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मुझे बड़ी उमर की औरतें Hindi Sex Stories बहुत पसंद हैं। अक्सर ऐसी औरतें आसानी से नही मिलतीं। काफ़ी मेहनत से मिलती हैं। यह एक सच्ची घटना है।
मैं पुणे मे पेईंग गेस्ट बनकर एक घर में रहता था। घर के मालिक काफ़ी अच्छे थे लेकिन उनकी पत्नी हमेशा अकेली और उदास रहती थी। उसका नाम राधा था। जैसा नाम वैसे ही रूप। भगवान ने फ़ुर्सत में उसको बनाया था। बला की ख़ूबसूरती थी उसमें। उमर कोई 40-45 होगी। लेकिन चेहरे से मदमस्त मदमाती नशीली लगती थी जो कि रस से भरी हुई हो और उनके अंग-अंग से रस छलकता था।
उसके पति को उनमें कोई रूचि नहीं थी, ऐसा मुझे अक्सर लगता था। एक दिन राधा ने मुझे रात के खाने के लिए आमंत्रित किया। मैंने अपने व्यस्त होने का नाटक किया लेकिन उसके आग्रह करने पर मैं मान गया। दूसरे दिन शाम को मैं जल्दी ही ऑफिस से आ गया और मौक़े का इंतज़ार करने लगा।
रात के करीब साढ़े आठ बजे राधा ने मुझे खाने के लिए आवाज़ दी। मैंने कहा कि 5 मिनट में आता हूँ।
मैंने राधा के लिए एक प्यारा सा फूलों का गुलद़स्ता खरीदा था जो मैं लेकर उसके पास चल दिया। वहाँ पहुँचते ही मैंने पूछा कि अंकल (मकान मलिक) किधर हैं। इस बात पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं समझ गया कि आज समय मुझ पर मेहरबान है। उन्होंने मुझे डिनर टेबल की तरफ इशारा कर बैठने को कहा और ख़ुद दूसरे कमरे में चली गईं।
डिनर टेबल कई तरह के पकवानों से सज़ा हुआ था। पर दोस्तों मुझे तो कोई और पकवान चाहिए था। थोड़ी देर मे वो एक पारदर्शी नाइट-गाउन पहन कर बाहर आई और मेरे सामने की कुर्सी पर बैठ गई।
उनको देखकर मेरा पप्पू सलामी के लिए अचानक तैयार हो गया। अचानक लण्ड खड़ा होने से मुझे बैठने मे दिक्कत होने लगी। ऐसा देखकर राधा ने पूछा कि क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं !
और फिर वो मुस्कुराने लगी और मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई और मेरे सिर पर हाथ फेरने लगी, ऐसा करने पर मेरी साँसें तेज हो गईं।
सिर पर हाथ फेरते हुए उसने अचानक मेरे कानों को भी छू लिया। उसी समय मैंने उसके नाज़ुक हाथों को पकड़ लिया और उन हाथों को अपने होंठों से चूम लिया। ऐसा करते ही उसकी साँसें तेज़ हो गईं, बिना देरी किए मैं कुर्सी से उठा और उसको अपनी बाहों मे भर लिया।
वो भी मुझसे कस कर चिपक गई और फिर मैंने अपने होंठ उनके नर्म होंठों पर रख दिए। उसने मुझे और मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया। मेरे हाथ उनके कबूतरों की तरफ बढ़ गए जो कि सदियों से किसी चाहने वाले के लिए बेताब थे।
मैंने बिना देर किए, उनको आज़ाद किया और मेरे हाथ उनसे खेलने लगे। उसने भी अपने हाथ मेरे पप्पू की तरफ बढ़ाए। मैंने अपने पैंट की ज़िप खोल दी। ऐसा करते ही मेरा पप्पू उसको सलामी देने को तैयार हो गया क्योंकि मैंने अंडरवीयर नहीं पहन रखी थी।
उसने मेरे पप्पू की सलामी ली और उसको नीचे झुक कर अपने मुँह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे वो जन्मों की प्यासी हो। मैं भी उनके कबूतरों को दाना खिलाने लगा। थोड़ी ही देर में उन्होंने मेरी पैंट नीचे खींच दी और मेरे बदन से पैंट को अलग कर दिया।
अब पप्पू पूरी तरह से आज़ाद होकर उन होंठों का गुलाम हो गया। वह धीरे-धीरे मेरे पप्पू के चमड़े को ऊपर नीचे करने लगी। 5 मिनट में मुझे ऐसा लगा कि मैं किसी ज़न्नत में पहुँच गया हूँ।
मेरा पप्पू उसके मुख का स्वाद ले रहा था, अचानक उसने मुझसे कहा कि बेडरूम में चलो।
मुझे भी यही चाहिए था। वहाँ पहुँचते ही मैंने उसके गाउन को उतार दिया और उसके मख़मली ज़िस्म का दीदार करने लगा।
ऐसा करते देख कर उसने मुझसे कहा कि बुद्धू ऐसे ही देखते रहोगे या मुझे कुछ करोगे भी। आज की रात मैं तुम्हारी हूँ और मुझे प्यासमुक्त करो।
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाकर बेड पर लिटा दिया और फिर दोनों 69 की पोज़ीशन मे आ कर एक दूसरे के जननांगों को चाटने लगे। मैंने मेरी पूरी जीभ उनकी प्यारी सी पप्पी मे घुसा दी जिससे उनक पूरा बद़न सिहर उठा और उसने मेरे पप्पू को अपने मुख से अलग कर दिया और अजीब क़िस्म की आवाज़ें निकालने लगी। इसके बाद मैं और तेज़ी से उसके पप्पी की पूजा करने लगा।
इसी दौरान वो दो बार झड़ गई और मैंने उसका सारा रस पी लिया। फिर भी रस रिस-रिस कर पप्पी से बाहर आ रहा था। वो मुझे ज़ोर-ज़ोर से गालियाँ देने लगी और कहने लगी की मुझे तृप्त कर।
अब समय आ गया था कि मैं उसकी पप्पी का मिलन अपने पप्पू से करवा दूँ। पप्पू को मैंने पप्पी के मुख पर रखने से पहले राधा के मुख-चोदन का आनंद लिया और फिर पप्पी के मुख पर रख कर धीरे से एक हल्का धक्का दिया ऐसा करने से पप्पू थोड़ा अंदर गया लेकिन पप्पी टाइट थी, इस वजह से राधा दर्द से चिहुँक उठी।
उसी समय मैंने अपने हाथों से राधा के कबूतरों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया और पप्पू को भी धक्का देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पप्पू पप्पी में समा गया। पूरी तरह से पप्पी में समाने के बाद राधा ने अपनी चिकनी चूतड़ उपर उठा-उठा कर पप्पी के पप्पू से मिलन की खुशियाँ मनाने लगी।
