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रात के साढ़े ग्यारह बज रहे Sex stories थे, होस्टल सुनसान सा हो गया था, मैं बैठ के कुछ पढ़ रही थी तो पड़ोस के रूम में रहनेवाली सोनू आयी।सुनीता भी सोयी नहीं थी। सोनू सुन्दर थी और बातें बहुत अच्छी अच्छी करती थी। मैने उसे देखके चोंक गयी क्योंकि वो सिर्फ़ एक हाफ़ पैंट और ब्रा में थी। मैने कहा, “क्या हुआ सोनू, कपड़े कहां गये?” तो वो हंसी और सुनीता बोली ये तो उसकी नाइट ड्रेस है। वो सीधी गयी औरसुनीता के साथ बैठके बातें करने लगी और मैने अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया। वो दोनो हंस रही थीं, थोड़ी देर बाद सोनू बोली, “क्या यार हमेशा पढ़ती रहती है? क्या कलेक्टर बनने का इरादा है?” मैने अपनी किताब को बंद करके बोली “नहीं अभी सोने जा रही हूं, सुबह स्कूल में बच्चों के एक्ज़ाम जो लेने है?” वो फिर हंसती हुई बोली, “तू तो ऐसे पढ़ रही थी मानो बच्चों का नहीं तेरा एक्ज़ाम हो।”
मैं रूम से बाहर आ गयी थी गरमी थी इसीलिये नहाने का सोचा, तो सुनीता बोली, तबियत खराब हो जायेगी, पर सोनू बोली नहाले, मैं नहाने चली गयी। मैं जरा देर तक नहाती हूं। तो शायद आधे घंटे में मैने नहाना खत्म करके रूम में आयी तो सोनू थी। मैने कहा, “कल ओफ़िस नहीं है तुम्हारा? इतनी देर हो गयी अभी तक सोने नहीं गयी।” वो मुझे देखके बोली, “तुम नहाके और भी सुन्दर लगती हो। हाय ये कपड़े उतार दो और यहां आ जाओ ऐश करते है। कल की किसको पड़ी है, जो भी है आज ही है।” मैने हंस दी और बोली “आप लोगों को और कोई काम धंधा है के नहीं?
रात के बारह बजा चुके है और नींद नही है?”
पर जैसे ही मैं मुड़ी और अपने कपबोर्ड से नाइटी निकालने गयी तो सोनू पीछे से आके मुझे जकड़ लिया और राजकुमार स्टाइल में बोली, “जानेमन आज तो हम ऐश करेंगे ही करेंगे।” मैं थोड़ी देर उसे देखी और शरमाती सी बोली, “हाय मैं मर जाउंगी जी।” सब हंस पड़े।
मोना आके दरवाज़े की कुंडी लगा दी और अपने कपड़े खोल दिये, वैसे भी सुनीता बहुत ही सुन्दर थी, इसलिये मुझे बहुत पसंद थी। सोनू बिस्तर के नीचे से एक किताब उठाके लायी, जिसमें लेस्बियन के फोटो थे। और मैने कुछ कहना नहीं था, हम तीनो एक साथ गले मिलने लगे। और एक दूसरे को कस के पकड़ लिया।सुनीता सोनू को किस करने लगी तो सोनू के हाथ मेरे स्तनों पे आ गये और जैसे कि मैने पहले भी कहा था मेरे स्तन काफी सेंसिटिव हैं, इसलिये मैं सिकुड़ सी गयी, तोसुनीता मेरी छाती को चाटने लगी और सोनू मेरे बायें स्तन को अपने मुंह में लेके चूसने लग गयी। और मुझे बिस्तर पे लिटा के दोनो मेरे छाती से सिमट गयी थी।
दोनो मुझे चूस रही थी। तो मैने अपने एक हाथ सेसुनीता की ब्रा का हुक को खोल दिया और उसका स्तनो को हाथों में लेके मसलने लगी। सोनू बहुत तेज़ थी, जैसे हीसुनीता मेरे स्तनो को जोर जोर से चाटने चूसने लगी सोनू नीचे गयी और मेरी चूत पे अपने जीभ रख दिया और मैं जल गयी। वो इतनी अच्छी चूसेगी मैने कल्पना नहीं की थी, वो मेरी चूत को चूसती रही चूसती रही औरसुनीता उठके गयी और सोनू की हाफ़ पैंट तो नीचे खींच ली और उसकी चूत से लिपट गयी। ये मेरे साथ पहली बार हो रहा था के हम तीन थे और तीनो चूस रहे थे चुसवा भी रहे थे। मैनेसुनीता की चूत पे मुंह डाला और चूसने लगी।सुनीता एक बार बोली के चूत के ऊपर जो छोटी सी एक उंगली जैसी चीज़ होती है उसको क्लाइटोरिस कहते हैं और उसको चूसने में मज़ा आता है, तो मैं कहां रुकने वाली थी, मैने अपनी जीभ से ही उसकी स्लिट को चाटने लगी तो वो जोर जोर से सिसकियां लेने लगी। सोनू बोली, “क्या सारा मज़ा तु ही लेगी क्या? अब पोजिशन बदल देते हैं, कहके वोसुनीता की चूत पे चली गयी और पानी चूत को मेरे सामने दे दी।
