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Massage Girl in Tarn Taran: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Tarn Taran who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Tarn Taran that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Tarn Taran massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Tarn Taran who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Tarn Taran massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Tarn Taran massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Tarn Taran who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Tarn Taran employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Tarn Taran helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Tarn Taran

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Tarn Taran at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

मेरे साले की बीवी का नाम स्वरा (बदला हुआ नाम) है. उसका फिगर 30-28-32 का है. वो दिखने में एकदम सुंदर माल जैसी है. उसका रंग मक्खन सा सफेद है.

उसकी शादी के बाद से ही हम दोनों में खूब जमती थी क्योंकि आपको तो पता ही है कि सलहज और जीजा में कुछ ना कुछ तो चलता ही रहता है.

स्वरा मुझसे अपनी हर बार साझा करती रहती थी, जिस कारण से हम दोनों काफ़ी क्लोज हो गए थे.

उसकी बातों से मुझे ये भी मालूम थी कि उसका पति उसमें कम इंटरेस्ट लेता था.
पता नहीं क्यों … लेकिन मेरे लिए तो ये सही था.

एक दिन मेरी सासू मां और उसके बेटे को उनके कोई निजी काम से एक दिन के लिए दिल्ली जाना पड़ा.

उन्होंने मुझसे कहा- आप या तो यहां रुक जाना या स्वरा को वहां अपने घर ले जाना.
स्वरा ने कहा- मैं जीजा जी के घर जाऊंगी तो घर सूना हो जाएगा. जीजू यहीं रुक जाएंगे. एक रात की तो बात है.

ये बात सुनकर उन्होंने भी हां कर दी और मैं उन दोनों को बस पर छोड़ कर उनके घर दस बजे के करीब पहुंच गया.

स्वरा ने नाइट सूट पहना हुआ था. नीचे पज़ामा और ऊपर बटनों टी-शर्ट वाली.

तो स्वरा ने मुझसे कहा- जीजू आपको चेंज करना है, तो कर लीजिए, फिर आराम से बैठते हैं.
मैं बाथरूम में चेंज करने चला गया.

मैंने जानबूझकर बाथरूम का गेट पूरा बंद नहीं किया. जब मैं अन्दर गया तो अन्दर स्वरा की ब्रा टंगी हुई थी. मैं वहां उसकी ब्रा अपने लंड पर लपेट कर मुठ मारने लगा.

कुछ ही देर में मैंने अपने लंड का पानी ब्रा में निकाला और चेंज करके बाहर आ गया.

मुझे ये नहीं पता था कि उस ब्रा को थोड़ी देर में ही उठा कर मशीन में डालने वाली है.

मैं अन्दर बैठा था तो मैंने देखा कि वो बाथरूम में गई और उसने बाथरूम से कपड़े उठाए.
फिर उसने मेरी और थोड़ा अजीब सी नजरों से देखा. फिर वो वॉशिंग मशीन की तरफ चली गयी.

मैं समझ गया कि इसे पता चल चुका है कि मैंने इसकी ब्रा के साथ क्या किया है.

फिर वो कमरे में आ गई.
कमरे की लाइट्स ऑफ होने के बाद रूम में अंधेरा हो गया था.

हम दोनों ही बेड पर लेटे हुए बातें कर रहे थे.
बातों बातों में वो मुझे बताने लगी थी कि इनको सेक्स में कोई इंटरेस्ट ही नहीं है. मैं कुछ कहूँ तो उन्हें मेरी बात बुरी लगती है.

मैंने कहा- नहीं तुम नहीं कहा करो, तुम क्यों ये सब कह कर अपनी वैल्यू कम करती हो.
वो बोली- हां, अब मुझे उनसे कुछ नहीं कहना है. मुझे उनसे अब कोई शिकायत नहीं है.

उसकी ऐसी बातें सुनकर मेरा लंड पूरा कड़क हो गया था. मैंने अंडरवियर भी नहीं पहनी थी, तो पजामे में मेरा लंड तम्बू बना रहा था.

रात के 12.30 बज चुके थे और स्वरा को नींद आ चुकी थी.

फिर भी मैंने चैक करने के लिए उसको आवाज लगाई.
उसका कोई जवाब नहीं आया.
मुझे कुछ हिम्मत मिली और मैं धीरे धीरे सरक कर उसके पास चला गया.

वो चित सोई हुई थी और उसने अपने बदन पर चादर डाला हुआ था.
शायद एसी के कारण उसे ठंड लग रही थी.

मैंने चादर को धीरे से एक तरफ किया और जहां उसकी टी-शर्ट के बटन थे, वहां हल्के हाथों से बटन खोलने लगा.

उसकी शर्ट में बटन आराम से खुलने वाले थे, तो जरा सी कोशिश में ही उसके दो बटन खुल गए.

एसी की एलईडी की रोशनी कमरे में काफी उजियाला कर रही थी जिसमें से में मुझे उसका पेट साफ़ दिखाई देने लगा था.

फिर मैं ऊपर वाले बटनों की तरफ गया तो वो उसके फूले हुए मम्मों के कारण उधर के बटन काफी टाइट लगे थे.
मुझसे बड़ी मुश्किल में उसमें से एक ही बटन खुल पाया.

तभी वो हिलने लगी और करवट लेकर पलट गई.

मुझे बहुत खीज हुई क्योंकि मुझे उसके बूब्स टच करने थे और अब वो उस साइड मुँह करके सो गई थी.

फिर भी मैंने अपनी कोशिशें जारी रखीं और कुछ मिनट बाद उसकी पीठ तरफ से उसका पज़ामा नीचे करने की कोशिश करने लगा.

स्वरा की फूली हुई गांड होने के कारण पजामा ने नीचे उतरने से मना कर दिया और मुझसे झांट कुछ नहीं हो पाया.

अब जब तक वो वापिस नहीं मुड़ जाती, तब तक मेरे पास कोई रास्ता नहीं था.

थोड़ी ही देर बाद मुझे ऐसे लगा जैसे शायद उसको सुसु आई क्योंकि वो हिल रही थी और उठने की कोशिश में थी.
मैंने इसे एक मौक़ा माना और मैं फटाफट उठ कर वॉशरूम में चला गया.

बाथरूम का गेट बिना बंद किए मैं मूतने लगा. मैं इस तरह से खड़ा था कि मेरा लंड उसे दिख जाए.

एक मिनट बाद ही वो आंखें मसलती हुई जब बाथरूम के पास आई तो मैं अपने लंड को हिला रहा था.
उसने मेरे लंड को देखा और वो एक तरफ हो गई.

वो बोली- जीजू, गेट बंद नहीं किया आपने.
मैंने कहा- कोई और था नहीं घर पर, मुझे नहीं पता था कि तुम भी उठ जाओगी. गर्मी कुछ ज्यादा थी तो नहीं किया.
वो बोली- ओके.

कुछ पल बाद मैं बाहर आ गया और वो अन्दर चली गई.

उसने सुसु की और हम दोनों वापिस बेड में आ गए.
हम दोनों फिर से सोने लगे.

उस समय रात के 3 बजे से ज्यादा का समय हो गया था.
उसने ठंड की वजह से एसी बंद कर दिया था और चादर भी हटा दिया था.

वो जब सो गई तो मैंने उसके मम्मों को सहलाना शुरू किया.

उसका कोई विरोध नहीं हुआ तो मुझे हिम्मत आ गई.
मेरी सोच यही थी कि आज कैसे भी करके ये मौका नहीं छोड़ना है.

मैंने हल्के से उसको आवाज दी, ‘स्वरा …’
उसका कोई उत्तर नहीं आया.

मैंने फिर से उसे जगाया, तो वो नींद में ही बोली- हां जीजा जी.
मैंने कहा- स्वरा यार, मैं तुझे पसंद करता हूँ.

ये बात सुनकर वो हंसने भी लगी और शर्मा गई.

वो बोली- मैं नींद में इतनी भी बेसुध नहीं हूँ, जो मुझे पता नहीं चल रहा कि आप क्या कर रहे हो. पहले मेरी ब्रा में अपना पानी गिराया, फिर मेरी शर्ट के बटन खोले. मुझे सिड्यूस करने के बाद भी आपने कुछ नहीं किया और 3 बजा दिए.

मैंने कहा- क्या मतलब?
वो बोली- मुझे भी जरूरत है जीजू … बहुत दिन से मैं भी प्यासी हूँ.
इतना कहते ही वो मेरे गले लग गई और हम दोनों लिपकिस करने लगे.

वो मेरे ऊपर आ गई और उसने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया. वो मेरे सीने को पागलों की तरह चूमने और चूसने लगी.

मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया और वो ऊपर ब्रा में रह गई. मैंने उसका पज़ामा उतार कर उससे कहा- हनी 69 में आ जाओ.

उसके पति ने कभी उसकी चूत नहीं चाटी थी तो वो 69 समझ नहीं पा रही थी.

