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सभी अन्तर्वासना के पाठकों Hindi Sex Stories को सुरेश का एक बार फिर नमस्कार ! मुझे आप लोगों की काफी ईमेल मिली और मैंने भी सभी को जवाब दिया। मैं आज आपको अपने जीवन का एक और वाकया बताना चाहता हूँ जो मेरे साथ कुछ ही दिन पहले हुआ।
एक दिन सुबह मेरे दोस्त राज का फ़ोन आया- सुरेश ! आज एक जुगाड़ आया है, अगर तुम अपना गैंगबैंग करना चाहते हो तो तुंरत फार्म हाउस आ जाओ !
शनिवार का दिन था, मैं भी फ्री था, मैंने अपनी गाड़ी उठाई और उसके फार्म-हाउस पहुँच गया। वहाँ राज और विकी पहले से ही मौजूद थे और शराब का दौर चल रहा था। उनके साथ एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी लड़की बैठी थी। उन्होंने मुझे भी शामिल होने के लिए कहा और मैं भी उनके साथ बैठ गया और बीयर का कैन ले लिया। उन्होंने मुझे उस लड़की से परिचय कराया। उसका नाम रीना था। वो गुडगाँव के किसी कॉल-सेण्टर में काम करती थी और पार्ट-टाइम यह काम भी करती थी। लड़की काफी बोल्ड थी- एकदम बिंदास स्मोकिंग और ड्रिंकिंग कर रही थी और काफी घुलमिल कर बात कर रही थी, ऐसा नहीं लग रहा था कि वहाँ कोई अनजाना हो !
विकी ने उसको अपने पास बुलाया और उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। इसी दौरान राज से भी नहीं रुका गया और उसने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिये। मैं भी इंसान था, मैं भी कण्ट्रोल से बाहर हो रहा था, सो मैंने भी उसकी स्कर्ट की तरफ कूच किया और उसको खोल दिया। कुछ ही सेकंडो में वो गुलाबी ब्रा और चड्डी में थी। हमने भी अपने कपड़े उतार दिये और उसको चूमने लगे। जिसको जो मिला उसने वहीं अपना काम शुरू कर दिया। उसकी टांगों को मैं किस कर रहा था, स्तन राज के कब्जे में थे, होठों पर विकी का कब्जा था। सब अपने काम में मस्त थे। बंदी(लड़की) भी सभी को पूरा साथ दी रही थी। बिल्कुल वैक्सिंग किया हुआ जिस्म था। ऐसा लगा जैसे किसी स्वर्ग की अप्सरा के जिस्म पर तीन शैतान टूट पड़े हों।
लेकिन वो भी पूरा एन्जॉय कर रही थी। मैंने उसकी चड्डी उतार दी। राज ने उसकी ब्रा खोल दी। उसका प्रेम-छिद्र मेरी नजरों के सामने था। एकदम गुलाबी रंग की चूत देख कर मेरा मन करने लगा कि इसको चूस लूँ !
मैं यह सोच ही रहा था कि उसने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह लगा दिया। मेरी झिझक ख़त्म हो चुकी थी और मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। वो भी मेरे सर को पकड़ कर जोर-जोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी। ऊपर राज उसके दोनों स्तन चूस रहा था। विकी जाने क्यों उसके होठों पर ही लगा हुआ था। पांच मिनट में ही उसकी चूत में से पानी आने लगा और वो एकदम से झड़ गई।
तभी विकी ने अपना लंड निकाला और उसके मुँह में डाल दिया और वो उसको लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। देखने से ही लगता था कि वो चूसने में कितनी अनुभवी है। मैंने भी अपना लंड निकला और उसकी चूत में घुसा दिया। अब राज बेचारा अपना लंड हाथ में पकड़ कर खड़ा हो गया और बोला- मैं कहाँ डालूँ ?
तभी रीना ने कहा- अभी एक छेद बाकी है !
अब बेचारे ने तेल लगाकर अपना लंड तैयार किया। मैं नीचे लेट गया, रीना मेरे लंड पर आ गई, विकी मेरे सर की तरफ खड़ा हो गया और अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया। अब राज के लिये रास्ता खुला था। उसने तेल लगाकर अपना लंड उसकी गांड में डालना शुरू किया तो वो चिल्लाने लगी, गालियाँ देने लगी- बहनचोद ! धीरे घुसा ! फाड़ेगा क्या भोसड़ी के ?
पर बहुत देर हो चुकी थी, उस हरामी ने अपना लंड उसकी गांड में घुसा दिया था। अब वो और मैं दोनों धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर- बाहर करने लगे। जब वो अंदर करता तो मैं बाहर और जब मैं अंदर तो वो बाहर ! रीना बहुत मस्त तरीके से अपनी गांड आगे पीछे करके हमारे दोनों लंड ले रही थी। वो पागलों की तरह गालियाँ देती जा रही थी और कह रही थी- बहुत मजा आ रहा है बहनचोदो ! मुझे चोदने में असली मजा तो सालो मुझे आ रहा है तीनो का लंड एक साथ लेने में !
अब हमारी भी हिम्मत और स्पीड धीरे-धीरे तेज होने लगी और हम तीनों ने आपस में कहा कि एक साथ तीनों करेंगे और हमने अपना सारा माल एक साथ उसकी चूत, गांड और मुँह में डाल दिया और रीना भी दूसरी बार स्खलित हुई !
कुछ देर उसी हालत में रहने के बाद हमने अपना लंड बाहर निकाला। रीना भी काफी थकी सी लग रही थी। हम बाथरूम में गए और अपना लंड धोकर फ़िर दारू पीने लगे। तभी राज ने डीवीडी पर एक नग्न मूवी लगा दी और हमारा मूड दोबारा बनाने लगा।
दस ही मिनट बाद हम दोबारा बिस्तर पे थे। इस बार मुझे रीना की गांड मिली, राज ने उसके मुँह पर कब्जा किया और विकी ने उसकी चूत पर !
