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अलोन गर्ल नंगी कहानी एक ऐसी लड़की की है जो एक अपार्टमेन्ट में अकेली रहती है, सेक्स की शौकीन है, कहानियाँ लिखती है. उसके पड़ोस में 3 लड़कोण पर उसकी नजर है चुदाई के लिए!
दोस्तो, मेरा नाम शनाया उर्फ सन्नो है.
मैं आपको एक ही बिल्डिंग में रहने वाले तीन अलग अलग युवाओं से अपनी चूत गांड की चुदाई की कहानी सुना रही हूँ.
पिछली सेक्स कहानी
अन्तर्वासना की लेखिका चुदी एक लेखक से
में आपने लेखक अनुज के साथ मेरी चुदाई का जायका लिया था.
मेरी अलोन गर्ल नंगी कहानी थोड़ी लंबी है, क्योंकि इसमें एक महीने की पूरी चुदाई की घटनाओं का विस्तार से जिक्र है.
मेरी अनुज से मुलाकात और उसके साथ चुदाई के बाद अब जय की बारी थी.
जय मुझे अच्छा लगता था. मेरी उससे बात होती थी.
वह बातचीत से उतना सीधा-सादा तो नहीं लगता था जितना मैं समझती थी.
अनुज अपने घर गया था, उसको एक हफ्ते बाद वापस आना था.
अनुज के जाने के दो दिन बाद जय के कमरे की लाइट खराब हो गयी थी.
मैंने उस दिन जय को चाय पर बुलाया.
वह आया और बैठ गया.
हम दोनों ने चाय पीते हुए बातें की.
रात होने को थी.
जय कहने लगा- मैं अपने फ्रेंड के यहां चला जाता हूं. कल लाइट ठीक करा लूंगा.
मैंने कहा- जय, यदि चाहो तो तुम यहीं सो सकते हो. मैं तुम्हारे साथ बेड शेयर कर सकती हूं.
उसने झट से हां कर दी.
जैसा कि मैंने बताया था कि जय एक कबड्डी प्लेयर था और काफी मस्त था.
हम लोग खाना खाने लगे.
मैंने उसके खाने में कामशक्ति बढ़ाने वाली गोली मिला दी और उसे खाना खिला दिया.
अब करीब 10 बजने को थे.
हम दोनों बेड पर लेट गए और सोने लगे.
मैं जानबूझकर उसी की तरफ पीठ करके करवट लेकर सो गई थी.
मेरे बदन पर एक मैक्सी थी, जिसे ऊपर करके पूरा बदन देखा जा सकता था.
मैंने पैंटी भी ऐसी पहनी थी कि लंड डालो तो एक तरफ हो जाएगी.
करीब एक घंटा बाद जय को बेचैनी होने लगी थी.
मैं उसको दवाई के असर से तड़पता हुआ महसूस कर रही थी.
मैंने उसके लंड को महसूस किया कि उसके लंड ने मेरी टांगों में दस्तक देनी शुरू कर दी.
मैं बेसुध होने का ड्रामा करती रही.
जय ने मेरी मैक्सी को ऊपर कर दिया.
मैं सोने का नाटक करती रही.
उसने मेरी पैंटी को निकाल दिया.
अब मैं उसका मोटा लंड अपनी टांगों के जोड़ में महसूस करने लगी थी.
तभी उसके थूकने की आवाज आई, मैं समझ गई कि लंड में थूक लगाया जा रहा है.
फिर कुछ ही पल में मेरे चूतड़ों के पास उसके लंड का टोपा महसूस हुआ.
मैंने अपने हाथ को अपने मुँह पर रख लिया और लंड की हरकत को महसूस करने लगी.
जय अपने कड़क लंड को आराम से मेरी गांड में डालने लगा था.
उसका लंड अनुज के लंड बराबर मोटा नहीं था, तब भी काफी कड़क था.
आखिरकार उसने लंड गांड की तरफ से चूत में पेल दिया और मैं अपने मुँह पर हाथ रख कर सोती रही.
मेरा चिल्लाने का मन था लेकिन नहीं चिल्लाई, अपने हाथ से अपनी पूरी आवाज दबा ली.
उसने एक तेज झटके मारा और लंड पेल दिया.
वह किसी वहशी दरिंदे के जैसे मुझे चोदने लगा था.
मैं अब उठने को तैयार हो गई थी.
जब चुदना है ही, तो पूरा मजा लेकर चुदने का सोचा और मैं आआह आआह करके उठ गई.
मैं ड्रामा करती हुई एकदम शॉक्ड आवाज में बोली- जय, ये सब क्या है आआह मम्मी!
जय- शनाया रुको, कुछ नहीं है … मैं बस चैक कर रहा था शनाया.
उसने मुझे अपनी तरफ खींच कर फिर से एक तीव्र झटके के साथ लंड अन्दर डाल दिया.
मैं- आआह जय नहीं … प्लीज यह सब गलत है … आआह जय नहीं आआह.
जय तेज तेज झटके मारते हुए मेरे हाथ पकड़े हुए था और कह रहा था- आह शनाया … बस रुक जाओ थोड़ी देर बस प्लीज शनाया.
मैं- आआह आआह जय आआह जय आआह मम्मी … दर्द हो रहा है आआह.
जय- नहीं शनाया, अब दर्द नहीं होगा बस … थोड़ा रुक जाओ … बस थोड़ी देर और … आह.
यह कह कर वह तेज तेज चोदने लगा.
मैं- आआह जय आई जय ईई जय आराम से करो जय … आराम से करो.
यह सुनकर अब जय ने मेरे हाथ छोड़ दिए और वह मुझे किस करने लगा.
वह मुझे किस करते हुए ही चोद रहा था.
मैं- आआह जय ईईईई आआह.
तभी उसने मेरी चूत से लंड बाहर निकाल लिया.
जय ने अब मेरे कपड़े निकाल दिए और मुझे पूरी नंगी कर दिया.
वह मेरे मम्मों को मसलने लगा और कहने लगा- वाह शनाया क्या माल हो तुम … इतने गोरे गोरे टाइट मम्मे पहली बार देखे हैं.
वह मेरे एक दूध को चूसने लगा और मेरे दोनों पैर फैला कर वापस लंड चूत में डाल दिया.
लंड अन्दर गया और उसके धक्के लगने लगे.
वह तेज रफ्तार में मुझे चोदने लगा था और साथ ही मेरे दोनों दूध बारी बारी से चूसने लगा था.
मैं कराहने लगी थी- आऊच … जय आआह … आऊच जय आआह … इतनी तेज मत चूसो … आह दर्द हो रहा है आईई ईई ऊऊ जय बस करो अब नहीं!
जय मेरी किसी बात को आज मानने वाला नहीं था.
वह तो आज मुझे सड़कछाप रंडी बनाने के मूड में दिख रहा था.
कुछ देर बाद उसने वह उठाया और लंड जबरदस्ती मेरे मुँह में डाल कर बोला- आह लो चूस लो इसको … चूसो न यार!
मैं क्या करती … मुझे तो लंड चाहिए ही था. मैं भी उसका लंड चूसने लगी.
वह अपने लंड को मेरे मम्मों के बीच में फंसा कर मेरे दोनों दूध दबाते हुए मसलने लगा.
यह सब उसने पोर्न वीडियो के जैसे किया था जैसे ब्लू फिल्म में पोर्नस्टार करते हैं.
