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पप्पू मेरे गाँव का ही लड़का था Antarvasna और बचपन में हम लोग साथ साथ ही रहे थे। उसका बाप हमारे घर का पुराना नौकर था, मगर गाँव देहात में इन सब चीज़ों को कोई नहीं मानता। हम लोग साथ ही दिन भर खेला करते थे और मेरी उम्र उस समय लगभग अठारह साल की थी. मैं नया नया जवान हुआ था और जैसा कि होता है, अक्सर सेक्स के बारे में सोचा करता था, मगर कभी मौका नहीं मिला था।
हम और पप्पू रोज़ सुबह शौच के लिए लोटा ले कर खेत में जाते थे और अगल बगल ही बैठ जाते थे। हर दिन साइड से मुझे उसका लटका हुआ आण्ड और थोड़ा सा लौड़ा दिख जाता था। मेरे बदन में हमेशा उसका सामान देख कर थोड़ी थोड़ी झुरझुरी हुआ करती थी। मैंने तब तक किसी भी लड़के या लड़की के साथ सेक्स नहीं किया था मगर दिल तो हमेशा रहता था कि और कुछ नहीं तो किसी लड़के के साथ ही थोड़ी बहुत छु-छा हो जाये।
मैं मुठ मारा करता था अकेले में, मगर जो मज़ा किसी के साथ है वो अकेले में कहाँ !
मैं मन ही मन योजना बनाने लगा कि किसी तरह से पप्पू को पटाया जाए साथ में मज़ा लेने के लिए।
एक दिन जब हम सुबह शौच के लिए गए तो उसका लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा दिख रहा था। मैंने मजाक करते हुए पप्पू से कहा,”क्या यार, अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए !”
“क्यों”
“तुम्हारा मन कर रहा होगा”
“ये कैसे कह रहे हो?”
“मुझे लगा !”
मगर पप्पू ने उस से ज्यादा कोई बात नहीं की। मैं भी मन मसोस कर रह गया।
अगले दिन हम सभी को एक शादी के लिए बगल के गाँव में जाना था। पप्पू भी साथ में गया। रात में ऐसा हुआ कि हम दोनों को सोने के लिए छत पे बना हुआ एक कमरा दे दिया गया। कमरा छोटा ही था और बिस्तर तो और भी छोटा, मगर मैं मन में खुश हो रहा था कि शायद आज कुछ इधर उधर की बात हो। मगर पप्पू लेटते ही सो गया। मेरे बदन में तो झुरझुरी चालू थी और मेरा लौड़ा भी थोड़ा थोड़ा खड़ा हो रहा था।
जब मुझे लगा पप्पू पूरी तरह सो गया है तो मैंने धीरे से करवट बदला और अपना हाथ उसके घुटनों के थोड़ा ऊपर रख दिया। उसने लुंगी पहन रखी थी आधा मोड़ कर। धीरे धीरे मैंने अपना हाथ ऊपर उठाया और सीधे उसके लंड के ऊपर रख दिया। शायद उसका लंड अभी सोया हुआ था और ऐसे भी लुंगी के ऊपर से पता नहीं चल पा रहा था। मैंने हलके से लुंगी को ऊपर से उसके लंड को दबाने की कोशिश की. मैंने लुंगी के ऊपर से उसका लौड़ा पकड़ लिया. उसका लंड अभी एकदम ठंडा पड़ा हुआ था मगर फिर भी बहुत ज्यादा मोटा लग रहा था।
मैंने धीरे धीरे उसके लंड को दबाना शुरू किया कि शायद पप्पू अगर जगा हो तो उसे पता चल जाये कि क्या हो रहा है।
पप्पू ने धीरे से अपना देह हिलाया जिससे मुझे लगा कि शायद वो जग गया है। मगर उसने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश नहीं की। मैंने अपना सहलाना जारी रखा। थोड़ी ही देर में मैंने महसूस किया कि उसका लंड थोड़ा थोड़ा कड़ा हो रहा है। मैंने अब उसके लौड़े को थोड़ा और कस के दबा दिया। लुंगी के अन्दर से उसका लंड अब एकदम बड़ा हो गया था। मैंने धीरे से अपना हाथ हटाया और उसकी लुंगी को थोड़ा ऊपर उठा कर अन्दर डाल दिया।
अब मेरा हाथ उसके जांघिये के ऊपर था। मैंने पाया कि उसका लंड रह रह कर हलके से उछल रहा था। मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने धीरे से उसके जांघिये को सरका कर उसका लंड पूरा पकड़ लिया। पप्पू का लंड इतना बड़ा था कि मुझे यकीन ही ना हुआ। मैंने उसका सुपाड़ा अपने हाथ में ले लिया और हौले से रगड़ने लगा। उसके सुपाड़े पर से मैंने चमड़ी नीचे खींच दी और उसका हल्का सा अहसास लिया। उसके सुपाड़े से थोड़ा थोड़ा भीगा रस चिकना चिकना सा निकल रहा था।
