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Massage Girl in Churachandpur: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Churachandpur who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Churachandpur that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Churachandpur massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Churachandpur who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Churachandpur massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Churachandpur massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Churachandpur who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Churachandpur employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Churachandpur helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Churachandpur

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Churachandpur at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

प्रेषक : विजय पण्डित Antarvasna

मैं अपनी फ़र्स्ट इयर की पढ़ाई कर Antarvasna रहा था। मुझे याद है उस समय बरसात का मौसम था…. पापा ने मुझे बताया कि दीदी के साथ उदयपुर जाना है। दीदी की उम्र करीब 27 वर्ष की थी। जयपुर में भी एक दिन रुकना है। मुझे घूमने का वैसे ही बहुत शौक था। मैंने तो तुरन्त हां कह दी। फिर दीदी मुझे कई चीजें भी देती थी। पापा ने हमारा बस में रिजर्वशन करवा दिया था।

दिन की बस थी सो हमने खाना वगैरह खा कर बस में बैठ गये…. दीदी खिड़की वाली सीट पर थी। बस के चलने के बाद थोड़ी ही देर में बरसात शुरु हो गई थी। रास्ते भर दीदी पर खिड़की से छींटे आते रहे और बार बार वो रुमाल से अपने हाथों को और बोबे को पोंछती जाती थी। मैंने भी उनकी मदद की और एक दो बार मैंने भी दीदी बोबे को अपने रूमाल से साफ़ कर दिया। उन्होने मुझे घूर कर देखा भी…. हाथ लगाते ही दीदी के उभार लिये हुए चिकने और नरम बोबे मेरे दिल में बस गये।

बस के हिचकोले से वो बार बार मुझ पर गिर सी जाती थी। एक बार तो उनका हाथ मेरे लण्ड पर भी पड़ गया। मुझे लगा कि दीदी जान कर के मुझे उकसा रही है। मैं भी जवान था, मेरे दिल में भी हलचल मच गई। शाम होते होते हम जयपुर पहुंच चुके थे। टूसीटर ले कर हम सामने ही होटल में रुक गये और वहीं से दूसरे दिन का उदयपुर स्लीपर का रिजर्वशन करवा लिया। दीदी काऊंटर पर गई और कमरा बुक करवा लिया। मैंने सारा सामान एक साईड में रख दिया।

हमने खाना जल्दी ही खा लिया और होटल के बाहर टहलने लगे। दीदी मुझे कभी आईसक्रीम तो कभी कोल्ड ड्रिंक पिला कर मुझे खुश कर रही थी। मुझे लगा मुझे भी दीदी के बदन को हाथ लगा कर खुश कर देना चाहिये। सो मैंने टहलते हुए मजाक में दीदी के चूतड़ पर हाथ मार दिया। उस हाथ मारने में मुझे उनके गाण्ड का नक्शा भी महसूस हो गया। दीदी की गाण्ड पर मेरा हाथ लगते ही वो चिहुंक गई….मुझे फिर से उसने मुस्करा कर देखा, मुझे इस से ओर बढ़ावा मिला। मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था इस सेक्सी खेल में।

“शैतान….मारने को यही जगह मिली थी क्या….?” मतलब भरी निगाहों से मुझे देखते हुए उसने कहा।

“दीदी….मजा आया ना….! नरम गद्देदार है….!” मैंने उसे छेड़ा।

“चल हट…. ” कह कर दीदी ने भी मेरी चूतड़ पर एक चपत लगा दी।

“दीदी एक और चपत लगाओ ना….” मैंने शरारत से कहा।

“क्यो तुझे भी मजा आया क्या ?” दीदी मुस्कराने लगी।

“हां….लगता है खूब मारो और बल्कि दबा ही दो !” मैं भी थोड़ा खुल गया।

“जानता है मुन्ना….मेरी भी हनीमून मनाने की इच्छा होती है !”

ये सुनते एकाएक मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने अन्जान बनते हुए कहा,”ये कहां मनाते हैं? कैसे करते हैं?”

“होटल में और कहां….!” दीदी ने मेरी ओर देखते हुए कहा।

“होटल में….चलो ज्यादा से ज्यादा कुछ खर्चा हो जायेगा….पर तुम्हारी इच्छा तो पूरी हो जायेगी ना….”

“बुद्धू …. नहीं मालूम है क्या….?”

“दीदी….कोई बताये तो मालूम हो ना…. हाँ एक फ़िल्म आई थी….मैंने नहीं देखी थी !”

“पागल है तू तो …. तुझे सब सिखाना पड़ेगा…. बोल सीखेगा?” मुझे मालूम हो गया कि दीदी मुझसे चुदना चाहती है।

“हनीमून सीखने वाली बात है क्या?”

दीदी मेरी पीठ पर घूंसे मारने लगी।

रात के 9 बजने को थे। हम फिर से होटल के कमरे में आ गये और सोने की तैयारी करने लगे। अचानक मेरी नजर बिस्तर पर गई। एक ही सिंगल बिस्तर था। मुझे लगा दीदी ने जान बूझ कर के सिंगल बेड लिया है, मैंने अपना पजामा पहन लिया और अंडरवियर मैंने नहीं पहनी। मैं दीदी को अपना फ़ड़फ़ड़ाता लण्ड दिखाना चाहता था। मैंने झुक कर देखा तो पजामे में से मेरा झूलता हुआ लण्ड बाहर से ही नजर आ रहा था।

दीदी मेरी सब बातों को नोट कर रही थी और मुस्करा रही थी। मेरे झूलते हुए लण्ड को तिरछी नजरों से देख भी रही थी। मुझे भी अब शरीर में सनसनी होने लगी थी। लण्ड भी अब खड़ा होने लगा था। दीदी ने भी अपना नाईट गाऊन पहन लिया पर मेरी तेज निगाहों ने भांप लिया था कि अन्दर वो कुछ नहीं पहने थी। मुझे लगा कि दीदी आज सेक्सी मूड में हैं, और शायद हीट में भी हैं….दीदी ने अपने हाथों को उठा कर और अपनी चूंचियों को उभार कर एक भरपूर अंगड़ाई ली ….मुझे लगा कि मेरे दिल के सारे टांके टूट जायेंगे। मुझे महसूस हुआ कि मैं इसका फ़ायदा ले सकता हूँ। शायद मेरी किस्मत खुल जाये। दीदी बिस्तर पर लेट गई और बोली…”अरे मुन्ना….यहीं आजा तू भी….”

सुनते ही मेरा लण्ड कड़क गया। मैं भी लाईट बन्द करके दीदी की बगल में लेट गया। बिस्तर बहुत ही संकरा था। हम दोनों का बदन छू रहा था। मेरा हाथ उनके बदन पर यहाँ वहाँ लग जाता था पर वो कुछ नहीं कह रही थी। कुछ ही देर में वो सो गई। पर मेरे दिल में हलचल थी। लण्ड भी कड़ा हो रहा था।

अचानक दीदी ने नींद में अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया….मेरे जिस्म में झुरझुरी आ गई पर उसने किया कुछ नहीं। मैंने लण्ड को थोड़ा सा और कड़ा कर दिया और हिला दिया। पर दीदी ने कुछ नहीं किया। वो नींद में मेरे से और चिपक गई। उनका हाथ मेरे पेट पर से होता हुआ लण्ड पर था। मुझे दीदी के जवान जिस्म की अब महक आने लगी थी। मैंने भी अपनी हथेली उनकी चूचियों के ऊपर जमा दी और उनके सांस लेते समय उनकी उठती और गिरती छातियों को हल्के से दबा कर मजे ले रहा था।

शायद दीदी की नींद खुल गई थी या वो नाटक कर रही थी। उन्होने चुपके से मेरी तरफ़ देखा, और मेरी नजरें उनसे मिल ही गई। हम दोनों आपस में एक दूसरे को निहारने लगे। उसकी आंखों में निमंत्रण था, भरपूर वासना थी। मेरे हाथ उसने नहीं हटाये और ना ही मेरे लण्ड पर से उसका हाथ हटा। हम दोनों ने एक दूसरे की मौन स्वीकृति पा कर मैंने उसकी चूंची पर दबाव बढ़ा दिया और नीचे मेरे लण्ड पर उसके हाथ का कसाव बढ़ गया। दोनों के मुख से एक साथ सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी।

मेरा लण्ड मसलते हुए बोल पड़ी,”मुन्ना क्या कर रहा है….छोड़ दे ना….”

