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Massage Girl in Bharatpur: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Bharatpur who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Bharatpur that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Bharatpur massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Bharatpur who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Bharatpur massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Bharatpur massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Bharatpur who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Bharatpur employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Bharatpur helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Bharatpur

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Bharatpur at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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आज मेरी भाभी कंचन वापस घर आ गई। Hindi Porn Stories

यहां से पचास किलोमीटर Hindi Porn Stories दूर शहर में भैया काम करते थे। मेरे से कोई चार साल बड़े थे। शादी हुये साल भर होने को आया था।

भैया शहर में शराब पीने लग गये थे। इसी कारण घर में झगड़े भी होने लगे थे। भाभी की आये दिन पिटाई भी होने लगी थी।

एक बार भाभी ने मोबाईल पर मुझे रात को दस बजे रिंग किया।
मैंने मोबाईल उठाया, पर फ़ोन पर चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दी तो मैंने पापा को बुला लिया।

पापा ने फोन को ध्यान से सुना फिर उन्होंने मुझे आदेश दिया कि सवेरे होते ही कार ले कर जाओ और बहू को यहाँ ले आओ।

गांव में पापा की एक छोटी सी दुकान है पर आमदनी अच्छी है। वो सवेरे नौ बजे दुकान पर चले जाते हैं।

मैं भाभी को लेकर घर पर आ गया। भाभी मुझे अपना दोस्त समझती हैं। हम दोनों एक ही उम्र के हैं।

शाम तक मेरे पास बैठ कर भाभी अपना दुखड़ा सुनाती रही, उसने अपनी पीठ, हाथ व पैर पर चोट के कई निशान दिखाये।

ये सब देख कर मुझे भैया से नफ़रत सी होने लगी।
मैंने भाभी को जैसे तैसे मना कर उनके चोटों पर एण्टी सेप्टिक क्रीम लगा दी।

अब मेरा रोज का काम हो गया था कि पापा के जाने के बाद उनकी चोटों पर दवाई लगाता था।

भाभी का शरीर सांवला जरूर था पर चमकीला और चिकना था। कसावट थी उनके बदन में। जब वो अपनी पीठ पर से ब्लाउज हटा कर दवाई लगवाती थी उनकी छोटी छोटी चूंचियां सीधी तनी हुई कभी कभी दिखाई दे जाती थी। तभी मैंने भाभी की चूंचियों पर भी चोट के निशान देखे।

“भाभी, आपके तो सामने भी चोटें हैं!” मैंने हैरत से कहा।
“देख भैया, तुझसे क्या छिपाना … ये देख ले … ”

कंचन ने झिझकते हुये सामने से अपनी छाती दिखाई … चूंचियों और चुचूकों पर खरोंच के निशान थे।

“भाभी प्लीज ऐसे मत करो!” मैंने तुरन्त पास पड़ा तौलिया उनकी छाती पर डाल दिया। उसकी आंखों से आंसू टपक पड़े। पर भाभी के चोटों के निशान मेरे मन में एक नफ़रत भरा बीज बो गये।

“नहीं देखा जाता है ना … वो आपकी तरह नहीं हैं … आप तो मेरा कितना ख्याल रखते हैं, दवाई लगाते हैं … अभी तो आपने मेरी पिछाड़ी नहीं देखी है … कितना मारते थे

वो यहाँ पर!”

“बस भाभी बस … अब बस करो …”

भाभी ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। अनायास ही मेरे हाथ उसके बालों पर चले गये और उन्हें सहलाने लगे। मेरा प्यार पा कर वो मुझसे लिपटने सी लगी। मैंने एक हल्का सा चुम्मा उसके गालों पर ले लिया … वो अपनी आंखें जैसे बन्द करके प्यार का आनन्द लेने लगी।

“भैया मेरी छाती पर दवाई लगा दो …!”

“क्या छाती पर ?… न … न … नहीं … यहाँ नहीं …!”

“तो क्या हुआ … दर्द है ना मुझे … प्लीज!”

मैंने उसे घूर कर देखा … पर उसकी आंखों में केवल प्यार था। मैंने उसे लेटा दिया और तौलिया हटा कर उसकी चूंचियों की तरफ़ झिझकते हुये हाथ बढ़ाया … और दवाई लगा दी।

मुझे अहसास हुआ कि उसके चुचूक कड़े हो गये थे। छोटी छोटी चूंचियां कुछ फ़ूल गई थी।

मेरा मन भी डोल सा उठा, पर मैंने फिर से उस पर तौलिया डाल दिया।

भाभी ने मुझे प्यार से बिस्तर पर लेटा लिया और मेरी कमर पर में एक पांव लपेट कर जाने कब सो गई।

मुझे नहीं पता था कि यह उसके दिल की पुकार है कि मुझे बाहों में लेकर खूब प्यार करो। वो प्यार की भूखी थी।

मैंने धीरे से उसका हाथ हटाया और बिस्तर से हट गया।
तभी अनायास मुझे ध्यान आया कि उसके चूतड़ों पर भी शायद चोट है, जैसा कि उसने अपनी पिछाड़ी के बारे में कहा था।
मैंने धीरे से उसका पेटीकोट ऊपर हटा दिया।

उसके गोल गोल चूतड़ों पर नील पड़ी हुई थी। मैंने तुरन्त दवाई उठाई और लगाने लगा। पर आश्चर्य हुआ कि दरारों के बीच गाण्ड के छेद पर भी चोट जैसा सूजा हुआ था।

मैंने चूतड़ों को खोल कर वहां भी दवाई लगा दी।

मैं पास ही बैठ कर भैया के बारे में सोचने लगा कि भैया उसकी गाण्ड में चोट कैसे लगा देते हैं? यह तो बहुत नाजुक स्थान है … इतना बुरा व्यवहार … मुझे बहुत ही खराब लगने लगा।

कंचन भाभी को यह पता चल गया था कि मैंने उनके बदन में दवाई कहां कहां लगाई थी।

अब वो मुझसे रोज ही जिद करके दवाई लगवाने लगी थी। कंचन को अपने गुप्त अंगों पर दवाई लगाने से या मेरे द्वारा छूने पर शायद आनन्द आता था।

पर इसके ठीक विपरीत मेरे दिल में कंचन भाभी के लिये प्यार बढ़ता जा रहा था।

पापा के दुकान पर जाने के बाद मैं दवाई लगाता था, फिर वो मेरे साथ लेटे लेटे खूब बातें करती थी।
मैं उसके बालों को सहलाता रहता था। वो प्यार में मुझे जाने कितनी ही बार चूम लेती थी।

पर आज जाने मुझे क्या हुआ, मुझे जाने क्यूँ उत्तेजना होने लगी। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मेरे दिल में एक बैचेनी सी होने लगी।

इन दस बारह दिन में भाभी की चोटें ठीक हो चुकी थी।
आज मैंने उनकी चूचियों पर दवाई लगाते हुये कहा भी था कि अब उसे दवाई की आवश्यकता नहीं है .. लेकिन उसका कहना था कि आप रोज ही लगायें … और मेरा हाथ अपनी चूंचियों पर दबा लिया था।

“आप बहुत शरारती है कांची … ”
बस … उसने एक कसक भरी हंसी वतावरण में बिखेर दी।

मेरे विचारों में अचानक ही परिवर्तन होने लगा, मुझे अपनी भाभी ही सेक्सी लगने लगी।
उनका सांवला रूप मुझे भाने लगा। वो तो निश्चिन्तता से मेरी कमर पर पांव लपेटे आंखें बंद करके कुछ कह रही थी। पर मेरा दिल कहीं और ही था।

मैंने अचानक ही कांची के होठों पर एक चुम्बन ले लिया।
उसने कोई विरोध नहीं किया।
मैंने साहस करके दुबारा चुम्मा लिया।

उसने मुझे देखा और अपने होंठ मेरी तरफ़ बढ़ा दिये। भाभी के दोनों हाथ मेरे गले से लिपट गये।

मैंने गहराई से कांची को चूम लिया … उसने भी प्रत्युत्तर में मुझे प्यार से खूब चूमा।

मैंने जाने कब एक करवट लेकर भाभी को अपने नीचे दबोच लिया और उनके ऊपर चढ़ गया।

मेरा कसा हुआ तन्नाया हुआ लण्ड उसकी चूत से टकराने लगा।
भाभी के मुख से वासना भरी सिसकारी निकल पड़ी।

“भैया … आह मुझे जोर से प्यार करो … मुझे आज प्यार से, आनन्द से भर दो।”

“कंची मुझे जाने क्या हो रहा है… शरीर में जाने कैसी कसावट सी हो रही है …!”