फिर मैंने खुद ही उसकी चूत की तरफ आकर उसकी चूत चाटी, तो वो कंट्रोल से बाहर हो गई. मैं लगा रहा और वो आंह आंह करती रही अपनी चूत मेरे मुँह में देती रही.

कुछ ही पलों में उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुँह में आ गया.
वो झड़ कर मेरे बाजू में लेट गई.

कुछ मिनट बाद मैं नंगा हो गया और उसको गोदी में उठा कर उसे चूमने लगा.
मेरा लंड उसकी चूत में रगड़ मार रहा था.

उसने मेरे लंड को हाथ पकड़ कर रास्ता दिखाया और मैंने लंड चूत में डाल दिया.
वो आंह कह कर सिसक उठी.

उसकी चूत एकदम कसी हुई थी.
साले साहब का लंड एक तो छोटा था और काफी दिन से चूत में गया भी नहीं था.

कुछ देर की उन्ह आह के बाद वो चुदाई के पूरे मजे लेने लगी.

हमारी चुदाई धकापेल चलने लगी.
पहली बार का मामला था तो ये चुदाई 10 मिनट ही चली और मेरा लंड पानी छोड़ने को हो गया.

मैंने लंड चूत से निकला और पानी बाहर ही छोड़ दिया.
वो काफी खुश थी.

कुछ देर बाद हॉट फॅमिली पोर्न का दूसरा राउंड शुरू हो गया.
उस बार मैंने उसे हचक कर चोदा.
वो भी अपनी चूत को हर आसन में चुदवाने को मचल रही थी.

मैंने रात भर अपनी सलहज की चूत का मजा लिया.

पूरी रात चुदाई के चार राउंड करने के बाद हम दोनों काफी थक चुके थे.
स्वरा को भी नींद आ रही थी.

मैंने उसको सोने के लिए कहा और हम दोनों बिना कपड़ों के सो गए.
अगली सुबह मॉर्निंग जब मैं उठा तो देखा कि वह बिस्तर पर नहीं थी.

जब मैंने बाहर देखा, तो वो किचन में काम पर लगी हुई थी.

मैंने उसे आवाज लगाई और चाय बनाने के लिए कहा. मेरे दिमाग़ में अभी भी सेक्स करने की इच्छा चल रही थी.

मैंने उसके रूम में आने से पहले ही लंड सहलाना शुरू कर दिया था.

कुछ ही देर में वो अन्दर आई और मुझे लंड सहलाते देख कर मुस्कुराने लगी.

उसने कहा- जीजू, अभी तक शांत नहीं हुए आप!
मैंने कहा- तू है ही इतनी सेक्सी कि कंट्रोल करना मुश्किल है.

मेरी बात सुनकर वो मेरे पास आकर मुझे लिपकिस करने लगी.

मैंने उसे कपड़े उतारने के लिए कहा.
वो झट से अपना सलवार कुर्ता उतार कर मेरे पास आ गई.

उसने सिर्फ़ ब्लैक कलर की ब्रा डाल रखी थी.

मैंने उसे मेरे मुँह पर बैठने को कहा.
वो अपनी चूत चटवाने के लिए मेरे मुँह पर बैठ गई.

मैंने जीभ से उसकी फुद्दी चाटना शुरू कर दिया. मेरी जितनी जीभ अन्दर तक जा सकती थी, मैंने डालकर मजा लिया.

मेरी इस हरकत से वो फिर से चुदासी हो गई और मेरे मुँह से चूत हटा कर मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.

मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया.
वो और ज़्यादा गर्मा गई और मुझे लंड अन्दर डालने के लिए कहने लगी.

मैं झट से उसके ऊपर चढ़ गया और लंड सैट करके एक ही झटके में पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी फुद्दी में उतार दिया.
वो ‘आह मर गई …’ कह कर सिहर उठी.

कुछ ही मिनट में ही उसको चरम सुख की प्राप्ति होने लगी और उसकी चूत से पानी बाहर बहने लगा.
वो चिल्लाने लगी.

मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड बाहर निकाला और उसके मम्मों पर मुठ मारने लगा, अपने लंड का सारा पानी उसके मम्मों और पेट पर निकाल दिया.
वो खुश हो गई.

उस दिन शाम को मेरे साले और सासू मां को वापस आना था.
मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और तीन बजे तक अपनी सलहज को चोद चोद कर तृप्त कर दिया.

Hindi Sex Stories

मेरा नाम मोहित है। मैं इन्दौर में Hindi Sex Storiesरहता हूँ। मेरी उमर अभी ५२ वर्ष है। मैं एक सरकारी नौकरी में हूँ। मैने कुछ ही दिनों से अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। मुझे भी अपनी आप बीती लिखने की इच्छा हुई। मुझे ये बताने में जरा भी संकोच नहीं है कि ये सब मैने नेहा वर्मा के कहने पर उसे बताया। और उसी ने मेरी आप बीती आप लोगों को बताने को कहा और आप तक पहुंचाया।

यूं तो मेरी आप बीती आप लोंगो को बहुत साधारण सी लगेगी… क्योंकि ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है। सच तो यह है कि नेहा की कहानी “अंकल की प्यास” कुछ कुछ मुझे अपनी सी लगी।

मैने अदिति से लव मेरिज की थी। वो बहुत ही सेक्सी लड़की थी। हमने अपनी जिन्दगी में बहुत सेक्स का लुफ़्त उठाया, जैसा कि सभी लुफ़्त उठाते है। मेरी बचपन की गलत आदतों से मेरा लण्ड पिछले कई साल से कुछ ढीला पड़ गया था। अब धीरे धीरे रही सही कसावट भी जाती रही। बाज़ार में मिलने वाली सभी दवाईयों को मैं आजमा चुका था।

मेरा डाक्टर दोस्त ने भी खासे एक्सपेरिमेंट मेरे ऊपर किये…पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। एक बार तो मैने क्रीम का भी उपयोग किया …. पर उसका तो और ही उल्टा प्रभाव हुआ। नीम हकीमों के पास भी गया…कई बार तो मेरी तबियत भी इतनी खराब हो गई कि मुझे होस्पिटल में भरती होना पड़ा। इसलिये मेरा आपसे भी ये अनुरोध है कि आप भी अगर ऐसी कोई समस्या से पीड़ित हो तो कृपया नीम हकीम के चक्करों में ना पड़े।

मेरी इस हालत का असर मेरी पत्नी पर भी हुआ। अब वो मेरे से दूर रहने लगी। सेक्स की बात तक नहीं करती थी। मेरे हाथ भी लगाने से उसे अच्छा नहीं लगता था। धीरे धीरे मेरे सुनने में भी आने लगा कि अदिति के किसी दूसरे के साथ लग गई है। घर में इस बात को लेकर मैं उलझ भी पड़ता था। कइ बार मैने पत्नी से विनती भी की कि मुझे भी बहुत इच्छा होती है…. मुझे ऊपर से सहला कर या मुठ मार कर….या लण्ड चूस कर मेरा वीर्य निकाल दिया करो। पर उसका कहना था कि ऐसे करने से उसके तन बदन में आग लग जाती है….उसे कौन चोदेगा फिर। मेरा कहना था कि फिर मैं कहां जाऊं। किससे कहूं…. किसके साथ अपनी प्यास बुझाऊं।

अब तो ये हाल है कि मेरी पत्नी मुझसे ज्यादा बात ही नहीं करती। अब अलग कमरे में सोता हूँ…. बस देर रात तक मैं पोर्न साईट देखता रहता हूँ और मुठ मार कर अपना माल निकाल देता हूँ। अब तो इसकी मुझे आदत सी हो गई है।

इन्हीं दिनों मेरी मुलाकात नेहा से हुई। वो किसी समय में अदिति की छात्रा थी। उसमें मुझे कोई बात अलग सी लगी। उसके बात करने का अन्दाज़ और उसकी सहानुभूति का अन्दाज़ भी अलग था ….कहा जाये तो बहुत मधुर स्वभाव की जान पड़ी। हालांकि वो तो मेरे से बहुत छोटी थी। करीब २५ साल की होगी। फ़िगर और सेक्स अपील उसमे बहुत थी। मुझे वो सुन्दर भी बहुत लगती थी।

एक दिन बातों बातों में उसने मुझे पूछ ही लिया “अंकल…. आप अलग क्यो रहते हैं…. ये कमरा तो शायद बैठक है….” ये सीधे मेरे दिल पर चोट थी।

“ऐसी कोई बात नहीं है…. बस मैं लिखता पढ़ता बहुत हूँ….इसलिये मुझे डिस्टर्बेन्स नहीं चाहिये….”

