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दोस्तो, मैं फिर आप लोगों Indian Sex Stories की सेवा में आ गया। आप लोगों की काफी मेल आई, बहुत अच्छा लगा कि आप सभी लोगों ने मेरी कहानी को पसंद किया। मेरी जिंदगी ऐसे ही जा रही है, कोई भी माल नहीं था कि मैं भी उसके साथ कुछ चुदाई करता लेकिन जल्द ही वह मौका आ गया।
एक दिन मैं और मेरा दोस्त उसके मारुति गाड़ी से शाम के 3 से 6 बजे की फिल्म देखकर आ रहे थे। फिल्म का नाम था “जिस्म”। आप सब जानते ही है कि यह कैसी फिल्म है। फिल्म देखकर मन कर रहा था कि कोई लड़की होती तो बस। शहर से आते हुए एक सुनसान रास्ते से गुजर रहे थे। कुछ दूरी पर एक औरत अपने सर को झुकाकर बैठी थी। मुझे लगा कि वह बीमार है। हमने गाड़ी रोक कर जा कर देखा तो वह रोने लगी। वह एक गन्दी सी साड़ी पहने हुई थी। बाल उसके बिखरे हुए थे। उसकी उम्र 45 से 50 तक की होगी।
मैंने कहा- क्या हुआ? वह बस रोये जा रही थी। काफी पूछने पर बोली- मैं मरना चाहती हूँ बेटा। मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया है। कई दिनों से मैं भीख मांगकर खा रही हूँ। आज तो मुझे किसी ने भीख में भी कुछ नहीं दिया। भूख से पेट दर्द कर रहा है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं कहाँ जाऊँ। मुझे उस पर दया आ गई।
मैंने कहा- मेरे साथ मेरे घर चलिए। मैं आप को खाना खिलाता हूँ।
वह मान गयी। मैंने उसे सहारा देकर गाड़ी में बैठाया। मेरा दोस्त गाड़ी चला रहा था। मैंने एक सेब उसे निकाल कर दिया, वह खाने लगी फिर पानी पी कर उसे कुछ आराम महसूस हुआ। उसे नींद आने लगी। वह बैठे बैठे ही सोने लगी। जब वह सो रही थी तो उसका पल्लू उसके कंधे से सरक कर नीचे गिर गया तो मेरी नज़र उसकी चुचियों पर जा टिकी। मैं न चाहते हुए भी बार बार चुचियों को देख रहा था। मुझे लगा कि उसे घर ले जाना ठीक नहीं है। हम दोनों मिल कर उसे कहीं और ले जाना ठीक समझा।
कुछ दोस्तों ने मिलकर एक कमरा किराए पर ले रखा था जिसमें हम सब डांस-प्रक्टिस करते थे। वह कमरा आबादी से कुछ दूर था। क्योँकि म्यूजिक की आवाज़ से लोगों को तकलीफ होती थी। वहाँ केवल दो कमरे थे, एक किचन। किचन का सामान कोई ख़ास नहीं था। कभी कभी हम सब कुछ पार्टी भी वहां मना लेते थे।
किराये के घर के पास गाड़ी रोकते ही मेरे दोस्त ने उसे उठने को कहा। मैंने उसे उठाया और घर के अन्दर चलने को कहा। घर में पहुँचते ही उस औरत ने कहा- अरे तुम्हारे घर में तो कोई भी नहीं है।
हमने उसे बताया- यह किराये का घर है यहाँ कोई नहीं रहता है।
वह थोड़ा घबराई और कमरे के अन्दर चली गयी। मेरा दोस्त गाड़ी पार्क करने अपने घर चला गया। कुछ देर बाद मेरे मोबाइल पर मेरे दोस्त का फ़ोन आया कि वह नहीं आ सकता है। मैंने किचन में कुछ बनाया और उसे भी खिलाया। खाना खाना के बाद मुझे आशीर्वाद देते हुए धन्यवाद किया। जब मैंने उसके परिवार के बारे में पूछा तो वह कहने लगी- मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया हैं। मेरे पति के मरने के बाद मेरे बेटे और बहू ने दोनों मिलकर सताना शुरू कर दिया था। साडरी बातें कहते कहते वह रोने लगी। जब मैंने उसके सर पर हाथ रखा तो वह एकाएक मुझसे लिपटकर रोने लगी। मैंने भी उसे पकड़ लिया। उसके चूचियां मेरे सीने से दब रही थी। यह महसूस करके मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था। मैं वासना में बहने लगा। धीरे धीरे उसे अपनी और खींचते जा रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि अब मैं उसमें समां जाऊंगा। वह पीछे हटने की कोशिश करने लगी। पर मैं उसे कस कर जकड़े हुए था।
वह कह रही थी- नहीं बेटा, मुझे छोड़ दो, मुझे दर्द हो रहा है।
पर मैं उसे वासना भरी नजरों से देखे जा रहा था। वह अब सब कुछ समझने लगी थी। वह छूटने की नाकाम कोशिश कर रही थी। मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने अपने होंठ उसके सूखे होंठों पर रखे और जोरदार किस करने लगा था। लम्बी किस के बाद अपनी जीभ से उसके जीभ को चाटे जा रहा था। कुछ समय बाद उसकी छटपटाहट कम हुई। पर मैं उसकी जीभ को चाटे जा रहा था। धीरे धीरे उसकी गर्दन और उसकी चुचियों को कपड़ों के ऊपर से ही चाटने लगा था।
वह मदहोश होती जा रही थी। वह बस खड़ी खड़ी मेरी हरकत देखे जा रही थी। मैंने किस करते करते उसकी साड़ी और पेटीकोट को खोल दिया था। जैसे ही मैंने उसके बुर पर हाथ लगाया तो वह मचल गयी। उसके बुर पर बड़े बड़े बाल थे। मैंने एक ऊँगली उसके बुर में डालना चाहा पर पर आसानी से अन्दर नहीं जा रही थी क्योंकि उसकी बुर एकदम सूखी थी। उसके ब्लाउज को खोलकर उसकी चुचियों को चाटने लगा। एकाएक उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया। मैंने फट से अपने सारे कपड़े खोल दिए। वह मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी। फिर अपने मुंह में लेकर चाटने लगी। हम दोनों ६९ के पोजीशन में आकर एक दूसरे के अंगों को चाटने लगे। वह मेरे लण्ड को जोर-जोर से चाटे जा रही थी और कह रही थी- २ साल के बाद मुझे लण्ड चाटने को मिला है, आज तो खूब चाटूंगी।