और मेरे चूतड़ों ने मेरा लण्ड जोर से उसकी चूत पर दबा दिया।

मुझे लगा कि भाभी ने भी उत्तर में अपनी चूत का दबाव मेरे लण्ड पर बढ़ा दिया है।

तभी मेरा वीर्य निकल पड़ा … मैं हैरत में रह गया … मेरा सारा नशा काफ़ूर हो गया।

मेरे लण्ड में से वीर्य का गीलापन देख कर कांची ने मुझे प्यार से उतार दिया।

“सॉरी … ये … ये … सब क्या हो गया …!!” मुझे अत्यन्त शर्मिन्दगी महसूस हुई।

“क्या पहली बार हुआ है ये?”
मैंने धीमे से हां में सर हिला दिया।

“अरे छोड़ ना यार … होता है ये … तुझे कुछ नहीं हुआ है … … शर्माना कैसा …”

“भाभी … मै तो आपको मुँह दिखाने के लायक भी नहीं रहा … ”

उसने धीरे से खिसक कर मेरी छाती पर अपना सर रख लिया।

हम फिर से बातें करने लगे … पर फिर से मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी। मेरा लण्ड फिर खड़ा होने लगा।

इस बार कांची ने कोई मौका मुझे नहीं दिया। मेरे खड़े लण्ड पर उसकी नजर पड़ गई। उसने धीरे से हाथ बढा कर उसे हल्का सा पकड़ लिया।

“भाभी, यह क्या कर रही हो … छोड़ो तो …!” मुझे शरम सी लगी, पर शरीर में कंपकपी सी आने लगी।

“मेरे काम की तो यही एक चीज़ है तुम्हारे पास! है ना भैया … ? और मेरे पास तो आपके काम की कई चीज़ें हैं, जैसे सामने ये उठे हुये गोल गोल, नीचे … वहीं जहाँ अभी तुम जोर लगा रहे थे … और पीछे जहां तुम अन्दर तक दवाई लगाते हो …”

मैं यह सब सुन कर उत्तेजना से हांफ़ उठा। उसकी बातें मेरी उत्तेजना भड़का रही थी।

“तुमने दवाई लगा लगा कर मेरे सभी चीज़ों को फिर से तैयार कर दिया है ना … अब उसके मजे भी तो लो!”

भाभी मेरे लण्ड को अब मसलने और मुठ मारने लगी थी। मेरा लण्ड उफ़न पड़ा था। सुपाड़ा फ़ूल कर लाल हो चुका था। जाने कब कांची ने मेरी एलास्टिक वाला पजामा नीचे खींच दिया था।

“हाय भैया … ये तो बड़े मजे का है … बड़ा तो तुम्हारे भैया जितना ही है … पर मोटा बहुत है …!” कहते हुए वो उठ कर मेरे लण्ड के पास पेटीकोट उठा कर बैठ गई।
उसके नंगे चूतड़ मेरी जांघ पर बड़ा मोहक स्पर्श दे रहे थे।

अपने मुख में से थूक निकाल कर उसने अपनी गाण्ड पर लगा लिया और मेरे लण्ड पर अपनी गाण्ड का छेद रख दिया। फिर जोर लगा कर उसके सुपाड़ा अन्दर घुसा लिया।

मेरे लण्ड में जलन होने लगी। मेरे मुख से आह निकल पड़ी.

“भैया … बिल्कुल फ़्रेश हो क्या?” उसने चुटकी लेते हुये कहा।

“फ़्रेश क्या … दर्द हो रहा है ना … जैसे आग लग गई है …” मैंने कराहते हुये कहा।

“भैया … तू तो बहुत प्यारा है … लव यू … कभी किसी को चोदा नहीं क्या … ?”

उसके मुख से चोदा शब्द सुन कर मेरे मन में गुदगुदी सी हुई।

“भाभी … आप पहली हैं … जिसे चोद …ऽऽ ” मैं बोलता हुआ झिझक गया।

“हां … हां … बोल … बोल दे ना प्लीज …!”

“जी … पहली बार आप ही चुद रही है … ”

“हाय रे मेरे भैया …!” चुदाई की बातें उसे बहुत ही रस पूर्ण लग रही थी।

उसने मुस्कराते हुये अपनी गाण्ड पर और जोर लगाया।
मेरा लण्ड भीतर सरकता गया और जलन बढ़ गई।
पर मौका था और इस मौके को मैं छोड़ना नहीं चहता था। मस्ती भी बहुत आ रही थी।

भाभी ने मुझ पर झुकते हुये मेरे अधरों को अपने अधरों से भींच लिया और कहने लगी- आप शर्माते बहुत है ना … देखो आपके भैया ने मेरी क्या हालत कर दी थी, मुझे पीट पीट कर मेरा तो पूरा शरीर तोड़ फ़ोड़ कर रख दिया, और आप हैं कि मेरे एक एक अंग को फिर से ठीक कर दिया, मेरे प्यारे भैया, आप बहुत अच्छे हैं।

“कांची तू बोलती बहुत है … अब जो हो रहा है उसकी मस्ती तो लेने दे!”

“हाय रे, तेरा लाण्डा पुरजोर है … ”

“ये लाण्डा क्या है … ”

“जिसका लण्ड बहुत मोटा होता है उसे हम लड़कियां लाण्डा कहती हैं … ही ही … ”

वह मुँह से मेरा होंठ चाटते हुये हंसी।

मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में फ़ंसा हुआ था। वह हौले हौले ऊपर नीचे हो कर आनन्द ले रही थी। मेरा लण्ड तरावट में मीठी मीठी लहरों का मजा ले रहा था।

मैं भी अपने चूतड़ों को धीरे धीरे हिला कर चुदाई जैसी अनुभूति ले रहा था। जैसे ही उसके धक्के थोड़े तेज हुये, मेरा बांध टूटने लगा। बदन में कसक भरी मिठास उफ़नने लगी और अचानक ही मैंने उसे अपनी बाहों में भींच लिया।

“कांची मेरा तो निकला … हाय … आह … ” और उसकी गाण्ड की गहराईयों में लण्ड वीर्य उगलने लगा।

“मेरे प्यारे भैया, निकाल दे … सारा भर दे मेरे अन्दर … पूरा निकाल दे …!” उसने मुझे चूम लिया और प्यार भरी नजरों से मुझे निहारने लगी।

वीर्य निकलने के बाद मेरा लण्ड सिकुड़ कर बाहर आ गया। उसकी गाण्ड की छेद से वीर्य टप टप करके बाहर टपकने लगा।

“पता है इतना मजा तो मुझे कभी नहीं आया … हां जोरदार चोदन जैसा अनुभव तो मुझे बहुत है … आपके भैया तो जानवर बन जाते हैं … ” वह मेरी छाती पर लेटे-लेटे ही बोली।

“भाभी, अब भूख लगी है … कुछ खिलाओ ना …!”

“रुक जा … अभी तो मेरी सू सू बाकी है … उसे खिलाऊंगी तुझे …!”

उसकी भाषा पर मैं शरमा गया … फिर भी कहा,”भाभी … खाना खाना है … सू सू नहीं …!”

कांची खिलखिला कर हंस पड़ी … वह उठी अपना पेटीकोट ठीक किया और दूध का एक गिलास भर कर ले आई।
मैंने एक ही सांस में पूरा गटक लिया।

“हां सू सू खिलाओगी … या पिलाओगी …?”

“धत्त … पागल हो क्या!” अपना पेटीकोट उतारते हुई हंसने लगी।

“इसकी बात कर रही हूँ … ” उसने चूत की तरफ़ इशारा किया।

मैं अनजाना था … कहा,”हां, हां … यही तो है सू सू … ”

“चल हट, बुद्धू बालम जी … ” हंसती हुई उसने अपना ब्लाऊज उतार दिया.
“माल तो यहाँ है बालमा … थोड़ा सा स्वाद तो लो …” कांची ने अपने ओर इशारा करते हुए कहा।

मैं अब नंगा हो कर बिस्तर पर बैठ गया था- कांची … रे … इसमें तो छोटा सा मुत्ती का छेद है … फिर तुम्हारा ये लाण्डा …कैसे डलवाओगी?

“तुम क्या सच में इतने बुद्धू हो … सच है जिसका माल ही आज पहली बार निकला हो, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है?” उसकी खिलखिलाती हंसी से मैं झेंप सा गया।

तभी कांची के छोटे छोटे मम्मे मेरे अधरों से टकराये।
उसके मम्मे की नरम सी रगड़ से मेरे रोंगटे खड़े हो गये।

सेक्स का इतना मधुर अनुभव होता है, यह मुझे आज ही मालूम हुआ।

पता नहीं भैया को इन सबका अनुभव है या नहीं। …फिर इतनी बेदर्दी क्यूँ … जंगलीपना … वहशीपना … अब यह तो मेरी पत्नी नहीं है ना … अगर यह सुखों का भण्डार है तो जब स्वयं की पत्नी आयेगी तो वो मुझे निहाल कर देगी।

मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। मेरे जैसे बुद्धू को चोदना तक नहीं आता था …। वो फिर से एक बार मेरे ऊपर चढ़ गई … मेरे खड़े उफ़नते लण्ड पर वो अपनी सू सू घिसने लगी … उसकी सिसकी निकल पड़ी … फिर मेरा सुपाड़ा फ़क से चूत में उतर गया।

“आह रे कांची … ये सू सू इतनी चिकनी होती है … इसे ही चूत कहते हैं क्या?”

