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मैंने मामी को नीचे Antarvasna खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा. मेरा जोश अब पहले से भी ज्यादा था. क्या पता फिर मौका मिले ना मिले? मैं उनके मम्मे चूसे ही जा रहा था और एक हाथ से चूत सहला रहा था. मैंने अब उनको चाटना चालू किया. उन्होंने अपने हाथों से सर के नीचे जो तकिया था, उसे कस के पकड़ा था. तो मैंने उनकी बगलों में चूमना चालू किया जिससे मामी पूरी सिहर उठी. धीरे धीरे चूमते हुए मैं नीचे आ गया और चूत चाटने लगा. अब मामी ने धीरे से अपने पैर उठाये और अपनी छाती के पास ले गई जिससे अब उनकी गांड का छेद मेरे सामने आ गया था.
“नयन, अगर तुमको तकलीफ ना हो तो थोड़ा इसे भी चाटो ना!”
मैंने अपनी जीभ गांड के छेद पर रखी और धीरे धीरे अपनी जीभ का जोर बढ़ाया. मामी कसमसा रही थी और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुसवा रही थी.
“मामी क्या इस छेद को कभी किसी ने छेड़ा है?”
“नहीं नयन, ये तो मेरी चूत को हो नहीं चाटते! तो इसको क्या चाटेंगे!”
“मामी, मैं इसको चूसूंगा भी और बजाऊँगा भी!”
मामी अब जरा मेरा लंड गीला तो करो!”
मामी ने वापस मेरा लंड मुँह में लिया और चूसना चालू किया.
“अब मामी पेट के बल हो जाओ, मैं आपके पीछे के छेद को छेड़ता हूँ!”
“नयन, संभल के! मैंने कभी पीछे लिया नहीं है!”
“अरे मामी जी! तुमने कभी आगे भी नहीं लिया था! लेकिन अब लेती हो ना!”
मैंने अपनी पकड़ बना ली और उनकी गांड पर लंड का दबाव बनाने लगा.
“नयन, धीरे से करो! मुझे दुःख रहा है!”
“हाँ मामी! मैं धीरे से करता हूँ!”
“मामी, एक काम करो! आप नीचे से गांड उठाओ और धीरे से अन्दर लेने की कोशिश करो!”
लंड तो अब मेरा भी दुखने लगा था क्योंकि गांड का छेद बहुत ही छोटा था. मामी ने अपनी गांड नीचे से उठानी शुरू कर दी थी. वो गांड तो नीचे से उठा रही थी, साथ में चिल्ला भी रही थी.
“नयन, आऽऽऽऽ आआआऽऽऽ बहुत दर्द हो रहा है नयन…!”
अब लंड आधा अन्दर जा चुका था और मामी अब गांड आगे खींचने लगी थी. मुझे लगा कि मामी अब बाहर निकलेगी तो मैंने मामी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा. मामी की तो चीख ही निकलने वाली थी पर उसने जैसे तैसे रोक ली.
“मामी, अब पूरा अन्दर गया है! अब कैसा लग रहा है?”
“नयन, बहुत ही दर्द हो रहा है!”
“मामी, थोड़ा सहन करो! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ!”
“हाँ मामी! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ!”
मामी ने अपना काम चालू कर दिया था.
“मामी, कैसा लग रहा है?”
“नयन, यह तो अलग ही अनुभव है! मुझे बहुत ही मजा आ रहा है! तुम भी कमर हिलाओ ना! मजा आ रहा है बहुत!”
अब मैंने अपने शॉट धीरे से चालू किये जिससे उनको तकलीफ़ ना हो.
लेकिन मामी पूरे जोश में आ गई थी, वो तो नीचे से गांड हिला हिला कर लंड ले रही थी.
मैं भी जोरों पर था और और एक हाथ से उनकी चूची भी दबा रहा था.
बहुत देर ये खेल चला!
“मामी, क्या बस करूँ गांड की ठुकाई?”
“हाँ नयन, अब जरा मेरी चूत पर जोर लगाओ!”
मैंने गांड से लंड बाहर निकाला और उनको घोड़ी बना कर उनकी चूत में डाल दिया और पूरी गति से कमर हिलाने लगा.
मामी की सिसकारियाँ रुक रुक कर निकल रही थी जो के मेरे धक्के के कारण हो रहा था.
“मामी, कैसा लग रहा है?”
“नयन, मत पूछो! तुम अपना काम चालू रखो!”
“नयन! आआऽऽऽ आआआआअ… क्या मजा आ रहा है! मैं तो पागल थी जो तुम्हें चोदने को मना कर रही थी!”
“नयन, मैं निकलने वाली हूँ मुझे कस लो नयन! आआऽऽऽ आआआआअ…! ”
मैंने मामी की हालत जान ली और पीछे से उनको कस कर पकड़ लिया.
मामी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर कस लिया जिस कारण मैं भी मचलने लगा.
“मामी, ऐसे ही चूत से दबाओ मेरे लंड को! मैं भी निकलने वाला हूँ…मामी ऽऽऽ! ”
और मैं और मामी एक साथ झड़ने लगे. मेरे लंड का फव्वारा मामी की चूत में खाली हो रहा था और मामी भी अपनी चूत के होंट दबा दबा कर मेरा पूरा लंड खाली करवा रही थी.
“क्यों नयन, मजा आया?”
“बहुत मामी…बहुत मजा आया!”
“अरे अभी कहाँ? मजा तो अब तुझे दूंगी जो तुम जिन्दगी भर नहीं भूलोगे!”
और मामी ने मेरा मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह में लिया और अपनी जबान से और दातों से उसे चूसने लगी. मेरी हालत तो ख़राब हो रही थी, एक तो पहले ही मैं दो बार झड़ चुका था.
