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मैं राज हिमाचल क रहने वाला हूं। यह बात की है जब मैं बारहवीं में Antarvasna पढ़ता था। मैं अपने मामा के यहां पेपर देने गया था।
वहां पड़ोस में एक लड़की सुन्दर सी, मस्त फ़िगर वाली रहती थी। नाम था हिना। वो मुझ पर पहले दिन से ही लाइन मारने लगी थी पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया.
एक दो दिन में वो मुझ से बात भी राजे लगी और हम लोग एक दूसरे को इशारे भी राजे लगे। एक दिन जब मामा काम पे गये थे और मामी बच्चों के साथ पड़ोस में गयी थी तो वो बाहर छोटे बच्चों के साथ खेल रही थी।
मैंने बड़ी हिम्मत कर के उसे इशारा किया और अपने पास बुलाया मगर उसने आने से मना कर दिया।
उस दिन के बाद मैंने सोच लिया कि कुछ ना कुछ तो जरुर करुंगा उसे पाने के लिये।
मेरे मामा शाम को 7:30 बजे वापिस आते थे। उस के थोड़ी देर बाद जब थोड़ा स अन्धेरा हो गया तो सब बच्चे घर चले गये और उस ने मुझे इशारा कर के मुझे बुलाया, मैं उसके पास गया मगर पड़ोस की एक औरत वहां आ गयी और उससे बात राजे लगी।
मैं बात बिना किये ही आगे चला गया।
थोड़ी देर बाद जब वापिस आया तो वो अकेली खड़ी थी। मैं उससे बात राजे लगा। पहले तो हम इधर उधर की बातें करते रहे फ़िर वो बोली कि आप मुझे भूल तो नहीं जाओगे।
मैंने कहा कि भूलूंगा तो नहीं मगर चाहता हूं कि ये याद थोड़ी शानदार और हसीन हो जाये।
यह सुन कर वो शरमा गयी।
उस समय काफ़ी अन्धेरा हो गया था और उसने बाहर की रोशनी भी नहीं जला रखी थी। हम अन्धेरे में ही बातें कर रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आगे कैसे बढूं। उस तरफ़ भी आग बराबर लगी थी.
वो हिम्मत कर के बोली- मुझे एक किस करो.
तो मैंने पूछा- कहां पे?
तो वो बोली- गाल पे।
मैंने कहा- नहीं मेरा दिल होठों पे राजे को कर रहा है।
उसने कहा- जहां दिल करता है वहीं कर लो।
मैंने उसे अपनी बाहों में पकर लिया और एक जोरदार चुम्मी ली उसके होठों पे। उसका गदराया बदन मेरे हाथों में था। पहली बार मैंने ऐसे किसी लड़की को पकड़ा था।
हम दोनों बहुत गरम हो गये थे।
उसने कहा कि यहां कोई आ जायेगा, चलो मेरे कमरे में चलो।
मैंने पूछा- घर पे कोई नहीं है?
वो बोली- पापा मम्मी बाहर रहते हैं, यहां मैं और भैया रहते हैं। वो भी आज नहीं आयेंगे। मेरे साथ मेरी एक भतीजी है 5 साल की, उसे पहले ताई जी के पास भेज देती हूं थोड़ी देर के लिये।
उसने फ़टाफ़ट भतीजी को भेज दिया और मैं उस के कमरे में चला गया।
दरवाजा बद करके हम एक दूसरे से लिपट गये। मैंने उसे बिस्तर पे गिरा लिया और उस की कमीज उतार दी। मैं उसके मोम्मों को दबाने लगा। हम काफ़ी देर एक दूसरे को चूमते, चूसते रहे। मैंने उस के मोम्में खूब चुसे पर दिल नहीं भरा।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और हम डर गये।
हिना ने पूछा- कौन है?
तो बाहर उसकी भतीजी थी।
उसने मुझे फ़टाफ़ट छिपने के लिये कहा। मैं बिस्तर के नीचे छिप गया।
उस ने दरवाजा खोला और कुछ बात करके भतीजी को फ़िर कहीं भेज दिया। दरवाजा बद करके वो वपिस आयी तो मैं निकला। मैंने देर ना करते हुए उसकी सलवार उतार दी और जल्दी से उसकी चूत में अपना लन्ड घुसा दिया।
मगर बड़ी दिक्कत के साथ अन्दर गया और उसके आंसू निकल आये।
वो चीखी- निकालो बाहर इसे!
मगर मैं अन्दर घुसाये जा रहा था। मेरे कुछ रुकने पे वो सामान्य हुई।
अब मेरे हल्के हल्के धक्कों से उसे मजा आने लगा और वो सिस्कारियां भरने लगी। मैं उसे चोदता रहा वो मजे लेती रही।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे कस के पकड़ लिया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- तुम धक्के लगते रहो, मजा आ रहा है।
मैं धक्के लगाता रहा और मैंने अपने लन्ड पे कुछ गरम गरम महसूस किया। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मुझे भी मजा आ रहा था। मैंने धक्के तेज कर दिये। थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया।
हम एक दूसरे से लिपटे रहे और चूमते रहे। कुछ देर बाद हमने कपड़े पहन लिये।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
हिना ने पूछा- कौन है।
बाहर उसकी भतीजी थी.
हिना ने मुझसे कहा- तुम अभी छुप जाओ, मैं इसे कहीं और ले जाती हूं, पीछे से तुम निकल जाना। हम कल मिलेंगे।
मैं वहां से आ गया।
अगले दिन उसका भाई आ गया और हम दोबारा नहीं मिल पाये।
एक दो दिन में मैं वापिस आ गया। फ़िर 3 – 4 साल बाद वहां गया तो उसकी शादी हो चुकी थी, मगर उसने कहा था कि भूलना मत और सही में मैं उसे आज भी नहीं भुला पाया हूं. Antarvasna
दोस्तो, मेरा नाम राजवीर है. मैं 28 साल का हूँ.
मेरी बीवी का नाम हर्षा है और वह 25 साल की है.
हम लोग गुजरात में जूनागढ़ के रहने वाले हैं.
मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं.
अपनी बीवी को मैं बहुत प्यार करता हूँ. मेरी बीवी भी मुझे बहुत प्यार करती है.
मैं और मेरी बीवी अपनी अपनी फैन्टेसी हर तरीके से पूरी करते हैं.
यह पोर्न बीवी Xxx कहानी मेरी पत्नी की है.
एक दिन रात में बेड पर हर्षा ने मुझसे कहा- बेबी, आज मेरे साथ कुछ अजीब हुआ था.
मैंने कहा- क्या हुआ था डार्लिंग?
हर्षा- शाम को मैं जब बाल्कनी में खड़ी होकर कॉफी पी रही थी. तब रोड के पास से एक जवान लड़का साइकल पर खड़े होकर मुझको ताड़ रहा था.
मैंने कहा- सच में!
हर्षा- हां … और जब मैंने उसकी तरफ देखा, तो उस ने मुझे हाय का इशारा भी किया.
मैंने कहा- क्या … नहीं, वह तुम्हें कोई और समझ रहा होगा!
हर्षा- हां जी, मुझे भी ऐसा ही लगा और मैं भी उसे नजरअंदाज करके बाल्कनी से अन्दर आ गई.
मैंने कहा- अच्छा काम किया … चलो अब कुछ अपना मनोरंजन करते हैं.
हर्षा- हमेशा तुम्हें मेरी लेने की पड़ी रहती है … हा हा हा.
