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मैं पूना में रहता Hindi Sex Stories हूँ। आज मैं जो घटना बताने जा रहा हूँ वो मेरी जिदंगी मे घटी सची घटना है।
एक महीने पहले की बात है, मैं ऑफ़िस से निकलने के बाद बस स्टॉप पर खड़ा था। अचानक मेरे सामने एक कार आकर रूकी। मैंने देखा पर गाड़ी के शीशे काले होने के कारण अंदर का कुछ दिखाई नहीं दिया। गाड़ी के शीशे नीचे हुए तो मैं चोंक गया क्योंकि अंदर जो लड़की थी वो हमारे बाजू वाले ऑफ़िस की मालकिन नेहा थी। उसने मुझे अंदर बैठने का इशारा किया। मैं तुरंत ही अंदर बैठ गया। मैं सोच रहा था कि यह सपना है या हकीकत! क्योंकि नेहा से सिर्फ़ बात करने के लिये सब तरसते थे और मैं आज उसकी गाड़ी में उसके पास बैठा था। गाड़ी चल पड़ी। उसने शीशे बंद कर दिए।
नेहा के बारे में कुछ बता दूँ। नेहा की उमर 25 साल। मुझसे 4 साल बड़ी। रंग गोरा भूरी भूरी सी आंखें और फ़िगर के बारे में क्या बताऊँ, एकदम कयामत है, कहीं पर भी जरूरत से ज्यादा या कम नहीं है। कुल मिलाकर सोनाली बेंद्रे जैसी दिखती है। और बात रही मेरी, तो मैं एक साधारण 21 साल का लड़का हूँ। बहुत स्मार्ट नहीं पर दिखने में अच्छा हूँ। मेरा स्वभाव एकदम शांत है। शायद इसीलिए आज तक मुझसे एक भी लड़की नहीं पटी। जाने दो, अब कहानी की ओर चलते हैं।
गाडी के अंदर ए सी चालू था। मौसम भी अच्छा था। उसने अचानक पूछा- तुम्हें गाड़ी चलानी आती है?
मैंने हाँ कहा तो उसने गाड़ी साईड में रोक ली। उसने मुझे गाड़ी चलाने को कहा। मैं गाड़ी चलाने लगा। उसने कुछ रोमांटिक गाने लगाए। गाड़ी तेजी से आगे बढ़ रही थी। उसने गाड़ी धीरे चलाने को कहा। वो मुझे बार-बार देख रही थी। कोई कुछ नहीं बोल रहा था। पहल उसी ने की।
नेहा- तुम कहाँ रहते हो?
मैं- हडपसर में! आप?
नेहा- मैं चंदन नगर में।
मैं- तो फ़िर हडपसर क्यों जा रही हैं?
नेहा- बस आज तुम्हारे साथ जाने का मन हुआ!
यह सुनकर तो मैं चौंक ही गया। मेरे दिमाग में घंटी बजने लगी। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसकी आंखो में एक चमक थी और उसकी सांसें तेजी से चलने लगी थी। उसने गाड़ी साइड लेने को कहा। वहाँ पास में एक गार्डन था। नेहा ने मेरी तरफ़ देखा ओर कहा- चलो थोड़ी देर गार्डन में बैठते हैं।
मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे साथ आज क्या हो रहा है। मैं बस पागलों की तरह उसकी तरफ़ देख रहा था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और चलने लगी। मैं भी उसके साथ चलने लगा। मैं बस सोच रहा था कि आगे क्या होने वाला है।
हम एक पेड़ के नीचे बैठ गए। वो जगह काफ़ी सुनसान थी। सामने की झाड़ी में एक प्रेमी-युगल था। वो दोनों चुम्बन कर रहे थे। उन्हें शायद पता ही नहीं था कि हम वहाँ थे। वो तो बस एक दूजे में ही खोए हुए था। धीरे धीरे लड़के का हाथ लडकी के टॉप के अंदर जाकर उसके स्तन दबाने लगा था। यह देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया जो कि 6′ का है (मैं सब लोगों की तरह झूठ नहीं बोलना चाहता)। मैं यह पूरी तरह से भूल गया था कि मैंनेहा के साथ हूँ। मेरी नजर उधर जाते ही मुझे होश आया। वो मेरी तरफ़ ही देख रही थी। मेरी नजर शर्म के मारे झुक गई।
नेहा- तुम अभी क्या देख रहे थे?
मैं-?
नेहा- मैं नहीं जानती थी कि तुम ऐसे निकलोगे।
मेरी तो जैसी जान ही निकल गई। वो उठी और जाने लगी। मैंने उसे सॉरी बोला पर वो नहीं रुकी और जाकर गाड़ी में बैठ गई। मैं ड्रायविंग सीट पर आ गया। मैंने फ़िर से उसे सॉरी बोला पर वो कुछ नहीं बोली।
मैं गाड़ी चालू करने लगा, तभी मेरे लण्ड को कुछ स्पर्श हुआ। मैंने नीचे देखा तो वो नेहा का हाथ था। मैं उसकी तरफ़ देखने लगा। उसने मेरी ज़िप खोली और मेरे लण्ड को बाहर निकाला जो कि घबराहट की वजह से छोटा हो गया था। वो उसे सहला रही थी।
मैं- आप क्या कर रही हो?
नेहा- मुझे मत रोको। मैं इसके लिए तरस रही हूँ। मैं तुम्हारे साथ इसके लिए ही आई थी। मैंने जबसे तुम को देखा है तबसे तुम्हें अपने ऊपर लेने को तरस रही हूँ। इसीलिए मैं तुम्हें यहाँ लाई थी।
यह सुनकर मेरी हिम्मत बढ़ गई। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये। मैं जैसे स्वर्ग में था। मैंने भी उसे जोर से चूमना शुरु कर दिया और उसके मुँह में अपनी जबान सरका दी। इसका असर मेरे लण्ड पर होने लगा जोकि अब भी उसके हाथ में था। वो धीरे धीरे अपनी असली रूप में आने लगा। हम इतनी जोर से चूमा-चाटी कर रहे थे कि गाड़ी में चप-पच ऐसी आवाजें आ रही थी।
मैंने अपना एक हाथ उसके वक्ष पर रख दिया और उसे दबाने लगा। वो आहें भरने लगी। मेरा लण्ड भी पूरा खड़ा हो गया था। उसने मुझसे कहा कि आराम से बाद में करेंगे, अभी जल्दी से अपने लण्ड को मेरी बुर में डाल दो।
उसने जल्दी से अपने पैंट और पेंटी को निकाल दिया। मैंने सीट पीछे की और सीट को सीधा कर उस पर लेट गया। मेरा लण्ड तो उसकी चिकनी बुर को देख कर उछल रहा था। वो मेरे लण्ड के ऊपर बैठ गई और मेरे लण्ड को अपने हाथों से सही जगह लगा कर जोर से उस पर बैठ गई। मेरा लण्ड अंदर जाते ही जोर से चिल्लाई। मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था।
उसने मेरे होटों पर अपने होंट रख दिये और हम फ़िर से किस करने लगे। मैं अपने हाथों से उसके दोनों स्तनों को दबा रहा था। वो जोर जोर से मेरे लण्ड के ऊपर ऊपर-नीचे हो रही थी और जोर जोर से आह आह्ह अहह अह कर रही थी। वो शायद बड़ी जल्दी में थी। वो झड़ने के करीब थी और मैं भी। वो जोर से ऊपर नीचे होने लगी। अचानक वो सिकुड़ने लगी। उसने मुझे जोर से पकड़ रखा था। मैं समझ गया कि वो झड़ चुकी थी। वो शांत हो गई पर मैं अभी तक झड़ा नहीं था।
मैंने उसे अपनी जगह लिटा दिया मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी बुर में डाल दिया और जोर जोर से झटके मारने लगा। मेरा भी समय करिब आ गया था। 5-7 झटके मारने के बाद मैं उसकी बुर में झड़ गया। तकरीबन 30 मिनट तक हमारी चुदाई चली होगी।
उस दिन के बाद जब भी हमें चोदने का मन हो तो मैं उसके घर जाकर उसको रात भर खूब चोदता हूँ। हफ़्ते एक बार तो मैं उसके घर जरूर जाता हूँ। और जब हम ऑफ़िस में हों तो वहाँ पर भी हमारा मन हुआ तो मैं टेरेस पर उसे चोदता हूँ! वो कैसे! मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगा। पर आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताइए। Hindi Sex Stories
मेरा नाम ललित है, दिल्ली Hindi Sex Stories का रहने वाला हूँ। मैंने अंतर्वासना में बहुत कहानियाँ पढ़ी और आज मन किया कि मैं अपनी भी कहानी लिखूँ !
