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हाय दोस्तों!
यह मेरी पहली कहानी है, मुझे सेक्सी कहानियाँ पढ़ने बहुत मजा आता Sex Stories है मेरा नाम सुरेश है गोंडा में मेरा घर है एक बार मैं अकेले घर पर था उस दिन मेरे घर पर कोई नहीं था मैं सेक्सी बुक देख रहा था मेरा लंड खड़ा था मेरे घर का दरवाजा खुला था तभी पड़ोस में रहने वाली आंटी जी अन्दर आ गयीं और मुझे लगा कि कोई आ रहा है मैं ने शीशे में देख लिया कि आंटी खड़ी मुझे देख रही थी
मैने अपना मोटा लाल और चिकना लंड अपने हाथ में पकड़ रखा था मैने कुछ नहीं पहना था एक दम नंगा था आंटी बहुत ध्यान से देख रही थी मैं ने लंड को और ऊपर कर दिया अब आंटी को मेरा लम्बा लंड साफ़ दिख रहा था वो मस्त हो रही थी बहुत देर देखने के बाद वो आगे आकर पीछे से आकर पकड़ लिया मैं खड़ा हो गया तभी मेरा लंड आंटी के पेट में गड़ने लगा तभी वो देख कर बोली कि कितना सेक्सी है तुम्हारा और झट से पकड़ लिया वो बोले तुम भी प्यासे हो और मैं भी चलो दोनो की प्यास बुझ जायेगी
मैने कहा क्यों अंकल आप को नहीं करते है वो बोली कभी नहीं मैने कहा मैं तैयार हूं। आंटी बोली क्या करने के लिये, मैं शरमाया, तभी वो बोली चोदने के लिये। फिर मैं आंटी को गोद में ले जाकर बेड पर लिटा दिया और कपड़े उतारने लगा सच में उनकी चूची एक दम कड़ी थी मैने दबाना शुरु किया वो एक दम मदमस्त हो रही थी जब मैने उनकी चूत में उंगली डाली तो इतनी गरम थी कि मैं बता नहीं सकता आंटी बोली पहली बार तो जल्दी चोद दो दोबारा आराम से चोदना मैं भी ताव में था अपना लंड आंटी की चूत पर रख दिया धीरे धीरे चूत में डालने लगा आंटी को दर्द हुआ, आवाज़ निकाल रही थी आह आआहह अहह ओहो होहह्हूऊऊ मैने ५-६ धक्के में लंड को अन्दर कर दिया और धक्के मारने लगा, पहले धीरे धीरे फिर तेज़ और तेज़ और फिर खूब जोर जोर से धक्के मारने लगा आंटी एक दम नशे में थी बोली एतनी अच्छी चुदाई कैसे कर लेते हो मेरे पति तो कभी करते नहीं जब करते भी हैं तो उनका लंड इतना छोटा है कि मेरी चूत में जाता ही नहीं।
मैं धक्के मारता जा रहा था आंटी बोली पहली बार तो ऐसे ही जल्दी जल्दी चोद दिया है, अब भरपूर मजा दुंगी तुमको कि तुम मस्त हो जाओगे। मैं आंटी को चोदता रहा फिर लंड को चूत से बाहर निकाल कर चूत को देखने लगा और सहलाने लगा, आंटी बोली पहली बार चूत देख रहे हो, मैने कहा हाँ आज़ मैने चूत देखी पहले फोटो देखता था आज़ सामने है आप की चूत तो बहुत रसीली है बहुत रस निकल रहा है, वो बोली जब से तुम्हारा लंड देखा है तभी से पानी निकल रहा है और मेरा मन कर रहा था के झट से पकड़ कर मुँह में डाल लूं और सारा रस पी जाऊं। आंटी बोली कि इस बार चोद दो फिर तुम मेरी चूत चाटना। मैं तुम्हारा मोटा लंड पीउंगी।
मैने आंटी की चूत से थोड़ा सा रस निकाल कर अपनी लंड पर लगाया और फिर चूत में डाल दिया आंटी आआहह्ह ऊह्ह करती रही मैने स्पीड तेज़ कर दी और तेज़ कर खूब तेज़ कर दी आंटी के ऊपर लेटा रहा और आंटी को झड़ने लगी थी तभी आंटी बोली स्पीड और तेज़ करो मैं झड़ने वाली हूं, मेरी चूत का रस निकलने वाला है। मैने स्पीड और तेज़ कर दी तभी आंटी ने मुझे कस के पकड़ लिया। मैने भी आंटी को कस के पकड़ लिया दोनो झड़ गये थे। मेरे लंड का रस आंटी की चूत में गिर रहा था मुझे बहुत मजा आया। Sex Stories
मेरा नाम रोहित है, मेरी Hindi Porn Stories उम्र अभी 23 साल, मैं कोलकाता का रहने वाला हूँ। मैंने यहाँ पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं तो मैंने सोचा कि मैं भी अपनी कहानी लिखूँ।
यह मेरी पहली कहानी है जिसे मैं आप के साथ बाँट रहा हूँ। मैं आप का वक़्त जाया नहीं करके अपनी कहानी बताता हूँ।
यह कहानी सन 2008 की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था। मैं विशाखापटनम के एक स्कूल में पढ़ता था तो मुझे हॉस्टल में रहना पड़ता था। हॉस्टल में लड़के और लड़कियाँ एक ही मंजिल में रहते थे पर उनके अलग कमरे थे।
मैंने अपने पहले दिन हॉस्टल में एक लड़की को देखा था, वह बहुत ही सुंदर थी। उसकी उम्र होगी कोई 18 साल … उसकी लम्बाई 4.8″ होगी और उसकी फिगर 32-28-32 होगी, देखने में बहुत गोरी थी। मैं सोचने लगा कि कैसे मैं उससे बात करूँ ??
जैसे ही मैं अपकी कक्षा में आया तो देखा कि वो लड़की मेरी ही क्लास में पढ़ती है। मन ही मन मैं खुश भी हो गया, चलो कोई तो बहाना मिला बात करने के लिए। वो लड़की पढाई में भी बहुत अच्छी थी तो मैडम ने उससे बोला मेरी मदद कर देने के लिए क्योंकि मैं नया था क्लास में!
तो मैं उसकी बगल में आकर बैठ गया। उसने मुझसे पूछा- तुम्हारा नाम क्या है? तुम कहा से हो? यहाँ के तो नहीं लगते!
मैंने कहा- मेरा नाम रोहित है और मैं कोलकाता से हूँ। मैं हॉस्टल में पहली बार रह रहा हूँ।
उसने कहा- मैं भी पहली बार हॉस्टल में रह रही हूँ और मैं मुंबई से हूँ।
ऐसे हमारी बातों का सिलसिला चल पड़ा और दिन बीतते-बीतते हम दोनों बहुत पास आ गये। हम हर दिन बात करते थे एक दूसरे के साथ बैठ कर … चाहे क्लास में हो या हॉस्टल हो।
जब भी छुट्टी मिलती हम दोनों बाहर घूमने निकल जाते और पूरा दिन मस्ती से घूमते, पार्क जाते, बीच जाते और शाम को वापस आ जाते।
इन दिनों में मैं उसे बहुत पसंद करने लगा, वो मुझे भी बहुत पसंद करने लगी।
हमारे एक्साम ख़त्म हो चुके थे, अब हमारी गर्मी की छुट्टी शुरू होने वाली थी। सब बच्चे अपने घर जा रहे थे हॉस्टल छोड़ के … पर हमने सोचा कि एक दिन और रुकेंगे और घूमने की तैयारी करने लगे।
हमारे सिवा कुछ और बच्चे थे तो हॉस्टल वाले ने हमें एक ही कमरे में सोने को कहा। हम सब एक ही कमरे में सोने लगे। हम दोनों को नींद नहीं आ रही थी और हम बात करने में मग्न थे।
बातों-बातों में मैंने मजाक में पूछा उसे- कभी तुमने प्यार किया है किसी से?
उसने कहा- हाँ!
मैंने सोचा कि लगता है अब मेरी दाल नहीं गलेगी क्योंकि वो किसी और से प्यार करती है तो मैंने अन्दर से दुखी हो कर पूछा- कौन है वो जिससे तुम प्यार करती हो?
उसने कहा- वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त है, हर दिन मैं उससे बात करती हूँ।
तब मैंने सोच लिया था कि अब मैं गया काम से …
मैंने फिर पूछा- उसका नाम बताओ?
उसने कहा- उसका नाम रोहित है और वो तुम ही हो!
मैं यह जान के बहुत खुश हो गया और उसको अपने बाँहों में भर लिया और उसे होंठों पर चूम कर कहा- आई लव यू निशा!
उसने कहा- आई लव यू ठू!
मैंने पूछा- पहले क्यों नहीं बताया?
उसने कहा- हिम्मत नहीं हो रही थी, पर आज बता दिया..
और क्या था … मैंने उसे और अपने आपसे चिपका लिया … उसकी चूचियाँ मेरे सीने पर दब रही थी। वो उस वक़्त नाईट सूट में थी … मैं उसको चूमते हुए उसका सूट उतारने लगा। वो आहें भरने लगी … कुछ देर बाद मैंने उसकी पैंटी और ब्रा भी उतार डाले …
वह शरमा रही थी और उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी..
