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Massage Girl in Mount Abu: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Mount Abu who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Mount Abu that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Mount Abu massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Mount Abu who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Mount Abu massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Mount Abu massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Mount Abu who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Mount Abu employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Mount Abu helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Mount Abu

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Mount Abu at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

मैं कॉलेज में आ चुका था। मेरे Antarvasna एक पुराना दोस्त मेरे साथ में मेरे घर में रहता था। हम दोनो पक्के दोस्त थे और एक दूसरे को बहुत चाहते थे। सेक्स के मामले में मैं बहुत झिझकता था। इतनी तो मेरी बड़ी दीदी भी नही शर्माती थी। मैं जब सुबह जागता था तो मेरे लण्ड में पेशाब भरे होने के कारण वो खड़ा हो जाता था। दीदी बस यही देखने के लिये सुबह मेरे कमरे में आ जाती थी और मेरे खड़े लौड़े को देख कर आहें भरती थी। अपनी चूत भी दबा लेती थी।

मेरी नजर जब उस पर पड़ती तो मैं झेंप जाता था, पर दीदी बेशर्मों की तरह मुस्करा कर चली जाती थी। मुझे ये सब देख कर सनसनी आने लगती थी। दीदी के चूतड़ मस्त गोल गोल उभरे हुए थे, मेरे भी वैसे ही थे … पर लड़की होने के कारण उसके चूतड़ ज्यादा सेक्सी लगते थे। उसकी चूंचिया भी भरी भरी गोल गोल मस्त उठान और उभार वाली थी। सीधी तनी हुई, किसी को भी दबाने के लिये निमन्त्रण देती हुई।

मेरा दोस्त ज्यादातर मेरे बिस्तर पर ही सोता था। कितनी बार तो रात को वो मेरे चेहरे को चूम भी लेता था। मुझे लगता था वो मुझे बहुत प्यार करता है। कभी कभी मैं भी उसे चूम लेता था।

इन दिनों उसमें कुछ बदलाव आ रहा था। हम जब कॉलेज साथ साथ जाते तो वो कभी कभी मेरी गाण्ड सहला देता था। मुझे बड़ा अच्छा लगता था। एक बार तो छत पर उसने मेरे पीछे आ कर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में लगा दिया था। मुझे एक झुरझुरी सी आई थी। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी गाण्ड को करण्ट मार रहा था। मैंने अपनी गाण्ड हटा ली। बात आई गई हो गई।

रात को सोते समय उसने धीरे से मेरा लण्ड पकड़ लिया, मुझे अच्छा लगा। पर शरम के मारे मैंने उसका हाथ हटा दिया।

एक बार रात को सोते समय अनजाने में मेरा हाथ जाने कैसे उसके लण्ड पर चला गया। रवि ने मेरा हाथ अपने लण्ड पर दबा दिया। शायद उसने ही अपने लण्ड पर मेरा हाथ रख दिया होगा। कुछ देर मैं सोने का बहाना करता रहा, उसका हाथ अब मेरे लण्ड पर आ गया … मुझे बहुत मजा आया। मैं शान्त ही रहा। उसने अपना हाथ मेरे पजामे में डाल कर मेरा नंगा लण्ड पकड़ लिया। वो मेरा लण्ड सहलाने लगा।

मैंने मन ही मन आह भरी और जब सहा नहीं गया तो दूसरी तरफ़ करवट ले ली। उसने लण्ड छोड़ दिया। अब मेरा लण्ड तड़प रहा था कुछ करने को … पर क्या करने को … शायद गाण्ड मारने को या मराने को … वो पीछे से मेरे से चिपक गया और अपना लण्ड मेरे चूतड़ो में घुसाने की कोशिश करने लगा। चूतड़ो की दरार के बीच उसका लण्ड फ़ंसा हुआ अपनी साईज़ का अहसास दिला रहा था।

मैंने अचानक जागने का नाटक किया,”अरे यार सो जा ना … “

“तुझे प्यार करने को मन कर रहा है … ” उसने अपनी झेंप मिटाने की कोशिश की।

“ओह हो … ये ले बस … ” मैंने करवट बदल कर उसे पकड़ कर चूम लिया पर उसने मुझे जबरदस्ती होंठ पर चिपका लिया और होंठ चूसने लगा।

मैंने अलग होते हुए कहा,”ऐसे तो लड़किया करती हैं … साले … बस हो गया अब सो जा … “

“अभी आया … ” कह कर वो बाथ रूम गया, शायद अन्दर वो मुठ मार रहा था। कुछ देर में वो आ गया और अब वो शांति से सो रहा था। मुझे भी मुठ मारने की तेज इच्छा होने लगी थी, पर कुछ ही देर मेरा वीर्य बिस्तर पर ही निकल गया। मैंने अपना रूमाल पजामे में घुसा लिया और वीर्य पोन्छ दिया।

हमने सिनेमा देखने का कार्यक्रम बनाया। हॉल लगभग खाली था। बालकनी में बस हम दोनों ही थे। पिक्चर शुरू होते ही रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया … और फिर धीरे से हाथ छोड़ कर उसने मेरी जांघ पर रख दिया। मुझे पता था कि मुझे ये सिनेमा लाया ही इसीलिये है।

आज मैंने सोचा कि ये अधिक परेशान करेगा तो मैं उठ कर चला जाऊंगा।

पर उसके हाथों में जादू था। मेरी जांघ वो सहलाता रहा। मुझमें करण्ट दौड़ने लगा। धीरे से उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगने लगा पर आनन्द भी आया। जैसे ही उसने लण्ड दबाया, मैंने उसका हाथ हटा दिया। उसने मुझे देखा फिर कुछ ही देर के बाद उसने हाथ फिर से मेरी जांघ पर रख दिया। कुछ ही देर के बाद उसने फिर कोशिश की और मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और हल्के से सहलाने लगा।

मेरे मन में एक हूक सी उठी … हाय … कितना मजा आ रहा है … । पर दिल नहीं माना … उसका हाथ मैंने फिर से हटा दिया। उसने भी हिम्मत नही हारी … और कुछ ही देर में उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। पर यहाँ मैंने हिम्मत हार दी और उसे करने दिया।

वो मेरा लण्ड दबाने लगा … और अपनी अंगुलियां से दोनो ओर से लण्ड को दबा कर सहलाने लगा। मुझे कोई विरोध ना करते देख कर वो खुश हो गया। और मेरी पेन्ट की ज़िप खोल दी … अब उसका हाथ मेरे अंडरवीयर को ऊंचा करके नंगे लण्ड तक पहुंच गया था। उसने अपने हाथ में उसे पूरा भर लिया। मुझे आनन्द की एक तरावट सी आ गई। मुझे लगने लगा कि काश मेरा मुठ मार दे और मेरा वीर्य निकाल दे।

“कैसा लगा … बता ना !” उसने मुझसे फ़ुसफ़ुसा कर पूछा।

“बस रवि … अब हाथ हटा ले यार … “

“अरे नहीं … देख बहुत मजा आता है … ” कह कर उसने लण्ड पेन्ट से बाहर निकाल लिया। मेरा मन खुशी से भर गया। मैंने अपना हाथ उसके लण्ड की तरफ़ बढा दिया और बाहर से उसे पकड़ लिया।

“तुझे भी मजा आया क्या … ” मैंने उससे पूछा और उसके पेन्ट के अन्दर हाथ डाल दिया उसने अन्दर चड्डी नही पहन रखी थी, सीधे लण्ड से हाथ टकरा गया। उसे मसलते हुए मैंने बाहर निकाल लिया। अब वह मेरे लण्ड को हौले हौले घिस रहा था, और मैं उसके लण्ड को घिस रहा था। तभी इन्टरवेल हो गया।

हॉल की लाईटें जल उठी। दोनो के लण्ड बाहर मस्त हो कर लहरा रहे थे। मैंने शरमा कर लण्ड एक दम पेन्ट के अन्दर डाल लिया।

“चल यार … अब चलें … कही आराम से मजे करते हैं … “

“ओके … चल … ।” बाहर आकर मैंने स्टैण्ड से अपनी मोटर साईकल निकाली और नेहरू गार्डन चले आये। रात हो चुकी थी, भीड़ भी कम थी। हम दोनों एक एकान्त की ओर बढ़ गये। एक घने झाड़ के नीचे बैठ गये।

“आ जा अब मस्ती करते हैं !” मुझे तो वही मस्ती आ रही थी, मैंने तुरन्त अपना लण्ड निकाल दिया। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अब फ़्री स्टाईल में मुठ मारना चालू कर दिया। मैं झूम उठा …

“मजा आ रहा है ना … देख घर पर तबीयत से चुदाना … “

” चुदाना ? मैं क्या लड़की हूँ … साले … आह्ह्ह भोसड़ी के … मस्त मजा आ रहा है … तू भी अपना लौड़ा निकाल ना … ला मसल दूँ … ”

