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Antarvasna stories

ये Antarvasna कहानी उस समय की है जब १२ में आया था हमारे एक नौकरानी थी उसकी २ बेटी थी छोटी बेटी की मस्त थी फ़ीगर देख कर किसी के मुंह में पानी आ जाये.

एक बार वो झाडू बैठ कर लगा रही थी में उसके पीछे से गुजरा और मैने अपना पैर उसके चूतड़ पे छुआ कर निकला वो चौंक गयी लेकिन कुछ नहीं बोली। इस तरह मैं हमेशा करने लगा, मुझे इस बात का डर नहीं लग रहा कि वो मम्मी से कुछ कह देगी।

एक बार सब लोग बाहर थे मैं अंदर रूम में, वो झाडू लगाने आयी मैने उसे पकड़ कर किस करने लगा वो हैरान हो गयी और कहने लगी मैं बता दूंगी मैने उसके मुंह में अपनी थूक डाल दी और उसके लिप चूसने लगा फिर मैने एक हाथ से उसके बूब्स छुआ और कसके दबाने लगा तभि किसी के अंदर आने की आवाज आयी मैने उसे छोड़ दिया।

फिर एक बार फिर वैसा मौका मिला उस दिन मैं उसे पीछे से पकड़ कर क्लोथ सेक्स करने लगा वो थोड़ा मुस्कुरा रही थी फिर वो ज़मीन पर बैठ कर पोंछा लगाने लगी फिर मैने एक हाथ उसके कुरते के अंदर गर्दन की साइड से डाल कर उसका एक बूब बाहर निकालने लगा वो छटपटा गयी वो उस समय समीज पहनती थी उसके निप्पल दिखने लगे फिर कोई आ गया।

एक बार मैं स्टोरी वाली मैगज़ीन लाया उसमे ज़्यादातर कहानी वर्जिन की थी मेरा दिमाग खराब हो गया। मैं उसे घर में कहीं भी अकेला देखता तो उसको किस करने लगता।

एक बार मैने उससे पूछा चूत के बाल बनाती हो कि नहीं?
वो बोली- ये क्या होता है?
मैने उसकी चूत पर हाथ रख कर कहा इसको वो शरमा गयी और अंदर चली गयी।

हम लोग के यहां दो बाथरूम थे जिसमे एक बाथरूम कमरे और बाहर आंगन से जुड़ा था फिर जब वो बाथरूम में कुछ लेने जाती मैं कमरे से आकर उसको पकड़ कर किस करने लगता और अपना लंड बाहर निकाल कर उसको पकड़ने की कोशिश करता। जब मैने पूरी बुक पढ़ ली मैने सोचा अगर ये बुक इसको दे दूं तो ये बात आगे बढ़ सकती है। मैने बुक घर के दरवाजे के किनारे रखे गमले के पीछे रख दी और उसको बता दिया कि वहां बुक रखी है, ले जाना।

बाद में जब वो काम करके चली गयी तो मैने सोचा किताब ले गई कि नहीं मैने बाहर जाकर देखा तो किताब गायब थी। दो दिन बाद वो आयी तो उसकी आंखें चमक रही थी और अजीब सी नशीली थी।

मैने अकेले में उससे पूछा कैसी थी किताब उसने कहा बहुत गंदी थी.
मैने कहा- तो लाओ मेरी बुक वापस?
उसने कहा- मैने फेंक दी।

मुझे गुस्सा आया मैं उसको पकड़ कर किस करने लगा और एक हाथ सो उसकी चूत दबाने लगा इस बार उसने ज्यादा प्रतिरोध नहीं किया।

एक बार घर के सब लोग बाहर गये शाम से पहले कोई नहीं आना वाला था उस समय डोर बेल बजी मैने खोल के देखा दरवाजे पर सामने वो खड़ी थी, उसने कहा- मेम साहिब हैं?
मैने कहा- हां!
वो अंदर आ गयी।

मैने दरवाजा बंद कर दिया फिर मैं अंदर आ गया और जैसे वो रूम में आयी मैं उस पर टूट पड़ा और उसको किस करने लगा वो रिसपोंस कर रही ती फिर मैं उसके बूब्स दबाने लगा और मस्त हो गयी तभी वो चौंकी और बोली मेमसाहिब आ जायेंगी.
मैने कहा- घर पर कोई नहीं हैं।
वो डर गयी और बाहर जाने लगी मैने उसे पकड़ लिया वो रोने लगी- मुझे छोड़ दो।
मैने कहा इतने दिनो बाद मौका मिला है, कैसे जाने दूं।

फिर मैने अपने हाथ उसके कुरते के अंदर डाल कर उसके नंगे बूब्स कसके दबाने लगा. वो चिल्ला रही ती मगर मुझे मजा आ रहा था फिर मैने उसका कुरता उतारा वो विरोध कर रही थी मैने कहा चुपचाप करवा लो वरना जबर करना पड़ेगा और तुम्हारे कपड़े फट जायेंगे और सबको पता चल जायेगा और तुम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगी अगर चुपचाप करवा लोगी तो किसी पता नहीं चलेगा।

उसका विरोध कम हो गया मैने उसकी सलवार उतार दी और पेंटी को चूमने लगा फिर मैं उसके बूब्स चूसने लगा जैसे मैं उसका बेटा हूं और उसका दूध पी रहा हूं वो बहुत गरम हो गयी स्सस्सशह्ह ह्हह्हह की आवाज़ आने लगी थी उसके मुंह से, फिर उसने कहा- मेरे निप्पल को और तेज चूसो.

मैं हैरान हो गया, मैने कहा- ये कहा सीखा वो बोली जो आपने किताब दी उसमे, उसने मुझे झूठ बोला था वो मेरे बोक्स में है मैने खुशी के मारे उसकी आंखों को चूम लिया।

फिर मैने उसकी पैंटी उतारी.
वो मुझसे कहा कि मुझे बाथरूम आ रहा है.
मैं उसे बाथरूम ले गया और मैने उसे अपने सामने मूतने के लिये विवश किया वो शरम से पानी-२ हो गयी। और मैने उसके पेशाब में अपने हाथ धोये मुझे लगा कि गरम पानी से हाथ धो रहा हूं फिर मैने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया और ६९ पोसिशन में अपना लंड उसके मुंह में डाला और उसकी क्लीन शेव चूत चूसने लगा. थोड़ी देर बाद वो झड़ गयी मैने उसका टेस्टी कम पी लिया. फिर मैं भी झड़ गया वो मेरा कम मुंह में लेकर गटक गयी, पर उसको थोड़ा अजीब मगर अच्छा लगा।

फिर मैने अपना लंड उसे पकड़ कर बड़ा करने को कहा वो उससे खेलने लगी। जब मेरा ६” का कड़ा हुआ तो मैने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धक्का मारा टोपा अंदर घुसा था वो चिल्लाने लगी ईइ मार डालाअ बाहर निकालो मैने उसका मुंह बंद करके धक्के मारने लगा उसके आंसु निकलने लगे वो मेरी तरफ़ गुस्से से देख रही थी उसका मुंह बंद था। फिर मैं तेजी से उसे पेलने लगा वो चाहते हुए भी चीख नहीं पा रही थी मैने उसकी ह्य्मेन ब्रेक का सीन अपने मोबाइल पर शूट कर लिया उसकी चूत से खून बह रहा था थोड़ी देर के बाद वो नोर्मल हुई और मजे लेने लगी उसके मुंह से आवाज आने लगी फ़ाड़ दो मेरी।

यह तुम्हारी है मुझे पता नहीं था कि इसमे इतना मजा आता है, अब मैं तुमसे रोज चुदवाउंगी ओह्हह्ह यीईईईई और वो झड़ गयी मैं उसे पेलता रहा मेरा लंड भी झड़ने वाला था, मैने धक्के तेज कर दिये और उसकी चूत में झड़ गया उसकी चूत मेरे लावा और खून से सनी थी मैने उसको बैठने को कहा उसको दर्द हो रहा था बड़ी मुश्किल में बैठी तो उसकी चूत से मेरा वीर्य निकलने लगा मैने ये भी शूट किया।

