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मेरा नाम राम है। मैं आपको जो कहानी Hindi Porn Stories सुनाने जा रहा हूँ, यह तब की बात है जब मैं कालेज में पहले सेमस्टर में पढ़ता था। मेरे कोलोनी में ही मेरा एक दोस्त अमित(बदला हुआ नाम) रहता था जो मेरे साथ ही कालेज में था, वो कमरा किराए पर लेकर रहता था। सो मैं उसके यहाँ स्टडी या ऐसे ही कभी कभी मिलने चला जाता था। उसके साथ उसकी एक दीदी रीना और उनकी एक सहेली नेहा भी रहती थी। वो दोनों आई आई टी कर रही थी। वे लोग एक ही कमरे में रहते थे।
एक बार जब मैं उससे मिलने उसके कमरे पर गया तो मैंने देखा कि नेहा वहाँ अकेली थी। मेरे पूछने पर उसने बताया कि रीना ओर अमित बाज़ार गये हैं। फ़िर मैं जाने को हुआ तो नेहा ने मुझे ये कह कर रोक लिया कि वो लोग बस आते ही होंगे। सो मैं वहीं रुक गया।
मैंने कभी नेहा से ज्यादा बाते नहीं की थी, ना ही उसके बारे में जानता था, वो मुझसे उमर में शायद तीन साल बड़ी होगी। मैं एक कुर्सी लेकर बैठ गया और अमित के आने का इन्तज़ार करने लगा।
मैने सोचा क्यूँ ना नेहा से ही बातें कर ली जाये। मैं उठ कर उसके पास गया और उससे इधर उधर की बाते करने लगा। बातों ही बातों में मैने उससे पूछ लिया कि क्या उसका कोई बाय फ़्रेन्ड है?
तो उसने शरमाते हुये कहा- नहीं !
मुझे यह बात पूछ्ने में डर इसलिए नहीं लगा क्योंकि वो मुझसे तब तक खुल के बातें करने लगी थी। फ़िर उसने मुझसे पूछा तो मैने भी बता दिया कि मेरी भी कोइ गर्ल फ़्रेन्ड नहीं है।
फ़िर उसने कहा- तुम बैठो ! मैं चाय बना के लाती हूँ।
तो मैं अमित का लेपटोप ओन करके गाने सुनने लगा। तभी मुझे एक शरारत सूझी। मुझे याद आया कि अमित के लेपटाप में बहुत सी ब्लू-फ़िल्में हैं। मैने सोचा क्यूं ना इसे नेहा को दिखाऊँ और अगर काम बन जाता है तो उसकी चुदाई भी कर दूँ!
इस ख्याल से ही मेरे पैन्ट के अन्दर सो रहा मेरा हथियार जाग गया। जैसे तैसे मैंने अपने आप को सम्भाला और गाने सुनने लगा। मैंने 4 गाने एक साथ सिलेक्ट किये और उसके बाद एक ब्ल्यू-फ़िल्म का वीडियो लगा दिया। मेरी उम्मीद के मुताबिक दो गाने खत्म होते ही नेहा चाय लेकर आ गई और मेरे पास बैठ के बातें करने लगी। मैने भी लेपटोप की आवाज को इतना कम कर दिया कि वो कमरे से बाहर ना जाये।
मैंने नेहा से बाथरुम जाने का बहाना किया और बाथरुम चला गया।
बाथरुम दूसरी तरफ़ था। मैं बाथरुम में रुककर चौथे गाने के खत्म होने का इन्तजार करने लगा। फ़िर जैसे ही वो पल आया मैं धीरे से कमरे में आ गया। नेहा तो लेपटोप में ब्ल्यू-फ़िल्म ऐसे देख रही थी जैसे छोटे बच्चे टी वी देखते हैं। उसका मुँह खुला हुआ था, शायद किसी का लन्ड मांग रही थी।
मैं चुपके से जाकर उसके पीछे खड़ा हो गया और उससे कहा- क्या देख रही हो?
तभी वो हड़बड़ा गई और लेपटोप की स्क्रीन बन्द कर दी। वो मूवी देखने में इतनी खो गई थी कि उसे होश ही नहीं था कि मैं भी वहीं हूँ।
शायद उसका यह पहला अनुभव था नग्न फ़िल्म देखने का !
लेपटोप से आहह्ह्ह्ह उउहहहहह की आवाजें आ रही थी जिन्हें सुन कर मेरा लन्ड खड़ा हो गया। उसने शायद यह देख लिया था।
मेरे पूछ्ने पर कि क्या कर रही थी, वो कुछ नहीं बोली, शायद शरमा गई थी।
मेरे बार बार पूछ्ने पर भी उसने कुछ नहीं कहा तो मैने लेपटोप की स्क्रीन ऊपर कर दी। चूंकि मूवी बहुत लम्बी थी इसलिये वो अभी भी चल ही रही थी। फ़िर मैने नेहा की तरफ़ देखा तो उसने अपनी आँखें अपने हाथों से बन्द कर ली।
उसे देख कर मन तो एसा कर रहा था कि पकड़ कर अभी चोद डालूँ लेकिन मैं थोड़े मजे लेना चाहता था। फ़िर मैने उसके दोनों हाथों को पकड़ा और उससे कहा- इसमें शरमाने की क्या बात है? ये तो सब लोग देखते हैं !
और उसको आँखें खोलने को कहा। उसने अपनी आँखें खोली और मुझसे पूछ्ने लगी- क्या तुमने कभी ऐसी मूवी देखी है?
तो मैने कहा- हाँ ! एक दो बार देखी है !
उसने बताया- मैंने कभी ऐसी मूवी नहीं देखी थी !
मुझे तो यह पहले ही पता चल गया था जब उसे मुँह खोल के मूवी देखते देखा था। खैर फिर मैने उससे कहा- चलो साथ में देखते हैं !
पहले तो वो मना करने लगी पर थोड़ा सा मनाने पर मान गई। फ़िर हम दोनों साथ में मूवी देखने लगे। मैं और वो एक ही बिस्तर पर बैठे थे। मूवी देखते हुए मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज चलने लग गई थी।
तो मैंने भी सोचा- अब मौका है !
मैं धीरे से अपना हाथ उसकी जांघों पर लाया और उसे सहलाने लगा।
तो उसने कुछ भी नहीं कहा। फ़िर मैं हाथ थोड़ा ऊपर करके उसकी गाण्ड पर लाया और उसको दबाने लगा। कसम से क्या गान्ड थी उसकी ! एक दम मुलायम !
तो उसने कहा- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- वही जो तुम मूवी में देख रही हो ! और पूछा- क्यूँ? अच्छा नहीं लगा क्या?
तो उसने कहा- अगर करना ही है तो अच्छे से करो !
मैं भी यह सुन कर जोश में आ गया और उसे पकड़ कर उसके होंठों पे किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी।
क्या रसीले होंठ थे उसके ! मजा आ गया उसे चूमने में !
फ़िर मैने उसके सारे कपड़े उतार दिये, उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ लगा दी और उसे चाटने लगा। वो तो जैसे पागल सी हो गई और मेरा मुँह पकड़ के अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी मदहोश हो कर उसकी चूत चाट रहा था। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई मैंने उसका सारा रस पी लिया। उसके बाद मैंने उसे अपना लन्ड चूसने को कहा। पहले तो उसने मना किया पर मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में डाल कर उसे मुँह में चोदने लगा। उसे भी मेरा लन्ड चूसने में मजा आने लगा। करीब 5 मिनट बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया। उसके बाद मैंने उसकी तीन बार चुदाई की और एक बार गाण्ड भी मारी। उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे को किस किया।
फ़िर अमित ओर उसकी बहन भी आ गये।
अगली बार आपको बताउँगा कि रीना को मैंने कैसे मनाया चुदाई के लिये !
