Our site can help you find a professional massage girl in Imphal East who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.
Find Related Category Ads
Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Imphal East that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.
Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Imphal East massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.
Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Imphal East who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.
Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Imphal East massage service, which makes it easier to obtain more customers.
There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.
A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Imphal East massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.
This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Imphal East who are good at deep tissue treatments that function effectively.
Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Imphal East employ the use of custom oil preparations to make you feel good.
A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Imphal East helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.
Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Imphal East
Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Imphal East at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:
Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.
Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.
When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.
The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.
All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मैं बचपन से अच्छे माहौल में नहीं Indian Sex Stories रहा हूँ। मैं चोरी बहुत कुशलता से कर लेता हूँ। पर इसके लिये भाग्य का भी आपके साथ होना जरूरी है। शारीरिक सुडौलता एक आवश्यक गुण है। इसके लिये मैं हमेशा कठिन योग भी करता हूँ और जिम भी जाता हूँ। मेरा शरीर एक दम चुस्त और वी शेप का है। मैं सुबह सुबह मैदान के चार से पांच चक्कर लगाता हूँ। मेरी चोरी करने के कपड़े भी एकदम बदन से चिपके हुए होते हैं। तो आईये चलते हैं चोरी करने…
मेरे सामने एक मकान है। उसमें एक छोटा सा परिवार रहता है। सिर्फ़ मियां-बीवी और उनकी एक १८-१९ साल की लड़की वहां रहती है। पैसा अच्छा है… जो सामने वाले कमरे कि अल्मारी में रखा है। उसकी अलमारी की चाबी मालकिन के पास उसके तकिये के नीचे होती है। रात की शिफ़्ट में मालिक काम करता है। मालिक ड्यूटी पर जा चुका है। मैं मकान के पास, कभी पान की दुकान पर या पास की चाय की दुकान पर मंडरा रहा हूँ।
कमरे की लाईट अभी जल रही है… मैने समय देखा रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। और अब लाईट बन्द हुई है। मैंने टहलते हुये उस घर का एक चक्कर लगाया… सभी कुछ शान्त था। १२ बज चुके हैं।… मैं घर के पिछ्वाड़े में गया और एक ही छलांग में चाहरदीवारी पार कर गया। बिना कोई आवाज किये बाल्कनी के नीचे आ गया। उछल कर बालकनी में आ गया। थोड़ी देर इन्तजार करके खिड़की को धीरे से धक्का दिया… मेरी आशा के अनुरूप खिड़की खुली मिली… मैने धीरे से कदम अन्दर बढ़ाया। कमरे मे पूरी शान्ति थी। सामने बिस्तर था। मैं दबे पांव वहां पहुँचा। वहां पर, जैसा मैंने सोचा था, घर की मालकिन सो रही थी। मै चाबी निकालने के लिये ज्यों ही झुका…
“मैने दरवाजा खुला रखा था… खिड़की से क्यों आये…” फ़ुसफ़ुसाते हुये मालकिन ने कहा।
मै घबरा गया। पर मेरा दिमाग कंट्रोल में था। …
“बाहर से कोई देख लेता तो…” मैंने हकलाते हुए कहा…
“लेट क्यो आये … इतनी देर कर दी…”
“लाईट जली थी…मैं समझा कि कोई है……” उसने मुझे अपने बिस्तर पर मुझे खींच लिया…
“तुम मनोज के दोस्त हो ना… क्या नाम है तुम्हारा…”
“जी… सोनू… है…”
“अरे… मनोज तो रवि को भेजने वाला था… तुम कौन हो…”
” जी… मैं रवि ही हूँ…सोनू तो मुझे प्यार से कहते हैं…”
“अरे सोनू हो या मोनू … तुम तो बस शुरू हो जाओ… ” उसने मुझे अपनी बांहों मे कस लिया।
मुझे अहसास हुआ वो बिलकुल नन्गी थी। मैं चोरी के बारे में भूल गया। मेरे शरीर मे गर्मी आने लगी। वो किसी का इन्तजार कर रही थी। शायद रवि का…
“दरवाजा खुला है क्या…?”
“अरे हां…” वो जल्दी से उठी और दरवाजा बन्द करके आ गई। मैने भी अपने कपड़े उतार लिये और नंगा हो गया।
“आपका नाम क्या है …” मैने उसका नाम पूछ ही लिया
“कामिनी… क्यों मनोज ने बताया नहीं क्या…”
मैने कुछ नहीं कहा … उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया… और बेशर्मी से अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। मेरे बदन में वासना भड़क उठी। उसका नंगा बदन मुझे रोमान्चित कर रहा था। मेरा लण्ड जाग चुका था। और अपने काम की चीज़ ढूंढ रहा था। फ़ड़फ़ड़ाती चिड़िया को कामिनी ने तुरन्त अपने कब्जे में ले लिया। मेरे लण्ड पर उसके हाथ कस चुके थे और अब उसे मसल रहे थे। मेरे मुख से आह निकल गई… मैंने उसे चूमना जारी रखा… तभी
“बहन के लौड़े… मेरी चूंचियां तो दबा … ” उखड़ती हुई सांस और एक गाली दी… मैं और उत्तेजित हो गया। उसके बोबे बड़े थे… दबा दिये और उन्हें मसलने लगा।
“मेरी जान… जल्दी क्या है … देख तेरी चूत को कैसा चोद कर भोंसड़ा बना दूंगा”
कामिनी मेरे लण्ड की खाल को ऊपर नीचे मुठ मारने जैसी चलाने लगी। मैने जोश में आकर उसके चूतड़ों को दबा डाला।
“हाय रे… मेरी गाण्ड मसल दी … बहन चोद… मेरी गाण्ड मारनी है क्या…” वो वासना में डूब चुकी थी।
“इच्छा है तो कहो… आपका गुलाम हूँ… ” मैने उसकी चमचागिरी की।
“तो चल चोद दे पहले मेरी गाण्ड… फिर मेरा भोंसड़ा चोद देना…” उसकी भाषा … हाय रे… मुझे उत्तेजित कर रही थी। शायद वो बहुतों से चुदा चुकी थी … और उसकी गाली देने की आदत पड़ गई थी। मैंने उसके मस्त चूतड़ दबाने और मसलने चालू कर दिये। उसके मुख से सिसकियाँ निकलने लगी।
वो सीधी लेटी थी। मैंने उसकी चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और गाण्ड ऊंची कर दी। मैने उसकी गाण्ड पर अपना लण्ड टिका दिया और जोर लगाने लगा। मेरे दोनो हाथ फ़्री थे। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे उतर गया… मैने उसके बोबे दबाये और और उसकी गाण्ड को चोदना चालू कर दिया। वो मस्त होने लगी। कुछ देर बोबे मसलने के बाद बोबे छोड़ कर उसकी चूत में अपनी अंगुली घुसा दी।
वो चिंहुक उठी। बोली -“हरामी ये तरीका किसने बताया रे…… मस्त स्टाईल है… अब तो चूत में भी मजा आ रहा है…।”
” कामिनी जी … आपकी चूत मस्त है…अगर इसकी मां चुद जाये तो आपको मजा आ जायेगा ना…”
“हाय मेरे सोनू…… तूने ये क्या कह दिया … मां चोद दे मेरी भोसड़ी की…हाय…सच में बहुत प्यासी है रे…”
