To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
दोस्तो ! मैं सेक्सी कहानियाँ सात महीनों Antarvasna से पढ़ रहा हूँ। मैं २५ साल का शादीशुदा मिडल परिवार का राजस्थान के एक छोटे से कसबे का सेक्सी लडका हूँ। मैं कम्प्यूटर इन्जीनियर हूं। मैं मेरी शादी को दो साल हो गये है।
आपने मेरी कहानी “कुंवारी सलहज को प्रेगनेंट किया” पढ़ी और बस एक मेल ही आया। दोसतो ये कहानी आपको लगता है पसंद नही आई। दोस्तो ! मैने वो पहली बार कहानी लिखी थी।
अब एक बार फिर हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !
२००४ के दिसम्बर की छुट्टियों में मेरे मामा की लडकी हमारे घर १०-१५ दिन के लिए आई। वो २४ साल की थी. बहुत सुंदर है, उसका फिगर २८-२४-२८, ऊंचाई ५’३”, वो बहुत सेक्सी है. जब भी मैं उसके बारे मे सोचता तो उसको जमकर चोदने का मन करता लेकिन मैं कुछ नही कर पाता,वो मुझे तिरछी नजर से देखती थी।
बस तो सरदियों के दिन थे। सब लोग {परिवार वाले} रजाई ओढ़ के रात को बातें करते थे। वो मेरी वाली साईड में बैठ गयी। मैने धीरे से उसकी टांग पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। वो मेरी तरफ़ देख के मुस्करायी तो मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया। मैने उसके बुबस दबाने शुरु किये वो मस्त हो रही थी। वो कहने लगी- मुझे कम्प्यूटर सिखाओ !
मैने कहा क्लास लगेगी, वो भी रात के ९ बजे के बाद !
वो कहने लगी ठीक है। मैं डिनर करके आपके कमरे में आ जाऊगी। वो रात को मेरे कमरे में आयी। गांव में सब ८:३० बजे तक सब सो जाते है। हमारा घर बहुत बड़ा था। मैने उसे कम्प्यूटर ओन करके दिया। उसको गाने चलाना, ओफ़ीस ,सीडी चलाना बताने लगा। मैं उसको बताते हुए छू रहा था। उसे अजीब सी मस्ती चढ़ रही थी। उसका ध्यान मेरी ओर हो गया। धीरे से मैं सेक्सी फ़िल्म पर क्लिक करके सोने का नाटक करने लगा। उसने वो फ़िल्म एक दम डर के बंद कर दी और फ़िर कुछ देर तक वो कम्प्यूटर चलाने के बाद सोने को जाने लगी। लेकिन उसका मन उस फ़िल्म को देखने का था तो वो उठ कर मेरी ओर देखा तो मैं सोने का नाटक करने लगा। वो इत्मिनान से फ़िल्म देखने लगी।
फ़िल्म देखने के बाद वो गरम हो गई। वो अपने बूबस को मसलने लगी। मैने धीरे से उसको किस किया तो वो चोंक गयी। मैं उसे अपने बैड पर उठा लाया तो वो बोली- भैईया यह क्या कर रहे हो?
मैने कहा जो तुम्हें चाहिए वो दे रहा हूं। मैं उसके बूबस दबाने लगा वो मस्त होती जा रही थी। और मैं होठ किस भी करने लगा। वो बोली ये नीचे मेरे से एक डंडा सा क्या है इतने में उसने मेरे लंड पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। मुझे भी मस्ती चढ़ रही थी। मैने धीरे से उसकी सलवार को खोल दिया अब मैं सलवार को पैर से उतारने लगा वो बोली किसी को पता चल गया तो?
मैने कहा तुम बताओगी?
वो बोली- नहीं। मैने उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिये। हम दोनो एकदम नंगे थे। मैं उसे बेसबरी से चूम रहा था। वो भी मुझे ‘चूमते रहो’ कह रही थी, इतने दिन पहले क्यों नहीं मिले। मेरा ९” का लंड एकदम खडा था। वो बेसबरी से उसे देखने लगी ओर बोली- इतना बडा पहली बार देखा है।
वो एकदम नंगी मस्त दिख रही थी उसकी छोटी छोटी चूचियाँ पूरी कसी हुई थी। मैने पहली बार उसे नँगी देखा था। मैं उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो मस्त हो कर तडफ़ रही थी। मैं उसके पूरे शरीर को चूमता हुआ उसकी चूत को चूसने लगा। बाद में हम लोग ६९ पोजीसन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी,मैं उसकी गोरी साफ़ चूत को जीभ से चूस रहा था।
‘चूसो मेरी चूत को……आ.आ..आआया.आआआआआअ..आआआ..उ.ऊउऊ.ऊ.ईई.ऊई..ऊई आह आआह्ह्छ’ वो मस्त हो रही थी। अब मैं झड़ने वाला था वो भी इस दौरान दो बार झड़ गई थी। मैं उसका नमकीन रस पीता रहा। मेरा रस उसके मुँह में झड़ गया। वो सारा रस मस्ती से पी गई।अब मैं फ़िर उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो बहुत खुश थी। मैने एक उँगली उसकी चूत में डाली। वो मेरे लँड को फ़िर चूसने लगी और मेरा ९” का लँड खडा हो गया।
अब वो बोली कि मुझे कुछ हो रहा है जल्दी करो, मेरी प्यास बुझाओ।
मैने कहा- इतनी भी जल्दी क्या है? मैने कहा दर्द बहुत होगा ! झेल लोगी?
वो बोली- चाहे मेरी चूत फ़ट जाये, मैं चाहे जितना भी चिल्लाऊँ, छोडना मत, बस अब जल्दी करो, चोद डालो, फ़ाड डालो मेरी चूत, जल्दी करो।
मैने ९” के लंड पर तेल लगाया और थोड़ा सा उसकी चूत पर लगा के, चूत पर लंड रखा और धक्का दिया तो लंड २” अंदर ही गया था कि वो चिल्लाने लगी- छोड दो, बस करो, मर जाऊगी।
मैं रुक गया और फिर वो शाँत हो गयी। मैने एक जोर से झटका मारा और चूत की सील तोड़ते हुए अँदर घुस गया। वो चिल्लाती रही, मैं रुक गया और उसके बूब्स चूसने लगा। वो मस्त हो रही थी। थोड़ी देर में मैंने झटके लगाने शुरु किये। वो भी मेरा साथ देने लगी थी। वो चूतड़ उठा उठा के चुद रही थी। २००-२५० झटके लगाने के बाद मैं झड़ गया, इस दौरान वो तीन बार झड़ चुकी थी।
वो रात ३१ दिसम्बर २००४ की रात थी, मैने उसे नये साल के जश्न में पूरी रात में लगभग १५ बार चोदा। वो अब पूरी तरह से टूट चुकी थी। उससे उठना ही मुश्किल हो गया था। सुबह के ६ बज चुके थे। वो उठ के अपने कमरे में चली गयी। ये सिलसिला १० दिन तक चलता रहा। वो पूरी पूरी रात मस्त होकर चुदवाती थी। १० दिन बाद वो अपने घर चली गयी। पर जब भी मौका मिलता था वो चुदने को तैयार रहती थी।
आपको कहानी कैसी लगी ? Antarvasna
मुझे लिखें !
हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम मोहित है Hindi Porn Stories और मैं 22 साल का हूँ। मैं पुणे में रहता हूँ और यह मेरी अन्तर्वासना को भेजी पहली कहानी है।
ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता था। हमारे घर के पास ही मेरे भैया (कज़न) अपने परिवार के साथ रहते थे।
उनकी 2 बेटियाँ थी, जिनमे से बड़ी वाली का नाम प्रिया और छोटी का नाम अदिति था। प्रिया 18 साल की थी।
यूँ तो मेरे अपनी दोनों भतीजियों के साथ अच्छे रिश्ते थे पर प्रिया के साथ मैं ज्यादा नजदीक था।
प्रिया भी मुझसे काफी घुल मिल रखी थी और मैं भी।
वो मुझे अपने भाई की तरह मानती थी।
वैसे जब तक मैं 12वीं कक्षा में नहीं आया था तब तक मैंने प्रिया की तरफ किसी ऐसी वैसी नज़र से नहीं देखा था पर 12वीं में आने के बाद वो मुझे अचानक ही बहुत अच्छी लगने लगी, शायद यह उसके बढ़ते हुए उभारों की वजह से था।
एक दिन मैं घर पर अकेला था, गर्मियों के दिन थे, मैने हाफ पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी । मैं काफ़ी बोर हो रहा था तो मैने सोचा क्यों ना प्रिया से मिलने चलूं !
