Important Notice: 📧 Mail for rent: info@tottaa.com

Massage Girl in Puruliya: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Puruliya who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Puruliya that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Puruliya massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Puruliya who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Puruliya massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Puruliya massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Puruliya who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Puruliya employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Puruliya helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Puruliya

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Puruliya at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

मेरा नाम हर्ष है। उम्र 23 साल, कद 5 फुट 11 इंच, पतला-छरहरा जिस्म पर ऊर्जा सी भरी हुई। मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूँ। मेरा औज़ार 7 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है — यह सोचकर ही मैं मुस्कुरा देता हूँ। मेरी इंग्लिश कमज़ोर थी, इसलिए मैंने एक ट्यूशन टीचर रखी। नाम है नेहा मैडम। उम्र 31 साल। पति एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं और 20 दिन बाहर रहते हैं। पहली मुलाकात में ही मेरी नज़रें उन पर टिक गईं। उन्होंने सफेद कॉटन साड़ी पहनी थी, गीले बाल थे। जब वह झुककर किताब खोलने लगीं तो पल्लू फिसल गया। मैंने उसे वापस रखने की कोशिश में उनकी त्वचा को छू लिया। "थैंक यू," उन्होंने कहा, मेरी आँखों में देखकर। "मैडम जी, आप बहुत खूबसूरत हैं," मैंने मुस्कुराते हुए कहा। उनके गालों पर लाली छा गई। "चुप रहो, पढ़ने दो।" लेकिन मैं उन्हें घूरता रहा। उनकी गर्दन लंबी थी, और जब वह झुकतीं तो ब्लाउज की गहराई से मेरी नज़रें नहीं हटतीं थीं। अगली बार जब मैं गया तो जानबूझकर थोड़ा लेट पहुँचा। शाम के 6 बजे, बारिश में भीगा हुआ। मेरी टी-शर्ट चिपक गई थी मेरे जिस्म पर। "अरे, तुम तो पूरे भीग गए!" वह चौंकीं। "आपकी याद आ रही थी पूरे दिन," मैंने कपड़े ठीक करते हुए कहा। उनकी नज़रें मेरे सीने पर टिकीं। "जाओ, ऊपर बाथरूम में तौलिया ले लो।" जब मैं नीचे आया तो उन्होंने चाय दी। मैंने जानबूझकर उनके पास बैठते समय अपना पैर उनके पैर से छुआ दिया। "सॉरी मैडम जी," मैंने कहा। "कोई बात नहीं," वह पल्लू ठीक करने लगीं। मैंने अपना हाथ ड्राइंग टेबल पर रखा, जहाँ उनका हाथ पहले से था। "मैडम जी, आपके हाथ बहुत नरम हैं।" "हर्ष..." वह घबराईं, "यह ठीक नहीं है।" "क्यों? मैं तो बस सच बोल रहा हूँ," मैंने उनकी उँगलियों को छुआ। वह हाथ हटाने लगीं, लेकिन मैंने हल्के से दबाव बनाए रखा। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने उनका हाथ अपने होंठों के पास लाया और हल्का सा चूम लिया। "हर्ष! यह क्या कर रहे हो!" वह उठ खड़ी हुईं। "मैडम जी, मैं जानता हूँ आप भी यही महसूस करती हैं," मैंने कहा। "चुप! पढ़ाई करो," वह सख्त होने की कोशिश की, लेकिन उनकी आँखें कुछ और ही कह रही थीं। कुछ दिन बाद फिर मिलना हुआ। इस बार मैंने दरवाज़ा बंद करते समय जानबूझकर चाबी लगा दी। वह नीले रंग की साड़ी में थीं। "आज क्या पढ़ाना है मैडम जी?" मैंने पास बैठते हुए पूछा। जब वह झुकीं, तो मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी पीठ पर रख दिया। "हर्ष!" वह चौंकीं। "क्या हुआ? मैं तो बस देख रहा था कि आप ठीक तो हैं," मैंने उनके कंधे पर हाथ फेरा। वह मुड़ीं। मैं उनके बहुत करीब था। "यह गलत है... मैं तुमसे 8 साल बड़ी हूँ... और शादीशुदा भी..." "तो क्या हुआ? दिल तो उम्र नहीं देखता," मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में भर लिया। "प्लीज़..." वह धीमी आवाज़ में बोलीं, "अगर किसी को पता चल गया तो..." "किसी को पता नहीं चलेगा," मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए। वह सिहर उठीं। मैंने उनकी गर्दन को चूमना शुरू किया, हल्के-हल्के चुंबन देते हुए ऊपर की ओर बढ़ा। जब मैंने उनके कान के पास होंठ रखे तो वह काँपने लगीं। "कैसा लग रहा है मैडम जी?" मैंने फुसफुसाते हुए कहा। "अच्छा... मतलब... नहीं... रुको..." वह उलझन में थीं। मैंने उनका चेहरा उठाया और उनके होंठों पर चुंबन कर दिया। वह पहले तो हिचकिचाईं, फिर धीरे से जवाब देने लगीं। हमारी जुबानें मिलीं। वह मीठी लग रही थीं, चाय की तरह गरम। मैंने अपने हाथ उनकी कमर पर ले गया और उन्हें अपनी ओर खींचा। "हर्ष... हमें रुकना चाहिए..." वह मेरे होंठों के बीच बोलीं। "क्यों?" मैंने उनके होंठ चूमते हुए कहा। "क्योंकि यह... यह बहुत आगे बढ़ रहा है..." मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। "मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ।" "मैं डर रही हूँ..." उनकी आँखें नम थीं। मैंने उन्हें सीने से लगाया। "मैं हूँ ना।" मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे, फिर धीरे से नीचे की ओर सरक गए। जब मैंने उनकी साड़ी के ऊपर से ही कमर को सहलाया, तो वह काँप उठीं। "आपकी कमर बहुत नरम है," मैंने फुसफुसाते हुए कहा। "हर्ष... प्लीज़... आज के लिए बस इतना ही..." मैंने रुककर उनका चेहरा देखा। "कल?" वह शरमा गईं और नीचे देखने लगीं। "कल... देखेंगे..." हफ्ता बीतता गया और हमारी मुलाकातें जारी रहीं। हर बार हम थोड़ा और करीब आते। एक शाम, जब बारिश तेज़ हो रही थी, मैं फिर से भीगा हुआ पहुँचा। वह गुलाबी रंग की साड़ी में थीं। "आ गए?" उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी आँखों में अजीब सी चमक थी। मैंने उनका हाथ पकड़ा। "आपकी याद आ रही थी पूरी रात।" वह कुछ नहीं बोलीं। बस मेरी ओर देखती रहीं। मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में भरा और होंठों पर चुंबन कर दिया। इस बार वह पूरी तरह से जवाब देने लगीं, कोई हिचकिचाहट नहीं थी। मैंने उन्हें सोफे पर लिटाया और उनके ऊपर झुक गया। मेरे होंठ उनके होंठों से होते हुए गर्दन पर आए, फिर कंधे पर, फिर उनकी बाहों पर। "आपके जिस्म की खुशबू बहुत अच्छी है," मैंने कहा। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। अब उनके कंधे और ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। "हर्ष... हम..." वह रुक गईं। "हाँ?" मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके स्तनों को छुआ। "हम... आगे बढ़ सकते हैं... लेकिन धीरे-धीरे..." मैंने उनकी आँखों में देखा। "मैं आपकी रफ़्तार से चलूँगा।" मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक... दो... तीन... ब्लाउज खुल गया। अंदर क्रीम रंग की ब्रा थी। मैंने ब्रा को ऊपर किया। उनके गोल स्तन बाहर आ गए। निप्पल गहरे भूरे रंग के, खड़े हुए थे। "आप बहुत खूबसूरत हैं," मैंने कहा और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। "ओह... हर्ष... वहाँ..." वह सिसक उठीं। मैंने चूसना शुरू किया, हल्के-हल्के दांतों से काटा, फिर जीभ से सहलाया। दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को दबा रहा था। "बहुत अच्छा लग रहा है..." वह आँखें बंद करके बड़बड़ा रही थीं। मैंने नीचे की ओर चुंबन देना शुरू किया। उनके सीने के बीच से होता हुआ, पेट पर आया। उनके पेट पर हल्की सी चर्बी थी, मैंने उसे चूमा। "यहाँ भी बहुत प्यारा है," मैंने कहा। मैंने उनकी साड़ी का नाड़ा खोला। साड़ी फैल गई। फिर पेटीकोट की डोरी खोली। "हर्ष... मैं शर्मा रही हूँ..." वह अपने हाथों से चेहरा ढकने लगीं। "मत देखिए मुझे... बस महसूस कीजिए," मैंने उनके हाथ हटाए। मैंने उनकी पेटीकोट नीचे खींची। अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। मैंने उनके पैरों के बीच में आकर उनकी जाँघों पर चुंबन दिए। "आपके पैर बहुत सुंदर हैं," मैंने कहा। जाँघों के ऊपरी हिस्से पर चुंबन देते हुए, मैं धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा। उनकी त्वचा काँप रही थी। "हर्ष... वहाँ मत... बहुत पास हो रहे हो..." वह शरमा रही थीं। "मैं वहीं जाना चाहता हूँ जहाँ आपकी सबसे ज़्यादा खुशी है," मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से चूमा। वह उछल पड़ीं। "ओह गॉड... प्लीज़..." "मैडम जी... अब मैं आपको पूरा महसूस करना चाहता हूँ... अंदर..." मैंने धीरे से कहा। वह मेरे सीने पर सिर रखते हुए बोलीं, "हर्ष... अभी नहीं... हमें थोड़ा वक्त देना चाहिए... यह सब बहुत जल्दी हो रहा है..." "लेकिन मैं तो..." मैंने उनके चेहरे को उठाया। "मैं जानती हूँ तुम क्या चाहते हो... और मैं भी चाहती हूँ... लेकिन अगले हफ्ते... जब मैं पूरी तरह तैयार हो जाऊँ... आज यहीं रुकते हैं..." मैंने उनके होंठों पर चुंबन किया। "ठीक है... जैसी आपकी मर्जी... लेकिन मैं कल भी आऊँगा।" "कल नहीं... परसों... और तब भी सिर्फ़ इतना ही... जब तक मैं खुद न कहूँ..." मैंने उनके बालों को सहलाया। "मैं इंतज़ार करूँगा... लेकिन याद रखिए... मैं आपको पूरा अपना बनाना चाहता हूँ... हर तरह से..." वह शरमा गईं और मेरे सीने में मुँह छुपा लिया। "मैं भी... बस थोड़ा वक्त दो..." वह रात हम दोनों के लिए नई शुरुआत थी। हमने वादा किया कि पहले हफ्ते में सिर्फ़ ऐसे ही एक-दूसरे को छूएँगे, लेकिन असली मिलन अगले हफ्ते होगा... जब नेहा मैडम पूरी तरह तैयार होंगी। पूरा हफ्ता मैंने कुछ नहीं सोचा सिवाय नेहा मैडम के। मेरे शरीर में आग लगी रहती थी। हर रात मैं उन्हें याद करके अपना हाथ अपने औज़ार पर फेरता, लेकिन वो मज़ा नहीं आता था जो उनके मुँह में था। ठीक एक हफ्ते बाद मैं उनके दरवाज़े पर खड़ा था। शाम के पाँच बजे, लेकिन मेरे दिल की धड़कन ऐसे चल रही थी जैसे मैं पहली बार मिलने आ रहा हूँ। मैंने दरवाज़ा खटखटाया। नेहा मैडम ने दरवाज़ा खोला। मेरी साँसें थम गईं। उन्होंने गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी थी — बनारसी सिल्क। उनके बाल खुले थे, गीले भी थोड़े, इतर की खुशबू आ रही थी। उनकी आँखों में वो चमक थी जो पहले नहीं थी। "आ गए?" उन्होंने पूछा, आवाज़ में हल्की सी कँपकँपी थी। "जी मैडम जी... आप... आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं," मैंने अंदर आते हुए कहा। इस बार उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और चाबी भी लगा दी। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। "हफ्ता कैसा रहा?" उन्होंने पूछा, पीठ मेरे सीने से लगाते हुए। "बहुत लंबा... बहुत कठिन..." मैंने उनकी कमर पकड़ ली। वह मुड़ीं। उनके होंठ मेरे होंठों से इंच भर दूर थे। "मैंने भी बहुत सोचा... रोज़ सोचा... तुम्हें..." "क्या सोचा मैडम जी?" मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए। "ये सोचा कि मैं... मैं तैयार हूँ... पूरी तरह..." मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में भरा। "पक्का? कोई जल्दबाज़ी नहीं है..." "नहीं... अब और इंतज़ार नहीं होता... मैंने पूरे हफ्ते अपने आपको तैयार किया... मैं चाहती हूँ तुम्हें... पूरा..." मैंने उन्हें गोद में उठाया। वह हल्की सी चीखीं, फिर मेरे गले से लिपट गईं। मैं उन्हें बेडरूम में ले गया। वहाँ पर सफ़ेद चादरें बिछी थीं, कमरे में इतर की खुशबू थी। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। वह पीठ के बल लेटी थीं, साँसें तेज़ चल रही थीं। मैं उनके ऊपर झुका और होंठों पर चुंबन किया — गहरा, प्यार भरा चुंबन। "आज मैं आपको पूरी तरह अपना बनाऊँगा," मैंने फुसफुसाते हुए कहा। "हाँ... प्लीज़... धीरे से... मैं थोड़ी घबरा रही हूँ... इतने बड़े औज़ार से..." "डरो मत... मैं आपको दर्द नहीं दूँगा... सिर्फ़ खुशी..." मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। बनारसी सिल्क फिसलती हुई उतर गई। फिर मैंने नाड़ा खोला और साड़ी पूरी उतार दी। वह पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। मैंने उनके पैरों पर चुंबन किया — पहले टखनों पर, फिर घुटनों पर, फिर जाँघों पर। वह काँप रही थीं। "हर्ष... प्लीज़... जल्दी करो... मैं रुक नहीं पा रही..." "सब्र रखो मैडम जी... आज रात लंबी है..." मैंने उनकी पेटीकोट उतारी। अंदर गोल्डन रंग की पैंटी थी। मैंने उसे भी नीचे खींचा। वह पूरी तरह नंगी नीचे से थीं, ऊपर ब्लाउज और ब्रा में। मैंने उनकी जाँघों के बीच में जगह देखी। काले बाल, गीली योनि — पिछले हफ्ते की तरह ही, लेकिन आज और भी ज़्यादा गीली। मैंने जीभ लगाई। वह उछल पड़ीं। "ओह गॉड... हाँ... वहीं..." मैंने उन्हें चाटना शुरू किया — क्लाइटोरिस को चूसा, जीभ से छेद में डाली, फिर ऊपर-नीचे किया। उनकी कमर उठने लगी। "मैं झड़ने वाली हूँ... प्लीज़ रुको मत..." मैंने और तेज़ किया। कुछ ही देर में वह झड़ गईं — उनकी योनि ने मेरी जीभ को कसकर पकड़ा और फुरफुराने लगी। वह चीखीं, मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाए रखा। जब वह शांत हुईं, मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा औज़र पूरी तरह खड़ा था — 7 इंच लंबा, 2.5 इंच मोटा, नसों से भरा हुआ। नेहा मैडम ने उसे देखा और निगल लीं। "यह... यह सच में बहुत बड़ा है..." मैंने उनके पास लेटा और उनके हाथ को अपने औज़ार पर रखा। "छुओ इसे... महसूस करो... यह आपके लिए तैयार है।" उन्होंने हाथ से सहलाया, फिर मुँह में लेने लगीं। कुछ देर चूसने के बाद मैंने उन्हें रोका। "अब नहीं... अब मैं आपके अंदर जाना चाहता हूँ..." वह पीठ के बल लेट गईं। मैंने उनके पैर फैलाए। उनकी योनि गीली और थोड़ी खुली हुई थी, लेकिन फिर भी मेरे मोटे औज़ार के लिए तंग थी। मैंने औज़र का सिरा उनके छेद पर रखा। "तैयार हो?" "हाँ... धीरे से... प्लीज़..." मैंने धीरे से धक्का दिया। सिरा अंदर गया। वह कराह उठीं। "दर्द हो रहा है?" "थोड़ा... और अंदर करो... धीरे-धीरे..." मैंने थोड़ा और अंदर किया — आधा औज़र। वह साँसें फूलने लगीं, हाथों से चादर पकड़ ली। "बहुत मोटा है... लग रहा है फट जाऊँगी..." "नहीं फटोगी... आप बहुत गीली हो... अब आराम से लूँगा..." मैंने रुका और उनके स्तनों को चूमने लगा। जब वह थोड़ी ढीली हुईं, मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और पूरा 7 इंच अंदर कर दिया। "आह्ह्ह... ओह गॉड... हर्ष... यह बहुत अंदर चला गया..." वह रोने लगीं, खुशी और दर्द से। मैंने उनके होंठों पर चुंबन किया और धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर गति बढ़ाता गया। "कैसा लग रहा है मैडम जी? अब दर्द कम है?" "दर्द... दर्द बदल गया है... अब बस मज़ा आ रहा है... और तेज़ करो... प्लीज़..." मैंने गति बढ़ा दी। बिस्तर की चरपराहट और हमारी साँसें मिलकर एक अजीब सा संगीत बना रही थीं। मैं उनकी गर्दन पर चुंबन कर रहा था, कानों में फुसफुसा रहा था — "आप बहुत अच्छी हो... मैं आपसे प्यार करने लगा हूँ..." "मैं भी... ओह हाँ... वहीं... बस वहीं..." मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और और गहरा धक्का लगाया। मेरा औज़र उनके गर्भाशय के मुँह से टकरा रहा था। "मैं फिर से झड़ने वाली हूँ... इस बार बहुत ज़ोर से... तुम भी... मेरे साथ... प्लीज़..." "हाँ... मैं भी... तैयार हो जाओ..." मैंने और तेज़ धक्के लगाने शुरू किए। उनकी योनि ने मेरे औज़र को कसकर पकड़ लिया — वह झड़ गईं, शरीर तन कर सिकुड़ा, पैरों ने मेरी कमर कसकर पकड़ी। और मैं भी उनके अंदर ही झड़ गया। मेरा वीर्य उनकी योनि में भर गया, गर्म-गर्म। हम दोनों एक साथ काँपते रहे, एक-दूसरे से लिपटे हुए। जब हम शांत हुए, मैंने अपना औज़र बाहर निकाला। उनकी योनि से मेरा वीर्य और उनका रस बह रहा था। बिस्तर पर एक गीला धब्बा बन गया। नेहा मैडम ने मुझे सीने से लगाया। "शुक्रिया... मैंने कभी सोचा नहीं था कि... यह इतना खूबसूरत हो सकता है..." "यह तो सिर्फ़ शुरुआत है," मैंने उनके बालों को सहलाते हुए कहा। "आज रात अभी बाकी है... और पूरी ज़िंदगी..." हम उलझे हुए थे एक-दूसरे में, जैसे समय थम गया हो। लगभग एक घंटे बाद, जब हमारी साँसें थोड़ी शांत हुईं, तो नेहा उठीं और मेरा हाथ पकड़कर मुझे बाथरूम की ओर ले गईं। शायद आधी रात हो गई थी, कमरे में सिर्फ बाहर से आती सड़क की रोशनी थी। "नहा लो," उन्होंने कहा और शावर चालू किया। गर्म पानी की बौछार में हम फिर से एक-दूसरे को छूने लगे। मैंने उनकी पीठ पर साबुन लगाया, धीरे-धीरे उनकी कमर से होते हुए उनकी जाँघों तक गया। वह कांप गईं जब मेरे हाथ उनके अंदरूनी हिस्सों को छुए। "हर्ष, मुझे लगता है मैं फिर से... तुम्हें चाहती हूँ," वह शरमा कर मेरे कान में फुसफुसाईं। "अभी?" मैंने मुस्कुराते हुए पूछा। "कहीं भी... बस तुम चाहिए," वहने मेरे औज़र को पकड़ लिया जो फिर से खड़ा हो रहा था। इस बार हमने खड़े होकर किया। मैंने उनका एक पैर उठाया और बाथरूम के दरवाज़े पर टिका दिया। पीछे से मैं उनके अंदर घुसा। गीले शरीर, भाप और पानी की बौछार में हम फिर से एक हो गए। उनकी पीठ मेरे सीने से सटी थी, और मैं उनके स्तनों को सहला रहा था। "यहाँ... बहुत गहरा है... तुम मुझे पूरा भर रहे हो," वह दीवार से सटकर कराह रही थीं। पानी की आवाज़ में हमारी साँसें मिल रही थीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए, हर बार जब मैं अंदर जाता तो वह सिसक उठतीं। हम लगभग पंद्रह मिनट तक इसी तरह एक-दूसरे में खोए रहे, फिर जब वह झड़ने लगीं तो मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और खुद भी उनके साथ छोड़ दिया। हम दोनों की गर्मी पानी में मिलकर बह गई। नहाने के बाद हम वापस बिस्तर पर आए। इस बार कोई कपड़े नहीं थे, कोई बाधा नहीं थी। हम एक-दूसरे के बिना कपड़ों के शरीरों को महसूस करते रहे। वह मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं, मेरी उँगलियाँ उनके बालों में फंसी हुई थीं। "कभी सोचा नहीं था कि रात इतनी लंबी हो सकती है," नेहा ने धीमी आवाज़ में कहा। "तुम्हारे साथ तो वक़्त रुक जाता है," मैंने उनके माथे पर चूमा। कुछ देर बाद, जब बाहर का अंधेरा हल्का पड़ने लगा और सड़क पर सुबह की पहली गाड़ियों की आवाज़ आने लगी, तो नेहा की आँखें खुलीं। वह मुझे देख रही थीं, जैसे पहली बार देख रही हों। "सुबह हो गई," उन्होंने कहा, उनकी उँगलियाँ अभी भी मेरे सीने पर चल रही थीं। "तो?" मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया। "तो तुम्हें जाना चाहिए... पड़ोसी जाग जाते हैं," उन्होंने चिंता से कहा, लेकिन उनका शरीर मुझे छोड़ने को तैयार नहीं था। "मैं नहीं जाना चाहता," मैंने उनके होंठ चूमे। "प्लीज़... अगले हफ्ते फिर आना... लेकिन अब जाओ..." मैंने धीरे से अपने कपड़े उठाए। वह चादर में लिपटी खड़ी रहीं, मुझे देखती रहीं। उनकी आँखों में आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी थी। दरवाज़े पर, मैंने मुड़कर देखा। वह हाथ हिला रही थीं। "मैं तुमसे प्यार करती हूँ हर्ष," उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा। "मैं भी... हमेशा," मैंने जवाब दिया। और मैं उनके घर से निकला, जानते हुए कि यह शुरुआत थी... एक ऐसे रिश्ते की जो हमें पूरी तरह बदल देगा। बाहर सुबह की हवा में ओस की खुशबू थी, और मेरे शरीर में अभी भी उनकी गर्मी बची हुई थी।
Hindi porn stories

