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इसे आप मनघड़ंत स्टोरी कहे या और Sex Stories कुछ पर सच बात तो ये है कि सेक्स मतलब सेक्स है वो किसी से भी किया जा सकता है या हो जाता है।
अब मैं 24 साल का हूँ और अपनी ऐम.ई. की पढ़़ाई कर रहा हूँ दिल्ली में अपनी फॅमिली से दूर।
पता नहीं वो सब कैसे क्या हुआ सब एक सेक्स कहानी की तरह लगता है पर ये कोई कहानी नहीं बल्कि सच्ची घटना है जो मैं अन्तर्वासना के मध्यम से आपके सामने रख रहा हूँ।
बात उस वक्त की है जब मैं 18 साल का था।
एक दिन हम किसी बर्थडे पार्टी में जा रहे थे, मेरी माँ को तैयार होने में काफी वक्त लगता था इसलिए पापा हमेशा ही गुस्सा हुआ करते थे, उस दिन पापा गुस्से में अकेले ही चले गए, माँ आज बहुत ही खूबसूरत लग रही थी, माँ ने सिल्क की साडी पहनी थी और बाल स्टेप कट किए हुए थे, होंटो पे ब्राउन लिपस्टिक, और क्या कहूँ ऐसा लग रहा था जैसे मानो वो किसी मूवी की एक्ट्रेस हो. बस वो थोडी मोटी थी बाकी फिगुर तो 36-30-36 है।
ड्रेसिंग रूम से आवाज़ आई बेटे ज़रा इधर तो आना, मैं रूम में गया तो माँ आइने के सामने खड़ी हाथ पीछे कर के ब्रा का हूक लगा रही थी, मुझसे कहा ये हूक तो लगा दे, मैंने हूक लगाया तब पहली बार मैंने मेरी माँ को ब्रा में देखा था. आइने में माँ के 36 साइज़ के बूब्स साफ़ दिखाई दे रहे थे .फिर मैं और माँ दोनों पार्टी के लिए निकल पड़े.
इस वक्त मुझे कुछ समझ में नहीं आता था पर ये जान चुका था कि मेरी माँ बहुत सेक्सी है. तबसे मैं कभी कभी माँ की ब्रा और पैंटी पहन कर देखता था. 2 -3 सालों बाद पापा का प्रमोशन हो गया.
अब पापा हमेशा ऑफिस के काम से वीकली बाहर गांव जाते थे, तब घर में हम 4 लोग होते थे छोटा भाई, बहन, मैं (सबसे बड़ा) और हमारी खूबसूरत माँ जिसे सजना- संवरना काफी पसंद था और कुछ हद तक बेशरम भी थी.
जब भी घर में कोई नहीं होता तब माँ हमेशा सिर्फ़ ब्रा और निक्कर में ही बाथरूम से बाहर आती और अपनी साड़ी पहनती. माँ की उमर 36 साल होते हुए भी वो बहुत ही नशीली लगती थी, मैंने कई बार माँ को ब्रा और पैंटी में देखा था कपड़े पहनते हुए, कई बार तो नहाते हुए भी देखा था पर छुप छुप के, जब भी दरवाजा खुला छोड़ नहाती थी.
तब मेरी हालत कैसी होती होगी आप महसूस कर सकते हो.
वो गर्मी के दिन थे. घर में कूलर था पर बिजली कभी भी जाती थी आती थी रात को कभी कभी तो 1 -2 घंटे आती ही नहीं थी. उस रात से तो मेरी जिंदगी ही बदल गई। उस रात मैं और मेरी माँ पास में ही सोये हुए थे भाई और बहन बाजू में थे।
रात के करीब 11 बजे बिजली चली गई मेरी भी नींद खुल गई।
मैंने देखा की माँ मोमबत्ती लगा रही है मुझे नींद नहीं आ रही थी गर्मी भी काफी हो रही थी.थोडी ही देर में देखा तो माँ अपना ब्लाउज उतार रही है, माँ ने काली ब्रा पहनी थी इसलिए उन्हें ज्यादा गर्मी लग रही थी, ब्रा भी जालीदार थी इसलिए उनके नीपल साफ नजर आ रहे थे. ब्रा के ऊपर से उनके बड़े बड़े बूब्स आधे से भी ज्यादा नजर आ रहे थे.
मैं तो देखता ही रह गया. वैसे तो मैंने कई बार माँ को इस हालत में देखा था, पर आज करीब से देखने का मौका मिला था. मैंने कभी सोच भी नहीं था कि मेरी माँ इतनी खूबसूरत है.
अब मैं काफी समझदार हो गया था। माँ ने फिर अपने बालों को उपर करके बाँध दिया। तब मैंने माँ की ब्रा के हूक को देखा लगा कि खोल दूँ इसे। थोडी ही देर में बिजली आ गई और कूलर शुरू हो गया। माँ बिना ब्लाउज के ही सो गई.
मुझे नींद नहीं आ रही थी मैं सोच रहा था कि काश मुझे आज रात को माँ को चोदने का मौका मिलता!!!
पर किस्मत ने साथ नहीं दिया…
कब सुबह हुई पता ही नहीं चला. अब मैं हमेशा माँ को चोदने की नज़र से ही देखता रहता। आज मैं स्कूल नहीं गया था. माँ जैसे ही नहाने गई मैं चेंजिंग रूम जाकर सोने का नाटक करने लगा. माँ आई आज वो सिर्फ़ तौलिया ही ओढे थी फिर उन्होंने वो भी हटा दिया माँ सिर्फ़ ब्रा और पैंटी
ही पहने थी, माँ की जांघें बहुत ही चिकनी और गोरी थी और पैंटी से उनकी गांड उभर कर आई थी और ब्रा के अंदर से बड़े बड़े और काले निप्पल के बूब्स तो मानो बाहर निकलने को बेकरार थे .. मैं माँ की खूबसूरती देखते ही झड़ गया ..
फिर माँ आईने में अपनी बगलों के बालों को निहार रही थी. माँ ने पापा का रेजर निकला और बालों को निकालना शुरू किया. मैं सोच रहा था काश
मेरी शादी मेरी माँ से हुई होती…!!!!
आज फिर रात हो हो गई .. सोचा आज तो किस्मत साथ दे दे। मैं सेक्स में ये भी भूल गया था कि वो मेरी माँ है। हम सोने की तय्यारी कर रहे थे .
भाई बहन सो चुके थे, पापा भी घर में नहीं थे. माँ ने मेरे सामने ही अपना ब्लाउज उतारा और अपनी पीठ खुजाने लगी. माँ ने आज सफेद ब्रा पहनी थी, धीमी रोशनी की वजह से माँ और भी सेक्सी लग रही थी, मैंने कहा क्या हुआ?
माँ बोली- कुछ नहीं! खुजली हो रही है जरा गर्मी का पाउडर तो ले आ!
मैं पाउडर लाया.
माँ ने कहा अब लगा भी दे.
मैं माँ के पीठ पर पाउडर लगाने लगा पर ब्रा का बेल्ट उँगलियों में फँस जाता था.
माँ ने कहा जरा बगल में भी लगा दे माँ ने हाथ उपर उठाया मैंने देखा कि आज सुबह जो माँ ने बाल निकाले थे वो जगह काफी चिकनी हो चुकी थी
मैंने कहा ये हूक निकाल दूँ तो माँ बोली क्यों?
मैंने कहा ताकि पूरी पीठ को पाउडर लगा सकूँ.
माँ ने कहा ठीक है पर पूरी ब्रा मत निकालना.
फिर मैंने माँ की ब्रा का हूक खोला। माँ की चिकनी पीठ काफी सुंदर लग रही थी. मैं कभी कभी अपना हाथ आगे की और भी ले जा रहा था जिससे मैं माँ के बूब्स को टच कर सकूँ.
फिर माँ ने ख़ुद ही अपनी ब्रा उतार दी और कहा जरा इधर भी पाउडर लगा दे .मैं माँ के बूब्स सहलाने लगा. माँ के बूब्स काफी बड़े और नर्म थे, माँ के बूब्स इतने टाइट थे कि ब्रा की जरुरत नहीं थी।
मैं माँ के नीपल को दबाने लगा तभी माँ ने कहा क्या करते हो .. माँ की धड़कने बढ़ रही थी .. फिर माँ ने कहा तेरा भाई उठ जाएगा .. हम चेंजिंग रूम में चलते हैं। माँ के बूब्स चलते हुए हिल रहे थे।
फिर मैंने कहा अब तुम मुझे पाउडर लगा दो.
माँ ने कहा क्यों तुझे भी खुजली हो रही है?
मैंने कहा हाँ.
