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Antarvasna

सभी मेल फ़ीमेल को मेरा प्रणाम। आल रीडर्स आपको मेरी स्टोरी Antarvasna कैसी लगी जरूर मेल करना। मैं कसम खाता हूँ कि जितनी स्टोरी आपको दूंगा रियल दूंगा… स्टोरी पढ़कर आपको रियली मज़ा जरूर आयेगा। सभी आंटी भाभियों गर्ल्स की चूत से पानी जरूर आयेगा।

दोस्तों…….तैयार हो जाइये, मैं राजेश, २६, लखनऊ। “बात उन दिनो की है जब मैं १५ -१६ साल का था। मैं एक लड़की को चाहने लगा कब प्यार हुआ पता ही न चला। इतनी ज्यादा जनकारी भी नहीं थी स्कूल में मुझे सब हीरो जैसे अजय देवगन कहते थे। स्कूल में बहुत लड़कियों से दोस्ती थी लेकिन उनके लाइन देने के बाद भी मुझे उनसे प्यार नहीं था। मुझे प्यार सोना से हुआ जो कि मेरी ही कोलोनी में रहने आयी थी। वो महाराष्ट्र से आयी थी। मैं वहाँ पर क्रिकेट खेलने जाता था। ५’६” हाइट गोरा चिट्टा रंग कोलोनी के सब लड़के उसे लाइन मारते थे। नये साल पे मैने हिम्मत करके उसे लव लेटर दिया तो उसने जवाब दिया। आई एम सीनियर यू आर जूनियर। वो ११वीं में थी और मैं १०वीं में था लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया। मैं उसे किसी भी कीमत पर प्यार करना चाहता था। मैने उसकी दोस्त जो देविका थी उससे कहा कि वो मुझसे रिश्ता बनाये चाहे जो भी रिश्ता, मुझसे बात करे। मैं रियली उसे प्यार करता हूँ, मेरी हालत पागलों से भी बदतर थी। मुझे न भूख लगे न प्यास। सिर्फ़ वही दिखती थी।

आखिर वो दिन आ ही गया जब उसने मुझे अपने घर बुलाया बात करने के लिये। एक बात बताऊं वो मेरी सीनियर थी मेरी गांड फ़ट रही थी कि कहीं मेरे घर में बता न दे। मैं टोपर स्टुडेन्ट था इसलिये मेरे सभी इज़्ज़त करते थे। अरे भैया। मैं उसके दरवाजे पर पहुँचा तो मुझे १०४ डिग्री फ़ीवर था। उसके छोटे भाई ने मुझे एक टुकड़ा कागज़ का दिया और बोला दीदी ने आपको देने को कहा है। जिस पर लिखा था” आई लव यू माई अजय देवगन” + इसके आगे हम और क्या कहें जानम समझा करो। शाम ६ बजे घर पर आना। कोई नहीं होगा। मैं आपको चाय पिलाऊंगी। प्लीज़ आ जाना ilu तुम्हारी सोना। अब तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। शाम ६ बजे मैं उसके घर गया। उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था बहुत खूबसूरत थी मेरी सोना गोरा रंग ५’६” हाइट अच्छी फ़ीगर गोल चूचियां गोरी जांघे वो सबकुछ उसमे था जो किसी को भी पागल कर दे। लंड को टाइट कर दे हाथ मसलने को मजबूर कर दे १८ साल की कमसिन चुदायी वाली उमर। यहाँ तक कि अगर कह दे तो मैं किसी को भी गोली मार देता। उसने मुझसे नमस्ते किया तो मैं बोला सोरी आप मेरी सीनियर हैं वो बोली पहले सीनियर थी पर आप अब मेरे सबकुछ हो मुझे वो फ़ील हुआ जो मैं शब्दों में नहीं कह सकता हूँ

रियली शी इज़ माई फ़र्स्ट लव एवर एंड फ़ोरेवर, इट इज़ माई रियल सेक्स स्टोरी। प्रिय पाठकों, मैं उसे आज भी प्यार करता हूँ। अब आगे सुनिये उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा “डरो नहीं रियली आई लव यू” मैं भी आपको चाहती थी पर डरती थी कि कहीं आप नाराज न हो जायें इसलिये नहीं कहा। डियरराजेश जब तुम्हारे पास लड़कियां होती हैं तो मैं बहुत जलन फ़ील करती हूँ। मुझे दूर मर करना, इतना कहकर वो मेरे सीने से लिपट कर रोने लगी। मैं भी रो रहा था। पहली बार कोई लड़की मेरे सीने से लिपटी थी उसकी चूचियां मेरे सीने से चिपक रही थी मेरा लंड खड़ा होने लगा फ़िर उसने अपने गुलाबी होंठों से मेरे लिप्स को फ़्रेंच किस करने लगी मैं उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर रहा था वो रो रही थी।

किस करते समय उसने अपनी जीभ से मेरी जीभ चाटने लगी ये मेरे लिये पहला एक्सपेरिएंस था मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी चूत के पास छूने लगा मुझे लगा वो बुरा मान जायेगी मगर वो धीरे से बोलीराजेश क्या पहले ही दिन ये सब ठीक रहेगा। मैं बोला क्यों क्या मतलब वो बोली अच्छा चलो कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी ही हूँ जो करना चाहो करो। अब मेरे समझ में न आये कि क्या करूं? कैसे करते हैं? वो बोली सामान तो दिखाओ और मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी। उसके मुलायम गोरे हाथों से मेरा ७” इंच लम्बा मोटा लंड बाहर निकाला तो आँख मार कर बोली यार ये तो बहुत बड़ा है मैं अब पूरे जोश में था। मैं उसको बेड पर ले गया और जींस उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में था। मैने उसके होंठों को कसकर चूमने लगा। मेरे हाथ में उसके बूब्स थे गोरे गोरे गोल गोल भूरे रंग की भुंडी, ब्रा नही पहने हुए थी सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो वो शरमाकर आँखें बंद कर ली। मैं बोला डियर अब काहे की शरम मैं आपका पति हूँ वो बोली तो मैं कुछ कह रही हूँ क्या……..अब आप ही मेरे सबकुछ हो…. मेरा सबकुछ आपका ही है जो चाहो करू……… उसे विश्वास था कि हम लोगों की शादी हो जायेगी क्योंकि हम एक ही जाति के थे

उसके मेरे बीच प्यार बहुत था…….. हम दोनो के ही पिता ओफ़िसर हैं इसलिये कोई प्रोब्लम का सवाल ही नहीं था… मैं भी शादी करना ही चाहता था। सलवार खोल कर अलग किया उसकी गोरी गोरी जांघें मेरा स्पर्श पाकर और भी गरम हो गयी उसकी पैंटी में थोड़ा छेद था देखा तो मैने उंगली डाली तो बोली अरे यार पैंटी दोनो गीली थी इसलिये ये पुरानी पहन ली थी। हँस कर बोली यार तुम तो मेरी गरीबी का मज़ाक बना रहे हो मैं बोला डियर आप बहुत ही मालदार हैं। बोली माल तो नीचे है मेरे सजना इस चड्ढी को फ़ेंक दो और अपने माल को ले लो इतना कहकर वो शरमा गयी….पैंटी उतारा तो उसकी बुर बिल्कुल गोरी उस पर भूरे छोटे बाल हल्के हल्के अब तो मैं पागल हो गया