इतने में पप्पू ने करवट ली और मेरे बदन पे अपना पैर रख दिया और मुझे हल्के से अपनी बाँहों में भींच लिया। अब हम दोनों के मुँह एक दूसरे के पास पास थे और मेरे हाथ में उसका बड़ा सा लौड़ा था। उसका लंड लगभग साढ़े छः इंच लम्बा और मोटाई लगभग पांच इंच थी। उसके लम्बे लम्बे झांट मेरे हाथों में फँस रहे थे। मैंने उसका लौड़ा सहलाना चालू रखा। पप्पू ने धीरे से मेरे गालों पे एक किस कर लिया। मैं भी अब एकदम गरम हो गया था और मैंने भी अपने हाफ पैंट को खोल कर सरका लिया. अब हम दोनों एक दूसरे से एकदम सट गए थे और मेरा लंड उसके जांघ को छू रहा था। मैंने अपना हाथ उसके लंड से हटा लिया और उसकी पीठ पे रख दिया। अब हम दोनों अपने लौड़े को आपस में रगड़ रहे थे। पप्पू की सांस भी तेज़ हो चली थी।
थोड़ी देर में मुझे अहसास हुआ कि पप्पू मेरे सर को धीरे से नीचे की ओर धकेल रहा था। मुझे लग गया कि शायद वो मेरा मुँह अपने लंड के पास ले जाना चाहता है। मैंने भी कोई प्रतिकार न किया और नीचे की ओर सरकता गया। थोड़ी ही देर में मेरा मुंह उसकी जांघों के पास था। उसका लोहे जैसा कड़ा लंड बिलकुल मेरे होंठ के पास था और उससे एक अजीब सी गंध आ रही थी।
इतने के बाद पप्पू ने हल्के से अपने बदन को आगे बढ़ाया जिससे कि उसके लंड का सुपाड़ा मेरे मुँह में आ गया। मैंने धीरे से उसका पूरा का पूरा लंड ही अपने मुँह ले लिया जो इतना बड़ा और मोटा था कि मुझे मुंह में रखने में भी दिक्कत आ रही थी।
मैंने उसके लंड को बड़े प्यार से चूसना चालू कर दिया और पप्पू भी हौले हौले से धक्के लगाने लगा। उसका एक झांट टूट कर मेरे जीभ पे आ गया था जिसे मैंने हटा दिया। उसका लंड बेहद गरम था और उससे थोड़ा थोड़ा पानी भी निकल रहा था जिसका नमकीन स्वाद मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। मैंने अपनी जीभ उसके सुपाड़े के चारों तरफ घुमानी शुरू कर दी जिससे वो और भी ज्यादा गरम हो गया। पप्पू ने अपने हाथ से मेरे सर को दबाना शुरू कर दिया और अपने धक्के भी तेज़ कर दिए। मैंने अपना लंड उसकी टांगों के बीच डाल दिया था और हल्के से आगे पीछे कर रहा था। थोड़ी देर में पप्पू के मुँह से ऊं ऊं की हल्की आवाज़ आने लगी और उसके धक्कों की रफ्तार भी बढ़ गई। मैंने उसका सुपाड़ा चाटना जारी रखा। दस पंद्रह मिनट के बाद मुझे लगा कि उसके लंड से वीर्य की धार निकल रही है। मैंने भी बहुत बार मूठ मार कर अपना माल गिराया है मगर इतना ज्यादा कभी नहीं निकलते देखा था। मेरा पूरा मुँह उसके वीर्य से भर गया था। उसका वीर्य बहुत ही नमकीन था और मैं उसे पूरा का पूरा पी गया। थोड़ा सा वीर्य मेरे गाल और होठ पे भी निकल आया था जिसे मैंने चाट लिया।
पप्पू की टांगों के बीच मेरा लंड दबा रखा था और मैं भी लगभग साथ साथ ही झड़ गया।
मैंने अपने मुँह से उसका लौड़ा बाहर निकाला और चमड़ा खींच कर सुपाड़े के ऊपर कर दिया। पप्पू भी करवट बदल कर वापस सो गया। मुझे इतना मज़ा जिंदगी में कभी नहीं आया था। चूंकि मेरा गिर चुका था इसलिए मुझे भी जल्दी ही नींद आ आ गई और मैं सो गया।
लगभग दो घंटे बाद मुझे लगा कि पप्पू ने मेरे पैंट के अन्दर हाथ डाल दिया है और धीरे से मेरे गांड के छेद को सहला रहा है। मुझे भी मज़ा आने लगा और मैंने झट से अपना पैंट खोल कर हटा दिया और घूम कर उसके लौड़े को फिर से मुँह में ले लिया। जब पप्पू का लंड पूरा गरम हो गया तो उसने मुझे पेट के बल लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया पीछे से।
उसने पहले तो मेरे चूतड़ों को हल्का सा अलग किया और गांड के छेद पे झुक कर थूक दिया। मैं समझ गया कि अब वो मेरी गांड मारना चाह रहा है। मगर उसका लौड़ा इतना बड़ा था कि मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी। मैंने धीरे से कहा,”पप्पू तुम्हारा बहुत ज्यादा मोटा है, नहीं घुस पायेगा।”
“सब चला जायेगा, थोड़ा आराम से ढीला करो छेद !”
