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Massage Girl in Amritsar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Amritsar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Amritsar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Amritsar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Amritsar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Amritsar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Amritsar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Amritsar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Amritsar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Amritsar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Amritsar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Amritsar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi Sex Stories

जमशेदपुर की Hindi Sex Stories स्वर्णलता लिखती है कि अन्तर्वासना की कहानियाँ बहुत रोचक होती हैं। पढ़ने के बाद दिल में कुछ कुछ होने लगता है।
आज वो 40 वर्ष की अधेड़ महिला है और अपने पति की मृत्यु के उपरान्त उसी कार्यालय में कार्य करती है।

उसकी यह कहानी उस समय की है जब वह 26 वर्ष की थी। उनके पास उस समय एक 9 माह की लड़की भी थी। उसके पति सरकारी दफ़्तर में ड्राईवर थे, जो अक्सर अपने बड़े साहब के साथ अधिकतर यात्रा पर ही रहते थे।

स्वर्णलता के शब्दों में :

हम पति पत्नी एक कस्बे में बड़े से मकान में किराये पर रहते थे। हम उस बड़े मकान की रखवाली भी करते थे। हमारी माली हालत भी अच्छी नहीं थी। किसी तरह से दिन गुजर रहे थे। मेरे पति राधेश्याम बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति थे।
सेक्स में उनकी अधिक रुचि नहीं थी।

उन्हीं दिनों ऑफ़िस में एक नये अधिकारी का पदस्थापन हुआ था। वे बड़े साहब के सहायक थे। उनका नाम अनिल था।

नई भर्ती से आये थे, बहुत चुस्त, फ़ुर्तीले, मधुर स्वभाव के थे वो। उस समय लम्बे बालो का फ़ेशन था, उनके हल्के उड़ते हुये रेशमी बाल मुझे बहुत अच्छे लगते थे। अनिल को मेरे पति ने अपने बड़े मकान में एक हिस्सा दे दिया था।

अनिल बहुत हंसमुख स्वभाव के थे। मुझसे वो बहुत इज्जत से पेश आते थे। एक मन की बात कहूँ ! आप पाठकगण शायद हंसेंगे?

हम जैसी महिलाओं में अधिकतर यह दिली चाह होती है कि हमारा पति भी एक ऑफ़ीसर जैसा हो, उसका रुतबा हो ! और उसी स्वप्न में हम उसी स्टेण्डर्ड से रहने भी लग जाती हैं, अच्छे कपड़े पहनना, मंहगी वस्तुएँ खरीदना, और हां फिर उसे सभी को बताना। ये सभी कमियां मुझ में भी थी।

अनिल को हमारे साथ रहते हुये तीन चार माह बीत चुके थे। मैं उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होने देती थी, उन्हें खाना, चाय नाश्ता वगैरह उनकी पसन्द का ही देती थी, बदले में वो हमें जरूरत से अधिक पैसा देते थे। मैं अनिल के साथ बहुत घुलमिल गई थी। वो मेरे पति से अधिक बात नहीं करते थे, क्योकि शायद वो उनके भी ड्राईवर थे।
घटना की यूँ शुरूआत हुई …

एक शाम को हमारा एक पुरानी फ़िल्म देखने का कार्यक्रम बना। मुझे याद है वो दिलीप कुमार की पुरानी फिल्म देवदास थी।

किसी कारणवश मेरे पति को बड़े साहब के साथ यात्रा पर जाना पड़ा। मैं मन मसोस कर रह गई।

ऐसे में अनिल ने कहा कि वो मुझे फ़िल्म दिखा लायेगा।
शाम को 5 बजे के शो में हम दोनों चले गये।
मैनेजर ने अनिल को स्पेशल क्लास में बैठाया… मुझे भी बड़ा गर्व सा हुआ कि मैं किसी बड़े अधिकारी के साथ फ़िल्म देखने आई हूँ।
मैनेजर ने अपने नौकर से हमारी सेवा करने का आदेश दे दिया था, वो बीच में आ कर हमे कोल्ड ड्रिंक आदि दे जाता था।

फ़िल्म चल रही थी। मुझे अचानक अहसास हुआ कि अनिल ने जैसे मुझे छुआ था।

मुझे लगा कि यह सम्भव ही नहीं है। तभी दुबारा उसका हाथ मेरे हाथों से धीरे से टकराया।

मुझे झुरझुरी सी हुई, मैंने तिरछी आंखो से उन्हें देखा।

वो भी मुझे चुपके चुपके देख रहे थे।

मुझे लगा कि शायद वे मेरे अकेलेपन का फ़ायदा उठा रहे हैं।

मर्दों की एक फ़ितरत यह भी होती है कि एक बार कोशिश तो कर लो, क्या पता लड़की पट जाये… नहीं तो कुछ समय के लिये नाराज हो जायेगी और क्या?

नहीं… नहीं… ऐसा नहीं हो सकता… मेरे जैसी छोटे तबके वाली लड़की के साथ तो कभी नहीं… फिर ऐसा क्यूँ?

क्या मेरे रूप लावण्य के कारण, या मेरी सेक्स अपील के कारण।
फिर वो कुंवारा भी तो था … शायद जवानी के जोश में …

मुझे सावधान रहना था कि कहीं मुझसे कोई भूल ना हो जाये। पर फिर एक बार और उसकी अंगुलियों का स्पर्श मेरे हथेली पर हुआ … मैं तो जैसे जड़ सी हो गई …

मुझसे अपना हाथ हिलाने की शक्ति भी जैसे जवाब दे गई। मुझे यह मालूम हो गया था कि अनिल ये सब जानबूझ कर कर रहा है। मेरे चेहरे पर पसीना आ गया था।

वो मुझसे क्या चाहता है … क्या मालूम?

उसने जब मेरा विरोध नहीं देखा तो उसकी हिम्मत बढ़ गई।

उसकी अंगुलियां मेरी हथेली पर दबाव डालने लगी। मुझे जैसे लकवा मार गया था। मैं चाह कर भी अपना हाथ नहीं खींच पा रही थी।

अचानक उसका हाथ मेरे हाथों पर आकर ठहर गया और मेरे अंगुलियों को पकड़ने लगा।

मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा… मेरी जिन्दगी में किसी पहले पराये मर्द का स्पर्श मेरे मन में बेचैनी पैदा कर रहा था।

अब उसका हाथ मेरे हाथों को दबाने और सहलाने में लगा था।

मैंने हिम्मत बांधी और अपना हाथ खींच लिया।
मैं अपने पल्लू से माथे का पसीना पोंछने लगी।
उसका हाथ एक बार फिर मेरी जांघों से स्पर्श करने लगा।
मेरे तन में जैसे बिजलियाँ तड़क उठी। मैं कांप सी गई।

शायद मेरी ये कंपकंपी उसने भी महसूस की।
मुझे सामान्य महसूस कराने के लिये वो मेरे से बातें करने लगा।

उसका हाथ ज्योंही मेरे जांघो को सहलाने लगा, मुझे घबराहट होने लगी थी।

तभी मेरी बच्ची की नींद खुल गई। मैंने उसे जल्दी से अपनी गोदी में लिया।

उधर अनिल भी बेचैन सा होने लगा। कुछ ही देर में बच्ची फिर से सो गई। पर जाने क्यूँ अब मेरा दिल भी बेचैन सा होने लगा था।
मुझे अनिल के हाथों मे जादू सा लगा। मैंने सोच लिया था कि इस बार उसका हाथ मैं थाम लूंगी … और उसे भी अपनी दिलचस्पी दिखाऊंगी।

उसके बढ़ते हाथों का इस बार मैंने स्वागत किया और उसकी अंगुलियां मेरे हाथों में खेलते समय मैंने उन्हें थाम लिया।

मैंने अपनी मौन स्वीकृति दे दी थी। उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी सीट पर ले लिया था और उसे सहला रहा था।
एक बार तो उसने चूम भी लिया था।

मैंने धीरे से उसके कंधे पर अपना सर रख दिया। उसने अपना एक हाथ मेरे गले से लिपटा कर अपनी ओर मुझे खींच लिया।

आह… कितना प्यारा माहौल था … मुझे लगा कि जैसे मैं उसे प्यार करने लगी हूँ।
उसके होंठों ने मेरे गाल चूम लिये।
मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखें खोल कर उसे आसक्ति से निहारा।

उसका चेहरा मेरे होंठों की तरफ़ बढ़ने लगा। मेरे कोमल पत्तियों जैसे अधर कंपकंपा उठे … थरथरा उठे… और एक दूसरे से चिपक गये।

जाने कितनी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को चूमते रहे … फिर एक दूसरे को प्यार से निहारते हुये अलग हो गये। सारी फ़िल्म में यही सब कुछ चलता रहा।

रात को नौ बजे फ़िल्म समाप्त हुई तो हम घर लौट आये। रास्ते भर मेरी नजरें शर्म से झुकी रही। अनिल तो बहुत खुश लग रहा था पर फिर भी चुप था। रास्ते भर कोई बात नहीं हुई।

रात का भोजन करने के बाद हम दोनों छत पर आ गये थे।

मैं अपनी साड़ी उतार कर मात्र पेटीकोट में थी, ब्रा भी हटा दी थी।

बच्ची सो चुकी थी। वो चांदनी रात में सफ़ेद पजामे में बड़ा ही मोहक लग रहा था।

काफ़ी देर तक तो हम चुपचाप खड़े रहे …

उसी ने चुप्पी तोड़ी- फ़िल्म कैसी लगी…?