मैंने कहा- अब क्या करूं, तुम हो ही ऐसी माल!
और मैंने उसको अपने पास खींचा और उसके साथ चूमाचाटी करने लगा.
जल्दी ही हमारे कपड़े निकल कर दूर हो गए और चुदाई का कार्यक्रम चालू हो गया.
हम दोनों में दो बार धकापेल हुई और झड़ कर थक गए, फिर एक दूसरे से यूं ही नंगे लिपट कर सो गए.
अगले दिन सवेरे मैंने नाश्ता किया और ऑफिस चला गया.
लेकिन लंच करते हुए भी रात की बात मेरे दिमाग़ में चल रही थी कि कोई अजनबी लड़का मेरी बीवी को ताड़ रहा है और हाय भी बोल रहा है.
मैं भी इस बात को कुछ समय के लिए भूल गया और शाम को घर लौट आया.
हर्षा ने फिर बतायार- जी सुनो.
मैंने कहा- हां बोलो डियर!
हर्षा- वह जो कल आपको बोला ना … वह लड़के के बारे में!
मैंने कहा- हां हां … क्या हुआ? उसने आज भी कुछ किया क्या?
हर्षा- हां, आज भी उसने मुझे हाय का इशारा किया. मैंने इधर-उधर देखा तो उस वक्त हमारी बिल्डिंग में कोई भी बाहर नहीं था, सिर्फ़ मैं ही थी. तो मैंने भी उसको हाय कह दिया.
मैंने कहा- फिर?
वह- उसने मुझे इशारों इशारों में कहा कि तुम बहुत खूबसूरत हो. मैं थैंक्यू कह कर अन्दर आ गई.
मैंने कहा- ओह … क्या तुम्हें वह लड़का परेशान कर रहा है?
हर्षा- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है. वैसे भी अगर कुछ परेशानी होती, तो तुम्हें कह देती.
मैंने कहा- ठीक है. अगर वह कुछ परेशान करता है, तो मुझे बताना.
हर्षा- ओके बेबी.
मैंने उस चीज़ को अनदेखा किया।
अगले दिन मेरी बीवी ने फिर से मुझसे कहा- बेबी सुनो, वह लड़का आज भी आया और उसने आज भी इशारे में बात की. मैंने भी थोड़ी बात की. उसने इशारे में मुझे अपना नंबर दिखाया, जिसे मैंने नोट किया पर कॉल नहीं किया. उसने इशारा किया कि वह कुछ बात करना चाहता है.
मैंने कहा- अगर तुम्हें लगता है कि वह अच्छा लड़का है, तो उससे दोस्ती कर लो. वैसे भी यहां तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है. वह शायद यहां पर तुम्हारी कुछ मदद कर दे.
हर्षा- ठीक है बेबी … कल करती हूँ.
अब मेरे मन में भी अब उस लड़के को लेकर कुछ ग़लत विचार आने लगे थे.
लेकिन मैंने सोचा कि वह लड़का शायद वैसा नहीं है.
इसी लिए मैंने इस चीज़ को अनदेखा कर दिया.
अगले दिन मैंने हर्षा से पूछा- हर्षा क्या हुआ उस लड़के का?
हर्षा- हां वह लड़का अच्छा है. आज भी शाम आया था … तो मैंने उसको देखते हुए कॉल किया. उसने भी एक रिंग में ही कॉल उठा लिया.
अब उस लड़के ने कॉल पर बताया कि क्या हुआ.
अजनबी लड़का- नमस्ते भाभी.
हर्षा- नमस्ते तुम्हारा नाम?
अजनबी- जी मैं यश … और आपका नाम?
हर्षा- जी, मैं हर्षा.
यश- ओह बहुत प्यार नाम है.
हर्षा- हां … यश तुम हमेशा मेरी बाल्कनी में क्यों देखते रहते हो?
यश- वह हर्षा भाभी ये घर 3 साल पहले हमारा था. जिसे डैड ने बेच दिया था. लेकिन इस घर से मेरा बचपन जुड़ा है सो हर दिन आकर देखता हूँ.
हर्षा- ओह … मगर पहले तुम्हें कभी नहीं देखा. इन चंद दिनों में ही तुम कई बार दिखे.
यश- वह भाभी, मैं राजकोट चला गया था. अब वापस आ गया हूँ.
हर्षा- ओह …
उसके बाद कुछ ऐसे ही डेली लाइफ की बात होती रही पर उससे आगे कुछ नहीं.
फिर उसने खुद ही बाय कह कर कॉल कट कर दिया.
मैंने कहा- क्या तुमने यश को नया दोस्त बना लिया है?
हर्षा- हां हां … उसने कहा अगर मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हो तो वह एक बार घर आकर अन्दर से देखना चाहता है.
मैं समझ गया कि वह भावनाओं में बांध कर मेरी बीवी के पास आना चाहता है.
पर मुझे मेरी बीवी पर यकीन था इसलिए मैंने भी उसको इग्नोर करके कहा- ठीक है बुला लो, कोई प्रॉब्लम नहीं है.
हर्षा- ओके बेबी, कल बुला लूँगी.
मैंने कहा- ओके बेबी.
अगले दिन मैं ऑफिस से घर आया.
तब हर्षा ने मुझसे कहा- वह लड़का आया था.
मैंने पूछा- क्या कहा उसने?
तब हर्षा ने कहा- कुछ नहीं, उसने अपने बचपन की बातें बताईं. बड़ा क्यूट है और बातों-बातों में ही वह रोने लगा. मैंने उसको अपना कंधा दिया. वह मुझे हग करके रोने लगा. फिर हम दोनों ने कुछ सेल्फ़ियां भी ली थीं.
मैंने कहा- दिखाना सेल्फ़ियां!
हर्षा- हां ये देखो.
अब मैंने देखा, वह लड़का अच्छा था.
कुछ फ़ोटोज में उसने अपना हाथ हर्षा के ऊपर रख रखा था.
मैंने कहा- हम्म … अच्छा लड़का है.
हर्षा- हां.
अब मैं समझ चुका था कि लड़का कुछ तो करेगा.
पर मैं अपनी बीवी को परखना चाहता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती है या नहीं. तो जो भी हो रहा है, उस सबको इग्नोर करने का ठान लिया.
कुछ दिन ऐसे ही चला.
ये दोनों कॉल बात करते.
जब मैं हर पर नहीं रहता, वह घर आता और मेरी बीवी हर्षा से बातें करता.
एक दिन हर्षा ने मुझसे कहा कि उसको शॉपिंग करने जाना है.
मैंने कहा कि मैं बिज़ी हूँ.
तो उसने कहा- फिर मैं यश के साथ जा रही हूँ.
मैंने भी कहा- हां ठीक है चली जाओ.
उसने मेरे सामने ही यश को फोन किया.
वह तय समय पर आ गया और दोनों ऑटो में जाने लगे.
मैंने उन दोनों के जाते ही घर में कैमरे और माइक्रोफोन्स सैट कर दिए.
पूरा घर अपने कंट्रोल में सैट कर दिया जिससे वह जो भी करे, उस सबका मुझे पता चल जाए.
अब मैं घर पर उन दोनों के आने का इंतज़ार करने लगा पर वे दोनों आए ही नहीं.
मैं नजदीक के मॉल में गया.
उधर पार्किंग एरिया में अपनी कार के पास खड़ा होकर उनके आने का इंतजार कर रहा था.