बात उन दिनों की है जब मैं अपने ऑफिस से घर जा रहा था रास्ते में एक आदमी पड़ा हुआ था। मैं हिम्मत कर के उसके पास गया। उसको दमा का दौरा पड़ा था! वो अपनी जेब से कुछ निकलने की कोशिश कर रहा था! मैंने उसकी जेब से इन्हेलर निकलने में मदद की। इन्हेलर को मुँह में पम्प करने के कुछ देर बाद वो थोड़ा ठीक हुए और मुझे धन्यवाद कहा।
मैंने पूछा- अगर आपको कहीं जाना है तो मैं छोड़ दूँ, आपकी तबियत ठीक नहीं है, कहीं दोबारा से दौरा पड़ा तो कौन संभालेगा !
वो मेरी बात मान गए और मेरे साथ बाइक पर बैठ गए ! कुछ देर में मैं उनको लेकर उनके घर पर पहुंच गया। उन्होंने मुझे घर के अन्दर आने के लिए कहा, अपने परिवार वालों को सारी बात बताई। उनके परिवार वालों ने भी मुझे धन्यवाद कहा। फिर उन्होंने मुझे चाय पिलाई!
चाय उनकी बेटी ले कर आई थी। क्या बला की खूबसूरत थी, जो भी देख ले, बस देखता ही रह जाये ! फिगर 36 28 36 ! कसम से खुदा ने बहुत फुर्सत में बनाया होगा ! जैसे ही वो मेरी तरफ चाय बढ़ाने के लिए झुकी, मुझे उसके दो बड़े बड़े खरबूजों के दर्शन हुए! मन कर रहा था कि अभी पकड़ कर दबा दूँ ! पर मजबूर था !
अचानक उसके पापा के किसी दोस्त का फ़ोन आ गया, वो फ़ोन पर बात करने के लिए साथ वाले कमरे में चले गए। मुझे भी मौका मिल गया उनकी बेटी से बात करने का !
मैंने उससे पहले उसका नाम पूछा, उसने अपना नाम पूनम बताया, जैसा रूप-रंग वैसा नाम ! एकदम पूनम का चाँद !
बातों का सिलसिला चल निकला, मैंने उससे उसका मोबाइल नंबर माँगा तो उसने फ़ौरन अपना नंबर मुझे दे दिया और मैंने भी अपना नंबर उसको दे दिया। इतने में उसकी मम्मी ने अन्दर से उसको आवाज दी।
मैंने उसको कहा- मैं तुम्हें कल फ़ोन करूंगा !
फिर मैंने अंकल को कहा- अब मुझे चलना चाहिए, बहुत देर हो गई है। फिर मैं वहाँ से चला आया। सारे रास्ते मैं पूनम के बारे में सोचता रहा कि काश एक बार पूनम की चूत मिल जाये तो मैं निहाल हो जाऊंगा।
घर पर पहुंच कर खाना खाया और सोने चला गया। लेकिन मेरी आँखों में नींद कहाँ ! मुझे तो हर तरफ सिर्फ वो ही नज़र आ रही थी। ख़ैर किसी तरह रात कटी, मैं सुबह जल्दी ऑफिस के लिए निकल गया। ऑफिस से मैंने उसको फ़ोन किया। जैसे ही मैंने हेल्लो कहा, उसने मेरी आवाज़ पहचान ली और कहा- मैं तुम्हारे फ़ोन का ही इंतजार कर रही थी, मुझे पता था कि तुम मुझे आज फ़ोन जरुर करोगे।
उसने कल जो मैंने उसके पापा की मदद की थी उसके लिए मेरा धन्यवाद किया और कहा कि वो अपने पापा से बहुत प्यार करती है।
फिर मैंने भी पूनम से कहा- पूनम, मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ अगर तुम मुझे गलत ना समझो तो कहूँ !
तो वो बोली- ललित जी, आप जो कहना चाहते हो, कह दो !
जैसे कि उसको पता था कि मैं क्या कहना चाहता हूँ !
मैंने कहा- मुझे तुमसे पहली नज़र में प्यार हो गया है, कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई, सारी रात तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा !
उसने मेरी सचाई की कदर करते हुए कहा- ललित, जो हाल तुम्हारा था रात को, वही मेरा था, मैं भी सारी रात सो नहीं सकी, बस तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी! मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है।
मेरे प्यार को जब उसने कबूल किया तो थोड़ी हिम्मत आई मुझमें, वरना उसको अपने प्यार का इज़हार करते वक़्त मेरी गांड फट रही थी। लेकिन अब कोई डर नही था, दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी ! अब तो रोज़ हम दोनों फ़ोन पर बातें करते और जब भी ऑफिस की छुट्टी होती तो मैं उससे मिलने उसको कॉलेज चला जाता ! कभी पिक्चर देखने तो कभी किसी रेस्टोरेंट जाने लगे ! रविवार के दिन हम दोनों ने कहीं बाहर घूमने का कार्यक्रम बनाया।
तय वक्त पर मैं उसको अपनी बाइक पर ले कर लवर्स पार्क में (यानि बुद्धा गार्डन) पहुंचा और एक सुनसान से जगह पर, जहाँ कोई हमें तंग करने वाला नहीं था, बैठ कर बातें करने लगे ! बातों-बातों में मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ गई! धीरे धीरे मैंने उसकी जांघों पर अपना हाथ फेरना शुरू किया। उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की जिससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई !
मैंने उससे पूछा- पूनम, क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ ?
तो उसने मुझे कहा- मुझ पर तुम्हारा पूरा हक है ललित ! जिसको प्यार करते हैं उससे इजाजत की कोई जरुरत नहीं ! मैं तुम्हें और तुम मुझे प्यार करते हो और अगर तुम्हारा मुझे चूमने का दिल कर रहा है तो कर लो !
फिर क्या था ! हरी झंडी पा कर मैं खुश हो गया और पूनम को चूमने लगा। थोड़ी देर तक उसके होंटों को चूमता रहा और धीरे धीरे उसके स्तन दबाने लगा। फ़िर उसके कुरते में हाथ डालकर, फिर धीरे से उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके चुचूक मसलने लगा। उसका कुरता ऊपर करके उसके पेट पर चूमने लगा। उसने मुझे रोकते हुए कहा- ललित यहाँ नहीं ! यह जगह सुनसान जरुर है पर सुरक्षित नहीं ! किसी ऐसी जगह चलो जहाँ पर तुम्हारे और मेरे अलावा कोई और न हो !
तो मैं उसको अपने ऑफिस ले कर चला आया। रविवार होने की वजह से ऑफिस की छुट्टी थी। मेरे केबिन की चाबी मेरे ही पास थी। ऑफिस जाकर मैंने गार्ड को कहा कि मुझे कुछ जरुरी काम है इसलिए ऑफिस आया हूँ और अन्दर चला गया पीछे के दवाजे से पूनम को भी अन्दर बुला लिया। अपने केबिन को अन्दर से लॉक कर लिया। फिर पूनम को अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा, उसके बड़े बड़े दूध दबाने लगा। वो भी पूरी मस्ती में मेरा साथ देने लगी। कभी मेरे होंटों को चूसती तो कभी मेरी जीभ को ! लगता था कि जैसे मुझसे ज्यादा वो प्यासी हो ! मैंने उसको कुरते को उसके शरीर से अलग कर दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे भी उसके जिस्म से जुदा कर दिया। अब वो केवल ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी। मैं उसको चूमता रहा, गर्दन से होते हुए उसकी पीठ पर चूमते हुए मैंने उसकी ब्रा खोलकर उसके जिस्म से अलग कर दी और उसके दोनों कबूतर आजाद हो कर बाहर निकल आये !
क्या मस्त स्तन थे उसके ! मैं बता नहीं सकता ! गोरे गोरे स्तनों उस पर गुलाबी चुचूक मुझे पागल बना रहे थे।
उसने मुझे कहा- ललित, तुमने मेरे तो सब कपड़े उतार दिए ! क्या अपने कपड़े नहीं उतारोगे ? या मुझसे उतरवाने का इरादा है?
मैंने कहा- अगर तुम उतारना चाहो तो उतार दो ! फिर उसने भी मेरे सब कपड़े उतार कर बगल में अपने कपड़ों के साथ रख दिए। फिर मैंने देर न करते हुए उसकी पैंटी भी उतार दी। उसका एक चूचा मेरे मुँह में था और दूसरे को हाथ में ले कर दबा रहा था। उसकी चूची चूसते हुए मैंने उसको फर्श पर लिटा दिया और उसके पेट पर अपनी जीभ फिरने लगा। फिर मैंने उसकी बालों वाली चूत पर अपना हाथ रख दिया, उसकी चूत से पानी निकल रहा था !
मैंने अपने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी, वो सिसक उठी और पागलों की तरह मेरे बालों को नोचने लगी। मैं अपनी ऊँगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से निकाल कर अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसने मेरे सर को उसने अपनी चूत पर कस कर दबा लिया और अपने पैरों को मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट लिया और कुछ देर में वो झड़ गई !
मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसके ऐसे मुँह में लिया जैसे कोई आइसक्रीम खा रहा हो। बड़ी मस्ती में वो मेरे लंड को चूस रही थी।
कुछ देर बाद उसने कहा- ललित, अब बर्दाश्त नहीं होता ! फाड़ दो मेरी चूत को !
मैंने उसकी टांगों को थोड़ा सा ऊपर मोड़ कर लंड को निशाने पर लगाकर एक धक्का दिया। लंड करीब एक चौथाई तक उसकी चूत में घुस गया था। वो दर्द से तड़प रही थी। मैं लंड उसकी चूत में डाले उस पर पड़ा रहा। जब उसका दर्द कम हुआ तो एक और धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी चूत में समा चुका था। उसकी चूत से खून निकलने लगा। 15 मिनट तक मैंने धक्के नहीं लगाये, सिर्फ उसके वक्ष को ही मसलता रहा। जब दर्द ख़त्म होने लगा तो लंड महाराज को एक जोरदार धक्के के साथ चूत की जड़ तक पहुंचा दिया। वो दर्द से तड़पने लगी, मुझे लंड बाहर निकलने के लिए बोलने लगी, कहने लगी- बाहर निकालो ! दर्द बहुत हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !
करीब दस मिनट बाद उसका दर्द कम हो गया ओर वो नीचे से अपने चूतड़ हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी। अब मैं और वो पूरे जोश में थे।
वो बोल रही थी- जोर से चोदो मेरे राजा ! निकाल दो कचूमर मेरी चूत का ! बहुत तंग किया है इसने मुझे ! पी जाओ मेरी जवानी का रस ! खूब जोर लगा कर चोदो! जूऊऊऊऊऊ सीईई मीईरीईईए राआअजाआआअ औररररररर जोर सीई मीएरीईई माआआआआआ मैं तो डिसचार्ज होने वाली हूँ !
ये कहते हुए वो झड़ गई लेकिन मैं अभी इतनी जल्दी डिस्चार्ज नहीं होने वाला था। लंड निकाल कर उसकी चूत से मैंने उसके मुँह में दे दिया! वो लंड को चाट-चाट कर मजे ले रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसके मुँह से लंड निकाल कर उसको घोड़ी बना कर उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा। उसको तो पता नहीं पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था! वो भी मजे से अपने चूतड़ आगे पीछे कर के मेरा लंड अपनी चूत में डलवाने लगी।
क्या मस्त चुदाई चल रही थी ! पूरा केबिन फच फच की आवाज से गूंज रहा था। अब मैं भी अपनी चरमसीमा पर आने वाला था तो मैंने उसको सीधा लिटाया और लंड उसकी चूत में डाल कर धक्के लगाने लगा।
उससे मैंने कहा- पूनम, मेरा निकलने वाला है !
तो उसने कहा- आज तो अपनी चूत में तुम्हारा अमृत रस डलवाना है ! अन्दर ही डिस्चार्ज होना ! भर दो अपने अमृत से मेरी चूत को !