दिन में उसे ३ बार पेला फिर मैने उसे पैन किलर दी और उसकी चूत की सिकाई की उसको देख कर मेरी फट रही थी कहीं उसने किसी को बता दिया या उसे देखकर किसी को पता चल गया तो। लेकिन सब ठीक रहा.
उसके बाद उसको मौका मिलने पर चोदता उसके बाद उसकी शादी हो गयी।

शादी वाले दिन से १ दिन पहले उसने खुशखबरी दी कि वो मेरे बच्चे की मां बनने वाली है। शादी के १ साल बाद आयी तो उसके साथ मेरा बच्चा भी था वो मेरे समने ही उसे दूध पिलाने बैठ जाती थी।

पिता जी का ट्रांसफ़र हो गया और मैं उससे अलग हो गया। मेरा मन कहीं लग नहीं रहा था फिर मैने अपनी स्वीट लिटिल सिस एस (चसमिश) के ऊपर नज़र आ गयी नेक्स्ट स्टोरी में बताउंगा उसको कैसे चोदा। Antarvasna

Sex Stories

ये मेरी अपनी आपबीती है, ये कोई कहानी नही है और Sex Stories इसमे कुछ ऐसा भी नही है जो मैंने कल्पना से लिखा हो.

बचपन में जब मैं पांच साल का था तब मेरी ताईजी का देहाँत होने के कारण उनकी लड़की जो मुझसे सात साल बड़ी हैं हमारे साथ रहती थी. उनका नाम गीता है. मेरे पिताजी सरकारी ऑफिस में अच्छी पोस्ट पर काम करते थे. हमें सरकारी मकान मिला हुआ था. मकान बहुत बड़ा था और उसके कमरे भी बहुत बड़े थे. चार बैडरूम, रसोई और बैठक थे उस मकान में. जबकि उस समय मैं अमन, मेरा छोटा भाई छोटा और छोटी बहिन मुन्नी, मां, बाबूजी और गीता जीजी कुल छः लोग ही उस मकान में रहते थे.

जैसे जैसे बड़ा हुआ एक्सरसाइज़ ठीक होने से लंड का साइज़ भी सात इंच का हो गया. पिताजी का तबादला राजस्थान के अलग अलग शहरों में होता हुआ जयपुर में कुछ समय रुका तो पिताजी ने यहाँ घर बनवा लिया. अब स्कूल में उसके बाद लड़को के कोलेज में पढ़ा लेकिन लड़कियों से बात करने में गांड फटती थी इसलिए हमारी गली में आठ लड़कियां होते हुए भी खूब इच्छा होने पर भी मैं उनमे से एक को भी पटा नही पाया. इच्छा बहुत होती थी चोदने कि लेकिन मुट्ठ मारकर ही काम चलाना पड़ता था. साइंस का छात्र था इसलिए पढ़ा सबकुछ लेकिन प्रैक्टिकल हो नही पाया. बाईस साल का होने पर मेरा कद छः फुट आ गया रंग साफ़ और चेहरा आकर्षक.

मैंने इलेक्ट्रॉनिक आइटम की रिपेरिंग की दुकान खोली. ठीक ठाक चलने लग गई. दुकान के बहार से कुछ लड़कियां मुझे देख कर चक्कर लगाती, लेकिन बात करने में अब भी मेरी गांड फटती थी. अब मुझे देखने लड़की वाले आने लग गए. एक लड़की, जो की आज मेरी पत्नी है, ठीक ठाक लगी तो जुलाइ में सगाई हो गई. सगाई छः महीने तक रही. हमने ढेरों फोन किए लेकिन लंड चूत की कोई बात करने की हिम्मत नही होती थी तो शादी होने तक उसको भी नही चोद पाया. मन में लड्डू फूटते थे कि अब मेरी कहने को भी कोई है. सगाई होने के बाद मैंने मुठ मरना बंद कर दिया.

खैर शादी हो गई और अब बहुत साल प्रतीक्षा के बाद आया सुहागरात का समय. शाम को ससुराल आनीजानी रस्म थी सो पत्नी को स्कूटर पर बिठा कर छोटे सगे व रिश्ते के भाई बहिनों को साथ लेकर ससुराल गया. रात को साडे दस बज गये रस्मो रिवाज निबटाते हुए. जैसे ही फ्री हुए मैंने सभी भाई बहिनों को ऑटो रिक्शा में घर भेज दिया और पत्नी को स्कूटर पर बिठा कर उसका हाथ अपनी कमर पर कस कर सटे चिपके से घर के लिए रवाना हुए.

लंड महाराज आज अपनी पूरी जवानी में तने खड़े थे लग रहा था कि सूट फाड़ कर अभी बाहर आ जायेंगे. इच्छा तो बहुत हो रही थी कि इस जनवरी की ठण्ड में घर से सात किलोमीटर दूर कहीं सुनसान में रोक कर चोद चाद दूँ. साला लंड फेरे में हाथ पकड़ते ही कंट्रोल से बाहर था. लेकिन अपने को ये सोचकर कंट्रोल किया की माल अपना है और जरा देर बाद घर पहुँचते ही मेरा ही होने वाला है. साडे ग्यारह बजे घर पहुंचे तो चाचाजी के बेटे, मेरे बड़े भाई की पत्नी मेरी भाभी ने रस्म निभाई की ये मेरी देवरानी आज तुम्हारे साथ सोएगी. दिल उछल कर गले में आ गया. कमरे में आकर एक दूसरे की ओर पीठ करके हमने कपड़े बदले. कंडोम का पैकेट मेरे दोस्त ने पहले ही इंतजाम कर दिया था.

पत्नी ने जेवर भी उतारे और मैंने सजे धजे पलंग पर पत्नी को बिठाया. कमरे में पन्द्रह वाट का बल्ब जल रहा था. कैमरे से चार छः फोटो लिए और उसकी बगल में बैठ गया. फोन पर ढेरो बात करने वाली मेरी पत्नी के जबान पर ताला लग गया और वो नीची नजर किए बैठी थी, उसके होंट सूख रहे थे. मैंने इधर उधर की दो चार बातें करने के बाद कहा कि किस करूँ तो उसने नजरें नीचे किए धीरे से गर्दन हिला दी. लंड बैठने का नाम नही ले रहा था. मैंने उसके गाल पर किस किया जो मेरी जिन्दगी का किसी जवान लड़की का पहला किस था. फ़िर मैंने उसको बोला किस करने को तो उसने भी मेरे गाल पर धीरे से किस किया अब मैंने उसके बूब्स पर हाथ रखा, वो सिहर गई लेकिन हाथ नही हटाया. अब धीरे धीरे मैंने बूब्स दबाना शुरू किया मुझे वैसे ही बहुत चढी हुई थी, जिन्दगी में पहली बार बूबू दबा रहा था, मजा बहुत आ रहा था, धीरे धीरे उसका ब्लाउज खोल दिया. ब्रा भी हटा दी. सेब के साइज़ से थोड़े बड़े उसके गोरे स्पंज की बोल की तरह सख्त नरम बूबू बाहर आ गए.

पत्नी निढाल सी मेरे सीने से चिपकी पड़ी थी धीरे धीरे किस चल रहा था. अब मैंने उसके पेटीकोट को ऊपर सरकाना शुरू किया. एक बात माननी पड़ेगी की उसने किसी भी बात के लिए रोका नही. बस निढाल सी चिपकी रही. आज एक जवान नंगी लड़की मेरे बिस्तर पर थी और उसके गोरे सवा पाँच फुट के बदन पर एक बाल भी नही था और उबटन लगने से पूरा बदन मक्खन जैसा चिकना हो गया था. झांटे थी इसका मुझे ज़रा भी बुरा नही लगा. क्यूंकि झांटों से मुझे जवानी का एहसास होता है न की नादानी का. उसका बदन देखकर कोई भी फख्र कर सकता था. हालाँकि कद में हमारे नौ इंच का फर्क था.

