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Antarvasna Stories

अन्तर्वासना के सभी Antarvasna Stories पाठकों को खास कर लडकियों और भाभियों को रोहण के लन्ड का आदर भरा प्रणाम…

मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं। आपको मैं अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। आपकी जानकारी के लिए : मैं मुम्बई का रहने वाला हूँ, कद 5’10” रंग गेहुंआ, उम्र 32 साल !

एक बार मैं बस से जा रहा था। सीट ना मिलने से खड़े खड़े सफ़र कर रहा था। मेरी सामने वाली सीट पर एक औरत और लड़का बैठे थे। लड़का खिड़की की तरफ़ बैठा था। उस औरत ने लाल रंग की साड़ी और लो-नेक ब्लाउस पहना था… बड़े और गोरे स्तन नज़र आ रहे थे। जिसका भरपूर आनन्द मैं ले रहा था और सोच रहा था कि काश ऐसी भाभी मिल जाए चोदने के लिए।

तभी एक स्टॉप पर बस रुकी और काफ़ी लोग बस में चढ़े … भीड बढ़ गई। मेरा लन्ड उसके कन्धे से टकराया, उस औरत ने मेरी तरफ़ देखा और सीधी हो कर बैठ गई। जिससे मेरा लन्ड उसके कन्धे से सट गया। मैंने थोड़ा पीछे हटने की कोशिश की लेकिन नाकामयाब रहा और अपना लन्ड सटा दिया। उसके बदन का स्पर्श पाते ही मेरे लन्ड ने अंगडाई ली और अब मेरे लन्ड को वो महसूस कर रही थी। मैंने लन्ड का दबाव बढ़ाया तो वो मेरी तरफ़ देख कर हल्के से मुस्कुरा दी। और साड़ी ठीक करने के बहाने उसने एक दो बार मेरे लन्ड को छू भी लिया। मेरी भी हिम्मत बढ़ी और एक बार उसके स्तनों को छू लिया।

थोड़ी देर बाद उसके बगल में बैठा हुआ लड़का उतरने के लिए उठा तो मै उस औरत के बगल में उससे सट कर बैठ गया और जानबूझ कर अपनी कोहनी उसके वक्ष पर सटा दी। अब वो भी मेरा साथ देने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर अपने वक्ष पर दबाने लगी। मैंने जानपहचान बढ़ाने लिये उससे पूछा,”आप कहाँ जा रही है?”

तो उसने बताया कि वो घर जा रही थी और अगले स्टॉप पर उतरने वाली है।

ज़ब वो उठी तो मैं भी उसके साथ उठा और हम दोनों अगले स्टॉप पर उतर गए। उसने अपना नाम सारिका बताया और पूछा,”क्या तुम्हारा स्टॉप भी आ गया?”

मैंने कहा,”नहीं सारिका, मैं तो तुम्हारे लिए उतर पड़ा !”

वो बोली,”क्या इरादा है आप का?”

मैंने कहा,”इरादा तो नेक है, बाकी आप जैसा चाहो !”

वो बोली,”तो घर चलिए !”

हम दोनों उसके घर पहुँचे। मुझे बैठा कर वो किचन से पानी लेकर आई। तब तक मैंने भांप लिया कि घर में कोई नहीं है। पानी का ग्लास देकर मेरे सामने वाले सोफ़े पर बैठ गई और मेरे बारे में पूछने लगी। मैं ग्लास देने बहाने उठा और उसकी बगल में बैठ गया और अपना हाथ उसके कन्धे पर रख दिया तो वो बोली,”बस में भी शरारत कर रहे थे और यहां भी?”

तो मैंने कहा,”बस में तो लोगों के डर से थोड़ा कंट्रोल करना पड़ा पर यहाँ तो हमारे सिवा कौन है?”

धत्त्त्त्त्… उसने कहा और शरमा गई।

कुछ देर चुप रहने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी टांग पर रखा और बोला- बड़ी सेक्सी लग रही हो सारिका !

और फिर मैंने उसकी जाँघ को प्यार से सहलाया। उसकी जाँघें काफी बड़ी और मुलायम थी। मेरा लंड खड़ा होने लगा था। और वह भी सेक्सी मूड में थी। उसने मुझे नहीं रोका। मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूची को प्यार से सहलाया, दबाया। जैसे ही मैंने दबाया, उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया और मैंने देखा कि उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ ब्लाऊज़ से बाहर आने के लिए बेताब़ हो रहीं हैं। मेरी आँखों की तृप्ति मिल रही थी और मैं उसकी चूचियों को भूखी नज़रों से देख रहा था।

इस दौरान पता ही नही चला कब हमारे होंठ जुड़ गये… एक तरफ़ चूचियों को दबा रहा था और उसके रसीले होंठों को पी रहा था।

मैं अब थोड़ा नीचे की ओर बढ़ा… मैंने उन नरम चूचियों को दबाना शुरू किया और साथ ही मैं अपनी जीभ उसकी गर्दन पर फिरा रहा था। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हल्की आहें भरने लगी। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी दाईं चूची को दबाने लगा, और बाईं चूची को चूसने लगा। फिर मैंने बारी-बारी से बाईं और दाईं चूचियाँ बदल-बदल कर दबाईं और चूसीं।

सारिका आहें भर रही थी, “हम्म्म्म्म…. ऊम्म्म्म्म। रोअओहहहन और जोर से रोहन आआआअहहह माँमम्म… ” वह अपना हाथ मेरे लंड पर रखकर उसकी कठोरता का आभास कर रही थी और तब मैंने उसकी चूत को ऊपर से ही सहला दिया। इस दौरान हमने एक-दूसरे को बिलकुल निवस्त्र कर दिया। उसकी गोरी और साफ़सुथरी चूत को देख मेरे मुँह में पानी आ गया और चूत पर उंगली फ़ेरने लगा। तब वो उत्तेजना में सिसकारियाँ लेते हुए बोली,”उईईईईईई, माँ… और दबाओ ना मेरे चूचे … रगड़ो मेरी चूत…।”

मैंने अपनी ऊंगली उसकी चूत में फिरानी शुरू की। मैं ज्यों ही ऐसा कर रहा था, वह अपनी चूतड़ सेक्सी तरीके से ऊपर उठाकर मुझे और भी बढ़ावा दे रही थी। थोड़ी देर ऊंगली करने के बाद मैंने उसकी जाँघें फैलाईं और उसकी शानदार चूत में अपना मुँह लगा दिया। इस दौरान उसने मेरे लन्ड पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था और वो मेरे लन्ड को सहला रही थी।

मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। उसकी चूत टाईट तरीके से बन्द थी। सामान्यतः एक नियमित रूप से चुदने वाली चूत के फ़लक खुले रहते हैं और ये थोड़ा बाहर की ओर निकले होते हैं। पर सारिका के साथ ऐसा नहीं था, शादीशुदा होने के बावजूद उसकी चूत एक अनछुई लड़की की तरह थी… बाद में पता चला कि उसका पति बिसनेस के चक्कर में बाहर घूमता रहता है और सारिका प्यासी रह जाती है।

मैंने उसकी चूत के होंठ फैलाए और उसकी गुलाबी झलक ली। फिर मैंने अपनी जीभ अन्दर घुसेड़ दी और अच्छी तरह चलाते हुए चाटने लगा। मैं उससे निकले रस को भी चाटता जा रहा था। वह मादक आहें भर रही थी… हमम्म्म्म्मम… मैंने उसकी चूत को फैलाया और छेद में जीभ घुसेड़ कर चूसने लगा।

मैंने इधर अपनी जीभ उसकी चूत में घुसाई, और साथ ही उधर अपनी एक उँगली उसकी गाँड में घुसेड़ दी… सारिका ने मेरा सिर उसकी चूत पर दबा दिया, और मैं उसकी चूत में समाता चला गया।

थोड़ी देर बाद हम 69 पोज़िशन में आ गये… मैं उसकी चूत का रसपान कर रहा था और वो मेरे लन्ड को चूस रही थी…मुझे तो लगा कि मैं ज़न्नत में आ गया हूँ। फिर उसने धीरे से मेरे लंड के आगे की चमड़ी हटाकर गुलाबी सुपाड़े चाटना शुरु किया और मेरी आहें निकलने लगीं,”ओह यस….”