मेरा लण्ड अब थोड़ा तेजी पर था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, उसकी गाण्ड थोड़ी सी टाईट भी थी। मेरे धक्के उसकी गाण्ड में और उसकी चूत में मेरी अंगुलियां तेजी से चल रही थी। वो लगभग चीखती हुई सिसकारियां भर रही थी। उसे डबल मजा जो मिल रहा था। अब मेरा भी लण्ड फूल कर बहुत ही मस्त हो रहा था। मुझे लग रहा था कि ऐसे ही अगर गाण्ड चोदता रहा तो मैं झड़ जाऊंगा। मैने अपना लण्ड अब गाण्ड में से निकाला और उसकी चूत में फ़ंसा दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी चूत में फ़क से फ़िट हो गया ।
“हाय्…री… गया अन्दर… चुद गई…रे……” वो मस्त होती हुई सिसकने लगी।
मुझे भी तेज आनन्द की अनुभूति हुई… उसे अपनी चूत में लण्ड उतराता हुआ मह्सूस हो रहा था। मेरे लण्ड की चमड़ी रगड़ खाती हुई तेज मजा दे रही थी। मैने अपने धक्के लगा कर चूत की गहराई तक अपना लण्ड गड़ा दिया। अब मै उसके ऊपर लेट गया और अपने हाथो से शरीर को ऊंचा उठा लिया। मुझे लण्ड और चूत को फ़्री करके तेजी से धक्के लगाना अच्छा लगता है। अब मेरी बारी थी तेजी दिखाने की। जैसे ही मैने अपना पिस्टन चलाना चालू किया वो भी बड़े जोश से उतनी ही तेजी से अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर साथ देने लगी।
“तू तो गजब का चोदता है रे… मुझे तू ही रोज़ चोद जाया कर…”
“मत बोलो कुछ भी…… मुझे बस चोदने दो… हाय रे…कितना मजा आ रहा है…”
“मादरचोद…रुक जा…झड़ना मत……वर्ना मेरी चूत को फिर कौन चोदेगा…”
“चुप रहो … छिनाल… अभी तो चुद ले… झड़े तेरी मां… कुतिया…”
मेरे धक्के बढ़ते गये। उसकी सिसकारियां भी बढ़ती गई…उसकी गालियां भी बढ़ती गई… अचानक ही गालियों की बौछार बढ़ गई………
“हरामी … चोद दे……मेरी भोसड़ी फ़ाड़ डाल…… मेरी बहन चोद दे… कुत्ते… मार लण्ड चूत पर… हाय रे मेरी मां…”
मैं समझ गया कि अब कामिनी चरमसीमा पर पहुंच रही है। मैंने भी अपने आप को अब फ़्री छोड़ दिया झड़ने के लिये।
“मर गई रे…… भोंसड़ी के… लगा… दे धक्के… निकाल दे मेरा पानी… मादरचोद रे…अरे…गई… निकला रे……हाऽऽऽऽय री मां…”
और वो झड़ने लगी। मैने भी लण्ड अब उसके भोंसड़े में जोर से गड़ा दिया। और जोर लगाता रहा…दबाव से मेरे लण्ड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। मेरा लण्ड झटके मार मार कर वीर्य उसके चूत में छोड़ रहा था। कामिनी ने मुझे अपनी टांगों के बीच मुझे जकड़ लिया था। दोनो का रस एक साथ ही निकल रहा था। हम आपस में चिपके रहे। अब मैं बिस्तर से नीचे उतर गया था।
“बस कामिनी जी… आपने तो मेरा पूरा रस निकाल दिया…”
“……ये लो… कल दरवाजे से आना……” कामिनी ने मुझे ५०० का एक नोट दिया…”तुम बहुत अच्छा चोदते हो…अब मुझे किसी दूसरे की जरूरत नहीं है…”
मैने झिझकते हुए रुपये ले लिये और चुपचाप सर झुका कर दरवाजा खोला और बाहर निकल गया।Indian Sex Stories
बुआ जैसे ही Antarvasna नहाकर बाथरूम से आई तो उसने केवल लाल रंग ब्रा और काली स्कर्ट पहन रखी थी। बुआ लाल ब्रा में बहुत सुन्दर लग रही थी। उसका गोरा और गीला बदन बिजली की तरह चमक रहा था।
मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा था। मैं खड़ा हो कर बुआ को देखने लगा। बुआ भी मुझको देख रही थी पर वो बोली कुछ नहीं। बुआ तैयार होने लगी, उसने अपने बाल खोले और उन्हें संवारने लगी। मैं बुआ को देखता रहा। मेरा लण्ड अब पूरे जोश में आ चुका था। बुआ ने अपनी एक लंबी वाली ज़ुराब उठाई और बेड पर पैर रखकर पहनने लगी। बुआ की एक ज़ुराब बेड के नीचे गिर गई। बुआ जैसे ही उसे उठाने की लिए बेड के नीचे घुसी तो उसकी स्कर्ट ऊपर हो गई। बुआ ने नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था। मेरा मन डोल गया। इससे पहले बुआ बेड से निकलती मैंने अपना लण्ड निकाला और बुआ को कमर से पकड़ कर उसकी ग़ांड के छेद पर रख दिया। बुआ को एक दम झटका लगा और बुआ बाहर निकलने के लिए कोशिश कर रही थी कि मैंने लण्ड पर दबाब बनाया तो बुआ बोली- यह क्या कर रहा है? तू तो मना कर रहा था !
मैंने कहा- बुआ, तू ही तो कह रही थी कि तू मेरे लण्ड की दीवानी हो गई है।
तो बुआ बोली- ठीक है, पर मेरी गांड क्यों मार रहा है इसमें तो बहुत दर्द होगा। यह तो आज तक मैंने तेरे फूफा से भी नहीं मरवाई ! वो भी ज़िद करता है पर मैं दर्द के कारण मना कर देती हूं।
मैं बोला- बुआ अब मैं आज तेरी गांड को खूब मारूँगा।
और मैंने एक हाथ से लण्ड को पकड़ के सही से बुआ की गांड के छेद पर रखा और ज़ोर लगाने लगा पर बुआ की गांड बहुत टाइट थी, बस थोड़ा सा ही लण्ड आगे का टोपा बुआ की गांड में गया। बुआ को दर्द हुआ और बोली- मान जा ! लण्ड बाहर निकाल ! मुझे दर्द हो रहा है !
मैं ऐसे ही धक्के मारता रहा और बुआ के बदन को चूमता रहा। फिर कुछ देर बाद मैंने बुआ को कमर से पकड़ा और एक ज़ोर से धक्का लगाया, अब की बार मेरा लण्ड बुआ की गांड को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया। बुआ को बहुत दर्द हुआ और बुआ चिल्लाने लगी- मार दिया रे ! कम से कम इस पर तेल या क्रीम लगा ली होती या थूक ही लगा लिया होता।
मैंने कहा- बुआ, सूखी चूत मरवाने से तो बहुत मज़ा आता है ! अब देख तेरा लंडबाज़ तेरी सूखी गांड भी मार रहा है।
और फिर बुआ की कमर पकड़ कर मैने एक झटका और दिया, मेरा लण्ड पूरा अंदर चला गया बुआ और ज़ोर से चिल्लाने लगी, बुआ बोली- बहनचोद, निकाल इसे ! मुझे दर्द हो रहा है।
पर मैं नहीं माना।
बुआ बोली- मैं तेरे लण्ड को चूसूंगी और हाथ से कर दूंगी।
पर मै बुआ की ज़ोर से गांड मारता रहा। बुआ भी गांड मरवाने को मजबूर थी क्योंकि वो बेड के नीचे फंसी हुई थी। मैं अब अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर बुआ की गांड में डाल रहा था। फिर मैं एक हाथ बुआ की चूची दबाने लगा और एक हाथ उसकी चूत पर ले गया। वहाँ पर मैंने बुआ की चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी। जिससे बुआ का दर्द कम हुआ अब बुआ तीन जगह से मज़ा ले रही थी। दस मिनट बाद बुआ झड़ गई। उसकी चूत का पानी नीचे ज़मीन पर गिर रहा था। फिर बुआ बोली- जल्दी कर ! मुझे क्लिनिक जाना है।
फिर मैं ज़ोर से धक्के मारने लगा, पाँच मिनट के बाद बुआ की गांड में ही झड़ गया और अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। बुआ एकदम बाहर निकली और खड़ी हो गई पर उससे सही से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था। बुआ ने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगा लिया और बोली- तू तो बड़ा ही ज़ालिम है रे ! पर तेरे इस दर्द में बहुत मज़ा आया। तेरे फूफा से तो मैं एक ही बार मना करती हूं तो वो मान जाता है पर मुझे भी इसी दर्द की तलाश थी।
फिर बुआ मेरे लण्ड को ज़ोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी और दो तीन मिनट बाद उसने मेरे लण्ड को छोड़ दिया। और अपनी ज़ुराब और गाऊन पहनकर क्लिनिक चल दी। पर बुआ पर चला नहीं जा रहा था, उसे दर्द हो रहा था। बुआ के क्लिनिक जाने के बाद मैंने वही ब्लू फिल्म देखी जो बुआ ने देखी थी। उस में अलग अलग स्टाइल से चूत और गांड मारी गई थी। मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया मैं बुआ का इंतज़ार करता रहा। मैंने घड़ी पर देखा तो दस बजे थे और बुआ एक बजे आती है। तो मैं कभी अपने लण्ड को हाथ में लेता तो कभी बुआ को याद करके उसकी ब्रा और पैंटी पर मल देता।खैर बुआ एक बजे आई तो मैं बुआ के अंदर आते ही बुआ से चिपट गया और ब्लू फिल्म को चला दिया।
बुआ बोली- रुक तो ! तूने सुबह ही तो मेरी गांड मारी है। अब फिर से करेगा?