“आह्ह्ह्ह … बस चुप हो जा … बुद्धू … ये चूत ही है … सू सू नहीं …!” मेरे अधरों से अपने अधरों को रगड़ती हुई बोली।
उसकी आवाज में कसक भरी हुई थी।

वो अपने ही होठों को काटते हुये बड़ी सेक्सी लग रही थी। उसके सांवले रूप का जबरदस्त लावण्य किसी को भी पिघला सकता था।

उसका कोमल गुंदाज़ जिस्म मेरे बदन में जैसे आग लगा रहा था। उसकी कमर ने एक प्यार भरा हटका दे दिया और उसका बदन जैसे शोलों में घिर गया।

उसने एक लचीली लड़की की तरह अपना बदन ऊपर उठा लिया और चूत को मेरे लण्ड पर एक सुर में अन्दर बाहर करने लगी।

उसके मुख से सिसकियाँ निकलने लगी। मेरी सीत्कारें भी कुछ कम नहीं थी।

फिर से एक बार मेरी तड़प बढ़ने लगी। मेरे चूतड़ नीचे से उछल उछल कर उसके धक्के लगाने में सहायता कर रहे थे।

कांची की कमर तेजी से चलने लगी थी जैसे जन्मों की चुदासी हो … उसके होंठ फ़ड़क रहे थे … पसीने की बूंदें छलक आई थी चेहरे पर …

उसका चेहरा लाल हो गया था।
उसकी चूचियाँ दबाने से और मसलने से लाल हो गई थी … उसकी जुल्फ़ें जैसे मेरे चेहरे से उलझ रही थी … आंखें भींच कर बन्द कर रखी थी।

वो अपूर्व आनन्द के सागर में डूबी हुई थी।

अचानक जैसे वो चीख सी उठी- हाय मेरे भैया … मुझे समेट ले … कस ले बाहों में … मैं तो गई … माई रे … मेरे राजा … मेरे बालमा … मुझे जोर से प्यार कर ले … उईईई … ईईई इह्ह्ह!

मुझे यह सब समझ में नहीं आया पर उसके कहे अनुसार मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया।
वो सीत्कार भरती हुई मेरे लण्ड पर दबाव डालने लगी और फिर उसकी चूत में लहरें सी चलने लगी … जैसे मेरे लण्ड को कोई नरम सी चीज़ लिपट रही थी।

उसका पानी निकल चुका था।
तभी मेरा लण्ड भी नरम सी गुदगुदी नहीं सह पाया और एक बार और मेरा वीर्य छूट पड़ा।
मुझे लगा कि इस बार वीर्य कम ही निकला।

नीचे दबे हुये मैंने एक दीर्घ श्वास ली … और अपने ऊपर कांची के तड़पने आनन्द लेता रहा।

थकी हुई सी, उखड़ी हुई तेज सांसें, भारी सी अखियाँ, उलझी हुई जुल्फ़ें, चेहरे पर पसीने की बूंदें … चेहरे पर अजीब सी शान्ति भरी मुस्कान … लग रहा था कि बरसों बाद उसे दिली संतुष्टि मिली थी.

उसने अपनी नशे से भारी पलकें मेरी तरफ़ उठाई और अपने होंठों को मेरे होठों से रगड़ती हुई बोली- मेरे बालमा … साजना … तुम मुझे ही अपनी पत्नी बना लो, देखो अपनी उम्र भी बराबर है … हाय रे, मैं तो तुम्हारे बिना मर जाऊंगी!

“भाभी मजाक तो खूब कर लेती हो … पर यह तो बताओ अभी यह सू सू थी या चूत?”

“उह्ह्ह … तुम तो … अब मारुंगी … इस उम्र में मुझे बताना पड़ेगा कि सू सू और चूत में क्या फ़र्क है …? जाओ हम नहीं बोलते।”

“पर घुसा तो मुत्ती में ही था ना … ?”

“ओ हो … अब ये कुर्सी तुम्हारे सर पर दे मारूंगी … बुद्धू, बेवकूफ़, हाय रे मोरा नादान बालमा …!!” उसकी खिलखिलाती, ठसके भरी जोर की हंसी मुझे सोचने पर नमजबूर कर रही थी कि मैंने ऐसा क्या कह दिया है … ?

मेरी प्यारी और अनुभवी पाठिकाओ, यदि आपको ऐसा बालमा मिल जाये तो आपको कैसा लगेगा? Hindi Porn Stories

प्रेषक : मोहित Antarvasna Sex Stories

मैं मोहित उम्र 37 साल Antarvasna Sex Stories गुड़गाँव निवासी एक बार फिर आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ।

जैसे कि मैंने आपको बताया था कि मेरा अपनी पत्नी के साथ महीने में लगभग एक या दो बार सैक्स हो पाता है। इसलिए मैं और मेरा एक दोस्त देवेन्द्र कभी-कभी घर में दिन में लड़की लाकर या कभी-कभी बाहर किसी काल-गर्ल के साथ सैक्स करते थे। मेरा दोस्त देवेन्द्र एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सेल्स-मेनेजर है। वो हफ्ते में अकसर 3-4 दिन बाहर रहता है।

सोनिया से मेरी मुलाक़ात उसी ने करवाई थी। मेरे दोस्त को सोनिया बस में मिली थी। बस में ही उनका परिचय हो गया। रात काफी हो गई थी, इसलिये मेरे दोस्त ने सोनिया को घर तक छोड़ दिया। अगले दिन उसने मुझे सोनिया के बारे में बताया और यह भी बताया कि सोनिया की शक्ल मेरी एक पुरानी गर्ल-फ़्रेंड से मिलती है। मैं सोनिया से मिलने को बेचैन हो गया। मैंने मेरे दोस्त को सोनिया से मिलवाने के लिये कहा।

उसने सोनिया को फोन किया। सोनिया ने शाम को मार्केट में मिलने का वादा किया। शाम को हम दोनों सोनिया से मार्केट में मिलने गये। सोनिया को देख कर मैं वाकई हैरान रह गया। उसकी शक्ल मेरी एक पुरानी गर्ल-फ़्रेड रेखा से मिलती-जुलती थी। अगले दिन मैंने सोनिया को फोन किया और उसे मिलने को कहा। वो मिलने आई और हमने काफी देर बातचीत की और गाड़ी में घूमे। धीरे-धीरे सोनिया से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। एक दिन मैंने सोनिया को फोन करके घर बुलाया।

सोनिया घर आई। हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बाते करने लगे। फिर मैंने सोनिया से कुछ लेने को कहा। सोनिया ने मना किया तो मैंने सोनिया को कहा कि थोड़ी-थोड़ी बियर लेते है। सोनिया मान गई। मैंने बेडरूम में बियर व स्नैक्स का इंतजाम कर दिया। फिर हम दोनों बेडरूम में बैठ कर बियर पीने व बातचीत करने लगे। सोनिया ने जीन्स व टी-शर्ट पहनी थी। जीन्स की वजह से उसे बैड पर बैठने में दिक्कत हो रही थी। बार-बार वो अपने पैर इधर-उधर कर रही थी।

मैंने सोनिया को कहा कि जीन्स उतार कर आराम से बैठ जाए। सोनिया मना करने लगी। मैंने ज़िद की और लगभग जबरदस्ती उसकी जीन्स उतार दी। सोनिया लाल रंग की पैंटी में अपने पैर सिकोड़ कर बैठ गई। हम दोनों फिर से बियर पीने व बातचीत करने लगे। एक बियर खत्म होते ही मैं दूसरी खोलने लगा। सोनिया ने मना किया तो मैंने सोनिया को कहा कि थोड़ी-थोड़ी और लेते है। सोनिया मान गई।

जब दूसरी बियर की बोतल भी खत्म हो गई तो मैंने स्नैक्स की प्लेटें उठा कर अलग रख दी और सोनिया को छेड़ने लगा।

सोनिया ने कहा- क्या कर रहे हो?

मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।

मैंने सोनिया को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया। फिर मैं सोनिया के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। सोनिया ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तन दबाने लगा।

फिर मैं उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो सोनिया बोली,”क्या करते हो? प्लीज इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।”

मैंने कहा,”डरने वाली क्या बात है।” कह कर मैं फिर उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा।

सोनिया बोली,”कोई आ जाएगा?”

मैंने कहा,”कोई नहीं आएगा !” कह कर मैंने ज़िद की और लगभग जबरदस्ती उसकी टी-शर्ट उतार दी।

सोनिया के गोरे-गोरे वक्ष गुलाबी ब्रा में फँसे थे। मैंने उठ कर मेन-दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जौकी में सोनिया से लिपट गया। मैंने सोनिया का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लिटा लिया। फिर मैंने लाईट बंद कर दी। कमरे में लाल रंग का नाइट लैम्प जल रहा था।

मैंने सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। मैंने अपनी टांगे सोनिया की टांगों पर रख दी और मैंने अपने जलते हुए होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सोनिया ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ सोनिया के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने सोनिया को बैड पर सिधा लिटा दिया। फिर उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुऐ होंठ रख दिए।

फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सोनिया के मुँह से आह निकलने लगी। लगा। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा। सोनिया ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैंने उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डाल दिया।

कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। सोनिया ने कोई विरोध नहीं किया, उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा, फिर मैं अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सोनिया के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। सोनिया ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चिकनी और क्लिन-शेव चूत पर हाथ फिराने लगा।

थोड़ी देर बाद मैं उसकी पैन्टी को उतारने लगातो सोनिया बोली “प्लीज इसे मत उतारो।” सोनिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोली “नहीं इसे मत उतारो !”