“मामी बस करो ना! अब मेरे लंड में दर्द हो रहा है!”
“नयन, यह दर्द बस थोड़ी देर सहन करो! फिर देखो!”
थोड़ी देर बाद मेरी लंड में जान आने लगी और वो वापिस पहले की तरह तैयार हो गया. मामी मेरे लंड को निहार निहार कर चाट रही थी. शायद उनको लंड चूसना बहुत ही पसंद था.
“नयन, तुम्हरे लंड में तो बड़ा जोर हैं! यह तो तीसरी बार भी तैयार हो गया है?”
“यह तो आप के मुँह में लेने की कला के वजह से हो रहा है!”
“अब मेरी समझ में आया कि मेरी गांड में इतना दर्द क्यों हुआ! यह तो कितना बड़ा है!”
“अब आपको पता चला? जब चूत और गांड दोनों चोद कर हो गया?”
“अरे तुमने देखने ही कहाँ दिया? जब देखो मशीन चालू थी तुम्हारी!”
“हाँ मामी! अब क्या करना है मुझे?”
“नयन, चूत और गांड तो तुमने चोद दी! अब मैं तुम्हें मुँह चोदना सिखाती हूँ.
मामी ने मुझे घोड़ा बना दिया और मेरे नीचे आ कर नीचे से मेरे लंड को पकड़ा.
“नयन, जैसे तुमने मेरी चूत चोदी और मेरी गांड चोदी, उसी तरह अब मेरे मुँह को चूत समझ कर जोर से चोदो!”
मैंने जैसे ही अपनी कमर हिलाना चालू किया, मामी ने अपने मुँह से कमाल दिखाना चालू किया, नए-नए तरीके से मेरे लंड को मुँह में चूस रही थी, कभी अपने होंटों का दबाव बना कर, कभी अपनी जबान से सहला कर मुझे पागल कर रही थी.
मैं भी अब पूरी गति से उनके मुँह में लंड को हिला रहा था. मैं अब घुटनों के बल बैठ गया और मामी वैसे ही नीचे से सर हिला के अपने मुँह को खुद चुदवा रही थी.
मैंने एक हाथ पीछे किया और उनकी चूत में उंगली डाल दी. मामी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी. अब मेरा बदन अकड़ने लगा था. मामी अपने मुँह का कमाल दिखा रही थी. मैं अब अपने हाथों पर आ गया और कमर हिला हिला के मामी का मुँह चोदने लगा.
मामी पूरा लो! खा जाओ! मैं तो झड़ने वाला हूँ ऽऽ!!
और एक जोरदार धक्का लगाकर मैं उनके मुँह में झड़ गया. पहले की तरह मामी ने मेरा वीर्य पूरा चाट लिया और मेरे लंड को साफ कर दिया.
फिर हमने उठ कर कपड़े पहन लिए.
“मामी, मैं निकलता हूँ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा!”
“नयन भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी! तो फिर नयन कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी.”
तो दोस्तो! कैसी लगी मेरी आगे की कहानी?
अब तो मैं इतना चोदने का आदि हो गया हूँ कि जब तक दो बार झड़ता नहीं, मैं नीचे उतरता ही नहीं.
तो अब मैं 29 साल का हूँ और मुंबई में रहता हूँ.
मुझे जरूर मेल करें कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी! Antarvasna
मेरे पति ने मेरे बारे में आप सभी Hindi Sex Stories को तो बता ही दिया है कि मैं क्या हूँ और उन्होंने सच ही बताया है। मैं सच में बहुत ही कामुक औरत हूँ! मुझे ना जाने क्यों कम उमर से ही सेक्स करने का शौक है!
और मुझे पति भी ऐसा मिला है बिल्कुल मेरे जैसा!
वह कहता है कि अगर जैसे हम ब्लू फ़िल्म देखते हैं, वैसे ही अगर हम अपने सामने अपने किसी खास को चुदते देखें तो सेक्स का मज़ा दुगना हो जाता है।
वैसे मेरा पति भी एक नंबर का चोदु है! कभी कभी तो मुझे चोद चोद कर इतना परेशान कर देता है कि मैं ‘बस’ कह उठती हूँ।
कई बार मैं उसके सामने ही दूसरे मर्दों से चुद चुकी हूँ!
जैसा मज़ा मेरे पति को मुझे चुदवाने में आता है वैसा ही मुझे भी दूसरों से चुदने में आता है।
हमारी शुरुआत कुछ इस तरह हुई:
एक बार एक इनका दोस्त हमारे घर आया।
उसका नाम अरुण है और हम सब उसे पंकज कह कर पुकारते थे।
ये दोनों शराब पी रहे थे.
मैं भी थोड़ी देर इनके साथ बैठ कर अपने कमरे में चली गई, अपने बेटे को सुलाने के लिए!
ये दोनों पीते हुए बातें करते रहे।
थोड़ी देर में मनु मुझे देखने आए कि मैं सो गई हूँ या नहीं।
मैंने भी सोने का नाटक किया और लेटी रही।
थोड़ी देर में ये दोनों फिर बात करने लगे:
“यार तेरे तो मज़े है, अभी तू कुंवारा है और जब चाहे कोई भी लड़की पटा कर बजा सकता है!”मनु ने कहा।
“खाक मज़े है! साला किसी लड़की को पटाओ तो हफ्तों बीत जाते है! साला गश्ती ले कर आओ तो उसके रेट ऊंचे होते हैं!”पंकज ने कहा।
“तो क्या हुआ यार कोई ऐसी लड़की पटा जो पहले से ही बजी हुई हो और अपनी और बजवाना चाहती हो!”
