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कई लोगों ने Sex Stories यह जानना चाहा है कि संभोग के पूर्व क्या किया जाना बेहतर हो सकता है! तो प्रस्तुत है सेक्स के जादुई आनंद का बटन – भगशिश्निका
अन्य नाम- शिश्निका, भगनासा, भग ! अंग्रेजी में clitoris, clit !
यह महिला के लिए सेक्स के जादुई आनंद का बटन है। भगशिश्निका मूलतः पुरुष के शिश्न की ही तरह है लेकिन आकार में काफी छोटी होती है। यदि इसे सही तरीके से सहलाया जाता है तो यह महिला को अत्यधिक आनंद व उत्तेजना प्रदान करती है। महिला के शरीर में भगशिश्निका ही ऐसी इकलौती इन्द्रिय है जिसका एकमात्र कार्य सेक्स-आनंद है। यह लगभग एक सेमी. लंबी होती है तथा योनि द्वार के ऊपर होती है।
शिश्न की ही तरह, भगशिश्निका की भी अग्र-त्वचा (foreskin) और एक दंड (shaft) भी होता है। लेकिन भगशिश्निका को सहलाने के कई तरीके होते हैं जो कि हर महिलाओं में अलग-अलग होते हैं। इसके लिए आपको स्वयं तलाशना होगा कि कौन सा तरीका आपकी महिला-साथी के लिये सबसे बेहतर हो सकता है। सबसे सही और शीघ्रता वाला तरीका तो यही है कि उसे कहें कि वह स्वयं अपने भगशिश्निका को सहला कर दिखाए, फिर आप उसके तरीके की नकल कर लें। कई महिलाएँ तो भगशिश्निका को सहला कर ही हस्तमैथुन की क्रिया को पूरा करतीं हैं। इसी दौरान आपको देखना होगा कैसे वह परम आनंद की ओर जाती है।
लेकिन कई महिलाएं इस प्रकार से हस्तमैथुन नहीं करतीं, तो कई महिलाएँ आपके सामने इस क्रिया को करने से हिचकिचा सकतीं हैं। इन परिस्थितियों में उसकी उत्तेजना के बारे में जानने के लिये आपको कई प्रयोग करने होंगे। इसके लिए आपको उसके भगशिश्निका को विभिन्न तरीकों से सहलाना होगा
यहाँ यह ध्यान यह रखें कि आप सीधे उसके भगशिश्निका तक न पहुंचें। हमेशा लैंगिक उत्तेजना की शुरुआत उसके शरीर से खिलवाड़ (foreplay) द्वारा करके उसे थोड़ी मीठी तरह से सताएँ। इसके बाद जब उसके भगशिश्निका के पास पहुंचें, तो उसके चारों ओर के क्षेत्र की मालिश करें या मसलें। यह क्रिया उसके भगशिश्निका में पर्याप्त मात्रा में रक्त भर देगी (शिश्न की तरह)। इसके पश्चात भगशिश्निका सीधे तरीके से खिलवाड़ के लिये तैयार होगी।
अभ्यास 1: भगशिश्निका के चारों ओर खिलवाड़
उसके भगशिश्निका के चारों ओर अंगमर्दन (Massage) करें: मसलन जंघा, उदर (पेट), कूल्हे। अंगमर्दन की यह क्रिया करते हुए आप शनैः-शनैः भगशिश्निका के निकट जाएँ। अंगमर्दन द्वारा भगशिश्निका के चारों ओर एक घेरा बनाएँ लेकिन भगशिश्निका को छुएँ नहीं। इस क्रिया को कुछ मिनटों तक दोहराते रहें। अब जब आप उसके भगशिश्निका तक पहुँचे तो अपनी एक उँगली के सिरे का उपयोग करें। उँगली द्वारा भगशिश्निका को काफी हल्के से वृत्ताकार घेरे में रगड़ें, फिर ऊपर-नीचे की दिशा अपनाएँ, फिर बाएँ व दाएँ की दिशा के अनुसार उँगली से सहलाएँ. यह सब इसपर निर्भर करता है कि उँगली की किस हरक़त को महिला अधिक प्राथमिकता देती है। क्योंकि हर महिला व हर भगशिश्निका अलग प्रवृत्ति की होती है। लेकिन सामान्य तौर पर पहली क्रिया काफी हल्के स्पर्श या छुअन के रुप में होनी चाहिए।
अभ्यास 2: भगशिश्निका से खिलवाड़
जब आप निश्चिन्त हो गए हों कि वह तैयार हो गई है तो आप अपनी उँगली के अग्रभाग को उसके भगशिश्निका पर ले जाएँ। यह तब अधिक सरल होगा जब उसके पाँव फैले हों। अब उसके भगशिश्निका को काफी हल्के तरीके से सहलाना शुरू करें। सबसे पहले गोलाई में सहलाएँ, फिर अन्य दिशाओं में भी प्रयत्न करें। साथ ही उससे पूछें कि वह किस स्थिति को अधिक पसंद कर रही है
इनके अतिरिक्त सबसे अच्छा मार्ग है कि उसके भगशिश्निका को उस तरह सहलाया जाए जिस तरीके से वह हस्तमैथुन करती है। इसके लिए उससे पूछें या उसे करके दिखाने को कहें। यदि वह कोई प्रस्ताव या सलाह देती है तो उसे स्वीकार करें। यहाँ पर यह अवश्य ध्यान रखें, जब भी आप उसके भगशिश्निका के समीप जाएँ तो अपने नाखून काट कर रखें या काफी छोटे रखें। भगशिश्निका की कोमलता के कारण लंबे और तीखे नाखून छिलने या कटने का कारण बन सकते हैं। इतना कुछ करने के बाद भी यदि आप प्रत्युत्तर नहीं पा रहे हैं तो समझें कि आप निश्चित तौर पर उसके भगशिश्निका को गलत तरीके से सहला रहे हैं (यह न भूले कि कभी कभी जो चीज किसी व्यक्ति के लिये सही होती है वही दूसरे के लिये गलत भी हो सकती है)।
यहाँ यह भी जानने योग्य है कि आप यदि गलत कर रहें हैं तो भी वह आपसे नहीं कहेगी। अतः आपको ही अपनी शैली में उससे पूछना पड़ेगा कि किस प्रकार से सहलाने पर उसे आनंद की प्राप्ति अधिक होती है। यदि एक बार आपने सही तरीका पा लिया तो उसे आप बेहतरीन सेक्स आनंद का लाभ दे सकते हैं और उसकी उत्तेजना को शिखर तक पहुंचा सकते हैं। Sex Stories
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आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई Hindi Sex Stories के बारे में बताने जा रहा हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं दिल्ली इंजिनियरिंग कॉलेज के आखिरी वर्ष में था। घर के सभी लोग गर्मियों की छुट्टियों में गाँव (नैनीताल) गये थे। घर की देखभाल और मेरे खाने के लिए मेरी छोटी बहन की विधवा सास घर में रहने आई थी। उसका फिगर ३२-३४-३२, कद में मेरे ही बराबर, उम्र ३९, गदराया बदन उसकी छाती और गाँड दोनो ही मस्त थे। एक बार जो देख ले, उसका लंड एक सेकेंड मे ही घोड़े का लंड बन जावे ! उसके पति को मरे काफ़ी साल हो गये थे, इसलिए वो काफ़ी सालों से लंड के लिए जुगाड़ देख रही थी।
तो दोस्तो, मैं भी काफ़ी दिनों से जिसको चोदने के सपने देख कर मूठ मरता था, आज मेरा सपना सच होगा, यह मुझे मालूम नहीं था। वो किचन में काफ़ी बार मुझसे जानबूझ कर अपनी चुचियाँ या अपनी गोल-मटोल गाँड किसी न किसी बहाने छुआ रही थी पर मैं उसकी इस हरकत को नज़र-अंदाज़ कर रहा था। मुझे सेक्स के बारे में कोई ज्ञान नहीं था।
रात का खाना खा कर हम दोनों अलग-अलग कमरे में सोने के लिए चले गये। एक घंटे तक उसको चोदने के बारे में सोच-सोच कर नींद नहीं आई, सो पेशाब करने के लिए उठा और पेशाब करने के बाद मैं उसके कमरे में गया तो मैंने देखा कि वो पेटिकोट और ब्लाऊज़ में सो रही थी। उन्हें देख कर मेरे शरीर में कम्पन सी होने लगी। मैं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। मैं अपने आपको उसकी तरफ़ जाने से रोक नहीं पा रहा था। वो देखने में बिल्कुल मस्त थी।
मेरा लण्ड उसको देखते ही खड़ा हो गया था। मेरा एक हाथ उसकी टांग पर गया और धीरे धीरे उसके चूतड़ों तक पहुँच गया। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया, इतने में ही वो जाग गई। जैसी ही वो जगी, मैं वहाँ से भाग लिया और अपने कमरे में आ गया। थोड़ी देर बाद वो मेरे कमरे में आई और आते ही बोली- तुम क्या कर रहे थे?
मैं एकदम डर गया, मेरा चेहरा लाल हो गया। मैं चुप रहा। वो मन ही मन खुश हो रही थी, मैंने हिम्मत करके कहा- आगे से ऐसा नहीं होगा !