माँ ने कहा ठीक है. मैं शर्ट और बनियान निकाल बेड पर लेट गया. माँ मेरे पीठ पर पाउडर लगा रही थी।
अब माँ ने मुझे पलट जाने को कहा ताकि वो मेरे सीने पर भी पाउडर लगा सके मैं अब पीठ के बल लेट गया और माँ मेरे बाजु में थी माँ जब मुझे पाउडर लगाती मैं उनके बूब्स की और देखता था।
वो बहुत ही रसीले लग रहे थे मैं बड़ी हिम्मत से माँ के बूब्स को हाथ लगाया माँ ने कुछ नहीं कहा
फिर मैंने उन्हें दबाना शुरू किया, मैं उन्हें धीरे धीरे दबा रहा था।
माँ ने कहा जरा देख तो लो तेरे भाई बहन सोये कि नहीं?
मैं देख आया दोनों सोये हुए थे .. माँ को बताया।
माँ ने कहा हम इधर ही सो जाते हैं .. मैं भी मान गया माँ ने अपनी साड़ी उतारनी शुरू की।
मैंने कहा साड़ी क्यों निकाल रही हो,
तब माँ ने कहा आज मैं तेरे साथ रात गुजारना चाहती हूँ और माँ ने अपनी साड़ी उतार दी अब वो सिर्फ़ पैंटी में थी, माँ की चूत के बाल जालीदार पैंटी से साफ नज़र आ रहे थे.
क्यों आज क्या तू पहली बार मुझे नंगी देख रहा है ..
मैंने कहा मैं कुछ समझा नहीं.
मुझे सब पता है तू रोज़ मुझे नंगी देखता है जब मैं नहा कर आती हूँ, क्यों सच है न?????
मैं एकदम ही डर गया, डर मत माँ ने कहा देख मैं ये बात तेरे पापा को नहीं बताऊँगी पर एक शर्त है.
मैंने कहा कौन सी शर्त? माँ ने कहा तुझे मेरे साथ नंगा सोना पड़ेगा.
मैं डर के मारे तैयार हो गया ..मैंने अपने कपड़े उतार दिए। फिर हम दोनों बेड पर आ गए. माँ सिर्फ़ अपनी पैंटी में ही थी और मैं अंडरवियर में. माँ मुझसे लिपट गई और चूमने लगी, मैंने कहा ये सब ठीक नहीं और बेड से उठ गया ..
तब माँ ने गुस्से में कहा जो तू करता है क्या वो ठीक है अपनी माँ को नहाते हुए देखता है!
माँ ने मुझे समझाया बेटे ये कोई ग़लत बात नहीं है ..तू भी अब जवान हो गया है और मेरी भी कुछ इच्छाएं हैं जो तेरे पापा समय की वजह पूरी नहीं कर सकते, तब तू मेरी इच्छाएं पूरी करे तो इसमे ग़लत क्या है? आह्किर मैं तेरी माँ हूँ .. और बेटा ही माँ को समझ सकता है ..
मैंने कहा अगर पापा को पता चला तो…
माँ बोली यह बात हम दोनों के बीच ही रहेगी… टॉप सीक्रेट… और जब कि तूने मेरे बूब्स को दबाया और सहला भी दिया है तो फ़िर अब चोदने में क्यों घबराते हो? बात सिर्फ़ आज रात की तो है ..
तब मैं मान गया , आख़िर मैं भी तो यही चाहता था. माँ ने कहा चलो बेटे आज हम सुहागरात मानते हैं , आज की रात तुम ही मेरे पति हो ..
फिर माँ ने मुझे अपनी बाँहों में कस के पकड़ लिया और मुझे चूमने लगी मैंने भी माँ को चूमना शुरू किया, माँ मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहला रही थी, मैं भी माँ की चूत को पैंटी के ऊपर से सहला रहा था।
फिर माँ ने मेरी अंडरवियर उतार दी और मेरे लौडे को हाथ से सहलाने लगी ताकि वो और बड़ा और टाइट हो जाए।फिर माँ ने अपनी कच्छी उतारी और मेरे लौडे को अपनी चूत में डाल दिया अब हमने खड़े खड़े ही चोदना शुरू कर दिया था।
मैंने अपना दायाँ पैर बेड पर रखा और जोरों से धक्के दे रहा था ..माँ के मुंह से आह ..!! आह ..!! आह ..!! आवाज़ निकाल रही थी ..माँ ने भी मुझे जोरों से अपनी बाहों में पकड रखा था।
फिर हम बेड पर आ गए और मैं माँ के नीपल को मुंह में लिए चूस रहा था, माँ एक हाथ से मेरे लौडे को सहला रही थी। फिर मैंने माँ को बेड पर पीठ के बल लेटाया और माँ की चूत को चूमने लगा। माँ सेक्स के मारे पागल हो रही थी, फिर माँ ने मेरे लौडे को चूमना शुरू किया,वो उसे मुंह में ले रही थी।
फिर माँ ने मेरा लौड़ा अपने हाथों से अपनी चूत में डाला और कहा- ले अब छोड़ अंदर तक ले जा… माँ ने अह्ह्ह… भरी, कहा ऐसे ही करते रह, मैं भी माँ की जांघों को पकड़ पकड़ कर चोदता रहा…
बहुत अच्छा लग रहा था. मेरा गिरने ही वाला था माँ ने कहा अंदर मत गिरा फिर माँ ने मुझे बेड से दूर कर के नीचे गिराने को कहा।
हमने फ़िर एक दूसरे को चूमना शुरू किया और उत्तेजित हो गए। मां बिस्तर पर लेट गई और मुझे कहा कि मेरी गाण्ड में लौड़ा डाल दे। मैंने मां की गाण्ड मारना शुरू किया।
फ़िर हम सीधे हो कर एक दूसरे को चोदते रहे। रात भर हम सब कुछ भूल कर बस चोदते ही रहे। मां को कई तरह से चुदवाना आता था। उन्होंने मुझसे 10-12 अलग अलग तरीकों से चुदवाया।
मां का बदन काफ़ि नर्म और खूशबूदार था। मैंने मां को पूरी तरह से सन्तुष्ट कर दिया।
इस बीच मैं दो बार झड़ गया। रात के तीन बजे हम कपड़े पहन कर सोने चले गए। मां खुश लग रही थी। सुबह जब मैं नाश्ते के किए बैठा तब मेरी मां से बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थ
मां ने कहा- क्या हुआ? मैंने कहा है ना तुमसे कि यह बात सिर्फ़ हम दोनों के बीच रहेगी। और फ़िर भी तुम्हें शरम आती है तो मुझे अपनी वाईफ़ समझ सकते हो, वैसे भी हम सुहागरात तो मना ही चुके हैं
मां ने हंसते हुए मेरे होंठो को चूमा। मैं भी मां को अपनी बाहों में लेकर चूमता रहा।
फ़िर उस दिन से जब भी हमारा मूड होता और पापा घर में नहीं होते, हर रात हम सुहागरात मनाते रहे। कभी कभी तो दिन में भी बिना कपड़ों के साथ रहते।
एक दिन तो मैंने मां के नीचे वाले बालों की शेव कर दि थी और मां ने मेरी। अब चुदाई में बहुत मज़ा आता था। कभी कभी हम ब्लू फ़िल्म देख कर वैसे ही चुदाई करते थे।
मैं अब मां को नाम से पुकारता था। अब हम ऐसे रहते थे जैसे कि मानो हम सच में पति-पत्नी हों। ड्रेसिंग रूम को ही हमने अपना बेड-रूम बना लिया था। भाई और बहन दूसरे कमरे में सोते थे और हम पूरी रात बिना कपड़ों के साथ में सोते थे।
मां को अभी भी मेक-अप का शौंक था। वो मेरे लिए ही अब सजती संवरती थी। मैं कभी कभी स्कूल नहीं जाता और पूरा दिन मां के साथ चुदाई करता। जब भी मैं मां को किसी शादी, पार्टी में ले जाता तो लोग भी हमें पति-पत्नी समझते थे।
एक दो बार तो पापा घर में होते हुए भी मैंने मां को चोदा। मां तब नहा रही थी और पापा टी वी देख रहे थे।
मैंने बाथरूम के पास जाकर मां को आवाज़ दी, मां ने कहा- अभी नहीं, अभी तेरे पापा घर में हैं, जब मैं नहीं माना तो मां ने मुझे बाथरूम में बुला लिया और हमने चुदाई कर ली।
बहन ने एक दिन पापा को बताया कि मां हमारे साथ नहीं सोती, भैया के साथ सोती है तब मां ने गुस्से से कहा- कुछ भी कहती है नालायक, तेरे भैया को पढ़ाते हुए कभी कभी नींद आ जाती है तब वहीं सो जाती हूं।
