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मैं दो हफ्ते के लिए मौसी के घर आई थी.
इस दौरान रोज रात को सर का कॉल आता और वे मुझसे सेक्सी बातें करते.
मैं सारी बातें उसकी बहन को भी बताती और समीर को भी ऑडियो सेंड कर देती थी.
एक दिन सर ने वीडियो कॉल किया और मेरे सामने नग्न हो गए.
मैंने भी उनको अपने बूब्स दिखाए और हम दोनों ने वीडियो कॉल पर अपना अपना पानी निकाल दिया.
यह सब मैंने समीर को और सुमन को बताया.
बाद में मैं वापिस आई तो कॉलेज गई.
उस दिन मैंने जानबूझ कर जांघों तक आने वाला स्कर्ट और टाइट शर्ट पहनी थी.
जब सर ने मुझे देखा तो आखिरी वाले पीरियड में मुझे लैब में बुला लिया.
मैंने सुमन से कहा- तेरे भैया ने मुझे लैब में बुलाया है.
वह हंस कर बोली- हां, चली जा न और भैया के साथ मजा कर!
मैं वहां गई तो लैब खाली थी, बस सर थे.
सर ने जाते ही गले लगा लिया और कहने लगे- अरे मेरी मेघा रानी, कहां थी तू … तेरे बिना मैं कितना बेचैन था!
यह सब कह कर वे मुझे किस करने लगे.
‘उम्म स्स्स …’ की आवाजें आने लगीं.
‘सर, कोई आ जाएगा!’
‘अरे इस टाइम यहां कोई नहीं आएगा.’
यह कह कर सर ने मेरे बूब्स पकड़ कर मरोड़ दिए.
‘आआह सर आराम से … ये संतरे आपके लिए ही हैं उम्म स्स्स्स धीरे मसलो न!’
यही सब कहते हुए मैंने सर का लंड पकड़ लिया.
उनका लंड एकदम टाइट था.
मैं- क्या बात है सर ये छोटे नवाब कैसे अकड़ कर खड़े हैं!
मैं कुर्सी पर बैठ गई.
सर मुझे किस करते रहे और उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए.
मेरे बूब्स ब्रा में कैद थे.
वे ब्रा को ऊपर करके मेरे एक दूध को चूसने लगे और दूसरे को मसलने लगे.
सर चूस कम रहे थे, काट ज्यादा रहे थे.
मैं दर्द से कराह उठी- आह इस्स्स्स आह … काटो मत जानू … आह लगती है.
पर वे कहां कुछ सुनने वाले थे.
उनका एक हाथ मेरी पैंटी में घुस गया और मेरी रस छोड़ती चूत में उंगली जाने लगी.
मैंने भी अपनी दोनों टांगें खोल दीं और मजा लेने लगी.
कुछ देर बाद उन्होंने मेरी टांगों को चिपकाया और पैंटी खींच कर नीचे कर दी.
वे कुर्सी के सामने बैठ गए और मेरी चूत में जीभ डाल कर चूसने लगे.
‘अअह उम्म … सर बहुत अच्छा लग रहा है और चाटो आह … म्मम्म सर जल्दी से मेरी चूत बस झड़ने वाली ही है … मुझे चुदाई के बिना आराम नहीं मिलेगा. आज रात को मैं आपको अपनी चूत के साथ एक सरप्राइज भी दूंगी … अभी बस झाड़ कर छोड़ दो … अभी इतना काफी है.’
मैं कुछ ही देर में झड़ गई तो सर से अलग होने लगी.
‘जान मेरा लंड अभी भी खड़ा है, उसका क्या करूँ?’
‘मैं हूँ न!’
मैंने खड़े होकर सर की पैंट नीचे की और उनके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
‘उम्म आह मेघा मेरी जान … चूस लो आह इतना मिस किया तुझे!’
मैं बिना कुछ सुने सर का लंड चूसे जा रही थी.
थोड़ी देर में उन्होंने अपने लंड का पानी छोड़ दिया तो मैंने हाथ पर वीर्य लेकर अपने मम्मों पर मसल लिया.
फिर सर ने मुझे छोड़ दिया और मैं अपने कपड़े पहन कर वापस क्लास में आ गई.
मैं सुमन के साथ बैठ गई.
सुमन ने पूछा- क्या हुआ?
मैं- कुछ नहीं, तेरे भैया का पानी चूस कर निकाल दिया. आज रात तेरे घर आऊंगी, तो हमारी चुदाई लाइव देख लेना और रिकॉर्ड भी कर लेना.
वह- ठीक है.
फिर शाम को मैं सुमन के घर चली गई और हमने डिनर किया.
रात को सर आए तो मुझे आया देख कर खुश हो गए.
जब सुमन किचन में थी, तो सर ने पूछा- सुमन का क्या करेंगे?
मैंने कहा- मैंने सब सोच लिया है. रात को चाय बनाएंगे, तो उसे नींद की गोली दे देंगे.
सर राजी हो गए.
मैंने तो सुमन को अपना प्लान पहले ही समझा दिया था.
रात को मैंने चाय बनाई और सुमन ने चाय पीने के बाद सोने का नाटक करना शुरू कर दिया.
फिर ग्यारह बजे मैंने सुमन से कहा- मैं जा रही हूँ, तू खिड़की से देख लेना और रिकॉर्ड भी कर लेना.
उसने कहा- ठीक है.
मैं सर के कमरे में गई तो सर मुझे आया देख कर खुश हो गए.
मैंने चादर से अपना सारा बदन ढक रखा था.
‘ये चादर क्यों ओढ़ रखी है?’
‘इसमें खजाना है.’
वे बोले- मैं लूटूँगा उस खजाने को!
मैंने चादर छोड़ दी. मैं अन्दर से एकदम नंगी थी.
वे मुझे देखते ही रह गए.
अगले ही पल वे मेरे पास आकर मुझे चूमने लगे.
मैंने उनको बिठाया और उनके कपड़े उतारे. उनका लंड पकड़ कर मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
‘ऊऊह ओह मेघा कितना अच्छा चूसती हो यार … कितनी ऑसम हो! अच्छा लग रहा है … चूसती रहो!’
मैं उनका लंड पूरा मुँह में लेकर अन्दर बाहर कर रही थी और उनके बॉल्स भी चूस रही थी.
सर मेरे निप्पल पकड़ना चाह रहे थे, पर मैंने उनके साथ साइड में झटक दिए.
‘सर इस सुहाने पल को आंखें बंद करके महसूस कीजिए बस.’
तब सर ने अपना हाथ मेरे सिर पर रखा और मेरे मुँह में लंड को अन्दर बाहर करने लगे.
‘अअह मेघा रानी मेरा पानी निकल जाएगा!’ वे कॉलेज गर्ल की सेक्स की हवस का मजा ले रहे थे.
‘निकल जाने दीजिए … मैं हूँ न दुबारा से आपका लंड खड़ा कर दूँगी.’
बस यह सुनते ही सर ने हथियार डाल दिए.
उनके लंड से एक तेज पिचकारी मेरे गले में आ लगी.
अब सर ने आंखें खोल दीं.
‘सर अच्छा लगा आपको!’
‘बहुत अच्छा जान.’
‘दो हफ्ते से आपसे दूर थी, आज उसकी पूरी भरपाई कर रही हूँ. अब आप अपनी जीभ का कमाल दिखाइए.’
सर ने मेरे होंठ चूमे, फिर गर्दन चूमते हुए मेरे बूब्स पर पहुंच गए.
‘उम्मम्म … अच्छे से चूसिए … आपके लिए ही हैं. कितने दिन से अपने ये आम आपसे चुसवाने को तड़प रही थी.’
सर मेरे एक दूध के निप्पल मरोड़ रहे थे और दूसरे को मुँह में लेकर चूस रहे थे.
फिर वे पहला निप्पल चूसने लगे और दूसरा मरोड़ने लगे.
उसके बाद वे मेरी नाभि चाटने लगे और दोनों हाथों से मेरे दोनों निप्पल मरोड़ने लगे.
उसके बाद सर नीचे आ गए और चूत पर किस करके उसे चाटने लगे.
‘अआ अह स्स्स्स सर … बहुत प्यासी है मेरी चूत … आह खा जाओ इसे … जीभ डालो न चूत में आह.’
सर जीभ चूत में डाल कर अन्दर बाहर करने लगे.
मेरा रस छूटने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने अपने शरीर को समेटना शुरू कर दिया.
मेरा सारा पानी सर ने चाट लिया था.