आप मुझे मेल करके बताना आपको मेरी कहानी कैसी लगी। Hindi Porn Stories
मेरी प्यारी चुदासी औरतें और तमाम चूतवालियों आपको राजेश का Antarvasna प्यार। आशा करता हूं कि अभी तक की कहानी जो हकीकत है आप सबको पसन्द आयी होगी और तमाम चूतें रस से लबालब भर गयी होंगी। मैं हमेसा तैयार हूं किसी भी चूत को मारने के लिये। मेरा तो दिल करता है जैसे सभी खेलों का विश्वकप होता है वैसे ही लंड चूत के खेल का भिउ विश्वकप होना चाहिये। अब आपको आगे की कहानी बताता हूं।
सोनम, पाठकों गलती से भाग-२ में इसका नाम शालु लिख दिया है आप नाम को छोड़िए और घटना का आनन्द लीजिये, कि जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनो पस्त होकर सो गये। सोनम बोली “राजा तूने आज इस चूत का खूब मजा लिया और मुझको भी मजा दिया। सचमुच इतनी जबरदस्त चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी। मेरी तो पूरी चूत दर्द कर रही है। हरामी, हमेशा मुझको चोदते रहना।” मैं बोला “रन्डी अभी तो तेरी गाँड तो बाकी है, मैं तो तेरी गाँड भी मारुंगा तब शान्ती मिलेगी।” सोनम “न रे मादरचोद तेरे इतने मोटे लंड से मैं अपनी गाँड नहीं फड़वाउंगी। तू तो मेरी जान ले लेगा।”
मैने कहा “रानी बड़े प्यार से तेरी गाँड मारुंगा, तू चिंता मत कर तुझे बड़ा मजा आयेगा, मैं जैसा बोलता हूं वैसा कर। जा देख चाची के किचन में कोई मोटा लकड़ी का चिकना डंडा है।” चाची के किचन में दाल को मथने वाली मथानी मिली जिसका हैंडल चिकना और मोटा था। किचन में तेल की शीशी भी मिल गयी।
दोनो को लाने के बाद मैने सोनम से कहा “रानी जरा अपनी गाँड तो दिखाओ उसका रास्ता जरा साफ़ कर दूं ताकि मेरा लंड असानी से उसमें घुस सके।” मैने उसकी साड़ी उठाकर उसको उल्टा सुला दिया, उसके ब्लाउज़ के बटन खोलकर उसके दोनो मम्मो को बे-रहमी से मसलने लगा, वो चिल्लाने लगी “अरे सुअर कितनी जोर से मसल रहा है, जरा धीरे धीरे मसल ताकि मुझको भी मजा आये। इसको छोड़ मादरचोद अपना लंड मेरे मुँह में दे ताकि उसको चूस के खड़ा तो करूं तभी तो तू मेरी इस कोमल गाँड को मार पायेगा।
मैने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया वो सचमुच एक कुतिया की तरह चभर चभर मेरे लंड को चूसने लगी और बोली “बहनचोद, तेरा लंड अभी कितना शांत है और खड़ा होता है तो खतरनाक हो जाता है।” लंड धीरे धीरे अपने असली रूप में आने लगा। मैने उसको उल्ता सुला कर कुतिया के पोज में कर दिया। उसकी गाँड का छेद दिखने लगा था।
मैने उसकी गाँड के छेद पर थूक लगाया और अपनी जीभ से उसकी गाँड को कुत्ते की तरह चाटने लगा और अपनी जीभ को उसकी गाँड में घुसाने लगा। अपनी एक उंगली उसकी गाँड में धीरे धीरे डाला और अंदर बाहर करने लगा। सोनम “राजा तेरी उंगली से तो मजा आ रहा है जरा जोर जोर से डाल।” मैने उसकी गाँड पर ढेर सारा तेल डाला और उसको अपनी उंगली से उसकी गाँड के अंदर डाल दिया। फिर दाल मथानी के हैंडल पर तेल लगाया और उसको सोनम की गाँड पे रखा और दबाया, वो सरकता हुआ उसकी गाँड में घुसने लगा और वो बोल पड़ी “अरे हरामी के बच्चे आराम से घुसा” धीरे धीरे हैंडल उसकी गाँड में घुस गया और मैं उसको अंदर बाहर करने लगा। सोनम को भी मजा आने लगा “अरे राजा बड़ा मजा आ रहा है जरा जोर जोर से डाल, हाय रे मादरचोद, नहीं पता था कि गाँड में भी इतना मजा आता है। राजा मेरी गाँड का भी छेद मेरी चूत की तरह कर दे और इसको भी अपने खम्भे से चोद।” मैं हैंडल को गोल गोल घुमाने लगा ताकि उसकी गाँड ढंग से खुल जाये और मेरे लंड का रास्ता साफ़ हो जाये।
उसके बाद मैने अपने लंड पे ढेर सारा तेल लगाया और उसकी गाँड के छेद पर रख कर एक जोर का झटका मारा, सोनम चीख पड़ी “अरे हर्रर्राम्ममीइ मादरचोद, सुअर मार डाला रे, अहह … र्रर्रर्रर्रीईईए माअद्ददाअर्ररछहूओद्दद्द ने मेरी गाँड फाड़ दी रे। हराम का चोदा रे रुक जा रे साला धीरे धीरे डाल रे हाय रे मेरी गाँड।” मैने फिर धीरे धीरे दबाना सुरु किया और १० मिनट की मेहनत के बाद मेरा लंड उसकी गाँड मेँ ठस गया था। मैने धीरे धीरे अंदर बाहर करना चालु किया, सोनम का दर्द भी कम हो गया था। मैने स्पीड बढ़ाना चालू किया और अब सोनम रंडी को भी मजा आ रहा था। पूछा “क्यों रंडी अब मजा आ रहा है न, छिनाल आज मैं तेरी गाँड फाड़ के रहूँगा, साली एक नम्बर की चुदक्कड है तू, तेरा सारा परिवार छिनाल है। हरामजादी तुझे बता दूं तेरी दोनो बड़ी बहनें भी मेरे लंड की आशिक है और मैं उनको भी जम के चोदता हूं, समझी। तेरी माँ को भी मैने एक बार चोदा हाय रे रंडी। तेरी माँ तो तेरे से बड़ी छिनाल है साली का भोसड़ा इतना बड़ा है कि उसमें दो लंड घुस जाये।”
मेरा लंड तूफान मेल की तरह सोनम की गाँड में उसको चोद रहा था और सोनम तो जैसे पागल हो गयी थी “जियो मेरे राजा आज तुमने मुझको नया आनन्द दिया है, बहुत मजा आ रहा है दिल करता है इस लंड को अपनी गाँड से निकालू ही नहीं। आहा रे मेरे राजा, जोर से मार आह्हह मार मार मार जोर जोर से मार और जोर से मार रे मादरचोद हाय रे अरे पूरा लंड घुसा दे रे मादरचोद। शाबाश मेरे राजा ये चूत और गाँड तुम्हारी हुई जब चाहे जितना चाहे मारना। तू तो बड़ा हरामी है रे तूने तो मेरे पूरे परिवार को चोद दिया है। अगली बार तू मुझको और मेरी माँ को एक साथ चोदना, नई और पुरानी चूत दोनो का मजा एक साथ लेना।”
मैं पागलों की तरह उसकी गाँड में अपना लंड पेले जा रहा था और २० मिनट बाद मेरे लंड ने अपना सारा माल उसकी गाँड में गिरा दिया और शांत हो गया। सोनम ने माल से सने लंड को कुतिया की तरह साफ़ कर दिया चाट चाट कर। सोनम “चल मेरे राजा तूने बहुत मजा दिया और मैं याद रखुंगी तेरी इस चुदाई को। समय समय पर लंड का आनंद देते रहना।”
इस प्रकार सोनम की एक चुदाई खत्म हुई, मैने अनगिनत बार उसकी चूत मारी है और आज भी उसकी चूत मारता हूं। दोस्तों अगली बार मैं अपने मामी की चुदाई की असली दास्तान ले कर आपके सामने आउंगा। Antarvasna
वे बोलीं- क्या हुआ हार्दिक?
मैं पहले कुछ नहीं बोला फिर उनसे कहा- आप एक मिनट आइए.
तब मैं एक रेस्टोरेंट में उनको ले गया और उनको बैठने को बोला.
वे कुछ बोलतीं, इससे पहले मैं ऑर्डर देने चला गया.
और वे एक टेबल से लगी कुर्सी पर बैठ गईं.
मैं उनका पसंदीदा कप केक लेकर आया. ये मैंने उनसे व्हाट्सैप पर उनकी पसंद पूछी थी, तभी पता चला था.
वे कप केक देख कर खुश हो गईं.
मैंने उनसे कहा- यहां का कप केक काफ़ी अच्छा है.
हम दोनों वे कप केक खाने लगे, जिससे उनके चेहरे पर थोड़ी स्माइल आ गई.
फिर मैंने उनसे पूछा- मैम एक बात बोलूँ!
वे बोलीं- हां बोलो.
मैंने कहा- मैम, आपको देख कर लगता नहीं कि आपका कोई बेटा भी होगा. इनफॅक्ट ऐसा भी नहीं लगता है कि आपकी शादी भी हुई है.
वे बोलीं- अच्छा जी, ऐसा क्यों?
मैं बोला कि बस आपको देख कर लगता है कि आप 21-22 साल की ही लड़की हो.
वे बोलीं- ऊओह ये बात!
वे ये कह कर हंस पड़ीं और कुछ देर वापस हम दोनों बाइक पर बैठ कर चल दिए.
मैंने उनको उनके घर पर ड्रॉप कर दिया.
वे मुझे अन्दर आने के लिए बोलने लगीं पर मुझे कुछ काम था तो मैंने मना कर दिया.
उन्होंने मुझे थैंक्यू बोला.
मैं वहां से चला गया.
अब मैं उनसे और ज़्यादा बातें करने लगा.
वे भी मुझसे खुल सी गई थीं.
फिर एक दिन वे मुझसे मेरी फैमिली के बारे में पूछने लगीं.