और 5-7 धक्कों के बाद मैंने अपने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और कुछ देर उसके ऊपर ही पड़ा रहा ! थोड़ी देर बाद मैं उस पर से हटा तो देखा कि उसकी चूत की सील टूटने से उसकी चूत से खून और वीर्य बह रहा था। हम दोनों सीधे बाथरूम में गए और खुद को साफ़ किया। इसके बाद बाहर आकर मैं उसको और वो मुझे चूमने लगी। किस करते करते हम दोनों में फिर से जोश आ गया और फिर से उसकी चुदाई शुरू कर दी मैंने !
वो मेरा लंड चूस रही थी, मैं उसकी चूत चाटने लगा। 69 की पोजीशन में थे हम दोनों ! अपनी जीभ मैंने उसकी चूत में अन्दर तक डाल दी। वो लंड को बड़े आनंद लेकर चूसती रही, कभी अंडों को चूसती, कभी लंड ! मैंने उसको खड़ा किया और नीचे झुका। उसकी चूत में पीछे से लंड डाल कर चोदने लगा। उस दिन मैंने उसको चर बार चोदा। फिर करीब दो साल तक उसकी चुदाई की उसी के घर पर।
अब उसकी शादी हो चुकी है, शादी के बाद भी मैंने उसको कई बार चोदा ! Hindi Sex Stories
मैं जब हॉस्टल में आई तो मैंने देखा वहाँ पर रूम बड़े अच्छे और सभी सामान के साथ थे. एम ए की पढाई करने वालों के लिए सिंगल रूम था. रूम देख कर मैं बहुत खुश थी. हॉस्टल में आते ही जो अनुभव मुझे हुआ वो मैं आपको बताती हूँ।
शाम को हॉस्टल में सभी नए और पुराने स्टुडेंट डिनर के लिए मेस में जा रहे थे. रूम के बाहर ही मुझे तीन सिनियर लड़कियां टकरा गयी. उन्होंने मुझे देखा. मैंने उन्हें गुड इवेनिंग कहा. वो आगे निकल गयी, उनमे से एक मुड़कर वापस आयी और कहा – “क्या नाम है…”
“अंजू शर्मा ..”
“डिनर के बाद 10 बजे रूम नम्बर 20 में मिलो…”
“कोई काम है दीदी ..”
“नई आयी हो… सभी को तुम्हारा स्वागत करना है ..”
“जी…अच्छा…”
वो मेस में चली गयी. मुझे पसीना छूटने लग गया. मैं समझ गयी थी की अब मेरी रागिंग होगी .
मेस में मुझसे खाना भी ठीक से खाया नही गया .जैसे तैसे मैंने खाना पूरा किया और अपने रूम में आ गयी. घबराहट में मुझे कुछ सूझ नही रहा था कि मैं क्या करूं। समय देखा तो रात के 10 बजने वाले थे. मन मजबूत करके 10 बजे में उठी और रूम नम्बर 20 के आगे जाकर खड़ी हो गयी. मैं दरवाजा खटखटाने ही वाली थी की वो सीनियर लड़की मेस से आती हुयी दिखायी दी. आते ही बोली- “आ गई… कामिनी…”
“जी हाँ…” मैंने सर झुकाए कहा .
“मेरा नाम सोनाली है…पर तुम मुझे दीदी कहोगी “उसने दरवाजा खोलते हुए कहा -“आ जाओ अन्दर ..”
मैं उसके कमरे में आ गयी. उसने मुझे बैठने को कहा .
“पहली बात सुनो…जब कोई सीनियर तुम्हे नज़र आए तो तुम उसे विश करोगी…”वो मुझे नियम समझती रही. फिर बोली- “अच्छा अब तुम स्वागत के लिए तैयार हो ..”
मैं चुप ही रही…पर पसीना आने लग गया था ..
“घबराओ मत… सिर्फ़ स्वागत ही है…”
“…जी. ..”
“खड़े हो जाओ…और अपना सीना आगे को उभारो ”
मैंने अपना हाथ पीछे करके अपना सीना आगे उभार दिया ..
“शाबाश… अच्छे है… अब अपना टॉप उतार दो ..”
“नही दीदी…शर्म आती है…”
“वोही तो दूर करना है ”
“कोई देख लेगा…दीदी… और सीनियर भी तो आने वाली है…”
“अब उतारती हो या मैं उतारूं ”
मैंने अपना टॉप उतार दिया. उसने ब्रा भी उतारने को कहा. थोड़ा झिझकते हुए मैंने ब्रा भी उतार दी .
“यहाँ पास आओ ”
मैं दीदी के पास गयी. सोनाली ने खड़े हो कर पहले मुझे पास से देखा. फिर मेरे स्तनों पर हाथ लगाते हुए कहा -“सुंदर है…” फिर मेरी छातियों को सहलाना शुरू कर दिया. मुझे सिरहन होने लगी. उसने मेरी चुन्चियों को हौले से दबा कर घुमाया .. मेरी सिसकारी निकल गयी. वो जो कुछ कर रही थी…मुझे डर तो लग रहा था… पर उसकी हरकतों से मजा भी आ रहा था. फिर वो पीछे गयी और मेरे चूतड़ों को निहारा. अपने हाथों से उसे सहलाने लगी और दबा दिया.
“किस करना आता है…”
मैंने कहा- “जी हाँ ..आता है ”
“मेरे होंट पर किस करो ..”
मैंने धीरे से किस कर दिया. वो बोली – “किस ऐसे नही करते हैं ”. उसने मेरे नरम होंट अपने होंट से भींच कर चूसना चालू कर दिया .बोली- “ऐसे समझी… अब अपनी स्लैक्स उतारो ”
” दीदी ऐसे तो मैं नंगी हो जाऊँगी…”
“वो तो स्वागत में सबको नंगी होना पड़ता है ..”
मैंने अपनी स्लेक्स उतार दी और सीधी खड़ी हो गयी ..”
सोनाली ने पास आकर मेरा बदन सहलाया ..और मेरी चूत पर हाथ फेरना चालू कर दिया. बीच बीच में वो मेरे चुतड़ भी सहलाती और दबाती जा रही थी…
“दीदी अब कपड़े पहन लूँ…दूसरे सीनियर्स आ जायेंगे ..”
“वो देर से आयेंगे… अब तुम मेरे कपड़े उतारो ” सोनाली थोड़ा मुस्कराते हुए बोली .
मैंने उसका कुरता उतार दिया. उसने ब्रा नही पहनी थी. उसके बूब्स उछल कर बाहर आ गए .
“…हाँ अब मेरा पजामा भी उतार दो…और मुझे अपने जैसी नंगी कर दो .”
मैंने सोनाली को पूरी नंगी कर दिया .
“अब तो खुश हो न… अब तुम्हे शर्म तो नही आ रही है…”
मैंने सर झुका कर मुस्करा कर कहा- “नही दीदी… अब तो आप भी ..”
” अच्छा अब बताओ…इसे क्या कहते हैं…”
“स्तन या बोबे ..”
“देसी भाषा में बताओ ..”
“जी…चूचियां…”
“गुड…अब बताओ नीचे इसे क्या कहते हैं…”
“जी…चूत…” मैं शरमा कर बोली .
“वाह तुम तो सब जानती हो…आओ गले लग जाओ ..”