“निकाल तो रखा है यार … तू तो मस्ती में खोया है … ” मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और मसलने लगा। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे होंठो को चूमने लगा। मैं भी प्रति-उत्तर में उसे चूमने लगा। हम दोनो मदहोशी में भूल गये कि हम गार्डन में है।

लण्ड मसलने से कुछ ही देर में मेरा वीर्य छुट गया, कुछ ही देर में वो भी झड़ गया। हमें झड़ने के बाद होश आया। देखा तो पूरा गार्डन सूना था … हम उठ खड़े हुये, लण्ड को पेण्ट के भीतर डाला और उठ खड़े हुए।

“थेन्क्स यार … बड़ा मजा आया … ” और हम चल दिये।

घर आ कर मुझे बड़ी घिन आने लगी कि हाय मैं ये क्या कर रहा था? मैंने अलमारी से दारू की बोतल निकाली और दो पेग बना कर पी गया। खाना खा कर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे नशे में फिर से वासना की खुमारी चढ़ने लगी। इतने में दीदी आ गई।

“रवि, आज लगता है कोई खास बात है … ।”

“नहीं दीदी … ऐसा तो कुछ भी नहीं है … “

“अरे बता दे ना … आज कितनी मस्ती मारी है हमने … मजा आ गया !” मैंने नशे में कहा।

“भैया आप ही बता दो ना … !” दीदी ने मुझसे पूछा।

“अरे दीदी, क्या बताऊँ … इस साले ने मेरा लण्ड का मुठ मार कर माल ही निकाल दिया” मैंने हिचकी लेते हुये कहा।

‘दीदी ये तो बहक रहा है … “रवि ने शर्माते हुए कहा।

“अच्छा तो ये बात है … अकेले अकेले मजे कर रहे हो … ” दीदी मुस्कराई।

और मुड़ कर चली गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया … रवि ने भी मौका देखा और लाईट बंद कर दी और वो भी नंगा हो कर लेट गया। कुछ ही देर बाद हम दोनो एक दूसरे का लण्ड मसल रहे थे … मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मुझे लग रहा था कि कुछ करना चहिये … पर क्या ?

“गाण्ड मरवाओगे क्या … “

“क्या … क्या मरवाओगे … “

“मेरा मन, तेरी गाण्ड में लण्ड घुसेड़ने को कर रहा है … देख मजा आयेगा राजू … “

“पर यार छेद तो छोटा सा है … ” मुझे पता था कि लण्ड गाण्ड में घुसेड़ कर उसे चोदी जाती है … पर मैं मसूम ही बना रहा।

“लौड़ा घुस जायेगा … देख उल्टा लेट जा … ये तकिया भी नीचे लगा ले … “

मैं नीचे तकिया लगा कर लेट गया, मेरी गाण्ड और ऊंची हो गई। उसने मेरी गाण्ड ने थूक लगाया और वो मेरी पीठ पर चिपक गया और मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ने लगा। उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद में ठोकर मारी। मुझे गुदगुदी सी हुई। मैंने अपनी गाण्ड खोल दी उसने जोर लगा कर लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड में घुसेड़ दिया और आगे हाथ बढा कर मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसने जोर मार कर लण्ड अन्दर घुसा मारा …

मेरी गाण्ड नरम थी, जवान थी … पूरा लण्ड निगल गई। अब उसने धक्के मारने शुरू कर दिये … मुझे थोड़ी सी जलन हुई, पर मजा अधिक आया। पहली बार लण्ड से गाण्ड मरा रहा था। वो मुझे चूमने चाटने लगा … मेरा लण्ड तकिये से दबा हुआ सिसक रहा था … और जोर मार रहा था।

रवि तो मस्ती में चूर था … पूरे जोश के साथ मेरी गाण्ड चोद रहा था और कुछ ही देर में वीर्य निकाल दिया। रवि निढाल सा एक तरफ़ लुढ़क गया।

“राजू, तेरी बहन को चोद डाले क्या?” रवि ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

“साले मरवायेगा क्या … ?”

“नहीं यार … बड़ी सेक्सी है … चल यार कोशिश करते हैं … अपना लण्ड का माल उसी से निकाल लेना !”

“अच्छा, चल कोशिश करते हैं … देख बात बिगड़े तो सम्हाल लेना !”

रवि ने हामी भर दी। मेरी दीदी की नजर तो मुझ पर थी ही … मुझे लगता था कि काम हो ही जायेगा … । हम दोनों बिस्तर से उठे और तोलिया लपेट लिया और दबे पांव दीदी के कमरे में सामने चले आये। कमरे में बाहर की लाईट का खासा उजाला था … दीदी दोनों पांव चौड़े करके और स्कर्ट ऊंची करके लेटी हुई थी। मैं दीदी के बिस्तर पर उसके पास बैठ गया।

दीदी ने धीरे से आंखे खोली,”राजू … क्या हुआ … ये सिर्फ़ तोलिया लपेटे क्यूँ घूम रहे हो … ?”

मैं थोड़ा नर्वस हो गया। पर रवि बोल उठा,”दीदी … आप लेटी रहो … राजू … चल कर ना … “

मैंने दीदी की चूंचियों की तरफ़ हाथ बढ़ाया। दीदी सब समझ चुकी थी। मुस्करा उठी …

मेरे हाथ उसके बोबे तक आ चुके थे …

“राजू … घबरा मत … पकड़ ले और दबा दे … !”

मेरी हिम्मत खुल गई,” दीदी … थेन्क्स … ” और मैंने धीरे से दीदी के बोबे पकड़ कर दबा दिये।

“अरे, शरमा मत … मसल दे … मजा ले ले दीदी का … और मजा दे दे दीदी को … ” दीदी सिसक उठी, जाने कब से बेचारी चुदासी थी …

उसने मेरा तौलिया उतार दिया और रवि ने मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया …

“बस बस … चढ़े ही जा रहे हो … ” वो उठ कर बैठ गई … और भाग कर अपना दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। रवि ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और उसका एक चूतड़ दबा लिया।

“दीदी, आपकी बाटिया यानी चूतड़ सोलिड हैं … बॉल भी बड़े कसे हुए हैं …! ”

“तू भी तो रवि सोलिड है … भैया की अभी गाण्ड मारी है ना … उसकी बाटिया मेरी जैसी ही तो है … !”

“दीदी … आपने सब देखा है क्या … ” मैं चौंक गया। दीदी मुस्कुरा उठी।

“राजू जवानी लगी है अभी … इसमें सब चलता है … देख मैं भी अभी चूत मरवाऊंगी और इसकी प्यास बुझाउंगी, रवि से गाण्ड मरवाउंगी … साला हरामी मस्त गाण्ड चोदता है !” और खिलखिला कर हंस पड़ी।

रवि से हट कर दीदी मेरे पास आई,”भैया … पहले आपका हक बनता है … देखो प्यार से चोदना … तेरी मस्त चूतड़ो की तो मैं भी दीवानी हूँ !”

“और मैं भी दीदी … तेरी चूतड़ो की गहराई देख कर तो मेरा लण्ड कब से चोदने को बेताब हो रहा था।”

“हाय रे भैया, तो देरी किस बात की है … चोद दे ना … ” और वो मेरे से लिपट पड़ी।

मैंने उसे तुरन्त घोड़ी बनाया और और उसे अपने से चिपका लिया। रवि लपक कर आया और नीचे से मेरा कड़क लौड़ा उसकी चूत के द्वार पर रख दिया।

“मार राजू … चोद दे दीदी को … पर देख प्यार से … दीदी अपनी ही है … ” रवि के स्वर में प्यार झलक रहा था।

मैंने धीरे से लण्ड दीदी की चूत में ठेल दिया।

लण्ड का प्रवेश होते ही उसके मुख से प्यारी सी सिसकारी निकली और उसने प्यार भरी निगाहों से मुझे देखा,”भैया … रहम मत करना … साले लौड़े को जोर से ठोक दे … बहुत महीनों बाद लौड़ा खा रही हूं !”

“हाय दीदी … ये लो … मुझे भी मत रोकना … मेरा तो रोम रोम सुलग रहा है … पहली बार मुझे भी कोई चूत मिली है … !”

मैंने जोर लगा कर लण्ड चूत की जड़ तक बैठा दिया। रवि ने मेरी गाण्ड सहलानी चालू कर दी। उसका लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। मैंने दीदी की चूंचिया दबा कर पकड़ ली और मसलते हुए पूरी ताकत से लौड़ा खींच कर दे मारा।

“आह राजू … ये हुई ना बात … अब ढेर सारे जोर की ठोकरे दे मार … साली चूत को मजा आ जाये … “

मैं जैसे ये सुनते ही पगला गया … जोर जोर से उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ कर चोदने लगा … पर जवानी तो दीदी पर पूरी तरह से छाई हुई थी … उसकी चूत लपक लपक कर लौड़ा ले रही थी। तभी मुझे लगा रवि भी अपना संयम खो बैठा और उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

“राजू प्लीज … तेरे गोल गोल चूतड़ मारने को कर रहा है … !” रवि ने कहा।

“अरे रुक जा साले … दीदी की गाण्ड और भी मस्त है … ठहर जरा … दीदी, आप दोनो छेद से मजा लो ना … “

दीदी तो वासना की आग में जली जा रही थी …

“हाय आगे से और पीछे से … दोनो तरफ़ से चोदोगे … माँ मेरी … चल पोजिशन ले … आज तो तुम दोनों मुझे मस्त करके ही छोड़ोगे !”

मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया और दीदी ने ऊपर आ कर मेरा लण्ड चूत में डाल लिया और पूरा घुसेड़ कर जड़ तक बैठा लिया … और दोनों पांव से अपने चूतड़ ऊपर उठा लिये। रवि तुरन्त लपक कर बिस्तर पर चढ़ गया और उसकी खुले हुये चूतड़ो के पट में लण्ड रख दिया। दीदी ने रवि को देखा और मुस्कुरा दी और लण्ड गाण्ड में सरक गया।

“हाय रवि … भारी है … पर हां, कस के गाण्ड मारना … ये जवान लड़की की गाण्ड है … खूब लेती है और भरपूर लेती है !”

रवि तो सुनते ही जोश में आ गया और पहले धीरे धीरे और फिर जो जोर पकड़ा तो दीदी को भी मजा आ गया। अपनी गाण्ड उभार कर चुदाने लगी।

“वाकई, राजू … दीदी की गाण्ड तो मस्त है … जबरदस्त चोदने लायक है …! ” मैं नीचे उसके बोबे मसल मसल कर लण्ड उछाल उछाल कर दीदी को चोद रहा था। दीदी दोनों तरफ़ से चुद कर मस्त हो चली थी।

अब मुझे लगा कि मेरी नसें खिंचने लगी हैं … सारा कुछ लण्ड के रास्ते निकलने वाला है … मैं सिसक उठा,”दीदी … प्यारी दीदी … मेरा तो निकला … हाय … “

दीदी मुझसे चिपक गई … “राजू … निकाल दे … मस्त हो जा … रवि है ना, वो चोद देगा … तू झड़ जा … आराम से … हां”

“दीदी … तेरी तो … हाय … भेन की चूत … मैं गया … अरे रे रे रे … ओह्ह्ह्ह्ह्ह हा हाऽऽऽऽऽ।” और मेरा वीर्य छुट पड़ा … दीदी ने मेरा लौड़ा बाहर निकाल दिया … सारा वीर्य उसकी चूत के आस पास निकलता रहा। इतने में रवि ने गाण्ड से लण्ड निकाल कर दीदी की चूत में घुसेड़ दिया।

“आह्ह्ह साला हरामी रवि … मेरी चूत मार रहा है … “

“दीदी, अब आपकी बारी है माल निकालने की … “

“तेरे को कैसे पता … मैया री … अह्ह्ह् … साला … रवि … चोद दे रे … जोर से … मार और मार… भैया “

और मेरे से से जोर से लिपट गई … और दीदी का पानी छुट गया … दीदी मेरे से लिपट कर बल खाती हुई झड़ने लगी।

“दीदी … मेरा लण्ड … गया रे … निकला मेरा भी … ओये रे … चल निकल … हाऽऽऽऽऽऽ … ” और रवि ने लण्ड चूत से बाहर निकाला और दीदी की गाण्ड पर फ़ुहारें छोड़ दी … दीदी मुझे दबाये लेटी रही … रवि उठ कर बैठ गया।

“अब हो गया … सबका माल निकल गया … चलो उठो” रवि ने हांक लगाई।

दीदी ने मेरे ऊपर से सर उठाया और मुझे आंखो से जी भर कर देखा, और मुस्कराने लगी।

मुझे चूमते हुये बोली,”आप बहुत प्यारे हैं भैया … दीदी की प्यास बुझा दी और एक रवि जैसा गाण्ड की प्यास बुझाने वाला दोस्त भी दे दिया … क्यो रवि … है ना !”

“दीदी … आप के तो हम दास है … बस आप तो आदेश दे दे ना … लण्ड हाजिर है … “

दीदी हंस पड़ी और मुझे फिर से चूम लिया। वो मेरे ऊपर से हट गई और रवि को लिपट कर प्यार करने लगी। मैंने बड़ी मुश्किल से दोनों को अलग किया।

“चल साले तौलिया लपेट और निकल यहाँ से … अब तो रोज का प्रोग्राम रहेगा … उतावाला मत हो !”

रवि बड़ी आसक्ति भरी नजरों से दीदी को देखता हुआ कमरे से बाहर आ गया।

हम बिस्तर पर जा कर जैसे लुढ़क पड़े, और नींद की आगोश में चले गये … अचानक मेरी नींद रात को खुल गई … देखा तो रवि पास में नहीं था … मैंने जल्दी से उसे तलाशा … तभी दीदी के कमरे से सिसकियाँ सुनाई दी … अन्दर देखा तो मस्त चुदाई चल रही थी … मैं उनके पास गया”शश्श्श्श्श्श्श … चुप … ।”

“भैया … प्लीज करने दो … रहा नहीं गया ना … “

“चुप … बाहर तक सिसकारी की आवाजें आ रही हैं … चुप से चोदा-चादी करो … शोर नहीं … वरना ऐसा पिटोगे कि सब भूल जाओगे … ” मैंने दरवाजा बाहर से बंद कर किया … अब वो दोनों बिना आहें भरे … चुदाई कर रहे थे … । Antarvasna

Sex Stories

हाय दोस्तो, मैं अन्तरवासना का Sex Stories नियमित पाढ़क हूँ और मैं इस पर छपने वाली हर कहानी को बड़े ही मजे से पढ़ता हूँ।
तो चलो आते हैं मेरी कहानी पर।

मेरा नाम देव है और मैं दिखने में ठीक-ठाक और 20 साल का एक अच्छा लड़का हूँ। मैंने कभी भी किसी लड़की को गलत नजर से नहीं देखा था।

यह घटना लखनऊ की है और मेरे पापा की पोस्टिंग के बाद मैं बटिण्डा(पंजाब) चला गया। इस घटना के बाद मेरा लडकियों के प्रति नजरिया बदल गया।

बात उन दिनों की है जब मैं बारहवी कक्षा में पढ़ता था। चूँकि मैं सांइस विषय से था इसलिए मुझे लड़कियों के साथ पढ़ने का काफी मौका मिलता था। मैं और मेरी कुछ 2 या 3 लडकियाँ दोस्त अक्सर गेम्स के समय थोड़ा पढते थे और थोड़ा मौज-मस्ती किया करते थे।

यह बात मेरी ही क्लास के कुछ लड़के और लड़कियों को अच्छी नहीं लगती थी और वह मुझे कभी-कभार इस बात को लेकर मजाक भी किया करते थे।

मेरी ही क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम पूजा था। वह दिखने में एकदम किसी फिल्म की हीरोइन की तरह लगती थी, उसकी आँखों में एक अजब सा नशा दिखाई पढ़ता था। वह अभी कच्ची उम्र यानि कि करीब 18 साल की रही होगी और वह देखने में गोरी और चिकनी थी। वह मुझसे जब भी मिलती तो मुस्कुरा देती और मुझसे शरारत भरे सवाल पूछती कि तुम उन लड़कियों के साथ क्या करते रहते हो? वगैरह-वगैरह और मैं कह देता था कि बस पढ़ता ही तो हूँ और क्या करता हूँ। उस समय मैं उसकी शरारत भरी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था और उसे अक्सर टाल जाता था।

ऐसे ही महीने बीतते गये और मेरे फाइनल पेपर के लिए कुछ महीने शेष रह गये। तब मुझे भी अन्य विद्यार्थीयों की तरह पेपर में अच्छे नंबर लाने के लिए एक कोचिंग सेन्टर में प्रवेश लेना पडा़। एक दिन मैं थोड़ा सा बिमार पड़ गया और मैं उस दिन कोंचिग क्लास नहीं ले पाया। मेरी आदत थी कि मैं कोचिंग शुरु होने से पहले ही वहाँ पहुँचकर अपने दोस्तों के साथ थोड़ी यहाँ-वहाँ की बातें करता था।

अगले दिन रोज की तरह मैं कोचिंग गया तो मेरे दोस्तो ने बताया कि कल ही तुम्हारे स्कूल की एक लड़की ने यहाँ ऐडमिशन लिया है और उसका नाम पूजा है। मेरी तो यह सुन कर सिटी-पिटी गुम हो गई। मैन सोचा कि अब वह मुझे यहाँ भी चिढ़ायेगी।

मैं उसकी शरारतों से बहुत ही डरता था। अभी कुछ ही देर हुई थी कि वह कोचिंग क्लास में आ गई। मैंने उसे वहाँ देखा तो देखते ही रह गया, वह पीले पटियाला सूट में एकदम पटाका लग रही थी। उसने मुझे देखते ही हाय किया और मैंने उसे अनदेखा करते हुए यहाँ-वहाँ देखने लगा। जब क्लास खत्म हो गई और मैं वहाँ से जाने लगा तो उसने मुझे पीछे से रोका और मुझे आवाज दी। मैं वहाँ ही रुक गया।

उसने कहा- तुम भी यहाँ पढ़ते हो?
तो मैंने कहा- हाँ!
उसने कहा- कबसे?
मैंने कहा- 10 दिन से।
उसने कहा- क्या हम साथ चल सकते हैं?