मैंने कहा,”देखो सोनिया हम कुछ करेंगे नहीं ! बस कपड़े उतार कर नंगे एक दूसरे से लिपट कर लेटेंगे और प्यार करेंगे !” कह कर मैंने उसकी पैन्टी उतार दी।

सोनिया का नंगा बदन और उसकी चिकनी चूत लाल रौशनी में नहाकर लाल हो गये। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जौकी को फ़ाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जौकी उतार कर फेंक दी। फिर मैं सोनिया से लिपट गया।

मैंने सोनिया को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड तन कर सोनिया की चिकनी चूत से टकरा रहा था। मैं सोनिया की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं सोनिया की चूत पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ सोनिया की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से सोनिया की चूत की फाँक को खोलने और बन्द करने लगा। फिर सोनिया की चूत के दाने को रगड़ने लगा। सोनिया के मुँह से सिसकियां निकलने लगी।

मेरा लण्ड सोनिया की जांघों से रगड़ खा रहा था। मैंने सोनिया का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। सोनिया ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। सोनिया मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं सोनिया की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैंने सोनिया को कहा “सोनिया जरा सा इसे ऊपर घिस लूं क्या ? बहुत मन हो रहा है !”

सोनिया कुछ नहीं बोली। मैंने इसे ही सोनिया की हाँ समझ लिया। मैं सोनिया के ऊपर लेट गया। सोनिया का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था।

मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर सोनिया की चूत के दाने के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर सोनिया की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। सोनिया ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। फिर सोनिया मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के दाने के ऊपर रगड़ने लगी। कुछ देर बाद सोनिया की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था।

शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने सोनिया का हाथ पकड़ लिया।

मैंने सोनिया को कहा,”कुछ करें क्या ? बहुत मन हो रहा है। लाओ मैं करता हूँ।”

सोनिया कुछ नहीं बोली।

उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी। वह बोली,”प्लीज ऐसे ही करते रहो !”

मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। मैं सोनिया को चोदने को बेताब हो रहा था। सोनिया की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर सोनिया की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

सोनिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली।”प्लीज कंडोम तो लगा लो ! मुझे डर लगता है।”

मैंने बैड की दमोहित में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। सोनिया ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। फिर मैं सोनिया के ऊपर लेट गया। सोनिया का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। फिर मैंने अपने जलते हुऐ होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने भी मुझे अपनी बाँहो में भर लिया। मेरा लण्ड सोनिया की जांघों के बीच फंसा हुआ था। कुछ देर बाद मैंने अपने लण्ड को सोनिया की चूत के सुराख पर लगा दिया और फिर मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा सोनिया की चिकनी चूत में घुस गया। सोनिया के मुँह से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली।

मैंने थोड़ा और जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड सोनिया की चूत में घुस गया। सोनिया के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड सोनिया की चूत में समा गया। सोनिया के मुँह से जोर से आह निकली और उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया। मैंने भी सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए। मेरा पूरा लण्ड सोनिया की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँहो में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी। सोनिया का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें सोनिया की टांगों के बीच में फँसी हुई थी। मैं सोनिया के माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर गालों को किस करने लगा। सोनिया भी मेरे गालों को किस करने लगी।

कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से सोनिया की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से उसकी चूत में अन्दर घुसा दिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद सोनिया ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे सोनिया की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी।

हम दोनों बियर के तथा सैक्स के नशे में चूर हो रहे थे। सोनिया को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स उपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर सोनिया को चोदने लगा।

मैं बैड पर हाथ रख कर सोनिया के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड उसकी चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। वो भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं सोनिया को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से सोनिया के ऊपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। सोनिया इस चुदाई तथा बियर के नशे से मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर सोनिया से कहा “सोनिया अच्छा लग रहा है क्या?”

सोनिया बोली,”प्लीज रुको मत। तेज-तेज करते रहो।”

सोनिया के मुँह से यह सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने सोनिया के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर सोनिया को चोदने लगा।

सोनिया के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह्ह्होहोहोह सिस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज तेज-तेज करो।”

मैं सोनिया के ऊपर लेट गया और मैंने सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुऐ उसे और तेजी से चोदने लगा। सोनिया भी अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसती हुई मजे से चुदाई का मजा ले रही थी। लगभग 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते हुऐ चुदाई का मजा लेते रहे।

फिर अचानक सोनिया ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया। उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक जोर से आह भरी। मैं समझ गया कि सोनिया डिस्चार्ज हो गई है। मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं तेज-तेज धक्के मार कर सोनिया को चोदने लगा। सोनिया आँखें बंद करके मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी। लगभग 2 मिनट तक सोनिया को तेज-तेज चोदने के बाद मैं सोनिया की चूत के अन्दर कंडोम में डिस्चार्ज हो गया।

कुछ देर तक मैं सोनिया के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। सोनिया मेरे नीचे आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड सोनिया की चूत में से बाहर खींच लिया।

फिर उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर डस्टबिन में फेंक दिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके सोनिया की बगल में लेट गया। सोनिया आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की लाल रौशनी में उसका गोरा और नंगा बदन लाल हो कर चमक रहा था। कुछ देर बाद सोनिया मेरी तरफ करवट ली और अपनी टांग मेरी टांगों पर रख दी। फिर वो मेरी छाती के बालों पर हाथ फिराने लगी।

फिर सोनिया बोली,”हो गई तुम्हारे मन की।”

मैंने कहा,”हाँ बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया !” कह कर मैंने करवट ले कर सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुऐ बातचीत करते रहे।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी यह कहानी ? मुझे मेल करेंगे ना ? Antarvasna Sex Stories

Antarvasna

यह घटना इसी होली Antarvasna की है। 6 साल के बाद मैं होली में अपने घर पर था। मेरी उम्र 19 साल की है। मैं अपने शहर से बहुत दूर एक कॉलेज में तकनीकी की पढ़ाई कर रहा हूँ। हड़ताल होने के कारण कॉलेज एक महीने के लिए बन्द हो गया था।

सारे त्योहारों में मुझे यह होली का उत्सव बिल्कुल पसन्द नहीं है। मैंने पहले कभी भी होली नहीं खेली। पिछले 6 साल मैंने होस्टल में ही बिताया। मेरे अलावा घर में मेरे बाबूजी और माँ है। मेरी छोटी बहन का विवाह पिछले साल हो गया था। कुछ कारण बस मेरी बहन रेनू होली में घर नहीं आ पाई। लेकिन उसके जगह पर हमांरे दादाजी होली से कुछ दिन पहले हमांरे पास हमसे मिलने आ गये थे। दादाजी की उम्र करीब 61-62 साल है, लेकिन इस उम्र में भी वे खूब हट्टे कट्टे दिखते हैं। उनके बाल सफेद होने लगे थे लेकिन सर पर पूरे घने बाल थे। दादाजी चश्मा भी नहीं पहनते थे। मेरे बाबूजी की उम्र करीब 40-41 साल की होगी और माँ की उम्र 34-35 साल की। माँ कहती है कि उसकी शादी 14 वे साल में ही हो गई थी और साल बीतते बीतते मैं पैदा हो गया था। मेरे जन्म के 2 साल बाद रेनू पैदा हुई।

अब जरा माँ के बारे में बताउँ। वो गाँव में पैदा हुई और पली बढ़ी। पांच भाई बहनों में वो सबसे छोटी थी। खूब गोरा दमकता हुआ रंग, 5’5″ लम्बी, चौडे कन्धे, खूब उभरी हुई छाती, उठे हुए स्तन और मस्त, गोल गोल भरे हुए नितम्ब। जब मैं 14 साल का हुआ और मर्द और औरत के रिश्ते के बारे में समझने लगा तो जिसके बारे में सोचते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था, वो मेरी माँ मालती ही है। मैंने कई बार मालती के बारे में सोच सोच कर हत्तु मारा होगा लेकिन ना तो कभी मालती का चुची दबाने का मौका मिला, ना ही कभी उसको अपना लौड़ा ही दिखा पाया। इस डर से क़ि अगर घर में रहा तो जरुर एक दिन मुझसे पाप हो जायेगा, 8वीं क्लास के बाद मैं जिद कर होस्टल में चला गया।