मोना की चूत बहुत चिकनी है क्योंकि वो हमेशा उसके बाल साफ़ कर देती थी, सोनू के चूत में छोटे छोटे बाल थे पर उस समय जो मज़ा हमें आ रहा था उसमें जो भी करे अच्छा लगता था। सोनू की क्लाइटोरिस बहुत बड़ी थी और मेरे मुंह में जैसे ही मैने उसे अपने जीभ और दांत से काटा तो वो करांह उठी और बोली, “हाय, ये क्या कर दिया तूने मेरी तो जान ही निकाल दी।” पर मैने चूसना जारी रखा।सुनीता मेरी चूत को चाट रही थी और मेरी स्लिट को ढूंढ रही थी शायद पर नहीं मिल रही थी। तो वो अपनी उंगली मेरी चूत में घुसेड़ने लगी। मरे बदन में कम्पन हुआ, मैने पूरी थरथरा गयी। और सोनू को जोर जोर से चूसने लगी। आधे घंटे के बाद, निचली मंजिल से उषा दीदी पुकारी, “मोना। सो गयी क्या?” तोसुनीता ने चूसना छोड़ के उठ गयी और सोनू भी। बाहर जाकेसुनीता नीचे खड़ी उषा दीदी से बातें करने लगी थी के सोनू बोली, “उसे जाने दे, हम करते हैं, बस और थोड़ी देर फिर में चली जाउंगी”।
हम दोनो ६९ में हो गये और एक दूसरे को चूसने लगे। मैने एक उंगली सोनू की चूत में डालना चाहा लेकिन उसने मना कर दिया। मैने पूछा क्या हुआ तो बोली, “नहीं, इसके अन्दर कुछ मत डाल, ये मेरे पति के लिये है, सिर्फ़ वो इसमें अपना लौड़ा डालेगा।” मैं हंस दी और जोर जोर से चूसने लगी। लेकिन सोनू के चूसने में जो मज़ा मुझे आ रहा था, मुझे यूं लग रहा था मानो मेरे अन्दर से कुछ निकल जायेगा, उषा दीदी बोली थी कि सेक्स करने के बाद चूत से पानी निकलेगा, पर मेरे साथ ऐसा कभी नही हुआ था। इसलिये पता नहीं था, पर उस रात, सोनू की जीभ ने वो कमाल कर दिया और मुझे लगा जैसे मेरी चूत में से पानी निकल रहा है।
मैं दीवानी सी हो गयी और सोनू को चूसने लगी तो वो भी थरथरा गयी और थोड़ी देर बाद शायद उसका भी पानी निकल गया। हम दोनो उठे और बाथरूम जाने लगे। वहां अपने आप को साफ़ करते हुए बोली, “सोनू, तूने ये ठीक नहीं किया मेरे साथ, अगर ये सब करना था तो पहले बता देती तो मुझे दो बार नहाना नही पड़ता न?” वो हंसी और बोली, “तो नहाने में तुझे थकान लगती है क्या, तो चल मैं तुझे नहला देती हूं।” और उस रात उन्होने मुझे नहला दिया। रात को रूम में आते आते नीचे सेसुनीता बुला रही थी, “आभा आभा, नीचे आ उषा दीदी बुला रही हैं।”
मैने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और नीचे गयी तो उषा दीदी के रूम में सीडी चल रही थी, और सिर्फ़ उषा दीदी औरसुनीता ही थी वहां। रात के एक बजने वाले थे और मुझे सुबह स्कूल भी जाना था इसलिये मैने ऊपर जाने को कहा तो उषा दीदी बोली, “यहीं सो जा मैं सुबह तुझे उठा दूंगी।” Sex stories
फिर उसके बाद क्या हुआ ये अगले हिस्से में लिखूंगी।
समस्त Antarvasna चूतों को समस्त लंडों की तरफ से सलामी! मेरा नाम अंकुर है दोस्तो!
और मेरा लंड भी कोई ज्यादा बड़ा नहीं है जैसा कि सब लिखते हैं यहाँ पर, मेरा लंड का आकार सामान्य है और आप जानते हैं कि सील जब टूटती है तो कितना दर्द होता है और मेरा लंड ज्यादा बड़ा नहीं है इसलिए शायद लड़कियाँ मुझे ज्यादा पसंद करती हैं अपनी सील तुड़वाने के लिए।
मुझे सील तोड़ने का बहुत ज्यादा अनुभव भी है और शौक भी। मैं पुरानी चूतें तब ही मारता हूँ जब नई नहीं मिलती।
मैं वैसे तो अब तक उन्नीस सीलें तोड़ चुका हूँ पर अब मैं आपको ज्यादा बोर ना करते हुए कहानी पर आता हूँ।
सबसे पहले तो बता दूँ कि यह एक सत्य कथा है क्योंकि मुझे झूठ बोलने से भी और बोलने वालों से भी सख्त नफरत है। यह बात अभी पिछले महीने की है, हमने दिल्ली में एक नया घर खरीदा था।
एक लड़की जिसका नाम हेमा है, हमारे घर के सामने अपने परिवार के साथ रहती है। उम्र कोई होगी 18 के करीब, छोटी छोटी चूचियाँ, पतली कमर, गुलाबी होंठ और चूतड़ तो समझो कयामत।
अभी हमें नए घर में आये हुए चार दिन ही हुए थे। मैने देखा कि वो मेरी तरफ देख रही थी।
मैंने उस दिन उसको पहली बार देखा। बस मेरा तो समझो लंड पूरा अकड़ गया। मन किया कि साली को अभी पटक कर चोद दूँ पर मैं चाहता था कि पहल वही करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा।
मैं बाईस साल का स्मार्ट लड़का हूँ, अच्छी अच्छी लड़कियाँ मरती हैं मेरे ऊपर!