बीस मिनट तक ऐसा करते रहने के बाद मेरा पप्पू अपनी मलाई निकालने की तैयारी करने लगा तो मैंने राधा को पूछा की वो पप्पू की मलाई पप्पी को खिलाएगी या खुद खाएगी। उसने कहा कि उनको पप्पू की मलाई खानी है, फिर मैंने मेरे पप्पू को पप्पी से जुदा कर राधा के मुख में डाल दिया और सारी मलाई उनके मुख में आ गई और उसने सारी मलाई एक ही झटके मे चट कर ली।
काफ़ी देर तक मैं और राधा नंगे बदन बिस्तर पर लेटे रहे और आधे घंटे बाद बाथरूम में जाकर साथ मे नहाया और उस दौरान भी पप्पू-पप्पी एक बार फिर मिल गए। बाद मे साफ हो कर हमने साथ में खाना खाया और फिर साथ में बेडरूम मे चले गये।
उस रात हमने 5 बार रसपान किया और करवाया। जब तक मैं पुणे में रहा उसको अच्छी सेवा देता रहा। आज भी मैं उसे बहुत याद करता हूँ।
आपकी बेबाक टिप्पणी का स्वागत है। ग़लतियों के लिए माफ़ करेंगे। Hindi Sex Stories
मेरा नाम आयुष है.. मैं लखनऊ में रहता हूँ।
जब मैं 18 साल का हुआ था.. मेरा भी लण्ड मुझे परेशान कर रहा था और मैं काफ़ी सालों से मुठ मार रहा था। एक बार मेरे बाप ने मुझे मुठ मारते पकड़ लिया था.. बहुत मार पड़ी थी यार। मैं बचपन से ही बड़ा मनचला रहा हूँ।
चलो ये सब बाद में.. अब कहानी पर आते हैं।
एक बार मेरे घर पर मेरे दूर के रिश्ते के चाचा चाची आए थे, जब मैंने चाची को देखा तो मेरी तो सांस ही रुक गई।
क्या कयामत थी वो.. मेरा तो दिल किया इसको यहीं खड़े-खड़े चोद दूँ।
मैंने ऐसा किया भी.. उसको वहीं खड़े-खड़े आँखों से ही चोद दिया।
वो भी समझ गई कि मैं उसको आँखों से चोद रहा था.. पर उसने कुछ बोला नहीं।
रात को जब हम सब खाना खाकर सोने की तैयार करने लगे.. तभी ममी ने मुझे बताया कि वो दोनों मेरे ही कमरे में रहेंगे.. मुझे बड़ी खुशी हुई।
साथ में दु:ख भी था कि चाचा भी साथ में हैं।
ये तो वही बात हो गई कि हाथ में आया.. पर मुँह को ना लगा।
हम सोने चले गए।
चाचा तो कमरे में जाते ही सो गया.. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, फिर भी आँखों में चाची को चोदने के सपने ले सो गया।
रात को मेरी आँख खुल गई.. तो मैंने पाया कि कमरे में अंधेरा था और मेरे ऊपर से एक हाथ बार-बार आ-जा रहा था। मैंने महसूस किया कि वो हाथ चाचा का था.. जो बार-बार चाची को छू रहा था। चाची बार-बार उसको हटाने की कोशिश रही थीं। काफ़ी देर तक कोशिश करने पर भी जब चाचा को लगा कि दाल नहीं गलने वाली.. तो वो सो गए।
अब तक मेरी नींद तो उड़ गई थी। मैं काफ़ी देर तक अपने आपको रोकता रहा.. पर नहीं रोक पाया और मेरा हाथ चाची के ऊपर चला गया। मैं चाची की छाती दबाने लगा.. आह्ह.. चाची के क्या ठोस मम्मे थे।
मैं काफ़ी देर तक चाची के मम्मों को दबाता रहा।
फिर मेरा हाथ धीरे-धीरे नीचे की तरफ जाने लगा.. जब मेरा हाथ उनके पेट पर गया.. तो देखा उस पर एक ग्राम भी एक्सट्रा चर्बी नहीं थी.. बिलकुल सपाट और मुलायम था।
मैं और नीचे गया तो उनकी सलवार का नाड़ा मेरे हाथ में आ गया.. मैंने बड़ी सफाई से उसको खोल दिया और अपना हाथ उनकी सलवार में डाल दिया।
उनकी चूत पर थोड़े-थोड़े बाल थे.. ज़िनको छूकर मेरा तो दिल मचल गया। मैंने थोड़ी देर तक उन झांटों को सहलाया फिर नीचे की ओर जाने लगा उनकी चूत के दाने को थोड़ी देर तक बड़े प्यार से सहलाता रहा।
जब मेरा हाथ और नीचे गया.. तो मेरी एक उंगली उनकी चूत में चली गई, वहाँ गीला सा लगा, मैं अपनी उंगली को उनकी चूत में घुमाता रहा।
इस पर भी जब चाची कुछ नहीं बोलीं.. तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।
तब तक मेरे लण्ड का बुरा हाल हो चुका था।
दोस्तो, ये डर और उत्तेजना का मिला-जुला अहसास होता है.. इसका मुकाबला तो बड़े से बड़ा चोदू भी नहीं झेल सकता.. जो मैं उस वक्त झेल रहा था।
मुझे जब पूरा विश्वास हो गया कि चाची कुछ नहीं बोलने वाली हैं.. तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने चाची की पीछे से सलवार को इतनी नीचे कर दी कि वो मेरे लण्ड और चाची की चूत के बीच दीवार ना बन पाए।
मैंने अपना लण्ड भी अपनी पैंट की ज़िप खोलकर बाहर निकाल लिया और चाची की चूत में पीछे से ही डालने लगा।
मेरे काफ़ी देर कोशिश करने पर भी लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था।
एक तो चोदने को पहली बार चूत मिली थी.. ऊपर से यह डर कि कहीं चाची जाग ना जाएं.. उससे भी बड़ा कि उस चूत का मालिक भी बगल में ही सोया है।
आप समझ सकते हैं कि ऐसा करने के लिए कितना बड़ा ज़िगरा चाहिए।
मेरी भी गाण्ड फटी हुई थी। इसी चक्कर में.. मैं अपना लण्ड चाची की चूत में नहीं डाल पाया और बाहर ही ढेर हो गया। मेरी तो कलेजा गले में आ गया कि ये क्या हो गया।
मैंने अपने ऊपर थोड़ा काबू किया और चाची की सलवार को ऊपर करके दूसरी तरफ मुँह करके सो गया.. क्योंकि मुझे खुद पर इतनी शरम आ रही थी कि चूत मिली.. तो चोद नहीं पाया और लण्डबाज बना फिरता हूँ। शरम के मारे बाथरूम में भी नहीं जा सका.. वहीं पड़े-पड़े कब नींद आ गई.. पता ही नहीं चला।
आप सब भाभियों और औरतों को चूतों Indian Sex Stories को मेरे नौ इंच के लौड़े का खड़े हो कर प्रणाम !
