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‘रागिनी, अब Sex Stories बहुत देर हो चुकी है.. तुम भी जानती हो कि अब हम दोनों के लिए रुकना नामुमकिन है.. अब इस मौके का फायदा उठाओ और मजा लो.. इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया..
पेटीकोट नीचे खिसका.. अब उसने अपनी गांड उठाते हुए पेटीकोट को चूतड़ से निकाल दिया.. उफ्फ्फ्फ्फ़.. उसके वो भरे-गदराये चूतड़.. पतली कमर पर टिके हुए वो गोल गोल गोरे चूतड़.. मैंने उन पर हाथ फेरते हुए पेटीकोट को नीचे किया.. और…
रागिनी ने पैंटी नहीं पहनी थी.. मैं तो जैसे पलक झपकाना भूल गया..और मेरी तो आँखे फटी रह गई.. क्या चूत थी.. दो केले के खंभे जैसी जांघों के बीच में गोरी चूत.. एक भी बाल नही.. मुझे मेरी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि यह किसी 35 साल की औरत की चूत है.. उभरी हुई.. और चूत की सिर्फ़ दरार दिखा रही थी..
मेरी बीवी की चूत तो काली होने लगी थी चुदवा चुदवा कर.. लेकिन यह तो जैसे किसी 20 साल की लड़की की कुंवारी चूत मेरे सामने थी..
मैंने जैसा सोचा था उससे कहीं ज्यादा सेक्सी चूत थी.. जैसे ही मेरी नज़र उसकी चूत को घूरने लगी.. उसने शरमाते हुए सर झुकाया और अपनी चूत को हाथों से ढक लिया। उसकी गुलाबी चूत मुझ से कुछ इंच दूर थी, मैंने धीरे से उसके हाथ हटाये और चूत पर मेरे होंठ रख दिए..
उसके बदन की थरथराहट मैंने महसूस किया… उसके मुँह से.. ओह्ह.. निकला… उसकी चूत से पानी बाहर बह रहा था.. और जैसे ही मैंने उसके पैरों को फैला कर मेरी जीभ चूत की गुलाबी फांक के अन्दर डाली।
‘आह.. ह.ह.ह.ह.हह… सं.ज.ज..ज…य… य..य.य.य… म..त. क..रो…ओह.. हह.ह.ह.ह.. मै..म..र.. जाऊँ..गी..ई..ई…’ मैं उसकी चूत को फैलाकर मुँह से फूँक मार रहा था.. जीभ से उसका रस चूस रहा था..
और वो- हे भगवान्… ये क्या.. हो..रहा.. मुझे… ऐसा पहले..कभी नहीं हुआ..’ वो मेरे चेहरे को और ज्यादा अपनी चूत के ऊपर दबा रही थी..’संजय.. मत त..ड़..पा..ओ… आह.. उफ़.. स्.स्.स्.स् .स्.स्.स्.स्…’
इधर मेरा लंड मानो मेरा बरमूडा फाड़ कर बाहर निकल आयेगा इस तरह उछल रहा था.. मैंने खड़े हो कर अपना बरमोडा खोल कर उसे नीचे किया अन्दर मैंने अंडरवियर नहीं पहना था. इसलिए मेरा लंड उछल कर एकदम से बाहर निकाल आया और सीधा रागिनी के मुँह के सामने डोलने लगा।
रागिनी को इस रूप में देख कर मेरा लंड फटा जा रहा था.. उसकी फूली हुई, रस भरी चूत और उसके नितम्ब की मांसलता से मैं बेकाबू हो रहा था… मेरे लंड को इस तरह बाहर आते देख कर अचानक रागिनी के मुँह से निकल गया- बाप रे! कितना लंबा और कितना मोटा है तुम्हारा.. मुझे संगीता ने कभी नहीं कहा कि वो इतना मजा लेती है!’
उसके चेहरे पर आश्चर्य झलक रहा था।
मैंने कहा ‘रानी.. आज तुम भी इसका मजा लो!’
उसने जल्दी से मेरे लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और वो उसके सुपारे से घूँघट खोल कर उसे ऊपर नीचे करने लगी। सुपारा भी बहुत फूल गया था और उसके मुँह से लार टपक रही थी। रागिनी मेरे लंड को बहुत आहिस्ता आहिस्ता सहला रही थी.. उसने मेरी तरफ़ ऊपर देखा और मुस्कुराते हुए उसने सुपारे पर चूम लिया और जीभ निकाल कर सुपारे का स्वाद लेते हुए अपना मुँह खोल कर उसे मुँह के अन्दर लेने का प्रयास करने लगी…
लेकिन यह उसके बस की बात नहीं थी.. फ़िर भी किसी तरह उसने पूरे सुपारे को अपने थूक से गीला कर दिया था… फ़िर किसी तरह उसने सुपारा मुँह के अन्दर ले लिया और अन्दर बाहर करने लगी..
मैंने उसका सर पकड़ कर धक्के लगाने शुरू किए.. मेरे लंड में अब तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था… मैं अपना लावा उसके मुँह के अन्दर ही निकाल दूंगा, ऐसा महसूस हुआ..
लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता था.. मैं मेरे लंड को उसकी चूत के अन्दर डाल कर उसकी जबरदस्त चुदाई करना चाहता था.. अपना सपना आज सच करना था मुझे.
मैंने उसके मुँह से लंड बाहर निकालते हुए कहा- रागिनी.. रुक जाओ… और लंड बाहर निकालते ही मैंने उसके होंठो को चूम लिया.. उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया..
वो मेरे कान के पास फुसफुसाई- संजय.. मुझे बेड पर ले चलो.. जहाँ तुम संगीता को ऐसे नंगी कर के प्यार करते हो!’
मैंने उसे बांहों में उठा लिया.. उसका वज़न 50 किलो से ज्यादा ही होगा.. फ़िर भी मैंने उसे गोद में उठाया और बेड पर ले जाकर पटक दिया। बेड पर उसने अपने पैर फैला दिए.. मैंने उसे खींच कर बेड के किनारे पर लिया… उसके पैर नीचे लटक रहे थे.. उसके नितम्ब के नीचे एक तकिया रखा उसकी उभरी हुई चूत और ऊपर हो गई..
मैं झुका और मैंने उसकी गुलाबी चूत पर फ़िर से अपने होंठ रख दिए.. इतनी प्यारी चूत मैंने आज तक नहीं देखी थी। मैंने अब तक 8-10 कुंवारी चूतों की सील भी तोड़ी है और शादीशुदा की तो गिनती ही मुझे याद नहीं.. लेकिन रागिनी की चूत सबसे अलग थी.. दो बच्चों की माँ की चूत इतनी प्यारी.. मुझे पूरा विश्वास था कि इसकी चूत चोदने में किसी कुंवारी चूत से कम मजा नहीं आएगा…
मैंने उसके पैर फैलाये और नीचे अपने पंजों पर बैठ कर उसके जांघ मेरे कंधे पर रखते हुए अपनी जीभ फ़िर से उसकी रसीली चूत में लगा दी.. स्लर.र.र.प.प.प. . स्लर.र.र.प.प.प की आवाज़ करते हुए मैं उसके बहते हुए नमकीन पानी को चूसते हुए मेरी जीभ की नोंक उसकी चूत में गोल गोल फिरते हुए मथने लगा।
रागिनी अब बहुत गरम हो रही थी.. अपनी चूत को मेरी जीभ से एकदम चिपका रही थी.. तीन-चार मिनट बाद वो चिल्लाई.. ओह्ह.ह.ह.ह. सं.ज ज ज य य य य…ओह्ह..माँ.. तुम सच में बहुत सेक्सी हो.. संगीता.. किस्मत वाली है.. आह्ह.. अब.. डाल दो…ओ.ओ. . और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी..
मैंने पूछा- क्या डाल दूँ..?
उसने कहा- मत सताओ.. मैं जल रही हूँ.. तुम्हारा ये डाल दो मेरी वाली में..’
मैं अब उसे तड़पाना चाहता था.. मैंने कहा- किसमें क्या डालना है? उसका नाम बोलो ना?’
उसने कहा- मुझे शर्म आती है.. मेरे मुँह से गन्दी बात मत कहलवाओ!’
मैंने कहा- यह गन्दी बात है? तुम जब तक नहीं कहोगी मैं कुछ नहीं करूँगा..
और मैं ऊँगली से उसकी चूत के उभरे दाने को दबाते हुए रगड़ने लगा.. चूत फड़कने लगी थी.. मैंने ऊँगली अन्दर डाली और उसकी चूत के अन्दर का ज़ी-स्पॉट को ढूंढ कर उसे कुरेदा..
रागिनी अब रुक नहीं सकती थी.. उसने चीखते हुए कहा..सं.. ज.ज.ज. य.य.य… मुझे मा..र.. डा.लो..गे.. क्या.. आ..आ.आ… करो ना..
मैंने कहा- तुम बोलो जल्दी से..
अब मैंने खड़े हो कर लंड को अपने हाथ में पकड़ा और सुपारे को सहलाते हुए मसलने लगा..
उसने अपने पैर फैलाते हुए चूत का मुँह खोला.. लेकिन मैं खड़ा रहा।
‘क्या हुआ?’ उसने पूछा।
मैंने कहा- तुम कहो ना..!
अब उसने कहा- अपना लंड मेरी चूत में डालो और चोदो मुझे..
उसका इतना कहना था कि मैंने लंड को उसकी चूत के छेद पर रखा और दो-तीन बार ऊपर नीचे रगड़ा और छोटे से लाल सुराख़ पर रखा.. उसकी चूचियों को एक हाथ से सहलाते हुए मैंने हल्का सा लंड को अन्दर दबाया। उसने अपने पैरों को थोड़ा और फैला दिया ताकि मेरा मोटा लंड अन्दर जा सके.. लेकिन सुपारा चूत के गीलेपन से अन्दर फिसल कर फंस गया.. उसकी चूत मुझे बहुत कसी हुई लगी..
मैंने जैसे ही मेरे कमर को सख्त करके और अन्दर दबाया तो वो हल्के से चीख उठी.. उई..ई.ई.ई… धीरे.. बहुत मोटा है…
मैंने उसके स्तन को दबाते हुए उसे प्यार किया और लंड को अन्दर धकेलता रहा.. गीली चूत में लंड फिसलता हुआ जा रहा था.. लेकिन उसकी चूत फ़ैल रही थी और उसे दर्द हो रहा था यह उसके चेहरे से पता चल रहा था..
मैंने अब लंड को थोड़ा पीछे खींचा.. और उसके जाँघों को कस कर पकड़ते हुए पूरी ताकत से लंड को अन्दर धकेला.. मेरा लंड उसकी चूत को पूरा चीरता हुआ.. सर.. र.रर.र.से अन्दर फिसला और रागिनी अब अपनी चीख नहीं रोक पाई.. म..र.. ग..ई.. इ.इ.ई.ई.ई.ई… इ.ई.ई.ईई.ई.. मेरा लंड उसकी चूत में गहराई में घुस चुका था और अन्दर उसकी बच्चे दानी से टकराया था..
मैं पूरा लंड अन्दर डाल कर रुक गया.. ताकि उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए और उसकी चूत को मेरे मोटे और लंबे लंड की आदत हो जाए।
थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ.. उसने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुराई- संजय.. बहुत लंबा और बहुत मोटा है तुम्हारा लंड.. इतना दर्द तो मुझे सुहागरात में भी नहीं हुआ था.. और इतना भीतर तक आज तक कुछ नहीं घुसा’
मैंने पूछा- मोहन (उसका पति) का छोटा है क्या’?
उसने कहा- तुम्हारे लंड का आधा भी नहीं होगा.. इसीलिए तो मुझे इतनी तकलीफ हो रही है.. ऐसा लग रहा है चूत एकदम भर गई है.. और किसी तेज़ धार वाले चाकू के काट कर तुमने लंड को अन्दर डाला है।’
मैंने कहा- अच्छा लग रहा है ना?’
उसने हाँ में सर हिलाया.. मैंने उसके होंठो को चूमा और अब मैंने आहिस्ता-आहिस्ता लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया..
अब उसके गदराये नितम्बों में हाथ लगाते हुए मैंने उसे और ऊपर उठाया और धक्कों की गति बढ़ाने लगा.. उसके मुँह से आह..ऑफ़..चोदो संजय.. अपनी बीवी की सहेली को चोदो.. हाँ उफ्फ्फ क्या लंड है..आह्ह..
अब वो अपनी चूत से मेरे लंड को कसने लगी थी.. मेरे गोटियाँ उसके गांड और चूतड़ पर टकरा के ‘थाप..थाप..थपाक’ की आवाज़ निकल रही थी.. उसके गोरे गोरे.. चिकने चूतड़ और ऊपर उठाते हुए मैंने उसके पैर उसकी चूचियों तक मोड़ दिए और लंड और गहराई में पेलने लगा.. मैं लंड को पूरा बाहर खींच रहा था, सिर्फ़ सुपाड़ा अन्दर रहता था.. और वापिस पूरा अन्दर डाल देता था.. मेरी स्पीड बहुत बढ़ गई थी..
तभी रागिनी चिल्लाई- संजय और जोर से.. हाँ.. जोर से. आह्ह.. आह्ह..मैं.. गई..ई.ई.ई..ई…
इस तरह चीखते हुए उसने अपने चूतड तीन-चार बार जोर से हवा में उछाले और शान्त पड़ गई.. मैं समझ गया कि वो झड़ गई है.. उसकी चूत से बहुत सारा पानी निकला.. मेरे लंड को अपने गरम गरम पानी से नहला दिया.. उसका पानी निकलने से चिकनाई और बढ़ गई.. अब चूत से फच फच..फचाक की आवाज़ आने लगी..
रागिनी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया.. और अपनी बाहें मेरी पीठ पर कस दी. उसके लंबे नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए.. और नोंचने लगी. ..