तो मैंने बहाना बना दिया और वहाँ से चला गया। दरअसल उसका घर मेरे घर के रास्ते में ही पड़ता था।

ऐसे ही कुछ दिन बीत गये और एक दिन क्लास के समय पूजा की तबीयत अचानक खराब हो गई। सर ने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने कहा- कुछ नहीं! बस सर दर्द हो रहा है! और वह एक तरफ सर झुका कर बैठ गई।

जब क्लास खत्म हो गई तो भी वह वैसे ही बैठी हुई थी। सर उसके पास गये और उसकी तबीयत देखकर कहा- क्या कोई इसके घर के पास रहता है?

तो उसकी सहेलियों में से एक ने मेरा नाम बताया।
सर ने मुझे कहा- अब तुम इसको घर तक पहुँचाओगे।

मैं भी क्या करता, मुझे भी हाँ करनी पड़ी। हम दोनों साइकिल से ही जाते थे तो रोज की तरह मैंने साइकिल उठाई और आज पूजा को साथ लेकर चलने लगा।

पहले तो मैंने उससे कुछ नहीं कहा, क्योंकि घर थोड़ी दूर था इस लिए उसने ही पहले शुरुआत करते हुए पढ़ाई कैसी चल रही है वगैरह-वगैरह के बारे में पूछा। रास्ते में बातें करते करते अब मैं उससे थोड़ा नजदीक आ गया था। उसने अपने घर के बारे में बताते हुए कहा कि उसको घर में रहना बहुत बेकार लगता है क्योंकि उसके मम्मी-पापा हमेशा लड़ते रहते थे। मेरी बातों ही बातों में उससे दोस्ती हो गई।

अब मैं जानने लगा कि वह इतनी भी दिल की बुरी नहीं है जितना कि मैं उसको समझता था। अब तो क्या था वह रोज मेरे साथ कोचिंग जाने और आने लगी। अब वह मेरे लिए दोस्त से बढ़कर थी। परीक्षा शुरु होने में अभी दो हफ्ते शेष रह गये थे और अब हम लोग घर में रहकर ही परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे।

एक दिन अचानक मुझे उसका फोन आया और उसने कहा कि उसके सर के दिए हुए कुछ नोटस खो गये हैं और मुझसे मेरे नोटस मँगवाये। मैं कुछ ही देर बात उसके घर पहुँच गया।

उसने मेरा स्वागत किया और कुछ चाय-बिस्किट वगैरह लाकर टेबल पर रख दी।
मैंने उससे पूछा- क्या घर पर कोई नहीं है?
तो उसने कहा- चाचा जी के लड़के की शादी है इसलिए सब कानपुर गये हुए हैं!

अब वह मुझे अपने कमरे में ले गई और उसने मेरे नोटस ले लिए और फिर हम दोनों कुछ बाते करने लगे। आज मैंने उसकी आँखों में कुछ अजीब से शरारत देखी।

बातें करते-2 उसने मुझे कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ।

उसकी यह बात सुन कर मेरा दिल उछलने लगा क्योंकि दिल ही दिल में मैं भी उसको चाहने लगा था। उसकी यह बात सुनकर मैंने भी उसे अपने प्यार का इजहार कर दिया। उसी समय टीवी पर ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ आ रही था और उसमें पल-पल हर पल वाला गाना चल रहा था। आप लोग तो जानते ही होंगे कि वह कितना प्यारा रोमांटिक गाना है।

गाने को देखकर पूजा मुझसे लिपट गई और कहने लगी- देव मुझे इतना प्यार दो कि मैं आज तुम्हारे प्यार से भर जाऊँ।

उसने मेरे औंठों पर अपने गुलाबी औंठ रख दिया। इतना प्यार पाकर मेरे अन्दर का मर्द भी जाग गया और मैंने भी उसे जी भरकर चाटना-चूमना शुरु कर दिया। इतना प्यार पाकर हम दोनों काम वासना की ज्वलंत अग्नि में जलने लगे। हम दोनों का शरीर गर्मी से जला जा रहा था।

अब मैंने हिम्मत दिखाते हुए उसके कमीज को अलग कर दिया। वह थोड़ा शरमाने लगी। मैंने कहा- जान, अब क्यों शरमाती हो, मैं तो तुम्हारा ही हूँ। फ़िर सलवार निकालने के बाद तो उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेन्टी ही शेष बाकी रह गये थे। उसके रसीले यौवनयुक्त शरीर को देखकर मैं पागल हुए जा रहा था।

उसने कहा कि मुझे ही नंगा किये जा रहे हो। अपने शरीर को भी तो दिखाओ?
मैंने कहा- अभी लो जान!

और मैं झट से नग्न अवस्था में उसके सामने खड़ा हो गया, उसने मेरे शरीर को ऊपर से नीचे तक निहारा और प्यार से मेरे छाती पर अपने औंठों का घुमाने लगी।

मेरा 6 इंच का लंड देखकर उसके मुँह खुला का खुला रह गया। मैं तो बस पागल ही हुए जा रहा था। अब मैं उसकी ब्रा को उठाने लगा तो उसने अपने हाथ आगे कर लिए। धीरे धीरे मैंने आगे बढ़ते हुए उसकी ब्रा को उसके कोमल से शरीर से अलग कर दिया। वह अब किसी परी की तरह लग रही थी। मैंने अब उसके स्तन चूसने प्रारंभ किये। हाय!! कितने सुख की अनुभूति मुझे हो रही थी मैं आपको बता नहीं सकता।

वह अब सिसकियाँ लेने लगी… हाय!! ऐसे ही! हाँ ऐसे ही!…हाय!!

यह सब उसके मुख से निकल रहा था। कुछ देर तक चूची का रस चूसने के बाद मैंने उस कच्ची कली की पैन्टी भी उतार दी।

अब उसके शरीर पर एक धागा तक शेष ना बचा था। उसके इस नग्न छरहरे कामुक बदन को देखकर तो शायद कामदेव भी शरमा जाए।

मैंने अब उसकी चूत को निहारा, बिल्कुल गुलाबी सा रंग, एक भी बाल न था उसकी चूत पर। अब तो सारा काम मुझे ही करना था।

मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत पर हाथ फिराना शुरु किया, पहले तो उसे कुछ गुदगुदी सी हुई फिर उसे मजा आने लगा, मैं अब एक अँगुली उसकी गुलाबी चूत के मुहाने पर रखकर अन्दर-बाहर करने लगा।

वह तो मानो पागल हो गई और कामवासना की आग में जलने लगी और कहने लगी- हाँ राजा!! ऐसे ही हाँ ऐसे ही!! ऊम… ऊमममम… ऊईईईईईई…

अब उसे बर्दाशत नहीं हो रहा था… थोड़ी देर बाद मैंने सोचा- अब बस बहुत खेल लिया अब इस लंड की प्यास भी बुझाई जाए और मैं अपने लंड को आगे लेकर उसकी चूत की ओर बढ़ा़।

उसने कहा- इतना बडा! मेरी चूत में कैसे जाएगा?

मैंने कहा- जानम! तुम बस देखती जाओ…!

उसने कहा- दर्द होगा?!
मैंने कहा- तुम्हें बिल्कुल भी दर्द न होने दूँगा।

यह सुनकर उसकी जान में जान आई। अब मैंने लंड को उसके योनि-द्वार पर रखा और हल्के से झटका मारा, लंड अभी थोड़ा सा ही अन्दर गया होगा कि उसकी चीख निकल पड़ी- हाय!!!! मर गईईईईई… आआआआ…

मैंने सोचा- लगता है गई भैंस पानी में। थोड़ी देर तक हम इसी अवस्था में रहे। उसकी कुंवारी चूत जानकर मैं पास ही पड़ी एक क्रीम उठाकर उसकी चूत के अन्दर बाहर लगाने लगा।

उसके कहा- यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने कहा- जान घबराओं मत, इसको लगाने से तुम्हें दर्द की अनुभुति कम होगी और मेरा लंड आसानी से तुम्हारी इस प्यारी चूत में समा जायेगा।

उसने कहा- ठीक है!

उसकी तरफ से हरी झंडी मिलते ही मैंने फिर से एक बार चूत पर अपने लंड की दस्तक दी और मारा एक जोरदार शॉट, ऐसा करते ही उसकी चूत की सील फट गई और उसकी चूत का खून रिस-रिस कर चूत के छेद से बाहर बहने लगा और वह जोर से चिल्लाई-… हाय!! माँ मर गईईईई ईईईईईई…

हाय!!, मैंने सोचा कि यह क्या हो गया!!