उसके नर्म-नर्म हाथों का लन्ड को मसलना और गर्म-गर्म जीभ का अहसास मेरे लंड के सुपाड़े पर बड़ा आनन्ददायक प्रतीत हो रहा था। मेरे लंड से हल्का सा वीर्य निकला, जिसे उसने चाट लिया। फिर उसने मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया, और साथ में वह मेरे अंडकोषों को भी सहला, चूस रही थी। करीब आधे घंटे बाद वो मिन्नतें करने लगी,”रोहन, अब चोद डालो मुझे ! और ना तड़पा मुझे… उईईईईईई, माँ… और दबा ना मेरे बूब्स…!”

मैंने कहा,”हाँ मेरी जान ! मेरा लन्ड भी बेताब है तेरी चूत पाने के लिये।”

इस दौरान वो एक बार झड़ चुकी थी…

उसकी ड़ांगें फ़ैला कर बीच में बैठ गया और लन्ड के सुपाड़े को उसकी गीली चूत पर रख दिया। गर्म सुपाड़े का स्पर्श पाते ही उसके चूतड़ उठने लगे और लन्ड को चूत में लेने की कोशिश करने लगे। मैंने अपने सख्त लन्ड का दबाव उसकी चूत पर बढ़ाया और फ़च्च से लन्ड का सुपाड़ा उसकी गीली चूत में समा गया और सारिका कराह उठी- …उईईईईईई, माँ…

चूत टाइट थी…

फ़िर एक जोरदार धक्का दिया तो लन्ड चूत की दीवार को चीरता हुआ जड़ तक समा गया …

आआह्ह्ह्ह्ह्ह् … … … … आह्ह्ह … … मार डालोगे क्या … … ! उसकी चीख निकल गई।

पूरा लन्ड बाहर खींचा और फ़िर पूरी ताकत से फ़िर से पेल दिया।

कुछ देर हम वैसे ही पड़े रहे… दर्द कम होते ही उसने अपनी गांड उठानी शुरु कर दी और बोलने लगी- चोदो मेरे राजा… रुकना नहीं… मेरी चूत बहुत दिनों से प्यासी है… चोदो… जोर से चोदो आअह्ह्ह्ह…

“ये लो मेरी जान्… और लो… ये लो… आआह्ह्ह्ह्ह्ह्… क्या चूत पाई है तूने…” और मैंने उसे दनादन चोदना शुरू कर दिया। वोआह्ह आह्ह करती रही और मै उसे चोदता रहा।

मैं अब अपना सारा ६ इंच का लंड उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। सारिका के मुंह से स्स्स्स्स्स्स्स आह आह्ह्ह उस्सुसुसू जैसी मादक आवाजें निकाल रही थी। 10 मिनट इसी तरह चोदने के बाद मैंने अब सारिका की चूत में से अपना लंड निकाल कर उसको घोड़ी स्टाईल में खड़ा कर उसकी चूत में लंड घुसा दिया और धक्के मारने लगा। उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे बहुत ही आनंद दे रहे थे। दो मिनट में ही वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी।

सारिका बोली,”मुझे कुछ हो रहा है। लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।”

सारिका भी अब अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदाने लगी… दस मिनट बाद वो चिल्लाने लगी,”ओ रोहन मै आ रही हू आआह्ह्ह्ह्ह्ह् … … … … आह्ह्ह … ..”

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।

वो बोली,”आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ”

उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग २० मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे…।

इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।

उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता सारिका मुझे बुला लेती है और हम जम कर चुदाई करते हैं !

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मुझे लिखें। Antarvasna Stories

Antarvasna

मैंने मामी को नीचे Antarvasna खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा. मेरा जोश अब पहले से भी ज्यादा था. क्या पता फिर मौका मिले ना मिले? मैं उनके मम्मे चूसे ही जा रहा था और एक हाथ से चूत सहला रहा था. मैंने अब उनको चाटना चालू किया. उन्होंने अपने हाथों से सर के नीचे जो तकिया था, उसे कस के पकड़ा था. तो मैंने उनकी बगलों में चूमना चालू किया जिससे मामी पूरी सिहर उठी. धीरे धीरे चूमते हुए मैं नीचे आ गया और चूत चाटने लगा. अब मामी ने धीरे से अपने पैर उठाये और अपनी छाती के पास ले गई जिससे अब उनकी गांड का छेद मेरे सामने आ गया था.

“नयन, अगर तुमको तकलीफ ना हो तो थोड़ा इसे भी चाटो ना!”
मैंने अपनी जीभ गांड के छेद पर रखी और धीरे धीरे अपनी जीभ का जोर बढ़ाया. मामी कसमसा रही थी और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुसवा रही थी.
“मामी क्या इस छेद को कभी किसी ने छेड़ा है?”
“नहीं नयन, ये तो मेरी चूत को हो नहीं चाटते! तो इसको क्या चाटेंगे!”
“मामी, मैं इसको चूसूंगा भी और बजाऊँगा भी!”
मामी अब जरा मेरा लंड गीला तो करो!”

मामी ने वापस मेरा लंड मुँह में लिया और चूसना चालू किया.
“अब मामी पेट के बल हो जाओ, मैं आपके पीछे के छेद को छेड़ता हूँ!”
“नयन, संभल के! मैंने कभी पीछे लिया नहीं है!”
“अरे मामी जी! तुमने कभी आगे भी नहीं लिया था! लेकिन अब लेती हो ना!”

मैंने अपनी पकड़ बना ली और उनकी गांड पर लंड का दबाव बनाने लगा.
“नयन, धीरे से करो! मुझे दुःख रहा है!”
“हाँ मामी! मैं धीरे से करता हूँ!”
“मामी, एक काम करो! आप नीचे से गांड उठाओ और धीरे से अन्दर लेने की कोशिश करो!”

लंड तो अब मेरा भी दुखने लगा था क्योंकि गांड का छेद बहुत ही छोटा था. मामी ने अपनी गांड नीचे से उठानी शुरू कर दी थी. वो गांड तो नीचे से उठा रही थी, साथ में चिल्ला भी रही थी.
“नयन, आऽऽऽऽ आआआऽऽऽ बहुत दर्द हो रहा है नयन…!”

अब लंड आधा अन्दर जा चुका था और मामी अब गांड आगे खींचने लगी थी. मुझे लगा कि मामी अब बाहर निकलेगी तो मैंने मामी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा. मामी की तो चीख ही निकलने वाली थी पर उसने जैसे तैसे रोक ली.
“मामी, अब पूरा अन्दर गया है! अब कैसा लग रहा है?”
“नयन, बहुत ही दर्द हो रहा है!”
“मामी, थोड़ा सहन करो! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ!”
“हाँ मामी! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ!”

मामी ने अपना काम चालू कर दिया था.
“मामी, कैसा लग रहा है?”
“नयन, यह तो अलग ही अनुभव है! मुझे बहुत ही मजा आ रहा है! तुम भी कमर हिलाओ ना! मजा आ रहा है बहुत!”

अब मैंने अपने शॉट धीरे से चालू किये जिससे उनको तकलीफ़ ना हो.
लेकिन मामी पूरे जोश में आ गई थी, वो तो नीचे से गांड हिला हिला कर लंड ले रही थी.
मैं भी जोरों पर था और और एक हाथ से उनकी चूची भी दबा रहा था.
बहुत देर ये खेल चला!