बुर को छुआ तो लगा जैसे भट्टी हो गरम गरम बुर को मैं सहलाने लगा तो वो स्सस्सस्सस्स आह ओह्हह्हह्हह्हकया कर रहे हो प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़……मैने उसकी बुर की स्लिट में उंगली डाली तो बोली क्या उंगली ही डालेंगे आप वूऊऊऊ कहकर चुप हो गयीए……..मैने कहा रोको डार्लिंग अभी सब डालूंगा जी भर कर तुझे चोदूंगा पहले तेरी चूत चाट लूँ………जीभ से मैं उसकी चूत के दोनो हिस्सों को चाटकर चोदने लगा मैं उत्तेजित हो रहा था वो आह ओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह मार डालोगे….. चोद दो प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ फ़िर मैने उसके मुंह में अपना लंड डाला तो बोली चाटो मज़ा आ रहा था ६९ की पोज़िशन में हम दोनो पागल हो रहे थे वो बोलीराजेश……..लंड धीरे से डालना प्लीज़ वरना मेरी खूबसुरत बुर फ़ट जायेगी ……….समझ रहे हो न……….मैने अब उसकी बुर पर सुपाड़ा रखा तो लंड बुर में नहीं गया फ़िसल गया तो………

हँस कर बोलि बुद्धु ऐसा न ही होगा…..और मुँह से थूक निकाल कर मेरे लंड पर डाल दिया और लंड को बुर के मुँह पर खींचा मैने हल्के से शोट दिया तो बुर में २ इंच अन्दर गया। वो बोली दर्द हो रहा है। अब मेरे लंड को चूत की गरमी मिल गयी थी मैं होंठों को चूसे जा रहा था धीरे धीरे ५-६ बार अन्दर बाहर किया अब उसे मजा आ रहा था नीचे से कमर भी हिला रही ….थी …….वो बोली आप इतना ही डालो …अब दर्द में भी मजा आ रहा है लेकिन मैं तो पूरा लंड इसकी बुर में डालना चाह रहा था मैं बोला देखो सोना अब तुम्हें पूरे लंड का मजा देता हूँ…दूसरा शोट लगाया तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी बुर में घुस गया … वो इतनी तेज़ चिल्लायी कि मैं डर गया कि कोई पड़ोस से न आ जये………..अब जोर से मैने उसके शरीर पर दबाया कि वो उठ न जाये………बोली हटो मैं मर गयी प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ खून आ गया था………. मुझे छोड़ दो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है……………. मैं जानता था कि अगर इसे छोड़ा तो फ़िर इस डर की वजह से कभी नही चुदवायेगीईईईए सो……..मैने धीरे धीरे ७-८ शोट लगाये तो उसका विरोध कुछ कम हुआ बोली मार डालोगे क्या हल्की मुस्कुराहट के साथ कमर भी हिलाने लगी…. बस। बाकी अब आप लोग खद ही समझ लो कि आगे क्या क्या हुआ। Antarvasna

उस गांव से मेरा ट्रांसफर 45 किलोमीटर दूर एक गांव में हो गया था।
यह गांव थोड़ा बड़ा था और यहां के लोग थोड़े पढ़े लिखे और सुखी सम्पन्न थे।
गांव के लोगों के पास खेती के लिए काफी बड़ी जमीनें थी और लोग राजकीय पहुंच भी रखते थे।

खैर जहां समृद्धि होती है वहां टकराव भी होता है.
तो इस गांव में ताकतवर लोगों के गुट बने हुए थे और ये गुट आपस में अक्सर लड़ते रहते थे.
तो यह गांव किसी भी कर्मचारी के कठिन पर माल वाला पोस्टिंग माना जाता था।

मुझे मेरे साथी कर्मचारियों ने इस गांव के बारे में यह सब बताया था- तुम जैसे सीधे सादे आदमी को इस गांव में नौकरी करना मुश्किल है। यहां के लोगों की पहुँच ऊपर तक होने से वे हमारे जैसे छोटे कर्मचारियों को दबा के रखते हैं।

अब मेरा इस गांव से पाला पड़ ही गया था तो सोचा कि जो होगा देखा जायेगा।

मैंने वहां के पुराने पटवारी से चार्ज लिया और काम देखने लगा।

दूसरे दिन गांव के सरपंच से मेरी मीटिंग थी।
सरपंच एक महिला थी.

उसने मिठाई का डिब्बा देकर मेरा स्वागत किया और कहा- आपको हम यहां कोई परेशानी नहीं होने देंगे. हम सब साथ मिल कर काम करेंगे. आप भी हमारा साथ दीजिएगा।

मुझे काफी अच्छा लगा और मैंने महसूस किया कि सरपंच काफी होशियार महिला थी।

बाद में जानने को मिला कि सरपंच तो भले दिल की और अच्छी है पर उसका पति गांव का बाहुबली था और सरफिरा भी!
उसका गुट काफी बड़ा और ताकतवर था और काफी लड़ाई झगडे के बाद उसे सरपंच का पद दिलवाया था।

अगले कुछ दिनों में गांव के बाकी गुट वाले भी मुझसे मिलने आये और उन सबकी मुझसे समर्थन के लिए मांग थी तथा अप्रत्यक्ष रूप से धमकी भी थी की मैं उन्हें ही समर्थन करूं।

इस गांव में शुरु से ही मैंने अच्छे से कामकाज चालू किया तो लोगों के काम समय से होने लगे।
मेरे पहले के पटवारी गांव के कोई ना कोई गुट में मिल जाते थे और काम कराने के पैसे भी लेते थे तो आम लोगों में नाराजगी रहती थी।

वैसे भी गांव के गुट वाले अपनी पसंद का ही पटवारी का गांव में पोस्टिंग करवाते थे।

मैं सभी का काम अच्छे से समय पर और बगैर पैसे लिए करने लगा तो एक दो महीने में ही मेरी गांव में काफी अच्छी छवि उभर आई थी।

दूसरी तरफ दो महीने से मुझे कोई चूत नहीं मिली थी तो मेरा बुरा हाल था।
रश्मि की बहुत याद आती थी, साथ में नम्रता की गोरी और फातिमा की काली चूत भी मुझसे भूली नहीं जा रही थी।

मैंने रश्मि को वचन दिया था तो मैं उस गांव की तरफ जाना नहीं चाहता था।
हालांकि नम्रता और फातिमा की चूत तो मुझसे चुदाने को आज भी तैयार थी।

पर मैंने अब इसी गांव में चूत ढूँढना का तय किया।
यह इस गांव के हिसाब से मुश्किल और मेरे लिए ख़तरनाक भी था क्योंकि पकड़ा गया तो इस गांव के लोग जान से भी मार सकते थे।

पर मेरे लिए इस गांव में किस्मत ने पहले से अच्छा तय करके रखा था।

मैं नयी जगह और कामकाज के चलते अब तक लोंडियाबाजी में नहीं पड़ पाया था. पर अब मैंने गांव में चूत ढूँढना शुरु किया।

पहले तो मैंने सरपंच के बारे में सोचा।
वह 35 साल की घरेलू महिला थी. ऐसे तो वह काफी गोरी थी थोड़ी सी मोटी पर उसका चेहरा खास मुझे प्रभावित नहीं कर पाया. वैसे भी वह मेरा छोटे भाई की तरह ख्याल बहुत रखती थी तो मेरी नीयत उसके लिए खराब नहीं हो पायी।

मैंने दूसरी भाभियों और लड़कियों के बारे में सोचा।
कुछ भाभियां और लड़कियां मेरे पास काम करवाने अक्सर आया करती थी तो उसमें ही जुगाड़ करने की फिराक में रहने लगा।

दो महीने बाद एक बार मैं ऑफिस के दूसरे कमरे की खिड़की खोल रहा था जिसे कभी कभार ही खोलते थे क्योंकि उस कमरे में पुरानी फाइलें और रेकोर्ड ही रखते थे।
मुझे एक पुरानी फाइल की जरूरत पड़ी थी तो मैं उस कमरे में गया और वहां की खिड़की खोली।

खिड़की से बाहर थोड़ी ही दूर एक जवान औरत कपड़े सुखाती दिखी।
उसकी पीठ मेरी तरफ थी पर मैं तो उसे देखता ही रह गया।

उसका बदन कसा हुआ गठीला और एकदम गुलाबी था जिससे मेरे पैंट में हरकत सी होने लगी।
काफी देर तक मैं उसे निहारता रहा।

फिर वह मेरे सामने घूमी तो देखा कि मैं इसे जानता था।
उसका नाम नाम रेखा था, वह मेरे पास कुछ काम के लिए तीन दिन पहले ही आयी थी।

रेखा सरपंच की रिश्ते में दूर की देवरानी थी और सरपंच के मायके के गांव की ही थी तो सरपंच से उसकी काफी बनती थी।

सरपंच ने मुझे उसका काम जल्दी निपटाने का अनुरोध भी किया था।
काम में व्यस्त होने की बजह से मैंने उस पर ध्यान नहीं गया था पर आज उसका कामुक बदन देख कर मेरे तो तोते उड़ गये थे।

मैंने तुरंत ही एक प्लान बनाया और सरपंच के जरिए उसे संदेश दिया कि उसके दिये कागज में एक दो कागज कम हैं.

