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हेल्लो दोस्तों, मैं रिचा । मैं एक शादी शुदा औरत हूँ। मैं खाली समय में सेक्स विडियो देखन और नई नई चुदाई कहानियां पढना पसंद करती हूँ। हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी में घटी एक घटना है।
मैं कोटा की रहने वाली हूँ और यहाँ की कोटा यनिवर्सिटी में मैं प्रोफेसर हूँ। मैं मेकैनिकल इंजीनियरिंग पढाती हूँ। मैं बहुत सुंदर और जवान औरत हूँ। सेक्स के मामले में मैं बहुत गर्म औरत हूँ और हमेशा नये नये लंड की तलाश में मैं रहती हूँ। मेरी इसी छिनरपन वाली आदत के कारण मेरे पति ने मुझे तलाक दे दिया और अब अकेले ही रहती हूँ। मैं हर साल अपने क्लास के लड़को को डरा धमका कर उन्हें अपने घर पर बुला लेती हूँ और उसने कसकर चुदवाती हूँ। मैं इसी तरह लंड का इंतजाम करती हूँ। मेरी किस्मत तेज है की हर साल मेरी युनिवर्सिटी में नये नये गबरू जवान लड़के पढने के लिए आते रहते है और मुझे लंड की कोई कमी नही होती है। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रही हूँ। सन 2016 के बीटेक बैच में मेरी क्लास में एक बहुत ही हैंडसम लड़का पढ़ने आया। उसका नाम राहुल था।
उसके पापा अमेरिका के रहने वाले थे। उसकी माँ से उसके पापा से लव मैरिज की थी जब वो अमेरिका पढने गयी थी। इसलिए राहुल भी बिलकुल गोरा गोरा लगता था और हिन्दुस्तानी भी लगता था, क्यूंकि उसकी माँ तो एक हिन्दुस्तानी ही थी। राहुल मेरी क्लास में आकर पढने लगा। धीरे धीरे मुझे वो बहुत अच्छा लगने लगा। वो बिलकुल अंग्रेज लगता था और कोई राजकुमार जैसा लगता था। 6 फुट का इकदम गोरा गोरा। धीरे धीरे वो मुझे अच्छा लगने लगा और मैं उससे प्यार करने लगी। एक दिन मैंने उसे अपने चैम्बर में बुलाया। मैं बाकी स्टूडेंट से बहुत सख्ती से पेश आती थी, पर राहुल से मुझे प्यार हो गया था।
“कहे मैडम…..मुझे क्यों बुलाया??” राहुल मेरे चैम्बर में आया और पूछने लगा। मेरे समझ नही आ रहा था की उससे कैसे कहूँ की मैं उससे प्यार करने लगी हूँ और उससे कसकर चुदवाना चाहती हूँ।
“आओ आओ देव…प्लीस सिट!!” मैंने उसे बैठने को कहा
“देखो अगर कोई चैप्टर समझ ना आए तो तुम मेरे घर पर चले आना। मैं चाहती हूँ की तुम्हारे एक्साम में अच्छे मार्क्स आये। ये लो मेरा फोन नॉ..!” मैंने उस हैंडसम लड़के को अपना कार्ड दे दिया। उसमे मेरे घर का पता और फोन नॉ लिखा हुआ था। मैं रात भर सोचती रही की काश वो राहुल मुझसे पट जाए और मैं उससे कस के चुदवाऊ। वो कितना हॉट और हैंडसम लड़का था। बार बार मुझे उसी का ख्याल आ रहा था। रात में मैंने 3 बार अपने स्टूडेंट राहुल को सोच सोचकर अपनी चूत में उंगली डाल कर मुठ मारी। हर बार मुझे खूब मजा आया। मैं अपने स्टूडेंट से प्यार करने लगी थी। पर 1 महिना तो वो मेरे पास नही आया। फिर कुछ दिन बाद वो रविवार को मेरे घर पर आ गया। उसने मेरे दरवाजे की बेल बजाई। मैंने दरवाजा खोला। सापने राहुल खड़ा हुआ था। बाप रे….वो कितना हैंडसम लग रहा था बिलकुल जॉन अब्राहम लग रहा था। मेरा तो दिल कर रहा था की उसे गले लगा हूँ और ऊसके होठो से अपने होठ जोड़कर किस करने लगूं। मैंने किसी तरह खुद को समहाला।
“गुड मोर्निंग…..रिचा मैम। मुझे मेकैनिकल में कुछ क्वेश्चन पूछने है क्या आप बता देंगी??” राहुल ने पूछा
“हा हा …क्यों नही। मैं तो कबसे तुम्हारा इंतजार कर रहा थी!!” मैंने कहा और उसे मैंने लॉबी में ले गयी। वो मेरा आशिक था, वो मेरे लिए बहुत मायने रखता था, इसलिए उसे देखकर मैं बहुत खुश थी। मैंने उसे 4 घंटे बैठकर अच्छे से सारे सवाल बता दिए। वो बहुत खुश हो गया। धीरे धीरे ये सिलसिला चल निकला और राहुल अक्सर मेरे घर पर आने लगा। एक दिन मैंने उसे एक गुलाब का फूल दे दिया।
“ये फूल किसलिए मैडम??” राहुल बोला
!” मैं कहा
राहुल ब्लश करने लगा। मैंने उससे पूछा की उसकी कोई गर्लफ्रेंड तो नही है। तो उसने कहा की ये प्यार व्यार फ़ालतू की चीज है और वो इन सब चीजो में अभी वक़्त नही खराब करना चाहता। एक दिन जब राहुल मेरे घर में स्टडी टेबल पर पढ़ रहा हा तो मैंने झूठ मूठ फिसल के गिरने का नाटक किया। राहुल मुझे बचाने आ गया और मैं उससे लिपट गयी। मैंने गुलाबी रंग की साडी पहन रखी थी और आगे से डीप नेक और पीछे से बैकलेस ब्लाउस पहन रखा था। जैसे ही राहुल ने मुझे उठाने की कोशिश की मैं उससे लिपट गयी और झूठ मुठ दर्द का बहाना करने लगी।

“राहुल ……प्लीस मुझे गोदी में उठाकर बेडरूम तक ले चलो..मैं चल नही पाउंगी!!” मैंने बहाना बनाया
उसने एक आज्ञाकारी चेले की तरह मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम में लेकर जाने लगा। उफफ्फ्फ्फ़ कितना हसीन पल था वो की मेरा आशिक मेरा जानम ही आज मुझे गोद में उठाये हुए था। जब बेडरूम आ गया और वो मुझे बेड पर उतारने लगा तो मैं अचानक उससे चिपक गयी और उसके गाल और होठो पर किस करने लगी। मेरा स्टूडेंट हैरान था।
“मैडम……??? ये सब…??”