यह जो स्टोरी लिखने जा रहा हूँ वो कल की ही Hindi porn stories बात है, मेरे एक चाची है उसकी स्टोरी है.
मुझे चाची बहुत अच्छी लगती थी. क्या माल था. उसकी फ़ीगर 38-30-38 थी, बड़े 2 चूतड़ और इतनी सेक्सी गांड थी कि मेरा लंड उसको देख कर टाइट हो जाता था. गांड का पूछो मत मोटी मोटी गांड जब जब वो चलती थी तो गांड हिलती रहती. जब जब मैंने चाची की गांड देखा करता था मेरा लंड जोश में आ जता. चाची बहुत ही सेक्सी थी. बेचारी चाची अंकल के लंड से खुश नहीं थी .

एक दिन मैं उनके घर गया, मीनू चाची अकेली थी. मैंने चाची से पूछा कि सब लोग कहाँ हैं?
चाची ने जवाब दिया- अंकल का तो तुमको पता ही है, और सभी बच्चे मामा के घर गये हैं, आज रात को नहीं आयेंगे.
फिर मैंने चाची को कहा- ओके चाची, मैं चलता हूँ.
चाची ने मुझे रोक लिया और कहा- अभी रुक जाओ, मुझे नहाना है, तब तक तुम मेरे घर का ख्याल रखना, मैं अभी नहा कर आती हूँ.

चाची नाइटी में थी, पिंक नाइटी में उनके बूब्स बड़े सेक्सी लग रहे थे. मैं रुक गया चाची नहाने चली गयी.

मैं इनके बेडरूम में चाची का इन्तज़ार कर रहा था कि अचानक मेरी नज़र बेड पर पड़ी, बेड पर टोवल, पेंटी और ब्रा पड़ा था. ब्रा और पेंटी बहुत बड़ी थी.
चाची ने आवाज़ दी और कहा- टोवल दे दो मुझे.
मैं चाची को टोवेल दिया.
फिर चाची ने कहा- सैम, प्लीज़ मेरी पेंटी और ब्रा भी दे दो.
मैंने चाची को पेंटी और ब्रा भी दे दी.

अब चाची नहा कर निकली. चाची ने ब्लैक कोटन का सूट पहना हुआ था. चाची की सफ़ेद ब्रा नज़र आ रही थी.
अब मैंने चाची को कहा- चाची अब मैं चलता हूँ.
चाची ने कहा- तुम्हें कुछ काम से जाना है क्या?
मैंने जवाब दिया- नहीं.
फिर चाची ने मुझे कहा- रुक जाओ, मैं अकेली बोर हो जाऊँगी. कुछ बातें करते हैं.

मैं बैठ गया और चाची अपनी लाइफ़ के बारे में बता रही थी.
अब चाची कुछ खुल कर बातें करने लगी.