मैंने उसकी चूची सहलाना शुरू किया और बड़े प्यार से सहलाने लगा। अब वो उत्तेजित होने लगी थी … मैंने उसकी चूची को अब दबाना शुरू किया … उसकी चूची बहुत ही नरम थी, इसी वजह से उससे दर्द हो रहा था … कुछ देर बाद मैंने उससे बिस्तर में लेटाया और उसकी चूत पर अपने हाथ को फिराने लगा … और बीच-बीच में मैं उसकी चूत में अपनी उंगली डाल के अन्दर बाहर करने लगा … ऐसा करने से वो सिसकारने लगी और तड़प उठी, उसने कहा- और बर्दाश्त नहीं हो रहा हैं …
और वो मेरे लण्ड को मेरे पजामे के ऊपर से ही सहलाने लगी, लण्ड को अपने हाथ में भर के हिलाने लगी … उस वक़्त मैं जन्नत में चला गया था, ऐसा लगा …
फिर उसने मेरे लण्ड को अपने मुँह में भर लिया और पूरा साफ़ कर दिया …
उसके बाद मैंने उसकी चूत को चाटा और कुछ देर में उसका चिकना पानी मेरे मुँह में भर गया और मैं भी उसे पूरा चाट गया … और हम दोनों शांत हो गए …
कुछ देर बाद फिर मेरा लण्ड खड़ा हुआ और मैंने इस बार उसकी चूत पर रख कर एक जोर का धक्का दिया और उसके मुँह से आह की चीख निकल गई …
मैंने फिर जोर से एक और धक्का दिया तो लण्ड अन्दर जाने लगा और वो चिल्लाने लगी तो मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूमते हुए एक और धक्का दिया …
इस बार लण्ड पूरा अन्दर चला गया था …
मैं कुछ देर रुक गया.. जब उसका दर्द कम हुआ तो उसने मुझे इशारा किया कि अब मैं अपना काम शुरू कर सकता हूँ …
और मैंने धीरे धीरे से उसे पेलना शुरू किया … उसके बाद मैं थोड़ा और जोर से चोदने लगा …
उसने कहा- रोहित, और जोर से करो … मेरी चूत तुम्हारी लण्ड की प्यासी है … बहुत दिन से यह प्यास मेरी चूत में थी पर मेरी हिम्मत नहीं थी कि मैं तुम्हें बताऊँ … प्लीज़! आज मेरी प्यास बुझा दो न …!!
मैंने कहा- जान! मैं तुम्हारा दीवाना उसी दिन बन गया था जब मैंने तुम्हें पहली बार हॉस्टल में देखा था.
अपनी स्पीड मैंने बढ़ा दी थी … उससे बहुत मज़ा आ रहा था … बीस मिनट के बाद वो झड़ी और उसके बाद मैं भी झड़ गया.
मैंने अपना सारा पानी उसकी चूत में भर दिया और उसके साथ सो गया!
उस रात के बाद जब भी मौका मिलता, हम सेक्स कर लेते थे.
जब हमारे स्कूल ख़त्म हो गए तो हम दोनों अलग हो गए पर हम दोबारा कभी मिल नहीं पाए!
यह मेरी सच्ची कहानी है जो मैंने आप के साथ शेयर की है, उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आएगी!
अगर आप मुझे कुछ बताना चाहते हैं या कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो मुझे मेल कीजियेगा!
मैं आपके मेल का इंतज़ार करूँगा! Hindi Porn Stories
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हॉट कजिन स्टोरी में लॉक डाउन में मैं गुरुग्राम में एक बढ़िया फ्लैट में अकेला रह रहा था. तभी मेरी बुआ की बेटी का फोन आया. वह दिल्ली में थी और लॉकडाउन में घर जाकर कैद नहीं होना चाहती थी.
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम नीलेश शुक्ला है, मैं 27 वर्ष का हूँ और मूल रूप से इलाहबाद से हूँ.
मेरे परिवार वाले मुझे ‘नीलू’ कह कर ही पुकारते हैं अक्सर!
मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ, और सत्य अनुभव पर आधारित यह कहानी लिखने की प्रेरणा मेरे कुछ प्रिय लेखक हैं, जिनकी लेखन शैली इतनी उत्कृष्ट और आकर्षक है कि पाठक पढ़ते हुए स्वयं को उस कहानी के अंदर महसूस करता है.
अतः मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी इस सत्य कथा के माध्यम से आपसे अपनी आप बीती हॉट कजिन स्टोरी साझा करूँ.
इस लेख की भाषा में मैंने अधिकतर हिंदी और हिंगलिश के शब्दों का प्रयोग किया है, जो मेट्रो शहरों में बातचीत का आम लहज़ा बन गया है.
यह मेरी पहली रचना है, अतः कोई भी त्रुटि या कमी के लिए पहले ही पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ.
वर्तमान में पुणे में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हूँ.
लगभग 6 फ़ीट की हाइट और कसरती बदन के साथ एक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होने के कारण मेरे आज तक काफी लड़कियों के साथ सम्बन्ध रहे हैं.
किन्तु कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी अपनी एक अलग कसक, एक अलग खनक और एक अलग स्वाद होता है और वे जीवन में अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं.
अपने जीवन के एक ऐसे ही ख़ास अनुभव को मैं आपसे साझा कर रहा हूँ जिसने मुझे बहुत हद तक बदल कर रख दिया.
अपने जीवन की जिस घटना का उल्लेख मैं करने जा रहा हूँ वह 2020 में घटित हुई थी.
उस समय मैं अपनी इंजीनियरिंग की सफल पढ़ाई के पश्चात गुरुग्राम में एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपर काम कर रहा था.
काम करते हुए मुझे लगभग 2 साल हो गए थे.
2019 में अपने रहने के लिए मैंने अपने एक मित्र अखिल के साथ गुड़गाँव शहर के थोड़ा बाहरी इलाक़े में सोहना हाईवे की तरफ एक बहुमंजिला सोसाइटी में एक 2BHK फ्लैट किराये पर ले लिया था.
हम दोनों में गहरी मित्रता थी और खूब पटती थी.
हमारे बीच पार्टियों से लेकर लड़कियों की बेशर्मी से चर्चा होती थी.
अखिल भी गुड़गाँव में एक अन्य कंपनी में सेल्स लीड की भूमिका में कार्यरत था.
हमारा फ्लैट उन्नीसवीं मंजिल पर था.
सोसाइटी मुख्य शहर से दूर होने के कारण पूर्णतः फर्निश्ड लक्ज़री फ्लैट के बाद भी उसका किराया काफी कम था.
बाइपास और फारेस्ट एरिया से पास होने के कारण हमारे इलाके में खूब हरियाली और न के बराबर शोरगुल था.
ऑफिस से थोड़ा दूर था, परन्तु मानसिक शांति के परिप्रेक्ष्य से उस इलाक़े का कोई मुक़ाबला न था.
मकान मालिक कनाडा में रहता था और कोई हस्तक्षेप नहीं करता था.
हम भी समय पर किराया पंहुचा दिया करते थे.
सोमवार से शुक्रवार काम में व्यस्त रहने के बाद उस फ्लैट पर एक अलग ही सुकून मिलता था.
मास्टर बैडरूम मैंने और दूसरा बैडरूम अखिल ने ले लिया था.
इसके अतिरिक्त फ्लैट में फ्लैट में एक छोटा स्टडी रूम था जिसकी हमें तब तक ज़रूरत नहीं पड़ी थी, अतः हम स्टोररूम जैसे ही उसका उपयोग करते थे.
खाने और सफाई के लिए हमने एक नौकरानी भी लगवा ली थी.
उस समय गुड़गाँव में मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी श्रद्धा … जिसको डेट करते हुए मुझे लगभग डेढ़ साल हो गया था जबकि अखिल सिंगल था.
कुल मिलाकर हम दोनों मित्र नौकरी करते हुए मस्ती से अपना बैचलर जीवन जी रहे थे.
दिसंबर 2019 में अखिल ने बुझे बताया कि उसका बैंगलोर में एक बड़ी कंपनी में सफल इंटरव्यू हुआ है, बढ़ोतरी के साथ नयी नौकरी मिल गयी है और उसे जनवरी से ही ज्वाइन करना होगा.
20 जनवरी के आसपास अखिल अपना अधिकतर सामान लेकर बैंगलोर के लिए निकल गया.
किंतु चाबी मेरे हाथ में थमाते हुए अपनी कार यहीं छोड़ गया यह कहकर कि एक-आध महीने में बैंगलोर में अपना डेरा जमाने के पश्चात वह वापस आएगा और अपनी कार लेकर जाएगा.
चूँकि फ्लैट का किराया अधिक नहीं था इसलिए मैंने अकेले ही फ्लैट रखने का निश्चय किया यह सोचकर कि यदि कोई ऐसा मित्र मिले जिससे समन्वय बने तो वह अखिल की जगह रह सकेगा.
अखिल के जाने के बाद उस आलीशान फ्लैट में मैं अकेले रहने लगा.
फरवरी 2020 मध्य से कोरोना वायरस की खबरें (जो अबतक लोग हल्के में ले रहे थे) रफ़्तार पकड़ने लगी और फरवरी अंत तक समाचार का मुख्य हिस्सा बन गयी.