फिर उसने मुझे खड़ा कर दिया और मेरा एक पैर ऊपर उठाकर लंड को मेरी चूत में लगा कर वापस चोदने लगा.
वह दवा के प्रभाव में था तो जल्दी झड़ने का मतलब ही नहीं था.
कुछ देर चुदाई करने के बाद उसने मुझे बेड पर पटका और ताबड़तोड़ चोदने लगा.
उसने अपनी चुदाई की स्पीड तेज कर दी थी.
मैं भी उत्तेजित हो गई थी और जय को अपनी बांहों में भर कर उससे अपने जिस्म को कुचलवा रही थी.
कराब आधा घंटा तक जबरदस्त चुदाई के बाद मैं समझ गई थी कि अब वह झड़ने वाला है.
वह ‘आह लव यू बेबी.’ कहते कहते झड़ने लगा और पूरा वीर्य झाड़ कर वह मेरे ऊपर ढह गया.
मैं उसकी पीठ को सहलाने लगी.
लेकिन मैं अभी भी झड़ी नहीं थी.
मैं बोली- जय थोड़ी और दम साध कर मुझे चोद दो. मैं भी झड़ना चाहती हूँ.
वह मुझसे कुछ मिनट मांगने लगा लेकिन मैं इतना नहीं रुक सकती थी.
कुछ मिनट बाद मैंने जय को लिटाया और उसके ऊपर आकर उसका लंड चूसने लगी.
लंड चूसने से लंड खड़ा हो गया.
मैं लपक कर लंड पर बैठ गई.
उसका लंड अब मेरी चूत में समा गया था.
मैं उसके लौड़े पर उछलने लगी.
मेरे उछलते समय वह मेरे दोनों दूध पकड़ कर मसलने लगा और अपना सिर ऊपर करके एक एक करके मेरे दोनों दूध चूसने लगा.
मैं करीब दस मिनट उसके लंड पर उछलती रही.
फिर मैं भी टूटने की कगार पर आने लगी.
मेरे मुँह से निकलने लगा था- आह जय मैं आ रही हूँ … आह जय.
वह तेज तेज चुदाई करने लगा.
मैं कट कर उसके सीने पर गिर गई और मेरे शरीर में ऐंठन सी होने लगी थी.
उधर जय नहीं रुका.
वह मुझे अपने सीने से दबा कर चोदता रहा.
फिर वह भी झड़ गया.
ऐसे ही मैं उसके ऊपर चढ़ी हुई सोने लगी.
दस मिनट बाद जय ने मुझे उठाया और बाथरूम में ले जाकर मेरी चूत साफ करने लगा.
वह अपने लंड को भी साफ करने लगा.
मैं बहुत थक चुकी थी.
जय मुझे उठा कर अन्दर लाया और बेड पर लिटा दिया.
मेरे साथ में वह भी लेट गया.
मैं उसकी बांहों में सुकून की नींद सो गई.
सुबह करीब 9 बजे मेरी नींद खुली.
जय का लंड उस वक्त मेरी चूत में था.
मेरा एक दूध उसके मुँह में था और जय सो रहा था.
मैं जैसे ही थोड़ी सी हिली तो मुझे दर्द हुआ.
मैंने जय को जगाया और उससे पूछा- जय ये कब से डाल रखा है तुमने?
जय बोला- अरे यार मेरी सुबह 5 बजे नींद खुली. तुम एसी की ठंडक से कुछ हिल सी रही थीं, तब मैंने तुम्हें चादर उढ़ाई और अपने से सटा लिया. तभी लंड खड़ा हो गया, तो मैंने अन्दर डाल दिया और मैं लिपट कर सो गया. तुमने करवट लेकर फिर से लंड डलवा लिया और मैंने तुम्हारे एक दूध को मुँह में लगा लिया. फिर हम दोनों सो गए थे. तुम नींद में थीं, यह तबकी बात है.
फिर मैंने उसे प्यार से अपने आप से चिपकाया और लेटी रही.
कुछ ही देर में हम दोनों पुनः सो गए.
फिर हम लोग 12 बजे उठे और जय अपने घर चला गया.
मैंने मेल से अपने ऑफिस में आज का अपना ऑफ डाल दिया और कुछ काम करके सो गई.
सारे दिन मैं सोती रही और रात को जब भूख लगी, तब उठी और डिनर ऑर्डर करके खाना मँगवा कर खाया.
अगले दिन मैं ऑफिस गई.
जय के साथ अलोन गर्ल नंगी कहानी इतनी ही है.
अब तक ये दोनों लड़के मेरी मुट्ठी में आ चुके थे.
तब बारी थी सोहन की जो हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ा भी था.
उसे सैट करना मामूली सा काम था.
सोहन शरीर से सबसे अच्छा था. वह एक जिम में ट्रेनर था.
मैंने उसके कहने पर उसकी जिम जॉइन की.
वह मुझे जिम में सिखाने लगा था.
कुल तीन दिन जिम करने के बाद चौथे दिन मेरा पैर फिसल गया.
मैं जिम में गिर पड़ी.
उस दिन सोहन अपनी कार में मुझे घर लाया.
मैं ठीक थी … लेकिन मैं फिर से जिम नहीं जाना चाहती थी क्योंकि मेरे फिगर और मम्मों की वजह से सब मुझे ही देखते थे.
मैंने सोहन से कहा- कमर में दर्द है, मैं अब जिम नहीं जाऊंगी.
सोहन मेरा अच्छा फ्रेंड बन चुका था.
वह बोला- कमर के दर्द को मैं चुटकियों में ठीक कर दूंगा. लेकिन तुम जिम जाना बन्द नहीं करोगी.
मैंने कहा- मैं वहां नहीं जाऊंगी.
उसने कहा- ओके मैं कमर पर मालिश कर दूँगा, फिर तुम घर पर ही एक्सरसाइज करना. मैं तुम्हें यहीं सिखाने आ जाया करूँगा!
इस तरह से वह मेरे घर आने लगा.
मैं सोहन के साथ में मजे लेने की जुगत में थी.
उस दिन मैंने अचानक दर्द होने का नाटक किया तो वह बोला- मालिश करने वाली लड़की तो कल आएगी.
मैंने कहा- और आज मैं दर्द से मरी जा रही हूँ, उसका क्या?
वह बोला- तो मालिश मैं कर देता हूं. मुझे मसाज आयल दो.
मैं कहा- ओके मसाज आयल उधर से ले लो.
सोहन आयल लाकर बोला- शनाया, तुम्हें उल्टा लेटना पड़ेगा और अपने कपड़े भी निकाल दो.
मैं अन्दर बिल्कुल पतली ब्रा और पतली बद्दी की पैंटी पहनी हुई थी.
मैंने कहा- सॉरी सोहन, मैंने अन्दर सही कपड़े नहीं पहने हैं.
वह बोला- ठीक है, तो मसाज बाद में करा लेना.
मैं बोली- अरे यार सोहन, दर्द तो अभी है … तुम मसाज कर दो.
मैंने कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गई.
मेरी डोरी वाली पैंटी में मेरे दोनों चूतड़ पूरे नंगे थे और उसके सामने पूरे पूरे साफ खुले हुए थे.
बस कमर में एक बद्दी सी थी जिससे चूत एक त्रिभुजाकार कपड़े से ढकी हुई थी.
सोहन- शनाया में नहीं कर सकता, मेरी एक कमजोरी है.
मैं बोली- क्या कमजोरी है?