“पर आन्टी तो आपको बुरा भला कहती है….कि बुढ्ढा तो किसी काम का नहीं है…. बस परेशान करता रहता है….” नेहा ने मुझसे हंसी में कहा। फिर एक चोट दिल पर लगी। मेरी आंखे कब गीली हो गई मुझे पता ही नहीं चला। पर मेरे छलकते आंसू नेहा की नजरों से नहीं छुप सके।

मै ऊपर से मुस्कराते हुए बोला….”अदिति….बहुत प्यारी है….वो तो मजाक में कहती है….देख मैं बुढ्ढा लगता हूँ….” अपनी लड़खड़ाती आवाज को मैं खुद भी नहीं छिपा सका।

“सॉरी अंकल…. मेरा मतलब ये नहीं था….सच में सॉरी….” उसने मेरा हाथ थाम लिया। मैं अपने आंसू नहीं रोक पाया पर दो बून्दें टपक ही पड़ी। नेहा को शायद दुख हुआ।

मेरे माथे को चूमती हुई बोली,”आप तो मेरे पिता समान है…. पर मैं तो आपको बोय फ़्रेंड मानती हूँ ना….” मैने माहौल को हल्का बनाने की कोशिश की। मैने भी हालात को सम्हालने की कोशिश की।

“हाय….मेरी गर्लफ़्रेन्ड…. ” मैने उसके उसके गाल चूम लिये।

“अंकल…. कैसी भी बात हो ….प्लीज़ मुझे बताईये ना….”

“अरे छोड़ ना….जख्मो को कुरेदेगी तो फिर से घाव रिसने लगेगा….”

“एक अन्दर की बात बताऊं….आप को शक है ना कि मैं कामुक कहानियाँ लिखती हूँ….हां अंकल मैं ही वो नेहा हूँ….”

“सच…. देखा मेरा आईडिया सही था ना…. तब मै तुम्हे सब बता सकता हूँ।” मैने उसे धीरज से पूरी कहानी बताई…. नेहा ने मेरी इज़ाज़त लेकर उसे अपने छोटे से रेकोर्डर में रेकॉर्ड कर लिया।

“अंकल बुरा ना माने तो मैं एक बात कहू….”

” हां….हां….कहो मेरी गर्ल फ़्रेन्ड….” मैने उसे हल्का सा मजाक करते हुए कहा।

“आपने बताया कि आप में कमजोरी आ गई है…. मुझे लगता है आप इन्टरकोर्स कर सकते है…. बस आंटी का रूखापन आपको मार गया है….”

” हो सकता है…. आज कल उसके और आनन्द के चर्चे भी हो रहे है…. शायद वो उससे खुश भी है….” मैने अदिति की एक तरह से शिकायत की। पर नेहा का इरादा कुछ और ही था। उसने सीधा मुझ पर वार किया -“मैं कुछ आप पर ट्राई करूं….” उसने मेरी पेन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड पर हाथ रखते हुए कहा।

मैं एकदम से शरमा सा गया….असंमजस की स्थिति में हो गया कि अचानक ये क्या….। पर दिमाग ने सोचा कि इससे मेरा क्या लेना देना…. करने दो….ज्यादा से ज्यादा मुझे गाली दे कर चली जायेगी और क्या होगा। मेरी सोच कुछ अलग होने लगी। शायद कुछ स्वार्थ समाने लगा था या मैं मजे का मौका नहीं छोड़ना चाह रहा था।

“क्या…. जैसे…. ” उसका हाथ मेरे लण्ड पर कसता जा रहा था। मुझे तेज सिरहन आने लगी थी। मैने उसे निराशा से कहा -“नेहा…. छोड़ो ना…. कोई फ़ायदा नहीं है….”

जवाब में उसने मुस्कराते हुए अपने होंठ मेरे होंटो पर चिपका दिये…. मुझे धकेल कर सोफ़े पर लेटाने लगी। मेरे हाथों को उसने अपनी छातियों पर रख दिया। मेरी इच्छायें बलवती होने लगी। अन्दर का मर्द जाग उठा। मेरा ठन्डा खून एकाएक उबल पड़ा। मैंने उसे कस लिया। नेहा ने भी ऐसा दिखाया कि जैसे उसे नशा सा आ गया हो।

“मैं आपको खुश कर रही हूँ….कुछ इनाम दोगे….?”

“हाय….नेहा…. तुम कितनी अच्छी हो….”

“अंकल…. अपना पजामा उतारो ना….” नेहा ने भी अपनी जीन्स उतार दी…. आश्चर्य ….मेरा लंड खड़ा हो चुका था….

नेहा बिस्तर पर लेट गई और अपने दोनों पांव ऊपर उठा लिये। उसकी गोल गोल गाण्ड और चूत रोशनी में चमक उठी। उसकी जवानी और नीचे के कटाव गजब के थे…. फूल जैसी चूत की दो पन्खुड़ियां खिल उठी।

“अंकल ….आओ न….” नेहा ने मुझे चोदने का न्योता दिया। मैं लपक कर उसके दोनो पांवो के बीच आ गया…. मेरे अन्दर नई उत्तेजना थी….लण्ड को खड़ा देख कर और जवान लड़की को देख कर मेरी उत्तेजना फ़ूटी पड़ रही थी। मेरा सुपाड़ा भी फूल कर लाल हो गया। पर उसी समय मुझे अपना कोन्फ़ीडेन्स डगमगाता हुआ दिखाई दिया और मेरा लण्ड मुझे ठन्डा होता जान पड़ा। मैने अपना लण्ड नेहा की चूत में लगाया और धक्का दिया। पर हाय…. वो अन्दर नहीं गया और फ़िसल कर नीचे आ गया। मैने फिर से ट्राई किया पर नहीं घुसा।

मैं घोर निराशा में डूब गया। मैं धीरे से उठा और बिस्तर से नीचे आ गया। मेरा मुँह उतर गया था। नेहा तुरन्त बिस्तर से उतर आई और अपनी जीन्स पहन ली।

“अंकल …. आप बिलकुल ठीक है….इतना कठोर था…. बस आप कोन्फ़ीडेन्स छोड़ देते है….”

“नही….नेहा सॉरी…. तुम बेकार ही ये सब कर रही हो….”

“नहीं अंकल…. बस आप मुझे अच्छे लगते है…. मेरा तो मन आप पर आ गया है….” नेहा ने मुझे प्यार करते हुए कहा।

“क्याऽऽऽ….तुम्हारा दिमाग तो सही है न…. मै बुढ्ढा ५२ साल का और अभी तो तुम ….”

“आपकी गर्लफ़्रेन्ड…….. अच्छा अंकल कल मैं इसी समय फिर आऊन्गी…. आंटी तो स्कूल जाती है ना इस टाईम….” नेहा इठलाते हुए चली गई।

मैं सोचता रहा कि क्या कुछ जादू हो गया…. नेहा एक दम से मुझसे कैसे प्यार करने लगी…. हुहं मरने दो…….. साली चालू होगी….। वरना कोई क्या ऐसे ही चुदने को तैयार हो जायेगी ??

अगले दिन ठीक उसी समय नेहा आ गई। मैने सोच लिया था कि आज ये जितना मजा देगी उसका मैं उसे पेमेंट कर दूंगा। आते उसने सवधानी से सभी ओर देखा….

“कोई नहीं है…. ” मैने हंस कर कहा। और वो मुझसे लिपट गई…. उसने फिर से मुझे उत्तेजित करना चालू कर दिया। इस बार मैने सोच लिया था कि मजे करूंगा और उसे कुछ रूपये दे दूंगा। मैने भी उसके बोबे मसलने शुरु कर दिये। उसने मेरा पायजामा खोल दिया।

आज वो साड़ी पहन कर आई थी। उसने साड़ी समेत अपना पेटिकोट ऊंचा कर लिया और बिस्तर पर लेट गई। मुझे ख्याल ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। बस मैं उसके ऊपर चढ गया और लण्ड नेहा की चूत में घुसा डाला।

“हाय अंकल…. मैं तो चुद गई…. कस के चोद दो….प्लीज….धक्के लगाओ…. हाय रे….”

मैं उसकी नंगी भाषा से और उत्तेजित हो उठा। और मस्त हो कर उसे चोदने लगा। मुझे लगा कि सारी जन्नत मेरे नीचे है…. सारी नसें खिंच कर लण्ड में भरने लगी। शरीर में फ़ुरहरी छूट गई…. और…. मेरे लण्ड ने फ़ुहार छोड़ दी। नेहा ने मुझे कस कर पकड़ लिया…. मै झड़ता रहा …. लगा मेरे शरीर की एक एक बूंद निकल गई है…. मैं हांफ़ उठा था।

अचानक मुझे मह्सूस हुआ….अरे ये कैसे हो गया….क्या मैने अभी अभी चुदाई की थी। नेहा अपनी साड़ी ठीक कर रही थी।

“थेंक यू माय बॉय फ़्रेंड…. फ़ोर ए नाईस फ़क….” नेहा ने मुस्करा कर कहा।

“नेहा….पर ये सब…. हो गया ना….”

“आप मर्द है….अभी आप सब कुछ कर सकते हो…. पर कल मैं फिर आ रही हूँ…. कल जरा और जोरदार फ़क….थोड़ा ज्यादा देर तक…. ठीक है ना….।”

मैं नेहा से लिपट पड़ा। मैने जेब से उसे १००० रु का नोट निकाल कर दिया….