तो वह दूसरे दिन ऑफिस आ गयी।

ऑफिस में कोई नहीं था, वह अपने छोटे बच्चे के साथ आयी थी।
मैंने उसे बहुत अच्छी तरह से निहारा।

आज उसने सर पर घूंघट नहीं निकाला था तो मैं जी भर कर उसे निहारता रहा।
शायद उसे भी इस बात का अंदेशा हो गया था।

मैंने उससे हंसते हुए काफी बातें की.
उसने कहा- अरे साहब, ऐसे छोट मोटे कामों के लिए थोड़ा बुलाते हैं आप खुद ही निपटा लेते ना!
वह भी थोड़ी बातूनी और मजाकिया स्वभाव की निकली।

शाम को घर आकर मुझे उसकी कल्पना करते हुए हाथ हिला के आग को शांत करना पड़ा।

रेखा छब्बीस साल की थी और उसका एक चार साल का बच्चा भी था.
उसका फीगर करीब 36-32-34 का होगा।
उसके नाक नक्श ऐसे कि बोलीवुड की हीरोइन से टक्कर ले सकें।

वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी पर काफी होशियार थी।
मैंने सोचा कि पति ने भी क्या किस्मत पायी थी।

अब मैं रोज उस कमरे की खिड़की से रेखा को निहारने लगा।
वह अपने पति और बच्चे के साथ अलग रहती थी, उसके घर से सट कर ही उसके ससुर और जेठ के भी घर थे।

उसका घर का मुख्य द्वार बिल्कुल मेरे ऑफिस के पीछे ही पड़ता तो मैं खिड़की से ही उसके घर में भी देख सकता था।
मैंने कई बार कपड़े सुखाते या झाड़ू निकालते समय उसकी ब्रा और क्लीवेज भी देखी थी।

अब उसकी चूत मिल जाए तो जन्नत मिल जाए।

ऐसे ही तीन चार महीने निकल गये।
उसे भी शायद पता लग गया था कि मैं खिड़की से उसे झांकता हूँ।
वह अब मेरे सामने मुंह रख कर कपड़े सुखाती थी और कभी मुस्कुराती भी थी।

बात यहीं आकर रुक गयी थी, कुछ आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
उससे बात करने की मेरी हिम्मत भी नहीं हो रही थी।

फिर समय ने करवट बदली और वह एक बार शाम को पांच बजे के आसपास सरपंच से मिलने ऑफिस आयी।
सरपंच ने उसे पारिवारिक काम से बुलाया था।

वैसे मेरे ऑफिस में दोपहर के बाद ज्यादा काम नहीं रहता था पर सरपंच ने अब दोपहर के बाद ऑफिस में बैठना शुरू किया था।

अब यह सिलसिला चल पड़ा की वह सरपंच के साथ गप्पे लड़ाने ऑफिस आ जाती थी।

मेरा टेबल सरपंच के पास ही था तो मैं उसे देखते रहता था और उनकी बात सुनता था।

असल में सरपंच अपने छोटे भाई के लिए रिश्ता ढूँढ रही थी. उसी चक्कर में वह रेखा को बुलाती थी कि फलाना गांव में फलाने आदमी की बेटी अच्छी है।

सरपंच मुझे बहुत मानती थी तो उन दोनों की बातों में मुझे भी शामिल करती थी.
कभी कभी मज़ाक भी हो जाता था।

रेखा बहुत बातूनी थी और हमेशा मजाकिया बातें करती रहती थी।
मैं रेखा को टार्गेट करके बातों के शोट मारता तो वह भी मुझे करारे जवाब देती थी।
सरपंच हमारी बातों का मज़ा लेती थी।

तीन महीने तक ऐसा चलता रहा।

एक बार वह ऑफिस में आयी तो मैं अकेला ही था.
सरपंच किसी काम से बाहर गयी हुई थी.

तो वह वापिस जाने लगी.
उसी वक्त चाय वाला लड़का चाय लेकर आया.
तो मैंने रेखा को रोका और चाय पीने को बोला.
तो वह रुक गयी।

चाय पीते पीते वह बोली- विशाल जी, आपने अब तक सगाई क्यों नहीं की? कोई पसंद नहीं आयी क्या?
मैंने कहा- अभी मेरी उम्र ही क्या है … शादी वादी करके क्या फायदा!

ऐसे थोड़ी देर बात हुई.
फिर जाती हुई वह बोली- जल्दी से कोई ढूँढ लीजिए, कब तक आप यों ही खिड़की से झांकते रहोगे।
मैं कुछ समझ पाऊं … उससे पहले वह इतना बोल कर झट से चली गई।

मुझे समझ आ गया कि वह भी मुझे लाइन दे रही थी।

दूसरे दिन जब मैं खिड़की से उसे झांकने गया तो देखा कि आज वह मेरे सामने ही चेहरा करके मुस्कुराती हुई कपड़े सुखा रही थी।
जाते जाते बाल्टी में बचा पानी उसने जोरदार मुस्कान के साथ मेरी तरफ फेंका।

मैं समझ गया अब इसकी चूत दूर नहीं है।

अब वह खिड़की के पास आकर मुझसे मज़ाक भी कर लेती।
मैंने उसे कई बार शहर घूमने आने का न्योता दिया.
पर वह हमेशा अपने पति के साथ ही शहर आती थी।

एक बार उसने कहा- मेरी मौसी शहर में रहती हैं और मैं उनके घर चार पांच दिन के लिए रहने जाऊँगी.

मौसी के घर का जो पता उसने बताया, वह स्थान मेरे घर से आधा किलोमीटर दूर था।
उसी दौरान मेरी भी दो दिन की छुट्टी थी।

उसने कहा- चलो आप बहुत दिन से निमंत्रण दे रहे थे तो आपकी मेहमान नवाजी भी देख लेते हैं।
मैंने उसे शहर में पास वाले पार्क में मिलने के लिए कहा।

आखिर वह दिन भी आ गया.
वह पार्क में अपने बच्चे के साथ आयी हुई थी।
मैं भी सज-धज के वहां पहुंचा।

उसके बच्चे को अपनी गोद में लेकर मैं उससे बातें करने लगा।
फिर मैंने उसे रूम पर आने को बोला तो थोड़े नखरे दिखा कर वह मान गई।