बस उस दिन तो मैं जैसे तैसे ऑफिस चला गया तो वो बाद में मेरे घर आई, मेरी मम्मी से मिली और पूछा कि कहाँ से आये हो? क्या करते हो? और मेरे बारे में भी पूछा।
आपको बता दूँ कि मेरा खुद का व्यापार है क्रॉकरी एक्सपोर्ट का। मैं सुबह 10 बजे ऑफिस जाता हूँ और रात को 8 बजे आता हूँ। शनिवार और रविवार मेरी छुट्टी होती है।
अगले दिन शनिवार था तो वो स्कूल नहीं गई। शायद उसे मम्मी ने बता दिया था कि मैं शनिवार को घर पर ही रहता हूँ।
जब मैं 7 बजे सोकर उठा तो बालकोनी की तरफ आया। देखा कि वो खड़ी थी, मेरी तरफ देखते ही उसने गरदन हिलाकर मुझे नमस्ते किया और मेरी तरफ एक मिनट में आने इशारा करके चली गई।
मैं देखता रहा।
अचानक देखा तो वो मेरे घर पर ही मेरे पीछे खड़ी थी।
अच्छा हुआ कि उस समय मम्मी वहाँ नहीं थी मंदिर चली गई थी।
मैंने उससे पूछा- जी हाँ! बताईये!
तो वो कहने लगी- आप मेरी तरफ देख रहे थे न! तो मैंने सोचा कि जाकर ही मिल लूँ।
मैंने कहा- प्लीज़, आप यहाँ से चली जाओ! कहीं किसी ने देख लिया तो परेशानी हो जाएगी।
वो बोली- ओ के बाबा! चली जाउंगी, तुम क्यों इतना डर रहे हो?
फिर बोली- अच्छा तुम्हारा नाम अंकुर है ना? और तुम बिजनेस करते हो! और तुम्हारी शादी भी नहीं हुई है! अभी तक क्या तुम्हारा शादी करने का मन नहीं करता?
तो मैंने गुस्से से कहा- तुम्हें इससे क्या मतलब?
क्योंकि मुझे डर लग रहा था, अभी चार दिन हुए थे मोहल्ले में आये हुए।
वो बोली- प्लीज़, मेरा एक काम करोगे?
उसकी आँखों में मासूमियत झलक रही थी तो मैं भी पिघल गया और बोला- बोलो, क्या काम है?
तो वो बोली- मैंने सुना है कि आपकी इंग्लिश बहुत अच्छी है लेकिन मेरी बहुत कमजोर है। अगर आप मुझे थोड़ा बहुत पढ़ा दिया करें तो आपका एहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।
मैंने कहा- इसमें एहसान की क्या बात है, अगर तुम्हारे घर वालों को कोई परेशानी नहीं है तो मुझे भी कोई परेशानी नहीं होगी। तुम रोज रात को आठ बजे आ सकती हो।
उसने मुझे धन्यवाद कहा तो मैंने सोचा कि मौका है गुरु! चौका मार दो और बोल दिया- दोस्ती में नो सॉरी! नो थैंक्स!
वो मुस्कुराई और जाने लगी.
तभी मेरी मम्मी भी मंदिर से आ गई और उससे पूछ ही लिया- हाँ बेटी! कैसे आई थी?
मम्मी को शक तो हो रहा था, बस मैं तुरंत अपने कमरे में चला गया।
पर उसने खुद ही मम्मी को बोल दिया कि मैं आज से शाम को 8 बजे से उसे पढ़ाने वाला हूँ क्योंकि उसकी परीक्षा करीब आ रही हैं, और उसे कोई इंग्लिश का अच्छा टीचर नहीं मिल रहा है।
मैंने भी चुपके से सुन लिया।
मैं भी मन ही मन खुश होने लगा।
उस दिन ऑफिस में भी काम में मन नहीं लगा।
अब इतनी सुन्दर लड़की और वो भी नई, तो भला किसका मन करेगा काम करने का!
और मैं ऑफिस से सात बजे ही आ गया।
मम्मी ने खाने को पूछा तो मैंने बोला- अभी नहीं! थोड़ा बाद में खाऊंगा।
बस 8 बजे और वो गई अपनी किताबें लेकर!