तब वह दोनों कई सारे शॉपिंग बैग लेकर आते दिखे.
सारे थैले यश ने उठाए हुए थे.
किसी कारण से बीच में कुछ बैग गिर गए तो वह बैग उठाने लगा.
मैंने देखा कि उस वक्त हर्षा हंस रही थी.
यश ने मायूस सी शक्ल बनाई तो हर्षा ने उसको बैग उठा कर दे दिए.
वह तब भी कुछ उदास सा था.
तब हर्षा ने उसके गाल पर एक छोटी सी पप्पी कर दी.
मैं ये देख कर शॉक हो गया था.
वह दोनों ऑटो करके घर आ गए.
मैं भी वापस आ गया.
मैंने नीचे खड़े होकर अपने मोबाइल पर देखा कि वे दोनों क्या कर रहे हैं.
मेरे घर के हिडन कैमरे आदि वाई फ़ाई से जुड़े हुए थे.
मैं देख कर शॉक हुआ कि यश हर्षा को किस कर रहा है.
हर्षा- उमम्म … उम्माह …. ओंम …
यश- आह … उम्म … उम्म …
फिर थैले वहीं रख कर उसने हर्षा को सोफे पर गिरा दिया और उसे किस करने लगा.
किस करते हुए ही उसने हर्षा के कपड़े निकाल दिए.
साथ ही यश ने भी अपने कपड़े निकाल दिए.
वह हर्षा की टांगों को अपने कंधे पर रख कर उसे चोदने लगा.
हर्षा- आह … उम्म … एकदम से पेल दिया … आह मर गई.
यश- आह … बहुत टाइट हो यार आह!
भकाभक चोदते हुए उसने हर्षा के बूब्स हाथ में पकड़ लिए और एक को चबाते हुए वह मेरी बीवी की चूत में अपना लंड तेज रफ्तार से चला रहा था.
हर्षा- आह … आह … यश बेबी आरामम्म … सेए … आह.
यश- आह … आ … क्या … … मम्मे हैं भाभी तेरे … आह … मस्त माल है यार तू.
कुछ देर बाद यश और हर्षा दोनों झड़ गए.
यश- अहह …
हर्षा- उई मांआ … आअहह … तोड़ दिया … आह.
वे दोनों हांफ रहे थे.
कुछ देर बाद वे अलग हुए और यश अपने कपड़े पहन कर वहां से जाने लगा.
हर्षा अभी भी सोफे पर नंगी पड़ी थी.
मैंने देखा कि यश नीचे आ गया था और सड़क पर आने लगा था.
उसे आता देखकर मैं छिप गया.
बाद में मैंने फोन में फिर से देखा, हर्षा उठ कर अपने कपड़े पहनने लगी.
कुछ देर बाद देखा कि हर्षा रो रही थी.
अब मैं समझ गया कि हर्षा बहक गयी और वासना में उससे चुद गयी थी.
मैंने उसको इस बात का पता नहीं चलने दिया कि मैं उसकी हरकत जानता हूँ.
उस दिन हर्षा सारे दिन चुप रही और अपने ही ख्यालों में डूबी रही थी.
अगले दिन सवेरे जब मैं सो रहा था. तब हर्षा के फोन पर यश का कॉल आया कि वह नीचे है और पार्किंग में मिलना चाहता है.
उसने मना कर दिया.
यश ने कहा- सिर्फ़ माफी मांग कर चला जाऊंगा और कभी नहीं दिखूंगा.
उस वक्त मैं आंख बंद करके सुन रहा था.
फिर मैंने देखा कि हर्षा जा रही है.
उसके जाने के पांच मिनट बाद मैं भी नीचे आया और पार्किंग में एक कार के पीछे खड़ा हो गया था.
यश अपनी साइकिल से आया था.
हर्षा लिफ्ट से नीचे आई और उसे देख कर उसने कहा- अब क्या बचा? तुमको मैं दोस्त समझती थी, पर तुमने मुझे ग़लत समझा … छी!
यश- आई एम सॉरी. जो भी हुआ … पर जो भी हुआ तुम भी उससे खुश थी ना!
हर्षा- क्या मतलब तुम्हारा?
यश- हां, तुम मज़े से मुझसे चुदवा रही थीं ना!
हर्षा- ऐसा नहीं है, वह हालात के चलते ऐसा हो गया था.
यश- अगर ऐसा है तो मुझे क्यों नहीं रोका?
हर्षा चुप रही.
यश- तुमने मुझे वहां मॉल की पार्किंग एरिया में भी तो किस किया था. उसका क्या मतलब था?
हर्षा- तुम बहुत खराब लड़के हो. तुम मुझे फिर से कभी मत दिखना … चले जाओ.
यश ने हर्षा को पकड़ कर दीवार से सटा दिया और उसे किस करने लगा.
यश- उम्म म्मा उम्माह.
हर्षा विरोध करने वाला किस कर रही थी- नहीं … एमेम .. उम्माह.
यश ने थोड़ी देर किस किया और कहा- ये लो गिफ्ट … इसको पहन लेना और रेडी रहना. दोपहर में आकर तुम्हारी डोरबेल बजा कर 4 बार नॉक करूँगा. दरवाजा खोल देना. अगर नहीं खोला, तो चला जाऊंगा. आगे तुम्हारी मर्ज़ी.
ये बोल कर वह चला गया.
हर्षा वहां पर एकदम बदहवास हाल में थी और एकदम चुप थी.
वह यश की दी हुई ड्रेस को लेकर लिफ्ट की ओर जाने लगी.
मैं भी भागता हुआ दूसरी लिफ्ट से फ्लैट में पहुंचा और उसके अन्दर आने से पहले मैं बेड पर पड़ा था.
वह आई, मुझे देखा और आंखों से आंसू पौंछती हुई बाथरूम में चली गई.
उसने अपनी उस ड्रेस को कपबोर्ड में रख लिया.
मैं उठा और तैयार होने लगा. मैंने ऐसा दिखाया जैसे कुछ नहीं हुआ.
फिर जैसे ही हर्षा ने ब्रेकफास्ट दिया.
मैं खाकर चला गया.
जाते हुए मैंने सोच लिया कि अगर इस बार हर्षा ने कुछ किया मतलब ये मुझे धोखा दे रही है. मैं इसको तलाक दे दूँगा. क्योंकि यश ने साफ कहा था कि दरवाजा खोलना.
अब ये हर्षा के ऊपर है कि वह क्या करती है.
उस दिन मैं ऑफिस नहीं गया.
घर से निकल कर एक ग्राउंड में जाकर कार पार्क करके बैठ गया और फोन में देखने लगा.
हर्षा अपना काम कर रही थी.
कुछ देर बाद वह अपने रूम में गयी.
उसके कुछ देर बाद वह बाथरूम में यश की दी हुई ड्रेस को लेकर चली गयी.
जब वह बाहर आई तो मैं चौंक गया.
उसने एकदम झीनी ड्रेस पहनी हुई थी.
कुछ देर बाद डोर बेल बजी और दरवाजा चार बार नॉक किया गया.
पहली बार हर्षा ने नहीं खोला.
दूसरी बार उसने खोला तो देखा सामने यश था.
उसने हर्षा को देख कर उसको दरवाजे से ही पकड़ लिया और किस करना चालू कर दी.
हर्षा ने दरवाजा बंद कर दिया और यश उसको किचन में ले गया.
धीरे धीरे उसके सारे कपड़े निकाल कर हर्षा को किचन के प्लेटफॉर्म पर टिका कर चोदना चालू कर दिया.