मैंने जल्दी से नैपकिन लाकर उसकी चूत की सफाई करी। थोड़ी देर बात मैंने उससे कहा- क्या फिर से शुरु करें।

उस समय तक उसका दर्द कुछ कम हो गया था। मैंने उसे अपनी कसम दी तो वह मान गई।

मैंने अब फिर से एक बार डरते हुए लंड डाल दिया, वह अबकी बार थोड़ा कम चिल्लाई, मैंने अब हौले-हौले चुदाई शुरु कर दी।

थोड़ी देर बाद उसको भी मजा आने लगा और वह कहने लगी- हाँ राजा ऐसे ही ऐसे ही… उममम… आआआ… हाय…
अब मैंने भी अपने पूरे जोर से चोदना चालू रखा।
मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं स्वर्ग में हूँ।

लगभग 15 मिनट की तेज चुदाई के बाद में झड़ने लगा, उसने कहा- बस थोड़ी और देर! मैं भी झडने वाली हूँ।

मैंने कहा- ले! मैं गया! और मैं अपने पूरे तेज के साथ उसकी चूत में झड़ गया और वह भी मेरे साथ झड़ गई। हम दोनों का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और हम लगभग आधे घन्टे तक एक दूसरे के ऊपर ही चिपकर लेटे रहे।
फिर आधे घन्टे बाद मैंने उसे उस दिन फिर दो बार चोदा वह भी अलग-2 स्टायल में।

दूसरे ही दिन पूजा के मम्मी-पापा शादी से आ गये। फिर पेपर के बाद मेरे पिताजी की पोस्टिंग आ गई और उसके बाद फिर मैं उससे कभी नहीं मिल पाया।

यह थी मेरे पहले सेक्स की सच्ची कथा अन्तर्वासना डॉट कॉम पर। आशा करता हूँ कि आपको पसंद आयेगी।
किसी भी प्रकार की गलती के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ। Sex Stories

मेरा नाम राघवेंद्र है और मेरी उम्र 27 साल की है. मुझे अपने से बड़ी उम्र की औरतें चोदना बहुत पसंद है.

शुरू से ही मन में था कि मुझे चालीस से पैंतालीस साल की औरत को चोदने का सुख कब नसीब होगा.

फिर लॉकडाउन में ऊपर वाले ने मेरी सुन ली.
मैं मूलत: लखनऊ का रहने वाला हूं. पिछले वर्ष लॉकडाउन में घर पर काम करने की वजह से मैं दिल्ली से वापस अपने घर लखनऊ आ गया था.

अब मैं घर से ही काम करने लगा था.
परंतु लखनऊ में आकर मुझे चूत मिलना बंद हो गई थी जैसे कि दिल्ली में मुझे मेरी गर्लफ्रेंड की चूत चोदने को मिल जाती थी.

कुछ दिनों तक तो मैंने हाथ से मुठ निकाल कर काम चलाया, पर दिल है कि मानता नहीं.

मैं सुबह शाम को घर से निकल आता था. नजर इसी पर रहती थी कि शायद कोई ऐसी मिल जाए, जिसको मैं चोदकर अपनी अन्तर्वासना शांत कर लूँ.
Xxx भाभी हॉट चुदाई के लिए मैं बेचैन हो रहा था.

कुछ हफ्तों की मेहनत के बाद मुझे एक भाभी मिलीं भी, जो अपना कुत्ता टहलाने के लिए हमारी सोसाइटी में आती रहती थीं.
कुछ दिन तक तो मैं सिर्फ उन्हें देखता था कि वे अकेली आती हैं और अकेली ही कुत्ता टहला कर वापस हो जाती हैं.

धीरे-धीरे मैंने उनसे बात करने का तरीका ढूंढा और एक दिन ऐसे ही उनके पास जाकर पूछा- आपको पहले कभी नहीं देखा है … क्या आप नयी आई हैं?
उन्होंने मुझे जवाब दिया- मैं तो यहां पर नयी नहीं हूं. पर शायद आप नए हो, जो आप मुझे नहीं जानते हो.

इसके बाद बातों बातों में मालूम पड़ा कि उनके पति देश के बाहर कहीं जॉब करते हैं और वह लॉकडाउन की वजह से अपने देश वापस नहीं आ पाए.
मेरे मन में तुरंत लड्डू फूटा कि इनकी चूत प्यासी हो सकती है … और मैं इन्हें सैट करके इनकी व अपनी प्यास मिटा सकता हूँ.

अब मैं रोजाना उसी समय का इंतजार करने लगा कि कब शाम हो. कब वो अपना कुत्ता टहलाने के लिए सोसाइटी में आएं.
इस तरह से मेरी उसकी बातचीत लगभग रोज होने लगी.

धीरे-धीरे बातों में हम दोनों ने एक दूसरे के नंबर शेयर किए और उसके बाद मोबाइल का इस्तेमाल शुरू हो गया.
मैं कभी-कभी उनको सामान्य मैसेज करने लगा.

एक दिन जानबूझकर मैंने उन्हें ऑनलाइन देख कर एक गंदा सा मैसेज भेजा और उसके बाद उसको डिलीट फॉर ऑल कर दिया.
इस पर उनका रिप्लाई आया कि क्या भेज दिया … देख कर भेजा करो.

मैं सकपका गया और मुझे लगा कि आज बात खत्म हो गयी.
तो मैं उनसे माफी मांगने लगा.

मुझे लगा कि आज शाम को वो कुत्ता घुमाने नहीं आएंगी.
पर उस दिन शाम को वह लोअर और हाफ टी-शर्ट पहन कर आईं, जिसे देखकर मुझे समझ आ गया कि भाभी मूड में हैं.

मैंने उनके करीब जाकर उनकी तारीफ़ की जिससे वो खुश हो गईं.
फिर बात हुई तो साफ़ लगने लगा कि इनकी चूत का नशा मेरे लंड से ही उतरेगा.

बातों ही बातों में उन्होंने बताया- आजकल मैं घर पर अकेली ही रहती हूँ. मेरा बेटा भी अपनी मौसी के घर गया था पर लॉक डाउन होने की वजह से वह भी वापस नहीं आ सका है.
मैंने कहा- अरे तो आप कहें तो मैं आपका अकेलापन दूर करने आपके साथ आपके घर आ जाऊं?

वो हंस दीं और हम दोनों खुल कर बातें करने लगे.

मैंने अगले दिन अकेलापन दूर करने के लिए साथ में मिलकर घर पर पिक्चर देखने का प्लान बनाया जिससे कि उनका अकेलापन दूर हो सके और हम दोनों की दोस्ती हो जाए.
वह इस बात पर राजी हो गईं.

बस फिर क्या था.

उस दिन मैं रात में अपने घर आया और मैंने अपने लंड के बाल साफ किए.
उस दौरान मुझे उनकी ही याद आ रही थी और लंड खड़ा हो गया था.

मैंने उसी रात में यह सोच कर एक बार अपने लंड का माल निकाल दिया कि मैं भाभी को चोद रहा हूं.
माल निकलने के बाद थकान हुई और मैं सो गया.

अगले दिन जब सुबह मैं उठा और उनके घर जाने की योजना बनाने लगा.

लेकिन उसके लिए मुझे अपने घर से जाने की इजाजत लेनी जरूरी थी क्योंकि लॉकडाउन चल रहा था.

बाद में मौक़ा पाकर मैंने मम्मी पापा को बताया कि इधर पास में ही एक दोस्त रहता है, मैं उसके जा रहा हूं. वापस आने में शाम हो जाएगी.
मम्मी ने हां कह दी.

मैंने अपना लैपटॉप उठाया और गाड़ी उठा कर भाभी के साथ सुहागरात मनाने के लिए उनके घर पहुंच गया.

भाभी समझ गई थीं कि मामला एकदम गर्मागर्म है और मूवी देखने का तो सिर्फ बहाना है.
मैं भी जानता था कि हम दोनों को एक दूसरे की जरूरत है.

इसलिए उन्होंने ज्यादा वक्त बर्बाद नहीं किया और बैठकर बातों ही बातों में मुझसे पूछा- तुम अपनी फिजिकल जरूरत कैसे पूरी करते हो?
मैंने बताया कि दिल्ली में मेरी एक फ्रेंड है. उसके साथ में जब मेरा होता है या उसका मन होता है तो हम लोग सेक्स कर लेते हैं. आप बताइए आप कैसे करती हो?

तब उन्होंने शायराना अंदाज में कहा- क्या बताएं यार, मैं तो तन्हा ही उम्र गुजार रही हूँ … सनम की याद में!
मैंने हंस कर कहा- ऐसा मत कहिए. मैं आपकी तन्हाई दूर करूंगा.