“देव…ये सच है की मैं तुमसे प्यार करती हूँ। प्लीस मना मत करना। वरना मेरा दिल टूट जाएगा!!” मैंने कहा। उसके बाद वो भी मान गया और मेरे साथ ही बेड पर लेट गया और हम दोनों किस करने लगे। हर नए लड़के को मैं इसी तरह इमोशनल डाईलोग मारके पटा लेती थी और उनका मोटा और रसीला लंड खाती थी। कुछ देर में राहुल की नजर मेरे डीप नेक वाले ब्लाउस पर पड़ गयी। मेरे हसीन, बड़े बड़े और चिकने चिकने दूध तो पूरे पूरे दिख ही रहे थे और बस नाम मात्र को छिपे हुए थे। मैं गदराई 30 साल की जवान औरत थी और आज मैं अपने चेले का मोटा लंड खाने वाली थी। मैंने राहुल को अपने उपर लिटा लिया और उसके लबो से मैंने अपने लब जोड़ दिए और हम दोनों एक दूसरे के ओंठ पीने लगे। मैं बहुत खुश थी की राहुल ने मेरा ऑफर ले लिया था वरना मुझे बहुत दुःख होता।
हम दोनों होठ से होठ जोडकर किस करने लगे।
दोस्तों, मेरे होठ बहुत सुंदर थे। बिलकुल किसी ताजे गुलाब की पंखुड़ियों की तरह मेरे होठ थे। कुछ देर में राहुल भी मुझसे प्यार करने लगा और उसे भी चुदाई का जूनून चढ़ गया था। उसकी उँगलियाँ मेरे होठ पर थी और उसे छू रही थी। बड़ी देर तक आज वो मेरी जैसी सुंदर चुदासी औरत को पास से देखकर मजा लेता रहा।
“मैडम….कभी आपको चोदने को मिलेगा मैं कभी नही सोचा था!!” राहुल बोला
“जान….अब तुम मेरे स्टूडेंट नही मेरे यार और मेरे जानम हो। मेरे सारी सुन्दरता सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए है। आज तुम मुझे जी भरकर पेल खा लो!!” मैंने अपने स्टूडेंट से कहा। उसके बाद वो और जादा चुदासा हो गया और मेरे रसीले होठो को अपनी उँगलियों से दबाने लगा। फिर वो मेरे लबो पर अपने लब रखकर मेरे होठ मजे से पीने लगा। आज मैं अपने स्टूडेंट से अपने ही घर में कसकर चुदने वाली थी। हम दोनों धीरे धीरे जोश में आ रहे थे। बड़ी देर तक हमारा गरमा गर्म चुम्बन चला। मैंने अपनी जीभ निकालकर राहुल के मुंह में डाल दी। वो मेरी जीभ चूसने लगा। मुझे एक विशेष प्रकार का सुख मिलने लगा, चुदाई का नशा धीरे धीरे चढ़ता जा रहा था। फिर राहुल ने ही अपनी लम्बी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। इस तरह हम दोनों एक दूसरे की जीभ चूसने लगे।
मैं चुदासी और मदमस्त हो गयी। उफ्फ्फफ्फ्फ़….ये मुझे क्या हो रहा है। इससे पहले मैंने कई स्टूडेंट से चुदवाया था और होठो पर किस किया था पर कभी इतना मजा नही आया था। पर आज तो मुझे अजीब सा नशा चढ़ रहा था। आज मैं अपने आशिक से कसके चुदवाना चाहती थी। आधे घंटे तक हम दोनों एक दूसरे के होठ और जीभ चूसते रहे। इसी बीच मैंने अपना ब्लाउस खुद ही खोल दिया और निकाल दिया। फिर गुलाबी ब्रा भी मैंने खोल कर निकाल दी। मेरा स्टूडेंट राहुल मेरे हुस्न को देखकर पागल था। राहुल मेरे दूध पीने लगा।
बिना देर किये राहुल ने मेरे मम्मे को हाथ में ले लिया और उसका साइज पता करने लगा। मेरे दूध बहुत सुंदर थे, छातियाँ भरी हुई, सुडौल और गोल गोल थी, जैसे उपर वाले ने कितनी फुर्सत से बैठकर मेरी जैसी माल और मस्त चोदने लायक औरत बनाई थी। मेरी उजली छातियाँ पुरे गर्म से तनी हुई थी। छातियों के सिखर पर अनार जैसे लाल लाल बड़े बड़े घेरे मेरी निपल्स के चारो ओर बने थे, जिसमे मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। राहुल की नजर मुझ पर जम गयी। तेजी से उसने मेरी रसीली बलखाती चुचियों को अपने वश में कर लिया और दोनों मम्मो को दोनों हाथ से दबोच लिया और तेज तेज दबाने और मसलने लगा।
““उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….” मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। मेरा स्टूडेंट मेरे दूध को किसी हॉर्न की तरह दबाने लगा। मुझे भी काफी मजा आ रहा था। फिर वो लेटकर मेरे दूध मुंह में लेकर पीने लगा। मैं तडप गयी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी।
‘मैडम!!.. आप इतनी कड़क माल हो की जो मर्द आपको एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाएगा और वो आपको चोदकर ही मानेगा’ राहुल बोला। मुझे उसकी बात अच्छी लगी। वो फिर से मुझ पर लेट गया और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। वो तो बहुत शरारती निकला। वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी रहा था। मुझे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था. ‘देव…..प्लीस आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से चूसो!!’ मैंने कहा। पर उस पर कोई असर नही पड़ा। वो अपनी धुन में था। जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चुचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे था। वो बहुत जादा चुदासा हो गया था। उसका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेता। मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा रहा था और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पी रहा था। दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा।
अब मेरा प्रिय स्टूडेंट मुझसे कसकर चोदने वाला था। उसने मेरी साड़ी निकाल दी, फिर मेरे पेटीकोट के उपर से ही मेरे जिस्म को इधर उधर हाथ लगाने लगा। मेरी चूत मेरे पेटीकोट के पर्दे में और फिर अंदर पेंटी में छुपी हुई थी। मेरा स्टूडेंट राहुल मेरे पेटीकोट के उपर से ही मेरी चूत को छूने लगा और हाथ लगाने लगा। मैं उत्तेजित हो रही थी।
“आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई….अई..मम्मी…..” मैं जोर से सिसकी। राहुल पेटीकोट के उपर से मेरी चूत में ऊँगली करने लगा। मैं डरकर अपनी आँखे बंद कर ली। मुझे डर लग रहा था। ना जाने वो मुझे किस तरह से चोदे। काश आज वो मुझ पर इतना सितम ढाये की चोद चोदकर आज वो मेरा बुरा हाल कर दे। मैं यही कामना कर रही थी। ये साफ़ था की आज मैं उस हैंडसम जॉन अब्राहम जैसे दिखने वाले लड़के का रसीला लंड खाना चाहती थी। आज मैं दिल खोलकर चुदवाना चाहती थी। राहुल के हाथ बराबर और बिना रुके पेटीकोट के उपर से ही मेरी चूत में बड़ी देर तक मेरी चूत में ऊँगली करता रहा। मुझे ये बड़ा अच्छा लग रहा था।
राहुल ने मेरे गुलाबी पेटीकोट का किनारा पकड़ लिया और उपर जांघो तक उठा दिया। मेरी नंगे टाँगे अब उसे दिखने लगी। मेरी नंगी टाँगे बहुत ही खूबसूरत थी, चिकनी और दूधिया। मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी। राहुल की आँखों में सिर्फ और सिर्फ वासना थी। मुझे रगड़कर चोदने की अपार इक्षा उनके मन में किसी जहरीले सांप की तरह कुंडली मारकर बैठी थी। इसी बीच उसके हाथ मेरी नंगी चिकनी टांगो पर यहाँ वहां दौड़ते रहे और सहलाते रहे। गजब तो तब हो गया जब मेरे स्टूडेंट ने मेरा पेटीकोट घुटनों के उपर तक उठा दिया। मेरी सुंदर बर्फी जैसे नायाब जांघो के उसे दर्शन हो गये। मेरे घुटनों बहुत सुंदर थे। राहुल ने हाथ मेरी टांगो और घुटनों से होता हुआ उपर बढ़ गया और मेरी नंगी जांघो पर पहुच गया। मैं सिसक गयी और कसमसाने लगी।“……मम्मी…मम्मी….सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” बस इतना ही मेरे मुंह से निकला। उसके हाथ मेरी चिकनी उजली जांघो को सहला रहे थे। मैं काम और वासना की अग्नि में जल रही थी।
राहुल ने मेरे पेटीकोट का सिरा उठाकर इकदम उपर कर दिया और अपने होठ से मेरी चिकनी जांघे चूमने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी सफ़ेद जांघो को वो इधर उधर सब जगह चूमने लगा और हजारो चुम्बन उसने मेरी दोनों जांघो पर जड़ दिए। मैं सिहर गयी। ये लौंडा तो आज मेरी जान ही ले लेगा, मैंने सोचा। बड़ी देर तक मेरा स्टूडेंट राहुल मेरी दोनों खूबसूरत जांघो को चूमता, चूसता और पीता रहा। मैं उससे चुदने को बेताब थी। मैं उसके मोटा रसीला लंड खाने को पागल थी। आज मैं कसकर चुदने वाली थी। राहुल ने नारा खोल दिया और पेटीकोट भी निकाल दिया। मैंने गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी। मेरी बड़ी सी चूत किसी बड़ी मोहर की तरह मेरी पेंटी के उपर से ही साफ़ साफ़ दिख रही थी। पेंटी का सूती कपड़ा मेरी चूत की बीच वाली दरार (घाटी) में दबा हुआ था जिससे मेरी रसीली चूत का आकार किसी ट्रेस पेपर की तरह उपर से ही साफ़ साफ़ झलक गया था। राहुल ने एक बार मेरी चूत को पेंटी के उपर से ही चाटा, फिर वो भी निकाल दी। हाय, अब मैं अपने स्टूडेंट के सामने पूरी तरह से नंगी हो गयी थी। शर्म से मैं अपनी चूत छुपाने लगी, पर राहुल ने मेरे हाथ पकड़ लिए और चूत से हटा दिए।
आखिर राहुल ने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगा। मैं भी मस्ती से चुदवाने लगी। उसके जल्दी जल्दी चोदने से मेरी बुर के दोनों होठ बार बार खुलते थे और बार बार बंद हो जाते थे। वो मुझे जोर जोर से पेल रहा था। सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। बहुत मजा मिल रहा था। बड़ी नशीली रगड़ थी मेरे स्टूडेंट के लौड़े की। बहुत सुख मुझे मिल रहा था दोस्तों। 24 साल का राहुल हचर हचर करके मेरे जैसी 30 साल की औरत को चोद रहा था। उसके मोटे से लम्बे लौड़े पर मेरा पूरा शरीर थिरक रहा था और डांस कर रहा था। जैसे लग रहा था वो कोई इंजन मेरी चूत में डाल के चला रहा हो। वो मेरी बुर पर बड़ी मेहनत कर रहा था। वो हच हच करके मुझे चोद रहा था। जैसे वो अपना लौड़ा मेरी बुर में डालता था, लौड़ा हच्च से देता था मैं 2-4 इंच आगे सरक जाती थी। फिर जैसे वो लौड़ा निकलता था मैं 2-4 इंच वापिस पीछे आ जाती थी। वो जोर जोर से हच हच करके मेरी बुर में लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था। घंटों यही सिलसिला चला। उसने मुझे 3 घंटे चोदा और माल मेरी चूत में ही गिरा दिया। उसके बाद हम लेटकर प्यार करने लगे।
हाय! रीडर्स मेरा नाम मनीष है। sex stories और मैं मनीषकोट (गुजरात) में रहता हूं, मेरे घर में तीन लोग हैं, मैं,पापा और मां मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और कोई भी मर्द उसे देखे तो उस का दीवाना हो जाये उसके। उसके दोनों दूध इतने बड़े है कि कभी भी उसके ब्लाउज़ में नहीं आते और बाहर से उसकी सत देखती है
हमारा जो भाजी वाला है वो मां से पैसे भी नहीं लेता क्योंकि जेब मां सब्जी खरीद ने जाती है तो वो झुकती है और उसके दोनों चूची बिल्कुल उसके सामने देखते है और उसकी धोती में उसका डंडा खड़ा हो जाता है… ये तो हुई रोज़ की बात लेकिन में अब आप को जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वो सब कुछ मेरी आंखों के सामने हुआ है…
मैंने 12वीं पास कर लिया है अब मुझे बोम्बे की युनिवर्सिटी मे पढ़ाना था वहाँ मेरे अंकल रहते हैं, पापा ने उनसे बात की वो घर आये और सब कुछ समझने के बाद पापा ने मुझे वहाँ जाने के लिये हाँ कहा मैं वहाँ चला गया और थोड़े दिनों बाद घर से मां का फोन आया और मुझसे पूछा कि तु खुश है तो मैंने कहा हाँ फ़िर मां ने कहा जरा अंकल को फोन देना तो मैंने दिया और चला गया
तभी मुझे याद आया कि मुझे अपने दोस्त को फोन करना था मैंने दूसरी लाइन से फोन करने वाला था मैंने जैसे ही रिसीवर उठाया अभी मां और अंकल बातें कर रहे थे मैं वो बातें सुनने लगा
अंकल ने मां से पूछा तुम कब आ रही हो तो मां बोली थोड़े दिनो में!
