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मैं नेपाली हूं और ग्रेजुऐशन के बाद एक सरकारी दफ़्तर में नौकरी करता हूं Sex stories. मेरा घर राजधानी काठमांडु में है और नौकरी के दौरान मुझे देश के अलग अलग हिस्सों में जाना पड़ता है।
ये एक दस साल पुरानी हकीकत है जो मैं आपके साथ बांट रहा हूं।
ऐसे ही मेरा नेपाल के पूरवी शहर बिराट नगर तबादला हुआ। मैं शहर के बीचों बीच एक घर में डेरा लेकर रहने लगा।
वो घर तीन मंजिला था और सबसे ऊपर घरवाला रहता था बीच में मैं और सबसे नीचे एक व्यापारी था।
घरवाला इंजीनियर था और वो अपनी बीवी और दो बच्चों के साथ रहता था।
मैं अकेला रहता था और मेरी शादी भी नहीं हुई थी।
इंजीनियर को मैं भाई और उसकी बीवी को भाभी कहकर बुलाता था। हम शाम के वक्त छत पर बैठ कर गप्पे मारते थे और इंजीनियर की बीवी कभी चाय तो कभी शरबत पिलाकर हम लोगों का सत्कार करती थी।
उसकी बीवी का नाम गौरी था और लगभग सत्ताइस साल की थी लेकिन इंजीनियर देखने में पचास साल का लगता था।
इंजीनियर से उसके बारे में मैंने कभी नहीं पूछा और जरूरत भी नहीं समझी।
वो घर से बहुत दूर नौकरी करता था और महीने दो महीने में एक बार दो चार दिन के लिये घर आता था।
उनके दो बेटे थे एक आठ साल का और दूसरा पांच साल का।
दोनों स्कूल जाते थे और मैं फ़ुरसत के समय में उन लोगों को होमवर्क करने में हेल्प कर देता।
मुझे उन लोगों के घर में या किसी कमरे में जाने में रोकटोक नहीं थी।
गौरी अपनी नाम के तरह गोरी थी और देखने में बहुत सुंदर थी। बड़ी बड़ी काजल लगी हुई आंखें और काले लम्बे बाल उसको और सेक्सी बना देते थे।
गर्मियों का महीना था और शाम का वक्त था मैं हवा खाने छत पर निकल गया।
गौरी ढेर सारे कपड़े लेकर धो रही थी और मैं एक कुर्सी खींचकर गप्पे मारने के लिये उसके सामने बैठ गया।
जैसे ही मेरी नजर उस पर पड़ी, मैं सन्न रह गया वो पतला सफ़ेद रंग का टाइट ब्लाउज़ पहने हुए थी और तीन चौथाई से ज्यादा चूचियों का हिस्सा बाहर उबलने को तैयार था।
उसने बरा नहीं पहनी हुई थी।
मेरे लंड ने हरकत करना शुरु किया और कुछ ही देर में तनकर खड़ा हो गया।
उसकी चमकीली चूचियां गोल गोल थी और उसके बारूद ने मुझे हिलाकर रख दिया।
मेरा दिल तो करता था अभी उठकर जाऊं और गन्ने की तरह सारा रस पी जाऊं या यूं कहूं उसकी घाटी के बीच खुद को समा लूं।
मेरा 6.5” लम्बा और 2.5” मोटा लंड सनसनाकर खड़ा हो गया था और मैं उसको ठंडा करने के बारे में सोच रहा था।
मैं अपने भाग्य को कोस रहा था कि क्यों मैंने पहले ऐसा नजारा नहीं देखा।
सफ़ेद रंग के ब्लाउज़ से निकलता स्तन बेचैनी कर रहा था। मैं अपने शरीर में गर्मी महसूस करने लगा।
मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैं भाभीजी को बोला- भाभीजी, आप कपड़े धोइए मैं पानी डाल देता हूं।
उसने हाँ कहा और मैं पानी डालने लगा।
मैं पानी डालते समय दो चार छींटे उसके ब्लाउज़ पर जानबूझकर डाल देता था और वो मुस्कुरा देती।
मैं एक हाथ से अपना लंड पकड़ रहा था और दूसरे हाथ से पानी डाल रहा था।
कुछ देर बाद भाभी का सारा ब्लाउज़ भीग गया और मैं सकते में आ गया। उसके भीगे ब्लाउज़ से लाल लाल निप्पल साफ़ दिखाई देने लगे या यूं कहूं कि वो ऊपर से पूरी तरह नंगी हो गई।
मेरे सब्र का बांध टूट रहा था और मैं उसको बोला- भाभी, आप पूरी तरह से भीग गयीं हैं, कपड़े बदल लीजिये नहीं तो आपको सर्दी लग जायेगी.
वो बस मुस्कुरा कर बोली- आपने ही तो भिगाया है देवर जी, आप बहुत बड़े वो हो।
मैं अपना लंड पकड़कर थोड़ा हिला रहा था और इसी दौरान मेरा लंड झड़ गया।
उसे देख कर मैं उसकी कल्पना में खोया था कि उसके बच्चे आ गये और मेरा सपना टूट गया।
दूसरे दिन जब मैं ओफ़िस से घर लौटा तो शाम के चार बज रहे थे।
मैं कपड़े बदलकर सीधा ऊपर चला गया।
भाभी और बच्चों में जंग चल रही थी कि सबसे ताकतवर कौन है। वो एक आपस में एक दूसरे को उठा रहे थे।
मैंने गौर से भाभी को देखा तो उस दिन भी उसने ब्रा पहनी नहीं थी, हल्के गुलाबी रंग के ब्लाउज़ और शिफ़ोन की साड़ी के साथ हल्का मेकअप उसको और हसीन बना रहा था।
मेरे शरीर में हरकत शुरु हो गयी और मेरा लंड धीरे धीरे बढ़ने लगा।
मैं भाभी और अपने लंड के बारे में सोच ही रहा था कि एक लड़का बोला- अंकल, आप हमारी मम्मी को उठा सकते हैं?
तो मैं भाबी को चिढ़ाने के लिये बोला- आपकी मम्मी भारी तो हैं पर हम उठा सकते हैं।
इतने में भाभी बोली- हम भारी हैं या देवर में उठाने की ताकत नहीं है?
हम कुछ कहने वाले थे कि बच्चों को उनके दोस्तों ने नीचे से आवाज़ दी और बच्चे नीचे की तरफ़ भागने लगे और भाभी उन लोगों को आहिस्ता जाने की हिदायत दे रही थी।
उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी और मैंने सोचा यही मौका है भाभी को दबोचने का और मैं आगे बढ़ा और उनकी कमर में हाथ डाल के झटके से ऊपर उठा लिया।
वो न नुकर कर रही थी लेकिन मैंने उसको दबोचे रखा।
मैंने अंदाज़ा लगाया वो लगभग 55 किलो की थी और 5’5” उंचाई वाली औरत थी।
उसने हल्का खुश्बुदार परफ़्यूम लगा रखा था जो मुझे और मदहोश कर रहा था।
मैंने अपना हाथ थोड़ा ढीला किया तो वो धीरे धीरे नीचे की तरफ़ सरकने लगी और जब वो ज़मीन पर टिक गयी तो उसकी दो बड़ी बड़ी चूचियां मेरे हाथ में थी।
मैंने अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर महसूस किया और मैंने अपना हाथ का दबाव उसकी चूचियों पर थोड़ा और बढ़ाया।
उसका शरीर भी काँप रहा था और सांसें गर्म हो गयी थी।
इसी बीच मैंने एक लम्बा चुम्बन उसके होंठों पर रख दिया।
उसके निप्पल बहुत कड़क हो गये थे और मेरा लंड साड़ी के बाहर से ही उसकी चूत में जाने के लिये तड़प रहा था।
अपना हाथ मैंने उसके ब्लाउज़ के अंदर डाल दिया और उसकी दो पहाड़ जैसी रसीली चूचियां दबाने लगा।
मैंने महसूस किया कि मेरे लंड से पानी निकल रहा है।
जबमैंने उसके निप्पल को थोड़ी ज़ोर से दबाया तो वो दूसरी तरफ़ हटकर बोली- देवर जी, आप बहुत नटखट हैं, जो काम रात को करते हैं वो दिन में नहीं करते.
इतना कहकर वो किचन की तरफ़ चली गयी और मैं वहीं बैठकर अपने लंड हिला हिला कर पानी निकालने लगा।
मैं एक बार फिर नकामयाब होकर लौट गया।
अब मुझे रात का इन्तज़ार था और घड़ी की सुई थी कि हिलती ही नहीं थी।
मैं कभी कभी व्हिस्की पीता था इसलिये एक दो व्हिस्की की बोतल मेरे पास रहती थी।
मैंने एक पैग ले लिया लेकिन मेरी बेसब्री और बढ़ गयी।
मैंने दूसरा पैग भी ले लिया अब मेरी बेसब्री थोड़ी कम हुई। मैंने तीसरा पैग बनाया और खाना खाने लग गया।
खाना खाने के बाद मैंने ब्रश किया और थोड़ा परफ़्यूम अपने शरीर पर और थोड़ा अपने लंड पर लगा लिया।
इतने में रात के नौ बज गये और मैं तैयार होने लगा।
मैंने व्हिस्की का तीसरा पैग एक घूंठ में हलक से नीचे डाला और मैं सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ा।
भाभी का मेन गेट खुला था और एक कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी।
मैं उसी दरवाजे की तरफ़ बढ़ा, दरवाजा आधा खुला था और भाभी पलंग पर बैठकर कुछ पढ़ रही थी।
मैंने दरवाजा थोड़ा पुश किया तो भाभी दरवाजे की तरफ़ पलटी, उसकी और मेरी आंखें चार हुई तो वो अलग अंदाज़ में मुझे न्यौता दे रही थी।
अब मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया।
सारे कमरे में हलकी खुशबू फ़ैली थी।
भाभी भी पलंग से उठकर आयी तो मैंने देखा, वो एक झीनी सी पारदर्शी नाइटी में थी और उसका सारा अंग मुझे दिखाई पड़ रहा था।
उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और वो अभी भी ब्रा पहने नहीं थी।
काले लम्बे बालों को आगे की तरफ़ झुकाये थी और आंखों में काजल उसको और सेक्सी बना रहा था।
मेरा लंड फिर हरकत में आ गया और देर करना मुझे मेरी मूर्खता लगी.