वह बोला- यह सब देखने से मेरा मेन पॉइंट जाग जाता है.
मैं अपनी हंसी दबाती हुई बोली- सोहन, यह सबके साथ होता है यार … मुझे दर्द हो रहा है. तुम मसाज करो यार.
फिर सोहन ने तेल डाला और मालिश करने लगा.
वह पहले कमर पर अपने हाथ फेर रहा था.
मैं आराम से उसका हाथ महसूस कर रही थी और आह आह कर रही थी.
वह बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- तुम्हारे हाथ फेरने से दर्द हो रहा है सोहन.
सोहन मेरे सिर की तरफ आ गया. मैंने देखा कि उसका लंड सच में खड़ा हो चुका था.
अब मैंने जानबूझ कर हाथ आगे रख दिया. वह टेबल से टिका हुआ था.
मैं उसके लंड को महसूस कर रही थी.
सोहन- अरे सॉरी शनाया!
मैं उससे बोली- कोई बात नहीं सोहन … मेरा दर्द अब सच में कम हो गया है.
उसने भी जानबूझ कर अपने लंड को चड्डी से बाहर निकाल दिया.
मैंने जब उसका लंड देखा, तो मुझे उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा दिखाई दिया.
उसी समय उसने मेरे हाथ को पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
मैं बोली- अरे सोहन यह क्या कर रहे हो?
सोहन ने मेरे मुँह को पकड़ा और मेरे साथ जबरदस्ती करता हुआ मेरे ऊपर चढ़ गया.
उसने मेरी पैंटी नीचे कर दी और हड़बड़ाहट में अपना लंड मेरी चूत के अन्दर डाल दिया.
मैं- आह सोहन नहीं … आआह मम्मी मर गई … आह सोहन नहीं.
वह- आह शनाया आई लव यू … शनाया तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और तुम्हारा यह बदन मुझे बहुत अच्छा लगा है शनाया … प्लीज मना मत करना.
यह कहते हुए उसने अपने मोटे लंड को और अन्दर दबा दिया.
मैं दर्द से भर उठी और नकली गुस्से में चीखी- आह सोहन … इसको बाहर निकालो पहले … आआह मुझे दर्द हो रहा है.
वह मुझे किस करने लगा और उसने मेरी ब्रा को निकाल दिया.
वह दांत पीसते हुए मेरे दूध को मसल कर बोला- शनाया, यदि तुमने हां नहीं किया, तो मुझे जबरदस्ती करनी पड़ेगी.
मैं- आह सोहन छोड़ो मुझे प्लीज … आह सोहन दर्द हो रहा है उम उम्म.
वह नहीं रुका और मेरे मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा.
अब मैं भी मन बना चुकी थी कि बहुत हुआ ड्रामा … अब तक उसके लंड से मुझे चैन भी मिलने लगा था.
मैंने उसको पकड़ लिया और किस करने लगी.
मैं- सोहन प्लीज अब जबरदस्ती मत करो न … मैं मना नहीं कर रही हूँ.
सोहन का लंड मोटा था इसलिए उसका मोटा वाला हिस्सा दर्द दे चुका था, अब उसका लंड मजा देने लगा था.
मेरे कहने पर सोहन ने मुझे सीधा लिटा दिया है और नीचे आकर उसने मेरे दोनों पैर फैला दिए.
फिर वह मेरी चूत पर जीभ फेरने लगा और पागलों की तरह चूत के दाने को चूसने लगा.
मेरी कामुक सिसकारियों से कमरे में आवाजें गूँजने लगी थीं.
सोहन- आआह शनाया क्या मस्त चूत है तेरी … मुआह … मुझे चूसने दो मुआह आआह.
मैं- आआह सोहन चूसो … और चूसो सोहन आह.
वह उठ गया और लंड हिलाने लगा.
मैं समझ गई कि वह लंड चुसवाना चाहता है.
तभी वह मेरे चेहरे के पास आया और अपने मूसल लंड को मेरे होंठों पर रख कर होंठों को मसलने लगा.
बड़ी मादक खुशबू आ रही थी. मैंने जीभ निकाल कर लंड के सुपारे को चाट लिया.
उसकी आह निकल गई और मैं उसके लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी.
अब सोहन भी मस्त हो गया था.
वह कहने लगा- आह पूरा मुँह खोलो बेबी … अन्दर तक लेकर चूसो इसको!
उसने मेरे गालों को दबाया और मुँह में लंड अन्दर ढकेल दिया. मैं उसके लंड को चूसने लगी.
वह पूरा लंड अन्दर डालने लगा था और झटके दे रहा था.
मैं दस मिनट तक उसके लंड को चूसती रही.
उसके बाद वह मुझे उठा कर बोला- अब बोलो बेबी, कैसे चुदवाना है?
मैं बोली- तुम्हारी बॉडी इतनी मस्त है, क्या मुझे उठा सकते हो?
सोहन- हां, दिन रात उठाए रह सकता हूँ यार!
मैं- तो हाथों से उठा लो और झूला झुला दो … मुझे ऐसे चुदवाना पसन्द है!
सोहन- आ जाओ रानी … लंड का झूला झुला देता हूँ.
उसने मुझे उठा लिया. मेरे पैरों को अपने हाथों में फंसा कर मेरे पैर ऊपर की ओर कर दिए.
दोस्तो मैं आप सभी को यदि इस पोजीशन को फ़ोटो से दिखाऊंगी, तो आप झट से समझ जाओगे.
वह मुझे टांग कर बोला- बेबी, लंड पकड़ कर अन्दर डालो.
‘मैं नहीं ले पाऊंगी सोहन, तुम ही डाल दो.’
वह बिना पकड़े डालने लगा.
उसका लंड मेरी गांड में जाने लगा.
‘आआह उम्म सोहन … उधर नहीं साले … मादरचोद उधर नहीं … वह गांड का छेद है.’
सोहन- अरे बेबी सॉरी, अब सही रखा लंड!
मैं- हां अब ठीक है सोहन … सॉरी मैंने गुस्से और दर्द में गाली दे दी थी, बुरा मत मानना!
सोहन- नहीं बेबी, ऐसी बात नहीं है.
सोहन ने लंड चूत में पेल दिया और मैं आआह सोहन आआह करने लगी.
वह जोर जोर से झटके देने लगा.
मैं- आआह मां आआह ईई.
वह लगा रहा.
इधर मैं चिल्लाती रही.
Fucking started and I kept swinging his penis for about 10 minutes and kept screaming.
कुछ देर बाद वह लेट गया और मैं उसके ऊपर चढ़ गई.
फिर से चुदाई होने लगी.
सोहन मेरी चुदाई करीब 4 घण्टे तक बार बार करता रहा.
मैं और सोहन दोनों ही पस्त हो गए थे और नंगे ही सो गए.
दोस्तो, अभी आपको जय और सोहन के साथ चुदाई का मजा पढ़ने को मिला है.
असली मजा तो आगे की सेक्स कहानी में आने वाला है.
इस चुदाई के बाद मैंने इन तीनों के साथ एक साथ चुदवाने का मजा लिया था.