तब अंकल ने कहा- तुम्हारी गांड, पिकी और बोबले केसे हैं?
ये सुनकर मैं सुन्न हो गया.
तब मां ने जवाब दिया वहाँ आ रही हूं तब सब देख लेना तो अंकल ने कहा तुम्हारा पति नहीं आ रहा?
तो मां मुस्कुरा कर बोली- नहीं।
मां ने कहा- मेरे आने के बाद मुझे मौज कराओगे?
अंकल ने कहा हाँ क्यों नहीं तुम देखना तुम्हारी चुदाई में कोई कसर नहीं होगी!
फ़िर दोनों ने फोन रख दिया…
थोड़े दिनो में मां वहाँ आयी और अंकल उनको देख कर खुश हो गये वो तो मैं वहाँ खड़ा था इसलिये अंकल में कुछ रिएक्शन नहीं देखा था थोड़ी देर के बाद अंकल ने मां के सामने देख कर अपने लौड़े पर हाथ फ़िराया मां ने हाँ में सिर हिलाया फ़िर मां ने मुझसे कहा तुम ऊपर जाओ मुझे अंकल से कुछ बातें करनी है
मैं भी समझ गया था कि आज मां अपनी चुदाई करवाने वाली है
जैसे ही मैं गया दरवाजा बंद हो गया तो मैं वापस आया और की होल में से देखने लगा और बात चीत सुनने लगा…।
मां: क्या आप रात तक नहीं रुक सकते, आज लड़के को पता चल गया तो वो आप के भाई को बता देगा,
अंकल: मेरी रानी उसे कुछ नहीं पता चलेगा, तू चल अपने कपड़े उतार
मां: मुझे शरम आती है,
अंकल:अरे कितनी बार तो तुझे चोद चुका हूं मुझसे कैसी शरम डार्लिंग
मां: अगर मेरा बेटा नीचे आया तो…
अंकल: नहीं आयेगा चलो चलो…
फ़िर अंकल मां के पीछे आये और पीछे से मां की साड़ी और पेटीकोट कमर तक ले गये मैंने देखा कि मां की गांड दिख रही थी थोड़ी देर अंकल ने उसे सहलाया मां के मुंह से अजीब आवाज आ रही थी आअह्हह… आअह्हहा आह्हहा अह्हह ऊऊउह्ह हहाआआ…
मां के कहा- चलो ना डाल दो ना’ तो देर तक मुझे समझ नहीं आया क्या डाल दो फिर अंकल ने अपनी लुंगी में से अपना बड़ा लौड़ा निकाला और मां को देखते हुए बोले ले चाट ले…… मां बिना कुछ कहे चाट ने लगी जब मां चाट रही थी तब अंकल ने उनकी ऊँगली मां की गांड में घुसा दी मां उछल पड़ी और मुंह से आवाज निकल गयी आआहह ह्हहाह और बोली ‘क्या कर रहे हो, बता ना तो चाहिये’ तो अंकल मुस्कुराते हुए बोले ‘बता तो तुम यूं थोड़ी उछलती’ फ़िर अंकल बहुत उत्तेजित हो गये थे और उसने मां के कपड़े उतारने के बदले फ़ाड़ने शुरु कर दिये मां भी उत्तेजित हो चुकी थी फ़िर उस ने मां को आगे की तरफ़ झुकाया और मां की गांड में अपना लौड़ा डालने लगे लेकिन जा नहीं रहा था तब मां ने उनकी हेल्प की, अपने दोनों हाथों से अपनी गांड फ़ैलाते हुए बोली ‘चलो ये रास्ता क्लीयर है’ अंकल ने एक ही झटके में अपना लौड़ा डाल दिया और मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हह मार डाला आअ आआ आआअ… ह्ह दर्द कर रहा है आअ अहहहहा अह…अह… अह… अहह…अ हा अहा ह
फ़िर अंकल अपना लौड़ा अंदर बाहर करने लगे और तेजी से मुंह से आआअ… अ… अअ…ह ह्हह्हह की आवाज चल रही थी 15 मिनट के बाद दोनों शांत पड़ गये
तब मुझे लगा कि अंकल ने अपना वीर्य मां की गांड में छोड़ दिया है फ़िर दोनों थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे फ़िर 5 मिनट के बाद अंकल उठे और अपना लौड़ा मां के मुंह में रख दिया और मां भी उसे लोलीपोप समझकर चूस ने लगी 15 मिनट तक ऐसा ही हुआ फ़िर शायद अंकल फ़िर तैयार हो गये उसने मां की चूत पर हाथ फ़िराते हुए कहा ‘अब इस की बारी है’
तो मां बोली- हाँ, चलिये!
अंकल ने कहा ‘काफ़ी साफ़ है’
तब मां बोली ‘कल ही साफ़ की है’
फ़िर अंकल मां के ऊपर चढ़ गये और अपने लौड़े को अंदर डाल दिया और मां मुंह से आआअ… अ…अअ… ह्हह की आवाज शुरु हो गयी और बोली थोड़े देर रुकिये दर्द हो रहा है
लेकिन अंकल ने सुना नहीं और शोट लगाते गये और मां चिल्लाती गयी, मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हहह… हहह
आधे घंटे तक ऐसा चला फ़िर दोनों शांत पड़ गये 15 मिनट के बाद दोनों ने कपड़े पहने मां ठीक से चल भी नहीं पा रही थी लेकिन अंकल को और चोदने की इच्छा थी वो मां को पकड़ कर चूमने लगे
तब मां ने कहा- अब रात के लिये तो कुछ रखो, रात को मैं तुम्हारे पास ही आऊँगी!
अंकल ने कहा- ठीक है!
और वो दोनों दरवाजे की तरफ़ आये तो मैं ऊपर चला गया फ़िर मां ऊपर आइ मां कोई गीत गा रही थी मैंने मां को इतना खुश कभी नहीं देखा जब पापा मां की चुदाई करते हैं… और उस रात कि चुदाई sex stories फ़िर कभी बताऊँगा बाय बाय!!
उस समय तक मेरे लण्ड पर Sex Stories बाल उग आए थे। मैं अक्सर रात को अपने बिस्तर पर नंगा लेट कर अपने लण्ड के बालों को सहलाया करता था एवं अपने लण्ड को खड़ा कर उसे सहलाता रहता था।
एक रात मैं अपने लण्ड को सहला रहा था। उसमे मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। अचानक मैंने जोर जोर से अपने लण्ड को अपने हाथ से रगड़ना शुरू किया। मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लग रहा था। अचानक मेरे लण्ड से मेरा माल निकलने लगा। उत्तेजना से मेरी आँखे बंद हो गई। 5-6 मिनट तक मुझे होश ही नहीं रहा। ये मेरा पहला मुठ था। इसके पहले मुझे इसका कोई अनुभव नहीं था। मैंने बाथरूम में जा कर अपने लण्ड को धोया और बिस्तर पे आया तो मुझे गहरी नींद आ गई।
अगली सुबह मैं अपने कमरे से बाहर निकला तो देखा कि भइया अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे हैं। उनकी शादी हुए 2 साल हो गए थे। भाभी मेरे साथ बहुत ही घुली मिली थी। मैं अपनी हर प्रोब्लम उनको बताया करता था। मेरे माता-पिता भी हमारे साथ ही रहते थे। थोड़ी देर में भईया अपने ऑफिस चले गए। पिता जी को कचहरी में काम था इस लिए वो 10 बजे चले गए। मेरे पड़ोस में एक पूजा का कार्यक्रम था सो माँ भी वहाँ चली गई।
मैंने देखा कि घर में मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं है। मैं भाभी के कमरे में गया। भाभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी। मैं उनके बगल में जा कर लेट गया। मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं थी। भाभी को इसमें कोई गुस्सा नहीं होता था। भाभी ने करवट बदल कर मेरी कमर के ऊपर अपना पैर रख कर अपना बदन का भार मुझे पे डाल दिया और कहा- क्या बात है राजा जो आप कुछ परेशान लग रहे हैं?
भाभी अक्सर मेरे साथ ऐसा करती थी।
मैंने कहा- भाभी कल रात को कुछ गजब हो गया, आज तक मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ था।
भाभी ने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कल रात को मेरे लण्ड से कुछ सफ़ेद सफ़ेद निकल गया, मुझे लगता है कि मुझे डाक्टर के पास जाना होगा।
भाभी ने मुस्कुरा के पूछा- अपने आप निकल गया?