इसलिये मैं आगे बढ़ा और एक झटके में उसे बांहों में जकड़ लिया।
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और उसकी जीभ को चूसने लगा।
उसने मेरी पैंट का हुक खोलकर मेरी पैंट नीचे गिरा दिया।
मेरे लंड का दबाव शायद वो अपनी चूत पर कर रही थी।
मैंने उसकी नाइटी को उतार दिया और अपने भी सारे कपड़े उतार दिए।
हल्की रोशनी में मुझे उसका जिस्म ताजमहल जैसा लग रहा था।
मैंने फिर एक बार उसके होंठों पर लम्बा किस जड़ दिया।
मेरे हाथ धीरे धीरे उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर बढ़ने लगे।
उसकी चूचियां सख्त थी और ऐसा नहीं लगता था कि उसके दो बच्चे भी हैं।
मैं अपना दबाव उसकी गोलाइयों पर बढ़ाता गया और वो मेरे शरीर के अंग अंग को किस कर रही थी।
जब मैं उसकी कड़क निप्पलों को चूसने लगा तो सिसकारी भरने लगी।
उसके शरीर की गरमाहट मुझे और मदहोश बनाने लगी थी।
मैं अपनी एक उंगली उसकी चूत पर रगड़ने लगा और मुँह से उसके निप्पल चूस रहा था।
उसके चूत से निकला पानी से मेरी उंगली भीग गई थी।
मैंने उसको उठकर बेड पर लिटा दिया। मैं उसके ऊपर विपरीत दिशा में बैठ गया तो उसकी टांग मेरे सर की तरफ़ थी और मेरी टांग उसके मुँह की तरफ़ थी।
मैं धीरे धीरे उसकी चूत सहलाने लगा तो वो छटपटाने लगी।
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर फ़ेरना शुरु कर दी।
लाल चूत के बीच में जो छोटा मांस का टुकड़ा होता है, मैं उसको मुँह में लेकर अपनी जीभ से दबाने लगा।
वह भी मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी।
उसकी चूत में अपनी जीभ अंदर बाहर करता था और कभी कभी मैं टुकड़े को हल्का सा काट देता था तो वो सिहर उठी थी और मेरे सर को जोर से चूत की तरफ़ खींचती थी।
वो अपनी चूत को ऊपर नीचे कर रही थी जिससे मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर बाहर हो जाती थी।
थोड़ी देर हिलने के बाद उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकला जो मैंने ज्यादा से ज्यादा मुँह से निगल गया।
मेरा भी लंड तुनक रहा था तो मैं अब उसके ऊपर आ गया।
मैंने अपना लंड उसकी चूत के सामने रखकर थोड़ा दबाव दिया तो लंड का सुपारा उसकी चूत के अंदर घुस गया।
उसने हल्की आह की आवाज़ मुँह से निकाली और मुझे अपनी बाहों में भींच लिया।
मैंने एक और जोरदार धक्का मारा, अब सारा लंड उसकी चूत के अंदर था।
मैं धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। मेरे दोनों हाथ उसकी चूचियों पर थे और मेरा मुँह कभी उसके निप्पल तो कभी उसके होंठ पर चल रहा था।
मेरे होंठ, हाथ और लंड की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने लगा।
वो मुझे पूरी तरह साथ दे रही थी और बीच बीच में सिसकारी भरकर मुझे भींच लेती थी।
मेरे लंड की स्पीड बढ़ती गयी और उसकी चूत से इतना पानी निकल रहा था कि पूरा कमरा फच फच की आवाज़ से गूंज रहा था।
मैं दनादन उसकी चूत में लंड डाल रहा था।
इतने में ही उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकला और वो निढाल हो गयी।
मैं भी झड़ने वाला था तो अपना लंड चूत से निकालकर उसके मुँह में दे दिया।
वह मेरे लंड के सुपारे को अपने दांतों से दबाव देकर चूसने लगी और वो लंड को जड़ तक चूस रही थी।
थोड़ी देर बाद मेरे लंड से ढेर सारा सफ़ेद वीर्य निकला जो वो चाव से चाटने लगी।
हम दोनों पलंग पर बैठ कर बातें करने लगे।
मैं बोला- भाभी, कैसी रही चुदाई?
तो वो बोली- आपका लंड तो बहुत बड़ा है, मेरे मियां का लंड तो इससे आधा भी नहीं है और जब वो चोदने आते हैं तो मैं अभी तैयार भी नहीं होती हूं और उसका लंड झड़ जाता है। देवर जी, तुम में बहुत दम है और अब जब चाहो मुझे चोद सकते हो।
मैंने पूछा- भाभी, आपके दो बच्चे हैं लेकिन आपकी चूचियां तो बहुत सख्त हैं.
तो वो बोली- मैं रोज योगा करती हूं इसलिये मेरा शरीर दुरुस्त है।
मैं उसकी चूचियां दबा रहा था और वो मेरी छाती पर हाथ फेर रही थी।
धीरे धीरे उसका हाथ मैंने अपने लंड पर पाया और वो उसे उठाने की कोशिश कर रही थी।
मैं भी उसकी चूचियां दबाता रहा था तो कभी उसके निप्पल को मुँह में ले के चूसता था।
मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ से खेलना शुरु किया जिसमें उसने मेरा पूरा साथ दिया।
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मैं उसकी जीभ चाट रहा था और वो मेरी। उसका मुँह मेरे मुँह से सटा हुआ था और उसके दोनों हाथ लंड को सहला रहे थे।
शादी के बाद से नज़मा भाभी की चुदाई Sex Stories बहुत ही कम हुई थी। जवान तन लण्ड का प्यासा था। मुझे रोज चुदते देख कर उसका मन भी मचल उठा। वो रोज छुप छुप कर अब्दुल से मेरी चुदाई देखा करती थी। जब वो गाण्ड मारता था तो भाभी का दिल हलक में अटक जाता था। भैया को बस धंधे से मतलब था। रात को दारू पीता और थकान के मारे जल्दी सो जाता था। सात दिन पहले वो मुम्बई चला गया था।
नज़मा भाभी आज तो ठान रखी थी कि मुझसे बात करके कुछ काम तो फ़िट कर ही लेगी।
भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा,”बानो छत पर चल, एक जरूरी काम है !”
“यहीं बोल दे ना … !”
“अब तू भी गाण्ड फ़ुला कर नखरे दिखा ! … कहा ना जरूरी काम है !”
“चूतिया टाईप बातें मत कर … गाण्ड जैसा अपना मुँह खोल … बोल क्या बात है !”
“साली हारामजादी … मां चुदा ! … नहीं बताती … !”
“हाय मेरी भाभी जान … चल फिर … लगता है जरूर कोई बात है !”
भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और लगभग खींचती हुई छत की ओर छलांगें मारती हुई सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। छ्त पर पहुंचते ही वो हांफ़ने लगी। उसकी छातियाँ ऊपर नीचे होने लगी।
“सुन … एक बात कहूँ … बुरा तो नहीं मानेगी ना … ” उसने बड़ी मुश्किल से उखड़ती आवाज में कहा।
“बोल ना … दिल में इतनी बेचैनी … क्या बात है … किसी ने चोद मारा है क्या … ?”
“बात ही कुछ ऐसी है … देख नाराज मत होना … !”
मैंने उसे हैरानी से देखा … “बोल ना … ऐसा क्या है?”
“बहुत दिन हो गये, तेरे भाई जान तो यहाँ है नहीं … !” वो अटकते हुए बोली।
“हाँ तो … आ जायेंगे ना …! “
“वो तेरा दोस्त है ना, अब्दुल … उससे मेरी दोस्ती करवा दे !” भाभी ने जमीन की ओर देखते हुये कहा।
“ओह हो … मेरी भाभी की चूत चुदासी हो गई है … चुदना है क्या?”
“बानो ! … प्लीज़ देख मजाक मत कर … मेरी हालत बहुत खराब हो रही है … देख, चूत में से पानी टपक रहा है !”
