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मेरा नाम करण है, मैं शिमला से हूँ और दिल्ली में काम करता हूँ, आपको अपनी असली Antarvasna कहानी सुनना चाहता हूँ।
मैंने दो महीने पहले अन्तर्वासना-कथाएँ पढ़नी शुरू की और सोचा कि मुझे भी अपनी असली कहानी सुनानी चाहिए कि मैंने कैसे पहली बार अपनी होने वाली बीवी के साथ सेक्स किया। उसका नाम कोमल है और अब हमारी शादी हो गई है।
दो साल पहले की बात है, एमबीए पूरा करने के बाद मैंने एक कंपनी में नौकरी कर ली। मेरी एक मौसी की लड़की पूजा चंडीगढ़ में नौकरी करती थी। वो एक पेइंग-गेस्ट रहती थी अपनी दोस्त के घर पर। हम दोनों भाई-बहन बहुत करीब हैं। कोमल उसकी पुरानी दोस्त थी। मैंने उसे कभी नहीं देखा था।
पूजा मुझे मजाक में कहती थी- भईया आपकी शादी अपनी सहेली कोमल से करवाउंगी।
मैं भी बोल देता- ठीक है, करवा देना !
मैं एक बार दिल्ली से शिमला जा रहा था। त्यौहारों के मौसम के कारण चंडीगढ़ से दो घंटे बाद बस थी। तो मैंने बस स्टैंड से पूजा को फोन किया।
उसने बोला- मैं मार्केट में हूँ, आप बाजार में आ जाइए।
मैं बाजार चला गया। उसके साथ एक खूबसूरत लड़की थी।
पूजा ने बताया- यह कोमल है !
क्या बताऊँ उसके बारे में ! प्राकृतिक सौंदर्य था वो। हमारी सिर्फ हाय हैलो हुई।
पूजा कोमल को भी कहती थी कि आप दोनों की शादी मैं करवाउंगी। एक सप्ताह बाद में वापिस दिल्ली चला गया। पूजा रोज फोन पर कोमल के बारे में पूछती थी- कोमल कैसी लगी आपको?
बाद में मैंने हाँ कर दी और कोमल ने भी हाँ कर दी। कोमल के परिवार वाले भी मान गए क्योंकि उसके पापा मुझसे मिल चुके थे। मेरे परिवार को भी पूजा ने बताया, वो भी मान गए। फिर हमारी फ़ोन पर बात होने लगी और हम संदेशों का आदान-प्रदान भी करने लगे।
धीरे-2 हम काफ़ी घुलमिल गए। इस बीच हम दोनों के परिवार मिले और हमारा रिश्ता तय हो गया और दो महीने के बाद मार्च में सगाई भी तय हो गई। अब जब भी मैं कभी घर जाता तो कोमल से 1-2 घंटे के लिए मिल लेता था। हम बाजार में ही मिलते। अब तक हम काफ़ी पास आ गए थे।
हमारी सगाई से दो सप्ताह पहले मेरे एक दोस्त के पिता की मृत्यु हो गई। मैं वहाँ गया। वापिसी में मैं कोमल से मिलने चंडीगढ़ चला गया।
उस दिन बरसात हो रही थी। बैठने के लिए हम एक पार्क चले गए। पार्क के बीच एक छत सी बनी हुई थी, हम वहाँ बैठ गए। वो भीग गई थी, उसने कहा- मुझे ठण्ड लगा रही है।
मैंने हिम्मत करके उसे बाँहों में ले लिया। बहुत नाजुक सी थी वो ! उसने आंखें बंद कर ली और अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया।
मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने उसे और कस लिया। वो मदहोश हो गई। मुझे अपनी छाती पर उसके मम्मों का एहसास होने लगा। मुलायम और गर्म गर्म मम्मों के एहसास से मेरा लंड खड़ा होने लगा। किसी लड़की से मेरा पहला एहसास था। वो बिलकुल मदहोश हो गई।
मैंने हिम्मत करके कहा- कोमल, मैं तुम्हें चूम सकता सकता हूँ?
उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखें बंद ली। मैंने उसके माथे पर एक चुंबन किया। फिर दोनों गालों पर किया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए। धीरे धीरे उसके होठों को चूसने लगा।
क्या एहसास था ! गरम और नरम होंठ थे उसके !
वो भी साथ देने लगी थी मेरा। एक लड़की को बरसात में चूमने का क्या एहसास क्या होता है, मैं ही जानता हूँ।
काफी देर बाद हम अलग हुए, सिर्फ चुंबन ही किया। हम शादी से पहले आगे नहीं जाना चाहते थे। फिर कुछ दिन बाद हमारी सगाई हो गई। अब जब भी मिलते तो हम एक दूसरे को चूमते थे। एक बार चूमते हुए हम कुछ ज्यादा ही गर्म हो गए। हम पार्क में थे तो कुछ कर भी नहीं सकते थे।
दिल्ली जाकर मैंने संदेश भेजा कि आज मेरा दिल नही मान रहा, मुझे फ़ोन पर ही चूमो।
वो मुझे चूमने लगी। वो भी तब कुछ ज्यादा ही गर्म थी।
मैंने कहा- आज मेरा दिल कर रहा है कि तुम्हें सारी पा लूँ !
उसने कहा- कैसे ?
मैंने कहा- मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।
उसने कहा- वो क्या होता है?
मैंने कहा- सेक्स !
तो कोमल बोली- किया तो है हमने !
मुझे तो झटका लग गया, मैंने पूछा- कब किया?
वो बोली- क्यूं? चूमते तो हो हर बार !
मुझे हंसी आ गई और पूछा- सेक्स के बारे में क्या जानती हो?
उसने कहा- जब होंठ चूमते हैं तो उसको सेक्स कहते हैं।
मेरी तो हंस-2 कर बुरी हालत थी! मैंने पूछा- तुम्हें किसी सहेली ने सेक्स के बारे में नहीं बताया क्या?
वो बोली- नहीं।
मुझे लगा कि वो मेरा बेवकूफ बना रही है पर सच में उसे पता नहीं था कि सेक्स में क्या करते हैं!
तो मैंने उसे बताया कि सेक्स क्या होता है और सेक्स क्यूँ करते हैं। वो शरमा गई। फिर मैंने उसे फोन सेक्स के बारे में भी बताया। अब हम रोज रात को फोन सेक्स करते थे, उसे भी मजा आता !
अगली बार जब हम मिले तो एक फिल्म देखने गए। थियेटर में बहुत कम लोग थे। मैं उसके कंधे पर हाथ फेरने लगा, वो भी गर्म होने लगी थी। .उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया! फिर मैं उसके होंठ चूमने लगा, वो भी पूरा साथ दे रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और उसके मुँह में फिराने लगा और उसकी जीभ को चूस रहा था!
मैंने एक हाथ उसकी कमीज में डाल दिया और पेट पर फिरने लगा। उसके शरीर को मैंने पहली बार छुआ था। उसकी सांसें तेज हो गई, उसने आंखें बंद कर ली और उसके मुँह से आवाजे निकलने लगी- म्मम्मम्मम्म मम्म म्मम्मम आहऽऽ
मैंने अपना हाथ ऊपर किया और उसके मम्मों पर फिराने लगा। मैं ब्रा के ऊपर से उसके चूचे दबा रहा था। इतनी नरम चीज़ मैंने पहली बार स्पर्श की थी। मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। वो भी मम्म अम मम कर रही थी। फिर मैंने हाथ उसकी ब्रा के अंदर डाल दिया। उसके नर्म नर्म मम्मों से मेरी हालत खराब हो रही थी, मैं तो पागल हो रहा था। उसकी भी हालत खराब हो रही थी।
मैंने धीरे से पूछा- कोमल, मुझे तुम्हारी सलवार में हाथ डालना है !
उसने मना कर दिया- कोई देख लेगा।
वो भी चाहती थी पर डर रही थी। मैंने धीरे से हाथ उसकी सलवार में डाल दिया और उसकी पैन्टी के ऊपर से हाथ फिराने लगा। उसकी चूत की गर्मी को महसूस करने लगा, मेरी हालत ख़राब हो गई थी! अब मैंने उसकी पेंटी के अंदर हाथ दाल दिया। उसने अपनी चूत के बाल एक दम साफ़ किये हुए थे। एकदम गर्म और चिकनी चूत थी। मैं उसकी चूत की मालिश करने लगा। कोमल ने अब मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और मेरी गर्दन को चूसने लगी! मैं भी तेज-2 उसकी चूत को मलने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- मम्म म्मम्म मम मम मम म्मम्म .
उसने मेरी गर्दन पर अपने दांत लगा दिए और काटने लगी। शायद वो भी गर्म हो गई थी, उसकी चूत भी गीली हो गई थी। मैंने एक ऊँगली अंदर दाल दी और फिराने लगा। उसने और तेज काटना शुरू कर दिया। मेरी हालत भी खराब हो गई थी!
फिर उसने कहा- बस करो ! मुझे कुछ हो रहा है !
शायद उसे लंड चाहिए था। तभी फिल्म ख़त्म होने लगी, हम ठीक होकर बैठ गए। Antarvasna
मैं अपने पाठकों से देरी के लिए माफ़ी Indian Sex Stories चाहती हूँ !और शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ र्वासना की पूरी टीम का कि उन्होंने मेरी कहानी अधूरी होने के बावजूद प्रकाशित की।
मैं अपनी पिछली कहानी टीचर्स डे में एक जगह ऐसी छोड़ी थी जहाँ पे में चाहती थी कि मेरे पाठक मुझसे सवाल करें…पर वो सवाल केवल मुझे एक ही इन्सान ने पूछा था .. जिसका जवाब मैं उन्हें दे चुकी हूँ .!!
साथ ही मेरी मेरे पाठकों से गुजारिश है कि मेरी कहानी पढ़के ये ना सोचें कि मैं एक अदद पार्टनर की तलाश मैं हूँ मैं जैसी हूँ सम्पूर्ण हूँ .. मुझे किसी की जरूरत नहीं इसलिए मुझे भद्दे और अश्लीलता भरे मेसेज ना करें, मेरी मेरे पाठको से इल्तिजा है की वो अगर ईमेल करके अपने विचार प्रस्तुत करेंगे तो अच्छा रहेगा.