अब हम दोनों साथ में लेट गए.
सर मेरे मम्मों से खेलने लगे और वे मुझे किस करते रहे.
‘जब दो हफ्ते तक तुम नहीं थी तो रोज रात को याद करते हुए लंड हिलाता था.’
‘सच में सर … तभी उस दिन वीडियो कॉल पर इतना सारा पानी निकला था आपका. अभी तो आपको मजा आ रहा है न!’
‘अरे बहुत, इतना मजा कभी नहीं आया.’
थोड़ी देर के बाद हम दोनों 69 में आ गए और सर ने मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया.
वे अपनी जीभ को चूत में अन्दर बाहर करने लगे.
मैंने भी उनका लंड और बॉल्स चूसना शुरू कर दिया था.
लगातार चुसाई के कारण हम दोनों बहुत गर्म हो गए थे.
‘सर अब रहा नहीं जाता, इस चूत को अपने हथियार से चोद कर ठंडी करो न!’
सर ने मुझे गोद में बिठाया और होंठ चूसने लगे. वे लंड से चोदने लगे.
मैं मादक आवाजें निकाल रही थी.
‘स्स्स्स उम्म …’
सर ने मेरे मुँह में जीभ डाल दी और मुँह को भी चोदने लगे.
उसके बाद वे मेरी जीभ चूसने लगे.
बीच बीच में मेरे निप्पल मसल देते गांड पर हाथ फेरते हुए लगातार चूत चुदाई तो चल ही रही थी.
करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद उनका पानी निकलने वाला हो गया था.
मेरा पानी दो बार निकल चुका था.
मैंने उनका लंड अपने मुँह में लेकर पानी निकलवाया, फिर साथ में लेट कर सो गए.
वह मेरी तारीफ करते रहे और हम दोनों नंगे ही सो गए.
रात को तीन बजे सर ने मुझे उठाया- मेघा उठो!
‘क्या हुआ सर?’
‘मुझे तुम्हें और चोदना है.’
‘सर सारी रात से चोद रहे हो, अभी मन नहीं भरा क्या?’
‘तेरे से मन कहां भरता है!’
‘तो अब नंगी पड़ी हूँ, जो चाहे कर लो.’
‘ओह मेरी जान कितनी प्यारी है.’
‘सर, एक मिनट रुको, मैं वॉशुरूम जाकर आती हूँ.’
मैं बाहर गई नंगी ही और सुमन को उठाया.
मैं बोली- सुमन उठ.
‘क्या हुआ और तुम नंगी क्यों हो?’
‘तेरा भाई मुझे दोबारा चोदेगा, चल.’
वह भी तैयार हो गई.
मैं वापिस गई तो जाकर सर का लंड मुँह में ले लिया.
थोड़ा बहुत वीर्य अभी लंड पर चिपका हुआ था.
मैंने अच्छे से लंड चूसा.
फिर सर ने मेरे होंठ चूसे गर्दन चूमी, बूब्स चूसे, आर्मपिट, नाभि चाटी, जाँघें चाटी और चूत भी चाटी.
उसके बाद लंड को झटके से पेल दिया.
न जाने क्यों इस बार मेरी चीख निकल गई- आआह सर बस करो!
सर नहीं रुके और धकापेल चोदते रहे.
काफी देर तक जबरदस्त चुदाई के बाद उन्होंने मेरे मम्मों पर पानी छोड़ दिया.
उसके बाद सर कपड़े पहन कर सो गए और मैं सुमन के साथ आकर लेट गई.
सुबह जब मैं उठी तो मैंने कह दिया- मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं कॉलेज नहीं जाऊंगी.
सुमन भी बोली- हां भैया, मैं भी नहीं जाऊंगी.
मैंने सर से धीमे से कहा- शायद नींद की गोली से ऐसा हुआ होगा!
वे हां में सर हिलाने लगे.
उसके बाद सर कॉलेज चले गए तो हम दोनों घर पर अकेली रह गई थीं.
सर के जाने के बाद हमने बातें की और साथ में बैठ कर रात की चुदाई देखी.
चुदाई देखते देखते सुमन गर्म हो गई और उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा और मुझे किस किया.
मैंने भी उसको किस में पूरा साथ दिया.
उसने टी-शर्ट के ऊपर से ही मेरे दूध मसले और मुझे लिटा दिया.
साथ ही उसने अपनी टी-शर्ट और पजामा उतार दिया.
फिर मेरी टी-शर्ट उतार कर मुझे भी नंगी कर दिया.
वह मेरे बूब्स चूसने लगी और मैं उसके बूब्स मसलने लगी.
मैं कुछ देर बाद उसकी चूत पर आ गई और चाटने लगी, चूत में उंगली डालनी शुरू कर दी.
हम दोनों 69 में आ गई और एक दूसरी की चूत चाटने लगी.
बूब्स और चूत चाट कर एकदम गीली कर दी.
फिर सुमन ने मेरे बैग से डिल्डो निकाला और मुझे पकड़ा दिया.
अपनी कमर में डिल्डो बांध कर मैंने उसकी चुदाई की.
वह सारी रात की चुदाई देख देख कर बहुत ज्यादा गर्म थी.
डिल्डो से चुदाई करके मैंने उसका पानी निकाला और ये सब हमने रिकॉर्ड भी किया.
चुदाई करके हम दोनों नंगी ही सो गईं.
फिर जब मैं उठी तो सुमन सो रही थी.
मैंने टी-शर्ट पहन ली और किचन में आकर चाय बनाने लगी.
थोड़ी देर बाद सुमन भी आ गई.
वह अभी नंगी थी.
उसने पीछे से आकर मुझे चूम लिया- उम्म्म्म …
उसने मेरे मम्मों पर दोनों हाथ रखे और सहलाने लगी.
मेरी टी-शर्ट ऊपर करके गांड पर हाथ फेरने लगी और चूमने लगी
उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और गांड चाटने लगी.
हम दोनों किचन में ही एक दूसरे को चूमने लगीं.
फिर कमरे में आकर मैंने सुमन की चूत में उंगली की और दोनों ने चूत रगड़ी, एक दूसरे के चूत से निप्पलों पर काटा, मैंने उसके निप्पल रगड़े.
फिर दोबारा डिल्डो बांध कर सुमन को चोदा और उसकी चूत का पानी निकालने के बाद उसने मेरा पानी चाट कर निकाला.
हम दोनों एक साथ लेट कर एक दूसरी के शरीर को सहलाते रही.
‘सुमन तू और तेरा भाई दोनों मेरी लेते हो. मेरा फिगर तो तुम लोगों के कारण ही बढ़ रहा है!’
‘अब क्या करें मेरी बन्नो, तू है ही इतनी मस्त माल!’
यह बोल के- वह मुझे किस करने लगी और हम दोनों नंगी ही सो गईं.
फिर जब सुमन उठी तो मैं सो रही थी.
वह मेरे दूध सहलाने लगी और चूसने लगी.
इससे मेरी नींद खुल गई- क्या हुआ मेरी जान, मन नहीं भरा तेरा!
वह मेरे होंठों को चूमने लगी- उम्मम्म स्स्स!
मैं भी उसे चाटने लगी और हमारी जीभ आपस में कुश्ती लड़ने लगीं.
मैंने पुनः डिल्डो कमर पर बांधा और उसकी चुदाई करना शुरू कर दी.
चुदाई के बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए.
सुमन और मैं बहुत खुश थे.
सारा दिन हम ऐसे ही किस वगैरह करते रहे.
शाम को सर आ गए और सुमन कोचिंग चली गई.
सर आए और नंगे हो गए और वे मुझे किस करने लगे.
मैं स्कर्ट टॉप पहनी थी.
सर ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी टांगें नीचे करके खोल दीं.
वे पैंटी के ऊपर से ही चूत चाटने लगे.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
‘सर लगता है, दो हफ्ते का मजा एक ही दिन मैं ले लोगे!’
वे कुछ नहीं बोले.
उन्होंने बस मेरी पैंटी निकाल दी और चूत चाटने लगे.
मैं अपने कपड़े उतार कर पूरी नंगी हो गई.
सर ने मेरे मुँह में लंड देकर चुसवाया.
और जब उनका लौड़ा एकदम कड़क हो गया तो मुझे गोदी में बिठा कर मेरे बूब्स मुँह में लेकर चूसते हुए चोदने लगे.
‘अअह स्स्स्स सर आराम से चूसो न .. आराम से चोदो.’