मैंने उनको अपनी फैमिली के बारे में बताया साथ ही ये भी बताया कि मेरी फैमिली की कंडीशन इतनी अच्छी नहीं है.
उन्होंने कहा- सब ठीक हो जाएगा … और हां कभी कुछ भी ज़रूरत हो, मुझसे बोल देना.
मैंने उनसे कहा कि कोई नहीं मेम.
वे बोलीं- क्या कोई नहीं?
फिर मैं कुछ नहीं बोला और उनको बस थैंक्यू बोला.
अब हमारी ऐसे ही बातें होती रहीं.
मैम मुझे अब अपनी बातें और कुछ काम भी बता दिया करती थीं और कभी कभी मेरे साथ कॉलेज जातीं.
फिर उन्होंने अचानक से मुझसे कॉलेज में बोलना बंद कर दिया और मुझसे अब मज़ाक भी नहीं किया.
मैंने शुरू में तो कुछ ध्यान नहीं दिया पर 5-6 दिन बाद मुझे जब ये महसूस हुआ.
तो मैंने उनसे फोन पर पूछा.
वे बोलीं कि कुछ नहीं बस तुमको ऐसे ही लग रहा है.
अगले दिन में कॉलेज गया और मैम ने मुझे लेक्चर के बाद अपने केबिन में बुलाया.
मैं वहां गया तो उन्होंने मुझसे कहा- हार्दिक, तुमको पता है कि क्लास में हमारे बारे में क्या चल रहा है?
मैं चुप रहा.
मुझे तो पता था कि क्लास में मेरे और मैम के बारे में बातें होती थीं.
वे बोलीं- बताओ?
मैंने कहा- मुझे नहीं पता मेम?
वे बोलीं- ज़्यादा सीधे मत बनो. अच्छा चलो तुम जाओ … और हां अब थोड़ा ध्यान रखो. इन सब बातों ने मेरा दिमाग़ खराब कर दिया है.
मैं बोला- मैम, मैं कुछ बोलूँ, बुरा ज़रूर लगेगा आपको!
वे बोलीं- हां बोलो!
मैंने उनसे कहा- आप बिना मतलब इन बातों पर ध्यान दे रही हैं.
वे बोलीं- क्या मतलब?
मैंने कहा- आप इन बातों को पहले सोचना छोड़ो … और सोचो क्लास में तो सबको फालतू बकने का काम करते हैं और अगर आप मुझसे बोलोगी भी नहीं तो भी भी क्लास में सब ये ही सोचेंगे, जो वे सोच रही हैं. पर कुछ टाइम बाद सब भूल जाएंगे. आपको इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए कि कोई आपके बारे में अच्छा सोचे या बुरा. वे उनकी सोच है, जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते. वे अब आपके बारे में सोच रहे हैं … कल को किसी ओर के बारे में सोचेंगे.
फिर वे बोलीं- अच्छा बाबा ठीक है, चलो तुम अब अपनी क्लास में जाओ.
मैं क्लास में आया और सोचने लगा कि कहीं मैम मुझसे बातें करना बंद ना कर दें.
पर फिर मैम मुझसे फिर से अच्छे से बातें करने लगीं.
कुछ दिन बाद मैम का बर्थडे आया.
मैं पहले उनको विश करने की सोच रहा था लेकिन फिर मैंने नहीं किया.
मैंने उनको सर्प्राइज़ देने का सोचा.
मैं कॉलेज गया और मैम से बात भी हुई.
पर मैंने ऐसे रिएक्ट किया जैसे मुझे याद ना हो कि उनका आज बर्थडे है.
वे थोड़ा दुखी हो गईं.
मैं समझ गया कि क्या बात है.
एक तो मैंने भी उनको बर्थडे विश नहीं किया और दूसरा वे अपने बर्थडे पर अकेली थीं.
वे लेक्चर में भी चुप-चुप सी रहीं.
मैंने प्लान बनाया कि उनको सर्प्राइज़ देता हूँ.
जैसे ही मेरा कॉलेज खत्म हुआ और मैंने मैम को कॉल किया.
तब 4 बजे थे.
‘मैम आप फ्री हो क्या?’
वे बोलीं- क्यों, क्या हुआ?
मैंने उनसे झूठ बोला कि आज मेरी भाभी का बर्थडे है, तो उनके लिए कुछ गिफ्ट लेना है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि क्या लूँ.
वे बोलीं- देख लो, कुछ भी ले लो.
मैंने कहा- मैम मुझे समझ आता, तो आपको कॉल थोड़े ही करता.
मैंने उनसे जोर देकर कहा- प्लीज मैम चलिए ना प्लीज.
वे मान गईं, वे बोलीं- अच्छा ठीक है.
मैंने उनसे कहा- मैं 30 मिनट में आपको पिक करने आता हूँ.
उन्होंने ओके बोला और फोन कट कर दिया.
मैं तैयार होकर मैम के पास चला गया और उनको पिक करके हम दोनों एक मॉल में आ गए.
वहां के लेडीज सेक्शन में आए और उधर मैम ने एक पर्फ्यूम सिलेक्ट किया जिसकी खुशबू मैम को काफी अच्छी लगी.
वाकयी में खुशबू अच्छी थी.
मैंने परफ्यूम पैक करवा ली और हम वहां से निकल पड़े.
रास्ते में आते हुए मैंने एक रेस्टोरेंट के बाहर बाइक रोकी और मैम से कहा- कुछ खाते है, बहुत भूख लग रही है.
मैम ने कहा- मेरा मन नहीं है.
वे अभी भी थोड़ा सा अपसैट थीं पर मेरे ज़िद करने पर वे मान गईं.
हम अन्दर गए और मैंने वहां पहले से ही एक सेक्शन मैम के बर्थडे के लिए बुक किया हुआ था जो उनके लिए सर्प्राइज़ था.
वहां थोड़ी डेकोरेशन भी करवाई थी.
मैं मैम के साथ वहां गया और उनको बिठा कर मैं काउंटर पर बोल कर आया कि वे केक भेज दें.
मैंने थोड़ा बर्थडे बॉम्ब वगैरह का इंतजाम भी किया था और गाने चलाने के लिए भी होटल वालों को बोल दिया था.
उन्होंने प्यारे से सॉंग्स चलाए और मैम मुझे देख कर कुछ पूछने वाली थीं कि तभी वेटर केक लेकर आ गया और टेबल पर रख दिया.
मैंने मैम को बर्थडे विश किया.
मैं मैम के बराबर में ही बैठा था.
मैंने उनको केक कट करने के लिए बोला.
उनको बहुत अच्छा लगा.
जब वे केक कट करने लगीं, तो वहां वे बर्थडे बॉम्ब वगैरह भी फोड़े, जिससे उनको और ज्यादा खुशी मिली.
मैंने उनको एक बार और विश किया.
उन्होंने मुझे थैंक्स बोला और मुझे केक खिलाया.
मैंने उनको वे परफ़्यूम दिया तो वे बोलने लगीं- ये तो तुम्हारी भाभी के लिए था ना!
मैंने कहा- मैंने आपसे झूठ बोला था, जिससे मेरा सर्प्राइज़ खराब ना हो. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या गिफ्ट दूँ तो ये बहाना बनाया था.
वे बोलने लगीं- इस सबकी क्या ज़रूरत थी. तुमने इतना सब क्यों किया?
मैंने कहा- ख़ास लोगों के लिए ख़ास चीजें ही की जाती हैं.
वे बोलीं- लेकिन फिर भी इतना सब … और तुम्हारी कंडीशन भी इतनी अच्छी नहीं है, फिर भी?
मैंने उनसे कहा कि मैंने आज के लिए अपनी पॉकेट मनी सेव की थी.
उनके कुछ बोलने से पहले मैं बोला कि अब आप केक भी कट कीजिए ना!
वे हंस दीं और उन्होंने केक कट करके मुझे खिलाया.
मैंने भी उनको खिलाया और बोला कि अब तो मूड ऑफ नहीं है आपका!
वे बोलीं कि मुझे इतना अच्छा सर्प्राइज़ कभी नहीं मिला.
उन्होंने मुझे फिर से थैंक्स बोला और मेरे गाल पर किस कर दिया.
वे अपना चेहरा नीचे करके बैठ गईं.
एक पल बाद उन्होंने मुझे सॉरी बोला.
अब मैं उनको क्या बोलता.
फिर हम दोनों ने वहां पर डिनर किया और मैंने उनको घर ड्रॉप कर दिया.
रात को मैं उनके बारे में सोचता रहा और वे किस याद करके अपना लौड़ा सहलाता रहा.
अगले दिन सब नॉर्मल था.
ऐसे ही कुछ दिन निकले. अब मेरी उनसे और ज़्यादा बातें होना शुरू हुईं.
एक दिन मैंने उनको प्रपोज़ करने का सोचा.
लेकिन हिम्मत नहीं हुई कि कहीं उनको बुरा लगा तो!