अब कहानी पे आते हैं ..
टीचर्स डे के अगले दिन रविवार था यानि छुट्टी .. मैं सारा दिन उसके बारे मैं सोचती रही कि वो ऐसा क्यूँ है… जब मैं उस से बात नहीं करती तो मुझे दूर से निहारता है और जब मैं उसे अपनी और आकर्षित करती हूँ तो मुझे डांट देता है…
रात होते होते मैंने ये तय किया कि मैं उस से कल जाके बात करुँगी…
मैं अपने स्कूल की हेड गर्ल थी और सुबह पहले पीरियड से पहले और प्रार्थना के बाद मैं और मेरा एक सीनियर जो हैड बॉय था स्कूल का राउंड लगाते थे ये देखने के लिए की किसी क्लास में कोई दिक्कत तो नहीं है या कोई अध्यापक अगर अनुपस्थित है तो किस टीचर को उस क्लास में भेजना है.
मैं सीनियर हेड गर्ल थी तो मुझे 8 वीं क्लास से लेकर 12 वीं क्लास तक का राउंड लगना होता था .. और जूनियर हेड बॉय और हेड गर्ल जो 7वीं क्लास के थे वो पहली से लेकर 7 वीं क्लास का राउंड लगाते थे.
इसी तरह हर क्लास से होते हुए मैं अंत में 12 वीं क्लास के कामर्स सेक्शन में पहुँची… अटेंडेंस चेक करने के बाद बच्चों को काउंट किया और डायरी में नोट किया उसके बाद क्लास के मॉनिटर को बुलाके क्लास की कन्डीशन के बारे में पूछा (ऐसा हम हर रोज़ करते थे क्यूंकि 12 वीं में सब सीनियर होते हैं और सेनियर स्कूल अथॉरिटी की चीजों का नुकसान भी बहुत करते हैं जैसे कि ट्यूब लाईट तोड़ना या फ़िर खिड़कियों के शीशे तोड़ना ) उसके बाद .. मैंने सभी हौसेस के कैप्टेन्स को बुलाया ये बताने के लिए कि अगले महीने एन्नुअल फंक्शन है और इस बार मॉनीटरिंग कमिटी कि मीटिंग में डिस्कशन होगा और सब लोग अपने अपने हॉउस की तैयारी करके आएंगे.
(आपको बता दूँ हमरे स्कूल में 5 हॉउस थे पृथ्वी-भूरा, अग्नि-पीला, जल-नीला, आकाश-लाल, मोक्ष-गुलाबी..जिनके अपने अपने कलर की टी -शर्ट थी .. जोकि बच्चे बुधवार और शनिवार को सफ़ेद पैन्ट/ स्कर्ट के साथ पहनते थे। हर विद्यार्थी किसी ना किसी हाऊस से जुड़ा था। वरुण्जल हाऊस का कैप्टन था और मैं मोक्ष हाऊस की। गुलाबी मेरा पसन्दीदा रंग है। )
हमें ऊपर से सभी हाऊस के कैप्टन्स से सम्पर्क करने के आदेश थे। जब सभी कैप्टन्स अपनी अपनी सूचनाएं ले कर वापिस जाने लगे तो मैंने वरुण को रोका और कहा कि रिसैस में आकर मुझसे मिले अतिरिक्त सूचना के लिए, क्योंकि बार बार उसकी कक्षा में जाने से सबके मन में शक़ पैदा होता, इसलिए मैंने उसे इस तरह बुलाया था।
वो रिसैस में मेरी कक्षा में आया। इससे पहले कि मैं उससे कुछ कहती, उसने मुझे कहा कि मुझे पता है कि तुम्हें क्या कहना है। मैंने उस से पूछा कि क्या कहना है मैं भी तो जानू?
तो उसने कहा तुम मुझे थंक्स करना चाहती हो न कि उस दिन मैंने तुम्हें बारिश में तुम्हारे घर तक ड्राप किया .. एक बार तो में सकपका गई कि जो मैं कहना चाहती थी वो भी नहीं कहने दिया और जाने क्या राग अलापे जा रहा है ..
और हडबडाहट में मैंने कहा हाँ मैं यही कहना चाहती थी. बस मेरी मुंह से ये सुन के वो चला गया… मुझे बहुत गुस्सा आया ..
अगले हफ्ते मॉनीटरिंग कमेटी कि मीटिंग थी .. एक बड़ी लम्बी मेज़ थी जिसके एक तरफ़ सभी कक्षाओ के मोनिटर्स बैठे और एक तरफ़ हाउस के कैप्टेन्स और वाइस कैप्टेन्स। एक तरफ़ मैं थी और मैं ठीक उलटी साइड पर मेरा साथी था मीटिंग में ये तय हुआ कि ऑडिटोरियम, लाईट्स, साउंड, म्युझिकल इंस्ट्रुमेंट्स का प्रबंध स्कूल की तरफ़ से होगा और परफॉर्मेंस के आधार पर अंत में ग्रुप और सोलो ईनाम बांटे जायेंगे. ईनाम में एक घड़ी दी जायेगी सोलो पेरफोरमेर्स को और ग्रुप परफॉर्मेंस के सभी प्रतिभागियों को एक एक पारकर का पेन दिया जाएगा और कोई भी ग्रुप 5 लोगों से ज्यादा का नहीं होगा।
ज्यूरी में हमारी स्कूल की प्रधानाचार्या, मुख्य अतिथि, ड्रा से नाम निकाले हुए 2 अभिभावक और 2 अध्यापक होंगे. साथ ही होस्ट और होस्टेस का नाम भी हम ही निश्चित करेंगे उनके लिए नोटिस बोर्ड पे वोलंटियर्स को आगे आने का मौका दिया जाएगा.
कुछ दिनों बाद अलग अलग परफॉर्मेंस के ऑडिशन शुरू हुए उनमें से हमने 6 ग्रुप फाइनल किए जिनमें से 4 प्ले फाइनल में जाने के लिए चुने गए.
सोलो में हमने 4 सिंगेर्स और 4 डांसर्स को चुना. 2 लड़के दो लड़कियाँइन दोनों ही भागों में. उसके बाद पिछले साल के सबसे अच्छे शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए इनाम में स्वर्ण रजत और कांस्य पदक देने पर विचार हुआ और खेल में भी इसी तरह करने की योजना तय हुई. जो कि प्रधानाचार्या और हमारे मुख्य अतिथि बच्चों को उनके माता पिता के साथ प्रदान करेंगे. उसके बाद अंत में एक जोरदार प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम रखने का प्रस्ताव आया ताकि सभी लोग मुस्कराते हुए साल को अलविदा करें. साथ ही वार्षिकोत्सव के निमंत्रण पत्र ठीक एक सप्ताह पहले सभी बच्चों के माता पिता के पहुँचा दिए जायें ताकि वो उस दिन का कोई अन्य कार्यक्रम न रखें.
होस्टेस के लिए कोई उपयुक्त लड़की न मिलने पर सभी ने सर्व सम्मति से ये मन कि होस्टेस के लिए मुझे ही आगे जन होगा. और जो प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम था वो वरुण के जिम्मे लगाया गया.
धीरे धीरे वक्त गुज़रा और वार्षिकोत्सव का दिन आ ही गया हम लोग सभागार के मंच के एक दम पीछे थे सभी बच्चों को धीरज बंधा रहे थे कि मंच पे जाके घबराएँ नहीं.
मैंने एक गुलाबी रंग का पटियाला सलवार कमीज़ पहनी थी और बाल खुले थे कानों में प्लेटिनम टोप्स और चेहरे पे सिर्फ़ काजल और लिप गार्ड थी। वरुण ने सफ़ेद कुरता और ब्लू जींस पहनी थी. परदा खुला और मैंने शुरुआत की और सभी का स्वागत करते हुए सबको शान्ति पूर्वक बैठ जाने को कहा और सरस्वती वंदना से वार्षिकोत्सव का शुभ आरंभ किया.
सभी कार्यक्रमों के मंचन के बाद वरुण की बारी थी उसके स्टेज पे आते ही पूरा सभागार ठहाकों से गूँज उठा पहले मैंने उसे नहीं देखा पर दर्शकों के हँसने की आवाज सुनते ही मैंने गर्दन घुमा के जब उसकी तरफ़ देखा तो नाक पे चेरी जैसा कुछ था आंखें लाइनर से जबरदस्ती बड़ी बना राखी थी गलों पे जोकर जैसा गुलाबी रंग था और कपड़े… लाल रंग की निकर और पीले रंग की पोल्का डोट्स की शर्ट पहनी जिस पे फ्लेयर्स लगे थे वो पूरा एन्टीक पीस लग रहा था, और ऐसे चल रहा था जैसे सच मुच के जोकर चलते हैं.
फ़िर उसने मेरी तरफ़ देखा और गिर गया जान बूझ कर और मेरे पास आ के बोला जी क्या मैं ले सकता हूँ… मैंने कहा क्या .. उस वक्त माइक ओन था. सब लोग सुनते ही हंस पड़े .. फ़िर कहने लगा जी मैं तो माइक की बात कर रहा हूँ.
उसे माइक सौंप के मैं परदे के पीछे चली गई और फ़िर जो उसने अपने चुटकुलों से समां बंधा कि मैं परदे के पीछे होते हुए भी अपनी हँसी नहीं रोक पा रही थी। मैं सोच भी नहीं सकती थी कि हमारे कार्यक्रम का ये भाग इतना सफल होगा उसने कई सवाल किए जैसे कि
दुनिया मैं ऐसा कौन सा गेट है जिसमें कोई घुस नहीं सकता >> कोलगेट
ऐसी कौन सी कली है जो कभी नहीं खिलती >>> छिपकली
उसका कार्यक्रम ख़त्म होने ही वाला था कि अचानक फायर अलार्म बजने लगा. जल्दी जल्दी मैं सभी को सभागार से निकाल कर पास के ही एक मैदान मैं ले जाया गया.