तो मैंने उसे बोला कि पढ़ाई हमेशा एकांत में ही होती है और अपने कमरे में आने को कहा।
बस वो मेरे पीछे पीछे आ गई। अब वो और मैं मेरे बिस्तर पर बैठ गये।
उसने अपनी किताब खोली और पूछने लगी यह क्या होता है, वो क्या होता है।
मेरा कहाँ मन कर रहा था पढ़ाने का! मैं तो बस उसकी तरफ देखता ही जा रहा था।
उसने पूछा- क्या देख रहे हो?
तो मैंने कहा- तुम्हारा चेहरा पढ़ रहा हूँ क्योंकि मैं एक साइकोलोजिस्ट हूँ और मुझे लगता है कि तुम्हें कोई ना कोई परेशानी जरूर है।
तब वो उत्साहित हो गई और बोली- आपको कैसे पता? और बताओ ना कुछ!
तो मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है और बोला- लगता है तुम्हें किसी की कमी खलती है अपनी जिन्दगी में!
वो बोली- हाँ! और तुम्हें शायद कोई अच्छा दोस्त नहीं मिला जिससे तुम अपने दिल की बातें कर सको!
तो उसने हाँ में सर हिलाया और उदास सी ही गई और बोली- कुछ और भी बताओ ना!
तो मैंने कहा- लाओ तुम्हारे गालों की लकीरें देखता हूँ क्या कहती हैं! और उसके गालों को छू-छू कर देखने लगा।
मेरा लंड तो समझो बाहर आने को बेताब था पैंट से!
वो देख रही थी और बोली- बताओ ना क्या लिखा है मेरे गालों पर?
तो मैंने बोल दिया कि तुम्हारी जिन्दगी में कोई बहुत जल्दी आने वाला है और तुम भी उसे चाहती हो और अगर तुमने उसे बोलने में थोड़ी भी देर की तो तुम जिन्दगी भर ऐसे ही पछताते रहोगी।
तब वो बोली- अगर उसने मना किया तो?
मैंने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता।
तब अचानक वो मुझसे लिपट गई और बोली- आई लव यू अंकुर!
बस मैंने भी बोला- आई लव यू टू जान!
और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
पांच मिनट तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे रहे कि अचानक उसकी मम्मी ने नीचे से आवाज लगाई- पढ़ाई ख़त्म हो गई हो तो आ जाओ बेटा! बाकी कल पढ़ लेना।
अगले दिन इतवार था तो मैंने उसे कहा- कल मैं कहीं बाहर जा सकता हूँ इसलिए तुम्हें सुबह आठ बजे ही पढ़ा दूंगा।
रात भर नींद नहीं आई और बस सोचता रहा कि कब सुबह हो और चोद डालूं उसे!
वो रात भी इतनी लम्बी हो गई कि बस आप तो जानते ही होंगे दोस्तो कि इंतजार कितना मुश्किल होता है।
खैर सुबह हुई, आठ बजे और वो आ गई। और तभी मम्मी भी मंदिर चली गई।
वो और मैं सीधे कमरे में गये, दरवाज़ा बंद कर लिया और जाते ही उसके जलते हुए होठों पर अपने होंठ रख दिये। वो भी मेरा साथ देने लगी। ना जाने कब ही कब में मैंने उसकी चूचियों को आजाद कर दिया और उन्हें जोर जोर से मसलने लगा।
उसने मेरा हल्का सा विरोध किया पर उसके बाद वो भी गर्म हो गई।
मेरा लंड अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और उसने अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया।
करीब 10 मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी।
मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए। उसने केवल पैन्टी ही पहनी थी।
उसका नंगा बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूचियाँ इस तरह मेरे सामने थीं कि मानो मुझे अपनी वासना बुझाने के लिए आमन्त्रित कर रही हों।
थोड़े ही समय में दोनों पूरे नंगे हो गए। वह घुटने के बल बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबा रहा था।
फिर मैंने उसे लिटा दिया और उसकी संगमरमरी चूत अपनी उंगलियों से चोदने लगा।
उसकी चूत एकदम कसी थी अनचुदी कली थी।
वह सिसकारियाँ भर रही थी और इतने में वह झड़ चुकी थी। मैंने उसके अमृत-रस को साफ़ कर दिया।
तब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद से सटाया और सांस रोक कर जोर लगाने लगा। पर उसकी चूत बहुत कसी लग रही थी तो मैंने कर थोड़ा जोर से धक्का लगाया तो उसकी चीख निकल गई। मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि पड़ोसी न सुन सकें।
लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस चुका था। अब मैंने लंड को थोड़ा सा पीछे करके एक और जोर से धक्का दिया तो लण्ड चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा घुस गया।
अब वह सर को इधर उधर मार रही थी पर लंड अपना काम कर चुका था।
मैंने अपनी सांस रोकी और लंड को वापिस थोड़ा सा पीछे करके जोर से धक्का दिया तो लंड पूरा उसकी चूत में घुस गया।
उसकी आँखों से आंसू निकल गए और ऐसे लग रहा था कि जैसे वह बेहोश हो गई हो!