मैंने सोचा कि उनको व्हाट्सैप पर ही बोल देता हूँ.
उनसे व्हाट्सैप पर बात करते हुए मैंने कहा- मुझे आपको कुछ बोलना है!
वे बोलीं- हां बोलो.
मैंने मैसेज किया कि आई लव यू.
उन्होंने 2 मिनट तक कोई रिप्लाइ नहीं किया.
फिर कहा- अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, तुमको अभी बहुत कुछ करना है. कल से तुम्हारे पेपर भी हैं.
मुझे थोड़ा बुरा लगा और मैं उनकी बात समझा भी नहीं.
फिर बस मैंने अगले 12 दिन उनसे बातें नहीं की और अपने एग्जाम पर ही ध्यान दिया.
ये इंटर्नल एग्जाम थे.
बस मुझसे सवाल पूछा था, तो उससे रिलेटेड बातें हुईं.
एग्जाम खत्म हुए और मैं उनसे कॉलेज में अकेले में मिला.
मैंने उनसे सॉरी बोला, तो वे बोलीं- क्यों?
मैंने कहा कि उस दिन के लिए.
वे कुछ नहीं बोलीं और कहा कि छोड़ो इस बात को.
फिर इधर उधर की बातें हुईं और मैं घर आ गया.
पहले तो मैं उनको केवल हवस की निगाहों से देखता था और उनको चोदना चाहता था, इसलिए टीचर रोमांस कर रहा था लेकिन अब कहीं ना कहीं मेरे दिल में उनके लिए थोड़ी सी फीलिंग्स आ गई थी.
शायद इसका एक कारण ये भी था कि हम दोनों की कंडीशन सेम थी.
उनके पास इतना कुछ होते हुए भी वे अकेली थीं … और मेरे पास कुछ नहीं था इसलिए परेशान और अकेला था.
मैं रात को सोचने लगा कि लगता है पल्लवी मैम के मन में भी मेरे लिए कुछ है.
क्योंकि जब मैंने उनको प्रपोज़ किया तो उन्होंने हां नहीं की और मना भी नहीं की.
उनको यदि बुरा लगता तो वे मुझसे नाराज़ होतीं.
यह सोचते ही मैंने आगे सोचा कि मेरे बर्थडे के 3 दिन बाद वे फ्री हो जाएंगी, उनकी कॉलेज की टेंशन, जो पेंडिंग वर्क है, वे भी खत्म हो जाएगा, तभी उनसे तसल्ली से बात करना ठीक रहेगा.
ऐसे ही 3-4 दिन निकल गए.
वे मुझसे, इतना व्यस्त होने के बाद भी काफ़ी बातें करतीं और मुझे छेड़ भी देतीं.
मैं भी उनसे अब ज़्यादा हंसी मज़ाक करने लगा था.
अगले दिन जब मैं कॉलेज गया तो मेरे कुछ क्लासमेट मेरे बर्थडे की पार्टी की बात करने लगे.
पहले तो नॉर्मल ही रहा.
फिर पल्लवी मैम लेक्चर लेने आईं तो मैम ने उनकी बात सुन ली कि वे मुझसे पार्टी के लिए बोल रहे हैं.
वे भी मुझे कहने लगीं- हार्दिक, बर्थडे की पार्टी कहां दे रहे हो?
मैंने उनसे भी यही बोला कि देखते हैं मेम.
मैम और मेरे दोस्त दोबारा कहने लगे तो मैंने कह दिया- रेस्टोरेंट में चलते हैं. पर बर्थडे से अगले दिन का रखेंगे.
अब मैं उन्हें क्या बताता कि मुझे पैसों का भी इंतजाम करना था.
मैम भी बोलीं- हां ठीक है. उस दिन तो मैं भी फ्री हूँ.
सभी ने मेरे बर्थडे से अगले दिन का प्लान फिक्स किया.
अब मुझे पैसों का देखना था.
मैंने सोचा कि अपने फ्रेंड से मांग लेता हूँ बाद में दे दूंगा.
मेरा बर्थडे आया, मुझे मैम ने 12 बजे विश किया और कुछ प्यारी से कपल वाली केक कट करते हुए एक पिक सेंड की.
मैंने उनको थैंक्स बोला.
उन्होंने पूछा- तुम कल कॉलेज तो आ रहे हो ना!
मैंने कहा- हां मेम, आ रहा हूँ ना … क्यों क्या हुआ?
वे बोलीं- कुछ नहीं, बस ऐसे ही पूछा. वो कल शायद तुम्हारा असाइनमेंट होगा ना!
मैंने उनको ओके बोला और मैं सुबह कॉलेज गया.
मेरा बर्थडे हर बार की तरह सिंपल सा था.
मुझे पता था कि बस घर जाकर शाम को केक कट करना और बस घरवाले कुछ गिफ्ट देंगे शायद और बस खत्म.
मुझमें कुछ उत्साह नहीं था.
अब मैम का लेक्चर आया, वे क्लास में आईं … तो मैं उनको देखता ही रह गया.
वे आज ब्लैक साड़ी पहन कर आई थीं. वे आज से पहले कभी ब्लैक साड़ी में नहीं आई थीं.
जब वे क्लास में आईं तो मेरी तरफ आंख मारती हुई और अपनी कमर मटकाती हुई आईं.
मेरे नजदीक आकर मुझसे थोड़ा मादक सी आवाज़ में बोलीं- हैप्पी बर्थडे टू यू हार्दिक!
मैंने उनको थैंक्यू मैम बोला.
उन्होंने मुझे फिर से आंख मारी, पर मैं कुछ समझा ही नहीं क्योंकि मेरा ध्यान तो उस काली साड़ी में उनके गोरे टाइट जिस्म पर था, जिसे देख कर मेरा बुरा हाल हुआ जा रहा था.
मैं खुद पर किसी तरह कंट्रोल कर रहा था.
उनका लेक्चर खत्म हुआ और वे बाहर चली गईं.
मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर हाथ चलाया, तब जाकर मुझे कुछ राहत मिली.
कुछ समय बाद जब छुट्टी हुई, तो मैम की कॉल आई कि मैं उनके केबिन में जाऊँ.
मैं वहां गया तो वे मुझसे बोलीं कि उनकी स्कूटी फिर से खराब हो गई है और उनको कुछ बुक्स घर लेकर जाना है, तो मैं उनको घर पर ड्रॉप कर दूँ.
वे अब मुझे कुछ भी बात अपने हक़ से बोलने लगी थीं, पहले की तरह नहीं कि प्लीज प्लीज कह कर कहें.
मैंने उनको ओके बोला.
उन्होंने कुछ बुक मुझे भी पकड़ा दीं और मैं उनके साथ नीचे पार्किंग तक आया.
फिर मैंने उनको वे बुक्स दे दीं और वे मेरे पीछे बैठ गईं.
मैं बाइक लेकर निकला, मैंने बाइक पर रास्ते में 4-5 बार ब्रेक मारे, जिससे वे मेरे ऊपर गिर जातीं और उनके 34 इंच के बूब्स मेरी पीठ में दब जाते.
वे आउच बोलतीं.
मैं उस पल का सुख लेता हुआ अपने नसीब को सराहता.
हम दोनों उनके घर आ पहुंचे.
मैंने बाइक रोकी और वे उतर गईं.
उन्होंने बुक्स मेरी बाइक पर ही रखी हुई थीं.
वे मुझे अन्दर आने के लिए बोलने लगीं.
मेरा उनको देख कर ही बुरा हाल हो रहा था.
यदि उनके घर में जाता तो पक्की कुछ न कुछ गड़बड़ हो जाती.
मैंने मना किया तो वे थोड़ा फोर्स करने लगीं और बोलीं- इतनी सारी बुक्स हैं, ये तो अन्दर रखवा दो.
तब मैंने उनको ओके बोला और बाइक को साइड में खड़ा करके उनके पीछे बुक्स लेकर चल दिया.
वे मेरे सामने अपनी गांड मटका मटका कर चल रही थीं.
वे घर खोलने के बाद एक रूम में गईं और मुझे भी बुलाया.
वे उनका बेडरूम था.
उन्होंने वहां टेबल पर बुक रखने को कहा.
मैंने वहां बुक्स रख दीं.
उन्होंने मुझे बैठने को बोला, मैं मना करता … उससे पहले ही उन्होंने फिर से बोल दिया- बैठ जाओ, ज़्यादा नखरे ना दिखाओ.
मैं उनके बेड पर बैठ गया.
वे मेरे लिए पानी लेकर आईं.
मैंने पानी पिया और ग्लास टेबल पर रख दिया.
मैं अब उनको देख रहा था और उनके रूम को भी.
वे मुझसे बोलीं- अपना ये बैग साइड में रख दो, कौन सा भागना है तुमको!
मैं चुप था.
मैंने उनको देखते हुए बैग रख दिया.