इस पर वो बोली- क्या नहीं होगा?
मैंने मुंह नीचे झुका लिया।
वो बोली- अब शरमा रहा हैं ! जब शर्म नहीं आई जब मेरे गाँड मे अंगुल कर रहा था !
मैंने उससे कहा- मैंने जान बूझ कर नहीं किया ! मैं अपने आप को रोक नहीं पाया !
उसको पेटिकोट और ब्लाऊज़ में देख कर मेरा लण्ड फ़िर तन गया था, उसने एक नज़र से ही उसे देख लिया था। वो बोली- अब तूने मुझे गरम कर दिया है, तुझे मेरे को चोदना पड़ेगा।
मैंने कहा- मुझे क्या करना होगा?
उसने कहा- मेरे कपड़े उतार !
मैं डर गया, मैंने कहा- नहीं !
उसने कहा- उतार भोसड़ी के ! नहीं तो तेरी ऐसी तैसी करवा दूंगी !
मैंने फिर डरते डरते पेटिकोट, ब्लाउज व चड्डी उतारी, और फिर उसने अपनी चूची मेरे हाथों में थमा दी और कहा- ले बेटा मज़े कर !
मैं उसकी चुचियों को सहलाने लगा और मसलने लगा। मेरे शरीर में एक अलग सा अनुभव हो रहा था ! उसके मुँह से आहह उह्ह स स स स स की आवाज़ आ रही थी। धीरे-धीरे मैं उसके शरीर को चूमने लगा। मेरा लण्ड एकदम सख्त हो गया था, उसने नीचे कुछ नहीं पहना था, मेरा एक हाथ उसकी चूत में जा रहा था, वो एकदम गरम हो गई थी और गालियाँ दे रही थी- चोद साले ! चोद मुझे !
उसने मेरा लण्ड हाथ में ले लिया और मेरे सारे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों नंगे थे। उसने मुझसे पूछा- तूने पहले कभी चुदाई की हैं?
मैंने कहा- नही !
तब उसने कहा- अपना लण्ड मेरे चूत में डाल !
मैंने पूरी कोशिश की लेकिन लण्ड चूत में नहीं घुस रहा था, तब उसने अपनी गांड के नीचे तकिया लगाया, मुझे खड़ा करके लण्ड घुसाने को कहा। इस बार लण्ड का सु्पाड़ा चूत में घुस गया, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं स्वर्ग में हूँ ! उसके बाद एक झटके में ही लण्ड पूरा उसकी चूत में घुस गया ! तीन चार झटको में ही मैं झड़ गया। तब उसने बताया कि पहली बार ऐसा ही होता हैं, तुम सच बोल रहे थे कि तुम ने पहले चुदाई नहीं की हैं।
उस रात उसकी तीन बार चुदाई की, फिर तो जब भी मौका मिलता, मैं उसको चोदता।
मुझे निःसंकोच ई मेल करे- Hindi Sex Stories
हाय दोस्तो, मैं आप लोगों को अपनी पहली Antarvasna चुदाई की सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ। उस समय मेरी उम्र 18 साल से तीन महीने ज्यादा थी और मैं इन्टरमीडिएट का छात्र था।
दशहरे के अगले दिन मैं अपने गाँव से वापस कस्बे आ गया, माँ गाँव में ही रह गयीं। उसी दिन मेरे चचेरे भाई साहब अपनी बीवी और डेढ़ साल की बेटी के साथ हमारे घर आये। वे लोग हमारे दूसरे गाँव में रहते थे। घर में मैं और मेरे पिताजी थे, उन्हें उस रात टूर पर जाना था।
भाई साहब मेरे साथ पास के शहर गये, वहाँ से वे अपनी बहन के घर चले गये और मैं वापस आ गया।
जब मैं शहर में था तभी मेरे मन में भाभी के साथ सम्भोग करने का पागलपन सवार हो गया क्योंकि रात के बारह बजे पिताजी के चले जाने के बाद घर में भाभी और मैं अकेले रहने वाले थे, बेटी उनकी काफ़ी छोटी थी।
दरअसल भाभी की शादी को चार साल हो चुके थे, वे बहुत तो नहीं पर सुन्दर हैं और शुरू से ही वे हम लोगों से काफ़ी मजाक, खासकर गन्दे मजाक किया करती थीं और वे काफ़ी खुली थीं हालाँकि मैं बहुत शर्मीला था।
पर अब मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था और दो तीन सालों से मैं हस्तमैथुन करके अपनी बेचैनी शान्त कर लेता था, चूत चोदने का बहुत मन करता था पर कोई जुगाड़ नहीं हो पाता था।
मैंने उस रात उनको अपने साथ चुदाई के लिये राजी करने का प्लान बनाने लगा।
आधी रात को पिताजी के घर से निकलते ही मैं बाथरूम गया तो खिड़की से देखा कि भाभी जगी हैं। मैंने उन्हें आवाज दी- भाभी, आप जगी हुई हैं क्या?
उन्होंने कहा- हाँ देवर जी, नींद उचट गयी है।
मैंने कहा- भाभी, अगर चाहें तो मेरे कमरे में आ जाइये।
भाभी झट से तैयार हो गयीं और अपनी बेटी को ले कर मेरे कमरे में आ गयीं। मेरी चौकी के बगल वाली चारपायी पर अपनी बेटी को दूसरी तरफ़ सुला कर खुद मेरी तरफ चारपायी लेट गयी।
फ़िर हम बातें करने लगे, पहले से सोचे हुए प्लान के अनुसार मैंने उन से कहा- भाभी, मैं एक बात पूछना चाहता हूँ, आप नाराज तो नहीं होंगी?
उन्होंने कहा- देवर जी, ऐसी क्या बात है?
मैंने कहा- नहीं पहले वादा करो तब?
उन्होंने कहा- ठीक है बोलिये, मैं नाराज नहीं होऊँगी।
मैंने कहा- भाभी, आज मैंने अपनी एक क्लासमेट को देखा जिसकी शादी 3-4 महीने पहले हो गयी थी, आज वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी, उसका बदन भर गया है और वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। शादी के बाद ऐसा क्या हो जाता है कि लड़कियों में इतने परिवर्तन हो जाते हैं?
मैंने यह सवाल जान बूझ कर बातों का रुख सेक्स की तरफ़ करने के लिये किया था।
उन्होंने कहा- शादी के बाद पति के साथ रहने से ऐसा होता है।
मैंने कहा- भाभी, ज़रा खुल कर बताइये ना…
तो भाभी ने मुस्कुरा कर मेरे गालों को मसल दिया।
ओह… ह… ह…!! मुझे तो मानो मन की मुराद ही मिल गयी, मैं समझ गया कि आज मेरा भाग्योदय होने वाला है।
मैं भी उनके बालों में उँगलियाँ डाल कर सहलाने लगा। वह भी मेरे बालों को सहलाने लगीं। अब तक भाभी अपनी चारपायी पर ही थी और मैं अपनी चौकी पर।
मैं भाभी के गालों को सहलाते हुए बोला- कि मेरे बिस्तर पर आ जाओ भाभी।
वो झट से मेरे चौकी पर आ गयीं और… और… और… और… और…मैं तो जैसे पागल हो गया… जोर से भाभी को अपनी बाहों में भींच लिया… उन्होंने भी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया… और दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों का चुम्बन लेने लगे… दोनों के जिस्म एक दूसरे में उलझ गये…वो जोर जोर से मेरा चुम्मा लेने लगी…
मुझे भी होश कहाँ रहा खुद का। बस एक नशा सा छा गया और मुझे कुछ होश नहीं कि आगे क्या करना है।
हालाँकि मैंने पहले से अपने मस्त राम की कहानियों के द्वारा प्राप्त ज्ञान के आधार पर काफ़ी कुछ करने का सोचा था पर सब किताबी ज्ञान धरा रह गया।
मैंने सोचा था कि उनकी चूत में उंगली करुंगा, इस लिए मैंने अपने नाखून काट लिये थे। पर उनके चिपकते तथा चुम्मा चाटी करते ही मैं एकदम बेकाबू हो गया, उफ़्फ़ बरदाश्त करना मुश्किल था अब… जिस चूत को चोदने की कल्पना पिछले तीन सालों से कर रहा था, तथा जिस प्यारी भौजाई को चोदने की कल्पना मैं दोपहर से कर रहा था…वह सुनहरा मौका मेरे सामने आज आ गया था।
उफ़्फ़्फ़्फ़… अब एक पल भी रुकना असम्भव था।
उस वक्त भाभी सिर्फ़ साया और ब्लाउज में थीं। मेरा मन चूची चूसने पर इस लिये नहीं गया क्योंकि वह उन दिनों अपनी बेटी को दूध पिलाती थीं… वैसे में चूचियों को चूसने की कल्पना करते ही मन लिजलिजा सा हो जाता था।
मैंने भाभी से कहा- भाभी… दोगी?
उन्होंने पूछा- क्या?
मैंने कहा- अब तुम्हें भी बताना पड़ेगा कि क्या माँग रहा हूँ?