‘जी फ़िल्म में तो जी ही नहीं लगा… मेरा ध्यान उधर नहीं था।’ मैंने अपनी सच्चाई बयान कर दी थी।

‘सच कहती हो, मन तो मेरा भी कही ओर था…’ वो हंस कर बोला।

‘हॉल में कोई देख लेता तो…’

‘कौन देखता भला, इतनी पुरानी फ़िल्म कोई नहीं देखता है… एक बात कहूँ?’

मैं एकदम घबरा सी गई। मुझे मालूम था कि वो कहने वाला है।

‘जी… जी… कहिये?’

‘मुझे नहीं कहना चाहिये लेकिन दिल से मजबूर हूँ… आप मुझे … ओह कैसे कहूँ !’

मैं शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी। मेरा दिल जैसे उछल कर गले में आ गया था।

‘जी … क्या कहना है?’

मैंने अपना मुख पीछे कर लिया। वो मेरे पीछे आ गये और मेरे कंधों पर हाथ रख दिया।

‘आ…आ… आप बहुत अच्छी हैं !’ उसकी आवाज में कम्पन था।

‘जी… जी…’ मैं हकला सी गई।

‘सोना, मैं आपसे… उफ़्फ़ कैसे कहूं !’

मैंने पलट कर अनिल को प्रेम से देखा और कहा- जी… आप क्या कहना चाहते है… कहिये ना … मैं इन्तज़ार कर रही हूँ।’

‘बस एक बार जैसे हॉल में किया था वैसे…’

‘क्या … कहिये ना…’

उसने असंमजस में मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया।
मैं थोड़ा सा कुलबुलाई और उसे दूर हटा दिया।

‘ये क्या कर रहे है आप…’ मैं शर्म से फिर से पानी पानी होने लगी थी।
मेरा मन उनकी बाहों में समाने को करने लगा था।
मैंने अपना दिल मजबूत कर लिया कि अगली बार उसने कुछ किया तो मैं स्वयं ही उससे लिपट जाऊंगी।

‘वही जो हॉल में किया था… बस एक बार !’ उसने फिर से मुझे अपनी बाहों में खींच लिया।
दिल तो पागल है ना… मचल उठा।

कैसे रोकूँ अपने आप को… मैं अपने दिल से बेबस हो गई।
मैं उसकी बाहों में झूल गई।
उसका मुख मेरे चेहरे के करीब आ गया।
मैंने अपनी आंखें बन्द कर ली। दोनों के तड़पते हुये अधर मिल गये।
मेरा शरीर विचित्र सी आग में जल उठा।

उसके हाथ मेरी पीठ पर गड़ गये और यहां-वहां दबाने लगे।
मेरे हाथ भी उसकी बनियान को जैसे हटा देना चाहते थे।

उसका बलिष्ठ शरीर दबाने में मुझे बहुत आनन्द आ रहा था।

तभी… हाय रे … ये क्या … उसका कड़क लण्ड मेरी योनि द्वार के समीप टकराने लगा। मुझे नीचे एक बहुत ही दिल को भाने वाली गुदगुदी सी हुई। वो मेरी चूत पर गड़ता ही गया…
मुझे लगा … कही ये मेरे शरीर में प्रवेश ना जाये।

‘अनिल … बस करो…’

‘एक बात कहूं … मानोगी?’

‘एक क्या, सौ बात कहो… सब मानूंगी !’ मैंने शर्माते हुये कहा।

‘हॉल में मैं कुछ करना चाहता था… पर नहीं कर पाया … प्लीज करने दो !’

‘क्या … बोलो ना !’

‘बस आप चुप हो जायें … मुझे करने दो।’

उसने मुझे दीवार से सटा दिया और धीरे से मेरे उन्नत उरोजों पर अपना हाथ रख दिया।

मेरा जिस्म कांप गया।

उसके हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही चूचियों को दबाने लगे। बटन एक के बाद एक खुलते गये।

उसने हाथ उरोजों पर गोल गोल घूमते रहे, सहलाते रहे, दबाते रहे … मेरी चूत में से ये सब बहुत तेजी से असर कर रहा था।
उसमें से प्रेम रस की बूंदें चू पड़ी थी।
चूत में गुदगुदी भरी मिठास तेज होने लगी थी।

मैं निश्चल सी बुत बनी हुई खड़ी रही।
उसका पजामा बाहर की ओर तम्बू सा तन गया।

मैं उससे लिपट पड़ी। मेरा हाथ अनजाने में ही उसके लण्ड की ओर बढ़ गया। आह … मेरे ईश्वर … कैसा लोहे जैसा कड़ा, जाने घुसने पर क्या कर डालेगा?

लण्ड दबते ही अनिल के मुख से आह निकल पड़ी।

‘सोना, कैसा लग रहा है ना … मुझे तो बहुत आनन्द आ रहा है।’

‘हाय रे … तुम कितने अच्छे हो अनिल … ‘

‘सोना, बस कुछ मत कहो … मुझे तो जैसे स्वर्ग मिल गया है।’

उसने मेरे चूतड़ों पर हाथ फ़िराना चालू कर दिया, मेरे पीछे के उभारों को दबाने लगा, मेरे चूतड़ों के बीच की दरार में अपनी अंगुली घुसाने लगा।
उसके चूतड़ों को इस तरह से दबाने से मुझे बहुत आनन्द आने लगा।
मेरे चूतड़ को वो हाथ से पकड़ता और ऊपर नीचे हिला डालता था।

मुझे जिंदगी में मेरे पति ने कभी ऐसा कभी नहीं किया था।
वो अपना लण्ड भी मेरे गाण्ड में गड़ा देता था। उसके लण्ड के दबाव से मेरी खूत में खुजली उठने लग जाती थी।

‘सोना, देखो रात का समां है … कोई देखने, सुनने वाला नहीं है … प्लीज एक बार मेरा लण्ड थाम लो … प्लीज, मुझे बहुत आनन्द आयेगा !’

उसने अलग होते हुये अपने पजामे में से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।

हाय रे … ये क्या … इतना सुन्दर … मैं उससे फिर लिपट गई और हाथ नीचे बढ़ा कर उसे थाम लिया।

उफ़्फ़्फ़ ! कितना गरम, कितना नरम और ये सुपाड़ा !!! मेरी जान ले लेगा … मैंने छत की पेरापिट की दीवार पर उसे टिका कर लण्ड को हाथ में लेकर उसकी चमड़ी डण्डे के ऊपर उघाड़ दी।
चांदनी रात में उसका सुपाड़ा चमक उठा।

मैंने उसे अपनी मुठ में भर लिया और धीरे धीरे उसका हस्त मैथुन करने लगी।

वो मस्ती में तड़प उठा। उसकी दोनों हाथों की मुठ्ठियां भिंच गई।

मैं उसके सामने खड़ी बड़े जोश से लण्ड मल रही थी। उसकी तड़प मेरे दिल को छू रही थी। उसके चूतड़ भी मुठ मारने से हिल हिल कर मेरा साथ दे रहे थे।

‘सोना … मार देगी रे तू तो आज…’

‘ये तो हम हॉल में नहीं कर सकते थे ना … वही तो कर रही हूँ… कैसा मजा आ रहा है … है ना?’ मेरे मुख से उसी की भाषा निकल पड़ी।