माँ को पता नहीं चल पाया कि उसके इकलौते बेटे का लौड़ा माँ की बुर के लिए तड़पता है। छुट्टियों में आता था तो चोरी छिपे मालती की जवानी का मज़ा लेता था और करीब करीब रोज रात को हत्तु मारता था। मैं हमेशा यह ध्यान रखता था कि माँ को कभी भी मेरे ऊपर शक ना हो। और माँ को शक नहीं हुआ। वो कभी कभी प्यार से गालों पर थपकी लगाती थी तो बहुत अच्छा लगता था। मुझे याद नहीं कि पिछले 4-5 सालों में उसने कभी मुझे गले लगाया हो।

अब इस होली कि बात करें। माँ सुबह से नाश्ता, खाना बनाने में व्यस्त थी। करीब 9 बजे हम सब यानि मैं, बाबूजी और दादाजी ने नाश्ता किया और फिर माँ ने भी हम लोगों के साथ चाय पी। 10 – 10.30 बजे बाबूजी के दोस्तो का ग्रुप आया। मैं छत के ऊपर चला गया। मैंने देखा कि कुछ लोगों ने माँ को भी रंग लगाया। दो लोगों ने तो माँ की चूतड़ों को दबाया, कुछ देर तो माँ ने मजा लिया और फिर माँ छिटक कर वहाँ से हट गई। सब लोग बाबूजी को लेकर बाहर चले गये । दादाजी अपने कमरे में जाकर बैठ गये।

फिर आधे घंटे के बाद औरतों का हुजूम आया। करीब 30 औरतें थी, हर उम्र की। सभी एक दूसरे के साथ खूब जमकर होली खेलने लगे। मुझे बहुत अच्छा लगा। जब मैंने देखा कि औरतें एक दूसरे की चुची मसल मसल कर मजा ले रही हैं, कुछ औरतें तो साया उठा उठा कर रंग लगा रही थी। एक ने तो हद ही कर दी। उसने अपना हाथ दूसरी औरत के साया के अन्दर डाल कर बुर को मसला। कुछ औरतों ने मेरी माँ मालती को भी खूब मसला और उनकी चुची दबाई। फिर सब कुछ खा पीकर बाहर चली गई। उन औरतो ने माँ को भी अपने साथ बाहर ले जाना चाहा लेकिन माँ उनके साथ नहीं गई।

उनके जाने के बाद माँ ने दरवाजा बन्द किया। वो पूरी तरह से भीग गई थी। माँ ने बाहर खड़े खड़े ही अपना साड़ी उतार दी। गीला होने के कारण साया और ब्लाऊज दोनों माँ के बदन से चिपक गए थे। कसी कसी जांघें, खूब उभरी हुई छाती और गोरे रंग पर लाल और हरा रंग माँ को बहुत ही मस्त बना रहा था। ऐसी मस्तानी हालत में माँ को देख कर मेरा लौड़ा टाइट हो गया। मैंने सोचा, आज अच्छा मौका है। होली के बहाने आज माँ को बाहों में लेकर मसलने का। मैंने सोचा कि रंग लगाते लगाते आज चुची भी मसल दूंगा। यही सोचते सोचते मैं नीचे आने लगा। जब मैं आधी सीढी तक आया तो मुझे आवाज सुनाई पड़ी!

दादाजी माँ से पूछ रहे थे,” विनोद कहाँ गया?”
“मालूम नहीं, लगता है अपने बाबूजी के साथ बाहर चला गया है।” माँ ने जवाब दिया।

माँ को नहीं मालूम था कि मैं छत पर हूँ और अब उनकी बातें सुन भी रहा हूँ और देख भी रहा हूँ। मैंने देखा मालती अपने ससुर के सामने गरदन झुकाये खड़ी है। दादाजी माँ के बदन को घूर रहे थे।

तभी दादाजी ने माँ के गालो को सहलाते हुये कहा,”मेरे साथ होली नहीं खेलोगी?”

मैं तो ये सुन कर दंग रह गया। एक ससुर अपनी बहू से होली खेलने को बेताब था। मैंने सोचा, माँ ददाजी को धक्का देकर वहाँ से हट जायेगी लेकिन साली ने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मुस्कुरा कर कहा,” मैंने कब मना किया है, और अभी तो घर में कोई है भी नहीं!”

कहकर माँ वहां से हट गई। दादाजी भी कमरे के अन्दर गये और फिर दोनों अपने अपने हाथों में रंग लेकर वापस वहीं पर आ गये। दादाजी ने पहले दोनों हाथों से माँ की दोनों गालों पर खूब मसल मसल कर रंग लगाया और उसी समय माँ भी उनके गालों और छाती पर रंग रगड़ने लगी। दादाजी ने दुबारा हाथ में रंग लिया और इस बार माँ की गोल गोल बड़ी बड़ी चुचियों पर रंग लगाते हुए चुचियों को दबाने लगे। माँ भी सिसकारती मारती हुई दादाजी के शरीर पर रंग लगा रही थी।

कुछ देर तक चुचियों को मसलने के बाद दादाजी ने माँ को अपनी बाहों में कस लिया और चूमने लगे। मुझे लगा कि माँ गुस्सा करेगी और दादाजी को डांटेगी। लेकिन मैंने देखा क़ि माँ भी दादाजी के पांव पर पांव चढ़ा कर चूमने में मदद कर रही है। चुम्मा लेते लेते दादाजी का हाथ माँ की पीठ को सहला रहा था और हाथ धीरे धीरे माँ के सुडौल नितम्बों की ओर बढ़ रहा था । वे दोनों एक दूसरे को जम कर चूम रहे थे जैसे पति-पत्नि हों।

अब दादाजी माँ के चूतड़ों को दोनों हाथों से खूब कस कस कर मसल रहे थे और यह देख कर मेर लौड़ा पैंट से बाहर आने को तड़प रहा था। क़हां तो मैं यह सोच कर नीचे आ रहा था कि मैं माँ के मस्त गुदाज बदन का मजा लूंगा और कहां मुझसे पहले इस हरामी दादाजी ने रंडी का मजा लेना शुरु कर दिया।
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था। मन तो कर रहा था कि मैं दोनों के सामने जाकर खड़ा हो जाऊँ। लेकिन तभी मुझे दादाजी कि आवाज सुनाई पड़ी,” रानी, पिचकारी से रंग डालूँ?”

दादाजी ने माँ को अपने से चिपका लिया था। माँ का पिछवाड़ा दादाजी से सटा था और मुझे माँ का सामने का माल दिख रहा था। दादाजी का एक हाथ चुची को मसल रहा था और दूसरा हाथ माँ के पेड़ू को सहला रहा था।

“अब भी कुछ पूछने की जरूरत है क्या?”

माँ का इतना कहना था कि दादाजी ने एक झटके में साया के नाड़े को खोल डाला और हाथ से धकेल कर साया को नीचे जांघो से नीचे गिरा दिया। मैं अवाक था माँ की बुर को देखकर। माँ ने पैरों से ठेल कर साया को अलग कर दिया और दादाजी का हाथ लेकर अपनी बुर पर सहलाने लगी। बुर पर बाल थे जो बुर को ढक रखा था। दादाजी की अंगुली बुर को कुरेद रही थी और माँ अपनी हाथो से ब्लाउज का बटन खोल रही थी। दादाजी ने माँ के हाथ को अलग हटाया और फटा फट सारे बटन खोल दिए और ब्लाउज को निकाल दिया।

अब माँ पूरी तरह से नंगी थी। मैंने जैसा सोचा था, चूची उससे भी बड़ी बड़ी और सुडौल थी। दादाजी आराम से नंगी जवानी का मजा ले रहे थे। माँ ने 2-3 मिनट दादाजी को चुची और चूत मसलने दिया फिर वो अलग हुई और वहीं फर्श पर मेरी तरफ पाँव रखकर लेट गई। मेरा मन कर रहा था कि जाकर चूत में लौड़ा पेल दूँ। तभी दादाजी ने अपना धोती और कुर्ता उतारा और माँ के चेहरे के पास बैठ गये। माँ ने लन्ड को हाथ में लेकर मसला और कहा,”पिचकारी तो अच्छा दिखता है लेकिन देखें इसमें रंग कितना है! अब देर मत करो, वे आ जायेंगे तो फिर रंग नहीं डाल पाओगे।”

और फिर, दादाजी ने माँ पाँव के बीच बैठ कर लन्ड को चूत पर दबाया और तीसरे धक्के में पूरा लौड़ा बुर के अन्दर चला गया। क़रीब 10 मिनटों तक माँ को खूब जोर जोर से धक्का लगा कद चोदा। उस रन्डी को भी चुदाई का खूब मजा आ रहा था, तभी तो साली जोर जोर से सिसकारी मार मार कर और चूतड़ उछाल उछाल कर दादाजी के लंड के धक्के का बराबर जबाब दे रही थी। उन दोनों की चुदाई देखकर मुझे विश्वास हो गया था कि माँ और दादाजी पहले भी कई बार चुदाई कर चुके हैं.