पापा ने कुछ नहीं कहा क्योंकि पापा तो हमारे इस रिश्ते से बिल्कुल ही अनजान थे ना…॥ Sex Stories
मेरी हॉट एच आर गर्ल के साथ ऑफिस में मेरा चुदाई का खेल चल रहा था। एक दिन मैंने रिस्क लेने की सोची। लोगों के रहते हुए मैं एच आर के पास पहुंच गया और फिर …
अगर आप इस सेक्स स्टोरी को शुरू से पढ़ते आ रहे हैं तो आपको पता होगा कि मेरे ऑफिस में एचआर जैनब और मेरे बीच चुदाई का खेल चल पड़ा था।
हम दोनों ने कई बार चुदाई कर ली थी और इस चुदाई के खेल में अब एक कैम गर्ल रूमी भी शामिल हो चुकी थी।
ऑफिस में से जब सब लोग चले जाते थे हम दोनों ही आखिर में रह जाते थे।
मैं उसके केबिन में चला जाता था और वहीं डेस्क पर उसकी टांग उठवाकर उसकी चूत में लंड डाल देता था।
इस तरह से कई बार हम लोग चुदाई कर चुके थे।
अब धीरे-धीरे हम लोगों का डर खत्म हो चुका था।
दरअसल शुरुआत में ऑफिस में चुदाई करने के काम में डर के कारण एक रोमांच पैदा होता था जो अब कम हो गया था।
हम अब इसे थोड़ा खतरनाक बनाना चाहते थे।
कंपनी ने सभी सीनियर मैनेजर के लिए कॉन्फ्रेंस बुक की थी।
लेकिन सारे ही मैनेजर शहर से बाहर गए हुए थे।
केवल मेरे जैसे निचले कर्मचारी ही बचे थे।
तो यह हमारे लिए भी अच्छी ही बात थी।
ऑफिस के टाइम में सब लोग मस्ती करते रहते थे लेकिन मैं काम में पिसता रहता था।
मेरे काम का बोझ अब बढ़ता जा रहा था।
बावजूद इसके मैं थोड़ा रिलैक्स रहता था।
इसके पीछे भी एक वजह थी।
जो एचआर काम को चेक करती थी, वह रोज मेरी टांगों के बीच में पड़ी रहती थी, मेरा लौड़ा चूसती रहती थी।
इसलिए मुझे किसी के टोकने का डर नहीं था।
तो मैं नीचे पहुंचा और जाते ही अपने लंड पर उस हॉट ऑफिस गर्ल का मुंह दबा दिया।
उसकी सांस रुकने लगी तो उसने ताजी हवा लेने के लिए जोर से सांस छोड़ी।
इसी दौरान उसके होंठ मेरे लंड को चूस गए।
उस वक्त मेरे डिपार्टमेंट के सभी लोग रिट्रीट के लिए गए हुए थे।
दूसरी बात यह भी थी कि मेरी कंपनी साइबर सिक्योरिटी को लेकर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देती थी।
तब मैंने Dscgirls.live वेबसाइट खोली।
इस दौरान जैनब मेरा लंड चूसने में लगी हुई थी।
मैंने गहरी सांस ली और एक बार फिर से उसके गले में लंड को फंसा दिया।
उसने रंडी की तरह लंड को गले में फंसा लिया और ऊंह करके सिसकारी भरी।
जैनब हाँफती हुई- रूमी को कॉल कर रहे हो क्या?
मैं- हां, मुझे चुदाई करने का मन हो रहा है. और जब वो अपनी चुदक्कड़ चूत को हमें देखते हुए रगड़ती है तो मुझे बहुत मजा आता है।
जैनब- तुम उसका बहुत फायदा उठाते हो। याद रखो, पहले वह मेरी थी।
अब मैंने नीचे की ओर जाकर जैनब की रसीली चूत को पकड़ लिया।
एकदम से उसका मुंह खुल गया और आह्ह … निकल गई।
वह हैरानी के साथ-साथ मजे में मेरी तरफ देख रही थी।
मैंने उसे जोर से किस कर लिया।
मैं- हो सकता है कि वह पहले तुम्हारी हो … लेकिन अब तुम दोनों ही मेरी हो।
जैनब- ओह, मेरी चूत गीली हो रही है!
मैं- सही टाइम आने पर मैं इसमें उंगली भी करूंगा और इसे जमकर चोद भी दूंगा।
जैनब- ओह येस! कर दो!
अब उसने उठकर अपनी सनड्रेस को उठा दिया।
उस हॉट ऑफिस गर्ल ने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी।
उसने अपनी उंगली को मुंह में लिया और फिर चूत के दाने को मसलने लगी।
उसकी क्लीव शेव चूत का पूरा नजारा वो मुझे दिखा रही थी।
मैं उसे देखकर मुठ मारने लगा।
साथ ही मेरी नजर लैपटॉप पर भी थी।
तभी रूमी ने वीडियो कॉल को जॉइन कर लिया।
वह देख रही थी कि कैसे मैं अपने लंड की मुठ मार रहा हूं और जैनब तेजी से अपनी चूत को रगड़े जा रही है।
रूमी- आआ, तुम दोनों तो बड़े नॉटी हो, मेरा इंतजार कर रहे थे क्या?
उसने मुस्कराते हुए अपने टैंक टॉप के स्ट्रैप कंधों पर से हटा दिए।
उसके चूचे नंगे हो गए।
वह अपने निप्पलों को मसलने लगी।
अब जैनब भी उसकी तरफ घूम गई और अपनी चूत का पूरा नजारा उसे दिखाने लगी।
उसने चूत में उंगली दे डाली और गहराई तक चोदने लगी।
उसकी चूत कैमरा में चमक उठी थी और रूमी को यह नजारा बहुत पसंद आ रहा था।
अब रूमी बेड पर पीछे की ओर झुक कर लेट गई और अपने शॉर्ट्स भी उतार दिए।
उसकी चूत भी गीली थी।
उसने भी अपनी चूत में उंगली डाल ली और दोनों एक दूसरे को देखते हुए चूतें चोदने लगीं।
दोनों के ही मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं।
मैंने मुठ मारना रोक दिया और पीछे से जैनब के पास पहुंच गया।
उसने मेरी गर्दन पकड़ ली और गहरी सांस ली।
इतने में ही मेरी पैंट नीचे गिर चुकी थी।
मुझे नंगा देखते ही उसकी टांगें खुल गईं और वो इंतजार करने लगी कि कब मैं उसकी चूत में लंड डालूं।
लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।
मैं उसकी टांगों के बीच में झुक गया। मैं लार से सनी अपनी जीभ से उसकी गांड के छेद को चाटने लगा।
वो हैरानी में पड़ गई और उसने कैमरा में देखते हुए एक कामुक सिसकारी ली।
मैं जैसे उसकी सनड्रेस के अंदर ही घुस गया था क्योंकि उसने ड्रेस को मेरे मुंह पर ही डाल दिया था।
जैनब- ओह्ह माय गॉड, रूमी!! वह ड्रेस के अंदर जाकर मेरी गांड चाट रहा है! फक! बहुत नॉटी है ये!
रूमी जोर से अपनी चूत रगड़ते हुए- फक! ओह याह! चाटो उसकी गांड बेबी! बहुत हॉट है, मैं तो झड़ने वाली हूं!
मैंने अब जैनब की गांड को चाटना बंद कर दिया।
वह हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी … जैसे वो निराश हो गई हो।
वो चूत में उंगली अभी भी चला रही थी।
रूमी भी अपनी दो उंगलियों को गीली चूत के होंठों पर फिराती हुई कैमरा में ही देख रही थी।
अब उसे इंतजार था कि मेरा अगला कदम क्या होगा।
मैं उठा और मैंने जैनब की ड्रेस ऊपर चढ़ा दी जिससे उसके रस में सने झांट भी मुझे दिखने लगे।
मैंने उसकी टांगें ऊपर करवा कर डेस्क पर रखवा दीं।
उसकी आह्ह निकल गई।
वो लगातार अपने बदन पर हाथ फिरा रही थी।
रूमी भी कैमरा में सामने आहें भर रही थी।
मैं- रूमी, घूम जाओ, और इस चूत में कुछ डाल लो। इसे रिसने दो!
हॉट ऑफिस गर्ल जैनब- ओह फक, और फिर?
रूमी- हां बताओ हमें!
वह घूम गई और गांड को हवा में उठा लिया और डिल्डो लेकर उसके गांड और चूत के आसपास फिराने लगी.