मैं भी उसे जम कर चोद रहा था.. उसके मुँह से अब सिर्फ़ आह.. ओह्ह..उफ़.. श..श..स.. स.स.स.. ऐसी आवाजें और तेज़ साँस निकल रही थी…
मैं थोड़ा उठा तो उसने अपने पैर मेरी गर्दन से लपेट दिए..उसके चूतड़ मैंने हवा में उठा लिए और मेरा लंड अन्दर बाहर होने लगा.. मैं उसके मांसल चूतड़ों को अपनी उँगलियों से दबा रहा था.. मेरे नाखून उसे गड़ रहे थे। मेरा लंड पूरा उसकी गहराई तक जा रहा था। रागिनी अब मस्त हो चुकी थी.. अब तक उसकी चूत ने तीन बार पानी छोड़ दिया था..
अब मेरे लंड ने उसकी चूत को भरने की तय्यारी कर ली थी.. वो और मोटा और कड़क हो चुका था..
मैं उसकी गांड को दबाते हुए उसके होंठो पर झुका और उससे कहा- रागिनी मेरा होने वाला है..’
कहते हुए मैंने बहुत जोर से अपना लंड उसकी चूत की गहराई में धकेल दिया जड़ तक और उसे दबा कर पिचकारी से मेरा लावा उसकी चूत में डालने लगा.. मालूम नहीं कितनी पिचकारी निकली… लेकिन उसकी चूत पूरी भर गई.. और मेरे वीर्य की गर्मी से रागिनी फ़िर से झड़ गई. और मुझसे बहुत जोर से चिपक गई।
मैं भी उसके ऊपर लेट गया .. ऐसे करीब दस मिनट हम एक दूसरे से चिपके रहे.. मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था..हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए गहरी साँस लेते हुए लेटे हुए थे। उसका नरम और गदराया बदन मेरी बांहों में था। मैं उसे हल्के-हल्के चूम भी रहा था। उसके सख्त उरोज मेरे सीने में दबे हुए थे।
मेरी बीवी को इस तरह सीने से लगाने पर उसकी चूचियाँ मेरे सीने में दब कर चपटी हो जाती है.. लेकिन रागिनी के खड़े स्तनाग्र मानो मेरा सीना भेद कर छेद कर देंगे। ऐसा महसूस हो रहा था कि दो गरम नरम कबूतर मेरे और उसके सीने के बीच में दबे हुए है.. ये सब मिल कर मेरे लंड को पूरा ढीला होने से रोक रहे थे.. वो आधा सख्त रागिनी की चूत में फ़िर से चुदाई के लिए तैयार हो रहा था।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला.. उस पर मेरा और उसका दोनों का रस लगा हुआ था और उसकी चूत से भी मेरा क्रीम बहते हुए उसकी गांड की तरफ़ बह रहा था।
उसकी चूत एकदम लाल हो चुकी थी.. और मुँह भी खुल गया था… चूत थोड़ी फूल भी गई थी। मैं उसके वक्ष को अब हल्के से सहला रहा था.. थोड़ा उठ कर उसके रसीले होंठों को फ़िर से चूमा- रागिनी कैसा रहा यह अनुभव?’
‘बुरा नहीं था!’ उसने मुस्कुराते हुए कहा ‘लेकिन तुम्हारे इस मोटे और लंबे लंड ने मुझे आज पहली बार चुदाई का मजा क्या है, यह दिखा दिया।’ कहकर उसने मेरे लंड पर हाथ रखा और उसे दबाया।
‘रागिनी क्या पहली बार तुमने अपने पति के सिवा किसी दूसरे का लंड लिया?’
‘हाँ.. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कभी करुँगी… मैं सच कह रही हूँ।’
‘लेकिन अच्छा लगा ना?’
‘हाँ, बहुत अच्छा.. मुझे तो अभी तक विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मैंने ऐसा किया है.. लेकिन अगर तुम यह बात गुप्त रखोगे तो मैं इसके बाद भी तुम्हारे साथ करने के लिए तैयार हूँ।’ कहकर उसने मेरे होंठो को चूम लिया.. फ़िर उठ कर बैठी..’मुझे बाथरूम जाना है..मैं अभी आती हूँ!’
और वो नंगी ही बाथरूम गई.. मैं उसके जाते हुए बदन को देख रहा था.. उसके नितम्ब और चूतड़.. पतली कमर उफ्फ्फ.. मैं उसके चूतड़ देख कर फ़िर से गरम हो गया.. चूतड़ों के बीच में लंड डाल कर घिसने का मजा ही कुछ और है…
उसके वापिस आते ही मैंने कहा ‘रागिनी मुझे तुम्हारे चूतड़ और गांड देखना है.. मैं वहाँ प्यार करना चाहता हूँ।’
‘मुझे पूरी नंगी कर के सब कुछ तो देख लिया तुमने!’
‘रागिनी तुम्हारे चूतड़ सच में किसी भी मर्द का लंड खड़ा कर देंगे। शायद तुम्हारे पीछे चलने वाले मर्द तो अपने पैंट में ही झड़ जाते होंगे!’ मैंने उसका हाथ पकड़ कर पास खींचा और उसका मुँह घुमा दिया और उसके चूतड़ पर हाथ फेरते हुए कहा।
‘अच्छा..!?’
मैं उसके चूतड़ सहला रहा था, उन्हें दबा रहा था। फ़िर दोनों चूतड़ों को दो हाथ से फैलाया.. ओह्ह उसकी गांड भी एकदम गुलाबी थी और चूतडों के बहुत अन्दर की तरफ़ यानि गहराई में थी। एकदम नाज़ुक सी गुलाबी गांड! मैं गांड का शौकीन नहीं हूँ.. लेकिन ऐसी मतवाली गांड देख कर मेरा लंड अपनी आदत बदलने के लिए तैयार हो गया।
मैंने उसकी गांड में एक ऊँगली डालने की कोशिश की.. वो चिहुंक उठी.. मैंने गांड फैला कर उसके छिद्र में थूका और ऊँगली को घुमाते हुए धीरे धीरे ऊँगली अन्दर करने लगा। आधी ऊँगली अन्दर जाते ही उसने कहा..’संजय वहाँ नहीं प्लीज़.. बहुत दर्द होगा.. ‘
मैंने पूछा- कभी किया है गाण्ड में?
उसने कहा- हाँ मेरे पति ने एक बार किया था, लेकिन बहुत दर्द की वजह से हमने फ़िर नहीं किया.. और उनका ज्यादा सख्त नहीं था इसलिए अन्दर भी नहीं गया।
मैंने उससे कहा- मैं भी कोशिश करता हूँ..
उसने कहा- नहीं.. प्लीज़.. तुम्हारा तो बहुत मोटा और लंबा है.. और ये सख्त भी है.. ये तो फाड़ कर अन्दर घुस जाएगा।
मैंने कहा- मैं धीरे धीरे करूँगा..
कह कर मैं रसोई में गया और वहाँ से मक्खन ले कर आया। मैंने उसकी गांड पर और अपने लंड पर बहुत सारा मक्खन लगाया। फ़िर उसके चूचियों पर भी लगाया और उन्हें चूसना शुरू किया.. उसे मैंने एक कुर्सी पर बिठाया, उसके पैर ऊपर अपने कंधे पर लिए और मैं उसके सामने पंजो के बल बैठा, उसकी चूत पर भी मक्खन लगाया और उसे चाटने लगा।
उसके चूत के दाने को मुँह में लेकर जैसे ही मैंने चूसना शुरू किया उसकी चूत से पानी निकलने लगा.. मक्खन और उसका पानी दोनों मैं जीभ से चाट रहा था.. और ऐसा करते हुए मैं एक ऊँगली उसकी गांड में डाल रहा था.. मक्खन लगा होने से अब ऊँगली आराम से अन्दर बाहर हो रही थी। मैंने फ़िर दो ऊँगली अन्दर डाली.. और गांड के छेद को बड़ा करने के लिए गोल गोल घुमाने लगा.. इस तरह रागिनी की चूत और गांड दोनों जगह एक साथ मैं गरम कर रहा था.. मेरे होंठो में उसकी चूत का दाना था.. जिसे मैं बहुत तेज़ी से चूस रहा था..
उसने मेरे बालों में हाथ फेरते हुए मेरे सर को अपनी चूत पर दबा लिया और..’आह..संजय..गई..मै..गईई..आह..आह्ह.. जोर से.. ओह्ह ऐसे मत चूसो.. मेरा.. हो जाएगा… ओह्ह.. ओह्ह.. सं..ज..ज..य..य… आ..आ.आ… आ.आह्ह..गई..ई. ई.ई.ई..स्.. स् स्.स्.स. ‘ करते हुए उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
मैंने अपनी जीभ उसी चूत पर फेरते हुए गांड से ऊँगली निकाल ली और फ़िर उसकी चूत का पानी उसकी गांड पर लगाने लगा.. मेरा लंड तो फ़िर से खंभे जैसा खड़ा हो चुका था। मैंने खड़े होते हुए अपना लंड उसके मुँह के पास दिया, उसने मखन लगे लंड को दोनों हाथों से पकड़ा और अपना मुँह खोल कर अन्दर ले लिया .. पूरे लंड को उसने चाटा, फ़िर से मखन लगाया।
मैंने उसे खड़ा किया और बेड पकड़ कर झुकाया।
इस तरह खड़े होने से उसके चौड़े और उभरे हुए चूतड़ बहुत ही सेक्सी दिख रहे थे। गांड का छेद और चूत दोनों उभर आए थे। मैंने पहले उसके चूत और गांड दोनों पर लंड को बहुत अच्छे से रगड़ा और पहले मैंने उसकी चूत के ऊपर मेरा लंड टिकाया और उसकी पतली कमर को जोर से पकड़ कर दबाया.. मेरा लंड अन्दर घुसने लगा.. उसकी कसी हुई चूत मेरा लंड धीरे धीरे अन्दर ले रही थी.. दूसरे झटके में पूरा लंड अन्दर डाल दिया.. और मैं उससे चिपक कर उसकी चूचियों को मसलने लगा..
इधर मेरे लंड के हल्के हल्के धक्कों से रागिनी कराह रही थी- संजय बहुत भीतर घुस गया है.. इस पोज़ में और ज्यादा अन्दर तक घुसा दिया तुमने.. आह्ह. मैंने कभी ऐसा नहीं किया.. चोदो..
वो भी अपने चूतड़ पीछे धकेल कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अपनी छोटी सी चूत में। अब मैंने थोड़ा ऊँगली में लिया और उसकी गांड के छेद में फ़िर से लगाया और ऊँगली अन्दर डाल कर घुमाने लगा.. गांड का छेद कुछ खुल गया था..
अचानक मैंने लंड पूरा बाहर खींचा और उसे गांड के छेद पर रखा.. रागिनी के कुछ समझने के पहले मैंने उसकी पतली कमर को पूरी ताकत से जकड़ कर एक धक्का लगा दिया..’भच्च’ की आवाज़ हुई और लंड का सुपारा गांड में घुस गया और रागिनी चीख कर छूटने का प्रयास करने लगी..
लेकिन मेरी पकड़ मज़बूत थी!
‘ओह्ह..मा..र. डा.आ.आ ला.आ..आ… स्.स्.स्.स्.स्.स्… निकालो..संजय..
मैंने कहा- रुको रानी..! अभी मजा आयेगा..!
और मैं उसके चूतड़ दबाने लगा.. लंड को भी दबाते हुए अन्दर धकेल रहा था.. मक्खन की वजह से उसकी टाईट गांड में लंड फिसल रहा था। मेरा लंड भी छिल रहा था.. आधे से ज्यादा अन्दर करने के बाद मैंने अब लंड को हल्के से आगे पीछे करने लगा..
रागिनी की आंखों से आंसू निकल आए थे. लेकिन जैसे जैसे लंड अन्दर जा रहा था उसे मजा आने लगा था.. अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा और लंड को बाहर खींच कर जोर का धक्का दिया और पूरा लंड जड़ तक उसकी गांड में समा गया..
रागिनी फ़िर से चीखी और सामने की तरफ़ गिरने को हुई तो मैंने सामने हाथ बढ़ाया और उसकी चूचियों को थाम लिया.. पूरा लंड अन्दर निकल कर मैं उसकी गांड मार रहा था.. अब मैंने गांड और चूत दोनों को एक साथ चोदने का इरादा किया.. और लंड को गांड से निकाला और एक ही धक्के में चूत के अन्दर डाल दिया फ़िर वैसे ही चूत से बाहर निकला और गांड में एक धक्के में अन्दर पूरा लंड डाल दिया..
इस तरह से एक बार गांड में फ़िर एक बार चूत में.. मैं मेरे लंड से रागिनी को चोद रहा था.. अब उसे भी मजा आ रहा था..
वो कहने लगी- शादी के 15 साल में चुदाई का ऐसा मजा मुझे नहीं मिला।’
मैंने कहा- रानी तुम्हारी गांड और चूतड़ इतने सुंदर हैं कि मेरे जैसा मर्द जो कि गांड का शौकीन नहीं है उसे भी आज तुम्हारे गांड में लंड डालने का दिल हो गया!’
उसने पूछा- सच! मेरे चूतड़ इतने सुंदर हैं?’
मैंने कहा- सुंदर कहना तो कम होगा.. ये खूबसूरत और बहुत ही उत्तेजक हैं।’
कहते हुए मैं उसकी गांड और चूत चोदने लगा… करीब बीस मिनट से ज्यादा हो गया था।
रागिनी कहने लगी- मेरे पैर दुःख रहे हैं..
मैंने कहा- ठीक है!
मैंने लंड बाहर निकला और सामने रखी कुर्सी पर बैठ गया.. उस कुर्सी में बाजू के हत्थे नहीं थे..
मैंने रागिनी से कहा- अब तुम अपनी चूत मेरे लंड के ऊपर रखो और दोनों पैर मेरे पैरों के साइड में फैला लो.. मेरी तरफ़ मुँह करके बैठो..