तो इस पर वो मुस्कराते हुए बोलीं- आपको रोका कौन है, जो इच्छा हो कर लीजिये।
अब तो मानो मेरे सपनों के साकार होने का वक़्त आ गया… मैं उनके बगल से उठ कर उनके टाँगों के बीच पहुँचा और उनका साया ऊपर उठा दिया.
फ़िर उन्होंने अपनी दोनों टाँगों को ऊपर कर लिया, अब उनकी भरी पूरी चूत जिस पर झाँटें ही झाँटें थी नजर आ रही थी जो अब मेरे लिये थी। जिन्दगी में पहली बार चूत के दर्शन हुए थे, पर नाइट लैम्प की रोशनी में जितना दिख रहा था वही बहुत था।
मैंने अपना फ़नफ़नाया लण्ड उनकी चूत में डाला… चूत एक दम गरम और गीली थी… ओह… मेरा पूरा लण्ड घचाक से उनकी चूत में बिना किसी रुकावट के चला गया… क्योंकि भाभी का चूत तो भोसड़ा हो गया था.
खैर पहली बार एक छेद में डालने का मौका तो मिला चहे वह कुँवारी चूत हो या चुदा चुदाया भोसड़ा… मैं तो गुरू ऽऽ सातवें आसमान पर था… खैर उनकी गरम चूत में पूरा लण्ड जाते ही मेरा पूरा शरीर झनझना गया और मैं तुरन्त ही झड़ गया… और सच बताऊँ मैं बेहद शर्मिन्दा भी हो गया कि पहली बार मौका मिला भी तो मैं शीघ्र पतन का शिकार हो गया।
मैं उनके ऊपर से उतर कर बाथरूम गया, लौट कर उनके बगल में लेट गया, उन्होंने मुस्कराते हुए पूछा- क्या हुआ देवर जी, बड़ा फ़ड़फ़ड़ा रहे थे, सारी मस्ती कहाँ गयी? बस हो गये शान्त?
मैं अन्दर ही अन्दर शर्मिन्दा तो था पर मैंने कहा कि दोपहर से ही तुम्हें चोदने का प्लान बना रहा हूँ और तभी से लण्ड खड़ा है, फ़िर जिन्दगी में पहली बार चूत के दर्शन हुए हैं शायद इसी वजह से डालते ही झड़ गया।
उन्होंने पूछा- क्या सचमुच पहली बार है?
मेरे हाँ कहने पर उन्होंने कहा- पहली बार ऐसा अक्सर होता है, चिन्ता मत करिये सब सीख जायेंगे।
फ़िर वो मुझ से चिपट कर लेट गयीं, मुझे चुम्मा लेने लगीं क्योंकि वो अभी भी गरम थीं। धीरे धीरे मैं भी उत्तेजित होने लगा। इस बार मेरे हाथ उनकी चूचियों को सहलाने लगे… उनके निप्पल को चुटकी में मसलने लगा तो वो सिसकारी लेने लगीं मुझे लगा कि उनको मजा आ रहा है… वो अपना निप्पल मेरे मुँह में डालने लगीं.
मेरी झिझक को भाँप कर बोली- घबराइये मत, जब तक जोर से चूसेंगे नहीं तब तक दूध नहीं निकलेगा… इसको सक करना पड़ता है तब दूध निकलता है… समझे लल्लू देवर जी!
और फ़िर उन्होंने मेरे लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया, मैंने उनके निप्पल को मुँह में लेकर हौले हौले चूसना शुरू कर दिया
ओह… ओह.. .ओ… ओह… उम्म्ह… अहह… हय… याह…
वो सिसकारियाँ लेने लगीं और अपने भोंसड़े को मेरे लण्ड से रगड़ने लगीं।
हम दोनों करवट लेटे हुए थे वो मेरे दाहिनी तरफ़ थीं, वो मुझे और जोर जोर से निप्पल चूसने को कहने लगी. मुझे भी अब अच्छा लग रहा था और मैं उनकी घुण्डी को दाँटों से काट कर चूसने लगा जोर से बस इतना कि दूध न निकले।
वो मस्त होकर मेरा हाथ अपनी चूत पर ले जा कर रगड़ने लगीं… उनकी चूत एकदम गरम और लिसलिसी हो गयी थी… लग रहा था कि चूत को बुखार हो गया हो जैसे…
फ़िर उन्होंने करवट में ही लण्ड चूत के मुँह पे रख कर डालने को कहा.
मैंने कहा- जरा अपनी चूत तो पौंछ लो, एकदम कीचड़ कीचड़ हो रही है.
इस पर उन्होंने साया से अपनी चूत पौंछी और मुझे अपनी दोनों टाँगों के बीच लेकर मेरे लण्ड को पकड़ कर चूत के मुँह पर रख कर धक्का लगाने को कहा।
मैंने लण्ड को उनकी चूत में जोर से पेला तो एकदम जड़ तक चला गया… शायद करवट होने की वजह से इस बार चूत कुछ कम ढीली लग रही थी, खैर लण्ड अन्दर लेकर भाभी मेरा चुम्मा लेने लगीं… फ़िर होंठ चूमते हुए जीभ मेरे मुँह में डाली मुझे बड़ा मजा आया और मैं भी उनके होंठों को चूसने लगा और जीभ अन्दर करके उनकी जीभ से खेलने लगा।
अब वो अपना चूतड़ आगे पीछे करने लगीं और मैं भी अपना लण्ड बाहर भीतर करने लगा फ़च… फ़च्… फ़च… फ़चाफ़च… सट्… सट्… सटासट्… सट… की आवाजें गूंजने लगी कमरे में…
हम दोनों देवर भाभी मस्ती के हिलोरें ले रहे थे.
दरअसल मेरी भाभी बहुत ही चुदक्कड़ हैं, वो मुझे अपनी बाहों में जकड़े हुए लण्ड घचाघच अपनी चूत में लिये जा रही थीं साथ ही साथ जोर जोर से साँसें लेते हुए बोलती जा रही थी- हाए रे मेरे बबुआ, आज तो आपने एक नये लण्ड का स्वाद चखा दिया… मैं तो कब से तरस रही थी स्वाद बदलने को… कब से आपके भैया का लण्ड ले ले कर बोर हो गयी हूँ।
मैंने पूछा- मेरा लण्ड तो छोटा है, भैया का कैसा है?
तो भाभी बोली- आपके भैया का आप से बड़ा और मोटा है पर समय आने पर आप का भी तगड़ा हो जायेगा।
और मुझे जोर से भींचते हुए बोली- मेरे राजा, मजा सिर्फ़ मोटे और बड़े लण्ड से ही नहीं आता, कौन चोद रहा है और कैसे चोद रहा है यह महत्वपूर्ण है, अब देखिये आप अपने भैया से हैण्ड्सम हैं तथा पढ़ने में भी तेज हैं, कोई भी लड़की आपसे चुदवाना चाहेगी.
ऐसा कह कर वह मेरे गाल सहलाने लगी और मैं भी मारे उत्तेजना के और जोर जोर से लण्ड को उन की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. हम दोनों ही मारे मस्ती के सटासट धक्का पे धक्का मारे जा रहे थे.
दोनों की साँसें तेज… तेज… तेज… होने लगी और उन्होंनें मुझे जोर से जकड़ते हुए कहा- हाय रे मैं तो गयी मेरे राजा… आज तो आपने मुझे जन्नत की सैर करा दी मेरे देवर जी… शादी के बाद पहली बार कोई नया लण्ड मिला है मैं तो निहाल हो गयी…
हम दोनों एक साथ ही झड़े और देर तक एक दूसरे से चिपके रहे।
उन्होंने पूछा- कैसा लगा भाभी को चोद कर?
मैंने हँसते हुए कहा- मैं तो कल्पना कर रहा था कि आप की चूत एकदम टाइट होगी लण्ड घुसाने में दिक्कत आयेगी… पर वैसा कुछ हुआ ही नहीं?
इस पर वह मुस्कराते हुए बोली- अगर कुँवारे में हम दोनों मिले होते तो वैसा होता भी, मैं तो शादी से पहले ही कई बार चुदवा चुकी हूँ और फ़िर इसी चूत में से आपकी भतीजी निकली है तो थोड़ी ढीली हो गयी है… आप का तो पहला अनुभव है मजा तो आ ही रहा है… चलिये रात काफ़ी हो गयी अब सोया जाय।
उस के बाद इतनी गहरी नींद आयी कि पूछो मत… सुबह 7 बजे ही आँख खुली, फ़्रेश होने के बाद नाश्ता करके हम दोनों आपस में बातें कर रहे थे कि भतीजी को भूख लग गयी और भाभी चौकी पर लेट कर उस को अपनी चूची खोल कर दूध पिलाने लगीं, हालाँकि आँचल से ढका था फ़िर भी थोड़ा सा दिख रहा था.
अब तो मेरा मन भी करने लगा क्योंकि दोपहर तक भाई साहब भी आने वाले थे, मैंने कहा- भाभी एक बार और चोद लेने दो.
तो उन्होंने कहा- बेटी जगी है, देखेगी तो किसी से कह सकती है.