यह कह कर उसने मेरे गांड के छेद पे थोड़ा और थूक लगाया और उंगली से सहलाने लगा। मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। फिर धीरे से उसने अपने सुपाड़े को मेरी गांड के छेद पे रखा और अन्दर की ओर धकेलने लगा। मुझे बड़ा दर्द हुआ मगर पप्पू ने अपने पैरों से मुझे कस कर जकड लिया था जिससे कि मैं हिल नहीं पाया। धीरे धीरे उसने पूरा ही सुपाड़ा मेरी गांड में घुसा दिया और अंत में पूरा लौड़ा अंदर चला गया।
मुझे भी अब बहुत मज़ा आने लगा था और मैं भी नीचे से धीरे धीरे गांड उचका कर ठाप देने लगा। पंद्रह बीस मिनटों बाद उसका पूरा वीर्य मेरी गांड में ही निकल गया। मैं भी अपने लंड को चादर में रगड़ता जा रहा था और मेरा भी तुंरत ही गिर गया।
“पप्पू अब बाहर आ जाओ !” मैंने कहा।
“रुकिए न, थोड़ा बाथरूम में चलते हैं।”
“क्यों?”
“चलियेगा तब तो !”
पप्पू ने अपना लौड़ा भीतर ही रहने दिया और मुझे उसी अवस्था में खींच कर बाथरूम में ले गया। बाथरूम का दरवाज़ा सटा हुआ ही था। अन्दर जा कर हम दोनों खड़े हो गए और उसका लंड अभी भी मेरी गांड में फंसा हुआ था।
“क्या कर रहे हो पप्पू?”
“अभी पता चल जायेगा !”
थोड़ी देर वैसे रहने के बाद मुझे लगा कि जैसे उसके लौड़े से कोई गरम धार सी मेरी गांड में गिर रहा है। मैं समझ गया कि पप्पू ने मेरी गांड में ही अपना पेशाब कर दिया है। फिर हम दोनों अलग हुए और आ कर सो गए वापस। उस दिन मैंने तीन बार और उसका लौड़ा चूसा और अपनी गांड मरवाई।
हालाँकि इस घटना को अब सात साल गुजर गए, पप्पू की शादी हो गई, मगर अब भी जब मैं गाँव जाता हूँ तो मैं उसका मोटा लंड अपने मुँह में जरूर लेता हूँ और वो मेरी गांड भी मारता है। Antarvasna
उधर श्वेता ने उनके लिंग Hindi Sex Stories को फिर लोहे की गर्म रॉड की शक्ल दे दी थी और अब स्वयं ही अपनी योनि उस पर टिका कर धीरे धीरे धक्के देने लगी थी। लिंग-मुंड के उसकी योनि में प्रवेश करते ही वह सिसक उठी- उफ….माई डीयर…. डबराल ! ….. उफ … ! कम आन कोमल ! तू इधर आकर मेरे स्तनों को संभाल… ज़रा ! डबराल यार को दूसरा काम करने दे…. श्वेता ने मुझसे कहा।
मैंने तुंरत उसके स्तनों को अपनी हथेलियों में संभाला और उसके अधरों का रसपान करने लगी, डबराल सर की मशीन आन हो गई थी, कमरे में अब श्वेता की कामुक चीखें गूंजने लगी थी।
मैंने देखा कि श्वेता की योनि में डबराल सर का लिंग आसानी से आगे पीछे हो रहा था लेकिन फिर भी लिंग की मोटाई के आगे उसकी योनि भी एक तंग सुरंग थी।
थोड़ी देर में ही डबराल सर पुनः चरम सीमा पर आ गये और इस बार उन्होंने जब श्वेता की योनि से लिंग निकाला तो मैने उसे अपने मुँह में ले लिया, लिंग कई बार मेरे हलक से टकराया और फिर कुछ गर्म बूंदें मेरे हलक में गिरी, मैं उस स्वादिष्ट पदार्थ को पी गई, इस तरह मेरे विज्ञान में पास होने के बहाने से मैने प्रथम यौनसंबंध का सुख पाया।
कई दिनों तक मैं लंगडा कर चलती रही, श्वेता मेरी इस हालत को देख कर मुस्करा देती। डबराल सर ने अब किसी भी बात पर हम दोनों को क्लास रूम में डांटना छोड़ दिया था। मेरे घर में मेरी मां ने मेरी लंगडाहट पर एक बार प्रश्न उठाया तो मैंने सीढ़ियों से गिर जाने का बहाना कर दिया। उन्होंने फिर नहीं पूछा।
इस घटना के पन्द्रह दिनों के बाद जब मेरी हालत ठीक हो गई थी।
स्कूल हाफ में मैं लंच कर रही थी, तब श्वेता ने बताया कि तुझे चपरासी पूछ रहा था। तुझे प्रिंसीपल साहब ने बुलाया है।
मैंने प्रश्न किया- क्यों….?