मैंने जैनब को अब उसके चूतड़ों से पकड़ लिया, उसकी टांगें खोल दीं।
तब मैंने लंड पकड़ा और उस हॉट ऑफिस गर्ल की चूत में पेल दिया।
मैंने उसको चोदना शुरू किया तो उसने डेस्क को पकड़ लिया और चुदास के चस्के में अपनी गंदी ड्रेस के किनारे को ही दांतों से काटने लगी।
चुदाई के धक्कों से उसके बाल बिखरने लगे।
चुदती हुई वो भी अब बहुत ज्यादा हॉर्नी लग रही थी।
उसने रूमी की तरफ देखा।
उधर रूमी भी मुझे एचआर की चुदाई करते देख उतनी ही स्पीड से डिल्डो से अपनी चुदाई करने लगी।
मैंने जैनब को घुमाया ताकि वो मुझे किस कर सके।
वह मेरी जीभ को चूसने लगी।
मैं उसे तेजी से चोद रहा था।
धक्कों के कारण केबिन के ग्लास पैनल भी हिलने लगे।
और उनके हिलने के साथ ही जैनब भी कराहने लगी।
उसकी आंखें ऊपर चढ़ने लगी थीं और वह अपने होंठ काट रही थी।
जैनब आनंद में उछलते हुए- ओह फक … रूमी देख रही हो … देखो ये … ओह फक!
रूमी रंडियों की तरह सिसकारते हुए- अम्म याह! ऐसे ही चोदो इसे!
अब मैं छूटने की कगार पर पहुंच रहा था।
उन दोनों की सिसकारियों मुझे पागल बना रही थीं।
फिर मुझे एक नॉटी आइडिया आया।
मैंने लंड में कड़ापन महसूस किया और मैं समझ गया था कि मैं छूटने वाला हूं।
उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और अंदर तक घुसा लिया।
लेकिन मैं लंड को ठोक कर रुक गया।
उसने गुस्से भरी चुदास से मेरी तरफ देखा। उसने डेस्क को पकड़ा और मेरे लंड पर अपनी गांड की जैसे चक्की चलाने लगी।
मैंने फिर से लंड देकर रोक दिया।
वह सिसकारने लगी और मेरा लंड बाहर निकाल दिया।
वो मेरा लंड देखते हुए अपनी चूत सहला रही थी और मैं अपने लंड को हाथ से हिला रहा था।
मैंने जल्द ही सारा माल जैनब की ड्रेस पर छोड़ दिया।
जैनब ने अपनी गन्दी हो चुकी ड्रेस को देखा।
माल उसके बदन को भी भिगो चुका था।
फिर उसने सारा माल चाट लिया और मेरे गाल पर हल्का तमाचा लगा दिया जैसे प्यार भरा गुस्सा दिखा रही हो क्योंकि मैंने उसकी ड्रेस खराब कर दी थी।
एचआर- तुम बहुत नॉटी हो।
मैं- तो अब क्या करोगी तुम?
उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी।
उधर रूमी भी धीरे धीरे अपनी चूत को सहला रही थी और हमारी तरफ देखते हुए मुस्करा रही थी।
रूमी- तुम दोनों हमेशा ही कुछ न कुछ ऐसा मजा करते रहते हो। मेरा इंतजार अब दूसरा क्लाइंट कर रहा है तो मुझे जाना होगा।
हमने रूमी को बाय बोल दिया।
जैनब- हमें उसे कुछ घंटे बाद फिर बुलाना चाहिए!
वह मेरे कानों में फुसफुसाई- जब यहां से हर कोई जा चुका होगा।
मैं- तो क्या तुम पूरा दिन इस सनी हुई ड्रेस में घूमोगी?
जैनब ने बदन से ड्रेस पूरी तरह हटा दी और मेरे ऊपर फेंक दी।
मैंने उसे दीवार से सटा दिया और ग्लास पैनल के सहारे लगाकर उसे चोदने लगा।
अबकी बार मेरा माल उसकी चूत में छूट गया।
उसने मेरी तरफ देखा और मुस्करा दी।
फिर वो एक तरफ गई और कुछ टिश्यू ले आई, साथ में एक नई सनड्रेस भी।
मेरे पास आकर उसने मुझे किस किया और फिर ड्रेस पहन ली।
जैनब- मैं पहले से ही तैयारी करके आई थी। मुझे अंदेशा था कि तुम अपना माल मेरी ड्रेस पर भी गिरा सकते हो।
मैं- मैं तो बार-बार तुम्हारे अंदर ही अपना माल निकालना चाहता हूं जान!
हॉट ऑफिस गर्ल जैनब मुझे चूमते हुए- थोड़े घंटे इंतजार करो, फिर मेरी गांड में भी गिरा लेना।
मुझे इस वर्चुअल थ्रीसम में बहुत मजा आ रहा था।
मस्त राइड थी यह मेरे लिए!
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मेरा नाम स्वाति है। मेरी उम्र ४० वर्ष की Hindi Sex Stories है। मेरे पति का तीन साल पहले एक दुर्धटना में स्वर्गवास हो गया था। मेरी बेटी स्वर्णा की शादी मैंने अभी चार महीने पहले ही सम्पन्न करा दी थी। स्वर्णा का पति अशोक कॉलेज में असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर था। २५ साल का खूबसूरत लड़का था। वो मेरी बेटी को ट्यूशन पढ़ाने आता था। सामने वाले गेस्ट रूम में मेरी बेटी पढ़ा करती थी। पढ़ा क्या करती थी बल्कि यह कहो कि सेक्स में लिप्त रहती थी। दरवाजे की झिरी में से मैं उन दोनों की हरकतों पर नजर रखती थी।
कुछ देर पढ़ने के बाद वो दोनों एक दूसरे के गुप्त अंगो से खेलने लगते थे। कभी अशोक बिटिया के उभरती हुई छातियों को मसल देता था कभी स्कर्ट में हाथ डाल कर चूत दबा देता था। बेटी भी उसका मस्त लण्ड पकड कर मुठ मारती थी। मैंने समझदारी का सहारा लेते हुये उन दोनों की शादी करवा दी ताकि इस जवानी के खेल में कहीं कुछ गलत ना हो जाये।
शादी के बाद वो अभी तक बहुत खुश नजर आ रहे थे। यूँ तो स्वर्णा के साथ अपने घर में ही रहता था, पर अधिकतर वो दोनों रात मेरे यहाँ ही गुजारते थे।
रात को मैं जानकर के नौ या साढ़े नौ बजे तक सो जाती थी, ताकि उन दोनों को मस्ती का पूरा समय मिले। पर इस के पीछे मुख्य बात ये थी कि मैं उनकी चुदाई को दरवाजे की झिरी में से देखा करती थी। मेरे कमरे की बत्ती बन्द होने के कुछ ही देर बाद मेरे कानो में सिसकारियाँ सुनाई पड़ने लग जाती थी। मैं बैचेन हो उठती थी। फिर मिली जुली दोनों की आहे और पलंग की चरमराहट और चुदाई की फ़च फ़च की आवाजें और मदहोशी से भरे उनके अस्पष्ट शब्द कानों में पड़ते थे। मैं ना चाहते हुए ही बरबस ही धीरे से उठ कर दरवाजे के पास आ कर झिरी में से झांकने लगती थी।
अशोक का मोटा और लम्बा मदमस्त लण्ड मेरी आंखो में बस चुका था। अशोक का खूबसूरत चहरा, उसका बलिष्ठ शरीर मुझे बैचेन कर देता था। मेरी सांस तेज हो जाती थी। पसीना छलक उठता था। मैं बिस्तर पर बिना जल की मछली की तरह तड़पने लगती थी। चूत दबा कर बल खा जाती थी। पर यहा मेरी बैचेनी समझने वाला कौन था। धीरे धीरे समय निकलता गया….मैं अब रात को या तो अंगुली से या मोमबत्ती को अपनी चूत में घुसा कर अपनी थोड़ी बहुत छटपटाहट को कम कर लेती थी। पर चूत की प्यास तो लण्ड ही बुझा सकता है।
पर हां मेरे में एक बदलाव आता जा रहा था। मैं सेक्स की मारी अब अशोक के सामने अब सिर्फ़ ब्लाऊज और पेटीकोट में भी आ जाती थी। मैं अपनी छातियो को भी नहीं ढंकती थी। लो कट ब्लाऊज में मेरे आधे स्तन बाहर छलके पड़ते थे। अशोक अब नजरें बचा कर मेरे उभारों को घूरता भी था। मैं जब झुकती थी तो वो मेरी लटकी हुई चूंचियो को देख कर आहें भी भरता था, मेरी गांड की गोलाइयों पर उसकी खास नजर रहती थी। ये सब मैं जानबूझ कर ही करती थी…. बिना ये सोचे समझे कि वो मेरा दामाद है।
उसकी वासना भरी निगाहें मुझसे छिपी नहीं रही। मुझे धीरे धीरे ये सब पता चलने लगा था। इससे मेरे मन में वासना और भी भड़कने लगी थी। विधवा के मन की तड़प किसे मालूम होती है? सारी उमंगें…. सारी ख्वाहिशें…. मन में ही रह जाती हैं…. फिर चलती है आगे सिर्फ़ एक कुन्ठित और सूनी जिन्दगी….। पर एक दिन ईशवर ने मेरी सुन ली…. और मुझ पर महरबानी कर दी। और मैं अशोक से चुद गई। मेरी जिन्दगी में बहार आ गई।
जब भी स्वर्णा ससुराल में होती थी तो अकेलापन मुझे काटने को दौड़ता था। मैं ब्ल्यू सीडी निकाल कर टीवी पर लगा लेती थी। उस शाम को भी ९ बजे मैंने सारा घर बन्द किया और टीवी पर ब्ल्यू पिक्चर लगा कर बैठ गई। चुदाई के सीन आने लगे …. मैंने अपनी ब्रा निकाल फ़ेंकी और सिर्फ़ एक ढीला सा ब्लाऊज डाल लिया। नीचे से भी पेन्टी उतार दी। फ़िल्म देखती जाती और अपनी चूंचियाँ दबाती जाती…. कभी चूत मसल देती…. और आहें भरने लगती…. बाहर बरसात का महौल हो रहा था। कमरे में उमस भी काफ़ी थी। पसीना छलक आया था।
इतने में घर के अन्दर स्कूटर रखने की आवाज आई। मैंने टीवी बन्द किया और यूं ही दरवाजा खोला कि देखूं कौन है। सामने शेख्रर को देख कर मैं हड़बड़ा गई। अपने अस्त-व्यस्त कपड़ों का मुझे ख्याल ही नहीं रहा। अशोक मुझे देखता ही रह गया।
“अशोक जी…. आओ…. आ जाओ…. इस समय…. क्या हुआ….?”