“दीदी…. हाय….आप कितनी अच्छी है…!.” मैंने गाऊन के अन्दर हाथ डाल दिया और चूंचियों का जायका लेने लगा, और मसलने लगा।

“मुन्ना….हाय कितना शैतान है रे तू….मेरे तो बोबे ही मसल डाले रे….!” दीदी ने मेरा पजामा का नाड़ा खींच दिया और अन्दर हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ लिया।

“दीदी….जरा जोर से मसलो ना…. दबाओ और दबाओ….बहुत मजा आ रहा है….!”

“तू भी मेरे बोबे खींच खींच कर दबा डाल….हाय रे….तू अब तक कहां था रे….!” मैंने दीदी की चूंची निकाल कर मुख में भर ली और मैं दूध पीने लगा। मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर पहुंच गया। मैंने उनकी चूत दबा दी।

वो तड़प उठी….”अरे छोड़ दे जालिम मेरी चूत….”

“दीदी….तू भी मेरा लण्ड छोड़ दे….हाय रे….!”

“मुन्ना….चल अपन दोनों हनीमून मना लें….!”

“कैसे….?”

मेरा गाऊन ऊपर करके मेरे से चिपक जा….हनीमून अपने आप हो जायेगा। “

“सच दीदी….” मुझे तो अब चोदने की लग रही थी। लण्ड बेकाबू होता जा रहा था। मैंने गाऊन ऊंचा करके लण्ड उसकी चूत पर गड़ा दिया। दीदी ने अपनी चूत का मुँह खोल कर मेरे लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी गीली चूत में फ़ंसा लिया और जोर लगा कर लण्ड अपनी चूत में अन्दर सरकाने लगी।

“ये लो मुन्ना….बन गया हनीमून…. अ….अ….आह्….स्सीऽऽऽऽऽऽऽ ….अह्ह्ह्ह्ह्….” लण्ड गहराई में धंसता चला गया। मेरे लण्ड के सुपाड़े में मिठास आने लगी। मैंने भी अपने चूतड़ का जोर लगा कर पूरा अन्दर तक घुसा डाला। दीदी तो चुद्दकड़ निकली….इतनी गहराई तक लण्ड लेने के बाद तो उसे और मस्ती चढ़ गई…. वो मेरे से चिपकती गई। मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया और उसके ऊपर चढ़ गया। और उसकी नरम नरम चूत को चोदने लगा…. वो नीचे दबी सिसकती रही…. मैं आनन्द के सागर में डूब चला था। दीदी के कड़कती चूचियों को मसलता जा रहा था।

दीदी जैसे चुदाते समय भी तड़प रही थी, जैसे उसकी सारी इच्छायें पूरी हो रही हों…. कुछ ही देर में उसकी शरीर में जैसे ताकत भर गई हो….मुझे उसने बुरी तरह से भींच लिया….और सिसकी लेती हुई झड़ने लगी। मुझे भी लगा कि जैसे सारा संसार मेरे में सिमट रहा हो…. मेरे जिस्म ने ऐठन के साथ ही लण्ड से सारा वीर्य निकाल दिया। सारा वीर्य उसकी चूत में भरने लगा….मेरा लण्ड बार बार रुक रुक कर वीर्य छोड़ रहा था….जैसे सारा जिस्म निचोड़ लिया हो। मैं निढाल हो कर एक तरफ़ चित लेट गया। हम दोनों ही जाने कब सो गये।

सवेरे उठते ही नहा धो कर हमने नाश्ता किया। और घूमने निकल पड़े…. दिन भर में सारा काम निपटाया और रात की बस में बैठ गये। बस लगभग खाली थी। ठीक साढ़े नौ बजे बस रवाना हो गई। बस के चलने के बाद बस की लाईटें बन्द हो गई। अभी हम नीचे सीट पर ही बैठे थे जिसे हमें अजमेर में खाली करके स्लीपर में जाना था। सीट के साथ लगे पर्दे मैंने खींच दिये।

अंधेरे का फ़ायदा मैंने उठाते हुए दीदी के बोबे मसलने चालू कर दिये, दीदी ने भी मेरा लण्ड बाहर निकाल कर झुक कर चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े के रिंग को खास तरह से चूस रही थी। मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो गया था। साथ में मैं सावधानी से इधर उधर भी देख लेता था कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है….पर सब अलसाये हुए से आंखे बन्द किये पड़े थे। मैंने अब दीदी का सर अपने लण्ड पर जोर से दबा दिया और लण्ड से उसका मुँह चोदने लगा। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हू, तो मैंने लण्ड दीदी के मुँह से लण्ड निकालने की कोशिश की पर दीदी लण्ड छोड़ने को तैयार नहीं थी…. मेरा वीर्य उसके मुँह में ही छूट पड़ा…. मै उसके सर को पकड़ कर उस पर दोहरा हो गया। मेरा सारा रस वो पी चुकी थी। मेरा एक दम साफ़ सुथरा लण्ड उसके मुह से बाहर निकला। मैंने जल्दी से अपनी पेन्ट की ज़िप चढ़ा दी। दीदी भी ठीक से बैठ गई। उसकी आंखे अभी भी शराबी लग रही थी।

अजमेर के बस स्टेण्ड पर बस आ गई थी….समय किस तेजी से निकला पता ही नहीं चला। यात्री बस में चढ़ रहे थे कुछ उतर रहे थे। हम भी कोल्ड ड्रिंक लेने के लिये उतर गये। हम दोनढ़ एक दूसरे से नजर मिला कर देखे जा रहे थे। आंखो ही आंखो में बातें हो रही थी।

तभी कंडक्टर ने कर तन्द्रा भंग की,”साहब जी….चलो या यहीं रहना है….?”

हम दोनों मुस्करा पड़े और बस की तरफ़ चल दिये। बस पूरी भर चुकी थी। हम दोनों आगे की डबल स्लीपर पर चढ़ गये…. हमने अपना सारा हिसाब जमाया और लेट गये…. पर्दा अच्छी तरह से खींच दिया। बस चल पड़ी। कुछ ही देर में बस की लाईट बंद हो गई और हमारे दिल में शैतान एक बार फिर से जाग उठा। बाहर अब हल्की सी बरसात होने लगी थी। ठण्डक बढ़ गई थी। हमने एक चादर ओढ़ ली।

कुछ ही देर में चादर के अन्दर कयामत टूट पड़ी। दीदी ने अपना कुर्ता ऊपर कर लिया और सलवार नीचे खींच ली। मैंने भी अपनी पैन्ट नीचे खींच ली। हम दोनों के लण्ड और चूत नीचे से खुले हुए थे। मैंने दीदी के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड दबा दिया। उसके गोल गोल मांसल चूतड़ की फ़ांके लण्ड के दबाव से खुलने लगी। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड के छेद से टकरा गया।

“भैया आज तो गाण्ड भी हनीमून मनायेगी….!”

“चुप रह दीदी…. तेरी गाण्ड फ़ाड़ने को मन कर रहा है….!”

“फ़ाड़ दे मेरे मुन्ना….”