सूखी बुर को गीली बनाने के लिए बहुत चटाई करनी पड़ी। काफी देर के बाद उसके बुर ने धीरे धीरे पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। उधर मेरा भी छूटने वाला था। मैं उठा और उसे लिटाकर अपना गीला लण्ड उसकी बुर पर रखा और उसे अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। उसने अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया। मैंने लण्ड डालना शुरू किया पर उसे कुछ नहीं हो रहा था। मैंने एकाएक लण्ड को पीछे लाकर जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा लण्ड उसके बुर में पूरा चला गया। वह थोड़ा छटपटाई और उसकी चीख भी निकली।
मैंने चोदना शुरू किया तो वह औरत बोली- जरा जोर से बेटा ….. और जोर से … और जोर से करो। फाड़ दो मेरी बुर को। मैं पूरी ताकत लगाकर उसे चोदने लगा। मेरा लण्ड काफी तेजी से उसकी बुर में अन्दर-बाहर हो रहा था। वह मुझे अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर अपनी ओर खींच रही थी। उसके झड़ने के बाद मैं भी झड़ कर उसके ऊपर लेट कर सो गया।
रात को मेरी नींद खुली तो देखा कि वह औरत मेरे लण्ड को जोर जोर से चाट रही है। लण्ड खड़ा होते ही वह उस पर अपनी बुर रखकर बैठ गई। लण्ड उसकी बुर में सांप सा चला गया। वह उछल-उछल कर चुदवाने लगी और झड़ गई। करीब 3:30 बजे उसे उठाया और जाने को कहा। वह कपड़े पहन कर जा ही रही थी कि 4 बजे मेरा दोस्त वहां आ गया। मैंने उसे सारी बात बताई। उसने उस औरत को पकड़ कर लिटाया और अपना काला लण्ड उसकी बुर में एक ही बार में डाल दिया। उस औरत के मुंह से चीख निकल गई। मेरा दोस्त का लण्ड मेरे लण्ड से काफी बड़ा है।
चुदाई के बाद मेरे दोस्त ने उसे 500 रूपये दिए और जाने को कह दिया, वह चली गयी और फिर नहीं मिली।
जब कोई लड़का कोई औरत को देखता है तो कहता है कि वह तो बूढ़ी है। यारो, सुखी बुर में भी काफ़ी मजा आता है। कोई आस-पास है तो कोशिश कर के देख लो। मेरी आप बीती आप को कैसी लगी जरुर मेल करें। गन्दी लड़कियों का मैं स्वागत करता हूँ। Indian Sex Stories
दोस्तो, मेरा नाम Antarvasna रवि है। मैं पुणे का रहने वाला हूँ। मैं आप लोगों को अपनी बदचलन माँ की कहानी सुना रहा हूँ। जो मैं सोच भी नहीं सकता था वो मुझे आजमाने को मिला है। क्या बताऊँ दोस्तो !
मैं एक चाल में रहने वाला लड़का हूँ, नौवीं तक ही पढ़ा हूँ ! मैं पढ़ाई में कमजोर था लेकिन सेक्स में नहीं ! अब मेरी उम्र तेईस साल है, मेरे पिताजी कुछ काम नहीं करते हैं, बस शराब पीते हैं रोज़ ! इसी वजह से शायद उनमें अब सेक्स नहीं रहा है, इसी वजह से मेरी माँ ने दूसरों के साथ सबंध बनाये हैं। मेरी माँ सुबह काम पर जाती है और दोपहर को घर आती है और शाम को जाती तो रात को आठ बजे आती है।
बात उस समय की है जब मैं थोड़ा बीमार था तो मैं काम से दोपहर को घर आया था और घर में मैंने देखा कि आज माँ घर आई नहीं थी। तो मैंने सोचा कि उसे किसी काम से देर हो गई होगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। मेरी माँ तो हमारे पड़ोसी अंकल के घर में थी। उनका दरवाजा बंद देखकर मुझे शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है। मैंने उनकी खिड़की के छेद से देखा कि मेरी माँ और विशाल अंकल दोनों एक दूसरे की बाहों में हैं। मेरी माँ की उम्र 45 साल और अंकल की उम्र 35 साल होगी। फिर भी वो एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे।
यह देखकर मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर जाकर सो गया। उस रात को मैं सो नहीं पाया। मैंने यह बात अपने दोस्त से कही कि मेरी माँ और अंकल के बीच सेक्स सम्बन्ध होता है तो उसने कहा कि हम दोनों नजर रखेंगे।
मैंने भी हाँ कर दी !
चार-पाँच दिन बाद उसने फोन कर के मुझे बताया कि मेरी माँ और अंकल मेरी ही घर में हैं और मुझे घर आने को कहा। मैं और मेरा दोस्त मेरी घर के खिड़की से देखने लगे। मेरी माँ पूरी की पूरी नंगी थी विशाल अंकल के साथ ! अंकल भी पूरा नंगा था। मुझे बहुत ही गुस्सा आया लेकिन दोस्त ने रोका और मुझे चुपचाप देखने को कहा और मैं देखता रहा।
मेरी माँ अंकल का लण्ड चूस रही थी और अंकल चुसवा रहा था। 5 मिनट बाद उसने सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया और कहने लगा- ले ले जोर से चूस ले ! पी ले … तेरे मर्द में ऐसा रस नहीं मिलेगा !
माँ ने कहा- इसीलिए तेरा पीती हूँ ना मेरे जानू ! तेरा लण्ड तो लोहा है ! ऐसा मजा कही नहीं मिलता है !