सोनाली ने मुझे गले लगा लिया… उसका हाथ मेरी चूतडों पर चला गया…और उन्हें मसलने लगा. अब मुझे लग रहा था कि रैगिंग तो बहाना था…वो मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी. सोनाली गरम होने लगी थी. उसने कहा-
“कामिनी…तुम भी ऐसे ही कुछ करो…”
मैंने उसके बूब्स सहलाने चालू कर दिए. उसके मुंह से सिस्कारियां निकलने लगी ..
“हाँ जोर से मसलो… चुचियों को खेंचो…”
मैं उसकी चुन्चियों को खीचने मसलने लगी. अचानक मैंने महसूस किया कि उसने एक उंगली मेरी चूत में घुसा दी है. मैं चिहुक उठी.
“हाय…दीदी… मैं मर गयी…”
“अच्छा लग रहा है ना…”
“हाँ दीदी…”
मैं भी उसकी चूत में अपनी उंगली और अन्दर घुमाने लगी…
“अब…बस…” कह कर सोनाली दूर हट गयी .”कपड़े पहन लो ..”
हम दोनों ने कपड़े पहन लिए… वो अलमारी में से मिठाई निकाल कर लाई… और मेरे मुंह में एक टुकडा डालते हुए कहा -“मुंह मीठा करो…तुम्हारा स्वागत पूरा हो गया… स्वागत से डर नही लगा ना…”
“नहीं दीदी…मुझे बहुत मजा आया…”
“धन्यवाद कामिनी… मजा मुझे भी आया .”
मैं अचानक सोनाली से लिपट गयी ..- “दीदी आज रात में तुम्हारे साथ रह जाऊँ ”
दीदी ने प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा- “क्यों… क्या इरादा है…”
” दीदी अब मैं रात भर सो नहीं सकती… मुझे शांत कर दो. ..”
“तुम्हे जाने कौन देगा… मुझे भी तो पानी निकलना है…”
हम दोनों फिर से कपड़े उतार कर अब बिस्तर पर आ गये .
लेटे लेटे मैंने सोनाली से पूछा –“वो और सीनियर लड़कियां अभी आएँगी तो…”
“कोई नहीं आयेगा…”
“पर आप तो कह रही थी…कि सभी आएँगी ”
उसने मेरे मुंह पर उंगली रख दी.
“मैंने तुम्हे देखा था तो मुझे लगा था कि तुम्हें पटाया जा सकता है…इसलिए मैं वापिस आयी और तुम्हें बुलाया…उन लड़कियों को नहीं मालूम है .”
कहते हुए उसने अपनी नंगी जांघ मेरी कमर में डाल दी. और अपने होंट मेरे होटों पर रख दिए. धीरे से उसने मेरा एक बूब सहलाना चालू कर दिया। मैंने भी उत्तर में उसे अपने ऊपर खींच लिया. मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी. उसके होंट मैंने अपने होटों में दबा लिए. वो मेरे ऊपर चढ़ कर मुझसे जोर से लिपट गयी. और मेरे होटों को चूसने लगी. मैं उसके स्तनों को दबाने, मसलने लगी. उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. हम दोनों मस्ती में डूब गए थे. उसने अब अपनी चूत मेरे चूत से मिला दी और लड़कों की तरह मेरी चूत पर अपनी चूत पटकने लगी .
“ हाय रे…कितना मज़ा आ रहा है ..” सोनाली सिसक के बोली .
“ हाँ दीदी बहुत मज़ा आ रहा है…मेरी चूत तो गीली हो गयी है ..” मैंने कहा
“मेरे चुतड पकड़ के दबा दे…हाय ..” अपनी चूत घिसती हुयी बोली. मैं उसकी गोलाईयां दोनों हाथो से दबाने लगी… उसका एक हाथ मेरी चूत पर पहुँच गया और सोनाली ने दो उंगलियाँ मेरी चूत में घुसा दी. मैं सिस्कारियां भरने लगी…
“दीदी और जोर से उंगली घुमाओ… ”हाय…मजा आ रहा है… दीदी लंड होता तो कितना मज़ा आता…”
“ हाँ… लंड तो लंड होता है… सुन मेरे पास है…तुझे उस से चोदुं ..”
मैं उस से लिपट गयी… “हाँ…हाँ सोनाली जल्दी से लाओ ..
सोनाली ने तकिये के नीचे से चुपचाप लंड निकाल लिया. मुझे पता ही नहीं चलने दिया कि उसके हाथ में लंड है ..
बोली – “अपनी टाँगे ऊपर कर लो… ”
“पहले लंड लाओ तो सही…”
“नहीं पहले टाँगे ऊपर उठा लो…मुझे तुम्हारी चूत देखनी है…”
मैंने अपनी दोनों टाँगे ऊपर कर ली. दीदी ने प्यार से चूत सहलाई और लंड को चूत पर रख दिया और धीरे से अन्दर घुसा दिया .
“हाय दीदी…ये क्या…लंड अन्दर कर दिया ..” मुझे मोटा लंड, अपनी चूत में घुसता महसूस हुआ. “दीदी अब देर नहीं करो… हाथ चलाओ… चोद दो दीदी ..”
सोनाली धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगी…
“हाय रे दीदी…मज़ा आ गया… लगा ..और लगा ..”
वो अपना हाथ तेजी से चलाने लगी. मैं भी आनंद के मारे इधर उधर लोटने लगी… करवटें बदलने लगी. पर सोनाली भी मेरी करवटों के साथ साथ कस कस के अन्दर बाहर लंड को चलने लगी. उसने चोदना चालू रखा. मैं जोश के मारे करवटें बदल कर उलटी हो गयी। पर सोनाली ने लंड नहीं निकलने दिया और अपने दूसरे हाथ का सहारा लेकर लंड को अन्दर बाहर करती रही. मैं आनंद के मारे घोडी बन गयी. अपने चूतडों को दीदी के सामने कर दिया. पर उसने लंड नहीं छोड़ा और हाथ चलता ही गया.
“हाय दीदी… मेरा निकाल जाएगा…अब लंड निकाल दो ..”
“झड़ने वाली है तो झड़ जा…अब निकल जाने दे…छोड़ दे अपना पानी…चल निकाल दे…”
“दीदी अभी तो इस से मुझे गांड भी चुदवानी है ना…फिर मज़ा नहीं आयेगा…”
“अच्छा तो ये ले…” उसने मेरी चूत से लंड निकाल दिया. और अब मेरी चूतडों की दोनों फाकें सहलाने लगी और उसे खींच कर फैला दी. मेरा गांड का छेद खुल गया. मेरी गांड के छेद में उसने थूक लगाया और फिर उस पर लंड रख दिया. सोनाली बोली – “अब चालू करें…”
“ हाँ दीदी… घुसा दो ..”