तो उसने अनजाने पन का ढोंग कर दिया, मैं जल्दी-जल्दी लंच निपटा कर प्रिंसीपल साहब के ऑफिस पहुंची तो वहां अधेड़ उम्र के प्रिंसीपल को अपने इन्तजार में पाया।
कोमल….. दरवाजे की सिटकनी चढ़ा दो, मुझे तुमसे कुछ स्पेशल बात करनी है ! …प्रिंसीपल ने कुर्सी पर बैठे बैठे कहा।
मैंने उनकी आज्ञा का पालन किया।
इधर आओ हमारे पास !…… प्रिंसीपल ने दूसरी आज्ञा दी।
मैं उनके निकट पहुँच गई।
हमें पता है तुमने मिस्टर डबराल को केवल इस लिये खुश किया है कि उसने तुम्हारे विज्ञान में पास होने का वादा किया है, लेकिन हम भी तो कुछ अहमियत रखते हैं, क्या हमें तुम्हारा हुस्न देखने का हक़ नहीं है ! प्रिंसीपल ने ऐसा कहा तो उनकी आँखें चमक उठीं और भद्दे होंठों पर मुस्कान दौड़ गई।
जी…..मैं पीछे को सिमटी, मेरे जेहन में खतरे की घण्टियाँ बज उठीं और यही विचार दिमाग में आया कि यहाँ से तुंरत भाग लेना चाहिये, इसी विचार के तहत मैं पलटी मगर प्रिंसीपल के शक्तिशाली हाथों ने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया, मैं चीखने को हुई तो उनकी एक हथेली मेरे खुले मुँह पर आ जमी, उनके ठंडे से स्वर में ये शब्द मुझे खामोश कर गये कि अगर तुमने हमारा सहयोग नहीं किया तो हम तुम्हारे करेक्टर को गलत साबित करके तुम्हारा रेस्टीकेशन कर देंगे।
मैं विवश हो गई, इस विवशता में एक बात का हाथ और था वह यह कि प्रिंसीपल के हाथ ने मेरी शर्ट में छुपे मेरे स्तनों को क्षण भर में ही मसल डाला था और उस मसलन ने मुझे आनंद से झंकृत कर दिया था, पन्द्रह दिन बाद आज फिर एक प्यास महसूस हो गई थी।
मुझे शान्त जान प्रिंसीपल मेरी शर्ट के बटन खोलते चले गये, उन्होंने मेरी शर्ट के पल्लों को इधर उधर कर के मेरी समीज को स्तनों के ऊपर कर दिया और मेरे तने हुए स्तनों को मसलने लगे, मैं हल्के हल्के सिसकारने लगी, मैने उनकी गोद में ही मुद्रा बदली और अब मेरे स्तन उनके सीने से भिड़ने लगे, प्रिंसीपल मेरे कांपते लरजते अधरों को भी चूसने लगे थे, मेरे हाथ उनकी पीठ पर चले गये थे, मेरा युवा शरीर तो जैसे पुरुष शरीर के स्पर्श को तलाश ही रहा था, उनके हाथ मेरी स्कर्ट के भीतर मेरे नितंबों और जाँघों को सहला रहे थे, उनकी साँसें गर्म होने लगी थी और फिर उन्होने अपने होंठों को मेरे अधरों से हटा कर मेरी गर्दन को चूमते हुए मेरे स्तनों पर ले आये, उनकी इस क्रिया ने मुझे और अधिक उत्तेजित कर डाला।
ओह सर ! …… क्यों तड़पा रहे हैं ! …… ऐसे कुर्सी पर कैसे कुछ होगा? उफ…ओह….आह ! मैं उनके कान मैं सरसराई।
ओह…. ! तुम ऐसा करो ! टेबल पर लेट कर अपनी टांगें नीचे लटका लो…..उठो…..! प्रिंसीपल ने कहा।
तो मैं उनकी गोद से उतर कर टेबल पर अधलेटी सी हो गई।
प्रिंसीपल ने खडे होकर मेरी स्कर्ट ऊपर करके मेरी पेंटी को भी जरा ऊपर को करके मेरी योनि को सहलाया और भंगाकुर को भी छेड़ दिया, मैं मचल उठी, मेरे मुख से कामुक ध्वनि फूटी और मैंने खड़े होकर उनके हाथों को पकड़ कर अपने स्तनों पर रख लिया, उनके हाथों ने मेरे स्तनों को मसलते हुए मुझे पीछे को ही लिटा दिया और पेंटी को जरा सा योनि छिद्र से हटा कर अपने लिंग-मुंड को योनि के मुख में फंसा कर धक्का दिया तो मुझे ऐसी पीड़ा हुई जैसे मेरी जांघें फट जायेंगी।
मैं चीख पड़ी, मैने दर्द के मारे फिर उठने का प्रयास किया तो उन्होंने हाथों के दबाव से मुझे उठने नहीं दिया और एक और धक्का मारा, मुझे दर्द तो हुआ पर गजब का आनंद भी आया, उनका लिंग दो तीन इंच तक मेरी योनि में उतर गया था।
सर….. ! उफ…. ! लगता है…. ! ओह…….. ! लगता है कि आपका लिंग बहुत मोटा है…… क्या लंबा भी ज्यादा है…..? मैने अपने स्तनों पर जमे उनके हाथों को दबा कर कहा।
नहीं….हाँ मोटा तो काफी है, लेकिन लंबाई आठ इंच से ज्यादा नहीं है, उन्होंने लिंग को और आगे ठेल कर पीछे करके फिर ठेलते हुए कहा।