हर्षा- आह … आह … धीरे करो!
यश- आह चैन कहां मिलता है तुम्हें देख कर … बस कच्चा खा जाने का जी करता है … आह लो और लो … आह.
वह हर्षा को चोदते हुए ही उठा कर बेडरूम में ले गया और वापस चोदने लगा.
हर्षा- आह मां … आह कितनी अन्दर तक पेल रहे हो … हाड़ मांस की ही हूँ ऐसे मत कुचलो यश आह … धीमे करो ना!
यश- आह उफ़फ्फ़!
कुछ ही देर में मेरी Xxx बीवी हर्षा की चूत ने अपना गर्म लावा छोड़ दिया.
हर्षा- उई मां आहह … आह.
यश- आ हां हर्षा यू आर सो हॉट बेबी.
यश ने अपना लंड हर्षा की चुत से बाहर निकाल कर उसको दिखाया. उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था.
यश हर्षा को घुमा कर उसकी गांड के छेद में डालने लगा.
हर्षा मना कर रही थी.
वह फिर भी नहीं माना.
सने अपना लंड हर्षा की गांड के छेद में डाल ही दिया.
हर्षा- आआआ आह मर गई!
यश- आह … उफ्फ़!
कुछ देर बाद यश का पूरा लंड हर्षा की गांड में चला गया और वह हर्षा की गांड मारने लगा.
यश- आह … जान मजा आ रहा है ना!
हर्षा- आह साले तू बहुत कुत्ता है आह पीछे से भी फाड़ दी तूने … आह एयेए!
कुछ देर बाद वह हर्षा की गांड में झड़ गया.
यश- आआआह.
फिर वह उठा और उसने हर्षा को लंड चूसने को कहा.
मेरी पोर्न बीवी हर्षा ने बहुत देर लंड को चूस कर यश को मजा दिया.
उसका लंड फिर से तन गया था और जब तक यश का लंड फिर से नहीं झड़ा, तब तक यश ने हर्षा के मम्मों में लंड फंसा कर चोदा, उसकी जांघों में लौड़ा फंसा कर रगड़ा और आखिर में यश ने हर्षा के मुँह में अपना गाढ़ा लावा डाल दिया.
इस तरह से उन दोनों ने तीन घंटे तक चुदाई की और काफी थक गए.
वे दोनों बेड पर वैसे ही नंगे पड़े थे.
मैं जो भी फोन से देख रहा था, उससे मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.
वह सब देख कर मैं मुठ मारने लगा और शांत हो गया.
मैंने तय किया कि ये भी मेरी एक फैन्टेसी की तरह है. अब हर्षा को तलाक देना कैंसिल … अब से उसकी चुदाई दूसरों के साथ देखना चालू.
उस दिन से मैंने कई बार फोन में यश को हर्षा की चुदाई करते देख कर अपना लंड हिलाया.
न जाने क्यों मुझे भी मज़ा लंड हिलाने में मजा आने लगा था.
मैंने हर्षा को साथ ही रखा क्योंकि मुझे उसका ये रंडीपना पसंद आने लगा था.
वह मुझसे छुप कर सेक्स करती थी तो ये और भी पसंद आने लगा था.
इस तरह से हम तीनों मज़े ले रहे थे.
हर्षा भी मुझसे झूठ बोल कर कह देती थी कि यश बहुत ही समझदार दोस्त की तरह पेश आता है.
मैं भी उसकी बात को सुनकर नजरअंदाज कर देता था.
मैंने रीता को तीन Antarvasna बार दिन और चार बार रात में चोदा। फिर एक दिन नीलम ने मुझ से चुदवा ही लिया।
पर कैसे?
वो आज मैं आपको बताता हूँ कि कैसे मैंने रीता के बाद नीलम को चोदा!
अगले दिन मैं जल्दी 5 बजे ही जगा, जब सब लड़कियाँ नहाती थी और खिड़की के पास बैठ गया। जब सविता आई तो उसने मेरे कमरे की तरफ झांका और बाथरूम में चली गई। और जाते ही उसने गीता की गांड पर हाथ मारा और कहा- क्या हाल है मेरी चुदक्क्ड़?
और मेरी खिड़की की तरफ मुँह करके पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो गई और गीता से कहने लगी- यार गीता, मेरी चूत में बहुत आग लगी है, किसी असली लंड से इसको चुदवा दे!
और अपनी चूत के होठों को खोलते हुए उसे मेरी तरफ मुँह करके दिखाने लगी जिससे मुझे उसकी चूत अन्दर तक लाल दिखाई दी और मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया।
इतने में गीता बोली- अपने राजेश के लंड से चुदवा ले ना!
इतने में बाथरूम में रीता घुसते हुए बोली- यार कौन राजेश से चुदवाना नहीं चाहता? सभी चाहती हैं पर चुदवाने का बहाना तो तलाश करो!
और रीता ने अपनी एक उंगली सविता की चूत में डाल दी तो इस पर सविता बोली- अब इसे तेरी उंगली की नहीं, राजेश के लंड की जरूरत है!
फिर सभी लड़कियाँ मस्ती से नहाकर अपने कॉलेज चली गई और मैं भी नहाकर अपने कॉलेज चला गया पर जब मेरा दिल नहीं लगा तो वापस कमरे पर आ गया।
वहाँ देखा कि नीलम बाथरूम में नंगी ही नहा रही है!
तो मैं भी कपड़े धोने के बहाने पूरे कपड़े उतार कर सिर्फ अंडरवीयर में बाथरूम में चला गया। नीलम मुझे देख कर बाथरूम में इधर-उधर चक्कर लगाये क्योंकि वो अपने कमरे से नंगी ही नहाने आई थी। तो मैंने कहा- क्या हुआ नीलम जी? आप ऐसे इधर उधर क्यों भाग रही हो? अब तो मैंने आपका सब कुछ देख लिया है, चूत भी चूचियाँ भी! बड़ी मस्त चूत और चूचियाँ हैं!
इतना सुनकर वो बोली- मेरा इतना देख कर भी अपना लंड इस टेंट में छिपा रखा है?
तो मेरा लंड निक्कर में फड़फड़ाने लगा। नीलम मेरी निक्कर नीचे सरका कर उसे चूसने लगी तो मेरा लंड एक लोहे की छड़ की तरह हो गया।
मैं बोला- साली, यदि तू मेरा चूस रही है तो कुछ मुझे भी चुसा!
और मैंने उसकी टांग पकड़ के उसकी टांग ऊपर उठा के उसे उल्टा लटका दिया और उसकी चूत चूसने लगा और वो मेरा लंड!
15 मिनट के बाद वो सी सी… करके अपनी टांग दबाने लगी और झड़ गई। मैं उसकी चूत का नमकीन और स्वादिष्ट रस पी गया। फिर मैंने उसे खड़े खड़े ही पल्टा और उसको लंड पर बिठा कर चूत में लंड घुसा दिया और चोदने लगा। वो भी मेरे कन्धों को पकड़ कर अपनी गांड हिलाने लगी। अब वो पूरी मस्ती में आ चुकी थी, बोली- राजेश, प्यारे मैं तुझे पहले ही दिन देख कर समझ गई थी कि तू ही मेरी चूत की आग बुझा सकता है। आज मेरी चूत की आग चोद-चोद कर बुझा दे।
मैं बोला- मैं तो तब ही समझ गया जब आपको मैंने बाथरूम में झांट काटते हुए देखा और आपकी गुलाबी चूत ने मेरा जीना हराम कर रखा था। यह लंड मुझे जीने नहीं दे रहा था, आज मुझे शांति मिली है जब मैंने तेरी चूत में इसे घुसा दिया है। अब रोज तेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाया करूँगा।
फिर मैं उसे दबा कर चोदता रहा और वो भी मुझे खूब गांड हिला कर उकसाती रही। जब मैं उसे तीसरी बार चोद रहा था तो नीलम बोली- राजा, अब मुझे लंड पर बैठा कर चोदते हुए मुझे मेरे कमरे में ले चलो! यहाँ कोई आ जायेगा!