मैंने कहा- डेढ़ साल की बच्ची क्या समझेगी।
उन्होंने कहा- यह कह सकती है कि चाचा मम्मी के ऊपर थे। यह अपने पापा से बहुत बातें करती है।
फ़िर भी मेरा मन रखने के लिये वो चौकी के किनारे चूतड़ रख कर बेटी को अपनी छाती पर रख कर उसके मुँह में निप्पल डाल कर आँचल से उसे ढक कर अपनी टाँगों को फ़ैला कर अपनी साड़ी उठा कर मुझ से बोली- लीजिये, जल्दी से चोद लीजिये, फ़िर पता नहीं कब मौका मिले ना मिले।
मैंने वहीं खड़े हो कर तुरन्त अपना पहले से खड़ा लण्ड उनके भोसड़े में डाला और चोदने लगा, वो तो कोई हरकत नहीं कर रही थी, मैं भी सावधानी से चोद रहा था ताकि उनकी बेटी डिस्टर्ब होकर हमारी हरकत ना देखने लगे।
थोड़ी देर चोदने के बाद मेरा झड़ गया और मैं उन्ही के साये में पौंछ कर अलग हो गया।
फ़िर उस दिन दुबारा मौका ही नहीं मिला, कोई कोई आ जाता था तथा उनकी बेटी भी सोई नहीं, और भाई साहब भी जल्दी ही आ गये। Antarvasna
मैं बहुत ही दुबला पतला Antarvasna हूँ, मेरे शरीर पर नाम मात्र के बाल हैं। झांट और सर के बाल के अलावा छाती या हाथ पैर पर बाल नहीं हैं। मतलब यह है कि मैं अगर साड़ी में भी आ जाऊँ तो लोग मुझे पहचान नहीं पाएंगे, मेरी आवाज़ भी वैसी ही लड़कियों वाली है।
खैर, दोस्तो, यह कहानी नहीं सच्ची घटना है..
मैं रोज की तरह मैं मोहल्ले में खेलने के लिए निकला। मैं अपने दोस्त के घर खेलने जाता था। वो मुझसे 4-5 साल बड़ा भी होगा। उस दिन वो घर पर अकेला था और उसका मूड बदला बदला सा था। दरवाजा खोलने के बाद मैंने देखा कि उसकी पैंट में से कुछ निकल रहा था।
फिर मुझे उसने अन्दर बुलाया और कहा- आज एक नया खेल खेलेंगे !
मैं तैयार हो गया।
उसने कहा- अगर किसी को इस खेल के बारे में बताया तो फिर वो यहाँ नहीं रह पायेगा।
मैंने सोचा- ऐसा क्या है इस खेल में..?
उसने कहा- खेल कपड़ों अदला बदली का है।
मैंने कहा- इसमें ऐसी क्या बात है? ठीक है, मैं तैयार हूँ।
वो मुझे अपनी मम्मी के कमरे में ले गया। वहाँ मैंने अपने कपड़े उतरने शुरू किये.. पहले पैन्ट, फिर शर्ट और बनियान ! मैं केवल चड्डी में था।
उसने कहा- चड्डी भी उतार !
मैंने मना कर दिया पर वो जबरदस्ती करने लगा, आगे बढ़ कर एक झटके में मुझे नंगा कर दिया। मैं अपनी नुन्नी छुपाने लगा। फिर उसने मुझे चड्डी दी जो लड़कों की नहीं लड़कियों की थी। जो मैंने पहनने के बाद महसूस की। फिर उसने मुझे ब्रा दी जो मैंने फैंक दी, तो उसने मुझे पहना दी। इसके बाद वो मुझे साया और ब्लाउज पहनाने लगा। ये सारी चीज़ें उसकी मम्मी की थी। ये पहनने के बाद मैंने महसूस किया कि मेरी नुन्नी में हलचल हो रही है और वो खड़ा हो रहा है। फिर उसने मेरी कमर में साड़ी खोंसी और फिर एक लपेटा दे कर चुन दे कर साड़ी मेरी कमर में खोंसी और फिर मेरी कंधे पर आँचल डाला। उसकी मम्मी मेरी ऊंचाई की थी तो साइज़ की दिक्कत नहीं थी।
मुझे अब यह अच्छा लगने लगा था।
उसने आगे कहा- लॉलीपॉप चूसोगे?
मैंने कहा- इतना करने के बाद लॉलीपॉप मिल जाए तो क्या बुरा है.। मैंने कहा हाँ !
इस पर उसने अपनी पैंट और चड्डी दोनों उतार दी और मुझे बिस्तर पर ले गया। मेरी नजर उसके लिंग पर गई जो पूरा तना था। उसने मेरे मुँह में अपना लिंग दिया। मैं परेशान हो गया कि यह क्या हो गया, मैंने तो लॉलीपॉप माँगा था।
उसने कहा- मेरे लिंग का सुपारा ही लॉलीपॉप है।
थोड़ी देर बाद उसके लिंग से कुछ सफ़ेद से गाढ़ा सा तरल निकला, मैंने उसे उगल दिया। फिर उसने देखा कि मेरा अब भी खड़ा है तो उसने मुझे मुठ मारना सिखाया कि कैसे लिंग को साड़ी में हिलाने से मजा आता है। मुझे असीम सुख का आनंद आया।
उसने कहा- जब तक साड़ी पहन कर किसी का लिंग नहीं चूसो तो मजा नहीं आता।
मैंने इसे ही सच माना। फिर मैं अपने घर आ गया।
पिछली बार का मजा मुझे फिर उसके घर खींच लाया पर उसका घर खाली नहीं था। मेरे मम्मी पापा की पार्टी में जाने वाले थे तो मैंने उसे अपने घर बुला लिया। इस बार भी उसने मुझे साड़ी पहना कर अपना लिंग चुसवाया। यह सब चार महीने चला जब तक कि उसके पापा का तबादला नहीं हो गया। अब मैं अकेला था लेकिन मुझे साड़ी पहनने और लिंग चूसने की आदत पड़ गई थी।
मेरी परीक्षा शुरू होने वाली थी और मेरा परीक्षा केंद्र नजदीक के शहर में था जहाँ मेरे मामा और मामी रहते हैं। मैं परीक्षा के शुरू होने के कुछ दिन पहले ही मामा के घर पहुँच गया।
पहली परीक्षा के बाद मैं बड़ा खुश था। घर पहुँच कर मामी को चौंका देने वाला था। मेरे पास एक्स्ट्रा चाभी थी। मेरी मामी नहा रही थी उनको पता नहीं चला कि मैं आ चुका हूँ। मामी थोड़ी देर के बाद नंगी ही आईने के सामने अपने बदन को निहारने लगी। मैंने अभी तक किसी औरत को नंगी नहीं देखा था, मेरा लिंग खड़ा होने लगा।
मैं चुपके से मामी की चूचियाँ देखने लगा। तब तक शायद मामी ने मुझे आईने में कोने से देख लिया।
चिल्लाने के बजाये उन्होंने मुझे बुलाया और कहा- यह गलत बात है ! ऐसे किसी को देखना गलत है !
और भी बहुत कुछ सुनाया..।
मैंने कहा- मामी गलती हो गई, मैं बस आपको किस करना चाहता था.. मैं आपको किस कर सकता हूँ ??
मामी ने कहा- हाँ !
और अपना गाल आगे बढाया, और जैसे ही मैं चूमने के लिए अपने होंठ उनके गाल पर लगाने वाला था, उन्होंने अपने होंठ आगे कर लिए। मैं उनके होंटों को चूम रहा था। मामी भी मेरा साथ दे रही थी। हम दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को चूमते रहे और इस बीच मेरी मामी का हाथ मेरी पैंट तक पहुँच गया। वो मेरी पैंट को खोलने लगी और मेरी चड्डी से मेरे लिंग निकाल कर खेलने लगी जो अब बहुत बड़ा हो चुका था।
मामी ने कहा- मैंने जितना अनुमान लगाया था, यह उससे भी बड़ा है…
फिर वो मुझे अपने बिस्तर पर ले गई, मामी की सहायता से मैं अपने जौहर दिखाने लगा।मामी मेरा चूस रही थी, मैं 69 स्थिति में मामी की बुर चूस रहा था।
मामी “आह आह” करने लगी… मैं मामी की बुर को जीभ से चाट-चाट कर गीला कर रहा था।
मामी ने कहा- अपनी उंगलियाँ घुसा !
मैंने अपनी दो उंगलियाँ डाली, मामी की बुर फैलने लगी।
मामी ने कहा- और डाल !