उसकी गाण्ड के छेद पर लण्ड ने अपना पूरा दबाव डाल दिया। मेरे लण्ड का रिंग उस छेद में अन्दर जा कर फ़ंस गया। अब मैंने और दीदी ने आराम की पोजीशन बना ली दोनो एक दूसरे से सट गये। दीदी ने भी अपनी गाण्ड पीछे उभार कर ढीली छोड़ दी। मैंने दीदी के बोबे पकड़ लिये और लण्ड अन्दर सरकाने लगा। मेरा लण्ड फिर मिठास से भरने लगा। मैंने अब धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया। मुझे मजा आने लग गया। बस के झटके और सहायता कर रहे थे।

काफ़ी देर तक तक मैं उसकी गाण्ड मारने का मजा लेता रहा ….फिर मुझे लगा कि दीदी तो बेचारी अब तक प्यासी ही है। ये सोचते हुये मैंने अपना लण्ड गाण्ड से निकाल कर पीछे से ही उसकी चूत में घुसेड़ दिया। आनन्द की तेज सिसकारी दीदी के मुँह से निकल पडी…. मैंने तुरन्त उसके मुँह को दबा दिया….दीदी की नरम नरम चूत एक बार फिर मेरे लण्ड में उत्तेजना भरने लगी। चूत में अन्दर बाहर करने से दीदी और मुझे असीम आनन्द आने लगा। मैंने अब धक्के जमा कर जोर से मारने शुरू कर दिये। दीदी का जिस्म मसकने लगा…. बल खाने लगा….उसे जबरदस्त मस्ती चढ़ने लगी….जिस्म थरथराने लगा….

‘मुन्ना….मुझे जकड़ ले बोबे मसल दे…. राम रे….!” और दोहरी होते हुए झड़ने लगी…. अचानक मेरे लण्ड ने भी जोर से पिचकारी छोड़ दी। हम दोनों लगभग साथ ही झड़ने लगे थे…. एक दूसरे को हमने भींच रखा था……..। हम शान्त होने लगे थे। दीदी की चूत के पास वीर्य फ़ैल रहा था। मैंने तुरन्त चादर खींच ली और साफ़ करने लगा। पर उसकी चूत से रह रह कर वीर्य आता ही जा रहा था। मैंने अपना साफ़ रूमाल निकाला और उसे दीदी की चूत के अन्दर थोड़ा सा डाल कर रख दिया। दीदी ने अपना सलवार कुर्ता ठीक कर लिया। मैं भी पैन्ट पहन कर लेट गया। सवेरे बस उदयपुर पहुंच चुकी थी…. हमने टूसीटर वाले से किसी होटल में ले जाने को कहा….अब हम होटल में चाय नाश्ता कर रहे थे….

“मुन्ना ….अपना तो ये हनीमून का सफ़र हो गया….”

“दीदी बहुत मजा आता है ना…. होटल में….बस में…. कितना चोदा….मजा आ गया….” हम दोनों आगे प्लान बनाने लगे….काम का कम और हनीमून का अधिक …. उदयपुर बहुत सुन्दर जगह थी इसलिये हमने अपना प्रोग्राम दो दिन और बढ़ा लिया था….साथ में हनीमून के दिन भी बढ़ गये….

दोस्तो यह मेरी पहली कहानी है….कृपया अपने विचार भेजें….धन्यवाद। Antarvasna

इंडियन देसी मॉम सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरी सौतेली मम्मी खुले आंगन में नहाती हैं. मैं उन्हें नहाते हुए देखता हूँ और उनकी चूत मारने का मन होता है. तो मैंने क्या किया?

हाय, मेरा नाम राहुल है. मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूँ.
यह बात अभी से लगभग 2 साल पहले की उस वक्त की है जब मैंने पहली बार अपनी सौतेली मम्मी की चुदाई की थी.
उसके बाद तो मैं उन्हें बहुत बार चोद चुका हूँ.

इंडियन देसी मॉम सेक्स कहानी का पूरा मजा लें.

मेरी सगी मम्मी का देहांत अठारह साल पहले किसी बीमारी की वजह से हो गया था.
मेरे परिवार में हम दो भाई हैं. दूसरा भाई मुझसे बड़ा है.

हम दोनों भाइयों को पालने के लिए पापा ने दूसरी शादी कर ली थी.
मगर पापा की मृत्य भी आज से तेरह साल पहले हो गई थी.

मेरी सौतेली मम्मी की उम्र अभी 45 साल की है. बड़े भाई की 23 और मेरी 21 साल है.
आज से कुछ साल पहले हमारे घर में बाथरूम नहीं था तो मम्मी खुले में ही नहाती थीं.

उस टाइम मैं उन्हें नहाते हुए देखता था. मेरी मम्मी का गोरा शरीर बड़ा मस्त लगता था. वो मुझे हमेशा से ही एक माल लगती थीं.
लेकिन जैसे जैसे मैं बड़ा होता गया, मेरा मन उनको चोदने को होने लगा था.

पापा के देहांत के बाद उनको किसी ने नहीं चोदा था.
उनका रंग एकदम गोरा है, शरीर एकदम पतला सा और चूचियां भी छोटी छोटी हैं.

ये बात तब की है जब मेरे भाई की शादी होने के बाद भाई भाभी एक रूम में सोते थे और मैं और मम्मी एक रूम में!
मैं रात में उठ उठ कर उनकी जांघों को देख कर मुठ मारता था पर कभी हिम्मत नहीं होती थी कि कुछ कर पाऊं.

फिर एक दिन मेरा एक दोस्त मुझे एक मज़ार पे ले गया, मैं भी उसके साथ चला गया.
वहां हमें एक मौलवी जी मिले.

मेरा दोस्त उनके पास कुछ काम से गया था.
उसका काम होने के बाद हम दोनों आ गए.

मैंने दोस्त से पूछा- क्या काम था?
उसने बताया- ये मौलवी जी कोई भी काम करवा सकते हैं. इनकी मदद से किसी को भी तू अपने वश में कर सकता है.

मैंने पूछा- कैसे मदद?
उसने बताया- मौलवी जी कुछ ताबीज वगैरह देते हैं.

मैंने उसको बोला- चल छोड़ … मैं नहीं मानता.
उसने कुछ नहीं कहा.

हम दोनों अपने अपने घर आ गए.

घर आने के बाद जब रात में मैंने मम्मी को देखा, तो वो गहरी नींद में सोई हुई थीं और उनका पेटीकोट जांघों तक उठा हुआ था.
लाइट बंद होने के बाद भी मम्मी की गोरी जांघें चमक रही थीं.

मैंने मन बना लिया कि एक बार मम्मी को तो चोदना ही है.
मगर मैं बिना मम्मी की राजी के उन्हें नहीं चोदना चाहता था.

मैं अगले दिन अपने उसी दोस्त से मिला और मैंने उससे मौलवी जी का फोन नंबर ले लिया.

दोस्त ने पूछा- क्या काम है मौलवी जी से?
मैंने उसको बोला- कुछ ख़ास नहीं यार, ऐसे ही अपनी जॉब के बारे में बात करनी है.

शाम को मैंने मौलवी जी को कॉल किया.
मैंने उनको अपना नाम ग़लत बताया और कहा कि एक औरत को अपने वश में करना है.

पहले तो वो मना करते रहे लेकिन काफ़ी बार कहने के बाद वो मान गए.
उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया.

मैं गया तो उन्होंने मुझे पहचान लिया, पर मैंने उनसे कहा- आप मेरे दोस्त को नहीं बताना.
वो मान गए.

फिर जो भी जानकारी उन्होंने मांगी, मैंने उन्हें दे दी.
उन्होंने मुझसे कहा- जाओ कोई भी मिठाई लेकर आ जाओ.

मैं बर्फी ले आया.
मेरी मम्मी को बर्फी बहुत पसन्द थी.