“मामी, क्या बस करूँ गांड की ठुकाई?”
“हाँ नयन, अब जरा मेरी चूत पर जोर लगाओ!”
मैंने गांड से लंड बाहर निकाला और उनको घोड़ी बना कर उनकी चूत में डाल दिया और पूरी गति से कमर हिलाने लगा.
मामी की सिसकारियाँ रुक रुक कर निकल रही थी जो के मेरे धक्के के कारण हो रहा था.
“मामी, कैसा लग रहा है?”
“नयन, मत पूछो! तुम अपना काम चालू रखो!”
“नयन! आआऽऽऽ आआआआअ… क्या मजा आ रहा है! मैं तो पागल थी जो तुम्हें चोदने को मना कर रही थी!”
“नयन, मैं निकलने वाली हूँ मुझे कस लो नयन! आआऽऽऽ आआआआअ…! ”

मैंने मामी की हालत जान ली और पीछे से उनको कस कर पकड़ लिया.
मामी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर कस लिया जिस कारण मैं भी मचलने लगा.
“मामी, ऐसे ही चूत से दबाओ मेरे लंड को! मैं भी निकलने वाला हूँ…मामी ऽऽऽ! ”

और मैं और मामी एक साथ झड़ने लगे. मेरे लंड का फव्वारा मामी की चूत में खाली हो रहा था और मामी भी अपनी चूत के होंट दबा दबा कर मेरा पूरा लंड खाली करवा रही थी.
“क्यों नयन, मजा आया?”
“बहुत मामी…बहुत मजा आया!”
“अरे अभी कहाँ? मजा तो अब तुझे दूंगी जो तुम जिन्दगी भर नहीं भूलोगे!”

और मामी ने मेरा मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह में लिया और अपनी जबान से और दातों से उसे चूसने लगी. मेरी हालत तो ख़राब हो रही थी, एक तो पहले ही मैं दो बार झड़ चुका था.
“मामी बस करो ना! अब मेरे लंड में दर्द हो रहा है!”
“नयन, यह दर्द बस थोड़ी देर सहन करो! फिर देखो!”

थोड़ी देर बाद मेरी लंड में जान आने लगी और वो वापिस पहले की तरह तैयार हो गया. मामी मेरे लंड को निहार निहार कर चाट रही थी. शायद उनको लंड चूसना बहुत ही पसंद था.

“नयन, तुम्हरे लंड में तो बड़ा जोर हैं! यह तो तीसरी बार भी तैयार हो गया है?”
“यह तो आप के मुँह में लेने की कला के वजह से हो रहा है!”
“अब मेरी समझ में आया कि मेरी गांड में इतना दर्द क्यों हुआ! यह तो कितना बड़ा है!”
“अब आपको पता चला? जब चूत और गांड दोनों चोद कर हो गया?”
“अरे तुमने देखने ही कहाँ दिया? जब देखो मशीन चालू थी तुम्हारी!”
“हाँ मामी! अब क्या करना है मुझे?”
“नयन, चूत और गांड तो तुमने चोद दी! अब मैं तुम्हें मुँह चोदना सिखाती हूँ.

मामी ने मुझे घोड़ा बना दिया और मेरे नीचे आ कर नीचे से मेरे लंड को पकड़ा.
“नयन, जैसे तुमने मेरी चूत चोदी और मेरी गांड चोदी, उसी तरह अब मेरे मुँह को चूत समझ कर जोर से चोदो!”

मैंने जैसे ही अपनी कमर हिलाना चालू किया, मामी ने अपने मुँह से कमाल दिखाना चालू किया, नए-नए तरीके से मेरे लंड को मुँह में चूस रही थी, कभी अपने होंटों का दबाव बना कर, कभी अपनी जबान से सहला कर मुझे पागल कर रही थी.
मैं भी अब पूरी गति से उनके मुँह में लंड को हिला रहा था. मैं अब घुटनों के बल बैठ गया और मामी वैसे ही नीचे से सर हिला के अपने मुँह को खुद चुदवा रही थी.

मैंने एक हाथ पीछे किया और उनकी चूत में उंगली डाल दी. मामी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी. अब मेरा बदन अकड़ने लगा था. मामी अपने मुँह का कमाल दिखा रही थी. मैं अब अपने हाथों पर आ गया और कमर हिला हिला के मामी का मुँह चोदने लगा.
मामी पूरा लो! खा जाओ! मैं तो झड़ने वाला हूँ ऽऽ!!

और एक जोरदार धक्का लगाकर मैं उनके मुँह में झड़ गया. पहले की तरह मामी ने मेरा वीर्य पूरा चाट लिया और मेरे लंड को साफ कर दिया.
फिर हमने उठ कर कपड़े पहन लिए.
“मामी, मैं निकलता हूँ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा!”
“नयन भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी! तो फिर नयन कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी.”
तो दोस्तो! कैसी लगी मेरी आगे की कहानी?

अब तो मैं इतना चोदने का आदि हो गया हूँ कि जब तक दो बार झड़ता नहीं, मैं नीचे उतरता ही नहीं.
तो अब मैं 29 साल का हूँ और मुंबई में रहता हूँ.
मुझे जरूर मेल करें कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी! Antarvasna

प्रेषक : राहुल Hindi Sex Stories

आइये, आपको एक बार Hindi Sex Stories और मैं प्यार की रूहानी दुनिया में कुछ समय के लिये ले चलता हूँ, यहाँ आपको प्यारा नरम सा सेक्स भी मिलेगा, उत्तेजना भी मिलेगी, आपका लण्ड भी खड़ा होगा और आपसी रिश्तो की उल्झन भी नजर आयेगी …

मैं पन्जिम से मडगांव की तरफ़ आ रहा था। शाम ढल चुकी थी। बादलों के कारण मौसम में ठण्डक आ गई थी। अचानक रास्ते में मुझे एक लड़की नजर आई। वो पंजों के बल उछल उछल कर मुझे रुकने का इशारा कर रही थी। बरसात होने वाली थी। काले बादल सर पर आ चुके थे। ऊंचा सा स्कर्ट पहने और गहरे गले का टॉप पहने कोई मॉडर्न गर्ल थी। मैंने उसके पास ही गाड़ी रोकी … कार का दरवाजा खोल कर मैंने अन्दर आने का इशारा किया। वो लपक कर सामने बगल वाली सीट पर आ गई।

“थेन्क्स जो … नाईस ऑफ़ यू … “

“आप मुझे जानती हैं … आप का परिचय … ?”

“मैं शैली … यहीं पास में होटल में काम करती हूँ … आप कल शाम को यहाँ रुके थे ना … “

“ओह हाँ … मैंने 50 रुपये टिप में दिये थे … ऐसे मौसम में बाहर नहीं निकलना चाहिये … “

” रात भर मैं यहाँ क्या करती … सोचा बाहर आ कर कोशिश करूँ … देखा, आप मिल गये ना … यहाँ पास में मन्दिर में रुकना … मुझे कुछ काम है।” उसने सामने मन्दिर की तरफ़ इशारा किया। बरसात चढ़ी हुई थी, मेरा मन रुकने को नहीं था, बस 50 किलोमीटर ही दूर था मडगांव। फिर भी मैंने मन्दिर की तरफ़ गाड़ी मोड़ ली। बूंदा बांदी शुरू हो गई थी। बादलो की गड़गड़ाहट और तेज बिजलियाँ कौंध रही थी। गाड़ी मन्दिर परिसर में खड़ी करके हम दोनों मन्दिर के अन्दर चले आये।

“जल्दी करना शैली … “

“बस दो मिनट … “

इतने में अन्दर से एक लड़का भागता हुआ आया … उसके हाथ में छाता था और शायद वो घर जा रहा था।

“मन्दिर में कोई नहीं है … चलो … ” लड़के ने भागते हुए कहा “बारिश जोर की आयेगी … ”

“अरे मुझे पण्डित जी से काम है … ” शैली ने जोर से चीख कर कहा।

” वो नहीं है … चाबी वहीं हैं … आप इन्तज़ार कर लो … ” वो तेजी से सीढ़ियां उतर कर चला गया।

“मुझे पता है … आओ जो … ” वो मुझे देख कर मुस्कराई …

इतने में बरसात तेज हो गई। हवा में शैली का छोटा सा स्कर्ट बार बार कमर के ऊपर उड़ कर आ रहा था। उसकी छोटी सी पेन्टी में से उसके उभरे हुए चूतड़ साफ़ दिखने लगे थे। मैंने अपना दिल थाम लिया … साली चुदने लायक है … मैंने लण्ड को दबा कर समझाने का प्रयास किया। फिर मैंने निराशा से बाहर देखा और रुकने में ही भलाई समझी। मन्दिर के साथ ही पुजारी का कमरा था,हमने पुजारी का कमरा खोला … और अन्दर आ गये।