मम्मी और पापा आज सवेरे दिल्ली जाने वाले थे। मैं Hindi Sex Stories घर पर अकेली थी। पापा ने पड़ोस में रहने वाले शर्मा जी को कहा था की वो मेरी और घर की देखभाल करें। शर्मा जी की बेटी मेरी सहेली है। उसका भाई राहुल२० साल का है और कॉलेज में पढता था। वो मम्मी – पापा के जाने के बाद अपनी किताबें ले कर घर पर आ गया था। उसे बैठक का कमरा दे दिया था।
दो जवान जिस्म और एकांत…फिर पूरी आज़ादी। कुछ तो होना ही था। वो शुरू से ही मुझे पसंद करता था। वो मुझसे बात करने के लिए बार बार मेरे कमरे में आ जाता था। मैं मन ही मन उसकी बात समझती थी और मुस्कुराती थी। मुझे भी वो अच्छा लगता था।
जिस समय वो मेरे कमरे में आया उस समय मैं बाथरूम में नहाने घुसी ही थी। मैंने बाथरूम के दरवाजे के छेद में से झांक कर देखा तो वो बाथरूम की तरफ़ ही देख रहा था। मैं कपड़े उतरने लगी। तभी मुझे लगा कि राहुल दरवाजे के पास आ गया है। मुझे मौका मिल गया उसे पटाने का।
मैंने चुपके से देखा कि बाथरूम के दरवाजे के उसी छेद से… एक आँख झिलमिला रही थी। मैं समझ गयी कि वो मुझे अब देख रहा है। मैंने उसे अपनी और आकर्षित करने के लिए अनजान बनते हुए अपना टॉप उतारा… मेरी चुंचियाँ उछल कर बाहर आ गयी। मैंने चुन्चियो को धीरे से सहलाया और नोकों को मसल दिया।
फिर मैंने छेद की ओर अपनी पीठ करते हुए अपना पजामा उतर दिया। पेंटी भी उतर दी। मेरे चूतडों की गोलाईयां और गहराइयाँ उसकी नजरों के सामने थी। ऐसा करते समय मेरे बदन में सनसनी फ़ैल रही थी, क्योकि मुझे पता था कि राहुल मुझे नंगा देख रहा है। मैंने अपना बदन अब उसके सामने कर दिया जिस से उसे मेरी छूट साफ़ दिख जाए। उसकी नजरे अभी भी छेद में चमक रही थी।
मैंने झरना खोला और गरम गरम पानी मेरे शरीर पर पड़ने लगा। मैंने कभी अपनी चुंचियाँ मलती, तो कभी अपनी चूत साफ़ करती। मैं चाहती थी वो मुझे देखे और उत्तेजित हो जाए। मैं नहा चुकी तो मैंने दरवाजे के छेद के पास अपनी चूत सामने कर दी। मेरी चुंचियाँ कड़ी होने लगी थी।
मुझे लगा कि उसे अब मेरी चूत साफ़ नजर आ रही होगी। मैंने अपना बदन तोलिये से पोंछ कर कपड़े पहनने शुरू किए। अब उसकी आँख वहाँ नहीं थी।
मैं बाथरूम से बाहर आयी और अनजान बनते हुए बोली-‘अरे… राहुलकब आए..?’
‘बस अभी ही आया हूँ…’ उसका झूठ पकड़ में आ रहा था। उसका लंड पैंट के ऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था।
‘क्या बात है… तुम्हारा मुंह लाल क्यूँ हो रहा है…’ मैं बालों पर कंघी कर रही थी। उसे छेड़ने में मुझे मजा आ रहा था। मैं उसके सामने बैठ गयी और झुक कर पंखे की हवा में बाल सुखाने लगी। उसकी नजरों के सामने मेरी उभरी हुयी चुंचियाँ टॉप के भीतर से झाँकने लगी।
उसकी नजरें मेरे स्तनों पर गड़ गयी।
मैंने नीचे से ही तिरछी नजरों से उसे देखा… और उसके गर्माते शरीर पर सीधे चोट की…’विनोद… अन्दर क्या देख रहे हो …झांक कर ?’
‘हाँ… नही… क्या…?’ वो बुरी तरह झेंप गया।
‘अच्छा.. अब मैं बताऊँ…कि क्या देख रहे हो तुम…’ राहुलएकदम से शरमा गया।
‘नेहा… वो… नही… सो… सॉरी…’
‘क्या सॉरी… एक तो चोरी…फिर सॉरी…’
‘नेहा… अच्छी लग रही थी…सॉरी कहा न ‘
मैं उसके पैंट पर से लंड के उभर को देख रही थी। उसने ऊपर हाथ रख लिया।
‘नही देखो… इधर.. ‘ वो शरमा गया। मैं मुस्कुरा उठी।
‘तो कान पकडो…’
राहुलने अपने कान पकड़ लिए… ‘बस…ना…’
हाथ हटाने पर लंड का उभार फिर से दिखने लगा।
मैं हंस पड़ी।
वो देखो… जो है वो तो दिखेगा ही… ‘
अब राहुलको समझ में आ गया था कि खुला निमंत्रण है। उसका लंड का आकार तक दिखने लगा था। राहुलउठ कर मेरे पास आ गया। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा-‘नेहा…तुम्हारी भी तो उभार है… एक बार दिखा दो…’
‘अरे…मैं तो मजाक कर रही थी… तुम अन्दर देख रहे थे… इसलिए मजाक किया था…’
राहुलसे रहा नही गया उसने एकदम से मेरे गालों को चूम लिया। मैं शरमा गयी…
‘विनोद… ये क्या कर रहे हो…’
उसने तुंरत ही मेरे होंट पर अपने होंट रख दिए। मैंने सोचा अब इसे और आगे बढ़ने दो। मुझे मजा आने लगा था।
उसने मेरे भारी स्तनों को पकड़ लिया। उसने स्तनों को मसलना चालू कर दिया। मैं सिमटी जा रही थी। पर उसके हाथों ने मेरे उभारों को मसलना जारी रखा। मैं अपने को बचाती भी रही…पर उसे रोका भी नहीं।
जब उसने मेरे उभारों को अच्छी तरह से दबा लिया तब मैंने जान कर के उसे पीछे की ओर धक्का दे दिया-‘बहुत बेशरम हो गए हो…’ मेरे हाथ से कंघी नीचे गिर गयी। मैं जैसे ही उठ कर कंघी उठाने को झुकी, मेरे पजामे में से मेरी गांड की गोलाईयां उभर कर राहुलके सामने आ गयी। राहुलबोल उठा-‘नेहा बस ऐसे ही रहो…’ मैं जान कर के वैसे ही झुकी रही।
‘क्या हुआ…?’
उसने मेरे नरम नरम गोल चूतडों को हाथ से सहला दिया। गोलाईयां सहलाते हुए उसके हाथ दोनों फाकों की दरार में घुस पड़े ओर फिर अपनी उंगली घुसा कर मेरी गांड के छेद को सहलाने लगा। मुझे बहुत आनंद आ रहा था। मैं वैसे ही जान कर के झुकी रही। अब उसके हाथ मेरी चूत की तरफ़ बढ गए।
मैं सिहर उठी। जैसे ही उसने चूत दबी… चूत का गीलापन उसके हाथ में लग गया। अब उसने मेरी चूत को भींच दिया। मैंने जल्दी से उसका हाथ हटा दिया। और सीधी खड़ी हो गयी।
राहुलमुस्कुराया ‘नेहा… मज़ा आ गया… तुम्हें कैसा लगा…?’
