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मेरे परिवार में मैं, पिताजी, माताजी Hindi Porn Stories और मुझ से तीन साल बड़ी दीदी हैं, जिनका नाम है शालिनी। मैं और दीदी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। भाई-बहन से अधिक हम दोस्त हैं। हम एक-दूसरे की निजी बातें जानते हैं और मुश्किल में राय भी लेते-देते हैं। सेक्स के बारे में हम काफ़ी खुले विचार के हैं। हालाँकि हमने आपस में चुदाई नहीं की है। जब मैं छोटा था तो वह अक्सर मुझे नहलाती थी। उस वक़्त मात्र कौतूहल से दीदी मेरे लौड़े के साथ खेला करती थी। मुझे गुदगुदी होती थी और लौड़ा कड़ा हो जाता था। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई तैसे-तैसे हमारी छेड़-छाड़ बढ़ती चली गई।
तब मैं अट्ठारह साल का था और वो इक्कीस साल की। तब तक मैंने उसकी चूचियाँ देख लीं थीं, भोस देख ली थी और उसने मेरा लंड हाथ में लेकर मूठ मार दिया था। चुदाई क्या है, कैसे की जाती है, क्यूँ की जाती है, यह सब मुझे उसी ने सिखाया था।
कहानी शुरु होती है शालिनी की शादी से। पिताजी ने बड़ी धूम-धाम से उसकी शादी की। बारात दो दिनों की मेहमान रही। खाना-पीना, गाना-बजाना सब दो दिनों तक चला। जीजाजी शैलेश कुमार उस वक्त तेईस साल के थे और बहुत ख़ूबसूरत थे। दीदी भी कुछ कम नहीं थी। लोग कहते थे कि बड़ी सुन्दर जोड़ी है।
बारात में एक लड़की थी- पारुल, जीजू की छोटी बहन यानि दीदी की ननद। भाई-बहन भी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। पारो पाँच फुट लम्बी, गोरी और पतली थी। गोल चेहरे पर काली-काली बड़ी आँखें थीं। बाल काल और लम्बे थे। कमर पतली थी और नितम्ब भारी थे। कबूतर की जोड़ी जैसे छोटे-छोटे स्तन सीने पर लगे हुए थे। मेरी तरह वो भी बचपन से निकल कर जवानी में क़दम रख रही थी।
क्या हुआ, कुछ पता नहीं, लेकिन पहले दिन से ही पारो मुझसे नाराज़ थी। जब भी मुझसे मिलती तब डोरे निकालती और हुँह — कहकर मुँह बिचका कर चली जाती थी। एक बार मुझे अकेले में मिली और बोली: तू रोहित है ना? पता है? मेरे भैया तेरी बहन की फाड़ कर रख देंगे।
ऐसी बेहूदी बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। भला कौन दूल्हा अपनी दुल्हन की झिल्ली तोड़े बिना रहता है? अपने आप पर नियंत्रण रख कर मैंने कहा: तू भी एक लड़की है ना, एक ना एक दिन तेरी भी कोई फाड़ देगा।
वह मुँह लटकाए वहाँ से चली गई।
दीदी ससुराल से तीन दिन बाद आई। मैंने माँ को उसे कहते सुना: डरने की कोई बात नहीं है। कभी-कभी आदमी देर लगाता है। पर सब ठीक हो जाएगा।
अकेली पाकर मैंने उससे पूछा: क्यूँ री? साजन से चुदवा कर आई हो ना? कैसा है जीजू का लंड? बहुत दर्द हुआ था पहली बार?
दीदी: कुछ नहीं हुआ है रोहित। वो पारुल अपने भैया से छूटती नहीं, रोज़ हमारे साथ सोती है। तेरे जीजू ने एक बार अलग कमरे में सोने को कहा तो रोने लगी और हंगामा मचा दिया।
मैं समझ गया। दीदी चुदवाए बिना आई थी। पाँच-सात दिनों के बाद वह पुनः ससुराल चली गई और एक महीने के बाद आई। अबकी बार उसे देख कर मेरा दिल डूब गया। उसके चेहरे पर से नूर उड़ गया था। कम से कम पाँच किलो वज़न घट गया था। आँखों के आसपास काले धब्बे पड़ गए ते। उसका हाल देखकर माँ रो पड़ी। दीदी ने मुझे बताया कि वो अब भी कुँवारी थी। जीजू ने एक बार भी नहीं चोदा था।
मैंने पूछा: जीजू का लंड तो ठीक है ना? खड़ा होता है या नहीं?
दीदी: वो तो ठीक है, नहाते वक्त देखा है मैंने। रात को मौक़ा नहीं मिलता।
मैं: हनीमून पर चले जाओ ना?
दीदी: तेरे जीजू ने यह भी कोशिश की, पर वो भी साथ चलने पर अड़ गई।
मैं: सच कहूँ? तेरी उस ननद को चाहिए एक मोटा-तगड़ा लंड। एक बार चुदवाएगी तो शांत हो जाएगी।
दीदी: तेरे जीजू भी यही चाहते हैं। लेकिन कौन चोदेगा उसे?
मैंने शरारत से कहा: मैं चोद लूँ?
दीदी हँस पड़ी: तू क्या चोदेगा? तेरी तो नुन्नी है, चोदने के लिए लंड चाहिए।
मैंने पाजामा खोल कर मेरा लौड़ा दिखाया और कहा: ये देख, नुन्नी लगती है तुझे? कहे तो अभी खड़ा कर दूँ। देखना है?
दीदी: ना बाबा ना। सलामत रहे तेरा लंड।
मैं: मान लो कि मैंने पारुल को चोद भी लिया, जीजू को पता चले कि मैंने उसे चोदा है तो तुम पर गुस्सा नहीं होंगे?
दीदी: ना, वो भी उससे थक गए हैं। कहते थे कि कोई अच्छा आदमी मिल जाए तो उसे कोई हर्ज़ नहीं है पारुल की चुदाई में।
मैं: तो दीदी, मुझे तेरे घर आने दे। कोशिश करेंगे, क़ामयाब रहे तो सही, वर्ना कुछ नहीं।
दीवाली के दिन आ रहे थे। स्कूल में डेढ़ महीने की छुट्टियाँ पड़ीं। दीदी ने जीजू से बात की होगी क्योंकि उनकी चिट्ठी आई थी पिताजी के नाम जिसमें मुझे दीवाली मनाने अपने शहर में बुलाया था। मैं दीदी के ससुराल चला आया। मुझे मिलकर दीदी और जीजू बहुत ख़ुश हुए। हर वक्त की तरह इस बार भी पारो हुँह कर के चली गई।
जीजू सिविल कोर्ट में नौकरी करते थे और अपने पुरखों के मकान में रहते थे। मकान पुराना था लेकिन तीन मंजिलों वाला बड़ा था। आस-पास दूसरे मकान जो थे वे भी काफी पुराने थे, लेकिन खाली पड़े थे। शहर के बीच होने पर भी जीजू ने काफी एकान्त पाया था।
यहाँ आने के पहले दिन मुझे पता चला कि जीजू के परिवार में वो और पारो दोनों ही थे। कई साल पहले जब उनके माता-पिता का देहान्त हुआ तब पारो छोटी बच्ची थी। उस दिन से जीजू ने पारो को अपनी बेटी की तरह से पाला-पोसा था। उस दिन से ही पारो अपने भैया के साथ सोती थी और इतनी लगी हुई थी कि दीदी के आने पर छूटना नहीं चाहती थी। दीदी की समस्या हल करने का कोई प्लान मैंने बनाया नहीं था। मैं सोचता था कि क्या किया जाए। इतने में जीजू हम सब को एक छोटी सी ट्रिप पर ले गए और मेरा काम बन गया।
शहर से करीब तीस मील दूर गलटेश्वर नाम की एक जगह है, वहीं सागर किनारे एक सदियों पुराना शिव-मन्दिर है, आसपास काफी प्राकृतिक सुन्दरता है। बहुत सारे लोग पिकनिक के लिए वहाँ जाते हैं। आने-जाने में लेकिन सारा दिन लग जाता है।
मैंने एक अच्छा सा कैमरा ख़रीदा था जो मैं हमेशा अपने पास रखता था। इस पिकनिक पर वो ख़ूब काम आया। मैंने जीजू और दीदी की कई तस्वीरें लीं। मैं जानबूझ कर पारो की उपेक्षा करता रहा, उसके जानते हुए भी उसकी एक भी तस्वीर नहीं ली। हाँलाकि मैंने उसकी चार तस्वीरें लीं थी जिसका उसको पता नहीं चला था।
अचानक मेरी नज़र मन्दिर की बाहरी दीवारों पर जो शिल्प था उस पर पड़ी। मैं देखता ही रह गया। वो शिल्प था चुदाई करते हुए युगल का। अलग-अलग पोज़ीशन में चुदाई करती हुई पुतलियाँ इतनी सजीव थीं कि ऐसा लगे कि अभी बोल उठेगीं। जीजू से छुपा-छुपी मैं फटाफट उन शिल्प को तस्वीर खींचने लगा। इतने में दीदी आ गई। चुदाई करते प्रेमी के शिल्प देख वो उदास हो गई।
पारो मुझसे कतराती रही। सारा दिन इधर-उधर घूमे-फिर और शाम को घर आए।
दूसरे दिन मैंने मेरे दोस्त के स्टूडियो में फिल्म्स दे दी। डेवलप और प्रिंट निकालने के लिए तीसरे दिन दीदी और जीजू को कुछ काम के वास्ते बाहर जाना पड़ा, सुबह से गए रात को आने वाले थे। ट्यूशन-क्लास की वज़ह से पारो साथ न जा सकी। दोपहर के दो बजे वो क्लास से आई। फोटो स्टूडियो रास्ते में आता था। इसलिए वो तस्वीरें लेते आई। आते ही उसने पैकेट मेरी ओर फेंका और रसोईघर में चली गई चाय बनाने। मैं इसके पीछे-पीछे गया। अकड़ी हुई मेरी ओर पीठ करके वह खड़ी थी।
मैंने कहा: मेरे लिए भी चाय बनाना।
गुस्से में वो बोली: ख़ुद बना लेना। नौकर नहीं हूँ तुम्हारी।
मैंने पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा। उसने तुरन्त झिड़क दिया और बोली: दूर रहो मुझसे। छुओ मत। मुझे ऐसी हरक़तें पसन्द नहीं।
मैंने धीरे से कहा: अच्छा बाबा, माफ़ करना। लेकिन ये तो बताओ कि तुम मुझसे इतनी नाराज़ क्यों हो? क्या किया है मैंने?
पारो: अपने आप से पूछिए, क्या नहीं किया है आपने।
मैं: अच्छा बाबा, क्या नहीं किया है मैंने?
अब तक वो मुझ से मुँह फेरे खड़ी थी। पलट कर बोली: बड़े भोले बनते हो। सारी दुनिया की तस्वीरें निकाल लेते हो। यहाँ तक कि वो मंदिर के पत्थरों भी बाक़ी ना रहे। एक में हूँ जिसको तुम टालते रहे हो। मेरी एक भी तस्वीर नहीं खींची तुमने। आपका क़ीमती कैमरा ख़राब हो जाएगा, इतनी बदसूरत हूँ ना मैं?