मैंने कहा- नहीं! मैं अपने लण्ड को सहला रहा था तभी ऐसा हुआ।
भाभी ने कहा- राजा बाबू! अब आप जवान हो गए हो, ये सब तो होगा ही! लगता है कि मुझे देखना होगा।
भाभी ने अपना हाथ मेरे लण्ड के ऊपर रख दिया तथा धीरे धीरे इसे दबाने लगी। इससे मेरे लण्ड खड़ा होने लगा।
भाभी बोली- जरा दिखाइए तो सही!
मैं कुछ नहीं बोला। मैंने धीरे से अपने पैन्ट का बटन खोल दिया। भाभी ने मेरे पैन्ट को नीचे की ओर खींचा और उसे पूरी तरह उतार दिया। अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था।
भाभी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लण्ड को सहला रही थी, बोली- क्या इसी से कल रात को सफ़ेद सफ़ेद निकला था?
मैंने कहा- हाँ!
भाभी ने कहा- अंडरवियर खोलिए!
मैंने कहा- क्या भाभी जी! आपके सामने मैं अपना अंडरवियर कैसे खोल सकता हूँ?
भाभी बोली- अरे जब आप मेरे को अपनी पूरी समस्या नहीं बतायेंगे तो मैं कैसी जानूंगी कि आपको क्या हुआ है? और मुझे क्या शरमाना? अपनों से कोई शरमाता है भला? जब आपके भइया को मेरे सामने अपने कपड़े खोलने में कोई शर्म नहीं है तो फिर आप क्यों शरमाते हैं?
मैं इस से पहले कि कुछ बोलता भाभी ने मेरा अंडरवियर पकड़ कर अचानक नीच खींच लिया। मेरा लण्ड तन के खड़ा हो गया।
भाभी ने मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़ लिया और कहा- अरे राजा बाबू! आप तो बहुत जवान हो गए हैं।
भाभी मेरे लण्ड को पकड़ कर सहला रही थी। मेरे लण्ड से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा। अचानक भाभी मेरे को जकड़ कर नीचे की तरफ़ घूम गई। इस से मैं भाभी के शरीर पर चढ़ गया। भाभी का शरीर बहुत ही मखमली था। भाभी ने मुझसे कहा- मुझे चोदियेगा?
मैं कहा- मैं नहीं जानता।
भाभी ने मेरे शरीर को पकड़ लिया और कहा- मैं सीखा देती हूँ, मेरा ब्लाउज खोलिए।
मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया। भाभी का चूची एकदम सफ़ेद सफ़ेद दिख रहा था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि भाभी का चूची इतना सफ़ेद होगा। मैं भाभी के चूची को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा।
भाभी ने कहा- ब्रा तो खोलिए तब ना मजा आएगा।
मैंने भाभी का ब्रा भी खोल दिया। अब भाभी की समूची चूचियाँ मेरे सामने तनी हुई खड़ी थी। मैंने दोनों हाथो से भाभी की चूचियों को पकड़ लिया और कहा- क्या मस्त चूचियाँ है आपकी भाभी?
मैं भाभी के चुचियों को धीरे धीरे दबा रहा था, अचानक भाभी ने कहा- मेरी साड़ी खोलिए ना! तब और भी मजा आएगा।
मैंने एक हाथ से भाभी की साड़ी को खोल दिया। भाभी अब सिर्फ़ पेटीकोट में थी। फ़िर मैंने भाभी को कहा- क्या पेटीकोट भी खोल दूँ?
भाभी बोली- हाँ।
मैंने बैठ कर भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोला और झट से उतार फेंका। अब मेरे सामने जो नजारा था, मैं उसकी कल्पना सपने में भी नहीं कर सकता था। भाभी की बुर एकदम सफ़ेद सी थी। उस पर घने घने बाल भी थे। मैं भाभी की बुर को देख रहा था। कितनी बड़ी बुर थी। बुर के अन्दर लाल लाल छेद दिख रहा था।
मैंने भाभी को कहा- आपके भी बाल होते हैं?
भाभी सिर्फ़ मुस्कुराई, भाभी बोली- छू कर तो देखिये।
मैं भाभी की बुर को धीरे धीरे छूने लगा। भाभी की बुर के बाल एक तरफ़ कर के मैं उसे फैला के देखने की कोशिश करने लगा कि इसका छेद कितना बड़ा है। मुझे उसके अन्दर छेद तो नजर आ रहा था पर भाभी से ही मैंने पुछा- भाभी ये छेद कितना बड़ा है?
भाभी ने कहा- उंगली डाल के देखिये न?
मैंने बुर में उंगली डाल दी। मैं अपनी उंगली को भाभी के बुर में चारों तरफ़ घुमाने लगा। बहुत बड़ी थी भाभी की बुर। मैं बुर से उंगली निकाल के भाभी के शरीर पर लेट गया। भाभी ने अपने दोनों पैर को ऊपर उठा के मेरे ऊपर से घुमा के मुझे लपेट लिया। मैंने भाभी के शरीर को जोर से पकड़ लिया।
मेरी साँसे बहुत तेज़ हो गई थी। मेरी पूरी छाती भाभी की चूचियों से रगड़ खा रही थी। भाभी ने मेरे सर को पकड़ के अपने तरफ़ खींचा और अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा दिया।
मैं भी समझ गया कि मुझे क्या करना है? मैं काफी देर तक भाभी के होठो को चूमता रहा। चूमते चूमते मेरे शरीर में उत्तेजना भरती गई। मैं भाभी के होंठ छोड़ कर कुछ नीचे आया और भाभी की चूची को मुँह में ले कर काफ़ी देर तक चूसता रहा।
भाभी सिर्फ़ गर्म साँसें फेंक रही थी। फिर भाभी अचानक बैठ गई और मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। मैं लेट कर भाभी का तमाशा देख रहा था। भाभी ने मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया। वो मेरे लण्ड के सुपाड़े को ऊपर नीचे कर रही थी। मैं पागल हुआ जा रहा था।
भाभी ने अचानक मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मेरा पूरा लण्ड मुंह में घुसा लिया। मैं एकदम से उत्तेजित हो गया।
मैंने भाभी को कहा- भाभी प्लीज ऐसा मत कीजिये!
लेकिन भाभी नहीं मानी। वो मेरे लण्ड को अपने मुंह में पूरा घुसा कर मज़े से चूस रही थी। अचानक मेरे लण्ड से माल निकलने लग गया। मेरी आँखें बंद हो गई। मैं छटपटा गया। मेरा सारा माल भाभी के मुंह में गिर रहा था लेकिन भाभी ने मेरे लण्ड को अपने मुंह से नहीं निकाला। और मेरा सारा माल भाभी पी गई।
2-3 मिनट के बाद मुझे होश आया। देखा भाभी मेरे शरीर पर लेटी हुआ है और मेरे होठों को चूम रही है। भाभी बोली- अरे वाह राजा जी! अभी तो खेल बांकी है। अब जरा मुझे चोदिये तो सही।
मैं बोला- क्या अभी भी कुछ बांकी है? अब क्या करना है मुझे?
भाभी बोली- आप क्या करना चाहते हैं?
मैं बोला- जिस तरह से आपने मेरे लण्ड को चूसा उसी तरह से मैं भी आपके बुर को चूसना चाहता हूँ।
भाभी ने बिस्तर पे लेट कर अपनी दोनों टांगें अगल-बगल फैला दी। अब मुझे भाभी की बुर की एक एक चीज साफ़ साफ़ दिख रही थी। मैंने नीचे झुक कर भाभी के बुर में अपना मुँह लगा दिया। पहले तो बुर के बालों को ही अपने मुंह से खींचता रहा। फ़िर एक बार बुर के छेद पर अपने होंठ रख कर उसका स्वाद लिया।
बड़ा ही मजा आया। मैं और जोर से भाभी के बुर को चूसने लगा। चूसते चूसते अपनी जीभ को भाभी के बुर के छेद के अन्दर भी घुसा दिया। भाभी को देखा तो वो अपनी आँख बंद कर के यूँ कर रही थी जैसे कि कोई दर्द हो रहा है।
तभी भाभी की बुर से हल्का हल्का पानी के तरह कुछ निकलने लगा। मैंने उसका स्वाद लिया तो मुझे कुछ नमकीन सा लगा।
थोड़ी ही देर में मेरा लण्ड तन के खड़ा हो गया था। मैं भाभी के होठ को चूमने के लिए जब उनके ऊपर चढ़ा तो मेरा लण्ड उनकी बुर से सट गया। भाभी ने मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़ लिया और कहा- राजा जी अब मुझे चोदिये न!
मैंने कहा- अभी भी कुछ बाकी रह गया है क्या?
भाभी धीमे से मुस्कुराई और कहा- अभी तो असली मजा बाकी है!
मैंने कहा- आप ही बताइए कि मैं क्या करुँ?
भाभी बोली- अब आप अपने लण्ड को मेरी बुर में डालिए।
मैंने कहा- इतना बड़ा लण्ड आपकी बुर के इतने छोटे से छेद में कैसे घुसेगा? भाभी बोली- आप डालिए तो सही!
भाभी ने अपने दोनों पैरों को और फैलाया। और मेरे लण्ड को पकड़ के अपने बुर के छेद के पास ले आई और बोली- घुसाइए!
मैंने संदेहपूर्वक अपने लण्ड को उनकी बुर के छेद में घुसाना शुरू किया।
ये क्याऽऽऽ?