शेष कहानी दूसरे भाग में ! Hindi Sex Stories

मॅाम फक कहानी में मैंने ट्रेन में अपने पापा की दूसरी बीवी को चोदा, कई बार चोदा. फर्स्ट क्लास के केबिन में 4 लोग थे, दूसरा कपल भी चुदाई में लगा था. दोस्तो, मेरा नाम विकी है. हम लोग पुराने पैसे वाले रईस हैं. पापा स्कूल में प्रिंसिपल हैं. मेरे पापा ने दो शादियाँ की थी. दोनों पत्नियों को एक साथ ही रखा हुआ था. कुछ साल पहले मेरी जन्मदात्री इस दुनिया से चली गयी थी. अब मेरी दूसरी माँ ही है. मैं अपनी सौतेली मां के बारे में बता दूं. मां का नाम निर्मला है. वह पेशे से हाउसवाइफ हैं और घर में ही रहती हैं. यह मॅाम फक कहानी तब की है जब हम शहर से हमारे गांव भागलपुर के पास जा रहे थे. हमारी फर्स्ट एसी की टिकटें थीं और एक ही कंपार्टमेंट में थीं जहां एक रूम होता है और 4 सीटें होती हैं. मां की नीचे वाली सीट थी और मेरी उनके सामने वाली ऊपर की सीट थी. करीब दो घंटा बाद हमारे कम्पार्टमेंट में एक कपल आया. शायद उनकी नई नई शादी हुई थी. पूछने पर पता चला वह बीवी को मायके से लेने आया था. अब वे दोनों अपने घर जा रहे थे. अब दोनों की सेक्सी हरकतें चालू हो चुकी थीं. उनका एक दूसरे से सेक्सी बातें करना और बात बात में एक दूसरे को टच करना चल रहा था. मां यह सब देखकर शर्मा रही थीं. शायद उनको अपने दिनों की याद आ रही थी. मैंने मां को होंठ चबाते हुए देखा और जब किसी की नजर नहीं थी, तो मां ने साड़ी सैट करने के बहाने अपनी चूत भी खुजाई थी. उस वक्त मैं उन्हें देख रहा था. जैसे ही उन्होंने मेरी तरफ़ देखा, मैं यहां वहां देखने लगा. अब मुझे उनकी हरकतें मां के ऊपर लगे हुए शीशे में साफ दिख रही थीं. तभी मुझे उस सामने वाली औरत के पति ने देख लिया कि मैं उन दोनों को प्यार की हरकतें करता देख रहा हूँ. उस आदमी ने मुझे इशारा कर बाहर आने को कहा. मैं आ गया और वह भी पीछे आ गया. उसने कहा- भाई, मेरी नई नई शादी हुई है. तुम लोग ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा? मैंने सॉरी कहा. तो उसने कहा- कोई बात नहीं. अरे मुझसे कंट्रोल ही नहीं हो रहा है. तुम्हारा भी क्या दोष है … और सामने जो औरत बैठी है, मेरी पत्नी उसे समझा रही है. तू समझ गया तो मेरा एक काम करेगा. तू उनके साथ बैठ जा. उनको कंपनी दे दे. हम यहां लाइट बंद करके आते हैं. मेरा स्टेशन आने को अभी 5-6 घंटे हैं. उसके बाद मुझे घर पर ऐसा मौका 4-5 दिन नहीं मिलेगा. भाई मान जा. क्या पता अगर उस आंटी ने तुझे चांस दे दिया, तो कुछ भी हो सकता है. मजे ले ले! मैंने उससे कहा- ठीक है. कुछ देर बाद हम अन्दर आए तो मैं ऊपर न जाकर मां के बगल में ही बैठ गया. मां ने कहा- उनको प्राईवेसी चाहिए, तू यहीं मेरे साथ बैठ जा. फिर उन्होंने पूछा कि लाइट बंद कर दें? मैंने कहा- हां कर दो. उसके बाद अंधेरे में मैं और मां एक दूसरे से सट कर बैठे थे. अब हमें कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था पर उनकी हरकतों की आवाजें आ रही थी. उनकी चूमने की आवाज और उस लड़की का मादक भाव से सिसकना सुनकर मेरा लंड तन गया था. मेरा हाथ मां की तरफ था. मुझे लग रहा था कि मां अपने मम्मों से मेरी कोहनी पर दबाव डाल रही हैं. इतने में मां का फोन आया तो लाइट जली. हम दोनों ने देखा कि वह औरत ऊपर से नंगी हो चुकी थी और वह आदमी उसकी गोदी में बैठा, उसके मम्मे चूस रहा था. मां ने हड़बड़ा कर फोन कट किया और फोन ब्लाउज में डाल लिया. जैसे ही हाथ नीचे किया, तो मेरी जांघों पर लंड के करीब हाथ रख दिया. मैं कुछ नहीं बोला. फिर ना जाने क्यों … मां ने हाथ सरका कर लंड पर रखा और मेरे खड़े हुए लंड को महसूस करने लगीं. मां मेरे लंड को भांप रही थीं. उन्होंने लंड को पकड़ने की कोशिश की. शायद उन्हें पता चला होगा कि यह मेरा लंड है, तो उन्होंने झट से हाथ हटा लिया. अब मेरा पारा चढ़ गया था, मैंने हाथ पीछे लेकर मां की कमर पर रखा और वहां से हाथ निकाल कर मां के पेट को मसलने लगा. मां फुसफुसा कर बोलीं- बेटा यह क्या कर रहा है! मैंने पूछा- क्या? मां कुछ नहीं बोलीं. अंधेरे में मां ने वापस मेरे लौड़े पर हाथ रखा. इस बार उन्होंने उठाया नहीं. मुझे ऐसा लगा जैसे वे इशारा दे रही थीं कि चलो हम भी कुछ करते हैं. मैंने अपना एक हाथ मां के मम्मों पर रखा और मसलने लगा. मां मेरे कान में धीरे से बोलीं- बेटा, यह गलत है. मैंने मां के कान में कहा- छोड़ो ना मां … किसे पता चलेगा. प्लीज मां करने दो ना! बस एक बार, मैं इसके बाद ना मांगूंगा और ना किसी से कुछ कहूंगा. मैं ऐसे कहते कहते मां के कान और उनकी गर्दन को चूमने लगा. उनकी सांसें धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थीं. माहौल में गर्मी बढ़ रही थी. मैं मां का ब्लाउज खोलने लगा. मां ने मेरा हाथ पकड़ा मगर मैंने ब्लाउज के सारे हुक एक एक करके खोल दिए. मां का ब्लाउज खुल चुका था और मां का हाथ अभी भी मेरे हाथ पर ही था. मैं समझ गया था कि मां गर्म है और यही मौका है उनकी चूत पर लौड़ा मारने का. अब मैं मां की साड़ी को ऊपर खींचने लगा. मां ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन इस बार उन्होंने रोका नहीं. मैंने साड़ी ऊपर की और मां की जांघों पर हाथ फेरने लगा. मां की सांसें तेज़ चल रही थीं. ‘हम्मम हम्म सों सों …’ की आवाजें आ रही थीं. मैं चूत पर गया और चड्डी के ऊपर हाथ फेरने लगा. चड्डी गीली सी लगी इसलिए मैंने अन्दर हाथ डाला. शायद मां ने 2-3 दिन पहले ही चूत साफ की थी. उनके छोटे छोटे बाल आए हुए थे. उनकी चूत पर हाथ फेरने का क्या मीठा अहसास था. मुझे उनकी चूत के होंठ समझ नहीं आ रहे थे. यह मेरा पहली बार था, जब मैं किसी की चूत को टच कर रहा था. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर घुसाया और मेरी उंगली पकड़ कर चूत के छेद के अन्दर डाल दी. फिर गांड उठा कर इशारा दिया कि अन्दर बाहर करो. मैंने चूत से हाथ निकाला और खुद से दो उंगलियां डाल कर अन्दर बाहर करने लगा. तब तक सामने वाली सीट पर चुदाई चालू हो चुकी थी. पच फच धक्कों की आवाजें आ रही थीं. मैं उठा और अपनी पैंट निकाल कर नंगा हो गया. फिर मां के पास बैठ कर उनकी चड्डी निकालने के लिए हाथ लगाने लगा. पर मां पहले ही चड्डी निकाल टांगें फैला लेटी हुई थीं. मैं मां के ऊपर लेट गया. मां ने मेरा लंड पकड़ चूत पर सैट किया और धक्का देने को बोलीं- पेल दे! जैसे ही मेरा हैवी लंड चूत के अन्दर गया, मां की चीख निकल गई- उई मर गई आह आराम से कर ना! मेरे कुछ ही धक्कों में मां सामान्य हो गईं. मेरा लंड आसानी से अन्दर आ जा रहा था. अब हम भी फच फच की आवाज़ें करने लगे. मां गांड उठा उठा कर चुदवा रही थीं. अब मैंने मां के मम्मे चूसने को हाथ ऊपर किए, तो वे नंगे थे. मां ने ब्रा पहले से ही ऊपर कर ली थी. मैं बुरी तरह से मम्मे चूसने लगा और काट भी रहा था. मां कह रही थीं- आह काट मत बेटा … बस चूस कर मजा ले और ऐसे ही धक्के देता रह … बड़ा अच्छा लग रहा है. मैं धक्के देते देते हुए ही मां की चूत के अन्दर झड़ गया. मां भी झड़ गई थीं. उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और अपनी झड़ी हुई चूत को रगड़ने लगीं. हम दोनों ने अपने आपको संभाला. मैंने मां की चड्डी अपनी जेब में छुपा ली. थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे. फिर एक स्टेशन आया तो खिड़कियां खटखटाई जाने लगीं- चाय चाय. सामने की सीट वाले उस आदमी ने बाहर जाकर चाय ली. मेरी मम्मी ने भी मुझसे चाय मँगवा ली. वह आदमी मुझे देख कर हंस रहा था. उसने मुझे इशारा किया. हम दोनों पानी लेने के बहाने बाहर गए. बाहर आकर वह मुझसे बोला- भाई सही खेल गया तू तो … क्या गजब माल बजाया है. वैसे एक बात बोलूं यह मेरी बीवी नहीं है, मेरी बहन है. मैं शॉक्ड हो गया. मैंने कहा- चल झूठे … ऐसा भी कहीं होता है? “क्यों नहीं होता. आज तूने क्या किया. तुझे क्या लगा कि मुझे पता नहीं चलेगा कि जिसको तूने चोदा है, वह तेरी कौन है? मैंने बाहर लगे चार्ट पर तुम्हारे नाम पढ़े थे! तू मॅाम फक कर रहा था.” अब मेरी बोलती बंद हो गई. मैं उदास हो गया और सोचने लगा कि यह मुझसे क्या हो गया! वह बोला- भाई टैंशन क्यों लेता है, साले मजे ले इतना बड़ा कांड किया है तूने! हर फैमिली में ऐसे ही होता है, बस कोई बताता नहीं है. अब मुझे ही देख ले अपनी बहन को बीवी की तरह चोदता हूँ. कुछ रुक कर वह फिर से बोला- हमारे पास तो अभी मौका है. हम लोग तो यहां से जाने से पहले एक और शॉट मारने वाले हैं. अब तक मेरी बहन ने तेरी मां का दिमाग सैट कर दिया होगा. अब तुझे जब चाहे चूत मिलेगी, नहीं भी मिली तो अब भी मौका है. जो चाहे वह कर ले. अब हम दोनों ट्रेन में चढ़ गए. मेरी मां और उस लड़की की बातों से लग नहीं रहा था कि उनका कोई डिस्कशन हुआ था. उन दोनों में हंसी मजाक चल रहा था. फिर टीसी टिकट चैक करने आया. अब उस आदमी ने बोला- लाइट बंद कर दूँ … कोई दिक्कत तो नहीं है आपको! मैं हंस कर बोला- हां जी जरूर जरूर. मैं ऊपर वाली बर्थ पर जाने लगा तो मां बोलीं- बेटा कहां जा रहा है, यहीं मेरी बगल में सो जा! अब मैं बाहर की तरफ सो रहा था और मां अन्दर की तरफ सीट पर. जगह कम पड़ रही थी, इसलिए हम दोनों चिपक कर सो रहे थे. वे दोनों पुनः शुरू हो चुके थे. उसकी बहन की चूड़ियों की आवाज गूंज रही थी व उसकी खिलखिलाने की आवाज आ रही थी. मैं सोच रहा था कि अब क्या होगा. क्या मैं आगे फिर से कुछ करूँ. तभी मां की हरकतें शुरू हो गईं. मां अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं. मैं फिर से सेक्स नहीं करना चाहता था लेकिन इस बार मां सामने से मौका दे रही थीं. मेरा हाथ पकड़ मां ने अपने पेट पर घुमाते हुए नीचे को किया और अपनी चूत पर रख लिया. मां ने अपनी साड़ी ऊपर कर ली थी और एक हाथ से मेरी पैंट नीचे करने की कोशिश कर रही थीं. मैंने उठकर अपनी पैंट उतारी और मां ने मेरा लंड पकड़ लिया. वे लंड हिला हिला कर उसे टाइट कर रही थीं. मां मूड में आ गई थीं. अब मां मेरी तरफ मुँह कर मेरे ऊपर आना चाह रही थीं. मैंने मां को अपने ऊपर खींच लिया. मां ने अपना ब्लाउज के बटन खोल दिए; ब्रा तो पहले ही ढीली थी. ऊपर से मां नंगी हो गई थीं और अपने दूध मेरे मुँह में दे रही थीं. कुछ देर बाद मां ने मेरी भी शर्ट के बटन खोल दिए. मैंने भी जोश मैं मां की साड़ी उतार दी. मैं मां के नीचे था और वे मेरे ऊपर थीं. मां मुझे अपने दूध चुसवा रही थीं और मेरे लंड को मां अपनी चूत में लेकर खुद ऊपर नीचे करने लगी थीं. मैं नीचे से धक्के दे रहा था. ऐसे ही चुदाई होती रही. काफी देर बाद हम दोनों झड़ गए. मां मेरे ऊपर नंगी ही सोई रहीं. हमें जो कंबल मिला था, उसमें ही हम दोनों सोए रहे. सुबह अचानक उन दोनों ने हमें जगाया. उनका स्टेशन आ गया था. हमने उन्हें विदा करके कुंडी लगाई. अब हम दोनों ऐसे ही नंगे बैठे थे. मैंने पहली बार मां का नंगा गोरा बदन देखा था. मां मुझसे चिपक कर सोई थीं. हम एक दूसरे को देख रहे थे. मां ने मुझसे कहा- विकी बेटा देख, जो ट्रेन में हुआ, वह किसी को पता नहीं चलना चाहिए … और यह सब यहीं पर खत्म हुआ मान लेना. ट्रेन से उतरने के बाद गलती से भी नहीं होगा. ना ही मेरी तरफ से, ना ही तेरी तरफ से … ओके! मैंने मां से ओके कहा और उनके दूध चूसने लगा. मां मेरे बालों में हाथ डाल सहलाने लगीं मेरी एक जांघ मां की जांघों के बीच गई तो मुझे चूत की गर्मी महसूस हुई. मैं मां की चूत में लौड़ा घिसने लगा. मां कुछ नहीं बोलीं. मैंने मां से कहा- मां, अभी ट्रेन से उतरने में दो घंटा बाकी हैं. क्यों ना एक आखिरी बार और हो जाए. मां हंस दीं और बोलीं- बदमाश मुझे पता था कि तू इतने में नहीं मानेगा. अब हम दोनों ने किस करना चालू किया. मैं मां को चूमे जा रहा था और चूसे जा रहा था. यह मॅाम फक का आखिरी मौका था. मां मेरा लंड हिला रही थीं. मैंने मां से लंड चूसने को कहा. मां खड़ी हुईं और मेरा लंड चूसने लगीं. आह बड़ा मजा आ रहा था. मैंने मां को सीट पर बिठाया और उनके पैर फैला कर चूत चाटने लगा. अब मैं मां को अपनी गोद में बिठा कर चोद रहा था. फिर मैं मां को खिड़की के पास डॉगी स्टाइल में चोदने लगा. मां खिड़की की सलाखों को पकड़ कर गांड उछाल उछाल कर लंड अन्दर ले रही थीं. मस्त माहौल था. मां का ऐसा जंगली रूप रात को भी नहीं था. मैं मां को खड़ा करके और झुका कर पीछे से चोद रहा था. मैंने मां को नीचे बिठाया और उन पर अपने माल की बरसात कर दी और मां का सारा बदन अपने माल से भर दिया. हम दोनों हांफते हांफते एक दूसरे के ऊपर सो गए. अब मुझे मां को और चोदना था लेकिन मां जुबान की पक्की थी. वे मुझे ट्रेन के बाहर कभी चोदने नहीं देतीं. तो कैसे मैंने मां को पटाया और अगली चुदाई कब की. यह सब मैं अगली कहानी में लिखूँगा. इस मॅाम फक कहानी पर आप अपने विचार मुझे बताएं. rp8753660@gmail.com
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और तब मुझे पता Hindi Porn Stories चला कि मेरी जांघों पर कोई मोटी चीज गड़ रही है। जांघों के बीच इधर उधर फिसलती हुई कुछ खोज रही है। फिर वह मेरे कटाव में उतरी और वहँ के चिकने रस में फिसलकर दबाव में एकदम नीचे उतरकर गुदा के छेद पर दस्तक दे गई।