और हम फिर शुरू हो गए ! इस बार का राउंड लगभग चालीस मिनट तक चला। इस दौरान रीना तीन बार झड़ी और हम भी अपना सारा माल उसके तीनों छेदों में डाल कर झड़ गए !
हमने होटल से लंच मंगवाया और चारो ने मिलकर बिना कपड़े पहने नंगे ही खाया।
एक घंटा आराम करने के बाद अब हम तीसरे राउंड के लिये तैयार थे !
इस बार मेरा लंड रीना के मुँह में था, राज के लंड ने चूत के दर्शन किये, विकी अब गांड मार रहा था। इस बार चुदाई साठ मिनट तक चली।
रीना बहुत ही हिम्मत वाली लड़की थी जो हम तीनों का पूरा साथ दिए जा रही थी, गजब की चुदासु थी वो, और हम भी चोदूओं की तरह उसको चोदे जा रहे थे। उसकी चूत एकदम फूल कर डबलरोटी जैसी हो गई थी, उसका मुँह लाल हो चुका था, गांड बिल्कुल खुल चुकी थी, पर वो थी कि चुदवाए जा रही थी और हम थे कि चोदे जा रहे थे। साठ मिनट में वो पाँच बार और झड़ी और हम तीनों तीसरी बार फिर एकसाथ उसके तीनों छेदों में झड़ गए।उसके तीनों छेदों में से वीर्य बाहर निकल रहा था। बिस्तर को देख कर ऐसा लगता था कि जैसे कुश्ती का मैच हुआ हो !
हम चारो बिल्कुल थक चुके थे ! हम सो गए। हमारी आँख शाम को आठ बजे खुली। तब रीना सिगरेट पी रही थी, वो बोली- अब मेरे जाने का समय हो गया है, सो मेरी पेमेंट कर दो। राज ने एक दस हज़ार की गड्डी निकाली और उसको दे दी और उसने ख़ुशी-खुशी वो अपने पर्स में डाल ली और बोली- मुझे राजीव चौक पर ड्राप कर दो !
मैंने अपनी गाडी स्टार्ट की और उसको राजीव चौक पर ड्राप करने चल पड़ा।
रास्ते में मैंने उससे पूछा- तुम यह सब किसी मजबूरी में करती हो या क्या कारण है?
तो वो बोली- कुछ मुझे शौक है, कुछ मज़बूरी भी !
उसने बताया कि उसको कई बार उसके बॉय-फ्रेंडस ने चोदा है, वो भी मुफ़्त में ! तो अगर चुदना ही है तो पैसा लेकर चुदा जाए ताकि आम के आम और गुठलियों के दाम ! तो क्या बुरा है ! मेरे पास उसकी इस बात का कोई जवाब नहीं था, सो राजीव चौक पहुँच कर मैंने उसको हज़ार के पाँच नोट और दिये और गुड बाय किस करके दोबारा मिलने का वादा करके मैं अपने घर आ गया।
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मेरे घर कुछ दिन Sex Stories पहले मेरी छोटी दादी (पिताजी की चाची) आई। उनके साथ कोई उनके मायके की भतीजी थी। उन्हें मेरे ही कमरे में ठहराया गया।
मेरी पारखी नज़रों ने मुझे बताया कि चांस मारा जा सकता है। फ़िर मुझे पता चला कि उनके पति स्वर्गवासी हैं, तो मैंने कुछ भी ऐसा-वैसा करने का इरादा छोड़ दिया।
पर उन्होंने मेरा हौसला खाने के वक्त बढ़ाया। मेज़ के नीचे बार-बार मेरा पैर अपने पैर से रगड़ती रहीं।
फ़िर मैंने ख्याल किया उनके नीचे गले वाले ब्लाउज से बाहर झांकते स्तनों का। कुछ नहीं तो 36 सी आकार रहा होगा।
मेरा तो कलुआ खुशी से उठ खड़ा हुआ जब पता चला कि उन्हें मेरे कमरे में ठहराया गया है।
वे मेरे बिस्तर पर चैन से सो रहे थे। दादी साइड में थी। सीमा – उनका नाम था- किनारे पर इस तरफ थी। और मैं अपने सिस्टम पर प्रोग्रामिंग का अभ्यास कर रहा था। पर दिमाग अलग ही प्रोग्रामिंग में लगा था।
जब मैंने देख लिया कि अब सब गहरी नींद में हैं तो उठा। अभी मुझे चेक करना था कि क्या सही में सीमाजी और कितनी हद तक एक्सेसिबल हैं।
मैंने कम्बल ओढ़ाने के बहाने उनके एक बेल को मसला। उनकी आंख झट से खुली। मैं डरा, पर उनकी मुस्कान ने मुझे ग्रीन सिग्नल दे दिया।
फिर दादी को कम्बल ओढ़ाने के बाद मैंने उनके कम्बल को पैर से सर तक सही किया, एक बार। वो भी एकदम अच्छे तरीके से। पर देखा दादी अभी करवट ले रही है, इसलिये फ़िर से मशीन पर बैठ गया।
बैठा था मैं जो करने, वहाँ ध्यान ही नहीं था। मैं उन लड़कियों और औरतों के बारे में सोच रहा था, जिनके साथ खेला हुआ था, या मैंने करना चाहा था।
मुझसे रहा नहीं गया। मैं उठ कर बाथरूम चला गया। वहीं हस्तमैथुन करने लगा, एकदम से भीतर जाकर।
तभी मुझे लगा कोई आया बाथरूम में। रात के एक बज रहे थे, सो मैंने बन्द नहीं किया था। पता नहीं कौन होगा, सोचकर मैंने खांसी की। पर देखा कि वो मेरे सामने आकर मुस्कुरा रहीं हैं, सीमाजी!!