मौलवी जी ने उस बर्फी के डिब्बे में से एक पीस लिया और उसपर कुछ मंत्र बोलने के बाद मुझे देकर बोले- ले … उसको खिला देना.

मैं घर आ गया और रात में अपने कमरे में चला गया.
जब भाई और भाभी सो गए, तब मैं मिठाई लाया और वो पीस मम्मी को खाने को दे दिया.

उन्होंने पूछा- ये कहां से लाया है?
मैंने बोला- एक दोस्त के साथ था, तो वहां ले ली थी. दोनों ने खाई मगर ये दो पीस बच गए थे.

मम्मी ने बड़े प्यार से बर्फी खा ली.

मौलवी जी ने बताया था कि असर 3 दिन बाद होना शुरू हो जाएगा और 7 दिन में काम पूरा हो जाएगा.

दोस्तो, दो दिन बाद ही असर दिखना शुरू हो गया था. अब मम्मी मुझसे रात में देर तक बात करने लगी थीं और जानबूझ कर पेटीकोट को ऊपर करने लगी थीं.

लेकिन मौलवी जी ने बोला था कि 7 दिन से पहले तू कोई अपनी तरफ से कोई हरकत नहीं करना इसलिए मैंने कुछ नहीं किया.

फिर इस दौरान मेरे मामा के घर में एक फंक्शन आ गया तो मैं दो दिन के लिए वहां चला गया.

लेकिन जिस दिन मैं वापस आया, मम्मी के चहरे पर उस दिन अलग ही ख़ुशी नजर आ रही थी.
उन्होंने बड़े प्यार से मुझसे बात की और रात को हम दोनों सोने चले गए.

उन्होंने मुझसे कहा- कल तू मेरे साथ खेत में चलना.
ये कहते समय मम्मी के चेहरे में एक विशेष ख़ुशी सी झलक रही थी.

मैं बोला- ठीक है मम्मी.
हम दोनों रात में देर तक बातें करते रहे.

सुबह उठने से पहले ही वो मेरे लिए चाय लेकर आईं और बोलीं- जल्दी से खड़ा हो ज़ा, आज हमें खेतों के चलना है.

हमारे खेत गांव से थोड़े दूर हैं, हमने अपने खेत एक बंदे को बटाई पर दे रखे हैं. हम दोनों कभी कभी ही खेत पर जाते हैं.

हम दोनों तैयार हुए. भाई के काम पर जाने के बाद हम दोनों बाइक पर बैठ कर खेत के लिए निकल गए.

रास्ते में मैंने कई बार ब्रेक मारे और वो भी हंस हंस कर बात करती जा रही थीं.

वहां पहुचने के बाद हम दोनों हमारे खेत पर बने कमरे में आ गए.
वहां एक चारपाई पड़ी है. उस पर जाकर मम्मी बैठ गईं.

कुछ देर बाद आराम करने के बाद वो बाहर आईं और खेती करने वाले आदमी को बुला कर उससे बात करने लगीं.

मैं कमरे की छत में ऊपर चढ़ गया और चारों ओर इधर उधर देखने लगा.
मैंने देखा दूर दूर तक बाजरे के खेतों में फसल लहलहा रही थी.

मम्मी उस आदमी और उसकी बीवी से बात करती रहीं.

फिर उस आदमी को कहीं काम से जाना था, उसने मम्मी से कहा- मालकिन मुझे बाजार जाना है, कुछ सामान लाने के लिए.
मम्मी ने उसे जाने के लिए हां कह दिया.

वो चला गया.
उसकी बीवी और मम्मी बातें करती रहीं.

थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज़ दी- बेटा, नीचे आ जाओ, चलते हैं.
मैं नीचे आ गया.

मम्मी ने उस औरत से पूछा- खरबूजे कहां लगे हैं?
उसने इशारा करके बताया- मालकिन उस वाले खेत में लगे हैं.

मम्मी ने मुझसे कहा- घर जाने से पहले कुछ तोड़ लाते हैं.
मैंने बोला- ठीक है चलो.

मम्मी आगे आगे चल रही थीं और मैं उनके पीछे पीछे.
वो बहुत सेक्सी लग रही थीं.

खेतों के काफ़ी अन्दर जाने के बाद उन्होंने मुझसे पूछा- क्या हम लोग बहुत अन्दर आ गए हैं?
मैंने कहा- हां मम्मी.

वो बोलीं- एक बात बोलूँ?
मैं समझ गया कि असर हो गया.

उनकी नज़रों से साफ़ लग रहा था.
वो बोलीं- तेरी कोई दोस्त लड़की है?
मैंने कहा- नहीं.

वो बोलीं- शर्मा मत, सच बता.
मैंने कहा- नहीं है, आपकी कसम.

वो बोलीं- क्यों नहीं बनाई?
मैंने कहा- कोई बनती ही नहीं.

मम्मी हंसने लगीं.

मैंने कहा- आप बन जाओ.
वो बोलीं- तू पागल है, मैं मम्मी हूँ तेरी, किसी को पता चल गया तो?

मैंने कहा- कौन बताएगा. ना आप किसी से कहोगी और ना मैं.
यही सब बातें करते करते हम बहुत अन्दर चले गए.

वहां जाकर वो रुक गईं और मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं.
मैं समझ गया कि मम्मी मेरे वश में आ गई हैं.

मैंने थोड़ी हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया.
वो बोलीं- कोई आ जाएगा पागल … छोड़.

मैंने कहा- यहां कौन आएगा?
वो मुस्कुराती हुई बोलीं- कोई नहीं आएगा तो तू क्या करेगा?

मैंने थोड़ी हिम्मत करके मम्मी के दोनों कंधे पकड़ लिए. वो मेरी तरफ़ देखती रहीं और मुस्कुराती रहीं.
मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

मैं उन्हें गले लगाने के लिए आगे को बढ़ा और वो शर्माते हुए मेरे सीने से लग गईं.
उनको गले से लगाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था.

मैंने सबसे पहले मम्मी के माथे पर एक किस किया.

वो बोलीं- लेकिन कभी किसी को पता नहीं चलना चाहिए.
मैंने कहा- आपकी कसम कभी किसी को पता नहीं चलेगा.

अब मैंने मम्मी को अपने गले से जोर से चिपका लिया और उनकी पतली कमर पर हाथ फेरने लगा.

उन्होंने इतने साल से किसी के साथ सेक्स नहीं किया था तो वो कांप रही थीं.

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया.
उन्होंने आंखें बंद कर लीं.
मैंने पूरी साड़ी खोल दी.

मेरे दिल की धड़कन भी तेज हो गई थी.
मैंने उनकी साड़ी को नीचे बिछा लिया और उनको पकड़ कर नीचे लेटा दिया.
मम्मी आंखें बंद करके लेट गईं.

मैं सबसे पहले उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों पर किस करना शुरू कर दिया.
मम्मी ने भी अपना मुँह खोल दिया ओर पूरा साथ देने लगीं.

मैंने किस करते करते मम्मी के ब्लाउज के हुक खोल दिए.
मेरे सामने उनकी बिल्कुल छोटी छोटी चूचियां ब्रा में दिख रही थीं.

मैंने उनकी ब्रा के हुक खोल दिए और उनकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
मम्मी ने कामुक सिसकारियां भरनी शुरू कर दीं.
मैंने अपना एक हाथ नीचे उनके पेटीकोट में डाल दिया. उनकी चूत पानी छोड़ रही थी, लेकिन एकदम मस्त थी.

मैंने अपनी लाइफ में मम्मी के जैसी चकाचक चूत नहीं देखी थी.
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उनका पेटीकोट निकाल दिया और उनकी टांगों के बीच में हाथ ले आया.

फिर मम्मी की दोनों टांगों को चौड़ा करके उनकी चूत पर अपना हाथ रख दिया.