मार्च के पहले हफ्ते में जब कोरोना के फैलने की खबरें चरम पर थी, मेरे ऑफिस ने सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से अनिश्चितकालीन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की घोषणा कर दी.
मैंने अपने फ्लैट में स्टडीरूम को अपना ऑफिस बना लिया और मास्टर बैडरूम पहले से मेरे पास ही था.
बस अखिल का कमरा था जो खाली था.
7 या 8 मार्च की बात है.
दोपहर के समय मैं ऑफिस के काम में व्यस्त था.
अचानक से मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, जो नाम स्क्रीन पर चमका उसको देखते ही मैं थोड़ा सा चौंका.
“Moni Di Kanpur”
मोनी, जिसका पूरा नाम मोनिका भारद्वाज था, मेरी कानपुर वाली बुआ की लड़की थी और मुझसे पांच साल बड़ी थी.
मोनिका ने मास्टर्स तक की पढ़ाई कानपुर से ही की थी और अगस्त 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एक कॉलेज में पी०एच०डी में दाखिला ले लिया था.
साथ ही साउथ दिल्ली में ही एक गर्ल्स पीजी में कमरा ले लिया था.
मोनिका जब दिल्ली शिफ्ट हुई थी, तब उसका एक बार फ़ोन आया था और हमारी बात हुई थी.
किन्तु अब तक मिलने का अवसर नहीं मिला था; सच कहूँ तो मैंने प्रयास भी नहीं किया था, मैं नहीं चाहता था की मेरी रिश्तेदारी में किसी को भी मेरे बैचलर जीवन और मॉडर्न रहन-सहन का किसी को भी पता चले क्योंकि समस्त परिवार में मेरी छवि एक प्रतिभाशाली और परिश्रमी छात्र की थी.
अतः मैं परिवार के लोगों से और रिश्तेदारी में काफी रिज़र्व रहता था.
मोनी और मैं बचपन में छुट्टियों में काफी बार मिलते थे, कभी इलाहबाद में तो कभी कानपुर में.
हमारी अच्छी पटती थी लेकिन मोनी के हाई-स्कूल के पश्चात से हम बराबर संपर्क में नहीं थे.
मिले थे तो बस पारिवारिक शादी-ब्याह और अन्य पारिवारिक समारोह पर.
लगभग साढ़े तीन- चार साल पहले हम एक पारिवारिक फंक्शन में आखिरी बार मिले थे.
खैर, इन सब विचारों के बीच मैंने फ़ोन उठाया.
दूसरी तरफ से वही पहचानी हुई, चुलबुली आवाज़, तंज कसते हुए- नीलू!! कभी बहन को भी याद कर लिया कर!
मैंने कहा- दीदी, इतने दिनों बाद कैसे याद किया? कैसी हो आप? क्या हाल चाल है?
मोनी ने कहा- तेरी सवाल पे सवाल पूछने की आदत गयी नहीं अब तक! हाल चाल सब बढ़िया है, पी जी में हूँ फिलहाल. लेकिन कुछ दिक्कत हो गयी है. इसीलिए तुझे फ़ोन किया!
“दिक्कत? क्या हो गया ऐसा दीदी?”
“अरे तू न्यूज़ नहीं देखता क्या!? पता नहीं ये कोरोना वायरस क्या बला है. शुरुआत में तो मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कल कॉलेज से नोटिस आया कि कॉलेज बंद हो रहा, पता नहीं कब तक. सारी क्लासेज और रिसर्च का काम सब ऑनलाइन चलेगा. भाई मुझे तो सच में टेंशन हो रही. पी.जी. की लड़कियाँ खाली करने की बात कर रहीं. मेरी रूममेट दिव्या के तो घर से आज फ़ोन आया था, उसके पापा उसको लेने आ रहे 2 दिन में सारे सामान के साथ. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ … सब कुछ इतना अचानक से हो रहा!”
“सारी न्यूज़ देख रहा मैं दीदी, कोरोना की वजह से यूरोप, खासकर इटली में बुरा हाल है … वायरस तेजी से फ़ैल रहा. मेरे ऑफिस ने तो बीते हफ्ते से ही वर्क फ्रॉम होम कर दिया है सबका!”
“तो तेरा क्या प्लान है … घर निकलने का सोच रहा?”
“नहीं दीदी … मैं तो यहीं रुक रहा अपने किराये के फ्लैट में!”
मोनी ने लगभग हँसते हुए कहा- वाह भाई! गज़ब कॉन्फिडेंस है तेरा. कोई गर्लफ्रेंड है क्या जिसकी वजह से रुका हुआ है?
“क्या दीदी आप भी ना न… कुछ नहीं है ऐसा; फ्लैटमेट था, वह भी 2 महीने पहले चला गया, अकेला ही रहता हूँ. लेकिन 2 दोस्त दूसरी सोसाइटी में 15-20 मिनट दूर रहते हैं, तो मिलजुल कर देख लेंगे जो भी होगा!”
“तेरा तो सही हिसाब है भाई. ऐसे ही नहीं तेरी तारीफों के पुल बांधते हैं सब मेरी फैमिली में. पढ़ाकू तो तू था ही, तेज भी हो गया इतना यहाँ आकर. गुरुग्राम रह रहा ना तू?”
“हाँ दीदी गुरुग्राम में ही, लेकिन मेन गुरुग्राम से थोड़ा बाहर है. ये सब छोड़ो, आप बताओ कि बुआ फूफ़ा क्या बोल रहे?”
“यार, वे तो घर आने को बोल रहे हैं. चौदह तारीख की टिकट भी करवा दी है. लेकिन ये कोरोना इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा और इतनी अफरा तफरी भी है. पता नहीं सेफ होगा या नहीं इस तरह अचानक से जाना!”
“अब दीदी, बुआ फूफा ने बोल ही दिया है तो ऑप्शन भी क्या है और. मास्क वगैरह लगा कर जाना, आई थिंक सेफ रहेगा सब. ज़्यादा टेंशन मत लो!”
“हम्म … सही कह रहा यार … चल मैं पैकिंग वगैरह देखती हूँ.” मोनी ने बुझे मन से कहा.
“ओ.के. दीदी, अपना ध्यान रखना आप, और कुछ मदद चाहिए हो तो बेझिझक कॉल करना!”
“हाँ नीलू, तू भी ध्यान रख और बाहर ज़्यादा मत निकलना. नयी बीमारी का कुछ पता नहीं. चल मैं रखती हूँ … बाय!” कहते हुए मोनी ने फ़ोन रख दिया.
लगभग एक हफ्ता बीता.
13 तारीख की बात है, रात में साढ़े 11 बजे मेरे पास मोनिका का फ़ोन आया.
“नीलू! सो तो नहीं गया था?”
“नहीं दीदी, क्या हुआ? सब ठीक तो है न?”
“अरे यार … अभी मैसेज आया मेरे पास irctc का. ट्रेन कैंसिल हो गयी है. मैंने पता किया तो बहुतेरी ट्रेनें कैंसिल हो रहीं!”
“ओह इतने अचानक से? अब क्या दीदी?”
“समझ नहीं आ रहा यार, दिव्या भी चली गयी है. पीजी में 3 -4 लड़कियाँ बची हैं, लगता है वो भी चली ही जाएँगी कल परसों में!”
“दीदी बस का टिकट देखा? उसमे शायद मिल जाये आपको …”
“भाई ए.सी. बस में एक भी टिकट नहीं है और नार्मल बस से मैं सफ़र नहीं कर सकती, मेरी तबियत ख़राब हो जाती है. ऊपर से कितने सारे लोग भी होंगे बस में. इन्फेक्शन का चांस भी ज़्यादा है.”
“दीदी अब तो एक ही विकल्प बचा है. इंटरसिटी कैब या टैक्सी कर लो. थोड़ा महंगा पड़ेगा लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं!”
“अबे, तू भाई है या कसाई है … . मुझे घर भेजकर ही दम लेगा??” मोनी ने लगभग चिल्लाते हुए कहा.
“मतलब … समझा नहीं दीदी?”
“समझा नहीं मतलब क्या? तुझे नहीं पता घर जाकर मेरी ज़िन्दगी जेल जैसी हो जाएगी … सारी मौज मस्ती बंद … पहले से ही दुखी हूँ इतनी!”
“ओह … तो ये बात है … क्या सोच रही हो आप फिर? दिल्ली में ही रुकोगी?”
“यार सारी सहेलियों और दोस्तों से बात करके देख लिया … इस वक्त किसी के पास रुकने का जुगाड़ नहीं … तेरे पास कुछ व्यवस्था हो सकती है कुछ दिनों के लिए?” मोनी ने आशा भरी आवाज़ में पूछा.
सच तो यह था कि मैं भी अकेला ही था. मेरी गर्लफ्रेंड श्रद्धा जो अक्सर आती रहती थी, वह होली के समय घर गयी थी और उसके परिवार ने उसको माहौल ठीक होने तक वहीं रोक लिया था. केवल मेरे दो मित्र देवेश और सुमित थे, जो पास की एक सोसाइटी में रहते थे.
मैंने भी सोचा, एक-आध हफ्ते की तो बात है, मैनेज हो जाएगा सब.