आप सबने मेरा पहला सेक्स, मेरी सच्ची कहानी को बहुत पसंद किया, मुझे बहुत सारी मेल भी आई, बहुत अच्छा लगा कि आप सबने मेरी कहानी को बहुत पसंद किया। वैसे मैं पंजाब का रहने वाला हूँ लेकिन परिवार शिफ्ट होने की वजह से मुझे भी दिल्ली आना पड़ा। मैं दक्षिण-दिल्ली में रहता हूँ। अब मैं आपको एक और सच्ची कहानी बताना चाहता हूँ, जो तब की है जब मैं दिल्ली में नया-नया आया था, हमने नया घर लिया था, आस-पास का माहौल बहुत अच्छा था, आस-पास के घर सरदारों के थे, मेरा घर वालों का दिल लगा रहता था, सब लोगों से अच्छी दोस्ती हो गई थी मेरी माता की।
मैं घर से बहुत कम बाहर निकलता था, मेरे घर के आस पास बहुत लड़कियाँ रहती थी पर मैं बहुत शरमीला था इसलिए मैं सिर्फ़ उन्हें दूर से निहार ही सकता था और कुछ नहीं कर सकता था। कुछ महीनों के बाद मेरी जॉब पास में ही (ओखला) में एक इंटरनॅशनल कॉल सेंटर में लग गई थी। मेरी जॉब नाइट शिफ्ट की थी और सारा दिन मैं घर में रहता था। हर रोज़ मैं शाम को छः बजे के बाद ही उठता था।
एक दिन मेरी छुट्टी होने की कारण मैं थोड़ा जल्दी उठा तो देखा घर के कोई लड़की मेरी माता से बात कर रही है, बाहर आया तो देखा वो एक शादीशुदा औरत थी। क्या मस्त चीज़ थी यार ! वो देख कर खड़ा हो गया उसे। ज़्यादा से ज़्यादा पच्चीस साल की होगी, क्या मस्त फिगर थी ! उसके स्तन होंगे कोई 34 इंच के, कमर होगी 30 इंच और उसकी गाण्ड 36 इंच और उभरी हुई गाण्ड देख कर कोई भी पागल हो जाए।
मैने अपनी माता से पूछा तो वो हमारे घर के सामने वाले घर मे किराए पर रहती थी, उस का पति मेट्रो में काम करता था वो भी नाइट शिफ्ट। मैं उसके बारे मैं ही सोच रहा था तभी वो फिर मेरे घर आई और मुझे अपना देवर बोल कर बातें करने लगी।
अब मैं उसके लिए हर रोज़ जल्दी उठ जाता था, वो रोज़ मेरे घर आती और हम बातें करते, कभी कभी मैं उसे छू भी लेता था, हर रोज़ बातें करता रहता था तो वो मेरे से खुलने लगी, रोज़ मज़ाक करती मेरे साथ मेरी गर्ल-फ्रेंड के बारे मैं पूछती तो मैं मना कर देता कि मेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है।
तो वो मेरा मज़ाक उड़ाती !
मैं बोलता- आप मेरे गर्ल फ्रेंड बन जाओ।
कई बार तो मैं उसके बारे में सोच के मूठ मार लेता था। कई बार वो मेरे साथ बाज़ार भी जाती थी, मुझे वो बहुत अच्छी लगने लगी थी। मैं रोज़ उसकी चूत मारने की सोचता था।
अब गर्मियाँ शुरू हो गई थी। कई बार मैं घर में निकर पहन कर ही सो जाता था।
उस दिन मेरी माता कहीं गई हुई थी शाम तक आने का बोल कर। मैं सोते हुए भी उसी के बारे में सोचता था। मुझे पता नहीं चला कि कब वो मेरे घर में आ गई और मेरे ऊपर से चादर उतारने लगी, उतारते हुई उसका हाथ मेरे आधे खड़े लौड़े पर लग गया। वो एक दम धक से रह गई। मैं थोड़ी नींद में था, उसने अपना हाथ मेरी निकर के ऊपर ढाल लिया और मेरे लौड़े को महसूस करने लगी। अब मेरा लौड़ा भी तैयार होता जा रहा था। मेरी आँखों से नींद बहुत दूर थी। उसने लाल रंग की सलवार कमीज़ पहन रखी थी मैंने अपनी आँखें खोली तो उसने एक दम हाथ उठा लिया लेकिन उस की साँस चढ़ी हुई थी।
मैने अंजान बन कर कहा- क्या हुआ भाभी जी ?
वो बोली- कुछ नहीं, माता जी कहाँ है आपकी?
मैंने कहा- वो तो कहीं गई हैं, कल आएँगी !
तो उसने अपने आप को संभाल कर बोला, “आप आज काम पर जाओगे या नहीं?
मेरी उस दिन छुट्टी थी, मैने कहा,” नहीं आज नहीं जाना, क्यूँ क्या हुआ? आप क्यूं पूछ रही हैं?”
नहीं वैसे ही ! आज आप शाम को फ्री हो क्या?
मैने कहा,”हां जी !”
बोली,”आप का सामान बहुत बड़ा है !” उसने शर्माते हुए कहा।
मैं भी एकदम हैरान हो गया।
मुझसे बोली- बाहर निकाल के दिखाओ !