यह सोचकर मैं उसके घर गया और मैने बेल बजाई । शायद मेरी किस्मत अच्छी थी, प्रिया ने दरवाज़ा खोला तो मैने देखा कि उसने काला स्लीवलेस टॉप और लाल रंग की कॅप्री पहन रखी थी, और वो अत्यंत सेक्सी लग रही थी।
मैने पूछा क्या कर रही थी?
तो उसने बोला- कुछ खास नहीं, ऐसे ही !
हम दोनों अंदर गये तो मैने पूछा- भैया भाभी कहाँ हैं?
तो उसने बताया कि वो तो अदिति को ले कर बाज़ार गये हैं। उसके बाद हम दोनों पढ़ाई की बातें करने लगे और एकदम से हम बाय्फ्रेंड और गर्लफ्रेंड की बातों पर भी आ गये (असल में हम दोनों एक दूसरे के बीच काफ़ी फ़्रैन्क थे)
हम बात कर ही रहे थे कि उसने चाय के लिए पूछा और मैने कहा ठीक है।
प्रिया चाय बनाने किचन में चली गयी।
मैं भी उसका साथ देने रसोई में चला गया, पर जैसे ही मैं रसोई में घुसा, मेरा ध्यान प्रिया की मोटी गाण्ड की तरफ गया और मैं आकर्षित हो गया।
तभी प्रिया मेरी तरफ मुंह करके बोली- चीनी कितनी लोगे?
मैने साहस जुटाया और प्रिया के पास गया और बोला प्रिया क्या तुम मेरी एक बात मानोगी?
प्रिया ने पूछा- कौन सी बात?
तो मैंने कहा- मैं एक बार तुम्हारे चोचे दबाना चाहता हूँ।
इस बात पर वो सहम गयी और बोली- यह क्या कह रहे हो?
तो मैंने कहा- किसी को पता नहीं चलेगा क्यूंकि हम दोनों के घर वाले घर पर नहीं है और शाम तक नहीं आने वाले।
इस पर उसने कहा- ठीक है, तू मेरा चाचा लगता और मैं तेरी भतीजी हूँ तो हम दोनों के बीच इतना रिश्ता तो हो ही सकता है।
मैं खुश हो गया और प्रिया को गोदी में उठा कर बेडरूम में ले गया।
वहाँ मैने पहले तो उसके होठों पे किस किया जिसका उसने भी जवाब दिया, उसके बाद मैने उसका लाल टॉप उतार फेंका और उसके चोचे उसकी ब्रा के बाहर से ही दबाने लगा, इतने में वह गरम हो गयी।
उसके तुरंत बाद मैने अपनी टी-शर्ट उतार दी तो प्रिया कहने लगी- मोहित तुम क्यों अपने कपड़े उतार रहे हो?
तो मैने कहा- क्या इससे तुम्हें कोई परेशानी है?
तो प्रिया ने कहा- नहीं !
और धीरे से मुस्कुरा दी।
मैं समझ चुका था की रास्ता साफ है।
इसके बाद मैने प्रिया की ब्रा उतार दी और पागलों की तरह उसके चोचे चूसने लगा, प्रिया भी मज़े ले रही थी और आ आ की आवाज़ निकल रही थी।
मैने ज़्यादा देर नहीं की और उससे पूछा क्यों ना हम चुदाई करें?
तो प्रिया ने जवाब दिया जैसा मर्ज़ी वैसा करो पर किसी तो पता नहीं चलना चाहिए तो मैने उसे निश्चिंत होने के लिए कहा।
बस फिर क्या था, मैने प्रिया की कैप्री और चड्डी भी उतार दी और अपना भी अंडरवीयर उतार दिया मेरा लण्ड टंकार खड़ा हो गया कम से कम 7 इंच तक।
मेरे लण्ड को देखकर प्रिया ने उसे अपने मुंह में ले लिया और जम के चूसने लगी, यह सिलसिला 10 मिनिट तक चला।
इसके बाद मैने अपना लण्ड प्रिया की चूत पे लगाया और एक ही झटके में उसकी चूत में घुसा दिया, इस पर वह ज़ोर ज़ोर से आ आ की आवाज़ें निकालनें लगी।
मैने कहा- चिंता मत करो।
उसके बाद तो हमने एक दूसरे के साथ करीब 20 मिनट तक कभी डोगी स्टाइल में तो कभी घोड़ी बनकर सेक्स किया।
उसके बाद मैने प्रिया से पूछा कि तुमने आज तक कितनी बार चुदाई कराई है तो उसने कहा 4-5 बार कराई थी पर मेरे चाचा जैसा मज़ा किसी ने नहीं दिया जिस पर मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सका।
उस दिन के बाद जब भी हम दोनों के घर पर कोई नहीं होता है हम दोनों एक दूसरे में खो जाते है और एक दूसरे की प्यास बुझाते हैं। Hindi Porn Stories
मेरे घर में रोज सुबह के Antarvasna समय घर का काम करने के लिए एक नौकरानी आती है। मैं रोज उसे देखता था, दिखने में अच्छी थी। एक दिन उसने मुझे उसे घूरते हुए देख लिया वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ।
एक दिन मेरी बीवी नहाने के लिए गई थी। रविवार का दिन था, ठीक १० बजे वो आई, मैंने गेट खोला, वो अन्दर आई और अपने रोजमर्रा के काम करने लगी। वो झाडू लगा रही थी, मैं पलंग पर बैठ कर टीवी देख रहा था। वो जैसे ही मेरे पास आई, मुझे उसके स्तन दिखाई देने लगे। मुझ से रहा नहीं गया, कुछ न सोचते हुए मैंने एक हाथ सीधे उसके ब्लाऊज़ में डाल दिया। पहले तो उसने विरोध किया, बोली- मेमसाब देख लेंगे ! फ़िर मेरे नहीं मानने पर वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने उसी उस दिन तो नहीं चोदा क्योंकि मेरी बीवी घर पर ही थी।
कुछ दिनों के बाद मेरी बीवी को उसके पापा के घर जाना था सो वो चली गई। अब मैं घर में अकेला था। मैं भी सोच कर बैठा था कि आज जरुर कर के रहूँगा।
जैसे ही सुबह नौकरानी आई, मैंने उसे पकड़ लिया और उसे चूमने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने उसका पेटीकोट ऊपर कर दिया। अब मुझे उसकी चूत के साफ-साफ दर्शन होने लगे थे। वो कुछ शरमा रही थी उसकी अभी ३-४ महीने पहले ही शादी हुई थी पर पता नहीं शायद वो अपने पति से संतुष्ट नहीं थी।
उसकी उम्र २३ साल होगी, एकदम गोरी तो नहीं पर गेंहुआ रंग था।
फ़िर मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी, वो कराह उठी। मैंने देर न करते हुए अपना ८ इंच का लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी। हम दोनों चुदाई में मस्त थे, इसी मस्ती में हम लोग दरवाज़ा बंद करना भूल गए थे। जब हमारा ध्यान गया तो मैंने देखा की मेरे मकान-मालिक की बड़ी बेटी हमारे सामने खड़ी है।
वो मुझसे बोली- ये क्या हो रहा है? भाभी को गए अभी तो एक दिन भी नहीं हुआ और आप यह सब करने लगे? आने दो भाभी को ! सब कह दूंगी !
मैंने कहा- अरे ऐसी बात नहीं है !
तो वह बोली- फिर कैसी बात है…. ?
कहते कहते वो जाकर दरवाज़ा बंद करने लगी और बोली- इस तरह के काम गेट लगा कर किया करो…. ! चलो अब तैयार हो जाओ मुझे भी चोदना होगा तुम्हें ! हम दोनों मिलकर मज़ा लेंगे। मैं भी बहुत दिनों से अन्तर्वासना पर व्यस्क कहानियाँ पढ़ पढ़ कर सोच रही थी कि मेरी प्यास कौन बुझायेगा, पर मुझे क्या पता था कि बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा है ! चलो भइया, शुरू हो जाओ ! अब डबल बैटिंग करना है तुम्हें !
मैं अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हो रहा था क्योंकि मेरे मकान मालिक की बेटी बला की खूबसूरत है। फिर पहले मैंने कहा- तुम दोनों मिलकर मेरे लंड को चाट चाट कर साफ करो !
