चार बार गाण्ड मारी थी इसी कारण मैंने अंडरवियर पहना ही नहीं था।

‘ यह क्या कर रहे हो? ‘ मैं चिल्लाया।

‘ वही जो तुमने रात भर अपने जीजा से कराया है ! ‘ कहते हुए राहुल ने मेरे पोंड के छेद में अपनी बड़ी वाली उंगली घुसा दी। मेरी गाण्ड का छेद वैसे भी फूला हुआ था इसलिए मुझे बहुत तकलीफ हुई।

‘ इसके हाथ बाँध दो ! यह ऐसे नहीं मानेगा ! ‘ बंटी ने कहा।

राहुल ने रूमाल से मेरे हाथ बाँध दिए। मैं नंगा तो पहले ही हो चुका था, उन्होंने मेरी शर्ट भी उतार दी।

राहुल मेरी मुत्तु सहलाने लगा तथा बंटी मेरे पोंड फैला कर गाण्ड के छेद को देखने लगा।

‘ इसकी गाण्ड तो बहुत फूली हुई है ! साहब ने बड़ी बेरहमी से इसकी गाण्ड मारी है ! ‘ बंटी बोला – ‘हम इसे राहत पहुंचाएंगे !’

बंटी मेरे पीछे नीचे बैठ गया तथा मेरे पोंड पकड़ कर सहलाने लगा, राहुल मेरी मुत्तु से खेलने लगा। मेरी मुत्तु धीरे धीरे खड़ी होने लगी। जैसे ही मुत्तु बड़ी हुई, राहुल ने लपक कर उसे अपने मुंह में ले लिया और लालीपॉप सा चूसने लगा। बंटी मेरे पीछे बैठ कर मेरे पोंड के छेद में अपनी जीभ फिराने लगा। पोंड के छेद में बंटी अपनी जीभ थोड़ा अन्दर तक डालने की कोशिश कर रहा था। सामने से राहुल मेरी मुत्तु को चूस रहा था।

मुझे बड़ा आनंद आने लगा। गाण्ड का दर्द भी कम हो गया। पहली बार किसी ने मेरी मुत्तु को चूसा था। मुझे बड़ा ही मजा आया। लगभग १५ मिनट बाद मेरी मुत्तु से कुछ रस सा निकालने लगा। मैं डर गया क्योंकि पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ था।

राहुल ने तब मुझे समझाया – गाण्ड तो मराते हो पर लण्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसमें से यह निकलता ही है, इसके निकल जाने के बाद ही पूरा मजा आता है।

मेरी गाण्ड को चाटते चाटते बंटी का लण्ड खड़ा हो गया। उसने जल्दी से अपनी नेक्कर उतारी और अपना तना हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। हालाँकि उसका लण्ड जीजाजी से काफी छोटा था पर मुझे काफी दर्द हुआ। वह खड़े खड़े ही मेरी गाण्ड के छेद में लण्ड घुसा कर धक्के लगा रहा था पर वह ठीक से नहीं लगा पा रहा था। उसने मुझे आधा पलंग पर और आधा नीचे लटका कर लिटा दिया।

अब उसका लण्ड अच्छी तरह से मेरी गाण्ड में अन्दर बाहर हो रहा था। मेरी गाण्ड फूली हुई थी फिर भी मुझे आनंद आ रहा था। थोड़ी देर में वह झड़ गया लेकिन मेरा लण्ड अब तन्ना गया था।मैने राहुल की गाण्ड मारने की इच्छा जताई, वह तैयार हो गया।

मैने भी उसे घोड़ी बन जाने को कहा, ऐसी पोसिशन में उसकी गाण्ड का छेद काफी खुल गया। मैने अपना लण्ड धीरे से उसकी गाण्ड के छेद में घुसाया, फिर एक धक्का मारा, मेरा लण्ड पूरी तरह अन्दर घुस गया। उसकी गाण्ड का छेद काफी बड़ा था। जब मैने पूछा तो उसने बताया कि तुम्हारे जीजाजी ने उसकी गाण्ड मार मार कर उसका भुरता बना दिया है।

अब मैं भी अपना लण्ड उसकी गाण्ड के छेद में अन्दर बाहर करने लगा। मेरे लिए किसी की गाण्ड मारने का यह पहला मौका था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मानो मैं ज़न्नत में पहुँच गया हूँ। थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया पर मुझे गाण्ड मारने में बहुत ही आनन्द आया।

दोनों के साथ मैंने तीन नए अनुभव लिए। मैंने पहली बार किसी से अपना लण्ड चुसवाया था, किसी ने पहली बार मेरी गाण्ड में जीभ फ़ेरी थी और मैंने पहली बार किसी की गाण्ड मारी थी।

जीजाजी शाम तक के लिए गए थे अतैव हम तीनों ने बारी बारी से एक दूसरे की गाण्ड मारी।

उस दिन सही मायनों में मैंने गाण्ड मारने और मराने का मजा लिया। वो दोनों मेरे दोस्त बन गए। उन्होंने बताया कि जब भी साहब यहाँ आते हैं तो वह हम दोनों की कई कई बार गाण्ड मारते हैं। हम दोनों भी आपस में एक दूसरे की गाण्ड मारते रहते हैं, बहुत मजा आता है।