“अच्छा … पहले देखूँ तो कितनी बैचेन है भाभी की चूत … ” मैंने उसकी चूत दबा दी।
सच में रसीली हो चुकी थी।
तो भोसड़ी की ! रान्ड को चुदवाना है ? मैंने कहा।
“सच रे … ये तो बहुत ही चुदासी है … साली पहले क्युँ नहीं चुदवा लिया … कब चुदवाओगी … … कब बुलाऊँ उसे …??? “
“आज रात को ही चुदवा दे ना मुझे … “भाभी ने कातर नजरो से मुझे देखा। मुझे उस पर दया आ गई …
अब्दुल तो शाम को सात बजे ही घर पर आ गया था। शाम का धुंधलका बढ़ गया था। हम दोनों छत पर आ गये। दूसरी छतों पर लोग थे।
“बानो, भाभी आये उसके पहले कुछ हो जाये … ?” अब्दुल बोला।
मुझे डर सा लगा, पर तुरन्त आईडिया आ गया। दीवार की आड़ में मस्ती कर लेते हैं।
“अच्छा तो नीचे बैठ जा और मेरी चूत खोल ले … ऊपर तो कुछ दिखेगा नहीं”
मैं दीवार पर खड़ी हो गई ताकि कमर तक दीवार आ जाये … वो नीचे बैठ गया और मेरी सफ़ेद पेन्टी नीचे उतार दी। मेरी चूत उसके सामने थी। उसने नीचे कुर्सी की गद्दी लगा ली और वो दीवार से टिक कर आराम से बैठ गया, और मेरी चूत से खेलने लगा। कभी मेरी चूत को सहलाता, तो कभी मेरे दाने को छू लेता …
फिर दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को पकड़ कर दबा देता और मेरे गाण्ड के छेद में अंगुली डाल देता। बड़ा मजा आ रहा था। उसका लण्ड खड़ा हो गया था। सो जिप खोल कर उसने लौड़ा बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा। उसके हाथ कभी कभी मेरे टॉप के अन्दर भी घुस जाते थे। मुझे डर लगता कि कोई मादरचोद मुझे देख ना ले, सो उसका हाथ पकड़ कर वापस नीचे ले जाती।
“चूतिये … ऊपर मत कर … कोई देख लेगा तो … मेरी तो माँ चुद जायेगी !”
“बानो धीरे से नीचे बैठ जा … तब तो कोई नहीं देखेगा ना !” मैं उसकी तरकीब समझ नहीं पाई। मैने नीचे देखा और धीरे से बैठ गई और उसका लण्ड सीधा मेरी चूत में घुस गया। लण्ड चूत में घुसते ही मुझे उसकी बात पल्ले पड़ गई और हंस दी।
“भोसड़ी के … मुझे चोदेगा क्या … ? भाभी को आने दे ना … !” मैंने उसका लौड़ा बाहर निकाल दिया।
तभी छत के कमरे में से मुझे खिड़की से झांकती हुई भाभी नजर आ गई। वो वहाँ खड़ी खड़ी अपनी चूंचियाँ मसल रही थी। जाने वो कब से खड़ी हो कर हमें देख रही थी। उसने मेरे देखते ही इशारा किया। मैंने अब्दुल को दूर हटा दिया।
“सुन रे गाण्डू, कपड़े पहन ले … भाभी आने वाली है !” मैंने अब्दुल को लताड़ा।
अब्दुल ने कपड़े पहन लिये और खड़ा हो गया। मैंने भी अपने कपड़े सही कर लिए। सब कुछ सही देख कर भाभी कमरे में से बाहर छत पर आ गई।
भाभी जान के आते ही अब्दुल जैसे तैयार हो गया। मैने भाभी को इशारा किया कि क्या शुरु करें कार्यक्रम?
वो तो जैसे पहले ही गरम हो चुकी थी। उसका हाथ तो चूत पर ही था और उसे दबा रखा था … मानो पेटीकोट दबा रखा हो।
“अब्दुल, यह है नजमा भाभी … तुम्हें याद कर रही थी !”
“सलाम, भाभी जान … आप तो बड़ी खूबसूरत हैं !”
प्रत्युत्तर में भाभी मुस्कराई और बोली,”मुझे तो बानो ने बताया कि आप तो कमाल के हैं !”
“यह भोसड़ी का तो बस … चुदाई में कमाल दिखाता है … ” मैंने उन दोनों को खोलने की कोशिश की।
“चल हट री भेन की लौड़ी … वो तो सभी मर्द होते हैं !” भाभी ने खुलना ही मुनासिब समझा।
“भाभी जान … आपकी बात तो अलग लग रही है … आपके पोन्द तो कैसे मस्त हैं !” अब्दुल ने पास आते हुए कहा।
“हाय अल्लाह … आप तो पोंद पर ही आ गए … मैंने तो आपके बारे में अभी कुछ नहीं कहा ?”
अब्दुल ने सीधा आक्रमण कर दिया। भाभी के उभरे हुए मस्त पोंद दबा दिये।
“भाभी इसे यानि पोंद मरवा कर देखो … ” गाण्ड में अब्दुल ने अंगुली करते हुये कहा।
“आईईई … बानो … मेरी पोंद दबा दी इसने … !”
“अब्दुल चूंचे भी दबा दे … जल्दी कर … ” मैंने अब्दुल को इशारा किया।
अब्दुल ने उसके पीछे आ कर दोनों चूंचिया दबा दी। भाभी के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी।
“अरे हट छोड़ मुझे, किसी ने देख लिया तो रट्टा हो जायेगा !” भाभी ने यहां वहां देखा और घबरा कर कहा … “चल वहीं बैठ जा, जहां तू बानो की चूस रहा था।”
अब्दुल तुरन्त वहीं जा कर बैठ गया और भाभी जान अब्दुल के पास गई और अपना पेटीकोट उठाया और उस पर डाल दिया।
“बानो, शुक्रिया मेरी जान … अब तो अब्दुल से मैं चुदा लूंगी … चल रे अब्दुल … शुरू हो जा … ” भाभी ने मुस्करा कर मुझे देखा और आंख मार दी और भाभी के मुख से आह निकल पड़ी। मैं समझ गई कि अब्दुल ने कुछ अन्दर किया है।
“हाय अब्बा … डाल दे अंगुली … पूरी घुसेड़ दे रे … “
भाभी ने मुझे पकड़ लिया। मैं भाभी की चूंचियाँ दबाने लगी। उसने मुझे वासना भरी नजर से देखा और सिसकारी भरने लगी। ” बानो, यह तो मस्त लड़का है रे … चूत का पानी ही निकाल देगा !”
“भाभी जान … मस्त हो जा … अब तेरे पेटीकोट में क्या हो रहा है मैं क्या जानू रे … “
“हाँ बानो … ये अन्दर की बात है … साला गजब चूत चूसता है … हाय मुझे मूत आ रहा है !” नजमा भाभी मचलती हुई बोली।
“मूत दे भाभी … मैं चूत खोलता हूँ … “अब्दुल पेटीकोट के अन्दर से बोला।
“हाय मेरी अम्मा … ” भाभी ने जरा सा जोर लगाया और मूतना चालू कर दिया। अब्दुल अन्दर ही अन्दर उसके पेशाब का आनन्द लेने लगा। अपना मुँह गीला कर लिया और अपना मुँह खोल कर पेशाब भर लिया।
“और निकाल मूत … भाभी … क्या स्वाद है … ” उसने चूत में अपना मुँह घुसा कर चाटने लगा।
“बैठ जा भाभी जान … आजा … ” भाभी धीरे से उकडू बैठ गई और मुख से एक आनन्द भरी सीत्कार निकल गई … “हाय रे … लण्ड घुस गया चूत में … ” अब्दुल ने लण्ड घुसते ही पेटीकोट अपने ऊपर से हटा लिया और भाभी को जकड़ लिया। अब्दुल का लण्ड चूत में पूरा घुस गया था। मैंने तुरन्त वहा फ़ैला हुआ पेशाब साफ़ किया और दौड़ कर दरी ले आई और भाभी के पीछे लगा दी। अब्दुल ने भाभी को कसे हुए दरी पर लेटा दिया और लण्ड को चूत में फिर से घुसेड़ दिया।
“हाय अब्दुल … तेरा लौड़ा कितना प्यारा है … पूरा ही अन्दर तक उतर गया … अह्ह्ह्ह”
अब्दुल अब ठीक से सेट हो कर उस पर लेट गया और चोदने का आनन्द लेने लगा। मैंने भी भाभी की गाण्ड में अपनी अंगुली डाल दी।
“बानो … मजा आ गया … एक अंगुली और डाल दे …! “
मैंने भाभी की गाण्ड में दो अंगुलियां डाल दी और घुमाने लगी। मुझे एक शरारत और सूझी, अब्दुल की गाण्ड में भी दूसरे हाथ की अंगुली डाल दी।
“बानो, तू साली चुपचाप नहीं बैठ सकती है ना … साला युसुफ़ गाण्ड चोद जाता है वो कम है क्या ?”
“क्या, युसुफ़ भी तुम्हारा दोस्त है … ?”
“हां भाभी, और फ़िरोज भी है … ” मैने फ़िरोज का नाम और जोड़ दिया
“हाय रे, बानो … मुझे भी अपनी टोली में मिला लो ना … ” भाभी चुदते हुये बोली।
“भाभी चलो, अब हम भी तीन और ये भी तीन … नसीम को भी बताना चाहिये !”