मैं: कौन कहता है कि मैंने तु्म्हारी तस्वीर नहीं खींची? भला इतनी सुन्दर लड़की पास हो और तस्वीर ना निकाले, ऐसा कौन मूर्ख होगा!
पारो: मुझे उल्लू मत बनाईए। दिखाइए मेरी फोटो।
मैं: पहले चाय पिलाओ।
उसने दोनों के लिए चाय बनाई। चाय पी कर हम मेरे कमरे में गए और तस्वीर देखने बैठे। मैं पलंग पर बैठा था। वो मेरे बगल में आ बैठी। थोड़ी सी दूर। उसने पतले कपड़े की फ्रॉक पहना था जिसके आर-पार अन्दर की ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी। उसके बदन से मस्त खुशबू आ रही थी। सूँघ कर मेरा लौड़ा जागने लगा।
पहले हमने दीदी और जीजू की तस्वीरें देखीं। बाद में पारो की चार तस्वीरें निकलीं। अपनी तस्वीर देखने के लिए वो नज़दीक सरकी। मेरे कंधे पर हाथ रख वो ऐसे बैठी की हमारी जाँघें एक-दूसरे से सट गईं, मैं मेरी पीठ पर उसके स्तन का दबाव महसूस करने लगा। बेचारा मेरा लंड, क्या करे वो? खड़ा होकर सलामी दे रहा था और लार टपका रहा था। बड़ी मुश्किल से मैंने उसे छुपाए रखा।
पारो की चार तस्वीरों में से तीन सीधी-सादी थी जिसमें वो हँसती हुई पकड़ी गई थी। बड़ी प्यारी लगता थी। चौथी तस्वीर में वह नीचे झुकी हुई थी और हवा से दुपट्टा सीने से हट गया था। उसकी चूचियाँ साफ़ दिख रहीं थीं। तस्वीर देखकर वह शरमा गई और बोली: तुम बड़े शैतान हो।
मैं: तो ओर तस्वीर खींचने दोगी?
पारो: हाँ-हाँ लेकिन ये बाक़ी की तस्वीर किसकी है?
मैं: रहने दे। ये तस्वीरें तेरे देखने लायक नहीं है।
पारो: क्या मतलब? नंगी है क्या? देखूँ तो मैं।
इतना कहकर अचानक वो तस्वीर लेने के लिए झपटी। मैंने हाथ हटा लिया। इस छीना-झपटी में वो गिर पड़ी मेरी बाँहों में। वो सँभल जाए इससे पहले मैंने उसे सीने से लगा लिया। झटपट वो सँभल गई। शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया, और उसने सिर झुका लिया। मेरे पहलू से लेकिन वो हटी नहीं। मैंने मेरा हाथ उसकी कमर में डाल दिया। ऊँगलियाँ मलते-मलते दबी आवाज़ में वो बोली: क्यों सताते हो? दिखाओ ना।
मेरे पास कोई चारा नहीं था। चुदाई करते हुए शिल्प की तस्वीरें मैं दिखाने लगा। मुस्कुराती हुई दाँतों में उंगली चबाती हुई वो देखती रही।
अन्त में बोली: बस? यही था? ये तो कुछ नहीं है, भैया के पास एक किताब है, जिसमें सच्चे आदमी और औरतों की तस्वीरें हैं।
मैं: तुम्हें कैसे मालूम?
पारो: मैंने किताब देखी है, देखनी है तुझे?
मैं: हाँ, हाँ… ज़रूर।
खड़ी होकर वो बोली: चलो मेरे साथ।
अब समस्या यह थी कि मेरा लंड पूरा तन गया था। निकर के बावज़ूद उसने मेरे पाजामे का तम्बू बना रखा था। इस हालत में मैं कैसे चल सकूँ?
मैंने कहा: मैं बैठा हूँ, तू किताब ले आ।
वो किताब ले आई और बोली: एक दिन जब मैं भैया के कमरे की सफाई कर रही थी तब मैंने पलंग के नीचे ये पाई। मेरे ख्याल से भाभी ने भी देखी है।
मैं: दीदी देखे या ना देखे, क्या फ़र्क पड़ेगा? तू जो उनके बीच आ रही है।
पारो: मैं उनके बीच नहीं आ रही हूँ। देख रोहित, भैया मेरे सर्वस्व हैं, और कोई मुझसे उन्हें छीन ले, यह मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी। चाहे वह भाभी हो या कोई और।
मैं: अरी पगली, दीदी कहाँ जाएगी तेरे भैया को छीन लेकर? भैया के साथ वो भी तेरी हो जाएगी। कब तक तू कबाब में हड्डी बनी रहेगी?
पारो: मैं जानती हूँ।
मैं: क्या जानती हो?
पारो: कि मेरी वज़ह से भैया वो नहीं कर पाए हैं।
मैं: वो मायने क्या? मैं समझा नहीं।
पारो: ख़ूब समझते हो और भोले बन रहे हो!
वो शरमा रही थी फिर भी बोली: मज़ाक छोड़ो। देखो, मैंने भैया से सिर्फ एक चीज़ माँगी है।
मैं: वो क्या?
उसने नज़रें फेर लीं और बोली: मैंने कहा, एक बार, सिर्फ़ एक बार मुझे देखने दे।
मैं: क्या देखने दे?
पारो: शैतान, जानते हुए भी पूछते हो?
मैं: नहीं जानता मैं साफ़-साफ़ बताओ ना।
पारो: वो, वो जो हर दूल्हा-दुल्हन करते हैं सुहागरात को।
मैं: मुझे ये भी नहीं पता। क्या करते हैं?
पारो: हाय राम, चु… चु… मुझसे नहीं बोला जाता।
मैं: ओह.. .ओ… चुदाई की कह रही हो?
अपना चेहरा छुपा कर सिर हिला कर उसने हाँ कही।
मैं: तुझे दीदी और जीजू की चुदाई देखनी है एक बार, इतना ही!
उसने मुँह फेर लिया और हाँ बोली।
मैं: जीजू ने क्या कहा?
पारो: भाभी ना बोलती है।
मैं: मैं उनको समझाऊँगा। लेकिन एक ही बार, ज्यादा नहीं। और एक बात पूछूँ? उनको चोदते देखकर तुम अगर उत्तेजित हो जाओगी तो क्या करोगी?
पारो: नहीं बताऊँगी तुझे।
मैंने आगे बात ना चलाई। पलंग पर बैठ मैंने उसे पास बुला लिया। वो मेरी बगल में आ बैठी। मैंने किताब उसके हाथ में रख दी। मेरा हाथ उसकी कमर में डाला। उसने किताब खोली।
किताब के पहले पन्ने पर नर्म व खड़े लौड़ों के चित्र थे। देखकर पारो बोली: ऐसा ही होता है। क्या बोलें इसको? शिश्न? मैंने देखा है।
मेरा लंड ठुमके ले रहा था। मैंने कहा: इसको लौड़ा कहते हैं और इसको लंड। कहाँ देखा है तुमने?
वो फिर शरमाई और बोली: किसी को ना कहने का वचन दे।
मैं: वचन दिया।
पारो: मैंने भैया का देखा है, कैसे वो बाद में बताऊँगी।
मेरा हाथ उसकी पीठ सहलाने लगा। वो मेरे और निकट आई। हम दोनों उत्तेजित हो चले थे, लेकिन उस वक्त हमें इसका भान नहीं था।
दूसरे पन्ने पर बन्द और चौड़ी की हुई चूत की तस्वीरें थीं।
जानबूझ कर मैंने पूछा: ये भी ऐसी ही होती है क्या? क्या कहते हैं उसे?
सिर झुका कर वो बोली: भोस। ऐसी ही होती है भाभी की भी ऐसी ही होगी।
मैं: तेरी कैसी है? देखने देगी मुझे?
पारो: तुम जो तुम्हारा दिखाओ तो मैं मेरी दिखाऊँगी।
मैं खड़ा हो गया। नाड़ा खोल पाजामा उतारा और लंड को आज़ाद किया।
थोड़ी देर वो ताज्ज़ुब होकर देखती रही, फिर बोली: मैं छू सकती हूँ?
मैं: क्यों नहीं?
ऊँगलियों के नोक से उसने लंड छुआ। कोमल उँगलियों का हल्का स्पर्श पाकर लंड और कड़ा हो गया और ठुमके लेने लगा।
पारो: ये तो हिलता है।
मैं: क्यूँ नहीं? तुझे सलाम कर रहा है।
पारो: धत्त।
मैं: मुट्ठी में ले तो ज़रा।
उसने मुट्ठी से लंड पकड़ा तो ठुमक-ठुमक करके वो अधिक कड़ा हो गया।
उसकी मदहोशी बढ़ने लगी, साँसें तेज़ चलने लगी, चेहरा लाल हो गया।
वो बोली: हाय रे, इतना कड़ा क्यों हुआ है? दर्द नहीं होता ऐसे तन जाने से?
मैं: ऐसे कड़ा ना हो तो चूत में कैसे खुस सके और कैसे चोद सके?
पारो: ये तो लार भी निकालता है।
वाकई मेरा लंड अपनी लार से गीला हो चला था।
मैं: ये लार नहीं है, अपनी प्यारी चूत के लिए वो आँसू बहा रहा है।
मुट्ठी से लंड दबोच कर वो बोली: रोहित, बड़ा शैतान है तू।
मैंने उसे बाँहों में भर लिया और कहा: ऐसे-ऐसे मुठ मार।
वो डरते-डरते मुठ मारने लगी। उसके गोरे-गोरे गाल पर मैंने हल्के से चूमा और कहा: मजा आता है ना?
जवाब में उसने मेरे गालों पर भी चूम लिया।
मैं: अब सोच, जब ये चूत में घुसकर ऐसा करे तब कितना आनन्द आता होगा।
वो बोली: नहीं, और उसने मुट्ठी से लंड मसल डाला।
मैंने लंड छुड़ा कर कहा: अब तेरी बारी।
शरमाती हुई वो खड़ी हो गई। फ्रॉक के नीचे हाथ डाल कर कच्छी निकालने लगी। मैंने कहा: ऐसे नहीं, पलंग पर लेट जा।
वो चित्त लेट गई। शरम से नज़रें चुराकर उसने फ्रॉक ऊपर उठाया।
उसकी गोरी-गोरी चिकनी जाँघें खुली हुई देखकर मेरे लंड फनफनाने लगा। उसने सफ़ेद पेंटी पहनी थी। भोस के पानी से पेंटी गीली होकर चिपक गई थी। कुल्हे उठाकर उसने पेंटी उतारी। तुरन्त उसने हाथ भोस से ढँक दी।
मैंने कहा: ऐसे छुपाओगी तो कैसे देख पाऊँगा?