“नेहा प्लीज मना मत करना…. अपने लिये मेरी तरफ़ से कोई गिफ़्ट ले लेना….”

” बस अंकल…. मेरी बोली लगा दी ना आपने….”

“नेहा नहीं….नहीं…. क्या मैं अपनी गर्लफ़्रेन्ड को कोई गिफ़्ट नहीं कर सकता….?” मैने अपनी नजरे शर्म से झुका ली….जिसमे गलती का अहसास भी था और ग्लानी भी थी….शायद पकड़े जाने की….

“अंकल लाओ ये रुपये अब मेरे…. पर देखा आप कहते थे ना…. आंटी आपको बुढ्ढा कह्ती थी…. अरे अपनी मर्दानगी बता दो उसे…. “

“नेहा …. पर ये अचानक ही कैसे हो गया….”

“एक जैसे लाईफ़…….. एक जैसी रोज की चुदाई…. ज़िन्दगी में एकरसता…. कोई नयापन नही…. नया आसन नही…. वगैरह….ना तो आपमे कोई कमी है और ना ही आंटी में….”

मैं उसे देखता ही रह गया। इतनी सी उमर मे….इतना ज्ञान…. फिर क्या नेहा ने सिर्फ़ मेरा आत्मविश्वास उठाने के लिये ये सब किया।

“अब मैं जाती हूँ…. अंकल कल मैं इसी समय फिर आऊंगी…. याद रहे…. कल कस के चुदाई करना…. कि मुझे नानी याद आ जाये….”

वो लहराती हुई चली गई…. मैं दरवाजे पर खड़ा उसे देखता रह गया…. जिसे मैं शुरु से अपनी बेटी की तरह प्यार करता था उसने मुझे ये सब करके मेरी ज़िन्दगी में फिर से एक आत्मविश्वास जगाया। मुझे अपना बॉय फ़्रेन्ड बना कर मुझे बता दिया कि मैं अभी भी सब कुछ कर सकता हूँ।

ये थी मोहित की आप बीती सच्ची कहानी…. जिसमे मैने अपने आपको हिरोइन के रूप में रखा है। इन दोनो चरित्रों के नाम बदले हुए है। ये आप बीती मुझे एक मेल द्वारा प्राप्त हुई थी। पर मेरा मानना है कि ये एक अस्थाई वासना का रूप है…. जो कि एक जवान लड़की को देख कर आग की तरह भड़क जाती है….तो जल्दी बुझ भी जाती है। एक नयापन जिन्दगी में आता है…. । नसों में नया जोश….नया खून दौड़ पड़ता है…. लण्ड एक बारगी तो फ़ड़फ़ड़ा उठता है…. और आगे….Hindi Sex Stories

Antarvasna

मित्रो, मैं अपना Antarvasna परिचय दे दूँ, मेरा नाम गौरव गुप्ता है, उम्र 30 साल, कद 5′ 5″, रंग गोरा और बदन गठीला है और अभी तक मैं कुँवारा हूँ।

मैं लखनऊ में एक कंप्यूटर सेन्टर चलाता हूँ, जिसमें मैं और मेरा एक हिस्सेदार है।

कंप्यूटर सेन्टर हिस्सेदार के घर के एक कमरे में चलता है। उस कमरे का एक दरवाज़ा हिस्सेदार के घर के अन्दर खुलता है।
मैं अक्सर कंप्यूटर सेन्टर चलाता हूँ और हिस्सेदार बाहर के काम निपटाता है।

हिस्सेदार के घर में उसकी पत्नी सीमा, उम्र लगभग 26 साल, कद 5′ 2″, रंग गोरा और भरे-पूरे बदन की मालकिन अकेली ही रहती थी।
वो हालांकि मुझे छोटी थी पर फिर भी मैं उसको भाभी जी ही बुलाता था।

खाली समय में हम दोनों खूब लम्बी बातें किया करते थे।

एक बार मेरा हिस्सेदार किसी काम के सिलसले में जयपुर गया था 4-5 दिनों के लिए।
इसलिए सेन्टर का सारा काम मुझे संभालना पड़ रहा था।

हफ्ते के 6 दिन तो बच्चो को ट्रेनिंग देने में ही निकल जाते और इतवार को मुझे दफ़्तरी काम निपटाना होता था।

उस दिन भी मैं सेन्टर में कंप्यूटर पर बैठा अपना जरूरी काम कर रहा था, चपरासी को भी जल्दी थी तो मैंने उससे सेन्टर का मुख्य-द्वार बंद करके चले जाने को कहा।

मैंने सोचा सेंटर का गेट बंद होने बाद मैं अन्दर बैठ कर अपना काम शांति से कर सकूँगा और फिर हिस्सेदार के घर वाले दरवाज़े की तरफ से बाहर चला जाऊंगा।
तो मैंने जाने को कह दिया।

उसने ऐसा ही किया और वो चला गया।

अब मैं सेन्टर के अन्दर बिलकुल अकेला था।

काफी देर काम करने के बाद जब मैं अपना काम कम्प्यूटर में सेव कर रहा था तभी मेरी नजर कंप्यूटर में सेव की हुई एक मूवी पर पड़ी जो शायद किसी टीचर ने या फिर मेरे हिस्सेदार ने लोड कर दी थी।
वो एक ब्लू फिल्म थी।

मैं काम करके काफी थका हुआ था तो कुछ मस्ती करने के मूड में मैंने वो फिल्म चालू कर दी.

चूँकि मैं सेन्टर में अकेला था इसलिये मुझे कोई डर भी नहीं था।

फिल्म देखते देखते मेरा 8″ का लण्ड पैंट के अन्दर तम्बू बन कर खड़ा हो गया।

मुझे काफी गर्मी लग रही थी तो मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब मैं सेन्टर में बिलकुल नंगा होकर ब्लू फिल्म देखते हुए मुठ मार रहा था।

तभी पीछे से एक खट की आवाज ने मेरी तेज़ होती सांसों को ब्रेक लगाने पर मजबूर कर दिया।

मैंने पलट कर देखा तो अन्दर के दरवाज़े पर सीमा भाभी चाय का प्याला लिए खड़ी थी।

उन्हें अचानक देख कर मेरे होश उड़ गए। मेरे पास इतना समय नहीं था कि मैं कपड़ों से अपने तन को छुपा सकता।

मैं उनके सामने एक दम नंगा खड़ा था, मेरी गले की आवाज गायब सी हो गई थी।
मैंने हकलाते हुए पूछा- सीमा भाभी, आप इस समय?

भाभी ने भी कुछ नहीं कहा लेकिन मेरे बड़े लण्ड को 2-3 मिनट तक देखते रही फिर बोली- देवर जी, यह आप क्या कर रहे थे? मैं तो आपको एक अच्छा आदमी समझती थी पर आप अपने दोस्त की गैर मौजूदगी में यह सब?
मैं डर गया और बोला- भाभी मुझे माफ़ कर दो।

सीमा भाभी पहले कुछ नहीं बोली फिर मेरे 8″ लण्ड को हाथ में लेकर बोली- एक शर्त पर मैं तुम्हे माफ़ कर सकती हूँ कि जो कुछ इस फिल्म में चल रहा है वो सब तुम्हें मेरे साथ भी करना पड़ेगा।

वैसे तो मैं कई बार सीमा भाभी की अंगों को दूर से निहार चूका हूँ पर आज सीमा भाभी खुद मुझसे चुदाने को तैयार थी, यह सोच कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
आज तक मैंने उन्हें कभी नंगा नहीं देखा था। आज मेरा सबसे हसीन सपना पूरा होने जा रहा था।

मैंने उसके होंठों पे अपने होंठ कस के दबा दिये।
15 मिनट तक वो मेरे और मैं उसके होंठ चूसता रहा।

होंठों के बाद वो मुझे सब जगह पर चूमने लगी, गाल छाती और सब जगह। मैं भी उसके गालों को चूसने लगा। चूस चूस के उसके गोरे गाल मैंने लाल कर दिये।

अब तो वो बहुत गर्म हो गई थी मगर वो अब भी कपड़ो में थी और मैंने उसके कपड़े निकालने शुरू कर दिये।

धीरे से उनकी साड़ी खींच कर अलग कर दी और उनके मम्मे दबाते हुए ब्लाउज के हुक खोल दिए, पेटीकोट का नाड़ा खोल के पेटीकोट नीचे खिसका दिया।
अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी।
मैं सफ़ेद ब्रा में उसके बड़े बड़े मम्मे देख के पागल हो गया।

वो बोली- गौरव, जब से तुम्हें अपना यह बड़ा लण्ड हिलाते देखा है, मैं तो इसके लिये पागल सी हो गई हूँ, अब मुझे और ना तड़पाओ!