“जी….वो स्वर्णा के कुछ कपड़े लेने थे…. वो ऊपर सूटकेस में रखे हैं….”
“अच्छा लाओ मैं उतार देती हूँ।” मैंने स्टूल रखा और उस पर चढ़ गई।
“अशोक ! मुझे सम्हालना….!”
अशोक ने मेरी कमर थाम ली। मुझे जैसे बिजली का करण्ट दौड़ गया। उसका एक हाथ धीरे से नीचे कूल्हों पर आ गया। मुझे लगा कि काश मेरे चूतड़ दबा दे। मेरे शरीर में सिरहन सी दौड गई। मैंने सूटकेस खींचा तो मेरा संतुलन बिगड़ गया। पर अशोक के बलिष्ठ हाथों ने मुझे फूल की तरह झेल लिया। सूटकेस नीचे गिर पड़ा। और मैं अशोक की बाहों में झूल गई। मेरा ब्लाऊज भी ऊपर उठ गया और एक चूंची बाहर छलक पड़ी।
अशोक भूल गया कि मैं अभी भी उसकी बाहों में ही हूं। मैं उसकी आंखो में देखती रह गई और वो मुझे देखता रह गया।
“श्….श्….अशोक्…. अब उतार दो….” मैं शरमाते हुए बोली। वो भी झेंप गया….पर शरीर की भाषा समझ गये थे….
“ह…. हां हां…. सॉरी….!” उसने मेरा ब्लाऊज मेरे नंगे स्तन के ऊपर कर दिया। मैं शरमा गई।
“आपकी तबियत तो ठीक है….?”
“नहीं…. बस…. ठीक है….” बाहर बादल गरज रहे थे। लगता था बादल बरसने को है।
उसने सूटकेस खोला और कपड़े निकाल लिये। उसकी नजर मेरे ऊपर ही जमी थी। वो मेरे हुस्न का आनन्द ले रहा था। मेरे जिस्म में जैसे कांटे उग आये थे। इतने में बरसात शुरु हो गई।
अशोक ने मोबाईल से स्वर्णा से बात की कि मां की तबियत कुछ ठीक नहीं है और बरसात भी शुरु हो गई है….इसलिये रात को वो यहीं रुक रहा है। सुनते ही मेरी सांस रुक गई…. हाय राम….रात को कहीं ये….? क्या चुद जाऊंगी….? पर मेरा एक मन कह रहा था कि शायद आज ऊपर वाले की जो इच्छा है….आज होने दो। मेरा मन बहुत ही चन्चल हो रहा था…. मैला भी बहुत हो रहा था…. मेरे जिस्म में एक आज एक तड़प थी, जो अशोक बढ़ा दी थी। मैंने पलट कर अशोक को देखा…. वो मेरे चूतड़ों की गोलाईयों को देखने में मग्न था। मेरे चेहरे पर पसीने की बून्दें छलक आई।
“क्या देख रहे हो….?” मैंने कांपते होठों से कहा।
“जी…. आप इस उमर में भी….लड़कियों की…. सॉरी….” वो कह कर झेंप गया।
“कहो…. क्या कह रहे थे…. लड़कियों की क्या….?” मेरी सां भी तेज हो उठी
वो मेरे पास आकर मेरे ब्लाऊज के बटन लगाने लगा। मेरी सांसे बढ़ गई…. छातियाँ फ़ूलने पिचकने लगी। वासना ने मेरे होश खो दिये…. काश अशोक मेरी छाती दबा दे….!
“सम्भालो अपने आप को मां जी….” पर मुझे कहाँ होश था। मैं धीरे से उसकी छाती से लग गई और उसका शरीर सहलाने लगी।
“मां जी….ये क्या कर रही है आप….!” उसने मेरे सर पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा।
“अशोक विधवा की अगन कौन समझ समझ सकता है…. ये तन की जलन मुझे जला ना दे….” मेरा सीना फ़ूलने और पिचकने लगा था। मैंने अपनी छाती उसकी छाती से रगड़ दी।
“मां…. अपने पर काबू रखो…. मन को शांत रखो…. !” अशोक ने लड़खड़ाते स्वर में कहा। वह भी बहक रहा था। उसका लण्ड खड़ा हो चुका था। उसने मेरे बाल खींच दिये और मेरा चेहरा ऊपर उठा दिया। मेरे होंठ थरथराने लगे। अशोक अपना आपा खो बैठा। मेरे से लिपट पड़ा। उसके होंठ मेरे कांपते होठो से आ लगे। आग शान्त होने की बजाए और भड़क उठी। बाहर बादल गरज के साथ बरस रहे थे। उसके हाथ मेरे स्तनों को थाम चुके थे। ब्लाऊज आधा खुला हुआ था….मेरे बोबे बाहर छलक रहे थे। शखर के अन्दर आग सुलग उठी।
“मां…. मुझसे अब नहीं रहा जा रहा है….मेरा लण्ड चोदने के लिये बैचेन हो रहा है….” मेरे सामने ही उसने निर्लज्जता से अपने सारे कपड़े उतार डाले और नंगा हो गया। उसका मोटा और तगड़ा लण्ड देख कर मेरी चूत तड़प उठी। उसने अब मेरा ब्लाऊज उतार डाला और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया। मेरा पेटीकोट जमीन पर आ गिरा। उसका कड़कता हुआ लण्ड सीधा खड़ा तन्ना रहा था। मैं शरम के मारे सिमटी जा रही रही थी। पसीना पानी की तरह बह निकला…. अंततः मैं बिस्तर पर बैठ गई। उसका लण्ड मेरे मुख के करीब था। उसने और पास ला कर मुँह के पास सटा दिया। मैंने ऊपर देखा…. बाहर बिजली कड़की….शायद बरसात तेज हो चुकी थी।
“मां ….! ले लो लण्ड मुँह में ले लो….! चूस लो….! अपना मन भर लो…. !” उसने अपना लण्ड मेरे चेहरे पर बेशर्मी से रगड़ दिया। उसकी लण्ड की टोपी में से दो बूंद चिकनाई की छलक उठी थी।
“अशोक….! मेरे लाल….! ला दे दे….! ” मैं बैचेन हो उठी। मैंने उसके लण्ड की चमड़ी उपर की और लाल सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। और अपने मुँह में रख लिया। मैं लण्ड चूसने में अभ्यस्त थी….उसका सुपाड़ा को मैंने प्यार स्र घुमा घुमा कर चूसा। मन की भड़ास निकालने लगी। इतना जवान लण्ड…. कड़क….बेहद तन्नाया हुआ…. अशोक सिसकारियाँ भरने लगा।
“हाय मां…. ! क्या मेरा निकाल दोगी पूरा….! ” मैंने थोड़ा और चूस कर कर छोड़ दिया फिर अशोक को अपनी नीची निगाहों से इशारा किया। अशोक मुझसे लिपट गया। मेरा नंगा जिस्म उसकी बाहों में झूल गया। मेरा जिस्म अब आग में जल रहा रहा था। मैं बेशर्मी से अपने आपको उससे लिपटा रही थी। उसने मुझे प्यार से बिस्तर पर लेटाया। मैंने शरमाते हुए अपने पांव खोल दिये। अशोक ने मेरी टांगे खींच कर अपने मुख के पास कर ली । मेरी चूत खिल उठी….चूत के पट खुल गये थे….अब कुछ भी अन्दर समेटने को वो तैयार थी। उसने अपने होंठ मेरी चूत से सटा दिये।
मेरी चूत गीली हो चुकी थी। उसकी लपलपाती जीभ ने मेरी चूत को एक बार में चाट लिया और जीभ से मेरी योनि-कलिका चाटने लगा। बीच बीच में उसकी लम्बी जीभ मेरी चूत में भी उतर जाती थी। मुझे ऐसा सुख बहुत सालों बाद मिला था। मेरी चूत मचल उठी ….और मैंने अंगड़ाई लेकर अपनी चूत को और ऊपर उभार दिया। मैं अपने मन की पूरा करना चाहती थी। उसके दोनों हाथ मेरे बोबे को मसल रहे थे। मुझे तन का सुख भरपूर मिल रहा था। मैं अपने अनुसार ही अपना बदन अशोक से मसलवा और चुसवा रही थी।
“हाय रे….मेरे लाल…. ! तूने आज मेरे मन को जान लिया है…. ! हाय रे…. ! ला अब अब तेरे लण्ड को मस्त कर दूं…. !” मैंने उसे उठा कर सामने खड़ा कर दिया और उसका लण्ड अपने हाथो में ले लिया। मैंने उस पर खूब थूक लगाया और उसे मलने लगी….