ये कह कर मैंने आगे बढ़कर उनके गालों के नीचे गर्दन पर एक किस कर दिया.

वह पहले तो सकपका गईं, पर खुश भी हो गईं.
उसके बाद भाभी ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और उठकर गांड हिलाती हुई अपना गेट बंद करने लगीं.

उसके बाद उन्होंने वहीं से मुझे देखा और अपने होंठों पर जीभ फेरी.
मैंने आंख मार कर अपना लंड सहला दिया.

वो नशीली चाल से मेरे करीब आईं और मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर वाले कमरे में ले गईं.
अन्दर आकर उन्होंने मुझे बेड की तरफ चलने का इशारा किया और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया.

मैं उन्हें देखने लगा.
भाभी मादक भाव से चलती हुई बेड पर मेरे बाजू में बैठ गईं.
अब हम दोनों कमरे में बैठे थे.

उन्होंने मेरा खड़ा हुआ लंड देखकर कहा- अभी करना है … या थोड़ा मूड बनाना है?
मैंने भाभी को अपने पास खींचते हुए किस करना शुरू कर दिया और ऊपर से ही उनके दूध दबाने लगा.

वो मेरे होंठों से लग गईं और कम से कम पांच मिनट तक ऐसे ही चूसने के बाद मैंने उनके टॉप के अन्दर से हाथ डाल कर मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
भाभी की आह आह निकलने लगी.

ऐसे ही दबाते दबाते भाभी के एक निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच दबा कर उसको मींजते हुए कहा- भाभी मेरा तो मूड बना हुआ है, मुझे तो अभी करना है … आप अपनी बताओ कि अभी लेना है या बाद में लोगी?

मैंने भाभी जी से पूछा तो वो बोलीं- क्या दोगे?
तो मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- ये … चैक कर लो … मस्त मूसल है.

लंड पर हाथ फेरते ही भाभी का मूड बन गया और पूछने लगीं- ऐसे ही रांड बना कर लोगे या दुल्हन बनाकर चोदना है?

मैंने कहा- रंडियां तो बहुत चोद चुका हूँ … अब तो मैं आपको दुल्हन बनाकर चोदना चाहता हूं.
उन्होंने मुझसे कहा- ठीक है तुम थोड़ी देर बाहर बैठ कर टीवी देखो, तब तक मैं दुल्हन बन जाती हूँ. शादी वाला लहंगा चुनरिया पहन लेती हूं. उसके बाद मैं तुमको आवाज दूंगी. तब कमरे में आ जाना.

मैंने भाभी को चूमा और बाहर बैठकर टीवी पर पिक्चर देखने लगा.
तभी भाभी ने आवाज लगा कर कहा- तुम भी नहा लो.
मैंने कहा- ओके.

तब मैंने सोचा कि नहाने की कहने का मतलब है कि भाभी खुल कर मैच खेलना चाहती हैं. मतलब लंड चूत चूस कर मजा लेना चाहती हैं.
मैं नहाने चला गया.

नहाते समय मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अभी अन्दर भाभी के साथ खुल कर मैच खेलना है और खूब देर तक दबा दबा कर भाभी को चोदना है.
इज्जत का सवाल है आज भाभी को अपने लंड का गुलाम बनाना ही है.

मैं लंड को अच्छे से साफ़ करके बाथरूम से बाहर आ गया.
मैंने कुरता पजामा पहना हुआ था.

अभी मैं बैठा ही था कि कुछ ही देर बाद भाभी की आवाज आ गई- अन्दर आ जाओ देवर जी!

मैं जैसे ही अन्दर घुसा तो हतप्रभ रह गया.
मैंने देखा कि भाभी एक लाल लहंगा पहने हुए एक कोने में बैठी हुई थीं और बाजू की टेबल पर एक दूध का गिलास रखा हुआ था.

भाभी ने मुझे देखा तो तुरंत उठ कर मेरे करीब आईं और मेरे पैर छूकर मुझसे बोलीं- आप आज मेरे एक दिन के पति बन जाओ … आओ प्राणनाथ बैठो.
उनके इस तरह से झुक कर पैर छूने से मैं सकपका गया और ‘अरे अरे …’ कहते हुए मैंने उनकी बांहों को पकड़ कर उठाया.

आह … एकदम मलाई सी चिकनी बांहों को पकड़ते ही लंड ने झुरझुरी सी ली और लंड एकदम से अकड़ गया.

भाभी ने मुझे दूध का गिलास लाकर मेरे हाथों में दे दिया.
मैंने एक घूंट पी लिया और उनके होंठों से गिलास लगा दिया.

भाभी भी उसी गिलास से दूध पीने लगीं.

फिर दूध का गिलास खत्म करके मैं उनके लिपस्टिक लगे होंठों को चूसने लगा.
भाभी भी मेरे मुँह में अपनी जीभ देती हुई चुम्बन का मजा लेने लगीं.

इसके बाद मैंने खुद अपने कपड़े उतारे और धीरे से भाभी के लहंगे का नाड़ा ढीला कर दिया.
लहंगा ढीला हुआ तो सरसराता हुआ नीचे सरकने लगा.
भाभी नीचे से पैंटी में रह गईं.

उसके बाद मैंने उनको अपनी बांहों में भरा और उनके ब्लाउज के पीछे लगे बटन खोलने लगा.
ब्लाउज के हुक खोलने के बाद मैंने उसको उतारा नहीं, बस यूं ही ब्लाउज के साथ भाभी के मम्मों को मसलने लगा.

भाभी आह आह करने लगीं.
फिर मैंने एक झटके से हाथ से खींचकर ब्लाउज को हटा दिया.

अब भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं. उन्होंने जालीदार ब्रा पैंटी पहन रखी थी, जो नारंगी रंग की थी.

पैंटी की जाली से भाभी की सफाचट चूत साफ दिख रही थी.
चिकनी चूत देख कर एकदम साफ़ समझ आ रहा था कि भाभी ने आज ही झांटों को बनाया है.

मैंने घुटनों के बल बैठ कर भाभी की पैंटी को बिना उतारे हुए हल्का सा किनारे कर दिया और उनकी चूत में अपनी जुबान डाल दी.

जुबान डालते ही गुदगुदी की वजह से वह कसमसाने लगीं और पीछे को हटने की कोशिश करने लगीं.
इसी कोशिश में भाभी बेड पर गिर पड़ीं.

वो कहने लगीं- मैं आजके लिए तुम्हारी बीवी हूं … इतनी जल्दी क्या है!

पर मैं भूखा शेर सा तड़फ रहा था, चूत का स्वाद चखने के बाद अब कहां रुकने वाला था.
मैं चूत पर टूट पड़ा और चाट चाट कर चूत का दाना लाल कर दिया.

भाभी की चूत विकट गर्म हो गई थी.

वो सीत्कार भरती हुई बोलीं- अब बस भी करो … क्या बिना चोदे ही रस निकाल दोगे?
मैंने कहा- पहले तो बिना चोदे निकाल दूँगा … फिर चोद कर पानी निकाल दूँगा.
भाभी मस्त हुई पड़ी थीं.

इसके बाद मैं ऊपर उठा और उनके गले के पास जाकर अपना अंडरविअर हटाकर अपना लंड उनके मुँह में दे दिया.

मेरा मोटा और काला चिकना लंड देखकर भाभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हारा लंड देख कर मेरी नीयत डबडबा गई है. मैं तुमको एक शर्त पर अपनी चूत दूंगी.

मैं नंगा लड़का चूत के लिए भाभी की हर शर्त मानने को तैयार था.
मैंने लंड हिलाते हुए कहा- आपकी हर शर्त मान लूंगा … पहले आप मेरे लंड को अपने मुँह में लो.
उन्होंने कहा- ठीक है मैं ले लूंगी. पर मेरी शर्त यह है कि तुम जब तक यहां रहोगे, तब तक मुझे चोदने आया करोगे.

मैं उत्साह में था. मैंने झट से भाभी की बात मान ली और उनके मुँह में अपना लंड डाल दिया.
भाभी मेरे लंड को ठीक ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई भूखा बच्चा लॉलीपॉप चूसता है.

मैं उनकी दोनों चूचियों को अपने हाथों से गोल गोल घुमाता हुआ रगड़ रगड़ कर मसल रहा था.

भाभी भी लंड की गोलियों को मुँह में ले रही थीं और कभी लंड को जीभ से चाट रही थीं.
उन्होंने लंड को चूस चाट कर एकदम से कड़क कर दिया था.

मुझसे रहा नहीं गया और मेरा लंड उनके मुँह में झड़ गया.
उन्होंने माल मुँह में ले लिया लेकिन खाया नहीं.
बाद में पूरा माल अपने कमरे के फर्श पर थूक दिया.

मैंने कहा- अब लंड खाली हो गया है … अब हम लोग देर तक असली खेल खेलेंगे.
वो बोलीं- जरूर … पर पहले अपने लंड को वापस खड़ा कर लो.