मेरा सारा का सारा लण्ड उनकी बुर में घुस गया। मुझे बहुत ही मजा आया। भाभी को देखा तो उनके मुंह से सिसकारी निकल रही थी। मैंने झट से अपने लण्ड को उनकी बुर से बाहर निकाल लिया। भाभी ने कहा- यह क्या किया?
मैंने कहा- आपको दर्द हो रहा था ना?
वो बोली- धत! आपके भइया तो रोज़ मुझे ऐसा करते हैं, इसमें दर्द थोड़े ही होता है, इसमें तो मजा आता है! चलिए! डालिए फ़िर से अपना लण्ड मेरी बुर के छेद में।
मैं इस बार अपने लण्ड को अपने आप से ही पकड़ कर भाभी के बुर के छेद के पास ले गया और पूरा का पूरा लण्ड उनकी बुर में घुसा दिया। भाभी के मुंह से एक बार फ़िर सिसकारी निकली। मैं उनकी बुर में अपना लण्ड डाले हुए 1 मिनट तक पड़ा रहा। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करना है। मैं अपने दोनों हाथो से भाभी के चुचियों से खेलने लगा।
भाभी बोली- खेल शुरू कीजिये ना।
मैं बोला- अब क्या करना है?
भाभी बोली- चोदना शुरू कीजिये ना!
मैं बोला- अभी भी कुछ बाकी है? अब क्या करुँ?
भाभी बोली- मेरे बुद्धू राजा बाबू! अपने लण्ड को धीरे धीरे मेरी बुर में ही आगे पीछे कीजिये।
मैं बोला- मैं समझा नहीं।
भाभी बोली- अपनी कमर को आगे पीछे कर के अपने लण्ड को मेरी बुर में आगे पीछे कीजिये।
मैंने ऐसा ही किया। अपने कमर को आगे पीछे कर के लण्ड को भाभी के बुर में अन्दर बाहर करने लगा। भाभी का शरीर ऐंठने लगा।
मैं बोला- निकाल लूँ क्या भाभी?
भाभी बोली- नहीं! और जोर से चोदिये।
मैंने भाभी की कमर को अपने हाथ से पकड़ लिया और अपने लण्ड को उनकी बुर में आगे पीछे करने लगा। मुझे अब इसमें काफ़ी मजा आ रहा था। मेरा लण्ड उनकी बुर से रगड़ा रहा था। मैं पागल सा होने लगा।
5 मिनट तक करने के बाद देखा कि भाभी की बुर से पानी निकल रहा था। भाभी अब निढाल सी हो रही थी। मैंने भाभी के शरीर पर लेट कर उनकी चुदाई जारी रखी।
भाभी बोली- जल्दी जल्दी कीजिये राजा जी!
मैं बोला- कितनी देर तक और करुँ?
वो बोली- मेरा तो माल निकल गया है, आपका माल जब तक नहीं निकलता तब तक करते रहिये।
मैंने और जोर जोर से उनको चोदना जारी कर दिया। उनका सारा शरीर मेरे चुदाई के हिसाब से आगे पीछे हो रहा था। उनकी चूचियाँ भी जोर जोर से हिल हिल कर ऊपर नीचे हो रही थी। मुझे ये सब देखने में बहुत मजा आ रहा था। मैं सोच रहा था कि ये चुदाई का खेल कभी ख़तम ना हो।
तभी मुझे लगा कि मेरे लण्ड से माल निकलने वाला है। मैं भाभी को बोला- भाभी मेरा लण्ड से माल निकलने वाला है।
भाभी बोली- लण्ड को बुर से बाहर मत निकालिएगा। सब माल बुर में ही गिरने दीजियेगा।
मैंने उनको चोदना जारी रखा। 15-20 धक्के के बाद मेरे लण्ड से माल निकलना शुरू हो गया। मेरी आँख जोर से बंद हो गई। मैंने अपने लण्ड को पूरी ताकत के साथ भाभी की बुर में धकेलते हुए उनके शरीर को कस के पकड़ के उनको लिपट कर उनके ही शरीर पर गिर गया, बोला- भाभी, फ़िर माल निकल रहा है।
भाभी ने मुझे कस के पकड़ के मेरे कमर को पीछे से पकड़ कर अपने तरफ़ नीचे की ओर खींचने लगी। 2 मिनट तक मुझे कुछ होश नहीं रहा।
आँख खुली तो देखा मैं अभी भी भाभी के नंगे शरीर पे पड़ा हूँ। भाभी मेरे पीठ को सहला रही थी। मेरे लण्ड से सारा माल निकल के भाभी के बुर में समां चुका था। मेरा लण्ड अभी भी उनके बुर में ही था। मैं उनके चूची पर अपने सीने के दवाब को बढ़ते हुए कहा- क्या इसी को चुदाई कहते हैं?
भाभी बोली- हाँ, कैसा लगा?
मैंने कहा- बहुत मजा आता है! क्या भईया आपको ऐसे ही करते हैं?
वो बोली- हाँ, लगभग हर रात को!
मैं कहा- क्या अब मुझे आप चोदने नहीं दोगी?
वो बोली- क्यों नहीं? रात को भइया की पारी और दिन में तुम्हारी पारी।
मैंने कहा- ठीक है।
भाभी बोली- जब तुम्हें मौका नहीं मिले अपने हाथ से ही लण्ड को सहला लेना और माल निकाल लेना।
मैंने कहा- ठीक है।
उसके बाद मैंने अपना लण्ड को उनकी बुर से निकाला। भाभी ने उसे अपने हाथ में लिया और कहा कि रोज़ इसमें तेल लगाया कीजिये। इस से ये और भी बड़ा और मोटा होगा।
भाभी के बुर को मैं फ़िर से सहलाते हुए पुछा- मुझे नहीं पता था कि इस के अन्दर इतना बड़ा छेद होता है।
भाभी बोली- सुनिए, कल आप अपने लण्ड के बाल को शेव कर लीजियेगा। मैं भी आज रात को शेव कर लूंगी। तब कल फिर आपको चोदने के और भी तरीके बताऊँगी। और हाँ! यह बात किसी को बताइयेगा नहीं।
इसके बाद भाभी ने मुझसे और भी कई तरीकों से अपनी चुदवाई कराई। आज तक किसी को इस बात का नहीं चला। Sex Stories
मेरा नाम आर्यन गुप्ता है। मैं Hindi Porn Stories अब अकेला हूँ। मेरी उम्र अभी ५९ वर्ष की है। मेरे दो लड़के हैं जो कनाडा में रहते हैं और वहीं नौकरी करते हैं। मेरी पत्नी का निधन, जब वो ४८ वर्ष की थी, एक दुर्घटना में हो गया था। तब से मैं अकेला हूँ और अपना छोटा सा बिजनेस सम्भालता हूँ।
मेरी पत्नी जब जीवित थी तभी से मेरी सेक्स में रूचि कम हो गई थी। मेरे लण्ड में तनाव भी कम हो गया था और उस समय भी मैं अपनी पत्नी को सन्तुष्ट नहीं कर पाता था। मेरी चोदने की इच्छा तो बहुत होती थी पर शायद मेरे में उम्र के हिसाब से लण्ड में मामूली सा कड़ापन आता था, पर मैं चुदाई नहीं कर पाता था।
धीरे धीरे मेरी पत्नी भी मुझसे दूर रहने लगी। शारीरिक तौर पर भी स्तन दबाना, मसलना, चूतड़ दबाना और मस्ती करने का सुख भी मेरे हाथ से जाता रहा। चूत चाटने का और अंगुली से उसे सन्तुष्ट करने का सुख भी जाता रहा। धीरे धीरे मैं इस अवसाद में ही घिर गया। मैंने हार कर अकेले ही रहने की आदत डाल दी। कभी कभी मुठ भी मार लेता था, वह भी जब मुझे लगता था कि ये जरूरी है।
फिर मेरी पत्नी एक दुर्घटना में चल बसी तो मैं बिल्कुल ही अकेला हो गया और अन्दर से टूट गया। अब मैं अपना मन सिर्फ़ काम में लगाने लग गया था, इससे मुझे फ़ायदा तो बहुत होने लगा पर मन में यही आता कि इन पैसो का क्या करूंगा। तब मैं एक अनाथों की संस्था में से दो बच्चों को पालने का खर्च उठाने लगा। उन्हें पढ़ाना, लिखाना, कपड़े यानि सभी जरूरतें पूरा करने लगा। लोगों ने भी मेरे इस कार्य को सराहा।
कुछ दिनों पहले मेरे एक दोस्त की लड़की को इस शहर में एक कॉलेज में दाखिला करवाया। वो एम ए कर रही थी। मेरा घर चूंकि बहुत बड़ा था सो मैंने उसे अपने ही घर में एक कमरा दे दिया। उसका नाम सोनिया था। देखने में सुन्दर थी और उसका फ़िगर भी बहुत अच्छा था। वह बहुत समझदार भी थी। उसे जब कम्प्यूटर का काम करना होता था तब वो मेरे कमरे में आ जाती थी। मेरी अनुपस्थिति में वो अक्सर कम्प्यूटर इस्तेमाल करती थी। तभी एक प्यारी सी घटना घट गई। सोनिया ने मेरी दिल की मुराद पूरी कर दी।