बस…..आठ इंची….तब तो आप खूब जोर जोर से धक्के मारिये….. ! ऑफ़…. ! तभी मजा आयेगा ! मैं उत्तेजना के वशीभूत होकर बोली।
अच्छा…. ! तुम्हें तेज तेज शॉट पसंद है ! तब तो यहाँ से हटो और दीवार से हाथ टिका कर खड़ी हो जाओ …. ! यहाँ तो टेबल गिर जायेगी, उन्होंने अपना लिंग मेरी योनि से निकाल कर कहा।
मैं मेज से उठ कर दीवार पर पंजे जमाकर उनकी और पीठ करके खड़ी हो गई तो उन्होंने मेरे नितंबों को सहलाते हुए अपने मोटे ताजे लिंग को मेरी योनि में डाल दिया और फिर तेज तेज धक्के मारने लगे, मेरा पूरा शरीर जोर जोर से हिल रहा था, उनकी जांघें मेरे नितंबों से आवाज के साथ टकरा रही थी, वे धक्के मारते मारते हांफने लगे, लेकिन खूब धक्के मारने पर भी वे स्खलित नहीं हो रहे थे, यहाँ तक कि वो आगे को शाट मारते तो मैं पीछे को हटती, मुझे लिंग के योनि में होते घर्षण से और लिंग की संवेदनशील नसों से भंगाकुर पर होते घर्षण से मैं आनंद की चरम सीमा तक पहुच गई थी। मैं उन्हें और प्रोत्साहित कर रही थी, और अन्दर तक करो सर…… ! और अन्दर तक…… ! और जोर से….! उफ… उफ… ओह…..यस्…. ! आई लव इट…. ओ… मैं हर तरह से उनके साथ सहयोग करते हुए बोली।
मेरी साँसें भी तूफानी हो चकी थी।
और फिर प्रिंसीपल सर अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गये, मेरे गर्भाशय में एक शीतलता सी छाती चली गई, तब पता चला मुझे की पुरुष के खौलते वीर्य की धार जब स्त्री के गर्भ से टकराती है तो कैसा अदभुत आनंद प्राप्त होता है ! मैं पागलों की भांति प्रिंसीपल से लिपट गई और उनके लिंग को भी बेतहाशा चूमा। कुछ देर बाद अपने वस्त्र ठीक करके मैं प्रिंसीपल रूम से निकल गई।
अभी बात खत्म नहीं हुई !
आगे आगे देखिए क्या क्या होता है ! Hindi Sex Stories
मेरी प्यारी चुदासी औरतें और तमाम चूतवालियों आपको राजेश का Antarvasna प्यार। आशा करता हूं कि अभी तक की कहानी जो हकीकत है आप सबको पसन्द आयी होगी और तमाम चूतें रस से लबालब भर गयी होंगी। मैं हमेसा तैयार हूं किसी भी चूत को मारने के लिये। मेरा तो दिल करता है जैसे सभी खेलों का विश्वकप होता है वैसे ही लंड चूत के खेल का भिउ विश्वकप होना चाहिये। अब आपको आगे की कहानी बताता हूं।
सोनम, पाठकों गलती से भाग-२ में इसका नाम शालु लिख दिया है आप नाम को छोड़िए और घटना का आनन्द लीजिये, कि जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनो पस्त होकर सो गये। सोनम बोली “राजा तूने आज इस चूत का खूब मजा लिया और मुझको भी मजा दिया। सचमुच इतनी जबरदस्त चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी। मेरी तो पूरी चूत दर्द कर रही है। हरामी, हमेशा मुझको चोदते रहना।” मैं बोला “रन्डी अभी तो तेरी गाँड तो बाकी है, मैं तो तेरी गाँड भी मारुंगा तब शान्ती मिलेगी।” सोनम “न रे मादरचोद तेरे इतने मोटे लंड से मैं अपनी गाँड नहीं फड़वाउंगी। तू तो मेरी जान ले लेगा।”
मैने कहा “रानी बड़े प्यार से तेरी गाँड मारुंगा, तू चिंता मत कर तुझे बड़ा मजा आयेगा, मैं जैसा बोलता हूं वैसा कर। जा देख चाची के किचन में कोई मोटा लकड़ी का चिकना डंडा है।” चाची के किचन में दाल को मथने वाली मथानी मिली जिसका हैंडल चिकना और मोटा था। किचन में तेल की शीशी भी मिल गयी।
दोनो को लाने के बाद मैने सोनम से कहा “रानी जरा अपनी गाँड तो दिखाओ उसका रास्ता जरा साफ़ कर दूं ताकि मेरा लंड असानी से उसमें घुस सके।” मैने उसकी साड़ी उठाकर उसको उल्टा सुला दिया, उसके ब्लाउज़ के बटन खोलकर उसके दोनो मम्मो को बे-रहमी से मसलने लगा, वो चिल्लाने लगी “अरे सुअर कितनी जोर से मसल रहा है, जरा धीरे धीरे मसल ताकि मुझको भी मजा आये। इसको छोड़ मादरचोद अपना लंड मेरे मुँह में दे ताकि उसको चूस के खड़ा तो करूं तभी तो तू मेरी इस कोमल गाँड को मार पायेगा।