मैं और मेरे साथ के समिति के सदस्य सभी को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे .. और सभी अभिभावकों को अपने बच्चे घर ले जाने की इजाज़त दे दी गई. सब घर चले गए. अगले दिन क्लास में ये अफवाह सुन ने को मिली कि सभागार की किचेन के पास जो फायर अलार्म था वो बजा था और शायद गैस के धुंए की वजह से फायर अलार्म बज उठा हो.
पर बाद में जब प्रधानाचार्य ने आके असेम्बली में खेद प्रकट किया और हमें सूचित किया कि हमारे स्कूल का हेड बॉय शौचालय में धुम्रपान कर रहा था जिस वजह से फायर अलार्म बजा चूँकि किचेन और शौचालय दोनों पास ही थे इसीलिए इस बात का पता नहीं लग पा रहा था कि वजह क्या थी.
उसके बाद CCTV से देखा गया कि अलार्म की आवाज़ आते ही हेड बॉय शौचालय से निकला उसके हाथ में अधजली सिगरेट थी उसने जमीन पे फेंकी और बुझा दी और बाहर की तरफ़ चला गया. इस मामले में हेड बॉय को 10 दिन के लिए स्कूल से निकाल दिया गया. और सबसे खुशी की बात तो ये थी हेड बॉय के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार वरुण ही था उसके बाद.
तो जाहिर सी बात है उसे हेड बॉय बना दिया गया. और हम रोज़ साथ में स्कूल के चक्कर लगते और धीरे धीरे हम दोस्त से अच्छे दोस्त बन गए. दोस्त होने के बावजूद हम में एक दम दुश्मनों की तरह लडाई होती थी.
हालांकि हम एक दूसरे के विचारों से सहमति जताते थे पर फ़िर भी हममें लड़ाई कुछ ऐसी बातों पर होती थी जिन्हें कोई सोच भी नहीं सकता था। ऐसा ही एक मुद्दा था मेरी स्कूल ड्रेस की स्कर्ट का साईज़… बढती हाईट के साथ मेरी स्कर्ट छोटी हो चुकी थी और अब वो मेरे घुटने से ऊपर आने लगी थी।
जब मैंने मां से नई स्कर्ट लाने की बात की तो उन्होंने यह कह कर टाल दिया कि अगले साल तो तुम्हारा स्कूल खत्म ही हो जाएगा तो सिर्फ़ एक साल के लिए मैं तुम्हें नई स्कर्ट लेके दूं? और मामला वहीँ दब गया.
फ़िर एक दिन मैं गेम्स पीरियड में ग्राउंड में बास्केट बाल खेल रही थी अब बास्केट में बाल डालने के लिए उछलना तो पड़ता है, तो जब बाल मेरे हाथ में आती और मैं बास्केट में डालती तो सब लड़के टक टकी लगाये मेरी जांघों को निहारने लगते ..
मुझे भी अजीब सा महसूस होता था कि बार बार मुझे ही क्यूँ मोका मिल जाता है बाल को बास्केट में डालने का .. वहीँ कुछ दूरी पर से वरुण स्टाफ रूम की तरफ़ जा रहा था उसके हाथ में नोटबुक्स थी नोटबुक्स स्टाफ रूम में रख के आने के बाद वो थोड़ी देर के लिए मेरा गेम देखने के लिए रुक गया और ये बात उसने नोटिस कर ली आख़िर लड़का है लड़कों की आदत नहीं जानेगा तो और किसकी जानेगा।
उस वक्त उसने मुझे पास बुलाके सिर्फ़ छुट्टी के समय रुकने को कहा कि उसे कोई बात करनी है। मैं आखिरी पीरियड टक यही सोचती रही कि आखिर उसे ऐसी क्या खास बात करनी है जो वो तब नहीं कर सकता था।
मैं छुट्टी के बाद गेट पे उसका वेट कर रही थी वो अपने फ्रेंड्स के साथ था .. मुझे देख उसने अपने फ़्रेन्ड्स को जाने के लिए कहा और कहा कि वो शाम को उन्हें कॉल करेगा.
मेरे पास आते ही उसने सीधे बोला ..’ मेरे पास दाल नहीं गली तो अपने क्लास के लड़कों को रिझाने मैं लगी हो ..’ मैंने उसे अजीब तरह से देखते हुए कहा,’ क्या बोल रहे हो दिमाग तो ठीक है .. पहले सोचो तोलो और फ़िर बोलो कि बोल क्या रहे हो…’
तो फ़िर कहने लगा तुमरे पास स्कर्ट लेने के पैसे नहीं है तो मेरे डैड की गारमेंट फैक्ट्री है मैं बनवा देता हूँ .. .बस ये सुनने की देर थी मेरा हाथ उस पे उठ गया पर उसने मेरा हाथ रोक लिया और मैंने कहा कि .. तब से देख रही हूँ बेसिर पैर कि बातें किए जा रहे हो .. अपनी हद मैं रहके बात किया करो .. जो कहना है साफ साफ कहो .. मुझे जलेबी कि तरह सीधी बातें समझ नहीं आती।
कहने लगा- तुम्हें नहीं लगता तुम्हारी स्कर्ट कुछ ज्यादा ही छोटी है? तो मैंने कहा इसमें लगने वाली क्या बात है वो तो छोटी ही है .. तो मुस्कुराते करते हुए कहता- तुम्हें ज़रा भी शर्म है के नहीं तुम्हारी क्लास के लड़के जाने तुम्हें कैसे देखते हैं जैसे तुम कोई नुमाइश की चीज़ हो !
तो मैंने कहा तुम्हें क्यूँ इत्ती जलन हो रही है अगर वो मुझे देखते हैं तो .. कुछ देर सोचने के बाद हडबडाते हुए बोला ‘तुम मेरी दोस्त हो तुम्हें हो न हो मुझे अपने दोस्तों की बहुत फिकर है और हाँ कल से अगर ये स्कर्ट पहन के आना हो तो प्लीज़ नीचे स्टाकिंग्स पहन के आना ..अब घर जाओ तुम्हें देर हो रही होगी और मैं रिक्शा से घर चली गई।
कुछ दिन बाद टेनिस टूर्नामेंट था जयपुर में हमारे ही स्कूल की जयपुर वाली ब्रांच में ..हमारे शहर में हमारा स्कूल टॉप पे था और इसीलिये हमें टूर्नामेंट के लिए बुलाया गया था .. वरुण का नाम सेलेक्ट हुआ था और उसके साथ कोई वंशिका नाम की लड़की थी जिसे मिक्स्ड डबल्स मैं उसके साथ खेलना था .. (ये बात वरुण ने ही मुझे बताई थी )
वंशिका !!! बेहद खूबसूरत चार्मिंग और फ़ैशनेबल लड़की थी उसके बाल करली थे और कमर से झूलते रहते थे, रंग सांवला, आँखों में मोटा मोटा काजल, नाक में सानिया मिर्जा टाइप नथ और कानों में बड़े बड़े बाले होते थे टाई हमेशा कालर से नीचे लटकती हुई शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए स्कर्ट इतनी छोटी कि किसी को नीचे झुक के देखने की जरूरत न पड़े पैरो में व्हाइट स्पोर्ट्स शूज़ टखने तक की जुराबें, कलाई पर अदीदास और नाइकी के बैंड्स. इसमें कोई शक नहीं कि वंशिका पूरे स्कूल में सबसे अच्छा टेनिस खेलती है। हालांकि कई और लड़कियां, जिनमें मैं भी हूं, अच्छा टेनिस खेल लेती हैं।
मैंने उसे वरुण के साथ प्रक्टिस करते हुए देखा था कई बार शाम को वरुण और वंशिका साथ में स्कूल ग्राउंड में प्रक्टिस के लिए जाया करते थे और मैं कभी कभी अपनी ट्युशन गोल करके उसे देखने जाया करती थी कि कहीं वंशिका मेरी जान पे डोरे तो नहीं डाल रही !
वरुण किसी लड़की के हाथ में आने वालों में से नहीं था। तब तक मैं उसकी बेस्ट फ्रेंड बन चुकी थ। हम दोनों बहुत झगड़ते थे पर बात किए बगैर रह भी नहीं सकते थे. 6 नवम्बर को वरुण और वंशिका को जयपुर के लिए निकलना था प्रशांत सर के साथ. 4 नवम्बर को मुझे 7 वें पीरियड में गेम्स रूम से बुलावा आया. वहां पे प्रधानाचार्या भी थी.
सर ने मुझसे पूछा कि क्या तुम टूर्नामेंट के लिए जाना चाहती हो. मैं कुछ समझ नहीं पाई और मैंने कहा कि सर वंशिका ने बहुत प्रक्टिस की है इस टूर्नामेंट के लिए, इसीलिए प्लीज़ उसे जाने का मौका दिया जाए।
पर उन्होंने मुझे बताया कि वंशिका के पैर में कल दोपहर को खेलते समय मोच आ गई थी शाम को एक्स-रे के बाद पता चला है कि उसका पैर भागते वक्त मुड़ने कि वजह से फ्रक्चर हो गया है और सेकंड बेस्ट प्लेयर रुपाली का मैच दूसरे स्कूल के साथ है इसीलिए वो भी नहीं चल सकती .. तो बची सिर्फ़ तुम क्या चल सकती हो तुम ..पहले मैंने बहाना बनाया सर मेरी ज्यादा प्रक्टिस भी नहीं है तो सर ने मुझे यह कहकर आश्वस्त किया वरुण अच्छा खेलता है तुम्हें उसके साथ खेल के कुछ न कुछ सीखने को ही मिलेगा.
मैंने हालात सुन के हाँ कर दी मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं था .. और फ़िर अपने स्कूल का नाम रोशन करने का इस से बेहतर तरीका और क्या हो सकता है और सोने पे सुहागा तो ये था कि वरुण का साथ मिलेगा पूरे तीन दिन ..!!