फिर मैं उसे लंड पर बिठा कर उसके कमरे में लाकर उसके बेड पर घोड़ी बना कर चोदने लगा। जब मैं नीलम को घोड़ी बना कर चोद रहा था तो अचानक रीता आ गई और वो बड़ी तेजी से कमरे में घुसी और घुसते ही रुक गई और हमें देखा तो मैंने उसे आँख मारी, वो समझ गई कि अपनी चुदाई की बात नहीं बतानी है।
वो नीलम पर बरस पड़ी- आप तो राजेश से चुदवा रही हैं और यहाँ हमरी चूत की फिकर ही नहीं है!
तो नीलम उसे अपने पास बुलाया और उसकी चूची दबा कर बोली- यार, तू क्या समझती है कि मुझे पता नहीं है कि तू कल कहाँ थी जब मैं और सविता आपस में प्लास्टिक के लंड से चुद रहे थे!
तो मैं अचानक चौंका- आपको कैसे पता चला?
तो नीलम बोली- जब हम चुदाई करते हैं और रीता होती है तो यह जरूर हमसे अपनी चूत में लंड डलवाने आती है और कल यह आई नहीं! और मैंने तुम्हें कमरे में घुसते हुए देख लिया था। फिर जब सविता मेरी चूत में प्लास्टिक के लंड से चुदाई कर रही थी तो मैंने देखा कि कोई तेरे लंड को नीचे बैठे चूस रहा है क्योंकि मुझे रीता के सर के बल दिखे और जब मैंने सविता को छोड़ा तो मैंने देख लिया था कि तुम रीता को घोड़ी बना कर चोद रहे थे।
इस पर रीता बोली- दीदी आपको आना चाहिए था असली लंड से चुदवाने!
नीलम बोली- मैंने सोचा कि अब मैं तो प्लास्टिक के लंड से चुदवा ही रही हूँ, चलो तुम ही चुदवा लो!
फिर मैंने नीलम को दो बार और रीता को एक बार चोद कर रात को चोदने का फैसला किया और इसके बाद सविता, गीता, मीरा को चोदा। Antarvasna
मेरा नाम निक्की Antarvasna है और अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है। दोस्तो, मैं दावे से कह सकता हूँ कि मेरी यह कहानी पढ़ने के बाद सभी लड़के अपने लण्ड को मसले बिना नहीँ रह पाएंगे और सभी लड़कियाँ अपनी चूत में ऊँगली करती नज़र आयेंगी।
मेरी उम्र 25 साल है और मैं अजमेर का रहेने वाला हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। कॉलेज मै प्रवेश लेने के कुछ ही दिन में हमारा अच्छा खासा ग्रुप बन गया। उसी ग्रुप में एक लड़की थी सिमी। देखने में वो एकदम सेक्सी लगती थी। जब चलती थी तो ऐसा लगता था कि दिल पर छुरियाँ चला गई। उसकी गांड बहुत ही मस्त और मोटी थी। उस पर उसका गोरा बदन और मोटे मोटे बोबे ! उसको देखते ही ऐसा लगता था कि बस कैसे भी इसे चोद डालूँ !
धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ती जा रही थी और हम एक दूसरे से मस्ती करने लगे थे। कुछ दिनों बाद इससे पहले कि कोई और उसे प्रपोज़ करता मैंने उसे प्रपोज़ कर दिया और उसने भी हाँ कह दी। बस फिर क्या था, मेरे तो मन की हो गई थी। अब तो मुझे अपना काम बनता नज़र आ रहा था। धीरे धीरे हमारा रिश्ता बढ़ने लगा और हम एक दूसरे से काफी खुलने लगे। कभी कभी मैं उसके अंगों को भी छू लेता। शुरू में तो उसने एक दो बार एतराज़ किया पर फ़िर धीरे धीरे उसे भी ये सब अच्छा लगने लगा।
अब हम दोनों काफी खुल गए थे और सेक्स के बारे में भी बातें करने लगे थे। मेरी सारी योजना मुझे सफल होती नज़र आ रही थी।
एक दिन मैंने उसे एक रेस्टोरंट में चलने को कहा तो वो झट से राजी हो गई। मैं उसे अपने ही एक दोस्त के रेस्टोरंट में ले गया जहाँ पर हट-सिस्टम था। हम वहाँ कुछ देर बैठे और फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया।
पहले तो वो बोली- यह क्या कर रहे हो ? कोई देख लेगा !
पर जब मैंने उसे बताया- कोई नहीं आयेगा ! यह मेरे दोस्त का ही रेस्टोरेंट है और मैंने उसे पहले ही मना कर दिया है कि हमारी हट में वेटर को दोबारा मत भेजना !
तो उसने कोई आपत्ति नहीं जताई और सीधी मेरी बाहों में आ गई। मैंने भी बिना कोई देर किये अपने होंट उसके होंटों से सटा दिए और उसे जोर से चूमने लगा। शुरू में तो वो साथ नहीं दे रही थी पर जब मेरे हाथ धीरे धीरे उसके बदन पर रेंगते हुए उसके वक्ष तक पहुँचे और मैंने उन्हें उसके कुरते के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया तो कुछ ही देर में वो भी गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी। उस दिन मैंने उसके होटों का मस्त रसपान किया और उसके स्तनों को भी दबा दबा कर लाल कर दिया।
इस तरह हमारा एक दूसरे के बदन से खेलना कुछ दिनों तक जारी रहा और फ़ोन पर भी मैं उससे सेक्सी बातें करता रहा।
एक दिन उसके घर कोई नहीं था तो वो कॉलेज नहीं आई। मैंने उसके घर पर फ़ोन किया तो उसने मुझे घर पर ही आने को कह दिया। मै तो कब से ऐसे ही मौके की तलाश में था। मैंने समय बर्बाद न करते हुए तुरंत ही अपनी गाड़ी उठाई और उसके घर पहुँच गया। जैसे ही मैंने घण्टी बजाई सिमी ने दरवाजा खोला। उसने हल्के गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी और वो उसमे मस्त लग रही थी। उसने मुझे अन्दर बुलाया और बैठने को कहकर पानी लेने चली गई। वो पानी लेकर आई और मेरे सामने बैठ गई।
मैंने उससे पूछा- सब कहाँ गए हैं?
तो उसने बताया कि भाई स्कूल गया है और ५ बजे तक आयेगा और मम्मी और पापा किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हैं और वो भी शाम तक ही आएंगे।
यह सुनकर मेरे चेहरे पर ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी।
तभी उसने मुझसे पूछा- क्या लोगे ?
तो मैं भी तपाक से बोला- तुम को !
इतना सुनते ही वो बोली- तुम बहुत शरारती हो गए हो !