रूम पर जाकर उसके बच्चे को मेरे बेड पर सुला दिया और हम नीचे चटाई पर बैठ गए।

उसने बताया कि उसकी शादी अठारह की उम्र में हुई थी। शुरू में उसका पति बहुत अच्छे से उसको रखता था फिर बाद में वह सरपंच के पति के संगत में आया और वह पैसों के पीछे पड़ा। वह ट्रांसपोर्ट का बिज़नस करता था जिसमें अच्छी कमाई हो जाती थी. पर अब वह और ज्यादा कमाने के चक्कर में पड़ गया था और राजनीति में भी बड़ा पद पाना चाहता था। सरपंच के पति के अच्छे बुरे सब कामों में वह शामिल रहता है. उस पर पुलिस केस भी चल रहे थे। महीने में करीब बीस दिन घर से बाहर ही रहता था और जब घर आता था तो भी अपने गुट वालों के साथ मीटिंग या पुलिस या कोर्ट वकील या प्रोपर्टी के कामों में व्यस्त रहता। आठ दस दिन घर आता उसमें भी दो तीन दिन ही वह पत्नी और बच्चे के लिए ठीक ठाक समय दे पाता।

दूसरी बात यह थी कि रेखा को अपनी खूबसूरती पर काफी नाज था।
वह चाहती थी कि हर कोई उसकी खूबसूरती का लोहा माने।

पर छोटी उम्र में ही उसकी शादी हो गई और उसके पति ने भी दो तीन साल ही उसकी खूबसूरती को भोगा था। अब वह घर पर होता तो खाली अपनी हवस बुझाने ही रात को रेखा के ऊपर चढ़ जाता और अपने आपको शांत कर के जल्दी ही उतर जाता।
उसमें भी कई बार तो नशे में चूर होकर रेखा को भोगता तो अब रेखा को संतुष्टि नहीं मिलती।
ना तो वह रेखा की तारीफ करता और न उसे समय दे पाता।

पर रेखा की जवानी अब भी बहुत कुछ मांग रही थी जो उसका पति उसे नहीं दे रहा था।

जब रेखा ने मुझे उसके पीछे लट्टू पाया तो उसके अरमान फिर से हरे भरे हो गये।

उसने सरपंच से मेरी काफी तारीफ सुन रखी थी तो वह भी मेरी तरफ आकर्षित हुई थी।

मैं उससे चिपक कर बैठ गया और बातों बातों में मस्के मारने लगा वह भी मुझे करारे जवाब दे रही थी।

वह मुझसे पांच साल बड़ी और एक बच्चे की मां थी आज मैं उसे चोदने जा रहा था।
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उसके कंधे पर भी एक हाथ रख दिया।

जब मैंने उसके गालों पर एक चुम्बन लिया तो वह दूर जाने लगी.

पर मैंने उसे पकड़े रखा और फिर उसके होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
वह भी मेरा साथ देने लगी।

मैंने उसकी पीठ के खुले हिस्से को काफी सहलाया और चूमा भी!
इससे वह काफी गर्म हो चुकी थी.

फिर मैंने उसके बोबे पकड़ लिये और दबाने लगा।
उसके बोबे फातिमा से भी बड़े थे और वह नम्रता से भी ज्यादा गोरी थी तथा रश्मि की तरह गर्म थी।

उसने खुद ही ब्लाउज और ब्रा उतारी फेंकी।
वह बार बार विशाल कर रही थी.
मतलब था कि वह जल्दी मेरा लौड़ा अपनी चूत में चाहती थी.

पर मैं उसे थोड़ा तड़पाना चाहता था और धीरज के साथ उसकी खूबसूरती को पीना चाहता था।

मैं उसके स्तनों को चूसने और दबाने लगा.
वह भी मदहोश हो गई थी।

मैंने उसके पूरे शरीर को चूमा तो वह पागल सी हो गई और हांफने लगी।
वह बोली- विशाल जल्दी करो, अब सब्र नहीं होता है।

मैंने भी अपने कपड़े उतारे और उसने अपने बाकी बचे कपड़े उतार फेंके।

उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी, फिर टोपा चाटने लगी और फिर पूरा लंड चूसने लगी।
मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया था क्योंकि एक परी मेरा लंड चूस रही थी।

थोड़ी देर बाद उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकला और बेड पर सीधी लेट गई और मुझे कहा- विशाल जल्दी आओ, मुझसे रहा नहीं जाता।
मैं भी उसके उपर चढ़ गया और लंड उसकी चूत में डालने लगा।

उसकी गोरी चूत पर काफी काली झांटें थी तो मुझे चूत का छेद ढूंढने में तकलीफ हो रही थी.
पर उससे रहा नहीं गया और उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत में सेट किया और बोली- अब धक्का मारो।

मैंने एक ही झटके में पूरा लौड़ा उसके अंदर घुसा दिया तो उसके मुंह से आह निकली।
मैं उसे धमाधम चोदने लगा.
वह विशाल आह आह और जोर से जोर से ऐसी आवाजें निकाल रही थी।

मैं भी बोल रहा था- मेरी रानी रेखा, तुम्हें जब से देखा तब से मेरे मन में शोले भड़क रहे थे। आज तू मिली है मेरी जान!
ऐसा बोलते हुए मैं उसे जोर जोर से चोद रहा था।

ज्यादा जोश के कारण दस मिनट में ही मेरा पानी छूटने को हुआ तो मैंने कहा- डार्लिंग, पानी कहां निकालूं?
उसने कहा- अंदर ही निकालो।

मैंने उसके अंदर ही अपना वीर्य निकाल दिया और उसके ऊपर ही लेटा रहा।

काफी देर बाद हम अलग हुए और कपड़े पहन कर एक दूसरे की बाहों में लिपट कर बैठ गये।

उसने कहा- काफी समय बाद किसी ने इतने प्यार से मुझे चोदा है। मेरा पति तो बस दारू के नशे में मुझ पर चढ़ जाता है और पांच ही मिनट में पानी छोड़ कर लुढ़क जाता है। मैं प्यासी ही रहती हूँ।

आधा एक घंटा हमने बातें की।

वह फिर से चुदना चाहती थी तो बार बार अपने बोबे मेरे मुंह पर घिसती और मेरे लंड को सहलाती.
तो मेरा लौड़ा भी अब खड़ा हो गया था।

हमने फिर कपड़े उतारे और फिर से चुम्माचाटी और बोबा दबाई की।

उसने मेरा लंड फिर से चूसा तो वह लोहे की छड़ की तरह खड़ा हो गया।
मैंने फिर से उसकी चूत में लौड़ा डाल दिया और चोदने लगा।

इस बार धैर्य के साथ चुदाई की तो आधा घंटा चोद सका।
फिर से मैंने उसकी चूत में अपना वीर्य छोड़ा।

इस चुदाई के बाद वह अपनी मौसी के यहां गयी।
वह अपनी मौसी के घर पांच दिन तक रुकी और मैंने भी अपनी ऑफिस में छुट्टी ले ली और हम रोज मिलते रहे और चुदाई करते रहे।

फिर गांव आ कर वही सिलसिला खिड़की से झांकने का चालू हुआ।

हम दोनों एक-दूसरे को फ्लाइंग किस करते तथा दिन में चार पांच बार खिड़की पर ही मिलन हो जाता।
ज्यादा कुछ नहीं कर पाते थे क्योंकि उसका पति उसके मौसी के घर से वापस आने के दूसरे दिन ही घर आ गया था।

एक हफ्ते बाद उसका पति वापस काम पर लौटा तो उसने मुझे दोपहर में अपने यहां खाने पर बुलाया।

हमने साथ में खाना खाया और खूब चुदाई की.

ऐसे दो महीने चलता रहा।

बाद में उसने मुझे बताया कि वह मां बनने वाली है और उसके बच्चे का बाप मैं ही हूं।
मेरी गांड फट गई.