उसकी कलाई पकड़ कर मैंने उसके हाथ हटा दिए, उसकी छोटी सी भोस मेरे सामने आई।
काले घुँघराले झाँट से ढँकी उसकी भोस छोटी थी। मोन्स उँची थी। बड़े मोटे होंठ थे और एक दूजे से लगे हुए थे। तीन इंच लम्बी दरार चिकने पानी से गीली हुई थी। मैंने हल्के से छुआ। तुरन्त उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने कहा: तूने मेरा लंड पकड़ा था, अब मुझे तेरी छूने दे।
मैंने फिर भोस पर हाथ रखा। उसने मेरी कलाई पकड़ ली लेकिन विरोध किया नहीं। ऊँगलियों से बड़े होते चौड़े कर मैंने भोस का भीतरी हिस्सा देखा। किताब में दिखाई थी, वैसी ही पारो की भोस थी। जवान कुँवारी लड़की की भोस मैं पहली बार देखा था। छोटे होंठ नाज़ुक और पतले और साँवली रंग के थे। दरार के अगले कोने में एक इंच लम्बी कड़ा सा भग्न था। भग्न का छोटा मत्था चेरी जैसा दिखाई दे रहा था। दरार के पिछले हिस्से में था, चूत का मुँह जो गीला-गीला हुआ था। मैंने उंगली के हल्के स्पर्श से दरार को टटोला। जैसे मैंने भग्न को छुआ वो झटके से कूद पड़ी। मैंने चूत का मुँह छुआ और एक उंगली अन्दर डाली। उंगली योनि-पटल तक जा पहुँची।
हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए थे। उसने आँखें बन्द कर ली थीं। मुझे यहाँ तक याद है कि अपनी बाँहें लम्बी कर उसने मुझे अपने बदन पर खींच लिया था। इसके बाद क्या हुआ और कैसे हुआ वो मुझे याद नहीं। वो जब चीख पड़ी, तब मुझे होश आया कि मैं उसके ऊपर लेटा था और मेरा लंड झिल्ली तोड़कर आधा चूत में घुस गया था। वो मुझे धकेल कर कहने लगी: उतर जाओ, उतर जाओ, बहुत दर्द होता है।
मैंने उसके होंठ चूमे और कहा: ज़रा धीरज धर, अभी दर्द कम हो जाएगा।
वो बोली: तू क्या कर रहा है? मुझे चोद रहा है?
मैं: ना, हम एक-दूज़े को चोद रहे हैं।
पारो: मुझे गर्भ लग जाएगा तो?
मैं: कब आई थी तेरी माहवारी?
पारो: आज-कल में आनी चाहिए।
मैं: तब तो डरने की कोई बात नहीं है। कैसा है अब दर्द?
पारो: कम हो गया है।
मैं: बाक़ी रहा लंड डाल दूँ अब?
वो घबड़ा कर बोली: अभी बाकी है? फिर से दुखेगा!
मैं: नहीं दुखेगा। तू सिर उठा कर देख, मैं हौले-हौले डालूँगा।
मैं हाथों के बल थोड़ा उठा। वो हमारे पेटों के बीच से देखने लगी। हल्के दबाव से मैंने पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।
अब हुआ ये कि मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी। दीदी के घर आ कर मूठ मारने का मौक़ा मिला नहीं था। बड़ी मुश्किल से मैं अपने-आप को झड़ने से रोक पा रहा था। ऐसे में पारो ने चूत सिकोड़ी। मेरा लंड दब गया। फिर क्या कहना? दन-दना-दन धक्के शुरु हो गए, मैं रोक नहीं पाया। पारो की परवाह किए बिना मैं चोदने लगा और आठ-दस धक्कों में झड़ पड़ा।
उसने पाँव लम्बे किए और मैं उतरा। उसने भोंस पर पेंटी दबा दी। चूत से खून के साथ मिला हुआ ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा। बाथरूम में जाकर हमने सफाई कर ली।
वो रोने लगी, मैंने उसे बाँहों में भर लिया, मुँह चूमा और गाल पर हाथ फिराया। वो मुझसे लिपट कर रोती रही।
मैं: क्यूँ रोती हो? अफ़सोस है मुझ से चुदाई की, इस बात का?
मेरे चेहरे पर हाथ फिरा कर बोली: ना, ऐसा नहीं है।
मैं: बहुत दर्द हुआ? अभी भी है?
पारो: अभी नहीं है, उस वक्त बहुत दर्द हुआ। मुझे लगा कि मेरी… मेरी… चूत फटी जा रही है। लेकिन तू इतनी जल्दी में क्यूँ था? तेरा बदन अकड़ गया था और तूने मुझे भींच डाला था। और तेरे ये… ये… लंड कितना मोटा हो गया था? क्या हुआ था तुझे?
मैं: इसे स्खलन कहते हैं। उस वक्त आदमी सबकुछ भूल जाता है और अद्भुत आनन्द महसूस करता है।
पारो: लड़कियों के साथ ऐसा नहीं होता?
मैं: क्यूँ नहीं। तुझे मजा नहीं आया?
पारो: तू चोदने लगा तो भोस में मीठी सी गुदगुदी होने लगी थी, लेकिन तू रुक गया।
मैं: अगली बार चोदेंगे तब मैं तुम्हें भी स्खलित करवाऊँगा।
पारो: अभी करो ना। देखो तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा है।
मैं: हाँ, लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है, मिटने तक राह देखेंगे, वर्ना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा।
शेष अगले भाग में… Hindi Porn Stories
वाइफ चेंज सेक्स कहानी में पढ़ें कि शादी की दूसरी सालगिरह पर मेरी बीवी का मन हुआ कि उसे एक और लंड चाहिए. उसने मुझे कहा तो मैंने वाइफ स्वैप का खेल करने को कहा.
मेरा नाम रोहित है दोस्तो!
मैं 30 साल का एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ.
मेरा कद 5′ 10″ है, रंग एकदम गोरा है और बदन कसरती है।
मेरी शादी अभी 2 साल पहले ही हुई है। मेरी बीवी का नाम रश्मिका है।
रश्मिका 28 साल की बेहद खूबसूरत, सेक्सी और हॉट लड़की है।
उसके मम्मे बड़े बड़े हैं, उसकी बाहें बहुत ही सुन्दर और आकर्षक हैं।
वह हमेशा स्लीवलेस डीप नेक के कपड़े पहनती है जिससे उसके बड़े बड़े मम्मों के साइज का पता चलता है।
उसके चूतड़ थोड़ा उभरे हुए हैं और गांड बड़ी मस्त है।
मेरी बीवी पढ़ी लिखी है, बोल्ड है, और खुश मिज़ाज़ है।
उसे सेक्स बहुत ही ज्यादा पसंद है। उसे लण्ड पकड़ने, चाटने और चूसने का बड़ा शौक है.
उससे ज्यादा चुदवाने का शौक है.
वह रोज़ रात को नंगी होकर मेरे लण्ड से खेलती है और मैं भी उसके नंगे जिस्म से खेलता हूँ।
एक रात को जब मेरी बीवी मेरे लंड से खेल रही थी तो उसके मुंह से निकला- भगवान् ने अगर दो लण्ड बनाये होते तो कितना अच्छा होता! मैं तो एक लण्ड से खेलते खेलते बोर होने लगी हूँ।
मैंने कहा- हां यार, तुम सच कह रही हो। अगर तुम्हारे साथ एक और चूत होती तो अदल बदल कर चोदने में कितना मज़ा आता!
वह कुछ देर तक सोचती रही, फिर बोली- अगर तुमको एक और चूत चाहिए तो फिर वाइफ स्वैपिंग करना क्यों नहीं शुरू कर देते? तुमको दूसरी चूत मिल जाएगी और मुझे दूसरा लण्ड!
यहाँ से शरू होती है हमारी वाइफ चेंज सेक्स कहानी!
मैंने कहा- आईडिया तो तेरा बड़ा अच्छा है. पर वाइफ स्वैपिंग के लिए वाइफ का राज़ी होना बहुत जरूरी है। क्या तुम किसी और से चुदवाने के लिए राज़ी हो? साथ ही साथ मुझे किसी और की बीवी चोदने दोगी?
वह बोली- हां हां … क्यों नहीं चोदने दूँगी? बड़े शौक से चोदने दूंगी। जब तुम अपनी बीवी को किसी और से चुदवाने दोगे तो मैं भी तुम्हें किसी और की बीवी चोदने दूँगी।
मैंने कहा- ठीक है. तुम भी कोई ऐसा कपल ढूंढो जो हमारे साथ चोदा चोदी कर सके। मैं उसकी बीवी चोदूँ, वह मेरी बीवी चोदे!
बात पक्की हो गयी।
उस रात मुझे अपनी बीवी चोदने में ज्यादा मज़ा आया।
उसके बाद हम दोनों काम पर लग गए।
अगले दिन हम शॉपिंग हॉल में घूम रहे थे।
मैं थोड़ा दूर था रश्मिका से … इतने में मैंने देखा कि सामने से एक बड़ी खूबसूरत सेक्सी औरत मेरी बीवी की तरफ मुस्कराती हुई आई और आते ही मेरी बीवी से बोली- अरे यार रश्मिका, तू यहाँ कैसे?
वह भी उसे देख कर दंग रह गयी और कहा- अरे यार प्रेमा, तू यहाँ क्या कर रही है?
वे दोनों थोड़ा दूर कोने में चली गई तो रश्मिका ने उसके कान में कहा- यहाँ क्या गांड मरा रही है तू अपनी?
प्रेमा बोली- तू क्या अपनी माँ चुदा रही है यहाँ?
दोनों हंसने लगी।
फिर प्रेमा बोली- मैं तो यही रहती हूँ अपने हसबैंड के साथ।
रश्मिका ने पूछा- तो फिर कहाँ है तेरा हसबैंड?
प्रेमा ने बताया- वो तो आया नहीं है, घर पर है।
मेरी बीवी ने फिर मुझे बुलाया और उसे मुझसे मिलवाया।
मैंने उसे बड़े प्यार से नमस्ते की।
यह सच है दोस्तो … कि प्रेमा मुझे एक नज़र में भा गयी।
वह बोली- अच्छा अब आप लोग मेरे घर चलो।
पहले तो हमने थोड़ा न नुकुर किया फिर हम दोनों उसके घर पहुँच गए।
रश्मिका ने बताया कि प्रेमा मेरी कॉलेज की दोस्त है।
हम दोनों उसके पति पवन से मिले परिचय हुआ और खूब ढेर सारी बातें हुईं।
मेरी बीवी ने अंदर जाकर प्रेमा से खुल कर वाइफ स्वैपिंग के लिए बात की.