मैं सकपका गया। एकदम सावधान खड़ा हो गया। वो मुस्कुराते हुए चली गईं।
मैं अब आकर सोफ़े पर एक चादर लेकर सो गया। देखा वो करवटें ले रही थी। और उनकी चूचियाँ छलक-छलक के बाहर आ रही थी।
एकबार जब वो शान्त हुई, तो मैंने हिम्मत की। डर मुझे इतना ही था कि ये मेरे पापा की सम्बंधी लगती एक रिश्ते में, बस।
मैं उनके छाती पर धीरे-धीरे ऊँगलियों से हरकत कर रहा था। थोड़ी देर बाद पूरे हाथ से दबाना शुरू किया उनके बेल के आकार के स्तनों को।
उन्होंने अपने दोनों हाथ जांघों के भीतर दबा कर डाल लिये। जगी तो वो थी ही, अब आंखें भी खोल ली उन्होंने और मुझे इशारा किया ब्लाउज खोलने को।
पैकिंग और अनपैकिंग के काम मेरा हाथ तेज है। मैंने झट-पट ब्लाउज के साथ ब्रा भी खोल दिया।
अब उनको मस्ती आने लगी थी। पर मैंने होठों पर हाथ रख कर आवाज ना करने को कहा।
वो हाथ पैर फेंक कर दादी को डिस्टर्ब करे उससे पहले मैंने उनसे सोफे पर चलने को कहा।
सोफे पर जाते ही उन्होंने मेरा सर अपनी तनी हुई चूचियों वाली छाती पे लगा दिया। मैं भी लगा चूसने कस के।
सिसकारी निकलने लगी तो मैंने उनके मुँह पर हाथ रख दिया। वो बड़े-बड़े बोबे, दोनों हाथों से पकड़ो तो हाथ मे आयेंगे। मैं सब कुछ भूल कर दूध पी रहा था उसका।
वो भी जन्नत की हूर थी, कैसे आ गई मेरा रात रंगीन करने!!! जो गठीला बदन था, आजकल पैसा खर्चने पर भी वैसी आइटम नहीं मिलेगी।
जब मेरा मन भर गया ऊपर से तो मैंने नीचे की ओर देखा। उन्होंने सहमति में सर हिलाया।
मैंने धीरे से साड़ी के भीतर हाथ डाला। पूरे पैर को सहलाते हुए जांघों तक पहुँचा। इस बीच उनके हाथ मेरे लुंगी के भीतर मेरे लोहे जैसे गर्म और सख्त टूल को टटोलने लगे थे।
वो मेरे साइज से बेहद खुश थी। एक ही बार में भूखी शेरनी जैसे भेड़िये को खाती है, मेरे तीसरे पैर को डाल लिया अपने मुँह में।
मैं सिहर उठा। आज मैं सातवें आसमान में उड़ रहा था। मेरे हाथ अब उस चूत की ओर बढ रहे थे जिसे उन्होंने बताया कि 3-4 साल से जल रही थी।
सच में किसी ऑवन से कम गर्मी न थी। पर सारा लव-होल एरिया जंगल से भरा था। वो चाहती थी, मैं चाटूं। पर बालों ने मेरा उत्साह कम कर दिया।
पर उन्होंने मेरा मन खुश किया था, तो मैंने कहा कि आज मैं टेस्टर से चेक कर लूँ कि कितना कर्रेंट है, फिर कल मुँह डालूंगा, इतना गरम है कि क्या पता मुंह जल जाए।
वो मेरे बात से सहमत थी।
मैंने अपना रॉड गाड़ दिया उनके आग के कुंए में। कसम से आज मैं समझा कि जिसको हम चरित्रहीनता कहते हैं, वो उसके अन्तःमन की दबी हुई आग की चिन्गारी भर होती है, अन्तर्वासना होती है।
एक सम्पूर्ण संतुष्टि का भाव था उनके चेहरे पर उस वक्त।
सालों से ना चुदने की वजह से उनके लव-स्पॉट की दीवारें तंग हो गई थी। बड़ी दिक्कत हो रही थी मुझे। मैं उठ कर अपने रसोई से मक्खन ले आया। गर्मी तो इधर इतनी थी कि मक्खन पिघलते देर नहीं लगी।
खैर मैं उत्तेजना की वजह से दस मिनट से ज्यादा सम्हाल न सका। पर वो खुश थी।
उसके बाद 2-3 दिन और रुके वो लोग… Sex Stories
Xx हिंदी चुदाई कहानी में मेरे साथ एक लड़की काम करती थी. उसका उसके पति से झगड़ा हो गया तो उसे सेक्स की कमी लगने लगी. तब हम दोनों ने आपस में सेक्स करके मजा किया.
दोस्तो, मैं राजेंद्र कोटा से!
मेरी पिछली कहानी थी:
प्यासी विधवा मकान मालकिन की चूत चुदाई
आज मैं फिर से आपके लिए अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.
यह Xx हिंदी चुदाई कहानी करीब 10 साल पुरानी है.
उस समय मैं एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट था.
मेरे साथ एक मैडम थी, वह भी लैब असिस्टेंट थी.
उस मैडम का नाम सीमा था.
हम दोनों का काम स्टूडेंट्स को मदद करना होता था.
वह मैडम देखने में बड़ी हॉट थी और स्कूल के कई टीचर्स उसकी लेने की फिराक में रहते थे.
लेकिन वह किसी को भाव ही नहीं देती थी.
जबकि वह हंसमुख बहुत ही ज्यादा थी.
उसकी इसी आदत के चलते मैं उससे काफी मजाक करता रहता था.
मेरी हमेशा मज़ाक करने की आदत भी थी, इसी वजह से मैं हमेशा कह देता था कि मैडम क्या डेट पर चलोगी?
वह मुस्करा देती थी.
