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हाय दोस्तों, मैं यानि करण गुप्ता फ़िर Sex Stories एक बार आपके लिए एक कहानी तो नहीं बल्कि एक सच्ची दास्तान लिखने जा रहा हूँ.
दोस्तों समय बरबाद न करते हुए अपनी असली बात पर आते हैं,
बात उन दिनों की है जबकि मैंने नया नया मोबाइल ख़रीदा था. उन दिनों प्रीपेड कनेक्सन नहीं होते थे, सब कोई पोस्ट पेड यानी बिल वाले मोबाइल ही प्रयोग किया करते थे.
मैंने मोबाइल ख़रीदा तो कॉल का आना जाना भी जरुरी था. लेकिन किसी का फ़ोन ही नहीं आता था. एक दिन मुझे एक कागज़ पर एक नम्बर लिखा हुआ मिल गया, उस पर नम्बर के साथ किसी लड़की का नाम भी लिखा हुआ था. मेरे मन में आई कि क्यूँ ना इस नम्बर पे कॉल की जाए. सो मैंने कॉल कर दिया. वहां से लड़की की आवाज़ आई -जी कौन?
मैंने कहा- जी क्या मैं शालू से बात कर सकता हूँ?
वो बोली- जी आप बात कर रहे हैं !
मैं हैरान था क्योंकि कागज़ पर जिस लड़की का नाम लिखा था उसका नाम अंजना था. मैंने भी बातों का सिलसिला जारी रखा। मैंने कहा कि आप तो भूल ही गए हमें लेकिन हम आपको नहीं भूल पाए.
वो भी बात से बात जोड़ती गई कि आपने ही हमें भुला दिया वरना हम तो ऐसा सोच भी नहीं सकते.
मैं हैरान था कि मैं तो वैसे ही झूठ बोल रहा हूँ लेकिन ये तो हर एक बात का जवाब ऐसे दे रही है जैसे हम काफ़ी समय से एक दूसरे को जानते हों.
आधा घंटे बात करने के बाद वो बोली कि आपने ग़लत नम्बर डायल किया है और मेरा नाम शालू नहीं है, मैं बोर हो रही थी तो बस आपका फ़ोन आया और मैं टाइम पास करने लगी. आप दोबारा इस नम्बर पर फ़ोन न करें.
मैं उदास हो गया. लेकिन मैं मानने वाला नहीं था, २ दिन बाद फ़िर से उसका नम्बर डायल किया तो वो बोली- तुम्हे मैंने मना किया था और तुमने फ़िर से फ़ोन कर दिया !
तो मैंने कहा कि आज मैं बोर हो रहा हूँ तो क्या कंपनी नहीं दोगी?
तो वो मान गई और हम दोनों बात करने लगे. बातों -२ में उसने कहा कि मेरा बॉय फ्रेंड है और हम जल्दी ही शादी करने वाले हैं. तो मैं उसके बारे में ग़लत ना सोचूं और कोई ऐसी बात भी ना करूँ जिस से उसका दिल टूटे.
मैंने उसकी बात मान ली. उस दिन के बाद हम हर रोज़ बातें करने लगे. धीरे-२ हम सब तरह की बातें करने लगे. एक दिन हम दोनों एक दूसरे से मिलने को तैयार हुए. हम एक रेस्तौरां में मिले, तो मैं उसे देख कर दंग रह गया. वो एक खूबसूरत बदन की मालकिन थी. कद ५’६” ,३० /२६ /३० का फिगर होगा. रंग थोड़ा सांवला था लेकिन बहुत ही सेक्सी थी.
हमने साथ बैठकर काफ़ी ली। मैंने उसे कहा कि आप बहुत खूबसूरत हो तो वो शरमा गई। दिल में था कि उसे पकड़ के चूम लूँ लेकिन मैं उससे डरता भी था.
इस दिन के बाद हम कई बार मिले लेकिन मैं उसे कभी हाथ भी नहीं लगा पाया. हम एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए थे और हम सब तरह की बातें करने लगे.
एक दिन उस ने बताया कि उसकी शादी फिक्स हो गई है तो मैं उदास हो गया कि अब मेरी एक अच्छी दोस्त मुझ से जुदा हो जायेगी, उस का पति पता नहीं उसे मुझसे बात करने भी देगा या नहीं.
उसने मुझे अपनी शादी में बुलाया लेकिन मैं गया नहीं, थोड़े समय के बाद मेरी भी शादी फिक्स हो गई. इस के बाद मैं भी अपनी लाइफ में व्यस्त हो गया. ३ साल बीत गए और मेरे घर पे मेरी पत्नी ने एक चाँद से बेटे को जन्म दिया.
एक दिन मैं बाज़ार में घूम रहा था तो अचानक किसी ने मुझे आवाज़ दी तो मैं हैरान था कि अंजना मेरे सामने थी, उसने कहा कि वो २ दिन
पहले ही मायके आई थी.