उसने कहा- नहीं संजय.. इतने मोटे पर मैं नहीं बैठ पाऊँगी.. बहुत दर्द होगा.. और मैंने ऐसा कभी किया भी नहीं..
मैंने उसे अपने पास खींचा और कहा- तुम आओ तो..
वो दोनों पैर फैला कर मेरे लंड के ऊपर आई..
मैंने कहा.. अब अपने छेद को इसके ऊपर रखो..
उसने वैसा ही किया..
मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे बैठाने लगा..
जैसे ही सुपाड़ा अन्दर गया वो खड़ी होने लगी.. नहीं संजय.. ऐसे में ये बहुत अन्दर घुस जाएगा.. कितना लंबा और कड़क है..
मैंने उसे उठाने नहीं दिया.. और अब उसके चुचूक मेरे मुँह के सामने थे.. मैंने एक को मुँह में लिया और नीचे से धक्का दिया.. और उसकी कमर को नीचे दबाया.. मेरा लंड ‘गप्प्प’ से पूरा अन्दर घुस गया.. मैंने दूसरा हाथ उसकी गांड के पास लगाया.. गांड का मुँह अब खुल गया था.. मैंने उसके होंठ अपने होंठों में लिए और उसे चूतड़ों से पकड़ कर उसे मेरे सीने से चिपका लिया..
दोस्तो, इस आसन में चुदाई का मजा ही अलग है।
मैं उसके होंठ चूस रहा था और वो आहिस्ता आहिस्ता अपनी गांड उठा कर चूत में लंड अन्दर बाहर कर रही थी.. मैं कभी उसके होंठ.. कभी चूची और कभी उसके कंधे चूमता..
इस पोज़ में 5-7 मिनट में ही वो झड़ गई..
अब मैंने उसे वैसे ही गोद में उठाया.. क्यूंकि मेरा लंड भी अब झड़ने वाला था.. उसे फ़िर से बेड के किनारे पर लिटाया.. कुर्सी से बिस्तर तक जाते हुए लंड उसकी चूत में ही था। बेड के किनारे पर उसे लिटाकर उसके पैर मेरे कंधे पर लिए और फ़िर तो मैंने दस मिनट तक उसकी चूत का बुरा हाल किया.. और आख़िर में लंड को उसकी चूत के अन्दर गहराई में रख कर एक मिनट तक पिचकारी मारता रहा.. मुझे लगता है उस वक्त मेरे लंड ने जितनी पिचकारी निकली होगी उतनी पहले कभी नहीं निकली..
उसके बाद मैं थक कर उसके ऊपर ही लेट गया। उसकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी और मेरे साथ वो भी झड़ गई थी…
मैंने उसे पकड़ कर बेड के ऊपर ले लिया वो मेरे सीने पर थी.. लंड चूत में!
मैंने उसे चूमते हुए कहा- आई लव यू रागिनी! मैं बहुत दिनों से तुम्हें पाना चाहता था!’
वो मुस्कुराई और कहा- मैं यह तो नहीं कहूँगी कि मैं तुम्हें पाना चाहती थी.. लेकिन आज के बाद जरुर तुम्हें हमेशा पाना चाहूंगी। तुमने मुझे सेक्स का जो मजा दिया है उससे मैं अनजान थी.. और इसमे इतना मजा है यह मुझे पता ही नहीं था।’ कहते हुए उसने मुझे चूम लिया।
‘तुम खुश हो न संजय? तुमने जो चाहा, वो मैंने तुम्हें दिया.. ज़िन्दगी में पहली बार मैंने पीछे से सेक्स का मजा लिया.. तुम पहले मर्द हो जिसने मेरे पीछे वाले में अपना ये मोटा वाला पूरा अन्दर डाला।’
‘मेरी रानी रागिनी, मैं खुश ही नहीं खुशकिस्मत हूँ जो तुम्हारी लाजवाब चूत और मस्त गांड में मेरे लंड को जगह मिली।’
उसके बाद करीब एक घंटा हम दोनों वैसे ही नंगे पड़े रहे.. फ़िर वो उठी और बाथरूम गई.. वहाँ से बाहर आ कर उसने कपड़े पहने..’संजय, मुझे लगता है कि मैंने जरुरत से ज्यादा वक्त यहाँ बिता दिया है, अब मैं चलूंगी!’
‘काश तुम और रुक सकती.. शायद तुम ठीक कहती हो .. किसी को शक करने का मौका नहीं देना चाहिए..’
मैं भी उठा .. बाथरूम में गया। रागिनी ने ड्रेसिंग टेबल पर मेरी बीवी के मेकअप के समान से अपना हुलिया ठीक किया.. मैं बाथरूम से नंगा ही साफ़ करके बाहर आया तो वो तैयार थी.. मैंने उसे फ़िर से बांहों में लिया और किस किया.. उसने मेरे लंड को पकड़ कर सहलाया.. मैंने उसे बताया कि संगीता अभी और दो हफ्ते नहीं लौटेगी..
उसने कहा- अब घर पर नहीं! कहीं बाहर.. और तुमने मेरी जो हालत की है मैं वैसे भी दो-तीन दिन कुछ नहीं कर पाऊँगी.. जानते हो मैं वहाँ हाथ लगा कर धो भी नहीं पा रही हूँ.. बहुत दर्द हो रहा है और बहुत फूल गई है.. वो तो अच्छा है मेरे पति महीने में एक बार ही करते है वो भी कभी कभी.. इसलिए जब मैं ठीक हो जाऊँगी तो तुम्हें कॉल करुँगी..
मैंने घड़ी देखी .. अब ऑफिस आधे दिन के लिए ही जा सकता था।
मैंने देखा रागिनी की चाल भी बदल चुकी है.. थोड़ा लंगडा रही थी.. शायद गांड मारने की वजह से.. पैर भी फैला के चल रही थी.. फ़िर भी वो दरवाजे तक गई.. दरवाजा खोला .. और कहा..’थैन्क यू!’ और मुस्कुराकर चली गई..
दोस्तो, मैं उस दिन की हर घटना को सपना समझ रहा था। लेकिन दो दिन बाद ही रागिनी का फ़ोन आया कि आज बच्चे आज अपने मामा के घर गए है और पति भी टूर पर हैं तीन दिन के लिए, इसलिए ऑफिस से सीधे मेरे घर आ जाओ..
उस रात की कहानी आपके मेल मिलने के बाद! Sex Stories
दोस्तो, मैंने पिछले दिनों अन्तर्वासना की Antarvasna कहानियाँ पढ़ीं तो मेरा भी मन हुआ कि मैं भी अपने अनुभव आपके साथ बाटूँ। मैं आपको अपने बारे में बताती हूँ.
मेरा नाम मंजू है. मैं 34 साल की शादीशुदा औरत हूँ. मेरे पति बिज़नस के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं.
कुछ दिन पहले की बात है मेरे पति दो दिन के लिए घर से बाहर गए हुए थे और मैं घर में अकेली टीवी पर ब्लू फ़िल्म देख रही थी. ब्लू फ़िल्म देख देख कर मेरी चूत में से पानी आने लगा था. मेरा मन कर रहा था कि कोई मज़ेदार लंड मिल जाए तो जी भर के चुदाई करवाऊं.
वो कहते हैं ना कि सच्चे दिल से मांगो तो सब कुछ मिलता है. घर की कॉल बेल बजी तो मुझे लगा कि भगवान् ने मेरी सुन ली. मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि मेरे पति के ख़ास दोस्तों वर्मा और गुप्ता बाहर खड़े थे.
अचानक उनको देख कर मैं चौंक गई. मैंने उनसे कहा कि ‘ये’ तो बाहर गए हैं दो दिन बाद आयेंगे. यह बात सुन कर वो दोनों भी उदास हो गए और बाहर से ही वापस जाने लगे.
मैंने सोचा कि अगर इन लोगों को अन्दर नहीं बुलाऊंगी तो ये लोग बुरा मान जायेंगे, मैंने उनसे कहा कि आप लोग अन्दर आ जाईये.
ये सुन कर मेरे पति के खास दोस्त वर्मा ने कहा कि नहीं भाभी हम लोग चलते हैं. हम लोग तो ये सोच कर आए थे कि पाटिल घर में होगा तो बैठ कर दो दो पैग लगायेंगे.
मैं आप लोगों को बता दूँ कि पाटिल मेरे पति का नाम है और ये सारे दोस्त हमारे घर में अक्सर दारू पार्टी करते हैं. क्योंकि इन लोगों के घरों मैं दारू पीना मना है.
मेने एक अच्छे मेजबान का फ़र्ज़ निभाते हुए कहा कि कोई बात नहीं आप लोग अन्दर बैठ कर पैग लगा लीजिये मुझे कोई परेशानी नहीं है. मेरी बात सुन कर दोनों खुश होते हुए बोले ‘क्या सचमुच हम लोग अन्दर बैठ कर पी सकते हैं.’
मैंने कहा- क्यों नहीं आप का ही घर है आप लोग अन्दर आ जाईए, मैं आप लोगों के लिए पानी और सोडा का इंतजाम कर देती हूँ.
ये सुन कर गुप्ता ने कहा कि एक शर्त है ‘आपको भी हमारा साथ देना होगा !’
मैं पहले भी कई बार अपने पति के सामने इन लोगों के साथ दारू पी चुकी थी इसलिए इन लोगों को पता था कि मैं भी दारू पीती हूँ. मैंने तुंरत हाँ भर दी और वो दोनों अन्दर आ गए.
अन्दर आते ही उनकी निगाह टीवी पर चल रही ब्लू फ़िल्म पर गई जिसे मैं बंद करना भूल गई थी. मैंने जल्दी से शरमा कर टीवी बंद कर दिया. लेकिन वो दोनों ये सब देख कर मुस्करा रहे थे. मैं किचेन मैं पानी और सोडा लेने चली गई.
किचन में जाकर मैंने सोचा कि मैं तो एक लंड के इंतज़ार मैं थी और भगवान् ने मुझे दो दो लंड गिफ्ट में भेज दिए. क्यों ना इस मौके का फायदा उठाया जाए और ये सोच कर मैंने सोडा और पानी की बोतल फ्रीज़ में से निकली और तीन गिलास साथ में ले कर वापस कमरे में आ गई.
वर्मा ने अपनी जेब से व्हिस्की कि बोतल निकाल कर मुझे दी और मैं तीन पैग बनाने लगी. वो लोग साथ मैं खाने के लिए स्नेक्स भी लाये थे. हम लोग बातें करते हुए पैग लगा रहे थे. कुछ ही देर में हम सभी पर थोड़ा थोड़ा सुरूर छाने लगा.
उन दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया और फ़िर गुप्ता ने मुझसे पूछा ‘भाभी आप टीवी पर ब्लू फ़िल्म देख रहीं थीं तो फिर आपने टीवी बंद क्यों कर दिया. टीवी चलाओ ना हम लोग भी फ़िल्म देखना चाहते हैं. ‘
अब तक मुझ पर भी शराब नशा चढ़ने लगा था. मैंने सोचा कि यही मौका है चुदाई का माहौल बनाने का. ये सोच कर मैं उठी और टीवी चालू करने लगी.
टीवी चालू करते हुए मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया जिसे मैंने जानबूझ कर ठीक नहीं किया. मेरे कसे हुए ब्लाउज में से बड़े बड़े बूब्स आधे बाहर निकल आए थे.
मैंने तिरछी नज़र से देखा कि वो दोनों मेरे बूब्स पर निगाह गड़ाये हुए मुस्करा रहे हैं.
मैंने टीवी पर ब्लू फ़िल्म चालू कर दी और उसी सोफे पर जा कर बैठ गई जिस पर वो दोनों बैठे हुए थे. अब मैं उन दोनों के बीच में बैठी थी. टीवी पर चल रही फ़िल्म मैं भी एक औरत को दो आदमी चोद रहे थे.
ये सीन देख कर हम तीनो ही गर्म हो गए. मैंने जान बूझ कर अपना पल्लू नीचे सरका दिया और सोफे पर आधी लेट गई. मेरे बगल में बैठे वर्मा ने पहल की और धीरे से मेरे बूब्स के ऊपर हाथ फिराने लगा.
मैंने कोई विरोध नहीं किया और आँखे बंद कर लीं. थोडी ही देर में उन दोनों ने मिल कर मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और मेरे बड़े बड़े फलों का रस चूसने लगे.
अब हम लोग खुल चुके थे इसलिए मैंने भी हाथ बढ़ा कर पैंट के ऊपर से ही उनके लंड को टटोलना शुरू कर दिया था. वर्मा मेरे होटों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और गुप्ता मेरी एक चूची को मुंह में भर कर पीने लगा.
अभी हमारा खेल चालू हुआ ही था कि अचानक घर कि कॉल बेल फ़िर से बज गई. हम तीनो चौंक गए. मैंने कहा कि अब कौन हो सकता है.
तभी गुप्ता ने कहा- अरे यार में समझ गया, शर्मा और ठाकर होंगे हमने उन लोगों को भी बुलाया था.
मैंने जल्दी से टीवी बंद कर दिया और अपने कपडे ठीक करने लगी तो वर्मा ने मेरे हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया और कहा- रहने दो भाभी ये लोग भी अपने ही दोस्त हैं इनसे क्या शरमाना?
जब तक मैं कुछ कहती तब तक गुप्ता ने दरवाजा खोल दिया था और मेरे सामने तीन नए लोग खड़े थे. जिनका नाम शर्मा, ठाकर और नारंग था.
अब घर में पॉँच मर्द थे और मैं अकेली औरत. शराब का दौर चल रहा था सब लोग नशे में थे. मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे. मेरी बरसों की इच्छा आज पूरी होने जा रही थी. मेरी इच्छा थी की मैं एक साथ पॉँच मर्दों के साथ चुदाई का खेल खेलूं और आज ये सपना सच होने वाला था.
किसी ने मेरे बदन से ब्लाऊज़ उतार दिया था.
वर्मा और गुप्ता मेरी एक एक चूची को मुंह में लेकर चूस रहे थे.