मैंने कहा- बोल मत बुआ ! आज अपनी जवानी का सारा मज़ा लूटने दे मुझे।
बुआ भी गरम हो रही थी, मैंने बुआ का वो नर्स वाला गाऊन कस के पकड़ लिया और गाऊन के ऊपर से ही बुआ की चूची चूसने लगा। बुआ और मैं ब्लू फिल्म देख रहे थे। अब बुआ भी मुझे अपनी तरफ खींच रही थी।
फिर क्या था, मैंने नीचे हाथ डालकर बुआ चूत को सहलाना शुरू कर दिया। अब बुआ की चूत गीली हो चुकी थी। बुआ ने एकदम मेरे अंडरवीयर से लण्ड निकाला और चूत पर मलने लगी। फिर मैंने बुआ के गाऊन के बटन खोल दिए और बुआ की ब्रा हटा कर चूची चूसने लगा। बीच बीच में बुआ की चूची के दाने को काट भी लेता था। फिर बुआ का गाऊन ऊपर किया । और मैं एक कुर्सी पर बैठ गया। बुआ भी मेरे लण्ड पर अपनी चूत का छेद रखकर मेरी गोदी में बैठ गई। मैंने बुआ को नीचे किया और अपने को ऊपर झटका दिया। मेरा लण्ड बिना किसी के रोके बुआ की चूत को चीरता हुआ बुआ की चूत में समा गया। बुआ ज़ोर से झटके देने लगी। बुआ मेरा पूरा लण्ड बाहर निकाल कर अपनी चूत में पेल रही थी।बुआ ने एकदम मुझे कसकर पकड़ लिया। मैं समझ गया कि बुआ का काम हो गया है। बुआ खड़ी हो गई। मैंने बुआ को पकड़ा और बेड पर धक्का दे दिया। फिर मैं बुआ का दूध पीने लगा। बुआ की चूची एक दम कड़क हो रही थी।
फिर बुआ बोली- चल, अब मेरी गांड मार !
मैंने बुआ को कुतिया बना दिया और अपना लण्ड बुआ की गांड के छेद पर रख दिया। बुआ ने भी पीछे धक्का लगाया और मैंने आगे धक्का लगाया। मेरा लण्ड आसानी से अंदर चला गया। अबकी बार बुआ को दर्द कम हुआ क्योंकि उसके मुँह से बस सी-सी की आवाज़ ही आई थी। फिर मैं और बुआ ज़ोर से धक्के लगाते रहे। करीब दस मिनट बाद मैंने अपना सारा पानी बुआ की गांड में ही छोड़ दिया। फिर मैंने बुआ की गांड से लण्ड निकाला तो बुआ बैठ कर मेरे लण्ड को चूसती रही। फिर उठी और रसोई में गई और दूध से मलाई लाई और कुछ मेरे लण्ड डाली और कुछ अपनी चूची पर और बोली ले चाट इसे !
मैंने बुआ को बेड पर बैठाया और उसकी एक करके चूची चूसने लगा बुआ को बहुत मज़ा आ रहा था। फिर बुआ ने मुझे पीछे किया और मेरे लण्ड की मलाई चूसने लगी। बुआ अब मेरे लण्ड को जड़ तक चूस रही थी। मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया, बुआ देखकर बोली- ले यह तो फिर चूत और गांड माँग रहा है।
अबकी बार मैं ब्लू फिल्म देखकर करना चाहता था। बुआ को मैंने करवट से लिटाया और खुद उसके पीछे लेट गया। बुआ की मैंने एक हाथ से टांग को ऊपर उठाया और अपने लण्ड को बुआ के गांड के छेद पर रख दिया और एक धक्का दिया । बुआ की गांड में मेरा लण्ड चला गया पर बुआ को इस स्टाइल में दर्द हो रहा था। क्योंकि उसकी टांग धक्कों से ऊपर उठती जा रही थी।
बुआ बोली- इस स्टाइल में दर्द हो रहा है, मैं सहन नहीं कर पा रही हूं।
पर मैं पूरे जोश में धक्के लगाता रहा। फिर ब्लू फिल्म में स्टाइल बदला, करीब पाँच मिनट बाद मैंने भी वही स्टाइल करा। अब मैंने बुआ को खड़ा किया और बुआ का एक पैर बेड पर रखा और दूसरा ज़मीन रखा। फिर अपने लण्ड पर बुआ के पर्स से क्रीम निकाल कर लगाई और कुछ बुआ की गांड पर। फिर मैंने लण्ड बुआ की गांड पर रखा और आगे पीछे करने लगा, लण्ड अभी बाहर ही था। फिर मैंने एक दम ज़ोर का धक्का लगाया और मेरा लण्ड बुआ की गांड में। क्योंकि अबकी बार गांड भी चिकनी और लण्ड भी चिकना था। इससे बुआ को दर्द भी नहीं हुआ। मैंने बुआ की चूची भी दबाई और बुआ की चूत में उंगली भी कर रहा था।
बुआ बोल रही थी- मार अपनी बुआ की गांड मार ! फाड़ दे बेटा आज इसे। मेरे बेटा आज अपनी बुआ की सारी प्यास बुझा दे ! देख तेरी बुआ कितनी जवान लग रही है आज तुझ से गांड मरवाकर ! फिर मैं बुआ की गांड में ही झड़ गया। मै और बुआ बिस्तर पर लेट गये। मैंने घड़ी देखी तो तीन बज गये थे। फिर मैं खड़ा हुआ और ऊपर के बाथरूम मे नहाने चला गया। जब मैं नहाकर आया तो बुआ भी नहा चुकी थी और चाय बना रही थी। मैंने चाय पी और मैं बाहर वाले कमरे में लेट गया। बुआ भी अब आराम करना चाहती थी। मैं सो गया। मेरी आँख करीब सात बजे खुली और मैं बाथरूम में जाकर हाथ- मुँह धोकर आया। मैंने अपने कपड़े पहने और घर आने लगा।
मैं बुआ को कहने के लिए गया, बुआ ने लाल साडी और कट स्लीव का ब्लाऊज़ पहन रखा था। वो अब एक दम नई-नवेली लग रही थी। ब्लाऊज से झांकती हुई उसकी चूची जैसे वो मुझको बुला रही हों। मैंने बुआ का हाथ पकड़ा और बुआ को उल्टा यानी पेट के बल नीचे ज़मीन पर लिटा दिया। बुआ कुछ नहीं बोली क्योंकि उसे पता था कि मैं जा रहा हूं। मैंने बुआ का पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर कर दिया और उसकी गांड देखने लगा।
बुआ ऊपर हुई और हाथ टेक कर घोड़ी सी बन गई और बोली- जल्दी जल्दी कर वरना तेरा फूफा आ जायेगा।
इतना सुनते ही अपनी पैंट की ज़िप खोली और लण्ड निकाला और बुआ की गांड में पेल दिया और पूरे ज़ोर से धक्के लगाने लगा। बुआ भी मेरा पूरा साथ दे रही थी ताकि दोनों को जल्दी मज़ा आ जाये। करीब बीस मिनट के बाद मैं बुआ से बोला- मुझे मज़ा आ रहा है।
बुआ बोली- ज़ोर से मार ! मुझे भी अब मज़ा आने वाला है।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और झड़ गया। बुआ भी झड़ गई। फिर मैंने बुआ की गांड से अपना लण्ड निकाला और पैंट के अंदर कर लिया। बुआ भी खड़ी हो गई और साड़ी ठीक करके बोली- गेप, वादा करती हूँ कि तुझसे ही गांड मरवाऊँगी, किसी और से नहीं।
और मैं अपने घर आ गया।
इसके बाद मैंने अपनी चाची को चोदा। यह अगले भाग में !
