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मैं अब बड़ी हो Hindi Sex Stories गई हूँ। मेरी माहवारी चालू हुए भी चार साल हो चुके हैं। मेरी चूंचियाँ भी उभर कर काफ़ी बड़ी बड़ी हो गई हैं। मेरी चूत में अब पहले से अधिक खुजली हुआ करती है। उसकी गहराई अधिक हो गई है। मेरे चूतड़ अब और सुडौल हो गये हैं। मेरी गर्दन भी अब सुराहीदार और खूबसूरत हो गई है।
मेरा भाई मुझसे बस डेढ़ वर्ष ही छोटा है।
उसका लण्ड तो बहुत ही सोलिड जान पड़ता था। जब वो सोता था तो उसका लण्ड कभी कभी खड़ा हो जाता था। छोटी सी चड्डी में से वो खम्बे की भांति खड़ा नजर आता था। उसे देख कर मेरा दिल भी बेईमान हो उठता था। दिल में खलबली मच जाती थी। कई बार तो मैं अपनी चूत को हाथ से दबा लेती थी। शायद यह उम्र भी बेईमान होती है। उसे भाई बहन के रिश्तों का भी ध्यान नहीं रहता है।
मेरा भाई भी कम नहीं है, वो भी मेरे अंगों को अब घूरने लगा था। मेरे अकेलेपन का फ़ायदा वो उठाने लगा था। वो हंसी हंसी में कितनी ही बार मेरे चूतड़ों पर हाथ मार देता था। छुप-छुप कर स्नान के समय वो मुझे झांक कर देखता था। उसकी इस हरकत से मुझे रोमांच हो उठता था। अब मैं भी उसको स्नान करते समय झांक कर देखती थी। जब वो लण्ड पर साबुन मलता, तो मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
आज मैंने बाथरूम के अन्दर कपड़ों में छुपा हुआ मोबाईल देखा। उसके कैमरे का कोण मेरी वीडियो लेने के हिसाब से लगाया था। मेरे मन में वासना जाग उठी…
सोचा आज भैया को सब कुछ दिखा ही दूं, शायद भैया पिघल ही जाये और हमारे बीच शर्म की दीवार टूट जाये। मैंने बड़ी अदा से एक एक कपड़ा उताड़ा और चूतड़ मटकाते हुये मैं अपने आपको मोबाइल में कैद करवाने लगी। चूत को और चूतड़ों को साबुन से मल मल कर और चूंचियों को सेक्सी तरीके से मल मल कर उसे दिखाने लगी। फिर अपने चूतड़ों को उभार कर और उसके दोनों पट खोल कर अपना चूतड़ों के मध्य केन्द्र बिन्दु भी दर्शा दिया। फिर अपनी चूत सामने करके चूत को सहलाते हुये अन्दर अपनी अंगुली भी डाल कर उसे बताई। अन्त में अपना मटर जैसा दाना भी हिला कर बताया। फिर साधारण तरीके से कपड़े पहने और बाहर निकल आई।
मेरे बाहर निकलते कुछ ही देर बाद भैया ने बाथरूम में जाकर अपना मोबाइल ले लिया। मेरे किचन में जाते ही वो वीडियो देखने लगा।
मैने छुप कर उसे देखा तो वो वीडियो देख देख कर अपना लण्ड मसले जा रहा था। उसे शायद ये मालूम हो गया था कि ये तस्वीरें मैंने जान करके खिंचवाई हैं।
मुझे लगा कि बबलू बड़ा बेताब हो चुका है। उसकी बेचैनी उसके चेहरे से झलक पड़ती थी। शाम ढलते ढलते तो शायद उसने दो बार तो मुठ मार लिया था। शायद अब वो मुझसे खुलना चाहता था। पर मैं उससे बड़ी जो थी … उसकी हिम्मत कैसे हो।
शाम को मैं अपनी चड्डी उतार कर बस शमीज में आ गई थी। मुझे लगा कि आज ही उसे बस में कर लेना चाहिये … लोहा गरम था। मैं कमरे के बाहर ठण्डी हवा का आनन्द ले रही थी। भैया भी वहीं आ गया। उसके चेहरे पर तनाव स्पष्ट नजर आ रहा था। वो मुझसे बे-मानी की, यहां वहां की बातें कर रहा था। मैं सब कुछ भांप चुकी थी। उसका लण्ड खड़ा था। उसने भी चड्डी नहीं पहन रखी थी। ट्यूब लाईट की तेज रोशनी में उसके सुपाड़े तक का आकार साफ़ नजर आ रहा था। उसे देख कर मुझे झुरझुरी सी होने लगी।
“भैया, क्या बात है… तू कुछ परेशान है… ?”
“नहीं तो … ! मुझे एक बात बात पूछनी थी !”
मैंने अपनी गाण्ड उसके लण्ड के नजदीक लाते हुये जैसे बेफ़िक्री से पूछा,”मुझे पता है तेरी बात … यही ना कि आशा को कैसे पटाना है?”
वो बुरी तरह से चौंक गया।
“तुझे आशा के बारे में कैसे मालूम… ?”
“बस, मालूम है ! ऐसा कर, धीरे से उसकी कमर पकड़ लेना और उसके पीछे चिपक जाना… और कह देना… !”
“कैसे दीदी … हिम्मत ही नहीं होती… “
“देख ऐसे … अपना हाथ बढ़ा और मुझे पीछे से पकड़ कर अपने से चिपका ले !”
मैने मुस्करा कर उसे देखा। उसने ज्योंही मुझे जकड़ा, उसका उठा हुआ लण्ड मेरे चूतड़ों से टकरा गया। मेरे तन बदन में जैसे बिजली सी कौंध गई। पर देर हो चुकी थी। बबलू ने मेरी कमर में हाथ डाल कर अपने लण्ड को चूतड़ों की दरार के बीच घुसा दिया था। मैंने तुरन्त ही उसे दूर करने की कोशिश की। तब तक उसका दूसरा हाथ मेरे सीने पर आ चुका था।
“दीदी ऐसे ही ना… ?”
“अरे बस, मुझे तो छोड़ ना… “
पर भैया में बहुत ताकत थी। उसने मुझे ऐसे ही उठा लिया और कमरे में आ गया।
मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरी पीठ पर सवार हो गया। मेरी शमीज कमर से ऊपर तक उठ गई थी और मेरे चूतड़ नीचे से नंगे हो गये थे।
“बस यशोदा, चुप हो जा… मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड तू ही तो है … मैं तेरे ही कारण तो पागल हुआ जा रहा था।”
उसने पजामा जाने कब नीचे कर लिया था उसने ! उसका नंगा लण्ड का स्पर्श महसूस हो रहा था। मुझे ये सब शायद पहले से मालूम था कि वो कुछ ना कुछ तो करेगा ही। मुझे दिल ही दिल में खुशी हो रही थी कि मैंने आखिर इस मोड़ तक तो ला ही दिया था।
“बबलू… देख ! मैं तो तेरी बहन हू… छोड़ दे … चल दूर हट जा !”
“तेरे ये मस्त चूतड़, ये मस्त चूचियाँ … ! साली तेरी तो गाण्ड मार कर ही रहूंगा !”
“देख मैं मम्मी को बुलाऊंगी … आह अरे रे रे … ना कर … हाय लण्ड घुसा ही दिया ना… !”
मेरी गाण्ड में जैसे लोहा घुसता हुआ सा लगा। वो थोड़ा रुका… फिर जोर लगाया।
“यशोदा … प्लीज चुप हो जा ना … देख ना … मेरा लण्ड तेरे नाम की कितनी बार पिचकारियाँ छोड़ चुका है… तू नहीं जानती … तू तो एक दम कड़क माल है … !”
“आईईईई … बहुत मोटा है भैया, धीरे से… !” मेरे मुख से आह निकल गई।
उसका लण्ड भीतर तक घुस चुका था। मुझे भी अपनी इस सफ़लता पर गर्व हो रहा था।
उसने अपना लण्ड बाहर खींचा और फिर से अन्दर घुसा डाला। अब मुझे भी धीरे धीरे मजा आने लगा था। उसके हाथ मेरी छोटी छोटी चूंचियों पर कस गये थे।
मैं आनन्द से सराबोर हो उठी। मैंने अपने पैर पूरे पसार दिये और उसे गाण्ड मारने में सहायता करने लगी।
“देख, दीदी … मुझे बहुत मजा आ रहा है … किसी को कहना मत यह बात… “
“मैं तुझसे कभी बात नहीं करूंगी … देखना, हाय रे ! तूने तो मेरी गाण्ड कितनी जोर से मार दी !”
उसे तो असीम मजा आ रहा था। उसका लण्ड अब सटासट चल रहा था। कुछ ही देर में उसका वीर्य निकल पड़ा। उसने मेरे चूतड़ के गोलों पर अपना माल निकाल दिया और हाथ से मलने लगा।
“छीः, ये क्या कर रहा है… ?”
“फ़िल्म में तो ऐसे ही दिखाते हैं ना दीदी… ” अब वो मेरे ऊपर से उतर गया।
उसके लण्ड से पूर्ण स्खलन हो चुका था। वो बस हाथी की सूंड की तरह झूल रहा था।
“अभी मम्मी यहां आ जाती तो … ?”