फिर कुछ देर बाद वो दोनों 69 की अवस्था में आ गए। अंकल माँ की चूत चाट चाट कर पानी ला रहा था, माँ भी लण्ड को चोकोबार की तरह चूसे जा रही थी। इतने में मेरा और मेरे दोस्त का लण्ड खड़ा कब हुआ, पता ही नहीं चला !
फिर अंकल ने माँ को लिटा कर उसकी टाँगें कंधे पर लेकर अपना लण्ड चूत पर रख दिया और चूत में पेलने लगा। उसका 6 इंच का लण्ड चूत को फाड़ रहा था। साल हरामी जोर जोर के धक्के मारने लगा। दस बारह मिनट में वो भी थक गया, वो माँ को पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं कर सका, यह हम जान गए थे।
उनका खेल ख़त्म हो गया और वो कपड़े पहन रहे थे। हम वहाँ से चले गए। फ़िर अंकल चले गए और माँ सो गई।
मेरे दोस्त ने कहा- हम भी अंकल की बीवी को बताकर उसे भी हम चोदते हैं।
मैंने मना किया।
फिर उसे एक मस्ती सूझी, उसने कहा- आज मैं तेरे घर सोने आता हूँ।
मैंने हाँ कर दी।
रात को नौ बजे वो खाना खाकर आया। मेरा बाप तो घर पर सोता नहीं है। हम टी वी देखकर सो गए- मैं, मेरा दोस्त और माँ !
रात को बारह बजे मेरे दोस्त ने मुझे जगाया और मुझे कहा- मैं क्या करता हूँ, तू सिर्फ देख ! और मुझे चुप रहने को कहा उसने !
वो माँ के पास जाकर लेट गया और माँ के बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। माँ सोई हुई थी और वो माँ को गर्म करने लगा था। वो माँ के मम्मों पर हाथ फेर रहा था, मैं देख रहा था। उसने माँ का ब्लाऊज खोल दिया और मम्मे चूसने लगा। मैंने भी हिम्मत की और माँ की दूसरी बाजू में जाकर दूसरा मम्मा चूसने लगा।
क्या मम्मे हैं ! वाह ! मैं पहली बार चूस रहा था।
इतने में मेरी माँ जाग गई और एकदम से घबरा गई और कहा- तुम यह क्या कर रहे हो ?
मेरे दोस्त ने कहा- हमारा भी लण्ड चूस कर देखो ! उस अंकल से बहुत अच्छा है ! उससे चुदवाती हो तो हमने क्या पाप किया है ?
माँ ने कहा- तुम्हें सब पता है तो फिर क्या डर है मुझे !
यह सुनकर मेरे तो होश ही गुल हो गए। मेरे दोस्त ने माँ की साड़ी खोली। अब माँ सिर्फ और सिर्फ पेटीकोट में थी, वो भी मैंने नाड़ा खोलकर नीचे खींच दिया। अब वो सिर्फ पैन्टी में थी। उसके ऊपर से मेरे दोस्त ने चाटना शुरु किया। उसकी चूत से पानी आने लगा। फिर मैंने अपनी पैंट उतार दी। मैं और दोस्त सिर्फ अन्डरवीयर पहने थे। फिर वो चूत चाटने लगा और मैंने मुँह में लण्ड डाला। वो जोर से चूसने लगी। मैं उसके मुँह में चोदने लगा। उधर वो अन्डरवीयर उतार कर माँ की चूत में लण्ड डालने लगा था। माँ लेटे लेटे अपनी टाँगें फैलाने लगी और उसने 8 इंच का लण्ड माँ की चूत में पेल दिया।
फिर माँ ने मुझे कहा- तुम मेरी गांड में लण्ड डालो !
मैंने दोस्त को गांड मारने को कहा, मैं तो चूत मारूँगा ! माँ की गांड भी मस्त है
फिर उसने माँ को उठा कर बिस्तर पर ऐसे लिटाया कि मैं चूत के सामने था तो वो गांड के पीछे !
मुझे उसने कहा- सोच मत ! मार हथोड़ा !
फिर मैंने भी नंगा होकर मेरा सात इंच का लण्ड माँ की चूत पर टिका दिया। मैं मम्मे चूस कर चूत में लण्ड घुसाने की कोशिश रहा था, वो आह आहा अह अ करने लगी।
मैंने तो अभी लण्ड भी डाला नहीं फिर कैसे ?
मेरे दोस्त ने गांड भी मार दी थी। उसने तो पूरा का पूरा लण्ड गांड में घुसा डाला था ….
वो कहने लगी- जोर जोर से चोदो मुझे ! मैं बहुत प्यासी हूँ लण्ड की !
मैंने भी जोर लगाना शुरु किया और जोर से चूत में पेल दिया। उसे इतना खुश कभी नहीं देखा मैंने !
उस रात हमने उसकी खूब चुदाई की। मैंने सिर्फ चूत मारी, मेरे दोस्त ने उसके मुँह में, चूत और गांड को चार-पाँच बार चुदाई की। फिर मैं तो रात के तीन बजे ही सो गया लेकिन मेरे दोस्त ने माँ की पाँच बजे तक चुदाई की। इससे माँ भी खुश थी।
इस तरह मेरा दोस्त जब भी मौका मिलता है माँ की चुदाई करता है। मेरी माँ अब उस विशाल से नहीं चुदती है बल्कि मेरे दोस्त विकी से चुदती रहती है !