‘कैसे आराम से चूसूँ और कैसे आराम से चोदूं … साली तू है ही बहुत मस्त चीज.’
यह कह कर सर आधा घंटा तक अलग अलग पोजीशन में मुझे चोदते रहे.
फिर जब सर का पानी निकल गया, तब हम दोनों ने कपड़े पहने और बैठ गए.
थोड़ी देर बाद सुमन आ गई.
सर ने कहा- मैं तुमको घर छोड़ आता हूँ.
मैंने कहा- हां ठीक है.
रास्ते भर सर ने ब्रेक लगा लगा कर मेरे मम्मों को अपनी पीठ पर रगड़वाया.
मैं भी अपना हाथ आगे करके उनका लंड सहला रही थी.
कुछ देर बाद हम दोनों घर आ गए.
रात को समीर ने हमारी चुदाई देखी.
मेरी पत्नी और मेरा एक दोस्त एक ही ऑफिस में काम करते हैं।
कई बार ऑफिस से वापस आते वक्त मेरा दोस्त मेरी पत्नी को घर ड्रॉप करता है।
जिस दिन पत्नी को ऑफिस से आने में देर हो जाती है तो मैं उससे कहता हूँ कि मैं उसे पिक कर लूंगा तो वह कहती है कि आप परेशान मत होइए मैं उसके (मेरे दोस्त) साथ आ जाऊँगी।
मैं अपनी पत्नी पर शक नहीं कर रहा हूँ लेकिन आजकल मुझे यह बात खटकने लगी है।
उन दोनों का ऑफिस से साथ आना मुझे पसन्द नहीं आता, या यों कहूँ कि मैं उन दोनों के साथ साथ होने पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूँ।
क्या मेरा इस तरह से सोचना सही है कि उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है।
या मुझे इस बात को ज्यादा गम्भीरता से न लेते हुए भूल जाना चाहिए।
क्या यह मेरा वहम है?
क्या मैं अपनी बीवी को लेकर कुछ ज्यादा पोजैसिव हो रहा हूँ?
मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ?
अगर आपके पास कोई सुझाव, कोई सलाह हो तो जरूर बतायें।
हो सकता है, आपकी एक छोटी-सी राय हमारी जिंदगी की दिशा बदल दे।
मैं अजीत, मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ.
मुझे चूत चाटने का बेहद शौक है.
आज मैं अपनी पहली सेक्स कहानी लेकर आया हूँ Xxx बुर की चुदाई का मजा लेने की.
मैं एक सरकारी काम से जबलपुर से दिल्ली जा रहा था.
मेरी ट्रेन शाम के 7 बजे जबलपुर से चली.
मैं सेकंड एसी कोच में सफर कर रहा था.
दोस्तो, मैं आपको बता दूँ कि मैं बहुत ही अनुशासन में रहने वाला युवा हूँ.
मुझे सामने से देखने से किसी को नहीं लगेगा कि मुझे चूत का इतना चस्का हो सकता है.
कोच में अन्दर आकर मैंने नजर घुमाई तो कुछ खास नजर नहीं आया.
मैं अपनी बर्थ पर लेट गया.
रात में करीब दो बजे एक लड़की मेरे सामने वाली सीट पर आकर लेट गई.
वह उसकी रिज़र्व सीट थी.
मैंने ध्यान से देखा तो वह अपने फ़ोन में एक चुदाई वाली ब्लू फिल्म देख रही थी.
मैं चुपचाप लेटा रहा.
थोड़ी देर बाद मैंने ध्यान दिया कि वह लड़की अपनी चूत में कुछ डाल रही है.
मेरा मन तो किया कि रंगे हाथ पकड़ कर चोद देता हूँ लेकिन फिर मैं सामान्य बना रहा और मैंने सुबह होने का इंतजार किया.
सुबह उसका कोमल और फूला हुआ बदन देख कर तो लंड अन्दर ही गीला हो गया.
मैंने ठान लिया कि इसको दिल्ली पहुंचने से पहले किसी भी तरह से पटाना है.
यहां मैं आपको बताना चाहूँगा कि मेरी अंग्रेजी बहुत ही अच्छी है और जब मैं अंग्रेजी बोलता हूँ उस वक्त मुझे बोलता देख कर कई बार लोग पलट कर भी देख लेते हैं.
मैंने सोचा अपनी इसी योग्यता से इसे सैट करने की कोशिश करता हूँ.
तो मैंने मुस्कुराते हुए उससे पूछा- आपका नाम क्या है?
उसने बताया- मेरा नाम दीक्षा है.
मैं- आपको कहां तक जाना है?
दीक्षा- जी, मुझे दिल्ली जाना है.
मैं- क्या करती हैं आप दिल्ली में?
दीक्षा- मैं एक आईटी कंपनी में जॉब करती हूँ और घर से वापस जॉब के लिए जा रही हूँ.
वह मुझसे बात करने लगी थी और उसने बताया कि वह लक्ष्मी नगर में कहीं रहती है और दिल्ली में उसका एक बॉयफ्रेंड भी है, जो उसके साथ ही उसकी कंपनी में काम करता है.
अब तक उसके बूब्स को देखकर मुझसे रुका नहीं जा रहा था क्योंकि उसके दूध बहुत कामुक लग रहे थे, एकदम तने हुए थे.
मेरी नजरें बार बार उसके मम्मों पर ही टिक रही थीं.
वह टी-शर्ट पहनी हुई थी और उसके थिरकते मम्मों से साफ समझ आ रहा था कि उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई है.
उसके बिना ब्रा में होने का सुबूत उसकी चूचियों के कड़क निप्पल भी इशारा दे रहे थे.
फिर मैंने सोच लिया कि हिम्मत करके चुदाई की बात भी छेड़ देता हूँ.
मैं- आपको हिंदी फिल्म पसंद है?
दीक्षा- हां, मुझे अच्छी लगती है.
मैं- मेरा मतलब एडल्ट फिल्म से है, जो आप रात में देख रही थीं.
दीक्षा- जी, वह मैं … वह …
उसका ये बुदबुदाना था कि मुझे मौका मिल गया.
मैंने एक हाथ उसके पैर पर रखा और कहा- कोई बात नहीं यार, मैं भी बहुत देखता हूँ लेकिन मुझे रियल वाली ज्यादा पसंद है और बस यही जानना चाहता था कि आपको कैसी वाली पसंद है?
वह शर्माती हुए आंखें झुका कर बोली- मुझे भी रियल वाली पसंद है.
मेरा हाथ अब उसकी जांघों तक जाने लगा था.
सुबह का टाइम था तो मैं ज्यादा कुछ ना कर सका मगर उसका विरोध ना देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैंने उससे कहा- एक काम करो अपना नंबर दे दो, मैं एक मस्त चुदाई वाली वीडियो भेजता हूँ.
उसने नंबर दिया तो मैंने उसे व्हाट्सप्प पर एक वीडियो भेजी.
वह फिल्म उसको अच्छी लगी.
अब मैंने उससे चैट पर ही पूछा- चुदना चाहती हो?
उसने कहा कि ट्रेन में नहीं हो पाएगा और अब तो हम लोग दिल्ली पहुंचने वाले ही हैं!
मुझे भला इससे ज्यादा क्या ही चाहिए था.
मैंने पूछ लिया- तो दिल्ली पहुंच कर चुदवा लो!
उसने कहा- कहां चोदोगे?
तो मैंने कहा- जहां तुम कहो.
फिर उससे बात करके मैंने पहाड़गंज के एक होटल में एक रूम बुक कर दिया.
अब तक हम दोनों सेक्स चैट कर रहे थे तो मैंने उससे पूछा- कितनी देर तक चुदना चाहती हो मेरे लंड से?
तो वह बिंदास बोली- जितनी देर तुम चोद सकते हो, उतनी देर तक चुत चुदवाऊंगी … और अगर अच्छा चोदोगे तो रात में भी तुम्हारे साथ ही रुक जाऊंगी.
दोस्तो, उसकी ये कामुक बातें सुनकर मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने ट्रेन के बाथरूम में जाकर जोर से मुठ मारी.
वह समझ गई थी तो मुझे देख कर मुस्कुरा दी और बोली- अब फ्री हो गए?
मैंने कहा- क्या करता यार … रहा ही नहीं जा रहा था.
वह खिलखिलाने लगी.
उसी समय मैंने मौका देख कर उसका दूध मसल दिया.
वह हँसती हुई आह कह कर मुझसे दूर हो गई.