शायद भगवान् भी यही चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझें इसीलिए उन्होंने हमें आपस में घुलने मिलने का एक स्वर्णिम अवसर दिया था। सुबह 8 बजे हमने जयपुर जाने वाली बस ली। बस में काफी भीड़ थी इसीलिए बैठने कि सीट नहीं मिली। सर हमसे कुछ ही दूरी पर खड़े थ… वरुण और मैं दोनों साथ में खड़े थे मैंने पय्जामी और कमीज़ पहनी थी और उसने जींस और टी शर्ट। वो क्यूट लग रहा था। भीड़ हर स्टैंड के गुजरने के साथ बढती जा रही थी।
जैसे ही बस में ब्रेक लगती मेरा कन्धा उसके बाजू से टकराता था और में तुंरत पीछे हो जाती थी। उसे भी पीछे से धक्के लग रहे थे और मुझे भी. हम दोनों इतने करीब थे कि उसकी सांसें मेरे माथे को छूकर गुज़र रही थी। उसके सांसों की खुशबू लेते ही कुछ पल के लिए मुझे स्वर्ग में होने का एहसास होता।
फ़िर हमारे पास वाली एक सीट से एक अंकल उठे, उनका स्टाप आ गया था वरुण झट से बैठ गया (वो बहुत ही फुर्तीला है ) दो सीट आगे एक बूढी आंटी खड़ी थी, उसने उन्हें पास बुलाया और उन्हें सीट दी. ये देख कर में दंग रह गई कि उसके माँ बाप ने उसे कितने अच्छे संस्कार दिए हैं. वो जानता है कि बडो बूढों का आदर सम्मान कैसे किया जाता है। अब मेरे दिल में उसके लिए प्रेम ही नहीं इज्ज़त भी बढ़ गई थी। इसी बीच मैंने देखा कि हमारे अध्यापक को भी बैठने की जगह मिल गई थी।
जैसे कैसे कुछ स्टैंड के बाद हम दोनों को सीट मिल गई और हम बैठ गए। वो खिड़की की तरफ़ बैठा था. हवा का झोंका आते ही मैं उसके बदन की खुशबू को साफ महसूस कर सकती थ॥ मैं खिड़की से बाहर देखने के बहाने से उसे निहार रही थी कि वो कैसे हवा से गिरते अपने लंबे बालो को गालों पर से किस तरह से समेट रहा है।
फ़िर जब थोड़ी देर बाद उसे लगता कि मैं उसे देख रही हूँ तो मैं इस तरह खिड़की से बाहर देखती जैसे मैंने कुछ देखा ही न हो. फ़िर अचनक रास्ते में मौसम बेहद खुशगवार होने लगा आसमान में बदल छा गए मधुर मधुर हवा चलने लगी।
मैंने उस से कहा कि प्लीज़ मुझे बैठने दो .खिड़की पे ..
बहुत बार कहने के बाद उसने मुझे बैठने दिया. मैंने अपने बाल खोल लिए। अब मेरी लम्बी लम्बी जुल्फें हवा में लहराने लगी जो कभी उसके गालों को चूमती तो कभी उसके बदन से लिपट जाती.
वो मेरे बालों को हटाने की नाकाम कोशिश करता रहा. पर हवा काफी तेज़ थी. फ़िर मैंने आसमान से हलकी हलकी रिम झिम फुहारें गिरती देखी. और थोड़ा सा सूरज भी निकला था तब.
मुझे सिर्फ़ इन्द्रधनुष का इंतज़ार था। रेनबो तो नहीं पर एक मोर नाचता हुआ जरूर दिखा जिसे देखने की इच्छा में उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर अनजाने में रख दिया . जिसके लिए उसने मुझसे बाद में माफ़ी भी मांगी. हमारे सर जो आगे कहीं बस में खर्राटे भर रहे थे.
वरुण के साथ वक्त बहुत अच्छा गुज़र रहा था. उसने मुझे हंसा हंसा के मेरे गालो में दर्द करवा दिया. इसी बीच उसने मुझसे पूछा कि तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड नहीं है.
मैंने कहा- नहीं.
उसने कहा तुम बहुत प्यारी हो तुमसे कभी किसी लड़के ने उलटी सीधी कोई बात नहीं की.
मैंने कहा- कही है मेरी क्लास के लड़कों ने भी कही है और मेरे कालोनी के लड़कों ने भी. जब भी कोई ऐसी बात करता है तो मेरा एक ही सवाल उनसे होता है कि क्या वो मुझसे शादी करेंगे. अगर वो कहते हैं- हाँ तो में कहती हूँ की ये सब तो फ़िर शादी के बाद भी हो सकता है इतनी जल्दी किस बात की है. और अगर वो कहते हैं न तो मैं कहती हूँ कि जिसे ख़ुद पे ही इतना भरोसा नहीं कि वो मेरे साथ जिंदगी बिता भी पायेगा के नहीं ऐसे इन्सान को में अपना सब कुछ कैसे सोंप दूँ…!! और बात यही ख़तम हो जाती है.
मेरी बात सुनके हँसते हुए उसने कहा तुम बहुत चालू लड़की हो सही ग़लत खूब समझती हो. पर मैं तुमसे पहली और आखिरी बार कह रहा हूँ- तुम मुझे इस तरह से मत देखा करो, हम सिर्फ़ अच्छे दोस्त हैं और कुछ नहीं. अगर एक दोस्त की तरह रहोगी तो मुझमें एक सच्चा दोस्त पाओगी और अगर तुम दोस्त बन के नहीं रहना चाहती तो मुझसे दूर रहो. मुझ पे काफी जिम्मेदारियाँहै और अभी ये उमर भी नहीं है हमारी ये सब करने की, न ही ये कोई खेल है. ऐसे जल्दी में लिए फैसलों से जिंदगी बर्बाद भी हो सकती है. मुझे अब तक समझ नहीं आया कि वो मेरे मन की बात कैसे जान लेता है.
आज का अंक यही समाप्त हुआ अगला भाग आपको जल्दी ही मिल जाएगा…!!!!
मैं अपने पाठकों को अपनी कहानी के हर एक छोटे से छोटे पहलू से अवगत कराना चाहती हूं, इसलिए प्यारे पाठको! मैं जानती हूं कि आप कुछ और ही पढ़ना चाह रहे होंगे इस कहानी में, पर अभी उसमें बहुत देर है। इसलिए संयम बनाए रखें और पढ़ते रहें। Indian Sex Stories
प्यारे भाइयो मैं एक और कहानी शुरू करने जा रहा हूँ इस कहानी को मैं सिर्फ़ हिन्दी में पोस्ट कर कर रहा हूँ क्योंकि ये कहानी मैने नही लिखी है आप सब पाठक-पाठिकाएँ, लेखक-लेखिकाएँ अपनी गर्मागर्म हिंदी सेक्सी स्टोरी, चुदाई की कहानी भेज सकते हैं
मेरा नाम अयान है. एज 25, हॅंडसम ऑर गुड लुकिंग हूँ
ये स्टोरी तब की है जब मैं अम्मी के घर था.
मैं अपनी अम्मी की फॅमिली मे सब से पहला बच्चा हूँ. ऑर पहले बच्चे को बोहत प्यार दिया जाता है तो मुझे भी मामू खाला वग़ैरह सब बोहत प्यार करते थे.
मैं शुरू ही से अपनी नानी की घर रहता था. ऑर सब लोग मुझ से बहुत प्यार करते थे.
नानी के घर मे 2 खाला ऑर ऐक मामू थे.
बड़ी खाला का नाम शमा है ऑर छोटी खाला का नाम अंबर है. मैं घर मे अंबर खाला के साथ बहुत फ्री था ऑर वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थी.
शमा खाला की शादी हो गई थी और मामू की भी शादी हो गई थी.
मैं जब भी नानी के घर जाता था तो अंबर खाला के रूम मे सोता था.
अंबर खाला 20 साल की थी. 20 साल की एज मे भी वो बहुत खूबसूरत नज़र आती थी. उनके ब्रेस्ट का साइज़ 36 था.
मैं जब घर जाता था तो अंबर खाला मेरे सामने दुपट्टा नही लेती थी.
मामू की शादी हो गई थी ऑर वो रात को अपने रूम मे मामी के साथ होते थे.
ऐक दिन रात के 10 बज रहे थे कि मैं अंबर खाला के साथ सोया था.
अंबर खाला को वॉशरूम जाना था.
वॉशरूम कमरे से बाहर था अंबर खाला चली गई ऑर तरीबन 10 मिंट लगा कर वापस आई.
जब वो बेड पे लेटी तो मेरी आँख खुल गई मगर मैं फिर भी सोने की आक्टिंग करता रहा.
खाला मेरे साथ आ कर लेट गई ऑर मेरा सिर उठा कर अपने बाज़ू पर रख दिया ऑर मुझे हग कर के लेट गई.
जब खाला ने मुझे हग किया तो मेरा फेस उनकी चेस्ट के क़रीब था.
मुझे उनके जिस्म की स्मेल बहुत अच्छी लग रही थी.
खाला मेरे साथ चिपक कर लेटी हुई थी. मुझे उनके जिस्म की स्मेल बोहत अच्छी लग रही थी.
कुछ देर बाद मैं ने अपना फेस खाला के मम्मो से उपेर नंगे सीने पर रख लिया. ऑर मेरे लिप्स उनके सीने को टच करने लगे..
मैं ने आहिस्ता से खाला के सीने पर किस कर लिया. जिस पर खाला हल्का सा हिली ऑर फिर मेरा सिर पीछे कर के मेरी आँखो मे देखा मगर मैं सोने का नाटक कर रहा था. तो खाला समझी कि शायद नींद मे ये सब हो गया होगा.
पहली बार मुझे अपनी खाला के लिए कुछ अजीब सी फीलिंग हुई थी. मेरे माइंड मे पहली बार अपनी ही सग़ी खाला के साथ सेक्स करने का ख़याल आया. मगर सोचने वाली बात तो ये थी कि मैं उसके साथ सेक्स केसे करूँ गा
मैं ने कुछ देर बाद खाला के नंगे सीने पर मम्मो से थोड़ा उपर ऐक ऑर किस किया. जिस पर खाला हल्की सी मूव हुई फिर मेरी तरफ देखा ऑर अब काए बार उन्हो ने मेरा फेस अपने सीने पर ज़ोर से दबा दिया ऑर मेरे बालों मे अपनी फिंगर्स मूव करने लगी..