मैने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया वो सचमुच एक कुतिया की तरह चभर चभर मेरे लंड को चूसने लगी और बोली “बहनचोद, तेरा लंड अभी कितना शांत है और खड़ा होता है तो खतरनाक हो जाता है।” लंड धीरे धीरे अपने असली रूप में आने लगा। मैने उसको उल्ता सुला कर कुतिया के पोज में कर दिया। उसकी गाँड का छेद दिखने लगा था।
मैने उसकी गाँड के छेद पर थूक लगाया और अपनी जीभ से उसकी गाँड को कुत्ते की तरह चाटने लगा और अपनी जीभ को उसकी गाँड में घुसाने लगा। अपनी एक उंगली उसकी गाँड में धीरे धीरे डाला और अंदर बाहर करने लगा। सोनम “राजा तेरी उंगली से तो मजा आ रहा है जरा जोर जोर से डाल।” मैने उसकी गाँड पर ढेर सारा तेल डाला और उसको अपनी उंगली से उसकी गाँड के अंदर डाल दिया। फिर दाल मथानी के हैंडल पर तेल लगाया और उसको सोनम की गाँड पे रखा और दबाया, वो सरकता हुआ उसकी गाँड में घुसने लगा और वो बोल पड़ी “अरे हरामी के बच्चे आराम से घुसा” धीरे धीरे हैंडल उसकी गाँड में घुस गया और मैं उसको अंदर बाहर करने लगा। सोनम को भी मजा आने लगा “अरे राजा बड़ा मजा आ रहा है जरा जोर जोर से डाल, हाय रे मादरचोद, नहीं पता था कि गाँड में भी इतना मजा आता है। राजा मेरी गाँड का भी छेद मेरी चूत की तरह कर दे और इसको भी अपने खम्भे से चोद।” मैं हैंडल को गोल गोल घुमाने लगा ताकि उसकी गाँड ढंग से खुल जाये और मेरे लंड का रास्ता साफ़ हो जाये।
उसके बाद मैने अपने लंड पे ढेर सारा तेल लगाया और उसकी गाँड के छेद पर रख कर एक जोर का झटका मारा, सोनम चीख पड़ी “अरे हर्रर्राम्ममीइ मादरचोद, सुअर मार डाला रे, अहह … र्रर्रर्रर्रीईईए माअद्ददाअर्ररछहूओद्दद्द ने मेरी गाँड फाड़ दी रे। हराम का चोदा रे रुक जा रे साला धीरे धीरे डाल रे हाय रे मेरी गाँड।” मैने फिर धीरे धीरे दबाना सुरु किया और १० मिनट की मेहनत के बाद मेरा लंड उसकी गाँड मेँ ठस गया था। मैने धीरे धीरे अंदर बाहर करना चालु किया, सोनम का दर्द भी कम हो गया था। मैने स्पीड बढ़ाना चालू किया और अब सोनम रंडी को भी मजा आ रहा था। पूछा “क्यों रंडी अब मजा आ रहा है न, छिनाल आज मैं तेरी गाँड फाड़ के रहूँगा, साली एक नम्बर की चुदक्कड है तू, तेरा सारा परिवार छिनाल है। हरामजादी तुझे बता दूं तेरी दोनो बड़ी बहनें भी मेरे लंड की आशिक है और मैं उनको भी जम के चोदता हूं, समझी। तेरी माँ को भी मैने एक बार चोदा हाय रे रंडी। तेरी माँ तो तेरे से बड़ी छिनाल है साली का भोसड़ा इतना बड़ा है कि उसमें दो लंड घुस जाये।”
मेरा लंड तूफान मेल की तरह सोनम की गाँड में उसको चोद रहा था और सोनम तो जैसे पागल हो गयी थी “जियो मेरे राजा आज तुमने मुझको नया आनन्द दिया है, बहुत मजा आ रहा है दिल करता है इस लंड को अपनी गाँड से निकालू ही नहीं। आहा रे मेरे राजा, जोर से मार आह्हह मार मार मार जोर जोर से मार और जोर से मार रे मादरचोद हाय रे अरे पूरा लंड घुसा दे रे मादरचोद। शाबाश मेरे राजा ये चूत और गाँड तुम्हारी हुई जब चाहे जितना चाहे मारना। तू तो बड़ा हरामी है रे तूने तो मेरे पूरे परिवार को चोद दिया है। अगली बार तू मुझको और मेरी माँ को एक साथ चोदना, नई और पुरानी चूत दोनो का मजा एक साथ लेना।”
मैं पागलों की तरह उसकी गाँड में अपना लंड पेले जा रहा था और २० मिनट बाद मेरे लंड ने अपना सारा माल उसकी गाँड में गिरा दिया और शांत हो गया। सोनम ने माल से सने लंड को कुतिया की तरह साफ़ कर दिया चाट चाट कर। सोनम “चल मेरे राजा तूने बहुत मजा दिया और मैं याद रखुंगी तेरी इस चुदाई को। समय समय पर लंड का आनंद देते रहना।”
इस प्रकार सोनम की एक चुदाई खत्म हुई, मैने अनगिनत बार उसकी चूत मारी है और आज भी उसकी चूत मारता हूं। दोस्तों अगली बार मैं अपने मामी की चुदाई की असली दास्तान ले कर आपके सामने आउंगा। Antarvasna
मेरा नाम तपन घोष है! मैं Hindi Porn Stories आसनसोल का रहने वाला हूँ ! आज मैं आपको ऐसी कथा बताने जा रहा हूँ जो सुनकर सब कहेंगे तपन बना बहन चोद !