यह मेरी बुरी मगर सच्ची कहानी आप लोगों को कैसे लगी, मुझे मेल करें और बताये ! Antarvasna
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मैं आज अपने मायके आ Hindi Sex Stories गई, सोचा कि कुछ समय अपने भाई और माता पिता के साथ गुजार लूँ। मेरी माँ और पिता एक सरकरी विभाग में काम करते हैं, भैया कॉलेज में पढ़ता है। आप जानते हैं ना चुदाई एक ऐसी चीज़ है जिसके बिना हम लड़कियाँ तो बिल्कुल नहीं रह पाती। यहां मायके में भी यही हाल हुआ। ये चूत है कि लण्ड मांगे मोर…। बोबे भी फ़ड़क उठते हैं… गांड भी लण्ड दिखते ही लचकदार होकर अदाएँ दिखाने लगती है… चाल ही बदल जाती है। देखने वाला भी समझ जाता है कि अब ये लण्ड की भूखी है। बाहर से हम चाहे जितनी भी गम्भीर लगें, सोबर लगें पर हमारी नजरें तो पैन्ट के अन्दर लण्ड तक उतर जाती हैं। लड़कों का खड़ा लण्ड नजर आने लगता है।
मैं खिड़की पर खड़ी सब्जी काट रही थी की भैया आया और बिना इधर उधर देखे बाहर ही दीवार पर अपना लण्ड निकाल कर पेशाब करने लगा। मेरा दिल धक से रह गया। इतना बड़ा और मोटा लण्ड… भैया ने पेशाब किया और लण्ड को झटका और पेण्ट में घुसा लिया। मैं तुरन्त एक तरफ़ हो गयी। भैया अन्दर आ गया और मुझे रसोई में देख कर थोड़ा विचलित हो गया … उसे लगा को शायद मैने उसे पेशाब करते हुये देख लिया है।
“ये खिड़की क्या खुली हुई थी…”
“हां क्यो, क्या बात है…”
“नहीं यू ही बस …।”
“हां… तुम वहा पेशाब कर रहे थे न…” मैं मुस्कराई और उसकी पेन्ट की तरफ़ देखा
भैया शर्मा गया।
“धत्त , तुझे शरम नही मुझे देखते हुये”
“शरम कैसी… ये तो सबके होता है ना, बस तेरा थोड़ा सा बड़ा है…”
“दीदी…” वो शरमा कर बाहर चला गया। मुझे हंसी आ गयी। हां, मेरा दिल जरूर मचल गया हा। पर भैया भी चालू निकला, वो जब भी खिड़की खुली देखता तो वहा पेशाब करने खड़ा हो जाता था… और मुझे अब वो जान करके अपना लण्ड दिखाता था। मेरा मन विचलित होता गया। एक बार मैने उससे कह ही दिया…
“बबलू… तू रोज़ ही वहा पेशाब क्यो करता है रे…”
“मुझे अच्छा लगता है वहां”
“… या मुझे दिखाता है…अपना वो…”
“दीदी, आप भी तो देखती हो ना… फिर ये तो सबका एक सा होता है ना…”
” जा रे… तू दिखायेगा तो मैं देखूंगी ही ना… फिर…” मैं शर्मा सी उठी
“दीदी… तेरी तो शादी हो गई है…तुझे क्या…”
“अच्छा छोड़, मैं स्टूल पर चढ कर वो समान उतारती हू, तू मेरा ध्यान रखना…मैं कही गिर ना जाऊ”
मैं स्टूल पर चढी, और कहा “बबलू… मेरी कमर थाम ले…और ध्यान रखना…”
समान उतार कर मैं ज्योही स्टूल पर से उतरी बबलू ने मुझे उतरते हुये अपनी तरफ़ खींच लिया।
“धीरे धीरे दीदी…”और उसने मुझे ऐसे उतारना चालू किया कि मेरे बोबे तक दबा डाले धीरे धीरे सरकते हुए वो मुझे नीचे उतारने लगा और मेरे चूतड़ उससे चिपकते हुए उसके लण्ड तक पहुंच गये। अब हाल ये था की मेरे दोनो बोबे उसके कब्जे में थे और उसका लण्ड मेरे पटीकोट को दबाते हुए गाण्ड में घुस गया था। उसके मोटे लण्ड का स्पर्श मैं अपने दोनो चुतड़ो के बीच महसूस कर रही थी। मैने उसे देखा तो उसकी आंखे बंद थी… और मुझे वो कस कर जकड़ा था। शायद उसे मजा आ रहा था। मुझे बहुत ही मजा आने लगा था। पर शराफ़त का तकाजा था कि एक बार तो कह ही दू…”अरे छोड़ ना…क्या कर रहा है…”
“ओह दीदी… मुझे ना क्या हो गया था… सॉरी…”
“बड़े प्यार से सॉरी कह दिया… “मैने उसकी हिम्मत बढाई।
“दीदी क्या करू बस आपको देख कर प्यार उमड़ पड़ता है…”
“और वो जो खड़ा हो जाता है… उसका क्या”
“दीदी… वो तो पता नही , बस हो गया था” और मुस्कराता हुआ बाहर चला गया।
रात को सब सो गये तब मन में वासना जाग उठी। भैया के अन्दर का शैतान जाग उठा और मेरी अन्तर्वासना जाग उठी। जवान जिस्मो को अब खेल चाहिये था। दोनो के तन बदन में आग लगी हुई थी। कैसे शैतान ने काम किया कि हम दोनो को एक दूसरे की जरुरत महसूस होने लगी । हम दोनो लेटे हुये एक दूसरे को देख रहे थे… आंखो ही आंखो में वासना भरे इशारे हो रहे थे। भैया ने तो अपना लण्ड ही दबाना शुरू कर दिया, मैने भी उसे देख कर अपने होंठ दांतो से काट लिये। मैने उसे अपने बोबे अपना ब्लाऊज नीचे खींच कर दिखा दिये और दबा भी दिये। अब मैने चादर के अन्दर ही अपनी पेण्टी उतार दी और ब्रा खींच कर खोल दी। पेटीकोट को ऊपर उठा लिया… और अपनी चूत सहलाने लगी। ऊपर साफ़ दिख रहा था मेरा चूत का मसलना…
“दीदी, आप यही क्यो नही आ जाती , अपन बाते करेंगे”
“क्या बात करेंगे… मुझे पता है… तुझे भी पता है…आजा मेरे भैया…”
हम दोनो बिस्तर से उतर कर खड़े हो गये। धीरे धीरे एक दूसरे के समीप आ गये और फिर हम दोनो आपस में लिपट पड़े। मेरा अस्त व्यस्त ब्लाऊज और पेटीकोट धीले हो कर जाने कब नीचे खिसक गये, उसका पजामा भी नीचे उतर गया। हम नंगे खड़े थे। हम दोनो अब एक दूसरे को चूमने लगे। उसका लण्ड मेरी नगी चूत पर ठोकरे मारने लगा।