थोड़ी देर में उसका दर्द कुछ कम हुआ।
अब वह धक्के पर आः ऊह्ह्ह श् औरऽऽर्र आआह्ह्ह कर रही थी, उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और वह अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा रही थी।
उसने अपनी टांगों को मेरी टांगों से ऐसे लिपटा लिया था जैसे सांप पेड़ से लिपट जाता है।
मुझे बहुत आनंद आ रहा था।
उसके ऐसा करने से लंड उसकी चूत की पूरी गहराई नाप रहा था.
और हर शॉट के साथ वह पूरा आनंद ले रही थी, बोल रही थी- अंकुर, प्लीज़ कम ओन ऽऽ न! फक मी हार्ड!
उसकी साँसें तेज हो गई थी और पूरे कमरे में आ आ… आ… उ… की आवाजें गूंजने लगी और फिर आःह्हछ उफ्फ्फ श्ह्ह्ह की आवाजें करते करते वो फिर से झड़ गई।
अब उसकी चूत और चिकनी हो गई थी और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, कभी तेज शॉट और छोटे शॉट तो कभी तेज शॉट और लॉन्ग शॉट लगाता।
जब छोटे शॉट लगाता तो उसको लगता कि उसकी जान निकल रही है, जब लॉन्ग शॉट लगाता तो उसको दर्द होता!
और ऐसे ही दस मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और ऐसे ही उसके ऊपर निढाल होकर लेट गया। उसके चेहरे पर संतुष्टि और आनंद झलक रहा था।
हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो अपने कपड़े पहन सके। मैंने उसको जल्दी जल्दी जल्दी कपड़े पहनाए क्योंकि डर था कहीं कोई आ ना जाये!
मुझे उसने बाद में बताया कि अब वह बहुत खुश है!
और उसके बाद मैंने उसे चार बार और चोदा और उसने मुझ से अपनी तीन सहेलियों की सील भी तुड़वाई पर वो मैं अगली बार लिखूंगा।
दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है सो प्लीज़ मुझे मेल जरूर करें ताकि मैं अपनी और भी सत्य कथाएँ तुम्हें भेजता रहूँ। Antarvasna
हैलो ! मेरा नाम सोनू है और Sex Stories मैं जालंधर का रहने वाला हूँ और मैं 30 साल का हूँ। आज मैं आपको अपनी सच्ची लव स्टोरी के बारे में बताने जा रहा हूँ।
बात 5 साल पहले की है जब मैं एक कंपनी से दूसरी कंपनी में काम करने के लिए आया। नए ऑफिस में दो लड़कियां पहले से ही काम कर रही थी। दोनों गजब की स्मार्ट और सेक्सी थी। एक की उमर 33 साल की थी, नाम शरण था और मुझे लाइन भी दे रही थी। वो मुझे बहुत सेक्सी और पटने वाली लगी। धीरे धीरे मैंने उस से दोस्ती कर ली।
तीन महीने के बाद मैंने उस से पूछा कि क्या उसको मुझसे प्यार है। वो घबरा गयी और कुछ नही बोली। उसके मुम्मे घबराहट से बड़े हो गए और होंठ सूख गए। दूसरे दिन वो ऑफिस में मेरे पास वाली सीट पे बैठी थी।
मैंने उस से किस मांगी। पर उसने इनकार कर दिया। फ़िर मैं धीरे से उसके पास गया और हाथ पकड़ के किस करने की कोशिश की। उसने मुझे नहीं रोका और मैंने पहली बार किसी लड़की के होंठ चूसे। उसके हाथ और चेहरा बहुत गर्म हो गया। फ़िर कुछ देर बाद उसने मुझे पीछे कर दिया। और इस तरह पहले चुम्बन से सिलसिला शुरू हो गया।
फ़िर मैंने उसे बाहर मिलने के लिए जोर डाला। पर शरण नहीं मानी। फ़िर कुछ दिन बाद मेरे ऑफिस के दूसरे लड़के की रात की शादी थी। उसने सब को शादी में बुलाया। मेरे मन में आया कि मैं शरण को इस शादी की रात चोदूंगा और ऐसा ही हुआ।
शादी में शरण भी आ गयी। वो बहुत सेक्सी लग रही थी और सलवार कमीज में थी कमीज का गला बड़ा था और उसके मुम्मों की बीच की लाइन साफ़ नज़र आ रही थी। मैंने उससे बोला कि शादी के बाद मैं उससे अपनी कार में घर छोड़ दूंगा और वो मान गयी। सो, शादी में कुछ देर एन्जॉय करने के बाद मैं शरण को कार में लेके निकल पड़ा। थोड़ा दूर जा के मैंने कार साइड में लगा दी और शरण से किस मांगी। उसने इंकार नहीं किया। मैंने उसे कार में ही किस करना शुरू किया।