“मम्मी तो नहा रही है अभी… उन्हें तो एक घण्टा लगता है।”
“साला, मरवाने के काम करता है … मुझे तो डरा ही दिया था।”
“डरने की क्या बात है दीदी, कोई चोट थोड़े ही लगती है … बस मजा ही आता है ना… ” उसने अपना पजामा पहन लिया था।
“पर तेरा मोटा कितना है … और ये भी कोई घुसाने की जगह है ?”
“पर दीदी, बुरा मत मानना, मुझे पता है तू भी तो इतने से कम कपड़े पहन कर मुझे चिढ़ा रही थी ना?”
मुझसे कुछ कहते ना बना, शायद उसने भांप लिया था कि मैं चुदासी हूं। पर क्या करती मैं ! यह जवानी तो मुझ पर कहर बन कर टूटी पड़ रही थी, और देखो ना, मेरी चूत अभी भी लण्ड मांग रही थी। घर पर मर्द नाम का तो बस बबलू ही था।
अब यूं ही हर किसी से थोड़ी ना चुदा सकती हूं, क्या पता कब, कैसा बवाल खड़ा हो जाये। पर हां, अब मेरी और भैया की दोस्ती और पक्की हो गई थी। दिन भर हम साथ ही साथ चिपके रहे। इसी बीच उसने मुझे वो वीडियो दिखाया कि कैसे उसने चालाकी से मेरा नहाते समय वीडियो बनाया। मैंने उसे देखा तो सच में बहुत उत्तेजक वीडियो था वो। मैं ही तो उसकी हीरोइन थी। यूँ तो मैंने उसे ऊपरी मन से खूब डांटा। पर वो बता रहा था कि जिसमें हीरो का लण्ड इन होता है वो हीरोइन होती है। हम खूब मस्ती और मजाक कर रहे थे। शाम को भैया मुझे अपनी मोटर साईकल पर घुमाने भी ले गया। हम दोनों ने बाजार में खूब मस्ती भी की। रास्ते भर मैंने अपने स्तन उसकी पीठ से खूब रगड़े।
रात का खाना खाकर हम दोनों कमरे में आ गये थे। पापा और मम्मी सो चुके थे।
पर यहां नींद कहां थी। मैंने लाईट जलाई और भैया के पास आ गई। भैया अपना पजामा उतार कर नंगा ही सो रहा था। मैंने भी अपनी शमीज उतारी और उसके पास लेट गई। उसका लण्ड पहले से ही खड़ा था। मैंने उसका लण्ड हाथ में ले लिया और आगे पीछे मुठ को चलाने लगी। इतने में भैया ने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
“श्… श… श्… चुप रहना… ” उसका लण्ड मेरे शरीर में कूल्हों के पास यहाँ-वहाँ गड़ने लगा। मुझे लगा कि बस अब तो चुद गई मैं।
“भैया, बस ऊपर ही ऊपर से करना … बहुत मजा आयेगा देखना ! ” मैंने फ़ुसफ़ुसाते हुये कहा।
“नहीं दीदी, आज बस एक बार चुद ले … देखना मस्त हो जायेगी… ” वो जैसे गिड़गिड़ाया।
“नहीं रे … मुझे पता है चुदने से बच्चा हो जाता है… बस चोदना मत … ऊपर से ही मस्ती मारते हैं ना !”
“अच्छा, जैसी तेरी मरजी… ” वो अपने लण्ड को मेरी चूत में घिसने लगा और आहें भरने लगा। मेरी चूंचियाँ मलने लगा। उसकी सांसे तेज हो गई। मेरा दिल भी धाड़-धाड़ करके धड़क रहा था। मैं आनन्द से अंखियां बंद किये स्वर्ग में विचरण कर रही थी। मेरी चूत पानी से गीली हो गई थी, बहुत चिकनी हो चुकी थी। मेरे चेहरे पर पसीने की बूंदे छलक आई थी। वो भी पसीने में तरबतर था।
वो मेरे से लिपट पड़ा था। जाने कब उसका लण्ड मेरी चूत में उतर गया। हम दोनों के ही मुख से एक आनन्द भरी सिसकारी निकल गई। पर ये सब कब हो गया, मस्ती में पता ही नहीं चला। हम दोनों के शरीर जाने कब एक हो गये, बस हमारी कमर तेजी से चल रही थी। मेरी चूत उसके लण्ड को गपागप ले रही थी। वो भी उछल-उछल कर लण्ड पेल रहा था। मेरी चूंचियों की शामत आई हुई थी। उसने खींच-खींच कर उन्हें लाल कर दी थी।
“दीदी… आह कितनी चिकनी है रे तू … तू तो बहुत मस्त है… “
“भैया … बस चोद दे… कुछ मत कह … मस्त लण्ड है रे !”
“दीदी … ” और मुझ पर और जोर से पिल पड़ा।
“बबलू… और जोर से मार… हाय दैय्या … मेरी मार दी भैया… ” सच में भैया का लण्ड जैसे मेरी चूत के लिये बना था। अच्छी चुदाई कर रहा था। हम दोनों इस बात से बेखबर थे कि हम के जिस्म के साथ क्या हो रहा है। शायद इसी को स्वर्ग सा आनन्द कहते हैं।
तभी मेरे शरीर में जैसे आनन्द की लहरें उठने लगी … नहीं चूत में … नहीं शायद …
“आह्… बबलू … मेरा तो निकला … उफ़्फ़्फ़्फ़्… मुझे सम्भाल रे… उईईईईई… “
और मेर रति-रस जैसे बाहर को उबल पड़ा। मैं झड़ने लगी … मैंने उसे कस कर भींच लिया। तभी उसने अपने चूतड़ उठाये और लण्ड बाहर निकाल लिया और मेरे पेट परदबा दिया। उसका गरम वीर्य मेरी नाभि के आस पास निकल पड़ा। उसने भी मुझे कसकर लिपटा लिया। दोनों ही झड़ते रहे और जब तन्द्रा टूटी तो हम एक दूसरे से नजर तक नहीं मिला पा रहे थे। मैं उठ कर अपने बिस्तर पर चली आई। मुझे आज पहली बार तृप्ति का अहसास हुआ। मेरे चूत की झिल्ली शायद पहले ही टूट चुकी थी, जाने कब। पहली चुदाई मेरी तो असीम आनन्द से भरी हुई थी। इन्हीं ख्यालों में मैं डूबी हुई थी कि तभी मेरी चादर भैया ने खींच ली। उसका लण्ड तो ऐसे तना हुआ था कि जैसे अभी कुछ हुआ नहीं था। मैंने आनन्द से वशीभूत हो कर उसका लण्ड पकड़ लिया और अपनी तरफ़ खींच लिया। वो मेरे बिस्तर में मेरे साथ गुत्थमगुत्था हो गया। कुछ ही देर के बाद मैं उसके ऊपर बैठी हुई उसका लण्ड चूत के अन्दर बाहर कर रही थी। भैया नीचे दबा हुआ चुद रहा था… Hindi Sex Stories
अब मैं एक और कहानी आपके सामने प्रस्तुत Hindi Sex Stories कर रहा हूँ. कृपया अपने विचार लिखते रहें. मैं किस तरह का आदमी हूँ ये मेरी कहानी ” डॉक्टर मेरी गुरुआनी” पढने के बाद जान चुके होंगे.
डॉक्टर से मिलना कम हो गया था, डॉक्टर साब का ट्रान्सफर अलका के साथ ही हो गया, डॉक्टर साहब और अलका साथ रहने लगे थे और अब खुश भी थे. हम भी खुश हैं, हमारी दोस्ती बिगड़ी नही लेकिन अब मेरी भी शादी हो चुकी थी और हमारी दोस्ती में सेक्स का वो मतलब भी वैसे ही पूरा हो रहा था. फ़िर भी हम खुश हैं क्यूंकि हम बेवफा नही हैं.
कुछ साल निकल गए. धीरे धीरे मेरी पत्नी का सेक्स के प्रति लगाव थोड़ा कम हो गया और आश्चर्य कि वो पहले नही शरमाती थी अब कई बातों में शरमाने लगी या यूँ कह लें कि हिचकने लगी. मेरे सेक्स की चाहत अधूरी हो गई.
ये बहुत पुरानी बात नही है।
मेरा परिचय मेरे खास दोस्त के ऑफिस में इंटरव्यू देने आई एक लड़की से हुआ. मैं ही इंटरव्यू ले रहा था. वो लड़की नमस्ते कर के सामने कुर्सी पर बैठ गई. साधारण शक्ल सूरत की लड़की ५ फुट ६ इंच कद की थी. लेकिन उसका बदन बहुत आकर्षक है. एकदम सुता हुआ. उसने मुझे बहुत इम्प्रेस किया. मैंने उसको जाने के लिए बोला और कहा कि आपके फ़ोन पर कॉल करके आपको बुला लिया जाएगा.
मैंने अपने दोस्त को उस लड़की रीना को बुलाने को कह कर आगे के सारे इंटरव्यू कैंसल कर दिए और अपने ऑफिस में चला आया. मेरे दोस्त ने उस लड़की रीना को कॉल करके बधाई दी और ऑफिस जोइन करने के लिए कह दिया. जाने रीना ने मुझमे क्या देखा कि हम दोनों में धीरे धीरे बातचीत शुरू हुई फोन पर और फ़िर वो अपने ऑफिस के बाद मेरे ऑफिस में आने लगी. हम दोनों साथ में ही खाना खाते, नाश्ता करते और शाम को ७ बजे बाद मैं उसको उसके घर के बाहर मेन रोड पर छोड़ भी आता. फ़िर तो हम एक दूसरे से खुलते गए. मैं लगभग रोज ही उसको घर तक छोड़ने लगा. आश्चर्य की बात थी कि आज के जमाने में कोई ऐसी भी लड़की थी जिसको सेक्स की कोई जानकारी नही थी.