ठाकर जो बाद में आया था उसने अपना लंड निकाल कर मेरे मुंह में डाल दिया और नारंग और शर्मा मेरे नीचे के कपडे हटाने की कोशिश कर रहे थे.
मैंने उन सब को रोक कर कहा कि चलो अन्दर बेड रूम मैं चलते हैं. ये सुन कर उन पांचों ने मुझे गोदी में उठा लिया और ले जा कर बेड पर डाल दिया. अब मेरे बदन पर कोई कपडा नहीं था.
ठाकर जिसका लंड काला और ज्यादा ही लंबा था उसने मेरे मुंह में अपना पूरा लंड डाल दिया. मैं उसके लंड को लेमनचूस की तरह चूसने लगी.
नारंग और वर्मा ने मेरे बोबे मसलने और चूसने चालू कर दिए.
वर्मा ने मेरी दायीं तरफ़ आ कर मेरे हाथ में अपना मोटा लंड पकड़ा दिया. जिसे मैंने आगे पीछे करना चालू कर दिया.
गुप्ता पलंग के नीचे बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा. मुझे जन्नत का मज़ा मिल रहा था.
मेरे चारों तरफ़ अलग अलग तरह के लंड थे. मैं किसी भी लंड को हाथ में लेकर खेलने लगती. मेरे मुंह में भी अलग अलग साइज़ के लंड डाले जा रहे थे और मैं सभी लंड बड़े प्यार से चाट और चूस रही थी. तभी उनमे में से किसी ने मेरी चूत में अपनी जीभ डाल दी. खुशी के मारे मेरे मुंह से चीख निकल गई.
मैं जोर से चिल्लाई ‘वैरी गुड… ऐसे ही चूसो मादरचोदों चाटो मेरी चूत को…’. मैं पूरे नशे में थी और उछाल उछाल कर चूत चुसवा रही थी.
ठाकर ने मेरे मुंह में लंड डालकर मुंह की ही चुदाई शुरू कर दी. दो लोग मेरे हाथ में लंड पकड़ा कर मुठ मरवा रहे थे. एक जन अभी खाली था इसलिए मैंने कहा- मेरे यारो… अभी तो एक छेद बाकी है उसमे भी तो कुछ डालो!
मेरी बात सुनते ही वर्मा ने सब को रोक कर कहा कि रुको पहले आसन लगा लेते हैं. सब ने अपनी अपनी पोसिशन ले ली.
नीचे वर्मा सीधा लेट गया और मुझसे कहा- आओ भाभीजान मेरे ऊपर आओ मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड डाल कर मज़ा देता हूँ.
मैं तुंरत अपनी गांड चौड़ी करके उसके लंड पर बैठ गई. वर्मा का लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा मोटा नहीं था इसलिए आराम से मेरी गांड में चला गया.
दोस्तों मैं आपको बता दूँ कि मेरे पति भी काफी माहिर चुद्दकड़ हैं और मुझे बहुत मज़ेदार ढंग से चोदते हैं लेकिन मेरी प्यास उतनी ही बढ़ जाती है जितना मैं चुदवाती हूँ. यही कारण है कि आज मैं अपने पति के पाँच दोस्तों से एक साथ चुदवाने को तैयार हूँ.
हाँ तो दोस्तों वर्मा का लंड मैंने अपनी गांड में डाल लिया और सीधी होकर अपनी चूत ऊपर की तरफ करते हुए बोली ‘ चलो कौन मेरी चूत का बाजा बजाना चाहता है वो आगे आ जाए.’
नारंग जिसका लंड थोडी देर मैंने मुंह में डाल कर चूसा था वो मेरे ऊपर आ गया और निशाना लगाते हुए बोला ‘मेरी जान सबसे पहले मेरा स्वाद चखो.’
गुप्ता भी मेरे सर कि तरफ़ आते हुए बोला ‘मेरी प्यारी भाभी मुझे अपने मुंह में डालने दो प्लीज़.’
अब शर्मा और ठाकर बच गए थे, मैंने उनसे कहा कि आओ मेरे यारो, अभी तो मेरे दोनों हाथ खाली हैं.
इस तरह पोसिशन लेने के बाद घमासान चुदाई चालू हो गई. मेरी गांड और चूत में एक साथ लंड अन्दर बाहर हो रहे थे. मुझे जम कर मज़ा आ रहा था.
मैं बीच बीच में अपने मुंह से लंड निकाल कर सिस्कारियाँ लेने लगी ‘आआ… और जोर से… चोद… ओऊऊ… फाड़ डालोऊऊओ… मेरी चूत… बहनचोदों एक भी छेद मत छोड़ना… सब जगह डाल दोऊऊओ… फाड़ डाल मेरी गांड… वर्मा…के बच्चे… और जोर से नारंग… अन्दर तक डाल अपना हथियार…यार… आर आर अअअ आ आ आ…मज़ा आ गया.’
काफी देर तक पोसिशन बदल बदल कर ये चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा. कभी किसी ने मेरे मुंह में लंड डाला कभी किसी ने. अलग अलग लंडों का स्वाद मेरे मुंह में आता रहा. करीब एक घंटे तक चले इस खेल में मैं पॉँच बार झड़ चुकी थी. अब मेरी चुदाई की आग शांत होने लगी थी.
मैंने उन सबसे कहा- मेरे यारों… एक बात ध्यान रखना कोई भी अपना पानी इधर उधर नहीं डालेगा…सबको मेरे मुंह में ही अपना पानी डालना है… मैं बहुत प्यासी हूँ…मेरी प्यास तुम्हारे पानी से ही बुझेगी. कम से कम पचास ग्राम पानी पिलाना मुझे.’
वो सब लोग भी अब अपनी मंजिल पर पहुँच चुके थे.
गुप्ता ने कहा- चल भोसड़ी की अब नीचे लेट जा और पानी पी… आज नहला देंगे तुझे मेरी जान.
मैं पलंग पर सीधी लेट गई और उन पांचों ने मेरे मुंह के चारों तरफ़ घेरा डाल लिया. मैंने एक एक करके सबके लंड को मुंह में ले कर पानी निगलना चालू कर दिया.
मेरा पूरा मुंह और गला लिसलिसे वीर्य से भर गया. सबका मिलाजुला स्वाद मुझे कॉकटेल का मज़ा दे रहा था और मैं स्वाद ले ले कर उन सबका पानी पीती चली गई और सबके लंडों को चाट चाट कर साफ़ कर दिया.
मेरी बरसों की तम्न्ना आज पूरी हो गई थी.
दोस्तों मेरी चुदाई के और भी मज़ेदार किस्से मैं आप को बताऊंगी पहले आप मुझे जरूर बताएं कि ये किस्सा आप को कैसा लगा.Antarvasna
मेरे घर में एक पार्टी थी। मैंने एक Hindi Sex Stories खेल रखा था और सब उसके नियम सुनने को बेचैन थे। १५ मिनट हो चुके थे।
“दोस्तों! अब जो खेल मैंने रखा है… प्लीज़ सब ध्यान से उसके नियम सुन लें”, मैं सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए बोला। “दीवार पर लगी घड़ी में इस समय साढ़े सात बजे हैं। ठीक सवा आठ पर बार बंद हो जायेगा। और सवा आठ से नौ के बीच में हर मर्द को अपनी औरतों की जोड़ी को एक बार जरूर चोदना है। ठीक नौ बजे औरतों को अपने-अपने मर्द का लंड चूसना है। जिस जोड़ी की औरत अपने मर्द का पानी पहले छुड़ाने में कामयाब होगी, वो ही इस खेल की विजेता होगी। कोई सवाल है किसी के दिल में?”
“क्या हम औरतों की चुदाई एक से ज्यादा बार नहीं कर सकते?” आर्यन ने पूछा।
“तुम्हारा दिल चाहे… उतनी बार तुम उनको चोद सकते हो पर तुम्हारी जोड़ीदार औरतों को ही तकलीफ होगी तुम्हारा पानी छुड़ाने में”, मैंने जवाब दिया।
“पहले किसको चोदना है… माँ को या बेटी को?” राम ने पूछा।
“इसकी कोई पाबंदी नहीं है। ये तुम लोग आपस में तय कर सकते हो”, मैंने उसकी बात का खुलासा किया।
“नहीं मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ”, मिली ने मेरे लंड को चूमते हुए कहा, “उम्र के हिसाब से अहमियत बड़ों को पहले मिलनी चाहिये। क्या सब मेरी बात को मानते हैं?”
सबने उसकी बात का समर्थन किया।
“तो ठीक है! जो बड़ी है पहले वो चुदाई करायेगी”, मैंने कहा।
“क्या जीतने वाले को इनाम भी मिलने वाला है? अगर हाँ तो वो क्या है?” आयेशा ने पूछा।
“इनाम ये है कि जीतने वाली आज अपना चुदाई का कोई भी ख्वाब पूरा कर सकती है”, मैंने कहा, “और कोई सवाल?”
“क्या लंड चूसने के भी कोई नियम हैं?” अनिता ने पूछा।
“नहीं उसके कोई नियम नहीं हैं, सिर्फ़ इतना कि लंड चूसते वक्त औरतें अपने हाथों का इस्तमाल नहीं करेंगी।” मैंने कहा, “और कुछ पूछना है किसी को।”
“हाँ! बार वापस कब खुलेगा?” योगिता ने पूछा।
“जैसे ही ये खेल कोई जीत लेगा”, मैंने जवाब दिया, “वैसे बार अभी खुला है।”
“मम्मी!” आर्यन रूही के पास पहुँचा।
“हाँ बेटा! तुम ड्रिंक ले सकते हो पर ज्यादा मत लेना”, रूही ने आर्यन के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा जबकि खुद तो रूही नशे में झूम रही थी।
“क्या तुमने पहले कभी शराब पी है?” आयेशा ने आर्यन से पूछा।
“नहीं आज से पहले कभी नहीं पी, पर आज पीने वाला हूँ”, आर्यन ने कहा।
“चलो तुम्हें बीयर पिलाती हूँ… पहली बार ही व्हिस्की पियोगे तो चोद नहीं पाओगे… चलो मेरा भी पैग खत्म हो गया है”, आयेशा लड़खड़ाती हुई आर्यन को घसीट कर बार की ओर ले गयी।
“कितनी अच्छी जोड़ी है दोनों की!” मैंने रूही के कान में कहा।
“हाँ! मैं भी यही सोच रही थी” रूही ने जवाब दिया।
जब हम सब ड्रिंक करते हुए आपस में बातें कर रहे थे तो एम-डी ने कहा, “सुनील मैं तुम्हें बता सकता हूँ कि आज कौन जीतेगा।”
“कौन?” मैंने पूछा।
“मैं अपने पैसे अनिता पर लगा सकता हूँ। मेरी ज़िंदगी में कई औरतों ने मेरा लंड चूसा पर अनिता का लंड चूसने का अंदाज़ ही निराला है। वो एक नपुंसक के लंड में भी जान डाल सकती है”, एम-डी ने हँसते हुए कहा।
“पर सर, मिली, रूही और प्रीती भी किसी से कम नहीं हैं। मुझे लगता है कि स्पर्धा काफी नज़दीकी होगी,” मैंने कहा।
“अनुभवी इंसान की बात को मानना सीखो… हमेशा फ़ायदे में रहोगे”, एम-डी ने अपनी छाती पे हाथ ठोंकते हुए कहा।
ठीक सवा आठ बजे, सात खड़े लंड, सात गीली हुई चूतों में घुस गये और एक साथ सात आवाज़ें “आआआआहहहहह” की कमरे में गूँज पड़ी। थोड़ी ही देर में कमरे का माहोल गरमा गया। चारों तरफ से सिसकरियों की आवाज़ गूँज रही थी, “ओहहहहहह हाँ…आआआआ चोदो मुझे!!!!!”कोई कह रहा था, “हाहाहाँआआआ जोर से!!!! और जोर से डालो!!!! हाँ और जोर से!!!!”
कुछ देर बाद सिसकरियाँ बड़बड़ाहट में बदल गयीं, “रुकना मत… चोदते जाओ… और जोर से… मेरा छूटने वाला है…” और मर्दों ने एक जोर की “आआआआआहहहहह” के साथ अपना पानी उनकी चूत में छोड़ दिया।
जैसे ही सब मर्दों का लंड दोबारा खड़ा हुआ तो वो बेटियों की चूत में अपना लंड घुसा कर चोदने लगे। थोड़ी देर में सब औरतों की चुदाई एक बार हो चुकी थी। सब मर्द अपनी उखड़ी साँसों को संभालते हुए आराम कर रहे थे, सिवाय आर्यन के। “आयेशा चलो एक बार फिर से चुदाई करते हैं। तुम्हारा तो सपना कोई होगा नहीं!”
“सच कहूँ तो एक नहीं… कई हैं! और मैं आज उनमें से अपने एक सपने को जरूर पूरा करूँगी!” आयेशा ने जवाब दिया।
निराश होता हुआ आर्यन प्रीती के पास पहुँचा, “प्रीती! चलो चुदाई करते हैं।”
“अभी नहीं! मैं नहीं चाहती हूँ कि आयेशा इस खेल में हार जाये”, प्रीती ने जवाब दिया।
“जैसे सब बैठे हैं वैसे ही तुम भी बैठ जाओ और नौ बजने का इंतज़ार करो”, कहकर आयेशा ने आर्यन को एक कुर्सी पर बिठा दिया।
ठीक नौ बजे औरतों की जोड़ी में जो छोटी थी, वो अपने मर्दों का लंड चूसने लगी, “आयेशा! जरा धीरे चूसो! तुम्हारे दाँत मुझे चुभ रहे हैं”, आर्यन ने दर्द से सिसकते हुए कहा।
“आर्यन! अपना मुँह बंद रखो… मेरे हिसाब से आयेशा सही ढंग से चूस रही है”, प्रीती ने उसे डाँटते हुए कहा।
टीना मेरे लंड को चूस रही थी। उसे भी लंड चूसने का अनुभव नहीं था इसलिये उसके भी दाँत मेरे लंड पर चूभ रहे थे। थोड़ी देर बाद सब बड़ी औरतों ने छोटी लड़कियों का स्थान ले लिया। “शुक्रिया!!! आल्लाह!!!!” आर्यन ने एक गहरी साँस ली। “आयेशा तुमने तो मेरे लौड़े को चबा ही डाला था।”
मैंने अनिता को कहते हुए सुना, “मीना! कैसा चल रहा है?”