मैं शाम को घर आया, नौकर खाना बना कर जा चुका था। मैंने हमेशा की तरह अपनी व्हिस्की की बोतल खोल कर बैठ गया। मैंने कम्प्यूटर ऑन किया। जैसे ही मैंने गूगल लोड किया, सोनिया की साईट खुल कर सामने आ गई। शायद उसने जल्दी में लोग-ओफ़ नहीं किया होगा या जाने कैसे ये हो गया।
मैं अपनी उत्सुकता नहीं रोक पाया और उसके मेल देखने लगा। अधिकतर मेल अश्लील थे। मेरी अनुपस्थिति में वो ये खेल खेलती थी। तभी मैंने देखा कि उसकी और भी अलग नामों से आई डी भी थी जिनके एड्रेस और पास वर्ड भी अपने ही मेल में लिखे थे। मैं उन्हें भी खोल कर देखने लगा। उन सेक्सी मेल पढ़ कर कर मेरे मन में वासना जागृत हो गई।
उसमें बहुत सारे नंगी और चुदाई करते हुए तस्वीरें भी थी। उसमे कुछ लिंक चुदाई के वीडियो के भी थे। और एक वीडियो तो सोनिया ने अपने मोबाईल से खुद की चुदाई का भी लिया था। मैं उसे ध्यान से देखने लगा। वीडियो साफ़ तो नहीं था पर सोनिया का नंगा शरीर उसमें अवश्य नजर आ रहा था।
सोनिया मुझे सेक्सी लड़की लगने लग गई। मैंने अपनी ड्रिन्क समाप्त की और भोजन करने लगा। पीसी अभी भी ओन ही था। मैंने सोनिया कि जो आईडी उसके मेल में थी मैंने नोट कर ली। मैं अब रोज रात को उसके सेक्सी मेल पढ़ता था और कभी कभी मुठ मार लेता था। शायद सोनिया को अब कुछ शक होने लगा था।
एक रात मैं ड्रिन्क्स ले रहा था और सोनिया की साईट का आनन्द ले रहा था, कि सोनिया कमरे में आ गई और उसने मुझे रंगे हाथ पकड़ लिया। वो लपक कर आई और साईट बन्द कर दी।
“अंकल ये क्या कर रहे हो?” उसने जोर से कहा। मैं वास्तव में घबरा गया। मेरे मुख से घबराहट में कुछ भी ना निकल पाया। मुझे अपने बड़े होने पर और ऐसा काम करने पर शायद पहली बार शर्मिन्दगी हुई।
पर इतने में सोनिया सम्भल गई- “सॉरी अंकल, आपने तो मेरी सारी मेल पढ़ ली, प्लीज इसे अपने तक ही रखना !” मेरी सांस में सांस में आई।
“नहीं सोनिया, माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिये, मुझे ये सब नहीं करना चाहिये था, पर तुम्हारी साईट एक दिन अचानक ही अपने आप खुल गई थी। कुछ सेक्सी बातों पर बाहर से नजर पड़ी तो मुझसे रहा नहीं गया।”
“अंकल ये तो बस हम अपने मनोरंजन के लिये करते हैं, ये सब सच तो नहीं है ना।”
“पर वो राहुल, विक्की, और जय उन्हें तो तुम पसन्द करती हो ना, तुम्हारी तो एक इसमे वीडियो भी है !” मैंने उसे भी बांधने की कोशिश की जिससे उसे लगे कि उसके भी कुछ रहस्यो को मैं जान गया हूँ।
“अंकल प्लीज किसी को बताना मत, मैं बदनाम हो जाऊंगी !” उसका सिर नीचे झुक गया।
“अरे कैसी बात करती है, मैं इन सब बातों को समझता नहीं हूँ क्या ? जवानी में मस्ती तो करनी ही चाहिये ना, हमने भी खूब मस्ती की थी।” मैंने उसे उत्साहित करते हुए कहा।
“अंकल, ये तीनों मेरे व्यक्तिगत दोस्त हैं, आप तो जान ही गये हैं, बस पापा को मत बताना !”
“तू जानती है ना, मैं भी सालों से अकेला हूँ, मेरे दिल में भी इच्छाएँ होती हैं, पर मैं तो अब ६० साल का होने जा रहा हूँ, देखो मैं अपनी दबी इच्छाएँ किसी को नहीं बताता हूँ, मैं इन सब बातों को समझता हूँ।”
“हाय अंकल, इस उमर में भी आपकी इच्छा होती है, फिर क्या करते आप?” उसे आश्चर्य हुआ।
“कुछ नहीं, बस मन मार कर रह जाता हूँ, हमें कौन समझ पाता है !” मेरे चेहरे पर निराशा उभर आई। सोनिया मुझे देखती रह गई। मुझे लगा उसके मन में मेरे प्रति सहानुभूति उभर आई थी।
“अंकल किसी आण्टी से दोस्ती कर लो, मैं मदद करूँ इसमें?” वो मेरे पास आकर हाथों में मेरा हाथ ले कर बोली।
“नहीं मैं अब ये सब नहीं कर सकता हूँ, सच !” मेरे मुँह से अचानक सच्चाई निकल आई।
“तो क्या हुआ, और तो सब काम तो कर सकते हो ना !” उसके चेहरे पर अब शरारत मचलने लगी थी। मुझे उसकी ये शरारतें मोहक लग रही थी।
“अब तू चुप हो जा, मेरी इच्छाएँ जाग जायेंगी, तुझे क्या है, हाल तो मेरा खराब हो जायेगा ना !” मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा, मुझे लगा कि वो मुझे बुरा भला कहेगी। पर हुआ उल्टा ही।
“अंकल, एक बात कहूँ, मुझ पर भरोसा हो तो मुझे अपना राजदार बना लो, मैं आपकी अधूरी इच्छा पूरी कर दूंगी…. पर देखो, पापा को इंटरनेट के बारे में मत बताना, प्रोमिस?” वो इठला कर बोली। मेरे शरीर में सनसनाहट होने लगी। सोनिया मेरे साथ…. पर मुझसे तो होता ही नहीं है।
“तेरे पापा को? कैसी बाते करती है, उन्हें मुझ पर भरोसा है, और सुन ले ये ठीक नहीं है, तू तो मेरी बेटी जैसी है और फिर मैं तो कुछ कर ही नहीं पाता हूँ।” मैं असमंजस में था।
“मैं तो कर पाती हूँ ना !” वो धीरे से मेरे पास आ गई और मेरे गाल चूम लिया। मुझे इतने में ही असीम आनन्द आ गया। दूसरे ही पल उसने मेरे गालों को हाथ से थाम लिया और मेरे होंठ चूमने लगी।
“अंकल मैं जय, विक्की और राहुल को एक एक करके बुलाऊं तो आप उन्हें यहा आने देंगे ना?” उसने मुझे ब्लैक मेल करने की कोशिश की। मुझे हंसी आ गई। मुझे क्या फ़रक पड़ता था भला। मुझे समझ में आने लगा था कि वो मुझे पटा कर अपना राज गुप्त रखना चाहती थी और साथ ही अपने दोस्तों के लिये इस घर का रास्ता भी खोलना चाहती थी। जवान लड़की थी, उसे भी जवान लण्ड चाहिये था, उसे भी अपने जिस्म की प्यास बुझानी थी। मैंने दिल ही दिल में अपने आप से समझौता किया कि तन का सुख चाहिये तो ये सब करना ही पड़ेगा, फिर इस उम्र में मुझे कौन घास डालेगा।
“हां… हां… जरूर, पर मेरी उपस्थिति में, ताकि कोई गड़बड़ हो तो मैं सम्भाल लूँ !” सोनिया मेरे से चिपक गई और मेरे सोते हुए लटके लन्ड को सहलाने लगी।
“आप क्या मुझे उनके साथ सोता हुआ देखना चाहते हैं, मजा लेना चाहते हैं ?”
“अरे नहीं, तुम एन्जोय करो, पर यदि तुम चाहो तो मैं भी चुपके से देख लूं?”
उसने मुझे तिरछी निगाहो से देखा,“अच्छा जी, अब आप मुझे ऐसे भी देखना चाहेंगे, कोई बात नहीं, देख लेना, पर चुपके से !”
“सोनिया, तुम क्या जानो इस उम्र के लोगों की तड़प….”
“माफ़ करना अंकल, मुझसे आपकी तड़प देखी नहीं जाती, मैं ये अहसास समझ सकती हूँ।” सोनिया ने मुझे प्यार करते हुए कहा।
“मैं तुम्हारा अहसानमन्द रहूंगा सोनिया, तुमने मुझे दिल से समझा है।” मैंने उसे प्यार से लिपटा लिया।
“आज से आप मुझे बेटी कहना छोड़ दीजिये अब मैं आपकी दोस्त बन गई हूँ, और जो मैं दोस्तों के साथ करती हूँ आपके साथ भी वही करूंगी।” उसके हाथ का दबाव मेरे लण्ड पर बढ गया और मेरे लण्ड का साईज़ नापने लगा। मुझे उसके हाथ लगाने से जोश आने लगा। मेरे खून का दौरा बढ़ गया। मेरी सांसें तेज हो गई।
“अंकल अब शरम छोड़ दीजिये, ये 21वीं सदी है, आपसे तो हम ही ठीक हैं।” सोनिया ने मेरे झेंपू स्वभाव को परख लिया था।
“क्या इरादा है, मेरे साथ ब्लात्कार करोगी क्या, मुझसे तो कुछ नहीं होगा !” मैंने लगभग हांफ़ते हुए कहा।
“आप तो यूं ही शरमा रहे हैं, उतारो ये कपड़े और फ़्री हो जाओ, देखो फिर कैसा मजा आता है इस उम्र में भी !”