“नहीं यार ऐसी लड़कियाँ कम ही मिलती हैं, अगर मिल भी जायें तो सालियों को मज़ा देना पड़ता है बहुत कम ऐसी होंगी जो ख़ुद मज़े दें!”
“तो फिर ख़ुद मज़े देने वाली कहाँ से मिलेगी?”
“हाँ यार अगर कोई शादीशुदा औरत जिसका एक तीन या चार साल का बच्चा हो न! वो ही फुल मज़े दे सकती है।”
“मतलब? कैसे?”
“यार जिसका अभी बच्चा हुआ हो वो और छोटा हो तो उसकी चूत अभी नई नई खुली होती है उसकी चूत में खुजली भी बहुत होती है और उस खुजली को सिर्फ़ मोटा ताज़ा लंड ही बुझा सकता है!”
“अच्छा!”
मैं अन्दर से सब सुन रही थी!
“हाँ यार ऐसी औरत के साथ मज़े ही अलग आते हैं, मैंने एक बार एक गश्ती चोदी थी, साली का फिगर इतना मस्त था! क्योंकि औरत बच्चा होने के बाद थोड़ा सा भर जाती है उसके चुचे बिल्कुल पके हुए आम की तरह हो जाते हैं
एकदम रसीले मोटे मोटे!”
“साली की गांड बाहर को निकली हुई उठी उठी सी! गोल गोल मोटी मोटी जांघें आ आहा देखते ही नंगी करके चोदने को जी चाहे!
“अच्छा यार चल अब बता तो तूने उसे कैसे चोदा? मेरा तो लंड सलामी देने लगा है!”
“बस मत पूछ यार! मैंने नहीं, उस साली ने मुझे चोदा! मैं तो सिर्फ़ उस के बताए अनुसार कर रहा था। क्या पोज़ थे उस साली के, कम से कम तीन बार उसने मुझे चोदा!”
“अच्छा यार, एक बात बोलूं? तू तो अपना दोस्त है तुझसे क्या परदा! सोनिया भी यार एक बच्चे की माँ है वो भी भरे बदन की है और तू सच कह रहा है ऐसी औरतों को चुदने का बड़ा मन करता है!”
पंकज थोड़ा सा चौंका कि ये मनु क्या कह रहा है??
“ऐसे मत देख पंकज मैं सही कह रहा हूँ, सच में सोनिया के साथ मज़ा आ जाता है!”
“पंकज तुझसे एक बात पूछूँ?”मनु ने कहा!
“हाँ हाँ! पूछ न!”
“यार तुझे सोनिया का बदन कैसा लगता है?”
अब तो पंकज बिल्कुल ही चौंक गया, “ये क्या कह रहा है तू मनु?”
“सच बता यार! शरमा मत! मैं चाहता हूँ, कोई सोनिया के बदन की तारीफ करे!”
“लगता है तुझे ज्यादा हो गई है!”
मैं भी सुनना चाहती थी कि अब कोई क्या कहता है! मुझे भी सुनने में मज़े आ रहे थे।
“नहीं तू बुरा मत मान, जो कहना है कह दे आज, तू मेरा दोस्त है! मैं बुरा नहीं मानूंगा!”
पंकज को लगा अब मनु नहीं मानेगा तो उसने भी कहना शुरू कर दिया, “यार सच में न सोनिया भाभी का फिगर इतना कातिल है की कोई भी देखे तो उसका लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आ जाए!”
“और बता यार!”
“सच में यार तू मानेगा नहीं! मैं हफ्ते में तीन बार तो सोनिया भाभी को याद कर के मुठ मारता हूँ, रात को सोते हुए भी कभी कभी में आँखें बंद करके सोचता हूँ अगर मैं सोनिया भाभी की चुदाई करूँगा तो किस तरह करूँगा! सच में
सोनिया भाभी के 36 इंच की गोलाइयों के बीच में अपना लंड छुपाने को मन करता है। कम से कम सोनिया भाभी की कमर 27 इंच की तो होगी ही और गांड तो मत पूछ इतनी गोल और कसी हुई है की घोड़ी बना कर गांड में थूक लगा
कर लंड का पूरा सुपाड़ा अन्दर करने को मन करता है, सोनिया भाभी की जांघें इतनी गोल और चिकनी है कि मन करता है चूमता ही रहूँ!”
“मैं तुझे बताता हूँ! मनु तूने कभी ब्राजील में साम्भा डांस देखा है क्या? उनमें जो काली काली सी औरतें सिर्फ़ रंग बिरंगी पैंटी पहन कर अपने चूचों को सिर्फ़ नाम मात्र के कपड़े से ढक कर नाचती हैं, उनको देख कर मुझे हमेशा
सोनिया भाभी की याद आ जाती है!”
“हाँ यार पंकज, तूने सही कहा सोनिया बिल्कुल वैसी ही है वैसे है, मोटी गांड वैसी जांघें उतने ही मोटे चूचे कसम से तूने सही कहा!”
मैं भी आपने बदन की तारीफ सुन कर खुश हो रही थी।
“यार पंकज, अब बता, अगर तुझे सोनिया को चोदने का मौका मिले तो तू कैसे चोदेगा?”
“सच बताऊँ तो सोनिया भाभी को सबसे पहले एक टाइट सा टॉप पहनाऊंगा और नीचे एक मिनी स्कर्ट वो भी चिपकी हुई जिसमें से उनकी गोल गोल जांघों के दर्शन हो रहे हों और स्कर्ट की लम्बाई भी इतनी की सिर्फ़ उनकी पैंटी न
दिखे! अन्दर उनको एक सेक्सी सी बिकनी पहनाऊंगा जिसमे सिर्फ़ उनके चूचों की नोकें छुपें और चूत की दरार ढके! पीछे गांड के अन्दर से जाती हुई बिकनी! कसम से फिर धीरे धीरे से उनको अपने कपड़े उतरने को कहूँ, पहले टॉप!