Hindi Sex kahaniya -
मेरा लंड हार्ड हो गया था. मैं सोच रहा था कि अपने लंड को केसे खाला से टच ना होने दूं. मगर खाला तो मेरे साथ चिपक कर लेटी हुई थी. खाला को भी मेरा लंड हार्ड होता हुआ फील हुआ था.
खाला ने मुझे टाइट हग किया ऑर मेरी लेग्स के बीच मे अपनी लेग्स ऑर मेरी लेग को अपनी लेग के उपेर रख दिया. जिस से उनकी लेग मेरे लंड से टच हो रही थी क्यू कि मेरी लेग्स के बीच मे उनकी लेग आ गई थी.
खाला को पता लग चुका था कि मैं जाग रहा हूँ. मगर उन्हो ने मुझ पर कुछ ज़ाहिर नही होने दिया.
अब खाला अपनी लेग्स को स्लोली स्लोली मूव कर रही थी मेरी लेग्स के बीच मे. जिस से उनकी लेग मेरे लंड को बार बार टच हो रही थी.. मुझे पसीना आ रहा था. क्यू कि मैं खुद से कुछ नही कर सकता था. मुझ मे हिम्मत नही हो रही थी कुछ करने की क्यू कि अगर खाला ने माइंड किया ऑर सब को बता दिया तो मुझे बहुत मार पड़ेगी .
खाला ऐसे ही कुछ देर तक मेरे लंड से अपनी लेग लगाती रही. फिर ऐक दम से उनका जिस्म अकड़ गया. उन्हो ने मुझे टाइट हग कर लिया. ऑर मेरे लंड पर बार बार अपनी लेग मूव करती रही. खाला का जिस्म अकड़ चुका था. मैं डर गया.
मैं समझा कि पता नही खाला को क्या हो गया है अचानक से. खाला की साँसे तेज थी. ऑर उन्हो ने मुझे हग किया हुआ था.
कुछ देर बाद खाला अपनी जगह से उठी ऑर वॉशरूम चली गई. जेसे ही खाला रूम से निकली मैं ने जल्दी से अपने लंड को हाथ मे लिया ऑर मूठ मारने लगा..
अभी मैं अपने लंड पर मूठ मार रहा था कि अचानक खाला रूम मे एंटर हो गई. मैं ने जल्दी से लंड से हाथ हटा दिया. ऑर आइज़ क्लोज़ कर लीं. खाला ने मुझे देख लिया था मगर अंजान बनी रही ऑर कुछ नही बोली. वो बेड पर आ कर मेरे साथ लेट गई. ऑर अपना फेस दूसरी साइड पर कर लिया ओर मेरी तरफ बॅक कर लिया.
इसी तरह लेटे लेटे उन्हो ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने पेट पर रख दिया जिस की वजह से मैं उनके साथ बॅक से चिपक गया. अब मेरा लंड हार्ड था जो कि खाला के अचानक आने से अपना पानी भी नही निकाल सका.. अब मेरा हार्ड लंड मेरी खाला की गान्ड से टच होना शुरू हो गया.
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मेरा लंड खाला की गान्ड से टच होना स्टार्ट हो गया. खाला की नरम गान्ड से मेरा लंड टच हुआ तो मेरा लंड ऑर ज़्यादा अकड़ गया.
मुझे खाला की नरम गान्ड बहुत अच्छी लग रही थी. मैं ने अपने आप को थोड़ा सा मूव किया तो मेरा लंड खाला की गान्ड की लकीर पर आ गया.
लंड जेसे ही खाला के गान्ड की लकीर पर आया. खाला के जिस्म को ऐक झटका लगा ऑर उन्हो ने मेरा हाथ अपने पेट पर ऑर टाइट कर लिया ऑर थोड़ा सा पीछे हो गई.
जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी गान्ड की लकीर के बीच मे फँस गया.
मुझे बोहत अच्छा लग रहा था. मैं ने अपने जिस्म को हल्का सा मूव किया तो मेरा लंड खाला की लकीर मे थोड़ा सा आगे हो गया.
खाला ने अपनी गान्ड को टाइट कर लिया. जिसकी वजह से मेरा लंड खाला की गान्ड के बीच मे फँस गया. मुझे बोहत अच्छा लग रहा था.
मैं ने आज तक कभी किसी लड़की के जिस्म को टच नही किया था. पहली लड़की मिली ऑर वो भी मेरी सग़ी खाला. मैं बोहत एग्ज़ाइटेड था.
एग्ज़ाइट्मेंट मे मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करूँ. मैं अपने जिस्म को आगे पीछे मूव करने लगा. ऑर खाला को भी मज़ा आने लगा.
वो भी अपनी गान्ड को कभी टाइट कर लेती ऑर कभी खोल देती. इतनी देर से हम लोग ये सब कर रहे थे मगर आहिस्ता आहिस्ता.
ना खाला कुछ बोल रही थी ऑर ना मैं कोई आवाज़ निकाल रहा था.. मुझे तो मुफ़्त मे मज़े मिल रहे थे. मैं कुछ बोलना भी नही चाहता था कि कहीं ऐसा ना हो कि खाला को बुरा लग जाए ऑर वो किसी को बता दे.
जब मेरा लंड पानी छोड़ने वाला था तो मेरा दिल कर रहा था कि मैं अपना पूरा लंड खाला की गान्ड मे घुसा दूं मगर बीच मे शलवार थी जिस की वजह से मैं ऐसा नही कर सकता.
मैं ने ऐक हाथ से अपना ट्राउज़र नीचे किया ऑर अपना लंड बाहर निकाल कर अपना लंड खाला की गान्ड की लकीर मे घुसा दिया.
अब खाला की गान्ड ऑर मेरे लंड मे सिर्फ़ ऑर सिर्फ़ खाला की शलवार थी. मेरा बस नही चल रहा था कि मैं ऐक दम से खाला की शलवार उतार दूं.
झटके मारते मारते मैं ने ऐक 2 झटका ज़ोर से मारे ऑर खाला की गान्ड की लकीर मे उसकी शलवार के उपेर ही फारिघ् हो गया.
जेसे ही मैं ने अपना पानी निकाला मुझे कुछ सकून मिला. ऑर मैं ने अपना लंड वापस अपने ट्राउज़र मे डाल दिया.
खाला ने मेरा हाथ छोड़ कर अपना हाथ अपनी गान्ड पर शलवार के उपेर रखा जहाँ पर मेरे लंड का पानी लगा हुआ था. जो खाला की गान्ड को शलवार के अंदर से भी गीला कर रहा था. खाला ने मेरे पानी को हाथ लगाया. ऑर बेड से उठ कर वॉशरूम मे चली गई.
खाला जेसे ही रूम से बाहर निकली मैं ने आइज़ खोली. ऑर उठ कर खाला के पास गया. मैं ने देखा की वॉशरूम का डोर खुला हुआ है. ऑर खाला की बॅक साइड दरवाज़ी की तरफ है.
मैं छुप छुप कर खाला को देखने लगा.. खाला ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे ऑर अपनी चूत मे फिंगरिंग करने लगी.
मैं पहली बार किसी लड़की का नंगा जिस्म देख रहा था. अपनी खाला को नंगा देख कर मेरा लंड फिर से हार्ड होने लगा.
खाला की बॅक दरवाज़े की तरफ थी. ऑर वो फिंगरिंग कर रही थी. उसको देख कर मैं ने अपना लंड ट्राउज़र से बाहर निकाला ओर मूठ मारने लगा.
मूठ मारते मारते जोश मे मेरा हाथ वॉशरूम के दरवाज़े पर लग गया.
जिसकी वजह से वॉशरूम के दरवाज़े की हल्की सी आवाज़ हुई. खाला ने ऐक दम घबरा कर पीछे मूड़ कर देखा. मगर मैं जल्दी से साइड मे होगया.
मैं डर गया था. ऑर शायद खाला ने भी मेरी ऐक झलक देख ली थी.
मैं जल्दी से बेड पर आ कर लेट गया.
डर के मारे मेरी गान्ड फॅट गई थी. ऑर मेरा लंड जो कुछ देर पहले किसी रोड की तरह टाइट था. खाला के डर की वजह से ऐक मरे हुए साँप की तरह हो गया था.
खाला जल्दी से रूम मे आई ऑर लाइट ऑन कर के मेरी तरफ देखा. मैं ने अपनी आइज़ को बिल्कुल हल्का सा ओपन रखा हुआ था ऑर मुझे नज़र आ रहा था सब कुछ
खाला मेरे क़रीब आई ऑर मेरी आइज़ ने देखने लगी. पता नही उन्हो ने क्या अंदाज़ा लगाया. उसके फेस पर ऐक स्माइल आई.
ऑर उन्होने वापस जा कर लाइट ऑफ की.
लाइट ऑफ करने के बाद वो मेरे साथ बेड पर आ कर लेट गयी. ओर ऐक बार फिर से मुझे हग कर लिया.
मैं भी अपने लंड का पानी ऐक बार निकाल चुका था. मैं ने भी खाला को हग किया ऑर फिर हम दोनो सकून से सो गये थे.
नेक्स्ट डे जब हम दोनो सुबह उठे तो एक दूसरे से कोई ज़िक्र नही किया.
खाला ने मेरी तरफ देखा ऑर कहा कि “जाओ जा कर नहा लो". मैं तुम्हारे कपड़े निकाल देती हूँ.
मैं नहाने चला गया ऑर नहा कर खाला को आवाज़ दी ऑर कपड़े देने का बोला.
खाला कपड़े ले कर आई. और मैने अपना हाथ बाहर निकाला मगर खाला ने डोर को थोड़ा सा धक्का दिया और अपना फेस अंदर कर के मुझे देखा ओर कहा कि जल्दी से बाहर आ कर नाश्ता कर लो.
मैं बाहर आया तो खाला मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैने शरम के मारे सिर झुका लिया.