उसने मौके का फायदा उठाया।
प्रेमा खुश होकर बोली- अरे यार, मेरा पति तो जाने कबसे वाइफ स्वैपिंग के लिए तैयार है। तुम किसी दिन प्रोग्राम बना लो, हम दोनों आयेंगे।
हमारा हौंसला बढ़ गया और अगले दिन हम दोनों शाम को अपने दोस्त आरव के घर पहुँच गए।
उसने हमारा स्वागत किया।
हम लोग एक दूसरे से अच्छी तरह मिले।
आरव की बीवी सपना बहुत ही सुन्दर सभ्य और हॉट बीवी है। मैं जब जब उसे देखता हूँ तो मेरे मन में कुछ कुछ होने लगता है।
अब आपसे क्या छिपाना दोस्तो, सच्चाई यह है कि मैं जब अपनी बीवी चोदता हूँ तो मन में सोचता हूँ कि मैं आरव की बीवी चोद रहा हूँ।
मैं आरव से बातें करने लगा और मेरी बीवी रश्मिका सपना भाभी से।
हम दोनों बाहर कमरे में थे और वो दोनों अंदर किचन में।
कुछ देर बाद जब दोनों बीवियां कमरे में वापस आईं तो मेरी बीवी ने इशारा किया कि काम हो गया।
मैंने मन में कहा कि सपना भाभी मान गयी है तो आरव भी मान ही जाएगा; अपनी बीवी से विपरीत वह नहीं जा सकता।
अब वह दिन दूर नहीं जब मैं आरव की बीवी चोदूंगा।
हम दोनों ने खूब जम कर नाश्ता किया और खूब मस्त मस्त बातें कीं।
रात को सपना भाभी का फोन मेरी बीवी के पास आ गया।
वह बोली- मेरा हसबैंड वाइफ स्वैपिंग के लिए तैयार हो गया है। अब आप तारीख़ बताइये कि हमें किस दिन आना है।
मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।
रश्मिका भी ख़ुशी के मारे नाचने लगी।
अगले ही दिन मेरी शादी की सालगिरह थी।
मैंने दोनों कपल को रात भर के लिए डिनर और वाइफ स्वैपिंग की पार्टी के लिए आमंत्रित कर लिया।
अगले दिन की छुट्टी ले ली मैंने और सारा इंतज़ाम कर लिया।
शाम को 8 बजे दोनों कपल आ गए।
हमने उनका तहे दिल से स्वागत किया और उन्होंने हमको शादी की साल गिरह पर बधाई दी.
पवन प्रेमा और आरव सपना दोनों कपल भी एक एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश हुए।
दोनों ही स्मार्ट और हैंडसम थे इसलिए ख़ुशी सबके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी।
मेरी बीवी ने सपना और प्रेमा को अंदर बुलाकर सारी बात खुल कर बता दी और कहा- आज रात भर हम तीनों बीवियां एक ही बिस्तर पर एक दूसरे के पति से चुदवाएंगी।
सपना बोली- अरे यार, हम लोग एक बार एक कपल के साथ ऐसा कर चुके हैं। एक ही बेड पर मैंने उसके पति से चुदवाया और उसने मेरे पति से चुदवाया। इसलिए मुझे तो कोई शर्म नहीं।
प्रेमा बोली- तो मुझे भी शर्म नहीं है. मैं तो भकाभक चुदवाऊंगी तुम दोनों के पतियों से.
फिर तीनों बीवियां बाहर कमरे में आ गयीं।
हमने ड्रिंक्स शुरू कर दी।
पराई बीवियों के साथ शराब पीने का यह मेरा पहला मौक़ा था।
मैं तो इसका पूरा फायदा उठाने लगा।
मुझे मज़ा आने लगा।
फिर बातें होने लगीं तो धीरे धीरे और गहरी खुल कर बातें होने लगीं; सेक्स की बातें होने लगीं।
मैंने देखा कि शराब पीने में और बातें बीवियां सबसे आगे हैं।
तो मेरे मुंह से निकला- प्रेमा भाभी, कोई फड़कता हुआ नॉन वेज चुटकुला सुनाओ न प्लीज?
वह बोली- अच्छा तो सुनो!
एक बस में दो औरतें सीट के लिए लड़ रहीं थीं।
आखिरकार पहली बोली- ले राण्ड ये सीट तू अपने भोसड़ा में डाल ले!
दूसरी बोली- तू मादरचोद पूरी बस अपनी गांड में डाल ले!
इतने में कंडक्टर बोला- तो क्या मैं पैसेंजर्स को अपने लण्ड पर बैठा के ले जाऊंगा?
सबने खूब तालियां बजायी और एन्जॉय किया।
फिर सपना भाभी ने भी सुनाया- एक ने पूछा तुम्हारा नाम क्या है?
दूसरा बोला- लाला उमा नाथ दास.
पहले वाला बोला- इसे छोटा करके बताओ।
दूसरा बोला- LUND ( Lala Uma Nath Das )
सबने खूब तालियां बजाईं।
फिर मेरी बीवी का नंबर आया तो उसने कहा- एक बार एक लड़का और एक लड़की बात कर रहे थे।
लड़का बोला- यार तुम लड़कियां तो बहुत अच्छी हो। रात तो मजे से सोती तो हो?
लड़की बोली- सोते तो तुम भी हो मजे से?
लड़का बोला- कहाँ मजे से यार? हमको तो हर करवट पर अपना लण्ड सेट करना पड़ता है।
सबने खूब एन्जॉय किया और तब माहौल एकदम से गर्म हो गया।
उधर दो दो पैग व्हिस्की भी ख़त्म हो गई।
सब लोग नशे में आ गए।
नशे में थोड़ी बेशर्मी, थोड़ी सी शरारत और थोड़ी बदतमीजी करने का बहाना मिल जाता है।
अचानक मैंने प्रेमा भाभी का हाथ पकड़ लिया तो उसने मेरे गाल चूम लिए और बोली- यार रोहित, आज तुम बहुत हैंडसम लग रहे हो!
मैंने उसे अपने गले लगा लिया।
उधर सपना भाभी ने पवन के गले में अपनी बाहें डाल दीं।
वे दोनों एक दूसरे को चूमने लगे।
फिर मेरी बीवी कहाँ पीछे रहने वाली थी, उसने आरव को अपनी तरफ खींचा और उससे चिपक गयी।
आरव उसकी चूँचियाँ दबाने लगा तो मेरी बीवी उसका लण्ड टटोलने लगी।
पवन बड़े प्यार से बोला- रोहित, आज तेरी शादी की साल गिरह है। आज तुम मेरी बीवी के साथ अपनी सुहागरात मनाओ। मैं आरव की बीवी के साथ सुहागरात मनाऊंगा।
तब मैंने कहा- आरव मेरी बीवी रश्मिका के साथ सुहागरात मनाएगा।
सब लोग हंस पड़े।
अब यह तो ज़ाहिर हो गया कि बीवियों की अदला बदली में कौन किसकी बीवी चोदेगा और कौन किसके पति से चुदवायेगी.
मैं पवन की बीवी प्रेमा से लिपट गया।
मुझे पराई बीवी का आलिंगन बड़ा सुख देने लगा।
पवन आरव की बीवी के आलिंगन से खुश हो रहा था और आरव मेरी बीवी को चिपका कर मज़ा करने लगा था।
बीवियां भी पराये मरद से चिपक चिपक कर बड़ा आनंद का अनुभव कर रही थी।
इतने में मैंने प्रेमा भाभी के कपड़े उतार दिए और उसने मेरे कपड़े।
हम दोनों एक दूसरे के आगे एकदम नंगे खड़े हो गए।
मैं प्रेमा भाभी की मस्त मस्त चूचियाँ दबाने लगा तो वह मेरा लण्ड पकड़ कर बड़े मजे से हिलाने लगी।
वह बोली- यार रोहित, बड़ा मोटा तगड़ा है तेरा भोसड़ी का लण्ड!
उसने झुक कर मेरे लण्ड की चुम्मी ली तो मैं गनगना उठा।
मुझे प्रेमा भाभी पर प्यार आ गया, मैं उसके नंगे जिस्म से खेलने लगा।
तब मैंने देखा कि आरव नंगा होकर मेरी बीवी के नंगे जिस्म से खेल रहा है और पवन आरव की बीवी को नंगी करके उसकी चूचियाँ दबा रहा है और चूत सहला रहा है।
आरव की बीवी सपना पवन का लण्ड मस्ती से चाटने लगी और उसके पेल्हड़ भी चूमने लगी।
मेरी बीवी आरव का लण्ड ऐसे चूस रही थी जैसे उसे पहली बार कोई लण्ड मिला है।
तीनों बीवियां पराये मरद का लण्ड पाकर बेहद खुश थीं और तीनों मरद भी पराई बीवी के मम्मे दबा दबा कर, उनकी चूत सहला सहला कर, उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मार मार कर, उनके नंगे बदन पर हाथ फिरा फिरा कर मज़ा लूट रहे थे।
मेरी नंगी बीवी बड़े प्यार से आरव का लण्ड चूसने लगी, आरव की नंगी बीवी सपना पवन का लण्ड और पवन की बीवी प्रेमा नंगी नंगी मेरा लण्ड चूसने लगी।
अब आने लगा हम सबको पराई बीवी से लण्ड चुसवाने का मज़ा।
मैं मन ही मन बड़ा खुश हो रहा था।
हम तीनों कपल एक ही बेड पर एकदम नंग धड़ंग बीवियों की अदला बदली का मज़ा लेने लगे।
मेरी बीवी बोली- यार सपना, बड़ा मोटा लण्ड है तेरे पति का! मुझे इसका टोपा चाटने में बड़ा अच्छा लग रहा है।
सपना बोली- मुझे तो प्रेमा के पति का लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है क्या मस्त लौड़ा है इसका मादरचोद … एकदम घोड़े का लण्ड लग रहा है।
प्रेमा ने भी अपने मन की बात कही- यार, मुझे तो रश्मिका के पति का लण्ड पसंद आ गया है। भोसड़ी का जितना मोटा है उतना ही कड़क भी है। ये तो आज मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा।
बीवियों की इन मस्त मस्त बातों ने सबके लण्ड में एक नया जोश भर दिया।
उनके मुंह से गन्दी गन्दी बातें सुनकर लण्ड भी साले एकदम घोड़े के लण्ड की तरह खड़े हो कर हिनहिनाने लगे।
बीवियों को पराये मर्दों के लण्ड बहुत ज्यादा ही मज़ा देने लगे।
मेरी बीवी बोली- मन करता है कि मैं हर रोज़ पराये मरद का लण्ड अपने मुंह में लूँ, उसके लण्ड से खेलूं और फिर उसे अपनी चूत में पेलूं।
उत्तेजना सबकी इतनी बढ़ गयी कि अब किसी से रुका नहीं गया।
मैंने तो लण्ड गप्प से पवन की बीवी की चूत में पेल दिया।
लण्ड एक बार में पूरा घुस गया और मैं सटासट चोदने लगा उसकी चूत।
पवन ने भी जोश में आकर अपना लण्ड आरव की बीवी की चूत में पेल दिया।
वह मस्ती से आरव की बीवी चोदने लगा।
आरव ने अपना लम्बा लण्ड मेरी बीवी की चूत में ठोंक दिया और घपाघप चोदने उसकी चूत!
मेरी बीवी रश्मिका उससे बड़े प्यार से चुदवाने लगी।
हम तीनों इस तरह खुल्लम खुल्ला चोदने लगे एक दूसरे की बीवी की चूत।
बीवियां भी बड़ी बेशर्मी से एक दूसरे के पति से अपनी अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगीं।
जितनी बेताबी हम लोगों को दूसरे की बीवी चोदने की थी, उससे कहीं ज्यादा बेताबी इन बीवियों को दूसरों के पतियों से चुदवाने की थी।
मुझे तो यकीन हो गया कि हर बीवी भोसड़ी वाली किसी न किसी पराये मरद से चुदवाती जरूर है।
मेरी बीवी को शायद बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था।
वह बोली- हाय मेरे राजा आरव, मुझे आज खूब अच्छी तरह चोदो, तुम्हारा लौड़ा बड़ा दमदार है। बड़ा मज़ा आ रहा है मुझे। आज मैं सच में अपनी असली सुहागरात मना रही हूँ। हाय रे फाड़ डालो मेरी चूत, चीर डालो मेरी चूत. ऐसा मज़ा तो मुझे पहले कभी नहीं आया।
उधर प्रेमा भी ऐसा ही कुछ कहे जा रही थी- हाय मेरे रोहित राजा, बड़ा जबरदस्त है तेरा लौड़ा। अंदर दूर तक चोट कर रहा है तेरा लण्ड मेरी चूत में। इतना मज़ा तो मुझे अपनी सुहागरात में भी नहीं आया था। आज तो सबके सामने चुदाने का मज़ा ही कुछ और है। और चोदो मुझे, अपनी बीवी की तरह चोदो मुझे, चीथड़े उड़ा दो मेरी चूत के!