मैंने कहा- अब क्या करेंगे?
वह हंसती हुई बोली- बिल्कुल फट्टू हो तुम. इसमें डरने की क्या बात है. यह तो खुशी की बात है।

मैंने कहा- किसी को पता चल गया तो क्या होगा?
उसने कहा कि उसने सोच समझ कर ही बच्चा रखवाया था। वह अपने पति की जगह मेरे बच्चे की मां बनना चाहती थी इसलिए उसने मुझे कभी कोंडोम इस्तेमाल नहीं करने दिया था और मेरा वीर्य अपनी चूत में डलवाती थी।

उसने कहा- तुम तो खुश हो. बस किसी को बताना मत कि यह बच्चा तुम्हारा है. यह बच्चा तो हमारे प्यार की निशानी है।

तब जाके मुझे भी राहत हुईं और मैं भी खुश हुआ।

नौ महीने बाद रेखा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया।
रेखा ने मुझे कहा- यह तुम्हारी बेटी है तो तुम्हीं इसका नाम रखो।
मैंने उसका नाम प्रेरणा रखा।

बाद में मौका मिलने पर मेरी और देशी भाभी चुदाई चालू ही रही।

उसी ने मुझे गांव की कुंवारी चूत भी दिलाई जो आपको बाद में बताऊंगा।
लेखक के आग्रह पर उनकी ईमेल आईडी प्रकाशित नहीं की जा रही है।

Antarvasna

हाय मेरा नाम राकेश है।मेरी वर्तमान Antarvasna उम्र ३५ साल है। मैं अपनी किशोरावस्था से बहुत ही सेक्सी रहा हूँ। मैं अभी इंदौर मैं रहता हूँ। मैंने आज तक करीब ५० से ऊपर लड़की और आंटी के मजे लिए हैं और उनकी चूत को अपने लंड के दर्शन कराये हैं।

मेरे साथ घटी एक घटना आपको बता रहा हूँ, कहानी सच्ची है पर पात्रों के नाम बदल कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ।

ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और मेरी उम्र २७ साल थी।

एक दोस्त के माध्यम से एक मुस्लिम परिवार में आना जाना था। पाँच लोगों का परिवार था वो। पति सलीम ट्रक ड्राईवर जो ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था जिसको मैंने कभी घर पर नहीं देखा और न ही उसकी शकल जानता हूँ। पत्नी शबनम, थोड़ा सांवला रंग पर कसा हुआ बदन ३४-२८-३६ उम्र उस समय ३६-३७, बड़ी लड़की शमीम उमर १८, रंग साफ़ ३०-२८-३४ दिखने में साधारण उससे छोटी बानो, और सबसे छोटा लड़का उम्र १० साल मैं एक बार उनके घर गया तो शबनम ने कहा कि घर मैं तंगी है इसलिए शमीम को कहीं नौकरी लग जाए तो अच्छा रहेगा। मैंने मेरे ऑफिस में उसको नौकरी पर रख लिया। मैं उस वक्त तक उनके बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोचता था।

करीब एक महीने तक उसने मेरे यहाँ काम किया उसके बाद २-३ दिन वो आई नहीं, मैंने भी ध्यान नहीं दिया, एक दिन मैं मार्केट मैं था तो मुझे शमीम जाती हुई दिखी। मैंने बाईक उसकी तरफ़ मोड़ी और उससे पूछा कि क्या बात है तुम ऑफिस नहीं आ रही हो?

तो उसने बोला कि तबियत ठीक नहीं थी, और अभी आप मुझे घर छोड़ दो।

मैंने उसे बाइक पे बिठा लिया, इससे पहले मैंने कभी उसे बाइक पर नहीं बिठाया था। उसके बैठते ही उसके मम्मे मेरी पीठ पर गडे। मेरा लंड खड़ा हो गया।उसका घर दूर था हम बात करते हुए चल रहे थे, रास्ते में सिनेमा हॉल आया तो मैंने उसे पूछा कि पिक्चर देखनी है ?

उसने हाँ कर दी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही गया था सो उसे ठंडा करना जरूरी भी था। सिनेमा हॉल में मुश्किल से ३० लोग भी नहीं थे। हमने कोने की सीट पकड़ी और बैठ गए। पिक्चर चल रही थी कि मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने सिग्नल ग्रीन समझ कर धीरे से उसके मम्मों पर हाथ रख दिया उसने उसका भी कोई प्रतिवाद नहीं किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई, इधर पैंट में लंड कड़क होने लगा था।

मैंने धीरे -२ उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिए उसे भी अच्छा लग रहा था। धीरे से मैं अपने हाथ उसके कुरते के अन्दर ले जाकर उसकी ब्रा के ऊपर और अन्दर से उसके निप्पल और गोलाई के मजे लेने लगा। पर दोस्तों ! मजा अभी भी अधूरा था।

तो मैंने धीरे से उसकी सलवार में हाथ डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ चलाने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा था पर वो शायद पहल करने में अभी भी शरमा रही थी। मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड जो अब तक काफी तगड़ा हो चुका था बाहर निकल लिया

और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लंड पर रख दिया, वो शायद इसका ही इंतजार कर रही थी।

इधर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। वो भी मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहला रही थी। मैं कभी उसके दूध दबाऊं और कभी उसकी चूत में उंगली डालूँ।

दोस्तों मुझे बिल्कुल भी अपनी तकदीर पर विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसे अकस्मात मुझे उस लड़की का सब कुछ मिल जाएगा जिसे मैंने कभी इस नज़र से देखा ही नहीं।

इधर उसके हाथ मेरे लंड पर कसावट के साथ चलते जा रहे थे और दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ जो उसकी चूत में था उसको पकड़ लिया और मेरे हाथ को वो अपनी चूत में तेज़ी से अन्दर बाहर करने लगी। उसकी चूत ने थोडी देर में ही पानी छोड़ दिया जिसे उसने अपने रुमाल से पोंछ लिया। अब उसकी बारी थी मैंने उसे मेरा लंड मुंह में लेने के लिए बोला तो उसने ना कर दिया। फिर वो मेरी तरफ़ इस तरीके से मुड़ गई कि मैं उसके दूध पी सकूं मैंने उसके दूध पीने शुरू कर दिए, इधर उसने मेरे लंड पर अपना हाथ और तेज़ कर दिया जिससे मेरा पानी निकल जाए पर कमबख्त पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।

फिर मैंने उसकी सलवार उतार कर घुटने तक कर दी और पैंटी नीचे खिसका कर उसे इस तरह से बिठाया कि उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर आ जाए। मैंने उसे इस पोसिशन में बिठाकर नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए मेरा लंड उसकी चूत में अन्दर तक गया था, वो भी मेरे लंड के मज़े लेने लगी इधर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके मम्मे दबाना और मसलना जारी रखा। करीब तीन मिनट की उछल कूद के बाद उसने अपनी गांड मेरे लंड पर दबा ली और मेरी जाँघों पर अपने हाथ कस लिए। मैं समझ गया कि ये अब जाने वाली है, मैंने भी अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल कर उसके मम्मे दबाते हुए अपना पानी निकाल दिया।

उसके बाद हमने अपने-२ रूमाल से अपने लंड और चूत साफ़ किए और सामान्य होकर बैठ गए। उसने बोला कि अब आप मेरे को घर छोड़ दो क्योंकि घर पर मेरा इंतज़ार हो रहा होगा। उसने मुझे ये भी बोला कि घर पर मत बताना कि हम पिक्चर गए थे। दोस्तों मुझे चुदाई का शुरू से ही बहुत शौक रहा है। अभी मैं चाहता हूँ कि नई चूत चोदने के लिए मिले ! अगली बार आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने शबनम और उसकी बेटी की एक ही पलंग पर रात भर चुदाई की। मेरी अगली कहानी का इंतज़ार करें ! Antarvasna