उस दिन हम तीनों ने दो बार एक दूसरे की गाण्ड मारी तथा मराई, मेरी गाण्ड का दर्द भी गायब हो गया।

इसी बीच जीजाजी कब आ गए और हमारा खेल देखते रहे, हमें पता ही नहीं लगा। उन्होंने मुझे बंटी की गाण्ड मारते देख लिया था पर वह बोले कुछ नहीं। वह अनजान बने कमरे में आए और चाय बना कर लाने का आर्डर देकर लेट गए। लेकिन बाद में क्या हुआ जानने के लिए इन्तजार करें अगली कहानी का …. Hindi Porn Stories

स्टेप मॉम सेक्स कहानी मेरे पापा की दूसरी बीवी की चुदाई की है. एक दिन मैंने उन्हें नंगी होकर किसी लड़के संग वीडियो सेक्स करते देखा. तो मैंने भी फ़ायदा उठाया.

दोस्तो, ये चुदाई कहानी मेरी और मेरी स्टेप मॉम रश्मि की है. अगर आपको ये रिश्ता ग़लत लगता हो तो प्लीज़ इस कहानी को आगे मत पढ़ें, इसे नजरअंदाज कर दीजिए.

अगर अपने लंड का पानी निकालना है और चूत में उंगली करनी है, तो पूरी कहानी पढ़ कर मजा लें.
इसस्टेप मॉम सेक्स कहानी में सब कुछ रियल है.

मेरा नाम आर्यन है. मैं यूपी से हूँ. मेरी सगी मॉम की डेथ के बाद डैड ने दूसरी शादी कर ली थी.

मेरे डैड का अपना बिजनेस है और वो हमेशा अपने काम में लगे रहते हैं, मॉम को ज़्यादा टाइम नहीं देते हैं.
डैड अपने व्यापार के लिए सुबह से ही निकल जाते हैं और वापस आने का कोई समय निश्चित नहीं रहता है.

मेरी मॉम का नाम रश्मि है, उनकी उम्र 44 साल की है और फिगर 36-32-38 का है.
मॉम के मस्त सेक्सी बूब्स और उठी हुई गांड एकदम हॉट लुक वाली लगती है. उनका रंग भी गोरा है.

मेरी मॉम इतनी ज्यादा कामुक दिखती हैं कि उनको देखकर किसी बुड्ढे का भी लंड खड़ा हो जाए.

यह चुदाई कहानी उस समय की है, जब मेरी उम्र 23 साल की थी.

एक बार की बात है, मैं घर पर था और अपने रूम में लैपटॉप पर पॉर्न देख रहा था.
उस वक्त मेरा लंड पूरे जोश में था और मैं मुठ मार रहा था.
कान में हेडफोन लगे होने की वजह से मुझे पता नहीं चला कि मॉम मेरे रूम में कब आ गईं.

मॉम ने मुझे पॉर्न देखने के साथ साथ मुठ मारते हुए भी देख लिया.
फिर जैसे ही मेरी नज़र मॉम पर पड़ी, मेरी तो गांड फट गई कि ये क्या हुआ.
मैं एकदम से डर गया था.

लेकिन अब तक जो होना था, वो तो हो ही चुका था.

मॉम ने गुस्से में मुझसे कहा- शर्म नहीं आती, ये सब करते हो!
मैंने सॉरी बोला लेकिन वो गुस्सा होकर रूम से चली गईं.

अब मुझे बहुत डर लग रहा था.
ये सोचकर मेरी फट रही थी कि मॉम इस बात को पक्का डैड को बोलेंगी और मेरी क्लास लगने वाली है.

ऐसे ही सारा दिन निकल गया … मैं अपनी फटी हुई गांड लिए मॉम से बचता रहा.

शाम को डैड आए, उन्होंने फ्रेश होकर खाना खाया और अपने रूम में सोने चले गए.
मैं देख रहा था कि डैड ने मुझसे कुछ नहीं कहा.
इससे मुझे समझ में आया कि मॉम ने अभी तक डैड को कुछ बताया नहीं होगा.

अगले दिन मैं दोस्त के घर चला गया और जब वापस आया तो आवाज से अंदाजा लगा कि मॉम अपने रूम में हैं और मोबाइल पर किसी से बात कर रही हैं.
मैं कान लगाकर ध्यान से सुनने लगा तो ऐसा लगा कि मॉम अपनी चूत में उंगली कर रही थीं क्योंकि उनकी आवाजों में कुछ कामुक स्वर शामिल थे.

मैं धीरे से रूम के अन्दर घुस गया क्योंकि रूम लॉक नहीं था.
मम्मी एकदम नंगी थीं.
मेरी खोपड़ी सनक गई कि ये क्या माजरा है.

मैं चुपचाप अन्दर आ गया. मॉम अपनी आंखें बंद करके चूत में उंगली करने में इतनी मगन थीं कि वो मुझे नहीं देख पाईं.