मैंने तुरंत उसकी ब्रा निकाल दी, उसके गोरे गोरे कबूतर आज़ाद होकर बाहर निकल आये। मैंने धीरे से उस की पैंटी नीचे खिसका दी अब हम दोनों पूरी तरह नंगे खड़े थे।

वो मेरा पूरा नंगा लण्ड देख कर जो कि अब 8″ से बड़ा हो गया था, अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी।

उसने उसे अपने हाथों से हिलाना शुरु किया और बोली- तुम्हारा तो तुम्हारे दोस्त यानि मेरे पति से काफ़ी बड़ा है, इसलिये मैं तुम्हें कहती थी कि तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है क्या?? मेरे भोले गौरव जी लड़कियों को ऐसे बड़े लण्ड वाले लड़के बहुत पसंद होते हैं!

वो मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी।
अब उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मेरा लण्ड पहली बार किसी छेद में जा रहा था।
मेरे लण्ड को गुदगुदी सी हो रही थी। मैं जैसे स्वर्ग में था।

उसने मेरा लण्ड पूरा अपने मुंह में ले लिया।
क्योंकि यह मेरा पहली बार था, मैं ज्यादा देर नहीं टिक पाया, 5 मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं छूटने जा रहा हूँ!
उसने कहा- मुंह के अंदर ही छोड़ देना!

मैंने बड़े जोर के साथ अपना वीर्य उसके मुंह में निकाल दिया और उसने वो पूरा निगल भी लिया।
अब छूटने की वजह से मेरा लण्ड फ़िर अपने सामान्य आकार में आ गया।

तब भाभी और मैं बाथरूम में सफ़ाई के लिये चले गये।
वहाँ वो तो और सेक्सी बातें करने लगी।
लगता है अब तक उसकी गर्मी ठंडी नहीं हुई थी।

उसने कहा- मेरे पति का लण्ड तुमसे बहुत छोटा है, और वो मुझे इतना प्यार भी नहीं करते, वो यहाँ नहीं थे तो मैं सेक्स के लिये बहुत पागल हुए जा रही थी, मुझे तुम अपनी बीवी समझना और जब जी चाहे तब चोदना। ये भाभी आज से तेरी है।

और उसने मुझे फिर चूमना शुरु किया।
हम एक दूसरे को फिर चूसते रहे, चूमते रहे।

मैंने उसे कहा- भाभी, देवर को दूधू पिलाओ!
उसने कहा- पूछो मत! ये दूध और दूधवाली सब आप ही के लिये हैं! जितना दूध पीना है पी लो!

और मैं बिना रुके उसके 36 डी साइज़ के सेक्सी स्तन दबाने लगा, उन्हें ज़ोर से चूसने लगा।
वो चीखने लगी- चूसो और ज़ोरों से, पी जाओ सारा, गौरव आआ आआअ आईईइ ईइ अ दूध ऊऊऊह ह्हह्हा आऐइ ईई ईई … ऊऊ ऊऊओ ऊऊओ ऊओ ऊ…आ आआअ आ आअ।

मैंने अपनी चुसाई जारी रखी, और वो मेरे लण्ड से खेले जा रही थी।

बीस मिनट मैंने उसके स्तन चूस चूस के लाल कर दिये, अब मेरा लण्ड फ़िर तन रहा था।

अब तो मेरे लण्ड को उसके चूत के छेद में जाना था। अपना तना हुआ लण्ड मैंने उसकी चूत पर रख कर अन्दर करने का प्रयत्न किया।
मेरा लण्ड मोटा होने के कारण अंदर जाने में थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन 2-3 जोर के झटकों के बाद अंदर चला गया।

तब वो चिल्लाई- आआअ आआअ आऐइ ईईईइ ऐईईइऊ ऊऊऊईइ ईईई माआ आआआ निकालो बहुत दर्द हो रहा है!
लेकिन वो उसे अलग नहीं होने दे रही थी। उसे भी बहुत मज़े आ रहे थे।

मेरा लण्ड भी बहुत मज़ा कर रहा था। उसे चूत चुदवाना अच्छा लग रहा था।

मैंने उसे लगभग बीस मिनट तक चोदा और उसकी चूत में पानी निकाल दिया। उसी समय पर उसके भी चूत से पानी निकला।

फिर हम दोनों बाथरूम में एक साथ शॉवर में नहाये, वहाँ भी मैंने थोड़ी मस्ती की।

उस रात को मैं उसी के घर रुक गया था क्योंकि वो घर में अकेली थी।
हम दोनों एक ही बेड पर सोये थे एक दूसरे के बाहों में पति-पत्नी की तरह।

मेरी सेक्सी भाभी के बदन की आग ठंडी हो ही नहीं रही थी।

सुबह साढ़े पाँच बजे वो फ़िर से मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी, मैं तब नींद में था।

लेकिन उसकी मस्ती से मैं उठ गया और मेरा लण्ड भी उठ गया और फिर एक बार मस्त चुदाई हुई।

उस पूरे दिन में हम दोनों ने 4-5 बार सेक्स किया, मैं तो पूरा थक गया था और वो भी।

अब भी हम लोगो का यह कार्यक्रम हिस्सेदार की गैर मौज़ूदगी में चलता रहता है।

यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था जो काफी शानदार था। मगर मैं अब चिंतित हूँ क्योंकि जल्द ही मेरी शादी होने वाली है। फिर पता नहीं भाभी जैसी हसीना के साथ ये हसीं लम्हे गुजारने को मिलें या न मिलें।
मेरी इस सच्ची घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें! Antarvasna

Antarvasna

जब मैंने मौसी की बेटी सोनू की चूत मारी और Antarvasna मुझको मज़ा आया तो मेरी और चूत मारने की इच्छा हुई पर क्या करता स्कूल भी तो था। इसीलिए मैं अपने घर पर ही रहता था। पर मन ही मन तड़पता था।

एक रात हमारे यहाँ मेरी छोटी बुआ आई। मुझे अगले दिन उसको लेकर एक गाँव की शादी में जाना था। वो मुझसे बहुत बड़ी थी पर लगती एक दम सोलह साल की जवान थी। जिसे देखकर किसी का भी मन डोल जाए। मेरी बुआ के लंबे बाल थे और रंग एक दम गोरा था। चूची भी बहुत बड़ी थी। वो अक्सर मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती थी। उस दिन उसने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। वो टाइम गर्मी का था। घरवाले सभी शादी में जा चुके थे। मैं घर पर अकेला ही था।

वो जैसे ही घर पर आई तो बोली- आज गॅप गर्मी बहुत है जा तू घर का गेट बंद करदे और अपने कमरे का एसी चला दे। मैं गया और गेट बंद करके आया। मैंने अपने कमरे का एसी चला दिया। मेरी बुआ कमरे में आई और उसने एक दम अपना साडी का पल्लू हटा दिया। और कुर्सी पर बैठ गयी फिर उसने पूछा के मम्मी पापा कब गये?

पर मैं तो उसके ब्लाउज से उसकी चूची को देख रहा था। ब्लाउज इतना टाइट और हल्का था की उसकी सफेद ब्रा ब्लाउज के अंदर साफ दिख रही थी और चूची एक दम कसी हुई थी। मानो चूची ब्रा और ब्लाउज को फाड़ना चाहती हो। बुआ रात को भी ब्रा ही पहनकर सोती थी। बुआ मुझसे बोली तेरा ध्यान किधर है एक दम मैंने उनकी आँखो की तरफ देखा वो बोली मैं पूछ रही थी कि मम्मी पापा कब गये है? मैंने कहा- सुबह ही गये है।

बुआ बोली- अच्छा चल मैं तेरे लिए कुछ बना देती हूँ। और बुआ उठी और उसने अपनी साडी उतार दी। उस का ब्लू पेटीकोट भी एक दम टाइट ही था। अब बुआ मुझे बिना साडी के बहुत अच्छी लग रही थी वो केवल अब ब्लाउज और पेटीकोट मैं ही थी। वो ब्लाउज और पेटीकोट मैं ही रसोई में चली गई। और मेरे लिए खाना बनाने लगी मैं भी रसोई में आ गया और खड़ा हो कर उसे देखने लगा। वो इधर उधर काम करते हुए चलती तो कभी वो मुझसे टकरा जाती कभी उसकी गांड तो कभी उसकी चूत मेरे लंड से टकरा जाती। अब तो बस मेरे मन में यही था कि मैं अपनी बुआ को चोद डालूँ पर डर रहा था कि कही वो मुझे डांटे नही।

अब खाना तैयार था। वो खाना लेकर मेरे कमरे में आ गई और बोली- चल खाले। फिर मैं खाना खाने बैठ गया। बुआ मेरे सामने ही बैठ गयी और वो अपने पेटीकोट को थोड़ा ऊपर करने लगी। उसने अपना पेटीकोट घुटनो तक ऊपर किया और फिर नाड़ा खोल कर पेटीकोट टूंडी से नीचे करने लगी। पर उसने तो मेरी उम्मीद से ज़्यादा ही अपना पेटीकोट नीचे कर दिया था। अब मैं उसकी टूंडी और टूंडी से नीचे भी साफ देख सकता था। क्योंकि उसने पेटीकोट चूत से ऊपर ही कर रखा था। मुझे उसके चूत के ऊपर कुछ काला-काला सा नज़र आया। मैं समझ गया कि बुआ के भी बाल है पर उसने काट रखे है। और उसकी सोनू टांग भी सुन्दर दिख रही थी। जिन पर हल्के-हल्के बाल थे। फिर मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था।