मेरे से पूछने लगी- तुम्हारी गर्लफ़्रेंड्स हैं या नहीं, कभी सेक्स किया है या नहीं?
मैं ऐसी बात सुन के हैरान हो गया. अब मैं भी खुल गया था. मैंने चाची से पूछा- चाची, आपको सेक्स पसंद है?
चाची ने जवाब दिया- सेक्स हर किसी को पसंद होता है पागल. क्या तुम्हें पसंद नहीं है?
मैंने जवाब दिया- कभी किया ही नहीं है.
चाची ने कहा- झूठ मत बोलो, मुझे मालूम है, तुम बहुत बुरे हो, तुमने अपनी काम वाली को चोदा है और नेहा को भी, मुझे सब पता है और तुमने उन पर स्टोरी भी लिखी, मैंने भी तुम्हारी स्टोरी कल रात को पढ़ी थी और मेरी चूत गीली हो गयी थी, जी करता था कि तुमको रात को ही अपने घर बुलाकर अपनी प्यास बुझा लूँ, लेकिन बच्चे घर पे थे, झूठ बोलता है, तूने अपना मोबाइल नम्बर भी दे रखा है, लेकिन मैंने सोचा जब घर आओगे तब ही बात करूंगी तुमसे. तेरी माँ को बोलना पड़ेगा कि तेरा विवाह कर दे.

मैं अचानक डर गया.

चाची ने कहा- डरो मत, मैं कुछ नहीं कहूँगी. मैंने तो तुमको नंगा भी देखा है.
मैंने चाची से पूछा- कब देखा आप ने मुझे नंगा?
चाची ने जवाब दिया- जब तुम मेरे घर के बाथरूम में पेशाब कर रहे थे.
मैंने कुछ नहीं कहा.

‘मेरी भी चूत प्यासी है क्या अपनी चाची की प्यास नहीं बुझाओगे? स्टोरी में तो लिख रखा है गुलाम हाज़िर है, अब चुप क्यों बैठे हो बोलो, अब तुम्हारा लंड प्यास बुझायेगा मेरी चूत की प्यास को?’
मैं सोनिया चाची की बातों से मन ही मन खुश हो रहा था, सोचा नहीं था कि कभी कि चाची खुद तैयार हो जायेगी. मैं उनसे डरता भी था, वो बहुत गुस्से वाली थी.

चाची ने अब अपना हाथ मेरे लंड पर रखा मुझे. तब बहुत अच्छा लगा. मेरी चाची बहुत प्यासी थी वो बिल्कुल गोरी थी. उनकी उमर 38 की थी लेकिन अभी भी बिल्कुल जवान लगती थी. ज़िंदगी में आज पहली बार 38 साल की औरत के साथ सेक्स करने जा रहा था.

अब चाची ने मुझसे कहा- अपनी पैंट उतारो. मैं भी देखूँ तुम्हारा प्यारा सा लंड.
मैंने अपनी पैंट उतार दी.
मैंने उस दिन अंडरवियर नहीं पहना हुआ था. मैं अब नीचे से नंगा था.

चाची मेरे पास आई और मेरी शर्ट भी उतार दी और मुझे पूरा नंगा कर दिया. चाची को मेरा लंड बहुत अच्छा लगा. चाची ने मेरा हाथ अपने बूब्स पर रखा और कहा- प्रेस करते रहो प्लीज़.
मैंने खूब प्रेस किये.
चाची को मजा आ रहा था.

फिर चाची ने अपनी कमीज़ उतारी फिर सलवार उतारी, फिर मेरे लंड को चूसने लगी.
मैं चाची की ब्रा खोलने की कोशिश कर रहा था. तो चाची मुस्करा कर बोली- बेटा, मैं खोल देती हूँ.
फिर चाची ने ब्रा खोल दी और पेंटी भी उतार दी. अब चाची का गोरा गोरा जिस्म मेरे सामने पूरा नंगा था.

चाची ने अपने बड़े बड़े बूब्स को मेरे लंड पर रख दिये और अपने बूब्स से मुझे चुदाई का मजा दे रही थी. कुछ देर बाद मैं चाची की चूत को चाटने लगा. चाची की सेक्सी सेक्सी आवाज़ें निकल रही थी- आआहह ऊऊहह सैम बेटा आआहह ज़ोर से बेटा आआहह तेरी चाची प्यासी है मेरी प्यास बुझा दे बेटा. आआअहह.
चाची ने कहा- अब अपना लंड मेरी चूत में डालो, प्यासी है मेरी चूत, प्यास बुझाओ जल्दी.

मैंने चाची की दोनों टांगों को अपने हाथों से अपने कंधों पर रखा और चूत पर 8 इंच का लंड रखा, चाची की चूत टाइट हो रही थी, मैंने हल्का सा धक्का दिया तो चाची की चीख निकल गई और चाची ने कहा- आराम से डालो, क्या जल्दी है तुमको.
मैंने कहा- चाची नहीं अब आराम से डालूँगा.

फिर मैंने हल्के हल्के झटके लगाने शुरु कर दिये. मेरे धक्कों से चाची को मजा आ रहा था. चाची की आवाज़ें निकल रही थी- ऊओहह ऊफ़फ़्फ़ हाआआ. और डालो और डाल आज मेरी चूत को मजा दे दो प्लीज़. तेज़ करो.
मैंने तेज़ कर दिया.

चाची मुझे बेड पे ले गई और मुझे बेड पे धक्का दे दिया, बोली- आज तुझसे मैं चुदवाती हूँ.
और सोनिया चाची ने मेरे लंड की टोपी को किस किया और मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे लंड के ऊपर अपनी चूत रख दी और ज़ोर 2 से हिलने लगी और चिल्लाने लगी- आहह बेटा सैम, बेटा आआहह्ह मजा आ गया, तुम्हारा लंड अब मेरी प्यास बुझा देगा!
और ज़ोर 2 से ऊपर नीचे होने लगी, ऐसे मैं मेरे लंड को भी दर्द हो रहा था.

चाची और मैं दोनों पागल हो गये, मैंने चाची को उठा लिया और नीचे लिटा कर उनकी टांगें खोल दी और फिर से चुदाई शुरु कर दी.
चाची झड़ने वाली थी. हमको 15-20 मिनट हो गये थे और मेरा भी पानी निकलने वाला था, चाची ने कहा- अंदर नहीं निकालना.
मैंने कहा- ठीक है चाची.

अब मैंने अपना लंड निकाल लिया और चाची के बूब्स पर पानी निकाल दिया फिर चाची ने मेरा लंड चूसा और पानी पी गई.
15 मिनट तक हम नंगे ही बेड पर लेटे रहे.

फिर मैंने चाची से कहा- चाची मुझे आप की गांड मारनी है.
चाची ने जवाब दिया- आज से सब कुछ तुम्हारा है बेटा, ये गांड भी तुम्हारी है जब बोलोगे, दे दूंगी मेरे सेक्सी सैम.
मैंने कहा- अभी मिल सकती है?
चाची ने कहा- अभी क्यों नहीं.

चाची ने फिर मेरे लंड को चूसना शुरु किया, 5 मिनट के बाद मैं चाची की मोटी मोटी गांड पर अपनी जुबान फेरने लगा.
चाची ने कहा- ये क्या कर रहे हो. आज तक किसी ने मेरी गांड पर जुबान नहीं फेरी.
मैंने जवाब दिया- चाची, एक ब्लू मूवी मैंने देखी थी.

चाची ने कहा- सैम, तुमको तो बहुत कुछ पता है सेक्स के बारे में.

अब चाची डोगी स्टाइल में थी और मेरा लंड बेचैन था मोटी गोरी गोरी मोटी मोटी गांड में जाने के लिये. चाची ने कहा- आराम आराम से डालना, ये चूत नहीं है गांड है. बहुत दर्द होता है.
मैंने कहा- चाची आप फ़िक्र नहीं करें, मैं आराम से करूंगा.
मैंने अब चाची की गांड में हल्का सा झटका दिया, चाची को दर्द हुआ, उनकी चीख निकल गई- आआहह हरामी बाहर निकाल, फट जायेगी. रहम कर… आआहह्ह नो बेटा प्लीज़ अहह ऊऊईईए माआ मम्मयी आअहह बाहर निकाल.

फिर मैंने अपनी स्पीड हल्की कर दी. अब हल्के हल्के मेरा पूरा लंड चाची की गांड में जा चुका था और चाची को भी मजा आ रहा था. चाची को भी बहुत मजा आया गांड में लंड लेकर.
मैंने चाची को कहा- चाची पानी निकलने वाला है.
चाची ने कहा- निकाल लो.

फिर चाची ने सारा पानी फिर से पिया और लंड को चूसने लगी.