पहले ऊपर का होंठ खूब चूसा, फ़िर नीचे वाला चूस के लाल कर दिया, फ़िर मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया और पेट को सहलाते हुए मुम्मे तक पहुँच गया, साथ में लिप किस भी हो रही थी। फ़िर मैंने उसकी कमीज ऊपर की और ब्रा के ऊपर से उसके मुम्मों को खूब रगड़ा। शरण पूरी गरम हो गयी थी। फ़िर मैंने पीछे से उसकी ब्रा की हूक खोली और उसके दोनों मुम्मों में अपना मुँह दे दिया। अब तो मेरा लंड खूब फर्राटे मार रहा था।
फ़िर मैंने धीरे से उसकी सलवार का नाला खोल दिया और झट से अपना हाथ बीच में डाल कर उसकी चूत पकड़ ली। उसने पैंटी नहीं पहनी थी। वो एकदम से घबरा गयी और जान गयी की आज वो ज़रूर चुद जायेगी। उसने मुझे रोकने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका। उसकी चूत पे थोड़े से ही बाल थे। मैंने उसकी चूत में खूब ऊँगली दी। उसकी चूत पूरी लाल और गीली हो गयी थी। फ़िर मैंने उसकी सलवार उतार दी, उसकी चूत के बाहर के हिस्से को खूब रगड़ा। मेरा लंड उसकी चूत का स्वाद चखने को तैयार था। उसकी चूत में से पानी निकल के कार की सीट पे जा रहा था।
फ़िर मैंने अपनी पैंट उतारी और शरण के ऊपर चढ़ गया। मैंने अपना लंड उसकी चूत की मोरी पे रख दिया पर अंदर धक्का नहीं दिया। शरण तड़प उठी और बोली कि अब अपना लंड अंदर डाल दो। फ़िर मैंने एक ही झटके में अपना पूरा बड़ा लंड उसकी चूत में दे दिया और जोर से झटके मारने लगा।
उसको पहले दर्द हुआ फ़िर मज़ा आने लगा। उसने भी अपनी गांड ऊपर उठा के झटके देने शुरू कर दिए। मैंने उसकी गांड को पकड़ लिया और जोर से अपना लंड उसकी बच्चेदानी तक ले गया। वो फिस फिस करने लगी। फ़िर मैंने झटके के साथ साथ शरण के मुम्मों को दबोचा, किस किया, काटा, निप्पल को चूसा।
फ़िर मैंने अपना लंड उसकी चूत में से निकाल के उसे उल्टा करके पीछे से उसकी चूत को पकड़ के फ़िर चूत में डाल दिया। उसकी गांड पे झटके लग रहे थे। मैंने उसकी गांड पकड़ के पूरी चौड़ी कर दी और फ़िर गांड की मोरी में अपनी उंगली दे दी। इसी बीच वो डिस्चार्ज हो गयी और बाद में मेरा लंड भी उसकी चूत में डिस्चार्ज हो गया। और इस तरह से लगभग आधा घंटा मैंने उसके साथ सेक्स का मज़ा लिया। शरण ने भी खूब चुदने का मज़ा लिया।
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सभी पाठकों और आँटियों Antarvasna को राजू के लण्ड का सलाम। अन्तर्वासना में यह मेरी पहली कहानी है। मैं बचपन से ही सेक्स के लिए उतावला रहा हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं बी. कॉम प्रथम वर्ष में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक दम्पत्ति रहने आया। उनकी शादी हुए चार-पाँच साल ही हुए थे। मेरा उनसे मेल-जोल होने लगा। मैं उनको भैया और भाभी कहता था। मेरा उनके घर आना-जाना शुरू हो गया
एक बार भैया ने रात को दस बजे मुझे फोन किया कि मैं उनके घर आउँ। मैं तुरन्त उनके घर गया तो भैया ने कहा उनको बस-स्टैण्ड जाना है, उनको रात को किसी ज़रूरी काम से दिल्ली जाना था। भैया ने कहा कि तुम्हारी भाभी को डर लगता है इसलिए हो सके तो तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना।
मैंने कहा – ठीक है।
मैं आधे घण्टे में उनको बस-स्टैण्ड पहुँचा कर वापस भाभी के पास आ गया। भैया की माँ भी उस दिन बाहर गई हुईं थीं।