“वैसे तो ठीक है पर खड़ा नहीं हो रहा”, मीना ने जवाब दिया।
“लाओ इसके लंड को मुझे चूसने दो”, अनिता ने कहा, “मैं इसके लौड़े को थोड़ी देर में ऐसा कर दूँगी कि ये कमरे के चारों ओर पिचकारी मारता रहेगा।” थोड़ी देर मैं जय के मुँह से सिसकरियाँ फूटनी शुरू हो गयीं। “हाँ…आआआआ चूसो ऐए!!!!! हाय ओहहहहह हाँ जोर से… ऊईईई।”
वैसे तो मिली भी काफी अच्छी तरह चूस रही थी पर जय के चेहरे से लग रहा था कि वो लोग बाज़ी मार ले जायेंगे।
“ओहहहह अनिता..आआआआआ मेरा छूटने वाला है!!!!” जय जोर से चिल्लाया, “हाँ जोर से चूसो… हाँ ऐसे ही… हाँ मेरा छूटा।” उसका शरीर अकड़ा और उसके लंड ने अपने वीर्य की पिचकारी अनिता के मुँह में छोड़ दी।
खुशी से झूमते हुए अनिता ने जय के लंड को अपने मुँह में से निकाला और मीना और जय को अपनी बाँहों में भर लिया, “हम जीत गये… हम जीत गये!!!”
जब सब मर्दों का पानी छूट गया तो सभी औरतें अनिता को बधाई देने लगीं। “एम-डी सही कह रहा था, लगता है हम सब को तुमसे ट्यूशन लेना पड़ेगा। अब बताओ तुम अपना कौन सा सपना पूरा करना चाहोगी?”
“मेरा एक सपना है जिसके बारे में मैं हमेशा सोचती रहती थी किंतु…!” अनिता कहने जा रही थी पर मैं बीच में बोला, “अनिता! तुम अपना समय लो और सोच कर बोलो। हम खाना खाने के बाद तुम्हारा सपना जरूर पूरा करेंगे। अब बार खुला है और जो लोग फिर से ड्रिंक्स लेना चाहें… ले सकते हैं।”
“सुनील! मुझे मालूम है कि मैं क्या करना चाहती हूँ… मुझे सोचने की जरूरत नहीं है!” अनिता हँसते हुए बोली।
खाना खाने के बाद सब ये जानने को उत्सुक थे कि अनिता का वो ऐसा कौन सा सपना है जिसे वो पूरा करना चाहती है। सब अपने-अपने ड्रिंक्स लेकर अनिता के पास इकट्ठा हो गये। “मेरा हमेशा से सपना रहा है कि मुझे पाँच मर्द मिल कर चोदें और मेरे शरीर को अपने वीर्य से नहला दें… आज मैं अपना ये सपना पूरा करूँगी”, अनिता ने अपना ड्रिंक पीते हुए कहा।
“क्या पाँच मर्द? वो कैसे?” अंजू ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“सीधी सी बात है, एक मेरी चूत में, एक मेरी गाँड में, और एक मेरे मुँह में! बाकी बचे दो… तो वो या तो मेरे हाथों में या मेरी चूचियों के बीच!” अनिता ने बताया।
“ठीक है तुम अपने साथी चुन सकती हो?” मैंने अनिता से कहा।
“विजय तुम नीचे लेट जाओ और मैं तुम्हारे ऊपर चढ़ कर तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लूँगी। जय… तुम मेरी गाँड मारोगे और मैं आर्यन के लंबे लंड को अपने मुँह से चूसूँगी। राम और श्याम के लंड को अपने हाथों में लूँगी।”
जब सब लड़कों ने अपनी जगह ले ली तो अनिता ने कहा, “लड़कों! मेरा सपना है कि तुम सब आपस में ताल मेल रखते हुए अपना पानी छोड़ोगे और सब मेरे बदन पर ही छोड़ोगे। इससे सबको ज्यादा मज़ा मिलेगा।”
“हे राम और श्याम! ध्यान रखना जब तुम अपना पानी छोड़ो तो अनिता के बदन पर ही छोड़ना… कहीं मेरे चेहरे पर मत छोड़ना”, विजय ने उनसे कहा।
“राम! तुम इसकी बांयी आँख पर पिचकारी मारना और मैं इसकी दांयी आँख पर”, श्याम ने हँसते हुए कहा। इसके पहले कि विजय कुछ कहता, अनिता बोली, “विजय ये मज़ाक कर रहे हैं! और अगर ये ऐसा करते भी हैं तो तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें चाट-चाट कर साफ कर दूँगी।”
नज़ारा जो अनिता ने रखा था, वो देखने लायक था। जय उसकी गाँड में अपना लंड जड़ तक पेल देता जिससे जय का लंड भी अंदर तक घुस जाता। राम और श्याम के लंड अनिता की बंद हथेलियों में अगे पीछे हो रहे थे। और आर्यन के लंड को अनिता जोर-जोर से चूस रही थी।
कमरे में सबकी सिसकरियाँ गूँज रही थीं। जय उसकी गाँड में लंड पेलते हुए बड़बड़ा रहा था, “ले साली! और जोर से ले!!! बहुत शौक है ना पाँच मर्दों से चुदवाने का??? आज मैंने तेरी गाँड ना फाड़ दी तो कहना!!!”
वहीं आर्यन बड़बड़ा रहा था, “हाँ! और जोर से चूसो ना!!!! हाँ अपने गले तक ले लो!!! ओहहहह आआआहहहह।”
अनिता जोर-जोर से लंड चूसने लगी तो आर्यन तुरंत बोला “अनिता आँटी! धीरे! मेरा छूटने वाला है।” अनिता ने अपनी रफ़तार धीमी कर दी।
“भाई! कैसा चल रहा है?” जय ने पूछा।
“मज़ा आ रहा है, ऐसा लग रहा है कि तुम्हारा लंड मेरे लंड को स्पर्श कर रहा है। हाँ इसी तरह अंदर तक अपने लंड को इसकी गाँड में पेलते रहो।” विजय ने नीचे से धक्का लगाते हुए जवाब दिया।
“हाँ जोर से!!! जोर से चोदो मुझे सब मिलकर!!!! मेरा छूटने वाला है!!!” अनिता जोर-जोर से अपने कुल्हे उछाल रही थी।
आर्यन ने अनिता के सर को अपने हाथों से पकड़ रखा था और अपना लंड उसके गले तक डाल कर चोद रहा था।
बहुत ही दिलकश नज़ारा था। ऐसी सामुहिक और भयंकर चुदाई ना तो मैंने देखी थी ना ही मैंने की थी।
“ओहहह मेरा…आआ छूटा…आआआ!” अनिता का इतना कहना था कि आर्यन ने भी, “ओहहहह मेरा छूटा!!!!” कहकर अपने लंड की बौंछार अनिता के चेहरे पर कर दी।
विजय ने जोर से अनिता को कमर से पकड़ कर अपने लंड को ऊपर की ओर करते हुए अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। वहीं जय ने अपने लंड के दो चार धक्के उसकी गाँड में और मारे और अपना पानी अनिता की पीठ पर छोड़ने लगा।
राम और श्याम ने अपने लंड को ठीक अनिता के चेहरे और छाती का निशाना बना कर अपनी पिचकारी छोड़ना शुरू किया। अरे संभालो! विजय कुछ कहता इसके पहले उनके लंड से छूटा वीर्य उसके चेहरे पे गिर पड़ा।
फातिमा जोर से हँस पड़ी और आयेशा ताली बजाने लगी कि तभी दो और बौंछार विजय के चेहरे से टकरायी।
“गंदे साले! क्या और कोई जगह नहीं मिली निशाना साधने के लिये”, विजय गुस्से में बोला।
“अरे गुस्सा क्यों करते हो”, कहकर अनिता उसके चेहरे पर लगे वीर्य को चाटने लगी। जब उसने विजय को अच्छी तरह साफ कर दिया तो निढाल पड़ गयी।
जब सब कोई सुस्ता चुके थे तो आयेशा ने कहा, “सर! अब मेरी बारी है।”
“नहीं तुम्हारी नहीं! अब मीना की बारी है”, मैंने कहा, “मीना! तुम बताओ तुम्हारा क्या सपना है।”
“मेरा कोई खास सपना नहीं है। एम-डी और आप मुझे ऑफिस में चोदते हैं… मैं उससे ही खुश हूँ”, मीना ने जवाब दिया। मीना बुरी तरह नशे में धुत्त थी और सोफे पर पसरी हुई थी।
“तो फिर दोनों के साथ यहाँ क्यों नहीं चुदवाती?” फातिमा ने कहा।
“दोनों मुझे कई बार एक साथ चोद चुके हैं… इसलिये एक बार और चुदवाने से मुझे कोई फ़रक नहीं पड़ेगा”, मीना ने हँसते हुए कहा, “एम-डी सर! आप लेट जायें और नीचे से मेरी चूत में लंड को डालें और सुनील सर, आप पीछे से मेरी गाँड मारें। आपका मोटा और लंबा लंड मुझे अपनी गाँड में अच्छा लगता है।”
कमरे में फिर एक बार चारों तरफ चुदाई का आलम था। मैं यहाँ एम-डी के साथ मिलकर मीना को चोद रहा था और चारों तरफ कोई ना कोई किसी को चोद रहा था।
थोड़ी देर बाद सब थक कर निढाल पड़े थे। पार्टी करीब-करीब खत्म होने को आ गयी थी। “आयेशा! रात काफी हो चुकी है… चलो तुम्हें घर छोड़ आऊँ”, मैंने आयेशा से कहा।
“सर! मुझे यहीं रहने दें ना… वैसे भी घर में सबको पता है कि मैं यहाँ हूँ”, आयेशा थोड़ा नाराज़ होते हुए बोली। नशे में उसकी आवाज़ बहक रही थी।
“वो तो सब ठीक है… पर काम ऐसा करना चाहिये कि तुम्हें दोबारा भी यहाँ आने की इजाज़त मिल जाये”, मैंने उसे समझाते हुए कहा।
“ठीक है! पर क्या मैं सुबह यहाँ आ सकती हूँ? रूही मैडम! आप और आर्यन कल यहीं हैं ना?” आयेशा ने कहा।
“हाँ मेरी जान! हम यहीं हैं”, रूही ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा। “तुम कल सुबह आ जाना… हम इंतज़ार करेंगे।” फिर आयेशा को कपड़े पहनाने में विजय ने मेरी मदद की क्योंकि आयेशा को तो नशे में कुछ होश नहीं था। बड़ी मुश्किल से उसे कार में बिठा कर उसके घर ले गया।
जब मैं आयेशा को उसके घर छोड़ कर आया तो देखा कि सब किसी ना किसी को बाँहों में लिये सो गये है। मैंने देखा कि प्रीती और रजनी अकेले सो रहे हैं तो मैं भी उनके बीच में जाकर सो गया।
“ट्रिंग…ट्रिंग” डोर बेल की घंटी बजी। मैंने उसे अनसुना कर दिया। “ट्रिंग…ट्रिंग” घंटी फिर बजी और देर तक बज रही थी। इतनी सुबह कौन हो सकता है? सोचकर मैंने घड़ी पर देखा तो सुबह के नौ बज चुके थे। दरवाजा खोलते ही मैं चौंक पड़ा, दरवाजे पर आयेशा खड़ी थी। उसकी आँखें अभी भी नशे में सुर्ख थीं। वो सो कर उठते ही सीधी यहाँ आ गयी थी।
“ओह गॉड! इतनी सुबह… तुम यहाँ क्या कर रही हो?”
“मैं यहाँ पार्टी जॉयन करने आयी हूँ”, उसने अंदर आते हुए कहा, “आप ही ने तो कहा था कि मैं आ सकती हूँ।”
“हाँ कहा था पर इतनी सुबह आ जाओगी… उम्मीद नहीं थी, सब सोये पड़े हैं”, मैंने कहा।
“आप इसकी चिंता मत करो… मैं सबको जगा दूँगी”, कहकर वो अपने कपड़े उतारने लगी। “ये वक्त चुदाई करने का है ना कि सोकर बर्बाद करने का।”
वो आर्यन को ढूँढने लगी जो अंजू और मंजू के बीच सोया हुआ था। उसने उसके मुर्झाये लंड को अपने हाथों में लिया। “गुड मोर्निंग मेरे प्यारे सुनीला!” कहकर उसके लंड को चूसने लगी।
“ओहहहह बहुत ही अच्छा लग रहा है!” आर्यन ने बड़बड़ाते हुए अपनी आँखें खोलीं, “ओह आयेशा! तो ये तुम हो?”