फिर स्कर्ट धीरे धीरे! ब्रा उतरते ही उनको कहूँगा- अपने चूचे हाथ से पकड़ ले! फिर धीरे धीरे उनके चूचे उन्हीं के हाथ से चूसूंगा! फिर पैंटी को उन्हीं को उतारने को कहूँगा!”
मुझे भी ये सब ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे साथ पंकज कर रहा है।
उधर पंकज पूरे मज़े से मनु को बता रहा था, “मैं भी पूरा नंगा हो कर सोनिया भाभी के मुँह में अपना लंड दे दूंगा! चूसाता ही रहूँगा चूसाता ही रहूँगा! जब तक उनके बदन पर अपना गरम माल नहीं छोड़ देता!”
“अपना माल झाड़ते ही फिर भाभी को दुबारा चूसने को कहूँगा इस बार उनकी आंखों पर पट्टी बाँध कर बिस्तर पर उल्टा लेटा कर उनके हाथ बाँध कर पीछे से उनकी चूत मारूंगा आहा! पीछे से जब चूत मारूंगा तब झटके
पड़ते ही सोनिया भाभी की चीख निकल जाए ऐसा झटका मारूंगा! आहा! हर झटके पर उनकी गांड पर पट!पट! की आवाज़ आहा! भाभी हर झटके पर चिल्ला कर कहेगी और तेज़ पंकज और तेज़!
फिर उनको कुतिया की तरह पोज़ में लाऊंगा! इस बार गांड पर थूक लगा कर अपना लंड सीधा करके सीधा एक ही शॉट में अन्दर! सोनिया भाभी चीखती रह जाएंगी आहा मर गई! कुत्ते! आआ आआ आआआ फाड़ डाली मेरी
गांड कमीने! अआहा हरामजादे! पंकज! ये क्या कर डाला तूने! पर मैं एक नहीं सुनूंगा! और लगातार लगा रहूँगा उनके भोसड़े को फाड़ने में!
भाभी जब चुप नहीं होंगी तो मुझे भी कहना पड़ेगा “! साली कुतिया एक तो इतनी टाइट गांड कर रखी है! उस पर जब तेरी गांड का भोसड़ा बना रहा हूँ तो चिल्ला रही है! साली कल को इतना बड़ा छेद कर दूंगा के जब मर्ज़ी
दो दो लंड ले लेना आगे भी पीछे भी एक साथ! साली रांड! आज ले ले मज़े! आज तो तेरी जवानी को कुचल के रख दूंगा!
और ये पक्का है मेरा ऐसा कहते ही भाभी और मज़े से मेरे साथ लग जाएगी! बड़ी देर तक भोसड़ा चोदने के बाद सोनिया भाभी की गांड से लंड निकाल कर उसी पोज़ में चूत में लंड पेल दूंगा! सोनिया भाभी की आवाज़
आएगी! बहन चोद अब आया न असली पोज़ में साले कुत्ते अब न छोड़ियो! मुझे पेल कमीने मादरचोद! आज तो इस प्यासी चूत की चटनी बना दे!
आअहा आह साली! ले और ले! ले आज पूरा लंड तेरी चूत के हवाले! और सोनिया भाभी भी अपनी गांड हिला हिला कर पीछे को धक्के मारती रहेंगी! हाँ हाँ पंकज हाँ हाँ! ले और तेज़! और तेज़! ले फाड़ दे आज चूत को! निकाल दे सारा पानी आज तो! कमीने! मेरी गर्म चूत को मत उदास छोड़ना! आज मेरा पानी निकाल दे … मैं सारी ज़िन्दगी तेरे लंड का सलाम लेती रहूंगी!
“इस पोज़ में भी काफी देर के बाद फिर पोज़ बदलूँगा इस बार उन्हें बिस्तर पर सीधा लेटा कर ख़ुद नीचे खड़ा होकर उनकी कमर पकड़ कर! अपना लंड बिल्कुल सीधा डाल कर!
“बस बस पंकज बस?” मनु तभी बोल पड़ा!
ओहो ये क्या किया मनु तूने मैंने मन ही मन सोचा! इतना मज़ा आ रहा था लग रहा था पंकज सच में ही मुझे चोद रहा था! मेरी चूत भी कुछ गीली हो चुकी थी!
“बस यार अब मेरा काम तो हो गया!” मनु ने अपना हाथ अपने लंड से हटा कर कहा!
“ये क्या मनु! तू मुठ मार रहा था?” पंकज बोला
“हाँ यार, क्या करूं … तू बता ही इस तरह से रहा था!”
“यार बता ही तो रहा था अगर असली में करुंगा तो तेरा क्या होगा?”
“होगा क्या … जब तू सोनिया को चोदेगा तो मैं भी तेरे साथ उसको चोदने लगूंगा!
“हाँ यार मज़ा तो बहुत आएगा, एक साथ सोनिया भाभी की चुदाई करने में!”
“हाँ हम तीनों एक कमरे में एक बिस्तर पर दोनों बिल्कुल नंगे और तेरी सोनिया भाभी तेरे पहनाए हुए कपड़ों में हम दोनों यहाँ बिस्तर पर बैठ कर पैग लगते हुए उसको कपड़े उतारते हुए देखेंगे और फिर टक टका टक!”चुदाई का खेल शुरू!
“पर यार, भाभी मानेगी?”