अब तक हम दिल्ली पहुंच गए.
फिर मैंने एक ऊबर कैब बुक की और हम सीधा होटल पहुंच गए.
इसी बीच मैंने उसके चूचे खूब मसल लिए और वह भी मेरे लौड़े को अपने हाथ से दबा कर देख चुकी थी कि मेरा हथियार कैसा है.
वह जब लंड सहला रही थी तब बहुत गर्म हो रही थी.
मैंने कहा- कैब में ही चूसना चाहोगी.
तो वह कुछ बोली तो नहीं पर उसने मुँह से खा जाने जैसा एक्शन किया.
मैं समझ गया कि आज की सुबह मस्त चुत के नाश्ते से ही शुरू होगी.
होटल के कमरे में अन्दर आए और हमारा दरवाजा बंद हुआ ही था कि मैं उस पर टूट पड़ा.
वह भी मेरे साथ लग गई.
मैंने उसको कुछ मिनटों में ही नंगी कर दिया.
उसने भी लपक के मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया.
उसको मेरे लंड का बड़ा साइज बहुत पसंद आया.
उसने नीचे बैठ कर मेरा लंड चूसा.
दीक्षा- हाय भेनचोद, कितना मोटा लंड है रे तेरा … इसको तो मैं आज खा ही जाऊंगी.
मैं- हां बेबी, आज ये तेरी चुत के लिए फुल तैयार है … आज यह तुम्हारी चूत को रगड़ कर फाड़ देगा.
वह बोली- हां मुझे भी ऐसे ही लंड से फड़वाना है.
उसने जब जी भरके मेरा लंड चूस लिया तो वह कहने लगी- अच्छा बाथरूम में मुठ मार आए थे, इसीलिए नहीं झड़ रहा है.
मैंने कहा- यह तो तुम्हारे फायदे की बात है न!
वह हंस कर बोली- हां है तो फायदे की बात … अब देर तक चलेगा.
मैंने कहा- मुठ न भी मारता तब भी देर तक ही चलने वाला था.
वह हंस रही थी.
मैं- चलो अब कुश्ती लड़ते हैं.
अब हम दोनों बेड पर आ गए और मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी और उसे डीप किस करने लगा.
साथ ही मैं अपने एक हाथ से उसके एक मम्मे को मसलता रहा.
एक हाथ से दूध मसलना और एक हाथ से चुत रगड़ना … मेरी ये अदा उसे बहुत पसंद आयी.
वह पूरी मस्ती के साथ किस करने लगी.
कुछ देर बाद मैं उसकी चूत पर आया और चाटने लगा.
उसकी चूत तड़पने लगी थी.
वह बोली- अब और ज्यादा मत तड़पाओ … जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डालो.
लेकिन मैं ऐसे कहां उसको चोदने वाला था.
उसकी तड़प को बढ़ाने के लिए मैंने चूत में जीभ अन्दर डाल दी.
वह जोर से चिल्लाने लगी और मेरा सर चूत में घुसाने लगी.
काफी देर चूत चाटने के बाद मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लंड दे दिया और वापस से उसकी चूत चाटने लगा.
अब हम दोनों 69 की पोजीशन में थे.
इसी दौरान मेरा पानी निकल गया और वह मेरे लंड की एक एक बून्द को चट कर गई.
वह बोली- कैसा लगा?
मैंने उसके गाल में लंड रगड़ते हुए कहा- अब तो यह और देर तक चलेगा!
वह बोली- मेरी चुत में कसावट इतनी ज्यादा है कि तेरे लवड़े को निचोड़ लेगी.
मैंने कहा- निचोड़ेगी तो तब, जब अन्दर लेगी. चल टांगें खोल रंडी … अभी देखता हूँ तेरी चुत को … आज उसे भोसड़ी बना दूंगा.
यह सुनकर वह खिलखिलाने लगी और बोली- बड़े कमीने हो … फ्री की चुत मिल गई, तब भी रंडी बोल रहे हो.
मैंने उसके एक दूध को मींजते हुए कहा- क्या हुआ बेबी, रंडी शब्द से झांटें सुलग गई क्या?
वह बोली- साले, अभी चुत चाट कर हटा है … झांटें दिखी भी थीं तुझे? मैं हर वक्त चुत साफ रखती हूँ.
मैंने हंस कर कहा- हां, तेरी तो झांटें सुलगने का कोई सीन ही नहीं है.
इसी तरह की चुहलबाजी में वह मेरे लंड को सहलाती रही और कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
अब चुदाई शुरू होने का वक्त था.
मैंने उसकी चूत चुदाई के लिए उसे चित लेटने का कहा.
दीक्षा- हां, मुझे चित लिटा कर ही चोदो … और पूरी ताकत से चोदना.
मैंने उसे लिटा दिया और चुत पर लंड सैट कर दिया
वह- आह जल्दी से लंड डालो मेरी चूत में … आह बुझा दो मेरी प्यास और मसल डालो मुझे … रगड़ डालो.
उसकी कामुक सिसकारियां सुन कर मेरा लंड और कड़क हो गया.
मैंने चुत में लंड पेल दिया और पूरी स्पीड से Xxx बुर की चुदाई करने लगा.
वह एकदम से लंड पेलने से दर्द से चिल्ला उठी और बोली- साले मादरचोद … धीरे चोद भैन के लवड़े … अभी नई नकोर चुत है … मैं ज्यादा बार नहीं चुदी हूँ.
मैंने कहा- हां तो ज्यादा बार चुदवा ले रंडी साली … कुतिया चिल्ला क्यों रही है. सारा होटल अपने कमरे में बुलाएगी क्या?
उसे एकदम से ‘होटल में हैं’ इस बात का भान हुआ और वह अपने मुँह पर हाथ रख कर कराहती हुई बोली- धीरे धीरे चोदो न … दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- कुछ देर रगड़वा ले रानी सारा दर्द मस्ती में बदल जाएगा.
यही हुआ भी, कुछ ही देर में वह मस्त हो गई और चुत उठा उठा कर लंड से लोहा लेने लगी.
मैंने भी मस्ती से उसकी चुत में ठोकरें देते हुए उसकी एक चूची को पीना शुरू कर दिया.
वह ऊपर को उठ कर मेरे मुँह में अपना पूरा दूध देने की कोशिश कर रही थी.
कुछ ही देर में बुर की चुदाई चरम पर पहुँच गई और मैंने उससे पूछा- माल किधर लोगी?
वह बोली- चुत में नहीं छोड़ना … मेरे मुँह में दे दो.
मैंने लंड चुत से निकाला और उसके मुँह में दे दिया.
उसने लंड का माल पी लिया और लंड को चाट कर साफ कर दिया.
हम दोनों चुदाई के बाद अलग अलग होकर अपनी अपनी साँसों को नियंत्रित करने लगे.
वह मेरी छाती चूम कर बोली- मजा आ गया दोस्त … सच में तुमने चुत की मां चोद दी है.
मैं भी हंस कर बोला- अभी तो शुरुआत है बेबी … एक और राउंड के बाद बताना कि कैसा लगा मैं!
वह हंसने लगी और हम दोनों ने दूसरा राउंड शुरू कर दिया.
इस बार मैंने उसको डॉगी स्टाइल में चोदा.
उसकी Xxx बुर दो बार चुदने के बाद और रसीली हो रही थी.
मैंने उसकी गांड पर लंड झाड़ कर पूछा- आज मजा आ गया सच में … बोलो मेरी रांड, और चुदवाना है क्या?
वह भी हांफ़ती हुई बोली- हां बेबी. तुम मस्त चोदते हो.
मैंने कहा- फिर तो आज रात यहीं रुकना पड़ेगा.
तो उसने कहा- ठीक है, इसके लिए मुझे कुछ कॉल करना पड़ेंगे.
उसने किसी से कुछ बात की और रुकने का फैसला किया.
शाम को हम थोड़ा बाहर गए और फिर खा पीकर वापस आकर हमने जमकर पूरी रात चुदाई की.