अब जब भी मौका मिलता है मैं चाची की प्यास बुझाता हूँ. Hindi porn stories

लेखक : मुन्ना Sex Stories

यह बात हैं कुछ 12-14 साल Sex Stories पुरानी, तब मैं 19 साल का एक हट्टा- कट्टा नौजवान था।

मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव “सिवामुलिक” में रहता था। हमारे गाँव में हर साल सावन में मेला लगता था और हम सारे दोस्त उस मेले में जाते थे, बहुत मज़े करते थे। मेला काफी प्रसिद्ध था इसलिए आस-पड़ोस के 5-7 गाँव के भी लोग वहाँ आते थे।

मैंने तब तक किसी भी लड़की को चोदा तो क्या नंगा भी नहीं देखा था। मगर हाँ, मेरे दोस्तों ने मुझे किताबों में लड़कियों की नंगी तस्वीरें दिखाई थी। उसमें अनगिनत लड़कियों की तस्वीरें थी, अलग अलग पोज़ेज़ में ! कहीं एक लड़की दो-दो लड़कों के साथ चुदवा रही थी, तो कहीं तीन लड़कियाँ एक लड़के के लौड़े के लिए लड़ रही थी, सभी कुछ सपना सा लगता था और मैं उन्हें देख कर मुठिया मारा करता था।

खैर, उस मेले में जाने का मुख्य तात्पर्य चोदना था, हम हर बार इसी उद्देश्य से वहाँ जाते थे, इस बार भी हम गए।

इस बार का मेला कुछ अलग ही था, इस बार बहुत सी नई दुकानें थी, झूले थे और काफी सुन्दर लड़कियाँ !

एक लड़की मुझे भी भा गई और मैं उसका पीछा करने लगा। वो जहाँ जाती, मैं वहाँ चला जाता, कभी गुबारा लेने तो कभी चूड़ियाँ लेने !

मेरे मामा की भी वहाँ एक चूड़ियों की दूकान थी, वो वहाँ जा पहुंची और भी वहाँ उसके पीछे पीछे मैं भी चला गया।

मुझे आता देख मामा जी ने कहा,” मुन्ना, अच्छा हुआ तू आ गया, आधे घण्टे के लिए दूकान संभाल ! मुझे ज़रा कुछ काम है !

मौका पाकर मैं वहाँ बैठ गया और उसे चूड़ियाँ दिखाने लगा।

उसके गोरे-गोरे हाथ अपने हाथों में लेकर उनमें चूड़ियाँ पिरोने लगा। कभी कोई टाइट चूड़ी से उसे दर्द होता तो वो अपना दर्द अपने होटों को काट कर दर्शाती। यह सब देख-महसूस कर के मेरा तो लौड़ा ही खड़ा हो गया।

मैंने कहा,” आपके हाथ काफी कोमल हैं, मानो रेशम के बने हों !”

और वो शरमा गई। मुझे लगा कि उसे भी मैं अच्छा लगता हूँ।

धीरे धीरे मैं उसका हाथ अपने लौड़े के पास लाते गया, शायद उसने यह महसूस कर लिया और मुझसे कहा,” क्या आप मुझे घर तक छोड़ सकते हैं, रात काफी हो गई है और मेरी सहेलियाँ भी नहीं दिख रही !”

मैं फट से तैयार हो गया, मामाजी आये तो उनसे सायकिल ली और चल पड़ा उसके साथ।

रास्ते में उससे उसका नाम पूछा।

“रति” उसने जवाब दिया।

काफी देर चलने के बाद हम एक सुनसान जगह पर पहुँचे, मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे पास के खेत में ले गया।

उसके होठों को अपने हाथ से छुआ, उन पर शबाब की बूंदें मानो शहद लग रही थी, मैंने हलके से उसके होठों पर अपने होठ रखे और अपनी जबान को उसके मुँह के अन्दर फ़िलाने लगा। उसके हाथ भी मेरे शरीर पर घूमने लगे, कभी वो मेरी गर्दन को चूमती तो कभी मेरे कान को अपनी जुबान से सहलाती।

मेरे अंग-अंग में रोमांच भर गया, मैंने उसकी चोली निकाली तो उसके स्तन बाहर छलक पड़े, उनका आकार बहुत बड़ा था, मेरे हाथ से भी बड़ा !

मैंने एक को मुँह में लिया और चाटने लगा, उसके चुचूक खड़े हो गए। मैं अपनी जुबान से उसके चुचूक के इर्द गिर्द गोला बनाने लगा, उससे उसको बहुत अच्छा लगा “आ…आया…ऊऊओह्ह्ह्ह” की आवाज़ से मेरे लौड़ा पैन्ट फाड़ने को तैयार हो गया।

मैंने उसे नीचे लिटाया, उसका घगरा निकला और फिर उसकी चड्डी। उसकी गोरी गोरी टांगें देखकर तो मेरे मुँह में पानी आने लगा। मैंने जल्दी से अपनी पैन्ट और चड्डी निकली और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत में मेरी जुबान अन्दर तक जा रही थी। वो अपना आनंद ” और ….और जोर से …..आह…” की आवाज़ से जता रही थी।

फिर वो हट गई और मुझे लिटा दिया, वो मेरी टांगों की बीच बैठ गई और मेरे खड़े लौड़े को देखने लगी।

” बाप रे ९ इंच ! बहुत बड़ा हैं यह तो ! क्या मेरी चूत में जा पायेगा?”

मैं भी सोच में पड़ गया। मगर उसने मुझे सोचने का वक़्त नहीं दिया, और फट से मेरे लण्ड को अपने गरम होठों के बीच ले लिया, अपने सिर को ऊपर-नीचे करने लगी, लौड़े के सर पर जुबान से गोले बनाने लगी। ख़ुशी के मारे मैं चिल्लाने लगा,” हाँ, हाँ और जोर से…..और जोर से……रति…….रांड और अन्दर ले …”

इतने में मेरा चीक(वीर्य) निकल गया, वो हँस पड़ी, उसने मेरा पूरा चीक खा लिया।

मेरा लौड़ा छोटा हो गया। वो उसे हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी, मेरी छाती को चूमने लगी, मेरे चुचूकों को चाटने लगी। वो फिर मेरी गोटियों को अपने मुँह में लेकर खेलने लगी। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।

“चल अब डाल दे !” रति बोली।

मैंने कहा,” मैंने कभी किया नहीं, क्या आप मुझे बताएंगी कि कहाँ डालना है !”

उसने मेरे खड़े लौड़े को अपने हाथ में लिया और अपनी चूत के दरवाज़े पर रख दिया।

“चल अब डाल !” वोह बोली।

और मैंने डाल दिया, थोड़ा सा दर्द हुआ मुझे, पहली बार था ना !

“अब अन्दर-बाहर कर अपने लौड़े को, फिर देख क्या मजा आता है !”

मैं वैसा ही करने लगा, उसके स्तनों को काटने लगा, उसके होठों को चूमने लगा, उसके उभार लाल लाल हो गए थे, उनमें मेरे हाथों के निशाँ भी पड़ गए थे। मैंने अपने धक्कों को गति बढ़ा दी।

” डालो और जोर से डालो, मेरी चूत कब से एक लौड़े के लिए प्यासी थी…. रणजीत… अपने हाथों से मेरी गांड भी दबाओ… !”

मैंने फिर उसके पैर अपने कंधे पर रख लिए और फिर से धक्के देना चालू किया, उसे पैरों को काटता तो कभी चूमता !

मेरे धक्कों के उसके स्तन यूं झूलते मानो आंधी में लालटेन !

” रणजीत, अपने लौड़े की वर्षा से एक बार फिर मेरे चेहरे को नहला दो, जोर से डालो अन्दर……आअह्ह…..ऊऊऊउऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह……मेरे राजा…..बड़ी तेज़ हैं तेरी गाड़ी…….फाड़ डाल मेरी चूत को………आ …और और और…..हाँ हाय हाँ हाँ हाँ…” वो बड़ी ही रोमांचित थी और मैं भी !

मैं फिर से निकलने वाला था, मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह की तरफ रख कर हिलाने लगा … एक-दो बार हिलाने के बाद मेरा पूरा चीक निकल गया,”ओह , आ आ….ले…पूरा ले मुँह में रांड……ले ले मेरे लौड़े को !” मैं बोला।

उसके बाद हमने कपड़े पहने और फिर उसे उसके घर छोड़ दिया।

इस घटना के बाद मैंने कई बार कोशिश की उससे मिलने की, मगर वो कहीं नहीं मिली………

आप बताइए, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Sex Stories

Antarvasna

अन्तर्वासना पढ़ने Antarvasna वाले पाठकों को मेरी तरफ से यानी ॠचा सिंह की तरफ से एक बार फिर से बहुत बहुत प्यार ! सब के लौड़े खड़े रहें, हर औरत को उसका मर्द रात को रोज़ चोद कर संतुष्ट करे, किसी की चूत प्यासी न रहे !