‘अब तुम बेशरमी ज्यादा ही दिखा रहे हो… कालेज़ नहीं जाना क्या…?’ मैंने भी उसे मुस्कुरा कर कहा।
हम दोनों ने दोपहर का खाना खाया। फ़िर राहुलकालेज़ चला गया। मैंने अपने कपड़े बदले, पैन्टी और ब्रा उतार दी और सिर्फ़ स्कर्ट और हल्का सा टाप पहन लिया। मैंने सोचा कि अब जब राहुलआएगा तो मुझे चोदे बिना नहीं छोड़ेगा। मैंने हमेशा की तरह अपनी गाण्ड में क्रीम लगा कर चिकनी कर ली और बिस्तर पर लेट गई। राहुलके बारे में सोचते सोचते जाने कब मुझे नींद आ गई।
अचानक मेरी नींद खुल गई। मुझे अपनी पीठ पर एक जिस्म का भार महसूस हुआ। मैं सिहर उठी और समझ गई कि यह राहुलहै पर मैंने आंख नहीं खोली। राहुलमेरी पीठ पर सवार था और उसका नंगा लण्ड मेरी गाण्ड पर स्पर्श हो रहा था।
मैं नीचे दबी हुई थोड़ी इधर उधर हुई तो उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर टिक गया। मैंने अपनी टांगें थोड़ी और फ़ैला दी।
‘नेहा… तुम बहुत अच्छी हो…’
‘आऽऽऽह… विनोद…’ उसके लण्ड की सुपारी से चिकनाई निकलने लगी जो मेरी गाण्ड को भी चिकना कर रही थी। उसके लण्ड ने अपनी मर्दानगी दिखानी शुरू कर दी, उसके चूतड़ों ने लण्ड पर जोर लगाया और सुपारी छेद में आराम से घुस गई।
‘आऽऽऽऽह… अन्दर गया…ऽऽ विनोद…’ मेरे मुंह से सिसकारी फ़ूट पड़ी। उसने हल्का सा जोर लगाया तो लण्ड गाण्ड की गहराईयों में रगड़ खाता हुआ उतरने लगा। अब मैंने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी और टांगें पूरी खोल दी। अब उसके लण्ड का जोर पूरा लग रहा था।
मैंने उसके हाथ पकड़ कर अपनी चुन्चियों पर रख दिए. मैं कोहनियों पर हो गयी और आगे से शरीर को थोड़ा ऊपर कर लिया. उसने अब मेरी चुंचियां पकड़ ली और मसलने लगा. मेरे ऊपर वो चिपका हुआ था. लंड उसका मेरी गांड में पूरा घुसा था पर वो अभी धक्के नहीं मार रहा था. वो मुझे चूमने चाटने में लगा था. उसके होंट मेरे होंट तक नहीं पहुँच पा रहे थे. मैं मस्ती में नीचे दबी पड़ी थी.
अब उसने अपने दोनों हाथ बिस्तर पर रखे और मेरे बदन को उसने मुक्त कर दिया. अब उसने धीरे धीरे धक्के मारने चालू कर दिए. मैं फिर से बिस्तर पर चिपक कर लेट गयी. और आराम से आंखे बंद कर ली. मैं पूरे मन से गांड चुदाई का आनंद ले रही थी. उसकी स्पीड अब तेज हो गयी थी. उसके लंड से चिकनाई भी निकल रही थी.
‘नेहा… आःह्ह… मजा आ रहा है…’
‘हाँ रे…सी सीई.. आः…’ मैं नीचे लेटे लेटे आँखें बंद करके सिस्कारियां भरती रही. मेरे अन्दर अब मीठी मीठी सी गुदगुदी बढने लगी. नीचे मेरी चूत भी बहुत पानी छोड़ रही थी. सारे बदन में वासना की रंगीन कसक सी बढ रही थी. मुझे ऐसा महसूस होने लगा था की राहुलमेरे अंग अंग को दबा दे , उसे मसल डाले… मेरा सारा कस बल निकाल दे.
‘विनोद… करते रहो…जोर से…करो… हाय…’ ऐसा लगा आवाज़ मेरी अंतरात्मा से निकाल रही हो. उसके धक्के मेरी गांड में ऐसे आराम से चल रहे थे जैसे कि चूत चुद रही हो. उसी सरलता से… उसी तेजी से…मजा भी उसी के समान आ रहा था…
‘हाय… आ अहह हह… नेहा… मैं गया… निकला मेरा…नेहा…’
उसके लंड ने मेरी गांड के अन्दर ही सारा वीर्य भर दिया. मेरी गांड में उसका लंड फूलता पिचकता का सा अहसास दे रहा था. उसका पूरा वीर्य निकल चुका था. राहुलमेरे ऊपर ही लेट गया. उसका लंड सिकुड़ कर अपने आप धीरे से गुदगुदी करता हुआ बाहर आ गया. वो एक तरफ़ लुढ़क गया. मेरी गांड में से वीर्य टपक टपक कर बिस्तर पर चूने लगा. मैं वैसे ही उलटी लेटी रही.
मैंने आँख खोली और गहरी साँस ली. मैं तुंरत बिस्तर पर से नीचे आ गयी. तौलिये से अपनी गांड साफ़ की, फिर राहुलका लंड भी साफ़ किया. अब मैं उसके ऊपर चढ़ कर लेट गयी. राहुलने अपनी आँख खोली… और मुस्कराया… मैंने उसे चूमना चालू कर दिया. एक हाथ नीचे ला कर उसका मुरझाया हुआ लंड पकड़ लिया. और उसे हिलाने लगी, मसलने लगी…
उसके लंड ने फिर से अंगडाई ली और जाग उठा. मैंने उसे अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे मुठ मारने लगी. कुछ ही देर में उसका लंड चोदने के लिए तैयार था. मैं राहुलके ऊपर लेट गयी. अपनी दोनों टांगे फैला दी.
लंड का स्पर्श मेरी चूत के आस पास लग रहा था. मैंने उसके होंट अपने होटों में दबा लिए. हम दोनों अपने आप को हिला कर लंड और चूत को सही जगह पर लेने की कोशिश कर रहे थे. उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड लिया. मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी.
अचानक मेरे अन्दर आनंद की तीखी मीठी लहर दौड़ पड़ी. उसका लंड फिर एक बार और मर्दानगी दिखने के लिए उतावला हो गया. वो मेरी चूत में रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुस गया. मेरे मुंह से एक मीठी सी सिसकारी निकाल पड़ी…’विनोद… अ आह हह हह हह… सी ई स स स ई एई…’
‘मजा आ रहा है न नेहा…’
‘विनोद… आआह्ह्छ… करते रहो…आ आह हह ह… लगाओ धक्का… आ अह ह्ह्ह्छ..’
मेरे मुख से आहें फूट पड़ी. गांड चुदाने से मेरी उत्तेजना पहले ही बढ़ी हुयी थी. अब उत्तेजना और भी बढाती जा रही थी. उसके लंड के मोटेपन का चूत में अहसास हो रहा था. लंड जड़ तक जा रहा था. मैं आनंद से सराबोर हो गयी थी. सिस्कारियां… आहे… फूट रही थी. मेरे चूतड ऊपर से तेजी से चल रहे थे. मैंने उसके हाथ अपनी चुन्चियों पर रख दिए. उसने मेरे स्तनों को मसलना…मरोड़ना… चालू कर दिया. उसने जैसे ही मेरी नोकों को मसलना और खींचना चालू किया. मेरी तो जान निकलने लगी.
‘जोर से खींच… मेरे राजा… मसल दे… आः ह्ह्छ… मेरे धक्के तेज होने लगे… मैं चरम सीमा पर पहुँचने लगी थी.