मैंने उसका मोबाइल नम्बर पूछा तो उसने कहा कि तुमने अपना नम्बर बदल दिया है लेकिन मैंने नहीं बदला. उसने बताया कि उसके पति किसी ऑफिस के काम से टूर पर गए हैं तो वो १ महीने के लिए मायके में ही रहेगी. उसने मुझे किसी भी समय फ़ोन करने को कहा और कहा कि मुझसे उसे बहुत सी बातें करनी हैं.
अगले दिन मैंने उसे फ़ोन मिलाया. हम ने काफ़ी बातें की. बातों बातों में पता चला की अभी उसके कोई भी औलाद नहीं हुयी थी. उसने बताया कि उस के पति हर रोज़ शराब पी कर आते हैं और वो शराब के बाद सेक्स करना ठीक नहीं समझती.
मैंने उसे समझाया कि सब ठीक हो जाएगा. हम फ़िर से हर रोज़ बातें करने लगे.
एक दिन अंजना ने मुझे अपने घर बुला लिया. मैं उसके घर चला गया. उसके मोम और डैड से मैं पहली बार मिला. उस का घर सड़क से
करीब एक किलोमीटर था, मतलब एक किलोमीटर पैदल का रास्ता था.
उसके घर पर बैठे हुए मुझे करीब ५ बज गए. मैंने कहा कि अब मुझे चलना चाहिए.
अंजना ने कहा कि वो मुझे मेरी गाड़ी तक छोड़ कर आएगी। मैंने मना किया तो वो नहीं मानी और साथ चलने को तैयार हो गई. रास्ते में चलते हुए उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया, मैं हैरान था कि आज उसने ये कैसे किया क्योंकि ३ साल कि दोस्ती में जिसने मुझे कभी हाथ भी नहीं लगाने दिया वो आज मेरा हाथ पकड़ कर खड़ी है.
मैंने कहा कि ये क्या?
तो वो बोल पड़ी कि मैं ग़लत थी, मेरी पसंद ग़लत थी, मुझे तुम से अच्छा जीवन साथी नहीं मिल सकता था.
मैंने उसे कहा कि अब हम दोनों की शादी हो चुकी है और जैसे भी हो हमें अपने साथी को खुश रखना चाहिए.
वो बोली- मैं इन बातो को नहीं मानती. मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हूँ और तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ. मेरा पति हर रोज़ शराब के नशे में आता है और कुछ भी नहीं कर पाता.
मैं तुमसे एक दोस्त के रिश्ते से बस एक रात मांग रही हूँ. प्लीज़ मना मत करना.
मैंने कुछ समय माँगा और कहा कि मैं सोच कर बताऊंगा.
तो दोस्तों ये है किस्सा मेरा और मेरी दोस्त अंजना का.
तो दोस्तों अब आप ही बताओ कि मैं क्या करूँ क्या मुझे उसकी बात मान लेनी चाहिए ?
मैं अपने परिवार के साथ बहुत खुश हूँ लेकिन मैं अपने दोस्त का साथ भी नहीं छोड़ सकता !
अंजना बहुत दुखी है ,तो क्या मुझे उस की बात मान लेनी चाहिए?
आप मेरी मदद करें और मुझे बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?
मैं आपका तहे दिल से शुक्र गुजार रहूँगा !
आपकी सलाह का मुझे मेरे मेल पर इन्तेज़ार रहेगा Sex Stories
मैं अत्यंत गर्म औरत हूँ। वैसे मेरी शादी Hindi Porn Stories हो चुकी है पर मुझे सिर्फ़ अपने पति से संतुष्टि नहीं मिलती इसलिए मैंने पड़ोस के एक हट्टे कट्टे मोटे लंड वाले लड़के को अपना बॉय फ्रेंड बना रखा है। वह मेरा गुलाम बना रहता है। उसे मैंने कैसे फंसाया इसकी घटना आप सबको बताती हूँ।
मैं अपने पति संग अकेली रहती हूँ और वो हमेशा अपने ऑफिस के काम से बाहर जाते रहते हैं। उनके नहीं रहने पर मैं रात में मोटे बैंगन से अपनी चूत की खुजली शांत करती थी।
एक दिन मेरी नजर बगल के 26 वर्ष के लड़के सुमन पर पड़ी। उसका शरीर अत्यन्त गठीला था और उस दिन वह मेरे घर के बाउंड्री के बगल में पेशाब कर रहा था। मैं छत पे बैठी थी और वो बिल्कुल मेरे सामने नीचे लंड निकाले पेशाब कर रहा था। उसने मुझे देखा नहीं था और मैं उसके लंड को सामने से देख रही थी और मुझे लगा कि सुमन का लंड बहुत मोटा है।
उसी दिन से मैं उसके लंड से चुदने का प्लान बनने लगी। मैं उससे नजदीकी बढ़ाने के लिए उसे बाजार से कुछ सामान लाने को कह देती थी। वह मुझे भाभी कहता था और खुशी से सामान ला देता था। मैंने उसका मोबाइल नंबर भी ले रखा था।