मैं तो कब से तैयार हूँ सालो! अभी आ जाओ तो बताती हूँ कौन किसे चोदता है! मैंने सोचा।
“यार उसे तो मनाना पड़ेगा पता नहीं तैयार होती है या नहीं! चल अभी तो तू यही सो जा! रात हो गई है सोनिया भी सो गई है। मैं भी मुठ मार कर हल्का हो गया हूँ, मैं भी सोता हूँ! अगर तुझे भी रात को मुठ मारने के लिए कुछ
चाहिए तो बता? सोनिया ने काफी सेक्सी मैक्सी पहन रखी है, थोड़ा सा उसकी जांघों के दर्शन चाहिएँ तो बता!
“हाँ यार करा दे यार! आज रात मुठ मार कर ही काम चलाता हूँ, आज तक सोनिया भाभी को सोच कर मुठ मारता रहा था, अब देख कर मुठ मारता हूँ!
मैंने ये सुन लिया और मैं भी सीधी लेट गई। अब मेरी टाँगें पूरी तरह दिख रही थी!
“ये ले पंकज!” मनु ने मेरी पूरी मैक्सी ऊपर कर दी। अब सिर्फ़ मेरी पैंटी दिख रही थी और मेरी नंगी जांघें उन दोनों के सामने थी!”
“आऽह ऽआ मनु साले कसम से क्या जांघें हैं! मन कर रहा है खोल कर कच्छी खींच कर डाल दूँ अन्दर!”
तो देख क्या रहा है कुत्ते!कर न फिर! मैंने सोचा।
पंकज ने अपना लंड निकाल लिया और मेरे सामने ही मुठ मारने लगा।
मैं भी थोड़ी खुली आंखों से उसके लंड को निहार रही थी, सच में काफी बड़ा लंड था उसका!
कितनी ही लड़कियाँ उस लंड ने चोदी होंगी! सोच कर ही मेरे बदन में सिहरन हो गई!
पर ये क्या??
पंकज भी झड़ चुका था! खैर चलो! शायद कल इनका प्रोग्राम बन जाए! और मेरे मज़े आ जायें?
अगले दिन फिर जो हुआ वो सब मैं आपको अगली बार बताऊंगी!
पर इतना है कि उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा!
सोनिया Hindi Sex Stories
मेरे साले की बीवी का नाम स्वरा (बदला हुआ नाम) है. उसका फिगर 30-28-32 का है. वो दिखने में एकदम सुंदर माल जैसी है. उसका रंग मक्खन सा सफेद है.
उसकी शादी के बाद से ही हम दोनों में खूब जमती थी क्योंकि आपको तो पता ही है कि सलहज और जीजा में कुछ ना कुछ तो चलता ही रहता है.
स्वरा मुझसे अपनी हर बार साझा करती रहती थी, जिस कारण से हम दोनों काफ़ी क्लोज हो गए थे.
उसकी बातों से मुझे ये भी मालूम थी कि उसका पति उसमें कम इंटरेस्ट लेता था.
पता नहीं क्यों … लेकिन मेरे लिए तो ये सही था.
एक दिन मेरी सासू मां और उसके बेटे को उनके कोई निजी काम से एक दिन के लिए दिल्ली जाना पड़ा.
उन्होंने मुझसे कहा- आप या तो यहां रुक जाना या स्वरा को वहां अपने घर ले जाना.
स्वरा ने कहा- मैं जीजा जी के घर जाऊंगी तो घर सूना हो जाएगा. जीजू यहीं रुक जाएंगे. एक रात की तो बात है.
ये बात सुनकर उन्होंने भी हां कर दी और मैं उन दोनों को बस पर छोड़ कर उनके घर दस बजे के करीब पहुंच गया.
स्वरा ने नाइट सूट पहना हुआ था. नीचे पज़ामा और ऊपर बटनों टी-शर्ट वाली.
तो स्वरा ने मुझसे कहा- जीजू आपको चेंज करना है, तो कर लीजिए, फिर आराम से बैठते हैं.
मैं बाथरूम में चेंज करने चला गया.
मैंने जानबूझकर बाथरूम का गेट पूरा बंद नहीं किया. जब मैं अन्दर गया तो अन्दर स्वरा की ब्रा टंगी हुई थी. मैं वहां उसकी ब्रा अपने लंड पर लपेट कर मुठ मारने लगा.
कुछ ही देर में मैंने अपने लंड का पानी ब्रा में निकाला और चेंज करके बाहर आ गया.
मुझे ये नहीं पता था कि उस ब्रा को थोड़ी देर में ही उठा कर मशीन में डालने वाली है.
मैं अन्दर बैठा था तो मैंने देखा कि वो बाथरूम में गई और उसने बाथरूम से कपड़े उठाए.
फिर उसने मेरी और थोड़ा अजीब सी नजरों से देखा. फिर वो वॉशिंग मशीन की तरफ चली गयी.
मैं समझ गया कि इसे पता चल चुका है कि मैंने इसकी ब्रा के साथ क्या किया है.
फिर वो कमरे में आ गई.
कमरे की लाइट्स ऑफ होने के बाद रूम में अंधेरा हो गया था.
हम दोनों ही बेड पर लेटे हुए बातें कर रहे थे.
बातों बातों में वो मुझे बताने लगी थी कि इनको सेक्स में कोई इंटरेस्ट ही नहीं है. मैं कुछ कहूँ तो उन्हें मेरी बात बुरी लगती है.
मैंने कहा- नहीं तुम नहीं कहा करो, तुम क्यों ये सब कह कर अपनी वैल्यू कम करती हो.
वो बोली- हां, अब मुझे उनसे कुछ नहीं कहना है. मुझे उनसे अब कोई शिकायत नहीं है.