खैर दोस्तो, अपने बारे में मैं पिछली लिखत में बता चुकी हूँ कि किस तरह पैसे के पीछे भागते हुए मैंने बड़ी उम्र के बंदे से अपना गर्भ छुपाने के लिए शादी की।

उस दिन ऑफिस में जब मैं ननद के जेठ के लौड़े के साथ खेल रही थी तो पति का फ़ोन आने से हमारा सारा काम खराब हो गया और पहली बार एक दूसरे के कुछ ही दिनों में बने दीवानों को सिर्फ चुम्मा-चाटी करके अलग होना पड़ा।

उसके बाद उसका जेठ एक ही मिशन में लग गया, मुझे चोदने के लिए सुरक्षित जगह और आखिर उसको अपने दोस्त के घर का सहारा लेना ही पड़ा और मुझे वहाँ ले गया। हम दोनों एक दूसरे के इतने दीवाने बन चुके थे कि कमरे में घुसते ही बिना देखे भूखे की तरह एक दूसरे के जिस्मों से लिपटने लगे। दोस्त के सामने ही एक दूसरे को नंगा करके खेलने लगे।

तभी पीछे चूत पर जब किसी का स्पर्श पाया तो देखा उसका दोस्त जिसका लौड़ा कोई कम नहीं था, मेरी चूत चाटने लगा।

दो हब्शी जैसे लौड़े मेरी आँखों के सामने थे। तभी जेठ जी ने मुझे अपने नीचे लिटा कर मेरे गोल-मोल मम्मों से खेलने लगे। इतने में उसका दोस्त अपना लौड़ा मेरे मुँह के पास लाया तो मैं रोक ना पाई और पक्की रंडी की तरह उसके साथ खेलने लगी। जल्दी ही उसने मेरे मुँह में घुसा दिया।

उसका इतना मोटा था कि चूसने में तकलीफ होने लगी। लौड़े को चाट-चाट कर उसको मजे देने लगी। जेठ जी मेरे मम्मों में इस कदर उलझे, इतने दीवाने हुए कि मानो खा ही जायेंगे।

तभी उनका दोस्त मुझे चूत चुदवाने के लिए कहने लगा। लेकिन तभी जेठ जी को होश आया और बोले- साले, मेरा माल है ! पहले मैं चोदँगा ! तब तक दारु और चिकन का इंतजाम करवा !

उसने अपनी जिप बंद की और दारु लेने चला गया। मैं अब उसका लौड़ा चूसने लगी। उसने मेरी चूत पर अपना लौड़ा रख दिया और झटके से अन्दर किया। थोड़ी सी चुभन हुई, सह गई। लेकिन जब दूसरा झटका लगा तो मेरी सांस अटक गई गले में !

कितना ज़बरदस्त लौड़ा होगा जो एक खेली-खाई को भी तकलीफ दे रहा था !

चीरता हुआ पूरा लौड़ा मेरी चूत में था, वो दोनों टाँगे कन्धों पर रख मेरा भरता बनाने लगा। मैं हाय हाय करके दर्द सहती हुई उसको भड़का रही थी।

कुछ देर सीधा चोदने के बाद उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से चूत में घुसा दिया और घुसता गया। उसकी हर चोट से जब उसके टट्टे मेरे दाने पर लगता तो मुझे स्वर्ग दिखता। काफी देर ऐसे चोदा !
क्या बंदा था, झड़ने का नाम नहीं था !

मैं एक बार छुट चुकी थी। तभी फिर से उसने मुझे अपने नीचे लिटाया और मुझ पर छाने लगा। तेज़ तेज़ झटके मारता हुआ आखिर उसने अपना गाढ़ा गर्म-गर्म माल मेरी चूत में छोड़ा तो मैं भी उसके साथ दुबारा झड़ गई और उसको कस लिया। दोनों टांगों का नाग बल उसकी कमर के चुफेरे(चारों ओर) डाल दिया ताकि एक एक बूँद चूत में निकले।

दोस्तो, यह सुख मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सुख था, अब तक का सबसे बड़ा लौड़ा मेरी चूत में था।

उसका दोस्त दारु लेकर आया और मेरी ननद का जेठ उठ कर पेग बनाने लगा तो उसका दोस्त मुझ पर छाने लगा। उसने अपना मोटा लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया और फिर मैंने उसका मुँह में लेकर खूब चूसा। खड़ा होते ही फिर से तकलीफ देने लगा और चाटने लगी।

दोनों मेरे बदन पर दारु डाल कर चाटने लगे। एक पेग अन्दर जाते मैं और गन्दी औरत बन चुकी थी। कभी एक का चुप्पा मारती तो कभी दूसरे का !

मैंने पर्स से कंडोम निकाल कर उसके दोस्त को दिया। उसने कंडोम डाल मेरी चूत में घुसा दिया। कुछ देर पहले झड़ी थी, थोड़ा चुभ रहा था।

मैंने कहा- एक-दो पेग लगा लो ! तब तक मेरी चूत इसको सह लेगी !

उसने गांड के नीचे तकिया लगा दिया जिससे मेरी गांड का छेद साफ़ दिखने लगा। उसने पहले थूक लगा ऊँगली गांड में डाली। फ़िर उसने बिना तैयार करवाए एक दम से झटका देकर गाण्ड में पेल दिया। मेरी चीखें निकलने लगीं।

उसने म्यूजिक सिस्टम लगा आवाज़ तेज की, जेठ ने मेरी दोनों बाहें पकड़ ली और उसके दोस्त ने मेरी गांड चीर दी, फट गई मेरी गाण्ड ! मैं रोने लगी। वो पूरा डालकर रुका, खून से लथपथ उसका लौड़ा जब उसको निकाल साफ़ करते देखा तो मैं और रोने लगी। उसने नया कंडोम डाला और फिर से घुसा दिया।

अब जेठ का लौड़ा फिर से शबाब पर था। दो हब्शियों में फंसी पड़ी थी मैं ! लेकिन तीन पेग जाते ही मैं रंडी बन गई और उसकी ओर पीठ करके उसके लौड़े पर बैठ कर गांड मरवाने लगी। जेठ बीच में आया और एक साथ ही मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा और घुसा ही दिया।
दोनों खुल कर फाड़ रहे थे मुझे !

कमीनो, मुझे चलने लायक छोड़ोगे या नहीं?
हट बहन की लौड़ी ! कुतिया ! रांड साली ! इतने लौड़े लिए हैं, फिर भी नाटक करती है?

पूरा दिन मुझे चोदते रहे ! सच में चलने लायक नहीं छोड़ा मुझे ! नशा भी पूरा !
किस्मत से पति उस रात घर नहीं आने वाले थे, दो दिन के लिए मुंबई गए हुए थे।

फिर एक रात पति ने मुझे उससे चुदवाते हुए पकड़ लिया। खूब पीटा, मारा कमीने ने !

यह घर मेरा है ! मेरे नाम में ! मैं नहीं रहना चाहती तेरे साथ !

उसने अपना बेटा लिया और चला गया, तलाक ले लिया।

ननद की जेठानी को भी जब पति की करतूत का पता चला तो वो भी उसको छोड़ चली गई।

उसके बाद इन्टरनेट पर मेरी दोस्ती एक असली अमेरिकन हब्शी से हुई। वो मुझे बहुत पसंद करने लगा। वेबकैम पर उसका लौड़ा देख में भी फ़िदा हो गई। उसने मुझे शादी के लिए कहा, मैंने हाँ कर दी उसने मुझे स्पोंसर किया और मैं अमेरिका गई, जहाँ उसने मेरे साथ कोर्ट मैरिज़ कर ली।

फ़िर क्या हुआ, वो अगली कड़ी में लिखूंगी ! Antarvasna

Antarvasna Stories

तो रूबी कहने लगी- इतना मजा Antarvasna Stories पहली बार ले रही हूँ ! आज तक जिन्दगी में इतना मजा और तृप्ति मुझको कभी नहीं मिली !

मैं कहने लगा- रूबी, अब मैं चलता हूँ !

तो रूबी कहने लगी- अभी नहीं ! एक बार और हो जाये राम !

मैंने कहा- रूबी जी ! आपको खुश कर दिया, यही मेरा काम था। यहीं पर मेरा काम खत्म हो जाता हैं। अब रूबी जी मेरी फीस दो ! मैं चलता हूँ !

तो रूबी नशीली आँखों से मुझको देखकर बोली- आपकी फीस मिल जायेगी और वो भी मुँह माँगी। मुझको पता है कि आप फीस अपने हिसाब से लेते हो ! पर कोई बात नहीं अभी एक बार मेरी आग शान्त करके जाना जोकि बहुत दिन से भड़की हुई थी राम। यार राम ! ओ मेरे राम ! बस एक बार ! आप नाराज तो नहीं हो गये?

मैंने कहा- नहीं रूबी जी, ऐसी बात नहीं ! पर मेरा जो उसूल है, मैं उस पर ही अमल करता हूँ।

तो रूबी बोली- चलो आप अपना उसूल भी मत तोड़ो, मेरी एक छोटी सी बात मानोगे?

मैंने कहा- क्या ?

राम, मैंने आपसे दोस्ती के लिए कहा था !