इतने में मैंने खड़े होकर उसे चूम लिया और अपनी बाँहों में भर लिया। धीरे-धीरे मेरे हाथ उसके बदन पर ऊपर-नीचे रेंगने लगे। वो भी मेरी बाँहों में समाती चली गई। उसके होंट मेरे होंटो से सट चुके थे। तभी मैंने उसके वक्ष पर हाथ डाल दिया और उसके मस्त मोटे स्तनों को हाथ में ले लिया और सहलाने लग गया। उसके स्तनों को हाथ में लेते ही मैं समझ गया कि आज उसने ब्रा नई पहनी है। मैंने उसे एक ही झटके में गोद में उठा लिया और पूछा- तुम्हारा बेडरूम कहाँ है?
उसने हाथ के इशारे से मुझे रास्ता बताया। बेडरूम में आकर मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया, उसकी बगल में लेट कर उसे चूमने लगा और बोला- आज मैं तुम्हारा बदन देखना चाहता हूँ !
यह कहकर मैंने उसे नाइटी उतारने के लिए कहा। पहले तो उसने मना किया पर मेरे जोर देने पर वो मान गई और नाइटी उतार दी। जैसे ही उसने नाइटी उतारी, उसके गोल गोल संतरे जैसे स्तन मेरी आँखों के सामने थे। क्या मस्त चूचियाँ थी ! उन्हें देखते ही मेरा सात इन्च का लंड सलामी देने लगा और मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर मस्त तरीके से चूमने लग गया।
इस पर वो बोली- अब तुम्हें भी अपने कपड़े उतारने होंगे !
उसके इतना कहते ही मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर एक तरफ़ फ़ेंक दिए और उससे चिपक गया। उसका गोरा बदन देख कर मैं मस्त हुआ जा रहा था। अब मैं उसके गोरे गोरे और मोटे स्तन चूसने लग गया और एक हाथ को उसके पूरे बदन पर ऊपर से नीचे तक घुमा रहा था। धीरे धीरे वो गर्म होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी- आआह्ह्ह्ह स्सस्सस्सस उसने लाल रंग की पैंटी पहन रखी थी मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबा दिया और सहलाने लगा।
उसके मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी और वो मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। मैंने भी मौका देखकर उसकी पैंटी मै अपना हाथ डाल दिया और धीरे से उसकी चूत के दाने को रगड़ दिया।
इतना करते ही वो एकदम से चिंहुक उठी और मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- नीचे नहीं !
पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने भी उसे अपनी कसम दी और उसके हाथ को हटा दिया। अब मैं उसकी चूत की फांकों को अपनी उंगलियों से अलग करने लगा और उसकी चूत के दाने को रगड़ने लग गया। वो बेचैन हो उठी और मुझे अपने से कसने की कोशिश करने लगी, उसकी सिसकारियाँ और भी बढ़ गई। थोड़ी देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मैं समझ गया कि यह चुदने के लिए बिल्कुल तैयार है।
तभी मैंने उसकी पैंटी को उसके बदन से अलग कर दिया और उसने भी कोई विरोध नहीं किया। उसकी चूत क्या मस्त थी ! बिल्कुल गुलाबी ! एक भी बाल नहीं था उसकी चूत पर ! उसे देखते ही मैं तो जैसे पागल हो गया। मैंने बिना किसी देरी के उसकी चूत पर एक चुम्मा जड़ दिया और अपने हाथ से उसे दबाने और मसलने लग गया। वो और भी उत्तेजित हो गई और मुझसे चिपक गई।
मैंने एक बार फिर से उसके होटों को चूसना शुरू कर दिया और एक हाथ से उसकी चूत के दाने को छेड़ता रहा।
अब वो भी साथ देने लगी थी और उसका हाथ अपने आप मेरे लंड तक पहुँच गया था। मैंने भी धीरे से अपना जॉकी उतार दिया और अपना लंड उसके हाथों में थमा दिया। वो भी अब मेरे लंड से खेलने लगी थी मैंने उसे लंड मुंह में लेने को कहा तो उसने मना कर दिया पर मेरे जोर देने पर मान गई और उसे चूसने लगी, मेरे पूरे बदन में एकदम से बिजली सी दौड़ गई और मेरा लंड एकदम लोहे की छड़ की तरह सख्त हो गया। मेरे लंड को देखकर वो बोली- यह तो बहुत बड़ा है !
मैंने भी कह दिया- मजा भी बड़े से ही आता है !
और हम दोनों हंस पड़े। फिर मैंने उसे लिटा कर उसके बोबों को चूसना शुरू कर दिया और फिर से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा और धीरे से अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के द्वार पर रखकर अन्दर दाल दी। वो सिसकियाँ लेने लगी और मस्त होने लगी … उसकी मस्ती बढ़ने लगी थी, उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मै समझ गया कि यही सही समय है और उसके ऊपर आकर अपने लंड को उसकी चूत के मुख का रास्ता दिखा दिया और एक हल्का सा झटका दिया पर चूत कसी होने की वजह से लंड अंदर नहीं गया…..
मैंने थोड़ा और जोर लगाया और लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया और वो चीख उठी !
यह उसकी पहली चुदाई थी… वो मुझे हटाने लगी पर मैंने उसे समझाया- पहली बार में थोड़ा दर्द होता ही है !मैं उसे चूमने लग गया, थोड़ी देर में वो शांत हो गई तो मैंने दूसरा झटका लगाया और करीब आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। उसके मुँह से चीख निकल गई और वो रोने लगी। पर मैंने रहम ना करते हुए एक और झटका मार दिया और मेरा पूरा लंड उसकी जड़ तक जा बैठा।
वो जोर से चिल्लाई पर मैंने अपने हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया और उसे शांत रहने को कहा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। मैं कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा और उसे चूमता रहा। उसकी चूत से खून निकल रहा था। कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया और वो कमर हिलाने लगी। मैंने भी अब लंड अंदर-बाहर करना चालू कर दिया।
अब वो भी मजे लेने लगी थी और मेरा साथ दे रही थी और उसके मुँह से मस्त आवाज़ भी आ रही थी-आ आहऽऽ आआऽऽ अँऽऽ आ……..आआअ..हह……
और अब मैंने भी अपनी गति बढ़ा दी थी…….
करीब आधा घंटा की चुदाई के बाद अब वो अकड़ने लगी और अब मैं भी झड़ने वाला था। दस पन्द्रह झटकों के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।
उसके बाद मैंने उसे कई तरीकों से चोदा, वो फिर कभी बताऊंगा…..
आपको मेरी यह सच्ची कहानी कैसी लगी, मेल करके बताएँ ! Antarvasna
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मेरे पति ने मेरे बारे में आप सभी Hindi Sex Stories को तो बता ही दिया है कि मैं क्या हूँ और उन्होंने सच ही बताया है। मैं सच में बहुत ही कामुक औरत हूँ! मुझे ना जाने क्यों कम उमर से ही सेक्स करने का शौक है!
और मुझे पति भी ऐसा मिला है बिल्कुल मेरे जैसा!
वह कहता है कि अगर जैसे हम ब्लू फ़िल्म देखते हैं, वैसे ही अगर हम अपने सामने अपने किसी खास को चुदते देखें तो सेक्स का मज़ा दुगना हो जाता है।
वैसे मेरा पति भी एक नंबर का चोदु है! कभी कभी तो मुझे चोद चोद कर इतना परेशान कर देता है कि मैं ‘बस’ कह उठती हूँ।
कई बार मैं उसके सामने ही दूसरे मर्दों से चुद चुकी हूँ!