मैंने उसे धीरे से लिटाया अपने कपड़े उतारे, तन्नाया फन्नाया लंड इतना तन चुका था की टंकार तक नही मार रहा था. लंड पर कंडोम चढाया, उत्तेजना इतनी ज्यादा थी की कभी भी क्रीम बाहर आ सकती थी. पत्नी के ऊपर आया तो उसकी टाँगे मेरी टांगों पर आ गई, मेरा माथा ठनक गया कि इसका कोई चक्कर तो नही चल चुका. उसी वक्त मुझे एक परिचित की बात याद आ गई की कुंवारी लड़की के ऊपर लड़का आते ही लड़की की टाँगे अपने आप लड़के की टांगों पर आ जाती है. और कहीं किसी किताब मैं पढ़ा था कि अच्छा चोदक वो है जो अपना वजन अपने घुटनों और कोहनी पर रखता है. अब हालत ये थी कि यदि अपना वजन घुटनों और कोहनी पर रखता तो लंड अपनी जगह से हिल जाता और यदि लंड को गीले छेद पर सेट करता तो एक कोहनी से दम नही लग रहा था. इतने में उत्तेजना इतनी ज्यादा हुई कि लंड से छः महीने का स्टॉक क्रीम बह निकला. लंड अपनी अकड़ खो चुका था. मैंने बहुत कोशिश की कि लंड दोबारा खड़़ा हो जाए लेकिन वो सारी रात खड़़ा नही हुआ. कंडोम निकाल कर मैंने पलंग से नीचे डाल दिया.

पत्नी को हलकी सिहरन हो रही थी. मैं समझ रहा था, उत्तेजना से उसकी तबियत बिगड़ रही थी और मैं कुछ भी कर नही पा रहा था. उसको अपनी बाँहों में लेकर पडा रहा. उसने एक बार कहा कि करो लेकिन मेरा लंड सिकुड़ चुका था.

सुबह चार बजे माँ ने आवाज लगाई तो मेरी बीवी चली गई, कोई घंटे भर सोया हूँगा. नींद नही आई, सुबह साडे छः बजे बाहर निकलने कि हिम्मत नही हो रही थी. कोई सामने आएगा तो क्या होगा. जैसे तैसे हिम्मत करके कमरे से बहार आया. बुआ की लड़की सामने थी जो मुझसे दो साल छोटी थी और कुंवारी थी, हम दोनों में अच्छी पटती थी. वो गहरी नजरों से देख रही थी, मैंने पूछा क्या है. तो वो बोली “कुछ नही”. पिताजी सामने आए मैंने नजरें घुमा ली. अब मैं गुसलखाने में गया. अपने दिमाग को ठिकाने पर लाने की कोशिश करने लगा. लंड को हाथ में लिया. धीरे धीरे सहलाने लगा, दिमाग को केंद्रित किया. लगभग पाँच मिनट में लंड खड़़ा होने लगा, मैंने हाथो को तेज चलाना शुरू किया. मुठ मारने में जरुरत से ज्यादा समय लगा. लेकिन सब कुछ सही हो गया. मैंने छः महीने मुठ नही मारकर अपनी उत्तेजना ख़ुद बढ़ा ली थी.

अब मुझको रात का इंतजार था. खैर धीरे धीरे रात पास आती गई. रात के साडे दस ग्यारह के करीब मेरी जान कमरे में आई, मैंने कमरे की सांकल बंद की, जान को अपनी आगोश में लिया. किस किया. लंड अब अपनी दस्तक देने लग गया. दो मिनट बीते होंगे की पत्नी दूर हो गई. मैंने कहा कि क्या हुआ. वो बोली एमसी हो गई. उसने अपनी अभी तक कुंवारी चूत पे हाथ लगा कर देखा. बोली मम्मी को बोलती हूं. मैंने कहा “क्यूँ ” तो बोली कि नीचे सौउंगी. वो मेरी माँ को बोलके आई तो साथ में कम्बल और रजाई लेके आई.

उसने बिस्तर बेड से नीचे किए. कमरा बंद किया. अब तक मैं कुछ नही बोला था. मन लेकिन थोड़ा उदास हो गया था. आज मेरा लंड तैयार था तो उसकी चूत ने धोखा दे दिया. जैसे ही वो नीचे लेटने को हुई तो मैंने उसे अपने पलंग पे खींच लिया. पत्नी बोली कि मम्मी को पता चल गया तो? मैंने कहा कौन बताएगा ? तुम या मैं. वो समझ गई और मेरे साथ पलंग पर आ गई. उसने चूत पर कपड़ा लगा लिया था. आज दिनभर में वो घरवालो के साथ घुलमिल गई थी, शर्म भी बहुत कम हो गई थी.

अब मैंने उसके होटों को अपने होटों से चिपका के किस करना शुरू किया. होंट थे कि अलग होने का नाम नहीं ले रहे थे. मैंने उसके बोबे दबाने शुरू किए. मेरी बीवी के हाथ मेरी गर्दन के लिपट चुके थे. मेरे हाथ उसके बोबों को मसल रहे थे. धीरे धीरे ब्लाउज और ब्रा अलग हो गई. फ़िर थोडी देर में पेटीकोट भी खींच कर अलग कर दी. जल्दी से मैंने भी अपने कपड़े उतार फैके, मैंने बीवी को अपने ऊपर ले लिया और घमासान चालू हो गया वो ऊपर से अपनी गांड को चला रही थी और मैं नीचे से लंड को उसकी कपड़ा लगी चूत पे दबा के घिस रहा था.

होंट एक दूसरे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं थे, मेरा एक हाथ उसके बोबे दाब रहा था जो मेरे सीने से चिपके पड़े थे और दूसरा हाथ मेरी बीवी का मखमली शरीर को ऊपर से नीचे तक नाप रहा था, मेरी बीवी के हाथ मेरी गर्दन के नीचे कसे थे. हम दोनों अपनी मंजिलों कि तरफ़ बढ़ रहे थे कि मेरी बीवी अकडी और ढीली पड़ गई. उसके होंट खुल गए, हाथ ढीले हो गए, मैं रुक गया, उसकी आँखें मुंदी हुई थी. दो मिनट बाद मैंने उसके बोबे वापस दबाने शुरू किए, उसका मुह अपनी और किया उसके होंट चूसने लगा, मेरी बीवी में जान आने लगी, उसके होंट मेरे होटों से चिपक गए, हाथ मेरी गर्दन पर कसते गए. अब वो अपनी गांड धीरे धीरे हिलाने लगी, मैं भी नीचे से उसकी चूत को लंड से दबाते हुए रगड़ने लगा, एक बार फ़िर घमासान होने लगा और लगा जैसे पलंग पर भूचाल आ गया हो. हम दोनों अपनी अपनी मंजिल कि और बढ़ने लगे फ़िर मेरी बीवी को ओर्गास्म हो गया।

लेकिन अबके मैं रुका नही. ढीली पड़ी बीवी को अपनी बाँहों में कसे नीचे से उसकी चूत को अपने लंड से रगड जा रहा था. अब मुझे भी ओर्गास्म आने लगा. मैं फ़िर भी रगड़ता गया और मुझे खूब जोर का ओर्गास्म आया. मैं भी ढीला पड़ गया. दोनों पसीने में लथपथ थे उस जनवरी कि ठंडी रात में भी. मैं ने अपने पैरों से रजाई धीरे से मेरे ऊपर पड़ी बीवी के कूल्हों तक ऊपर कर ली ताकि पसीना सूखने के बाद कोई गड़बड़ न हो. हम दोनों की एमसी की चार रातें ऐसे ही एक रात में चार चार पांच पाँच राउंड लगाते निकली. हम रात को सिर्फ़ दो घंटे मुश्किल से सो पाते थे. सुबह वो साडे चार बजे कमरा छोड़ देती थी. चारों दिन वो बिस्तर नीचे लगाती रही और मेरे पास सोती रही.