अब गुरूजी ने अपने लंड को मेरी Hindi Porn Stories योनि-द्वार पर रख दिया। मैं उनके चेहरे को निहार रही थी, मगर मेरा ध्यान योनि से सटे उनके लिंग पर था। मैं इंतज़ार कर रही थी कि कब उनका लिंग मेरी योनि की तृष्णा को शांत करेगा। उत्तेजना से मेरे भगोष्ठ अपने आप थोड़े से खुल गए थे।
“इसे अपने हाथों से अन्दर लो !” उन्होंने कहा।
मैंने फ़ौरन उसके लिंग को पकड़ कर अपने योनि-लब खोल कर उसमें रखा, गुरूजी ने एक जोर का झटका मारा और पूरा लिंग सरसराता हुआ अन्दर तक चला गया।
“ऊऽऽ ऊऊ फ़्फ़फ़्फ़्फ़ आऽऽऽ आआ ह्ह्ह्ह्ह्ह् !” मैं चीख उठी। ऐसा लगा कि उनका तगड़ा लिंग मेरे पूरे बदन को चीर कर रख देगा। मैंने अपनी टांगों से गुरूजी की क़मर को जकड रखा था, मुँह से चीख निकल रही थी मगर टांगों से उनके क़मर को अपनी योनि की तरफ ठेल रही थी।
“धीरे गुरुजी ! दर्द कर रहा है ! आपका ये बहुत बड़ा है !!”
गुरूजी धीरे धीरे अपना लिंग मेरी योनि से बाहर तक खींचा साथ साथ मैं झड़ गई। ऐसा लगा कि उनका लिंग पिस्टन की तरह बाहर आते हुए अपने साथ मेरे योनि-रस को खींचता हुआ ले आ रहा है।
फ़िर उन्होंने अपने लिंग को हरकत दे दी। मेरा दो बार रस निकल चुका था इसलिए मैं हांफने लगी थी। लेकिन उनके धक्कों ने कुछ ही देर में मुझे दोबारा गरम कर दिया। कुछ देर तक इसी तरह मुझे चोदने के बाद मेरे बदन से उतर गए। अब वो बिस्तर पर सीधे लेट गए. मैंने उठकर उनके लिंग को देखा मेरे रस से भीगा हुआ मोटा काला लिंग मुझे पागल कर रहा था। मैंने उनकी क़मर के दोनों ओर अपने घुटनों को रख कर अपने योनि-छिद्र को असमान की ओर तने लिंग पर रखा, अपने हाथों से लिंग को ठीक से छिद्र में करके उनकी छातियों पर दोनों हाथ रख कर उन्हें सहलाते हुये अपने चूतड़ों को नीचे की ओर दबाया। उसका लिंग कुछ अन्दर तक घुस गया। फ़िर मैंने अपना सारा बोझ उनके ऊपर डाल दिया और उनका लिंग मेरी योनि में अन्दर तक घुसता चला गया।
मैं उनके लिंग पर अपनी चूत को ऊपर नीचे करने लगी। उन्होंने मेरी छातियों को पकड़ कर दबाना शुरू किया, एक छाती के अग्र भाग को जोर से खींचा तो उसमें से दूध के धार निकल कर गुरूजी के चेहरे पर पड़ी। उन्होंने मुँह खोल कर उस धार को अपने मुँह में समेट लिया। मैं उत्तेजना से पगला गई थी और उनके लिंग को बुरी तरह चोद रही थी, मेरा सिर पीछे की तरफ झटके खा रहा था। मैंने उनकी छातियों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और चीख पड़ी- आआह्ह्ह् !!!
मैंने उनके सीने के बालों को अपनी मुट्ठी में भर कर खींचा साथ ही मैं तीसरी बार झड़ गई, पट पट करके जाने कितने बाल टूट कर मेरी मुट्ठी में आ गए। मैं निढाल सी उनके सीने पर लेट गई।
“अब बस भी करो !” मैंने उनके होंठों को चूमते हुये कहा,”मार ही डालोगे क्या आज?”
उसने मुझे अपने ऊपर से हटाया और मुझे खींच कर बेड के किनारे पर हाथ और पैरों के बल ऊँचा किया। तभी वही लडकी दोबारा आकर मेरी चिकनी हो रही योनि को अच्छी तरह से साफ कर गई। फ़िर गुरूजी ने खुद बेड के पास जमीन पर खडे होकर पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया. और फ़िर से जोर जोर से धक्के मारने लगे। मैं उसके लंड के हर धक्के के साथ चीख उठती। पूरे कमरे में मेरी उत्तेजना और दर्द मिश्रित आनन्द भरी आवाजें गूँज रही थी। ऐसी चुदाई मुझे पहली बार मिल रही थी। वरना जीवन तो अधिक से अधिक दस मिनट ही सम्भल पाते हैं।
कोई घंटे भर तक इसी तरह चोदने के बाद उन्होंने अपने वीर्य से मेरी पूरी योनि को पूरी तरह से भर दिया। मैं बिस्तर पर निढाल हो कर गिर पडी, गुरूजी मेरे बदन पर ही कुछ देर तक पसरे रहे, फ़िर बगल में लेट गए। मेरी योणी से उनका वीर्य निकल कर सफ़ेद चादर को गीला कर रहा था। हलकी सी खटाक की आवाज आई तो मैं समझ गई कि मोनी बाहर चली गई है। मैं गुरूजी से बेतहाशा लिपट गई।
“आप मुझे अपनी छत्रछाया में ले लो ! मैं अब आपसे दूर नहीं जा सकती !” मैंने उनके होंठों को चूमते हुए कहा। उन्होंने मुझे बाँहों में भर कर करवट लेकर मुझे अपने सीने पर लिटा लिया, मैंने नीचे सरकते हुये उनके सीने को चूमा और सीने के बालों पर उँगलियों से खेलने लगी। फ़िर जीभ निकाल कर उनके चूचुकों पर फिराने लगी। फ़िर मेरे होंठ सरकते हुये नीचे की ओर फिसलने लगे, उनके लिंग के चारों ओर फैले घने बालों में अपने चेहरे को रख एक गहरी सांस ली और जीभ को उनके शिथिल पड़े लिंग पर फिराने लगी। उनकी उँगलियाँ मेरे बालों पर फ़िर रही थी।
“क्यों मन नहीं भरा?”उन्होंने पूछा।
“उम्म्म्मऽऽ ! नहींऽऽऽ !”
उन्होंने मेरे वक्ष और उनकी चोटियों को मसलते हुए अपने लिंग की ओर संकेत करते हुए पूछा,”कैसा लगा ये?”
“बहुत अच्छा. जी करता है इसे अपनी योनि में ही डाले रखूँ !” मैंने उसके ढीले पड़े लिंग को वापस मुँह में डाल लिया। थोड़ी ही देर में वो फ़िर से अगली लड़ाई के लिए तैयार हो गया।
उन्होंने उठ कर लाइट जला दी। मैंने शर्म से अपने चहरे को हाथों से ढक लिया। गुरूजी ने बिस्तर पर आकर मेरे हाथों को चेहरे पर से हटा दिया। मैंने झिझकते हुये आँखें खोली तो उसका मोटा तगड़ा लिंग आँखों के सामने तना हुआ था। मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरी टांगों को मोड़ कर सीने से लगा दिया, अब एक तकिया लेकर मेरी क़मर के नीचे रख दिया, ऐसा करने से मेरी योनि उँची हो गई थी।
“देखना अब कैसे जाता है मेरा लिंग तुम्हारे अन्दर !” कह कर वो अपना लिंग मेरी योनि से सटा कर बहुत धीरे धीरे अन्दर करने लगे।
मेरी योनि पूरी तरह फ़ैल गई थी। ऐसा लग रहा था मानो कोई मोटा बांस मेरी योनि में डाला जा रहा हो। पूरी तरह अन्दर करने के बाद इस बार बहुत तसल्ली से मुझे चोदने लगे। मैं भी नीचे से क़मर उठा कर उनका साथ देने लगी। काफ़ी देर तक इसी तरह चोदने के बाद उन्होंने बिस्तर के किनारे पर बैठ कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और चोदने लगे। फ़िर मुझे दीवार से सट कर जमीन से उठा लिया, मैंने अपनी टांगें उनकी क़मर पर बाँध दी और उनके लिंग के खूंटे पर झूल गई। कई तरह से मुझे चोदने के बाद वापस बिस्तर पर लाकर गुरूजी मेरी योनि में अपना रस डाल दिया। उसके बाद हम थक कर सो गए।
सुबह छः बजे मोनी के उठाने पर मेरी नींद खुली। मैं नग्न अवस्था में ही सो रही थी। मैंने बगल में देखा, गुरूजी पहले ही उठ कर जा चुके थे।
मैं थकान महसूस कर रही थी, मोनी ने सहारा देकर मुझे उठाया,”रात कैसी गुजरी?” मोनी ने पूछा।
मैं उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा उठी, जो उसे समझाने के लिए काफ़ी था। मैंने आगे बढ़ने को कदम बढ़ाया तो मेरे कदम लड़खड़ा उठे। मोनी सहारा देकर मुझे बाथरूम की तरफ ले गई,”नहा लो, थकान उतर जायेगी !”