मैं भी निशाना लगा कर लण्ड को लपकने की कोशिश करने लगी कि उसे अन्दर ले लूं। हम दोनो के नगे और चिकने जिस्म रगड़ खाने लगे। जाने हम दोनो के होंठ कब एक दूसरे से चिपक गये। बबलू ने खुद को नीचे करते हुए मेरी गीली चूत में लण्ड घुसाने कोशिश करने लगा। उसका लण्ड मुझे यहा वहा रगड़ खा कर मस्ती दे रहा था। मेरी चूत अब लप लप करने लगी थी। तभी लगा की लण्ड ने चूत में प्रवेश कर लिया है। मैने अपनी एक टांग कुर्सी पर रख ली और चूत का द्वार और खोल दिया। लण्ड अन्दर घुस पड़ा। मीठा मीठा सा मजा आने लगा … मैने भी अपनी चूत उसके लण्ड पर दबा दी , उसका लण्ड पूरा अन्दर तक उतर गया।
अब मैने अपनी टांग नीचे कर ली। और भैया को जकड़ लिया। हम एक दूसरे से चिपके हुये कमर को हौले हौले चलाने लग गये। गीली और चिकनी चूत में लण्ड अन्दर बाहर फ़िसलने लगा। मुझे चुदाई का नशा सा आने लगा। बबलू का मोटा लण्ड मुझे भरपूर मजा दे रहा था। हम काफ़ी देर तक यू ही वासना की कसक भरी मस्ती लेते रहे। वो धीरे धीरे मुझे चोदता रहा… अब मुझे लगा कि कही मैं झड़ ना जाऊ… पर देर हो चुकी थी…मेरी चूत में पानी उतरने लगा था, सब्र टूट रहा था… मेरी सांसे जोर से चलने लगी और मेरा पानी छूट पड़ा। पर मैं उससे चिपकी रही। भैया मुझे हौले हौले चोदता ही रहा। धीरे धीरे मुझे फिर से चुदने का मजा आने लगा। मैं फिर से उसे पकड़ कर चिपट गयी। वो मेरे बोबे दबाता रहा और चोदता रहा, उसमें दम था…
“दीदी … अब उल्टी हो जाओ दूसरा मजा भी लू क्या ?”
“मेरे प्यारे भैया … हाय रे गान्ड चोदेगा क्या…” उसने हां में सर हिलाया। मैं उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ी हो गयी। उसने मुझे घोड़ी जैसा झुकाया और झुक कर देखा, पास में पड़ी शीशी से क्रीम निकाली और गाण्ड में भर दी।
“क्रीम मत लगा, मेरी गाण्ड तो वैसे ही खुली हुई है… खूब लण्ड खा लेती है…” मैने उसे बताया पर तब तक उसका लौड़ा मेरी गाण्ड में घुस चुका था। लण्ड गाण्ड में कसता हुआ जा रहा था पर दर्द नही हुआ। बस एक मीठी सी सुरसुरी होने लगी। उसका लौड़ा मेरी गाण्ड में पूरा अन्दर तक बैठ गया था।
मैने फ़्री स्टाईल में कमर हिलानी शुरू कर दी पर भैया को मजा चाहिये था, सो उसने मुझे सीधा खड़ा कर दिया और और मेरी पीठ अपने से चिपका ली । मेरे बड़े बड़े बोबे थाम कर उसे मसलना चालू कर दिया और लण्ड को हौले हौले गाण्ड में चलाने लगा। लण्ड का पूरा मजा आ रहा था। उसका साईज़ मेरे चूतड़ो तक को महसूस हो रहा था मुझे अब थोड़ी सी इस पोज में तकलीफ़ होने लगी थी सो मैं अब झुकने लगी और घोड़ी बनने लगी चुदते चुदते ही मैने अपने अपने हाथ कुर्सी पर टिका दिये और अपने पांव खोल दिये। उसका लण्ड अब अच्छी तरह से तेज चलने लगा। मैने भी चूतड़ो कि ताल में हिला कर गाण्ड मरवाने लगी। अब मुझे भी मस्ती आने लगी थी। भैया गाण्ड मारने में माहिर था। अब तो मेरी चूत भी फिर से तैयार थी, भैया ने मेरा इशारा समझा और लण्ड को गाण्ड में से निकाल कर फिर से चूत में पिरो दिया। मेरी चूत में मजे की तरावट आ गयी। खूब गुदगुदी भरी मिठास उठने लगी।
मैने भी चूत को गाण्ड के साथ नचाना शुरू कर दिया और मजा तेजआने लगा। चूत के पानी का चिकनापन से चोदते समय फ़च फ़च की आवाज आने लगी थी। सारी दुनिया मेरी चूत में सिमट कर रह गई थी। मस्ती सर पर चढ चुकी थी। चुदाई जोरो पर थी। भैया तूफ़ानी गति से कस कर धक्के मार रहा था। मेरी चूत बेहाल हो उठी थी। अब लग रहा था कि मेरा माल निकलने वाला है… उत्तेजना चरम दौर पर थी… चूत पर लण्ड की चोट मुझे मस्त किये दे रही थी। अचानक भैया ने लण्ड मेरी चूत में दबा दिया और मेरी कमर कस कर भींच दी ।
“दीदी… दीदी… हाय… आह्ह्ह … मेरा लण्ड गया… दीदी… मेरा निकला…ऊईईईईई…ऐह्ह्ह्ह्ह्ह्…”
तभी मेरी भी सारी नसे जैसे खिंच उठी और मैं तड़प उठी। मेरा भी पानी जैसे अन्दर से उबल पड़ा और मैं झड़ने लगी। तभी भैया के लण्ड ने भी पिचकारी छोड़ दी। लण्ड बाहर निकाल कर सारा वीर्य छोड़ दिया। उसका लण्ड रह रह कर रस बरसा रहा था। मेरी गाण्ड पूरी वीर्य से तर हो चुकी थी। वो लगता था थक गया था। उसने पास पड़े कपड़े से मेरे चूतड़ साफ़ कर दिये और अपना लण्ड भी पोंछ डाला। हम दोनो फिर से आपस में लिपट गये और प्यार करने लगे।
अब हम एक ही बिस्तर में लेटे थे और एक दूसरे के साथ खेल खेलने लगे थे। मुझे तो उसे फिर से उत्तेजित करना था। मेरा तो रात भर का कार्यक्रम था… कुछ देर में भैया फिर से तैयार था … उसका लण्ड कड़क हो चुका था… मैं भी चुदने को तैयार थी… उसने मेरे ऊपर चढ कर मुझे दबा डाला… और उसका लण्ड एक बार फिर से मेरी चूत में घुसता चला गया… मेरी सिसकारिया मुख से फ़ूट उठी… लण्ड और चूत का घमासान युद्ध होने लगा… Hindi Sex Stories
जब मैं बी.टेक. कर रहा था तभी Hindi Porn Stories गौरी नाम की लड़की से मेरी दोस्ती फोन पर हुई। मैंने उसे देखा नहीं था पर मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था। धीरे-2 हम लोगों में इतना प्यार हो गया था कि हम एक दूसरे से फोन पर 4 घंटे तक रोज बात करते थे और जैसे -2 प्यार बढ़ता गया, हम मन से होते हुए तन पर चले गये। हम लोग फोन पर ही सेक्स करते थे। वो इतनी सेक्सी बातें करती थी कि वो वहाँ उंगली डाल कर अपनी आग बुझाती थी और मैं मुठ मार कर अपनी जवानी की तड़प शांत करता था। पर जब भी मैं उससे मिलने को कहता था वो कोई न कोई बहाना बना कर मुझे चुप करा देती थी। मुझे समझ में नहीं आता था कि उसके मन में क्या था.