अगर आपको कहानी अच्छी लगी हो तो आगे लिखूंगा। Antarvasna
मेरा नाम राहुल है और मैं Hindi Sex Stories नोएडा में अपने परिवार समेत रहता हूँ। मेरे एक ही चाचा हैं और वो हमसे अलग घर में रहते हैं। उनकी शादी को लगभग पंद्रह साल हो चुके हैं और दो बच्चे भी हैं। पहले हमारी और चाचा जी की कोई खास बातचीत नहीं होती थी क्योंकि मेरे चाचा की काफ़ी उँची पोस्ट थी। वे हमारे मुक़ाबले में काफ़ी अमीर थे, इसी वजह से चाचा और चाची काफ़ी घमंडी थे और हमसे बात करना पसंद नहीं करते थे।
लेकिन एक दिन ऐसा आया कि उन्हें हमारे सहारे की ज़रूरत हुई।
हुआ यूँ कि मेरे चाचा जी का ऐक्सिडेंट हो गया जिससे उन्हें काफ़ी गंभीर चोट आई। वो दो महीने तक ‘आई. सी. यू.’ में रहे। उनके बचने की संभावना बहुत कम थी। किसी तरह से उनकी जान तो बच गयी लेकिन उनकी रीढ़ की हड्डी टूटने से वो चल फिर नहीं पा रहे थे और उनको दिमागी चोट भी लगी थी, जिनसे उनके सोचने समझने की शक्ति कम हो गयी थी। उनको ठीक होने के लिए काफ़ी वक्त चाहिए था।
खैर मुश्किल की घड़ी में अपने ही काम आते हैं, इसी वजह से मेरा चाचा जी के घर में काफ़ी आना-जाना हो गया। मैं उनकी सच्चे मन से सेवा करता और चाची को भी घर के कामो में मदद करता।
मेरी चाची दिखने में काफ़ी सुंदर हैं और उनके स्तन काफ़ी बड़े है। वो घर में हमेशा सलवार सूट पहनती हैं। उनके बड़े बड़े स्तन उनके सूट में नहीं समाते और हमेशा बाहर झाँकते रहते थे जिससे मेरी निगाहें उनपे जम जाती। हालाँकि मुझे ये सब ग़लत भी लगता था लेकिन क्या करूँ, कंट्रोल ही नहीं होता था। कभी कभी चाची भी मुझे अपने स्तनॉ में झाँकते हुए देख लेती थी लेकिन फिर भी वो उनको छुपाने की कोशिश नहीं करती थी, जिससे मुझे लगता कि शायद वो भी मुझे अपने स्तन दिखाना चाहती हैं लेकिन फिर मैं सोचता कि ये मेरा भ्रम ही होगा और मैं नज़रे घुमा लेता।
मेरा चाचा की हालत में सुधार हो रहा था लेकिन चाची फिर भी दुखी रहती थी। मैं पूछता तो कुछ नहीं बताती थी।
एक दिन जब चाचाजी सो रहे थे और उनके दोनों बच्चे स्कूल गये थे तो चाचीजी इसी तरह से ऊपर छत पे उदास बैठी हुई थी। मैंने उनसे पूछा कि चाची अब तो चाचा की तबीयत भी सुधर रही है, आप फिर भी क्यों उदास रहती हो? आख़िर बात क्या है?
तो उन्होंने कुछ नहीं बताया लेकिन मेरे बार बार पूछने पे वो बोली- राहुल बात यह है कि जब से तुम्हारे चाचा जी की तबीयत खराब हुई है मैं बहुत अकेलापन महसूस कर रही हूँ। एक औरत को एक मर्द के साथ की ज़रूरत होती है, जो मुझे नहीं मिल रहा है।
तो मैं बोला- चाची मेरे होते हुए आप फिक्र क्यों करती हैं, मैं हूँ ना आपके साथ।
चाची बोली- तूने हमारी बहुत मदद की है लेकिन मेरा समस्या तुम नहीं सुलझा सकते।
मैंने कहा- क्यों नहीं चाची मैं आपकी हर प्रकार से मदद करूँगा, आप बताएँ तो सही कि बात क्या है? अभी तक मैं समझा नहीं था कि चाची किस अकेलेपन की बात कर रही थी।
वो बोली- नहीं तुम मेरे बेटे जैसे हो और यह परेशानी तुम नहीं सुलझा सकते। मैं तुमसे ऐसी बात भी नहीं कर सकती।
अब तक मुझे कुछ अंदाज़ा हो गया था कि चाची किस और इशारा कर रही है, लेकिन यह बात मैं उन्हीं के मुँह से सुनना चाहता था। मैंने कहा- चाची आख़िर बताएँ तो बात क्या है?
कुछ सोचते हुए वो बोली- मैं शारीरिक रिश्ते की बात कर रही हूँ। देखो तुम मुझे ग़लत ना समझना, तुमने पूछा तो मैंने बता दिया। हर औरत को शारीरिक सम्बन्ध की ज़रूरत होती है और मुझे भी है मैं इसीलिए उदास रहती हूँ।
यह सुनकर मैं कुछ नहीं बोल सका।
लेकिन चाची जी शायद कुछ ज़्यादा ही अकेलापन महसूस कर रही थी। वो बोली- बोलो ! चुप क्यों हो गये? क्या तुम मेरी ये समस्या सुलझा सकते हो? मेरा अकेलापन दूर कर सकते हो?
मैंने कहा- चाचीजी ! मैं कर तो सकता हूँ लेकिन ये तो ग़लत होगा। हम इस तरह से चाचाजी को धोखा नहीं दे सकते !
इसीलिए तो मैं तुम्हें नहीं बता रही थी। पहले मैं रोज तुम्हारे चाचा के साथ सेक्स करती थी। अब इसी वजह से मेरा कहीं मन नहीं लगता। जी करता है कि आत्महत्या कर लूँ। देखो, अब तुम मेरी समस्या सुलझा सकते हो, वरना मैं मर ही जाऊँगी।
मैं भी एक जवान लड़का था। मेरा भी मन सेक्स के लिए करता था, इसीलिए मैंने कहा- नहीं चाची ! ऐसा मत कहो, मैं तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूँ।
यह सुनकर वो बहुत खुश हुई और उठकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उनका नर्म स्पर्श पाकर मेरा मन भी मचल उठा और मैंने उनके बड़े से स्तन को पकड़ लिया। क्या कमाल का अहसास था ! मैंने पहले बार किसी औरत के स्तन को पकड़ा था। उपर से नरम नरम और जोर से दबाओ तो सख़्त लगता था। सच में बहुत मज़ा आ रहा था।
फिर मैंने चाची को अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें अंदर कमरे में ले गया। वहाँ वो बुरी तरह से मेरे होंठो पे टूट पड़ी और उन्हें चूसने व काटने लगी। मैं भी उनका साथ देने लगा। फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मैं उसे चूसने लगा। क्या गरम गरम अहसास हो रहा था ! हम इसी तरह करीब पाँच मिनट तक किस करते रहे। फिर मैंने उनके कपड़े उतारने शरू किए।
उस दिन भी वो सलवार-सूट में थी। मैंने पहले कमीज़ फ़िर सलवार भी उतार दी और पीछे हट कर उनके बदन को देखने लगा। वो ब्रा और पेंटी में कमाल लग रही थी। मैं ये देखकर हैरान था कि दो बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने खुद को बहुत फिट रखा था। बड़ी चुचियाँ और पतली कमर, उनका फिगर शानदार था। मैं उन्हें देखता ही रह गया।
तभी वो आगे बढ़ी और मेरे पैंट और शर्ट उतार दिए। इसके बाद मैंने उनकी ब्रा उतारी तो बड़ी बड़ी चुचियाँ उछल कर बाहर आ गईं। क्या चुचियाँ थी ! बिल्कुल दूध जैसी सफेद और बीच में साँवले रंग का निप्पल बहुत जँच रहा था। मै तो पागल हो गया था और उनके निपल और चुचियों को चूसने व काटने लगा। एक बार तो मैंने बहुत ज़ोर से काट लिया तो वो चिल्ला उठी, बोली- बदमाश क्या कर रहे हो? इन्हें खा ही जाओगे क्या?
मैंने कहा- मन तो बहुत कर रहा है चाची खाने का !