वो मुझे बाथटब में रगड़ रगड़ कर नहलाने लगी। गुलाब के फूलों से भरे टब में नहाते हुये मेरा मन ख़ुशी से भर उठा। मैं नहा कर बाहर निकली तो मुझे फ़िर से एक किमोनो औढ़ा दिया गया। मेरी क़मर में डोरी से किमोनो को बाँध दिया। सामने से पूरा खुला होने के कारण चलने पर मेरी नग्न टाँगें बाहर निकल आती थी।
अब मुझे सहारे की जरूरत महसूस नहीं हो रही थी मगर मोनी ने मेरा एक हाथ थाम रखा था। कमरे में आते ही मानो पूर्व-नियोजित तरीके से एक युवती एक ग्लास में वैसा ही कोई तरल पदार्थ ले कर आई जैसा पिछली रात मैंने लिया था। इसे पीते ही मेरे बदन में एक नई ताजगी आनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में मैं एक दम तारो-ताजा हो गई।
अब मुझे लेकर मोनी एक हॉल में आ गई। हॉल के बीचों बीच एक बिस्तर सजा हुआ था। उस पर सुर्ख लाल रंग की रेशमी चादर बिछी हुई थी। बिस्तर के चारों ओर बारह कुर्सियों में आश्रम के सारे शिष्य बैठे हुए थे। बिस्तर के पास एक सिंहासन पर गुरूजी बैठे हुए थे। मोनी मुझे लेकर चलते हुए बिस्तर के पास आकर रुकी, उसने मेरे किमोनो की डोरी को खोल दिया, किमोनो सामने से खुल गया, अन्दर कुछ नहीं पहना होने के करण टांगों के बीच का उभार सामने दिख रहा था।
मोनी थोड़ी दूर हट गई, गुरूजी उठे और मेरे पीछे आकर मेरे खुले हुए गाऊन को मेरे कंधे से उतार दिया। मेरा गाऊन बदन पर से फिसलता हुआ नीचे गिर गया। मैं उन चौदह जोड़ी प्यासी अँखिओं के सामने बिल्कुल नग्न अवस्था में खडी थी।
गुरूजी ने मुझे कंधे से पकड़ कर उसी जगह पर चारों ओर घुमाया, फ़िर क़मर से मुझे थामे हुये धीरे धीरे चलते हुए एक एक शिष्य के पास से घुमाया। सब भूखी नजरों से मेरे बदन को निहार रहे थे।
गुरूजी ने कहा,”ये है रुचिका ! आज से ये हमारे आश्रम को ज्वाइन कर रही हैं !”
सबने ख़ुशी से तालियाँ बजाई।
“संस्था में शामिल करने के लिए जो जो रस्म होती हैं उन्हें आरम्भ किया जाए !”
कहकर गुरूजी जाकर अपनी स्थान पर बैठ गए। तभी एक लड़की एक चाँदी का कटोरा लेकर आई। मोनी ने उसे मेरे हाथ में देते हुये कहा,”इसे पी लो !”
उस पात्र में गाढ़ा मक्खन की तरह कुछ रखा था। मैंने अपने होंठों से उसे लगा कर एक घूँट भरा तब पता चला कि वो वीर्य था।
“यह हमारे आश्रम के सारे शिष्यों का वीर्य है, इसे पूरा पी लो !” मोनी ने कहा।
मैंने घूँट भर भर कर सारा वीर्य पी लिया।
“आज से तुम संस्था के किसी भी मर्द के साथ सम्भोग करने के लिए स्वतंत्र हो और कोई भी जब चाहे तुम्हें भोग सकता है। तुम इन्कार नहीं करोगी।” गुरूजी ने कहा।
अब मोनी ने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया। दो लड़कियाँ दो खाली कटोरे लेकर आई। उन्हें मेरे स्तनों के नीचे रख कर मेरे चूचुकों को पकड़ कर उनमे से दूध निकालने लगी। ऐसा लग रहा था मानो मैं कोई औरत नहीं गाय हूँ जिसका दूध निकाला जा रहा है। मेरी छातियों को वो तब तक दुहती रही जब तक आखिरी बूँद तक नहीं निकल गया। मेरी दोनो छातियाँ उनके मसलने की वजह से लाल हो गई थी और दुःख रही थी।
दूध की कटोरियाँ लेकर वो युवतियाँ वहाँ मौजूद एक-एक आदमी के पास जाती और वो आदमी उस से कुछ दूध पीता। ऐसे करके सारे आदमियों ने मेरा दूध चखा।
अब सारे शिष्य खडे हो गए और अपने अपने कपड़े उतार दिए। सिर्फ़ गुरूजी ही कपड़े पहने हुए थे। अपने चारों ओर इतने सारे खड़े लंड देख कर मेरा बदन सनसनाने लगा। सारे मर्द अपने अपने स्थान पर बैठ गए।
अब मोनी ने मुझे बिस्तर पर हाथों और घुटनों के बल झुका दिया। मैं एक ऐसी कुतिया लग रही थी जो गरमाई हुई हो। मेरी योनि में रस से छूटने लगा। तभी कुछ हुआ कि मेरा बिस्तर धीरे धीरे घूमने लगा। रफ्तार बहुत धीमी थी लेकिन इससे मैं बारी बारी हर आदमी के सामने से गुजर रही थी। तभी दो आदमी उठे और मेरे दोनों तरफ आकर खड़े हो गए।
एक ने मेरे पीछे से बिना मुझे किसी तरह उत्तेजित किए अपना लंड एक झटके से मेरे अन्दर कर दिया। अगले झटके में तो उसका लिंग पूरी तरह मेरी योनि में समा गया और उसके अन्डकोष मेरी जांघों से टकरा गए।
“आऽऽआअह …… ऊऊऊऊह् ह्ह्ह्छ !!” बस यही निकला मेरे मुँह से।
फ़िर वो जोर जोर से धक्के मारने लगा। दूसरा मेरे सामने आया और मेरी थोढी को पकड़ कर मेरे चेहरे को ऊपर उठाया। मेरे चेहरे पर फैले हुए मेरे बालों को हटा कर नीचे झुक कर मेरे होंठों को एक बार चूमा, फ़िर वो खड़ा हो गया। मेरी नजरें अगले कदम के इन्तजार में उसके चहरे पर जमी हुई थी।
“इसे मुँह में लो ! उसने अपने लिंग की तरफ इशारा किया।
मैंने देखा उसका तगड़ा लिंग मेरे होंठों से बस कुछ ही इंच दूरी पर है, मेरे होंठ अपने आप खुलते चले गए। उसने धीरे से मेरे सिर को थामते हुए अपने लिंग को मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने देखा लिंग से भीनी भीनी सुगंध आ रही थी।
अब दोनो तरफ से मेरी ठुकाई चालू हो गई। दोनों जोर जोर से मुझे ठोक रहे थे और सारे आदमी अपनी अपनी जगह पर नग्न बैठे हुए मेरी चुदाई देख रहे थे। सबके हाथ अपने अपने लिंग को सहला रहे थे। जो मेरी योनि में ठोक रहा था उसने कोई १५ मिनट तक मुझे चोद कर अपना लिंग एकदम से अन्दर तक डाल दिया और उसके लिंग से निकली वीर्य की धारा मेरी योनि को भरने लगी। उसके इस तरह जोर से धक्का मारने के कारण सामने वाले का लिंग मेरे मुँह में अन्दर तक घुस गया, साथ ही उसका लिंग भी झटके मारने लगा। वो भी अपने वीर्य से मेरे मुँह को भरने लगा। मैं भी उनके साथ ही झड़ गई।
दोनों ने अपना वीर्य मेरे अन्दर खाली करने के बाद अपने अपने लिंग बाहर निकाले, फ़िर मुझे उन दोनों के लिंग को चाट चाट कर बिल्कुल साफ करना पड़ा।
दोनों अपनी अपनी जगह पर जा कर बैठ गए। मैं जोर जोर से हांफ रही थी।
फ़िर दो और आदमी आकर पहले की तरह ही मेरी चुदाई करने लगे। दोनों काफ़ी देर तक ठोक कर मेरे अन्दर खाली हो गए। उनके बैठने पर दो और उठ कर उनकी जगह आ गए।