मेरी उस से कोई ग़लत फायदा उठाने की नीयत नही थी. डॉक्टर की तरह ही उस से भी अच्छी दोस्ती रखना चाहता था. इसलिए मैंने उसको सेक्स की जानकारी देना शुरू किया. हम और एक दूसरे के करीब आते गए इसके बावजूद कि वो जानती थी कि मैं शादी शुदा हूँ हम एक दूसरे को चाहने लगे. हम ने एक दूसरे को वादा किया कि हम एक दूसरे के साथ तब तक बंधे रहेंगे जब तक कि हमारे कोई और रिश्ते इस कारण ही बिगड़ने न लगें. हम एक दूसरे से चिपक कर बैठने लगे. उसको सेक्स चढ़ने लगा. शाम को मेरे ऑफिस में हम दोनों को छोड़ कर कोई नही होता था.
एक दिन एकांत पाकर मैंने ऑफिस में ही उसको होटों पर किस किया. हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगा. फ़िर मैंने उसके बोबों पर हाथ रखा तो उसने कसकर मेरे हाथों को पकड़ लिया. उसकी हालत ख़राब होने लगी. थोडी देर रुक कर जब रीना थोड़ा सामान्य हुई तो मैं उसको उसके घर छोड़ आया.
फ़िर एक दिन हम कुछ ज्यादा ही फ्री हुए तो मैंने ऑफिस के दरवाजे में चाभी लगा कर बंद किया और वापस कुर्सी पर आकर उसका पायजामा नाड़ा खोल कर थोड़ा नीचे कर दिया और उसकी जांघें सहलाने लगा. रीना को सेक्स चढ़ने लगा. उसकी आँखें मुंदने लगी. मैंने पैंटी में हाथ डालना चाहा तो रीना ने मेरा हाथ पकड़ लिया बोली प्लीज नही. तो मैंने उसकी पैंटी की साइड से ऊँगली उसकी चूत पर छुआई. वो तो जैसे पागल हो गई. उसका सर मेरे सीने से लग गया. मेरा एक हाथ उसकी गर्दन पर लिपट गया और दूसरे हाथ से उसकी चूत साइड से सहलाता रहा. वो सेक्स में पिघलने लगी. फ़िर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में दे दिया. वो थोड़ा कसमसाई लेकिन मैंने हाथ नही हटाया. वो लम्बी साँसे लेने लगी. मैंने उसकी चूत सहलाना शुरू किया. और साथ में लिप किस भी शुरू कर दिया. मेरी इच्छा थी उस से आज ही सेक्स करने की. मैंने उसकी चूत में ऊँगली की. मुझे एक झटका सा लगा. वो अभी तक अनछुई थी. मैंने सोच लिया कि कोई बात नही, इस लड़की को लंड अंदर डाल कर नही करूँगा.
मैं खडा हो गया. और उसको भी कुर्सी से खडा कर लिया और हम एक दूसरे से होंट मिलाते हुए एक दूसरे की बाँहों में बंध गए. मैंने भी अपने पैंट और अंडरवीयर उतार कर लंड उसको खेलने को दे दिया. उसने लंड अपने हाथों में पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया. मैंने उसके बोबे दबाने शुरू कर दिए.
फ़िर थोडी देर में उसका कुरता ऊँचा करके मैंने उसके बोबे ब्रा से बाहर कर लिए और उनको चूसना शुरू कर दिया वो जल उठी. उसने कस कर मुझको बाँहों में ले लिया. मैंने उसकी हिप्स को टेबल टॉप के साथ लगाया और अपने लंड को उसकी चूत की दरार में लगा दिया और जोर से दबा कर धीरे धीरे चूतड़ चला कर उसके कलाईटोरिस को लंड से रगड़ देने लगा. हम एक दूसरे के होंट और जीभ को खूब चूसने लगे. रीना को भी मजा आने लगा. वो भी अपनी गांड चलाने लगी. अब मैंने अपना बायाँ हाथ उसके चूतड़ों के पीछे करके अपनी और भींच रखा था और दायें हाथ से उसके बोबे दबा रहा था. मुँह से मुह मिले हुए थे. उसके हाथ मेरी गर्दन पर लिपटे हुए थे. धीरे धीरे हमारी मंजिल करीब आती गई फ़िर वो और उसके बाद हम दोनों ही झड़ गए. कुर्सी पर बैठ कर एक दूसरे को बाँहों में ले कर सहलाने लगे. फ़िर थोडी देर बाद कपड़े पहन कर सामान्य हो गए.
आज कई महीने हो गए. हम एक दूसरे के साथ सुखी और संतुष्ट है. वो सेक्स जान चुकी है लेकिन अब भी हम इसी तरीके से करते हैं. Hindi Sex Stories
मेरा नाम रेशमा बेगम है। मेरी शादी एक साल पहले हो चुकी है और इस एक साल में मैं अपनी ससुराल के सभी लोगों को अच्छी तरह जान गई हूँ; घुल मिल गई हूँ मैं सबसे!
मुझे अब ऐसा लगने लगा है कि जैसे मैं इस घर में वर्षों से रह रही हूँ।
मेरी सास और ननद तो मेरे लिए बहुत ही अच्छी हैं; उनकी जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है।
मेरी सुहागरात के दूसरे ही दिन मेरी ननद ने रात में अपने शौहर का लंड मेरी चूत में पेल दिया था।
ऐसा बहुत कम होता है जब कोई बीवी अपने ही शौहर का लंड अपने हाथ से किसी और की चूत में पेल दे।
उसका लंड मेरे शौहर के लंड से मोटा भी है और हैंडसम भी!
ननद मेरे बगल में नंगी बैठी उसका लंड पेलती रही और मेरे नंगे जिस्म पर हाथ भी फेरती रही।
वह अपने मियां के चूतड़ सहला सहला कर मेरी चूत मजे से चुदवाती रही।
उसने अपने मियां से कहा- मेरी चूत चोदी भाभी जान की चूत चोद चोद कर हलवा बना दो। फाड़ डालो इसकी चूत … जैसे तुम मेरी माँ का भोसड़ा फाड़ते हो!
तब मुझे मालूम हुआ कि मेरी ननद अपने शौहर से अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदवाती है।
यह जानकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गयी।
मुझे चुदवाने में दुगुना मज़ा आने लगा।
आखिर में जब उसका लंड झड़ने लगा तो उसने मेरे साथ बड़े प्यार से झड़ता हुआ लंड चाटा।
बस उसी दिन से मैं ननद की गुलाम हो गयी, मेरी ननद से दोस्ती पक्की हो गई।
एक दिन मेरी सास आ गई।
वह बड़े मूड में थी- बहू, मैं तुमसे एक सवाल पूछ रही हूँ। जवाब सच्ची सच्ची देना?
मैंने कहा- पूछो।
वह बोली- तुम शादी के पहले चुदी हुई थी या नहीं?
मैंने कहा- चुदी हुई तो खूब थी मैं शादी के पहले सासू जी!
बस उसने मुझे गले लगा लिया और बोली- मैं चुदी हुई बहू चाहती थी क्योंकि चुदाई का मज़ा जितना चुदी हुई बहू देती है उतना बिना चुदी हुई दे ही नहीं सकती। मैं भी शादी के पहले खूब चुदी हुई थी. और तेरी ननद तो खूब जमकर चुदी हुई थी। असल बात यह है कि चुदी हुई बहू अपनी सास के भोसड़ा का और ननद की चूत का बड़ा ख्याल रखती है. चुदी हुई सास अपनी बेटी बहू को बड़े बड़े लंड का मज़ा देती है और चुदी हुई ननद अपनी माँ की चूत और भाभी की चूत खूब मजे से चुदवाती है।
सास की ये बातें सुनकर तो मैं ख़ुशी से पागल हो गई।
मुझे यकीन हो गया कि अब मुझे नए नए लंड का मज़ा खूब मिला करेगा।
तब तक मेरी ननद आ गयी।
उसको देख कर सास बोली- बहू, तेरी ननद की माँ का भोसड़ा!
ननद बोली- तेरी बहू की ननद की चूत अम्मी जान!
फिर मुझे भी जोश आ गया तो मैं बोली- तेरी माँ की बहू की चूत ननद रानी!
मैंने सास से कहा- तेरी बेटी की भाभी की चूत सासू जी!
फिर हम तीनों खिलखिलाकर हंसने लगीं।
सास बोली- मैं जानना चाहती थी कि मेरी बहू को गालियां देना आता है या नहीं … इसलिए मैंने गालियां देना शरू किया। बहू, तू तो बड़ी मस्त मस्त गालियां देती है। तू बुरचोदी सच में बड़ी मजेदार है। मैं अपनी बेटी बहू से गालियों के रिश्ते और चोदा चोदी के रिश्ते इसीलिए रखती हूँ कि मुझे अपनी बढ़ती उम्र का पता ही न चले। मेरी जवानी का राज़ है अपनी बेटी बहू के साथ लंड का मज़ा लेना, लंड पेलना और पेलवाना।
इतनी मस्ती और खुल्लम खुल्ला चोदा-चोदी की बातें करने से मुझे कुनबे के सारे लोगों के लंड के बारे में मालूम हो गया।
कुछ ननद ने बताया, कुछ सास ने बताया, कुछ मेरी जेठानी ने बताया.