चलो आपने कहा था कि मैं दोस्ती कर सकता हूँ पर आपने जो कहा था आपको आपकी फीस मिलेगी !

क्या अपने दोस्त की इतनी छोटी सी बात नहीं मानोगे राम।

मैंने कहा- चलो ठीक है, पर जैसा मैं चाहूँगा वैसा करूगाँ रूबी जी।

रूबी कहने लगी- मुझको सब कुछ मंजूर है, आप जो कहोगे वही होगा ! किसी बात पर भी कोई भी मेरी तरफ से आपत्ति नहीं होगी।

मैंने कहा- चलो ठीक है ! मुझको फँसा ही लिया आखिरकार तुमने ! चलो कोई बात नहीं।

रूबी खड़ी होकर चलने लगी तो मैंने कहा- मेरी जान कहाँ चली?

रूबी बोली- राम, बातों ही बातों में हम दोनों ठण्डे हो गये। मैं पहले आपके खाने के लिए कुछ लेकर आती हूँ !

और रूबी नंगी ही खड़ी होकर चल दी, मैं भी रूबी के पीछे पीछे चल दिया तो रूबी कहने लगी- राम जी, आप आराम करो, मैं अभी लेकर आती हूँ !

मैंने कहा- मैं भी साथ में चलता हूँ !

रूबी ने फ्रिज से तीन बीयर निकाली और पनीर निकाला और ड्रांइग रूम में मेज़ पर रखा। हम दोनों ने पनीर को छोटे टुकड़ों में काटा और एक दूसरे के नंगे बदन को देखकर हँसते रहे। फिर हमने बीयर पी वो भी एक ही गिलास में डालकर बारी बारी से। रूबी को अपनी गोद में बिठाकर २०-२५ मिनट तक हम दोनों जब तक बीयर खत्म नहीं हुई पीते रहें और पनीर खाते रहे। कभी मैं रूबी को अपने हाथ से पिलाता और कभी रूबी मुझे पिलाती।

हम दोनो ऐसे ही पीते रहे और एक दूसरे के साथ छेड़छाड़ करते रहे। अब हम दोनों पूरे शबाब में थे।

मैं बोला- रूबी ये तुम्हारी टांगों के बीच में क्या है?

तो रूबी बोली- राम मेरी नहीं ये तो आपकी टांगों के बीच में है !

हम दोनों नशे में एक दूसरे को पता नहीं क्या क्या बकते रहे और दोनो ऐसे ही झूमते रहे। फिर रूबी काफी देर के बाद बोली- राम कुछ करते हैं !

मैंने कहा- अब क्या करेंगे?

अरे आप तो बडे़ नशेड़ी निकले जो सब कुछ भूल गये?

मैंने कहा- राम कुछ नहीं भूलता ! आपके बदन की आग ठण्डी नहीं हुई क्या।

रूबी बोली- अबे राम ये नशे में तू क्या बोलने लगा?

मैंने कहा- रूबी जी, अब राम तो अपने घर जायेगा।

रूबी बोली- ओ राम, तू यहीं पर रहेगा !

मैं बोला- नहीं मैं तो अपने घर जाऊँगा !

और हम दोनों ऐसे ही बच्चों की तरह झगडने लगे- यार रूबी तेरे साथ तो झगड़ने बड़ा ही मजा आता है, तू तो बिल्कुल ही बच्ची है !

रूबी ऐसे बोली- बे राम, हम बच्चे ही तो हैं !

मैंने कहा- मेरी जान रूबी, आज मैं तो तेरी प्यारी गाँड मारूँगा ! तू मेरे लन्ड को खड़ा तो कर !

तो रूबी कहने लगी- नहीं राम, पहले तू मेरी चूत फ़ाड़ेगा !

मैं बोला- नहीं मैं तो पहले तेरी गाँड फ़ाडूँगा !

हम दोनों ऐसे ही झगड़ने लगे क्योंकि मैं भी नशे में था और रूबी भी ! क्योंकि हम दोनों ने मिलकर ५ बीयर जो डकार ली थी।

रूबी बोली- राम ऐसा करते हैं, जो पहले बैडरूम में जायेगा उसकी जीत होगी और पहले उसकी मर्जी मानी जायेगी !

मैंने कहा- कोई बात नहीं रूबी, हमें सब कुछ मंजूर है।

और हम दोनों लड़खड़ाते हुए बैडरूम की तरफ चलने लगे। मैं रूबी से आगे निकला ही था कि रूबी ने पीछे से मेरी टांग खींच ली और मैं गिर पड़ा तो रूबी तेजी से भागी। मैं भी कहाँ कम था, मैंने भी उठकर रूबी को बाहों में भर कर पीछे गिरा दिया और रूबी से पहले बैडरूम में पहुँच गया।

रूबी कहने लगी- ओ राम, तू तो बड़ा ही चीटर है।

मैंने कहा- रूबी तू बड़ी चीटर है।

और हम दोनों फिर झगड़ने लगे। रूबी मुझे गाली देती और मैं रूबी को गाली देता- साली हरामी चीटर, रूबी कहती- साले राम तू बड़ा चीटर है।

फिर हम दोनों में फैसला हुआ कि हम दोनों ही चीटर हैं। दोनों बारी बारी से अपनी अपनी जगह पर चुदाई करेंगे। मैंने रूबी से कहा- रूबी जी पहले आपकी बारी है।

तो रूबी कहने लगी- पहले आप करो ना ! अपना लण्ड मेरी गाँड में डालो !

मैंने कहा- नहीं, कोई बात नहीं ! पहले आप मेरे लन्ड को अपनी चूत में लो !

हम दोनों फिर ऐसे ही झगड़ने लगे।

मैंने कहा- यार रूबी, हम तो दोनों ही असली बात को भूल गए हैं और झगड़ने में लग गए हैं। चलो, मैं आपको गर्म करता हूँ ! आप मुझे गर्म करो !

और फिर हम दोनों ६९ की पोजीशन में होकर एक दूसरे को गर्म करने लगे। मैं रूबी की चूत को अपनी जीभ से चाट चाट कर गर्म करता और रूबी मेरे लन्ड को मुंह में लेकर चूसती और हाथ से मुठ मारती। ७-८ मिनट में मेरा लन्ड लोहे की रॉड की तरह से अकड़ गया। रूबी कहने लगी- यार तेरा औजार तो बहुत ही बड़ा हो गया है और मेरे मुहँ में भी नहीं आ रहा, अब क्या करूँ राम?

मैंने कहा- यार रूबी, तेरी चूत भी रस छोड़ने लगी है !

हाँ यार राम, मुझे तो बड़ा ही मजा आ रहा है, चलो अब मेरी चूत को फाड़ डालो राम।

मैंने कहा- नहीं रूबी, मैं तो पहले तेरी गाँड फाडूँगा !

तो रूबी बोली- राम अब हम झगड़ेंगे नहीं, क्योंकि हम अब नशे में नहीं हैं !

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं ! आप अब बैड से नीचे उतरो, मैं आपको एक नया ऐहसास देता हूँ।

रूबी एकदम से बैड से नीचे उतर करके नीचे खड़ी हो गई।

मैंने कहा- माई डियर रूबी जी, अब आप बेड के साथ दीवार के पास खड़ी हो जाओ !

तो रूबी ऐसे ही खड़ी हो गई। मेरा लन्ड तो सीधा था, मैंने रूबी से कहा- आप अपनी एक टांग बैड के ऊपर रखो !

अब मुझे रूबी की चूत पीछे से दिखाई देने लगी और रूबी की चूत का मुँह भी खुल गया। मैंने रूबी से पूछा- आप मेरा लन्ड अपनी चूत में लेने के लिए तैयार हो क्या?

रूबी कहने लगी- मैं तो तैयार हूँ, पर यह देख लेना कि मुझे नुकसान नहीं पहुँचे !

मैंने कहा- नहीं आप सिर्फ नये अनुभव का मजा लो !

तो कहने लगी- यार राम मुझे आप पर विश्वास है, आप जैसे चाहो करो, मैं आपका पूरा साथ दूँगी।

मैंने कहा- रूबी जी ठीक है !