“दीदी मैं तो गुरुग्राम रहता हूँ … साउथ दिल्ली से दूर पड़ेगा, लगभग सवा घण्टा. मुझे क्या समस्या होगी, फ़्लैट में एक कमरा भी खाली है, आप आ जाओ अगर आपको ज्यादा दूर न पड़े तो!”
मेरे इतना कहते ही मोनी की आवाज़ में राहत और प्रसन्नता का सैलाब आ गया- भाई … पक्का आ जाऊं ना? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न तुझे?
“अरे कम ऑन दीदी … इतनी फॉर्मेलिटी?”
“हाय मेरे प्यारे नीलू!! तूने बचा लिया मुझे … बस यही उम्मीद थी मुझे तुझसे … सुन, एक काम करती हूँ. पी.जी. खाली ही कर देती हूँ, तेरे साथ 2 -3 हफ्ते रुक लूंगी, और थोड़ा माहौल ठीक होते ही नया पी.जी. ढूंढ लूंगी. तू एक काम कर, मुझे लोकेशन भेज दे, मैं 3-4 दिन में सारा सामान पैक करके आती हूँ.”
“ठीक है दीदी … पहुँचने में कोई दिक्कत हो तो बताना … मैं लोकेशन व्हाटसऍप करता हूँ!” कहकर मैंने फ़ोन काट दिया.
अगले 3 दिन मैं काम में काफ़ी व्यस्त रहा तो मोनी से बात करने की तरफ ध्यान नहीं गया.
19 तारीख को मेरे पास सुबह लगभग 9:30 बजे मोनी का फ़ोन आया- नीलू, मैं निकल रही हूँ बस 10 मिनट में. कल ही आ जाती लेकिन सिक्योरिटी मनी फंसा हुआ था, वही लेने रुक गयी. गूगल मैप पर दिखा रहा एक-सवा घंटे में पहुंच जाऊंगी. तू फ्लैट पर ही रहेगा ना?
“हाँ दीदी, आप आराम से आ जाओ, मैं फ्लैट पर ही रहूँगा.”
“तेरी सोसाइटी का नाम क्या बताया था तूने?”
“दीदी सोसाइटी का नाम रीगल कासा है. और टावर का नाम ऐमीरेट्स है. आप गार्ड से बात करा देना मेन गेट पर!”
मोनी ने शरारत भरे फ़िल्मी लहज़े में पूछा- स्वागत नहीं करोगे हमारा?”
“हाहा … अरे बिलकुल दीदी … आप पहुँचो बस. फ्लैट इतना आलीशान है. उसको देखकर ही स्वागत हो जाएगा!”
मोनी ने उत्साह से भरपूर आवाज़ में कहा- हाय सच में क्या! मेरा छोटा भाई कितना बड़ा आदमी बन गया है … अब तो इंतज़ार नहीं हो रहा नीलू … चल मेरी कैब आ गयी, पहुंच कर कॉल करती हूँ”
कहते हुए फ़ोन काट दिया.
लगभग 11 बजे मेरे इण्टरकॉम पर गार्ड का फ़ोन आया- गुड मॉर्निंग सर … मैडम आयी हैं टैक्सी से, आपसे मिलने. सामान भी है साथ में!”
मैंने गार्ड को आदेश दिया- फ़ौरन उनको मेरे टावर पर भेज दो. वो मेरी कज़िन सिस्टर हैं.”
“जी सर, बिल्कुल!”
मैंने लिफ्ट ली और जब तक मैं नीचे पंहुचा, मोनी की कैब मेरे टावर के नीचे पहुंच गयी थी.
पीछे डिक्की से ड्राइवर कुछ सामान निकाल रहा था.
और एक सूटकेस मोनी पीछे वाली सीट से निकल रही थी.
क्योंकि हम सोशल मीडिया पर जुड़े हुए नहीं थे, मोनी को इतनी दिनों बाद देख रहा था मैं, 2 मिनट तक तो मेरी आँखें टिक गयी उस पर!
और टिकें भी क्यों न …
5′ 6″ से 5′ 7″ की हाइट, हल्का सांवला सुनहरा रंग, बॉटल ग्रीन रंग का चुस्त टॉप, जिसमें से मोनी के 36C के स्तन फाड़ के बाहर निकलने को हो रहे थे.
नीचे सफ़ेद रंग के हॉट-पैंट शॉर्ट्स जो सिर्फ चालीस प्रतिशत के लगभग चिकनी सुनहरी जांघों को ढक रहे थे.
मोनी की चिकनी टांगों पर एक भी बाल का नामोनिशान न था.
ऊपर से तीखे नैन-नक्श, बड़ी बड़ी आँखें, मेकअप, सनग्लासेस, जूते, मॉडर्न बॉडी लैंग्वेज.
अट्ठाइस-उनतीस साल की उस उम्र में मोनिका का वो यौवन से परिपूर्ण बदन डेवलपमेंट के चरम पर था.
10 सेकंड के लिए तो मैं उसे पहचान ही नहीं पाया.
मोनी डी०यू० की एक आइटम, पटाका माल लग रही थी.
देख कर साफ़ पता लग रहा था कि बहना को दिल्ली की हवा बहुत ज़बरदस्त लगी है. सच कहूं तो दो पल के लिए मेरा ईमान डगमगा गया.
वर्जिन बॉय फर्स्ट Xxx स्टोरी में मैं पढ़ाई केर लिए किराये के कमरे में रहता था. माकन मालकिन की भतीजी उनके पास रहने आई तो वह मुझसे घुल मिल गयी और एक दिन उसने सेक्स की पहल की.
दोस्तो, कैसे हैं आप सभी … मेरा नाम संदीप यादव है. मैं बिहार का रहने वाला हूं.
मैं अन्तर्वासना का 6 साल से फैन हूं. यहां की लगभग सभी सेक्स कहानियां मैंने पढ़ी हैं.
इस कारण से मुझे पेलाई का पूरा ज्ञान तो हो गया था, पर कभी चुदाई करने का मौका नहीं मिला था.
मैंने सोचा कि जब भी चुदाई करने का मौका मिलेगा, तो मैं उसे आप सभी के साथ साझा करूंगा.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है … मेरी वर्जिन बॉय फर्स्ट Xxx स्टोरी एकदम सच है.
दोस्तो, जब ये वाकया हुआ था, तब मेरी उम्र 26 साल की थी. मेरी हाईट 5 फुट 6 इंच है और रंग भी काफी गोरा है.
बचपन से ही मेरा खानपान अच्छा रहा है, जिससे मेरा स्वास्थ भी काफी अच्छा है.
अपने घर में सबसे छोटा होने की वजह से घर और बाहर के सभी काम मैं ही करता था, जिससे काफी फिट और मजबूत भी हूं.
साथ ही पढ़ाई में भी अच्छा हूँ और आज्ञाकारी होने की वजह से सबका दुलारा भी हूँ.
मेरा अब तक किसी भी लड़की से कोई प्रेम संबंध भी नहीं था, पर कोचिंग की कई लड़कियां मुझे पसंद करती थीं क्योंकि पढ़ाई के साथ साथ मेरा व्यवहार भी अच्छा था.
मैं सबके डाउट्स भी क्लियर कर देता था.
किसी से प्रेम संबंध न होने की वजह से तब तक मेरे लौड़े का टांका भी नहीं टूटा था.
मेरे लंड का आकार भी मस्त है.
यह साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा था. मेरा लंड किसी को भी संतुष्ट कर सकता था.
यह बात मुझे उसी लड़की ने बताई थी जिसकी चूत में पहली बार मेरे लौड़े ने घुस कर चुदाई की शुरुआत की थी.
उस लड़की का नाम लाली था.
उस वक्त मेरे लंड के टोपे पर खाल चढ़ी थी; उसे थोड़ा भी पीछे खिसकाने पर काफी दर्द होता था.
चुदाई के समय वह खाल फट गई थी और काफी दिन तक जख्म ठीक नहीं हुआ था.
मेरी स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के कुछ साल बाद मेरे घर वालों ने मुझे आगे की तैयारी करने के लिए दिल्ली भेज दिया था जहां मैं बहुत मन लगाकर अपनी पढ़ाई में लग गया.
जहां मैं रहता था, वह एक पांच माले की बिल्डिंग थी.
उसमें मैं चौथे माले पर सिंगल और अटैच बाथरूम वाले कमरे में रहता था.
वहीं ग्राउंड फ्लोर पर किराए से एक 42 साल की आंटी रहती थीं जो टिफिन सप्लाई करती थीं व अपने घर में ही बैठा कर सबको खाना खिलाती थीं.
उन्होंने अपने घर से ही टिफिन सेवा का छोटा सा बिजनेस सैट कर रखा था.
उनके घर कई लड़के खाने आते या टिफिन मांगते.
उनकी अपने पति से बिल्कुल भी नहीं बनती थी. वे दोनों हमेशा अलग ही रहते थे.
जब मेरा मन होता तो वैसे ही खाना खा लेता था और आंटी की भी थोड़े पैसे से या फिर और भी किसी तरह से मदद कर दिया करता था.
मेरी इस बात से आंटी से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी.
वे अपने सारे सुख दुख व्हाट्सएप पर मुझसे शेयर करने लगी थीं.