“नसीम भी … ।” भाभी तो इतने सारे चुदाई के साथी मिल जायेंगे यकीन भी नहीं हो रहा था। भाभी चुदवा कर मदमस्त हो रही थी। उसे लण्ड क्या मिला मानो दुनिया मिल गई हो। वो बहुत ही उत्तेजित हो कर आनन्द ले रही थी। मैंने गाण्ड में अंगुली पेलना चालू रखा, दोनों ही डबल मार से बहुत उत्तेजित हो गये थे … अब्दुल सटासट लण्ड चला रहा था। अब्दुल का लौड़ा कड़कने लगा था, उसका डण्डा लोहे जैसा हो गया था। दोनों की कमर एक तालमेल के साथ तेजी से चल रही थी। चूत गीली होने से फ़च फ़च की आवाजें भी सुनाई पड़ रही थी। उत्तेजित भाभी के जिस्म में ऐंठन होने लगी थी।
मैंने भाभी और अब्दुल की गाण्ड में से अंगुली निकाल दी और भाभी की चूंचियां और निपल मसलने लगी, भाभी के मुँह से एक गहरी आह निकली और उसकी चूत ने रस छोड़ दिया। इधर अब्दुल भी लण्ड का जोर लगा कर वीर्य छोड़ने की कोशिश कर रहा था। मैं भाभी को छोड़ कर अब्दुल के चूतड़ों को दबा कर मसलने लगी। … बस अब्दुल ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और पिचकारी छोड़ दी। मैंने तुरन्त उसका लौड़ा मुठ में भर लिया और उसे निचोड़ने लगी और मुठ मार मार कर बाकी का वीर्य बाहर निकालने लगी। भाभी नीचे पडी हांफ़ रही थी और अब अब्दुल भी ठण्डा पड़ रहा था।
“भोसड़ी के … अब ऊपर से तो हट जा भाभी के … ” मैने अब्दुल को पीछे खींचा।
अब्दुल खड़ा हो गया। भाभी भी उठ बैठी। भाभी ने पेटीकोट नीचे किया और मुझसे लिपट पड़ी।
“बानो, शुक्रिया इस शानदार चुदाई का … एक बात कहूँ ? प्लीज मना मत करना … !”
“हां बोलो … नज्जो भाभी …! “
“मुझे भी, अपने दोस्तों में शामिल कर लो … फ़िरोज, हाय कितना चिकना है … युसुफ़ का लौड़ा तो सोलिड है और अब्दुल तो कितना प्यारा है !”
“भाभी … फिर तो आप रोज चुदोगी, होशियार … भैया को भूल जाओगी …! ” मैंने भाभी को मजाक में कहा।
“हाय बानो … ये लो मैंने तो पेटीकोट अभी से ऊपर उठा दिया … चोदो … मुझे जी भर कर चोदो !”
हम तीनों ही हंस पड़े … और फिर सभी दोस्त बन गये । चुदाई सिलसिला शुरू हो गया … भला चढ़ती जवानी के जोश को कोई रोक सका है … । Sex Stories
मेरा नाम श्याम कुमार, उम्र Hindi Sex Stories बीस वर्ष है। मेरे पापा दुबई में एक पांच सितारा होटल में काम करते हैं। पापा की अच्छी आमदनी है, काफ़ी पैसा घर पर भेजते हैं। घर पर मम्मी और मैं ही हैं। मम्मी एक स्कूल में टीचर हैं और मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ।
घर में काम काज के लिये एक नौकरानी अंजलि रखी हुई है। अंजलि बाईस साल की शादीशुदा लड़की है। उसका पति एक प्राईवेट स्कूल में चपरासी है। अंजलि एक दुबली पतली पर गोरी चिट्टी लड़की है। वो घर पर काम करने छ: बजे आ जाती और साढ़े सात बजे तक घर का काम पूरा करके चली जाती है। फिर मम्मी भी स्कूल चली जाती हैं।
अंजलि जब सवेरे काम करने आती है तब मैं सोता ही होता हूँ। वह मुझे बड़ी देर तक सोता हुआ देखती रहती थी। उस समय मैं सुस्ती में पड़ा अलसाया सा बस आंखे बन्द किये लेटा रहता था। मुझे सुबह पेशाब भी लगता था, पर फिर भी मैं नहीं उठता था। नतीजा ये होता था कि पेशाब की नली मूत्र से भरी होने के कारण लण्ड खड़ा हो जाता था तो मेरे पजामे को तम्बू बना देता था। अंजलि बस वहीं खड़े लण्ड को देखा करती थी। मुझे भी ये जान कर कि नौकरानी ये सब देख रही है, सनसनी होने लगती थी। मुझे सोया जान कर कभी कभी वो उसे छू भी लेती थी, तो मेरे शरीर को एक बिजली जैसा झटका भी लगता था।
फिर जब वो दूसरा काम करने लगती थी तो तो मैं उठ जाता था। वो अधिकतर सलवार कुर्ते में आती थी। कुर्ता कमर तक खुला हुआ था जैसा कि आजकल लड़कियाँ पहनती है। जब वो सफ़ाई करती थी तब या बर्तन करती थी तब, वो कुर्ता कमर तक ऊपर उठा कर बैठ कर काम करती थी तो उसकी चूतड़ की गोलाईयां मुझे बड़ी प्यारी लगती थी। उसके गोल गोल चूतड़ उसके बैठते ही खिल कर अलग अलग दिखने लगते थे। उसके खूबसूरत चूतड़ मेरी आंखों में नंगे नजर आने लगते थे। मुझे उसे चोदने की इच्छा तो होती थी पर हिम्मत नहीं होती थी। कभी कभी उसे आने में देर हो जाती थी तो मम्मी स्कूल के लिये निकल जाती थी। तब वो मुझ पर लाईन मारा करती थी। बार बार मेरे से बात करती थी। बिना बात ही मेरी बातों पर हंसती थी। मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। इन सब से मुझे ऐसा जान पड़ता था कि वो मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाह रही है। तब मैंने उसे पटाने की एक तरकीब सोची।
मैं उस दिन का इन्तज़ार करने लगा वो कभी लेट आयेगी तो मम्मी की अनुपस्थिति का फ़ायदा उठा कर जाल डालूंगा। फ़िलहाल मैंने उसके सामने रुपये गिनना और उसे दिखा दिखा कर अपनी जेब में रखना चालू कर दिया था। एक दिन वो लेट हो ही गई। मम्मी स्कूल जा चुकी थी। मैंने कुछ रुपये अपनी मेज पर रख दिये। दाना डालते ही चिड़िया लालच में आ गई।
मुझसे बोली- श्याम, मुझे कुछ रुपये उधार दोगे, मैं तनख्वाह पर लौटा दूंगी।”
मैंने उसे पचास का एक नोट दे दिया। एक दो दिन बाद उसने फिर मौका देख कर रुपये और उधार ले लिये। मुझे अब यकीन हो गया कि अब वो मुझसे नहीं बच पायेगी। हमेशा की तरह उसने मुझसे फिर पैसे मांगे। मैंने सोचा अब एक कोशिश कर ही लेनी चाहिये। उसकी बेकरारी भी मुझे नजर आने लगी थी।
“आज उधार एक शर्त पर दूंगा।” वो मेरी तरफ़ आस लगा कर देखने लगी। जैसे ही उसकी नजर मेरे पजामे पर पड़ी, उसका उठान उसे नजर आ गया। उसने नीचे देख कर मुझे मुस्करा कर देखा, और कहा,” मैं समझ रही हूँ, फिर भी आप शर्त बतायें।”
“आज एक चुम्मा देना होगा” मैंने शरम की दीवार तोड़ ही दी। पर असर कुछ और ही हुआ।
“अरे ये भी कोई शर्त है, आओ ये लो !”
उसे मालूम था कि ऐसी ही कोई फ़रमाईश होगी। उसने मेरे गाल पर चूम लिया। मुझे अच्छा लगा। लण्ड और तन्ना गया। पर ये भी लगा कि चुम्मा तो इसके लिये मामूली बात है।
“एक इधर भी !” मैंने दूसरा गाल भी आगे कर दिया।
“समझ गई मैं !” उसने मेरा चेहरा थाम लिया और मेरे होंठों पर गहरा चुम्मा ले लिया।
“धन्यवाद, अंजलि !”
“धन्यवाद तो आपको दूंगी मैं … जानते हो कब से मैं इसका इन्तज़ार कर रही थी !”
मैं सिहर उठा। ये क्या कह रही रही है? पर उसने मेरी हिम्मत बढ़ा दी।
“अंजलि, नाराज तो नहीं होगी, अगर मैं भी चुम्मा लू तो”
“श्याम, देर ना करो, आ जाओ।” उसकी चुन्नी ढलक गई। उसके उरोज किसी पहाड़ी की भांति उभर कर मेरे सामने आ गये। वो मुझे आकर्षित करने लगे। मैंने उसका कुर्ता थोड़ा सा गले से खीच कर उसके उभार लिये हुए उरोजों को अन्दर से झांक कर देखा। उसकी धड़कन बढ़ गई। मेरा दिल भी जोर जोर से धड़कने लगा। उसके उरोज दूध जैसे गोरे और चिकने थे। मैंने अन्दर हाथ डाला तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“श्याम सिर्फ़, चुम्मा की बात थी, ये मत करो… !” उसने सिसकते हुये मेरा हाथ अपनी छातियों से हटा दिया।
“अंजलि, मेरे मन की रख लो, मैं तुम्हें सौ रुपये दूंगा।”
रुपये का नाम सुनते ही वो बेबस हो गई। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मैंने उसके कुरते के भीतर हाथ डाल दिया और उसके कोमल और नरम स्तन थाम लिये और उन्हें सहलाने लगा। उसके शरीर में उठती झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। वो अपने धीरे धीरे झुकने लगी। पर उससे उसके चूतड़ो में उभार आने लगा। वो सिसकते हुए जमीन पर बैठ गई। उसके बैठते ही उसके चूतड़ों की दोनों गोलाईयाँ फिर से खिल उठी। वही तो मेरा मन मोहती थी।
मैं उसके पास बैठ गया और उसके चूतड़ो की फ़ांको को हाथ से सहलाने लगा। उसकी दरारों में हाथ घुमाने लगा। मेरा लण्ड बुरी तरह से कड़कने लगा था। उसके चूतड़ों को सहलाने से मेरी वासना बढ़ने लगी। अंजलि भी और झुक कर घोड़ी सी बन गई। मैंने उसका कुर्ता गांड से ऊपर उठा दिया ताकी उसकी गोलाईयाँ और मधुर लगे। जोश में मैंने उसकी गाण्ड के छेद में अंगुली दबा दी।
अंजलि से भी अब रहा नहीं जा रहा था, उसने हाथ बढ़ा कर मेरा लण्ड पजामे के ऊपर से ही थाम लिया। मेरे मुख से आह निकल पड़ी।
मैंने उसे पकड़ कर खड़ा कर दिया और कहा,”अंजलि, तुम्हारी गाण्ड कितनी सुन्दर है, प्लीज मुझे दोगी ना !”