जैसा मज़ा मेरे पति को मुझे चुदवाने में आता है वैसा ही मुझे भी दूसरों से चुदने में आता है।
हमारी शुरुआत कुछ इस तरह हुई:
एक बार एक इनका दोस्त हमारे घर आया।
उसका नाम अरुण है और हम सब उसे पंकज कह कर पुकारते थे।
ये दोनों शराब पी रहे थे.
मैं भी थोड़ी देर इनके साथ बैठ कर अपने कमरे में चली गई, अपने बेटे को सुलाने के लिए!
ये दोनों पीते हुए बातें करते रहे।
थोड़ी देर में मनु मुझे देखने आए कि मैं सो गई हूँ या नहीं।
मैंने भी सोने का नाटक किया और लेटी रही।
थोड़ी देर में ये दोनों फिर बात करने लगे:
“यार तेरे तो मज़े है, अभी तू कुंवारा है और जब चाहे कोई भी लड़की पटा कर बजा सकता है!”मनु ने कहा।
“खाक मज़े है! साला किसी लड़की को पटाओ तो हफ्तों बीत जाते है! साला गश्ती ले कर आओ तो उसके रेट ऊंचे होते हैं!”पंकज ने कहा।
“तो क्या हुआ यार कोई ऐसी लड़की पटा जो पहले से ही बजी हुई हो और अपनी और बजवाना चाहती हो!”
“नहीं यार ऐसी लड़कियाँ कम ही मिलती हैं, अगर मिल भी जायें तो सालियों को मज़ा देना पड़ता है बहुत कम ऐसी होंगी जो ख़ुद मज़े दें!”
“तो फिर ख़ुद मज़े देने वाली कहाँ से मिलेगी?”
“हाँ यार अगर कोई शादीशुदा औरत जिसका एक तीन या चार साल का बच्चा हो न! वो ही फुल मज़े दे सकती है।”
“मतलब? कैसे?”
“यार जिसका अभी बच्चा हुआ हो वो और छोटा हो तो उसकी चूत अभी नई नई खुली होती है उसकी चूत में खुजली भी बहुत होती है और उस खुजली को सिर्फ़ मोटा ताज़ा लंड ही बुझा सकता है!”
“अच्छा!”
मैं अन्दर से सब सुन रही थी!
“हाँ यार ऐसी औरत के साथ मज़े ही अलग आते हैं, मैंने एक बार एक गश्ती चोदी थी, साली का फिगर इतना मस्त था! क्योंकि औरत बच्चा होने के बाद थोड़ा सा भर जाती है उसके चुचे बिल्कुल पके हुए आम की तरह हो जाते हैं
एकदम रसीले मोटे मोटे!”
“साली की गांड बाहर को निकली हुई उठी उठी सी! गोल गोल मोटी मोटी जांघें आ आहा देखते ही नंगी करके चोदने को जी चाहे!
“अच्छा यार चल अब बता तो तूने उसे कैसे चोदा? मेरा तो लंड सलामी देने लगा है!”
“बस मत पूछ यार! मैंने नहीं, उस साली ने मुझे चोदा! मैं तो सिर्फ़ उस के बताए अनुसार कर रहा था। क्या पोज़ थे उस साली के, कम से कम तीन बार उसने मुझे चोदा!”
“अच्छा यार, एक बात बोलूं? तू तो अपना दोस्त है तुझसे क्या परदा! सोनिया भी यार एक बच्चे की माँ है वो भी भरे बदन की है और तू सच कह रहा है ऐसी औरतों को चुदने का बड़ा मन करता है!”
पंकज थोड़ा सा चौंका कि ये मनु क्या कह रहा है??
“ऐसे मत देख पंकज मैं सही कह रहा हूँ, सच में सोनिया के साथ मज़ा आ जाता है!”
“पंकज तुझसे एक बात पूछूँ?”मनु ने कहा!
“हाँ हाँ! पूछ न!”
“यार तुझे सोनिया का बदन कैसा लगता है?”
अब तो पंकज बिल्कुल ही चौंक गया, “ये क्या कह रहा है तू मनु?”
“सच बता यार! शरमा मत! मैं चाहता हूँ, कोई सोनिया के बदन की तारीफ करे!”
“लगता है तुझे ज्यादा हो गई है!”
मैं भी सुनना चाहती थी कि अब कोई क्या कहता है! मुझे भी सुनने में मज़े आ रहे थे।
“नहीं तू बुरा मत मान, जो कहना है कह दे आज, तू मेरा दोस्त है! मैं बुरा नहीं मानूंगा!”
पंकज को लगा अब मनु नहीं मानेगा तो उसने भी कहना शुरू कर दिया, “यार सच में न सोनिया भाभी का फिगर इतना कातिल है की कोई भी देखे तो उसका लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आ जाए!”
“और बता यार!”
“सच में यार तू मानेगा नहीं! मैं हफ्ते में तीन बार तो सोनिया भाभी को याद कर के मुठ मारता हूँ, रात को सोते हुए भी कभी कभी में आँखें बंद करके सोचता हूँ अगर मैं सोनिया भाभी की चुदाई करूँगा तो किस तरह करूँगा! सच में
सोनिया भाभी के 36 इंच की गोलाइयों के बीच में अपना लंड छुपाने को मन करता है। कम से कम सोनिया भाभी की कमर 27 इंच की तो होगी ही और गांड तो मत पूछ इतनी गोल और कसी हुई है की घोड़ी बना कर गांड में थूक लगा
कर लंड का पूरा सुपाड़ा अन्दर करने को मन करता है, सोनिया भाभी की जांघें इतनी गोल और चिकनी है कि मन करता है चूमता ही रहूँ!”
“मैं तुझे बताता हूँ! मनु तूने कभी ब्राजील में साम्भा डांस देखा है क्या? उनमें जो काली काली सी औरतें सिर्फ़ रंग बिरंगी पैंटी पहन कर अपने चूचों को सिर्फ़ नाम मात्र के कपड़े से ढक कर नाचती हैं, उनको देख कर मुझे हमेशा
सोनिया भाभी की याद आ जाती है!”
“हाँ यार पंकज, तूने सही कहा सोनिया बिल्कुल वैसी ही है वैसे है, मोटी गांड वैसी जांघें उतने ही मोटे चूचे कसम से तूने सही कहा!”
मैं भी आपने बदन की तारीफ सुन कर खुश हो रही थी।
“यार पंकज, अब बता, अगर तुझे सोनिया को चोदने का मौका मिले तो तू कैसे चोदेगा?”
“सच बताऊँ तो सोनिया भाभी को सबसे पहले एक टाइट सा टॉप पहनाऊंगा और नीचे एक मिनी स्कर्ट वो भी चिपकी हुई जिसमें से उनकी गोल गोल जांघों के दर्शन हो रहे हों और स्कर्ट की लम्बाई भी इतनी की सिर्फ़ उनकी पैंटी न
दिखे! अन्दर उनको एक सेक्सी सी बिकनी पहनाऊंगा जिसमे सिर्फ़ उनके चूचों की नोकें छुपें और चूत की दरार ढके! पीछे गांड के अन्दर से जाती हुई बिकनी! कसम से फिर धीरे धीरे से उनको अपने कपड़े उतरने को कहूँ, पहले टॉप!