आते ही शैली बिस्तर पर लेट गई, लेटते ही उसकी स्कर्ट फिर से ऊपर हो गई। उसकी चिकनी सलोनी गोरी मांसल जांघें चमक उठी। मेरी पैन्ट के ऊपर से लण्ड का उभार देख कर वो भी इतराने लगी और जान करके अपनी टांगें फ़ैला ली। चूत के स्थान पर एक गीला धब्बा उभर आया था।

“शैली , स्कर्ट नीचे कर लो … सब दिख रहा है।” मैंने झिझकते हुए कहा।

“अच्छा … तो देखो ना … कैसी हूँ नीचे से … ” उसने मुझे निमंत्रण देते हुए कहा, अपनी चूत को हाथ से दबाते हुई बोली … गीला धब्बा और फ़ैल गया … चूत का रस निकल रहा था।

“तराशी हुई चिकनी जांघे, गोरी सुन्दर् … छोटी सी पेन्टी … और उभरी और गीली हुई … “

“हाय … ” उसने जल्दी से स्कर्ट ऊपर डाल लिया … “आप तो मेरे अन्दर ही घुसे जा रहे हैं … “

“आपने पूछा था ना … कोई दूसरा होता तो … वो जाने क्या कर डालता … ये गीली … “

“और आप कुछ भी नहीं करते क्या … और गीली क्या … ” खुला न्योता दे रही थी … अगर मैंने कुछ नहीं किया तो वो समझेगी कि मेरे में कुछ कमी है।

“क्यों नहीं करता … । जैसे ये आपके बड़े बड़े सेक्सी चूंचे … और ये गीली चूत … ” मैंने उसके पास जाकर उसके चूंचे दबा दिये।

“रुको … 5000 रुपये लूंगी … ” मुझे भड़का कर उसने कमाई की दर बता दी।

“मंजूर है … पर फिर मैं जो चाहूँगा वो करूंगा … चाहे पिछाड़ी ही मार दूँ !”

“और सुनो … उसके अलावा, मैं जो चाहूँ वो भी करोगे ना … आ जाओ ना … समय कीमती है … शुरू हो जाओ … और निकाल दो मेरी हसरतें … आपकी हसरतें … ” वो बड़े ही प्रोफ़ेशनल अन्दाज में बोली।

“चलो कपड़े उतारें … शैली” बाहर बरसात पूरा जोर पकड़ चुकी थी।

मैंने अपने कपड़े उतार दिये … उसके तो कपड़े वैसे ही ना के बराबर थे। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड देख कर उसके मुख से अनायास ही निकल पड़ा …

“माई गॉड … … ये लण्ड है या मूसल … इसका तो पूरा मजा लूंगी मैं तो … ” मुझे समझ में नहीं आया, मेरा लण्ड तो साधारण था, हां खड़े होने के बाद आठ या साढ़े आठ इन्च का हो जाता होगा।

उसकी नंगी चूत गीली थी, हाथ लगाया तो लसलसी सी, चिकनाई से भरी हुई थी … मेरा हाथ उसने झटक डाला।

“यहाँ खड़े हो जाओ जो … ” खुद एक कुर्सी पर नंगी बैठ गई और मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसके ठण्डे और नरम हाथों ने मेरे लण्ड को और कड़क कर दिया। मेरे लण्ड को वो हल्के हल्के मलने लगी। मुझे मीठा मीठा सा मजा आने लगा। मैंने उसके बाल पकड़ लिये और दूसरे हाथ से उसकी चूची सहलाने लगा। वो कभी कभी मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूस भी लेती थी। मेरा सुपाड़ा उसके थूक से भीग जाता था।

“साला … चूत में घुसेगा तो मुझे मस्त ही कर डालेगा … और गाण्ड को तो मजे आ जायेंगे … “

“शैली, अब जरा मुठ मार के मजा दे यार … “

“ये लो … क्या कड़क लौड़ा है … चूसने में भी मजा आ रहा है … ” और उसने अपने हाथ में लण्ड को ठीक से बांध लिया और जोर से दबा लिया … ।

“तैयार हो जो … तेरा लण्ड अब तो गया … ” उसके हाथों ने कस कर हाथ जड़ तक रगड़ा और फिर बाहर तक दबा कर रगड़ मारी … मुझे लगा कि माल निकाला …

“हां शैली अब लगा कि मुठ मारा है … चल जल्दी जल्दी कर … फिर चुदाई भी तो करनी है …

“जल्दी क्या है जो … ये भयंकर बरसात है, सुबह तक तो चलेगी … तब तक क्या करोगे … “

और उसका भारी हाथ मेरे लौड़े को रगड़ मारते हुये मुठ मारने लगा। मुझे मस्ती चढ़ने लगी। मुझे आश्चर्य हुआ कि उसके हाथों में इतनी ताकत कहां से आ गई। मेरा जिस्म वासना से भर कर तन गया। लण्ड को मैंने और उभार लिया। शैली जम कर मुठ मार रही थी।

“बस कर शैली … देख मेरा माल निकल जायेगा … “

“जो … निकाल दे माल … निकाल दे … मजा आ जायेगा … ” उसने अपने हाथों को और तेज कर दिया। मेरा लण्ड उफ़ान पर आ गया।

“शैली … रुक जा रे … देख निकल जायेगा … “

उसने हाथ रोक दिया और लण्ड को मुँह में ले लिया … और एक विशेष तरह से लण्ड को मोड़ कर मुठ मारा … तीन चार स्ट्रोक में मेरी हालत खराब हो गई।

“मा … दी फ़ुद्दी … मां चुद गई मेरी तो … हाय रे … ओह्ह्ह्ह्ह्ह” और मेरे लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया, वीर्य उसके हलक में सीधा उतर गया और वो गट से पी गई। अब वो मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी, मानो लण्ड की सफ़ाई कर रही हो … ।

मैं बिस्तर पर लम्बी सांसें भरता हुआ लेट गया। मेरे लेटते ही वो मेरे ऊपर आ गई। और मुझे लिपटा कर चूमने लगी।

“जो मजा आया ना … तेरा लण्ड मस्त है रे … मुठ मारने में बहुत मजा आया … ।”

शैली अपनी चूत मेरे लण्ड पर घिसने लगी … उसकी शेव की हुई चूत के कड़े बाल मेरे लण्ड पर चुभ रहे थे और खरोंचें मार रहे थे। बड़ा मजा आ रहा था।

“शैली तुमने कहां से सीखी ये सब मस्ती वाली हरकतें …? “

“यह तो मैं अस्सी नब्बे सालों से कर रही हूँ … ।” और हंस दी … “तुम्हें जब सौ साल का अनुभव हो जायेगा ना, तो तुम भी एक्स्पर्ट हो जाओगे … “

“हां जैसे सत्तर साल का तो हूँ ही … !” और हम दोनों हंस पड़े।

“सच कहती हूँ रे … साला मजाक समझ रहा है … ” वो हंस के अजीब से स्वर में बोली।

“सच है … चूत 20 साल की, बोबे 15 साल के … जवानी 25 साल की … गाण्ड 20 साल की … और नशीली आंखें … जोशीला बदन … माल निकाल देने वाली अदायें … 20 साल और जोड़ लो हो गया 100 का आंकड़ा।”

“हाय तुमने तो ये बोल कर मेरे बदन में आग लगा दी। आह्ह्ह्ह्ह्ह, साला लौड़ा चूत में घुस ही गया ना”

मेरा लौड़ा जाने कब कड़ा हो गया और शैली ने जोर लगा कर अपनी चूत में घुसेड़ लिया था। मुझे भी चूत का गरम गरम अहसास होने लगा। उसने अपनी चूंचियां उठा कर मेरे मुँह में घुसेड़ दी और मैं उसकी चूची एक एक करके दोनों चूसने लगा। अचानक उसके चूचियों में से दूध आने लगा। मीठा मीठा सा … स्वाद भरा … मैं दूध पीने लगा … उसने अपनी चूत का धक्का जोर से मारा और मेरा पूरा लण्ड चूत ने समा लिया।

“कैसा लगा मेरे जो … दूध का मजा … चूत का मजा … ?”