“तुम्हारा लण्ड भी कितना मस्त है, दोगे ना !”
“अंजलिऽऽऽऽ !”
अंजलि ने नाड़ा खोल कर अपनी सलवार उतार दी और कुर्ता ऊंचा कर लिया। उसके चूतड़ों की गोरी गोरी गोलाईयाँ मेरे सामने चमक उठी। मैं तो उसकी गाण्ड का पहले से ही दीवाना था। उसे देखते ही मेरे मुख से हाय निकल पड़ी। मैंने हाथ में थूक लगा कर उसकी गाण्ड के छेद में लगा दिया और पजामा नीचे करके लण्ड छेद पर रख दिया। मेरे दिल की इच्छा पूरी होने के विचार से ही मेरे लण्ड के मुख पर गीलापन आ गया था। मेरी आंखे बन्द होने लगी। मेरा लण्ड उसके भूरे रंग के छेद पर बार बार जोर लगा रहा था। गुदगुदी के मारे वो भी सिसक उठती थी।
छेद टाईट था पर मर्द कभी हार नहीं मानता। किले को भेद कर अन्दर घुस ही पड़ा। अंजलि दर्द से कराह उठी। मुझे भी इस रगड़ से चोट सी लगी। पर मजा अधिक था, जोर लगा कर अन्दर घुसाता ही चला गया। मेरे दिल की मुराद पूरी होने लगी। कमर के साथ मेरे चूतड़ भी आगे पीछे होने लगे। अंजलि की गाण्ड चुदने लगी। उसके मुँह से कभी दर्द भरी आह निकलती और कभी आनन्द की सिस्कारियाँ। इतनी सुन्दर और मनमोहक गाण्ड चोद कर मेरी सारी इच्छायें सन्तुष्टि की ओर बढ़ने लगी।
उसके टाईट छेद ने मेरी लण्ड को रगड़ कर रख दिया था। मैं जल्दी ही उत्तेजना की ऊंचाईयों को छूने लगा और झड़ने लगा…मैंने तुरन्त ही अपना लण्ड बाहर खींच लिया और वीर्य की बौछार से गाण्ड गीली होने लगी। मैंने तुरन्त कपड़े से उसे साफ़ कर दिया। हम दोनो ही अब एक दूसरे को चूमने लगे।
वो अब भी प्यासी थी…उसकी चूत मेरे लण्ड से फिर चिपकने लगी थी। मेरा लण्ड एक बार फिर खड़ा हो गया था। मैंने अंजलि को बिस्तर पर लिटा दिया और उस पर छाने लगा। वो मेरे नीचे दब गई। लण्ड ने अपनी राह ढूंढ ली थी। नीचे के नरम नरम फूलों की पंखुड़ियों के पट को खोलते हुए मेरा सुपाड़ा खाई में उतरता चला गया। तले पर पहुंच कर गहराई का पता चला और वहीं पर तड़पता रहा।
खाई की दीवारों ने उसे लपेट लिया और लण्ड को सहलाने लगी। मुझे असीम आनन्द का अनुभव होने लगा। लण्ड में मिठास भरने लगी। मेरे धक्के तेज हो चले थे, अंजलि भी अपने चूतड़ों को झटका दे दे कर साथ दे रही थी। उसके मटके जैसी कमर और कूल्हे सरकस जैसी कला दिखा रहे थे। मैं चरमसीमा पर एक बार फिर से पहुंचने लग गया था। पर मेरे से पहले अंजलि ने अधिक उत्तेजना के कारण अपना पानी छोड़ दिया। मैं भी जोर लगा कर अपना वीर्य निकालने लगा। उसकी चूत वीर्य से भर गई। मेरा पूरा भार एक बार फिर अंजलि के शरीर पर आ गया। हम दोनो झड़ चुके थे। अंजलि जल्दी से उठी और अपने आप को साफ़ करने लगी।
“श्याम, सच में मजा आ गया… कल भी मौका निकालना ना !”
चाची की भोसड़ी का भोसड़ा बनाया-Antarvasnaअब उसकी नजरें मेरे पर्स पर थी। मैं समझ गया, उसे एक पचास का नोट और दे दिया। अब वो अपनी ऊपरी कमाई से खुश थी। उसने नोट सम्भाल कर रख लिये। और मुस्कुरा कर चल पड़ी…शायद अपनी सफ़लता पर खुश थी कि मुझे पटा कर अच्छी कमाई कर ली थी। और उसे आगे भी कमाई की आशा हो गई थी। लण्ड में ताकत होनी जरूरी थी पर साथ में शायद पैसे की ताकत भी मायने रखती थी… जो कुछ भी हो मैंने तो मैदान मार ही लिया था। Hindi Sex Stories
मेरी शादी के बाद एक महीना Indian Sex Stories तो रोज 4 से 5 बार चुदाई करते हुए निकल गया, और कैसे निकला कुछ पता ही नहीं चला। उसके बाद भी सेक्स के प्रति दीवानापन बना ही रहा। अक्सर औरतों की आदत होती है कि वो पति को ताने मारती रहती हैं कि आपको तो बस सेक्स के अलावा कुछ सूझता ही नहीं है।
मैंने उससे पूछा कि शायद तुम्हारे मायके में तुमको खिलाने के लिए कम पड़ने लगा होगा इसलिए तुम्हारी शादी करनी पड़ी !
तो पत्नी बोली- हो ओ ओ ओ ओ, कोई नहीं, खूब था !
मैं बोला- फिर लिखाई पढ़ाई लायक धन नहीं होगा !
तो वो बोली- और कितना पढ़ना था, खूब तो पढ़ लिया !
मैंने फिर पूछा- तो ओढ़ने पहनाने में असमर्थ होने लगे होंगे?
पत्नी बोली- आप भी ना कैसी बातें कर रहे हो, रुपये पैसों की कमी तो कोई नहीं थी !
तो मैं बोला- मेरी प्यारी प्राणेश्वरी ! अरे तो जिस चीज की कमी थी वो था लंड, और सेक्स ! समझी ना ! और इसी के लिए अपनी शादी की गई है और जिसके लिए शादी की गई है, उसका अनादर क्यों करें !
यह तो मन की खेती है, जब भी मन करे खूब चुदाई करो। इससे भी कभी मन भरना चाहिए क्या !
अरे यार लोगों में कई तरह की गलत धारणाएँ होती हैं, कई तो उन धारणाओं के चलते सेक्स का मजा नहीं ले पाते हैं, और कई लोग असमर्थ होते हैं, जल्दी ही स्खलित हो जाते हैं या किसी कारणवश उनका मन ही नहीं करता, वो बेचारे वैसे मजा नहीं ले पाते हैं, इसलिए जब तक इस मशीनरी को चालू रखेंगे ये सही तरीके से काम करेगी, वरना खराब हो जायेगी।
और मेरी दीवानगी पर तो तुझको फख्र होना चाहिए, कि इस कारण ही सही मैं तुम्हारे आगे पीछे तो घूमूँगा ना !
और मजे की बात कि मेरी पत्नी को यह बात ठीक से समझ आ गई, उसके बाद उसने कभी मुझे इस बात का उलाहना नहीं दिया।
लगभग बीस साल शादी को हो चुके हैं, अब कुछ समय से मेरी पत्नी में कुछ बदलाव आए हैं, वो सेक्स के लिए मना तो नहीं करती है, लेकिन वो सेक्स में सक्रिय भाग भी नहीं लेती है, मुझे सेक्स करना हो तो फोरप्ले मुझे अकेले को करना होता है, वो नहीं करती, सेक्स के लिए खुद पहल नहीं करती, हाँ सेक्स में ओर्गास्म लेने के लिए जरूर सक्रिय होती है ! बस, हो गयी चुदाई उसकी तरफ से ! चुम्बन लेने को मना करती है, बोलती है मेरा दम घुटता है।
मैंने उसको समझाया कि तुम किस के समय मुँह से सांस क्यों लेती हो, नाक से लो!