उसकी ऐसी बातें सुनकर मेरा लंड पूरा कड़क हो गया था. मैंने अंडरवियर भी नहीं पहनी थी, तो पजामे में मेरा लंड तम्बू बना रहा था.
रात के 12.30 बज चुके थे और स्वरा को नींद आ चुकी थी.
फिर भी मैंने चैक करने के लिए उसको आवाज लगाई.
उसका कोई जवाब नहीं आया.
मुझे कुछ हिम्मत मिली और मैं धीरे धीरे सरक कर उसके पास चला गया.
वो चित सोई हुई थी और उसने अपने बदन पर चादर डाला हुआ था.
शायद एसी के कारण उसे ठंड लग रही थी.
मैंने चादर को धीरे से एक तरफ किया और जहां उसकी टी-शर्ट के बटन थे, वहां हल्के हाथों से बटन खोलने लगा.
उसकी शर्ट में बटन आराम से खुलने वाले थे, तो जरा सी कोशिश में ही उसके दो बटन खुल गए.
एसी की एलईडी की रोशनी कमरे में काफी उजियाला कर रही थी जिसमें से में मुझे उसका पेट साफ़ दिखाई देने लगा था.
फिर मैं ऊपर वाले बटनों की तरफ गया तो वो उसके फूले हुए मम्मों के कारण उधर के बटन काफी टाइट लगे थे.
मुझसे बड़ी मुश्किल में उसमें से एक ही बटन खुल पाया.
तभी वो हिलने लगी और करवट लेकर पलट गई.
मुझे बहुत खीज हुई क्योंकि मुझे उसके बूब्स टच करने थे और अब वो उस साइड मुँह करके सो गई थी.
फिर भी मैंने अपनी कोशिशें जारी रखीं और कुछ मिनट बाद उसकी पीठ तरफ से उसका पज़ामा नीचे करने की कोशिश करने लगा.
स्वरा की फूली हुई गांड होने के कारण पजामा ने नीचे उतरने से मना कर दिया और मुझसे झांट कुछ नहीं हो पाया.
अब जब तक वो वापिस नहीं मुड़ जाती, तब तक मेरे पास कोई रास्ता नहीं था.
थोड़ी ही देर बाद मुझे ऐसे लगा जैसे शायद उसको सुसु आई क्योंकि वो हिल रही थी और उठने की कोशिश में थी.
मैंने इसे एक मौक़ा माना और मैं फटाफट उठ कर वॉशरूम में चला गया.
बाथरूम का गेट बिना बंद किए मैं मूतने लगा. मैं इस तरह से खड़ा था कि मेरा लंड उसे दिख जाए.
एक मिनट बाद ही वो आंखें मसलती हुई जब बाथरूम के पास आई तो मैं अपने लंड को हिला रहा था.
उसने मेरे लंड को देखा और वो एक तरफ हो गई.
वो बोली- जीजू, गेट बंद नहीं किया आपने.
मैंने कहा- कोई और था नहीं घर पर, मुझे नहीं पता था कि तुम भी उठ जाओगी. गर्मी कुछ ज्यादा थी तो नहीं किया.
वो बोली- ओके.
कुछ पल बाद मैं बाहर आ गया और वो अन्दर चली गई.
उसने सुसु की और हम दोनों वापिस बेड में आ गए.
हम दोनों फिर से सोने लगे.
उस समय रात के 3 बजे से ज्यादा का समय हो गया था.
उसने ठंड की वजह से एसी बंद कर दिया था और चादर भी हटा दिया था.
वो जब सो गई तो मैंने उसके मम्मों को सहलाना शुरू किया.
उसका कोई विरोध नहीं हुआ तो मुझे हिम्मत आ गई.
मेरी सोच यही थी कि आज कैसे भी करके ये मौका नहीं छोड़ना है.
मैंने हल्के से उसको आवाज दी, ‘स्वरा …’
उसका कोई उत्तर नहीं आया.
मैंने फिर से उसे जगाया, तो वो नींद में ही बोली- हां जीजा जी.
मैंने कहा- स्वरा यार, मैं तुझे पसंद करता हूँ.
ये बात सुनकर वो हंसने भी लगी और शर्मा गई.
वो बोली- मैं नींद में इतनी भी बेसुध नहीं हूँ, जो मुझे पता नहीं चल रहा कि आप क्या कर रहे हो. पहले मेरी ब्रा में अपना पानी गिराया, फिर मेरी शर्ट के बटन खोले. मुझे सिड्यूस करने के बाद भी आपने कुछ नहीं किया और 3 बजा दिए.
मैंने कहा- क्या मतलब?
वो बोली- मुझे भी जरूरत है जीजू … बहुत दिन से मैं भी प्यासी हूँ.
इतना कहते ही वो मेरे गले लग गई और हम दोनों लिपकिस करने लगे.
वो मेरे ऊपर आ गई और उसने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया. वो मेरे सीने को पागलों की तरह चूमने और चूसने लगी.
मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया और वो ऊपर ब्रा में रह गई. मैंने उसका पज़ामा उतार कर उससे कहा- हनी 69 में आ जाओ.
उसके पति ने कभी उसकी चूत नहीं चाटी थी तो वो 69 समझ नहीं पा रही थी.
फिर मैंने खुद ही उसकी चूत की तरफ आकर उसकी चूत चाटी, तो वो कंट्रोल से बाहर हो गई. मैं लगा रहा और वो आंह आंह करती रही अपनी चूत मेरे मुँह में देती रही.
कुछ ही पलों में उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुँह में आ गया.
वो झड़ कर मेरे बाजू में लेट गई.
कुछ मिनट बाद मैं नंगा हो गया और उसको गोदी में उठा कर उसे चूमने लगा.