“क्या राजा, इस बहू का बुर कैसा है? मजा आया या नहीं?” माँ ने कमर उछालते हुये पूछा।

“मेरी प्यारी बहू! बहुत प्यारी चूत है और चूची तो बस, इतनी मस्त चुची पहले कभी नहीं दबाई।”दादाजी ने चुची को मसलते हुये पेलना जारी रखा और कहा।

“रानी, तुम नहीं जानती, तुम जबसे घर में दुल्हन बन कर आई, मैं हजारों बार तुम्हारे चूत और चुची का सोच सोच कर लंड को हिला हिला कर तुम्हारा नाम ले ले कर पानी गिराता हूँ।”

दादाजी ने चोदना रोक कर माँ की चुची को मसला और रस से भरे ओंठों को कुछ देर तक चूसा। फिर चुदाई शुरू की और कहा,”मुझे नहीं मालूम था कि एक बार बोलने पर ही तुम अपनी चूत दे दोगी, नहीं तो मैं तुम्हें पहले ही सैकडों बार चोद चुका होता!”

मुझे विश्वास नहीं हुआ कि माँ दादाजी से पहली बार चुद रही है। दादाजी ने एक बार कहा और हरामजादी बिना कोई नखरा किये चुदाने के लिये नंगी हो गई और दादाजी कह रहे है कि आज पहली बार ही माँ को चोद रहे हैं।

लेकिन तब माँ ने जो कहा वो सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि माँ पहली बार ही दादाजी से मरवा रही है।

माँ ने कहा,” राजा, मैं कोई रंडी नहीं हूँ। आज होली है, तुमने मुझे रंग लगाना चाहा, मैंने लगाने दिया, तुमने चुची और चूत मसला, मैंने मना नहीं किया, तुमने मुझे चूमा और मैंने भी तुमको चूमा और तुम चोदना चाह्ते थे, पिचकारी डालना चाहते थे तो मेरी चूत ने पिचकारी अन्दर ले ली। तुम्हारी जगह कोई और भी ये चाहता तो मैं उस से भी चुदवाती। चाहे वो राजा हो या नौकर! होली के दिन मेरा माल, मेरी चूत, मेरी जवानी सब के लिये खुली है…!”

माँ ने दादाजी को अपनी बांहों और जांघों में कस कर बांधा और फिर कहा,”आज जितना चोदना है, चोद लो, फिर अगली होली का इंतजार करना पड़ेगा मेरी नंगी जवानी का दर्शन करने के लिये!”

माँ की बात सुनकर मैं आश्चर्य-चकित था कि होली के दिन कोई भी उसे चोद सकता था.

लेकिन यह जान कर मैं भी खुश हो गया। कोई भी में तो मैं भी आता हूँ। आज जैसे भी हो, माँ को चोदूँगा ही। यह सोच कर मैं खुश था और उधर दादाजी ने माँ की चूत में पिचकारी मार दी। बुर से मलाई जैसा गाढ़ा दादाजी का रस बाहर निकल रहा था और दादाजी खूब प्यार से माँ को चूम रहे थे।

क़ुछ देर बाद दोनों उठ गये।
“कैसी रही होली?” माँ ने पूछा,” आप पहले होली पर हमारे साथ क्यों नहीं रहे। मैंने 12 साल पहले होली के दिन सबके लिये अपना खजाना खोल दिया था।”

माँ ने दादाजी के लौड़ा को सहलाया और कहा,” अभी भी लौड़े में बहुत दम है, किसी कुमारी छोकरी की भी चूत एक धक्के में फाड़ सकता है।”

माँ ने झुक कर लौड़े को चूमा और फिर कहा,”अब आप बाहर जाईये और एक घंटे के बाद आईयेगा। मैं नहीं चाहती कि विनोद या उसके बाप को पता चले कि मैंने आप से चुदाई है।”

माँ वहीं नंगी खड़ी रही और दादाजी को कपडे पहनते देखती रही। धोती और कुर्ता पहनने के बाद दादाजी ने फिर माँ को बांहो में कसकर दबाया और गालों और होंठों को चूमा। कुछ चुम्मा चाटी के बाद माँ ने दादाजी को अलग किया और कहा,”अभी बाहर जाओ, बाद में मौका मिलेगा तो फिर से चोद लेना लेकिन आज ही, कल से मैं आपकी वही पुरानी बहू रहूंगी।”

दादाजी ने चुची दबाते हुये माँ को दुबारा चूमा और बाहर चले गये।

मैं सोचने लगा कि क्या करूँ?

मैं छत पर चला गया और वहाँ से देखा- दादाजी घर से दूर जा रहे थे और आस पास मेरे पिताजी का कोई नामो निशान नहीं था। मैंने लौड़े को पैंट के अन्दर किया और धीरे धीरे नीचे आया। माँ बरामदे में नहीं थी। मैं बिना कोई आवाज किये अपने कमरे में चला गया और वहाँ से झांका। इधर उधर देखने के बाद मुझे लगा कि माँ किचन में हैं। मैंने हाथ में रंग लिया और चुपके से किचन में घुसा। माँ को देखकर दिल बाग बाग हो गया। वो अभी भी नंग धड़ंग खड़ी थी। वो मेरी तरफ पीठ करके पुआ बेल रही थी। माँ के सुडौल और भरे भरे मांसल चूतड़ों को देख कर मेरा लौड़ा पैंट फाड़ कर बाहर निकलना चाहता था।

कोई मौका दिये बिना मैंने दोनों हाथों को माँ की बांहो से नीचे आगे बढ़ा कर उनके गालों पर खूब जोर जोर से रंग लगाते हुये कहा,”माँ, होली है!”

और फिर दोनों हाथों को एक साथ नीचे लाकर माँ की गुदाज और बड़ी बड़ी चुचियों को मसलने लगा।

“ओह … तू कब आया? दरवाजा तो बन्द है! छोड़ ना बेटा … क्या कर रहा है? माँ के साथ ऐसे होली नहीं खेलते … ओह्ह्ह्ह … इतना जोर जोर से मत मसल … अह्ह्ह्ह्ह … छोड़ दे! … अब हो गया…!”

लेकिन मैं ऐसा मौका कहां छोड़ने वाला था। मैं माँ के चूतड़ों को अपने पेरु से खूब दबा कर और चूची को मसलता रहा। माँ बार बार मुझे हटने के लिये बोल रही थी और बीच बीच में सिसकारी भी भर रही थी.. खास कर जब मैं घुंडी को जोर से मसलता था। मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था। मैं लंड को पैंट से बाहर निकालना चाहता था। मैं कस कर एक हाथ से चुची को दबाये रखा और दूसरा हाथ पीछे लाकर पैंट का बटन खोला और नीचे गिरा दिया। मेरा लौड़ा पूरा टन टना गया था। मैंने एक हाथ से लंड को माँ के चूतड़ों के बीच दबाया और दूसरा हाथ बढ़ा कर चूत को मसलने लगा।

“नहीं बेटा, बुर को मत छुओ … यह पाप है!”

लौड़े को चूतड़ों के बीच में दबाये रखा और आगे से बुर में बीच वाली अंगुली घुसेड़ दी। करीब 15-20 मिनट पहले दादाजी चोद कर गये थे और चूत गीली थी। मेरा मन झनझना गया था, माँ की नंगी जवानी को छू कर। मुझे लगा कि इसी तरह अगर मैं माँ को रगड़ता रहा तो बिना चोदे ही झड जाउंगा और फिर माँ मुझे कभी चोदने नहीं देगी। यही सोच कर मैंने चूत से अंगुली बाहर निकाली और पीछे से ही कमर से पकड़ कर माँ को उठा लिया।

“ओह … क्या मस्त माल है … चल रंडी, अब तुझे जम कर चोदूंगा … बहुत मजा आयेगा मेरी रानी तुझे चोदने में!”

ये कहते हुये मैंने माँ को दोनों हाथों से उठा कर बेड पर पटक दिया और उसकी दोनों पैरों को फैला कर मैंने लौड़ा बुर के छेद पर रखा और खूब जोर से धक्का मारा।

“आउच..जरा धीरे! ” माँ ने हौले से कहा।

मैंने जोर का धक्का लगाया और कहा,”ओह्ह्ह्ह … माँ, तू नहीं जानती, आज मैं कितना खुश हूँ!” मैं धक्का लगाता रहा और खूब प्यार से माँ के रस से भरे होंठों को चूमा।

“मां, जब से मेरा लौड़ा खड़ा होना शुरु हुआ, चार साल पहले, तो तबसे बस सिर्फ तुम्हें ही चोदने का मन करता है। हजारों बार तेरी चूत और चुची का ध्यान कर मैंने लौड़ा हिलाया है और पानी गिराया है.. हर रात सपने में तुम्हें चोदता हूँ। ले रानी आज पूरा मजा मारने दे!”

मैंने माँ की चुचियों को दोनों हाथों में कस कर दबा कर रखा और दना दन चुदाई करने लगा। माँ आंख़ बन्द कर चुदाई का मजा ले रही थी। वो कमर और चूतड़ हिला हिला कर लंड को चुदाई में मदद दे रही थी।

“साली, आंख खोल और देख, तेरा बेटा कैसा चुदाई कर रहा है … रंडी, खोलना आंख!”