वे मुझसे पूछने लगीं- क्या देख रहे हो ऐसे?
मैं बोला- कुछ नहीं … सक्षम नहीं दिखाई दे रहा!
वे बोलीं- मैंने तुमको बताया था ना कि मेरे हज़्बेंड मुंबई में रहते हैं. सक्षम की अभी 2 महीने की छुट्टी है, तो वे अभी 3 दिन पहले ही अपने पापा के पास गया है.
मैंने ओके कहा.
वे मुझसे बोलीं- क्या लोगे … चाय कॉफी या कोल्ड ड्रिंक?
मैं बोला कि कुछ नहीं मेम. बस आज्ञा दीजिए, मैं चलता हूँ.
क्योंकि मेरा लंड काबू से बाहर हो रहा था. मेरा मन तो ये कर रहा था कि उनको अभी पकड़ कर चोद दूँ पर फिर उनकी लाइफ के बारे में सोचता, तो मेरा ये ख्याल चला जाता कि मेरी किसी हरक़त की वजह से उनको बुरा लग गया, तो उनकी लाइफ में रहेगा ही कौन … क्योंकि वे मुझसे ही बातें करती हैं बस.
वे बोलीं- अच्छा 2 मिनट रूको, मैं आती हूँ.
मैं हां में सर हिला कर बैठा रहा और वे रूम से बाहर चली गईं.
दोस्तो, मैम कमरे से बाहर जरूर चली गई थीं.
लेकिन जब वे वापस आईं तो मैं भौचक्का रह गया था.
मैंने उनसे जो चाहा था वे मुझे खुद ब खुद मिल गया था.
जी हां … मैम ने अपने आपको मेरे हवाले कर दिया था और मैंने उनकी तबियत से चुदाई की
हॉट मौसी सेक्सी कहानी में मैंने रात को अपनी मौसी को पापा के साथ जाती देखा तो मुझे लगा कि दोनों चुदाई करने जा रहे हैं. बाद में जब मौसी ने मुझसे भी सेक्स किया तो …
मेरा नाम प्रशांत है.
मेरे पापा का नाम रमेश है.
पापा की उम्र 45 साल है.
मेरे मौसा की उम्र 50 साल है क्योंकि मेरे मौसा जी ने दो शादी की हैं.
पहली मौसी शांति जो कि बड़ी है और दूसरी मौसी का नाम रीतिका है, मेरी छोटी मौसी की उम्र 33 साल है.
छोटी मौसी अभी बहुत जवान है इसलिए उनके अंदर गर्मी बहुत है.
यह हॉट मौसी सेक्सी कहानी तब की है जब मैं 22 साल का था और वाराणसी में रहकर पढ़ाई करता था.
एक बार 2 दिन की छुट्टी हुई तो मैं घर गया.
घर पर मौसी भी आई थी.
हम सबसे मिले उसके बाद खेत में काम करने चले गए.
जब शाम हुई तो सब लोगों ने खाना खा लिया.
उसके बाद मैं खेत में बने कमरे में सोने चला गया.
कुछ देर बाद पापा भी आए सोने के लिए, मेरे पास लेट गए.
उनको लगा होगा कि मैं सो रहा हूं तो वे मुझसे कुछ नहीं बोले.
उसके आधा घंटा बाद छोटी मौसी आई पानी लेकर!
तो पापा बोले- तुम क्या करने आ गई यहां पर?
मौसी बोली- पानी लेकर आई हूं आपके पास!
तो पापा बोले- पानी पिलाओगी या कुछ और भी पिलाओगी?
तब मौसी बोली- और क्या पिएंगे? साथ में बेटा लेटा हुआ है!
तो पापा बोले- यह तो सो गया.
तब पापा ने मुझे आवाज दी, मैं कुछ नहीं बोला.
तो उनको लगा कि मैं सो गया हूं.
उसके बाद मौसी पानी रख कर चल दी.
तो पापा भी उसके पीछे पीछे गए.
तो मैंने सोचा कि पता नहीं ये दोनों कहां जा रहे हैं.
थोड़ी दूर तक तो मैंने देखा, वे ज्यादा दूर निकल गये, अंधेरा होने कारण मैं कुछ देख नहीं पाया.
उसके बाद पापा कब आये पता नहीं … मैं सो चुका था.
बीच्ग रात मेरी नींद खुली तो पापा मेरे पास थे, मौसी नहीं थी, मेरे ख्याल से मौसी घर चली गई थी सोने उसके बाद!
सुबह हुई तो मेरे दिमाग में वही बात घूम रही थी.
मुझे लगा कि पापा ने मौसी को रात में जरूर चोदा होगा.
लेकिन मुझे पक्का तो पता था नहीं!
उसके बाद शाम तक मैं निकल आया वाराणसी फिर पढ़ाई करने के लिए!
तो मेरे मन में मौसी और पापा की चुदाई देखने का मन हुआ.
परंतु कैसे … यह तो संभव नहीं था क्योंकि क्योंकि मैं वाराणसी में था.
मैं सोच रहा था कि कैसे करूं … क्या करूं!
तो कुछ समझ में नहीं आया.
2 दिन बाद पापा का फोन आया.
पापा बोले- तुम्हारे मौसा घर बनवा रहे हैं तो उसमें उनको कुछ हेल्प चाहिए; उनका फोन आया था.
तो मैं बोला- अच्छा!
उन्होंने बोला- घर में काम है इसलिए हम लोग जा नहीं पाएंगे.
तो मैंने बोला- ठीक है, मैं कोशिश करता हूं.
दूसरे दिन मैं तैयार हुआ और मौसी के घर पहुंचा.
सब लोग घर पर थे.
मैं बड़ी मौसी से मिला, उनके पैर छुइ.
उसके बाद मौसा मिल गए, उनके पैर छुइ.
फिर छोटी मौसी रीतिका मिल गई.
उसके पैर छूने का मेरा मन नहीं कर रहा था क्योंकि उसके लिए मेरे दिमाग में बहुत गलत विचार बन गया था.
फिर खाना पीना हुआ शाम को!
खाने के बाद सोने की व्यवस्था कम थी तो मौसा जी वहां चले गए सोने जहां पर मकान बन रहा था.
और अब बड़ी मौसी अपनी बेटी को लेकर बाहर सो रही थी.
उसके बाद छोटी मौसी और उनका लड़का कमरे में चले गए सोने!
तभी छोटी मौसी ने बोला- कमरे में दो बैड हैं, वही तुम भी सो जाओ!
मैंने कहा- ठीक है!
तो मेरे मन में तो खुशी के लड्डू फूटे.
मैं गया.
गर्मी का मौसम था तो लेट गया.
कुछ देर बाद देखा तो मौसी की साड़ी ऊपर उठी हुई थी, उसकी जांघें दिख रही थी और दूध भी आधे आधे दिख रहे थे.
मेरा लन्ड खड़ा हो गया तुरंत!
पर मेरे मन में डर था.
कुछ देर बाद जब मौसी गहरी नींद में सो गई तो मैंने उनकी साड़ी उठाकर देखी.
पेंटी नहीं पहनी थी मौसी ने!
मुझे कुछ शक हुआ.
पर उसके बाद मैं सो गया.
सुबह हुई तो हम सब नाश्ता कर रहे थे.
मैंने देखा कि रीतिका मौसी नहा कर आ रही थी.
जब वह कपड़े रस्सी पर डालने गई तो उनमें पेंटी भी थी.
मैंने सोचा कि रात में तो पेंटी नहीं थी, अभी कैसे आ गई?
पर मैंने ज्यादा कुछ नहीं सोचा.
हम लोग काम पर लग गए.
फिर रात हुई तो फिर सोने गए.
तो जब मौसी सो गई तो मैंने उसकी साड़ी के अंदर अपना पैर डाल दिया और हॉट मौसी की सेक्सी चूत को हल्के से सहलाया.
मुझे लगा कि मौसी सो गई हैं.
तो फिर मैंने और जोर से सहलाया तो मौसी ने हल्के से आह आह की.
उसके बाद मेरी गांड फटी तो मैंने अपना पैर अपने बेड पर कर लिया.
लेकिन मौसी अब गर्म हो चुकी थी क्योंकि मेरे मौसा चोदते नहीं है क्योंकि वो अब बुड्ढे हो चुके हैं लेकिन मौसी तो अभी जवान है.
थोड़ी देर बाद जब मौसी को लगा कि मैं डर गया हूँ और अब कोई हरकत नहीं करूंगा तो मौसी ने खुद कहा- बेटा, तू मेरे पास आ जा, मुझे तुमसे बातें करनी हैं.
मैं मौसी के पास गया तो मौसी और मैं इधर उधर यहाँ वहाँ की बात करने लगे.
मौसी का हाथ मेरे लंड के एकदम पास था. मैं कुछ नहीं कर रहा था.
तभी मौसी का हाथ मेरे लंड से टकरा गया और वे हल्के हलके मेरे लंड को सहलाने लगी.