मैंने खाना खाया तो वो बरतन लेने के लिए आगे झुकी तो मुझे उसकी बड़ी-बड़ी चूची के बीच की गहरी लाइन दिख रही थी। बस मैंने अपने मन पर काबू कर रखा था। फिर वो बर्तन लेकर रसोई मे गयी और मैं टी वी देखने लगा। बुआ वापस आई तो चाय बना कर लाई थी। एक कप चाय उसने मुझ को दी और दूसरे कप को लेकर मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गई और बोली- आज तो गर्मी बहुत है तू इस एसी को ज़्यादा कूलिंग पर कर।

मैंने एसी की कूलिंग और कर दी। फिर बबुआ अपने ब्लू ब्लाउज के बटन खोलने लगी। मैं तो बस देख ही रहा था। मेरा लंड खड़ा होता गया। बुआ अपने ब्लाउज के बटन खोलकर हाथ ऊपर करके बैठ गई। अब मुझे उसकी ब्रा बिल्कुल साफ दिख रही थी। मेरी नज़र उसकी बगल पर पड़ी तो वहाँ पर बहुत छोटे-छोटे बाल थे। बुआ बोली चल सो जाएँ। और हम चाय खत्म करके बेड पर चले गये।

मैं बेड पर लेट गया और बुआ अपने ब्लाउज के बटन खुले ही छोड़ कर मेरे बराबर में लेट गयी। बुआ ने मुझसे पूछा कुछ परेशानी तो नही हो रही। मैंने कहा नही। मैंने बुआ से पूछा के घर भी आप ऐसे ही सोती हो। वो बोली कैसे? मैंने बुआ के ब्लाउज और ब्रा की तरफ इशारा किया।

बुआ बोली- हाँ जब घर पर कोई नही होता तो मैं अपने सारे कपड़े उतार कर सोती हूँ। फिर वो बोली यहाँ भी तो कोई नहीं है। मैं बोला मैं तो हूँ। वो बोली तू तो मेरा बेटा है। तुझसे कैसी शर्म। जब मैं तेरे सामने कपड़े बदल लेती हूँ तो अब क्या शर्म करो। फिर बुआ ने करवट बदली और दूसरी तरफ मुँह कर लिया।

अब बुआ की गाँड मेरी तरफ थी। बुआ की गाँड ब्लू पेटिकोट में बहुत सुन्दर लग रही थी। बुआ बोली- चल सो जा सुबहा जल्दी उठना है। मैं बस चुप होकर बुआ की गाँड देखता रहा। फिर करीब दस मिनिट बाद,मैंने धीरे से अपनी पैंट उतार दी और बुआ की तरफ मुँह करा और उसकी गाँड पर अपना लंड टेक दिया। बुआ ने भी अपनी गाँड और पीछे कर ली और उसकी गाँड के छेद मे मेरे लंड के कारण उसका पेटीकोट हल्का सा चला गया।
फिर मैं ऐसे ही धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। फिर मैंने एक हाथ बुआ के पेट पर रखा और धीरे-धीरे उसके चूत के ऊपर के भाग पर और टूंडी के अंदर अपनी उंगलियाँ घूमने लगा। जिससे बुआ जाग गई। और लेटे-लेटे ही बोली क्या कर रहा है,पीछे होकर सो ना। मैं ऐसे हो गया जैसे मैंने सुना ही नही। फिर बुआ ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया और सोने लगी।

मैंने फिर अपने हाथ से हरकत शुरु कर दी और बुआ के पीछे से धक्के लगाने शुरु कर दिए। बुआ बोली नही मानेगा। मैं फिर चुपचाप लेट गया। बुआ ने एक हाथ पीछे किया और अपनी गांड से मेरा लंड निकाला और अपनी गांड पर हाथ रख लिया।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड निकर मे से निकाला और बुआ के हाथ पर रख दिया। बुआ ने उस पर हाथ रखा। फिर बुआ ने अपनी गांड से हाथ हटा लिया। शायद बुआ को मेरे लंड की लंबाई और मोटाई पसंद आ गयी थी। फिर मैंने धीरे से उनका पेटीकोट जाँघ तक ऊपर कर दिया ओर पीछे से पूरा कमर तक।

फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर जैसे ही रखा तो बुआ ने भी पीछे को झटका दिया। मैं समझ गया कि बुआ अब गरम हो चुकी है। पर सोने का नाटक कर रही है। फिर मैंने अपने आपको पीछे किया और बुआ की दोनो जाँघो के बीच में थूक लगाया और दोनो जाँघो में अपना लंड फसा दिया। बुआ ने भी अपनी दोनो जाँघो को कसकर भींच लिया। अब मेरा लंड उनकी दोनो जाँघो को एक गांड की तरह ही चोद रहा था।

फिर मैंने एक हाथ बुआ के आगे से उसके पेटीकोट में डाल दिया। और उसकी चूत पर ले जाने लगा तो बुआ ने अपनी ऊपर की जाँघ को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया। फिर मैंने अपनी बुआ की चूत को छुआ तो उसमें से चिकना पानी निकल रहा था। फिर मैं ने बुआ की जाँघो में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और एक हाथ से मैं उसकी चूत को सहलाता रहा और उसकी चूत से चिपचिपा पानी निकलता रहा था।

अब बुआ को भी मज़ा आ रहा था। पर वो बोली नही और उसने अपनी टांग उठाकर मेरे पीछे रख दी। और मेरे लंड को हाथ से पकड़कर एक इशारा सा किया। और मेरा लंड उसकी चूत से चिपक गया पर अंदर नहीं गया। मुझे ऐसे ही मज़ा आ रहा था। इसी लिए मैंने कोशिश भी नहीं की उसकी चूत में लंड डालने की।

मैने चूत से लंड हटाकर उसकी गांड के बीच मे रख दिया और धक्के लगाने लगा। बुआ फिर पहले की तरह हो गई। मैंने फिर एक हाथ उसके आगे से उसके पेटीकोट में डाला और चूत की खाल पकड़ कर खींचने लगा। इससे बुआ को दर्द हुआ और वो बोली बहुत देर हो गई तुझे। तू अब सो जा, सुबह जाना नहीं है क्या? मैंने फिर अनसुना कर दिया। मैं अब की बार धक्के लगता रहा। फिर मैंने बुआ की चूत को टटोलना शुरू किया और उसकी चूत को चौड़ा करके सहलाना शुरू कर दिया। अब बुआ को बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकि वो भी मेरे लंड पर अपनी गांड का ज़ोर लगा रही थी मानो वो मेरा लंड अंदर करना चाहती हो।

अब मैं झड़ने वाला था। तो मैंने कई झटके ज़ोर-ज़ोर से मारे और बुआ की चूत को ज़ोर से रगड़ने लगा। बुआ की चूत से एक दम गरम पानी सा निकाला और बुआ ने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया। जिससे मैं रुक जाऊं पर मैं रूका नहीं मैं उसकी चूत को कोशिश करके जब तक रगड़ता रहा जब तक के मेरा पानी उसकी गांड के बीच में ना निकल गया। और मैं धक्के मारता रहा, बुआ भी अब धक्के मार रही थी। जिससे मैं जल्दी झड़ जाऊं और उसे छोड़ दूँ। मैंने एक ज़ोर का झटका दिया। तो बुआ ने भी ज़ोर से झटका दिया। और मेरा सारा पानी उसकी गांड के

बीच में ही निकल गया। मैं थोड़ी देर रुका तो बुआ ने मेरा लंड हाथ से ऐसे ‍‍‍निकाल दिया जिससे कि मुझे लगे कि उसे कुछ पता ही नही है। पर मैं समझ गया था कि बुआ को सब पता है।

मैं भी दूसरी तरफ मुँह करके लेट गया। फिर मैंने बुआ की साइड मुँह किया। तो मैंने देखा के बुआ का पेटीकोट पीछे से गांड से ऊपर है और आगे से जाँघ तक है। फिर मैं आँख खोलकर देखता रहा की बुआ क्या करेगी? क्योंकि वो शायद मेरे सोने का इंतज़ार कर रही थी। क्योंकि वो मेरे जगाने पर सही करती तो मुझको पता चल जाता की उसे सब पता है। इसीलिए,मैं चुपचाप उसकी तरफ मुंह करके पड़ा रहा जैसे मैं सच में सो गया हूँ। फिर कुछ देर बाद बुआ उठी और उसने मेरे सर पर अपना हाथ फेरा और बेड से खड़ी हो गई। फिर उसने अपना पेटीकोट नीचे किया और और पेटीकोट को देखने लगी। पेटीकोट उसके और मेरे पानी से बहुत गीला हो चुका था। और वो बाथरूम में चली गई जो मेरे कमरे में ही था।