मैंने मोबाइल निकाला और उनका वीडियो बनाने लगा.
वो किसी सनी नाम के लड़के से बात कर रही थीं.

मैंने पूरी वीडियो ढंग से बना लीं और चुपचाप वहां से बाहर निकल कर अपने रूम में जाकर लेट गया.
अब मैं मॉम को सोचकर मुठ मारने लगा.

पहली बार मैंने मॉम को पूरी नंगी देखा था.
क्या मस्त गोरा बदन और बड़े बड़े मिल्की एकदम टाइट मम्मे थे. एकदम चिकनी चूत, जैसे आज ही शेव की हो

मेरा तो लंड फटा जा रहा था.
मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था, मन कर रहा था कि अभी जाकर मॉम को चोद दूँ लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी.
आज के इस सीन से एक बात तो साफ़ हो गई थी कि डैड, मॉम की प्यास सही से नहीं बुझा पाते हैं.

अब मैं अपनी मॉम को चोदने के सपने देखने लगा.
मैं चाहता था कि मॉम खुद ही मुझसे चुदवाने को बोलें इसलिए मैं प्लान करने लगा.

शाम को डैड आ गए, फिर वही रूटीन, खाना खाकर सोने चले गए.

अगले दिन मॉम किचन में काम कर रही थीं.

मैं गया और पीछे से उनसे चिपक कर उस दिन के लिए सॉरी बोलने लगा क्योंकि उस दिन के बाद मॉम मुझसे बता नहीं कर रही थीं.
मॉम ने कुछ नहीं कहा.

उन्होंने मुझे नाश्ता दिया और मैं खाने के बाद दोस्त के पास चला गया.

अब मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया कि क्यों ना मॉम को वो वीडियो भेजूं, जो मेरे पास थी.
कुछ देर तक हर बिंदु पर सोचने के बाद मैंने ठान लिया कि कुछ भी हो जाए मॉम को अब चोद कर ही रहूँगा.

फिर मैं ज़रूरी काम से कुछ दिन के लिए अपनी मौसी के घर चला गया.
मैं मॉम को मिस कर रहा था.

रात को मैंने मॉम की वीडियो देखी और लंड हिलाते हुए मॉम के नंबर पर कॉल की.
मॉम ने हैलो बोला.
मैंने हालचाल पूछे और पूछा- डैड क्या कर रहे हैं?

मॉम बोलीं- डैड सो गए हैं.
मैंने कहा- मॉम नेट खोलो, मैंने आपको कुछ भेजा है.

उन्होंने कहा- क्या भेजा है?
मैंने कुछ नहीं कहा और कॉल कट कर दी.

फिर मैंने मॉम की न्यूड वाली वीडियो उन्हें भेज दी और थोड़ी देर के लिए अपना मोबाइल ऑफ कर दिया.

शायद मॉम का मूड खराब हुआ होगा इसलिए वो कॉलबैक कर रही होंगी.
लेकिन मेरा नंबर लगा ही नहीं.

इसलिए दस मिनट बाद मॉम ने मौसी के मोबाइल पर कॉल कर दी और उनसे बोलीं- आर्यन से बात करा दो.

मौसी का मोबाइल लेकर मैंने हैलो बोला.
मॉम बोलीं- ये कहां से मिली?

मैंने जानबूझ कर बोला- क्या?
मॉम बोलीं- पहले अपना मोबाइल ऑन करो और मुझसे बात करो. मैं उसी पर बात करूंगी.

मैंने तुरंत अपने मोबाइल से कॉल लगाई.
मॉम बोलीं- बेटा प्लीज़ बताओ, ये वीडियो कहां से मिला?
मैंने कहा- आप परेशान न हों.

तब मॉम मुझसे फोर्स करके पूछने लगीं.
मैंने कहा- डैड को भी भेज दूँ क्या?

वो रोने लगीं और बोलीं- नहीं, प्लीज़ ऐसा मत करना.
मैंने कहा- मैं तो आपको बहुत सती सावित्री समझता था और आप एक ब्वॉयफ्रेंड से बात करती हो!
मॉम बस सॉरी सॉरी बोल रही थीं.

मैंने कहा- मेरी बात सुनो और बताओ. सन्नी के साथ आप कितनी बार चुदी हो?
मॉम ने मेरे मुँह से ‘कितनी बार चुदी हो …’ शब्द सुने, तो मॉम हिल गईं और बोलीं- ये क्या बकवास कर रहे हो?

मैंने कहा- ठीक है, मत बताओ. फिर खुद ही समझना.
मॉम धीमे से बोलीं- बस अब तक 3 बार … उससे मिले ज़्यादा दिन नहीं हुए हैं.
मैंने कहा- डैड क्या अच्छे से चोदते नहीं हैं?

मॉम बोलीं- बहुत सालों से मेरे साथ तेरे डैड ने सेक्स नहीं किया इसलिए ग़लती हो गयी. अब आगे से किसी के साथ कभी नहीं करूंगी. लेकिन प्लीज़ वीडियो डिलीट कर दो.
मैंने कहा- एक ही शर्त पर. जब आप मुझे खुश करोगी.