मैंने कहा- हो जाएगा मेरी प्यारी भाभी जी. बस आप थोड़ी देर और चूस लो.
वो लंड को साफ़ करके फिर से चूसने लगीं और मैं उनकी चूचियां पीने और रगड़ने लगा.

दस मिनट के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
मैंने हल्का सा थूक लगाकर अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया.

कई महीनों से ठुकाई नहीं कारण भाभी की चूत टाइट हो गई थी.
दो तीन झटके के बाद लंड खुद-ब-खुद चूत में सैट हो गया और मस्त चुदाई चालू हो गई.

कम से कम 15 मिनट चोदने के बाद मैंने भाभी को बेड का किनारा पकड़ा कर घोड़ी बना दिया और उनकी गांड के छेद को साफ़ करके चाटने लगा.
गांड को चाट कर गीला कर दिया और उसमें अपना लंड डाल दिया.

जिस वजह से वह पागल हो गई थीं क्योंकि भाभी की गांड बहुत टाइट थी.
वो चिल्लाने लगी थीं- आंह मर गई … बाहर निकालो इसको … मैं मर जाऊंगी.

पर मैं कहां मानने वाला था … मैंने उनकी कमर को पकड़ कर दो तीन झटके में पूरा लंड गांड के अन्दर पेल दिया.
और दे धक्के दे धक्के मैं भाभी को चोदे जा रहा था.

भाभी की गांड चुदाई मुझे सामने लगे शीशे से साफ दिखाई पड़ रही थी.
मैं भाभी के बाल पकड़कर उन्हें घोड़ी की तरह चलाता हुआ चोद रहा था.

वे मेरे लंड को चाबुक समझ कर गांड हिलाती हुई दनादन दौड़ी जा रही थीं.

तभी मुझे अपने लंड के पास हल्का गीला सा महसूस हुआ.
मैंने जैसे ही हाथ ले जाकर देखा, तो खून था. मैं समझ गया कि जिस घोड़ी की मैं सवारी कर रहा हूँ वो कुंवारी गांड वाली घोड़ी हैं.

मैंने भाभी को कुछ नहीं बताया और उनकी गांड मारता रहा.

कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद मैंने पूरा माल भाभी की गांड में छोड़ दिया और गांड में से लंड निकाल लिया.

अब मैंने अपने लंड को भाभी के कमरे के परदे से साफ किया और भाभी के बाजू में लेट गया.
कुछ देर तक भाभी ऐसे ही अचेत लेटी रहीं.

फिर मैंने भाभी की चूत को चूसना शुरू कर दिया.

मैंने उनकी चूत को चूस कर गीला किया और उनकी चूत में फिर से अपना चेतक उतार दिया.
भाभी हल्की से कराहीं और उन्होंने लंड को चूत में समा लिया.

मेरा चेतक भाभी की गुफा में पूरी ताकत से दौड़ लगाये जा रहा था.

भाभी की चूत भी लगातार चुद चुद कर लाल हो गई थी और नाभि के नीचे की साइड सूज गयी थी.
पर मैं कहां मानने वाला था.

मैंने भाभी को तब तक चोदा, जब तक लंड ने उसकी चूत में उल्टियां करना शुरू नहीं कर दिया.
भाभी की चूत की फांकें सुर्ख लाल हो गयी थीं, पर चुदाई का सुख भाभी के चेहरे से साफ़ दिख रहा था.

मुझे भी लगा कि आज मेहनत सफल हो गई है.

इसके बाद मैं सो गया.

थोड़ी देर बाद जब मैं उठा तो मैंने देखा कि भाभी बाजू में नहीं हैं.
वो किचन में कुछ खाने को बना रही थीं. पर वो पैर फैला कर खड़ी थीं.

मैं समझ गया कि मेरे लंड ने भाभी की गांड और चूत दोनों को मसल दिया है, इसलिए ये टांगें फैला कर खड़ी हैं.

मैंने पूछा- भाभी क्या बना रही हो?
उन्होंने कहा- पोहे और चाय बना रही हूँ, खा पी लो. उसके बाद फिर से खेलेंगे.

मैंने कहा- फिर से खेलना ही है, तो बाद क्या होता है?
भाभी हंसने लगीं.

मैंने उनको पकड़ कर किचन की पट्टी पर टिका कर फिर से घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया.
इस बार मैंने अपने खड़े लंड से भाभी की चूत को चोदा और चाय में उबाल आने से पहले मेरे लंड में उबाल आ गया.

मैं भाभी की चूत में झड़ गया और भाभी को खुश कर दिया.

इस तरह मैं 45 दिन तक लखनऊ में रहा और लगातार उस भाभी की दिन में कई कई बार चुदाई की.
मैंने किसी भी दिन दो बार से कम नहीं खेला और उसकी चूत को और गांड को फैलाकर चौड़ा कर दिया था.

मैंने Xxx भाभी हॉट चुदाई करके उनकी रसीली चूत को भोसड़ा बना दिया था.
आज भी बात होती है तो भाभी कहती हैं कि लखनऊ आना तो मुझसे जरूर मिलना.

मैं जब भी लखनऊ जाता हूं और उस दिन अगर भाभी के पति घर नहीं होते हैं, तो कम से कम दो बार चोद कर आता हूं.
क्या करूँ अपने से बड़ी उम्र की भाभी मेरी कमजोरी है. फिर भाभी की रसीली चूत से कैसे दूर रह सकता हूँ.

अन्तर्वासना के सभी पाठको को मेरा नमस्कार ! Indian Sex Stories

मेरा नाम Indian Sex Storiesसुनील है और मैं हरियाणा के कुरूक्षेत्र का रहने वाला हूँ।

मैं अपनी कहानी पर आता हूँ!

सपना जिसकी उम्र १९ साल है उसके सेक्सी होंठ, कातिल जवानी, भरी हुई गांड और मोटे मोटे चुचे किसी भी लंड को खड़ा कर दें। सपना हमारे ही पड़ोस में ही रहती है और उसका हमारे घर आना जाना है।

एक दिन मैं घर में अकेला था और टी वी पर सेक्सी मूवी देख रहा था। तभी बेल बजी, मैंने जल्दी-जल्दी टीवी बंद किया और दरवाजा खोला तो सपना थी।

वो बोली- मेरे कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है, तुम ठीक कर दो!

तो मैं उसके साथ उसके घर चला गया। उसके घर पर कोई नहीं था। मैंने कंप्यूटर स्टार्ट किया तो देखा कि उसमें वाइरस की वजह से कुछ प्रॉब्लम थी। इतने में सपना मेरे लिए पानी लेकर आई।

मेरी नजर तो उसके चुचों पर थी। क्या बड़े बड़े चुचे थे ! देख कर किसी के भी मुँह में पानी आ जाये ! मैंने घर से विन्डोज़ की सी डी लाकर इन्सटाल करना शुरू कर दिया और उससे बातें करने लगा। मेरा ध्यान तो उसके चुचों और होठों पर था। थोड़ी देर बाद विन्डोज़ हो गई तो मैंने कंप्यूटर रिस्टार्ट किया और उसके कंप्यूटर पर फ़ाईलें चेक करने लगा तो मैंने देखा कि एक फोल्डर में कुछ हिडेन फ़ाइलें थी। जब मैंने उनको खोला तो देखा कि उसमें सेक्सी फिल्में और वाल-पेपर थे।

तभी सपना वहाँ आ गई।

कंप्यूटर पर चुदाई का सीन चल रहा था। तीन अंग्रेज एक लड़की तो चोद रहे थे। सपना कंप्यूटर बंद करने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और वहीं पर बिठा लिया अपने गोद में, उसके चुचे पकड़ लिए और मसलने लगा। कंप्यूटर पर चुदाई का सीन चल रहा था। पहले तो उसने विरोध किया पर बाद में वो भी गरम होने लगी और उसे भी मजा आने लगा। मैंने उसे पास में सोफे पर गिरा दिया और उसके होठों पर होंठ रख दिए। उसकी कमीज ऊपर कर दी और उसके फिर उसकी ब्रा भी खींच दी। उसके बड़े बड़े चूचों को आजाद कर दिया और मुँह में भर कर उसके तने हुए निप्पलों को चूसने लगा। उसके मुँह से आहें निकलने लगी।

मेरा लंड भी तन कर पैंट से बाहर आने को बेताब था और उसकी टांगों में चुभ रहा था। सपना पूरी तरह से तड़प उठी और उसने हाथ डाल कर मेरे लंड बाहर निकाल लिया।

६ इंच लम्बा लंड देख कर सपना बोली- हाय राम ! कितना बड़ा और मोटा है !