“हाँ मेरे सुनीला! तुम्हारी जान आयेशा, और सिर्फ़ तुम्हारी”, आयेशा थोड़ा मुस्कुरायी, “आराम से लेटे रहो और मज़े लो।”
आर्यन के मुँह से सिसकरी निकाल पड़ी और वो अंजू और मंजू की चूत को सहलाने लगा। अंजू और मंजू ने आँख खोलकर जब देखा तो दोनों आर्यन की छाती में चेहरा छिपा कर उसके निप्पल पर अपनी ज़ुबान फिराने लगीं।
“आयेशा का सुझाव बुरा नहीं है”, सोचते हुए मैं भी देखने लगा कि कोई उठा हुआ है कि नहीं। मैंने देखा कि विजय सिमरन और साक्षी के बीच सोया हुआ था। सिमरन अपनी पीठ के बल लेटी हुई थी। मैं उसकी टाँगों के बीच आकर उसकी चूत को चाटने लगा।
“ओह प्लीज़ नहीं, प्लीज़ रुक जाओ ना!” वो चिल्ला पड़ी
“क्या तुम्हें मेरा, तुम्हारी चूत चाटना अच्छा नहीं लग रहा?” मैंने थोड़ा झल्लाते हुए पूछा।
“ऐसी बात नहीं है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है पर मुझे पिशाब जाना है और अगर मैं जल्दी से नहीं गयी यहीं तुम्हारे मुँह पर कर दूँगी”, सिमरन ने जवाब दिया।
“ठीक है जाओ!” मैंने उसे जाना दिया। वो लगभग दौड़ती हुई बाथरूम की तरफ लपकी। बाकी लड़कियों की तरह उसने भी पिछली रात अपने सैंडल नहीं उतारे थे। मैं फिर दूसरों की तरफ देखने लगा। मैंने अनिता और मीना को उठाया और उन्हें दूसरों को भी उठाने के लिये कहा। इतने में सिमरन टॉयलट से लौट कर आ रही थी।
“ओये ये यहाँ क्या चल रहा है?” वो बोली जब उसने आर्यन को तीन लड़कियों के साथ मज़े लेते देखा। “किसी को बुरा तो नहीं लगेगा अगर मैं भी इसमें शामिल हो जाऊँ?” कहकर उसने अपनी चूत आर्यन के मुँह पर रख दी।
“ये क्या कर रही हो?” आर्यन ने पूछा।
“कुछ नहीं… मेरी चूत के पानी के रूप में तुम्हें सुबह की चाय पिला रही हूँ”, सिमरन ने हँसते हुए कहा, “चलो अब अपनी चाय पियो।”
“सुनील! क्या तुमने जय को देखा है?” अनिता ने पूछा। मैंने अपनी गर्दन ना में हिला दी।
“मैंने उसे उस कमरे में जाते देखा था”, रूही ने जवाब दिया।
“आओ रूही हम उसे ढूँढते हैं”, अनिता ने रूही का हाथ पकड़ते हुए कहा। जय उन्हें बाथरूम में नहाते हुए मिला। छोटी बच्चियों की तरह उन्होंने जय को बाथरूम के बाहर खींचा और बिस्तर पर ढकेल दिया। जय का पूरा बदन साबुन से भीगा हुआ था।
“रूही! मैं इसका लंड चूसती हूँ और तुम अपनी चूत इसे चाटने के लिये दे दो?” अनिता जोर से चिल्लायी।
कमरे के बाहर मैंने देखा कि एम-डी फातिमा की चूत चाट रहा था वहीं प्रीती उसके लंड को मुँह में लेकर जोरों से चूस रही थी।
हम सब लोग पूरे दिन चुदाई, चटाई, गाँड मराई करते रहे। हालत ये थी कि सब चोद-चोद के इतना थक चुके थी कि किसी में भी ताकत नहीं बची थी।
दूसरे दिन रूही अपने बच्चों के साथ वापस चली गयी और वादा कर गयी कि वो जल्द ही वापस आयेगी। शाम को मेरी बहनें अपने पतियों के साथ और मेरे साले अपनी बीवियों के साथ अपने-अपने घर जाने के लिये ट्रेन में सवार हो गये।
कई महीने गुज़र गये। इसी दौरान हम कई बार रूही के यहाँ हो आये थे और रूही भी कई बार हमारे यहाँ आ चुकी थी। गौरी के इक्किसवें जन्मदिन को अब एक हफ्ता ही रह गया था और हमें उसके जन्मदिन की तैयारियाँ करनी थी।
गौरी के जन्मदिन से एक दिन पहले रजनी, योगिता, टीना, प्रीती और मैं, सब डिसकस कर रहे थे कि हम गौरी की कुँवारी चूत को चोदने के प्रोग्रम को कैसे अंजाम दें। हमें पता था कि इस बार एम-डी पूरी सावधानी बरतेगा कि मैं उसकी बेटी कि कुँवारी चूत ना फाड़ पाऊँ। हम ये भी जानते थे कि टीना की तरह वो हमें गौरी की बर्थडे पार्टी नहीं करने देगा।
“योगिता! तुम्हें क्या लगता है कि हमें मिली से भी होशियार रहना चाहिये?” मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“नहीं… मुझे ऐसा नहीं लगता। वो बड़ी प्रैक्टीकल किस्म की औरत है। उसे ये बात मालूम है कि उसकी बेटी की चूत को एक दिन तो फटना ही है, सो कल फटे या आज… उसे कोई फ़रक नहीं पड़ता”, योगिता ने जवाब दिया।
“अगर ऐसा है तो क्या हम उसे सारी हकीकत बता कर अपना राज़दार बना सकते हैं?” मैंने पूछा।
“नहीं उसे बिल्कुल मत बताना। सारी बात जानने के बाद शायद वो अपनी बेटी की चूत चुदवाने में हमारी मदद ना करे पर चुद जाने के बाद शायद वो ऐतराज़ ना करे”, योगिता ने जवाब दिया।
“क्या उसके जन्मदिन की पार्टी होगी?” प्रीती ने पूछा।
“जरूर होगी! गौरी अपने पापा की लाडली बेटी है। उन्होंने उसे एक बड़ी पार्टी का वादा किया है और वो अपना वादा जरूर पूरा करेंगे, बस सवाल ये उठता है कि वो पार्टी कहाँ पर रखेंगे”, टीना ने जवाब दिया।
“क्या गौरी अब भी अपनी उस इंगलिश टीचर की चूत चाटती है और अपनी चटवाती है… क्या नाम था उस टीचर का… मुझे याद नहीं आ रहा… हाँ याद आया, मिस ब्रिगेंज़ा!” प्रीती ने पूछा।
“बदकिस्मती से हाँ! पूरी लेस्बियन बन गयी है!” रजनी ने जवाब दिया, “और उसका यही शौक हमारे काम को अंजाम देने में आड़े आ सकता है।”
उसी समय फोन की घंटी बजी। एम-डी लाईन पर था, “सुनील! मैं तुम्हें और प्रीती को मेरी बेटी गौरी की जन्मदिन की पार्टी की दावत देता हूँ… पार्टी शनिवार की शाम को है… सो जरूर से पहुँच जाना।”
“थैंक यू सर!” मैंने जवाब दिया, “पर सर! आपने क्यों तकलीफ उठायी? मुझसे कह दिया होता… मैं पार्टी का सारा इंतज़ाम कर देता, जैसे मैंने टीना की पार्टी का इंतज़ाम किया था।”
“सुनील! क्या तुम मुझे बेवकूफ़ समझते हो?” एम-डी ने जोर से हँसते हुए कहा, “तुम्हें क्या लगता है कि मैं अपनी मासूम बेटी को तुम्हारे फ्लैट पे आसानी से आने दूँगा जिससे तुम मेरी बेटी की कुँवारी चूत को चोद सको? किसी भी हालत में नहीं सुनील! इस बार पार्टी मेरे घर पे होगी। और मैं तुम्हें सावधान कर रहा हूँ कि अगर तुमने मेरी बेटी की ओर आँख उठा कर देखा तो मैं तुम्हें जान से मर दूँगा।”
“सर! आप जबरदस्ती मुझ पर शक कर रहे हैं”, मैंने झूठ बोलते हुए कहा, “मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है।”
“हो सकता है तुम्हारा इराद ना हो… फिर भी मैं तुम्हें सावधान कर रहा हूँ”, एम-डी हंसा, “ठीक है शनिवार कि शाम को मिलते हैं”, कहकर उसने फोन रख दिया।
“एम-डी था फोन पर… उसने गौरी के जन्मदिन की पार्टी के लिये शनिवार की शाम की दावत दी है हमें”, मैंने सबको बताया।
“पर तुमने ऐसा क्यों कहा कि तुम्हारा गौरी की कुँवारी चूत चोदने का कोई इरादा नहीं है?” रजनी ने पूछा।
“मैंने ये इसलिये कहा कि जिससे वो निश्चिंत हो जाये और आखिरी वक्त पर अपना इरादा ना बदल ले”, मैंने जवाब दिया।
“अब जब पार्टी उसके घर पर है तो हम अपने इरादों को कैसे कामयाब बनायेंगे?” योगिता ने पूछा।
“जब मैं उससे बात कर रहा था तो एक ऑयडिया मेरे दिमाग में आया है… हम वही तरीका आजमा सकते हैं जो हमने सायरा की कुँवारी चूत के लिये आजमाया था”, मैंने कहा।
“ये सायरा कौन है और क्या हुआ था?” योगिता ने पूछा।
तब रजनी ने उसे सब बताया कि किस तरह और कैसे हमने सायरा की कुँवारी चूत चुदवायी थी।
“ये तो सब समझ में आता है… फिर भी ये बात समझ में नहीं आती कि गौरी अपनी चूत चुदवाने को कैसे तैयार होगी?” योगिता ने पूछा।
“रुको सब लोग! मेरे पास एक प्लैन है”, प्रीती ने कहा, “उसकी चूत चूसने की आदत ही उसकी चूत का उदघाटन करायेगी।” फिर प्रीती हमें प्लैन समझाने लग गयी। हम सब उसकी बात से सहमत हो गये और शनिवार का इंतज़ार करने लगे।
शनिवार की शाम को मैं और प्रीती एम-डी के घर पहुँच गये। हमने एक बड़ा सा तोहफ़ा लिया था गौरी के लिये। केक काटने की रस्म के बाद सबने गौरी को तोहफ़े दिये। कमरे में म्यूज़िक चालू था और सब आपस में बातें कर रहे थे।
“सर! हम सबने मिलकर काफी समय से मज़ा नहीं किया है… क्यों ना आज कर लें”, प्रीती ने एम-डी से कहा।
“क्यों नहीं? वैसे भी मुझे इतनी जोर से म्यूज़िक बजता अच्छा नहीं लगता”, एम-डी अपने स्टडी रूम की ओर बढ़ता हुआ बोला। “रजनी! गौरी को सिर्फ़ चार बिस्कुट देना खाने के लिये… ज्यादा नहीं!” प्रीती रजनी के कान में फुसफुसायी और लड़खड़ाते कदमों से सैंडल खटपटाती हुई एम-डी के पीछे चल पड़ी। उसने काफी शराब पी रखी थी और इतने नशे में होने के बावजूद उसे अपना मकसद याद था।
“तुम इस बात की चिंता मत करो”, रजनी ने कहा।
जब स्टडी रूम में पहुँचे तो योगिता को छोड़ कर हम सबने अपने कपड़े उतार दिये। “क्या बात है डार्लिंग! क्या आज तुम हमे अपनी चूत नहीं दिखाओगी?” एम-डी ने पूछा।
“आज मैं तुम लोगों का साथ नहीं दे पाऊँगी। मेरी तबियत ठीक नहीं है”, योगिता ने जवाब दिया।
“मेरी जान अगर तुम्हारी चूत बिमार है तो क्या हुआ… हम तुम्हारी गाँड तो मार ही सकते हैं”, एम-डी ने हँसते हुए कहा।
“जब कोई मेरी गाँड मारना चाहेगा तो मैं अपने कपड़े उतार दूँगी”, योगिता ने जवाब दिया।
जब एम-डी और योगिता ये बातचीत कर रहे थे तो मैंने मिली को रूम में लगे दिवान पर लिटा दिया और उसे चोदने लगा।
एम-डी ने जब देखा कि योगिता साथ देने को तैयार नहीं है तो उसने प्रीती को खींच कर हमारे बगल में सोफ़े पर लिटा दिया। “प्रीती! जल्दी करो नहीं तो सुनील और मिली हमसे आगे निकल जायेंगे”, कहकर वो अपना लंड प्रीती की चूत में घुसाने लगा।
“नहीं! ऐसे मज़ा नहीं आयेगा”, प्रीती ने उसे रोकते हुए कहा, “पहले तुम मेरी चूत चूसो और ऐसे चूसो कि मैं चुदवाने कि लिये भीख माँगने लगूँ।”
“ठीक है… अगर तुम यही चाहती हो तो…” एम-डी ने प्रीती को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर उसकी टाँगों के बीच आ गया। इधर मैं जोर के धक्के मार कर मिली को चोद रहा था।
थोड़ी ही देर में प्रीती के मुँह से सिसकरियाँ फूटनी सुरू हो गयीं, “हाँ!!!! अच्छा लग रहा है!!!!” वो और सिसकी, “हाँ आआआआ और जोर से चूसो… हाँ जोर से!!!!”
मिली भी उत्तेजना में पागल हो रही थी। वो भी अपने कुल्हे उछाल कर मेरी ताल से ताल मिला रही थी।
“हाँ अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक डाल दो”, प्रीती बड़बड़ा रही थी, “हाँ ऐसे ही!!!! हाँ अब अपनी जीभ से मेरी चूत को चोदो।”
“ओहहहहह सुनील!!!! जोर से हाँ और जोर से कितना अच्छा लग रहा है…” मिली चिल्ला रही थी और मैं अपनी पूरी ताकत से उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ा रहा था।
“ओहहहहहहह बस अब मुझसे सहन नहीं हो रहा”, प्रीती चिल्लायी, “चोदो मुझे… अपना गधे जैसा लंड डाल दो मेरी चूत में… और फाड़ दो मेरी चूत को!!!!”