अब पांचवी रात को उसको पलंग पर लेकर कपड़े उतारने के बाद किस शुरू किया, बोबे दबाने शुरू किए, धीरे धीरे वो गरमाने लगी, उसके हाथ मैंने अपने लंड पर रख दिए आज उसकी पैंटी भी उतार फेंकी. उसकी चूत पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगा, गर्मी बढ़ने लगी, उसके हाथ मेरे लंड पर कसने लगे, आज उसको एमसी में ब्लड भी जरा सा आया था. उसकी चूत से पानी बाहर आने लगा. मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में सरकानी शुरू की, करीब डेढ़ इंच अन्दर जाने के बाद उंगली अड़ गई, छेद छोटा था, मैंने बड़ी लाइट जलाई, उसकी टांगो को चोडा करके उसकी चूत को फैला कर अन्दर देखा तो हाईमन साफ़ नजर आया, छेद बहुत छोटा था, वापस छोटी लाइट जलाई, दोनों वापस पहले वाली पोजीशन में आ गए. अब मेरे दिमाग में ये बात आई की यदि ऐसे ही मैंने अपना सात इंच का रोड अन्दर डालने की कोशिश की तो इसको बहुत दर्द होगा, ये सोचकर मैं अपनी अंगुली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

शुरू में थोड़ा सा दर्द हुआ फ़िर उसको अच्छा लगने लगा. अब मैंने उसको सारी बात समझाते हुए कहा कि या तो तुम ज्यादा दर्द सहो या कम. वो बोली कि कम दर्द करो. फ़िर मैंने कहा कि अब मैं तुम्हारी चूत में दो उंगली करूंगा, सहयोग करो, ड्रेसिंग टेबल से वैसलीन की शीशी निकाल कर दोनों बड़ी उँगलियों पर अच्छी तरह वैसलीन लगाई, अब धीरे से उसकी चूत फैला कर दो उंगली उसकी चूत में डालना शुरू किया, हाईमन को चीरने पर उसको दर्द हुआ मैंने अपनी उंगली को रोका. मैं उसको दर्द नही करना चाहता था क्यूंकि फ़िर आनंद की चरम सीमा एकदम से कम हो जाती है, फ़िर एक बात और भी है, यदि अपने भी ऐसा ही दर्द हो तो क्या अपन भी मजा ले पाएंगे. धीरे धीरे करके मैंने उसके हाईमन को थोड़ा चोडा कर दिया, अब अंगूठा उसकी चूत में जाने पर दर्द नही हुआ.

मैंने सोच लिया के अब मेरी बीवी लंड ले सकती है, इतना दर्द तो वो सहन कर ही लेगी, मैं उसके ऊपर आ गया, लेकिन प्रैक्टिकल प्रॉब्लम वोही थी, की एक हाथ से लंड सही जगह पर लगाता तो लंड को घुसाने में जोर नही लगा पा रहा था, उस रात को फ़िर पिछली चार रातों जैसे ही रगड़ना पडा, समझ नही आ रहा था की अन्दर कैसे डालना है,

मेरे एक दोस्त की शादी एक महीने पहले हुई थी, उस से मिला, उसने बताया की पत्नी की गांड के नीचे तकिया रख ले, उसकी टांगो के बीच में बैठ कर लंड को उसकी चूत पर सेट कर ले, घुटने मोड़ दे, फ़िर बैठे बैठे ही उसकी दोनों जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर धक्का लगा कर लंड चूत में पेल दे. सील टूटने दे. इसी को सील टूटना कहते हैं. मैंने उसको नही बताया कि उसकी सील मैं ढीली कर चुका हूँ.

अब टाइम निकलने लगा, रात आई, मेरी बीवी वोही ग्यारह बजे कमरे में आई, धीरे धीरे कपड़े उतारते गए, हम एक दूसरे से चिपकते गए, पसीना चुहचुहाने लगा, उसकी चूत गीली हो चुकी थी, अब वो समय आ गया, जिसके लिए मेरा लंड बाइस साल से तरस रहा था, मैंने वैसलीन कि शीशी का ढक्कन खोला, बीवी कि चूत पर खूब सारी वैसलीन अन्दर तक लगाई, गांड के नीचे तकिया लगाया, उसकी टांगो को फैला कर उनके बीच में बैठ गया, लंड को उसकी चूत पर सेट किया, टांगो को घुटने से मोड़ दिया, आज मेरे लंड उसकी चूत पर एकदम सही सेट हुआ, उसकी जाँघों पर अपना हाथ जकडा, धीर से दमदार धक्का लगाया, मेरा लंड उसके हाईमन को तोड़ता हुआ डेढ़ इंच अन्दर चला गया।

बीवी बोली कि जलन होने लग रही है, मैंने अपने आपको रोका और बीवी को पूछा कि इतना तो सहन कर सकती हो न, बोली हाँ इतना तो सहन कर लुंगी, अन्दर जाने के अहसास से मेरे लंड में एक नया कड़कपॅन महसूस हो रहा था, मैंने डेढ़ इंच में ही बीवी कि चूत को अपने लंड से सम्भोग किया, धीरे धीरे आसानी से. पहली बार मेरी क्रीम किसी चूत में छूटी थी. पास में से नेपकिन उठा कर उसकी चूत साफ़ की, सिर्फ़ दो बूँद खून और थोडी क्रीम.

अब वापस वो ऊपर और मैं नीचे, अब बिना घुसाए फ़िर घमासान चालू हुआ और जब रुका तो पन्द्रह बीस मिनट शांत पड़े रहे, धीरे धीरे फ़िर दोनों के शरीर में गर्मी आने लगी, अबके जो किस और दबाने का कार्यक्रम चला तो बेधड़क, बिना किसी दर्द के डर के, बिना नयेपन के एहसास के. मुझे पता था कि लंड को अन्दर कैसे जाना है, जीभें एक दूसरे को चाट रही थी, उसकी चूत से पानी टपकने लगा, मैं उसकी टांगो को चौडी करके बीच में बैठ गया, लंड को चूत के छेद पर सेट किया, हलके से धीरे धीरे धक्का लगाते हुए बीवी के मुंह को दर्द के लिए देखते हुए अपने लंड को अन्दर देता चला गया।

क्या अहसास था लंड के चूत में अन्दर तक जाने का. लंड स्टील की रोड के माफिक सख्त हो गया था, थोड़ा सा कसमसाने के बाद सब कुछ ठीक हो गया, अब मैं पहली बार, लंड बीवी की चूत में दिए उसके ऊपर आ गया, हमारी जीभें एक दूसरे पर फिरने लगी, फ़िर मैं उसके बोबे चूसने लगा, उसकी चूत गीली हो गई, हमारे होंट एक दूसरे के चिपक गए और हमने एक दूसरे को बाँहों में जकड कर जो चक्की चलाई की उसके मुकाबले में क्या कोई भूकंप होगा, सच में आज पूरा मजा आ रहा था, आज पता चल रहा था की क्यूँ अप्सराएं ऋषि मुनियों की तपस्या भंग कर देती थी. दोनों ने अपना अपना काम बखूबी निबटाया. फ़िर पस्त से एक दूजे पर यूँ ही पड़े रहे, इस तरह से सातवें दिन पूरा सम्भोग हुआ.