जिस पर मकान मालिक की बेटी ने इंकार कर दिया पर नौकरानी शुरू हो गई। उसे देख कर वो भी रुक न सकी और शुरू हो गई। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मानो मैं स्वर्ग में था।
थोड़ी देर बाद मैंने दोनों को जी भर कर चोदा। पूरे महीने हमारा यह कार्यक्रम चलता रहा। मकान मालिक की बेटी तो कई रात मेरे साथ ही सोई। उसे पूरी रात नंगी करके अपने पास सुलाता था। अब उसे पूर्ण नग्न होकर सोने की आदत हो गई है। अब वो कई बार मुझसे कहती है करने के लिए, पर ऐसा मौका नहीं मिल पाता। पर फिर भी हम महीने में एक-दो बार जल्दी जल्दी वाला सेक्स तो कर ही लेते हैं। पर उसमें हमें पूरी तरह मज़ा नहीं आता। Antarvasna
हाय दोस्तो, मेरा नाम विजय Antarvasna कुमार है और मैं एक काल बॉय हूँ। मैंने अन्तर्वासना की बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी, मेरा मन भी करा कि मैं भी एक कहानी लिखूं जो कि काल्पनिक नहीं हकीकत है!
मेरा रंग साफ, कद 5 फीट 8 इंच, एकदम स्लिम हूँ। मैं दिल्ली में रहता हूँ।
दोस्तो अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ!
बात उन दिनों की है जब मैं नया नया दिल्ली आया था, पर कहीं पर नौकरी मिल नहीं पा रही थी।
मैं बहुत परेशान हो गया और मैं अपने एक दोस्त सुरेश के पास गया तो उसने मुझे कहा कि आप नौकरी के लिए परेशान क्यों होते हो, मैं आपको एक नम्बर देता हूँ, आप मेरे बताये पते पर जाना और पैसे भी बहुत ज्यादा मिलेगें।
मैं सुरेश की बात से सहमत हो गया।
उसके अगले दिन मैंने उस नम्बर पर फोन किया तो उस नम्बर पर मुझे एक महिला की आवाज सुनाई दी जिसे मैं सुनकर घबरा गया और मैंने फोन रख दिया।
फिर शाम को मैं अपने दोस्त से मिलने के लिए उसके घर गया तो उसने मुझे समझाया कि तुम्हार पास कोई नौकरी तो है नहीं तो फिर क्या करेगा भीख मांगेगा क्या। आप कल फोन करके उसके उसके बताये पते पर चला जाना और उनको कहना कि सुरेश ने आपका नम्बर दिया है, और पूछना कि मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ।
फिर अगले दिन मैंने 12.30 पर मैंने फोन किया तो उसी महिला ने फोन उठाया, तो मैंने कहा कि मुझको सुरेश ने आपका फोन नम्बर दिया है।
तो उसने कहा- आपका नाम क्या है?
मैंने कहा- मेरा नाम विजय जे है।
उसने मेरी उम्र पूछी तो मैंने कहा कि मेरी उम्र 22 साल है। तब उसने मुझे अपना नाम शिवानी बताया और पता जी. के. फेस-2 में रहती हूँ आप मुझसे शाम को 9.00 बजे मिलना।
मैं शाम को 9.00 बजे उसके घर जी. के.फेस-2 पर पहुँचा और उसके घर की बैल बजाई, तो उसके घर पर उसकी नौकरानी ने दरवाजा खोला।
मैंने कहा- मुझे शिवानी मैडम से मिलना है!
उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने अपना नाम विजय जे बताया। उसने कहा- मैं मैडम से पूछ कर आती हूँ आप तब तक यहीं ठहरो।
मुझे बहुत ज्यादा डर रहा था और दिल धक धक कर रहा था। उसकी नौकरानी दो मिनट बाद आई और मुझे अन्दर आने को कहा।
मैं अन्दर जाकर उसके घर को देख कर और भी ज्यादा धबरा गया क्योंकि उसका घर बहुत ज्यादा ही आलीशान था।
नौकरानी ने मुझे पानी पिलाया और कहा कि मैडम अभी आती है, आप थोड़ी देर तक आराम से बैठो और उनका आने का इन्तजार करों।
10 मिनट बाद मैडम शिवानी आई तो मैं तो उसे देखकर घबरा ही गया क्योकि वह तो बहुत ही खूबसूरत थी, हूर की परी।
उसकी फिगर तो बस बहुत ही कमाल की थी उसकी लम्बाई 5 फीट 3 इंच, कमर 28, हिप्स 34 और चेस्ट 32 और रंग दूध जैसा सफेद।
वो क्रीम रंग का कुर्ता और काले रंग का शलवार पहने हुए थी।
मैडम ने आते ही कहा- हाय विजय! क्या हाल है?
मैंने कहा- ठीक है मैडम।
मैडम ने पूछा कि आपको मेरा फोन नम्बर कहाँ से मिला तो मैंने सुरेश का नाम बाताया और कहा कि वो मेरा दोस्त है।
फिर हम दोनों बैठकर बात करने लगे फिर उसने नौकरानी को चाय लाने का कहा तो नौकरानी 5 मिनट बाद चाय लेकर आई और हम दोनों ने साथ बैठकर चाय पी।
मैडम शिवानी ने मुझे देखकर कहा- आप घबरा क्यों रहे हो?
मैंने कहा- आज मैं पहली बार किसी मैडम से मिला हूँ!
तो वो मेरी बात सुनकर हँसने लगी और कहने लगी- आपको घबराने की जरूरत नहीं है।
उसके बाद उसने अपनी नौकरानी को घर जाने के लिए कह दिया कि सेवेरे आ जाना। नौकरानी अपने घर चली गई।
शिवानी मैडम मुझको अपने ड्रांईग रूम में ले गई वहाँ पर उसने एक वाईन की बोतल, सोडा, पानी, दो गिलास और कुछ नमकीन निकाली और मुझको उसने कुर्सी पर बैठने के लिए कहा और फिर उसने दो पैग वाईन के बनाये तो मैंने कहा कि मैं तो ड्रिंक नहीं करता तो उसने कहा कि आप हमारा साथ तो दो आप कम से कम लेना।
उसने मुझको बहुत ही लाईट ड्रिक्स के दो पैग दिये मैंने पहले कभी पी तो नहीं थी, मुझको हल्का सा नशा होने लगा।
मैडम ने कहा- चलो बैडरूम में चलते हैं।
मैं मैडम के साथ उसके बैडरूम में चला गया। मैडम ने कहा- पहले आपने किसी के साथ सम्भोग किया है?
मैंने कहा- हाँ! एक दो बार अपनी गर्लफ्रैड के साथ किया है।
मैडम ने कहा- आपको मेरे साथ सम्भोग करना है।
मैं उसकी बात सुनकर घबरा गया और कहने लगा- नहीं मैडम! मैं नहीं कर सकता!
मैडम ने कहा- फिर आप मेरे पास क्यों आये हो!
मैंने कहा- मैं तो आपके पास नौकरी के लिए आया हूँ।
उसने कहा- आपको सुरेश ने नहीं बताया कि आपको क्या करना है?
मैंने कहा- नहीं! उसने तो यही कहा था कि आप मैडम से मिल लेना।
मैडम गुस्से से लाल-पीली होने लगी और सुरेश को गाली देने लगी, कहने लगी- पता नहीं किस को भेज दिया।
यह सुनकर मैं तो बहुत ही ज्यादा घबरा गया, मैंने कहा- मैडम आप नाराज मत हो, आप जो भी कहोगी, मैं वही करने को तैयार हूँ।
तो मैडम ने कहा- ठीक है!
मेरी जान में जान आई और मैडम ने हँसकर कहा- ठीक है चलो बैड पर बैठो।
मैं बैठ गया। उसने कहा- मैं चेंज करके आती हूँ, आप यहीं पर बैठो।
मैडम शिवानी थोड़ी देर बाद आई तो उसको देखकर मैं तो हैरान रह गया। वह केवल बहुत हल्की नाईटी पहने हुए थी और उसके अन्दर सब कुछ दिखाई दे रहा था।
वो मुझको देखकर मुस्कराई और कहने लगी- आपने पहले किसी औरत को ऐसे नहीं देखा क्या?
मैंने कहा- मैडम! नहीं! देखा तो है, पर आप जैसी अप्सरा को नहीं देखा, आप तो परियों से भी सुन्दर दिखती हो।
मेरी बात सुनकर वह खिलखिला के हँसने लगी।
अब मेरी भी जान में जान आ गई, उसने मुझे कहा- आप मुझे मैडम मत कहो, मुझे सिर्फ शिवानी कहो।
मैंने कहा- जी अच्छा।
शिवानी अपनी दोनों टांगों को ऐसे करके बैड पर मेरे सामने बैठ गई कि उसकी मुझे पैंटी दिखाई देने लगी और मैं उसकी टांगों के बीच में से उसकी पैंटी को देखने लगा।
मेरा लण्ड जो की साईज में 8 इंच लम्बा और 2.5 इंज मोटा था पैंट के अन्दर दहाड़ मारने लगा।
शिवानी ने कहा- विजय तुम क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं!