“माँ चुदवा लो अब…. ! मुझसे नहीं रहा है…. ! देखो आपकी चूत भी कैसे फ़ड़क रही है…. !” मेरी बैचेन चूत का हाल उससे छुपा नहीं था।
अब मैं उसके लण्ड को मुठ मार रही थी।
“हाय क्या कर रही हो….! मेरा निकल जायेगा ना….!” पर मैंने उसे ओर जोर से मुठ मारने लगी।
“निकल जाने दे ना….! निकाल दे अब…. ! कर दे बरसात…. !” मुझे उसके लण्ड को झड़ते हुए देखना था और उसका स्वादिष्ट वीर्य का भी स्वाद लेना था।
उसका शरीर ऐठने लगा मैं समझ गई थी कि अब अशोक झड़ने वाला है….उसके लण्ड को मैंने और जोर से दबा कर मुठ मारी और उसका लण्ड अपने मुँह में डाल लिया। और लण्ड को जोर से दबा दिया।
“हाय मांऽऽऽऽऽ…. ! मेरा निकला…. ! गया मैं तो…. !” उसकी पिचकारी छूट पड़ी…. उसका वीर्य मेरे मुख में भरने लगा…. फिर से एक बार पुरानी यादे ताज़ा हो गई। सारा वीर्य मैंने स्वाद ले लेकर पी लिया।
“ये क्या…. ! आपने तो मेरा माल निकाल ही दिया…. !”
“तुमने कहा था ना…. ! अपना मन भर लो…. ! वीर्य का मजा कुछ ओर ही होता है…. ! फिर रात भर तो तुम यही हो ना…. ! प्लीज…. ऐसा मौका पता नहीं फिर मिले ना मिले….!” मैंने अब उसे समझाया।
अशोक हंस पड़ा। और मेरी बगल में लेट गया,” मां…. मुझे आपकी जैसी प्यारी सास कहां मिलेगी…. ! हम छुप छुप कर ऐसे ही मिलेंगे। देखना आपकी चूत कैसी मदमस्त हो जायेगी !”
“हां मेरे अशोक…. मैं भी तुम्हें बहुत प्यार दूंगी….! “
बरसात का एक दौर थम चुका था। मुझे पता था अशोक में अभी जवानी भरपूर है, कुछ ही देर उसका लण्ड फिर फूल जायेगा और अभी फिर से वो मुझ पर चढ़ जायेगा। जवान माँ चोदने को मिल रही है भला कौन छोड़ेगा।
अशोक को मैं अपने बेटे के समान मानती थी, आज उसने अपनी विधवा मां की तड़प जान ली थी और उसने मेरी दुखती रग को पकड़ लिया था। मुझे इस अजीब से रिश्ते से सनसनी हो रही थी। ये काम चोरी से करना था….और चोरी में जो मजा है वो और कहां।
मेरा हाथ अशोक के शरीर पर चल रहा था। उसका लण्ड फिर खड़ा हो चुका था। मेरी चूत तो चुदने के लिये पहले से तैयार थी…. ! पर अभी गाण्ड मराने का मजा और लेना था। एक बार झड़ने के बाद मुझे पता था कि अब वो देर से झड़ेगा। फिर पहले रस का भी तो आनन्द लेना था सो मुठ मार कर उसका पूरा मजा ले लिया था। बरसात फिर से जोर पकड़ रही थी। मैं उल्टी लेट गई…. और पांव खोल दिये। मेरे दोनों चूतड़ खिल उठे। बीच की मस्त दरार में एक फूल भी था। अशोक मेरी पीठ पर सवार हो गया। लण्ड का निशाना फूल था। खड़ा लण्ड दरार में घुस पड़ा, मोटे और लम्बे लण्ड का अहसास दोनों चूतड़ो के बीच होने लगा। एक लाजवाब स्पर्श और लण्ड का अससास….बहुत सुहाना लग रहा था और लण्ड ने अपने मतलब की चीज़ ढूंढ ली। मुझे उसका लण्ड मेरी दरार में अपनी मोटाई का अहसास करा रहा था।
मुझे लगा कि आज गाण्ड भी मस्त चुदेगी…. उसका सुपाड़ा मेरे फूल को दबा रहा था। थूक भरा उसका लण्ड फूल को चूमता हुआ अन्दर जाने लगा। मैंने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी। बहुत सालों बाद गांड चुद रही थी इसलिये थोड़ा दर्द हुआ। पर आनन्द का मजा कुछ और ही था। कुछ ही समय में उसका लम्बा लण्ड गाण्ड में पूरा जड़ तक बैठ गया था। मैं अपनी कोहनियो पर हो गई थी। मेरे दोनों बोबे नीचे झूल रहे थे।
अब अशोक ने भी अपनी कोहनियो का सहारा ले कर अपनी हथेली से मेरे बोबे को अपने हाथों में ले लिया। पीछे से उसकी कमर चलने लगी। मेरी गाण्ड चुदने लगी। मैं आनन्द से भर उठी…. उसके धक्के तेजी पकड़ने लगे। मैं मदहोश होती जा रही थी। अशोक के शरीर का भार मुझे फूलों जैसा लग रहा था। कमर उठा कर वो मेरी गाण्ड को सटासट पेल रहा था। मेरा जिस्म वासना में लिपटा हुआ था। उसका हर धक्का मुझे अपनो सपनों को पूरा करता नजर आ रहा था। कुछ देर पेलने के बाद उसने अपना लण्ड निकाल लिया। मैंने भी आसन बदला….अब मुझे भी अपनी चूत को गहराई तक चुदवाना था। इसलिये मैंने अशोक को नीचे लेटाया और उसके खड़े लण्ड पर बैठ गई। लण्ड को चूत में डाला और एक ही बार में जड तक घुस डाला। और दर्द से चीख पड़ी। सालों बाद चूत सिकुड़ कर तंग हो गई थी। सो ्दर्द का अहसास हुआ। मेरे झूलते हुये बोबे उसने पकड़ लिये और मसकने लगा। चूंचक को खींचने लगा। मैं उस पर लण्ड पर बैठ गई और अपनी कमर चलाने लगी। ऊपर से चुदने में गहरी चुदाई हो जाती है।
उसका सुपाड़ा भी फूल कर कुप्पा हो रहा था। उसने मेरे चूतड़ दबा कर अब नीचे से झटके मारने चालू कर दिये। उसके झटके मुझे अब चरम सीमा पर ले जा रहे थे….मेरी चूत उसके लण्ड को गहराई तक ले रही थी….गहरी चुदाई से अन्दर लगती भी जा रही थी पर मैं ऐसा मौका नहीं छोड़ने वाली थी। पर अशोक अब चरमसीमा पर पहुंचने लगा था। उसने अब मुझे दबा कर नीचे पलटी ले ली। और मेरे ऊपर चढ़ गया।
उसके धक्के बढ़ गए…. मेरा जिस्म भी अब उत्तेजना की सीमा को पार करने लगा। मेरे चूतड़ उछल उछल कर उसका साथ बराबरी से दे रहे थे….वो लण्ड पेले जा रहा था…. मेरा कस बल सब निकलने वाला था….
“हाय रेऽऽऽ ….! चोद दे रे …. ! मै मरी…. ! हय्…. ऊईईईऽऽऽअऽऽ….! मैं गई…. ! लगा रे…. ! जोर से लगा रे….!”