तीसरा दौर ख़त्म होते होते मेरे हाथों में और अपना बोझ सम्हाले रखने की ताकत नहीं बची और मैं मुँह के बल बिस्तर पर गिर पडी। अभी भी छः आदमी बचे थे।
अब तीन आदमी उठ कर आए।
एक मेरी बगल में आकर लेट गया। उसका खड़ा लिंग ऊपर की तरफ खड़ा हुआ था. बाकी दोनों ने मुझे बाँहों से पकड़ कर उठाया और मेरी टांगों को चौड़ा कर के उसके लिंग पर मेरी योनि को टिकाया, मेरी योनि से रस टपक कर बिस्तर पर गिर रहा था। एक धार उसके लिंग को भिगोती हुई नीचे जा रही थी। कुछ देर तक मैं उस अवस्था में रही फ़िर मैंने अपना बोझ उसके लिंग पर डाल दिया और उसका मोटा लिंग मेरी योनि में घुसता चला गया।
मैं अपने हाथ उसके सीने पर रख कर अपनी क़मर को धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगी मगर उसका तो इरादा ही कुछ और था। उसने मेरे चूचुकों को पकड़ कर अपनी ओर खींचा, मैं उसके सीने से सट गई। उसने मेरे बदन को अपनी बाँहों में समां कर सख्ती से अपने से लिपटा लिया। मेरी मोटी मोटी छातियाँ उसके सीने में पिसी जा रही थी।
एक लडकी एक कटोरे में कोई तेल लेकर आई। मोनी ने मेरे दोनो चूतड़ों को अलग करते हुए मेरी गाण्ड के छिद्र पर कुछ तेल गिराया और अपनी उँगलियों से अन्दर तक उसे अच्छी तरह लगाने लगी।
“नहींऽऽईई.. ..प्लीज़ऽऽ ..यह..मुझ से …नहींईइ. ..होगाऽऽ॥ ” मैं कसमसा उठी।
“मेरी फट जाएगीऽऽईई. प्लीज़ !!!… मैं सबको खुश कर दूँगी ऽऽऽई मगर वहाँ नहींऽ।…”
मगर वहाँ मेरी विनती सुनने वाला कोई नहीं था।
एक जोर के धक्के से उस आदमी ने अपने लिंग का सुपाड़ा मेरी गाण्ड में डाल दिया।
“आऽ… अऽऽऽआआआ आआअह ह्ह्ह्ह …… म्माअआ ” मैं चीख उठी।
दो और जोर जोर के झटके लगे और पूरा लिंग मेरी गाण्ड के अन्दर था।
मैं दर्द से दोहरी हुई जा रही थी। मोनी पास आकर मेरे चेहरे को सहला रही थी और धैर्य रखने को कह रही थी।
अपना पूरा लिंग अन्दर डाल कर वो कुछ देर रुका, फ़िर दोनों आगे और पीछे से मुझे चोदने लगे। अब तीसरे ने मेरे पास आकर मेरे चेहरे को एक ओर घुमा कर अपना लिंग मेरे मुँह में डाल दिया। इस तरह की यौन क्रीड़ा मैंने सिर्फ़ विदेशी नग्न फ़िल्मों में देखी थी या सुनी थी मगर आज यही मेरे साथ हो रहा था।
तीनों ने जोर जोर से मुझे ठोकने के बाद मेरे तीनों छेदों में अपने अपने गर्म-गर्म वीर्य भर दिया। उनके बाद बाकी बचे तीनों ने भी मुझे उसी तरह चोदा।
कोई दो-ढाई घण्टे की चुदाई के बाद मुझमें तो उठकर खड़े होने की भी ताकत नहीं बची थी, पूरा बदन बुरी तरह दुःख रहा था। मोनी और एक युवती ने आकर मुझे उठाकर गुरूजी के क़दमों में बिठा दिया, गुरूजी ने अपना लिंग निकाल कर मेरे सिर पर रखा, फ़िर उसे नीचे सरकाते हुए मेरे मुँह में डाल दिया। उनके लिंग को मैंने चूस चूस कर खल्लास किया।
फ़िर सब उठ कर उस कमरे से निकल गए, सिर्फ़ मैं मोनी और एक लड़की बची थी।
मोनी ने मुझे उठाकर मेरे बदन को पोंछा और मुझे मेरे कपड़े पहनाए, मुझे मेरी कार की पिछली सीट पर बैठा कर एक शिष्य मुझे मेरे घर तक छोड़ आया। मेरे पति जीवन लाल काम पर जा चुके थे, इसलिए मैं बच गई।
मैं घर आकर ख़ूब नहाई और खाना खाकर जम कर नींद ली। अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाया क्योंकि कुछ बचा ही नहीं था उसके लिए।
शाम तक एकदम तरोताज़ा हो गई थी और बन-संवर कर माथे पर सिन्दूर और मंगलसूत्र को ठीक कर अपने पति के आने का इंतज़ार करने लगी ! Hindi Porn Stories
हेल्लो दोस्तों ! मैं कोई कहानीकार Antarvasna नहीं हूँ, पर यहाँ कई कहानियाँ पढ़ने के बाद मैंने भी अपना एक अनुभव आपको बताने की कोशिश की है. उम्मीद है आपको पसंद आएगी.
बात उस समय की है जब हम एक महानगर के पास के एक छोटे से शहर में रहने गए. वो एक नई कालोनी थी और बाज़ार दूर था इस. उसी समय हमारे पड़ोस के मकान में एक परिवार रहने आया. पति पत्नी और उनका 6 महीने का बच्चा. उस औरत को जब भी देखता था तो मेरे लंड उससे सलामी देने लगता था. क्या ज़बरदस्त माल थी. उमर 21 साल. बच्चा होने के बाद भी अच्छा संवार कर रखा था उसने अपने आप को.
पतली कमर गोरा रंग और भरा हुआ शरीर. मुझे शुरू से ही भरे बदन की ज़बरदस्त आंटियाँपसंद हैं. आंटी को हिन्दी फिल्मों का बहुत शौक था. और मुझसे हर हफ्ते 1-2 फिल्मों की कैसेट मंगवा कर घर पर देखती थी. उसके पति का ट्रांसपोर्ट का बिज़नस था और उन दिनों उनके अहमदाबाद के कई चक्कर लगते थे.
वो महीने में मुश्किल से एक हफ्ता ही घर पे रह पाते थे. पर जब वो घर पर होते थे तो भी मुझसे ही फिल्में मंगवाया करते थे. विडियो लाइब्रेरी वाला उनका दोस्त था, वोह उससे फ़ोन कर देते थे और मैं कैसेट ले आता था. पर जब वो कैसेट मंगवाते थे तो मुझे फ़िल्म की स्पेल्लिंग असली स्पेल्लिंग से अलग लगती थी.
एक दिन अंकल घर आए, मुझसे एक फ़िल्म मंगवाई. अगले दिन मैं कॉलेज से वापस आया तो देखा कि घर पे ताला लगा है तो मैं आंटी के घर चला गया. आंटी ने बताया कि मम्मी को मार्केट जाना था तो वो अभी गई हैं, तुम यहीं इंतज़ार कर लो.
मैंने अंकल के बारे में पूछा तो पता चला कि उनका ट्रक ख़राब हो गया है तो वो सुबह ही चले गए हैं और 10 दिन के बाद आएंगे. आंटी का मूड बहुत ख़राब था. मुझे लगा कि वो अभी रो रही थी. मैंने पूछा तो वो बोली कि तबियत ठीक नहीं है. मुझसे कहा कि मैं नहा कर आती हूँ फिर चाय बना दूंगी.
मैं बैठ गया, अचानक मेरी नज़र उस कैसेट पर पड़ी और मैं सोच ही रहा था कि इस फ़िल्म कि स्पेल्लिंग भी कुछ अलग क्यों है. थोड़ी देर में आंटी नहा कर आ गई और चाय बना लायी. मैंने उनसे पूछा कि आंटी कुछ कैसेट की स्पेल्लिंग ग़लत क्यों लिखी होती है, तो वोह मुस्कुरा दी और बात को घुमा दिया. फिर अंकल और उनके काम के बारे में बात होने लगी तो वो कहने लगी कि अंकल के पास मेरे लिए समय नहीं है और अचानक फिर से रोने लगी और अपना सर मेरे कन्धों पर रख दिया. मैंने उनके कन्धों पे हाथ रखा और चुप कराने की कोशिश करने लगा.