मैने कहा- खुद ही निकाल लो !
उसने झट से मेरी निकर में हाथ डाला और मेरे लौड़े को पकड़ कर बाहर निकाल लिया। एकदम उसकी आंखें हैरान रह गई इतना बड़ा देख कर !
वो हाथ से लंड को हिलाने लग गई और वो और भी टाइट होता चला गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। मेरे लंड पर मुझे थोड़ी गर्मी महसूस हुई तो मैंने आंखें खोली तो देखा कि उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया था।
मुझे मज़ा आने लगा, वो मेरे लंड को चाटती हुई मुँह में ले रही थी, मुझे मज़ा आ रहा था, मेरा लंड उसके मुँह में आधा ही जा रहा था। अब मैं खड़ा हुआ और उसको घुटनों के बल नीचे झुका दिया और उसके बाल पकड़ के अपना लंड उसके मुँह में देने लगा। मैं भी काफ़ी दिनों से उसकी चूत मारने की सोच रहा था। मुझे मज़ा आ रहा था।
मैं उसके बड़े बड़े मुम्मे पीना चाहता था। मैने अपनी निकर पूरी नीचे कर दी, वो भी काफ़ी खुश थी कि आज वो इतना बड़ा लौड़ा लेगी।
मैंने उससे बेड पर लिटा लिया और ऊपर चढ़ कर उसके होंठ पीने लगा। वो मेरे लंड को अपनी चूत पर घिसा रही थी सलवार के ऊपर से। अब मैने उसका सूट उतार दिया। उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहन रखी थी, मैने जोश में उसकी हुक तोड़ दी, वाउ ! वाऽऽवाहह क्या बूब्स थे उसके बिल्कुल सफ़ेद दूध जैसे ! इतने बड़े कि जितने मैंने सोचा नहीं था।
मैं उसके निप्पल मुँह से काटने लगा, उसके मुँह से आवाज़ें निकलने लगी- आअहह अहहा हाहः अहहा प्लीज़ मत करो !
मैने और ज़ोर से काटा, फिर चूसने लग गया उसके बूब्स।
अब उसकी हालत खराब हो गई थी। उसने अपनी सलवार खोल दी थी और मेरे लंड को अपनी पैन्टी के ऊपर से चूत पर हिला रही थी। मुझे भी मज़ा आ रहा था मेरे लोड्ा लोहा बन चुका था, अब मैं भाभी की चूत चूसना चाहता था मैं बेड के नीचे उतरा, नीचे बेत कर पनटी नीचे करी भाभी जी की और चूत पर अपनी जीव रगड़ने लगा, आअहह अहहा अहह अहह अहह प्लीज़ अपना लंड मुझे दो ना, पर मैं उसे अच्छी सी तरह चूसना चाहता था, मैं उसकी चूत के होंठों को चूस रहा था।
अब हम 69 पोज़ में आ गये। मैंने अपना खड़ा खंभा उसके मुँह में दे दिया और उसकी चूत चाटने लगा। वो बोलने लगी- प्लीज़ मेरे अंदर डाल दो ! प्लीज़ प्लीज़ !
मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया उसकी गाण्ड पर ज़रा सा अपना लंड रखा, वो डर गई, बोली- नहीं ! चूत में प्लीज़, गाण्ड नहीं ! मैने पहले कभी नहीं मरवाई !
उसके 36 इंच के कूल्हे क्या लग रहे थे ! डॉगी स्टाइल ऐसा लग रहा था कि एक साथ तीन लण्ड खा जाएगी।
मैने उसकी चूत के छेद पर अपना लण्ड रखा और एक ज़ोर का ज़टका दिया, कसम से उसका रोना निकल गया क्यूँकि पूरा लंड एक ही झटके में अंदर था, उसकी आँखों से आँसू आ गये। लेकिन बोल रही थी- और ज़ोर से मज़ा आ रहा है, अहह अहह अहह अहह अहह ज़ोर से !
मैने उसकी कमर पकड़ी और ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा। मेरा लंड पूरा बाहर और फिर अंदर जाता, मेरा लंड उसकी चूत को पूरा भर रहा था।
वो बोली- जल्दी झटके मारो ! मैं आने वाली हूँ ! आहह आह अहह अहह अहह अहह अहह मर गई !
मैने उसे कन्धे से पकड़ा और लंड अंदर करके साथ में खड़ा कर लिया, मैं उसके मम्मे दबा रहा था और मेरा लंड अपना काम तो कर ही रहा था। अब वो झड़ गई थी। मैंने लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह में भर दिया और मम्मे दबाने लगा तो कुछ समय बाद वो फिर तैयार हो गई। अब मैं उसकी गाण्ड मारना चाहता था, मैंने उसे खड़ा किया, उसके हाथ दीवार के साथ लगाए, उसकी गाण्ड का छेद खोला और लंड अंदर डालने लगा। छेद टाइट था, लंड अंदर नहीं जा रहा था। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया, छेद पर लौड़ा रखा और अंदर घुसा दिया।
खूब दबा के चोदा उसे ! वो चिल्ला रही थी दर्द और आनन्द से ! मैं साथ ही उसके मम्मे दबा रहा था।
अब मैने उसे बेड पर लिटा लिया, उसकी चूत के नीचे तकिया रखा और उसकी बुर में लंड दे दिया फिर से ! अब मैं उसके होंठों पर चूम रहा था और ले रहा था उसकी !
अब मैंने झटकों की गति बढ़ा दी और उसके बूब्स खींचने लगा और मैं उसके अंदर झड़ गया। उसने मेरा लंड निकाला और चूसने लगी।
फ़िर उस रात मैने उसे बिना लाइट जलाए चोदा, बहुत मज़ा किया।
अब जब भी मेरा दिल करता है उसे चोदता हूँ !
मुझे भाभी और थोड़ी बड़ी उमर की औरतें बहुत पसंद है। Indian Sex Stories
मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं और हम दोनों मुंबई में रहते हैं.
यह बात जो मैं बताने जा रहा हूं, वह मेरी कल्पना है.
उस लड़की को देखकर जिसे मैं हमेशा से चोदना चाहता था लेकिन रिश्तों की वजह से कभी चोद नहीं पाया.
यह बात मेरी साली की है जो मुझसे उम्र में छोटी है और मेरे साथ अब काफी नटखट भी हो गई है.