‘विनोद…हाय… मैं गयी… हाय… मैं गयी…सी सी ई… अरे..विनोद… रे…’
मैंने अचानक ही उसके हाथ मेरी चुन्चियो पर से हटा दिए…और चूत का पूरा जोर उसके लंड पर लगा दिया.
‘आ आह्ह ह्ह्ह… विनोद… निकला…निकला… हाय… रे…निकला… हाय… छूट गयी..रीई… आह्ह्ह्छ…’
मैं झड़ने लगी… मेरे चूत की लहरें उसके लंड पर लग रही थी. मैं पूरी झड़ चुकी थी. मैं तुंरत उठी और उसका लंड चूत में से निकाल गया. मैंने उसे अपने हाथों में लेकर कस के दबा लिया…और तेजी से दबा कर मुठ मारने लगी… जोश में उसके चूतड ऊपर उठे और उसके लंड ने फुहार छोड़ दी. उसका लंड रुक रुक कर पिचकारियाँ छोड़ रहा था. मैंने उसका सारा वीर्य उसके लंड पर लगा कर उसकी मालिश करने लगी. थोड़ा वीर्य उसके चूतडों पर और उसकी गांड के छेद पर भी मल दिया.
वो शान्ति से आँखे बंद करके लेट गया था. उसने थकान से अपनी आँखे बंद कर ली. मैं उठ कर बाथरूम में नहाने चली गयी. मैं जब बाहर आयी तो राहुलने बिस्तर की चादर बदल दी थी. अब वो कपड़े पहन रहा था.
‘नेहा तुम आराम करो… मैं चाय बना कर लता हूँ.’
मैंने घड़ी देखी…दिन के 4 बज रहे थे. मैं बिस्तर पर लेट गयी. वो चाय कब लाया मुझे पता नहीं चला। मैं गहरी नींद में सो गयी थी…
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दोस्तो, मेरा नाम रणवीर है, मैं Antarvasna Stories अबोहर(पंजाब) शहर का निवासी हूँ। मैं आज पहली बार अपनी सच्ची कहानी आपके सामने पेश कर रहा हूँ। यह कहानी मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका और मेरी है। आपका समय बर्बाद न करते हुए मैं कहानी शुरू करता हूँ।
मैं और मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। हमारी फ्रेंडशिप फ़ोन के जरिये हुई थी। एक महीने तक हमने एक दूसरे को देखे बिना केवल फ़ोन पर ही बात की। आखिर एक दिन हमारे मिलने का समय आ गया, मैंने उसे एक होटल में बुलाया।
वो देखने में इतनी सुन्दर नहीं थी। उसका रंग सांवला था लेकिन उसका फिगर “32-24-36” था। क्या मस्त लग रही थी वो ! उसके स्तन बड़े मस्त लग रहे थे। होटल में हम कुछ देर बैठे और मैंने उसे पहली बार चूम लिया, मैं 15 मिनट तक चूमता रहा और उसके वक्ष भी दबाता रहा। पहली बार मिलने पर तो सिर्फ उसने चूमने ही दिया लेकिन सेक्स के मामले में वो पूरी कठोर थी। कहती थी कि सेक्स तो हम शादी के बाद ही करेंगे !
फिर वो मेरे साथ ही पढ़ने लगी। हम इकट्ठे पढ़ाई के लिए जाने लगे। धीरे-धीरे मेरा उसके घर आना-जाना हो गया। उसके घर में केवल उसकी माँ रहती थी, उसके बाप का देहांत हो चुका था। उसके घर पर मैंने उसे बहुत बार चूमा, थोड़े दिनों के बाद मैं उसके स्तनों पर भी रोज़ किस करने लगा। मैं ही उसे पढ़ाई के लिए उसके घर से लेकर जाता और छोड़ने भी मैं आता। इसलिए मुझे मौका मिल जाता उसे किस करने का।
फिर एक दिन दोपहर का वक़्त था उसने मुझे फ़ोन किया कि रणवीर, मेरे घर पर कोई नहीं है, तुम पढ़ाई करने के बहाने मेरे घर आ जाओ।
मैं कुछ किताबें लेकर उसके घर पहुँच गया ताकि उसके आस-पड़ोस वालों को शक न हो। वो अपने कमरे मैं बैठी थी और उसने लोअर और टीशर्ट पहन रखी थी। बड़ी कयामत दिख रही थी वो ! फिर मैं उसके करीब गया और उसे चूमने लगा और तक़रीबन बीस मिनट तक मैंने उसे किस किया और उसकी चूचियाँ दबाता रहा। वो पूरी तरह गर्म हो गई थी और मुझसे पूरी तरह चिपक गई।
फिर मैंने मौका देखकर उसका लोअर नीचे कर दिया। उसने अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी। फिर अचानक उसने मुझे अपने से दूर कर दिया और थोड़ा सा नाराज़ हो गई और कहने लगी- शादी से पहले यह ठीक नहीं !
और मैं चला आया वहाँ से।
मैं हर वक़्त उसे चोदने के सपने देखने लगा लेकिन वो तो साली मान ही नहीं रही थी। हमारे परीक्षाएं शुरू होने वाली थी, हमारी दोस्ती को छः महीने से ऊपर हो चुके थे लेकिन मैं अभी तक पूरी तरह चूत भी नहीं देख पाया था। लेकिन वो कहते है ना कि सब्र का फल मीठा होता है।
एक रात के 11 बज रहे थे और हम फ़ोन पर बात कर रहे थे तो मैंने उसे बातों बातों में कहा- दीपिका, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ !
और वो भी झट से मान गई और कहने लगी- कोई जगह है क्या ?
तो मैंने कहा- हाँ ! मेरे एक दोस्त का कमरा है, वहाँ चलेंगे !
तो उसने कहा- ठीक है ! कल मैं सुबह 11 बजे पढ़ाई के बहाने घर से निकलूंगी और मुझे बता देना कि कहाँ आना है ! लेकिन कंडोम जरुर लेते आना !
मैंने सोचा कि कहीं वो मजाक कर रही है और नहीं आएगी !
लेकिन अगले दिन 11 बजे उसका फ़ोन आया और वो बोली- रणवीर, मैं घर से चल रही हूँ ! बोलो, कहाँ आना है ?
तो उस वक़्त मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं क्योंकि इससे पहले मैंने कभी किसी को नहीं चोदा था।
वो सही 11-30 बजे मेरे बताये हुए दोस्त के घर पर पहुंच गई। मैं और दीपिका कमरे में चले गए।
सबसे पहले तो मैंने उसे किस किया, वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर धीरे-धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। अब वो मेरे सामने केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी और थोड़ा शरमा भी रही थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और केवल अण्डरवीयर में खड़ा था। फिर मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके स्तन चूसने शुरू किये। वो धीरे-धीरे गरम हो रही थी। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला और उसकी चूत को सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ भरने लगी। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी, अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, कितनी मस्त चूत थी उसकी गुलाबी रंग की ! हाय !
फिर मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाई तो उसने बड़ी जोर से सिसकारी भरी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से रगड़ता रहा। उसकी चूत ने जल्द ही पानी छोड़ दिया।फिर मैंने अपना फनफनाता हुआ लंड बाहर निकाला तो वो देखकर डर गई और बोली- इतना मोटा मेरी छोटी सी चूत में कैसे जायेगा ? यह तो मेरी चूत फाड़ देगा ! मुझे तो बहुत डर लग रहा है !