मैं चूँकि 32 साल की सेक्सी औरत हूँ सो उसका भी आकर्षित होना स्वाभाविक था पर वह डर या शर्म से कुछ बोलता नहीं था पर उसकी नजर मेरी चुचियों और गांड पर अक्सर रहती थी। और फ़िर एक सप्ताह बाद मैंने उसे फंसा ही लिया।
उस दिन मैंने उसे फोन करके दोपहर के बाद 2-3 बजे घर बुलाया। मैंने इसके बाद अपनी चूत के बालों को हेयर रिमूवर क्रीम से साफ़ किया और लगभग 1 बजे तक पूरी तरह तैयार हो चुकी थी। मैंने साड़ी पहनी पर अंदर न तो पैंटी पहनी और न ही ब्रा। ब्लाउज भी स्ट्रिप वाली थी जिसमें लगभग पूरी पीठ दिखाई पड़ती थी।
लगभग ढाई बजे सुमन मेरे दरवाजे पर खड़ा था, मैंने जैसे ही खिड़की से उसे आते देखा मैं पेट के बल अपने बेड पर लेट गई, अपनी साड़ी को इस कदर उठा लिया की मेरी पूरी जांघ दिख रही थी और अगर कोई झुक कर देखता तो उसे मेरी गांड की भी झलक मिल जाती। पीठ पर भी मैंने साड़ी नहीं रहने दी थी और बगल में एक डेबोनेयर पत्रिका खोल कर रख दी थी, ऐसा लग रहा था मानो मैं पत्रिका पढ़़ते हुए सो गई थी।
सुमन को मैं पहले ही बोल चुकी थी कि अगर दरवाजा खुला रहे तो कालबेल बजाने कि जरुरत नहीं है बस आवाज देकर अन्दर आ जाना। दरवाजा मैंने खुला छोड़ कर ही रखा था और सुमन अन्दर आ गया। उसने आवाज लगाई पर मैंने कोई जबाब नहीं दिया।
मेरे बेडरूम में बज रही हलकी म्यूजिक की आवाज सुनकर वह इस ओर बढ़ गया और फ़िर वही हुआ जिसका मुझे इंतजार था।
उस स्थिति में देखकर उसने पहले तो धीरे से आवाज लगाई और कोई जबाब नहीं मिलने पर मेरी बगल में आहिस्ते से बैठ गया। उसने धीरे से मेरी साड़ी जांघो पर से उठा दी और मेरी गोरी-गोरी चूतड़ उसके आँखों के सामने थी।
उसने धीरे से मेरी चूतड़ों को एक दूसरे से अलग कर गांड का छेद देखने की कोशिश की और मैंने अपनी टांगों को जानबूझ कर इस कदर फैला लिया की उसे मेरी चूत भी दिखने लगा। उसने अपनी ऊँगली से मेरी चूत को छूना शुरू किया और मैंने जागने का नाटक किया और बोली- ‘सुमन यह क्या कर रहे हो?’
वह घबरा गया और मेरे पैरों पर गिर कर गिड़गिड़ाया- ‘भाभी मुझे माफ़ कर दो आप जो कहोगी मैं करूँगा।’ वह डर चुका था।
मैं बोली कि ठीक है माफ़ करुँगी पर मेरा कहा मानोगे तब।
उसने हां में सर हिलाया।
मैं उसे दरवाजा बंद कर आने को बोली और वह दौड़ कर दरवाजा बंद कर आया। तब मैं उससे बोली-‘देखो, तुमने मेरी चूत देखी है और इसके बदले मैं तुम्हें पूरा नंगा देखना चाहती हूँ।’ सुमन ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मैं उसके लंड का आकार देखकर उत्तेजित हो उठी। उसका लंड लगभग 7 इंच लंबा था पर उसकी मोटाई ज्यादा थी।
मैंने उसके लंड को पकड़कर उसके सुपाड़े की चमड़ी को नीचे कर दी। फ़िर मैंने उसे अपनी चूत चूसने को कहा और मैं अपने पैर मोड़कर बेड पर लेट गई। वह मेरी चूत चूसने और चाटने लगा, मुझे बहुत मजा आ रहा था। वह मेरे चूत का रस मस्त होकर पी रहा था।
फ़िर मै उसे रोककर अपने कपड़े उतारने को बोली और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों नंगे थे। मैंने उसे अपनी चूचियाँसहलाने और चूसने को कहा और उसने ऐसा ही करना शुरू किया। मैं सी सी सी, की आवाज निकाल रही थी। फ़िर मैंने सुमन को अपने क्लिटोरिस को चाटने को कहा और उसने चाटना शुरू किया मैं आनंद के असीम सागर में गोते लगा रही थी।
मेरी चूत एकदम गीली हो चुकी थी मैंने उसके मोटे लंड को पकड़ कर उसे चूत में डालने का इशारा किया और वह मेरे पैरों के बीच बैठ कर लंड को चूत के छेद पर रगड़ रहा था और फ़िर उसने एक धक्के के साथ अपने लंड को मेरी चूत में धंसा दिया पर उसका मोटा लंड मेरी चूत में फंस रहा था, मैंने अपने पैरों को थोड़ा और फैलाया और उसने एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड मेरी चिकनी चूत में उतार दिया और फ़िर धक्के लगाकर चुदाई करने लगा।