उसे देखकर मुझे हमेशा लगता कि काश यह मेरी पत्नी होती.
उसके बारे में सोच सोच मैं हमेशा मुठ मार लेता हूं.
उन दिनों हम दोनों शादी करके कुछ दिनों के लिए ससुराल गए थे.
हमारा स्वागत बढ़िया हुआ था और हम दोनों घर में प्रवेश कर गए.
प्रवेश करते ही मुझे मेरी स्वप्नकन्या दिखाई दी.
उसका नाम सोनल है.
वह बहुत ही सुन्दर हेयर स्टाइल वाली लड़की है.
उस दिन वह पिंक कलर की ड्रेस में एक अप्सरा ही लग रही थी.
उसकी उम्र बीस साल की थी लेकिन उसके भरे हुए स्तन किसी 25 साल की लड़की के जैसे हैं.
सोनल के तने हुए दूध देख कर मुझे अपने सास ससुर के सामने बैठना मुश्किल हो गया था.
जैसे तैसे मैं बहाना करके उठा और वाशरूम से फ्रेश होकर आ गया.
साली के स्तनों का आकार देख कर मुझसे अभी भी रहा नहीं जा रहा था.
सोनल को देखकर तो ऐसे लग रहा था कि वह गंभीर मिजाज वाली लड़की है; उसे सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई से प्यार है.
मैं उसे गौर से देखने लगा और उसे देखकर मन ही मन सोचने लगा कि क्या करूँ, जिससे सोनल को सैट कर सकूं.
उस रात मैंने अपनी पत्नी को ऐसे चोदा मानो मैं सोनल को ही चोद रहा हूं.
पत्नी भी संतुष्टि के साथ सो गई लेकिन मुझे अभी भी सोनल की जवानी ने परेशान कर रखा था.
मैंने तय कर लिया था कि कुछ भी हो जाए, मैं सोनल को चोदे बिना वापस नहीं जाऊंगा.
दूसरे दिन सुबह जब मैं उठा तो सब लोग अपने अपने काम में व्यस्त हो गए थे.
फिर मैं भी नाश्ता करके अखबार पढ़ने बैठ गया.
मैंने जान बूझकर नाश्ते की प्लेट सामने रखी ताकि सोनल उसे उठाए और मैं उसके दोनों स्तनों को जीभर के देख सकूं.
हुआ भी वैसे ही.
मैंने अंततः उसके दोनों स्तनों को देख लिया.
मानो मेरे अन्दर ज्वालामुखी भड़क गया था और मुझे अपने लावा को सोनल के स्तनों पर छोड़ना है, यह सोच सोच कर मैं पागल होने लगा.
एक दो दिन और गुजर गए और मेरी परेशानी बढ़ती गई.
मौका देख कर मैंने उससे बात करना शुरू किया.
वह कम ही घुल-मिल पाती थी.
फिर भी कोशिश करके मैंने उससे दोस्ती कर ली.
मैं इस बात से खुश था कि उसने मुझसे दोस्ती की.
एक दो दिन और गुजर गए और वह अभी मुझे बेझिझक बातें करने लगी.
मैं उसके कॉलेज के बारे में बात करने लगा और उसकी सहेलियों व उसकी पढ़ाई को लेकर बात करने लगा.
बात तो वह करती थी, मैं तो सिर्फ उसे निहारता था.
कभी कभी ठंड की वजह से उसके स्तनों के निप्पल कड़क दिख जाते तो कभी मेरी आंखें उसके स्तनों के आकार को दूर से ही नाप लेतीं.
ऐसे ही चलता रहा.
एक दिन बात करते समय हम दोनों उसके एक फ्रेंड की लव स्टोरी डिस्कस करने लगे.
मैंने भी मौका देख कर उससे पूछा- तुम्हारा बॉयफ्रेंड कौन है?
उसने साफ मना करते हुए कहा कि उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है.
मेरे जोर देने पर भी उसने मना किया तो मैंने और छेड़ना ठीक नहीं समझा और इधर उधर की बातें करने लगा.
फिर हमारे बीच इस तरह बात हुई:
मैं- सोनल क्या मैं एक बात पूछूं, बुरा मत मानना तुम मुझे फ्रेंड मानती हो तो ही पूछूंगा.
सोनल- हां पूछिए न!
मैं- तुम अभी जवान हो गई हो और तुम्हारी सहेली का भी बॉयफ्रेंड है, तो तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड होना चाहिए?
सोनल चुप रही.
मैं- डरो मत, मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा!
सोनल- मुझे भी लगता है लेकिन पापा और घर के सभी लोग स्ट्रिक्ट हैं, तो चाहकर भी मैं सिंगल हूँ.
मैं- और एक सवाल पूछूं?
सोनल- हां.
मैं- सेक्स करने का मन करता है? शर्माना मत या फिर गुस्सा भी मत करना.
सोनल- करता तो है, पर अभी मेरी उम्र कम है … और शादी भी नहीं हुई.
मैं- यह कौन बोला कि सेक्स के लिए शादी करनी पड़ती है. सेक्स तो एक कला है. उसे सिर्फ नर और नारी चाहिए शादी नहीं. तुम अपनी दीदी से पूछो सेक्स का मजा क्या होता है!
सोनल- आप भी ना!
वह शर्मा कर उठ गई और जाने लगी.
मैंने सोनल को अपने हाथ से पकड़ा और पहली बार उसकी नजर में मैंने कामवासना देखी.
अब तक मैं काबू खोता जा रहा था लेकिन मुझे जल्दबाजी नहीं करनी थी.
मैं- सच बताओ … कौन हैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड?
सोनल- कोई नहीं है.
मैं- फिर शर्मा क्यों रही हो?
सोनल- आपने मेरा हाथ पकड़ रखा है.
मैं- तो क्या हुआ आधी घरवाली हो मेरी!
सोनल- प्लीज छोड़िए, मम्मी आ जाएंगी.
मैं- आने दो.
मौका देख मैंने उसको कमर से पकड़ कर अपनी बांहों में जकड़ लिया.
उसकी छूटने की कोशिश बेकार हुई.
उसे मैंने किस करना शुरू कर दिया.
वह शर्माती हुई मेरा साथ दे रही थी.
तभी मेरी पत्नी आ गई और हम अलग हो गए.