भाभी को मैंने कहा कि वो अन्दर बेडरूम में सो जाये, मैं बाहर ड्राईंगरूम में सो जाता हूँ। भाभी ने कहा कि ठीक है। भाभी ने मुझे जान-बूझकर पतली सी चादर दी ताकि मुझे ठंड लग जाए। करीब आधे घण्टे में वो पानी पीने के लिए बाहर आई तो मैं ठण्ड से सिकुड़ रहा था। भाभी ने कहा कि ठण्ड लग रही है तो अन्दर सो जाओ। मैं तैयार हो गया। अन्दर केवल एक डबल बेड पलंग था। भाभी ने कहा कि यहीं सो जाओ। मैं थोड़ा सकुचाया। फिर मैं भी वहीं सो गया। करीब आधे घण्टे बाद मैंने पाया कि भाभी की एक टाँग मेरी टाँगों पर आकर लगी। टाँग पर से साड़ी ऊपर हो गई थी और भाभी की गोरी-गोरी मादक जाँघें मुझे मखमल की तरह लग रही थीं। मैंने भी धीरे से अपनी टाँग भाभी की टाँगों पर रख दीं। मेरे आठ इंच का मूसल खड़ा होने लगा। मैंने धीरे-धीरे टाँगों को रगड़ना शुरू किया तो भाभी ने भी जवाब दिया। मुझे हरी झंडी मिल गई।
फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के पास आता गया और मैंने भाभी की चूचियों पर अपना हाथ रख दिया तो भाभी सोने का नाटक करने लगी। अब मैंने भाभी की मादक, रसीली और भरी-भरी चूचियों को हल्के-हल्के दबाना शुरू किया। अचानक भाभी जाग गईं और कहने लगीं कि ये तुम क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि मुझे नींद में पता नहीं चला, सॉरी। मैं उठकर बाहर सोने के लिए जाने लगा तो भाभी ने कहा नहीं यहीं सोना है।
भाभी ने मुझे एक भद्दी सी गाली मादरचोद कहा और कहा कि लण्ड खड़ा करने की हिम्मत है पर डालने की नहीं। मैंने भाभी से कहा कि लण्ड तो आपने ही खड़ा किया था। भाभी हँसने लगीं। भाभी उठीं और रसोई से जाकर गरमा-गरम दूध लेकर आईं, फिर हमने दूध पिया। फिर कहा कि सर्दी बहुत है, मैंने कहा कि अभी सर्दी भगा देता हूँ।
भाभी बोली- तो देर क्यो कर रहे हो।
मैंने भाभी को पलंग पर ही पटक दिया और उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया और उनकी पैण्टी में हाथ डाल दिया। अचानक मुझे लगा कि जैसे कि मैंने कोई भट्ठी में हाथ डाल दिया है। मैंने भाभी की फूली हुई ब्रेड की माफ़िक रसीली चूत को मसलना शुरू किया। भाभी आआआआआ… आआआआ… श्श्श्श्शस्स्स्स्ससी श्सस्स्स्सी… करने लगी। फिर मैंने भाभी की ब्लाउज़ खोल दी और उसकी चूचियों को दबाना शुरू किया। मैंने भाभी के पूरे बदन को अपनी जीभ और होठों से चूमा। फिर मैंने बाभी की चूत पर अपनी जीभ फेरनी शुरू की। भाभी का पूरा शरीर अकड़ने लगा और अचानक ही उनकी चूत से कुछ रस बहने लगा।
मैंने भाभी से पूछा- ये क्या है?
भाभी ने कहा- मादरचोद, गाण्डू, चाट इसको।
मैंने रस को चाटा तो काफी गरम और टेस्टी था। भाभी ने अब मेरे मूसल को हाथ में लेकर मुट्ठ मारनी शुरू कर दी, थोड़ी देर में मुझे लगा कि अब मेरा रस निकलने वाला है तो मैंने भाभी को कहा कि मेरा निकलने वाला है तो भाभी ने उसको अपने मुँह में लिया और सारा रस पी गई।
१५ मिनट के बाद लण्ड फिर से खड़ा होने लगा क्योंकि भाभी अपनी चूत के बाल साफ कर रही थीं, और मैं उनको देख रहा था, मैंने भाभी से पूछा – कि भाभी आप तैयार हो? तो भाभी ने कहा- मेरे चोदू, आ जा ! चोद दे !
मैं सीधे ही भाभी के ऊपर चढ़ गया और अपना ८ इंच का मूसल उसकी चूत में डाल दिया, मूसल जाते ही भाभी दर्द के मारे छटपटाने लगी और बोली, भड़वे, लण्ड है कि मूसल है। भाभी की चूत काफी टाईट थी, मुझे अन्दर-बाहर करने में मज़ा आ रहा था। मैंने भाभी से इसका राज पूछा तो वह बोली कि जब तक किसी चीज़ को काम में नहीं लाओ तो वह नई-नई ही रहती है। मैं सारा माज़रा समझ गया।
मैंने भाभी की चूत को और तेज़ी से चोदने लगा, फिर १५ मिनट बाद में, मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और भाभी की चूत में पीछे से लण्ड डाल दिया और चोदने लगा, बाभी का माँसल बदन और मेरे शरीर की टकराहट से कमरे में फच्च फच्च फच्च… की आवाज़ें आने लगीं।
भाभी लगातार शस्स्स्स्सी…. श्स्स्स्सी…. उई… उई… अह्ह्ह्हहा…. अह्ह्ह्हाहा की आवाज़ें निकाल रही थी। भाभी अब ज़ोर ज़ोर से धक्के लेने लगी, मैंने भी गति बढ़ा दी। भाभी बोली- साले, बहनचोद, और ज़ोर से चोद, मेरी चूत फाड़ डाल !