तो मॉम गुस्सा हो गईं और उन्होंने फोन कट कर दिया.
मैंने मैसेज किया- अगर मुझे भी चोदने दोगी, तो डैड को नहीं बताऊंगा … और हां सोच लो आराम से. आपके पास अभी दो दिन का टाइम है.

अब अगले दिन सुबह 10 बजे मॉम ने कॉल किया.
शायद डैड के जाने के बाद फोन किया था.

मैंने पूछा- बोलो जान क्या सोचा!
मॉम बोलीं- लेकिन ये सब एक बार होगा … और वीडियो डिलीट करनी पड़ेगी.

मैंने कहा- ठीक है, लेकिन मैं घर पर नहीं करूंगा, कहीं बाहर चलो.
मॉम फिर डरने लगीं और बोलीं- घर पर क्या दिक्कत है?

मैंने कहा- मैं अच्छे से एंजाय करूंगा.
वो बोलीं- ठीक है, सब कुछ खुद ही मैनेज करो.

अब मेरे अन्दर सेक्स की आग भड़क रही थी.
मैं उसी दिन मौसी के घर से वापस निकल आया और शाम को घर आ गया.

मॉम अभी भी मुझसे डर रही थीं.
हम दोनों ने बात नहीं की.

डैड के आने बाद मैं डैड से कहा- मैं मॉम के साथ 4 दिन के लिए मसूरी जा रहा हूँ.
मॉम एकदम से बोलीं- अरे 4 दिन क्यों?

मगर तब तक डैड ने हां कर दी- हां चार दिन से कम में मसूरी का क्या मजा आएगा.
मॉम कसमसा कर रह गईं और मैं उन्हें देख कर मुस्कुराने लगा.

फिर अगले दिन हम दोनों अपनी कार से मसूरी निकल गए.
सफ़र में हम दोनों ने कुछ ज्यादा बात नहीं की और वहां पहुंचकर होटल में चैकइन कर लिया.

मैं इस होटल में अपनी बुकिंग पहले से ही कर ली थी.
ये एक अच्छा होटल था और हिल्स पर था.

कमरे में आकर मैं फ्रेश होने चला गया.
मॉम को तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे क्या होगा.

मेरे फ्रेश हो कर आने के बाद मॉम बाथरूम में चली गईं और थोड़ी देर बाद मॉम एक काले रंग के मस्त गाउन में बाहर आ गईं.
उनको देखकर मेरा लंड टाइट हो गया.

मैंने मॉम को ज़ोर से अपनी बांहों में भर लिया.
मैं उनकी गांड दबाने लगा. मॉम के गले पर किस करने लगा.

मॉम कुछ उदास थीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ, आप घर से इतनी दूर आई हो, एंजाय करो न मेरी जानू मॉम!

मॉम बोलीं- वीडियो डिलीट करो, मुझसे ग़लती हो गयी.
लेकिन मैंने कहा- आप खुद को किसी दूसरे से संतुष्ट करवाओ, ये मुझे मंजूर नहीं है.

वो मेरी बात सुनकर चुप हो गईं.
मैं उन्हें चुप देखकर नहीं रुका और उनको किस करने लगा.
अब मैं मॉम के बूब्स भी दबा रहा था.

मॉम धीरे धीरे गर्म हो रही थीं और उनका विरोध भी ना के बराबर हो गया था.

अब मॉम ने धीरे से कहा- ये सब तो घर पर भी हो सकता था, यहां क्यों लाए हो. मेरी तुमसे रिक्वेस्ट है, प्लीज़ वीडियो डिलीट कर दो.

मैंने उनकी एक नहीं सुनी. मैं अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और किस करने लगा.
पहले तो काफ़ी देर तक मॉम ने होंठ नहीं खोले, लेकिन मेरे हाथ उनकी चूत में चलने की वजह से अब मॉम की चूत का रस निकलने लगा था.

मतलब उनका मूड बन चुका था.
तभी मॉम ने मेरे होंठों को चूसना स्टार्ट कर दिया और उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा दी.

अब मुझसे भी सब्र नहीं हुआ. मैंने मॉम को बेड पर पटक दिया और उनके गाउन को हटा दिया.
मॉम ने कुछ नहीं बोला.

मैं उनके बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.
कुछ ही देर में मॉम मस्ती में आ गई थीं और आहें भरने लगी थीं.

मैंने अपनी दो उंगलियां चूत में एकदम से घुसा दीं.
मॉम एकदम से उछल गईं ‘आह मर गई …. ऊऊह …’
कुछ देर में मॉम ने मेरी उंगलियों से अपनी में मजा लेना शुरू कर दिया.

फिर मॉम ने मेरा लंड ज़ोर से अपनी मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगीं.

अब मैंने भी झट से अपने कपड़े उतारे और मॉम के नंगे जिस्म पर चढ़ गया.
मैंने मॉम की ब्रा को भी फाड़ डाला.
मॉम ने कुछ नहीं कहा. मॉम ने अपनी पैंटी पहले ही उतार दी थी इसलिए अब वो मेरे सामने पूरी नंगी लेटी थीं और मस्त माल लग रही थीं.