उसने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा कि आप मुझसे ऐसी बात नहीं किया करो या कुछ भी गुस्सा वाली बात नहीं दिखाई दी थी.
यदि वह मुझसे एक बार भी कह देती कि आप मुझसे यह सब नहीं कहा करो तो मेरी उसके साथ मजाक करने की कभी हिम्मत ही न होती.
हालांकि मेरे मन में कुछ गलत नहीं था, बस इतना कहने का मन करता था और मैं हमेशा ही ऐसा कहकर उसको छेड़ देता था.
जब स्टूडेंट्स की और टीचर्स की छुट्टियां भी हो जाती थीं, तब भी हम दोनों की ड्यूटी होती थी क्योंकि हम दोनों टीचिंग स्टाफ में नहीं थे.
धीरे धीरे हम दोनों काफी नजदीक आते गए.
साथ में टिफिन शेयर करना, एक दूसरे के काम कर देना, यही सब चलता रहता था.
वह मेरे खाने की बड़ी तारीफ करती थी और मैं उसके हाथ के बने खाने की तारीफ करता था.
मैं रोजाना उसकी आदतों को लेकर तारीफ करता रहता था तो वह कहती- आप झूठे हो, मुझे यूं ही बनाते हो.
मैं भी कह देता- चलो झूठ को ही सच मान लो, क्या घट जाएगा!
इस पर वह हंस पड़ती थी.
एक बार उसने मेरे सामने अपना दुखड़ा रोया कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया और वह काफी अकेला महसूस कर रही है.
मैं समझ गया कि इसको क्या अकेलापन लग रहा है.
मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- तुम मुझसे अपने दिल की बात कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो.
उसने मेरी तरफ देखा और वह मेरे कंधे से सर लगा कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.
इसी तरह से वह मेरे साथ काफी क्लोज हो गई थी.
गर्मी की छुट्टी में हम दोनों रोजाना कॉलेज जाते थे और लैब में ही होते थे.
उस दौरान टाइम निकालना मुश्किल होता था क्योंकि हमारे पास कोई काम तो होता नहीं था, बस यूं ही बैठ कर समय गुजार देते थे.
एक दिन सीमा मैडम ने कहा- सर आप रोज मुझे कहते हो कि डेट पर चलो, डेट पर चलो. आज बोलो कहां चलना है!
मैं उसकी इस बात को सुन कर एकदम से स्तब्ध रह गया.
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा.
तो वह बोली- ये बात किसी से नहीं कहना, मैं सच में आपके साथ चलूँगी.
यह कहती हुई वह मेरे पास आकर बैठ गयी.
वह मेरे काफी करीब बैठी थी, बोली- आपने ही तो कहा था कि अपने दिल की बात मुझसे कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो!
मैंने उसकी आंख में आंख डालकर देखा और पूछा- क्या सच में डेट पर चलना है?
वह बोली- हां!
मैंने कहा- मालूम है कि डेट पर चलने का अर्थ क्या होता है?
वह हंस दी और बोली- नहीं मालूम है … आप बताओ कि डेट पर चल कर क्या होता है?
जबाव में मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा, तो उसने भी मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया.
मुझे समझ आ गया कि आज यह मुझसे कुछ चाह रही है.
मैंने उसे चूमा, तो वह उठकर गेट के पास गयी और इधर उधर देख कर वापस आ गयी.
आते ही वह मेरी गोद में बैठी और कुछ सेकंड के बाद उठ गयी.
वह वापस दरवाजे के पास चली गयी.
दुबारा से उसने इधर उधर झांक कर देखा और फिर से मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैंने उसके गाल पर उंगली फिराई, वह शांत रही.
मैंने उंगली ऊपर से नीचे उसके 36 साइज के मम्मों पर फेरना चालू की, तब भी वह चुप रही.
तब मैंने उसके एक दूध को कसके पकड़ लिया.
उसने एक गहरी सांस ली और हवस भरी निगाहों से मुझे देखने लगी.
अब तक मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मेरा लंड फनफना रहा था, मेरी भी सांसें तेज हो चुकी थीं.
मैं बार बार लंड पर हाथ रख रहा था.
वह यह नजारा देख रही थी.
फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर ले गया.
जैसे ही उसने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ रखा, वह ऊपर से नीचे तक सिहर गयी.
उसने अपने होंठों को दांत से काटना शुरू कर दिया और आंख बंद करके लंड को सहलाने लगी.
मैं भी उसकी चूचियों को दबाता हुआ सहला रहा था.
उस दौरान वह अपने होंठों को अपने दांतों से काटती गयी.
उसने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जाता!
मैंने कहा- अभी इधर ही डेट पूरी कर लें?
उसने हां में सर हिला दिया.
मैं झट से उठ कर फिर से दरवाजे पर आया और देखा कि बाहर कोई है तो नहीं.
उधर कोई नहीं था.
मैं वापस आया.
वह खड़ी थी.
मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसकी दोनों चूचियों को कस कसके दबाने लगा.
उसका हाथ मेरे हाथ के ऊपर था.
जब जब मैं उसकी मस्त चूचियों को दबा रहा था, वह इस्स्स आह की आवाज़ निकाल रही थी.
फिर वह झटके से मेरी तरफ घूम गयी और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ ले आयी.
वह मुझे किस करने लगी.
उसका किस एकदम वाइल्ड किस था.
वह अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा रही थी, तो कभी हल्के से दांतों से काट रही थी.
उसके दोनों हाथ मेरे गाल पर आ गए थे और वह चुंबन का मजा ले रही थी.
मैंने भी अपने हाथ उसके पीछे किए और उसके दोनों उभरे हुए चूतड़ों को पकड़ कर जोर से दबाया. ताकि उसकी चूत मेरे लंड के करीब आ जाए.
जैसे ही वह मेरे लौड़े से चूत रगड़ने लगी, मैं जोर जोर से धक्का लगाने लगा.