फिर कुछ दिन बाद उनकी भतीजी लाली आ गई.
उसकी उम्र 21 साल थी.
वह थोड़ी दुबली पतली और सांवली सी थी.
लाली अपनी चाची के घर कुछ दिनों के लिए रहने आई थी.
मेरा ये वाकया उसी के साथ हुआ था.
वह भी अपनी चाची के घर आते ही काम में मदद करने लगी थी. वह काफी सारे लोगों से और मुझसे भी घुल-मिल गई थी.
अब तो वह कभी कभी कुछ बहाने से मेरे रूम में भी आ जाती थी.
लेकिन मुझे पता नहीं चला कि वह मेरे पास क्यों आती है … और ना ही मैंने उस पर कभी ज्यादा ध्यान दिया.
फिर एक दिन जब दोपहर में मेरे अगल बगल वाले कमरे में कोई नहीं था.
मैं सिर्फ तौलिया लपेटे और बनियान पहने अपनी पढ़ाई कर रहा था.
तब वह अचानक से मेरे कमरे में आ गई और बोली- मैं कपड़े सुखाने आई थी. नीचे सब सो रहे हैं और मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं आ गई. तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं है?
मैं बोला- नहीं, कोई दिक्कत नहीं है.
वह मेरे बगल में बैठ कर पूछने लगी- क्या पढ़ रहे हो?
मैंने उसे अपनी किताब दिखा दी.
वह हंस कर बोली- मुझे कुछ समझ नहीं आएगा.
शायद वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, पर काफी समझदार थी.
वह यह सब बोल कर मुझसे चिपकती जा रही थी.
मैं उससे दूर होने लगा, तो उसने मेरा तौलिया पकड़ लिया और मुझे बेड पर धकेल कर मेरे पास बैठ गई.
मैं- तू पागल हो गई है क्या?
वह- हां, मैं पागल ही हो गई हूं आपको देख कर … मैं आपको कब से लाइन दे रही हूं और आज बड़ी मुश्किल से मौका मिला है. इसलिए आपके पास आ गई हूं. पर आप समझते ही नहीं हैं.
यह बोल कर लाली नाराज़ सी हो गई.
मैं सब समझ रहा था.
अब तक मेरा लंड भी फन मारने लगा था.
तब भी मैं अंजान बना रहा.
मैं- अरे तो तू ऐसे नाराज़ क्यों हो रही है? अच्छा तू बता … क्या चाहिए तुझे … पैसे चाहिए क्या?
वह गुस्से से देखते बोली- नहीं, आप दूध पीते बच्चे नहीं हो, जो हर एक बात मैं ही बताऊं.
यह बोल कर वह मेरा हाथ अपने सीने के पास ले जाने लगी और मेरी जांघों पर लेटने सी लगी.
अब स्थिति मेरे आपे से बाहर जाने लगी. मैं भी इतना सीधा नहीं था कि कुछ समझ ही न पाऊं.
मैं फटाक से उठ गया और दरवाजे बंद करने आ गया.
मैंने देखा कि दरवाजे के बाहर उसकी चप्पलें पड़ी थीं. मैंने इधर उधर देखा और उसकी दोनों चप्पलों को उठा कर अन्दर करके दरवाजा लगा लिया.
उसकी चप्पलों से किसी को ये शक हो सकता था कि मेरे अन्दर से बंद कमरे में कोई लड़की है.
कोई बवाल न हो जाए तो मैंने जल्दी से यह सब किया और दरवाज़ा बंद कर दिया.
वापस आकर मैं लाली से लिपट गया और उसे चूमने लगा.
यह तो आप भी जानते हैं कि लड़की खुद से पहल कर रही थी और मैं बंद कमरे में उसके साथ था.
ऐसी स्थिति में बुर चुदने को रेडी हो, तो किसी भी लड़के का मूड बन जाएगा.
बस कोई प्यार और इज्जत से मजा लेता है तो कोई धोखा या पैसा देकर चूत चुदाई कर लेता है.
मुझे भी बुर चाहिए थी लेकिन इज्जत और सम्मान से.
अब हमारे होंठ आपस में कब मिल गए, हमें पता ही नहीं चला.
मुझे जो भी करना था, जल्दी करना था क्योंकि हमारे पास ज्यादा समय नहीं था.
जल्द ही उसको ढूंढते हुए उसकी चाची की दस साल की लड़की कभी भी आ सकती थी.
मैं लाली के होंठों को दस मिनट तक चूसता रहा.
वह भी मेरे लंड के आसपास हाथ घुमाती रही.
मैं उसके बूब्स दबाने लगा जो कि मध्यम आकार के थे.
मुझे उसके दूध दबाने में बड़ा मजा आ रहा था.
यह मेरा पहली बार का मामला था, जब मैंने किसी के मम्मों को ऐसे पकड़ा था.
कुछ देर बाद मैंने उसको अपने आप से अलग किया और गद्दे को बेड से निकाल कर नीचे फर्श पर बिछा दिया.
ऐसा इसलिए किया था कि मेरा बेड चूं चूं करता था और उस पर कबड्डी खेलता, तो ज्यादा आवाज होने लगती.
मैंने उसको नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.
मैं उसके कपड़े उतारने लगा, तो वह शरमा कर मना करने लगी.
पर अब तो मेरे मुँह को खून लग चुका था और मैं उसे छोड़ना भी नहीं चाहता था.
जैसे तैसे करके मैंने उसके कपड़े खोल कर दूर फेंक दिए.
मेरे सामने लाली सिर्फ पैंटी में थी और मैं जांघिया में था.
मेरा जाँघिया आगे से मेरे कामरस से काफी भीग गया था. मैंने ऊपर बनियान पहनी हुई थी.
इस धक्का मुक्की में मेरा तौलिया कब नीचे को सरक गया था, मुझे पता भी नहीं चला.
मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और खींचते हुए चूसने लगा.
साथ ही एक हाथ से मैं उसकी पैंटी के ऊपर से ही बुर को सहलाने लगा.
उसकी बुर काफी गर्म और गीली हो चुकी थी.
मुझे उसकी बुर चाटने का बड़ा मन था पर समय न होने के कारण उसकी पैंटी को खोल कर सूंघा और उसे दूर फेंक दिया.
फिर मैंने उसकी नमकीन बुर पर एक गहरा चुम्बन किया और अपना जांघिया भी उतार दिए.
अब मैंने उसके मुँह के पास अपने लौड़े को ले गया.
मैंने लंड को उसके होंठों के ऊपर रखा, तो वह मेरी इच्छा समझ गई.
उसने मुँह खोल दिया और लंड का चूसन कांड शुरू गया.
उस वक्त मैं सिर्फ एक बनियान में था.
मेरा लंड अपनी पूरी सख्ती पर था और उसके होंठों पर लार टपका रहा था.
वह अपनी जीभ से लंड से टपकने वाले शीरा को चाट कर मेरे रस का स्वाद लेने लगी.
मेरे लंड को देखते ही उसकी आंखें बड़ी हो गई थीं.
फिर वह सामान्य होकर सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसने लगी.
वह सुपारे को अपने होंठों में दबा कर रगड़ रगड़ लंड की मां बहन करने लगी.
उसकी इस हरकत से मैं जल्दी झड़ जाने के डर से हटने लगा.
वह मेरे लंड को पकड़ कर उसे बार बार मुँह में लेने की कोशिश करने लगी.
मैं लंड हटा कर नीचे हो गया और चुदाई की पोजीशन में उसके ऊपर चढ़कर उसके होंठों को चूसने लगा.
उस वक्त मैं अपनी कमर हिला हिला कर अपने सख्त और मोटे लंड को उसकी गर्म गीली बुर पर रगड़ने लगा.
यह उसे भी अच्छा लगने लगा. उसने भी अपनी टांगें खोल दीं और अपनी चूत को लंड से रगड़वाने लगी.
अब हमारे कामरस आपस में मिल कर एक अलग ही लुब्रीकेंट का काम करने लगे थे.
इस क्रिया से मेरे अंडे भी गीले हो गए थे.
वह बोली- अब डाल दो अन्दर … मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा.
मैं बोला- थोड़ा दर्द होगा तो बर्दाश्त कर लेना!
उस समय तक मुझे नहीं पता था कि वह कुंवारी है या नहीं. मुझे इससे मतलब भी नहीं था क्योंकि मुझे पहली बार बुर का स्वाद मिलने जा रहा था.
उसने अपनी मौन स्वीकृति दे दी.
अब मैं भी जल्दी से अपने लौड़े के सुपारे को उसकी गीली चिकनी बुर की फांक में रगड़ने लगा.
उसकी बुर पर थोड़ी झांटें थीं, जबकि मैं अपने लंड को एकदम चिकना करके रखता था.
चिकने लौड़े को हाथ से पकड़ कर वह मेरी तरफ देख रही थी और एक अर्थ भरी मुस्कान देती जा रही थी.
मैंने पूछा- कैसा है?
वह बोली- एकदम चिकना है!
मैंने कहा- और तेरी चूत जंगली है.
वह हंस दी और बोली- कल से साफ मिलेगी.