तो वो बोली- फिलहाल तुम मुझे चाची मत कहो, बड़ा अजीब सा लगता है।
मैंने कहा- ठीक है पूनम डार्लिंग ! और उनकी पेँटी भी उतार दी। घनी झांटो के बीच उनकी फूली हुई चूत अब मेरे सामने थी। वह देखने में ही काफ़ी गरम लग रही थी। जब मैंने उसे छुआ तो सचमुच में काफ़ी गरम थी। मैं उनकी चूत पे हाथ फेरने लगा। झांटों की वजह से वह जगह काफ़ी मखमली और मुलायम लग रही थी।
अब चाची घुटनों के बल बैठ गई और मेरा अंडरवीअर उतार दिया। अंडरवीअर उतरते ही मेरा खड़ा हुआ लंड चाची के गाल से जा लगा। वो मेरे लंड को देखकर बहुत खुश हुई और बोली- वाह !!!! कितना प्यारा है, तुम्हारा लंड तो बिल्कुल तुम्हारे चाचा जैसा ही है। इतना कहकर उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया।
मैं यह देखकर काफ़ी हैरान रह गया। मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मेरी चाची इतनी वाइल्ड नेचर की होगी। अब तक मैंने लण्ड को चूसते हुए सिर्फ़ ब्लू फ़िल्मो में ही देखा था। पहली बार यह मेरा अपना अनुभव था।
चाची के मुंह का गरम स्पर्श बहुत आनंद दे रहा था। कभी वो मेरे लंड को जीभ से चाटने लगती तो कभी अपने मुंह के अंदर लेकर चूसने लगती। उस वक्त जो मज़ा मुझे आ रहा था वो मैं बता नहीं सकता। थोड़ी ही देर बाद मुझे अपने लंड पे दबाव सा महसूस होने लगा मैं समझ गया कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने चाची को कहा- पूनम जान ! मैं झड़ने वाला हूँ।
लेकिन वो मेरी बात को अनसुनी करके लंड को चूसती रही। मैं भी नहीं चाहता था कि वो लंड को बाहर निकाले।
फिर मेरा शरीर काँपने लगा और मेरे वीर्य का फव्वारा चाची के मुँह में ही छुट गया, मेरे वीर्य से उनका मुँह भर गया और कुछ वीर्य उनकी चुचियों पे भी गिर गया इसकी वजह से वो और भी हसीन लग रही थी।
मैं पहले भी हस्तमैथुन करता था लेकिन जो मज़ा आज चाची के मुखमैथुन से आया, ऐसा मज़ा कभी महसूस नहीं किया।
तभी चाची मेरे और देख कर बोली- क्यों मज़ा आया?
मैंने कहा- जान ! तुम्हारी कसम ! ऐसा मज़ा मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया।
फिर वो बोली- तो मुझे भी ऐसा ही मज़ा दो ना ! और ये कहकर वो अपनी टांगें फैलाकर बेड पे लेट गई। मैं समझ गया कि वो मुझसे अपनी चूत चटवाना चाहती हैं।
एक बार झड़ने के बावजूद भी मेरा जोश कम नहीं हुआ था क्योंकि चाची जो मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी।
मैं तुंरत चाची की टांगों के बीच में बैठकर उनकी चूत चाटने लगा। मैं पहली बार किसी औरत की चूत चाट रहा था, लेकिन फिर भी बहुत अच्छी तरह से चाट रहा था क्योंकि ब्लू फिल्म देखने का मेरा अनुभव मेरे काम आ रहा था। मैंने अपनी पूरी जीभ चाची की चूत के अंदर डाल दी और उसे अंदर बाहर करने लगा। फिर मैंने एक उंगली भी उनकी चुत में पेल दी। जल्द ही वो अपना शरीर उठा उठा कर मेरे मुँह पे मारने लगी। मैंने अंदाज़ा लगा लिया कि वो झड़ रही हैं और अपनी जीभ की स्पीड और भी तेज कर दी।
वो चींखती हुई हाई ए हा अए करती हुई झड़ गयी।
कुछ देर तक हम शांत रहे। फिर मैंने कहा- जान आगे का काम शुरु करें?
‘क्यों नहीं।’ वो बोली।
अब मैं फिर से उनकी टाँगों के बीच में था। तभी वो बोली- देखो राहुल काफ़ी समय से मेरी चूत के अंदर लंड नहीं गया है इसीलिए थोड़ा आराम आराम से ही डालना और जितना मैं कहूँ उतना ही डालना !
मैंने कहा- जान तुम चिंता ना करो, मैं बड़े प्यार से डालूँगा।
फिर मैंने उनकी चूत पे अपना लण्ड टिकाकर हल्के से दबाया तो उन्होंने अपनी आँखे बंद कर ली। मेरा लंड आसानी से उनकी चूत में जाने लगा। करीब दो इंच लंड अंदर डालकर मैंने उनसे पूछा- जान और डालूँ?
उन्होंने कहा- हाँ !
मैंने थोड़ा लंड और सरकाकर पूछा- और?
वो बोली- हाँ और !
और?
हाँ और !
इसी तरह करते करते मेरा पूरा लंड उनकी चुत में चला गया। फिर मैंने ऐसे ही मज़ाक में कहा- और?
वो बोली- थोड़ा और !
मैंने कहा- पूरा तो अंदर ले गई, अब और कहाँ से लाऊँ?
अरे वाह ! तुमने तो बड़े ही प्यार से डाला, बिल्कुल दर्द नहीं हुआ।
फिर मैंने अपना पूरा लंड झटके से बाहर निकाल कर एक ही झटके में अंदर डाल दिया। इस बार वो चिल्ला पड़ी- हाय मर गयी ! मैंने कहा था कि आराम से डालना !
मैं बोला- ठीक है। और धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा।
थोड़ी ही देर बाद वो नीचे से उछ्लने लगी तो मैंने भी अपनी स्पीड तेज कर दी अब उन्हें दर्द नहीं हो रहा था और वो मज़े में चिल्ला रही थी- आऽऽऽऽ आअऽऽऽ ईऽऽऽ ऐऽऽऽ ईऽऽऽऽऽ शीईऽऽऽऽ मजा आ रहा हाय और जोर से हाय ऽऽऽऽऽ क्या बात है ! हाय !!!!!!!!!
क्योंकि हम दोनों ही कुछ देर पहले झड़ चुके थे इसीलिए इस बार ज्यादा समय तो लगना ही था। मैं करीब दस मिनट तक उनकी चूत में लंड पेलता रहा। फिर वो बोली- अब तुम नीचे आ जाओ और मुझे ऊपर आने दो !
मैंने कहा- ठीक है।
अब वो मेरे लण्ड पे बैठकर कूद रही थी। जब वो कूदती तो साथ साथ उनकी चुचियाँ भी ऊपर नीचे उछल रही थी। वो सीन वाकई में लाजवाब था।
कुछ देर बाद मैंने फिर से उनको नीचे गिरा लिया।
अब वो पीठ के बल लेटी हुई थी और मैं उनकी कमर पे लेट कर उन्हे चोद रहा था।
मत पूछो यारो क्या मज़ा आ रहा था और चाची का तो मुझसे भी बुरा हाल था- वो लगातार चिल्ला रही थी- हाय आऽऽऽऽ ओऊ !!
आख़िरकार हमारी मंज़िल नज़दीक आने लगी थी। मुझे अपने लंड में गुदगुदी सी महसूस होने लगी थी और चाची भी चिल्लाने लगी थी- हाय मैं झड़ने वाली हूँ और ज़ोर से !!! और ज़ोर से!!! आऽऽऽऽऽऽ फ़ाड़ डालो मेरी चूत को हाय ऽऽऽऽऽ उई ऽऽऽऽ हाय मैं मर गई ! आआआ आऽऽऽऽऽऽ अआया !!
ऐसे ही चिल्लाते हुए वो झड़ गयी और कुछ ही देर में भी चिल्लाया- हाय जान, मैं भी आ रहा हूँ हाय !!!!!!