वो हँस कर बोली- विजय! जब तुम कुछ नहीं देख रहे हो तो तुम्हारी पैंट क्यों उपर की तरफ उठ रही है। चलो, अपनी पैंट उतार कर दिखाओ कि इसमें क्या सामान है जो कि बार बार पैंट फाड़ने के लिए तत्पर है।
मैंने सोचा कि कही मैडम गुस्सा ना करने लगे तो मैंने पैंट उतार दी।
मैडम ने कहा- आप अपने सारे कपड़े भी उतारो!
मैंने शर्ट और बनियान भी उतार दिया अब मेरे शरीर पर सिर्फ अन्डरवीयर था।
तो शिवानी के चेहरे पर अजीब सी मुस्कुराहट दिखाई देने लगी और मेरा शर्म के मारे मेरा बुरा हाल हो रहा था क्योंकि मैंने पहले कभी भी किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे थे।
शिवानी ने कहा- विजय! अब अपना अन्डरवियर भी उतारो!
मैंने कहा- शिवानी जी! आपने मेरे तो सारे कपड़े उतरवा दिये हैं, पर आपने अपने कपड़े तो पहने हुए है आप भी तो अपने कपड़े उतारो शिवानी जी। शिवानी ने कहा- आप ही उतार दो ना!
पहले मैंने उसकी नाईटी उतार दी, नाईटी उतारते ही उसके बदन को देखकर मैं तो चकित ही रह गया कि उसका बदन तो संगमरमर की तरह से बिल्कुल चमकीला और सफेद था।
और उसके फिगर तो किसी भी परी से कम नहीं थी उसकी फिगर को देखकर मैं तो पागल ही हो गया और सोचने लगा कि यह शादीशुदा होने के बाबूजूद अपने शरीर की आग किसी और से बुझवाती है?
शिवानी ने कहा- विजय आप सोचते बहुत ज्यादा हैं, काम कुछ कम करते हो!
मैंने कहा- नहीं मैडम, ऐसा कुछ भी तो नहीं!
शिवानी ने मझे अपनी बाँहो में भर लिया और कहने लगी- आप मुझे ऐसे मजा दो कि हम दोनों सब कुछ भूल जाएँ!
मैंने कहा- शिवानी जी! आप जो कह रही हैं, वह ठीक है।
और मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और शिवानी के होठों को चूसने लगा। तो शिवानी ने अपनी जीभ में मुँह के अन्दर डाल दी।
मैं भी उसकी जीभ को चूसने लगा।
अब वो मस्त होती जा रही थी, कहने लगी- विजय, तुम मेरे अन्दर समा जाओ! आप जैसा जवान मर्द मुझे अभी तक मिला नहीं!
मैंने कहा- शिवानी जी! आप तो शादीशुदा हो, तो फिर क्या आपके पति आपको सन्तुष्ट नहीं कर पाते हैं?
शिवानी ने कहा- मेरी शादी को 6 साल हो गये और मुझे आज तक कभी भी वो शारिरिक सुख नहीं दे पाए हैं, बस उसके पास तो पैसा ही पैसा है और उसी के पीछे लगा रहता है, हफ्ते दस दिन में ही आता है, मैं अकेली ही रहती हूँ और जब भी आता है बस उसको काम ही काम नजर आता है। कभी मैं उनको कहती भी हूँ तो वो इस काबिल ही नहीं हैं कि वह कुछ कर पायें! मैं चाहे कुछ भी कहीं भी करूँ उसको तो इस बात से भी एतराज नहीं है। मैं बस अपनी प्यास ऐसे ही आज आपसे बुझवा रही हूँ। विजय आप भी अपने बारे में बताओ कि इस लाईन में तुम कैसे आये?
मैंने कहा- मैं नौकरी की तलाश में भटक रहा था तो सुरेश ने इस काम के बारे में मुझे बताया और आज मेरी पहली कॉल है।
तो वो यह सुनकर और भी ज्यादा खुश हो गई और मेरे से लिपट गई।
मैं एक हाथ उसकी ब्रा के ऊपर ले गया और धीरे-2 हाथ उसकी चूचियों पर फेरने लगा।
अब वो मस्त होने लगी और मैंने उसकी ब्रॉ के हुक खोल दिये, शिवानी के मम्मे आजाद हो गये।
उनको देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि वो 28 साल की होगी।
उसकी चूची 16 साल की लड़की की तरह सिर्फ 32 साइज की थी और बिल्कुल कसी हुई जो कि आराम से हाथ में आ जाये।
मैं अपने को बहुत ही खुशनसीब मानने लगा कि पहली ही कॉल पर ऐसा माल मिल गया जिसके लिए मैं क्या कोई भी कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाये।
मैं उनको धीरे-धीरे सहलाने लगा और वो सिसकने लगी। फिर मैंने अपने होठों को उसके होंठ से हटाकर उसकी चूची को चूसने लगा जो कि एकदम से टाईट हो चुकी थी और उसके निप्पल तो एक दम से तन चुके थे।
मैं एक हाथ से उसकी बाँई चूची को सहलाने लगा और दाँई चूची को मुँह से चूसने लगा। वो बुरी तरह से सिसकने लगी। मैं बुरी तरह से, पागलों की तरह उसकी चूची को चूसे और मसले जा रहा था।
वो बुरी तरह से तड़पने लगी, उसने मेरे अन्डरवीयर में हाथ डाल दिया और मेरे लण्ड को बाहर निकाल कर उसको पागलों की तरह से मसलने लगी।
मैं तो दीवानों की तरह उसकी चूचियों को मसल व चूस रहा था और वो बुरी तरह से मदहोश होकर मेरे लण्ड से खेलने लगी।
हम दोनों 5-6 मिनट तक ऐसे ही करते रहे।
फिर एक ही झटके में उसने मेरे अन्डरवियर को निकाल फेंका और मुझसे अपने आप को छुड़ाकर वो मेरे लण्ड को चूसने लगी।
मैं बुरी तरह से हाँफने लगा और उसके मुँह में ही अपने लण्ड को अन्दर बाहर करने लगा।
थोड़ी देर के बाद मैंने अपने लण्ड को उसके मुँह से बाहर निकाल लिया और उसकी पैंटी को निकाल दिया। वाह क्या चूत थी उसकी! बिल्कुल गुलाबी! मानो गुलाब की पँखुड़ियों से बनी हुई और उसमें से निकलता हुआ उसकी टाईट चूत का पानी जो कि उसकी बिल्कुल सफेद टांगों के बीच में ऐसे लग रही थी कि बरसों से आज ही जागी हो, और उसका गुलाबी दाना!
मैंने उसकी चूत को मैंने ऊपर से ही चूमना शुरू किया और मुँह को चारों तरफ घुमाने लगा उसकी चूत से मीठी मीठी गंध आ रही थी जिसको मैं सूंघकर मदहोश होता जा रहा था। उसकी गीली चूत फूल गई थी।
अब मैंने उसकी टांगों को चौड़ा किया और उसकी चूत एकदम खुलकर मेरे सामने थी, मैं उसकी चूत की गहराई देख रहा था। अब मैंने दोनों हाथ से उसकी चूत को फैलाकर उसके अन्दर अपनी जीभ घुसा दी।
वो बुरी तरह से सी सी सी करने लगी और मैं अब उसकी चूत के अन्दर बाहर अपनी जीभ को करने लगा और उसकी गोले गोल गांड को बुरी तरह से सहलाने लगा।
वो बुरी तरह से तड़पने लगी और मेरे लण्ड को सहलाने लगी। मैं तो उसकी चूत को चाट चाट कर मदहोश होता जा रहा था, अचानक उसने अपने हाथों से मेरे मुँह को पकड़ लिया और कहने लगी- विजय! और ज्यादा ना तड़फाओ, मेरे से रूका नहीं जा रहा है, बस अब अपने लण्ड को मेरी चूत में घुसा दो! दो ना विजय!
और अपने ऊपर से मुझको धकेलने लगी। मैं भी उसकी चूत से हटकर उसके ऊपर 69 की पोजीशन में आ गया।
अब मैं उसकी चूत को चाट रहा था और शिवानी मेरे लण्ड को मुँह में लेकर चाटने और हाथ से मसलने लगी और 6-7 मिनट के बाद शिवानी का शरीर बुरी तरह से अकड़ गया और उसने मुझको कस के पकड़ लिया और बुरी तरह से तड़पने लगी और कहने लगी- जोर जोर से! ऐसे चूसो! जीभ को पूरी अन्दर डाल दो! विजय वैरी वैरी फास्ट! तेजी से मैं मर जाउँगी! आ आ ई ई!
और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, सारा पानी मैं अपने मुँह के अन्दर ले गया। उसने मेरे लण्ड को कस के पकड़ लिया और बुरी तरह से मसलने लगी और कहने लगी- विजय बस अब तो अपना लण्ड मेरी चूत में डालो जल्दी से! जल्दी डालो! नहीं मैं तो मर जाउँगी!