मैं मॉम के दूध चूसने लगा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.
मैंने मॉम के मम्मे इतने अधिक दबाए कि चूचे एकदम लाल हो गए.

मैं मॉम के दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसने लगा और उनके दूध चूसते हुए नीचे आ गया.

मैंने अपनी जीभ उनकी नाभि में घुसा दी और फिर सीधा चूत पर आ गया. मैंने अपना मुँह मॉम की चूत पर रख दिया और जीभ डालकर चूत का स्वाद लेने लगा.

एकदम रसदार नमकीन पानी बह रहा रहा था.
मेरी मॉम भी पूरे जोश में आ गई थीं. वो बोलीं- अब जल्दी से पेल दो.

मैंने दस मिनट तक मॉम की चूत को जीभ डालकर चूसा.
कुछ ही देर में मेरी मॉम ने अपनी चूत का पानी छोड़ दिया था.

कुछ देर तक और चूत चाटने के बाद मैं उठा और मॉम से लंड चूसने के लिए बोला.
पहले तो मॉम ने मना किया लेकिन फिर मुँह में लंड ले लिया.

मुझे मजा आने लगा और मैंने धीरे धीरे करके अपना पूरा लंड मॉम के मुँह में घुसेड़ दिया.

मेरा लंड उनके गले में जाकर फंस गया था.
मॉम बुरी तरह से छटपटा रही थीं लेकिन मैं जोरदार तरीके से लंड पेलता रहा.
कुछ ही पलों में मॉम का मुखड़ा एकदम लाल हो गया.

पूरा मुझे इतना जोश चढ़ गया था कि मैंने मॉम के मुँह में ही अपना सारा माल निकाल दिया.
लंड उनके गले में था तो लंड का सारा माल मॉम के मुँह के अन्दर चला गया.

मॉम हौ हौ करने लगीं और तुरंत उठ कर थूकने के लिए जाने लगीं.
उनके मुँह में बचा हुआ माल जो उन्हें थूकने के लिए मजबूर कर रहा था.

मैंने उनके बाल पकड़े और अपना मुँह मॉम के होंठों पर रख दिया, उन्हें किस करने लगा.
मैं पहली बार अपने लंड का माल अपने मॉम के मुँह से लेकर स्वाद ले रहा था. मैं मॉम के मुँह में जीभ डालकर उन्हें किस करने लगा.

मुझे इतना मज़ा आया कि मेरा लंड फिर से फनफ़ना गया.
कुछ देर किस करने के बाद मैंने मॉम को बेड पर लिटाया और मैंने नीचे खड़े होकर अपना मोटा लंड मॉम की टाइट चूत में लगा दिया.

एक बार मैंने मॉम की तरफ देखा और ज़ोर से धक्का दे दिया.
मॉम की चूत गीली होने की वजह से सट से पूरा लंड चूत के अन्दर घुस गया.

उनके मुँह से चीख निकल गई.
वो सीत्कार करने लगी- आआहह उआहह बेटा ऊऊओह आहह ऊऊउ अया बेटा आराम से कर ना … प्लीज़ दर्द हो रहा है.

तभी मैंने मॉम के होंठों को अपने मुँह में लॉक किया और ज़ोर के झटकों के साथ उनकी चूत चुदाई करने लगा.

दो मिनट बाद बाद मॉम को भी चूत चुदवाने में मज़ा आने लगा. वो अपनी गांड उठाकर लंड लेने लगीं.

अब मैंने मॉम से कहा- मजा आ रहा है.
मॉम मुस्कुरा दीं और बोलीं- मैं चुदाई के लिए कबसे तरस रही थी … इसी वजह से मुझे सनी से अपनी चूत चुदवानी पड़ी. मगर अब मैं खुश हूँ.

मैंने कहा- अब आप लंड की सवारी करो,
मैंने लंड चूत से खींचा और बेड पर लेट गया. मॉम को मैंने अपने लंड पर बैठा लिया. मॉम भी अपनी चूत फंसा कर लौड़े पर बैठ गईं और अपनी गांड उठाकर चुदवाने लगी थीं.

मॉम की चूचियां मस्त हिल रही थीं और उनकी मादक सिसकारियां मुझमें जोश भर रही थीं.
कुछ मिनट तक ऐसे ही चुदाई होने के बाद मॉम अकड़ने लगीं और मेरे ऊपर गिर गईं.
वो मेरे सीने पर गिर कर निढाल हो गईं.

मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और उनके चेहरे को चूमने लगा.
मेरा लंड अभी भी कड़क था और मॉम की चूत में घुसा हुआ था.

कुछ देर बाद मैंने मॉम को उल्टा किया और मॉम के ऊपर चढ़ गया.
एक बार फिर से मैं लंड पेल कर पूरे जोश के साथ मॉम की चूत को चोदने लगा.

मॉम बोलीं- आंह जल्दी जल्दी से चोद दे बेटा … आअह हहह बहुत मज़ा आ रहा है.

मैंने उनकी गर्दन को चूमते हुए कहा- मॉम, अब आपको लंड की कमी कभी महसूस नहीं होगी. मेरे लंड से आप जब चाहे मजा ले सकती हैं.
मॉम मुझसे चुदवा कर खुश थीं.