प्यारे चुदक्कड़ साथियों बुर चोदने का मौसम कैसा चल रहा है चलो आज मैं आप लोगो के साथ मेरी बीवी शुभी की बुर चुदाई का एक और किस्सा बताता हूँ और वो ये है कि मेरी बीवी कैसे एक अजनबी के पराये लन्ड से अपने शौहर के बिस्तर पर ही चुद गई आप लोगो को बता दूं कि हम लोग उत्तर प्रदेश के एक शहर बहराइच के रहने वाले है और मेरी बीवी को सबसे ज़्यादा टेलीग्राम चलाने का शौक़ है उसको फेसबुक , व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम से ज़्यादा अच्छा टेलीग्राम लगता है और उसने टेलीग्राम पर अपना ग्रुप और चैनल और इस नीचे वाली नाम से id भी बनाई हुई है @SandhyasharmaS भी बनाया हुआ है जिस पर उसके बहुत से दोस्त है जिसमे मर्द , जवान लड़के , लड़कियां सभी हैं जिनसे वो चैट किया करती है और सेक्सी वीडियो भी देखती रहती है मैं आप लोगो को पहले भी बता चुका हूं, कि वो इतनी स्मार्ट और हॉट सेक्सी है कि लोग उसकी बुर चोदने के लिए सब कुछ निछावर कर दें , अगर गलती से कोई या आप लोगों में से ही कोई उसकी गदराई हुई गुदाज़ बुर को खुला देख लो तो चोदने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाओ तो हुआ कुछ यूं कि हम दोनों की मैरिज एनिवर्सरी थी जो कि हम दोनों बहुत धूम धाम से मनाते हैं और अपने दोस्तों को भी इनवाइट करते है जो लोग दूर के होते है उनके लिए रुकने का भी बंदोबस्त होता है, और हर एनिवर्सरी पर हम लोग सुहागरात ज़रूर मनाते है और मैं अपनी बीवी शुभी की बुर को नए नए तरीके से चोदता हूँ आप लोगो को ये भी मालूम है कि मेरी बीवी स्लिम है यानी पतली है फिट है , लेकिन उसकी जो चूची है उसका साइज बहुत बड़ा है , इतना बड़ा की उसकी चूची की साइज की ब्रा मार्किट में नही मिलती , और वो अपनी ब्रा को टेलर मास्टर से नाप देकर सिलवाती है जब भी वो कोई नई ब्रा सिलवाती है नई डिज़ाइन का तो वो टेलर मास्टर को घर बुलाती है और टेलर मास्टर उसको चोदने के लिए हर बार उसको ऊपर से नँगी करके नाप लेता है , फिर उसकी गदराई हुई गुदाज़ बुर को चोदता है उसके बाद तब ब्रा सिलकर लाता है और मेरे ही सामने मेरी बीवी की चुचियों मेंब्रा पहनाता है , इस बार की एनिवर्सरी के लिए शुभी ने नए स्टाइल की ब्रा बनवाई थी एक हफ्ता पहले ही जिसमे सिर्फ छातियों के मम्मे बंद करने तक ही सिस्टम था और बाकी चुचियाँ खुली ही थी उस ब्रा से और जब टेलर मास्टर ब्रा देने आया तो फिर से मेरी शुभी की बुर को चोदकर गया था आप लोगो को ये बता दूं कि टेलर मास्टर मेरी बीवी को क्यों चोदता था असल मे बात ये थी की उसके अलावा कोई भी शुभी की ब्रा बना ही नही सकता था , और शॉप पर उसके स्पेशल चूची होने की वजह से उस नाप की ब्रा मिलती नही थी इसलिए टेलर मास्टर मेरे ही सामने कभी मेरे ही साथ मे मेरे ही बेड पर मेरी बीवी को चोदता था , और वो उससे खुशी खुशी चुदा लेती थी खैर बात अब पॉइंट की तो इस एनिवर्सरी पर भी हम।लोगो ने अपने अपने सभी दोस्तों को इनवाइट किया था प्रोग्राम रात का होता था तो उस दिन मैरिज एनिवर्सरी में उसके टेलीग्राम चैनल ग्रुप के दोस्त भी बाहर सिटी से आए थे कुछ लोकल के भी थे ऐसे ही मेरे दोस्त भी थे पार्टी हुई हम लोगो ने खूब मज़े किये और व्हिस्की का पैग पर पैग लिया दोस्तो ने भी खूब इंजॉय किया और रात 12 बजे तक पार्टी चली , लोकल के लोग तो सब चले गए दूसरे शहर से आये हुए शुभी के दोस्त हम लोगो के साथ ही हमारे ही घर मे रुक गए और हम लोग भी खूब इंजॉय करते हुए अपने कमरे में जाने की बजाय जहाँ की हर एनिवर्सरी पर कमरा सजाया जाता था और हम दोनी सुहागरात मनाते थे और मैं अपनी बीवी की बुर चोदे बिना सोता नही था लेकिन उस दिन वही हाल में सबके सोने का इंतज़ाम करके हम दोनों भी वही बैठ कर गपशप करने लगे थे , शुभी के जो दोस्त थे उसमे से एक ऐसा था जो कि जबसे आया था शुभीको घूर घूर कर ताड़ रहा था , उसने पार्टी में पता नहीक्यों सबसे ज़्यादा शुभी को व्हिस्की के साथ पानी भी खूब पिलाया था इसका मुझे बाद में पता चला नाम था उसका रोहन हाइट 6 फिट थी तगड़ा कसरती बदन था वो भी रुक गया था और शुभी को अपनी नज़रों से ही चोदे दे रहा था खैर आधा एक घण्टे तक हंसी मजाक करने के बाद कोई सो गया था , कोई सोने की तैयारी कर रहा था शुभी भी रोहन के जांघों पर अपनी टांग रखकर हूँ हाँ कर रही थी जबकि रोहन को तो जैसे नींद ही नही थी शुभी का सर मेरी जांघ पर था और शुभी के पैर रोहन की जाँघों पर थे बात करते करते ही शुभी अपनी बड़ी बड़ी चुचियों को अपनी कमीज़ के बड़े गले से 75 परसेंट बाहर दिखाती नींद में चली गई तो मैं भी उसको बिना हटाये ऐसे ही लेट गया की जब जागेगी तब कमरे में जाया जाएगा उधर रोहन की तो जैसे चांदी हो गई थी वो बोला सम्मू भाई शुभी को अच्छे से लिटा दो जब जागेगी तब रूम में चले जाना और आराम से सोना हाँ ठीक है , मैं बोला और रोहन को अपनी तरफ बुलाया की वो शुभी का सिर अपने गोद मे रख ले क्योंकि मुझे बाथरूम जाना था वो तो जैसे चाहता ही यही था उसने धीरे से शुभी का सिर उठाया और अपनी गोद मे रख लिया और बहाने से चूची को बंद करने के लिए उसकी कमीज़ को पकड़ कर ऊपर चूची पर सरकाने लगा , एक दो बार तो उसने शुभी के चुचों के मम्मे भी पकड़ लिए मैं बाथरूम चला गया और कुछ देर के बाद आया तो देखता हूँ कि रोहन मेरी बीवी के चुचों पर अपना हाथ रखे था मैं भी आकर लेट गया और शुभी को देखने लगा वो व्हिस्की के खुमार में जब अंगड़ाई लेती तो दोनो टांगो को फैलाती और पहाड़ों को भी शरमा देने वाली छातियां जैसे बुला रही हो कि दबाओ और सहलाओं मुझे उधर रोहन जब भी शुभी अंगड़ाई लेती तो वो अपना मुंह शुभी की आधे से ज़्यादा खुली चुचियों के पास ले जाता और अपनी गर्म सांसे