“इतना सारा दूध निकल रहा है … मजा आ रहा है … पी जाऊँ क्या … तुम्हारा कोई बच्चा है ना … ?”

“कुछ भी मत कहो … तुम ही हो मेरे सब कुछ … बस पी लो … ” और चूत उछाल उछाल कर लण्ड पर मारने लगी। उसकी छाती में से दूध भी बहने लगा। मेरा लण्ड मस्ती में भर गया थ। मेरा पेट दूध पी कर भर चुका था। जाने कितना दूध था उसकी छातियों में …

“जो … राजा तुम्हारा पेट भर गया क्या …? “

“क्या ?? शैली तुम भी ना गजब की हो … ” मैंने भी अपना लण्ड ऊपर चूत पर मारते कहा।

उसका दूध निकलना बन्द हो गया था और अब वो रुक गई थी …

“जो लण्ड निकालो तो … मुझे सू सू आ रही है … ” मेरे लण्ड निकालते ही वो मुझसे लिपट गई और थोड़ा सा जोर लगाया तो पेशाब होने लगा। जाने कैसे मेरे लण्ड में भी तरावट आ गई और मेरे लण्ड से भी पेशाब निकल पड़ा। पेशाब निकलते ही मुझे बड़ा आराम सा लगा। हम दोनों ही पेशाब करने लगे। मुझे लगा कि साथ ही मैं झड़ भी गया हूँ … वीर्य भी साथ निकल गया है … एक अजीबो गरीब अहसास … जो मुझे कभी नहीं हुआ था।

“शैली यह क्या हुआ … मेरा तो माल ही निकल गया … “

“मेरे दूध का असर था … मैं भी झड़ गई हूँ … तुमने मुझे आज पूरा सन्तुष्ट कर दिया है … अब तुम सो जाओ।”

“आअह्ह्ह्ह्ह्ह, ये क्या … मुझे गहरी नींद आ रही है … ।”

“मेरे प्यारे जो, तुम्हारे पापा, मेरे मित्र थे … अपनी मां से पूछना … मुझे तुम्हारे नाना ने मार डाला था … पर मैं तुमसे, तुम्हारे पापा से प्यार करती थी … तुम्हारे अन्दर मुझे डेविड हन्टर नजर आते है … तुमसे चुद कर यूँ लगता है जैसे डेविड ही हो … मुझे तुम्हारा हमेशा इन्तज़ार रहेगा।” जैसे मुझे कोई दूर से बोल रहा हो … मेरी पलकें बंद होती जा रही थी … मैं सोना नहीं चाह रहा था। शैली मेरे ऊपर लेटी हुई मुझे चूमे जा रही थी … । उसके प्यार की गर्मी से मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।

सुबह पन्डित मुझे जगा रहे थे … मेरा सर भारी था, पन्डित जी ने मुझे कॉफ़ी पिलाई … मेरा सर थोड़ा हल्का हुआ। अचानक मुझे रात वाली घटना याद हो आई … मैंने तुरन्त बिस्तर की ओर देखा … वो एक दम साफ़ सुथरा था … कोई पेशाब का दाग नहीं था।

“अब आप जाईये जो साहब … भाभी को मेरा प्रणाम कहना … !”

मैंने उन्हें धन्यवाद कहा।

मैं बाहर निकल आया … मौसम साफ़ था … मैंने कार स्टार्ट की और मडगांव की ओर चल पड़ा।

घर आ कर मैंने मां से शैली के बारे में पूछा तो उन्होने बताया कि शैली एक बहुत अच्छी लड़की थी, सुन्दर थी, पर मेरी शादी पापा से होने वाली थी। मेरे पापा को पता चला कि उनका किसी शैली नाम की बार गर्ल से प्यार था और शारीरिक सम्बन्ध भी था। तो वे भड़क उठे। एक बार पापा ने उन्हें आपत्ति जनक हालत में पकड़ लिया, शैली की तो डर मारे पेशाब निकल गई थी, उसके पेट में बच्चा भी था , पर तुम्हारे नाना बड़े बेरहम निकले और शैली की वहीं हत्या कर दी। उसे वो समुद्र में फ़ेंक आये … तुम्हारें पापा को दादा ने बहुत मारा था … … ।

मां बोलती रही … मैं वहाँ से दुखी मन से उठ कर बाहर आ गया … और मजबूर शैली के बारे में सोचने लगा … क्या प्यार करना गुनाह है ??? मैंने सोचा कि शैली से उस रात ही माफ़ी मांग लूंगा, पर उसकी सेक्स की इच्छा, पापा का प्यार जो उसे मुझमें नजर आता है, बच्चे को दूध पिलाने की चाह, पापा जैसा शरीर की चाह … ये तो उसकी ही इच्छा थी … फिर क्या कहूँ उससे … मैं उलझता ही जा रहा था … Hindi Sex Stories

दोस्तो, मेरा नाम राजवीर है. मैं 28 साल का हूँ.
मेरी बीवी का नाम हर्षा है और वह 25 साल की है.

हम लोग गुजरात में जूनागढ़ के रहने वाले हैं.

मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं.

अपनी बीवी को मैं बहुत प्यार करता हूँ. मेरी बीवी भी मुझे बहुत प्यार करती है.
मैं और मेरी बीवी अपनी अपनी फैन्टेसी हर तरीके से पूरी करते हैं.

यह पोर्न बीवी Xxx कहानी मेरी पत्नी की है.

एक दिन रात में बेड पर हर्षा ने मुझसे कहा- बेबी, आज मेरे साथ कुछ अजीब हुआ था.
मैंने कहा- क्या हुआ था डार्लिंग?

हर्षा- शाम को मैं जब बाल्कनी में खड़ी होकर कॉफी पी रही थी. तब रोड के पास से एक जवान लड़का साइकल पर खड़े होकर मुझको ताड़ रहा था.
मैंने कहा- सच में!

हर्षा- हां … और जब मैंने उसकी तरफ देखा, तो उस ने मुझे हाय का इशारा भी किया.
मैंने कहा- क्या … नहीं, वह तुम्हें कोई और समझ रहा होगा!
हर्षा- हां जी, मुझे भी ऐसा ही लगा और मैं भी उसे नजरअंदाज करके बाल्कनी से अन्दर आ गई.

मैंने कहा- अच्छा काम किया … चलो अब कुछ अपना मनोरंजन करते हैं.
हर्षा- हमेशा तुम्हें मेरी लेने की पड़ी रहती है … हा हा हा.

मैंने कहा- अब क्या करूं, तुम हो ही ऐसी माल!

और मैंने उसको अपने पास खींचा और उसके साथ चूमाचाटी करने लगा.

जल्दी ही हमारे कपड़े निकल कर दूर हो गए और चुदाई का कार्यक्रम चालू हो गया.
हम दोनों में दो बार धकापेल हुई और झड़ कर थक गए, फिर एक दूसरे से यूं ही नंगे लिपट कर सो गए.

अगले दिन सवेरे मैंने नाश्ता किया और ऑफिस चला गया.
लेकिन लंच करते हुए भी रात की बात मेरे दिमाग़ में चल रही थी कि कोई अजनबी लड़का मेरी बीवी को ताड़ रहा है और हाय भी बोल रहा है.

मैं भी इस बात को कुछ समय के लिए भूल गया और शाम को घर लौट आया.

हर्षा ने फिर बतायार- जी सुनो.
मैंने कहा- हां बोलो डियर!

हर्षा- वह जो कल आपको बोला ना … वह लड़के के बारे में!
मैंने कहा- हां हां … क्या हुआ? उसने आज भी कुछ किया क्या?

हर्षा- हां, आज भी उसने मुझे हाय का इशारा किया. मैंने इधर-उधर देखा तो उस वक्त हमारी बिल्डिंग में कोई भी बाहर नहीं था, सिर्फ़ मैं ही थी. तो मैंने भी उसको हाय कह दिया.