फिर सपना भाभी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, वह भी बोली- हाय पवन, तेरा लौड़ा भोसड़ी का बड़ा खूंखार है, बिना रुके गचागच चोदे चला रहा है मेरी चूत! ऐसी चुदाई तो मेरी कभी नहीं हुई बहनचोद। बड़ा अच्छा लग रहा है यार, खूब हचक हचक कर चोदो मेरे प्यारे। मुझे आज अपने मरद के आगे पराये मरद से चुदवाने में कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा है। मुझे अपने पति को रोहित की बीवी चोदते हुए देख कर बड़ा अच्छा लग रहा है। कोई और भी है जो मेरे पति से चुदवाकर मज़ा लेती है।
उधर आरव बोला- यार रोहित, मुझे अपने बीवी के सामने तेरी बीवी चोदने में जो मज़ा आ रहा है उसे बयान नहीं किया जा सकता। बड़ा मस्त चुदवाती है तेरी बीवी यानि मेरी रश्मिका भाभी।
इस तरह हम सब एक दूसरे की बीवी चोदते हुए अपनी अपनी बीवी चुदवा भी रहे थे।
अपनी बीवी दूसरों से चुदवाना भी एक बड़ा मजेदार खेल है।
यह वाइफ चेंज सेक्स का खेल अमेरिका ऐसे देशों में खूब होता है।
लोग दूसरों की बीवियां कम चोदते हैं, अपनी बीवी दूसरों से ज्यादा चुदवाते हैं और एन्जॉय करते हैं।
इन सब मस्तानी बातों से लण्ड एक एक करके झड़ने लगे और चूत भी सबकी खलास होने लगी।
चुदाई की पहली पारी ख़त्म हुई तो सबने बड़े प्रेम से नंगे ही खाना खाया और आपस में खूब हंसी मजाक भी की।
दूसरी पारी में मैंने आरव की बीवी सपना की चूत में लौड़ा पेला और खूब मस्ती से चोदा।
आरव ने अपना लण्ड पवन की बीवी प्रेमा की चूत में घुसेड़ दिया और खूब तबीयत से चोदा।
पवन ने मेरी बीवी रश्मिका की चूत में लौड़ा ठोक दिया और खूब धकाधक चोदा।
इस तरह रात भर हम बीवियां अदल बदल कर चोदते रहे और हमारी बीवियां भी लण्ड अदल बदल कर चुदवातीं रहीं।
तो दोस्तो, यह थी हमारी शादी की सालगिरह पर बीवियों की अदला बदली की एक सच्ची कहानी।
रेखा मेहता ने झांसी से मुझे मेल के Sex Stories द्वारा अपनी कहानी का एक स्वरूप बना कर भेजा था, उसे कहानी के रूप में ढाल कर आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ।
मेरे पति कपिल का दोस्त राहुल, जिसकी यह कहानी है, मेरे घर पर लगभग रोज ही आता था। जब राहुल पहली बार जब घर में आया था उसकी नजर मुझ पर पड़ी। वो मुझे देखता ही रह गया। मेरी नई नई शादी हुई थी, मेरी उमर भी बीस वर्ष की थी। भरपूर जवानी के दौर में थी। अभी तक मुझ पर से कॉलेज का नशा नहीं उतरा था। मैं कभी जीन्स, या काप्री और टॉप पहनती थी। कॉलेज के समय से ही अपने फ़िगर को दूसरों के सामने उभार कर दिखाना हम लड़कियों का सबसे फ़ेवरेट शौक था। राहुल के सामने भी मैं लगभग उसी अन्दाज़ में आती थी। राहुल की वासना भरी निगाहें मुझ पर पड़ चुकी थी। उसके ऐसे घूरने से मैं भी रोमांचित हो उठती थी। उसे उत्तेजित करने में मुझे मजा भी आता था। शायद मैं उससे चुदना भी चाहती थी। राहुल एक पच्चीस साल का जवान था। सुन्दर था और स्टाईल में रहता था। वो और मेरे पति कपिल रेलवे में काम करते थे। राहुल बुकिन्ग क्लर्क था और मेरे पति ट्रेन टिकट एक्जामिनर थे। राहुल का घर हमारे पास ही था। कपिल को कही मुझ पर शक ना हो इसलिये मैं राहुल को भैया कहती थी।
वो जब भी मुझे घूरता था तो मुझे भी लगता था कि मैं भी उसे देख कर मुस्कराऊँ और उसे आगे बढ़ने की हिम्मत बढ़ाऊँ। पर शरम के मारे मैं ऐसा नहीं कर सकती थी। पता नहीं वो मुझे ऐसे क्यूँ देखता था, शायद उसके दिल में भी मेरे लिये भावनाएँ थी। मेरे पति सुबह ही ड्युटी पर निकल गये थे। राहुल आज करीब नौ बजे मुझ पर लाईन मारने घर आया था। उसके पास बात करने को कुछ भी नहीं था। बस उसने कपिल के बारे में पूछा, जिसके बारे में वो पहले से जानता था कि वो इस समय घर पर नहीं होगा।
मैंने कहा – वो तो नहीं है, काम पर गये हैं।”
मैं दरवाजे पर खड़ी हुई उसे निहार रही थी। वो मुझे देख कर हमेशा की तरह मुस्कराया। मेरी नजरें झुक गई और मैं जमीन की ओर देखने लगी।
“आप अकेली हैं, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?” उसने मुस्करा कर पूछा।
“ओह, सॉरी, अन्दर आईये ना भैया, हां अभी मैं अकेली हूँ, आपको तो पता है, मैं इस समय अकेली रहती हूँ।” मैंने शर्माते हुये जवाब दिया। वो अन्दर आ गया।
“भाभी जी, आप अभी भी पढ़ाई करती हैं?” उसका बेतुका सा प्रश्न था जिसका उत्तर वो जानता था, पर मुझे पता चल गया था कि वो मुझ पर लाईन मारने आया था।
अब मैं सोच रही थी कि कैसे उसे रिझाऊं कि वो मुझे अकेली पा कर कुछ सेक्सी हरकत करे। सो बस मैंने एक मतलब भरी तिरछी नजर उस पर डाली और मुस्करा दी। ये तो उसके लिये जरूरत से ज्यादा ही हो गया।
“चाय लेंगे आप ? कोई खास काम से आये थे आप ?” मेरी तिरछी नजरें अब भी उसे न्योता दे रही थी। बस समझने वाला चाहिये था। शायद वो समझदार था।
“चाय तो पी लूंगा, पर हाँ आया तो खास काम से ही था।” मैं चाय बनाने चली गई, राहुल भी उठ कर वहीं आ गया और शायद नजरों इशारा पा कर उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और बोला,”शालू, तुम बहुत सुन्दर लगती हो !”
उसके हाथ लगाते ही मेरे शरीर में चीटियां सी रेंगने लगी, मुझे तेज झुरझुरी आ गई। उसकी वासना भरी आवाज में लड़खड़ाहट थी। मुझे लगा कि उसने बहुत अधिक हिम्मत कर ली थी। मेरा मन अन्दर से खुशी से कांप उठा। पर मुझे तो अपने आप को पतिव्रता बताना था ना।
“भैया, आप वहा बैठे प्लीज !” मैंने चाय निकाली तो लगा मेरे हाथ कांप रहे थे। मैं ज्योंही पलटी, राहुल बिलकुल सामने था। मेरे हाथ से चाय गिरते गिरते बची।
“शालू, प्लीज बस एक बार मुझे किस दे दो !” उसकी सांसे तेज थी।
“क्…क्… क्या ?” मैं बुरी तरह से चौंक गई, और थर थर कांपने लगी। मुझे लगा मैं एक्टिन्ग ठीक ठाक कर लेती हूँ। पर सच में मुझे इस तरह बहुत शर्म आ रही थी। ऐसा कभी किया नहीं था ना। एकदम से मेरी हिम्मत नहीं हुई कुछ पहल करने की।
“राहुल जी, नहीं नहीं, ये क्या कह रहे हैं आप !” मेरी निगाहें नीचे झुक गई। चाय मैंने वहीं वापस रख दी। मैं चुप से पास में से निकल कर बैठक में आ गई और दीवार से लग कर खड़ी हो गई।
“प्लीज, शालू सिर्फ़ एक बार, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा।” उसकी विनती जारी थी। उसकी सांसों के साथ उसकी धड़कन की आवाज तक मुझ तक आ रही थी। उसने शायद ये कहने में अपनी पूरी शक्ति लगा थी। मैं घबरा गई हालांकि वो मुझे अच्छा लगता था, पर एकदम से जैसे मुझ पर हमला हुआ हो, मैं कुछ तय नहीं कर पाई। मुझे लगा कि वो एक किस ले लेगा तो मेरा क्या जायेगा। मान जाऊं क्या ? पर कहीं और आगे बढ़ गया तो, क्या फिर मुझे ये चोदेगा। ये सोच कर मुझे वासना का तेज भी चढ़ने लगा और घबराहट सी भी होने लगी। पर ये सोच कर एक बार मेरी चूत में भी फ़ड़फ़ड़ाहट हो गई। इसी कशमकश के बीच राहुल मेरे करीब आ चुका था। मेरी नजरे जमीन में गड़ी जा रही थी। मेरे चेहरे पर शर्म की लालिमा आ गई थी। मैं बार बार नजरे उठा कर उसकी ओर देखने लगी।
“शालू प्लीज, मान जाओ ना !” उसके हाथ एकबारगी मेरी तरफ़ बढ़ चले थे।
“नही, भैया नहीं, ये पाप है, मुझे छूना नही, प्लीज !” दिल में इच्छा होते हुए भी मुझे जाने क्यों मर्यादा तोड़ना अच्छा नहीं लग रहा था।
“सिर्फ़ एक बार, आपका क्या जायेगा, मेरी दिल की इच्छा पूरी हो जायेगी।” लगभग वो हांफ़ उठा था।
“मैं मर जाऊंगी, राहुल, बस आप जाईये यहाँ से !” मैं पसीना पसीना हो उठी, मेरा दिल धड़क उठा, किसी अन्जाने सुख की तलाश में मेरा मन भटक चला।
राहुल ने मेरे चेहरे को उठाया और कहा,”सच में चला जाऊगा, ठीक है !! बस एक किस के बाद !” और उसने गजब ही हिम्मत दिखाते हुए अपने होंठ मेरे कांपते होंठ पर जबरदस्ती रख दिये। मेरे दोनों हाथ उसने कस कर पकड़ लिये। मैंने जाने किस नशे में अपनी आंखे बन्द कर ली। मेरा मन खिल उठा। मैं उसे कुछ नहीं कह पाई। शायद कहना भी नहीं चाहती थी। वो मेरे होंठ पीने लगा। अब उसने मेरे हाथ छोड़ दिये थे और अब उसके प्यार भरे हाथ मेरे बालों को संवार रहे थे। एक हाथ मेरे पीठ को सहला रहा था। मैं लम्बाई में छोटी थी, उसके पांवो पर चढ़ गई और अब अपने हाथ उसके गले में हार की तरह डाल दिये। मेरा सीना उसके सीने से दब गया, और जोर से अपने उरोज उसकी छाती से रगड़ने लगी। मेरे मन में आनन्द की लहरें उठने लगी। उसने जोश में मेरे चूतड़ों की गोलाईयाँ सहला डाली। वासना का आनन्द मुझ पर चढ़ने लगा। अचानक मेरे वक्षस्थलों पर उसका हाथ जम गया और उसे सहलाने लगा।