मेरी चूत सुमन के मोटे लंड की रगड़ से मस्त हो रही थी और मैंने अपनी चूत उठाकर सुमन का साथ देना शुरू कर दिया। लगभग 22-25 धक्कों के बाद सुमन ने अचानक चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और उसका लंड मेरी चूत में वीर्य छोड़ने लगा, गर्म वीर्य, लंड के फूलने सिकुड़ने और सुमन के मजबूत जकड में मुझे चुदाई का असीम आनंद मिल रहा था और मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया। मैं झड़ रही थी।
इसके बाद लगभग 3-4 मिनट तक हम वैसे ही पड़े रहे इसके बाद मैंने सुमन को तौलिया से अपने चूत को पौंछ कर साफ़ करने को कहा और उस दिन से मेरे हाथ सुमन के रूप में एक चुदाई का गुलाम प्राप्त हुआ जो मेरी इच्छानुसार आकर मेरी चुदाई कर मेरी चूत को तृप्त करता है। Hindi Porn Stories
मेरा नाम सैम है। अन्तर्वासना में मेरी Indian Sex Stories यह पहली कहानी है। यह कहानी तब की है जब मैं कॉलेज में था।
एक दिन जब मैं कॉलेज पंहुचा तो एक लड़की कॉलेज के बाहर खड़ी थी। मस्त माल थी ! उसके गजब के बूब्स थे जो उसकी ब्रा से निकले जा रहे थे। लेकिन उसका रंग काला था पर वो गजब की सेक्सी लग रही थी।
मैंने उससे उसका नाम पूछा।
वो बोली- जी पूनम ! मैं अपनी दोस्त से मिलने आई थी। लगता है कि वो आज नहीं आई है।
उसने मुझसे कहा- क्या आप मुझे बस-स्टैंड तक छोड़ देंगे?
मैं तो मौके की तलाश में था, जो मुझे मिल गया। मैं उसे अपनी बाइक पर लेकर निकल गया, उसके बूब्स मेरे पीठ पर लग रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो जाता, उसके नुकीले निप्पल मुझे पागल कर रहे थे। स्टैंड पहुँच कर पता चला कि बस निकल गई है और अगली बस शाम को ६ बजे है। अभी तो सिर्फ़ १ बजा है, तो उसने कहा कि चलो घूम आते हैं, समय भी निकल जाएगा और पता भी नहीं चलेगा।
मैं उसे लेकर एक पार्क में गया। गर्मी के दिनों में वैसे भी कम लोग ही दिन को पार्क में होते हैं। एक पेड़ की नीचे हम दोनों बैठ गए। घास चारों तरफ थी, इसलिए हमें कोई दूसरा नहीं देख पा रहा था, और मेरी नज़र तो सिर्फ़ उसके बूब्स पर थी, बातों का सिलसिला चल रहा था, वो अपने बारे में बता रही थी और मैं अपने बारे में।
अचानक उसने कहा कि मैं लेटना चाहती हूँ ! क्या मैं अपना सर आपकी गोद में रख दूँ?
उसने अपना सर मेरी गोद में रख दिया और बातें करने लगी। मेरी नज़र तो उसकी छाती पर थी, उसके गोल गोल स्तन मैं साफ देख रहा था। जब वो साँस लेती तो उसकी छाती ऊपर नीचे होती, उसके स्तन कभी छोटे तो कभी बड़े हो जाते और मेरा लंड का तो बुरा हाल था। मैं तड़प रहा था उसे चोदने के लिए। मैं जानबूझ कर एक हाथ उसकी छाती पर ले गया और उसके बूब्स को छुआ लेकिन उसने कुछ कहा नहीं।
तब मैंने उससे पूछा कि कभी तुमने सेक्स किया है?
वो मेरे इस सवाल को सुनकर घबरा गई और शरमाते हुए बोली- नहीं !
मैंने तुंरत पूछा- ब्लू फ़िल्म देखी है कभी?
वो बोली- नहीं हाँ एक बार, अपने घर पर !
क्या देखा? – उससे मैंने पूछा।
मतलब- क्या?- क्या देखा?- एक लड़का एक लड़की को नंगा करके चोदे जा रहा है, और लड़की सिस सिस कर रही है।
अब वो मुझसे खुल कर बाते करने लगी। मैं अपना एक हाथ उसके स्तन पर ले गया अब वो भी मज़े लेने लगी, मैंने उसे जोरो से दबाया वो सी स सी सी —- कर रही थी, और दूसरे हाथ उसकी जींस के अन्दर ले गया, पैंटी के नीचे स्वर्ग था जिसकी अनुभूति मुझे मिलने लगी, उसकी चूत पर बाल थे, जैसे ही मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा, वो तिलमिला गई।
मैं अपनी उंगली उसके चूत के अंदर ले गया, साली पहले भी चुदवाई हुई थी, एक बार में पूरी उंगली चली गई। उसके मुंह से अजीब सी आवाजें निकल रही थी।
उसने मेरी जिप खोली और मेरा लंड चूसने लग गई और मैं उसकी चूत में अपनी ऊँगली अंदर बाहर करने लगा।
अब वो भी तड़प रही थी और मैं भी। मैंने उसकी जींस खोल दी, उसकी पैंटी को नीचे कर दिया और उसकी चूत को चूसने लगा।
जोर से — और जोर से चूसो ना मुझे ! आज मेरी चूत को पका दो मेरे राजा !