फिर खाला ने मुझे कहा: तुम बैठो मैं भी जल्दी से नहा कर आती हूँ. मैं जब आवाज़ दूं तो मुझे मेरे कपड़े दे देना वॉशरूम मे.
मैने कहा की ठीक है.
खाला वॉशरूम मे गई ऑर वॉशरूम का डोर ओपन छोड़ दिया. और नहाने लगी. मैं इस एंगल पे बैठा था कि खाला मुझे नज़र नही आ री थी. नहाने से फारिघ् हो कर खाला ने मुझे आवाज़ दी ऑर कहा: कपड़े दे दो.
मैं खाला के कपड़े ले कर डोर के पास गया तो खाला एक दम से थोड़ी सी बाहर की तरफ हुई जिस की वजह से मुझे उनका एक मम्मा (ब्रेस्ट) नज़र आया. जब खाला ने देखा कि मैं उनका मम्मा देख रहा हूँ तो खाला ने जल्दी से मुझे कहा कि सॉरी. और अंदर हो गई.
जब खाला नहा कर निकली तो उनके कपड़े उनके गीले जिस्म के साथ चिपके हुए थे. जिस की वजह से उनके जिस्म का एक एक हिस्सा क्लियर नज़र आ रहा था.
मैं खाला के जिस्म को देख रहा था तो खाला बोली कि : क्या देख रहे हो मेरी तरफ.
मैने कहा : कुछ नही.
इतने मे मामी भी अपने रूम से निकल आई. और मामी ने कहा कि तुम दोनो बैठो. मैं नाश्ता लगाती हूँ. फिर मुझे पति के साथ जाना है 2 दिन के लिए.
मामी ने नाश्ता ला गया ऑर मामू को आवाज़ दी. मामू भी नाश्ता करने आ गये ऑर हम ने नाश्ता किया.
मैं खाला के साथ वाली चेयर पे बैठा हुआ था. तो खाला अपनी टाँग मेरी टाँग के साथ लगाने लगी.
मैने जल्दी जल्दी नाश्ता ख़तम किया और खाला से कहा कि मैं बाहर जा रहा हूँ क्रिकेट खेलने.
मामू ने मुझे कहा कि तुम बाहर ना जाओ. खाला घर मे अकेली है. अब हम लोग जा रहे हैं दो दिन बाद आएँगे . जब तक तुम ने घर से बाहर नही जाना. और खाला का ख़याल रखना है. मैने खाला की तरफ देखा ऑर कहा कि मैं खाला का बहुत ख़याल रखूँगा .
हम लोग नाश्ते से फ्री हुए तो मामी उठ कर अपने रूम मे चली गई. और तय्यारी करने लगी.
और मैं उठ कर टीवी लाउंज मे आ गया ऑर केबल पर मूवी देखने लगा.
खाला ने बर्तन वग़ैरह समेटे ऑर टीवी लाउंज मे आ कर मेरे साथ सोफे पर बैठ गई ऑर मूवी देखने लगी.
मामू भी वहाँ ही आ गये ऑर खाला से बोले : तुम अकेली बोर हो जाओगी . ऐसा करो कि तुम अपनी फ्रेंड को बुला लो 2 दिन के लिए.
खाला ने कहा कि नही भाई मैं ऐसे ही ठीक हूँ ऑर अयान (मैं) है ना मेरे साथ. मुझे कुछ प्राब्लम नही है.
मामू बोले नही यार. कम आज़ घर मे ज़्यादा बंदे होंगे तो मुझे कोई टेन्षन तो नही होगी ना.
अब खाला भी कुछ नही कर सकती थी क्यू कि बड़ा भाई बोल रहा था ऐसा करने को. तो खाला ने अपनी फ्रेंड जिसका नाम सोबिया है. उसको कॉल कर दी तो सब बात बताई.
सोबिया ने अपनी अम्मी से पार्मिशन ली ऑर कहा की ठीक है मैं कुछ देर मे आ जाउन्गी. जिस पर मामू थोड़ा रिलॅक्स हो गये. और अपने रूम मे चले गये.
खाला उठ कर घर की सफाई करने लगी. सब चीज़ें समेट कर खाला घर मे झाड़ू लगाने लगी.
खाला जब रूम से बाहर झाड़ू लगा रही थी तो मैं उनको देख रहा था. उनकी गोल गोल गान्ड मुझे बहुत अच्छी लग रही थी ऑर मुझे रात वाली हरकत याद आ गई.
रात वाली हरकत को याद कर के मेरा लंड खड़ा होने लगा. ऑर मैं उसको शलवार के उपर से पकड़ कर सहलाने लगा.
खाला ने जब बाहर से झाड़ू लगा ली तो टीवी लाउंज मे आ गई झाड़ू लगाने के लिए.
खाला ने दुपट्टा नही लिया हुआ था. जब वो मेरे सामने आई तो मुझे महसूस हुआ कि शायद खाला ने ब्रा भी नही पहना है. ये सोचते ही मेरा लंड एक दम से डंडे की तरह खड़ा हो गया.
मैने जल्दी से अपने लंड पर हाथ रख दिया ऑर अपनी टाँग के उपर टाँग रख दी.
खाला की नज़रो मे मेरा खड़ा हुआ लंड आ गया था. मैं घबरा गया था कि कहीं खाला को बुरा ना लग जाए.
खाला मुस्कुरा दी ऑर कमरे मे झुक कर झाड़ू लगाने लगी. जिस की वजह से खाला के मम्मे लटक कर कमीज़ से जुड़ गये थे.
मैं अपने लंड को बिठाने की बहुत कोशिश कर रहा था मगर लंड था कि सोने का नाम ही नही ले रहा था. मेरे माथे पर पसीना आ गया था कि अगर खाला ने मेरा खड़ा हुआ लंड देख लिया तो क्या होगा .
खाला मेरी हालत को फील कर रही थी ऑर एंजाय कर रही थी
खाला ने मेरे माथे पर पसीना देखा तो बोली: अयान तुम्हारी तबीयत ठीक है ना?
मैं: हाँ, हाँ हाँ मैं ठीक हूँ. तो खाला मेरे पास आई ऑर कहा कि ये तुम्हे इतना पसीना क्यू आ रहा है.
मैं: पता नही गर्मी है बहुत शायद इस वजह से.
खाला: नही गर्मी तो नही है इतनी
फिर खाला ने मेरे माथे पे हाथ लगाया ऑर बोली.
तुम्हे तो बुखार भी नही है. फिर क्या हुआ.
और इसी तरह खाला मेरे सामने खड़ी हुई थी ऑर मैं खाला के मम्मो की तरफ देख रहा था.
एक दम से खाला ने अपनी कमीज़ का पल्लू उठाया ओर मेरे माथे पर से पसीना सॉफ करने लगी.
कमीज़ का पल्लू उठाने की वजह से उनका पेट मुझे नज़र आने लगा. मैं खाला का पेट देख रहा था ऑर खाला मेरे माथे पर से पसीना सॉफ कर रही थी.
खाला जब मेरे सामने से पसीना साफ कर रही थी तो मैं सोफे पर बैठा हुआ था. और खाला मेरी टाँगों के बीच मे खड़ी हुई आहिस्ता आहिस्ता मेरा पसीना सॉफ कर रही थी.
माथे पर पसीना सॉफ करने के बाद खाला मेरे सिर पर बालों मे अपनी कमीज़ से पसीना साफ करने लगी. जिसकी वजह से खाला की कमीज़ थोड़ा सा ऑर उपर हो गई.
खाला ने मेरा सिर नीचे किया तो मेरा फेस खाला के पेट से टच होने लगा.
जेसे ही मेरा फेस खाला के पेट से टच हुआ “““मेरा लंड रोड की तरह सीधा खड़ा हुआ ऑर खाला की शलवार के उपर से उसकी चूत को टच करने लगा""".
खाला के निचले जिस्म को एक हल्का सा झटका लगा. मगर खाला अपनी जगह से हिली नही.
अब मेरा लंड शलवार के उपर से खाला की चूत को टच क्र रहा था तो खाला ने मेरा फेस अपने पेट पर दबा दिया. और ज़ोर ज़ोर से मेरे बालों पर फिंगर्स मूव करने लगी. अब एक ओर चेंजिंग भी आ गई थी कि खाला मेरे सिर मे फिंगर्स मूव करने के साथ साथ “‘अपनी चूत को भी मेरे लंड पर हल्का हल्का मूव करने लगी““
ऐसे ही चल रहा था कि अचानक घर के मेन डोर पर दस्तक हुई.
और खाला जल्दी से मुझसे अलग हुई.
खाला की आँखे लाल हो रही थी ऑर उनका साँस तेज तेज चल रहा था.
खाला ने मुझसे पूछा: अयान जानू अब कैसा फील कर रहे हो.
मैं: अब ठीक हूँ.
खाला के अचानक हट जाने से मैं एक दम घबरा गया ऑर मुझे अहसास भी नही हुआ कि मेरा लंड अभी तक खड़ा है. और खाला मेरे लंड को ही देख रही थी जो उस टाइम तकरीबन 6 इंच का था.
इसी दौरान दरवाजे पर फिर दस्तक हुई तो खाला ने अपने कपड़े ठीक किए ऑर मुझे कहा:
अयान तुम ठीक से हो कर बैठो. मैं दरवाज़ा खोलती हूँ.
मैने जब देखा तो मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा हुआ था.
मैं जल्दी से उठ कर वॉशरूम की तरफ भागा. ऑर खाला दरवाज़ा खोलने चली गई……
कहानी जारी रहेगी.............