तो भी वो मना करने लगी है, बोलती है किस मत करो।
अब बताइये जो चीज मुझको सबसे अच्छी लगती है, जिस क्रिया में मैं 10-20 मिनट आराम से निकाल सकता हूँ, वो ही नहीं करने को मिले…
खैर…
मैंने कई जगह पढ़ा है कि लोग अपने लण्ड को तीन इंच चौड़ा और 9 इंच लम्बा बताते हैं।
एक आम इंसान के लिए यह सोच कर अपना दिमाग खराब करने की कोई बात नहीं है…
मैं एक बहुत साधारण सा उदाहरण दे रहा हूँ-
आप एक बिसलरी की पानी की बोतल ले लीजिये, यह बोतल तीन इंच चौड़ी होती है और इसके ऊपर का मुंह जहां से बोतल घूमना शुरू हो जाती है वहां तक नौ इंच लम्बाई होती है, मैंने 9 इंच लम्बाई का तो सुना है और बन्दे को देखा है लेकिन तीन इंच चौड़ा… मैंने कभी भी नहीं देखा…
मेरी सेक्स पॉवर में कोई कमी नहीं आई, अब मुझे रोज ही अधिकतर मुठ मार मार कर काम निकालना पड़ता है। जहां सेक्स रोज करते थे अब 20 दिन से एक महीना तक निकल जाता है, मन भटकने लगा, कि कोई साथी मिल जाए जो मेरी समस्या को समझे और मेरा साथ दे।
मेरी कंप्यूटर रिपेयरिंग शॉप के बाजू में मोबाइल कम्युनिकेशन की दुकान खुली, कुछ दिन तो बन्दा लगातार बैठा फिर उसने एक लड़की को वहाँ अपोइंट किया और खुद ने किसी और मल्टीप्लेक्स में एक और दूकान खोल ली और वहाँ बैठने लग गया। एकदम स्लिम लड़की जवानी की गोद में सर रखा ही था और जवानी में लड़की को जैसे खूबसूरती और अरमानों के पंख लग जाते हैं, वो थोड़ा बोलने में बोल्ड हो जाती है, वो भी शुरू में तो कम बोलती थी, फिर बोल्ड हो गई, किसी बात को लेकर परेशानी होती तो मुझे बोलती।
हम लोग आपस में खुलने लगे, एक दिन बहुत ही अजीब सा वाकया हुआ…
उसको सू सू जाना था वो मुझसे बोल गई कि मैं अभी आई ! ज़रा इधर दुकान में ध्यान रखना !
वो गई और वापस आई और बहुत परेशान सी लगी, कुछ देर बीत गई…
फिर हिचकती सी बाहर आकर मुझे बोली- सर, प्लीज ! एक मिनट इधर आयेंगे?
मैंने लड़कों को बोला- तुम लोग काम करो, मैं आया !
और उसके पीछे उसकी दुकान में गया, वो अन्दर केबिन में चली गई थी, मैं केबिन के दरवाजे पर जाकर बोला- हाँ क्या हुआ?
तो उसका मुँह लाल हो गया, बोली- मुझे शर्म भी आ रही है और इमरजेंसी इतनी है कि मैं बिना कहे रह भी नहीं सकती।
मैंने कहा- तो कह दे ना, फिर शर्म की क्या बात है।
तो वो हिचकते हुए रुक रुक कर बोली- सर मैं सु सु गई थी… मेरी सलवार… क्या बोलूं,
मैंने कहा- अरे बोल ना…
तो बोली- नाड़े में गाँठ लग गई है…
मैंने कहा- ओह्ह्ह, है तो समस्या ही ! लेकिन जो करना है वो तो करना ही पड़ेगा…
मैं केबिन के अन्दर हो गया, उसको एक साइड में किया और कुरते को ऊपर कर के नाड़े में पड़ी गाँठ को सही किया, और उसको सु सु करने भेज दिया…
मेरी क्या हालत हुई होगी आप भी इस हालत में होते तो… सहज ही अंदाजा लगा लो…
मैंने छोटे को चड्डी में हाथ डाल कर ऊपर की ओर किया और अपनी धड़कन पर काबू करने का यत्न करने लगा।
सपना का क्या हाल हुआ होगा, जिस तरह से बेचारी के हाव भाव लग रहे थे, धड़कन तो उसकी भी बढ़ ही गई होगी…, उसका मुँह एकदम लाल हो गया था। इसका मतलब पहली बार किसी मर्द का हाथ इस तरह से उसको लगा था…
मैंने सोचा कि मैंने तो क्या गलत किया, उसने कहा तो मदद कर दी ! इमरजेंसी थी ही इतनी ! खैर अब होगा जो देखा जायेगा…
अब मेरे मन में एक अरमान जागा कि सपना यदि तैयार हो जाए तो…
जो घुटन मेरे मन में मुझे महसूस होती है वो ख़त्म हो जायेगी।
खैर… मैंने अपना सर झटका, सोचा थ्योरी में और हकीकत में बहुत फर्क होता है…
वो जैसे ही अपनी दुकान में आई मैं अपनी दुकान में चला आया, लेकिन आते आते उसके मुँह से थैंक यू सर… निकला, मैंने उसकी और देखा और मुस्कुरा कर चला आया…
अब हम थोड़ा और खुल गए, कभी कभी जब वो बिल्कुल अकेली होती तो मुझसे कह देती- सर लंच कर लो !
तो हम साथ साथ लंच कर लेते थे…, कुछ हंसी मजाक, जोक्स भी चलता रहने लगा…
लेकिन दिल्ली अभी कितनी दूर थी कुछ पता नहीं…
वो खाली टाइम में कंप्यूटर पर गेम्स खेलती थी, ज्यादातर ताश वाले गेम्स !
एक बार लंच में बुलाया तो वही गेम लगा पड़ा था तो मैंने कहा- बोर नहीं होती इन गेम्स से? रोज रोज यही गेम, बच्चों वाले…
तो उसके मुंह से अचानक ही निकल गया- तो सर आप ही बता दो कुछ !
मैंने मौका देख कर कहा- तू बुरा तो नहीं माने तो बता दूंगा !
तो सपना बोली- आप भी क्या बात करते हो, बुरा काहे का मानना?
तो लंच के बाद मैं उसके कंप्यूटर पर अन्तर्वासना साईट लगा कर बोला- यह देख, एक एक टोपिक पर क्लिक कर, यदि पसंद ना आये तो बुरा मत मानना ! बंद कर देना मैं और कुछ गेम्स में कंप्यूटर पर डाल दूंगा…
उसके बाद 3-4 दिन तक उसने न तो मुझसे बात ही की और ना ही मुझे लंच के लिए आवाज ही दी। मैं यदि बाहर निकलता भी तो वो मेरी तरफ नहीं देख कर नजर नीचे कर लेती..
मैंने समझा कि गलत ही हो गया लगता है… शायद यह लड़की इस तरह की चीजों में रुचि नहीं लेती होगी…, मेरे मन में पछतावा होने लगा, कि क्यों मैंने उसको बिना उसका मन जाने इस तरह की साईट उसको दिखाई… बेचारी अच्छी दोस्त थी..
खैर.. अब जो होना था वो तो हो चुका…
हमारे मॉल में दुकानें लगभग 11 तक पूरी तरह से खुलती थी, लेकिन मैं हमेशा 9:30 पर दुकान खोल लेता हूँ।
इस घटना को लगभग 5 दिन निकल गये होंगे कि एक दिन वो भी 9:30 पर आई और सफाई पूजा के बाद उसने मेरी दुकान के बाहर से मुझे आवाज लगाई- सर एक मिनट प्लीज !
मैंने सोचा- जाने आज क्या होगा, यह क्या कहना चाहती है? मैंने सोचा कि अभी यहाँ कोई आस पास है भी नहीं… जो गलत हो गया उसको सुधरने का मौका भी है, यह सोच कर धड़कते दिल से उसकी दुकान में चला गया। वो मिठाई का डिब्बा हाथ में लेकर खड़ी थी, बोली- मिठाई खाओ सर…!
मैंने मिठाई का पीस हाथ में लेकर पूछा- किस खुशी की मिठाई है?
तो बोली- मैं आज बी ए की परीक्षा में पास हो गई।
मेरे मुंह से निकला अरे वाह…! बधाई हो !
और आधा टुकड़ा उसके मुँह में डाल दिया और बाकी का अपने मुँह में और उस पीस को ख़त्म करके एक और पीस उठाया। फिर मिठाई ख़त्म करके मैंने उसको बोला- सपना मैं तुझसे कुछ कहना चाहता हूँ।
मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई और मुँह से शायद लालिमा भी फूटने लगी हो…
सपना का मुँह भी सकपकाहट से लबरेज हो गया, उसको भी भान होगा कि मैं क्या कहना चाहता हूँ…
मैंने हिम्मत करके कहा- सपना उस दिन जो मैंने तुझको साईट खोल कर दी, यदि तुझे बुरा लगा हो तो मैं सच्चे मन से माफ़ी मांगता हूँ, सच में तेरी मंशा जाने बिना मैंने तुझको वो सब पढ़ने को दिया जो वर्जित माना जाता है, और यह जानते हुए भी कि यदि तुझको सेक्स चढ़ा तो तेरे पास उसको सँभालने का कोई साधन नहीं है। तू किसको कहेगी कि तुझको क्या हुआ है…
सपना का मुँह नीचा हो गया, चेहरा लाल हो गया, और बोली जैसे जम गई हो।
मैंने उसकी ठुड्डी के नीचे अपनी ऊँगली रख कर उसका चेहरा उठाया और मेरी तरफ देखने को बोला।
उसकी नजरें धीरे धीरे मेरी ओर उठी तो मैं बोला- सपना तू मेरी अच्छी दोस्त है, अब तू क्या मानती है यह तो तू जाने, लेकिन मैं तेरी दोस्ती कम से कम तेरी शादी तक तो नहीं खोना चाहता।
तो उसकी आँखों से दो बूँद आंसू टपक आये…
मेरा दिल भारी हो गया।
उसने धीरे धीरे रुक रुक कर कहा- सर मैं भी आपको अपना अच्छा दोस्त मानती हूँ, मैं नाराज नहीं हूँ…, नहीं तो आज इस समय क्यों आती…, मुझे आपसे बात करना अच्छा लगता है…
मेरे मन को कितना चैन आया, जैसे सर पर से पहाड़ एकदम से हटा दिया गया हो…
मैंने कहा- ठीक है तू थोड़ी देर मेरे पास मेरी दुकान पर बैठ… आ जा !