हम दोनों की बेचैनी बढ़ रही थी, क्योंकि अभी तक हमारे जिस्म से जिस्म मिले नहीं थे. कपड़ों के ऊपर से ही ये सब हो रहा था.
उसने कहा- अब आगे बढ़ो न!
मैंने कहा- आगे बढ़ने के लिए कपड़े हटाने पड़ेंगे … हटा दूँ?
वह कुछ कहती कि तभी कोई कॉरीडोर में आता दिखाई दिया.
मैंने उससे अलग होते हुए कहा- यहां कुछ भी करना ठीक नहीं है.
वह भी अपने कपड़े ठीक करने लगी.
हम दोनों अलग अलग होकर बैठ गए और वह कुछ करने लगी, मैं किताब पढ़ने लगा.
थोड़ी देर बाद ही छुट्टी हो गयी थी.
उस दिन इससे अधिक कुछ भी नहीं हो पाया था.
बस यह था कि वह अपनी प्यास मुझसे बुझवाना चाहती थी, यह बात खुल कर सामने आ गई थी.
उसके बाद शाम को करीब 5 बजे सीमा का फ़ोन आया- सर, क्या कल आप छुट्टी कर सकते हो, मैं भी कल ऑफिस नहीं जाऊंगी … दोनों मिलकर कहीं चलते हैं.
मैंने कहा- हां ठीक है. मैं ऑफिस के लिए ही निकलूंगा, पर ऑफिस नहीं आऊंगा.
सीमा बोली- ठीक है, मैं भी वही करूंगी.
हम दोनों ने प्लान बनाया और एक जगह पर मिलने का तय किया.
मैं बाइक से उसी जगह पर पहुंच गया.
वह वहीं पर दुपट्टा से चेहरा ढक कर खड़ी थी.
फिर हम दोनों एनसीआर में एक होटल में गए.
उधर करीब 11 बजे पहुंच गए थे.
कमरा बुक किया.
हम दोनों जैसे ही कमरे के अन्दर पहुंचे, पागलों की तरह एक दूसरे को चाटने लगे.
एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए.
अब वह सिर्फ पैंटी में थी और बेड पर लेटी नशीली आंखों से मुझे निहार रही थी.
क्या खूब लग रही थी.
फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को मसलने लगा, उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.
हम दोनों के होंठ और गाल लाल हो गए थे.
मैंने उसके होंठों पर जीभ को फिराना शुरू किया और मम्मों से होते हुए नाभि पर, फिर पैंटी के पास पहुंच गया.
फिर एक गहरी सांस लेकर मैंने पैंटी को सूंघा तो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी.
मेरा तो लंड खड़ा हो गया था, लौड़े के ऊपर से थोड़ा लसलसा सा पानी भी निकलने लगा था.
मैंने उसकी पैंटी खोली तो देखा उसकी चूत भी पानी पानी हो चुकी थी.
उसकी चूत को मैंने थोड़ा फैला कर देखा तो एकदम टाइट चूत थी.
अन्दर का रंग एकदम गुलाबी था.
मैंने जीभ को लगाया तो वह सिहर गयी और गांड हिलाने लगी.
मैं उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.
वह अपने दोनों हाथ ऊपर करके तकिए को अपनी मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी.
फिर कुछ देर बाद वह अपनी चूत को उछालने लगी.
मैं एक उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह काफी ज्यादा कामुक हो चुकी थी, उसके माथे से पसीना निकलने लगा था.
वह कहने लगी- अब बर्दाश्त के बाहर है, मुझे चोद दो … मेरी वासना की पूर्ति कर दो … मेरा मन भर दो … चोद दो मुझे … आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.
तब वह मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
वह ऐसे लंड चूस रही थी कि न जाने कितनी प्यासी हो.
मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मैं उसकी ज्वाला को शांत करने के लिए तैयार था.
जैसे ही उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला, मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत पर लंड का सुपाड़ा रख दिया और एक ही झटके में अन्दर घुसा दिया.
वह ‘आआ अह मर गई …’ की आवाज़ निकालने लगी.
मैं झटके पर झटके दे रहा था और कुछ ही देर में वह भी मजा लेने लगी.
वह कभी अपने बूब मसलती तो कभी मेरे बालों में उंगली फिराती.
इस तरह से मैंने उसे काफी देर तक चोदा और झड़ कर हम दोनों निढाल होकर सो गए.
करीब एक घंटा बाद जब हम दोनों उठे तो एक दूसरे को चूम कर मुस्कुराने लगे.
बहुत तेज भूख लग आई थी.
फिर नीचे जाकर हम दोनों ने खाना खाया और मैंने वहीं मेडिकल स्टोर से सेक्स समय बढ़ाने वाली दवा ले ली.
अब तो हमारे बीच सेक्स और भी ज्यादा वाइल्ड और हार्डकोर हो गया था.
मैंने उसे हचक कर चोदा. उसकी चूत का सत्यानाश कर दिया.
शाम को ऑफिस के टाइम पर ही होटल से अपने अपने घरों को निकल गए.
उसके बाद मैंने कई बार सीमा को चोदा. कई बार उसके घर जाकर भी उसे चोदा.
मेरा नाम अविनाश है। मैं वैसे तो Antarvasna जयपुर में नौकरी करता हूँ, पर आजकल एक कॉल-ब्वॉय का काम भी करता हूँ। ये काम मेरे शौक की वज़ह से मुझे मिला।
हुआ यूँ कि पहले-पहल जब मैं जयपुर आया तो यहाँ की हसीन लड़कियों को देख कर मैं पहले बहुत तड़पता था। मेरी बहुत इच्छा होती चूत की, पर कुछ कर नहीं पाता था। फ़िर मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई और मैंने उसको बहुत अच्छे से संतुष्ट किया। फिर उसने मुझे अपनी दोस्तों से मिलवाया और फिर दोस्तों के दोस्तों से मिलते चले जाने का सिलसिला चलता ही रहा। कई बार तो कोई बदसूरत मिलती है, कभी बहुत ही मस्त ग्राहक मिल जाती है तो मज़ा आ जाता है।
मैं आपको अपना सच्चा अनुभव सुनाता हूँ जो मुझे हमेशा याद रहेगा। एक बार मेरी दोस्त ने कहा, “कुछ काम है।”
.मैंने पूछा – “बोल, क्या काम है?”