इतने से ही मेरा लंड में खड़ा होना शुरू हो गया था.
मैं अभी भी दारा हुआ था तो मैं पीछे हटने लगा.
पर तभी सेक्सी मौसी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली- प्रशांत बेटा, मेरी एक बात मानेगा क्या तू?
इस पर मैंने कहा- मौसी, आप बोलिए, मैं जरूर मानूँगा!
‘तो बेटा, तू मेरी प्यास बुझा दे बेटा … अपनी मौसी को इस्ल्न्द से चोद दे … तेरा लंड बहुत लम्बा है. तेरा लंड बहुत मजा देगा मुझे!
तभी मौसी ने मेरे लंड को हाथ से जोर से दबाया.
मैंने हटना चाहा तो मौसी मुझ से लिपटकर मेरे लबों को चूमने लगी.
मौसी के स्तन मेरी छाती पर रगड़ रहे थे.
मुझे इसमें बहुत अच्छा लग रहा था.
तब मैं अपना हाथ मौसी की गांड पर ले गया और मौसी के चूतड़ दबाने लगा.
उसके मुख से कामुक सीत्कारें निकलने लगी.
तब मैंने मौसी से पूछा- मौसी, ज़रा बताओ कि मेरा लंड आपने कब देखा? जो बोल रही हो तुम्हारा लंड बहुत बढ़िया है?
मौसी- जब तुम्हारे घर गई थी और तुम खेत में सोये थे, तब!
मैं हैरान हो गया कि उस समय मुझको तो पता ही नहीं चला.
मौसी बोली- पहले प्यास बुझाओ, बाद में सब बताऊंगी.
मैं बोला- ओके!
फिर मैंने मौसी के चूचे दबाना शुरू किया, वे काफी बड़े थे.
मैंने मौसी की साड़ी निकाली और उसके ऊपर लेट गया.
तो मौसी ने कहा- बेटा, मेरे चूचों को चूस ले. बहुत समय से किसी ने इनको नहीं चूसा है बस एक मर्द को छोड़कर! वे भी जब मौका मिलता है तो सिर्फ चोद लेते हैं. क्योंकि उनके पास इतना टाइम नहीं होता!
मैं- किस मर्द को छोड़कर?
मौसी- तेरा बाप!
मैं चकित नहीं हुआ क्योंकि शक तो मुझे पहले ही था.
तो मैं बोला- बताओ कैसे तुम चुदी पापा से?
मौसी- बाद में बताऊंगी.
मैं मौसी के चूचे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
मौसी के चूचे और फूलने लगे थे.
फिर मैंने मौसी का साया उतार कर उसकी चूत को ज़ोर से मसल दिया.
तब मौसी ने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.
मौसी बोलेन लगी- आआह ऊह ऊओ … और ज़ोर से मसल … फाड़ दे इसको!
तब मैंने अपनी मध्यमा उंगली उसकी चूत में घुसा दी.
तो उसके मुंह से गर्म सीत्कारें निकलने लगी.
मौसी ने कहा- बेटा जल्दी कर … चोद दे मुझे!
तो मैं बोला- अरे मौसी जल्दी क्यों करती हो, पूरी रात है हमारे पास!
मौसी ने हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया.
मैंने कहा- यार मौसी, इसे अपने मुंह में लेकर चूस ना!
मौसी मेरा लंड चाटने लगी.
इससे मैं बहुत गरम हो गया तो मैंने अपना लंड सीधे मौसी की चूत में घुसा दिया.
तब मौसी के मुख से चीख की आवाज़ निकली- आआ ईई ईई उम्म्हां … अह … हांह… ओ!
मैं मौसी के उरोज मसलने लगा और थोड़ी देर बाद मौसी सामान्य हो गई.
मैं अविरत छोटी मौसी की चुदाई में लगा था.
और मैं झाड़ें लगा तो मुझसे रुका नहीं गया, मैंने अपना सारा रस मौसी की गर्म फुद्दी में डाल दिया.
मौसी बोली- यार प्रशांत, तू तो बड़ा चोदू निकला रे … मेरी जवानी की आग एक बार में ही ठण्डी कर दी.
लेकिन मौसी नहीं जानती थी कि यह मेरा प्रथम यौन सम्बन्ध अनुभव है.
उसके बाद मैंने कहा- पहले बताओ तुम पापा कब और कैसे चुदी? और मेरा लन्ड कब देखा? उसके बाद मैं तुम्हारी गान्ड मारूंगा.
मौसी- जब मैं तुम्हारे घर गई थी, तब तुम खेत में सो रहे थे. मैंने तुम्हारी चड्डी उतार कर तुम्हारा लंड देखा था.
मैं बोला- जब मैं और पापा सो रहे थे तब?
मौसी- हाँ!
मैं बोला- मैं जान नहीं पाया था.
मौसी- मैं पानी लेकर आई थी. तब मैं तुम्हारे पापा के साथ वहां से दूर दूसरे खेत में चुदवाने गयी थी.
मैं- अच्छा मतलब तुम उसी दिन पापा से चुदाई करवाने गई थी.
मौसी- तुम जानते हो क्या?
मैं- मैं जग रहा था जब तुम आई थी.
मौसी- अच्छा!
मैं- मुझे पता चला होता तो उसी दिन मैं आपको चोद लेता!
मौसी- तेरे पापा से चुदवा कर भी मेरी प्यास नहीं बुझी थी क्योंकि तुम्हारे पापा भी बुड्ढे हो रहे हैं. उस वक्त मैंने तुम्हारे पापा के सामने तुम्हारा लंड देखा था. फिर तुम्हारे पापा बोले थे कि इसे भी लेने का इरादा है क्या?
मैं- अच्छा?
मौसी ने कहा- तो मैंने तुम्हारे पापा को तुम्हारे लंड से चुदाई की इच्छा बताई थी.
इस तरह से मौसी ने ये सब कहानी मुझे बताई.
फिर मैं बोला- मुझे पापा और आपकी चुदाई देखनी है.
मौसी- चलो, अब जब तुम्हारे घर आऊंगी तो तुम्हें फोन कर दूंगी. तुम भी घर आ जाना. फिर हम साथ में चुदाई करेंगे.
मैं बोला- साथ में कैसे?
मौसी- वो मैं सब जुगाड़ कर लूंगी.
उसके बाद मैं 3 दिन मौसी के यहां रुका और उसकी खूब चुदाई की.
अगले दिन तो मैंने मौसी की गांड भी मारी.
लेकिन वो बोल रही थी- मैंने आज तक गान्ड नहीं मराई थी.
हॉट कजिन स्टोरी में लॉक डाउन में मैं गुरुग्राम में एक बढ़िया फ्लैट में अकेला रह रहा था. तभी मेरी बुआ की बेटी का फोन आया. वह दिल्ली में थी और लॉकडाउन में घर जाकर कैद नहीं होना चाहती थी.
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम नीलेश शुक्ला है, मैं 27 वर्ष का हूँ और मूल रूप से इलाहबाद से हूँ.
मेरे परिवार वाले मुझे ‘नीलू’ कह कर ही पुकारते हैं अक्सर!
मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ, और सत्य अनुभव पर आधारित यह कहानी लिखने की प्रेरणा मेरे कुछ प्रिय लेखक हैं, जिनकी लेखन शैली इतनी उत्कृष्ट और आकर्षक है कि पाठक पढ़ते हुए स्वयं को उस कहानी के अंदर महसूस करता है.
अतः मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी इस सत्य कथा के माध्यम से आपसे अपनी आप बीती हॉट कजिन स्टोरी साझा करूँ.
इस लेख की भाषा में मैंने अधिकतर हिंदी और हिंगलिश के शब्दों का प्रयोग किया है, जो मेट्रो शहरों में बातचीत का आम लहज़ा बन गया है.
यह मेरी पहली रचना है, अतः कोई भी त्रुटि या कमी के लिए पहले ही पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ.
वर्तमान में पुणे में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हूँ.
लगभग 6 फ़ीट की हाइट और कसरती बदन के साथ एक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होने के कारण मेरे आज तक काफी लड़कियों के साथ सम्बन्ध रहे हैं.
किन्तु कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी अपनी एक अलग कसक, एक अलग खनक और एक अलग स्वाद होता है और वे जीवन में अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं.
अपने जीवन के एक ऐसे ही ख़ास अनुभव को मैं आपसे साझा कर रहा हूँ जिसने मुझे बहुत हद तक बदल कर रख दिया.
अपने जीवन की जिस घटना का उल्लेख मैं करने जा रहा हूँ वह 2020 में घटित हुई थी.
उस समय मैं अपनी इंजीनियरिंग की सफल पढ़ाई के पश्चात गुरुग्राम में एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपर काम कर रहा था.
काम करते हुए मुझे लगभग 2 साल हो गए थे.
2019 में अपने रहने के लिए मैंने अपने एक मित्र अखिल के साथ गुड़गाँव शहर के थोड़ा बाहरी इलाक़े में सोहना हाईवे की तरफ एक बहुमंजिला सोसाइटी में एक 2BHK फ्लैट किराये पर ले लिया था.