जैसे जैसे मैं उसकी चूत चूसता उसको मज़ा आता, अब उसने कहा- मादरचोद मुझे चोद ! चोद मादरचोद !
मैंने कहा- रंडी अभी चोदता हूँ तुझे, सच सच बता कितनी बार चुदाई है?
५ बार मेरे बॉय-फ्रेंड्स ने मुझे चोदा है और एक बार टीचर ने अपने मुझे घर पर !
अब मुझे चोद- उसके काले रंग पर उसकी चूत का रंग बहुत खिल रहा था। उसकी चूत लाल रंग और उसका सारा जिस्म काले रंग से ढका हुआ था।
उसके काले-काले स्तन और उस पर काले रंग के निप्पल मुझे पागल किए जा रहे थे।
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर जोर से धक्का दिया, और मेरा पूरा लंड उसके चूत में समां गया, अब वो भी अपनी गाण्ड उठा उठा कर जबाब देने लगी और उसके मुँह से गन्दी गन्दी गलियाँ निकल रही थी।
बहनचोद ! चोद मुझे ! आज चोद मुझे ! उसके चूत की गोलाई कभी फैल जाती कभी सिकुड़ जाती।
रंडी की औलाद ! आज जी भर के चोदूँगा तुझे !
हाँ मेरे राजा ! ये चूत तो तुम्हारी है !
जोर से ! जोर से ! से..से सी.. सी… सी….. अ आई…… अ….अ…आह्ह …. …या….. जोर .. जोर से मेरे रज्जा !
उई उई चोद दे … जोर से… आज ……. सी ! मैं तो गई …. मैं … मैं गयी…….. और वो झड़ गई।
थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया, उसने मेरा लंड साफ किया और मैंने उसे चूत।
इसी तरह हमने चार बार चुदाई की। Indian Sex Stories
काजल के साथ ताश के बहाने नंगापने के Hindi Porn Stories खेल के बादि सुमित और अनवर इस बीच घर नहीं आए, पर फोन पर हमेशा मुझसे पूछा कि मैंने अब तक काजल को चोदा या नहीं।
मुझे इतना होने के बाद भी हिम्मत नहीं हो रही थी काजल से सेक्स के लिए कहने की। काजल भी ऐसे थी जैसे उस दिन कुछ हुआ ही ना हो।
खैर, जब सुमित ने अल्टिमेटम दे दिया कि अगर आज मैंने काजल को नहीं चोदा तो वो उसे पटा के मेरे सामने चोदेगा तब मुझे भी जोश आ गया, और शाम में डिनर टेबल पर मैंने काजल से कहा,’काजल, आज रात मेरे साथ सो जाओ ना प्लीज, उस दिन के बाद से मुझे बहुत बेचैनी हो रही है।’
यह बात मैंने अपना सर नीचे करके खाना खाते हुए कहा।
मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं काजल से नजरें मिलाऊँ।
काजल ने मेरे झिझक या शर्म को समझ लिया और फिर मेरे पास आ कर मेरे सर को उठाया और कहा,’आज नहीं, दो-तीन दिन बाद!’
और मेरे होंठ चूम लिए।
मुझमें अब हिम्मत आ गई और मैंने पूछा,’आज क्यों नहीं, दो-तीन दिन बाद क्यों?’
अब काजल मुस्कुराते हुए मेरे कान के पास फ़ुसफ़ुसा कर बोली,’थोड़ा समझा करो संजीव भैया! अभी पीरियड्स चल रहे हैं, इसीलिए कह रही हूँ दो-तीन दिन बाद। तब तक इससे खेलो!’
कहते हुए उसने अपने स्तनों पर मेरा हाथ रख दिया। मैं खुश हो गया कि चलो अब दो-तीन दिन बाद काजल जैसी एक मस्त लौंडिया मिलेगी चोदने को।
तीसरे दिन जब मैं ऑफ़िस से लौटा तो काजल एकदम फ़्रेश लग रही थी, मुझसे बोली,’संजीव भैया! आज कहीं बाहर चलिए डिनर के लिए।’
वो तैयार थी। करीब एक घंटे बाद हम लोग एक चाईनीज रेस्ट्रां में बैठे थे। वो मेरे साथ ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे वो मेरी गर्लफ़्रेंड हो। मुझे भी मजा आ रहा था। करीब 9 बजे जब हम लौट रहे थे तब काजल ने मुझसे कहा,’रास्ते में कहीं से कन्डोम खरीद लीजिएगा संजीव भैया।’
यह सुनके मेरा लण्ड गरम होने लगा। मैंने बात हल्के से लेते हुए पूछा,’क्यों, आज रात मेरे साथ सोना है क्या?’