“मुझे कुछ पैसों की ज़रूरत है।” उसने बताया।
पर मेरे पास उस समय पैसे तो थे नहीं, और वह मेरी अच्छी दोस्त थी। तो मैंने कहा, “ठीक है, मैं कहीं से लाकर देता हूँ।”
तो उसने कहा, “किसी से लेने की ज़रूरत नहीं है, मैंने उसका भी इन्तज़ाम भी कर लिया है, बस तू मेरा एक काम कर दे।”
“तुम्हारे लिए तो जान भी हाज़िर है, तू बोल तो सही।”
“मेरी एक दोस्त है जो तुम्हें पैसे दे देगी, पर तुझे उसकी प्यास बुझानी पड़ेगी।
“ये भी कोई बात है, पैसे भी, मज़े भी। इसके लिए कौन मना करता है।”
“तो शाम को मेरे कमरे पर आ जाना।” उसने कहा।
मैं शाम को उसके कमरे पर गया। कुछ देर बाद ही उसके दरवाज़े पर किसी ने खटखटाया। मैं समझ गया कि मेरी ग्राहक आ गई है। मेरी दोस्त ने दरवाज़ा खोला तो सामने एक बला की ख़ूबसूरत लड़की खड़ी थी। उसे तो देखते ही मेरी लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं मन-ही-मन सोचने लगा, क्या क़िस्मत है, ऐसे माल को तो कोई भी उल्टे पैसे देकर भी नहीं छोड़ेगा। फिर वो अन्दर आ गई। मेरी दोस्त ने कहा कि मुझे कुछ काम है, मैं एक-दो घंटे में आ जाऊँगी। तब तक तुम लोग अपना काम कर लो। कह कर वह कमरे से चली गई।
उसके जाते ही मैं उसके पास आ गया। उसने अपना नाम बताया, मैंने उससे पूछा कि उसे पैसे देकर सेक्स करने की क्या ज़रूरत है। उसे चोदने के लिए तो कोई भी तैयार हो जाएगा। तो उसने कहा कि आजकल की लड़की किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकती। पता नहीं कौन कब अपनी ज़बान खोल दे। इसलिए तुम्हारी ज़रूरत पड़ी। प्रोफेशनल लोग ऐसा नहीं करते। मैंने नीमा (मेरी दोस्त) से इस बारे में पहले पक्की बात की है। मैंन कहा, ये तो सच है, इस बारे में तुम बेफ्रिक रहो।
फिर वह मेरा हाथ पकड़कर मुझे बेडरूम में ले गई। हम दोनों बेडरूम में थे, रंग एकदम सफेद, और फ़िगर तो गज़ब का था। उसने मेरे होठों पर किस किया। फिर मैंने उसकी कमीज़ उतार दी। उसकी चूचियाँ बड़े और मस्त थे, और ऊपर से झाँक कर शायद कह रहे थे, कि हमें भी आज़ाद कर दो। मैंने उसकी जीन्स भी खोल दी. अब वो ब्रा-पैन्टी में मेरे सामने खड़ी थी। उसने मेरे कपड़े भी उतारे और मेरे लंड से खेलने लगी। कभी वो मेरी गोलियाँ दबाती, कभी मेरे लंड को मुँह में लेती, फिर उसने मेरे लंड को चूसना चालू कर दिया। मैं तो आसमान में था। उसने १५ मिनट ऐसी ही मेरे लंड की चुसाई की। अब मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके दूध जैसे रंग की चूचियाँ मेरे सामने थीं। उसकी गुलाबी-गुलाबी घुंडियाँ जैसे मुझे अपनी ओर खींच रहीं थीं, मैंने उसकी एक घुंडी को मुँह में लिया और दूसरी घुंडी को एक हाथ से मसलने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उसी बीच उसकी पैंटी भी उतार दी।
अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया, पर उसकी निप्पल की चुसाई मैंने जारी रखी। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था। उसने कहा, जान बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत समय के बाद आज चुदाई का मौक़ा मिला है। ख़ूब जम कर चोदना। मैंने उसकी चूत में एक ऊँगली डाल कर आगे-पीछे करना शुरू किया तो वो तड़प उठी। मुझे लगा जैसे अब उँगली नहीं लंड डाल कर फाड़ दो।
फिर उसने कहा कि बस अब डाल दो, और सहन नहीं होता। मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखीं और लंड को उसकी चूत से लगा गिया। बहुत गरम थी उसकी चूत… उसकी चूत में से चिकनाई निकल रही थी। मैंने एक धक्का मारा तो आधा लंड उसकी चूत में समा गया। उसके मुँह से स्स्स्स्सीईईई की आवाज़ निकल गई। बोली – थोड़ा धीरे !
फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना चालू किया। मैं तो बस ज़न्नत में था, उसकी कसी हुई चूत में अलग ही मज़ा था। मैं उसे चोदता जा रहा था और उसकी चूचियाँ भी चूस रहा था। फिर मैंने उसे कुतिया बनाकर के भी चोदा। वह लगभग १५ मिनटों में झड़ गई। उसके चूत की पानी के कारण अब फच्च-फच्च की आवाज़ें आ रहीं थीं।
मैंने उसे आधे घंटे चोदा और मैं भी झड़ गया, इस बीच वो दो बार झड़ गई थी। उसे आज बड़ा मज़ा आया था। मैंने कहा कि तो फिर मज़े ले लो। उसने कहा पर अभी तुम्हारी दुगुनी फ़ीस मेरे पास नहीं है। मैंने कहा, तुमसे फ़ीस की बात किसने की है, तुम जब चाहो, दे देना। बस तुम्हारा जब मन करे, मुझे बता देना। तुम्हारे जैसी लड़की से तो फ़ीस लेने का मन भी नहीं करता। मैंने उसे दोबारा चोदा।
थोड़ी देर बाद मेरी दोस्त आ गई। उसके जाने का समय हो गया। उसने मेरा मोबाईल नम्बर लिया, और बाद में मिलने का वादा करके चली गई। Antarvasna
Antarvasna पाठकों को मेरी प्यारी सी चूत की तरफ से बहुत सारा प्यार ! काफी सारी कहानियाँ पढ़ने के बाद मैं चाहती हूँ कि अपनी आप-बीती भी मैं आपको सुनाऊँ।
मेरा नाम बेला है, मैं मुज़फ्फरनगर से हूँ। मेरी शादी एक सीधे साधे चूतिया टाइप के इंसान से हुई है। शादी के बाद हम अपनी मधु चन्द्रिका मनाने मनाली गए पाँच दिनों के लिए। उन पाँच दिनों में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे मुझे मज़ा आया हो ! आप शायद समझ गए ! प्रदीप (मेरे पति) ने मुझे ढंग से नहीं चोदा- मैं अनचुदी रह गई।
मैं वापस दिल्ली आ गई और ऑफिस के काम में लग गई।
एक रोज़ बॉस ने कहा- शनिवार को आना है !
मुझसे वैसे भी शनिवार काटे नहीं कटता था क्यूंकि प्रदीप का शनिवार को भी ऑफिस होता है। मैं तकरीबन ग्यारह बजे ऑफिस पहुँच गई। बॉस आ चुके थे। हम दोनों ने दो बजे तक डटकर काम किया। ऑफिस में सिर्फ मेरा बॉस, मैं और ऑफिस बॉय राजू था।
मैं अपने कंप्यूटर पर कुछ काम कर रही थी कि बॉस पीछे से आकर देखने लगे और समझाने लगे कि कैसे क्या करना है। मैं उनका निर्देश लेकर काम करती रही। चूंकि बॉस बहुत पास आकर देख रहे थे, मेरा एक गाल उनके बहुत ही नज़दीक हो गया था। उनको पता नहीं क्या सूझी, उन्होंने मेरे गाल पर एक पप्पी दे दी। मैं चौंक गई।
बॉस ने कहा- बेला, तुम बहुत सुन्दर हो और मुझे तुम अच्छी लगती हो।
मैं बस उनको देखती रह गई। फिर उन्होंने मेरी बाहों पर हाथ फेरना शुरु किया। हाथ फेरते फेरते उनके हाथ मेरे गले तक पहुंचे और वे मुझे प्यार करने लगे। इतने में राजू अन्दर आया। मैंने बॉस से कहा- सर, राजू को बाहर भेजिए पहले।
बॉस खुश। इसमें मेरी हाँ जो थी।
वे बाहर गए यह कहते हुए कि तैयार रहना। मैं समझ गई कि बॉस मुझे आज चोदेगा और मैं खुश हो गई। मैंने अपनी चूत से कहा- देख निगोड़ी ! सब्र का फल मीठा होता है। आज उछल कर चुदना।
मैं सीधे बाथरूम गई, खूब मूता और अपनी चूत को खूब साफ़ किया। हल्का सा स्प्रे लगाकर मैं बाहर आ गई। इतने में बॉस अन्दर आये। और उन्होंने मुझे दीवार से टिकाकर मुझे खूब चूमा। चूमते चूमते उन्होंने मेरा ब्लाऊज उतार दिया। अब मैं ब्रा और स्कर्ट में थी। मुझे अपनी गोद में बिठाया और मेरे होटों को चूसने लगे। मैं भी कहाँ पीछे हटने वाली थी। मैं भी मस्त हो कर उनसे झूल गई। क्यों ना झूलती ! मेरी चूत में भी तो कुछ कुछ हो रहा था।
उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरी स्कर्ट उतार दी। मैं अब सिर्फ चड्डी और ब्रा में थी। बॉस मुझे निहार रहे थे, मैंने इनकी टी-शर्ट उतार दी और फिर उनकी जींस। बॉस का लंड तो बाहर आने के लिए कुलांचे भर रहा था। मैंने उनका लंड पकड़ लिया। बॉस ने एक आह भरी और मुझे मेरी ब्रा से अलग किया। दोनों मम्मों को दबाने लगे और फिर मुझे गोद में उठाकर मेरी चड्डी अलग कर दी। इस वक़्त मैं बॉस की बाहों में पूरी की पूरी नंगी थी। बॉस मुझे इसी अवस्था में बोर्ड रूम ले गए और मुझे मेज़ पर लिटा दिया। मेरे दोनों हाथ ऊपर और दोनों टाँगे अलग अलग करके वे मेरी झांटों से खेलने लगे। मेरे होंठों पर उनके होंठ, उनका एक हाथ मेरी एक बांहों को सहला रहा था और दूसरे हाथ से वे मेरी चूत से खेल रहे थे। ऐसा सुख मुझे प्रदीप ने कभी नहीं दिया था। बॉस मुझे चूमते हुए मेरी नाभि तक पहुंचे और फिर मेरी चूत पर। चूत को चौड़ा कर उन्होने अपनी जीभ मेरे रति-छिद्र में डाल दी जिससे में दो फ़ुट ऊपर उछल गई।
इतने में मेरा मोबाईल बजा, अब मैं कैसे उठाती। बजते बजते बंद हो गया। फिर बजा। और उसके बाद फिर। मैं समझ गई प्रदीप ही होंगे। इतने में ऑफिस का फ़ोन बजा और चूंकि एक फ़ोन उस मेज़ पर ही था, मैंने अनायास उठा लिया।
प्रदीप ही थे, पूछ रहे थे- क्या कर रही हो डार्लिंग?