और बचा खुचा वहां की मस्त जवान लड़कियों ने बता दिया।
बातों बातों में एक दिन ननद बोल भी गई- मेरे अब्बू के लंड के मुकाबले यहाँ किसी भोसड़ी वाले का लंड नहीं है.
ससुर बहू सेक्स कहानी की नींव यहीं से पड़ गयी.
यह बात मेरे दिमाग घुस गई बहनचोद कि यहाँ सबसे बढ़िया और मस्त लौड़ा तो मेरे ससुर का ही है।
बस मैं जल्दी से जल्दी अपने ससुर का लंड खाने की फ़िराक में घूमने लगी।
मुझे यह तो मालूम हो गया कि मेरे ससुर को बहू बेटियां चोदने का शौक है।
ऐसे में मुझे उसका लंड पकड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि मैं तो उसकी बहू हूँ।
अगर उसे बहू बेटियां चोदने का शौक है तो मुझे भी अब्बू और ससुर से चुदवाने का शौक है; उनके लंड पकड़ने का शौक है।
मैं बस मौके की तलाश में थी।
एक दिन जब वह अपनी लुंगी बदल रहा था तो मुझे उसके लटकते हुए लंड की एक झलक मिल गयी।
मैंने सोचा जब लटकता हुआ इतना बड़ा और हैंडसम है तो खड़ा होने पर कितना बड़ा हो जाएगा बहनचोद!
लंड के बाहर निकले हुए गोल गोल सुपारे ने तो मेरी जान ले ली।
मेरे मुंह में पानी आ गया और मेरी चूत गीली हो गई।
बस मैं मौक़ा की खोज में घूमने लगी।
मेरे दिमाग में उसका लंड घूमने लगा।
एक दिन जब मैं रात को लगभग 12 बजे उठी तो देखा कि मेरा ससुर मेरी जेठानी की चूत में लंड पेले हुए बड़ी मस्ती से चोद रहा है।
मुझे उसे देख कर जलन होने लगी।
मैंने मन में कहा- भोसड़ी के ससुर मैं भी तेरी बहू हूँ। तू मुझे क्यों नहीं चोदता? मेरी चूत में लंड क्यों नहीं पेलता? मैं तो जेठानी से ज्यादा जवान हूँ। मेरी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी है, मेरी भी गांड बड़ी चौकस है।
फिर मैंने सोचा कि आज वह मेरी जेठानी की चूत ले रहा है तो कल मेरी भी चूत लेगा।
मैं चुपचाप अपनी जेठानी की चुदाई देखती रही।
मेरी जेठानी भी बड़ी खूबसूरत और बड़े बड़े मम्मों वाली है।
वह अपने मियां के साथ पड़ोस के घर में रहती है।
आज ही शाम को आई थी और आज ही रात को अपने ससुर से चुदवाने लगी।
मुझे लगा कि वह ससुर से चुदवाने ही आई थी।
ससुर बोला- बहू, किसी दिन अपनी छोटी बहन को ले आना. मैं उसकी चूत में अपना लंड पेलना चाहता हूँ। वह मुझे बड़ी सेक्सी और हॉट लगती है।
जेठानी ने कहा- हां वह भी चूतचोदी ग़ैर मर्दों से खूब चुदवाती है जैसे मैं चुदवाती हूँ। अभी वह अपनी ससुराल में है. जब आएगी तब तेरे पास भेज दूँगी। वह खुद ही पकड़ लेगी तेरा लंड!
उसकी बात सुनकर मेरी झांटें सुलगने लगीं।
मैंने मन में कहा- भोसड़ी के ससुरे … तुझे जेठानी की बहन की चूत याद आ रही है लेकिन अपनी छोटी बहू की चूत याद नहीं आ रही है?
थोड़ा दूर से ही सही पर मैंने ससुर का लंड देख तो लिया।
मैंने मन में कहा- लंड तो भोसड़ी का बड़ा हक्कानी है.
फिर क्या … सारा मज़ा मेरी चूत चोदी जेठानी लेकर चली गई.
अब उसका लंड पकड़ने की मेरी तमन्ना और बढ़ गयी।
मैंने उस दिन की रात बिना लंड के गुज़ार दी।
दूसरे दिन मैं सवेरे से ही ससुर के आगे पीछे घूमने लगी, उसे अपने जिस्म का जलवा दिखाने लगी, कभी अपनी नंगी नंगी टांगें दिखाती कभी अपनी उछलती हुई चूचियाँ दिखाती और कभी अपनी मटकती हुई गांड दिखाती।
वह भी मुझे बड़े गौर से देखने लगा।
मैं कभी उससे आँखें मिलाती, कभी सेक्सी अदा से मुस्करा देती, कभी उसे तिरछीं निगाहों से देखती तो कभी उसके बदन से छू करके आगे निकल जाती।
किसी न किसी तरह मैं उसके लंड में आग लगाना चाहती थी।
रात के ११ बजे थे।
मेरी सास अपने मायके गई थी।
ननद थी, पर कहाँ थी और क्या कर रही थी, मुझे कुछ भी नहीं पता।
अचानक मेरे फोन की घंटी बज उठी।
मैं फोन पर जान बूझ कर खुल कर बातें करने लगी।
मेरा ससुर बगल में ही बैठा था; वह सब सुन रहा था।
मैं जो बोल रही थी वही उसे सुनाई पड़ा।
उधर की आवाज़ उसे बिल्कुल नहीं सुनाई पड़ी।
मैंने कहा – हां बोल भोसड़ी की रिया … क्या हुआ?
“अच्छा ऐसी बात है तो फिर पकड़ ले न उसका लंड!”
“अरे कुछ नहीं होगा पगली!”
“अपनी माँ के भोसड़े में भी पेल दे लंड … मोटा लंड सबको पसंद आता है यार!”
“ठीक है, मुझे भी कभी पकड़ा देना!”
फोन बंद हुआ तो ससुर ने पूछा- किसका फोन था बहू रानी?
मैंने कहा- मेरी फूफी की बेटी रिया का फोन था.
“रिया तुमसे खुल कर बात करती है. किसी दिन उसे बुला लो न बहू रानी!”
“हां हां बुला लूंगी। पर तुम क्या करोगे?”
वह उठा और मुझे अपनी बाँहों में भर कर बोला- मैं उसके मुंह से भी गालियां सुनूंगा बहू रानी जैसे मैंने तेरे मुंह से सुनी हैं गालियां। बड़ी प्यारी प्यारी गालियां देती हो तुम रेशमा! तुमने मेरा दिल जीत लिया। तूने तो मेरे लंड में आग लगा दी है रेशमा बहू!
“आग तो तेरी बड़ी बहू लगाती है तेरे लंड में … मैं क्या चीज हूँ?” मैंने मारे जलन के कहा।
“तुम तो उससे ज्यादा खूबसूरत हो, सेक्सी हो और हॉट हो रेशमा!”
“तो क्या करोगे तुम मेरा?”
“रानी बनाऊंगा मैं तुम्हें … रात भर के लिए बीवी बनाऊंगा मैं तुम्हें … तुम्हारे कपड़े उतार कर मैं तुम्हारे साथ नंगा लेटूँगा रेशमा!”
मैंने उसे और ललकारा- तेरे लंड में ताकत है इतनी? कुछ कर पायेगा तेरा लंड?
उसने अपनी लुंगी खोल दी और कहा- लो पहले पकड़ कर देख लो मेरा लंड, बहू रानी … तुम्हें अंदाज़ा हो जाएगा!
लंड तो मादरचोद पहले से ही खड़ा था।
मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ लिया लंड … तो वह और फनफना उठा।
तब मैंने मन में कहा- अब आया बहनचोद मेरे हाथ में ससुर का लंड, जिसके लिए मैं इतने दिनों से तड़प रही थी.
लंड पकड़ते ही मेरे अंदर की रंडी जाग उठी।
मेरी अम्मी जान ने एक बार कहा था- बेटी रेशमा, हर औरत अंदर से एक रंडी होती है उसके मन में गैर मर्दों से चुदवाने की इच्छा जरूर होती है और मौक़ा पाकर वह चुदवा भी लेती है। दुनिया में ऐसी कोई औरत नहीं जो पराये मर्दों से चुदवाना न चाहती हो.
अम्मी जान ने यह भी कहा था कि हर औरत को ग़ैर मर्दों से चुदवाने का हक़ है। मैं भी गैर मर्दों से चुदवाती हूँ। मुझे भी ग़ैर मर्दों के लंड बहुत पसंद हैं।
यह ख्याल आते ही मैंने ससुर का लंड बड़े प्यार और मजबूती से पकड़ लिया; पकड़ कर उसे हिला हिला कर मस्ती करने लगी।
उसने मुझे नंगी करके अच्छी तरह दबोच लिया।
मेरा पूरा नंगा बदन उसने अपने नंगे बदन से चिपका लिया।
लेकिन मैंने उसका लंड नहीं छोड़ा, मैं लंड मुट्ठी में लिए हुए सहलाती रही।
मेरे ससुर का नाम है ताहिर!
वह 48 साल का हट्टा कट्टा गोरा चिट्टा मर्द है।
जैसा मैंने उसके लंड के बारे में सुना था वैसा ही पाया।
मोटा तगड़ा लंड बड़ा शानदार था.
मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई और लंड की बड़े प्यार से कई चुम्मियाँ ले लीं; पेल्हड़ भी मजे से चूमे।
मैं मस्ती में चूर हो गयी।
मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी।
वह भी भोसड़ी वाला मेरे नंगे जिस्म से खेलने लगा, मेरे मम्मे दबाने लगा, मेरी चूत पर उंगलियां फिराने लगा; मेरे चूतड़ों पर, मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा; मेरे गाल, मेरे होंठ चूमने लगा.
फिर बोला- रेशमा बहू, तुम बड़ी बहू से ज्यादा खूबसूरत हो, ज्यादा हसीन हो और ज्यादा अच्छी लंड पकड़ती हो। तुम्हारा जिस्म बड़ा सेक्सी है. मुझे तुम्हारी ही जैसी बहू बेटियों को चोदने में मज़ा आता है जिनका नंगा जिस्म बिल्कुल तुम्हारे नंगे जिस्म की तरह हो.
तब मुझे पक्का मालूम हो गया कि मेरे मादरचोद ससुर को बहू बेटियां चोदने का शौक है।
फिर मैंने उसे नीचे जमीन पर लिटा दिया और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी।
वह मेरी चूत चपर चपर चाटने लगा और उसका लंड चाटने लगी।
मुझे लंड का टोपा चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
बिना झांट का एकदम चिकना चिकना लंड बड़ा हैंडसम लग रहा था।
कल यह भोसड़ी का लंड मेरी जेठानी के कब्जे में था, आज यह मेरे कब्जे में है।
उत्तेजित वह भी था और उत्तेजित मैं भी थी।
इतने में वह उठा और मेरे बूब्स फिर से मसलने लगा।
मैं भी उसके मरदाने जिस्म का मज़ा लेने लगी।
फिर उसने मुझे नीचे लिटा दिया, मेरी टांगें फैला दीं.
तो उसके सामने मेरी चूत एकदम खुल गयी।
उसने लंड उसी पर टिका दिया और फिर एक ही धक्के में पूरा लंड पेल दिया अंदर!
मैं तो चुदी हुई थी इसलिए दर्द तो हुआ नहीं … पर चिल्ला पड़ी- भोसड़ी के ससुरे … तूने इतना बड़ा लंड पेल दिया मेरी छोटी सी चूत में! तुझे रहम नहीं आया? बहुत बड़ा हरामजादा है तू … तेरी बहन का भोसड़ा … यह मेरी चूत है, तेरी जागीर नहीं … ज़रा संभल कर चोद न … प्यार से चोद न, मज़ा ले ले के चोद! मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या?
फिर वह सच में बड़ी मस्ती से चोदने लगा मुझे!
और मैं भी अपनी चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगी।
इतने में अचानक मेरी ननद एकदम नंगी हमारे सामने गई।
उसे देख कर मैं समझ गई कि वह किसी से लगी हुई थी; किसी के लंड का मज़ा ले रही थी।
पर कौन था यह मुझे मालूम नहीं।
मेरे ससुर ने उसे इस अवस्था में देखा तो उसका मन डोल गया।
उसने ननद का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वह खिंचती चली आई।
ससुर ने उसे चित लिटा कर गच्च से पेल दिया अपना लंड उसकी चूत में!
मैं यह देख कर चकित रह गयी कि एक बाप ने अपनी ही बेटी की चूत में लौड़ा घुसा दिया।
लेकिन फिर सोचा कि यह तो होता ही रहता है हमारे यहाँ!
मेरे मुंह से निकला- ससुर जी यह क्या हो रहा है? यह क्या किया तुमने? मेरी ननद तेरी बेटी है।
वह बोला- मैं तेरी ननद की चूत चोद रहा हूँ बहू रानी! मेरे लंड के सामने जो भी चूत आएगी, उस चूत में मेरा लंड घुस जाएगा. वह कोई भी हो, वह चाहे जिसकी चूत हो … इससे मेरे लंड को कोई फर्क नहीं पड़ता।
तब तक पीछे से आवाज़ आई- हां यार ताहिर, तुम ठीक कह रहे हो। मेरे भी लंड के सामने जो चूत आती है मेरा लंड बे रोक टोक के उसी में घुस जाता है।
मुझे नंगी देख उसने मेरी चूत में लंड पेल दिया बिना कोई देर लगाये!
वह बोला- अब देख न, तेरी बहू की चूत मेरे सामने है तो मैंने लौड़ा पेल दिया तेरी बहू की चूत में, ताहिर!
तब मुझे मालूम हुआ की वह मेरी ननद का ससुर है साहिर।
इसका मतलब की ननद चूत चोदी अपने ससुर से चुदवा रही थी।
साहिर बोला- देख यार ताहिर, मैं तेरी बहू चोद रहा हूँ, तुम मेरी बहू चोद रहे हो. कितना मज़ा आ रहा है। तेरी बहू बड़ा मज़ा दे रही है।
मेरा ससुर बोला- तेरी बहू भी बड़ा मज़ा दे रही है।
ननद बड़ी मस्त होकर अपनी कमर हिला हिला कर चुदवा रही थी।
मज़ा मुझे भी बहुत आ रहा था ननद के ससुर से चुदवाने में!
वह भी बड़ा शातिर बन्दा था चूत चोदने में … खूब हचक हचक कर चोद रहा था; छक्के छुड़ा रहा था वह मेरी चूत में!
मैं समझ गयी आखिर कार मेरी ननद माँ की लौड़ी अपने ससुर के लंड के पीछे पीछे क्यों लगी रहती है.
हम दोनों अगल बगल लेटी हुईं थीं।
मेरा मुंह उसकी गांड की तरफ था और उसका मुंह मेरी गांड की तरफ।
मैं उसकी चुदती हुई चूत देख रही थी और वह मेरी चुदती हुई बुर!
उधर वो दोनों ससुरे एक दूसरे की बहू चोदने का मज़ा ले रहे थे।
पहले दोनों ने अपनी अपनी बहू की चूत चोदी, अब एक दूसरे की चोद रहे हैं।
अम्मी ने सही कहा था कि बेटी रेशमा लंड जब खड़ा होता है तो वह किसी की भी चूत में घुस जाता है फिर वह चाहे बेटी की चूत हो चाहे माँ की चूत! इसी तरह जब चूत जब गर्म हो जाती है, चुदासी हो जाती है तो वह किसी का भी लंड पेलवा लेती है फिर वह लंड चाहे बाप का हो चाहे बेटे का!
उस समय हम दोनों की खूब घपाघप चुदाई हो रही थी; धच्च धच्च, भच्च भच्च, फच्च फच्च आवाज़ें चारों तरफ फ़ैल रहीं थी।
जितनी बेशर्मी से दोनों ससुर चोद रहे थे, उतनी बेशर्मी से हम दोनों बहुएं भी चुदवा रही थीं।
आखिर में हमने जब झड़ते हुए लंड चाटे तो उसका मज़ा ही कुछ और था।
उसके बाद हम सब नंगे नंगे ही बैठ कर सुस्ताने लगे।
लगभग आधे घंटे में फिर दोनों लंड टनटना उठे।
चुदाई फिर शुरू हो गई और फिर रात भर होती रही।
अगले दिन मेरी ननद बोली- अरे रेशमा भाभी जान, तेरी चूत चोदी ननद बड़ी चुदक्कड़ हो गई है।
तब तक उधर से आवाज़ आई- अरे बहू रानी, तेरी ननद की माँ भी भोसड़ी वाली बड़ी चुदक्कड़ है।
यह आवाज़ मेरी सास की थी।
उसने मुझसे पूछा- कैसा लगा तुम्हें अपनी ननद के ससुर का लंड, रेशमा बहू?
मैंने कहा- लंड तो बड़ा जबरदस्त है उसका सासू जी! किसी दिन तेरे भोसड़े में पेलूँगी।
वह बोली- तुम किसी दिन पेलोगी लंड मेरी चूत में … मैं तो आज ही पेलूँगी तेरी चूत में अपने देवर का लंड!
फिर क्या … रात में हम तीनों सास बहू ननद ने एक दूसरे की चूत में लंड पेल पेल कर खूब लिया सामूहिक चुदाई का मज़ा।
यह बात 2008 की है, जब मैंने पहली बार घर से दूर कोटा में एडमिशन लिया था और कॉलेज की दहलीज पर कदम रखा था. मेरे पहले दिन ही कॉलेज में कुछ अच्छे दोस्त बन गए.. मुझे अच्छा भी लगा. दो दिन बाद मेरी क्लास में एक नई लड़की आई, जिसका नाम तान्या था. वो दिखने में एकदम गोरी, खूबसूरत, शांत स्वभाव की लड़की थी. उसके लिए मैं ये कह सकता हूँ कि उसे भगवन ने फुर्सत से बनाया था.
चूंकि उसका कॉलेज में पहला दिन था तो मैंने उससे पूछ लिया- न्यू एडमिशन?
तो उसने हाँ में जवाब दिया. उसके बाद मैंने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम तान्या बताया. वो इटारसी की थी. वो एक साधारण देसी लड़की थी. उसके बाद 10 दिन उससे कोई बात नहीं हुई.. न ही वो किसी लड़के से क्लास में बात करती थी. लेकिन पता नहीं उसे देख कर मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगती थी. मन ही मन मैं उसे प्यार करने लगा था, लेकिन उससे बात करने की हिम्मत नहीं कर पाता था.