दीदी ने लंड को अन्दर ठेल दिया. फिर और अन्दर घुसाया. फिर हलके से बाहर निकाल कर अन्दर डाल दिया. मुझे मीठा मीठा सा मज़ा आने लगा। सोनाली की स्पीड बढती गयी. मुझे मज़ा आने लगा… उसी समय दीदी ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी और अन्दर घुमाने लगी. चूत से पानी तो पहले ही निकल रहा था. अब दोनों तरफ़ से डबल मज़ा आने लगा. अब मेरे से सहन नहीं हो रहा था…
“दीदी क्या कर रही…आह्ह ह्ह्ह…मज़ा आ रहा आया है… दीदी… हाय रे… मुझे ये क्या हो रहा है…दीदी…मैं मर जाऊँगी…ऊओई एई…सी…सी… अरे…अरे…मैं गयी… निकला… निकला… दीदी…गयी मैं तो दीदी… हाय…हाय… ऊऊह ह्ह्छ…अआया आई ईई .”
कहते हुए मैं बिस्तर पर घोडी बनी हुयी एक तरफ़ लुढ़क गई. मैं हाँफ रही थी .
सोनाली कह रही थी – “कैसा लगा… मज़ा आया ना…”मैंने आँख बंद किए ही सर हाँ में हिलाया. फिर मैं उठी .
सोनाली ने कहा – “अब मेरी बारी है…हाथ चलते ही रहना मैं चाहे कितना ही करवटें बदलूं या उछल कूद मचाऊँ. लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए…जैसे कि मैंने नहीं निकलने दिया था…ऐसे में पूरा मजा आता है .”
“दीदी तुम्हें तो बहुत अच्छा अनुभव हो गया है…इस लंड से चोदने का ..”
“अच्छा तो चालू हो जाओ…”
मैंने भी उसकी लंड से चुदाई चालू कर दी… वो भी तरह तरह से चुदवाती रही…फिर उसका भी पानी निकाल दिया. हम दोनों फिर दूर हो गयी और टांगे फैला कर नंगी ही लेट गयी. जाने कब धीरे से नींद ने आ घेरा और मैं गहरी नींद में सो गयी. सवेरे उठी तो देखा दीदी ने मुझे एक चादर ओढा दी थी. उसने मुझे मुस्करा कर देखा और झुक कर किस किया. और कहा – “कामिनी…थंक यू ..”
ये मेरा हॉस्टल का अनुभव है जो मैं आप तक पहुँचा रही हूँ. अपने कमेन्ट जरूर भेजे. Hindi Sex Stories
कहानी की शुरुआत महाराष्ट्र के एक शहर से होती है, जहां अवंतिका नाम की एक महिला एक कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाती है.
उसमें वह महिलाओं को अलग अलग विषयों पर क्लास देती है.
लेकिन अवंतिका अब इस इंस्टीट्यूट को बड़ा करना चाहती थी और इसके लिए उसे किसी से आर्थिक मदद की तलाश थी.
इसी चीज को लेकर वह कई दिनों तक प्रयास करती रही.
एक दिन उसे किसी परिचित ने एक युवा नेता का संपर्क सूत्र दिया और कहा कि यह व्यक्ति आपकी मदद करेगा और आपको कोई न कोई रास्ता जरूर दिखाएगा.
अवंतिका एक शादीशुदा महिला थी.
उसकी उम्र 37 साल की थी और वह एक गदराए जिस्म की मालकिन थी.
उसके जिस्म के सबसे आकर्षित अंग उसके बूब्स थे जिन्हें देख कर कई लंड शहीद हो चुके थे.
अवंतिका की भी कामना थी कि कोई ऐसा मर्द आए जो उसकी वासना को शांत कर सके.
चूंकि अवंतिका एक मॉडर्न ख्यालात की महिला थी, जिसका पति एक शांत स्वभाव वाला व्यक्ति था.
उसके शांत स्वभाव वाले पति के बस में इतनी गर्म बीवी को संभालना संभव नहीं था.
अवंतिका भी अपने जिस्म की जरूरत को भली भांति समझती थी और उसे जिस वक़्त सुख की जरूरत होती, वह सुख प्राप्त करना जानती थी.
अपने पति के और समाज की नजरों में सभ्य और संस्कारी बने रहना भी उसे खूब अच्छे से आता था.
एक प्रकार अवंतिका एक बहुत शातिर किस्म की और मॉडर्न महिला थी.
अवंतिका ने अपने इंस्टीट्यूट को अपने अनुसार चलाने के लिए उस युवा नेता से मिलने का तय किया.
उस नेता का नाम अमन था.
वह एक 26 वर्ष का नौजवान युवा था, जो काफ़ी जुझारू और आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक था.
अवंतिका ने अमन को कॉल किया और अपनी समस्या बताई.
अमन ने उसकी सब बात सुनकर उसे अपने ऑफिस मिलने के लिए बुलाया.
अगले दिन अवंतिका एक नीली साड़ी और काले ब्लाउज को पहन कर गई.
उसका यह ब्लाउज बहुत ज्यादा चुस्त था, जिसमें से अवंतिका के गुब्बारे जैसे बूब्स उभर कर सामने आ रहे थे.
अपने पेट को नाभि तक खुला रखने की अवंतिका की हमेशा की आदत है, इसी सेक्सी लुक के साथ अवंतिका अमन के ऑफिस में गई.
जैसे ही अवंतिका अमन के ऑफिस में गई, अमन इतनी सेक्सी औरत को देख मन्त्रमुग्ध हो गया.
पोलिटिकल सेक्स का वह अपने सामने अवंतिका के पूरे जिस्म को एकटक होकर निहारने लगा.
अवंतिका के लिए यह आम बात थी क्योंकि वह जानती थी कि मर्द उसे घूरते हैं और आंखों से चोदते हैं.
हालांकि अमन भी एक आकर्षक नौजवान था.
उसे देख कर अवंतिका को वह पहली ही नजर में भा गया था.
लेकिन अवंतिका को अपना काम ज्यादा जरूरी था इसलिए उसने अपनी वासना पर संयम रखते हुए हल्की सी मुस्कुराहट होंठों पर लाई.
उसने अमन को हैलो कहा.
अमन ने भी उसकी हैलो का जवाब दिया और उसे बैठने के लिए कहा.
अवंतिका ने सामान्य औपचारिकता के बाद अमन के सामने अपनी समस्या को बताना शुरू किया.
अमन भी पूरे ध्यान से उसे सुनता रहा; साथ ही वह उसके जिस्म की महक को महसूस करता रहा.
अमन को समझ में यह आ गया था कि अवंतिका को किसी सरकारी फंड की जरूरत है, जिसे कैसे लिया जाए … इसका उसे कोई इल्म नहीं था.
जबकि अमन के लिए ये सब कराना कोई बड़ी बात नहीं थी.
अवंतिका ने अमन से कहा कि मुझे 25,00,000/- का फंड मिल जाए, तो मेरा सपना पूरा हो जाएगा.
अमन बोला- अवंतिका जी आप चिंता ना करें. आप सही जगह आई हैं. अब आपका काम कराने का मैं पूरा प्रयास करूँगा.