मैंने एक-एक करके अपना पूरा हाथ उनकी बुर में डाल दिया। मामी की कराहने की आवाज़ें मुझे बेचैन किये पड़ी थी।मामी ने कहा- मादरचोद, अब तो चोद दे ! क्यों तड़पा रहा है जालिम।
मैंने मामी का कहा माना और अपना लिंग उनकी बुर में प्रवेश करा दिया, इसके बाद मामी ही उछल उछल कर अपनी दे रही थी। फिर मैंने उन्हें तीन तरीके से चोदा, पहले मैं उनके ऊपर, फिर वो मेरे ऊपर और फिर मैंने पीछे से उसे कुतिया बना कर चोदा।
मामी बहुत खुश हो गई, अब तो मेरा हर दिन ही रंगीन था, मामा शाम को आते थे और थक कर सो जाते थे। तब मैं समझा कि मामी मुझसे क्यों चुदने के लिए तैयार हो गई।
लेकिन बात यह नहीं थी। मैंने असली बात मामा के घर आखिरी रात को जानी। मेरे मामा भी मेरी तरह साड़ी और लिंग के शौक़ीन थे। यह बात शायद मामी को पता नहीं या फिर मामी पसंद नहीं करती थी।
मामा के घर में तीन कमरे थे। मामा मामी एक कमरे में और मैं दूसरे कमरे में सोता था। उस रात को मैं पानी पीने के लिए उठा, तभी मैंने देखा कि तीसरे कमरे में मेरे मामा साड़ी पहन कर बिस्तर पर बैठने ही वाले थे। मामी दूसरे कमरे में सोई थी। मेरी पुरानी इच्छा जाग उठी। वैसे भी एक सप्ताह से मामा जल्दी आ जाते थे और मैं मामी की चुदाई नहीं कर पाता था। मामा भी मेरे कारण एक महीने से साड़ी नहीं पहन पाए थे। इसलिए शायद मामा साड़ी पहन कर बैठे ही थे।
मैंने सोचा कि इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा और मैं कमरे में घुस गया। मामा मुझे देखते ही चौंक गए। मामा बोले- बेटा जो तुम सोच रहे हो, वो ये नहीं है।
मैंने कहा- मामा, आप अगर आज मुझे अपना लिंग चूसने दे दो तो मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा !
मामा भी सुनते ही खुश हो गए, उन्होंने खुद ही अपने साड़ी उठा दी और अपने 5″ के लिंग के दर्शन करा दिए। अब मैं समझा कि मामी खुश क्यों नहीं होती !
मैं और मामा एक दूसरे में समां गए। वो मेरा और मैं उनका चूसने लगा। झड़ने के बाद उन्होंने मुझे राज की बात बताई कि मेरे पापा भी साड़ी पहनते हैं और यह सब उन्होंने अपनी आँखों से देखा है, वैसे मेरे पापा नहीं जानते कि मेरे मामा यह बात जानते हैं। मामा जी की आज तक हिम्मत नहीं हुई कि वो पापा को अपनी गांड मारने के लिए तैयार कर सकें।
मैंने कहा- मामा, आप बस तैयार रहना ! जब मैं कहूँ, आप बस हाजिर हो जाना।
मेरे पापा साड़ी तो पहनते थे लेकिन समलैंगिक नहीं थे। एक दिन उनके बिस्तर पर मैंने साड़ी साया ब्लाउज का सेट देखा जो घर में किसी औरत का नहीं था। यह मेरे शक को पक्का करने के लिए काफी था।
एक दिन सुबह सुबह पापा उठ कर नीचे चाय पीने आये। उस समय बस मैं ही जगा था, मैंने देखा कि उनके माथे पर बिंदी है और होंठों पर लिप-ग्लॉस की चमक बरक़रार थी। पापा ने थोड़ी देर बाद आईने में देखा और झट से बिंदी हटाई। पर तब तक तो मुझे विश्वास हो गया था।
लेकिन अब पापा को पटाया कैसे जाए?
मैं इस कोशिश में दो साल जुटा रहा।
मेरे घर में दो मंजिलें हैं। नीचे की मंजिल पर एक शयन कक्ष और एक मेहमानों का कमरा है। ऊपर वाली मंजिल पर वो कमरा श्रृंगार कक्ष है। सर्दियों में हम लोग ऊपर वाले कमरे में दो पलंग लगा कर सोते हैं। पापा अकेले ही सोते हैं।
मैं एक दिन पापा के साथ, कह कर कि उस कमरे में नींद नहीं आ रही, सोने गया। मेरे पापा को उस दिन पीठ में दर्द था तो मुझे तेल लगाने के लिए कह दिया। मैं पीठ में तेल लगाने के बजाये कमर पर लगाने गया और मेरे हाथ फिसलते फिसलते उनकी गांड तक पहुँच गए। मैं उनका लिंग पकड़ने ही वाला था कि फ़ोन बज उठा और उन्होंने फ़ोन उठा लिया। बहुत देर तक वो बात करते रहे और मैं सो गया। रात में मैंने उनके पजामे के ऊपर उनकी गांड पर लिंग रख कर मुठ मारी पर उन्हें पता नहीं चला शायद।
एक दिन मैं रात को सोने के लिए आया तो मैंने देखा कि कमरे की बत्ती बुझी हुई है और पापा की सांसें बहुत तेज चल रही है। पापा ने कहा कि मैं जाकर नीचे से उनके लिए दवा ले कर आऊँ, लगता है कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ है।
पर मुझे पता चल गया था कि पापा मुठ मार रहे हैं, गलती से कमरे का दरवाजा खुला रह गया था। मैंने मद्धम रोशनी में देखा कि पापा की रजाई से उसी साड़ी का एक कोना निकल रहा था जो मैंने कुछ दिनों पहले देखी थी।
मैंने कहा,” अच्छा ! आप साड़ी पहने हुए हैं? वैसे भी आप साड़ी में ही अच्छे दीखते हैं। आदमियों के कपडे में नहीं !”
यह सुन कर पापा दंग रह गए पर कुछ बोल नहीं पाए। मैं उनके बगल में जा कर लेट गया और उनकी छाती और लिंग छूने की कोशिश करने लगा पर छू नहीं पाया। थक कर मैं उनके सामने मुठ मार कर सो गया।
अगले दिन से उन्होंने मुझे साथ सोने से मना कर दिया। फिर भी मेरी इच्छा उन्हें नंगा देखने की बढ़ती गई। उनके लिंग को सोच सोच कर मैंने कितनी बार मुठ मारी होगी।
अगली गर्मियों में घर के सब लोग नीचे सोये हुए थे, मैं रात को पहले आकर सो गया था जिसका पता पापा को नहीं चला। उस रात में 1-2 बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि मेरे पापा मेरी मम्मी बनने के लिए तैयार हो रहे हैं। उन्होंने अपनी बनियान उतारी और फिर सफ़ेद रंग की ब्रा पहन ली। उनके बूब्बे बहुत ही फूले हुए थे, उन्हें ब्रा के अन्दर कुछ डालना नहीं पड़ा। मेरे पापा के शरीर पर भी मेरी ही तरह बाल नहीं हैं तो पता नहीं चलता था कि यह आदमी है या औरत।
फिर उन्होंने प्यार से अपना पजामा उतार कर मोड़ कर रख दिया। अब मुझे लगा कि मैं उनके लिंग का दर्शन कर लूँगा। पर फिर एक साया लाकर ऊपर से औरतों की तरह पहना और नीचे से अपनी चड्डी निकाल का मोड़ कर रख दी। फिर एक मखमल का ब्लाउज पहना, इसके बाद वो आईने से सामने खड़े हो कर अपना साया जोर जोर से हिलाने लगे। इतना करने के बाद वो श्रृंगार कक्ष गए और वह जाकर साड़ी पहनने लगे। मैं रजाई के अन्दर नंगा होने लगा। मैंने दूर से पापा को साड़ी पहनते हुए देखा और उनकी गांड देख कर मदमस्त हो गया। पापा वापस इस कमरे में आ रहे थे, मैं वापस रजाई में घुस गया।
पापा आकर लेट गए, फिर कमरे में अचानक प्रकाश हो गया, पापा चौंक गए। मैं पापा के सामने नंगा खड़ा था। पापा रजाई में थे और सन्न रह गए। इतनी देर में मैंने पापा की रजाई खींच ली और पापा के रूप का दर्शन किया। इतने सुन्दर मेरे पापा होंगे यह मैंने सोचा नहीं था। पापा के सामने तो अच्छी सुन्दर हिरोइने भी पानी भरें !
मैंने पापा से कहा- पापा, मुझे लिंग चूसने दीजिये तो मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा।
पापा मना करते रहे और मैं माना नहीं। मैंने उनकी साड़ी उठाई और फिर साया। पापा ने सुन्दर पैंटी पहन रखी थी जो उनके लिंग का बोझ नहीं झेल पा रही थी। मैंने पैंटी का बोझ अपने मुँह में ले लिया। थोड़ी देर तक चूसने के बाद मैंने अपना लिंग पापा के मुँह में दिया। पापा नहीं-नहीं करते रहे पर मैं माना नहीं और जबरदस्ती अपना लंड उनके मुँह में घुसेड़ दिया। पापा को मन मार कर मेरा लंड चूसना पड़ा।
पापा का लंड चूसने के बाद मैंने उनके बूब्बे दबाये और चूसे। पापा मदमस्त हो गए थे- इतना कि उनका झड़ा तो पूरी साड़ी भीग गई।
इस घटना के दो तीन दिन बाद घर के सारे लोग किसी शादी में गए थे, मैं और पापा नहीं गए थे। उस रात मैं साड़ी पहन कर पापा के पास गया तो उन्होंने मुझे भगा दिया। अब वो मेरे साथ सेक्स नहीं करेंगे यह सोच कर मैं वापस श्रृंगार रूम आ गया। मैंने पैंटी नहीं पहन रखी थी, वो ही ढूंढ रहा था। बाद में खोजूंगा, सोच कर मैं हार और लिप ग्लॉस लगा रहा था। चूड़ी पहनने के लिए झुका और उठा तो आईने में पापा को देख कर चौंक गया।
पापा ने कहा,”इसे ही ढूंढ रहे थे न?”