और मैंने उनकी चूत में अपने लंड का फव्वारा छोड़ दिया।
फिर हम दोनो शांत हो गये और लेट गये कुछ देर लेटने के बाद चाची ने एक कपड़े से मेरा लंड साफ़ किया और अपनी चूत की भी सफाई की।
हम दोनों फिर से एक दूसरे को किस करने लगे। फिर अपने अपने कपड़े पहन लिए और नीचे आ गये। अब मेरी चाची काफ़ी खुश लग रही थी।
उस दिन से आज तक हम यूँ ही मज़े ले रहे है, अब मेरी चाची काफ़ी खुश और संतुष्ट लगती है। Hindi Sex Stories
दोस्तो, यह मेरी पहली Antarvasna कहानी है अन्तर्वासना पर ! मैं यहाँ दूसरों की कहानियाँ पढ़ने में काफी समय बिताता हूँ। इतना पढ़ने के बाद आज मेरा भी मन किया कि कुछ लिखा जाए तो यह कहानी आपके लिए लाया हूँ। सच है या काल्पनिक इसका फैसला मैं आप पर छोड़ रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आपको यह पसंद आएगी।
मेरा नाम रोहित है उम्र 20 साल, कद करीब 5′ 9″, देखने में भी ठीक हूँ और मेंरे लंड की लम्बाई 6″ है। मैं हमेशा से पढ़ाई में अच्छा रहा हूँ जिस कारण मुझे काफी अच्छा कॉलेज मिला जहाँ से मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ, तीसरे वर्ष में ! मैं घर साल भर में दो तीन बार ही आ पाता हूँ। मेरे घर में मेरे अलावा मुझसे तीन साल बड़ी मेरी बहन है जो हॉस्टल में रहती है और मम्मी पापा हैं। मम्मी एक सरकारी विद्यालय में अध्यापिका हैं और मेरे पापा एक बैंक मेनेजर हैं।
मेरी छुटियाँ होने ही वाली थी जब मेरी मम्मी ने फोन पर मुझे हमारे नए पड़ोसियों के बारे में बताया। मेरी मम्मी उनको लेकर काफी खुश लग रही थी और बता रही थी कि वो लोग दोस्ताना स्वाभाव के हैं और मेरी मम्मी के काफी अच्छे दोस्त भी बन गए हैं। कुछ ही दिनों में मैं दो महीनों के लिए अपने घर आया। मम्मी ने बताया कि आंटी मुझसे जल्दी से जल्दी मिलना चाहती हैं इसलिए मैं अगले ही दिन उनके घर चला गया और मुझे उस परिवार से मिलने का पहले मौका मिला।
परिवार छोटा ही था जिसमें सिर्फ भाई बहन और मम्मी पापा थे। बहन का नाम आस्था था और उसके भाई का रोहण। आस्था करीब 19 साल की होगी और रोहण 10 साल का। आंटी ने मेरा उनसे परिचय करवाया और बताया कि आस्था भी इंजीनियरिंग के दूसरे साल में है।
आस्था 19 साल की एक मस्त लौंडिया थी जिसको देखते ही मुँह में पानी आ जाये, गोरा रंग, बी-कप वक्ष, मस्त गांड और कद 5’5″। जब वो चलती थी तो उसकी बड़ी गांड देखने में बड़ा मजा आता और मन करता कि अभी कुतिया बना कर चोद डालूँ साली को।
आस्था और रोहण मेरे घर मेरी मम्मी के साथ बैडमिन्टन खेलने रोज शाम को आया करते थे। मैं भी उनके घर कभी कभार चला जाता था पर सिर्फ आंटी से ही बात कर रह जाता था। फिर एक दिन हुआ यूँ कि मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। हमारी रिश्तेदारी में किसी के यहाँ लड़का हुआ था तो इसी खुशी में पार्टी थी। मम्मी-पापा वहीं गए थे। आस्था और रोहण घर खेलने के लिए आये पर मेरी मम्मी को न देखकर आस्था ने मुझसे उनके बारे में पूछा।
मैंने उसे बताया- मम्मी-पापा पार्टी में गए हैं।
अब उसे खेलने के लिए एक पार्टनर की जरुरत थी तो उसने मुझसे खेलने के लिए कहा।
मेरे मन में ठरक तो पहले से ही उठी थी तो मैंने मौके का फायदा उठाने का सोचकर बोला- अभी बाहर धूप है, कुछ देर में खेलते हैं और अभी तुम अंदर आ जाओ।
वो अंदर आ गई मगर उसका भाई बाहर ही कुछ खेलने लगा।
वो जब अंदर आई तो मेरा कंप्यूटर चालू था, डेस्कटॉप देखकर उसने कहा- यह क्या लगा रखा है?
डेस्कटॉप पर एक गन्दा सा वालपेपर लगा था। वालपेपर अश्लील नहीं था मगर एक बदसूरत कुत्ते का था। तब मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को बोला और कहा- बेब्स फोल्डर में जाकर तुम अपनी मनपसंद का वालपेपर लगा दो।
यह कहकर मैं जानबूझ कर वहाँ से रसोई में चला गया। बेब्स फोल्डर में बहुत सारी नग्न और बहुत ही सेक्सी तसवीरें थी। जब मैं वापिस आया तो मैंने देखा कि वो उन तस्वीरों को जल्दी जल्दी बदल कर देख रही है।
मैंने कहा- शरमाने की कोई बात नहीं है, तुम इन्हें आराम से देखो।
यह कहकर मैंने उसे कुर्सी से उठाया और खुद बैठ जाने पर उसको अपने टांगों के बीच की जगह में कुर्सी पर बैठा लिया। वो मेरी गोद में तो नहीं थी पर मेरा लंड उसकी गांड से टकरा रहा था और हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।
मैंने अब अपना हाथ उसकी कमर पर घुमाना शुरू किया जिसका उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। कुछ देर बाद उसने मुझे शरमाते हुए ब्लू फिल्म देखने की इच्छा बताई मगर मेरे कंप्यूटर में न होने के कारण मुझे उसे मना करना पड़ा।
कुछ देर में हमें एहसास हुआ कि शायद रोहण आ रहा है तो वो खड़ी हो गई और मुझे फोल्डर बंद करने को बोला। मैंने उसे बंद किया और हम लोग बाहर जाकर बैडमिन्टन खेलने लगे और फिर कुछ देर बाद अँधेरा होने पर मेरे मम्मी पापा आ गए और आस्था, रोहण भी अपने घर चले गए।
अगले दो चार दिन मुझे वो दिखाई नहीं दी पर मैं इस बीच कुछ मसालेदार नग्न फिल्में ले आया था। अगले दिन मैं बाहर जा रहा था तो वो मुझे मिली, उसने बताया कि उसके पेपर आ गए है इसलिए तैयारी करने में उसका सारा समय निकल जाता है।
हमने कुछ देर और बातें की, उसने मुझे अगले दिन दोपहर में अपने घर आने को बोला, उसके मम्मी पापा कहीं जाने वाले थे और रोहण स्कूल। मैं उस रात भर उसकी चूत के बारे में सोचता रहा और मुठ मार कर सो गया।
अगले दिन करीब एक बजे मैं उसके घर पहुंचा। उसने दरवाजा खोला और उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। वो काले रंग के सलवार कमीज़ में थी और बहुत मस्त माल लग रही थी। फिर क्या था मैं अंदर घुसा और उससे जा चिपका। मेरे दोनों हाथ उसकी गर्दन पर पहुँच गए और होंठ उसके होंठों को चूसने लगे। मेरे हाथ अब कभी उसके वक्ष पर जाते, कभी उसकी गांड पर तो कभी उसकी कमर को सहलाते। हाथ अब इधर उधर उसके गरम बदन पर भटक रहे थे। वो बेचारे करते भी क्या ! इतना गर्म माल था कि हर जगह का मजा लेना चाह रहे थे।
कुछ पल बाद मैं उसके पीछे अपना लंड उसकी गांड में लगाकर खड़ा हो गया। मेरे दोनों हाथ उसके स्तनों को मसल रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मजे में उसकी आँखें भी बंद थी, मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।
अब मेरा एक हाथ उसकी सलवार में चला गया और उसकी कच्छी के ऊपर से उसकी बुर का मजा लेने लगा। कुछ गीलापन महसूस हुआ तो हाथ उसकी पेन्टी में डाल दिया और ऊँगली से उसकी चूत को रगड़ कर मजा देने लगा।
अब तक तो वो इस नशे में पागल हो गई थी और आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह कर अपनी गांड और पीछे कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी।
कुछ देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए और एक दूसरे को देखते देखते नंगे हो गए। नंगे होने पर जब मैंने उसके चुचूक देखे तो मैं रुक नहीं पाया और उन्हें चूसने लगा। क्या गज़ब का शरीर था उसका ! हर जगह से एक दम मस्त ! चूत पर कोई बाल नहीं और ऊपर से नीचे तक दिन-रात चोदने लायक !