मैंने उसको छोड़कर अपनी पैंट की जेब से कन्डोम का पैकेट निकाला और कन्डोम को निकाल कर अपने लण्ड के ऊपर चढ़ाने लगा तो शिवानी ने कहा- नहीं! कन्डोम के बगैर करो!
मैंने कहा- नहीं शिवानी जी! मैं ऐसा नहीं कर सकता।
शिवानी नाराज हो कर कहने लगी- मेरी शादी को 6 साल हो गये हैं और मेरी आज तक एक भी औलाद नहीं है, इसलिए ही तो मेरे पति ने मुझे इतनी छूट दे रखी है और आज पहली बार किसी पराये मर्द से चुद रही हूँ, प्लीज कन्डोम नहीं! मेरी सहेली ने मुझको सुरेश का नम्बर दिया था, इसलिए ही तो आपको बुलाया है, और आप भी कन्डोम लगाकर करेंगे? नहीं नहीं! विजय।
इतना कह कर उसने मुझको बाँहो में भर लिया और कहने लगी- बस मुझे एक बच्चा ही तो चाहिए और क्या! मुझको अपनी प्यास नहीं बुझानी! बस एक बार मेरी कोख भर दो विजय! मुझे बस एक बच्चा चाहिए।
वो रोने लगी, मैंने उसको बाँहों में भर लिया, उसके सर को सहलाने लगा और धीरे धीरे उसकी कमर पर हाथ फेरने लगा। वो भी मेरे लण्ड को सहलाने लगी और तड़पने लगी, कहने लगी- विजय मेरी चूत में अपना लण्ड जल्दी से डालो! मुझसे रूका नहीं जा रहा है, मैं तो मर ही जाउँगी!
फिर मैंने उसको बैड पर लिटाया, उसकी टांगों को ऊपर उठाकर अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के उपर रखा और एक जोर से धक्का मारा, वो बुरी तरह से तडफने लगी और जोर से चीखी- विजय आपका लण्ड तो बहुत मोटा है! आप धीरे से अन्दर करो, नहीं तो मैं तो मर ही जाउँगी!
मैंने कहा- ठीक है!
फिर मैंने उसकी चूत पर खूब सा थूक लगाया और उसने मेरे लण्ड पर थूक लगाया, मैंने उसकी चूत पर अपना लण्ड टिका कर धीरे धीरे दबाव लगाना शुरू किया तो शिवानी बोली- विजय, धीरे धीरे से अन्दर करते रहो!
मैं भी धीरे धीरे लण्ड को अन्दर करने लगा लेकिन जैसे से मेरा लण्ड उसकी चूत में 3 इंच गया तो वो कहने लगी- विजय, और अन्दर मत डालो, मेरा तो बुरा हाल हो रहा है, मैं ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाउँगी!
मैं धीरे-धीरे अपने लण्ड को ऐसे से अन्दर बाहर करने लगा तो कुछ ही देर बाद उसको मजा आने लगा और कहने लगी- थोड़ा और अन्दर डालो!
मैंने फिर एक जोर का धक्का मारा, मेरा लण्ड 6 इंच तक उसकी चूत में घुस गया, वो दर्द से बुरी तरह हाँफने लगी और कहने लगी- रूको, थोड़ी देर के लिए!
मैं रूक गया और उसकी चूचियों को दबाने लगा और उसके होठों को चूसने लगा।
थोड़ी देर के बाद मैं अपने लण्ड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा, उसका भी दर्द कम होने लगा और उसको मजा आने लगा।
उसने कहा- विजय अब अपने लण्ड को थोड़ा और अन्दर करो!मैंने एक जोर का धक्का मारा, मेरा लण्ड उसकी चूत में जड़ तक उसके अन्दर घुस गया, शिवानी बुरी तरह से तड़पने लगी और कहने लगी- विजय बाहर निकालो, नहीं तो मैं तो मर ही जाउँगी!
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और उसकी चूचियों को बुरी तरह से मसलने लगा।
कुछ ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और अब मैं अपने लण्ड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।
शिवानी का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। 3-4 मिनट बाद शिवानी ने कहा- विजय धक्कों की स्पीड बढ़ाओ!
मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। अब शिवानी को मजा आने लगा और अपनी गाँड को उपर नीचे करने लगी। धक्कों की धप धप की आवाज आने लगी। शिवानी के मुँह से आआआअ ऊऊऊऊ इइइइइ आआआऽऽ अआआआ ऊऊऊऽऽ ईईईईर्ई सीसीसीसी की आवाजों के साथ मुँह से सिसकारी निकलने लगी और जोर जोर से चिल्लाने लगी- मार दे मुझे! आऽऽआ आह सी सी सीऽऽऽइ इ इऽऽइ!
और कुछ ही देर में उसने मुझको जोर से जकड़ लिया और उसका पानी छूट गया जोकि मेरे लण्ड पर और उसकी जाँघों पर फैलने लगा।
उसके बाद मैंने उसको कुतिया की तरह पैरों और हाथों के बल खड़ा किया, पीछे से अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और दनादन धक्के पे धक्के मारने लगा।
वो मजे में बड़बड़ाने लगी- विजय! ओ विजय! खूब तेजी से करो! मेरी चूत को फाड़ डालो! आज तक आप जैसा मर्द मुझे नहीं मिला! काश आप मेरे पति होते मुझको जन्नत की रोज सैर करा देते! नहीं! फाड़ दो मेरी चूत को विजय! वेरी फास्ट! जल्दी जल्दी विजय! तेजी से!
मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड दुगनी कर दी। मैं बड़ी बेरहमी से चूचियाँ पकड़ के उसको मसलने लगा और धक्कों की भी स्पीड और भी ज्यादा कर दी। कुछ ही देर में मेरा छूटने का आ गया और मेरे मुँह से आ आहा आ हा सी सी ई ई ई आई की आवाज आने लगी।
शिवानी कहने लगी- विजय लण्ड को बाहर मत निकालना! अपना पानी अन्दर ही छोड़ना! अन्दर ही छोड़ना! मैं आपके ही बच्चे की माँ बनूंगी विजय!
मैंने अपना लण्ड शिवानी की चूत से बाहर निकाल लिया और उसको लेटने के लिए कहा, वो सीधा लेट गई और फिर मैंने उसकी टांगों को ऊपर उठाकर अपना लण्ड शिवानी की चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा अन्दर उतार दिया। वो थोड़ा करहाई।
फिर मैंने अपना लण्ड पूरा बाहर खींचा, जबरदस्त धक्के पे धक्के मारने लगा और 2-3 मिनट के ही बाद मेरे लण्ड ने अपना पानी उसकी चूत के अन्दर छोड़ दिया और मैं अपना लण्ड उसकी चूत के ही अन्दर डाल कर उसके ऊपर लेट गया। दो तीन मिनट तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे।
मैंने शिवानी से पूछा- बाथरूम कहाँ पर है?
तो शिवानी मुझको बाथरूम में छोड़ कर आई।
मैंने बाथरूम में जाकर अपना लण्ड पानी से साफ किया और फिर मैं नहाने लगा तो कुछ ही देर में बाथरूम के दरवाजे पर ठक ठक की आवाज हुई और साथ में शिवानी की आवाज आई- विजय मैं आपके लिए तौलिया लेकर आई हूँ, प्लीज दरवाजा खोलो!
मैंने दरवाजा खोला तो शिवानी नंगी ही तौलिया लेकर दीवार के सहारे खड़ी हुई थी।
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने शर्म से सिर झुका लिया और अन्दर आ गई, कहने लगी- विजय अकेले ही अकेले नहा रहे हो? क्या मैं भी आपके साथ नहाउँ?
मैंने कहा- हाँ हाँ क्यों नहीं!
और हम दोनों साथ साथ नहाने लगे। एक दूसरे के अंगों से छेड़छाड़ करने लगे, कुछ ही देर में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो शिवानी ने कहा- विजय तुम्हारा औजार तो बहुत शानदार है, बहुत ज्यादा लम्बा और मोटा! मेरे पति का तो आपसे दो इंच छोटा है! कह कर शिवानी पीछे की तरफ को घूम गई।
मैंने शिवानी को पीछे से बाँहो में भर लिया और उसकी गोले गोल गांड को देखकर सोचने लगा क्यों ना लगे हाथ साली की गांड भी आज ही मार लूँ!
मैं शिवानी की चूचियों को पीछे से पकड़ के धीरे धीरे दबाने लगा और वो फिर से गर्म होने लगी। शिवानी ने मरे लण्ड को हाथ पीछे करके पकड़ लिया और लण्ड को धीरे धीरे सहलाने लगी।
मेरा लण्ड लोहे की रॉड की तरह से खड़ा हो गया।
शिवानी कहने लगी- बाप रे बाप! आपका लण्ड तो रॉड की तरह से अकड़ गया और बहुत ही ज्यादा सख्त हो गया है विजय!