मेरे भीतर चेतावनी दौड़ गई। अब आगे बढ़ने में खतरा है। अब वह असली काम पर आ गया था। वह घटना जिसका हर लड़की अपने यौवन में विवाह तक इंतजार करती है और जिसे सिर्फ अपने पति के लिए बचाकर रखना चाहती है। अब तक जो हुआ था वह एक एडवेंचर के रूप में लिया जा सकता था। मगर अब इसके बाद जो होगा उसका अधिकार सिर्फ मेरे तन मन के स्वामी को ही था। जिसे मैं सपनों के राजकुमार को अर्पित करना चाहती थी।

मगर रोकना कैसे हो। अब तक जो हुआ है उसके बाद उसे किस तरह रोकूं। मैं सम्पूर्ण निर्वस्त्र थी। उसने न केवल केवल मेरे बदन को छुआ था बल्कि उसके रहस्य की अंतिम सीमा तक गया था और मेरे सबसे गुप्त अंग में मुँह घुसाकर मेरे पहली बार फूटे कुंआरे रस को भी पिया था, जिसका स्वाद इसके पहले मैंने भी नहीं जाना था।

वह मुझ पर छाया हुआ था। मैं उसके नीचे दबी थी। कुदरत अब मुझसे अपना हिस्सा मांग रही थी जिसके लिए उसने मुझे जन्म के बाद से ही तैयार किया था। उसका शिश्न ढूंढ रहा था। मेरी योनि भी उससे मिलने को बेकरार थी, मुझे आगे बढ़ने के लिए ठेल रही थी।

मैंने अंधेरे को ओट देने के लिए धन्यवाद दिया। वही मेरी मदद कर रहा था। मैंने संयम की लगाम छोड़ दी। नियति का घोड़ा जिधर ले जाए।

वह थोड़ा ऊपर उठा और मुझ पर से नीचे उतरा। उसने मेरे पाँव घुटनों से मोड़ दिये और घुटनों को किताब के पन्नों की तरह फैला दिया। गंतव्य को टटोला। लिंग को हाथ से पकड़कर छेद के मुँह पर लाया। वहाँ उसने ऊपर नीचे रगड़कर रस में अच्छी तरह भिगोया।

मैं दम साधे प्रतीक्षारत थी- क्या करता है !