“नहीं अभी नहीं!!!!” एम-डी हँसते हुए बोला, “पहले तुम भीख माँगो।”
“ओहहहहह प्लीज़!!!! मैं आपसे भीख माँगती हूँ… डाल दो अपने लंड को मेरी चूत में…” प्रीती मिन्नत करते हुए बोली।
“प्रीती! अब मैं तुम्हारी चूत का भोंसड़ा बना दूँगा”, हँसते हुए एम-डी ने पूरी ताकत से अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया।
“ओहहहहह मज़ा आआआआ गया… और जोर से!!!!” प्रीती चिल्ला उठी।
“ओहहहह सुनील!!!! रुको मत!!!! हाँ आआआआ कुछ धक्कों की बात और है… ओहहहह सुनील मेरा छूटा!!!!” मिली जोर से सिसकी। उसी समय मैंने भी एक जोर की हुंकार भरते हुए अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।
“ओह सुनील! आज तो चुदाई में मज़ा आ गया”, मिली मुझे बाँहों में भरते हुए बोली, “चलो एक बार फिर से करते है।”
“जरूर मेरी जान… पर सुस्ता तो लेने दो”, कहकर मैंने हम दोनों के लिये दो सिगरेट जला लीं।
उसी समय प्रीती के प्लैन के मुताबिक योगिता मेरे पास आयी। “सुनील! जरा मेरे साथ आना तो!” वो धीरे से बोली।
“ठीक है आता हूँ!” मैंने जवाब दिया। “डार्लिंग! मैं अभी आता हूँ”, मैंने मिली से कहा।
“जाओ पर ज्यादा देर मत लगाना, मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ”, मिली ने सिगरेट का कश लेते हुए कहा।
एम-डी प्रीती की चूत को भोंसड़ा बनाने में इतना खोया हुआ थी कि उसका ध्यान ही नहीं गया कि मैं कमरे के बाहर खिसक गया हूँ। योगिता मुझे गौरी के कमरे में ले आयी। गौरी बिस्तर पर नंगी लेटी हुई अपनी दोनों टाँगें हवा में फ़ैलाये हुए थी।
रजनी उसकी टाँगों के बीच बैठी उसकी चूत को चूस रही थी। “ओहहहह दीदी!!!!! अपनी जीभ को और अंदर तक घुसाओ ना। मेरी चूत में इतनी खुजली हो रही है कि शाँत ही नहीं हो रही… ओहहहह और अंदर तक!!!!!” गौरी सिसक रही थी।
“गौरी! देख तो हमारे बीच कौन आया है”, योगिता ने कहा।
गौरी ने अपनी गर्दन घुमाई और मुझे कमरे में नंगा खड़ा देखा। मैं अपने लंड की चमड़ी को ऊपर नीचे करते हुए उसे देख रहा था।
“अच्छा हुआ सुनील तुम आ गये! देखो ना मेरी चूत में इतनी खुजली मच रही है और रजनी दीदी की जीभ इतनी लंबी नहीं है कि उस खुजली को मिटा सके। तुम अपना लंबा लंड मेरी चूत में घुसा कर मेरी खुजली मिटा दो ना!” गौरी गिड़गिड़ाते हुए बोली।
“मेरा लंड तुम्हारी चूत को फाड़ देगा!” मैंने जवाब दिया।
“फट जाने दो मेरी चूत को… पर मुझे इस खुजली से छुटकारा दिला दो प्लीज़!” गौरी बिस्तर पर मचलते हुए बोली।
“जैसा तुम कहो मेरी जान!” कहकर मैं उसकी टाँगों के बीच आकर उस पर झुक गया और अपने लंड को उसकी चूत पर घिसने लगा। योगिता ने टीना को आँख मारी और धीरे से कहा, “अब तुम अपना काम करो?”
टीना दरवाजे के बीचों बीच खड़ी होकर चिल्लाने लगी, “पापा आप वहाँ प्रीती को चोद रहे हैं और सुनील यहाँ गौरी की चूत चोदने की तैयारी कर रहा है।”
“ओह सुनील! तुम ये क्या कर रहे हो? अपने लंड को मेरी चूत में डालो ना अंदर!” गौरी अपनी चूत को मेरे लंड पर और रगड़ते हुए बोली, “तुम्हारे लंड रगड़ने से तो खुजली कम होने के बजाये और बढ़ रही है।”
“मुझे थोड़ा समय दो!” मैंने कहा, “अभी तुम्हारी चूत की खुजली मिटाता हूँ।”
“क..क..क..क्याक्याक्या बकवास कर रही हो। सुनील तो यहाँ तुम्हारी माँ की चुदाई कर रहा है”, एम-डी ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, “मिली सुनील कहाँ है?”
मिली ने क्या कहा हमें सुनाई नहीं पड़ा। “हरामजादी कुत्तिया! तूने सुनील को जाने कैसे दिया??? साली यहाँ नशे में मस्त हो कर पड़ी है और सिगरेट फूँक रही है… सुनील को जाने कैसे दिया? तुझे पता है कि सुनील गौरी की कुँवारी चूत के पीछे पड़ा है”, एम-डी जोर से मिली पर गुर्राते हुए बोला। “हे भगवान! इसके पहले कि सुनील गौरी की कोरी चूत फाड़ दे… मुझे उसे बचाना चाहिये।”
“हे रुको!!!! तुम इस तरह नहीं जा सकते!!!!” प्रीती एम-डी को रोकते हुए बोली, “तुम्हें पता है कि मेरा छूटने वाला है।”
“प्रीती मुझे अभी जाने दो। मैं बाद में आकर तुम्हारी चूत का पानी छुड़ा दूँगा”, एम-डी गिड़गिड़ाते हुए बोला, “अगर गौरी का कुँवारापन छिन गया तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा।”
एम-डी प्रीती को लगभग घसीटते हुए कमरे में दाखिल हुआ। मिली भी लड़खड़ाती हुई उसके पीछे-पीछे आ गयी।
कमरे में आकर जब एम-डी ने देखा कि मेरा लंड अभी भी गौरी की चूत पर ही था और अंदर नहीं गया था तो एम-डी चिल्लाया, “रुक जाओ सुनील! मेरी बेटी गौरी की कुँवारी चूत को बख्श दो… मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ।”
मैं थोड़ी देर के लिये हिचकिचाया। “सुनील किसका इंतज़ार कर रहे हो? घुसा दो अपना लंड गौरी की चूत में”, योगिता मुझे जोश दिलाते हुए बोली।
“सुनील! इसकी बातों पर ध्यान मत देना, मैं तुमसे गौरी की चूत की भीख माँगता हूँ”, एम-डी अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए बोला।
“सुनील! मेरे पापा की बात मत सुनो और जैसे योगिता आँटी कह रही हैं, वैसे ही फाड़ दो मेरी चूत को”, गौरी अपने कुल्हे उछाल कर बोली।
“जैसे तुम चाहो डार्लिंग!” कहकर मैंने गौरी की दोनों जाँघों को पकड़ लिया और धीरे से अपना लंड उसकी चूत में ढकेल दिया।
“ओहहहहह मर गयीईईई”, गौरी चींख पड़ी।
मैंने एक जोर का धक्का लगाया। मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड गौरी की चूत की झिल्ली को चीरता हुआ उसकी चूत में घुस गया है। मैंने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और एक जोर का धक्का दिया।
“ओहहहह सुनील!!! बहुत दर्द हो रहा है!!!! मर गयी!!!!” गौरी दर्द से चिल्ला पड़ी।
मैं धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। जैसे-जैसे गौरी की चूत ढीली पड़ रही थी वैसे ही मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।
“सुनील! तुमने ये क्या कर दिया!!!” एम-डी गिड़गिड़ाते हुए बोला। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“सुनील ने गौरी की चूत फाड़ दी है और उसे चोद रहा है”, योगिता हँसते हुए अपना शराब का ग्लास हवा में नचाते हुए बोली।
उसकी बात पर ध्यान दिये बिना एम-डी ने मुझसे पूछा, “सुनील! तुमने तो फोन पर कहा था कि तुम्हारा गौरी की चूत को चोदने का कोई इरादा नहीं है… फिर ये क्या है?”
“सर मेरा… आआआआ इरादा…” मैं कुछ कहने ही वाला था कि गौरी बीच में बोल पड़ी, “पापा! आप शाँत रहिये… ये कोई वक्त है सवाल करने का। सुनील को पहले मेरी चूत की खुजली मिटा लेने दीजिये फिर जितने सवाल करने हों कर लीजियेगा”, गौरी अपने कुल्हे उछालते हुए बोली, “सुनील! मैं चाहती हूँ कि तुम जमकर मेरी चुदाई करो।”
“तुम्हारा हुक्म सिर आँखों पर!” कहकर मैं जोर के धक्के लगाने लगा।
“शाबाश मेरे शेर!” योगिता ताली बजाने लगी।
“तुम्हें बड़ा मज़ा आ रहा है, इस घिनोनी हर्कत पर?” एम-डी ने घूरते हुए योगिता से कहा।
“क्यों ना आयेगा? ये मेरे बदले का हिस्सा है”, योगिता ने जवाब दिया।
“बदला, मैं तो समझा था कि अपना हिसाब बराबर हो चुका है”, एम-डी ने चौंकते हुए कहा।
“मेरी बे-इज्जती का हिसाब तो बराबर हो चुका है। पर ये बदला मेरे पति की बनायी हुई कंपनी को रंडी खाना बनाने के लिये है”, योगिता बोली।
“ओह गॉड! अगर इन जैसे दोस्त हों तो दुनिया में इंसान को दुश्मनों की जरूरत नहीं है”, कहकर एम-डी वहीं सोफ़े पर ढेर हो गया।
“ओहहहह सुनील! कितना अच्छा लग रहा है”, गौरी सिसक रही थी। मुझे भी मज़ा आ रहा था। मैं जोर-जोर से उसकी कसी चूत में धक्के लगा रहा था।
“हाँ! अब और अच्छा लग रहा है… हाँ और जोर से!! हाँ ऐसे ही चोदो मुझे!!! ओहहहह सुनील!!! लगता है कि मेरा छूटने वाला है!!!!” कहकर गौरी बिस्तर पर निढाल पड़ गयी।
ये मेरी दूसरी चुदाई थी इसलिये मेरा छूटने में टाईम था। मैं अब भी उसकी चूत में अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था।
थोड़ी देर में गौरी फिर अपने कुल्हे उठा कर मेरी ताल से ताल मिलाने लगी। “ओहहह सुनील!!! लगता है कि मेरा फिर छूटने वाला है!!! हाँ और जोर से चोदो ना!!! हाँ और जोर से!!! ओहहहह मेरा छूटा!!!” कहते हुए उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया।
मैंने भी जोर के दो चार धक्के और लगा कर अपना वीर्य उसकी चूत में उगल दिया। गौरी ने मुझे बाँहों में भींच लिया और चूमने लगी, “ओहहह सुनील! कितना अच्छा लगा। लंड से चुदवाने में सही में मज़ा आ गया! मिस ब्रिगेंज़ा की जीभ और उंगलियों से तो तुम्हारा लंड लाख दर्ज़े अच्छा है!”
गौरी की बात सुन एम-डी चौंक उठा, “ये मिस ब्रिगेंज़ा कौन है?”
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अब आगे हॉट कॉलेज गर्ल्स सेक्स कहानी:
कुछ देर बाद मीनाक्षी का दर्द जाता रहा और वो लंड के मजे लेने लगी.
आलोक अभी भी सावधानी बरत रहा था कि कहीं मीनाक्षी को ज्यादा दर्द न हो इसलिए वो धीरे धीरे ही लंड चुत में आगे पीछे कर रहा था.
थोड़ी देर के बाद मीनाक्षी बेकरारी से बोली- क्या कर रहे हो? धीरे धीरे क्यों कर रहे हो … और जोर से चोदो मुझे, आने दो तुम्हारा पूरा लंड मेरी चूत में … मेरी चूत में अपना लंड जड़ तक पेल दो … और जोर जोर से धक्का मारो.
यह सुनते ही आलोक ने चुदाई फुल स्पीड से शुरू कर दिया और बोलने लगा- आह मेरी मीनाक्षी रानी, चुदाई कैसी लग रही है … चूत की आग बुझ रही है या नहीं?
मीनाक्षी नीचे से अपनी कमर उछालती हुई बोली- अभी बात मत करो … और मन लगा कर मेरी चूत चोदो. चुदाई के बाद जितनी चाहे बात कर लेना, अभी तुम मुझे अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत को खिलाओ. इस समय मेरी चूत बहुत भूखी है और उसको बस लंड की खुराक चाहिए.
आलोक और मीनाक्षी इस समय एक दूसरे को जोर से अपने हाथ और पैर से जकड़े हुए थे और दोनों फुल स्पीड से एक दूसरे को अपने अपने लंड और चूत से धक्का मार रहे थे.
पूरे कमरे में उनकी सिसकारियां और चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं.
मीनाक्षी की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी और इसलिए उसकी चूत से आलोक के हर धक्के के साथ बहुत आवाज निकाल रही थी.
अचानक से मीनाक्षी बहुत जोरों से अपनी कमर उछालने लगी और वो एकदम से निढाल होकर बिस्तर पर अपने हाथ पैर फ़ैला कर ढीली पड़ गयी.
मीनाक्षी अब झड़ चुकी थी और उसमें और चुदने की हिम्मत नहीं बची थी.
आलोक ने भी मीनाक्षी के झड़ जाने के बाद जोरदार धक्के लगाए और मीनाक्षी की चूत के अपना पूरा लंड घुसेड़ कर उसके ऊपर ही गिर गया.
आलोक भी झड़ चुका था. अब वो मीनाक्षी के ऊपर आंख बंद करके लेटा था और हांफ रहा था.
थोड़ी देर के बाद आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की चूत से बाहर निकाला और लंड के बाहर निकलते ही मीनाक्षी की चूत से ढेर सारा सफ़ेद गाढ़ा गाढ़ा पानी निकलने लगा.
मीनाक्षी ने यह देख कर चूत में अपनी पैंटी खौंस दी और उठ कर बथरूम की तरफ़ चली गई.
अब तक प्रोफेसर आलोक काफी थक चुका था.
वो आज लगातार दो कुंवारी लड़कियों के साथ चुदाई कर चुका था.
उसने मन में कुछ सोचा कि अभी तो तीसरा माल भी बाकी है. एक बार इसकी सील और फाड़ दूँ … फिर ये तीनों बार बार चोदने के लिए मिलती रहेंगी.