धीरे धीरे मैंने उसका मोबाइल नम्बर पता किया और उसे कॉल किया. उसने हैलो बोला, तो मैं डर गया और बात नहीं कर सका. फिर जब वो अगले दिन कॉलेज आई तो मैंने हिम्मत करके जाकर उसे बताया कि वो कॉल मैंने किया था.
इस पर उसने कई सवाल किए कि मेरा नम्बर कहां से मिला था, क्यों फोन किया था.. मुझसे क्या चाहते हो?
मैंने उसके सारे सवालों का जबाब दिया.
धीरे धीरे मेरी उससे बात होने लगी. हम लंच शेयर करने लगे. लाइब्रेरी, कैंटीन लैब में साथ जाने लगे. फिर 6 महीने बाद मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया.
लगभग एक महीने तक उसने मुझसे बात नहीं की. मैं पहले से ज्यादा उदास रहने लगा. फिर मेरे कुछ दोस्तों ने उससे बात की और कुछ क्लास की लड़कियों ने भी तब जाकर उसने मुझसे बात की. तीन महीने बाद मैंने फिर से अपने प्यार का इज़हार किया.
तब जाकर उसने कहा कि मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ, लेकिन डरती हूँ कि इसका असर हमारी स्टडी पर ना आये.
मैंने उसे समझाया कि ऐसा कुछ नहीं होता.
अब मैं उससे हर रोज घंटों बात करने लगा. रात में दो बजे तक बात करता, कभी पूरी रात लगा रहता. कभी कॉल से बात करता तो कभी मैसेज से करता रहता. ऐसे ही दिन निकलते रहे.
एक दिन मैंने उससे बोला कि मुझे तुम्हारे साथ वो सब करना है.
उसने साफ़ मना कर दिया.
मैंने उससे कुछ नहीं कहा.
फिर एक दिन वो मेरे रूम पर आई तब हम दोनों ही थे और कोई नहीं था. उसने मेरी तरफ अनुराग भरी निगाह से देखा तो मैंने धीरे से उसे किस किया. वो कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे गले से लगाया और धीरे धीरे उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगा. अब उसे लगने लगा कि कुछ गड़बड़ होने वाली है तो वो मुझसे अलग हो गयी.
वो मुझसे कहने लगी कि ये सब शादी से पहले किसी के साथ करना गलत है.
मैंने उसे बहुत समझाया, लेकिन वो नहीं मानी और अपने होस्टल चली गयी. दो दिन हमारा झगड़ा बना रहा, उसके बाद उसका कॉल आया, वो बोली- मुझे तुमसे मिलना है.
तो मैंने उससे बोला कि आ जाओ बाहर किसी पार्क में मिलते हैं.
उसने बाहर मिलने से मना कर दिया और मेरे ही रूम पर मिलने का कहने लगी.
मैंने उसे बोल दिया कि ठीक है आ जाओ.. मैं अपने ही रूम पर हूँ.
जब वो आई तो उसने मुझसे सेक्स के बारे में बात की. मैंने उसे बहुत कुछ बताया और उसने भी, जो उसे पता था मुझसे शेयर किया.
फिर वो बोली कि तुम गुस्सा मत हो जानू… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ लेकिन वो सब नहीं कर सकती और अगर तब भी तुम करना चाहते हो तो ऊपर ऊपर से जो भी करना है, कर लो.
मैंने भी उसके जज्बातों को समझा और मना कर दिया कि नहीं मुझे कुछ भी ऐसा नहीं करना है.
यह सुन कर वो मुझसे लिपट गयी और मुझे किस करने लगी. उसने मुझे पन्द्रह मिनट तक लगातार किस किया और बोली- हम आज नहीं.. लेकिन सही समय आने पर इस बारे में जरूर सोचेंगे.
इस तरह समय निकलता गया. एक दिन किसी फेस्टिवल का टाइम था, वो अपने घर नहीं गयी थी. उसकी वजह से ही मैं भी घर नहीं गया था. कॉलेज 5 दिन के लिए बंद था और सभी दोस्त अपने अपने घर जा चुके थे. उसका भी हॉस्टल लगभग खाली था, तो उसे भी बुरा लग रहा था.
मैंने उसे अपने रूम पर रुकने का ऑफर किया, तो उसने बोला कि तुम्हारे मकान मालिक क्या कहेंगे?
मैंने उससे बोला- तुम उसका छोड़ो, वो मेरी परेशानी है.
तब मैंने अपनी मकान मालिक से बात की और उन्हें बात बताई कि वो अकेली हॉस्टल में रह गई है, जिस वजह से वो डर रही है और बुरा फील कर रही है.
यह सुनकर उन्होंने उसे मेरे रूम पर रुकने की इजाजत दे दी. तब मैंने उसे बता दिया कि मकान मालिक ने रहने की हां कर दी है. वो अपना बैग लेकर आ गयी.
अब हम दोनों साथ साथ टाइम स्पेंड करने लगे. दिन तो जैसे तैसे निकल गया अब रात आयी. चूंकि मैं अकेला रहता था तो एक ही बिस्तर था.
उसने बोला- कोई बात नहीं, हम सो जाएंगे.
मुझे भी ये सुनकर अच्छा लगा. खाना खाने के बाद जब हम बिस्तर पर आये तो वो मेरे सीने पर हाथ रख कर और मेरे हाथ पर अपना सर रख कर मुझसे बात करने लगी.
बात करते करते वो सो गयी और मैं उसे देखता रहा. मुझे जरा भी नींद नहीं आ रही थी. मैं रात को लगभग दो बजे तक जागता रहा.
तभी अचानक से उसकी नींद खुली और वो मुझे जागता देख कर पूछने लगी- अभी तक क्यों नहीं सोये?
मैंने उससे कहा- तुम सो रही थी तो मैं तुम्हें देख रहा था.
यह सुनकर उसने मुझे किस किया और वो मेरे ऊपर आ कर मुझे किस करती रही. काफी देर तक किस करने के बाद मैंने उससे बोला कि क्या आज मैं तुम्हारे साथ सेक्स कर सकता हूँ?
तो उसने थोड़ा टाइम लेकर जबाब दिया कि हां कर सकते हो अगर मुझे कोई प्रॉब्लम हुई तो वहीं पर रोकना पड़ेगा.
मैं मान गया, तब फिर मैंने धीरे धीरे उसके मम्मों को सहलाना चालू किया. जब काफी देर हो गयी तो मैंने उसके टॉप को अलग किया. अन्दर का जो नज़ारा देखा तो मैं उसे देख कर पागल हो गया.
एक दूध सी सफ़ेद लड़की ब्लैक रंग की ब्रा में मेरे सामने थी. मैंने उसको देख कर उसे चूमना स्टार्ट किया. चूमते चूमते मैंने कब उसकी ब्रा खोल दी.. पता ही नहीं चला.
वो मेरे सामने आधी नंगी होकर शर्माने लगी और खुद को चादर में छिपाते हुए बोली- अपने भी तो कपड़े उतारो.
मैं अपने कपड़े निकालने लगा और केवल फ्रेंची में उसके सामने खड़ा हो गया. तब वो मेरी फ्रेंची की तरफ नज़र टिका कर देख रही थी.
मैंने उसे टोका और पूछा- कहां ध्यान है तुम्हारा?
तो वो मुस्कुराने लगी. मैं भी झट से उसकी चादर में घुस गया और उससे चिपक गया. मैंने उसे सहलाते सहलाते उसके लोअर को नीचे किया तो उसने अपनी टाँगें उठाकर उसे उतारने में मेरी मदद की. फिर मैं उसे किस करने लगा और वो मेरा साथ देने लगी.
तभी मैं सहलाते सहलाते अपना हाथ उसकी पेंटी के ऊपर ले गया, जहां उसकी चूत पहले से ही भट्टी के जैसी गर्म थी. मैंने जरा सा हाथ नीचे किया तो पता चला कि कुछ गीला और चिपचिपा सा द्रव्य उसकी पेंटी से लगा है. मैंने उससे पूछा- ऐसा क्यों?
वो बोली कि मुझे खुद नहीं पता कि कैसे गीली हो गई?
मैं समझ गया कि वो एक बार झड़ चुकी थी और उसे खुद नहीं पता था.
मैंने अब देर न करते हुए उसकी पेंटी में हाथ डाल लिया और उसकी चूत को सहलाने लगा. वो गर्म होने लगी और मुझे कसके पकड़ने लगी. तो मैंने एक झटके में ही उसकी पेंटी उसके बदन से अलग कर दी और उसकी चूत में एक उंगली डालने लगा. जैसे ही मैंने उसकी चूत में उंगली डाली, वो चिहुंक उठी. उसे थोड़ा सा दर्द हुआ तो मैंने उसे समझाया कि दर्द तो होगा और ब्लड भी आएगा.
वो कहने लगी- हां ये सब तो पता है कि पहली बार में ये आएगा.
मैंने उसे चूमा और कहा कि अगर तुम न चाहो तो मैं ये सब यहीं पर रोक सकता हूँ.
तो वो बोली- मैंने तुमसे प्यार किया है तो तुम्हारा ही इस पर हक है. आज जो चाहे हो जाए.. हम एक बार तो जरूर ही ये सब करेंगे, इसके लिए मुझे कितना भी दर्द क्यों न हो.
तब मुझे उस पर और ज्यादा प्यार आने लगा और मैंने मना किया कि नहीं, मैं अब ये सब नहीं करना चाहता.