“आह्ह्ह्ह्….मेरा भी निकला रे…. ! मांऽऽऽ हाय्…. !” उसके धक्के बेतहाशा तेज होते गये…. पर मैं…. झड़ने लगी…. उसके धक्के चलते रहे और मैं झड़ती रही…. मेरी सारी तमन्नाये पूरी हो चुकी थी।
“हाय्…. ! मेरा निकला रे…….. ! मैं गया….आह्ह्ह !”
“निकाल दे अपना रस बेटा…. निकाल दे…. ! झड़ जा….! आजा मेरे सीने से लग जा….मेरे राजा !” अशोक थोड़ा सा कसमसाया और उसके लण्ड ने अपनी पिचकारी छोड़ दी। अपना पूरा जोर लगा कर मेरी चूत अपना रस भरने लगा। जोर लगाता रहा…. झड़ता रहा और निढाल हो कर मेरे ऊपर ही लेट गया। फिर धीरे से साईड में आ गया। हम दोनों लम्बी लम्बी सांसें भरते रहे….फिर अशोक मुझसे लिपट कर लेट गया।
“मां…. आप बहुत दिनों से व्याकुल थी ना !”
” हां मेरे लाल…. ! तुम लोगों को देख कर मेरे मन में भी अरमान जाग उठे….एक आग लग गई तन में…. मुझे भी आज जैसी भरपूर चुदाई चाहिये थी।”
“आप तो सच में चुदाई की कला जानती हैं…. सब तरफ़ से ….जी भर कर….चुदवा लिया आपने….!”
मैंने अपना एक चूचुक उसके मुँह में घुसेड़ते हुए कहा,” देख स्वर्णा को पता नहीं चलना चाहिये…. और अपनी चुदाई भी ऐसी ही चलनी चाहिये….!”
“हाँ माँ जी….माँ चोदने का मजा ही अलग होता है….! अब लोग मुझे मादरचोद कहेंगे ना !” मैं जोर जोर से जी भर कर हंसी….चुदाई के बाद मेरा मन हल्का हो गया था…. मेरा बदन खुशी से खिलने लगा था। मेरे में एक नई उमंग आ चुकी थी…. अब मैं पूरी बेशर्मी के साथ अशोक के रह सकती थी….चुदा सकती थी…. मेरे बदन में जवान लड़कियों सी चंचलता…. और फ़ुर्तीलापन आ गया था…. मैंने अपने टांगें फिर से चौड़ी कर दी….
“आओ अशोक….फिर से चढ़ जाओ मेरे ऊपर…. बरसात बिलकुल बन्द हो चुकी थी ….पर ऊपर वाले ने मेरे ऊपर खुशियों बरसात कर दी थी…. Hindi Sex Stories
हाय ! मेरा नाम मुकेश है। मैं 22 साल 5’8 ” का लड़का हूं। मेरे Sex Stories उसका साईज़ 7″ है। आज मैं आपको अपनी एक ट्यूशन वाली स्टूडेन्ट की चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं। मैं कंप्यूटर साइंस स्टुडेंट हूँ, मैं पार्ट टाइम के लिए टूशन पढाता हूँ। 2 साल पहले की बात है उस समय मेरी एक स्टुडेंट थी सिया, साली बहुत सेक्सी थी, कहने को 10वी में थी मगर बूब्स का साइज़ देख कर लगता था कि पूरी जवान है, चलती थी तो कयामत ढा देती थी, वैसे ये बात मेरे दोस्त बोलते थे मैंने उसे ऐसी नज़र से कभी नहीं देखा था
एक दिन उसे मैथ्स में प्रॉब्लम आ गया, बेचारी ने सारी रात सोल्व करने कि कोशिश कि मगर झांट सोल्व नहीं कर पाई, उसने दूसरे दिन मुझसे वोह प्रॉब्लम पूछा मैंने एक ही बार में सोल्व कर दिया वोह पूरी इम्प्रेस हो गई, उसको हाव भाव बदलने लगे, वैसे मैं अपने स्टूडेंट्स से क्लो्ज रहता हूँ पर वोह कुछ ज्यादा ही क्लोज हो रही थी.
एक दिन उसने मुझसे कहा- सर मुझे आपसे कुछ कहना है.
मैंने कहा- बोलो सिया क्या बात है?
उसने कहा- सर अकेले में बात करनी है.
मैंने कहा- ठीक है छुट्टी के बाद रुक जाना.
उसकी आँखे चमक गई, मेरे और भी स्टूडेंट्स थे पर उनमे सबसे बड़ी सिया ही थी. सबके जाने के बाद सिया ने मुझसे कहा सर अगर मैं आपसे कुछ कहूं तो आप बुरा तो नहीं मानेगे, मैंने कहा पहले कहो तो, उसने कहा पहले प्रोमिस करिए कि बुरा नहीं मानेंगे मैंने कहा अच्छा बाबा नहीं मानूगा अब बोलो उसने कहा सर आप… आप .मुझे…अच्छे लगते है.
मैं चौंक गया, फिर सोचा मस्त माल मिल रही है छोड़ा क्यों जाए मैंने कहा वैसे मैं भी तुम्हे पसंद करता हूँ उसके बाद हमारी लव स्टोरी शुरू हुई (ऐसा वो समझती थी ), पर मुझे तो बस अपनी चूत की प्यास बुझानी थी एक दिन मैंने मौका देख कर उसे अकेले में अपने घर बुलाया, घर के सभी लोग बाहर गए थे, और 2 -3 घंटे तक उनके आने की उम्मीद नहीं थी, हम काफी करीब आ गए थे और मैंने उसे सेक्स करने के लिए मना लिया था आज अच्छा मौका था.
डोर बेल बजा मैंने दरवाजा खोला तो वो खड़ी थी जींस और टॉप में क़यामत लग रही थी, मैंने उसे अन्दर बुलाया और बोला आई लव यू सिया और उसे बाँहों में भर लिया और लिप किस करने लगा वोह भी मेरा पूरा साथ देने लगी मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और चूसने लगा, ये मेरा पहला सेक्स था,
उसके बाद मैंने उसके एक बूब को पकड़ कर दबाया, इतना मजा आया की क्या बोलूं, उसके बाद मैं अपना हाथ जींस के ऊपर ही उसके चूत पर फेरने लगा अब वोह गरम होने लगी, मैंने सबसे पहले उसका टॉप उतारा अन्दर ब्रा थी, उसके बाद जींस उतारी, फिर उठा कर बिस्तर पर ले गया वहाँ अपनी जींस और शर्ट उतार दी उसके बाद मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसके मस्त गोरे गोरे टमाटर जैसे बूब्स को आजाद कर दिया.
उसके बाद मैं उसे दबाने लगा वोह सिसकियाँ ले रही थी अह ह्ह्ह्ह्ह्छ…ऊओअया अआः…
मुकेश बहुत मजा आ रहा है जान, फिर मैंने पैंटी उतारी और अपना अंडरवियर भी, वोह मेरा लंड देख कर खुश हो गई उसके बाद मैंने एक ऊँगली उसके बूर में डाल दी वोह बोली हाई…मैं मर गई उसके बाद मैं ऊँगली करने लगा, एक हाथ से ऊँगली कर रहा था और एक से उसकी बूब्स दबा रहा था.
अब वोह पूरी तरह गरम हो गई थी मैंने उसके बूर से ऊँगली निकली और खड़़ा हो गया वोह भी घुटनों के बल बैठ गई मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया फिर उसने थोडी देर तक मेरा लंड चूसा फिर मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा, दोनों ही वर्जिन थे इसलिए किसी का गिरा नहीं फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक धक्का मारा मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया.
वोह चिल्लाई आआअह ह्ह्ह्ह्ह्छ ह्ह्ह। ..मुकेश… धीरे .
उसके बाद मैंने धीरे धीरे पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था उसके बाद मैं लेट गया और वोह अपनी चूत मेरे लंड पर सेट करके बैठ गई अब मैं उसे जोर जोर से चोदने लगा जब मैं झड़ने वाला था तो रुक गया और उसे के बाद गोद में बिठा के फिर से मारने लगा करीब 1 घंटे तक हमने चोदा -चोदी का खेल खेला मेरी चूत की प्यास उस दिन ठंडी हो गई. उसके बाद हम दोनों झड़ गए।
उसके बाद जब कभी भी हमे मौका मिला तो हमने होनीमून मनाया, मेरे पढ़ाने के कारण उसे 10वी में 90% मार्क्स मिले और वोह अब एक मेडिकल कॉलेज में है जब भी छुट्टी में आती है तो हम पूरा एन्जॉय करते हैं। Sex Stories
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पंचम भाग से आगे : जब मैं Antarvasna टॉयलेट से लौट रही थी तो मैंने सोचा कि मम्मी के बेडरूम में झांक कर देखा जाए कि यहाँ क्या चल रहा है !