एक महीने तक हम लोगों का कार्यक्रम रोज रात चार पाँच बार होता था, हम कई बार एक दूर पर ही सो जाते थे, लंड जब देखो खड़़ा ही मिलता था, आज इस बात को सत्ताईस साल हो गए हैं, मेरी बीवी को अब मैं जो कर लूँ वो अपनी तरफ़ से पहल नहीं करती है, मुझे आज भी चार पांच बार डेली मुठ मारनी पड़ती है, मेरे पहले साल एक बेटी और उसके दो साल बाद एक बेटा हुआ लेकिन आज मैं प्यासा हूँ, मुझे कोई साथी चाहिए, बिल्कुल अपनापन सा, प्यारा सा, एक दूसरे को साथ देने वाला,… Sex Stories

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जब मैं दरवाजा बंद कर भाभी के पास गया Sex stories तो भाभी ने मुझे अपने पास बुला लिया मैने देखा भाभी ने अपना ब्लाउज़ और ब्रा नहीं पहने हुए हैं, उनके गोरे-गोरे मम्मे ठीक निम्बु के आकार के हैं मैने भाभी से कहा इतने छोटे मम्मे में तो दूध ज्यादा नहीं होता होगा और छोटू का पेट भी नहीं भरता होगा? तो उन्होनें कहा नहीं ऐसी बात नहीं है मुझे यकीन ही नहीं आ रहा था तो उन्होनें कहा लो चेक कर लो, वो वहीं बेड पर लेट गई मैं उनके पास बेड पर झुक कर उनका दूध पीने लगा। ओह! उनका दूध तो वाकई मीठा था और दूध भी तेजी से निकल रहा था। भाभी के निप्पले भी तन गये थे अब मुझे अच्छा लग रहा था मैं भाभी के मम्मे तेजी से दबाने लगा भाभी भी आंख बंद कर न जाने क्या सोच रही थी, अब मैं भाभी से पूरी तरह सट गया और मेरे होंठ भाभी के होंठों से जुड़ गये, ये मुझे तब पता चला जब भाभी मुझे हटाते हुए अपने कपड़े ठीक करने लगी तभी मुझे छोटू के रोने की आवाज सुनाई दी। भाभी ने छोटू को उठा कर अपनी गोदी में ले लिया, हम वहीं बिस्तर पे बैठ कर बातें करने लगे, पता नहीं क्यों आज मुझे घर जाने का मन नहीं कर रहा था, तब भाभी ने कहा अब तुम जाओ अभी भैया आ जायेंगे, तुम कल जल्दी आना और ये सब तुम किसी से नहीं बताना।

दूसरे दिन मैं भाभी के घर गया तो भाभी ने मुस्करा कर कहा आज तो बहुत जल्दी आ गये अभी तो मैं नहाई ही नहीं हूं तो मैने कहा कोई बात नहीं मैं यहीं बैठ जाता हूं आप नहा लो। भाभी बेडरूम जा कर अपने बाथ रूम में नहाने लगी तभी छोटू के रोने की आवाज आई मैं भी बेडरूम में जा कर छोटू को थपकी देने लगा तभी भाभी नहा कर केवल टोवल लपेट कर बाहर आई और मुझे देख कर बोली मैने तो तुम्हे बाहर बैठने के लिये कहा था तो मैने कहा छोटू रो रहा था। भाभी ने मेरे सामने ही अपना गाउन पहन लिया अब हम दोनो बेड पर बैठ कर बातें करने लगे, क्योंकि हल्की ठंड लग रही थी इसलिये हम लोगो ने कम्बल ओढ रखा था सामने टीवी चल रहा था

बात करते करते हम दोनो एक दूसरे से सट गये थे और अचानक भाभी ने कहा तुमने कभी किसी को नंगी देखा है तो मैने कहा कि आप नाराज तो नहीं होगी तो उन्होनें कहा नहीं, तो मैने कहा रात में जब आप और भैया नंगे सोते हो तो मैने आप दोनो को देखा है तब भाभी ने कहा कि तुम तो अपने घर रहते हो तब कैसे देखते हो तो मैने कहा कि जब मैं छत पर जाता हूं तो अपके बेडरूम की खिड़की से सब कुछ दिखता है भाभी ने कहा तुम बहुत बदमाश हो, अब से हम अपनी खिड़की बंद रखेंगे भाभी से मैने कहा कि ऐसा मत करना।

टीवी पर कोई रोमांस सीन चल रहा था मैं भाभी से और सट गया और भाभी से बोला मुझे आपका दूध पीना है भाभी की सांसे गरम हो गई थी भाभी ने अपना गाउन के बटन खोल दिये और कम्बल के अन्दर मेरे पैंट को खोलने लगी, उनकी चूंचियां अब तन गई थी मेरे हाथ उनके गाउन के नीचे कुछ छूने का प्रयास करने लगे अब हम पूरी तरह से खुल चुके थे।

भाभी ने मेरे पैंट के अन्दर हाथ डाल दिया था मेरा औजार बुरी तरह तन गया था, जब मैने भाभी की चूत पर हाथ रखा तो मेरे बदन में बिजली सी दौड़ गयी अब हम एक दूसरे को पूरी तरह महसूस कर रहे थे। तभी भाभी ने कहा चलो अब मैं तुम्हे बताती हूं कि मजा कैसे लिया जाता है। हम दोनो ने अक दूसरे के कपड़े उतार दिए, मैं तो एक टक भाभी को देखने लगा भाभी ने कहा ऐसे मत देखो मुझे शरम आ रही है।

भाभी की चूत पर एक भी बाल नहीं था भाभी ने मुझे लिटा कर मेरे औजार को धीरे धीरे सहलाना शुरु किया, मैं भाभी की छोटी चूंचियों को मसल रहा था भाभी का बदन ऐंठता जा रहा था काफ़ी देर तक ये सब करने के बाद भाभी ने मेरे औजार को चूमते हुए कहा ये तो बहुत ही प्यारा सा है मैं इसे अब वो सारी तरकीबें सिखाउंगी जिससे तुम जिंदगी को जीना सीख जाओगे। मैने भाभी से कहा भाभी मैं भी आपकी चूत की चुम्मी लूंगा भाभी ने कहा ठीक है मैं लेट जाती हूं मैने भाभी की चूत की चुम्मी ली और अपने जीभ के आगे की नोक से अन्दर जाने की कोशिश करने लगा लेकिन शायद भाभी को बहुत एक्साइटमेंट लग रहा था इस लिए उसने मेरे सिर को हटा दिया। अब हम दोनो बैठ गये मैं उनके गोद में लेट गया भाभी मेरे होंठों पर अपनी उंगलियां फ़िरा रही थी मैने उसकी एक उंगली अपने मुंह में डाल कर चूसने लगा भाभी अपनी आंखों को बंद रखे हुए थी अचानक फोन की घंटी बजी मेरे घर से फोन था मुझे तुरन्त ही जाना पड़ा मैने भाभी की एक चुम्मी ले कर जाने लगा तो भाभी ने कहा कल फिर मिलेंगे Sex stories

लेखक : मुन्ना Sex Stories

यह बात हैं कुछ 12-14 साल Sex Stories पुरानी, तब मैं 19 साल का एक हट्टा- कट्टा नौजवान था।

मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव “सिवामुलिक” में रहता था। हमारे गाँव में हर साल सावन में मेला लगता था और हम सारे दोस्त उस मेले में जाते थे, बहुत मज़े करते थे। मेला काफी प्रसिद्ध था इसलिए आस-पड़ोस के 5-7 गाँव के भी लोग वहाँ आते थे।

मैंने तब तक किसी भी लड़की को चोदा तो क्या नंगा भी नहीं देखा था। मगर हाँ, मेरे दोस्तों ने मुझे किताबों में लड़कियों की नंगी तस्वीरें दिखाई थी। उसमें अनगिनत लड़कियों की तस्वीरें थी, अलग अलग पोज़ेज़ में ! कहीं एक लड़की दो-दो लड़कों के साथ चुदवा रही थी, तो कहीं तीन लड़कियाँ एक लड़के के लौड़े के लिए लड़ रही थी, सभी कुछ सपना सा लगता था और मैं उन्हें देख कर मुठिया मारा करता था।

खैर, उस मेले में जाने का मुख्य तात्पर्य चोदना था, हम हर बार इसी उद्देश्य से वहाँ जाते थे, इस बार भी हम गए।

इस बार का मेला कुछ अलग ही था, इस बार बहुत सी नई दुकानें थी, झूले थे और काफी सुन्दर लड़कियाँ !

एक लड़की मुझे भी भा गई और मैं उसका पीछा करने लगा। वो जहाँ जाती, मैं वहाँ चला जाता, कभी गुबारा लेने तो कभी चूड़ियाँ लेने !

मेरे मामा की भी वहाँ एक चूड़ियों की दूकान थी, वो वहाँ जा पहुंची और भी वहाँ उसके पीछे पीछे मैं भी चला गया।

मुझे आता देख मामा जी ने कहा,” मुन्ना, अच्छा हुआ तू आ गया, आधे घण्टे के लिए दूकान संभाल ! मुझे ज़रा कुछ काम है !