मैं अपनी माँ का एकलौता बेटा हूँ! मेरी एक बड़ी बहन है छाया ! मुझसे उम्र में चार साल बड़ी है! जब मैं अपने यौवन का स्वाद चख ही रहा था तब मुझे पता चला कि मैं हरामी हूँ .. उनकी अपनी संतान नहीं हूँ ! मेरे फ्लैट-सोसाईटी वाले मुझे छेड़ते थे इस बात को लेकर ! पापा मम्मी अलग कमरे में सोते थे और मैं और दीदी बाजू वाले कमरे में सोते थे।
वो मेरा बहुत ध्यान रखती थी ! मैं नया नया मुठ मरना शुरू किया था ! स्कूल के दोस्त कहते थे अगर किसी लड़की मुठ से मरवाई जाए तो क्या कहना . मैं सोचता था कि छाया मेरी अपनी बहन तो है नहीं ! क्यूँ न इस पर ही कोशिश करूँ?
एक रात वह बिलकुल मदहोश होकर सो रही थी! मैं अपना लंड उसके मुलायम हाथ में रखा ! आह अहह कितनी नर्म हैं दीदी की उंगलियाँ ! मज़ा आ गया ! फिर मैंने उसकी हथेली में अपना वीर्य निकाल दिया!
सुबह मैंने देखा वो अपने हाथ धो रही थी …
दीदी क्या हुआ ??
अरे देखो ना क्या लग गया है सोते सोते ! साबुन जैसा चिकना है !!
दीदी कैसी खुशबू है उसकी ?
उसने सूंघा, अहह पता नहीं अजीब सी है !
बेचारी अब तक कुँवारी चूत लेकर फिर रही है … मैं तो बेकार में ही सुनीश के साथ शक करता था ?
सुनीश की पास में परचून की दुकान थी।
एक दिन मैं स्कूल से जल्दी आ गया, घर का दरवाज़ा खुला था ..
मैंने अन्दर जाकर देखा कि सुनीश दीदी को चोद रहा था।
दीदी की गोरी-गोरी टाँगें फैली हुई थी और सुनीश की काली काली गांड हवा में उछल उछल के घस्से मार रही थी।
दीदी की गोरी गांड देख कर जैसे मेरा खड़ा हुआ कि सुनीश मुझे देख वहाँ से रफूचक्कर हो गया …
तपन ! मम्मी को मत बताना ! मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती हूँ !!
मैं ज़रूर बताऊंगा दीदी … मैं नाराज़ होकर बोला।
ठीक है ! बता देना ! फिर पापा को मैं भी तुम्हारे बारे बता दूंगी कि तुम रात में मेरे हाथ में मुठ मारते हो। हरामी कहीं के…
मैं चुप हो गया … रात आई .. मुझे नींद नहीं आ रही थी …
मैंने दीदी को पकड़ लिया।
अहह ! तपन यह क्या कर रहे हो ?
अपनी टांगें मैं उसकी नायटी में फेरने लगा …
नायटी में हाथ डाल कर उसकी पैंटी को छुआ !
आह्ह ! नहीं ! मैं तुम्हारी दीदी हूँ !
कैसी दीदी? मैं तो हरामी हू ना ?
कहकर मैंने उसकी पैंटी खोल दी … उसकी जांघें ! मानो जन्नत ..
आओ ना ! जो कसर सुनीश ने छोड़ी है, मैं पूरा किये देता हूँ !
ओह! आ जा मेरे राजा ! चढ़ जा !
उसने अपने नायटी हटाई, मैं उसके मम्मों को चूसने लगा।
दूध नहीं निकलता क्या ? मैं निचोड़ते हुए बोला।
हट पागल ..
उसने मेरे लौड़े को अपने चूत में घुसाया !
अहह ! मज़ा आ गया छाया दी !
अहह अह !
मैं स्खलित हो गया।
बस बच्चे ! दो चार ही बार में ही?
सुनीश तो पचास बार कम से कम करता है ! चलो मैं तुम्हें सिखाती हूँ !
उसने मेरे लण्ड को चूसा, जब खड़ा हो गया तो उसने अपने प्रवेश द्वार पर डाला। मैंने धक्के मारने शुरू किये ..
बस छाया दी निकल जायेगा ..
उसने पूछा- बता 5 गुने 5 ?