तो मैं उसकी चूचियों का छोड़ कर उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा, मैंने शिवानी से कहा- शिवानी! आप की फिगर तो बहुत ही शानदार है, पर आप की गांड तो उससे भी सुन्दर है, क्या मैं आपकी गांड की भी भूख मिटा दूँ?
नहीं! नहीं विजय! शिवानी ने कहा- जब तुम्हारे लण्ड से मेरी चूत की यह हालत हो गई तो मेरी गांड की क्या हालत होगी। नहीं नहीं माँ रे! विजय आज तो आप मेरी चूत की ही प्यास बुझाओ, आओ, जल्दी से मेरी प्यास एक बार और बुझा दो ना, बुझाओ ना! विजय आपने जो मजा मुझे दिया है आज तक मेरा पति कभी भी नहीं दे पाया है और ना ही दे पायेगा। मैं तो आज आपकी गुलाम हो गई। ये देखो मेरी चूत से अभी भी खून निकल रहा है। विजय मुझे तो आपसे चुदने पर ऐसा लगा कि जैसा आज ही पहली बार चुद रही हूँ, ओ विजय, एक बार बस प्यास बुझा दो ना विजय!
मैंने शिवानी का बाँहो में भर लिया और उसको चूमने लगा। कभी मैं उसके होटों को चूसता तो कभी उसकी गर्दन को चूमता!
और पागलों की तरह से शिवानी मदहोश होने लगी। फिर मैं उसकी चूची को एक हाथ से पकड़ के मसलने लगा और दूसरी चूची को चूसने लगा। कुछ ही देर में शिवानी कहने लगी- विजय! अपना लण्ड मेरी चूत में डालो ना जल्दी से!
मैं उसकी चूचियों को छोड़कर, नीचे झुक कर, उसकी एक टांग को ऊपर उठाकर उसकी चूत को चाटने लगा, जिसमें से पहले ही मेरे लण्ड और उसकी चूता का पानी निकल रहा था। मैंने उसको चाट-चाट के साफ किया।
लेकिन थोड़ी ही देर में शिवानी ने तड़प कर कहा- विजय ज्यादा मत तड़फाओ! बस जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ो ना विजय!
मैंने उसकी एक टांग को थोड़ा और ऊपर किया और अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रखा ही था कि शिवानी ने शावर चला दिया। ऊपर से पानी की बारिश होने लगी।
एक ही धक्के में मैंने अपना लण्ड शिवानी की चूत में आधे से ज्यादा अन्दर कर दिया और वो दर्द के कारण जोर से करहाई।
फिर मैंने एक और धक्का जोर से मारा, मेरे पूरा का पूरा लण्ड शिवानी की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया और शिवानी बुरी तरह से तड़फने और चिल्लाने लगी- मार ही डालोगे क्या? आराम से नहीं कर सकते क्या?
मैंने अपना लण्ड आधा बाहर निकाला और फिर धीरे धीरे से अन्दर बाहर करने लगा और उसकी चूचियों को मसलने लगा और उसके होंठों अपने होंट से बन्द कर दिया।
कुछ ही देर में उसको मजा आने लगा, शिवानी कहने लगी- विजय धीर धीरे अन्दर बाहर करो अपने लण्ड को! मुझे मजा आ रहा है विजय!
मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये और कुछ ही देर में अपनी स्पीड फुल कर दी।
सात आठ मिनट के ही बाद शिवानी की चूत ने पानी छोड़ दिया।
अब मैंने उसको नीचे झुकने के लिए कहा, वो झुक गई तो मैंने अपना लण्ड पीछे से उसकी चूत में अन्दर घुसा दिया और थोड़ा सा करहाई और फिर उसको मजा आने लगा।
मैं फिर दनादान धक्के पे धक्के मारने लगा और दस बरह मिनट में मेरे भी लण्ड ने पानी उसकी चूत में ही अन्दर छोड़ दिया। शिवानी इस दौरान दो बार झड़ी।
फिर मैंने शावर के पानी से उसकी चूत को साफ किया और उसने मेरे लण्ड को साबुन लगा कर अच्छी तरह से साफ किया। नहा कर हम दोनों नंगे ही वापस शिवानी के बेडरूम में आ गये, हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और मैंने शिवानी से जाने की इजाजत माँगी तो शिवानी ने मुझसे कहा- विजय! जब भी मैं आपको फोन करूँ तो आपको जरूर आना पड़ेगा!
मैंने शिवानी से कहा- मेरे पास तो फोन ही नहीं है।
तो शिवानी कहा- कोई बात नहीं फोन हम आपको दे देते हैं!
और शिवानी ने मेरी फ़ीस के मुझे आठ हजार रूपये दिये और चार हजार रूपये फोन के लिए दिए। मैंने शिवानी का धन्यवाद किया और मैं अपने घर चला आया।
उसके बाद शिवानी मुझे हफ्ते में कम से कम एक बार बुलाती और उसके दो महीने ही बाद ही शिवानी गर्भवती हो गई। अब शिवानी के दो बच्चे है। वो मेरा बड़ा ही अहसान मानती है और बहुत ही ज्यादा इज्जत करती है। अब महीने में कम से कम एक बार जरूर बुलाती है।
शिवानी ने मुझे अपने परिवार के हर सदस्य से मिलाया है और तो और उसने अपने पति से भी।
शिवानी का पति मेरी बहुत इज्जत करता है और उसने मुझे नौकरी भी अपनी कम्पनी में दिलाई।
अब शिवानी और उसका परिवार बहुत खुश है, खुश भी क्यों ना हो भरा-पूरा परिवार है, किसी भी चीज की कमी नहीं है, मैं भी उनकी बहुत ही इज्जत करता हूँ क्योंकि वो मेरे जरूरत के दिनों में काम आई।
मेरे और शिवानी के बीच जो भी हुआ, और है, एक राज है और राज ही रहेगा।
मैं विजय, जो ना चाहते हुए भी यह कहानी लिख रहा हूँ जो कि एक हकीकत है, आप लोग मानो या ना मानो, सिर्फ नाम बदल रहा हूँ। Antarvasna
मेरी योनि के Hindi Porn Stories अन्दर घूमती उंगली ने मुझे मदहोश कर रखा था… स्स्स्स्सईई मेरी सिसकारी निकलने लगी… वो धीरे धीरे उन्गली अन्दर बाहर कर रहा था… पर मैं इतनी मस्त हो गई थी कि ना तो एक उंगली से गुजारा हो रहा था और ना ही इतनी कम स्पीड में अब मजा आ रहा था…
आज इन को क्या हो गया? इतनी देर से एक ही उंगली से करे जा रहे थे और वो भी इतनी धीरे धीरे… मेरी कामुकता इतनी बढ़ गई थी कि मैंने अपने आप ही उनकी दो उंगलियाँ पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ कर जोर जोर से पेलने के लिये जैसे ही उनका हाथ पकड़ा… मैं सन्न रह गई… यह तो बड़ा मुलायम सा हाथ था… मेरे पति का हाथ तो घने बालों से भरा पड़ा है.
तभी मेरा दिमाग झन्नाया… मुझे याद आया कि मैं तो अपने एक रिश्तेदार के घर शादी में शामिल होने आई थी और खाली जगह देख कर कोने में सो गई थी। कमरे में अन्धेरा था, मैंने उसके हाथ को पकड़ कर दूर करना चाहा लेकिन मैं उस की ताकत के सामने हार गई, मेरा बदन कांपने लगा।
इस कमरे में तो मेरे आने से पहले तीन औरतें और एक छोटा सा बच्चा सो रहा था और कमरे में लाइट जल रही थी तो फ़िर यह कौन है? कब अन्दर आया और इतनी हिम्मत कर ली कि मेरे साथ यह सब?
मैं उस को पहचानने के लिये अपना हाथ उसके चेहरे पर ले गई तो वो मेरे कान में फ़ुसफ़ुसाया- मम्मी, मैं हूं बिल्लू!