मैंने कहा- फिर?
वह- उसने मुझे इशारों इशारों में कहा कि तुम बहुत खूबसूरत हो. मैं थैंक्यू कह कर अन्दर आ गई.

मैंने कहा- ओह … क्या तुम्हें वह लड़का परेशान कर रहा है?
हर्षा- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है. वैसे भी अगर कुछ परेशानी होती, तो तुम्हें कह देती.

मैंने कहा- ठीक है. अगर वह कुछ परेशान करता है, तो मुझे बताना.
हर्षा- ओके बेबी.

मैंने उस चीज़ को अनदेखा किया।

अगले दिन मेरी बीवी ने फिर से मुझसे कहा- बेबी सुनो, वह लड़का आज भी आया और उसने आज भी इशारे में बात की. मैंने भी थोड़ी बात की. उसने इशारे में मुझे अपना नंबर दिखाया, जिसे मैंने नोट किया पर कॉल नहीं किया. उसने इशारा किया कि वह कुछ बात करना चाहता है.

मैंने कहा- अगर तुम्हें लगता है कि वह अच्छा लड़का है, तो उससे दोस्ती कर लो. वैसे भी यहां तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है. वह शायद यहां पर तुम्हारी कुछ मदद कर दे.
हर्षा- ठीक है बेबी … कल करती हूँ.

अब मेरे मन में भी अब उस लड़के को लेकर कुछ ग़लत विचार आने लगे थे.
लेकिन मैंने सोचा कि वह लड़का शायद वैसा नहीं है.
इसी लिए मैंने इस चीज़ को अनदेखा कर दिया.

अगले दिन मैंने हर्षा से पूछा- हर्षा क्या हुआ उस लड़के का?

हर्षा- हां वह लड़का अच्छा है. आज भी शाम आया था … तो मैंने उसको देखते हुए कॉल किया. उसने भी एक रिंग में ही कॉल उठा लिया.

अब उस लड़के ने कॉल पर बताया कि क्या हुआ.

अजनबी लड़का- नमस्ते भाभी.
हर्षा- नमस्ते तुम्हारा नाम?
अजनबी- जी मैं यश … और आपका नाम?
हर्षा- जी, मैं हर्षा.

यश- ओह बहुत प्यार नाम है.
हर्षा- हां … यश तुम हमेशा मेरी बाल्कनी में क्यों देखते रहते हो?

यश- वह हर्षा भाभी ये घर 3 साल पहले हमारा था. जिसे डैड ने बेच दिया था. लेकिन इस घर से मेरा बचपन जुड़ा है सो हर दिन आकर देखता हूँ.

हर्षा- ओह … मगर पहले तुम्हें कभी नहीं देखा. इन चंद दिनों में ही तुम कई बार दिखे.
यश- वह भाभी, मैं राजकोट चला गया था. अब वापस आ गया हूँ.
हर्षा- ओह …

उसके बाद कुछ ऐसे ही डेली लाइफ की बात होती रही पर उससे आगे कुछ नहीं.
फिर उसने खुद ही बाय कह कर कॉल कट कर दिया.

मैंने कहा- क्या तुमने यश को नया दोस्त बना लिया है?
हर्षा- हां हां … उसने कहा अगर मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हो तो वह एक बार घर आकर अन्दर से देखना चाहता है.

मैं समझ गया कि वह भावनाओं में बांध कर मेरी बीवी के पास आना चाहता है.
पर मुझे मेरी बीवी पर यकीन था इसलिए मैंने भी उसको इग्नोर करके कहा- ठीक है बुला लो, कोई प्रॉब्लम नहीं है.

हर्षा- ओके बेबी, कल बुला लूँगी.
मैंने कहा- ओके बेबी.

अगले दिन मैं ऑफिस से घर आया.
तब हर्षा ने मुझसे कहा- वह लड़का आया था.
मैंने पूछा- क्या कहा उसने?
तब हर्षा ने कहा- कुछ नहीं, उसने अपने बचपन की बातें बताईं. बड़ा क्यूट है और बातों-बातों में ही वह रोने लगा. मैंने उसको अपना कंधा दिया. वह मुझे हग करके रोने लगा. फिर हम दोनों ने कुछ सेल्फ़ियां भी ली थीं.

मैंने कहा- दिखाना सेल्फ़ियां!
हर्षा- हां ये देखो.

अब मैंने देखा, वह लड़का अच्छा था.
कुछ फ़ोटोज में उसने अपना हाथ हर्षा के ऊपर रख रखा था.

मैंने कहा- हम्म … अच्छा लड़का है.
हर्षा- हां.

अब मैं समझ चुका था कि लड़का कुछ तो करेगा.
पर मैं अपनी बीवी को परखना चाहता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती है या नहीं. तो जो भी हो रहा है, उस सबको इग्नोर करने का ठान लिया.

कुछ दिन ऐसे ही चला.
ये दोनों कॉल बात करते.
जब मैं हर पर नहीं रहता, वह घर आता और मेरी बीवी हर्षा से बातें करता.

एक दिन हर्षा ने मुझसे कहा कि उसको शॉपिंग करने जाना है.
मैंने कहा कि मैं बिज़ी हूँ.

तो उसने कहा- फिर मैं यश के साथ जा रही हूँ.
मैंने भी कहा- हां ठीक है चली जाओ.

उसने मेरे सामने ही यश को फोन किया.
वह तय समय पर आ गया और दोनों ऑटो में जाने लगे.

मैंने उन दोनों के जाते ही घर में कैमरे और माइक्रोफोन्स सैट कर दिए.
पूरा घर अपने कंट्रोल में सैट कर दिया जिससे वह जो भी करे, उस सबका मुझे पता चल जाए.

अब मैं घर पर उन दोनों के आने का इंतज़ार करने लगा पर वे दोनों आए ही नहीं.

मैं नजदीक के मॉल में गया.
उधर पार्किंग एरिया में अपनी कार के पास खड़ा होकर उनके आने का इंतजार कर रहा था.

तब वह दोनों कई सारे शॉपिंग बैग लेकर आते दिखे.
सारे थैले यश ने उठाए हुए थे.

किसी कारण से बीच में कुछ बैग गिर गए तो वह बैग उठाने लगा.

मैंने देखा कि उस वक्त हर्षा हंस रही थी.
यश ने मायूस सी शक्ल बनाई तो हर्षा ने उसको बैग उठा कर दे दिए.
वह तब भी कुछ उदास सा था.

तब हर्षा ने उसके गाल पर एक छोटी सी पप्पी कर दी.
मैं ये देख कर शॉक हो गया था.

वह दोनों ऑटो करके घर आ गए.
मैं भी वापस आ गया.

मैंने नीचे खड़े होकर अपने मोबाइल पर देखा कि वे दोनों क्या कर रहे हैं.

मेरे घर के हिडन कैमरे आदि वाई फ़ाई से जुड़े हुए थे.
मैं देख कर शॉक हुआ कि यश हर्षा को किस कर रहा है.

हर्षा- उमम्म … उम्माह …. ओंम …
यश- आह … उम्म … उम्म …

फिर थैले वहीं रख कर उसने हर्षा को सोफे पर गिरा दिया और उसे किस करने लगा.

किस करते हुए ही उसने हर्षा के कपड़े निकाल दिए.
साथ ही यश ने भी अपने कपड़े निकाल दिए.

वह हर्षा की टांगों को अपने कंधे पर रख कर उसे चोदने लगा.

हर्षा- आह … उम्म … एकदम से पेल दिया … आह मर गई.
यश- आह … बहुत टाइट हो यार आह!

भकाभक चोदते हुए उसने हर्षा के बूब्स हाथ में पकड़ लिए और एक को चबाते हुए वह मेरी बीवी की चूत में अपना लंड तेज रफ्तार से चला रहा था.

हर्षा- आह … आह … यश बेबी आरामम्म … सेए … आह.
यश- आह … आ … क्या … … मम्मे हैं भाभी तेरे … आह … मस्त माल है यार तू.

कुछ देर बाद यश और हर्षा दोनों झड़ गए.