और यह कहकर मैंने अपना लन्ड रूबी की चूत पर रखा, देखा कि रूबी की चूत तो पूरी तरह से गीली है और अपने लन्ड का दबाव बनाकर जोरदार धक्का मारा और मेरा लन्ड जड़ तक रूबी की चूत में उतर गया। रूबी की चूत गीली होने के कारण हल्का सा दर्द हुआ पर वो सहन कर गई। अब मैंने रूबी की चूत में पीछे से धक्के मारने शुरू किये और कुछ ही देर में रूबी को मजा आना लगा। मैं रूबी की दोनों चुचियों को हाथ से पकड़कर मसलने लगा और रूबी के मुँह से सिसकारी निकलने लगी और कहने लगी- राम आप में तो कमाल का जादू है, आप तो चुदाई के हर काम में माहिर हो।

मैंने कहा- रूबी इसीलिए तो मेरी डिमांड हमेशा रहती है और मैं अपना फोन नम्बर भी किसी को नहीं देता क्योंकि मुझको पता है कि लोग मुझको परेशान करेंगे।

राम, आप बात को छोड़कर आज मुझे सबसे प्यारे जहान की सैर करा रहे हो बस मुझे ऐसे ही मजा देते रहो- आ आअअअइइइइई ओइइइआआ ओ नो यस कम आन राम कम आन राम ! मुझे भी और भी जोश आ गया और मैं भी जोर जोर से से धक्के मारने लगा। कुछ ही देर में रूबी का शरीर अकड़ने लगा और रूबी की चूत ने पानी छोड़ दिया। रूबी ढीली पड़ने लगी और फिर मैंने अपना लन्ड रूबी की चूत से निकाल कर रूबी को कहा- अपना पैर बैड से नीचे कर लो और अपने हाथ बेड पर रख कर घोड़ी बन जाओ ! रूबी जी अब मैं आपकी गाँड में अपना लन्ड डालूँगा।

रूबी बोली- राम मैं अपनी गाँड पहली बार आपके हवाले कर रही हूँ, जरा ध्यान से करना राम, मेरे दोस्त राम।

मैंने कहा- मेरी जान रूबी, आपने पहली बार जब अपनी चूत फ़ड़वाई थी तो तब जितना दर्द हुआ था, उससे कम ही होगा।

रूबी बोली- राम, अब चाहे जो भी हो, आप करो ना ! मुझे देर पंसन्द नहीं !

मैंने रूबी की गाँड पर अच्छी तरह से थूक लगाया और अपने लन्ड पर रूबी की चूत का रस लगाकर खूब गीला किया, रूबी की गाँड पर हल्का सा दबाव बनाया तो मेरा लन्ड जोकि पूरा ही लोहे की तरह से सख्त था, उसका सुपाड़ा अन्दर गया तो रूबी को बहुत ही तेज दर्द हुआ और रूबी बुरी तरह से चिल्लाई !

तो मैंने कहा- रूबी जी अगर आप को परेशानी है तो अपना लन्ड बाहर निकाल लेता हूँ !

रूबी बोली- राम, यह तो कुछ भी नहीं, जब पहली बार चूत चुदाई थी तो इससे भी ज्यादा दर्द हुआ था, अब तो कुछ भी नहीं हुआ। अब तो कोई बात ही नहीं, चाहे दर्द हो या कुछ भी हो। आपने हमारी इच्छा पूरी की और अब हमारा भी तो फ़र्ज़ बनता हैं कि हम आपकी इच्छा भी पूरी करें। राम आप अपना काम करो !

फिर क्या था, मैं अपने हाथ से रूबी की चुचियों को मसलने लगा और अपना लन्ड पहले धीरे धीरे से फिर स्पीड बढ़ाने लगा।

रूबी को मजा आने लगा और रूबी कहने लगी- आप में ऐसी क्या कशिश है कि आप जो भी काम करते हो उसमें पूरा मजा देते हो। ओ राम आ ई ईआ आअ इऐऐ ऐ ऐ ऐ ऐ एए ई ई ई ओ राम, बस जिन्दगी में आज पहली बार ऐसा मजा आया है।

मेरा छुटने को आया तो मैंने कहा- रूबी जी, अब आप बैड पर सीधी लेट जाओ !

रूबी सीधी लेट गई और मैं रूबी की टांगों को अपने कंधों पर रखकर अपना लन्ड रूबी की चूत में एक ही बार में पूरा उतार कर दनादन धक्के मारने लगा और ३-४ मिनट के बाद में ही मेरे लन्ड ने अपना पानी रूबी की चूत में छोड़ दिया। मैं रूबी के ऊपर लेट गया और पता ही नहीं चला कि हम दोनों को कब नींद आ गई।

सवेरे आठ बजे मेरी आँख खुली तो मैं देखता हूँ कि मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था, मेरे कपड़े कमरे में इधर उधर पड़े थे। मैंने अपने कपड़े पहने और कमरे के बाहर निकला ही था तो रूबी की आवाज आई- राम फ्रेश हो लो।

मैंने रूबी से कहा- नहीं, मैं अब निकलता हूँ !

रूबी बोली- नहीं, पहले नहा लो !

तो मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया और नहा धोकर फ्रेश होकर बाहर निकला तो रूबी ने नाश्ता तैयार कर दिया था। हम दोनों ने नाश्ता किया। मैं रूबी को देखकर बोला- आपको हमारी सेवा कैसी लगी?

रूबी हँसकर कहने लगी- यार राम, जिन्दगी ऐसे लम्हें मुश्किल से मिलते हैं, आपने तो हमारी पूरी रात यादगार बना दी। हम इन लम्हों को हमेशा अपनी यादों में सम्हाल के रखेंगे।

रूबी जी ! हमें जाने की इजाजत दो !

रूबी कहने लगी- ठीक हैं राम। अगर मुझे आपको बुलाना पड़े तो आपको फोन करके बुला सकती हूँ ना?

मैंने कहा- हाँ, मेरा काम ही यही है, आपको जब भी जरूरत पडे तो आप याद करना।

रूबी कहने लगी- फिर आज आप क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- घर जाकर पूरा दिन सोना है बस और कुछ नहीं !

तो रूबी कहने लगी- फिर आज के दिन मेरे साथ ही रूक जाओ, मैं भी दो दिन तक अकेली ही रहूँगी।

मैंने कहा- नहीं, आज नहीं ! फिर कभी !

तो रूबी ने अपनी बाँहे मेरे गले में डालकर कहा- राम मत तड़फाओ, आपको पता है कि औरत को तड़फाना अच्छी बात नहीं होती मेरी जान, अब मान भी जाओ न मेरे प्यारे राम, प्लीज प्लीज !

मैंने कहा- ठीक है, पर अभी मैं दो घन्टे के लिए सोने जा रहा हूँ, मुझे डिर्स्टब मत करना।

रूबी बोली- चलो, मैं आपको बैडरूम में छोड़ देती हूँ !

रूबी मुझे अपने बैडरूम में ले गई मैं अपने कपड़े उतारने लगा तो रूबी ने कहा- राम अपने कपड़े मुझे दे दो, मैं इनको धो देती हूँ !

मैंने रूबी को अपने सारे कपड़े उतार कर दे दिये। अब मेरे शरीर पर सिर्फ़ अन्डरवीयर ही था। मैं जैसे सोने के लिए बैड पर लेटा तो मुझको रूबी तिरछी नजर से निहार रही थी और मुस्कुरा रही थी। रूबी की मुस्कुराहट को देखकर मेरा लन्ड खड़ा होने लगा तो रूबी बोली- राम आपका औजार तैयार है, अगर आपको कोई एतराज ना हो तो कुछ हो जाये?

मुझे लगा कि पूरा दिन जब यहीं बिताना है तो ठीक है, मैंने कहा- अब आ जाओ !

रूबी ने कपड़े रख दिये और मेरे ऊपर चढ़ गई और फिर हम दोनों एक दूसरे में समा गये। आधे घन्टे तक हम दोनों की कामक्रिया चली और मैं वहीं पर सो गया। रूबी कपड़े धोने के लिए चली गई और अपने घर का काम खत्म करके रूबी भी मेरे ही पास सो गई। उस दिन हम दोनों ने हर तरीके से खूब जमकर चुदाई की। और फिर मैं शाम को ८.०० बजे अपने घर जाने लगा तो रूबी मुझको पूरे ८० हजार रूपये देने लगी तो मैंने कहा- रूबी, ये तो मेरी फीस से ज्यादा हैं !

तो रूबी ने कहा- नहीं, ये पार्ट टाइम के भी हैं। राम आपने मुझको जो पूरी रात और आज दिन में दिया, उसके बदले में तो ये कुछ भी नहीं हैं, मैं आपको और भी देती हूँ, बस हमारी आपसे विनती यही है कि जब भी हम आपको बुलाएँ आपको ही आना पड़ेगा।

मैंने कहा- रूबी, यह तो मेरा काम है कि मैं अपनी तरफ से अपने ग्राहक को पूरी तरह से खुश करूँ, बस आखिरी बार यही जानना चाहूँगा कि हमारे साथ में आपका अनुभव कैसा रहा।

रूबी जी ने कहा- राम यह अनुभव नहीं, यह तो एक पिकनिक जैसा रहा, जो कभी कभी ही नसीब होता है।

फिर मैंने जाने के लिए रूबी से इजाजत माँगी तो रूबी ने मुझको अपनी बाँहों में भरकर गले लगा लिया, होठों से होंठ मिलाकर एक लम्बा किस किया और मुझको बाहर तक छोड़ने आई।

और मैं अपने घर वापिस आ गया। Antarvasna Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