मेरे पैरों के पंजे मेरे नितम्बों के पास नमस्कार की मुद्रा में जुड़े थे। वह लिंग के मुंह को मेरे छेद पर लाकर टिकाया और हल्के से ठेला।

तब मुझे उसके थूथन के मोटेपन का पता चला और मैं डर गई। इतना मोटा मेरे छोटे छेद के अंदर कैसे जाएगा? मेरे छेद का मुँह फैला और उस पर आकर उसका शिश्न टिक गया। अब उसके इधर उधर फिसल जाने का डर नहीं था।

शिश्न को वहीं टिकाए उसने हाथ हटाया और मेरे ऊपर झुक गया। मेरे बगलों के नीचे हाथ घुसाकर उसने मेरे कंघों को ऊपर से जकड़ लिया। उसके वजन से ही शिश्न अंदर धँसने लगा।

अब मैं जा रही थी। लुट रही थी। चोर मेरा सबसे अनमोल मेरे हाथों से ही धीरे धीरे छीन रहा था। मेरे राजीनामे के साथ ! और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। विरोध नहीं करके उसे छीनने में मदद कर रही थी। अंधेरा मुझे लुट जाने के लिए प्रेरित कर रहा था।

किसे पता चलेगा? फिर परेशानी क्या है? रुकना किस लिए? अंधेरा मेरी इच्छा के विरुध्द मेरी मदद कर मुझे छल रहा था।

अंधेरा उसे भी छल रहा था क्योंकि मैं उसकी स्वीटी नहीं थी, मगर उसकी मदद भी कर रहा था क्योंकि उसने मुझे निश्चिन्त करके मुझको उसे उपलब्ध करा दिया था।

कुंवारी लड़की की सबसे अनमोल चीज। कितनी बड़ी भेंट वह अनजाने में पा रहा था। जानते हुए में क्या मैं उसे हाथ भी लगाने देती ! हाथ लगाना तो दूर अपने से बात करने के लिए भी उसे तरसाती। मगर अनजाना होने पर मैं क्या कर रही थी। वह मेरा कौमार्य भंग कर रहा था। उसके मुँह पर दस्तक दे रहा था।

एक घक्का लगा और उसका शिश्न थोड़ा और भीतर धँस गया। छेद मानो खिंचकर फटने लगी।

मैं दर्द से बिलबिला उठी। जोर लगाकर उसे हटाना चाहा मगर उससे खुद को छुड़ा नहीं पाई। ऊपर वह मुझे कंधों से जकड़े हुए था और नीचे मेरे पैरों को मोड़कर सामने से अपने पैरों से चाँपे था। छूटती किस तरह! उसने और जोर से दबाया।

आह, मैं मर जाउंगी। शिश्न की मोटी गर्दन कील की तरह छेद में धँस गई। वह ठहर गया। शायद छेद को फैलने के लिए समय दे रहा था। मैंने उसे बगलों से पकड़कर ठेलकर छुड़ाने की कोशिश की। मगर सफलता नहीं मिली।

वह कसकर मुझे जकड़े था। कोई उपाय नहीं। कोई सहायता नहीं। बुरी तरह फँसी हुई थी। योनि के खिंचाव का दर्द कुछ कम होने लगा। हल्की सी राहत मिली। झेल पाने की हिम्मत बंधी।

मगर तभी एक जोरदार धक्का आया और धक्के के जोर से सारा बदन ऊपर ठेला गया। शिश्न मुझे लगभग फाड़ते हुए मेरे अंदर घुस गया।

मैं दर्द से चीख उठी मगर उसने मेरा मुँह बंद कर आवाज अंदर ही घोंट दी। वह बेरहम हो रहा था। लगा आज वह मुझे मार ही डालेगा। जिस तरह कुल्हाड़ी लकड़ी को फाड़ती है उसी तरह मैं फटी जा रही थी।

वह मुझे छटपटाने भी नहीं दे रहा था, हर तरफ से जकड़े था, मुँह पर हाथ दबाए था और नीचे दोनों पाँव जुड़े हुए उसके पैरों से मेरे नितम्बों पर दबे थे, ऊपर से कंधे जकडे था, हिलना भी मुश्किल था।

अब वह कोई दया दिखाने को तैयार नहीं था। छेद पर अपना दवाब बढ़ाता जा रहा था। कील धीरे धीरे मुझमें ठुकती जा रही थी। शिश्न मेरे काफी अंदर घुस चुका था। योनि के चिकने गीलेपन में वह भीतर सरकता ही जा रहा था।

मैं दर्द से व्याकुल हो रही थी। नश्तर की एक धार मुझे चीरती जा रही थी।

छोड़ दो ! छोड़ दो ! मगर मुँह बंधे जानवर की तरह उम… उम…. की आवाज भीतर ही घुट रही थी।

उस सुरंग में सरकते हुए उसका शिश्न मानो किसी रुकावट से टकराया। कोई चीज दीवार की तरह उसका रास्ता रोक रही थी। वह चीज उसके नोंक के दबाव में खिंचती हुई भी आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। मेरे भीतर मानो फटा जा रहा था।

उसने बेरहमी से और जोर लगाया। भीतर का पर्दा मानो फटने लगा। दर्द की इन्तहा हो गई। मैंने जांघें भींच लीं। किस तरह छुड़ाऊँ। कई तरफ से जोर लगाया। मगर कुछ कर नहीं पाई। रस्सी से बंधे बकरे की तरह हलाल हो रही थी। विवशता में रो पड़ी। सिर्फ जांघों को भींचकर खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी। मगर जांघें तो फैली थी। भींचने की कोशिश में छेद और सख्त हो रहा था, उससे और पीड़ा हो रही थी।

शायद उसे मुझ पर तरस आया। उसने मेरे बहते आँसुओं पर अपने होंट रख दिए। मुझे उस दर्द में भी उस पर दया आई। यह आदमी फिर भी क्रूर नहीं है। मेरा दर्द समझ रहा है। उसने सारे आँसू चूस लिये। मेरी बंद पलकों पर जीभ फिराकर उन्हें भी सुखा दिया। कैसा विरोधाभास था ! नीचे से लिंग की कठोर, जान निकाल देनेवाली क्रूरता, उपर से उसकी जीभ का कोमल सहानुभूति भरा सांत्वनादायी प्यार।

उसने मेरे चिड़िया की तरह अधखुले मुँह पर बार बार चुम्बन की मुहर लगाई। फिर ठुड्डी को, गले को, कॉलर की हड्डी को चूमता हुआ नीचे उतरा और प्रतीक्षा में फुरफुराती मेरी बाईं चूची को होंठों में अंदर गर्म घेरे में ले लिया।

फिर मेरे दाएं कंधे के नीचे से हाथ निकालकर वह मेरी प्रतीक्षारत दूसरी चूची को चुटकी में पकड़कर मसलने लगा। नीचे तड़तड़ाहट के दर्द के बावजूद आनंद की लहरें मुझमें दौड़ने लगीं।

एक तरफ दर्द और दूसरे तरफ आनंद की लहर। किधर जाऊँ! एक तड़पा रही थी दूसरी ललचा रही थी। कुछ क्षण आनंद के हिचकोले मुझे झुलाते रहे और उन हिचकोलों में चुभन की पीड़ा भी कुछ मध्दिम होती सी प्रतीत हुई। हालांकि वह मुझमें उतना ही घुसा हुआ था।

“स्वीटी आई लव यू… आई लव यू ….” वह नीचे चूचियों को चूसते हुए वहीं से बुदबुदाया।

‘स्वीटी !’ हाँ, मैं जूली नहीं स्वीटी थी। उसके लिए स्वीटी। संवेदनों की तेज सनसनाहट में मैं भूल गई थी कि मैं स्वीटी नहीं जूली थी।

वह इतना प्यार मुझ पर बरसा रहा था कोई और समझकर। मुझे पछतावा हुआ। इच्छा हुई उसे बता दूँ। मगर आनंद और दर्द की लहरों में यह खयाल मुझे निरर्थक लगा। जो कुछ मैं भोग रही थी, जो आनंद, जो दर्द मुझे मिल रहा था उसमें इससे क्या फर्क पड़ता था मैं कौन हूँ। वह भोगना ही था। वह स्त्री देह की अनिवार्य नियति थी। कोई और राह नहीं थी। नीचे उस अनजान अतिथि को मेरी योनि अपनी पहचान के रस में डुबोकर भीतर बुला ही चुकी थी। अब क्या बाकी रहा था?