धीरे-2 वक़्त गुजरता गया। हमारे इस चक्कर को 2 साल हो गये थे पर मैं उसे देख भी न सका था। मैं सुल्तानपुर से बी टेक कर रहा था और वो बनारस की थी। फिर भी मैं उसकी चाहत में मजबूर था।
मेरा यह भ्रम तो तब टूटा जब मैंने अपना कोर्स पूरा कर लिया और मेरी जॉब लग गई।
तो मैंने उससे शादी के लिए कहा तो उसने अचानक ही अपने सारे नंबर बंद कर लिए। मेरा दिमाग आपे से बाहर हो गया, मैं उसे ऐसे कैसे जाने देता जिसके लिए मैंने कितनी बार मुठ मारी थी। मैंने अपने कुछ दोस्तों की मदद ले के उसके नम्बर की आईडी निकलवाई और बनारस आ गया…
अपने दोस्तों को नीचे खड़ा करके जैसे ही मैं उस पते पर पहुंचा, वहाँ मेरे सपनों की मल्लिका ने नहीं, एक 35 साल की औरत ने दरवाजा खोला। फोन पर वो मुझे हमेशा 22 साल की लड़की बताती रही थी। मुझे बहुत तकलीफ हुई, मैंने उससे बदला लेने की अपने दिमाग में ठान ली…
वैसे मैं आपको बता दूँ कि वो 35 साल की औरत भी इतनी माल थी कि 18 साल की लड़कियों को पानी भरा दे। उसका फिगर 34-30-38 का था। मेरा तो लंड देख के ही फनफना गया पर जब सब बातें सामने आई तो वो रोने लगी, बोली- चाहे जो कर लो, पर मेरे पति को कुछ मत बताना, मेरा घर बर्बाद हो जायेगा.
मैंने कहा- ठीक है, मुझे खुश करना होगा सारी जिन्दगी!
और वो राजी हो गई…
वो मुझे अपने बेडरूम में ले गई। उसकी गांड और उभरे हुए स्तनों के उभरे हुए चुचूक देख कर मेरे लंड महाराज आपे से बाहर हो रहे थे। बेडरूम में आते मैंने उसको अपनी बाहों भर लिया और उसके रसीले होटों पर अपने होंट टिका दिए। मैं 10 मिनट तक उसके होटों को चूसता रहा। मेरा एक हाथ उसके पिछवाड़े को सहला रहा था तो दूसरा उसकी चूची को मसल रहा था।
मैंने उसको बेड पर गिरा दिया और उसके पल्लू को हटाया। जोश-2 में मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन को तोड़ दिए। अन्दर वो काली ब्रा पहने हुई थी और चूचियाँ तो जैसे ब्रा को फाड़ कर निकलने को बेताब थी। मैंने उसको उल्टा लिटा कर ब्रा का हुक खोल दिया, एक चूची को मुँह में ले कर दूसरी को दबाना शुरु कर दिया…
उसके मुँह से आह आह ऊ ऊह आह… की आवाजें आ रही थी… उसकी गांड बहुत ही ज्यादा मस्त थी, उसको सहलाते हुए मैंने उसका पेटीकोट नीचे खिसका दिया… क्या माल थी! मैं कैसे बयाँ करूँ शब्द नहीं है मेरे पास! गोरी संगमरमर जैसी जांघें… काली पेंटी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मैंने महसूस किया कि उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी। मैंने अपने दाँतों से उसकी पेंटी नीचे खिसका दी। उसकी चूत पर हल्के-2 काल बाल थे। मैंने अपने होटों को उसके नीचे के होटों से मिला दिया. और जी भर के चूसने लगा… वो आह अहः आह ओह्ह के साथ बोल रही थी- आज तुम्हीं मेरे मालिक हो! मेरी प्यास बुझा दो! मेरे पति से कुछ नहीं होता! मुझे गरम कर के खुद लुढ़क जाते हैं . आज तुम मिले हो, मेरी आग बुझा दो…
मैं उसकी चूत चूस रहा था, तभी वो पलटी और मेरी जींस उतार दी, अंडरवियर भी और मेरे 7 इंच के लंड को मुँह में ले कर लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…
मैं भी जोश में आ कर उसके मुँह में धक्के मारने लगा। कुछ देर बाद मैं झड़ गया और यहाँ इसकी चूत ने भी पानी फेंक दिया… वो मेरा और मैं उसका सारा अमृत जल पी गये…
इसके बाद मैंने उसे कुतिया स्टाइल में होने को कहा। शायद वो सब जानती थी, झट से अपनी गांड खोल कर झुक गई। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड पेल दिया। कई सालों से लंड खा रही थी सो आराम से झेल गई मेरा 7 इंच का लौडा…
मैंने भी जोर जोर से चुदाई शुरु कर दी…
उसके मुँह से पता नहीं क्या-2 निकल रहा था… चोदो मेरे राजा… मेरे पति का तो अब खड़ा भी नहीं होता! सही से मुझे तुम से जवान मर्द की तलाश थी… भोसड़ा बना दो आज मेरी चूत का… आह्ह… ऊह… उम्म्म… राजा… आह्ह… उम्म्म… सीई… सीई . मेरे राजा मेरे मालिक…
मैं भी अपनी मस्ती में पेले जा रहा था… अचानक उसका जिस्म अकड़ने लगा- और जोर से मेरे राजा! मेरा होने वाला है! आज तीन साल बाद मेरी आग बुझेगी और जोर से. आह… उम्म्म्म… सीई… आः…