मैं सन्न रह गई… यह मेरा अपना 12वीं में पढ़ने वाला 18 साल का बेटा ही मेरी चूत में उंगली घुसेड़ कर मज़े लूट रहा था।
“कमीने, यह तू क्या कर रहा है… शरम नहीं आती… अपनी माँ के साथ…? चल हटा अपना हाथ!” मैं उसके कान में फ़ुसफ़ुसाई।
“मम्मी, प्लीज… अब रहने दो ना… मजा आ रहा है।”
मैंने उसको समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उस को जो कुछ भी करना है जल्दी करने को कहा।
बिना वक्त गवांये वो मेरे ऊपर आया… मेरी गीली चूत पर अपना लण्ड रखते ही धक्के मारने चालू किये, 6-7 धक्कों के बाद वो शान्त हो गया।
अगले दिन 11 बजे ऑटो से मैं और बबलू घर आये, रास्ते में हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई। चूंकि उस दिन वर्किंग-डे था सो बबलू के पापा पड़ोस में चाबी देकर गये थे, पड़ोस से चाबी ले कर दरवाजा खोलने के बाद मैं अपने बेडरूम में गई और बबलू अपने रूम में। बैग से कपड़े निकाल कर मैं बाथरूम में चली गई।
कपड़े धोने और नहाने के बाद मैं हमेशा की तरह पेटिकोट और ब्लाउज पहनकर अपने बेडरूम में साड़ी पहनने के लिये गई। साड़ी पहनने से पहले मैं आगे की तरफ़ झुक कर तौलिए से अपने बाल सुखा रही थी कि तभी किसी ने पीछे से आ कर मेरी दोनों चूचियाँ जोर से भींच ली, उस का तने हुये लण्ड का स्पर्श मैंने अपनी गांड की दरार पर महसूस किया।
एक सेकेन्ड के लिये चौंकी… फ़िर अहसास हुआ कि बबलू के अलावा घर में कोई और है भी नहीं…
मैंने गुस्से में पलट कर जोर से उसके गाल पर एक जबरदस्त तमाचा जड़ा। उसने मेरी चूचियाँ इतनी जोर से दबाई थी कि मेरे आंसू निकल गये। वो मेरे तमाचे से बौखला गया… उसका चेहरा लाल हो गया… और जोर से चिल्ला कर बोला- चाचा से तो खूब करवाती हो… चिल्ला चिल्ला कर… मैं भी तो वही कर रहा था… फ़िर मारा क्यों…??
उस की बात सुनकर मेरी जबान कुछ कहने से पहले मेरे हलक में अटक गई… मैं फटी आंखों से उस को देखती रही… मैं अवाक रह गई।
“बोलो ना! अब क्यों नहीं बोलती कुछ?” उसने गुस्से में कहा।
थोड़ी देर खामोश रहने के बाद मैंने थोड़े गुस्से और थोड़े प्यार के लहजे में उस से कहा- क्या बकवास कर रहा है तू? कौन चाचा और कैसा चाचा?
“सहारनपुर वाले चाचा और कौन? जब वो पिछली बार जब वो दोपहर में आये थे, मैंने सब अपनी आखों से देखा था… पहले दिन अपने बेडरूम में और आपने जबरदस्ती उन को एक दिन और रोका था… वही करने के लिये और दूसरे दिन गेस्ट रूम में…! मैंने दोनों दिन देखा था और उन के जाने के बाद आप बहुत उदास भी हुई थी।” उस ने उसी गुस्से वाले अन्दाज में कहा।
मेरे पैर काम्पने लगे… मैं सिर झुका कर बेड पर बैठकर सोचने लगी… अब क्या करूं…???
उसको समझाने के लिये हिम्मत कर मैंने उस की तरफ़ देखा… पर उस की निगाहें दूसरी जगह टिकी देख मैंने अपने पेट के नीचे देखा… मेरे पेटिकोट के नाड़ेघर के पास के कट की सिलाई उधड़ी होने के कारण मेरा पूरा झांट प्रदेश साफ साफ दिखाई दे रहा था।
मैं जल्दी से उस जगह पर अपना हाथ रख कर खड़ी हुई और पेटीकोट को घुमा कर नाड़ेघर को साइड में कर उसको पकड़ कर अपने साथ बिस्तर पर बिठाया और उस को समझने लगी- देख, देवर भाभी और जीजा साली के रिश्ते में कभी कभी ऐसा हो जाता है… पर तू तो मेरा बेटा है… मां बेटे के रिश्ते में यह सब पाप होता है… गाली भी होती है।
“झूठ मत बोलो मम्मी! राजू भी तो अपनी मम्मी के साथ कभी कभी करता है।” बबलू ने झल्ला कर कहा।
राजू बबलू की बुआ का लड़का जो बबलू से एक साल छोटा है.
इस बात से मैं और चौंकी और पूछा- तुझे कैसे पता ये सब…?
वो जब रात को सोने की जगह नहीं मिली तो राजू और मैं उस कमरे में गये जहाँ आप सो रही थी… आप का एक पैर मुड़कर एक साइड में और दूसरा पैर सीधा था, जिस वजह से आपकी साड़ी पूरी ऊपर सरकी हुई थी और पूरी नंगी लेटी हुई थी। मैंने जल्दी से लाइट बन्द की और राजू का हाथ पकड़ कर नीचे ले गया। राजू ने नीचे आकर कहा कि आप की चूत बहुत सुन्दर है और उसकी मम्मी की तरह काली नहीं है।
जब मैंने उस से पूछा कि तेरी मम्मी तो गोरी है तो फ़िर उनकी चूत काली कैसे हो गई? और तुझे कैसे पता?
तो उसने बताया कि पहले वो छुप छुप कर गुसलखाने में नहाते समय दरवाजे के नीचे की झिरी से देखता था और एक दिन उसकी मम्मी ने उसको पकड़ लिया और तब से वो कभी कभी अपनी मम्मी के साथ वही करता है जो चाचा ने आपके साथ किया था। उसने यह भी बताया कि उन के पड़ोस में रहने वाले जडेजा अंकल के साथ भी उस की मम्मी वही करती है।
उस ने मुझ से कहा कि मैं ऊपर जा कर चुपचाप आप की बगल में लेट जांऊ और अपनी उंगली में थूक लगा कर आप की चूत में डाल कर धीरे-धीरे घुमाऊँ… फ़िर आप अपने आप मुझे अपने ऊपर लिटा कर करने को कहोगी… लेकिन आपने तो ऐसा कुछ नहीं किया… उलटा रात को मेरा हाथ झटक दिया और अभी मेरे गाल पर तमाचा जड़ दिया…क्यों??
अब मैं उस को क्या जवाब देती…? कुछ समझ में नहीं आया। अपनी उस गलती को याद करने लगी जब घर में उसके होते मैंने अपने देवर से… पर मैं करती भी क्या…? मेरे देवर का लण्ड था ही ऐसा जो एक बार देख ले चुदाये बिना रहना मुश्किल और एक बार चुदवा लिया तो जहन में आते ही चूत कुलबुलाने लगती है।
मेरी शादी के चार या पांच महीने बाद एक दिन सहारनपुर में उन्हीं के घर में मौका पाकर उसने मुझ से सम्बन्ध बनाने चाहे…
मेरे टालमटोल करने के बावजूद उसने एक रात मेरे कमरे में आ कर अपनी हसरत पूरी करनी चाही… और पूरी हो भी गई लेकिन बेचारे को आधे में ही भागना पड़ा क्योंकि दूसरे कमरे में लाइट जलने पर वो मेरे ऊपर से उतर कर बाहर भाग गया था। जिस कमरे में मैं सोई थी और बगल वाले कमरे (देवर और उनकी बहन का कमरा) के बीच में छत के पास एक रोशनदान था जहाँ से लाइट जलने का पता चला।
उस रात जो आठ दस धक्के मेरी चूत पर पड़े थे, उन को मैं आज तक नहीं भूल पाई हूँ। ऐसा लग रहा था जैसे एक के पीछे एक दो दो लण्ड अन्दर जा रहे हों और बाहर निकल रहे हों। एक दिन पहले पीरियड से फ़्री होने के कारण ठुकाई के लिये आतुर मेरी चूत और ऊपर से आठ दस धक्कों की रगड़ से और भड़की आग की तड़प से मैं पूरी रात सो नहीं पाई थी।
एक हफ्ता वहाँ रहते हुये हम दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन असफलता ही हाथ लगी और एक दिन मेरे पति आ कर मुझे अपने साथ दिल्ली ले आये।
आज से दो महीने पहले (जिस दिन की याद बबलू ने आज दिलाई) दोपहर को खाने के वक्त वो हमारे घर आये अपनी लड़की से कोई कोर्स करवाने के सिलसिले में मेरे पति से सलाह लेने!