उसने जिद करते हुए बोला कि आज कर लो.. पता नहीं ऐसा मौका दोबारा कभी मिलेगा भी कि नहीं.
तो मैं उसकी बात मान गया. चूंकि आग दोनों तरफ लगी थी, सो मैंने अपनी फ्रेंची उतार कर साइड में रख दी और उसके ऊपर आ गया.
जब उसने मेरा लंड देखा तो वो थोड़ा डर गयी और कहने लगी- एक उंगली से इतना दर्द हुआ तो इससे तो बहुत ज्यादा होगा.
तो मैंने हाँ में सर हिलाया तो उसने बोला कि जो भी हो, अब यहाँ तक पहुँच गए तो आगे भी जाएंगे.
मैंने ओके कहा तो उसने मुझसे बोला कि जब तुम ये अन्दर डालो, तो मेरा मुँह बंद कर देना.
मैंने उसे फिर से समझाया कि अगर इतना ही डर हो रहा है तो मत करो.
तो उसने मेरी एक न सुनी और बोलने लगी- अब मैं रेडी हूँ, जो चाहे सो आज कर लो.
तब मैंने उसे अपनी एक टी-शर्ट दी और उससे बोला- इसे अपने मुँह में दबा लो, जिससे आंटी के रूम तक आवाज़ न जाये.
उसने मेरी बात मान ली और कपड़े को मुँह में उतना ठूंस लिया, जितना बन सकता था.
तब मैंने उसे इशारा किया कि मैं अपना लंड उसकी चूत में डाल रहा हूँ तो उसने हाँ में सर हिलाया.
फिर जैसे ही मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर रखा तो वो ऊपर तरफ खिसकने लगी. मैंने उसे प्यार से किस किया और धीरे धीरे उसकी चूत पर अपना लंड फिराने लगा.
इससे उसे कुछ अच्छा लगा और आँखों से सहमति दे दी कि करो अब.
तब मैंने उसकी गीली चूत पर अपना लंड रखा और उसकी तरफ देख कर हल्का सा झटका दिया. मेरा लंड का टोपा उसकी चूत के अन्दर चला गया. उसको बहुत ज्यादा दर्द हुआ और वो मुझे धकेलने लगी. मैंने उसकी तरफ देखा तो आँख में आंसू थे. उसी समय मैं झट से अलग हो गया और अपना टोपा बाहर निकाल लिया. फिर मैंने उसके मुँह से कपड़ा निकाला और उसके आंसू पौंछे.
उसने कराहते हुए कहा- बहुत ज्यादा दर्द हुआ है.
उसने नीचे हाथ लगाया तो देखा हल्का सा ब्लड लगा था, जो उसकी चूत की साइड की स्किन कटने से निकला था.
तब मैंने उससे बोला कि अब नहीं करते हैं, जब इतना दर्द हो रहा है तो रहने दो.
उसने बोला- एक बार और कोशिश कर लो.. अगर इस बार हुआ तो फिर नहीं करेंगे.
मैंने उसकी बात मानी और उसके मुँह में कपड़ा देकर अपने लंड पर पहले तेल लगाया और कुछ तेल उसकी चूत पर भी लगा दिया. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सैट किया और इस बार जोर का धक्का लगाया तो मेरा लंड लगभग तीन इंच उसकी चूत में चला गया. वो दर्द से आंसू बहाने लगी और अपने हाथ पैर छटपटाने लगी. तब मैंने उसके आंसुओं को पोंछा और समझाया कि अब अन्दर चला गया है. कुछ देर बाद दर्द नहीं होगा.
उसने मुझे ऐसे ही दो मिनट रुकने को बोला. मैं वैसे ही उसके ऊपर रुका रहा.. अन्दर मेरा लंड जल रहा था. मुझे लग रहा था कि जैसे मैंने किसी गरम भट्टी में अपना लंड डाल दिया हो.
कुछ देर बाद मैंने थोड़ा सा हिलना शुरू किया और अपना लंड अन्दर बाहर किया, तो उसे फिर से दर्द हुआ. मैंने अब उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और अन्दर बाहर करने लगा. कुछ देर बाद वो नार्मल हुई और अपने मुँह से कपड़ा निकल कर मादक सिस्कारियां निकालने लगी. वो मुझे किस करने लगी.
जब मैंने उससे पूछा कि अब कैसा फील हो रहा है?
तो उसने मुस्कुराकर कहा- बहुत अच्छा.
मैंने उससे बोला- अभी थोड़ा और बाहर बाकी है..
उसने बोला- डाल दो पूरा, पर मेरा मुँह पकड़ कर करना.
मैंने वैसा ही किया, अपने होंठ उसके होंठ से लगा कर एक तेज़ झटका दिया और पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया.
उसे फिर से दर्द हुआ और चीखने लगी लेकिन मेरी किस की वजह से उसकी चीख वहीं सिमट गयी.
फिर थोड़ा रुक कर मैंने उसे चोदना चालू किया. वो कुछ देर बाद झड़ने वाली थी. उसे बहुत अच्छा लगने लगा था, वो कहने लगी- और जोर से और जल्दी आह आह आह्ह ऊंह.
ये कहते हुए उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और वो झड़ गयी. उसके एक मिनट बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने तुरंत अपना लंड बाहर निकाल कर सारा माल उसकी चूत के ऊपर गिरा दिया.
जब वो उठी और उसने जो देखा तो पागल सी हो गयी. उसकी चूत से बहुत ज्यादा खून निकला था. जिससे चादर का एक फीट का हिस्सा पूरी तरह ख़राब हो गया था, उसमें दाग लग चुका था.
फिर उसने अपनी चूत की तरफ देखा तो वो सूज गयी थी और लाल हो गयी थी. वो लंगड़ाते हुए बाथरूम गयी और खुद को साफ़ करके बाहर आई.
उसने मुझे किस किया और बोली- आज जो हुआ, वो करने की हिम्मत तुमसे मिली है.. और यह रात मेरी जिन्दगी की सुहागरात से कम नहीं है.
उसके बाद उसने वो बेडशीट हटाई और दूसरी बिछाई. हम फिर से बिस्तर पर आ गए.
मेरा नाम श्याम कुमार, उम्र Hindi Sex Stories बीस वर्ष है। मेरे पापा दुबई में एक पांच सितारा होटल में काम करते हैं। पापा की अच्छी आमदनी है, काफ़ी पैसा घर पर भेजते हैं। घर पर मम्मी और मैं ही हैं। मम्मी एक स्कूल में टीचर हैं और मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ।
घर में काम काज के लिये एक नौकरानी अंजलि रखी हुई है। अंजलि बाईस साल की शादीशुदा लड़की है। उसका पति एक प्राईवेट स्कूल में चपरासी है। अंजलि एक दुबली पतली पर गोरी चिट्टी लड़की है। वो घर पर काम करने छ: बजे आ जाती और साढ़े सात बजे तक घर का काम पूरा करके चली जाती है। फिर मम्मी भी स्कूल चली जाती हैं।
अंजलि जब सवेरे काम करने आती है तब मैं सोता ही होता हूँ। वह मुझे बड़ी देर तक सोता हुआ देखती रहती थी। उस समय मैं सुस्ती में पड़ा अलसाया सा बस आंखे बन्द किये लेटा रहता था। मुझे सुबह पेशाब भी लगता था, पर फिर भी मैं नहीं उठता था। नतीजा ये होता था कि पेशाब की नली मूत्र से भरी होने के कारण लण्ड खड़ा हो जाता था तो मेरे पजामे को तम्बू बना देता था। अंजलि बस वहीं खड़े लण्ड को देखा करती थी। मुझे भी ये जान कर कि नौकरानी ये सब देख रही है, सनसनी होने लगती थी। मुझे सोया जान कर कभी कभी वो उसे छू भी लेती थी, तो मेरे शरीर को एक बिजली जैसा झटका भी लगता था।
फिर जब वो दूसरा काम करने लगती थी तो तो मैं उठ जाता था। वो अधिकतर सलवार कुर्ते में आती थी। कुर्ता कमर तक खुला हुआ था जैसा कि आजकल लड़कियाँ पहनती है। जब वो सफ़ाई करती थी तब या बर्तन करती थी तब, वो कुर्ता कमर तक ऊपर उठा कर बैठ कर काम करती थी तो उसकी चूतड़ की गोलाईयां मुझे बड़ी प्यारी लगती थी। उसके गोल गोल चूतड़ उसके बैठते ही खिल कर अलग अलग दिखने लगते थे। उसके खूबसूरत चूतड़ मेरी आंखों में नंगे नजर आने लगते थे। मुझे उसे चोदने की इच्छा तो होती थी पर हिम्मत नहीं होती थी। कभी कभी उसे आने में देर हो जाती थी तो मम्मी स्कूल के लिये निकल जाती थी। तब वो मुझ पर लाईन मारा करती थी। बार बार मेरे से बात करती थी। बिना बात ही मेरी बातों पर हंसती थी। मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। इन सब से मुझे ऐसा जान पड़ता था कि वो मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाह रही है। तब मैंने उसे पटाने की एक तरकीब सोची।
मैं उस दिन का इन्तज़ार करने लगा वो कभी लेट आयेगी तो मम्मी की अनुपस्थिति का फ़ायदा उठा कर जाल डालूंगा। फ़िलहाल मैंने उसके सामने रुपये गिनना और उसे दिखा दिखा कर अपनी जेब में रखना चालू कर दिया था। एक दिन वो लेट हो ही गई। मम्मी स्कूल जा चुकी थी। मैंने कुछ रुपये अपनी मेज पर रख दिये। दाना डालते ही चिड़िया लालच में आ गई।
मुझसे बोली- श्याम, मुझे कुछ रुपये उधार दोगे, मैं तनख्वाह पर लौटा दूंगी।”
मैंने उसे पचास का एक नोट दे दिया। एक दो दिन बाद उसने फिर मौका देख कर रुपये और उधार ले लिये। मुझे अब यकीन हो गया कि अब वो मुझसे नहीं बच पायेगी। हमेशा की तरह उसने मुझसे फिर पैसे मांगे। मैंने सोचा अब एक कोशिश कर ही लेनी चाहिये। उसकी बेकरारी भी मुझे नजर आने लगी थी।
“आज उधार एक शर्त पर दूंगा।” वो मेरी तरफ़ आस लगा कर देखने लगी। जैसे ही उसकी नजर मेरे पजामे पर पड़ी, उसका उठान उसे नजर आ गया। उसने नीचे देख कर मुझे मुस्करा कर देखा, और कहा,” मैं समझ रही हूँ, फिर भी आप शर्त बतायें।”
“आज एक चुम्मा देना होगा” मैंने शरम की दीवार तोड़ ही दी। पर असर कुछ और ही हुआ।
“अरे ये भी कोई शर्त है, आओ ये लो !”