और उसकी चूत ने लावा फेंक दिया. मैं भी मंजिल पर पहुँचने वाला था… मैंने स्पीड बढ़ा दी… 10-15 झटकों में ही मैंने अपनी आग उसके भोंसड़े में भर दी…
यह थी मेरी दूसरी चुदाई चाची की चुदाई के बाद…
आपको मेरी यह वास्तविक कहानी कैसी लगी, जरूर जवाब दें! खासकर हर शादीशुदा और कुंवारी लड़की जो अन्तर्वासना से जुड़ी है…
आपके इन्तजार में Hindi Porn Stories
इस घटना ने शिल्पा को Antarvasna भी हम लोगों के प्रति बोल्ड कर दिया था. शिल्पा शाम को चली गई, मेरा भाई भी तीन दिन बाद चला गया, कोई दस दिन बाद मेरे पति टूअर से लौटे. इस बार भी वे तरह तरह के प्रसाधन लाये थे, शाम के वक्त घर में घुसे तो घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, उन्होंने कपडे भी नहीं बदले और मुझसे लिपट गये. मैंने दरवाजे को जब तक लोंक किया तब तक वे मेरे गाउन को हटा चुके थे और देखते ही देखते मेरी ब्रा को हटा स्तनों से सरका कर मेरे स्तनों को चूसने लगे.
“ओफ्फो… तुम सारे भाई बहन एक जैसे हो! घर में आकर पानी वानी पीने के स्थान पर मेरे स्तनों पर टूट पड़ते हो!” मैंने उनके सिर पर हाथ फ़ेर कर कहा.
वह चौंके और स्तन के निप्पल को मुंह से निकाल कर बोले- क्या मतलब है तुम्हारे कहने का? तुमने मेरे साथ मेरी बहन का जिकर क्यों किया?
“इसलिये किया क्योंकि आपके यहाँ से उस दिन जाते ही आपकी बहन शिल्पा आई थी, वो भी दरवाजा खुलते ही मेरे ब्लाउज को खोलने लग पड़ी थी!” मैंने हंसते हुए कहा.
“क्या!? क्या शिल्पा को भी यह सब पसंद है?” उन्हें आश्चर्य हुआ.
“फिर क्या हुआ?” उन्होंने मुझे अपनी बाजूओं में उठा कर बैडरूम की ओर चलते हुए पूछा.
मैं उनकी टाई की नॉट ढीली करती हुई बोली- जब वह यहाँ पहुंची थी तब मैं अपने भाई के साथ बाथरूम में थी, हम दोनों नहा रहे थे.
“साथ साथ नहा रहे थे… तब तो बड़ा मजा आ रहा होगा! चलो, अपन भी साथ साथ नहाते हैं, नहाते नहाते सुनेंगे पूरा किस्सा! उन्होंने बैडरूम में प्रवेश होते होते अपने कदम बाथरूम की और मोड़ कर कहा.
मजा तो आना ही था…! मेरा भाई मुझे साबुन लगा कर मुझे बुरी तरह गर्म चुका था, वह मेरी योनि को चाट ही रहा था कि तुम्हारी बहन ने कॉल बेल बजा दी, हम दोनों का मूड ऑफ़ हो गया. मैं उसे प्यासा छोड़ बाथरूम से निकली और जल्दी जल्दी साड़ी ब्लाउज पहन कर दरवाजे पर पहुंची. दरवाजा खोला तो पाया कि सामने गहरे गले के टॉप और घुटनों तक की चुस्त स्कर्ट में अपनी उफनती जवानी लिये शिल्पा खड़ी थी.
मेरे इतना कहते कहते मेरे पति ने मुझे बाथरूम में ले जाकर मुझे फर्श पर उतार दिया और मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. फिर मेरे होंठों को चूमने के बाद मेरे स्तनों को चूम कर बोले- फिर… फिर क्या हुआ… कहती रहो और मुझे इन झरनों से अपनी प्यास बुझाने दो!
इतना कह कर उन्होंने फिर मेरे स्तन पर मुंह लगा दिया. मेरे शरीर में आग भरती जा रही थी, मेरे हाथों ने उनकी टाई निकालने के बाद उनके कोट को भी उतार दिया था, अब शर्ट के बटन खुल रहे थे.
शर्ट के बटन खोलते खोलते मैं बोली- उफ… उफ… शिल्पा ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई कि लड़की प्यासी है, मेरी बातों को… उफ… उफ… आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें… आप तो पागल हुए जा रहे हैं… उफ… मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियाँ फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है.
मैंने उत्तेजना से उत्पन्न होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया- शिल्पा को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने… उफ… ऑफ… ओफ्फो… क्या कर रहे हैं आप…? क्या कोई ट्रेनिंग लेकर आये हैं कहीं से स्तनों के साथ इस तरह पेश आने की… आज तो आप मेरे स्तनों को झिंझोडे डाल रहे हैं आज…
मेरे इस तरह कहने से उन्होंने स्तन से मुँह हटा कर मेरे होंठ चूम कर मनमोहक ढंग से कहा- क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा? अगर मजा नहीं आ रहा है तो मैं इन्हें आहिस्ता आहिस्ता चूसता हूँ.