अब मैंने उसकी बुर पर लंड सैट कर दिया और जैसे ही अन्दर पेलने के हिसाब से दबाया तो कुछ अधिक ही चिकनाई की वजह से लौड़ा फिसल गया.
वह हंसने लगी और बोली- चिकना है ना!
उसकी इस टिप्पणी से मेरी झांटें सुलग गईं.
मैंने फिर से कोशिश की तो इस बार मेरा आधा सुपारा एक गीली तंग सुरंग में फंस सा गया.
अब वह सिसकारी मारने लगी.
कुछ सेकेंड के बाद मैंने फिर से एक झटका मारा तो मेरा पूरा मोटा सुपारा उसकी बुर में घुस गया.
उसके हाथ में हाथ, होंठों पर होंठ रखने की वजह से न वह हिल पा रही थी और न ही आवाज कर सकी.
फिर मैंने उसके पैरों को अपनी गांड पर लपेटवा लिया जिससे लौड़े को घुसने में आसानी हो.
कुछ क्षण बाद मैंने एक और धक्का दिया ही था कि उसकी बुर में मेरा पूरा लौड़ा जड़ तक घुसता चला गया.
यह ऐसे हुआ, जैसे अंजाने में कोई सही काम पूरा हो जाता है.
उसकी झांटें मेरे लंड की जड़ में चुभने लगीं.
उसको तो जो दर्द हुआ सो हुआ और वह भी कुंवारी थी, तभी मुझे ये बात पता चली.
उस वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे लौड़े को किसी ने अपनी मुट्ठी में दबोच रखा हो.
साथ ही ऐसा भी लगा जैसे मेरा सुपारा उसकी बच्चेदानी में घुस गया था.
मेरा भी टांका टूटने से बहुत दर्द होने लगा.
लेकिन मुझे पता था कि ये दर्द मुझे एक न एक दिन होना ही है, तो आज ही सही.
जैसे ही मुझे पता चला कि उसका भी पहली ही बार था. तो यह जान कर मुझे बहुत अच्छा लगा कि कंडोम की यहां कोई जरूरत नहीं थी.
क्योंकि वैसे भी मेरे पास उस समय नहीं था.
जैसे ही उसके होंठ को छोड़कर मैंने उसके चेहरे का भाव देखना चाहा, तो वह चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने वापस से उसके होंठों को अपने होंठों से लॉक कर दिया.
उसकी घुटी सी आवाज निकली- साले मादरचोद फट गई मेरी … आह.
पर उसकी यह गाली भरी आवाज मेरे मुँह में ही दबकर रह गई.
मेरा मन हंस रहा था और यह कहने को आतुर था कि हां साली कुतिया मेरा लंड चिकना है न!
लेकिन मैंने अपना मुँह उसके मुँह से नहीं हटाया.
ये सेक्स कहानी लिखते हुए अभी भी मुझे दो बार मुठ मारनी पड़ी थी.
कुछ देर बाद वह अपनी कमर हिलाने लगी, तो मैं समझ गया कि इसको अब पेलाई चाहिए.
मैं भी फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और धक्कों की गति कब चौथे गियर पर चढ़ गई, मुझे भी पता नहीं चला.
मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी बुर में धक्के पर धक्का लगाने लगा, जिससे गच गच … फच फच … चट चट गप गप … और न जाने कैसी कैसी आवाजें आने लगीं.
यह हमारे मिले-जुले कामरस का कमाल था, जिससे मेरे अंडे और लंड की जड़ सब गीले हो चुके थे.
मेरा गद्दा भी उसके और मेरे टांके के खून से सन गया था.
मुझे अभी भी अहसास हो रहा था कि मेरा कामरस अभी भी निकल निकल कर उसकी बुर में गिर रहा था.
उसकी चूचियां हिल हिल कर अपनी ख़ुशी जाहिर कर रही थीं.
इससे हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
फिर रुक रुक कर लंबे धक्के मार मार कर करीब 20-25 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने को हो गया था.
तब तक वह दो बार झड़ चुकी थी.
उसने मुझे भी बांहों में जकड़ रखा था और उसके पैर अभी भी मेरी कमर से लिपटे हुए थे.
मैंने काफी दिनों से मुठ भी नहीं मारी थी जिससे मेरा काफी रस इकट्ठा हो गया था.
इतनी लंबी चुदाई होने के बाद अब मेरा रुकना असंभव था तो उसकी बुर में जड़ तक लौड़ा ठांस के झड़ने लगा.
उसके बाद 1, 2, 3, 4 … न जाने कितनी लंबी पिचकारियां मेरे लंड से निकल कर उसकी बुर के रास्ते बच्चेदानी में गिरने लगीं.
मैं आंखें बंद करके न जाने कितनी देर तक उसके अन्दर झड़ता रहा.
मेरे साथ वह भी झड़ गई थी.
हम दोनों की सांसें ट्रेन की तरह दौड़ रही थीं.
दोनों अभी भी एक-दूजे की बांहों में चिपके पड़े थे.
कुछ मिनट बाद मैंने उसकी बुर से लौड़े को धीरे धीरे निकाला.
मेरा लंड अभी भी पूरे वेग से खड़ा था.
मैं दूसरा राउंड भी लगाता लेकिन हमारे पास समय बिल्कुल भी नहीं था.
मेरे लौड़े की चमड़ी पूरी खिसक कर नीचे आ गई थी.
मेरी और उसकी जांघों पर काफी खून भी लगा था.
यह नजारा देख वह घबरा गई.
फिर मेरे समझाने पर समझ भी गई.
उसकी बुर की पुत्तियां भी फैल कर सूज गई थीं.
मेरे अंडे भी पूरे गीले हो गए थे और गद्दा भी खून से सना था.
मेरे और उसके मिले हुए रस के कतरे बाहर आने लगे थे.
उसने मेरे रूमाल से सब साफ़ करके रूमाल को अपने पास रख लिया.
मैं भी कुछ नहीं बोला कि शायद वह अपनी पहली चुदाई की निशानी रखना चाहती हो.
उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान थी, जिसे देख मुझे भी सुकून मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या तुम्हें यही चाहिए था?
यह कह कर मैंने आंख मार दी, तो वह मुस्कुरा कर अपने कपड़े पहन कर नीचे चली गई.
अब जब भी उसका मन होता, तो वह मेरे रूम में किसी बहाने से आ जाती या फिर मैं ही इशारे से उसे अपने कमरे में आने की कह देता.
वह आ जाती और मैं उसको जमकर पेलता.
बाद में मैंने उसकी गांड का भी उद्घाटन किया.
अगर वह रंगीन सेक्स कहानी भी आपको जानना हो, तो मुझे मेल करें.
उसके बाद मैंने अपनी इच्छा को पूरा किया. उसकी बुर चाटकर और अपना पूरा लौड़ा और आंड चुसवाकर मजा लिया.
वह लगभग 3 महीने वहां रही और लगभग हर दो तीन दिनों में हमारा काम लगने लगा था.
इससे मेरा लौड़ा और मजबूत और मस्त हो गया था.
उसकी पूरी खाल नीचे आकर पूरा सुपारा खुलने लगा था.
लाली गर्भ से न हो जाए इसलिए उसको बीच बीच में गोली भी देता रहा लेकिन मैंने कभी कंडोम इस्तेमाल नहीं किया.
अब उसकी चूत पूरी तरह से मैंने खोल दिया था.
यह बात किसी को भी पता नहीं चल पाई थी.
पर शायद आंटी समझ गई थीं.
उन्होंने भी कुछ नहीं कहा था तो मैं अब लाली को बिंदास चोदने लगा था.
कुछ समय बाद मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर चला गया.
जब वापस आया तब तक वह भी अपने घर चली गई थी.
मैं बहुत उदास हो गया था.
लाली के बाद आंटी मेरे लौड़े का सहारा कैसे बनी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा.
एक साल बाद मेरी भी एक अच्छी सरकारी नौकरी लग गई और मैं भी वहां से चला आया.
वह लड़की वहां पर फिर से आ गई थी पर अब मैं वहां नहीं था.
मैं पुलिस स्टेशन से बाहर Hindi Sex Stories आया और अपनी मोटर साईकल उठा कर सीधे राहुल के घर आ गया। अभी सवेरे के साढ़े आठ ही बजे थे…हमेशा की तरह राहुल घर पर नहीं था। उसे शायद यह मालूम नहीं था कि आज उसका इस घर में अन्तिम दिन है। घर में सरोज नहीं थी…दिव्या ही मिली।
‘आज तो जल्दी आ गये… क्या हुआ रात को नींद नहीं आई क्या…?’ उसकी चुलबुली हरकत मेरे मन को बहुत अच्छी लगी।
‘दिव्या…बस रात को तो मैं तुम्हारे ही सपने देखता रहा… तुम्हारे जैसी कमसिन और जवान लड़की जिसे मिल जाये…उसकी तो किस्मत ही खुल जाये…’ मेरी बात सुन कर वो और इठलाने लगी।
‘अब अन्दर भी चलो… ‘ मुझे वो धक्का देते हुए बोली…’बोलो अब क्या इरादा है…!’