मम्मी के मुँह से एक तेज आह की आवाज़ आई और मैंने उनकी चूत को मींजना शुरू कर दिया.
उन्होंने अपने हाथ मेरे सर पर रख दिए और दबाने लगीं.

मम्मी सिसयाती हुई बोलीं- आह बस कर … क्या कर रहा है … रहने दे.
मैंने कहा- क्यों पहले किसी ने नहीं किया?

वो बोलीं- सच में तेरी कसम आज … पहली बार तूने ही नीचे किस की है. तेरे पापा ने भी कभी नहीं की.
मैंने कहा- मजा नहीं आया क्या?
मम्मी बोलीं- बहुत ज्यादा मजा आ रहा है यार!

मैंने अपना लोवर निकाल दिया और देखा वो मेरा लंड देखने की कोशिश कर रही थीं.
तो मैंने अपने पूरे कपड़े निकाल दिए.

मेरा कड़क लंड देख कर मम्मी की आंखें फटी की फटी रह गईं.
लंड को देख कर मेरी मम्मी घबरा गई थीं, वो बोलीं- ये इतना बड़ा … मैं नहीं ले पाऊंगी. तेरे पापा का तो इससे बहुत छोटा था.

मैं आपको बताऊं, मैंने अपना लंड मालिश कर कर कर बहुत बड़ा कर रखा है. मेरे लंड का साइज़ काफी बड़ा है, ये मोटा भी बहुत है.
मैंने उनका हाथ पकड़ कर लंड पर रखा.

वो बोलीं- बेटा मैं इसे नहीं ले पाऊंगी. इससे मेरी फ़ट जाएगी.
मैंने कहा- सब हो जाएगा, प्यार से करूंगा मैं!

ये कह कर मैंने मम्मी की चूत के मुँह पर हाथ से दबा दिया और चूत के अन्दर एक उंगली डाल दी.
वो सिसकारी लेने लगीं.

उनकी पतली पतली टांगों को मैंने ऊपर उठा लिया.
उनकी आंखों में डर दिखाई दे रखा था.

इधर मुझसे रुका नहीं जा रहा था.
मैं मम्मी की टांगों के बीच में आ गया और अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया.

मम्मी ने आंखें बंद कर लीं और मैं उनके ऊपर लेट गया.
मैंने मम्मी के होंठों को अपने मुँह में ले लिया और एक जोर का झटका दे दिया.

एक ही धक्के में मेरा आधा लंड मम्मी की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया.
मम्मी के होंठ मेरे मुँह के अन्दर होने की वजह से वो चिल्ला नहीं पाईं, पर वो छटपटाने लगीं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए.

मैंने उनकी टांगें थोड़ी सी ऊपर की और फिर से एक जोर का धक्का दे दिया.
इस बार मेरा पूरा लंड, छूट को फाड़ता हुआ जड़ तक घुसता चला गया.

मैं थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा.
थोड़ी देर में वो नॉर्मल हो गईं.

मैंने उनके होंठों से मुँह हटा लिया.

वो बोलीं- बेटा निकाल ले, मर जाऊंगी.
मैंने कहा- नहीं मरेगी मेरी जान.

मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.
पहले तो मम्मी को दर्द हुआ, लेकिन फिर वो भी साथ देने लगीं.

मैंने मम्मी की टांगें उठा कर कंधों पर रख लीं और उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.
अब वो भी मस्ती में बोल रही थीं- आह ऐसे ही चोद दे … ऐसे तो पहले कभी किसी ने नहीं चोदा.

मैंने थोड़ी देर चोदने के बाद मम्मी को घोड़ी बनने के लिए कहा.
पर वो बोलीं- अभी ऐसे ही पेल ले. रात में घर में कुतिया बना कर चोद लेना. अभी बहुत दर्द हो रहा है.

मैं लग गया और 15 मिनट तक मम्मी को ताबड़तोड़ चोदने के बाद मेरा माल निकलने वाला था.

मेरी सौतेली मम्मी का अब तक दो बार पानी निकल चुका था.

वो हाथ जोड़ने लगीं और बोलीं- छोड़ दे यार आज ही मार देगा क्या?
मैं बोला- मेरी जान माल निकलने वाला है, क्या करूं?
वो बोलीं- अन्दर ही निकाल दे जानू.

मैंने अपने लंड का पूरा माल मम्मी की चूत के अन्दर ही निकाल दिया.
फिर कुछ देर बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और घर आ गए.

ऐसे मौलवी जी की मदद से मेरा मॉम सेक्स का सपना पूरा हुआ.

रात में मैंने मम्मी को दबा कर चोदा और दो दिन बाद उनकी गांड भी मारी.

दोस्तो, मेरा नाम निखिल है और मैं पुणे का रहने वाला हूँ। वैसे मैं अभी 20 साल का हूँ और अमेरिका में पत्रकारिता की स्टडी करने आया हूँ।
वैसे मैं औसत कदकाठी वाला लड़का हूँ.. पर मेरा लंड करीब 8 इंच का है और 2.5 इंच मोटा है।

यह मेरी पहली कहानी है जो मैं आपके सामने रख रहा हूँ।
बात उन दिनों की है.. जब मैं अमेरिका में नया था और हमारे हॉस्टल में काफी लड़कियाँ थीं। मैं उनको देख हैरान था.. उनकी चूचियाँ बहुत बड़ी-बड़ी थीं। मैं कई बार उनकी बारे में सोच कर मुठ्ठ मार लेता था।

जब हमें पत्रकारिता के लिए सब्जेक्ट मिले तो मैंने एक पोर्न स्टार का सब्जेक्ट चुना। तो अब मुझे रायलेनी नामक पोर्न स्टार से मुलाकात करनी थी।
वैसे मैंने उसकी बहुत सी सेक्स मूवीज देखी थीं तो जब मुझे उसका अपॉइंटमेंट मिला.. तो मैं बहुत खुश था।

मुझे उनके ऑफिस से कॉल आया और टाइम दिया गया। मुझे रात दस बजे का टाइम दिया था.. तो मैं तैयार होकर निकला।
उसके ऑफिस पहुँचा.. तो उसकी सेक्रेटरी ने कहा- मैडम बिजी है- आप बैठो..

मैं वहाँ बैठ कर वेट करने लगा और ऐसे ही 11 बज गए। फिर उस सेक्रेटरी को अन्दर से कॉल आया और मुझे अन्दर बुलाया गया।

दोस्तों क्या बताऊँ.. अन्दर जाते ही मेरा लंड इतनी जोर से उछला.. कि मैं अन्दर सब देखता ही रह गया। सभी दीवारों पर रायलेनी की नंगी तस्वीरें लगी हुई थीं। मेरा लंड मेरे पैन्ट की अन्दर ही तम्बू हो गया था। जब मैंने उसकी तस्वीरें देखीं तभी मेरे होश उड़ गए थे।

तभी रायलेनी शायद बाथरूम से बाहर आ गई और अपनी सेक्रेटरी को फ़ोन किया और बोली- तुम अब घर जाओ।
जब मैंने उसे देखा तो देखते ही रह गया.. उसने लो कट वाला टॉप पहना था। उसमें से उसके मम्मे बड़े ही साफ दिख रहे थे।
मेरा यहाँ बहुत बुरा हाल ही रहा था और हम बातें करने लगे।

मैं- हाय
रायलेनी- हैलो..
मैं- मुझे आपके बारे में कुछ जानकारी चाहिए थी..
रायलेनी- हाँ क्यों नहीं.. प्लीज़ पूछिए..

मैं- आपने इस काम की शुरुआत कब की?
रायलेनी- जब मैं 21 साल की हुई..

इसी तरह काफी देर तक उसने मेरे सवालों के उत्तर दिए जिससे मेरा काम बन गया अब सिर्फ कुछ फोटो लेने बाकी थे।

मैं- क्या मैं आप की फोटो ले सकता हूँ?
रायलेनी- क्यों नहीं… ले लो..