मेरी बीवी को पता नहीं चला.
वह खाने के लिए बुलाने आई थी और चली गई.
उसके जाने के बाद मैंने फिर से सोनल को पकड़ा और उससे कहा- सोनल यार, पहले दिन से तुम्हें देख कर चोदने का मन बनाया है. अब और न तड़पाओ. तुम्हारी दीदी और तुम दोनों लाजवाब हो. दोनों भी सेक्सी हो. लेकिन तुम्हें एक बार चखना है. तुम जितनी टेस्टी हो उतनी टेस्टी तो तुम्हारी दीदी भी नहीं है. तुम्हें वही सुख देने के लिए मैं बेसब्र हूँ. मैं तुम्हारा रात को टेरेस पर इंतजार करूंगा, जरूर आना.
वह चुपचाप चली गई और मैं सोचता रहा कि क्या होगा.
फिर भी मैं रात को वाइफ सोने के बाद ऊपर आ गया और सोनल की राह देखने लगा.
दो बजे के करीब सोनल आ गई और मैं खुशी से झूम उठा.
मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और किस करने लगा.
वह अब खुलकर साथ दे रही थी.
हमारे टेरेस से सब कुछ दिखता था लेकिन टेरेस पर क्या चल रहा है, ये किसी को नहीं दिखता क्योंकि हमारे घर की ऊंचाई बहुत ज्यादा थी.
मैं उसको गोद में उठाकर उस कमरे में लेकर आ गया जो टेरेस पर सामान रखने में काम आता था.
उसे दीवार के सहारे खड़ा करके मैं उसके गले को चूमने लगा.
मैं उसके दोनों हाथों को ऊपर पकड़ कर मुँह से उसके गले को और होंठों को चाट रहा था.
मुझसे भी संयम नहीं हो रहा था तो मैंने उसके टॉप को ऊपर करके निकाल दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को चूसने और दबाने लगा.
सोनल सिर्फ ‘जीजाजी मत करो …’ इतना ही कह पाई.
उसके हाथ मेरे बालों को पकड़ कर मेरे सिर को स्तनों पर दबा रहे थे.
मैंने ब्रा को निकाल दिया और जिसका इतना इंतजार किया, उसका जी भरके आनन्द लेने लगा.
खुद की शर्ट को भी उतार कर हम दोनों कमर के ऊपर नंगे हो कर एक दूसरे के जिस्म का आनन्द लेने लगे.
जब तक सोनल के स्तनों पर मेरे दांतों के निशान नहीं बने, तब तक मैं रुका नहीं.
स्तन पान करते हुए मैं पेट को किस करने लगा और वह मदहोश हो गई.
मैंने उसके बचे हुए कपड़ों को भी हटा कर उसे सिर्फ पैंटी पर खड़ा कर दिया.
वह शर्म के मारे आंखें बन्द कर चुकी थी लेकिन मैं उसे देख कर बेकाबू हो चुका था.
मैंने भी मेरे बचे हुए कपड़ों को उतार कर उसे देखा और उसका हाथ पकड़ कर मेरे लंड पर दबा दिया.
लंड की गर्म त्वचा से वह सहम उठी और उसने मुँह दीवार की तरफ कर दिया.
मौका देखकर मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी, जो पूरी गीली हो चुकी थी.
पीछे से उसे जोर से पकड़ कर मैंने उसकी चूत को उंगली से छेड़ना शुरू कर दिया और साथ ही दूसरे हाथ से निप्पल को रगड़ना शुरू कर दिया.
वह अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी और फिर से एक बार गर्म हो चुकी थी.
मैंने उसे पैरों पर बैठने को कहा तो वह झट से बैठ गई.
मुझे तो मानो जन्नत मिल गई. मैंने अपना लंड उसको मुँह में लेने के इरादे से हिलाया.
उसने पहले तो सर हिला कर मना किया लेकिन बाद में वह खुद ही तैयार हो गई और उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया.
वह बड़े ही पेशेवराना तरीके से लंड को चूसने लगी.
यह देख कर मुझे जरा हैरानी हुई.
पर मैं मजा लेने लगा.
मेरा लंड उसके मुँह हिसाब से साइज़ में काफी बड़ा था और वह पूरा लंड अन्दर तक नहीं ले पा रही थी.
फिर भी उसे मजे लेने थे तो उसने अपने मुँह में किसी तरह से पूरा लंड ले लिया.
मेरी पत्नी तो कभी लंड को छूती भी नहीं थी.
मैंने उसे उठाया और कहा- सोनल, तुमसे अच्छी लंड चूसने वाली कोई नहीं है. तुम्हारी दीदी को तो ये पसंद ही नहीं है.
सोनल- जीजा जी, आप टाइमपास न करो, मैं अभी तड़प रही हूं. जल्दी से अपना ये औजार मेरी चूत में डालो और इसकी भूख मिटाओ.
मैंने भी समय की गहराई को देखकर तुरंत उसे दीवार पर सटा कर अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा.
पहला धक्का लगते ही उसके मुँह से चीख निकली और वह तड़प उठी.
मैंने उसकी कमर को न छोड़ते हुए और एक धक्का लगाया.
फिर तो मैं वहशी हो गया और धक्के पर धक्का लगाता चला गया.
वह भी लंड रगड़ से मजा लेने लगी.
कुछ ही देर में उसकी चूत से खून निकलने लगा था लेकिन अंधेरे में उसे कुछ समझ नहीं आया.
कुछ ही देर में वह एक बार फिर से झड़ गई और पुराने गद्दे पर लेट गई.
मैं अभी बाकी था, तो रुकने के मूड में नहीं था. मैं उधर ही उसकी चूत में पूरा लंड डालकर उसे चोदने लगा.
वह थक गई थी लेकिन मुझे साथ दे रही थी.
मुझे भी लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूं.
तो मैंने उसके दोनों स्तनों पर मेरे वीर्य का स्खलन शुरू कर दिया और वीर्य की आखिरी बूंद तक टपका दी.
फिर मैं भी उसी के बाजू में लेट गया.
हम दोनों की सांसें फूल रही थीं लेकिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
मैंने जो सोचा था हो गया.
पड़े पड़े हम दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुराते रहे और फिर उठकर अपनी अपनी जगह पर जाकर सो गए.