‘बस एक मीठा सा चुम्मा…’ मैंने शरारत से कहा।
‘है हिम्मत तो ले लो…!’ उसने हंस कर कहा।
‘ऐसे नहीं… पहले अपनी आँखें बंद करो…फिर देखो मेरा कमाल…’
उसने अपनी आँखें बन्द कर ली और अपना गोरा और चिकना चेहरा आगे कर दिया… मैंने उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिये… उसके कांपते होंठो का स्पर्श मुझे रोमांचित कर गया। एकदम नरम होंठ…गुलाब की पंखुड़ियों की तरह… हम दोनों एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे… दोनों ही मदहोश होने लगे। कुछ देर बाद अलग हुए तो दोनों के चेहरे की रंगत बदली हुई थी। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। उसकी आंखों में भी गुलाबी डोरे खिंच चुके थे।
दिव्या ने थोड़ा सा शर्माते हुए और फिर से आँखें बन्द करके कहा,’जो…मेरी छातियों को पकड़ लो…हाय… मसल डालो…’ उसने अपनी छाती आगे को उभार दी, उसके तने हुए उरोज बाहर को उभर आये। मैंने उसकी चूंचियो पर अपना हाथ रख दिया। और हौले हौले से दबाने लगा। उसके मुख से सिसकारी निकलने लगी। वो भी मेरे हाथों पर ज्यादा दबाने के लिये और दबाव डालने लगी।
मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर एक हाथ से उसके उभारों को मसलना शुरू कर दिया और अब मेरी कमर वाला हाथ चूतड़ों के ऊपर आ कर थम गया। मेरे हाथ उसके बोबे और चूतड़ दबा रहे थे और दिव्या अपने जिस्म को मेरे जिस्म से बल खा कर रगड़ रही थी। उसके मुँह से आह… हाय… मां री… जैसी सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने उसे दीवार से सटा कर उसकी चूत को पकड़ कर दबा दी। वो चिहुंक उठी…
‘हाय छोड़ दे जोऽऽऽ… मैं मर गई…’ वो मदहोश सी झूम गई। मैंने उसकी चूत नहीं छोड़ी… स्कर्ट के बाहर से ही उसकी चूत मसलता रहा… उसकी चूत पानी छोड़ रही थी… मेरे हाथ को गीलापन लगने लगा था।
वो मस्ती में झुकने लगी… पर उसने मेरा हाथ नहीं छुड़ाया… ‘क्या कर रहे हो जोऽऽऽ… मुझे मार डालोगे क्या???… अब बस अब…नहीं रहा जा रहा है…’ उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी… बेहाल हुई जा रही थी…
मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और प्यार से उसे बिस्तर पर लेटा दिया। उसकी आँखें बंद थी। मैंने उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया… उसकी पानी छोड़ती हुई गीली चूत सामने थी। गुलाबी रंग… हल्की भूरी भूरी झांटे… चूत के दोनों लब फ़ड़फ़ड़ा रहे थे… मैंने अपनी पैन्ट उतार दी… और अपना मोटा और तन्नाया हुआ लण्ड उसकी पनीली चूत पर रख दिया। चिकनापन इतना था कि रखते ही सुपाड़ा अन्दर घुस पड़ा और छेद में उतर गया।
‘घुसा दे रे… हाय… जरा जोर लगा दे…जो…’ उसकी बैचेनी बढ़ रही थी… पूरा लण्ड लेने को उतावली हो रही थी… मैं उस पर झुक पड़ा… और जोर लगा कर लण्ड अन्दर सरकाने लगा। वो भी अपनी चूत का पूरा जोर लगा रही थी। जब दोनों और बेकरारी बराबर हो तब भला तेजी को कौन रोक सकता था। वो भरपूर जवान… खिलती हुई कली… पूरा जोश… नतीजा ये कि धक्का पर धक्का… गजब की तेजी… चूत का उछाल… लण्ड को सटासट चला रहा था। मैंने उसके बोबे भींच लिये…
‘और जोर से भींचो… मेरे राजा… चोद दो आज मुझे…!’ उसकी वासना बढ़ती जा रही थी… मेरा लण्ड पूरी गहराई तक पहुंच रहा था… उसकी चूत जवान थी…कोई भी लण्ड पूरा ले सकती थी। मेरा लण्ड भी मानो कम लम्बा लग रहा था।
अचानक मेरे चूतड़ पीछे से किसी ने दबा दिये… मैंने देखा तो सरोज थी…चुदाई के जोश में वो कब आई पता ही नहीं चला। उसने मुझे इशारा किया। मैंने समझ गया… मैंने तुरन्त ही दिव्या के बोबे जोर जोर से मसलने और खींचने लगा। उसने भी मेरे चूतड़ दबाना चालू रखा।
‘जो मत करो… मैं झड जाऊंगी… हाऽऽऽय ना करो…’ पर मैंने बेरहमी से दिव्या के बोबे मसलना जारी रखा… और धक्के चूत में गड़ा कर मारने लगा। उसे जबर्दस्त चुदाई चाहिये थी।
‘मैं मर गई… राम रे… चुद गई… मेरी फ़ाड़ डाल जो… हाय मैं गई…’ उसके जिस्म में उबाल आ गया था। उसे नहीं पता था कि उसकी मां उसके पास खड़ी है। मेरी उत्तेजना भी बहुत बढ़ गई थी… पर अब दिव्या का शरीर ऐंठने लग गया था। वो मुझे अपनी ओर जोर से खींचने लगी थी। अचानक उसने पूरी ताकत से मुझे चिपका लिया और उसकी चूत लहरा उठी।
वो झड़ने लगी थी।
सरोज ने दिव्या का जिस्म जोर जोर से सहलाना शुरु कर दिया था। उसकी चूत का कसना और ढीला होना…उसका पानी छोड़ना मुझे बहुत सुहाना लग रहा था। सरोज बराबर उसका जिस्म सहलाये जा रही थी।
‘झड़ जा बेटी… निकाल दे पूरा पानी…’ सरोज उसे प्यार से कह रही थी।
‘मांऽऽऽ… हाय मेरी मां ऽऽऽ… तेरी बेटी तो चुद गई… जो ने तो मेरा दम निकाल दिया…’ दिव्या हांफ़ते हुए बोली। मैंने अपना लण्ड दिव्या की चूत से बाहर निकाल दिया।
‘लेकिन मेरा लण्ड तो देखो ना…अभी तक ये फ़ुफ़कार रहा है… सरोज तुम ही शान्त कर दो…’ मैंने अपनी बात भी कही… दिव्या भी अब बिस्तर से उठ चुकी थी।
‘जो…मम्मी की गाण्ड मार दो… मां की गाण्ड बहुत नरम है…!’ अचानक दिव्या ने मुझे सुझाया।
सरोज ने शरम से अपना मुख छिपा लिया। मैंने सरोज को तुरन्त घोड़ी बना दिया। और साड़ी खींच दी। सरोज की गोरे गोरे चूतड़ों की दोनों फ़ांके सामने आ गई। सरोज ने अपनी दोनों टांगें फ़ैला कर अपने गाण्ड का छेद खोल दिया। फिर मुझसे शर्माते हुए बोली,’हाय… मत करो जो… मैं मर जाऊंगी…’ फिर दिव्या की तरफ़ देखा -‘ दिव्या तू जा ना यहाँ से…’
‘मां, मेरे सामने ही गाण्ड चुदवा लो ना…! मुझे भी तो एक इसका एक्स्पीरीएन्स चाहिये ना…!’
‘चल हट… बेशरम… तेरे सामने चुदूंगी तो शरम नहीं आयेगी?’
‘मैं भी तो आपके सामने चुदी थी ना… जो लग जाओ ना अब…’ दिव्या ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल मां की गाण्ड में लगा दिया… ‘अब चोद दो मां की गाण्ड को…!’