नमस्कार दोस्तो, मेरी Hindi Porn Stories कहानी को पढ़ कर बहुत लोगों ने मुझे मेल किया और मुझसे निशु के साथ के सेक्स मजे के बारे में और लिखने को कहा। अपने उन सभी पाठकों के लिए मैं उससे आगे की घटना ले कर आया हूँ।
जब सुमित को पता चला कि अनवर ने भी निशु की कमसिन जवानी का मजा लूट लिया है तब उसने भी निशु के साथ सेक्स करने की इच्छा जताई।
सुमित और अनवर निशु के लिए नये नहीं थे और जब से उसने वो ताश का खेल हम लोगों के साथ खेला था तब से ही उसको पता था कि उसको मेरे दोनों दोस्त आज न कल चोदेंगे ही।
साथ ही मैं भी कहता कि तुम परेशान न हो, वो अगर सेक्स करेंगे भी तो हमेशा नहीं एक दो बार ही करेंगे, क्योंकि उनको पता है कि तुम मेरी बहन कम गर्लफ़्रेन्ड ज्यादा हो।
मानसिक रूप से निशु भी अनवर से चुदाने के बाद सुमित से सेक्स करने के लिए तैयार थी।
जब सुमित ने मुझे अपनी इच्छा बताई तो मैंने उसको सीधे निशु से बात करने को कहा।
अगले रविवार को हम तीनों दोस्त जमा थे और निशु चिकेन पका रही थी कि फ़िर सुमित ने यह बात की। तय हुआ कि आज खाने की मेज पर सुमित निशु से बात कर ले।
जैसा तय था, खाने की मेज पर सुमित ने निशु से पूछ लिया कि क्या वो उसके साथ एक बार सेक्स करेगी।
निशु भी मुस्कुरा कर बोली कि वो तो बहुत पहले से ही ये सोच रही है कि इतने दिनों तक आखिर सुमित भैया यह बात कह क्यों नहीं रहे हैं और फ़िर उसने तीन चार दिन बाद की बात कही क्योंकि तब उसके पीरियड्स के दिन शुरु हो गये थे।
अनवर ने ठहाका लगा कर जोर से कहा- ‘के एल पी डी’
और हम सब हंसने लगे। सुमित का चेहरा देखने लायक था। फ़िर वो निशु से बोल पड़ा- ठीक है पर रोकने का मुझे हर्जाना देना होगा।
निशु भी हंसते हुए पूछन लगी- क्या?
और सुमित ने कहा-तुम्हें मुझसे अपनी गाण्ड भी मरवानी होगी!
मुझे पता था कि सुमित साला एक नम्बर का हरामी है और चुदाई के मामले में वो लड़की से पूरा मजा लूटता है।
अब मुझे निशु के जवाब का इंतजार था, उसका जवाब तुरंत आया- नहीं रे बाप, जब आगे घुसवाने में इतना दर्द होता है तब वहाँ करवाने में तो मैं मर जाउँगी!
पर सुमित भी मिन्न्तें करने लगा। जहाँ निशु कहती कि नहीं और सुमित कहता- सिर्फ़ एक बार! इसके बाद वो कभी निशु से सेक्स की मांग नहीं करेगा।
थोड़ी देर बाद जब निशु का सुर बदलने लगा तो मुझे भी लगने लगा कि अब निशु को सेक्स में पूरा पी0एच0डी0 मिल जायेगा।
निशु ने तब कहा था- अभी तक सिर्फ़ मैंने सुना है गाण्ड चोदन के बारे में!
तब अनवर ने भी निशु को चढ़ाया कि वो एक बार यह अनुभव भी ले।
निशु ने तब मुझसे पूछा कि क्या मैंने कभी ऐसा किया है, और मैंने सच कह दिया कि नहीं, पर साथ ही कहा कि सुमित ही ऐसा करता रहता है लड़कियों के साथ, वो इस मामले में अनुभवी है।
अनवर ने अपनी बात कही कि उसने दो-चार बार गांड मारी है और उसको खूब मजा आया, पर सब लड़कियाँ राजी नहीं होती हैं इसलिए बहुत मौका नहीं मिला।
सुमित ने उसको तब आश्वस्त किया कि वह निशु को खूब प्यार से पहले गांड मरवाना सिखाएगा और तब उसकी गाण्ड मारेगा।
निशु भी तब बोली- ठीक है, पर अगर मुझे दर्द हुआ तो आप भी रुक जाएँगे!
और मुझे और अनवर को इसकी गारंटी लेने को कहा। मुझे तो कोइ आपत्ति होनी नहीं थी। मैं खुश था कि चलो अब निशु के साथ मुझे और ज्यादा मजा का मौका मिलेगा। आखिर सुमित से गाण्ड मराने के बाद उसको मुझसे तो मरवाना ही था।
तय हुआ कि सुमित रोज़ शाम को एक घण्टा निशु के साथ बितायेगा और धीरे धीरे उसके डर को एक सप्ताह में खत्म करेगा।
गुरुवार को सुमित का फ़ोन आया कि आज वो शाम आठ बजे आयेगा। उस दिन वो एक डी वी डी लाया जिसमें करीब बीस क्लिप थी, सब में 20-22 साल की लड़कियों को चोदा गया था और गाण्ड भी मारी गई थी। दो क्लिप भारत की भी थी।
चाय पीने के बाद सुमित ने उस फ़िल्म को चला दिया और फ़िर निशु को अपने सोफ़े के सामने टीवी की तरफ़ मुँह करके झुकने को कहा।
निशु सेन्टर टेबल के सहारे झुक गई और फ़िल्म देखने लगी। सुमित ने उसका लम्बा स्कर्ट कमर से ऊपर कर दिया और फ़िर पैन्टी खोल दी।
निशु अब तक बिल्कुल बेशर्म हो गई थी, बोली- आप तो बोले थे कि मुझे पहले सिखाएँगे कि कैसे किया जाता है, फ़िर अभी क्यों?
सुमित हँसा- हाँ मुझे याद है! आज तुमको सिखाउँगा ही, कुछ दिन में जब तुमको अपनी गाण्ड की मांसपेशियाँ खुद ढीला करना आ जायेगा तब पेलूंगा भीतर!
और फ़िर उसने निशु की बुर पर हाथ फ़ेरना शुरु किया। फ़िल्म देखते हुए और बुर को ऐसे मसलवाते हुए निशु भी धीरे धीरे कसमसाने लगी। जब उसकी बूर पनीया गई।
तब सुमित ने उसकी बुर के पानी को ही उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और फ़िर थूक लगा लगा कर निशु की गाण्ड से खेलने लगा। उसका एक हाथ बूर के साथ खेल रहा था और एक हाथ गाण्ड के साथ।
15 मिनट बाद सुमित ने अपनी उँगली निशु की गाण्ड में ठेली। उसकी उँगली के दबाब को महसूस कर निशु पीछे पलटी, पर फ़िर उसको पता था कि क्या होना है सो वापस अपना ध्यान टीवी पे ले गई।
इसी तरह से रोज़ गाण्ड में उँगली करते करते चार दिन बाद रविवार को जब अनवर भी था तब सुमित ने हमें दिखाया कि निशु अब बड़े प्यार से अपना गाण्ड ढीली करके दो ऊँगलियाँ भीतर ले रही थी।
इस चार दिनों में जिस तरह से निशु को तैयार किया जा रहा था, उसमें निशु को खुद मजा आने लगा था। उसे लगता था कि वो एक स्पेशल लड़की है।
मैंने भी जब उसको चोदा या घर में जब मौका मिला उसकी गाण्ड में उँगली जरूर की। उसको अब समझ में आने लगा था कि इस काम का एक अलग मजा है।
मंगल को एक छुट्टी थी, तय हुआ कि उसी दिन दोपहर में निशु की गाण्ड का उदघाटन हो। सुमित ने निशु को पेट साफ़ करने के लिए दवा दी और कहा कि सोमवार की रात वो उसे खा ले और फ़िर मंगल को जब तक उसकी गाण्ड नहीं मारी जाती वो खाली पेट रहे।
मैं और अनवर ऐसे बेचैन हो रहे थे कि जैसे एक बहुत बड़ा कारनामा देखने वाले हो। सच में हमने कभी किसी लड़की को गाण्ड मरवाते नहीं देखा था और वो भी जब वो पहली बार ऐसा करवा रही हो।
हम यह जानते थे कि सुमित अक्सर लड़कियों की गाण्ड मारता है पर हम सबने जब भी साथ-साथ सेक्स किया, सुमित ने लड़की को चोदा ही था।
मुझे अब मंगल का बेसब्री से इंतजार था, क्योंकि मेरे लिए पहला मौका होता जब मैं किसी लड़की को गाण्ड मराते देखता, हालाँकि ब्ल्यू फ़िल्मों में मैंने कई बार देखा था फ़िर भी एकदम सामने किसी लड़की को पहली बार गाण्ड मराते देखना कम किस्मत बात नहीं थी।
मंगल को करीब 11 बजे सुमित आया। अनवर उसके पहले ही आ गया था। हम सबने चाय पी जो निशु ही बनाई।
चाय पीने के बाद सुमित बोला- निशु अब जाओ और अपनी बुर और गाण्ड अच्छे से धो लो, फ़िर मैं भी अपना लण्ड धो कर तुमको एकदम नया मजा देता हूँ!
अब तक निशु भी अपनी गाण्ड में लण्ड का मजा लेने के लिए उत्सुक हो गई थी, बोली- भीतर चलिए न सुमित भैया कमरे में! वही कपड़े खोल कर बाथरुम में धोकर बिस्तर पर आ जाऊँगी!
हम सब अब बेडरुम में आ गए। सुमित ने अपने कपड़े खोले और फ़िर अपने लण्ड को हाथ से सहलाते हुए बाथरुम की तरफ़ बढ़ गया। निशु ने भी अपना टॉप-स्कर्ट खोल दी और सिर्फ़ पैन्टी में बाथरुम की तरफ़ चल दी।
सुमित अब वापस आ रहा था। उसका लण्ड अब आधा कड़ा हो गया था। उसने जब निशु को पैन्टी पहने देखा तब बोला- अब निशु, पैन्टी भी खोलो ना, अब हम तीनों से क्या शर्म है तुमको!