और मैंने उसका हाथ जोर से दबा दिया।
वो एक कातिल मुस्कान के साथ बोली,’आपके साथ बेड पे जब मैं रहूँगी, तब आप सोएँगे या जागेंगे?’
मैंने उसको घूरते हुए कहा,’बहुत गहरी चीज हो काजल तुम, एकदम कुत्ती चीज़ हो भई।’
वो भी पूरे मूड में थी, बोली,’आप और आपके दोस्तों का किया है सब, वर्ना मैं जब आपके पास आई तब तक मुझे हेयर रिमूवर तक यूज करना नहीं आता था।’
मैंने उसके चूतड़ पे एक चपत लगाया और कहा,’हाँ, वोह तो उस दिन तेरी झांट देख कर पता चल गया है। तुम चिंता ना करो, बिना कन्डोम भी मैं जब करुंगा तो अपना माल भीतर नहीं बाहर निकालूँगा।’
और हम दोनों घर आ गए।
काजल बोली- आप चलिए, मैं तैयार हो कर आती हूँ।
पर मेरे लिए अब रुकना मुश्किल था, बोला,’इसमें तैयार क्या होना है, नंगा होना है बस।’
और मैं अपने शर्ट के बटन खोलने लगा। कुछ समय में ही मैं सिर्फ़ अपने फ़्रेंची अंडरवीयर में था।
काजल पास खड़ी देख रही थी, बोली,’बहुत बेचैनी है क्या?’
वो मुझे चिढ़ाने के मूड में थी। मैं उसकी ये अदा देख मस्त हो रहा था, पर उपर से बोला- ‘अब जल्दी से आ और प्यार से चुदवा ले, वर्ना पटक के चूत चोद दूंगा। साले यार लोगों ने रोज़ पूछ पूछ कर कान पका दिया है।’
काजल अब सकपकाई और पूछा,’क्या आप अपने दोस्तों से मेरे बारे में बात करते हैं?’
उसके चेहरे से चिंता दिखी तो मैंने सच कह दिया,’सुमित और अनवर रोज़ पूछते हैं, उस दिन का ताश का खेल भी मेरे और तुम्हारे बीच यही करवाने के लिए ही तो था। असल में, जब से तुम आई हो उस दिन से वो दोनों तेरे बदन के पीछे पड़े हैं।’
काजल अब सामान्य हुई,’अच्छा वो दोनों, मुझे लगा कि कोई और दोस्त को भी आपने बताया हैं। क्या आप आज रात की बात भी उनको बताएँगें?’
मैंने देखा कि अब सब ठीक है, सो सच कह दिया- ‘जरूर, वो जरूर पूछेंगे, और तब मैं बता दूंगा!’
और मैंने काजल को पास खींच कर अपने सीने से लगा लिया और उसके होठों का रस पीने लगा।
काजल भी सहयोग कर रही थी, हम लोग कोई 5 मिनट तक सिर्फ़ होठ ही चूसते रहे। काजल की साँस थोड़ी गहरी हो गई थी।
मैंने काजल को कहा,’चलो अब बेड पर चलते हैं।’ उसने एक बच्चे की तरह मचलते हुए कहा,’मैं खुद नहीं जाऊँगी, गोदी मे ले चलो मुझे। मैं तुमसे छोटी हूँ या नहीं।’
उसे बच्चों की तरह मचलते देख मुझे मजा आया, बोला,’साली, नखरा कर रही है, छोटी है तू, अभी दो मिनट में जवानी चढ़ जायेगी!’ और उसको मैंने गोदी में उठा लिया।
वो मेरे सीने से लग गई और बोली,’ऐसे कभी गोदी लेते क्या आप, अगर मैं न कहती!’
मैंने जवाब दिया,’अरे तेरे जैसी मस्त लौंडिया अगर बोले तो अपने सर पे बिठा के ले जाऊँ उसे!’
मैंने उसको अपने बेड पे ला कर पटक दिया। मुझे पेशाब आ रही थी, तो बाथरूम जाते हुए मैंने कहा,’अब उतार अपने कपड़े, और नंगी हो जा, जब तक मैं आता हूँ’।
मैं जब लौटा तब भी काजल अपने पूरे कपड़ों में बेड पर दिखी। मैं थोड़ा चिढ़ गया इस बात पर। मैं बोला- ‘क्या साली नखरे कर रही है, मेरा लण्ड खड़ा करके। मेरे से कपड़े उतरवाना है तो आ जरा लण्ड चूस मेरा।’
वो भी थोड़ा तुनक कर बोली,’अच्छा, तो अब मैं आपकी साली हो गई। आप दो बार मुझे साली बोल चुके हैं!’