मुझे लगा कि बस स्वर्ग है तो यहीं है… मां बेटी मुझसे इतने उत्साह से चुदवा रही थी…मैं तो सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैंने अपना लण्ड सरोज की गाण्ड के छेद पर लगा दिया और जोर लगाया, छेद में तेल भरा हुआ था मेरा सुपाड़ा फ़क की आवाज करता हुआ छेद में फ़ंस गया।
‘उईऽऽ…मां… हाय रे…घुस गया…!’ सरोज सिसक उठी। दिव्या अपनी मां के बोबे पकड़ कर धीरे धीरे मलने लगी और प्यार करने लगी।
‘जो… मेरी प्यारी मां को तबियत से चोदो… मां को आनन्द से भर दो… देखो ना मां को कितना अच्छा लग रहा है…’ दिव्या मां की ओर प्यार से देख रही थी। सरोज ने अपनी आँखें बन्द कर ली थी।
मैं अब अपना लण्ड जोर लगा कर अन्दर सरकाने लगा। मेरे लण्ड को छोटे से छेद में घुसने के कारण तेज मीठा सा सा मजा आने लगा। पर सरोज ने अपने दांत भींच लिये। उसे हल्का सा दर्द हो रहा था।
दिव्या मां को मजा देने के लिये उसके बोबे मसल रही थी। मेरा लण्ड गाण्ड में पूरा घुस चुका था। सरोज ने मुझे मुड़ कर देखा और आंख मार दी…
‘लण्ड है या लोहा… मेरी तो फ़ाड़ के रख दी… अब मारो ना जोर से गाण्ड को…’
मैंने हरी झण्डी पाते ही स्पीड बढ़ा दी। वो सिसक उठी। मजे में उसकी फिर आँखें बन्द होने लगी।
‘चोद दे मेरी मां को… प्यार से भर दो मां को… मेरी प्यारी मां…’ अब दिव्या सरोज को चूमने लगी थी। बोबे पर तो दिव्या ने कब्जा जमा रखा था। मैंने कमर में हाथ डाल कर उसकी चूत में अपनी अंगुली डाल दी। और डबल चुदाई करने लगा। उसका दाना मसलने लगा। उसे तेज मजा आने लगा।
‘हाय रे छोड़ दे अब रे… लगा…जोर से लगा… मेरी मांऽऽऽ… मार दी रे मेरी…’ सरोज ना जाने क्या क्या कहती रही। उसकी गाण्ड अब मक्खन की तरह चिकनी हो गई थी। लण्ड सटासट चल रहा था। अति उत्तेजना से उसका दाना अचानक ही फ़ड़फ़ड़ा उठा और सरोज झड़ने लगी। ये देख कर कर दिव्या ने भी मां को कस लिया।
मैंने भी झड़ने के चक्कर में स्पीड बढ़ा दी। मेरा सुपाड़ा फ़ूल कर कुप्पा हो रहा था। सहनशीलता सीमाएं पार करती जा रही थी और आखिर अन्तिम पड़ाव आ ही गया। मैंने तुरन्त अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। दिव्या ने देखते ही देखते मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर लिया और कस कर दबा कर मुठ मार दिया। मेरे लण्ड ने पिचकारी लम्बी और दूर तक उछाल दी।
‘हाय मम्मी… देखो तो… माल तो फ़व्वारे की तरह निकल रहा है…’
सरोज ने बिना समय गवांये झट से मेरा लण्ड मुख में भर लिया… अब वीर्य सरोज के मुख में भर रहा था… और वो उसे एक ही घूंट में पी गई। अब वह बचे खुचे वीर्य को भी निचोड़ रही थी… दिव्या अपनी मां की इस हरकत को ध्यान से देख रही थी…
‘मम्मी… ये क्या गन्दापना कर रही हो… इसे भी कोई पीता है क्या?’
मैंने दिव्या को समझाया कि ये तो पौष्टिक होता है और आनन्ददायक होता है… दिव्या ने कपड़े से मां की गाण्ड का तेल पोंछ दिया फिर मेरा लण्ड भी साफ़ कर दिया। सरोज ने दिव्या को गले लगा लिया। और चूमने लगी…
‘देखा जो…माँ को तुमने मस्त कर दिया… मुझे बहुत अच्छा लगा…मेरी प्यारी मांऽऽ…’ कह कर सरोज से अलग हो गई।
मैंने सरोज से बात पलटते हुए कहा- ‘आज राहुल नहीं दिख रहा है…?’
‘वो चारों आज शाम को गांव जा रहे हैं न… देर से आयेगा…’ सुनते ही मैं चौकन्ना हो गया।
‘अब तो वो तुम दोनों को पीटता तो नहीं है ना…’
‘वो जंगली है… कल देखो मुझे कितना मारा… दिव्या के तो बोबे तक नोच डाले… साला मरता भी तो नहीं है…हमारी जिन्दगी नर्क बना रखी है’ कह कर सरोज ने मेरे सीने पर सर रख दिया। दिव्या भी मां की पीठ से चिपक कर रोने लगी। तो सच में वो इतना निर्दयी और क्रूर है।
मैंने उन्हें अलग करते हुए कहा…’मुझे अब चलना चाहिये…शाम को आऊंगा।’ मैं मुड़ कर बाहर आ गया। वो दोनों मुझे प्यार से निहारते रही।
मैं तुरन्त पुलिस स्टेशन गया और अंकल से मिला… उन्हें सब कुछ बताया… कि वो सभी गांव जाने की तैयारी में है।
‘शायद उन्हें भनक लग गई है… चलो…’ उन्होंने जीप तैयार की और सभी सिपाहियो को आज्ञा दी। मैंने अपनी बाईक उठाई और उनके आगे आगे चला। पान-वाले की दुकान पर पहला छापा मारा।
मैंने भाग कर टूसीटर पर बैठे मौन्टी और सुरजीत को जा दबोचा। मौन्टी ने मुझे पीछे धक्का दे दिया और मौके की नजाकत देख कर भागने लगा। मैंने उछल कर एक फ़्लाईंग किक मार कर उसे गिरा दिया।
इतने में दो पुलिस वालों ने उन्हें धर दबोचा। हैप्पी का पीछ करके अंकल ने उसे हथकड़ी पहना दी। पान की दुकान को सील कर दी। जीप वहां से कॉलेज पहुंची। मुझे राहुल पर नजर रखने को कहा और साथ में दो पुलिस वालों को भी हिदायत दी। अंकल प्रिन्सिपल से मिलने ओफ़िस में चले गये। कुछ ही समय में अंकल और प्रिन्सिपल राहुल की क्लास के सामने थे।
राहुल देखते ही समझ गया और खिड़की से कूद कर भागने लगा। पर खिड़की के बाहर मुझे देखते ही उसके होश उड गये। उसे हथकड़ी डाल दी गई। समय पर पूरा अभियान निपट गया। चारों दोस्तों को और पान वाले को हवालात में बंद कर दिया गया। अब चला तलाशी अभियान ।
पुलिस मेरे साथ सबसे पहले राहुल के यहाँ पहुंची। राहुल भी साथ था। दिव्या और सरोज ने मुझे और राहुल को पुलिस के साथ देखा तो घबरा गई।
‘साब इसने कुछ नहीं किया… जो तो अच्छा लड़का है…’ अंकल ने मेरी तरफ़ देखा।
‘क्या बात है जो… बड़ी तरफ़दारी हो रही है… ये लो… अब इसका ध्यान रखना वरना साले की थाने में इसकी टांगें तोड दूंगा…’ अंकल में मेरी तरफ़ गुस्से में देखा और मुझे सरोज की तरफ़ धक्का दे दिया।
‘जी… जी… मैं ध्यान रखूंगी…’ घबराई सी सरोज मेरा हाथ पकड़ कर खड़ी हो गई।
‘साली… हरामजादी… जो के साथ खड़ी है… आने तो दे मुझे… तुम दोनों मां बेटी के हाथ पांव ना तोड़े तो देखना !’
मैंने राहुल के कान में कहा…’तू फ़िकर मत कर यार… मैं तेरी मां और बहन को रोज़ चोदूंगा… मस्त चीज़ें है दोनों…’
‘भड़वे… तेरी तो मैं… ‘ उसी समय अंकल का एक हाथ उसके मुँह पर पड़ा… उसके होंठो से खून छलक पड़ा।
मैंने राहुल की तरफ़ मुस्करा कर देखा… ‘तू क्या समझा था… कामिनी के साथ तूने जो किया था… वो चुपचाप बैठती…’ अब उसकी नजरें ऊपर उठी… वो समझ चुका था… कि ये सब क्यों हुआ है… उसका सर एक बार फिर झुक गया।
‘आगे से अगर ये जो… राहुल के साथ दिखा तो साला जेल जायेगा…’ अंकल अपने डायलोग बोले जा रहे थे। सरोज और दिव्या को अब भी कुछ समझ में नहीं आया। उनकी नजर में बस राहुल एक अपराधी था।
कामिनी का बदला उन दोनों के समझ में नहीं आया था। इतने में पुलिस वाले सारे घर की तलाशी ले कर कुछ समान ले कर आ गये। उसे वहीं पर सील कर दिया और हम तीनों के उस पर हस्ताक्षर करवा लिये।
वो मुझे छोड़ कर आगे तलाशी अभियान में निकल गये। मैं अंकल की अदाओं पर मुसकरा उठा। सरोज और दिव्या मुझसे प्यार करके लिपट कर रोने लगे। मैंने उन्हें समझाया
‘मैं कोई चोर थोड़े ही हूँ… मुझे तो बस इन्होंने यहां से निकलते देखा तो पकड़ लिया… हां राहुल ड्रग्स बेचने के चक्कर में पकड़ा गया है जाने कितने सालों के लिये अन्दर जायेगा।
उन दोनों ने राहुल से पीछा छूटने पर चैन की सांस ली… उनकी नजर में मैं पुलिस से बच गया और मुझे प्यार से बिस्तर पर सुला दिया। दोनों एक एक करके मुझे प्यार करने लगी… अचानक मुझे कामिनी का ख्याल आया।
‘मैं शाम को आऊंगा… रात भर मजे करेंगे… बाय…’ मैं सीधा वहां से कामिनी के पास आया। उसे सारी बात बताई… कामिनी खुश थी… उसने मुझे प्यार से चूम लिया…
‘बात कहां तक पहुंची… कार्यक्रम चालू है…?’ कामिनी और नेहा ने मुस्करा कर पूछा्।
‘दोनों ही बहुत सेक्सी है… खूब मजा आता है और अब तो दोनों ही मेरी फ़ेन है… क्यों जल गई ना…’ मैंने शरारत की नजरो से देखा।
दोनों ने मुझे पकड़ लिया और मेरी पिटाई शुरू कर दी… Hindi Sex Stories
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