उसने जैसे ही बाथरूम का गेट बंद किया। तो मैं भी बाथरूम के पास गया और गेट के एक छेद में से देखने लगा। मैंने गेट में एक छेद कर रखा था। जिससे की कोई लड़की या औरत मेरे बाथरूम का इस्तेमाल करे तो मैं उसे देख सकूं।

मैंने देखा बुआ अपने आप को देख रही थी। और अपनी चूची को ब्रा के ऊपर से मेरा नाम लेकर दबा रही थी। फिर उसने अपना पेटीकोट उठाया और गांड के पीछे हाथ लगाकर देखा। उसके हाथ पर मेरा पानी आ गया था। तो उसने हाथ को देखा और फिर उसे चाटा भी फिर उसने अपनी चूत से भी हाथ से अपना पानी लिया और उसे भी चाटा। फिर वो पेटीकोट को कमर तक ऊपर करके बैठ गयी। फिर उसने मग्गे में पानी लिया और अपनी चूत और गांड को धोया। फिर खड़ी होकर उसने अपने पेटीकोट मुंह से पकड़ा और और अपनी टांगों से मेरा और अपना पानी धोया। फिर उसने बाथरूम वाला एक टोवल लिया और अपनी चूत, गांड और टांग पूँछी। फिर उसने पेटीकोट नीचे किया और शीशे में देखने लगी। फिर वो बाहर आने के लिए चल दी।

मैंने घड़ी देखी रात का एक बज चुका था। और मैं बेड पर आकर लेट गया और सोने का नाटक करने लगा। बुआ आई और मेरे बराबर में आकर लेट गई। मैंने देखा बुआ के ब्लाउज के बटन अभी भी खुले और पेटीकोट टूंडी से नीचे था। मैं बुआ की तरफ ही मुंह करके सो रहा था। बुआ ने भी मेरी तरफ मुंह कर लिया। तो उसके पेट से मेरा लंड अंडर‍वियर के अंदर से टकरया तो मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने फिर अपना लंड निकाला और उसके मुलायम और गोरे पेट पर रगड़ने लगा। बुआ बोली तेरे पास लेट कर तो मैं दुखी हो गयी। तू नहीं सोने देगा।

मैं चुप लेट गया। बुआ थोड़ी ऊपर को हो गई जिससे मेरा लंड उसकी गहरी टूंडी में चला गया। मैं बुआ का मतलब समझ गया था कि उसको मेरा लंड पसन्द आया और अब वो मुझसे फिर मज़ा लेना चाहती। यानी अपनी टूंडी और पेट को चुदवाना चाहती है।

मैं उसकी टूंडी में लंड और अंदर कर के धक्के मारने लगा। अबकी बार मैनें उसकी एक साइड की ब्रा भी ऊपर करदी। और उसकी चूची को मुंह से चूसने और चाटने लगा बीच में उसे काट भी लेता तो वो दर्द से आह सी भरती। फिर मैने पीछे हाथ करके उसके पेटीकोट में हाथ डाल दिया। और उसकी गांड को दबाने लगा। मैं अबकी बार जल्दी झड़ गया और सारा पानी मैंने बुआ की टूंडी में ही छोड़ दिया। जिससे बुआ का पेट गीला हो गया। फिर मैं सीधा हो कर लेट गया। और बुआ के पेट पर हाथ फेरने लगा। जिससे बुआ के पेट पर मेरा पानी सारे में फ़ैल गया।

फिर मैं चुपचाप लेट गया। बुआ ने सोचा मैं सो गया हूँ। तो उसने अपनी ब्रा ठीक की और सो गयी सुबह को जब मैं उठा तो बुआ घर की सफाई कर रही थी। उसने अपना ब्लाउज उतारा हुआ था। वो केवल ब्रा और पेटीकोट में ही थी। पर हम एक दूसरे से नज़र नही मिला पा रहे थे। फिर नहा कर हम शादी में चले गये। इसके बाद बुआ ने मुझे कई बार चोदा और मुझसे चुदवाया।

अगर आपको कहानी अच्छी लगी हो तो आगे लिखूंगा। Antarvasna

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सभी Hindi sex stories पाठकों को मेरा प्रेम भरा नमस्कार। मैं इस साईट की कहानी को पढने वाला नियमित पाठक हूं। नमन ने इस साईट के बहुत सारी कहानियों को पढा है। मुझे सारी कहानियां बहुत ही अच्छी लगती है। उन्हीं कहानियों से प्रभावित होकर मैं आज आपके लिये एक कहानी लिखाने जा रहा हूं।

लेकिन इससे पहले कि मैं ये कहानी शुरू करु मैं आपका परिचय उन दोनो लोगो से करा दूं जिसके बारे में लिखाने जा रहा हूं। मैं एक साधारण फ़ेमिली का लड़का हूं। मेरे परिवार में मेरे और मेरे मम्मी और मेरे डैडी के अलावा और कोई नहीं है। मेरे डैडी हम दोनो से दूंर रहते है। घर में मैं और मेरी मम्मी दो लोग ही रहते है। मेरी मम्मी जिनकी उमर अब चालीस साल की है एक बेहद ही खूबसूरत और काफ़ी आकर्षक महिला है।

उनका रंग गोरा और चेहरा इतना सुन्दर है कि जो भी उनको देखता है बस देखता ही रह जाता है। दूसरी तरफ़ मेरे दूर के एक रिश्तेदार है जो कि विदेश में रहते है वो कभी कभी घर आते है। अब मैं आपको उस दिन की कहानी को बताने जा रहा हूं।

मैं उन दिनो मम्मी के साथ एक छोटे से शहर में रहता था। उन दिनो हमे पैसे की थोड़ी सी परेशानी रहती थी। एक दिन जब मैं पढने के लिये क्लास में गया तो टीचर ने मुझे फ़ीस लाने के लिये बोला। घर में आया तो नमन ने मम्मी से फ़ीस के बारे में बोला तो मम्मी बोली कि अभी थोड़े दिन के बाद ही पैसे की व्यवस्था हो पायेगी। उस दिन नमन आये हुये थे। वो हमारी बारे सुन रहे थे।
रात में जब खाना खाने के बाद मैं अपने रूम में गया तो अपने बगल वाले रूम में कुछ बातें होते हुये सुना। मैं समझ गया कि वो अवाज मेरी मम्मी और नमन की है। नमन ने ध्यान से सुना तो पाया कि नमन मम्मी से कह रहे थे कि अगर तुम्हें पैसा चाहिये तो गेस्ट रूम में निर्वस्त्र हो के आ जाओ। इतना कहने के बाद नमन अब मम्मी के कमरे से निकाल के गेस्ट रूम में चले गये।

उनके जाने के बाद नमन ने मम्मी को अपने सारी कपड़े उतारते हुये देखा तो समझ गया कि आज कि रात मम्मी उनके साथ बितायेंगी। मम्मी अपने सारी कपड़े उतरने के बाद गेस्ट रूम में चली गई। जब मम्मी गेस्ट रूम में गई उस समय नमन बाथ रूम में गये हुये थे।

मम्मी रूम में जाकर खड़ी हो गई। तभी नमन बाथरूम से निकले। उस समय वो भी पूरी तरह से निर्वस्त्र थे। जब मैंने उनके लण्ड को देखा तो उसकी लम्बाई को देख के मैं समझ गया कि उसकी लम्बाई साढे सात से आठ इन्च की होगी। नमन का लण्ड पूरी तरह से तना हुआ था।

नमन मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गये। मम्मी के पास खड़े होने के बाद नमन ने मम्मी की गाण्ड पर एक हाथ को रखते हुये सहलाया। इसके बाद वो मम्मी के गाण्ड से अपने लण्ड को सटा दिया और एक जोर से झटका मारा तो मम्मी के मुह से जोर से आवाज निकाली जो कि मेरे कान तक पहुंचने के लिये काफ़ी थी। नमन ने एक हाथ से मम्मी के कमर को पकड़ लिया और अपने कमर को हिलाने लगे।

अब नमन ने अपने कमर को हिलाते हुये मम्मी से पूछा कि सेक्स किये हुये कितने दिन हुये तो मम्मी ने कराहते हुये बताया कि तीन साल। इतना सुन के नमन ने एक जोर का झटका मारा तो मम्मी जैसे उछल पड़ी। मम्मी ने नमन से कराहते हुये धीरे धीरे झटके मारने के लिये बोला। लेकिन उनके इस बात का नमन पर कोई भी असर नहीं पढा और वो मम्मी को वैसे ही पेलते रहे। वैसे तो वो अपने कमर को जोर जोर से ही हिला रहे थे। लेकिन जब अपने कमर को थोड़ा और तेजी से झटका लगते तो मम्मी की हालत देखते ही बनती थी।