फ़िर मुस्कुराने लगी।
मैंने हँसते हुए कहा,’तो क्या तुम मुझे बहनचोद बनाना चाहती हो?’
इस बार वह सेक्सी अंदाज़ में बोली,’आप मुझे रंडी बना रहे हो तो कोई बात नहीं और मैं आपको बहनचोद भी ना बनाऊँ?’
और वो मेरे से सट गई। मैंने उससे नज़र मिला के कहा,’मैं तो तुम्हें अपनी रानी बना रहा हूँ जान, रन्डी नहीं। पर तुम्हारे लिये बहनचोद, क्या तू जो बोल वही बन जाऊँगा मेरी प्यारी काजल।’
मैं फ़िर उसके होंठ, गाल चूमने लगा। वो साथ देते हुए बोली,’थैंक्स संजीव भैया, पर मुझे तो रन्डी बनना पड़ेगा अब। आपके दोनों दोस्त मुझे ज्यादा दिन छोड़ेंगे ही नहीं!’
मैंने उसकी हाँ में हाँ मिलाई,’यह बात तो है, काजल, पर कोइ बात नहीं एक-दो बार से ज्यादा वो लोग नहीं करेंगे। मैं जानता हूँ उनको!’
काजल थोड़ा गरम होने लगी थी, बोली,’अब छोड़ो ये सब बात और चलो शुरु करो संजीव भैया!’
मुझे यह सुनकर मजा आया,’क्या शुरु करे तुम्हारा संजीव भैया, जरा ठीक से तो कहो मेरी छोटी बहना।’
मेरा हाथ अब उसकी दाहिनी चुची को कपड़े के उपर से ही मसल रहा था। एक बार फ़िर मैंने पूछा,’बोल न मेरी बहना, क्या शुरु करे तुम्हारा भैया! बात करते हुए ज्यादा मजा आयेगा मेरी जान। इसलिए बात करती रहो, जितना गंदा बात बोलोगी, तुम्हारी चूत उतना ज्यादा पानी छोड़ेगी। अब जल्दी बोलो बहन, क्या शुरु करूँ मैं?’
उसकी आँखें बन्द थी, बोली- ‘मेरी चुदाई’
चुदाई या तेरे चूत की चुदाई?
‘मेरी चूत की चुदाई’, वह बोली।
मेरे दोनों हाथ अब उसके चूतड़ों पर थे, मैं हल्के हल्के उन्हें दबा रहा था।
फ़िर मैंने उसको बेड पर बिठा दिया, और उसकी कुर्ती धीरे धीरे सर के ऊपर से निकाल दी। इसके बाद मैंने उसकी सलवार खोल दी। अब काजल मेरे सामने एक सफ़ेद ब्रा और काली पैंटी में थी।
मैंने कहा,’अब ठीक है, आओ लण्ड चूस कर एक पानी निकाल दो!’
काजल अब मजाक के मूड में थी, अपनी गोल गोल आँख नचाते हुए बोली,’किसका लण्ड चुसूँ, मुझे तो कोई लण्ड दिख नहीं रहा।’
मुझे उसकी ये अदा भा गई, मैंने गन्दे तरीके से कहा,’अपने प्यारे भैया का लण्ड निकालो और फ़िर उसको मुँह से चूसो, मेरी रन्डी बहना! अपने भैया को सैंया बना के चुदवाओ अपनी चूत और फ़िर अपनी गांड भी मरवाओ!’
मैं सीधा लेट गया। काजल ने मेरा लण्ड चूसना शुरु कर दिया। मैंने उसको लण्ड से खेलना सिखाया और वो जल्दी ही समझ गई और मुझे मजे देने शुरु कर दिये।
कोई 10 मिनट चुसाने के बाद मेरा लण्ड जब झरने वाला था, मैंने काजल को कहा कि वो तैयार रहे और फ़िर मैं उसके मुँह में झर गया। मेरे कहने से उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।
अब मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी खोल दी। काली काली झांटों से भरी हुई उसकी चूत का एक बार फ़िर दर्शन कर मैं निहाल हो गया। जैसे ही मेरे हाथ काजल की चूत की तरफ़ गये, वो बोली,’भैया, कुछ होगा तो नहीं। डर लग रहा है, कहीं बदनामी ना हो जाए।’
मैंने समझाते हुए कहा,’कुछ नहीं होगा। आज तक जब तुम्हारी बदनामी नहीं हुई तो अब क्यो डर रही हो?’
उसका जवाव सुन के मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो बोली थी,’आज पहली बार करवाऊँगी, इसीलिए डर रही हूँ।’
मैं बोला-‘क्या, क्या तुम कुँवारी हो अब तक?’ उसके हाँ कहने पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। मैंने बोल ही दिया,’मुझे विश्वास नहीं हो रहा। एक कुँवारी लड़की होते हुए तुम उस दिन तीन तीन जवान लड़कों के सामने नंगी हो कर खेल रही थी?’