माँ ने आंखें खोली। उसकी आंखो में कोई ‘भाव’ नहीं था। ऐसा भी नहीं लग रहा था कि वो मुझसे नाराज है…ना ही यह पता चल रहा था कि वो बेटे के लंड का मजा ले रही है.. लेकिन मैं पूरा मजा लेकर चोद रहा था…

“साली, तू नहीं जानती … तेरे बुर के चक्कर में मैं रन्डियों के पास जाने लगा और ऐसी ऐसी रंडी की तलाश करता था जो तुम्हारी जैसी लगती हो… लेकिन अब तक जितनी भी बुर चोदी सब की सब ढीली ढाली थी … लेकिन आज मस्त, कसी हुई बुर चोदने को मिली है … ले रंडी तू भी मजा ले!”

और उसके बाद बिना कोई बात किये मैं माँ को चोदता रहा और वो भी कमर उछाल उछाल कर चुदवाती रही। कुछ देर के बाद माँ ने सिसकारी मारनी शुरु की और मुझे उसकी सिसकारी सुनकर और भी मजा आने लगा। मैंने धक्के की स्पीड और दम बढ़ा दिया और खूब दम लगा कर चोदने लगा.

माँ जोर जोर से सिसकारी मारने लगी।

“रंडी, कुतिया जैसे क्यों चिल्ला रही है, कोई सुन लेगा तो?”

“तो सुनने दो…लोगों को पता तो चले कि एक कुतिया कैसे अपने बेटे से मरवाती है…मार दे , फाड़ दे इस बुर को…मादरचोद , माँ की बुर इतनी ही प्यारी है तो हरामी पहले क्यों नहीं पटक कर चोद डाला… अगर तू हर पिछली होली में यहाँ रहता और मुझे चोदने के लिये बोलता तो मैं ऐसे ही बुर चिरवा कर तेरा लौड़ा अन्दर ले लेती…चोद बेटा ..चोद ले…लेकिन देख तेरा बाप और दादाजी कभी भी आ सकते हैं..! जल्दी से बुर में पानी भर दे!”

“ले मां, तू भी क्या याद रखेगी कि किसी रन्डीबाज ने तुझे चोदा था… ले कुतिया, बन्द कर ले मेरा लौड़ा अपनी बुर में!” मैं अब चुची को मसल मसल कर, कभी माँ की मस्त जांघों को सहला सहला कर धक्के पर धक्का लगाये जा रहा था।

“आह्ह्ह्ह्ह … बेटा, ओह्ह्ह्ह्ह … बेटा… अह्ह्ह्ह्ह … मार राजा … चोद … चोद!”

और माँ ने दोनों पाँव उपर उठाए और मुझे जोर से अपनी ओर दबाया और माँ पस्त हो गई और हांफने लगी।

“बस बेटा, हो गया … निकाल ले … तूने खुश कर दिया!”

“माँ बोलती रही और मैं कुछ देर और धक्का लगाता रहा और फिर मैं भी झर गया। मैंने दोनों हाथों से चुची को मसलते हुये बहुत देर तक माँ के गालों और ओंठो को चूमता रहा। माँ भी मेरे बदन को सहलाती रही और मेरे चुम्बन का पूरा जबाब दिया। फिर उसने मुझे अपने बदन से उतारा और कहा,”बेटा, कपड़े पहन ले … सब आने बाले होंगे!”

“फिर कब चोदने दोगी?” मैंने चूत को मसलते हुये पूछा।
“अगले साल, अगर होली पर घर में मेरे साथ रहोगे!” माँ ने हंस कर जवाब दिया.
मैंने चूत को जोर से मसलते हुये कहा,”चुप रंडी, नखरे मत कर, मैं तो रोज तुझे चोदूँगा!”

“ये रंडी चालू माल नहीं है… तू कालेज जा कर उन चालू रंडियों को चोदना…” माँ कहते कहते नंगी ही किचन में चली गई।

मैंने पीछे से पकड़ कर चूतड़ों को मसला और कहा,”मां, तू बहुत मस्त माल है … तुझे लोग बहुत रुपया देंगे, चल तुझे भी कोठे पर बैठा कर धंधा करवाऊँगा।” मैंने माँ की गांड में अंगुली पेली और वो चिहुंक गई.
मैंने कहा,”रंडी बाद में बनना, चल साली अभी तो कपड़े पहन ले.”

“कमरे से ला दे … जो तेरा मन करे!” वो बोली और पुआ तलने लगी।

मैंने तुरंत कमरे से एक साया और ब्लाउज लाकर माँ को पहनाया।
“साड़ी नहीं पहनाओगे?” माँ ने मेरे गालों को चूमते हुये कहा।
“नहीं रानी, आज से घर में तुम ऐसी ही रहोगी, बिना साड़ी के…”
“तेरे दादाजी के सामने भी?” उसने पूछा।
“ठीक है सिर्फ आज भर … कल से फिर साड़ी भी पहनूंगी।”
माँ खाना बनाती रही और मैं उसके साथ मस्ती करता रहा। Antarvasna

Antarvasna

मैं अपने दोस्त की Antarvasna कहानी ले कर आया हूँ। मेरे दोस्त का नाम पिंकू है। पिंकू की गर्ल फ्रेंड सोनी की शादी बहुत पहले ही हो गई थी।

लीज़िए पढ़िए पिंकू के ही शब्दों में !

अभी कुछ दिन पहले सोनी से एक शादी में मुलाकात हो गई, कई सालों बाद मिली थी। सोनी ने मुझे बताया कि वो अभी मायके आई हुई है। उसने मुझे बताया उसकी दो बेटी और एक बेटा है बेटी मोनी और मानसी है जिनमें मोनी 18 साल की मानसी 15 साल की है और लड़का सबसे छोटा है मोनू जो 11 साल का है।

सोनी ने मुझे अगले दिन दस बजे घर आने को कहा। मेरा उसके घर में आना जाना लगा रहता था क्योंकि उसके परिवार से पुरानी जान पहचान है।

जब मैं उसके घर गया तो सोनी और उसकी साल की बेटी मोनी ही थी, बाकी लोग बाज़ार गए थे। सोनी ने मुझे बैठने को कहा और उसकी बेटी से मुझे मिलवा कर वो चाय बनाने को चली गई।

मैं सच बता रहा हूँ कि मैंने उसकी लड़की के बारे में कुछ भी गलत नहीं सोचा था अब तक ! पर यह चूत बहनचोद कुछ भी करवा दे !

मैंने मोनी से बोला- बेटा, मेरे पास आ !

तो वो मेरे गोद में आकर बैठ गई और अब मैं उसके साथ खेल रहा था उसे एक छोटी सी बच्ची समझ कर !

पर थोड़ी ही देर में मुझे मेरे लंड पर थोड़ा दबाब उसकी गांड का महसूस हुआ जिसे मैंने नज़र-अंदाज़ कर दिया।

तब तक सोनी चाय ले कर आ गई। हमने कोई भी पुरानी बात नहीं की, चूंकि उसकी बेटी मोनी वहीं थी। सोनी ने चाय खत्म कर किसी काम ले लिए बोल कर चली गई। मोनी अ़ब फ़िर मेरी गोद में आ गई थी और उसने मुझसे बोला- अंकल, आप मुझे मीठी नहीं दोगे?

मैंने कहा- जरूर दूंगा मेरी बच्ची !

और वो मेरी तरफ घूम गई। अब हम दोनों का चेहरा एक दूसरे के सामने था तो मैंने उसके गाल को चूम लिया।

मैंने उससे पूछा- तेरी मॉम कब तक आएगी?

इस पर वो बोली- अभी तो एक घंटा लग जायेगा।

वो गोद से उतरने का नाम नहीं ले रही थी। मेरी पैरों में भी दर्द होने लगा था। पर क्या करता, तो मैंने सोचा- चलो थोड़ा और मन बहला कर उतार दूंगा।

मैंने टीवी ऑन कर दिया और कोई कार्टून सीरियल लगा दिया और मैं भी देखने लगा।

थोड़ी ही देर में मैंने मोनी के हाथ को मेरे लंड पर महसूस किया। अब मुझे कुछ होने लगा था। पहले उसकी गांड और अब उसका हाथ !

अब मैं उसे समझ चुका था तो अब मैं उसे दूसरी ही निगाहों से देख रहा था और सोच भी रहा था।

मैंने फ़िर से उसके गाल को चूम लिया तो इस पर वो बोली- यहाँ नहीं ! यहाँ ! और वो मेरे होठों को चूसने लगी।

तब मैंने उसकी फ़ीगर को देखा, कम उम्र में ही उसकी चूची 30 की हो गई थी, गांड मस्त गद्देदार लग रही थी। तो अब मैं अपना हाथ उसके चूची पर ले गया। इस पर उसने कुछ विरोध नहीं किया,

उसने टॉप पहना हुआ था, मैंने किस करते हुए उसके चूची को दबाना चालू कर दिया और वो भी साथ दे रही थी। अब मैंने उसे टॉपलेस कर उसकी चूची को चूसने लगा तो इस पर वो बोली- मैं भी कुछ चूसना चाहती हूँ।

तो उसे मैं मना क्यों करता ! मैंने पैंट और अंडरवियर उतार दिया और उसे भी नंगा कर दिया हम दोनों 69 वाले पोज़ में आकर चूसने लगे। चूंकि समय कम था, मैंने उसे उठा कर उसके मुँह में लंड डाल दिया।

अब वो बोली- मुझे जल्दी चोदो ! नहीं तो मॉम आ जायेगी !