मेरे निपल कड़े होने लगे। मेरे स्तन उसके हाथों में मचल उठे। तन में मीठी सी आग जल उठी। मैं मदहोश होने लगी। हाय राम… मुझे ये क्या हो गया…इसे मैं भाई कहती हूँ… पर मुझे ये कैसा आनन्द आ रहा है… क्या ये आनन्द सही है या रिश्ता… पर रिश्ता तोड़ा तो राहुल ने ही है ना… कौन सा मेरा सगा भाई है … हाय मसल दे मुझे…। उसी समय राहुल ने मुझे धीरे से अपने पांवों पर से मुझे उतार दिया। जैसे नशा टूट गया…
“शालू, देखो किसी को मत कहना, आपका ये अहसान जिन्दगी भर मेरे दिल में रहेगा, मुझे असीम आनन्द आया, थंक्स शालू !” उसकी सांसे अब भी उखड़ी हुई थी। अचानक उसका मुझे यूँ छोड़ देना मुझे नहीं भाया, मेरी नजरें झुक गई और पैर के नाखून से जमीन कुरेदने लगी।
“राहुल जी, आप भी मत कहना, अब आप जाईये।” मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखे उठा कर राहुल की ओर देखा।
“क्या मैं कल भी आऊ?” उसकी शरारत भरी मुस्कान मेरे दिल को चीर गई।
“आपकी मरजी, आपका घर है !” घायल सी मैं बोली। राहुल खुश हो गया और जल्दी से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया।
उसके जाने के बाद मेरा दिल अब कही नहीं लग रहा था। मैं निढाल सी बिस्तर आ गिरी और राहुल के बारे में सोचने लगी। पहले तो मुझे अपने ऊपर शर्म आने लगी कि मैंने ये क्या कर डाला। फिर शनै: शनै: मुझे सब कुछ मोहक लगने लगा। अपनी छातियों पर दबाव, निपल को खींचना, नरम होंठो का किस, मेरे नरम नरम चूतड़ को सहलाना, मेरे बदन में आग भरने लगी। काश मैं उसका लण्ड पकड़ कर दबाती, उसका सुपाड़ा बाहर निकाल कर मलती। एक बार अपनी चूत में उसे ले कर तड़पती, तो मुझे शान्ति मिलती। शाम को कपिल थका हुआ सा घर आया और आते ही उसने राहुल को बुला लिया। राहुल ने मुझे जान कर देखा तक नही, बस आकर दोनों ने ड्रिंक ली और कपिल खाना कर सोने चला गया। राहुल कुछ देर तक बैठा रहा, शायद मुझसे कुछ कहना चाहता था।
“शालू, सुबह के लिये एक बार फिर थेंक्स !” उसने मेरी तरफ़ बड़ी आशा भरी निगाहों से देखा, मुझे समझ में आ गया कि वो चाहता है कि मैं उसे सुबह बुलाऊँ। वैसे सुबह ही बात हो चुकी थी, पर शायद वो उसे सुनिश्चित करना चाह रहा था। पर फिर से कैसे कहूँ ? मैं शरमा गई और धीरे से बोली,”भैया, बार बार कह कर शर्मिन्दा मत करो।”
“कल सुबह आप फ़्री है ना, यही पूछ रहा था?” मेरी नजरें फिर से झुक गई। मैंने नजरें नीची करके ही बस हां में सिर हिला दिया। वो उठा और जल्दी से बाहर चला गया।
रात भर मैं फिर से राहुल के ख्यालों में उलझ सी गई। मुझे वो सेक्सी लगने लगा। मुझे अब लगा कि सुबह वो क्या क्या करेगा, जरूर वो मुझे चोदेगा, मेरी इच्छा जरूर पूरी करेगा। मेरे बोबे भी मसलेगा और्… और्… लण्ड को मेरी चूत में… हाय राम, मैं तो मर जाऊंगी।
मेरी आंख खुली तो कपिल मुझे देख कर मुस्करा रहा था। मुझे जागते देख कर पूछा,”रात को तुम कोई सेक्सी सपना देख रही थी क्या” उसके कहते ही मैं उछल पड़ी।
“हाय राम, आपको क्या पता ?” फिर मैं ही शरमा गई। शायद मैं सोच सोच कर रात को झड़ गई थी।
“हाय कपिल, तुम तो बस सो जाते हो, मेरा तो कुछ सोचते ही नहीं !” मैंने पकड़ा जाने पर शिकायत कर दी।
“डार्लिन्ग, अभी नहीं, मुझे अभी जुकाम और हल्का बुखार है, ठीक होने दो।”
मुझे लगा कि कहीं ये आज की छुट्टी ना ले लें। पर नहीं, उसका छुट्टी लेने का जरा भी मन नहीं था। मैं तुरंत उठी और नित्य कर्म से निपट कर कपिल के लिये नाश्ता और टिफ़िन बनाने लगी। कुछ ही देर में वो ऑफ़िस के लिये निकल गया। मैंने अपना सफ़ेद टाईट पजामा पहना, पर पेन्टी नहीं पहनी। ढीला सा ऊंचा सा टॉप बिना ब्रा के पहन लिया। मुझे लगा कि सच में मुझे ब्रा की आवश्यकता ही नहीं थी। मेरे स्तन तो वैसे ही सीधे तने हुए खड़े थे। मुझे ये सब अपने मजे के लिये तो करना ही था। मेरा दुबले बदन की सारी गहराईयां अधिक लचीली नजर आने लगी। पजामा चूतड़ों की दरार में घुस कर उसकी गहराई नाप रहा था, शायद राहुल को ये सब सेक्सी लगेगा। यदि अब वो मेरे स्तनो पर हाथ डाले तो सीधे बोबे ही उसके हाथ में आये। लण्ड तैयार हो तो अन्दर जाने में कठिनाई ना हो। पर मुझसे यह सब कैसे होगा।
राहुल भी अपने समय से आ गया। उसे देखते ही मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मुझे पता था आज वो फिर किस करेगा और फिर्…
“शालू, मुझे कल कितना मजा आया कि मैं बता नहीं सकता।” उसने कल की बात याद दिलाई। मैं शरमा गई और झुकी निगाह से कह उठी। बात सीधे ही बिन्दु पर लाने का ये सबसे अच्छा तरीका था।
“राहुल, पर ये सब ठीक नहीं है, अगर पता चल गया तो मैं तो मर ही जाऊंगी।” मैंने अपनी शंका व्यक्त की। राहुल उठा और मेरे पास आ गया।
“मेरे ऊपर भरोसा रखो, जवानी है तो मजे लूटो और जिस्म की प्यास खुद भी बुझाओ और मुझे भी बुझाने दो।”
“राहुल, हाय रे ऐसे ना कहो, मुझे कुछ होता है” मैंने अपनी तड़प उसे दर्शाई।
“शालू, तुम्हारा जिस्म लाजवाब है, तुम्हारा क्या मस्त फ़िगर है, इसका मजा उठा लो।”
“नहीं जी… वो… वो … कैसे… हाय रे मैं मर जाऊंगी।” मैं कांप उठी।
“सच में , ये बदन इतना सेक्सी है कि इसे एक मर्द मसलने को चाहिये” उसके हाथ मेरी कमर पर आ गये और मेरे स्तन की और बढ़ने लगे। मैं अपने कांपते हाथो से उसका हाथ रोकने की कोशिश करने लगी, पर नाकाम रही, ताकत के साथ मेरे हाथ को हटाते हुए वो मेरे चूंचियो के ऊपर आ गये। मेरी सिसकारी निकल पड़ी। मेरे चूंचियां दब गई… एक मीठी सी कसक उठी।
“ना कर्… हाय, लाज आती है।” मैं सिमट उठी। पर मन में लगा कि मेरी चूंचियाँ वो बेरहमी से मसल डाले। मेरी मन की कसक शांत कर दे। उसका हाथ मेरी चूंची को सहलाने लगे। तभी उसका दूसरा हाथ मेरे पेट को दबाते हुए टाईट पजामे में घुस कर चूत की ओर बढ़ गया।
“बस ना… ये नहीं करो…मैं मर जाऊंगी राम रे !” पर तब तक उसका हाथ मेरी नरम नरम झांटो को सहलाते हुए चूत तक पहुंच गया था और मेरी चूत को प्यार से सहला रहा था। मेरी चूत गीली हो चुकी थी, उसका चिकनापन उसकी अंगुलियों में लग गया। मैं तड़प उठी। मुझे मीठी मीठी सी सेक्सी गुदगुदी का अहसास होने लगा था। मैंने उसे धन्यवाद की नजरों से निहारा। मेरा मन उसका लण्ड पकड़ने को तरस उठा। मेरी चूत लपलपा उठी। मैंने अब शरम छोड़ दी और मेरे मुख से एक हाय निकल पड़ी। मैंने शर्म के साथ अपना पांव और जिस्म फ़ैला कर उसके हवाले कर दिया। उसके हाथ मेरे जिस्म पर फ़िसलने लगे, मुझे नशीली तरंगों का अह्सास होने लगा। मेरी चूंचियों को वो मसलने लगा, चूत के अन्दर उसकी दो दो उंगलियां उसकी गहराईया नापने लगी। मेरा बदन उसकी बाहों में बल खाने लगा, तड़प उठा।
उसने मुझे उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। उसने अपनी कमीज और पैन्ट उतार दिया और अपना बलिष्ठ लण्ड मेरे सामने लहरा दिया। उसका लण्ड तन्ना कर सीधा खड़ा था। मैंने धीरे से उसका लण्ड थाम लिया और हाथों में कस लिया। उसके मुँह से हाय निकल पड़ी। मेरा पजामा उसने नीचे खींच लिया और मेरा टॉप भी उतार कर पास में रख दिया। मैंने उसके लण्ड को कस कर थाम कर मुठ मारना आरम्भ कर दिया। आह भरते हुए उसने मेरी तारीफ़ करने लगा।
“सुन्दर, शालू, तुम्हारा जिस्म कितना सुन्दर है !” वो कुछ करता उसके पहले ही मुझसे नहीं रहा गया और उसके लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। उसने तो मुँह में ही धक्के मारने आरम्भ कर दिये। मुझे बहुत ही आनन्द आने लगा।