अब मॉम ने मुझे अपनी दोनों टांगों में दबा लिया और एकदम से मेरा सारा माल उनकी चूत में निकल गया.

मॉम ने जब तक मुझे दबाए रखा जब तक पूरा माल उनकी चूत में नहीं गिर गया.
उनकी गर्म चूत से निकल रहे लावा का अहसास भी मेरे लंड को हो रहा था.

अब मेरा लंड ढीला पड़ गया और मैं भी ऐसे ही मॉम के ऊपर लेटा रहा.
हम दोनों मां बेटा इस मधुर चुदाई से इतना थक गए थे कि पता ही नहीं चला, कब नींद आ गई.

देर शाम को करीब 9 बजे मेरी आंख खुली.
मैंने देखा मॉम नंगी ही सो रही थीं.
मेरे बगल में नंगी मॉम मुझे बहुत हॉट लग रही थीं.

तभी मैंने मोबाइल की रोशनी जलने लगी. मोबाइल साइलेंट मोड पर था. मैंने फोन उठाया और देखा कि डैड की कॉल आ रही है.

मैंने डैड से हैलो बोला.
डैड ने हालचाल पूछे और मॉम के बारे में पूछा.

मैंने मॉम को जगाया और उनके हाथ में मोबाइल थमा दिया.
मॉम अब भी शर्मा रही थीं.
वो उठ कर बाथरूम में जाने को हुईं लेकिन मैंने उन्हें उठने नहीं दिया.

मैं उनके बूब्स दबाने लगा.

मॉम डैड से फोन पर बता कर रही थीं और अपने बेटे के साथ नंगी पड़ी थी.

मेरे ज़ोर से बूब्स दबाने की वजह से मॉम की आह निकल गई.

पापा ने पूछा- क्या हुआ?
मॉम- कुछ नहीं.

फिर मॉम ने कॉल कट कर दी.
उसके बाद मैं उठकर फ्रेश होने चला गया.
मॉम भी अन्दर नंगी ही आ गईं.

मैंने मुस्कुरा कर उनकी तरफ देखा.
वो बोलीं- मुझे सुसु करना है.
मैंने कहा- हां कर लो.

तभी मुझे मस्ती सूझी. मैंने मॉम को दीवार के सहारे खड़ा किया और उनकी चूत में अपनी जीभ लगा दी.
मैंने इशारे कहा- अब मूतो.

मुझे मॉम ने बहुत रोका लेकिन मैं नहीं माना.

मॉम की चूत पानी टपकाने लगी. मॉम खुद से मेरे मुँह में झटके मारने लगीं और एकदम से बोलीं- अब हटो … सुसु आ रही है.

लेकिन मैंने पीछे से उनकी गांड को इतनी ज़ोर से पकड़ा हुआ था और जीभ अन्दर चूत में डालकर चूस रहा था कि मॉम कुछ कर ही ना सकीं और उनका मूत निकलने लगा.

मॉम की चूत से पूरी पेशाब मेरे मुँह में चली गई; कुछ बाहर भी टपक गई.

मुझे अपनी मॉम की पेशाब पीकर इतना मज़ा आया दोस्तो कि क्या बताऊं.

उधर मेरी मॉम शर्म से लाल हो गयी थीं और शरारती मुस्कान देती हुई बोलीं- पागल, ऐसे कौन करता है.
मैंने कहा- मॉम, तेरा बेटा करता है.

फिर मैं उठा और तभी मॉम ने शॉवर ऑन कर दिया.
हम दोनों पानी के नीचे नंगे खड़े थे पानी से नहाने लगे और मस्ती करने लगे.

हम दोनों ने एक दूसरे को साबुन लगाया और चुदास भड़क गई तो फिर से एक राउंड चुदाई की.

अब मॉम मुझसे खुलने लगी थीं.
मॉम ने मुझसे कहा- इतना मज़ा मुझे अपनी लाइफ में कभी नहीं आया.

मैंने मॉम को आई लव यू बोला.
मॉम ने भी मुझे लव यू टू आर्यन बोला.

ऐसे ही 4 दिन तक हम दोनों ने बहुत मस्ती की.
मैंने मॉम को बहुत सारी हॉट सेक्सी ड्रेस भी दिलाईं.

मॉम ने मुझसे एक प्रॉमिस लिया कि ये बात डैड को पता नहीं चलना चाहिए और अकेले में मैं मॉम को उनके नाम से बुलाऊं.
मेरी मॉम मुझसे बोली- अब से तू मुझे मॉम समझ कर नहीं, बीवी बनाकर चोदेगा.

इस तरह से मॉम ने अपने बेटे के लंड को चूत की मस्ती देना शुरू कर दी थी.
आज भी डैडी को स्टेप मॉम सेक्स की बात नहीं मालूम है कि मेरी मॉम मुझसे चुदवाती हैं.