“मजा तो बहुत आ रहा है, इतना आ रहा है कि ऐसा लगता है जैसे मैं आज कण कण होकर बिखर रही हूँ. ठीक है तुम ऐसे ही चूसो!” मैंने उनकी शर्ट को उनकी बाजुओं से निकाल कर कहा.
“तुम शिल्पा वाली बात तो बताओ…” उन्होंने यह कह कर स्तन के निप्पल को फिर मुंह में ले लिया और अपने हाथों को मेरे नितंबों पर ले जाकर नितंबों की मालिश सी करने लगे.
मैं उनकी बेल्ट खोलते हुए बोली- फिर एक ओह्ह.. उफ… ऊई… फिर हाँ मैं..उफ… मैं कह रही थी कि शिल्पा को मैं रसोई में ले गई तो उसने वहाँ पहुँचते पहुँचते ही मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया और मेरे स्तनों को चूसने की इच्छा जाहिर की और यह भी बताया कि अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव का आनन्द लेती है. मेरी… उफ… ओह… अपने पति के द्वारा अपनी योनि में मौजूद भंगाकुर को मसले जाने से मेरे कंठ से कराह निकल गई- उफ… ये शावर तो खोल लो… नहाना भी साथ साथ हो जायेगा!
मैं इतना कह कर पुनः विषय पर आई- मेरे शरीर में मेरे भाई ने पहले ही कामाग्नि भड़का डाली थी, शिल्पा द्वारा स्तनों को पकड़ने मसलने और उसकी स्तन पान की इच्छा ने मुझे और उत्तेजित कर डाला था. उसे तब तक पता नहीं था… उफ… ओह… ओफ…
मेरे पति अब मेरे स्तनों को छोड़ कर नीचे पहुँच गए थे, उन्होंने मेरी योनि पर मुख लगा दिया था, अब वो मेरे भंगाकुर को चूसने लगे थे.
मैं उनके बालों में अंगुलियाँ फंसा कर मुट्ठियाँ भींचने लगी, उनकी इस क्रिया ने मेरी नस नस में बहते रक्त को उबाल सा दिया था, मुझे अपनी उत्तेजना ज्वालामुखी का सा रूप लेती महसूस हुई, मुझे रोम रोम में फूटते कामानन्द के कई घूंट भरने पड़े.
“सुनाओ न आगे क्या हुआ…?” मेरे पति ने अपना मुख मेरी योनि से पल भर के लिए हटा कर कहा.
“तुम शावर खोलो, मैं आगे बताती हूँ…” अपनी साँसों को संयत करने का असफल प्रयास करती हुई बोली.
“ओफ़्फ़… फिर शिल्पा के सामने मेरा भाई आ गया, वह रसोई के बाहर खड़ा होकर पहले से हम दोनों को देख भी रहा था और हमारी बातें भी सुन रहा था, मेरा भाई सिर्फ अंडरवीयर में था, वह भी पहले से उत्तेजित था इसलिए उसका बृहद आकार में फैला लिंग अंडरवीयर में से भी उभरा उभरा दिखाई दे रहा था. शिल्पा की दृष्टि उसके अंडरवीयर पर टिक गई, मैं समझ गई कि उसने अभी तक लिंग के दर्शन नहीं किए हैं, ओह… उफ आउच… ओह…
इतनी कहानी सुनते सुनते ही मेरे पति ने अपने लिंग का मुंड मेरी योनि में प्रविष्ट करा दिया, वे शावर वह खोल चुके थे.
मैं उनके द्वारा हुए लिंग प्रवेश से आवेशित होने लगी थी, मेरे हाथ उनके कन्धों से पीठ तक बारी बारी से कस रहे थे, मेरी साँसें तीब्र हो रही थी, मादक सिसकियों की अस्फुट ध्वनियाँ रह रह कर मेरे कंठ से उभर रही थी.
मेरे पति ने लिंग का योनि में घर्षण करते हुए कहा- स्टोरी का क्या बना…! आगे क्या तुमने अपने भाई से शिल्पा की प्यास बुझवा दी?… ओह… कितना मजा आ रहा है!
शावर के नीचे मैथुन करने में… उफ… वह लिंग को आगे तक ठोक कर बोले. उनके हाथों में मेरी पतली कमर थी, उनकी जांघें मेरी जाँघों से टकरा कर विचित्र सी आवाज पैदा कर रही थी.
“हाँ… उफ… ओह… ऊई मां… तुम क्या मोटा कर लाये हो अपने लिंग को… इससे आज ज्यादा ही आनन्द मिल रहा है…” मुझे वाकई पहले से ज्यादा मजा आ रहा था, मैं फिर स्टोरी पर आई- बड़ा मजा आया था… शिल्पा को मेरे भाई ने पूरा मजा दिया था… खूब जोर जोर के धक्के मारे थे… मैंने बताया और लिंग प्रहार से उत्त्पन्न आनन्दित कर देने वाली पीड़ा से मेरे शरीर के रोयें रोयें में पुलकन थी, कंठ खुश्क हो गया था, मेरी जीभ बार बार मेरे होठों पर फिर रही थी.
थोड़ी देर में मेरे पति ने मेरी मुद्रा बदलवाई, अब मेरी पीठ उनकी ओर हो गई, मैंने जरा झुक कर दीवार में लगी नल को पकड़ लिया, वह मेरी योनि से लिंग निकाल चुके थे और अब मेरी गुदा(गांड) में प्रवेश करा रहे थे. गुदा में लिंग पहले ही प्रहार में प्रवेश हो गया, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर खूब शक्ति के साथ धक्के मारे और गुदा में ही स्खलित हो गए, मैं भी स्खलित हो चुकी थी.
फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर देर तक नहाते रहे.
कहानी जारी है. Antarvasna
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