फिर स्कर्ट धीरे धीरे! ब्रा उतरते ही उनको कहूँगा- अपने चूचे हाथ से पकड़ ले! फिर धीरे धीरे उनके चूचे उन्हीं के हाथ से चूसूंगा! फिर पैंटी को उन्हीं को उतारने को कहूँगा!”
मुझे भी ये सब ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे साथ पंकज कर रहा है।
उधर पंकज पूरे मज़े से मनु को बता रहा था, “मैं भी पूरा नंगा हो कर सोनिया भाभी के मुँह में अपना लंड दे दूंगा! चूसाता ही रहूँगा चूसाता ही रहूँगा! जब तक उनके बदन पर अपना गरम माल नहीं छोड़ देता!”
“अपना माल झाड़ते ही फिर भाभी को दुबारा चूसने को कहूँगा इस बार उनकी आंखों पर पट्टी बाँध कर बिस्तर पर उल्टा लेटा कर उनके हाथ बाँध कर पीछे से उनकी चूत मारूंगा आहा! पीछे से जब चूत मारूंगा तब झटके
पड़ते ही सोनिया भाभी की चीख निकल जाए ऐसा झटका मारूंगा! आहा! हर झटके पर उनकी गांड पर पट!पट! की आवाज़ आहा! भाभी हर झटके पर चिल्ला कर कहेगी और तेज़ पंकज और तेज़!
फिर उनको कुतिया की तरह पोज़ में लाऊंगा! इस बार गांड पर थूक लगा कर अपना लंड सीधा करके सीधा एक ही शॉट में अन्दर! सोनिया भाभी चीखती रह जाएंगी आहा मर गई! कुत्ते! आआ आआ आआआ फाड़ डाली मेरी
गांड कमीने! अआहा हरामजादे! पंकज! ये क्या कर डाला तूने! पर मैं एक नहीं सुनूंगा! और लगातार लगा रहूँगा उनके भोसड़े को फाड़ने में!
भाभी जब चुप नहीं होंगी तो मुझे भी कहना पड़ेगा “! साली कुतिया एक तो इतनी टाइट गांड कर रखी है! उस पर जब तेरी गांड का भोसड़ा बना रहा हूँ तो चिल्ला रही है! साली कल को इतना बड़ा छेद कर दूंगा के जब मर्ज़ी
दो दो लंड ले लेना आगे भी पीछे भी एक साथ! साली रांड! आज ले ले मज़े! आज तो तेरी जवानी को कुचल के रख दूंगा!
और ये पक्का है मेरा ऐसा कहते ही भाभी और मज़े से मेरे साथ लग जाएगी! बड़ी देर तक भोसड़ा चोदने के बाद सोनिया भाभी की गांड से लंड निकाल कर उसी पोज़ में चूत में लंड पेल दूंगा! सोनिया भाभी की आवाज़
आएगी! बहन चोद अब आया न असली पोज़ में साले कुत्ते अब न छोड़ियो! मुझे पेल कमीने मादरचोद! आज तो इस प्यासी चूत की चटनी बना दे!
आअहा आह साली! ले और ले! ले आज पूरा लंड तेरी चूत के हवाले! और सोनिया भाभी भी अपनी गांड हिला हिला कर पीछे को धक्के मारती रहेंगी! हाँ हाँ पंकज हाँ हाँ! ले और तेज़! और तेज़! ले फाड़ दे आज चूत को! निकाल दे सारा पानी आज तो! कमीने! मेरी गर्म चूत को मत उदास छोड़ना! आज मेरा पानी निकाल दे … मैं सारी ज़िन्दगी तेरे लंड का सलाम लेती रहूंगी!
“इस पोज़ में भी काफी देर के बाद फिर पोज़ बदलूँगा इस बार उन्हें बिस्तर पर सीधा लेटा कर ख़ुद नीचे खड़ा होकर उनकी कमर पकड़ कर! अपना लंड बिल्कुल सीधा डाल कर!
“बस बस पंकज बस?” मनु तभी बोल पड़ा!
ओहो ये क्या किया मनु तूने मैंने मन ही मन सोचा! इतना मज़ा आ रहा था लग रहा था पंकज सच में ही मुझे चोद रहा था! मेरी चूत भी कुछ गीली हो चुकी थी!
“बस यार अब मेरा काम तो हो गया!” मनु ने अपना हाथ अपने लंड से हटा कर कहा!
“ये क्या मनु! तू मुठ मार रहा था?” पंकज बोला
“हाँ यार, क्या करूं … तू बता ही इस तरह से रहा था!”
“यार बता ही तो रहा था अगर असली में करुंगा तो तेरा क्या होगा?”
“होगा क्या … जब तू सोनिया को चोदेगा तो मैं भी तेरे साथ उसको चोदने लगूंगा!
“हाँ यार मज़ा तो बहुत आएगा, एक साथ सोनिया भाभी की चुदाई करने में!”
“हाँ हम तीनों एक कमरे में एक बिस्तर पर दोनों बिल्कुल नंगे और तेरी सोनिया भाभी तेरे पहनाए हुए कपड़ों में हम दोनों यहाँ बिस्तर पर बैठ कर पैग लगते हुए उसको कपड़े उतारते हुए देखेंगे और फिर टक टका टक!”चुदाई का खेल शुरू!
“पर यार, भाभी मानेगी?”
मैं तो कब से तैयार हूँ सालो! अभी आ जाओ तो बताती हूँ कौन किसे चोदता है! मैंने सोचा।
“यार उसे तो मनाना पड़ेगा पता नहीं तैयार होती है या नहीं! चल अभी तो तू यही सो जा! रात हो गई है सोनिया भी सो गई है। मैं भी मुठ मार कर हल्का हो गया हूँ, मैं भी सोता हूँ! अगर तुझे भी रात को मुठ मारने के लिए कुछ
चाहिए तो बता? सोनिया ने काफी सेक्सी मैक्सी पहन रखी है, थोड़ा सा उसकी जांघों के दर्शन चाहिएँ तो बता!
“हाँ यार करा दे यार! आज रात मुठ मार कर ही काम चलाता हूँ, आज तक सोनिया भाभी को सोच कर मुठ मारता रहा था, अब देख कर मुठ मारता हूँ!
मैंने ये सुन लिया और मैं भी सीधी लेट गई। अब मेरी टाँगें पूरी तरह दिख रही थी!
“ये ले पंकज!” मनु ने मेरी पूरी मैक्सी ऊपर कर दी। अब सिर्फ़ मेरी पैंटी दिख रही थी और मेरी नंगी जांघें उन दोनों के सामने थी!”
“आऽह ऽआ मनु साले कसम से क्या जांघें हैं! मन कर रहा है खोल कर कच्छी खींच कर डाल दूँ अन्दर!”
तो देख क्या रहा है कुत्ते!कर न फिर! मैंने सोचा।
पंकज ने अपना लंड निकाल लिया और मेरे सामने ही मुठ मारने लगा।
मैं भी थोड़ी खुली आंखों से उसके लंड को निहार रही थी, सच में काफी बड़ा लंड था उसका!
कितनी ही लड़कियाँ उस लंड ने चोदी होंगी! सोच कर ही मेरे बदन में सिहरन हो गई!
पर ये क्या??
पंकज भी झड़ चुका था! खैर चलो! शायद कल इनका प्रोग्राम बन जाए! और मेरे मज़े आ जायें?
अगले दिन फिर जो हुआ वो सब मैं आपको अगली बार बताऊंगी!
पर इतना है कि उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा!
सोनिया Hindi Sex Stories
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