चुचों के मम्मों पर छोड़ता जिससे शुभी और बार बार अंगड़ाई लेती थी , रोहन के ऐसा करने से वो भी धीरे धीरे गरम हो रही थी और वो मेरे चक्कर मे रोहन के लन्ड को कपड़े के ऊपर से ही पकड़ लेती वो समझ रही थी कि मैं हूँ उसका सम्मू हम लोग छोटे शहर के होते हुए भी खुले दिमाग के खुले विचारों वाले लोग थे इसलिए मैं इस पर कोई ऐतराज नही कर रहा था रोहन भी कभी शुभी के चुचों के मम्मे हल्के से दबाता , कभी उसके पेट को सहला रहा था और बहाने से वो अपने हाथों को शुभी के कपड़े के अंदर से ही शुभी की नरम और गुदाज़ , फूली हुई बुर को छूने की कोशिश कर रहा था वो जब ऐसा करता तो शुभी बड़ी ज़ोर से अंगड़ाई लेती जिससे लगता कि अभी शुभी की बड़ी बड़ी चूची कपड़ों से बाहर आ जायेगी ऐसा हो भी जाता लेकिन रोहन शुभी के कपड़ो को अपने हाथों से शुभी की बड़ी बड़ी चुचियो पर चढ़ा देता था मुझे भी अब नींद आ रही थी लेकिन मैं ऐसा देखकर सो नही पा रहा था , क्योंकि मामला बहुत गरम हो रहा था अब जैसे ही रोहन बहाने से शुभी की बुर को छूने के लिए हाथ अंदर घुसा रहा था तो शुभी ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी मोटी ,फूली हुई नरम ,गुदाज़ बुर पर हाथ रख लिया वो मेरे धोखे में ऐसा कर रही थी फिर व्हिस्की का खुमार भी था अब रोहन को जैसे सब कुछ मिल गया था रोहन भी अपने फड़फड़ाते लन्ड से शभी की गुदाज़ बुर को चोदना चाहता था रोहन ने शुभी की वडापाव जैसी फूली और मोटी, गुदाज़ बुर को जिस पर बाल नही थे शुभी अपनी चूत को चिकना ही रखती थी सहलाना शुरू कर दिया रोहन जैसे चुदाई के नशे में मुझे भूल ही गया था कि मैं देख रहा हूँ और वो मेरे ही घर मे है और जिसकी बुर वो चोदना चाहता था , जिसकी बुर पर वो हाथ रखे बुर मसल रहा था वो उसकी बीवी नही , बल्कि मेरी बीवी है और वो मेरी बीवी को चोदने के लिए बेताब था अब शुभी पर खुमार दोनो ही था व्हिस्की का भी और रोहन का हाथ उसकी चूत और चुचों पर लगने से चुदाई का भी शुभी ने आंखे बंद किये ही किये रोहन के लन्ड को पैंट से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी रोहन भी अपनी पैंट को खोलकर उतार दिया और उफ्फ क्या बताऊँ उसका लन्ड था कि जैसे कोबरा था स्साला जैसे ही रोहन का लन्ड रोहन की पेंट से आज़ाद हुआ तो बुर चोदने के लिए फुंफकार रहा था रोहन के लन्ड का झटका इतना तेज था की कम से कम 5-6 इंच रोहन का अनकट लन्ड नीचे जाता और एकदम से फुंफकारता हुआ एक्स्ट्रा 5-6 इंच ऊपर तक झटका मारता था रोहन ने अपने आग के लोहे की रॉड जैसे दहकते लन्ड को शुभी की खुमार से बंद मुंह पर लहराने लगा और शुभी के नीचे का कपड़ा उतार दिया जिससे शुभी कमर से नँगी हो गई फिर रोहन ने शुभी का ऊपर का कपड़ा भी उतार दिया जिससे शुभी अब पूरी तरह नँगी हो चुकी थी उसकी गुदाज़ बुर भी नँगी थी और उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ भी अब ब्रा से आज़ाद हो चुकी थीं रोहन का लन्ड तो मेरे कट लन्ड से भी मोटा था उसका अनकट लन्ड का टोपा खाल के अंदर से ही बुर चोदने की ख्वाहिश से ही झूम रहा था उसने अपना अनकट लन्ड शुभी के हाथों में थमाया और रोहन शुभी की गुदाज़ बुर को चाटने लगा अब शुभी भी अपनी दोनो टांगो को फैलाकर अपनी गुदाज़ गद्दे जैसी बुर की फांक को खोल दी और रोहन के मोटे अनकट लन्ड को जैसे ही हाथ मे लेकर सहलाने लगी तो वो चौंक उठी क्योंकि शुभी का हाथ कट वाला लन्ड पहचानता था लेकिन उसी वक़्त रोहन ने अपनी लम्बी लम्बी जीभ से ही शुभी की बुर को चोदने लगा था जिससे शुभी ने मस्ती में आवाज़ें निकालना शुरू कर दी थी आssह आह उफ्फ आउच श श शी अब शुभी रोहन के लन्ड को छोड़कर रोहन का चेहरा अपनी बुर में ही खोसने कि कोशिश करने लगी क्योंकि रोहन अपनी जीभ को पूरा निकालता और शुभी की गदराई हुई गुदाज़ बुर में पेल देता जिससे शुभी को चुदाई जैसा मज़ा मिल रहा था अगले पार्ट में पढ़ें की रोहन ने कैसे मेरी मैरिज एनिवर्सरी पर शुभी को चोद कर रोहन ने ही सुहाग रात मनाई स्टोरी कैसी लगी कमेंट में बताएं या मेल भी कर सकते हैं मेल - pownady837@gmail.com मेरी बीवी की सुहागरात किसी और ने मनाई ( पार्ट 2 ) दोस्तो जैसा कि आपने पिछले भाग में पढ़ा कि मेरी बीवी शुभी का एक टेलीग्राम दोस्त मेरे घर मे रुककर मेरी बीवी शुभी की मोटी ,मुलायम , गदराई हुई, गुदाज़ को चोद कर सुहागरात मनाना चाहता था अब आगे पढ़िए क्या हुआ मैंने देखा कि शुभी नँगी है और उसके सेक्सी चुदक्कड़ बदन पर एक भी कपड़ा नही था अब रोहन ने अपनी शर्ट भी उतार दी यानी वो भी नँगा था रोहन ने जीभ से शुभी की गदराई बुर को चोदना छोड़कर शुभी को अपनी मज़बूत बाँहों में जकड़ लिया उसके गर्म और रसीले होंठो को चूसने लगा अब शुभी भी उसकी बुर का नमकीन स्वाद ले चुकी होंठो में मस्त थी रोहन उसकी बड़ी बड़ी गोल चुचियो को दोनो हाथों से पकड़ता और मसलता मींजता था मैं बोला शुभी , रोहन ये क्या कर रहे हो मेरे ही घर मे मेरी बीवी को चोदने जा रहे हों शुभी तो ऐसे चौंकी जैसे कि उससे गलती हो गई हो अरे सम्मू तुम वहां हो तो ये कौन है अरे रोहन तुम हाँ शुभी मैं लेकिन मैं तो सम्मू के पास सोई थी फिर ? तब तक मैं बोला असल मे मुझे बाथरूम जाना था इसलिए रोहन ने तुम्हारा सिर अपनी जांघ पर रख लिया था मैं तुम्हारी नींद नही खराब करना चाहता था ओह हो तो ये बात है शुभी बोली उधर रोहन शुभी के खुले हुए चुचों से अभी भी खेल रहा था चलो छोड़ो फिर अब क्या शुभी बोली तो रोहन कहने लगा प्लीज शुभी मुझे अब तुम्हारी बुर चोदने दो प्लीज मैं तुमको कब से कह रहा था टेलीग्राम पर आज मौका मिला है तो चोद लेने दो शुभी मुझे देखी और बोली कर लेने दो सम्मू ये रोहन मेरा अच्छा दोस्त है चोद लेने दो