मैंने देखा कि पापा ने लंड पर मेरी रंग बिरंगी पैंटी रख रखी है। मैंने आगे बढ़ कर पैंटी ले ली और देखा कि उनके लंड पर कंडोम चढ़ा है।
“सेक्स ऐसे नहीं करते, पहले कंडोम पहनते हैं, फिर कुछ करते हैं !””चूस कर देखो, तुम्हारा मनपसंद स्वाद है !”
मैं केले का स्वाद चखते ही पागल हो गया।
मैंने कहा- अब आप ही मुझे पैंटी पहना दो।
पापा ने मुझे गोद में उठाया और धीरे से मेरी साड़ी उठाई और फिर प्यार से पैंटी पहना दी। पापा ने मेरा बाकी श्रृंगार किया, कहा- तुम्हारे लिए तो मैंने विग भी रखा है।
फिर मुझे बिल्कुल औरतों में बदल दिया, पूछा- बता कि औरतें कैसे चलती हैं?
मैंने चल कर दिखाया और कैसे मलत्याग करती हैं मैंने वो भी करके दिखाया।
“शानदार ! तुम एक अच्छी औरत साबित होगे !”। पापा ने कहा कि शादी के बिना औरत अधूरी है !
मैंने कहा- आप मुझसे शादी करोगे?
पापा ने कहा- मैं तुम्हें अपनी धर्मपत्नी स्वीकारता हूँ।
मेरी मांग में उन्होंने सिन्दूर भरा और फिर कहा- तुम्हें पत्नी का धर्म निभाना होगा।
और मुझे अपने कमरे में ले गए.। पहले हम एक दूसरे का चूसते रहे फिर पापा ने मेरी गांड चाटी, चाट चाट कर मेरी गांड नरम कर दी। फिर मुझसे वैसलिन लाने के लिए कहा। मैं वैसलिन लेकर आया।
पापा ने कहा- यह तकिया मुँह में रखो और कुतिया बन जाओ !
मैं कुतिया बन गया। पापा.. माफ़ कीजिये मेरे पति ने तब तक मेरी गांड में ढेर सारा वैसलिन लगाया। मैंने जैसे ही तकिया मुँह में लिया, पतिदेव ने अपना लंड पूरे का पूरा एक बार में मेरी गांड में दे दिया। मैं दर्द से बिलबिला उठी, तकिये के कारण चिल्ला नहीं सकी। पापा ने धीरे धीरे मेरी गांड मारनी शुरू की। थोड़ी ही देर में मुझे मजा आने लगा। मेरे पति ने अपनी रफ़्तार फुल कर दी और थोड़ी देर में मेरी गांड में झड़ गया। मैं भी थक कर नीचे गिर गई। थोड़ी देर बाद मैं उठ खड़ी हुई और उसके लंड से खेलने लगी, उसका लंड खड़ा हो गया। मैंने अपना लंड उसके मुँह में दिया।
वो बोला- मैं दोबारा झड़ने वाला हूँ।
यह सुनते ही मैंने उसका कंडोम फाड़ दिया ताकि मैं उसके रस का मजा ले सकूँ।
पति मेरे मुँह में और मैं उसके मुँह में झड गई। हम लोग ऐसे ही एक दूसरे की बाँहों में सो गए।
सुबह मेरी नींद देर से खुली और मैंने देखा कि मेरे पति मेरे पास नहीं हैं। मैंने कपड़े बदले और फ़िर सो गया।
शाम में पापा वापस आये और साथ में खाने का सामान भी लाए। पापा के पास एक और पैकेट था जिसे लेकर वो अपने कमरे में गए। थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने कमरे से आवाज़ लगाई। मैं ऊपर गया और उन्हें साड़ी में देखा। मेरा फिर खड़ा होने लगा।
उन्होंने कहा- तैयार हो जाओ।
मैं कपड़े उतार कर साड़ी की तरफ बढ़ा था कि वो बोले- आज हम माँ बेटी बनेंगे। मैंने अपनी बेटी के लिए महँगी वाली लहंगा चोली ली है
मैंने ब्रा-पैंटी पहनने के बाद चोली पहनी तो पाया कि वो थोड़ी कसी है।
यह देखकर मम्मी हसने लगी,”मैंने अपनी बेटी के लिए जानबूझ कर छोटी चोली ली है !”
मैंने पूरे कपडे पहने और फिर हम खाने के मेज़ पर पहुँचे। मम्मी ने हम दोनों के लिए खाना लगाया। इतनी भूख लगी थी हम दोनों ने तीन मिनट के अन्दर ही खाना ख़त्म कर दिया। फिर हम 12 बजे रात तक औरतों के कपड़ों में रहे और देर तक बातें करते रहे कि मम्मी ने कब साड़ी पहननी शुरू की। मम्मी ने बताया कि वो बचपन से ही साडी पहनने की शौक़ीन है। मुझे कैसे लत पड़ी, यह मैंने उन्हें बताया।
मम्मी ने कहा कि वो जानती है कि उस लड़के ने मुझे ही क्यों चुना। पर बताया नहीं। फिर बातों बातों में वो मेरे लंड से खेलने लगी और अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया। मैं झुक कर उनके लंड को चूसने लगा। थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने मम्मी की गांड चाटी। इस बार मैंने अपनी मम्मी की गांड मारी।
मम्मी ने कहा- मैंने कल से पहले किसी की गांड नहीं मारी थी और आज से पहले किसी से गांड नहीं मराई थी। मैंने कसम ली थी कि अपने बेटी से ही गांड मराऊंगी।
मैंने कहा- मम्मी, आपको यह कसम किसने दिलाई थी?
मम्मी ने कहा- यह बात मैं तुझे फिर कभी बताऊंगी।
बाकी अगली कहानी में। Antarvasna
मेरी कहानी कुछ इस तरह है. 6 महीने Sex Stories पहले हमारे बाजु मे एक जोड़ा रहने आया. उनकी शादी हुए 7-8 साल हुए थे पार उनका कोई बच्चा नहीं था. और वो करीबन 32 साल के ही होंगे. उनके हसबंड का कुछ इंपोर्ट एक्सपोर्ट का बिज़नस था.
थोड़े दिन रहने के बाद उनकी हमारी जान पहचान हो गई और हमारा उनका आना जाना हो गया. थोड़े दिनों बाद उस भाभी और मेरी दोस्ती हो गयी. वोह बहुत सेक्सी थी, वेसे भाभी का फिगेर होगा 34 -28 -34 उसके बूब्स बड़े थे और सेक्सी थे जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे यह देख कर कोई भी मचल जाए.
उसका हब्बी अक्सर महीने मे 15 20 दिन बाहर रहता था और मैं जब भी उसके घर पर जाता तो उसको देखता ही रहता और उसको चोदने की सोचा करता और घर आ कर मुठ मारता था. मैं उसके बूब और गांड के बारे मे सोच सोच कर मुठ मारा करता था. मैं जब भी उसके घर जाता तो, उसे देख के मुझे लगता था की वो उदास उदास रहती है.
एक दिन जब मैं उसके घर गया तो उसका घर का दरवाज़ा खुला हुआ था और मैं बेल बजाये बगैर ही उसके घर मे चला गया तो मैंने देखा कि घर में कोई नहीं है वो बाथरूम मे थी तो मैं सोफा पर जाकर बैठ गया तो मैंने देखा कि वहाँ एक xxx बुक पड़ी है.
मैंने उसको उठा कर देखा तो उसमें xxx तस्वीरें थी सारी तस्वीरें बड़े लंड वाले मर्दों की थी. मैं यह देख कर एक दम गर्म हो गया और फिर मैंने वहीं पर बुक को रख दी, और भाभी बाथरूम मे थी उसकी और चल पड़ा और बाथरूम मे कहा से देखा जाए यह देखने लगा.
जब मैंने बाथरूम मे देखा तो भाभी पूरी न्यूड नहा रही थी और अपने सारे बदन पर साबुन लगा कर अपने बूब्स और चूत को रगड़ रही थी, यह देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया भाभी अपनी चूत मे 2 ऊँगली अन्दर बाहर कर रही थी और हलकी हलकी सिसकार रही थी.
फिर उसकी ऊँगली जोर से चलने लगी, मैं समझ गया की यह अब झड़ने वाली है. तब मैं वहाँ से हट गया, यह देख कर मैं फ़ौरन अपने घर पर आ गया और अपने रूम मे आकर अपनी पेंट उतार कर अपना पूरा लंड बाहर निकाला और मुठ मारने लगा. अब मुझे लगा की भाभी को क्या चाहिए यह मैं जान गया.