यश- अहह …
हर्षा- उई मांआ … आअहह … तोड़ दिया … आह.

वे दोनों हांफ रहे थे.

कुछ देर बाद वे अलग हुए और यश अपने कपड़े पहन कर वहां से जाने लगा.
हर्षा अभी भी सोफे पर नंगी पड़ी थी.

मैंने देखा कि यश नीचे आ गया था और सड़क पर आने लगा था.
उसे आता देखकर मैं छिप गया.

बाद में मैंने फोन में फिर से देखा, हर्षा उठ कर अपने कपड़े पहनने लगी.

कुछ देर बाद देखा कि हर्षा रो रही थी.

अब मैं समझ गया कि हर्षा बहक गयी और वासना में उससे चुद गयी थी.

मैंने उसको इस बात का पता नहीं चलने दिया कि मैं उसकी हरकत जानता हूँ.

उस दिन हर्षा सारे दिन चुप रही और अपने ही ख्यालों में डूबी रही थी.

अगले दिन सवेरे जब मैं सो रहा था. तब हर्षा के फोन पर यश का कॉल आया कि वह नीचे है और पार्किंग में मिलना चाहता है.
उसने मना कर दिया.

यश ने कहा- सिर्फ़ माफी मांग कर चला जाऊंगा और कभी नहीं दिखूंगा.

उस वक्त मैं आंख बंद करके सुन रहा था.
फिर मैंने देखा कि हर्षा जा रही है.

उसके जाने के पांच मिनट बाद मैं भी नीचे आया और पार्किंग में एक कार के पीछे खड़ा हो गया था.

यश अपनी साइकिल से आया था.

हर्षा लिफ्ट से नीचे आई और उसे देख कर उसने कहा- अब क्या बचा? तुमको मैं दोस्त समझती थी, पर तुमने मुझे ग़लत समझा … छी!
यश- आई एम सॉरी. जो भी हुआ … पर जो भी हुआ तुम भी उससे खुश थी ना!

हर्षा- क्या मतलब तुम्हारा?
यश- हां, तुम मज़े से मुझसे चुदवा रही थीं ना!

हर्षा- ऐसा नहीं है, वह हालात के चलते ऐसा हो गया था.
यश- अगर ऐसा है तो मुझे क्यों नहीं रोका?

हर्षा चुप रही.
यश- तुमने मुझे वहां मॉल की पार्किंग एरिया में भी तो किस किया था. उसका क्या मतलब था?

हर्षा- तुम बहुत खराब लड़के हो. तुम मुझे फिर से कभी मत दिखना … चले जाओ.
यश ने हर्षा को पकड़ कर दीवार से सटा दिया और उसे किस करने लगा.

यश- उम्म म्मा उम्माह.
हर्षा विरोध करने वाला किस कर रही थी- नहीं … एमेम .. उम्माह.

यश ने थोड़ी देर किस किया और कहा- ये लो गिफ्ट … इसको पहन लेना और रेडी रहना. दोपहर में आकर तुम्हारी डोरबेल बजा कर 4 बार नॉक करूँगा. दरवाजा खोल देना. अगर नहीं खोला, तो चला जाऊंगा. आगे तुम्हारी मर्ज़ी.

ये बोल कर वह चला गया.
हर्षा वहां पर एकदम बदहवास हाल में थी और एकदम चुप थी.

वह यश की दी हुई ड्रेस को लेकर लिफ्ट की ओर जाने लगी.
मैं भी भागता हुआ दूसरी लिफ्ट से फ्लैट में पहुंचा और उसके अन्दर आने से पहले मैं बेड पर पड़ा था.

वह आई, मुझे देखा और आंखों से आंसू पौंछती हुई बाथरूम में चली गई.
उसने अपनी उस ड्रेस को कपबोर्ड में रख लिया.

मैं उठा और तैयार होने लगा. मैंने ऐसा दिखाया जैसे कुछ नहीं हुआ.

फिर जैसे ही हर्षा ने ब्रेकफास्ट दिया.
मैं खाकर चला गया.

जाते हुए मैंने सोच लिया कि अगर इस बार हर्षा ने कुछ किया मतलब ये मुझे धोखा दे रही है. मैं इसको तलाक दे दूँगा. क्योंकि यश ने साफ कहा था कि दरवाजा खोलना.
अब ये हर्षा के ऊपर है कि वह क्या करती है.

उस दिन मैं ऑफिस नहीं गया.
घर से निकल कर एक ग्राउंड में जाकर कार पार्क करके बैठ गया और फोन में देखने लगा.

हर्षा अपना काम कर रही थी.
कुछ देर बाद वह अपने रूम में गयी.

उसके कुछ देर बाद वह बाथरूम में यश की दी हुई ड्रेस को लेकर चली गयी.
जब वह बाहर आई तो मैं चौंक गया.
उसने एकदम झीनी ड्रेस पहनी हुई थी.

कुछ देर बाद डोर बेल बजी और दरवाजा चार बार नॉक किया गया.

पहली बार हर्षा ने नहीं खोला.
दूसरी बार उसने खोला तो देखा सामने यश था.

उसने हर्षा को देख कर उसको दरवाजे से ही पकड़ लिया और किस करना चालू कर दी.

हर्षा ने दरवाजा बंद कर दिया और यश उसको किचन में ले गया.

धीरे धीरे उसके सारे कपड़े निकाल कर हर्षा को किचन के प्लेटफॉर्म पर टिका कर चोदना चालू कर दिया.

हर्षा- आह … आह … धीरे करो!
यश- आह चैन कहां मिलता है तुम्हें देख कर … बस कच्चा खा जाने का जी करता है … आह लो और लो … आह.

वह हर्षा को चोदते हुए ही उठा कर बेडरूम में ले गया और वापस चोदने लगा.

हर्षा- आह मां … आह कितनी अन्दर तक पेल रहे हो … हाड़ मांस की ही हूँ ऐसे मत कुचलो यश आह … धीमे करो ना!
यश- आह उफ़फ्फ़!

कुछ ही देर में मेरी Xxx बीवी हर्षा की चूत ने अपना गर्म लावा छोड़ दिया.

हर्षा- उई मां आहह … आह.
यश- आ हां हर्षा यू आर सो हॉट बेबी.

यश ने अपना लंड हर्षा की चुत से बाहर निकाल कर उसको दिखाया. उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था.

यश हर्षा को घुमा कर उसकी गांड के छेद में डालने लगा.

हर्षा मना कर रही थी.
वह फिर भी नहीं माना.
सने अपना लंड हर्षा की गांड के छेद में डाल ही दिया.

हर्षा- आआआ आह मर गई!
यश- आह … उफ्फ़!

कुछ देर बाद यश का पूरा लंड हर्षा की गांड में चला गया और वह हर्षा की गांड मारने लगा.

यश- आह … जान मजा आ रहा है ना!
हर्षा- आह साले तू बहुत कुत्ता है आह पीछे से भी फाड़ दी तूने … आह एयेए!

कुछ देर बाद वह हर्षा की गांड में झड़ गया.
यश- आआआह.

फिर वह उठा और उसने हर्षा को लंड चूसने को कहा.

मेरी पोर्न बीवी हर्षा ने बहुत देर लंड को चूस कर यश को मजा दिया.
उसका लंड फिर से तन गया था और जब तक यश का लंड फिर से नहीं झड़ा, तब तक यश ने हर्षा के मम्मों में लंड फंसा कर चोदा, उसकी जांघों में लौड़ा फंसा कर रगड़ा और आखिर में यश ने हर्षा के मुँह में अपना गाढ़ा लावा डाल दिया.

इस तरह से उन दोनों ने तीन घंटे तक चुदाई की और काफी थक गए.

वे दोनों बेड पर वैसे ही नंगे पड़े थे.

मैं जो भी फोन से देख रहा था, उससे मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.

वह सब देख कर मैं मुठ मारने लगा और शांत हो गया.

मैंने तय किया कि ये भी मेरी एक फैन्टेसी की तरह है. अब हर्षा को तलाक देना कैंसिल … अब से उसकी चुदाई दूसरों के साथ देखना चालू.