मैंने अपने कपड़े उतार दिये। अब शर्म करने से कोई फ़ायदा नहीं था। मेरा दुबला बदन और सूखा लण्ड देख कर वो मुस्करा उठी। मेरा लण्ड इन सब बातों से खड़ा हो गया था और थोड़ा फूल गया था। सुपाड़ा भी लाल हो कर कुप्पा हो गया था। सोनिया भी अब अपने जिस्म को दिखाने लगी।
“बदन हो तो ऐसा…. ये देखो !” सोनिया ने अपने कपड़े अदाओं के साथ उतारना आरम्भ कर दिया।
उसका एक एक अंग तराशा हुआ था। सेक्स की गुड़िया लग लग रही थी वो। उसके उरोज बड़े और भारी थे, कमर पतली और उसके चूतड़ और गोलाइयाँ मटके जैसी थी। उसने अपनी गाण्ड को मेरी तरफ़ घुमाया और नीचे झुक कर अपनी चूतड़ो की गहराईयाँ दिखाने लगी।
चिकनी गांड चमकती हुई, और बीच में एक प्यारा सा छेद। गुलाबी गीली चूत और उस पर काली काली बड़ी झांटे, उसके बदन को निहारते हुए जाने मेरा लण्ड कब खड़ा हो गया। इस तरह से अपने बदन को मेरी पत्नी ने भी कभी नहीं दिखाया था। उसने एक भरपूर अंगड़ाई ली और नंगे बदन को मेरे नंगे बदन से चिपका लिया। मेरा लण्ड उसकी चूत में ठोकर मारने लगा। उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी।
उसने अपनी एक टांग उठा कर मेरी कमर से लिपटा दी और खड़े खड़े ही अपने योनि-द्वार से मेरे लण्ड को सटा दिया। मेरे हाथ स्वयंमेव उसकी भरी भरी चूंचियों पर आ गये और उन्हें मसलने लगे। उसने अपनी चूत का दबाव मेरे लण्ड पर डाल दिया। पर मेरा लण्ड एक ओर फ़िसल गया। उसने अपना हाथ नीचे लिया और मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी गीली चूत में डाल दिया। चूत की गर्माहट मेरे लण्ड को मिली। वो अन्दर सरकता चला गया।
सोनिया ने अपनी कमर हिलानी शुरु कर दी, लण्ड पहले अन्दर बाहर होता रहा पर, मैं अथाह आनन्द में डूबने लगा। लण्ड में प्यारी सी सरसराहट, गुलाबी सा मीठा मीठा सा मजा, मैंने अपने चूतड़ो का पूरा जोर उसकी चूत पर लगा दिया, हल्के से धक्के लग रहे थे, पर आह्….कुछ ही देर में वो ढीला पड़ने लगा और अब तो लण्ड बिलकुल ही ढीला हो कर लचलचा हो गया, और धीरे धीरे बाहर निकल आया। मैं फिर से निराशा में डूबने लगा।
“हाय अंकल, आपने तो दो मिनट में कितना मजा ले लिया, लण्ड तो आपका लम्बा है।” उसने अपनी टांगें नीचे कर ली और मेरा ढीला लण्ड उठा कर अपने मुँह में डाल लिया।
“अब देखो, आपका मस्त लण्ड कैसे मजे लेता है !”
मुझे लण्ड चूसने से बहुत मजा आने लग गया था। मेरा सुपाड़ा यूँ तो चूसने से फ़ूल गया था और तीखा सा और मीठा सा आनन्द आने लगा था। लण्ड की जोरदार चुसाई से मेरा लण्ड एक बार फिर से खड़ा हो गया, सोनिया ने लण्ड खड़ा देख कर अपने हाथ में लेकर उसे मुठ मारना आरम्भ कर दिया।
मेरे बदन में मुठ मारने से आग लग लग गई। लण्ड की जोरदार रगड़ाई हो रही थी। वो मुह से थूक लगा कर लण्ड को चिकना और गीला कर रही थी फिर दुगने जोश से मुठ मारने लगती थी। मुठ मारते मारते मेरा हाल बुरा हो गया और लगा कि बस अब माल निकल ही जायेगा। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकलने लग गई।
“अंकल मजा आ रहा है ना….ये ….ये…. माल निकलने वाला है अब !!!”
“आह हाँ हाँ, मार , मुठ मार …. निकाल दे मेरा पानी !!” मैं भी अब जोश के मारे चूतड़ हिला हिला कर मुठ मरवा रहा था। लग रहा था कि कभी भी मेरा माल निकल पड़ेगा।
“ये….ये….फ़ड़क रहा है अंकल, टाईट हो गया है….आपका माल आया….हाय रे ….ये आया !”
“सोनिया, मेरा निकला, आह, ये ऊहऽऽ आया !”
“निकाल दो अंकल, निकालो हाय रे…. आ गया….”
मेरी धार छूट पड़ी, पिचकारी तेजी से बाहर आई और सोनिया के चेहरे पर गिरी, और झटके मार के निकलती ही गई। इतना वीर्य निकला कि उसका चेहरा पूरा भीग गया और नीचे पानी की तरह बह निकला। वो मेरे लण्ड को अब धीरे धीरे मसल रही थी। दूध दुहने की तरह मेरा वीर्य निकाल रही थी, बूंद बूंद करके सारा वीर्य बाहर निकाल लिया। फिर जीभ निकाल कर मुँह पर लगा वीर्य चखा और मेरी चादर से अपना मुँह साफ़ कर लिया।
“हाय इतनी सारा रस, कहां से आ रहा है ये….?” सोनिया हैरानी से देखने लगी।
“मेरा लण्ड खड़ा नहीं होता है इसका ये मतलब नहीं है कि मेरी इच्छा ही नहीं होती है।”
“पर इतना माल ?”
“मैं बहुत दिनो बाद दिल से सन्तुष्ट हुआ हूँ, मुझे इतना सारा रस निकाल कर बहुत सुकून मिला है।”
मैंने सोनिया के नंगे बदन को अपने से चिपका कर खूब प्यार किया। मैं इतने से थक गया था और कमजोरी सी आ गई थी। हम दोनों ने कपड़े पहने और कमरे से बाहर आ गये। सोनिया ने डिनर गर्म किया और हम दोनों मेज पर बैठ गये।
“सोनिया, आज तो तुम्हारा अह्सान रहेगा मुझ पर, आज तुमने मुझे बहुत सुख दिया और मेरी कमजोरी का मजाक नहीं उड़ाया।”
“अरे मजाक क्यूँ…. ये तो सभी के साथ होता होगा। पर इस बात को समझने वाली होना चाहिये, वर्ना तो इस उमर में मर्द अपनी इच्छा को मार कर कहा जायेगा?”
“तुम्हें इतनी समझ कैसे आई, मेरी पत्नी ने भी ये नहीं समझा, फिर तुम तो इतनी सी उमर में इतना जान गई हो !”
”अंकल, ये मह्सूस करने के लिये दिल होना चाहिये, उसने फ़ीलिंगस होनी चाहिये, अरे छोड़ो ना अब, आपका ध्यान आज से मैं रखूंगी। पर एक्स्क्यूज मी….मेर ध्यान भी आप रखना….मेरे तीन तीन आशिक है और जोरदार चुदाई करते हैं…. आपको याद है न….?”
मैं और सोनिया जोर से हंस पड़े और मैं आज की याद लिये बेडरूम की तरफ़ बढ़ गया। सोनिया भी शुभ-रात्रि कह कर अपने कमरे में चली गई। सोनिया की समझदारी की बातें मेरे दिल में घर कर गई थी। मैं पूर्ण रूप से सन्तुष्ट हो कर बिस्तर पर लेट गया। Hindi Porn Stories
मेरा नाम राहुल Antarvasna Stories है, मेरी उम्र २२ साल है। मैं ६ फ़ुट २ इंच लम्बा सांवला लड़का हूँ। मेरे लण्ड का साइज़ ७ इंच है। मैं आपको अपने पहले सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ. मैंने अपना पहला सेक्स अपनी पड़ोसन अंजलि आंटी के साथ किया था। यह उन दिनों की बात है जब मैं ग्यारहवीं में पढ़ता था। अंजलि आंटी बहुत सेक्सी थी। उनकी उस समय नई नई शादी हुई थी। उनका पति चालीस साल का था और वो केवल पच्चीस साल की ही थी। उनका गोल-मटोल बदन, उनके उभरे हुए वक्ष देख कर कोई भी अपना काबू खो दे !