मौका पाकर मैं वहाँ बैठ गया और उसे चूड़ियाँ दिखाने लगा।

उसके गोरे-गोरे हाथ अपने हाथों में लेकर उनमें चूड़ियाँ पिरोने लगा। कभी कोई टाइट चूड़ी से उसे दर्द होता तो वो अपना दर्द अपने होटों को काट कर दर्शाती। यह सब देख-महसूस कर के मेरा तो लौड़ा ही खड़ा हो गया।

मैंने कहा,” आपके हाथ काफी कोमल हैं, मानो रेशम के बने हों !”

और वो शरमा गई। मुझे लगा कि उसे भी मैं अच्छा लगता हूँ।

धीरे धीरे मैं उसका हाथ अपने लौड़े के पास लाते गया, शायद उसने यह महसूस कर लिया और मुझसे कहा,” क्या आप मुझे घर तक छोड़ सकते हैं, रात काफी हो गई है और मेरी सहेलियाँ भी नहीं दिख रही !”

मैं फट से तैयार हो गया, मामाजी आये तो उनसे सायकिल ली और चल पड़ा उसके साथ।

रास्ते में उससे उसका नाम पूछा।

“रति” उसने जवाब दिया।

काफी देर चलने के बाद हम एक सुनसान जगह पर पहुँचे, मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे पास के खेत में ले गया।

उसके होठों को अपने हाथ से छुआ, उन पर शबाब की बूंदें मानो शहद लग रही थी, मैंने हलके से उसके होठों पर अपने होठ रखे और अपनी जबान को उसके मुँह के अन्दर फ़िलाने लगा। उसके हाथ भी मेरे शरीर पर घूमने लगे, कभी वो मेरी गर्दन को चूमती तो कभी मेरे कान को अपनी जुबान से सहलाती।

मेरे अंग-अंग में रोमांच भर गया, मैंने उसकी चोली निकाली तो उसके स्तन बाहर छलक पड़े, उनका आकार बहुत बड़ा था, मेरे हाथ से भी बड़ा !

मैंने एक को मुँह में लिया और चाटने लगा, उसके चुचूक खड़े हो गए। मैं अपनी जुबान से उसके चुचूक के इर्द गिर्द गोला बनाने लगा, उससे उसको बहुत अच्छा लगा “आ…आया…ऊऊओह्ह्ह्ह” की आवाज़ से मेरे लौड़ा पैन्ट फाड़ने को तैयार हो गया।

मैंने उसे नीचे लिटाया, उसका घगरा निकला और फिर उसकी चड्डी। उसकी गोरी गोरी टांगें देखकर तो मेरे मुँह में पानी आने लगा। मैंने जल्दी से अपनी पैन्ट और चड्डी निकली और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत में मेरी जुबान अन्दर तक जा रही थी। वो अपना आनंद ” और ….और जोर से …..आह…” की आवाज़ से जता रही थी।

फिर वो हट गई और मुझे लिटा दिया, वो मेरी टांगों की बीच बैठ गई और मेरे खड़े लौड़े को देखने लगी।

” बाप रे ९ इंच ! बहुत बड़ा हैं यह तो ! क्या मेरी चूत में जा पायेगा?”

मैं भी सोच में पड़ गया। मगर उसने मुझे सोचने का वक़्त नहीं दिया, और फट से मेरे लण्ड को अपने गरम होठों के बीच ले लिया, अपने सिर को ऊपर-नीचे करने लगी, लौड़े के सर पर जुबान से गोले बनाने लगी। ख़ुशी के मारे मैं चिल्लाने लगा,” हाँ, हाँ और जोर से…..और जोर से……रति…….रांड और अन्दर ले …”

इतने में मेरा चीक(वीर्य) निकल गया, वो हँस पड़ी, उसने मेरा पूरा चीक खा लिया।

मेरा लौड़ा छोटा हो गया। वो उसे हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी, मेरी छाती को चूमने लगी, मेरे चुचूकों को चाटने लगी। वो फिर मेरी गोटियों को अपने मुँह में लेकर खेलने लगी। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।

“चल अब डाल दे !” रति बोली।

मैंने कहा,” मैंने कभी किया नहीं, क्या आप मुझे बताएंगी कि कहाँ डालना है !”

उसने मेरे खड़े लौड़े को अपने हाथ में लिया और अपनी चूत के दरवाज़े पर रख दिया।

“चल अब डाल !” वोह बोली।

और मैंने डाल दिया, थोड़ा सा दर्द हुआ मुझे, पहली बार था ना !

“अब अन्दर-बाहर कर अपने लौड़े को, फिर देख क्या मजा आता है !”

मैं वैसा ही करने लगा, उसके स्तनों को काटने लगा, उसके होठों को चूमने लगा, उसके उभार लाल लाल हो गए थे, उनमें मेरे हाथों के निशाँ भी पड़ गए थे। मैंने अपने धक्कों को गति बढ़ा दी।

” डालो और जोर से डालो, मेरी चूत कब से एक लौड़े के लिए प्यासी थी…. रणजीत… अपने हाथों से मेरी गांड भी दबाओ… !”

मैंने फिर उसके पैर अपने कंधे पर रख लिए और फिर से धक्के देना चालू किया, उसे पैरों को काटता तो कभी चूमता !

मेरे धक्कों के उसके स्तन यूं झूलते मानो आंधी में लालटेन !

” रणजीत, अपने लौड़े की वर्षा से एक बार फिर मेरे चेहरे को नहला दो, जोर से डालो अन्दर……आअह्ह…..ऊऊऊउऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह……मेरे राजा…..बड़ी तेज़ हैं तेरी गाड़ी…….फाड़ डाल मेरी चूत को………आ …और और और…..हाँ हाय हाँ हाँ हाँ…” वो बड़ी ही रोमांचित थी और मैं भी !

मैं फिर से निकलने वाला था, मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह की तरफ रख कर हिलाने लगा … एक-दो बार हिलाने के बाद मेरा पूरा चीक निकल गया,”ओह , आ आ….ले…पूरा ले मुँह में रांड……ले ले मेरे लौड़े को !” मैं बोला।

उसके बाद हमने कपड़े पहने और फिर उसे उसके घर छोड़ दिया।

इस घटना के बाद मैंने कई बार कोशिश की उससे मिलने की, मगर वो कहीं नहीं मिली………

आप बताइए, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Sex Stories

अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गई और फिर सब लोगों को उठा दिया, हम सब लोग तैयार हुए और फिर रवि हम सब को रेलवे स्टेशन छोड़ आए.
हमारी ट्रेन सुबह छह बजे थी.

थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई और हम लोग ट्रेन में बैठ गए।
रात को दस बजे हमारी ट्रेन नैनीताल पहुँच गई… हमने वहां से टैक्सी बुक की और अपने होटल में पहुंच गए. अनिल ने होटल ऑनलाइन ही बुक किये थे तो हमें जाते ही वहाँ तीन कमरे मिल गए।

हमने अपने अपने कमरे चुन लिए. स्वाति और अनिल एक कमरे में… आलोक और रोहित एक कमरे में थे और रोहन, अन्नू और मैं… हम तीनों एक ही कमरे में रुक गए क्योंकि हमारा रूम थोड़ा बड़ा था।

सफर के कारण हम लोग पसीने से नहा रहे थे… तभी आलोक हमारे कमरे में आया, बोला- चलो, सब लोग स्वीमिंगपूल में नहाने चलते हैं।
मैंने आलोक से कहा- कहाँ है पूल… और इतनी रात को कौन-कौन जा रहा है?
आलोक ने कहा- अरे चाची जी… यहीं होटल में ही है… और सब लोग नहाने जा रहे हैं… आप भी चलो।
मैंने कहा- नहीं… मैं नहीं जा रही… तुम लोग जाओ।

सब लोग जाने के लिए तैयार हो गए और मुझसे भी चलने के लिए जिद करने लगे तो मैंने सभी को समझाते हुए कहा- ना ही मेरे पास स्विमिंग कॉस्ट्यूम है और ना ही मुझे तैरना आता है..
तभी स्वाति और अनिल मेरे रूम में आ गए।