वो हँसते हुए बोली,’इसमें विश्वास न करने वाली बात क्या है? आप तीनों मुझ पर लाईन मार रहे थे कई दिन से, सो उस दिन मैं भी सोचा कि चलो आज लाईन दे देती हूँ, बस। आप लोग को मजा आया तो मुझे भी तो मजा आया।’
मैं हँस दिया,’बहुत कुत्ती चीज है तू बहना। चल लेट, जरा तेरी चूत की जाँच करूँ, कैसी कुँवारी कली है तू!’
और मैंने उसकी चूत की फ़ाँक खोल करके भीतर की गुलाबी झिल्ली की जांच की। साली सच में कुँवारी थी। सांवले बदन की काजल की चूत थोड़ी काली थी, जिससे उसके चूत का फ़ूल ज्यादा ही गुलाबी दिख रहा था।
करीब 10 मिनट तक उसकी चुची और चूत को चुमने चाटने के बाद मैंने उसकी टांगों को चौड़ा कर के उसकी चूत को खोल दिया और खुद बीच में बैठ के लण्ड को काजल की चूत की फ़ाँक पर सेट कर लिया।
मजे से काजल की आँख बन्द थी। वह अब सिर्फ़ आह-आह-आह सी सी सी जैसा कर रही थी।
मैंने काजल से पूछा,’तैयार हो काजल रानी चुदवाने के लिए? मेरा लण्ड तुम्हारी चूत को चुम्मा ले रहा है। कहो तो पेल दूँ भीतर और फ़ाड़ दूँ तुम्हारी चूत की झिल्ली? बना दूँ तुम्हें लड़की से औरत? कर दूँ तुम्हारे कुँवारेपन का अंत? बोलो जान, बोलो मेरी रानी, बोल मेरी बहना, चुदवाएगी अपने भैया के लण्ड से अपना बूर?’
अब उससे रहा नहीं जा रहा था, वह बोल पड़ी,’हाँ मेरे भैया, चोद दो मेरी बूर अपने लण्ड से। बना दो मुझे औरत। अब मुझे कुँवारी नहीं रहना।’
मैं अपना लण्ड पेलने लगा वो थोड़ा कसमसाई, शायद उसको दर्द हो रहा था। पर मैं नहीं रुका, उसकी गीली बूर में लण्ड ठाँसता चला गया।
काजल इइइस्स्स्स आह करती जा रही थी और बोलती जा रही थी,’कर दो मेरे कुँवारेपन का अंत आज। मेरी बूर को जवानी का मजा दो मेरे भैया, लूट लो मेरे जवानी को और चोद कर बना दो मुझे रन्डी। चोदो मुझे भैया, खूब चोदो मुझे। मेरी जवानी का रस लूटो संजीव भैया।’
मैं जोश में चोदता जा रहा था। हम दोनों साथ साथ बोलते जा रहे थे।
मैं बोल रहा था,’चुद साली चुद। अब फ़ट गई तेरे बूर की झिल्ली। गया तेरा कुँवारा पन। लूटो मजा अपनी जवानी का। साली अभी थोड़ी देर पहले बच्ची बनी हुई थी। गोदी में घूम रही थी। अब इसी चूत से बच्चे पैदा करेगी तू मेरी बहना। मैं तुम्हें चोद कर बच्चे पैदा करुँगा। चुदो साली चुदो, खूब चोदवाओ।’
काजल भी बड़बड़ा रही थी,’अभी बच्चा नहीं। अभी मुझे अपने बूर का मजा लूटना है। खूब चुदवाऊँगी। जवानी का मजा लूटूँगी। फ़िर बच्चे पैदा करुँगी। आआआहह चोदो और चोदो मुझे। रन्डी बना के चोदो। बीवी बना के चोदो। साली बना के चोदो। बहन बना के चोदो, नहीं बहन तो हूँ ही। और आप बहनचोद हो। संजीव भैया, बहनचोद भैया, चोदो अपनी छोटी बहन को।’
मैंने अब उसको पलट दिया और पीछे से उसकी बूर में लण्ड पेल दिया और एक बार फ़िर चुदाई चालू हो गई। अब वोह थक कर निढाल हो गई थी, मैंने 8-10 जोर के धक्के लगाये और फ़िर मैं भी झर गया। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था, मेरा माल उसके नितम्बों पर फ़ैल गया।
काजल मेरे नीचे पेट के बल बेड पे थी और मैं उसके ऊपर था। मेरा लण्ड उसके गांड की दरार पर चिपका था। हम दोनों जोर जोर से हाँफ़ रहे थे, जैसे मैराथन दौड़ कर आये हों।
तभी घड़ी ने 11 बजे का घंटा बजाया।
मैंने काजल से कहा,’अब?’
वोह हाँफ़ते हुए बोली,’अब कुछ नहीं, बस सोना है’
और उसने करवट बदल ली। हम दोनों नंगे ही सो गये।
आप सब को यह कहानी कैसी लगी, बताना साथ ही यह भी बताना कि मुझे काजल के साथ और क्या-क्या हुआ वो लिखना चाहिए या नहीं। Hindi Porn Stories
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