इसको मुझे मैं बोला अभी जो ये 8-10 लोग है ये उठ पड़े तो ये भी बिना चोदे तुमको मानेंगे नही अरे नही सम्मू भाई रोहन बोला वो सब ज़्यादा नशे में है इनकी नींद नही खुलने वाली आप भी आओ और हम दोनों मिलकर शुभी की गदराई गुदाज़ बुर को साथ मे चोदते है बोल तो वो ऐसे रहा था कि जैसे वो मेरी बीवी की बुर को मुझसे चुदवाकर मुझपर अहसान कर रहा हो और वो मेरी बीवी न होकर उसकी बीवी हो इधर रोहन का फड़फड़ाता फंफनाता लन्ड शुभी की बुर को चैलेंज कर रहा था शुभी रोहन के 4 इंच तक कि मोटाई वाले इतने लंबे तगड़े लन्ड को देखकर वो ताज्जुब में पड़ गई वॉव अचानक ही उसके मुंह से निकला मैं भी रोहन का लम्बा मोटा लन्ड देखकर हैरत में था एक तो साला उसका लन्ड अनकट था तो उसके लन्ड का टोपा छुपा हुआ था लेकिन लन्ड के टोपे की मोटाई तो लन्ड से भी ज़्यादा थी वो बिना खाल से बाहर निकले ही इतना मोटा दिख रहा था कि पूछो मत शुभी अपने नरम हाथों से उसका अनकट लन्ड पकड़ कर ज़ोर ज़ोर आगे पीछे करने लगी ऐसा करने के लिए शुभी को दोनो हाथों से रोहन के मोटे लम्बे लन्ड को पकड़ना पड़ रहा था वो जैसे कोई लन्ड न पकड़ कर कोई भारी चीज़ दोनो हाथों से पकड़े थी फिर रोहन ने उसको नीचे बैठा दिया और अपने लन्ड का भारी भरकम मोटा सुपाड़ा खाल से बाहर निकालकर शुभी के मुंह मे डालने लगा शुभी भी एक्साइटेड थी अनकट लन्ड को देखकर शुभी भी ज़ुबान से चाटकर उसका मोटा अनकट लन्ड चूसने लगी शुभी की नाज़ुक ज़ुबान से रोहन और गरम हो गया और उसने शुभी को 69 वाली पोज़ में लिटाया और उसकी गदराई हुई गुदाज़ बुर से बहते पानी को मज़े लेकर फिर से चाटने लगा और अपनी लम्बी ज़ुबान उसने शुभी की दोनो टांगो को हल्का सा फैलाकर गदराई हुई बुर में घुसेड़ दिया उन्ह ,,,, अअअअ आउच,,,,,, की मस्त भरी आवाज़ शुभी के हलक से निकली और मस्ती से उसने रोहन का लन्ड अपने दोनों चुचियों में दबा लिया और दोनो टांगो को और फैला दिया जिससे अब उसकी गदराई हुई गुदाज़ बुर की दोनी फांके और खुल गई और बुर की लाल लाल फांके नज़र आने लगी शुभी भी स्साली बड़े लम्बे मोटे लन्ड से चुदने को एक्साइटेड हो रही थी और रोहन अपनी लम्बी ज़ुबान से ही शुभी को सपड सपड करके चोद रहा था और शुभ भी मज़े ले कर गाँड़ हिला हिलाकर उसके मुंह से ही अपनी बुर चुदाने लगी आह ह ह ऊह श श शी कर रही थी मुझे बुलाकर पूछती है सम्मू क्या तुम भी मुझे चोदोगे या सिर्फ रोहन ही मेरी बुर चोदेगा मैं बोला नही तुम अभी जैसी चुद रही हो चुदो बाद में मैं देखूंगा जबकि मेरा लन्ड भी भड़क रहा था शुभी की बुर चोदने के लिए फचाक फचाक की आवाज़ से हॉल गूंजने लगा स्साला रोहन अपनी जुबान से ही शुभी को ऐसा चोद रहा था जैसे लन्ड से चोदने पर फच फचाक की आवाज़ आती है और शुभ भी ऐसा चिल्ला रही थी जैसे सेक्सी फिल्मों में गोरे लोग जब चोदते हैं तो लड़कियां आवाज़ निकालती है और चिल्लाती हैं वैसा ही कुछ मेरे घर मे हो रहा था वो तेज़ तेज़ आ ऊ आह आउच चिल्ला रही थी मैं सोच रहा था कि स्साला ये जो दूसरे शुभी के दोस्त लोग है कही जाग न जाये और वो 8-10 लोग भी शुभी को चोदना शुरू न कर दे ऐसे तो मैं अपने सामने ही अपनी बीवी का गैंगबैंग हो जाता फिर वो 8-10 लोग चोदते तो उनका दिल शुभी की गदराई गुदाज़ बुर को चोदने से मन नही भरता और मैं सारी रात एनिवर्सरी की सुहागरात नही मना पाता सुहागरात तो वैसे भी आज शुभी के साथ मेरे ही सामने रोहन मना रहा था रोहन ने शुभी को सीधा लिटाया और उसकी बड़ी चुचियों में अपना अनकट लन्ड डालकर शुभी की चूची चोदने लगा 20 मिनट तक चूची चोदने के बाद रोहन के लन्ड का गाढ़ा सफेद पानी शुभी के होंठ और नाक को सराबोर कर दिया उसके बाद रोहन के लन्ड को शुभी अपने मुंह मे लेकर चूसने लगी जिससे रोहन का। लन्ड फिर से फुंफकारता हुआ शुभी की चूत चोदने को तैयार हो गया था शुभी ने रोहन को लिटाया और उसके बम्बू जैसे तने अनकट लन्ड पर अपनी बुर को सेटकर बैठ गई और रोहन का मोटा अनकट लन्ड शुभी की गदराई गुदाज़ मोटी, बुर में समाने लगा रोहन ऐसे लन्ड को चोदना चूत से झेल नही पाया और शुभी की चूतड़ पकड़ कर एक ज़ोरदार धक्का शुभी की गदराई हुई गुदाज़ बुर में दे मारा और लन्ड शुभी की गदराई बुर को चीरता हुआ अपनी वीरता का सबूत देता हुआ शुभी की गुदाज़ बुर में समा गया जैसे ही रोहन का लन्ड शुभी की बुर की गहराई में समाया दोनो ही ज़ोर ज़ोर से एकदूसरे को चोदने लगे जिससे आवाज़ भचाक भचाक , फच फच आने लगी लेकिन मैंने देखा कि शुभी की मोटी गाँड़ और फूली हुई मोटी गदराई गुदाज़ बुर की वजह से ज़्यादा गहराई तक नही चोद पा रहा था इस बार रोहन ने 40 -50 मिनट तक तो शुभ की बुर को चोदा ही होगा शुभी की चुचों के मम्मों से टपकता नमकीन पसीना रोहन गटक गटक कर पी रहा था अब रोहन के लन्ड से भी पानी निकलने वाला था शायद जिससे रोहन ज़ोर ज़ोर तेज़ी के साथ शुभी की बुर चोदने लगा इतनी देर चुदाई करने से दोनो पसीने से लथपथ हो गए थे रोहन के लन्ड से निकलता पसीना भी रोहन को भिगो रहा था उधर शुभी खूब ज़ोर ज़ोर से नीचे लेते रोहन के लन्ड को अपनी गुदाज़ गदराई बुर से चोदने लगी और रोहन के ऊपर खूब ज़ोर ज़ोर से तने लन्ड पर बुर को पटकती थी दोनो एक साथ झड़े और दोनो ने खूब ज़ोर से एक दूसरे को भींच लिया एक दूसरे की बाँहों में रोहन के लन्ड का निकला हुआ पानी रोहन के लन्ड को सफेद कर दिया था इस तरह से मेरे शादी की एनिवर्सरी पर रोहन ने अपने अनकट लन्ड से मेरे घर में मेरी बीवी को चोदकर सुहागरात मनाई दोस्तो स्टोरी कैसी लगी आप मेल करके बता सकते है साथ मे ये बताए कि स्टोरी का टॉपिक और क्या हो सकता है मेल- powandy837@gmail.com

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