अब मैंने उसे गोदी में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने के लिए आगे बढ़ा। यह सब मैं पहली बार करने जा रहा था। उसने शर्म के कारण अपनी टांगों को एक दूसरे से चिपका लिया और मुझे मना करने लगी। पर मैं कौन सा रुकने वाला था, एक झटके में उसके पैर खोल दिए और उसकी चूत मेरे सामने थी। चूत चाटने के लिए जब मैंने अपनी जीभ निकाल कर उस पर लगाई तो मुझे थोड़ा गन्दा स्वाद लगा और मैं पीछे हट गया। चूत चाटने का ख्याल छोड अब मैं उसके स्तनों को चूसने चाटने लगा और वो बोलने लगी- आज तो इन्हें पूरा पी जाओ !
यह कहकर अब उसके मुँह से सिर्फ आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! जल्दी करो ! सिर्फ ये आवाजें आ रही थी।
अब उसने कहा- मुझसे रुका नहीं जाता और इस चूत को ले लो अब ! अपना लंड इसमें डाल इसको फाड़ डालो, पूरा अंदर घुसा दो और मेरी माँ चोद दो !
यह सब सुनते ही मेरा लंड कड़क होकर एकदम फटने को हो गया। मैंने लंड को उसकी चूत पर रखकर घुसाने की कोशिश की पर घुसा नहीं पाया। साली की चूत थी ही इतनी कसी हुई कि मैं क्या करता। मेरे बेचारे लंड का भी आज पहली बार था और मुझे घुसाने में हल्का दर्द महसूस हो रहा था तो मेरी गांड फटने लगी और मैंने अभी के लिए उसकी फुद्दी मारने का अपना इरादा छोड़ दिया।
फ़िर अपना लंड उसके मुँह में डालकर उसको चूसने को बोला। कुछ देर उसने लंड को ऐसे ही मुँह में रखे रखा। तब मैंने कहा- मेरी प्यारी रांड ! इसे लॉलीपॉप समझ कर चूसना शुरू कर !
यह सुनते ही वो भी जोश में आ गई और लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसना शुरू किया। मैं तो जन्नत में पहुँच गया था और उसे बोल रहा था- मान गए मेरी रांड को …. बस ऐसे ही चूसती रह.. आआआआआह्ह्ह्ह्ह् आआआह्ह्ह्ह्ह् …..
कुछ ही पल में मेरा झड़ने वाला था और मैंने उसके मुँह में पिचकारी मार दी। कुछ बूंदें तो अंदर ले गई और बाकी सब बाहर निकाल दिया। अब उसने मेरी और देखा और मुस्कुराने लगी। कुछ देर यूँ ही लेटे गए और तभी घर कोई आ गया। हमने फटाफट कपडे पहने और आस्था ने दरवाजा खोला तो पाया कि रोहण स्कूल से घर आया था।
उसने मुझे देखा और हैरान होकर अंदर चला गया। मैं उस दिन अब चूतिये की तरह वहाँ से भाग आया वो भी बिना उसको चोदे।
अगले दिन आंटी मेरे घर आई। मैं घर पर अकेला अपने कान में हैड्फोन लगाकर अश्लील फ़िल्म देख रहा था। आंटी ने दरवाजा खटखटाया मगर मुझे सुनाई नहीं दिया और मैं मुठ मारता रहा। आंटी ने तब बाहर से अंदर झाँक कर देखा कि अंदर मैं क्या कर रहा हूँ और तब दरवाजे को काफी जोर से खटखटाया।
इस बार मैंने उसे सुना और एकदम घबराया और अपना लंड अंदर करके दरवाजा खोला। मैं आंटी को देख हैरान था। तब मैंने देखा कि वो काफी गुस्से में थी और मुझसे पूछा- अभी क्या कर रहे थे और कल उनके घर दोपहर में क्या हुआ था?
मैं समझ गया था कि रोहण ने उन्हें बता दिया होगा। मैंने कुछ नहीं ! कहकर बात का जवाब नहीं दिया। तब उन्होंने एक दम से मेरे को एक चांटा लगा दिया और कहा- आज के बाद हमारे घर दिखाई दिए तो तुम्हारी टाँगे तोड़ दूंगी !
मुझे उनकी यह बात सुन कर बहुत गुस्सा आया और मैंने एक झटके में उन्हें कमर से खींच कर उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। उन्होंने मुझे हटाने की कोशिश की पर अब तक तो मेरे ऊपर हवस हावी हो गई थी। दो मिनट बाद आंटी को भी मजा आने लगा और उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ घूमने लगी।
आंटी 42 साल की मस्त महिला थी। उनकी गांड और चूचियों का आकार काफी बड़ा था और अपनी बेटी आस्था की तरह वो भी गोरी चिट्टी थी। देखकर लगता था कि अपनी जवानी में बहुत सारे लोगों के लौड़े शांत कर चुकी होंगी।
मैं अपने हाथ आंटी की मोटी गांड पर फ़िरा रहा था और उन्होंने मुझे कस कर गले लगा रखा था। ऐसा लग रहा था कि वो काफी समय से एक लंबी चुदाई की भूखी थी। मैं आंटी को गोदी में लेकर बैठ गया और नग्न मूवी चला दी। आंटी के स्तन दबाने में बहुत मजा आ रहा था और वो भी खूब मस्त हो रही थी। उनके मुँह से अब आआअह्ह्ह्ह्ह के अलावा कुछ और नहीं निकल रहा था और उनके हाथ उनकी चूत पर पहुँच गए थे। मूवी में अब एक 69 दृश्य चलने लगा, तब मैं आंटी को बिस्तर पर ले गया और हम भी 69 की दशा में आ गए। आंटी ने लंड को चाटना, चूसना शुरू किया। वो एक भूखी कुतिया की तरह लंड को चाट रही थी।
मुझे बेहद मजा आ रहा था और मैंने उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया। पिछले दिन की तरह आज मुझे गन्दा नहीं लगा बल्कि मजा आ रहा था ऐसा करने में। मैं चूत चाटते चाटते उनकी गांड पर थप्पड़ मार देता था तो उनकी गांड हिलती हुई काफी अच्छी लगती और गांड अब लाल हो चुकी थी। दो ही मिनट में मैं और आंटी दोनों झड गए। आंटी ने अपना मुँह बिल्कुल नहीं हटाया और सब कुछ चाट लिया। मैं भी उनकी चूत में घुसा जा रहा था जिसका स्वाद अब नमकीन लग रहा था। अब उन्होंने मेंरे लंड को छोड़ा और एक लंबी सांस लेकर उठ गई। वो उठ कर एक कुतिया की तरह बिस्तर पर खड़ी हो गई और मुझे आँखों से उनकी पीछे से चूत मारने का इशारा किया। मैं पीछे गया और लंड चूत पर लगाकर एक जोर का झटका दिया, मेरा 6 इंच का लंड सीधा अंदर चला गया क्योंकि चूत वैसे ही बहुत चिकनी हो गई थी। आंटी की एक काफी तेज चीख निकली थी जिसको रोकने के लिए मैंने पीछे से उनके मुँह पर हाथ रखा। कुछ पल में अब मैं अपनी कुतिया आंटी की सवारी कर रहा था।
उनके मुँह से आवाज़ आ रही थी- चोद दे मुझ रांड को, माँ चोद दे मेरी ,कितने समय से एक ऐसी चुदाई के लिए तड़प रही थी ! आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह !
और पच पच की आवाजों से पूरा कमरा भर गया था। पीछे से चोदते वक्त गांड बहुत बड़ी और मुलायम लग रही थी। अब मैं नीचे आया और वो मेरे ऊपर आ कर मेरे लंड पर बैठ गई। बैठते ही उन्होंने लंड पर उछालना शुरू किया और मेरे हाथ लेकर अपने वक्ष पर रख उन्हें दबवाने लगी।
वो आँखें बंद कर बोल रही थी- फाड़ डाल मेरी, मैं तो तेरी कुतिया बनके रहूंगी, आज तुम मुझे छोड़ना मत, मुझे पूरी तरह से चुदाई का मजा दो, सभी तरह से चुदाई करो मेरी तुम, चोद और चोद, मेरी चूत की प्यास बुझा दे आज तू ! ऊँगली से थक गई अब एआआह्ह्ह् आआआआह्ह्हह !
मैंने भी नीचे से एक दो फटके मारे और एक जोर के झटके में सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो सिसकाई- आहाहाआह्ह आजा मेरे अंदर आजा ! डाल मेरे अंदर डाल !