मैंने भाभी को कहा, हरामज़ादी, साली, कुत्ती, तेरी चूत का तो मैं औज फौलाद बना ही डालूँगा। यह कहते-कहते भाभी का रस निकल गया और थोड़ी देर बाद में मेरा भी। हमने एक दूसरे को साफ किया और सो गये। सुबह ६ बजे में मैंने भाभी को एक बार फिर से चोदा। चुदाई के बाद भाभी ने चाय बनाई, मैंने चाय पीकर भाभी को किस किया और पूछा- “रात को सर्दी तो नहीं लगी?” तो भाभी मुस्कुराने लगी।
उसके बाद से मैं भाभी को लगातार चोद रहा हूँ…. Antarvasna
हाय, मेरा नाम दीपक है। मैं Antarvasna Sex Stories गाजियाबाद का रहने वाला हूँ। मैंने अतंर्वासना की बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं और मैं भी अपनी एक हसीन कहानी आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूँ। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी।
तो आइये अब रूख करते हैं कहानी की ओर-
यह कोई दो महीने पहले की बात है, मैं ट्रेन से सफर करते हुए अपने गाँव जा रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी इसलिए मुझे सीट नहीं मिली। मैं जाकर ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा हो गया। मैं खड़ा हुआ बोर हो रहा था, तभी एक लड़की और उसकी दादी भी उसी डिब्बे में चढ़ गई। दादी को तो एक अकंल ने सीट दे दी पर वो लड़की मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई। इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी। गाड़ी तेज चल रही थी जिससे यात्री इधर उधर हिल रहे थे। मेरा हाथ बार बार उसके पेट से टकरा रहा था और वो मुझे गर्म लग रही थी। अब तो मेरे मन ने हिलोरें लेनी शुरू कर दी, मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उसके पेट पर फेरना शुरू कर दिया। उसे भी लगने लगा कि मैं यह सब जानबूझ कर कर रहा हूँ। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे धीरे से मना कर दिया। भीड़ की वजह से किसी का ध्यान हम पर नहीं था।
अब मैं घूम कर उसकी ओर मुँह करके खड़ा हो गया और उससे उसका नाम पूछा तो उसने बिना किसी ना-नुकर के अपना नाम बता दिया। उसका नाम विनीता था। मैंने उससे उसके बारे में सब कुछ पूछ लिया। वो फरीदाबाद की रहने वाली थी। मैंने उससे उसका पता और फोन नंबर लिया, मैंने भी अपना नंबर उसे दे दिया। इसके बाद मेरा स्टेशन आ गया और मैं उतर के अपने गाँव चला गया।
15 दिन गुजर गये, ना तो उसने काल किया ना मैंने ! लेकिन 15 दिन बाद उसका एस एम एस आया कि वो एक जरूरी काम से गाजियाबाद आ रही है। उसने मुझे होटल का नाम बता दिया। उस दिन मैं शाम 7 बजे होटल पहुँच गया। मैंने उसके बताये कमरे का दरवाजा खोला, मैंने देखा कि विनीता बेड पर उल्टी लेटी थी। मैंने दरवाजा बंद कर दिया, विनीता ने एक हल्की नाईटी पहनी थी जिससे उसका सारा शरीर साफ दिख रहा था।
जब मैंने विनीता को उस हल्की नाईटी में देखा तो मेरा छ: इंच का लंड सलामी देने लगा। मैंने खुद को कन्ट्रोल किया और धीरे से मैंने उसे आवाज लगाई। मेरी आवाज सुनकर वो बड़ी तेजी से उठी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे बेहताशा चूमने लगी। मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मेरे हाथ उसके पेट पर घूम रहे थे। मैं उसे बिस्तर पर ले गया वो चुदने के लिए बेकरार थी।
मैंने उसकी नाईटी उतार दी। अब वो सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। मैंने उसका फिगर निहारा क्या गजब का फिगर था ! उसकी चुच्ची बिल्कुल कैटरीना की तरह थी। मैंने उसकी चुच्ची को दबा दिया। अब उसने मुझे कपड़े निकालने को कहा तो मैंने कहा- तुम ही निकाल दो !
उसने मेरे कपड़े उतार दिए। अब मैं भी सिर्फ कच्छे में था। मेरा लंड बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैंने अब अपना हाथ विनीता की पैंटी में डाल दिया और उसकी चूत मसलने लगा। उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था। उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और वो जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी- आ आह अअअ उउउ आ अअ ! मार डाल ! फाड़ दे ! चोद दे ! सि..
मैं भी उसकी चूत को जोर जोर से रगड़ रहा था। वो मेरे हाथ पे ही झड़ गई।
मैंने उसे लेटने को कहा, उसकी टाँगें चौड़ी की और अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और दो धक्को में ही लंड अंदर चला गया। पूरा कमरा उसकी चुदाई की चीखों से भर गया। मैंने विनीता की चुच्चियों को मुँह में दबा रखा था। लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
सुबह वो अपने रास्ते चली गई और मैं अपने !
पर हम आज भी फोन पर चूत-चुदाई करते हैं!
आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरुर बतायें ! Antarvasna Sex Stories
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