हम दोनों में गहरी मित्रता थी और खूब पटती थी.
हमारे बीच पार्टियों से लेकर लड़कियों की बेशर्मी से चर्चा होती थी.
अखिल भी गुड़गाँव में एक अन्य कंपनी में सेल्स लीड की भूमिका में कार्यरत था.
हमारा फ्लैट उन्नीसवीं मंजिल पर था.
सोसाइटी मुख्य शहर से दूर होने के कारण पूर्णतः फर्निश्ड लक्ज़री फ्लैट के बाद भी उसका किराया काफी कम था.
बाइपास और फारेस्ट एरिया से पास होने के कारण हमारे इलाके में खूब हरियाली और न के बराबर शोरगुल था.
ऑफिस से थोड़ा दूर था, परन्तु मानसिक शांति के परिप्रेक्ष्य से उस इलाक़े का कोई मुक़ाबला न था.
मकान मालिक कनाडा में रहता था और कोई हस्तक्षेप नहीं करता था.
हम भी समय पर किराया पंहुचा दिया करते थे.
सोमवार से शुक्रवार काम में व्यस्त रहने के बाद उस फ्लैट पर एक अलग ही सुकून मिलता था.
मास्टर बैडरूम मैंने और दूसरा बैडरूम अखिल ने ले लिया था.
इसके अतिरिक्त फ्लैट में फ्लैट में एक छोटा स्टडी रूम था जिसकी हमें तब तक ज़रूरत नहीं पड़ी थी, अतः हम स्टोररूम जैसे ही उसका उपयोग करते थे.
खाने और सफाई के लिए हमने एक नौकरानी भी लगवा ली थी.
उस समय गुड़गाँव में मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी श्रद्धा … जिसको डेट करते हुए मुझे लगभग डेढ़ साल हो गया था जबकि अखिल सिंगल था.
कुल मिलाकर हम दोनों मित्र नौकरी करते हुए मस्ती से अपना बैचलर जीवन जी रहे थे.
दिसंबर 2019 में अखिल ने बुझे बताया कि उसका बैंगलोर में एक बड़ी कंपनी में सफल इंटरव्यू हुआ है, बढ़ोतरी के साथ नयी नौकरी मिल गयी है और उसे जनवरी से ही ज्वाइन करना होगा.
20 जनवरी के आसपास अखिल अपना अधिकतर सामान लेकर बैंगलोर के लिए निकल गया.
किंतु चाबी मेरे हाथ में थमाते हुए अपनी कार यहीं छोड़ गया यह कहकर कि एक-आध महीने में बैंगलोर में अपना डेरा जमाने के पश्चात वह वापस आएगा और अपनी कार लेकर जाएगा.
चूँकि फ्लैट का किराया अधिक नहीं था इसलिए मैंने अकेले ही फ्लैट रखने का निश्चय किया यह सोचकर कि यदि कोई ऐसा मित्र मिले जिससे समन्वय बने तो वह अखिल की जगह रह सकेगा.
अखिल के जाने के बाद उस आलीशान फ्लैट में मैं अकेले रहने लगा.
फरवरी 2020 मध्य से कोरोना वायरस की खबरें (जो अबतक लोग हल्के में ले रहे थे) रफ़्तार पकड़ने लगी और फरवरी अंत तक समाचार का मुख्य हिस्सा बन गयी.
मार्च के पहले हफ्ते में जब कोरोना के फैलने की खबरें चरम पर थी, मेरे ऑफिस ने सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से अनिश्चितकालीन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की घोषणा कर दी.
मैंने अपने फ्लैट में स्टडीरूम को अपना ऑफिस बना लिया और मास्टर बैडरूम पहले से मेरे पास ही था.
बस अखिल का कमरा था जो खाली था.
7 या 8 मार्च की बात है.
दोपहर के समय मैं ऑफिस के काम में व्यस्त था.
अचानक से मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, जो नाम स्क्रीन पर चमका उसको देखते ही मैं थोड़ा सा चौंका.
“Moni Di Kanpur”
मोनी, जिसका पूरा नाम मोनिका भारद्वाज था, मेरी कानपुर वाली बुआ की लड़की थी और मुझसे पांच साल बड़ी थी.
मोनिका ने मास्टर्स तक की पढ़ाई कानपुर से ही की थी और अगस्त 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एक कॉलेज में पी०एच०डी में दाखिला ले लिया था.
साथ ही साउथ दिल्ली में ही एक गर्ल्स पीजी में कमरा ले लिया था.
मोनिका जब दिल्ली शिफ्ट हुई थी, तब उसका एक बार फ़ोन आया था और हमारी बात हुई थी.
किन्तु अब तक मिलने का अवसर नहीं मिला था; सच कहूँ तो मैंने प्रयास भी नहीं किया था, मैं नहीं चाहता था की मेरी रिश्तेदारी में किसी को भी मेरे बैचलर जीवन और मॉडर्न रहन-सहन का किसी को भी पता चले क्योंकि समस्त परिवार में मेरी छवि एक प्रतिभाशाली और परिश्रमी छात्र की थी.
अतः मैं परिवार के लोगों से और रिश्तेदारी में काफी रिज़र्व रहता था.
मोनी और मैं बचपन में छुट्टियों में काफी बार मिलते थे, कभी इलाहबाद में तो कभी कानपुर में.
हमारी अच्छी पटती थी लेकिन मोनी के हाई-स्कूल के पश्चात से हम बराबर संपर्क में नहीं थे.
मिले थे तो बस पारिवारिक शादी-ब्याह और अन्य पारिवारिक समारोह पर.
लगभग साढ़े तीन- चार साल पहले हम एक पारिवारिक फंक्शन में आखिरी बार मिले थे.
खैर, इन सब विचारों के बीच मैंने फ़ोन उठाया.
दूसरी तरफ से वही पहचानी हुई, चुलबुली आवाज़, तंज कसते हुए- नीलू!! कभी बहन को भी याद कर लिया कर!
मैंने कहा- दीदी, इतने दिनों बाद कैसे याद किया? कैसी हो आप? क्या हाल चाल है?
मोनी ने कहा- तेरी सवाल पे सवाल पूछने की आदत गयी नहीं अब तक! हाल चाल सब बढ़िया है, पी जी में हूँ फिलहाल. लेकिन कुछ दिक्कत हो गयी है. इसीलिए तुझे फ़ोन किया!
“दिक्कत? क्या हो गया ऐसा दीदी?”
“अरे तू न्यूज़ नहीं देखता क्या!? पता नहीं ये कोरोना वायरस क्या बला है. शुरुआत में तो मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कल कॉलेज से नोटिस आया कि कॉलेज बंद हो रहा, पता नहीं कब तक. सारी क्लासेज और रिसर्च का काम सब ऑनलाइन चलेगा. भाई मुझे तो सच में टेंशन हो रही. पी.जी. की लड़कियाँ खाली करने की बात कर रहीं. मेरी रूममेट दिव्या के तो घर से आज फ़ोन आया था, उसके पापा उसको लेने आ रहे 2 दिन में सारे सामान के साथ. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ … सब कुछ इतना अचानक से हो रहा!”
“सारी न्यूज़ देख रहा मैं दीदी, कोरोना की वजह से यूरोप, खासकर इटली में बुरा हाल है … वायरस तेजी से फ़ैल रहा. मेरे ऑफिस ने तो बीते हफ्ते से ही वर्क फ्रॉम होम कर दिया है सबका!”
“तो तेरा क्या प्लान है … घर निकलने का सोच रहा?”
“नहीं दीदी … मैं तो यहीं रुक रहा अपने किराये के फ्लैट में!”
मोनी ने लगभग हँसते हुए कहा- वाह भाई! गज़ब कॉन्फिडेंस है तेरा. कोई गर्लफ्रेंड है क्या जिसकी वजह से रुका हुआ है?
“क्या दीदी आप भी ना न… कुछ नहीं है ऐसा; फ्लैटमेट था, वह भी 2 महीने पहले चला गया, अकेला ही रहता हूँ. लेकिन 2 दोस्त दूसरी सोसाइटी में 15-20 मिनट दूर रहते हैं, तो मिलजुल कर देख लेंगे जो भी होगा!”
“तेरा तो सही हिसाब है भाई. ऐसे ही नहीं तेरी तारीफों के पुल बांधते हैं सब मेरी फैमिली में. पढ़ाकू तो तू था ही, तेज भी हो गया इतना यहाँ आकर. गुरुग्राम रह रहा ना तू?”
“हाँ दीदी गुरुग्राम में ही, लेकिन मेन गुरुग्राम से थोड़ा बाहर है. ये सब छोड़ो, आप बताओ कि बुआ फूफ़ा क्या बोल रहे?”