अनिल ने मुझसे कहा- आपको जो ठीक लगे… आप वह पहन कर चल सकती हैं… और हम लोग तो बस वहां मस्ती करने जा रहे हैं!
अनिल के कहने पर मैं भी चलने के लिए तैयार हो गई।

सब लोग चलने के लिए तैयार थे… रोहन, आलोक, रोहित और अनिल सभी ने केवल हाफ पैंट ही पहने हुए थे… अन्नू ने भी एक टी-शर्ट और एक हॉट पैंट पहना हुआ था… स्वाति भी टी-शर्ट और कैपरी में थी।

मेरे पास पहनने के लिए केवल एक गाउन ही था जो मुझे रात मैं पहनना था. मैंने स्वाति को अपनी यह दुविधा बताई तो स्वाति ने अपनी एक नाइटी लाकर मुझे दे दी और मुझे वह पहनने के लिए कहा।

स्वाति की नाइटी केवल घुटनों तक ही थी और आर्मलेस थी… उस नाइटी को कमर पर बांधने के लिए एक रिबन लगी हुई थी.
बच्चों के सामने इसे पहनने में मुझे थोड़ी हिचकिचाहट हो रही थी… पर बच्चों को इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी।

हम सब रूम से निकलकर स्विमिंग पूल पहुंच गए और फिर सब लोग पूल में उतर कर नहाने लगे… रात के समय केवल हम लोग ही पूल में नहा रहे थे, और कोई नहीं था… बस पास में बेंच पर एक आदमी बैठा हुआ था.
हम सब लोग पूल में नहाने लगे, हम सब लोग साथ में ही नहा रहे थे।

सब लोग पूरी तरह से गीले थे… गीली होने की वजह से मेरी नाइटी मेरे शरीर से बिल्कुल चिपक गई… मेरे साथ साथ अन्नू और स्वाति दोनों की टीशर्ट भी उनके मम्मों से चिपकी हुई थी जिसमें से हम सभी के उभार साफ नजर आ रहे थे.

तभी आलोक और रोहन दोनों ने हम लोगों के पास आकर हमें पानी में इधर-उधर खींचना शुरू कर दिया और मेरे साथ मस्ती करने लगे।

रोहन भी मेरे पास आया और मुझसे कहा- मम्मी… मैं आपको तैरना सिखाता हूँ।

मैंने कहा- हां… ठीक है.. जब तक हम इस होटल में हैं, तुम लोग मुझे तैरना सिखा दो।

रोहन मेरे पीछे आ गया और वह मुझसे चिपक कर खड़ा हो गया. रोहन का लंड भी टाइट हो गया था और फिर वो अपने लंड को मेरी गांड पर घिसने लगा… हम लोग चार फीट गहरे पानी में थे… पानी में होने की वजह से ना किसी को कुछ दिख रहा था… ना ही कुछ समझ आ रहा था।

रोहन ने मुझे मेरे हाथ फैलाने के लिए कहा… फिर रोहन ने अपने एक हाथ को मेरी कमर पर रखा और दूसरे हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया… फिर वह मुझे तैरना सिखाने लगा… रोहन पीछे से अपने लंड से बॉक्सर में ही मेरी गांड पर झटके देने लगा।
मैंने रोहन से धीरे से कहा- अभी रुक जाओ…यह सही वक्त नहीं है कोई देख लेगा…
रोहन भी हल्के स्वर में बोला- मम्मी, आप बस तैरने पर अपना ध्यान लगाओ बाकी सब मुझ पर छोड़ दो…
और फिर वो झटकों के साथ साथ मुझे पानी के अंदर हाथ पैर चलाना सिखाने लगा।

तभी मेरी नज़र सामने बैंच पर बैठे उस आदमी पर गई जो कि शुरू से ही हम लोगों को नहाते हुए देख रहा था… उस आदमी की नज़र मेरी और और लड़कियों की तरफ ही थी।

तभी हम दोनों की नज़रें आपस मे टकरा गई… और वो मेरी तरफ घूरते हुए मुस्कुरा दिया.
जवाब में मैंने उस आदमी से नज़र हटा ली.

रोहन मेरे पीछे ही था और मेरे हाथों को पकड़ा हुआ था…तभी उसके झटके तेज हो गए और वो झड़ने लगा।
मैंने रोहन से कहा- रोहन खाली हो गया क्या तेरा?
तो रोहन ने कहा- हाँ मम्मी, मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ…

उत्तेजना के कारण मेरी चूत भी पानी छोड़ रही थी।
ग्यारह बजने को थे… फिर हम लोग पूल से वापस अपने अपने रूम में आ गए. अन्नू रोहन और मैं तीनों ही गीले थे. रूम में आकर हम लोग खुद को पौंछने लगे. तब तक अन्नू बाथरूम से कपड़े बदलकर आ गई और फिर स्वाति के रूम में चली गई।

अब मैं और रोहन ही रूम में बचे थे, रोहन ने अन्नू के जाते ही गेट को लॉक कर दिया और मेरे हाथ से टॉवल लेकर बिस्तर पर फेंक दिया.
मैं कुछ बोलती, उससे पहले ही रोहन ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया… फिर रोहन ने मेरी नाइटी को खोलकर उतार दिया।

मैं बस ब्रा और पैंटी में ही खड़ी थी. मेरे होंठ रोहन की गिरफ्त से छूटते ही मैंने रोहन से कहा- रोहन बेटा, तू तो इतना उतावला हो रहा है जैसे मैंने कभी तुझे चोदने ही नहीं दिया ।
रोहन बोला- ऐसी बात नहीं है मम्मी… आज जब से आपको पूल में नहाती हुई देखा है.. मुझसे रहा ही नहीं जा रहा।

मैंने हँसते हुए रोहन को अपने गले से लगा लिया. रोहन के दोनों हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी पीठ पर लिपटे हुए थे, मैंने रोहन से कहा- मेरा राजा बेटा अपनी मम्मी से इतना प्यार करता है?
रोहन ने हां में सर हिला दिया।

तभी रोहन ने पीछे से ही मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा को खींचता हुआ मुझसे दूर हो गया. मैं अधनंगी थी और अपने स्तनों को देखने लगी… फिर मैंने रोहन की तरफ देखते हुए उसे कहा- रोहन, बहुत शरारती हो गया है तू?
और फिर हम दोनों हँसने लगे।

हम दोनों अभी भी गीले थे… रोहन मेरे पास आया और मेरे मम्मों पर एक चुम्मी देते हुए मेरी पैंटी को भी उतार दिया… मेरी नाइटी, ब्रा और पैंटी वही जमीन पर पड़ी हुई थी… मैं बिल्कुल नंगी रोहन के सामने खड़ी थी और फिर रोहन टॉवल लेकर मेरे नंगे शरीर को पौंछने लगा.
फिर मैंने भी झुककर रोहन की हाफ पैंट को उतार दिया… और फिर रोहन की चड्डी को भी उतार दिया.

कपड़ों से आजाद होते ही रोहन का लण्ड फनफनाने लगा।
पूल में झड़ने की वजह से रोहन की चड्डी और उसका लण्ड दोनों ही उसके वीर्य से लथपथ थे.

मैं जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और मैंने रोहन के गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया… वीर्य के कारण लण्ड का स्वाद काफी अच्छा लग रहा था।

फिर हम दोनों उठ कर बिस्तर पर लेट गए, रोहन मेरे ऊपर आकर आकर 69 की पोजीशन में लेट गया… फिर रोहन ने मेरी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया.
रोहन का लण्ड मेरे मुंह के सामने था तो मैंने भी रोहन के लण्ड को अपने मुंह मे भर लिया और उसे चूसने लगी.
रोहन ने उत्तेजित होकर अपने लण्ड से मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया।

रोहन अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था… मेरी चूत काफी देर से पानी छोड़ रही थी तो मैं ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और झड़ने लगी… मेरी चूत से रस की धार बहने लगी जिसे रोहन ने चाटना शुरू कर दिया।

चूत चाटने के बाद रोहन मेरे ऊपर से उठ गया और अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथों से पकड़कर सहलाते हुए मुझसे बोला- मम्मी… अब बताओ, किस पोजीशन में चुदना पसंद करोगी आप?