तो मैंने उसे कहा- जान, तुम फिकर क्यों करती हो ! मैं हूँ ना ! मैं बड़े आराम से डालूँगा !
फिर मैंने कंडोम लगाया और उसकी चूत पर प्यार से अपने लंड को रगड़ने लगा। उसने अपनी आँखें बंद कर ली, सिसकारियाँ भरने लगी और कहने लगी- अब नहीं रहा जाता ! चोद दो जल्दी से मुझे। मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में अपना लंड डालना शुरू किया। उसकी चूत की सील अभी टूटी नहीं थी इसलिये लंड अंदर घुस नहीं रहा था। फिर मैंने थोड़ा जोर लगाया और सुपारे को अन्दर करते ही उसने जोर से चीख मारी और कहने लगी- रणवीर, अपना लंड बाहर निकालो !बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने उसके होंठ चूसने शुरू किये और थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई। उसके बाद मैंने दुबारा जोर लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में चला गया इस बार तो वो मुझे धकेलने लगी लेकिन मेरे होंठ उसके होंठों पर थे इसलिए वो चिल्ला नहीं पाई लेकिन वो मुझे धकेलने की नाकाम कोशिश करती रही।
उसके बाद उसके दोबारा शांत होने पर मैंने फिर जोर लगाया और इस बार पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। इस बार तो जैसे उसकी जान ही निकल गई हो और वो रोने लगी लेकिन मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- जान रोओ मत ! बस अब दर्द नहीं होगा।
मैं उसे किस करता रहा, थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई और मैं भी अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी अच्छा लगने लगा था लेकिन थोड़ा दर्द तो उसे अब भी हो रहा था। फिर मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और उसने कस के मुझे पकड़ लिया। मैं भी उसके झड़ने के 5 मिनट बाद झड़ गया और तक़रीबन 15 मिनट हम एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही लेटे रहे।
फिर उस दिन मैंने उसे तीन बार चोदा और फिर अंत में हमने एक दूसरे को चूमा और अपने घर आ गए।
उसके बाद मैंने उसे चार बार चोदा। फिर किसी कारण हमारी दोस्ती टूट गई। लेकिन आज भी जब वो मुझे कहीं देखती है तो मुझसे नज़रें नहीं मिला पाती। इसलिए दोस्तो मैं आपको एक हिदायत देता हूँ कि कभी किसी लड़की पर विश्वास मत करो। अगर हम उसे नहीं चोदेंगे तो वो हमें हमेशा धोखा ही देगी। इसलिए जब भी अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने का मौका मिले तो उसे गंवाना मत।
और पंजाबी में एक कहावत भी है “सप्प ते फुदी जिथे मिले, मार देओ !”
दोस्तो अन्तर्वासना में मेरी इस कहानी को पढ़ने के बाद मुझे मेल अवश्य करें। Antarvasna Stories
हैलो डियर रीडर्स । मै सूरज २६ साल का लड़का भोपाल में Antarvasna रहता हूँ। मैं एम कोम फ़ाइनल इयर का स्टुडेंट हूं। अभी भी मैं अपने चाचा के यहां रह रहा हूं। मेरे चाचा मुझसे सिर्फ़ ९ साल बड़े हैं और उनकी शादी ४.५ साल पहले हुई थी। मेरी चाची बहुत खूबसूरत है ५.४ लम्बा कद खूबसूरत होंठ जूस से भरे हुए हिरनी जैसी आंखें पतली सी कमर और बड़े गोल मटोल बूब्स हैवी हिप शी लुक लाइक ए ब्युटी क्वीन। उसके बूब्स का साइज़ है ३८ /२७ /३६ ।
एक दिन मेरे चाचा घर वापस आये तो काफ़ी परेशान थे हमने (मैं और चाची) उनसे पूछा तो कहने लगे कि मुझे करोबार में बहुत नुकसान हुआ है और कुछ भी बाकी नहीं बचा फिर चाचा ने अपना सब कुछ बेंच दिया और बचने वाले रुपयों से मुम्बई चले गये और मेरे घर वालों से कहा कि सूरज को इधर ही चाची के पास रहने दें तो मैं चाची के साथ रहने लगा।
मैं रोज़ कोलेज़ जाता और वापस घर आता तो चाची मुझे खाना देती और फिर मैं खाना खा कर सो जाता और फिर शाम को उठ कर स्टडी के लिये चला जाता और फिर रात को वापस आता। एक दिन की बात है मैं कोलेज़ गया तो कोलेज़ बंद था क्योंकि कोलेज़ में झगड़ा हो गया था जिसकी वजह से कोलेज़ में स्ट्राइक थी तो मैं वापस घर आ गया मैं अपने कमरे मैं अपनी चीज़ें रख कर चाची के रूम की तरफ़ आया कि चाची को बता दूं कि मैं कोलेज़ से आ गया हूं अभी मैं कमरे के दरवाज़े पर पहुंचा ही था कि मैंने चाची को देख लिया वो अपने कपड़े बदल रही थी। मैं वापस होने लगा तो मेरा दिल चाहा कि मैं चाची को देखता ही रहूं तो मैं वापस आ कर दरवाज़े की ओट से चाची को देखने लगा चाची ने पहले अपना सूट उतारा फिर ब्रा भी उतार दी और शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखने लगी
उफ़ कितना खूबसूरत बदन है चाची का क्या खूबसूरत बूब्स हैं और क्या पतली कमर है, मैं देखता ही रह गया और मेरा लंड खड़ा हो गया इससे पहले मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा था मगर आज अचानक ही मेरे दिल में ख्वाहिश जागी क्यों न मैं चाची की चूत का मज़ा लूं। सामने चाची नंगी खड़ी थी और मैं उसको देख रहा था और मैं उसको देखता ही रहा काफ़ी देर तक कभी चाची खुद को आगे से देखती कभी साइड से शायद वो अपनी फ़िटनेस देख रही थी फिर चाची अपने बूब्स को मसलने लगी और मैं अपने लंड को मसलने लगा। फिर वापस अपने कमरे में आ गया और कुछ देर के बाद मैं दोबारा चाची के कमरे में गया और उसको बताया के मेरा कोलेज़ बंद है इसलिये मैं वापस आ गया हूं। मैंने महसूस किया कि चाची की नज़रें आज कुछ बदली हुई हैं और आज उसने मुझे अजीब सी नज़रों से देखा। फिर कहने लगी कि अच्छा ठीक है।
रात को खाना खने के बाद मैं टीवी देखने लगा और फिर रात को काफ़ी देर तक टीवी देखता रहा और चाची के बारे में सोचता रहा चाची का जिस्म मेरी नज़रों में घूम रहा था फिर मैं सो गया अचानक रात को मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे कमरे में आया है मैंने उठ कर बेड लैम्प जलाया तो देखा कि चाची है तो मैंने उससे पूछा क्या बात है तो वो कहने लगी कि मुझे अकेले में डर लग रहा है मैं तुम्हारे पास सो जाऊं तो मैंने कहा कि हां आप इधर बेड पर सो जाओ मैं सोफ़े पर सो जाता हूं और मैं बेड से उठ कर खड़ा हो गया तो वो कहने लगी कोई बात नहीं तुम भी इधर ही बेड पर सो जाओ क्योंकि यह डबल बेड है और हम दोनो ही इस पर सो सकते हैं। तो मैं बेड की दोसरी साइड पर आ कर लेट गया अब मेरी नींद उड़ गई थी और मैं सोच रहा था कि कब चाची गहरी नींद सो जाये और मैं चाची के जिस्म को सही तरह देख सकूं।