उसने अपना हाथ पीछे करके मेरी चूत को सहलाते हुए मेरी योनि-कलिका को हल्के से मल दिया। दाना मलते ही एक तीखा मजा आया। फिर उसकी अंगुली मेरी चूत में उतरती चली गई। मैं मस्ती में चिहुंक गई। अब उसने मेरे मुख से लण्ड निकाल लिया और मेरे ऊपर लेट गया और मेरे मुख से मुख मिला दिया और मेरे होंठ और जीभ को चूसने सा लगा। उसका जिस्म का दबाव मेरे ऊपर बढ़ता ही चला गया और उसके भटकते राही ने अपनी राह ढूंढ ही ली। लण्ड अपना रास्ता खोज कर आगे बढ़ चला और गहराईयों का लुफ़्त लेने लगा। मेरे शरीर में लण्ड के अन्दर उतरते ही, एक तेज मिठास जिस्म में भर गई। योनिद्वार से मस्ती का पानी चू पड़ा। उसका मुख मेरे मुख को रगड़े जा रहा था और लण्ड की मस्ती भरी चाल मेरी योनि को असीम सुख दे रही थी। मेरी टांगें ऊपर की ओर उठ चुकी थी और कमर खुल कर चल रही थी। मेरी आंखे मस्ती में बंद थी। मेरी कस कर चुदाई चल रही थी। सच में राहुल एक अच्छी चोदने की कला जानता था। मेरा पूरा जिस्म वो इस तरह से मसल रहा था कि मेरा कोई भी अंग अछूता नहीं रहा।
अचानक मुझे लगा कि मैं अब नहीं सह पाउंगी और झड़ जाऊंगी। मेरे शरीर में अतिवासना भर उठी। पूरा जिस्म वासना की तीव्र मिठास से भर उठा और मैंने राहुल को जकड़ लिया। राहुल समझ चुका था, उसने और तेजी दिखाई और मैं छूट पड़ी। चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं झड़ने लगी। पर राहुल में दम था, उसका कड़क लण्ड बाहर आ गया। मेरी उठी हुई टांगों का फ़ायदा उठाते हुए उसने अपना लण्ड मेरे दूसरे छेद में सटा दिया। मैं एकदम से घबरा उठी, क्योंकी मेरे गाण्ड का द्वार अभी तक अछूता था और खुला हुआ भी नहीं था। मुझे पता था कि मेरी गाण्ड में यदि उसका लण्ड घुस पड़ा तो मेरी फ़ट भी सकती है।
“राहुल प्लीज ये नहीं करना…उईऽऽऽऽ… मत घुसाओ ना…हाऽऽऽय रेऽऽऽ…मार दी रे मेरी…” मैं विरोध करते हुए चीख सी उठी, पर जब तक लण्ड मेरी गाण्ड में घुस चुका था। मैं दर्द से तड़प गई। पर मेरी गाण्ड अभी नरम थी, स्किन भी नरम थी सो फ़टने से बच गई।
“बस हो गया शालू… इसे भी कब तक छुपा कर रखती…थोड़ा सा दर्द होगा, पर असली मजा तो यही है।”
उसका दूसरा धक्का लगा, मुझे लगा की जैसे गाण्ड में आग लग गई हो। मैंने अपना मुख कस कर बंद कर लिया। मेरी आंखो से आंसू निकल पड़े। मेरी गाण्ड में जलन होने लगी। उसने धीरे धीरे लण्ड अन्दर बाहर करना आरम्भ कर दिया। धीरे धीरे आग जैसी जलन कम होने लगी। वो मेरी गाण्ड के छेद में थूक लगाता जाता और लण्ड पेलता गया। उसकी आहें भी तेज हो उठी, और मेरी चीखें क्रमश: कम होती गई। पर गाण्ड का छेद टाईट होने से उसका वीर्य छूट पड़ा और मेरी गाण्ड के अन्दर ही भरने लगा। उसका चिकना चिकना वीर्य मेरे दर्द को भी राहत दे रहा था और मेरी गाण्ड की पूरी ग्रीसिन्ग भी होने लगी थी। उसका लण्ड सिकुड़ कर बाहर आ गया। उसने मेरा टॉप लेकर मेरी गाण्ड साफ़ कर दी।
“राहुल, देख खून तो नहीं निकला ना?”
“नहीं जरा सा भी नहीं, रोज ग़ाण्ड भी मराना तो फिर तुम्हें पूरा मजा आयेगा, और छेद भी खुल जायेगा !”
“नही, पीछे तो लगती है, आगे ही ठीक है !” मैंने अपनी बात कही।
“ईश्वर ने जितने छेद दिये हैं उसका पूरा फ़ायदा उठाओ, चुदाई कराओ तो पूरी कराओ, पूरा मजा लो, सारे छेद मुझसे खुलवा लेना फिर भरपूर मजा उठाना चुदाई का !” राहुल ने मुझे समझाया।
“धत्त, अब बस भी करो, चलो जल्दी से कपड़े पहन लो, कहीं कोई आ गया तो … मजा तो हमने ले ही लिया है ना !” मैं हंस पड़ी।
“बस अपन दोनों को मजा आ गया, चुदाई सफ़ल हो गई” राहुल ने भी कमेन्ट्स किये। हम दोनों ने जल्दी से कपड़े पहन लिये और दरवाजा शरीफ़ लोगों की तरह खोल दिया। मैं चाय बना कर ले आई और अब हम दोनों अच्छे पड़ोसी की तरह व्यवहार कर रहे थे। प्यार की बातें होने लगी थी। हम दोनों को अब लगने लगा था कि कही हमें प्यार तो नहीं हो गया है… Sex Stories
घर पर खाना खाते खाते शाम के Sex Stories सात बज गये थे। मैने जो से कहा – “जल्दी करो वर्ना रात ज्यादा हो जायेगी…… फिर तुम्हारे पुराने वाले मकान को भी तो देखना है…”
अन्दर से मां बोली…- “उस पुराने मकान में मत जाना… सुबह जाना वहां पर…।”
“बस बस…ठीक है… हो गया…… ये बैग रख लो……”
जो जल्दी से उठा और कुछ सामान पेक किया और बोला,”चलो कामिनी ……”
हम दोनो ने अपना अपना सामान उठाया और नीचे आ गये। कार में सामान रखा और जो ने कार स्टार्ट कर दी।
“पहले समुन्दर के किनारे बीच पर चलते हैं……” मैं खुश थी कि आज बीच की सैर करने को मिलेगी। गाडी बीच की तरफ़ चल दी। मुझे लगा कि शायद बरसात होने वाली है। मैने मायूसी भरे शब्दों में कहा, “यार जो…… बरसात हो जायेगी तो फिर क्या मजा आयेगा………”
“नहीं होगी……यहां तो हमेशा ऐसा ही रहता है।”
लेकिन किस्मत खराब ही थी। बाहर वर्षा की फ़ुहारें पडने लगी थी। अचानक जो ने मुख्य सडक छोड दी। और एक सुनसान सी रोड पर आ गया।
“तुम ठीक कहती हो …… बारिश चढ रही है…… लगता है कुछ ही देर में तेज बरसात होने वाली है………”
एक बडे और सुन्दर मकान के सामने जो ने गाड़ी रोकी…… गेट कीपर अपना छाता लिये भाग कर आया …… करीब 65 साल का वो होगा…… कार में झान्कते हुए बोला…”साहब…किससे मिलना है……।”
“यहां एक पुराना बन्गला था……डा हन्टर का …कितनी दूर है……”
“यही है ………आप कौन है…?” जो ये सुन कर चकरा गया… मै जो को देख रही थी……वो कुछ परेशान सा दिखने लगा।
” मैं डा हण्टर का सबसे छोटा बेटा ……… जो हूं………”
“अरे…… जो बाबा ………आओ…आओ…उसने भाग कर मुख्य फ़ाटक खोल दिया …… बरसात तेज हो चुकी थी…। जो बडी असमन्जस की स्थिति में दिख रहा था। उसने गाड़ी मोड़ी और गेट के अन्दर कार लाकर सीधे पोर्च में छज्जे के नीचे खडी कर दी। बूढा गेट कीपर भी धीरे धीरे भागता हुआ आ गया … वो इतने में ही हांफ़ने लगा था।
“वो पुराना बन्गले का क्या हुआ……”
“वो तो डाक्टर साहब ने मरने से पहले ठीक करवाने को कहा था …… उसके लिये उन्होने जरूरत से ज्यादा पैसा दिया था………”
हम दोनो घर के अन्दर आ गये …… मेरी आंखे उसे देख कर फ़टी रह गयी………
“जो…… तुम यहां क्यों नहीं रहते हो…” गोवा की पुरानी इमारतें जिसे हेरीटेज प्रोपर्टीज कहते है… प्रसिद्ध हैं। पर जो भी उनमें से एक का मालिक है …मुझे नहीं पता था। इतने में मुझे उपर के कमरे में कुछ हलचल दिखाई दी…… बूढा भांप गया था।
“मेरा लड़का और बहू हैं………आपके कमरे की सफ़ाई कर रहे हैं…मैं आप के लिये कोफ़ी बना कर लाता हू…” बूढा बाहर चला गया।
जो उठा और ऊपर कमरे की ओर जाने लगा। मैं भी लपक कर जो दे साथ हो ली। सीढियां चढ कर जैसे ही हम खिडकी के पास पहुन्चे…… हमारी नजर खिडकी के अन्दर पडी। एकबारगी हम देखते रह गये। बूढे का लडका और बहू काम-क्रीड़ा में लिप्त थे। लडकी ने अपने दोनो हाथ सर पर रखे थे और अपने नन्गी चूंचियां आगे उभार कर आंखे बन्द करके खडी थी… और लडका उसके उरोजों को दबा रहा था…… मैने जो की बाहें कस कर पकड ली… लडके का लन्ड खडा था। वो लडका कुछ देर तक तो चूंचियों से खेलता रहा फिर उससे लिपट गया और अपने लन्ड को उसकी चूत पर मारने लगा।
नीचे कुछ आहट सुनाई दी… हम तुरन्त बिना किसी आवाज के नीचे आ गये। कोफ़ी आ गयी थी। ऊपर जो देखा था उससे मेरे दिल में वासना जागने लगी थी। बूढा कह रहा था –
“साहब… बाहर तो बरसात ……तेज हो गयी है … रात को यहीं रुक जाईये… कुछ चाहिये तो बेल हर रूम में है…बुला लीजियेगा…।” बूढा वहां से बाहर गेट पर अपने कमरे मे चला गया।
मैं थोडा रंग में आ रही थी… मैने जो का हाथ दबाया …जो ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। उसने अपने होन्ठ मेरे होन्ठों से लगा दिये। मेरे उरोजों को हल्के हल्के दबाने लगा। मुझे लगा कि कोई कमरे में है। मैने जो को अलग किया तो देखा वोही युगल जो कमरे में था मेरे सामने खडा था … मैं शरमा गयी। वो दोनो सामने खडे मुसकरा रहे थे।
“तुम यहां क्या कर रहे हो …… तुम कौन हो…”
” जी…मालिक मैं उनका दामाद हू ये उनकी लड़की है …” मैं समझ नहीं पाई…वो तो बहू और लडके की बात कर रहा था।
लडकी… ने इशारा किया तो वो बोला …