मेरा लंड उसकी चूत में रगड़ मार रहा था.
उसने मेरे लंड को हाथ पकड़ कर रास्ता दिखाया और मैंने लंड चूत में डाल दिया.
वो आंह कह कर सिसक उठी.
उसकी चूत एकदम कसी हुई थी.
साले साहब का लंड एक तो छोटा था और काफी दिन से चूत में गया भी नहीं था.
कुछ देर की उन्ह आह के बाद वो चुदाई के पूरे मजे लेने लगी.
हमारी चुदाई धकापेल चलने लगी.
पहली बार का मामला था तो ये चुदाई 10 मिनट ही चली और मेरा लंड पानी छोड़ने को हो गया.
मैंने लंड चूत से निकला और पानी बाहर ही छोड़ दिया.
वो काफी खुश थी.
कुछ देर बाद हॉट फॅमिली पोर्न का दूसरा राउंड शुरू हो गया.
उस बार मैंने उसे हचक कर चोदा.
वो भी अपनी चूत को हर आसन में चुदवाने को मचल रही थी.
मैंने रात भर अपनी सलहज की चूत का मजा लिया.
पूरी रात चुदाई के चार राउंड करने के बाद हम दोनों काफी थक चुके थे.
स्वरा को भी नींद आ रही थी.
मैंने उसको सोने के लिए कहा और हम दोनों बिना कपड़ों के सो गए.
अगली सुबह मॉर्निंग जब मैं उठा तो देखा कि वह बिस्तर पर नहीं थी.
जब मैंने बाहर देखा, तो वो किचन में काम पर लगी हुई थी.
मैंने उसे आवाज लगाई और चाय बनाने के लिए कहा. मेरे दिमाग़ में अभी भी सेक्स करने की इच्छा चल रही थी.
मैंने उसके रूम में आने से पहले ही लंड सहलाना शुरू कर दिया था.
कुछ ही देर में वो अन्दर आई और मुझे लंड सहलाते देख कर मुस्कुराने लगी.
उसने कहा- जीजू, अभी तक शांत नहीं हुए आप!
मैंने कहा- तू है ही इतनी सेक्सी कि कंट्रोल करना मुश्किल है.
मेरी बात सुनकर वो मेरे पास आकर मुझे लिपकिस करने लगी.
मैंने उसे कपड़े उतारने के लिए कहा.
वो झट से अपना सलवार कुर्ता उतार कर मेरे पास आ गई.
उसने सिर्फ़ ब्लैक कलर की ब्रा डाल रखी थी.
मैंने उसे मेरे मुँह पर बैठने को कहा.
वो अपनी चूत चटवाने के लिए मेरे मुँह पर बैठ गई.
मैंने जीभ से उसकी फुद्दी चाटना शुरू कर दिया. मेरी जितनी जीभ अन्दर तक जा सकती थी, मैंने डालकर मजा लिया.
मेरी इस हरकत से वो फिर से चुदासी हो गई और मेरे मुँह से चूत हटा कर मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.
मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया.
वो और ज़्यादा गर्मा गई और मुझे लंड अन्दर डालने के लिए कहने लगी.
मैं झट से उसके ऊपर चढ़ गया और लंड सैट करके एक ही झटके में पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी फुद्दी में उतार दिया.
वो ‘आह मर गई …’ कह कर सिहर उठी.
कुछ ही मिनट में ही उसको चरम सुख की प्राप्ति होने लगी और उसकी चूत से पानी बाहर बहने लगा.
वो चिल्लाने लगी.
मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड बाहर निकाला और उसके मम्मों पर मुठ मारने लगा, अपने लंड का सारा पानी उसके मम्मों और पेट पर निकाल दिया.
वो खुश हो गई.
उस दिन शाम को मेरे साले और सासू मां को वापस आना था.
मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और तीन बजे तक अपनी सलहज को चोद चोद कर तृप्त कर दिया.
तृतीय भाग से आगे : अगले Antarvasna दिन रविवार था। सभी लोग जल्दी ही उठ गए थे क्योंकि विशाल भैया लखनऊ मेल से सुबह आठ बजे ही आ गये थे। हम लोग विशाल भैया से कोई एक साल के बाद मिल रहे थे। विशाल भैया को मेरे इलाज के बारे में कुछ पता नहीं था। सभी लोग खुश थे, चाय नाश्ते के साथ हंसी मजाक चल रहा था। मैं कुछ जादा ही उत्साहित थी, यह सोच कर कि आज विशाल भैया मुझे चोदेंगे।
अचानक विशाल भैया मेरी तरफ देखते हुए मम्मी से बोले- लगता है रश्मि छोटी की छोटी ही रह जाएगी, बढ़ेगी नहीं।
इस पर मम्मी ने मेरे इलाज के बारे में विशाल भैया को विस्तार से, गम्भीरता से बताया।
ठीक है ! मैंने भी डाक्टर लाल का नाम सुना है काफी मशहूर हैं, उन्होंने जो राय दी है वह ठीक है। जब तक मैं यहाँ हूँ। मैं ही अपना वीर्य पिला दूंगा !