मैंने भी उसकी सलवार और पैन्टी उतार दी और उसको उठा कर बेड पर ले गया और उसकी फुदी को सहलाने लगा। उसकी फुदी पर हल्के हल्के बाल थे। क्या कसी चूत थी ! देख कर मुँह में पानी आ गया।

अब मैं उसके टांगों के बीच आ गया और मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी। वो सीत्कार कर उठी। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और चुदने के लिए तैयार थी, पर मैं चाहता था कि वो तड़पे ! मैं उसकी चूत तो चाटने लगा तो उसके बदन में तो जैसे आग ही लग रही थी।

फिर मैंने उसके बाल पकड़े और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया। पहले तो वो मना करने लगी पर बाद में उसे भी मजा आने लगा।

१५ मिनट के बाद मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया जिसे वो पी गई।

थोड़ी देर बाद फ़िर मैंने उसे 69 की पोजिशन में लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा और सपना मेरा लौड़ा मुँह में भर कर फिर से चाटने लगी। थोड़ी देर बाद लंड फिर से खड़ा हो गया।

मैंने उसकी दोनों टाँगे उठा कर अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोर दार धक्का मारा। मेरा लंड उसकी चूत में फंस गया और वो चिल्लाने लगी। मैंने उसकी परवाह न करते हुए एक और जोर का धक्का मारा तो आधा लंड उसकी चूत में चला गया और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी और उसकी चूत से खून भी आने लगा।

उसकी चूत की झिल्ली फट चुकी थी और वो कलि से फ़ूल बन गई थी। मैंने एक जोर का धक्का और मारा तो सारा लंड उसकी चूत में चला गया। मैं उसको किस करने लगा और उसके चुचे रगड़ने लगा। कुछ देर में जब वो शांत हो गई तो मैंने फिर से धक्के मारने चालू कर दिया। अब उसका दर्द काफी कम हो गया था। उसे भी मजा आने लगा और वो नीचे से चूतड़ उठा उठा कर मजे लेने लगी।

मैंने भी जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। उसे बहुत मजा आ रहा था। १५ मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए और मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो उसकी चूत खून से लाल हो चुकी थी। उसे काफी दर्द भी हो रहा था और उससे चला भी नहीं जा रहा था तो मैं उसे बाँहों में उठा कर बाथरूम में ले गया।

शॉवर चालू कर दिया मैंने और उसकी चूत पर साबुन लगा कर साफ़ कर दिया और फ़िर हम शॉवर का मजा लेने लगे।

वो फिर से गर्म हो गई और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। लंड खड़ा हो गया !

मैंने उसे डौगी स्टाइल में कर दिया, एक ही बार में अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और मैंने उसे जोर से चोदना शुरू कर दिया। 15 मिनट बाद उसने पानी छोड़ दिया पर मेरा लंड अभी भी खड़ा था।

मैंने कहा- अब मैं तुम्हारी गांड मारूंगा !

क्या मस्त गांड थी उसकी! पर वो मना कर रही थी। पर मैंने उसे मना लिया और उसकी गांड में काफी सारा तेल लगाया और अपना लंड उसकी गांड पर रख कर एक जोर कर धक्का मारा और मेरा आधा लंड उसकी गांड में चला गया। वो चिल्लाने लगी!

मैंने कुछ देर रुक कर एक ही झटके में सारा लंड उसकी गांड में घुसेड़ दिया और 20 मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद सारा वीर्य उसके मुँह और स्तनों पर डाल दिया।

इसके बाद तो मैंने उसे जब भी मौका मिला मैंने उसे और उसकी कई सहेलियों को भी चोदा।

पर वो सब अगली बार !

उम्मीद है कि आप लोगों को मेरी कहानी पसंद आई होगी।

मुझे मेल कर सकते हैं ! Indian Sex Stories

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आज मेरे लण्ड में Indian Sex Stories वही खुजली हो रही थी … न जाने आज उसके मुंह में पानी क्यूँ रिस रहा था।

मेरे घर में एक जवान लड़की काम करने आती है आज कल…

माँ बीमार है ! छोटे साहब डॉक्टर ने आराम करने को कहा है … कहकर वो काम में जुट गई।

घर में आज कल कोई नहीं रहता … पापा का टूरिंग चल रहा था और मम्मी मामाजी के घर में रहती थी।

मेरी परीक्षा नजदीक आ रही थी इसलिए पढ़ाई की चिन्ता थी।

उसका नाम रचना था .. पास ही झोंपड़ी में रहती थी।

बाबूजी ये कपड़े धोने के है? .. यह पूछ कर मेरी चड्डी उठा ली उसने !

रात में मैंने उसमें मुठ मारा था, उसका गीलापन और महक अभी भी थी।

मैंने कहा- अरी रहने दे ! मैं धो लूँगा उसे ! छोड़ दे ..

वो चले गई और बाकी के कपड़े धोने लगी… उसकी काली ब्रा पीछे से दिख रही थी .. उसकी मांसल जांघें और उसके उरोजों के बारे में सोचने लगा।

मेरा लण्ड खड़ा हो गया .. मैंने अपने चड्डी में मुठ मारा और फिर उसे धोने को कहा।

क्या बाबूजी ! कितना गन्दा हो गया … ख्याल नहीं रखते क्या ?? हँसकर वो चड्डी धोने लगी ..

उसके कमसीन उरोजो को मैं छुप कर देख रहा था …

वो हँसने लगी …

कभी देखा नहीं है क्या बाबूजी ? .. आपकी तो बहुत गर्लफ्रेंड होगी ना??

मुस्कुरा कर मेरे मुठ वाली चड्डी को रगड़ने लगी … ओह्ह हो यही मिली थी माल निकलने के लिए …

मैं डर गया मेरा लण्ड सिकुड़कर मूंगफली बन गया … इतनी तेज़ चीज़ ..इतनी तेज़ तो अंजू भी नहीं है ??

मैं जल्दी से अपने कमरे घुस गया … रात भर नींद नहीं आई … मैंने सोचा- अगर मुठ मार लिया तो कल चोदना पड़ गया फिर … ना ना नौकरानी को नहीं चोदूंगा .. पापा को पता चल गया, फिर ?

अगले दिन वो नहीं आई उसकी माँ आई थी।

मेरे खड़े लण्ड पर डंडा हो गया ! मैं सोचने लगा कल ही मौका था … फिर एक सेक्सी आवाज़ आई … माँ ! रहुआ फिर आ गयी .. जहियो ! मैं हूँ ना ! घर जहियो…

मेरा लण्ड खड़ा हो गया .. रचना मेरे कमरे की सफाई करने लगी। मैंने उसे बांहों में भर लिया और चुम्मियाँ लेने लगा …

अरे बाबूजी ! बस भी करो ! कहकर वोह बेड पैर गिर पड़ी.. ओह्ह इतना आरामदेह बेड ! इसमें चुदवाने का मज़ा ही कुछ और होगा !

उसने समय का सदुपयोग करके अपना आवरण त्याग दिया, उसकी सांवली देह पर फटे पुराने पैंटी और ब्रा थी।

मैं उसके और पास आया और पूछा- तुम पहले भी चुदवाई हो क्या ?

वो हंसी और पूछा- क्यों ? शादी करने का इरादा है क्या बाबूजी ?

मैं शरमा गया !

मैंने भी अब तक सिर्फ दो बार ही अंजू को चोदा था। पर कहाँ उसकी पतली सुखी हुई काया और कहाँ इसका चरमरा हुआ .. भरा हुआ मांसल बदन … मैंने अपने कपड़े खोल दिए और उसकी पैंटी खोलकर उसी को चाटने लगा।

उसने कहा- अरे बाबूजी ! आपकी जगह वहां नहीं है !

कहकर मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया।

आह आह आराम से .. आज तक अंजू ने भी मुझे मुँह से मुठ नहीं मारी !

उसे यह गन्दा लगता है ..

मैंने उसकी टांगो को अलग किया और अपना भाला घोंप दिया ..

आह बाबूजी ! चोद दो इस रांड को .. और दम लगाओ आह आह और घस्से मारो ..

मैं पूरे जोर से अन्दर बाहर कर रहा था- आह अहह अंजू !

ओह्ह तो उसका नाम अंजू है साहब.. क्या वो मुझसे भी मस्त है क्या ?

नहीं जानेमन यू आर तो सेक्सी ?? आह सच में साहब आप भी बहुत सेक्सी हो …

उसने मेरी गांड कस ली और मैं स्खलित हो गया …. आह अ अआहा

ओह्ह साहब ! आज इस गरीब को आपने वीर्य से नहाकर शुद्ध कर दिया !

थैंक्यू साहब ! कहकर वो पीछे घूम गई …

मैंने उसकी गांड मारी ! क्यूंकि अंजू की सूखी गांड क्या मारता !

उस दिन मैंने उसको पॉँच बार पेला !

आह रचना ! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !

मैंने अपने तिजोरी से गर्भ निरोधक गोली दी और और उसे खिला दिया।

जाते वक़्त मैंने उसकी पोटली में मम्मी के नए ब्रा और पैंटी डाल दी थी ..

बाय बाय ! छोटे साहब फिर मिलूंगी …. Indian Sex Stories

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