उसने शटर उठे रहने दिए और अलुमिनियम का दरवाजा लगा कर मेरे पास मेरी दुकान में आ गई और मैं रिपेयरिंग के साथ साथ उससे बात भी करने लगा। धीरे धीरे हम दोनों ही सामान्य होने लगे।
लगभग 45 मिनट बातचीत हुई जिसमें हमने एक दूसरे के घर में कौन कौन है, घर कैसा है, एक दूसरे की रुचियाँ क्या हैं यह सब जाना, फिर वो करीब 10:30- 10:45 पर अपनी दुकान में चली गई। अच्छा भी नहीं लगता था कि कोई उसको और मेरे को इस तरह से आपस में घुट कर बातें करता देखे, लड़की जात जल्दी बदनाम हो जाती है…
फिर वो अक्सर जल्दी ही आने लगी, हम दोनों में बहुत सी बातें होने लगी, धीरे धीरे वो मुझसे मजाक भी बहुत करने लगी, उसके चेहरे को देख कर लगता था कि उसको मेरा साथ अच्छा लगता है, वो ज्यादा से ज्यादा टाइम मेरे साथ निकालना चाहती है।
लेकिन मैंने उसको चेता दिया था कि देख सपना अपनी दोस्ती की बात अपने दोनों तक ही सीमित होनी चाहिए ! पगली, नहीं तो लड़की जात को बदनाम होते देर नहीं लगती।
यह बात उसको भी अच्छे से समझ में आ गई और जो भी हंसी मजाक हमें करना होता था वो सब हम और दुकानों के खुलने से पहले कर लेते थे। वो अकेले में मुझे निक नेम सोनू पुकारने लगी, मुझे बहुत अच्छा लगता था।
एक दिन जब मैं 9:30 पर दुकान पंहुचा तो सपना दुकान खोल चुकी थी और मुझसे बोली- सोनू प्लीज आज तुम थोड़ी देर मेरे साथ मेरे पास बैठो ना !
मैंने कहा- ठीक है आधा घंटा के करीब तुम्हारे साथ बिता लूँगा।
तो वो बोली- हाँ हाँ ठीक है।
मैं उसके पास बैठ गया। मैंने थोड़ा सा मूड हल्का करते हुए सपना से कहा- आज क्या बात है गुन्नू, तुम आज बहुत रोमांटिक मूड में लग रही हो, बिजली गिराने का इरादा तो नहीं है ना?
उसका मुँह लाल हो गया, और मेरे हाथ को अपने हाथो में ले लिया और बाजु के साइड में अपना सर हौले से टिका दिया…, मैं चौंका और सपना की ओर देखने लगा, वो नीचे देखने लगी, मैंने अपनी बांह उस से छुडाई ओर उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया ओर दूसरे हाथ से उसकी ठुड्डी उठाई, उसका चेहरा शर्म से लबरेज था… होंट पर एक गीलापन आ गया था, जो किसी लड़की के गरम होने पर आ जाता है, ओर आँखों में एक कुंवारी लड़की की शर्म भरी लालिमा आ गई थी। मुझे डर था कि कोई आ न जाए।
लेकिन वैसे अभी बाजार खुलने में थोड़ा समय था, मैंने सपना से कहा- गुन्नू मेरी रानू, हम आपस में अच्छे दोस्त हैं ना?
तो उसने हाँ में सर हिला दिया।
मैंने फिर कहा- गुन्नू ! अपनी नजरें मुझसे मिलाओ और बताओ कि क्या बात है?
तो उसने नीचे देखते हुए ना में सर हिला दिया और उसकी पलकें बंद हो गई, मैं बुरी स्थिति में फंस गया था, उसको वास्तव में सेक्स की गर्मी चढ़ गई थी।
अब यदि मैं उससे इस स्थिति का फायदा उठता हूँ तो मेरे दिल को गवारा ना था औजर यदि छोड़ता हूँ तो उसका क्या हाल होगा, मैं समझ सकता था। मैंने भगवान् को याद किया और टेबल पर से बाहर के गेट की चाभी उठाई और अन्दर से एल्यूमिनियम का दरवाजा लॉक कर दिया अन्दर सपना के पास आया और उसको अन्दर केबिन में ले गया और हम दोनों दो स्टूल पर सट कर बैठ गए। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसकी ठुड्डी उठा कर बोला- गुन्नू मेरी ओर देख…
बहुत मुश्किल से उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली, मैंने कहा- सेक्स के बारे में जानना है?
तो उसने हाँ में सर हिला दिया.
मैंने उसको सेक्स के बारे में बताना शुरू किया कि कैसे होता है, बच्चे कैसे होते हैं ओर करते में क्या क्या महसूस होता है।
उसने कहा- सोनू, रात को मैंने… अपने मम्मी पापा को… देखा है ! तुम भी करो… मेरे साथ… सब कुछ… वो… ही…
ओह तो यह बात है ! मैंने सोचा…
उसने मेरा दूसरा हाथ अपने दोनों हाथो से पकड़ लिया और उसका सारा शरीर कांपने लगा, उसके पूरे शरीर में थिरकन हो रही थी। ओ माय गोड… मैंने सोचा और मुझे बस एक ही उपचार नजर आया, मैं उसके एकदम सामने हुआ और मैंने उसको अपने से चिपटा लिया ओर उसके होंटो पर अपने होंट रख दिए… हम दोनों स्मूच (होंट ओर जीभ को चूसते हुए किस) की स्थिति में हो गए।
मैंने अपनी पेंट की हुक और जिप खोल दिए, उसकि सलवार के नाड़े को खोल दिया ओर उसका हाथ उठा कर अपने लण्ड पर रख दिया और उसकी पेंटी में हाथ डाल कर उसकी चूत पर सहलाने लगा।
उसकी चूत से पानी टपक रहा था और सलवार का कुछ हिस्सा तक गीला हो गया था। मैंने बैठे बैठे ही उसको थोड़ा ऊपर करके उसकी सलवार और पेंटी को टांगो से अलग किया और एक अन्य स्टूल पर सुखाने की स्थिति में डाल दी जैसे तैसे स्विच बोर्ड पर पंखा चालू कर दिया और उसकी टांगों को थोड़ा सा ऊपर करके उसको अपनी जांघो पर खींच लिया, उसकी चूत को थोड़ा सा खोल कर अपना लंड उसकी चूत की दरार में लम्बाई में रख दिया और उसके हिप्स के नीचे मेरे हाथ रखकर उसको अपने हाथों में थोड़ा सा उठा कर उसकी चूत में मेरे लंड की रगड़ देने लगा।
सपना ने कसमसा कर अपने होंट मेरे होंटो से अलग कर के खोले और बोली- सोनू अन्दर घुसा दो, प्लीज ! मैंने कहा- गुन्नू नहीं ! आज नहीं !