और तभी आँखों के आगे चिनगारियाँ सी छूटीं और मैं बेसम्हाल उठी दर्द की लहर में बेहोश सी हो गई।

‘धचाक’..! उसने शिश्न को थोड़ा बाहर खींचा था।

मैंने सोचा वह हमदर्दी में ऐसा कर रहा है, इसलिए ढीली पड़ी थी। मगर तभी एक बेहद जोर का धक्का लगा और मेरी आँखों के आगे तारे नाच गए। वह मुझे फाड़ते हुए मुझमें दाखिल हो गया। मैं खुद को भींच भी नहीं पाई थी कि उसे रोक सकूँ।

मेरी साँस रुक गई। मैं बिलबिला उठी। आ ऽऽऽ ह ….. आ ऽऽऽ ह ….. छोड़ो मुझे, छोड़ो मुझे … वह जैसे ठहर कर मेरी छटपटाहट का आनंद ले रहा था। कोई दया नहीं। शिकारी जैसे अपने शिकार को तड़पते देख रहा था। मगर उसने मुझे दर्द की लहर से उबरने का मौका नहीं दिया।

अभी ठीक से साँस लेने भी नहीं पाई थी कि दूसरा वार हुआ। एक और जोर का धक्का आया और वह एक गर्म सलाख की तरह मुझमें जड़ तक धँस गया। मेरा कलेजा मुँह को आ गया। उसका छोर मानो मेरे कलेजे तक घुस गया था।

कील पूरी तरह ठुक चुकी थी और उसमें भिदकर मेरा कौमार्य एक तितली की भांति तड़प तड़पकर दम तोड़ चुका था, खत्म हो चुका था। अब वह कभी वापस नहीं लौट सकता था। इस जीवन में अब कभी नहीं।

मैं ग्लानि से भर उठी। जो इतना अनमोल, इतना सहेजकर रखा था उसे यूँ ही सस्ते में बिना मोल के ही खो दिया था। उसे कभी वापस नहीं पा सकूंगी। मुझे बहुत कसकर अपनी बेहद कीमती चीज के खो जाने का एहसास हुआ। मैं फफक पड़ी।

“डार्लिंग, हो गया, बस… बस, इतना ही।” वह मुझे सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था।

‘इतना ही?’ यह क्या कम है?

अब और कुछ नहीं होगा। बस इतना ही सहना था ! वह मुझे सहलाने लगा था- कंधों को, बगलों को, नर्म छातियों को।

“पहली बार थोड़ा सहना पड़ता है। इसके बाद कभी दर्द नहीं होगा।” आश्वासन का मरहम लगाकर उस दर्द को शांत करने की कोशिश कर रहा था जो मेरी जांघों के जोड़ से बहुत भीतर मर्म तक दहकती आग जैसी जलन से उत्पन्न हो रहा था।

उसका हाथ बहुत हौले हौले घूम रहा था, मसलने से दुख रही नाजुक चूचियों पर, तेज सांस में ऊपर नीचे होते नर्म पेट पर, उसके नीचे धड़कते फूले मांसल पेड़ू पर।

वह सांत्वना दे रहा था- जांघों पर, घुटनों पर, पैरों पर, कोमल तलवों पर वहाँ से उतर कर संकरी कमर पर, उपर क्रमशः चौड़े होते धड़ पर। हर जगह घूमता हुआ वह मानो मेरा दर्द खींच रहा था।

सांत्वना की सहलाहटें, स्पर्श, आश्वासन बरसाते चुम्बन धीरे धीरे असर कर रहे थे। उस आग की जलन कुछ कुछ घट रही थी। हालाँकि दर्द अब भी बहुत था। मगर उसके प्यार का बल पाकर सहने की ताकत आ रही थी। बिल्कुल औरत की तरह जो मर्द के प्यार के बल पर बड़े बड़े दर्द सह जाती है।

मैं अब औरत बन गई थी। मगर क्या वह मेरा मर्द था?

एक दिया सा जल रहा था। मैं जल रही थी। जलन मेरे जांघों के बीच हो रही थी जहाँ उसकी विजय पताका पूरे जोश से फहरा रही थी जिसका खंभा मेरे गर्भ तक बेधता हुआ गड़ा हुआ था। मैं उसकी आरती में दिए सी असहाय जल रही थी। हारी हुई, विवश जलन। जलन मेरे भीतर रही थी। हालाँकि योनि की जलन अब घट रही थी। इसमें उसका दोष नहीं था, मैंने खुद इसे चुना था, स्वीटी बनकर।

उसका शिश्न मेरे भीतर हिला। इस बार दर्द नहीं हुआ। वह थोड़ा बाहर निकला और फिर बिना किसी खास बाधा के घुस गया। गर्भ के मुंह पर दस्तक पड़ी। डरकर फिर मैंने साँस रोक ली। मगर कुछ खास दर्द नहीं हुआ।

वह कुछ ठहरकर फिर थोड़ा बाहर सरका। पहले से ज्यादा। उसके साथ उसके लिंग पर कसी मेरी योनि की दीवारें बाहर की ओर खिंच गई। मेरी भीतरी कोमल नितम्बों पर दबाव पड़ा और वह मोटा शिश्न मेरे अंदर रगड़ता हुआ फिर भीतर पैठ गया।

अब मेरी योनि फैल रही थी। वह धीरे धीरे धक्के देने लगा। इस बार दर्द थोड़ा कम हुआ। मेरा भय घटा। अब सह सकूंगी। धीरे धीरे धक्कों का जोर बढ़ने लगा। उसका शिश्न मेरी सुरंग में जोर जोर रगड़ता फिसलने लगा। वह बाहर भीतर हो रहा था और योनि के संकुचन की रही सही सलवटें मिटा रहा था।

मैं सह रही थी। पहली बार फैली बुर की तड़तड़ाहट बरकरार थी। फिर भी उसके धीरज और कोमलता से पेश आने पर मुझे दया आई। सहानुभूति में ही मैंने उसके धक्के से मिलने के लिए अपने नितम्ब उचकाए। वह उत्साह से भर गया, और जोर जोर धक्के लगाने लगा। मेरी योनि में दर्द के बीच भी आनंद की हल्की तरंगें उठने लगी। वह और जोर जोर से धक्के मारने लगा।

उसका शिश्न मेरे छेद के मुँह तक आता और फिर सरसराकर भीतर घुस जाता। जब बाहर निकलता तो राहत मिलती और भीतर जाता तो दर्द होता, हालाँकि पहली बार की तरह असह्य नहीं।

वह हाँफ रहा था। उसके बदन पर घूमते मेरे हाथ उसके पसीने से गीले हो रहे थे। वह जोर जोर से धक्के मार रहा था। मैं भी हाँफ रही थी।

दर्द को भुलाने के लिए कभी उसकी पीठ पर हाथ पटकती, कभी नितम्ब उचकाती। इसे वह मेरा मजा आना समझ रहा था।

वह और सक्रिय हुआ, और जल्दी जल्दी करने लगा। उसके मुंह से एक घुटी सी कराह निकली … आ ..ऽ … ह … और उसने मुझे जोर से भींच लिया।

कसाव में मेरी हड्डियाँ चटखने लगीं। मुझे अपने भीतर उसके शिश्न के झटके से फैलने सिकुड़ने का एहसास हुआ। हर झटके में मेरे भीतर एक गर्म लावा सा भरने लगा।

आ ऽऽऽ ह … ओ ऽऽ ह… वह झड़ रहा था और मेरे भीतर उसकी गर्म धार भरती जा रही थी। वह मुझमें बार बार झड़ रहा था। बाढ़ की तरह मुझे भर दिया दिया। उस गर्म धार में मेरी बुर, मेरा फूला पेडू भीग गए। आसपास के बाल उसमें भीगकर चमड़ी में चिपक गए। मुझे भी झड़ने की जरूरत महसूस हो रही थी। मगर दर्द भी हो रहा था। पहली बार होने का दर्द।

मैंने उसे सहलाया और फिर उसके मुँह को चूम लिया। पता नहीं क्यों मुझे एक कृतज्ञता सी महसूस हुई, हालाँकि उसने चोर की तरह छुपकर मुझे विवश करके मेरा शील भंग किया था। मगर फिर भी मैंने उसकी धार में पहला स्नान किया था।

वह उठा। लबालब भरे बुर से बहते लिसलिसे द्रव को छेद पर से, कटाव में से, नीचे गुदा के छेद पर से ऊपर चूत पर से पोंछा और मुझपर से उतर गया। मैंने भी अपनी पैंटी, अपनी शलवार खींची और ब्रा, फ्रॉक को टटोलकर उठाया और बाथरूम में चली गई। अब सब कुछ समाप्त हो गया था।

बाथरूम की रोशनी में मुझे सलवार पर और फ्राक पर खून के धब्बे नजर आए।

धो पोंछकर जब निकली तो मैंने अंधेरे में ही बिस्तर पर उसकी आहट लेने की कोशिश की। गहरी साँसों के आने जाने की आवाज आ रही थी। वह सो रहा था। अच्छा है। जब स्वीटी सोने आएगी तो समझेगी। मैं दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई। Hindi Porn Stories

सूरज शाह Indian Sex Stories

मैं सूरज सूरत से लिख रहा Indian Sex Stories हूँ। मैंने काफी कहानियाँ पढ़ीं हैं, और मैं अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मेरी लम्बाई 5 फीट 8 इंच है। मैं दिखने में सामान्य हूँ, पर सेक्स में बहुत तेज़ हूँ। मैं सूरत, गुजरात का रहनेवाला हूँ। अब मैं सीधा बात पर आता हूँ।

मेरी एक चाची है जिसका नाम पलक है, वह दिखने में सुन्दर है, साफ-गोरा बदन 36-28-38 की फिगर है। मैं उसे हमेशा से पसन्द करता था। मैं छुप-छुप कर उसे देखा करता था और उसे चोदने के प्लान सोचता रहता था और मेरी इच्छा 8 साल बाद पूरी हुई।