“यार, वे तो घर आने को बोल रहे हैं. चौदह तारीख की टिकट भी करवा दी है. लेकिन ये कोरोना इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा और इतनी अफरा तफरी भी है. पता नहीं सेफ होगा या नहीं इस तरह अचानक से जाना!”
“अब दीदी, बुआ फूफा ने बोल ही दिया है तो ऑप्शन भी क्या है और. मास्क वगैरह लगा कर जाना, आई थिंक सेफ रहेगा सब. ज़्यादा टेंशन मत लो!”
“हम्म … सही कह रहा यार … चल मैं पैकिंग वगैरह देखती हूँ.” मोनी ने बुझे मन से कहा.
“ओ.के. दीदी, अपना ध्यान रखना आप, और कुछ मदद चाहिए हो तो बेझिझक कॉल करना!”
“हाँ नीलू, तू भी ध्यान रख और बाहर ज़्यादा मत निकलना. नयी बीमारी का कुछ पता नहीं. चल मैं रखती हूँ … बाय!” कहते हुए मोनी ने फ़ोन रख दिया.
लगभग एक हफ्ता बीता.
13 तारीख की बात है, रात में साढ़े 11 बजे मेरे पास मोनिका का फ़ोन आया.
“नीलू! सो तो नहीं गया था?”
“नहीं दीदी, क्या हुआ? सब ठीक तो है न?”
“अरे यार … अभी मैसेज आया मेरे पास irctc का. ट्रेन कैंसिल हो गयी है. मैंने पता किया तो बहुतेरी ट्रेनें कैंसिल हो रहीं!”
“ओह इतने अचानक से? अब क्या दीदी?”
“समझ नहीं आ रहा यार, दिव्या भी चली गयी है. पीजी में 3 -4 लड़कियाँ बची हैं, लगता है वो भी चली ही जाएँगी कल परसों में!”
“दीदी बस का टिकट देखा? उसमे शायद मिल जाये आपको …”
“भाई ए.सी. बस में एक भी टिकट नहीं है और नार्मल बस से मैं सफ़र नहीं कर सकती, मेरी तबियत ख़राब हो जाती है. ऊपर से कितने सारे लोग भी होंगे बस में. इन्फेक्शन का चांस भी ज़्यादा है.”
“दीदी अब तो एक ही विकल्प बचा है. इंटरसिटी कैब या टैक्सी कर लो. थोड़ा महंगा पड़ेगा लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं!”
“अबे, तू भाई है या कसाई है … . मुझे घर भेजकर ही दम लेगा??” मोनी ने लगभग चिल्लाते हुए कहा.
“मतलब … समझा नहीं दीदी?”
“समझा नहीं मतलब क्या? तुझे नहीं पता घर जाकर मेरी ज़िन्दगी जेल जैसी हो जाएगी … सारी मौज मस्ती बंद … पहले से ही दुखी हूँ इतनी!”
“ओह … तो ये बात है … क्या सोच रही हो आप फिर? दिल्ली में ही रुकोगी?”
“यार सारी सहेलियों और दोस्तों से बात करके देख लिया … इस वक्त किसी के पास रुकने का जुगाड़ नहीं … तेरे पास कुछ व्यवस्था हो सकती है कुछ दिनों के लिए?” मोनी ने आशा भरी आवाज़ में पूछा.
सच तो यह था कि मैं भी अकेला ही था. मेरी गर्लफ्रेंड श्रद्धा जो अक्सर आती रहती थी, वह होली के समय घर गयी थी और उसके परिवार ने उसको माहौल ठीक होने तक वहीं रोक लिया था. केवल मेरे दो मित्र देवेश और सुमित थे, जो पास की एक सोसाइटी में रहते थे.
मैंने भी सोचा, एक-आध हफ्ते की तो बात है, मैनेज हो जाएगा सब.
“दीदी मैं तो गुरुग्राम रहता हूँ … साउथ दिल्ली से दूर पड़ेगा, लगभग सवा घण्टा. मुझे क्या समस्या होगी, फ़्लैट में एक कमरा भी खाली है, आप आ जाओ अगर आपको ज्यादा दूर न पड़े तो!”
मेरे इतना कहते ही मोनी की आवाज़ में राहत और प्रसन्नता का सैलाब आ गया- भाई … पक्का आ जाऊं ना? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न तुझे?
“अरे कम ऑन दीदी … इतनी फॉर्मेलिटी?”
“हाय मेरे प्यारे नीलू!! तूने बचा लिया मुझे … बस यही उम्मीद थी मुझे तुझसे … सुन, एक काम करती हूँ. पी.जी. खाली ही कर देती हूँ, तेरे साथ 2 -3 हफ्ते रुक लूंगी, और थोड़ा माहौल ठीक होते ही नया पी.जी. ढूंढ लूंगी. तू एक काम कर, मुझे लोकेशन भेज दे, मैं 3-4 दिन में सारा सामान पैक करके आती हूँ.”
“ठीक है दीदी … पहुँचने में कोई दिक्कत हो तो बताना … मैं लोकेशन व्हाटसऍप करता हूँ!” कहकर मैंने फ़ोन काट दिया.
अगले 3 दिन मैं काम में काफ़ी व्यस्त रहा तो मोनी से बात करने की तरफ ध्यान नहीं गया.
19 तारीख को मेरे पास सुबह लगभग 9:30 बजे मोनी का फ़ोन आया- नीलू, मैं निकल रही हूँ बस 10 मिनट में. कल ही आ जाती लेकिन सिक्योरिटी मनी फंसा हुआ था, वही लेने रुक गयी. गूगल मैप पर दिखा रहा एक-सवा घंटे में पहुंच जाऊंगी. तू फ्लैट पर ही रहेगा ना?
“हाँ दीदी, आप आराम से आ जाओ, मैं फ्लैट पर ही रहूँगा.”
“तेरी सोसाइटी का नाम क्या बताया था तूने?”
“दीदी सोसाइटी का नाम रीगल कासा है. और टावर का नाम ऐमीरेट्स है. आप गार्ड से बात करा देना मेन गेट पर!”
मोनी ने शरारत भरे फ़िल्मी लहज़े में पूछा- स्वागत नहीं करोगे हमारा?”
“हाहा … अरे बिलकुल दीदी … आप पहुँचो बस. फ्लैट इतना आलीशान है. उसको देखकर ही स्वागत हो जाएगा!”
मोनी ने उत्साह से भरपूर आवाज़ में कहा- हाय सच में क्या! मेरा छोटा भाई कितना बड़ा आदमी बन गया है … अब तो इंतज़ार नहीं हो रहा नीलू … चल मेरी कैब आ गयी, पहुंच कर कॉल करती हूँ”
कहते हुए फ़ोन काट दिया.
लगभग 11 बजे मेरे इण्टरकॉम पर गार्ड का फ़ोन आया- गुड मॉर्निंग सर … मैडम आयी हैं टैक्सी से, आपसे मिलने. सामान भी है साथ में!”
मैंने गार्ड को आदेश दिया- फ़ौरन उनको मेरे टावर पर भेज दो. वो मेरी कज़िन सिस्टर हैं.”
“जी सर, बिल्कुल!”
मैंने लिफ्ट ली और जब तक मैं नीचे पंहुचा, मोनी की कैब मेरे टावर के नीचे पहुंच गयी थी.
पीछे डिक्की से ड्राइवर कुछ सामान निकाल रहा था.
और एक सूटकेस मोनी पीछे वाली सीट से निकल रही थी.
क्योंकि हम सोशल मीडिया पर जुड़े हुए नहीं थे, मोनी को इतनी दिनों बाद देख रहा था मैं, 2 मिनट तक तो मेरी आँखें टिक गयी उस पर!
और टिकें भी क्यों न …
5′ 6″ से 5′ 7″ की हाइट, हल्का सांवला सुनहरा रंग, बॉटल ग्रीन रंग का चुस्त टॉप, जिसमें से मोनी के 36C के स्तन फाड़ के बाहर निकलने को हो रहे थे.
नीचे सफ़ेद रंग के हॉट-पैंट शॉर्ट्स जो सिर्फ चालीस प्रतिशत के लगभग चिकनी सुनहरी जांघों को ढक रहे थे.
मोनी की चिकनी टांगों पर एक भी बाल का नामोनिशान न था.
ऊपर से तीखे नैन-नक्श, बड़ी बड़ी आँखें, मेकअप, सनग्लासेस, जूते, मॉडर्न बॉडी लैंग्वेज.
अट्ठाइस-उनतीस साल की उस उम्र में मोनिका का वो यौवन से परिपूर्ण बदन डेवलपमेंट के चरम पर था.
10 सेकंड के लिए तो मैं उसे पहचान ही नहीं पाया.
मोनी डी०यू० की एक आइटम, पटाका माल लग रही थी.
देख कर साफ़ पता लग रहा था कि बहना को दिल्ली की हवा बहुत ज़बरदस्त लगी है. सच कहूं तो दो पल के लिए मेरा ईमान डगमगा गया.
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