उन्होंनें स्लीवेलेस सूट पहना था और उनकी चिकनी बाहों का स्पर्श मुझे मजा देने लगा. मेरा लंड खड़ा हो गया और पैंट से बाहर आने के लिए मचलने लगा. मैं आंटी को तसल्ली देने लगा और बोला कि आप जैसी सुंदर बीवी को छोड़ कर वो कैसे चले जाते हैं. अगर मैं आपका पति होता तो…
फिर चुप हो गया तो वो बोली कि अगर होते तो… आगे बोलो… मैंने कहा कि तो मैं आपको दिन रात प्यार करता. वो बोली कि फिर तुम्हारे अंकल क्यों नहीं करते… क्या मैं अच्छी नहीं हूँ…?
मैंने कहा कि आप बहुत सुंदर हो…फिर धीरे से मैंने उसके होठों को चूम लिया और हम दोनों धीरे धीरे एक दूसरे को किस करने लगे. धीरे धीरे हमने एक दूसरे को बाहों में भर लिया और ज़ोरदार किस चालू हो गई, होंठ होंठों को चूसने लगे। कभी मेरी जीभ उसके मुहँ में जाती और कभी उसकी जीभ मेरे मुहँ में।
अचानक वो बोली कि तुम पूछ रहे थे ना कि इस मूवी की स्पेल्लिंग ग़लत क्यों है? तो उस मूवी को ओन करो पता चल जाएगा। मैंने वीसीआर में मूवी लगा दी, वो बेड पे बैठ गई और आवाज़ कम कर दी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया। वो एक नग्न मूवी थी।
ब्लू फ़िल्म देखते देखते हम उत्तेजित हो गए और मैंने किस करते करते उसका कुरता उतार दिया…मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिरने लगे……क्या चिकना बदन था उसका…
फिर उसने मेरा शर्ट और बनियान निकाल दी… मैं एक बात बतानी भूल गया कि मैं जिम्नास्टिक का प्लेयर हूँ और इसी वजह से मेरी फिजिक ज़बरदस्त है… फिर धीरे से मैंने उसकी ब्रा खोल दी। उसके मस्त कबूतर फडफडा कर बाहर आ गए और मैं उन्हे धीरे धीरे दबाने लगा
उसने मुझे कस कर बाहों में भर लिया… उसका गर्म चिकना नाजुक शरीर .. मुझे ऐसा लगा जैसे इससे अच्छी फीलिंग कोई हो ही नहीं सकती… फिर मैंने धीरे धीरे उसके बूब्स बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया… उसने मस्ती में अपने सर पीछे फ़ेंक दिया और मज़े में सिस्कारियाँलेने लगी… मैंने धीरे धीरे उसकी सलवार का नाडा खोल दिया।
अब मेरे हाथ उसके पूरे नंगे शरीर को सहलाने लगे पैरों से लेकर कंधे तक। और मैं चूसते और चूमते हुए नीचे जाने लगा। फिर मैंने उसकी नाभि पे जीभ फिरानी शुरू कर दी… फिर मैं उसके पैरों की तरफ़ चला गया और उसके पैर के अंगूठे और उँगलियों को एक एक करके चूसने लगा…
इससे वो और उत्तेजित होने लगी और मुझे प्यार से देखकर मीठी मीठी सिस्कारियाँ लेने लगी… फिर मैंने अपनी पैंट उतार दी और उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से हलके हलके सहलाने लगा…
उसने फिर मेरे अंडरवियर में हाथ डालकर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया…… उसके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड लकड़ी की तरह सख्त हो गया और मैंने उसकी पैंटी को अलग करके उसकी मस्त चूत को चाटना शुरू कर दिया और बीच बीच में जीभ को चूत के अंदर डालकर क्लिट्स को चाट लेता था।
थोड़ी देर सिस्कारियाँ लेने के बाद वो मेरा सर पकड़ कर जोर से चूत पे दबाने लगी और चूत को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी… मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है।
थोडी देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा पर मुझे अच्छा नहीं लगता सो मैंने मुँह हटा लिया। वो धीरे धीरे साँसे लेने लगी… पर मेरी बेचैनी बढती जा रही थी।
मैंने फिर से उसके बूब्स से खेलना शुरू कर दिया और वो फिर से मस्त होने लगी। मैं उसके बूब्स मसलते हुए किस करने लगा और सारे बदन को सहलाता रहा थोडी देर मैं वो फिर से उत्तेजित होने लगी।
फिर उसने पलंग से नीचे बैठकर मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया… सच कहूँ तो ऐसी चुसाई का मजा मुझे और किसी ने नहीं दिया…और मेरी झाटों से खेलने लगी… थोडी देर में मेरे लंड का पानी निकल गया और उसने एक एक बूँद चाटकर साफ़ कर दी… फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा… वो बोली कि यह बड़ा शैतान है… देखो फिर से उठ गया… मैंने कहा कि मैंने तुम्हें कहा ही था कि मैं तुम्हे सारी रात प्यार कर सकता हूँ…
वो बहुत भावुक हो गई और मुझे ज़ोर से गले लगा लिया और मेरे होंठ चूसने लगी… अब हम दोनों पूरे जोश में आ चुके थे। मैंने उसको लिटा दिया और पैरों के बीच मैं आ गया… फिर मैंने उसके चूतड़ों के नीचे 2 तकिये रख दिए और उसके दोनों पैर अपने कन्धों पे रख लिए।
फिर मैं लंड को उसकी चूत पे रगड़ने लगा… वो पागल हो रही थी और लंड अंदर पेलने की मिन्नत करने लगी…… थोड़ा तरसाने के बाद मैंने एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा लंड आधा उसकी चूत में चला गया… उसकी चूत बहुत टाइट थी…
उसने अपना निचला होंठ दातों में दबा लिया और मुझे रोकने का इशारा किया…… फिर बोली कि दर्द हो रहा हैं आराम से करो… मैं थोडी देर और रुका और फिर दूसरा धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर समां गया और वो दर्द से करह उठी।
मैंने फिर थोड़ा इंतज़ार किया… उसका दर्द कम हो गया था और उसने धीरे धीरे अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी… .. फिर मैंने भी अपने धक्के तेज़ कर दिए और लंड पिस्टन की तरह अंदर बाहर होने लगा…
उसे भी पूरा मज़ा आ रहा था और वो मेरा साथ देने लगी… थोडी देर बाद मैंने अपने पंजे बेड पर टिका दिए और घुटने सीधे करके ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगा… यह एक ज़बरदस्त पोसिशन होती है बिल्कुल ऐसे जैसे दंड बैठक करते हैं… इसमें बहुत मज़ा आता है… और वो झड़ के निहाल हो गई…
मैंने फिर से उसे किस करना शुरू किया… फिर वो बोली कि मैं ऊपर आ जाती हूँ… मैंने कहा ठीक है… तो वो मेरे ऊपर बैठ गई और पैर मोड़कर उछलने लगी… मेरा लंड पूरा अन्दर बाहर हो रहा था और उसे भी मज़ा आ रहा था… थोडी देर बाद वो फिर से झड़ गई।
फिर मैंने उसे नीचे लिटाया और एक पैर ऊपर कर कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा… थोडी देर इसी तरह चुदाई करने के बाद मैंने उसे डोग्गी स्टाइल मैं आने को कहा तो वो डर गई… बोली पीछे से नहीं… बहुत दर्द होगा…
तो मैं समझ गया कि अभी गांड नहीं मरवाएगी… मैंने कहा कि नहीं मैं पीछे से चूत में ही डालूँगा…
वो धीरे धीरे डोग्गी स्टाइल में आ गई और मैंने पीछे से लंड उसकी चूत में डालकर धक्के लगाने लगा… वो मजे से सिस्कारियाँ निकालती रही और गांड को आगे पीछे करती रही… मैं उसकी गांड के छेद को धीरे धीरे मसलता रहा… और थोडी देर में हम दोनों एक साथ फिर से झड़ गए… फिर मैं लेट गया और वो मेरे साथ लगकर लेट गई…
हम दोनों को ही बहुत मज़ा आया था… इसके बाद हम कई दिनों तक रोज़ चुदाई करते रहे… मैंने उसको गांड मारने के लिए तैयार किया और गांड मारी… पर वो कहानी फिर कभी…
मैं अगली कहानी कब लिखूंगा और लिखूंगा या नहीं ये सब आपकी मेल पर निर्भर करता है… तो मुझे ज़रूर बताइयेगा कि यह कहानी आपको कैसी लगी…Antarvasna
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