कुछ देर के बाद नमन ने मम्मी को ड्रेसिन्ग टेबल के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की चूत को देख देख के पेलने लगे। मम्मी की चूत पर अपने हाथ रखने के बाद वो मम्मी को वैसे ही झटके लगाते रहे और मम्मी के गाण्ड में अपने पूरे लण्ड को घुसा दिया। अब उनका पूरा लण्ड मम्मी के गाण्ड में चला गया था। कुछ देर तक उसी तरह से झटका लगने के बाद नमन ने देखा कि उनके कमर की स्पीड बढने लगी तो मैं समझ गया कि उनका सब अब अन्तिम पोजिशन पर था।

मेरा सोचना बिलकुल ही सही था। क्योंकि कुछ देर के बाद नमन मम्मी के कन्धे पर अपने सर रख के शान्त पड़ गये। कुछ देर तक वैसे खड़े रहने के बाद नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के गाण्ड से निकाल दिया। अब मम्मी बथरूम में चली गई। नमन भी उनके पीछे चले गये। कुछ देर के बाद जब दोनो बाहर निकले तो नमन ने देखा कि मम्मी ने नमन के लण्ड को अपने एक हाथ से पकड़ रखा था। रूम में आने के बाद नमन ने देखा कि नमन बेड पर बैठ गये। अब मम्मी को इशारे से लण्ड को चाटने के लिये बोले।

मम्मी फ़र्श पर बैठ गई और नमन के लण्ड को अपने मुह में लेके चाटने लगी। नमन मम्मी के चूंची को अपने हाथ में ले के धीरे धीरे दबाने लगे। लगभग पांच मिनट के बाद जब नमन पूरी तरह से गरम हो गये तो मम्मी को लण्ड को छोड़ने के लिये बोला। मम्मी ने जब लण्ड को मुह से निकाला तो नमन ने देखा कि नमन का लण्ड पूरी तरह से तन चुका था। अब नमन का लण्ड मम्मी की चूत में जाने के लिये पूरी तरह से तैयार हो चुका था। अब नमन ने मम्मी को बेड पर लेटने के लिये बोला। मम्मी बिस्तर पर लेट गई।

नमन ने मम्मी के चूत के बालो को सहलाना शुरू किया। मम्मी ने अपने अखे बंद कर लिया और जोर जोर से सासे खींचने लगी। इसके बाद नमन ने मम्मी की चूत को अपने दोनो हाथो से फ़ैलाया और बोले- ये तो बहुत ही सख्त है। जैसे कि अभी तो बिलकुल ही कुवारी है।
अब वो पास के अलमारी से सरसो के तेल के दीबे को लेकर पास के टेबल पर रख दिया।

अब नमन ने मम्मी के चूत पर तेल लगाने लगे। मम्मी के चूत पर तेल लगने के बाद अपने लण्ड पर तेल लगाया। इसके बाद नमन मम्मी के जांघ पर बैठ गये। अब उनके लिये बर्दाश्त करना जैसे मुश्किल हो रहा था। नमन ने अपने लण्ड को एक हाथ से पकड़ के मम्मी के चूत पर सटाया और दूसरे हाथ से मम्मी के चूत को फ़ैलाया। नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के चूत के होल पे रख के अपने कमर को हलका सा आगे के तरफ़ पुश किया तो मम्मी के मुह से हल्की सी सिसकी निकिली।

मैं समझा कि मम्मी के चूत में उनका लण्ड का लाल टोपा भीतर चला गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं था। मम्मी कि चूत नमन के लण्ड के लिये छोटी थी। अब नमन ने मम्मी के दोनो पैरो को फ़ोल्ड कर के फ़ैला दिया और दोनो पैरो के बीच में आ गये। अब मम्मी के चूत पर अपने लण्ड को सटा के रगड़ने लगे। दो मिनट तक ऐसा करने से मम्मी धीरे धीरे गरम होने लगी और तेज सांसे लेने लगी।

कुछ देर के बद मम्मी ने अपने चूत को अपने दोनो हाथो से फ़ैला दिया और राज को लण्ड को घुसने के लिये बोली। नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के चूत के छेद पर रख के जोर से झटका मारा तो मम्मी अपने जगह से दो इन्च ऊपर घसक गई। नमन ने ध्यान से देखा तो पाया कि नमन का लण्ड मम्मी में चला गया था। अब नमन अपने कमर को धीरे धीरे हिलाने लगे और मम्मी उनके हर झटके के साथ हिलाने लगी।

अब नमन मम्मी के ऊपर लेट गया और दोनों एक दूसरे को अपने बांहों में कस लिया। नमन ने मम्मी के गाल पर एक पप्पी ली और एक जोर का झटका मारा तो मम्मी कराह उठी।

नमन ने पूछा- दर्द कर रहा है?
तो मम्मी ने कराहते हुये जवाब दिया – हां आआ औऊऊऊ आह्हहह.

अब नमन ने मम्मी की दोनों कलाईयों को पकड़ कर एक जोर से झटका मारा तो मम्मी तो जैसे पूरी तरह से कांप गई। अब नमन मम्मी के चूचियों को मुँह से पकड़ के धीरे धीरे पीने लगा और अपने कमर को धीरे धीरे हिलाने लगा। मम्मी अब पूरी मस्ती के साथ आहे भरने लगी।

मैंने देखा कि नमन अपने डण्डे को मम्मी के अन्दर ले जाने के लिये जोर जोर से दो तीन झटके मारे तो मम्मी पूरी तरह से कांपते हुये आआआ आऔऊऊ ऊऊउ आआ आआहह उआआ आआ आऐई ईईइ औआआ नह्हह्ही आआआजजु फ़्फ़फ़्फ़ फ़फ़्फ़फ़ आआऔऊऊउ आआआह्ह उआआआआ आआऐईईइ औआआआ नह्हह्हीई आआआज्ज फ़्फ़फ़्फ़ फ़्फ़फ़्फ़ फ़्फफ़ की आवाज निकाल रही थी और उधर नमन अपने कमर को जोर जोर से हिला रहे थे।

तभी मम्मी ने बोला- थोड़ा धीरे धीरे अन्दर डालिये आआ अह्ह ह्हह्ह ऊह ह्हह अह्ह ह्हह्ह।
अब नमन ने मम्मी को बोला कि अभी तो आधा ही अन्दर गया है। आज तो कुंवारापन को खत्म करना है। पिछले दो साल से तो कुंवारी रही है ये चूत। ये कहते हुये नमन ने जोर जोर से तीन चार झटके लगाये तो मम्मी आऔऊउ आआहह्ह उआआ आआऐईईइ औआआ नह्हह्हीई आआआ ज्जजफ़्फ़ आऔऊऊउ आहह्ह उआआआ आआ आआऐईईइ औआआ नह्हह्हीई आआज्ज जुफ़्फ फ़्फ़फ़्फ़फ़ की आवाज के साथ जैसे धीमी आवाज में चीख पड़ी। नमन ने अपने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाल दिया और मम्मी के दोनो चूंचीयों को फ़िर से मसलना शुरू कर दिया कुछ देर के बाद नमन ने अपने कमर को जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया और मम्मी के आआआ आआआ आअह्ह् ऊओह्ह ह्हह के आवाज आने लगी। जब नमन ने देखा कि अब रुकना नहीं है तो अपने होठों को मम्मी के होठो को कस लिया और जोर जोर से झटके मारने लगा।

तब मम्मी अपने होठों को अजाद करते हुये पूछा कि अब और कितना बाहर है राजा। नमन ने बोला कि थोड़ा है डाल दूं पूरा तो मम्मी ने हामी में अपने सर को हिलाया। नमन ने अपने कमर को जोर के झटके के साथ अपने लण्ड को पूरा अन्दर कर दिया। कुछ देर तक जोर के झटके मारने के बाद नमन ने जब फ़ील किया कि मेरा सपुरम उसके चूत में जाने वाला है तो नमन ने एक तरफ़ से मम्मी के चूंचीयों को जोर से मसलना शुरू किया तो दूंसारी तरफ़ मम्मी के होठों को चूसना शुरू किया। अब वो भी नमन के सुर के साथ अपना ताल मिलाने लगी थी। नमन ने पूछा मजा आ रहा है तो मम्मी ने सर हां में हिलाया। कुछ देर के बाद नमन का सपुरम मम्मी के चूत को गीला करने लगा तो मम्मी इ लवीईईए ऊऊऊ ऊऊउ आआह्ह ईईई लूऊऊव्वी ईईईई ऊऊऊउ कर के अपने दोनो हाथो को नमन के पीठ पर रगड़ते हुए पूरी तरह से नमन के अगोश में आ गई।

कुछ देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद नमन ने उठ के अपने लण्ड को निकाला उसमे खून लगा हुआ था। नमन ने मम्मी कि चूत को देखा तो वो काफ़ी फ़ूल चुकि थी। मम्मी चुपचाप कुछ देर तक वैसे ही लेटी रही और तब उठ के अपने कपड़े को पहन के बाथ रूम में गई वहां पेशाब करने के बाद वो जब बाहर आई तो मुसकुराते हुए नमन के तरफ़ देखती रही।

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