सोते समय भी मुझे सोनल के शरीर का स्पर्श महसूस हो रहा था और मैं सपने मंख भी यही चाह रहा था कि वह मुझसे अलग ना हो.
दूसरे दिन सोनल मुझे देख कर शर्माने लगी और मेरे सामने ही नहीं आई.
मैंने सोचा कि ऐसे काम नहीं चलेगा, मुझे कुछ करना पड़ेगा.
तब मैंने इशारे में उसे कोने में बुलाकर उससे उसका फोन नंबर मांगा और उसे मोबाइल पर बात करने को कहा.
मैं- क्या हुआ शर्मा क्यों रही हो? कल जो हुआ, क्या वह पसंद नहीं आया?
सोनल- ऐसी बात नहीं है. मुझे बहुत पसन्द आया और आपका वह भी काफी बड़ा है.
मैं- ऐसी बात है, तो फिर घूमने चलें? बहाना बनाकर बाहर चलते हैं?
सोनल- ना बाबा ना … जो कुछ करना है रात को ही कर लेना!
मैं- ठीक है, फिर लेकिन आज रात रंगीन होगी. आधा अधूरा नहीं छोडूंगा.
सोनल शर्माकर मेरी ओर देखने लगी और मैं रात का इंतजार करने लगा.
आज मैंने पहले से कुछ सैटिंग कर रखी थी.
कल रात जो दिक्कत आई थी, वह न हो इसलिए मैंने गद्दा अच्छी तरह बिछाया और उस पर कपड़ा डालकर उसे कुछ ठीक कर दिया.
अब बस इंतजार सिर्फ सोनल के आने का था.
आज कुछ नया भी ट्राय करना था तो मैंने मन ही मन ठान लिया कि उसे आज पूरी रात सोने नहीं देना है.
सब लोग सोने के बाद मैं चुपके से ऊपर चला गया और उसका इंतजार करने लगा.
थोड़ी देर में वह भी आ गई.
मैंने उसे गद्दे पर लिटाया और उससे लिपटकर चूमने और चाटने लगा.
वह पहले से ही गर्म हो गई थी और मेरे ऐसा करने से वह और जादा कामुक हो गई.
मैंने उसका टॉप ऊपर करके धीरे धीरे स्तनों को चूसना और चाटना चालू किया.
वह आह आह की आवाज निकालने लगी.
मेरा भी लंड तन चुका था.
मैंने उसकी नाभि को चाटकर गीला कर दिया और नीचे की ओर जाने लगा.
उसकी पैंटी को नीचे कर उसकी चूत को देख कर मैं बेकाबू हो गया और मैंने अपनी जीभ से उसकी दोनों पंखुड़ियों को अलग कर दिया.
वह मेरे बालों को पकड़ कर मेरा सिर अपनी चूत पर दबाने लगी.
मैंने पूरा प्रयास करके उसकी चूत में अपनी जीभ डालकर रसपान शुरू किया और उसे काम वासना के शिखर पर पहुंचा दिया.
इधर मेरी कामवासना भी तूफान की तरह उछल पड़ी थी तो मैंने मेरी दिशा बदली और मेरा लंड उसके मुँह में डाल दिया.
फिर मैं 69 की पोजीशन में आ गया. उसके लिए ये चीज नई थी, लेकिन उसे मजा भी आ रहा था.
मैंने पूरा लंड उसके मुँह में डाला और मेरी जीभ जितनी अन्दर जा सकी, उतनी पेल कर अच्छी तरह से उसकी चूत को चाटा.
बड़ी देर बाद जब हम दोनों झड़ गए तो थोड़ी देर के लिए एक दूसरे से लिपटकर वैसे ही पड़े रहे.
अचानक से सोनल ने फिर से लंड चूसना चालू कर दिया और मेरा लंड भी तुरंत खड़ा हो गया.
इस बार बारी चूत चुदाई की थी.
मैंने सोनल की चूत पर अपना लंड सैट करके जोर से झटका लगाया.
इस बार मेरा लंड पूरा अन्दर चला गया.
कल जैसे खून आया था, आज उतना खून नहीं आया.
सोनल को भी सेक्स की लत लग चुकी थी और वह उछल उछल कर मेरा लंड ले रही थी.
दोनों टांगों को ऊपर उठाकर मैंने पूरी ताकत के साथ लंड अन्दर डाल दिया.
सोनल की चीख निकल गई लेकिन अभी मैं रुकने के मूड में नहीं था.
दस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ने पोजीशन बदली.
मैंने उसे कुतिया की तरह खड़ा करके चोदना शुरू किया.
यह पोजीशन हम दोनों को पसंद आई.
धकाधक पेलापेली से थक कर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.
बड़ी देर तक Xxx साली जीजा सेक्स यानि चुदाई चलती रही लेकिन न वह झड़ रही थी और न मैं!
फिर मैंने उसे पुनः दीवार से सटाकर चोदना शुरू किया.
शरीर की पूरी ताकत जुटा कर मैंने जोर जोर से उसे चोदना चालू कर दिया था.
अब वह भी थक चुकी थी तो उसने मुझसे कहा- मुझे लंड के रस को पीना है.
उसे मेरा माल टेस्टी लगा था.
मैंने उसे नीचे बिठाकर उसके मुँह में लंड दे दिया.
थोड़ी देर के झटकों के बाद उसने मेरा सारा माल पी लिया व लंड को चाट कर साफ भी कर दिया.
हम दोनों बहुत खुश थे.
तीन बार चुदाई करने के बाद देर रात को हम दोनों अपने अपने बिस्तर पर जाकर सो गए.
उस दिन से आज तक मैंने कभी भी सेक्स की कमी को महसूस नहीं किया.
कभी पत्नी के साथ तो कभी साली के साथ चुदाई के पूरे मजे किए.
मेरा नाम विकास है, Antarvasna Sex Stories प्यार से लोग मुझे वीरू बुलाते है।
पहले मैं आपको अपने बारे में बता दूँ, मैं हरियाणा में रहता हूँ, यहाँ मेरा पूरा परिवार रहता है। मेरी लम्बाई सवा पांच फ़ुट है, भरा हुआ शरीर है, लंड की लम्बाई साढ़े पाँच इंच है और मोटाई 2.5 इंच है।
मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था जो आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी पहले सेक्स की कहानी है। उसके बाद मैंने कईयों बार सेक्स किया। सेक्स में मजा ही ऐसा होता है, जितना करो उतना और ज्यादा करने का मन करता है।
तो अब अपनी कहानी सुनाता हूँ!