निशु मुस्कुराई और वहीं खड़े हो कर पैन्टी नीचे करके पैर से फ़ुटबाल को किक करने के स्टाईल में उसको अनवर और मेरी तरफ़ उछाल दिया। अनवर ने उस पैन्टी को कैच किया और उसकी खुशबू लेने लगा।
वो उसको ऐसे करते देख जोर से हँस दी, बोली- आप तीनों को मैं भैया बोलती हूँ, फ़िर भी आप लोग कितने बेशर्म की तरह मेरे लिए करते हैं।
अनवर साला अब कहाँ चुप रहता, बोला- अरे तुमको भी तो हम लोग छोटी बहन समझ कर ही प्यार करते हैं। अगर हम लोग इस जवानी में तुम्हारा ख्याल नहीं करेंगे तब तुम भी जैसे हम कभी कभी रंडी-बाजी करते हैं, किसी ऐरे-गैरे से चुदाने लगी तब बदनामी होगी की नहीं। यही सोच कर हम लोग तुम्हें इतना खुश रखते हैं। अब देखो आज तुम्हारी गांड के लिए हम सब कितने दिन से बेचैन हैं।
सुमित भी हँसते हुए जोड़ दिया- वैसे भी हम लोगों को बहनचोद कहलाने में कोइ परेशानी नहीं है!
और मेरी तरफ़ देख कर आँख मार दी।
‘सही में तुम लोग बहनचोद हो’, कहते हुए निशु बाथरुम में घुस गई।
शेष कहानी अगले भाग में! Hindi Porn Stories
बात उन दिनों की है जब मैं अपनी Antarvasna Stories पढ़ाई के लिए दिल्ली आया था, मुझे मेरे बुआ के घर पर रहना था। मेरी बुआ का लड़का एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी में काम करता है। उनकी शादी अभी दो साल पहले हुई थी। मेरी भाभी जिनका एक साल का एक लड़का भी है, उनकी सुन्दरता में कोई कमी नहीं थी।
उनकी चूची ऐसी थी मानो नागपुरी संतरे अभी अभी पेड़ों पर लदा ही है। उनका आकार भी मानो क़यामत हो। उनको देख कर कोई यह कह नहीं सकता कि उनका एक साल का एक बच्चा भी है।
हमेशा मेरा मन उन्हें चोदने को करता पर मौका नहीं मिल पाता। वैसे जब भी मैं पढ़ कर घर आता तो उनका बिस्तर ही मेरे आराम का साधन होता था। मैं उनके बिस्तर पर ही लेट जाता जाता था, मेरी भाभी भी आकर मेरे बगल में लेट जाती थी।
चूंकि घर में बुआ के अलावा और कोई था भी नहीं और मेरी बुआ को मेरे ऊपर विश्वास था ही, इसकी वजह से कभी किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।
एक दिन भाभी मेरे बगल में लेट कर बच्चे को दूध पिला रही थी, उस वक़्त उनकी चूची देखी थी, क्या रंग दिया था खुदा ने उनके शरीर को, एकदम दूधिया रंग की चूची थी उनकी? देखा तो देखता ही रह गया था! उस दिन चोरी चोरी उनकी चूची को देखता रहा और कब नींद लग गई पता ही नहीं चला।
उस दिन के बाद मैं हमेशा उनके आगे-पीछे डोलने लगा कि कब मौका मिल जाये और उनके गोरे बदन का दीदार हो जाये। रब ने ऐसा मौका जल्दी ही दे दिया।
उस दिन बुआ पड़ोस में पूजा देखने के लिए गई थी और शाम से पहले लौटने वाली भी नहीं थी। मैं गया और भाभी की रजाई में घुस गया। थोड़ी देर बाद भाभी भी बच्चे को ले कर आई और मेरे सामने ही दूध पिलाने लगी।
अब मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं रजाई से निकल कर जाने लगा तो भाभी ने मुझे टोका, कहा- कहाँ जा रहे हो?
तो मैंने छूटते ही कहा- जब आप ऐसे रहोगी तो मेरे लिये यहाँ पर रहना मुश्किल हो जाएगा।
वो मेरी बात को समझ नहीं पाई और बोली- क्या हुआ? मैंने ऐसे क्या कर दिया जो ऐसे बोल रहे हो?
फिर मैंने कहा- भाभी एक तो आप बला की खूबसूरत हो! जो भी देखे देखते रह जाए। मेरे लिए तो आपको देख कर अपने आप पर काबू कर पाना पहले ही मुश्किल था उपर से आपके आपके ये नागपुरी संतरे मुझे जीने नहीं दे रहे हैं।
यह सुनकर भाभी थोड़ा सा शरमा गई और रूठने का नाटक करती हुई बोली- जाओ! मैं आपसे बात नहीं करती!
फिर मैं भाभी को अपनी तरफ घुमाते हुए बोला- सच कहता हूँ भाभी! मैंने जब से आपको देखा है मेरे तो नींद ही उड़ गई है, हरदम मेरे खयालो में आप ही रहती हो।
इतना सुनते ही भाभी शरमा गई और बस इतना ही बोली- धत्त!
फिर क्या था मैंने उनको अपने आगोश में लेते हुए उनके गाल पर एक चुम्मा जड़ दिया।
उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली और थोड़ी देर तक ना-नुकर करती रही, लेकिन उन पर मेरी पकड़ मजबूत होती जा रही थी, उनके गालो की जगह मेरे ओंठ उनकी ओंठों को चूमने लगे थे और मेरे हाथ धीरे-धीरे उनकी नंगी चूचियों की तरफ बढ़ने लगे थे।
मेरी उँगलियों का जादू उन पर धीरे-धीरे छाने लगा था और वो भी मदहोश होने लगी थी।
जब पहली बार मेरे हाथ उनकी चूचियों पर पड़े, मानो मुझे स्वर्ग मिल गया।
जिंदगी में पहली बार इस सुखद एहसास का आनंद मिल रहा था जिसे मैं किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था। मेरे ओंठ अभी भी उनके ओंठों पर चिपके हुए थे और मेरी उंगलियाँ उनकी चूचियों पर तैर रही थी।
मैंने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई और मैंने अपना दायाँ हाथ उनकी कमर में डाल दिया और धीरे धीरे उनकी नंगी कमर को सहलाने लगा, साथ ही अपनी जीभ उनके मुँह में ठेलने लगा।
इसके एवज में उन्होंने मुझे बहुत जोर से जकड़ लिया और मेरे हर चुम्बन का जबाव दुगुने जोश के साथ देने लगी।
अब मेरे लंड की हालत ख़राब होने लगी थी और पजामे के अन्दर वो फुंफकार मारने लगा था। मैंने एक हाथ से अपने पजामे का नाड़ा ढीला किया और 7″ लम्बे लंड को बाहर निकाल कर उनके हाथों में थमा दिया। जिसे वो बड़े प्यार से सहलाने लगी मेरे लंड की अकड़ धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी।
मैंने अपने हाथों का दायरा थोड़ा और बढ़ाया और धीरे-धीरे अपनी उँगलियों को उनकी चूत की तरफ बढ़ाने लगा।
पहले तो वो थोड़ा सा कसमसाई पर मेरे जोर देने पर फिर मान गई। मेरी उंगलियाँ ज्यों-ज्यों उनकी चूत की तरफ बढ़ती जा रही थी उनकी सांसें उतनी ही तेज चलने लगी थी, उनके मुँह से अजीब सी आवाजें निकल रही थे जैसे- ऊओह आह स स स श श!!!
मैंने धीरे से उनको बिस्तर पर लिटाया और धीरे धीरे उनके कपड़े उतारने लगा।
चूंकि दूध पिलाने के लिए उन्होंने अपने ब्लाउज के कुछ बटन पहले ही खोल रखे थे और उनकी एक चूची बाहर निकली हुई थी, इसलिए ब्लाउज उतारने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगी। अब सफ़ेद ब्रा में उनका शरीर दमक रहा था। धीरे से मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ऊपर से वो बिल्कुल नंगी थी।
इस बार उन्होंने उठ कर मेरा शर्ट खोल दिया। इस तरह हम दोनों ऊपर से आधे नंगे होकर एक दूसरे को चूम रहे थे।
फिर मैंने उनकी साड़ी खोल दी, फिर पेटीकोट भी खोल दिया। अब उनके शरीर पर सिर्फ पैंटी ही रह गई थी जिसमें उनका जिस्म चमक रहा था।
मैं फिर से उनके शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमने लगा जिससे उनमें मादकता छाने लगी।
जैसे ही मेरे ओंठ उनकी नाभि को छुए, वो बेचैन होने लगी। मेरे ऊपर भी एक अलग सा नशा छाने लगा था और मैंने अब उनकी पैंटी को भी उनके शरीर से अलग कर दिया और धीरे-धीरे मेरे ओंठ उनकी चूत की तरफ बढ़ने लगे।
उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे, इससे लगता था कि उन्होंने एक-दो दिन पहले ही अपने बाल साफ़ किये थे।
जैसे ही मेरे होंठ उनकी चूत से लगे, वो सीत्कार कर उठी। अब हम 69 की पोजीशन में आ गए थे और मेरा लंड उनके मुँह को छू रहा था। उन्होंने लपक कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और हम दोनों एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे। बहुत देर तक हम एक दूसरे को अंगो को चूसते रहे, फिर भाभी ने अपने मुँह से मेरे लंड को निकाल दिया और बोली- जल्दी डालो! अब बर्दास्त नहीं होता!
फिर क्या था, मैंने उनको सीधा लिटाया और अपना फनफनाता हुआ लंड उनकी चूत के मुंह पर जैसे ही लगाया, नीचे से वो धक्का लगाने लगी। मैंने भी एक जोर का धक्का लगाया और लंड उनकी चूत के अन्दर घुस गया।
उस दिन मैंने उन्हें पाँच बार चोदा और रात को भी भैया नहीं आये तो दो बार रात को भी चुदाई की।
फिर जब भी हमे मौका मिलता हम एक दूजे में खो जाते।
आज मेरी शादी हो चुकी है, फिर भी हमारा सम्बन्ध बदस्तूर जारी है और जब भी मौका मिलता है मैं उसी जोश के साथ उनकी चुदाई करता हूँ जैसे पहले किया था।
अब भी ऐसा लगता है कि मैं उनको पहली बार ही चोद रहा हूँ।
मेरे प्यारे दोस्तो, मुझे जरूर लिखना कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी? Antarvasna Stories
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