और फिर हंसी मजाक चलने, होने लगा।
विशाल भैया चाय नाश्ता करने के बाद मम्मी से बोले- बुआ जी ! मुझे नींद आ रही है मैं रात को सो नहीं पाया।
मम्मी बोलीं- ठीक है, तुम स्लीपिंग सूट पहन कर कुछ देर आराम कर लो, जब खाना तैयार हो जाएगा, तब मैं तुमको उठा दूंगी।
इसके बाद मेरे फूफा अपने काम से बाहर चले गए, मम्मी और मैं खाने की तैयारी में लग गए।
खाना एक बजे तैयार हो गया। मम्मी ने मुझ से कहा- जाकर विशाल को जगा कर खाने के लिए बुला लो।
मैं भैया को उठाने के लिए उनके कमरे में गई। विशाल भैया सो रहे थे लेकिन उसका लंड पजामे के अन्दर पूरी तरह से खड़ा दिख रहा था। तभी मेरे दिमाग में सुबह की डोज लेने का खयाल आया और मैं उनके लंड को पजामे के ऊपर से ही पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी। इतने में भैया की आँख खुल गई हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ सामान्य तरीके से देखा।
मैंने अपना हाथ लंड पर से हटा लिया और बोली- आप जब सोए हुए थे तो आप का लंड पूरी तरह से खड़ा था, देखिए अभी भी खड़ा है ! यह बताइये कि आप सपने में किसको चोद रहे थे? इतने में मम्मी भी कमरे में आ गईं, उन्होंने मेरी बातें सुन ली और भैया के पजामे की तरफ देखने लगी जिसमें भैया का लंड अभी भी ठुनकी मार रहा था और भैया उसको बैठाने की कोशिश कर रहा था …
हाँ विशाल ! बताओ… कोई लड़की है जिसकी तुम लेते हो?
विशाल भैया थोड़ा सा शरमाते हुए बोले- रेनू ! मेरी क्लास-मेट है !
अच्छा तो तुम उसी को नींद में चोद रहे थे… मम्मी ने व्यंग्य में कहा।
भैया मुस्कराने लगा।
फिर मम्मी ने कहा- चलो, अभी तुम्हारा मूड है ! रेनू समझ कर अपनी फुफेरी बहन को सुबह की डोज दे दो फिर आकर खाना खा लेना।
यह कहते हुए मम्मी कमरे से बाहर निकल गई।
विशाल अभी भी लेटा था उसने मेरी तरफ सेक्सी निगाहों से देखा और बोला- चल रश्मि पहली बार चुदने के लिए तैयार हो जा।
मैं बोली- मैं तो सुबह से ही तैयार हूँ…
तो आ जा ! मेरा लंड पजामे के बाहर निकाल ! इसने भी बहुत दिनों से चूत के दर्शन नहीं किये हैं, तेरी अनचुदी चूत को चोद कर यह मस्त हो जाएगा।
फिर मैने विशाल का पजामा पूरा उतार दिया. उसका लंड अभी भी खड़ा था, मैं गप्प से मुँह में ले कर चूसने लगी। भैया का लंड और कड़ा हो गया। मैं लंड के सुपारे को कस कर चूस रही थी, भैया मेरे मुँह को कायदे से चोद रहा था।
पांच मिनट के बाद वह बोला- तुम अपने सारे कपड़े उतार दो ! अब मैं तुम्हारी चूत को चोदूँगा।
मैंने सारे कपड़े उतार दिए। फिर भैया ने मुझे बिस्तर पर लिटाया, मेरी टांगें फैलाई और फिर 69 की अवस्था में मेरी चूत को चाटने लगा। मैं उसके लंड को कस कर चूसने लगी। जैसे जैसे भैया मेरी चूत को चूस रहा था, वैसे-वैसे मेरी चूत में चुदाई की चाहत बढ़ती जा रही थी, मेरी चूत ने पानी का फव्वारा छोड़ना शुरू कर दिया था। भैया का पूरा चेहरा मेरी चूत के पानी से भीग गया था।
भैया ने कहा- तुम तो बहुत जबरदस्त झड़ती हो ! लगता है तुम्हारी चूत अब चुदने के लिए तैयार है।
मैंने कहा- जी भैया… !
और फिर विशाल उठ कर बैठ गया और मेरी टांगें फैलाकर अपना फनफनाता हुआ लंड मेरी चूत के मुँह पर रख कर धीरे से अन्दर की तरफ ठेला।
हालांकि भैया का लंड थोड़ा पतला था लेकिन लम्बा था। फिर भी सुपारा घुसते ही मेरा चेहरा दर्द के मारे लाल हो गया।
भैया ने मेरी तरफ देखा और बोले- दर्द हो रहा है?
मैंने कहा- हाँ… बहुत दर्द हो रहा है।
भैया बोले- बस थोड़ा सा सह लो ! अभी यह दर्द मस्ती में बदल जएगा।
और भैया लगा कस कर पेलने।
भैया ने सही कहा था ! करीब 5मिनट के बाद मेरा सारा दर्द गायब हो गया था और मैं भैया से चिपटने लगी। विशाल मुझे कस कर चोदे जा रहा था !
मेरे मुँह से अनायास ही निकलने लगा- … ओह्ह्ह्ह्ह……आह्ह्ह्ह्… और कस कर चोदो मेरे अच्छे भैया… ओह माई गॉड प्लीज और अन्दर तक पेलो, मेरी बुर को चोद चोद कर भक्काड़ा कर दो प्लीज भैया… प्लीजऽऽऽ !
इस अलौकिक आनन्द से जैसे मैं पागल हुई जा रही थी और कई बार मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे बुर से पानी का फव्वारा निकला हो।
इतने में भैया ने झट से अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और मुझसे बोले- ले मेरे लंड को जल्दी से चूस ले ! माल निकलने वाला है !
मैंने तुरन्त उनका लन्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी ही देर में भैया का ढ़ेर सारा वीर्य मेरे मुँह में भर गया, मैं तुरन्त वीर्य को गटक गई भैया का वीर्य काफी स्वादिष्ट था।
इसके बाद हम लोग खाना खाने चले गए।
क्रमश: ………….. Antarvasna
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