मैं जब फोटो लेने के लिए उठा.. तो उसका ध्यान मेरे पैंट पर गया और उसने पूछा- तुम ठीक हो?
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

वो अपनी कुर्सी से उठ कर मेरे पास आई।
वैसे ही मेरा बुरा हाल था.. जैसे ही वो मेरे पास आई मेरे तो पसीने छूटने लगे।
उसने मेरे हाथ पर हाथ रखा और कहने लगी- तुम्हारा लंड काफी बड़ा लगता है।

वो मेरे तरफ देख मुस्कुराने लगी और अपना हाथ मेरी पैंट पर रख दिया और मुझे किस किया।
मुझे बहुत डर लगा और मैं वहाँ से हट गया।
तो उसने कहा- डरो मत.. यहाँ हम दोनों के सिवा और कोई नहीं है।

उसने मेरा हाथ लिया और अपने मम्मों पर रख दिया.. तो मेरा डर भी कम हुआ और मैं धीरे-धीरे उसके मम्मों को दबाने लगा।

वो टेबल पर बैठी थी और मुझे जोर-जोर से किस किए जा रही थी। अब मैं भी उसके मम्मों को जोर-जोर से दबा रहा था और कस कर उसे किस कर रहा था।

मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर और दूसरा उसकी चूत को सहला रहा था। वो अब बहुत गर्म हो चुकी थी और उसकी चूत से पानी निकल रहा था। वो अब नीचे आ गई और मेरे पैंट से मेरा लण्ड निकालने लगी। उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.. अब मैं भी पूरे जोश में था।

वो मेरे लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं भी उसकी मुँह की चुदाई करने लगा।
वो इतना जोर-जोर से मेरा लंड अन्दर-बाहर कर रही थी कि दस मिनट में ही मेरा पानी उसके मुँह में निकल गया और वो पूरा पानी पी गई।

थोड़ी देर के बाद मेरे लंड फिर से खड़ा हो गया और रायलेनी ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए।
उसने अपने कूल्हों गाण्ड पर मस्त टैटू बनाया था। मैंने जैसे ही उसे नंगी देखा.. मैं उस पर टूट पड़ा, मैंने उसको टेबल पर लिटाया और उसका पूरा शरीर पागलों की तरह चाटने लगा।

उसकी चूत से बहुत मादक खुशबू आ रही थी। मैं भी बड़े मजे से उसकी चूत चाट रहा था और वो अपने मुँह से आवाज निकाल रही थी ‘ऊऊओह्ह ह्हह्हह ऊओया आअ.. ऊऊऊ ऊऊ ऊऊईई ईईइ..मा..’
वो बोल रही थी- फ़क मी हार्ड..

अब मैंने जरा सा थूक अपने लण्ड पर लगाया और उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया। मेरे पूरा लौड़ा एक ही बार में अन्दर चला गया। अब मैं बड़े ही मस्त तरीके से उसे चोद रहा था और वो भी काफी कामुक आवाजें निकाल रही थी ‘फक मी हार्ड.. ओह्ह.. यू आर ग्रेट फकर.. योर टूल इस सो लॉन्ग.. फक मी हार्ड..’

अब मैंने अपनी पोजीशन बदली और उसकी कुर्सी पर बैठ गया और उसे अपने लंड पर बैठने को कहा।
वो जैसे ही लंड पर बैठी.. उसके मम्मे मेरे मुँह के सामने आ गए और मैं उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं चूचियाँ चूसते-चूसते बीच में ही हल्के से काट भी लेता.. तो वो मेरे सर को अपने मम्मों के बीच दबा लेती।

उसकी काफ़ी लम्बी चुदाई के बाद वो थक गई और मेरे ऊपर से हट गई।
मैंने उससे कहा- मुझे तुम्हारी गदराई गाण्ड मारनी है।

तो वो अपनी अलमारी से एक तेल लाई और टेबल पर लेट गई। उसने वो तेल मेरे लण्ड पर और अपनी गाण्ड में लगाया और मेरे लंड अपनी गाण्ड में डालने लगी। थोड़ी दिक्कत के बाद मेरा पूरा लण्ड आराम से उसकी गाण्ड में चला गया। अब वो सीधे मेरे लंड पर बैठ गई और चुदने लगी।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड गाण्ड से निकाल कर फिर से अपनी चूत में डाल लिया और अपनी उंगलियों से अपनी चूत सहलाने लगी और आवाजें निकालने लगी।

‘आआहह.. आआअ ऊऊहह..’

अचानक उसकी चीख निकल पड़ी और उसने अपना सारा पानी छोड़ दिया।
इधर मैं भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था.. तो मैंने उसे उठाकर टेबल पर बैठा दिया और अपना पूरा लावा उसके मम्मों और मुँह पर छोड़ दिया।
उसने मेरा लंड चाट कर साफ़ किया और खुद भी बाथरूम से साफ़ होकर आ गई।
फिर हमने कपड़े पहने।

जाते वक़्त उसने मुझे अपना कार्ड दिया और फ़ोन करने को कहा।
जाते-जाते उसने फिर एक लम्बा चुम्बन किया और चली गई।

फिर अमरीका से वापिस के बाद अब मैं पुणे में ही हूँ।

Hindi Porn Stories

मेरा नाम राहुल है. यह Hindi Porn Stories मेरी पहली कहानी है, सच है या झूठ, आप ही बता सकते हैं. मैं अभी हैदराबाद में जॉब करता हूँ.

कहानी उन दिनों की है जब मैं +2 की परीक्षा देकर हॉस्टल से अपने घर गया था. हॉस्टल में तो सेक्स के बारे में हम सभी खूब बात करते थे, पर सही में सेक्स कैसे होता है मुझे मालूम नहीं था. घर पर मेरे पापा, मम्मी, बड़ा भाई और एक छोटी बहन है जो आठवीं में है. मेरे पापा नौकरी करते हैं और मम्मी स्कूल टीचर है. मेरा बड़ा भाई मुझसे तीन साल बड़ा है. घर पर दिन मैं और मेरा बड़ा भाई अकेले ही रहते थे क्योंकि उसका सरकारी कालेज था.

मैंने एक दो दिनों तक गौर किया कि घर पर जब कोई नहीं रहता है तो पास के घर की रानी नाम की लड़की नोटबुक ले कर घर आती है. पहले तो मैं गौर नहीं करता था पर एक दिन जब उसे कमरे से निकल कर उसके कपड़े ठीक करते देखा तो मुझे शक हो गया.

दो दिनों बाद जब वो आई तो मैं रोशनदान से छिप कर देखने लगा. वो आते ही मेरे भाई से चिपक गई, मेरा भाई भी उसके होटों को चूम रहा था. फिर भाई ने उसका कुरता और ब्रा खोल दिया और उसके चूचे चूसने लगा. फिर मैंने रानी को देखा- वो बहुत ही मदहोश हो चुकी थी और सेक्सी सेक्सी आवाजें निकाल रही थी… ऊऊऊह्ह आआअह्ह्ह ह्म्मम्म ऊऊउ स्स्स्स!

फिर भाई ने उसकी सलवार को खोल दिया और उसकी पेंटी के उपर से हाथ घुमा रहा था रानी पागलों की तरह आवाजें निकालने लगी, पूरा कमरा सेक्सी आवाजों से गूंज रहा था. फिर मैंने देखा कि भाई उसकी पेंटी उतार कर खुद भी नंगा हो गया और अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा. कुछ देर तक चोदने के बाद वो एक झटके के साथ मेरे भाई से चिपक गई, फिर मेरा भाई भी थोड़ी देर तक उसके शरीर पर पड़ा रहा. फिर रानी ने उठ कर अपने कपड़े पहन लिए और अपने घर चली गई.