बात दो साल पहले की है जब मैं 18 साल का था, अब 20 साल का हूँ। हमारे घर के आगे एक छोटा सा गार्डन है।
तो एक बार मैं घर पर अकेला था, ब्लू फिल्म देख रहा था। मैंने उस समय निक्कर पहन रखी थी। मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने निक्कर और अंडरवियर उतार दिया और मुट्ठ मारने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बज़ी।
मैं जल्दी-जल्दी में सिर्फ निक्कर ही पहन कर चला गया, दरवाजा खोला तो एक 20-21 साल की लड़की खड़ी थी, रंग एकदम गोरा, पतली कमर, लम्बे बाल, जींस और टी-शर्ट पहन रखी थी, एकदम मॉडल लग रही थी।
वो एक सेल्स-गर्ल थी, लेडीज सामान बेच रही थी, ब्रा और पैंटी की नई कोलेक्शन। मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा था, उसे देख और भी खड़ा हो गया। उसे शायद मालूम हो चुका था कि मेरा लंड खडा है क्योंकि साफ़ दिख रहा था।
वो पहले बोली- क्या यहाँ कोई लेडीज है?
मैंने कहा- है तो सही पर अभी बाहर गई है, अभी 5 मिनट में आ रही है।
तो वो प्रतीक्षा करने लगी। उसे क्या मालूम कि घर शाम के पाँच बजे तक खाली है।
थोड़ी देर बाद वो बोली- एक ग्लास पानी मिलेगा?
मैंने कहा- जरूर मिलेगा!
मैं उसके लिए पानी लेने गया और सोचने लगा कि इसको कैसे फंसाया जाये?
मुझे एक तरकीब सूझी।
मैं जैसे ही उसके पास पानी लेकर पंहुचा, जानबूझ कर उसके कपड़ों पर पानी गिरा दिया। वो पूरी गीली हो गई। क्या मस्त चूची लग रही थी उसकी गीले टी-शर्ट में!
वो कहने लगी- मैं तो गीली हो गई!
तो मैंने कहा- कोई बात नहीं! मैं आपको दूसरे कपड़े दे देता हूँ!
मैंने उसे हाफ शर्ट और मिनी स्कर्ट दे दी। वो बाथरूम से पहन कर आ गई। क्या गोरी-गोरी जांघें थी उसकी! शर्ट में चूची तो उसकी पूरी कस ही गई थी। तब मेरा लण्ड और सख्त हो गया पर मैं चाहता था कि पहल वो करे।
मैंने उसे कहा- आप इन्तज़ार करो, मैं आपके लिए चाय बना कर लाता हूँ! तब तक आप टीवी देख लो!
मैं चला गया, उसने टीवी ऑन किया, उस पर ब्लू फिल्म अभी चल ही रही थी। वो मजे से वो सब देख रही थी, एकदम लाल हो गई थी वो! उसने अपना हाथ अपनी पैंटी में डाल दिया और मसलने लगी।
मैं ये सब देख रहा था। मैं चाय की जगह बियर ले आया। वो मेरे आने की आहट सुन कर सीधी बैठ गई और टीवी ऑफ कर दिया।
मैंने उसके सामने बियर रख दी। वो कहने लगी आप तो चाय लेने गए थे पर ये क्या ले आये?
मैंने कहा- जैसा माहौल है वैसी चीज भी तो होनी चाहिए!
वो हैरान होकर पूछने लगी- मतलब?
मैंने टीवी ऑन करके कहा- मतलब ये!
तो शरमाई और कहने लगी- ये तो पहले से ही चल रहा था! आप ही देख रहे थे जिसके कारण आपका वो खड़ा था!
मैंने उससे पूछा- वो क्या?
वो कहने लगी- आप बहुत बदतमीज है!
मैंने कहा- आप कैसी हो? आपको यह सब अच्छा नहीं लगा तो टीवी ऑफ कर देना था! आप तो उल्टा ही देख कर पैंटी में अपनी चूत सहला रही थी।
ये सुनकर वो चुप हो गई। ये देख मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने गोद में बैठा लिया। फिर उसे चूमने लगा।
पहले वो थोड़ा कसमसाई, थोड़ी देर बाद वो मेरा साथ देने लगी। मैंने उसकी शर्ट और स्कर्ट खोल दी। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और उसकी चूची चूसने लगा।
मैंने अपनी निक्कर और शर्ट भी उतार दी। उसने मेरा लंड देखा और कहा- यह तो बहुत बड़ा है!
शायद उसने पहले कभी किसी का लंड नहीं देखा था। मैंने उसे अपना लंड पकड़ा दिया।
वो मेरे लंड से खेलने लगी और चूसने लगी।
मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी नंगी थी। मैंने अपने जीवन में पहली बार किसी लड़की को नंगी देखा था। मैं भी उसकी चूत चूसने लगा। अब हम एक दूसरे को चूस और चूम रहे थे। अब मैं और वो पूरी तरह से तैयार थे।
मैंने उसकी चूत पे अपना लंड रखा और एक धक्का दिया, मेरा 2 इंच लंड अंदर चला गया। वो थोड़ा कसमसाई,न उसकी सील अभी खुली नहीं थी, वो अक्षत-यौवना थी। मैंने एक और धक्का दिया और पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया।
15 मिनट तक मैं उसे चोदता रहा। हम दोनों एक साथ झड़ गए। फिर मैंने उसकी गांड भी मारी। उसकी गांड मैंने 25 मिनट तक मारी और उसकी गांड में ही पानी छोड़ दिया।
अब हम दोनों थक चुके थे। हम जाकर पहले नहाए, नहाने के बाद हमारी थकान दूर हो गई, हमने बियर पी और वो जाने लगी। मैंने उसका नंबर माँगा तो वो कहने लगी कि आज के बाद हम कभी नहीं मिलेंगे।
जाते जाते उसने मुझे चूमा और कहा- यू आर सो स्वीट एंड हार्ड!
मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और दो महीने बाद उसका फ़ोन आया।
अब आगे की मैं अगली कहानी में सुनाऊँगा। तब तक इसे ही पढ़ कर मुट्ठ मारिये।
आपको यह कहानी कैसी लगी, मेल जरूर करें! Antarvasna Sex Stories
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