अब आलोक ने अपना मुँह घुमा कर देखा कि सोनम और डिंपल आपस में व्यस्त थीं. सोनम डिंपल के चूचे उसकी ब्रा के ऊपर से ही दबा रही थी.
सोनम ने डिंपल की जींस और टी-शर्ट को उतार दिया था और अब डिंपल सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में थी.
डिंपल की चूचियां बहुत ही सेक्सी थीं. उसकी चूचियां बहुत बड़ी तो नहीं थीं … पर बहुत गठीली और गोल गोल थीं.
उसकी चूचियों के निप्पल इस समय बिल्कुल तन कर खड़े थे और कड़क हो गए थे.
डिंपल की एक निप्पल को सोनम ने अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
वो अपने एक हाथ को डिंपल की जांघों के बीच में घुमाने लगी.
कुछ ही देर में सोनम ने डिंपल की पैंटी भी उतार दी और लिटा कर अपना मुँह डिंपल की चूत पर रख दिया.
सोनम ने अपनी जीभ निकाल कर डिंपल की चूत के अन्दर कर दिया और किसी कुतिया की तरह अपनी बहन की चुत चाटने लगी.
इससे डिंपल इतनी ज्यादा गर्म हो गई थी कि वो अपने हाथों से अपने दोनों निप्पलों को मसल रही थी.
यह सब देख कर आलोक के अन्दर वासना का ज्वर फिर से भरने लगा और चुदाई के लिए उसका लंड फिर से गर्म होने लगा.
वो उठ कर सोनम और डिंपल के पास पहुंच गया और दोनों बहनों की कामलीला को ध्यान से देखने लगा.
दोनों बहनों को मस्ती करते देखते हुए ही उसने अपना हाथ डिंपल की एक चूची पर रख दिया और निप्पल को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगा.
फिर उसने अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच निप्पल को मसलने लगा.
डिंपल आलोक की तरफ़ देखने लगी कि आलोक सर उसके बगल में नंगे खड़े हैं और उनका लंड अब गर्म होकर खड़ा होने लगा है.
उसने आलोक का लंड अपने हाथों में ले कर पूछा- क्या सर अब मुझको भी चोदेंगे?
आलोक ने पूछा- क्यों तुमको नहीं चुदवाना है?
शीरीन- हां सर, मैं भी अपनी बहनों की तरह अपनी चूत आपसे चुदवाना चाहती हूँ. प्लीज आप मुझे भी अपने लंड से चोदिए. लेकिन आपके लंड को क्या हो गया है … ये तो ढीला पड़ा है … क्या अब यह मेरी चूत में घुसने के काबिल नहीं रहा?
आलोक लड़कियों की चुदाई का पुराना खिलाड़ी था. उसने अपने लंड को हिलाते हुए कहा- घबराओ मत, अभी तुम्हें अपना लंड का कमाल दिखाता हूँ.
यह कह कर आलोक ने अपना लंड डिंपल के मुँह में दे दिया और बोला- लो मेरी जान … मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसो.
डिंपल भी उनके लंड को अपने मुँह में लेकर उस पर अपनी जीभ चलाने लगी और कभी उस पर अपने दांत गड़ाने लगी.
आलोक को डिंपल की लंड चुसाई से बहुत मज़ा आया और उसका लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा.
उधर सोनम अपनी एक हाथ से डिंपल की चूत सहला रही थी और दूसरे हाथ से आलोक के गांड में अपनी उंगली पेल रही थी.
थोड़ी देर के बाद लंड चुसाई और गांड में सोनम की उंगली होने से आलोक का लंड पूरे जोश के साथ खड़ा हो गया और वो फिर से चुत चुदाई शुरू करने के लिए तैयार था.
आलोक ने अपना लंड डिंपल के मुँह से निकाला और उसके पैरों के बीच में बैठ गया.
उसने अपने दोनों हाथों से डिंपल की चूत को फ़ैलाया और उसके अन्दर अपनी जीभ डाल दी.
आलोक अपनी जीभ डिंपल की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा और अपनी जीभ से चूत की अंदरूनी दीवारों के साथ खेलने लगा.
कभी कभी आलोक अपनी जीभ डिंपल की भगनासा को भी खींच कर चुभला रहा था और कभी कभी उस दाने को अपने दांतों के बीच पकड़ कर जोर जोर से खींचते हुए चूस रहा था.
डिंपल अब काफी बेचैन हो गई थी और अपनी कमर हिला हिला कर अपनी चूत को आलोक के मुँह पर आगे पीछे कर रही थी.
आलोक समझ गया कि डिंपल की कुंवारी चूत अब लंड खने की लिए तैयार है.
अब आलोक का लंड भी पहले जैसा तगड़ा हो गया था और डिंपल की चूत में घुसने के लिए उतावला था.
आलोक ने अपनी जीभ को डिंपल की चूत से से बाहर निकाल लिया और पोजीशन बना कर उसकी चुत पर लंड टिका कर तैयार हो गया.
उसने पहले अपना सुपारा डिंपल की चूत पर रख कर एक हल्का सा धक्का दिया लेकिन डिंपल की चुत काफी कसी थी. वो इस जरा से धक्के से ही जोर से चिल्ला पड़ी.
आलोक का लंड डिंपल की छोटी चूत के हिसब से बहुत मोटा था और डिंपल की यह पहली चुत चुदाई थी.
डिंपल अपने हाथों से आलोक को रोक रही थी जिससे आलोक अपना लंड डिंपल की चूत में पेल नहीं पा रहा था.
उसने सोनम और मीनाक्षी से डिंपल के चूचों और चूत से खेलने को कहा जिससे डिंपल दर्द भूल जाए और आलोक के लंड को अपनी चूत में घुस जाने दे.
वो दोनों डिंपल की चूची और चुत से खेलने लगीं.
तब तक आलोक उठ कर नारियल के तेल का शीशी उठा लाया और उसने अपने लंड पर तेल को अच्छी तरह से मल लिया.
फिर उसने सोनम को हटा कर डिंपल की चूत पर भी तेल को अपनी उंगली में लेकर मल मल कर लगा दिया.
उसने चूत के अन्दर तक अपनी उंगली से घुमा घुमा कर तेल लगाया.
तेल लग जाने के बाद आलोक अपनी दो उंगलियों को डिंपल की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा.
कभी कभी वो अपनी उंगली से उसकी चूत की घुंडी भी रगड़ देता था.
डिंपल की चूत अब पानी छोड़ रही थी और इससे उसकी चूत चुदाई के तैयार हो गयी.
आलोक फिर से डिंपल के पैरों को फ़ैला कर उनके बीच घुटनों के बल बैठ गया और डिंपल को समझाया कि अब कोई डरने की बात नहीं है. उसको तेल से कोई दर्द नहीं होगा.
उधर सोनम और मीनाक्षी डिंपल की एक एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूस रही थीं.
आलोक ने डिंपल के दोनों पैर हवा में उठा दिए और उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया, जिससे कि फिर से वो छूटने की कोशिश ना कर सके.
अब आलोक ने फिर से डिंपल की चूत पर अपना लंड रखा और डिंपल को कुछ समझ आने के पहले ही एक जोरदार झटका लगा दिया.
डिंपल की चूत तेल और चूत से निकले पानी की वजह से काफी चिकनी हो गई थी जिससे आलोक का लंड एक ही झटके से पूरा का पूरा चुत के अन्दर घुसता चला गया.
इस अचानक हमले से तो डिंपल पहले चीखी और उसने आलोक को अपने ऊपर से हटाने के लिए धक्का मारा लेकिन इस बार आलोक की पकड़ बहुत ही मजबूत थी.
डिंपल कसमसा कर रह गई.
आलोक ने तभी अपनी कमर आगे पीछे करके अपना लंड डिंपल की चूत में पेलते हुए एडजस्ट करने लगा.
थोड़ी देर के दर्द और तकलीफ के बाद डिंपल को भी चुत चुदवाने में मज़ा आने लगा और अब वो अपनी कमर उठा उठा कर आलोक को चुदाई में सहयोग करने लगी.
आलोक और डिंपल दोनों एक दूसरे को ऊपर और नीचे से दनादन धक्के मार रहे थे और डिंपल की चूत में आलोक का लंड तेज़ी से आ-जा रहा था.
सोनम और मीनाक्षी अब डिंपल के पास से हट कर उन दोनों की ताबड़तोड़ होती चुदाई को देख रही थीं और एक दूसरे की चूत में उंगली कर रही थीं.
डिंपल और आलोक दोनों एक दूसरे से चूत और लंड के साथ जुड़े हुए थे.
बीस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद डिंपल की चूत से मलाई निकलने लगी तो आलोक ने अपनी चुदाई की स्पीड और तेज़ कर दी क्योंकि आलोक भी अब झड़ने वाला हो चला था.
उसने आखिरी के चार पांच धक्के जोरदार तरीके से डिंपल की चूत में लंड से मारे और वो डिंपल की चूत के अन्दर पूरा लंड पेल कर झड़ गया.
डिंपल भी अब तक झड़ चुकी थी.
आलोक का सारा पानी डिंपल की चूत में समा गया. दोनों हांफ़ रहे थे और एक दूसरे से चिपके पड़े थे.
कुछ पल बाद आलोक ने अपना लंड को डिंपल की चूत से निकाला तो चुत में से ढेर सारा पानी निकलने लगा.
सोनम और मीनाक्षी ने जल्दी से अपने अपने मुँह डिंपल की चूत पर लगा दिए और उससे निकल रहा आलोक और अपनी बहन की चूत के मिश्रित पानी को जीभ से चाट चाट कर पीने लगीं.
थोड़ी देर के बाद डिंपल ने अपनी आंखें खोलीं और मुस्कुरा कर आलोक से बोली- सर, आपके लंड से चुदवा कर बहुत मज़ा आया. आज हम तीनों बहनों ने आपसे अपनी अपनी चूत की सील तुड़वा कर ओपनिंग करवा ली. आपको किसकी चूत सबसे मस्त लगी और कौन सी बहन की चुत चोदने में आपको ज्यादा मज़ा आया … सच सच बताना.
आलोक ने डिंपल की चूची को मसलते हुए कहा- अरे ताजी ताजी चुदी हुई लड़कियो, मुझे तो तुम तीनों बहनों की चूत की बहुत मस्त लगी. हां तुम्हारी चूत बहुत टाईट थी और इसे खोलने में मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी, तेल भी लगाना पड़ा. लेकिन तुम तीनों बहनों ने आज दिल खोल कर अपनी अपनी चूत चुदवाई हैं. मुझे तो तुम सभी बहनों की चूत को चोदने में मज़ा आया.
इतना सुन कर तीनों बहनें मुस्कुरा दी और एक साथ बोलीं- अब फिर से हमारी चूत को आपके लंड का भोग कब मिलेगा? जल्दी से कोई दिन निकालिए और हमारे पिछवाड़े की ओपनिंग कर कर दीजिए. हम तीनों बहनें आपके लंड के धक्के अपनी अपनी चूत में खाने के लिए हाज़िर हो जाएंगी.
आलोक ने कुछ देर सोच कर कहा- ऐसा करो कि मैं रविवार को नई दिल्ली एक सेमीनार में चार-पांच दिन के लिए जा रहा हूँ. तुम तीनों बहनें अपने घर से परमीशन लेकर हमारे साथ दिल्ली चलो. मैं तुम सबको वहां रोज सुबह शाम और रात को वियाग्रा की गोली खा खाकर चोदूंगा और तुम्हारी चूतों को चोद चोद कर भोसड़ा बना डालूंगा. हां, वहां और भी लोग आएंगे … तुम लोग अगर चाहोगी तो तुम्हें और भी लंड अपनी चूतों में पिलवाने को मिल जाएंगे … और तुम तीनों बहनें मज़े से अपनी अपनी चूत को लम्बे और मोटे लंड से चुदवा सकती हो.
यह सुन कर तीनों बहनों ने आलोक के साथ दिल्ली जाने का प्रोगाम बना लिया.
चुदने के बाद तीनों बहनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए और आलोक ने सिर्फ एक लुंगी अपनी कमर पर बांध ली.
चुदाई के बाद आलोक ने उनको अपने हाथ से कॉफ़ी बनाई और नाश्ते के साथ दी.
फिर आलोक तीनों बहनों को बाहर छोड़ने गया.
बाहर जाने के पहले दरवाजे के पास आलोक ने उन तीनों को फिर से एक एक करके अपनी बांहों में लेकर उनको चुम्मा दिया और इन तीन बहनों की चूचियों को उनके कपड़ों के ऊपर से दबा दीं.
सोनम का मन नहीं भरा था तो उसने फिर से आलोक को अपनी बांहों में लेकर चूमा और फिर अपनी साड़ी उठा कर आलोक से अपनी चूत पर चुम्मा देने को कहा.
आलोक ने सोनम की चूत पर एक जोरदार चुम्मा दिया और उसको चूत की घुंडी को जीभ से चाट दिया.
मीनाक्षी और डिंपल अपनी चूत पर आलोक का चुम्मा नहीं ले सकीं क्योंकि वो सलवार और जींस पहनी हुई थीं. वो अपनी चूत चुसवाने के लिए नहीं खोल सकीं.
सोनम ने आलोक की लुंगी हटा कर उसके मोटे लंड का सुपारा खोल कर चूमा. सोनम की देखा देखी मीनाक्षी और डिंपल ने भी आलोक के लौड़े को चूमा और उसके सुपारे को मुँह में लेकर चूसा.
अब वो तीनों हॉट कॉलेज गर्ल्स अपनी अपनी चुदी हुई चूत में आलोक के लंड से निकला हुआ रस भरवाए हुए अपने घर चली गईं.
उनके जाते ही आलोक अपने कमरे में आकर सो गया.
वो बहुत थक चुका था.
उसको अब दिल्ली में इन तीनों बहनों की चुत चुदाई का अवसर मिलने वाला था.
आपको हॉट कॉलेज गर्ल्स चुदाई की कहानी कैसी लगी, प्लीज़ कमेंट्स के माध्यम से जरूर बताएं.
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