एक दिन उसका बदन बहुत दर्द कर रहा था, मैंने कहा कि लाओ मैं आपका बदन दबा देता हूँ। वह तैयार हो गई। हम लोग उनके कमरे में पहुँचे और उन को पेट के बल सुलाकर मैंने उनका बदन दबाना शुरू कर दिया। मगर वह कुछ न बोली तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी, मैं उनके कूल्हों को दबाने लगा, उनके मुँह से आह निकल गई।

उन्होंने मेरी तरफ मुड़ कर देखा पर कुछ नहीं बोली। उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। तब मैंने उसकी कमर और पीठ दबानी शुरू कर दी और हल्के-हलके कंधों और हाथों को भी दबाने लगा। करीब पन्द्रह मिनट के बाद मैंने पीठ दबाते-दबाते बगल से उसकी चूची पर हाथ फेर दिया तो वह कुछ नहीं बोली, शायद उसे बहुत मज़ा आया। फिर मैंने उसके टॉप को थोड़ा सा ऊँचा करके उसकी नंगी पीठ को दबाना और हाथ फेरना शुरू किया।

मेरे हाथ धीरे-धीरे उसकी ब्रा को लगने लगे। मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसके दोनों सफेद कबूतरों को आज़ाद कर दिया। धीरे से उसको पीठ के बल लिटाकर टॉप ऊपर कर दिया और उसके चूचकों को चूसने और दबाने लगा।

अब उससे रहा नहीं गया और उसने मेरा लण्ड पैंट के ऊपर से ही पकड़ लिया। यह हरी झण्डी पाकर मैंने धीरे से उसका नाड़ा खोल, लँहगे में हाथ डाल दिया और पैण्टी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ कर चूत पर दबा दिया, तो मैं समझ गया कि अब यह तैयार है तो मैंने उसके सारे कपड़े एक-एक करके उतार दिए और उसके बदन को चूमना शुरू कर दिया।

जैसे ही मेरी जीभ उसकी चूत पर पहुँची, वह हिल सी गयी और ज़ोर से मेर सिर को चूत पर दबाने लगी। मैं भी बहुत शौक से चाटने लगा, क्योंकि आठ सालों के बाद प्यास बुझाने का मौका मिला था।

उसको चाटते-चाटते मैंने उसकी चूत में ऊँगली भी करनी शुरू कर दी, थोड़ी ही देर में उसने अपना पानी छोड़ दिया। अब मैं अपना 7 इंच का लण्ड उसके मुँह के पास ले गया और उसने फौरन उसे चूसना शुरू कर दिया। वह ऐसे चूस रही थी जैसे छोटे बच्चे को लॉलीपॉप मिल गयी हो।

10 मिनटों के बाद मेरा भी माल निकल गया।

अब मैंने फिर से उसकी चूत में ऊँगली करनी शुरू कर दी, और वह दुबारा मेरा लण्ड चूसने लगी। थोड़ी ही देर में हम फिर से तैयार थे।

मैंने उसे सीधा लिटा दिया और पैर फैला दिये, मैं बीच में आ गया और धीरे से लण्ड को प्रविष्ट करा दिया, फिर तो धक्के पर धक्के लगने लगे। उसे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं भी मज़े से चोद रहा था। 5 मिनट में उसको कुतिया की तरह करके पीछे से लण्ड डाल के चोदने लगा। वह भी सामने से धक्के दे रही थी।

20 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गए।

उसे इतना मज़ा आया कि वह मौका मिलते ही हमेशा मुझे बुलाने लगी और हमारा काम अब बराबर चलता रहता है। Indian Sex Stories

दोस्तो! Antarvasna

मेरा नाम आतिश है, मैं Antarvasna दिल्ली में रहता हूँ। मैं हमेशा यह सोचा करता था कि क्या मैं भी कभी अपनी ज़िन्दगी में किसी के साथ सेक्स कर पाऊँगा! मुझे ब्लू-फिल्म देखने की आदत है लेकिन क़िस्मत देखिए कि कभी भी मैं किसी के साथ सेक्स नहीं कर पाया था। मेरी उम्र 23 साल और कद 5 फीट 9 इंच है। वैसे लोग कहते हैं कि मैं स्मार्ट भी हूँ, ख़ैर छोड़िये।

लेकिन मैं आप को अपनी एक ऐसी हक़ीकत से वाक़िफ कराना चाहता हूँ जो मेरे साथ पहले कभी नहीं हुई। ये होने के बाद मैं मन ही मन बड़ा खुश होता रहता था क्योंकि जो मैं इतनी कोशिश करने के बाद भी नहीं कर पाया वो अचानक हो गया।

हुआ ये कि मेरे घर के सामने एक घर है जिसमें एक परिवार रहता है जो बिहार से है, उस परिवार में 4 सदस्य हैं जिनमें से 2 बच्चे और दो बड़े हैं

जून 2004 की बात है जब मेरा परिवार स्कूल की छुट्टियों की वज़ह से गाँव गई हुई थी तो बस मैं ही घर पर अकेला था। शनिवार की बात है उस दिन मेरे ऑफिस में छुट्टी होती है तो थोड़ा देर से सोया और देर से जागा। उसके बाद मैं फ्रेश हुआ और बिस्किट खरीदने के लिए दुकान पर गया।

वह दुकान बहुत ही छोटी थी और वहाँ भीड़ बहुत ज्यादा रहती थी। जहाँ मैं खड़ा था उसके एकदम आगे मेरे सामने वाली आंटी खड़ी थी वो भी कुछ सामान ले रही थी और भीड़भाड़ होने की वज़ह से हम एक-दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया फिर मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड आंटी की गाँड पर लग रहा है। मेरा लण्ड एकदम तन गया, मुझे बहुत मज़ा आने लगा।

फिर आंटी सामान लेकर जाने लगी, जाते हुए आंटी ने मेरी तरफ देखा, उनका चेहरा गुस्से से लाल था। मुझे पता नहीं क्यों, बहुत शर्म सी आई और फिर मैं भी उनके जाने के करीब 10-15 मिनटों के बाद घर आ गया।

मैंने पहले तो चाय पी, फिर अपने दरवाज़े के सामने खड़ा हो गया। अचानक आंटी ने अपना दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर आंटी ने मुझे कहा ‘बेटा, क्या तुम हमारा एक काम कर दोगे?’

‘कहिए आंटी जी- मैंने डरते हुए कहा।

उन्होंने कहा- बेटा, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है, तुम मेरा एक डिब्बा उतार दो।’

मैंने कहा- ठीक है। फिर मैं उनके घर चला गया, वहाँ ऊँचाई पर एक डिब्बा रखा हुआ था, आंटी ने बताकर कहा- बेटा यही डिब्बा उतारना है।’

मैंने डिब्बा उतार दिया। तभी आंटी ने गेट बन्द कर लिया।

मैंने कहा- आंटी! मैं जाता हूँ, तो उसने मुझे बुलाया- इधर आओ-

यह सुनकर मेरी तो हवा ही खिसक गई, लेकिन फिर मैं भी हिम्मत करके चला गया। मैंने कहा ‘कहो आंटी, क्या कोई और कोई काम है?’

‘नहीं, एक बात पूछनी थी।’ आंटी ने कहा।
मैं डर गया, डरते-डरते मैंने कहा- कहिए आंटी जी!’
आंटी ने पूछा- तुम्हारी उम्र कितनी है?’
मैंने जवाब दिया- आंटी जी, 23 साल!’

फिर आंटी ने कहा कि मेरी उम्र 40 साल है और मैंने तुम्हारी माँ के उम्र की हूँ, तुम्हें शर्म नहीं आई दुकान पर ऐसी हरक़त करते हुए?

मैंने गर्दन नीचे किये हुए उनसे माफी माँगी- आंटी मुझे माफ कर दो, आज के बाद ऐसा नहीं होगा- मैं उनके सामने हाथ जोड़ने लगा।
‘अरे कोई बात नहीं, ऐसी उमर में ऐसा होता है। पहले भी किसी के साथ ऐसा या कोई और गलत काम किया है?’
मैं कुछ नहीं बोला।

फिर आंटी ने कहा- अरे शरमाओ मत, बताओ।’
‘नहीं आंटी! अभी तक नहीं।’
‘शादी से पहले कम से कम 2-3 बार ज़रूर करना चाहिए।’

मैंने हिम्मत करके कहा- क्यों आंटी?’
‘क्योंकि हर काम से पहले ट्रेनिंग ज़रूरी है, जैसे आर्मी वालों को दी जाती है। क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?’
‘नहीं आंटी जी, मेरी कोई भी गर्लफ्रेण्ड नहीं है।’
‘ये तो बड़े ही दुःख की बात है।’ आंटी ने कहा।
‘अगर तुम इजाज़त दो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ।’ आंटी ने आगे कहा।
‘कैसे?’ मैंने प्रश्न किया।

उन्होंने कहा- मैं तुम्हें ट्रेनिंग दूँगी ताकि तुम अपनी बीवी को ज़्यादा खुश रख सको। क्या तुम तैयार हो?’
‘जी हाँ आंटी, जैसा आप कहें।’