“मालिक… आप आये हैं है तो……ये आपकी सेवा करना चाहती है…और आपकी इच्छा हो हो तो मैं मालकिन कि सेवा कर दूं……” दोनो की मतलबी निगाहें कुछ इशारा कर रही थी।
“साफ़ साफ़ कहो …… हम किसी बात का बुरा नहीं मानते हैं…” मैं उनके इशारों को भांपते हुए बोली…
लडके ने जो के पास आ कर जो के कान मे कुछ कहा। जो ने लड़की को ऊपर से नीचे तक देखा … फिर मेरे से कहा …
“कामिनी ये कह रहा है कि ……ये रोज़ी को मेरे साथ मजे लेना है …… और तुम चाहो तो… सैम के साथ एन्जोय कर सकती हो…”
‘वोऊऽऽऽऽऽऽऽ …जो क्या बात है………पर तुम्हे कोई………”
” कामिनी जिन्दगी के मजे मिल रहे हैं तो ……भरपूर लो… आज की ही तो बात है………कुछ चेन्ज हो जाये…”
मेरे तो शरीर में सनसनी दौड़ गयी। नया माल……नया लन्ड… नई चुदाई…। जो से तो कितनी ही बार चुदा चुकी हूं … मजा आ जायेगा। मैने जो को आंख मार दी……
“तो फिर हो जाये …” इतने में एक आदमी और एक औरत साईड में से निकल कर बाहर चले गये। हमने उस ओर ध्यान नहीं दिया।
हम दोनो ऊपर के कमरे में चले आये। वहां दो शानदार गद्दे वाले बेड थे। हम चारो वहां का खुशनुमा माहौल देख कर फ़ूले नहीं समा रहे थे। मै बाथरूम में गयी और पानी से अपनी चूत और गान्ड साफ़ की और एक बडा तोलिया लपेट कर बाहर आ गयी। मैने देखा तो सैम और रोज़ी अपने पूरे कपडे उतार कर नन्गे खडे थे… सैम का शरीर कसा हुआ था उसका लन्ड भी मोटा और लम्बा था… रोज़ी भी मुझे बहुत सेक्सी लगी… रोज़ी का बदन गुआनी स्टाइल का था … उसके चूतड गोल गोल भरे हुए … पांव थोडे मोटे से छोटा कद ……उसे देख कर किसी भी मर्द का लन्ड खडा हो सकता था। मैं धीरे धीरे सैम के पास आ गयी… उसने मुझे प्यार से किस किया…… मेरा तोलिया उसने उतार कर एक तरफ़ रख दिया। मेरे शरीर फ़िगर देख कर सैम के मुख से आह निकल गयी।
“इतने प्यारे फ़िगर को चोदने को कितना मजा आयेगा…”
मैं तो उसकी ये बात सुनते ही आनन्द से भर गयी… “सेम … तुम भी कुछ कम नहीं हो……”
उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उसका शरीर बलिष्ठ था…उसके मसल्स कसे हुये थे… इतने में जो भी आ गया। जो ने अपना तोलिया एक तरफ़ रख कर रोज़ी को अपनि गोदी में बैठा लिया। सैम मुझे एक खिलोने की तरह उठा लिया। उसके ताकतवर शरीर का एक अलग ही मजा आ रहा था। मैने उसकी कमर में अपने पांव कस लिये। उसका लन्ड सीधे मेरी गान्ड पर लग रहा था। मैं उससे एक बेल की तरह लिपटी थी…… मेरे शरीर का बोझ उसे शायद बिल्कुल ही नही लग रहा था…वो मुझे उठाने के बाद भी लोहे की तरह तना हुआ था। मैने उसे तन्ग करने लगी……उसके गले में हाथ डाल कर मैने चूत को उसके लन्ड पर मारने लगी कि उसे बोझ लगे और मुझे उतार दे…पर उसके लोहे जैसे श्रीर पर कुछ असर नहीं हुआ। वो उतना ही आरम से खडा रहा और लन्ड को मेरे चूतडों कि दरारों में लगा दिया…… उसने एक हाथ मेरी चूतड पर रख कर मुझे थोडा सहारा दिया। मैं सोच में पड गयी कि इन्सान है या लोहे का पुतला। मेरे होंठ सैम के होंठो से से जुड गये…… उसके होंठ चूसने में गजब का मजा आ रहा था… उसका लोहे जैसा लन्ड मेरी गान्ड के छेद पर था। मुझे पता चल गया था कि वो मेरी गान्ड ही चोदेगा। मैने भी उसके लन्ड को गान्ड दे छेद पर सही तरीके से लगा दिया।
उसने मेरी चूंचियां बडे ही नरम तरीके से सहलायी। उसके हाथों में जादू था। उसके लन्ड का सुपाडा मेरी गान्ड में घुस गया… मेरी आह निकल गयी… पर तकलीफ़ जरा भी नहीं हुई…उसका लोहे जैसा लन्ड…कितना नरम था, गरम था … पर कड़ाई गजब की थी। मैने कहा- “सेम मुझे उतारो…… बिस्तर पर चोदना ना…”
सेम ने मुझे ऐसे ही लन्ड अन्दर डाले बिस्तर पर यूं रख दिया जैसे कोई खिलोना हो…… उसने तकिया ये कर मेरे चूतड के नीचे लगा दिया। मेरी गान्ड थोडी सी ऊंची हो गयी…… और सैम का काम बन गया। उसने हौले से लन्ड गान्ड में सरकाना चालू कर दिया। उसके मस्त लन्ड पर मैं मर मिटी थी। मीठी मीठी सी गुदगुदी करता हुआ अन्दर तक पूरा बैठ गया। उसने मेरी चूंचियां सहलाते हुए धीरे धीरे मसलना चालू कर कर दिया। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। उसके धक्के बढ्ने लगे……… सैम में जादू था…… उसे चोदने की कला आती थी। उसके धक्के एक ही रफ़्तार से चल रहे थे…… मेरी चूत की हालत खराब हो रही थी…।
“सेम प्लीज़्…… अब मुझे चोद भी दो…।”
सेम मुस्कराया और उसने अपना लन्ड मेरी गान्ड से निकाल लिया……… और चूत के द्वार पर रख दिया। मुझसे रहा नही जा रहा था……
“सेम … घुसेडो ना ………हाय्………जल्दी करो……”
उसने लन्ड अन्दर सरका दिया…… मेरी चूत निहाल हो गयी …… मेरी उत्तेजना बहुत बढ गयी थी …… मुझसे उसका भारी लन्ड नहीं सहा जा रहा था……… मुझे लगा कि मैं झडने वाली हूं ……… और मैं चरम सीमा पर थोडी सी चुदायी के बाद पहुन्च गयी थी……… मेरा पानी छूट पडा…… मै झडने लगी। मैने सुख के मारे अपने होंठ भींच लिया। उसका लन्ड अभी भी लोहे की रोड की तरह कडक था…… वो धीरे धीरे चोदता रहा …… उसे पता था कि मैं झड चुकी हूं। फिर भी उसका जादू भरा लन्ड बहुत धीरे धीरे चुदाई कर रहा था……… कुछ ही देर मैं फिर गर्माने लगी …… चूत फ़िर से फ़डफ़डाने लगी …… मुझ में फ़िर से उत्तेजना भरने लगी……… सैम सब समझ रहा था………कुछ ही देर में धक्को का जवाब धक्को से रही थी। दूसरी ओर ……… जो और रोज़ी का जोश देखते बनता था………।
सेम भी अब उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुंचने वाला था……… उसका लन्ड कडकने लगा था……… मुझे साफ़ मह्सूस हो रहा था …… सैम की सारी पहलवानी मेरी चूत में झडने वाली थी। अचानक उसने मुझे जकड लिया और मेरे से लिपट गया……… मेरी चूत ने भी जोर लगाया…… और मैं एक बार फिर झडने लगी……… इतने में सैम क लन्ड फ़ुफ़कार उठा ……… मेरी चूत में उसकी पिचकारी छूट पडी………… उसका कडक लन्ड पिचकारी मारता रहा और ढीला पड गया…… जो और रोज़ी पहले ही झड चुके थे…… तभी बिजली चली गयी। सारे मकान मेइन अन्धेरा छा गया……… बाहर बरसात जम कर हो रही थी……… हमें वैसे भी लाईट का क्या करना था……… दो बार झडने के बाद मैं थक चुकी थी……… इतनी सुन्दर और मनमोहक चुदाई के बाद पूरी सन्तुष्टी के साथ मैं नीन्द दे आगोश में समाने लगी………
सवेरे मेरी आंख खुली…… मैं नन्गी ही सो गयी थी…… अलसायी सी मैने करवट बदली…… मैने जो देखा तो मैं चीख उठी …… मेरी बगल में और कोई नही बल्कि एक नरकंकाल पडा था। जो भी मेरी चीख सुन कर उठ गया…… वो भी दह्शत के मारे चीख उठा उसकी बगल में भी एक नरकंकाल पडा था। वो उछल कर खडा हो गया…… मै भी घबरा कर बिस्तर से नीचे आ गयी।
मैने कमरे को देखा…हम रात भर यहां थे ? … एक पुराना सा कमरा जगह जगह जाले…… धूल से भरा कमरा…… बिस्तर पर मिट्टी…… और… हमने जैसे तैसे कपडे पहने और बाहर भागे…… कमरे से बाहर निकलते ही …… हम सन्न रह गये ……… जो बोल उठा।-” हे भगवान ………ये क्या है…कबाडखाना……चमगादड़ की गन्दगी…… एक अजीब सी बदबू … हम दोनो के चेहरे पर हवाईयां उडने लगी। हम दोनो तेजी से बाहर भागे …… जो फ़ुर्तीला था … मैं पीछे रह गयी…… जो बाहर आते ही कार में बैठा और स्टार्ट कर दी…… उसने दूसरा कार का दरवाजा खोल दिया मैं भागते हुए आयी और कार में बैठ गयी। जो ने गाडी मोडी और बंगले से बाहर आ गया…… मैन रोड पर जो ने कार रोकी …हमने कार से उतर कर देखा …… वो चमचमाता हुआ बंगला कहां गया… उजाड वीराना…… काला…काई से भरा … टूटा फूटा घर ………बडे बडे जन्गली पेड्…झाडियां …… लगता था उसमे बरसों से कोई नही आया …… मैं डर के मारे सिहर उठी ……
“जो… चलो यहां से … मैं लगभग रो पडी…… मैने रात को किसके साथ चुदाई की थी और जो ने…… सैम और रोज़ी कौन थे……… जो स्तब्ध खडा था।
तभी पास से एक आदमी साईकल से निकला …
” भाई साब … ये डाक्टर साब का बंगला है ना……”
” हां… सही पहचाना ………डाक्टर साब ने यहा नौकर की लडकी और उसके हसबेन्ड को मरवा डाला था … उनका दिल नौकर की बेटी पर था…।”
” शट अप … साले कुछ भी बोलने लग जाते है…” पर जो अन्दर ही अन्दर सब समझ गया था…… अनमने मन से वो कार में बैठा और गाडी स्टार्ट कर दी…
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