मैं सोचने लगा और मैं इस बार स्खलित नहीं हुआ ..
वाह दीदी ! क्या आईडिया है ..
मैंने इस तरह बहुत बार उस रात छाया दी को चोदा।
मैंने मुठ उसके होंठो पर मारी …
ओह तपन कितना शरारती हो ?
मैंने उसे अपने माल से नहला दिया।
अगले दिन छुट्टी थी ..
हम दोनों साथ में नहाए..
मैं उसे रोज़ चोदता था..
वो कहती थी- तुम सुनीश से भी एक्सपर्ट हो गए हो..
आज उसकी शादी है ..
मेरे दीदी के शादी में जजूल आना। Hindi Porn Stories
हाय! अन्तर्वासना के पाठकों को Sex Stories नमस्कार! अपनी पिछली कहानी “पापा के दोस्तों ने चोदा- 1” में आपने पढ़ा कि किस प्रकार पापा के दो दोस्तों ने सीमा हमारे घर में ही चोदा। वो अलग बात है कि इसके लिये उन्हें कोई विशेष कोशिश नहीं करनी पड़ी। सीमा तो वैसे ही चुदने के लिये मरी जा रही थी। उसी कड़ी में पेश आगे की कहानी …
यह कहानी भी मैं सीमा की ओर से ही पेश कर रहा हूं …
उस रात गुरुबचन अंकल और अकील अंकल ने जो कमरतोड़ चुदाई की उसका असर दूसरे दिन तक रहा। तीसरे दिन अकील का फोन आया, मैं घर में अकेली थी …
हैलो …
हाय रानी!!! कैसी है … ?
कौन बोल रहा है … मैं चौंक गई।
आय! हाय! दो दिन में ही लन्ड पच गया …
ओह! अकील अंकल … … मैं आवाज पहचानते ही बोली। अनायास ही मेरा हाथ चूत पर पहुँच गया।
अब अंकल तो मत कह रानी … क्या कर रही थी … अकेली ही है ना?
हाँ … क्यों … क्या करना है … मैं शोखी से बोली।
चोदना है तेरी प्यारी चूत को …
ना बाबा ना … अब तक नहीं सम्भल पाई हूँ … …
अरे जान … वो तो मौका प्रोपर नहीं था … वर्ना एक हफ़्ते तक बिस्तर से नहीं उठती …
तभी तो कह रही हूं … मुझे मरना नहीं है …
अच्छा! देख शनिवार को तेरे पापा टूर पे जा रहे हैं और गुरु की वाइफ़ भी बाहर है तो उस दिन गुरू के घर पे प्रोग्राम रखेंगे …
और फ़िर शनिवार का इन्तजार होने लगा।
पापा सुबह 5 बजे की बस से चले गये। मैं एक बार फ़िर चूत चिकनी की और फ़िर तैयार होके 11 बजे गुरू के घर पहुंच गई। मेरे पहुंचते ही उन्होंने मेरा दिल खोलकर स्वागत किया और सीधे बैडरूम में ले गये जहाँ एक शानदार बैड था। पूरा कमरा इत्र की खुशबू से महक रहा था … मैं रोमांचित हो रही थी … … गुरू ने नाश्ते का इन्तजाम किया हुआ था। नाश्ते के दौरान हम खूब गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे मैं भी पूरी तरह खुल चुकी थी।
इस सब में एक घंटा गुजर गया तो …
अकील बोला … चल अब शुरू करें …
और हम नंगे हो गये। अकील सोफ़े पर बैठ गया। मैंने जमीन पर कुतिया बनके उसके लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। गुरू मेरे पीछे आया और चूत चाटने लगा। जब अकील का लंड पूरी तरह तैयार हो गया तो मैं गुरू की ओर मुड़ी। गुरू घुटने के बल खड़ा हो गया तो मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और इधर अकील चूत चाटने लगा।
फ़िर अकील ने अपना लंड पीछे से ही चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा तो गुरू का लंड मेरे गले तक घुस गया मेरी सांस रुकने लगी पर वे रुके नहीं और मैं दोनों तरफ़ से चुदने लगी …
ले मादर चोद आज देख हमारे लंड का कमाल … … अकील दनादन ठोकते हुए बोला तो गुरू ने भी मेरे बाल पकड़ कर मुँह में ही अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। मुँह बन्द होने के बावजूद भी मैं कराह रही थी पर बहुत मजा आ रहा था। फ़िर उन्होंने साइट बदली और चालू हो गये। लगभग आधा घंटे की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद उन्होंने मुझे जमीन पर सीधा लिटाया और एक साथ अपने लंड मुँह डाल दिये, मैं लपालप चूसती रही। थोड़ी ही देर में वे मेरे मुँह में झड़ गये। उनके लंड से निकले गरम गरम वीर्य ने मेरा मुँह भर दिया। मेरी चूत भी झड़ चुकी थी। हम तीनों निढाल हो कर पड़ गये।
दूसरा राउंड 2 बजे शुरू हुआ और ये पहले से भी भारी था। मेरा रोम रोम दर्द करने लगा। ये मेरी जिन्दगी की सबसे यादगार चुदाई थी। Sex Stories
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