काफ़ी देर मैंने इन्तज़ार किया, १ घंटे बाद मैंने चाची के जिस्म पर हाथ लगाया तो वो गहरी नींद में थी उसको कुछ पता नहीं लगा तो मैंने हाथ को फेरना चालू केर दिया आहिस्ता आहिस्ता मैंने हाथ को चाची के बूब्स की ब्रा खोल दिये और फिर मैंने चाची का एक बूब हाथ में ले लिया वो इतना बड़ा था कि मेरे हाथ में नहीं आया फिर मैंने आहिस्ता से चाची की कमीज़ के बटन को खोला और अब चाची के बूब्स साफ़ नज़र आ रहे थे उसने इस वक्त ब्रा नहीं पहना हुआ था। मैंने उसके मम्मे को हाथ लगाया तो वो टाइट हो गया। फिर मैं आहिस्ता से उस पर अपने होंठ रख दिये मैंने उसकी चूचियों को मुंह में ले कर आहिस्ता आहिस्ता चूसने लगा फिर मेरे दिल में आया कि मैं चाची के रस भरे होंठों पर किस करूं जब मैंने होंठों पर किस करने के लिये मुंह उठाया तो मुझे लगा कि जैसे मैं बर्फ़ का हो गया हूं क्योंकि चाची की आंखें खुली थी।
मैं चाची को जगता देख कर इस तरह हो गया जैसे मुझे सांप सूंघ गया हो और मेरे हाथों के तोते तो क्या चिड़िया कौव्वे तक भी उड़ गये हों। चाची ने मुझ को कहा यह क्या कर रहे हो? तो मैंने शरम से सर झुका लिया तो चाची ने मेरी थोड़ी से पकड़ कर मेरा चेहरा अपने चेहरे के सामने किया और कहने लगी जब तुम छुप छुप कर मुझे देख रहे थे तो तब भी मैंने तुम्हें देख लिया था यह तुम क्या कर रहे हो मैं तुम्हारे चाचा को बता दूंगी तो मैं बहुत डर गया और चाची से कहा कि आप चाचा को न बताना प्लीज़ मैं दोबारा ऐसी हरकत नहीं करूंगा। तो वो कहने लगी एक शर्त पर तुम्हारे चाचा को नहीं बताऊंगी तो मैंने कहा कि क्या शर्त है मुझे आपकी हर शर्त मंज़ूर है
तो चाची कहने लगी कि जो तुम कर रहे थे दोबारा करो, मैंने कहा के नहीं यह बात ठीक नहीं है चाची (वैसे मैं दिल में बहुत खुश हो रहा था) तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं चाचा को बता दूंगी और तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त मंज़ूर है तो मैंने चाची से कहा कि ठीक है और चाची को बाहों में ले लिया और उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा तो चाची ने मुझे कहा कि तुम्हें तो किस करनी भी नहीं आती फिर चाची ने मुझे किस किया तो मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया और मैं ने चाची को ज़ोर से दबाया फिर चाची ने मुझे कहा कि मेरे कपड़े उतारो।
जब मैंने चाची की कमीज़ उतारी तो चाची के मम्मे पकड़ लिये और उनको मसलने लगा चाची को भी मज़ा आने लगा तो वो कहने लगी आआहह्ह ज़ोर से चूस ले आज मेरे मम्मों को और बुझा दे मेरी प्यास फिर चाची ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिये और मेरी छाती पर किस करने लगी। मुझे भी मज़ा आने लगा फिर चाची ने मेरा ट्राउज़र भी उतार दिया और मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगी और फिर उसने मेरा लंड को पकड़ लिया और उसे मसलने लगी आआहह्ह कितना बड़ा है तेरा लंड गुड्डो यह तो बहुत बड़ा है रे अब मैं भी काफ़ी इज़ी महसूस कर रहा था क्योंकि अब बात खुल गई थी फिर मैं चाची के पूरे जिस्म पर हाथ फेरने लग गया। उसके मम्मों पर उसकी चूत पर उसकी गांड पर। मैंने एक उंगली डाली तो वो चीख उठी ओय उल्लू के पट्ठे क्या कर रहा है?
फिर मैंने चाची को कहा कि मुझे गाइड करो तो उसने मुझे कहा कि मैं उसकी टांगों के दरमियान आ जाऊं और उसकी टांगों को उठा कर कंधों पर रख लूं तो मैंने यह ही किया फिर उसने कहा कि अब अपने लंड को मेरी चूत में डालो फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा तो उसने नीचे से एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा पूरे का पूरा लंड उसने अपनी चूत में ले लिया और फिर कहा कि अब मैं अपने लंड को उसकी चूत में अंदर डालूं और बाहर करूं तो मैं लंड को इन और आउट करने लगा। काफ़ी देर में चाची को इसी तरह चोदा फिर चाची ने मुझे कहा कि मैं थक गई हूं अब दूसरी तरह करो और फिर चाची ने डोगी स्टायल बना लिया और मैं चाची को डोगी स्टायल में चोदने लगा और चोदते चोदते मैंने चाची की चूत से लंड बाहर निकाल लिया और उसको चाची की गांड में डाल दिया।
जब मैंने गांड में डाला तो चाची चिल्लाने लगी अबे बहनचोद निकाल मेरी गांड से मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अबे गांड से निकाल और उसको फुद्दी में डाल मैंने कहा कि आज गांड चोदने का मज़ा भी ले लो तो वो कहने लगी कि मेरी गांड तो कभी तेरे चाचा ने भी नहीं ली तो मैंने कहा कि मुझे तो तुम्हारी गांड लेनी है तो वो कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा क्या तुम आराम से नहीं कर सकते आआअहह्हह आराम से करो वर्ना मेरी गांड फट जायेगी हरामी, आराम से अबे मादर चोद कोई तेरी गांड में अपना लंड डाले तो तुझे पता चले कि कैसे दर्द होती है ओय तुझे मैं कह रही हूं आराम फिर उसने मुझसे अपना छुड़ा लिया और मेरा लंड उसकी गांड से बाहर निकल गया और वो बैठ कर अपनी गांड को दबाने लगी फिर मुझे कहने लगी तुम तो बिल्कुल ही वहशी हो। तुम्हें किसी के दर्द का कुछ ख्याल ही नहीं है। मुझा इतना दर्द उस वक्त नहीं हुआ जब मैं पहली बार चुदी थी जितना दर्द मुझे आज हुआ है
फिर कुछ देर बाद मैंने दोबारा चाची को चोदने लगा और फिर सारी रात हमने मज़े लिये और मैंने चाची को हर तरह से चोदा कभी डोगी स्टायल में तो कभी घोड़ी बना कर कभी सीधा लिटा कर तो कभी उसको अपने लंड पर बिठा कर, हर तरह से मैंने उसको चोदा। मैंने और चाची ने खूब चुदाई की और करवाई और अब हम रोज़ ही मज़े करते हैं लेकिन अब मुझे चाची को चोद कर पहले जैसा मज़ा नहीं आता क्यों अब उसकी चूत खुली हो गई है और जो मज़ा तंग चूत में है वो खुली चूत में कहां आप का क्या ख्याल है दोस्तों आप अपनी राय मुझे जरुर बतायें Antarvasna
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