ये सुनकर अवंतिका बहुत खुश हो गई और बोली- अमन जी, आपका ये अहसान होगा मुझ पर … मैं कई सालों से प्रयत्न कर रही हूँ लेकिन हो नहीं रहा था. आप अगर मेरा काम करवा दोगे, तो मैं आपकी पूरा जीवन आभारी रहूंगी.
अमन ने कहा- आपका काम बहुत जल्द हो जाएगा. आप बस मेरे संपर्क में रहें. चूंकि अब आप मेरे संपर्क में रहेंगी, तो आपके बाकी के भी काम यदि कोई होने हैं, तो वे भी पूरे हो जाएंगे.
अमन की बातों से अवंतिका काफ़ी प्रभावित हो गई थी.
कुछ देर बातें करने के बाद वह घर आ गई.
उसी रात अवंतिका ने व्हाट्सप्प पर अमन को गुडनाईट का मैसेज किया.
उसे देख अमन ने जबाव दिया- कैसी हैं अवंतिका जी?
अवंतिका- जी, सब बढ़िया है. आप बोलिए … कहां हैं?
अमन- जी, बस घर पर ही हूँ.
अवंतिका- जी, आप पूरा दिन व्यस्त होते हैं, तो काफी थक जाते होंगे!
अमन- हां जी, वह तो है.
अवंतिका- अमन जी, आपने आज किया कुछ मेरे काम का?
अमन- जी बिल्कुल किया, उस विभाग का प्रमुख मेरा काफ़ी करीबी है. उसने कहा है कि वह आपका काम करा देगा. आपको अपने कागज लेकर 4 दिन बाद उसके ऑफिस चलना होगा.
अवंतिका- शुक्रिया अमन जी, आपने मेरा बहुत बड़ा काम किया है. आपका अहसान कैसे चुकाऊं, समझ नहीं आता है.
अमन- कोई आपसे भी हमारा काम हुआ, तो आप वह कर देना … बस इतनी सी इच्छा है!
अवंतिका- आपके लिए मैं कुछ भी करूँगी अमन जी!
अमन- शुक्रिया अवंतिका जी.
अवंतिका- आपको कल रात मेरी दावत कबूल करनी होगी. आप आएंगे ना?
अमन- जी, आप बुलाएं और हम ना आएं … मैं जरूर आऊंगा.
अमन अगले दिन पूरी तरह तैयार होकर अवंतिका के घर चला गया.
वहां अवंतिका घर में काली साड़ी के साथ मैचिंग का काला ब्लाउज पहने हुई थी.
उसके साथ उसके पति और उसका 6 साल का बेटा भी था.
पूरे परिवार ने अमन का स्वागत किया.
अमन अवंतिका को देख देख कर पागल हुआ जा रहा था लेकिन वह खुद को संभाल कर अन्दर आ गया.
अमन ने अवंतिका के परिवार के साथ खाना खाया.
खाने के बाद वह परिवार के साथ कुछ देर बात करता रहा.
अवंतिका के पति को अमन का स्वभाव काफ़ी अच्छा लगा और अमन से वह काफ़ी घुल-मिल गया.
फिर अमन ने अवंतिका से कहा- आपका घर काफ़ी बड़ा और अच्छा है.
अवंतिका का पति बोला- अवंतिका, तुमने अमन जी को घर दिखाया ही नहीं. तुम इन्हें घर दिखा लाओ, तब तक मैं बच्चे का होमवर्क कराता हूँ.
अवंतिका अमन को अपना घर दिखाने लगी.
और देखते देखते दोनों घर के दूसरी मंजिल पर आ गए जहां अवंतिका ने अमन को अपने रूम दिखाया.
कमरे में अवंतिका की कुछ बड़ी बड़ी फोटोज लगी थीं जिनमें अवंतिका काफ़ी सेक्सी दिख रही थी.
दो तस्वीरें तो एकदम नंगी थीं, जिनमें अवंतिका ने खुद को कुछ फूलों से छिपाया हुआ था.
अमन उन दोनों तस्वीरों को काफ़ी ध्यान से देखता रहा और बोला- अवंतिका जी, आपको बुरा ना लगे, तो एक बात कहूँ?
अवंतिका- अरे अमन जी आप कहिए ना … आपकी बात का क्या बुरा मानना भला!
अमन- आप काफ़ी खूबसूरत और मनमोहक लगती हो. आपकी तस्वीरें किसी हीरोइन से कम नहीं हैं.
अमन की इस बात पर अवंतिका शर्मा गई और उसने अमन को शुक्रिया कहा.
उस वक्त अमन अवंतिका के इतने करीब था जिससे उसे अवंतिका के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही थी.
बातों बातों में किसी बात पर जोर से हंसी आने पर अमन ने अवंतिका की पीठ पर हाथ फेर दिया.
अवंतिका ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, उसने हंस कर अमन से बातें करना जारी रखा.
अब अमन अवंतिका की खूबसूरती की तारीफ करने लगा.
यह सब बात करते हुए वह अवंतिका की मुलायम गांड को भी अनजान बनते हुए एक दो बार छू लेता है.
उसके इस स्पर्श को अवंतिका ने गहराई से महसूस किया लेकिन वह अभी भी सामान्य बनी रही.
अवंतिका को अमन से बातें करना अच्छा लग रहा था, तभी अवंतिका के पति ने आवाज़ दी और दोनों नीचे चले आए.
उस रात अमन अपने घर वापस आया और अवंतिका के सेक्सी बदन को याद करते हुए अपना लंड मसलने लगा.
रात के बारह बजे थे … अमन से न रहा गया और उसने अवंतिका को मैसेज कर दिया ‘दावत के लिए शुक्रिया!’
अवंतिका ने तुरंत जवाब दिया- अरे आप तो अब हमारे परिवार के सदस्य हो, आप आए … ये हमारे लिए ख़ुशी की बात है.
फिर थोड़ी इधर उधर की बातें करते हुए अमन ने कहा- मैं तो सोच रहा था कि आप सो गई होंगी. आप अभी तक क्यों नहीं सोईं … साहब जगाए हुए हैं क्या?
अवंतिका- अरे नहीं बाबा, वे तो कब के सो गए. मुझे ही देर से सोने की आदत है.
अमन- क्या … वे सो गए? इतनी खूबसूरत बीवी होते हुए उन्हें नींद कैसे आ सकती है!
अवंतिका- क्यों नहीं आती नींद, खूबसूरत बीवी होने पर क्या होता है?
अवंतिका भी अमन के ख़ुशी के लिए उसके मन के हिसाब से बातें करने लगी.
अमन- अब आपको नहीं पता क्या?
अवंतिका- जी नहीं.
अमन- प्यार करते हैं … और उनके पास आपके जैसी बीवी है तो क्या ही कहूँ?
अवंतिका- कहिए ना!
अमन- आपको बुरा लगेगा!
अवंतिका- अमन जी आप कहिए, जो भी कहना हो. मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगता.
अमन- सच बात तो यह है अवंतिका जी कि आप बहुत सेक्सी दिखती हैं. आपका पूरा हुस्न देख कर न …
अवंतिका- अरे रुक क्यों गए, खुल कर बोलिए ना … मेरा हुस्न देख … क्या?