और यह सोच ने लगा कि कैसे भाभी को चोद सकूँ, क्यूंकि इस बीच उसका हब्बी भी 7 दिन के टूर पर बाहर जाने वाला था ,तब मुझे लगा कि यह कर सही मोका है भाभी को चोदने का. टूर पे जाते समय उसके हब्बी ने कहा कि 1 वीक के लिए तुम इसका ख्याल रखना, तो भाभी ने कहा कि कोई बात नहीं यह मेरा और मैं इस का ख्याल रखूंगी.
पहली रात को भाभी के घर पे खाना खाने के बाद मैंने भाभी को अपने फ्लैट की चाबी दे दी और कहा कि अगर मोर्निंग में मुझे उठने मे देरी हो गई तो प्लीज़ आप मुझे उठा देना. तो भाभी ने कहा कि कोई बात नहीं मैं तुमको उठा दूंगी और मैं चाबी देकर अपने फ्लैट पर आ गया.
और मोर्निंग में जब उठा तो मेरा लंड हार्ड था तो मैं भाभी के बारे में सोचने लगा और मेरे लंड और हार्ड हो गया तो मैंने अपना शोर्ट उतारा और भाभी को याद करके मुठ मारना शुरू कर दी।
मैं मुठ मारने में मशगूल था और अचानक मेरे बेडरूम मे भाभी मुझे उठाने आ गई मैं मुठ मारने में इतना मशगुल था कि मुझे पता कर नहीं चला कि भाभी कब आ गई उसने मुझे देखा और कहा कि क्या कर रहे हो मैं एकदम घबरा गया और अपना शोर्ट पहने लगा तो भाभी मुस्कुराई और कहा कि तुम्हारा तो बहुत बड़ा है इतने बड़े लंड को हिला हिला कर क्यूँ तंग कर रहे हो.
तो मैंने भाभी को कहा कि यह मुझे बहुत तंग करता है इस लिए हिला रहा हूँ तो उसने कहा कि मैं इस का आज तंग करना बंद करवा दूंगी. भाभी के सामने अपना 8′ का लौड़ा दिखा दिखा कर अपने हाथ से हिलाने लगा. मेरा आठ इंच का लंड फनफना कर खड़ा हो गया था.
भाभी मेरे खड़े लंड को देखते हुई बोली- सचमुच तुम्हारा लंड बहुत लम्बा और मोटा है. उस लड़की को बहुत मज़ा आएगा जो तुमसे चुदवायेगी.
इस पर मैं अपना लंड उनकी तरफ़ कमर हिला कर बढ़ाते हुए बोला- आप ही चुदवा कर देख लो कि कितना मज़ा आता है.
मेरी बात सुन कर भाभी बोली- हाय! अगर मेरे पति को पता चल गया तो बहुत ही बुरा होगा!
मैंने कहा- जब हम किसी को नहीं बताएँगे तो किसी को कैसे पता चलेगा?
यह सुन कर भाभी मेरी तरफ़ देखते हुए मुस्कुराने लगी और अपने होटों पर अपनी जीभ फेरने लगी. मुझे मालूम हो चुका था कि भाभी मुझसे अपनी चूत चुदवाना चाहती हैं, लेकिन पहल मेरी तरफ़ से चाहती है.
मैंने तब आगे बढ़ कर उनकी चुन्चीयों पर अपना हाथ रख दिया और उन्हें धीरे धीरे सहलाने लगा. भाभी कुछ नहीं बोली बस मुस्कुराती रही.
तब मैंने उनकी नाईटी उतार दी और मेरे सामने भाभी सिर्फ़ ब्लैक ब्रा और गुलाबी पैंटी अपनी जवानी का जलवा दिखाते हुए अधनंगी खड़ी थी. फिर मैंने उसकी ब्रा को निकाल फेंका मैं उनकी गोल गोल चुन्ची देख कर हैरान हो गया. उनकी चुन्ची कुछ लम्बे आकार की थी, लेकिन बिल्कुल तनी हुई थी. उनके एरोला करीब 1′ का था और निप्पल देखने में फूला हुआ मुनक्का लग रहे थे.
मैंने फिर धीरे से उनको अपनी बाँहों में ले लिया और उनके चुन्चीयों पर अपना पकड़ मजबूत करके उनको अपने दोनों हाथों में लेकर मसलने लगा. मैंने भाभी को अपनी बाँहों में भर कर कस कर जकड लिया.
भाभी भी मुझको अपने दोनों हाथों से पकडे हुए थी मैंने उनके दोनों होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसने लगा. भाभी भी हमारे बाँहों में अधनंगी खड़ी खड़ी मुझे दोनों हाथों से पकड़ कर अपने होंठ चुसवा रही थी और अपनी चुन्ची मसलवा रही थी.
अब धीरे धीरे भाभी ने मेरे हाथों से निकल कर मेरा बनियान उतार दिया, फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में डाल के उस की चूत को हाथ में लेके उस को रगडा, फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उस की चूत में डाल दी, और उस को ऊँगली से चोदने लगा.
मेरे ऐसा करने से कुछ देर में उस की चूत गीली हो गयी. फिर मुझे लगा अब यह रंडी चुदने को एक दम तैयार है, तब मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से बाहर निकाली, और उसकी पैंटी को उस के बदन से अलग कर दी.
अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल मादरजात नंगे खड़े थे और दोनों एक दूसरे को देख रहे थे.
भाभी बोली- हाय रजा तुम नंगे बहुत सुंदर दीखते हो, तुम्हारा खड़ा हुआ लम्बा लंड देखने में बहुत ही सुंदर लगता है और कोई भी लड़की या औरत इसको अपनी चूत में लेकर चुदवाना चाहेगी.
मैं अब भाभी के पास गया और अपने बाँहों में ले कर उससे पूछा- हमें कोई और लड़की या औरत से मतलब नहीं है, क्या आप मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर लेना चाहती हैं?
तब भाभी बोली- अरे तुम अभी नहीं समझे, मैं तो तभी से तुम्हारे लंड से अपनी चूत की चुदाई करना चाहती हूँ. अब जल्दी से तुम हमको चोदो. मेरी चूत में आग लगी है.’
भाभी मेरे पास आई और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर प्यार करने लगी. अब मैं भाभी का एक चुन्ची अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चुन्ची अपने एक हाथ में लेकर मसलने लगा.
भाभी भी अब तक गर्मा गयी थी. उन्होंने मेरा लंड अपने हाथों में पकड़ कर मुझ को बेड पर पटक दिया और मेरा लंड अपने हाथों में लेकर उसको बड़े ध्यान से देखने लगी. थोडी देर के बाद वो बोली, वैसे तुम्हारा लंड बहुत ही सेक्सी है. आज मेरी चूत खूब मज़े ले ले कर इस लंड से चुदेगी. अब तुम चुपचाप पड़े रहो. मुझको तुम्हारा लंड का पानी चखना है.
मैं तब बोला- ठीक है भाभी जब तक आप मेरे लंड का स्वाद चखोगी, मैं भी आपकी चूत के स्वाद का आनंद उठाऊँगा.
आइये हम दोनों 69 पोसिशन पर पलंग पर लेटते हैं.
फिर हम दोनों पलंग पर एक दूसरे के पैर की तरफ़ मुंह करके लेट गए. मैंने भाभी को अपने ऊपर कर लिया. भाभी ने मेरे लंड के सुपारे को अपने होठों से लगा कर एक जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और कभी कभी उसको अपनी जीभ से चाटने लगी.
मुझको अपने लंड चुसाई से रहा नहीं गया और अपना लंड भाभी के मुंह में पेल दिया. भाभी लंड को अपने मुंह से निकलते हुए एक रंडी की तरह बोली- वाह मेरे राजा अभी और पेलो अपने लंड को मेरे मुंह में, बाद में इसको मेरी चूत में पेलना.’
अब मैंने भाभी को जो कि मेरे ऊपर लेटी हुई थी उसके दोनों पैरों को फैला दिया. अब मेरी आँखों के सामने उनकी झांटों वाली चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और मेरा लंड खाने के लिए तैयार थी. मैं अपनी ऊँगली उनकी चूत में पेल कर अन्दर -बाहर करने लगा.
भाभी तब जोर से बोली- हाय! क्यों टाइम बर्बाद कर रहे हो, मेरी चूत को ऊँगली नहीं चाहिए.. अभी तुम इसको अपनी जीभ से चोदो. बाद में उसको अपना लंड खिलाना, वो तुम्हारा लंड खाने के लिए तरस रही है,’ मैं बोला- क्यों चिंता कर रही हो भाभी, अभी आपकी चूत और अपने लंड का मिलन करवा देता हूँ. पहले मैं आपकी चूत का रस चख तो लूँ. देखूं तो भाभी की चूत का टेस्ट कैसा है. .सुना है कि सुंदर और सेक्सी औरत की चूत का रस बहुत मीठा होता है.’