अब मैं क्या कहती – अपनी चूत चुसवा रही हूँ?
मैंने कहा- काम कर रही हूँ।
इतने में राज के चूसने से मैं झड़ने वाली थी। मेरे मुँह से एक लम्बी आह निकली।
प्रदीप ने पूछा क्या हुआ?
सोचा- बोल दूं कि झड़ने वाली हूँ, लेकिन कहा- एक जगह बैठे बैठे पांव सुन्न हो गया। हिल नहीं पा रही हूँ।
इतने में राज ने मेरी चूत से पानी निकाल दिया। मैंने फ़ोन रख दिया और जोर से हूँ-हाँ करने लगी। बॉस ने अब ऊँगली करनी शुरू कर दी और मैं फिर से झड़ गई। बॉस मुझे खूब चूमा और कहा- उठो।
मैं मेज़ से उठ नहीं पा रही थी। बॉस समझ गए। मेरे बदन को निहारते रहे।
पांच मिनट के बाद में उठी और बॉस के सामने खड़ी हो गई। अब बॉस मेज़ पर लेट गए। मैंने उनकी चड्डी उतार दी। उनका लंड तो एक भयानक किस्म का जीव लग रहा था। आठ इंच लम्बा और डेढ़ इंच मोटा। उनका सुपारा एकदम गुलाबी रंग का था और मैंने उस सुपारे को अपने नाख़ून से थोड़ा पिंच किया। मेरे बॉस के मुँह से एक दर्दनाक आह निकली। मैंने अपने दोनों हाथों से उनका लंड लिया। मेरे दोनों हाथों में नहीं समा पा रहा था वो। खैर मैंने एक हाथ से उसको हिलाना शुरू किया।
फिर बॉस ने अपनी टांगें चौड़ी की और कहा- टेबल पर आ जाओ !
मैं मेज़ पर चढ़ गई और उनका लंड चूसने लगी। मैंने खूब चूसा और खूब हिलाया। उनके टट्टे अपने मुँह में लेकर उनके लंड को ऊपर नीचे करने लगी। बॉस शायद झड़ने वाले थे। एक लम्बी आह भरी और बोले- बेला मेरा मट्ठा निकल रहा है ! चूस रानी चूस।
मैने भी उनके लंड को चूसकर सारा का सारा मट्ठा निकाला और पी गई। बॉस का लंड एक ओर लुढ़क गया। मैने उसे चूमा और बॉस के पास आकर लेट गई।
दस मिनट के बाद बॉस ने पूछा- तैयार हो?
मैं तो कब से तैयार थी, मैं बोली- हाँ ! और इनका लंड फिर से तैयार करने लगी।
बॉस मेरी चूत में ऊँगली करने लगे। मैं तो गीली हो गई थी। बॉस ने मुझे गोद में उठाया और सोफे की ओर ले गए। मुझे औंधा लिटा कर उन्होंने मेरे चूतड़ उठाये और फिर मेरी फुद्दी में अपनी एक ऊँगली डाल दी। मैं तैयार थी। इतने में बॉस ने अपना सुपारा मेरी चूत में डाला और एक जोर का झटका दिया। मैं चीख पड़ी। बॉस को कोई फर्क नहीं पड़ा। वे मेरी कमरिया को पकड़कर कभी मुझे अपनी ओर खींचते या फिर मुझे स्थिर रखकर अपने आप को धक्का देते। दोनों ही सूरत में मेरी फाड़ रहे थे। मैं तो बस चीखती रही। ये तो सहवाग की तरह बल्लेबाजी कर रहे थे। पता नहीं इनको क्या जल्दी थी। ऐसा उन्होने मेरे साथ तकरीबन पंद्रह मिनट तक किया और नीचे से मेरे मम्मों को भी दबा रहे थे।
मैं चिल्ला रही थी- बस करो बस करो, आह, ऊह, मर गई, मम्मीईई, मम्मीईईई !
मगर बॉस को कोई रहम नहीं आया। बॉस मुझे चोदते रहे और मैं चुदती रही। मेरी चूत का तो उन्होंने भोसड़ा बन दिया था। मन ही मन चाह रही थी कि प्रदीप देखें और सीखें कि किस तरह से एक चूत को चोदा जाता है। थोड़ी देर में बॉस झड़ने वाले थे। उन्होंने अपना लंड निकाला और मेरी गोरी पीठ पर रख दिया। एक गर्म एहसास हुआ पीठ पर और बॉस ने अपना सारा माल मेरी पीठ पर उड़ेल दिया और फिर मेरे बगल में बैठ गए। मैं बॉस की गोद में लुढ़क गई। मैं बहुत थक गई थी। मैंने शादी से पहले ऐसी चुदने की कल्पना भर की थी। प्रदीप ने यह सुख कभी ना दिया और ना ही कभी देगा। और बॉस ने तो मेरी ले ली।
उस रोज़ बॉस ने मुझे दो बार मेरी चूत को और चोदा और एक बार गांड भी मारी। शाम होते होते मैं बहुत पिद चुकी थी। इतनी चुदाई के बाद तो मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। बॉस ने मुझे उस रात घर तक छोड़ा। उसके बाद तो मैं बॉस से खूब खुलकर चुदने लगी। मैं हफ्ते में तीन चार बार तो बॉस से चुदती ही हूँ। अच्छा एक बात तो बताना ही भूल गई। मेरा प्रोमोशन हो गया है।
वैसे Antarvasna प्रदीप भी कभी कभी अपनी लुल्ली मेरे अन्दर डाल देता है। अब बर्फी खाकर गुड़ में मजा कहाँ रहता है?
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