मैंने देखा कि फूफा जी मम्मी को कुतिया की तरह बहुत तेजी से चोद रहे थे और मुँह से अजीब अजीब सी आवाजें निकाल रहे थे, साथ ही साथ उत्तेजना में गाली भी बक रहे थे।
इतने में मम्मी की नजर मेरे ऊपर पड़ी। मैं तुरन्त खिड़की से भागी लेकिन मम्मी ने आवाज दे कर मुझे अन्दर बुला लिया।
दरवाजा खुला था। मैं अन्दर चली गई।
फ़ूफा जी लगातार मम्मी को आँख बन्द कर के चोदे जा रहे थे। मेरी उपस्थिति का उन्हें पता ही नहीं चला। मम्मी ने मुझे धीरे से बगल में बैठने के लिए इशारा किया और मैं उनके बगल में बैठ गई। लेकिन शायद फ़ूफा जी को कुछ आभास हुआ और उन्होंने अपनी आँखें खोल दी।
मुझे अपने सामने नंगी देख कर बोले- तुम कब आई? चलो अच्छा है, अब मैं झड़ने वाला हूँ ! तुम इसे पी लो…
यह कहते हुए उन्होने मम्मी के भोसड़े से अपना लंड बाहर निकाला और खुद बेड से उतर कर खड़े हो गए। मैं घुटनों के बल उनकी टांगों के बीच बैठ कर हुंकार मारते हुए लंड को एक हाथ से पकड़ कर, गप से अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और दूसरे हाथ से मैं अपनी चूत को सहलाने लगी। मेरी चूत अभी भी पूरी तरह गीली थी। मैं अपनी दो उंगलियों को चूत में डाल कर अन्दर-बाहर करने लगी। इधर फूफा जी कुछ ही पलों में अपना पूरा लंड मेरे मुंह में घुसेड़ते हुए झड़ने लगे, मैं उनका वीर्य पीने लगी। जब उनका लंड झड़ना बन्द हुआ, तब मैंने उनका लंड मुँह से बाहर निकाला और भाग कर मैं अपने कमरे में आ गई।
यहाँ प्रदीप और विशाल अपना अपना लंड खड़ा किए हुए सहला रहे थे। मुझे देखते ही विशाल बोला- इतनी देर से तुम कहां थी?
कुछ नहीं… दरअसल फ़ूफा जी मम्मी को चोद रहे थे तो मम्मी ने मुझे उनका वीर्य पीने के लिए बुला लिया था, इसलिए थोड़ी देर लग गई।
विशाल बोले- ओह… यह बात थी। खैर उसी तरह से तुम मेरी टांगों के बीच डॉगी स्टाइल में आ जाओ। तुम्हारी चूत रंवा हो चुकी है और अब प्रदीप तुम्हें हचक कर चोदेगा।
मैंने वैसा ही किया जैसे विशाल ने कहा। प्रदीप अपना हलब्बी लंड हाथ से पकड़े मेरे चूतड़ों के पीछे पहुँच गया और उसने एक साथ अपनी तीन उंगलियों को मेरी चूत में घुसेड़ दिया। मैं एकदम से उचक गई। इसकी मुझे कतई आशा नही थी कि प्रदीप पहले उंगलियों से चोदेगा। वो अपनी तीनों उंगलियों से कुछ देर चोदता रहा। मैं विशाल का लंड चूसे जा रही थी।
फिर प्रदीप ने चार उंगलियों से चोदना शुरू किया। मुझे थोड़ा अटपटा लग रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था। अब मेरी चूत पूरी की पूरी गीली हो चुकी थी मेरी चूत से पानी बिस्तर पर टपकना शुरू हो गया था, शायद प्रदीप के लंड के स्वागत के लिए तैयार थी। यह बात प्रदीप भी जान गया था, तभी उसने उंगलियों से चोदना बन्द कर अपने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और अपने खड़े लंड का सुपारा मेरी चूत के गुलाबी होठों पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा। मेरे पूरे बदन के रोएँ खड़े हो गए इस एहसास से कि जब प्रदीप अपना हलब्बी लंड घुसेड़ेगा तो कैसा लगेगा। मैं यह सोच ही रही थी कि तभी लंड का सुपारा मेरी चूत में घुसा। मुझे लगा कि कोई बहुत मोटा लट्ठ मेरी चूत को फाड़ कर अन्दर घुस रहा हो।
मैं दर्द के मारे कराहने लगी, प्रदीप बोले- बस रश्मि जान ! थोड़ा सा दर्द सह लो, अभी तुमको आराम मिल जायेगा।
मैं करती तो क्या करती? प्रदीप मेरी कमर को कसकर पकड़े हुए थे और विशाल मेरा सिर को पकड़ कर अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़े हुए थे। मेरे मुँह से तो कराह की आवाज तक ठीक से नहीं निकल पा रही थी, मैं तो दोनों के बीच में फंसी थी। मेरी मजबूरी थी दर्द सहना।
लेकिन थोड़ी ही देर में मेरा दर्द कम हो गया क्योंकि अब प्रदीप का सुपारा मेरी चूत में थोड़ा थोड़ा अन्दर बाहर हो रहा था और बीच बीच में प्रदीप अपने लंड को मेरी चूत की थोड़ी गहराई में झटके से पेल देता था, फिर जल्दी से पूरा लंड बाहर निकाल लेता था। वह मुझे बड़े आहिस्ता आहिस्ता चोद रहा था अब मुझे धीरे-धीरे मजा आने लगा था। साथ ही साथ मैं विशाल के लंड को भी चूस रही थी। मैंने विशाल के लंड से अपना मुँह हटाया और प्रदीप से बोली- प्रदीप ! मुझे दर्द नहीं हो रहा है अब तुम अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल सकते हो।
यह सुनते ही प्रदीप ने एक झटके में अपना पूरा 8 इन्ची लंड मेरी चूत में पेल दिया। एक पल के लिए मुझे हल्का सा दर्द महसूस हुआ। इसके बाद तो चुदाई का मजा आने लगा। प्रदीप लगातार पूरी गति से मुझे चोद रहा था और उसी गति से मैं अपनी गाण्ड आगे-पीछे कर के उसका साथ दे रही थी। दोनों लोग मुझको कस कर चोदते रहे, एक मुँह को, और दूसरा मेरी चूत को। इस बीच मैं कम से कम कम 7-8 बार झड़ चुकी थी।
करीब 30 मिनट के बाद विशाल ऐंठने लगा और वह मेरे मुँह के अन्दर ही झड़ गया। मैंने उसका वीर्य पी लिया। इधर प्रदीप ने भी अपनी स्पीड और बढ़ा दी। फिर एक झटके से अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल कर बोले- मैं झड़ने वाला हूँ ! मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो।
मैं बिल्कुल उल्टा घूम कर अपनी चूत विशाल की तरफ कर के प्रदीप का लंड, जोकि चुदाई के बाद और भी ज्यादा मोटा हो गया था, अपने मुँह में लेने का प्रयास किया लेकिन सुपाड़ा चुदाई के बाद इतना बड़ा हो गया था कि मैं उसको अपने मुँह में नहीं ले सकी सिर्फ चाट चाट कर वीर्य पीना पड़ा।
उधर जैसे ही विशाल ने मेरी चूत को देखा तो चिल्लाया- अबे प्रदीप, तूने तो रश्मि की चूत को भोसड़ा बना दिया। देखो तो इसकी चूत बिलकुल कमल की तरह खिल गई है।
प्रदीप मुस्कराने लगे और बोले- यार मैं जिसकी एक बार ले लेता हूँ उसकी बुर जिन्दगी भर के लिए भोसड़ा बन जाती है। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है यार ! मेरा लंड ही ऐसा है, मैं क्या करूं।
मैंने सोचा- देखें ! मेरी चूत प्रदीप की एक चुदाई से भोसड़ा कैसे बन गई।
मैं तुरन्त बेड से उतर कर ड्रेसिंग मिरर के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गई और अपनी दोनों टागें ऊपर उठा कर अपनी चूत को शीशे में देखते ही मेरे मुँह से निकला- ओह माई गॉड ! यह तो वाकई एक खूबसूरत भोसड़ा बन गई है।
अभी भी इसके दोनों लब दरवाजे की तरह दाएँ बाएँ खुले हुए थे और बीच में एक बड़ा सा दो इन्ची व्यास का छेद नजर आ रहा था। मैंने अपनी दो उंगलियों को उसमें डाला। मुझे कुछ पता ही नहीं चला कि मेरी भोसड़े में दो उंगलियां हैं !
मुझे बहुत खुशी हुई।
इसके बाद मैं उठ कर बेड पर दोनों के साथ लेट गई।
उस रात उन दोनों ने मेरी दो बार और चुदाई की। करीब तीन बजे हम सब थक कर वैसे ही नंगे सो गए।
कहानी अभी बाकी है दोस्तो ! Antarvasna
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