तब भाभी बोली- ठीक है, जो मर्जी में आए करो, यह चूत अब तुम्हारी है. इससे जैसे चाहे मज़े ले लो. हाँ एक बात और, जब हम एक दूसरे को चोदने के लिए तैयार हैं और एक दूसरे का चूत और लंड चाट रहे हैं, चूस रहे हैं तब यह आप आप का क्या रट लगा रखी है. तुम मुझको नाम लेकर पुकारो और आप आप की रट छोडो.
अब मैंने देखा कि उनकी चूत लंड खाने के लिए खुल बंद हो रही है और अपनी लार बहा रही है और उस की चूत बाहर और अन्दर से रस से भीगी हुई थी. मैंने जैसे ही अपनी जीभ भाभी की चूत में घुसेड़ी, वो चिल्लाने लगी- हाय, क्या चीज बनाई है भगवान ने, चूसो चूसो, और जोर से चूसो मेरी चूत को. और अन्दर तक अपनी जीभ घुसेडो, हई मेरी चूत की घुंडी को भी चाटो, बहुत मज़ा आ रहा है. हाय मैं अब छूटने वाली हूँ.
और इतना कहते ही भाभी की चूत ने गर्म गर्म मीठा रस छोड़ दिया जिसको कि मैं अपनी जीभ से चाट कर पूरा का पूरा पी गया.
उधर भाभी अपने मुंह में मेरा लंड लेकर उसको खूब जोर जोर से चूस रही थी और मैं भी भाभी के मुंह में झाड़ गया. मेरे लंड का सारा का सारा माल भाभी के मुंह के अन्दर गिरा और उसको उन्होंने पूरा का पूरा पी लिया.
अब भाभी का चेहरा काम ज्वाला से चमक रहा था और वो मुस्कुराते हुए बोली- चूत चुसाई में बहुत मज़ा आया, अब चूत चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूँ. अब तुम जल्दी से अपना लंड चुदाई के लिए तैयार करो और मेरे चूत में पेलो, अब मुझसे रहा नहीं जाता.’
मैंने भाभी को पलंग पर चित्त करके लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को ऊपर उठा कर घुटने से मोड़ दिया. फिर मैंने अपने लण्ड का सुपर खोल कर उनकी चूत के ऊपर रख दिया और धीरे धीरे उनकी चूत से रगड़ने लगा.
भाभी मारे चुदास के अपनी कमर नीचे ऊपर कर रही थी और फ़िर थोड़ी देर बाद बोली,’ साले बहनचोद! मुफ़्त में पराई औरत की चूत चोदने को मिल रही है इसीलिए खड़ा लण्ड मेरी चुदासी चूत को दिखा रहा है और लण्ड को चूत के अन्दर पेल नहीं रहा है! साले भोंसड़ी के! गाण्डू! अब जल्दी से अपना मूसल जैसा लण्ड चूत में घुसा, नहीं तो हट जा मेरे ऊपर से, मैं खुद ही अपनी ऊँगली चूत में डाल कर अपनी चूत की गर्मी निकालती हूं।’
तब मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर निप्पल को मसलते हुए उनके होटों को चूमा और बोला,’ अरे मेरी रानी! मितनी भी क्या जल्दी है? पहले मैं ज़रा तुम्हारे सुन्दर नंगे बदन का आनन्द तो उठा लूं! फ़िर तुम्हें जी भर के चोदूंगा। मैंने अब तक अपनी लाईफ़ में कभी इस तरह से नंगी औरत नहीं देखी है। फ़िर इतना चोदूंगा कि तुम्हारी यह सुन्दर डबलरोटी सी चूत लाल पड़ जाएगी और सूज कर पकोड़ा हो जाएगी।
भाभी बोली- साले चोदू! हमारी जवानी का मज़ा तुम बाद में लेना, उसके लिए पूरी रात पड़ी है, अभी हमको घर पे काम है, अभी तो बस तुम मुझको चोदो। मैं मरी जा रही हूं, मेरी चूत में आग लगी है और वो तुम्हारे लौड़े के धक्के से ही बुझेगी, जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दो, प्लीज़ मेरे राज़ा! अब जल्दी भी करो!’
भाभी मेरे लण्ड से चुदाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। मैंने अपना सुपारा उनकी पहले से ही भीगी चूत के दरवाजे के ऊपर रखा और धीरे से कमर हिला कर सिर्फ़ सुपारे को ही अन्दर किया। भाभी ने मेरे फ़ूले हुए सुपारे को अपनी चूत में घुसते ही अपनी कमर को झटके ऊपर उछाला और मेरा आठ इन्च का लण्ड पूरा का पूरा उनकी चूत में घुस गया।
तब भाभी ने एक आह सी भरी और बोली- आह! क्या शान्ति मिली तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत में डलवा कर। यह अच्छा हुआ, मुझे बहुत दिन से इच्छा थी कि किसी लम्बे लण्ड से चुदने की, आज वो पूरी हो गई। नहीं तो मेरी इच्छा पूरी नहीं होती।
अब मैं अपना लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उन्होंने पहले कभी अपनी चूत में इतना मोटा लण्ड कभी नहीं घुसवाया था। शायद उसके पति का लण्ड छोटा होगा, उन्हें कुछ तकलीफ़ हो रही थी। मुझे भी उनकी चूत काफ़ी टाईट लग रही थी। मैं मस्त हो कर उनकी चूत चोदने लगा।
भाभी मेरी चुदाई से मस्त होकर बड़बड़ा रही थी- हाय मेरे राजा! मेरे राजा और पेलो, और पेलो अपनी भाभी की चूत्में अपना मोटा लण्ड, तुम्हारी भाभी की चूत तुम्हारा लण्ड खाकर निहाल हो रही है। हाय! लम्बे और मोटे लण्ड की चुदाई का मज़ा कुछ और ही होता है, बस मज़ा आ गया, हाँ! हाँ! तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत में अपना लण्ड आने दो। मेरी चूत की चिन्ता मत करो, फ़ट जाने दो इसको आज! इसको भी बहुत दिनों से शौक था मोटा और लम्बा लण्ड खाने का। इसको और जोर से खिलाओ अपना मोटा और लम्बा लण्ड।
मैं भी जोर जोर से उनकी चूत में अपना लण्ड पेलते हुए बराबर कह रहा था,’ हाय! मेरी रानी! ले! ले! और ले, जी भर के खा अपनी चूत में मेरे लण्ड की ठोकर। मेरी किस्मत आज बहुत अच्छी है जिस से कि मैं तुम्हारी जैसी औरत की चूत में अपना लण्ड घुसेड़ कर चोद रहा हूं। क्या मेरी चुदाई तुम्हें पसन्द आ रही है, सही सही बताना भाभी- कौन अच्छा चोदता है तुम्हारी रसीली चूत, मैं या आप का पति?’
भाभी बोलि- हाय राजा, अब मैं तुमको क्या बताऊँ, मैं तुम्हारी चुदाई से बहुत खुश हूं। मेरा पति तो मुझको चोदता है लेकिन तुम्हारी और उनकी चुदाई में बहुत फ़र्क है, वो रोज़ सोने से पहले बिस्तर पर लेट कर झट से मुझे नंगी करके मेरी टांगों को उठाता है और अपना लण्ड मेरी चूत में पेलता है। उसको इस बात का अहसास नहीं होता कि औरत गर्म धीरे धीरे होती है। वो दो मिनट चोदता है और फ़िर झड़ जाता है… और मैं प्यासी रह जाती हूं। लगता है तुम्हारा लण्ड खाने के बाद मेरी चूत उनका लण्ड खाना पसन्द नहीं करेगी क्योंकि तुम्हारे लण्ड से मेरी चूत अब फ़ैल जाएगी और उस में उनका पतला और छोटा लण्ड ढीला ढीला जाएगा जिससे कम से कम मुझको तो मज़ा नहीं आएगा।
‘भाभी सही सही बताना, तुमने शादी से पहले भी किसी लण्ड को अपनी चूत में घुसाया है या नहीं?’
‘हाँ, मेरे बोयफ़्रेन्ड जो आजकल जम्मू में है और उसकी शादी किसी और लड़की से हो गई है, उसने मुझको मेरी शादी से पहले भी चोदा था, लेकिन उनके लण्ड की चुदाई मुझे पसन्द नहीं आई।’
‘क्यों?
‘अरे उनका लण्ड भी बहुत छोटा और पतला है, लेकिन वो मुझे चोदने से पहले और चोदने के बाद खूब चूत चाटता और चूसा करते थे और उनकी चूत चुसाई मुझे अच्छी लगती थी। वो शादी से पहले जब भी दिल्ली आते तो मेरी चूत जरूर चोदते थे पर अब उसकी शादी हो गई है।’
यह सब बातें करते करते हुए हम लोग चुदाई का मज़ा लेते रहे और हमारी चुदाई से भाभी दो बार झड़ गई और फ़िर मैंने अपना लण्ड उनकी चूत के अन्दर तक डाल कर उनके अन्दर झड़ गया। फ़िर मैं उस के ऊपर सो गया। कुछ देर बाद भाभी ने बेड से उठ कर अपने कपड़े पहन लिए, मुझे गाल पे किस दिया और अपने घर चली गई। Sex Stories
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