दोस्तो, आपको अगली चुदाई कहानी में लिखूँगा कि घर वापस आने के बाद मॉम ने मुझे किस किस तरह से चूत और गांड चुदाई का मजा दिया और उनकी एक ख़ास सहेली को भी बिना अपनी चुदाई की जानकारी दिए मुझसे चुदवा दिया.

Antarvasna Stories

दोस्तो, अन्तर्वासना में Antarvasna Stories मैंने जब कहानियाँ पढ़ी तो मेरा भी मन हुआ कि मैं भी अपने बारे में अन्तर्वासना के पाठकों को बताऊँ!

मेरा नाम राज है तथा मेरी उम्र 26 साल है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ.

बात अब से कई साल पहले की है जब मैं सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं जानता था. मैंने बारहवीं कक्षा पास की थी तथा कॉलेज में प्रवेश लिया था.

अभी कॉलेज जाते जाते एक महीना ही गुजरा था कि मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के की शादी हुई जिसका नाम विक्की था. वो उम्र में मुझसे चार साल बड़ा था. मैं भी उसकी शादी में गया, खूब मज़े किए तथा जब जयमाला का वक़्त आया तो उसकी बीवी को देख कर आँखें खुली रह गई. उसका नाम प्रीति था, वो गज़ब की सुंदर थी, गोरा बदन, उठी हुई चूचियाँ, उभरी हुई गांड, मानो कि स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो. उसकी नशीली आँखें जिसकी तरफ भी देखती थीं वो उसका दीवाना हो जाता था. उसके बॉब-कट बाल उसके चेहरे पर गजब के सुंदर लगते थे. खैर उसकी शादी से में लगभग रात में तीन बजे वापस घर आया पर आँखों से नींद गायब थी. सारी रात उसके बारे में सोच कर गुजार दी, मन में तरह तरह के ख्याल आए कि काश वो मेरी होती. यही सब सोचते सोचते पता नहीं कब नींद आई.

सुबह नौ बजे मैं सो कर उठा तो थोड़ा शोर सुन कर मैं बाहर आया. तो देखा कि विक्की अपनी बीवी को घर लेकर आ गया था. मन हुआ कि एक बार उसकी सूरत देखने को मिल जाये, पर औरतों की भीड़ के कारण मैं उसको देख नहीं पाया.

दो दिन रहने के बाद वो अपने मायके चली गई और मैंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया. लगभग दस दिन बाद विक्की ने मुझे अपनी सुसराल चलने के लिए कहा, बोला कि तेरी भाभी को लेने चलना है!

मेरे मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे. मैंने तुरंत हाँ कही और तैयार होकर विक्की के साथ चला गया.

उसकी ससुराल ज्यादा दूर नहीं थी, हम वहाँ पहुँचे तो वहाँ हमारा खूब स्वागत हुआ और लगभग दो घंटे बाद हम अपने घर के लिए चल दिए.

उस दिन मैंने उसे ‘भाभी, नमस्ते!’ कहा और कोई ज्यादा बात नहीं हुई.

कुछ दिन बीतने के बाद हमारी बातें होनी शुरू हो गई, वो मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में पूछती थी या कोई छोटा मोटा काम बता दिया करती थी, पर मेरा मन तो हमेशा भाभी की चूचियों पर अटका रहता था और हमेशा उसको चोदने के बारे में सोचता था. पर मुझे लगता था कि उसकी चूत के दर्शन शायद कभी नहीं होंगे.

एक दिन किस्मत ने साथ दिया, मैं घर पर अकेला था, घर के लोग शादी में गए हुए थे जो कि रात में करीब 11 बजे से पहले वापस आने वाले नहीं थे.

अचानक दरवाजे की घंटी बजी दरवाजा खोला तो प्रीति भाभी दरवाजे पर थी. मैं उसको देखता ही रहा, उसने टोका- अन्दर नहीं आने दोगे क्या?

मैं शरमा कर पीछे हो गया और वो अन्दर आ गई. उस समय शाम के लगभग छः बजे थे. वो अन्दर आकर सोफे पर बैठ गई, मैं सामने वाले सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर हम दोनों चुप रहे, फिर वो बोली- क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो?

मैंने शरमा कर ना कह दिया. वो मेरी घबराहट समझ गई और मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में पूछने लगी.
उसने मुझसे पूछा कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड है क्या?
मैंने मना कर दिया तो वो चौंक कर बोली- मैं यह बात नहीं मान सकती! आजकल कोई लड़का इतना शरीफ नहीं हो सकता!
मैंने फिर मना किया तो वो बोली- क्या कभी किसी लड़की को किस किया है?

मैं उसकी बात सुन कर हैरान रह गया क्योंकि वो पहली बार मुझसे इस तरह से बात कर रही थी.

मैंने जब मना किया तो वो बोली- अगर मैं तुम्हें यह सब सिखा दूँ तो कैसा रहेगा?

मैं उसकी बातें सुन कर कुछ भी नहीं बोल पा रहा था, बात घुमा कर मैंने उसे कोल्ड ड्रिंक के लिए पूछा तो वो बोली- जैसे मैं चाहूंगी, वैसे ही पिलानी पड़ेगी!