मैंने रोहन से बिना कुछ कहे अपनी दोनों टांगों को फैला दिया… रोहन को मैंने चुदाई का काफी ज्ञान दिया है… अब वो काफी अनुभवी हो गया है.
मेरे टाँगें फैलाते ही वो मुस्कुराते हुए मेरी टांगों के बीच आकर घुटनों के बल बैठ गया और फिर मेरी दोनों टाँगों को पकड़कर अपनी कमर के बगल में ले गया. इससे मेरी दोनों जाँघें रोहन की कमर पर टिक गई और मेरी कमर बिस्तर से थोड़ी ऊपर हवा में झूलने लगी।

रोहन ने देरी न करते हुए अपने लण्ड को मेरी चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्के के साथ अपना करीब सात इंच लम्बा और दो इंच मोटा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया जो सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया.
रोहन के इस धक्के के साथ मैं भी चीखते हुए आगे गिर पड़ी।

मैंने दर्द में चीखते हुए रोहन से कहा- उइईईई…माँ… मर गई…मैं… रोहन… तेरी माँ हू मैं… कोई किराये की वेश्या नहीं हूँ जो इतनी बेदर्दी से धक्के मार रहा है… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह…मम्मा…

रोहन ने कहा- सॉरी मम्मी… आज मैं बहुत हॉर्नी हो रहा हूँ… अगर मुझे पता होता कि आपको दर्द होगा तो मैं धीरे से ही धक्के मारता!
इतना बोलकर रोहन ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।

रोहन का लण्ड मेरी चूत की गहराई को छूता हुआ वापस बाहर आकर दोबारा मेरी चूत की गहराई में उतर जाता. मैं भी रोहन के हर धक्कों पर अपनी कमर उछाल कर रोहन को ओर उत्तेजित कर रही थी।

रोहन लगातार मेरी चूत के अंदर अपने लण्ड से वार कर रहा था… मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सिसकार रही थी- आहह… रोहन… बस ऐसे ही… चोद मुझे…चोद दे… मेरी चूत को अपने इस मोटे लंड से… और ज़ोर से… और ज़ोर से… हाँ बेटा.. ऐसे ही… बस ऐसे ही चोद मुझे… आहहहह… रोहन.. मेरे लाल… चोद डाल अपनी मम्मी को… आहह…

तभी रोहन ने मेरे मटकते हुए पेट को चाटना शुरू कर दिया और फिर मेरी नाभि में थूक दिया और फिर मेरी नाभि को चाटते हुए नाभि को जीभ से कुरेदने लगा.
ये सब मुझे काफी उत्तेजित कर रहा था।

कुछ देर की चुदाई के बाद मैं झड़ने को हुई तो मैं रोहन से बोली- उफफ्फ़… रोहन… ओह्ह… माय्य… गॉडड… फ़क्क… मीईई… रोहन… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ़… आहह… चोद दे अपनी माँ की चूत…
और फिर मैं झड़ने लगी।

रोहन अभी तक मेरी चुदाई कर रहा था पर मैं थक चुकी थी, मैंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया.
रोहन समझ गया था कि मैं अब थक चुकी हूँ तो उसने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया।

रोहन मुझसे बोला- मम्मी… बहुत दिनों से मैंने आपकी गांड नहीं मारी है…
और फिर उसने अपना लण्ड वैसे ही मेरी चूत से निकालकर मेरी गांड के छेद पर लगाया और फिर अपने लण्ड को मेरी गांड में डालने लगा।

रोहन का लण्ड गीला था… पर मेरी गांड भी कसी हुई थी क्योंकि मैं कभी कभार ही अपनी गांड के अंदर लण्ड लेती हूँ।

गीला होने की वजह से रोहन के लण्ड का सुपारा तो अंदर चला गया पर मेरी कसी हुई गांड में लंड को और अंदर डालने के चक्कर में रोहन झड़ने लगा… झड़ते वक्त रोहन ने अपना शरीर मेरे ऊपर रख दिया और ऊपर से ही गांड पर झटके देने लगा।

सुपारा अंदर होने की वजह से रोहन का वीर्य मेरी गांड के अंदर ही भर गया. झड़ने के बाद रोहन ने अपने लंड को बाहर खींच लिया और मेरी बगल में आकर लेट गया.
रोहन के लंड निकालते ही उसका वीर्य मेरी गांड से बहकर बाहर आने लगा जिसे रोकने के लिए मैं उलटी होकर लेट गई।

हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लेटे हुए थे… रोहन मुझसे आकर चिपक गया और मेरे बालों को हाथ से सहलाने लगा।

मैंने रोहन से कहा- रोहन… भर गया तेरा मन… या अभी भी कुछ बचा है… और आज तो गांड मारने से पहले ही तू आउट हो गया।
रोहन ने कहा- आपकी गांड बहुत कसी हुई है मम्मी… और मैं तब ही झड़ने वाला था जब मैंने आपकी चूत से लण्ड निकाला था।

फिर मैंने रोहन से कपड़े पहनने के लिए कहा और मैं खुद को साफ करने के लिए नंगी ही उठकर बाथरूम जाने लगी।

रोहन ने अपने साफ कपड़े पहन लिए और मैं जमीन से सभी कपड़े उठाकर बाथरूम चली गई.
रोहन का वीर्य मेरी गांड से निकलकर मेरी जांघों पर आ रहा था.

मैं शावर चालू करके उसके नीचे नहाने लगी.
तभी मुझे रूम की घंटी की आवाज़ सुनाई दी.. पर मैंने उस पर गौर नहीं किया।

मुझे नहाने में थोड़ी देर लग गई… नहाने के बाद मुझे याद आया कि जल्दी में मैं अपनी ब्रा, पैंटी और गाउन बाहर ही छोड़ आई हूँ…
तो मैंने रोहन को आवाज़ लगाते हुए कहा- रोहन, मेरे कपड़े बैग पर ही रह गए है… जरा मुझे दे तो जा?

मैं बिल्कुल नंगी गीली ही खड़ी थी… अपने बदन को पौंछने के लिए मेरे पास टॉवल भी नहीं था… तभी बाथरूम के गेट पर दस्तक हुई।

मैंने तुरंत ही दरवाज़ा खोल दिया…और सामने रोहित मेरे कपड़े लिए हुए खड़ा था… मैं बिल्कुल नंगी उसकी आँखों के सामने खड़ी थी और उसकी नज़र मेरे नंगे बदन पर टिकी थी।

रोहित को सामने देख मैं घबरा गई और गेट के पीछे चली गई… मैंने गेट के पीछे से ही अपने एक हाथ से रोहित से कपड़े ले लिए और फिर गेट बंद कर दिया।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और बाहर आ गई.
रोहित वहीं बेड पर बैठा हुआ था.

अभी जो हुआ था… उसके बारे में कुछ भी बात करने के लिए नहीं था… और हम दोनों नज़रें भी नहीं मिला पा रहे थे पर फिर भी मैंने रोहित से पूछा- रोहन कहाँ है?
रोहित ने कहा- वो आलोक भैया के साथ गया है।

इससे पहले कि मैं उससे कुछ कहती, रोहन और अन्नू रूम में आ गए… फिर मैंने रोहित से कोई बात नहीं की.
कुछ देर बाद रोहित अपने रूम में चला गया और फिर हम तीनों भी सो गए.

मैं बिस्तर के कोने से सो रही थी… अन्नू बीच में थी और रोहन दूसरे कोने पर!

मुझे नींद नहीं आ रही थी… मैं तो बस यही सोच रही थी ‘जाने रोहित क्या सोच रहा होगा…उसे भी खुद पर ग्लानि हो रही होगी?’
वैसे रोहन और रोहित हर बात आपस मे शेयर करते है तो मैंने सोचा कि कल में रोहन से इस घटना के बारे में बात करुँगी.
यही सब सोचते सोचते मैं सो गई।

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