मैं वो सीन देख कर सीधा बाथरूम गया और मूठ मार लिया. पर उस रात मैं सो नहीं पाया.उसके बाद एक और दिन चुदाई का कार्यक्रम देखा तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भी रानी को चोदने की ठान ली.

शाम को मैं और भाई जब बाज़ार से घर आ रहे थे तो मैंने हिम्मत कर के भाई को बोल दिया कि तुम और रानी जो करते हो मैंने देख लिया है. मेरे भाई का मुँह देखने लायक था, बेचारा मुझसे कुछ नहीं बोल पा रहा था.

वो इतना बोला कि प्ली़ज मैं यह बात किसी को न बोलूं! तो मैंने भी रानी को चोदने की शर्त रख दी.
वो बोला- कोशिश करूँगा.

दो तीन दिनों के बाद फिर रानी आई तो मैं फिर रोशनदान से छिप कर देखने लगा. आज दोनों कुछ बात कर रहे थे. थोड़ी देर में भाई कमरे से बाहर आने लगा तो मैं भाग कर नीचे आ गया और अपने कमरे में बैठ गया. भाई मेरे पास आया और बोला- रानी मुझे बुला रही है!

मैं डरते डरते कमरे में गया तो रानी चुपचाप खड़ी थी. मैंने भाई के डर से दरवाजा बंद नहीं किया. थोड़ी देर खड़े रहने के बाद रानी ने खुद बात शुरु की और मुझे दरवाजा बंद करने को बोला.

मैंने दरवाजा जैसे ही बंद किया, उसने मुझे बेड पर बैठने को कहा. वो खुद भी बेड पर बैठ चुकी थी. फिर उसी ने बात शुरु की, मुझसे पूछा- तुम छिप-छिप कर क्या देखते थे?

तो मैं बोला- वही जो तुम और भाई करते हो!
तो वोह बोली- क्या वही?
तो मैं बोल बैठा- ‘चुदाई’

फिर वो हंसने लगी और मुझसे पूछा- पहले किसी को किया है?
तो मैं बोला- नहीं!
फिर उसने बोला- आज कुछ करोगे या सिर्फ़ मुझसे बात ही करोगे!

इतनी में वो और करीब आ गई, मुझे समझ नहीं आ रहा था. फिर मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ लिया और उसे गले लगा लिया. उसने भी मुझे पकड़ लिया और मेरी पीठ को सहलाने लगी. फिर मैं उसके होटों को चूमने लगा. मेरा लंड काबू में नहीं हो रहा था. जल्दी-जल्दी मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए और अपने भी खोल दिए. वो मेरा लंड सहला रही थी, पर जैसे ही मैंने उसकी चूत में लंड डाला, वो तिलमिला उठी और बोली- तुम्हारा लंड तो तुम्हारे भाई से लम्बा और मोटा है! धीरे करो!

पर दो-तीन मिनट में ही मेरा माल निकल गया और मुझे शर्मिंदगी लगने लगी तो वो बोली- क्या हुआ?

मैं कुछ नहीं बोला तो वो बोली- पहली बार है ना!
तो मैं बोला- हाँ!
तो वो हंसने लगी और बोली- कोई बात नहीं! एक बार फिर कोशिश कर सकते हो!
इस बार उसने पहल की और बोली- जल्दबाजी मत करना! आराम से म़जा लोगे तो तुम्हें अच्छा लगेगा!

फिर उसने मेरा लंड सहलाना शुरु किया. पाँच मिनट में ही लंड खड़ा हो गया. मैं भी आराम से उसकी चूचियाँ दबा रहा था. इस बार सही में मजा दोगुना हो गया था.

उसने मुझसे कहा- अब जल्दी से ऊपर आ जाओ!

मैंने अपने लण्ड को निशाने पे लगाया और उसकी बूर पे रखकर एक जोरदार झटका मारा, वो दर्द के मारे कराहने लगी. मैं उसके स्तन मसलने लगा. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने एक और जोरदार शॉट मारा और पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत की गहराई में समां गया. वो एक बार फिर दर्द से चिल्ला उठी और आ आआ आ आह्ह्ह्ह ईईइह्ह्ह्ह ऊऊ ऊ ऊ ऊह्ह्ह्ह की आवाजें करने लगी. मैंने उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए.

जब उसका दर्द कम हो गया तो वो कहने लगी- जोर से चोदो मेरे राजा! आज इस चूत का भोंसड़ा बना दो! और जोर से… और जोर से! आज मुझे छोड़ना नहीं मेरे रज्जा!… मुझे आज पेल दो आज…!

मैं जोर-जोर से धक्के लगाने लगा, रानी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और नीचे से गांड उठा-2 कर झटके मार रही थी. करीब बीस मिनट बाद मैंने कहा- अब मैं झड़ने वाला हूँ!
उसने कहा- स्पीड बढ़ा दो!

मैं तेज-तेज़ झटके लगाने लगा और 10-15 झटकों के बाद मेरा लावा उसकी चूत में समां गया.

वो आज शादीशुदा है. और जब मैं घर जाता हूँ उसे फ़ोन कर देता हूँ! वो आ जाती है और हमारा चुदाई का कार्यक्रम एक बार तो होता ही है.

विश्वास के साथ यहीं ख़त्म कर रहा हूँ. कहानी आप लोगों को सच लगा या झूठ, कृपया मेल भेजना न भूलिएगा. Hindi Porn Stories

प्रेषक : सनी Hindi Sex Stories

यह तब की कहानी है Hindi Sex Stories जब मैं २४ साल का था। घर वालों ने मेरी शादी एक शहर की लड़की से तय की जिस शहर में मैं काम कर रहा था। लड़की के पिता साठ साल के थे और वो बीमार थे, माता सैंतालीस साल की थी और काफी सेहदमंद थी, बड़ी बहन माया सत्ताइस साल की शादीशुदा थी, उसकी शादी को तीन साल हुए थे लेकिन अभी उसकी कोई संतान नहीं थी और सबसे छोटी बहन अट्ठारह साल की थी जो पढ़ रही थी।

शादी के बाद मैं उन्हीं लोगों के साथ रहने लगा, क्योंकि घर में कोई जवान पुरुष नहीं था और पिताजी की देख-भाल के लिए वहाँ होना जरूरी था।

बड़ी साली माया दिखने में काफी सुन्दर थी लेकिन हमेशा चुपचाप रहती थी, उसके पति गाँव में अध्यापक थे और वो महीने में तीन या चार दिन ही आते थे।

मेरे साथ वो घुल मिल के रहती थी लेकिन कुछ पूछ्ने पर नहीं बताती थी। एक दिन दोपहर मैं घर पे अकेला था तो मैंने खिड़की से देखा कि माया स्कूल से घर आ रही थी, वो भी स्कूल टीचर थी, उसे देखते ही मुझे एक कल्पना सूझी और मैंने उसे पटाने की तरकीब निकाली।

मैंने अपनी चड्डी निकाल के सिर्फ लुंगी पहनी जोकि सामने से खोल सकते थे, और बेडरूम में सो गया। उसके विचार से मेरा लण्ड तन के दस इंच का हो गया था और लुंगी में खडा हुआ था।

थोड़ी देर में माया ताला खोल कर अन्दर आई और मुझे अन्दर उस स्थिति में देखकर मुस्कुराई। वो बड़े प्यार से मेरे तने हुए लिंग को देख रही थी। शायद उसने पहली बार इतना बड़ा हथियार देखा था।

अब उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किये। उसने अपनी साड़ी उतार कर बाजू में रखी और फिर ब्लाऊज़ निकाला। वो मुझे सोया हुआ समझकर बिंदास अपने कपड़े बदल रही थी या सब कुछ जानते हुए अनजान बन रही थी।