सोनू… प्लीज…
मैंने उसको बांहों में कस कर और भी जोर से भींच लिया, होंट से होंट मिला कर जोर से किस करने लगा, और उसको मेरे लंड से रगड़ देने लगा… अब उसको मजे आने लगे थे… सो वो भी धीरे धीरे हिलने लगी और 3-4 मिनट में ही हम एक दूसरे से जकड़े निढाल हो गए…
और तीन चार मिनट इस स्थिति में निकल गए फिर उसको धीरे धीरे होश आने लगा, आँखें खोल कर उसने अपनी स्थिति देखी, मेरी गोद में बैठी है… केबिन में है… नीचे कुछ नहीं पहना हुआ है… और मेरे नीचे के कपडे भी नीचे हुए पड़े हैं और हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में बंधे हुए हैं… एकाएक उसकी आँखों में लालिमा आई लेकिन उसने अपने हाथ मेरी पीठ से हटा कर मेरे मुँह को अपने हाथों में पकड़ा और और एक किस कर दिया।
सच में इस किस का कोई मुकाबला न था यह अब तक के मजे में सबसे ऊपर था.. आखिर यह किस उसने अपने पूरे होशोहवास में किया था।अब हम जल्दी से अलग हुए, मैंने अपने कपड़े दुरुस्त किये और उसकी सलवार को पंखे के एकदम सामने कर के 5 मिनट में जितना सूख सकता था उतना सुखाया और उसको भी उसके कपड़े पहनाए।
हमने फिर एक बार और किस किया फिर जल्दी से बाहर का दरवाजा खोला, गनीमत कि अभी तक चहल पहल न थी…
फिर मैंने और उसने एक दूसरे को देखकर मुस्कान दी. फिर मैं दुकान खोल कर अपने काम में व्यस्त हो गया।
लंच करते में सपना ने अगले दिन 9 बजे आने को बोला। मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसने आँख मार दी…
मैंने कहा- शैतान कहीं की… ठहर तो… कल देखूंगा…
अगले दिन मैं जब नौ बजे पहुंचा तो सपना दुकान में सफाई कर रही थी। जल्दी से फ्री हुई और मुझे अन्दर लेकर दरवाजा बंद किया और मेरे साथ केबिन में घुस गई और मुझे स्टूल पर बिठा कर मेरी गोद में बैठ गई और बोली- हाँ उस्ताद अब फिर से सिखाओ कल तो मैं होश में थी नहीं…
तो मैंने उसको सेक्स के बारे में फिर से बताना शुरू किया… आज न तो उसमे कल जितनी शर्म थी और ना ही मदहोशी…
वो बड़ी तन्मयता से सुन रही थी, समझ रही थी…
फिर उसने मेरे हाथ अपने बोबों पर लगा दिए और खुद मेरे होंटो को चूसने लगी फिर मेरी पेंट के हुक खोलने लगी…, मैंने उसको सहयोग किया तो उसने मेरे हाथ फिर से अपने बोबों पर रख दिए और मेरी पेंट को खोल दिया फिर खुद की सलवार को भी ! फिर खुद खड़ी होने की हालत में हो गई तो मुझे भी खड़े होना पडा तो उसने नीचे के कपड़े सरकाकर उतर जाने दिए…
फिर उसने मेरे लंड को अपनी चूत के दरार में सेट किया और मुझसे एकदम से चिपक गई, फिर अपने हाथ मेरी पीठ पर बाँध कर अपने पैर हवा में लेकर मेरे कूल्हों पर कस लिए और हिल कर चूत को मेरे लंड से रगड़ने लगी, तो मैंने अपने हाथ उसके बोबों से हटा कर उसके कूल्हों के नीचे किये और रगड़ में हिलाने में सहायता करने लगा। हमारा चुम्बन और भी प्रगाढ़ हो गया और धीरे धीरे वो अकड़ती गयी फिर मैं भी…
अब मैं उसको इसी हालत में लिये दिये स्टूल पर बैठ गया और हम अपनी साँसों में काबू पाने लगे…
ज़रा देर में ही सपना फिर चालू हो गई… चूमा-चाटी, बोबे दबाना चूसना, चूत को रगड़ना…!
फिर वो बोली- सोनू अन्दर डालो… चलो…
तो मैंने पूछा- तेरी एमसी कब हुई थी?
तो वो बोली- सत्रह दिन हो गए !
तो मैंने कहा- देवी और 2-3 दिन रुक जा ! नहीं तो फालतू में बच्चे का रिस्क हो जायेगा !
तो वो बोली- फिर अन्दर डाल कर करोगे…
मैंने कहा- हाँ बाबा हाँ !
वो बोली- प्रोमिस?
मैंने कहा- हाँ बिल्कुल पक्का…
तो बोली- लाओ हाथ और कसम खाओ !
मैंने उसके हाथ में अपना हाथ लेकर कसम खाई…
फिर हमारा दूसरा राउंड पूरा हुआ और उसके बाद हम हमारे काम में लग गए। दो और दिन इसी तरह से निकल गए…
इस बीच में मैंने वेसलीन की एक छोटी डिब्बी लाकर उसके केबिन में रख दी। उसने पूछा तो मैंने कहा- अन्दर वाले दिन काम आएगी ! फिर उसको बताया कि ज्यादा दर्द न हो इसके लिए जुगाड़ बिठा रहा हूँ…
तो वो मचल कर बोली- सोनू यार तुम्हारे जैसा आदमी तो बस… ये ध्यान रखते हो कि नादान से नहीं करना… उसको सेक्स का ज्ञान देते हो, उसे बच्चा न हो जाये ये ध्यान रखते हो.., उसे दर्द न हो ये भी ध्यान रखते हो आखिर क्यों…
मैंने कहा- मेरी जान हो तुम ! मैंने मात्र सेक्स के लिए नहीं, प्यार के लिए तुमको पाया है गुन्नू…
तो उसकी आँखों में जोश और विश्वास देखने के काबिल था…
आखिर एमसी के बीसवें दिन सुबह नौ बजे सपना बहुत उत्साह में थी, जैसे वो कोई तीर मारने जा रही हो।
मैंने उसको कहा तो बोली- हाँ ! तीर ही तो मार रही हूँ…, आखिर जिसके तुम जैसे गुरु हो वो कोई कम तीरंदाज होगा भला…
हम दोनों केबिन में बंद हो गए, और आज हमने एक दूसरे को पूरा नंगा किया और मैंने उसके होंट, बोबे और गर्दन चूसी, बोबे दबाये और खूब जोर से चिपटा कर किस करना चालू किया और सपना को कहा- लंड से खेल…!
वो लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी…! उसकी आँखों में खुमारी उतर आई और चूत में से पानी टपकने लगा…
मैं इसी इन्तजार में था… मैंने अपनी एक ऊँगली में खूब सारी वेसलीन लगा कर उसकी टांगों को फैला कर ऊँगली उसकी चूत में अन्दर डालता चला गया, उसका मुँह खुल गया और एक आह उसके मुँह से निकली।
मैंने पूछा तो बोली- कुछ नहीं…! आप तो करो…!
मैंने कहा- दर्द हो तो मुझे बताना !
तो बोली- सोनू दर्द तो एक बार होना ही है चाहे अभी या बाद में…! बाद का तो पता नहीं लेकिन तुम जैसा साथी हो तो इस साले दर्द की ऐसी की तैसी, होने दो एक बार ही तो होगा…
मैं दंग रह गया मुझे सपना पर बहुत प्यार आया, उसको कितना विश्वास था मुझपर…, जाने क्यों…
मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में दिए हुए ओ के आकार में घुमाने लगा… अन्दर उसका हायमन धीरे धीरे खुलने लगा, फिर 2-3 मिनट बाद में अंगूठे पर वेसलीन लगा कर चूत में डाला और उसके चेहरे को देखा तो फिर उसका मुँह किस करते करते रुक गया, और फिर वो किस करने लगी मैंने अंगूठे को आगे पीछे करना शुरू किया तो वो सिसकारी लेने लगी। धीरे धीरे कुछ देर बाद मैं अंगूठे को ओ के आकार में घुमाने लगा…
2-3 मिनट में उसका हायमन काफी खुल गया तो मैंने कहा- गुन्नू, अब तैयार…?
तो वो चहक कर बोली- अरे वाह सोनू ! मैं तो कब से राह देख रही हूँ… चलो… डालो…
मैं उसकी उत्सुकता देख कर दंग रह गया…
फिर मैंने उसको अपनी गोद में बिठाया और खूब सारी वेसलिन उसकी चूत पर मली ओर मेरे लंड पर भी, फिर हाथ बीच में रखकर अपना लंड उसकी चूत के छेद पर सेट किया… फिर सपना को बोला- गुन्नू अपनी टांगो को बिल्कुल ढीला छोड़… उसके कूल्हों पर मेरे हाथो का दबाव बनाते हुए धीरे धीरे अपनी ओर भींचने लगा… , लंड का सुपाडा अन्दर हो गया।
मैंने कहा- गुन्नू संभालो… दर्द होगा थोड़ा…
तो उसने अपनी टांगों को मेरे शरीर की तरफ एक झटका दिया और लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में आधा चला गया, उसके होंट भिंच गए और वो और और आने दो … की मुद्रा में गर्दन हिलाने लगी…
मैं धीरे धीरे हिलते हुए धक्के लगाते लंड अन्दर डालता गया… और फिर एक बार हम दोनों के होंट आपस में किस करने लगे। हाथ एक दूसरे के बदन पर फिरने लगे… लंड के अन्दर जाने का स्वाद धीरे धीरे सपना को आने लगा और उसके मुँह से सिसकारी और आह निकलने लगी। फिर जो घमासान होना था वो हुआ और अब तक की चुदाई का सबसे शानदार ओर्गास्म आया हम दोनों को…
उसके बाद हम दोनों लगभग 3 साल तक एक दूसरे के हुए रहे…, उसकी खाने पीने, पिक्चर देखने, घूमने की हर ख्वाहिश मैंने पूरी की। फिर उसकी शादी हो गई…, जिस दिन उसकी शादी पक्की हुई वो मेरे कंधे पर सर रखकर…
उसकी जुबानी कुछ बातें –
सोनू ना जाने क्यों मैं तुम पर मर मिटी, तुम्हारा बोलने चलने का ढंग, तुम्हारा सलीका देखकर तुमको मन ही मन चाहने लगी, फिर जब तुम्हारे यहाँ तुमको देखने तुम्हारे पास चली आती थी, जाने दिल अपने काबू में रखना मुश्किल हो जाता था।
फिर जैसे जैसे समय निकलने लगा मेरी दीवानगी तुम पर बढ़ने लगी. मैं चाहती थी कि तुम्हारे पास बैठ कर तुमको देखती रहूं और तुमसे बातें करती रहूँ, तुम्हारी सारी बातें मुझे अच्छी लगने लगी…
मुझे समझ आने लगा कि शायद यही प्यार है. फिर तो तुम पर विश्वास बढ़ने लगा, मैं खुद नहीं समझ पाती थी कि मुझे क्या हो रहा है…
फिर जब तुमने मेरी हालत का नाजायज फायदा नहीं उठाया तो मेरा विश्वास तुम पर और भी दृढ़ हो गया… और सच में तुम्हारा प्यार पाकर मैं निहाल हो गई…
और ये तीन साल तो तीन पलों की तरह से यूँ निकल गए… Indian Sex Stories
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