मैंने मन ही मन उन्हें चोदने का सोचता था लेकिन शुरुआत कैसे की जाए यह मुझे समझ नहीं आ रहा था। उनका पति शाम की पारी में काम करके आधी रात को घर आता था और रात को अंजलि आंटी की चुदाई करता था।
एक बार उनका पति रात को एक बजे आया, मैं उस वक्त जगा हुआ था, अचानक आह आह की आवाज सुनाई दी। मैंने बाहर जाकर देखा तो उनके घर से आवाज आ रही थी। उस समय बहुत अँधेरा था और रात में कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था तो मैंने हिम्मत करके उनकी खिड़की में झांकने की कोशिश की।
खिड़की में छेद थे और पर्दा लगा हुआ था जिससे मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तो मैंने डंडी से खिड़की का पर्दा हटाया, अंदर जीरो-बल्ब की रोशनी थी। अन्दर का नजारा देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। मैंने अन्दर देखा कि अंकल अंजलि आंटी के स्तन दबा रहे थे और वो आहऽ आहऽऽ की आवाज निकाल रही थी। कुछ देर के बाद अंकल अंजलि आंटी के ऊपर चढ़ गए और एक जोरदार धक्के के साथ अपना काला लिंग उनकी योनि में डाल दिया। अंकल दो-तीन धक्कों के बाद झड़ गये और आंटी के ऊपर सो गए। आंटी अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई थी, उनकी कामना उनकी चेहरे से मुझे साफ़ नजर आ रही थी। अंकल की ज्यादा उम्र होने के कारण आंटी संतुष्ट नहीं हो पाती थी।
तब उनकी शादी को एक साल बीत चुका था लेकिन आंटी को बच्चा नहीं हो रहा था। शायद अंकल की ज्यादा उम्र के कारण ऐसा हो रहा था। इस बात से आंटी हमेशा परेशान रहती थी। और उनकी परेशानी उनके चेहरे से साफ नजर आती थी।
एक दिन आंटी को बाजार जाना था, आंटी और मेरी खूब जमती थी। हम दोनों एक दूसरे से मजाक-मस्ती किया करते थे और नॉन-वेज़ चुटकले मारा करते थे। वो मुझसे केवल ३ साल ही बड़ी थी लेकिन अंकल की उम्र ज्यादा होने के कारण मुझे भी उन्हें आंटी कहना पड़ता था।
उस दिन मैं उनको मार्केट में शॉपिंग कराने ले गया। मार्केट में काफी भीड़ थी तो कई बार धक्के की वजह से मेरे हाथ उनके वक्ष से छू जाते थे, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। मेरे साहस और बढ़ गया, मैंने जानबूझ कर उनकी गांड पर हाथ फ़िराया- वोह आह…. करके रह गई। लेकिन मुझे कुछ नहीं कहा। मैं आंटी के मन की इच्छा समझ चुका था। मार्केट से शॉपिंग करने के बाद वो घर पर आई, उन्होंने मुझे उनके साथ आने के लिए धन्यवाद कहा। अब उस पल के बाद तो मैं एक दम बेकाबू सा हो गया था।
मैंने एक दिन साहस करके उन्हें अपने दिल की बात बता दी। पहले तो उन्होंने इंकार किया लेकिन बाद में मान गई। उनके घर में टीवी नहीं था, वो अक्सर सीरियल देखने के लिए मेरे घर आया करती थी।
मेरे बीच वाले कमरे में टीवी था और वो हॉल में बैठ कर टीवी देख रही थी। दोपहर का समय था, मेरी बहन अन्दर वाले कमरे में टीवी देख रही थी जहां टीवी रखा हुआ था और वो हॉल में बैठकर टीवी देख रही थी उस समय घर में कोई नहीं था। मैंने दरवाजा बंद कर दिया जिससे घर में थोड़ा अँधेरा हो गया।
फिर मैं आंटी के पास गया और उन्हें चुम्बन देने के लिए कहा। पहले तो वो हिचकिचाई लेकिन मेरी जबरदस्ती के आगे उन्होंने हार मान ली और धीरे से एक चुम्बन दिया। हाय क्या जादू था उस चुम्मे में ! मैं तो एकदम बेकाबू हो गया।
दूसरे दिन मैं उनके घर पर गया, वो सोई हुई थी। जैसा कि मैंने आपको बताया कि उनका पति दिन भर कम करता था और रात को लेट ही आता था जिससे घर में दोपहर को वो अकेली ही होती थी। उनको सोता देख मैं उनके पास गया, मेरी आहट सुनकर वो जग गई। मैं झट से उनके ऊपर आ गया और उनके होटों पे अपने होंठ लगा दिए। उन्होंने भी मेरा साथ देना शुरु किया। मैंने अब उनके स्तन दबाने शुरु किया- हाय, क्या गोल-गोल चूचे थे !
वो अब आह.. आह………. की सिसकारियाँ भर रही थी। उन्होंने कहा- मैं दरवाजा बंद कर देती हूँ, फिर जो करना हैं वो करना !
उन्होंने दरवाजा बंद किया और मुझसे आकर लिपट गई। मैंने उनको अपनी बाहों में भर लिया। उन्होंने भी मुझे जोर से जकड़ लिया। मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया और उन्हें चूमने लगा. मैं उनके पूरे बदन पर पागलों की तरह चूमने लगा। फिर मैंने उनके बदन से एक एक करके कपड़े उतारने शुरु कर दिए। जब मैंने उनकी ब्रा को उनसे अलग किया तो उनके स्तन बाहर आ गए, उन्हें देखकर मैं और बेकाबू हो गया और उनके गोरे-गोरे चूचों को जोर जोर से दबाने लगा। फिर मैंने उनकी साड़ी को उतारा। उन्होंने काले रंग की पैंटी पहन रखी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से हाथ फेरा तो वो आह…………….. करके आवाज निकालने लगी। फिर मैंने उनकी पैंटी को उनसे जुदा किया। उसके बाद का नजारा देख कर मैं तो एकदम दंग हो गया। उनकी चूत एकदम गुलाबी थी और हल्के-हल्के बाल थे।
मैंने उनसे पूछा- आपके तो बाल ही नहीं आये हैं?
तो उन्होंने जवाब दिया- मैं हमेशा इन्हें साफ़ करती रहती हूँ।
फिर मैंने उनके पेट पर चूमना शुरु किया तो वो एकदम मदहोश हो कर सिसकारियाँ लेने लगी। वो एकदम से गर्म होती जा रही थी। फिर मैंने उनकी चूत पे हाथ फ़िराया तो वो और रोमांटिक मूड में आ गई और जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। पूरा कमरा आह………… आह की आवाजों से गूँज रहा था। अब वो एकदम सुलग चुकी थी, उन्होंने मुझे कहा- राहुल अब नहीं बर्दाश्त होता, अब मेरी प्यास बुझा दो !
लेकिन मैं धीरे धीरे सब करना चाहता था इसलिए मैं उन्हें और गर्म कर रहा था। वो अब जोर जोर से सिसकारियाँ मार रही थी। अब मैं समझ चुका था कि वो अब चरम सीमा पर पहुँच चुकी है। तो मैंने अपनी पैंट उतार दी। अब मैं उनके सामने अंडरवीअर में था। उन्होंने मेरा अंडरवीयर सरकाया, जिससे मेरा ७ इंच लम्बा लण्ड बाहर आ गया। मेरा लण्ड ७ इंच लम्बा और चार इंच चौड़ा हो गया था।
मेरा लण्ड देख कर वो थोड़ी सहम गई। मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी ?
तो उन्होंने कहा- तुम्हारा लण्ड कितना मोटा और लम्बा है ! तुम्हारे अंकल का तो छोटा और पतला है।
फिर मैंने उनको सीधा बेड पर लिटा दिया और किस करने के लिए कहा। उन्होंने मेरा लण्ड हाथ में लिया और हिलाने लगी। मुझ बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी देर के बाद मैंने उनकी चूत में अपनी एक ऊँगली डाल दी तो वो चिल्ला उठी- हाई…मर गई रे. !
मैं अब अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा और वो सिसकारियाँ भरने लगी।
उन्होंने कहा- अब बस राहुल ! अब बर्दाश्त नहीं होता ! अब मेरी प्यास बुझा दे !
तो मैंने अपना लण्ड उनकी चूत पर रखा और एक धक्का लगाया, लेकिन मेरा लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। फिर मैंने एक जोरदार झटका लगाया और पूर लण्ड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी- हाई मर गई रे ! निकाल इसे जल्दी ! मेरी चूत फट गई रे ! कितना मोटा लण्ड है तेरा !
तो मैं कुछ देर के लिए रुक गया और फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरु किया। अब उन्हें भी मजा आ रहा था, वो भी अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुदवा रही थी। तक़रीबन २५ मिनट की चुदाई के बाद मैं अब झड़ने वाला था। मैंने उन्हें बताया कि मैं अब झड़ने वाला हूँ तो उन्होंने कहा कि बाहर मत गिराना ! सारा का सारा मेरे अन्दर ही गिरा दो ! मुझे गर्भवती बना दो ! मुझे तुम्हारे बच्चे की माँ बना दो !
मैंने वैसा ही किया, मैंने अपना सारा पानी उनकी चूत में गिरा दिया और उनके ऊपर सो गया।
हाय क्या चूत थी उनकी ! एकदम आग थी उनकी चूत में जिससे मैं जल्दी झड़ गया। उनकी चूत मेरे वीर्य के कारण पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने उनसे एक बार फिर सेक्स करने के लिए कहा तो उन्होंने मुझे एक बार फिर गरम किया और मेरा लण्ड तन गया।
इस बार मैंने उन्हें कुतिया स्टाइल में झुकने के लिए कहा। वो झुक गई और मैंने अपना लण्ड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया। चूत गीली होने की वजह से जल्दी से घुस गया। अब मैं अपने धक्कों की रफ़्तार तेज करने लगा और जोर जोर से उनको चोदने लगा।
वोह आः………आह आह……..करके चिल्ला रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था। करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं झड़ गया इस दरमियान वो तीन बार झड़ चुकी थी।
फिर हम दोनों एक दूसरे में उलझ कर सो गए।
उस रात को हमने छः बार चुदाई की।
अब जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई की खेल खेला करते थे।
मेरी चुदाई से वो गर्भवती हो गई और ९ महीने बाद उन्हें लड़का हुआ।
अब भी हम चुदाई का खेल खेलते रहे और दो साल के बाद वो फिर गर्भवती हुई, इस बार उन्हें लड़की हुई।
इस तरह मैंने पड़ोस वाली आंटी को गर्भवती बनाया।
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