दस मिनट बाद हमने एक और राउंड लगाया और फिर मेरी मम्मी के आने का समय हो गया था इसलिए वो कपडे पहन जाने की तैयारी करने लगी। जाते वक्त मुझे बोलती कि मैं आस्था की जगह सिर्फ उनकी चुदाई करता रहूँ।
मैं उनके बाहर जाते ही हंसने लगा कि आस्था की चुदाई न करूँ, ऐसा कैसे हो सकता है। खैर दोस्तो, होना क्या था, शनिवार को मौका मिला और मैंने इस बार आस्था का भी बैंड बजा डाला। दबा कर चोदा साली रांड को ! समय के साथ मैं माहिर होता गया और अब जब भी घर आता हूँ तो माँ बेटी दोनों की चूत को शांत करता हूँ। आंटी को तो मेरे और आस्था का पता है मगर आस्था मेरे और उसकी माँ की चुदम-चुदाई के बारे में नहीं जानती। Antarvasna
मेरा नाम राकेश है, मेरी Antarvasna उम्र 23 साल है. मुझे कंप्यूटर पर अच्छी तरह लिखना नहीं आता फ़िर भी कोशिश कर रहा हूँ. आपको लगे या ना लगे, यह मेरी सच्ची कहानी है.
बंटी हमारे घर के बगल में रहती है. वो दिखने में बहुत सुंदर ओर सेक्सी है. उसका कद करीब 5’5′ है. रंग गोरा है. उसके मम्मे छोटे हैं. मुझे छोटे मम्मे वाली लड़कियाँ ही पसंद हैं. मैं उसके बारे में सोच कर बहुत बार मुठ मार चुका था. मैं उसे चोदने का मौका ढूँढ रह था. जब भी मौका मिलता मैं उसे और वो मुझे देखकर मुस्कुराती थी. मैंने उससे आगे बढ़ने की सोची.
एक दिन जब वो कपड़े सुखाने आई तो मैंने सेक्सी तसवीरों वाली किताब उसके बगल में फेंकी और मैं दीवार के पीछे छिप गया. उसने वो किताब नहीं उठाई. मैं घबरा गया कि अगर उसने घरवालों को बताया तो मैं मर ही गया समझो.
लेकिन कुछ देर बाद वो फ़िर आई और उसने वो किताब उठाई और चली गई. दो दिन बाद जब वो दिखी तो शरमा के किताब मेरी तरफ फेंकी और धीमी आवाज में बोली- और किताबें हैं क्या?
मैं बोला- यह पसंद आई क्या?
उसने शरमा के हाँ में सिर हिलाया तो मैंने उसे हमारे घर के पिछवाड़े बुलाया.
उसने कहा- कल शाम को आऊँगी.
दूसरे दिन शाम को जब वो आई, मैंने किताब देने के बहाने उसका हाथ पकड़ लिया. वो घबराकर छुड़ाने लगी, बोली- कोई आ जायेगा!
मैंने कहा- कोई नहीं आयेगा!
शाम का समय था, इसलिये वहाँ कोई नहीं आता था.
मैंने उसे कहा- सिर्फ किताबों में ही पढ़ेगी या असल में भी कुछ करोगी?
उसने कहा- ना बाबा! बच्चा हो गया तो?
मैंने कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा.
ऐसा कहते ही मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसके गालों को चूम लिया. वो मुस्कुराई. फ़िर मैंने उसके होठों को चूसा, मुझे पता चल गया कि यह उसका पहला ही चुम्बन है.
उसके बाद मैं धीरे धीरे उसका स्कर्ट ऊपर उठाने लगा. उसने मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था. मैं धीरे धीरे उसकी जांघ सहलाने लगा. उसे मजा आने लगा था, मेरे हाथ उसकी पेंटी पर लग रहे थे. मैं पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा. उसके बाद मैं उसके टॉप के बटन खोलने लगा. जब मैंने देखा तो मैं दंग रह गया, उसके मम्मे बहुत गोरे और बिल्कुल छोटी नाशपाती की तरह थे. मैं उसकी एक चूची अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. बंटी कसमसाई उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगी, मेरा भी ख्वाब पूरा हो रहा था. मैं एक हाथ से उसका एक मम्मा दबा रहा था.
फ़िर मैंने उसकी पेंटी निकाल दी और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा. मेरे हाथ को उसकी चूत के नये छोटे छोटे बाल लगे. फ़िर मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाली तो वो एकदम से चीखी- आऊच और बोली जरा धीरे! मैंने पहले ऐसा कभी किया नहीं!
मैं धीरे धीरे अपनी उंगली उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा. फ़िर मैंने अपना लंड उसके हाथ में दे दिया. इतना बड़ा लंड उसके छोटे हाथों में बैठ भी नहीं रहा था. उसे मेरा लंड गरम लगा तो वो बोली- तुम्हारा लंड गर्म है, तुम्हें बुखार है क्या?
मैं हंसने लगा और बोला- जब आदमी का लंड खड़ा होता है तब वो गर्म भी होता है.
मैंने उसे हाथ से लंड को हिलाने को कहा. उसके कोमल हाथ मेरे लंड को मसलने लगे. मैं मानो जैसे जन्नत में सैर कर रहा था. फ़िर मैंने उसे दीवार से टिकाकर खड़ा कर दिया. उसके बाद मैंने उसकी एक टांग उठाई, अब मुझे उसकी चूत पूरी तरह दिख रही थी. मैं अपना लौड़ा उसकी चूत पर रख कर अंदर डालने की कोशिश करने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत कसी थी, इसलिये अंदर नहीं जा रहा था. मैंने उसे लंड चूसने को कहा पर वो नहीं मानी.
मैंने भी सोचा कि अच्छा खासा मौका हाथ से निकल जायेगा इसलिये उसे सिर्फ सुपारे पर चाटने को कहा. उसने मेरे सुपारे पर अपनी जीभ फ़िराई.
मैं नीचे बैठकर उसकी चूत चाटने लगा. वो आँख बंद करके मजा लेने लगी. जब मैंने देखा कि उसकी चूत गीली हो चुकी है तो मैंने फ़िर से अपना सुपारा उसकी चूत पर रख कर अंदर डालने की कोशिश की. इस बार मेरा लंड आधा उसकी चूत में घुस गया, वो दर्द से चिल्लाने लगी. मैंने अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया और आधा ही लंड अंदर-बाहर करने लगा. फ़िर धीरे धीरे अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाला, वो दर्द से और भी चिल्लाने लगी. मैं फ़िर कुछ देर वैसे ही रुका. फ़िर अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा. वो सिसकारियाँ भरने लगी.
मैं धीरे धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ाने लगा. मैं उसे खड़े-खड़े ही चोदने लगा. कुछ देर बाद उसने मुझे कस कर पकड़ लिया. मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है, इसलिये मैंने अपनी गति बढ़ा दी.
उसके मुँह से अअऽऽ आआ शशससउ ऐसी आवाजें निकलने लगी और वो मुझे कसकर पकड़ कर झड़ गई. उसकी चूत में से पानी और कुछ खून निकलने लगा. यह देख कर मुझे भी जोश आने लगा और अब हम दोनों सातवें आसमान पर थे. इस बीच वो दूसरी बार झड़ गई. करीब छः सात मिनट बाद मैं भी झड़ने के करीब पहुँचा, बंटी आय लव यू! कहकर उसे जोर जोर से चोदने लगा. अब मैं झड़ने ही वाला था कि झट से मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और मेरा सारा वीर्य बंटी के पेट और चूत के ऊपर गिर गया और मैं ढीला होकर उसके ऊपर गिर गया. कुछ देर बाद हमने अपने अपने कपड़े पहन लिये, जाते वक्त फ़िर से उसके चूचे दबाये और उसे चूमा.
बंटी से दोबारा मिलने का वादा करके उसे मैंने लाई हुई किताब दी और वो शरमा के बोली- माँ तो नहीं बनूंगी ना?
मैंने कहा- इसी लिये तो मैंने अपना वीर्य तुम्हारी चूत में गिरने नहीं दिया.
उसने कहा- आज बहुत मजा आया.
मेरी भी बरसों की तमन्ना पूरी हो गई थी.
दोस्तो, कहानी अच्छी लगी या बुरी जरूर बताना. Antarvasna
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.