उस दिन से मैंने कई बार फोन में यश को हर्षा की चुदाई करते देख कर अपना लंड हिलाया.
न जाने क्यों मुझे भी मज़ा लंड हिलाने में मजा आने लगा था.

मैंने हर्षा को साथ ही रखा क्योंकि मुझे उसका ये रंडीपना पसंद आने लगा था.

वह मुझसे छुप कर सेक्स करती थी तो ये और भी पसंद आने लगा था.
इस तरह से हम तीनों मज़े ले रहे थे.

हर्षा भी मुझसे झूठ बोल कर कह देती थी कि यश बहुत ही समझदार दोस्त की तरह पेश आता है.
मैं भी उसकी बात को सुनकर नजरअंदाज कर देता था.

Antarvasna stories

दोस्तो Antarvasna story, मेरा नाम मनदीप है, उमर २० और लम्बाई ५’९”। हमारा सारा परिवार एक ही घर में रहता है।

मैं आज आपको अपने जीवन की एक बड़ी ही सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहा हूं।

इस घटना से पहले मैं भी बड़ी सेक्सी फ़िल्में देखता था पर इसके बाद से तो मेरी लाइफ़ ही एक सेक्सी फ़िल्म जैसी हो गई है।

यह बात आज से करीब एक साल पहले की है जब हमारा सारा परिवार किसी की शादी में गया हुआ था और हमारे घर में कोई नहीं था। इसलिये मैं अपनी ताई जी के साथ शाम को घर वापिस आ गया। मेरी ताई की उमर ४७ साल और लम्बाई ५’८” है और उनकी फ़ीगर ४० -३५ -४० की है यानि कि वो थोड़ी मोटी है पर ऐसा होने पर भी वो बड़ी सेक्सी नज़र आती है।

जब पहले भी कभी मैं और ताई घर में अकेले होते थे तो ताई बिना चुनरी लिये काम किया करती थी मैंने कई बार उनकी झुक कर काम करते समय गोरी गोरी छाती देखी थी। उनके वो बड़े बड़े बूब्स हमेशा ही मेरी आंखों के सामने घूमते रहते थे।

उस शाम को जब ताई घर का काम कर रही थी तो उन्होंने सलवार कमीज पहना हुआ था। गरमी का मौसम होने के कारण उनके कपड़े पतले थे और उसमें से उनके अंदरूनी कपड़े ब्रा और चड्ढी साफ़ नज़र आ रहे थे। मैं उस वक्त टीवी देख रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान ताई की गांड और बड़े बड़े बूब्स पर था।

रात को भोजन खा के हम दोनों अपने अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझ को देर रात तक टीवी देखने की आदत है है इसि लिये मैं करीब रात ११:३० तक टीवी देखता रहा।

सोने से पहले जब मैं पेशाब करने के लिये जाने लगा तो मैंने देखा कि ताई अभी तक जाग रही है। मैंने पेशाब करके वापिस आ कर ताई से पूछा कि क्या बात है उन्हें नींद क्यों नहीं आ रही तो ताई ने बताया के उसके पेट में बड़ा दर्द हो रहा है।

तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं उनकी कोई मदद कर सकता हूं तो उन्होंने कहा के मुझे सरसों का तेल थोड़ा गरम कर के ला दो।
मैं तेल गरम कर लाया मैंने पूछा कि क्या मैं आप के पेट की मालिश कर दूं?
तो उन्होंने कहा ठीक है।

मैंने उनके पेट पर से कमीज ऊपर कर दिया मैंने उनके पेट की मालिश करनी शुरु कर दी। मैं करीब ३० मिनट तक उनकी मालिश करता रहा उसके बाद उनके पेट का दर्द ठीक हो गया पर अभी भी थोड़ा सा तेल बच गया था तो उन्होंने कहा कि इसे उनकी पीठ पर लगा दो।

ताई की पीठ से उनका कमीज ठीक से ऊपर नहीं हो रहा था ताई बोली कि चलो मैं कमीज ही उतार देती हूं। ताई कमीज उतार कर लेट गयी और मैं उनकी लातों पर बैठ कर उनकी पीठ की मालिश करने लग गया ऐसा करते समय मैंने कई बार अपना हाथ उनके बूब्स पे लगाया पर वो कुछ न बोली। फिर मालिश करने के बाद अपने कमरे में चला गया।

अभी मुझे लेटे हुए थोड़ा वक्त ही हुआ था कि ताई मेरे कमरे में आ गयी और मेरे ऊपर बैठ गयी। मुझे पता नहीं चल रहा था कि मैं क्या करूं मैंने ताई से पूछा कि आप यह क्या कर रही हो तो वो बोली कि आज तूने मेरे बूब्स को हाथ लगा कर कई सालों से मेरे अंदर की सोई हुई औरत को जगा दिया है और अब इसकी गरमी को ठंडा भी तुम्हें ही करना पड़ेगा।

वो ताई जिसके साथ नंगा सोने के मैं सिर्फ़ सपने ही देखता था वो आज मेरे ऊपर बिना कमीज के बैठी हुई थी। मेरा सपना सच होने जा रहा था इस लिये मैं बहुत खुश था।

फिर मैंने और ताई ने अपना काम शुरु कर दिया उसने अपने होंठ मेरे होंठों में डाल लिये और २-३ मिनट मुझे चूमती रही। पहले मैने अपनी जीभ ताई के मुंह में डाल दी और फिर उसने मेरे। फिर ताई ने अपनी सलवार उतार दी और अब उसने सिर्फ़ ब्रा और चड्ढी ही पहनी हुई थी।

वो बिस्तर पर लेट गयी और मैं उसके ऊपर फिर हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूजे को चूमते रहे कभी मैं उसकी छाती को चूमता कभी उसके पेट को तो कभी लातों को। फिर ताई ने अपनी ब्रा उतार दी और मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स चूसने शुरु कर दिया उसका दूध बड़ा मीठा था मैं अब भी कई बार उसका स्वाद चखता हूं।

फिर ताई ने अपनी चड्ढी भी उतार दी और मेरे साथ लेट गयी ताई की चूत बहुत बड़ी थी उसको चाटना शुरु कर दिया फिर ५-६ मिनट में ताई पहली बार झड़ गयी उसके बाद ताई ने मेरा बड़ा सा लंड अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लग गयी. मैंने भी उनके मुंह में ही पिचकारी मार दी।

ताई ने कहा कि चलो अब असली काम करते हैं और ताई लातों को थोड़ा खोल कर सीधी लेट गयी.
मैंने ऊपर से अपना लंड ताई की चूत में डाल दिया वो बड़ा खुश थी क्योंकि आज बड़े वक्त बाद उसकी चूत में लंड घुसा था।

मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरु कर दिया ताई ने भी आआअ ईए ऊऊह माआ हाआ हाअ की आवाज़ें निकालनी शुरु कर दी।
मैं करीब १ घंटे तक ताई की चूत चोदता रहा इसमें ताई दो बार झड़ गयी।

फिर मैंने ताई को कहा कि मैं अब उसकी गांड मारना चाहता हूं.
और ताई घोड़ी बन गयी. मैंने लंड को गांड में घुसेड़ दिया.

ताई की गांड बड़ी तंग थी, उसे दर्द हुआ और वो चिल्ला दी- आऐईईईईए माआआअ!
मैंने जोर जोर से लंड आगे पीछे करने शुरु कर दिया और १५ मिनट तक ताई को चोदता रहा। मैंने ताई जैसे गरम औरत की कभी नहीं ली थी।

फिर मेरा छूट गया और मैं ताई को चूमने लग गया।
ताई ने बोला कि मैं एक बार फिर उनकी चूत मारूं. और इस बार वो मेरे ऊपर बैठ गयी और अपने आप हिल हिल कर धक्के देने लगी।
मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर हम सारी रात ही नंगे सोये रहे सुबह उठ कर ताई ने फिर मुझे अपने बूब्स चुसवाये और चूमा भी। उसके बाद तो जब भी हम दोनो घर में अकेले होते हैं तो एक पति-पत्नी की तरह रहते हैं। Antarvasna

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