तो मैंने बोला- ठीक है !

तो वो बोली- अंकल मुझे बिल्कुल रंडी समझ कर ही चोदना !

मैं बोला- बहनचोद ! इतनी छोटी उम्र में तेरे को इतनी बात कैसे पता है?

तो वो बोली- बेटीचोद ! पहले चोद लो उसके बाद मैं बता दूंगी साले हरामी ! बोल रही हूँ कि समय है, तब भी बोले जा रहा है ! यहाँ मेरी चूत की हालत ख़राब हो रही है और मादरचोद, तुझे बातों की ही लगी है। चल जल्दी चोद हरामी ! नहीं तो मैं अभी तेरी गाण्ड ले लूँगी।

मैंने भी कुछ नहीं सोचा और उसकी बूर मैं लंड पेल दिया बोला- ले हरामी ले !

एक ही बार मैं उसने मेरा सात इंच का लंड ले लिया और ऊफ तक नहीं की। मैं उसे धकाधक पेले जा रहा था और मोनी बहनचोद गाली दिए जा रही थी- चोद, बेटीचोद ! अपने बेटी जैसी को चोद ! मेरी मां की चूत और मार फाड़ दे …..

पता नहीं क्या क्या !!

अब मैं छुटने ही वाला था कि मोनी की माँ सोनी आ गई, तब भी मैंने उसे नहीं छोड़ा, चोदता ही रहा जब तक कि मैं छुट नहीं गया।

सोनी ने बोला- बेटीचोद, तुमने मेरी बेटी को भी चोद दिया ? और इस भोंसड़ी वाली मादरचोद ने भी चुदवा लिया ? पिंकू तूने बर्बाद कर दिया ! मुझे चोद लिया होता !

असल मैं मैंने सोनी को भी शादी तक खूब चोदा था ! पर मैं अब काफी शर्मिंदा महसूस कर रहा था।

आगे मैं मोनी की चुदाई की कहानी ले कर आऊंगा ……….. Antarvasna

प्रेषक : अजित शर्मा Sex Stories

मैं अजित दिल्ली से एक बार फिर Sex Stories आपकी सेवा में हाज़िर हूँ। मेरी पिछली कहानी “रीना को सन्तुष्ट किया” को पढ़कर मुझे काफी लोगों ने मेल किया, उसके लिए मैं आप सबका आभारी हूँ।

दोस्तो, आज मैं आपको अपनी एक और कहानी बताने जा रहा हूँ।

जैसा कि मैंने अपनी पिछली कहानी में कहा था कि रीना ने मुझे अपनी एक सहेली से मिलवाया था जिसको मैंने चोदा था। पहले मैं आपको उसके बारे में बता दूं- उसका नाम अंजना था और वो थोड़ी सांवली थी, सुंदर तो इतनी नहीं थी जितनी कि रीना, पर हां उसमे सेक्स तो जैसे कूट-कूट कर भरा था। वो थोड़ी मोटी थी, उसकी मोटी गांड और मोटी-मोटी चूची देख कर किसी का भी लंड खडा हो जाये !

तो हुआ यह कि रीना की चुदाई के एक महीने बाद रीना का मेरे पास फ़ोन आया कि वो मुझसे मिलना चाहती है। मैंने सोचा कि दोबारा चुदवाना चाहती होगी। मैं खुश होकर गया लेकिन जब पहुँचा तो देखा कि वहां पर उसकी सहेली अंजना भी थी। मैं सोचने लगा कि यार आज तो फालतू में समय ख़राब किया, इसके घर तो मेहमान आई हुई है। खैर मैं भी बैठ गया।

तब रीना ने मुझे बताया कि यह अंजना है और वो भी मुझसे चुदना चाहती है।

मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ ! चलो बेडरूम में !

वो दोनों और मैं बेडरूम में आ गये। तो मैंने अंजना के कपड़े उतारने शुरु कर दिए तो वो शरमाने लगी। मैंने कहा- जान, शरमाने से काम नहीं चलने वाला ! मेरे कपड़े उतारो और मेरा लण्ड चूसो !

मैं तो उसको नंगा करने के बाद देखता ही रह गया और रीना से कहा- जान, आज तो तुमने मुझे पूरा मजा देने का प्लान बनाया है, मुझे भरे बदन की लड़कियाँ पसंद हैं। ऐसा नहीं कि जो पतली हो वो पसंद नहीं है लेकिन दोनों के चोदने का मजा अलग-अलग है।

खैर मैंने उसकी चूत चुसाई शुरु कर दी। वो तो ५ मिनट में ही झड़ गई। मैंने उसको दुबारा गरम किया और फिर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, मेरा आधा लंड घुसते ही वो चिल्लाने लगी। तब मैंने रीना, जो कि अभी तक हमारा खेल देख रही थी और अपनी चूत में ऊँगली डाल रही थी, से कहा कि रीना डार्लिंग जरा इस कुतिया की चूचियों को दबाओ !

तो वो उसकी चूचियाँ दबाने लगी और चूसने लगी। अंजना को मजा आने लगा और वो अपनी कमर हिलाने लगी। मैंने एक जोर का झटका दिया तो पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और वो बहुत तेज चीख पड़ी।

तो मैंने कहा- साली, रीना के पड़ोसी सुन लेंगे !

तो रीना ने अपनी चूची उसके मुँह में घुसा दी। फिर मैंने बिना कोई रहम के उसकी चुदाई शुरु कर दी। मैंने नीचे देखा तो चादर पर खून लग गया था। मैंने अपनी स्पीड चालू रखी और उसको ऐसे चोदने लगा जैसे पहली बार चुदाई कर रहा हूँ। दोस्तो, टाइट चूत को चोदने का मजा ही कुछ और है।

तभी वो झड़ गई और सुस्त हो गई, पर मेरा काम अभी बाकी था। मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी चूत में एक ही बार में लंड घुसा दिया जो सीधा उसकी बच्चेदानी से टकराया। वो फिर चिल्ला दी पर अबकी बार धीरे से मैंने अपनी स्पीड से चोदना शुरु कर दिया। रीना भी हमारी चुदाई देख कर गरम हो गई और अंजना के बगल में लेट कर अपनी चूत खोल कर मुझे चोदने के लिए बोलने लगी। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने अंजना को छोड़ कर अचानक रीना की चूत में लंड पेल दिया। वो इस अचानक हमले के लिए तैयार नहीं थी, सो चीख पड़ी और फिर हंसती हुई कहने लगी- बहुत शरारती हो तुम !

जब अंजना ने यह देखा तो वो मुझे गाली देने लगी कि मैं उसको बीच में छोड़ कर क्यों हट गया। तो मैंने फिर अंजना की चुदाई की। अब मैं ५ मिनट अंजना को चोदता और ५ मिनट रीना को !

तभी मुझे लगा की मेरा होने वाला है, तो मैंने दोनों से पूछा- किसकी चूत में डालूँ ?

तो रीना ने कहा- अजित ! प्लीज़ ! मेरी गांड में डालो !

मैंने कहा- ठीक है !

और मैं उसकी गांड में लंड घुसा कर १०-१५ झटकों के बाद अपना सारा रस उसकी गांड में ही डाल दिया। हमारा यह खेल अंजना बड़ी हैरान होकर देख रही थी।

मैंने पूछा- क्या हुआ ? मजा नहीं आया क्या ?

तो उसने कहा- मजा तो इतना आया कि जिन्दगी में कभी नहीं आया और ना ही कभी भूलूंगी मैं इस मजे को ! पर क्या गांड में भी लंड घुस सकता है?

इस पर रीना हँसने लगी और बोली- पागल ! गांड मरवाने में भी बहुत मजा आता है ! तू मरवा कर देख !

वो बोली- नहीं, बहुत दर्द होगा ! मेरी हालत तो चूत में लेने में ही ख़राब हो गई, खून भी निकला।

तो मैंने पूछा- तुम्हारा पति तुमको चोदता नहीं है क्या ?

वो बोली- चोदता तो है पर उसका बहुत छोटा है, कभी इतनी गहरे तक गया ही नहीं, जितना तुम्हारा गया, इसीलिए खून निकला।

फिर उसके बाद मैंने और रीना ने कैसे उसको गांड मरवाने के लिए मनाया यह अगली बार !

दोस्तो, मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरी यह कहानी भी पसंद आएगी। कृपया मेल जरुर कीजिये ताकि मुझे पता चल सके कि अगर मेरी लिखने में कोई गलती हो तो मैं अगली बार उसे सुधार सकूँ। Sex Stories

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