मैंने हाँ कह दी. फिर मैं दो गिलास में कोल्ड ड्रिंक लेकर आया, उसे एक गिलास दिया तो वो बोली- ऐसे नहीं! कोल्ड ड्रिंक अपने मुँह में लो और मुझे पिलाओ!

मैंने मना किया तो वो बोली- वैसे ही पिलानी है तो पिलाओ, नहीं तो मैं जा रही हूँ!

मैंने हाँ कही और कोल्ड ड्रिंक अपने मुँह में भर ली. फिर उसने अपना मुँह मेरे मुँह से लगाया और सारी कोल्ड ड्रिंक पी गई. उसके होंट जैसे ही मेरे होंटों से लगे, मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी फ़ैल गई और मैंने उसे हटा दिया. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिसके बारे में सिर्फ सपने में सोचता था वो अचानक मेरी होने वाली थी. फिर उसने मुझे बिस्तर पर चलने के लिए कहा, मैं कुछ नहीं बोला और उसके साथ बिस्तर पर चला गया.

उसके बाद खुद ही उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे कपड़े उतारने लगी और बोली- मैं आज तुमको वो सब कुछ सिखा दूँगी जो एक मर्द और औरत के बीच में होता है!

मैं कुछ भी नहीं बोला और मन ही मन में बहुत खुश हो रहा था लो आज मुझे वो सब कुछ मिलने वाला है जिसके बारे में सिर्फ सपने में ही सोचता था.

वो मेरे पूरे कपड़े उतार कर मेरे बराबर में लेट गई और अपने हाथों से मेरे पूरे बदन को सहलाने लगी. उसका हाथ लगने से मेरा लण्ड एकदम टाइट होने लगा, जैसे ही उसके हाथ ने मेरे लण्ड को छुआ, मेरे पूरे बदन में सनसनी सी दौड़ गई और वो मेरा लण्ड पकड़ के एकदम बैठ गई और बोली- हाय! तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है? आज सही मायने में मेरी चूत की प्यास बुझेगी!

मैंने कहा- विक्की का लण्ड इतना बड़ा नहीं है क्या?

तो वो बोली- यदि विक्की का लंड इतना बड़ा होता तो मुझे तुम्हारे पास आने की क्या जरूरत थी!

मैं समझ गया कि वो उसकी प्यास नहीं बुझा पाया है. उसके बाद उसने आधे घंटे तक मेरे लण्ड को मुँह से चूसा. मुझे लगा कि कुछ निकलने वाला है. जब मैंने उससे कहा तो वो बोली- मेरे मुँह में ही निकाल दो!

और मैंने उसके मुँह में सारा माल निकाल दिया और वो सारा का सारा माल पी गई, फिर भी उसने मेरे लंड को चूसना बंद नहीं किया. दस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैं बोला- इस बार भी मुँह में निकालने का इरादा है?

तो वो शरमा कर बोली- नहीं! इस बार मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगी!

और उसने मेरे पूरे बदन को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. मेरा लण्ड आपे से बाहर हो रहा था तो मैंने कहा- और कण्ट्रोल नहीं होता!

तो वो नीचे लेट गई और अपनी टांगें फैला दी और मुझे ऊपर आने को कहा. मैं ऊपर आ गया, उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया तथा लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और थोड़ा जोर लगाया तो मेरा लंड उसकी पानी से भरी हुई चूत में बस एक इंच अन्दर गया और मुझे दर्द होने लगा.

मैं रुक गया तो वो बोली- क्या हुआ?
मैंने कहा- दर्द हो रहा है!
वो बोली- पहली बार तो थोड़ा दर्द होगा ही! दुबारा कोशिश करो!

मैंने हिम्मत करके दुबारा लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया. इस बार लंड 4-5 इंच अन्दर चला गया पर मुझे दर्द होने लगा. मैंने जैसे ही लण्ड बाहर निकालना चाहा तो उसने मुझे कस के पकड़ लिया और अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होटों को चूसने लगी.

थोड़ी देर में मुझे मजा आने लगा, मेरा दर्द कम हो गया और मैं धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा. 5-6 धक्कों में लंड पूरा अन्दर चला गया और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- हाय मैं मर गई! मुझे और तेज चोदो!

मुझे भी मजा आने लगा और मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. लगभग 15 मिनट बाद मैं झड़ गया और सारा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया.

वो धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी और बोली- आज मुझे असली मजा आया है! आज के बाद मैं तुम्हारी हूँ! तुम जब चाहो मुझे चोद सकते हो! मेरी चूत हर वक़्त तुम्हारी राह देखेगी!

और उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और अपनी हालत ठीक करके चली गई. जाते-जाते उसने मुझे एक बहुत लम्बी किस करी और बोली- मैं हर वक़्त तुम्हारे लण्ड का इन्तजार करुँगी.

उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और सोचने लगा- क्या सच में मैंने उसे चोदा है? मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने प्रीति को चोदा है.

उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता था, हम एक दूसरे में खो जाते थे. सैकड़ों बार मैंने उसकी चुदाई की.

आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं!
आपका अपना मित्र-साथी राज Antarvasna Stories

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