उसे मालूम था कि ऐसी ही कोई फ़रमाईश होगी। उसने मेरे गाल पर चूम लिया। मुझे अच्छा लगा। लण्ड और तन्ना गया। पर ये भी लगा कि चुम्मा तो इसके लिये मामूली बात है।
“एक इधर भी !” मैंने दूसरा गाल भी आगे कर दिया।
“समझ गई मैं !” उसने मेरा चेहरा थाम लिया और मेरे होंठों पर गहरा चुम्मा ले लिया।
“धन्यवाद, अंजलि !”
“धन्यवाद तो आपको दूंगी मैं … जानते हो कब से मैं इसका इन्तज़ार कर रही थी !”
मैं सिहर उठा। ये क्या कह रही रही है? पर उसने मेरी हिम्मत बढ़ा दी।
“अंजलि, नाराज तो नहीं होगी, अगर मैं भी चुम्मा लू तो”
“श्याम, देर ना करो, आ जाओ।” उसकी चुन्नी ढलक गई। उसके उरोज किसी पहाड़ी की भांति उभर कर मेरे सामने आ गये। वो मुझे आकर्षित करने लगे। मैंने उसका कुर्ता थोड़ा सा गले से खीच कर उसके उभार लिये हुए उरोजों को अन्दर से झांक कर देखा। उसकी धड़कन बढ़ गई। मेरा दिल भी जोर जोर से धड़कने लगा। उसके उरोज दूध जैसे गोरे और चिकने थे। मैंने अन्दर हाथ डाला तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“श्याम सिर्फ़, चुम्मा की बात थी, ये मत करो… !” उसने सिसकते हुये मेरा हाथ अपनी छातियों से हटा दिया।
“अंजलि, मेरे मन की रख लो, मैं तुम्हें सौ रुपये दूंगा।”
रुपये का नाम सुनते ही वो बेबस हो गई। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मैंने उसके कुरते के भीतर हाथ डाल दिया और उसके कोमल और नरम स्तन थाम लिये और उन्हें सहलाने लगा। उसके शरीर में उठती झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। वो अपने धीरे धीरे झुकने लगी। पर उससे उसके चूतड़ो में उभार आने लगा। वो सिसकते हुए जमीन पर बैठ गई। उसके बैठते ही उसके चूतड़ों की दोनों गोलाईयाँ फिर से खिल उठी। वही तो मेरा मन मोहती थी।
मैं उसके पास बैठ गया और उसके चूतड़ो की फ़ांको को हाथ से सहलाने लगा। उसकी दरारों में हाथ घुमाने लगा। मेरा लण्ड बुरी तरह से कड़कने लगा था। उसके चूतड़ों को सहलाने से मेरी वासना बढ़ने लगी। अंजलि भी और झुक कर घोड़ी सी बन गई। मैंने उसका कुर्ता गांड से ऊपर उठा दिया ताकी उसकी गोलाईयाँ और मधुर लगे। जोश में मैंने उसकी गाण्ड के छेद में अंगुली दबा दी।
अंजलि से भी अब रहा नहीं जा रहा था, उसने हाथ बढ़ा कर मेरा लण्ड पजामे के ऊपर से ही थाम लिया। मेरे मुख से आह निकल पड़ी।
मैंने उसे पकड़ कर खड़ा कर दिया और कहा,”अंजलि, तुम्हारी गाण्ड कितनी सुन्दर है, प्लीज मुझे दोगी ना !”
“तुम्हारा लण्ड भी कितना मस्त है, दोगे ना !”
“अंजलिऽऽऽऽ !”
अंजलि ने नाड़ा खोल कर अपनी सलवार उतार दी और कुर्ता ऊंचा कर लिया। उसके चूतड़ों की गोरी गोरी गोलाईयाँ मेरे सामने चमक उठी। मैं तो उसकी गाण्ड का पहले से ही दीवाना था। उसे देखते ही मेरे मुख से हाय निकल पड़ी। मैंने हाथ में थूक लगा कर उसकी गाण्ड के छेद में लगा दिया और पजामा नीचे करके लण्ड छेद पर रख दिया। मेरे दिल की इच्छा पूरी होने के विचार से ही मेरे लण्ड के मुख पर गीलापन आ गया था। मेरी आंखे बन्द होने लगी। मेरा लण्ड उसके भूरे रंग के छेद पर बार बार जोर लगा रहा था। गुदगुदी के मारे वो भी सिसक उठती थी।
छेद टाईट था पर मर्द कभी हार नहीं मानता। किले को भेद कर अन्दर घुस ही पड़ा। अंजलि दर्द से कराह उठी। मुझे भी इस रगड़ से चोट सी लगी। पर मजा अधिक था, जोर लगा कर अन्दर घुसाता ही चला गया। मेरे दिल की मुराद पूरी होने लगी। कमर के साथ मेरे चूतड़ भी आगे पीछे होने लगे। अंजलि की गाण्ड चुदने लगी। उसके मुँह से कभी दर्द भरी आह निकलती और कभी आनन्द की सिस्कारियाँ। इतनी सुन्दर और मनमोहक गाण्ड चोद कर मेरी सारी इच्छायें सन्तुष्टि की ओर बढ़ने लगी।
उसके टाईट छेद ने मेरी लण्ड को रगड़ कर रख दिया था। मैं जल्दी ही उत्तेजना की ऊंचाईयों को छूने लगा और झड़ने लगा…मैंने तुरन्त ही अपना लण्ड बाहर खींच लिया और वीर्य की बौछार से गाण्ड गीली होने लगी। मैंने तुरन्त कपड़े से उसे साफ़ कर दिया। हम दोनो ही अब एक दूसरे को चूमने लगे।
वो अब भी प्यासी थी…उसकी चूत मेरे लण्ड से फिर चिपकने लगी थी। मेरा लण्ड एक बार फिर खड़ा हो गया था। मैंने अंजलि को बिस्तर पर लिटा दिया और उस पर छाने लगा। वो मेरे नीचे दब गई। लण्ड ने अपनी राह ढूंढ ली थी। नीचे के नरम नरम फूलों की पंखुड़ियों के पट को खोलते हुए मेरा सुपाड़ा खाई में उतरता चला गया। तले पर पहुंच कर गहराई का पता चला और वहीं पर तड़पता रहा।
खाई की दीवारों ने उसे लपेट लिया और लण्ड को सहलाने लगी। मुझे असीम आनन्द का अनुभव होने लगा। लण्ड में मिठास भरने लगी। मेरे धक्के तेज हो चले थे, अंजलि भी अपने चूतड़ों को झटका दे दे कर साथ दे रही थी। उसके मटके जैसी कमर और कूल्हे सरकस जैसी कला दिखा रहे थे। मैं चरमसीमा पर एक बार फिर से पहुंचने लग गया था। पर मेरे से पहले अंजलि ने अधिक उत्तेजना के कारण अपना पानी छोड़ दिया। मैं भी जोर लगा कर अपना वीर्य निकालने लगा। उसकी चूत वीर्य से भर गई। मेरा पूरा भार एक बार फिर अंजलि के शरीर पर आ गया। हम दोनो झड़ चुके थे। अंजलि जल्दी से उठी और अपने आप को साफ़ करने लगी।
“श्याम, सच में मजा आ गया… कल भी मौका निकालना ना !”
चाची की भोसड़ी का भोसड़ा बनाया-Antarvasnaअब उसकी नजरें मेरे पर्स पर थी। मैं समझ गया, उसे एक पचास का नोट और दे दिया। अब वो अपनी ऊपरी कमाई से खुश थी। उसने नोट सम्भाल कर रख लिये। और मुस्कुरा कर चल पड़ी…शायद अपनी सफ़लता पर खुश थी कि मुझे पटा कर अच्छी कमाई कर ली थी। और उसे आगे भी कमाई की आशा हो गई थी। लण्ड में ताकत होनी जरूरी थी पर साथ में शायद पैसे की ताकत भी मायने रखती थी… जो कुछ भी हो मैंने तो मैदान मार ही लिया था। Hindi Sex Stories
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