उसको देखते ही मेरी काम पिपासा जाग गई… अठारह साल पहले पड़े आठ दस धक्कों की रगड़ याद आते ही चूत रानी मस्तानी हो चली थी। मेरे पति उस वक्त आफिस गये थे। बबलू खाना खाकर अपने कमरे में लेटा था। मैंने दो थालियों में खाना परोस कर डायनिंग टेबल पर रखा और दोनों (देवर और मैं) बैठकर खाना खाने लगे।
खाना खाते खाते मेरी निगाह बार-बार उसकी टांगों के बीच अटक जाती, जिसे भांप कर देवर ने मेरे पैर पर पैर मारा… मैंने जब उसकी तरफ़ देखा तो उसने मैक्सी ऊपर सरकाने का इशारा किया।
मैंने आंख और सिर हिला कर नहीं में इशारा किया तो वो कुर्सी और नजदीक खिसका कर अपना एक पैर मेरी मैक्सी के अन्दर डालकर मेरी टांगों के बीच में लाकर पैर के अंगूठे से मेरी चूत टटोलने लगा… और उसके आग्रह पर मैंने कुर्सी से उठकर अपनी मैक्सी ऊपर कर उसको अपनी… के दर्शन कराये और बैठ कर खाना खाने लगी।
मेरा देवर तेज दिमाग वाला इंसान है, उसने लुंगी के नीचे कुछ नहीं पहना था, वो बीच में से लुंगी फ़ैलाकर अपने अजूबे लण्ड को निकाल कर मेरी तरफ़ देखते देखते खाना खाने लगा। खाना खत्म करने के बाद मैं किचन से आम लेकर आई।
किचन का काम निपटा कर मैं बाहर आकर उसके पास बैठ कर उसके घर परिवार के बारे में जानकारी लेने लगी।
“तुम बैठक में जाकर सो जाओ, मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा सुस्ता लूं!” कहते हुये जैसे ही मैं उठी, उस ने खींच कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया, एक हाथ से मेरी एक चूची दबा दी।
“पागल हो गये हो देवर जी! जवान लड़का घर में है… छोड़ो ना…” मैंने विनती की।
उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उठ कर अपने कमरे में चली गई। अन्दर जा कर मुझे पछतावा होने लगा। अठारह साल बाद ऊपर वाले ने मौका दिया था और मैंने गंवा दिया। मैं कुछ सोच कर पलटी ही थी कि देवर ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।
मन ही मन बल्लियों उछलते हुये मैंने नाटक करते हुये कहा- रुको देवर जी, मैं बबलू को देख कर आती हूँ।
“उसकी चिन्ता तुम मत करो मेरी जानेमन भाभी… मैं देख कर आया हूँ… वो अपने बिस्तर पर उल्टा हो कर सो रहा है।”
“छोड़ो तो सही… दरवाजा तो बन्द कर दूं!” मैंने कहा।
देवर बाहों में पकड़े पकड़े मुझे दरवाजे के पास लाया, अपने आप कुन्डी बन्द की और उसी अवस्था में ले कर बिस्तर पर आया… मुझे लिटाया… मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरे पैरों को फ़ैलाया और एक झटके में मेरी चूत की चुम्मी ले कर बोला- सच भाभी, भगवान की कसम, इन अठारह सालों तक कैसे कैसे बरदाश्त किया… उस दिन जल्दी जल्दी में कुछ मजा नहीं आया और मैंने तो तुम्हारी फ़ुद्दी के दर्शन भी नहीं किये थे।
मेरी चूत रस भरी की तरह अन्दर से भर चुकी थी, मैं किसी तरह भींच भींच कर पानी को बाहर निकलने से रोक रही थी। मैं आज तसल्ली से उसके लण्ड को देखना चाहती थी कि उस का आकार ऐसा क्यों है…??
मैं उठ कर बैठते ही अपना हाथ लम्बा कर उसकी लुन्गी के अन्दर ले गई… उसके लण्ड को पकड़कर लुन्गी से बाहर निकाल कर नजदीक से देखने लगी।
उसके लण्ड का टोपा नुकीला, टोपा खत्म होते ही (रिंग के पास से) फूला हुआ, 2 1/2 इंच के बाद जैसे 1/2 इंच की गांठ बंधी हो (पूछने पर देवर ने बताया कि बचपन में फोल्डिन्ग पलंग में उसकी लुली फंस गई थी, सात टांके आये थे, जिस कारण टांके वाली जगह से वो एक दम पतला और गिठा के आकार का हो गया था), उसके बाद तीन इंच पीछे की तरफ़ मोटा और जड़ के पास से आधा इंच पतला यानी कुल मिला कर करीब सात इंच लम्बा।
आज मुझे पता चला कि जिस रोज अठारह साल पहले इसने पहली बार मेरी चूत में डाला था उस वक्त मुझे क्यों अजीब लग था।
मेरे हाथ में ही उसका लण्ड झटके मारने लगा… इधर बैठे-बैठे मेरी चूत से फ़क से पानी पेशाब की तरह बाहर निकल गया और मेरे नीचे बेड सीट गीली हो गई। मेरी वासना पूरी तरह जाग चुकी थी…मैं बेड पर लेटी और बोली- आओ ना देवर जी… जल्दी करो… कहीं बबलू जाग ना जाये।
मैं आज अठारह साल पहले की भड़की आग को शान्त करना चाहती थी तसल्ली से।
देवर ने नीचे खड़े-खड़े मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हुये एक उंगली अन्दर सरका दी।
मैं बरदाश्त नहीं कर पाई… मैं समय बरबाद नहीं करना चाहती थी… उस को जोर से खींचते हुये मैंने अपने ऊपर लिटा कर कहा- बड़े कमीने हो तुम…! करते क्यों नहीं…??
“इतनी जल्दी क्या है मेरी जान…? तुमने तो मेरा तसल्ली से देख लिया… मैं भी तो देखूँ अपनी भाभी की मस्तानी फ़ुद्दी को…” वो बड़े इत्मिनान से बोला।
मेरी चूत से लगातार बूंद बूंद कर पानी रिस रहा था। हर औरत समझ सकती है कि ऐसा कब होता है और ऐसा होने पर अगर लण्ड नहीं मिले तो वो कुछ भी कर सकती है… कुछ भी। पर मैंने प्यार से काम लेना ही ठीक समझा और उसकी छाती पर उंगली फेरते हुए कहा- एक बार कर लो ना… फ़िर जी भर के देख लेना मेरे राजा।
“क्या कहा भाभी… जरा एक बार फिर बोलना जरा!” देवर बोला।
“मेरे राजा… एक… बार… कर लो… मेरी नीचे वाली तड़प रही है… उसके बाद जी भर कर जैसे मर्जी हो देखते रहना…” आधा बेशर्मी और आधा शरमाते हुये मैंने कहा और उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।
देवर- हाय मेरी जान… मुझे पता है तुम्हारी फ़ुद्दी टपक रही है… एक बार देखने दो…
मुझे खीज सी होने लगी थी- क्या है देवर जी… तंग मत करो ना… बोला तो है एक बार कर लो फिर जितना मर्जी देख लेना… कहते हुये मैं लेटे लेटे नीचे से अपने आप को एडजस्ट करने के बाद फ़िर कहा- अब नहीं सहा जा रहा है देवर जी… क्यों मेरा मजा खराब कर रहे हो… करो ना… नहीं तो मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगी…
“अच्छा यह बात है!” कहते हुये देवर ने पहले मेरी चूत के बाहर रिसे प्री-कम से अपने लण्ड के टोपे को गीला किया और फ़िर रखते ही गपा…क से घुसेड़ दिया।
मैं शायद इसी वक्त के लिये अटकी थी… मैं तो नीचे से फ़ुदकने लगी… आआआआ अभी आधा लण्ड ही अन्दर घुसा था कि मैं तो झड़ गई। मेरा मूड खराब हो गया…
मेरा बिगड़ा चेहरा देख देवर बोला- अब क्या हुआ…? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया फ़िर…
“बहुत गन्दे और कमीने हो तुम देवर जी!” मैंने कहा- कब से बोल रही थी… तुम हो कि माने ही नहीं, अब तुम भी जल्दी से अपना पानी झाड़ो और दूसरे कमरे में चले जाओ।
“पर हुआ क्या, कुछ बताओगी भी?” देवर ने पूछा।
“मैं तुम्हारे डंडे के साथ मज़े लेना चाहती थी पर तुमने तो सारा काम ही खराब कर दिया!” मैंने कहा।
“बस इतनी सी बात…! अरे मेरी जान…! सब्र करो! ऐसा मजा दूंगा कि भाई साहब को भूल जाओगी और सपने में भी याद करोगी तो चूत से पानी टपकेगा!” देवर ने कहा।
मेरे ऊपर से उतरने के बाद उसने मेरी मैक्सी से मेरी चूत को साफ़ किया और दोनों पैरों के बीच में आने के बाद मेरे चूतड़ों के नीचे अपनी दोनों हथेलियों को रख कर अपना मुँह मेरी चूत पर रखकर चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं उत्तेजित हो गई… चूत चटवाने का यह मेरा पहला अनुभव था… लाजवाब अनुभव!
मेरी चूत के अन्दर फ़िर से सरसराहट होने लगी।
आगे क्या हुआ? जानने के लिए कहानी का अगला भाग : बेटा और देवर-2 Hindi Porn Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.