अमन- मेरे अन्दर हलचल शुरू हो जाती है.
अवंतिका- अन्दर कहां, दिल में?
अमन- नहीं, कहीं और …
अवंतिका- कहां, बोलिए ना अमन जी?
अमन- छोड़िए … कल क्या कर रही हैं आप?
अवंतिका- आप बोलिए, कुछ काम है?
अमन- कल आपको दावत मेरी ओर से होटल में!
अवंतिका- जी जरूर, मैं मेरे पति को कहती हूँ … हम आ जाएंगे.
अमन- अरे अवंतिका जी, ये दावत सिर्फ आपके लिए है. हमारी दोस्ती के लिए … पति के साथ किसी और दिन!
अवंतिका- ओके जी, फिर कल कहां आना है?
अमन- आप मेरे ऑफिस के पास जो होटल है. वहां आइए … कल दोपहर को मिलते हैं.
अवंतिका- जी जरूर.
दूसरे दिन अवंतिका लाल साड़ी में पूरी सेक्सी लुक में तैयार होकर होटल आ गई.
वहां जाकर वह अमन को खोजने लगी.
लेकिन उसे अमन नजर नहीं आ रहा था.
कुछ देर बाद अवंतिका ने अमन को कॉल करके पूछा- कहां हो?
अमन ने उसे होटल के ही ऊपर एक कमरे का नंबर बताया और आने का कहा.
अवंतिका तो पहले ही समझ गई थी कि अमन के लौड़े में आग लग चुकी है और वह कमरे में बुला कर क्या चाहता है.
पर अवंतिका को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था.
उसके लिए अमन हीरो था जो उसके काम आ रहा था.
अवंतिका उस रूम में चली गई.
यह कमरा काफ़ी रोमांटिक तरीके से सजा कर तैयार किया गया था.
अमन ने अवंतिका को देख लंड पर हाथ फेरा और उसे अन्दर बुलाकर बेड पर बैठने को कहा.
अवंतिका पूरे आत्मविश्वास से वहां बैठ गई.
दोनों बातें करने लगे.
कुछ ही देर में खाना आ गया तो वे दोनों खाना खाने लगे.
अमन अवंतिका से बातें करते हुए बोला- अवंतिका जी, आप इस साड़ी में बहुत हॉट लग रही हो!
अवंतिका- अच्छा जी … सच्ची!
अमन- सच्ची मुच्ची … आपका पूरा जिस्म में ही लाजवाब है.
अवंतिका- हम्म … वह तो है!
अमन- क्या आप मेरा एक काम करेंगी?
अवंतिका- आप बस हुकुम करो.
अमन- क्या मैं आपको एक बार गले लगा सकता हूँ!
अवंतिका- क्यों?
अमन- जब से आपको देखा है, तब से इच्छा है कि आपको एक बार गले से लगा सकूँ.
अवंतिका- अब आपने मेरे लिए इतना किया है, तो एक दोस्त के नाते गले लगना क्या बड़ी बात है!
अमन खुश हो गया और वह अवंतिका के करीब आ गया.
उसने अवंतिका का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा कर दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने सीने से चिपका लिया.
अपने सीने से चिपका कर उसने अवंतिका की गदराई हुई गांड को जोर से दबा कर खुद के दोनों हाथों में भर लिया.
इससे अवंतिका की चीख निकल गई.
चीख निकलने के बावजूद भी अमन अवंतिका की गांड को इसी तरह जोरों से दबाए रहा.
साथ उसने अपने होंठ अवंतिका के गले पर रख दिए और उसे चूमना शुरू कर दिया.
अवंतिका की चूत में भी अब आग भड़क गई थी.
वह अमन से बोली- अमन जी, क्या कर रहे हो यार … दर्द हो रहा है. आपको तो बस गले लगना था. पर आप तो कुछ और ही कर रहे हैं!
अमन- शहहह् …
अमन अवंतिका के पूरे जिस्म को चूमने लग गया और इसी तरह से वह उसके होंठों को चूमने लगा.
अवंतिका भी अब उसका साथ देने लगी.
वह पूरे जोश में अमन को चूमने लगी और उसके कपड़े उतारने लगी.
फिर अमन ने भी अवंतिका की कमर को चूमते हुए उसकी साड़ी को खोल दिया.
देखते ही देखते दोनों एक दूसरे के सामने नंगे हो गए.
अमन अवंतिका को पलंग पर लिटा कर उसके नर्म रसीले होंठों को चूसने लगा.
वह अपना लंड अवंतिका की चूत पर घिसने लगा.
इससे अवंतिका तड़प उठी और सिसिया कर बोली- आह अमन जी … प्लीज चोदिए ना अपनी अवंतिका की चूत को … आह पेल दीजिए अपना मूसल.
बस अमन ने अपना लंड अवंतिका की चूत में घुसा दिया और वह घप … घपाघप घप … अवंतिका की चुदाई करने लगा.
लंड की रफ़्तार और अवंतिका की कड़क चूत का घमासान चालू हो गया था.
अवंतिका जोर जोर से आहें भरने लगी थी. इससे अमन में और जोश आ गया था.
इसी तरह से अमन ने अवंतिका को पूरे 40 मिनट तक चोदा.
उसकी मदमस्त चुदाई के बाद अमन ने अपने लंड के झरने को अवंतिका की चूत में छोड़ दिया.
वे दोनों जोर जोर से सांसें भरते हुए एक दूसरे को तृप्त करने लगे.
चुदाई के बाद वे दोनों एक दूसरे की बांहों में यूं ही नंगे सो गए.
एक घंटा बाद उठने पर अवंतिका अमन के होंठों को चूसने लगी.
उसने कहा- अमन, तुमसे चुदाई करवा कर बहुत मजा आया. मालूम है, जब मैं तुमसे पहली बार मिली थी न … मैं तभी समझ गई थी कि तुम मेरा काम करो या ना करो लेकिन मेरी चुदाई जरूर करोगे!
अमन- तो तुम भी चुदना चाहती थी?
अवंतिका- नहीं, लेकिन जितना तुमने किया है … उसके लिए ये इनाम तो मैं तुमको देती ही. पर आज तुमने खुद ले लिया.
इसी तरह की बातों के साथ वे दोनों फिर से चुदाई के दूसरे राउंड को तैयार हो गए.
चुदाई करने के बाद अवंतिका अपने कपड़े पहन कर जाने लगी.
तब अमन ने कहा- अवंतिका अब कब चुदाई कर पाऊंगा तुम्हारी?
अवंतिका- अब ये चूत हमेशा के लिए तुम्हारी ही है, ज़ब चाहे अपने लंड से चोद लेना.
ये कहकर वह अपनी गांड मटकाती हुई चली गई.
पोलिटिकल सेक्स का मजा लेकर अमन ने उसको अपने लंड के साथ फंड भी दिला दिया.
अब अमन जब मन होता, तब वह उसको चोद लेता.
अवंतिका की मदद से अमन उसकी इंस्टीट्यूट की भी कई लड़कियों को भी चोद चुका है.
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