फिर उसने पेटीकोट उठाकर अंदर से अपनी चड्डी निकाल कर बाजू में रखी। उसी कारण मुझे उसके बड़े बड़े गोरे कूल्हे नजर आये और मेरा लंड और तन गया।

फिर उसने अपनी ब्रा भी निकाली और वो घर में पहनने के कपड़े लेने के लिए मुड़ी तब मैंने उसके बड़े-बड़े गोरे आम जैसे स्तनों के दर्शन किये। उसका पेटीकोट आगे से थोड़ा फटा हुआ था इसलिए पेट के नीचे के बाल भी साफ़ नजर आ रहे थे।

अब मैंने आहिस्ते से अपनी लुंगी सरका दी ताकि मेरा पूरा का पूरा लंड उसको दिखे। जब उसने मेरा दस इंच का लंड खुला देखा तो उसके होश उड़ गए। लगता है उसको नजदीक से देखने की उसको लालसा हुई और वो थोड़ा नीचे झुक गई।

मैं उसी वक़्त उठकर खड़ा हुआ जैसे कि मुझे बाथरूम जाना है। सामने ही उसे देखकर मैंने आश्चर्य से उसे पूछा कि वो कब आई। लेकिन वो बिना कुछ बोले अपनी छाती पर हाथ रखकर खड़ी थी और मेरे नीचे वाले को देखकर मुस्करा रही थी।

मैंने नीचे देखा और उसे कहा- माफ़ करना, सपना देख रहा था, इसीलिए यह हालत हुई है।

तो उसने हंसते हुए कहा- कौन है वो जो सपने में इस सुन्दर चीज से खेल रही थी?

तो मैंने उससे कहा- बुरा नहीं मानना लेकिन वो तुम्हीं हो जो सपने में मुझे सताती हो !

ऐसा कहते हुए मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसके मुख को चूमा और उसके स्तन अपने हाथ में लेकर कुचलने लगा। लेकिन उसने मुझे जोर का धक्का देकर दूर धकेला और बेड पर बैठकर रोने लगी और कहने लगी- नहीं, मुझे माफ़ करो लेकिन मैं ये सब तुम्हारे साथ नहीं कर सकती, यह पाप है, तुम मेरे बहन के पति हो, यह पाप मैं नहीं कर सकती।

थोड़ी देर उसको रोने देने का बाद मैंने उसे कहा- कैसा पाप ? तुम तो मेरी साली हो और साली तो आधी घरवाली होती है और क्या मुझे मालूम नहीं कि शादी को तीन साल होने के बाद भी तुम्हारी संतान नहीं है क्योंकि तुम्हारा पति तुम्हें यह सुख नहीं दे पाता। क्या तुम नहीं चाहती कि तुम मेरे इस लंड की मालकिन बनो और इसका मजा लूटो ! क्या तुम मुझसे संतान होना पसंद नहीं करोगी? अगर मेरी शादी छाया (मेरी पत्नी) के बजाए तुम से हो जाती तो कितना अच्छा होता ! तुम्हें पता है कि मेरा ये दस इंच का हथियार छाया नहीं पेल पाती और वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाती।

वो मेरी तरफ देखने लगी, मेरी नजर में अपार करुणा थी, मैंने उसे कहा- क्या महाभारत में कितनी औरतों के दो या पाँच पति नहीं थे? कितनी औरतों ने दूसरे पुरुष से संतान नहीं पाई थी? यहां तो मैं तुम्हारे घर का पुरुष हूँ और अगर तुम्हारा पति तुम्हें यह सुख और सन्तान नहीं दे पाता तो सबसे पहले ये मेरा अधिकार और कर्त्तव्य है कि मैं तुम्हें यह सुख और संतान दे दूँ ! अब यह तुम्हारे हाथ में है कि हम सब दुखी रहे या तुम मेरी पत्नी बन के यह सुख भोगो और मुझसे संतान प्राप्त करो ! इस कारण मैं छाया को भी ज्यादा परेशान नहीं करुंगा और वो भी सुखी रहेगी। क्या तुम नहीं चाहती कि तुम, मैं, तुम्हारी बहन और संतान पाकर तुम्हारे पति सब खुश हो और घर ही घर में तुम्हें यह सुख मिले?

उसको चुपचाप खड़ी पाकर मैं समझ गया और उसको अपनी ओर खींचकर उसके चुम्बन लेने लगा और उसके बड़े बड़े आम जैसे उरोज कुचलने लगा।

अब वो मेरी बदन से चिपक गई। मैंने बिना समय गँवाए उसको बेड पे डाला और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसे दूर फेंक दिया। अब वो पूरी नंगी मेरे नीचे थी और मैं उसके पूरे बदन को चूम रहा था।

फिर मैंने 69 की पोजीशन ली और अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और मैं उसकी चूत को अन्दर जीभ डालकर चूसने लगा। मुझे औरतो की चूत चूसना बहुत पसंद है, उनकी चूत से बहता हुआ पानी मुझे बहुत अच्छा लगता है।

दस मिनट तक एक दूसरे की चाटने के बाद मैं उसकी टाँगों के बीच में आया और उसकी एक टांग अपने कंधे पर लेकर अपना लंड का सुपारा उसकी चूत की दरार पे टिका दिया. और एक जोर का धक्का दिया।

वो जोर से चिल्लाई तो मैंने अपने हाथ से उसका मुँह बंद किया। वो रोने लगी और मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत में से खून बह रहा था। मैं जान गया कि उसकी चूत की झिल्ली मैंने तोड़ दी है।

शादी के तीन साल बाद भी वो कुंवारी ही थी। मैंने उसके पति को मन ही मन धन्यवाद दिया कि उसका सील तोड़ने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने दूसरा जोर का धक्का दिया और इस बार मेरा पूरा दस इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लंड उसकी चूत में घुस गया।

फिर आहिस्ते- आहिस्ते मैं लंड को अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी। दस मिनट बाद उसने मुझे जोर से पकड़ लिया मैं समझ गया कि उसने अपना पानी छोड़ दिया है।

लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था और 15 मिनट तक लगातार धक्के मारने के बाद मेरा लावा गिरने को आया तो मैंने उसको पूछा कि वो क्या चाहती है, मैं मेरा वीर्य उसकी चूत में गिराऊं या वो उसे अपने मुँह में लेना पसंद करेगी?

वैसे मैं अपने वीर्य को बहुत कीमती मानता हूँ और उसे जमीन पे गिराना मुझे पसंद नहीं है। लेकिन उसने कहा कि वो मेरे वीर्य को पवित्र मानती है और वो उसे अपनी चूत में लेना चाहती है ताकि उसे संतान प्राप्त हो। वो चाहती है कि छाया की बड़ी बहन होने के नाते वो उससे पहले माँ बनना चाहती है।

मैंने भी उसे कहा कि मैं उसे अब मेरी बड़ी पत्नी के रूप में देखता हूँ और मेरे बच्चे की माँ बनना उसका ही पहला अधिकार है और मैं उसे पूरा करूँगा।

ऐसा कहकर मैंने 10-12 पिचकारी वीर्य उसकी चूत में छोड़ा और फिर हम दोनों उसी पोजीशन में दस मिनट तक पड़े रहे। फिर बाथरूम जाकर हमने एक दूसरे को साफ़ किया और भगवान की तस्वीर के सामने खड़े होकर मैंने उसके साथ गन्धर्व विवाह किया।

जिंदगी भर मैंने उसे पत्नी मानने की कसम खाई और उसे बच्चे देने का अधिकार प्राप्त किया।

उसके दो दिन बाद मेरे जीवन में क्या तूफ़ान आया ये आप सोच भी नहीं सकते !

वो सब अगली कहानी में बताऊंगा, मेरी अगली कहानी का इंतजार करिए। तब तक के लिए नमस्कार ! Hindi Sex Stories

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