मैं सोच रहा था कि ये मेरे साथ ऐसी बातें कैसे कर रही हैं, वो भी पहली बार। मुझे लगा शायद दुकान वाली हरकत की वज़ह से वह मुझसे ऐसी बातें कर रही है।

आंटी ने मेरे हाथ अपने चेहरे पर लगाये और मुझे कहा कि मेरे गालों को सहलाते रहो। मैं ऐसा ही करता रहा। फिर आंटी ने मेरा हाथ अपनी टाँग पर रखा और मुझसे कहा- मेरी टाँग पर अपना हाथ फेरते रहो।

मैं ऐसा ही करता रहा। मुझे भी मज़ा आने लगा। आंटी बहुत गरम होने लगी और मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरी गाँड पर हाथ फेरने लगी।

मैंने अपना हाथ टाँग से हटाकर आंटी के मोटे-मोटे बूब्स पर रखा, वैसे तो उन्होंने कपड़े नहीं उतारे थे, पर फिर भी मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। आंटी कहने लगी कि तुम तो इंटेलीजेन्ट हो, अपने आप ही हाथ रख लिया।

फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से बूब्स दबाने लगा, आंटी एकदम पागल सी हो गई। मैं भी होश खो बैठा और अपना हाथ आंटी के पेटीकोट में अन्दर उनकी प्यारी सी चूत पर रखा, वो एकदम मुझसे चिपक गई।
फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी चूत में डाली और बार-बार अन्दर-बाहर करने लगा। आंटी को बड़ा मज़ा आने लगा। मज़े की वज़ह से वो सिसकियाँ लेने लगी। उनके मुँह से आवाज़ें आ रहीं थीं… हाय! मैं मर गईईईई…! ओओओ…! ह्ह्ह्ह।

फिर अचानक आंटी ने कहा कि मैं तुम्हें इस ट्रेनिंग का आखिरी पाठ सिखाती हूँ और फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे अपने बेड पर लेटने के लिए कहा। मैं लेट गया। उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये।

अब वो मेरे सामने एकदम नंगी थी। वो उतनी ख़ूबसूरत तो नहीं थी, पर उसकी फिगर लाजवाब थी। फिर वो मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़कर अपने हाथ को ऊपर-नीचे करने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उन्होंने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और फिर अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी। मेरा लण्ड एकदम तन गया और करीब 7-7.5 इंच का हो गया।

फिर उन्होंने फिर मुझे कहा कि अब तुम उठो और मैं लेटती हूँ। मैं सोच रहा था कि यार, कहीं इसका दिमाग तो खराब नहीं हो रहा है, लेकिन फिर ये सोचकर कि कहीं बना-बनाया काम न बिगड़ जाये, मैंने कुछ नहीं कहा। फिर वो लेट गई और मुझे कहा अपना मुँह मेरी दोनों टाँगों के बीच में रखकर मेरी चूत को चाटो!

मैंने कहा, आंटी ये गन्दी है। आंटी ने पूछा- क्या तुम अपनी बीवी को खुश नहीं रखना चाहते?’

मैंने उत्तर दिया ‘हाँ’।
‘तो फिर चलो, जल्दी करो।’
मैंने चाटना शुरू कर दिया।

मैंने देखा कि आंटी की आँखें बन्द हैं और वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ ले रहीं हैं। थोड़ी देर ऐसा ही करने के बाद आंटी ने कहा ‘रूको!’

मैंने पूछा ‘क्या हुआ?’

आंटी ने कहा- कुछ नहीं हुआ, अब मैं तुम्हें सबसे मज़ेदार, और सबसे आख़िरी स्टेप सिखाती हूँ।

फिर आंटी ने अपनी टाँगें ऊपर कीं और मुझे कहा कि अपना लण्ड मेरी चूत पर रखो और अपने हाथ मेरे कंधे के पास। मैंने ऐसा ही किया। फिर आंटी ने मेरा गरम लण्ड अपनी गरम चूत पर रखा और मुझे कहा कि अब धीरे-धीरे इसे अन्दर करते रहो। मैंने ऐसा ही किया। जब मेरा आधा लण्ड अन्दर जा चुका था तो मुझे बड़ा मज़ा आने लगा।

आंटी कह रही थी कि तुम्हारा लण्ड कितना मोटा है। बड़ा दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- अगर आप कहती हैं तो मैं निकाल लेता हूँ।

आंटी ने कहा, नहीं मेरी जान, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, और दर्द तो ज़रूर होता है और जितना दर्द होगा, बाद में मज़ा भी उतना ही आयेगा।

मैंने फिर एकदम से अपना सारा का सारा लण्ड उसकी गरम चूत में पेल दिया। वो चिल्लाने लगी, कहने लगी कि इसे फाड़ेगा क्या। उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।

मैंने पूछा- बहुत दर्द हो रहा है क्या?’
‘जानवर की तरह करेगा तो दर्द नहीं होगा?’
‘सॉरी आंटी…!’

आंटी बोली- कोई बात नहीं, तुम लगे रहो, धीरे-धीरे दर्द कम हो जाएगा।’

चार-पाँच मिनट बाद शायद उसका दर्द कम हो गया, क्योंकि वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी- आज इसे फाड़ दो… मैं तुम्हारी हूँ… ज़ोर-ज़ोर से पेलो मेरी जा..आआआन… आआआआह ईईईईईईई ऊऊऊऊऊ आआआआआह मैं मर गईईईईई।

तकरीबन 15 मिनट के बाद आंटी ने कहा मेरी जान अब दूसरा स्टेप करते हैं और वो फिर उठी और डॉगी स्टाईल में हो गई और मुझे कहा अब दुबारा अपना काम शुरू करो।

मैंने फिर उसकी गरम चूत में अपना सात इंच का मोटा लण्ड पेल डाला। वो फिर सिसकियाँ लेने लगी, और चिल्लाने लगी- मैं मर गई… आज मेरी चूत को फाड़ डालो मेरी जान…’

और मैं भी मज़े से पागल हो रहा था। हम दोनों की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं।

तकरीबन 10 मिनट बाद आंटी ने कहा ‘ज़रा हटो।’
‘क्यों आंटी?’
‘अब मैं तुम्हें वो स्टेप सिखाऊँगी जो अन्त में करना चाहिए, जब तुम्हारी गाड़ी मंज़िल पर पहुँचने वाली हो।’
‘ठीक है आंटी।’

वो पिर उसी पोज़ीशन में आ गई जैसे कि शुरू में थी, अपने दोनों पैर ऊपर उठा लिये और फिर कहा कि अब दुबारा इसमें डाल दो, और चाहे जो कुछ भी हो, अपना लण्ड अन्दर ही रहने देना।

मैंने सोचा कि यार क्या होगा, फिर मैंने अपना लण्ड घुसेड़ दिया और तकरीबन 6-7 मिनटों के बाद मुझे और आंटी को बड़ा जोश आने लगा। हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगे… आहहहह ओययययय आआ आआह हहह।

मैंने फिर आंटी से कहा कि आंटी लगता है मेरे लण्ड से कुछ निकलने वाला है।
‘मेरी भी चूत से निकलने वाला है, लेकिन तुम अन्दर ही रखना और अन्दर ही डाल देना जो भी निकलेगा।’
मैंने कहा- ठीक है।’

आंटी फिर शायद झड़ने वाली थी क्योंकि उसने मुझे बहुत कसकर पकड़ रखा था और आंटी कहने लगी मेरी जान… मैं मर गई… मैं झड़ने वाली हूँ। फिर वह झड़ गई।

दो मिनट बाद मेरा भी काम हो गया। आंटी पहले भी 1 बार बीच में झड़ चुकी थी, फिर हम दोनों थोड़ी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे और फिर आंटी ने कहा- लो ये कपड़ा और इसे साफ कर लो।’ आंटी ने भी अपनी चूत साफ कर ली और फिर पूछा- कुछ सीखा?’

‘हाँ आंटी, मैं सीख गया।’

‘मेरी जान अब मैं तुम्हारी हो चुकी हूँ। अगर तुम्हें मेरी क्लास अच्छी लगी हो तो तुम रोज़ आ सकते हो।’

‘ठीक है आंटी जी मैं रोज़ सीखने आया करूँगा।’ मैंने उत्तर दिया।
आंटी ने मुझे एक लम्बी पप्पी दी और कहा कि अब तुम जाओ मेरी जान।
फिर मैंने कपड़े पहने और अपने घर वापस आ गया।

उसके बाद मैं आंटी को चोदने रोज उसके घर जाने लगा।
1 महीने तक हमने खूब मस्ती की। और अब भी जब मौका हाथ लगता है हम दोनों सेक्स करते हैं, खूब मज़े लेते हैं… अब मैं एक दूसरी औरत पर लाईन मार रहा हूँ जिसकी शादी अभी-अभी हुई है। अगर हमारी बात वहाँ तक पहुँचती है तो मैं आपको ज़रूर लिखूँगा… बाययय

प्लीज़ आप मुझे बतायें कि आपको मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी।
मुझे मेल करें! मैं आपके मेल का इन्तज़ार करूँगा! Antarvasna

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